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- Dec 5, 2013
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मल्टी ऐसे hi जंगल में भटकती रही... लेकिन लता ने उसको गांव से बहुत दूर जंगल में ले जाकर छोड़ा था..... ये जंगल मल्टी के लिए अनजान था..... अगर गांव का जंगल होता तोह वोह आसानी से अपने घर का रास्ता ढूंढ लेती... लेकिन इस अनजाने जंगल में वोह भटके... जा रही थी..... और mehhhhhhhhhhh mehhhhhhhhhhh.... करते हुए रट हुए मैं में चुड़ैल के साथ बिमला को भी गालियां देते हुए जा रही थी....
मल्टी - उस छिनाल बिमला की बात में आकर उस कौवे
को मारा उसी का सजा भुगतना पड़ रहा है...... और ये चुड़ैल रंडी भी.... क्या मैंने hi उसको पत्थर मारा था क्या...? वोह बिमला दिखाई नहीं दी इसको..... उसको तोह कुछ नहीं किया वोह बच गयी साली छिनाल और मई यहाँ फस्स गयी..... 

..... कोई बचाओ... मुझे यहाँ से बहार निकालो.... मुझे मेरे घर पंहुचा दो...... mehhhhhhhhhhh mehhhhhhhhhhh mehhhhhhhhhhh.....
लेकिन उसकी बात सुनने और समझने वाला वह कोई नहीं था....
लेकिन....... शयद... कोई था.. जिसने उसकी बात सुन ली थी और वोह उसकी मदद के लिए भी आ रहा था...... तेज़्ज़ तेज़्ज़ रफ़्तार से सरसराहट की आवाज़ से..... एक भेड़िया.......
बकरी की स्मेल
पाकर अपने पानी भरे मुँह से लार टपकाता हुआ..... दौड़ते हुए आने लगा....
मल्टी... - ये कैसी आवाज़ है... इतनी तेज़्ज़ दौड़ने की आवाज़ आ रही...... कही कोई जंगली जानवर तोह नहीं.....(. mehhhhhhhhhhh mehhhhhhhhhhh)
अभी मालती इतना hi सोच पायी थी की...... भेड़िया वह आ धमका.....
भेड़िया को देख के मल्टी की गांड फट गयी...... और वोह महहहह.... मेहह्ह्ह्ह.... चिल्लाते हुए भागने लगी......
भेड़िया भी उसका शिकार करने के लिए उसके पीछे पीछे दौड़ पड़ा....
मल्टी... की गांड फट के चिढ़ता होने की कगार पर थी..... वोह भेड़िया छलांग मारते हुए मल्टी के इतने करीब आ चूका था की अब तोह मालती ने उम्मीद hi खो दी थी...... लेकिन लास्ट मिनट पे एक पेड़ की नुकीली साखा उस बेहड़िये के पेअर में घुस गयी और वोह दर्द से बिलबिला उठा..... और बेतहासा चिल्लाने लगा.... मालती उसकी ऐसी हालत देख भगवान् को शुक्रिया अदा करते हुए तेज़्ज़ी से वह से भाग निकली.......
लेकिन ये जंगल है मेरी जान.....


मालती ( बकरी...) - भागते भागते...... एक गुफा के पास पहुंच गयी......
अब मालती थी अनजान..... कभी जंगल में निवास किया नहीं था...... वोह गुफा के पास थोड़ी देर रुक के सुस्ताने लगी........
मल्टी

- चैन की सांस लेते हुए...
-- थका... दिया उस कमीने भेड़िया ने...... उसने तोह लगभग पकड़ hi लिया था मुझे...... वोह भला हो उस पेड़ की टहनी का......... ये जगह थोड़ी ठिक्क लग रही है थोड़ी देर यहाँ आराम कर लेती..... भाग भाग के थक्क गयी हु.... आराम करने के बाद घर का रास्ता ढूढ़ने के लिए निकलूंगी......
मल्टी..... थोड़ा देर आराम करने के उद्देश्य से वह पे रुक गयी.... रात का समय था मालती की नींद भी पूरी नहीं हुई थी.... ऊपर से भागने के कारन थकान की वजह से कब उसकी आँख भारी हो गयी और बंद हो गयी उसको पता hi नहीं चला..... मल्टी नींद के आगोश में समां चुकी थी.... तभी.... कुछ सरकने की आवाज़ से मल्टी की नींद खुली.....
मालती
- ये घिसटने सरकने की आवाज़ कहा से आ रही है...
ये क्या.... मई पीछे कैसे जा रही हु.... और ये मेरी पूँछ ( टेल ) कौन पकड़ के खींच रहा है.... और ये मई गुफा के अंदर कैसे जा रही हु.... 

मल्टी
ने जैसे hi पीछे की ऑर्डर मुंडी घुमाई... तोह उसकी एक hi गांड 5तह ( पांचवी) बार पाहट गयी..... मम्मी... बचाओ.... ( महहहह).... ये तोह लकड़बग्घे है.,..
इसका मतलब मई लकड़बग्घों के गुफा के सामने सोई पड़ी थी.....
..... अब मेरा क्या होगा..
mehhhhhhhhhhh.. महहहहहह.....
मल्टी ने अपनी पूँछ...... झटकने की कोशिश की...... लेकिन लेकिन.... नहीं छुड़ा पायी.....
मल्टी
- अब क्या होगा... लगता है मई आज गयी.....
मल्टी ने दिल से एक बार भगवान् जी को याद किया..... और फिर संजू को याद किया......
मल्टी
- संजू बीटा... अगर आज तू यहाँ होता तोह मुझे बचा लेता.... लेकिन आज मई मौत के मुँह में फांसी हुई हु और तू भी मेरे साथ है......
....... लगता है अब मई नहीं बचूंगी... मरने से पहले एक बार तुझे देखना चाहती थी...... ये कहते हुए मालती
की आँखों में आंशू आ गए....
मल्टी
- मई कभी माँ नहीं बन पायी लेकिन तू जब मिला तोह मेरी फॅमिली कम्पलीट हो गयी.... तूने मुझे माँ बना दिया..... मुझे अभागन को माँ होने का दर्जा देकर तूने मेरा जीवन धन्य कर दी..... ये तेरी माँ आज मौत के मुँह में फांसी है लेकिन देख तुझे hi याद कर रही है......
मल्टी
रोने लगी..... तभी... पता नहीं शयद... संजू को एक आखरी बार देखने की उसकी प्रबल इच्छा ने या फिर.... उसके ममता की शक्ति ने उसको इतनी ताकत दे दी इतना जोश उसको दे दिया की उछाल पड़ी... जिससे उसकी पूँछ ( टेल) जो लकड़बग्घों के पंजे के नीचे दबी हुई थी वोह निकल गयी..... और जैसे hi मल्टी को इस बात का आभास हुआ की उसकी पूँछ निकल गयी है.... उसने आव देखा न ताव....... सीधा जो भी दिशा मिली... उस दिशा में किसी बुलेट ट्रैन की तरह दौड़ लगा दी....... शयद ये उसके दिल में संजू के लिए जो प्रेम था उसकी hi शक्ति थी.....
लकड़बग्घे भी एक सेकंड के लिए हैरत में पद गए की ये क्या हुआ..... फिर बकरी को भागता हुआ देख.... वोह लोग भी दौड़ लगा दिए.........
अब मल्टी
रुकने वाली नहीं थी.... कोई बाँदा जो काल के गाल से भागा हो उसकी हालत का अंदाजा आप लोग लगा hi सकते हो....
मल्टी
का अब ऐसा हो गया था की कौन सी झाडी..... कौन सा नदी.... कौन सा नाला.... कौन सा रास्ता..... वोह रास्ते में जो आरा सबको पार करते हुए आगे बढे जा रही थी... उसका अब यही सोच था की चाहे थक के मर जाउंगी लेकिन किसी का शिकार बांके नहीं मरूंगी......
लकड़बग्घे भी उसको दौड़ाते हुए उसके पीछे आने....... ऐसे... hi भागते भागते.... पूरी रात बीत गयी.... अब मल्टी
भी थक चुकी थी रात भर से भागते हुए....
तभी उसको सामने एक रास्ता दिकहि पड़ा जो जंगल से बहार एक गांव की तरफ जाता था....
मल्टी
- अब जितना भी दम बचा है सब झोक दूंगी........
मल्टी
ने फुल स्पीड में दौड़ लगाई..... और गांव में घुस गयी.... वोह लकड़बग्घे भी गांव में घुस गए.....
मल्टी की हवा टाइट हो गयी जब उसने देखा की लकड़बग्घे भी गांव में घुस आये है करके......
वोह फिर से अपनी जी जान लगते हुए भागते हुए जाके.... एक घर में घुस गयी.... वह और भी बकरे बकरियां... बंधी हुई थी... वोह उनके पास जेक.... बांध बैठ गयी.....
लकड़बग्घे घर के अंदर घुसने का हिम्मत नहीं कर पाए और वापस लौट गए....
लकड़बग्घों के जाने के बाद मल्टी
वह से जाने को हुई... तभी उस घर की मालकिन ने उसको देख लिया....
औरत - जिसका नाम राबिआ था.....
राबिआ - ारी... ये कौन सी बकरी खुल गयी है ये तोह भागने को हो रही है.. रुको अभी बाँध देती हूँ
राबिआ ने मल्टी
को पकड़ लिया और बाँध दिया....
राबिआ के यहाँ... 1 नया नया जवान हुआ बकरा था और बाकी सभी बकरियां hi थी....
बकरा छोड़ने के लिए.... और बकरियां दूध और बच्चे पैदा करने के लिए.... इसलिए ज्यादा मात्रा में बकरियां थी और बकरा एक hi था....
राबिआ - ये बकरी तोह हमारी नहीं लग रही.... तोह यहाँ कैसे आ गयी.... ारी हां ये भी तोह हो सकता है..... ये हमारी पुरानी वाली जो एक मेम्नि थी वोह कुछ सालों पहले जंगल में खो गयी थी मिली hi नहीं थी वोह हो.... अब खा पीकर मोती तगड़ी हो गयी हो.... हां वही होगी.. इसलिए इसको हमारा घर याद आया होगा तोह आ गयी होगी... अब आ गयी है न तोह बस अब इसको कही जाने नहीं दूंगी..... इसके हाथ पेअर सब बांध के रखूंगी..... मस्त मोती ताज़ी हो गयी है.....
राबिआ ने मल्टी को अपनी सालों पहले गुमसुदा हो गयी मेम्नि समझ के बांध लिया.....
मल्टी
- ारी मुर्ख औरत..... तुझे इतना समझ नहीं आता.... की जंगल में जो भी जाता वोह वापस नहीं आता..... उसका जान चला जाता... और तेरी उस मेम्नि को तोह ये लकड़बग्घे hi मार के खा चुके होंगे..... गाढ़ी कही की.. मुझे बकरी समझ के बाँध के चली गयी. अब मई घर कैसे जाऊ... mehhhhhhhhhhh... महहहह.... mehhhhhhhhhhh....
मल्टी ऐसे hi जंगल में भटकती रही... लेकिन लता ने उसको गांव से बहुत दूर जंगल में ले जाकर छोड़ा था..... ये जंगल मल्टी के लिए अनजान था..... अगर गांव का जंगल होता तोह वोह आसानी से अपने घर का रास्ता ढूंढ लेती... लेकिन इस अनजाने जंगल में वोह भटके... जा रही थी..... और mehhhhhhhhhhh mehhhhhhhhhhh.... करते हुए रट हुए मैं में चुड़ैल के साथ बिमला को भी गालियां देते हुए जा रही थी....
मल्टी - उस छिनाल बिमला की बात में आकर उस कौवे
लेकिन उसकी बात सुनने और समझने वाला वह कोई नहीं था....
लेकिन....... शयद... कोई था.. जिसने उसकी बात सुन ली थी और वोह उसकी मदद के लिए भी आ रहा था...... तेज़्ज़ तेज़्ज़ रफ़्तार से सरसराहट की आवाज़ से..... एक भेड़िया.......
बकरी की स्मेल
मल्टी... - ये कैसी आवाज़ है... इतनी तेज़्ज़ दौड़ने की आवाज़ आ रही...... कही कोई जंगली जानवर तोह नहीं.....(. mehhhhhhhhhhh mehhhhhhhhhhh)
अभी मालती इतना hi सोच पायी थी की...... भेड़िया वह आ धमका.....
भेड़िया को देख के मल्टी की गांड फट गयी...... और वोह महहहह.... मेहह्ह्ह्ह.... चिल्लाते हुए भागने लगी......
भेड़िया भी उसका शिकार करने के लिए उसके पीछे पीछे दौड़ पड़ा....
मल्टी... की गांड फट के चिढ़ता होने की कगार पर थी..... वोह भेड़िया छलांग मारते हुए मल्टी के इतने करीब आ चूका था की अब तोह मालती ने उम्मीद hi खो दी थी...... लेकिन लास्ट मिनट पे एक पेड़ की नुकीली साखा उस बेहड़िये के पेअर में घुस गयी और वोह दर्द से बिलबिला उठा..... और बेतहासा चिल्लाने लगा.... मालती उसकी ऐसी हालत देख भगवान् को शुक्रिया अदा करते हुए तेज़्ज़ी से वह से भाग निकली.......
लेकिन ये जंगल है मेरी जान.....
मालती ( बकरी...) - भागते भागते...... एक गुफा के पास पहुंच गयी......
अब मालती थी अनजान..... कभी जंगल में निवास किया नहीं था...... वोह गुफा के पास थोड़ी देर रुक के सुस्ताने लगी........
मल्टी
-- थका... दिया उस कमीने भेड़िया ने...... उसने तोह लगभग पकड़ hi लिया था मुझे...... वोह भला हो उस पेड़ की टहनी का......... ये जगह थोड़ी ठिक्क लग रही है थोड़ी देर यहाँ आराम कर लेती..... भाग भाग के थक्क गयी हु.... आराम करने के बाद घर का रास्ता ढूढ़ने के लिए निकलूंगी......
मल्टी..... थोड़ा देर आराम करने के उद्देश्य से वह पे रुक गयी.... रात का समय था मालती की नींद भी पूरी नहीं हुई थी.... ऊपर से भागने के कारन थकान की वजह से कब उसकी आँख भारी हो गयी और बंद हो गयी उसको पता hi नहीं चला..... मल्टी नींद के आगोश में समां चुकी थी.... तभी.... कुछ सरकने की आवाज़ से मल्टी की नींद खुली.....
मालती
मल्टी
इसका मतलब मई लकड़बग्घों के गुफा के सामने सोई पड़ी थी.....
mehhhhhhhhhhh.. महहहहहह.....
मल्टी ने अपनी पूँछ...... झटकने की कोशिश की...... लेकिन लेकिन.... नहीं छुड़ा पायी.....
मल्टी
मल्टी ने दिल से एक बार भगवान् जी को याद किया..... और फिर संजू को याद किया......
मल्टी
मल्टी
मल्टी
लकड़बग्घे भी एक सेकंड के लिए हैरत में पद गए की ये क्या हुआ..... फिर बकरी को भागता हुआ देख.... वोह लोग भी दौड़ लगा दिए.........
अब मल्टी
मल्टी
लकड़बग्घे भी उसको दौड़ाते हुए उसके पीछे आने....... ऐसे... hi भागते भागते.... पूरी रात बीत गयी.... अब मल्टी
तभी उसको सामने एक रास्ता दिकहि पड़ा जो जंगल से बहार एक गांव की तरफ जाता था....
मल्टी
मल्टी
मल्टी की हवा टाइट हो गयी जब उसने देखा की लकड़बग्घे भी गांव में घुस आये है करके......
वोह फिर से अपनी जी जान लगते हुए भागते हुए जाके.... एक घर में घुस गयी.... वह और भी बकरे बकरियां... बंधी हुई थी... वोह उनके पास जेक.... बांध बैठ गयी.....
लकड़बग्घे घर के अंदर घुसने का हिम्मत नहीं कर पाए और वापस लौट गए....
लकड़बग्घों के जाने के बाद मल्टी
औरत - जिसका नाम राबिआ था.....
राबिआ - ारी... ये कौन सी बकरी खुल गयी है ये तोह भागने को हो रही है.. रुको अभी बाँध देती हूँ
राबिआ ने मल्टी
राबिआ के यहाँ... 1 नया नया जवान हुआ बकरा था और बाकी सभी बकरियां hi थी....
बकरा छोड़ने के लिए.... और बकरियां दूध और बच्चे पैदा करने के लिए.... इसलिए ज्यादा मात्रा में बकरियां थी और बकरा एक hi था....
राबिआ - ये बकरी तोह हमारी नहीं लग रही.... तोह यहाँ कैसे आ गयी.... ारी हां ये भी तोह हो सकता है..... ये हमारी पुरानी वाली जो एक मेम्नि थी वोह कुछ सालों पहले जंगल में खो गयी थी मिली hi नहीं थी वोह हो.... अब खा पीकर मोती तगड़ी हो गयी हो.... हां वही होगी.. इसलिए इसको हमारा घर याद आया होगा तोह आ गयी होगी... अब आ गयी है न तोह बस अब इसको कही जाने नहीं दूंगी..... इसके हाथ पेअर सब बांध के रखूंगी..... मस्त मोती ताज़ी हो गयी है.....
राबिआ ने मल्टी को अपनी सालों पहले गुमसुदा हो गयी मेम्नि समझ के बांध लिया.....
मल्टी