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- Dec 5, 2013
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प्रतीक एक हाथ से अपने गाल को पकडे हुआ था और उसके दूसरे हाथ को उसकी बुआ ने पकड़ा हुआ था और उसको घर के अंदर लेके जा रही थी.....
घरवाले पहले से hi थोड़े परेशां the......unn सब को अचानक से बुल्ला लिया गया था पूनम बुआ के dwara......aur पूछने पे कुछ बताया भी नहीं unhone.....bas ये कहा की प्रतीक को तो आने do....jab वो आएगा तो सबको एक साथ बताएगी.....
अभी जब वो आया तो उसके साथ घर में एक एनर्जी बॉल भी आके घूम के gaya....wo लोग इस वजह से और भी चौक gaye.....wo एनर्जी बॉल घर के सुरक्षा कवच के अंदर आ गया tha....wo भी आराम से....
वो सब उसी को तो देखने के लिए बहार की ओर जा रहे थे और उनको प्रतीक दिख gaya.....Poonam बुआ उसका हाथ पकड़ के उसको उनकी तरफ hi लेके आ रही थी......
और वो एनर्जी बॉल्स अभी भी प्रतीक के चारो तरफ घूम रही थी...
निकिता - रूपल दीदी ye.....ye कैसी चीज़ज़ hai....aur ये उसके चारो तरफ ऐसे घूम क्यों रही है.....
रूपल - पता नहीं Nikita.....Maine भी इसको आज hi देखा hai....aur मुझे याद नहीं आ रहा इस जैसी चीज़ज़ के बारे में कभी पढ़ा हो Maine......Tunne वो देखा क्या.....
निकिता - क्या....
रूपल - उसको देख उसका हाथ कहा hai.....lagta है आज फिर से :lol: कुत्ता गया ये.....
निकिता - :lol: अरे हां इन् गोलों के देखने के वजह से मेरी नज़र उसके गालों पे गयी hi नहीं....
चची - माँ ये क्या hai....ye घेरे के अंदर आ गया और हममे उसको बिन्ना देखे पता भी नहीं चला...
दादी - मैं वही सोच रही हु bahu......iss चीज़ज़ के बारे में सायद किसी से सुना था maine.....par मुझे याद नहीं आ रहा...
ये सब यहाँ अपनी पानी बातें कर रहे थे वही प्रतीक को लेके पहुंच गयी थी पूनम बुआ घर दरवाजे pe.....ab सब वही पे खड़े थे तो उन्होंने कुछ कहा नहीं बस उनको देखती rahi.....lekin वो सब तो अपने में hi लगे हुए थे दरवाजा घेर के.....
पूनम बुआ- आप लोग हममे अंदर आने देंगे भी या nahi.....darwaje पे क्यों खड़े हो सारे.....
गुस्सा होने की वजह तो काफी थी उनकी जैसे की वो पूरी बात जान नहीं पायी प्रतीक se.....kyun की ये सब के सब दरवाजे पे आ गए the.....dusri ये की वो दोनों एनर्जी balls.....unko प्रतीक के ऐसे चक्कर काटते हुए देख उनको और गुस्सा आ रहा था क्यूंकि वो भी एक वजह थे बात पूरी ना होने ka.....par गुस्सा निकला उन्होंने बाकी सब पे जो दरवाजे पे खड़े हुए थे.....
बुआ ने जोर से अपनी बात kahi.....aur उनकी बातें सुनने के बाद सारे लोग एकदम से उनके गुस्से से लाल चेहरे को देखने लग gaye.....kisi ने भी ज्यादा कुछ पूछने का सोचा hi नहीं क्यूंकि लगभग सारे hi उनके गुस्से को जानते the.....bas फिर क्या.....
सारे के सारे अंदर जाने लग गए पर बुआ के पीछे पहले उनको और प्रतीक को अंदर जाने की जगह दी unhone.....uske बाद hi बाकी के सारे अंदर जाने लगे थे....
अभी भी वो सारे उन् दो एनर्जी बॉल्स को hi देख रहे the...aur जानने की कोशिश कर रहे थे आखिर वो है क्या.....
दब और लीडर दोनों अंदर आये तो थे पर बस जाके पुजारी जी के पास खड़े हो गए the.....ek उनमे से अपनी बेटी को देख रहा था और सोच रहा था की अब वो उसको सब बता सकता hai......dusra पुजारी जी से बातें कर रहा था....
जैसे hi हम अंदर गए और दरवाजा बंद hua.....ander और ज्यादा रोशनी फैल gayi......aur उसके बाद जो हुआ उसको देख के सब हैरान the.....kisi को समझ नहीं आ रहा था की क्या बोले कैसे bole.....bas आँखें फाड़ें देखे जा रहे थे.....
किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा tha.....yaa यूँ कहो की याक्किन hi नहीं हो रहा था की अभी जो वो देख रहे है वो सब सच है या कोई सपना......
किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी की कुछ kare......ek डर था उनके अंदर अगर ये सपना हुआ और मैंने कुछ किया तो कही ये टूट ना जाए.....
ये हाल घरवालों का tha.....baaki जो अलग से थे जैसे निकिता, मधु, पुजारी जी, लीडर और दब ये बस देख रहे the.....kabhi उन् दोनों को तो कभी बाकियों को जो एकदम से मूरत की तरह बन गए थे.....
K.bua बाकियों की तरह नहीं thi....wo बाहरवाली होक भी घरवालों के जैसे hi थी.....
मधु से तब रहा नहीं गया जब उसने देखा दक्ष के आँखें एकदम से आशुओं से लबलाबबा गयी hai.....tab उसने इन् सब के बिच बोलना शुरू किया.....
मधु - ये दोनों कौन hai.....aur आप सब....
अब वो बोल रही थी तो निकिता ने भी उसकी बात को dohraya......par उसके बाद भी कोई खास असर नहीं पड़ा था....
"Bhaiya...kaise हो आप"
ये सब्द जैसे hi दक्ष मां के कानो में pade.....jo आँशु अभी तक आँखों में फंसे हुए the.....unko जैसे रास्ता मिल gaya.....honth चल नहीं पा रहे the.....kaanp से रहे the.....kisi तरह खुद को सँभालते हुए.....
दक्ष - नीलम ये sach......sach में तू hi है.....
"हां Bhaiya......Main hi hu.....aap क्या भूल गए mujhe....haa...."
P.Bua - पार्थ.....
"पूनम....."
P.Bua - Maa.....aapne sunna.....Papa.....dekha aapne.....Bhaiya dekho....ye....ye पार्थ hai....hamara पार्थ...
दादी - Haa....Poonam....haa ye...ye पार्थ hi है.....
खुद को बहुत सँभालने के बाद कहा था ये दादी ne......aur इतना कहने के बाद आगे बढ़ी की एक बार अपने बेटे को छू sakke......par वो मुमकिन नहीं था.....
ये भी किसी सज़्ज़ा से काम नहीं lagta.....aap किसी से बहुत अर्सों बाद मिले वो भी तब जब आपको कोई उम्मीद hi नहीं थी की मिल sakenge....aur जब मिले तो बस एक दूसरे को देख भर hi सकते है और कुछ nahi.....bas देखना और बातें करना....
दादा जी भी रो रहे थे पर उस तरह नहीं ठीक वही हाल चाचा जी का tha......Par बुआ, चची और दादी का हाल अलग सा था....
ऐसा होता है अक्सर देखा जाता है ye.....Bhai भाई के बिच का लगाव बाप बेटे के बिच का लगाव दिखाई नहीं देता अगर हम भाई बहन के बिच का या माँ बेटे के बिच का लगाव dekhe.....par वो होता hai....aisa नहीं की ये होता hi नहीं है....
नीलम और दक्ष मां का भी कुछ ऐसा hi चल रहा tha.....Neelam की जो आकृति बननी हुई थी उसमे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था की उसके आँखों से आँशु निकल रहे hai.....par दक्ष उनको पांच नहीं पा रहा था....
K.Bua के भी आशु आ रहे थे पर वो वह से कुछ दूर चली गयी thi.....aur साथ में मधु और निकिता को भी लेके चली गयी thi.....khud से नहीं उनको सवाल करने थे इस वजह से वो दोनों गए थे.....
जब उन्होंने देखा प्रतीक बस ऐसे hi खड़ा hai.....to उनको लगा सायद इसको पता नहीं की ये कौन hai.....jab की उन्होंने खुद hi देखा था बाकी सब पार्थ और नीलम का नाम ले रहे है..
K.Bua - Prateek.....ye तुम्हारे माँ पापा hai.....jaao मिलो उनसे.....
K.bua की बातों ने जैसे बाकियों को जग्गा diya......unn लोगो ने तो फिर भी वक़्त बिताया था उन् दोनों के साथ पर प्रतीक ne.....usne कहा वक़्त बिताया tha......chota सा tha.....sayad याद भी ना हो उसको की वो दोनों कौन है.....
पूनम बुआ उठ के गयी प्रतीक के पास और उसको पार्थ के सामने लेके आयी....
ऐसा बिलकुल नहीं था की प्रतीक को इन् सब से कोई मतलब hi नहीं tha....matlab था बहुत मतलब tha....tabhi तो उसके आँखों में आँशु the.....wo बाकियों को खुश देख के खुश हो रहा था.....
P.Bua - प्रतीक ye.....ye तुम्हारे पापा hai.....Parth ye....ye प्रतीक है तुम्हारा और नीलम का बीटा.....
पार्थ - हम्म हममे पता hai.....yahi तो हममे यहाँ लेके आया है....
प्रतीक ने नहीं सोचा था की पार्थ कुछ ऐसा कह dega.....ab उसको सब कुछ बताना होगा सभी को....
जब सबने ये सुन्ना तो सब के सब प्रतीक को hi देखने लग gaye....jaise इंतज़ार में हो की वो कब कुछ कहेगा......
माँ समझ जाती है अपने बच्चो की pareshani.....Ye सच्च hi है....
जब वो कुछ नहीं बोल पा रहा था तो नीलम उसके पास आ गयी....
नीलम - इन् सब के बारे में कभी और बातें कर lena.....abhi हम आये है तो हमे तुमको देखने दो.....
नीलम ने अपना हाथ बढ़ाया पर आधे में hi ृक्क gayi...usko लगा जैसे बाकी लोग उसको नहीं छू पा रहे है वैसे hi वो भी अपने बेटे को नहीं छू payegi....aur इससे सायद प्रतीक को दुःख ho....to उसने बिच में hi हाथ मोड़ लिया apna.....ye किसी से भी चुप्पा नहीं मगर....
हां पर इससे ये हुआ की प्रतीक के ऊपर से ध्यान हैट गया था सभी का......
मधु - कितना बुरा है ये.....
निकिता - हां सामने होक bhi.....chu नहीं पाना.....
निकिता जब ये बोल रही थी तो उसके अंदर बहुत कुछ चल रहा tha.......ek तो वो जल रही थी अभी प्रतीक se......par उसको ये देख के बुरा भी लग रहा था प्रतीक और उसकी माँ के liye......wo ये भी सोच रही थी की क्या कभी उसके साथ भी ऐसा कुछ hoga......kya उसके माँ बाप भी किसी दिन.....
इतनी साड़ी बातें चल रही थी उसके दिम्माग में की अब चहेरा एकदम से सपाट हो गया tha.....koi एक्सप्रेशन hi नहीं बच्चा tha.....ya ये कहे इतने इमोशंस उम्मेद रहे थे की समझ hi नहीं आ रहा था की कैसे एक्सप्रेशंस दिखाए जाए.....
चची ने जब ये देखा की नीलम प्रतीक को छू भी नहीं सकती तो उसका ध्यान बताने के लिए उन्होंने रूपल दीदी को आगे कर दिया.....
चची - नीलम पार्थ इसको जानते हो क्या तुम दोनों.....
सब समझ रहे थे की क्या चल रहा ha....kisi ने कुछ ऐसा नहीं सोचा की वो चची नीलम को अपने बेटे को देखने भी नहीं दे रही hai....accche से मिलने भी नहीं दे रही है....
नीलम - ये रूपल है kya......itni बड़ी हो गयी ye.....Paarth पिछली बार तो कितनी छोटी थी ना ये.....
पार्थ - Haa.....dekho अब कितनी बड़ी हो गयी है.....
अभी उन्होंने ऐसा कहा hi था की उन् दोनों की आकृतियां थोड़ी और धुंधली सी हो गयी......
ये धुंधलापन पहले भी आ रहा tha.....aur सबको दिखाई भी दे रहा था पर सब उनसे मिलने में इतने खोये हुए थे की ध्यान hi नहीं दिया किसी ne......par इस बार ऐसा नहीं हुआ.....
ये धुंधलापन ये बता रहा था की उनके पास वक़्त काम hai.....aatmaon को बाँध के नहीं रखा जा सकता अगर रखा जाए तो उनकी यादें धुंधली होने लग जायेगी जैसी की उनकी आकृति होती जा रही hai.....aur कुछ वक़्त बाद उनको खुद के बारे में पता नहीं होगा और ना किसी और के बारे mein......wo बस खुद को उस जगह पे फंसा हुआ पाएंगे और कुछ भी करेंगे उस जगह से निकलने के लिए.....
वो लोगो पे हमला करेंगे उनको परेशां करेंगे ताकि उनको वह से जाने दिया jaaye....iss दौरान वो अपनों को भी नुकसान पंहुचा देते है......
सबने उन् दोनों की आकृति को धुंधला होते देखा और उस बारे में पूछा......
पार्थ - हमारा वक़्त ख़तम हो रहा है....
दादी - क्या मतलब वक़्त ख़तम हो रहा है......
नीलम - हममे जाना hoga....hum यहाँ पर आखिरी बार सबसे मिलने आये थे.....
दादी - नहीं नीलम अभी nahi.....abhi तो हम मिले भी nahi....aur....aur maine....maine माफ़ी भी नहीं मांगी.....
नीलम - अपने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिसकी वजह से आपको माफ़ी मांगनी pade....Prateek का ध्यान रखियेगा....
पार्थ - बीटा सबकी बातें सुन्ना aur......agar कोई कभी कभी दांत भी दे तो नाराज़ नहीं हो जाना....
नीलम - आप सब अपना ख्याल rakhna.....Bhaiya, पंकज बच्चे प्रतीक का ध्यान रखना.....
प्रतीक जानता tha.....wo उन् दोनों को यहाँ पे रोक सकता है पर इससे बस दर्द मिलने वाला tha.....agar वो अभी ृक्क गए तो आगे कभी bhi.....kabhi भी यहाँ से नहीं जा पाएंगे अनंत काल के लिए इसी जगह पे फंसे रहेंगे wo....aur उनकी यादें धुंधली हो जायेगी...
सायद अगर ये पहले वाला प्रतीक होता तो वो ये करने के बारे में sochta.....par अब वो बदल रहा tha....aur उसने उस पैन को छोड़ आगे बढ़ने के बारे में socha....haa पर उसको एक बात का बुरा लग रहा था वो चाहता था थोड़ा और वक़्त मिले sabko....par इसमें वो कुछ नहीं कर सकता था...
पुजारी जी - (धीरे से) मधु देखो ये अब जाने वाले है क्या तुम इन्हे रोकना चाहती हो....
मधु सभी को ऐसे देख के इमोशनल हो चुक्की थी सोचने की काशमता उसमे थी पर ज्यादा नहीं....
उसने बस हां में सर हिल्ला दिया.....
पुजारी जी - जाओ उन् दोनों को जाके छू आओ...
मधु ने की बात सुन्नी एक बार उनकी तरफ dekha.....aur बस बिन्ना कुछ बोले आगे बढ़ gayi.....aur बढ़ने के बाद मधु ने पार्थ और नीलम को छू लिया.....
यहाँ प्रतीक भी उनको छू सकता tha....par वो इस वजह से डर रहा था अगर उसने ऐसा कुछ किया तो उसकी डार्क एनर्जी उनके अंदर ना चली जाए.....
वो दोनों एनर्जी के फॉर्म में the.....yun समझ लो पानी अब अगर कला रंग दाल दे उनमे चाहे एक hi बूँद क्यों ना वो उनपे इफ़ेक्ट करेंगे.....
डार्क पावर है भी डिस्ट्रक्टिवे.....
मधु के साथ ऐसा नहीं hai....uski पावर क्रिएटिव hai.....chizzon को बना सकती hai.....jab उसने उन् दोनों को टच kiya.....wo जो धुंधलापन था unme......wo ख़तम हो गया और साथ hi साथ दोनों एकदम से चमकने लग गए.....
ये क्या हुआ वह पे बस दो लोग समझ पा रहे थे प्रतीक और पुजारी ji......DB तक को इस बारे में उतना पता नहीं tha......usko तो ये भी पता नहीं था की स्लेयर के सरीर से ये आत्माएं निकलने वाली है....
प्रतीक इस बात को जानता था पर वो ये करना नहीं चाहता tha.....usko नहीं पता था मधु इसके बारे में जान के आगे कैसे रियेक्ट करेगी......
नेक्स्ट अपडेट में थोड़ा और फॅमिली ड्रामा
प्रतीक एक हाथ से अपने गाल को पकडे हुआ था और उसके दूसरे हाथ को उसकी बुआ ने पकड़ा हुआ था और उसको घर के अंदर लेके जा रही थी.....
घरवाले पहले से hi थोड़े परेशां the......unn सब को अचानक से बुल्ला लिया गया था पूनम बुआ के dwara......aur पूछने पे कुछ बताया भी नहीं unhone.....bas ये कहा की प्रतीक को तो आने do....jab वो आएगा तो सबको एक साथ बताएगी.....
अभी जब वो आया तो उसके साथ घर में एक एनर्जी बॉल भी आके घूम के gaya....wo लोग इस वजह से और भी चौक gaye.....wo एनर्जी बॉल घर के सुरक्षा कवच के अंदर आ गया tha....wo भी आराम से....
वो सब उसी को तो देखने के लिए बहार की ओर जा रहे थे और उनको प्रतीक दिख gaya.....Poonam बुआ उसका हाथ पकड़ के उसको उनकी तरफ hi लेके आ रही थी......
और वो एनर्जी बॉल्स अभी भी प्रतीक के चारो तरफ घूम रही थी...
निकिता - रूपल दीदी ye.....ye कैसी चीज़ज़ hai....aur ये उसके चारो तरफ ऐसे घूम क्यों रही है.....
रूपल - पता नहीं Nikita.....Maine भी इसको आज hi देखा hai....aur मुझे याद नहीं आ रहा इस जैसी चीज़ज़ के बारे में कभी पढ़ा हो Maine......Tunne वो देखा क्या.....
निकिता - क्या....
रूपल - उसको देख उसका हाथ कहा hai.....lagta है आज फिर से :lol: कुत्ता गया ये.....
निकिता - :lol: अरे हां इन् गोलों के देखने के वजह से मेरी नज़र उसके गालों पे गयी hi नहीं....
चची - माँ ये क्या hai....ye घेरे के अंदर आ गया और हममे उसको बिन्ना देखे पता भी नहीं चला...
दादी - मैं वही सोच रही हु bahu......iss चीज़ज़ के बारे में सायद किसी से सुना था maine.....par मुझे याद नहीं आ रहा...
ये सब यहाँ अपनी पानी बातें कर रहे थे वही प्रतीक को लेके पहुंच गयी थी पूनम बुआ घर दरवाजे pe.....ab सब वही पे खड़े थे तो उन्होंने कुछ कहा नहीं बस उनको देखती rahi.....lekin वो सब तो अपने में hi लगे हुए थे दरवाजा घेर के.....
पूनम बुआ- आप लोग हममे अंदर आने देंगे भी या nahi.....darwaje पे क्यों खड़े हो सारे.....
गुस्सा होने की वजह तो काफी थी उनकी जैसे की वो पूरी बात जान नहीं पायी प्रतीक se.....kyun की ये सब के सब दरवाजे पे आ गए the.....dusri ये की वो दोनों एनर्जी balls.....unko प्रतीक के ऐसे चक्कर काटते हुए देख उनको और गुस्सा आ रहा था क्यूंकि वो भी एक वजह थे बात पूरी ना होने ka.....par गुस्सा निकला उन्होंने बाकी सब पे जो दरवाजे पे खड़े हुए थे.....
बुआ ने जोर से अपनी बात kahi.....aur उनकी बातें सुनने के बाद सारे लोग एकदम से उनके गुस्से से लाल चेहरे को देखने लग gaye.....kisi ने भी ज्यादा कुछ पूछने का सोचा hi नहीं क्यूंकि लगभग सारे hi उनके गुस्से को जानते the.....bas फिर क्या.....
सारे के सारे अंदर जाने लग गए पर बुआ के पीछे पहले उनको और प्रतीक को अंदर जाने की जगह दी unhone.....uske बाद hi बाकी के सारे अंदर जाने लगे थे....
अभी भी वो सारे उन् दो एनर्जी बॉल्स को hi देख रहे the...aur जानने की कोशिश कर रहे थे आखिर वो है क्या.....
दब और लीडर दोनों अंदर आये तो थे पर बस जाके पुजारी जी के पास खड़े हो गए the.....ek उनमे से अपनी बेटी को देख रहा था और सोच रहा था की अब वो उसको सब बता सकता hai......dusra पुजारी जी से बातें कर रहा था....
जैसे hi हम अंदर गए और दरवाजा बंद hua.....ander और ज्यादा रोशनी फैल gayi......aur उसके बाद जो हुआ उसको देख के सब हैरान the.....kisi को समझ नहीं आ रहा था की क्या बोले कैसे bole.....bas आँखें फाड़ें देखे जा रहे थे.....
किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा tha.....yaa यूँ कहो की याक्किन hi नहीं हो रहा था की अभी जो वो देख रहे है वो सब सच है या कोई सपना......
किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी की कुछ kare......ek डर था उनके अंदर अगर ये सपना हुआ और मैंने कुछ किया तो कही ये टूट ना जाए.....
ये हाल घरवालों का tha.....baaki जो अलग से थे जैसे निकिता, मधु, पुजारी जी, लीडर और दब ये बस देख रहे the.....kabhi उन् दोनों को तो कभी बाकियों को जो एकदम से मूरत की तरह बन गए थे.....
K.bua बाकियों की तरह नहीं thi....wo बाहरवाली होक भी घरवालों के जैसे hi थी.....
मधु से तब रहा नहीं गया जब उसने देखा दक्ष के आँखें एकदम से आशुओं से लबलाबबा गयी hai.....tab उसने इन् सब के बिच बोलना शुरू किया.....
मधु - ये दोनों कौन hai.....aur आप सब....
अब वो बोल रही थी तो निकिता ने भी उसकी बात को dohraya......par उसके बाद भी कोई खास असर नहीं पड़ा था....
"Bhaiya...kaise हो आप"
ये सब्द जैसे hi दक्ष मां के कानो में pade.....jo आँशु अभी तक आँखों में फंसे हुए the.....unko जैसे रास्ता मिल gaya.....honth चल नहीं पा रहे the.....kaanp से रहे the.....kisi तरह खुद को सँभालते हुए.....
दक्ष - नीलम ये sach......sach में तू hi है.....
"हां Bhaiya......Main hi hu.....aap क्या भूल गए mujhe....haa...."
P.Bua - पार्थ.....
"पूनम....."
P.Bua - Maa.....aapne sunna.....Papa.....dekha aapne.....Bhaiya dekho....ye....ye पार्थ hai....hamara पार्थ...
दादी - Haa....Poonam....haa ye...ye पार्थ hi है.....
खुद को बहुत सँभालने के बाद कहा था ये दादी ne......aur इतना कहने के बाद आगे बढ़ी की एक बार अपने बेटे को छू sakke......par वो मुमकिन नहीं था.....
ये भी किसी सज़्ज़ा से काम नहीं lagta.....aap किसी से बहुत अर्सों बाद मिले वो भी तब जब आपको कोई उम्मीद hi नहीं थी की मिल sakenge....aur जब मिले तो बस एक दूसरे को देख भर hi सकते है और कुछ nahi.....bas देखना और बातें करना....
दादा जी भी रो रहे थे पर उस तरह नहीं ठीक वही हाल चाचा जी का tha......Par बुआ, चची और दादी का हाल अलग सा था....
ऐसा होता है अक्सर देखा जाता है ye.....Bhai भाई के बिच का लगाव बाप बेटे के बिच का लगाव दिखाई नहीं देता अगर हम भाई बहन के बिच का या माँ बेटे के बिच का लगाव dekhe.....par वो होता hai....aisa नहीं की ये होता hi नहीं है....
नीलम और दक्ष मां का भी कुछ ऐसा hi चल रहा tha.....Neelam की जो आकृति बननी हुई थी उसमे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था की उसके आँखों से आँशु निकल रहे hai.....par दक्ष उनको पांच नहीं पा रहा था....
K.Bua के भी आशु आ रहे थे पर वो वह से कुछ दूर चली गयी thi.....aur साथ में मधु और निकिता को भी लेके चली गयी thi.....khud से नहीं उनको सवाल करने थे इस वजह से वो दोनों गए थे.....
जब उन्होंने देखा प्रतीक बस ऐसे hi खड़ा hai.....to उनको लगा सायद इसको पता नहीं की ये कौन hai.....jab की उन्होंने खुद hi देखा था बाकी सब पार्थ और नीलम का नाम ले रहे है..
K.Bua - Prateek.....ye तुम्हारे माँ पापा hai.....jaao मिलो उनसे.....
K.bua की बातों ने जैसे बाकियों को जग्गा diya......unn लोगो ने तो फिर भी वक़्त बिताया था उन् दोनों के साथ पर प्रतीक ne.....usne कहा वक़्त बिताया tha......chota सा tha.....sayad याद भी ना हो उसको की वो दोनों कौन है.....
पूनम बुआ उठ के गयी प्रतीक के पास और उसको पार्थ के सामने लेके आयी....
ऐसा बिलकुल नहीं था की प्रतीक को इन् सब से कोई मतलब hi नहीं tha....matlab था बहुत मतलब tha....tabhi तो उसके आँखों में आँशु the.....wo बाकियों को खुश देख के खुश हो रहा था.....
P.Bua - प्रतीक ye.....ye तुम्हारे पापा hai.....Parth ye....ye प्रतीक है तुम्हारा और नीलम का बीटा.....
पार्थ - हम्म हममे पता hai.....yahi तो हममे यहाँ लेके आया है....
प्रतीक ने नहीं सोचा था की पार्थ कुछ ऐसा कह dega.....ab उसको सब कुछ बताना होगा सभी को....
जब सबने ये सुन्ना तो सब के सब प्रतीक को hi देखने लग gaye....jaise इंतज़ार में हो की वो कब कुछ कहेगा......
माँ समझ जाती है अपने बच्चो की pareshani.....Ye सच्च hi है....
जब वो कुछ नहीं बोल पा रहा था तो नीलम उसके पास आ गयी....
नीलम - इन् सब के बारे में कभी और बातें कर lena.....abhi हम आये है तो हमे तुमको देखने दो.....
नीलम ने अपना हाथ बढ़ाया पर आधे में hi ृक्क gayi...usko लगा जैसे बाकी लोग उसको नहीं छू पा रहे है वैसे hi वो भी अपने बेटे को नहीं छू payegi....aur इससे सायद प्रतीक को दुःख ho....to उसने बिच में hi हाथ मोड़ लिया apna.....ye किसी से भी चुप्पा नहीं मगर....
हां पर इससे ये हुआ की प्रतीक के ऊपर से ध्यान हैट गया था सभी का......
मधु - कितना बुरा है ये.....
निकिता - हां सामने होक bhi.....chu नहीं पाना.....
निकिता जब ये बोल रही थी तो उसके अंदर बहुत कुछ चल रहा tha.......ek तो वो जल रही थी अभी प्रतीक se......par उसको ये देख के बुरा भी लग रहा था प्रतीक और उसकी माँ के liye......wo ये भी सोच रही थी की क्या कभी उसके साथ भी ऐसा कुछ hoga......kya उसके माँ बाप भी किसी दिन.....
इतनी साड़ी बातें चल रही थी उसके दिम्माग में की अब चहेरा एकदम से सपाट हो गया tha.....koi एक्सप्रेशन hi नहीं बच्चा tha.....ya ये कहे इतने इमोशंस उम्मेद रहे थे की समझ hi नहीं आ रहा था की कैसे एक्सप्रेशंस दिखाए जाए.....
चची ने जब ये देखा की नीलम प्रतीक को छू भी नहीं सकती तो उसका ध्यान बताने के लिए उन्होंने रूपल दीदी को आगे कर दिया.....
चची - नीलम पार्थ इसको जानते हो क्या तुम दोनों.....
सब समझ रहे थे की क्या चल रहा ha....kisi ने कुछ ऐसा नहीं सोचा की वो चची नीलम को अपने बेटे को देखने भी नहीं दे रही hai....accche से मिलने भी नहीं दे रही है....
नीलम - ये रूपल है kya......itni बड़ी हो गयी ye.....Paarth पिछली बार तो कितनी छोटी थी ना ये.....
पार्थ - Haa.....dekho अब कितनी बड़ी हो गयी है.....
अभी उन्होंने ऐसा कहा hi था की उन् दोनों की आकृतियां थोड़ी और धुंधली सी हो गयी......
ये धुंधलापन पहले भी आ रहा tha.....aur सबको दिखाई भी दे रहा था पर सब उनसे मिलने में इतने खोये हुए थे की ध्यान hi नहीं दिया किसी ne......par इस बार ऐसा नहीं हुआ.....
ये धुंधलापन ये बता रहा था की उनके पास वक़्त काम hai.....aatmaon को बाँध के नहीं रखा जा सकता अगर रखा जाए तो उनकी यादें धुंधली होने लग जायेगी जैसी की उनकी आकृति होती जा रही hai.....aur कुछ वक़्त बाद उनको खुद के बारे में पता नहीं होगा और ना किसी और के बारे mein......wo बस खुद को उस जगह पे फंसा हुआ पाएंगे और कुछ भी करेंगे उस जगह से निकलने के लिए.....
वो लोगो पे हमला करेंगे उनको परेशां करेंगे ताकि उनको वह से जाने दिया jaaye....iss दौरान वो अपनों को भी नुकसान पंहुचा देते है......
सबने उन् दोनों की आकृति को धुंधला होते देखा और उस बारे में पूछा......
पार्थ - हमारा वक़्त ख़तम हो रहा है....
दादी - क्या मतलब वक़्त ख़तम हो रहा है......
नीलम - हममे जाना hoga....hum यहाँ पर आखिरी बार सबसे मिलने आये थे.....
दादी - नहीं नीलम अभी nahi.....abhi तो हम मिले भी nahi....aur....aur maine....maine माफ़ी भी नहीं मांगी.....
नीलम - अपने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिसकी वजह से आपको माफ़ी मांगनी pade....Prateek का ध्यान रखियेगा....
पार्थ - बीटा सबकी बातें सुन्ना aur......agar कोई कभी कभी दांत भी दे तो नाराज़ नहीं हो जाना....
नीलम - आप सब अपना ख्याल rakhna.....Bhaiya, पंकज बच्चे प्रतीक का ध्यान रखना.....
प्रतीक जानता tha.....wo उन् दोनों को यहाँ पे रोक सकता है पर इससे बस दर्द मिलने वाला tha.....agar वो अभी ृक्क गए तो आगे कभी bhi.....kabhi भी यहाँ से नहीं जा पाएंगे अनंत काल के लिए इसी जगह पे फंसे रहेंगे wo....aur उनकी यादें धुंधली हो जायेगी...
सायद अगर ये पहले वाला प्रतीक होता तो वो ये करने के बारे में sochta.....par अब वो बदल रहा tha....aur उसने उस पैन को छोड़ आगे बढ़ने के बारे में socha....haa पर उसको एक बात का बुरा लग रहा था वो चाहता था थोड़ा और वक़्त मिले sabko....par इसमें वो कुछ नहीं कर सकता था...
पुजारी जी - (धीरे से) मधु देखो ये अब जाने वाले है क्या तुम इन्हे रोकना चाहती हो....
मधु सभी को ऐसे देख के इमोशनल हो चुक्की थी सोचने की काशमता उसमे थी पर ज्यादा नहीं....
उसने बस हां में सर हिल्ला दिया.....
पुजारी जी - जाओ उन् दोनों को जाके छू आओ...
मधु ने की बात सुन्नी एक बार उनकी तरफ dekha.....aur बस बिन्ना कुछ बोले आगे बढ़ gayi.....aur बढ़ने के बाद मधु ने पार्थ और नीलम को छू लिया.....
यहाँ प्रतीक भी उनको छू सकता tha....par वो इस वजह से डर रहा था अगर उसने ऐसा कुछ किया तो उसकी डार्क एनर्जी उनके अंदर ना चली जाए.....
वो दोनों एनर्जी के फॉर्म में the.....yun समझ लो पानी अब अगर कला रंग दाल दे उनमे चाहे एक hi बूँद क्यों ना वो उनपे इफ़ेक्ट करेंगे.....
डार्क पावर है भी डिस्ट्रक्टिवे.....
मधु के साथ ऐसा नहीं hai....uski पावर क्रिएटिव hai.....chizzon को बना सकती hai.....jab उसने उन् दोनों को टच kiya.....wo जो धुंधलापन था unme......wo ख़तम हो गया और साथ hi साथ दोनों एकदम से चमकने लग गए.....
ये क्या हुआ वह पे बस दो लोग समझ पा रहे थे प्रतीक और पुजारी ji......DB तक को इस बारे में उतना पता नहीं tha......usko तो ये भी पता नहीं था की स्लेयर के सरीर से ये आत्माएं निकलने वाली है....
प्रतीक इस बात को जानता था पर वो ये करना नहीं चाहता tha.....usko नहीं पता था मधु इसके बारे में जान के आगे कैसे रियेक्ट करेगी......
नेक्स्ट अपडेट में थोड़ा और फॅमिली ड्रामा