फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 14 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट - 112

प्रतीक एक हाथ से अपने गाल को पकडे हुआ था और उसके दूसरे हाथ को उसकी बुआ ने पकड़ा हुआ था और उसको घर के अंदर लेके जा रही थी.....

घरवाले पहले से hi थोड़े परेशां the......unn सब को अचानक से बुल्ला लिया गया था पूनम बुआ के dwara......aur पूछने पे कुछ बताया भी नहीं unhone.....bas ये कहा की प्रतीक को तो आने do....jab वो आएगा तो सबको एक साथ बताएगी.....

अभी जब वो आया तो उसके साथ घर में एक एनर्जी बॉल भी आके घूम के gaya....wo लोग इस वजह से और भी चौक gaye.....wo एनर्जी बॉल घर के सुरक्षा कवच के अंदर आ गया tha....wo भी आराम से....

वो सब उसी को तो देखने के लिए बहार की ओर जा रहे थे और उनको प्रतीक दिख gaya.....Poonam बुआ उसका हाथ पकड़ के उसको उनकी तरफ hi लेके आ रही थी......

और वो एनर्जी बॉल्स अभी भी प्रतीक के चारो तरफ घूम रही थी...

निकिता - रूपल दीदी ye.....ye कैसी चीज़ज़ hai....aur ये उसके चारो तरफ ऐसे घूम क्यों रही है.....

रूपल - पता नहीं Nikita.....Maine भी इसको आज hi देखा hai....aur मुझे याद नहीं आ रहा इस जैसी चीज़ज़ के बारे में कभी पढ़ा हो Maine......Tunne वो देखा क्या.....

निकिता - क्या....

रूपल - उसको देख उसका हाथ कहा hai.....lagta है आज फिर से :lol: कुत्ता गया ये.....

निकिता - :lol: अरे हां इन् गोलों के देखने के वजह से मेरी नज़र उसके गालों पे गयी hi नहीं....

चची - माँ ये क्या hai....ye घेरे के अंदर आ गया और हममे उसको बिन्ना देखे पता भी नहीं चला...

दादी - मैं वही सोच रही हु bahu......iss चीज़ज़ के बारे में सायद किसी से सुना था maine.....par मुझे याद नहीं आ रहा...

ये सब यहाँ अपनी पानी बातें कर रहे थे वही प्रतीक को लेके पहुंच गयी थी पूनम बुआ घर दरवाजे pe.....ab सब वही पे खड़े थे तो उन्होंने कुछ कहा नहीं बस उनको देखती rahi.....lekin वो सब तो अपने में hi लगे हुए थे दरवाजा घेर के.....

पूनम बुआ- आप लोग हममे अंदर आने देंगे भी या nahi.....darwaje पे क्यों खड़े हो सारे.....

गुस्सा होने की वजह तो काफी थी उनकी जैसे की वो पूरी बात जान नहीं पायी प्रतीक se.....kyun की ये सब के सब दरवाजे पे आ गए the.....dusri ये की वो दोनों एनर्जी balls.....unko प्रतीक के ऐसे चक्कर काटते हुए देख उनको और गुस्सा आ रहा था क्यूंकि वो भी एक वजह थे बात पूरी ना होने ka.....par गुस्सा निकला उन्होंने बाकी सब पे जो दरवाजे पे खड़े हुए थे.....

बुआ ने जोर से अपनी बात kahi.....aur उनकी बातें सुनने के बाद सारे लोग एकदम से उनके गुस्से से लाल चेहरे को देखने लग gaye.....kisi ने भी ज्यादा कुछ पूछने का सोचा hi नहीं क्यूंकि लगभग सारे hi उनके गुस्से को जानते the.....bas फिर क्या.....

सारे के सारे अंदर जाने लग गए पर बुआ के पीछे पहले उनको और प्रतीक को अंदर जाने की जगह दी unhone.....uske बाद hi बाकी के सारे अंदर जाने लगे थे....

अभी भी वो सारे उन् दो एनर्जी बॉल्स को hi देख रहे the...aur जानने की कोशिश कर रहे थे आखिर वो है क्या.....

दब और लीडर दोनों अंदर आये तो थे पर बस जाके पुजारी जी के पास खड़े हो गए the.....ek उनमे से अपनी बेटी को देख रहा था और सोच रहा था की अब वो उसको सब बता सकता hai......dusra पुजारी जी से बातें कर रहा था....

जैसे hi हम अंदर गए और दरवाजा बंद hua.....ander और ज्यादा रोशनी फैल gayi......aur उसके बाद जो हुआ उसको देख के सब हैरान the.....kisi को समझ नहीं आ रहा था की क्या बोले कैसे bole.....bas आँखें फाड़ें देखे जा रहे थे.....

किसी को भी कुछ समझ नहीं आ रहा tha.....yaa यूँ कहो की याक्किन hi नहीं हो रहा था की अभी जो वो देख रहे है वो सब सच है या कोई सपना......

किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी की कुछ kare......ek डर था उनके अंदर अगर ये सपना हुआ और मैंने कुछ किया तो कही ये टूट ना जाए.....

ये हाल घरवालों का tha.....baaki जो अलग से थे जैसे निकिता, मधु, पुजारी जी, लीडर और दब ये बस देख रहे the.....kabhi उन् दोनों को तो कभी बाकियों को जो एकदम से मूरत की तरह बन गए थे.....

K.bua बाकियों की तरह नहीं thi....wo बाहरवाली होक भी घरवालों के जैसे hi थी.....

मधु से तब रहा नहीं गया जब उसने देखा दक्ष के आँखें एकदम से आशुओं से लबलाबबा गयी hai.....tab उसने इन् सब के बिच बोलना शुरू किया.....

मधु - ये दोनों कौन hai.....aur आप सब....

अब वो बोल रही थी तो निकिता ने भी उसकी बात को dohraya......par उसके बाद भी कोई खास असर नहीं पड़ा था....

"Bhaiya...kaise हो आप"

ये सब्द जैसे hi दक्ष मां के कानो में pade.....jo आँशु अभी तक आँखों में फंसे हुए the.....unko जैसे रास्ता मिल gaya.....honth चल नहीं पा रहे the.....kaanp से रहे the.....kisi तरह खुद को सँभालते हुए.....

दक्ष - नीलम ये sach......sach में तू hi है.....

"हां Bhaiya......Main hi hu.....aap क्या भूल गए mujhe....haa...."

P.Bua - पार्थ.....

"पूनम....."

P.Bua - Maa.....aapne sunna.....Papa.....dekha aapne.....Bhaiya dekho....ye....ye पार्थ hai....hamara पार्थ...

दादी - Haa....Poonam....haa ye...ye पार्थ hi है.....

खुद को बहुत सँभालने के बाद कहा था ये दादी ne......aur इतना कहने के बाद आगे बढ़ी की एक बार अपने बेटे को छू sakke......par वो मुमकिन नहीं था.....

ये भी किसी सज़्ज़ा से काम नहीं lagta.....aap किसी से बहुत अर्सों बाद मिले वो भी तब जब आपको कोई उम्मीद hi नहीं थी की मिल sakenge....aur जब मिले तो बस एक दूसरे को देख भर hi सकते है और कुछ nahi.....bas देखना और बातें करना....

दादा जी भी रो रहे थे पर उस तरह नहीं ठीक वही हाल चाचा जी का tha......Par बुआ, चची और दादी का हाल अलग सा था....

ऐसा होता है अक्सर देखा जाता है ye.....Bhai भाई के बिच का लगाव बाप बेटे के बिच का लगाव दिखाई नहीं देता अगर हम भाई बहन के बिच का या माँ बेटे के बिच का लगाव dekhe.....par वो होता hai....aisa नहीं की ये होता hi नहीं है....

नीलम और दक्ष मां का भी कुछ ऐसा hi चल रहा tha.....Neelam की जो आकृति बननी हुई थी उसमे साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था की उसके आँखों से आँशु निकल रहे hai.....par दक्ष उनको पांच नहीं पा रहा था....

K.Bua के भी आशु आ रहे थे पर वो वह से कुछ दूर चली गयी thi.....aur साथ में मधु और निकिता को भी लेके चली गयी thi.....khud से नहीं उनको सवाल करने थे इस वजह से वो दोनों गए थे.....

जब उन्होंने देखा प्रतीक बस ऐसे hi खड़ा hai.....to उनको लगा सायद इसको पता नहीं की ये कौन hai.....jab की उन्होंने खुद hi देखा था बाकी सब पार्थ और नीलम का नाम ले रहे है..

K.Bua - Prateek.....ye तुम्हारे माँ पापा hai.....jaao मिलो उनसे.....

K.bua की बातों ने जैसे बाकियों को जग्गा diya......unn लोगो ने तो फिर भी वक़्त बिताया था उन् दोनों के साथ पर प्रतीक ne.....usne कहा वक़्त बिताया tha......chota सा tha.....sayad याद भी ना हो उसको की वो दोनों कौन है.....

पूनम बुआ उठ के गयी प्रतीक के पास और उसको पार्थ के सामने लेके आयी....

ऐसा बिलकुल नहीं था की प्रतीक को इन् सब से कोई मतलब hi नहीं tha....matlab था बहुत मतलब tha....tabhi तो उसके आँखों में आँशु the.....wo बाकियों को खुश देख के खुश हो रहा था.....

P.Bua - प्रतीक ye.....ye तुम्हारे पापा hai.....Parth ye....ye प्रतीक है तुम्हारा और नीलम का बीटा.....

पार्थ - हम्म हममे पता hai.....yahi तो हममे यहाँ लेके आया है....

प्रतीक ने नहीं सोचा था की पार्थ कुछ ऐसा कह dega.....ab उसको सब कुछ बताना होगा सभी को....

जब सबने ये सुन्ना तो सब के सब प्रतीक को hi देखने लग gaye....jaise इंतज़ार में हो की वो कब कुछ कहेगा......

माँ समझ जाती है अपने बच्चो की pareshani.....Ye सच्च hi है....

जब वो कुछ नहीं बोल पा रहा था तो नीलम उसके पास आ गयी....

नीलम - इन् सब के बारे में कभी और बातें कर lena.....abhi हम आये है तो हमे तुमको देखने दो.....

नीलम ने अपना हाथ बढ़ाया पर आधे में hi ृक्क gayi...usko लगा जैसे बाकी लोग उसको नहीं छू पा रहे है वैसे hi वो भी अपने बेटे को नहीं छू payegi....aur इससे सायद प्रतीक को दुःख ho....to उसने बिच में hi हाथ मोड़ लिया apna.....ye किसी से भी चुप्पा नहीं मगर....

हां पर इससे ये हुआ की प्रतीक के ऊपर से ध्यान हैट गया था सभी का......

मधु - कितना बुरा है ये.....

निकिता - हां सामने होक bhi.....chu नहीं पाना.....

निकिता जब ये बोल रही थी तो उसके अंदर बहुत कुछ चल रहा tha.......ek तो वो जल रही थी अभी प्रतीक se......par उसको ये देख के बुरा भी लग रहा था प्रतीक और उसकी माँ के liye......wo ये भी सोच रही थी की क्या कभी उसके साथ भी ऐसा कुछ hoga......kya उसके माँ बाप भी किसी दिन.....

इतनी साड़ी बातें चल रही थी उसके दिम्माग में की अब चहेरा एकदम से सपाट हो गया tha.....koi एक्सप्रेशन hi नहीं बच्चा tha.....ya ये कहे इतने इमोशंस उम्मेद रहे थे की समझ hi नहीं आ रहा था की कैसे एक्सप्रेशंस दिखाए जाए.....

चची ने जब ये देखा की नीलम प्रतीक को छू भी नहीं सकती तो उसका ध्यान बताने के लिए उन्होंने रूपल दीदी को आगे कर दिया.....

चची - नीलम पार्थ इसको जानते हो क्या तुम दोनों.....

सब समझ रहे थे की क्या चल रहा ha....kisi ने कुछ ऐसा नहीं सोचा की वो चची नीलम को अपने बेटे को देखने भी नहीं दे रही hai....accche से मिलने भी नहीं दे रही है....

नीलम - ये रूपल है kya......itni बड़ी हो गयी ye.....Paarth पिछली बार तो कितनी छोटी थी ना ये.....

पार्थ - Haa.....dekho अब कितनी बड़ी हो गयी है.....

अभी उन्होंने ऐसा कहा hi था की उन् दोनों की आकृतियां थोड़ी और धुंधली सी हो गयी......

ये धुंधलापन पहले भी आ रहा tha.....aur सबको दिखाई भी दे रहा था पर सब उनसे मिलने में इतने खोये हुए थे की ध्यान hi नहीं दिया किसी ne......par इस बार ऐसा नहीं हुआ.....

ये धुंधलापन ये बता रहा था की उनके पास वक़्त काम hai.....aatmaon को बाँध के नहीं रखा जा सकता अगर रखा जाए तो उनकी यादें धुंधली होने लग जायेगी जैसी की उनकी आकृति होती जा रही hai.....aur कुछ वक़्त बाद उनको खुद के बारे में पता नहीं होगा और ना किसी और के बारे mein......wo बस खुद को उस जगह पे फंसा हुआ पाएंगे और कुछ भी करेंगे उस जगह से निकलने के लिए.....

वो लोगो पे हमला करेंगे उनको परेशां करेंगे ताकि उनको वह से जाने दिया jaaye....iss दौरान वो अपनों को भी नुकसान पंहुचा देते है......

सबने उन् दोनों की आकृति को धुंधला होते देखा और उस बारे में पूछा......

पार्थ - हमारा वक़्त ख़तम हो रहा है....

दादी - क्या मतलब वक़्त ख़तम हो रहा है......

नीलम - हममे जाना hoga....hum यहाँ पर आखिरी बार सबसे मिलने आये थे.....

दादी - नहीं नीलम अभी nahi.....abhi तो हम मिले भी nahi....aur....aur maine....maine माफ़ी भी नहीं मांगी.....

नीलम - अपने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिसकी वजह से आपको माफ़ी मांगनी pade....Prateek का ध्यान रखियेगा....

पार्थ - बीटा सबकी बातें सुन्ना aur......agar कोई कभी कभी दांत भी दे तो नाराज़ नहीं हो जाना....

नीलम - आप सब अपना ख्याल rakhna.....Bhaiya, पंकज बच्चे प्रतीक का ध्यान रखना.....

प्रतीक जानता tha.....wo उन् दोनों को यहाँ पे रोक सकता है पर इससे बस दर्द मिलने वाला tha.....agar वो अभी ृक्क गए तो आगे कभी bhi.....kabhi भी यहाँ से नहीं जा पाएंगे अनंत काल के लिए इसी जगह पे फंसे रहेंगे wo....aur उनकी यादें धुंधली हो जायेगी...

सायद अगर ये पहले वाला प्रतीक होता तो वो ये करने के बारे में sochta.....par अब वो बदल रहा tha....aur उसने उस पैन को छोड़ आगे बढ़ने के बारे में socha....haa पर उसको एक बात का बुरा लग रहा था वो चाहता था थोड़ा और वक़्त मिले sabko....par इसमें वो कुछ नहीं कर सकता था...

पुजारी जी - (धीरे से) मधु देखो ये अब जाने वाले है क्या तुम इन्हे रोकना चाहती हो....

मधु सभी को ऐसे देख के इमोशनल हो चुक्की थी सोचने की काशमता उसमे थी पर ज्यादा नहीं....

उसने बस हां में सर हिल्ला दिया.....

पुजारी जी - जाओ उन् दोनों को जाके छू आओ...

मधु ने की बात सुन्नी एक बार उनकी तरफ dekha.....aur बस बिन्ना कुछ बोले आगे बढ़ gayi.....aur बढ़ने के बाद मधु ने पार्थ और नीलम को छू लिया.....

यहाँ प्रतीक भी उनको छू सकता tha....par वो इस वजह से डर रहा था अगर उसने ऐसा कुछ किया तो उसकी डार्क एनर्जी उनके अंदर ना चली जाए.....

वो दोनों एनर्जी के फॉर्म में the.....yun समझ लो पानी अब अगर कला रंग दाल दे उनमे चाहे एक hi बूँद क्यों ना वो उनपे इफ़ेक्ट करेंगे.....

डार्क पावर है भी डिस्ट्रक्टिवे.....

मधु के साथ ऐसा नहीं hai....uski पावर क्रिएटिव hai.....chizzon को बना सकती hai.....jab उसने उन् दोनों को टच kiya.....wo जो धुंधलापन था unme......wo ख़तम हो गया और साथ hi साथ दोनों एकदम से चमकने लग गए.....

ये क्या हुआ वह पे बस दो लोग समझ पा रहे थे प्रतीक और पुजारी ji......DB तक को इस बारे में उतना पता नहीं tha......usko तो ये भी पता नहीं था की स्लेयर के सरीर से ये आत्माएं निकलने वाली है....

प्रतीक इस बात को जानता था पर वो ये करना नहीं चाहता tha.....usko नहीं पता था मधु इसके बारे में जान के आगे कैसे रियेक्ट करेगी......

नेक्स्ट अपडेट में थोड़ा और फॅमिली ड्रामा
 
अपडेट - 113

जब पार्थ और नीलम की आकृतियों में गोल्डन पावर gaya.....dono के दोनों hi चमकने लग गए the.....aur वो भी बहुत jyada......logo को आँखें बंद करनी पद गयी थी थोड़ी देर में......

सभी को नहीं.....

पुजारी जी इस रोशनी को जानते the.....unki आँखों में इतनी क्षमता थी की वो इसको देख sakke.....Prateek का भी ऐसा hi tha....aur मधु के बारे में क्या कहना वो तो खुद hi गोल्डन पावर की सोर्स थी......

दादी (आँखें खोलने की कोशिश करते हुए) - ृक्क जाओ abhi.....abhi मत जाओ.....

बंद आँखों से भी आंसू बहे जा रहे थे....

उनको ऐसा लगा सायद नीलम और पार्थ जा रहे है इस वजह से ये ते रोशनी हुई hai......Baaki सब को भी ऐसा hi लग रहा tha.....ab उन्होंने hi बताया था उनके जाने का वक़्त हो चला hai.....aur अब कुछ वैसा hua....to सबको लगा की वो जा hi रहे होंगे......

अब रोज रोज तो आत्माएं आती नहीं वह pe.....to उन्होंने ऐसा सोच liya......aur दादी hi kya.....lagbhag सभी का यही हाल था......

एक तो उन् दोनों से मिलने की कोई उम्मीद hi नहीं थी सभी के पास और वो आज वह पे आ गए the....aur अब जाने भी वाले थे वो भी इतनी जल्दी......

नीलम और पार्थ को इस वक़्त कुछ अलग hi लग रहा tha.....wo पहले से एनर्जी के फॉर्म में the.....aur अब ये एनर्जी और मिलने से वो और ज्यादा एनर्जेटिक हो गए थे....

प्रतीक मधु की तरफ देख रहा था bas......uske दिम्माग में बस यही बात चल रही थी की अगर कही उसकी सोची बातें सच हो गयी तो ना जाने क्या hoga.....Agar यहाँ पे मधु संभल नहीं पाएगी तो बहुत मुश्किल होने वाली thi......agar ऐसा नहीं हुआ तो ना सिर्फ मधु को परेशानी होगी बल्कि वह पे जो कोई भी है सभी को......

गोल्डन एनर्जी क्रिएटिव एनर्जी है पर कैंसर जैसी बीमारी भी ख़राब सेल्स के बहुत मात्रा में क्रिएशन होने के कारन hi होती hai....Prateek इस बात को जानता था अगर गोल्डन पावर किसी तरह यहाँ पे बहार आने लग गया और मधु ने काबू नहीं किया तो वो एनर्जी यहाँ पे खड़े सभी को इतनी ताकत दे देगा की सारे के सारे उस ताकत की मात्रा से मर jaayenge.....bas यही नहीं वो बढ़ती hi जायेगी और कहा रुकेगी इसका अनुमान लगाना मुश्किल होगा......

वही दूसरी तरफ Madhu......wo बस ये सोच रही थी की चलो कुछ प्रतीक के माँ पापा अभी वह पे और रहने वाले hai.....usne ये सब सोचा hi नहीं की उसने ये कैसे kiya.....yaa क्या किया usne.....aisa कुछ भी nahi....wo बस खुश सी thi.....ki उसने कुछ अच्छा किया hai.......muskura रही थी वो.....

प्रतीक उसको hi देख रहा tha.....usko मुस्कुराते हुए देख वो कुछ समझ hi नहीं paaya.....usne क्या क्या सोच रखा था.......

वर्थिंकिंग बहुत बुरी चीज़ज़ होती है :सिघ: लोग ना जाने क्या क्या सोच के बैठ जाते hai......(log तो इतने चूतिये होते है :सिघ: क्या बताये सवाल पूछने से कतराते है कही जवाब देने वाला उस सवाल को hi गलत ना बता दे....)

खैर इस दौरान नीलम और पार्थ के आकृतियों से निकलने वाली रोशनी थोड़ी काम हुई थी पर वो थी अभी bhi....ab लोग अपनी आखें खोल पा रहे थे......

जब सभी ने बारी बारी से ये देखा की वो दोनों अभी भी वही पे है तो सब बहुत खुश hue....ummid नहीं थी ना इस बात की.....

सब वापस से उनकी तरफ बढ़ gaye......jaise पकड़ना चाहते ho.....Ye पता नहीं क्या tha.....koi सज़्ज़ा या फिर कुछ aur......wo सब नीलम और पार्थ के सामने the.....par छू नहीं सकते the.....ek पल को उनको लगा की सायद अब वो वह से चले jaayenge.....par दूसरे पल वो वह से गए नहीं कुछ देर के लिए और वही पे रहने वाले थे.....

उम्मीद ये किसी सज़्ज़ा से काम नहीं hoti.....bahut दुःख देती है ये ummid.....Khair इस वक़्त मधु जो बस मुस्कुरा रही थी उसको पुजारी जी ने पीछे अपने पास बुला liya.....chunne के बाद वो खुद से पीछे तो गयी थी पर अभी भी पास में hi थी पार्थ और नीलम के...

पुजारी जी उसको अपने पास बुला लेते है....

प्रतीक इस वक़्त तक उसको hi देख रहा था तो उसने ये भी dekha....aur ये देखते hi उसको बहुत गुस्सा aaya.....Pujari जी ने अभी जो किया था उसका नतीजा बहुत बुरा हो सकता था.....

पर अभी प्रतीक कुछ कर नहीं सकता था सिवाय चुप चाप खड़े रहने के......

दादी - Prateek......Prateek क्या कर रहे ho.....hum कब से तुम्हे बुला रहे है....

प्रतीक - हां Dadi....wo मैं बस.....

दादी - यहाँ aao....(Prateek का हाथ पकड़ के) नीलम तुमने तो कह दिया की हमने कोई ऐसा काम नहीं किया था जिसकी वजह से हममे तुम दोनों से माफ़ी मांगी pade.....par तुम भी जानती ho.....agar उस वक़्त हमने शांत दिम्माग से सोचा होता to.....sayad आज हम सब साथ hote.....aur प्रतीक को इतने वक़्त tak......apne परिवार से दुर्र नहीं रहना पड़ता....

नीलम - ये सब तो किस्मत की बात hai.....agar हम यहाँ पे होते आप सब के साथ तो सायद कुछ और भी बुरा हो jaata....aapko इन् सब के बारे में नहीं सोचना चाहिए.....

पार्थ - हां माँ आप क्यों बार बार ये सब सोच के खुद को तकलीफ देती ho.....kuch चीजजें हमने खुद भी चुन्नी thi....(Chacha की ओर देखते हुए) माँ आपको याद है जब भैया ने मुझसे दोस्त बनाने के बारे में बातें कही thi....aur मैं उनकी बातों का मज़ाक उड़ा रहा था....

दादी - हां याद hai....uss दिन तुम दोनों के बिच कहा सुन्नी भी हो गयी थी इसी वजह se.....aur मैंने तिण्णो को सज़्ज़ा दी थी....

पार्थ - :lol: हां गलती हम दोनों करते थे और सज़्ज़ा पूनम को भी दी जाती thi....(shant होकर) माँ उस वक़्त hi देर हो गयी थी.....

वह पार्थ दादी से बातें कर रहा था तो दूसरी तरफ दक्ष नीलम से....

दक्ष - नीलम तू चिंता मत karna....Main प्रतीक के साथ rahunga.....uska ध्यान रखूँगा....

नीलम - ये भी कोई कहने की बात है Bhaiya.....Mujhe तो पता hi है आप ऐसा hi karoge.....agar नहीं किया to...to आप जानते है न मैं आपसे नाराज़ हो जाउंगी....

इस बात को कहते हुए उसके आखों में भी आशु वापस आ गए थे साथ hi दक्ष के भी....

दक्ष से रहा नहीं गया और एक बार फिर से अपना हाथ आगे बढ़ाया उसने अपनी बहन के आशु पोछने के liye......aur जब ऐसा hua.....to दोनों hi हैरान हो गए.....

इस बार पता नहीं kaise.....par जब दक्ष ने नीलम की आकृति को चुनने की कोशिश करि तो उसको कुछ कुछ महसूस हुआ tha.....aur ऐसा hi कुछ खुद नीलम को भी लगा था.....

दक्ष (आँखें बड़ी करते हुए) - Neelam.....kya...tujhe भी....

नीलम - Haa....haa भैया मैंने आपका हाथ महसूस kiya....kya आपने भी....

दक्ष - Haa....Neelam haa....rukko.....Prateek....Prateek यहाँ आओ....

प्रतीक जो इस वक़्त दादी के साथ वो उस तरफ मुड़ता उससे पहले hi नीलम खुद उसके पास पहुंच चुक्की thi.....wo कुछ समझ पाटा उससे पहले hi नीलम ने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ा दिया tha......wo पीछे जाना चाहता था पर देर हो चूकककी थी......

नीलम ने उसको छू लिया था.....

प्रतीक ने सबसे पहले अपने अंदर मौजूद डार्क पावर को एकदम से अपने दिल के पास इकठा कर liya......Dark पावर पुरे सरीर में होता है uske.....par इसमें देर हो गयी थी.....

नीलम की आकृति जो अभी चमक रही थी वो धीरे धीरे वापस से धिम्मी पड़ती जा रही थी....

पार्थ - ये क्या हो रहा hai.....tum ऐसी क्यों.....

मधु जो ये सब देख रही thi.....usne जैसे hi देखा की नीलम वापस से धुंधली होती जा रही hai.....wo अपनी जगह से आगे बढ़ gayi.....aur ठीक प्रतीक के पास जाके कड़ी हो gayi....aur अपना हाथ उनकी तरफ बढ़ाया....

मधु - Hello....Main मधु hu....apke बेटे की दोस्त......

मधु का हाथ लग्न था गोल्डन पावर वापस से जाने लग गया नीलम की तरफ......

अभी नीलम को कैसा महसूस हो रहा था ये बात सिर्फ नीलम hi समझ पा रही थी और साथ में Prateek......haa चुनने की वजह से थोड़ा बहुत मधु को भी समझ आ रहा था......

जब मधु ने नीलम को छुआ तो उसके दिम्माग में तसवीरें बनने लग gayi.....andhera जो उजाले को खाये जा रहा tha....par उस अँधेरे के बिच से hi एक रौशनी बढ़ने लगी जो उस अँधेरे को कहती जा रही thi....aur उस रोशनी के बिछे में से फिर से एक andera.....aur ऐसे hi बहुत से अँधेरे और बहुत से ujale.....sab दिख रही थी मधु को......

नीलम की आकृति जैसे किसी बल्ब की तरह हो चली thi.....abhi चमक रही है और उसके तुरंत बाद dhundhli......Uske मैं में भी एक तस्वीर बन रही thi......aur ये अजीब thi.....ek तरफ उजाला hi उजाला और दूसरे तरफ बेसुमार andhera....itna की कुछ कहा hi नहीं जा sakta....aur वो उन् दोनों के hi सरहद पे कड़ी thi....kabhi इस तरफ तो कभी उस तरफ......

एक बार तो उसने अपना हाथ प्रतीक से अलग kiya.....to उसको वो सब दिखाना बंद हो गया अब वो बस उजाले में thi.....par उसको ये उजाला पसंद नहीं आया और वो हाथ जो प्रतीक से दुर्र जा रहा था वो वापस उसके पास जा पंहुचा.....

प्रतीक के बारे में क्या कहा jaaye......usko इमोशंस ज्यादा पसंद नहीं the.....pahle बिलकुल नहीं और अब थोड़ी बहुत आ रही thi.....lekin अभी जो उसने dekha....wo खुद को संभल नहीं पा रहा tha.....Neelam उस जाल में वापस आ gayi......uss दर्द को उसने अपना liya....bas प्रतीक यानी अपने बेटे को चुने के लिए.....

प्रतीक ने अपने हज़ारों साल के जीवन में ये कभी नहीं देखा tha....haa जब यहाँ एअर्थ पे था तो ऐसी चीज़ें देखि थी उसने पर कभी महसूस नहीं करि thi.....aaj वो महसूस कर रहा था......

उसके आँखों से आँशु गिरने लग गए.....

नीलम - पार्थ मैं अपने बेटे को छू सकती हु उसको महसूस कर सकती हु.....

पार्थ - पर ye.....tum इस तरह से....

नीलम - किसी चीज़ज़ को अपनानाने के लिए किसी दूसरे चीज़ज़ को छोड़ना पड़ता है बस वही कर रही hu.....(Madhu की ओर देखते हुए) तुम मेरे प्रतीक की दोस्त हो....

मधु को खुद वो सब महसूस हो रहा tha....usko तो ये सुनाई भी नहीं दिया tha....wo तो बस नीलम के चेहरे को देख रही thi.....usko जब नीलम के होंठ चलते हुए दिखाई दिए तब उसने पूछा...

मधु - haa.....kya हुआ.....

नीलम - कुछ nahi....Main बस पूछ रही थी तुम इसकी दोस्त हो....

मधु ने प्रतीक की ओर देखा भी नहीं बस हां में सर हिल्ला diya......wo इस वक़्त बहुत कुछ महसूस कर रही thi.....aur उसने बहुत सारे उम्मीद लगा लिए the......jaise जब वो अपनी माँ से मिलेगी तो क्या वो भी इसी तरह उसको प्यार karegi....aur भी ना जाने क्या क्या....

उसके आँखों से भी आँशु गिर जाते है.....

नीलम अपना हाथ आगे करती है और उसके आँशुयों को पोछने के कोशिश करती है....

पार्थ भी वह आ जाता है और वो भी प्रतीक को चुनने वाला होता hai.....ye देखते hi मधु ने अपना हाथ उसके पास में भी लगा दिया होता hai.....ab वो सब पार्थ भी महसूस कर रहा था.....

पार्थ ने थोड़ी देर में hi उसको छोड़ दिया पर बातें होती रही......

यहाँ पे ये सब चलता रहा......

दूसरी तरफ लूसिफ़ेर tha.....ab गुस्सा डाब गया था शांत नहीं हुआ tha.....kisi मुर्दे की तरह अपनी गद्दी पे बैठा हुआ था वो.....

जब कभी राजा उदास या निराश होता hai.....to कोई और आ जाता है उसकी जगह लेने ko......kuch ऐसा यहाँ पे होने वाला tha.....par अभी उसमे थोड़ा वक़्त है.....

डेमोस पे बस सनता tha......charo तरफ hi सन्नाटा था.....

पर यहाँ से ज्यादा दूर नहीं फोमोस pe.....waha बहुत हलचल थी.....

ध्रुव खुद को स्लेयर के सरीर में रखने के लिए संघर्ष कर रहा था......

अभी तक उसको ये पता नहीं चला था आखिर ये हो क्या रहा है.....

ध्रुव ने जीन आत्माओं को स्लेयर के अंदर बंधी बनाने के लिए कैद किया tha.....unhi आत्माओं से ताकत खिंच रहा था Justin......aur खुद को उससे ज्यादा ताकतवर बनाने की कोशिश कर रहा tha......Par ये हो नहीं पा रहा था......

लेकिन वो हार नहीं मान रहा था बस लगा हुआ था.....

ध्रुव थकता जा रहा tha....usko ये समझ नहीं आ रहा था की आखिर ये क्यों हो रहा hai.....koshish बहुत करि उसने ये जानने के लिए पर जान hi नहीं पा रहा tha.....koi अंदाजा ह नहीं tha....uske हिसाब से उसने स्लेयर के सरीर को खुला छोड़ दिया tha.....aur सब निकल ए थे......

उसने इस बारे में सोचा था की सायद जीन आत्माओं को उसने डार्क वर्ल्ड से उठाया उनमे से कोई एक hoga.....par इसको दिम्माग से निकल दिया उसने तुरंत hi.....aisa हो hi नहीं सकता tha....agar ऐसा होता तो उसको उनसे लड़ने में वक़्त lagta....aise hi ख़तम नहीं कर देता उन् सब को.....

उसने क्या किसी ने भी नहीं सोचा होगा की खुले पिंजरे के अंदर से कोई परिंदा बहार hi ना aaye.....Justin वही परिंदा था यहाँ पे.....

ध्रुव ने इस बारे में सन्देश भेजने के बारे में सोचा प्रतीक ko.....par वो कर नहीं paaya.....isse पहले तो वो दोनों जुड़े हुए the....matlab जब कभी भी दोनों में से किसी का मैं हुआ दूसरे से बात कर लेता tha......normally....haa अगर कोई खास वजह हो तब ये मुमकिन नहीं हो पाटा था.....

खैर वो प्रतीक को कोई संदेसा नहीं दे paaya.....aur बस वही पे रह gaya......aisa नहीं उसने कोशिश नहीं करि...

एक बार दो बार तीन बार उसने कोशिश kari....par कुछ भी नहीं hua.....aur फिर वो कमज़ोर पद गया......

ये मौका tha.....Justin के liye......iss वक़्त उसने स्लेयर की बॉडी पे काबू करना शुरू कर diya.....aur उसने भी यही कोशिश करि.....

किसी तरह अपने पिता लूसिफ़ेर तक अपनी बात पहुंचने के बारे में.....

पर यहाँ भी वही बात हो रही thi.....wo कही भी जाता कुछ भी तरय करता काम नहीं हो रहा tha......usne एक बार पेड़ों को तोड़ने की कोशिश kari.....jiske बाद उसने खुद को जमीं पे गिर्रा पड़ा पाया.....

वो भी कोशिश करता गया पर काम नहीं बना उसका भी....

ये सब कुछ वह ऊपर से वो इम्मोर्टल बैठा देख रहा था और समझने की कोशिश कर रहा था.....

ये इम्मोर्टल भी अजीब था इसने डार्क पावर को देखा था उस प्लेनेट pe....par इसको उससे ज्यादा जरुरी ये सब laga.....aur इन् सब में इस तरह से उलझा है की उसने वापस जाके कुछ बताने के बारे में भी नहीं सोचा अभी तक.....

डार्क पावर की बात आयी है तो वापस चलते है एअर्थ पे.....

यहाँ पे अब हाल ऐसा था की थोड़ी देर और थोड़ी देर और की कहानी चल रही थी.......

कोई नहीं चाहता था वो दोनों वह से वापस jaaye......aur मधु वो सभी से सहमत thi......bas एक पुजारी जी और दब hi थे वह pe......jinko सब दिखाई दे रहा था......

गोल्डन पावर का असर उन् दोनों पे उस वक़्त तक hi रहने वाली थी जब तक मधु chahe....aur यहाँ पे मधु को खुद hi पता नहीं उसके पास ऐसी कोई शक्ति भी hai......wo तो ये सब किसी और वजह से हो रहा है ऐसा सोच रही थी......

दब जानता था वो गुजर चुक्के hai....aur गुजरे हुए पल्लो को बांध के रखने से खुसी मिलती है पर उससे ज्यादा दुःख भी.....

दब ने इस बात का जीकर पुजारी जी से kiya.....Pujari जी भी उसकी बात से सहमत थे......

पुजारी जी ने मधु को अपने ओर आने का इशारा kiya......Madhu ने उनको देखा उसको लगा की अगर उसने उन् दोनों को छोड़ दिया तो उनको वह से जाना पद jaayega.....par इस बात को नीलम ने भी देख लिया tha.......wo मधु को hi देखे जा रही थी.....

नीलम - मधु बीटा वो लोग भी दोस्त है क्या.....

दब वही पे था और मधु को वह जाना भी था तो....

मधु - सारे नहीं उनमे से एक पुजारी जी hai....ek बाकी के दोनों दोस्त है....

नीलम - पार्थ चलो उनसे भी मिलते है.....

वैसे तो पार्थ को वह जाने की कोई इच्छा नहीं थी पर नीलम के कहने पे वो चला गया....

जब वो वह आये तो पहले तो इंट्रो हुआ उसके बाद पार्थ लीडर से और नीलम दब से बात करने लग गयी.....

मधु - क्या हुआ पुजारी जी.....

पुजारी जी - मधु इनके जाने का वक़्त हो गया है.....

मधु - पर अभी kaise.....abhi तो ये आये है.....

पुजारी जी - मधु इनका यहाँ ज्यादा देर तक रुकना अच्छा नहीं hai.....ye अपने आगे के सफर में पहले से hi बहुत पीछे छूटें हुए है अब अगर और देर हुई तो और पीछे हो जाएंगे....

नीलम - मधु पुजारी जी सही कह रहे hai.....Mujhe भी लगता है अब हममे यहाँ से जाना चाहिए....

नीलम बस यूँ hi बातें कर रही थी दब से पर उसका पूरा ध्यान तो यहाँ था मधु और पुजारी जी pe......jab उसने उनकी बात सुन्नी तो उसको भी वो बात सही लगी....

मधु - पर आप अभी भी यहाँ रह सकती हो....

नीलम - कब तक beta....kab तक तुम हमारे साथ ऐसे रहोगी....

मधु - अगर आप चले गए तो प्रतीक का क्या hoga....aur बाकी सब ka.....dekho सब कितना प्यार करते है आपसे....

नीलम - हम दोनों तो कब के जा चुक्के है beta....ye तो यहाँ पे बस प्रतीक और तुम्हारे वजह से आ पाए hai....aur रुक्के हुए hai....waha देखो उन् सब ko......hum जितनी देर यहाँ पे रुकेंगे ना हमारे जाने के बाद उतना hi दुःख होगा उन् सब ko.....hame अब जाना hi होगा....

मधु - मैं क्या आपसे कुछ पूछ सकती हु.....

नीलम - इसमें सोचना क्या hai.....jarur पूछो तुमने हममे वक़्त दिया है और साथ में अपने बेटे को एक बार चुनने का मौका bhi....puccho क्या पूछना है....

मधु - क्या सबके माँ पापा आप लोगो के तरह hi प्यार करते है अपने बच्चो से.....

नीलम - नहीं beta.....sabke ऐसे नहीं करते इससे भी ज्यादा करते hai.....Maa बाप के प्यार को दुसरो के माँ बाप के प्यार से कपड़े करना बहुत मुश्किल hai.....bahut jyada.....Mujhe पता है तुम्हे मेरे अंदर क्या चल रहा है सब पता चल चुक्का hai.....hai naa.....ek राज़ की बात बताओ मुझे भी पता चल गया है तुम्हारे अंदर के बातों ka.....to चिंता मत karo....jab तुम अपने माँ पापा के पास जाओगी और उनको पता चलेगा की उनकी इतनी प्यारी इतनी अच्छी बेटी है तो वो तुम्हे बहुत प्यार karenge....samjhi...

पार्थ - हां सही kaha.....(Pujari जी से) हममे एक आखिरी बार उन् सब को अलविदा कहने का मौका दीजिये....

पुजारी जी - आप कैसी बात कर रहे है ये सब मेरे हाथ में nahi...(Parth का इशारा समझते हुए) हां ha....jarur Madhu.....ab इनको पड़के रहने का कोई मतलब नहीं hai....inko छोड़ do...ye खुद से कुछ देर में यहाँ से चले जायेंगे...

मधु ने पार्थ को तो छोड़ दिया पर नीलम को छोड़ने से पहले उसके गले लगी थी wo.....sab देख रहे थे उसको....

पार्थ वह पे गया और उसने सभी को बताया की अब उनके जाने का वक़्त हो गया hai....wo और देर तक नहीं रुक सकते....

वापस से सबकी आखें भर आयी नीलम ने मधु को सभी की ओर देखते हुए कहा देखो ये वापस से उद्दस हो gaye.....par इनके अंदर एक उम्मीद है अभी भी की सायद हम थोड़ी देर और ृक्क jayenge....wapas से....

ये झूठी उम्मीद जब तक नहीं टूटेगी बढ़ती hi जायेगी और बहुत दुःख देगी इन्हे.....

मधु ने उसकी बात सुन्नी और हां में गर्दन हिलायी.....

नेक्स्ट अपडेट में देखते है निकिता का case.....yaha पे क्या होता है और साथ hi स्ट्रेंज वर्ल्ड की बातें कैसे दब वो करता है जो उसने करने का सोचा था
 
अपडेट - 114

पार्थ ने सबको बता दिया था की अब उनके पास ज्यादा वक़्त नहीं बच्चा hai.....ab उनको वह से जाना hoga.....Sabne ये बात सुन्नी और उदास हो गए......

ये सब जानते थे की वो कब के जा चुक्के थे इसके बाद भी वो इस उम्मीद में थे की वो इसी रूप में यहाँ उनके पास उनके साथ रह sakke......jo मुमकिन hi नहीं था......

नीलम - Dekho.....ye सब कैसे उद्दस हो gaye.....tumhe अब मेरी बात समझ आ रही है.....

मधु ने हां कहा उनसे......

नीलम उसको वही छोड़ के बाकी सभी के पास आ gayi......waha पे पार्थ सभी को वापस से समझा रहा था की वो वह से कब के जा चुक्के है इस रूप में वह सभी के साथ रहना मुमकिन hi नहीं है....

नीलम - मैंने अभी तक अपने बेटे का रूम नहीं देखा hai.....Prateek क्या हम देख सकते है तुम्हारा रूम....

प्रतीक ने जब ये सुन्ना तो वो कुछ नहीं bola...wo समझ hi नहीं पाया की क्या बोले......

इतने में P.Bua ने कहा.....

P.Bua - ये भी कोई पूछने की बात hai......Chalo इसके कमरे में.....

वो तो चली भी जाती रूम में अगर उनको समझ नहीं आया होता की रूम की बात यहाँ पे क्यों हुई hai......thoda बुरा लगा उनको पर वो भी समझदार थी....

वो जानती थी कुछ बातें होंगी जो नीलम और पार्थ बस प्रतीक से करना chahenge....kuch प्राइवेट बातें.....

उन्होंने पीछे मुद के प्रतीक की तरफ देखा.....

P.Bua - प्रतीक जाओ अपने माँ पापा को अपना रूम दिखाओ.....

प्रतीक ने कुछ नहीं kaha.....bas हां में सर hilaya....wo भी समझ चुक्का था इस बात ko.....aur फिर वो चल पड़ा अपने रूम की तरफ.......

यहाँ वो तिण्णो रूम में गए hi थे की लीडर ने सभी को कहा......

लीडर - मैं आप सब के सामने एक बात कहना चाहता हु.....

लीडर को यहाँ पे अच्छे से कोई नहीं जानता tha.....bas इतना hi पता था की पंकज इसको जानता है और उसके बाद बाकी सब से थोड़ी बहुत पहचान है बस......

जब लीडर ने कहा उसको कुछ कहना है तो सब उसकी तरफ देखने लग गए.......

दब ने धीर्रे से कहा भी......

दब - अभी सही वक़्त नहीं hai.......rukk जाओ अभी.....

लीडर ने इसका जवाब धीर्रे से दिया.....

लीडर - अभी नहीं तो और kab......ab तो मैं उन् सब चीज़ज़ों से भी आज़ाद हु.....

दब उसको समझाना चाहता था पर अब तीर कमान से निकल चुक्का था....

लीडर आगे aaya....aur सभी की ओर dekha.....sayad चेक कर रहा था की सभी का ध्यान उसकी तरफ है भी या नहीं.....

सब उसकी ओर hi देख रहे the.....ye देखने के बाद लीडर निकिता की तरफ देखने लग gaya.....aur थोड़ा आगे बढ़ा.....

वो कब से इस पल का इंतेज़्ज़र कर रहा tha.....uske आँखों में आँशु भी आ चुक्के थे....

वही निकिता को ये बात समझ नहीं आ रही thi.....wo ये बिलकुल भी समझ नहीं पा रही थी आखिर क्या वजह है की ये आदमी उसकी तरफ आ रहा है.....

थोड़ी परेशां थोड़ी हैररन सी थी निकिता abhi.....par उसको क्या पता था ये सब थोड़ी hi देर में क्या होने वाला है......

लीडर - Nikita......Main....Main......Nikita....tumhara.....Main.....Tumhara पिता हु निकिता......

ये लीडर कुछ ऐसा बोलने वाला है इस बात का पता नहीं था वह पे किसी ko.....par उसने तो बोल दिया था.....

सब के सब हैरान थे......

आज पता नहीं ये सब और क्या क्या देखने वाले the....abhi तक इन्होने नीलम और पार्थ को देखा था और अब ये निकिता का पिता है लीडर ये देख रहे थे......

सब के सब हैरान the....bas निकिता को छोड़ ke......wo तो जैसे थोड़ी देर पहले थी वैसे hi अभी भी thi......thoda भी बदलाव नहीं था उसके चेहरे पे.....

लीडर - Nikita.....Beta मैं तुम्हारा पापा हु......

अब भी उसके चेहरे पे कोई भी एक्सप्रेशन नहीं बदला tha......Leader को ये बात समझ hi नहीं aayi.....wo उसके पास जाने वाला था की तभी चची अपनी जगह से हिल्ली और जाके निकिता के सामने कड़ी हो गयी उसके तरफ मुँह करके.....

चची - निकल जाओ मेरे घर se......niklo.....

चची तो कुछ कर hi देती उस लीडर के saath......wo तो दब ने उनका ध्यान बता दिया......

दब ने लीडर को पकड़ा और उसको घर से बहार लेके जाने लग गया.....

लीडर कमज़ोर था पहले से पर इतना भी नहीं की वो किसी बच्चे की तरह दब के साथ चला jaayega......lekin इस वक़्त दब के पास भी वो हरे रंग का हीरा था जो उसने फोमोस से लिया tha....aur वो उसको काफी ताक़त दे रहा tha....jiski वजह से वो आराम से लीडर को अपने साथ लेके जा पा रहा tha.....par लीडर वो कुछ कर नाह पा रहा था पर बोल पा रहा था.....

वो वही से चिल्ला रहा था निकिता को बुल्ला रहा था.....

लीडर - Nikita....Main तुम्हारा पिता hu.....sach mein.....Meri बात sunno.....tum सब मुझे मेरी बेटी से दुर्र नहीं कर सकते......

यहाँ लीडर घर के दरवाजे से बहार गया और वह निकिता के आँखों से आँशु बहार आने लग गए.....

एक आदमी इतने वक़्त से उसके आस पास tha.....usne कभी उसको इस बात का अहसास नहीं होने diya....ki वो उसका पिता hai.....aur आज पता नहीं उसको क्या हुआ की उसने ये बात सबके सामने kahi.....wo किस चीज़ज़ के इंतज़ार में था.....

बहुत से सवाल थे सभी के मैं में और उन् सब से ज्यादा सवाल निकिता के मैं में थे.....

जब ये हुआ तो दक्ष पंकज की तरफ घूर रहा tha.....Pankaj hi था वो जिसने उसको मिलाया था उस लीडर से....

पर पंकज भी बेचारा क्या kare......use भी इसके बारे में पता नहीं चला tha....baat hi नहीं इस बारे में जब लीडर को कन्फर्म हुआ की निकिता उसकी बेटी है....

इस दौरान रूपल गुस्से में दरवाजे की तरफ जा रही thi.....jiska पता चची को लग गया.....

चची - रूपल यहाँ aao.....aur निकिता को रूम में लेके चलो......

रूपल - पर माँ....

चची - सुन्ना नहीं तुमने मैंने क्या kaha......chalo अंदर.....

रूपल दीदी क्या hi कर leti.....chup चाप पहले चची के पास गयी फिर वह से निकिता को लेके उनके साथ कमरे की ओर बढ़ gayi.....K.Bua भी उनके साथ अंदर चली गयी....

बहार जो बच्चे थे वो बस एक दूसरे को देख रहे थे......

प्रतीक को अपने रूम में गए वक़्त हो गया tha.....Dadi से रहा नहीं नहीं गया वो एक आखिरी बार दोनों से और मिलना चाहती थी तो उन्होंने P.bua से kaha....par P.bua ने थोड़ा रुकने को कहा

वही रूम में आने के बाद प्रतीक साइड में जाके खड़ा हो गया था......

नीलम - अच्छा कमरा है ये तो.....

पार्थ - ये रूम हमारे लिए hi था....

नीलम - प्रतीक तुम भी जानते हो हमारे पास वक़्त काम hai....hum यहाँ तुमसे बस एक बात करने आये hai....humme नहीं पता तुम किस तरह स्लेयर के पास जा पहुंचे और किस तरह उससे बचके हममे यहाँ लेके आये ho....par एक बात याद rakhna.....wo हमेसा वापस आता है....

पार्थ - हां बीटा हम इस बारे में hi बात करना चाहते the.....uss स्लेयर को कभी भी ख़तम नहीं किया जा sakta......uska जन्म नहीं हुआ था उसको बनाया गया था....

प्रतीक - मैं जानता हु पर आपको अब इसकी फिकर करने की जरुरत नहीं hai.....wo अब कभी भी वापस नहीं आ सकता.....

नीलम - बीटा तुम समझ नहीं रहे वो हर बार वापस आता hai......aur उसको ख़तम नहीं किया जा sakta.....tumhe हमसे एक वडा करना होगा.....

प्रतीक को अपने प्रति उन् दोनों का इतना स्नेह देख बहुत अलग सा महसूस हो रहा tha....wo भावुक होता जा रहा था.....

प्रतीक - कैसा वडा....

नीलम - तुम कभी खुद से उसके पास नहीं jaaoge......wada करो ये.....

प्रतीक ने सोचा इसमें क्या है वो ये वडा कर सकता hai.....par उसने ये भी सोचा था की वो ये वडा जरूर nibhayega.....chahe कुछ भी हो जाए.....

प्रतीक - ठीक hai.....Maa पापा मैं आप दोनों से वडा करता हु.....

दोनों ने ये सुन्ना तो वो खुस हो गए......

पता नहीं बहार क्या हो रहा था कुछ आवाजें आयी प्रतीक ने दरवाजे की तरफ dekha....aur जब पलट के वापस नीलम और पार्थ की ोूर देखा तो वो दोनों धुंधले होने लग गए थे....

प्रतीक - आपके पास अब ज्यादा वक़्त नहीं hai.....humme बहार चलना चाहिए वो सब आपको आखिरी बार देखना छह रहे होंगे.....

पार्थ - वो देख चुके है Prateek.....ab और देखा तो दुःख hi मिलना है बस.....

नीलम - सही kaha......Tum अपना ध्यान रखना beta....aur अगर कभी कोई घर का कुछ कह दे तो बुरा न manna.....baat सायद hi गलत नीकले पर उनका मकसद तुम्हारी भलाई hi होगी हमेशा.....

ऐसी hi कुछ और बातें करते गए वो और धीरे धीरे उनकी आकृतियां धुंधली होती जा रही thi....aur वैसे वैसे hi प्रतीक की आँखें नाम होती जा रही थी.....

वो आज इस बात को भी समझ रहा था की माँ बाप के होने का क्या मतलब होता hai......wo खुद तो दुखों की धुप में जलते रहते है पर अपने बच्चो को सुख के चौ में रखते है....

उनके जाने के बाद प्रतीक अपने बीएड पे बैठ गया.....

अभी कुछ hi वक़्त तो हुआ tha.....ki उसके दरवाजे पे दस्तक hui......Jab दरवाजा खुला तो सामने मधु और पंकज the....dono hi थोड़े परेशां से लग रहे the.....par अपनी परेशानी छुपाने की कोशिश कर रहे थे...

प्रतीक ने दरवाजा खोला और साइड में खड़ा हो gaya......wo दोनों भी अंदर आ गए.....

मधु - क्या वो दोनों चले गए......

प्रतीक - हआ वो चले गए....

पंकज - हम है तुम्हारे साथ.....

प्रतीक - हां पता hai.....chalo बहार सबको बता आते है की माँ पापा जा चुक्के hai......wo वह इंतज़ार कर रहे होंगे.....

पंकज - हां.....

पंकज ने हां तो कहा पर बहार जाने के लिए उठा नहीं वो बैठा hi रहा.....

प्रतीक - क्या बात hai....kuch हुआ है kya....pareshan लग रहे हो.....

पंकज ने मधु की तरफ dekha....aur इशारे में उसको बताने के लिए kaha....par मधु ने अपनी बड़ी बड़ी आखें और बड़ी करके उसको दिखाई.....

पंकज - वो bahar....Leader ne....wo निकिता se....kaha की वो uska.....Leader उसका पिता है......

प्रतीक - Ooh.....haa तो....

प्रतीक का रिएक्शन देख के दोनों hi हैरान the.....unko ऐसा लगा जैसे ये इस बात को पहले से जानता ho.....unko लग रहा था निकिता इसकी दोस्त है तो इसको गुस्सा aayega....wagera वगेरा पर ये तो.....

पंकज - ये क्या hai.....kya तुम्हे इस बारे में पहले से पता था.....

प्रतीक - हां....

वो आगे कुछ बोलता उससे पहले hi मधु ने गुस्से में उससे कहा......

मधु - तुम्हे पता tha......tumhe ये पता था तो तुमने बताया क्यों nahi.......Nikita तो दोस्त है tumhari......kyun नहीं बताया उसको.....

उसका गुस्सा देख के प्रतीक ने उसकी पूरी बात ना बताने का socha....aur कहा....

प्रतीक - अरे सुनने तो मुझे पूरा तो करने do....Main जानता हु ये बात पर कुछ वक़्त पहले hi पता चली जब यहाँ आ रहा था तभी.....

मधु - मुझे सब कुछ बताओ.....

प्रतीक - अभी ये जरुरी है kya....Mujhe देखना है बहार क्या चल रहा है.....

पंकज ने पहले तो उसको जो कुछ हुआ सब शार्ट में बताया और उसके बाद बहार चल दिए वो सब.....

बहार आते hi दादी ने उससे पूछा.....

दादी - वो दोनों कहा है......

प्रतीक - दादी माँ पापा जा चुक्के है.....

दादी ने जब ये सुन्ना तो वो रोने lagi....wo थोड़ा और वक़्त बिताना चाहती thi....par दादा जी ने उनको संभल लिया.....

प्रतीक कुछ बोलता उससे पहले दक्ष ने कहा.....

दक्ष - मुझे लगता है अब हममे भी चलना चाहिए.....

ये बोल के उन्होंने पंकज की तरफ घूरते हुए देखा......

वो जाना चाहते थे जो कुछ हुआ निकिता का वो सब क्या tha...Leader का सच जानना चाहते थे wo...aur लीडर से तो पंकज के कारन मिला था वो तो उससे hi पूछ सकता था,....

मधु - क्या मैं भी आज आ सकती हु वह.....

दक्ष ने एक बार वापस घूरा पंकज ko.....aur फिर बोलै....

दक्ष - इसमें भी कोई पूछने की बात hai......Wo तुम्हारा भी घर hai....tum वह आ सकती हो जब मैं करे.....

:सिघ: अपडेट इससे लम्बा tha.....par गलती से फाइल डिलीट हो gayi.....Raat में नेक्स्ट अपडेट आएगा उसमे दब का स्ट्रेंज वर्ल्ड जाना और वह क्या होगा वो सब दिखाया jaayega.....saath में यहाँ घर पे और क्या होता है वो भी.....
 
अपडेट - 115

रात हो चली थी रूपल दीदी के नाना नानी अपने घर चले गए the.....Daksh मां भी पंकज और मधु के साथ घर चले गए the......Pujari जी भी निकल गए the....aur दब वो तो तब से hi गया हुआ था जब से वो लीडर को लेके निकला tha.....wapas hi नहीं aaya....aur किसी ने ध्यान भी नहीं दिया....

घर पे माहौल कुछ भरी भरी सा tha......sayad इतना कुछ होने के वजह se......Dadi उदास थी की नीलम और पार्थ चले gaye......baaki सब भी उद्दस थे इस बात से पर जाहिर नहीं कर रहे थे उतना.....

दादी को सँभालने के लिए दादाजी थे और थोड़ा बहुत मदद चाचा और P.Bua कर रहे थे उनका.....

चची, K.Bua और रूपल दीदी ये तिण्णो hi निकिता के साथ the.....uske साथ भी एक झटके में बहुत कुछ हो गया था.....

अजीब है जब प्रतीक के माँ पापा आये उस हालत में तो वो उससे अंदर hi अंदर जल रही thi.....aur साथ में एक उम्मीद बना लिया था उसने की सायद वो भी kabhi....kisi दिन अपने माँ पापा से मिल paayegi.....par देखो उसके पिता उसके सामने आये उसको बताया पर उसने कुछ कहा hi nahi.....wo बस चुप हो gayi.....aur उसके बाद रोने लग गयी.....

चीजजें आपको मिल जाए जितना जरुरी ये है उतना hi जरुरी ये भी है की वो कैसे मिले hai.....Agar जरुरी नहीं होता तो सायद अभी निकिता भी लीडर के साथ hoti.....khush hoti....par ऐसा नहीं है.....

सब उसको संभल रहे the.....par उसके आँशु थे जो सुख hi नहीं रहे थे.....

प्रतीक उससे मिलने gaya....par वो समझ नहीं पाया की उसको क्या बोलना chahiye.....isko रिस्तों के बारे में ज्यादा एक्सपीरियंस है hi नहीं......

ये रात मुश्किल से बीतता यहाँ पे....

जब सुबह हुई तो प्रतीक के रूम के दरवाजे पे दस्तक हुई......

प्रतीक उठ तो पहले hi गया tha....aur बहार ध्यान भी लगा के आ चुक्का tha.....abhi बस तैयार हुआ hi था की दस्तक हुई थी ye.....Usne दरवाजा खोला....

सामने K.Bua thi....aur साथ में रूपल दीदी.....

रूपल दीदी - अच्छा है तू तैयार हो गया hai....chal हम बहार जा रहे है.....

प्रतीक - Bahar.....kaha bahar...mujhe तो......

वो बोल hi रहा था की उससे पहले hi रूपल ने अपना हाथ आगे किया और उसको रोकक diya.....aur बोलना शुरू किया.....

रूपल - हम सब बहार जा रहे hai.....K.Bua और P.Bua ने भी छुट्टी ले ली है स्कूल se....aur तो और पापा भी रेडी है......

प्रतीक - पर दीदी मुझे तो जाना है ना कॉलेज mein......wo मधु.....

रूपल ने जब मधु सुन्ना तो अपनी आँखें छोटी करके प्रतीक को देखने लगी....

प्रतीक - अरे वो पुजारी जी ने कहा था ना......

रूपल - वो बच्ची नहीं है koi.....samjhe....jo हर वक़्त उसके साथ raho....aur सुन्ना मैंने तुमने क्या किया tha....kaise उसकी सुरक्षा कर रहे ho.....Prateek वो अभी ठीक hai....par निकिता nahi.....Tumhe पता है कल कितने मुश्किल से उसका रोना बंद करा था humne.....aur कितनी मुश्किल से सोई थी wo......aaj हम कही बहार जाएंगे तो उसका भी मूड सही होगा kuch.....aur दादी का भी.....

प्रतीक - hmm....wo तो ठीक hai....par मैं पुजारी जी को बता देता हु ना.....

रूपल - किसी को कुछ बताने की जरुरत नहीं hai.....mat आओ तुम हमारे saath.....K.Bua चलो यहाँ से इससे बात करनी hi बेकार hai.....iske पास किसी के लिए वक़्त hi नहीं है....

प्रतीक - अरे मैंने ऐसा कब kaha....Main भी चल रहा हु आपके साथ....

रूपल - ठीक है अब चल ये बात निकिता को बता.......

प्रतीक - Kya.....kya मतलब है इसका.....

रूपल - क्या मतलब है से क्या मतलब है tera.....tu जा और बोल उसको बहार चलने के लिए हमारे saath....wo सुन्न नहीं रही मेरी बात ko.....tu भी होगा तो जरूर सुनेगी.....

मैं चल दिया रूपल दीदी और K.Bua के साथ.....

रूम के बहार hi थे हम की K.Bua ने कहा...

K.Bua - रूपल मुझे लगता है थोड़ा टाइम देना चाहिए isko.....abhi क्यों.....

रूपल - K.Bua.....Maine आपको पहले hi kaha......Main उसको ऐसे देख hi नहीं sakti.....agar वो ऐसे रहेगी तो मुझे गुस्सा आता rahega....aur गुस्से में मुझे खुद नहीं पता मैं क्या karungi.....kal रात से जब भी उसको देख रही हु उस आदमी पे इतना गुस्सा आ रहा है की मैं कर रहा है जाके उसको अभी के abhi....wahi पे पीट दू....

प्रतीक ने जब उसको ये बात करते हुए dekha....aur साथ में रूपल दीदी की आँखों का रंग बदलते देखा तो वो थोड़ा परेशां हो गया.......

ये गुस्सा जैसे जैसे बढ़ रहा tha.....Prateek को सामने दिखने लगा अगर इसको रोक्का ना गया तो लीडर का क्या हाल होने वाला hai......wo पावर्स जो रूपल दीदी के अंदर है वो उनको बिन्ना पता लगे hi लीडर का काम ख़तम कर आएंगे....

प्रतीक - Didi......haa आपने सही kaha.....K.Bua दीदी सही कह रही hai.....Main भी नहीं देख सकता निकिता को इस तरह se.....Didi आप शांत हो जाइये हम बात करते है उससे......

वो तिण्णो रूम के अंदर gaye.....waha पे चची और P.Bua पहले से the.....Chachi निकिता के बाल बना रही thi....aur wo.....wo बस बैठी thi.....jaise कोई बेजान सी गुड़िया को बिठा रखा हो किसी ने कुर्सी पे....

चची उससे बात करने की कोशिश कर रही thi....par ये एकतरफा बातें hi thi....bas चची बोलती जा रही thi.....Nikita तो अपना सर भी नहीं हिल्ला रही थी......

P.Bua भी इसी कोशिश में थी की वो कुछ बातें kare.....par वो बोल ह नहीं रही thi.....usne कल रात से कुछ कहा hi नहीं था अभी तक इसी वजह से तो ये परेशां थे.....

प्रतीक भी गया वह pe.....par जैसे कल था वैसे hi aaj.....haa बस आँखों से आँशु नहीं गिर रहे थे निकिता के सायद अब सुख गए होंगे सब....

वो तब भी वैसे hi बैठी rahi......uski तरफ देखा भी नहीं.....

प्रतीक ने ये देखा और उसका ध्यान अपनी ओर लाने के लिए कहा....

प्रतीक - Nikita....hum सब बहार जा रहे hai....Tum भी चलोगी न हमारे साथ.....

इतना कहने के बाद भी वो वैसी hi थी.....

रूपल दीदी जो पहले से गुस्से में थी वो उसके पास गयी और चची से पूछा......

रूपल दीदी - ये तैयार है ना......

चची - हां पर....

रूपल - अब कोई पर वॉर नहीं hoga.....ab ये चल रही है हमारे साथ.....

चची - रूपल बीटा उसको थोड़ा वक़्त तो दो.....

रूपल - क्या वक़्त do.....kuch हुआ है kya....kuch भी नहीं हुआ है isko......ye ठीक hai.....aur हमारे साथ चलेगी तो और ठीक हो जायेगी......

उन्होंने किसी की सुन्नी hi नहीं बस उसका हाथ पकड़ा और खींचते हुए उसको उठाने लग gayi.....aur वो किसी बेजान सी गुड़िया की तरफ उठ भी गयी.....

जब ऐसा हुआ तो रूपल दीदी ने उसकी ओर dekha.....gussa अब कुछ और hi बनता जा रहा tha.....jo आखें गुस्से से लाल हुई जा रही thi....unme अब आँशु आते जा रहे थे......

निकिता फिर भी बस कड़ी thi......chahre पे बिन्ना किसी भाव के.......

रूपल दीदी - माँ इसको बोलो ना बात kare......kyun ये ऐसे hai.....Bua आप बोलो na......dekho isko.....kyun चुप है ये.....

वो बोल रही थी और आँखों से आँशु बहने लग गए थे.....

निकिता के चेहरे पे अभी भी कोई भाव नहीं the.....usko देख के तो ऐसा लग रहा था जैसे सरीर में कोई आत्मा hi नहीं ho.....bejaan सी लाश कड़ी हुई है.....

रूपल दीदी वैसे hi सबको बोल रही थी की उसको बोलने के लिए कहे बातें करने के लिए kahe......Rupal दीदी को प्रतीक बहुत प्यारा tha.....par निकिता उससे काम प्यारी नहीं thi.....jaha प्रतीक भाई था unka.....wahi निकिता को भी अपनी छोटी बहन से काम नहीं मन्ना था unhone....aur अब इस तरह उसको देख वो अंदर hi अंदर रो रही thi.....shuru में जैसी उनकी प्रविर्ती है किसी भी चीज़ज़ को गुस्से का रूप दे देना उन्होंने वही kiya....par जब वो काम नहीं किया तो उसको वो जैसा है वैसे hi सबके सामने रख दिया उन्होंने.....

निकिता का भी अलग सा hi कनेक्शन बन गया था रूपल दीदी के saath,.....Prateek भले hi दोस्त हो सिर्फ उसके लिए पर उसने भी रूपल दीदी को बहन से काम कभी नहीं माना.....

जब रूपल दीदी ऐसे रो रही thi.....aur निकिता कुछ भी नहीं कर रही थी तो चची ने प्रतीक को और K.Bua को उनको बहार ले जाने को kaha.....apne रूम में......

चची समझ रही thi.....wo जानती थी की ऐसी बातों के बाद चाहे कोई भी हो उसको वक़्त की जरुरत पड़ती hi hai.....par वो ये बात रूपल दीदी को समझा hi नहीं पा रही thi....Rupal दीदी समझ hi नहीं पा रही thi......wo तो रात से hi उससे बात करना छह रही thi.....Kisi तरह उसको समझाया था चची ne....par अब कहा....

मैं और K.Bua रूपल दीदी को उस रूम से बहार दूसरे रूम यानी उनके रूम में लेके gaye......wo गुस्से में थी रो रही thi.....unko खुद समझ नहीं आ रहा था की उनके अंदर चल क्या रहा tha......Prateek उनकी आँखों में देख रहा tha....wo पल पल अपना रंग बदल रही थी.....

यहाँ पे ये चल रहा था वही दूसरी तरफ

डेमोस पे......

लूसिफ़ेर कल से अपने सिंघषण पे hi बैठा tha....wo उठा hi नहीं वह से kabhi.....bas बैठा रहा था......

जो सैनिक बचे हुए थे वो वह आ रहे the......wo किसी तरह डरते हुए अपनी बातें उसको बता रहे the.....par वो सुन्न नहीं रहा tha.....wo तो खुद में hi खोया हुआ था......

कुछ वक़्त बाद एक बाँदा आया वह पे जो खुश tha.....jo सैनिक वह आस पास थे वो उसको खुश देख के चौंक रहे the......khusi के लिए nahi.....iss लिए क्यूंकि वो लूसिफ़ेर के पास जा रहा tha....iss वक़्त.....

वो अंदर gaya....usne देखा लूसिफ़ेर वैसे hi बैठा हुआ hai.....kal के लड़ाई के बाद उसने खुद को साफ़ भी नहीं किया था उसके सरीर पे खून लगे हुए hi थे.....

"Maharaj......Main आपके लिए एक अच्छी खबर लेके आया हु...."

लूसिफ़ेर ने उसको देख के भी अनदेखा कर देता पर उसके चेहरे की khushi.....wo लूसिफ़ेर को कांटे की तरह चुभ रही थी.....

गुस्से से आँखें लाल हो उठी uski.....wo तो उठ के उसको मार hi deta.....par बन्दे की किस्मत बहुत अच्छी thi.....aaj के लिए तो अच्छी hi थी.....

उसने लूसिफ़ेर के उहने से पहले hi नाम ले लिए जस्टिन का......

"Maharaj.......Rajkumar जस्टिन ठीक है......"

अभी आँखें गुस्से से लाल thi.....par ये सुनने के बाद तो और लाल हो गयी thi.....Gussa और बढ़ गया था लूसिफ़ेर तय कर चुक्का था की इसको आसान मौत नहीं देनी hai.....usne अपनी जगह से hi पूछा......

लूसिफ़ेर - अगर वो ठीक है तो बताओ कहा है JUSTIIIIIIIIIIINNN.....

लूसिफ़ेर की गर्जना सुनके तो एक्पाल को वो कांप utha.....wo भूल hi गया की वो क्या कहने आया tha.....maut सामने दिख रही थी उसको.....

जो सैनिक वह बहार थे वो धीरे धीरे वह से दुर्र जाने लग गए.....

उस बन्दे ने छलकते हुए कुछ kaha.....par क्या kaha.....wo तो सायद उसको भी समझ नहीं आया hoga.......tutte फूटे सब्द निकल रहे थे उसके मुख से.....

लूसिफ़ेर - कहा है JUSTIN......BATAAAAAOOOOO

खुद को सँभालते hue....jo भूल चुक्का था उसको याद करते हुए किसी तरह अपनी बात कहने की हिम्मत जुटता रहा था वो.....

"Maharaj......aaj स्ट्रेंज वर्ल्ड में हमारे लोगो की आत्माएं घूम रही thi....guptcharon से पता चला की वो अपने परिवार वालो से मिल रहे थे....."

लूसिफ़ेर का गुस्सा अब इतना बढ़ गया था की अगर उसकी आँखों में सीधा देख ले कोई तो वो डर से मर jaayega.....ye बात hi ऐसी कही थी usne......aatmayein मौत के इतने वक़्त बाद नहीं पहुँचती है kahi.....yaa तो वो अपने आगे के सफर पे निकल जाती है या बस भटकती रहती है पर शुरू से hi ऐसे कभी भी सामने नहीं आ जाती वो.....

लूसिफ़ेर - तो तुम्हे ये गुप्तचरों से पता चला है.....

बड़े hi शांत लहज़े में कहा लूसिफ़ेर ne......aur उस बन्दे ने डरते हुए अपनी बात पूरी करि....

लूसिफ़ेर - चलो मान लिया वो आत्माएं वह गयी hogi.....par.....isse जस्टिन ठीक है इस बात का क्या प्रमाण है तुम्हारे पसससससस बताआऊवो

पेअर कांप रहे थे डर से ab......itna की घुटनो पे बैठना पड़ा उसको.....

"महाराज राजकुमार जस्टिन यहाँ नहीं aaye.....matlab उनको कोई सरीर मिल गया hoga.....unki मौत नहीं हुई है....."

ये कुछ बातें thi.....jinhone लूसिफ़ेर के गुस्से को गायब कर दिया.....

लूसिफ़ेर - तुमने जो कहा वो बात अगर सच है तो मुझे अपने गुप्तचरों से बात karao......Main खुद पूछना चाहता हु उनसे.....

"जी Maharaj......main उनतक सन्देश पहुँचता hu.....hum शाम तक उनसे बात कर पाएंगे...."

लूसिफ़ेर - शाम तक nahi....jitni जल्दी हो सक्के उतनी जल्दी का प्रबंध करो....

"जी महाराज"

किसी तरह वो वह से खुद को सँभालते हुए बहार nikla.....aur बहार जाते hi उसने गुप्तचरों से बात करने की तैयारी शुरू कर दी......

वही दूसरी तरफ एअर्थ पे आश्रम में.....

पुजारी जी और गुरूजी दोनों hi वह पे the.....Leader भी था वह पे निराश sa......khud को कोष रहा tha.....aur सवाल करना छह रहा था दब se.....Par दब अभी किसी और चीज़ज़ में लगा हुआ था......

दब इस वक़्त उस हर्रे माननी को एल्फ देश के उस मुकुट में वापस लगाने के लिए उसको सही आकर देने में लगा हुआ tha.....saath hi उसमे कुछ और भी चीजजें दे रहा था ऐसी चीजजें जिनकी अभाव थी उस वक़्त जब उसके पूर्वजों ने उस मुकुट में माननी लगाया tha......wo चीजजें जो उसको अब कभी भविष्य में उस मुकुट से अलग नहीं होने देने वाली thi.....wo चीजजें जो उस मुकुट को धारण करने वाले की शक्तियां कुछ हद तक बढ़ा देने वाली thi.....wo चीजजें जो उसको धारण करने वाले के मैं को शांत रखने का काम करने वाली थी......

जल फूलों का रास लीडर का बच्चा हुआ खून जिसमे फोमोस की भी शक्तियां thi....uss दानवी पेड़ के तन्ने का रास जिसको उसने लीडर का खून पीला के बड़ा किया था.....

ये चीजजें उसके पूर्वजों के पास कभी भी नहीं thi.....wo इस चीज़ज़ में लगा हुआ tha.....uss माननी को सटीक करने के काम में....

वो इस काम को कर hi रहा था की उसका फ़ोन baja.....phone उसके पास भी था वो भी इंसानो के बिच रहा था कुछ वक़्त.....

उसका फ़ोन पास में hi रखा था उसने लीडर की ोूर देखा तो लीडर ने उसका फ़ोन dekha.....phone पे निकिता लिखा हुआ था....

लीडर ये देख के बड़ा खुश hua....usko लगा सायद उसकी बेटी उसका पता पूछने के लिए दब को फ़ोन कर रही hai....bhala हो पुजारी जी का जिन्होंने वक़्त रहते फ़ोन उससे ले liya.....aur उसको चुप रहने को कहा.....

फ़ोन उठाया तो सामने से प्रतीक की आवाज आयी....

प्रतीक - दब हम बहार जा रहे hai......Nikita का मूड सही करने ko.....tum भी आना चाहो तो आ jaao....bas एक बात का ध्यान रखना अभी लीडर को संभल लेना.....

एक hi बार में उसने अपनी पूरी बात कह डाली....

लीडर भी सुन्नन रहा tha....saath में दब bhi.....DB ने पुजारी जी से फ़ोन पास में लाने को कहा और उससे जगह के बारे में puccha.....Jagah पता चलने पे उसने कुछ वक़्त लगेगा पर आ जाऊँगा ऐसा kaha.....saath में ये भी कहा की लीडर की चिंता ना kare.....aur फ़ोन काट दिया......

लीडर ने जब ये सुन्ना तो उसको बड़ा गुस्सा aaya.....pahle तो प्रतीक की बात और उसके बाद दब की भी हां को सुन्न के.....

अब सवालों की झड़ी लगा दी उसने.....

लीडर - क्या था ye....tumne कहा था मैं सब से बहार निकल जाने के बाद उसको बतला सकता hu....Maine तो वही कहा पर वो कुछ बोली hi nahi.....aur तो और तुम मुझे वह से ले आये यहाँ pe.....kab से वह वापस जाने के लिए बोल रहा हु जाने नहीं दे rahe......Ab भी मुझे उससे दुर्र रखने की बात कर रहे the....kya है ये.....

दब - शांत हो जाओ Leader.....Maine तब भी मन किया था और याद करो तुमने कहा था अब देर हो चुक्की hai.....tumhe मेरी बात माननी चाहिए थी.....

लीडर - बस एक बार नहीं मानी और बताओ कभी नहीं मानी हो to.....ye तुमने ठीक नहीं किया है.....

दब - इसमें मेरा कुछ करा नहीं hai.....jo है वो सब तुमने किया hai.....wo वक़्त सही नहीं था मैंने कहा तो था तुमसे पर सुन्ना hi नहीं तुमने.....

लीडर - मन्ना उस वक़्त मेरी गलती थी पर अब मुझे रोकने की बात क्यों करते ho.....jaane दो मुझे भी मिलने दो अपनी बेटी से.....

दब - तब भी कहा था अब भी कहूंगा ये वक़्त गलत hai.....tumne इतना इंतज़ार किया थोड़ा और नहीं कर सकते kya....Mann में उसके लाखों सवाल होंगे उन् सवालों से तो परिचय हो जाने दो uska.....waqt दो उसको सँभालने का खुद को.....

लीडर - मैं पिता हु उसका ये उसको पता चला hai....ye तो खुसी की बात है इसमें भला संभालना क्या है....

दब - समझ नहीं रहे तुम बात को ढंग se....Pujari जी इसको सम्भालिये aap.....ye बार ना जा पाए इस बात का ख्याल रखियेगा......

लीडर - दब तुम मुझे यहाँ पे कैद नहीं कर सकते.....

दब - तुमने मदद की है meri....ab मेरी बारी hai....thoda धीरज rakho....aur यकककिन करो मेरा.....

इतना बोल वो वापस से लग गया अपने काम mein......Leader को वह से पुजारी जी अपने साथ ले गए....

चलिए थोड़ा पीछे चलते है वक़्त mein....aur देखते है घर पे वो मैं कैसे गयी......

रूपल दीदी को जब हम अपने कमरे में लेके जा रहे the....to उस वक़्त उनके आँशु लगे हुए थे निकिता के हाथों pe.....aanshuyon से ज्यादा कुछ नहीं hua.....hua तो प्रतीक की बातों से था.....

रूम में प्रतीक देख रहा था इस चीज़ज़ को की अपने इमोशंस को संभल नहीं पा रही है रूपल didi....wo जानता था इसका नतीजा क्या होना hai.....to उसने एक चुनाव किया.....

वो गया वापस से निकिता के pass.....wo अभी भी कड़ी थी वैसे hi......Chachi उसको बैठने hi वाली थी की तभी प्रतीक वह पे पंहुचा था......

प्रतीक - Nikita.....kya हो गया है tumhe.....tumne नहीं देखा kya.....kaise रूपल दीदी रो रही है तुम्हारे बात ना करने के kaaraan.....nahi दिख रही क्या रात भर से तुम्हे चची और बुआ अपने pass.....Chachi को dekho.....ye सोई नहीं hai....raat भर से जाएगी रही तुम्हारे liye....Bua को देखो ये भी वैसे hi जाएगी रही है.....

चची - प्रतीक क्या कर रहा है beta.....tu तो समझदार है naa....Rupal जैसी बातें मत कर.....

अब वो क्या बताये की रूपल दीदी की वजह से hi ये करना पद रहा है usko.....agar ये ना बोली और उनका दिम्माग और ख़राब हुआ तो पता नहीं आगे क्या होगा.....

प्रतीक - Dekha.....abhi भी मुझे समझा रही है ye....tumhare liye.....aur एक तुम ho....baat नहीं कर रही humse....sayad हम तुम्हारे कुछ है hi नहीं....

P.Bua - प्रतीक क्या बोल रहा है tu.....jaa यहाँ se.....dimmag सही है ना तेरा.....

प्रतीक ने जब ये कहा उसको लग रहा था सायद अभी उसको थप्पड़ पड़ने वाली hai.....aur वो ये छह रहा tha.....par ऐसा हुआ nahi....to उसको और बातें बोलनी पड़ी....

प्रतीक - क्या चुप राहु Bua....sach hi तो कह रहा hu.....isne कभी हममे अपना माना hi nahi....hum hi पाएगा.....

Chattttttttttttttttttaaaaaaaaaaakkkkkkk.......chatttttttttttttttaaaaaaaaaaakkkkkkkkkkkk.....

चची - एक सब्द और निकाला तो मुझसे बुरा कोई नहीं hoga....Poonam लेके जाओ इसको यहाँ se......pata नहीं कैसा भूत सवार होता है दोनों भाई बहनो ko.....bolne से पहले.....

वो बोल hi रही थी की उनको पीछे से सिस्कों की आवाजें सुनाई देने लग gayi.....picche देखा तो निकिता वापस से रो रही थी.....

वो उसके पास गयी निचे बैठी और उसको पुचकारते हुए चुप करने लग गयी.....

चची - अरे इसकी बातों पे ध्यान नहीं देते Nikita.....tumhe तो पता है कुछ भी बोलता रहता है ye.....chup हो जाओ beta.....rote नहीं.....

चची इतना बोल के उसके आँशु पोछने लगी....

प्रतीक ने देखा की सायद उसने जो सोचा था वैसा hi कुछ हो रहा tha......Nikita उसके तरफ देख रही थी.....

ये बात पूनम बुआ ने भी dekhi....aur गुस्से में कहा.....

P.Bua - प्रतीक माफ़ी मांगो निकिता se......abhi....

प्रतीक - मैं माफ़ी मांगूंगा तो क्या ये बोलेगी kuch.....agar बोलेगी तब hi माफ़ी मांगूंगा मैं....

चची - पूनम लगा इसको 2 और खिंच के बहुत बोलने लग गया hai.....kab क्या बोलना है समझ hi नहीं आता इसको.....

चची भी गुस्से में थी.....

निकिता - मुझे पता है वो ये सब जान बुझ के कर रहा है......

वो boli.....sach में boli.....aur उसके बाद अपने आँशु खुद से साफ़ kiye....aur फिर बोली....

निकिता - ये जान बुझ के कर रहा है ऐसा ताकि मैं बात करू....

प्रतीक थोड़ा सा muskurya.....par उसको तभी कुछ याद आया....

प्रतीक - रूपल दीदी बहुत गुस्से में hai....aur रो भी रही hai....issliye मुझे ये करना पड़ा.....

चची ने जब ये सुन्ना तो अपनी जगह से उठ के प्रतीक के पास आयी और उसका कान पकड़ के मदद दिया....

चची - क्या चल रहा था ye......wo गुस्से में है इस लिए तुम ये सब करने आ gaye.....rukko उसको भी समझती हु मैं....

निकिता - nahi.....unko कुछ कहने की जरुरत नहीं है.....

P.Bua - तिण्णो hi एक जैसे है Bhabhi.....samjha नहीं सकेंगे हम.....

चची - तिण्णो कहा charo.....wo कहा है एल्फ राजकुमार.....

प्रतीक - मैं उसको बतला देता हु हम बहार जाने वाले hai.....wo आ जाएगा.....

चची - मधु और पंकज को भी बोल देना.....

प्रतीक - मधु तो कॉलेज गयी hogi.....aur पंकज से.....

प्रतीक जब ये बोल रहा था तो उसने निकिता की तरफ dekha.....Nikita ना में इशारा कर रही thi.....to प्रतीक ने पंकज का बहाना बना के ताल दिया.....

इसके बाद वो रूपल के पास पहुंच gaye.....Rupal ने जब निकिता को वह देखा तो गुस्सा कुछ शांत hua.....aur रोना बंद.....

आज यही तक रखते hai.....Strange वर्ल्ड का सफर अगले अपडेट mein.....saath mein...Lucifer का भी देख लेंगे क्या करता है अब वो
 
अपडेट -116

यहाँ लीडर को पुजारी जी लेके चले गए थे वही दब अपना काम पूरा करने में लग gaya.....par उससे वो हो नहीं पा रहा था.....

वो लगा रहा उस चीज़ज़ में पर वो साड़ी चीजजें एक साथ नहीं आ पा रही thi......agar आती तो शेप सही नहीं हो पाटा उस हीरे ka.....to गुरु जी वही पे थे उसको देख रहे थे......

गुरूजी - मुझे लगता है तुम्हे थोड़ा आराम चाहिए......

दब - Nahi.....Mujhe पहले ये करना है उसके बाद hi यहाँ से जाना है....

गुरूजी - तुम्हे शांत होना होगा पहले अपने मैं को शांत karo......uske बाद hi इस काम में सफल हो paaoge.....mera कहा maano.....tum बहार जाओ थोड़ा शांत हो जाओ उसके बाद वापस से प्रयास करना.....

दब - आप समझ नहीं rahe.....agar मैंने और देर करि तो वह पे हालत और बिगड़ते जाएंगे......

गुरूजी - मैं इसी लिए तो तुम्हे बहरत जाने को कह रहा hu....jab तक तुम शांत नहीं होंगे ये काम पूरा नहीं होने वाला और वह पे लोग और सहते rahenge......bahar जाओ तुम्हारे दोस्त तुम्हे बुल्ला रहे है....

दब ने अपनी बात रखने की पूरी कोशिश kari.....par उसको भी ये लग रहा था वो ये अभी कर hi नहीं paayega.....aisa बहुत बार होता hai.....aapke पास वो हर चीज़ हो जिसकी जरुरत हो किसी काम को करने के liye....par वो काम नहीं हो पा रहा ho.....kyunki उसके होने का वक़्त hi नहीं हुई है.....

खैर दब ने गुरूजी की बात सुन्नी और वो तैयार होने लग गया....

वही दूसरी तरफ स्ट्रेंज वर्ल्ड में......

लूसिफ़ेर के गुप्तचरों से वो बाँदा कांटेक्ट कर रहा था जिसने लूसिफ़ेर को जस्टिन के ठीक होने की बात बताई थी.....

सारे गुप्तचरों से उसने लूसिफ़ेर से बात करने को kaha......par वो सब के सब पहले से दर्रे हुए थे.....

जब से उनको डेमोस पे क्या हुआ ये बात पता चली वो सब के सब सोच में पड़े हुए the....wo नहीं चाहते थे की उनकी मौत भी उस तरीके की हो.....

उनको पता चला लूसिफ़ेर उनसे बात करना चाहता hai.....par कारन पता नहीं चला था unko....karan पता हो तो सब क्लियर होता है वर्ण कभी कभी मुश्किलें बढ़ जाती hai.....aisa hi कुछ यहाँ पे भी होना था.....

उन् गुप्तचरों में से एक ने घबराके इस बात को निक्स लोगो के कबीले के पास कह diya......aur इस बात का पता किसी तरह उस मूर्ति में कैद बन्दे को चल गया.....

उसको अभी तक स्लेयर के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं tha.....uske सामने कुछ हुआ hi नहीं था उससे related......haa पहले कुछ बातें होती थी पर उस वक़्त वो फलफूल के रास के नशे में होता tha.....aur वो इस बारे में समझ नहीं पाया kuch....to उसने कुछ किया भी नहीं.....

पर आज उसको कुछ कुछ पता चला tha......iss गुप्तचर से और कुछ बातें बाकि जगहों से......

उसके कानो तक ये बात पहुंच gayi.....ek ऐसे शरीर के बारे mein.....jo आत्माओं को कैद करके रखता था....

उसने एक निक्स को bulaya.....aur उसको उस गुप्तचर को पकड़ के उसका जगह ले लेने को कह दिया......

स्ट्रेंज वर्ल्ड पे जो भी निक्स बच्चे हुए थे उनमे से ज्यादातर अब इसके गुलाम भर बन के रह गए the,.....isne उनको फलफूल में अपनी ताकतों को मिला के दे दिया था unko......jisse वो पहले से ज्यादा ताकतवर हो गए थे पर अंदर से खोखले होते जा रहे the.....iske गुलाम बनते जा रहे थे.....

तो इसने एक निक्स को भेज दिया वह pe....Jab वो गुप्तचर इसके पास लाया गया तो वो बेहोश था......

अभी जो वह के मंदिर में रह रहा था उसको मूर्ति में कैद बन्दे ने फलफूल का राश पिलाने को बोल दिया......

उसने भी पीला दिया usko......par उससे कुछ हुआ nahi.....bahiri तौर पे तो बिलकुल hi नहीं हुआ था वो बेहोश का बेहोश hi रहा tha......par उसके बाद मूर्ति में कैद बन्दे ने उसके सेवक को वह से जाने को बोल दिया......

ये उस सेवक के लिए अच्छा मौका tha...wo वह से बहार जाना चाहता था पर जा नहीं पा रहा था उसको इज़्ज़ज़त hi नहीं thi....ab जब मिली तो वो यूँ भगा जैसे आसमान गिर रहा हो.....

उसके जाने के बाद मूर्ति में कैद बाँदा इंतज़ार करने लग गया की कब उस गुप्तचर को होश आये.....

वही दूसरी taraf.....Guptcharon से बात करने को लूसिफ़ेर तैयार हो चुक्का tha.....aur ये सब भी तैयार the.....sab एक जगह पे aaye.....aur देखते hi देखते उनके सामने लूसिफ़ेर की एक ाकृर्ति आ gayi.....ye उसी तरह का था जैसे एल्फ किंग का होता था जब वो फोमोस पे लीडर से मिलते थे.....

लूसिफ़ेर चुप tha.....wo बस देख रहा था इन् सब ko......wo उन् सब के चरहों पे आया हुआ खूफ देख रहा tha.....yun तो उसको वो अच्छा लगता tha....par इस वक़्त वो सवाल खड़ा कर रहा tha.....bas एक बाँदा tha....jo एकदम से शांत था....

एक बार तो उसने ये भी सोच लिए की कही ये सब झूट तो नहीं बोल रहे hai....ye सवाल आया उनके दिम्माग में par.....bahar भी निकल gaya.....jab कोई कारन समझ में नहीं आया.....

लूसिफ़ेर - आत्मा वाली बात कितनी सच है ?

गुप्तचरों ने सुन्न रखा था उस बारे mein.....unme से देखा बस 2 लोगो ने hi था उस चीज़ज़ को होते hue......to सारे के सारे उन् दोनों को hi देखने लग गए.....

लूसिफ़ेर ने जब ये देखा तो उसने भी उन् दोनों की तरफ देखा.....

ग1 - जी Maharaj......aapne सही सुन्ना है आत्मा के बारे mein.....aapke इस सेवक ने अपनी इन्ही आँखों से देखा था वो सब और इन्ही कानो से सुन्ना था......

लूसिफ़ेर - तो सेवक इस बात का भी ड़याँ rakhna....agar बात में थोड़ी bhi...thodi सी भी झूट की मिलावट का पता चला तो समझ lena.....kya hoga.....tumhare इन्ही कानो को जिनसे तुमने सुन्ना उनको जिस्म से अलग कर dunga....aur इन् आँखों में पिघलता लोहा दाल दूंगा....

लूसिफ़ेर की बात सुन्न के उसकी रूह कांप gayi....par वो जानता था की उसने उसका अपना सच hi बताया hai....to उसने वापस से अपनी बात को dohraya......aur साथ hi अपने दूसरे साथी को भी कहा उस बारे mein.....aur उसने भी बात की पुस्टि कर दी......

लूसिफ़ेर ने हर एक बात को पूछा उन् सब se....aur तब तक पूछा जब तक उसको याक्किन नहीं हो gaya.....aur याक्किन होने के बाद वह से निकल गया वो.....

इस दौरान वो निक्स वही पे tha......wo भी सब सुन्न रहा tha....aur वह से निकल के वो सीधा अपने कबीले में gaya....aur उस मंदिर में gaya.....jaha पे वो मूर्ति थी......

वो मंदिर के पास hi था ki.....usne चीखें sunni.....bhayanak चींखीं.....

अंदर ऐसी ऐसी आवाजें आ रही thi.....ki बहार लोगो के रूह कांप जाए......

चीखने चिल्लाने की aawajein......dard से कराहने की aawajein......gidgidane की aawajein......dard से भरी आवाजें......

वो निक्स एक पल को घबराने लग gaya.....ki उसको अभी वह जाना भी चाहिए या nahi....par अभी तो दो धरी तलवार पे खड़ा हुआ पड़ा था wo.....agar आगे नहीं gaya.....to बाद में उस मूर्ति में कैद बन्दे के हाटों मारा jayega....aur अगर अभी अंदर गया एयर कुछ ऐसा देख लिया जो नहीं देखना चाहिए tha....to बात और बिगड़ सकती hai....sayad अभी hi मार दे.....

कांपते पैरों से एक कदम आगे जाता था तो दो कदम पीछे भी चला आता tha.....wo दर्दभरी चीखें उसकी हिम्मत को तोड़ रही थी पल pal......par दर का क्या kare.....wo तो और बढ़ती hi जा रह थी.....

दर के वजह से किसी तरह उसने मंदिर के दरवाजे के पास अपना हाथ rakha.....aur जैसे hi उसने हाथ rakha.....ander से चीखें आणि एकदम से बंद हो gayi......wo दरवाजा जिसको खोलने में ताकत लगनी पड़ती thi....ekdum से खुद से खुल गया बस चुनने भर से,......

दरवाजा खुला सामने वही गुप्तचर पड़ा हुआ tha.....dekhne में तो ठीक सा hi लग रहा था हां बेहोश था अभी भी....

वो निक्स उसको देख hi रहा था की उसके दिम्माग में एक आवाज गुंजी.....

"क्या कहबर लाये हो...."

ये आवाज उस मूर्ति में कैद बन्दे की thi.....wo इसी तरह से बात करने लग गया था सभी से.....

आवाज सुनते hi उसका ध्यान उस गुप्तचर से हैट गया और सीधा उस मूर्ति पे चली gayi......usne जो जो उसने सुन्ना था सब कुछ उसको बता दिया.....

मूर्ति में कैद बन्दे ने बहुत hi गौर से उन् सब बातों को सुन्ना और उसके बाद उस बन्दे को वह से जाने को बोल दिया.......

वो बाँदा घबराया हुआ वह से धीरे धीरे निकल gaya.......ye सोच रहा था कही उसको वो मंदिर में hi रुकने को न बोल दे......

वो वह से ज्यादा दुर्र गया भी नहीं होगा की वापस से आवाजें आणि शुरू हो गयी thi.....wahi खौफनाक दर्द से भरी आवाजें......

वही दूसरी तरफ.....

प्रतीक और बाकी सब निकल चुक्के थे सैर सपाटे के liye.....maksad तो बस ये था की किसी तरह निकिता का मैं बहलाया jaaye......wo आ तो गयी थी उनके साथ पर वो सब भी इस बात को अच्छे से जानते थे.....

वो जानते थे की जिस चीज़ज़ का पता निकिता को लगा था और जिस तरह से लगा था उससे उभर पन्ना आसान नहीं tha.....aur वो भी एक रात mein.....bilkul भी नहीं.....

सभी बड़ों का मन्ना था की उसको कुछ वक़्त देना hi चाहिए पर अब रूपल दीदी के कारन प्रतीक को भी आना पद गया इन् सब में और उसने बस किसी तरह मन्ना लिया उसको.....

वो सब एक पहाड़ के पास गए हुए the......aas पास जंगल tha....to कोई उस पहाड़ पे आये बहुत hi काम चान्सेस थे इस बात के....

दब भी आ गया था वह pe.......wo जैसे hi आया वह पे उसको रूपल दीदी ने पकड़ लिया.....

हुआ ये उसको देखते hi उनको लीडर की याद आ gayi....to उन्होंने पकड़ लिया उसको.....

दब - arre.....aap कहा लेके जा रही हो mujhe......Main उंनसे मिलने आया हूँ.....

रूपल - चुप चाप चलो मेरे साथ......

रूपल दीदी उसको थोड़ा दुर्र लेके गयी सभी se....aur उसके बाद पूछा.....

रूपल दीदी - कहा छोड़ा था usko......aur कहा होगा अभी वो.....

दब - आप किसकी बात कर रही ho......Main समझ नहीं पाया आपकी बात को......

रूपल दीदी - तुम नहीं समझ rahe......sach mein.....chup चाप बताओ कहा है वो Leader.....Mujhe उससे बात करनी है.....

दब ने जब रूपल दीदी के सामने वो बात टालने की कोशिश kari.....to उसने सोचा नहीं था की उनकी आँखों का रंग hi बदलने लग jaayega......jab उसने देखा ये की रंग बदल रहा है मतलब इस बात को बहुत अच्छे से हैंडल करना होगा नहीं तो कुछ भी हो सकता है....

दब - Wo.....wo तो वह से चला गया था....

रूपल दीदी - कहा चला गया wo.....mujhe ये बताओ.....

दब ने सोचा झूट बोल के क्या ह मिलेगा कही इनको आगे पता चला की उसने झुट कहा tha....to हो सकता है मुसीबत हो जाए......

तो दब ने सब सच सच बता diya.....par उतना hi जितना पूछा गया था....

दब - लीडर इस वक़्त आश्रम में है......

रूपल दीदी - आश्रम mein.....waha पे क्यों है wo....kisne रहने दिया उसको.....

दब - आप समझ नहीं रही ho....didi वह कोई भी रह सकता है ना.....

रूपल दीदी - ठीक hai....main जाउंगी उससे मिलने kal.....aur पूछूँगी उससे जो उसने कल कहा था वो सच है या नहीं.....

दब - दीदी आपको नहीं लगता इसमें निकिता से भी पूछना चाहिए......

रूपल दीदी - मैं इस बात का ध्यान rakhungi......jaao यहाँ se......aur इस बारे mein....kisi को भी कुछ मत कहना.....

दब हां में गर्दन हिलता हुआ वह से निकल गया......

आते वक़्त खुद से hi बड़बड़ता हुआ बोल रहा था.....

दब - इनके बारे में बात करनी hogi....inka गुस्सा कभी भी कुछ भी कर सकता है....

उसके बाद वो भी प्रतीक के पास चला गया और वही पे सभी के साथ वक़्त बिताने लग गया.....

दब ने इस बात पे गौर किया की वो वह आया था तो सच में उसको आराम मिल रहा tha......kuch वक़्त से बहुत एनर्जी ख़तम कर चुक्का था वो और अभी भी तो उसी में लगा हुआ tha.....usko आराम की जरुरत थी और अभी वो आराम उसको मिल रही थी.....

उसने प्रतीक से रूपल दीदी के बारे में बात kari....unki आँखों के रंग को leke......Prateek ने भी उसको बताया की....

प्रतीक - मुझे इस बारे में पता hai.....par इसको लेके अभी मैं कुछ कर नहीं sakta.....Main देखूंगा की कहा तक जाता है क्या हर छोटी सी बात पे hi ऐसा होता है या फिर ये कुछ खास चीज़ज़ों की वजह से है....

दब - मुझे लगता है ये खास लोगो के साथ जुच बुरा होने पे है.....

प्रतीक - तुमने मेरे मैं की बात कह दी hai.....Main भी इसी नतीजे पे पंहुचा hu.....aur ये एक तरह से अच्छा भी hai......par मुझे इस्पे गौर करना होगा....

दब - मुझे तुमसे एल्फ कंट्री के बारे में बात करनी थी.....

प्रतीक - तो तुमने वो माननी सही कर ली है क्या.....

दब - नहीं अभी नहीं हुई hai....par अब लग रहा है जल्द hi हो jaayega.....Mujhe उसके बाद तुम सब की थोड़ी मदद चाहिए थी....

प्रतीक - ये भी कोई कहने की बात hai....hmm....Nikita के बारे में अभी कुछ कह नहीं sakta.....uske साथ जो हुआ hai.....tum तो जानते ho.....uss लीडर को वक़्त देख के बोलना चाहिए था.....

दब - मैं भी यही बात उसको बतला रहा tha....usne सही वक़्त hi नहीं chunna......par मुझे वह पे निकिता की भी जरुरत hogi....ye तुम जानते हो.....

प्रतीक - haa.....Main कुछ कर lunga.....kab जाना है ये बता देना बस......

दब - हम्म उसकी खबर तुमको पंहुचा dunga....par उससे पहले एक काम और hai.....tumhe यहाँ पे अभी लीमो को बुलाना hoga.....mujhe उससे तैराई के बारे में कहना है.....

प्रतीक - तो तुम क्या सच में एल्फ कंट्री को छोड़ डोज.....

दब - वक़्त आ चुक्का है जब क्रोनेड एल्फ परिवार वापस से अपने पुराने ौडे पे आ जाए.....

प्रतीक - तुम्हे पता है की पहले किस ौडे पे था तुम्हारा परिवार.....

दब - haa.....hum रक्षक हुआ करते the.....jo काम आज लेममो चुप के करता है वो काम हम खुले आम किया करते the.....jab कभी कोई बुरी शक्ति एल्फ नेशन की तरफ जाती तो पहले मेरा परिवार उसका सामना करता tha....aur उसको हारता tha....par एक बार हमारे साथ धोखा हो gaya.....kisi ने राजा को हमारे खिलाफ भड़का दिया.....

प्रतीक - हां मैंने इस बारे में सुन्ना hai.....Tumhare परिवार को एल्फ समुदाय की भलाई के लिए राज गद्दी को अपनाना पड़ा था....

दब - ha...aur अब वक़्त आ चुक्का है की हम उस ौडे को छोड़ दे.....

प्रतीक - पर क्या तुम उस जगह की सुरक्षा भी नहीं करोगे.....

दब - ये कैसे हो सकता hai.....main करूँगा suraksha.....par तब जब मुझे लगे की अब मेरी जरुरत hai......usse पहले nahi.....Main उस मुकुट में वो साड़ी शक्तियां इसी लिए दाल रहा हु ताकि उसको पेहेन्ने वाले खुद से सामना कर सक्के चीज़ज़ों का.....

प्रतीक - ठीक hai.....Main लीमो को अभी यहाँ बुलाता हु....

मैंने ओल्ड आउल से बोलै लीमो को वह से धुंध के यहाँ लेके aaya.....aur उसने तुरंत hi इस काम को अंजाम दिया......

लीमो ठीक हमारे सामने था.....

दब को देख के वो झुक गया उसके सामने.......

लिमि को इस बारे में बताया गया था की उसकी बेटी को एल्फ वर्ल्ड सौपा jaayega.......ye बात लीमो को पता नहीं थी.....

दब ने अभी बताना सही भी नहीं samjha.....wo इस बात को सभी को एक साथ बताना चाहता था......

प्रतीक - लीमो दब तुमसे कुछ बात करना चाहता है.....

प्रतीक इतना बोल वह से जाने लग गया......

दब - प्रतीक तुम्हे जाने की कोई जरुरत नहीं hai.....Leemo मैं वापस आ रहा hu.....mere वह आने का बंदोबस्त करो.....

लीमो - Rajkumar....par आपको वह चुप के रहना hoga.....baaki चीज़ज़ों का खयाम हम सब रख लेंगे....

दब - अब छिपना hi तो नहीं है leemo.....tum बस मेरे वह आने का बंदोबस्त करो....

लीमो - आप क्या कहना चाहते hai....kya आप खुल्ले आम वह आना चाहते hai.....Rajkumar ये सही नहीं hoga.....aap एल्फ कंट्री की hi नहीं साथ में स्ट्रेंज वर्ल्ड के सबसे बड़े कोर्ट की बेज़त्ती karenge......aapko और सज़्ज़ा दिया जा सकता है.....

दब - उसको चिंता मत करो लीमो जब मैं वह से वापस niklunga....to सभी को पता hoga...aur कोई कुछ कर भी नहीं पायेगा.....

लीमो - Prateek.....aap राजकुमार को samjhaye....aap दोस्त है inke...ye सायद मेरी बात समझ नहीं रहे hai.....maaf करियेगा राज कुमार....

प्रतीक - अब इस बारे में मैं क्या कहु Leemo......bas इतना कहूंगा की इसको बचने की कोशिश करूँगा सभी से.....

लीमो - आपने ये कह दिया ये भी बहुत hai.....Rajkumar मैं तैयारी करता hu.....waise आप वह पे कहा कहा जाना चाहते है उस हिसाब से हम और कुछ बंदोबस्त कर देंगे.....

दब - मुझे महल जाना है......

दब की बात सुन्न के लीमो की आँखें बड़ी हो gayi.....wo समझ hi नहीं पा रहा था क्या कहे अब.....

दब - प्रतीक इसको वापस भेज do.....dhyaan से काम करना लीमो.....

दब उतना बोल वह से निकल गया....

लीमो - प्रतीक आपने सुन्ना राजकुमार ने क्या kaha......wo महल जाना चाहते hai.....aap उनको रोकिये....

मैं - मैंने कहा ना मैं उसको मुसीबत में फंसने नहीं dunga.....tum बस अपने हिसाब से तैयारी कर लो....

मैंने पोर्टल खोला और वो वह से चला गया.....

यहाँ हम सब भी इस जगह से जल्द hi घर की ओर निकल gaye......Ab मुझे रूपल दीदी को संभालना tha.....Main जानता था वो जाएंगी वह लीडर से मिलने ko....aur मैं ये होने नहीं दे सकता था....

दब आश्रम गया और वह पे वापस से अपने काम पे लग gaya....aur कुछ hi वक़्त में उसका काम पूरा हो भी gaya.....usne उस हीरे को शेप भी दे दिया था साथ में उसके अंदर वो सब दाल भी दिया था जो वो डालना चाहता था.....

दब ने कल का वक़्त चुनना वह जाने ka.....usne मुझे इस बारे में लीमो से कहने को kaha.....par लीमो के होश पहले से उद्दे हुए the.....wo समझ नहीं पा रहा था कैसे रोकके दब को महल जाने से.....

उसको लग रहा था अगर दब वह गया और उसको देख लिए किसी ने तो परेशानी बहुत बढ़ जायेगी......

वो भी ठीक hi सोच रहा tha.....par अब तो सब तय हो चुक्का था.....

वही दूसरी तरफ......

लूसिफ़ेर अपने गुप्तचरों से बात करने के बाद इस सोच में पड़ा था की वो कैसे पता लगाए अपने बेटे ka......usne बहुत देर तक सोचा.....

वो सोच रहा था की किसको भेजे अपने बेटे को ढूंढने के liye....par कोई सामने नहीं आ रहा tha.....aur खुद वो जा नहीं सकता था डेमोस की गद्दी को छोड़ ke....Raja के भी कुछ नियम होते है.....

तो उसने अपनी तलवार को अपने गद्दी पे रख diya.....aur घोषणा करा दी की उसकी तलवार hi अभी से डेमोस पे राज करेगी जब तक वो वापस नहीं आ जाता.....

मतलब उसने खुद जाने का मैं बना लिया tha....koi और मिला hi नहीं उसको तो वो क्या hi कर सकता था.....

तलवार क इस वजह से रखा था उसने की उसके यहाँ ना रहने पे कोई भी गद्दी पे नज़र ना daale.....Ek राजा को बहुत कुछ देखना पड़ता है.....

तो उसने तय कर लिया था वो खुद से जाएगा फोमोस पे देखने अपने बेटे को......

नेक्स्ट अपडेट में देखते है स्ट्रेंज वर्ल्ड पे क्या होता है और साथ hi फोमोस पे भी क्या लूसिफ़ेर को जस्टिन milega.....aur साथ hi मूर्ति में कैद बाँदा आखिर क्या करने की कोशिश कर रहा था उस गुप्तचर के साथ ये भी....
 
अपडेट - 117

ना जाने कब से वो बाँदा उस मूर्ति में कैद tha....bas इम्मोर्टल्स को hi इस बात का सही जवाब पता hoga.....Pujari जी के पहले कोई और उनकी जगह पे होगा उस मूर्ति के लिए और उससे पहले कोई और और उससे भी पहले कोई aur....aam भाषा में वो बहुत लम्बे आरसे से उस जगह पे कैद था...

पहले तो मधु के वह ना जाने के वजह से और साथ hi फलफूल के नशे में वो शांत सा tha....usko खुद को कुछ पता नहीं tha.....par जब मधु वह आयी तो वो शुरू हो गया जो होना तय tha.....aur वो नशे से बहार आ गया कुछ वक़्त के liye.....par था तब भी कमज़ोर इतना की वो ज्यादा कुछ कर नहीं पा रहा tha.....upar से फलफूल की आदत लगी हुई थी उसको....

अब जब चीजजें उसकी हाथों में आने लग गयी तो वो उस मूर्ति से बहार आने की कोशिश करने लग गया.....

पुजारी जी के सतरंगे वर्ल्ड से चले जाने के बाद तो उसने फलफूल को hi दूषित कर दिया और उसके साथ साथ जितने भी निक्स उस जगह पे रह रहे थे वो सब भी अंदर से खोखले होते जा रहे the......wo उन् सब को अपना गुलाम बनाने में लगा हुआ tha....aur कामियाब भी होता जा रहा था....

वो जिसको भी मंदिर में आने को बोलता उसको मंदिर में आना पड़ता tha...aur उसके साथ वो बहुत से एक्सपेरिमेंट्स करता tha......saath hi उनको इतना दर्रा देता था की वो बहार जाके उनके साथ क्या हुआ इस बात को किसी को समझा hi नहीं पाए.....

शुरू में पुजारी जी के जाने के baad....to बच्चे हुए निक्स वह जाने के लिए तैयार मिला करते थे पर ab.....ab वो एक सज़्ज़ा सा बन गया tha....koi भी वह जाना नहीं चाहता था खुद से.....

वो मूर्ति में कैद बाँदा उनपे ना जाने कैसे कैसे प्रयोग किया करता था.....

जितना उससे हो पाटा उतना दुःख देता था उन् सब को ताकि वो टूट jaaye.....wo चाहता था की वो उस मूर्ति से आज़ाद हो jaaye...par ये हो नहीं पा रहा था मधु के गोल्डन पावर के कारन....

पर कब tak.....ye सवाल तो था hi.....wo ताकतवर होता जा रहा था और साथ hi गोल्डन पावर का असर काम हो रहा tha.....ab देखना ये था की कब तक वो मूर्ति में बंद रह पाटा है.....

अभी जब वो गुप्तचर उसके पास लाया गया तो उसके पास एक नयी तरह की प्रजाति आयी हुई thi.....aur वो उसपे एक्सपेरिमेंट्स कर रहा tha......dekh रहा था क्या वो सरीर उसको संभल paayega....uski शक्तियों को संभल पायेगा....

पर उसके बाद जो उसने sunna......wo सुन्न के वो चककित भी हो गया साथ hi खुश भी......

उसको एक सरीर के बारे में पता चला abhi.....ek ऐसा सरीर जो लोगो की आत्मायों को कैद करके उसके बल पे चल सकती hai......iss बात ने उसके मैं में आशा की एक नयी किरण जगा di....khus हो के उसने उस गुप्तचर को फलफूल के रास से भर diya....aur साथ में अपनी शक्तियां भी उसके अंदर दाल दी और उसके बाद एक झटके में सब बहार निकलने लग gaya......aur वो दर्द से चीखता रहा.....

ये तब तक चलता रहा जब तक उस बन्दे का चिल्लाना बंद नहीं hua....matlab वो बेहोश नहीं हो gaya.....usko मारा नहीं उसने क्यूंकि आगे भी काम लेना चाहता था उससे वो.....

उसको लूसिफ़ेर के बारे में भी पता चल चुक्का tha.....to उसने कुछ निक्स को अपने पास बुलाया ये सब करने के बाद और उनको भेज diya.....Lucifer के बारे में हर एक चीज़ज़ जानने के लिए.....

क्यूंकि अभी तो बस एक वही दिख रहा था उसको जो उससे उस शरीर तक लेके जा सकता था....

वह दूसरी तरफ.....

स्ट्रेंज वर्ल्ड पे hi

लीमो परेशां हुआ पड़ा tha.....usko समझ नहीं आ रहा था वो किस तरह की तैयारी kare.....aakhir दब ने उसको महल के अंदर आने के लिए भी कहा tha.....wo बहार तक का बंदोबस्त आसानी से कर leta....par महल के अंदर aana.....waha पे बहुत से लोग होते है जो एल्फ किंग के करीबी hai.....aur अगर वो दब को देख लेंगे तो जरूर बताएँगे दब के बारे में......

लीमो नहीं चाहता था इस बारे में एल्फ किंग को पता chale......wo ये बात जानता था दब आगे राजा बनने वाला hai....aur वो अपने पिता से भी अच्छा राजा banega.....iss बात में उसको थोड़ा भी शक नहीं tha....par अगर अभी कुछ ऐसा होता है तो पता नहीं ये चीज़ज़ कब hogi.....hogi भी या नहीं इस बात पे भी शक था उसको.....

लीमो जैसे hi यहाँ पे आया उसने तुरंत hi अपने लोगो को बुल्ला लिया एक मीटिंग के liye.....aur उन् सब को समझा दिया की उनको क्या करना है......

लीमो ने ये बात नहीं बताई की दब आ रहा है उस जगह pe......DB के बारे में बता hi नहीं सकता था wo.....Aisa नहीं था उसको अपने लोगो पे याक्किन नहीं था....

याक्किन बहुत tha....par अगर उन् सब को ये बताया जाता की दब वह आ रहा है तो वो सब कुछ ज्यादा hi तैयारी में लग jaate.....aur इससे आम लोगो को या फिर एल्फ किंग के खास लोगो को इस बात का पता चल jaata....aur ये वो नहीं चाहता था.....

तो उसने बस उतना hi बताया जितने में काम चल jaaye.....aur उसके बाद खुद भी लग गया काम पे.....

पहले तो महल के आस पास के गुप्त जगहों को चेक करने लग गया wo.....kyunki अगर कुछ गड़बड़ हुई तो वही साड़ी जगहें छुपने के काम आने वाली थी उस दौरान......

अब एअर्थ पे......

प्रतीक के साथ बाकी सब वापस आ गए the....DB तो अपने काम में लग भी गया था और उसको ख़तम भी कर लिया था usne.....uss माननी को पूरी तरह से तैयार कर दिया था उसने मुक्कुट में वापस से लगाने के liye.....aur इस बारे में उसने बता भी दिया था प्रतीक को......

प्रतीक जब घर में सभी के साथ आया तो वो बस एक hi बात का ध्यान रख रहा था रूपल दीदी निकिता के साथ रहे.....

वो समझ रहा था जैसे hi वो उसके पास से निकलेगी तो सबसे नज़र बच्चा के चल देगी आश्रम की taraf.....Leader से मिलने को.......

रूपल दीदी तो लगी हुई थी की किसी तरह वो निकिता को जल्दी से सुला de.....uske बाद वो निकल जायेगी वह से......

वही प्रतीक और रूपल को देख ke.....Chachi को बहुत गुस्सा आ रहा tha....unke हिसाब से इस वक़्त निकिता को आराम करने की जरुरत थी थोड़ी देर अकेले रहने की जरुरत thi....jo सवाल थे उसके मैं में उन् सब से रूबरू होने का वक़्त tha.....par नहीं.....

निकिता को रूपल और प्रतीक दोनों hi परेशां करते जा रहे the....aur वो दिख रहा था अब निकिता के चेहरे पे भी.....

चची ने एक बार तो आराम से जाके दोनों को समझाया की अब उसको वह अकेले रहने do....par वो दोनों कहा सुन्न रहे the......Rupal वह से जाने को हुई तो प्रतीक ने रोक liya.....aur फिर से बात शुरू कर दी.....

इससे चची को बहुत गुस्सा आने लग gaya......aur वो आयी वह पे.....

Chachi(chillate हुए) - Rupal.....Prateek.....tum दोनों को कहा ना अपने अपने रूम में jaao......samajh में नहीं आ रहा है.....

जब सुन्ना उन् दोनों ने तो एकदम से खड़े हो gaye......wo kya....uss वक़्त तो निकिता तक कड़ी हो गयी thi......tinno एकटुक देखते जा रहे थे चची को....

रूपल दीदी को तो इसका एक्सपीरियंस था पर प्रतीक और निकिता तो नए the.....Rupal दीदी बस चुप thi......honth जैसे सिल्ल लिए उन्होंने वैसे.....

चुप और आँखें निच्चे करके कड़ी हो गयी थी wo......par प्रतीक का... :lol:

प्रतीक - wo...chachi हम बस जा hi रहे थे.....

रूपल ने जब सुन्ना तो निच्चे मुंडी करे हुए hi तिरछी नज़रों से देखा उसकी oor....aur अंदर hi अंदर आज तो ये गया सोचने लग गयी.....

चची - क्या जा रहे the.....arre कब से कह रही hu....jaao अब इसको आराम करने do....par तुम dono.....Arre निकिता तुम क्यों कड़ी हो gayi....beta बैठ jaao....Mujhe पता है ये दोनों अपनी हरकतों से तुम्हे परेशां कर रहे है......

निकिता - नहीं ऐसी बात नहीं hai......ye तो बस.....

चची - कुछ बस वास् nahi......mujhe दिख रहा है sab.....maine कहा इनसे की जाओ अपने कमरे में पर nahi.....ye कहा सुनते है मेरा कहा.....

प्रतीक - चची हम bas.....jaa hi रहे the...aap...

चची - देखो अब टक्क रहा hai....Tumko किसी दिन अच्छे से समझाना hoga....Nikita इस बारे में याद दिलाना मुझे बाद mein.....iss लड़के को बहुत कुछ सीखना है mujhe.....aur ye.....Rupal....

रूपल दीदी - (धीरे से) आ गयी मेरी बारी.....

चची - इतनी बड़ी हो gayi.....par अकाल नाम की चीज़ज़ है hi nahi.....pahle सुबह से वो सब कर रही thi....Nikita को आराम करने नहीं diya.....aur ab....ab तो और भी थक्क गयी hogi....par तुम्हारा मैं नहीं भरा naa.....Tumko तो बस परेशां करना है सभी को.....

निकिता - वो परेशां नहीं कर रहे थे.....

चची - तुम चुप karo....mujhe सब दिख रहा tha.....Tum भी इन् दोनों को बचने के लिए बोल रही हो ये सब.....

ये पता नहीं कहा से शुरू हुआ tha......par इसके लपेटे में खुद निकिता तक आ चुक्की thi.....aur ये ख़तम तब हुआ जब वह पे बुआ aayi....unhone देखा की चची लगी पड़ी है हम तिण्णो को डांटने में......

वो आयी वह पे और उन्होंने उनको शांत kara....aur सब अपने अपने रूम्स में गए......

निकिता के रूम में hi K.bua भी thi.....Nikita को अभी इमोशनल सपोर्ट की जरुरत थी ये समझ रहे थे सब इसी लिए उनको वह भेजा गया था.....

प्रतीक अपने रूम में gaya....par कुछ hi देर के liye....wo तो झट से वापस रूम से निकल के चल दिया था रूपल दीदी के pass......wo जानता था ये किसी ना किसी तरह से वह निकलने की कोशश करेंगी hi......taaki उस लीडर से मिल सक्के......

प्रतीक पहुंच भी जाता वह pe....par रूम से निकलने के बाद hi वो P.Bua को दिख गया.....

P.Bua - ुये bacchu.....wapas से दांत कहानी है kya.....bahar क्या कर रहा है अब.....

प्रतीक - Wo....bua wo...main पानी लेने जा रहा था.....

P.Bua - accha...par सीढिया तो इस तरफ है naa....khidki से कुद्द के जाना है क्या.....

प्रतीक - अरे nahi....wo मैंने सोचा सायद किसी और को भी पानी चाहिए hoga.....(ye क्या बोल रहा हु मैं...)

P.bua - Bacchu.....jhoot नहीं बोलना आता tumhe....chup चाप से अपने कमरे में jaao....aur जो भी दिम्माग में पक्क रहा है उसको वही रहने दो abhi.....warna मुझे भाभी को बुलाने में वक़्त नहीं lagega....aur इस बार रोकूंगी नहीं मैं.....

प्रतीक - हम्म ठीक है मैं जा रहा हु रूम mein...aap ऐसा मत कहिये....

प्रतीक अपने रूम में जाने लग gaya.....ab पता नहीं बुआ को क्या हुआ.....

बुआ - चलो मैं भी चलती hu.....mujhe तुमसे hi बात करनी थी.....

बुआ उसको लेके चली गयी उसके रूम में hi.....

P.Bua - आज जब दब आया tha....to उस वक़्त तुम दोनों को किसी से बात करते देखा tha....kaun था वो.....

प्रतीक ने जब ये सुन्ना तो वो थोड़ा शॉकेड रह gaya....usne सोचा नहीं था की उसको किसी ने देखा भी था.....

P.bua - क्या hua.....tum दोनों जब भी साथ होते हो मेरी नज़र दोनों पे होती hai......kaun था wo....ye batao....Maine पोर्टल बंद होते देखा था.....

प्रतीक - वो लीमो था....

P.Bua - Leemo.....wo यहाँ pe.....kya hua....Leemi ठीक है ना.....

प्रतीक - वो ठीक hai.....wo हममे एक बार फिर से स्ट्रेंज वर्ल्ड जाना है तो उसी के लिए उसको बुलाया था दब ने......

P.bua - अब क्या हर बात पुछु Main......sab कुछ सही सही batao.....aur उससे पहले ये बताओ रूपल के रूम में इसी के बारे में बात करने जा रहे थे क्या तुम.....

प्रतीक - अरे नहीं वह पे to....wo दरसल उनको लीडर कहा है ये पता चल गया hai.....aur मुझे लगता है वो उसके पास जरूर jaayengi.....usse मिलने को....

P.Bua - kya.....Kaha है Leader.....ye बताओ मुझे....

प्रतीक - Wo....wo आश्रम में है.....

P.Bua - उससे तो मुझे भी मिलना hai.....kuch बातें करनी है usse......par अभी nahi......Rupal की चिंता मत karo....wo भूल के भी इस वक़्त तो घर से बहार जाने का नहीं sochegi....agar निकली तो भाभी को पता चल jaayega....aur फिर से उसकी सहमत आ जायेगी.....

प्रतीक - तो वो बहार नहीं जायेगी इस वक़्त.....

P.bua - अकेले तो बिलकुल......

अभी बात पूरी करती उससे पहले hi दरवाजे पे दस्तक हुई.....

P.bua - मुझे लगा hi tha.....wo तुम्हारे पास hi aayegi....ab dekhna.....bolegi ओल्ड आउल या ज्वाला को बुल्ला do...usko काम है....

प्रतीक ने जाके दरवाजा खोला hi tha.....ki वही पैर से रूपल दीदी शुरू हो गयी....

रूपल दीदी - आई प्रतीक मुझे ना अभी कही जाना hai....wo होटल के काम se.....par माँ को तो देखा ना tumne....abhi गयी तो wo.....Bua....aap यहाँ क्या कर रही हो.....

P.bua - माँ को तो देखा ना tumne....tum मुझे ओल्ड आउल या ज्वाला दे do....main चली jaaungi...aur जल्द hi वापस आ jaungi.....yahi बोलना था ना......

रूपल दीदी - haa....nahi nahi....ye kyun.....Main तो बस देखने आयी थी isko.....aapne देखा ना माँ ने कैसे इसको दांत diya.....ye बच्चा है abhi.....Mujhe लगा कही कुछ उल्टा सीधा ना करने लग jaaye.....to समझने आ gayi....aap क्या कर रही हो यहाँ.....

P.bua - मैं भी समझने hi आयी thi.....aur तुम भी समझ jaao.....koi कही नहीं जा रहा इस वक़्त.....

रूपल - पर बुआ मुझे काम है.....

P.bua - बुलाऊँ क्या भाभी ko.....phir करना kaam.....Suno ये स्ट्रेंज वर्ल्ड जाने वाला hai.....aur तुम भी हमारे साथ चल रही हो.....

प्रतीक - बुआ आप आने वाली ho....main आपसे इसके बारे में बात करने वाला था.....

P.Bua - haa...aane वाली hu....jyada बनने की जरुरत नहीं hai.....pata है मुझे कब बात करने वाले the.....aur ये बताओ तुम फोमोस पे क्यों गए थे....

प्रतीक - बुआ वो बाद में पहले सुनो naa....hummme निकिता को भी ले जाना hoga....uska वह होना जरुरी है.....

रूपल - हां उसको तो मैं ले hi आउंगी उसकी चिंता मत karo...par हम करने क्या वाले है.....

प्रतीक - ये तो वह जाके पता chalega....K.bua को भी कह देना....

यहाँ ये तय हो रहा tha......wahi लूसिफ़ेर डेमोस पे.....

उसने अपने तलवार को अपनी जगह डेमोस का राजा घोषित कर दिया tha.....kisi की भी पुरे डेमोस में हिम्मत नहीं थी जाके उस तलवार को छू le.....par फिर भी लूसिफ़ेर एक रात रुक कर देखना चाहता था.....

एक बार उसके साथ हो चुक्का था ऐसा kuch.....jiske बाद उसको दूसरों पे आसानी से याक्किन नहीं हो पा रहा था.....

जस्टिन की बॉडी के साथ जो हुआ उसके बाअद से आसानी से याक्किन कर lena....ye भूल गया था wo....usne उस सेनापति के बेटे पे बहुत भरोषा कर लिया tha....par धोखा मिला लूसिफ़ेर को.....

खैर उसने अब तय कर लिया था की एक रात वो वह पे rukega....aur देखेगा की कही किसी की हिम्मत तो नहीं बढ़ गयी इतनी की वो उसकी तलवार को लेने पहुंच जायेगा.....

पर ऐसा कुछ हुआ nahi....kisi में इतनी हिम्मत नहीं thi....aur अगर होगी भी तो उसने वक़्त सही नहीं लगा होगा ये.....

अगले din....subah से hi वो पूरी तरह से तैयार हो चुक्का tha....jaane के लिए फोमोस pe....saath hi उसने अपने सैनिकों से बोल दिया था की महल की सुरक्षा करे....

वो सुबह hi निकल पड़ा फोमोस के liye.....waha पोर्टल वगेरा से जा नहीं सकता tha......uss इम्मोर्टल की वजह से उसने पोर्टल्स से आने जाने की मनाही कर दी थी वह pe.....aam पोर्टल्स se.....par अगर ओल्ड आउल या कोई और इम्मोर्टल चाहता तो वो आसानी से वह पे आ जा सकता था....

पर ये तो लूसिफ़ेर tha....isko तो खुद से जाना था वह बिन्ना पोर्टल ke....to ये सफर तय करके गया वह pe....jaane में वक़्त भी लग गया इसको कुछ....

पर जब वो फोमोस के पास पंहुचा तो ऊपर से hi उस जगह को देख के चककित रह gaya.....ekdum से जंगल सा लग रहा था वो जगह ab.....upar से जमीन दिख hi नहीं रही thi.....saath hi एक और बात का ध्यान रखना था usko.....wo पेड़....

उसने देखा था वो पेड़ जो है वो उसको नुक्सान पंहुचा सकते hai.....uski सीना को नुकसान पहुंचाया था unhone....to वो अपने साथ बाकी का जो हथियार लेके आया था वो लेके तैयार था वो.....

वो धीरे धीरे निच्चे की तरफ आता जा रहा tha.....pahle तो कुछ भी अजीब नहीं लग रहा tha....sab नार्मल सा hi tha....par एक वक़्त के baad.....pata नहीं उसको क्या हुआ.....

लूसिफ़ेर एक दम से ृक्क gaya......wo समझ नहीं पा रहा था की क्या हो रहा hai......wo महसूस कर पा रहा था की उसके अंदर ताक़त आती जा रही hai.....wo भी बहुत ज्यादा taqat.....wo समझ नहीं पा रहा था की ये क्या हो रहा है......

वही दुर्र बैठा वो इम्मोर्टल उसको देख रहा था.....

"हम्म ये बहार से आया hai.....isko अब बहुत शक्तियां मिलनी hai.....dekhte है ये आगे क्या करता है...."

वो बैठा इसी को देख रहा था......

वही एअर्थ पे भी सब तैयार हो चुक्के the.....wapas से स्ट्रेंज वर्ल्ड के सैर पे जाने के लिए.....

रूपल दीदी ने जैसा कहा था उन्होंने निकिता को मन्ना hi liya.....wo दब की मदद करना चाहती थी isme......saath hi उसको कुछ पूछना भी था दब से अब.....

कल रात में उसने बहुत socha.....socha hi नहीं बल्कि समझने की कोशिश kari....aur थोड़ा बहुत तो रोई भी थी.....

उसके दिम्माग में कुछ सवाल आ चुक्के the....aur उनको अब जवाब चाहिए था unka....aur जवाब बस लीडर दे सकता tha....kyunki सवाल उसी से रिलेटेड थे.....

और दब hi लीडर को लेके गया था तो बस वही उसको बता सकता था की कहा पैर है वो......

प्रतीक ने ओल्ड आउल को bulaya....aur उसको सभी को स्ट्रेंज वर्ल्ड ले जाने को कहा......

लीमो से सुबह hi बात हो चुक्की थी....

लीमो को जगह बता दी गयी थी जहा पे वो सब आने वाले the....aur लीमो खुद उस जगह पे जा पंहुचा था सभी का स्वागत करने के liye......wo अभी भी सोच रहा था किसी भी तरह से रूक लिया जाए दब को महल जाने se.....par वो खुल के कह भी नन्ही सकता था....

नेट्स अपडेट एल्फ नेशन के बारे में और साथ में लूसिफ़ेर के बारे में जो जस्टिन से milega....par कैसे वो आगे देखेंगे
 
अपडेट -118

एल्फ नेशन के गेट के बहार......

वैसे तो ओल्ड आउल उन् सब को गेट के अंदर क्या सीधा महल में लेके चला जाता वो भी मुकुट के pass.....par दब का प्लान कुछ और tha.....usko बस इस जगह को ठीक नहीं करना tha......balki यहाँ पे वो अपनी बात भी रखने आया tha.....ki उसके पिता के बाद उस राज्य को आगे कौन देखेगा.....

लीमो को जब जगह बताई गयी तो वो थोड़ा और परेशां हो गया tha....usko तो ये बात पता thi.....ki ये सब लोग एल्फ नेशन के अंदर मतलब गेट के अंदर भी आ सकते the....binna किसी को पता chale....par उन् सब ने बहार hi आने को क्यों चुनना है.....

ये सवाल लीमो को परेशां कर रहा tha.....par वो अभी इसका जवाब नहीं पा सकता tha.....uske लिए उसको वह जाना होगा.....

लीमो ने अपने लोगो को बता दिया की उनको आगे क्या क्या करना hai.....Leemo ऐसे hi इतने बड़े सोसाइटी का हेड नहीं बना tha.....uske पास प्लान्स होते the....har चीज़ज़ के plans.....wo घबराता tha....sab घबराते hai....par रियेक्ट करने से पहले सोचता tha.....ye खासियत थी उसकी....

लीमो ने ना जाने कितने सारे काम किये अपने सोसाइटी के साथ मिलके और इसका पता स्ट्रेंज वर्ल्ड में ज्यादा लोगो को नहीं चलता था.....

लीमो बताई हुई जगह पे जाने को निकल गया.....

पहले तो वो गेट के पास hi aaya......gate के पास आने के बाद उसने एक बार आस पास सब चेक kiya....kitne लोग वह पे the.....uss गेट के बारे में तो उसको पहले से hi सब कुछ पता tha....wo कैसे काम करता hai...wagera वगेरा.....

लीमो ने देखा की आज गेट के पास जो खड़े है वो सब के सब ईंमानदार लोग थे.....

उनमे से कोई भी ऐसा नहीं दिखा लीमो को जिसको किसी चीज़ज़ का लालच दे के दब और बाकियों को अंदर ले आया jaaye.....wo ये देख के बस मुस्कुरा diya....aur आगे बढ़ गया.....

वो यहाँ पे एक आम सिपाही था बाकी सब के liye.....Gate के पास गया और वही एक छोटी सी लाइन थी जहा से लोग बहार जा रहे थे वह खड़ा हो गया वो भी....

लोग आगे बढ़ रहे the.....jaisa उसने देखा था कोई भी बईमान नहीं था वह pe.....ye सब के सब ईंमानदार the.....usne देखा....

एक बाँदा अपने साथ एल्फ नेशन में पायी जाने वाली एक खास जड़ी बत्ती लेके जा रहा था पर उसके पास उसके पेपर्स नहीं the.....to उन् सिपाहियों ने उसको वो लेके नहीं जाने diya.....wo जड़ी बत्ती वाला उन् सिपाहियों को फुसलाने की कोशिश करता है थोड़ा bahut.....par वो सिपाही तस से मास नहीं hua....aur दूसरे सिपाही ने आके उस आदमी को साइड किया और उसकी और अच्छे से तलाशी लेने लग gaya.....saath hi लाइन को आगे बढ़ाया जाने लग गया.....

कुछ देर बाद लीमो की भी बारी aayi.....aur वो सब क्लियर करा के वह से निकल गया.....

जब वो बताई हुई जगह पे पंहुचा तो वह पे सब पहले से उसका इंतज़ार कर रहे the....Leemo को देख के सभी ने पहले hi hello वाली फॉर्मेलिटी पूरी करि....

लीमो - एल्फ प्रिंस मैं नहीं जनता आप क्या करने वाले ho...par इतना तो पता चल चुक्का hai....jo भी होगा बहुत बड़ा होने वाला है...

दब - तुमने सही समझा hai.....kuch बड़ा होने वाला है एल्फ नेशन में कुछ ऐसा जिसके बाद ये जगह वापस से खुशियों से भर जायेगी.....

लीमो ने जब ये सुन्ना तो उसके दिम्माग में बस एक hi बात आयी....

लीमो - तो क्या आपको उस बीमारी का इलाज मिल चुक्का है.....

दब - हम्म वो भी मिल चुक्का hai....ab chalo....humme बहुत से काम करने है....

लीमो - हम्म chaliye.....aap सब भी चलिए.....

उसने चलने के बारे में तो कह दिया tha.....par दिम्माग में एक बात घूमने लगी uske.....DB ने कहा वो bhi....ye भी क्यों कहा usne.....matlab यहाँ पे कुछ और भी होने वाला है......

वो इस बात को सोच रहा था और आगे बढ़ता जा रहा था.....

लीमो - वैसे एल्फ प्रिंस एक और बात भी hai....aapne ये जगह क्यों chunni....jaha तक मुझे पता है प्रतीक जी और बाकी सब बिन्ना गेट तक आये भी अंदर आ सकते hai...phir इस जगह पे क्यों....

दब - बस यूँ hi.....Maine सोचा hi नहीं इसके बारे में.....

दब ने कुछ सोचते हुए ये बात कही usko.....Leemo भी देख रहा था ये....

K.bua - दब तुम्हे इस बारे में पहले सोचना चाहिए tha.....Main तो अभी भी कह रही hu....hum यहाँ से सीधा अंदर चले जाते है गेट तक जाएंगे hi नहीं.....

लीमो - हम्म एल्फ Prince.....inki बात सही hai....agar आपने इसके बारे में नहीं सोचा था तो आप अभी सोच सकते है....

दब - nahi.....ab ऐसे hi चलते hai.....isme मुझे कोई बुराई नहीं लग रही......

लीमो को तुरंत समझ आ गया था ये सब दब किसी प्लान के हिसाब से कर रहा hai....par क्या प्लान था ये पता नहीं था usko.....aur अब तो वो पूछना भी नहीं चाहता था.....

उसको ऐसा लगने लगा सायद इनसब को उसपे याक्किन hi नहीं hai....sayad इसी वजह से उसको नहीं बताया plan....par उसने इस बात को किसी के सामने नहीं आने diya.....usne सोच लिया था वो बस अपना काम करेगा वही काम जो उसको मिला था दब को और बाकियों को किसी भी तरह चुप्पा के महल में लेके जाने का काम.....

सभी लोग गेट के पास pahuche......Gate के दोनों तरफ hi लोग होते hai....aur सिपाही भी जो चेक करते है आने जाने वालो ko.....to इस तरफ भी लोग थे...

लीमो - ये सिपाही ईंमानदार hai....yaha से jaana....muskil hoga....aap सब क......

लीमो बोल hi रहा था की दब आगे बढ़ gaya.....aur जाके वह वाली लाइन में खड़ा भी हो gaya.....Leemo kya....ye देख के सब hi हैरान the.....Prateek को बस ये पता था वो वह पे अपने लोगो को ये बताने आया था की वो राजा नहीं banega....par उसको ये नहीं पता था की कैसे......

उसने भी ये नहीं सोचा था.....

लीमो आगे जाके उसको रोक लेता पर तब तक देर हो चुक्की थी वो उस लाइन में जा चुक्का था....

लीमो - आप सब को कुछ करना hoga....Prateek आपको इनको समझाना चाहिए.....

प्रतीक - Leemo....Main क्या kahu.....isne ये क्यों किया वो मुझे भी नहीं पता hai.....iske दिम्माग में सायद कुछ और hi चल रहा है.....

लीमो - हां पर ये वक़्त सोचने का नहीं hai.....agar इनको यहाँ पे लोगो ने पहचान लिया तो मुशीबत आ सकती है....

प्रतीक कुछ करने वाला था की तभी P.Bua ने देखा....

सामने लाइन में लगे हुए दब कुछ इशारे कर रहा था....

P.bua - प्रतीक rukko....wo देखो वो वह जाके क्या इशारे कर रहा है......

P.Bua की बात सुनके सभी ने देखा उस taraf.....DB इशारे में बता रहा था की बाकी सब आगे जाए अपने तय किये हुए जगहों pe.....plan ों है....

K.Bua - ye.....ye sayad....isne खुद को सबके सामने लाने के लिए किया है ye.....par क्यों....

लीमो - Nahi.....nahi....ye बहुत बुरा hai.....nahi....inko नहीं पता इसके बाद क्या होने वाला hai......iska अंजाम बहुत बुरा होगा....

रूपल - जहा तक मुझे पता hai....Leemo कही तुम स्ट्रेंज वर्ल्ड के कोर्ट को चलेंगे करने की बात कर रहे ho.....aur ये सच में गलत hai.....iski वजह से दब की सज़्ज़ा और बढ़ जायेगी.....

लीमो - haa...haa इसी वजह se......ab आप सब रोकिये unhe.....jaldi रोकिये....

कोई कुछ कर पाटा उससे पहले hi....jo सिपाही वह पे खड़े the....unme से एक की नज़र दब पे पद gayi....jab उसने दब को देखा तो एक बार के लिए वो भी चौक gaya.....DB यहाँ कैसे hoga.....par वापस से देखने पे भी वह वाली सकल दिखाई दी.....

वो आगे gaya....aur उसने दब को उस लाइन से बहार निकल liya.....aur कोई सिपाही उसका चेहरा ना देख पाए इसके लिए उसने तुरंत उसके चेहरे पे कपडा दाल दिया.....

लीमो और बाकी सब इस चीज़ज़ को देख रहे थे......

निकिता - ये क्या हो रहा hai....aisa तो नहीं होना चाहिए था....

वो सिपाही दब को वैसे hi अपने साथ लेके जाने लग gaya.....gate के पास पंहुचा तो उसने दूसरे सिपाही से कहा की ये एक बड़ा मुजरिम hai....isko यहाँ पे लोग देखेंगे तो उनमे डर आ सकता hai.....iska एल्फ नेशन में पाया जाना सही नहीं hoga.....aur इसको छोड़ भी नहीं सकते हम अब.....

उसकी बातों को समझते हुए उस सिपाही ने उसको अंदर जाने diya....aur साथ में दब को भी......

बाकी सब को समझ नहीं आ रहा था आखिर ये क्या tha.....kyunki उसने प्लान बताया नहीं किसी को पुरे तरह se....aur अगर बता दिया होता की वो जानबूझ के खुद को पकड़वा देगा तो जाहिर सी बात थी कोई भी इसके लिए तैयार नहीं होता.....

लीमो - मुझे लगता है वो सिपाही उसको सीधा महल तक लेके जाएगा......

प्रतीक - हममे भी चलना chahiye.....bas एक बात समझ नहीं आयी mujhe....usneitna सब कुछ क्यों किया hai.....kya वो किसी बात को साबित करना चाहता है या कुछ और....

रूपल दीदी - मुझे तो ये पागलपण लगता hai...tumhe अंदाज़ा भी नहीं है की दब के इस काम के वजह से एल्फ नेशन को क्या क्या मुश्किल सहना पद सकता है.....

निकिता - जब ये सब hi करना था तो हममे क्यों बताई उसने वो जगहें जहा पे हमको होना chahiye.....ye बात भी समझ नहीं आ रही है.....

P.Bua - शांत हो जाओ sab....mujhe लगता है अभी हमको बस वही करना चाहिए जो उसने करने को कहा hai.....par थोड़े स्मार्ट तरीके se......Leemo आपको एक बात का ख्याल रखना है अभी se.....Elf नेशन के bahar....kisi को भी ये पता नहीं चलना चाहिए की दब यहाँ पे आया hai.....court में जब तक ये साबित नहीं होता दब यहाँ आया था वो कुछ नहीं कर paayenge....aur अभी उनके हिसाब से दब स्कूल में hi hoga....kyunki वो क्लोन वही पे है.....

लीमो - जी मैं इस बात का ध्यान रखता hu....par आप सब को अंदर ले जाने के बाद.....

प्रतीक - उसकी जरुरत नहीं है लीमो तुम अपने काम में lago....uss सिपाही के पीछे jaao.....aur मैं बाकी सब को उनके जगहों पे पहुँचता hu.....tum niklo.....aur हां मदद चाहिए होगी तो बस आवाज दे देना....

लीमो ने एक बार सभी को dekha....uske बाद वह से निकल gaya.....ye वक़्त नहीं था बक्कर में वक़्त गवाने ka....pata नहीं वो सिपाही कहा लेके जा रहा होगा उस दब को.....

लीमो के जाते hi.....

प्रतीक - ओल्ड Owl.....Jwala.....

उसने दोनों को hi बुल्ला liya.....aur दोनों वह पे बहुत hi जल्द आ गए.....

प्रतीक - ओल्ड आउल तुम्हे निकिता और रूपल दीदी को महल के चाट पे पहुंचना hai....Jwala K.bua और P.bua को महल के बगीचे के पास और तुम वही rukoge....dono जो kahe....usko फॉलो करना है tumhe.....Old आउल अपने लोगो को यहाँ bulao...ye सब करने के बाद......

दब ने जिस जिस जगह को तय किया था वह वह पे लोगो को भेज दिया मैंने ओल्ड आउल और ज्वाला की मदद se....Jwala को तो बुआ के पास hi रहने को बोल दिया tha....par ओल्ड आउल को वापस बुल्ला लिया......

प्रतीक - ओल्ड आउल अपने कुछ लोगो को यहाँ पे bulao....aur पुरे एल्फ नेशन को अच्छे से jaancho.....kahi पे भी किसी तरह की गड़बड़ lage...uske बारे में उनसे रिपोर्ट lo...aur तुम फिर मुझे batao.....samjhe....

ओल्ड आउल - हम्म ठीक है.....

उसने अपने कुछ लोगो को bulaya....aur जैसा मैंने कहा था उनको ठीक वैसा hi kaha.....Old आउल प्रतीक के साथ hi रहा....

प्रतीक भी पोर्टल से जा सकता tha....par उसने कुछ अलग socha....usne ओल्ड आउल से पहले तो लीमो का पता लगाने के लिए bola.....aur ओल्ड आउल ने ये काम तुरंत hi कर diya....aur उसी के साथ प्रतीक को दब भी मिल गया और वो सिपाही भी.....

लीमो की बात सही thi.....wo सिपाही दब को सच में महल की ओर hi लेके जा रहा tha.....chahra चिप्पा ke....sayad लीमो भी उसकी बातें सुन्न पा रहा था या nahi....pata नहीं....

पर ओल्ड आउल का वो बाँदा जो उसके पीछा था वो सब सुन्न प् रहा था.....

वो सिपाही घबराया हुआ tha....thoda दर्रा हुआ tha....aur बार बार यही कह रहा था दब se.....aapko यहाँ नहीं होना चाहिए था.....

प्रतीक समझ gaya.....ispe नज़र रखने से कुछ नहीं होने wala.....ye बस अपना काम कर रहा है ये लेके जाएगा दब को महल में सीधा राजा के pass.....to प्रतीक अपने बताये हुए जगह पे जाने को निकल gaya......aur ओल्ड आउल के मदद से पालक झपकते hi पहुंच गया जाके महल के पीछे......

दब ने पता नहीं क्यों इन् सब को महल के अस्स पास रहने को कहा tha.....ye सवाल पहले भी आया था उनके मैं में और पूछा भी दब से तो उसने कहा की आगे पता चल hi जाएगा.....

सब अपनी अपनी जगह पे निर्धारित वक़्त से बहुत पहले hi जा पहुंचे the.....ab बस बारी थी दब के अपने जगह पे पहुंचने ki.....matlab दब के महल में पहुंचने ki....baaki सब तो पोर्टल्स से निकल के चले गए पर ये तो पैदल जा रहा tha.....isme वक़्त लग्न hi था....

अभी प्रतीक वह अपनी जगह पे पहुंच के जगह को देख hi रहा था की ओल्ड आउल के लोगो ने पुरे एल्फ नेशन को अच्छे से स्कैन कर लिया tha.....wo अब ऐसे ऐसे पॉइंट्स पे थे जीन पॉइंट्स से पूरा एल्फ नेशन कवर हो जाता tha.....kuch तो गेट के बहार भी the....aur वह से गेट को भी देख रहे थे.....

ओल्ड आउल ने ये बात बता दी की प्रतीक का आर्डर पूरा हो चुक्का hai....par उसके बाद जो ओल्ड आउल को सुनने में आया वो अजीब tha.....usko पहले याक्किन नहीं hua.....wo वही पे प्रतीक को छोड़ के ऊपर आसमान की तरफ निकल gaya.....aur काफी ऊंचाई तक पहुंचने के baad.....usne जो dekha....wo पुरे एल्फ नेशन के लिए खतरा था.....

वो वापस aaya....tezi से वापस आया.....

वही दूसरी तरफ.....

फोमोस पे......

लूसिफ़ेर भी निच्चे hi जा रहा tha....aur खुद को और ताक़तवर होता महसूस करता जा रहा tha.....wo इस ताक़त को महसूस करने के चाकर में एक बार को तो पेड़ों को भी भूल गया था....

पेड़ों के पत्तें जब उसके पैरों से टच होने लग गए तब जाके उसको ध्यान aaya....par उसने देखा की पेड़ उसपे कोई वार नहीं कर रहा hai.....wo थोड़ा चककित hua...waise तो पहले से भी बहुत था......

वो धीरे धीरे और निच्चे aaya....aur फिर वही फोमोस के जमीन पे कदम रखा usne.....jameen पे कदम रखने पे तो जैसे उसका सरीर कांप सा गया......

इतनी ज्यादा ऊर्जा वो खुद के अंदर महसूस कर पा रहा था जितना उसने कभी भी सपने में भी नहीं सोचा tha.....wo बस अपने हाथ पाऊँ देख रहा tha....aur साथ में अपनी पावर्स को उसे करना चाहता था.....

पर पावर्स किसपे उसे kare....yaha पे थे hi kya...bas पेड़ the..aur कुछ नहीं दिख रहा था.....

तो लूसिफ़ेर ने अपने सामने वाले एक पेड़ को निशाना banaya....aur उसके ऊपर हमला किया आग से.....

उसके हाथ से जो आग की लपटें nikli.....unhone उस पेड़ को hi nahi....balki उसके अस्स पास के पेड़ों को उसी पल राख बना दिया tha.....sidha राख....

लूसिफ़ेर अपना हाथ देखने laga....usko याक्किन hi नहीं हो रहा tha....par एक चीज़ज़ और हुई.....

जो जो पेड़ अभी जल के रख में मिले the.....wo सारे के सारे वापस से उग्ग gaye....matlab उनकी जगह पे जैसे नया पेड़ hi आ गया हो.....

लूसिफ़ेर का सपना था की वो अपने बेटे को इतना ताक़तवर बनाये की साड़ी चीजजें उसके बेटे की ho.....saare प्रमुख ग्रहों का राजा बनने Justin....par अभी जो ऊर्जा वो खुद के अंदर महसूस कर पा रहा tha.....wo भूल गया.....

लूसिफ़ेर भूल hi गया की जस्टिन करके उसका कोई बीटा भी hai.....wo इतना खो गया अपनी शक्तियों के बढ़ जाने की ख़ुशी में की वो भूल गया वो यहाँ पे आया क्यों था.....

वो बस आस पास के पेड़ों पे हमला कर कर के देख रहा tha.....dekh रहा था की उसकी शक्तियां कितनी ज्यादा बढ़ी है......

अब इसको उस इम्मोर्टल की शैतानी hi kahenge....usne यहाँ का माहौल hi ऐसा बना दिया था की आपको खुद को पता नहीं चल पायेगा की आप कितने ताकतवर हो....

लूसिफ़ेर लगा raha.....yaha वह पेड़ों पे अपनी शक्तियां देखने mein...par वो तो बढ़ते hi जा रहे the....matlab अगर उसने सोचा की उसके पावर की लिमिट बस इतनी होगी की वो एक बार में इतनी आग लगा सकता है की उसके सामने के 4 पेड़ जल जाये और रख में बदल जाए turant.....par होता ये था की 5तह वाले पेड़ का आधा हिस्सा भी जल जाता tha.....aur एक सवाल एक कसक लूसिफ़ेर के मैं में दे जाता था.....

क्या थोड़ा और तरय करने पे 5तह वाला पेड़ भी पूरा जल jaayega.....aur उस सवाल का जवाब जानने के लिए वो वापस से करता waise.....aur इस बार 5तह के साथ 6तह का आधा part जल जाता.....

एक कभी ना ख़तम होने वाले भ्रम में फास्ट जा रहा था Lucifer.....aur ये तो अभी और भी बुरा होने वाला था.....

वही एअर्थ पे......

मधु आज भी कॉलेज गयी हुई thi.....Pankaj स्कूल में था.....

पंकज को निकिता की चिंता हो रही thi....par उसको लग रहा था वो उससे गुस्सा hoga.....usne hi उसको लीडर से मिलवाया tha....iss वजह से....

पंकज चाहता था की वो निकिता से मिले और उससे बात kare....par वो हिम्मत नहीं जुटता पा रहा tha....aaj सुबह बहुत सोचने के बाद उसने तय कर लिया था की अगर आज निकिता उसे मिले तो वो सब बताएगा की उसको कुछ भी पता नहीं था इन् सब के बारे में.....

पंकज यहाँ वह घूमता रहा निकिता के तलाश mein....par उसको कोई खबर hi नहीं milli....haa ये और पता चला की वो तो आ hi नहीं रही है School....ye जानकारी पाके पंकज थोड़ा और परेशां हो gaya.....par सोचा सायद उसको इससे बहार आने में थोड़ा वक़्त लगे.....

लेकिन अब पंकज खुद को निकिता को सब बताने से रोक नहीं पा रहा tha....to उसने घर पे जाने का तय kiya....ab तो परमिट भी tha....aa जा सकता था वो...

पंकज स्कूल से निकल के चल दिया वही निकिता से मिलने ko....par यहाँ पे भी कन्फूसिओं थी थोड़ी....

उसको ये मालूम नहीं था की निकिता कहा milegi....Prateek के यहाँ या फिर रूपल दीदी के नानी के यहाँ....

तो उसने दोनों जगह hi तरय करने का socha.....par हैरानी इस बात पे hui.....ki दोनों hi जगह पे पहुंचने पे उसको ये बताया गया की निकिता स्कूल गयी है....

पंकज ने बड़े hi समझदारी से ये बात जाहिर नहीं होने दी की उसको पता है की निकिता स्कूल में नहीं hai....balki बन्दे ने ये तक कह दिया की.....

पंकज - वो मैं तो जाता नहीं ना स्कूल और जाता भी हु तो बस ऐसे hi लगा रहता हु बक्कर के कामो में निकिता सायद क्लासेज में hogi...Main पता करता हु....

इतना कहने के बाद वो वह से फुर्र से भगा.....

अब पंकज को लगने लग गया की कुछ गड़बड़ है तो उसने मधु को कॉल किया.....

Madhu...apne कॉलेज में thi....aur क्लास कर रही thi....breaks में अपनी बहनो के साथ होती thi.....ye जितने दिन प्रतीक वह नहीं गया उसके लिए सब अच्छा hi हो रहा tha...matlab वो आराम से जान पा रही थी अपने परिवार के बारे mein....par उसको खुद hi कुछ मिसिंग लग रहा था.....

वो सवाल पूछती अपने बहनो से और जवाब भी सुनती थी पर उसकी नज़रें कॉलेज के गेट की तरफ होती थी बस.....

उसकी बहेनो ने प्रतीक को कॉल किया tha....par बात नहीं हो पायी अच्छे se....uske चाचा जी ने भी पूछा था प्रतीक के बारे में आखिर उन्होंने तो अपनी बच्चियों की जिम्मेदारी सौप दी थी उसके ऊपर....

पर मधु के पास कोई जवाब नहीं था....

ऐसे hi मधु बैठी हुई थी की उसका फ़ोन baja.....Pankaj का कॉल था....

पंकज - मधु प्रतीक वह पे है क्या....

मधु - haa...tum भी उसी के बारे में puccho....mujhe नहीं पता कहा गायब है wo....usko यहाँ होना चाहिए tha....par वो आ नहीं raha....Pujari जी ने उसको यहाँ रहने को बोलै था और वो है की....

पंकज - वो वह नहीं hai....aur स्कूल में निकिता भी नहीं hai.....saath में K.Bua और P.bua भी नहीं है वह पे.....

मधु - सायद ये सब बहार गए होंगे कही....

पंकज - इनके घर में सबको पता है की निकिता और दोनों बुआ स्कूल में hai....Rupal दीदी अपने होटल में और प्रतीक तुम्हारे पास....

मधु - ये सब कही गए हुए है phir....ye अच्छा नहीं है Pankaj....Uss प्रतीक को यहाँ पे होना चाहिए था....

पंकज - तुम ठीक तो हो naa.....tum प्रतीक प्रतीक किये जा रही हो बस.....

मधु - अरे सब मुझसे पूछ रहे है वो कहा है तुमने भी तो इसी लिए कॉल किया naa.....Main कबसे सबको नहीं पता नहीं पता नहीं पता कहती जा रही hu.....ab मुझे भी जवाब चाहिए की वो है कहा pe....Main आ रही हु bahar....uss मैप वाले बुक के saath....agar एअर्थ पे हुआ तो उससे पता चल hi जाएगा....

पंकज - ठीक है मैं तुम्हारे रेंट वाले घर पे आता hu...tum जल्दी आओ....

यहाँ पंकज और मधु मिलने वाले the....wahi

एल्फ नेशन पे ओल्ड आउल ने अपनी बात बता दी प्रतीक को....

प्रतीक ने जब वो बात sunni....usne सोचा नहीं था की कुछ ऐसा होने वाला hoga....uske हिसाब से ये सब तब hi ख़तम हो चुक्का tha....phir उसको laga......sayad उसने अच्छे से ध्यान hi नहीं दिया होगा इन् बातों पे वो किसी और चीज़ज़ में लगा होगा जब वो इम्मोर्टल था तब.....

दब ने एक कहानी सुनाई thi....apne पुरखों के बारे mein.....usme ये भी बताया था की कोई आया tha....jisne राजा को उसके पूर्वजों के खिलाफ भड़काया था उस वक़्त.....

ये वही tha.....wo अभी भी वह आ सकता tha.....wo मर्रा नहीं tha...Mahel के निच्चे दफना दिया गया था जिन्दा hi पर सोते hue.....usko मारने का तरीका पता नहीं था किसी ko....aur आज जब वापस से मुकुट पे वो हीरा lagega....aur उससे जो एनर्जी बहार aayegi....uske वजह से वो जाग jaayega....aur बहार आएगा....

महल के अस्स पास इसी वजह से उन् सब को रहने के लिए बोलै गया tha.....aur महल में दब खुद भी इसी वजह से रहना चाहता होगा क्यूंकि उस बन्दे को सुलाने वाले के पास नेचर एलिमेंट tha.....matlab वो जागते hi बदला lega....usse जिसके पास नेचर एलिमेंट होगा....

प्रतीक को जैसे hi ये बात पता chali.....usne ज्वाला से कहा....

प्रतीक - ज्वाला तैयार raho...aur दोनों बुआ को भी तैयार रहने को bolo....ye जो आने वाला hai.....wo बहुत बड़े बड़े भ्रम फैलता hai.....unko इससे बचाना तुम्हारा काम hoga.....ho सक्के तो अपने कुछ लोगो को बुल्ला लो यहाँ पे.....

ज्वाला - ठीक है.....

ज्वाला ने ये सब दोनों बुआ को भी bataya.....uske baad....usne अपने कुछ लोगो को भी वह आने को बोल दिया....

वही प्रतीक ओल्ड आउल को समझा रहा था.....

प्रतीक - रूपल दीदी बहुत खतरनाक hai....agar उन्होंने खुद के ऊपर से आप khoya....to एल्फ नेशन का बहुत बुरा हाल हो सकता hai....Tumhe उन्हें हर तरह के भ्रम से बहार निकलना hai....aur निकिता को भी.....

ओल्ड आउल - ठीक hai....Main जाता हु वह पे....

वो वह चला गया.....

प्रतीक - और ध्रुव tum...tum मुझे...

वो बोल hi रहा था की उसको याद aaya.....ki अब ध्रुव उसके साथ नहीं है.....

प्रतीक - लगता है मुझे खुद को भ्रम से बच्चाकेँ रखना होगा.....

नेक्स्ट अपडेट में देखते है क्या होता है स्ट्रेंज वर्ल्ड mein.....aur साथ में वो लूसिफ़ेर को भी
 
अपडेट - 119

ओल्ड आउल को प्रतीक ने रूपल दीदी और निकिता के पास भेज दिया tha....aur Jwala....Jwala उस वक़्त दोनों बुआ के पास tha.....Jwala ने ये सब कुछ उन् दोनों को बता दिया था.....

ज्वाला अपने तरफ से तैयार tha.....wo इस बात की पूरी कोशिश करना चाहता था की दोनों बुआ उस भ्रम बनाने वाले के जाल में ना fanse.....aur उसकी इस कोशिश में खुद K.Bua और P.Bua ने भी मदद कर दी.....

उन् दोनों ने पहले भी ऐसे चीजजें देखि हुई thi....to उनको कुछ एक्सपीरियंस था इन् चीज़ज़ों से बचने ka.....aur K.Bua तो अपने साथ हमेशा अपनी चीज़ें ले कर hi चलती thi.....abhi भी उनके पास उनकी चीजजें थी....

अपने बैग में से एक सीसी निकली उन्होंने और उसके अंदर से छोटी छोटी गोलियां nikali.....rang बिरंगी goliyan....dekhne में तो एकदम से चॉकलेट की तरह लग रही थी.....

2-3 उन्होंने अपने मुँह में ले liya....aur कुछ P.bua को पास कर दिया.....

P.bua को पता था इसके बारे mein.....par वो अभी बाकियों के बारे में सोच रही थी....

P.bua - हममे ये बच्चो तक भी पंहुचा देना chahiye.....isse वो भी सुरक्षित रहेंगे......

K.Bua - haa....Jwala क्या तुम हममे.....

ज्वाला को तो बस कहने की देर thi......aur वो सब समझ भी रहा tha.....usne तुरंत hi पोर्टल खोला और K.Bua चली गयी रूपल दीदी और निकिता के pass.....aur P.bua प्रतीक के पास......

प्रतीक ने जब P.Bua को अपने पास देखा तो.....

प्रतीक - bua....aap यहाँ pe.....aapko अपनी जगह पे होना चाहिए tha....ye कभी भी शुरू हो सकता है.....

P.Bua - हम्म इसीलिए अब जल्दी से इनको अपने मुँह में lelo....aur मुँह में hi rakhna....bahar नहीं निकलना है और ना hi निगलना है समझे.....

प्रतीक - पर ये है क्या.....

P.Bua - ये चॉकलेट्स hai.....inki टास्ते तुम्हारे सेंसेस को काम में लगाए rakhegi.....kisi बह तरह के भ्रम में फसने से तुम्हे कुछ हद्द तक रोकेगी....

प्रतीक के पास सवाल तो और the....par समय कुछ काम था इस waqt....to उसने P.Bua के हाथ से वो गोलियां ली और अपने मुँह में ले लिए.....

प्रतीक - अब आप jaao.....ye कभी भी शुरू हो jaayega......aur आपका अपनी जगह पे रहना जरुरी है.....

P.bua ने हां में सर hilaya....uske बाद प्रतीक को गले लगा के उसके माथे को चुम लिया.....

प्रतीक - ये क्या कर रही हो आप.....

P.Bua - चुप raho....aur ध्यान रखना अपना......

इतना बोलके वो वापस मुद के चली गयी पोर्टल से अपने जगह pe......waha पहुंची तो K.Bua भी अभी hi आयी थी और एक तीसरा पोर्टल बंद हो रहा था.....

P.Bua - तुमने दे दिया उनको....

K.bua - haa....par ये लोग सवाल बहुत करते है.....

P.bua - ये अच्छी बात है ये सवाल करते hai.....Jwala तुम्हे पता है ये सब कब शुरू हो जाएगा....

ज्वाला - जैसा मुझे पता hai.....ye तब शुरू होगा जब दब वो माननी मुकुट पे लगा dega....abhi वो महल के पास hi है.....

P.bua - अभी वो महल के पास hai....usko अंदर लेके जाय jaayega.....kya लगता है वो उस मुकुट तक पहुंच भी payega....yaa

K.bua - हम्म ये बात तो hai.....mujhe नहीं लगता वो आसानी से वह पहुंच paayega....mujhe तो थोड़ी देर पहले तक यही लग रहा था हम उसकी मदद करने आये है की वो उस माननी को मुकुट में लगा sakke.....par यहाँ तो सब कुछ अलग hi चल रहा है.....

P.Bua - ये बात सही कही tumne....sayad वो इन् सब को किसी और तरीके से भी कर सकता tha.....agar हम पहले उसकी मदद कर देते उस माननी को मुकुट में लगाने का तो ये अच्छा नहीं होता क्या....

ये दोनों तैयार the....aur अब बातें किये जा रहे थे उस वक़्त का इंतज़ार करते हुए जब इनका काम शुरू होगा.....

वही कुछ ऐसा hi रूपल दीदी और निकिता के साथ चल रहा tha....par इससे अलग था.....

रूपल दीदी ने वैसे तो खुद को बहुत रोकक रखा tha....ki वो लीडर के बारे में ना बोले वह पे.....

पर रूपल दीदी तो रूपल दीदी hi hai.....unse कण्ट्रोल नहीं हो पाटा चुप रहना....

रूपल दीदी - Nikita.....tumne कुछ सोचा है क्या.....

निकिता - किस बारे में दीदी....

रूपल दीदी - ुसस्स बारे mein.....apne परिवार के बारे में...

निकिता ने sunna.....aur फिर चुप hi rahi....par वो रूपल दीदी की तरफ देख रही थी.....

रूपल दीदी को लगा उन्होंने गलत बात छेद di....ye बात उनको नहीं करनी चाहिए थी abhi.....to उन्होंने बात बदलना chaha.....par वो कुछ बोलती उससे पहले निकिता बोली....

निकिता - ठीक hai.....to मैं अपना सामन वापस से स्कूल के हॉस्टल में रख लुंगी....

रूपल - Kyun....saman क्यों रखना है waha....tumhe कोई परेशानी हो रही है क्या नानी के यहाँ pe....kisi ने कुछ कहा क्या.....

निकिता - आपने...

रूपल - Maine....kab....

निकिता - अभी तो कहा परिवार के बारे में क्या सोचा hai.....aap बताओ मुझे क्या कुछ सोचने की जरुरत hai....aap सब के होते hue....aap हो ना मेरा परिवार....

रूपल - हां हम सब hai.....aur आगे से ऐसा कुछ बोलै सम्मान वापस हॉस्टल में रख लेती hu....to बहुत बुरा होगा....

रूपल दीदी वापस से पूछना तो चाहती थी लीडर के बारे में par....unhone ये वक़्त सही नहीं समझा....

निकिता - मैंने सोचा है मैं उनसे मिलूंगी....

रूपल - haaan....kisse मिलोगी....

निकिता - मैं लीडर से milungi.....aur उनसे अपने कुछ सवाल पूछूँगी....

रूपल - तुम सच में milogi.....Main भी साथ chalungi....mujhe भी usse....nahi...unse मिलना hai....mere भी कुछ सवाल है....

निकिता - नहीं didi....mujhe उनसे अकेले में मिलना है एक baar.....inn सवालों का जवाब मैं अकेले सुन्ना चाहती हु....

रूपल - ठीक hai.....par याद रहे मेरे भी कुछ सवाल hai....aur उनको मैं पूछूँगी जरूर....

ये अलग hi लगे हुए थे......

प्रतीक भी अब अकेला नहीं रहा tha.....uske पास पोलर बेयर किंग आया हुआ था....

दरअसल हुआ ये की पोलर बेयर किंग को पता चला ओल्ड आउल के लोग और साथ hi ज्वाला के लोग भी कही जा रहे hai....Jwala भी वही गया हुआ hai.....to उसको लगा सायद कोई मुश्किल आ गयी hogi.....warna ऐसे hi मूवमेंट्स तो होती नहीं thi.....to वो ज्वाला के एक बन्दे के साथ चला आया यहाँ पे.....

यहाँ आया तो उसको पता चला ये sab....Jwala se.....to उसने ज्वाला से बोलके उसको प्रतीक के पास भेज देने को kaha....Prateek अकेला था इस वजह से....

प्रतीक ने जब पोलर बेयर किंग को वह देखा तो थोड़ा हैरान हो गया....

प्रतीक - तुम यहाँ....

पोलर बेयर किंग - सुन्ना तुम अकेले ho....to यहाँ आ गया.....

प्रतीक कुछ कहता उससे पहले उसको ऊपर आसमान में ओल्ड आउल के लोग घूमते हुए दिखाई देने लग gaye....ye सिग्नल था....

प्रतीक नहीं चाहता था की ओल्ड आउल का ध्यान थोड़ा सा भी यहाँ वह ho.....wo बस वही करे जो उसको करने को कहा गया hai....matlab रूपल दीदी को किसी भी तरह अपने सेंसेस काबू में रखने में मदद kare....to उसने इस तरह के सिग्नल्स के बारे में कहा था उससे.....

अभी के सिग्नल का मतलब था दब महल के अंदर पहुंच चुक्का था....

उसके महल के अंदर आने की बात अब सभी को पता चल चुक्की thi....Prateek दोनों बुआ और रूपल दीदी और निकिता ko......aur लीमो तो पीछे hi था उसके तो वो तो जानता hi था....

महल में दब को सामने के रस्ते से नहीं लेके जाय गया tha.....usko एक छोटे दरवाजे से लेके जाय गया था.....

महल के बाकी सारे लोगो को वह से हटवाने का काम लीमो करवाता जा रहा tha.....jaisa की उसने पहले hi अपने लोगो को हर जगह पे बिठा दिया tha....to अभी वो उस सिपाही और दब का पीछा करते hue....bas उन् सब को इंस्ट्रक्शंस दे रहा था की कौन सा गलियारा खली करना hai......aur उसके लोग भी समझदार the....wo भी अपना काम बड़े अच्छे से कर रहा थे.....

जो सिपाही दब को लेके जा रहा tha....usko खुद बहुत आश्चर्य हो रहा tha.....wo वह पे एक बन्दे को सबसे चुप्पा के लेके जा पाया था....

महल की सुरक्षा बहुत कड़ी होती hai....uss सुरक्षा को वो पार कर पा रहा tha....usko कुछ कुछ गड़बड़ लग रही थी.....

यहाँ पे अब दरबार ख़तम होने का समय हो चला tha....matlab अब एल्फ किंग अपने दरबार से बहार आने वाले थे और ये बात उस सिपाही को भी पता थी और लीमो को bhi....DB को तो पता था hi ये....

सिपाही ने सोचा था की अगर मौका मिले तो वो एल्फ प्रिंस यानी दब को सीधा एल्फ किंग के पास लेके jaayega....taaki किसी को पता ना chale....aur अभी तक जो कुछ hua....usse उसने ये तय किया की वो यही करेगा....

दब का भी सायद कुछ ऐसा hi प्लान tha...to वो भी चल diya...uss सिपाही के saath....par लीमो....

लीमो नहीं चाहता था की दोनों बाप बेटे mille....usko लग रहा था दोनों मिलेंगे तो वह पे धमाका हो jaayega.....Elf किंग बहुत गुस्सा हो जाएंगे दब से....

लीमो ने जब देखा दोनों उसी तरफ जा रहे है तो उसने खुद बहार आना hi सही samjha....aur वो पीछे से उनके पास चला गया.....

लीमो - Sipahi....tum ये कहा चले आ रहे ho....aur ये कौन है....

वो सिपाही एक पल को तो डर hi gaya....par फिर उसने socha....ye काम वो अकेले कभी भी नहीं कर sakta.....to उसने लीमो को सब बताने का socha...aur उसको सम्जहने का भी सोचा की क्यों दब को उसके पिता यानी एल्फ किंग के पास भेजना चाहिए.....

ये सब करने के लिए उसने सबसे पहले जो पतला कपडा दब के चेहरे पे लगा हुआ था उसको हटाया....

लीमो ने थोड़ा एक्टिंग किया की ये तो एल्फ प्रिंस hai...aur उसके बाद लीमो को उस सिपाही ने सब कुछ बताया...

लीमो - Nahi....manna ये एल्फ प्रिंस hai....par हम इनको एल्फ किंग के पास नहीं ले जा sakte....yaad नहीं क्या tumhe....inhone उनको हानि पहुंचने की कोशिश करि थी....

सिपाही - ये कैसे हो सकता hai.....kya तुम्हे लगता है हमारे एल्फ प्रिंस कभी ऐसा karenge....manna थोड़ा भटके हुए है ye....par....nukshan पहुंचने की koshish....main इस बात को नहीं मानता....

लीमो - तुम्हारे मानने न मानने से क्या hi होता hai....upar से इनको सज़्ज़ा भी दी गयी thi....agar किसी को इनके यहाँ होने का पता चला तो....

सिपाही - मैं इनको चुप्पा के यहाँ लाया हु....

लीमो - तुम्हे इनको यहाँ लाना hi नहीं चाहिए था....

दब जो चुप चाप ये सब सुन्न रहा था उनसे देखा दुर्र hi उसके पिता वह से जा रहे the....unke साथ सायद वह के मंत्री the.....DB ने बस आवाज लगा दी....

दब - पिता जी....

आवाज पहुंच गयी जहाँ उसको पहुंचना tha....par इससे पहले एल्फ किंग उस तरफ dekhte.....DB ने लीमो को पेअर पे मार के वह से जाने को bola.....aur लीमो इस बार bhi....kuch नहीं कर सक्का.....

अब हालत कुछ ऐसे the.....durr सामने एल्फ किंग खड़े the...aur यहाँ पे सिपाही के साथ दब खड़ा tha....Elf किंग के साथ उनका मंत्री भी tha...par जैसे hi उसने देखा यहाँ पे कौन hai.....usne तुरंत hi वह पे खड़े सारे सिपाहियों को और बाकी सब को जाने को बोल diya.....unn सब ने आवाज तो सुन्नी थी पर देखा नहीं कुछ....

एल्फ किंग के चेहरे को देख के कोई भी बता सकता था ये बहुत गुस्से में hai....par मंत्री वह पे tha....aur उसने बात सँभालने की कोशिश करि.....

मंत्री - एल्फ king.....ye सही वक़्त और सही जगह नहीं hai.....Rajkumar को हममे सबकी नज़रों से बचाना होगा....

एल्फ किंग ने बस हां में अपना सर हिला diya....aur वह से चल दिए....

मंत्री ने देखा दब के साथ एक सिपाही भी tha.....usne सिपाही को दब के साथ अपने पीछे आने को kaha....aur वो खुद एल्फ किंग के पीछे जाने लग गया.....

एल्फ किंग एक कमरे के अंदर चले gaye....wo मंर्ती उस कमरे के दरवाजे के पास खड़ा raha...aur जब सिपाही और दब वह पहुंचे तो दब को अंदर जाने को kaha....aur सिपाही को वही बहार रुकने को kaha....apne saath....aur दरवाजा बहार से बंद कर दिया....

मंत्री - एल्फ प्रिंस यहाँ कैसे.....

सिपाही ने उनको सब कुछ bataya....ye भी बताया की वो उसको यहाँ पे क्यों लेके आया....

मंत्री ने सिपाही की तारीफ kari....usne सही kiya...par उससे पूछा की किसी और ने तो नहीं देखा ना उनको यहाँ पे....

इस्पे वो सिपाही ने बताया....

सिपाही - अभी आपके आने से पहले मैं उसी से बात कर रहा tha....par आपके आने के बाद वो गायब hi हो gaya....agar आप कहे तो मैं उसको ढूंढ के लाता हु....

मंत्री - तुम्हे क्या लगता है वो इस बात को किसी और को बताएगा....

सिपाही - मैं उससे अभी hi मिला tha...to पक्का नहीं कह सकता....

मंर्ती ने कुछ socha....phir कहा...

मंत्री - अगर सिर्फ उसने hi देखा hai....to ये बात दबाई जा सकती hai....abhi तुम्हारा यहाँ होना ज्यादा जरुरी है...

वही अंदर.....

दब - पिता जी....

एल्फ किंग - तुम यहाँ पे क्यों ho....aur किस वजह se...tumhe पता भी है तुम्हारा यहाँ hona.....mere लिए एल्फ नेशन के लिए कितना बुरा है....

दब - पिता जी मेरा यहाँ होना न तो आपके लिए बुरा है और ना hi एल्फ नेशन के liye....Maine अपनी नेचर एलिमेंट को कण्ट्रोल करना सीख लिया है....

एल्फ किंग - तुम ये बताने यहाँ आये ho.....tum मेरा खून ho...iss वजह से अभी मैं यहाँ पे तुम्हारी बातें सुन्न रहा हु....

दब - हां मैं जानता hu....Main यहाँ पे एल्फ नेशन को उस बीमारी से आज़ादी दिलाने आया hu.....Mere पास ये माननी है.....

दब ने माननी को अपने हाथ में लेके दिखते हुए कहा.....

एल्फ किंग ने जब वो देखा तो उनको याक्किन नहीं हो रहा tha.....shuru में जब वो माननी गायब हुई तो ये बातें होने लगी की वो चोरी हुई hai...par बाद में एल्फ नेशन के कुछ विद्वान् लोगो ने बताया की ये सब इस वजह से नहीं hai...iska कोई और hi कारन hai.....aur वो कारण भी एल्फ किंग को बताया गया.....

शुरू में एल्फ किंग को यकीं नहीं हुआ tha...par कब तक किसी बात को नाकारा जा सकता hai....phir उनको भी कुछ कुछ याक्क्न होने लग गया की ये सब सायद उन्ही से हुआ hai....unko कभी bhi....Nature एलिमेंट वाले अपने बेटे को उस मुकुट का असली हकदार बनने से नहीं रोखना चाहिए tha....unhone रोका और इसकी वजह से ये सब हो गया.....

वो चाहते थे दब को वापस बुल्ला le....par अब ये बात बड़ी हो चुक्की thi....wo अगर ऐसा करते तो वो स्ट्रेंज वर्ल्ड के नियमों को todte....ye एल्फ नेशन के लिए अच्छा नहीं hota....to उन्होंने उसकी सजा ख़तम होने तक इंतज़ार करने का सोचा....

अब जब वो उस माननी को दब के हाथ में देख रहे थे तो उनको याक्किन नहीं हो रहा था....

दब - पिता जी मुझे अपना काम पूरा करने dijiye....uske बाद मैं यहाँ से चला जाऊँगा....

इसने अपना काम kaha.....ab एल्फ किंग को कहा पता इसका पूरा काम क्या hai....wo भी चाहते थे की उनकी प्रजा इस अजीब सी बीमारी से मुक्त ho....aur अभी तो वो ये भी चाहते थे की दब जल्दी से यहाँ से चला jaaye.....to उन्होंने वक़्त ना गवाते hue....darwaja खोलने को कहा....

दरवाजा खुल्ला....

एल्फ किंग - मंत्री ji.....humara mukut....humme यहाँ पे चाहिए....

मुकुट हमेसा सर पे नहीं होता wo....wo खास मुकुट है तो उसको बस दरबार में पेहेन के बैठते hai....aur बाकी जगहों के लिए दूसरा मुकुट था.....

मंत्री ने जब वो सुन्ना तो वो चल दिया वह से मुकुट लाने ko....aur जाने से पहले उस सिपाही को बता के गया की इस जगह पे कोई भी आ नहीं पाए.....

थोड़ी देर mein....manrti अपने हाथों में कपड़ों से छुपता हुआ वो मुकुट लेके आ रहा tha....Abhi वो दुर्र hi tha....ki मुकुट उसके हाथ में हिलने लग gaya.....aur साथ hi उसमे लगे हुए और मंनियाँ चमकने लग gayi.....yaha दब के हाथ में जो माननी थी वो भी चमक रही thi....dono एक दूसरे से दुर्र hi the.....par जैसे एक दूसरे को मेहसूस कर पा रहे थे....

दब - पिता ji.....Main जब ये माननी इस मुकुट में lagaunga...tab कुछ बड़ा hoga...apko खुद को संभालना hai....Mantri ji....iss मुकुट को इस कमरे में लेके चलिए........

मंर्ती ने एक बार एल्फ किंग की तरफ देखा तो उन्होंने भी वही kaha....to वो लेके चला गया.....

उसके बाद दब ने उनको और साथ में उस सिपाही को उस कमरे से बहार जाने को kaha...aur साथ में दरवाजा बहार से बंद कर देने को भी कहा.....

उन् दोनों ने वैसा hi किया और दब ने अंदर से भी दरवाजा बंद कर diya.......uske बाद दब उस मुकुट के पास आया....

दब - पिता जी इस वक़्त तो रॉयल फॅमिली के सभी लोग अपने अपने रूम्स में hi होंगे ना.....

एल्फ किंग - haa.....ye वक़्त आराम का hai....sab रूम्स में hi honge...kyun क्या बात है....

दब - नहीं बस अभी अगर कोई रॉयल फॅमिली का अपने रूम में नहीं है तो वो कुछ ऐसा dekhega....jo उसको हिल्ला के रख देगा....

इतना बोलने के बाद उसने वो माननी उस मुकुट पे रख diya....aur एक तेज़्ज़ रौशनी चारो तरफ फैल gayi....ye एनर्जी के वेव्स the....jo की बहुत ताक़तवर the....Isko पुरे स्ट्रेंज वर्ल्ड ने फील किया था.....

यहाँ से दूर निक्स कबीले में मूर्ति में फसा वो banda...usne bhi.....wo तो बहुत हैरान हो गया tha....usne कभी नहीं सोचा था इतनी ऊर्जा वो इस अजीब से प्लेनेट पे महसूस कर paayega....waise उसने पहले किया था मधु के पावर्स और प्रतीक के bhi....par वो अलग थे और ये बिलकुल से अलग.....

इस एनर्जी का असर भी hua.....jisko जागना tha....wo जाग गया...

महल के आस पास भुखम के झटके से आने लग गए the....Elf नेशन में....

एल्फ किंग - ये क्या हो रहा है....

दब - ये इसके वजह से हुआ hai....par अभी तो ये शुरू hi हुआ है....

एल्फ किंग - क्या मतलब....

दब - आप इस कमरे से बहार नहीं jaayenge....kuch भी हो जाये नहीं जाएंगे....

दब ये बोल रहा था और साथ hi रूम के जमीं पे अपने साथ लाया हुआ एक पाउडर से कुछ आकृति बना रहा tha.....Mujkut के चारो तरफ.....

यहाँ सब शुरू हो चुक्का था.....

महल के अंदर और बहार या ये कहे की महल के बौंडरीएस के अंदर जितने भी लोग the....sab अचानक से जैसे रोबोट बन चुक्के थे....

भूकंप के बाद अक्सर होता है लोग घबरा जाते hai...par यहाँ pe....koi घबराया हुआ नहीं tha....sab शांत the...koi कही से बहार नहीं आया tha.....balki सभी के सभी अपने हथियार बहार निकल रहे थे.....

जो रॉयल फॅमिली के लोग थे वो सब के सब कुछ दर्रे हुए the....ek दूसरे का हल चल लेना चाहते the....aur वो अपने कमरों से बहार निकलने लगे थे...

पर उनको कहा पता tha.....aaj उनके साथ क्या होने वाला hai....jab उनके अपने रखवाले उनकी hi जान के दुसमन बन जाएंगे तब...

नेक्स्ट अपडेट में देखते है महल में क्या हो रहा hai....aur इसको कैसे रोक्का जाता है....
 
अपडेट - 120

एअर्थ पे.......

मधु और पंकज किताब में देखने के लिए नए घर में आ चुक्के थे......

मधु ने किताब निकला और जैसे उस किताब को उसे करते है वैसे hi उसे करने लग gayi......par किसी एक जगह को दिखने के बदले उस किताब में एअर्थ दिखाई दे रहा tha.....ye अजीब था....

मधु - ये ऐसा नहीं होना चाहिए ना.....

पंकज - तुमने सही से तो किया था ना......

मधु - हां मैंने ठीक से किया tha....par ye......ye तो एअर्थ को दिखा रहा है....

पंकज - रूक्को एक बार मुझे देखने दो....

मधु ने पंकज के इस बात पे उसको पहले तो आँखें छोटी करके dekha.....aur उसके बाद किताब उठा के उसके हाथ में दे दिया.....

मधु - ये लो....

पंकज ने भी किताब ले लिया और उसको टेबल पे वापस से रख के वही करने लग gaya.....yaani किताब पे हाथ रख के जिसको ढूँढना है उसके बारे में sochna....par सब वैसा hi tha....jaisa मधु के वक़्त हुआ था....

मधु ने देखा और चुप rahi....Pankaj को लगा सायद किताब में कुछ खराबी आ गयी hai....Madhu ने इसका उसे सही से नहीं किया hoga.....to उसने निकिता का नाम लेना शुरू कर दिया किताब पे हाथ रख ke.....iss उम्मीद में की वो किताब काम कर jaaye.....aur उनको पता बताये की निकिता कहा है......

पंकज - Nikita...Nikita.....

मधु ने dekha.......wo तब भी चुप rahi......haa पर उसके चेहरे पे थोड़ा बदलाव आ गया था....

पंकज - ये तो अभी भी वैसे hi hai......sayad ख़राब हो गयी है तुमसे....

मधु - Kya......Maine.....maine ख़राब कर दिया isko.....(gusse में और चिढ़ते हुए उसने कहा)

पंकज जो अभी तक सम्मान्य hi था मधु के साथ एकदम से उसके अंदर ऐसा बदलाव देख ke....wo थोड़ा घबरा सा गया......

पंकज - arre..arre मैं तो bas....aise hi....

मधु - क्या ऐसे hi.....haa बताओ ना क्या ऐसे hi......waha पे सब मुझसे पूछ रहे उस प्रतीक के बारे mein....ek बार नहीं बार baar....yaha पे तुम कह रहे हो मैंने इसको ख़राब कर diya......aur मुझे दोनों के बारे में hi नहीं पता......

पंकज - मधु शांत हो jaao.....tum....tum बैठ जाओ यहाँ.....

मधु - Nahi......ab मैं उसको dhundhungi.....aur उसके baad.....uske बाद.....

उसको गुस्सा आ रहा tha...aur देखते hi dekhte.....aankhen एकदम से सुनहरी हो gayi.....aur बाल हवा में उड़ने लग गए.....

पंकज एकदम से घबरा गया उसको समझ नहीं आ रहा था वो अब क्या kare......pichli बार जब ऐसा हुआ था तो वो उसको स्ट्रेंज वर्ल्ड तक लेके चली गयी thi.....aur वह पे जो hua....usne पंकज को एकदम से हिल्ला के रख दिया था वह पे उसको न जाने किन किन चीज़ज़ों का पता चला था.....

इस बार भी कुछ वैसा hi hua......Madhu को गुस्सा aaya.....aur उसकी गोल्डन पावर्स जाग gayi.....uske बाद उसने सीधा एक पोर्टल khola...aur उसके अंदर चल दी वो......

पंकज दर्रा हुआ tha.....par वो ऐसे hi मधु को कही भी जाने नहीं दे सकता tha.....wo उसको रोक नहीं सकता था ये बात उसके दिम्माग में thi.....to उसने उसके साथ जाने का socha...aur इस बार भी पिछली बार की hi तरह चला गया उसी पोर्टल में.....

जब दूसरी तरफ pahucha......to उसके दिम्माग में जैसे कुछ हो gaya......ekdum se....ek तेज़्ज़ आवाज आयी और उसके baad.....aankhen जैसे बंद होने लग गयी......

उस वक़्त उसके सामने बस कुछ चीज़ें दिखाई दे रही thi.....Madhu की वो सुनहरी aankhen.....ass पास बहुत से पेड़ paudhe.....aur थोड़ी दुरी पे एक धुंधली सी बिल्डिंग जैसा कुछ......

जब वापस से आँखें khuli....to वो एक सुनहरे से घेरे में tha.....jameen पे nahi.....wo हवा में tha....aur यहाँ वह हो रहा tha.....usne देखा उसके ठीक सामने मधु hai.....jo अपनी एक ऊँगली से उसके सुनहरे गोले को यहाँ वह कर रही thi....aur वो खुद उस गोले में यहाँ वह होता जा रहा था....

उसको और भी चीजजें दिखाई di.....Elfs......bahut सारे ेल्फ्स हाथों में हथियार लिए hue.....usne आस पास देखने की कोशिश करि तो उसको थोड़ी दुरी पे प्रतीक भी दिखाई diya......paar उसकी हालत थोड़ी ख़राब सी थी.....

मधु आगे बढ़ती जा रही thi.....ek हाथ से पंकज को संभल रही thi.....wahi दूसरे हाथ se.....apni गोल्डन पावर उसे करती जा रही thi......aur जो भी उसके पास आता उसको सामने से हटती जा रही thi.....Panakj को साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा था की मधु प्रतीक के तरफ hi जा रही hai......Isko तो ये भी लग रहा था सायद ये प्रतीक को नुकशान पंहुचा degi......wo अंदर से hi उसको रोकने के लिए आवाजें देने लग गया.....

पंकज - Madhu.....rukk jaao.....Madhu.....

पर आवाज कहा बहार जाने वाली thi......wo तो बस वही पे thi.....ussi गोले में गूंज रही थी......

पंकज ने यहाँ वह देखा तो बहुत से ेल्फ्स the.....jo ऐसे hi जमीन पे पड़े हुए the....usne जब और ध्यान से देखा तो उसको समझ आया वो किसी इम्मारत के दरवाजे के पास hai.....Prateek दरवाजे के थोड़ा अंदर था बस......

वो देख hi रहा था की तभी उसी दरवाजे के पास रूपल और निकिता आ gaye....aur प्रतीक के पास जाके वह पे उसकी मदद करने लग gaye......aur उसके थोड़ी देर baad.....waha पे दोनों बुआ भी आ पहुंचे the......aur बस वही nahi....uske साथ उसने आज फिर से उन् जीवों को देखा tha......wahi जीव जिनको उसने पिछली बार भी देखा था.....

अब थोड़ा टाइम और जगह दोनों को बदल के ये जानते है यहाँ आखिर हुआ क्या की प्रतीक की हालत ऐसी हो gayi....aur क्या मधु बस ऐसे hi गुस्सा होक यहाँ पे आ gayi.....yaa phir....kuch और...

दब ने पता नहीं किस हिसाब से प्लान बनाया tha.......kisi भी हिसाब से बनाया ho.....par एक बात साफ़ साफ़ पता चल रही thi.....usne रॉयल फॅमिली के किसी भी आम सदस्य के बारे में नहीं सोचा tha.....agar वो sochta....to यहाँ ये सब शुरू होने के पहले hi उनको कही सुरक्षित भिजवा deta....yaa उनके सुरक्षा का इंतज़ाम करता....

लेकिन nahi.....aisa कुछ नहीं tha....usne बस एल्फ किंग की सुरक्षा के बारे में socha.....aur वो भी इस वजह से क्यूंकि अगर उनका खून उस भ्रम फैलाने वाले के हाथों लग jaata.....to वो इस जगह से आज़ाद हो jaata.....aur बस आज़ाद नहीं hota.....Mahel के बाहर के जितने भी ेल्फ्स है उन् सब पे भी काबू पा leta....aur उसके बाद पूरा का पूरा एल्फ नेशन उसका गुलाम hota.....uska बहुत पुराण प्लान सफल हो jaata.......bas इस चीज़ज़ को रोकने के लिए उसने अपने पिता को सेफ करने के बारे में सोचा.....

बाकियों का kya.....unke बारे में नहीं सोचा उसने ज्यादा kuch.....Elf किंग से भी तो बस यही पूछा उसने बाकी सब के बारे में की इस वक़्त तो वो सब आराम hi कर रहे होंगे......

आराम का ये मतलब नहीं होता की वो एकदम से बेहोश होक लेते हुए hai....unko ये भी समझ ना आएगा की महल पे हमला हुआ hai.....aur वो रॉयल फॅमिली से the......unke आस पास नौकर हर वक़्त होते है.....

Khair.....yaha पे दब ने अपना काम शुरू किया tha....matlab की उस माननी को उस मुकुट से जोड़ा tha....tabhi वो एनर्जी की तरंगें बहने लगी थी वो भी बहुत तेज़्ज़ी se.....jiska पता उन् सब को भी लग गया था,.....

बाकी जो नार्मल ेल्फ्स थे उनको भी पता चला पर वो इसके बारे में कुछ सोचते या करते उससे पहले hi वो सब अपने अपने लिए बने हुए भ्रम में फंस चुक्के the.....ajeeb अजीब से भ्रम.....

कोई अपनी उस दौलत को बचने में लगा हुआ था जो उसका कभी था hi nahi.....to कोई किसी लड़की को बचने mein......koi किसी ऐसे जानवर से बहादुरी से लड़ रहा था जो आज तक कही पे भी हुआ hi नहीं तो कोई बहुत hi ज्यादा गंदे कपडे साफ़ करता जा रहा था......

उनकी सेंसेस लॉक हो गयी thi......unka दिम्माग उन्हें भ्रम में जो चल रहा है वही दिखा रहा tha.....aur body.....wo उनके कण्ट्रोल में नहीं था ab......wo अब कोई और कण्ट्रोल कर रहा tha.....aur वो भी बहुत अच्छे से.....

प्रतीक जो की महल के पीछे tha.....Polar बेयर किंग के saath......wo दुर्र महल के बाउंड्री की तरफ देख रहा था ध्यान se......apne हाथों में अपना तलवार तैयार किये हुए.....

उसको साफ़ साफ़ दिखाई दे रहा tha....waha पे बहुत से परछाइयां hai.....bahut si....aur वो सारे बस महल के बाऊंडरी के बहार जाने की कोशिश करते जा रहे the.....par कामियाब नहीं हो पा रहे the......usne पोलर बेयर किंग से उनकी मदद करने को kaha.....par उसने मदद नहीं kari.....wo बस बट बना वही पे खड़ा रहा......

प्रतीक को बहुत सी आवाजें सुनाई देने लग gayi.....Prateek कभी किसी को तो कभी किसी और ki.....aur कभी कभी तो नीलम की......

प्रतीक जो अभी महल के पीछे tha....wo वह से आगे जाने लग gaya.....aur उस बाउंड्री पे पहुंच gaya.....aur अपने अंदर से डार्क पावर को बहार निकलने लग गया.......

अभी वो ये कर hi रहा था की उसको दर्द होने लग gaya......aur थोड़ी देर baad.....usko आवाजें सुनाई देने लग गयी वापस se......par इस बार नीलम की नहीं.......

इस बार आवाज पोलर बेयर किंग की thi.......wo उसके ऊपर अपने पंजे रखे खड़ा tha.....aur जोर जोर से दहाड़ मार रहा था......

प्रतीक की आखें जो की बंद सी thi.....ab वो वापस से खुलने लग गयी thi......usne यहाँ वह dekha.....aas पास बहुत तबाही मचाई थी usne......bahut से पेड़ जल रहे थे इस वक़्त......

हां ये बात रहत की थी की किसी और को कोई नुकशान नहीं पंहुचा था.....

पोलर बेयर किंग- तुम ठीक ho......ab होश में तो हो......

प्रतीक - मेरे ऊपर से हटो तो pahle.....saans नहीं ली जा रही तुम्हारे इस भरी वजन के वजह से.....

पोलर बेयर किंग - पहले ये बताओ तुम ठीक हो या nahi......aur मैं कौन हु.....

प्रतीक - मैं theek....nahi hu.....bilkul नहीं hu.....bahut अजीब लग रहा hai.....aur रही बात तुम्हारी तो tum....tum पोलर बेयर किंग हो.....

जब पोलर बैरक किंग ने अपना नाम उसके मुँह से सुन्न लिया तब जाके उसने उसके ऊपर से अपने पेअर hataye....aur उसके बाद उसको खड़े होने में मदद करने लग गया.....

प्रतीक - ये सब क्या hai......kya हुआ था यहाँ पे.....

पोलर बेयर किंग - उसकी शक्तियां तुम्हारी सोच से काफी ज्यादा hai......usne तुमपे भी लगभग से काबू पा लिया tha.....par tum....tum अंदर hi लड़ते रहे usse.....aur अब ठीक हो.....

प्रतीक - Kya.....main उसके काबू में tha....nahi......agar ऐसा है तो बाकियों का kya.....wo सब bhi......Jwala ओल्ड आउल.....

प्रतीक ने ऐसा बोलै और उसके तुरंत बाद वह पे ओल्ड आउल का एक बाँदा चला गया.......

वो - ओल्ड आउल अभी आपकी कही हुई बात का पालन कर रहे hai....unki जगह पे मैं आया हु......

प्रतीक - क्या बाकी सब ठीक hai.....kahi वो भी तो किसी भ्रम में.....

वो - वो सब ठीक hai.....kuch कुछ असर उनपे हुआ tha.....par वह पे ज्वाला जी और ओल्ड आउल ने उनको उससे बच्चा लिया tha....par....

प्रतीक - Par......kya पर....

वो - महल के अंदर कुछ लोग hai.....aur वो वह पे फंसे हुए है.....

प्रतीक - अंदर लोग फंसे हुए hai....main समझा नहीं.....

वो - जब यहाँ पे ये सब हुआ तो सारे लोग आपकी hi तरह खुद से काबू खो चुक्के the....bas कुछ लोगो को छोड़ ke.....jab मैंने dekha...to मुझे वो दब जी के तरह hi dikhe.....jaise उनके कान कुछ ज्यादा बड़े है वैसे hi उन् सब के भी hai.....wo सब अब नादेर बाकी के ेल्फ्स के साथ फंसे हुए hai.....aur उनसे बचने के लिए लड़ रहे है....

प्रतीक - वो सब रॉयल फॅमिली वाले honge.....sayad दब के घरवाले......

वो - इस बात का पक्का पता नहीं hai......par वो मुसीबत में है.....

प्रतीक ने जब ये सुन्ना तो वो वही जाने के लिए महल के दरवाजे के पास जा pahucha....par वह पे पहुंचने पे जब उसने दरवाजे को पार करने की कोशिश करि तो वो कर नहीं paaya.....ulta उसको हल्का सा झटका लगा......

पोलर बेयर किंग - ये कोई सुरक्षा घेरा दिखाई पड़ता hai.....iske अंदर नहीं जा पाएंगे hum....aur ना अंदर से कोई बहार आ पायेगा.....

प्रतीक ने जब ये सुन्ना तो उसने अपने हाथों को आगे किया और डार्क पावर को बहार निकलने लग gaya......ye अच्छी बात थी की डार्क पावर पे उसका कण्ट्रोल सही था इस waqt.....aur इसके बारे में उस भ्रम फैलाने वाले को पता नहीं चला tha......agar उसको पता hota....to अभी यहाँ के हालत और ख़राब होने थे.....

प्रतीक दरवाजे पे बने उस घेरे को तोड़ने की कोशिश करने hi वाला था की उसने कुछ धमाकों की आवाज सुन्नी उसी जगह पे जहा से अभी वो यहाँ आया tha....Old आउल के उस बन्दे ने भी ये sunna.....aur बिन्ना किसी चीज़ का वेट करते हुए वो उड़द के वह पे देखने को चला गया......

वो कुछ hi देर में वह पे वापस आया.....

वो - वह पे धमाके होने लग रहे hai.....kuch है वह पे पर वो दिखाई नहीं दे रहा.....

प्रतीक - पोलर बेयर king.....uss जगह पे जाके dekhon....kya है waha.....aur उस चीज़ज़ को sambhalo......Main इस घेरे को देखता हु......

पलर बेयर किंग ने एक बार वापस से प्रतीक से इसके बारे में puccha.....kyunki अभी उसने देखा था प्रतीक क्या कर रहा था वह pe.....wo खुद के ऊपर से काबू खो चुक्का tha.....agar वापस से कुछ वैसा हुआ और इस बार वो नहीं रहा उसके पास तो उसको कौन रोकेगा.....

प्रतीक - मैं इस बात का ध्यान rakhunga.....ab मुझे भी एक अंदाज़ा मिल चुक्का है uska.....wo अब ये नहीं कर paayega.....tum jao....aur वह पे जो भी है उसको सम्भालो.....

साथ hi प्रतीक ने ओल्ड आउल के उस बन्दे से भी kaha.....ki वो जिस तरह से अंदर से बहार आया tha....waise hi वापस अंदर jaaye.....aur प्रतीक के वह आने तक किसी भी तरह रॉयल फॅमिली के लोगो को सेफ रखे....

उसके जाने के बाद प्रतीक अपने काम पे लग गया.......

डार्क पावर का उसे वो करने लग gaya.......par ये जो भी घेरा था उसको तोड़ने के लिए ज्यादा अमाउंट में डार्क पावर की जरुरत thi......itni जितनी प्रतीक की बॉडी अच्छे से हैंडल नहीं कर सकती थी......

प्रतीक ने इस बारे में ज्यादा सोचा nahi.....yaa ये kahe....iss बार उसको इसके बारे में टोकने के लिए ध्रुव नहीं था......

अगर ध्रुव होता तो वो किसी भी हालत में उसको ये तो नहीं करने deta.....wo उसको कोई और रास्ता batata.....par ये तब तक नहीं जब तक सारे रस्ते बंद ना होते.....

मतलब अभी रूपल दीदी और निकिता महल के चाट पे hi the......wo आराम से निच्चे जाके मदद कर सकते the,....par प्रतीक ने खुद अंदर जाने के बारे में सोचा.....

तो प्रतीक ने अपने इस बॉडी के क्षमता से ज्यादा डार्क पावर को बहार kiya.....aur उसके बाद उसी से उसने उस घेरे को तोडना शुरू कर दिया......

यहाँ पे जब ये hua......to मधु जो की अभी एअर्थ पे thi.....uska गोल्डन पावर खुद से hi एक्टिव हो gaya.......Usko लगा की प्रतीक मुसीबत में hai....to वो चल दी प्रतीक को बचने के लिए......

और पंकज को लगा सायद मधु गुस्से में वह से निकली है और वो भी उसके पीछे वह पे आ गया.......

उस भ्रम फैलाने वाले ने कभी भी नहीं सोचा hoga.....ki उसका पाला किस्से पड़ने वाला hai......ye बात तय थी की उसकी मौत इन् दोनों के हाथों से नहीं hogi.....par मौत तो बहुत खुशनुमा होती hai......asal dard.....asal दुःख तो ये साली ज़िंदगी देती hai.....ye बात इसको आज समझ आने वाला था......

दब जो अभी भी उसी रूम में अपने पिता के साथ था.......

दब मुकुट को लेके बैठा हुआ था ध्यान mein.....uske पिता यानी एल्फ किंग उसको देख रहे the.....aur कभी दरवाजे ko......darwaje पे जोर जोर से दस्तक दी जा रही thi.....wo तो दब ने मन्ना किया था इस वजह से वो दरवाजा नहीं खोल रहे the.....waise सिर्फ ये वजह भी नहीं thi......wajah और भी थी.......

अगर दब को वह पे कोई और देख लेता तो बहुत बुरा हो सकता tha......aur दरवाजे पे जो दस्तक हो रही थी वो एक दो बन्दों की नहीं thi.....aisa लग रहा था जैसे 10-12 लोग आये हुए है दरवाजे के bahar....aur दरवाजा पीट रहे है......

एल्फ किंग के पास वेट करने के आलावा कोई और रास्ता था भी नहीं......

Accha.....aur मधु जो अभी अभी यहाँ पे मतलब महल के बहार और उसके पीछे पीछे वो पंकज भी आया था......

पंकज जैसे hi आया वह पे वो तो तुरंत hi भ्रम में फस gaya.....aur पता नहीं कैसे भ्रम में फंसा था wo......wo भागता हुआ मधु के पास जा पंहुचा और उसपे हमला करने लगा.......

हमला तो करवाया hi गया tha.......uss भ्रम फैलाने वाले ने मधु पे भी तरय किया hoga....par उसके बाद उसको जो महसूस हुआ hoga.....uss वजह से उसने हमला करवाया.......

गोल्डन पावर डार्क पावर ये सब आम पावर्स नहीं hai......Prateek फस गया था क्यूंकि उसने डार्क पावर का उसे नहीं किया हुआ tha......par फिर भी वो पूरी तरह से नहीं फसा tha.....wahi Madhu.....isko कण्ट्रोल करने की कोशिश अगर वो कर बैठता तो पता नहीं क्या होता uska.....aur क्या होता उस जगह का......

पंकज ने हमला किया uspe......Madhu को तो कुछ नहीं hua.....par मधु पे हमला करने के चक्कर में पंकज कुछ दुर्री पे गिरा हुआ दिखा था......

यहाँ पे जो हुआ वो बहुत hi अलग tha......sayad गोल्डन पावर के काबू में होने के बाद bhi......Madhu लोगो को पहचान पा रही thi......wo सोच पा रही thi......tabhi तो.....

उसने पंकज को उस जगह से उठाया और एक गोले में बंद कर diya....aur हवा में उड़ा diya....aur अपने साथ लेके जाने लग गयी......

यहाँ ये हुआ था तभी प्रतीक ने अपनी बॉडी को नुकशान पहुंचने के साथ साथ उस घेरे को भी डार्क पावर से तोड़ दिया tha......aur वो जैसे hi टूटा अंदर से बहुत से लोग बहार आने लग गए हथियार लिए hue.....aur वो हमला करने लग gaye......Prateek उन् सब को काम से काम नुकशान पंहुचा रहा था और महल के अंदर जाता जा रहा था......

वही ये सब ज्वाला और ओल्ड आउल को तुरंत पता चल गया था की प्रतीक मुशीबत में hai.....to दोनों ने जल्दी से पोर्टल्स खोले......

सायद ये भी एक रास्ता हो सकता tha......jaruri नहीं था ये karna....khud को नुकशान पंहुचा के उस घेरे को तोडना......

वह ज्वाला और ओल्ड आउल ने पोर्टल्स खोले और दोनों बुआ और निकिता एयर रूपल दीदी को प्रतीक के पास भेज diya.....aur खुद उन् जगहों पे रुक्के रहे.....

उस गोले में जाने के बाद पंकज धीरे धीरे ठीक हो रहा tha.....ek तो वो गोल्डन पावर का बना हुआ था इस वजह से और दूसरा अब वो भ्रम फैलाने वाला उसका कुछ नहीं कर सकता था.....

अब जब सारे लोग hi यहाँ पे the.....to वो सब चल दिए aage......par अभी तक सभी को ये पता नहीं था की मधु और पंकज भी वह पे आये हुए है.....

हलाकि प्रतीक को इस बात का पता चल जाना चाहिए tha.....par वो इस वक़्त ठीक नहीं tha.....iss वजह से उसको पता नाह चल.......

सबको इस बारे में तब पता चला जब उनके पीछे से एक सुनेहरा गोला चमकता हुआ aaya.....aur उसकी रौशनी चारो तरफ फैलने लग gayi......kuch देर वैसे ह रहने के baad......wo सीधा प्रतीक के सरीर में चला gaya......jisse उसका सरीर वापस से ठीक होने लग गया.......

निकिता - Ye.....ye तो मधु है.......

निकिता पीछे मुद गयी थी देखने के लिए की वो गोल्ला कहा से आया hai.....aur उसने ये देखा......

P.Bua - ये to....ye ऐसी है.....

प्रतीक कुश कह नहीं पा रहा tha.....Golden पावर उसके सरीर को अंदर से ठीक कर रहा tha.....aur उसके साथ hi कुछ मजबूत भी बना रहा था इस वजह से वो बोल नहीं पा रहा tha.....par देख पा रहा था......

और देख के वो घबरा रहा tha......ek तो मधु वापस से स्ट्रेंज वर्ल्ड में आयी हुई hai......matlab मूर्ति वाले बन्दे को पता चल jaayega.....aur dusra.....wo गोल्डन पावर को यहाँ वह बिखेर रही hai.....isse बहुत से लोगो को गोल्डन पावर के बारे में पता चल jaayega.....par वो कुछ कर नहीं सकता tha.....abhi तो बिलकुल नहीं.....

गोल्डन पावर के कारण एक चीज़ज़ और hui......jin जिन के ऊपर वो रौशनी पड़ी thi......wo सारे अपने अपने सेंसेस में वापस आ गए the.....aur बेहोश हो गए the.....aur ये baat.....ye बात उस भ्रम फैलाने वाले को बिलकुल भी पसंद नहीं आयी.....

इसके बारे में एक बात समझना जरुरी hai......iska कोई रूप नहीं hai.....aakar नहीं बच्चा है ab......jo बॉडी थी इसकी वो तो कब की ख़राब हो gayi......ab बस ये किसी भूत की तरह hi hai.....yaha से waha...hota रहता है.....

जब इसने महसूस किया की इसके भ्रम से बहुत से लोग एक hi बार में बहार आ रहे hai.....to ये बौखला gaya.....wajah भी thi......unn भ्रमहोन से hi तो इसको शक्तियां मिलती thi......ab अगर ऐसे hi भ्रम ख़तम होते रहे तो शक्तियां कहा से aayengi.....to ये गया वह पे देखने को.....

प्रतीक ठीक हो चूका tha.....aur ठीक होने के साथ hi...wo मधु के पास जा hi रहा था की उसने dekha......ek परछाई उसके पास आ रही hai......usne डार्क पावर का एक गोला बनाया ठीक वैसा hi जैसा पंकज के लिए मधु ने बनाया tha.....aur उस साये को उसी में कैद कर दिया.......

साया निकलने की कोशिश करता raha.....par वो निकल नहीं पा रहा था......

यहाँ पे hua.....wahi दब जो मुकुट लेके बैठा हुआ tha.....uski आँखें खुल gayi.....usne जो सोचा था अब वैसा कुछ नहीं हो रहा tha.....wo साया गायब हो चुक्का tha....aur ये बुरा tha.....ye नहीं होना चाहिए tha......uske हिसाब से......

उसको लगा सायद उस साये ने कोई और रास्ता निकल लिया महल के बौंडरीएस को पार करने ka......tab जाके उसको ध्यान aaya.....ki मुकुट पेहेन्ने वाले का थोड़ा खून hi उसको महल के बाउंड्री के बहार लेके जा सकता tha....par अगर रॉयल फॅमिली के आम लोगो का बहुत सा खून ho.....tab भी वो वह से बहार जा सकता था......

दब अपनी जगह से उठा और जाके दरवाजे को खोल diya.....bahar बहुत से सैनिक हाथों में तलवार लिए खड़े the......DB ने अपने नेचर एलिमेंट की मदद से सभी को तहिखने lagaya.....aur वह से बहार निकल gaya.....par मुकुट को और अपने पिता को अंदर hi बंद कर दिया उसने.....

अब वो अपने बाकी के परिवार वालो के पास जा रहा tha.....raste में लोग आते जा रहे the.....aur वो उनको खिड़कियों में या दरवाजों में पेड़ों के बैलों से बांधता जा रहा था.....

अभी वो अपने परिवार वालो का पता लगा hi रहा था की उसको निकिता दिखाई di.....Rupal दीदी के saath......jo कही जा रहे थे.....

दब को समझ नहीं aaya.....unn दोनों की जगह फिक्स कर चुक्का था wo...aur ये दोनों अपनी जगह छोड़ के यहाँ पे घूम रही thi......DB उनके पास जा hi रहा tha....ki वो दोनों एक कमरे में चली गयी........

दब ने जब उस कमरे में झक्क तो उसको उसका पूरा का पूरा परिवार वही पे दिखाई diya......sab के सब सुरक्षित the......wo जाना चाहता था उनके saamne.....par बहुत से सवाल होते उनके मैं mein.....jinka जवाब वो अभी नहीं देना चाहता tha....iss वहज से बस उनको सुरक्षित देख के hi वो वह से निकल gaya......par अब उसे ये समझ नहीं आ रहा tha......agar ये सब भी ठीक है तो वो साया गया कहा.....

ये बात वो अभी उन् दोनों से तो पूछ नहीं सकता था उसको अंदर जाना पद जाता इसके वजह से......

दब अभी सोच hi रहा था की उसके कंडे पे ओल्ड आउल का वो सिपाही बैठ गया......

वो - आपको अंदर नहीं जाना......

दब - तुम ओल्ड आउल के टीम से लगते हो.....

वो - haa.....par आप अंदर नहीं जाएंगे......

दब - अभी nahi.....thodi देर baad.....abhi किसी और काम में फसा हुआ hu.....usko देखने के बाद jaaunga......tumhe पता है बाकी सब कहा hai.....mujhe उनसे बात करनी है......

वो - हां पता hai.....aap आओ मेरे पीछे......

वो दब को अपने पीछे लेके चला gaya.....aur जा पहचा वही पे जहा पे मधु को अभी अभी शांत किया था प्रतीक ne.....aur पंकज को निच्चे उतरा था......

इस बार क्यूंकि मधु प्रतीक को hi बचने आयी थी प्रतीक उसके पास जा सकता था और साथ hi उसको छू भी सकता tha....to किसी तरह मधु को उसने गोल्डन पावर के काबू से बहार kiya.....aur उसके baad.....uske बाद वो बेहोश hi हो गयी थी......

प्रतीक ने तुरंत hi ओल्ड आउल को वह पे bulaya.....aur दोनों बुआ के साथ उन् दोनों को पंकज ko.....jisko बेहोश कर दिया था प्रतीक ने और मधु ko.....dono को hi घर पे भेजने को बोल दिया......

बुआ उसको पोर्टल से लेके चली gayi....par ओल्ड आउल ने पोर्टल का दूसरा सिर्रा प्रतीक के घर पे खोला tha.....jab वो दोनों वह पे पहुंच गए तब जाके पता चली ये बात उनको.....

दोनों बुआ ने उन् दोनों को रूम्स में सुल्ला diya.....aur वही पे रुक gaye......Chachi भी इस वक़्त घर पे नहीं thi.....sayad बहार गयी थी kahi......to कोई परेशानी नहीं हुई.....

नेक्स्ट अपडेट में देखते है आगे क्या होता hai......DB कैसे बताता है सभी को की वो ये एल्फ नेशन को किसी और को देने वाला hai......saath में लूसिफ़ेर के बारे में देखेंगे और साथ hi कुछ और चीजजें
 
अपडेट - 121

प्रतीक के दिम्माग में बहुत कुछ चल रहा tha......achanak से क्या क्या हो gaya......usne कभी नहीं सोचा था इन् सब में किसी तरह से मधु स्ट्रेंज वर्ल्ड में आ जायेगी वापस.....

मधु का स्ट्रेंज वर्ल्ड आना खतरनाक tha.....bahut खतरनाक ना सिर्फ मधु के लिए बल्कि बहुत से प्लैनेट्स के लिए bhi.....Ab जब की गोल्डन पावर उसके अंदर कभी भी एक्टिव हो जाता tha.....ab अगर मधु उस गोल्डन पावर के कण्ट्रोल में रहते हुए वापस से उस निक्स के मंदिर में चली जाती hai....to ये बहुत बड़ी मुशीबत हो जायेगी......

और इस बार तो ऐसा होने का बहुत ज्यादा चांस भी tha......yaha पे वो भ्रम फैलाने वाला tha.....agar वो गलती से bhi.....galti से भी मधु के दिम्माग तक पहुंच के उससे कोई काम करना चाहता तो उस वक़्त गोल्डन पावर उसको ख़तम करके खुद वापस से उसी जगह पे चली जाती जहा पे वो सबसे पहले एक्टिवटे हुई थी......

प्रतीक को अच्छे से पता tha......wo जगह कोई और नहीं वही मंदिर hai.....aur वो इस बात को भी अच्छे से जानता था मंदिर में कोई है जो मधु को पाने के लिए कुछ भी कर सकता है.....

ये सब सोच के प्रतीक को गुस्सा भी आ रहा था और वो चिंतित भी tha......aur इन् सब के वजह से वो भ्रम फैलाने वाला जो की उसके डार्क पावर वाले गोले में बंद tha......wo चीखता जा रहा था......

एक तो वो पहले से hi एनर्जी के फॉर्म में tha.....aur उसके बाद प्रतीक उसके स्टेबल फॉर्म को उन्स्तब्ले किये जा रहा tha.....kabhi डार्क पावर से उसको लबालब कर देता तो कभी उसके अंदर की एनर्जी भी चूस leta.......wo चीख रहा था बस......

दब इस बात को देख रहा tha.....aur उसको बस एक बात का दर tha.....kahi ये अपनी ताक़त पूरी तरह से खो ना baithe.....agar ऐसा हुआ तो वो किसी भी काम का नहीं bachega....aur bas...bas बक्कर हो जाएगा दब के लिए भी.....

अगर ऐसा हुआ तो दब उसका उसे नहीं कर paayega.....usko उस मुकुट में नहीं दाल पायेगा.....

दब ने इतना खतरा uthaya.....iske पीछे भी वजह thi.....wo चाहता था की वो किसी तरह उस भ्रम फैलाने वाले पे काबू कर le.....aur उसके बाद उसको मुकुट में उसे कर सक्के...

मुकुट में अगर उसकी पावर्स होगी तो इससे बहुत ज्यादा फायदा होगा ना सिर्फ उस मुकुट पेहेन्ने वाले को बल्कि उसके अस्स पास रहने वाले लोगो को bhi......mukut पेहेन्ने वाला उसको पेहेन के अगर ध्यान लगाए तो वो बहुत अच्छे से ध्यान लगा पायेगा और अपनी पावर्स और ज्यादा अच्छे से काबू कर पायेगा और उसको बढ़ा भी पायेगा

दब के दिम्माग में ये बात चल रही थी की उस मुकुट को पेहेन्ने वाला पुरे एल्फ नेशन को किसी भी तरह के खतरे से बचने में सक्षम rahe....aur वो ऐसा ho.....iss बात को सुनिश्चित करने के लिए बहुत म्हणत कर रहा था.....

हां इन् सब में उसने भी बहुत सी गलतियां कर दी......

दब प्रतीक को वैसा करता हुआ देख रहा tha......wo तुरंत उसके पास गया.....

दब - प्रतीक ये क्या कर रहे ho......aisa मत karo......agar इसको कुछ हुआ तो प्लान ख़राब हो जाएगा.......

दब यहाँ प्लान के बारे में सोच रहा tha......uss प्लान के बारे में जिसका हिस्सा तो बहुत से लोग the.....par उन् बहुत से लोगो में से किसी को bhi....kisi को भी उस प्लान के बारे में पता hi नहीं था......

प्रतीक यहाँ पे गुस्से में tha.....aur साथ hi बहुत से सवाल भी दिम्माग में घूम रहे the.....aise में उसके सामने दब आया और उसने उस प्लान की बात करि जिसका उसको कुछ भी पता नहीं था.....

थोड़ी देर पहले तक तो वो अंदाज़ा लगा रहा tha.....aur ये सोच रहा था की दब सायद इसको अपने तरह से हैंडल करना चाहता hai......to वो उसको करने दे रहा tha.....par ab.....ab चीजजें एकदम से बदल सी गयी thi.....thodi बहुत नहीं पूरी तरह से hi बदल गयी थी.....

प्रतीक कितना भी अंदाज़ा लगा le......kuch भी सोचे किसी हद्द तक सोचे उसके दिम्माग में ये कभी नहीं आने वाला था की मधु वापस से स्ट्रेंज वर्ल्ड आ jaayegi.....wo गुस्से को दबाना छह रहा tha....par.....

दब - देखो ये कमज़ोर हो चुक्का hai....aisa ना हो इसको कुछ हो jaaye.....warna हमारा पूरा plan.....puri म्हणत ख़राब हो जायेगी.....

प्रतीक - कौन सा plan....kaisa plan.....tumne बताया क्या किसी को अपने प्लान के बारे mein......aur क्या तुम्हे पता है की तुम्हारा प्लान क्या hai.....tum जानते भी हो की क्या क्या हो रहा है.....

दब को समझ नहीं आया ये इतना गुस्सा क्यों हो gaya.......waise देखा उसने भी tha.....Madhu और पंकज को वह से जाते hue......par अभी दिम्माग में वो बात थी hi नहीं.....

दब - ऐसा क्या हो gaya......sab कुछ ठीक सा hi तो hai.....bas थोड़ा बहुत बदलाव हो गया hai......abhi ये मेरे पास होना चाहिए tha....par तुम्हारे पास hai......lekin इसमें कोई बड़ी बात नहीं hai......tum चलो मेरे saath.....meri थोड़ी सी मदद कर do.....aur उसके बाद हम बात करेंगे.....

अक्सर ऐसा होता hai.....jab आप किसी से गुस्सा होते ho.....to गुस्सा होने की बहुत सी वजहें याद आने लगती है या फिर दिखने लग जाती है....

प्रतीक - waah......tumhe सब ठीक सा लग रहा hai.....tumhe पता भी है यहाँ पे मधु आ गयी thi....agar उसको कुछ हो जाता तो.....

दब - Madhu.....par उसको तुम्हारे रहते क्या hi हो जाएगा.....

प्रतीक - बा सिर्फ मधु की नहीं है DB....yaha पे बात कण्ट्रोल पे hai......tum नहीं जानते या जान बुझ के अनजान बन्न रहे हो sayad.....plan तुम्हारे हाथ से कब से hi निकल चुक्का है....

दब - नहीं ऐसा नहीं hai.....Madhu के यहाँ आने के अलावा बाकी सब लगभग से कण्ट्रोल में hi है.....

प्रतीक - अच्छा सच mein....to ये बताओ क्या तुम्हारे प्लान में था ये की महल के सैनिक और बाकी लोग तुम्हारे रॉयल फॅमिली पे हमला कर de.....yaa ये प्लान में था की लीमो यहाँ पे आके फस जाए......

दब के पास जवाब तो tha......par चीजजें थोड़ी और आगे बढ़ गयी thi.....usne भी मधु के यहाँ आ जाने के बारे में कभी नहीं सोचा tha.....ye सब उसने इस वजह से किया ताकि इन् सब की जिम्मेदारी उसके सर पे aaye....aur उसके बाद उसको आसानी हो.....

आसानी हो अपने पद को छोड़ के जाने mein......wo इस बात को अच्छे से जानता tha.....agar उसने वो बीमारी यहाँ से भागे तो वो यहाँ का हीरो बन jaayega.....aur वो ये नहीं करना चाहता tha......usne socha.....bahut socha....par अंतत में बस एक यही तरीका मिला उसको जिससे वो ना सिर्फ उस बीमारी को यहाँ से भगा सक्के बल्कि लोगो के बिच खुद के लिए नफरत भी पैदा कर sakke.....aakhir कौन होगा ऐसा जो अपने hi परिवार को या अपने दोस्तों की जान जोखिम में डाले.....

दब को चुप देख के प्रतीक ने अपनी बात आगे बधाई......

प्रतीक - अब चुप रहने से क्या hoga......yaha जो कुछ भी hua......uski जिम्मेदारी तुम्हे खुद लेनी होगी.....

दब ने जब ये सुन्ना तो बस प्रतीक की तरफ देख के मुस्कुरा diya.....Prateek को उसका ऐसा करना बिलकुल पसंद नहीं aaya.....wo पहले से गुस्से में tha....wo उसको वही पे पटक deta......par उसने खुद को थोड़ा कण्ट्रोल kiya....kyunki अभी वक़्त वह पे सिर्फ उसकी नहीं थी.....

दब ने वापस से बेशर्मो की तरह वही पूछा......

दब - क्या तुम मेरी मदद नहीं करोगे इसको इसके सही जगह पे पहुंचने में......

प्रतीक ने अपने दांत पिस्टे हुए उससे कहा.....

प्रतीक - बताओ क्या करना hai......ab क्या है तुम्हारे प्लान में......

दब - मेरे पीछे आओ.....

इतना बोल वो आगे जाने लग गया वापस से उसी कमरे की तरफ जहा पे वो मुकुट और एल्फ किंग के साथ tha......waise तो उसने एल्फ किंग को अंदर hi रहने को कहा tha....aur वो अंदर hi the....par जब सब एकदम से शांत हो gaya......matlab उस भरम फैलाने वाले के प्रतीक के कब्ज़े में जाने के baad.....unko लगने लगा कही दब को कुछ हो तो नहीं gaya.....aur वो वही चेक करने को बहार निकले मुकुट को वही पे छोड़ के....

बहार आये तो जो नज़ारा उनके सामने tha.....wo देख ke....wo समझ hi नहीं पाए ये सब क्या हो गया उनके साथ.....

वो मंत्री जो कुछ देर पहले उनके साथ tha.....wo अभी निच्चे बेहोश हुए पड़े हुए the....bas वही नहीं उसके साथ वो सिपाही जो दब को वह लेके आया tha....aur साथ hi साथ बहुत से और सिपाही और सेवक सेविकाएं......

एल्फ किंग को एकदम से समझ नहीं आ रहा था ये सब है क्या.....

वो बस दरवाजे पे hi खड़े the.....aur अपने आस पास सभी को बेहोश पड़ा देख रहे थे.....

इतने में उनको दूर से दब दिखाई देता है और उसके साथ एक जाना पहचाना चहेरा......

प्रतीक से पहले भी मुलाकात हुई thi.....par अच्छे से nahi......haa लेकिन चेहरा भूलने वाला नहीं है प्रतीक का तो वो याद था....

दब को उसके साथ देख के एक बार तो एल्फ किंग को लगा सायद ये सब दब और उसका किया धरा hai.....kahi उसने hi ये सब तो नहीं kiya.....par फिर उन्होंने तुरंत इस बात को अपने दिम्माग से निकल भी दिया.....

दब और प्रतीक दोनों उनके पास पहुंचे.....

एल्फ किंग - DB......dekho....dekho ये क्या हो gaya......hamare....hamare सारे log....ye सब इस तरह se.....main.....main...

प्रतीक पहले से गुस्से में tha.....usne ऐसे hi बोल दिया....

प्रतीक - आपका इनको देख के ये हाल hai.....jab आप अपने परिवार वालो को देखोगे तब क्या होगा.....

एल्फ किंग - Kya.....kya मतलब है tumhara....kaun हो tum.....DB ये कौन hai....aur हिम्मत कैसे हुई iski.....hamare परिवार के बारे में बोलने की....

प्रतीक - मैं वो हु जिसने उनकी मदद करि hai......jaaiye और जाके देखिये उनको.....

एल्फ किंग - क्या बात कर रहा है ये DB....yaha ये सब क्या हो रहा है.....

दब ने उनको कमरे के बारे में bataya....aur ये बताया की वह पे 2 लोग उनका ध्यान रख रही hai......bas....bas इतना hi बताया और कुछ नहीं....

एल्फ किंग - to....to तुम यहाँ क्या कर रहे ho.....jab सभी की हालत ऐसी है तो tum...tum यहाँ kyun.....chalo मेरे saath....humme उनके साथ होना chahiye.....vaidya को बुलाना चाहिए.....

दब - आप jaaiye....mujhe पहले ये काम करना hai....iss काम के बाद hi मैं कोई और काम कर सकूंगा.....

एल्फ किंग - क्या मतलब है tumhara......kya परिवार और हमारे लोगो से भी ज्यादा जरुरी है ये kaam......wo बीमारी तो ख़तम हो गयी ना......

दब ने कुछ नहीं कहा वो बस चुप रहा और आगे बढ़ gaya.....Elf किंग को ऐसा लगा जैसे किसी ने उनके सीने पे खंजर से वार कर दिया ho....wo भी दिल वाले साइड में.....

दब उनको क्रॉस करके आगे चला गया tha.....kuch देर वो वही पे रुक्के और उसके baad....uske बाद वो बिन्ना पीछे मुद्दे वह से निकल gaye.....uss कमरे में से.....

प्रतीक - ये भी था क्या प्लान में तुम्हारे......

दब ने वापस से कुछ नहीं kaha.....bas जाके मुकुट के पास बैठ gaya......aur बैठने के बाद लग गया अपने काम में......

थोड़ी देर तक उसकी आखें बंद hi rahi....uske बाद प्रतीक ने dekha.....uss मुकुट के बिछे में जो जगह है वह पे हर्री रौशनी होने लगी thi....uske अंदर कुछ शपेस बनने लग गए the....aur देखते hi देखते उसके अंदर से एक छोटा सा पौधा निकला......

ये सब दब कर रहा tha.....apne नेचर एलिमेंट की मदद se......Prateek सब जानता था.....

दब ने उस पौधे को और बड़ा kiya.....aur बड़ा kiya.....aur जब उसको लगा की अब वो इस चीज़ज़ के लिए तैयार है तो उसने प्रतीक से बोलै.....

दब - इस पौधे में अब एक फूल निकलने वाला hai.....tumhe ध्यान से उस फूल के ठीक ऊपर इसको छोड़ना hai.....dhyaan रहे अपनी डार्क पावर को भूल के bhi.....galti से भी उस फूल में टच नहीं होने देना......

प्रतीक ने ज्यादा कुछ नहीं kaha....bas हां में अपना सर hilaya.....wo भ्रम फैलाने वाला पहले से hi थोड़ा कमज़ोर हो चुक्का tha....usme इतनी ताकत तो नहीं थी की वो अभी कुछ कर sakke....to चिंता की कोई बात hi नहीं थी....

दब वापस से अपनी आखें बंद करके ध्यान में चला gaya.....aur देखते hi देखते एक सुन्दर सा फूल उस पौदे में khilla.....par अच्चानक से वह पे बहुत बदबू भी आने लग gayi.....ye उस फूल के वजह से hi tha.....DB ने कीड़े खाने वाले पौधे को उगाया tha.....aur इस वाले से बदबू आ रही थी.....

फूल अच्छे से खिल्ला और पूरा कमरा बदबू से भर gaya.....Prateek ने उस भ्रम फैलाने वाले को अच्छे से उस फूल के बिलकुल बिच में गिरा diya....aur गिराने से पहले अपनी साड़ी डार्क पावर उसके अंदर से खिंच ली थी उसने....

जैसे hi वो उस फूल के बिच में girra.......ekdum से उसकी शक्तियां वापस आने लग गयी.....

वो दब और प्रतीक के ऊपर हमला करने के लिए utha....par...der हो चुक्की thi.....wo फंस चुक्का था.....

उस फूल का मुँह बंद होने लग gaya....aur जहा अभी कमरे में इतनी बदबू thi.....wo अब काम होने लग gayi.....aur kam....aur काम....

एक वक़्त तो ऐसा आया जब उस कमरे में एक अलग hi खिऊशबू आने लग gayi.....DB ने जब ये महसूस किया तो उसने बस अपनी आखें बंद करि और वापस से ध्यान में लग gaya.....aur उस पौधे को वो जहा से आया था वही पे भेजने में लग गया.....

ज्यादा वक़्त नहीं गया hoga......aur वो पैदा जैसे बड़ा हुआ था बिलकुल वैसे hi छोटा होने लग gaya.......aur धीरे धीरे उसी हर्रे रंग के शपेस के अंदर सम्मा गया.....

उसके सामने के बाद मुकुट अचानक से हवा में उड़ने लग gayi......usme जो नया हीरा लगा था उसका हर्रा रंग और भी गधा हो गया......

दब ने अपना हाथ आगे badhaya......aur वो मुकुट उसके पास आने लग gayi......par वो जानता था......

वो जानता था अगर एक बार उसने उस मुकुट को पेहेन liya...to वो मुकुट उसको भूलेगी nahi.....usne उस मुकुट को खुद से दुर्र hi rakha....aur अपने साथ ले जाने लगा......

प्रतीक - अब कहा जा रहे ho.....oo अच्छा ये भी प्लान का हिस्सा hoga.....iss मुकुट को कही फेंकना होगा ना.....

दब - प्रतीक तुम इस वक़्त गुस्से में ho.....jab शांत हो जाओगे तो समझ jaaoge......Main जानता hu.....Madhu का यहाँ aana....wo तुम्हे अच्छा नहीं laga....tum नहीं चाहते वो कभी भी किसी भी मुशीबत में fasse.....aur सच में ये सब मुझे भी पता नहीं tha....mujhe अंदाज़ा नहीं था इसका की कुछ ऐसा हो जाएगा.....

प्रतीक - अंदाज़ा नहीं था...... :सिघ:

दब - चलो अभी मुझे ये मुकुट एल्फ किंग को देना है.....

प्रतीक चल दिया उसके saath.....ab प्रतीक बस जल्दी से यहाँ से निकलना चाहता tha....yaha से निकिता और रूपल दीदी को लेके निकलना चाहता था wo.....aur घर जाके मधु का हाल जानना चाहता था......

मधु को लेके उसके पास बहुत से सवाल आ चुक्के थे इस बार bhi......aur जवाब के लिए उसको वह जाना hi था.....

मधु ने अपने एक हाथ से पंकज को सेफ कर रखा tha....golden पावर के एक्टिव होने के बाद भी.....

प्रतीक ये समझ चुक्का था की मधु को इस बार कुछ बातें तो याद रहने वाली है जो यहाँ पे हुआ था उनमे se.....par वो ये नहीं जानता था की वो बातें उसको किस रूप में याद रहेंगी....

बातें इस वजह से याद रहने वाली थी क्यों की गोल्डन पावर ने उसके ऊपर कण्ट्रोल पाया tha....par फिर bhi....wo अंदर hi अंदर खुद पे थोड़ा बहुत तो कण्ट्रोल कर hi पा रही thi....tabhi तो उसने पंकज को बचाये रखा था.....

दोनों उसी कमरे में पहुंच गए जाहा पे एल्फ किंग गए थे......

वह गए तो एल्फ किंग रूपल दीदी और निकिता को शुक्रिया कह रहे the......wo दोनों उन् सब की चोटों पे दवाई लगा रही thi.....aur ये एल्फ किंग ने देख लिया था......

दब और प्रतीक वह पे gaye......DB ने मुकुट को उनके पास निच्चे रख दिया......

दब - मेरा काम हो गया hai.....ab आप इसको अपने पास रख सकते है.....

एल्फ किंग ने उसकी तरफ बिन्ना देखे hi......usse कहा.....

एल्फ किंग - मैंने सोचा tha.....socha था तुम अपनी सज़्ज़ा हातम करने के बाद यहाँ aaoge....aur मैं तुम्हे ये राज्य दे dunga.....yaha की जानती की सेवा करने के liye....par.....par आज जो dekha.....uske बाद ये गलती कभी नहीं karunga.....Tumne उस बीमारी को यहाँ से भगाया hai......iss वजह से यहाँ पे ho......aaj के baad....Main तुमसे मिलना पसंद नहीं karunga.....chale जाओ यहाँ से.....

दब ने कुछ नहीं kaha.....bas प्रतीक के तरफ dekha.....Prateek जो ये सुन्न के ज्यादा रियेक्ट नहीं कर रहा था उसने जब वापस से दब को हस्ते dekha....tab उसको थोड़ा बहुत समझ में आया.....

दब - अगर ऐसी बात hai.....to अब मुझे यहाँ से चलना chahiye......par मैं वापस aaunga.....jab भी जरुरत होगी इस जगह को meri.....Main aaunga....aap बुलाओगे तो मैं aaunga.....yaha के लोगो को जरुरत होगी मेरी तो aaunga.....Prateek मैं बहार hu....tum इन् दोनों को लेके वही आ jaana....hum निकल जाएंगे यहाँ से.....

इतना बोल वो वह से निकल गया.....

एल्फ किंग को अभी कुछ समझ aaye....wo इस हाल में थे नहीं इस waqt....to उन्होंने ज्यादा रियेक्ट नहीं किया उसके liye....bas रूपल दीदी और निकिता को एक बार और सुक्रिया कहा.....

प्रतीक जो यहाँ पे हर तरफ बेहोश लोगो को देख रहा था उसने एल्फ किंग से पूछा....

प्रतीक - आप इन् सब को क्या जवाब denge.....kya इन्हे दब के यहाँ आने का पता होना चाहिए.....

एल्फ किंग - मैं इसको खुद संभालना chahunga.....agar तुम मदद करना चाहते हो तो bas.....bas यहाँ पे कुछ वैद्यों को बुलवा दो.....

प्रतीक - ठीक hai.....main इसका इंतेज़ाम करता hu......aap यही पे rukiye.....mujhe इन् दोनों की भी मदद लगेगी थोड़ी....

वो रूपल दीदी और साथ में निकिता को लेके चल diya...aur ओल्ड आउल को वह पे bulaya....aur उसको जल्दी से जल्दी लीमो को ढूंढने को बोलै.....

लीमो को ओल्ड आउल ने तुरंत hi धुंध diya....aur उसके बाद उसका इलाज किया gaya.....uska सर बहुत दर्द कर रहा था....

उसको बैठाया गया कुछ वक़्त के liye.....jab वो थोड़ा ठीक हुआ तो उसने अपने आस पास देखा सभी गिर्री पड़े थे.....

लीमो - Ye....ye सब क्या है....

प्रतीक - इसके बारे में बाद में बात करेंगे Leemo.....abhi तुम्हारी जरुरत है सभी ko.....tumhe यहाँ पे वैद्यों को लेके आना होगा.....

लीमो - पर ye.....ye sab......accha ठीक hai....main लाता हु सभी ko.....Raj कुमार और एल्फ किंग कैसे hai.....wo ठीक है और बाकी सब....

प्रतीक - वो ठीक hi hai....tum बस जल्दी से उन्हें bulao...yaha पे सब बेहोश पड़े हुए है....

लीमो ने फिर सवाल नहीं puccha....wo जल्दी से बहार gaya.....aur जैसे की वो कम्यूनिकेट करता था अपने लोगो से उसी तरह से उसने बादलों की मदद से मदद maangi.....turant hi उसके ग्रुप के लोग जवाब देने लग gaye....aur उसने महल में लोग भेजने को kahe......wo सब भी समझ गए महल में कुछ हुआ hai....to वो खुद भी आये और साथ ें वैद्यों को भी लेके आये.....

प्रतीक ने जब देखा की वो अपना काम कर रहा है तो उसने लीमो से जाने के बारे में कह diya.....Leemo भी तब बिजी था तो कुछ पूछ नहीं paaya.....bas हां में जवळ दिया और वो सब चले गए.....

यहाँ पे ये सब चल रहा था.....

वही Lucifer.....wo कुछ वक़्त से अपनी नयी नयी आयी पावर्स का hi उसे कर रहा tha.....par थोड़ी देर पहले अपने लालच पे थोड़ा कण्ट्रोल पाया था usne......aur वो जस्टिन की तलाश में निकल गया.....

रस्ते में भी उसके अंदर और पावर्स आती जा रही thi.....ye जान बुझ के वो इम्मोर्टल कर रहा था उसको टेस्ट करने के liye....par लूसिफ़ेर खुद पे कण्ट्रोल करके चलता जा रहा था....

आगे देखते है वो कैसे पहुँचता है अपने बेटे के pass....aur जब पहुँचता है तो वो उसका बीटा hi होता है या कोई aur.....saath में मधु को भी देखना है......
 
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