फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 4 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट - 22

अब तक

क्लास में से मुझे और दब को निकलने की पूरी तैयारी कर के आये थे आज पंकज के पिता ji....jo की हमारे स्कूल के प्रोफ. hai...Kadho ke...unhone दब के साथ साथ मुझे भी लपेटे में लिया और मुझसे एक सवाल kiya....aur वो बिलकुल सूरे थे की मैं नहीं बता पाउँगा और फिर मुझे और दब दोनों को hi क्लास से जाना होगा....

सवाल :- आपके किसी दोस्त के खून में कोई जहरीला द्रव्य मिल गया ho...kisi भी कारण से किसी कीड़े ने काट लिया ho....yaa सांप ne,...to आप उसको कैसे बचाएंगे...

अब आगे.

मैं - वैसे तो बहुत से जवाब है इस सवाल के liye...par आपके लिए मैं बेस्ट जवाब दूंगा....

मेरी बात सुन के एक मुस्कान फैल गयी प्रोफ. के चेहरे pe....aur मुझे देखते हुए बोले...

प्रोफ - बहुत से तरीके hai....accha ठीक है हम भी देख लेंगे कोण कोण से तरीके है आपके पास बताओ jazza....par याद रहे गलत जवाब होने pe...aap और दब जी आप याद है ना क्या hoga...ab ज्यादा वक़्त ना लेते हुए जल्दी से जवाब दे ताकि बाकी की क्लास कम्पलीट कर सकू main....waqt नहीं है हमारे पास....

प्रोफ. के इसी बात से किसी को भी पता चल जाता वो आये hi हम दोनों को निकलने के लिए hai...par भला किसी सब्जेक्ट के होड़ से कोण बेकार में पन्गा le...sab बस चुप रहे....

मैं - वैसे तो इस सवाल के जवाब के लिए 2 केसेस बनाने honge....kyunki जहरीले इन्सेक्ट और जहरीले सांप के काटने से अलग अलग प्रभाव पड़ता है और उनका इलाज भी अलग अलग है पर मैं ऐसा एक इलाज बताऊंगा जिससे दोनों hi केसेस में इलाज हो सकता है.....

इतना बोलने के बाद में जान बुझ के रुक gaya...aur इसके बाद वापस se....charo ओर भुनुर भुनुर की आवाजें फैलने lagi...main बस प्रोफ. को देखना चाहता था वैसे फटती हुई मेरी भी thi....jo मेरी हेल्प कर रहा tha...uspe याक्किन करना... :स्वेट: ..बहुत मुश्किल tha....prof. के चेहरे पे एक विजयी मुस्कान आ gayi....wahi मैंने जब दब की ओर देखा तो वो अपना सामन समेत रहा tha....wo तो रेडी हो रहा था की कब मैं पूरा जवाब दू और वो निकल जाए वह से...

मैं (गहरी सांस लेते हुए) - डेमोस वर्ल्ड से कुछ hi दुरी पे एक बहुत hi छोटा सा प्लेनेट hai....waha पे सिर्फ जंगली ड्वार्फस की एक प्रजाति पायी जाती hai....Wo प्लेनेट छोटा है और ना हो वो प्रमुख प्लैनेट्स में आता है साथ hi उधर बस जंगल hi hai...waha पे एक नीले रंग का पौधा पाया जाता है जिसके पत्ते छोटे छोटे होते hai....aur वो पानी के पास hi उगता hai..uss पौधे की ये खासियत है वो किसी भी तरह के जाहे को काट सकती है अब चाहे वो किसी कीड़े के वजह से हो या फिर सांप....

मैंने अपना जवाब पूरा kiya....DB सामान उठा के निकलने laga...sab अभी भी भुनुर भुनुर किये जा रहे the....wahi प्रोफ. ने एक किताब उठायी और पढ़ना शुरू कर diya....main बैठ गया अपने जगह pe...aur जब बाकियों ने मुझे देखा तो वापस से भुनुर भुनुर की aawajein....Db मुझे इशारे करने लगा मैंने उसको भी बैठने को कहा और हम दोनों hi बैठ गए....

प्रोफ. ने एक बार सबको शांत कराया और क्लॉस लेने lage....Sab यही सोच रहे थे मेरा जवाब सही भी है या nahi....waise मैं भी सोच रहा tha...iss ध्रुव की बात पे अभी तो बिलकुल भरोषा नहीं था मुझे...

कुछ 10 मिनट baad...Prof. मुद्दे और हम दोनों को dekha....aur घूरने लगे...

प्रोफ. - अब तक गए नहीं bahar....DB जी आपके परम मित्र ने ना जाने कहा से ये बनाबटी जवाब दे दिया hai...par ये गलत hai...aapko तो अब तक चले जाना चाहिए tha...apne इस दोस्त के साथ...

मैं - प्रोफ. अन्सिएंट रमेडीएस नाम की एक किताब hai....Merlin ने लिखा है usko....aur उसमे उन्होंने ना सिर्फ उस प्लेनेट के बारे में बताया है बल्कि वह पाए जाने वाले हर तरह के मेडिसिनल प्लांट्स का भी बताया hai....aur मर्लिन कोण थे ये बताना तो सायद उनकी बेज़्ज़ती होगी....

मर्लिन का नाम आया तो वापस से जो क्लास अभी शांत थी वो आवाज करने लगी thi.....Merlin के बारे में क्या hi कहा jaaye....wo पहले ऐसे जादूगर हुए the...jinko टाइटन वर्ल्ड में देवताओं की लाइब्रेरी का हेड बनाया गया tha...unko कुछ स्पेसिफिक पावर्स deke...Merlin की नॉलेज के बारे में बात कर hi नहीं sakte...warna सायद इतना वक़्त निकल जाए की हम भी उसी वक़्त के साथ निकल ले.... उन्होंने ऐसी बहुत सी किताबें likhi...Prof. भी एक बार उनका नाम सुन के चौंक gaye....aur main...main खुद ये नाम पहली बार सुन रहा tha....aur बोल भी रहा tha....par सबको देख के ये समझ gaya...Merlin बाँदा स्मार्ट था...

प्रोफ. ने एक बार सबको शांत karaya...aur खुद सायद याद करने लगे इस किताब के बारे mein....aur वो दब उसने वो किताब की कॉपी कही से निकली और प्रोफ. को dedi...Prof. उसको गुस्से से देख रहे the....Prof, ने फिर किताब के पैन पलटने शुरू किये....

ध्रुव ने मुझे पेज नंबर और पैराग्राफ भी बता diya....aur मैंने वो प्रोफ. को bataya....mere बताने पे उन्होंने वो पेज खोला और देखने lage....aur उनसे पहले hi एक स्टूडेंट ने बोल diya....ye तो सच बोल रहा tha...likha हुआ है किताब में ये dekho...uske पास भी किताब की कॉपी आ गयी होगी....

दब - हाशह चलो अब तो क्लास कर hi सकते है....

प्रोफ. -अरे बीटा अभी रूक्को jarra....ye जवाब कहा से hua...aapne तो बस इलाज का तरीका बताया naa....ye कहा बताया की इलाज करोगे kaise....kaha से लाओगे ये पौधा..

मैं - प्रोफ. सवाल था मैं क्या karunga....to मैं कुछ नहीं karunga...main बस इतना करूँगा की अपने दोस्त को जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी मेडिकल डिपार्टमेंट में ले jaaun...waha बहुत से एक्सपर्ट्स hoge...jo उसको बच्चा hi लेंगे....

प्रोफ.- हम्म ठीक hai....baith जाओ....

मैं भी बैठ गया और फिर क्लास शुरू hui....wapas se...par अब दब रह रह के उसी किताब में लखि हुई बाते पढ़ रहा था कुछ इस तरीके से की वो प्रोफ. को सुनाई de.....aur इसका अंजाम ये हुआ की गुस्से में आके उन्होंने दब को क्लास से निकल hi दिया...

ये क्लास भी ख़तम हो gayi....aur मैं बन गया स्पेशल सबके liye...sabhi मेरी तारीफ़ कर रहे the...arre बहुत से लोगो को तो ये भी पता नहीं था वह पे की ऐसी कोई किताब भी है...

नेक्स्ट क्लास थी प्रोफ. नमन ki....hum सब चल दिए waha...DB भी ग्राउंड में मिल गया मुझे,....

दब - यार टुन्ने कहा सुन्ना था इस किताब के बारे में...

मैं - बस ऐसे hi लाइब्रेरी में घूम रहा था तो दिख गयी थी वही उठा के पढ़ li....bas याद हो गयी थी...

दब - हम्म सही है.....

मैं - वैसे बेकार में पन्गा नहीं लेना चाहिए yaar...wo प्रोफ. है यहाँ पे....

दब - अरे वो तो बस भावनाओं में बाह गया tha...aur ऐसा कुछ नहीं hai....chal आज देखते है क्या होता है प्रोफ. नमन के क्लास mein...waise तू क्या करेगा waha....spirit तो है नहीं तेरी....

मैं - नहीं है ना....

मैंने बस इतना hi ओला की ध्रुव ने मुझे रोक दिया...

ध्रुव - सबको बताने की जरुरत नहीं hai.....sabko क्या तुम किसी को नहीं बताओगे....

मैं - पर मेरा स्पिरिट एनिमल...

ध्रुव - वो भी बनना lenge....par गलती से भी किसी को ये ना कह देना तुम ड्रैगन्स लिए घूम रहे ho.....aisi स्पिरिट्स आम नहीं होती...

दब - हां वही तो यार नहीं hai....par चिंता मत kar.....maine सुन्ना था कही जितना ज्यादा टाइम स्पिरिट शैल लेती है उतना hi खतरनाक और ताकतवर स्पिरिट बहार निकलती hai....aur वैसे भी तू दुसरो से चीन भी तो सकता hai....yaa फिर सेकेंडरी स्पिरिट एनिमल्स lele....market में बहुत चल रही है ये आज kal....tunne तो सुन्ना भी होगा....

मैंने साला प्राइमरी का नहीं सुन्ना था और ये सेकेंडरी का बोल रहा hai...aur भला स्पिरिट एनिमल्स किसी से चीनी भी जाती है kya....Main तो ये सब जानता भी नहीं tha....baat करते करते हम पहुंच गए क्लास में....

क्लास में पहुंचे तो वह पे पहले से प्रोफ. आये हुए थे...

ध्रुव - मैं तुम्हारे स्पिरिट एनिमल को छुपा रहा hu...saath hi उसके बदले में एक नया स्पिरिट एनिमल बना रहा hu....ye बस दिखावे के लिए hi hogi....ye किसी काम का नहीं hoga...kaam सारे ड्रैगन्स hi karenge...batao क्या चाहिए स्पिरिट...

मैं - मुझसे क्या उच्च रहे हो बना दो कुछ bhi...main तो ये भी समझ नहीं पा रहा की ये सब है क्या....

ध्रुव - समझ jaaoge,....aaj इसी के बारे में बात करेंगे....

मैं क्लास में एंटर kiya...aur प्रोफ. नमन ने मुझे साइड में चलने को kaha...waha पे एक असीस. प्रोफ. पहले से tha...ek अलग सा सफर लिए hue....main भी गया उसके pass....ye देखने में कल वाले से बड़ा था...

नमन - हम्म जाओ उसको टच karo....ye स्पिरिट एनिमल के बारे में पक्का बता hi dega....ye बहुत पावरफुल hai....isse हम किसी नए जन्मे ुए बच्चे तक के स्पिरिट am=nimal को देख लेते है....

मैं - ठीक है (ध्रुव से) अब क्या karu...ye तो सबको पता चल जाएगा ना...

ध्रुव - बस थोड़ी देर रुक जाओ....10 तक गिन्नो उसके बाद चुनना उसको...

मैं - ठीक है...

मैं अब गया उस असीस. प्रोफ. के पास...

मैं - ये इससे कोई दिक्कत तो नहीं होगी naa...kahi कुछ...

A.prof. - नहीं बच्चे ऐसा कुछ नहीं hoga...ye खास कर टाइटन से मंगवाया है प्रोफ. ne....isse खतरा नहीं हो सकता कुछ....

मैं - पर मुझे तो दर लग रहा hai...pata नहीं क्या होगा मेरा स्पिरिट animal...sayad नर्वस हु मैं...

A.Prof. - अरे ऐसा होता hai...aur तुम्हारे केस में तो सच में होना chahiye...ab इतनी आगे तक अगर स्पिरिट अपने शैल से ना निकले तो कोई भी डरेगा...

मैं - मुझे मिल तो जायेगी ना स्पिरिट...

A.prof. - हां मिल जायेगी चिंता मत karo...aur हिम्मत रखो...

ध्रुव - रेडी जाओ...

ध्रुव ने बोल दिया मैं भी जो अभी तक A.Prof. से बातें कर रहा tha...turant hi उस सफर को chua...aur बस.... :सिघ:

ये एक चूहा tha.....usne मेरे लिए एक सफ़ेद चूहे को मेरा स्पिरिट एनिमल बना diya....pata नहीं ये चूहा एनिमल होता भी है या nahi....aur उस ध्रुव ने ऐसा किया....

जब सबने ये देखा तो सब हसने lage....saare के सारे है रहे the....maine नमन की ओर देखा तो उसके चेहरे पे अजीब सी रेखाएं thi....wo सायद समझ नहीं पा रहा था ये हुआ तो हुआ कैसे.....

A.Prof. ने सबको शांत कराया और मुझे मेरी जगह पे जाने को kaha.....aaj जो काढ़े वाली क्लास में हीरो की तरह था वापस से :सिघ:

प्रोफ. नमन को तो इससे इतना बड़ा झटका लगा की वो क्लास से hi चले gaye...unhone A.prof. को बोलै क्लास लेने को...

फिर क्या था आज का टॉपिक शुरू hua...apne एनिमल स्पिरित्य की ग्रोथ का कैसे ध्यान रखा jaaye...ye क्लास भी ख़तम ो गयी और सब बहार जाने lage....par तभी A.prof, ने मुझे रोका और कहा की प्रोफ. नमन के केबिन में उनसे मिलने जाना hai...main भी चला गया waha....waha गया तो वो वह भी उसी क्रिस्टल सफर को रखे हुए थे....

मैं बैठा उनकी केबिन में और उन्होंने मुझे वो क्रिस्टल दे diya...aur मैंने उसको वापस से chua....ek बार नहीं दो बार नहीं बार बार chua...aur प्रोफ. मेरे एनिमल स्पिरिट को स्टडी कर रहे the....aant में मुझे कहना पड़ा की नेक्स्ट क्लास के लिए लेट हो रहा है तब जाके कही मुझे जान ेडिया unhone...aur मैं पहुंच गया बुआ के क्लास mein....late हो चूका था मैं..

मैं क्लास में एंटर किया तो बुआ सबको किसी जादू के बारे में बता रही thi.....main गया तो मैं भी सुनने laga...par आधी बात में क्या hi समझ में aayega....wo तो अच्छा hua....ek लड़की ने कुछ डॉब्टस पूछे और उन् डॉब्टस के बारे में सुनते सुनते मेरा वो टॉपिक सही हो गया...

फिर बारी आयी प्रक्टिकल्स ki....aaj बुआ सबके लिए मैजिक स्टिक्स लेके आयी thi....sabke लिए मतलब टेस्ट मैजिक sticks....pichli बार जो टेस्ट लिया था उसका रिजल्ट hi इतना अच्छा tha.....ki उन्होंने तय किया सबको बस और बस टेस्ट स्टिक्स hi milegi....sabne उठा लिए ek....maine भी uthayi....par मेरी वाली टूटी हुई nikli...aur कोई एक्स्ट्रा मैजिक स्टिक्ट थी नहीं वह pe....to बुआ ने मुझे बैठ के देखने को कहा सिर्फ...

ये गलत है यार किसी और का मांग के मुझे दे सकती थी वो आखिर बुआ है meri...ye मेरे दिम्माग में आया पर बुआ ने ऐसा नहीं kiya...ye सोच के मैं खुश भी hua....wo यहाँ पे कोई रिश्ता नहीं देख रही अपने काम mein...haa क्लास के बहार कुछ हेल्प कर देती है पर ज्यादा नहीं...

मैं यही सब सोचता hua....aur बाकी सब को मैजिक स्टिक उसे करते हुए देखता raha...aur ये क्लास भी निकल गयी...

क्लास कहातम hui...sab जाने लगे तो बुआ ने मुझे रुकने को kaha...aur अपने साथ अपने केबिन में ले गयी....

बुआ - देखो दुखी मत hona...aisa होता hai...hum तुम्हारे लिए कोई सेकेंडरी स्पिरिट ले aayenge...yaa फिर तुम म्हणत करो और इसी वालो को इतना पावरफुल बनाओ की कोई सोच भी नहीं sakke...pata है ना चूहे कितने तेज़ होते hai...aur वो चाहे तो क्या कुछ नहीं कर सकते....

मैं समझ गया बुआ को पता चल गया है मेरे पास चूहा है स्पिरिट एनिमल के नाम पे और ये उनको भी अच्छा नहीं लगा hoga...par अभी मुझे समझा रही है ताकि मैं खुद को छोटा ना समझू...

मैंने एक बार सोचा बुआ से कह दू के ये बस दिखने के लिए है असल में तो कुछ और hi मिला है mujhe...par ये Dhruv.....isne मन्ना कर दिया बोलता है वक़्त आने दो उन्हें खुद सक होगा और जब वो पूछे तभी बताना..

ये कैसी बात hui...jab वो पूछे तब batana....arre जब बताना hi है तो अभी क्यों nahi...abhi hi बता देते hai...baat ख़तम हो jaayegi...Bua खुश हो जायेगी और मैं bhi...par नहीं...

बुआ - अच्छा चलो आज बहार डिनर पे चलते hai...waha से कुछ सामान भी लेना है मुझे....

मैं - आज???

बुआ - पूछा नहीं है बताया है रेडी rahna....samjhe....

मैं - हम्म ठीक है...

फिर में वह से निकल लिया रूम में आने ko.......par यहाँ भी मुझे निकिता मिल gayi...wo वैम्पायर ladki....pata नहीं क्या करने आयी है ये ab....main बुआ जे केबिन से निकला था और वो वही दरवाजे पे hi thi...mujhe लगा बुआ से मिलने आयी है तो बस स्माइल पास की और आगे को बढ़ gaya...par ये तो मेरे पीछे आने lagi...thodi दूर चलने पे जब मैंने ये नोटिस किया तो मैं भी मुद के उससे पूछने को hua....par वो आगे निकल gayi...aur जाके कैसल के बहार कड़ी हो gayi...main बहार गया तो...

निकिता - एक सवाल है मेरे मान में जो अब मान से दिम्माग तक पहुंच गया है और दिम्माग को ख़राब किये जा रहा hai....sayad कुतर रहा है मेरे दिम्माग को जैसे चूहा कट्टरता है...

मैं - ये मुझसे पूछने आयी हो tum...pucho...batao क्या है वो मान की बात...

निकिता - यहाँ पूछना कुछ सही नहीं लग रहा hai...chalo वह चलते है जहा से ये सवाल मेरे मान में आया और फिर मेरे दिम्माग तक पहुंच के उसको.....

मैं - है है उसको चूहे की तरह कुत्तर रहा hai...chalo जहा चलना है...

निकिता मुझे कल वाली जगह पे ले gayi...kal रात वाली jagah...wo तालाब वाली jagah...jaha पंकज और उसके लड़को ne...samajh गए ना..

मैं सोचने लगा ये भला यहाँ क्यों लेके आयी है mujhe...aur यहाँ से इसके मान में कोण सा सवाल आ गया...

मैं - यहाँ पे कोण सा सवाल आ गया तुम्हारे मान mein,...aur मुझे hi क्यों लायी हो.....

निकिता - अरे वो क्या है naa...kal एक फाइट देखि थी maine....theek थक thi...par एक ऐसे बन्दे के liye...jiska स्पिरिट एनिमल एक चूहा हो उसके हिसाब से तो बहुत hi अच्छी फाइट थी....

मैं - तुम कहना क्या चाहती हो...

निकिता - ये स्पिरिट एनिमल कैसे छुपाया apna...ye बता दो बस...

मैं - मैं नहीं जानता किस बारे में बात कर रही हो tum.....mujhe लगता है कोई ग़लतफहमी हुई है tumhe...tumne वो क्रिस्टल सफर नहीं देखा था क्या आज....

निकिता - देखा था ना पर उससे पहले जो कल यहाँ देखा था वो मुझे मने hi नहीं दे रहा इस बात ko....tum बस बता दो मुझे कैसे किया ये मैं चली jaungi......kabhi परेशां नहीं करुँगी तुम्हे...

मैं - मैं नहीं जानता किस बारे में बात कर रही हो tum....chalo अब जाने दो mujhe...main लेट हो रहा हु...

मैं वह से निकल gaya...par निकिता वही पे रही....

मैं रूम में आया और ऐसे hi एक किताब निकल के उसको पढ़ने laga....bas मूड नहीं था कुछ और करने ka...time काट gaya.....fir बुआ ने याद दिलाया की डिनर पे भी जान है और शॉपिंग भी तो मैं चल diya...taiyaar होने और रेडी होक पहुंच गया बुआ के केबिन mein.....Bua भी रेडी hi थी और हम दोनों निकल गए वह से....

हम दोनों जब उस मार्किट जाने वाली जगह पे पहुंचे तो वह पे कुछ लोग मिले जिन्होंने लम्बे लम्बे कपडे पहन रखे the....unn लोगो ने बुआ को ग्रीट kiya...matlab स्टूडेंट्स hi honge...unn सभी में से एक पे पता नहीं क्यों मेरी नजर atki....par मैं उससे कुछ बात करता उससे पहले hi दरवाजा खुला और हम अंदर.....

आज के लिए इतना hi

नेक्स्ट अपडेट रोमांचक होने वाला hai...kuch बाते सामने आएगी किसी के बारे mein...aur वो पंकज को भी तो देखना है जो आज वाले में नहीं मिला...

बनने रहिये
 
हां चल नाकामियाब rahi...Shak होना तो लाज़मी है ना अब आपको किसी स्टूडेंट के 90% आने के चान्सेस बहुत ज्यादा लग रहे हो और बाँदा फ़ैल हो जाए तो शक होगा hi...pichle अपडेट में देखा था कैसे खुश हो गए थे प्रोफ. नमन और अब चूहा :lol1:

निकिता का आगे देखते है क्या होता है

जिसपे नज़र गाड़ी उसको भी देखते है...

कीप रीडिंग एंड कमेंटिंग
 
अपडेट - 23

अब तक

निकिता को मेरे एनिमल स्पिरिट एक चूहा होने की बात हज़म नहीं हुई थी और उसने मुझसे पूछने के लिए मुझे वही तालाब के पास ले गयी और मुझसे पूछा उसके बारे में पर मैंने नहीं bataya....Shak तो सायद प्रोफ. नमन को भी हुआ था तभी तो वो भी इतनी बार टेस्ट कर रहे the....wahi ध्रुव ने मेरे ड्रैगन्स को चुप्पा के उनकी जगह वो चूहा रखा हुआ था जिसकी वजह से ये सब हो रहा tha....raat के डिनर का प्लान बुआ के साथ बनना था तो मैं और बुआ मार्किट जाने वाले रूम के पास आ खड़े हुए.....

अब आगे

वह कोई था या थी जो लम्बे लम्बे कपड़ों में thi....ek ग्रुप mein...pure ग्रुप में सबके कपडे वैसे hi the...unme से एक पे मेरी नज़र गयी और मैं उसको देखने laga...kuch था उसमे जो मुझे उसको देखने को मज़बूर कर रहा tha...sayad उसको जानता था main..Main उसके पास जाता बात करने उससे पहले मार्किट का दरवाजा खुला और वो ग्रुप अंदर चली gayi.....wahi बुआ ने भी मुझे अंदर चलने को kaha...Main अंदर गया उसको देखा तो वो क्या उसके ग्रुप का कोई भी नहीं dikha....Bua ने मुझे किसी को ढूंढते हुए देखा तो पूछ लिया...

बुआ - क्या बात है यहाँ किसको धुंध रहे ho...koi आने वाला था क्या...

मैं - Nahi...par वो...

बुआ - क्या वो वो ार रहे ho...jab कोई आने वाला नहीं तो रुक्का क्यों है चल जल्दी बता शॉपिंग करनी है या फिर डिनर करना है अभी.....

मैं - डिनर अभी करेंगे तो शॉपिंग नहीं कर paayenge...aur आपने बबताया नहीं क्या लेना hai...aise hi बस मुझे पकड़ लायी yaha...ab बताओ क्या लेना है..

बुआ - अरे हां बताया नहीं naa....wo पहले तो वो टेस्ट मैजिक स्टिक्स लेनी hai...teri वाली टूटी हुई थी naa...chal वही लेंगे पहले फिर कुछ कपडे लेने है aur....aur फिर डिनर bas...itna hi है...

मैं - हम्म ठीक है चलिए....

हम दोनों वह से निकलने lage....par तभी मुझे वही वो लम्बे कपड़ो वाला वो ddikhe....unme से एक भाग रहा था और बाकी के सारे उसको पकड़ने आये हुए थे...

मैं - बुआ वो देखो...

बुआ ने भी dekha....ki उन् सभी में से एक जो है वो भाग रहा है और बाकी सब उसको पकड़ने के लिए भाग रहे hai...ab मार्किट में कोई पकड़म पकड़ाई तो खेलेगा नहीं naa...upar से वो स्कूल से थे saayad...to बुआ को इसका पता लगाना hi tha....Bua ने मुझे सबसे पहहले सिक्योर करना सही समझा और मुझे वही दूकान में भेज दिया जहा से वो शील्ड और अंगूठी ली थी maine...(anguthi अब गायब हो गयी hai...aisa लगता है जैसे मेरे अंदर समां गयी ho...uss हर्रे के निकलने के बाद hi ऐसा हुआ था..) और मुझे कह दिया की यहाँ से बहार ना niklu...wahi आज भी वह का मालिक नहीं था बस वो बौना थाजो वह काम करता था उसको भी बोल दिया की मुझे मैजिक स्टिक्स dikhaye....aur बुआ बहार चली गयी....

मैं - वो कुछ जाना पहचाना लग रहा tha...mujhe भी जाना चाहिए वह...

ध्रुव - हां तो चलो ना....

मैं - पर ये बौना...

ध्रुव - तुम खड़े हो जाओ बाकी वो देख भी नहीं पायेगा...

इसकी बात समझ में तो नहीं आया मेरे को पर फिर भी मैं खड़ा हुआ और चौक gaya....meri बॉडी वही पे पड़ी हुई thi....aur मैं खड़ा tha....main खुद को देख रहा था...

मैं - ये क्या hai....main एक से दो कैसे हो गया....

ध्रुव - एक hi हो अभी bhi....clone बनाने में वक़्त लगेगा tumhe....par अभी भी मैडिटेशन के दम पेतुं अपने बॉडी को और सोल को अलग अलग कर सकते ho....hmm इसको एस्ट्रल प्रोजेक्शन बोलते hai...Abhi के लिए तुम्हारी बॉडी को मैं संभल lunga...tum jao...aur हां मैं तुमसे कांटेक्ट में rahunga....telepathy se...ek और बात hai....Astral प्रोजेक्शन के दौरान कोई कही भी कितने भी वक़्त में जा सकता hai...agar तुम सही से कण्ट्रोल में हो तो अभी मेरी बात ख़तम होने से पहले ओरियन या टाइटन घूम aao...auur अगर ना हो तो एक कदम दूर जाने के लिए भी 2- 3 साल लग jaayenge...par तुम कण्ट्रोल में ho...to ये नहीं hoga....aur पावर्स जो है तुममे वो तुम उसे कर सकते हो पर partially.....waise तो इस मेथड में बॉडी एकदम से बेजान हो जाती है पर मैं हु इसलिए ऐसा नहीं hoga...ab जाओ...

कुछ बातें समझ में आयी कुछ नहीं और मैं वह से निकल gaya....Wo सही बोल रहा tha...main पालक झपकते hi...market के ऊपर जा pahucha...waha से चारो ओर देखने laga...bahut भीड़ thi...par थोड़ी hi देर में mujhe...Bua dikhi...aur उनसे कुछ आगे वो ग्रुप भी dikha...Bua सायद उनका पीछा कर रही thi....Main बुआ के पास चला gaya.....jab उनके पास गया तो एक पल को वो यहाँ वह देखने लगी...

ध्रुव - घबराओ मत माना तेरी बुआ प्रोफ. है पर अभी भी उस लेवल पे नहीं पहुंची है जहा से वो तुम्हे देख paaye....par इतनी लेवल है इनके पास की ये महसूस कर पा रही है तुम्हारी और ko...ye बहुत आगे जाने वाली है...

मैं - हम्म ठीक है...

अभी मैं ध्रुव से बात कर रहा था की एक धड़ाम की आवाज aayi...wahi से जहा पे वो ग्रुप tha...maine बुआ को देखा तो वो अपनी जगह पे नहीं thi...Jab उस ग्रुप की ओर देखा तो वह पे थी bua....waha कुल और 6 लोग the...unme से एक को बुआ ने अपने पीछे खड़ा कर रखा था वो वही था जो भाग रहा था बाकियों se.....Main सब देख रहा tha....wo बाकी के पांच जो थे उन् सभी ने अपने लम्बे लम्बे कपड़ो में से उनकी स्टिक्स बहार nikali...aur बुआ को घेर के खड़े हो gaye....ek बार को तो मैं बह चौंक gaya...kon पागल है ये जो ऐसा karenge...Bua प्रोफ. है होड़ है मैजिकल डिपार्टमेंट ki...thoda तो सोचना चाहिए था naa...Bua को देखा मैंने तो उन्होंने ने भी अपनी स्टिक बहार nikali....Kaale रंग की स्टिक बिलकुल kaali....uske दोनों छदोर पे मेटल लगा हुआ tha...ada hi चमकीला मेटल था ye.....Bua भी एकदम रेडी हो गयी उन् सब को सबक सीखने के liye....wahi main...mereko क्या करना tha...itna अच्छा मौका मिला हुआ tha...aj एक और फाइट देखने ka...itna तो जानता था बुआ जीत hi jaayegi...to आराम से वही एक चाट पे बैठ गया मैं और देखने लगा...

वो जो 5 लोग थे उन् सभी ने बुआ को सामने से घेर लिया tha...aur फिर हमला शुरू कर diya...Bua भी आराम से सभी को रोके जा रही thi...main बैठा देख रहा tha...par...tabhi मेरा ध्यान gaya...Bua के picche...waha पे जो भी tha...kisi ने उसपे हमला kiya....aur वो वही गई gaya....maine जब वार करने वाले की ओर देखा तो ये भी उन्ही लोगो की तरह लम्बे लम्बे कपड़ों में आया हुआ tha...aur छुप के वार किया tha....uska अगला निशाना बुआ थी पर जब मैंने ये देखा तो खुद hi मेरा हाथ ऐसे रियेक्ट किया जैसे मैं कोई चीज़ उसकी ओर फेंक रहा tha....aur जब ऐसा हुआ तो सच में एक चीज़ उसकी ओर गयी और वो थी bijli...ur वो बिजली जाके सीधा उसके पैरों में लगी और वो वही गिर gaya...par गिरने से पहले कोई आवाज की उसने aur...wo आवाज होते hi जो लोग बुआ के सामने थे वो सब वह पे धुवां कर के भाग gaye...main अभी उनको देख रहा था और उसके बाद जब इस वाले की ओर देखा तो ये भी गायब tha...Main उनके पीछे जाता par...Dhruv ने मुझे बुआ के पास जाने को kaha...amine भी यही ठीक समझा और बुआ के पास gaya...Bua अभी वो लब्मे कपड़ों वाले को देख रही थी जो उसके पीछे था जिसको बुआ बच्चा रही थी....

मैं भी वह pahucha...Bua ने सबसे पहले तो उसके वो लम्बे कपडे hataye..jisse उसका चेहरा हाथ पेअर सब ढाका हुआ tha...aur जब चेहरे से वो हटाया तो बस देखती hi रह गयी wo...sirf वो hi नहीं मैं भी बस देखता hi रह gaya...aakhir ये यहाँ कैसे आ gayi...iska यहाँ इन् हालातों में hona...kuch समझ नहीं आ रहा tha...par फ़िलहाल तो वो बेहोश thi...Haa thi...wo एक लड़की थी....

बुआ ने तुरंत hi कविता मैडम को bulaya...aur उस लकड़ी को उनके पास भेज diya....kuch देर बुआ ने बात की कविता मैडम se..aur फिर परेशां सा चेहरा liye...wapas मेरे पास आने lagi...matlab मेरी बॉडी के pass....Main भी झट से वह पहुंच gaya...jab पंहुचा तो dekha...meri बॉडी पाय कर रही thi...matlab कुछ सामान लिए थे ध्रुव ने पर कुछ दिख नहीं रहा था उसके pass...pata नहीं क्या hoga...Dhruv ने मुझे अपने पास पाया तो मुझे अपनी बॉडी में आने को kaha...main भी चला गया....

मैं - ध्रुव वो तो...

ध्रुव - हां पर kyun...ye सोचने वाली बात है...

बुआ - चलो प्रतीक सामान ले लिया ना...

मैं - हां बुआ ले लिया....

बुआ - हम्म चलो डिनर करते है...

मैं - पर वो kapde...aur आपने तो कुछ,,,,

बुआ - बाद में आ जाउंगी अभी नहीं चलो अभी डिनर पैक करते है और स्कूल में खा lenge...thik है...

मैं समझ गया बुआ परेशां hai...arre मैं भी परेशां tha...hairaan tha...samajh hi नहीं आ रहा था की ऐसा क्यों hua...wo यहाँ क्या कर रही थी..

मैं बुआ के साथ निकल gaya...Bua ने वह कही से कुछ खाना पैक कराया और उसको सीधा मेरे रूम में भेज diya...aur फिर हम चल दिए दरवाजे के pass...aur फिर वह से स्कूल...

बुआ - बच्चू तुम जाओ खाना रूम में है तुम्हारे खा lena...mujhe कुछ जरुरी काम करना है ठीक hai...next टाइम हम साथ में खाएंगे....

मैं - हम्म ठीक hai...apna ध्यान रखियेगा...

इतना बोल मैं अपने रूम की ओर बढ़ gaya...aur फिर रूम में आ gaya...pareshan तो मैं भी tha...mujhe पता था की उसको कविता मैडम के पास रखा गया hai...main अभी वह जाना चाहता tha...par ध्रुव ने मुझे जाने को नहीं kaha...main जब उसकी बात ना मान के वह जाने laga..to उसने समझाया की अभी वह बुआ होगी और साथ में कुछ और भी log...jinke सामने अभी जाना सही नहीं hoga...jitna सबकी नज़रों से बच्चे रहिओगे उतना hi अच्छा है अभी के liye...Naa चाहते हुए भी बातें माननी padi...main रूम में hi रहा और खाना खाया और फिर...

ध्रुव - चलो सो जाओ आज से ट्रेनिंग शुरू है ना....

मैं - वो ठीक तो होगी naa..aur क्यों गयी वो waha..aur वो लोग थे कोण...

ध्रुव - वक़्त आने पे सब पता chalega...chalo अब सो जाओ और ट्रेनिंग शुरू करते है....

मैं भी उसकी बात मान के बीएड पे gaya...aur बाकी का काम तो बीएड और रूम के दीवारों पे बननी हुई उन् दसिग्नस ने hi कर diya...dimmag पूरा खली और main...neend में गहरी नींद mein....thodi देर में सामने वही दो ड्रैगन के बच्चे dikhe...jo कुछ खा रहे the...pata नहीं क्या था....

मैं - ध्रुव ये दोनों क्या खा रहे है...

ध्रुव - ये ये स्पिरिट्स का खाना hai...aaj hi लिया maine...aur भी बहुत कुछ लिया hai..par वो सब यहाँ नहीं आ sakte...ab sunno...ek गोली है वो दिन में 2 बार खानी है tumko...wahi goli...inn दोनों के लिए खाना बनती है उसी को स्पिरिट फ़ूड कहते hai...samjh गए ना...

मैं - Hmm...ab बताओ क्या करना है आज...

ध्रुव - मैंने सोचा था आज इन दोनों से दोस्ती karaunga...par ये दोनों तो बस खाये hi जा रहे hai...bhukhe थे दोनों इसी वजह se...to ाज्ये छोड़ते है और तुम्हारी नयी एलिमेंट पे बात करते hai...uske उससे बताता हुई मैं तुमको...

मैं - नया एलिमेंट...???? :हँ:

ध्रुव - हां नया element.....yaad नहीं क्या उनमे से एक को तुमने कैसे मारा था...

मुझे याद आया उस बिजली के बारे mein...Main बड़ा खुश हो gaya...koi भी हो jaata...element जो मिला था mujhe..aur वो भी थंडर...

ध्रुव - अभी ज्यादा खुश मत हो jaao...abhi तो बस आयी है तुम्हारे paas..wo..ab तुम्हे उसको ताकतवर बनाना है...

मैं - मतलब...

ध्रुव - मतलब ये की उसको अच्छे से कण्ट्रोल करना sikho...aur क्या....

मैं - हां समझ gaya...par कैसे...

ध्रुव - Kaise...uske लिए मैं हु naa....dekho...tumko सब बताता हु...2 तरीके है अपने एलिमेंट को मजबूत करने के liye....pahla...dhyaan लगाने se..aur dusra...use करने se..matllab प्रैक्टिस करने se...Dhyaan तो लगा लोगो तुम बहार पर प्रैक्टिस बहार karna...wo सायद मुमकिन ना ho...to उसके लिए यही पे आके कर सकते ho....yaha तुम जो चाहो वो आ सकता है...

मैं - हम्म तो मुझे दोनों करने है,,,

ध्रुव - हां दोनों करने hai...aur अभी एक के साथ karo...uske बाद 2 एलिमेंट्स को एक साथ करना sikhenge...par उसमे वक़्त है abhi....abhi एक hi सही है...

मैं - हम्म ठीक है...

ध्रुव - वैसे अब शील्ड की भी जरुरत पड़ने वाली hai...wo बच्चों वाली शील्ड का काम पूरा हो चूका hai...Jwala मिल गया है tumhe...ab उसको या तो ख़तम karo..yaa कही छुपा do...khatam कर नहीं पाओगे अभी तुम तो छुपाना hi सही होगा...

मैं - एक मिनट क्या मतलब है काम khatam...kya उसका बस यही काम था मुझे और ज्वाला को मिलवाना...

ध्रुव - Hmm...haa भी और नहीं bhi....uss शील्ड का काम था bas...tumhara पता देना उन् लोगो ko...aur वो anguti...uska काम था tumhe..jwala से milana...Anguthi ो अपना काम कर के चली गयी पर शील्ड नहीं गया है अभी bhi...wo जाता भी नहीं hai...pichle बार भी तो नहीं गया tha...tabhi तो तुम्हे मिला wo...sayad कोई और भी hoga..jisse मिलने के बाद वो गायब ho...to उसको चुप्पा do...wo खुद अपने नए मालिक को धुंध hi lega,,...waise अगर अपने पास रखना चाहते हो तो रख संकट ho...usme कोई दिक्कत की बात नहीं hai...bas उसे मत करना usko...Kal जब Prof.Suraj के पास जाओ तो उनको अपंने थंडर एलिमेंट का बताना वो तुम्हे शील्ड दे hi देंगे...

मैं - हम्म ठीक hai...par एक बात समझ नहीं aayi....shield मालिक ढूंढेगा अपना नया...

ध्रुव - हां वो dhundhega..ab इसको छोड़ो और ट्रेनिंग karo...wo देखो सामने वो हवा में कुछ चीजजें उड़द रही है उनपे निशाना लगाओ....

मैंने dekha...aur फिर निशाना लगाया.... :क्राई: निशाना chodo..haath से बिजली hi नहीं निकली....

मैं - ध्रुव ये तो कुछ हुआ hi नहीं...

ध्रुव - ोू कैसे भूल गया मैं इस बात ko....Prateek यहाँ पे तुम ट्रेनिंग अभी नहीं कर paaoge...waqt लगेगा कुछ तब जाके ये पॉसिबल होगा...

मैं - पर तुमने तो...

ध्रुव - हां मैंने hi कहा था par..main भूल gaya....abhi तक ये दोनों खाना hi खा रहे है.,...

मैंने भी ड्रैगन्स की ओर dekha..dono अभी भी लगे हुए थे खाने में...

ध्रुव - चलो छोड़ो आज बस जो बातें बताई है ध्यान वाली वो याद रखो और उसको hi karo...aur ट्रैनिंग के liye...elemnet उसे नहीं कर सकते यहाँ tum...to...to...to....haa कुछ टूल्स लेके उनका उसे करना सीखा सकता हु main....hathyaaron के बारे में ...कल वही bataunga...par उससे पहले िन्न्न दोनों से जान पहचान hogi...ab jaao...kal मिलेंगे...

मैं कुछ बोलता उससे पहले hi सब गायब हो गया....

मैं - ये अभी तो बोल रहा था प्रैक्टिस karenge..acchanak से क्या हुआ जो बनौलने लगा अभी नहीं hoga...yaha पे...

समझना मुश्किल था इसकी बातों को...

मेरी आँख khuli...ghadi देखा तो 4 बज रहे the...main जल्दी से रेडी हुआ और चल diya,...Dhyaan लगाने वाले जगह pe....waha गया और ध्यान में बैठ gaya...jab ध्यान में बैठा to...aankhen बंद करते hi अजीब अजीब से एनर्जी ोर्ब्स dikhe...wo सब यहाँ वह उछाल रहे the....aisa लग रहा था jaise...kisi बाल्टी में किसी ने कुछ बॉल्स रख दिए हो और अब बाल्टी को जोर जोर से झिल्ला रहा है जिससे वो बॉल्स यहाँ वह हो रहे hai...ek दूसरे से टकरा रहे hai....aur रीबोँके हो रहे है...

मैं - ये क्या है...

ध्रुव - ये ये है तुम्हारे नयी एलिमेंट्स की particles...ab तुम्हे ये करना है की इनके मूवमेंट को कंटोरल करना है और सबको एक जगह इकठा करना hai...jab ये उस जगह इक्कठा होंगे तो एक बाल में बदल jaayenge...jo जितना तुम ध्यान लगाओगे या प्रैक्टिस करोगे उतना hi badhega...iske बढ़ने के साथ साथ तुम्हारी पावर्स भी badhegi....tumhe यही करना hai...par एक बात का ध्यान रख ke...dusron को बस यही लगे की तुममे एलिमेंट आयी है और तुम भी नार्मल लोगो की hi तरह इसको मजबूत कर रहे हो....

मैं - समझा nahi...ek बार वापस से बताना...

ध्रुव - मतलब ये की तुम्हे इसको भी छुपाना hoga...ek लेवल पे लाने के बाद इसको उसी पे लॉक कर देना है ताकि लोगो को लगे की बस इतना hi hai....aaj फर्स्ट डे hai...waise तो ज्यादा नहीं होगा kuch...par जितना भी हो उसको लॉक कर lena...nahi अभिउ मैं hi कर dunga...baad में तुम्हे bataunga...Chalo अब इनमें सबमें से एक पे ध्यान lagao..aur उसको किसी एक जगह पे सेट karo...fix karo...aur उसी के पास बाकी सब को भी लाना hai...samjhe...

मैं - हां समझ गया...

मैं भी जैसा उसने कहा वैसे hi करने laga...par...ye इतने the..aur इनकी मूवमेंट इतनी फ़ास्ट थी की ये आसान नहीं था मेरे liye...ek तो इतने में से किसी एक पे धायण लगन मुश्किल हो रहा tha...par...par...maine कर hi liya...kuch नकमियाबी के बाद मैं कामियाब हुआ और उनमे से एक को एक जगह फिक्स कर दिया...

फिर बाकी के बॉल्स में से 1 को उसके पास ले gaya...aur उसके अंदर मिलाने की कोशिश ki...pahle तो नहीं hua..par दो तीन बार करने के बाद जब हुआ तब मेरी हालत ख़राब हो चुकी थी...

ध्रुव - बस आज के लिए काफी है अब जाओ फ्रेश होक क्लास में jaao...waise बहुत अच्छा िया hai...itne तक पहुंचने में लोगों को 2- 3 साल तो लग hi जाते है और tumne...ek hi दिन में ये किया है...

मैंने भी आँखें खोली और जब खोली तो पूरा भीगा हुआ था main...paseena se...main उठा और जल्दीसे रूम में गया वापस से फ्रेश हुआ और रूम के बहार आया ब्रेक फ़ास्ट के लिए...

बहार आया तो दब मिल gaya...aur उसी के साथ चल दिया मैं bhi...humne नास्ता किया और fir...Prof. सूरज के क्लास में आ गए...

आज के लिए इतना hi...next में उस लड़की का पता चलेगा कोण थी wo...saath में ड्रैगन्स से दोस्ती karenge..aur भी कुछ सीन्स होंगे...

बनने रहिये...

अगर पता चल गया हो लड़की कोण थी वो तो बता देना..
 
अपडेट - 24

अब तक...

थंडर एलिमेंट मिल गया था मुझे par...isko कण्ट्रोल करना बहुत hi मुश्किल tha....waise तो ध्रुव ने बोलै की मैंने अच्छा kiya..ye सा होने के बाद मैं ब्रेक फ़ास्ट के लिए गया और फिर वह से दब के साथ hi प्रोफ. सूरज की क्लॉस में....

अब आगे

हम दोनों वह gaye...aur जैसे hi मैं वह एंटर हुआ मुझे याद aaya...Nikita...wo वह नहीं thi....hogi भी कैसे वो तो कल मार्किट mein...par kyun....wo वह क्यों गयी thi...aur अब कैसी है wo...Main भूल कैसे गया उसके बारे mein...Main ये सब सोचने लगा वही पे खड़े khade...aur सायद दब ने ये देखा की मैं एकदम से रुक गया तो उसने पीछे आके मुझे हिलाया और फिर पूछा...

दब - क्या hua...aise रुक क्यों गए....

मैं - निकिता....

बस इतना hi मुँह से निकला और मैं य्ये जाने के लिए की आखिर वह हो क्या रहा था उसके पास मतलब कविता मैडम के पास जाने के लिए निकल gaya,...wahi दब भी मेरे पीछे मुझे आवाज देते हुए आने laga....Main जल्दी से मेडिकल डिपार्टमेंट के पास pahucha...par गेट पे hi मुझे बुआ दिख gayi....par उन्होंने अभी मुझे नहीं देखा tha....Wo अभी वह पे कड़ी होक कविता मैडम से hi बात कर रही thi...ab मैं उनके सामने से अंदर गया तो ये सवाल पे सवाल पूछेगी और फिर पता नहीं कहा से कहा तक बात पहुंच jaaye...to मैं बस छुप गया वही pe...Par kismat...Wo दब ने मुझे देख लिया छुपते हुए और वो तो और आवाज देता हुआ मेरे पास aaya....pahle तो सायद बुआ और कविता मैडम ने नहीं सुन्ना पर जैसे hi वो मेरे पास आया और चिलाय तब बुआ और कविता मैडम ने सुन liya...aur हमारी ओर देखने lagi...Halat सँभालने के लिए maine...DB के पेअर पे एक किक मारी उन् दोनों के नजरों से बचते हुए और उसका हाथ अपने कंधे पे रख liya....aur उसको वैसे hi पकड़ के आगे जाने laga...wo तो बस अपने पेअर को देख रहा था और मुझे आँखें बड़ी बड़ी कर ke...Bua और कविता मैडम ने हममे देख लिया था तो वो भी हमारे पास आ गयी...

कविता मैडम - क्या हुआ तुम दोनों इस वक़्त यहाँ अभी तो प्रोफ. सूरज की क्लास है ना और ये एल्फ प्रिंस को क्या हुआ....

दब कुछ बोले उससे पहले मैंने बोल दिया....

मैं - ये सीढ़ियों से गिर गया hai...sayad हड्डी टूट गयी है इसकी देखिये ये चल भी नहीं पा रहा है....

दब - क्या....

वो कुछ आगे बोलता मैंने धीरे से उसके पीठ पे maara..aur वो Haa...haa करने लगा....

कविता - हम्म ठीक है मैं इनका ध्यान रखती हु तुम जाओ क्लास में....

मैं - नहीं वो ये ऐसी हालत में hai....main इसको कैसे छोड़ के jaau...dost है ये मेरा.....

दब - हां हां दोस्त है mera....(mujhe घूरते हुए बोलै ो...)

कविता मैडम ने एक बार बुआ को dekha...Bua ने भी हां में इशारा किया और फिर क्या मैं अंदर चला गया दब के saath...DB को एक रूम में रखा gaya...main भी उसी रूम में tha...par मेरा ध्यान कही और tha.....Kavita मैडम भी हममे वह छोड़ के थोड़ी देर के लिए बहार चली gayi...main वही रूम में अकेले था दब के साथ वो अभी बीएड पे लेता हुआ था और मुझे घूरे जा रहा tha....par अभी मेरा ध्यान उसपे नहीं tha...Main सोच रहा तह निकिता के बारे mein...mujhe अब भी याक्किन नहीं हो रहा था इस बारे में...

ध्रुव - ये इतना ध्यान क्यों आ रहा है uska...kya बात है...

मैं - अरे नहीं वो मैं बस सोच रहा हु वो वह आकर क्या रही थी और वो log...wo कोण the...aur क्या कारन था की ये सब hua...Nikita ने हमारी मदद की thi.....meri भी दब को बचने mein...ab मैं उसको ऐसे hi छोड़ भी तो नहीं सकता ना...

ध्रुव - कल hi एक पावर के बारे में बताया था याद hai...agar उसका उसे करते तो अभी ये सब नहीं करना hota...tum क्लास में रह के ये सब पता कर सकते the....par तुमने ऐसा नहीं kiya...kyun...

मैं कुछ समझा नहीं ये पता नहीं कैसे सवाल कर रहा tha...usne हेल्प की थी हमारी और अब सायद वो किसी मुशीबत में thi....to बस एक बार बात करना था उससे mujhe...par ये ध्रुव ऐसे hi....

अभी सोच hi रहा था की ध्रुव ने वापस से बोलै....

ध्रुव - हम्म ठीक hai...sawal को छोड़ो उसका जवाब वक़्त आने पे milega..ab जाओ और जाके देखो कहा है wo....aur हां कनेक्ट में रहोगे तुम मुझसे याद है naa...kuch पूछना हो तो पूछ भी सकते हो....

मैं समझा नहीं ये लास्ट वाली बात का matlab....usne ये बातें सायद कल दुकान में भी तो कही थी फिर आज भी kyun....kya कोई वजह थी इसके पीछे....

मैं अभी सोच hi रहा था की मुझे मेरी बॉडी सामने पड़े हुए चेयर पे बैठी milli....matlab इस ध्रुव ने मुझे hi मेरी बॉडी से निकल दिया...

मैं भी ज्यादा सोचते हुए नहीं निकल पड़ा ढूंढने को निकिता ko....Room के बहार निकला और यहाँ वह देखने लगा पर कही निकिता का कुछ पता नहीं चल रह atha...main बस घूम रहा था यहाँ waha...abhi और घूमता रहता अगर कविता मैडम ना दिखती to...wo एक दीवार की ओर से आ रही thi....ajeeb tha...deewar के तरफ से कैसे आएगी ye...par फिर याद आया मैं तो मैजिक स्कूल में हु और यहाँ कुछ भी हो सकता hai....main उसी दीवार के पास गया और उसको देखने लगा वैसे तो कुछ नहीं दिखा...

ध्रुव - दीवार के अंदर जाओ...

मैं - पर कैसे और क्यों...

ध्रुव - यही आत्मा हो tum....aur आत्मा कही भी जा सकती है चलो अब jao..aur क्यों का जवाब जानते हो तुम...

मैं समझ गया की निकिता अंदर है और मैं चला गया ander....ander पंहुचा तो निकिता एक बीएड पे लेती हुई thi....sayad बेहोश थी अभी bhi.....main पंहुचा उस तक और ऐसे hi उसको देखने लगा....

ध्रुव - यही करने गए हो waha....yaa पता भी करना है उसके बारे में....

मैं - हां पता करना है पर किस्से karu...ye तो बेहोश है...

ध्रुव - होश में होती ना तो भी कुछ नहीं batati.....tumhe hi कुछ करना hoga..tab पता चलेगा कुछ...

मैं - क्या मैं....

ध्रुव - हां सही सोच रहे हो tum...uska हाथ पकड़ो और अपने मेमोरी रीडिंग पावर का उसे karo....isse तुम उसके बारे में सब जान सकते ho...agar उसने अपनी मेमोरी लॉक ना कर राखी हो....

मैं - मेमोरी लॉक...????

ध्रुव - हां मेमोरी lock...log करते है aisa..taaki कोई उनके सीक्रेट्स ना जान sake...par ये लड़की अभी इन् सब के लिए आहूत छोटी hai...tum तरय करो....

मैंने भी निकिता के आठ पे अपना हाथ रख दिया...

"एक बच्ची थी छोटी si....usko कोई उठा के ले जा रहा tha......wo कोई औरत thi....wo औरत दौड़ती जा रही thi..kuch लोग भी थे उसके picche....acchanak से वो औरत गायब हो गयी वह se....saath में वो बच्ची भी...."

मैं - ये क्या tha....ye कोण the...aur ये....

ध्रुव - yaadein...ye यादें है...

अभी वो कुछ और बोलता उससे पहले फिर से कुछ दिखने लगा मुझे....

वही औरत उसी बच्ची को किसी और को दे रही thi....aurat खुश नहीं दिख रही थी ऐसा करते hue...usne एक बार बच्ची के माथे पे किश किया और फिर सब गायब....

मैं - उसने तो उस बच्ची को दे दिया उस दूसरी औरत को...

ध्रुव - हां देखा मैंने...

फिर से शुरू hua...kuch....Wo औरत जिसको अब बच्ची मिली थी वो कुछ बुद्धि हो चली thi.....abhi वो बीएड पे thi....aur सायद घायल भी thi....aur वही उसके पास में बैठी थी एक ladki...ladki की सकल निकिता से मिल रही thi...haa ये निकिता hi hai..wo उस औरत से बात कर रही thi...Baatein सुनाई नहीं दी mujhe...par...baatein ख़तम होते hi उस औरत के शरीर से कुछ निकला और वो निकिता के बॉडी में चला gaya....aur वो औरत मार gayi...Nikita रोने लगी...

मैं - ये सब निकिता के साथ हुआ था क्या...

ध्रुव - हां लग तो वही रहा है....

निकिता अभी स्कूल के बहार कड़ी थी अपने सम्मान के saath....akele...

वो स्कूल के अंदर आयी और फिर सीधा प्रिंसिपल के ऑफिस गयी और उनको कोई कागज़ diya...jisko पढ़ के पहले तो प्रिंसिपल ने एक दो बार निकिता की ओर dekha...fir जब सब कन्फर्म हो गया तो उनोने उसको टेस्ट के बारे में bataaya...aur फिर...

मैं - एक मिनट ये कुछ ज्यादा लम्बा गैप नहीं hua...abhi तो छोटी थी ये और फिर एक hi बार स्कूल में...

ध्रुव - Haa...issi को कहते है मेमोरी को लॉक karna...par इसने ना सिर्फ लॉक किया है बल्कि मैनुपुलेट भी किया है usko...par ये कैसे कर सकती है इतना कुछ....

आगे मुझे दिखा की ये कुछ लोगो के साथ लाइब्रेरी में बैठी हुई thi...sayad वही लोग वो लम्बे कपडे wale...unme से किसी की शकल नहीं दिख रही थी...

ध्रुव - Dekha...chahre तक हटा दिए गए है...

मैं - तो इसने खुद...

ध्रुव - कुछ इसने खुद लिया है और बाकी सब उस वार के वजह से हुआ hai...abhi इसको वो साड़ी घटनाएं तो याद होगी पर वो किसके वजह से हुई ये याद नहीं hogi...kon थे वो लोग ये भी याद नहीं hoga...yaha एअर्थ पे कुछ गड़बड़ चल रही hai...aisi माजिक्स यहाँ pe....ye तो बहुइट खतरनाक है....

मैं - क्या मतलब है तुम्हारा...

ध्रुव - ये एक वैम्पायर है इस्पे उस मैजिक का इतना असर हुआ hai...socho कोई नार्मल इंसान होता तो क्या hota....Jwala के कबीले में खार pahuchao.....Earth पे हर एक मूवमेंट पे नज़र रखनी होगी...

मैं - क्या इतना खतरनाक है ये...

ध्रुव - वो तुम्हे पता चल jaayega...abhi जो कहा है वो karo....aur अब हाथ हटा lo....ab कुछ नहीं दिखने wala..sab मिट चूका है..

मैंने अपना हाथ हटाया और वापस से अपनी बॉडी में आ gaya....waha देखा तो दब बेहोश पड़ा हुआ था....

मैं - इसको क्या hua...ye बेहोश कैसे...

ध्रुव - ये पागल हो गया tha...ajeeb अजीब हरकलातें करने लगा तो मैंने इसको बेहोश कर diya....chinta मत karo...maine जो भी किया इसको याद भी नहीं होगा...

मैं - पर ऐसा क्यों kiya..dost है वो मेरा....

ध्रुव - ये भी दोस hai...hmm ठीक hai...ye जल्द hi ठीक hoga....waise एक बात batao...Doston के लिए क्या क्या कर सकते हो...

मैं - पहले कोई दोस्त नहीं था mera...haa दो थे मेरे साथ में बैठा करते the...par वो दोस्त नहीं the..main hi बात नहीं करता था unse...Master ने कहा था किसी से कोई लगाओ मत rakho....bas issiliye...par ये सब यहाँ पे दोस्त है मेरे और इनके लिए जो बन सके वो करूँगा मैं....

ध्रुव - पावर्स दे सकते हो क्या इनको...

मैं - हां क्यों nahi...powers में क्या hai...main दे सकता हु इनको...

ध्रुव - सोच लो...

मैं - मैंने कहा ना bas....dost और फॅमिली के लिए पावर्स क्या जान भी....

ध्रुव - हम्म चलो ठीक है इस बार सही है सब अभी तक...

मैं - क्या मतलब....

ध्रुव - कुछ नहीं बाद में पता चल jaayega....chalo अब ज्वाला के कबीले वालो को batao....unko बोलो यहाँ नज़र रखने के लिए...

मैं - हम्म ठीक है...

मैंने ज्वाला को याद किया और मेरे सामने वाले दीवार पे कही से आग लग gayi...aur वो एक गोल घेरे में बदल gayi...wo एक दरवाजा tha...Jwala के दुनिया में जाने का....

मैं उससे होक गया उसकी दुनिया में....

ज्वाला - मालिक बताइये क्या काम है...

मैं - काम कोई नहीं है मैं तो बस मिलने आया था तुमसे....

मेरी बात सुन के ज्वाला खुश हो गया...

ज्वाला - हां सब सही hai...yaha आपके आने के बाद से हम सब को हमारी ताकतें वापस मिलने लगी hai...ab बस कुछ और दिन और हम बिलकुल तैयार होंगे....

मैं - तैयार किस लिए....

ज्वाला - युद्ध के liye.....Polar बेयर के कबीले वालो ने हमे हरा दिया था पिछली बार और फिर humpe....par इस बार ऐसा नहीं hoga...iss बार हममे हमारे मालिक मिल चुके hai..iss बार वो हमारे कब्जे में होंगे...

मैं - एक मिनट ये पोलर बेयर कबीला क्या hai..aur ये हो क्या रहा है...

ध्रुव - फायर एंड ice....yahi हो रहा है yaha...dono hi एक दूसरे से लड़ते रहते hai...agar ये दोनों एक hue...to क्या कुछ नहीं हो सकता....

मैं - पर लड़ते क्यों है....

ध्रुव - मुझसे क्या पूछ रहे ho...isse puccho...inn सब ने ना जाने क्या कुछ नहीं किया hai.....shuru ये एक खेल की तरह किया गया और फिर आज जुंग में बदल गया है.... मेरा बस चलता तो इन् सब को यही मार deta...inn दोनों कबीलों की वजाहब से बहुत नुकशान होता है,,,,

मैं - नुकशान ,...पर कैसे kya..baat कर रहे हो tum...kuch समझ में आये ऐसे कहो....

ध्रुव - अभी शुरू किया तो बहुइट वक़्त लग्न hai...abhi के लिए मन्ना कर दो इसको....

मैं - हां वैसे लड़ाई मुझे भी पसंद नहीं hai...jab बातें कर के सब सुलझने की गुंजाइश हो तब तक लड़ाई नहीं करनी chahiye....par अगर सामने से hi कोई वार करे तो रुकना नहीं चाहिए बातों के लिए उनको सबक सीखना चाहिए....

मैं - ज्वाला जब तक पोलर बेयर कबीला हमला ना करे तब तक कुछ नहीं करोगे तुम सब....

ज्वाला - Par...theek है maalik...aur माफ़ करे मुझे मैंने पर सबद का इस्तेमाल किया....

मैं - अरे नहीं नहीं ऐसा मत kaho...tum सवाल कर सकते ho...main खुद करता रहता hu......aur ये मालिक मालिक कहना बंद karo...mera नाम प्रतीक hai...wahi बुलाया करो...

ज्वाला - नहीं हम कभी भी अपने मालिक को नाम से नहीं बुला sakte...ye नियम है...

मैं - हां पर वो तो सिर्फ मालिक के लिए ना और हम तो दोस्त है ना तो तुम मुझे मेरे नाम से hi bulaoge..aur अब इस टॉपिक को यही ख़तम करते है...

ज्वाला - जी...

मैं - अच्छा हां एक बात sunno...Earth पे कुछ गड़बड़ चल रही hai...tum बस अपने लोगो को नज़र रखने को बोलो वह पे....

ज्वाला - जी ठीक hai...main सबको खबर कर दूंगा....

मैं - हम्म ठीक hai...chalo मैं चलता हु...

फिर क्या था मैं वह से निकल गया par...par जैसे hi वापस से उसी रूम में pahucha...aur वह की घडी देखि तो चौंक gaya....maine लगभग सारे क्लासेज मिस कर लिए the....saare मतलब saare...Bua की क्लास भी अब लगभग से ख़तम होने को thi....saamne देखा तो दब अभी भी पड़ा हुआ था वैसे hi....

मैं रूम से बहार देखने laga./..Kavita मैडम ko....ki उनसे पुछु अभी तक ये उठा क्यों नहीं...

अभी बहार देख hi रहा था की वो सामने से आते हुए दिखी मुझे...

मैं - ये अभी तक ऐसे hi है...

कविता - नहीं इसको कब का होश आ गया hai...ye तुम्हे धुंध रहा था तुम मिले नहीं तो यही पे सो गया है ye...isko कमजोरी सी लग रही थी....

ये कमजोरी वाली बात बोलते हुए कविता मैडम थोड़ा स्माइल कर रही thi...matlab ये पकड़ा आया hai...natak भी नहीं होता इससे तो...

इतना बोल के वो चली gayi....wo कही और hi जा रही थी वो तो मैं आ गया था यहाँ इस्सलिये बोलै उन्होंने...

मैं गया उसके पसस और उसके ऊपर पानी दाल diya...wo छटपटाते हुए उठा...

मैं - अब ठीक है छूट...

दब - हां ठीक hai...waise क्यों किया था iasa....class नहीं करना था तो m,ujhe बताता मैं इससे भी अच्छे अच्छे बहाने बनता hu...aur उनमे यहाँ बंद भी नहीं रहना पड़ता hai...hum दोनों घूमने जा सकते the....par तुम तो...

मैं - हम्म ठीक है अगली बार तुमसे पूछ लूंगा...

बुआ - क्या पूछ loge.....Tum कहा the...classes बंक क्यों हुए,,...

दब - वो प्रोफ. ये मेरे पास था ना...

बुआ - एल्फ प्रिंस आप शांत rahe...aur अब आराम kare...waise अब छूट ठीक है naa...agar हां तो अपने रूम में जाए आपके लिए और आपके लिए भी वह पे एक्स्ट्रा असाइनमेंट्स रखे हुए hai...dono को कल तक सब सबमिट करना है....

बुआ की बात सुन के तो दब के होश hi उड़द gaye...wo बस मुझे देखे जा रहा tha..wahi हाल कुछ मेरा भी था मैं बुआ को देखे जा रहा था....

बुआ - देखना हो gaya...chalo अब niklo..jaldi से काम पे lago...aur हां गार कम्पलीट नहीं हुआ ना तो कल इससे 4 गुणा ज्यादा असाइनमेंट दिया जाएगा

दब - यस प्रोफ.

इतना बोल वो बहुत तेज़ी से वह से भगा...

बुआ - कहा छूट लगी थी इसको.... :सिघ: बच्चू वो बहुत बड़े लोग hai....aur हम मध्यम क्लास में आते hai...upar से तुम्हारे पास अभी ज्यादा मैजिकल पावर्स या बाकी की चीज़ें नहीं hai...tumhe सब पे ध्यान देना hoga...samajh रहे हो ना...

मैं - हां नए समझ gaya..mujhe पढ़ाई पे ध्यान देना होगा...

बुआ - हां सच्ची samjhe....ab आज जाओ और वो सब कम्पलीट karo...aur ये प्रोफ. नमन तुम्हे धुंध रहे the...kuch हुआ है क्या...

मैं - नहीं वो बस ऐसे hi पूछ रहे honge..app चिंता मत करो मैं मिल लूंगा उनसे...

मैं वह से nikla..aur पहुंच gaya..room mein...Waha पे शुरू हो गया उन् ास्सणगमेंट्स को कम्पलीट करने mein....thodi देर में मैं वह से डिनर के लिए निकला वह पे दब भी मिला वो बात नहीं कर रहा था... :lol: बेचारा मेरी वजह से वो भी फास गया...

वह से जल्दी हु हम रूम्स में गए और वापस से शुरू कर दिया काम...

मैंने लेट नाईट तक सब कम्पलीट किया और फिर सोने के लिए बीएड pe...waha लेता तो पहुंच गया उसी जगह उन् ड्रैगन्स के pass....aaj दोनों यहाँ वह दौड़ रहे थे बस.....

ध्रुव - तो कैसे हो janab.....haath तो दर्द कर रहा होगा ना...

मैं - हां थोड़ा bahut...par ये सुबह तक ठीक हो जाएगा...

ध्रुव - हां पता hai...accha चलो पहले बुलाओ दोनों को....

मैंने भी सेठी बजायी और वो दोनों जो यहाँ वह दौड़े जा रहे the...wo सीधा मेरे पास आए गए......

मैं भी झुक के ीउसके पास गया और उनके साथ कुछ खेला....

ध्रुव - नाम भी देना है इनको...

मैं - हम्म तो इस वाले का naam(ye देखने में थोड़ा सा ग्रीनिश टाइप tha....sharir पे बहुत जगह गोल्डन कलर के पैचेज बने हुए थे....) इसका नाम कूपर रखते hai.....aur दूसरे वाले ka..(wo देखने में थोड़ा वॉइलेट टाइप दिख रहा tha...aur बॉडी pe...chamkile ब्लैक कलर के पैचेज थे....) Albus....Thik है ना ये नाम....

ध्रुव कुछ बोलै hi nahi...wo बिलकुल चुप रहा....

मैं - Dhruv...yahi हो ना,..

मैंने अभी इतना hi बोलै था की किसी के छीलने की आवाज आयी और मैं वह से wapas..apne बीएड पे tha....Raat का वक़्त tha...room में बने हुए वो ड्रॉइंग्स वो आज बहुत hi अजीब तरह से चमक रहे the....unme से पता नहीं बहुत अजीब सी रौशनी आ रही thi...par...main उनके बारे में कुछ सोचु उससे पहले hi वापस से आँख लग गयी मेरी..

आज के लिए इतना hi और अगली अपडेट में देखते है आखिर हुआ kya..aur ये आवाज किसकी थी और वो उन् ड्रॉइंग्स का चमकना वो किस वजह से tha.....saath में दब को पता chalega...Nikita के जख्मी होने का...

बनने रहिये....

(नोट- टाइम सच में काम मिल रहा है अभी इसी वजह से दूसरे स्टोरी पे 2 उपदटेस मिस हुए hai...wo भी कंटिन्यू hi honge...kal उसमे अपडेट आ जाएगा)
 
अपडेट - 25

अब तक

एक नए कबीले का पता chala...Polar बेयर कबीला जो हमेशा से दुश्मन रहा hai...Jwala के कबीले ka....abhi ज्वाला उसी से लड़ने की प्लानिंग कर रहा था पर मैंने उसको रोक diya...Dhruv के कहने pe...waha से आने के बाद मैंने दोनों ड्रैगन्स को उनके नाम diye....Ek अलबूस और दूसरा Cooper...ye नाम hi तो दिया था maine...aur उसके बाद पता नहीं क्या हुआ ध्रुव ने मेरे सवालों का जवाब नहीं diya...aur फिर ाकनक से किसी के चिल्लाने की आवाज आयी और मैं जाग gaya...jab जाएगा तो आज साफ़ साफ़ देख सालकता था की वो ड्रॉइंग्स वो दसिग्नस बहुत ज्यादा चमक रही thi....par वो bed....wo भी काम नहीं tha.....main देख hi तो रहा था unko....ki नींद वापस से आ गयी और वो सब भूल के मैं सो गया....

अब आगे

जब मेरी आँख खुली तो लेट हो चूका tha...karib 5 बजने को the...main जल्दी से रेडी हुआ और ध्यान लगाने के लिए चला gaya....waha पे बुआ भी नहीं आयी थी abhi...sayad बिजी हो kahi....main ध्यान में बैठ gaya...aankhen बंद करते hi...wo दोनों द्रग्गोंस दिखे mujhe.....jo ऐसे hi खेल रहे थे...

मैं - Albus....Coooper यहाँ आओ दोनों....

मेरे कहने पे वो दोनों मेरे पास aaye...aur मुझे गर्दन ऊपर निच्चे कर के देखने lage....the बड़े प्यारे ये दोनों....

ध्रुव - ये naam...yahoi नाम क्यों रखा तुमने

मैं - क्यों रखा ???? पता nahi...mere दिम्माग में यही नाम आया तो मैंने रख diya...par क्या हुआ....

ध्रुव - नहीं कुछ nahi...wo तो मैं बस ऐसे hi...accha वो छोड़ो अब इन् दोनों को ट्रैन भी करना है साथ में तुम्हे bhi....to आज हम तलवार चलने की वो कल्ला सीखेंगे जो सायद अब किसी को पता nahi.......last टाइम इस आर्ट को एअर्थ पे hi देखा गया tha...baaki जगहों पे लोग इस ारतको भूलते जा रहे the...par यहाँ थे कुछ लोग जो उसे करते थे इस आर्ट को....

मैं - हम्म ठीक hai.....to मुझे क्या करना होगा...

ध्रुव - जाओ तलवार उठाओ...

मैं भी अपने तलवार क्क सोचा और वो मेरे हाथ में आ गया...

ध्रुव - हम्म बहुत accha....tumhe याद है की यहाँ जो भी चाहिए उसके बारे में सोचो और वो आ jaayega...ab ध्यान से sunno....yaha पे कोई और आने वाला है जो तुम्हे sikhayega.....woart...yahi वो लास्ट थे जिन्होंने इस आर्ट का उसे किया tha..aur सायद ये सब जानते है इसके बारे में.....

मैं - कोण आ रहा hai...aur यहाँ कैसे हां सकता है वो,....

ध्रुव - कोण आ रहा है ये मैं नहीं बता पाऊंगा और तुम्हे भी कहना चाहूंगा उसका नाम उससे ना hi पूछो तो सही hoga....aur उसके बारे में जान्ने की कोशिश करना बेकार hai...wo bahut...chalo छोड़ो जाने do...jaise hi वो आये वो टेस्ट लेगा तुम्हारा...

मैं - एक मिनट ट्रेनिंग तो रात को होती है naa..fir...

ध्रुव - मैं बतलाने आया था तुम्हे bas...aur हां अभी थंडर एलिमेंट को कण्ट्रोल karo...aur उसको और मजबूत बनाओ...

मैं - हम्म ठीक hai...waise कल कुछ हुआ था क्या saayad...mujhe याद नाहुई इन् दोनों के नाम रखने के बाद में कब वह से आया और आअज तो लेट उठा भी...

ध्रुव - नहीं कुछ नहीं हुआ था बस एक बात मेरी कभी मत bhulna....hamesha अपंने hi रूम में सोया karo...wo भी akele...jab तक 21 के ना हो जाते तुम....

मैं - हां वही तो करता हु main...aur मेरे रूम में मेरे अलावा कोण सोने आएगा....

ध्रुव - जब तक तुम चाहो कोई नहीं aayega..par तुम्हारे बुलाने पे वह कोई भी आ सकता hai....par किसी को बुलाना मत.....

मैं - यार बड़े अजीब हो तुम...

मैंने इतना hi तो बोलै था की सब कुछ वापस से चेंज हो गया और मेरी आँखों के सामने वही सब आ गया वो एनर्जी बॉल जिसको मैंने फिक्स किया था साथ में और भी बहुत सारे बॉल्स ज आस पास उछाल रहे the.....Main लग गया उनको एक करने mein...aaj 2 बॉल को उसमे मैं आत्ताच कर paaya...aur फिर उठा तो बिलकुल पसीने से भीगा hua...main जल्दी से रूम में गया खुद को फ्रेश किया और निकल gaya...breakfast के लिए....

रूम से निकला तो वही अपना दब खड़ा था नोटिस बोर्ड के pass....waha पे वो उसको देख रहा tha...akela था वो...

मैं - क्या हुआ क्या देख रहे हो.....

दब - नहीं बस ऐसे hi सोच रहा tha...yaha आने के बाद बहुत कुछ बदल गया hai...kaha स्ट्रेंज वर्ल्ड में main..Rajkumar tha...sab मुझे रेस्पेक्ट देते the....par यहाँ तो जब भी कोई मुझे एल्फ प्रिंस कहता है वो एक तन्ना सा लगता है......

मैं - क्या बातें कर रहा है कुछ हुआ है क्या....

दब - नहीं मैं बाद में bataunga..chal ब्रेकफास्ट करते है फिर क्लास में भी जाना है....

मैं - हां चलो...

हम दोनों वह से ब्रेकफास्ट के लिए चले गए....

दब ने ध्यान दिया की कल भी निकिता नहीं आयी thi...sirf यहाँ hi नहीं वो तो दिखी hi नहीं दिन bhar...aur आज भी नहीं hai.....issi में उसको कुछ गड़बड़ लगी....

दब - ुये सुन वो निकिता दिख नहीं रही है....

मैं खाना खा रहा था मुँह में निवाला था तो बस हां में गर्दन हिल्ला दी...

दब - कल भी नहीं थी wo...kahi वो पंकज..

मैं - अरे गयी होगी सायद घर pe...(pata तो था मुझे पर मैंने नहीं बताया पता नहीं क्यों...)

दब - Nahi,,,,mujhe नहीं लगता कही wo...usko भी पंकज ने ो nahi...yaad है उस दिन उन् दोनों को बचने में उसने hi मदद की थी hamari...sayad ये सब वही कर रहे ho....usko भी गायब कर दिउया ho...mmujhe लगता है हममे पता करना चाहिए...

मैं - अरे नहीं तुम ज्यादा सोच रहे हो उसको वो सब कुछ नहीं कर सकते याद है ना वो तुम्हारे सम्मोहन वाली शक्ति से भी बच गयी थी...

दब - हां याद hai...par.....main जा रहा हु उसके बारे में पता करने ko...tumhe चलना है तो बोलो...

मैं जानता था वो कहा है किस हालत में है पर उसके बारे में अगर इसको बताया और ये जाके बुआ या कविता मैडम से puchega...to घूम फिर के सवाल मेरे ऊपर aayegne...aur फिर मैं कैसे सब हैंडल करूँगा ये मैं समझ नहीं पा रह था बस इसी वजहः से मैं इसको बता नहीं रहा था par...iske साथ जाने में कोई दिक्कत नहीं hai,,,upar से बहुत से सवाल मेरे मान में चल रहे the...jo निकिता hi बता सकती thi...jo उसके ही लाइफ से जुड़ी हुई थी..

मैं - हम्म चलो मैं भी आता hu....par जल्दी करना hoga...kal भी क्लासेज मिस किये है

दब - हां ठीक है chalo...par पहले कहा चलना है...

मैं - (मान में ) बिन्ना कुछ पता किये hi ये बातें बोल देता है... :सिघ: इसको ये तक पता नहीं उसके बारे में जाने के लिए कहा जान होगा....

मैं - दब वो कविता मैडम के पास चलते है ना वो बोल रही थी ना उस दिन की निकिता उनके पास आती रहती hai.....to सायद उनको पता हो...

दब - Haa...sahi kaha...Madam सायद हेल्प कर दे hamari...chalo जल्दी से...

हम दोनों निकल पड़े उनके पास जाने के liye...Par रास्ते में hi हममे प्रोफ. सूरज मिल गए...

प्रोफ. सूरज - आप दोनों अभी यहाँ क्यों घूम रहे hai...class के लिए जान है ना....

दब - हम वही आ रहे है वो bas...hamara एक फ्रेंड यहाँ एडमिट है उसको देखने जा रहे है...

प्रोफ. सूरज - निकिता की बात कर रहे है आप एल्फ Prince...abhi वो बेहोश है पर चिंता की बात नहीं शाम तक सही हो जायेगी तब मिल लेना अभी चलिए क्लास mein.....warna आपको तो पता hai....main क्या करूँगा....1 दिन बंक kiya....to मैंने कुछ नहीं किआ पर अब अगर आज भी बंक करोगे to...mujhe कुछ करना hoga...aur aap...kya नाम था आपका....

मैं - प्रतीक....

प्रोफ. सूरज - हां तो पैट्रिक आप इनसे कुछ दूर hi रहे तो अच्छा hai.....ye कुछ ज्यादा hi एक्टिव है...

मैं - प्रोफ. पैट्रिक नहीं Prateek...aur हम दोस्त है तो दूर रहने की बात नहीं jamegi....par मैं ध्यान रखूँगा...

प्रोफ. सूरज मेरी बात सुनने के बाद एक बार ऊपर आसमान की ओर देखा और फिर वह से कुछ गुनगुनाते हुए चले gaye...kuch अजीब तरह से चल रहे थे वो जैसे चोट लगी हो उनको...

मैं - ये अजीब tha..(aasman की ओर देखते हुए)

दब - तुमने सुन्ना निकिता एडमिट है ander...matlab समझे...

मैं - सायद कोई प्रॉब्लम होगी usko...tabhi और किस लिए..

दब - हां कोई प्रॉब्लम होगी पर kya....Main जा रहा हु ander...mujhe नहीं जान क्लास में...

मैं - अरे वो प्रोफ. तो बोल रहे थे वो कुछ करेंगे...

दब - जो करना है करने दो उसको मैं पापा से खुद बात कर lunga...ab चलो bhi...waha पता नहीं निकिता को क्या हुआ है...

मैं - हां चलो...

और हम दोनों अंदर चले gaye...waha पहले hi कविता मैडम मिल gayi..humme देख के मुस्कुराते हुए...

कविता - आज किसकी बारी है...

मैं - बारी..????

कविता - ू रहे मेरा मतलब था आज किसको क्या हुआ है...

दब - निकिता क्यों एडमिट है yaha...kya हुआ है उसको...

कविता मैडम जो अभी एकदम से कूल लग रही थी निकिता का नाम सुनके वो कुछ अजीब तरह से हममे देखने लगी...

कविता - निकिता यहाँ है ऐसा किसने कह दिया...

दब - प्रोफ. सूरज ने अभी कहा unhine.....ab आप बताइये उसको क्या हुआ hai...wo ठीक है ना हम उससे मिल सकते है ना...

कविता - रुको रुको एल्फ प्रिंस थोड़ा शांत हो jaao...aur मेरी बात सुनने...

दब - जी ोलिये...

कविता - हम्म देखो उसको कुछ प्रॉब्लम हो गयी थी इसलिए यहाँ आयी wo...aur अब वो ठीक है बस बेहोशी की दवा दी है उसको ताकि आराम कर सक्के और कोई बात नहीं hai...aur उससे मिलना है तो वो तो शाम को hi hoga...aur कल तक वो उयहा से निकल jaayegi...apne क्लासेज में ध्यान देगी...

मैं - प्रोफ. सूरज उससे मिलने आये थे क्या...

मेरी बात sunke...Kavita मैडम भी कुछ सोचने लगी....

कविता - तुम दोनों जाओ शमाम में मैं खुद बुल्ला lungi....par एक बात ध्यान रहजे इस बारे में किसी को कुछ पता ना चले...

दब - par..kyun..

मैं - जी ठीक है हम जाते ही...

और मैंने दब को पदक और उसको वह से बहार लेके आ गया....

दब - ये सब उसी पंकज ने किया hai...hamari वजह से हुआ हिअ निकिता का ये haal....naa वो मदद करती हमारी और ना ये सब,,,

मैं - आराम से दब अभी क्लास में चलते hai...Kavita मैडम देख लेगी ये सब....

हम दोनों बातें hi कर रहे थे की बुआ को देखा मैं वह जाते hue.....wo कुछ परेशां लग रही थी....

मैं - ध्रुव बॉडी सम्भालो meri.....aur सीधा क्लास में जाओ इसके साथ सायद कुछ गड़बड़ है मैं देख के आता हु...

ध्रुव - हम्म ठीक hai....agar कुछ हो तो बता देना....

मैं - ठीक है...

इतना बोलने के बाद में अपने बॉडी से निकल गया और बुआ के पीछे चला gaya....jab अंदर पंहुचा to...Kavita मैडम भी वह पे नहीं थी जहा वो इससे पहले कड़ी thi....Wahi बुआ उसी दीवार के पास गयी जहा से कल मैं निकिता तक पंहुचा था...

मैं भी उनके साथ वह से चला gaya...Nikita वाले रूम में पंहुचा तो कविता मैडम उसको चेक कर रही थी....

बुआ - सूरज को कैसे पता चला निकिता के यहाँ होने का....

कविता - पूनम मुझे लगा टुन्ने बताया होगा...

बुआ - नहीं मैं क्यों bataungi,...humne तय किया था ना की किसी को नहीं batayenge...to फिर उसको पता कैसे chala...aur तुझे कैसे पता चला की उसको पता है...

कविता मैडम ने बुआ को सब कुछ बताया...

बुआ - इस सूरज को पता कैसे chala...accha इसको चेक किया सब सही है ना...

कविता - हां सब सही है...

कविता मैडम ने ऐसा कह तो दिया पर मुझे नहीं लग रहा था सब सही hai...aur इसी लिए मैं निकिता के बॉडी के पास गया और उसको देखने laga....jaise hi मैंने उसके सर को टच kiya....main कही और पहुंच gaya...ye कोई किल्ला था बहियत बड़ा killa....aur अभी मैं उस किल्ले के गेट पे खड़ा tha...bahut hi बड़ा गेट था ये...

मैं - ध्रुव ये क्या hai...ye कोण सी जगह है...

ध्रुव - ये क्या hua...kon इसके साथ ऐसा करेगा....

मैं - हुआ क्या है और ये जगह क्या hai..batao मुझे सब...

ध्रुव - निकिता की आत्मा को उसके बॉडी के अंदर hi इसी किल्ले में बंद कर दिया है किसी ne...par ये क्यों करेगा कोई....

मैं - क्या matlab...main कुछ समझा नहीं....

ध्रुव - कोमा के बारे में सुन्न है ,,,ना ये कुछ कुछ उसी तरह का hai...kisi ने निकिता को कोमा में दाल दिया hai...par क्यों करेगा कोई aisa....ab ऐसा करने के बाद अगर कोई नार्मल तरीके से निकिता को चेक करे तो वो यही कहेगा वो ठीक है पर एक्चुअल में वो ठीक नहीं होगी...

मैं - तो कैसे ठीक करना होगा निकिता को...

ध्रुव - इसी किल्ले में जाके उसके आत्मा को ढूंढ़ना hoga...par ये आसान नहीं होने वाला hai...yaha पे बहुत से जाल honge...jinko नाकाम करना होगा...

मैं - हम्म और बताओ कुछ...

ध्रुव - समझ नहीं रहे तुम यहाँ पे बहुत से जाल honge...aise जाल जो तुम्हे भी इसी जगह पे कैद कर सकते है...

मैं - ठीक hai...accha तो मुझे अगर निकिता को बचाना है तो उसको धुन्ध्दना है बस यही naa...main तैयार हु...

ध्रुव - अरे सुन तो lo...aisa नहीं hota....ab सुनने ध्यान se...Nikita यहाँ पे कैद hai...ye उसको खुद पता नहीं hoga...uske हिसाब से यहाँ पे सब सही hai..aur वो यही रहना chahegi...ab ये तुमपे होगा की कैसे उसको मानते हो की ये सब नकली है और उसको यहाँ से बहार ले जाते हो...

मैं - पर मैं ये कैसे करूँगा...

ध्रुव - वही तो कह रहा hu...ye सब करने के लिए पहले तो निकिता के बारे में सब जानना होगा naa...jo पता नहीं है तुम्हे..

मैं - तो कहा से पता करना है मुझे...

ध्रुव - अब ये कहा से बताऊँ mein...ye तो निकिता को hi पता होगा...

मैं - अरे कंफ्यूज ना करो...

ध्रुव - ठीक है तो फिर सुनने अंदर jao...Nikita को dhundo..aur उससे पता करो की उसकी वो खास चीज़ कहा है...

मैं - अब ये क्या है कोण सी खास चीज़ के बारे में बात कर रहे हो अब...

ध्रुव - खास चीज़ का मतलब वो चीज़ जिसमे निकिता की साड़ी यादें है...

मैं - पर उसने तो सब बदल दिया था ना और कोई मेमोरी लॉक ये सब किया था ना...

ध्रुव - हां किया था इसी लिए तो उस खास चीज़ के बारे में बता रहा hu...uske अंदर वो साड़ी मेमोरोएस ोगी uski....aur जो मेमोरी लॉक का है वो तुम्हे रोकेंगे वह तक जाने mein...wo लॉक्स अपना रूप बदल के आ सकते है किसिस भी रूप mein...par तुम्हे बस उस खास चीज़ तक पहुंचना है और फिर उससे निकिता के बारे में वो सब जाना है जो वो बताना चाहे या ना chahe...fir उन्ही यादों के बल पे उसको याक्किन दिलाओ की वो यहाँ फास्सी हुई hai...jaise hi उसको यकीन होगा वो खुद बहार निकल जायेगी..

मैं - मतलब मुझे एक ख़ास चीज़ का पता लगाना है निकिता से फिर उस चीज़ से उसकी मेमोरी निकालनी है और फिर निकिता को यहाँ से निकलना है...

ध्रुव - हां वही करना hai...ab सुनने इस गेट से उस तरफ जाने के बाद मेरा तुमसे सायद hi कनेक्शन ho....par मैं तरय करता rahunga....abhi के लिए तुम ज्वाला को यहाँ बुला lo...wo भी तुम्हारे साथ jaayega...wo रक्षा करेगा तुम्हारा...

मैं - मैं खुद देख लूंगा सब कुछ...

ध्रुव - हां देख maine...chup चाप से ज्वाला को bulao....wo साथ होगा tumhare...Albus और कूपर को भी मैं रेडी रखता hu/...agar कुछ जररत पड़े तो बुल्ला लेना उनको भी...

मैं - वो तो बच्चे है...

ध्रुव - बच्चे है पर अगर अभी भी उनका उसे सही से किया तो इस जगह से एक सेकंड में निकल लोगे तुम log..samjh...aur हां टाइम की चिंता मत karna....waha 100 साल भी गुजर लोगे तब भी यहाँ उसी समय में रहिओगे जब यहाँ से अंदर गए थे...

मैं - क्या...

ध्रुव - हां चलो अब बुलाओ ज्वाला को...

मैं - ज्वाला...

मेरा बोलना था की वह पे वो एक जगह आग लग gayi..aur वो आग गोल घेरे में बदल gayi..aur वही गोल घेरे से निकला Jwala...par इसने कवच पेचेन रखा था सर पे मुकुट था इसके....

मैं - ये सब क्या है ज्वाला...

ज्वाला - वो मैं तरय कर रहा था इन् सब ko..aur आपने बुला liya...bataiye क्या बाटत है...

मैंने ज्वाला को सब समझाया और उसने वो दरवाजा बंद कर diya,.....aur खुद को 10 छोटे छोटे चील में बदल दिया....

मैं - ये क्या है..

ज्वाला - इससे काम आसान hoga....main हर तरागफ नज़र रख lunga,...ab चलिए आपके दोस्त को बचते है...

मैं - हां chalo...aur अंदर जाने से पहले मैंने अपना वही ईगल वाला शील्ड लिया और साथ में अपनी talwar....Tunder एलिमेंट मिलने के बाद से क्लास में गया hi नहीं था की मैं ले पता वो नयी shield.....to अभी इसी से काम चलनी thi....Dhruv ने भी कुछ नहीं बोलै..

मैंने गेट पे एक लात मारी और गेट खुल गया और मैं और Jwala....joki अभी 10 चील में बदल गया था वो चल दिए अंदर.....

एक चील मेरे पास था वही बाकी के saare..uss किल्ले के चारो ओर उड़ने lage....aur वह के बारे में पता करने लगे...

मैं अंदर जा रहा था पर पता नहीं क्यों दिम्माग में उस प्रोफ. सूरज के बारे में ख्याल आ रहे थे....

मैं - ध्रुव प्रोफ. पे नज़र रखो...

पर हमारा कनेक्शन टूट चूका था तो सायद उसको मेरी बात सुनाई नहीं दी...

मैं - Jwala..maine कहा था तुमसे एअर्थ पे नज़र रखने को कुछ पता चला kya...kuch भी अजीब ...

ज्वाला - प्रतीक अभी तो ज्यादा कुछ पता नहीं चल पाया hai....maar काट लड़ाई झगडे ये सब तो इन् इंसानो में लगा hi रहता है बस यही सब दिख रहा था और कोई खास बात नहीं...

मैं - कुछ भी अजीब दिखे तो तुतरंत खबर करना mujhe...accha एक काम कर सकते हो क्या मेरा....

ज्वाला - हां बेताओ..

मैं - प्रोफ. सूरज पे नज़र रखने के लिए किसी को bhejo...koi ऐसा जो एक्सपर्ट हो इन् चीज़ों में...

ज्वाला - एक्सपर्ट ho...hmm हो jaayega..par

मैं - क्या पर...

ज्वाला - वो मान तो jaayega..par ..आपको खुद hi उससे बात करनी chahiye....jab तक पिता जी the...tab तक तो वो हमारी हर एक बात मंटा tha....par उनके जाने के बाद से ये बदल गया है...

मैं - किसकी बात कर रहे हो...

ज्वाला - मैं ओल्ड आउल की बात कर रहा hu...usne कसम खायी थी की वो हमारे कबीले का वफादार hoga...aur उसके बदले हम उसके लोगो की रक्षा karenge...par कुछ करने की वजह से हमारे बिच कुछ कन्फूशन्स आ गयी hai...Pita जी थे तो वो ये सब हैंडल कर रहे the..par मेरे कबीले के ऑर्डर बने के बाद से वो एक बार भी नहीं आया है...

मैं - हम्म ठीक है मैं बात करूँगा usse...par अभी के लिए बस उसको खबर पहुचाओ की वो प्रोफ. सूरज पे नज़र रखे,....

ज्वाला - हम्म ठीक है मैं देखता हु...

मैं - और अपनी पावर्स बढ़ाओ yaar..kya एक बुद्धा उल्लू भी नहीं संभल रहा है तुमसे...

ज्वाला - हां मैं कोशिश कर रहा हु...

हम दोनों ऐसे hi बातें करैत हुए उस किल्ले में एंटर हुए...

आज के लिए इतना hi अब आगे देखते है किल्ले में क्या होता hai...sath में निकिता के पास्ट के बारे में भी जानेगे..

बनने रहिये
 
अपडेट - 26

अब तक.

मैं एक किल्ले के सामने खड़ा tha....aur ध्रुव के अनुशार इस किल्ले में निकिता के आत्मा को कैद कर दिया है किसी ne...aur मुझे उसको वह से निकलना hai...Dhruv के काने पे hi मैंने वह ज्वाला को भी बुला liya....aur तैयार होक चल दिय्या किल्ले के ander....waha ध्रुव ने बोलै था की हम कनेक्ट नहीं कर पाएंगे sayad...main फिर ज्वाला से बातें करते हुए अंदर आ गया..

अब आगे

ज्वाला - ओल्ड आउल को खबर पंहुचा दी है मैंने...

मैं - एक मिनट क्या तुम यहाँ से अपने कबीले के लोगो से कांटेक्ट कर सकते हो...

ज्वाला - हां मैं कर सकता hu...main कही से भी उन्हें कांटेक्ट कर सकता ह.....

वो बोलते बोलते रुक gaya....aur फिर मेरी ओर देखने लगा...

मैं - क्या हुआ...

ज्वाला - पता चल गया है उसका....

मैं - निकिता क्क पता चल गया बताओ कहा है वो...

ज्वाला - बताता हु पर उससे पहले इस किल्ले के बारे में जान लेते है ताकि कोई परशानी ना ho..to इसके अंदर 4 फ्लूओर hai...aur निकिता 3रद फ्लोर के 6तह रूम में hai...par वह जाना आसान नहीं hai...har एक फ्लोर पे कुछ ना कुछ मुसीबतें पैदा की हुई hai...jaise hi हम अंदर जाएंगे एक मिरर िल्लिओसिओन है वह pe....jaha पे हमे खुद के जैसे hi हज़ारो milenge....aur हममे उनको मारना hai...1st फ्लोर pe...paani hi पानी hai....agar ठीक से कहा जाए तो 1सत फ्लोर पे बाढ़ आयी हुई hai....aur हमारे कबीले में कहा जात्रा है पानी मतलब khatra...paani के अंदर क्या है ये पता नहीं चला है abhi...wahi उसके upar...uske ऊपर वाले फ्लोर पे है 5 सुनस illiusion...ye जिसने भी बनाया है वो बहुत hi ताकतवर hai...aur ना जाने कब से ब्लैक मैजिक को प्रैक्टिस कर रहा hai....ye 5 सुनस जो hai...unse कोई दिक्कत नहीं hai...dikkat ये है की वो ऐसे एंगल्स पे रखे है की हम जैसे hi उस फ्लोर पे जाएंगे हमारे शादौस बन jaayenge....shadows जो की एक हो सकते hai....agar वह से भी निकल गए तो हम pahuchenge...3rd फ्लोर pe....yaha सबसे ज्यादा खतरा hai...kyunki ये फ्लोर निकिता के कण्ट्रोल में hai...aur अभी जब हम वह जाएंगे तो उसके लिए घुसपैठिये honge,,,bin बुलाये log....jo किसी को पसंद नहीं तो वो जरूर हममे वह से भागने की कोशिश karegi...aur फोर्थ फ्लोर...

मैं - एक मिनट 4तह का क्यों बता रहे ho...waise भी काम तो 3रद तक का hi है ना तो उसको रहने देते hai.....ab चलो under...dekhte है क्या होता है अंदर....

ज्वाला - अगर आप चाहे तो मैं आपके अंदर...

मैं - Matlab...kya कहना चाहते तो...

ज्वाला - जी हमारे कबीले के लोगो में ऐसी पावर्स होती है जो अपंने मालिक के अंदर जाके उसके सोल से जुड़ सकते है इससे ना सिर्फ हम दोनों की ताकत बढ़ जाती है बल्कि और भी बहुत कुछ होता है...

मैं - बहुत कुछ का क्या मतलब है....

ज्वाला - बहुत कुछ का मतलब की अगर आपको कुछ हुआ तो मैं उसको खुद पे ले सकता हु ये सुरक्षा के लिए है aapke....aur मैं इस्पे कोई रिस्क नहीं लेना चाहता

मैंने मन्ना किया पर वो मान ेको तैयार hi नहीं tha....to हार के मुझे hi माना पड़ा

मैं - हां ठीक hai...chalo आ जाओ....

मेरा ऐसा कहना था की वो मेरे सर पे आके बैठ gaya...aur कुछ hi देर में उसके जो बाकी के चील थे जो किल्ले को देक्झ रहे थे वो भी आ गए मेरे upar...aur फिर एकदम से रोशनी हुई और जब मेरी आँखें खुली मैंने अपने हाथ देखे तो किसी बॉडी बिल्डर जैसे लग रहे the....ekdum से कम्मल ke...main खुद के बॉडी को hi देखता रहा...

ज्वाला - अब चलिए...

मैंने उसकी आवाज सुनी पर वो दिखा नहीं मुझे....

मैं - ज्वाला कहा हो तुम...

ज्वाला - आपके मुकुट में....

मैं - मुकुट...????

मैंने अपना हाथ अपने सर की ओर किया तो एक मुकुट जैसा कुछ था मेरे सर pe...aur उसमे बना हुआ था एक ईगल...

मैं - ये क्या है ज्वाला...

ज्वाला - ये मेरे मालिक का पहनावा hai..aur अब जब आप मेरे मालिक है तो ये आपका पहनावा है अब चलिए...

मैं भी चल दिया और दरवाजे पे जाके खड़ा hua.....darwaja खुद hi खुल gaya....ander बहुत hi अच्छा सा म्यूजिक चल रहा tha....slow music...main अंदर गया तो मेरे सामने एक मिरर आ gaya....ab मैं उसके बगल से जान ेको हुआ तो वह पे भी एक मिरर आ gaya...aur ऐसे करते करते वो जगह बन गयी मिरर वाली bhulbulaiya....main जहा भी जाता वह मिरर hi दीखता mujhe...main पूरा फास आया था यहाँ पे...

जब बहुत तरय करने के बाद भी मैं वह से निकल नहीं पा रहा tha...to ज्वाला से भी राय ली पर उसने भी यही कहा की वो भी ऐसी जगह पे पहले बार hi आया hai...haa उसने अपने पिता से सुना था ऐसी जगहों के बारे में इसीलिए उसको वह के बारे में कुछ बातें पता थी जो उसने पहले hi बता दी thi...ab बात आ गयी थी की आगे क्या करना है और कैसे करना है...

कुछ देर और सोचने पे भी जब कुछ समझ नहीं आया और ध्रुव से भी कोई कांटेक्ट नहीं हुआ तो मैंने एक मिरर को एक लात दे maari...jiske बाद वो मिरर hi टूट gaya...par...sirf वो मिरर hi नहीं टुटा बल्कि वह के जितने भी मिर्रोर्स थे वो सब भी टूट gaye....par..unke टूटने से पहले उसमे से मैं निकल रहा tha...matlab...waha पे जितने भी मिर्रोर्स होंगे उन् सब से मैं निकल रहा तह और उस मिरर को तोड़ रहा था...

मैं ये सब देख के दांग रह गया...

ज्वाला - अच्छा तो इस तरह से वो आते hai...maine ये पहले कभी नहीं सोचा था...

जब सारे मिर्रोर्स टूट गए तो वह पे मैं बिच में और मेरे अस्स पास पता नहीं कितने मेरे जैसे hi दिखने वाले लोग the....main उनको गईं भी नहीं सकता था इतना नंबर था उनका...

मैं - अब क्या करना है Jwala....pata है naa...ready रहो..

ज्वाला - हां बिलकुल...

मैं थोड़ा आगे बढ़ा तो वो सब भी आगे badhe...main थोड़ा पीछे बढ़ा तो वो सब भी पीछे hue....maine गौर किया की ये सब मेरे hi मूव्स को कॉपी कर रहे hai...ye इमेजेज वाली बार hai...bilkul वही wali...maine सोचा तो था की यहाँ पे लड़ाई करना hoga...par जब ये देखा तो समझ गया की ये सारे मेरे hi मूव्स कॉपी करेंगे तो इनसे जितने के लिए कोई और काम करना होगा...

मैं खड़ा खड़ा सोचने laga....aur जब मैं खड़ा तह ा तो वो सारे भी वैसे hi खड़े the...images जो थे मेरे जो ऑब्जेक्ट करेगा वही तो वो भी karengi...par सायद ये बातें ज्वाला को समझ में नहीं आ रही थी...

ज्वाला - ये क्या कर रहे ho...chalo उनको मारते है...

मैं - Rukko...ye ऐसे नहीं hoga....wo हमे hi कॉपी karenge...humko पहले उनकी कोई कमजोरी ढूंढनी hogi...ussi के बाद होगा kuch...ab वो मेरे इमेज है क्या मैं hi उनकी कमजोरी बन सकता हु...

मैंने ये ज्वाला को कहा और फिर खुद hi इसके बारे में सोचने लगा और कुछ hi देर में मैं समझ गया क्या करना hai...maine खुद को hi एक ग़ुस्सा मारा और जैसा की मैंने सोचा था उन् लोगो ने भी वही किया खुद को ग़ुस्सा मारा....

ज्वाल - ये क्या कर ेरहे ho...khud को मारने से क्या होगा...

मैंने उसको सामने देखने को bola....aur वो ये देख चौंक गया वह पे वो सारे hi खुद को मारे जा रहे थे...

ज्वाला - ये ये कैसे...

मैं - वो सब मेरे इमेजेज है ज्वाला मैं जो करूँगा वो वही करेंगे...

इतना बोल मैंने वापस से एक पंच मर्रा खुद को....

ज्वाला उनको देख रहा था...3 पंचेस के बाद ज्वाला को पता नहोइ क्युआ हुआ उसने मुझे रुकने को kaha....main भी रुक गया...

मैं - क्या हुआ ज्वाला..

ज्वाला - वो तुम्हारे इमेजेज hai...hai ना....

मैं - हां पहले hi बताया ना इसके बारे में...

ज्वाला - वो सब एक दूसरे के बहुत करीब है...

मैं - हां तो.....

मैं समझ गया ज्वाला क्या कहना चाहता है और मैं सोचने लगा ये बात मेरे दिम्माग में क्यों नहीं aayi...Maine अपमना एक हाथ हवा में kiya...aur उसको ऐसे hi घुमाया जैसे मैंने मेरे बगल वाले को तप्पड़ मार रहा hu...aur जो हुआ उसको देख के तो मज़ा hi आ gaya...wo सारे इमेजेज एक दूसरे को तपाद मैरने लगे... :lol:

मज़्ज़ा hi आ गया tha....ab वह पे स्लो म्यूजिक चल रहा था मेरे आस पास मेरे बहुत से इमेजेज खड़े the...maine सोचा क्यों आज थोड़ा तलवारबाजी की jaaye...maine अपना तलवार निकला और मेरे ऐसा करने के बाद मेरे इमेजेज ने भी ठीक वैसा hi kiya...fir क्या था मैं हवा में तलवार घुम्मा रहा था और वो लोगक दूसरे pe...aur ऐसे hi करते करते वह pe...bas और अस सीसे hi bacche..wo aise...ki जब भी कोई एक इमेज ख़तम होता तो उसके जगह पे वह पे सीसे के कुछ टुकड़े आ jaate....aur ऐसा करते करते वह पे बस वही सीसे के टुकड़े बच्चे...

मैं - सब khatam...pahla लेवल complete...chalo अब 2ंद लेवल पे चले ज्वाला..

ज्वाला - हां चलो...

हम सीढ़ियों से ऊपर जाने लगे पर तभी मुझे निच्चे कुछ dikha...ye एक हर्रे रंग का पाथेर tha...jo बहुत चमक रहा tha...baaki के सरे तो बस वो आईने के टुकड़े hi the...par ये हर्रा रंग का था और इस्पे मेरी नज़र पद गयी तो मैंने भी इसको उठा liya..aur इसको उठाते hi ये मेरे हाथ में गायब हो गया...

मैं - ये क्या था ज्वाला...

ज्वाला - पता nahi.....aisa मैंने कभी कुछ नहीं देखा है...

ध्रुव - उसको अपने पास rakho...aise hi तुम्हे यहाँ पे 4 और पाथेर milenge....unn सब को भी अपने पास रखना...

मैं - ध्रुव तुम सुन सकते हो क्या humme...sunno प्रोफ. सूरज मुझे कुछ अजीब से लग रहे है...

मैं बोलता गया पर कोई रिप्लाई नहीं आया मतलब साफ़ था कनेक्शन वापस से काट गया था....

मैं फिर वापस से ऊपर जाने laga...aur ऊपर पहुचे तो वो पूरा का पूरा पानी से भरा हुआ tha....par एक बात अजीब थी वो पानी श्रीदियों से निच्चे नहीं जा रही thi...kammal की बात थी ये...

मैं - ज्वाला इ पानी निच्चे क्यों नहीं जा रही है...

ज्वाला - इसको यहाँ पे बंधा गया hai...ye सीधी पे देख रहे हो ना यहाँ hi कोई मैजिक किया गया होगा जिसकी वजह से वो निचे नहीं जा रहा है...

मैं - हम्म समझ gaya...chalo अब हम ुओंपर से चलते है...

ज्वाला - ऊपर से का क्या मतलब है...

मैं - ऊपर से मतलब पानी के ऊपर se....kuch मैजिक मैंने भी सीखी है बस उसी का उसे करूँगा....

मैंने सोचा था की यहाँ के पानी को जम्मा दूंगा और फिर वह से आराम से निकल lunga...iske ऊपर वाले फ्लोर pe..par हमेशा ऐसा थोड़ी होता hai....maine तरय किया पानी को ज़माने ka...aur वो जैम भी gaya...aur मैं उसके ऊपर से वह से जाने laga...par ये ज्यादा देर नहीं chala...main थोड़ा hi तो आगे बढ़ा था की वह बर्फ में दरार आने लगा और मैं देखता hi रह गया और वो बर्फ की परत टूट गयी और मैं पानी के अंदर चला गया...

वो तो अच्छा था मैं तैरना जानता tha...par पानी बहुत ज्यादा ठंडा tha...itne ठन्डे पानी में तैरना बहुत मुश्किल tha...par सुकर था की ज्वाला मेरे साथ tha....usne अपने फायर के पावर को उसे किया और मेरे अस्सपस्स के पानी को गरम kiya...par सायद ये भी एक गलती hi थी....

कहते है पानी में रहने वाले जीवों को गर्मी अपनी ओर खिंच लाती hai....bas वही hua....wo मेरे पास आ gaye...wo मतलब jalpariyan...uss पानी के अंदर बहुत hi खूबसूरत जलपरियां thi....kisi का भी मान मोह ले ऐसी jalpariya...Jab वो मेरे पास आयी मैं तो बस देखता hi रह गया unko...main सब कुछ भूल गया मैं कहा hu..kya कर रहा hu...bas मेरे आँखों के सामने तो वो जलपरियां hi नज़र आ रही thi....aur उनकी khubsurati.....aur ये तब तक चला जबतक मेरी साँसे अटकने ना lagi.....maine एक दम से अपने चारो तरफ देखा तो मैं एकदम से अँधेरे में tha....Jwala मुझे आवाज दिए जा रहा tha.....bahar niklo....bahar niklo...par मैं सुन hi नहीं ोपा रहा tha....abhi मैं पानी के इतना निच्चे चला गया था की कुछ भी नहीं डीउख रहा था मुझे...

मैं जल्दी से ऊपर जाने की कोशिश करने लगा par....kisi ने मेरे पैरों को पकड़ के रखा tha....par अँधेरे की वजह से कुछ दिख नहीं रहा था मुझे.....

मैं - ज्वाला कुछ दिख नहीं रहा mujhe...kuch कारु...

मेरे कहने पे पता नहीं उसने क्या किया पर जो भी किया उससे मुझे दिखाई देने laga...aur मेरे सामने अभी कुछ बहुत hi दवनी और भड़ी सी मछलियां thi...jinhone मेरा पेअर पाकर रखा था और अब वो मुझे और निच्चे ले जा रही thi....par जब मुझे सब दिखने लगा maine...apni तलवार निकली और उनपे वार kiya...aur थोड़ी hi देर में मेरे आस पास का पानी pura...kala हो गया tha...haa इनका खून कला tha...main तुरंत ऊपर जाने laga...par..tabhi मुझे निच्चे कुछ लाल सा चमकता हुआ दिखाई diya...aur ध्रुव ने कहा था की यहाँ मुझे वो हर्रे पत्थर जैसे 4 और पाथेर milenge...jinko मुझे अपने पास रखना hai..maine भी उसको उठा liya..aur फिर ऊपर की ओर आने laga...bahut वक़्त लगा मुझे बहार आने में par..ek बात अजीब thi...main सांस कैसे ले पा रहा था ander...bahar आने के बाद मैं इस्पे सोचने लगा...

मैं - ज्वाला मैं पानी के अंदर साँस कैसे ले पा रहा था...

मैंने ये सवाल किया पर जवाब कुछ नहीं aaya...jwala कोई जवाब नहीं दे रहा tha...meri समझ में नहीं आ रह अतः ये क्या hua....fir मुझे याद आयी उसकी बात जो उसने मुझे कहा था की वो मेरे अंदर आ जाएगा तो मुझे जो भी होगा वो उसको रोक lega...sayad ये वही tha...sayad उसी की वजह से मैं सांस ले पा रहा था पानी के अंदर और अब वो कुछ बोल नहीं रहा tha...main बहुएत डर gaya....mere hi कारन उसके पिता की जान गयी thi...ab मैं उसको कुछ और होने का ज़िम्मा नहीं ले सकता था...

मैं उसको आवाज देता रहा par...koi जवाब नहीं आ रहा था....

ध्रुव - वो आराम कर रहा hai...tumhe इसके ऊपर खुद हिओ संभालना hoga...chinta मत करो वो ठीक है बस थोड़ी देर आराम करने दो उसको...

ध्रुव की ये बात सुन मैंने चैन की सांस li...nahi तो मेरे दिमाग में ना जाने क्या क्या चलने लगा था...

इस बार भी वही हुआ ध्रुव से भी मेरा कनेक्शन टूट गया बहुत hi jaldi...ab अगले फ्लोर पे 5 सुन illiusion...iske बारे में ज्यादा पता नहीं था mujhe...Jwala ने भी बस इतना hi बताया था की यहाँ 5 सुनस है जो ऐसे एंगल में है जिससे मेरे अंदर जाते hi वह मेरे कुछ शादौस बन जाएंगे और मुझे उनसे लग्न होगा...

Sun....angles बस यही बातें मेरे दिम्माग में चल रही thi....main नेक्स्ट फ्लोर पे चल diya...waha पंहुचा तो सीढ़ियों से ऊपर जाते hi एक दरवाजा मिल gaya...jisse होक hi उस फ्लोर पे जाय जा सकता tha...maine भी वही kiya...main गया वह दरवाजा खोला और ander...ander आते hi मुझे बहुत ज्यादा गर्मी लगने lagi....yaha सच में मेरे सर के उपदर 5 - 5 सुन the...aur उनकी garmi....bahut गरम माहौल था वह पे..

मैं अभी उस गर्मी के बारे में hi सोच रहा था की मेरे बगल में कुछ आ gaya...main वह मुद्दा तो एक काला सा साया था और उसने मुझे एक गुस्सा aara...aur मैं पीछे की ओर गिर gaya....waha से उठने लगा तो वह पे भी एक साया मिला जिसने मुझे maara...main ऐसे hi मार खता raha...naa जान एकिटने hi सकते वह पे आ गए the...aur वो सारे मुझे बस मारते जा रहे the...main जहा भी जाता वह पे एक साया आ जाता और वो मुझे एक ग़ुस्सा मार deta...main परेशां सा हो gaya....samajh में hi नहीं आ रहा था की करे तो करे क्या जाए तो जाए kaha....aur ये तब तक होता रहा जब तक मैं एक ऐसे पॉइंट पे पहुंच गया जहा पर से मुझेवो सारे सुनस और मेरे बिच की जो दुरी थी वो कमान हो gayi...main सेंटर में था unke...aur इस जगह कोई शैडो नहीं बन paayi....aur ना hi पहले की बननी हुई कोई शैडो वह पे आ पा रही thi...par इस जगह पे एक और बात thi...yaha पे बाकी जगहों से ज्यादा गर्मी लग रही थी mujhe....par उन् सबसे बचा हुआ तो tha...wo कोई मौका hi नहीं दे रहे थे mujhe...yaha maara...waha maara,...jaha भी मैं गिरता था वह ोपे मारने पहुंच जाते थे वो लोग...

अब यहाँ से निकलने का कोई रास्ता देखना था वो भी jaldi....maine आस पास देखा तो एक दरवाजा दिखा मुझे सायद वही से आगे जाने का रास्ता tha...to बस अब मुझे वह जान अतः पर kaise...ye समझ नहीं आ रहा tha...Maine ऊपर देखा सुंस्की oor...to उनमे ना एक लाइनिंग बानी हुई thi...aisa लग रहा था जैसे अगर ,मैं उनको hilaun...to वो hilegi...ye बिलकुल वैसा ह थी की उनको फिक्स किया गया हो वह और उनको वह इ हिलाया बी जा सकता hai...maine तरय करने का socha...par कैसे करता वो गरम थे बहुत hi jyada...maine अपनी तलवार निकली और उससे तरय करने का socha..par वो भी बेकार साबित hua...usse भी वो नहीं hilla...par एक बात हुई उस तलवार se.....aur वो ये की तलवार से जो रोशनी रिफ्लेक्ट होती thi..aur वो जब किसी शैडो पे पड़ती तो वो शैडो ख़तम हो jaata...maine इस्पे गौर किया और इसी का उसे करने का सोचा और क्या bhi.....light को रिफ्लेक्ट करता गया और उन् शादौस को ख़तम करता gaya....aur धीरे धीरे आगे badga...par तब भी कुछ डव्स थे hi जो बच जाते...

मैं जल्दी से फिर उस दरवाजे के पास pahucha...usss दरवाजे पे एक हैंडल लगा tha...maine उसको ghumaya...aur वो जो सुनस वह थे वो वापस से मेरे पास आ gaye...matlab ये मूव कर सकते the..par इसके लिए जरुरत थी इस हैंडल को घूमने ki...saare सुनस मेरे पास आ गए और जितने भी वह पे शादौस थे वो सारे ख़तम हो gaye...aur दरवाजा खुल gaya...darwaja खुला तो वो हैंडल एक ब्लू पाथेर में बदल गया और मेरे अंदर चला गया...

मैं वह से अब नेक्स्ट फ्लोर पे जाने laga...par उससे pahle...unn सुनस में से भिओ कुछ निकला और मेरे मुकुट पे जा laga....aur वैसा होते hi मुझे ज्वाला की आवाज आयी....

मैं- ज्वाला तुम ठीक हो ना...

ज्वाला - हां मैं ठीक hu...chalo आगे चलते है..

मैं - हां ठीक hai...aur सुक्रिया मुझे बचने के लिए...

ज्वाला - ये काम है mera...ab इसको छोड़ो और ऊपर चलो...

मैं - हां...

फिर क्या था मैं 3रद फ्लोर पे pahucha...ye..bilkul किसी हॉस्टल की तरह लग रहा tha...main रूम्स गिनने laga....1st 2ंद 3रद 4रथ 5तह 6th....haa हममे 6तह में जाना tha..wahi निकिता thi....main वह गया और गेट नॉक kiya...gate पहले से खुला हुआ tha...main अंदर गया तो एक छोटी सी बच्ची अपने हाथ में कुछ पाथेर लिए उनके साथ कुछ खेल रही thi...aur उनके कोर्स को बोल रही thi...par जैसे hi मैं अंदर गया वो सारे पाथेर गायब हो गए उसके पास se...aur ये देख वो रोने lagi...jor जोर से रोने lagi...uske रोने की आअज से सच में कान ख़राब हो जाते.,...

मैं - चुप हो jaao....(chillate हुए)

मेरे ऐसा करने के बाद उसकी नज़र मेरे ऊपर padi...wo जाके अपने बीएड के पीछे चुप गयी....

वो - कोण हो आप..

मैं - मैं दोस्त hu...tumhara दोस्त..

वो - आप दोस्त ho...par आप तो निकिता पे chillaye...nahi आप दोस्त नहीं हो..

मैं - अरे मैं दोस्त हु सच में...

वो - नहीं आप झूट बोलते ho...aap झूठे ho..aapne hi मेरे पाथेर मुझसे ले लिए ना...

मैं - नहीं मैंने नहीं लिए...

वो - नहीं आपने hi लिए hai..ab आप मुझे वो वापस करो नहीं तो मैं रोउंगी...

मैं - अरे नहीं मैं इ नहीं लिए तुम्हारे पाथेर...

मेरा इतना बोलना था वो बहुत जोर जोर से रोने लगी wapas..se..aur उसके रोने की aawaj....dimmag ख़राब कर रहा था,...

ध्रुव - अरे पाथेर इक्कठा किया है ना तुमने वो उसके hi है देदो usko...kul 5 होने चाहिए...

मैं - पर मेरे पास तो बस 3 है....

ज्वाला - 3 नहीं 4 है...

मैं - 4 पर...

मैं कुछ बोलता उससे पहले ी मेरे हाथ में 4 पाथेर आ gaye...red..blue..green और येलो..

मैं वो लेके निकिता के पास गया...

मैं - ये लो ये रहे तुम्हारे पाथेर अब चुप हो जाओ...

पाथेर देख वो कुछ शांत hui..par फिर जब उसने काउंट किया तो वो 4 hi the...bas फिर क्या था वो वापस से रोने lagi...pink नहीं है पिंक नहीं है...

मैं - अब क्या हुआ इसको मैंने तो सारे दे दिए ना...

ज्वाला - एक और बाकी है जो 4तह फ्लोर पे hai...waha चलो...

मैं - हां चलो jaldi...iske रोने के आवाज से पता नहीं मुझे कुछ हो रहा है...

मैं लगभग से भाग के गया वह से bahar...aur फिर सीढ़ियों के पास और चढ़ गया ऊपर...

ऊपर गया तो वह पपे एक घ्जोड़ा tha...ye निकिता का स्पिरिट एनिमल tha...ye भी यहाँ पे कैद हो चूका tha...main उसके पास गया और उसने मुझपे हमला शुरू कर diya...ajeeb सा घोडा था ये.....

वो तो किस्मत सही थी मेरी की मैं जम्प कर गया और बच gaya....warna इसके मुँह से जो कुछ भी वो निकला था मुझे लेके hi जाता nicche....Haa उसके मुँह से कुछ निकल रहा था कोई एनर्जी बॉल की तरह कुछ...

ज्वाला - इससे बच के raho...ek बार भी अगर ये लग गया तो हमारा काम khatam...ye तो बहुत ताकतवर है....

मैं - क्या...

ज्वाला - हां ये बहुत ताकतवर hai...Nikita के आगे के हिसाब से ये बहुत जयादा विक्षित हो चूका है...

जब मैंने ये सुन्न अतब मुझे याद आया निकिता मुझसे यही तो पूछ रही थी कैसे अपने स्पिरिट एनिमल को छिपाया jaaye...kya वो इस वजह से पूछ रही थी वो सब...

मैं ये सोच रहा तह की ज्वाला ने मुझे कहा की इसके गले में वो पाथेर वो पिंक पाथेर लटका हुआ hai...mujhe उसको लेना है और यहाँ से भागना है...

मैंने भी उसको dekha....wo किसी धागे से बंधा हुआ था वह pe....maine अपनी तलवार निकली और उससे उस धागे को काटने की कोशिश की पर nahi...main जब भी उसके पास जाता वो हमला कर deta...kaam नहीं बन रहा tha...Main थक गया था....

ज्वाला ने मुझे सायद अपनी कुछ एनर्जी दी जिसके बाद में फिर से लग गया और इस बार किसी तरह उसके पास पंहुचा और तलवार से उस धागे पे वार kiya...par तलवार उस घोड़े को भी लग gayi....wo जख्म हो गया और वही बैठ gaya...Maine पाथेर उठाया और वापस आने लगा पर वो घोडा दर्द में चीख रहा था..

मैं - ज्वाला इसका क्या करे...

ज्वाला - तुम batao..isko यही ऐसे छोड़ भी सकते है ये फिर इस्पे खुद होगा की ये जीता है या मरता है और नहीं तो मैं इसको अपनी कुछ पावर्स दे सकता hu....jisse ये बदल जाएगा और ठीक भी हो jaayega...par...par उससे निकिता भी ताकतवर हो जायेगी...

मैं - तो उससे kya...apni पावर से इसको ठीक करो...

मैंने ये कहा और मेरे मुकुट से कुछ आग की लपटें निकली और वो सब जाके उस घोड़े के चारो तरफ फैल गयी और फिर वो aag...uske उसी चोट जो मेरी तलवार से हुआ था उसके अंदर चली गयी और देखते hi देखते वो चोट गायब हो gayi....par फिर जो कम्मल हुआ वो तो देखने लायक tha...Wo घोडा खड़ा हुआ और उसके जहा जहा पे बाल थे वह वह पे अब आग hi आग थी...

मैं - ये क्या है...

ज्वाला - मेरी पावर्स है ye...ab इसमें फायर एलिमेंट भी hai...ab chalo..isse पहले इसका मूड बदले...

मैं भी वह से निचे गया और वह निकिता अभी भी रोये जा रही thi...pink पिंक करते hue...main उसके रूम में गया और वो पाथेर उसको दे दिया...

निकिता ने जब वो पाथेर liya...to वो पाँचों पाथेर hi उसके चारो तरफ घूमने lage...aur उनमे से कुछ कुछ निकल के जा रहा था निकिता के अंदर....

मैं - ये क्या हो रहा है....

ध्रुव - तुम्हे जानना है निकिता के बारे में तो अभी उसको chuo...lekin...

मैं - लेकिन क्या...

ध्रुव - लेकिन ये की वो नहीं चाहेगी कोई उसके बारे में सब जाने वो भी उसके इज़्ज़ज़त के binna...main सोच रहा था ऐसा करना सही होगा पर अब गलत लग रहा hai...main ये तुमपे छोड़ता हु की तुम्हे उसके बारे में जाना है या नहीं...

मैं - क्या वो ऐसे भी आज़ाद हो सकती है....

ध्रुव - वो हो रही है aazad...waise ये कमल hi हो gaya...tumne ये सब जल्दी hi सोल्वे कर दिया..

मैं - हां वो तो है hi...main तेज़ hu...waise कितना वक़्त लगा इन् सब में...

ध्रुव - ज्यादा नहीं करीब 15 दिन से तुम यहाँ ho...par याद है ना मैंने कहा था यहाँ से तुम उसी वक़्त पे निकलोगे जब आये the.,..to चिंता मत करो...

अब थोड़ी देर में एक पोर्टल कझुलेहगा उससे बहार आ जाना और ज्वाला अब तुम भी जा सकते हो...

ज्वाला ने उसकी बात सुन्नी और वो वह से चला गया...

मैंने ध्यान नहीं दिया इस बात पे par...ab ज्वाला ध्रुव की बातें सुन पा रहा tha...par कैसे....

मैं - वो कैसे तुम्हे सुन सकता था....

ध्रुव - क्यूंकि वो अभी ट्यूमसे जुड़ा हुआ tha...par इससे कुछ नहीं hoga...wo जैसे hi बहार जाएगा सब भूल jaayega...usko मेरे वजूद का पता hi नहीं hoga...ab वो छोड़ो और वो देखो वो रहा पोर्टल बहार jao...abhi मैं क्लास में hu..matlab तुम क्लास में हो..

मैं उसी पोर्टल में गया और पहुंच गया क्लास में प्रोफ. सूरज के क्लास mein...jaise hi मैं अपनी बॉडी में पंहुचा मैंने dekha..ki Prof.Suraj को कुछ hua...ek जतका सा लगा unko...aur वो पसीने से भींग gaye...paata नहीं क्यों..

दब - अरे इनको क्या हुआ अब अभी तो सब सही था...

मैं - पता नहीं क्या हुआ इनको...

प्रोफ. ने उसी वक़्त क्लास hi ख़तम कर दी और हम सब को बहार जाने को कह diya...hum भी बहार आ gaye...main जब बहार आया तो एक उल्लू बैठा हुआ मिला मुझे वह एक पीड pe...maine उसको dekha...aur उसने भी मुझे dekha...sayad ये वही ओल्ड आउल था जिसकी बात हुई थी ज्वाला se...par ये मुझे पहचान नहीं पाया है सायद...

मैं वह से अभी के लिए चला gaya...DB मुइजहे वापस से खींचता हुआ वही ले gaya...Medical डिपार्टमेंट की oor...iss बार मुझे भी देखना था जो इतना कुछ किया मैंने उसका कोई असर हुआ भी या ऐसे hi...

आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में देखते है निकिता ko...aur साथ में इस प्रोफ. सूरज को भी...

बनने रहिएगा
 
थैंक्स भाई

प्रोफ. सूरज की भी एक अपनी hi स्टोरी है जो उनको और भी ज्यादा रहस्यमयी बनती है जो आगे पता चलता रहेगा...

हीरो के माता पिता ने स्लेयर का साथ दिया tha...yun तो स्लेयर ने सबको मिटता दिया था पर फिर भी बातें फैलती रसहि की प्रतीक के माता पिता यानी पार्थ और नीलम ब्लैक मैजिक करने वाले the...unke कनेक्शंस लूसिफ़ेर इ the..aur ऐसे hi बातें बढ़ते बढ़ते ना जाने कहा से कहा पहुंच गयी और इसीमें सब उनसे नफरत करने lage....kuch अपडेट बाद इन्ही ातों पे रोशनी जाने वाली है वह सब पता चल जाएगा..

कीप रीडिंग एंड कमेंटिंग
 
सायद सही ho..yaa सायद गलत bhi...wo तो टाइम आने पे पता चलेगा कोण कहा जाता है और क्या करता है...

विलन की बात है तो उसको भी वक़्त वक़्त पे सामने लाया जाएगा

प्रोफ. Suraj...ye एक इंटरेस्टिंग करैक्टर hai....jo किसी के लिए भी काम कर सकता है सायद वो लूसिफ़ेर का आदमी ho...yaa फिर स्लेयर का hi...Lucifer का नाम बहुत काम बार आया है पर वो है स्टोरी में :डी

मास्टर भी आने वाली है...

आपका 1सत कमेंट है इस फोरम पे वो भी मेरी स्टोरी पे....

थैंक यू वैरी मच...

ऐसे hi कमेंट करते रहे...

कीप रीडिंग एंड कमेंटिंग
 
अपडेट - 27

अब तक

मैं उस किल्ले से निकल चूका tha...aur सायद निकिता भी आज़ाद हो गयी thi...iss बात की पुस्टि अभी खुद नहीं किया था maine...wahi जब बहार आया तो मैं अपनी बॉडी में tha...jo इस वक़्त प्रोफ. सूरज के क्लास में thi....jaise hi मैं अपने बॉडी में pahucha...maine देखा प्रोफ. सूरज को अच्चानक से झटका सा laga.....jatka कुछ ऐसा था की उन्होंने उसी वक़्त क्लास ख़तम कर दिया और हम सब को बहार जाने को kaha...wahi बहार जाते hi...DB मुझे खींचता हुआ ले जाने लगमेडिकल डिपार्टमेंट mein...wo सच में चिंता कर रहा था निकिता ka...ek और भी बात हुई thi..class से निकलते hi एक पेड़ पे एक उल्लू दिखा mujhe...saayd ये वही उल्लू tha...The ओल्ड आउल जिसके बारे में ज्वाला बात कर रहा था..

अब आगे..

खड़े वाली क्लास को शुरू होने में वक़्त था और मैं भी तो देखना चाहता था की इतना कुछ जो किया वो कहा तक सफल hua...kya निकिता बहार आयी या nahi...to इसीलिए मैं भी चले जा रहा था दब के saath...Mai और दब वह pahuche...par जो देखा वो थोड़ी चिंता की बात thi...saayad..waha पे प्रोफ. सूरज भी the...wo इतनी जल्दी वह कैसे आ gaye...abhi तो क्लास में hi the..DB आगे जाने को हुआ par...maine उसको रोक liya...Mujhe देखना था ये कहा जा रहे hai...Wo मेडिकल डिपार्टमेंट में ग़ुस्से और यहाँ वह देखते hue...uss जगह चले गए जाहा पे खाड़े बनाने का सामान और बने बनायीं मेडिसेस राखी हुई होती है...

दब का ध्यान उनपे था hi नहीं वो तो बस जल्दी से जाना चाहता tha...par फिर कुछ ऐसा हुआ जिससे उसका भी ध्यान वह gaya..uss कमरे से किसी की आवाजें आने lagi...sayad प्रोफ. सूरज किसी से बात कर रहे the..aur वो आवाज जिसकी भी थी वो दब को सायद पहचानी हुई lagi....aur यही वजह भी रही की वो तुरंत उस कमरे की ओर चला गया चेक करने की वो आवाजें उसी की है जिसके बारे में वो सोच रहा है या फिर कोई और hi है wo..par यहाँ भी एक और अजीब बात hui...jaise hi उसने दरवाजा khola..waha कोई था hi nahi...koi नहीं से मतलब वह पे प्रोफ. सूरज भी नहीं the...wo रूम खली tha...matlab बस वही सामान थे वह जो वह पे होने चाहिए...

दब ने ैशे से चेक भी किया की वह पे कोई है या नहीं पर वह कोई नहीं tha...main भी अंदर गया मैंने भी खुद देखा पर कुछ नहीं था वह पे....

मैं - ध्रुव अभी तो प्रोफ. सूरज यही थे naa...aur वो आवाजें वो भी तो यही से आ रही थी वो किसी से बातें भी कर रहे the...to यहाँ पे दोनों को होना चाहिए था ना...

ध्रुव - होना तो चाहिए था पर वो है nahi....kuch तो चल रहा है यहाँ pe...Humme उनपे नज़र रखनी होगी..

मैं - मैंने ज्वाला से बोलै है उसने ओल्ड आउल कहलाने वाले किसी एक्सपर्ट को उसके पीछे लगाया hai..par वो चाहता था मैं एक बार उससे बात कर लू..

ध्रुव - ओल्ड Owl...Hmm सुन्ना है इसके बारे में maine..Chalo इनसे भी मिल लेंगे ...पर पहले दब को देखो....

मैं - दब ko...par उसक....

मैं अभी ये बोलते हुए दब की तरफ देखा hi था की वो सच में बहुत hi ज्यादा परेशां लग रहा tha...Main गया उसके पास...

मैं - दब क्या बात है दोस्त तुम एकदम से....

दब - वो aawaj...par वो यहाँ क्यों...

मैं - क्या मतलब यहाँ kyun...aur क्या तुम उसको पहचानते हो...

दब - हां sayad...mujhe ऐसा लग रहा है वो मेरे कजिन की hi आवाज thi...Eddy ki...par वो यहाँ पे kaise...usko तो अभी स्ट्रेंज वर्ल्ड में होना chahiye...Pita जी के pass...wo सेनापति है हमारा...

मैं - Eddy...kya ये वही कजिन है जिसकी तुम बातें किया करते the..jo तुम्हे वह पे ट्रेनिंग देता था...

दब - हां सही पहचाना ये वही hai..ye बहुत hi अच्छे hai...par वो यहाँ kyun.....sayad मेरे कान बज रहे होंगे...

मैं - Kya...sach mein....matlab तुम एल्फ ho...wo भी कोई आम एल्फ नहीं क्रोनेड एल्फ prince..kaan बजने की बातें तो एल्फ भी नहीं करते और तुम तो...

दब - अरे नहीं ये मेरा भरम hi hoga...wo यहाँ हो hi नहीं sakte..khass तौर पे इस वक़्त जब स्ट्रेंज वर्ल्ड में हमारे yaha..itni बड़ी पूजा होने वाली hai...aur वो थोड़ी ना प्रोफ. Suraj.....EK मिनट वो कहा गए वो तो यही पे थे naa..tumne देखा था ना उनको अंदर जाते हुए..

मैं - हां पर सायद मुझे भी भ्रम हुआ ho.....chalo छोड़ो उसको और यहाँ जिसके लिए आये है वो देखते है...

मैंने ऐसा इस्सलिये कहा क्यों की दब मानना hi नहीं चाहता tha...matlab वो एल्फ tha..uske कान कैसे बज सकते hai...agar वो ये कहता की सायद उसको आवाज पहचानने में दिक्कत हुई है तो मैं मान भी leta...par उसकी बातों से ये पक्का था की उसने अपने कजिन की hi आवाज सुन्नी थी ेड्डी ki..par वो मानना नहीं छह रहा tha...sayad यही वजह थी की मैंने भी उसको रूडली रिप्लाई kiya.....par ये तो अपनी hi दुनिया में रहता है... :सिघ: पता hi नहीं चला उसको की मैं उसको तन्ना मार रहा था..

दब ने फिर मेडिकल डिपार्टमेंट में कविता मैडम के केबिन की ओर जाने का सोचा और चल diya..main भी उसी के साथ हो चला..

मैं - ध्रुव ये दब की बातें कुछ अजीब नहीं lagi...matlab मैं तो यहाँ नया hu...nahi जनता यहाँ के बारे ेमिन उतना par..kitabon में पढ़ा है मैंने की एक एल्फ के कान कभी उसको दजहोखे नहीं दे sakte..aur ये...

ध्रुव - वो बस कंफ्यूज है और कोई बात नहीं hai...wo ये समझ नहीं पा रहा की आखिर उसके कजिन की आवाज यहाँ पे क्यों hogi...bas यही बात hai...aur उसके कान ने उसको कभी धोखा नहीं diya...usne बखूबी अपना काम kiya..usne वो आवाज pahchani...par ये उसका दिमाग है जो ये माने से मन्ना कर रहा hai...khair छोड़ो उसको...

मैं - नहीं एक minute...uska दिमाग उसको गुमराह कर सकता है पर हममे nahi...kya लगता है ये ेड्डी जो इसका कजिन है वो यहाँ पे क्यों था वो भी प्रोफ. सूरज के साथ..

ध्रुव - हम्म ये सही पॉइंट पकड़ा है तुममे बिलकुल पुराने दिंनो की याद आ गयी...

मैं - पुराने दिन ???

ध्रुव - अरे वो कुछ नहीं वो तो बस निकल गया मुँह se...usko छोड़ो और इस ेड्डी पे फोकस karo...ye ेड्डी यहाँ tha..yaa सिर्फ उसकी आवाज तो थी hi यहाँ ये कन्फर्म hai....sayad वो प्रोफ. सूरज के साथ ho...jaanta हो उनको...

मैं - हां हप सकता है पर ये प्रोफ. सूरज कहा गए उनको तो वही होना चाहिए था ना वो कहा गायब हो गए...

अब तक हम केबिन के बहुत करीब पहुंच छूके the....aur दब ने दरवाजा khola...aur मैंने जो ध्रुव से पूछा था की वो कहा गए उसका जवाब मुझे मिल गया..

प्रोफ. सूरज कविता मैडम के केबिन में hi बैठे हुए the...akele सायद उन्ही का वेट कर रहे हो...

मैं और दब दोनों hi हैरान राह gaye...par दब से ज्यादा मैं हैरान tha....aur सायद ये बात प्रोफ. सूरज समझ रहे the...tabhi तो हमे देख मुस्कुराते हुए ये कहा..

प्रोफ. सूरज - क्या बात है आप दोनों यहाँ pe...aur एल्फ प्रिंस यहाँ कैसे आना hua...kal hi की तरह आज भी कुछ हुआ है क्या आपको..

ये बोल वो हसने लगे...

दब - नहीं प्रोफ. वो तो हम बस मिलने आये थे कविता मैडम se....wo निकिता के बारे में कहा था ना aapne...bas उसको hi देखने आये थे...

प्रोफ. सूरज - हां Nikita....wo वैम्पायर लड़की naa,...dekh लिया क्या usko...kaisi है अब वो...

दब - नहीं हम बस मिलने आये the...wo उसने hi हमारे दोस्तों की मदद की थी ना एक baar...aur अब्वो यहाँ है तो हममे आगा...

प्रोफ. सूरज - वाह एल्फ प्रिंस आज आपने दिल जीत लिया mera...bilkul अपने पिता के जैसी सोच है aapki...wo भी अपने दोस्तों के बारे में बहुत चिंतित रहते hai,...hmm और aap...Patrick..aap भी निकिता से मिलने आये है ना...

मैं - प्रोफ. Prateek..patrick nahi...Prateek नाम है mera...aur हां मैं भी उसको hi देखने आया हु...

प्रोफ. सूरज - Haa...haa प्रतीक वो क्या है नाम में कंफ्यूज हो जाय करता हु कभी kabhi...to आप भी दोस्त हो उसके...

मैं - हां अभी तो बताया ना आपको दब ne...waise प्रोफ. आप ठीक तो hai..class में ाकनक se...aur फिर वह पे...

Prof.Suraj - हां ठीक तो नहीं हु abhi,...par हिओ hi jaunga....ussi के लिए तो आया था यहाँ और अब लगता है जाने ा वक़्त हो गया है...

मैं - पर आप तो कविता मैडम से मिले भी नहीं...

प्रोफ. सूरज - बाद में मिल lenge..unse भी और प्रोफ. पूनम से bhi...chalo अभी चलता हु...

इतना बोल वो निकल गए वह se.....par उन्होंने बुआ का नाम क्यों liya...kya उनको पता चल गया था की मैं उनका भतीजा hu...agar हां तो kaise....sab कुछ बहुत hi उलझा उलझा सा लग रहा था इनके केस mein...Abhi मैं ये सब सोच hi रहा था की केबिन में बुआ , कविता मैडम और निकिता aayi...Nikita खुद चल रही thi....matlab सब सही हो गया hoga...saayad...

कविता - तुम दोनों फिर से यहाँ pe...kaha था ना की शाम में aana...aur फिर से क्लास बंक किया क्या दोनों ने..

दब - वो हम तो bas...aur क्लास बंक नहीं किया वो तो Prof.Suraj ने क्लास पहले hi छोड़ di...usko सायद कुछ हुआ tha...wo तो यहाँ भी आये थे आपसे मिलने को...

प्रोफ. सूरज का नाम जब आया तो बुआ और कविता मैडम तो थोड़ी हैरान हुई hi...par निकिता के चेहरे पे भी एक पल के लिए कुछ आया tha..jisko उसने तुरंत hi बदल दिया...

बुआ - तो अब कहा है वो और ऐसा क्या हुआ की क्लास hi छोड़ दिया वो भी इतनी jaldi...ye तो अभी आधा टाइम बाकी है उनकी क्लास ख़तम होने में...

वो ये सब मुझे डेल्ह के बोल रही थी...

मैं - पता नहीं क्या hua...wo एकदम से उनको झटका सा लगा और क्लास ऑफ कर दिया unhone,...hum जब यहाँ आये तो वो यही पे the..aur फिर अभी चले gaye..bola बाद में मिलेंगे आप दोनों से...

मैंने भी दोनों वर्ड पे ज्यादा जोर diya...jisse उन् दोनों को कुछ अजीब lage...aur मैं कामियाब भी hua..dono को ये बात अजीब lagi...par अभी के लिए उन्होंने ये टॉपिक बंद किया और निकिता की ओर देखते हुए बोले..

कविता - हां निकिता ये दोनों तुमको hi देखने आये the..waise मैंने कहा तो था इनको की शाम में aaye..classes के बाद par...ye दोनों वेट नहीं कर paaye..chalo कोई नहीं अब मिल लो...

निकिता ने हमारी ओर dekha..ajeeb सा चेहरा बना के...

दब - क्या हुआ था तुम्हे अब तुम ठीक तो हो ना...

ऐटिटूड से भरा हुआ जवाब :सिघ:

निकिता - मुझे क्या होना hai..main तो एकदम से सही hu....wo तो रेगुलर चेकउप के लिए यहाँ आयी thi....par तुम log....chain से नहीं रहने देते किसी ko...(Bua और कविता मैडम से) थैंक्स प्रोफ. थैंक्स Madam...ab चलती हु main....baad में मिलेंगे..

इतना बोल वो तो निकल gayi..aur यहाँ दब बस गुस्से में उसको देखे जा रहा tha....wo भी निकल गया वह se....ab वह बस मैं और बुआ और कविता मैडम hi the...aur निकिता के जावा को सुने के बाद वो दोनों बस हिस्से जा रहे the...main भी वह से निकला और जा pahucha..DB के पास जो ऐसे hi गुस्से में बड़बड़ाता हुआ वह से जा रहा था...

दब - पता नहीं kya..samajhhti है खुद को एक तो हल चल पूछने जाओ तो ऐसे बात करती है जैसे क्या हो गया है..

ऐसे hi ना जाने क्या क्या बोलते वो वह से जा रहा tha...jab मनाएं वह उसके पास pahucha..to उसने कहा..

दब - अब अगर कभी मेरे मान में ऐसा कोई ख्याल आया की इस लड़की की मैडम करनी है या ऐसा कुछ तो एक ग़ुस्सा मारना mujhe..samjhe...

मैं - हां ठीक है..

थोड़ी देर में दब का गुस्सा शांत हो गया और हम दोनों चल दिए काढ़े वाली क्लास mein...aaj वह असिस्टेंट प्रोफ. आये the.....naa की हमारे होड़ saheb...to इस क्लास में ज्यादा कुछ हुआ नहीं हममे बस कुछ मेडिशनल प्लांट्स के बारे में बताया gaya...wahi फिर प्रोफ. नामा की क्लास में मुझे पहले तो दांत padi...matlab दांत तो मुझे और दब दोनों को hi पड़ी thi..par ज्यादा मुझे सुनाया गया tha...aur ये सायद इसलिए था क्यों की मैं समझ में नहीं आ रहा था Prof.Naman ko...par आज कोई और भी था जो उनके समझ से बहार हो गया tha...wo थी Nikita...aur वो ना सिर्फ उनकी बल्कि खुद के भी समझ से बहार चली गयी थी...

हुआ ये की प्रोफ. नमन मेरी और दब के क्लास बंक करने के लिए क्लास लेने के baad..sabko अपने स्पिरिट एनिमल्स को एक एक बार बहार निकलने को कहा gaya...sabne वोन nkiya...aur जैसे hi निकिता ने kiya...Prof. नमन की तो आँखें hi चौड़ी हो gayi...uska वो Ghoda...jo उसका स्पिरिट एनिमल tha...wo बिलकुल hi बदल गया tha...size भी बड़ा हो चूका था उसका और पावरफुल तो पूछो hi mat...aur उसके बॉडी पे आग लगी हुई thi...jo उसको और खास बना रही thi...Jaise hi निकिता ने उसको बहार निकला और प्रोफ. नमन की नज़र उसपे pad...unhone उसको वापस अंदर करने को कहा usko...kyunki एक बहुत hi हाई अमाउंट का एनर्जी पास होने वाला था पुरे रूम में उस स्पिरिट एनिमल के बाहर आयने se..sayad इस वजह से क्यूंकि अभी वो और भी विकसित हो रहा tha..aur यही बात तो अलग थी और अजीब thi...wo इतना विकसित कैसे हो सकता है और अभी तो और भी हो रहा था...

उसको सँभालने के बाद उन्हने निकिता को कुछ ध्यान लगाने के टिप्स diye....unko लग रहा था की उसके स्पिरिट एनिमल में कुछ गड़बड़ है बस इसीलिए वो उसको ऐसे मेडिटेशन्स के टिप्स दे रहे थे जिससे वो कण्ट्रोल में रहे...

उसके बाद वो बाकी सब के पास gaye...aur मुझ बहुत बुरा लग रहा था अपने नकली स्पिरिट एनिमल चूहे को बहार निकल ke...sab देख के है रहे the...par...Prof. नमन को अभी तक याक्किन hi नहीं हुआ tha..aur इसी लिए सायद वो बड़े hi ध्यान से देख रहे थे मेरे स्पिरिट एनिमल ko...aur यहाँ पे एक गड़बड़ हो gayi....Ek स्टूडेंट था हमारे क्लास में जिसका स्पिरिट एक स्नेक tha...to उसने सायद मस्ती में अपने स्पिरिट को मेरे स्पिरिट एनिमल के पास भेज diya...aur यहाँ पे वो हुआ जिससे वो चौंक गया और प्रोफ. के चेहरे पे एक अजीब सी मुस्कान आ gayi..aisa जैसे उन्होंने कोई बहुत बड़ा सकाम का पता लगा लिया ho...Hua ये की वो स्पिरिट मेरे चूहे के पास आने laga...ab यहाँ नोर्मल्लूय ह्ण ये चाहिए था की मेरा स्पिरिट उससे दर जाता और वापस मेरे अंदर आ jata...jis लेवल पे ध्रुव ने मेरे स्पिरिट को बनाया था उस हिसाब से यही होना tha...par हुआ कुछ aur...Chuhe ने उस स्नेक पे hi हमला कर diya...WO तो प्रोफ. नमन ने और उनके असिस्टेंट्स ने ये सब बंद karaya..warna मेरा ये नकली स्पिरिट एनिमल ना जाने क्या करने वाला था उसक saath...mujhe भी पता नहीं था,...

इसके बाद प्रो. नमन ने मुझे बस देखा पर कुछ कहा नहीं और थोड़ी देर में क्लास ख़तम हो gayi...par एक बात thi..Jab निकिता का स्प्रिट एनिमल बहार आया और समे ऐसे चंगेस आ रहे थे उसके बाद निकिता मेरी ओर देखे जा रही thi....sayad उसको पता चल गया था की मैं इन् सब के पीछे hu..yaa शक हुआ ho...pata nahi..kya मतलब निकला जाए उसका मुझे वैसे देखने का..

ये क्लास ख़तम कर के हम चल दिए बुआ के क्लास mein...waha पे छोटे मोठे मैजिक के बारे में कुछ बताया gaya...ye क्लास भी ऐसे hi निकल gayi...Maine यहाँ भी नोटिस किया निकिता मुझे देख रही थी...

इन् क्लासेज के बाद हम चल दिए अपने रूम mein..waha प फ्रेश hue...sham का वक़्त था मैं तो बस वही एक किताब लेके बैठ gaya....main हर रोज कोई ना कोई किताब पढता था यहाँ pe..yaha के बारे में जाने के liye...unhi सब के कारन मुझे ेल्फ्स के बारे में पता tha...aur भी कुछ प्रजातियां थी जिनके बारे में मैं जनता tha..par मैं जिस मकसद के लिए इनको पढ़ रहा था वो नज़र नहीं आ रहा था कम्पलीट होता hua...ye किताबें मैंने ज्वाला के और उसके कबीले के बारे में पता करने के लिए ली thi...par कुछ नहीं मिला अभी tak..haa ऊपर से ज्वाला ने hi बिलकुल उन्ही के कबीले जैसा एक और कबीले के बारे में बतला दिया था वो पोलर बेयर kabila...jinse उनका 36 का आकड़ा tha.....par मुझे इनके बारे में भी कुछ पता नहीं चल रहा tha...abhi किताब पढ़ रहा था की ध्रुव की आवाज आयी...

ध्रुव - हां मैं बताना भूल gaya...Thunder एलिमेंट का शील्ड नहीं मिला है abhi..maine बताया hi नहीं tha..Prof. सूरज को की तुम्हे लेमेंट मिल चूका hai..aur अब तो लगता है बताना सही भी नहीं hoga..unka जो किरदार है अब अजीब होता जा रहा hai...main तो कहता hu..humme मार्किट से कुछ ले लेना चाहिए...

मैं - हां ये भी सही hai...chalo आज भी शॉपिंग कर आते hai...Main बुआ से बात करता hu...unko एलिमेंट के बारे में बता के खुश कर hi सकता हु ना...

ध्रुव - हां jarur....waise बी कुछ तो ऐसा भी होना चाहिए जो दिखने के लिए ho...baaki छुपाने वाली बातें मैं बता hi दूंगा..

मैं - क्या मतलब.. ?

ध्रुव - होती के दांत दिखने के कुछ और होते है और खाने के लिए कुछ और hi....agar समझ ना आये तो रहने do..fir कभी बतला dunga...ab चलो जो करना है करो...

मैं - हां रूक्को मैं बुआ से बात करता हु...

मैं रूम से निकला और चल दिया बुआ के केबिन की ओर....

वह पंहुचा तो कविता मैडम भी थी waha..aur दोनों किसी बात पे बहुत गंभीर लग रही thi..Darwaja खुला था तो ये दिख gaya...fir मैंने नॉक किया और अंदर आने के लिए pucha..mujhe देख के दोनों ने hi अपने एक्सप्रेशंस बदल लिए...

बुआ - क्या हुआ बच्चू तुम यहाँ इस वक़्त...

मैं - वो मैं वो सोच रहा था कुछ शॉपिंग करने के liye..par लगता है आप बिजी हो मैं बाद में आऊंगा...

बुआ - नहीं नहीं हम बिजी नहीं hai...par 2 दिन पहले hi तो गए थे ना शॉपिंग pe..ab क्या लेना है...

मैं - वो एक शिलेड लेनी थी...

बुआ - Shield...par तुम्हारे पास तो वो टेस्टिंग शील्ड है hi naa..uska क्या किया...

मैं - हां वो था par...thunder एलेम्नेट के लिए क्या वो काफी होगा...

कविता - अरे वो टेस्टिंग शील्ड hai...wo काम aayega...ek minute..kya कहा..

बुआ - हां क्या कहा तुमने बच्चू थंडर एलिमेंट....

मैं - हां वो मुझे थंडर एलिमेंट मिला है...

बुआ -(खुश होते हुए) Kya...sach में...

मैं - हां मुझे थंडर एलिमेंट मिला है और अब मुझे शील्ड चाहिए...

प्रोफ. सूरज - शील्ड चाहिए तो मुझसे माँगना था ना यहाँ क्या कर रहे हो तुम पैट्रिक

मैं अभी जहा बुआ को ये बता hi रहा था की पीछे से ये आवाज सुनाई दी mujhe...waha दरवाजे pe..Prof. सूरज खड़े the..aur उनकी आवाज सुन के बुआ और हम सब ने अपने एक्सप्रेशंस बदल लिए...

बुआ - पैट्रिक नहीं प्रतीक नाम है iska...aur बताया था ना मास्टर ने इसकी जिम्मेदारी मुझे दी है बस इसीलिए ये यहाँ आया था मुझे बताने को...

प्रोफ. सूरज - अरे haa...main तो भूल hi गया tha..aur हां प्रतीक तुम्हारा नाम hi याद नहीं रहता mujhe..accha वो छोड़ो चलो मैं तुम्हे कल दे देता हु shield...abhi मिली तो नहीं है ना...

मैं - नहीं अभी नहीं मिली है...

बुआ - नहीं मैं इसको दिला देती hu...waise भी मैं और कविता शॉपिंग पे जा रहे the...ye भी चल lega...hai ना प्रतीक ...

मैं - हां प्रोफ.

प्रोफ. सुआरेज - हां ये भी सही hai...waise मैं कुछ बात करने आया tha...par अब जब तुमसब बिजी हो तो बाद में कर lenge...main चलता hu...Market में ध्यान रखना सुन्ना है वह का माहौल सही नहीं रहा है आज कल..

इतना बोल वो निकल गए वह se....ye बाँदा अब मुझे टेंशन दे रहा tha...aisa ला रहा था जैसे ये बुआ और कविता मैडम के साथ कुछ करने वाला hai....iska कोई ना कोई बंदोबस्त करना होगा....

उनके जाने के बाद बुआ और कविता मैडम के भो चेहरों पे कुछ अजीब सा tha...saayad शक उनको भी है inpe...par..samajh नहीं पा रहे है दोनों...

कविता मैडम ने चुप्पी तोड़ते हुए कहा...

कविता - प्रतीक पूनम अगर हम मार्किट में निकिता को भी ले चले तो कोई दिक्कत नहीं है ना..

मैं - निकिता को ??

बुआ - नहीं कोई दिक्कत नहीं hai...tum उसको बुला लो.,..

मेरी बात पे तो ध्यान भी नहीं diya...ye दोनों ने पहले hi सोच लिया था उसको लेके जाना है मतलब जाना है....

बुआ - तुम जाओ रूम में मैं बुला लुंगी तुमको...

मैं - ठीक है

इतना बोल रूम की ओर बढ़ गया main....waha पे केबिन से निकला तो वो उल्लू वापस से दिखा mujhe...par अभी उससे बात करने का मूड नहीं था मेरा...

मैं रूम में गया फ्रेश hua...aur जब बुआ ने बुलाया तो बहार nikla..par तभी मुझे मेरे रूम के सामने दब दिखा वो भी पूरा रेडी होक खड़ा था...

दब - तुम भी जा रहे हो कही क्या...

मैं - हां प्रोफ. पूनम और कविता मैडम के साथ मार्किट mein...wo कुछ काम है उनको...

दब - अच्छा तो तुम्हे भी बुलाया है मैं समझा की मुझे hi किसी पनिशमेंट के लिए बुलाया है..

मैं - मतलब..

दब - अरे अभी मुझे भी कहा कविता मैडम ने की उनके साथ मार्किट जाना है पता नहीं kyun...ab उनको मन्ना भी नहीं कर सकते ना..

मैं - Haa...(maan में) इसको bhi...par क्यों...

हम्म दोनों वह से सीधा वही उस रूम के पास पहुंचे जहा से मार्किट जाते hai...waha पे जाके दब को पता चला की निकिता भी है waha..par कुछ बोलै नहीं क्यूंकि बुआ और कविता मैडम जो थी वह pe...Nikita को भी समझ में नहीं आ रहा था क्यों उसको लेके जा राजे है मार्किट mein..yaa सायद वो समझ रही थी..

आज के लिउए इतना hi..next मेंदेखते है मार्किट में क्या होता है साथ में ध्रुव ने कहा था की कोई मुझे तलवार बाज़ी सीखने aayega..usse भी ट्रेनिंग लेनी है और फिर ओल्ड आउल से भी बात करनी है..

(नई करैक्टर - ेड्डी, दब का कजिन है जो उसको वह पे टूशन देता tha...wo स्ट्रेंज वर्ल्ड में एल्फ किंग यानी दब के पिता के सेना के सेनापति भी है)

बनने रहिये
 
अपडेट -28

अब तक

मैंने बुआ को अपने थंडर एलिमेंट के मिलने के बारे में बता दिया था और फिर हममे मेरे लिए एक नयी शील्ड लेने जाना tha...Kavita मैडम भी आ रही थी पर पता नहीं क्यों उन्होंने ना सिर्फ निकिता को बल्कि दब को भी अपने साथ चलने को kaha...aur तो और सायद वो प्रोफ. सूरज ने इंदिरेक्ट वार्निंग दे डाली थी humme...usne कहा था की मार्किट में आज कल कुछ भी होजाता है तो बच के रहो...

अब आगे

हम पांच लोग अभी उस कमरे के दरवाजे के सामने खड़े थे जहा से हम मार्किट जाते the...thoda वेट करने पे दरवाजा खुला और हम सारे अंदर...

बुआ - सब साथ रहेंगे समझे कोई यहाँ वह नहीं jaayega...pahle हम उस दुकान में जाएंगे जहा से कुछ चीज़ज़े लेनी है जो मुझे और कविता को लेनी hai...uske बाद अगर तुममे से किसी को कोई सामान चाहिए होगा तो हम वह jaayenge..uss सामान को lene..fir खाना खाने के बाद वापस school...sab समझ गए ना..

सबने हां में अपना सर hilaya...par अभी भी मेरे मान में यही चल रहा था दब और निकिता को क्यों लाया गया yaha...maltab मैं कोई दुसमन नहीं हु उनका की उनके यहाँ आने से मुझे बुरा लग रहा hai..bas बात इतनी सी थी की क्यों लाया गया जैसे मैं आया था बुआ के साथ शील्ड लेने ko...ussi तरह ये दोनों भी तो किसी वजह से आये है और मुझे वही वजह जानी hai..par पता नहीं चल रहा क्या वजह है.....

मैं चलता रहा और यही सब सोचता रहा और इतने में हम पहुंच गए उस दक्कन में जहा से मैंने शील्ड ली थी फिर वो टेस्टिंग मैजिक स्टिक भी जो एक्चुअली में ध्रुव ने ली thi...main तो अपने शरीर से बहार tha...wo निकिता वाला chapter जो देख रहा था...

तो हम सब वह उस दुकान में पहुंचे आज भी सायद मालिक नहीं था यहाँ का वही वो बौना था जो वह काम करता था उसी ने हमारा स्वागत kiya...Bua और कविता मैडम को तो सायद वो बहुत अच्छे से जानता था ऐसा लग रहा था देखने से...

बुआ - हममे पहले तो एक थंडर एलिमेंट का शील्ड दिखाइए जो अच्छे मेटल से बना हो अउ....

बौना - हम्म रुकिए मेरे पास एकदम नया पीेछे आया है और ये सूट करेगा आपको...

बुआ ने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी की वो बौना बिच में बोल पड़ा और ना सिर्फ बोलै वो तो उठ के वो शील्ड भी लाने चला गया...

मैंने दब और निकिता की ओर देखा दोनों hi दक्कन में राखी हुई चीज़ज़ों को देख रहे the...DB वह पे पड़े तीर कम्मं को देख रहा था वैसे थी भी वो देखने laayak...usme जो स्ट्रिंग लगा हुआ था वो बहुत hi मजबूत और साथ में हलके मटेरियल का लग रहा tha..aur कम्मं की बॉडी भी किसी अच्छे मेटल की लग रही थी ऊपर से उसपे कुछ माननी भी लगे हुए the..jisse वो और भी अट्रैक्टिव लग रहे the...Elfs को तीर कम्मं का बड़ा सुख होता है ऐसा पढ़ा था मैंने तो ये सब करना नार्मल था उसके liye...wahi Nikita...wo वह पे एक कोने में रखे हुए एक खंजर को देखे जा रही थी ये भी सायद कोई एंटीक पीेछे hi hoga...bahut hi सुन्दर नकसी की हुई थी उसके हैंडल पे और साथ में एक बड़ा सहेरा लगा हुआ था उसके लास्ट mein...aur उसका ब्लेड वो तो बहुत ज्यादा चमक रहा था ना सिर्फ चमक रहा था बल्कि बहुत तेज़ भी लग रहा tha....uske शार्प एज पे लाल रंग की कोटिंग की हुई थी जो उसको और भी आकर्षक बना रही थी....

वो दोनों उन् चीज़ों को देखने में लगे हुए थे और मैं उन् दोनों ko...tabhi बुआ ने आवाज दी...

बुआ - बच्चू यहाँ aao...ye लो...

मैंने सबसे पहले तो वापस से उन् दोनों की ूरर देखा कही उन् दोनों ने सुन तो नहीं लिया इनका मुझे बच्चू kahna...waise तो बोल रही थी क्लास में भी सबको ऐसे hi बोलती hai...jhoot था वो sab...ye बस मुझे hi बच्चू बुलाती hai...jab उनके देख के लगा की दोनों ने नहीं सुना है तो मैं बुआ की ओर दया उनको आँखें दिखते hue...wahi कविता मैडम जो अभी बौने को कुछ बता रही थी उनकी नज़र मेरे ऊपर गयी और वो हसने लगी...

मैं गया वह पे बुआ के पास वो शील्ड लिए हुए उसको देख रही थी चेक कर रही thi...aur जब मैं पंहुचा तो मुझे दे दिया वो shield......mera शील्ड को हाथ में लेना था और वो चमकने laga...uski चमक इतनी थी की वह पे खड़े सभी का ध्यान मेरी ओर खींच लिया उसने..

बौना - हम्म अच्छी पावर है आपके अंदर....

बुआ - मतलब....

बौना - मतलब ये की इनकी पावर्स बहुत अच्छी hai....abhi से किसी योद्धा jitni,...ye जो चमक उठी ना इस शील्ड से वो ये दर्शा रहा है.....

दब - योद्धा itni...matlab मेरे से भी jyada....par ये kaise...ek मिनट पहले तो ये बताओ तुम्हे कब मिली एलिमेंट वो भी थंडर एलिमेंट तुम तो वो टेस्टिंग शील्ड उसे करते थे ना....

बुआ - करता था पर ab..isko थंडर एलिमेंट मिल चूका hai....par एक बात है एक दिन में इतना ज्यादा पावरफुल.???

दब - वही तो प्रोफ. यही बात तो समझ में नहीं आ रही है...

निकिता - बस यही नहीं इसने तो और भी बहुत कुछ किया है...

बुआ - क्या मतलब है निकिता क्या किया है इसने...

निकिता - वो मैंने देखा था इसने अकेले hi पंकज और उसके दोस्तों को मारा tha...aur एल्फ प्रिंस बेहोश पड़े हुए थे...

दब - क्या मज़ाक कर रही ho...main और behosh....afwahein मत फैलाओ..

निकिता - याक्किन ना हो तो इसी से पूछ lo...yaa फिर निशान दिखाऊं गले pe...maine hi बचाया था तुम्हे...

बुआ - ये सब कब hua....kya बोले जा रही हो निकिता तुम और (मुझसे) तुमने बताया नहीं कुछ...

मैं - वो बस ऐसे hi था बस...

बुआ - हां बाद में इस्पे बात karenge..chalo...ab तुम दोनों कुछ पसंद आया क्या....

निकिता ने तो नहीं बोलै कुछ पर दब ने बोलै उस तीर कमान के बारे में....

बुआ ने बौने की ओर देखऔर बौने ने वो तीर कमान निकल के दब को दे diya...DB बिलकुल शॉकेड था उसको नहीं पता था की बुआ उसको वो दिलवा degi...wo तो बस बता रहा था की उसको वो पसंन्द आया है लेने के बारे में नहीं सोच रहा था wo...Bua ने उसके बाद निकिता की ओर देखा वो अभी भी नहीं बोल रही thi...par सायद बुआ ने पहले देख लिया हो उसको वो खंजर देखते हुए तो bas...Bua ने उसको भी वो दिलवा diya...Jab ये सब चल रहा था उस वक़्त कविता मैडम कुछ लॉकेट्स देख रही thi..aur जब उनका हो गया वो तो वो सारे लॉकेट्स लेके आयी हमारे पास और हम तिण्णो को एक एक दे दिया...

निकिता - ये क्या है मैडम...

कविता - तुम tinno...pata नहीं क्यों और कैसे पर हमेशा मुशीबतों में पड़े रहते ho...ye तुम तिण्णो की रक्षा करेगा...

बात तो सही थी unki...Db एक बार बेहोश हो गया था पर अगर सब कुछ पंकज के प्लान के हिसाब से होता तो वो अपने पावर्स भी खो सकता tha...upar से वो एक प्रिंस hai...uske साथ कुछ बुरा होता तो स्कूल में हंगामा भी हो सकता tha...wahi दूसरी ओर निकिता ये तो मार्किट में मिली thi..ispe हमला हुआ tha...fir main...haa माना मेरे साथ ध्रुव है और कूपर और अलबूस है साथ में ज्वाला भी है पर इनके बारे में थोड़ी ना पता है इनलोगो को तो मुझे भी एक लॉकेट मिल hi gaya...Hum तिण्णो ने जब उसको पहना तो ऐसा लगा कोई चीज़ है जिससे हमारी बीओडी कवर की गयी हो...

यहाँ की शॉपिंग पूरी हो चुकी thi...Bua ने फिर हमको पूछा किसी को और कोई सामन लेना है तो सबने मन्ना कर diya...fir क्या था हम सारे चल दिए डिनर करने ko..ussi दुकान के पास में hi कोई होटल था वही पे गए hum....acchi जगह thi...mainyaha वह देख रहा था की तभी मेरी नज़र गयी ओल्ड आउल pe....wo वही था होटल mein...hum होटल के रूफ पे थे वह पे टेबल मिली थी humko..aur वही से मुझे वो ओल्ड आउल दिखा जो वह बैठा था एक दीवार पे...

ओल्ड आउल यहाँ था मतलब क्या हो सकता है iska...wo मुझसे मिलने तो आएगा नहीं उसको काम दिया गया था प्रोफ. सूरज पे नज़र रखने के liye....aur जहा तक बात करनी थी तो मैं शुरू करता उससे बात karna...Meri समझ में नहीं आया उसका यहाँ hona...main आस पास देखने laga,...dhundhne लगा उसको जो यहाँ होना चाहिए tha...par वैसा कोई दिख hi नहीं रहा था mujhe...bahut से लोग जो ते वह...

मैं - ध्रुव ओल्ड आउल यहाँ है इसका मतलब समझे सायद प्रो. सूरज भी यहाँ hai...aur याद है उसने क्या कहा tha...market में कुछ भी हो सकता है...

ध्रुव - हां याद hai...ek काम करो मैं तुम्हारी बॉडी को संभाता हु तुम उसको dekho...wo यही hoga...aur नहीं तो ओल्ड आउल की मदद लो...

मैं - हां ये सही hai...waise एक बात batao...kya तुम्हे लगता है निकिता को उसी ने उस किल्ले में कैद किया था...

ध्रुव - और कोई अभी के लिए उस काम के लिए फिट नहीं बैठ raha..aur कोई kyunkarega..aur देखा था वो लंगड़ा के भी चल रहा था कुछ समझ में आया...

जब उसने मुझे याद दिलाया तो मेरा सर घूम गया उस दिन जिसने पीछे से हुम्ला किया था उसको मैंने पेअर पे hi मारा tha...kya वो वही हो सकता है...

मैं जल्दी से अपने बॉडी से निकला और यहाँ वह देखने laga...mujhe कही भी प्रोफ. सूरज दिखाई नहीं दे रहे the...kya ये सब वहम tha....par वो ओल्ड आउल ाभजी भी वही पे hai...Main गया उसके pass...par सायद वो मुझे देख नहीं paaya...dekhe भी कैसे मैं अभी अपने बॉडी में था hi नहीं....

ध्रुव - ज्वाला को bulao...sayad उसकी जरुरत पड़े...

मैंने पूछने में इस बार वक़्त नहीं गवाया और सीधा ज्वाला को वह पे बुल्ला liya...wo भी आया और इन्विंसिबल होक aaya...ye सही tha...Maine उसको प्रोफ. सूरज को ढूंढने के लिए bola...wo सीधा ओल्ड आउल के पास gaya...Old आउल उसको देख पा रहा था....

ज्वाला - यहाँ क्या कर रहे है aap...aapko तो अभी प्रोफ. सूरज के पीछे होना चाहिए था ना...

ओल्ड आउल - मैं वही कर रहा hu...main उसके hi पीछे लगा hu...wo यही पे है...

ज्वाला - कहा है वो बातो मुझे...

ओल्ड आउल ने अपने पंखों से एक तरफ इशारा kiya...maine जब उस ओर देखा तो वह एक बुद्धा सा आदमी बैठा हुआ था...

मैं - ये तो कोई और है...

ज्वाला - ये तो कोई और है तुम कही भटक तो नहीं गए...

ओल्ड आउल- जितनी आपकी उम्र है उससे कही जयादा साल का एक्सपीरियंस है mujhe...aur रही बात ये कोई और है तो जरा गौर से dekhiye...isne रूप बबदलने वाले खड़े का उसे किया है...

मैं - हां ये तो मैंने सोचा hi nahi...par अब जब पता लग गया है ये यहाँ है तो इसका करना क्या hai...mujhe पता नहीं की ये यहाँ करने क्या आये है मुझे तो बस शक hai...confirm नहीं हुआ हु मैं...

ध्रुव - ये सायद बस निकिता के लिए आया है यहाँ देखो उसी को देखे जा रहा hai...aakhir निकिता के पीछे क्यों है ये...

मैं - निकिता के liye....mujhe निकिता के ारे में सब जान लेना चाहिए था तभी hi..sayad कुछ पता चल जाता क्यों ये पीछे पद हुआ है iske...ab क्या करना है...

ध्रुव - करना क्या है ज्वाला यही raho...ispe नज़र रक्खो अगर ये कुछ भी करने वाला हो तो इसको रोकना है तुम्हे...

ज्वाला - बस रोकना है...???

मैं - हां बस रोकना hai...main भी निकियता से पता लगाने की कोशिश करता हु की ये उसके पीछे क्यों पड़ा है...

ज्वाला - हम्म ठीक है...

मैं अपने बॉडी में वापस आ gaya....saamne देखा तो प्लेट में बहुत सारा खाना पढ़ा हुआ tha...main भी उसको खाने लगा और नज़रे चुरा के उस साइड भी देख leta...ki प्रोफ. सूरज कुछ कर तो नहीं rahe...par नहीं वो तो bas...khana खा रहे the..aur कभी कभी हममे देख रहे the...Kya वो यहाँ हमपे नज़र रखने आये the...par kyun...bahut ज्यादा कन्फूसिओं था यहाँ पे....

कुछ हुआ नहीं वह हम सब निकल गए और पहुंच गए वापस से स्कूल mein...aur फिर अपने रूम्स mein...hamare सामन तो पहले hi वह पहुंच गए the...Main रूम में aaya....aur सबसे पहले ओल्ड आउल को बुलाया साथ में ज्वाला को भी...

मुझे देख के ओल्ड आउल पहले तो झुका उसके बाद बोलै...

ओल्ड आउल - तो आप है वो इस कबीले के नए राजा है....

मैं - नहीं राजा टी ज्वाला है मैं तो दोस्त हु उसका जैसे आपका हु....

ओल्ड आउल- दोस्त ....सब ऐसा hi कहते है शुरू में और उसके बाद जब जरुरत नहीं रहती तो भूल जाते है...

वो ये सब ज्वाला की ओर देख के बोल रहा tha...Jwala से वो पुरे उसके कबीले पे hi तंज कास रहा था,...

मैं - पहले जो भी हुआ वो सब कुछ मजबूरियों का नतीजा था मुझे ज्वाला ने बताया की उसके कबीले ने वडा किया था तुम्हारा और तुम्हारे लोगो का ध्यान रखने के लिए पर नहीं रख paaye...kyunki वो उस वक़्त खुद hi कमज़ोर पद गए थे...

ओल्ड आउल - वही तो बात है मैं क्यों एक ऐसे कबीले पे वापस से भरोषा karu..jo कमजोर hai..kya ये वापस नहीं होगा की मुझे और मेरे लोगो को जरुरत होगी इनकी और ये नहीं आएंगे क्यूंकि ये खुद में hi बिजी पड़े होंगे...

मैं - मैं इसका ध्यान rakhunga...aisa ना ho...aur तुम्हारे लोगो की रक्षा का जिम्मा अब सिर्फ ज्वाला के कबीले को hi नहीं मेरा भी दाइत्वा होगा...

ओल्ड आउल - ठीक है मैं आपकी बात मान लेता hu...aur मैं हमेशा आपका वफादार rahunga...par अब आपको मेरे लोगो की मदद करना hoga...wo मुशीबत में है मैं यहाँ बस अपने वेड को पूरा करने आया tha...apno को छोड़ के वह मुशीबत में..

मैं - मैं कुछ समझा नहीं क्या दिक्कत है वह पे...

ओल्ड आउल - एक कीड़ा hai...wo हम सभी के पंखों में चला गया है और हमसब को उससे बहुत परेशानी हो रही hai...aapko हममे उससे आज़ाद करना होगा..

मैं - Kidda....sach में बस ये है दिक्कत...

ध्रुव - या है कोण है सब पता कर लो उसके बाद हसना..

मैं - अरे ये कीड़े के बारे में बात कर रहा है...

ध्रुव - तुम जानते भी हो क्या है वो kidde...aur ये सोचो वो इनको परेशां कर रहे है मतलब कुछ तो होगा ना उनके अंदर...

मैं - अरे पर बस कीड़े है उनको तो हम ऐसे hi ख़तम कर सकते hai...sayad तुम्हे पता नहीं पर इंसानी दुनिया में भी ऐसी दिक्कतें आती है पंछियों के साथ और हम उनके ऊपर पाउडर या कोई स्प्रे छिड़क देते है जिनसे को आराम मिलने लगता है...

ध्रुव - वो इंसानी दुनिया है और ये मैजिक school...samajho मेरी बातों को...

मैं - अच्छा ठीक hai...to मैं इसको कल आने के बारे में बोल देता hu...kidde मारने के लिए..

ध्रुव - Kal....mujhe लगता है तुम्हे पहले उनके बारे में पता कर लेना चाहिए...

मैं - अरे जब तक जाएंगे नहीं तब तक पता कैसे chalega...Kal बस देखने जाएंगे अगर आसान हुआ और मुमकिन हुआ तो कल hi कर denge..aur अगर नहीं hua..to बाद में करेंगे..

ध्रुव - हां ये ठीक है...

मैं - ओल्ड आउल मैं कल आऊंगा वह तुम्हारे लोगो के पास और देखूंगा क्या कर सकता हु...

ओल्ड आउल - जी ठीक है...

मैंने सोचा की ये दिक्कत तो इसको भी होगी hi....to इसको hi देख लेता hu...unn कीड़ो के बारे में सायद कुछ पता चल jaaye...Maine इसीलिए उसके पंखों को देखना शुरू kiya..par कुछ मिला hi नहीं...

मैं - क्या तुममे वो कीड़े नहीं है...

ओल्ड आउल - नहीं मेरे अंदर नहीं है वोमेन बच्चा हुआ हु usse...par मेरे बहुत से लोग उससे दुखी hai...aap जल्द hi कुछ कीजिये...

मैं - हां ठीक है मैं कल आऊंगा..

ध्रुव - पता भी है कहा जाना है या बस ऐसे hi कल आऊंगा बोले जा रहे ho..puch तो लो कहा रहते है ये और इसके लोग...

मैं - ज्वाला है ना वो मुझे ले जाएगा इनके यहाँ...

थोड़ी देर और कुछ बातें करने के बाद मैंने दोनों को वह से भेज diya..aur फिर सोने के लिए रेडी हो gaya...aur बीएड का तो पता hi है जैसे hi उसपे लेते नींद आ जाती hai...bas वही hua..aur मैं सो गया...

मैं भूल गया था की आज hi वो aayega...mujhe ट्रैन karne...main सोया और पहुंच गया अलबूस और कूपर के pass....waha पंहुचा और उनके पास जाके उसके साथ थोड़ी मस्ती करने लगा की अचानक किसी ने मेरे ऊपर वॉर कर diya....wo तो अलबूस ने उसको देख लिया था तभी उसने मेरे पेअर पे पेअर मारा और मैं गिर गया और उससे बच gaya...par ये तो बस शुरुआत thi...wo तो अब वार पे वार किये जाने लगा मैंने भी अपनी तलवार nikali...aur उसका सामना करने laga.....par उसकी स्पीड बहुत hi ज्यादा thi...main हैंडल नहीं कर पा रहा tha...ab हालत ऐसी हो गयी थी की मैं उसको ठीक से डिफेंड तक नहीं कर पा रहा था...

सायद ये बातें अलबूस एयर कूपर को बुरी लगी की दोनों hi उस हमलावर पे टूट padde...waise तो दोनों hi छोटे थे abhi..par थे तो ड्रैगन्स hi...unke अंदर की पावर्स अभी बैलेंस्ड थी nahi...to इसी वजह से जब कूपर ने उस हमलावर के ऊपर fire...haa सायद वही tha...theek से दिखा नहीं mujhe...wo choda..to उसकी इंटेंसिटी बहुत hi ज्यादा thi....Wo कहते है ना सांप से ज्यादा खतरा सांप के बच्चे से होता hai...kyunki वो नहीं जानता कितना जहर काफी होता है किसी को मारने के liye...to वो कभी ज्यादा तो कभी बहुत काम उसे करते है जहर ka...bas वैसा hi कूपर ने भी kiya...aur जब उसने किया तो अलबूस कैसे पीछे रहता उसने भी किसी चीज़ से हमला किया uspe...oi एनर्जी बॉल जैसा tha...Cooper के हमले से तो वो बस चौंक गया था पर बचने में भी कामियाब रहा tha...haa थोड़ा बहुत उसको चोट आयी होगी पर अलबूस का hamla...wo तो कम्मल का tha...wo एनर्जी बॉल आसमान की ओर गया और फिर उसके अंदर से कुछ बिल्जी जैसा पर काले रंग का निकलने laga...aur वो बहुत hi तेज़ tha...wo हमलावर उससे बचने की कोशिश कर रहा था पर बच नहीं पा रहा था...

ध्रुव - अरे वो टेस्ट लेने आये the...maine बताया र्था ना ये तुम्हे तलवार बाज़ी सीखने वाले hai...ab रोक्को इन् दोनों ki...kahi वो जख्मी हो गए तो दिक्कत हो जायेगी...

मैंने ये सुनते hi अलबूस और कूपर को शांत करने में लग गया पर वो शांत hi नहीं हो रहे the...wo तो मैंने उसके लिए खाना रख दिया जिसको देख उनका ध्यान बात गया और उनकी जो भी पावर्स थी वो धीरे धीरे ख़तम hui...par इस बिच उन् जनाब की हालत ख़राब हो गयी थी जो मुझे सीखने वाले the...Main उनके पास गया और उनको उठाया...

जैसे hi मैंने उनको छुआ उठाने के लिए बहुत hi अजीब लगा mujhe...main बता नहीं सकता कैसा फील किया maine...bas अजीब सा laaga...aur सायद ये बात उनको पता चल गयी वो भी तुरंत अलग हो गए मुझसे...

वो - ध्रुव आपने तो कहा था यहाँ बस यही hoga...aurt दो बच्चे होंगे ड्रैगन्स के जो अभी कुछ नहीं जानते फिर ये क्या था...

ध्रुव - अरे ये सच में नहीं जानते कुछ पर पता नहीं कैसे ये सब पावर्स उसे करने lage...tum चिंता मत करो तुम्हारी बॉडी ठीक hogi...ab लेलो टेस्ट इसकी...

मैं - बॉडी ठीक hogi...ek मिनट और ये यहाँ कैसे ये तो मेरा मंद है ना..

ध्रुव - हां तुम्हारा hi मंद है तभी तो इनकी बॉडी नहीं इनका सोल आया है यहाँ पे तुम्हे सीखने ko...ye कैसे आये वो सब बाद में बताऊंगा...

मैं - वैसे hi आये होंगे ना जैसे मैं अपने बॉडी से निकलता हु और जैसे मैं निकिता को बचने गया था...

ध्रुव - हां सही samjhe...ab तैयार रहो ये टेस्ट लेगा तुम्हारा...

वो - टेस्ट हो गया है और मैं फ़ैल हु....

ध्रुव - अरे वो तो ये ड्रैगन्स आ गए बिच में वर्ण प्रतीक fa....ek मिनट तुम फ़ैल हो ये क्या है...

वो - हां मैं फ़ैल hu...agar ये जुंग का मैदान होता तो मैं अभी मारा jaata...mujhe सभी चीज़ों के लिए तैयार रहना चाहिए tha...par मैं नहीं रहा...

मैं - अरे वो तो ये अलबूस और कूपर के कारन ना नहीं तो आप मुझपे भरी पद रहे थे...

वो - हां जानता hu...par अब मुझे लगता है मुझे और प्रैक्टिस की जरुरत hai....main खुद को और मजबूत करना चाहता हु..

ध्रुव - तो क्या तुम इसको नहीं सिखाओगे..

वो - अरे नहीं नहीं ऐसी बात नहीं है मैं इसको सिखाऊंगा naa....main इसको तलवार वाजी sikhaunga..lekin मुझे नहीं लगता इन् दोनों के होते हुए इसको कोई कुछ कर पायेगा...

ध्रुव - नहीं फिर भी इसको तैयार तो रहना hi पड़ेगा naa..maan लो कभी ये दोनों नहीं हो फिर क्या होगा...

वो - ऐसा लगता तो नहीं कभी होने वाला hai..par हां ये भी सही hai...bure से बुरे वक़्त के लिए तैयार रहना सही होता है और ये मुझसे अच्छा कोण jaanega...Prateek कल से ट्रेनिंग शुरू करेंगे आज मेरी हालत ख़राब हो गयी है इन् दोनों की वजह se...waise कुछ भी कहो बॉन्डिंग अच्छी बना रहे हो इनसे...

वो फिर चला गया...

आज के लिए इतना hi.......next अपडेट में ओल्ड आउल के लोगो के पास jaayenge...saath में प्रोफ. सूरज के बारे में कुछ बातें पता karenge...aur अब कल से ट्रेनिंग भी शुरू करेंगे
 
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