- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 138,074
अपडेट - 29
अब तक
मैंने ओल्ड आउल से बात करि उसने मुझे बताया की उसकी कुछ परेशानियां है अगर मैं उनको सुलझा दू तो वो हमेशा के लिए मेरा और ज्वाला के कबीले का साथ dega..main तैयार हो gaya....wahi उसके जाने के बाद मैं अलबूस और कूपर के पास gaya...main भूल गया था की आज कोई मुझे ट्रैन करने आने वाला tha...main तो लगा हुआ था अपने नन्हे से दोस्तों के साथ की tabhi..kisi ने मुझपे हमला kiya...wo तो अलबूस ने मुझे बचा liya...fir उसके बाद जो hua...Cooper और अलबूस ने उस हमला करने वाले पे हमला कर diya....thodi देर में ध्रुव की आवाज आयी उसने मुझे उसको रोकने को कहा मैंने उनको रोका और फिर उस हालमा करने वाले को उठाया वो hi मुझे ट्रैन करने आये the...unse बातें हुई और
अब आगे...
मैं सुबह उठा और रेडी होक चला गया मेडिटेट करने ko..syad आज भी थोड़ी देर बाद बुआ वह आ gayi...Main ध्यान के वक़्त वही कर रहा था अपने थंडर एलिमेंट को मज्बूओत कर रहा tha...jab मैं ध्यान से उठा तो वह पे ना सिर्फ बुआ थी बल्कि निकिता भी thi...abhi वो ध्यान में hi बैठी हुई thi...Bua भी वैसे hi thi...main वह एक बार उन् दोनों को देखा और फिर वह से चला गया अपने रूम में वह गया और फिर जल्दी से रेडी होक चल दिया ब्रेकफास्ट के liye....bahar आया तो दब का ध्यान aaya.....maine सोचा की उसके साथ hi चल देता hu....Main उसके रूम के दरवाजे पे गया और दरवाजा khatkhataya...darwaja खुला हुआ tha....Maine देखा की वो वही फर्श पे बैठा हुआ था ध्यान pe...par मेरे दरवाजा खोलते hi वो उठ gaya....iska मेडिटेट करने का तरीका बड़ा hi कमजोर लगा मुझे...
दब - अरे प्रतीक tum...kya बात है...
मैं - क्या बात है ??? क्लासेज नहीं करनी क्या टाइम देखो क्या हो रहा है..
दब - नहीं आज मैं नहीं जा रहा hu....mujhe आज स्ट्रेंज वर्ल्ड जाना है पापा ने बुलाया है...
मैं - आज पर आज तो वीकेंड से पहले की आखिरी क्लासेज है आज क्यों जाना है कल चले जाना....
दब - नहीं यार वो पापा ने कहा है वह जल्दी आने ko...sayad कुछ काम hai...aur मैं ऐसे मौके नहीं छोड़ sakta...pata है मेरे और मेरे पापा में ज्यादा बनती nahi...Main हमेशा से कोशिश करता आया हु की उनसे मेरी जो बॉन्डिंग है वो मजबूत हो पर किसी ना किसी वजह से ऐसा नहीं हो paata...to अब मैं कपि भी मौका नहीं छोड़ता...
मैं समझ गया की इसके और इसके पिता के बिच की क्या कंडीशन है तो मैंने बस उसको आल थे बेस्ट बोलै और वह से बहार आ gaya...main ब्रेकफास्ट करने चला gaya....waha पे मैं आज अकेला बैठा हुआ tha....koi मेरे या दब के पास नहीं आया करता tha...karan भी था हम दोनों ने पंगे hi ऐसे लोगो से ले रखे the....wo दो दोस्त जिनको दब ने बचाया था वो भी हमारे साथ नहीं रहते थे अब...
मैं अकेला hi बैठा ब्रेकफास्ट कर रहा tha...ki तभी वह निकिता आती hai...aur आके बैठ जाती hai...waise भी जगह खाली hi thi...baithne के बाद वो भी खाना खाने लगती है apna...main एक पल के लिए उसको hi देखता रह जाता हु समझ hi नहीं आता मुझे ये यहाँ पे क्यों hai...matlab..ye तो दूसरे जगह बैठा करती थी...
निकिता - अपना खाना ख़तम करो मैं यही पे hu...baad में भी देख सकते ho..yaa फिर क्लास में..
मैं - तुम यहाँ क्यों....
निकिता - क्यों नहीं आ सकती kya...yaha पे बस तुम दोनों को बैठने की इज़्ज़ज़त मिली है kya...waise दिख नहीं रहे हमारे एल्फ प्रिंस कहा गए वो...
मैं - नहीं ऐसा नहीं है वो तो कोई हमारे साथ बैठता nahi..bas इसीलिए pucha...aur दब अभी अपने पिता से मिलने जाने वाला है वो क्लास भी नहीं करेगा आज...
निकिता - आज पर आज तो वीकेंड के पहले की लास्ट क्लास है naa...Fir आज kyun..kal जाना था ना..
मैं - नहीं उसने बोलै कोई जरुरी काम है तो चला गया...
निकिता - हम्म ठीक hai...waise क्या मैं भी तुम दूनो के ग्रुप में आ सकती हु kya...waise भी हममे तो एक साथ hi रहना है ना ab....wo प्रोफ. पूनम ने कहा था ना...
मैं - हां हां वैसे कोई ग्रुप नहीं है hamara.....aur तुम दोस्त बन सकती हो...
निकिता - thanks....waise मैं ना यहाँ कुछ पूछना चाहती थी तुमसे....
मैं - हां पूछो
निकिता - वो तुम नाराज़ तो नहीं ना वो कल मैंने तुम्हारी लड़ाई के बारे में बता दिया...
मैं - हां शुरू में थोड़ा गुस्सा आया था पर कोई बात nahi...chalo चलते है क्लास का भी टाइम हो गया है...
हम दोनों वह से थे और क्लास में चले gaye...par क्लास में जाने के बाद वह पे कोई असिस्टेंट प्रोफ. आ गया और वो क्लास लेने laga....hamare पूछने पे बताया गया की प्रोफ. सूरज किसी जरुरी काम से बहार गए hai....class हुई आधे यतीमे तक hi सिर्फ थ्योरी hi पढ़ाई गयी प्रक्टिकल्स नहीं hue..aur हम हाफ टाइम में hi फ्री कर दिए gaye....Main क्लास से निकला और अपने रूम में जाने laga...par तभी निकिता की आवाज आयी.....
निकिता - अरे कहा जा रहे ho...chalo लाइब्रेरी चलते है वह बहुत मज़्ज़ा आता है...
मैं - लाइब्रेरी में मज़्ज़ा ???? वो भला kaise....waha तो किताबें hi होती है ना और मुझे किताबें रूम पे hi मिल जाती है....
मैंने ऐसा कहा और निकिता मुझे घूरने lagi...jaise मैंने कोई बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो....
मैं - क्या हुआ ऐसे क्यों घूर रही हो...
निकिता - तो तुम भी उन्ही लोगो जैसे ho...library की अहमिययत अलग होती hai....aur उसको ये पोर्टेबल लाइब्रेरी कभी काम नहीं कर sakti....library में वो चीजजें भी मिल जाती है जिनको हम ढूंढ नहीं रहे होते है....
मैं - हां पता है पर मैं यहाँ के लाइब्रेरी में नहीं गया हु अभी तक...
निकिता - तो आज चलो मेरे साथ वह पे सच में बहुत अच्छी अच्छी किताबें है सभी चीज़ों के बारे में...
मैं एक बात समझ गया था अभी तक ज्वाला के कबीले और पोलर बेयर के कबीले के बारे में अगर कुछ भी पता लगाना हो तो मुझे पोर्टेबल लाइब्रेरी से नहीं पता चल sakta....kyunki उसमे से वही निकलता है जो मैं उससे मांगता hu..aur मैं ये hi नहीं जानता वो है कॉमन तो मैं क्या मांगू पोर्टेबल लाइब्रेरी se...aur कैसे पता करू उसके बारे mein....to मुझे अगर कुछ जाना हो या पता करना हो तो वो रैंडम्ली hi हो पायेगा sayad...haa वक़्त बहुत लगने वाला है इसमें पर तरय करने में क्या जाता है और वैसे भी लाइब्रेरी जाना कोई बुरी बात तो है nahi...to बस मैंने भी मैं बना लिया वह जाने का और निकल पड़ा निकिता के saath...hum थोड़ी देर में लाइब्रेरी में थे....
क्या लाइब्रेरी थी ye...matlab अगर मैं यहाँ पे किताबें hi गिनने बैठु तो भी मुझे 10 साल लग जाने है...
निकिता - यहाँ की किताबें रोज अपडेट होती hai...aur नयी किताबें हमेशा आती रहती hai...yaha पे हर तरह की किताबें मिल jaayegi...kadhe के लिए जादू के लिए लड़ाई के liye....yaa अपने स्पिरिट को ताकतवर बनाने के लिए...
लास्ट वाली बात पे उसने कुछ ज्यादा hi जोर दिया था और मुझे देख भी रही थी वो उस waqt....kal से hi मुझे ऐसा लग रहा है की वो जानती है सायद की मैंने उसको बचाया और साथ hi उसके स्पिरिट एनिमल को भी पावर्स दी है...
मैं - ये तो बहुत अच्छी बात है..
निकिता - हां अच्छा है तुम्हारी वो पोर्टेबल लिरार्य से बहुत अच्छा hai...usme बुक्स अपडेटेड नहीं hote...naye बुक्स भी लेट आते है...
मैं - उह मुझे ये पता नहीं टी...
मैं आगे बढ़ hi रहा था की एक बुक शेल्फ पे मुझे एक किताब dikhi....maine उसको उठाया और देखने लगा...
निकिता - हम्म अच्छी चॉइस है आते hi मर्लिन की लिखी हुई kitab,,,waise तुमने तो पढ़ी हुई होगी ये वाली ना...
मैं - नहीं तो क्यों...
मैंने ये कहा और निकिता के चेहरे पे एक स्माइल आ gayi...usne वो किताब मुझे ली और उसको मुझे dikhaya...maine उसको देखा और याद करने लगा इसको कही और भी देखा था मैंने...
निकिता - ये वही किताब है जिसमे लिखी हुई नबात दिखा के तुम और दब काढ़े वाली क्लास से निकलने से बच्चे the....tumne तो पेज नंबर तक बता दिया tha...aur अब कहते हो पढ़ी हुई नहीं है...
मैं शॉकेड रह gaya....mujhe याद नहीं था ये और इसको याद था ये sab...par क्या करे पकड़ा गया था अब बचें के लिए कुछ ना कुछ तो करना hi होगा ना...
मैं - हां मैंने पढ़ही हुई है वो बस याद नहीं रहा था...
निकिता - अच्छा फिर ये बताओ इस किताब की वो पेज कोण सी है जिसको मर्लिन ने नहीं लिखी...
मैं - ऐसा थोड़ी ना होता है किताब जब मर्लिन के नाम कीहै तो उन्होंने hi पूरी किताब लिखी होगी ना फिर क्या ऐसे hi....
निकिता- तुमने नहीं पढ़ी है ना ये किताब मुझे पता है तुमने नहीं पढ़ी है isko...agarr पढ़ी होती तो ये बात जरूर पता होती तुम्हे...
मेरी समझ में नहीं आ रहा था kuch...Main कुछ बोलता उससे पहले उसी ने उस टॉपिक को वही पे बंद कर दिया और कहा की नेक्स्ट क्लास शुरू होने वाली है तो चलो...
मैं भी खुद को बचने के लिए चल दिया वह se...aur हम दोनों जा पहुंचे काढ़े वाली क्लास में वह पे ज्यादा कुछ नहीं हुआ बस क्लास hui....Haa आज होड़ साहब भी आये थे par...aisa लगा नहीं की वो मेरे में थोड़ा सा भी इंटरेस्टेड hai..wo बस आये और क्लास ली और चले gaye...haa ये अजीब सा लगा कुछ की वो हमारे क्लास में आये the...jaisa सुन्ना था उनके बारे में उस हिसाब से तो उनका हमारे क्लास में आना ये किसी चमत्कार से काम नहीं था...
इस क्लास के बाद हम चल दिए प्रोफ. नमन के पास वह गए तो वह भी ज्यादा कुछ नहीं hua...bas क्लासेज hi हुई जैसे नोर्मल्ली होती है शामे बुआ के क्लास में भी hua...Ye सब होने के ठीक बाद में तुरंत hi अपने रूम में चला गया...
मैं आया और तुरंत hi ज्वाला को याद kiya...saath में ध्रुव को bhi...aaj उसकी आवाज भी नहीं सुनी और शाम तक हो गयी थी...
ध्रुव की आवाज तो नहीं आयी पर ज्वाला आ गया...
मैंने ज्वाला से ओल्ड आउल के जगह ले जाने को कहा और उसने वैसा hi kiya..mujhe ले गया ओल्ड आउल के इलाके में.....
इस जगह के बारे में क्या कहु समझ नहीं आ रहा tha...mausam से शुरू करता hu...yaha पतझड़ का मौसम tha...pedo से भरा हुआ ये इलाका अभी रंग बिरंगे पत्तो से भरा हुआ tha....dekh के एक पल को तो लगा इतना भी सुन्दर कोई जगह होता है kya...main तो यहाँ के खूबशूरती में hi खो गया वो तो ध्रुव की आवाज आयी और मैं होश में आया...
ध्रुव - याद किया था मुझे क्या तुमने...
मैं - अरे हां वो आज एक बार भी बात तक ना हुई अपनी तो bas...aur फिर यहाँ आना भी था ना...
ध्रुव - वो मैं आज उन दोनों को समझा रहा tha...unke पास पावर्स आ गए है अब उसको संभालना थोड़ा परेशानी भरा hai...bas उसी वजह से मैं बात नहीं कर पाया...
मैं - तो तुम भी उनको ट्रैन कर सकते हो naa...to तुम hi उनको मेरे लिए ट्रैन क्यों नहीं करते...
मैंने ये बस ऐसे hi पूछा tha...yaa यूँ कहो तो मजाक किया था पर ध्रुव तो मेरे ऊपर hi चढ़ गया...
ध्रुव - मैं यहाँ पे बस तुम्हे गाइड करने को आया हु ना की उनको तुम्हारे लिए तैयार करने के liye...aur अगर कर भी दिया ना पिछली बार की तरह तो वापस से वही hoga....main फिर से इन्ही के साथ चला जाऊंगा और तुम तुम....
मैं एक पल को तो समझ hi नहीं पाया की ये बोल क्या रहा है पिछली बार से क्या मतलब है इसका मैं उससे इसके बारे में पूछता उससे पहले hi हमारे सामने एक उल्लू आ गया.....
उल्लू - स्वागत है आपका आउल टाउन mein,..Aap होंगे ज्वाला (ज्वाला की ओर देखते हुए कहा...) और आप (मेरी ओर देखते हुए) आप होंगे हमारे मसीहा प्रतीक ji....aap दोनों से मिलके बहुत अच्छा लगा...
जब ये उल्लू आया ध्रुव ने वो साड़ी बातें hi बदल दी प्रतीक के दिम्माग se...wo नहीं चाहता था अभी वो सवाल उसके सामने आये जिनका जवाब अभी देना सही नहीं है...
मैं - अरे ऐसी कोई बात नहीं है मैं कोई मसीहा नहीं मैं तो दोस्त हु bas...Old आउल जी ka...waise आप कोण...
वो - Main...main यहाँ की एक निवासी hu...Old आउल ने मुझे hi आपका स्वागत करने का जिम्मा दिया tha....so बस मैं आ gayi...ab आप चले...
मैंने नोट किया की वो बोलते वक़्त कुछ थोड़ा हिचकिचा रही thi...haa ये लड़की thi...uske पंख भी थोड़े बिखरे हुए the...main समझ नहीं पाया कुछ...
ध्रुव - नहीं आगे नहीं जाना है पहले इससे उस कीड़े के बारे में पूछो...
कल मैंने चाहे कितना hi ध्रुव की बातों को नज़र अंदाज़ किया था पर उसके बातों में लॉजिक तो था hi...Maine उसकी बात मानी और इससे पूछा उस कीड़े के बारे में.....
मैं - है है चल लेंगे पहले ये बताइये वो कीड़ा जिसके बारे में ओल्ड आउल ने बताया tha...uske बारे में कुछ बता दे तो...
उस्सने अपना एक पंख तोडा और मुझे दे दिया और खुद वह से चली gayi...Main बस देखता raha...aisa कोण करता hai..abhi स्वागत करने आयी थी और अब भाग गयी...
ज्वाला - पीछे dekho...ye क्या है...
मैंने पीछे देखा तो वह से धुल की एक लहर आ रही thi...par वो धुल नहीं थी वो छोटे छोटे कीड़े the...Jwala ने तुरंत hi एक पोर्टल खोला जिससे होते हुए मैं अपने रूम में आ गया और वो सायद अपने कबीले में जा pahucha....ye क्या था मेंसमझ hi नहीं पाया...
ध्रुव- मैंने कहा था जान लो किश चीज़ के बारे में बात चल रही है....
मैं - अरे पर वो था kya....aur वो उसका ऐसे चले जाना पंख देके और ज्वाला का ऐसा karna..kya था ये सब...
ध्रुव - वो जो कीड़े थे अगर हमसे टच भी होते ना तो अलबूस और कूपर दोनों की hi हालत ख़राब हो जानी थी....
मैं - क्या मतलब hai...unko कैसे कुछ हो झाता वो तो स्पिरिट्स है मेरे...
ध्रुव - हां वही तो बात है वो स्पिरिट्स है और ये जो कीड़े थे वो स्पिरिट्स को hi मारते hai..abhi तक तो अलबूस और कूपर का...
मैं - बकवास बंद करो मैं कभी ऐसा नहीं होने दूंगा...
ध्रुव - अभी ये होने वाला tha...agar ज्वाला ने सही वक़्त पे ये नहीं किया hota...aur वो उल्लू वो कोण थी ये पता लगाओ pahle...mujhe तो इस्पे भी शक है वो उल्लू hi थी naa...uske पंख तो देखे ते ना...
मैं - वो उल्लू hi थी इतना पता है mujhe..par जैसे hi उसने वो पंख मुझे दिया तुरंत hi वो धुल का आना मुझे भी उसपे शक करने पे मजबूर कर रहा है....
ध्रुव - हम्म ओल्ड आउल से बात करनी होगी पर अभी नहीं रात में पर उसको खबर करा दो...
मैं - हां मैं करा देता हु...
मैंने ज्वाला को बोल दिया की उससे बोले की वो रात में मुझसे मिले साथ में ये भी तो जानना था उससे की ये प्रोफ. सूरज कहा है आज...
ये करने के बाद मैं वो पंख देखने लगा पर उसमे कोई चीज़ दिखी नहीं mujhe....maine उसको अपंने पास hi रख लिया और फिर रूम से बहार nikla...dinner को थोड़ा वक़्त tha..aur अभी कुछ करने का मूड नहीं tha...Main बहार निकला और मुझे निकिता वापस से मिल गयी...
निकिता - कहा चले गए थे मैं कब से धुंध रही थी चिम्को...
मैं - मुझे पर क्यों...
निकिता - वो बस ऐसे hi...accha एक बात batao...tum क्या घर जा रहे हो इस वीकेंड भी..
मैं - हां जा रहा हु बुआ के साथ..
मैं (मां में) ये क्या बोल दिया...
निकिता - बुआ के साथ तो तुम्हारी बुआ तुम्हे ेने आ रही है...
मैं - हां हां वही to..wahi लेने आ रही है mujhe...sayad आज hi निकल जॉन...
मैं उससे बात कर रहा था की तभी बुआ आ गयी वह पे....
बुआ - वो भी चल रही है हमारे साथ उसको पता है sab...maine बता दिया...
मैं - Kya...matlab इसको पता है की मैं आपका भतीजा हु...
बुआ - अभी क्या किसी और भासा में कहा maine...ab जल्दी से भागो और रेडी होक आओ हममे निकलना है बस आती hi होगी...
मैं - हम आज ही जा रहे है क्या...
बुआ - तूने hi तो बोलै ना बच्चू की तेरी बुआ आज लेने आएगी tujhe...to अब आ गयी जल्दी रेडी हो और chal...Nikita तुम जाओ और कविता को देखो वो तैयार हुई या नहीं..
मैं - क्या कविता मैडम भी जा रही है हमारे साथ...
बुआ - हां क्यों कोई दिक्कत है क्या...
मैं - नहीं पर...
बुआ नहीं ना फिर रेडी होक आ जल्दी...
मैं क्या बोलता बुआ तो अलग ही फॉर्म में चल रही थी तो बस मैं भी चल दिया वह se...room में गया रेडी हुआ और बहार आ gaya...Bua वही पे थी साथ में निकिता और कविता मैडम bhi...Main वह खड़ा हुआ hi था की बस आ गयी और हर बार की तरह इस बार भी बस पे जाना था और हम पहुंच भी gaye....jab हम चारो बस से उतरे तो वह पे पहले से रूपल दीदी कड़ी thi...mujhe देखती hi वो मेरे पास आयी और मेरे गाल खींचने lagi....tabhi उनकी नज़र बाकी के दो लोगो पे गयी...
रूपल - उह तो फिर आ गयी आप...
कविता - क्या करे ab..hum तो आपके दीवाने है आना hi pada..judayi बर्दास्त नहीं होती ना...
रूपल - इस बार देखो बस आप कैसे हारती हु आपपको..
कविता - अल्ले ले ली ले मेला बचा मुझे हलायेगा.....
बुआ - कविता Rupal...abhi शुरू नहीं होना है बाद मनें दोनों को मौका milega...aur संडे उसी के हिसाब से चलेगा जो jitega...pahle की तरह...
रूपल - हां ठीक hai...ye कोण है...
बुआ - अरे हां ये ये है Nikita....Bacchu की क्लासमेट है मेरी स्टूडेंट है और अभी के लिए यहाँ पे हमारी मेहमान है ये...
रूपल - Oo...chalo सब फिर वैसे भी माँ और बाकी सब वेट कर रहे है...
सभी अपना अपना सामान उठा के चल दिए वह pe...waha पहुंचे तो सभी खाने के टेबल पे बैठे हुए the...sayad बुआ ने कविता मैडम और निकिता के आने का नहीं बताया था पहले तो वह पे चेयर्स नहीं थी पर उनको देखते hi चची ने चेयर्स का बंदोबस्त कर diya...aur फिर सबने खाना khaya...sabki जान पहचान भी हुई निकिता se...unko उनका रूम दिया गया और सारे सोने चले gaye....Main सोने आया रूम तो वही था पहले वाला,,,,
सोने के बाद तुरंत hi पहुंच गया उसी जगह pe...Albus और कूपर के pass...unko देखा तो उनको कही दूर खाना दिया हुआ tha...wah एक परछाई सी कोई चीज आयी...
वो - पहला lesson....speed बढ़ाना hoga.......Ab सुनने यहाँ से स्पीड तो बढ़ेगी नहीं तो ट्रेनिंग पैहसिकलली hi करना होगा ना...
मैं - हां तो क्या अब कल से शुरू करे...
वो - अरे नहीं बात बस ये है की मैं..
आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में ट्रेनिंग आगे जायेगी और साथ hi वो ओल्ड आउल aayega...aur कीड़ो के बारे में पता छाए...
अब तक
मैंने ओल्ड आउल से बात करि उसने मुझे बताया की उसकी कुछ परेशानियां है अगर मैं उनको सुलझा दू तो वो हमेशा के लिए मेरा और ज्वाला के कबीले का साथ dega..main तैयार हो gaya....wahi उसके जाने के बाद मैं अलबूस और कूपर के पास gaya...main भूल गया था की आज कोई मुझे ट्रैन करने आने वाला tha...main तो लगा हुआ था अपने नन्हे से दोस्तों के साथ की tabhi..kisi ने मुझपे हमला kiya...wo तो अलबूस ने मुझे बचा liya...fir उसके बाद जो hua...Cooper और अलबूस ने उस हमला करने वाले पे हमला कर diya....thodi देर में ध्रुव की आवाज आयी उसने मुझे उसको रोकने को कहा मैंने उनको रोका और फिर उस हालमा करने वाले को उठाया वो hi मुझे ट्रैन करने आये the...unse बातें हुई और
अब आगे...
मैं सुबह उठा और रेडी होक चला गया मेडिटेट करने ko..syad आज भी थोड़ी देर बाद बुआ वह आ gayi...Main ध्यान के वक़्त वही कर रहा था अपने थंडर एलिमेंट को मज्बूओत कर रहा tha...jab मैं ध्यान से उठा तो वह पे ना सिर्फ बुआ थी बल्कि निकिता भी thi...abhi वो ध्यान में hi बैठी हुई thi...Bua भी वैसे hi thi...main वह एक बार उन् दोनों को देखा और फिर वह से चला गया अपने रूम में वह गया और फिर जल्दी से रेडी होक चल दिया ब्रेकफास्ट के liye....bahar आया तो दब का ध्यान aaya.....maine सोचा की उसके साथ hi चल देता hu....Main उसके रूम के दरवाजे पे गया और दरवाजा khatkhataya...darwaja खुला हुआ tha....Maine देखा की वो वही फर्श पे बैठा हुआ था ध्यान pe...par मेरे दरवाजा खोलते hi वो उठ gaya....iska मेडिटेट करने का तरीका बड़ा hi कमजोर लगा मुझे...
दब - अरे प्रतीक tum...kya बात है...
मैं - क्या बात है ??? क्लासेज नहीं करनी क्या टाइम देखो क्या हो रहा है..
दब - नहीं आज मैं नहीं जा रहा hu....mujhe आज स्ट्रेंज वर्ल्ड जाना है पापा ने बुलाया है...
मैं - आज पर आज तो वीकेंड से पहले की आखिरी क्लासेज है आज क्यों जाना है कल चले जाना....
दब - नहीं यार वो पापा ने कहा है वह जल्दी आने ko...sayad कुछ काम hai...aur मैं ऐसे मौके नहीं छोड़ sakta...pata है मेरे और मेरे पापा में ज्यादा बनती nahi...Main हमेशा से कोशिश करता आया हु की उनसे मेरी जो बॉन्डिंग है वो मजबूत हो पर किसी ना किसी वजह से ऐसा नहीं हो paata...to अब मैं कपि भी मौका नहीं छोड़ता...
मैं समझ गया की इसके और इसके पिता के बिच की क्या कंडीशन है तो मैंने बस उसको आल थे बेस्ट बोलै और वह से बहार आ gaya...main ब्रेकफास्ट करने चला gaya....waha पे मैं आज अकेला बैठा हुआ tha....koi मेरे या दब के पास नहीं आया करता tha...karan भी था हम दोनों ने पंगे hi ऐसे लोगो से ले रखे the....wo दो दोस्त जिनको दब ने बचाया था वो भी हमारे साथ नहीं रहते थे अब...
मैं अकेला hi बैठा ब्रेकफास्ट कर रहा tha...ki तभी वह निकिता आती hai...aur आके बैठ जाती hai...waise भी जगह खाली hi thi...baithne के बाद वो भी खाना खाने लगती है apna...main एक पल के लिए उसको hi देखता रह जाता हु समझ hi नहीं आता मुझे ये यहाँ पे क्यों hai...matlab..ye तो दूसरे जगह बैठा करती थी...
निकिता - अपना खाना ख़तम करो मैं यही पे hu...baad में भी देख सकते ho..yaa फिर क्लास में..
मैं - तुम यहाँ क्यों....
निकिता - क्यों नहीं आ सकती kya...yaha पे बस तुम दोनों को बैठने की इज़्ज़ज़त मिली है kya...waise दिख नहीं रहे हमारे एल्फ प्रिंस कहा गए वो...
मैं - नहीं ऐसा नहीं है वो तो कोई हमारे साथ बैठता nahi..bas इसीलिए pucha...aur दब अभी अपने पिता से मिलने जाने वाला है वो क्लास भी नहीं करेगा आज...
निकिता - आज पर आज तो वीकेंड के पहले की लास्ट क्लास है naa...Fir आज kyun..kal जाना था ना..
मैं - नहीं उसने बोलै कोई जरुरी काम है तो चला गया...
निकिता - हम्म ठीक hai...waise क्या मैं भी तुम दूनो के ग्रुप में आ सकती हु kya...waise भी हममे तो एक साथ hi रहना है ना ab....wo प्रोफ. पूनम ने कहा था ना...
मैं - हां हां वैसे कोई ग्रुप नहीं है hamara.....aur तुम दोस्त बन सकती हो...
निकिता - thanks....waise मैं ना यहाँ कुछ पूछना चाहती थी तुमसे....
मैं - हां पूछो
निकिता - वो तुम नाराज़ तो नहीं ना वो कल मैंने तुम्हारी लड़ाई के बारे में बता दिया...
मैं - हां शुरू में थोड़ा गुस्सा आया था पर कोई बात nahi...chalo चलते है क्लास का भी टाइम हो गया है...
हम दोनों वह से थे और क्लास में चले gaye...par क्लास में जाने के बाद वह पे कोई असिस्टेंट प्रोफ. आ गया और वो क्लास लेने laga....hamare पूछने पे बताया गया की प्रोफ. सूरज किसी जरुरी काम से बहार गए hai....class हुई आधे यतीमे तक hi सिर्फ थ्योरी hi पढ़ाई गयी प्रक्टिकल्स नहीं hue..aur हम हाफ टाइम में hi फ्री कर दिए gaye....Main क्लास से निकला और अपने रूम में जाने laga...par तभी निकिता की आवाज आयी.....
निकिता - अरे कहा जा रहे ho...chalo लाइब्रेरी चलते है वह बहुत मज़्ज़ा आता है...
मैं - लाइब्रेरी में मज़्ज़ा ???? वो भला kaise....waha तो किताबें hi होती है ना और मुझे किताबें रूम पे hi मिल जाती है....
मैंने ऐसा कहा और निकिता मुझे घूरने lagi...jaise मैंने कोई बहुत बड़ा जुर्म कर दिया हो....
मैं - क्या हुआ ऐसे क्यों घूर रही हो...
निकिता - तो तुम भी उन्ही लोगो जैसे ho...library की अहमिययत अलग होती hai....aur उसको ये पोर्टेबल लाइब्रेरी कभी काम नहीं कर sakti....library में वो चीजजें भी मिल जाती है जिनको हम ढूंढ नहीं रहे होते है....
मैं - हां पता है पर मैं यहाँ के लाइब्रेरी में नहीं गया हु अभी तक...
निकिता - तो आज चलो मेरे साथ वह पे सच में बहुत अच्छी अच्छी किताबें है सभी चीज़ों के बारे में...
मैं एक बात समझ गया था अभी तक ज्वाला के कबीले और पोलर बेयर के कबीले के बारे में अगर कुछ भी पता लगाना हो तो मुझे पोर्टेबल लाइब्रेरी से नहीं पता चल sakta....kyunki उसमे से वही निकलता है जो मैं उससे मांगता hu..aur मैं ये hi नहीं जानता वो है कॉमन तो मैं क्या मांगू पोर्टेबल लाइब्रेरी se...aur कैसे पता करू उसके बारे mein....to मुझे अगर कुछ जाना हो या पता करना हो तो वो रैंडम्ली hi हो पायेगा sayad...haa वक़्त बहुत लगने वाला है इसमें पर तरय करने में क्या जाता है और वैसे भी लाइब्रेरी जाना कोई बुरी बात तो है nahi...to बस मैंने भी मैं बना लिया वह जाने का और निकल पड़ा निकिता के saath...hum थोड़ी देर में लाइब्रेरी में थे....
क्या लाइब्रेरी थी ye...matlab अगर मैं यहाँ पे किताबें hi गिनने बैठु तो भी मुझे 10 साल लग जाने है...
निकिता - यहाँ की किताबें रोज अपडेट होती hai...aur नयी किताबें हमेशा आती रहती hai...yaha पे हर तरह की किताबें मिल jaayegi...kadhe के लिए जादू के लिए लड़ाई के liye....yaa अपने स्पिरिट को ताकतवर बनाने के लिए...
लास्ट वाली बात पे उसने कुछ ज्यादा hi जोर दिया था और मुझे देख भी रही थी वो उस waqt....kal से hi मुझे ऐसा लग रहा है की वो जानती है सायद की मैंने उसको बचाया और साथ hi उसके स्पिरिट एनिमल को भी पावर्स दी है...
मैं - ये तो बहुत अच्छी बात है..
निकिता - हां अच्छा है तुम्हारी वो पोर्टेबल लिरार्य से बहुत अच्छा hai...usme बुक्स अपडेटेड नहीं hote...naye बुक्स भी लेट आते है...
मैं - उह मुझे ये पता नहीं टी...
मैं आगे बढ़ hi रहा था की एक बुक शेल्फ पे मुझे एक किताब dikhi....maine उसको उठाया और देखने लगा...
निकिता - हम्म अच्छी चॉइस है आते hi मर्लिन की लिखी हुई kitab,,,waise तुमने तो पढ़ी हुई होगी ये वाली ना...
मैं - नहीं तो क्यों...
मैंने ये कहा और निकिता के चेहरे पे एक स्माइल आ gayi...usne वो किताब मुझे ली और उसको मुझे dikhaya...maine उसको देखा और याद करने लगा इसको कही और भी देखा था मैंने...
निकिता - ये वही किताब है जिसमे लिखी हुई नबात दिखा के तुम और दब काढ़े वाली क्लास से निकलने से बच्चे the....tumne तो पेज नंबर तक बता दिया tha...aur अब कहते हो पढ़ी हुई नहीं है...
मैं शॉकेड रह gaya....mujhe याद नहीं था ये और इसको याद था ये sab...par क्या करे पकड़ा गया था अब बचें के लिए कुछ ना कुछ तो करना hi होगा ना...
मैं - हां मैंने पढ़ही हुई है वो बस याद नहीं रहा था...
निकिता - अच्छा फिर ये बताओ इस किताब की वो पेज कोण सी है जिसको मर्लिन ने नहीं लिखी...
मैं - ऐसा थोड़ी ना होता है किताब जब मर्लिन के नाम कीहै तो उन्होंने hi पूरी किताब लिखी होगी ना फिर क्या ऐसे hi....
निकिता- तुमने नहीं पढ़ी है ना ये किताब मुझे पता है तुमने नहीं पढ़ी है isko...agarr पढ़ी होती तो ये बात जरूर पता होती तुम्हे...
मेरी समझ में नहीं आ रहा था kuch...Main कुछ बोलता उससे पहले उसी ने उस टॉपिक को वही पे बंद कर दिया और कहा की नेक्स्ट क्लास शुरू होने वाली है तो चलो...
मैं भी खुद को बचने के लिए चल दिया वह se...aur हम दोनों जा पहुंचे काढ़े वाली क्लास में वह पे ज्यादा कुछ नहीं हुआ बस क्लास hui....Haa आज होड़ साहब भी आये थे par...aisa लगा नहीं की वो मेरे में थोड़ा सा भी इंटरेस्टेड hai..wo बस आये और क्लास ली और चले gaye...haa ये अजीब सा लगा कुछ की वो हमारे क्लास में आये the...jaisa सुन्ना था उनके बारे में उस हिसाब से तो उनका हमारे क्लास में आना ये किसी चमत्कार से काम नहीं था...
इस क्लास के बाद हम चल दिए प्रोफ. नमन के पास वह गए तो वह भी ज्यादा कुछ नहीं hua...bas क्लासेज hi हुई जैसे नोर्मल्ली होती है शामे बुआ के क्लास में भी hua...Ye सब होने के ठीक बाद में तुरंत hi अपने रूम में चला गया...
मैं आया और तुरंत hi ज्वाला को याद kiya...saath में ध्रुव को bhi...aaj उसकी आवाज भी नहीं सुनी और शाम तक हो गयी थी...
ध्रुव की आवाज तो नहीं आयी पर ज्वाला आ गया...
मैंने ज्वाला से ओल्ड आउल के जगह ले जाने को कहा और उसने वैसा hi kiya..mujhe ले गया ओल्ड आउल के इलाके में.....
इस जगह के बारे में क्या कहु समझ नहीं आ रहा tha...mausam से शुरू करता hu...yaha पतझड़ का मौसम tha...pedo से भरा हुआ ये इलाका अभी रंग बिरंगे पत्तो से भरा हुआ tha....dekh के एक पल को तो लगा इतना भी सुन्दर कोई जगह होता है kya...main तो यहाँ के खूबशूरती में hi खो गया वो तो ध्रुव की आवाज आयी और मैं होश में आया...
ध्रुव - याद किया था मुझे क्या तुमने...
मैं - अरे हां वो आज एक बार भी बात तक ना हुई अपनी तो bas...aur फिर यहाँ आना भी था ना...
ध्रुव - वो मैं आज उन दोनों को समझा रहा tha...unke पास पावर्स आ गए है अब उसको संभालना थोड़ा परेशानी भरा hai...bas उसी वजह से मैं बात नहीं कर पाया...
मैं - तो तुम भी उनको ट्रैन कर सकते हो naa...to तुम hi उनको मेरे लिए ट्रैन क्यों नहीं करते...
मैंने ये बस ऐसे hi पूछा tha...yaa यूँ कहो तो मजाक किया था पर ध्रुव तो मेरे ऊपर hi चढ़ गया...
ध्रुव - मैं यहाँ पे बस तुम्हे गाइड करने को आया हु ना की उनको तुम्हारे लिए तैयार करने के liye...aur अगर कर भी दिया ना पिछली बार की तरह तो वापस से वही hoga....main फिर से इन्ही के साथ चला जाऊंगा और तुम तुम....
मैं एक पल को तो समझ hi नहीं पाया की ये बोल क्या रहा है पिछली बार से क्या मतलब है इसका मैं उससे इसके बारे में पूछता उससे पहले hi हमारे सामने एक उल्लू आ गया.....
उल्लू - स्वागत है आपका आउल टाउन mein,..Aap होंगे ज्वाला (ज्वाला की ओर देखते हुए कहा...) और आप (मेरी ओर देखते हुए) आप होंगे हमारे मसीहा प्रतीक ji....aap दोनों से मिलके बहुत अच्छा लगा...
जब ये उल्लू आया ध्रुव ने वो साड़ी बातें hi बदल दी प्रतीक के दिम्माग se...wo नहीं चाहता था अभी वो सवाल उसके सामने आये जिनका जवाब अभी देना सही नहीं है...
मैं - अरे ऐसी कोई बात नहीं है मैं कोई मसीहा नहीं मैं तो दोस्त हु bas...Old आउल जी ka...waise आप कोण...
वो - Main...main यहाँ की एक निवासी hu...Old आउल ने मुझे hi आपका स्वागत करने का जिम्मा दिया tha....so बस मैं आ gayi...ab आप चले...
मैंने नोट किया की वो बोलते वक़्त कुछ थोड़ा हिचकिचा रही thi...haa ये लड़की thi...uske पंख भी थोड़े बिखरे हुए the...main समझ नहीं पाया कुछ...
ध्रुव - नहीं आगे नहीं जाना है पहले इससे उस कीड़े के बारे में पूछो...
कल मैंने चाहे कितना hi ध्रुव की बातों को नज़र अंदाज़ किया था पर उसके बातों में लॉजिक तो था hi...Maine उसकी बात मानी और इससे पूछा उस कीड़े के बारे में.....
मैं - है है चल लेंगे पहले ये बताइये वो कीड़ा जिसके बारे में ओल्ड आउल ने बताया tha...uske बारे में कुछ बता दे तो...
उस्सने अपना एक पंख तोडा और मुझे दे दिया और खुद वह से चली gayi...Main बस देखता raha...aisa कोण करता hai..abhi स्वागत करने आयी थी और अब भाग गयी...
ज्वाला - पीछे dekho...ye क्या है...
मैंने पीछे देखा तो वह से धुल की एक लहर आ रही thi...par वो धुल नहीं थी वो छोटे छोटे कीड़े the...Jwala ने तुरंत hi एक पोर्टल खोला जिससे होते हुए मैं अपने रूम में आ गया और वो सायद अपने कबीले में जा pahucha....ye क्या था मेंसमझ hi नहीं पाया...
ध्रुव- मैंने कहा था जान लो किश चीज़ के बारे में बात चल रही है....
मैं - अरे पर वो था kya....aur वो उसका ऐसे चले जाना पंख देके और ज्वाला का ऐसा karna..kya था ये सब...
ध्रुव - वो जो कीड़े थे अगर हमसे टच भी होते ना तो अलबूस और कूपर दोनों की hi हालत ख़राब हो जानी थी....
मैं - क्या मतलब hai...unko कैसे कुछ हो झाता वो तो स्पिरिट्स है मेरे...
ध्रुव - हां वही तो बात है वो स्पिरिट्स है और ये जो कीड़े थे वो स्पिरिट्स को hi मारते hai..abhi तक तो अलबूस और कूपर का...
मैं - बकवास बंद करो मैं कभी ऐसा नहीं होने दूंगा...
ध्रुव - अभी ये होने वाला tha...agar ज्वाला ने सही वक़्त पे ये नहीं किया hota...aur वो उल्लू वो कोण थी ये पता लगाओ pahle...mujhe तो इस्पे भी शक है वो उल्लू hi थी naa...uske पंख तो देखे ते ना...
मैं - वो उल्लू hi थी इतना पता है mujhe..par जैसे hi उसने वो पंख मुझे दिया तुरंत hi वो धुल का आना मुझे भी उसपे शक करने पे मजबूर कर रहा है....
ध्रुव - हम्म ओल्ड आउल से बात करनी होगी पर अभी नहीं रात में पर उसको खबर करा दो...
मैं - हां मैं करा देता हु...
मैंने ज्वाला को बोल दिया की उससे बोले की वो रात में मुझसे मिले साथ में ये भी तो जानना था उससे की ये प्रोफ. सूरज कहा है आज...
ये करने के बाद मैं वो पंख देखने लगा पर उसमे कोई चीज़ दिखी नहीं mujhe....maine उसको अपंने पास hi रख लिया और फिर रूम से बहार nikla...dinner को थोड़ा वक़्त tha..aur अभी कुछ करने का मूड नहीं tha...Main बहार निकला और मुझे निकिता वापस से मिल गयी...
निकिता - कहा चले गए थे मैं कब से धुंध रही थी चिम्को...
मैं - मुझे पर क्यों...
निकिता - वो बस ऐसे hi...accha एक बात batao...tum क्या घर जा रहे हो इस वीकेंड भी..
मैं - हां जा रहा हु बुआ के साथ..
मैं (मां में) ये क्या बोल दिया...
निकिता - बुआ के साथ तो तुम्हारी बुआ तुम्हे ेने आ रही है...
मैं - हां हां वही to..wahi लेने आ रही है mujhe...sayad आज hi निकल जॉन...
मैं उससे बात कर रहा था की तभी बुआ आ गयी वह पे....
बुआ - वो भी चल रही है हमारे साथ उसको पता है sab...maine बता दिया...
मैं - Kya...matlab इसको पता है की मैं आपका भतीजा हु...
बुआ - अभी क्या किसी और भासा में कहा maine...ab जल्दी से भागो और रेडी होक आओ हममे निकलना है बस आती hi होगी...
मैं - हम आज ही जा रहे है क्या...
बुआ - तूने hi तो बोलै ना बच्चू की तेरी बुआ आज लेने आएगी tujhe...to अब आ गयी जल्दी रेडी हो और chal...Nikita तुम जाओ और कविता को देखो वो तैयार हुई या नहीं..
मैं - क्या कविता मैडम भी जा रही है हमारे साथ...
बुआ - हां क्यों कोई दिक्कत है क्या...
मैं - नहीं पर...
बुआ नहीं ना फिर रेडी होक आ जल्दी...
मैं क्या बोलता बुआ तो अलग ही फॉर्म में चल रही थी तो बस मैं भी चल दिया वह se...room में गया रेडी हुआ और बहार आ gaya...Bua वही पे थी साथ में निकिता और कविता मैडम bhi...Main वह खड़ा हुआ hi था की बस आ गयी और हर बार की तरह इस बार भी बस पे जाना था और हम पहुंच भी gaye....jab हम चारो बस से उतरे तो वह पे पहले से रूपल दीदी कड़ी thi...mujhe देखती hi वो मेरे पास आयी और मेरे गाल खींचने lagi....tabhi उनकी नज़र बाकी के दो लोगो पे गयी...
रूपल - उह तो फिर आ गयी आप...
कविता - क्या करे ab..hum तो आपके दीवाने है आना hi pada..judayi बर्दास्त नहीं होती ना...
रूपल - इस बार देखो बस आप कैसे हारती हु आपपको..
कविता - अल्ले ले ली ले मेला बचा मुझे हलायेगा.....
बुआ - कविता Rupal...abhi शुरू नहीं होना है बाद मनें दोनों को मौका milega...aur संडे उसी के हिसाब से चलेगा जो jitega...pahle की तरह...
रूपल - हां ठीक hai...ye कोण है...
बुआ - अरे हां ये ये है Nikita....Bacchu की क्लासमेट है मेरी स्टूडेंट है और अभी के लिए यहाँ पे हमारी मेहमान है ये...
रूपल - Oo...chalo सब फिर वैसे भी माँ और बाकी सब वेट कर रहे है...
सभी अपना अपना सामान उठा के चल दिए वह pe...waha पहुंचे तो सभी खाने के टेबल पे बैठे हुए the...sayad बुआ ने कविता मैडम और निकिता के आने का नहीं बताया था पहले तो वह पे चेयर्स नहीं थी पर उनको देखते hi चची ने चेयर्स का बंदोबस्त कर diya...aur फिर सबने खाना khaya...sabki जान पहचान भी हुई निकिता se...unko उनका रूम दिया गया और सारे सोने चले gaye....Main सोने आया रूम तो वही था पहले वाला,,,,
सोने के बाद तुरंत hi पहुंच गया उसी जगह pe...Albus और कूपर के pass...unko देखा तो उनको कही दूर खाना दिया हुआ tha...wah एक परछाई सी कोई चीज आयी...
वो - पहला lesson....speed बढ़ाना hoga.......Ab सुनने यहाँ से स्पीड तो बढ़ेगी नहीं तो ट्रेनिंग पैहसिकलली hi करना होगा ना...
मैं - हां तो क्या अब कल से शुरू करे...
वो - अरे नहीं बात बस ये है की मैं..
आज के लिए इतना hi नेक्स्ट अपडेट में ट्रेनिंग आगे जायेगी और साथ hi वो ओल्ड आउल aayega...aur कीड़ो के बारे में पता छाए...