फंतासी इम्मोर्टल्स - Page 2 - SexBaba
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फंतासी इम्मोर्टल्स

अपडेट - 9

अब तक

Main....Prateek...Kal से मेरी दुनिया hi बदल गयी hai....aisi ऐसी बातें जानने को मिल रही है जो कभी सोचा भी नहीं tha...Master ने बताया मेरी एक बुआ भी है और मैं आज का पूरा दिन उन्ही का साथ गुजर रहा था...

अब आगे

नेक्स्ट डे

मैं उठा और सब कुछ सही tha....wahi हुआ जो अक्सर होता था मेरे साथ कितनी भी परेशानी हो रात में सोने से pahle...jaise hi में बीएड पे आता मुझे नींद आ जाती और सुबह सब सही सा lagta...kuch तो था इस रूम में...

मैं बीएड से उठा और फिर फ्रेश होने के बाद जैसे hi बहार आया बाथरूम se...meri नज़र उस लेटर पे padi...jo मुझे दिया tha...kal पूनम बुआ ne....fir से सब कुछ याद आ gaya....aur मैं सोचने लगा उसी बारे में की मास्टर की आवाज मेरे रूम में aayi.....wo मुझे मैडिटेशन के लिए बुला रही thi....maine वो लेटर को मोड़ के अपने पास रखा और चला गया मैडिटेशन के liye....waha पे अभी सिर्फ मास्टर थी और कोई nahi....main भी उनके बगल में बैठ के मैडिटेशन की कोशिश करने laga....Haa दिम्माग में बहुत कुछ चल रहा था par....unn सब को किसी तरह साइड करके बिठा hi था की वह पे बुआ आ गयी और मेरे बगल में बैठ gayi....ab उनका आना था की मेरा ध्यान टूट gaya....maine उनकी ओर देखा वो ध्यान में बैठ गयी टी आँखें बंद कर ली थी उन्होंने bhi...main भी फिर से आँखें बंद करके बैठ गया....

इस बार मैं अच्छे से कंसन्ट्रेट कर पा रहा था aur....pata नहीं कितनी देर तक करता raha...main अपने रूटीन से hi उठा था...4 बजे के आस पास और फिर फ्रेश होना और बाकी सब कुछ तो ज्यादा वक़्त नहीं लगा hoga...wahi करीब 30 minute.....fir मैं यहाँ आ गया ध्यान लगाने और अब जब मेरी आँखें खुली है तो करीब 8 बज रहे the.....maine देखा बुआ और मास्टर दोनों hi बातें कर रही thi...kisi बारे में मुझसे दूर जाके...

मैं भी उठा और उनकी तरफ जाने laga...main जब उनके पास पंहुचा तो वो दोनों मेरे क्लासेज के बारे में बात कर रहे the....Special बैच के क्लासेज भी अलग होते the....baaki सब से ज्यादा वक़्त हममे दिया जाता है और कुछ खास फैसिलिटीज bhi....Bua ने मुझे देखा और मुस्कारे हुए बोली...

बुआ- हां तो बच्चू तैयार हो पहली क्लास के लिए...

मैं - हां बुआ मैं तैयार hu...(master से) मास्टर कोई डेरी नहीं थी बस एक खत था जो बुआ ने दिया था...

मैंने वो चिट्टी मास्टर के हाथ में दे दिया...

मैं - मास्टर इनको भी पता है सायद की अभी सही वक़्त नहीं आया है वर्ण सायद ुये मुझे वो डेरी दे देती जो आप नहीं चाहती थी....

मास्टर मुझे देखने लगी....

मास्टर- हम्म ठीक hai...(Bua से) क्लासेज के लिए देर नहीं हो रही kya...isko लेके jao...ab ये तुम्हारी जिम्मेदारी है....

बुआ ये सुन के बहुत खुश हो गयी वही मैं pareshan....yyaar मैं भी जीता जगता insan...haaa अभी तक तो यही लगता है ना mujhe....aur मुझे ऐसे hi लोगो को सौपा जा रहा है....

मैं - मास्टर मैं खुद को संभल सकता hu....Bua आप परेशां ना हो मैं खुद को देख लूंगा...

मैंने ये बोलै और आगे जाने लगा की तभी मैं किसी पाथेर से ठोकर खा के निच्चे गिर गया और मास्टर और बुआ दोनों हसने lage....Main जल्दी से उठा एक बार पीछे मुद्दा और फिर अपने कपड़ो को साफ़ करके वापस चल दिया रूम mein....wahi इ mujhe...classes का पता चलना था......

वही वो दोनों है रही थी...

मेरे जाने के बाद....

पूनम - मैडम आपको लगता है की इसको मैं संभल paaungi...aapne जो कुछ बताया है उस हिसाब से तो....

मास्टर- चिंता मत करो तुम संभल hi logi....aur वो भी (हस्ते हुए) बड़ा हो गया है to....bas कुछ hi दिन की बात है मैं बहार जा रही hu....fir मैं रहूंगी hi यहाँ तुम्हारी मदद करने के liye....main तो कब से किसी को धुंध रही थी जो इस नए जगह पे उसकी सही से देख भल कर sakke...aur मुझे तुम मिल गयी...

पूनम - जी मैडम मैं पूरा ध्यान रखूंगी.....

मैं रूम में पहुंच गया था फिर मैंने वह पड़े हुए रूटीन को dekha....special क्लास की रूटीन बक्कियों से अलग thi....hamare लिए क्लासेज के दुराशंस दुगने the...sath hi प्रक्टिकल्स भी होते थे वो भी बाकियों से बहुत ज्यादा....

मैंने देखा 1सत period....Castle व में hai...uske निच्चे लिखा था की क्या क्या ले जाना hai...Talwar अगर हो तो एक शील्ड भी लेते जाना है वो शील्ड आपका अपना होना चाहिए अगर नहीं हो तो वो आपका टेस्ट करने के बाद वही से दिया jaayega...bas इतना hi लिखा था....

अब शील्ड तो था नहीं मेरे pass....bas एक तलवार थी उसको उठा के लेके जाने लगा main....Jab रूम से बहार पंहुचा तो वही पे वापस से बुआ मिल गयी....

बुआ - बच्चू आज शील्ड milegi...main भी रहूंगी वह पे मुझे भी देखना है कोण सा शील्ड मिलता है tumhe....waise तो मुझे पता है कोण सा मिलेगा....

मैं - ये शील्ड का क्या है और जब हम शॉपिंग करने गए तो आपने दिलाया क्यों नहीं....

मेरी इस बात पे वो भी सोच में पद गयी....

बुआ- पता नहीं मुझे तो वही से तुम्हे तुम्हारा शील्ड दिला देना चाहिए tha...aur उस दूकानदार ने हममे शील्ड दिखाया भी नहीं tha...main तो तुमसे मिलने की खुसी में खोयी हुई थी तो होश hi नहीं था mujhe....accha छोड़ो वो वैसे भी यहाँ से तुम्हारे शील्ड का पोता चल hi जाएगा और फिर हम उसी एलिमेंट का नया शील्ड ले लेंगे...

मैं - एलिमेंट ???

बुआ - हां Element...kya इसके बारे में भी नहीं बताया है मैडम ने....

मैं - नहीं इसका कुछ पता नहीं है मुझे...

बुआ- हम्म चलो क्लास में चलते है वह प्रोफेसर इसी पे आज लेक्चर denge....aur मुझ पक्का पता है तुम समझ hi jaaoge...aisa नहीं की मुझे नहीं आता पर अब अगर मैं अभी बताऊँ फिर वही बात वह सुननोगे तो बोर ना हो जाओ इस्सलिये...

उनसके ऐसे बोलने पे मैंने उनकी ओर dekha....aur फिर आगे बढ़ गया..

वो भी आने lagi...aur वो है रही thi...pata नहीं क्यों....

मैं - क्या बात है आप है क्यों रही हो...

बुआ- ये तलवार ऐसे क्यों लेके जा रहे ho....isko छोटा karlo...iss तलवार की वजह से तुम्हारी चल बहुत अलग लग रही थी....

मैं - क्या मतलब अलग लग रही thi....wo तो लगेगी hi ना मैं थोड़ी ना तलवार बाँध के चलता....

बुआ- तो वो जो सूट ख़रीदा है उसका क्या करना hai...usko पेहेन लेते उसमे मयान भी है बैक साइड में वो भी 2 - 2 साथ में शील्ड रखने की जगह और भी बहुत कुछ है usme....par नहीं तुम ये कपडे पहन के तलवार को करम के पास टांग के चल रहे ho...aas पास देखो जरा कोई दिख रहा है ऐसा tumhe....naam ख़राब कर रहे हो मेरा तुम....

मैंने आस पास देखा तो ना सिर्फ बुआ है रही थी बल्कि बाकी सब भी मुझे देख देख है रहे the....unn सब ने सूट पेहेन रखा tha....armour पहन रखा था...

मैं - आपने पहले क्यों नहीं बताया मुझे....

बुआ - तुमने पूछा kya.....aur तुम तो बड़े हो गए हो ना मास्टर के सामने क्या बोल रहे थे....

मैं अपने रूम की तरफ गया जल्दी से और फिर दरवाजा बंद करने लगा पर बुआ भी अंदर आ गयी....

मैं - आप यहाँ क्या कर रहे हो मुझे चेंज करना है....

बुआ - ये आर्मर पहनना आता है क्या tumhe...jo चेंज करना है बोल रहे हो....

मैंने देखा आर्मर की oor....aisa कोई ड्रेस होता है kya...Ye एक ताम्बे का आर्मर था जिसको मुझे पेहेनना tha...par उसके साथ साथ और भी बहुत कुछ था इस ड्रेस में....

बुआ- क्या हो gaya....chalo अब चुप चाप रहो और कपडे utaro...bas इनर वियर में खड़े रहो यहाँ....

मैं - पर आप...

बुआ- मैं यहाँ बस तुम्हे आज बताने आयी हु एक बार देख लो फिर खुद करना...

मैंने भी अपने कपडे उत्तर diye....aur खड़ा हो गया उनके सामने सिर्फ अंडरवियर में....

बुआ- कुछ कहते थे भी या हवा पानी पे जिन्दा the,,,,,sharir में ताकत भी है yaa....nahi

मैं क्या बोलयता अब मैं था hi थोड़ा दुबला पतला....

उन्होंने उस ब्रोंज के आर्मर को उठाया और मेरे सर से होते हुए मुझे पहना diya...Main भी वैसे अकेले पहनना सच में मुश्किल था isko....fir बाकी की चीज़ज़े जैसे वो टॉलर के मयान के लिए wo...belts ये सब अकेले मुश्किल तो था hi...mujhe थोड़ी देर में बुआ ने तैयार किया और फिर मैं मैंने जैसे hi तलवार राखी अपने मयान में तलवार गायब हो गयी...

मैं - ये क्या हुआ ये कहा गया...

बुआ - यही hai...ye लेटेस्ट आर्मर सूट है इसमें ये सारे फैसिलिटीज hai....tunne ध्यान नहीं दिया पर ये सूट अपने पहनने वाले के साइज का हो जाता है तभी तो तुम्हारे साइज में एकदम फिट आ रहा है...

मैं - हम्म ठीक hai...aur भी कुछ है जो बताना है....

बुआ- हां मैं भूल gayi,...Madam बहार गयी hai...kuch दिन बाद लौटेंगी तब तक तुम्हे अपना वो पुराण रूटीन फॉलो करने को कहा है और साथ hi मेरी हर बात माने को भी...

मैं - क्या मास्टर चली गयी मुझे बिन्ना बताये....

बुआ- हां पर कुछ hi दिंनो के liye...to चिंता मत करो वो आ jaayengi.....aur

मैं - और क्या...

बुआ - अब अगर ऐसे hi टाइम वास्ते करते रहे तो पनिशमेंट मिलेगी वह ....चलो जल्दी..

मैं भी रूम से निकला और जल्दी जल्दी जाने laga...Waha से कैसल व में जहा शील्ड मिलने वाली थी....

थोड़ी hi देर में हम क्लास में पहुंच gaye...bada सा हॉल tha...aur उसी जगह पे कुछ लोग the...jaise hi हम अंदर गए सब हुम्म्मे देखने लगे....

बुआ- प्रोफ. सूरज सॉरी आपको डिस्टर्ब करने के liye....wo एक नया स्टूडेंट है स्पेशल बैच ka..ussi को पहुंचने आयी हु...

Prof.Suraj- आपने ये सब कब से शुरू किया पूनम ji...aur ये कोण से नए स्टूडेंट है जिनका मुझे नहीं पता hai....kal hi तो सबसे मिला था मैं ग्राउंड पे.....

बुआ- हां तब ये नहीं होगा waha....kyunki कल hi तो टेस्ट दिया है isne....reports आपके पास पहुंच गयी होगी और अपने अटेंडेंस नहीं देखा होगा...

सूरज - हम्म चलिए मैं देख लेता हु...

वो इतना बोल के अपने टेबल पे पड़े हुए अटेंडेंस में देखता है जिसमे मेरा नाम होता है फिर उसी टेबल पे राखी हुई मेरी रोपर्ट को भी देखा usne...aur उसको देख वो मुझे देखने लगा...

सूरज - बिना एनिमल स्पिरिट के 2 लड़को को हर्रा diya...Element कोण सा है तुम्हारा....

मैं - मुझे नहीं पता....

प्रोफ. सूरज ने मेरे इस बात पे एक बार वापस से रिपोर्ट को dekha...fir उसपे कुछ किया जिससे उस टेस्ट का वीडियो वह चलने लगा जो सब देख सकते the.....sab ने उसको देखा और फिर सूरज सर मुझे देखते हुए बोले...

सूरज - हम्म प्रजेंस ऑफ़ mind...sahi इस्तेमाल किया है uska...chalo तुम्हारा भी एलिमेंट देख लेंगे aaj...yaha लगभग सबको पता है उनका एलिमेंट और शील्ड भी मिल चुकी hai..bas कुछ hi है जो किसी और चाकर में ये सब भूल जाते hai.....Hai ना एल्फ प्रिंस....

वही पे एक लड़का खड़ा था ये वही है जिसको मैंने कल देखा था उसको hi बोल रहे थे प्रोफ. Suraj...Wo एल्फ प्रिंस था....

नई करैक्टर -:

दब - एल्फ prince...ye स्ट्रेंज वर्ल्ड में रहता था पर वह इसने ऐसे ऐसे कारनामे किये की इसको इसके पिता यानी एल्फ किंग ने यहाँ एअर्थ पे भेज दिया है इस स्कूल में....

बैक तो स्टोरी

दब - प्रोफ. मैं तो बस...

सूरज - चुप hi रहो तो बेहतर है...

वो चुप हो gaya....Wahi सूरज ने एक बार बाकियों की ओर देखा और फिर बोलना शुरू किया...

सूरज - एलिमेंट्स और शील्ड्स दोनों का नाता बहुइट hi पुराण है पर ये इस स्कूल में पहले से नहीं सिखाया जाता tha...ye सब सिखने के लिए आपको कही और जाना होता था या जैसे किसी मास्टर के pass...par जब से वो घटनाये badhi...app जानते होंगे कोण si...tab से ये तय हुआ की अब शील्ड और एलिमेंट्स इन् सब के बारे में भी सबको पता होना चाहिए ताकि वो खुद की रक्षा कर sakke.....kul 5 एलिमेंट्स होते hai...sab जानते honge...Air, Water,Fire ,लैंड और Sky...bas यही सिखाया जाएगा यहाँ pe...agar हम क्लास के नियमों से चले तो par....hum ऐसा नहीं karenge....main तुम्हे इन् 5 के आवला भी जो एलिमेंट्स होते है उनसे भी तुम्हारी पहचान karaunga...par वक़्त आने pe...ab आते है शील्ड pe...to ये होते है आपके एलिमेंट को अलग तरह का रूप देने के liye.....matlab मान लो किसी के पास फायर एलिमेंट hai...to आपका shield...usko अलग अलग रूप dega...jaise में फायर wave...yaa कुछ aur.....Shield के बारे में और भी बहुत सी बातें है जो वक़्त के साथ hi सामने आये तो सही hoga..kyunki इसको अभी समझा पाना मेरे लिए उतना hi मुश्किल है जितना तुम सब के लिए इसको समझ पाना hoga....to इसको वक़्त पे छोड़ देते hai....ab जो लोग अपना अपना एलिमेंट नहीं जानते वो एक साइड में आ jaaye....(Bua से) पूनम जी अब आप यहाँ पे है hi तो मेरी मदद कर दीजिये...

बुआ - जी बिलकुल....

बुआ ने अपनी आँखें बंद करि और उस हॉल के दीवारों पे बनने हुए कुछ ड्रॉइंग्स चमकने lage...aur उनके अंदर से कुछ शील्ड्स निकलने lage...wo शील्ड्स हवा में लटक रहे थे...

सूरज - हम्म तो ये है मास्टर शील्ड्स इनसे हम पता करते है की किस्मे कोण सी एलिमेंट hai...jab पता चल जाए तो इन्ही मास्टर शील्ड्स में से उनके लिए एक एक शील्ड खुद निकल आती है और उनकी हो जाती hai...Chalo आओ सब आगे...

हम सब आगे गए एक लाइन se...sabse पहले एक लड़का था जिसके बाल बहुत लम्बे लम्बे the...wo gaya....samne..kul 5 शील्ड the....Prof. सूरज ने उसको सभी शील्ड्स को एक एक बार चुनने को kaha...usne chua...fir कुछ देर कुछ नहीं hua...sab शांत tha...Ki उसके ऊपर लाल रोशनी पड़ी...

सूरज - फायर Element...wo रोशनी जो उसपे पद रही थी वो एक शील्ड में बदल गयी और उसके हाथ में आ gayi...aur वो चला gaya....fir 2ंद नंबर वाले पे लाइट ब्लू light...jo वाटर का tha...3rd वाले पे blue...matlab...Sky....fir बाजरी आयी वो दब की वो गया तो uspe...green कलर aaya...par ऐसा कुछ था hi nahi...usko प्रोफ. ने सबसे अलग खड़ा कर diya...fir एक पे ब्राउन आया तो वो लैंड हो gaya...fir एक काग्रे जैसा कुछ आया तो वो एयर का हो gaya...fir ऐसे hi हॉट रहा मेरा नंबर 7तह tha...main गया मुझपे कोई रोशनी hi नहीं aayi...ye देख बुआ को लगा की मैंने सही से टच नहीं किया है उन् शील्ड को...

बुआ- वापस से टच करके देखो..

मैंने किया पर फिर से कोई लाइट नहीं...

सूरज - हम्म interesting...tum भी दब के पास खड़े हो जाओ...

बुआ- प्रोफ. सायद कुछ गलत...

सूरज - जो भी कर रही है आप कर रही है मैं तो बस देख रहा hu.....to कैसे कहु की आप कुछ गलत कर रही hai...waise एल्फ प्रिंस का तो पता है वो अपने खानदानी शील्ड को hi उसे karenge...Par ये बचा इसका समझ नहीं आ रहा hai....Prateek...Yahi नाम है ना इसका...

बुआ- हम्म

सूरज- हां तो देखा aapne...Elements के बारे में मैंने कहा था की बस 5 hi है जिनके बारे में हममे जाना होता hai....par यहाँ तो ऐसे दो लोग है जिनके पास ये एलिमेंट्स है hi nahi....Elf प्रिंस की बात करते hai....to इनके परिवार की हिस्ट्री को देखते हुए मुझे लग hi रहा था इनके अंदर इन् पांचो एलिमेंट्स से अलग hi कोई एलिमेंट hoga...Crowned एल्फ डायनेस्टी जिससे ये बिलोंग करते है वह पेय आम बात hai...inke परिवार में हर 2 पीढ़ी को छोड़ के कोई ऐसा होता hi है जो इनके फॅमिली के काश एलिमेंट के साथ आता hai...Wo है Nature...To दब जी के पास है नेचर एलिमेंट जो केवल एक hi शील्ड उसे कर सकती है जो इनके परिवार के पास होगा hi...(DB से) हां तो एल्फ प्रिंस आप एल्फ किंग से बात करेंगे या फिर मैं ये खुशखबरी उन्हें सुनौ....

दब ने उनको खुद बताने के लिए बोल diya..aur फिर वही खड़ा रहा.....

सूरज - अब आते है inpe...Prateek...aap इन् सब से अलग hai...koi भी लाइट ना आयने का बस 2 मतलब है या तो आपके पास कोई एलिमेंट है hi nahi....jo की बहुत hi रेयर बात hai...wahi दूसरी बात उससे भी रेयर hai...ki अभी तक आपका ेलमेंट जाएगा hi नहीं ho...ye ना के बराबर होता hai....har किसी का एलिमेंट उसके पैदा होते hi जाग जाता hai....Ab देखना ये होगा की आप इन् दोनों में से किस में आते है...

मैं - ये पता करने के लिए मुझे क्या करना होगा...

सूरज - करने को तो बहुत उच्च है पर अभी के लिए अस इंतज़ार karo...main पहले इस बारे में कुछ किताबों को पढ़ना चाहता हु फिर तुम्हे कुछ और बताऊंगा...

मैंने बुआ की ओर dekha...wo दुखी थी उन्होंने इशारे में मुख्य हां kaha....aur वह से चली gayi...Main वही रहा

क्लास शुरू हुई फिर se...aur हममे बस एक दूसरे का इंट्रो दिया गया और वही थोड़ी बहुत दूसरी बातें की ये पढ़ना है वो पढ़ना hai....ye क्लास ख़तम हुई और फिर हममे जानना था कैसल म में मैजिक क्लास के liye....waha गया तो बुआ थी waha...wo hi तो वह की मैजिक की प्रोफ. thi...yaha भी हम सबके साथ वैसा hi कुछ hua...class ख़तम होते होते उन्होंने हुमसेकल एक टेस्ट के बारे में bataya....iss टेस्ट में वो ये देखती की कोण कितना कुछ जानता hai...yaha भी मैं गोल होने वाला हु kal...yaar मैजिक का म तक नहीं आता मुझे और स्पेशल बैच में आए गया हु...

क्लास ख़तम हुई और इतने देर में कुछ लोगो से बातें हुई meri...wo अच्छे थे...

अब मैं रूम में आ gaya...yaha आया तो बुआ भी तुरंत आ गयी और मुझे अपने साथ अपने ऑफिस में ले गयी....

बुआ- तुम्हारे पसस कोई एलिमेंट नहीं है ये कैसे हो सकता hai...kuch तो गड़बड़ hai...ye मैडम भी चली गयी वर्ण सायद में जान पाती kuch...tum घबराना नहीं मैं भी कियताबों में देखूंगी की ऐसा कैसे हो सकता है साथ hi इस विषय में लोगो से बात भी करुँगी....

मैं - हां ठीक है पर आराम से karna...aur मैं कुछ बताना चाहता था....

बुआ- हां पता hai...magic नहीं आता tuumhe...par सीखना तो है hi ना उसी लिए लेके आयी hu.....ye लो ये बैग...

एक बैग उन्होंने मुझे दे दिया...

मैं - इसमें क्या है...

बुआ- ये एक पोर्टेबल लाइब्रेरी hai...isme तुम्हे बहुत सी किताबे milengi...bas उस किताब के बारे में socho...yaa फिर तुम्हे जो भी पढ़ना हो वो सोचो वो चीज़ जिस भी किताब में होगी वो तुम्हारे पोएस आ जायेगी...

मैं - हम्म ठीक hai..to मुझे मैजिक की किताब पढ़नी होगी..

बुआ- हां आज hi तुम्हे मैजिक के बेसिक्स को जानना hoga...kal याद रहे टेस्ट hai...agar कुछ गड़बड़ की तो तुम्हे छोडूंगी नहीं मैं,,,,,

मैं - पर इतने काम वक़्त में...

बुआ- वक़्त काम नहीं है तुम चाहो तो कर सकते हो और तुम्हे करना hi होगा समझे...

मैं - हां हां ठीक है आप गुस्सा क्यों हो रही हो मैं कर लूंगा...

मैं वह से वो बैग लेके चल दिया वापस अपने रूम mein....fir उस बैग में हाथ दाल के एक ऐसे किताब के बारे में सोचा जिसमे मैजिक के बेसिक्स ho...to मेरे हाथ में आ गया एक kitab..usko मैं पढ़ने laga..ye सब मैडिटेशन क कमल था साथ hi उस किताब की आसान भासा का भी की मैं जल्दी hi सब समझ पा रहा tha...khane के लिए जाते वक़्त तक मैंने लगभग आधी किताब पढ़ डाली thi...ab जब वह गया..

हां अब यहाँ दिंनिंग हॉल का भी नज़ारा बदल गया था अब यहाँ पे बैच के अनुसार बैठना था और अगर आप चाहे तो कही और भी जा सकते hai...niyam बदले है कुछ...

अब खाना खाने के बाद में चल दिया वापस रूम और फिर रात तक में पूरी किताब चाट gaya....sab कुछ पढ़ डाला ता maine....jo समझ ना आये उसके लिए एक सबदकोष भी उसी बैग से निकल लिया था.....

रात बहुत हो गयी थी तो फिर मैं सो gaya....ab कल देखना था की क्या होता है...

आज का यही तक रखते है आगे का नेक्स्ट अपडेट mein....jaha हम मैजिक टेस्ट देखेंगे और साथ hi में स्कूल के दादा से मिलेंगे मतलब वही गुंडा
 
अपडेट - 10

अब तक

कल बुआ ने एक पोर्टेबल लाइब्रेरी के नाम पे एक बैग थमा दिया मुझे और ये भी कहा की कल होने वाली मैजिक टेस्ट में मुझे काम से काम बेसिक्स का नॉलेज होना hi chahiye...unhone मुझे किताब पढ़ने को kaha....Main भी अपने रूम में आके किताब धुंध के पढ़ने laga....aur रात तक में hi पूरी किताब पढ़ dali....ye सब मुमकिन हुआ मेरे ग्रास्पिंग पावर se...jo मैडिटेशन के कारन बढ़ती गयी थी...

अब आगे...

मैं सबेरे उठा अपने रूम में वही कोई 4 baje...fresh हुआ और फिर कल hi वाले जगह पे चला gaya....waha पे कोई नहीं tha....Master तो चली गयी thi...Main अकेला hi बैठ गया मेडिटेट करने ko....karib 8 बजे के आस पास आँखें खोली maine....dekha तो बुआ भी वही पे thi...wo भी ध्यान लगा रही thi.....Main उठा और उन्हें वही छोड़ के अपने रूम में चला aaya...waha आया फिर वेअपनारी क्लास के लिए रेडी होने laga....Haa वही आर्मर ये sab....ab वो मेरे साइज की हो गयी thi...jaduyi जो thi....Wo पहन के मैं निकल लिया क्लास के लिए पर रूम के बहार hi बुआ मिल गयी...

बुआ - वह रुक्के क्यों nahi...main तुमसे बात करने आयी थी...

मैं- वो आप ध्यान में बैठी थी ना तू डिस्टर्ब नहीं किया....

बुआ - हम्म ठीक है अब ये बताओ कैसी तैयारी है तुम्हारी....

मैं - ठीक थक है काम चलने लायक....

बुआ- एक बात और hai...Madam ने कहा था की यहाँ किसी को ये पता ना चले की मैं तुम्हारी बुआ hu...pata नहीं क्यों वो ये चाहती है....

मैं - मुझे पता है sayad....wo ये इस्सलिये चाहती है ताकि कबकी नज़र मेरे ऊपर ना pade.....ye पहले भी हुआ hai....Jab मैं स्कूल में था मास्टर न्वॉयरसे सख्त हिदायत दी थी बस उतना hi करो की नार्मल स्टूडेंट बन के raho....agar कुछ हो तो ज्यादा लोगो को पता भी ना chale...ab पता चला मुझे वो ये क्यों कहती thi....sayad वही वजह हो..

बुआ - नहीं अब वो यहाँ से थोड़ी कही ले जायेगी tumhe...Koi और वजह hogi...Haa तो अब तुम्हे मुझे बुआ नहीं कहना है सबके saamne...aur ये भी याद रखना की मैं कोई फवौर नहीं देने वाली तुम्हे....

मैं - वाह खुद मुझे बच्चू कहती हो आप और अब मुझे कह रही ho...aur फवौर कब कर दिया आपने mujhpe...hmm बताना जर्रा..

बुआ (घूरते हुए) - कल तुम्हारे साथ थी तुम्हारे फर्स्ट क्लास के वक़्त...

मैं - ये फवौर नहीं होता....

बुआ- (गुस्से में) हम्म और वो जो पोर्टेबल लाइब्रेरी वो उसका क्या....

मैं - हां वो मान सकता हु पर वो अस ा टीचर किया था आपने...

बुआ (गुस्से में) - ठीक है अब देख तू अस ा टीचर मैं क्या करती हु तेरे saath...aaj ना तू बच के रहियो मेरे se...Bacchu

मैं - ये देखो फिर से बोलै....

बुआ- हां बुलाऊंगी तुझे तू क्या कर लेगा.....

मैं - मैं क्या karunga...bas मास्टर ने जो बोलै है आप उसको नहीं मान रही हो....

बुआ - ू hello मैंने मैडम की बात मानी है और वैसे भी अपने सभी स्टूडेंट्स को ऐसे hi बुलाती हु मैं तो ज्यादा चढ़ मत समझा...

मैं - है है ठीक है अब जाने भी दो लेट कराओगी आप मुझे...

बुआ - हां तो जा ना खड़ा क्या है....

बुआ को ऐसे गुस्सा दिलाने में जो मज़्ज़ा आ रहा था ऐसा मज़्ज़ा पहले कभी नहीं आया tha...pahle की लाइफ hi कैसी थी meri....bas 2 दोस्त hi तो थे पुररे स्कूल में टीचर्स से भी ज्यादा कुछ मतलब नहीं tha...main एक दम से नार्मल बच्चा था वह पे जिससे किसी को खास फर्क नहीं पड़ता tha...aur आज जब यहाँ पे कोई मिला है जिसको फर्क पड़ता है तो अच्छा लग रहा है....

मैं क्लास में चला gaya...pahle हुआ हमारा थ्योरी क्लास तो उसमे तो सभी ने पार्टिसिपेट किया पर जब बारी aayi...practicles की मतलब वेपन्स को चलने की या उनको बस चुनने की भी तो मुझे और दब को अलग कर दिया gaya....Prof. सूरज ने कह दिया की जब तक आपको आपके शील्ड्स नहीं मिलते स्कूल के किसी भी वेपन्स को चुनना भी पाप hai....ye बिलकुल उसी तरह था जैसे केमिस्ट्री लैब में जाने के liye....mask और अपप्रो जरुरी होता है स्कूल में चाहे वह बस टीचर को एक्पेरिमेंट करतेदेखनहि हो बस.....

मैं और दब साइड में बैठे सबको देख रहे the....mujhe तो सायद hi किसी हथियार का कुछ पता था पर दब वो सबके बारे में जानता tha...talent था बन्दे ka....upar से क्रोनेड एल्फ प्रिंस bhi....wo ना सभी हथियाँ को देखता और उनके बारे में जो भी पता होता वो badbadata....main सब सुन रहा था....

मैं - तुम्हे तो सब पता है फिर स्कूल में क्यों आये....

मेरी इस बात पे उसने पहले मुझे ghoora....fir बोलै....

दब- हां मेरे लिए टुटर रखा गया था घर पे waha....aur वीओ टुटर कोई और नहीं मेरा कजिन tha....usi से इन् सब के बारे में कुछ कुछ पता hai....main भी उसी के साथ होता अभी पर मेरे pitaji....unko पता नहीं क्या hua....choti सी बात पे गुस्सा हो गए और मुझे यहाँ एअर्थ पे भेज दिया है मैं वही सही था स्ट्रेंज वर्ल्ड mein....aur yaha...halat बहुत ख़राब है..

मैं - हालत खरतब है से क्या मतलब....

दब - अरे वही यहाँ एक तो टीचर्स की कम्मी है ऊपर से उस स्ट्रेंज वर्ल्ड वाले स्कूल जैसी बात नहीं है यहाँ वाले स्कूल mein...main रोज सोचता हु आखिर क्यों किया था वो सब मैंने....

मैं - क्या कर दिया था जो tum,hare पिता जी ने यहाँ भेज दिया तुम्हे....

दब - अरे यार पतानहीं क्या हुआ था मुझे मैंने सही मेहमान की बेटी को किश कर दिया था वो भी भरे दरबार में सबके saamne....waise लड़की वो कोई बुरी नहीं थी पर वो हमारी p[ahli mul;akat थी और वो मेहमान गुस्सा हो गया और फिर अपनी बेटी के साथ चला gaya....aur main....main यहाँ आ गया...

मैं - क्या बात कर रहे हो....

दब - (उदास होता हुआ) हां दोस्त यही सच है और अब इससे मुकरा भी नहीं जा sakta...kaash मैंने ऐसा नहीं किया hota...matlab खास अकेले में उससे मिलता तब ये करता तो उस वक़्त खोइसल के मज़्ज़े कर सकता उसके साथ....

मैं - Hain...ye क्या बोल रहे हो वो ट्यूमसे अकेले मिलती तो तुम उसको किश करते और वो कुछ ना करती....

दब - और नहीं तो kya....wo उल्टा m,era साथ deti....arre मैं एल्फ प्रिंस हु...

मैं - तो क्या hua...usse थोड़ी ना फर्क पड़ता है मैं नहीं मान सकता की तुम किसी अनजान लड़की को किश करो और वो तुम्हारा साथ दे....

दब - ये baat......chalo चैलेंज लगते hai.....ladki तुम चुन्नो मैं उसको किश करूँगा....

मैं - कुछ भी मत बोलो....

दब - अरे तुम ंबस लड़की का बताओ बाकी मैं खुद देख लूंगा....

मैंने क्लास में hi एक लड़की को dekha....bahut hi ज्यादा सफ़ीद थी उसकी स्किन और आँखें उतनी hi काली और होंठ भी लाल एकदम खून jaise......figure का क्या bataun....hogi कोई 19 साल की मस्त सेक्सी ladki....ek ंबार कोई देखे तो देखता रह जाए वैसी waali....Maine....ussi की ओर इशारा करते हुए कहा उसको.....

दब - वपमीरे ladki....waaah चॉइस तो बड़ी अच्छी हैउ तेरी अब बस देखता जा आज शाम से पहले इसको किश karunga....bas तुम साथ रहना....

मैं - है है देखते है....

ये पता नहीं आखें बंद करके क्या करने laga....aur मैं देख रतः टघा वो लड़की जिसकी ओर मैंने इशारा किया था वो इस दब की ओर देखती और अपनी लाल जीभ अपने लाल होंठो पे ghumati....ye हो क्युआ रहा था ये बाँदा आखें बंद किये हुए है और वो वह से....

थोड़ी hi देर बाद क्लास ख़तम हुई और हम चल दिए फिर बुआ के क्लास में सॉरी प्रोफ. पूनम के क्लास mein....Waha जैसे hi बैन एंटर किया वो मुझे सैतानी मुस्कान के साथ देख रही thi.....maine जब उनको वैसा करते देखा तो मैं भी muskuradiya....uske बाद वो मुझे घूरने lagi...aur फिर क्लास शुरू किया....

बुआ - हम्म्म तो सब रेडी है ना यहाँ pe....yaad है ना आज टेस्ट का कहा tha....ab सुन lo....basic टेस्ट होगा ye...bas छोटे मोठे जादू hi करके दिखने hobnge....aur इसी टेस्ट के बेसिस पे मैं तुम सब को तुम्हारे लेवल की मैजिक स्टिक्स dungi.....yaa बस बता dungi....aur आप उससे खरीद सकते hai.....samjhe....

सभी ने बस हां बोलै पर मुझे पता नहीं क्या हुआ की मैं वो बच्चों की तरह एस मडंममम बोल bvaitha....jiske बाद सभी मुझे देखने लगे.....

दब - ुये पागल है क्या ये प्रोफ. नारज हुई ना तो बेटे लगा देगी teri...chup रह...

मैंने उसकी ओर देखा और बस मुस्कुरा दिया....

बुआ - चलो अब सभी लाइन से थोड़ी थोड़ी दुरी पे खड़े हो जाओ.....

सब खड़े हो गए.....

बुआ- अब बैठ जाओ....

यहाँ पे दो ऐसे नमूने हुए जो जमीन पे बैठ gaye.....aur कुछ ऐसे हुए जो बुआ को देखने लगे कहदे khade.....wahi कुछ मेरे जैसे भी थे jinhne....magic se....apne लिए चेयर वह पे की और उसपे बैठ गए.....

बुआ ने सबको dekha...sabko छोड़ो मुझे dekha.....aur बस और इशारे से जो इम्प्रेसिव कहते है ना वैसे hi किया,.....

वही फिर उन् लोगो को जो जम्में पे बैठ गए थे और जो खड़े रह गए थे उनका नाम हवा में खुद से लिख diya....aur उनके नाम के बगल में 1 माइनस का सिघन लगा दिया...

फिर उन् सब के लिए खुद वह पे चेयर्स करि और उनको बैठने को kaha....wo सब भी सर निच्चे किये हुए बैठ गए....

बुआ ने फिर उन्ही नामो के बगल में एक सिंबल banaya....tha कोई अजीब सा symbol....aur सबको कहा की 1 मिनट के अंदर सबके पास ये सिंबल होना चाहिए.....

तो इस बार कुछ लोगो ने मैजिक से कागज़ और कलम मंगवा लिया तो कुछ लोग ऐसे hi कुछ और करने lage....bas 5 ऐसे लोग थे जो बैठे थे वैसे hi उनमे से मैं और दब भी थे और वो लड़की भी जिसको इस दब को किश करना hai....hum बैठे rahe....Bua देखती रही सबको वो सिंबल ड्रा करते hue...aur अपना मुँह बनती rahi.....wahi मुझे बैठे हुए देख आँखों से hi इशारे में पूछा क्या बात hai....koi दिक्कत है kya.....wo जान भुझ के ऐसा कर रही थी ताकि मैं भी ुन्नन गधो की तरह द्रवे करने lagu....par मैं बस कुछ नहीं का इशारा कर के बैठा raha....thodi देर बाद जब सायद 5 सेकंड बाकी रहे honge....to मैंने एक आयना (मिरर) जादू से मंगवाया और उससे अपने बाल बनाने laga....same ऐसा hi कुछ बाकी के जो 4 लोग थे उन्होंने भी kiya....DB अपने कान देख रहा था वो वैम्पायर लड़की वो अपना मेक उप सही कर रही थी और बाकी के दो भी कुछ कर रहे थे....

बुआ ने फायर सबको रुकने को kaha....unke रुकने को कहने से पहले hi हमने भी उन् मिर्रोर्स को तब पे रख दिया था....

बुआ ने ahl;e उन् लोगो को देखा जो ड्राइविंग बना रहे the....aur उनको बहुत अच्छे शाबाश ऐसे कहती जा रही thi....jisse वो खुश होते जा रहे the...fir वो आयी मेरे pass...aur बस बिन्ना कुछ बोले निकल गयी शामे उन्होंने उन् बाकी के चरों के साथ भी किया...

फिर क्या सबका चेक करने के baad.....wapas से कुछ नए नाम वह उन् पुराने नमो के साथ ऐड किया बुआ ने और उनके बगल में भी माइनस का symbol.....isko देख वो सब चौंक गए.....

बुआ ने किसी को कोई सफाई नहीं दी बस इतना कहा की आगे सब bataungi..fir आयी बारी आखिरी टेस्ट की.....

ये टेस्ट tha...oral test.....isme बुआ सबसे 5 - 5 क्विस्तिओन्स पूछती मैजिक के बाजरे में और इसमें लागग से सब hi पास हो gaye...kisi नए का नाम नहीं ऐड हुआ उस लिस्ट में....

ये सब ख़तम करने के बाद....

बुआ- हम्म तो पहला टेस्ट वो था आपके दिम्माग को जांचने के liye....dusra था आपके क्रिएटिविटी को जांचने के लिए क्यूंकि क्रिएटिविटी नहीं तो जादू nahi.....jaadu hi क्रिएटिविटी है और क्रिएटिविटी hi jaadu...aur तीसरा टेस्ट ये था बस आपके उनंब किताबी नॉलेज को जाने के liye...haa ये भी जरुरी होता hai....binna किताबी ज्ञान के आप मुश्किल में पद सकते hai...to अब resul;t की बात करते है टॉप बहुत से ऐसे नाम है जिनमे 2 माइनस लगे हुए hai....to आपको बहुत जरुरत है अभी सुधर ki....fir आते है एक माइनस वाले तो आप लोग भी उसी तरह है सुधर की जरुरत है आपको bhi....aur अब आते है वो जिनको कोई माइनस नहीं milla....to आप लोग ...(मेरी ओर देख के) ज्यादा खुश होने की जरुरत नहीं hai....aapkobhi म्हणत करनी hi होगी और याद रहे अगर म्हणत नहीं किया तो इन् सब लोगो को जिनको माइनस 2 माइनस मिले है वो म्हणत करके आगे निकल jaayenge....to अच्छा ये है की म्हणत करे और किसी भी ग़लतफहमी ना ना rahe....Aaj की क्लास यही ख़तम करते hai......aaj मैजिक स्टिक्स देना पॉसिबल नहीं hai...iske लिए प्रिंसिपल सर की परमिशन lagegi...jo मिलते hi आप सब को मैजिक स्टिक दे दिया jaayega....ab आप जा सकते hai....aur हां कुछ दिन बाद से और भी दुसरई क्लासेज शुरू hongi...to वक़्त जाया ना करे तो अच्छा है....

बस इतना hi था फिर हम निकल gaye.....abhi कैसल म से बहार hi तो निकले थे की दब ने मणुझे पकड़ा और अपने साथ चलने को bola....puchne पे बताया की देख किश कैसे करते hai....main भी हो चला उसके पीछे...

हम दोनों एक पेड के पास pahuche....usne मुझे वहीरुक्ने को कहा और वो खुद आगे चला gaya....aage एक तालाब जैसा कुछ बना हुआ था छोटा sa...uske पास hi पत्थर के कुछ चेयर्स जैसे बने हुए the......unhi पे वो लड़की बैठी thi....DB गया उसके pass.....aur उसके कंधे पे हाथ rakh....wo लड़की चुप rahi...main ये देख रहा था और सोच रहा था ये सच में किश करेगा क्या और वो लड़की भी साथ देगी....

अब दब उसके बगल में बैठ गया था aur....apni मुंफडी उसके मुंडी के पास किये जा रहा था वही वो भी वैसा hi कर रही थी और यहाँ मेरी आँखें बड़ी होती जा रही thi......samajh में नहीं आ रहा था मुझे की ये लड़की kyun...saath दे रही hai....kya सच में एल्फ प्रिंस होने के इतने फायदे है...

इसका जवाब भी जल्द hi मिला mujhe....jab दोनों के hi लैब मिलने को तरहे दोनों की hi साँसे एक दम से एक होने को thi.....uss लड़की का हाथ अच्चानक से दब के लम्बे कानो पे गया और उसके lab....DB के होंठो से मिलने के वजाये उस्सकी उसके कानो के पास गया और वो जोरर से चिल्लाई उसके कानो mein....bahut जोर se....itna जोर से की मेरे कान दर्द करने lage....ab बेचारे दब का क्या हुआ होगा वो तो वही jaane....uske चिल्लाने की आवाज से दब बेचारा गिर गया दूर उससे...

लड़की - क्या लगता है ऍफ़ का जादू सबपे चल jaayega...hmmm मैं भी वैम्पायर हु bete....aise hi किसी के भी सम्मोहन में नहीं आ jaati...aur सुन वो त्येरा छुछुंदर दोस्त वो कहा gaya(ped की ओर देख के) ुये छुछुंदर बहार aa....kya लड़कियों की तरह चुप्पा hai....leja इको यहाँ se....dar गया है ये baccha...checkup करवा देना इसका क्या पता इस एल्फ के कान hi ख़राब हो गए हो

वो ये सब मुझे कह ररहि thi...itna कहके वो वह इ चली गयी और मैं भी पेड़ के पास से निकल के पहुंच गया दब के pass...jiska चहेरा पिल्ला पड़ा था.....

मैं - दब ोू DB....Tu ठीक तो है ....

पर कोई जवाब hi नहीं आ रहा था usse....maine भी खिंच के एक थपड मारा उसको तब जाके कही होश में आया वो.....

मैं - अरे ठीक तो हो ना

दब - Haa....nahi नहीं ये कैसे hua......mere सम्मोहन से बच gayi....ye to.....ye तो नामुमकिन है.....

मैं - हां देखा maine....ab चल बेकार में बेइज़्ज़ती कजरा ली....

दब - देख बतंबा नहीं ये किसी को और इस लड़की की तो main.....dekhna इसको एक दिन main...main....

वो बोल hi रहा था की फिर से आवाज आयी उस्सकी लड़की की....

लड़की- एक दिन kya....haa हां बोलो ना kya....lagta है अभी भी चैन नहीं आया है तुम्हे....

हमने चारो ओर देखा कुछ भी नहीं था waha...koi भी नहीं था तो ये aawaj....hum वह से भाग aaye...main भाग आया उसको पकड़ के.....

मैंने उसको उसके रूम में छोड़ा और फिर अपने रूम में आ gaya....ab बात थी ये की मुझे सब्बसे पहले अपने शेरलड के बारे में जाना थवार्ण वो प्रोफ. सूरज मुझे कुछ सिखने नहीं देते और 2 दिन में तो उस दब का भी शील्ड आ जाने वाला tha....fir मैं अकेला hi बचता बिन्ना शील्ड wala....to मैं रूम में जाते hi उसी पोर्टेबल लाइब्रेरी से वो एक किताब मांगी जिसमे शील्ड के बारे में सब कुछ ho.....bahut hi मोती किताब aayi....dekh के hi लोग पढ़ने की हिम्मत ना करे इतनी मोती.... मैं अभी किताब खोलने hi वाला था की रूम में बुआ कीआवाज आयी ...

बुआ मुझे अपने ऑफिस में बुल्ला रही thi....main भी किताब को साइड में रख के चल दिया उनके ऑफिस की ओर....

बुआ- हम्म्म तो एक hi दिन में कम्मल कर दिया मेरे बच्चू ne....waah,...

मैं - फिर से शुरू हो रहे हो आप....

बुआ - ये मेरा ऑफिस है यहाँ पे कोई भी हमारी बातें नहीं सुन सकता तो मैं तुम्हे अपना भतीजा कह सदाकति hu....ab सुनने काम की बात...

मैं - हम्म बोलिउए...

बुआ - बात तुम्हारे शील्ड को लेके hai...abhi तक प्रोफ. सूरज ने और मैंने कुछ किताबें पढ़ी है पर कोई नतीजा नहीं मिल पा रहा hai....aoisi बस कुछ hi केसेस सामने आये है jinme....kisi का एलिमेंट उसके अंदर hi कहिओ छुपा हुआ हो या छुपाया हुआ हो वो तब तक नहीं निकलेगा जब तक जरुरी नहीं ho.....ab इस वजह से तुम्हारी क्लासेज मिस हो ये प्रोफ. सूरज को अच्छा नहीं laga....unhone देखा है तुम्हारा रिपोर्ट तुमने कैसे उन् दोनों को हराया tha....to वो तुम्हे एक शील्ड के बारे में बतंबा चाहते है....

मैं - कोण सी शील्ड क्या आपको पता है....

बुआ - हां पता है पर ये मुझे बिलकुल भी पसंद नहीं है....

मैं - अरे आप बताइये तो...

बुआ - टेस्टिंग shield....ye बच्चो को दिया जाता hai.....khelne के liye....kahte है ये आपके अंडे के किसी भी एलिमेंट को अपने अंदर रख सकता है और उसको फिर उसे करने में मदद भी कर सकता hia....ye आम तौर पे छोटे बच्चो को उनके पैरेंट्य पहनते है ताकि वो पहले से hi अपने एलिमेंट का पता कर पाए और उसके साथ कुछ कर sake....matlab उसके बारे में पहले से hi सिख sake....par इसमें दिक्कत भी बहुत सी है ये जरुरी नहीं है की ये आपके अंदर की असली एलिमेंट को hi दिखाए बहुत बार ऐसा हुआ है की एलिमेंट गलत बताया हो isne....par अभी के लिए बस यही एक रास्ता है...

मैं - हम्म ठीक है कुछ ना होने से अच्छा है कुछ हो मेरे pass....to ये शील्ड कहा मिलेगी mujhe.....Prof.denge या आप डौगी या कही और से....

बुआ - तुम्हे hi लाना hoga....dekho मैं भी चलती तुम्हारे साथ मार्किट पर मुझे कुछ ऑफिसियल वर्क है मैं तुम्हे एक दूकान का ककार्ड दे देती हु मेरी उनसे बात हो गयी है तुम वह जाओऔर उनको मेरा नाम बताना वो तुम्हे दे देंगे Shield...aur हां अगर कोई और चीज़ पसंद आये तो बेजिझक ले lena....samjhe....

मैं - मैं अकेले jaunga....aur ये दुआकन तक कैसे.....

बुआ - सॉरी बच्चू पर काम है मुझे क्या करू और तुम्हे किसी के साथ जाने को भी कहना यही नहीं hoga...akele hi चले जाओ....

मैं - हम्म ठीक है...

फिर क्या मैं निकल गया वह जाने को.....

आज का यही तक रखते है स्कूल के दादा से मुलाकात अगले उड़ाते में कर lenge...sath में ये भी dekhenge...kya होता है m,arket mein...aur ये शील्ड का क्या है...

तो बनने रहिये...
 
अपडेट - 11

अब तक

बुआ ने मुझे एक कार्ड दिया था और उसपे लिखे हुए पत्ते पे जाने कहा tha....waha से mujhe...testing शील्ड लेनी thi.....aur मुझे इसके लिए अकेले जाना था....

अब आगे....

शाम का वक़्त था मैं मार्किट जाने वाले उस रूम तक pahucha....jaha से पिछली बार भी मैं गया था मार्किट mein....bua के saath....waha पंहुचा तो 2-3 और भी लोग थे waha....Main भी उन्ही लोगो के साथ चला गया ander.....wo सायद मेरे सीनियर्स का कोई ग्रुप tha....sab आपस में बातें करते जा रहे the...hum जैसे hi अंदर गए मैंने किसी एक से पूछा....

मैं - ये दक्कन कहा पे है आप बता सकते हो क्या....

ये एक लड़की थी ...उसने कार्ड देखा और मुझे एक ओर इशारा कर दिया और मैं भी चल दिया उसी taraf...usne साथ में में कुछ डिरेक्शंस भी बताये the....to bas....waise hi मैं जाता रहा और बिन्ना रास्ता भटके अपनी मंज़िल पे पहुंच gaya....bada सा दरवाजा था इनकी दक्कन ka....maine दरवाजा खोला और अंदर gaya....pura दक्कन बस अजीब अजीब चीज़ों से भरा पढ़ा tha...aur कुछ था hi नहीं waha....dukkandaar भी नहीं दिख रहा था mujhe....saamne बस एक काउंटर बना हुआ था उसपे एक बेल्ल थी मेंगया ुस्तक और वो बेल्ल बजायी....

डिंग dong...ding डाँग

"अभी मालिक नहीं है बाद में आना...."

सायद यहाँ पे काम करने वाला होगा उसने ऐसा kaha....ajeeb भाई ना कोई दक्कन में एक कस्टमर को ऐसा जवाब मिले....

मैं - मुझे प्रोफ. पूनम ने भेजा है टेस्टिंग शील्ड के लिए.....

मैंने बुआ का नाम लिया hi था की वो नौकर या जो भी वो तुरंत बोलता है.....

"अरे आप आ gaye....maalik ने बताया था आप आओगे और मुझे आपको सम्मान देना hai....aap बैठो वह पे मैं अभी आता हु...."

मैंने आस पास देखा तो थोड़ी दूर पे एक अजीब सी कुर्सी थी मैं भी उसपे जाके बैठा gaya.....abhi बनेठा hi था की एक किल सी चुभी मुझे मेरे पीठ pe....main हिलने को हुआ की उस चेयर से कुछ पत्तियां निकली और मुझे बांधने lagi....pahle...haath फिर pair....main चिल्लाने लगा और मेरे चिल्लाने की आवाज sunke....pahle तो कही पे बहुत से सम्मान गिरने की आवाज आयी फिर वो naukar....joki एक छोटा सा बौना tha....matlab नट्टा आदमी tha....yaa कुछ वैसा hi....wo मेरे पास आया ....

"अरे ये कहा बैठ गए aap....waha सोफे है वह बैठने बोलै thga...ye तो सज़्ज़ा देने के लिए चेयर hai....pahle बहुत बिकती थी पर अब मांग बहुत हद तक काम हो गयी है तो बस ऐसे hi रखा हुआ tha....main आपकी मदद करता हु...."

उसने उस चेयर के पीछे के हिस्से हो छुआ और मैं आज़ाद हो gaya....jhat से उठ गया मैं....

बौना - अआप वह उस सोफे पे बैठो मैं जर्रा samman....wo आपके चिल्लाने से सारा सामान गिर गया है वही पे टेस्टिंग शील्ड भी राखी thi....bas थोड़ी देर रुकिए....

अभी वो मुझसे ये कह hi रहा था की दक्कन का फ़ोन bajja...(haa फ़ोन भी है यहाँ)

वो गया फ़ोन के पास और फ़ोन uthaya....call सायद उसके मालिक का hi था तभी वो मालिक मालिक कर रहा tha....usne बात करते हुए एक बार मुझे भी dekha...fir थॉडी देर और बात की और फुएर फ़ोन रख के जल्दी से गया और एक टेस्टिंग शील्ड जो उसके हाथ लगी थी वो लेके आया और मुझे दे diya....deri के लिए माफ़ी huzur.....koi और खिदमत हो तो bataiye....maine पहले तो सोचा जल्दी से इस अजीब से दिउक्कं से निकला जाए मैं नहीं बोल के उसको पाय करने के liye...counter के पास gaya....aur वही पे मेरी नजर पड़ी एक उस दक्कन के कैटेलॉग pe....maine उसको dekha...aur मुझे उसको देखते हुए उस बौने ने देख liya...ab उसने मुझे वो पकड़ा दिया और कहा की आप एक बार इसको देख ले अगर कुछ और पसंद आये तो bataye...pata नहीं क्या हुआ मुझे मैं भी पैसे देके निकलने की जगह वो लेके सोफे पे बैठ गया और उसको देखने laga...bahut से आइटम्स थे उसमे jaise...kuch pather...kuch angutiyan....hathiyaar भी the...jadu की छड़ी भी thi....aur भजि बहुत kuch...meri नजर गयी एक अजीब से दिखने वाले अंगूठी pe....jisko देख के लगता था की ये कोई चील (ईगल) है...

बड़ा hi अजीब लग रहा था wo...maine उस बौने को बुलाया जो साफ़ सफाई करने में लगा हुआ था....

मैं - ये अंगूठी इसके बारे में बताओ....

बौना - हम्म्म ये बहुत hi प्रच्छिन अंगूठी hai....yee जहा तक मुझे याद है किसी भी मैं प्लैनेट्स से बिलोंग नहीं करती इसका ओरिजिन कही और था किसी और प्लेनेट pe...par उतना पता नहीं है mujhe....ye जानता हु वह से बहुत सी अंगूठियां मिली थी और भी बहियत कुछ मिला tha...ye सब मालिक ने एक नीलामी में ख़रीदा था बेचने ko....aapko ये चाहिए क्या...

मैं - क्या मैं बस देख सकता हु उसको....

बौना - माफ़ kariyega....ye चीज़ज़े बहुत पुराणी है और बहुत वक़्त से इनका कोई खरीददार नहीं है तो मालिक ने इनको पीछे गोदाम में रक् दिया tha....aur वह से इसको धुनंधना कुछ मुश्किल है और वक़्त का काम भी hai....aap अगर कल आये तो मैं ये अंगूठी निकल के रखूँगा....

मैं - कल नहीं मैं संडे को aunga....issi वक़्त आप उस अंगूठी को निकल के rakhiyega....abhi के लिए बस ये टेस्टिंग शील्ड hi औरकुछ नहीं....

बौना - जी ठीक है आइये पेमेंट कर दीजिये....

मैं और वो दोनों hi काउंटर पे गए और मैंने उसको पाय कर दिया उस टेस्टिंग शील्ड का साथ hi उसको वापस से वो अंगूठी के बारे में बताया....

वो anguthi....kuch तो था उसमे जो मुझे खिंच रहा था मेरी ओर....

मैं वो शील्ड लेके आने लगा अपने रूम के लिए....

रूम में पंहुचा तो मैंने वो टेस्टिंग शील्ड खोली और उसको देखने laga,....par ये कोई पुराणी शील्ड थी सायद ुसेड की hui....uss बौने ने सायद गलती से मुझे ये दे दिया ho....dhyaan से देखा तो इस शील्ड पे भी एक ईगल का निशान tha....ye निशान यहाँ vbhi....hmmm कुछ तो है isme....par क्यूंकि ये ुसेड शील्ड थी तो मैंने इसको साइड में रख दिया ये सोच के की 3 दिन बाद संडे को जब उस दक्कन में जाऊँगा तो इसको भी चेंज करा लूंगा....

ये सब देखने के बाद मैंने वो मोयति शील्ड वाली किताब खोली और उसको पढ़ने laga....Magic बुक इसके हिसाब से ज्यादा इजी थी उसकी लैंग्वेज भी इजी थी और वर्ड्स बहुइट जगह शामे शामे थे जिससे बार बार डिक्टोनारी की जरुरत नहीं पड़ती thi....par इस baa.....har लाइन को समझने के लिए डिक्शनरी की जरुरत पद रही थी मुझे....

कुछ hi तो पेजेज पढ़े थे मैंने की वक़्त हो गया रात क्ले खाने ka....main रूम से निकल और चला गया खाने के liye....wahi मुझे वो एल्फ प्रिंस दब dikha....mujhe देख वो मुस्कुराया मैं भी muskutrraya....usne मुझे अपने पास बुआलया मैं गया उसके पास उसनने मुझे बैठने की जगह दी और मैं बैठ गया....

दब - दोस्त जो कुछ भी हुआ था वह वो किसी को मात बताना....

मैं - ठीक है पर क्या वो लड़की चुप रहेगी....

दब- हम्म उसी का तो दार है एक तो अभी तक मेरे कान बज रहे है उसके स्वहिलाने की वजह se....Dekho तो जरा लाल है अभी तक मेरे kaan....iss वैम्पायर की बच्ची को एक दिन ऐसा सबक सिखाऊंगी की ये....

अभी वो बोल hi रहा था की वही वैम्पायर लड़कीजो हमारे टेबल से काफी दूर बैठी हुई थी उसकी पीट हमारी तरफ thi....usne उसको और मुझे देखा और वो नईकिले दांत होते है ना वामपिरेस के वो बहार निजकल के हममे dikhaya....ye डरने के लिए करते है vampires...aur हम दोनों hi दर गए the....wo दब बिलकुल चुप हो गया वह मैं यहाँ वह देखने लगा....

मैं - तुम्हारा शील्ड परसो आ रहा है ना....

दब - Shield...nahi वो तो आ गया पिता जी को पहले याक्किन नहीं हुआ उनको लगा की मैंने प्रोफ. से ये बुलवाया hai....fir जब ोप्रिन्सिपल ने बताया तब वो बहुत खुश हुए और मेरे लिए वो शील्ड आज हिओ भेज दी hai....abhi रूम में hai....jald hi उसको मैं अपग्रेड करवा लूंगा उससे हमेशा मेरे पास hi रहेगी वो...

मैं - अपग्रेड मतलब....

दब - अपग्रेड matlab...usko छोटा करवा के अपने अंगूठी में फिट करवा लूंगा उसके बाद वो हमेशा मेरे पास hogi....aur वैसे भी किसी पता होता है कब क्या हो jaaye...hamesha तैयार रहना चाहिए....

मैं - हम्म

दब - तुम्हारा क्या हुआ...

मैं - मैंने एक टेस्ट शिलेड ले ली है....

टेस्ट शील्ड का नाम सुनके वो जोर जोर से हसे laga....sab हमारी ओर देखने लगे....

दब - टेस्टिंग शील्ड सच mein...testing शील्ड अरे वो तो बच्चे उसे करते है....

मैं बस चुप raha....bas chup....kya बोलता...

दब को भी सायद पता लग गया की मुझे बुरा लगा है किसी को भी lagega...to वो भी शांत हो गया और उसने मेरे कंधे पे हाथ रखते हुए kaha....arre कोई ना दोस्त ये टेस्टिंग शील्ड बस कुछ hi िन्नो के लिए है फिर तुम्हे जल्द hi अपना एलिमेंट मिलेगा और तुम भी अपना शील्ड ले paaoge....tab तक कोई बन्हि परेशानी हो मुझे कहना...

मैं - हम्म ठीक है...

फिर बस खाना खाया और मैं चल दिया रूम mein....room में पंहुचा तो हमारे रूम के बहार जो एक नोटिस बोर्ड लगा हुआ था वह पे ेक्नॉटिस लिखा हुआ था....

"सभी 1सत ईयर के स्टूडेंट्स 9;20 तक तालाब के किनारे रिपोर्ट करेंगे..."

इसके निच्चे किसी का सिग्न था अब ये पता नहीं किसका tha....Main पढ़ hi रहा था की कुछ और स्टूडेंट्स भी आये और उन्होंने ने भी ोपधा और उनमे से एक बोलै....

"ये तो पंकज hai.....yaha के जादुई काढ़ा पढ़ने वाले टीचर का बीटा...."

"हां मैंने भी सुन्ना है उसकी बहुत चलती है यहाँ पे...."

"मैंने भी सुन्ना है उसके बारे mein....3rd ईयर का है वो और 4तह ईयर वाले भी उससे दूर hi रहते hai....bahut शक्तिशाली है wo....log कहते है दर्दहै वो यहाँ का...."

दब - कोण किसका दादा हो गया मुझे भी batao...chal हैट रे मुझे भी देखने दो क्या है ये....

उसने पूरा padha...phir अजीब सा चहेरा बनके बोलै.....

दब - ये कोण है जो हममे बुल्ला रहा है वो भी इस वक़्त....

सबने फिर से पंकज का नाम लिया उसके गुणगान kiye...DB को घंटा फर्क ना pada...naa मुझे था kuch....main तो अपने रोम में चला gaya...aur वापस से वो किताब पढ़ने laga...aur सायद दब भी अपने रूम में चला गया ho...waqt gujra...aur 9:20 भी हो gaye...bahut से स्टूडेंट थे जो सायद चले गए थे वह वही बहुत से ऐसे भी थे जो अपने रूम में the...yahi कुछ 2 घंटे बाद सब वापस आ gaye....aur उन्ही के साथ आये थे wo....Pankaj के log....wo खुद नहीं आया था....

जो जो भी उसके बुलाने पे नहीं गए थे उसके लोग उनका दरवाजा पीट रहे the...mera भी दरवाजा पीटा किसिस ने पर जब मैं बहार गया तो 3 स्टूडेंन्ट्स हमारे स्पेशल बैच के उन् ;लोगो के सामने खड़े the...DB भी था उनमे se...aur वो पंकज के लोग वो उनको घेरे हुए the,...main बस ये देख रहा tha...aas पास देखा की गेट पीटने वाला कहा है कुन tha...to एक कोने में एक बाँदा गिर्रा हुआ milla...uske बाल खड़े हो रखे the,....aisa लग रहा था अभी इलेक्ट्रिक शॉक लगा हो usko...par किसी की भी नज़र उसपे नहीं thi...jo पंकज के बाकी के लोग थे वो सब तो वह उन् 3no को घेरे खड़े थे....

दब - निकल जाओ मुझे मजबूर मत करो वर्ण मैं खुद नहीं जानता क्या करूँगा तुम्हारे साथ...

उसके साथ जो दोनों थे वो भी अपनेशीएरलड्स लेके खड़े the...DB ने भी अपनी शील्ड ले राखी थी...

वो ;लोग जाने का नाम hi नहीं ले रहे the...aur ले भी क्युंकाः आप 10 लोग हो और सामने में 3 लोग है बस तो आप हार मान के थोड़ी ना चले jaaogge...bas यही था....

मैं - जो रूम के गेट पे था वही से ये सब देख रहा था की किसी की नज़र मुझपे padi....wahi पंकज के लोगो में से कोई...

वो - Tu....tu भी नहीं आया था ना चल बहार niikal...aur हां तू भी आजा लेके अपना शील्ड तेरे को भी देलख लेंगे....

ये बोल के वो हसने laga..saath hi उसके ग्रुप के लोग bhi...wahi मैं भी गया रूम mein....ab कोई ऐसे बुलाये और मैं ना जाऊं अच्छा थोड़ी ना लगता है bas...fir मैं भी वही ुसेड टेस्टिंग शील्ड लेके रूम से nikla...jisko देख के वो सब वापस से हसने लगे...

वो - अरे ये तो बच्चा है बच्चे टुन्ने गलती की है सज़्ज़ा भी मिलेगीआओ अपने पापा लोगो के पास आओ आओ...

अब ये ज्यादा tha...gussa आना लाजमी tha...aur मैं भी चला गया उनके पास पर एक दम साथ दीखते hue....aur जाके उन्ही तिण्णो के पास खड़ा हो गया...

दब - क्या जरुआत थी आने की अब मैं इन्हे मारु या तुझे बच्चों...

मैं - मुझे बचने को कोण बोल रहा है...

उन् सब में से किसी एक ने फिर से हममे गली दी इस बार माँ की gali...hum लोगो में एक अजीब सी बात होती है अगर कोई रिस्ता जो आपको जिंदगी में कभी ना मिला हो उस रिश्ते को लेके कोई गली de...to गुस्सा आता है बहुत गुस्सा आता hai...wahi मेरे साथ hua...bahut गुस्सा aaya....aur ये गुस्सा मेरे टेस्टिंग शील्ड पे आया और वो शील्ड लाल हो gayi...Hamare हॉस्टल वाले कैसल के बहार का नज़ारा देखने लायतक हो गया था उस वक़्त कहा आसमान इस वक़्त काला होना चाहिए था वही अभी एकदम se..lal हो गया था और एक चील की ाकिरीति बन गयी थी आसमान mein....aur फिर एक जोर की दहाड़ बदलो के आपस में टकराने se....ye इतना जोर का था की पूरा कैंपस hi हिल गया tha....turant hi लोग बहार की ओर bhage...ye लोग जो वह पे हममे घेरे हुए थे उनका भी ध्यान भटक gaya..dhayaan दब और बाकी के दोनोका भी भटका था पर वो ज्यादा देर के लिए nahi...jaise hi उन्होंने देखा की ये सारे लोगो का ध्यान यहाँ नहीं hai...unn तिण्णो ने हुम्ला कर diya.,...wahi main...main पता नहीं कहा चला आया tha....mere शरीर पे बाल hi बाल थे इस बार भी और आस पास देखा तो बस अंदर hi नजर आ रहा था mujhe...aur फिर अचानक से एक चील जिसके पंख आग के बनने हुए थे... नज़र aaya...aur फिर आँखें band...jab आँख khuli...main 3 लोगो को बुरी तरह पीटते जा रहा था matlab..bahut बुरी तरह se....wahi दब और बाकी के दोनों भी लगे हहुए the...inn सब सोर शराबे में वह पे स्कूल के प्रिंसिपल साथ hi बुआ और कुछ और प्रोफेसर भी aagaye,....Bua ने जब मुझे तीनो लोगो के upardekha....to वो बस थोड़ी सी चौकी और फिर normal...principal आये और जोर से चिल्ला के हम सबको अलग होने को kaha...main भी उठ गया...

प्रिंसिपल ने हम चारो को एक साइड खड़ा kiya...aur उनके साइड के जो खड़े होने लायक थे उनको खड़ा किया और बाकी के जो 5 थे उनको वैसे hi दिवार में अड्डा के बिठा दिया....

प्रिंसिपल - क्या हो रहा था ये sab.....(unmlogo से) तुम फर्स्ट ईयर के लड़को के पास कैसे aaye....kya काम था यहाँ पे...

उनके पास बोलने को कुछ नहीं था...

प्रिंसिपल (हमलोगो से) - क्या हुआ था यहाँ और ये लड़ाई क्यों....

दब ने बस उस नोटिस बोर्ड की ओर इशारा kiya..aur सारे प्रोफेस्सोर्स और प्रिंसिपल उसको देखने लगे.....

नोटिस पढ़ने के बाद वो सब समझ गए क्या बात हुई hogi....unhone कल उन् लड़को को और पंकज सबको अपने ऑफिस में आने को kaha....wahi humme...ye लड़ाई करने के लिए वार्निंग दी की आगे से ऐसा कुछ हो तो किसी प्रोफेसर को बताओ....

हमने भी ठीक है कह diya...sab अपने रूम में जाने लगे मैं भी जाने लगा तभी वो साइड में पड़ा हुआ बाँदा वापस से dikha...maine उसके बारे कहा unse...to वो उसको भी लेके gaye...main रूम में aaya.....aur फिर बस सू gaya...kuch समझ नहीं आया ये चील कहा से आया और मई उन् तीनो को मार रहा था और मुझे hi पता नहीं....

ये सब बड़ा अजीब था पर मेरे रूम का तो पता hi है चाहे कोई भी बात हो मैं बीएड पे आता हु और मुझे नींद आ hi जाती hai...bas वही hua...main सो गया...

आज के लिए इतना hi अब अगले अपडेट में देखते है दब और प्रतीक के बिच की कुछ बातें जिससे अवलो का एक नया बंडल प्रतीक के लाइफ में एंटर karega...sirf वही नहीं और फिर उस पंकज से भी एक मुलाकात होगी...

तो बनने रहिये.....
 
अपडेट -12

अब तक.....

कल रात को कुछ सीनियर्स आये the....aur हमारा उनके साथ पन्गा हो gaya....wajah थी की कुछ स्टूडेंट्स उनके बुलाने पे भी तालाब के किनारे नहीं गए the...unme से मैं भी एक tha......thodi लड़ाई हुई जिनमे उनकी हालत ख़राब हो गयी वही कुछ ऐसा भी हुआ जो मेरे लिए सवाल खड़े कर रहा tha....Baad में प्रिंसिपल सर आये और उन्होंने पंकज और उसके लड़को को अपने ऑफिस में आने को kaha...fir सब रूम में गए और सो गए....

अब आगे....

सुबह hui...Main उठा बिलकुल fresh....har बार की tarah....Room में कुछ तो hai....pata नहीं क्या जो मुझे हमेशा सही कर देता है....

अभी यही कोई 4 बजे honge...main तैयार हुआ और निकल गया मेडिटेट करने ko...wahi जहा 2 दिन से करता आ रहा tha....Aaj भी कोई नहीं था वह pe....main बैठ गया और करने लगा meditate.....par आज कुछ अलग सा लग रहा tha...matlab...body थोड़ी हलकी लग रही थी....

आज भी जब आखें खुली तो बगल में बुआ थी और ध्यान में बैठी thi...maine उनकी ओर देखा और फिर अपनी जगह से utha.....jaise hi उठा तो कोई कागज़ का टुकड़ा निच्चे जम्मीं पे गिर्रा मैंने जब उसको उठा के dekha...to पता चला ये बुआ ने लिखा था....

"तैयार होने के बाद सीधे मेरे ऑफिस aana.....baat करनी है..."

मैंने उसको पढ़ा एक बार वापस मुड़के बुआ को देखा वो बैठी हुई थी ध्यान mein...main वह से फिर निकल गया रूम के liye...room में जल्दी से तैयार हुआ और fir...nikal पड़ा ब्रेकफास्ट के liye....waha पे मुझे आज bhi...DB ने अपने साथ बिठाया par....par वो कुछ परेशां सा tha.....wo बार बार मेरी ओर देखता fir...jab मैं उसको देखता तो वो यहाँ वह देखने लगता और खाना खाने lagta....mujhe समझ नहीं आया इसको क्या दिक्कत हो गयी अब....

मैंने फिर ज्यादा ध्यान नहीं दिया खाना खाया और चल दिया बुआ के ऑफिस की oor....waha पंहुचा तो bua....koi किताब लिए बैठी thi....aur गौर से उसको देखे जा रही थी....

मैं - मैडम आपने बुलाया था....

बुआ - यहाँ कोई नहीं है बुआ भी कह सकते ho.....chalo आओ और बैठो यहाँ पे....

मैं भी जाके उनके सामने चेयर पे बैठ गया.....

बुआ - नास्ता किया...

मैं - हां

बुआ - मैडम ने तुम्हे क्या क्या सिखाया है....

मैं - मास्टर ne....hmm...bahut कुछ जैसे ध्यान lagana....khana pakana....figghting...

बुआ - फाइटिंग में क्या क्या शिखाया है....

मैं - फाइटिंग में बस फ्री हैंड फाइटिंग टेक्निक्स सिखाया है जैसे मैं Jiu-jitsu, करते, बॉक्सिंग, और कुछ आर्ट्स शिखाये थे..

बुआ - नहीं कुछ और भी सिखाया है जो तुम बता नहीं रहे....

मैं - मैं भला क्यों नहीं bataunga....aap भी ना bua...maine वो सब अबतया जो मुझे आता hai.....aaj तक बस यही सब सिखाया है मास्टर ne....aur फिर मैडिटेशन और Yoga...aur आपको ऐसा क्यों लग रहा है मैं झूट बोल रहा हु....

बुआ - झूट बोल रहे हो ऐसा मैं नहीं बोल रही Bacchu....main बस ये कह रही हु सायद कोई ऐसी भी आर्ट मैडम ने सिखाया है जिसका नाम तुम्हे याद ना ho...aur तुम बता नहीं पा रहे....

मैं - नहीं बुआ ऐसा नहीं hoga...mujhe हर एक आर्ट का नाम याद hai...Master ने तो मुझे उनसे रिलेटेड बुक्स भी दी थी ताकि उनको पढ़ के और ज्यादा नॉलेज गेन कर सक्कु...

बुआ- हम्म पर कल जो तुमने किया उसको देखते हुए कोई भी कहेगा की तुम बहुत से ऐसे फाइटिंग टेक्निक्स जानते हो jo...sayad hi कोई यहाँ तुम्हारे उम्र का जानता है....

मैं - कल जो भी हुआ उसमे उन् लोगो की hi गलती thi....wo माँ डैड के बारे में उल्टा सीधा बोलने लगे और फिर mujhe...mujhe....

बुआ - हां गुस्सा आया और तुम सब ने उनलोगो को मारा...

मैं - हां गुस्सा तो आया hi था par...kuch और भी हुआ था....

बुआ - और क्या हुआ था बताओ....

मैं - Wo....jab मुझे गुस्सा आया तो फिर कुछ हुआ और उनकी नजरें हमसे हटती और फिर हमने उनको मारना शुरू kiya....par मुझे ये याद नहीं की मैं मार रहा था या nahi....main to..main कही और hi पहुंच गया था मुझे कुछ दिख भी नहीं रहा tha....fir एकदम से एक ईगल दिखा और मेरी आँखें बंद हो gayi....jab आखें खुली तो मैं पिट रहा था उन् तिण्णो को....

बुआ मेरी बात बहुत ध्यान से सुन रही थी....

बुआ - ईगल दिखा था ???

मैं - हम्म उसके पंखों में से आग की लपटे निकल रही थी,....

बुआ ने एक बार मुझे dekha....aur फिर बोली...

बुआ - जब तक मास्टर ना आये तुम संभल के rahoge...aise किसी भी लड़ाई में नहीं fasoge....samjhe....aur हां ये जो भी तुमने बताया वो किसिस और को मत बताना....

मैं - हम्म ठीक है....

बुआ - जाओ अपने क्लास में लेट ना ो jaaye.....accha सुनने ये ईगल वाली बात ये पहले भी कभी हुआ है क्या....

मैं - नहीं कभी नहीं ये पहली बार tha....kya कुछ गलत है....

बुआ - क्लास में जाओ और मेरी बातों का ध्यान रखना अगर कुछ गड़बड़ hui...to समझ lena....aur हां मास्टर तो है नहीं और मैं भी सैटरडे यानी कल घर जा रही hu....aur तुम भी चल रहे हो....

मैं - मैं पर.....

बुआ - इस्पे बाद में बात करेंगे अभी जाओ जल्दी se...late हुए तो सोच लेना...

मैं जल्दी से वह से वापस अपने रूम में गया और अपनी टेस्टिंग शील्ड ली और चल diya...jaldi से कैसल व में वह पे अपने क्लास mein.....Waha टाइम पे पहुंच गया mein...Class में गया और थ्योरी की क्लास शुरू hui...usme आज कुछ ख़ास वेपन्स की बातें बताई गयी और ज्यादा कुछ nahi...fir बारी आयी प्रक्टिकल्स ki....aaj सब रेडी थे सेबल पास अपना अपना शील्ड tha...Maine जब शील्ड निकला अपना तो एक बार तो सब हसने lage...par...Professor सूरज ने सबको शांत karaya....Aaj 2 - 2 के ग्रुप में रहना tha....sab लोग अपना अपना ग्रुप बना के तैयार the...bacche हुए थे मैं और DB....DB के साथ कोई इस्सलिये नहीं जाना चाहता था क्यूंकि उसका एलिमेंट सबसे अलग है और यहाँ किसी को उसके बारे में ज्यादा समझ नहीं थी अभी to...aur मेरे साथ उल्टा tha....mere पसस कोई एलिमेंट थी hi नहीं तो किसी को मेरे में इंटरेस्ट hi नहीं tha....last में मैं और दब बच्चे तो हम दोनों hi बन gaye....partners..

कुछ नियम बताने के बाद प्रोफ. सूरज ने उन् हथियारों को हम सबके सामने रख diya....par आज भी ना मुझे और ना hi दब को कुछ करने को मिलने वाला tha....humme hi नहीं बाकी के किसी को भी कुछ नहीं करने को milla.....darasal हुआ ये की 1 जोड़े ने प्रोफ. के बताये हुए नियम को माना hi नहीं और गलत तरीके से उस हथियार को उठाने की कोशिश करने लगे और दोनों hi घायल हो gaye.....Prof. से क्लास वही पे ख़तम कर दी आय हममे जाने को कह diya....aur खुद ुन्नन दोनों को हवा में उड़ाते हुए ले gaye...apneSchool के मेडिकल डिपार्टमेंट mein...wahi हम सब बहार चले गए अभी मैजिक क्लास में टाइम था तो मैं अपने रूम में जाने लगा tabhi....DB ने मुझे रोका...

दब - प्रतीक मुझे तुमसे कुछ पूछन है....

मैं - हम्म पूछो...

दब ने आस पास एक बार dekha....waha वैसे था तो कोई नहीं पर फिर भी बन्दे को पता नहीं क्या हुआ वो मुझे अपने रूम में लेके gaya....uska भी कोई रूम पार्टनर नहीं tha...wo भी अकेले रहता था मेरे jaise...usne मुझे चेयर पे bithaya...aur खुद बीएड पे बैठ गया...

मैं - क्या बात है यहाँ क्यों लाये हो mujhe...baat वह भी कर सकते थे ना...

दब - अगर कर सकता तो जरूर karta...accha चलो अपने बारे में बताओ मैं जाना चाहता हु तुम्हारे बारे में तुम्हारे फॅमिली के बारे में....

मैं (मान में) - ये इसको क्या hua....meri फॅमिली का क्यों पूछ रहा है ye....aur मैं इसको बताऊँ भी तो क्या bataun....khud हिकुछ पता नहीं मुझे...

मैं - फॅमिली के बारे में ???

दब - देखो मैं इसी लिए यहाँ लेके आया हु tumhe...taaki जान ये बात सिर्फ हुमतक hi rahe....kal जब तुम्हे लड़ते देखा to...to बिलकुल उन्ही लोगो के जैसा था.....

मैं (मान में) - ये किसके बारे में बात कर रहा hai,...Mom डैड के बारे mein....kya ये जानता होगा उन्हें....

मैं - तुम किसकी बात कर रहे हो....

दब - मैं....

अभिउ वो कुछ बोलता उससे पहले hi किसी बे दरवाजा khatkhataya....wo उठा और दरवाजा khola...samne कोई स्टाफ का tha...wo उसको प्रिंसिपल के केबिन में बुलाने आया tha....aur जब उसकी नज़र मेरे ऊपर पड़ी तो मुझे भी चलने को कहा....

दब के पूछने पर भी उसने बस इतना hi कहा की उसको नहीं पता किस कारण से बुलाया जा रहा है humme....wo बस बुलाने आया है....

मैं और दब दोनों उठे और चल दिए प्रिंसिपल के ऑफिस की oor...par रास्ते में hi हममे एक लड़का millaa...aur उसके साथ कल जो पीटते थे वो सब भी थे....

मैंने देखा कल जो हमारे साथ 2 और लड़के थे वो भी आ रहे थे हमारे picche....aur जो हममे बुलाने आया था वो वही से चला गया पीछे मदद ke....matlab साफ़ था प्रिंसिपल ने नहीं इन् लोगो ने हममे बुलाया tha....Jo बिच में खड़ा था वो पंकज tha....aisa पीछे से आ रहे दोनों बात कर रहे थे...

पंकज - तो तुम लोग हो जिनकी वजह se....mujhe प्रिंसिपल से सुन्ना पड़ा...

दब - नहीं हमारी वजह से नहीं अपने इन् चमचो की वजह se...agar ये बिन्ना बवाल किये निकल लेते तो अच्छा था...

पंकज - एल्फ prince...jyada अकड़ है तेरे mein....tu प्रिंस hoga...apne जगह pe....ye मेरा इलाका है यहाँ बस मेरा राज चलता hai...aaj बस मुंहदिखाई के लिए बुलाया tha...tum चारो ko....Waise जरुरत तो इसकी भी नहीं padti...par कल जो hua...uski वजह से बच गए तुम सब वर्ण कल hi समझा देता...

दब - कल वाले वो पाछो दिख नहीं रहे hai.....abhi तक हॉस्पिटल में है क्या....

मैं - पांच नहीं 6 एक और था जो मेरे दरवाजे के पास पड़ा हुआ था वो भी नहीं दिख रहा है...

दब -मतलब तेरा स्कोर 4 tha...yaar तू तो मेरे से डबल मारा...

पंकज - हां उड़द lo....par याद rahe....ab तुम बस जूनियर्स नहीं रहे mere...meri नज़र हमेशा रहेगी तुमपे.....

दब - ये तो अच्छी बात है हमपे ध्यान देने के लिए इतने लोग hai.,...waise एक बात ध्यान rahe...aaukkat के बहार मात जाना apne...warna क्या hoga...wo नहीं जानते tum...aur हां अपने चलो को समझा दो की बात कैसे करते है....

अभी और बातें होती पर तभी वह प्रोफ. सूरज आ गए....

सूरज - लड़को क्या बातें हो रही hai....Pankaj...class है तुंम्हारी और तुम यहाँ....

पंकज - क्लासेज तो रोज होती hai...aaj इनसे मिलने का दिल किया तो मिलने आ गया....

सूरज - हम्म तो अब मिल लिए ना अब नीकालो सारे...

सब अपने अपने जगह जाने lage...wo पंकज जाते हुए हममे देख के मुस्कुरा रहा था...

दब - दोस्तों ज्यादा तो नहीं बोल दिया ना...

मैं - हां थोड़ा सा.,...

2ंद - नहीं यार इनको ऐसे hi समझ aayega.....chalo अब क्लास का भजि वक़्त हो रहा है...

हम चारो चल diye,...class में...

मैजिक क्लास में आज बुआ नहीं आयी थी कोई असिस्टेंट प्रोफ. आया tha...usne बस थ्योरी कराई और हममे जाने को कह diya....hum भी आ gayue....Main वापस से रूम में जा हो रहा था की दब ने मुझे फिर अपने रूम में bulaya...ur एक किताब दी....

किताब का नाम था थे अननोन वररियर्स....

मैं - ये क्या है.....

दब - तुम तो बताओगे नहीं अपने बारे mein...par मैं सायद जानता हु kuch...aur दोस्त हु तो मदद भी karunga....Ye किताब लो और इसमें जो है उसको padho....jaha तक मुझे याद है इस किताब के एक करैक्टर ने भी बिलकुल वैसे hi लड़ाई की थी जैसा तुमने की है...

मैंने किताब को उलट पलट के dekha...to उसमे लिखा था ये फिक्शन है.....

मैं - ये तो सायद किसी के दिम्माग की उपज है बस...

दब - ये ओरिजिनल किताब नहीं है dost...par उससे बहुइट मिलती जुलती hai...Library ऑफ़ गोड्स में जोकि टाइटन प्लेनेट पे hai...ek किताब hai....kitab नहीं डेरी hai...ek योद्धा ki...jisko संभल के रखा गया hai...iss किताब के ऑथर ने वो किताब पढ़ी और फिर उस किताब में कुछ कुछ चंगेस करके छपवा diya.....aur ये बच्चो की किताब बन gayi....jab मैं छोटा था तो इसी कियताब की कहानियों को पढ़ा करता tha...Jab तुम्हे कल उन् तिण्णो को पीटते हुए dekha....to वो बिलकुल वैसा hi था जैसा इस किताब में tha....pata नहीं क्यों पर मुझे लगता है तुम्हारा कोई कनेक्शन है उससे...

मैं - मजाक तो नहीं कर रहे ना तुम.....

दब - नहीं बिलकुल नहीं....

मैं - हम्म ठीक है मैं पढता हु isko....chalo चलता हु.....

मैं निकलने को हुआ की कित्ताब मेरे हाथ से गिर गया जब उसको उठाया तो सामने एक पेज tha.....aur पेज pe....Ek ईगल की तस्वीर थी और उसके पंखों में आग thi....maine किताब बंद की और उसको लेके रूम में आ गया....

रोऊं में आते hi मैं सोचने लगा वो वही tha....wahi ईगल जो मैंने देखा tha......par ये kitab....kya दब की बात सही हो सकती है या बस ये एक इत्तेफ़ाक़ tha...pata nahi....Master भी नहीं थी यहाँ पे की उनसे इसके बारे में बात karu....Bua से बात कर सकता tha....par वो क्लास में भी नहीं आयी थी सायद बहार हगाई ho.....maine उस किताब को साइड में रखा और वो मोती kitab.,...Shields वाली उसको पढ़ने laga....maine उसको पहले शुरू किया था तो उसको hi पढ़ लेना सही लगा मुझे वैसे भी उस ोपिक से रिलेटेड पढ़ाई होनी भी थी क्लास में तो अगर मुझे पहले से पता हो तो वह आसानी होगी......

थोड़ी देर किताब पढ़ा मैंने वही डिक्शनरी के हेल्प se....fir खाना खाने का वक़्त आ गया और मैं खाना खाने चला gaya....waha से आया अउ वापस से किताब पढ़ने laga...usme एक चीज़ मुझे बहुत अजीब लगी और समझ में नहीं aayi....wo था शील्ड्स पे सिग्न बने हुए shields....ye कुछ hi the.,...aur अजीब से दीखते the....ye कहा से आये इसका कुछ पता नहीं दिया हुआ था किताब mein....maine उसको नोट kiya....aur फिर सोने की तैयारी करने laga...bahut थक गया था आज ......

बीएड पे गया और तुरंत नींद आ गयी....

चलो आज का यही तक रखते है नेक्स्ट अपडेट mein.....Kuch नए शील्ड्स के बारे में jaanege...saath hi प्रतीक के पास जो शील्ड है उसके बारे में भी और स्लेयर भी dikhega....saath mein...Prateek अपने दादा दादी से मिलने जाएगा या नहीं ये भी....

तो बनने रहिये
 
अपडेट - 13

अब तक

मैंने उस किताब में से कुछ बातें नोट की थी जो थी उन् शील्ड के बारे में jinpe...wo सिम्बल्स बने हुए the....Fir रात काफी हो गयी थी तो मैं सो गया....

अब आगे

नेक्स्ट डे....

मैं उठा वही 4 बजे और फिर वही तैयार होक ध्यान वाली जगह के लिए निकल gaya.....waha पंहुचा तो आज बुआ मेरे से पहले वह पे आयी हुई thi...aur ध्यान में बैठी हुई thi....maine भी उनको डिस्टर्ब नहीं किया और खुद बैठ गया ध्यान mein....Dhyaan में बैठने के बाद आज भी कुछ अलग hua....mujhe आँखें दिखाई di....kisi पंछी की..... छोटी सी आँखें thi....par darawani....unn आँखों में मुझे खुद की hi एक तस्वीर दिखाई दे रही थी par.....jas हालत में मैं दिखाई दे रहा था wo...kuch अलग hi था....

मैं खुद hi देख के दर gaya...usko....Maine जब अपनी आँखें kholi....main बुआ के केबिन में tha,......Bua ने मेरा सर अपने गॉड में रखा हुआ था और वो रो रही और बोले जा रही थी....

बुआ - क्या hua...tum ठीक हो naa...tum गिर कैसे gaye....aur...

ऐसे hi बोले जा रही थी वो....

मैंने जब उनको रट हुए देखा तो अपने हाथों से उनके आशु साफ़ kiya....tab तक सायद hi उन्हें पता चला था की मैं जाग गया hu....aaj बुआ को मेरे लिए ऐसे रूट देख पता नहीं क्यों अच्छा भी लग रहा था mujhe....sayad इस्सलिये की कोई मिल गया मुझे जिसको मेरी कदर hai...jo मुझसे प्यार करता hai.....Master थी तो पहले par....wo सायद hi मेरे लिए kabhi...royi ho....wo तो मुझे बस अपनी एक जिम्मेदारी hi समझती thi....aur समझे भी क्यों ना मैं भला था hi कोण unka....par आज बुआ को देख सच में मेरी भी आँखों से आशु निकलने लगे थे....

बुआ - तू तू ठीक है ना क्या हुआ था tujhe...tu चीखा क्यों था...

मैं - पता नहीं मैं बस ध्यान में बैठा था और फिर.....

बुआ - ध्यान में बैठे बैठे थोड़ी ना कोई ऐसे hi चीखने लगता hai....kuch तो हुआ tha...batao...

मैं - वो बस मैं दर गया था कुछ देख के और फिर जब आँख खुली तो मैं अपनी प्यारी बुआ के पास था....

बुआ - दर गए the....dhyaan में बैठे baithe....kaise....

मैं - वो जब मैं ध्यान में बैठा ना तो bas...kisi पंछी की आँख दिखी और उसके आँखों में मैं tha...aur खुद को देख के दर गया और....

बुआ - खुद को देख के दार gaye....kya बोल रहे ho...aur पंछी कहा से दिखने लगे tumhe.,..ai.....ek minute...aisa पहले भी हुआ है क्या...

मैं - हां वो उस दिन जब लड़ाई हुई थी ना उस दिन भी ऐसा हुआ tha....mujhe गुस्सा आया और फिर एक चील दिखाई दिया था जिसके पंखों में आग लगा हुआ था....

मेरी ये बात सुनके बुआ के चेहरे के रंग बदल गए.....

बुआ - यही रहना मैं अभी आती हु....

वो ये बोल के चली gayi....main जो अब बैठ चुक्का था वो वही पड़े hue...paani को पन्ने को पानी लेने के लिए uttha....glass में पन्नी liya...to वो भाफ्फ पैन gaya...evaporate हो gaya....maine अपनी हाथ के ओर देखा तो हाथ में आग लगा हुआ था....

मैं - Aa...aaagg...ye कहा से आय..

मैंने दूसरे जग से पूरा पानी उस हाथ पे गिरा दिया par...wo आग वैसे hi rahi...aag काम होने का नाम hi नहीं ले रही thi....agar एक बात थी उस आग में वैसे जलन नहीं thi...mujhe तो पता भी नहीं चलता इसके बारे में अगर देखता nahi....par क्या बुआ ने इसको देखा tha...nahi देखा होगा अगर वो देखती तो थोड़ी ना jaati....main कोशिश किये जा रहा था उसको काम करने की पर कुछ हो hi नहीं रहा tha....tabhi केबिन के एक खिड़की की एक कांच टूटी और उसमे से एक चील आया और मेरे उसी हाथ पे आके बैठ gaya....yaha पहले से फटती पड़ी थी और ये अलग hi है जो पता नहीं कहा से आ गया....

पर जो हुआ वो देखने लायक tha....mere हाथ में आटे hi मेरे हाथ का वो आग उसके ऊपर चला गया और वो बिलकुल उसी तरह दिखने लगा जैसा मैंने उस दिन देखा tha....Abhi मैं उसको देख रहा था की दरवाजा खुलने की आवाज aayi...aur मैं वह देखने लगा तब तक वो चील जा चूका tha.....par कहा se....ye पता नहीं...

बुआ - तू खड़ा क्या कर रहा hai...bola था ना बैठा रह...

मैं - Wo...wo वह....

मैंने जब उस कांच की और देखा तो वो टुटा hi नहीं tha.....ye आखिर क्या था mera...vahem या फिर कुछ aur...samajh नहीं आ रहा था...

बुआ - तू जा और बोइथ वह pe....Kavita....cheak करो इसको....

कविता - ये है स्कूल के मेडिकल डिपार्टमेंट की हैड hai...aaur पूनम की सहेली भी....

बैक तो स्टोरी

कविता जी मेरे पास आती है और फिर मुझको किसी एनर्जी के गोले में बंद कर देती hai....Ye मेरे लिए पहली बार था तो दर तो लग्न hi tha,,,,main उसको खुद को निकलने के लिए कहने लगा पर....

बुआ - चुप रहो और सीधा बैठे raho...dekhne दो इसको...

मैं बैठ गया....

थोड़ी देर baad...Kavita जी ने कहा...

कविता - हम्म वैसे तो सब नार्मल hai...sayad किसी ने मैजिक किया था इस्पे जो अब टूट गया है...

बुआ - मैजिक कैसा मैजिक...

कविता - अरे वही सम्मोहन wala....koi इसको अपने बस में करना चाहता था sayad....par ये पाका नहीं कह रही हु ये बस अंदाजा hi है....

बुआ - तू पक्का क्यों नहीं बता रही है इंटने टाइम से तो प्रैक्टिस कर रही है....

कविता - हां कर रही हु par.,...iske साथ समझ नहीं आ रहा है सब इतना ज्यादा नार्मल कैसे दिख रहा hai...aisa लग रहा है ये कभी बीमार hi नहीं हुआ....

बुआ - ये तो सही है ना की ये बीमार नहीं हुआ...

कविता - तू नहीं समझ रही hai...chalo chodo...abhi ये सही है कोई दिक्कत नहीं hai...(mujhse) हम्म क्लास कर सकते हो अब तुम चलो जाओ मुझे इससे बात करनी है कुछ....

इतना बोल के उन्होंने मुझे उस ेनेरगय के गोले से बहार किया और main...bahar जाने को उठा hi था की...

बुआ - तुम क्लास नहीं karoge,....room में जाओ और आराम करो....

मैं - पर मैडम....

मेरे ऐसे बोलते hi उन्होंने अपनी आँखें dikhayi....aur मैं भी चुप चाप अपने रूम में आ गया....

अब क्लास में जाना नहीं tha...iss वक़्त नींद नहीं aayega...Maine वो दब का दिया हुआ किताब निकला और उइसको पढ़ने laga...wahi वो उनकोंवों वररियर्स ऐसा hi कुछ था sayad.....uss किताब में बस कहानियां thi...sach hi कहा था usne....par कहानी थी बड़ी majedar.....jab तक मैं उस हिस्से में नहीं पंहुचा जहा pe....mere टेस्टिंग शील्ड का एक स्केच और साथ hi वो चील का भी स्केच नहीं मिला...

वो हिस्सा कुछ ऐसा था ki....Titan प्लेनेट पे जहा देवता बास्ते थे उनमे कुछ ऐसे भी the...jo सुपेरियर्स माने जाते the...unke पावर की कोई सीमा hi नहीं thi....Wo सब लोग मैडिटेशन से उस मुक्काम पे पहुंचे the....par...dikkat ये हुई ki...Titan प्लेनेट के राजा को उनसे जलन होने lagi....kyunki वो उनसे ज्यादा ताकतवर the....par वो अपनों के प्रति भी जाग्रुकत रहते the....ab जब ऐसा कुछ हुआ to...Devtaon के राजा ने कुछ इलज़ाम लहगा के उनको निकल दिया वह se...wo भी चले गए अपने परिवार वालो के साथ par....Raja ये नहीं समझ पाया ये सब kuch....Lucifer की चल thi.....usne ऐसे सीटुएशन्स बना के दिखाए राजा को की वो अपने यहाँ के सबसे शक्तिशाली लोगो को hi निकल de....Karib 10 परिवार थे जो निकल गए थे isse....unme से 2 परिवार ऐसे the...jinko नफरत सी हो गयी अब अपने राजा se...unka बस चलता तो वो अभी जाके टाइटन पे हमला कर देते और फिर वह राज्य करते par....unke ग्रुप के हेड को ये मंजूर नहीं tha....wo सारे एक छोटे से प्लेनेट पे चले gaye...aur वही पे रहने lage....uss प्लेनेट पे पहले भी लोग रहते the....Ek दिन की बात है किसी कारण उनन्साब में भी अणबण हुई और वो sab....ab वह से निकलने को हो gaye...sab बिछड़ gaye...aur यहाँ वह चले gaye...unn 10 परिवारों में से 2 स्ट्रेंज वर्ल्ड में आ gaye....aur उन्ही में से एक ने वो स्कूल की स्थापना ki....wahi 2 ऐसे थे जो डार्क वर्ल्ड में चले gaye....aur वही के हो gaye.....kuch hi वक़्त बाद उनका कॉपी पता नहीं raha....jo बाकी के 6 बच्चे उनमे से....3 ऐसे hi ओरियन पे चले गए और वही के हो gaye....waha पे वो जादूगरों के साथ राणे lage....baaki के 3 पता नहीं कहा gaye....unka कुछ पता hi नहीं hai....logo की माने तो वो आज भी इसी ब्रह्माण्ड में hai...par सबसे चुप्पे hue...apne लीडर की तलाश में.....

जो इनका लीडर था वो पता नहीं कहा चला gaya.....bas नंबर्स का hi पता था की इतने यहाँ gaye...itne वह gaye...par ये नहीं की कोण कहा गया....

उनके अलग होने की वजह थी उनके पावर्स और hatiyaar....unka जो लीडर था उसने वो सब कुछ एक जगह पे बंद कर दिया tha...ek गुफा mein....aur उसके आस पास एक ऐसा घेरा जिसको तोड़ पाना तब तक मुमकिन नहीं जब तक वो 10 के 10 वह नहीं ho...ye उसने इसीलिए किया था ताकि कभी कोई गुस्सा hoke....Titan प्लेनेट पे हमला न कर de,,,,shuru में तो सबको ये मंजूर था पर बीतते वक़्त के साथ ये सब बदल gaya....fir इसी बात को लेके वो सब बिछड़ गए....

मैंने पूरी किताब पढ़ daali....mujhe वही 10 शील्ड्स का पता चला par...wo अलग थी और मेरी वाली अलग thi...matlab उनमे से एक पे वो ईगल का सिंबल था तो पर वो टेस्टिंग शील्ड नहीं tha...wahi मेरा शील्ड टेस्टिंग शील्ड tha,,,,jo सायद उन्ही लोगो में से किसी के बच्चो का हो जो मेरे पास पहुंच गया hai....main सोच ने लगा क्या ये sab...jo भी वो चील का दिखाना अभी मेरा बेहोश होना ये sab...sab इसी शील्ड से तो नहीं मिले हुए थे....

पर कोई निष्कर्ष नहीं निकला....

मैंने उस किताब को पूरा किया और फिर उस पोर्टेबल लाइब्रेरी में हाथ दाल के स्पेशल शील्ड्स के बारे में सोचने laga...to एक पुराणी सी किताब निकली....

मैं उसको देखने लगा....

1सत पेज में 101 स्पेशल शील्ड्स का टाइटल लिखा हुआ tha...yahi नाम था इस किताब ka...main पेज पलटते gaya....aur मुझे बहुत तरह के शील्ड मिलते gaye....tarah तरह के शपेस ke....colours ke....aur साथ में महंगे और सस्ते bhi....kul 101 थे unme...par मेरी नज़र गयी कुछ पुराने वालो pe....jinme से एक दब का tha.....Crowned एल्फ फॅमिली का एक अलग hi शील्ड hai....waise hi कुछ और भी फैमिलीज़ है जिनके अलग शील्ड्स hai...jinka उसे केवल वो hi कर सकते hai....par kyun...aisa क्यों है...

मैं वो पूरी किताब को पढ़ा पर ऐसा कोई भी शील्ड नहीं मिला जिसमे ईगल का सिंबल ho....par जब मैं किताब बंद करने लगा तो उस किताब के बैक साइड पे मुझे उस थे अननोन वररियर्स बुक के बारे में लिखा milla....usme लिखा था....

"ये शील्ड्स सायद आज भी है पर सबकी नज़रों से दूर hai...ab ये अफवाह है या सच इसका पता किसी को नहीं है..."

मैं ये सब पढ़ रहा tha...waqt का भी पता नहीं चला mujhe....kab शाम हुई कब raat.....wo तो दब ने आवाज लगाई तब होश आया mujhe....wo आवाज दे रहा था मैं रूम से बहार nikla...wo पूछने लगा क्या हुआ क्लास में नहीं आये और अब डिनर भी...

मैं - अरे वो मैं भूल गया था किताब पढ़ रहा था तो बस....

दब - किताब पढ़ रहे थे तो खाना भी भूल gaye....waah....tumhe मेरे जगह पे होना चाहिए tha....mere पिता जी को तुम बहुत पसंद aate....wo हमेशा से कोई ऐसा hi बीटा चाहते the...par मिला मैं...

मैं - अच्छा वो छोड़ो चलो दिंनर कर आते है...

फिर हम तिण्णो चल दिए डिनर करने ko....dinner के वक़्त आज वो मुझे क्लास के बारे में बता रहा था फिर अपने फॅमिली के बारे में बताने laga.....mujhe उसकी बातें सुन के बहुत मज़्ज़ा आ रहा tha....main aksar...school में भी लोगो को अपने फॅमिली के बारे में बाटर करते हुए सुनता tha...accha लता होगा ना कोई अपना hona...tabhi मुझे बुआ की बात याद आयी वो मुझे ले जाना चाहती थी दादा दादी के pass....par मैंने अभी हां नहीं की thi...maine सोच लिया यहाँ से जाने के बाद में उनसे बोल दूंगा की मैं रेडी हु जाने को.....

मैंने जल्दी से डिनर किया और fir...unke पास जाने को निकल gaya...DB को मैंने उसके रूम में जाने को बोल दिया था....

मैं बुआ के केबिन में pahucha...waha dekha...Bua अभी भी उस कविता मैडम के साथ thi...sayad बातें कर रही thi...ab क्या ये तो वो hi jaane....Darwaja खुला था तो बस ये देखा था maine...phir दरवाजे पे नॉक किया ...

बुआ - आओ अंदर आओ बहार क्यों हो....

मैं भिओ अंदर चला गया....

कविता मैडम - हां कहो क्या बात है....

मैं - वो मैं ...वो मैडम से बात करने आया था....

कविता - हां तो बोलो ना...

मैं - नहीं मैं बाद में आता हु...

मैं जाने को हुआ तो बुआ हसने लगी....

मैं मुद्दा...

बुआ - इसको मैंने बता दिया था सुबह hi ये बस मजाक कर रही hai....chal बता क्या बात है...

मैं - ू ऐसा kya....Haa वो मैं रेडी हु आपके साथ चलने को...

बुआ - रेडी hu....maine तुझसे पूछा नहीं था बच्चू मैंने तुझे बताया था की तुझे मेरे साथ चलना hai...agar तू ना बोलता ना तब भी ले आती tujhe...Wo छोड़ ये बता अब कैसी है tabiyat...aaram किया ना...

मैं - हां तबियत सही hai...waise बिगड़ी भी नहीं thi....jabardasti आराम करने को कहा आपने ाकि वजह से क्लासेस मिस हो गयी...

बुआ - बड़ा आया क्लासेज wala....tujhe फ़िक्र करने की जरुरत नहीं क्लासेज के liye....main देख लुंगी सब,,,,

मैं कुछ नहीं bola...aur वह से निकल gaya...room में आया और सोने की तैयारी करने लगा...

चलिए इस्को यही छोड़ हम एक नज़र अपने स्लेयर पे डालते hai....wo अभी डार्क वर्र्ल्ड के अँधेरे गुफाओं में tha...uske आस paass...phir भी रोशनी thi...aas पास देख जा सकता tha....wo देखने में बहुत ताकतवर लग रहा tha....uske दोनों बाजुओं पे तत्तो जैसे कुछ बनने हुए the....ek पे सांप और दूसरे pe....ek भेड़िया.,....

आज के लिए इतना hi आगे का नेक्स्ट अपडेट में dekhenge....next update...Slayer का aatank...Dark वर्ल्ड mein....Sofia की kahani...Kon थी सोफ़िया कहा से आयी थी wo....aur विराज की भी थोड़ी सी हिस्ट्री जानेगे...
 
अपडेट - 14

अब तक...

प्रतीक को कुछ पता चला था उन् शील्ड्स के बारे mein....saath में वो eagle....wo उसके पास आया था पर अभी तक उसका कुछ समझ नहीं आ रहा tha...raat के वक़्त प्रतीक पूनम के साथ अपने दादा दादी के पास जाने को मान जाता hai...Wahi यहाँ से बहुत दूर स्लेयर डार्क वर्ल्ड के अँधेरी गुफाओं में बैठा मेडिटेट कर रहा था....

अब आगे....

चलिए डार्क वर्ल्ड में चलते hai....Haa वही जहा स्लेयर रहता है.....

यहाँ की अँधेरी गुफाओं में से किसी एक गुफा में जहा पे स्लेयर tha...meditate कर रहा था वह pe.....aawajein हो रही thi....khushphusane की aawajein.....jaise लोग बातें कर रहे ho.....bilkul धीरे dhire....par ये आवाजें मर्रे हुए लोगो की thi....yaani आत्माओं की जो स्लेयर के अंदर the....aur अब उन्हें भूख लगी thi.....matlab कोई नया आत्मा चाहिए था उन्हें....

ये ावजहेँ बहुत hi धिम्मे डिम्मे बढ़ने lagi.......tez....aur tez....fir एक दम से shant.....sab शांत हो gaya...kyunki किसी के पैरों की आवाज आने लगी thi....kisi के चलने की aawaj....ab ये कदमो की आवाज तेज़ होने lagi....aur स्लेयर वाले गुफा के सामने चली गयी....

एक एक आँख वाला इंसान जैसा दिखने वाला hi कोई जीव था ye....sharir का आकर बहुत बड़ा tha....hathon में उसके एक तलवार थी....

उसने अपने एक आँख से स्लेयर की ओर देखा वो अभी तक अपनी आँखें बंद किये हुए tha...uss एक आँख वाले ने जब ये देखा तो उसके सांस में सांस aayi....aur फिर वो अंदर gaya...apne हाथ में पड़े हुए तलवार कको एक बार dekha....fir अपनी आँखें बंद करि और सायद किसी को याद कर रहा हो wo....tabhi उसके एक आँख से आंसू के बुँदे बहने lagi....fir उसने त्रल्वार को अपने पेट में गुस्सा diya...par कोई आवाज नहीं की usne....fir उसी तलवार को अपने hi हांथों से घुमा दिया उसी tarah....aur फिर उसकी पकड़ उसके तलवार से छूटने lagi....aur देखते hi देखते wo....nicche जम्मीं पे गिर gaya......uska गिरना tha...ki उसके शरीर से एक रोशनी निकली ार वो सीधी स्लेयर के अंदर चली gayi....aur वो बॉडी जो उस एक आँख वाले जीव की थी वो वह से गायब हो गयी साथ में वो तलवार bhi....Slayer वैसे hi मैडिटेशन में बैठा रहा....

चलिए देखते है वो लाश कहा गयी....

इस गुफा से बहुत दूर एक बस्ती thi....jaha उसी एक आँख वाले जैसे लोग रहा करते the....aaj उसी बस्ती वालो की बारी थी की उनमे से कोई एक जाए और अपनी आत्मा को सौंप दे स्लेयर को.....

डार्क वर्ल्ड के सारे लोग ऐसे hi बस्तियां में रहते the...aur सभी बस्ती का एक हेड होता tha.....pahle के हालत कुछ ठीक थे अभी se....par इस सलाउएर के आने से hi तबाही मच गयी thi....naa जाने कितने ही लोगो को उसने एक hi दिन में ख़तम कर दिया tha....Wo तो कुछ ऐसे लोग आ गए थे वह जिन्होंने उससे लड़ाई लड़ी और लगभग से उसको हरा दिया tha.....aur वो स्लेयर वह से गायब हो गया और चुप गया कही पे.....

अब इसको किसी ज्वालामुखी के फटने से पहले wala...bhukamp कहा जा सकता hai.....jisse तबाही हुई थी पर उतनी नहीं.....

स्लेयर यहाँ इस डार्क वर्ल्ड में hi क्यों आया था इसके पिच्छे भी एक वजह thi....wajah थी उसकी Maa....Sofia ने स्लेयर से काफी बार इस जगह का जिक्र किया tha....bataya था उसको यहाँ के बारे में यहाँ के लोगो के बारे mein.....sayad यही वजह थी की स्लेयर ने यहाँ hi आने का chunna...ek और भी वजह थी उसकी भूख....

स्लेयर जो पिट के वह से भगा था वो भागते भागते एक खँडहर में pahucha....jaha उसको कुछ लोग दिखाई diye.....kuch जाने पहचाने से log.....jinko उसने सायद पहले देखा नहीं था कभी पर उनके चेहरे कुछ कुछ पहचाने हुए लग रहे te......jab स्लेयर ने ध्यान दिया तो वह की एक लड़की का chahera....bilkul उसकी माँ सोफ़िया की hi तरह दीखता ttha....Slayer ये देख के झटका खा गया......

वो उनके पास जाने लगा चिप चिप kar....aur जब उनकी ओर ध्यान से देखने लगा तब उसको पता चला इन् सब की हालत बहुत ख़राब hai......Wo उन् लोगो को देख hi रहा था की पोंछे से किसी ने उसको chua....jab स्लेयर पीछे मुद्दा तो वह वही लोगो में से एक था जिससे मार खा के वो भगा tha.....uss आदमी ने एक बार आस पास देखा जब कोई नहीं दिखा तो....

वो आदमी स्लेयर को अपने साथ ले gaya....wahi पास में एक छोटा सा घर जैसा बनना tha...Slayer को वही ले गया वो....

वह पे उसी ने उसकी मलहम पति ki.....ab इन् सब से सवाल उठना तो लाज़मी है....

स्लेयर ने पूछ hi लिया उनसे उनके बारे mein.....aur ऐसा जवाब मिला जिसकी उम्मीद भी नहीं थी स्लेयर को.....

जवाब आया वह पे एक बुध्दि se.....buddi दिखने में बहुत hi अजीब thi.....usne एक पल को बस एक पल को hi तो स्लेयर को देखा और उसको पहचान gayi.....usne स्लेयर से सोफ़िया के बारे में पूछा par....Slayer ने कुछ नहीं bataya.....aur जब उसने नहीं बताया तो उस बुढ़िया ने अपनी कहानी शुरुर कर दी....

बुढ़िया - यही इसी जगह पैदा हुई थी वो Sofia.....meri hi बहन थी wo.....apni सगी bahen......hamari माँ एक चुड़ैल thi....aur पिता देवताओं में से ek....par शक्ति नहीं थी उनमे koi......saari शक्तियां जा चुक्की thi....kuch भी नहीं था उनके pass....unki shadi....ko यहाँ के लोगो ने मान्यता नहीं di....dete भी kaise....koi देवता की शादी कभी किसी डायन से हो ये मुमकिन hi नहीं था यहाँ के लोगो के हिसाब se....Pita जी जो की यहाँ अपने पूर्वजो में से अकेले बच्चे थे उनको बंधी बना लिया gaya....yaha के कबीलों के सरदारों की तरफ से.....

माँ जो पेट से थी उनको ऐसे hi इसी जंगल में छोड़ दिया gaya.....hum दोनों को जनम देने में hi माँ की मौत हो gayi....jab सरदारों को ये पता चला तो उन्होंने हमारा ध्यान रखने के लिए पापा को बहार निकल diya....par Papa...unko कुछ हो गया था ab....wo बस किसी तरह से बदला लेना चाहते थे इस पुरे प्लेनेट se...par शक्ति थी nahi...tha तो बस लड़ने का tarika.....unhone हममे वो तरीका shikhaya...ek दिन उनके टेक्निक्स का पता चल गया यहाँ के वैम्पायर कबीले वालो ko....unhone पापा को खरीद liya...auur तब से हम गुलाम है unke.....jo वो कहते है हम वही करते hai....jisko मारने बोलो उसको मार देते hai...humme अपने लिए 2वक़्त का खाना मिल जाता hai....ye जिसने तुम्हे मारा वो भाई है तुम्हारा,....

सोफ़िया यहाँ से भाग गयी thi..jab वो बड़ी hui.....par उसके दिम्माग में भी बस बदले की hi बातें घूमती रहती thi.....uska कुछ भी पता नहीं था humme...ek दिन उसकी कुछ खबर मिली थी पर फिर से गायब हो गयी.....

स्लेयर सब ध्यान से सुन रहा tha......wo ये जान चूका था की यही जगह है जहा उसकी माँ का जनम हुआ tha....aur भी अपने मा और उसके परिवार के बारे में सब जान चूका था wo....unn लोगो ने स्लेयर को रहने के लिए जगह diya....par खाने को कुछ ना दे सके क्या hi देते कुछ होता तब ना.....

स्लेयर को वह पे एक किताब milli....ye वही किताब थी थे अननोन वररियर्स की कोई कॉपी thi.....wo उस बुढ़िया के पास thi....uss किताब पे बहुत कुछ लिखा tha...puchne पपे पता चला वो किताब उस बुढ़िया की पिता की आखिरी निशानी thi....Slayer वो किताब ले liya....aur उस किताब में लिखी हुई चीजजो se....aur बनने हुए नक्से को देखने लगा समझने की कोशिश करने लगा......

ज्यादा वक़्त नहीं लगा समझने mein....pahle से hi उसके pass....uss प्लेनेट का एक नक्शा था बस उसी को और उस किताब में बनने नक्से को देखते हुए उसको कुछ milla...unhi अँधेरी पहाड़ियों mein....aur वो चल पड़ा उन् पहाड़ियों की oor......Kuch दिन बीत गए थे usko....aatma ना मिले hue.....koi और रास्ता नहीं दिखा तो उसने उन्ही लोगो को जला dia....har एक ko...aur उन्ही आत्मा को अपने अंदर खिंच liya....aur चल दिया पहाड़ की ओर.....

पहाड़ के पास पंहुचा तो वह पे बहुत hi घाना जंगल tha....aur स्लेयर को जाना था उन्ही जंगल के बच्चो बिच बनने हुए एक गुफा में....

गुफा में उस किताब में लिखी गयी चीज़ों के अनुसार कुछ ऐसा चिप्पा हुआ था जो बहुत hi कीमती था......

स्लेयर बढ़ता गया बढ़ता गया और थोड़े बहुत जंगली जानवरों को मारते हुए वो पहुंच गया वह से उस गुफा mein...aur गुफा में जाते hi शुरू किया उसने अपना काम.....

किताब में लिखा tha....guiffa के दरवाजे के ठीक निच्चे है वो cheez.....jab स्लेयर ने ये शुरू किया और उस चीज़ तक pahucha...to वह पे बस एक कंकाल tha....haa एक कंकाल पता नहीं kiska....Slayer ने उसको chua...aur उसके एक हाथ pe...ek लोमड़ी का निशान बन gaya.....ab ये निशान क्या था क्यों था पता nahi.....tha स्लेयर को.....

जब वो निशान बना स्लेयर के हाथ पे रो एक पल के लिए तो खलबली hi मच गयी थी उसके शरीर mein....uske अंदर जजों भी आत्माएं थे वो चीखने लगी thi....aur देखते hi dekhte....Slayer जम्में पे था...

जब ये हुआ तो कुछ log....waha उस जंगल में जल्दी से pahuche.....une से एक के हाथ पे एक सांपं का निशान tha.....usne एक बार स्लेयर को dekha.....fir पीछे हैट gaya.....aur झुक गया उसके सामने.....

स्लेयर जो जमीन पे लेते हुए tha....chilla रहा था उसको ये सब दिख भी नहीं रहा tha,.....wo तो बस अपने hi दर्द में था......

वो लोग स्लेयर को उठा के ले गए उस जगह से....

स्लेयर....2 दिन वह प वैसे hi बेहोश रहा और जब उठा तो भूख से पागल हुआ था wo.....usne आस पास देखा एक औरत बैठी thi....usne उसके गर्दन में काट liya...aur वो औरत वही पे मर gayi...aur उसकी आत्मा स्लेयर के अंदर चली gayi......Jab स्लेयर ने आस पास और देखहा तो उसको बस एक खली झोपडी hi दिखाई di....jisme सायद एक वो औरत और एक स्लेयर hi था और कोई nahi....Slayer उस झोपडी से बहार निकला और यहाँ वह देखा तो उसको अपनी एक आदमी मिला जो आँखें बंद किये हुए एक पाथेर पे बैठा tha....Jab स्लेयर ने उसकी सकल देखि तो वो और चौक gaya....ye वही tha...bilkul उसी की तरह दिख रहा था वो जो हमेशा आता था Slayer....part और नीलम को मारने के liye...jab वो स्कूल में the....ye वही था जो हर बार बच के निकल जाता था....

स्लेयर उसके सामने जा बैठा और उसको देखने लगा....

आदमी - Malik....to आपको होश आ hi गया......

स्लेयर चुप रहा और उसको देखता रहा....

आदमी - मालिक आपकी माँ ने मुझे ये आदेश दिया था की आपको और आपके साथियों को मैं प्रैक्टिस करता rahu....bas यही वजह था मेरे आपके पास आने ka....ab आप उस काबिल हो गए है की मुझे अब यहाँ से मुख्त karenge....ye shakti....ye जो मुझे तौफे में मिली थी इस्कोप वापस लेले मालिक और मुझे मरने de....main जानता हु मेरी बीवीव को मार दिया है आपने....

स्लेयर कुछ नहीं बोल रहा था बस सुन रहा था.....

उस आदमी ने अपने पीठ पे लगे हुए उसके तलवार को निकला और खुद का गाला काट diya....Slayer ने उसकी बॉडी को छुआ और उसके दूसरे हाथ पे बन gayi..wo सांप की nishani....saath hi उसकी आत्मा भी उसी के अंदर चली गयी....

अब बारी थी ज्वालामुखी के फटने ki....Sab लोग अभी डार्क वर्ल्ड में आराम से the....par अब वक़्त बदलने वाला tha....Slayer ने वापस से लोगो को मारन शुरू कर diya...aur इस हद तक मर्रा की सभी सरदारों को उसके पास आना पड़ा और उसके सामने घुटने डालने pade....wo सब उससे हर मान गए और उसकी गुलामी को काबुल किया....

स्लेयर की बस एक hi शर्त thi....usko और कुछ नहीं चाहिए था वो बस उसी गुफा में रहने को तैयार था साथ hi किसी को भी ना मरने की बात भी कही उसने par....uske लिए रोज एक आत्मा उसके पास पहुँच जाना chahiye,,,,Jis दिन आत्मा नहीं पहुंची वो बहार निकल आएगा और वो दिन बुरा होगा.....

इतना बोल स्लेयर वापस से गुफा में चला gaya.....aur स्लेयर ने बाकी सब छोड़ दिया यहाँ के लोगो पे...

गुफा में स्लेयर अपने नए पावर्स पे ध्यान लगता उनपे काबू पाने की कोशिश किया karta....aur साथ hi वैसे hi और पावर्स dhundhta...roj कोई मना कोई आता और खुद का आत्मा उसको दे deta....khud को मार के....

चलिए सोफ़िया का देख लिया अब विराज का भी देख लेते hai....to विराज की भी कुछ ऐसी hi कहानी है वो भी उन्ही 10 परिवारों में से एक परिवार का tha....jinko टाइटन प्लेनेट से निकला गया tha....uske पूर्वज ओरियन प्लेनेट पे आ गए the...Sofia का उसी को अपने प्यार में फांसना कोई संजोग नहीं था ये सब सोफ़िया का सोचा समझा प्लान tha...par...kismat dekho...Viraj वह से भागने में कामियाब हो गया था...

चलो ये सब chodo...ab चलते है एअर्थ पे वापस...

हां तो प्रतीक यानी मैं सुबह उठा और चल दिया तैयार होक ध्यान lagane....aaj कुछ अजीब नहीं hua....sab नार्मल hi tha...wahi फिर 8 बजे के आस पास मैं उठा और जब उठा तो बुआ वही पे कड़ी thi....wo मेरे जागने का hi इंतज़ार कर रही थी बस....

बुआ - चल जल्दी कर बस आती hi होगी....

मैं - अरे हां मैं छान....

बुआ - वो सब वह हो jaayega....tu चुप चाप chal...wo मुझे लगभग खींचते हुए ले गयी गेट के pass...aur तुरंत hi वो बस aayi....main और बुआ उसमे चढ़ गए....

बुआ - हम्म तू रूम में जा फ्रेश होजा मैं यहाँ देखती हु....

मैं - Room...par मुझ....

अभी पूरा बोलै भी नहीं था की कोई आया और मेरा हाथ पकड़ा उसने और मैं एक रूम में tha....room में मेरे लिए 1 नया कपडे का सेट रखा हुआ tha...main भी इस बार वेट ना करके जल्दी से चेंज kiya...aur अभी चेंज कर के रेडी hi हुआ था की एक झटका लगा और फिर दरवाजा खुला...

बुआ - क्या कितना लेट करेगा चल jadi...aaj सब बहुत खुश होंगे तुझे देख के वह पे....

उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा और अगले hi पल हम दोनों रोड पे the....bada hi अलग जगह था ye....ass पास बस पेड़ hi दिख रहे the.....aur ठीक हमारे सामने था एक बड़ा सा घर....

बुआ - ये है हमारा घर...

आज के लिए इतना hi छोटा अपडेट है....

कल और परसो 2 दिन एक- एक अपडेट aayenge...raat में
 
अपडेट - 15

सोफ़िया के पास्ट के बारे में बताया gaya....sath में स्लेयर का क्या हाल है डार्क वर्ल्ड में वो भी बताया gaya...uske बाद हमने देखा की प्रतीक अपनी बुआ ...पूनम के साथ चल pada...apne दादा दादी से मिलने ko....aur जाके उनके घर के सामने खड़ा था...

अब आगे

ठीक सामने हमारे था एक बड़ा सा ghar....aas पास पेड़ लगे हुए the...Maine आस पास dekha...to बिलकुल वैसे hi घर थोड़ी दुरी दुरी पे बने हुए the....matlab....ek ghar...uskeas पास कुछ बड़े बड़े ped...fir थोड़ी दुरी पे दूसरा ghar......main यही सब देखने में लगा हुआ था की बुआ ने मेरे बैलन में अपना हाथ रखा...

बुआ - चलो अंदर चलते hai....dekhte है क्या होता है.....

मैं - क्या मतलब...

बुआ - Matlab...hmm वो अंदर चल के देखते hai...bas जो भी बोलना अच्छे से bona....mere पापा बड़े hi स्ट्रिक्ट है और माँ का तो पूछो hi mat....bakki बच्चे बड़े bhaiya....unse बच के hi rahna...aur भाभी भी काम नहीं है koi...Haa एक बहन भी है tumhari....tumse बड़ी hai...aur घरमें सबसे ज्यादा उसी की चलती है तू उसको अगर खुश रखा तो सब सही है...

मैं - ये सब पहले बताना था ना मैं कुछ गिफ्ट्स ले aata...pahli बार मिल रहा हु....

अभी बात भी पूरी नहीं हुई थी की घर का दरवाजा खुला और एक बॉडी बिल्डर टाइप aadmi...baal सफ़ेद थे uske...wo बहार आया...

बुआ - पापा आ gaye....ambhal कर....

बुआ के इन् बातों से मैं दर गया था कोई भी दर jaata.....jaise जैसे दादा जी पास आ रहे थे वैसे वैसे मेरा दर बढ़ता जा रहा था....

दादा जी - Poonam....kaun है ye...(jor से)

बुआ - वो पापा ye...ye ना wo...mera स्टूडेंट है....

मैं बुआ को देखे जा रहा था वो इतना दर दर के बोल रही थी अभी उन्ही कोटो देख रहा था की एक और आदमी घर से nikla...ye भी बॉडी बिल्डर टाइप hi tha...par इसकी आँखें एकदम से नीली थी....

मैंने बुआ की ओर देखा तो वो पहले से hi लगी हुई थी दादा जी के saath...unko हकलाते हुए कुछ कह रही थी....

वो आदमी मेरे सामने खड़ा हो gaya...aurmujhe घूरते हुए पूछा...

आदमी - कोण हो तुम और यहाँ क्यों आये हो...

मैं क्या hi bolu....lag रहा था यहाँ बुआ मुझे मरवाने के लिए लायी है एक दादा जी है जिनसे बुआ तक को दर लग रहा है मैं क्ट्या hi kahu...aur अब ये जनाब पता नहीं कोण है इनसे भी मुझे दर लग रहा tha....ki tabhi...ek औरत की आवाज आयी उन् दोनों के पीछे se....dikhne में बड़ी hi सूंदर लग रही थी wo...haa उम्र ज्यादा थी पर थी बड़ी hi sunder....main उनको hi देखने laga...aur बस देखता hi रहा....

दादा जी - दादी है teri...aisda क्या घुर रहा है....

मैं - क्या...

बुआ - क्या पापा अभी बोलना जरुरी tha...aur माँ aap..aapkyun आयी अभी bahar..sab प्लान के हिसाब से तो चल रहा था....

मैं - Plan...kaisa प्लान...

दादी - तू चुप kar...tere साथ रहता है ye...hamne तो बस एक झलक hi देखि थी iski...aur fir....tab से हमने तो उम्मीद hi छोड़ dithi...aur जब ये आज आया है तो तुम लोग ऐसे कर रहे हो इसके saath...khabardar अगर किसी ने इसको परेशां किया तो.....

मैं समझने की कोशिश hi तो कर रहा था की चल क्या रहा है यहाँ pe...wahi दादी ने अपनी बात ख़तम की मेरा हाथ पकड़ा और खींचते हुए मुझे अंदर ले गयी....

अंदर 2 और लेडिस thi....dono hi देखने में बहुत अच्छी लग रही thi....jo बड़ी वाली थी उसको देख के लगा की ये कोई वैम्पायर hai...aur मैं सही था वो वैम्पायर hi थी वही छोटी वाली का कुछ समझ में नहीं आया मुझे....

छोटी वाली लड़की ने मुझे देखा और मुँह बनाते हुए बोली... ये किसको उठा लाये हो यहाँ....

दादी - ू रूपल की बच्ची तेरी उस पूनम बुआ का प्लान ख़तम अब अच्छे से मिलो isse...samjhi वर्ण बहार कर दूंगी पता है ना...

रूपल - अरे Dadi....mujhe लगा वो सब अभी करना hai...main तो बस issiliye....accha अब नहीं करुँगी...

वो फिर मेरे पास आयी और एक स्माइल दी मुझे और गल्ले लग गयी mere....main बस खड़ा रहा और क्या करता batao...ye ऐसे hi कुछ भी चल रहा था यहाँ मुझे समझ नहीं आ रहा है और....

रूपल - और छोटे मैं रूपल हु तेरी बड़ी बहन samjha....ye मेरा घर है यतः बस मेरी चलती है कोई बह शैतानी नहीं karna....agar....aaaahhh मम्मी छोड़ो यार आप bhi....main तो bas....aaaahhh

बड़ी लेडी जो थी उन्होंने रूपल के कान पकड़ लिट्ये और जोर से मदद दिया...

बड़ी लेडी - तेरा राज चलता है yaha....badi aayi....tang करने की सोचना भी मत समझी naa...warna तुझे घर से....

रूपल - अरे मैं तो बस ऐसे hi...main क्यूँ भला इतने प्यारे भाई को परेशां karungi....hai ना भाई...

अब तक बहार से भी सभी अंदर आगये थे....

बुआ - हम्म तो मिल लुइये सभी se....(haste हुए) वो मैंने सोचा तेरा वेलकम कुछ अलग तरीके से किया jaaye....to मैंने और रूपल ने प्लान बनाया ये....

मैंने बुआ की ओर एक बार dekha....aur खुद बा खुद hi मेरे आँखों से आशु निकल hgaye....sayad एक परिवार के होने की खुसी के वजह se....inn लोगो ने मेरे लिए ये सब kiya...haa जो भी था पर मेरे liye...ye ज्यादा इम्पोर्टेन्ट है....

मेरे आँखों में आशु dekh...sabse नजदीक मेरी वो चची थी वपमीरे Chachi....wo मेरे पास आयी निचे बैठी और मेरे आशु पोछने लगी ...

चची - अरे बीटा ये सब यतो बस एक मजाक tha...maine मन्ना भी किया था इन् लोगो से par....Dekha ये रोंनने लगा... रूपल तुझे मैं नहीं छोडूंगी आज....

मैं कुछ बोल hi रहता की तभी दादी भी आ गयिओ aur...nicche बैठ गईमेरे पास.....

दादी - बीटा रट नहीं hai....ye बस एक मजाक था इन् लोगो ka...aur अब हमारी बारी होगी मज़ाक ki....tu मैं और तेरी ये चची अब देख बस tu.....(sabko) आज से किचन बंद किसी को कोई खाना नहीं मिलेगा...

ये सुनते hi वह खड़े सभी की आँखें बड़ी हो gayi....aur वो सब मेरी ओर देखने लगे.....

मैं - नहीं ऐसा मत kariye....ye आँशु तो बस किसी अपने के पास होने के वजह से आ gaye...isme उस मजाक का कोई हाथ नहीं hai...main आज तक बस अपने मास्टर के साथ रहा hu....waha सब कुछ टाइम तो टाइम होता tha...no मैक no masti...aur यहाँ सबको साथ dekh...aap लोगो के पास आके सच में बहुत अच्छा लग रहा है मुझे.....

मेरी बातें सुन के वह भी सबके आँखों में आशु आ गए...

दादी - तू भी हमारे साथ hi रहता बीटा अगर वो सब ना हुआ होता to....kaas...

अभी दादी बोल hi रही थी के दादा जीने उनके कंधे पे हाथ रखा और वो बस रोने lagi....sab रूए जारहे the....wo तो भला हो रुपालडीडी का जिन्होंने एक बार वापस खाने के बारे में बात चेदि और सबका ध्यान रोने से हटाया...

रूपल - वो दादी अब तो ये छोटू भी बोल रहा है की मजाक से नहीं रोया ये तो अब किचेन खोल do....dekho तो वक़्त कितना हो रहा hai....iske साथ नास्ता करेंगे बोलबॉलके अभी तक नास्ता नहीं diya....mera छोटू भी भूखा hoga...kuch तो रहें करो....

चची - रुक तुझे बताती हु nautanki..aur चची उसके पीछे जाने को hui....sabke चेहरों पे वापस से मुस्कान आ गयी...

फिर क्या मुझे वह से दिंनिंग टेबल पे बिठा दिया गया aur...baaki सब भी बैठ गए aur...Chachi और दादी किचेन से खाना लाने चली गयी....

रूपल - ुये छोटू यार तेरा नाम क्या है wo...Bua ने बताया hi नहीं हमें....

उसकी बात सुनके मैंने एक बार बुआ की ओर देखा जो पानी पि रझिओ थी और मुझे अपने ओर ऐसे देखते हुए.... पाया तो पानी उनके गले में विंड पाइप में चली गयी थोड़ी si....wo थोड़ी देर खासी और फिर खुद को सँभालते हुए बोली...

बुआ - अरे वो मैं बताने hi वाली थी पर वो प्लान का chakar....Waise इसका नाम प्रतीक है...

रूपल -= हम्म Prateek...accha नाम है पर मैं इसको छोटू hi bulaungi...akhir छोटा भाई है मेरा....

मैं - हां ठीक hai.....wais ेमें भी आपमें से किसी का नाम नहीं jaanta...Bua ने बताया hi नहीं मुझे.....

दादा जी - नाम वाम सब जान jaaoge....abhi नास्ता karo...fir हम अपने फॅमिली ट्री के पास चलते है वह तुम्हे अपना नाम और निशानी देनी hai...wahi से देख लेना हम ों hai...theek है...

मैं - हां ठीक है दादाजी...

चाचा - तो तुम भी स्पेशल बैच में हो....

मैं - जी...

चाचा - रूपल भी थी उसी mein....abhi पिछले साल hi स्कूल से पास आउट हुई है अब यहाँ इंसानो के बिच कुछ दिन वक़्त बिताएगी fir...hamare फॅमिली बसिनेस्स में लग जायेगी.....

मैं - फॅमिली बिज़नेस..????

बुआ - हां फॅमिली business.....ooffo भैया अभी ये सब बोलना जरुरी था क्या....

चाचा - हां क्यूंकि इसको भी पता होना चाहिए....

दादा - हां होना chahiye..par अभी कुछ वक़्त आराम करने देते है फर बता denge......ye नास्ता क्यों नहीं आ रहा hai....Rupal बीटा जरा देखो तो.....

अभी रूपल दीदी उठती उससे पहले hi चची हाथोमें प्लेट लिए हुए आ रही thi....saath में दादी bhi....aur खाना आ गया टेबल पे....

रूपल - wow....itna कुछ बना दिया आज...

चची - और नहीं तो क्या आज प्रतीक जो आया hai..welcome स्पेशल होना hi tha...beta चलो शुरू करो...

मैं समझ नहीं पा रहा था कह ऐसे शुरू karu...kyya कुछ नहीं था वह pe....sabjiya...meat...sabkuch....juices....Fir सभी ने शुरू किया तो मैंने भी खाना शुरू kiya...kya खनथा ye...badahi अज़ीज़ खाना tha...kya hi बोलू इसके बारे में.....

खाना कहते वक़्त सब के सब बिलकुल चुप थे और कल्हण खा रहे the...thode देर में सबका खाना ख़तम ह गया...

चची - कैसा था खाना...

मैं - बहुत अच्छा था....

बुआ - हम्म वो तो होगा hi.....accha वो chodo....ab जोथोड़ी देर आराम karlo...fir हम सब बहार चलेंगे अपने फॅमिली ट्री के pass...aaj वह पे एक नया नाम जोड़ना है...

दादा जी - हां बिल्कुलसाहि kaha....chao बीटा तुम आराम karo.....main आता हु वह तैयारी करके....

चाचा - में भी चलता हु papa.....Rupal जब कॉल करू तो ले आना सबको samjhi...chalo अब अपने भाई को कमरा दिखाओ उसका....

रूपल - Haa....chal छोटू तेरे को तेरा कमरा दिखत्ती hu....waha कुछ बातें भी हो jaayegi.....(last में बोलते वक़्त उनके चेहरे पे एक डरावनी मुस्कान आ गयी थी....)

चची - प्रतीक गर कुछ भी उल्टा सीधा करे ये तो सीधा मुझे batana.....iski अच्छे से खबर lunhgi...bahut...udhne लगी है आज कल ये....

रूपल - अरे मैं कहा कुछ karungi...main तो बस रूम दिखने के लिए....

वो मुझे खींचते हुए उठायी और मुझे सीढ़ियों से ऊपर ले गयी शिधि चढ़ते hi 4 रूम्स थे वह जो सबसे लास्ट का रूम था वही पे मुझे ले गयी और दरवाजा khola...abhi वेकुछ बोलती की उनका पफोने बजा और उन्होंने चाभी मुझे दी और व्वहा से निच्चे चली गयी...

मैं भी चाबी से दरवाजा खोला और जो dekha....bas मुँह से इतना hi निकला....

मैं - यहाँ भी...

आज के लिए इतना hi रखते है नेक्स्ट अपडेट में फॅमिली ट्री के बारे में और फ़मिलकी का इंट्रो hoga....aur कुछ सीन्स...

अच्चानक से mujhe...bahar जाना पड़ा तो लापतिआप है nahi...update सायद छोटे होंगे abhi...par aayenge...kuch दन की बात है....

बनने रहिएगा....
 
अपडेट - 16

अब तक

मैं अपनी फॅमिली से milla....sab बहुत hi अच्छे the...haa पहले मज़ाक में ये लोग मुझे परेशां करने वाले थे पर ये सब मुझे अच्छा लग रहा tha...humne साथ में खाना खाया और फिर कुछ देर बातें भी ki.....baad में ददा जी ने शाम को मुझे फॅमिली ट्री के पास ले जाने को kaha....Rupal दीदी नेमुझे मेरा रूम दिखाया और आराम करने को कहा....

अब आगे..

रूम का दरवाजा खुल तो मैं शॉकेड tha....ye रूम भी बिलकुल मेरे वाले रूम की hi तरह tha...sab कुछ वैसा hi.....aakhir है क्या इन् सब mein....main जहा भी जाता हु वह ठीक ऐसा hi रूम मिलता है mujhe....bachpan से hi ऐसा hi room....ghar भी बदला था मास्टर ने वह भी शामे रूम फिर स्कूल वह भी शामे room....uske बाद यहाँ आया तो यहाँ भी....

मैं रूम के अंदर gaya....pahle एक बार सबकुछ sdekha...sab वैसा hi tha....fir चुप चाप जाके बीएड पे लेट gaya....aur चाट की ओर देखने laga....sochne लगा रूम के बारे में par....neend आ गयी मुझे....

पता नहीं कितने देर बाद चची ने आवाज दी तब जाके मैं utha.....aur फिर बाथरूम में जाके हाथ मुँह doye....kapde चेंज kiye...jo बुआ ने hi सायद यहाँ रखे ho...aur फिर रूम से निकल gaya....nicche चला गया....

निच्चे गया तो चची, दीदी और बुआ hi थे वह...

बुआ - रेडी हो गया चल अब....

मैं - हां चलो...

मैंने इतना बोलै hi tha...ki रूपल दीदी को बुआ ने इशारा किया कुछ और उन्होंने मेरे ऊपर एक कम्बल दाल दिया....

मैं - ये क्यों hai...iska क्या करना है....

बुआ - ये तुम्हे और तुम्हारी स्मेल को chupayegi.....jaha हम जा रहे है वह सायद लोग तुम्हारे आने से खुश ना ho....par चिंता मत करना हम होंगे waha....agar कुछ हुआ तो हम देख lenge.......tum शांत रहना बस....

मैं - पर मैंने क्या किया है जो ये सब.....

बुआ - तुमने नहीं किया है पर पार्थ और नीलम उन् दोनों ने किया hai....ab [पता नहीं तब उन् के दिम्माग में क्या था जो उसके साथ मिलके ये सब....

चची - पूनम बाद में इसके बारे में बात करते hai...Prateek बीटा चलो आप....

सवाल थे मेरे मैं में पर जवाब एक भी nahi.....Mera माँ डैड ने भला ऐसा क्या किया की unhe....unko तो किसी ने मार दिया tha....aur मास्टर मुझे इस काबिल बना रही थी की मैं उसका सामना कर सक्कु....

मैं - माँ डैड ने क्या किया था aisa....ki लोग उन्हें....

चची - बीटा कहा ना बाद में बात करेंगे ispe....abhi के लिए chalo....sunno हम ट्रएंगले की तरह jaayenge....ye बीच में रहेगा समझे....

सब ने हां kaha....par तभी रूपल दीदी को कुछ याद आया वो जल्दी से रूम में gayi....sheediyan चढ़ के और वह सेकोई परफ्यूम ले aayi....ye एक लेडी परफ्यूम tha...aur मेरे ऊपर से पहले कम्बल को खिंचा और लगभग मुझे परफ्यूम से नाहा दिया usne....Main चिक्के जा रहा था....

रूपल - अब सही hai...ab अगर किसी ने इसके शरीर की खुसबू किसी तक नहीं पहुंच पाएगी.....

मैं - aaaaachhhiii.....ye क्या ....aaaccchhhiii...kiya....

बुआ - हां बिलकुल सही किया ....

अभी हममे से कोई और कुछ बोलयता की दीदी का फ़ोन बजा...

दीदी - हां पापा

चाचू........

दीदी - जी बिलकुल हम तैयारहै.....

चाचा....................

मैं - नहीं उसकी कोई चिंता ना kare....wo मैंने संभल लिया है...

चाचा....................

दीदी - ठीक है हम बस आ रहे है...

कॉल कट किया दीदी ने aur....tinno एक टैंगले की तरह कड़ी हो गयी.....

चची - Chalo...sab ready....niklo अब....

और हम सारे निकल गए वह se....lagbhag....30 मिनट चलने के baad.....ek बहुत बड़ा मैदान aaya....jaha पे कुछ दुरी दुरी पे बहुत hi बड़े बड़े पेड़ बनने हुए the....kaafi भीड़ थी वह पितरः तरह के जीव थे वह pe.....Main उन्ही सब को देखने लगा.....

रूपल - ोइये चल ना bhai......kya यहाँ वह देखे जा रहा hai...sab बाडमें दिखा दूंगी बता दूंगी अभी के लिए चल और नाम लिख अपना हमारे ट्री पे....

हमारा फॅमिली ट्री उस जगह पे एक कोने में tha...wahi पे दादा, दादी, और चाचा खड़े the.....Main गया वह पछुपते hue....unn सब मने पहले मेरे चारो ओर घेरा बना liya...aur फियर....

दादा जी - प्रतीक ये है हमारा फॅमिली tree....dekh रहे हो ना isko...ab dekho......sabse निच्चे ...नाम hai...wo है हमारे पहले पूर्वजो ka.....pahle हम भी यहाँ पुरे ब्लड में आते the...warewolf वरवोल्फ साथ mein.....fir मेरे दादा को पसंद आयी एक Elf....to वो बन गयी मेरी दादी maaa....aur हमारी फॅमिली बन गयी हाफ blood....wo देख रहे हो ना वह ट्रंक के पास से जो एक टहनी है वो मेरे दादा जी को दिखा रहा hai....wahi वो टहनी jaake...ek दूसरे पेड़ के टहनी से मिली हुई hai...to वो है मेरी दादी maa...samjhe...aur जब हम हाफ ब्लड बनने फिर सबको अपनी पसंद की hi लड़की या लड़का चाहिए tha....to इसी dauran....mere एक chacha....Jaiveer ने एक इंसान से शादी कर li....ye देख रहे ho...ye वाली tahni....ye उनको dikharahahai....aur यही टहनी फिर जमीन पे लगी हुई hai....ek घास se....unke कोई बच्चे नहीं hue....parinsano के साथ रह के वो बहुत hi ज्यादा बदल gaye....unhone उन् नसानो के बिच hi अपना एक बिज़नेस khola....Hotels का business....Veer ग्रुप ऑफ़ hotels...jaante hi होंगे tum....insano की दुनिया में उसका एक अलग hi रुतबा hai....to वही hotel...mujhe मिल गयी और अब उसको तम्हारे चाचा चला रहे hai....aur उनके baad....tumhe और रूपल को hi देखना है usko....ye थी हमारे बिज़नेस के बारे में baat....ab नाम पे भी आते है वर्ण गड़बड़ हो jaayegi.....Wo देख रहे हो मेरे चाचा जयवीर के ब्रांच के ऊपर एक और टहनी hai....haa वही वो मेरे पिता जी का hai....aur उनकी शादी एक वरवोल्फ से hi hui....unki पसंद thi.....aur मैं जब पैदा हुआ तो मैं bana....warewolf....par...with एक्स्ट्रा powers....Ab ये dekho.....meri टहनी क्या नाम hai....Hemant Veer....ye नाम इसलिए क्यूंकि इंसानो की दुनिया में ऐसे hi नाम चलते hjai....ab इसको dekjho....meri जो टहनी है वो जकाके मिली है एक और पेड़ के एक छोटे से टहनी se....jo तुम्हारी दादी का hai....Madhuri....Ye एक फेयरी hai....fir आते है hum...apne अपने टहनियों pe...yaani मेरे बच्च pe...to पहली टहनी तुम्हारे बड़े chacha....Satya वीर नाम है inka....aur इनकी टहनी dekho...wo जाके मिली है दूसरे पेड़ की टहनी se...yaani तुम्हारी चची se....naam है unka.....Nidhi Veer....ab देखिओ इन् दोनों की टहनियां मिलने के बाद एक टहनी वह से निकली hai...wo है Rupal....chalo अब वापस से मेरे टहनी को dekho....waha एक hai...tumhari bua...Poonam और दूसरी है तुम्हे डैड यानी मेरे बेटे पार्थ ki.....Poonam की शादी नहीं हुई है तो इसकी टहनी ऐसे hi hai....tumhare डैड की टहनी को देखो वो आगे जा रही hai...aur जमीन पे एक छोटे से झाडी से निकली हुई टहनी सी मिल रही hai.....Ye jhadiyan....unki है jinhone..insano से शादी की hai....jaise मेरे chacha...jai वीर का भी देख lo...tahni नई जमीन पे गयी hai...par उनका कोई बच्चा नहीं हुआ तो ये ैउसे hi रह gaya...wahi तुम्हारी माँ एक माइनॉरिटी थुइ तो वो स झड़ी से दिखाई जा रही hai....aur tum...in दोनों के bacche....Prateek....Ye टहनी तुम्हारी hai...samjhe....ab चलो इसको chuo...aur अपना नाम लो....

मैंने दादा जी को पूरा सुन्ना और उनकी हर एक बात samjhi...aur अब मैंने उनके कहे अनुसार अपने नाम की टहनी को पकड़ा और अपना नाम मन में liya.....aisa करने se.......mera फॅमिली ट्री साथ में उससे जो कुछ भी कनेक्ट था वो एक पल को चमकने laga...uski चमक सभी के आँखों में गयी और वो सब हमारे ओर aaye....Dada, दादी और बाकियों का ध्यान उनपे नहीं गया क्यों की वो इस चमक को समझने की कोशिश कर रहे थे....

आदमी - हम्म तो तुम सारे यहाँ आये ho....ab क्या कारनामा करना है यहाँ pe....kahi फिर से कोई तुम्हारे घर का काली शक्तियां तो नहीं सीखने लगा....

दादाजी - जुबान संभल के बात करो...

ा4 - लो भाई sunna....humme जुबान सँभालने कोकाह रहा hai....agar वक़्त रहते अपने उस बेटे को रोक लेता उस डायन से शादी करने से तो तेरा परिवर भी सही रहता और हमारा भी....

उस आदमी ने मेरी माँ को डायन कहा....

बुआ - जुबान संभल के बात karo....sayad भूल गए हो मैं कोण हु और ये मेरी फर्मीली है....

ा2 - हां हां अब बस यही रह गया hai...arre भाइयों मुझे तो लगता है इसने भी अपने भाई के साथ काली विद्याएं सीखी hogi....tabhi तो स्पेशल बैच की टीचर बननी हुई hai...warna पहले कभी सुन्ना था कोई हाफ ब्लड वाला इतना ताकतवर हो....

ये लोहग भी इंसानो की hi तरह hai....har चीज़में dharam,jaat इन्ही मुड़ूँ पे आ जाते hai....koi टैलेंट की कदर नहीं करता....

ा2 का ये बोलना था बुआ को गुस्सा आ गया वो कुछ करती उससे पहले दादी ने उन्हें रोक diya....par लोगो के मुँह बंद नहीं hue....wo बस लगे रहे मेरे घरवालों की बीजाति करने mein...aur इससे मेरा गुस्सा बढ़ता जा रहा tha....uss कम्बल के अन्डरथा mein....gusse से अपनी मुठियाँभेंछ ल्ली मैंने और आँखें बंद ki.....ankhen बंद की तो सामने वही चील दिखाई diya...wo आग के पंखों wala.....wo मुझे देख रहा tha....main उसके पास गया और उसको chua...usko चुने से मुझे दर्द होने लगा और मैं जोर से चिलाय....

और फिर आँखें kholi....jab आँखें kholi...to आसमान में एक बहुत hi bada...chillon का समूह tha...wo उस जगह के चारो तरफ उड़द रहे the....abhi मैंने उन्हें देखा फिर एक आदमी को देखा जो मेरे चची के बारे में बोल रहा tha....mera उसको देखना था की आसमान से वो चील उड़ती हुई aayi...aur वो उस जीव को उठा ले gayi....jeev उस चीकल से बड़ा था भरी tha....sayad hi हील उसको उठता पता पर वेव उठा ले gaya.....Jab लोगो ने ये देखा तो उनकी फात gayi....par कुछ सो कॉल्ड बहादुर भी the/....jinhone तलवारें निकल li...unka कहना था हम सब कला जादू जानते है तो हम सब को hi ख़तम कर de....wo आगे बढ़ रहे थे की tabhi...waha उसी मैदान में एक बहुत hi bada....cheel आया जिसके पंख में आग लगी हुई hi वो बिलकुल उनके सामने आके खड़ा हो gaya...aur जोर से chillaya...uski चीख सुन के hi सभी की फैट gayi....par एक बकवचा था वह पे जिसने अपनी माँ को कहा...

बैक्चा - माँ माँ ये तो वो किताब वाला पंक्ची है. जो अननोन वररियर्स वाले किताब में था....

सबने उस चील को देखा और सबकी आँखें फटती की फटती रह gayi....Wo चील हमारे फॅमिलीट ट्री के पास आया और उसपे अपनी चोंच टच karayti...uske baad...fir से हमारी फॅमिली ट्री चमकने lagi....wo पूरी हरी भरी हो gayi....saath hi उसपे एक चील का निशान बन gaya.....baat साफ़ थी मेरी पूरी फॅमिली उस चील की सुरक्षा मेजन आ गयी thi...aur जब ये हुआ तो सब के सब बस हममे देखते हुए निकल लिए वह se....kisi में हिम्मत hi नहीं था उसस्कील से लड़ने ki....himmat हो भी तो ज्यादा फायदा नहीं उसका साइज देख के ऐसा लग रहा था वो एक बार में की 2 -3 को निपटा लेता hoga......jab सब चले gaye...to वो चील भी वह से उड़द के निकल gaya...aur छोड़ गया हम सब को सस्पेंस में....

वो तो हम सारे सोंच से बहार तब निचले जब एक चील ने उसी आदमी को ठीक हमारे सामे कुछ उचाई से giiraya...wo चिल्लाते हुए गिर्रा अय्यर फिर उठा कर हम सब के पेअर पकड़ने लगा माफ़ कर दो माफ़ कर do....humme समझ नहीं आ रहा tha....Wo तो रूपल दीदी ने कहा माफ़ किया तब जाके वो फुर्र से छु मंतर हो gaya.,...aur हम सब भी घर की ओर निकल पड़े...

घर में पहुंच के...

सब सोफे पे बैठ gaye...sabke दिम्माग मं बस वही सब चल रहा था....

दादा जी - वो सब क्या था और हमारे फॅमिली को....

बुआ - पता नहीं पापा पर वो सच में वही tha...uss कहानियों के किताब में जो चील है वही और वो यहाँ हमारे लिए आया....

दादाजी - हां पर kyun...aur ये कोई आम पंछी तो है नहीं की हमारे लिए aaye....hamari एनिमल स्पिरिट उसके सामने kuch.....animal स्प्रिरित कही वो एनिमल स्पिरिट तो नहीं थी किसी की....

बुआ - क्या पापा ऐसा hona...naamumkin है....

दादी - नहीं मुझे नहीं lagta...aisa पहले भी देखा गया hai...kuch एनिमल स्पिरिट्स होते है ऐसे...

बुआ - नहीं माँ ऐसा नहीं hai..aur ये एनिमल स्पिरिट हो hi नहीं सकता ये कुछ और hai...app कजहिनता मत करिये मैं पता लगा लुंगी....

हम सब बातें कर रहे थे की रूबल दीदी बोली....

रूबल दीदी - हमारे फॅमिली का अब वो रक्षक hai,....wo हमारी फॅमिली का रक्षक है यानी मेरा bhi....(hilla कर) वाआहहह अब आएगा mazza.....Maa मैं जारही hu..aati हु थोड़ी देर में....

\

चची - कहा जा रही है ऐसे hi......wo बझी इस waqt...tu कही नहीं जायेगी समझी....

रूबल इ मेरी ओर देखा और एक स्माइल दी....

रूबल - वो माँ मैंने ना अपने छोटू को कुछ गिफ्ट्स देने है तो यही पास वाले दक्कन तक जाउंगी main...waha से कुछ जादुई चीजजें bas....Chaloge ना छोटू तुम....

मैं - मैं....

रूबल - अरे चल न इसी बहाने यहाँ के बारे में और जान भी jaayega...aur अब तो डरने की बात hi नहीं...

बुआ - हां ले जाओ इसको पर िउस्को अपना दोस्त बताना बभी बहार भाई नहीं समझी....

रूबल - हम्म्म ठीक है Bu....main समझ गयी आप क्या कह रही ho....chalo Ok हम चलते है....

मुझसे बिना हां ना सुनने hi मेरा हाथ पकड़ा और खींचते हुए बहार.....

हम बहार आये और घर से थोड़ी दूर aaye.....main चल रहा था दीदी रुक gauyyi...maine उनक देखा पीछे मुद ke...wo रुक्की हुई थी और एक और देखे जा रही थी....

मैं - क्या बात है दीदी क्या हैव वह.....

दीदी - वो मेरे नानाजी का घर tha....wo वही रहा करते the....Mom नाना nani....tinno......jab माँ की शादी हुई ना डैड se...to..Mom बताती है उसके बाद इस घर में कोई जावा नहीं बचा tha....aur मौका देख ker.....wo सामने वाला घर है ना वह के मालिक ने नाना नानी का घर हड़प liya....Nana नानी की आगे ज्यादा thi...to कुछ कर ना paaaye....Mom डैड ने कोशिश की यतो उन्हें भी झूठा kjaha.....aaj नाना - नानी को बंद करके रखा है उस घर mein....gulam की तरह रखते है वह unhe....main उन्हें hi छुड़ाने आयी hu....aaj इस आदमी से पूरा हिसाब चुकता करुन्गिओ....

अभी मैं कुछ बोलता उससे पहले hi दीदी ने रोड पे से एक पाथेर उठाया और उसको उस आदमी के घर की ओर फेँक्ज दिया....

आज का यही tak....kal एक ladayi.....fir प्रतीक का वापस स्कूल जान hoga....aur स्लेयर की वापस से एक झलक....

बनने रहिये...
 
जादू का काम ना करना :हम्म: ये एक सवाल hai....aur जवाब है naushikhiyapan....ab जहा पे समझ नहीं आता वह काहे को ऊँगली karna...aur खास कर के उन् जगहों पे जहा मौत का खतरा ho...pure ब्लड वालो ने ये सोचा नहीं था कुछ ऐसा hoga...upar से स्लेयर को सुनना बड़ी गलती thi..wo अपने अंदर बहुत सी पावर्स रखता है और ऐसे लोगो को :सिघ: समझ रहे ना इसी में गए वो sab...aur गुलाम बनना वो तो उसी जादू का इफ़ेक्ट tha...you मिस ी हिट वाला sidhant..bas इसी में गुलाम बन गए सारे
 
:शॉकेड:

वो लोग उनको ट्रेनिंग देने आते the....unko नहीं बस स्लेयर को ये कहना सही hoga...par चुक्की उन् आत्मायों के चाकर में तिण्णो hi एक दूसरे से जुड़ से गए थे तो तिण्णो को hi ट्रेनिंग मिलती thi...aur ये ट्रेनिंग इनको सोफ़िया के किसी खास के द्वारा दी जाती thi...jo आगे के अपडेट में है....

नीलम पार्थ का चले जाना इसमें भी कुछ बात थी कुछ सामने आयी कुछ बाकी है....

इलज़ाम वो भी आएंगे saamne...IP को क्यों निकला गया सब पता चलेगा...

हां हीरो प्रतीक है स्टोरी ka...aur उसके बारे में आगे पता चलेगा
 
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