बदन की ज्वाला 1 - SexBaba
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बदन की ज्वाला 1

seema.singh2003

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Nov 20, 2022
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अध्याय 1 नया शहर, नई शुरुआत


खण्ड 1


पल्लवी एक बाईस साल की शादीशुदा लड़की थी। उसकी शादी को महज़ चार महीने ही हुए थे। वह और उसका पति एक ही शहर में रहते थे और उनकी शादी अरेंज मैरिज थी। दोनों बहुत छोटे शहर से थे, जहाँ ज़िंदगी धीमी और परिचित थी।


पहले उसके पति दिल्ली में सॉफ्टवेयर कंपनी में फील्ड वर्क किया करते थे। लेकिन कंपनी ने उसके पति राहुल को बेंगलुरु में ट्रांसफर कर दिया था। साथ में रहने के लिए एक 2BHK का फ्लैट भी दे दिया था। सैलरी अच्छी होने के कारण राहुल ने इससे इनकार नहीं किया और अपनी पत्नी को लेकर बेंगलुरु आ गया।


राहुल दिखने में काफ़ी हैंडसम था। और पल्लवी दिखने में किसी अप्सरा से कम नहीं थी। उसके काले लंबे बाल थे जो उसके नितंबों तक आते थे। उसकी आँखें काफ़ी काली थीं, और वही उसका चेहरा गोल था, और रंग तो दूध के अंडे जैसा सफ़ेद था। लेकिन सबसे ज़्यादा आकर्षक चीज़ थी उसका फिगर। पल्लवी का फिगर बेहद कमाल का था। उसके बूब्स 32 साइज़ के थे, उसकी कमर 28 की थी, और उसके चूतड़ 34 साइज़ के थे।


पल्लवी बेंगलुरु पहुँची, तो कंपनी की तरफ़ से उन्हें जो फ्लैट मिला था, वह दसवीं फ्लोर पर फ्लैट था। पहले दिन पल्लवी और राहुल को पूरा घर सजाने में पूरा दिन लग गया। अगले दिन से उनका जीवन चालू हो गया।


राहुल सुबह ही ऑफ़िस के लिए निकल गया, और पल्लवी घर पर अकेली टीवी देख रही थी। पल्लवी और राहुल अपनी ससुराल से कुछ बुनियादी चीज़ें अपने साथ ले आए थे जिससे उन्हें यहाँ रहने में कोई तकलीफ़ न आए।


रात में खाना खाते समय पल्लवी ने राहुल से पूछा। उसने चम्मच को धीरे से प्लेट पर रखा, थोड़ा आगे झुककर और आँखें ऊपर उठाकर राहुल के चेहरे की ओर देखा।
“राहुल… कैसा रहा तुम्हारा आज का ऑफ़िस का दिन?”


राहुल ने मुँह में भरा कौर चबाते-चबाते सिर हिलाया। उसने गिलास उठाकर एक घूँट पानी लिया, फिर पल्लवी की तरफ़ मुस्कुराते हुए कहा,
“आज का मेरा दिन, फील्ड वर्क से तो बेहतर ही है यह नौकरी। मुझे ऑफ़िस में रहकर ही पूरा काम करना है, कहीं बाहर जाने की ज़रूरत नहीं है।”


वह थोड़ा और सीधा होकर बैठा, कंधे पीछे किए और गर्व से बोला,
“मैं तो यहाँ और भी बेहतर तरीके से काम कर सकता हूँ।”


पल्लवी ने भौंहें थोड़ी सिकोड़ लीं। उसने अपनी प्लेट को हल्के हाथों से घुमाया और धीरे से पूछा,
“क्या मतलब है आपका? ज़रा खुलकर बताइए।”


राहुल ने चम्मच नीचे रखा, दोनों हाथ टेबल पर रखकर थोड़ा आगे झुका। उसकी आवाज़ में उत्साह साफ़ था,
“कंपनी में तीन शिफ्ट में काम किया जाता है। मेरा जिस तरह का काम है, मैं हफ़्ते में करीब दो शिफ्ट एक्स्ट्रा लगा सकता हूँ।”


पल्लवी का चेहरा थोड़ा बदल गया। उसने होंठ भींच लिए, आँखें नीची करके प्लेट की तरफ़ देखा, फिर हल्का-सा गुस्सा करते हुए सिर उठाया। उसकी आवाज़ में नाराज़गी और चिन्ता दोनों थीं,
“यदि तुम इतने समय तक ऑफ़िस में रहोगे तो मैं यहाँ घर में बोर होती हूँ। प्लीज़ ऐसा मत करो यार…”


उसने एक हाथ से अपने लंबे बालों को कान के पीछे सरकाया, जैसे अपनी बेचैनी छुपाने की कोशिश कर रही हो।


राहुल ने हल्की मुस्कान के साथ टेबल के आर-पार हाथ बढ़ाया और पल्लवी की उँगलियों को धीरे से छू लिया। उसकी आवाज़ नरम और समझाने वाली थी,
“अरे मेरी जान, बेंगलुरु बहुत बड़ी सिटी है। यहाँ बहुत कुछ है घूमने के लिए। तुम मूवी देखने जा सकती हो, पार्कों में घूम सकती हो, मॉल घूमने जा सकती हो। अगर तुम प्रतिदिन भी यहाँ घूमोगी फिर भी कभी बोर नहीं होगी।”


पल्लवी ने उँगलियाँ धीरे से खींच लीं। उसने सिर थोड़ा झुकाया, बाल उसके गाल पर गिर पड़े। उसकी आवाज़ में शिकायत और थोड़ी-सी बेबसी थी,
“पर यार… मुझे तो यहाँ की भाषा आती ही नहीं है।”


राहुल ने सिर हिलाया, जैसे वह पहले से ही जानता हो। उसने कुर्सी पर थोड़ा पीछे हटकर और नरम स्वर में समझाया,
“मैं जानता हूँ कि यहाँ हिंदी बहुत ही कम लोगों को आती है, ना के बराबर। परंतु तुम्हें ठीक-ठाक इंग्लिश आती है। तुम सब कुछ हैंडल कर लोगी।”


पल्लवी चुपचाप बैठी रही। उसने प्लेट में बचे चावल को चम्मच से धीरे-धीरे घुमाया, फिर बिना आँख मिलाए बोली,
“पर यार… मैं रोज़-रोज़ आए दिन ऐसे घूमूँगी और फिर ख़र्चा भी करूँगी तो तुम पर कुछ ज़्यादा लोड नहीं पड़ जाएगा?”


राहुल ने हँसकर सिर हिलाया। उसने पल्लवी के चेहरे की तरफ़ देखा, आँखों में स्नेह लिए और धीरे से कहा,
“अरे मेरी जान, तुम खुश रहो। मैं इसी बात पर खुश रहता हूँ।”


खाना ख़त्म करने के बाद राहुल बेडरूम में चला गया। उसने कुर्सी धकेली, खड़े होते समय कमर सीधी की और बिना कुछ बोले कमरे की तरफ़ चला गया।


पल्लवी खाने की टेबल से सारे बर्तन उठाकर किचन में ले गई। उसने बर्तनों को साफ़ किया, नल का पानी चलाते हुए हर प्लेट और गिलास को ध्यान से धोया। फिर उसने टेबल को भी साफ़ किया, गीले कपड़े से बार-बार पोंछते हुए जैसे कोई अधूरा काम न छोड़ना चाहती हो।


जब उसका बाहर का पूरा काम हो चुका था तो उसने घड़ी में देखा कि अभी साढ़े दस बज रहे थे। किचन की लाइट बंद करके वह मुख्य दरवाज़े पर गई। वहाँ उसने देखा कि दरवाज़ा सही से लॉक है। हॉल की लाइट भी बंद कर दी और अपने कमरे की तरफ़ चल दी। उसके लंबे बाल पीठ पर लहरों की तरह हिल रहे थे, और घर की ख़ामोशी में उसके हल्के क़दमों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी।
 
अध्याय 1 खण्ड 2

कमरे के अंदर आते ही पल्लवी ने देखा कि राहुल बिस्तर पर बिना किसी कपड़े के पलंग के सहारे पीठ टिकाकर बैठा हुआ है। उसने अपने कुल्हे को हल्का-सा नीचे कर रखा था और अपनी टाँगें फैला रखी थीं। उसकी नज़र टीवी स्क्रीन पर टिकी हुई थी, मानो कमरे में और कुछ मौजूद ही न हो।

और राहुल टीवी देखने में व्यस्त था। पल्लवी और राहुल के लिए यह एक सामान्य हालात थे। शादी के बाद तो राहुल अक्सर उसके पास आता था और उसे किस करके संभोग की शुरुआत करता था। परंतु एक महीने बाद ही जब भी राहुल को पल्लवी के साथ संभोग करना होता है तो वह इसी तरह पलंग पर अवस्था ले लिया करता था। जैसे कोई तयशुदा रस्म हो, जिसमें शब्दों की ज़रूरत ही न पड़े।

पल्लवी ने सबसे पहले अपनी साड़ी उतारी। उसने साड़ी के पल्लू को धीरे से खोलकर कंधे से नीचे सरकाया, फिर कमर के आसपास लिपटी हुई साड़ी को घुमाते हुए पूरी तरह उतार लिया और एक तरफ़ रख दिया। फिर पेटिकोट उतारा। पेटिकोट की डोरी खोलते समय उसकी उँगलियाँ थोड़ी जल्दी में थीं। उसके बाद उसने अपनी ब्रा और पैंटी भी उतार दी। ब्रा के हुक खोलते समय उसकी पीठ थोड़ी सी मुड़ी, और पैंटी नीचे सरकाते समय उसने एक पैर ऊपर उठाया, फिर दूसरा। सारे कपड़े अब फर्श पर एक ढेर की तरह पड़े थे।

पल्लवी यह सब कर रही थी, तब भी राहुल उसकी तरफ़ नहीं देख रहा था। वह तो आराम से टीवी पर मूवी देखने में व्यस्त था, जैसे पल्लवी और उसके बीच पहले से ही समझौता हो चुका हो कि किसको क्या करना है। उसकी साँसें बराबर थीं, आँखें स्क्रीन पर जमी हुईं।

पल्लवी ने अपने सारे कपड़े साइड में रखे और पलंग पर आ गई। बिस्तर के गद्दे पर घुटने टेकते ही वह थोड़ी सी हिली। फिर वह राहुल की फैली हुई टाँगों के बीच में गई। उसने दोनों हाथों से बिस्तर का सहारा लिया और अपना सर नीचे ले जाकर उसके लंड के पास कर दिया। उसकी लंबी काली बालें आगे झुकते ही उसके चेहरे के दोनों तरफ़ लटक गईं।

राहुल का लंड अभी पूरी तरह से मुरझाया हुआ था। पल्लवी ने पहले उसे हल्का-सा हाथ से उठाया। उसकी उँगलियाँ गर्म थीं। फिर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। होंठों से धीरे-धीरे घेरते हुए, जीभ से नीचे की तरफ़ हल्के दबाव के साथ।

जैसे ही पल्लवी ने राहुल का लंड चूसना शुरू किया, राहुल के बदन में भी गर्मी होने लगी। उसका लंड धीरे-धीरे बड़ा और मोटा होने लगा। नसें उभरने लगीं। और कुछ ही देर में राहुल का साढ़े चार इंच का लंड पूरी तरह से खड़ा हो गया। वह अब कठोर और गर्म था, पल्लवी के मुँह में भरा हुआ।

इसके साथ-साथ राहुल के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं।
“हा… हह्… हह्हह… हहे… हह… हह… हे… हे… ओह… ओह… हहह…”

उसकी आवाज़ टूटी-टूटी थी। इस उत्तेजना में राहुल को काफ़ी मज़ा आ रहा था, जिसके कारण वह अपने दोनों हाथों को पल्लवी के बदन पर फेर रहा था। उसकी हथेलियाँ पल्लवी की पीठ पर फिसल रही थीं, फिर कंधों पर, फिर नीचे उसकी कमर की तरफ़। साथ में उसके बालों में हाथ फिर रहा था। उँगलियाँ बालों में उलझतीं और फिर सर को सहलातीं। कभी-कभी वह पल्लवी के सर को हल्के दबाव से और नीचे दबा देता, जैसे और गहराई चाहता हो।

एक मिनट के बाद राहुल का लंड पूरी तरह से कठोर हो चुका था। वह लगातार अपनी मुँह से बुदबुदा रहा था। उसकी साँसें तेज़ हो रही थीं, छाती ऊपर-नीचे हो रही थी।
“पल्लवी… मेरी जान… बहुत मज़ा आ रहा है… ऐसे ही चूस… मेरी रानी…”

उसकी आवाज़ में मस्ती और थोड़ी सी बेचैनी दोनों थीं। एक हाथ अब पल्लवी के बालों में पूरी तरह उलझा हुआ था, दूसरा उसकी पीठ पर घूम रहा था।

करीब दो मिनट के बाद राहुल का लंड अच्छे से चूसने के बाद पल्लवी ने उसे अपने मुँह से बाहर निकाल दिया। उसने होंठों से आख़िरी बार हल्की सी चाट ली, फिर सिर ऊपर उठाया। वह जानती थी अगर वह इससे ज़्यादा राहुल का लंड चूसेगी, तो वह झड़ जाएगा। उसके गाल थोड़े लाल हो गए थे, साँसें भी तेज़ थीं।

लंड चूसने के बाद पल्लवी घुटनों के बल बैठ गई। उसने अपने मुँह से बहुत सारा थूक अपने हाथ पर रखा। थूक उसकी हथेली पर चमक रहा था। फिर अपने हाथ को अपनी चूत पर रखकर उसे अच्छी तरह से फेर दिया। उँगलियाँ धीरे-धीरे फिसलतीं, गीलापन फैलातीं। उसकी आँखें थोड़ी सी बंद थीं, होंठ खुले हुए।

और फिर अपनी नितंब राहुल की तरफ़ करके डॉगी पोज़िशन में आ गई। उसने दोनों हाथों से बिस्तर का सहारा लिया, कमर को थोड़ा नीचे झुकाया और नितंबों को ऊपर की तरफ़ उठाया। उसकी लंबी बालें अब पीठ पर बिखर गई थीं।

पल्लवी ने यह सब इसलिए किया था क्योंकि राहुल को इसी पोज़िशन में उसके साथ संभोग करना पसंद आता था। वह चुपचाप इंतज़ार कर रही थी, साँसें थोड़ी तेज़।

राहुल सबसे पहले अपने स्थान से हटा। उसने टीवी की तरफ़ से ध्यान हटाया, बिस्तर पर घुटनों के बल आगे बढ़ा और पल्लवी की दोनों टाँगों को फैला दिया। उसकी हथेलियाँ पल्लवी की जाँघों के अंदरूनी हिस्से पर थीं। उसने उसे चुदाई की सही पोज़िशन में ले आया। पल्लवी की कमर और भी नीचे झुक गई।

फिर उसने अपने हाथ से अपने लंड के सुपारे को पल्लवी की चूत के ऊपर रख दिया। गर्म सिरा गीली जगह पर टिका। और फिर अपने दोनों हाथों से पल्लवी की कमर को दोनों तरफ़ से कसकर पकड़ लिया। उँगलियाँ उसकी नरम कमर में धँस गईं।

और एक धक्का मारा जिससे उसका लंड एक ही बार में पूरा-का-पूरा पल्लवी की चूत में समा गया। पल्लवी की साँस एक पल के लिए रुक गई। उसके नख बिस्तर की चादर में धँस गए।

फिर उसने पल्लवी की चूत में अपने लंड को अंदर-बाहर करके धक्के मारना शुरू कर दिया। हर धक्के के साथ उसकी कमर आगे-पीछे होती। पल्लवी की नितंबें हिलतीं। पूरे कमरे में थप-थप की आवाज़ होने लगी। त्वचा से त्वचा की टक्कर की आवाज़ साफ़ गूँज रही थी।

ढाई मिनट के बाद राहुल की सिसकारियाँ तेज़ होने लगीं।
“हा… हह्… हह्हह… हहे… हह… मेरी पल्लवी… हह… हे… हे… ओह… ओह… हहह… मेरररी जान… पल्लवी… हा… हह्… हह्हह… हहे… हह… हह… हे… हे… ओह… ओह… हहह…”

उसकी आवाज़ अब और टूटी हुई थी। राहुल के शरीर में अकड़न आने लगी। उसकी जाँघें सख्त हो गईं, पकड़ और मज़बूत। तभी पल्लवी अपने मन में गिनती गिनने लगी—५… ४… ३… २… १… और ज़ीरो।

ज़ीरो सोचते ही पल्लवी ने अपने ऊपर गरम-गरम वीर्य का रस महसूस किया।

दरअसल जैसे ही राहुल का शरीर अकड़ने लगा, और उसे महसूस हुआ कि वह किसी भी पल झड़ जाएगा, तो पल्लवी ने जब दो सोचा था, इस समय राहुल ने अपना सीधा हाथ पल्लवी की कमर से हटा दिया। उसने अपनी कमर को बाहर खींचते हुए अपना पूरा लंड पल्लवी की चूत से बाहर निकाल लिया। और अपने हाथ से अपने लंड को पकड़ लिया। जैसे ही उधर पल्लवी ने ज़ीरो सोचा, इस समय राहुल ने अपने लंड से अपने वीर्य को पल्लवी के नितंबों पर गिरा दिया। गर्म बूँदें उसकी त्वचा पर गिरतीं, फैलतीं।

वीर्य निकालने के बाद राहुल पीछे हट गया। वह बिस्तर पर बैठ गया, कमर झुकाए हुए, और लंबी-लंबी साँसें लेने लगा। उसकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। पसीने की एक पतली लकीर उसकी कनपटी से नीचे सरक रही थी। कमरे में अब सिर्फ़ दोनों की साँसों की आवाज़ और टीवी की हल्की ध्वनि बाक़ी रह गई थी।
 
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