बससससस.. करो ..(नम्रता एक पहेली) - Page 13 - SexBaba
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बससससस.. करो ..(नम्रता एक पहेली)

उससस खूबसूरत मोहतरमा के पीछे एक पतला सा पर कला आदमी खड़ा था जोह ुसस्स औरत के गांड और छूट को देख आपने बड़ा सा लुंड आपने हटो मैं लिए हिलाये जा रहा था मनो उसका लुंड उफान उफान के ुसस्स छूट मैं अपनी गरमी उतरना चाहा रहा हो

और ये कला आदमी और कोई नहीं वही था जोह नम्रता को पहले दीं और आज देख रहा था जब नम्रता आपने हिल्स ठीक कर रही तब यही लुंड नम्रता को देख खड़ा हो गया था पर अभी ुसस्स लुंड के सामने एक नंगी छूट थी

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उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ वोह आदमी तोह अधेड़ उम्र का था पर उसका लुंड एकदम कड़क और 9 इंच का था जिसको देख किसी भी औरत के मन में दर बस जाए वोह आदमी आपने काळा लुंड को आपने हटो से मसल रहा था और आपने लुंड को ुसस्स औरत के छूट की और बढ़ा देता हैंण्ण्न.....

यहाँ नम्रता अभी भी दिवार को कण लगाए कड़ी थी उससे अब्ब दर लगने लगा था पर अंदर से आ रही धमी आवाजे अब्ब बढ़ने लगी थी ....

आदमी :- अह्ह्ह तैयार हो न...

औरत :- अह्ह्ह है ... पर

आदमी :- पर क्या

औरत :- घर भी जाना हैं मुझे तोह चलना आना चाहिए

आदमी :- चिंता मत करो ..

औरत :- अहह है

ये आवाजे नम्रता को सर सर सुनाई दे रही थी और नम्रता का दिमाग पूरा घूम चूका था आखिर क्या हो रहा था अनादर

यहाँ अनादर वोह आवर्त अपनी साड़ी पकड़ के आपने छूट के छेद को आपने पेअर ऊपर रख फैलते हैं और वोह आदमी आपने लुंड को उसके छूट पे सेट कर देता हैंन...

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उफ्फफ्फ्फ़ उस आदमी के लुंड की गरमी पूरी तरह से ुसस्स औरत के छूट पे महसूस होती hainnn....aur तभी वोह आवर्त आपने पूरा चेहरा ऊपर कर एक जोर की सिसकारी भर्ती हैंन..

Aaah....ahhh हम .....दोस्तों वोह औरत और कोई नहीं

बल्कि नम्रता की फवौरीते टीचर मिस किंजल रॉय थी ....

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जी haaaa.....miss किंजल हे थी वोह आवर्त जोह अपनी सुन्दर से साड़ी उठा के ुसस्स आदमी के आगे अपनी नंगी छूट को खुल्ला फैला कर उस आदमी के लुंड की गरमी आपने अबदार ले रही थी ....

उफ्फ्फफ्फ्फ़ आखिर एक जवान 26 साल की टीचर एक अधेड़ उम्र के आदमी का लुंड आपने छूट पर टिका के क्यू कड़ी थी....

किंजल :- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ोुछहहहहहह

और तभी ुसस्स हैवान का लुंड किंजल के छूट के अंदर एंटर करता hainnnn....aur किंजल के छूट से अह्ह्ह्ह मनो गरमी बहार निकल जाती हैंण्ण्न...

आअदमी :- अह्ह्ह्ह मेरी jaan...ahhhhh madarchod...ahh

ये शब्द सुन्नन दिवार को कण लगायी नम्रता और शॉक हो जाती hainn...usne पहली बार ये गली सुनी थी वोह भी इस अग्रेशन से उसको कुछ अंदाजा नहीं था की अंदर क्या चल रहा हैंन....

यहाँ किनजल की कासी हुवी छूट में वोह लुंड आसानी से अंदर घुस जाता हैंण्ण्न.....

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किंजल :- अह्ह्ह्हह ोुछहहहह फुककक अह्ह्ह

आदमी :- अह्ह्ह्ह अब तोह नशा से हो गई हैं तेरी ये आवाज अह्ह्ह और ये जवानी अह्ह्ह

किंजल :- अह्ह्ह हम्म्म ोुछहहहह

किंजल मिस दर्द से तड़प रही थी और लुंड का दर्द साफ उसके चेहरे पे दिख रहा था ....

नम्रता को अंदर से आने वाली औरत की आवाज अब्ब कुछ जनि पहचानी लग रही थी पर वोह आवाज पहचान ने में वोह नाकामयाब हो जाती हैंण्ण्न....

अब्ब्ब नम्रता को अंदर से बोहत जोर से ...

Thappppppppppp थप्प्प्पप्प थप्प्प्पप्प

की आवाजे आने लगती hainnnn....joh काफी जोर की थी और तभी एक जोर की आवाज आती हैंन..

मिस किंजल :- ahhhhhhhhhh fuckjkkkkkkkkkk ुह्ह्हह्ह्ह्ह

आदमी :- अह्हह्ह्ह्ह इतने में जान जान nikal.gayi तेरी अह्ह्ह्ह ले साली अह्ह्ह्हह मादरचोद अह्ह्ह्हह अह्हह्ह्ह्ह ले ले मेरा ये लुंड अह्ह्ह्हह्हह साली अह्हह्ह्ह्ह

किंजल :- अह्ह्ह्हह कहा का ग़ुस्सा अह्ह्ह्हह निकल रहे हो आप अह्ह्ह्ह ोुछहहहह अह्ह्ह्हह

आदमी :- अह्ह्ह्ह चुप बैठ अह्ह्ह ोुछहहहह बहनचोद अह्ह्ह्हह मेरे लुंड को शांत कर अह्हह्ह्ह्ह

ये आवाज नम्रता को साफ सुनाई दे रही थी पर उसके चेहरे पैन कोई भाव नहीं था क्यू की उसको कुछ शब् के मीनिंग हे पता नहीं थे

15 मिनट्स हो चुके थे और अभी भी जोरदार ठुकाई का आवाज ुसस्स बाथरूम मैं गूंज रहा था ....

मिस किंजल :- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बस्सस अह्हह्ह्ह्ह ुह्ह्ह्हह्ह नहीं अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ोुछहहहह fuckjkkkkkkkkkk

किंजल का इस्सस ठुकाई मैं अब्ब्ब पूरा बदन नंगा हो चूका था ...और ुसस्स आदमी क्र और तोह मनो हवस का बहुत चढ़ गया था बड़ी हे बेहरहमी से वोह किंजल के छूट को थोक रहा था

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किंजल :- अह्ह्ह्हह्हह fuckjkkkkkkkkkk यार अह्ह्ह मर गयी आज मैं अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ोुछहहहहहह

आअदमी :- अह्ह्ह्हह साली मेरा अअअअअ रहा हैंन...

यहाँ नम्रता को अब्ब्ब घुटन और दर सा लगने लगता hainn...voh अपने टॉयलेट का दरवाजा खोल के बाहर निकलने लगती hainnn....aur तभी यहाँ ....

ुसस्स आदमी के लुंड का सारा पानी मिस किंजल के छूट मैं भर जाता hainnnn....aur किंजल ये महसूस कर सिसकारी भरने लगती हैंण्ण्न...

और नम्रता बहार निकलने हे वाली होती हैं की उसको उस औरत की एक बात सुनाई देती हैंन...

मिस किंजल :- अह्ह्हम्म्म सर अह्हह्ह्ह्ह दस सर अह्ह्ह्ह आज अपने मुझे चलने के भी औकात का नहीं छोड़ा अह्ह्ह

नम्रता को वोह नाम सुनाई देता hain....aur वोह अपने ोठो पे वोह नाम चलते चलते पूत पुटटी हैं

नम्रता :- दस सर ....दस sir....aur नम्रता कॉलेज से निकल जाती हैंण्ण्न.....

ाअगले दिन कॉलेज के पहले हे लेक्चर मैं एक नोटिस आती हैं....

नोटिस :- आअज से 3 वीक्स बाद कॉलेज मैं फ्रेशर पार्टी होने वाली हैं अगर कोई फ्रेशर स्टूडेंट इन् सब मैं इंटरेस्टेड हो तोह जल्द हे रेस्पेक्टिवे टीचर से कांटेक्ट करे इस प्रोग्राम मैं बोहत सरे एक्टिविटीज होंगे

सिंगिंग

डांसिंग

ेट्स ....

डांसिंग का नाम सुनके हे नम्रता के चेहरे पैन ख़ुशी आ जाती हैं उससे बचपन से डांस का शौक था

नोटिस :- डांसिंग के लिए स्टूडेंट प्ल्ज़ डिपार्टमेंट के सीनियर प्रोफेसर मर. नारायण दस सर से कांटेक्ट करे

और वोह नाम सुनके नम्रता वही सुन्नन हो जाती hainn...voh नाम उसने कल हे कही सुना था जोह यद् कर के उसके पाव वही कम्पनी लगते हैं..............

ये नाम नम्रता के जिंदगी मैं बोहत बड़ा तूफान लाने वाला था

:- रोयलकिंगफ़िरे

तो बे कॉन्टिनोएड........

स्टे सेफ ...........
 
नम्रता ….EK….PAHELI :- EPISODE 05

नारायण दस ये नाम इस कॉलेज का बड़ा नाम था बोहत हे एक्सपीरियंस वाले प्रोफेसर एंड ओने ऑफ़ थे फाउंडर एंड ओल्डर मेंबर ऑफ़ थिस कॉलेज जैसे दस सर को ज्ञान का श्राप लगा हो बोहत हे होशियार बूत उतने हे ज़िद्दी हमेशा से हे एजुकेशन के प्रति अच्छी सोच रखने वाला प्रोफेसर स्टूडेंट्स को मदत करने वाला और नई टीचर्स को अच्छे से सपोर्ट करने वाला

ऐसे कुछ ख्याति थी दस सर की कॉलेज मैं ये साल दस सर के कॉलेज कर्रिएर का आखरी साल था 57 आगे के दस सर अभी भी तबियत से मजबूत और इरादों से उतने हे मजबूत थे उसकी मजबूती को मिस किंजल पिछले 1 साल से झेल रही थी इस साल दस सर सिर्फ आराम करना चाहता था इसलिए उसने क्लास टीचर और अपने सब्जेक्ट की रिस्पांसिबिलिटी मिस किंजल पे छोड़ दे

रंग से कला दिखने में कुछ खास नहीं नार्मल से ड्रेसिंग ऐसा दस सर का हुलिया रहता था …..

40 के उम्र में दस सर का उसके वाइफ से डाइवोर्स हो गया लड़का गवर्नमेंट जॉब को हैं इसलिए लड़की वालो ने बड़ी हे सुन्दर और सुशिल लड़की को दस सर के गले में दाल दिया , दस सर को अपने आप पे विश्वास नहीं हुवा की इतनी सुन्दर गोरी और कामुक लड़की उसकी वाइफ हैं बोहत सालो तक दस सर ने अपने वाइफ को बेरहमी से छोड़ा जैसे उसके हैट खजाना लग गया हो पर एक दीं दस सर को पता चला उसके वाइफ का बहार किसी के साथ अफेयर हैं पर वोह कुछ बोलता उससे पहले हे उसके वाइफ ने उसको डाइवोर्स का नोटिस दे दिया और कहा

" बोहत हो गया तुम्हारा जुलुम , मैं कोई खिलौना नहीं हु , कभी प्यार करना सीखा हैं या नहीं , शकल देखो अपनी बस औरत चाहिए"

दस को ये बात दिल मैं खंजर की तरह घुस गई बाकि सब रियल फैक्ट्स पे ध्यान न देते हुवे दस ने शकल और अपने रंग वाली बात दिल पे लेली और उससे गोरी और सुन्दर लड़कियों से नफरत होने लगी

दस को ऐसा लगता था की िन्न्न गोरी और सुन्दर लड़कियों में एक गुरुर होता हैं एक ऐसा ऐटिटूड रहता हैं जोह सिर्फ उसके जैसा आदमी तोड़ सकता हैं

टीचर होने के बावजूद भी दस को लगता था औरत का काम सिर्फ पति को या मर्द को खुश करना हैं और उसकी सेवा करना उससे खुश करना और उसके ये विचार उससे आज यहाँ लेके आये थे

वाइफ के जाने के बाद दस की जिंदगी रेगिस्तान हो चुकी थी बोहत दीं तक वोह डिप्रेशन मैं था पर धीरे धीरे वोह अपनी जरूरते पुरे करने का रसा ढूंढ़ने लगा कॉलेज मैं होने की वजह से उसकी नजर फीमेल टीचर और स्टूडेंट्स पैन पड़ने लगी और आपने मास्टर मंद दिमाग से वोह एक एक कर के अपना शिकंजा कसता गया वोह ऐसे हे लड़कियों को शिकार बना ता जोह सुन्दर और गोरी हो और उनका घमंड तोड़ने में उससे बोहत मजा आता

उसका कला लुंड वोह उन् गोरी गुलाबी छूट में घुसा देता जोह देख उसके अंदर के शैतान को आराम मिलता जब कोई सुन्दर गोरी औरत उसके लुंड पे उछाल के आपने गुलाबी छूट से आपने पूरा माल

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दस सर के काळा लवडे पे छोड़ती तोह दस को एक मेन्टल शांति मिलती और आपने वाइफ को वोह जी भर के गलिये देता

जब उसने किंजल मिस को पहली बार आपने लुंड का दर्शन दिया था तोह किंजल की छूट वोह देख के हे कम्पनी लगी थी और दर के मरे उसका पसीना निकल गया था पर जब इस राक्षस ने किंजल के मुह्ह में अपना लुंड दिया तोह मनो किंजल मिस पागल से हो गई और कुट्टी की तरह दस के लुंड को चूसने और चाटने लग गई

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इस्सस गोरी मादरचोद औरत का ये रूप देख दस को अपने लुंड के ऊपर घमंड था उस गुलाबी ोठो पर और गोर चेहरे पर अपना कोयले जैसा कला लुंड को देख दस काफी संतुष्ट होता था

ऐसे रंगीन जिंदगी में और अपने लुंड के जोर पे दस ने काफी हुकूमत किए थी और अब अपने इस आखरी साल में दस का लुंड ऐसे छूट ढूंढ रहा था जोह किंजल मिस को भी पीछे छोड़ दे और वोह उस छूट पे हुकूमत करे ................

यहाँ कॉलेज से घर जाते वक्त नम्रता पूरी तरह से सेहमी हुवी थी इस सलग में वोह बोहत अच्छा फील कर रही थी और आज जोह उसने अपने कानो से सुना था उस वजह से वोह थोड़ी सदमे में थी बोहत सरे सवालों ने नम्रता को घेरा हुवा था जैसे की

कोण था उस बाथरूम मैं ?

लेडीज बाथरूम में वोह गेट्स की आवाज क्या कर रही थी ?

और क्या हो रहा था अंदर ?

और वोह लेडीज की आवाज मुझे अपना पण क्यू फील करावा रही थी ?

और सबसे बड़ा सवाल

ये दस सर कोण हैं है यही नाम लिया उस लेडीज ने आखिर चल क्या रहा था वह

इन सब सवालो में घेरा हुवा नम्रता कस मासूम चेहरा देखने लायक था

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नम्रता का मासूम चेरा देख साफ पता चल रहा था की सवाल उसके दिमाग में घर कर के बैठे हो पर तभी उसको यद् अत हैं उस नोटिस के बारे में और वोह उस पर सोचने लगती हैं

उस नोटिस में भी वही नाम था पर क्या पता मैं कुछ ज्यादा सोच रही हु कॉलेज जैसे पवित्र जगह थोड़ी ऐसा कुछ होता हैं

लगता हैं मुझे में कुछ ज्यादा हे बहक गयी हु और मुझे वहां हुवा होगा पर वोह आवाजे वोह तोह एकदम मेरे कानो को सुनाई दे रही थी पर ऐसा मैं सोच रही हु वैसा कुछ नहीं होगा मुझे ये सब ज्यादा सोचना नहीं चाहिए और इसी सोच में दुबे हुवे नम्रता नींद के अघोष में चली जाती हैं.......

सच बताया जय तोह नम्रता को अपने अंदर के बदलाव अब्ब महसूस होने लगे थे वोह अपने आगे से ज्यादा बड़ी लगती थी पर ऐसा कोई उससे बताने या महसूस करने वाला अब तक कोई नहीं था पर अब्ब्ब नम्रता खुद इन सब चीजों को महसूस कर रही थी

आज भी उससे उस बाथरूम मैं दर तोह लग रहा था पर उसके अंदर के रूह मैं वोह आवाज सुनके रोमांच चढ़ रहा था लेकिन दर के आगे वोह रोमांच डाब सा गया था

नेक्स्ट डे ;-

कल के बोहत सरे सवाल और जवाबो के बाद आज नम्रता डीडे कर लेती हैं की वोह जाके उस कोऑर्डिनेटर और हेड दस सर को कांटेक्ट कर के डांस मैं पार्टिसिपेट करेगी चाहे कुछ भी हो जाये नम्रता एक ऐसे लड़की थी की अपने पसंद के चीज को या एक्टिविटी को किसी और रीज़न से सैक्रिफाइस नहीं कर सकती थी चाहे मन मैं कितने भी सवाल क्यू न हो

आअज नम्रता बोहत हे सुन्दर ब्लैक कलर का सुईठे पहन लेती हैं जोह पूरा उसके बॉडी को कवर कर रहा था और चिपक भी उतना हे रहा था नम्रता की खूबसूरती ुसस्स ब्लैक सुईठे मैं कूट कूट का भरी हुवी थी

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नम्रता उसमे मनो किसी जन्नत की पारी लग रही थी ...नम्रता के उभर और बॉडी उस्समे मादक पर उतनी हे संस्कारी लग रही थी

उस सुईठे मैं नम्रता के गांड का part और जंघे बड़े हे मादक लग रही थी और बूब्स का उभर उस कपडे मैं उभर के आया था........

नम्रता सलग मैं पोहच जाती हैंन ..आज वोह सलग के टाइम से एक घंटा जल्द्दी आ गयी थी

वोह जल्द हे स्टाफ रूम के तरफ जाने लगती हैंन..... और वह जेक एक टीचर से पूछती हैं ...

नम्रता :- गुड मॉर्निंग सर ! ये दस सर कहा पैन हैं

टीचर :- दस सर का केबिन 2ंद फ्लोर पैन हैं बीटा

नम्रता :- ok थैंक ु सर !

और नम्रता आपने कदम सीढ़ियों के तरफ बढ़ा देती hain...aur उससे 2ंद फ्लोर पैन दस सर का केबिन दिख जाता हैंन......

वोह दस सर के केबिन के बहार पोहच हे जाती हैं की उससे वह का दरवाज़ा कोई खोल रहा था और एक औरत बहार आती hainnnn....aur वोह औरत और कोई नहीं नम्रता की किंजल मिस थी

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किंजल मिस को देख नम्रता थोड़ी सरप्राइज होती हैं और नम्रता मिस को सीढ़ियों से उतरता देखती हैं मिस आज भी हमेशा की तरह संस्कारी और खूबसूरत दिख रही थी और ऊपर से ब्लैक कलर के टाइट सदी में किंजल मिस के बदन का हर एक part कामुक लग रहा था

नम्रता :- गुड मॉर्निंग मिस्स्स

किंजल :- गुड मॉर्निंग डिअर ! व्हाट र ु दोंग हेरे ?

नम्रता :- एक्चुअली मिस मुझे दस सर से मिलना हे

ये सुनते हे किंजल मिस के थोड़े हाव भाव सरप्राइज हो जाते हैं

किंजल :- उन्होंने बुलाया हैं क्या तुम्हे

नम्रता :- नहीं !

किंजल :- थें ?

नम्रता :- मिस्स्स सलग ने फ्रेशर पार्टी अन्नोउंसेड किए हैं एंड उसमे मुझे पार्टिसिपेट करना हैं कल क्लास मैं नोटिस आयी थी की दस सर से कांटेक्ट करो

किंजल :- ओह्ह्ह्ह इतस ok ! दस सर अंदर हे हैं जाओ बात करलो एंड रेमेम्बेर कुछ गलत मत बोल देना वह थोड़े स्ट्रिक्ट हैं वोह

नम्रता :- ok एंड थैंक यू मिस !

किंजल:- बी थे वे नाम क्या हैं तुम्हारा डिअर

नम्रता :- नम्रता ...!

किंजल :- ok नम्रता सी यू इन लेक्चर !

और किंजल वह से निकल जाती हैं और यहाँ नम्रता केबिन की तरफ बढ़ती हैं

किंजल मिस चलते चलते पीछे मूड के नम्रता को देख सोहति हैं

किंजल मन मैं :-

(खूबसूरत लड़की हैं और होशियार भी लगती हैं हमेशा फर्स्ट बेंच पर रहती हैं बस कही इस्पे उस की नजर न पद जाये )

यहाँ नम्रता साँईं के दूर को धक्का देती हैं और अंदर से जड़ और कड़क आवाज आती हैं

दस :- कोण हैंण्ण्ण्ण्न.....

वोह कड़क आवाज सुन नम्रता थोड़ी दर जाती हैं पर जवाब देती हैं...

नम्रता :- गुड मॉर्निंग सर , ीाम नम्रता

लड़की का कोमल और सुन्दर सावज सुन के दस सर के कण खड़े हो जाते हैं और वोह ऊपर देखते हैं.....

तभी उनकी नजर नम्रता पे गिरती हैं और वोह थोड़े सरप्राइज से हो जाते hainn...aur आँखों मैं चमक से महसूस होती हैं नम्रता को देख उन्हें वोह सब पल याद आते हैं जोह पिछले दो मुलाकातों मैं एक लब्ज के बिना हुवे थे और उसी पाक दस सर नम्रता को अंदर आने को कहते हैंन....

दस सर की नजर नम्रता के नाजुक चल पर थी उसके चल के साथ बज रहे पैरो के पायल नम्रता के चल को और खूबसूरत बना रहे थे

पर नम्रता को अनादर जाते वक्त किंजल मिस की खुसबू आए रही थी मनो किंजल मिस यही हो वोह जब बहार किंजल मिस से मिली थी तब भी यही खुसबू थी उस खुसबू मैं एक कामुक अहसास था जोह नम्रता को महसूस हुवा

नम्रता अब्ब दस सर के सामने कड़ी थी और दस सर नम्रता को आपने हटो से टेबल के सामने वाली खुर्सी पे बैठ ने का िश्रा करते हैंन...

नम्रता ुसस्स खुर्सी की और चल पड़ती हैं तभी दस सर के दिमाग में कुछ ात हैं पर अब्ब कुछ नहीं हो सकता था क्यू की नम्रता उस खुर्सी तक पोहच गयी थी वह पोहचते हे नम्रता को एक अलग से खुसबू आती हैं जिस में किंजल मिस का प्रजेंस था मगर और भी एक स्मेल थी जोह काफी गहरी थी ....

नम्रता ुसस्स खुर्सी पैन देखती हैं उससे कुछ चमक सा दीखता हैं मगर वोह उस्सको नजर अंदाज़ कर उस खुर्सी पे बैठ ने जाती हैंन....

दोस्तों ुसस्स खुर्सी को नम्रता ने तोह नजर अंदाज कर दिया लेकिन ुसस्स खुर्सी पर बड़ी हे कामुक चीज थी और गीली भी

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नम्रता जीसस खुर्सी पर बैठ ने वाली थी वह गधा सा कामुकता भरा रास था जोह स्त्री या मर्द के संतुष्ट होने के बाद आता हैं नम्रता को भी ुसस्स कामुक रास का सुगंध आया था मगर ये कामुक रास उस खुर्सी पर क्या कर रहा था. .....

ओने ऑवर एगो इन केबिन :-

दस अपने टेबल के पीछे बैठा था और उसके

सामने किंजल मिस कड़ी थी

किंजल :- सर प्ल्ज़ आज नहीं कर सकती मैं कुछ कल की वजह से चलना मुश्किल हो गया हैं मेरा आज लेक्चर भी लेने हैं कल मिस हो गए

दस सर :- नाटक मत कर किंजल कुर अपना काम कर पहले मेरी सेवा बाद मैं लेक्चर

किंजल :- सर प्ल्ज़ आज नहीं

दस ग़ुस्से से उससे देखता हैं और किंजल थोड़ा सेहम जाती हैंन......

दस :- कुत्तिया कल तोह बड़े मजे से बाथरूम मैं छुड़वा रही थी और आज क्या हुवा

किंजल :- सर घर में इंगेजमेंट मैं की तैयारी शुरू हो गई हैं अगले हफ्ते इंगेजमेंट हो जाएगी आज मुझे मिलने जाना हैं उनसे

दस :- वहहहह और मेरा क्या ....मैं भी कल से फ्रेशर पार्टी के वर्क मैं बिजी हो जावूंगा तोह आज नाटक मत कर

वोह सुन के हे किंजल के चेहरे पैन मुस्कान आ जाती हैंन...

किंजल :- यह क्या करना हैं सर आअज

दस :- तेरा टाइट वाला छेद चाइये आज बोहत दीं हो गए उसको पेला नहिये

ये सुनकर किंजल कामुक से मुस्कान देती हैं और कहती हैं...

किंजल :- अहह हमेशा की तरह करोगे क्या

दस :- है मेरी रानी .....

और ये सुनते हे किंजल टेबल के सामने वाली खुर्सी की तरफ जाती hainn....aur कुट्टी की तरह उस पर घुटने टिका कर अपनी साड़ी मैं गांड को बहार निकलते हुवे कामुक मुस्कान से दस को आमंत्रण देती हैंण्ण्न....

दस :- बोल कुत्तिया जो हमेशा बोलती हैं...

किंजल :- अह्ह्ह मेरे मालिक आईये अह्ह्ह्ह देखिये मेरी 36 की गांड आपके लिए तड़प रही hainn...ahhh आपके काळा अवजार से मेरे इस तड़पती गांड की प्यास भुजा दीजिये अह्ह्ह्ह देखो अहह कैसे आग मर रही हैंन...

ये सुन कर यहाँ बैठे दस का लावड़ा टाइट होने लगा था.....

यहाँ किंजल आपने साड़ी को अब्ब ऊपर करने लगी और देखते देखते वोह अपनी साड़ी को कमर तक ऊपर कर अपनी गांड को नंगी कर देती हैं..

दस :- अह्ह्ह किंजल कुट्टी पंतय क्यू नहीं पहनी

किंजल :- अह्ह्ह मुझे पता हैं आप छोड़ कर हे रहोगे तोह नंगी हे चली आयी अह्ह्ह्ह

दस के सामने एकदम गोरी गोरी मक्खन जैसे गुलाबी गांड थी जिसका छेद भी गुलाबी था ..दस आपने लुंड को हिलाते हुवे किंजल के पास जाता हैं.. और किंजल के गांड पे जोर से छठा लगता हैं ..

किंजल :- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

और यहाँ समय बर्बाद न करते हुवे अपना बड़ा सा लावड़ा दस किंजल के गांड के छेद पे लगा देता hainn....aur उस तिघ्त छेद मैं कला सा लावड़ा घुसा ने की कोशिश करता हैंण्ण्न..

किंजल :- अह्ह्ह्हह ोुछहहहह इतना भी मत छोड़ना अहह होने वाले पति से मिलने जाना हैंन.

दस :- अह्ह्ह्ह साली अभी तोह तेरा पति मैं हु ..और ऐसे कहते हुवे दस अपना आधा लुंड किंजल के गांड में उतर देता हैंन ..

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दस के लुंड का मोटा टोपा किंजल के गांड को चिरड देता हैं...

किंजल :- अह्हह्ह्ह्ह मर गई अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ोुछहहहह

अह्ह्ह सर धीरे अह्ह्ह्ह ....

दस का कला मोटा लुंड किनजल बोहत बार आपने गांड मैं ले चुकी थी पर हर बार उसके गांड का छेद फैट जाता हर बार किंजल के मुँह से चीख निकलती और हर बार दस आपने ख्वाब को किंजल के गांड और छूट में देखता .......

दस आपने लुंड से किंजल के गांड की ठुकाई करना चालू कर दिया था ...अब्ब्ब उसका पूरा लुंड किंजल के गांड को खुश कर रहा था किंजल यहाँ निचे उस लुंड के गहराई को अपने अंदर समेत रही थी.....

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गांड को पूरा चिरड के लुंड अंदर बहार हो रहा था...

दस किसी शैतान की तरह ुसस्स गुलाबी गांड को आपने लुंड से चुड़ते हुवे देख रहा tha...aur है रहा tha...abb उसके अंदर अलग हे जूनून चढ़ जाता हैंन....

ुसस्स गुलाबी सुनदर और संस्कारी औरत के छेद मैं घुसता हुवा आपने लुंड उससे उसके पास्ट के बारे मैं यद् दिलाता hainnn...aur उसका खून बोहत ज्यादा गरम हो जाता हैंण्ण्न....

दस :- अह्ह्ह्हह्हह मादरचोद अह्ह्ह्हह साली अह्ह्ह्ह छुड़वा अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह साली अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

ऐसा बोलते हुवे दस अपनी पूरी ताकत किंजल के छेद पैन लगा देता हैंन....

और जोर जोर से किंजल के गांड को ठोकने लगता हैंन...

यहाँ किंजल को बोहत दर्द हो रहा था मगर एक साल से छोड़ने के बाद किंजल को दस के सब राज पता थे यहाँ किंजल भी अपनी गांड ऊपर उठा के रोमांच में आ रही थी.....

किंजल :- अह्ह्ह्हह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह फुककक में अह्ह्ह फ़क में दस अह्ह्ह्हह दस अह्ह्ह फ़क में

दस :- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह कुट्टी साली नाम से बुलाती hainnn...randi अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्ह

अब्ब्ब दोनों भी तरफ से गर्मी बढ़ चुकी thi....gaand पेलने का पूरा आवाज केबिन में गूंज रहा था

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किंजल मिस पूरा मजा ले रही थी गांड में लुंड का उसके गांड का दस ने भोसड़ा बना दिया था बिचारि करती भी क्या दस दस जैसे शैतान के हैट उसका जवानी भरा बदन लग चूका था....

थप थप थप थप गांड चुद रही थी....

दस :- अह्ह्ह्हह्हह मादरचोद किंजल रॉय अह्ह्ह्हह छुड़ा अह्ह्ह अह्ह्ह्हह

अब्ब्ब यहाँ से किंजल को पता था की दस को कैसे शांत करना हैंन...

किंजल :- अह्ह्ह्हह्हह काळा अह्ह्ह्हह मुहहह देख अपना अह्ह्ह औकात नहीं तेरी मेरी गुलाबी गांड छोड़ने की अह्ह्ह्ह साला

ये सुन्नन दस का खून गरम हो जाता hainnn...uski पुरे शरीर की आएग लुंड मैं जमा हो जाती hainnn...aur उसी पल किंजल के गांड के अंदर लुंड का वर अंदर तक घुस जाता हैंण्ण्न .... इतना अंदर की किंजल के आँखों से पानी निकल आता हैंन...

किंजल :- अह्ह्ह्हह्हह भगवन अह्ह्ह्हह मर गई अह्ह्ह्हह ोुछहहहह अह्हह्ह्ह्ह

दस :- अह्ह्ह्हह रैंड क्या बोली तू अह्ह्ह फिर से बोल अह्ह्ह बोल

किंजल :- अह्ह्ह्ह काळा सांड अह्ह्ह्ह औकात नहीं तेरी इस्सस जन्नत जैसे गांड को छोड़ने की अह्ह्ह्ह

और यी सुन गरम हुवा दस पागलो की तरह 30 मिनट्स तक गांड को पेलता hainnnn..aur यहाँ किंजल की गांड घड़ा काम रास छोड़ती hainnn....gaand मैं दस का पानी उतर रहा था ....उफ्फ्फ क्या नजारा था....

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किंजल निचे अभी भी आपने जबरदस्त गांड चुदाई का मजा ले रही थी और यहाँ गांड से मलाई बहार आना चालू हो रहा था लेकिन ठुकाई रुकने का नाम नहीं ले रही थी

गांड में यत्र हुवा माल की वजह से गांड से पाछह पाछह पाछह की आवाजे आ रही थी और घमसान चुदाई मैं काम रास की बुँदे पूरी खुर्सी पर उड़द रही थी इस्सस रॉस मिलान की खुसबू पुरे केबिन में फ़ैल चुकी थी....

निचे किंजल किंजल आपने गांड को पकड़ के बास कुछ देर और सहने को कह रही थी...

गुलाबी गोरी गांड को सुहृदता हुवा देख दस को मेन्टल रैल्फ मिल रहा था उसका मकसद वोह रोज पूरा होता देखता और आज भी देख रहा था.....
 
दस :- अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह कुत्तिया अह्ह्ह्हह मादरचोद रांड अह्ह्ह

किंजल :- अह्ह्ह्हह सर अह्हह्ह्ह्ह ुह्ह्हह्ह ोुछहहहह

दस :- अह्ह्ह्हह्हह तेरी गांड की प्यास भुजा रहा हु अह्ह्ह

किंजल :- अह्ह्ह्ह सर भर दो मेरी गोरी गुलाबी गांड को अपने काळा लुंड के मॉल से अहह और में आपके काळा लुंड की हमेशा वफादार रहूंगी अह्ह्ह हमेश उससे खुश रखूंगी अहह आप मेरे चुदाई के मालिक हो अह्ह्ह्ह

ये सब किंजल दस को शांत करने के लिए बोल रही थी उससे इतने दिनों मैं पता चल चूका था दस को क्या चाहिए

ये सब सुन दस का लुंड आपने कण्ट्रोल खो देता हैं और आपने पूरा माल किंजल के जवान गांड मैं उतर देता hainnn....aur दस आपने लुंड निकल देता हैं..

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लुंड को निकलते हे ढेर सारा गधा मॉल खुर्सी और किंजल के साड़ी पैन गिर जाता hainnn...aur किंजल एक लम्बी सिसकारी देती हैंण्ण्न....

अह्ह्ह्हह मर गयी आअज अह्ह्ह अब्ब लेक्चर कैसे लुंगी उफ्फ्फफ्फ्फ़

यहाँ दस आपने लुंड किंजल के साड़ी से पॉच के अपने खुर्सी पर बैठ जाता हैंन....

किंजल वैसे हे आपने साड़ी का पल्लू लेके दस के सामने आपने गांड का छेद साफ करती hainn...aur कड़ी होकर साड़ी को ठीक से पहन लेती हैंन ...

किंजल :- अह्ह्ह्ह सर आज जान निकल दे अपने

दस :- ok किंजल मिस अब्ब आप जा सकती हूँ...

और उसी पल किंजल वह से निकलती हैं और ुसस्स नम्रता दिखती हैंण्ण्ण्ण्न............

.................................................................................................

प्रेजेंट टाइम :-

दस नम्रता के प्रजेंस से थोड़ा सरप्राइज था लेकिन नम्रता के प्रजेंस से उस केबिन में अलग माहौल बनाना चालू हो गया tha....iski शुरवात उस खुर्सी पैन बैठ ने से शुरू हुवी जहा दस देख रहा था नम्रता आपने कामुक बदन लिए आपने पल्लू को थोड़ा आगे कर उस खुर्सी पे बैठ रही हैंन...

नम्रता धीरे से ुसस्स खुर्सी पर अपनी 34 की गांड टिका देती हैं और उसी वक्त खुर्सी पैन मौजूद काम रास का गिला पैन नम्रता के सलवार को छिटक जाता hainnn...aur तभी नम्रता को आपने पीछे कुछ गिला गिला सा महसूस होता हैंन.....

इससे पहले नम्रता को कुछ समाज आये दस सर बोलते हैं...

दस सर :- गुड मॉर्निंग , ी ऍम प्रोफेसर नारायण दस बोलिये क्या मदत कर सकता हु मैं आपकी ........

नम्रता थोड़ा सेहम कर जवाब देती हैं...

नम्रता :- सर ! वोह फ्रेशर पार्टी की नोटिस आयी थी उसमे डांस एंड इतर एक्टिविटीज में पार्टिसिपेट करने के लिए आपसे कांटेक्ट करने बोलै हैं that's य ी ऍम हेरे सर !

दस सर :- ओह्ह्ह ऐसे बात हैं तोह अपने तकलीफ क्यू उठायी आअज मैं और किंजल मम दोनों हर क्लास मैं जा के पूछने हे वाले थे

नम्रता :- ok सर सॉरी िफ़ आपको मेरा यहाँ आना बुरा लगा हो ...

दस सर :- अरे नहीं नहीं बीटा इतस ok आपकी इस क्वालिटी से में इम्प्रेस हु बोहत काम स्टूडेंट्स हैं ऐसे जोह खुद से आगे आते हैंन...

और इस बात पे नम्रता थोड़ी शर्म से हस्ती हैं और थैंक यू कहती हैंन....

दस नम्रता को बोहत अच्छी तरह से देख रहा था उससे नम्रता का ऐटिटूड से बैठना बोहत पसंद आया

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नम्रता के नजरो में एक धार थी जोह कोई भी देख घ्याल हो जाता एक खूबसूरती थी एक तलवार जैसा नुकीला पैन था जोह नम्रता को बोहत खूबसूरत बना रहा था नम्रता का ये ऐटिटूड दस को घायल कर गया

ऊपर से नम्रता उसके काम रास पे बैठी थी ये ख्याल उससे और भी नम्रता के और खींच रहा था

दस सर :- चलो अब्ब आ गए हो तोह आपने इंट्रोडक्शन कलगेंग , हॉबी , एजुकेशन का इम्पोर्टेंस एंड फवौरीते स्पोर्ट के बारे में बताओ

नम्रता इस क़ुएस्तिओन्स से थोड़ी चौक गयी लेकिन उसमे पूरा कॉन्फिडेंस होता था किसी भी सवाल का जवाब देने का और नम्रता चालू हो गई ....

नम्रता :- माय नाम इस नम्रता ..........

दस ने ये क्वेश्चन जान बुझ के किया था क्यू की वोह नम्रता के खूबसूरती को बेझिझक देख सके और निहार पाए

दस की सबसे पहले नजर जाती हैं नम्रता के गोर चेहरे पर जहा थोड़ा पसीना था और तभी नजर जाती हैं सबसे कीमती और खूबसूरत भाग पर और वोह था नम्रता के गुलाबी पर रेड लिपस्टिक से सजे हुवे नशीली ोठो पर .....

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जिससे देख दस के मुह्ह से एक हे शब्द निकलते हैं ..

"उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ क्या नायब लिप्स हैं इस्सस बच्ची के "

नम्रता के लाल ोठो पे किसी का भी दिल उतर जाए और उस लिप्स पैन मूवमेंट की वजह से लगा हुवा नम्रता का थूक और भी मादक बना रहा था ऐसा लग रहा था मनो नम्रता के यह सिर्फ उसका रास पिने के लिए बने हो

और ये मदहोश खूबसूरती को दस बैठे बैठे ताड रहा था ....ुसस्स कुछ समय के लिए ऐसा लगा की अभी जाए और इस खूबसूरत हर के लाल रंग के लिप्स को आपने काळा जबान से चाट ले और उसके नायब रास को आपने मुख में भर ले

पर तभी दस के नजर नम्रता के गर्दन पे जाती हैं जहा कुछ अलग हे माहौल था बहार से आयी हुवी नम्रता अभी भी गर्मी में थी और उसकी गार्डन बड़े हे कामुकता से भरे पसीने से सनी हुवी थी अंदर के एक की ठंडक उस पसीने को ठंडा कर रही थी पर यहाँ उस पसीने से सनी हुवी गर्दन को देख दस के लुंड को गर्मी चढ़ रही थी...

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"उह्ह्ह इस बाला का गर्दन के ऊपर का पसीना अंदर बह रहा हैं उफ़ अंदर जा के उस पसीने को इसके अमृत जैसे ामो को चूसने का मौका मिल रहा होगा "

अंदर नम्रता का पूरा बदन भीगा हुवा था और वोह भीगा बदन एक अलग किसम की कामुकता भरी सुघन्ड छोड़ रहा था .....

यहाँ अब्ब टेबल के निचे छुपा हुवा पंत में दस का लुंड हलचल मचने लगा था

दस :- अहह इम्पॉसिबल उफ़ अभी तोह किंजल को मन भर के और लुंड खली कर के छोड़ा हैं और इस बच्ची को देख मेरा लावड़ा हलचल मचा रहा हैं अह्ह्ह कुछ तोह बात हैं इस बाला में ुह्ह्हह्ह

बात करते वक्त हो रहे नम्रता के चेहरे के एक्सप्रेशन दस को और भी पागल बना रहे थे

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वोह खूबसूरत बिंदी

वोह झुमके

वोह नजर

वोह लिप्स

वोह लिप्स की कामुक लिपस्टिक

वोह खूबसूरत बल

और खूबसूरती के समंदर में सजी हुवी नम्रता बिना अंग दिखाए हुवे हे दस का लुंड तिघ्त कर गयी

इस्सस वजह से दस भी सरप्राइज था कोई इनर part नहीं कोई सेक्सी भाग नहीं देखा फिर भी उसका लुंड मचल रहा था

और इसी खूबसूरती को ताड़ते ताड़ते दस का हैट अपने तिघ्त लुंड पे सहलाने लगा ....

नम्रता :- सर दोने ! सो थिस इस माय आंसर

दस सर :- वैरी गुड बीटा नीस बोहत होशियार हो तुम एंड खूबसूरत भी ऐसे हे पढ़ते रहो

नम्रता :- थैंक ु सर ! क्या मैं जावु अब

दस सर :- ok बीटा कल तुम मुझे अपना छोटा सा डांस परफॉरमेंस डौगी क्लास नंबर 07 मैं 2ंद फ्लोर

नम्रता :- अच्छा ok सर ी ऍम रेडी

दस सर :- गुड

नम्रता :- तोह सर जाती हु मैं लेक्चर हैं अब

और नम्रता वह से कड़ी हो जाती हैं उठने के बाद उससे महसूस होता है. उस खुर्सी पर कुछ गिला सा था और चिपचिपा भी पर वोह वह ध्यान न देते हुवे बहार जाती हैं

दस भी खड़ा हो के नम्रता को जाता देखता हैं...

दस को दिखाई देता हैं की कैसे नम्रता के सलवार के ऊपर से उसका काम रास चमक रहा हैं नम्रता के गांड पे दस का काम रास मनो चिपक सा गया था

नम्रता हल्का सा पीछे मूड के देखती हैं तोह दस सर उससे हे देख रहे थे

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नम्रता मन में

"यार कितने अच्छे सर हैं , उनसे बात कर के तोह एक रेस्पेक्ट सा महसूस होने लगा और इस नाम से मैं कितना परेशां थी लगता हैं मुझे उस बाथरूम मैं वहां हुवा होगा पर सर तोह बिलकुल एक रेस्पेक्टफुल्ल पर्सन की तरह हैं और थोड़े स्ट्रिक्ट भी लगे वार्ना कोई ऐसे क्वेश्चन थोड़ी करता हैं पर कुछ भी हो ऐसे एज्ड सर के एक्सपीरियंस से पढाई और परफॉरमेंस दोनों मैं हेल्प होगी "

यहाँ नम्रता के 34 के गांड के मोशन और उभर को देख दस का और टाइट हो गया वापस केबिन में आके ुसस्स नम्रता के खुसबू ने पागल सा बना दिया

दस ुसस्स खुर्सी को देख रहा था जहा नम्रता बैठी थी वह से नम्रता के बदन की कामुक खुसबू उससे महसूस होती हैंन और वोह आपने लुंड को पंत के ऊपर से पकड़ लेता हैं

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बुड्ढे दस का लुंड इतने घमासान गांड चुदाई के बाद भी एक ऐसे बाला को देख टाइट हुवा था जिसने आपने जवानी के देहलीज मैं बस कदम रखा था

दस अपने चैन को खोल के आपने लुंड को आजाद कर देता हैं

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वोह लटका हुवा बड़ा अवजार बस नम्रता के एक झलक से खड़ा हो गया था

दस नम्रता को अभी भी अपने सामने वके खुर्सी पैन इमेजिन करता हैं और नम्रता की खूबसूरत इमेजिनेशन उसके सामने प्रकट होता हैं जिसे वोह बात करता हैं ...

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" तू जिससे मिली वोह प्रोफेसर था और मैं एक शैतान हु ऐसा शैतान जोह गोरी छूट को सूंघ के और संस्कारी चेहरे के निचे छुपी हुवी "रंडी" को जगा देता हैं उसके गुरूर का भोसड़ा बना देता हैं "

आअज बिना कुछ किये तेरे गांड पे मेरा माल चमक रहा था

क्या मजा आएगा जिस दिन मैं मेरे काळा लुंड से निकले हुवे मेरे गंदे काम रास से तेरा पूरा बदन भिगो दूंगा

" मेरे काम रास से नाहा के तू और भी खूबसूरत हो जायेगी"

आअऊर इस्सस ख्याल से दस का लावड़ा झट से खड़ा हो जाता हैं

तो बे कॉन्टिनोएड........

स्टे सेफ हार्ट
 
नम्रता ….EK….PAHELI :- EPISODE 06

ऍम आज मुझे बोहत अच्छा लगा कुछ अलग सा था आज के दिन में एक अलग सा अहसास था कल मैं क्या क्या नहीं सोच रही थी और कितना बुरा ख्याल आ रहा था आखिर था भी क्या वहां परत बाथरूम में आवाज तोह थी मगर मैं जोह सोच रही हु वैसा कुछ नहीं था कितने अच्छे थे दस सर इतनी उम्र हो गई मगर पर्सनालिटी अभी भी एक यंग प्रोफेसर की तरह हैं उनसे मिलके एक अलग सा कुछ महसूस हुवा पता नहीं क्यू पर ऐसा लग रहा था मैं मेरे किसी एल्डर मेंटर या पापा के लेवल के पर्सन के सामने बैठी हु पर कुछ भी हो सर थे बड़े अच्छे . और कल अच्छा परफॉरमेंस दूंगी एंड ी बिलीव ों में सो अच्छा हे होगा ............

िन्न्न सब ख्यालो में नम्रता आँख बंद कर लेती हैं और नींद के अघोष में चली जाती हैं .......

उफ्फफ्फ्फ़ कुछ बात थी ुसस्स लड़की में कुछ अलग था उसमे एक नायब खूबसूरती जोह बस देखती रेहनी चाहिए जीवन में पहली बार किसी लड़की को देख उसको गली देने का मन नहीं हुवा उसके खूबसूरती को पिने का मन नहीं हुवा उसके जवानी को चूसने का मन नहीं हुवा

ऐसा लग रहा था उस नायब हिरे को एक अहसास की जरुरत हैं उसको एक फीलिंग की जरुरत हैं उस कोहिनूर को एक आकर देने वाले की जरुरत हैं . बोहत खूबसूरत लड़किया देखि और उनके अंदर के संस्कार को फेक के हवस को ऊपर लेके आया पर ये लड़की कुछ अलग थे इसमें संस्कार तोह हैं मगर पुरे और उस संस्कार के पीछे एक तूफ़ान................ देखते हे कल ये तूफ़ान क्या रंग दिखता हैं अभी के लिए इस बुड्ढे हो रहे जवान शरीर को नींद की जरुरत हैं ................

एक हे रात में एक तरफ रेस्पेक्ट और आदर्शवादी भावना थी तोह दूसरी तरफ हवस से भरी नजाकत वाली भावना आखिर इस खेल का मजा हे ऐसा हे जोह संस्कार को हवस का आयना दिखा के दोनों उसूलो को अपना बना दे और दोनों का मिलान होक एक बेशर्मी की हद पर करदे ........

नेक्स्ट डे :-

सब तैयारी हो चुकी थी वोह खूबसूरत बाला खुद को आयने में निहार रही थी उसके बदन का एक एक अंग मनो जवानी का रास गिरा रहा था

येलो कमीज और रेड सलवार मैं वोह हमेशा की तरह नायब और खूबसूरत लग रही थी

आखिर क्या था वोह जोह इस संस्कारी लिबाज़ में भी इस्सस बाला को इतना नशीला बना रहा था

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जवाब था

उसका बदन जोह एक 20 साल के लड़की को बोहत जल्द मिल चूका था ऐसा बदन जोह एक मांजी हुवी हाउसवाइफ को भी छह कर भी नहीं मिलता

ऐसा बदन जोह संस्कारी लिबाज़ मैं भी आदमी को ुसस्स लड़की को आँखों से नंगा करने पे मजबूर कर दे , ऐसा बदन जिसका एक एक अंग को देख लुंड के अंदर हलचल मच जाये

और ऐसा बदन मिलने के बावजूद नम्रता को कोई ये बताने वाला नहीं था की

"तुम सब से अलग हो "

नम्रता कॉलेज मैं एंट्री करती हैं आज उसके चल में कॉन्फिडेंस था वोह non-stop दस के केबिन के यहाँ पौह्चती हैं रेगुलर लेक्चर को 2 घंटे थे तोह आज वोह एकदम स्ट्रेस फ्री थी उसके मन में एक दर था पर कल के फेस तो फेस कन्वर्सेशन के बाद आज नम्रता ने कॉन्फिडेंस की लहर थी वोह उस दरवाजे पे अपना हैट टकटकटी हैं

नम्रता :- सर मई ी के इन

अंदर से एक कॉंफिडेंट आवाज आती हैं

दस सर :- एससससस अफ़्कौर्स ....के इन ....

नम्रता :- सर नम्रता हेरे .....!

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दस ाअपनी गर्दन उपाए कर के बोलता हैं ...

दस सर :- एस्सस ी क्नोव बीटा आपके खूबसूरत आवाज से समझ गया मैं की ये अआप हो .....

नम्रता को ये सुन थोड़ी शर्म ौड सवाल आता हैं जोह वोह बिलकुल पूछने को डर्टी नहीं

नम्रता :- सर आवाज तोह आवाज होती हैं उसमे खूबसूरत जैसा क्या हैं

दस सर :- होशियार हो तुम पर तुम्हे नहीं पता इस्सस दुनिया में हर एक चीज खूबसूरत होती हैं बस नजरिया होना चाहिए ......

और ऐसा कहते हुवे दस की दोनों आँखे नम्रता के उससस दरार को देख रही थी जोह देखने के लिए हवस के आग में डूबा हुवा लुंड होना चाहिए ....

नम्रता दस सर के जवाब से इम्प्रेस थी फिर से उससे कुछ सिखने मिला था

और दस को आँख सीखने को मिला था ......

दस सर :- बैठो बीटा

नम्रता :- है सर

दस सर :- सो क्या पसंद हे तुम्हे डांस में

नम्रता :- सर ी लिखे क्लासिकल डांस

दस सर :- ओह्ह्ह ok बूत....

नम्रता :- बूत क्या सर ?

दस सर :- ु थिंक फ्रेशर पार्टी में क्लासिकल डांस

नम्रता :- सर डांस तोह डांस होता हैं चाहे क्लासिकल हो या कोई और बस पैशन से परफॉरमेंस आना चाहिए ऐसा मुझे लगता हैं

दस सर :- ी लिखे ुर अंसवेरस बीटा , चलो देखते हे तुम्हारा पैशन

नम्रता :- ok सर .........

दस सर :- चलो तुम बाजु के क्लास रूम मैं पोहचो मैं अभी आया

नम्रता :- ok सर

और नम्रता वह से निकल जाती हैं........

पर जल्दबाजी मैं नम्रता का ब्लैक कलर का रुमाल वही टेबल पे छूट जाता हैं ....

नम्रता के जाते हे दस को नम्रता के बदन की रसीली खुसबू ुसस्स केबिन में महसूस होती हैं वोह आपने नक् से वोह खुसबू को पागलो की तरह आपने जेहन में भर रहा था इस्सस छोटी से मुलाकात ने उससे फिर से आपने लुंड को खड़ा होने में मजबूर कर दिया था ......

अह्ह्ह्ह अनजाने में ये लड़की मुझे बोहत सत्ता रही hainnn...aur आज तोह हद करदी इसने उफ्फफ्फ्फ़

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कल के नम्रता और आज के नम्रता में बोहत फरक हैं अहह कल जो आयी थी वोह सेहमी हुवी थी और आज जोह आयी थी वोह कॉन्फिडेंस से भरपूर थी अह्ह्ह्हह क्या बदन क्या लचक और क्या रूप था

उसके दोनों चुचो के बिच की दरार मुझे अगर फिर से दिखी तोह मैं वही आआपा खो दूंगा अह्ह्ह्ह मेरा कला लुंड अंडे हे अंदर ुसस्स खूबसूरती को सलामी दे रहा हैं ....बॉस ुसस्स कयामत के सामने और नहीं ये प्रोफेसर वाला चेहरे दिखा पावूंगा मेरे लुंड का टोपा ुसस्स गुलाबी ोठो को देख गिला हो रहा हैंण्ण्न

उसकी नजर मुझे मर रही hainnn....aur उसका हर एक बदन का अंग मुझे उसके बारे में सोचने पे मजबूर कर रहा हैंन....

और तभी दस वह से खड़ा होता हैं और वोह आपने टेबल के यहाँ देखता हैं तोह नम्रता का ब्लैक कलर का रुमाल वह रह गया था वोह उसपे ज्यादा ध्यान न देते हुवे बाजु के रूम में पोहच जाता हैं

यहाँ नम्रता क्लास रूम मैं सब निहार रही थी तभी उससे महसूस होता हैं की दस सर आए चुके है

नम्रता :- सर साउंड सिस्टम ?

दस सर :- चिंता मत करो सब हैं यहाँ

नम्रता :- ok सर

दस सर :- बोलो क्या लगावउ नम्रता

नम्रता :- इतस टेस्ट सो आपको जोह अच्छा क्लासिकल सांग लगे वोह लगाओ

दस सर :- ी लिखे ुर कॉन्फिडेंस डिअर

नम्रता थोड़ा शर्मा जाती हैं ...

नम्रता :- थैंक यू सर

और तभी साउंड सिस्टम से एक सांग लग जाता हैंन......

नम्रता रेडी होने लगती hainnn...aur यहाँ दस उसके सामने दूर से खड़ा हो जाता hainnn..uski नजर नम्रता के रसीले बदन पे थी ...मनो उसके निगाहो मैं नम्रता का नशा चढ़ गया था बस नम्रता के बदन का नशा उसके रूह मैं दौड़ रहा था

आअज दस नम्रता को पूरा ऊपर से निचे तक देख रहा था

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उसकी नजर नम्रता को ऊपर से निचे तक नंगी कर रही थी नम्रता का रसीला बदन उसके लुंड को खड़ा कर रहा था नम्रता के चुचो की दरार उससे पागल बना रही थी आखिर क्या था उस संस्कारी लिबाज़ मैं जोह दस जैसे शैतान को हवस के आग मैं दाल रहा था और दस भी उस हवस को आपने आँखों से मिटा रहा था पर फिर नम्रता का लचीला बदन और बदन की खुशबु उसको पागल बना देती ........

नम्रता के दोनों चुके अब्ब्ब हिल रहे थे ऊपर निचे हो रहे बूब्स को देख दस का लुंड भी नाचने लगता hainnn.....gaand के मोशन से लुंड मई बिजली चमक जाती हैं... नम्रता के एक्सप्रेशन दस को घायल कर रहे थे , नम्रता के पैरो के नाजुकता दस को और भड़का रही थी .... नम्रता के कोमल ोठो की लिप्सिंग उसको उस तोहो के रास को चूमने को लरकर रही थी

सांग तोह क्लासिकल था मगर आग आइटम सांग की तरह लगा रहा तह....

नम्रता :- सर सर ......हो गया सांग ख़त्म हो गया ...

दस सर :- बोहत खूब नम्रता लाजवाब मैं दांग हो गया तुम्हे देख के मनो कोई अप्सर ा नाच रही हो

नम्रता आपने इस्सस तारीफ से वह शर्मा जाती हैं...

नम्रता :- सर ी ऍम सिलेक्टेड ?

दस सर :- यस अफ़्कौर्स , बूत

नम्रता :- बूत क्या सर

दस सर :- it's फ्रेशर पार्टी सो बोहत कुछ हमें डेवेलोप करना पड़ेगा .

नम्रता :- जैसे की ?

दस सर :- डांस सांग , स्टेप्स , डांस की कस्टम , परफॉरमेंस इन् सब को ध्यान में रख के प्रैक्टिस चालू करनी पड़ेगी

नम्रता :- ी ऍम रेडी सर

दस सर :- ग्रेट सो रोज यही टाइम पे आना चलो अब्ब मुझे इम्पोर्टेन्ट काम हैं

नम्रता :- ok bye सर

और नम्रता वह से चली जाती हिन्नन ..

दस वह से बोहत जल्द बजी मैं आपने केबिन मैं घुस जाता हैं उसके चेहरे पैन बोहत हे खतरनाक भाव थे आज उसने वोह महसूस किया था जोह इससे पहले कभी नहीं हुवा था. ...आअज उसने एक नायब खूबसूरती को संस्कार के निचे छुपा हुवा देखा था नम्रता की हर एक ऐडा उसके लुंड पैन वर कर रही थी आज तक उसने काफी मातुरे वुमन पैन नजर डाली थी अपने लुंड के जोर पर उनपे हुकूमत भी किए थी लेकिन ऐसा उसको किसी ने तरसाया नहीं था

अपने अंदर आग की ज्वाला और गरम लुंड लेके दस केबिन मैं था आपने एक हैट वोह आपने पंत पैन रख के आपने लुंड को जोर जोर से मसल रहा था उसके सामने नम्रता का इमेजिनेशन तैयार होने लगा था उसको वोह इमेजिनेशन मैं भी तरसा रही थी उसका लुंड नम्रता का भोला सा मासूम चेहरे देख पिघल जाता था नम्रता के नाजुकता से उससे कामुकता का अहसास होता था

तभी दस आपने पंत के चैन को खोल देता हैं नम्रता के गर्मी में उससे पता नहीं चल रहा था वोह क्या कर रहा hainn...uska खड़ा गरम लुंड उसके पंत से भार निकल आता हैंन...

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उफ्फ्फ्फ़ वोह बड़ा सा लुंड बहार आने के बाद अकड़ने लगता हैं और अम्नो केबिन मैं नम्रता की खुसबू सूंघने लगता हैंण्ण्न......

वोह आपने लुंड को हटो से सहलाने लगता हैं और खुद से बात करने लगता हैं...

अह्ह्ह्हह क्या खूबसूरती उफ्फ्फ्फ़ क्या अदा हैं ुसस्स लड़की मैं 2-3 मुकताओ मैं हे इसने मुझे तड़पा दिया आखिर क्या बात हैं इसमें उफ्फ्फ इस्सस तोह आपने सुंदरता का गुरूर भी नहीं लगता एक टिपिकल संस्कारी लड़की लगती हैंन .जोह आपने बदन को छुपा के और उसपे नाजुक से संस्कार का पल्लू ओढ़ के रखती हैंण्ण्ण्न....

अह्ह्ह्ह मेरे अंदर का शैतान कह रहा hainnnn...ahh अगर कितना मजा आएगा

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इस्ससे मीठी मुस्कान को अगर कामिनी मुस्कान मैं बदल दिया जाए

कितना मजा आयेग इस्सस सलवार कमीज को उतर के उसपे लस्ट और कमीना पैन का पेहराव चढ़ाया जाये मेरा

60 साल का एक्सपीरियंस हैं हर संस्कारी चेहरे के पीछे एक चुड़काड कमीना पैन छुपा होता हैंन...

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ अगर ये लड़की पूरी तरह से ट्रांसफॉर्म हो जाए तोह मेरे जिंदगी का मकसद पूरा हो जायेगा मेरे लाइफ में मैंने बस इतना जाना हैं की एक औरत बोहत कुट्टी चीज होती हैं उनमे लिमितलेस खुदको ट्रांसफॉर्म करने की एनर्जी होती हैं

िन्नन्न सब संस्कारों मैं एक हवस भरी होती हैं जोह इसलिए रंडी ये शब्द लोगो को संस्कारी के पीछे सुनना अच्छा लगता हैं सबको रंडी तोह चाहिए मगर बहार से संस्कारी होनी चाहिए ऐसे बोहत रंडिया आके चली गयी मगर ये कुछ अलग हैं एक इसके ऊपर जोह संस्कार हैं वोह अंदर भी हैं और अंदर से जब कोई बदलता हैं तोह पूरा माहौल बदल देता हैं

अह्ह्ह्हह नम्रता का एक संस्कारी चित्र मेरे दिमाग में आए रहा हैं मेरे ख्यालो वाली नम्रता कुछ ऐसे दिख रही हैं.....

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अह्ह्ह्हह क्या मजा आता हे एक लुंड को और आदमी को जब ऐसे खुदको संस्कारी पेश करने वाली लड़की खुदकी साडी सीमाएं भूल के और विद्रोह कर के आपने अंदर के आग को पहचानती हैं और खुदको पूरा बदल लेती हैं ये बात गुलामी की नहीं बात डोमिनान्स और वर्चस्व की हैं मजा तोह तब आता हैं जब दोनों बाजुओं से डोमिनान्स हो

अह्ह्ह बोहत शादी शुदा लड़कीओ को छोड़ा पर वोह गुलाम बन गयी उसमे भी मजा हैं पर असली मजा तब हैं जब वोह लड़की हुकूमत करे

किंजल को बोहत गुरुर था उसके खूबसूरती पैन और बहार से खुदको संस्कारी दिखती थी पर क्या फायदा हुवा वोह भी एक गुलाम बन के रह गयी

मजा तब आएगा जब संस्कार अंदर से हो सिर्फ बहार से नहीं तब जा के बनती हैं कोई संस्कारी रंडी ............अह्ह्ह्ह

यहाँ नम्रता आपने क्लास रूम मैं पोहच जाती हैं उसको पसीना आया हुवा था वोह पसीना पोछने के लिए जब वोह आपने रुमाल ढूंढ़ती हैं तोह वोह उससे कही नहीं मिलता और तब ुसस्स यद् आता हैं की वोह उसका रुमाल दस सर के केबिन मैं भूल आयी

और तेजी से वोह फिर से केबिन के और निकल पड़ती हैंन......

नम्रता की खूबसूरती भरी चल मादकता से केबिन के यहाँ पोहच जाती हैं और वोह दरवाजा खोलने हे वाली होती हैं की वोह थम से जाती हैं उसको हल्का सा आवाज आए रहा था

अह्ह्ह्हह ..........ahhh.....ah....

ऐसा लग रहा था अंदर कोई हांफ रहा हैं ..

नम्रता वही थम से जाती hainn...aur हल्का सा दरवाज़ा खोलने का तरय करती hainnn...aur दरवाज़े गैप मैं से उससे जोह दीखता हैं वोह देख नम्रता के पाव के निचे की जमीं सरक जाती हैं और पूरा शरीर ठंडा पद जाता हैं और अलग किसम का दर उससे लगने लगता हैं.......

आखिर देखा हे उसने ऐसा था.....

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अंदर उसके रिस्पेक्टफुल दस सर आपने काळा गरम नाग को आपने हटो से आएगी पीछे कर रहे थे और अपनी आंखे बंद कर कुछ इमेजिन कर रहे थे

नम्रता को दर सा लगने लगा पर उसके पाव ुसस्स जगह से हिल नहीं रहे थे वोह दस सर के हरकतों को देख रही थी दस जहा खड़ा था वही उसका रुमाल था

नम्रता की नजरे एक हे चीज को देख रही थी और वोह था दस का कला लुंड उसने अपनी पूरी जिंदगी मैं कोई लुंड नहीं देखा था न इमेज में न पोर्न में न रियल में उसके बदन के जवानी के देहलीज मैं उसने लुंड देखा तोह सीधा एक शैतान का जोह बोहत कला और 9 इंच लम्बा था जोह नम्रता के नजरो में भी नहीं भर रहा था नम्रता को वोह देख अलग सा महसूस हुवा उसके बदन पे एक कटा सा खड़ा हुवा और अंग मैं एक रोमांच की लहर दौड़ पड़ी जोह उससे वोह लुंड की हलचल देखने पे मजबूर कर रही थी एक अलग रोमांच भर रही थी ................

यहाँ आँख बंद करा हुवा दस आपने ख्यालो में नम्रता के बारे में सोच रहा था उसके ख्यालो में नम्रता ने आपने अंदर के संस्कारो को जीत लिया था और वोह निचे बैठ के दस को डोमिनेंट कर रही थी दस को वोह ख़ुशी दे रही थी जोह अब तक कोई नहीं दे पाया इसीलिए तोह ये दस का ख्याल था ......

अह्हह्ह्ह्ह Namrta.........ahhhhhh

दस के मुह्ह से वासना के भूक में ये शब्द निकल जाते हैंण्ण्न....

और ये नम्रता सुन लेती hainn...aapna नाम दस सर के मुह्ह में सुन के नम्रता पूरी तरीके से चौक जाती हैं और उससे आपने कानो पे विश्वास नहीं होता की उसने क्या सुन लिया.

नम्रता :- व्हाट मैंने सच में मेरा नाम सुना that's नॉट पॉसिबल फिर से वहां होना चालू हो गया ....

यहाँ दस के दिमाग में नम्रता अपनी साडी लिमिटेशंस क्रॉस कर चुकी थी ....वोह आपने संस्कारी सलवार कमीज मैं निचे आपने घुटनो पे बैठी हुवी थी और आपने कोमल से मुहहह में दस का कला फैन फैन कर रहा गरम लुंड किसी केले की तरह मुहहह में घुसा रही थी और आपने अंदर के कमीने पैन का सबूत आपने आंखे ऊपर कर दस के आँखों में देख कर दे रही थी .....

दस को आपने विचारो में आपने दिमाग में खुद की जीत दिखाई दे रही थी जोह उसका मकसद था जिसके लिए उसने इतने औरतो को छोड़ा था वही मकसद जोह उससे मेन्टल रिलीफ देता था

वोह आपने लुंड शीतन की तरह नम्रता के मुहहह मैं थुश रहा था उसके लुंड का माल और नम्रता का रसीला थूक नम्रता के कमीज पे गिर रहा था .......

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यहाँ असल में दस अपने फंतासी में खोया हुवा था...

अह्ह्ह्हह नम्रता अह्हह्ह्ह्ह ोुछहहहह

दस के मुहहह से आपने नाम इस्सस बार क्लियर सुनाने के बाद नम्रता का दिल देहल जाता हैं उससे समझ नहीं आए रहा था क्या हो रहा हैंन...

इधर दस को आपने जीत पे आनंद मिल रहा था आपने ख्यालो में उसने एक संस्कारी विचारो को गन्दा किया था और अपनी वोह गंध ुसस्स पवित्र मुह्ह में भर रहा था और वोह गंध उस पवित्र मुह्ह में वोह बाला खुद ले रही थी

जब दो आइडियोलॉजी एक दूसरे से मिलती हैं तोह वोह एक साथ कभी नहीं रह सकती एक को तोह ख़तम होना हे हैं....

यहाँ ..... नम्रता उसके सामने क्या चल रहा हैं वोह देखते हुवे आपने विचारो में थी की. नहीं वोह मेरा नाम नहीं हो सकता कोई और होगा इस नाम का

ये वोह आइडियोलॉजी हे जोह सबको अच्छा देखती हैं और बुरा आने पर भी एक्सेप्ट करने को मन कर देती हैं और खुद के हे दुनिया अच्छाइया देखती हैं .......

अह्हह्ह्ह्ह साली अह्ह्ह क्या चूस रही hainn...ahhh मादरचोद नम्रता अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

ये आवाज अब्ब्ब नम्रता के हर एक अंग को तोड़ रही थी अब्ब्ब उसे महसूस होने लगा था वोह जोह सोच रखती हैं वोह शायद गलत हैंन......

यहाँ दस को महसूस होने लगता हैं के उसका अब्ब निकलने वाला हैं तोह वोह आपने फ़ोन को लेता हैं और एक कॉल घुमा देता हैं...

दस :- अह्ह्ह्ह कहा हैं तू चैनल ...

सामने से जवाब आता हैं...

फीमेल :- सर वोह लेक्चर ले रही हु क्या हुवा

दस :- अह्ह्ह्ह चैनल मादरचोद अभी के अभी यहाँ आआआ

और कॉल को रख देता हैंन...

दस किसी भी कीमत पे आपने कीमती माल वास्ते नहीं करता tha....q की उसको मानना था इस्सस माल के हक़ सर उसके रंडियो का हैंन..

दस के लुंड पे कुछ चिप छिपा सा था और वोह धार निचे गिर रही थी वोह लिक्विड को नम्रता देखते हे रह गयी

नम्रता की आँखे उसी लुंड पे तिकी हुवी थी और चेहरे पे अब्ब्ब रोमांच के भाव थे

तभी नम्रता को निचे से कोई आने की आहात होने लगती हैंन. ...

यहाँ दस आपने लुंड को जोर जोर से शीतन की तरह हिला रहा था ..और वोह हिलना देख नम्रता दांग हो चुकी थी उसकी नजर बास ुसस्स काळा अजगर को देख रही थी और वोह कला नाग उसको देख रहा था दोनों के ोठो पे रास था मनो दोनों के मुह्ह में पानी लग चूका हो .....

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नम्रता का संस्कारी चेहरे उसी लुंड पे टिका हुवा था जोह उसके संस्कार को मिटने का ख्वाब देख रहा था नम्रता के रसीले ोठो पे अपने आप पानी आए रहा था और बहार के गर्मी से आपने अंदर के गर्मी को वोह महसूस कर प् रही थी

अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मादरचोद नम्रता अहह मेरी संस्कारी रंडी ...

नम्रता ये लाइन सुन लेती हैं और झट से वह से निकल का बाजु के क्लास रूम में घुस जाती हैं क्यू की कोई औरत केबिन की तरफ आए रही थी

यहाँ नम्रता की सांसे ऊपर निचे हो रही थी दिमाग में खूब सरे विचार चालू थे और बदन में हो रहे ऊपर निचे अंधरुनि बदलो को वोह भाप रही थी

और वोह खुद से हे सवाल करती हैं..

"संस्कारी रंडी " मतलब क्या होता हे संस्कारी रंडी और खुदका नाम उस दस सर के मुह्ह से सुनाने के बाद जोह रोमांच नम्रता ने महसूस किया था

दोस्तों वही तोह होती हैं "संस्कारी रंडी"

तो बे कॉन्टिनोएड.........................
 
नम्रता ....EK....PAHELI :- EPISODE 07

नम्रता की सांसे तेजी से चल रही थी उसको आपने आँखों पे यकीं नहीं हो रहा था जोह उसने देखा था और जोह उसने सुना था वोह सब आपने आँखों के सामने उससे उसके मन मैं अलग सा रोमांच चढ़ गया था और उसके मन मैं काफी सवाल चल रहे थे

सर मेरा नाम क्यू ले रहे थे ?

और मेरा नाम लेके इतनी गन्दी हरकत क्यू कर रहे थे ?

और सबसे बड़ा सवाल उसके मन मैं आता हैं

की सर ने कॉल कर के किसको बुलाया और कोण आ रहा था निचे से ..

तभी नम्रता को उसके कानो पैन एक औरत के पैरो के पैजनो की आवाज आती हैं वोह आवाज काफी शांत थी और वोह औरत दस के केबिन के तरफ बढ़ रही थी ......

तभी नम्रता के मन मैं रोमांच और इस्सस घटना के प्रति उत्सुकता जग उठती हैं और वोह क्लास से बहार निकल के झुक कर देखती हैंन..

उसको एक औरत का सुडोल बदन दिखाई देता हैं और उसकी नंगी पीठ जोह काफी अकृषक लग रही थी .....

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ुसस्स औरत के शरीर रचना को देख नम्रता सेहम से गयी उसके दिमाग मैं वोह बदन कही देखा देखा सा लग रहा था पर इस्सस औरत की साड़ी कमर के यहाँ बोहत कामुक थी ुसस्स औरत को देख नम्रता के मुह्ह से शब्द निकलता हैं .

नम्रता :- क्या क्या ये.... किंजल मम हैं .?

और तभी नम्रता खुद को समझती हैं..

नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता किंजल मम काफी अच्छी हैं और वोह ऐसे साड़ी नहीं पहनती एंड उनकी हर एक चीज परफेक्ट लगती हैंन ...

यहाँ अंदर दस का लावड़ा नम्रता के ख्याल मैं तप्त चला जा रहा था वोह आपने लुंड को हो सके उतना जोर जोर से हिला रहा था ........और इतने देर से हिलने की वजह से उसके लुंड से अब्ब्ब लस्सी निकलना चालू हो गया ....आउट तभी वह किंजल आती hainn...aur केबिन का दरवाज़ा बंद कर देती हैंण्ण्न ...

किंजल अपने दस सर का ऐसा हल देख के रोमांचित हो जाती hainnn....uski निगाहे उसी लुंड के टोपे से निकल रहे पिचकारी पर था

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जोह दस के बदन पैन उड़द रही थी ......

दस :- अह्ह्ह्हह आए गयी मेरी रैंड

किंजल :- है सर ... बोलिये क्या करू मैं आपके लिए

दस :- वही जोह तू करती hainnn...mera अमृत की कीमत ......

किंजल :- अह्ह्ह्ह सर उसकी कीमत मेरे आलावा और किसको पता होगी

और झट से किंजल जमीं पर बैठ जाती हैंन..

दस खुर्सी पर नंगा बैठा था और ठीक उसके सामने कमसिन बदन की किंजल थी

नम्रता बड़ी हिम्मत कर के दरवाजे के यहाँ आ जाती हैं और हल्का सा दरवाज़ा खोल के देखती हैं तोह उसकी आँखे फटी की फटी रह जाती हैं ..

अंदर का नजारा देख नम्रता का बदन कम्पनी लगता hainn..andar वोह औरत उस तरफ मुहहह कर के नंगे दस सर के सामने बैठी थी

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नम्रता को वोह बदन बार बार जाना पहचाना लग रहा था उसके दिमाग मैं बस वोह बदन को देख किंजल मिस का ख्याल आ रहा था और नम्रता अब्ब दर काम रही थी और सामने जोह था उससे बड़ा हिम्मत कर के देख रही थी......

यहाँ निचे बैठे हुवे. किंजल को देख दस का लुंड अकड़ सा गया था और वोह अब्ब्ब किंजल को देख लुंड को हिला रहा था

यहाँ से नम्रता को दस सर एकदम क्लियर दिख रहे थे उनका नंगा कला बदन और फैन फनता हुवा लावड़ा नम्रता को स्तब्ध कर रहा था वोह देख नम्रता को काफी घिन आ रही थी ......

सिर्फ लुंड को देख नम्रता के मुह्ह से निकलता हैं .

नम्रता :- चींईईईई ....कितना गन्दा हैं

पर उससे क्या पता था असली घिन वाला खेल तोह अब्ब चालू होने वाला था ....ये खेल दस का वजूद था ऐसा खेल जिस में दस अपने सामने वाली औरत को एक खिलौना बना ने वाला था .

नम्रता की निगाहे बस आपने दस सर के ऊपर थी और उससे उस कमसिन औरत को देख अलग हे लग रहा था

तभी दस आपने लुंड को हिलना बंद कर देता हैं और बड़े नजाकत से आपने उंगलिओ को निचे बैठी किंजल के मुह्ह पे रख के ुसस्स अपनी और आने का इशारा करता हैंन...

किंजल. भी मनो किसी गुलाम की तरह दस सर के और चली जाती हैं.. पास जाने के बाद किंजल को दस के लुंड के गर्मी का अहसास होता हैं और वोह मन मैं हे सोचती हैंन......

किंजल मिस :- अह्ह्ह कितना गरम हो चूका हैं इस हरामी बुड्ढे का अच्छा हुवा मुझे ये कही लेना नहीं पड़ेगा

और तभी दस आपने कला हैट आपने लुंड के यहाँ रखता हैं और आपने दोनों हटो की उंगलिओ को आपने काळा लुंड के टोपे पर रख के घूमता हैं उसके दोनों उँगलियों पे बोहत सारा सफ़ेद घड़ा काम रास लग जाता हैं और वोह किंजल के तरफ देख कामिनी मुस्कान देता हैंन....

किंजल समझ जाती हैं की उससे क्या करना हैंन......

वोह किसी कुट्टी की तरह ुसस्स उँगलियों को देख रही थी और दस के आँखों मैं आँखे दाल मनो कह रही थी

किंजल :- अह्ह्ह्ह देदो अह्ह्ह्ह मेरे अंदर उतर दो अपना वोह काम रास अह्ह्ह्ह

दस की दोनों उँगलियाँ अब्ब्ब हवा में थी उस उँगलियों से काम रास मनो टपकने वाला था और यहाँ निचे किंजल आपने मुहहह खोल देती हैंन .....और किसी कुट्टी की तरह जबान को बहार निकल देती हैंन ..

ये नजारा देख नम्रता की हवा निकल चुकी थी जिसने कभी सेक्स के बारे में सुना नहीं था देखा नहीं था और न हे कभी महसूस किया वोह आज एक साथ वोह एक्सपीरियंस कर रही थी

यहाँ दस अपना रंग दिखते हुवे आपने दोनों उँगलियों को किंजल के ोठो पे लगा देता हैं और आपने काम रास को उसके लिपस्टिक के ऊपर रगड़ने लगता हैं और बड़ी नजाकत से ुसस्स दोनों उँगलियों को ऊपर करते हुवे किंजल के अन्तर्मुख में घुसा देता हैंन....

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ क्या कामुकता भरा नजारा था

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किंजल ुसस्स दोनों उँगलियों को आपने अंदर समां लेती हैंण्ण्ण्ण्न....

किंजल :- अह्हह्ह्ह्ह उम्मम्मम अह्ह्ह्ह अह्हह्ह्ह्ह

पीछे से ये सब देख नम्रता के मुह्ह से एक हे शब्द निकलता हैंन .

नम्रता :- ेव्वव्वव्व कितनी घिनौनी हरकत हैं ये छी

यहाँ किंजल अच्छी कुट्टी की तरह दोनों उँगलियों को चूसना चालू कर देती हैं और दस का लुंड फिर से तपना चालू हो जाता हैंन .....

किंजल :- अह्ह्ह्हह उम्म्म अह्हह्ह्ह्ह उम्म्म

किंजल के मुह्ह से ऐसे आवाजे सुन यहाँ नम्रता के शरीर में बदलाव आना चालू हो चूका था उसका नशीला बदन आपने जवानी को अब्ब और नहीं छुपाना चाहता था और उसके अंदर की एक एक रोम आपने सामने का नजारा देख नम्रता के कामुकता का गवाह बन रही थी .....

नम्रता की आँखे बस आपने दस सर के ुसस्स लचीले अंग पे थी जोह उससे घूरे जा रहा था यानि की दस का कला लुंड क्या जादू थी उसमे क्या पता नम्रता बास उस लुंड के मूवमेंट को देखे जा रही थी और वोह देखती हैं की कैसे वोह लुंड बढ़ रहा था कैसे उसका तनाव बढ़ रहा था

और अगले हे पल दस आपने पैरो पे खड़ा हो जाता हैं और यहाँ. नम्रता थोड़ी दर से जाती हैं दस के आँखों मैं अंगार और हवस की नशा थी और ऐसा लग ररः था वोह अभी भी नम्रता के खयालो मैं डूबा हुवा हैंन .

किंजल को पता चल चूका था इस्सस राक्षस का अब्ब पानी निकलने के लिए उस की जान निकलने वाली हैं .....

समय न गवाते हुवे दस किंजल के बालो को पकड़ लेता हैं और किसी राक्षस की तरह आपने लुंड हैवे में हिलने लगता हैं और निचे बैठी किंजल किसी कुट्टी की तरह मुह्ह खोल के उस लुंड का आपने मुह्ह में स्वागत करती हैं

कला काम रास से सना हुवा लावड़ा किंजल के मुह्ह मैं घुस जाता हैं और अगले हे पल किंजल आपने मुह्ह को जोर जोर से हिअँइ लगती हैं और एक कामुक माहौल बन जाता हैं पुरे केबिन मैं लुंड को जोरदार चूसने की आवाज आने लगती हैं

वोह आवाजे नम्रता के कानो तक घूम रही थी और ुसस्स आवाज से नम्रता और सेहम रही थी एक अलग सा माहौल बन चूका था अब्ब्ब नम्रता उस घिनौनी हरकत को एक रोमांच के टूर पर देख रही थी आपने दस सर के एक एक हरकत उससे अब्ब अलग महसूस करवा रही थी

दस सर का कला बदन उसके आँखों में बस चूका था

दस सर के सफ़ेद झाटो के बालो को देख उससे घिन और उत्सुकता महसूस हो रही थी

दस सर के पुरे अंग को देख उससे अब्ब गलत पर रोमांचित लग रहा था

और ुसस्स औरत पे उससे दया आए रही थी पर दूसरे मन से उससे लग रहा था किती घिनौनी औरत हैं ये इतनी उम्र वाले सर के साथ ऐसे हरकत कर रही हैं कोई इस्सस जवानी के उम्र में बुड्ढे सिटीजन के साथ ऐसा कैसे कर सकता हैं चींईईई.......

तभी दस पागल सा हो जाता हैं और जोर से चिल्ला ता हैंन...

दस :- अह्हह्ह्ह्ह जानेमन अह्ह्ह्हह रैंड अह्ह्ह्ह निगल ले अह्ह्ह अह्ह्ह ऐसे हे अह्ह्ह्ह अह्ह्ह्ह

दस की ऐसे आवाजे सुन नम्रता दर से जाती हैं

क्या ये वही दस सर हैं जोह मुझ से प्यार से पेश आते हैं उसे सवाल पड़ता हैं

पर अब्ब नम्रता का रोमांच एक दर और चिंतित सिचुएशन में बदलने वाला था क्यू की इसके आगे जोह वोह देखने वाली थी वोह उसके उम्र के परे था

निचे बैठी किंजल अपनी पूरी जान लगा रही थी

ऊपर खड़ा राक्षस उसे अब्ब पूरी तरह डोमिनेंट कर रहा था उसको आपने हटो से मसल रहा था

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ क्या नजारा था और क्या देख रही थी नम्रता

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नम्रता आपने दस सर के हैवानियत को देख रही थी और निचे बैठी औरत भी कुछ काम नहीं थी दोनों के इस्सस वॉर मैं नम्रता का अंग अब्ब गरम हो रहा था ........

वोह नजारा देख नम्रता को आपने मुह्ह मैं कुछ महसूस हो रहा था और वोह और कुछ नहीं उसके मुह्ह से निकलने वाला पानी था वोह बड़े हे हिचकिचाहट से वोह पानी निगल जाती हैं उससे आपने शरीर मैं हो रहे बदलो पर यकीं नहीं हो रहा था

ुसस्स औरत के मुह्ह मैं ठूसा हुवा लुंड देख उसको आपने गले मैं कुछ अटकन से महसूस होती हैं ऐसा लगा रहा था मनो नम्रता उस लुंड को खुदके मुह्ह मैं इमेजिन कर रही हैंन ........

20 मिनट्स के घमासान मुहहह चुदाई के बाद दस का लावड़ा शांत सा हो रहा था झटको की स्पीड काम हो रही थी निचे बैठी किंजल का मुह्ह

थूक , काम रास , और काळा लुंड के गंध से सना हुवा था वोह अपनी निगाहे ऊपर कर के देखती हैं तोह लुंड से अब्ब ढब ढाबा बहने वाला था

दस :- आआह मेरी रैंड एक भी बूँद अगर वास्ते किया तोह तेरी खैर नहीं अह्ह्ह्हह .

ये सुन किंजल आपने चहरे को कुट्टी की तरह खोल देती हैं और आपने दोनों हटो से खुदका ब्लाउज खोलने लगती हैंण्ण्न

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किंजल को ऐसा करते देख दस का लुंड और तप जाता हैं और किंजल का खुला हुवा ब्लाउज उसका मासूम पर महा कमीना चहेरा उससे आपने जीत का सबूत दे रहा था

किंजल आपने मुह्ह मैं और बदन पर दस का गरम लावा लेने के लिए बिलकुल तैयार थी उसकी हवस भरी निगाहे मनो इंतज़ार कर रही थी की कब दस का काम रास गिरेगा

कुछ भी हो किंजल को दस के काम रास की प्यास थी इतनी म्हणत और इस्सस शैतान को शांत करने मैं उससे बोहत मजा आता था और इसी वजह से वोह एक बून्द भी गवा नहीं सकती थी आखिर उसे भी प्यास थी दस के लुंड की ........

दस आपने लुंड को पूरा खुल्ला छोड़ देता हैं और उसके लुंड से ग्राम लावा बहार निकल जाता हैं और सफ़ेद सफ़ेद काम रास चमकता हुवा उसके काळा लुंड से गिरने लगता हैंन.

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..दस के लुंड से गरम गरम धार छूट जाती हैं और उसका सारा काम किंजल पे बारिश करने लगता हैं उसके लुंड मैं एक मनो बिजली कड़कती हैं और दर्द सा महसूस होता हैं

दस :- आआह्ह्ह्हह ोुछहहहह ये सिर्फ तुम्हारे लिए मेरी रंडी अह्ह्ह्हह ...

दस के मुह्ह से ऐसा सुन यहाँ नम्रता की हालत टाइट हो गई थी नम्रता को समझ नहीं आ रहा था की वोह क्या करे बस उसकी निगाहे दस के काळा लुंड को तक रही थी और ुसस्स लुंड की हर एक एक्टिविटी को

किंजल के बदन पैन गरम गरम काम रास की बुँदे गिर रही थी उसके जुबान पैन सफ़ेद चिप छिपा रास लटक कर उसके छाती पैन गिर रहा था उसका चेहरा ुसस्स काम रास से धूल चूका था उसके बिंदी पैन भी काम रास लग चूका था आपने मुह्ह पैन ये संतुष्टि का आनंद निचे किंजल ले रही थी ......

देखते हे देखते दस का लुंड सारा काम रास छोड़ देता हैं ....और किंजल भी सब निगल जाती हैं

उस औरत को ये हरकत करता देख यहाँ नम्रता को घिन से आए रही थी आखिर ऐसा कोण कर सकता हैं कितनी घिनौनी औरत हैं ये चींईईई .....

कमसिन बदन की मालकिन किंजल को आपने चरणों मैं देख दस को संतुष्टि महसूस होती हैं तभी उसकी नजर खुद के पैरो के यहाँ जाती हैं जहा उसका काम रास गिरा हुवा था और वोह देख दस भड़क जाता हैं

दस :- कामिनी हरामजादी कही ki....mera काम रास जमीं पैन कैसे गिरा कुट्टी .....

ये सुन किंजल दर से जाती हैं , यहाँ नम्रता भी दर जाती हैं

और ाअगले हे पल किंजल कामुक मुस्कान देते हुवे कहती हैं ....

किंजल :- अह्ह्ह्ह सर मैं हु न आप शांत रहिये देखिये आप की ये कुट्टी क्या करती हैं

ुसस्स औरत का ये कामुक आवाज नम्रता को किसी की यद् दिला रहा था पर नम्रता के सामने जोह होने जा रहा था वोह भाप कर नम्रता का दिल देहल जाता हैं

वोह औरत दस के पैरो के यहाँ झुक जाती हैं और अपनी कमसिन जबान बहार निकल देती हैं और ुसस्स जमीं पैन गिरे उस माल को आपने जबान से चाटने लगती हैं

नम्रता :- एवव्वव्व मा ये क्या कर रही हैं उफ्फफ्फ्फ़ चींईईईई कितनी गन्दी हरकत हैं ये

दस आपने रंडी को आपने जमीं पे गिरा काम रास चाटता देख संतुष्ट हो जाता हैं ..

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किंजल काफी नजाकत से वोह माल चाट रही थी उससे चुम रही थी उसके साथ खेल रही थी मनो दस का उसपे पूरा वश हो वोह एक खिलोने की तरह दस के परिओ पे गिरी थी जमीं पे गिरा सारा माल वोह चाट लेती हैं ....

यहाँ दस टेबल पे कुछ ढूंढ रहा था और उसके हैट नम्रता का रुमाल लग जाता हैं ......

नम्रता ये देख हैरान हो जाती हैं दस वोह रुमाल आपने नक् के यहाँ ले जेक उसके अंदर की स्मेल लेता हैं

दस :- अह्ह्ह्ह क्या खुशबु हैं ...

और अगले हे पल उस रुमाल को आपने लुंड के यहाँ ले जा के पोछने लगता हैं और आपने झाटो के ऊपर का काम रास उस रुमाल से पॉच लेता हैं आपने लुंड को पूरा साफ कर लेता हैं और वोह रुमाल वही टेबल पे रख देता हैं..

नम्रता :- नाहीई सर ची. .ये क्या किया अपने और नम्रता को बुरा लगता हैं पर अगले हे पल उस काळा लुंड पे अपना रुमाल घिसता देख रोमांच की लहर बदन से गुजर जाती हैं

कुछ हे पल मैं किंजल कड़ी हो जाती हैं दस भी कपडे पहन लेता है. ..

नम्रता दर के फिर से बाजु वाले रूम मैं चली जाती हैं

कुछ देर बाद उसे महसूस होता हैं की केबिन से आने वाली आवाज बंद हो जाती हैं वोह वह से बहार आती हैं तोह देखती हैं अंदर कोई नहीं था ..

किंजल लेक्चर के लिए चली गयी थी और दस स्टाफ रूम .....

नम्रता बड़ी हिम्मत से केबिन के अंदर चली जाती हैं

अंदर जाते हे ुसस्स मदहोश कर देने वाली खुशबु आती हैं वोह ुसस्स मदहोशी मैं डूब जाती हैं ...उसका अंदाज कामुक था

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नम्रता वही कड़ी होक कुछ सोच रही थी उसको वोह वही कड़ी थी जहा वोह औरत निचे बैठे हुवी थी उसके सामने वही खुर्सी थी जहा दस नंगा बैठा था उसकी आँखे बंद हो जाती हैं और क्या पता नम्रता को क्या हो रहा था आपने अबदार उससे अलग से लहर महसूस हो रही थी उसके आँखों के सामने दस का कला कुंड उछाल रहा था उससे देख वोह बड़ा हो रहा था नम्रता के मन पे एक अलग असर हुवा था वोह आपने हे सोच में थी की तभी उसके हटो में

उसका रुमाल आए जाता हैं ....

और उससे ुसस्स रुमाल पे ऐसे चीज मिलती हैं जिसको देख उसके हैट पाव कम्पनी लगते हैं

वोह रुमाल ढेर सरे काम रास से सना हुवा था ..

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नम्रता उस काम रास को देखे हे जा रही थी

उसको उस काम रास की खुसबू आपने नको में महसूस हो रही थी कुछ अलग सा लग रहा था ......की तभी ..

ुसस्स रुमाल के निचे नम्रता को कागज सा महसूस होता हैं ... नम्रता वोह कागज पकड़ लेती हैं ..

जीसस पे लिखा था ...

बीटा कल जल्दी आना जैम कर प्रैक्टिस करनी हैं और है ट्रेडिशनल में सुन्दर दिखती हो पर उसमे डांस नहीं किया जाता , तोह कल शार्ट ड्रेस पहन के आना नम्रता...

और नम्रता नाम के ऊपर सफ़ेद गधे लुंड के रास की बून्द थी

और ये पढ़ के जिंदगी में पहली बार ...

नम्रता के छूट मैं एक दर , उत्सुकता , रोमांच और अच्चरिया का कड़ाके का झटका लगता हैं.......

अह्ह्ह्हह्हह.....

तो बे कॉन्टिनोएड..................
 
नम्रता ....EK....PAHELI :- EPISODE 08

नम्रता वही शॉक मैं कड़ी थी उसके हैट मैं वोह कागज का टुकड़ा और वोह रुमाल था और उसका हैट कम्प रहा था और मन मैं एक तूफान सा आ चूका था उसके कुछ सूझ नहीं रहा था और वोह उस केबिन के बहार आ जाती हैं

बहार आके वोह आपने क्लास की तरफ बढ़ रही थी उसका दिमाग पूरा ब्लेंक था कॉलेज पहले 15 दिन मैं हे उसके साथ ऐसा कुछ होगा ऐसा उसने सोचा नहीं था पर अभी भी वोह दस के बारे मैं कुछ बुरा नहीं सोच रही थी वोह आपने हे मन के कश्मकश मैं अटक चुकी थी

उसके मन मैं अब उस कागज पे लिखे मैसेज पे दयँ जयते हैं उसके नाम पर लगा वोह गिला पैन उसे घिन महसूस करवा रहा था और वोह झट से वोह कागज आपने हटो से डस्टबिन मैं फेक देती हैं और उस रुमाल को बड़े घिन वाले नजरो से देख के आपने बैग मैं दाल देती हैं और ऐसे हे अपने आप में किलो के सागर मैं दुब के आज का दिन ख़तम हो जाता हैं .............

रत को नम्रता आपने बीएड पैन आराम कर रही थी आज पहली बार उसका बदन अकड़ सा गया था उसके अंग मैं उसे थकन से महसूस हो रही थी और पुरे बदन में एक कपकपी से थी उसके दिमाग से आज उसने जोह देखा था वोह जाने का नाम नहीं ले रहा था

आखिर क्यू दस सर आपने केबिन मैं ऐसा कर रहे थे ?

उन्होंने मुझे शार्ट ड्रेस पहन के क्यू बुलाया ?

क्या एक प्रोफेसर को ऐसा शोभा देता हैं और मुझे क्या करना चाहिए आखिर उन्होंने बोलै की ट्रेडिशनल मैं डांस नहीं होता पर मेरा तोह डांस फॉर्म हे ट्रेडिशनल हैं तोह शार्ट ड्रेस पहन के में क्या करू नहीं मैं नहीं ऐसा कुछ कर सकती और अगर नहीं होगा तोह मैं डांस हे नहीं करुँगी और अब मुझे दस सर के बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए आखिर वोह उनका पर्सनल टाइम था वह मैं अचानक पोहच गई वार्ना मेरे लिए उनके बारे मैं वही रेस्पेक्ट हैं और में भी वही रेस्पेक्ट दिखावूँगी

और ये सब सोचते हुवे नम्रता की आँख लग गई ................

यहाँ रत का घाना अँधेरा था एक आदमी आपने घर मैं बीएड पे अकेला पड़ा था उसके आजु बाजू मैं बोहत सारा कचरा था सामान यहाँ वह गिरा था सिग्रेटे के पॉकेट्स पड़े हुवे थे दारू की बोतल भी थी और उसके सामने वाले लैपटॉप मैं कुछ चालू था

लैपटॉप पे कैमरा के 4 स्क्रीन थे

एक पर एक शख्स एक औरत के मुँह मैं आपने मुसल लुंड उस औरत के मुँह मैं घुसा रहा था

दूसरे स्क्रीन पर एक नाजुक खूबसूरत लड़की वोह सब देख रही थी और उस लड़की को कैमरा में देख उस लैपटॉप देखने वाले आदमी का लुंड फैन फ़ना रहा था

और वोह शख्स और कोई नहीं प्रोफेसर दस था

दस :- अह्ह्ह्ह दोपहर से 100 बार ये देख चूका हु अहह ये नाजुक पारी तोह मैं कुछ करू उससे पहले हे जल मैं अटक गई इसको तोह बड़ा आसान होगा इस लुंड का गुलाम बनाना अह्ह्ह देखो कैसे मेरे लुंड को घूरे जा रही हैं अह्ह्ह्ह अगर कल ये शार्ट ड्रेस मैं आयी तोह कल हे इसको गरम कर के पानी निकल दूंगा देखु तोह कैसा होता हैं 20 साल के जवान लड़की का तजा पानी ...ahhhh...ahhh...

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दस के सामने नम्रता की सूरत और उसका लिबाज आ जाता हैं उसके बदन का आकर उसके अंदर की गर्मी उसका मासूम चेहरा उसका कमसिन गोरा रंग , दूध जैसा बदन , बड़े बड़े बॉल्स और गांड का उछाल ....सब को इमेजिन कर उसका लुंड तप जाता हैं .......

और एक बार नम्रता को सोच के दस का लुंड निढाल हो जाता है और वोह भी नींद के अघोष मैं चला जाता हैं

मॉर्निंग .........

आअज नम्रता के लिए बड़ा दिन था वोह दस के बारे मैं सब जान चुकी थी पर फिर भी उसने कोई कठोर निर्णय नहीं लिया था वोह बस अपने डांस पे फोकस करना चाहा रही थी और उन सब चीजों को नजर अंदाज कर रही थी

कुछ देर के लिए नम्रता के मन मैं शार्ट ड्रेस वाली बात घूमती हैं पर वोह अपने डिसिशन पे रहती हैं और सुन्दर से कमीज़ और टाइट लेग्गिंग्स पहन लेती हैं और कॉलेज के लिए निकल जाती हैं......

यहाँ दस अपने केबिन मैं था और आज उसको बस नम्रता का इंतज़ार था ..........

यहाँ कॉलेज मैं पोहचने के बाद नम्रता को पता था उससे कहा जाना हैं उसके कदम अब लड़ काढ़ने लगते हैं कुछ भी हो आखिर वोह थी तोह एक बच्ची हे पर मन बोहत स्ट्रिक्ट था उसका कदम लड़ खड़ा रहे थे पर पैशन क्या होता हैं इसका दूसरा नाम था नम्रता हर एक चीज वोह लगन से करती और यही नम्रता की खासियत थी और आगे जेक कमजोरी भी ................

यहाँ दिमाग मैं दस के कुछ अलग हे चल रहा था उससे नम्रता के आने के आहात होने लगी थी और वोह अपना एक्सपीरियंस दिमाग भगा रहा था.........

और तभी केबिन का दरवाज़ा खुलता हैं और आवाज आती हैं

नम्रता :- सर क्या मैं अनादर ावु ....

दस :- अफ़्कौर्स बीटा ये कोई पूछने वाली बात हैं ..

नम्रता :- यस सर बूत सर आज मैं बैठ नहीं सकती ...हम प्रैक्टिस करते हैं एंड लेक्चर भी अटेंड करने हैं सो स्टडी से फोकस नहीं हटना चाहिए .......

ये सुन दस थोड़ा सरप्राइज होता हैं बूत...

दस :- ok बीटा ..ी क्नोव ु र फोकस्ड ...

नम्रता :- मतलब समझी नहीं मैं

दस :- मतलब तुम एक होनहार स्टूडेंट हो एंड फोकस्ड भी सो ी लिखे ु र ऐटिटूड ...

नम्रता :- थैंक यू सर

दस मन मैं :- ( अह्ह्ह बोहत देखे ऐसे ऐटिटूड , और कैमरा में तेरा फोकस कहा था सब देखा मैंने ...उफ़ कितनी घिनौनी होती हैं ये संस्कारी लड़किया कभी एक्सेप्ट क्यू नहीं करती जल्दी से क्या मजा आता हैं इन्हे ऐसा खुद को प्रेजेंट कर के ........ये भी वही मॉल हैं लग रहा था ये कुछ अलग हैं )

नम्रता :- सर ! सर कहा खो गए सर

दस :- है चलो बाजु वाले क्लास रूम मैं चलो

दोनों भी वह पोहच जाते हैं दस वह के चेयर पैन बैठ जाता हैं....

नम्रता :- सर क्या मैं अकेली हु जोह डांस मैं हु बिकॉज़ यहाँ कल भी कोई नहीं था और आज भी नहीं

दस :- बोहत लोग हैं बूत तुम ट्रेडिशनल डांस मैं अकेली हो और मुझे ट्रेडिशनल मैं इंटरेस्ट हैं सो इसलिए तुम मेरे सामने हो

नम्रता :- अच्छा ऐसे बात है. सो आपको पसंद हैं ट्रेडिशनल ?

दस :- है बूत तुम जोह करती हो वोह नहीं पसंद .....

नम्रता :- मतलब समझी नहीं मैं सर

दस :- तुम टिपिकल ट्रेडिशनल करती हो और अब वोह ओल्ड हो चूका हैं

नम्रता :- सर बूत ी लिखे पुरे फॉर्म ऑफ़ डांस

दस :- यस बीटा ी आल्सो लिखे आईटी बूत अब चीजे बदल रही हैं ट्रेडिशनल मैं भी एक फ्लेवर ऐड हुवा है. मॉडर्न का सो तुम अडॉप्ट कर सकती हो ....

नम्रता :- है सर अगर आप बताओगे वैसा करती जावूँगी .....

दस :- चलो फिर अस ा वार्म उप तुम्हारा बेस्ट फॉर्म दिखाओ........

नम्रता :- ok सर

और नम्रता अपनी पोजीशन लेती हैं

और यहाँ से दस का नयन सुख चालू होता हैं......

आअज वोह सबसे पहली हर काबुल करता है क्यू की नम्रता ने शार्ट ड्रेस नहीं पहना था पर जोह भी पहना था वोह देख दस खुश था पर उसको अपनी हर सत्ता रही थी

दस ( अहह लड़की इतनी भी आसान नहीं हैं अक्सर यह मैंने कोई कमी नहीं छोड़ी पर ये भी एक्सेप्ट हैं की आसान नहीं हैं ये काम पारी )

दस का अब्ब्ब पूरा ध्यान नम्रता को ताड़ने में था वोह आपने आँखों से नम्रता का जवान बदन स्कैन कर रहा था और उससे नेक्स्ट लेवल मजा आए रहा था

आज उसने शुरवात निचे से किए थी...

अह्ह्ह्ह क्या मजेदार रंग और लेग्स आज तोह टाइट लेग्गिंग्स थी तोह लेग्स का तिघटनेस और मजा दे रहा था

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उफ्फ्फफ्फ्फ़ जांघ से होता हुवा वोह जवान कोमल गांड का गोलाकार आकर लुंड को तापा रहा था क्या कर्व्स थे गांड के

वोह मुस्कान और वोह भरा हुवा बदन ...उफ़

उम् इतनी काम उम्र मैं अह्ह्ह ये भरी जवानी को दस आपने अंदर के आग को समां नहीं प् रहा था उसके सामने काम पारी थी जोह उसके हतियार को जगा रही थी ......

नम्रता आपने डांस को बड़े नजाकत से चालू करती हैं और दस के आँखों मैं आँखे दाल कर आपने कातिल ादाओ की पेशकश चालू करती हैं .......

दस की आंखे नम्रता के आँखों मैं खोने लगती हैं वोह बस नम्रता को और उसके नशीली आँखों को देखे जा रहा था ...

तभी नम्रता का दुपट्टा उसके मुलायम भरी भरकम उभर से खिसक जाता हैं और दस को नम्रता के ुसस्स नजाकत का दर्शन होता हैं जिस के लिए किसी भी बुड्ढे या जवान के मुह्ह से पानी टपक जाए ..... दस की आँखे बस उस सुन्दर सुडोल गरम जवानी को टटोल रही थी जोह उस दुप्पटे से अब्ब बहार आ रही थी ...

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दुप्पटा ुसस्स खजाने के ऊपर से हैट जाने के बाद दस का लुंड उस सुंदरता को सलामी देता हैं और मुह्ह से एक हे शब्द निकलता हैं

दस :- अह्ह्ह्हह गजब .... लाजवाब उफ़

नम्रता की वोह दरार जोह उसके ड्रेस से दिख रही थी वोह एक मातुरे लेडी की तरह लग रही थी उसमे एक परफेक्शन था जोह शादी के बाद भी कही औरतो में नहीं आटा ....और यही एक वजह थी नम्रता के कामबदन की जोह किसी को भी गरम कर सकता था

वोह नजारा देख दस से रहा नहीं जाता और वोह आपने लुंड को हल्का हल्का सहलाने लगता हैं .... नम्रता आपने हे दुनिया मैं नाच रही थी पर तभी उससे अलग सा महसूस होता हैं और वोह दस को देख रुक जाती हैं ......

दस :- क्या हुवा बीटा रुक क्यू गयी बोहत अच्छा कर रही हो ...

नम्रता :- बस सर अब्ब आप बताओ मुझे क्या करना चाहिए .....

दस :- बीटा डांस तोह तुम्हारा जबरदस्त हैं ऐसा ट्रेडिशनल मैंने किसी को करता नहीं देखा पर

नम्रता :- पर क्या सर

दस :- वक्त के साथ हमें भी बदलना चाहिए

नम्रता :- मतलब क्या करना चाहिए मुझे सर बताओ न .

दस :- यही की तुम्हे खुद मैं मॉडर्न फीचर्स ऐड करने होंगे

नम्रता :- जैसे की

दस :- फील आना चाहिए उस मैं एक स्पार्क

नम्रता :- स्पार्क ? ...

दस :- है एक स्पार्क की कमी हैं बस

नम्रता :- वोह कैसे आएगा सर ...

दस :- अब्ब्ब मेरी उम्र हो गई वार्ना दिखता तुम्हे ....

नम्रता :- अआप को भी डांस आता हैं सर ?

दस :- है किया करता था एक ज़माने मैं

नम्रता :- वाओ ...सर तोह दिखाए न

ये सुन के दस के अंदर का कमीना पैन खुश हो रहा था सब कुछ उसके मुताबिक चल रहा था

दस :- अरे नहीं नहीं अब्ब नहीं होगा मुझ से और अकेले तोह बिलकुल नहीं

नम्रता :- सर में हमेशा कुछ नया सिखने के लिए रेडी रहती हु आप बेझिझक सिखाइए

दस के अंदर का शैतान

( अह्ह्ह सीखने तोह मैं बोहत कुछ सीखा दूंगा तुझे )

दस :- पर अब्ब मुझे ऐसे शोभा नहीं देता

नम्रता :- मतलब

दस :- अब्ब डांस हैं तोह मुझे तुम्हे चुना होगा और अब्ब ये सब कोई देख लेगा तोह ाचा नहीं हैं

नम्रता थोड़ी सेहम से जाती हैं पर एक गुरु से सिखने मैं क्या खराबी हैं और नम्रता उत्साह से कहती हैं

नम्रता :- सर मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं और कोई क्यू कुछ बोलेगा मैं सिख रही हु आपसे एंड लर्निंग कहा से भी ले जाती हैं

दस :- राइट हो पर तुम्हे चलेगा न मैं तुम्हारे साथ डांस करू तोह

नम्रता :- ख़ुशी होगी सर मुझे

दस ( अह्ह्ह ख़ुशी तोह तुझे अब्ब होगी बाद मैं तुम्हे मैं सब ख़ुशी दूंगा मेरी जान )

दस आपने खुर्सी से उठ जाता हसीन उसके चल मैं एक अलग कॉन्फिडेंस था यहाँ नम्रता दस को आपने तरफ आता देख थोड़ा पीछे हो जाती हैं उसने है तोह कहा था पर अब्ब उसे भी पता नहीं था की आगे क्या होने वाला हैं

नम्रता और दस अब आमने सामने थे ...

दस :- तैयार हो न नम्रता

नम्रता :- है है सर...

दस :- देखो अगर थोड़ी भी हीच किचहात हो तोह अभी कह डोह क्यू की आज कल की मॉडर्न लड़कियों को नहीं पसंद ऐसा की कोई अधेड़ उम्र का आदमी उसके बदन को छुए और पास ले....

ये सुन नम्रता सेहम जाती है

दस ने भी गेम खेला था उसने इंदिरेक्ट्ली कह दिया था की वोह क्या करने वाला है. और वोह नम्रता को सूचित कर रहा था

नम्रता :- न्नन्न नहीं सर ऐसा कुछ नहीं बस आप मुझे सिखाओ और मैं सिख जावूँगी ाल मेरे टीचर हो तोह आप पे विश्वास हैं मेरा

ये सुन दस कामिनी मुस्कान देता है. और कहता हैं

दस :- पता हे मुझे और एक टीचर का काम होता हैं अपने स्टूडेंट का ख्याल रखना और उसको अच्छा सीखना

नम्रता एक मुस्कान देती हैं और आँखों में देख कहती हैं

नम्रता :- तोह kare...adha घंटा बचा हैं लेक्चर हैं बाद में ...

दस :- अफ़्कौर्स अब्ब कर हे लेता हु बड़े दिन बाद बदन को रहत मिलेगी ....

ये सुन नम्रता शर्मा जाती हैं ...

दस हलके से अपने हैट नम्रता के कमर पे रख देता हैं और म्यूजिक चालू होती हैं....

नम्रता को अभी कुछ नहीं लग रहा था पर दस के दिमाग में बोहत गन्दा खेल चालू होता हैं जोह सिर्फ उसे पता था .....

दस नम्रता के कमर पे एक हैट रख उसका एक हैट अपने हैट में पकड़ लेता हैं और दोनों झूमने लगते हैं .....

अब्ब्ब नम्रता को कुछ महसूस होने लगा था

दस की काली उंगलिया उसके नाजुक कमर पे घूमने लग चुकी थी और हरामी दस ाब्ब आपने दूसरे हैट को नम्रता के पेट के यहाँ ला चूका था दोनों की आहे एक दूसरे को देख रही थी

दस हटो का खेल खेल रहा था ...

कमर की उंगलिया अब्ब आपने कमल दिखा रही थी और दूसरा हैट अब पेट से घूमता हुवा नम्रता के सुडोल बदन के यहाँ जाता हैं...

नम्रता अब्ब उस डांस में खो गई थी उसको आपने बदन पे कुछ महसूस हो रहा था

और तभी दस नम्रता को आपने नजदीक खींच लेता हैं और नम्रता भी दस के गिरफ्त मैं आए जाती हैं .....

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ दस नम्रता के कमर को सेहला देता हैं और आपने दूसरा हैट नम्रता के ामो के निचे रख कर उसे सेहला देता हैं

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नम्रता को अजीब सा महसूस होता है. पर दस के बहो में उससे अलग से गर्मी महसूस होती हैं और वोह दस के और करीब हो जाती हैं

दस नम्रता को अब्ब किसी अजगर की तरह कास लेता हैं और नम्रता का कोमल बदन दस के बदन से भीड़ जाता हैं

नम्रता को कुछ होने लगता हैं उसकी सांसे तेज होने लगती हैं और वोह दस के मुँह पैन अपनी गरम गरम सांसे छोड़ रही थी उसके अंदर के पुरे रूह को एक कपकपी सी महसूस हो रही थी

और तभी दस नम्रता को म्यूजिक के साथ घूमते घूमते आपने कमर के यहाँ का हैट कास के नम्रता के पीछे ले जाता हैं और एक सिहर से निकल जाती हैं नम्रता के बदन से .......

और यहाँ निचे नम्रता को महसूस होता हैं की सर का हैट उसके कमर से होते हुवे उसके उभरी हुवी घुमावदर गांड पे जा चूका था .... नम्रता एकदम शॉक थी पर दस एकदम नार्मल एक्सप्रेशन दे रहा था जैसे कुछ हुवा हे न हो ....

यहाँ दस का कला कड़क हैट नम्रता के 34 के मलाईदार गांड पे जा के बैठ जाता हैं और नम्रता के बदन से एक उत्तेजना की लहर दौड़ जाती हैं

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ क्या नजारा था .....

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म्यूजिक के धुन पे दस का कला कड़क हैट नम्रता के गांड पे धीरे धीरे घूमने लगता हैं और नम्रता की हालत ख़राब हो जाती हैं

किसी मर्द का आपने पर्सनल प्राइवेट अंग पैन ये उसका पहला स्पर्श था और ये पहला स्पर्श किसी भी लड़की के लिए एक अलग अहसास होता हैं और वोह अहशास नम्रता आपने बुड्ढे प्रोफेसर से ले रही थी .....

नम्रता का शरीर अब्ब एक अलग रोमांच महसूस कर रहा था और क्या पता नम्रता ये सब महसूस कर के अच्छा फील करने लगी थी उसको एक अलग सा गरम अहसास हो रहा था दस के बदन से .....

अब्ब दस अपनी अगली चल चलते हुवे आपने दोनों हटो को नम्रता के पीछे ले जाता हैं और नम्रता को लिफ्ट कर के उठा लेता हैं

नम्रता आपने आँखे बंद कर उस म्यूजिक के ऊपर झूम रही थी दस उसके कमर को पकड़ हैवे में लहरा रहा था और थोड़ी देर मैं निचे रख देता हैं आउट वही वोह चांस मर के आपने दोनों हटो को धीरे से नम्रता के मलाईदार गांड पे रख देता हैंन..

अह्ह्ह इस्सस बार नम्रता के मुँह से हलकी से सिसकक निकल जाती हैं और वोह महसूस करती हैं की सर के दोनों हैट अब्ब उसके पीछे वाले अंग पैन थे

दस हलके से आपने दोनों हटो से नम्रता की मुलायम गांड रगड़ देता हैं और दोनों नम्रता के गांड के भाग को किसी पनीर समझ के सहलाने लगता हैं नम्रता को ये अहसास अलग सा रोमांच प्रदान करता हैं...

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दस आपने अनुभव का इस्तमाल कर चालाकी से नम्रता के कमीज को हल्का हल्का ऊपर कर रहा था और नम्रता के टाइट लेग्गिंग्स से नम्रता को दस के कड़क मर्दानी हटो का अहसास आपने अंधरुनि गांड के छेद पैन महसूस हो रहा था

पर दस उस अंधरुनि दरार को न छेड़ते हुवे नम्रता को उसी हालत पे रखता हैं और म्यूजिक के साथ नम्रता को पीछे से पकड़ लेता हैं और घूमने लगता हैं.....

अब्ब्ब म्यूजिक तेज हो चुकी थी नम्रता पूरी तरह से आपने कण्ट्रोल खो चुकी थी और दस आपने मंद गेम्स खेल रहा था वोह झूमता हुवा नम्रता को दिवार से चिपका देता हैं और खुद नम्रता के पीछे चला जाता हैं और नम्रता के गरदन पे आपने कड़क हैट घूमने लगता हैं....

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ नम्रता के 34 के बड़े चुके दिवार से सात चुके थे और नम्रता आपने गरदन पैन अजीब सा स्पर्श महसूस कर रही थी

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नम्रता :- अह्ह्ह सर क्या कर रहे हो....

दस नम्रता की बात अनसुनी करता हैं और आपने पुरे मन से नम्रता की गरदन सेहला देता हैं

अह्ह्ह नम्रता की और एक सिसक निकल जाती हैं और तेजी से उसके स्तन दिवार पे सात के ऊपर निचे हो रहे थे

दस को पता चल जाता हैं की ये चीज ज्यादा सेक्सुअल न हो इसलिए वोह नम्रता को फिर से म्यूजिक के धुन पे अपनी और खींच लेता हैं

और अगले हे पल नम्रता और दस एक दूसरे के सामने थे नम्रता की नजरे निचे थी दस उस का हैट पकड़ के उसको फिर से अपनी बहो मैं भर लेता हैं ......

नम्रता हलके से आवाज मैं कहती हैं

नम्रता :- सर कोई कोई आए जायेगा ....

दस :- अहम पता हैं तुमने तोह कहा था तुम्हे सीखना हैं एंड कोई देख भी ले तोह मैं सिर्फ सिख रही हु

नम्रता :- है पर अभी जोह चल रहा हैं वोह किसी ने देख लिया तोह अच्छा नहीं होगा

दस :- क्या चल रहा हैं अभी नम्रता बीटा

नम्रता :- मैं ऐसे अभी आपके करीब हु

दस :- तोह क्या हुवा हम डांस कर रहे हैं

नम्रता :- है पता हैं पर पर

दस :- क्या हुवा बीटा मैं अच्छा नहीं करता डांस

नम्रता :- नहीं ऐसे बात नहीं आप ाचे हो

ये सुनते हे दस नम्रता को आपने और करीब खींच लेता हैं और नम्रता दस के पुरे बदन से सात जाती हैं

नम्रता का ऊपर निचे होते हुवे स्तन अब्ब्ब दस के साइन से पूरी तरह से भीड़ चुके थे और दस आपने साइन को नम्रता के बूब्स पे प्रेशर देते हुवे कहता हैं

दस :- बोहत अच्छा कर रही हो तुम ...जल्द सिख जाओगी ....

नम्रता ये सुन गरदन झुका लेती हैं और शर्म से पानी पानी हो जाती हैं

नम्रता का ये नजाकत वाला शर्माना दस के लुंड को खड़ा कर देता हैं और उसका लुंड तेजी से पंत से टाइट होक नम्रता के छूट के यहाँ सात जाता हैं

नम्रता को आपने निचे झट से कुछ महसूस होता हैं और वोह समज जाती हैं उससे क्या चुभ रहा हैं ....और वोह सोच एक रोमांच भरी लहर पुरे बदन से होती हुवे छूट के यहाँ दर्द करती हैं

नम्रता :- ससससस अह्ह्ह .

लोहा गरम होता हुवा देख दस आपने एक हैट गांड के दरार पे टिका देता हैं

नम्रता सेहम जाती हैं

और दस हलके से उस दरार मैं आपने एक ऊँगली को सेहला देता हैं .....

अह्ह्ह्हह

और यहाँ ऊपर नम्रता के स्तन पैन दस का एक हैट घूम जाता हैं पर हल्का सा

आपने दोनों निजी आंग पे जोह वर हो रहा था वोह महसूस कर नम्रता वही पुतला बन के कड़ी हो जाती हैं

नम्रता के तरफ से कोई रिस्पांस न देख के दस एक कामिनी मुस्कान देके आपने एक ऊँगली से नम्रता के लेग्गिंग्स के ऊपर से नम्रता के कोमल गांड का जवान छेद ढूंढ लेता हैं

यहाँ ऊपर नम्रता के स्तन एकदम टाइट हो चुके थे दुपट्टा तोह कब का निकल चूका था और ुसस्स मुलायम 34 के स्तन पैन इस्सस बार दस का कला कड़क हैट तेजी से मसलते हुवे घूम जाता हैं

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उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ नम्रता के मुह्ह से दर्द भरी सिसकारी निकल जाती हैं

अह्हह्ह्ह्ह ouchhhhhhhh.....sir ....

दस को उसकी हद पता थी उसको पता था शिकार को कितन पकाना हैं और कितना नहीं वोह आपने दूसरे हैट को अभी भी नम्रता के दरार मैं सेहला रहा था

जैसे जैसे नम्रता को महसूस हो रहा था की सर का निचे वाला हैट और उसकी ऊँगली कहा जा रही हैं वैसे वैसे नम्रता के हाव भाव बदल रहे थे

और दस आपने कमीना पैन आखिर दिखा हे देता हैं एक कोमल जवान पोती के उम्र के लड़की के लेग्गिंग्स के ऊपर से वोह उसे जोह चाइये था वोह ढूंढ हे लेता हैं और वोह और कुछ नहीं नम्रता के नाजुक गांड के छेद का लोकेशन था

समय जाया न करते हुवे वोह ुसस्स छेद को आपने ऊँगली से पूरी तरह से कुरेद देता हैं उसकी एक कड़क ऊँगली नम्रता के लेग्गिंग्स को ुसस्स छेद मैं घुसा देती हैं दस की ये कामिनी हरकत से नम्रता का पूरा बदन कम्प उठता हैं ....

उसको बोहत दर्द से महसूस होता हैं की उसके लेग्गिंग्स का कपडा उसके छेद मैं घुस रहा हैं

नम्रता:- अह्हह्ह्ह्ह सर रररररररर अहह

नम्रता का चेहरा सुख सा जाता है वोह दस को मनो कह रही हो अहह ऐसा मत करो दस भी उसके चेहरे को पढ़ लेता हैं और ुसस्स भावुक हो रहे चेहरे मैं खो जाता हैं

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उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ नम्रता के कमसिन चेहरे पैन एक साथ कई सरे एक्सप्रेशन थे पढ़ पाना बोहत मुश्किल था

रोमांच , दर , घबराहट , अच्चर्य , लस्ट , दर्द , रसीलापन

सब था एक वक्त के लिए दस को नम्रता के ोठो का रास पिने का मन हुवा ऐसा लग रहा था अभी जा के नम्रता के रास को चूस ले पर दस बोहत शैतान था वोह नम्रता को अब्ब ऐसे पूछता हैं जैसे कुछ हुवा हे न हो

दस :- 5 दिन बाकि हैं फंक्शन को बोहत प्रेपर करना हैं तुम्हे सो कल से ज्यादा प्रैक्टिस होगी

नम्रता गरदन ऊपर कर है मैं मुंडी हिलती हैं ...और कहती हैं ..

नम्रता :- मुझ से यहाँ नहीं होगी प्रैक्टिस

दस :- तोह कहा करनी हैं

नम्रता :- पता नहीं ....

और दस का फसा सही गिरता हैं ...आज नम्रता को उसने इतना पानी पानी किया था की वोह यहाँ रुक हे नहीं सकती थी

दस :- तोह मेरे पास एक जगह हैं जहा कोई आता जाता नहीं और एक शैतानी स्माइल देता हैं

तोह वह हम जैम के प्रैक्टिस कर सकते हैं वोह ऐसे जगह हैं जहा आदमी खुद से मिलता हैं अपनी अंदर के बात सुनता हैं क्या तुम वह प्रैक्टिस करना चाहोगी नम्रता

नम्रता :- कककक कहा है. वोह जगह ...

दस :- यही कॉलेज के पीछे कल हम कॉलेज छूटने के बाद जायेंगे वह अगर अच्छा लगा तोह करेंगे

नम्रता अपनी गरदन है मैं हिला देती हैं

और ये उसके जीवन की सबसे बड़ी भूल थी

और नम्रता वह से गार्डन निचे कर जाने लगती हैं .....

दस भी उससे जाने देता हैं ....क्यू की 45 मिनट्स हो चुके थे

नम्रता वह से बहार निकलने लगती हैं और रूम से निकल आती हैं ...

बहार आते हे उसके चेहरे का दर निकल जाता हैं उसके चलने की वजह से उसका पूरा ध्यान आपने गांड के छेद पैन था

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ वोह महसूस करती हैं की धीरे धीरे अह्ह्ह उसके छेद के अंदर घुसी हुवी लेग्गिंग्स का कपडा बहार आए रहा था और उससे एक वक्त के लिए लगता हैं सर की ऊँगली वह से बहार निकल रही हैं ...

वोह बहार निकलते हे उसके चेहरे का भाव कुछ कामुकता से भर जाता हैं ...

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और खुद से हे वोह कहती हैं ....

अगर आज मैंने सच मैं शार्ट ड्रेस पहना होता तोह क्या होता ............

दस का निशाना एकदम सही लगा था .....

आपको क्या लगता हैं नम्रता के इस्सस कामुक एक्सप्रेशन के पीछे क्या वजह थी ?

तो बे कॉन्टिनोएड.............
 
डिअर रीडर्स हार्ट

थैंक ु वैरी मच , थैंक्स फॉर कमैंट्स एंड रिस्पांस

ये कहानी जब से चालू हुवी हैं हमने बोहत लाइक्स , व्यूज एंड क्वालिटी रिस्पांस पाया हैं

बूत आज ी थिंक इस कहानी के हिस्ट्री का सबसे अच्छा रिस्पांस रीडर पॉइंट ऑफ़ व्यू से मुझे आज मिला हैं एंड नॉट ओनली रिस्पांस , रिस्पांस की क्वालिटी , एनालिसिस एंड ट्रू ओपिनियन ये सब देख के बोहत अच्छा लगा बिकॉज़ एक राइटर को कितने भी लाइक्स मिले व्यूज मिले बूत जब तक रीडर से राइटिंग रिस्पांस नहीं मिलता तब तक कुछ अधूरा अधूरा सा लगता हैं बूत वोह भी अपने पूरा कर दिया आगे भी ऐसे हे कमैंट्स चालू रखे नमस्कार

बोहत सारा थैंक यू एंड कीप कमेंटिंग हार्ट

नेक्स्ट episode ओने थे वे , बे रेडी फॉर डार्क जोन चीता
 
नम्रता ....EK....PAHELI :- EPISODE 09

( वेलकम तो डार्क जोन ).

नोट :- हो सके तोह इस अपडेट को रात मैं पढ़िए

रत का समय था तक़रीबन रत के 2 बज चुके थे एक घर मैं घाना अँधेरा था और बोहत साडी किताबे पड़ी हुवी थी उस अँधेरे मैं स्टडी टेबल पे एक बल्ब चालू था और उस लाइट के निचे एक शख्स बड़े इत्मीनान से किताब पढ़ रहा था उसकी बड़ी बड़ी आंखे उस किताब के पन्नो पैन थी कला सा चेहरा अंधरे मैं गायब सा हो गया था हैट मैं एक सिग्रेटे थी किताब पढ़ते वक्त वोह सिग्रेटे के काश ले रहा था उसकी आंखे मनो लाल हो चुकी थी पर वोह काफी मन लगा के वोह किताब पढ़ रहा था वोह शख्स और कोई नहीं प्रोफेसर दस था

किताब का नाम था ....थे डेमों.....

दस के पास किताबो का भंडार था सोच से वोह हरामी और नीच था पर दिमाग से काफी तेज और हमेशा से होशियार

वोह किताब पढ़ते वक्त दस के दिमाग मैं दर्द हो रहा था और उसके विचारो मैं उसको दर्द महसूस हो रहा था उसकी आंखे कुछ सोच के लाल हो रही थी और बदन अकड़ रहा था किताब मैं वोह इतना खो गया था की उसका दिमाग अलग से उसके पास्ट लाइफ के बारे में सोच रहा था दस को अब तक ये भी मालूम नहीं था की उसके माँ - बाप को हैं अनाथ आश्रम मैं वोह पला बढ़ा बाद मैं उसको इस सोसिटी ने रीलीज़ कर के दिया की तू कितना कला और गन्दा दीखता हैं पर दस दिमाग से तेज था इसलिए उसने वोह सब प् लिया जोह पैसे और दिमाग से प् सकता था पर कभी लाइफ न उससे बीवी का प्यार मिला न औलाद का और न हे लोगो का . बचपन में वोह खुद मैं रहता और अपने सोच से चलता

अपने जीवन मैं उसने रूप और सुंदरता इसका अलग हे डेफिनेशन बना के राखी थी जोह हमें पता हे हैं .

आपने गरम दिमाग को वोह काबू कर लेता हैं और बुक को बंद कर देता हैं अपने रूम के दरवाजे के पीछे वोह चल के जाता हैं और दरवाजा बंद कर देता हैं और आपने हैट मैं रखा हुवा मार्कर दिवार के पीछे वाले हिस्से पे लेके जाता हैं और उस दिवार पैन बोहत सरे नाम थे

दस कामिनी स्माइल देते हुवे अपने हटो से 50 अकड़ा डालता हैं और कुछ इस प्रकार नाम लिख देता हैं

50) नम्रता

और शैतानी स्माइल देते हुवे मार्कर को फेक देता हैं और अपने बीएड पैन गिर जाता हैं ..........और उसके आँखों के सामने आज हुवे नम्रता के साथ के पल घूमने लगते हैं....

नेक्स्ट डे.................

नम्रता नींद से उठ चुकी थी हमेशा की तरह उसके माँ डैड काम पैन निकल चुके थे कल रत को नम्रता बोहत देर से सोई थी उसकी आंखे जगी थी पर रत को वोह सोच और विचार मैं खो गयी थी आज उतने के बाद उसको महसूस हुवा की उसका पूरा अंग दुःख रहा था उसके मन मैं आज किसी अनजान चीज का दर था

कल हुवे दस सर के डांस के बाद नम्रता खुद को बोहत सवालो के घेरे मैं दाल चुकी थी पर रत मैं उससे किसी भी सवाल का जवाब नहीं मिला था बस दस सर के इतना करीब आने से विचारो मैं उससे उनकंफर्टबले फील हो रहा था पर आखिर वोह कर तोह डांस रही थी इसलिए वोह दस सर के साथ हुवी नजदीकी को इग्नोर कर रही थी

पर है दस सर के बारे मैं उसके मन मैं अब्ब सवाल पैदा होना चालू हो चूका था उसको अब्ब नार्मल सा शक होने लगा था कही दस सर उसके ऊपर .....

नहीं nahi....main एक स्टूडेंट हु और एक टीचर कभी ऐसा सोच नहीं सकता और जितनी इज़्ज़त पूरी कॉलेज दस सर को देता हैं उससे तोह मैं ऐसा हरगिज़ नहीं सोच सकती पर सर उस औरत के साथ ?

बूत वोह उनकी पर्सनल लाइफ थी मुझे उसमे ध्यान नहीं देना चाहिए

पर उन्होंने मुझे क्यू उस दिन शार्ट ड्रेस पहन के आने को कहा ......एक हद तक सही भी थे वोह ट्रेडिशनल मैं डांस करना मुश्किल होता हैं .....पर मैं अपनी मर्यादा नहीं भूल सकती मुझे ऐसा हे रहना पसंद आता हैं ......और कॉलेज मैं शार्ट ड्रेस तोह बिलकुल नहीं

तभी नम्रता के मन मैं सवाल आता है. आखिर आज कॉलेज के बाद दस सर उसको कहा प्रैक्टिस के लिए लेके जाने वाले थे

और तभी नम्रता को दर का अहसास होता हैं सच मैं वह कोई नहीं होगा तोह ?

तभी उसको दस सर की बाटे यद् आती हैं

5 हे दिन बाकि हैं फंक्शन के लिए और आज से 4 तोह मुझे डांस पे फोकस करना चाहिए न की इन् सब चीजों को सोचने मैं और नम्रता आपने कपडे पहन कर रेडी हो जाती हैं.....

आज नम्रता के संस्कारी जीवन का बड़ा दिन था उससे नहीं पता था आज से वोह एक नयी दुनिया देखने वाली हैं ........

दिन शुरू हो जाता हैं आज दस पुरे दिन अपने केबिन मैं था और अभी भी वोह कुछ पढ़ रहा था टाइम निकलता जा रहा था

नम्रता भी अपने लेक्चर मैं लगी हुवी थी पर उसका मन उसमे नहीं लग रहा था वोह बस इन्ही ख्यालो मैं थी की आज का दिन उसका कैसे जायेगा उसके खूबसूरत चेहरे पैन एक अलग से चमक थी और बदन मनो चमक रहा था

ऐसे तैसे दोपहर के 5 बज जाते हैं और कॉलेज ख़तम हो जाता हैं और नम्रता के चेहरे पैन स्माइल थी वोह अब्ब अपने पैरो का रास्ता दस के केबिन के तरफ बढ़ा रही थी चलते चलते उसको यद् आता हैं की किंजल मिस 2 दिन से कॉलेज नहीं आए रही पर अभी उसका ध्यान दस सर के केबिन के तरफ था अपने कंधो पैन बैग लिए वोह आपने कदम बढ़ा रही थी तभी वोह केबिन के बहार पोहच जाती हैं और लम्बी से सास लेके अंदर जाती हैं

नम्रता :- सर ....मई ी के इन ...

दस का पूरा ध्यान बुक पढ़ने मैं था

नम्रता :- sir....sir...

तभी दस थोड़ा चौक जाता हैं और गर्दन ऊपर कर के देखता हैं और उसी नम्रता का सुन्दर सा रूप देखकने को मिलता हैं

दस नम्रता को नशीले आँखों से देख रहा था मनो उसमे वोह दुब हे गया था नम्रता के चेहरे पैन खिड़की से आ रहे सूरज के हलके किरण गिर रहे थे और वोह नम्रता को और खूबसूरत बना रहे थे .... नम्रता का ट्रेडिशनल वियर उससे और भी कामुक और सुंदरता से भरपूर बना रहा था उसके अंग अंग को जितना देखो उतना काम था

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ नम्रता का काजल , नम्रता के रसीले गुलाबी यह , दूध जैसा गोरा रंग और सुडोल बदन ये देख दस खो सा गया था

नम्रता के ुसस्स सुंदरता को देख उसके मुँह से एक हे शब्द निकलता हैं

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माय परफेक्ट एंजेल......

दस बास नम्रता को देखते जा रहा था मनो खो सा गया था ....

नम्रता :- सर ....क्या हुवा मैं अंदर ावु न बोलिये सर

और तभी दस आपने दुनिया से बहार आता हैं और नम्रता को हड़बड़ाते हुवे कहता हैं

दस :- यह हहह है है ...के इन

और दस आपने हैट मैं राखी किताब को रख देता हैं किताब का नाम था

थे DEVIL'S ऑय .......

नम्रता उस किताब को देखती हैं और इग्नोर करती हैं .....

दस :- बड़ी जल्द आगयी लेक्चर नहीं थे क्या ?

नम्रता थोड़ी चौक जाती हैं और कहती हैं

नम्रता :- सर 5 बज चुके हैं और कॉलेज छूट चूका हैं

दस :- क्या 5 बज गए उफ़ पढ़ते पढ़ते खो सा गया

नम्रता :- क्या पढ़ रहे थे सर अआप

इस सवाल से दस उनकंफर्टबले हो जाता हैं और तभी उसका ध्यान उसके किताब पे जाता हैं वोह झट से वोह किताब उठा के अपने लाकर मैं रख देता हैं

दस :- कककक कुछ नहीं ऐसे हे ....

नम्रता को थोड़ा अजीब सा लगता हैं ...

नम्रता :- तोह सर कहा जाने वाले हैं हम

दस :- हैं एक जगह पर तुम तैयार हो न ?

नम्रता :- है सर अपने परफॉरमेंस और पैशन के लिए कुछ भी

दस :- बात सिर्फ उतनी नहीं हैं

नम्रता :- मतलब समझी नहीं सर मैं

दस :- हम जहा जाने वाले हैं वोह जगह बोहत शांत हैं और मंद को शांत करने वाली भी

नम्रता :- तोह अच्छी बात हैं न सर

दस :- है बात तो अच्छी हैं ..पर..

नम्रता :- पर क्या सर ?

दस :- ुसस्स जगह का पता सिर्फ मुझे हैं और उसका रास्ता हमारे कॉलेज से होते हुवे जाता हैं सो मैं तुम पे ट्रस्ट कर के वह लेके जा रहा हु

नम्रता :- समझ गयी सर मैं

दस :- क्या समझ गयी ?

नम्रता :- यही की आपका ट्रस्ट मैं नहीं तोड़ने वाली मुझे बस डांस से मतलब हैं जगह कोई भी हो सो ट्रस्ट में

नम्रता के बात से दस खुश हो जाता हैं और मन में कहता हैं

( अह्ह्ह ट्रस्ट का टेस्ट तोह पास हो गयी ये उम् लड़की बड़ी तेज हैं मजा आएगा दस अहह )

दस :- गुड तोह मेरे पीछे चलना और चलते वक्त कुछ बोलना नहीं बस फॉलो करना मुझे

नम्रता :- है सर

और दस अपने केबिन से बहार निकल जाता हैं और नम्रता उसके पीछे चलने लगती हैं

दस अब्ब अपने केबिन से आगे हो जाता हैं और निचे सीढ़ियों पे उतरने लगता हैं वोह अपने कदमो की तेजी बढ़ा देता हैं नम्रता भी उसके पीछे चल रही थी ....

नम्रता मन मैं

( ये तोह रोज का रास्ता हैं सामने मेरी क्लास रूम वह बाकि क्लास रूम और आगे एग्जिट आखिर सर कहा लेके जा रहे हैं किसी दूसरे क्लास रूम मैं तोह नहीं )

और तभी दस नम्रता के क्लास रूम से राइट मोड़ ले लेता हैं और निचे उतर जाता हैं

नम्रता :- ( ओह निचे तोह स्टोर रूम हैं जहा पुराने बेंच और कबाड़ रकह जाता हैं )

दस निचे निचे उतर रहा था नम्रता भी उतर रही थी अब्ब्ब नार्मल लाइट काम हो रही थी और अँधेरा बढ़ रहा था निचे लाइट नहीं थी वोह दोनों स्टोर रूम मैं आ चुके थे

दस दिवार के यहाँ रूक जाता हैं और कमीने नज़रो से नम्रता को देखने लगता हैं

नम्रता दस को देख दर से जाती हैं क्यू की अँधेरे की वजह से दस का चेहरा उससे दिख हे नहीं रहा था .....

तभी उसका महसूस होता हैं की सर कुछ हटा रहे हैं

दस दिवार के यहाँ रखा बड़ा सा ब्लैक बोर्ड हटा देता हैं और सामने एक छोटा सा दरवाजा था जोह दस खोल देता हैं वोह दरवाजा खुलते हे बहार की तजा रौशनी अंदर आती हैं दस उस दरवाजे से बहार निकल जाता हैं

नम्रता भी वह से झुक के बहार निकल जाती हैं बहार निकलते हे सूरज की रौशनी नम्रता के खूबसूरती को बढ़ा देती हैं

आस पास बोहत साडी हरियाली थी वोह देख नम्रता को उत्सुकता और सवाल दोनों पैदा हो जाते हैं आखिर ये जगह कॉलेज के अंदर थी या बहार ...उसको अंदाजा लगाना मुश्किल था वोह दस सर से पूछने हे वाली थी की उसको यद् आता हैं की दस सर ने कुछ बोलने को नहीं कहा और वोह खुद को काबू कर लेती हैं ...

अब्ब्ब दस आपने कदम आगे की तरफ बढ़ा रहा था पर तभी वोह मुद के नम्रता को देखता हैं और रूक सा जाता हैं

नम्रता के भरे बदन वाले चल को देख वोह खो सा जाता हैं नम्रता का आक्रषण उसके दिल और दिमाग को काबू कर लेता हैं

उसकी नजर सिर्फ नम्रता के लचीले बदन पैन थी और नशीले आँखों पैन

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नम्रता के बदन का घेर ुसस्स उत्तेजना दे रहा था नम्रता के गांड का आयकर उससे उत्तेजित कर रहा था

नम्रता के चल मैं एक अलग हे मस्ती थी ..

और तभी नम्रता दस के पास पोहच जाती हैं

नम्रता :- सर अब्ब कहा जाना हैं

तभी दस होश मैं आ जाता हैं और कुछ न कहते हुवे आगे बढ़ने लगता हैं

5 मिनट्स बाद नम्रता के सामने एक बड़ा सा आधा बनाया हुवा बिल्डिंग का स्ट्रक्चर था जोह काफी पुराण था उसकी हालत बोहत ख़राब हो चुकी थी

वोह देख नम्रता को एक दर सा लगता हैं उसका लगता हैं कही सर उसे यहाँ न ले जाए और वही होता हैं दस उस खण्डार मैं चला जाता हैं

नम्रता भी पीछे चली आती हैं ...एक अलग सा अहसास नम्रता को होता हैं वोह आजु बाजु देखती हैं उस जगह को ऑब्सेर्वे करती हैं

चीजे काफी वीरान थी और सब टूट चूका था मनो कोई खण्डार हो

तभी दस और वोह एक जगह एंटर करते हैं जहा काफी सरे कमरे थे किसी क्लास रूम की तरह

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नम्रता वोह नजारा देख थोड़ी रोमांचित हो जाती हैं जगह तोह काफी ख़राब थी पर वह गन्दगी नहीं थी

दीवारे काफी ख़राब और काली हो चुकी थी एक सीधी ऊपर जा रही थी पर वोह भी टूटी हुवी थी सूरज के रौशनी से वोह जगह ठीक लग रही थी पर अँधेरे मैं किसी की भी हालत टाइट हो जाती

वोह नजारा देख नम्रता दर भी रही थी आखिर जगह हे ऐसे थी निचे काफी मिटटी थी और धुल भी वही एक कारन था जोह उस जगह को खण्डार बना रहा था

दस आगे बढ़ते हुवे एक रूम मैं घुस जाता हैं ......

नम्रता भी दस के पीछे उस रूम मैं घुस जाती हैं

और ुसस्स रूम मैं आ के नम्रता की आंखे फटी की फटी रह जाती हैं ....

इस्सस खण्डार में ऐसा कुछ होगा उससे यकीं नहीं होता ....

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उसके आँखों के सामने एक पुराने ज़माने के स्ट्रक्चर वाला आलीशान कमरा था जिसका निचे वाला सरफेस मजबूत लकड़ियों से बना था पुराने ज़माने की आलीशान झूमर था और बड़ी बड़ी खिड़किया जहा से सूरज की रौशनी अंदर आए रही थी बड़ा सा कमरा था जहा नजर मारो वह क्लीन था सामने एक बड़ी से आगे पीछे होने वाली खुर्सी थी उसके बाजु में एक छोटा टेबल जहा बोहत साडी किताबे और सिगरेट राखी हुवी थी

दस :- ये हैं वोह जगह कैसी हैं

नम्रता :- बबबब बोहत अच्छी हैं सर

दस :- बस अब मुझे कुछ सवाल मत पूछना मुझे पता हैं तुम्हारे मन मैं सवालो की छड़ी लग गई होगी पर कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिसका जवाब हमें न मिले वही अच्छा होता हैं समझी ?

नम्रता ये सुन चौक जाती हैं ..और कहती हैं

नम्रता :- ोोोू ok सर समझ गयी ...

तभी नम्रता के मन मैं सवाल आता हैं और वोह दस से पूछती हैं

नम्रता :- सर यहाँ साउंड सिस्टम कहा हैं

दस नम्रता का सवाल सुन उसे मुस्कान देते हुवे कहता हैं

दस :- बीटा यहाँ कोई साउंड सिस्टम नहीं हैं

नम्रता :- तो यहाँ प्रैक्टिस कैसे करेंगे

दस :- मोबाइल से काम चलना पड़ेगा बीटा

नम्रता ये आंसर सुन थोड़ी चौक जाती हैं पर उसे भी लगता हैं की इस खण्डार मैं कहा साउंड सिस्टम होगी

नम्रता :- सर तोह बताईये मुझे क्या करना हैं कोनसा डांस , कोनसा सांग ?

दस :- वोह तोह तुम कर चुकी हो बीटा ?

नम्रता :- मैं ? कब

दस :- पहले दिन तुमने जोह मुझे डांस कर के दिखाया था वही करना हैं तुम्हे बस मैं जोह बतावुंगा वोह इम्प्रूवमेंट करना

नम्रता :- जैसे की ?

दस :- जैसे की कुछ स्टेप्स , कस्टम, एक्सप्रेशन एंड फील

नम्रता :- है मैं करुँगी इम्प्रूवमेंट

दस :- तुम्हे कोनसा गण पसंद हैं बीटा

नम्रता :- क्यू सर क्या हुवा

दस :- कुछ नहीं लगाओ न

नम्रता आपने मोबाइल निकलती हैं और एक सॉफ्ट गण लगा देती हैं और मोबाइल को खिड़की पैन रख देती हैं

दस की नजरे नम्रता पैन थी ....

नम्रता भी अपने सर को देख रही थी

गाने का आवाज पुरे रूम मैं गूंज रहा था धीरे धीरे दस नम्रता की तरफ बढ़ता हैं जैसे जैसे दस नम्रता के करीब आए रहा था नम्रता आपने कदम पीछे ले रही थी और दिवार से चिपक जाती हैं

दस नम्रता के करीब जाता हैं और नम्रता को अपना हैट देता हैं

नम्रता दस सर का कला कड़क हैट देखती हैं और कुछ सोच के सर के हैट को पकड़ लेती हैं

दस नम्रता को अपनी और खींच लेता हैं और कहता हैं

दस :- डांस मैं फील होना चाइये बस उसकी कमी हैं तुम्हारे डांस मैं

नम्रता :- आआ है सर लवंगी मैं फील

दस :- कैसे लाओगी ?

नम्रता :- पता नहीं

दस :- मैं सीखा दू ?

नम्रता सेहम जाती हैं और बड़ी सेहमी आवाज मैं कहती हैं

नम्रता :- ा ा हआ

तभी दस नम्रता को म्यूजिक पे घुमा लेता हैं और गोल गोल घूमने लगता हैं पर अभी तक दस ने नम्रता को कामिनी नजरो से चुवा नहीं था वोह ईमानदारी से उसको सीखा रहा था

सूरज की रौशनी अब्ब काम हो रही थी और बोहत जल्द शाम होने वाली थी

दस अब्ब नम्रता के कम्बदान को देख उत्तेजित हो रहा था

दस को नम्रता की सांसो की आवाज अपने कानो मैं सुनाई दे रही थी

तभी दस नम्रता को अपने करीब कर लेता हैं और कहता हैं

दस :- तुम बोहत जल्द सब सिख लेती हो

नम्रता :- ha....h. है सर

तभी दस नम्रता को अपनी और सत्ता लेता है और कहता हैं

दस :- आज ड्रेस अच्छी हैं तुम्हारी

अपनी तारीफ सुन नम्रता शर्मा जाती हैं

नम्रता :- थैंक यू सर

दस :- पर

नम्रता :- पर क्या सर ?

दस :- पर शार्ट ड्रेस मैं डांस बोहत कम्फर्टेबले होता हैं

शार्ट ड्रेस का नाम सुनते हे नम्रता के बदन मैं सिसक निकल जाती हैं उससे वोह चिट्टी , और कल का डांस यद् आता हैं और पुरे बदन मैं कुछ महसूस होता हैं

नम्रता :- है सर ....

दस भी अब कुछ नहीं कहता वोह समाज चूका था नम्रता क्या सोच रही हैं और उसी का फायदा उठा के वोह नम्रता का आपने पुरे बदन के करीब लता हैं और कास के उससे बदन से सत्ता लेता हैं

और झट से नम्रता के एक कोमल तंग को पकड़ लेता हैं और ऊपर कर देता हैं ... नम्रता आपने कोमल सा हैट दस के बुड्ढे साइन पे रख देती हैं

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ क्या नजारा था ....

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दोनों भी एकदूसरे के अब्ब बोहत करीब आए चुके थे नम्रता की सांसे ऊपर निचे हो रही थी दोनों के सांसो मैं एक अलग से गर्मी थी

नम्रता की जांघ दस के काळा कड़क हटो मैं थी भले हे लेग्गिंग्स थी जांघ पर लेकिन दस को नम्रता के कोमल जांघ की गर्मी आपने कड़क हटो पैन महसूस हो रही थी नम्रता को वोह अनएक्सपेक्टेड टच मनो हल्का सा सहारा दे रहा था वोह अपने आप को उस सिचुएशन मैं भी समझा रही थी लेकिन उसका कोई फायदा नहीं था क्यू की नम्रता के कोमल जांघो पर दस का कड़क लोहे जैसा हैट हरकते करना चालू कर चूका था

दस की कड़क उंगलिया नम्रता के कोमल जांघ के निचे एक अलग से गर्मी पैदा कर रही थी

दस अब नम्रता को इस्सस कदर नजदीक कर रहा था की नम्रता की कोमल योनि दस के पंत मैं हो रहे होचल मतलब लुंड पैन सात चुकी थी नम्रता को महसूस हो रहा था की ये नजदीकी अब्ब डांस से परे हैं पर अब्ब वोह कुछ नहीं कर सकती थी

जब दस को महसूस होता हैं की नम्रता की कोमल योनि वाली जगह उसके पंत के ऊपर से उसके लुंड पैन सात चुकी हैं तोह वोह उत्तेजना से भर जाता हैं और झट से नम्रता की तंग को निचे कर उसको देखता हैं

और आपने कड़क गन्दी बहो मैं भर लेता हैं

वोह नम्रता को इस्सस कदर दबा लेता हैं की नम्रता का पूरा अंग और बदन दस से चिपक जाता हैं और एक अलग सा करंट दोनों के बॉडी मैं लगता हैं

नम्रता को कास के दस का एक हैट नम्रता के कोमल कमर पैन और एक हैट उसके रोमांच से भरपूर गांड पैन चला जाता हैं

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दस के इतने करीब जाने के बाद नम्रता के पुरे बदन मैं एक लहर से दौड़ गई पता नहीं था उससे उसके शरीर मैं क्या हो रहा हैं लेकिन जोह हो रहा था उससे वोह होने दे रही थी एक अलग सा अहसास था नम्रता को जोह वोह न चाहते हुवे भी कहा रही थी

दस को भी अब अलग सा अहसास होना शुरू हो चूका था न जाने कितने हाउसवाइफ , टीचर , गर्ल को वोह अपना शिकार बना चूका था लेकिन नम्रता के बदन मैं उससे अलग सा महसूस हो रहा था एक रिफ्रेशिंग और एक काम वासना को काबू और उत्तेजित जोह दोनों कर सके ऐसा अहसास था ये अहसास किसी काम हवस से परे था .....जिसकी तलाश दस को थी

दस जब देखता हैं उसके काळा बदन पैन एक दूध जैसी गोरी कमसिन पारी सात चुकी थी जिसका गोरा रंग बदन उसके छाती और शरीर से सात चूका था तब दस काम वासना मैं तड़पने लगता हैं और आपने एक हटो से नम्रता के कोमल से गांड को मसलने लगता हैं और मनो नम्रता दांग से रह जाती हैं और उसके मुह्ह से कोमल सा आवाज निकलता हैं

नम्रता :- अह्ह्ह्हह्हह

ये आवाज सुन दस रूक सा जाता हैं और उसके दिमाग से गोरा और कला ये ख्याल निकल कर वोह उस आवाज के सुंदरता को भाप लेता हैं और खो सा जाता हैं

निचे कोदो मैं हे सही पर नम्रता के जवान योनि का मतलब छूट का और दस के लुंड का मिलान हो चूका था और मनो दोनों एकदूसरे को कपड़ो के उअप्र से चुम रहे थे चूस रहे थे

तभी दस नम्रता को कास के थोड़ा ऊपर कर लेता हैं और जोह कोमल आवाज नम्रता के मुह्ह से निकली थी उस कमसिन चेहरे को देख कर खो जाता हैं नम्रता के गुलाबी यह उससे अपनी और बुला रहे थे नम्रता के यह का रसीला पैन उससे काम वासना मैं तड़पा देता हैं

नम्रता को महसूस होता हैं की गाना तोह कब का बंद हो चूका था पिछले 5 मिनट्स से वोह दोनों भी खुद के दुनिया मैं झूम रहे थे और ये रीलीज़ कर के नम्रता को खुद के ऊपर शर्म आती हैं और वोह अपनी आँखे बंद कर लेती हैं

आँखे बंद हुवा चेहरा दस को और खूबसूरत लग रहा था

ुसस्स सुन्दर कमसिन चेहरे को देखते हुवे दस आपने कड़क सा हैट नम्रता के वक्ष यानि एक बूब्स पैन रख देता हैं

नम्रता :- अह्ह्ह्ह ुम

नम्रता को आपने पर्सनल अंग पैन वोह गरम स्पर्श महसूस हो रहा था और उस हैट की गर्मी का अहसास वोह आंखे बंद होने के बावजूद ले रही थी

दस का आपने बूब्स पे हैट गिरते हे नम्रता का हैट दस के कंधे पैन चला जाता हैं और वोह खुद को वह से छूटने की नाकाम कोशिश करती हैं

दस ुसस्स खूबसूरत चेरे के और आपने कला सा मुह्ह ले जा रहा था

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ दस का एक हैट नम्रता को जवानी का अहसास करवा रहा था वोह हैट मनो नम्रता मैं जवानी की गरमी पैदा कर रहा था

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घाना अँधेरा होने जा रहा था सूरज की अब्ब बोहत काम रौशनी खिड़की से अंदर आ रही थी और हवा तेज होने लगी थी एक अलग से ठण्ड थी हवा मैं पर अंदर वातावरण बोहत गरम हो चूका था

दस की गरम सांसे अब्ब नम्रता को आपने खूबसूरत चहरे पैन महसूस हो रही थी उससे अहसास हो रहा था की सर उसके बोहत करीब आ रहे हैं

दस भी आपने कला चेहरा लेके नम्रता के रसीले ोठो की तरफ बढ़ रहा था उससे लग रहा था जैसे नम्रता के ोठो से रसीले रास की बून्द टपक रही हो और उससे वोह बून्द को आपने मुँह मैं लेके चेतना था

नम्रता को अब्ब आपने ोठो पैन एक अलग से गर्मी का अहसास हो रहा था

दस के काळा यह नम्रता के गुलाबी ोठो पैन चिपकने हे वाले थे की ........

नम्रता आपने मुँह घुमा लेती हैं और दस को आपने से अलग करवा देती हैं और दिवार से सात जाती हैं उसके आँखों मैं एक दर और रोमांच दोनों था पर पता नहीं उससे क्या हुवा

दस समझ जाता हैं क्या करना हैं वोह नम्रता के तरफ देख एक मुस्कान देता है. और बस शांत खड़ा रहता हैं नम्रता भी वह कड़ी थी दोनों के बिच कुछ बात नहीं हो रही थी

नम्रता खुद को गिलटी फील कर रही थी और दस खुदको कमीना नहीं दिखाना चाहता था इसलिए दोनों चुप थे खिड़की से आए रही तेज हवा दोनों के गर्मी को उतर रही थी जब नम्रता देखती हैं अँधेरा हो रहा हैं वोह थोड़ी दर से जाती हैं और अपनी नजरे झुका लेती हैं

तभी दस दोनों के बिच की ख़ामोशी तोड़ता हुवा कहता हैं

दस :- डरो मत हम निकल रहे हैं अभी 7 बज चुके हैं कॉलेज बंद हो चूका हैं तोह यहाँ पीछे से सीक्रेट रास्ता हैं वह से जायेंगे

नम्रता कुछ नहीं कहती हैं और आपने सर है मैं हिला देती हैं

दस :- पर मेरा बैग मेरे केबिन मैं हैं तोह मैं वोह लेके आता हु तब तक यही रहो तुम भी चलोगी तोह रत का पेओन देख सकता हैं

नम्रता थोड़ी दर से जाती हैं पर उसको भी समझ आता हैं उसका जाना ठीक नहीं और वोह फिर से है मैं सर हिला देती हैं

दस एक मुस्कान देकर वह से निकल जाता हैं और यहाँ नम्रता अकेली उस अँधेरी रूम मैं थी ......

खिड़की से आए रही तेज ठंडी हवा नम्रता को आपने बदन पैन महसूस हो रही थी और अब्ब खिड़की से हलकी से चाँद की रौशनी आए रही थी वोह रत पूर्णिमा की थी तोह चाँद की रौशनी कुछ ज्यादा थी जिससे नम्रता को आजु बाजु का सब कुछ दिखाई दे रहा था नम्रता बास उस रूम को ताड रही थी तभी वोह आपने कदम आगे बढ़ने लगती हैं पर उसकी चल बोहत धीमी थी पर नम्रता का नेचर एक्सप्लोरिंग था इसलिए आते वक्त हे उसको यहाँ के काफी सरे चीजों ने आकर्षित किया था

तभी नम्रता को पता चलता हैं की वोह उस रूम से बहार आ चुकी हैं अब्ब उसको थोड़ा दर सा लगता हैं पर वोह आपने कदन आगे बढाती हैं शाम का सन्नाटा उसके मन मैं अलग सा दर पैदा कर रहा था

तभी उसको और एक रूम दीखता हैं और वोह आपने कदम वह ले जाती हैं पर ये कमरा काफी सुंसम था कोई खिड़की नहीं थी निचे पूरी मिटटी और धुल थी तभी उसकी नजर अंदर जाती हैं जहा एक खिड़की थी और वह से चाँद की रौशनी दिवार पैन गिर रही थी वोह उस कमरे के और अनादर चली जाती हैं

धीरे धीरे उसके कदम उस खिड़की के तरफ जा रहे थे और वोह उस खिड़की के यहाँ पोहच जाती हैं ुसस्स खिड़की से बोहत सुन्दर चाँद की रौशनी सामने वाली काली दिवार पैन गिर रही थी नम्रता उस दिवार को देखने पीछे मूड जाती हैं

और ......... नम्रता का पूरा बदन कम्प उठता है. और उसकी हालत टाइट हो जाती हैं

क्यू की उसने उस दिवार पैन ऐसा कुछ देखा था

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वोह दृश्य देख नम्रता का पूरा बदन कम्प जाता हैं और दर का अहसास क्या होता हैं वोह लाइफ मैं पहली बार एक्सपीरियंस करती हैं पर वोह दृश्य उसके नजरो के सामने था जिसका उससे सामना करना था वोह हिम्मत से काम लेती हैं और अपनी नजरो को उस दृश्य पे टिका देती हैं तोह

उससे महसूस होता हैं की ये एक चित्र हैं

वोह उस चित्र के अब्ब करीब जाने लगती हैं और दर के मरे उसके पुरे बदन मैं पसीना छूट रहा था

वोह उस चित्र को देख शॉक हो जाती हैं

एक बोहत से सुडोल सुन्दर बदन वाली स्त्री आपने बदन को खोल रही थी और आपने एक वस्त्र को आपने ऊर्जा से हटा रही थी

उसका एक बड़ा सा आम पूरा नंगा था और एक बूब्स पैन उसके बड़े सुन्दर बल थे उसका आधा चेहरा उसके बालो से ढाका हुवा था

तभी नम्रता की नजर उसके निचे वाले हिस्से पैन जाती है जहा वोह औरत पूरी नंगी थी और आपने सुन्दर से योनि का प्रदर्शन कर रही थी वोह देख नम्रता शर्म से महसूस करती हुवी अपनी नजरे उस योनि पैन टिका देती हैं और उस चित्र को हैट लगाती हैं नम्रता को एक अलग हे रोमांचे महसूस होता है पर साथ मैं रत का वोह सन्नाटा उससे दर भी महसूस करवा रहा था

तभी नम्रता सवालो के घेरे मैं फास जाती हैं पर कुछ सोच पति उसको लगता हैं की आगे वाले कमरे मैं भी जेक देख ले और वोह आपने कदम आगे बढ़ा देती हैं और अगले कमरे मैं पोहच जाती हैं

वह पोहचते हे नम्रता को आपने पुरे बदन मैं अलग सा रोमांच महसूस होता हैं और उसी रोमांच के साथ अब्ब वोह बिना डरे आगे बढ़ती हैं आपने पायल की चुम चुम आवाज करते हुवे वोह उस अँधेरे कमरे मैं पोहच जाती हैं और फिर से वह एक वैसे हे खिड़की थी और इस्सस बार वोह दिवार पैन नजर घुमा ते हैं तोह .....

िस्स्सस्स बार उसके बदन मैं रोमांच और अलग सा करंट लग जाता हैं क्यू की ऐसा उसने आपने पुरे जीवन मैं कभी नहीं देखा था उसके बदन मैं बदलाव आ रहा था सांसे तेज हो रही थी गर्मी की वजह से पूरा बदन पसीने से भीग चूका था और नजरे बास ुसस्स विचित्र चित्र को देखे जा रही थी

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नम्रता को वोह चित्र समझने मैं थोड़ी देर लगती हैं पर जब समाज जाती हैं तोह उसके पुरे बदन से एक लहर दौड़ जाती हैं

चित्र काफी विचित्र था पर जोह चित्र मैं दृश्य था वोह देख किसी को भी रोमांच चढ़ जाये पर बात सिर्फ रोमांच की नहीं थी बात थी उस चित्र के रहस्य की ऐसा लग रहा था किसी ने वोह चित्र मिटाया था और सिर्फ लड़की के बदन को रकह था

पर नम्रता उस चित्र को देख समझ जाती हैं की क्या हो रहा हैं

इस्सस लड़की का चेहरा स्पष्ट दिख रहा था और वोह काम वासना के मजे ले रही थी चहरे पैन काम वासना के भाव थे और खुले बल और नंगा बदन

इस्सस लड़की का बदन उस पहले वाले चित्र से मिल रहा था पर ये वाला चित्र मनो लाल मिटटी के रंग का था और वोह वाला काळा कोयले जैसा

इस्सस चित्र के दृश्य को नम्रता अब्ब बारीकी से देख रही थी और रोमांचित हो रही थी वोह बस ुसस्स लड़की के सुडोल बदन को देखे जा रही थी वोह बदन काफी आकर्षित था

तभी नम्रता की नजर उस लड़की के निचे वाले हिस्से पे जाती हैं जहा उसके गांड मैं काम वासना माँ हतियार यानि की लुंड घुस रहा था और नम्रता को वोह लुंड को पकडे हुवे एक मर्द का हैट दीखता हैं जोह देख नम्रता का पूरा बदन कम्प उठता हैं

वोह लुंड काफी बड़ा था जोह देख नम्रता को उसके सर यानि प्रोफेसर दस के लुंड की तस्वीर आँखों के सामने आ जाती हैं

वोह उस चित्र को अब्ब फील करने लगती हैं

जीसस मैं वोह लड़की उस आदमी के लुंड पैन आपने गांड को उछाल रही हो

और काम वासना से चिल्ला रही हो

ोुछःह अह्ह्ह ोुछहहहह अह्ह्ह्हह

वोह सब देख नम्रता के अंदर बोहत कुछ हो रहा था सवालो के घेरो ने उससे घेर लिया था

..

उसकी नजर उस चित्र से हैट नहीं रही थी वोह उस चित्र के करीब जाती हैं और इस बार उस लड़की के गांड के छेद मैं घुस रहे लुंड को वोह छू लेती हैं

उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ नम्रता के पुरे बदन मैं उससे गर्मी महसूस होती हैं और एक करंट सा लगता हैं और वोह बड़ी अच्चर्य से पसीने मैं लटपट ुसस्स चित्र मैं खो जाती हैं

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नम्रता की नशीली आँखे बस उस दृश्य को देखे जा रही थी बदन मैं एक कप कपि से महसूस हो रही थी और रोमांचित मन बस उस दृश्य मैं खो चूका था

माथे से पसीने की बून्द उसके पुरे चहरे को गिला कर रही थी और रसीले ोठो पैन भी गिला पैन था

पुरे चहरे पैन एक अलग सा गिला पैन था और दर का अहसास भी था और रोमांच का उत्साह भी

बोहत सरे सवाल थे ...

ये चित्र किसने बनाये थे ?

और ऐसे अश्लील चित्र कोण बना सकता हैं ?

ये जगह तोह सिर्फ दस सर को पता हैं ?

कही .....

तभी वोह आपने आजु बाजु देखती हैं और अंधरे का अहसास होते हे दर जाती हैं नजरे चित्र पैन थी पर अब चित्र धुंदला सा नजर आता हैं और उससे कुछ आहात से महसूस होती हैं

और तभी उसके कंधे पैन एक कड़क सा हैट गिरता हैं और नम्रता झट से पीछे मूड जाती हैं और उस शख्स को देखती हैं

वोह शकस बड़ी आवाज और अच्चर्य से नम्रता को कहता हैं

दस :- तुम यहाँ क्या कर रही हो .....

तो बे कॉन्टिनोएड..............
 
डिअर रीडर्स... हार्ट

HELLO रीडर्स रोयलकिंग हेरे ...

ी क्नोव ये कहानी काफी दिनों से थम चुकी हैं कोई अपडेट नहीं कोई इनफार्मेशन नहीं और इसके लिए में जिम्मेदार हु ...बूत इस कहानी को स्टॉप करने का कोई इंटेंशन नहीं था कुछ पर्सनल इश्यूज एंड प्रोब्लेम्स की वजह से ये कहानी के अपडेट रोक दिए गए ...

और अभी भी अस ा राइटर मैं इस कहानी से काफी करीब हु थिस इस माय फर्स्ट स्टोरी सो IT'S हैवे स्पेशल फीलिंग फॉर में बूत फ़िलहाल इस कहानी को मैं ख़तम अन्नोउंसेड करता हु ी क्नोव आगे प्लाट था बूत अस ा राइटर ी हैवे रिक्वेस्ट तो यू कहानी का लास्ट CHAPTER सफर तक इसको एन्जॉय कीजिये एंड नम्रता के एनकाउंटर के बाद IT'S एंडेड ......

थिस इस नॉट प्रॉपर एंडिंग बूत कहानी कहा एन्ड होगी ये मुझे भी नहीं पता आप सब ने इस कहानी को स्पेशल बनाया और इतना प्यार दिया उसके लिए धन्यवाद् नमस्कार

फ़िलहाल ी ऍम थिंकिंग अबाउट नई स्टोरी अगर कुछ इरादा हुवा तोह जल्द हे बतावुंगा हार्ट
 
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