नम्रता ....EK....PAHELI :- EPISODE 09
( वेलकम तो डार्क जोन ).
नोट :- हो सके तोह इस अपडेट को रात मैं पढ़िए
रत का समय था तक़रीबन रत के 2 बज चुके थे एक घर मैं घाना अँधेरा था और बोहत साडी किताबे पड़ी हुवी थी उस अँधेरे मैं स्टडी टेबल पे एक बल्ब चालू था और उस लाइट के निचे एक शख्स बड़े इत्मीनान से किताब पढ़ रहा था उसकी बड़ी बड़ी आंखे उस किताब के पन्नो पैन थी कला सा चेहरा अंधरे मैं गायब सा हो गया था हैट मैं एक सिग्रेटे थी किताब पढ़ते वक्त वोह सिग्रेटे के काश ले रहा था उसकी आंखे मनो लाल हो चुकी थी पर वोह काफी मन लगा के वोह किताब पढ़ रहा था वोह शख्स और कोई नहीं प्रोफेसर दस था
किताब का नाम था ....थे डेमों.....
दस के पास किताबो का भंडार था सोच से वोह हरामी और नीच था पर दिमाग से काफी तेज और हमेशा से होशियार
वोह किताब पढ़ते वक्त दस के दिमाग मैं दर्द हो रहा था और उसके विचारो मैं उसको दर्द महसूस हो रहा था उसकी आंखे कुछ सोच के लाल हो रही थी और बदन अकड़ रहा था किताब मैं वोह इतना खो गया था की उसका दिमाग अलग से उसके पास्ट लाइफ के बारे में सोच रहा था दस को अब तक ये भी मालूम नहीं था की उसके माँ - बाप को हैं अनाथ आश्रम मैं वोह पला बढ़ा बाद मैं उसको इस सोसिटी ने रीलीज़ कर के दिया की तू कितना कला और गन्दा दीखता हैं पर दस दिमाग से तेज था इसलिए उसने वोह सब प् लिया जोह पैसे और दिमाग से प् सकता था पर कभी लाइफ न उससे बीवी का प्यार मिला न औलाद का और न हे लोगो का . बचपन में वोह खुद मैं रहता और अपने सोच से चलता
अपने जीवन मैं उसने रूप और सुंदरता इसका अलग हे डेफिनेशन बना के राखी थी जोह हमें पता हे हैं .
आपने गरम दिमाग को वोह काबू कर लेता हैं और बुक को बंद कर देता हैं अपने रूम के दरवाजे के पीछे वोह चल के जाता हैं और दरवाजा बंद कर देता हैं और आपने हैट मैं रखा हुवा मार्कर दिवार के पीछे वाले हिस्से पे लेके जाता हैं और उस दिवार पैन बोहत सरे नाम थे
दस कामिनी स्माइल देते हुवे अपने हटो से 50 अकड़ा डालता हैं और कुछ इस प्रकार नाम लिख देता हैं
50) नम्रता
और शैतानी स्माइल देते हुवे मार्कर को फेक देता हैं और अपने बीएड पैन गिर जाता हैं ..........और उसके आँखों के सामने आज हुवे नम्रता के साथ के पल घूमने लगते हैं....
नेक्स्ट डे.................
नम्रता नींद से उठ चुकी थी हमेशा की तरह उसके माँ डैड काम पैन निकल चुके थे कल रत को नम्रता बोहत देर से सोई थी उसकी आंखे जगी थी पर रत को वोह सोच और विचार मैं खो गयी थी आज उतने के बाद उसको महसूस हुवा की उसका पूरा अंग दुःख रहा था उसके मन मैं आज किसी अनजान चीज का दर था
कल हुवे दस सर के डांस के बाद नम्रता खुद को बोहत सवालो के घेरे मैं दाल चुकी थी पर रत मैं उससे किसी भी सवाल का जवाब नहीं मिला था बस दस सर के इतना करीब आने से विचारो मैं उससे उनकंफर्टबले फील हो रहा था पर आखिर वोह कर तोह डांस रही थी इसलिए वोह दस सर के साथ हुवी नजदीकी को इग्नोर कर रही थी
पर है दस सर के बारे मैं उसके मन मैं अब्ब सवाल पैदा होना चालू हो चूका था उसको अब्ब नार्मल सा शक होने लगा था कही दस सर उसके ऊपर .....
नहीं nahi....main एक स्टूडेंट हु और एक टीचर कभी ऐसा सोच नहीं सकता और जितनी इज़्ज़त पूरी कॉलेज दस सर को देता हैं उससे तोह मैं ऐसा हरगिज़ नहीं सोच सकती पर सर उस औरत के साथ ?
बूत वोह उनकी पर्सनल लाइफ थी मुझे उसमे ध्यान नहीं देना चाहिए
पर उन्होंने मुझे क्यू उस दिन शार्ट ड्रेस पहन के आने को कहा ......एक हद तक सही भी थे वोह ट्रेडिशनल मैं डांस करना मुश्किल होता हैं .....पर मैं अपनी मर्यादा नहीं भूल सकती मुझे ऐसा हे रहना पसंद आता हैं ......और कॉलेज मैं शार्ट ड्रेस तोह बिलकुल नहीं
तभी नम्रता के मन मैं सवाल आता है. आखिर आज कॉलेज के बाद दस सर उसको कहा प्रैक्टिस के लिए लेके जाने वाले थे
और तभी नम्रता को दर का अहसास होता हैं सच मैं वह कोई नहीं होगा तोह ?
तभी उसको दस सर की बाटे यद् आती हैं
5 हे दिन बाकि हैं फंक्शन के लिए और आज से 4 तोह मुझे डांस पे फोकस करना चाहिए न की इन् सब चीजों को सोचने मैं और नम्रता आपने कपडे पहन कर रेडी हो जाती हैं.....
आज नम्रता के संस्कारी जीवन का बड़ा दिन था उससे नहीं पता था आज से वोह एक नयी दुनिया देखने वाली हैं ........
दिन शुरू हो जाता हैं आज दस पुरे दिन अपने केबिन मैं था और अभी भी वोह कुछ पढ़ रहा था टाइम निकलता जा रहा था
नम्रता भी अपने लेक्चर मैं लगी हुवी थी पर उसका मन उसमे नहीं लग रहा था वोह बस इन्ही ख्यालो मैं थी की आज का दिन उसका कैसे जायेगा उसके खूबसूरत चेहरे पैन एक अलग से चमक थी और बदन मनो चमक रहा था
ऐसे तैसे दोपहर के 5 बज जाते हैं और कॉलेज ख़तम हो जाता हैं और नम्रता के चेहरे पैन स्माइल थी वोह अब्ब अपने पैरो का रास्ता दस के केबिन के तरफ बढ़ा रही थी चलते चलते उसको यद् आता हैं की किंजल मिस 2 दिन से कॉलेज नहीं आए रही पर अभी उसका ध्यान दस सर के केबिन के तरफ था अपने कंधो पैन बैग लिए वोह आपने कदम बढ़ा रही थी तभी वोह केबिन के बहार पोहच जाती हैं और लम्बी से सास लेके अंदर जाती हैं
नम्रता :- सर ....मई ी के इन ...
दस का पूरा ध्यान बुक पढ़ने मैं था
नम्रता :- sir....sir...
तभी दस थोड़ा चौक जाता हैं और गर्दन ऊपर कर के देखता हैं और उसी नम्रता का सुन्दर सा रूप देखकने को मिलता हैं
दस नम्रता को नशीले आँखों से देख रहा था मनो उसमे वोह दुब हे गया था नम्रता के चेहरे पैन खिड़की से आ रहे सूरज के हलके किरण गिर रहे थे और वोह नम्रता को और खूबसूरत बना रहे थे .... नम्रता का ट्रेडिशनल वियर उससे और भी कामुक और सुंदरता से भरपूर बना रहा था उसके अंग अंग को जितना देखो उतना काम था
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ नम्रता का काजल , नम्रता के रसीले गुलाबी यह , दूध जैसा गोरा रंग और सुडोल बदन ये देख दस खो सा गया था
नम्रता के ुसस्स सुंदरता को देख उसके मुँह से एक हे शब्द निकलता हैं
माय परफेक्ट एंजेल......
दस बास नम्रता को देखते जा रहा था मनो खो सा गया था ....
नम्रता :- सर ....क्या हुवा मैं अंदर ावु न बोलिये सर
और तभी दस आपने दुनिया से बहार आता हैं और नम्रता को हड़बड़ाते हुवे कहता हैं
दस :- यह हहह है है ...के इन
और दस आपने हैट मैं राखी किताब को रख देता हैं किताब का नाम था
थे DEVIL'S ऑय .......
नम्रता उस किताब को देखती हैं और इग्नोर करती हैं .....
दस :- बड़ी जल्द आगयी लेक्चर नहीं थे क्या ?
नम्रता थोड़ी चौक जाती हैं और कहती हैं
नम्रता :- सर 5 बज चुके हैं और कॉलेज छूट चूका हैं
दस :- क्या 5 बज गए उफ़ पढ़ते पढ़ते खो सा गया
नम्रता :- क्या पढ़ रहे थे सर अआप
इस सवाल से दस उनकंफर्टबले हो जाता हैं और तभी उसका ध्यान उसके किताब पे जाता हैं वोह झट से वोह किताब उठा के अपने लाकर मैं रख देता हैं
दस :- कककक कुछ नहीं ऐसे हे ....
नम्रता को थोड़ा अजीब सा लगता हैं ...
नम्रता :- तोह सर कहा जाने वाले हैं हम
दस :- हैं एक जगह पर तुम तैयार हो न ?
नम्रता :- है सर अपने परफॉरमेंस और पैशन के लिए कुछ भी
दस :- बात सिर्फ उतनी नहीं हैं
नम्रता :- मतलब समझी नहीं सर मैं
दस :- हम जहा जाने वाले हैं वोह जगह बोहत शांत हैं और मंद को शांत करने वाली भी
नम्रता :- तोह अच्छी बात हैं न सर
दस :- है बात तो अच्छी हैं ..पर..
नम्रता :- पर क्या सर ?
दस :- ुसस्स जगह का पता सिर्फ मुझे हैं और उसका रास्ता हमारे कॉलेज से होते हुवे जाता हैं सो मैं तुम पे ट्रस्ट कर के वह लेके जा रहा हु
नम्रता :- समझ गयी सर मैं
दस :- क्या समझ गयी ?
नम्रता :- यही की आपका ट्रस्ट मैं नहीं तोड़ने वाली मुझे बस डांस से मतलब हैं जगह कोई भी हो सो ट्रस्ट में
नम्रता के बात से दस खुश हो जाता हैं और मन में कहता हैं
( अह्ह्ह ट्रस्ट का टेस्ट तोह पास हो गयी ये उम् लड़की बड़ी तेज हैं मजा आएगा दस अहह )
दस :- गुड तोह मेरे पीछे चलना और चलते वक्त कुछ बोलना नहीं बस फॉलो करना मुझे
नम्रता :- है सर
और दस अपने केबिन से बहार निकल जाता हैं और नम्रता उसके पीछे चलने लगती हैं
दस अब्ब अपने केबिन से आगे हो जाता हैं और निचे सीढ़ियों पे उतरने लगता हैं वोह अपने कदमो की तेजी बढ़ा देता हैं नम्रता भी उसके पीछे चल रही थी ....
नम्रता मन मैं
( ये तोह रोज का रास्ता हैं सामने मेरी क्लास रूम वह बाकि क्लास रूम और आगे एग्जिट आखिर सर कहा लेके जा रहे हैं किसी दूसरे क्लास रूम मैं तोह नहीं )
और तभी दस नम्रता के क्लास रूम से राइट मोड़ ले लेता हैं और निचे उतर जाता हैं
नम्रता :- ( ओह निचे तोह स्टोर रूम हैं जहा पुराने बेंच और कबाड़ रकह जाता हैं )
दस निचे निचे उतर रहा था नम्रता भी उतर रही थी अब्ब्ब नार्मल लाइट काम हो रही थी और अँधेरा बढ़ रहा था निचे लाइट नहीं थी वोह दोनों स्टोर रूम मैं आ चुके थे
दस दिवार के यहाँ रूक जाता हैं और कमीने नज़रो से नम्रता को देखने लगता हैं
नम्रता दस को देख दर से जाती हैं क्यू की अँधेरे की वजह से दस का चेहरा उससे दिख हे नहीं रहा था .....
तभी उसका महसूस होता हैं की सर कुछ हटा रहे हैं
दस दिवार के यहाँ रखा बड़ा सा ब्लैक बोर्ड हटा देता हैं और सामने एक छोटा सा दरवाजा था जोह दस खोल देता हैं वोह दरवाजा खुलते हे बहार की तजा रौशनी अंदर आती हैं दस उस दरवाजे से बहार निकल जाता हैं
नम्रता भी वह से झुक के बहार निकल जाती हैं बहार निकलते हे सूरज की रौशनी नम्रता के खूबसूरती को बढ़ा देती हैं
आस पास बोहत साडी हरियाली थी वोह देख नम्रता को उत्सुकता और सवाल दोनों पैदा हो जाते हैं आखिर ये जगह कॉलेज के अंदर थी या बहार ...उसको अंदाजा लगाना मुश्किल था वोह दस सर से पूछने हे वाली थी की उसको यद् आता हैं की दस सर ने कुछ बोलने को नहीं कहा और वोह खुद को काबू कर लेती हैं ...
अब्ब्ब दस आपने कदम आगे की तरफ बढ़ा रहा था पर तभी वोह मुद के नम्रता को देखता हैं और रूक सा जाता हैं
नम्रता के भरे बदन वाले चल को देख वोह खो सा जाता हैं नम्रता का आक्रषण उसके दिल और दिमाग को काबू कर लेता हैं
उसकी नजर सिर्फ नम्रता के लचीले बदन पैन थी और नशीले आँखों पैन
नम्रता के बदन का घेर ुसस्स उत्तेजना दे रहा था नम्रता के गांड का आयकर उससे उत्तेजित कर रहा था
नम्रता के चल मैं एक अलग हे मस्ती थी ..
और तभी नम्रता दस के पास पोहच जाती हैं
नम्रता :- सर अब्ब कहा जाना हैं
तभी दस होश मैं आ जाता हैं और कुछ न कहते हुवे आगे बढ़ने लगता हैं
5 मिनट्स बाद नम्रता के सामने एक बड़ा सा आधा बनाया हुवा बिल्डिंग का स्ट्रक्चर था जोह काफी पुराण था उसकी हालत बोहत ख़राब हो चुकी थी
वोह देख नम्रता को एक दर सा लगता हैं उसका लगता हैं कही सर उसे यहाँ न ले जाए और वही होता हैं दस उस खण्डार मैं चला जाता हैं
नम्रता भी पीछे चली आती हैं ...एक अलग सा अहसास नम्रता को होता हैं वोह आजु बाजु देखती हैं उस जगह को ऑब्सेर्वे करती हैं
चीजे काफी वीरान थी और सब टूट चूका था मनो कोई खण्डार हो
तभी दस और वोह एक जगह एंटर करते हैं जहा काफी सरे कमरे थे किसी क्लास रूम की तरह
नम्रता वोह नजारा देख थोड़ी रोमांचित हो जाती हैं जगह तोह काफी ख़राब थी पर वह गन्दगी नहीं थी
दीवारे काफी ख़राब और काली हो चुकी थी एक सीधी ऊपर जा रही थी पर वोह भी टूटी हुवी थी सूरज के रौशनी से वोह जगह ठीक लग रही थी पर अँधेरे मैं किसी की भी हालत टाइट हो जाती
वोह नजारा देख नम्रता दर भी रही थी आखिर जगह हे ऐसे थी निचे काफी मिटटी थी और धुल भी वही एक कारन था जोह उस जगह को खण्डार बना रहा था
दस आगे बढ़ते हुवे एक रूम मैं घुस जाता हैं ......
नम्रता भी दस के पीछे उस रूम मैं घुस जाती हैं
और ुसस्स रूम मैं आ के नम्रता की आंखे फटी की फटी रह जाती हैं ....
इस्सस खण्डार में ऐसा कुछ होगा उससे यकीं नहीं होता ....
उसके आँखों के सामने एक पुराने ज़माने के स्ट्रक्चर वाला आलीशान कमरा था जिसका निचे वाला सरफेस मजबूत लकड़ियों से बना था पुराने ज़माने की आलीशान झूमर था और बड़ी बड़ी खिड़किया जहा से सूरज की रौशनी अंदर आए रही थी बड़ा सा कमरा था जहा नजर मारो वह क्लीन था सामने एक बड़ी से आगे पीछे होने वाली खुर्सी थी उसके बाजु में एक छोटा टेबल जहा बोहत साडी किताबे और सिगरेट राखी हुवी थी
दस :- ये हैं वोह जगह कैसी हैं
नम्रता :- बबबब बोहत अच्छी हैं सर
दस :- बस अब मुझे कुछ सवाल मत पूछना मुझे पता हैं तुम्हारे मन मैं सवालो की छड़ी लग गई होगी पर कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिसका जवाब हमें न मिले वही अच्छा होता हैं समझी ?
नम्रता ये सुन चौक जाती हैं ..और कहती हैं
नम्रता :- ोोोू ok सर समझ गयी ...
तभी नम्रता के मन मैं सवाल आता हैं और वोह दस से पूछती हैं
नम्रता :- सर यहाँ साउंड सिस्टम कहा हैं
दस नम्रता का सवाल सुन उसे मुस्कान देते हुवे कहता हैं
दस :- बीटा यहाँ कोई साउंड सिस्टम नहीं हैं
नम्रता :- तो यहाँ प्रैक्टिस कैसे करेंगे
दस :- मोबाइल से काम चलना पड़ेगा बीटा
नम्रता ये आंसर सुन थोड़ी चौक जाती हैं पर उसे भी लगता हैं की इस खण्डार मैं कहा साउंड सिस्टम होगी
नम्रता :- सर तोह बताईये मुझे क्या करना हैं कोनसा डांस , कोनसा सांग ?
दस :- वोह तोह तुम कर चुकी हो बीटा ?
नम्रता :- मैं ? कब
दस :- पहले दिन तुमने जोह मुझे डांस कर के दिखाया था वही करना हैं तुम्हे बस मैं जोह बतावुंगा वोह इम्प्रूवमेंट करना
नम्रता :- जैसे की ?
दस :- जैसे की कुछ स्टेप्स , कस्टम, एक्सप्रेशन एंड फील
नम्रता :- है मैं करुँगी इम्प्रूवमेंट
दस :- तुम्हे कोनसा गण पसंद हैं बीटा
नम्रता :- क्यू सर क्या हुवा
दस :- कुछ नहीं लगाओ न
नम्रता आपने मोबाइल निकलती हैं और एक सॉफ्ट गण लगा देती हैं और मोबाइल को खिड़की पैन रख देती हैं
दस की नजरे नम्रता पैन थी ....
नम्रता भी अपने सर को देख रही थी
गाने का आवाज पुरे रूम मैं गूंज रहा था धीरे धीरे दस नम्रता की तरफ बढ़ता हैं जैसे जैसे दस नम्रता के करीब आए रहा था नम्रता आपने कदम पीछे ले रही थी और दिवार से चिपक जाती हैं
दस नम्रता के करीब जाता हैं और नम्रता को अपना हैट देता हैं
नम्रता दस सर का कला कड़क हैट देखती हैं और कुछ सोच के सर के हैट को पकड़ लेती हैं
दस नम्रता को अपनी और खींच लेता हैं और कहता हैं
दस :- डांस मैं फील होना चाइये बस उसकी कमी हैं तुम्हारे डांस मैं
नम्रता :- आआ है सर लवंगी मैं फील
दस :- कैसे लाओगी ?
नम्रता :- पता नहीं
दस :- मैं सीखा दू ?
नम्रता सेहम जाती हैं और बड़ी सेहमी आवाज मैं कहती हैं
नम्रता :- ा ा हआ
तभी दस नम्रता को म्यूजिक पे घुमा लेता हैं और गोल गोल घूमने लगता हैं पर अभी तक दस ने नम्रता को कामिनी नजरो से चुवा नहीं था वोह ईमानदारी से उसको सीखा रहा था
सूरज की रौशनी अब्ब काम हो रही थी और बोहत जल्द शाम होने वाली थी
दस अब्ब नम्रता के कम्बदान को देख उत्तेजित हो रहा था
दस को नम्रता की सांसो की आवाज अपने कानो मैं सुनाई दे रही थी
तभी दस नम्रता को अपने करीब कर लेता हैं और कहता हैं
दस :- तुम बोहत जल्द सब सिख लेती हो
नम्रता :- ha....h. है सर
तभी दस नम्रता को अपनी और सत्ता लेता है और कहता हैं
दस :- आज ड्रेस अच्छी हैं तुम्हारी
अपनी तारीफ सुन नम्रता शर्मा जाती हैं
नम्रता :- थैंक यू सर
दस :- पर
नम्रता :- पर क्या सर ?
दस :- पर शार्ट ड्रेस मैं डांस बोहत कम्फर्टेबले होता हैं
शार्ट ड्रेस का नाम सुनते हे नम्रता के बदन मैं सिसक निकल जाती हैं उससे वोह चिट्टी , और कल का डांस यद् आता हैं और पुरे बदन मैं कुछ महसूस होता हैं
नम्रता :- है सर ....
दस भी अब कुछ नहीं कहता वोह समाज चूका था नम्रता क्या सोच रही हैं और उसी का फायदा उठा के वोह नम्रता का आपने पुरे बदन के करीब लता हैं और कास के उससे बदन से सत्ता लेता हैं
और झट से नम्रता के एक कोमल तंग को पकड़ लेता हैं और ऊपर कर देता हैं ... नम्रता आपने कोमल सा हैट दस के बुड्ढे साइन पे रख देती हैं
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ क्या नजारा था ....
दोनों भी एकदूसरे के अब्ब बोहत करीब आए चुके थे नम्रता की सांसे ऊपर निचे हो रही थी दोनों के सांसो मैं एक अलग से गर्मी थी
नम्रता की जांघ दस के काळा कड़क हटो मैं थी भले हे लेग्गिंग्स थी जांघ पर लेकिन दस को नम्रता के कोमल जांघ की गर्मी आपने कड़क हटो पैन महसूस हो रही थी नम्रता को वोह अनएक्सपेक्टेड टच मनो हल्का सा सहारा दे रहा था वोह अपने आप को उस सिचुएशन मैं भी समझा रही थी लेकिन उसका कोई फायदा नहीं था क्यू की नम्रता के कोमल जांघो पर दस का कड़क लोहे जैसा हैट हरकते करना चालू कर चूका था
दस की कड़क उंगलिया नम्रता के कोमल जांघ के निचे एक अलग से गर्मी पैदा कर रही थी
दस अब नम्रता को इस्सस कदर नजदीक कर रहा था की नम्रता की कोमल योनि दस के पंत मैं हो रहे होचल मतलब लुंड पैन सात चुकी थी नम्रता को महसूस हो रहा था की ये नजदीकी अब्ब डांस से परे हैं पर अब्ब वोह कुछ नहीं कर सकती थी
जब दस को महसूस होता हैं की नम्रता की कोमल योनि वाली जगह उसके पंत के ऊपर से उसके लुंड पैन सात चुकी हैं तोह वोह उत्तेजना से भर जाता हैं और झट से नम्रता की तंग को निचे कर उसको देखता हैं
और आपने कड़क गन्दी बहो मैं भर लेता हैं
वोह नम्रता को इस्सस कदर दबा लेता हैं की नम्रता का पूरा अंग और बदन दस से चिपक जाता हैं और एक अलग सा करंट दोनों के बॉडी मैं लगता हैं
नम्रता को कास के दस का एक हैट नम्रता के कोमल कमर पैन और एक हैट उसके रोमांच से भरपूर गांड पैन चला जाता हैं
दस के इतने करीब जाने के बाद नम्रता के पुरे बदन मैं एक लहर से दौड़ गई पता नहीं था उससे उसके शरीर मैं क्या हो रहा हैं लेकिन जोह हो रहा था उससे वोह होने दे रही थी एक अलग सा अहसास था नम्रता को जोह वोह न चाहते हुवे भी कहा रही थी
दस को भी अब अलग सा अहसास होना शुरू हो चूका था न जाने कितने हाउसवाइफ , टीचर , गर्ल को वोह अपना शिकार बना चूका था लेकिन नम्रता के बदन मैं उससे अलग सा महसूस हो रहा था एक रिफ्रेशिंग और एक काम वासना को काबू और उत्तेजित जोह दोनों कर सके ऐसा अहसास था ये अहसास किसी काम हवस से परे था .....जिसकी तलाश दस को थी
दस जब देखता हैं उसके काळा बदन पैन एक दूध जैसी गोरी कमसिन पारी सात चुकी थी जिसका गोरा रंग बदन उसके छाती और शरीर से सात चूका था तब दस काम वासना मैं तड़पने लगता हैं और आपने एक हटो से नम्रता के कोमल से गांड को मसलने लगता हैं और मनो नम्रता दांग से रह जाती हैं और उसके मुह्ह से कोमल सा आवाज निकलता हैं
नम्रता :- अह्ह्ह्हह्हह
ये आवाज सुन दस रूक सा जाता हैं और उसके दिमाग से गोरा और कला ये ख्याल निकल कर वोह उस आवाज के सुंदरता को भाप लेता हैं और खो सा जाता हैं
निचे कोदो मैं हे सही पर नम्रता के जवान योनि का मतलब छूट का और दस के लुंड का मिलान हो चूका था और मनो दोनों एकदूसरे को कपड़ो के उअप्र से चुम रहे थे चूस रहे थे
तभी दस नम्रता को कास के थोड़ा ऊपर कर लेता हैं और जोह कोमल आवाज नम्रता के मुह्ह से निकली थी उस कमसिन चेहरे को देख कर खो जाता हैं नम्रता के गुलाबी यह उससे अपनी और बुला रहे थे नम्रता के यह का रसीला पैन उससे काम वासना मैं तड़पा देता हैं
नम्रता को महसूस होता हैं की गाना तोह कब का बंद हो चूका था पिछले 5 मिनट्स से वोह दोनों भी खुद के दुनिया मैं झूम रहे थे और ये रीलीज़ कर के नम्रता को खुद के ऊपर शर्म आती हैं और वोह अपनी आँखे बंद कर लेती हैं
आँखे बंद हुवा चेहरा दस को और खूबसूरत लग रहा था
ुसस्स सुन्दर कमसिन चेहरे को देखते हुवे दस आपने कड़क सा हैट नम्रता के वक्ष यानि एक बूब्स पैन रख देता हैं
नम्रता :- अह्ह्ह्ह ुम
नम्रता को आपने पर्सनल अंग पैन वोह गरम स्पर्श महसूस हो रहा था और उस हैट की गर्मी का अहसास वोह आंखे बंद होने के बावजूद ले रही थी
दस का आपने बूब्स पे हैट गिरते हे नम्रता का हैट दस के कंधे पैन चला जाता हैं और वोह खुद को वह से छूटने की नाकाम कोशिश करती हैं
दस ुसस्स खूबसूरत चेरे के और आपने कला सा मुह्ह ले जा रहा था
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ दस का एक हैट नम्रता को जवानी का अहसास करवा रहा था वोह हैट मनो नम्रता मैं जवानी की गरमी पैदा कर रहा था
घाना अँधेरा होने जा रहा था सूरज की अब्ब बोहत काम रौशनी खिड़की से अंदर आ रही थी और हवा तेज होने लगी थी एक अलग से ठण्ड थी हवा मैं पर अंदर वातावरण बोहत गरम हो चूका था
दस की गरम सांसे अब्ब नम्रता को आपने खूबसूरत चहरे पैन महसूस हो रही थी उससे अहसास हो रहा था की सर उसके बोहत करीब आ रहे हैं
दस भी आपने कला चेहरा लेके नम्रता के रसीले ोठो की तरफ बढ़ रहा था उससे लग रहा था जैसे नम्रता के ोठो से रसीले रास की बून्द टपक रही हो और उससे वोह बून्द को आपने मुँह मैं लेके चेतना था
नम्रता को अब्ब आपने ोठो पैन एक अलग से गर्मी का अहसास हो रहा था
दस के काळा यह नम्रता के गुलाबी ोठो पैन चिपकने हे वाले थे की ........
नम्रता आपने मुँह घुमा लेती हैं और दस को आपने से अलग करवा देती हैं और दिवार से सात जाती हैं उसके आँखों मैं एक दर और रोमांच दोनों था पर पता नहीं उससे क्या हुवा
दस समझ जाता हैं क्या करना हैं वोह नम्रता के तरफ देख एक मुस्कान देता है. और बस शांत खड़ा रहता हैं नम्रता भी वह कड़ी थी दोनों के बिच कुछ बात नहीं हो रही थी
नम्रता खुद को गिलटी फील कर रही थी और दस खुदको कमीना नहीं दिखाना चाहता था इसलिए दोनों चुप थे खिड़की से आए रही तेज हवा दोनों के गर्मी को उतर रही थी जब नम्रता देखती हैं अँधेरा हो रहा हैं वोह थोड़ी दर से जाती हैं और अपनी नजरे झुका लेती हैं
तभी दस दोनों के बिच की ख़ामोशी तोड़ता हुवा कहता हैं
दस :- डरो मत हम निकल रहे हैं अभी 7 बज चुके हैं कॉलेज बंद हो चूका हैं तोह यहाँ पीछे से सीक्रेट रास्ता हैं वह से जायेंगे
नम्रता कुछ नहीं कहती हैं और आपने सर है मैं हिला देती हैं
दस :- पर मेरा बैग मेरे केबिन मैं हैं तोह मैं वोह लेके आता हु तब तक यही रहो तुम भी चलोगी तोह रत का पेओन देख सकता हैं
नम्रता थोड़ी दर से जाती हैं पर उसको भी समझ आता हैं उसका जाना ठीक नहीं और वोह फिर से है मैं सर हिला देती हैं
दस एक मुस्कान देकर वह से निकल जाता हैं और यहाँ नम्रता अकेली उस अँधेरी रूम मैं थी ......
खिड़की से आए रही तेज ठंडी हवा नम्रता को आपने बदन पैन महसूस हो रही थी और अब्ब खिड़की से हलकी से चाँद की रौशनी आए रही थी वोह रत पूर्णिमा की थी तोह चाँद की रौशनी कुछ ज्यादा थी जिससे नम्रता को आजु बाजु का सब कुछ दिखाई दे रहा था नम्रता बास उस रूम को ताड रही थी तभी वोह आपने कदम आगे बढ़ने लगती हैं पर उसकी चल बोहत धीमी थी पर नम्रता का नेचर एक्सप्लोरिंग था इसलिए आते वक्त हे उसको यहाँ के काफी सरे चीजों ने आकर्षित किया था
तभी नम्रता को पता चलता हैं की वोह उस रूम से बहार आ चुकी हैं अब्ब उसको थोड़ा दर सा लगता हैं पर वोह आपने कदन आगे बढाती हैं शाम का सन्नाटा उसके मन मैं अलग सा दर पैदा कर रहा था
तभी उसको और एक रूम दीखता हैं और वोह आपने कदम वह ले जाती हैं पर ये कमरा काफी सुंसम था कोई खिड़की नहीं थी निचे पूरी मिटटी और धुल थी तभी उसकी नजर अंदर जाती हैं जहा एक खिड़की थी और वह से चाँद की रौशनी दिवार पैन गिर रही थी वोह उस कमरे के और अनादर चली जाती हैं
धीरे धीरे उसके कदम उस खिड़की के तरफ जा रहे थे और वोह उस खिड़की के यहाँ पोहच जाती हैं ुसस्स खिड़की से बोहत सुन्दर चाँद की रौशनी सामने वाली काली दिवार पैन गिर रही थी नम्रता उस दिवार को देखने पीछे मूड जाती हैं
और ......... नम्रता का पूरा बदन कम्प उठता है. और उसकी हालत टाइट हो जाती हैं
क्यू की उसने उस दिवार पैन ऐसा कुछ देखा था
वोह दृश्य देख नम्रता का पूरा बदन कम्प जाता हैं और दर का अहसास क्या होता हैं वोह लाइफ मैं पहली बार एक्सपीरियंस करती हैं पर वोह दृश्य उसके नजरो के सामने था जिसका उससे सामना करना था वोह हिम्मत से काम लेती हैं और अपनी नजरो को उस दृश्य पे टिका देती हैं तोह
उससे महसूस होता हैं की ये एक चित्र हैं
वोह उस चित्र के अब्ब करीब जाने लगती हैं और दर के मरे उसके पुरे बदन मैं पसीना छूट रहा था
वोह उस चित्र को देख शॉक हो जाती हैं
एक बोहत से सुडोल सुन्दर बदन वाली स्त्री आपने बदन को खोल रही थी और आपने एक वस्त्र को आपने ऊर्जा से हटा रही थी
उसका एक बड़ा सा आम पूरा नंगा था और एक बूब्स पैन उसके बड़े सुन्दर बल थे उसका आधा चेहरा उसके बालो से ढाका हुवा था
तभी नम्रता की नजर उसके निचे वाले हिस्से पैन जाती है जहा वोह औरत पूरी नंगी थी और आपने सुन्दर से योनि का प्रदर्शन कर रही थी वोह देख नम्रता शर्म से महसूस करती हुवी अपनी नजरे उस योनि पैन टिका देती हैं और उस चित्र को हैट लगाती हैं नम्रता को एक अलग हे रोमांचे महसूस होता है पर साथ मैं रत का वोह सन्नाटा उससे दर भी महसूस करवा रहा था
तभी नम्रता सवालो के घेरे मैं फास जाती हैं पर कुछ सोच पति उसको लगता हैं की आगे वाले कमरे मैं भी जेक देख ले और वोह आपने कदम आगे बढ़ा देती हैं और अगले कमरे मैं पोहच जाती हैं
वह पोहचते हे नम्रता को आपने पुरे बदन मैं अलग सा रोमांच महसूस होता हैं और उसी रोमांच के साथ अब्ब वोह बिना डरे आगे बढ़ती हैं आपने पायल की चुम चुम आवाज करते हुवे वोह उस अँधेरे कमरे मैं पोहच जाती हैं और फिर से वह एक वैसे हे खिड़की थी और इस्सस बार वोह दिवार पैन नजर घुमा ते हैं तोह .....
िस्स्सस्स बार उसके बदन मैं रोमांच और अलग सा करंट लग जाता हैं क्यू की ऐसा उसने आपने पुरे जीवन मैं कभी नहीं देखा था उसके बदन मैं बदलाव आ रहा था सांसे तेज हो रही थी गर्मी की वजह से पूरा बदन पसीने से भीग चूका था और नजरे बास ुसस्स विचित्र चित्र को देखे जा रही थी
नम्रता को वोह चित्र समझने मैं थोड़ी देर लगती हैं पर जब समाज जाती हैं तोह उसके पुरे बदन से एक लहर दौड़ जाती हैं
चित्र काफी विचित्र था पर जोह चित्र मैं दृश्य था वोह देख किसी को भी रोमांच चढ़ जाये पर बात सिर्फ रोमांच की नहीं थी बात थी उस चित्र के रहस्य की ऐसा लग रहा था किसी ने वोह चित्र मिटाया था और सिर्फ लड़की के बदन को रकह था
पर नम्रता उस चित्र को देख समझ जाती हैं की क्या हो रहा हैं
इस्सस लड़की का चेहरा स्पष्ट दिख रहा था और वोह काम वासना के मजे ले रही थी चहरे पैन काम वासना के भाव थे और खुले बल और नंगा बदन
इस्सस लड़की का बदन उस पहले वाले चित्र से मिल रहा था पर ये वाला चित्र मनो लाल मिटटी के रंग का था और वोह वाला काळा कोयले जैसा
इस्सस चित्र के दृश्य को नम्रता अब्ब बारीकी से देख रही थी और रोमांचित हो रही थी वोह बस ुसस्स लड़की के सुडोल बदन को देखे जा रही थी वोह बदन काफी आकर्षित था
तभी नम्रता की नजर उस लड़की के निचे वाले हिस्से पे जाती हैं जहा उसके गांड मैं काम वासना माँ हतियार यानि की लुंड घुस रहा था और नम्रता को वोह लुंड को पकडे हुवे एक मर्द का हैट दीखता हैं जोह देख नम्रता का पूरा बदन कम्प उठता हैं
वोह लुंड काफी बड़ा था जोह देख नम्रता को उसके सर यानि प्रोफेसर दस के लुंड की तस्वीर आँखों के सामने आ जाती हैं
वोह उस चित्र को अब्ब फील करने लगती हैं
जीसस मैं वोह लड़की उस आदमी के लुंड पैन आपने गांड को उछाल रही हो
और काम वासना से चिल्ला रही हो
ोुछःह अह्ह्ह ोुछहहहह अह्ह्ह्हह
वोह सब देख नम्रता के अंदर बोहत कुछ हो रहा था सवालो के घेरो ने उससे घेर लिया था
..
उसकी नजर उस चित्र से हैट नहीं रही थी वोह उस चित्र के करीब जाती हैं और इस बार उस लड़की के गांड के छेद मैं घुस रहे लुंड को वोह छू लेती हैं
उफ्फ्फ्फफ्फ्फ़ नम्रता के पुरे बदन मैं उससे गर्मी महसूस होती हैं और एक करंट सा लगता हैं और वोह बड़ी अच्चर्य से पसीने मैं लटपट ुसस्स चित्र मैं खो जाती हैं
नम्रता की नशीली आँखे बस उस दृश्य को देखे जा रही थी बदन मैं एक कप कपि से महसूस हो रही थी और रोमांचित मन बस उस दृश्य मैं खो चूका था
माथे से पसीने की बून्द उसके पुरे चहरे को गिला कर रही थी और रसीले ोठो पैन भी गिला पैन था
पुरे चहरे पैन एक अलग सा गिला पैन था और दर का अहसास भी था और रोमांच का उत्साह भी
बोहत सरे सवाल थे ...
ये चित्र किसने बनाये थे ?
और ऐसे अश्लील चित्र कोण बना सकता हैं ?
ये जगह तोह सिर्फ दस सर को पता हैं ?
कही .....
तभी वोह आपने आजु बाजु देखती हैं और अंधरे का अहसास होते हे दर जाती हैं नजरे चित्र पैन थी पर अब चित्र धुंदला सा नजर आता हैं और उससे कुछ आहात से महसूस होती हैं
और तभी उसके कंधे पैन एक कड़क सा हैट गिरता हैं और नम्रता झट से पीछे मूड जाती हैं और उस शख्स को देखती हैं
वोह शकस बड़ी आवाज और अच्चर्य से नम्रता को कहता हैं
दस :- तुम यहाँ क्या कर रही हो .....
तो बे कॉन्टिनोएड..............