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From this section you can read all the indian sex stories arranged from the various users. So what you are going to read stories like 'Office girl with her lover', 'Indian mom with her son. Lots of erotic tales are posted here. So guys hold your cock for the amazing sexual fantasies.
मम्मी जब अपनी उंगलियों को असलम का हथियार बना अपनी चूत झाड़ लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी,
तभी सलमा आंटी मम्मी के कमरे में आ गई,
सलमा आंटी मम्मी की हालात देख सब समझ रही थी,
सलमा आंटी मम्मी के पास आकर बैठ गई और मम्मी से बड़े-बड़े संतरों को घूरते हुए बोली बहूं शौहर की याद आ रही है,
सलमा आंटी इस बात से मम्मी सरमाते हुए मुस्कुराने लगी
मम्मी हम्म ऐसी कोई बात नहीं, बस ऐसे ही, और सलमा आंटी के गले लग गई
सलमा आंटी बहूं में तेरी हालत समझ सकती हूं एक जवान औरत के लिए मर्द के लिए मर्द का साथ कितना जरूरी होता है, तूम असलम की बेगम रिश्ता ३ साल के लिए हो,
निकाह से अब तक असलम का मिलन भी नहीं हुआ है , तूम मर्द से मिलन के लिए तरसती रही हो,
बहूं थोड़ा एडजस्ट कर लो, ये खोली भी छोटी सी है,
औरत को जगह ही कितनी चाहिए बस उतनी जिसमें वो मर्द के नीचे अपनी टांगें चौड़ी कर सकें,
मम्मी सलमा आंटी से - मम्मी जी मैं आपकी खोली और असलम के नीचे अपनी टांगें फैला कर एडजस्ट कर लूंगी,
सलमा बहूं एडजस्ट करना ही पड़ेगा वो क्या ही मर्द जहां रहे उसकी जोरू को तो वही रहना पड़ता है,
मम्मी हम्म सरमाते हुए,
मम्मी, बस एक बात की चिंता है असलम मुझ से उमर में छोटे हैं,
सलमा; मुस्कुराते हुए बोली बहूं तूम उसकी चिंता मत कर,
उमर में ही छोटा ही बाकी उसका सब कुछ बड़ा ही है, जो एक पत्नी को चाहिए ना उसका वो सामान काफी बड़ा है तेरी अच्छें तसल्ली करवा देगा।
बहूं तेरे सॉकेट में असलम का प्लग दम फिट आएगा, वैसे बहूं तूम तो जानती ही हो अगर प्लग मोटा भी हो ना आजकल के लड़के कैसे भी करके के अपना प्लग औरत की सॉकेट में घुसा ही डालते हैं
उनको इसकी परवाह नहीं होती कि उनको बड़ा प्लग डालने पर औरत के सॉकेट की क्या हालत होगी।
वैसे बहूं आप का सॉकेट तो अभी टाइट ही होगा बरसों से तो इस्तमाल ही नहीं हुआ होगा।
सलमा आंटी के मुंह ये सुन मम्मी मंद मंद मुस्कुराने लगी
क्योंकि मम्मी भी जानती थी कि सलमा आंटी अपने बेटे के किस सम्मान की बात कर रही थी,
सलमा एकदम जवान गबरू मर्द है मेरा बेटा आप को खुश कर देगा बहूं,
मम्मी किसी से फोन पर बात कर रही थी, और कोई सामान घर पहुंचाने को बोल रहीं थीं,
जब मेंने ध्यान से सुना तो मम्मी पापा को कुछ सामान की बात कर रही थी,
उधर से पापा बस हां में ज़वाब दे रहे थे,
मम्मी पापा को किसी सामान का बोल मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था,
अब पक्का हो गया है कि दो चार दिन में ही मेरे कमरे का ठिकाना मम्मी कमरे से बदलकर अलग कमरे में होने वाला है।
फिर मम्मी अपने कपडे चेंज करके घर के काम में लग गयी। झाड़ू पोछा लगाने के बाद कपड़े धोने के लिए मम्मी असलम (अब तो वो मम्मी का कमरा हो चुका था) के कमरे में उनके कपड़े लेने चली गयी।
जब मम्मी कपड़े सेट करके रख रही थी तब मम्मी ध्यान दिया था कि मम्मी अपनी पैंटी असलम के ऊपर अंडरवियर रख दी ,
जिस का ध्यान आते ही मम्मी चूत तो मानो पानी ऐसे छोड़ने लगी कि जैसे चूत में नाल लगा हो मम्मी को ऐसा अहसास हो रहा वह मम्मी पैंटी के ऊपर असलम का अंडरवियर नहीं पड़ा,
बल्कि मम्मी की निगोड़ी चूत के ऊपर असलम का लंड पड़ा है।
मम्मी का हाथ खुद ही नीचे चूत के ऊपर चला गया जो गिली हो कर, सलवार को बुरी तरह से गिली कर दी थी।
अब शायद मम्मी की चूत भी असलम के मोटे लम्बे लंड की चोट के लिए बेकरार हो रही थी तभी पानी छोड़ रही थी।
फिर मम्मी मुस्कुराई और अपने काम में लग गई तभी बाहर दरवाजे पर बेल सुनी तो दरवाजे की ओर देख बोली
लगता है ये आ गए हैं फिर दरवाजे की ओर ऐसे लपकी जैसे अपने बरसो के बाद अपने साजन से मिल रही हो, मम्मी के चेहरे पर एक अलग ही ख़ुशी थी असलम को देखने की
जैसे ही मम्मी ने दरवाजा खोला सामने असलम नहीं कोई था,
असलम की जगह किसी ओर को सामने पा कर मम्मी का चेहरा मुरझा गया,
सामने खड़े उस लड़के से पूछा, जी आप को किस से मिलना है
लड़का; जी शेख़ कूरियर ये कूरियर है असलम के नाम से
मम्मी; जी वो घर पर नहीं है आप मुझे दे दीजिए,
वो लड़का ; मैडम आप कौन
मम्मी; जी मैं उनकी बेगम हूं
आज खुद को असलम की बेगम कहते हुए मम्मी को अलग ही खुशी मिल रही थी,
यह पहला मौका था जिससे मम्मी ने खुद को असलम की बेगम बताया था।
असलम शाम को आ गया, शायद कोई जरूरी ही काम था जो इतने देर से आया।
असलम अपने कमरे में फ्रेश होने चले गए और इतनी देर में मम्मी ने खाना लगा दिया।
खाना लगाने के बाद मम्मी ने बाहर से ही आवाज़ दी, सुनते हो,
असलम ने शरारत से मम्मी आंखों ही आंखों देखते हुए कहा, जी मेरे हुस्न की सरकार।
( असलम और मम्मी की ये सब आंखों के इशारे से हो रही थी )
मम्मी भी आंखों ही आंखों में इशारा से मुस्कराती हुई बोली धत्त,आप भी ना,
मम्मी; खाना लग गया है
असलम, तुम भी आ जाओ आंटी
मम्मी; आप लोग खा लीजिए मेरे बाद मैं खा लूंगी
मम्मी ने डिनर को टेबल पर लगा दिया , मैं, अब्दुल , सलाम आंटी और असलम सब डिनर कर रहे थे,
जब असलम की नज़र मम्मी की नज़रों से मिलती है तो मम्मी अपनी आंखें झुका लेती ,
तो असलम मुस्करा कर अपने होठों को गोल करके ऐसा जैसा मम्मी को चूमने का इशारा कर रहा था ,
तो मम्मी असलम पर बनावटी गुस्से से, आंखों में आंखों में डाल कर इशारों-इशारों में
बताने की कोशिश करने लगी कि क्या कर रहे हैं, सब पास बैठे हैं
लेकिन असलम था कि बार बार अपने होठों को गोल घुमा कर मम्मी को किस के लिए मना रहा था,
मम्मी ना में जवाब देते हुए मुस्कुराते हुए ना, में सर हिला देती,
असलम बार बार अपनी जीभ निकाल कर अपने होठों पर फिरता मानो अभी भी मम्मी के होठों का स्वाद ले रहा हो।
डिनर के बाद मम्मी किचन में बर्तन रखने गई तो असलम मम्मी के पीछे-पीछे किचन में आ गए,
असलम को किचन में अपने पीछे आते ही मम्मी की सांसे भी तेज चलने लगी,
मम्मी को पता था कि असलम किचन में क्यों आया है,
असलम ने किचन में आते ही अपने दोनों हाथ मम्मी कमर पर रख कर अपनी ओर खींचने लगा ,
तो मम्मी किसी पतंग से बांधी डोर की तरह असलम की ओर खिंची चली गई
असलम ने अपने दोनो हाथो में मम्मी की कमर डाल कर मम्मी को अपने से चिपका लिया,
मम्मी शर्म से बेहाल हो गयी थी, मम्मी जल्दी से असलम की बांहों से निकल बोली
मम्मी; क्या कर रहे हैं कोई आ जायेंगे
असलम भी आगे आ कर मम्मी के कानों के झुमके को छेड़ते हुए
कुछ भी तो नहीं आंटी ,
मम्मी; जाइये ना बाहर कोई आ जायेगा और मम्मी मुड़ कर असलम की ओर देख मुस्कुराने लगी
असलम; आंटी (असलम सब जानते हुए भी मम्मी को जानबूझकर आंटी बोल रहा था)
मम्मी असलम की ओर देख कर मुस्कुराते हुए,
ऐसे का देख रहे हो क्या पहले कभी देखें नहीं हो
असलम मम्मी की बात सुन कर ; आंटी देखा तो बहुत बार हूं पर आप के हुस्न का ऐसा जलवा आज पहली बार देख रहा हूं खुदा कसम जन्नत की हूर लग रही है खुदा ने आप ने हुस्न को बेपनाह दिया ही, ये सुन कर मम्मी शर्मा उठी
मम्मी; हाय दईया कैसे हमें चढ़ा रहे हैं अभी तारीफ से चढ़ा रहे हैं बाद में हमें अपने उस पर चढ़ायेंगे,
मम्मी असलम के 9 इंच लम्बा ओर 4 इंच मोटा लोड़े पर चढ़ने को तैयार थी,
मम्मी ; मेरी इतनी तारीफ कर रहे हो ऐसा का है हम में
असलम; ऐसा क्या नहीं है आप में आंटी, मुझे ये बताओ क्या नहीं है आपके पास,
आप तो पूरी की पूरी तारीफ के काबिल लगती हो, खुदा ने आपको बड़े ही फुर्सत से बनाया और असलम मम्मी की जुल्फों को बड़े प्यार से मम्मी के चेहरे पर से हटा दिया
असलम; ये काली काली रेशमी जुल्फें ये झील सी गहरी नशीली आंखे कोई भी इन आंखों को देखें तो उसे नशा हो जाए,
गोरे गोरे गाल गुलाबी, शरबती होंठ जिन को चूमने से जन्मों जन्मों की प्यास भुज जाए
ये सुन कर मम्मी शरमा गई और मुस्कुराहट के साथ थोड़े आगे को जाने लगी
मम्मी: और
असलम ने मम्मी को अपनी ओर आपनी बाहों में खींच लिया,
असलम मम्मी के कंधे पर अपना चेहरा रख कर बोला,
बता रहा हूं, कहां दूर जा रही हो आंटी रुको बताने तो दो
मम्मी; बता तो दिया है
असलम; अभी कहां बताया है अभी तो हमें आपके हुस्न की तारीफ करने ओर मौका दिजिए
आपको पता तो चले कि आप क्या कयामत हो,
हम इस लायक भी नहीं हैं जो आपके बेपनाह हुस्न की तारीफ ना कर सके
मम्मी; रोक रही हूं क्या मना करने पर मान जाओगे क्या,
और आप मुझे आंटी मत कहो,
ये कह कर मम्मी ने अपना चेहरा असलम के सीने में छुपा लिया,
(असलम सब जानता था फिर भी अनजान बना हुआ था कि मम्मी ने उसे दिल से अपना शौहर कबूल कर लिया है, असलम मम्मी को पूरी तरह से अपनी बेगम और अपने बच्चों की अम्मी बनाना चाहता था, वो ये सब मम्मी के मुंह से बुलवाना चाहता था )
मम्मी का ये कहना ही था
असलम ने मम्मी का चेहरा अपनी ओर घुमा कर अच्छा जी फिर हमें भी तो पता चले की आपको आंटी नहीं तो क्या कह कर बुलाना चाहिए।
मम्मी को भी पता था कि असलम उनके मुंह से ये सब सुनना चाहता है कि मम्मी वो खुद कहे कि वो मम्मी को आंटी नहीं सुनीता बेगम, अभि की अम्मी या बेगम साहिबां कहें।
मम्मी भी अब रोमांटिक हो चुकी थी मम्मी असलम की आंखो में आंखे डाल कर मुस्कराते हुए बोली,
हाय दईया जैसा आपको पता ही नहीं हो, शौहर अपनी बेगम को क्या बुलाते हैं
मम्मी असलम की आंखों में आंखें डालकर उसकी बाहों में कसमसाते हुए बोली, जैसे अभी के पापा कहते हैं सुनीता
असलम; मम्मी को बांहों में कसते हुए बोला,
असलम; अभि के पापा सुनीता के साथ अभि की मम्मी भी तो कहते हैं ,
मम्मी; हम्म,
अगर मैं अभि,नवाज़, नाजिम और नाजिमा की अम्मी कहूं तो असलम मम्मी को बांहों में कस कर बोला
असलम मम्मी को चोदने के साथ अपने बच्चों की अम्मी भी बनाना चाहता है असलम ने अपने इरादे मम्मी को बता दिया थे)
असलम के मुंह से नवाज़, नाजिम और नाजिमा मुस्लिम बच्चों के नाम सुन मम्मी के बदन में सिहरन सी दौड़ गई और मम्मी मुंह से सिस्की निकल आई, हाय दईया रे,
मम्मी ने असलम के होंठो को अपने रसीले गुलाब की की पंखुड़ियों जैसे होंठों से मिला धीरे से बोली,
मम्मी ; तो बुलाया करो, हम रोकें है का, पर ये अकेले में,
ये सुनते ही असलम मम्मी की पहाड़ जैसी चुचियों को सहलाता हुआ बोला,
जो हुकुम नाजिमा की अम्मी,
अकेले में हम आपको ये ही कहेंगे बेगम साहिबा, नवाज़ नाजिम और नाजिमा की अम्मी, जानेमन गुले गुलज़ार, हुस्न की मल्लिका
असलम; बेगम साहिबा ओर आप हमें क्या कहेंगी,
मम्मी; अदा से मुस्कराती हुई अभि के अब्बू
असलम; अच्छा, ओर (असलम मम्मी के मुंह से सुनना चाहता था कि मम्मी और उसके होने वाले बच्चों का नाम ले)
मम्मी; ओर का कहेंगे सुनीये जी नाजिमा के अब्बू और इतना कहकर मम्मी मुस्कराती हुई असलम के सीने से जा लगीं
असलम मम्मी को बांहों में कस कर,
असलम बेगम साहिबा अब एक दोस्त तुम्हारे बिना नहीं रहता तुमने तो मुझ पर जादू कर दिया है जादूगरनी हो तुम कोई,
जब कोई प्रेमी पति अपनी प्रेमिका पत्नी की ऐसी तारीफ करे तो किसे अच्छा नहीं लगता
उस औरत को अपनी सुन्दरता अपनी जवानी पर घमंड हो जाता है
असलम की बात सुन कर मम्मी अदा से मुस्कुराती,
मम्मी ; (अपने शौहर असलम से) मैं कहां की जादूगरनी हूं अभि के अब्बू मैंने कौन सा जादू किया है
असलम; अच्छा जी अभी आपने कुछ नहीं किया यही तो आपकी हुस्न की अदा है
जिसने हमें अपना गुलाम बना लिया और कह रही है कि कुछ किया ही नहीं,
मम्मी; क्या आप भी ना , कहां गुलाम बनाया है मेरे पास क्या है क्या मिलेगा आप को मेरी गुलामी से,
असलम; हजूर जो आपके पास हैं वो किसी और पास ने कहा आपके पास तो दुनिया की सब से अनमोल दौलत है, (असलम ने मम्मी साड़ी की के उपर से ही मम्मी की चूत पर हाथ फिराया )
सरकार आप की एक मुस्कान ही करोड़ो की है,
बस आप हमें ये मुस्कान ही तनख्वाह में दे दिजिए वैसे हजूर बाकी आपकी मेहरबानी जो आप इस दास को बक्शीश में दो,
असलम मम्मी को बांहों में भर रोमांस कर ही रहे था कि तभी अचानक से सलमा आंटी आ गयी,
मम्मी और असलम हड़बड़ा कर कर अलग हो गये
असलम जल्दी से किचन से बाहर चला गया, मम्मी रसोई का काम निपटाने में लग गई।
किचन का काम निपटा कर मम्मी , अपनी सुहागरात की सेज सजाने शौहर असलम और अपने कमरे की ओर जाने लगी,
असलम की आंखे मम्मी के लेफ्ट राइट हिलते हुए बड़े बड़े चूतड़ों पर जमीं थी,
मम्मी भी अपनी बड़ी सी गांड़ बड़ी अदा से हिला कर चल रही थी,
मम्मी चलती हुई दरवाजे के पास जाकर असलम की तरफ देख कर हाथ के इशारे दे बुलाया,
मम्मी; अभि के अब्बू आ जाइये
असलम तो जैसे मम्मी के इस इशारे के इन्तज़ार में था,
असलम के कमरे में आते ही मम्मी असलम का फोन मांगा,
असलम मम्मी को फोन देने की बजाए बोला, यार रहने दो ना फोन आओ ना हम बात करते हैं।
असलम के मुंह से मुझे फोन न देने की बात सुन कर मम्मी थोड़े गुस्से से रहने दीजियेगा आप अपना फोन,
मुझे आपके फोन से फोन नहीं करना, अपना नया फोन लुंगी, तभी बात करूंगी और कमरे से बाहर जाने लगी,
तो असलम कान पकड़ कर बोला, हजूर ये क्या आप नाराज हो गई।
मेरी सरकार हमारी क्या जरुरत है जो आप को मना कर दे मुझे क्या अपनी नौकरी से हाथ दोना है
असलम अपना फ़ोन के साथ फूलों का गुलदस्ता मम्मी की ओर बढ़ा,
बड़े प्यार से बोले, लिजिए बेगम साहिबा,
अब तो बता दो इस गुस्ताख को अपनी गुस्ताखी की माफ़ी मिलेगी।
असलम के इस अंदाज़ को देख कर मम्मी चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई।
मम्मी ने असलम से फ़ोन लिया और बाहर जाने लगी तो असलम बोले यही कर लो ना बात हमें भी तो पता चले कि हम से ज़्यादा किस पर आप की मेहरबानी है,
कहीं ऐसा तो नहीं तो हमारी शिकायत की जा रही है, लगता है अब थोड़ा संभल कर रहना होगा।
मम्मी कमरे से बाहर निकल दरवाजे के पास पहुंच कर पीछे मुड़कर कर असलम की ओर देख कर मुस्कुराने लगी
और असलम को अपनी नशीली आंखों से इशारों-इशारों में समझानें लगीं ,
बस थोड़ा सा इंतजार कीजिए,
मम्मी फ़ोन पर बात कर वापस अपने कमरे में जाना लगी, पर आज रात असलम के कमरे की ओर जाते मम्मी का दिल जोर जोर से धड़क रहा था,
मुझे पूरा यकीन था की आज रात मम्मी असलम को अपने ऊपर चढ़ने देंगी,
मम्मी और असलम की सुहागरात जो अधूरी रह गई थी आज पूरी होगी,
अगर देखा जाए तो जाए इस में गलत ही क्या आखिर असलम मम्मी का शौहर है,
असलम मम्मी के ऊपर चढ़ने का अधिकार रखता है, मम्मी के ऊपर चढ़ने का उसका कानूनी अधिकार 15 दिनों पहले ही मम्मी के निकाह कुबूल है कुबूल है कुबूल दे दिया था,
मैं ये सब सोच ही रहा था,
मम्मी तो कब की अपने शौहर के कमरे में आ गई थी।
मम्मी असलम को अदा से अपनी आंखें ही आंखों में इशारा से बोली,
जी वो नींद आ रही ही तो असलम बोले अरे यार सो जाना कुछ देर बाद कुछ देर तो बैठो और असलम ने कमरे में म्यूजिक चालू कर दिया तो मम्मी आंखों से धीरे से बोली
मम्मी लगता है जनाब के इरादे नेक नहीं ही आज रात ही तेरा बाजा बाजा डालेंगे तो फिर थोड़ा मुस्कुरा कर खुद ही मान में बोली,
बाजा तो इन्होंने ही तेरा बजाना है तेरा बाजा आज बजाए या कल बाजा तो बजना है।
असलम ने मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींच लिया मम्मी से बोला आओ ना सुनीता कुछ देर डांस करते हैं
असलम ने हाथ बढ़ाकर बोला आओ ना सुनीता तो मम्मी अपने बालों को ठीक करते कहा मुझे नाचना नहीं आता तो असलम मम्मी का हाथ पकड़ कर खींचे हुए बोला आओ ना जानता हूं तुम कितना अच्छा डांस करती हो।
मम्मी असलम के पास आकर म्यूजिक के साथ धीरे-धीरे डांस करने लगीं अपनी कमर हिलाते हुए,
असलम का यह रोमांटिक अंदाज देख जहां मम्मी अंदर से खुशी से झूम रही थी पर अभी थोड़ी शर्म ओर झिझक थी,
असलम के इस तरह खिंचने पर खिंची चली गई तो असलम ने मम्मी को अपने बांहों में भर लिया,
असलम ने मम्मी एक हाथ मम्मी के हाथ में और अपने दूसरा हाथ को मम्मी कमर में डाल कर धीरे धीरे नाचने लगे, मम्मी ने भी अपने दूसरे हाथ असलम के कंधे पर रख दिया
मम्मी असलम की आंखों में देख कर मुस्कराते हुए अपनी गांड को धीरे धीरे हिलाने लगी।
असलम के हाथ जो मम्मी की कमर पर थे उस से वो कभी मम्मी पीठ को सहलाता और कभी अपने हाथ को नीचे ले जा कर मम्मी के चूतड़ों पर रख कर जोर से दबा देता,
जिससे मम्मी के मुंह से प्यार ओर मस्ती भारी आआआआआआआआआआआ निकल जाती।
मम्मी और असलम दोनो के बदन एक दम से चिपके हुए थे असलम के गाल मम्मी के चिकने गालों से रगड़ खा रहे थे जिस से मम्मी अंदर एक अलग ही उत्तेजना उठ रही थी।
मम्मी असलम से एक दम चिपक गई जिस से असलम का खड़ा लंड मम्मी को साड़ी के ऊपर से मम्मी की चूतड़ों के ऊपर बार बार रगड़ता हुआ मेहसूस होता।
मम्मी की सांसे तेज ओर तेज चलने लगी, जिस से मम्मी भी कामातुर हो गई और मम्मी असलम की ओर घूम असलम के साथ ओर भी चिपक गई।
असलम के होंठो और मम्मी होंठो के बीच बस एक ही इंच की दूरी थी कि असलम ने अपने होंठो को मम्मी होंठो पर रख दिया और मम्मी होंठो को चूसने लगा..
असलम और मम्मी काफी देर तक ऐसे ही डांस करते, एक दूसरे के होंठो को चूमते रहे तो मम्मी असलम की बांहों से निकल बोली क्या सारी रात ऐसे ही नाचने का इरादा है,
तो असलम मम्मी से अलग हो अपना गद्दा जमीन पर बिछाने लगा,
असलम अपना गद्दा ज़मीन पर लगाने लगा तो मम्मी अदा से अपने गले में पड़ी चैन को अपनी उंगली घुमाती बोली, इसे रहने दो
असलम भी मम्मी की बात को समझ रहा था पर फिर भी अनजान बनते हुए मम्मी से बोला, सुनीता आप चाहती हो तो मैं बाहर सोने चला जाता हूं
मम्मी; मैने बहार जाने के लिए तो नहीं कहा, यही सो जाओ
असलम; कहा नीचे
मम्मी वहीं पड़े छोटे से बिस्तर की ओर इशारा करके वो बेड है ना वहां पर तो नीचे या फिर बहार जा कर सोने की क्या जरूरत है
असलम; जब मैं उस बेंड पर सोऊंगा ओर आप कहां सोयेंगी,
मम्मी; मैं भी उस पर , इतना बोल कर मम्मी शरमाने लगी
रात की तन्हाई हो और साथ मम्मी जैसी खूबसूरत औरत के साथ असलम जैसा जवान मर्द हो,
औरत मर्द के साथ ऐसी बाते करें तो ऐसा कौन सा मर्द होगा तो कंट्रोल कर सकेगा।
मम्मी तो आगे बढ़ चुकी थी और इस से आगे असलम को बढ़ना था,
वैसे मम्मी जो कर रही थी गलत नहीं था आखिर असलम मम्मी का शौहर था और मम्मी अपने शौहर को उसका हक ही तो दे रही थी।
मम्मी के साथ एक ही बेड पर सोने की बात सुन असलम की हिम्मत भी बढ़ गई तो वो वहीं खड़ी मम्मी के कान के झुमके पर अपनी उंगलियां चलाता बोला,
सुनीता दोनो एक ही बिस्तर पर
मम्मी; तो क्या हम एक ही बिस्तर पर नहीं सो सकते,
असलम अब थोड़ा रोमांटिक हो गया
असलम; एक ही बिस्तर पर तो बेगम अपने शौहर के ही साथ सोती हैं
मम्मी; तो इस में गलत क्या है, आप मेरे शौहर हो,
असलम; और
मम्मी अदा से हाय दईया रे पूछ तो ऐसे रहें हैं जैसे कुछ नहीं जानते
एक औरत जो मर्द से निकाह कुबूल है कुबूल है कुबूल है बोलते ही उस मर्द की बेगम हो जाती हैं,
असलम मम्मी से तो आप क्या है मेरी,
मम्मी; बेगम साहिबा,
असलम; ये भी है और असलम मम्मी के कंधे के पास अपना चेहरा ला कर बोला, आप जैसी जन्नत की हूर अगर किसी मर्द के साथ एक ही बेड़ पर सोओगी,
तो कौन मर्द होगा जो खुद को कंट्रोल कर पायेगा।
ये बात मम्मी को बोल कर असलम ने सीधे सीधे मम्मी को चोदने की बात बोल दी थी
मम्मी तो कब से असलम के नीचे अपनी टांगें फैला कर सोने के लिए तरस रही थी
अब मम्मी ये मोका हाथ से थोड़ी जाने देती, मम्मी भी मस्ती के मूड़ में बोली,
सुनीये जी अपनी बेगम के होते हुए शौहर को कंट्रोल करना भी क्यों है,
मम्मी मुस्कुराओ आगे की ओर चलने लगी तो असलम हिम्मत करके मम्मी की बांह से पकड़ कर अपनी ओर खींचते हुए अपने से चिपका लिया,
असलम; हम्म सुनीता इतनी खूबसूरत बणी-ठणी बेगम के होते हुए कंट्रोल होता कहां है,
असलम ; सिर्फ एक ही खामी है
मम्मी; धीरे से कौन सी कमी जी
असलम बिस्तर की ओर इशारा करते हुए
असलम ; सिर्फ हम दोनो की इस बिस्तर पर बेगम साहिबा,
आज ये बिस्तर हम दोनो के मिलन का गवाह बनेगा हम दो जिस्म से एक जिस्म एक जान हो जाएंगे,
मैं अपनी बेगम साहिबा के साथ अपने मिलन को यादगार बनाना चाहता हूं
तुम्हें हमारे मिलन को यादगार बनाने में मेरा साथ देना होगा बोलो दोगी मेरा साथ,
मम्मी; जी पूरी कोशिश करूंगी, और मम्मी के होंठो पर मुस्कान और चहरे पर सरम की लाली तैर रही थी
असलम; बेगम साहिबा ये बात तुम अच्छे से समझ लेना की आज की रात में तुम कोई रहम नहीं करुंगा
मम्मी ; कौन सी औरत चहाती है कि उसका शौहर रहम करें।
मम्मी; अभि के अब्बू लगता है पहले से प्रैक्टिस की हुई है
असलम; आज की रात तुम्हें भी सारी प्रैक्टिस करवा दूंगा,
बेगम साहिबा तुम्हें भी तो पता चले की तुम्हारा पाला किस मर्द से पड़ा है।
असलम मम्मी की कमर में हाथ डाल कर तो फिर बेगम साहिबा आप जा रही ही बेड पर
मम्मी; हम्म,
आज ये पक्का था कि ये बेड मम्मी और असलम के मिलन का गवाह बनने जा रहा था
असलम मम्मी के कंधे पर हाथ रख मम्मी को थोड़ा अपनी ओर कसते हुए सही कह रहा हूं ना
मम्मी ने असलम से शरमा कर अपना चेहरा घुमा लिया तो असलम मम्मी का चेहरा पकड़ अपनी ओर करते हुए बोला
बेगम साहिबा चले बेड पर , बेड छोटा है आप चाहे तो मेरे ऊपर चढ़ कर सो जाना,
अगर आप कहेंगी तो मैं आपके ऊपर चढ़ कर सो जाऊंगा।
ऊपर चढ़ कर सोने की बात सुन कर मम्मी ने अपना चेहरा शर्म से लाल हो गया और मम्मी ने अपना सरम से लाल चेहरा अपने शौहर असलम के सीने में छुपा लिया,
असलम; हाय गुले गुलज़ार यहीं खड़ी खड़ी ही शर्माओगी या फिर बेंड पर भी चलोगी,
फिर असलम मम्मी का चेहरा अपने हाथों से उठा मम्मी की आंखो में देखते हुए बोला
अल्लाह कसम जब से आप से निकाह हुआ है, मैं ही जनता हूं, मैंने कैसे कंट्रोल किया है, आप बिल्कुल चांद का टुकड़ा हैं, जन्नत की हूर हो, दिल करता है, आप को अपनी बाहों में भर लूं
तो मम्मी असलम की बात सुन कर सरमाते हुए बोली
इस रूम में और कौन है जो आपको अपनी बेगम साहिबा को प्यार करने से बांहों में भर ने से रोक रहा है,
मम्मी ने जैसा ही ये कहा असलम ने मम्मी को अपनी बाहों में भर कर मम्मी के होंठो को चूम लिया।
मम्मी ने भी अपनी बाहें असलम के गले में डाल दी और असलम के होंठो चूसने लगी कुछ देर बाद वो अलग हुए
मम्मी; आआआआआहह उउउउउउहहहहहह कितने जोर से करते हो, क्या खा जाओगे मुझे।
मम्मी को खाने की बात सुन असलम मम्मी के गालों को चूमते हुए बोला
इस मक्खन सी गोरी को सच में खा जाऊंगा
मम्मी असलम को अदा से मुस्कराती हुई बोली सुनीये जी रोका किसने है,
खां जाओ ना अपनी बेगम साहिबा को,
मम्मी बिस्तर की ओर जाने लगी,
तो असलम मम्मी का हाथ पकड़ कर अपनी ओर खींचते हुए बोला
इस जन्नत की हूर को तो मैं खुद अपनी बाहों में उठाकर ले जाउंगा
मम्मी के कुछ बोलने से पहले ही असलम ने मम्मी को ऐसे गोद में उठा लिया जैसे मम्मी कोई छोटी बच्ची हो,
मम्मी ने अपनी बाहों को असलम के गले में डाल बोली नीचे उतारो गिर जाउंगी,
कहा चढ़ा रहे हो , चढ़ने की बात सुन कर असलम मम्मी से बोला गिरने दूंगा क्या अपनी बेगम साहिबा को,
अभी चढ़ाया कहा आज रात चढ़ाऊंगा क्यूं मेरी जान चढ़नें दोगी
ना तो मम्मी मुस्कुराने लगी
असलम मम्मी को अपनी बाहों में भर बेंड की ले जाने लगा।
मम्मी भी अपनी बाहें असलम के गले में डाले मुस्कुराती देख रही थी दोनो प्रेमी प्यार का खेल खेलने के लिए मैदान में आ चुके बिस्तर रुपी मैदान सजा हुआ था प्यार का खेल किसी भी वक्त शुरू होने वाला था,
बेडरूम में आकर असलम ने मम्मी को नीचे उतारा और पीछे से मम्मी की कमर को अपनी बाहों में भर कर अपने से चिपका लिया,
असलम का खड़ा लंड मम्मी अपनी गांड पर मेहसूस कर रही थी।
असलम मम्मी की गर्दन पर अपने होठों को रख कर चूमता हुआ बोला, सुनीता तुम ने पागल बना दिया ही बड़ी मस्त हो।
असलम ने मम्मी को बांहों में भर कर बेड पर बैठ दिया।
असलम; बेगम तुम्हारी ये झील सी आंखें दिल करता है इन में डूब जाऊ।
मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा कि तुम मेरी हो गई कहीं मुझे कोई सपना तो नहीं देख रहा हूं ।
मम्मी शर्म से अपनी आंखें बंद करके बैठी थी
असलम; ये क्या जान आंखें खोलो ना तो इस बार असलम के कहने पर मम्मी ने अपनी आंखों को ऊपर उठा कर खोला और दोनो की आंखे मिलते ही मम्मी ने मुस्कुराते हुए
फिर से अपनी आंखे नीचे कर ली
असलम; अपनी बेगम की मुस्कान देख कर अपने दिल पर हाथ रख कर ,
मेरी जान तुम्हारी ये कातिल मुस्कान से मार डालोगी डार्लिंग,
असलम के मुंह से अपने लिए ये सुन का मम्मी मुंह नीचे झुकाये बैठी थी।
मम्मी को इस तरह मुंह झुकाये बैठे देख असलम ने बीच की दराज के ऊपर पड़ी अपनी और मम्मी की रोमांटिक तस्वीर उठा कर डार्लिंग मुझे लगता ही तुम शादी से खुश नहीं हो,
मम्मी ये आप कैसे बात कर रहे हो
मम्मी ने अपने सर असलम
के कंधे पर रख दिया और प्यार से अपने हाथ सीने कर रख सहलाती धीरे से बोली, बस ऐसे ही सारी जिंदगी मुझे प्यार करते रहना।
असलम मम्मी के पीछे खड़ा था तो असलम ने अपने हाथों को मम्मी के कंधे पर रख सहलाते उसे नीचे की ओर ले जाने लगे
मम्मी जोर जोर से लंबी सांस लेने लगी,
आज मम्मी असलम को ये सब करने से रोका नहीं जा सकता थी क्योंकि मम्मी को पता था कि आज रात उसके साथ बहुत कुछ होने वाला ही है अपने हाथों को नीचे मम्मी की कमर पर लाते असलम ने उन्हें कस कर अपनी बाहों में भर कर अपने होंठ मम्मी की गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया,
असलम के होंठ ने मम्मी की गर्दन को चूमा,
मम्मी; आआआआआहह उउउउउउहहहहहह ससससससीईईईईईईई...
असलम अपने होंठो को मम्मी की गर्दन और कंधे के बीच रख कर चूमते बोला,
डार्लिंग मेरा दिल कर रहा है कि आज की ये रात कभी खत्म ना हो,
हम दोनो ऐसे ही एक दूसरे से बाहों में प्यार करते रहें ,
फिर मम्मी को बिस्तर पर बैठा कर उसके
चेहरे को सहलाते डार्लिंग तुम भी कुछ बोलो ना
असलम मम्मी के ऊपर झुकता गया और मम्मी ने अपनी आंखे बंद किये बेड पर लेटती चली गई , बेड पर लेटी हुई मम्मी आंखे बंद किये थी
असलम ने अपने हाथ से मम्मी की चुनरी को थोड़ा हटाया तो मम्मी का गोरा पेट के बीच गहरी नाभि थी।
आज असलम ये नज़ारा पहली बार देख रहा था।
असलम की जगह कोई मर्द होता तो शायद ये देख कर ही पागल हो गया होता पर असलम को पता ही अब ये हुस्न सिर्फ उनका है मम्मी के हुस्न से खेलने चूसने का अधिकार सिर्फ उसका है, इसलिए आज वो बड़े प्यार और आराम से मम्मी की जवानी का मजा लेना चाहत था,
मम्मी भी ये बात अच्छे से जानती थी कि असलम उनको इस हालात में देख रहे थे,
यही सब सोचते मम्मी की चुचिया बड़ी तेज़ी से ऊपर नीचे हो रही थी।
असलम ने आगे बढ़ कर अपने हाथ को मम्मी के नंगे पेट पर फिराया तो मम्मी मस्ती में अपने चेहरे को इधर उधर झटके लगी।
मम्मी की चूचियों ब्लाउज में कैद बाहर आने को फाड़फडा रही थी।