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- Dec 5, 2013
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कब्रिस्तान
सूर्योदय होने को था अघोरी योग के माध्यम से अपनी उत्तेजना को काबू कर चूका था की अचानक उसके मोबाइल जो उसने लखन विनीता को पूजा की विधि समझने के लिए रखा था में लगा अलार्म बज उठा. यानि लखन विनीता को अगले गृह की पूजा की विधिया समझने का समय हो गया था और ये विधि सूर्योदय से पहले समझाना ज़रूरी था. अघोरी ने बिना देर किये लखन के नंबर पर कॉल लगा दी.
काकातुआ के जंगल
उस ब्लोजॉब के बाद बड़ी मुश्किल से विनीता और लखन की आँख लगी थी और वो कुछ घंटे hi सो पाए थे की अचानक से उनके फ़ोन की घंटी बज उठी. फ़ोन की घंटी से अचानक विनीता और लखन की आँख खुल गई. लखन ने तुरंत वो फ़ोन रइवे करा दूसरी तरफ अघोरी था.
अघोरी: आप दोनों उठ गए. (अघोरी ने जानबूझ कर कल रात की विधि के बारे में नहीं पुछा क्युकी वो कल रात के बारे में पूछ कर लखन को शर्मिंदा नहीं करना चाहता था.)
लखन: प्रणाम बाबा जी फ़ोन की घंटी की आवाज़ से हम दोनों उठ गए पर इतनी सुबह सुबह अपने कॉल करा अभी तो सूरज भी नहीं निकला.
अघोरी: मई जनता हु की अभी सूरज भी नहीं निकला और इसीलिए मैंने आपको अभी कॉल करि क्युकी आज की पूजा की पहली विधि आपको सूर्योदय के समय hi पूरी करनी है.
लखन: ऐसा क्या करना है हमे बाबा और आज किस गृह की पूजा करनी है हमे.
अघोरी: आज आपको ऐसे दो ग्रहो की पूजा करनी है जो ग्रहमाला का हिस्सा न होते हुए भी ग्रेहमाला और मनुषय के भाग्य से अनिवार्य रूप से जुड़े है. जिनका हमारी कुंडली में शेष ग्रहो की तरह एक महत्वपूर्ण स्थान है और जो हमारे भूत भविष्य वर्त्तमान तीनो समयकालो को प्रभावित करते है. हमारे जीवन से अंधकार को दूर करके ुए अपने प्रकाश से रोशन करते है.
लखन: आप सूर्य की बात कर रहे है.
अघोरी: सही समझे सूर्य ग्रेहमाला का मुखिया सभी ग्रह उपग्रह जिसके चारो और चक्कर लगते है. जो दुनिया को अपने प्रकाश से रोशन करता है. आज सूर्योदय से सूर्यास्त तक आपको सूर्य पूजा की साडी विधिया पूरी करनी है. और उनमे से पहली विधि आपको सूर्योदय के समय hi करनी है सूर्यनमस्कार और जल समर्पण जिसमे आपको अपनी अर्धांगिनी के साथ सूर्य को जल का अर्घ्य देना है वो भी पूरी तरह शुद्ध होकर शुद्ध वस्त्र धयान करके. अभी मई ज्यादा विस्तार से नहीं बताऊंगा क्युकी उसमे सूर्योदय का समय निकल जाएगा. इसलिए आप दोनों शीघ्रता से स्नान करके अपने वस्त्रो में से शुद्ध वस्त्र धारण करले जैसे आपको यहाँ आने पर उपलभ्द कराए गए थे. और सूर्योदय के समय सूर्य को नमस्कार करते हुए उसे गंगाजल का अर्घ्य चढ़ाए. जब तक आप लोग स्नान करके बहार आएँगे गंगाजल से भरा कमंडल आपके लिए बहार रख दिया जाएगा.
लखन: जी बाबा
अघोरी: आगे की विधि मई आपको सूर्योदय के बाद बताऊंगा.
लखन: जी
इतना कह कर अघोरी ने फ़ोन रख दिया. कल रात की घटनाओ को भूलते हुए लखन विनीता ने भी आगे बढ़ने का निश्चय करा. और चुपचाप अपने कपड़ो में से कुछ कपडे उठाकर बारी बारी से नहाकर आ गए.
लखन विनीता जब तैयार होकर बहार आए तो बहार हमेशा की तरह गंगाजल से भरा एक कमंडल दरवाज़े पर रखा था. लखन सिंह ने वो कमंडल उठा लिया और वो दोनों सूर्योदय का इंतज़ार करने लगे. शीघ्र hi पेड़ो के पीछे से सूर्य उदय होता नज़र आने लगा.
लखन विनीता ने उस उगते हुए सूर्य को प्रणाम करके उसका आशीर्वाद लिया और प्रार्थना की ये सूर्य उन दोनों के जीवन के अंधकार को अपने प्रकाश से रोशन कर दे अपनी परेशानियों का सामना करके की ऊर्जा प्रदान करे. सूर्य नमस्कार के बाद लखन विनीता ने सम्मलित रूप से उस कमंडल में भरे गंगाजल से सूर्य को अर्घ्य समर्पित करा. सूर्य पूजा की पहली विधि पूरी करने के बाद लखन ने अघोरी को फ़ोन करा.
लखन: बाबा सूर्योदय हो गया है और हमने सूर्य देवता को जल समर्पित करने की प्रथम विधि भी पूरी कर्ली है.
अघोरी: उत्तम आप दोनों कल यूरेनस नेप्तुने की कठिन विधिया पूरी कर्ली तो उनकी तुलना में आज की विधिया आपके लिए सरल है. आज आपको दुनिया को प्रकाश देने वाले दो देव ग्रहो की पूजा करनी है. देव गृह इसलिए क्युकी ग्रेहमाला का हिस्सा न होते हुए भी हमारे जीवन में इनका ख़ास स्थान है. जिनमे से एक है सूर्य, वैसे तो सूर्य का प्रकाश सदैव विद्यमान रहता है पर पृथ्वी के घूमने की वजह से इसके प्रकाश का स्वरुप बदलता रहता है. सूर्यास्त के पश्चात् एक अन्य नक्षत्र के माध्यम से पृथ्वी को सूर्य का प्रकाश मिलता है जो हमारा दूसरा देव गृह है जिसे हम चन्द्रमा कहते है. जो रात्रि में सूर्य को प्रकाश को शीतल करके सफ़ेद रूप में धरती को अँधेरे में नहीं डूबने देता है. और आज आपको प्रकाश के इन्ही दो स्रोर्तो सूर्य और च्नद्र की पूजा करनी है. किन्तु चाँद का अस्तित्व सूर्यास्त के बाद hi सामने अत है इसलिए चाँद की पूजा की विधिया आपको सूर्यास्त के बाद hi करनी है इसलिए उनके बारे में मई तब hi बताऊंगा. फिलहाल आप दोनों को सूर्य की पूजा संपन्न करनी है. जिसका प्रथम चरण अपने अभी अभी पूरा करा.
लखन: जी बाबा हमे क्या करना होगा.
अघोरी: सूर्य जिसे ग्रीक माइथोलॉजी में मानव स्वरुप में अपोलो के नाम से जाना जाता है. सूर्य की पूजा आप लोग यहाँ नहीं करेंगे बल्कि बल्कि हमारे उस आश्रम में करेंगे जहा से अब तक आपको समय समय पर सामग्री उपलब्ध कराइ जाती रही है. सूर्य को न्याय का देवता मन जाता है और उसे उत्सव नृत्य संगीत और खेल की प्रतियोगिताएं बहित प्रसिद्ध है. विदेशो में भी सूर्य को प्रसन्न करने के लिए उत्सव का आयोजन किया जाता है जिसमे तरह तरह की प्रतियोगिता आयोजित की जाती है नृत्य संगीत किया जाता है. इसलिए आज इस देव गृह को प्रसन्न करने के लिए वह एक उत्सव का आयोजन किया गया है. प्रथम चरण आप दोनों ने पूरा कर लिया है अब दुसरे चरण में उत्सव स्थल प् 101 यज्ञ वीडियो पर सामूहिक रूप से सूर्य को पसनन करने के लिए यज्ञ करा जाएगा यज्ञ के पश्चात उस उत्सव में तीन चरण की एक प्रतियोगिता होगी जिनमे आप भी प्रतिभाग करेंगे छठे चरण में नाच गए कर सूर्य को प्रसन्न करा जाएगा. और फिर सातवे चरण में उन्ही 101 वीडियो में 101 जोड़ो का विवाह कराया जाएगा जिसमे व्यय होने वाला धन आपसे शुरुआत में लिया गया था. आके परिवार ने कई कन्याओ hi हत्या का जो पाप किया था वो 101 कन्याओं के इस समहूकी विवाह से मिलने वाले पुण्य से काफी हद तक नष्ट हो जाएगा इसलिए आज की ये सूर्य पूजा काफी महत्वपूर्ण है. सूर्यास्त के बाद चंद्र पूजा के बारे में आपको बताऊंगा फिलहाल आप दोनों बहार इंतज़ार करे शीघ्र hi आपको लेने एक रथ आएगा जो आपको उत्सव वाली जगह ले जाएगा जहा इस पूजा के अगले 6 चरण पुरे किये जाएंगे.
लखन: जी बाबा
विनीता लखन भी निश्चिन्त थे की सूर्य पूजा में उन्हें कोई ऐसा काम नहीं करना पद रहा जिसके लिए वो पूरी तरह तैयार न हो. और पिछले तीन दिन से दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ जीवन जीने के बाद आज इस उत्सव की वजह से उन्हें थोड़ा मूड सही करने और रिलैक्स होने भी मौका मिलेगा, ये उत्सव उन्हें कल रात के अनुभव से बहार निकलने में भी मदद करेगा. विनीता लखन वही बहार रथ का इंतज़ार करने लगे. जल्द hi उन्हें रथ के पाइयो की आवाज़े सुनाई दी और पेड़ो के झुरमुट से निकल कर एक रथ उनके सामने आ खड़ा हुआ.
रथ में 2 सफ़ेद घोड़े लगे थे और रथ भी बेहद सुन्दर था. रथ शायद इसीलिए भेजा गया क्युकी सूर्य देव का वहां भी रथ है जिसमे 7 घोड़े लगे होते है.
रथ वाहक: आश्रम से आप दोनों के लिए ये रथ भेजा गया है आप दोनों इस पर बैठ जाए.
विनीता लखन दोनों रथ पर सवार हो गए और रथ पथरीले रास्तो में सरपट दौड़ता हुआ आश्रम की तरफ बाद चला. और कुछ घंटो के सफर के बाद लखन विनीता उस आश्रम में पहुंच गए जहा सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए उस उत्सव का आयोजन किया गया था. उत्सव स्थल को बहुत सुन्दर तरीके से सजाया गया था. मैदान में एक जगह एक विशाल शामियाना लगा था जक्सके अंदर 101 हवन कुंड बने थे जहा शुरुआत में हवन किया जाना था और अंत में इन्ही में 101 जोड़ो की शादी होनी थी.
मैदान के एक कोने 7 रथ खड़े थे अब उनमे क्या होना था पता नहीं शायद उनका सम्बन्ध उस प्रतियोगिता से हो सकता है. मैदान के बीच में कोई विशाल मूर्ति राखी थी जो एक केसरिया रंग के कपडे से ढकी थी. वह काफी भीड़ थी ये शायद आज विवाह बंधन में बांधने वाले वो जोड़े और उनके परिवार वाले होंगे. एक कोने में ढोल नगाड़े वाले नृत्य संगीत वाले कलाकार भी मौजूद थे. लखन विनीता वह उत्सव की शोभा को निहार hi रहे थे की उन्होंने देखा की आश्रम से पुजारियों का एक दाल एक वृद्ध साधू के नेतृत्व में उनकी तरफ आ रहा था. जब वो साधू उनके समीप पहुंच तो लखन विनीता ने रथ से उतारकर उन्हें प्रणाम करा.
वृद्ध साडू: यशश्वी भाव अब तक आपको आपके घर के बहार जो भी बक्से मिलते थे वो हमारे यहाँ से hi भिजवाए जाते थे. मुझे आप लोगो की पूजा के बारे में बता दिया गया था इसलिए आपकी पूजा प्रारम्भ होने के पहले दिन से भी पहले से हम इस उत्सव की तैयारी कर रहे थे. आज आपसे प्राप्त धन से कई गरीब कन्याओं का विवाह संपन्न होगा जिसका पुण्य प्रताप आपके पुरे परिवार को मिलेगा. आपके परिवार ने कैनकन्यायो को पैदा होते hi मार दिया पर आज आपकी वजह से यहाँ आज 100 गरीब कन्याओं का घर बसेगा उनकी उनके परिवार की दुआए तो आपको मिलेगी hi जिनसे उस श्राप का असर कम हो जाएगा.
लखन: पुजारी जी मुझे नहीं पता था वो धन इस महान काम के लिए लिया जा रहा है वर्ण मई और धन दे देता. और मई आज प्राण लेता हु सिर्फ इसी वर्ष नहीं हर वर्ष इसी तरह गरीब कान्याययो का विवाह करवाऊंगा. पर पुजारी जी मेरा एक सवाल है.
साधू: निसंकोच पूछिए.
लखन: अघोरी बाबा ने बताया था की यहाँ 101 की शादी होगी वह उन वीडियो पर भी अंतिम अंक 101 दिख रहा और आप कह रहे की 100 जोड़े है शायद आप 101 की जगह 100 बोल गए.
साधू: जी नहीं मई सही बोलै आप से मिले धन से यहाँ 100 गरीब कन्याओं hi विवाह होगा.
लखन: फिर वो 101वि जोड़ी.
साधू: वो 101वि जोड़ी इस वक़्त मेरे सामने कड़ी है.
लखन विनीता आश्चर्य से एक दुसरे को देखने लगे.
लखन: पर पुजारी जी हमारा विवाह तो हो चूका है.
साधू: मई जनता हु आपका विवाह हो चूका है पर विवाह कब और किन परिस्थितियों में हुआ इससे आप दोनों भी भली भाति परिचित है. उस वक़्त मजबूरी में कोई दूसरा उपाय न होने की वजह से आनन फानन में आप दोनों की शादी संपन्न करा दी गई थी. पर उस वक़्त उस शादी के लिए न विनीता जी तैयार थी न hi शायद आप खुद. बल्कि अगर मई सही हु तो उससे पहले आप दोनों एक दुसरे को जानते तक नहीं थे बस अचानक से मजबूरी वश आप दोनों को एक दुसरे के साथ विवाह बंधन में बांधना पड़ा.
लखन: जी बाबा मैंने जिस स्त्री को बुलाया था उसका एक्सीडेंट..
साधू: मुझे पता है ये सब पर विवाह हमारे जीवन के 16 संस्कारो में सबसे अहम् संस्कार है और इतनी बड़ी पूजा में हे संस्कार को बस एक औपचारिकता के रूप में नहीं किया जा सकता. इसीलिए आज आपके सामने वो अवसर दुबारा आया है जब आप इस विवाह संस्कार एक औपचारिकता की तरह नहीं बल्कि दिल से कर सकते है. तीन दिन से आप दोनों सिर्फ एक दुसरे के संपर्क में है ऐसे में ज़ाहिर है आप दोनों एक दुसरे को भली भाटी समझ गए होंगे. एक दुसरे के प्रति आपके मन में कुछ अच्छे कुछ बुरे भाव भी बन गए होंगे. मई यहाँ प्रेम भाव की बात कर रहा.
साधू की बात सुनकर विनीता लखन दोनों सकपका गए की ये साधू क्या बोल गए.
साधू: आप लोग मेरी बात का गलत अर्थ न निकले मई जनता हु ये पहले से शादीशुदा है और मई इनकी शादीशुदा लाइफ पर कुछ टिपण्णी कर भी नहीं रहा. और यहाँ प्रेम शब्द से मेरा तात्पर्य प्रेमी प्रेमिका का प्रेम नहीं. प्रेम शब्द बहुत गहरा है उसे एक रिश्ते में सीमित मत करिये. आप अपनी बेटे अपने बहु के लिए ये पूजा कर रहे है यानि आप उनसे प्रेम करते है विनीता जी अपनी सहेली के लिए ये कर रही है यानि उन्हें उनसे प्रेम है. पर क्या यही प्रेम आपके बीच है यही आज आपको निर्णय करना है. चाहे तो आज भी आप दोनों औपचारिक शादी कर सकते है किसी को कुछ पता नहीं चलेगा या आज के दिन कुछ पल के लिए अपने बेटे बहु अपने परिवार अपनी सहेली अपनी पिछली ज़िन्दगी को भुला कर सच्चे मन से सच्चे दिल से इस शादी की रस्मो को पूरा करे. दो दिन बाद तो वैसे भी आपको इस शादी से मुक्त कर दिया जाएगा पर आने वाले दो दिन आपके इस प्रेम भाव की कड़ी परीक्षा लेने वाले है क्युकी 72 घंटे से आप दोनों साथ है और 72 घंटे बहुत होते अगर इतने वक़्त में भी आपके मन में एकदूसरे के लिए अपनेपन की फीलिंग नहीं उत्पन्न हुई तो आने वाले दो दिन आपके लिए बहुत मुश्किल बीन वाले है. इसलिए आज इन 100 जोड़ो के साथ आपकी शादी उस प्रेम भाव को जगाने की ये अंतिम कोशिश है ताकि आपके अगले दो दिन आसानी से बीत जाए. क्युकी अगर अगले दो दिन भी आप ये पूजा मजबूरी में करेंगे तो शायद आप इस पूजा को पूरा न कर पाए इसीलिए आज आपकी दुबारा शादी करवा कर आपको और अवसर दिया जा रहा है. अब आप दोनों खुद विचार कर ले की आपको क्या करना है.
साधू की प्रेम पर कही गई ये बाते विनीता और लखन को अंदर तक झकझोर गई क्युकी ये सच था की इन तीनो दिनों में उनके मन एक दुसरे के प्रति भावो में काफी परिवर्तन आ चूका था पर अब भी वो असमंजस में थे की क्या ये सिर्फ अपनापन है या कुछ और. पर इसका निर्णय तो उन्हें खुद करना था. और अगले दो दिन में क्या क्या होने वाला है की प्रेम भाव की परीक्षा होगी. वो दोनों ये सोच hi रहे थे की साधू ने फिर उन्हें पुकारा.
साधू: लखन जी विनीता जी किस सोच में डूब गए देखिये विवाह इस पूजा का अंतिम चरण है उससे पहले काफी वक़्त मिलेगा आपको सोचने के लिए फिलहाल सामूहिक यज्ञ का समय हो रहा है अगर आप लोग तैयार हो तो यज्ञ स्थल की तरग चले.
लखन विनीता: जी जी बिलकुल चलते है.
लखन विनीता साधुओ के दाल के पीछे यज्ञ स्थल की तरफ चल दिए. यज्ञ स्थल का पंडाल लोगो से खचाखच भरा था. पंडाल में चारो तरफ लाइन से 100 हवन कुंड बने थे और बीच में एक बड़ा हवन कुंड बना था जहा प्रधान पुजारी को यज्ञ करना था. और शायद इसी वेदी पर विनीता को एक बार फिर लखन सिंह के साथ विवाह बंधन में बांधना था. प्रधान पुजारी लखन विनीता के साथ उस बड़ी वेदी के समीप आकर खड़ा हो गया और उनके कहने पर लोग बाकि हवन कुंडो के इर्द गिर्द बैठ गए. लखन विनीता और प्रधान पुजारी भी पंडाल के मध्य में बानी यज्ञ वेदी के इर्द गिर्द बैठ गए.
सभी 101 यज्ञ वीडियो को एक साथ अग्नि से प्रज्वलित कर दिया गया. और पूरा पंडाल ॐ सूर्याय नमः के जाप से गूंजायमान हो उठा. लखन विनीता भी हाथ जोड़ का ॐ सूर्याय नमः का जाप करते हुए भगवान् सूर्य देव से इस पूजा में अपना आशीर्वाद देने की प्रार्थना करने लगे. पर कही न कही उन दोनों के मन उस पुजारी की बातो से एक अजीब सा अंतर्द्वंद चल रहा था की क्या वाकई उनके मन एक दुसरे के प्रति प्रेम का भाव उत्पन्न हो गया है या सिर्फ अपनेपन का. तीन दिन पहले जो शादी उनके लिए एक मजबूरी में की गई औपचारिकता थी क्या 72 घंटे एक दुसरे के साथ गुजरने के बाद एक दुसरे के सुख दुःख बाटने के बाद क्या अब भी वो शादी उनके लिए औपचारिकता है. क्या आज जब वो दुबारा शादी की वो रस्मे पूरी कर्नेगे तब भी उनके मन में वही भाव रेहनेगे जो तीन दिन पहले थे या आज की शादी उनके मन नै इच्छाओ के बीज के अंकुरित होने की वजह बनने वाली थी.
सूर्योदय होने को था अघोरी योग के माध्यम से अपनी उत्तेजना को काबू कर चूका था की अचानक उसके मोबाइल जो उसने लखन विनीता को पूजा की विधि समझने के लिए रखा था में लगा अलार्म बज उठा. यानि लखन विनीता को अगले गृह की पूजा की विधिया समझने का समय हो गया था और ये विधि सूर्योदय से पहले समझाना ज़रूरी था. अघोरी ने बिना देर किये लखन के नंबर पर कॉल लगा दी.
काकातुआ के जंगल
उस ब्लोजॉब के बाद बड़ी मुश्किल से विनीता और लखन की आँख लगी थी और वो कुछ घंटे hi सो पाए थे की अचानक से उनके फ़ोन की घंटी बज उठी. फ़ोन की घंटी से अचानक विनीता और लखन की आँख खुल गई. लखन ने तुरंत वो फ़ोन रइवे करा दूसरी तरफ अघोरी था.
अघोरी: आप दोनों उठ गए. (अघोरी ने जानबूझ कर कल रात की विधि के बारे में नहीं पुछा क्युकी वो कल रात के बारे में पूछ कर लखन को शर्मिंदा नहीं करना चाहता था.)
लखन: प्रणाम बाबा जी फ़ोन की घंटी की आवाज़ से हम दोनों उठ गए पर इतनी सुबह सुबह अपने कॉल करा अभी तो सूरज भी नहीं निकला.
अघोरी: मई जनता हु की अभी सूरज भी नहीं निकला और इसीलिए मैंने आपको अभी कॉल करि क्युकी आज की पूजा की पहली विधि आपको सूर्योदय के समय hi पूरी करनी है.
लखन: ऐसा क्या करना है हमे बाबा और आज किस गृह की पूजा करनी है हमे.
अघोरी: आज आपको ऐसे दो ग्रहो की पूजा करनी है जो ग्रहमाला का हिस्सा न होते हुए भी ग्रेहमाला और मनुषय के भाग्य से अनिवार्य रूप से जुड़े है. जिनका हमारी कुंडली में शेष ग्रहो की तरह एक महत्वपूर्ण स्थान है और जो हमारे भूत भविष्य वर्त्तमान तीनो समयकालो को प्रभावित करते है. हमारे जीवन से अंधकार को दूर करके ुए अपने प्रकाश से रोशन करते है.
लखन: आप सूर्य की बात कर रहे है.
अघोरी: सही समझे सूर्य ग्रेहमाला का मुखिया सभी ग्रह उपग्रह जिसके चारो और चक्कर लगते है. जो दुनिया को अपने प्रकाश से रोशन करता है. आज सूर्योदय से सूर्यास्त तक आपको सूर्य पूजा की साडी विधिया पूरी करनी है. और उनमे से पहली विधि आपको सूर्योदय के समय hi करनी है सूर्यनमस्कार और जल समर्पण जिसमे आपको अपनी अर्धांगिनी के साथ सूर्य को जल का अर्घ्य देना है वो भी पूरी तरह शुद्ध होकर शुद्ध वस्त्र धयान करके. अभी मई ज्यादा विस्तार से नहीं बताऊंगा क्युकी उसमे सूर्योदय का समय निकल जाएगा. इसलिए आप दोनों शीघ्रता से स्नान करके अपने वस्त्रो में से शुद्ध वस्त्र धारण करले जैसे आपको यहाँ आने पर उपलभ्द कराए गए थे. और सूर्योदय के समय सूर्य को नमस्कार करते हुए उसे गंगाजल का अर्घ्य चढ़ाए. जब तक आप लोग स्नान करके बहार आएँगे गंगाजल से भरा कमंडल आपके लिए बहार रख दिया जाएगा.
लखन: जी बाबा
अघोरी: आगे की विधि मई आपको सूर्योदय के बाद बताऊंगा.
लखन: जी
इतना कह कर अघोरी ने फ़ोन रख दिया. कल रात की घटनाओ को भूलते हुए लखन विनीता ने भी आगे बढ़ने का निश्चय करा. और चुपचाप अपने कपड़ो में से कुछ कपडे उठाकर बारी बारी से नहाकर आ गए.
लखन विनीता जब तैयार होकर बहार आए तो बहार हमेशा की तरह गंगाजल से भरा एक कमंडल दरवाज़े पर रखा था. लखन सिंह ने वो कमंडल उठा लिया और वो दोनों सूर्योदय का इंतज़ार करने लगे. शीघ्र hi पेड़ो के पीछे से सूर्य उदय होता नज़र आने लगा.
लखन विनीता ने उस उगते हुए सूर्य को प्रणाम करके उसका आशीर्वाद लिया और प्रार्थना की ये सूर्य उन दोनों के जीवन के अंधकार को अपने प्रकाश से रोशन कर दे अपनी परेशानियों का सामना करके की ऊर्जा प्रदान करे. सूर्य नमस्कार के बाद लखन विनीता ने सम्मलित रूप से उस कमंडल में भरे गंगाजल से सूर्य को अर्घ्य समर्पित करा. सूर्य पूजा की पहली विधि पूरी करने के बाद लखन ने अघोरी को फ़ोन करा.
लखन: बाबा सूर्योदय हो गया है और हमने सूर्य देवता को जल समर्पित करने की प्रथम विधि भी पूरी कर्ली है.
अघोरी: उत्तम आप दोनों कल यूरेनस नेप्तुने की कठिन विधिया पूरी कर्ली तो उनकी तुलना में आज की विधिया आपके लिए सरल है. आज आपको दुनिया को प्रकाश देने वाले दो देव ग्रहो की पूजा करनी है. देव गृह इसलिए क्युकी ग्रेहमाला का हिस्सा न होते हुए भी हमारे जीवन में इनका ख़ास स्थान है. जिनमे से एक है सूर्य, वैसे तो सूर्य का प्रकाश सदैव विद्यमान रहता है पर पृथ्वी के घूमने की वजह से इसके प्रकाश का स्वरुप बदलता रहता है. सूर्यास्त के पश्चात् एक अन्य नक्षत्र के माध्यम से पृथ्वी को सूर्य का प्रकाश मिलता है जो हमारा दूसरा देव गृह है जिसे हम चन्द्रमा कहते है. जो रात्रि में सूर्य को प्रकाश को शीतल करके सफ़ेद रूप में धरती को अँधेरे में नहीं डूबने देता है. और आज आपको प्रकाश के इन्ही दो स्रोर्तो सूर्य और च्नद्र की पूजा करनी है. किन्तु चाँद का अस्तित्व सूर्यास्त के बाद hi सामने अत है इसलिए चाँद की पूजा की विधिया आपको सूर्यास्त के बाद hi करनी है इसलिए उनके बारे में मई तब hi बताऊंगा. फिलहाल आप दोनों को सूर्य की पूजा संपन्न करनी है. जिसका प्रथम चरण अपने अभी अभी पूरा करा.
लखन: जी बाबा हमे क्या करना होगा.
अघोरी: सूर्य जिसे ग्रीक माइथोलॉजी में मानव स्वरुप में अपोलो के नाम से जाना जाता है. सूर्य की पूजा आप लोग यहाँ नहीं करेंगे बल्कि बल्कि हमारे उस आश्रम में करेंगे जहा से अब तक आपको समय समय पर सामग्री उपलब्ध कराइ जाती रही है. सूर्य को न्याय का देवता मन जाता है और उसे उत्सव नृत्य संगीत और खेल की प्रतियोगिताएं बहित प्रसिद्ध है. विदेशो में भी सूर्य को प्रसन्न करने के लिए उत्सव का आयोजन किया जाता है जिसमे तरह तरह की प्रतियोगिता आयोजित की जाती है नृत्य संगीत किया जाता है. इसलिए आज इस देव गृह को प्रसन्न करने के लिए वह एक उत्सव का आयोजन किया गया है. प्रथम चरण आप दोनों ने पूरा कर लिया है अब दुसरे चरण में उत्सव स्थल प् 101 यज्ञ वीडियो पर सामूहिक रूप से सूर्य को पसनन करने के लिए यज्ञ करा जाएगा यज्ञ के पश्चात उस उत्सव में तीन चरण की एक प्रतियोगिता होगी जिनमे आप भी प्रतिभाग करेंगे छठे चरण में नाच गए कर सूर्य को प्रसन्न करा जाएगा. और फिर सातवे चरण में उन्ही 101 वीडियो में 101 जोड़ो का विवाह कराया जाएगा जिसमे व्यय होने वाला धन आपसे शुरुआत में लिया गया था. आके परिवार ने कई कन्याओ hi हत्या का जो पाप किया था वो 101 कन्याओं के इस समहूकी विवाह से मिलने वाले पुण्य से काफी हद तक नष्ट हो जाएगा इसलिए आज की ये सूर्य पूजा काफी महत्वपूर्ण है. सूर्यास्त के बाद चंद्र पूजा के बारे में आपको बताऊंगा फिलहाल आप दोनों बहार इंतज़ार करे शीघ्र hi आपको लेने एक रथ आएगा जो आपको उत्सव वाली जगह ले जाएगा जहा इस पूजा के अगले 6 चरण पुरे किये जाएंगे.
लखन: जी बाबा
विनीता लखन भी निश्चिन्त थे की सूर्य पूजा में उन्हें कोई ऐसा काम नहीं करना पद रहा जिसके लिए वो पूरी तरह तैयार न हो. और पिछले तीन दिन से दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ जीवन जीने के बाद आज इस उत्सव की वजह से उन्हें थोड़ा मूड सही करने और रिलैक्स होने भी मौका मिलेगा, ये उत्सव उन्हें कल रात के अनुभव से बहार निकलने में भी मदद करेगा. विनीता लखन वही बहार रथ का इंतज़ार करने लगे. जल्द hi उन्हें रथ के पाइयो की आवाज़े सुनाई दी और पेड़ो के झुरमुट से निकल कर एक रथ उनके सामने आ खड़ा हुआ.
रथ में 2 सफ़ेद घोड़े लगे थे और रथ भी बेहद सुन्दर था. रथ शायद इसीलिए भेजा गया क्युकी सूर्य देव का वहां भी रथ है जिसमे 7 घोड़े लगे होते है.
रथ वाहक: आश्रम से आप दोनों के लिए ये रथ भेजा गया है आप दोनों इस पर बैठ जाए.
विनीता लखन दोनों रथ पर सवार हो गए और रथ पथरीले रास्तो में सरपट दौड़ता हुआ आश्रम की तरफ बाद चला. और कुछ घंटो के सफर के बाद लखन विनीता उस आश्रम में पहुंच गए जहा सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए उस उत्सव का आयोजन किया गया था. उत्सव स्थल को बहुत सुन्दर तरीके से सजाया गया था. मैदान में एक जगह एक विशाल शामियाना लगा था जक्सके अंदर 101 हवन कुंड बने थे जहा शुरुआत में हवन किया जाना था और अंत में इन्ही में 101 जोड़ो की शादी होनी थी.
मैदान के एक कोने 7 रथ खड़े थे अब उनमे क्या होना था पता नहीं शायद उनका सम्बन्ध उस प्रतियोगिता से हो सकता है. मैदान के बीच में कोई विशाल मूर्ति राखी थी जो एक केसरिया रंग के कपडे से ढकी थी. वह काफी भीड़ थी ये शायद आज विवाह बंधन में बांधने वाले वो जोड़े और उनके परिवार वाले होंगे. एक कोने में ढोल नगाड़े वाले नृत्य संगीत वाले कलाकार भी मौजूद थे. लखन विनीता वह उत्सव की शोभा को निहार hi रहे थे की उन्होंने देखा की आश्रम से पुजारियों का एक दाल एक वृद्ध साधू के नेतृत्व में उनकी तरफ आ रहा था. जब वो साधू उनके समीप पहुंच तो लखन विनीता ने रथ से उतारकर उन्हें प्रणाम करा.
वृद्ध साडू: यशश्वी भाव अब तक आपको आपके घर के बहार जो भी बक्से मिलते थे वो हमारे यहाँ से hi भिजवाए जाते थे. मुझे आप लोगो की पूजा के बारे में बता दिया गया था इसलिए आपकी पूजा प्रारम्भ होने के पहले दिन से भी पहले से हम इस उत्सव की तैयारी कर रहे थे. आज आपसे प्राप्त धन से कई गरीब कन्याओं का विवाह संपन्न होगा जिसका पुण्य प्रताप आपके पुरे परिवार को मिलेगा. आपके परिवार ने कैनकन्यायो को पैदा होते hi मार दिया पर आज आपकी वजह से यहाँ आज 100 गरीब कन्याओं का घर बसेगा उनकी उनके परिवार की दुआए तो आपको मिलेगी hi जिनसे उस श्राप का असर कम हो जाएगा.
लखन: पुजारी जी मुझे नहीं पता था वो धन इस महान काम के लिए लिया जा रहा है वर्ण मई और धन दे देता. और मई आज प्राण लेता हु सिर्फ इसी वर्ष नहीं हर वर्ष इसी तरह गरीब कान्याययो का विवाह करवाऊंगा. पर पुजारी जी मेरा एक सवाल है.
साधू: निसंकोच पूछिए.
लखन: अघोरी बाबा ने बताया था की यहाँ 101 की शादी होगी वह उन वीडियो पर भी अंतिम अंक 101 दिख रहा और आप कह रहे की 100 जोड़े है शायद आप 101 की जगह 100 बोल गए.
साधू: जी नहीं मई सही बोलै आप से मिले धन से यहाँ 100 गरीब कन्याओं hi विवाह होगा.
लखन: फिर वो 101वि जोड़ी.
साधू: वो 101वि जोड़ी इस वक़्त मेरे सामने कड़ी है.
लखन विनीता आश्चर्य से एक दुसरे को देखने लगे.
लखन: पर पुजारी जी हमारा विवाह तो हो चूका है.
साधू: मई जनता हु आपका विवाह हो चूका है पर विवाह कब और किन परिस्थितियों में हुआ इससे आप दोनों भी भली भाति परिचित है. उस वक़्त मजबूरी में कोई दूसरा उपाय न होने की वजह से आनन फानन में आप दोनों की शादी संपन्न करा दी गई थी. पर उस वक़्त उस शादी के लिए न विनीता जी तैयार थी न hi शायद आप खुद. बल्कि अगर मई सही हु तो उससे पहले आप दोनों एक दुसरे को जानते तक नहीं थे बस अचानक से मजबूरी वश आप दोनों को एक दुसरे के साथ विवाह बंधन में बांधना पड़ा.
लखन: जी बाबा मैंने जिस स्त्री को बुलाया था उसका एक्सीडेंट..
साधू: मुझे पता है ये सब पर विवाह हमारे जीवन के 16 संस्कारो में सबसे अहम् संस्कार है और इतनी बड़ी पूजा में हे संस्कार को बस एक औपचारिकता के रूप में नहीं किया जा सकता. इसीलिए आज आपके सामने वो अवसर दुबारा आया है जब आप इस विवाह संस्कार एक औपचारिकता की तरह नहीं बल्कि दिल से कर सकते है. तीन दिन से आप दोनों सिर्फ एक दुसरे के संपर्क में है ऐसे में ज़ाहिर है आप दोनों एक दुसरे को भली भाटी समझ गए होंगे. एक दुसरे के प्रति आपके मन में कुछ अच्छे कुछ बुरे भाव भी बन गए होंगे. मई यहाँ प्रेम भाव की बात कर रहा.
साधू की बात सुनकर विनीता लखन दोनों सकपका गए की ये साधू क्या बोल गए.
साधू: आप लोग मेरी बात का गलत अर्थ न निकले मई जनता हु ये पहले से शादीशुदा है और मई इनकी शादीशुदा लाइफ पर कुछ टिपण्णी कर भी नहीं रहा. और यहाँ प्रेम शब्द से मेरा तात्पर्य प्रेमी प्रेमिका का प्रेम नहीं. प्रेम शब्द बहुत गहरा है उसे एक रिश्ते में सीमित मत करिये. आप अपनी बेटे अपने बहु के लिए ये पूजा कर रहे है यानि आप उनसे प्रेम करते है विनीता जी अपनी सहेली के लिए ये कर रही है यानि उन्हें उनसे प्रेम है. पर क्या यही प्रेम आपके बीच है यही आज आपको निर्णय करना है. चाहे तो आज भी आप दोनों औपचारिक शादी कर सकते है किसी को कुछ पता नहीं चलेगा या आज के दिन कुछ पल के लिए अपने बेटे बहु अपने परिवार अपनी सहेली अपनी पिछली ज़िन्दगी को भुला कर सच्चे मन से सच्चे दिल से इस शादी की रस्मो को पूरा करे. दो दिन बाद तो वैसे भी आपको इस शादी से मुक्त कर दिया जाएगा पर आने वाले दो दिन आपके इस प्रेम भाव की कड़ी परीक्षा लेने वाले है क्युकी 72 घंटे से आप दोनों साथ है और 72 घंटे बहुत होते अगर इतने वक़्त में भी आपके मन में एकदूसरे के लिए अपनेपन की फीलिंग नहीं उत्पन्न हुई तो आने वाले दो दिन आपके लिए बहुत मुश्किल बीन वाले है. इसलिए आज इन 100 जोड़ो के साथ आपकी शादी उस प्रेम भाव को जगाने की ये अंतिम कोशिश है ताकि आपके अगले दो दिन आसानी से बीत जाए. क्युकी अगर अगले दो दिन भी आप ये पूजा मजबूरी में करेंगे तो शायद आप इस पूजा को पूरा न कर पाए इसीलिए आज आपकी दुबारा शादी करवा कर आपको और अवसर दिया जा रहा है. अब आप दोनों खुद विचार कर ले की आपको क्या करना है.
साधू की प्रेम पर कही गई ये बाते विनीता और लखन को अंदर तक झकझोर गई क्युकी ये सच था की इन तीनो दिनों में उनके मन एक दुसरे के प्रति भावो में काफी परिवर्तन आ चूका था पर अब भी वो असमंजस में थे की क्या ये सिर्फ अपनापन है या कुछ और. पर इसका निर्णय तो उन्हें खुद करना था. और अगले दो दिन में क्या क्या होने वाला है की प्रेम भाव की परीक्षा होगी. वो दोनों ये सोच hi रहे थे की साधू ने फिर उन्हें पुकारा.
साधू: लखन जी विनीता जी किस सोच में डूब गए देखिये विवाह इस पूजा का अंतिम चरण है उससे पहले काफी वक़्त मिलेगा आपको सोचने के लिए फिलहाल सामूहिक यज्ञ का समय हो रहा है अगर आप लोग तैयार हो तो यज्ञ स्थल की तरग चले.
लखन विनीता: जी जी बिलकुल चलते है.
लखन विनीता साधुओ के दाल के पीछे यज्ञ स्थल की तरफ चल दिए. यज्ञ स्थल का पंडाल लोगो से खचाखच भरा था. पंडाल में चारो तरफ लाइन से 100 हवन कुंड बने थे और बीच में एक बड़ा हवन कुंड बना था जहा प्रधान पुजारी को यज्ञ करना था. और शायद इसी वेदी पर विनीता को एक बार फिर लखन सिंह के साथ विवाह बंधन में बांधना था. प्रधान पुजारी लखन विनीता के साथ उस बड़ी वेदी के समीप आकर खड़ा हो गया और उनके कहने पर लोग बाकि हवन कुंडो के इर्द गिर्द बैठ गए. लखन विनीता और प्रधान पुजारी भी पंडाल के मध्य में बानी यज्ञ वेदी के इर्द गिर्द बैठ गए.
सभी 101 यज्ञ वीडियो को एक साथ अग्नि से प्रज्वलित कर दिया गया. और पूरा पंडाल ॐ सूर्याय नमः के जाप से गूंजायमान हो उठा. लखन विनीता भी हाथ जोड़ का ॐ सूर्याय नमः का जाप करते हुए भगवान् सूर्य देव से इस पूजा में अपना आशीर्वाद देने की प्रार्थना करने लगे. पर कही न कही उन दोनों के मन उस पुजारी की बातो से एक अजीब सा अंतर्द्वंद चल रहा था की क्या वाकई उनके मन एक दुसरे के प्रति प्रेम का भाव उत्पन्न हो गया है या सिर्फ अपनेपन का. तीन दिन पहले जो शादी उनके लिए एक मजबूरी में की गई औपचारिकता थी क्या 72 घंटे एक दुसरे के साथ गुजरने के बाद एक दुसरे के सुख दुःख बाटने के बाद क्या अब भी वो शादी उनके लिए औपचारिकता है. क्या आज जब वो दुबारा शादी की वो रस्मे पूरी कर्नेगे तब भी उनके मन में वही भाव रेहनेगे जो तीन दिन पहले थे या आज की शादी उनके मन नै इच्छाओ के बीज के अंकुरित होने की वजह बनने वाली थी.