लालू का फार्महाउस
लालू का असली चेहरा शबाना के सामने आ चूका था जिस लालू पर भरोसा करके वो यहाँ अकेली उसके फार्महाउस पर आ गई थी उसीने उसे अपने मवाली दोस्तों के सामने तश्तरी में परोस कर रख दिया था. शबाना को अब अपनी गलती का एहसास हो रहा था एक गलती को छुपाने के चक्कर में वो पूरी तरह उनके जाल में फस चुकी थी. पर अब उस गलती को सुधरने ने बहुत देर हो चुकी थी.
एक छोटी सी पंतय में शबाना वह उन भेडियो के बीच बेबस लाचार सी पड़ी थी और वो भेडियो उसे नोच खाने को तैयार हो रहे थे. देव कुंदन प्रताप ने अपनी अपनी जेब से वो ड्रग्स की पुड़िया निकली उसका पाउडर अपनी हथेली में लिया और अपनी नाक उसके करीब लेकर उसका एक ज़ोरदार काश भरा.
वो ड्रग्स वाकई इतनी ज़ोरदार थी की एक काश में hi उनके दिमाग में अंदर तक उतर गई. उस ड्रग्स का असर उनकी आँखों में भी साफ़ नज़र आ रहा था उनकी आँखे खून सी सुर्ख लाल हो गई थी. शबाना उनके सामने हाथ जोड़े बैठी थी की शायद उनमे से किसी को तो उस पर रेहम आ जाए. पर ड्रग्स के नशे में चूर वो तीनो आहिस्ता आहिस्ता शबाना की तरफ बाद रहे थे और लालू शबाना की बर्बादी के हर पल का पूरा लुत्फ़ ले रहा था एक झापड़ का न जाने कितना बदला लेने वाला था वो. वह अगर किसी को शबाना पर तरस आ रहा था तो वो चांदनी थी पर वो भी बेबस थी वो चाहते हुए भी शबाना को बचने के लिए कुछ नहीं कर सकती थी. न जाने वो तीनो शबाना के साथ क्या करने वाले थे पर जो भी था वो बेहद बर्बर और खौफनाक होने वाला था.
वो तीनो शबाना के अगल बगल आकर बैठ गए और उसके बदन को अपने हाथो से यहाँ वह सहलाने लगे पर शबाना ने उन तीनो को परे धकेल कर खड़े होकर हॉल के दरवाज़े की तरफ दौड़ पड़ी और जैसे hi उस दरवाज़े को खींच कर खोलने की कोशिश की वो दरवाज़ा बहार से बंद था. वो तीनो वही बैठे डाट निकला कर है रहे थे.
देव: हेहेहे यार लालू ये तितली तो बड़ा फड़फड़ा रही है.
लालू: तो पर कुतर दो साली के साडी फड़फड़ाहट ख़तम हो जाएगी.
देव कुंदन प्रताप एक बार फिर दरवाज़ा पीट रही शबाना की तरफ बड़े. शबाना उन्हें अपनी तरफ आते देख रही थी पर उसके पास भागने की कोई जगह hi नहीं थी. कुंदन ने पीछे से शबाना को बालो को अपनी मुट्ठी में जकड लिया और उसे बालो से घसीटता हुआ वापस हॉल के बीच में ले आया. और हॉल के बीच में लेकर एक तेज़ झापड़ शबाना के गाल पर रसीद कर दिया. शबाना ौंधे मुँह लड़खड़ा कर ज़मीन पर जा गिरी. शबाना ने उठने की कोशिश करि पर देव और प्रताप ने उसकी टांगो पर अपनी टाँगे रख दी. शबाना दर्द से तड़प उठी पर उसकी दर्द का भी उन दरिंदो पर कोई असर नहीं हो रहा था.
देव और प्रताप शबाना की टांगो पर टांग रखे खड़े थे और कुंदन ज़मीन पर गिरी शबाना के सामने आकर बैठ गया और शबाना की सर को बालो से पकड़ कर उठा कर एक के बाद एक 10 - 12 झापड़ उसके दोनों गालो पर रसीद कर दिए. शबाना के गाल कुंदन के झापडो से लाल पद गए थे पर फिर भी वो खुद को छुड़ाने की पुरज़ोर कोशिश कर रही थी.
कुंदन: बहुत चिल्ला रही है तू जितना चिल्लाएगी तुझे उतनी hi ज्यादा तकलीफ होगी. अब तू सोच ले तू कितनी तकलीफ झेल सकती है. लगता है तुझे एक डेमो देना होगा.
कुंदन शबाना के सामने से उसके कूल्हों के करीब आया उसकी पंतय को अपने दोनों हाथो की मुट्ठी में भरा और एक झटके उसकी पंतय को दो टुकड़ो में पहाड़ कर उसके जिस्म से अलग कर दिया. शबाना को पूरा नंगा करने के बाद कुंदन ने देव और प्रताप को इशारा करा और देव ने शबाना के हाथ और प्रताप ने उसके पैरो को जकड लिए. कुंदन ने शबाना की फटी हुई पंतय को उसके मुँह में ठूस दिए. उसके बाद कुंदन ने खड़े होकर अपनी पंत से चमड़े की बेल्ट निकाल ली. शबाना बेबस से कुंदन को अपनी बेल्ट निकलते देख रही थी पर हाथ पेअर जकड़े होने की वजह से वो हिल नहीं सकती थी और मुँह में कपडा ठूसा होने की वजह से कुछ बोल नहीं सकती थी. बस गर्दन हिला कर उनसे रेहम की भीक मांग रही थी.
देव और प्रताप शबाना को जकड़े हुए थे और कुंदन ने अपनी बेल्ट से शबाना के कूल्हों पर बेल्ट से मारना शुरू कर दिया.
शबाना दर्द से चीख रही थी पर उसकी चीख भी उसके मुँह में hi घुट कर रह जा रही थी. कुंदन जानवरो की तरह शबाना को बेल्ट से मार रहा था शबाना की आँख का काजल बहकर उसके गालो तक आ गया था. वो दर्द से तड़प रही थी चांदनी की आँखे भी आसुओ से भर आई थी पर सिवाए रोने के वो कुछ नहीं कर सकती थी. पुर उन जल्लादो को शबाना के दर्द में भी मज़ा आ रहा था खासकर कुंदन को. कुंदन ताबड़तोड़ शबाना के चूतड़ों पर बेल्ट बरसाए जा रहा था हर मार पर शबाना का पूरा बदन हिल जाता जाता था लालू को भी शबाना की घुटी घुटी चीखो उसकी छटपटाहट में बड़ा मज़ा आ रहा था. शबाना मार खा खा कर बेदम सी हो गई थी उसकी चूतड़ों में खून छलक आया था उसके चूतड़ मार खा खा कर नीले पद गए थे.
लालू: अबे इतना मत मारना की मर hi जाए ध्यान रखना कल इसे ज़िंदा ले जाना है वापस.
कुंदन: ओह है यार मई तो भूल गया था की इसे ज़िंदा वापस ले जाना है भावनाओ में बह गया था.
कुंदन ने बेल्ट मरना बंद कर दिया और शबाना के कानो में फुसफुसाकर बोलै: कैसा लगा बेबी मज़ा आया बोलै था न जितना ज्यादा छटपटाएगी उतना ज्यादा तकलीफ होगी.
शबाना बेबस सी नंगी फर्श पर पड़ी थी. इधर देव कुंदन प्रताप ने भी अपने बदन के कपडे उतार कर वही फर्श पर दाल दिया. अब वो तीनो भी शबाना की तरह पुरे नंगे थे और दुर्गस्य के प्रभाव के कारन उनके लुंड कुछ ज्यादा hi फूले हुए और तने हुए हवा में लहरा रहे थे. तीनो के लुंड एक से बढ़कर एक लम्बे थे कुंदन का लुंड तो बदन से भी ज्यादा बदसूरत और काला था और बालो से भरा हुआ था. नंगे होने के बाद प्रताप ने शबाना को बालो से पकड़कर उठा कर बिठा दिया उसके मुँह में ठुसी उसकी पांच को बहार निकल दिया और तीनो शबाना के इर्द गिर्द उसे घेरकर खड़े हो गए हुए उसके चेहरे के सामने अपने लुंड लहराने लगे. वो तीनो शबाना के चेहरे पर यहाँ वह अपने लुंड रगड़ रहे थे और शबाना अपना चेहरा हिला दुलकर बचने की हर संभव कोशिश कर रही थी. देव का लुंड शबाना के ठीक सामने और बार बार उसके होंठो को छू रहा था और उसके मुँह के अंदर दाखिल होने के लिए ज़ोर लगा रहा था. पर शबाना इतनी मार खाने के बाद भी अपने होंठो को कास कर जकड़े थी और देव को परे धकेलने की हर संभव कोशिश कर रही थी.
देव: साली रुंडी की औलाद मुँह खोल कुटिया साली चल मुँह खोल.
पर देव के गाली देने के बावजूद शबाना उसे पीछे धकेल रही थी. एक औरत का इतना विरोध वो भी इतनी मार खाने के बाद उन हैवानो की बर्दाश्त के बहार था और ड्रग्स के नशे में उनका गुस्सा और बाद गया था. कुंदन की नज़र सिगरेट के काश भरते लालू पर पड़ी जो उन्हें देख कर है रहा था.
लालू: क्या हुआ एक दो टेक की औरत का मुँह नहीं खुलवा पा रहे तुम तीनो मिलकर मैंने अकेले इसका बंग करा था इसकी साड़ी अकड़ मिटटी में मिला दी थी और तुम साले तीन तीन मिलकर भी कुछ नहीं कर पा रहे. लानत है तुम लोगो की मर्दानगी पर, आए चांदनी अपनी कुछ चुडिया लेकर दे दे इन्हे क्युकी मर्द तो लगते नहीं ये.
लालू के इस टॉन्ट ने उनके गुस्से को और भड़का दिया था और लालू ने जानबूझ कर उनका गुस्सा भड़काया था क्युकी वो जनता था की उनका सारा गुस्सा शबाना पर निकलेगा और यही वो चाहता था.
कुंदन लालू के पास गया और उसके होंठो वो सिगरेट खींच ली उसका एक गहरा काश भरा और वो सिगरेट लेकर वापस शबाना के करीब आ गया और एक बार फिर उसके कान में फुसफुसा कर कहा.
कुंदन: बड़ी अड़ियल घोड़ी है तू तुझे इतना समझाया की ज्यादा अकड़ मत देखा जितना विरोध करेगी उतनी ज्यादा तकलीफ होगी डेमो भी दिया पर तुझे समझ नहीं आया. कोई बात नहीं हमे अड़ियल घोडियो को सीधा करना अच्छे से आता है. आए प्रताप चल घोड़ी बना इसे.
कुंदन के कहने पर प्रताप ने शबाना की गर्दन को अपनी बगल में दबाकर घोड़ी बना दिया. देव अब भी शबाना के सामने अपना लुंड टांग खड़ा था और कुंदन उस सिगरेट के काश भरता हुआ घोड़ी बानी शबाना के पीछे उसके चूतड़ों के पास आकर खड़ा हो गया. कुछ पल वो शबाना के बड़े बड़े कूल्हे जो बेल्ट की मार लाल हो गए थे उन्हें प्यार से सहलाता रहा और अगले hi पल उसने वो जलती हुई सिगरेट शबाना के कूल्हों पर मसल दी. पूरा हॉल शबाना की चीख से गूँज उठा, शबाना दर्द से तड़प उठी उसका असहनीय पीड़ा देख चांदनी की आँखे भी आंसुओ से भर आई.
पर बेचारी शबाना ज्यादा देर चीख कर अपने दर्द का इज़हार भी न कर पाई. चीखने के लिए उसके खुले मुँह में hi देव ने अपना लुंड एक झटके में अंदर तक पेल दिया.
और ताबड़तोड़ उसके मुँह में अपना लुंड अंदर बहार करने लगा. देव का लुंड भी काफी तगड़ा और फूला हुआ था और शबाना के मुँह के अंदर तक जा रहा था, देव शबाना को सांस लेने तक का मौका नहीं दे रहा था. देव ने आगे से शबाना की हालत ख़राब कर राखी थी और इधर पीछे से कुंदन ने अपने होंठ शबाना की लाल लाल फूली हुई गांड में बने सिगरेट के जलने के निशाँ पर रख दिए. एक पल को शबाना तड़प कर रह गई पर धीमे धीमे जब कुंदन ने उस जले पर अपनी जीभ से चेतना शुरू करा था जीभ का गीलापन उसे अपने जले पर थोड़ा ठंडा एहसास भी दे रहा था. देव और कुंदन को अपने अपने काम में लगा देख कर प्रताप का लुंड भी झटके खा रहा था उससे वह खड़े खड़े उन दोनों को शबाना के जिस्म से खेलते नहीं देखा जा रहा था इसलिए वो भी शबाना के पीछे से ज़मीन पर लेट कर उसकी जांघो के बीच घुस गया और सीधा अपने होंठ शबाना की पहली हुई छूट पर रख दिए. अब देव शबाना के मुँह में धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था तो कुंदन उसके चूतड़ों पर हद से ज्यादा बर्बरता करने के बाद उन्हें बड़े प्यार से चूम चाट रहा था वही प्रताप की जीभ शबाना की छूट की दरारों के अंदर दाखिल होकर उसकी छूट की गहराई को नाप रही थी. शबाना एक साथ उन तीन मर्दो के हाथ का खिलौना बानी हुई थी.
देव शबाना के मुँह में अपना लुंड पेले जा रहा था शबाना के मुँह की गर्माहट भी उसके लुंड को नहीं झड़वा पाई थी शायद ड्रग्स के प्रभाव के कारन उसके लुंड के झड़ने का टाइम बाद गया था. वही शबाना की छूट को छत्ते छत्ते प्रताप सरक कर चौपाया बानी शबाना के पूरा नीचे तक आ गया की उसका चेहरा देव के धक्को के कारन हिलते शबाना के मोठे मोठे दूध के नीचे आ गया था. और इतनी सुन्दर बड़ी बड़ी चूचियों के इतना करीब होकर इन्हे मुँह में लेने से खुद को रोकना तो बड़े से बड़े शरीफजादो के लिए भी नामुमकिन था फिर भला प्रताप कहा रुकने वाला था. उसने बिना देर किये शबाना को अपनी बहो के भरकर उसकी एक चुकी को अपने मुँह में भर लिया. ये बताने की ज़रूरत नहीं थी की प्रताप का बड़ा सा मुँह भी शबाना के पुरे दूध को अपने मुँह में भरने में नाकाम सिद्ध हुआ. वही कुंदन ने शबाना की गांड के बीच की दरार को चौड़ा करके अपनी नानक उस दरार में घुसेड़ दी और शबाना के चूतड़ों से आती मादक महक को सूंघने लगा. शबाना की गांड को सूंघते सूंघते कुंदन ने अपनी जीभ से शबाना की गांड को चेतना शुरू कर दिया. कुंदन अपनी जीभ से शबाना की गांड की दरार को ऊपर से नीचे तक चाट रहा था. तीन तीन मर्द के कामुक खिलवाड़ की वजह से शबाना का तो उत्तेजना के मारे बुरा हाल हो रहा था.
देव शबाना का मुँह छोड़ते हुए 10 मं से ज्यादा हो गया था शबाना का जबड़ा दर्द करने लगा था पर देव रुकने का नाम नहीं ले रहा था. शबाना ने उसे पीछे धकेलने की बहुत कोशिशे की पर उसकी पकड़ इतनी कर्री थी की शबाना का हर विरोध बेकार था. प्रताप कभी शबाना के एक चुके को मुँह में लेता तो कभी दुसरे को जैसे बछड़ा गई के नीचे खड़ा होकर उसके थान पीटा है वैसे hi प्रताप शबाना के दूध पी रहा था. वही शबाना की गांड को छत्ते छत्ते कुंदन शबाना को पीछे से उचका कर अपनी जीभ शबाना की छूट तक ले आया. कुंदन ने शबाना की छूट की फैंको को अपने होंठो में भर लिया और उन्हें होंठो के भर कर चूसने लगा. शबाना की छूट की गर्माहट को महसूस करने भर hi कुंदन का काला भुजंग लुंड झटके पे झटके खा रहा था तो शबाना के नीचे लेते उसके नरम मुलायम स्तनों को चूसते प्रताप के लुंड का भी यही हाल था. बार बार कुंदन और प्रताप के झटके कहते लुंड एक दुसरे से टकरा रहे थे.
ये सब अपनी मर्ज़ी के खिलाफ होने और असहनीय पीड़ा झेलने के बाद भी शबाना थी तो एक औरत hi और एक आवर्त के जिस्म की मर्यादाओ से बंधी थी. वो लाख कोशिशों के बावजूद अपनी बदन की उत्तेजना को काबू नहीं कर सकती और चाँद पालो में hi ये उत्तेजना उसकी छूट से झड़ने को मजबूर हो गई. शबाना की उत्तेजना का पूरा रूस उसकी छूट को मुँह में भरे कुंदन के मुँह में समां गया. उत्तेजना के नशे में मदमस्त होकर न चाहते हुए भी अनजाने में शबाना देव के लुंड को अपने होंठो में कसने को मजबूर हो गई. देव का लुंड पूरी तरह शबाना के मुँह में कैद हो गया और झड़ने के बाद शबाना के मुँह से उठती गरम गरम आहे सीधा देव के लुंड से टकरा रही थी. और देव का लुंड ज्यादा देर इन गरम गरम ाहो को बर्दाश्त नहीं कर पाया और उसके लुंड से निकलता वीर्य सीधा शबाना के हलक से नीचे तक उतरता चला गया.
शबाना को वो वीर्य बहार थूकने का मौका hi नहीं मिला और उसे ये वीर्य पीने को मजबूर होना पड़ा पर ये तो उसकी आज की वीर्य की पहली खुराक थी अभी तो उसे बहुत कुछ लेना था.