A wedding ceremony in village - Page 7 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

गरिमा दिन भर की थकन के बाद नींद के पहलु में जा चुकी थी तो आंसुओ से भरी विनीता की आँखों से आज नींद कोसो दूर चली गई थी अघोरी द्वारा बताई गई आज की पूजा की विधियों को करने या न करने का अजीब सा द्वन्द उसके दिलो दिमाग में चल रहा था.

वही हवेली में बाकि बची पाछो सहेलियों की ज़िन्दगी भी अपनी अपनी दिशा में आगे बाद रही थी. कल रात नशे की हालत में अपने बाप को अपना पति समझ मनाई गई सुहागरात की ख़ुशी में डूबी शोभा आज रात फिर विक्रम के साथ प्यार की गहराइयो में डूब जाना चाहती थी और इसी बारे में बात करने वो एक बार फिर विक्रम के कमरे में पहुंच गई.

शोभा: विक्रम आज रात भी तुम मेरे कमरे में आओगे न मई इंतज़ार करुँगी तुम्हारा.

विक्रम अब थोड़ा इर्रिटेट हो रहा था हलाकि वो भी शोभा को पसंद करता था पर अपने बाप को धोका भी नहीं देना चाहता था. पर शोभा कुछ सुनने को तैयार hi नहीं थी.

विक्रम: शोभा पापा की वो पूजा पूरी हो जाने दो उसके बाद तो हमारे पास वक़्त hi वक़्त होगा.

शोभा: अरे अभी छुप छुप कर ये सब करने का जो मज़ा है वो तब नहीं होगा. तुम्हारी बेशक कुछ गिर्ल्फ्रेंड्स रही होंगी पर मैंने तुम्हारे अलावा कभी किसीके बारे में नहीं सोचा कॉलेज में किसी लड़के के साथ नहीं घूमी. कॉलेज के बाद सोचा तुम्हारे साथ कुछ प्यार भरे पल बिताउंगी पर हमारी शादी तै हो गई और फटाफट हो भी गई अब दो दिन मुझे अपनी गर्लफ्रेंड बन लेने दो उसके बाद तो पूरी ज़िन्दगी बीवी hi बांके रहना है.

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विक्रम को समाजः नहीं आ रहा था की वो शोभा को कैसे समझाए कल तो जैसे तैसे उसने नशे की गोली देकर काम चला दिया था पर ये रोज़ रोज़ नशे की गोली इस्तेमाल नहीं की जा सकती थी और उसे आज की रात के बाद दो और राते बिना शोभा के करीब जाए कटनी थी इसलिए उसे इस समस्या का कोई सही इलाज खोजना था. वो जनता था शोभा को लड़कियों के छोटे छोटे कपडे कपडे अच्छे नहीं लगते कॉलेज के दिनों में भी उसने कई बार शोभा को ऐसे कपडे गिफ्ट करने चाहे पर शोभा ने हमेशा इंकार कर दिया. हलाकि शोभा साड़ी में भी बेहद सुब्दर लगती थी पर फिलहाल विक्रम को इसी बात में इस समस्या का हल नज़र आया की अगर वो शोभा को ऐसे कपडे पेहेन्ने को फाॅर्स करे तो शोभा कभी नहीं मानेगी तब वो भी इस बात पर अगले दो दिन आसानी से काट लेगा. वो थोड़ी नाराज़ होगी पर पूजा होने के बाद प्यार से उसे मन लेंगे. विक्रम को ये तरीका सही लगा.

विक्रम: तुम मेरी गर्लफ्रेंड बनने की बात कर रही हो पर गर्लफ्रेंड बनने से पहले ढंग से गर्ल तो बन जाओ. कॉलेज के दिनों में अपना गेटउप याद है ऊपर कुरता नीचे जीन्स लाठर जैकेट लड़की कम लड़का ज्यादा लगती थी और अब जबसे गाँव आई हो बस ये साड़ी जिसमे तुम लड़की कम औरत ज्यादा लगती हो. पहले बॉय बानी रही अब औरत बन गई हो गर्ल तो तुम कभी रही hi नहीं. कितनी बार तुम्हे कहा की थोड़ा खुद को बदलो थोड़ी मॉडर्न बनो मैंने कितनी बार तुम्हे मॉडर्न कपडे गिफ्ट करने चाहे पर तुमने कभी नहीं लिए.

शोभा: उन बदन दिखाऊ छोटे छोटे कपड़ो को तुम मॉडर्न होना कहते हो जिसमे साडी दुनिया के सामने औरत के जिस्म की नुमाइश होती है लोग उसे गन्दी नज़र से देखते है ये मॉडर्न होना है तुम्हारी नज़र में.

विक्रम: अब बाते मत बनाओ साडी दुनिया जहाँ की लड़किया ऐसे कपडे पहनती है पर तुम पेहेन लोगी तो बहुत बड़ी बात हो जाएगी. अपनी फ्रेंड नेहा को देखो वो भी तो पहनती है ऐसे कपडे कुछ उसीसे सीख लो.

शोभा: वाओ तो तुम चाहते हो मई नेहा से सीखू तुम जानते hi कितना हो नेहा को पता है वो किस चैरेक्टर की है कितने लड़को को अपने आगे पीछे घूमती है तुम चाहते मई वैसी हो जाऊ.

विक्रम: बेफिज़ूल की बाते मत करो मई यहाँ किसी के चैरेक्टर पर कुछ नहीं कह रहा वो चैरेक्टर वाइज कैसी है उससे मुझे कुछ लेना देना नहीं मई यहाँ सिर्फ लुक्स और कपड़ो की बात कर रहा. उसका ड्रेसिंग सेंस देखो कितनी हॉट बांके रहती है.

शोभा: मई जैसी हु ठीक हु मुझे कोई ज़रूरत नहीं उसके जैसा बनने की. मई यहाँ तुमसे कितने अच्छे मन से प्यार भरी बाते करने आई थी और तुम मुझे नेहा जैसा बनने को कह रहा. तुम इसी में खुश रहो शायद मैंने hi तुमसे कुछ ज्यादा एक्सपेक्ट कर लिया था. गुड नाईट अब तुमसे बीवी के रूप में hi मिलूंगी शायद गितलफ्रेंड बॉयफ्रेंड बनना हमारे नसीब में नहीं.

इतना कह कर शोभा गुस्से में कमरे से निकल गई विक्रम ने भी थोड़ी रहत की सांस ली की चलो अब शोभा अगले दो दिन शायद गुस्से में उससे बात भी नहीं करेगी और पापा के वापस आने के बाद हमारी सुहागरात पर मई इसे कैसे भी करके मन hi लूंगा तब तक ये मुझे अब दस्तूरब नहीं करेगी. 10 मं की बातचीत में इस प्रॉब्लम का सलूशन हो गया.

विक्रम को यही लग रहा था की उसने बड़े इंटेलीजेंट तरीके से 10 मं की बातचीत से इस प्रॉब्लम को फिलहाल के लिए सोल्वे कर लिया है पर उसे ये अंदाजा भी नहीं था की 10 मं की ये नार्मल सी दिखने वाली बातचीत उसकी नै नै शुरू हुई शादीशुदा ज़िन्दगी में ऐसा भूचाल लेन वाली थी जो उसकी शादीशुदा ज़िन्दगी की जड़ो को हिला कर रख देने वाला था. हवा में उड़ते तिनको को हम फूक मार कर उडा देते है ये सोचकर की ये एक छोटा सा तिनका हमारा क्या उखड लेगा पर जब यही अनगिनत तिनके एक साथ इकट्ठे हो जाते है तो इन्हे बवंडर का रूप लेने में ज्यादा वक़्त नहीं लगता. इस बातचीत में छुपा एक ऐसा hi बवंडर बड़ी मद्धम गति से हौले हौले उनकी तरफ बाद रहा था बस देखना ये था की क्या इनकी शादीशुदा ज़िन्दगी उस बवंडर का वेग सेहेन कर पाएगी या उस तिनके की तरह तिनको तिनको में बिखर कर रह जाएगी.

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रात काफी हो चुकी थी विक्रम के कमरे से निकल कर शोभा अपने कमरे में पहुंची hi थी की पीछे से उसके दरवाज़े पर दस्तक हुई उसे लगा शायद विक्रम माफ़ी मांगने आया है पर जब उसने दरवाज़ा खोला तो सामने नीतू और आरती कड़ी थी.

शोभा: ओह तुम दोनों इस वक़्त.

नीतू: है शोभा तुम्हे बताया था न वो उस साधना के बारे में.

शोभा: है तुमने सुबह बताया था तुम जाओ मई देख लुंगी बोल दूंगी तुम अपने किसी रिलेटिव के यहाँ गई हो. आरती तुम भी जा रही हो.

आरती: है अब इतनी रात में इसे अकेला कैसे जाने दो.

शोभा: Ok जाओ मई देख लुंगी अगर कोई प्रॉब्लम हो तो मई भी चालू साथ में या किसी आदमी को साथ भेज दू.

नीतू: नहीं नहीं हम पहले भी दो रात जा चुके है और किसी को भेजेगी तो बात खुल जाएगी इसलिए हम खुद चले जाएंगे.

शोभा: ठीक है बेस्ट ऑफ़ लक और कभी भी मेरी ज़रूरत महसूस हो तो फ़ोन कर देना.

नीतू और आरती हवेली से निकल गए उन्होंने नेहा को भी मश्ग करके अपने जाने के बारे में बता दिया, बातचीत के कन्फूसिओं में शोभा को यही लगा की आरती भी उसके साथ रहने के लिए जा रही है जबकि आरती ने केवल रात में साथ जाने की बात कही थी. नीतू आरती फिर उसी जगह पहुँच गए जहां कल रात अघोरी उन्हें मिला था यानि उस शिव मंदिर के पास पर आज उनके पहुंचने से पहले hi अघोरी वह पहुँच चुका था और उनका इंतजार कर रहा था. अघोरी उन्हें अपनी तरफ अत देख रहा था पर उनके अलावा उसे किसी और चीज़ के भी अपनी तरफ आने का आभास हो रहला था. नीतू और आरती उनके पास आ चुकी थी.

अघोरी- आज भी तुम्हारी ये सहेली तुम्हारे साथ है और जिसे तुम्हारे साथ होना चाहिए था वो बाल ब्रह्मचारी वो कहा है. क्या अब तक तुम्हे पुरे गाँव में ऐसा एक आदमी नहीं मिला.

नीतू और आरती एक दुसरे का मुँह देखने लगे क्युकी उन्हें वो ब्रह्मचारी मिल तो गया था पर अभी अघोरी के सामने वो ये खोलना नहीं चाहते थे क्युकी वो और कोई नहीं खुद अघोरी है और ये सुनकर वो कैसे रियेक्ट करे ये कहना मुश्किल था इसलिए अच्छा रहेगा की अभी इस बात को गुप्त रखा जाए और नीतू को उन्हें सडके करने का मौक़ा दिया जाए.

नीतू- वो बाबा आरती तो आज बस मुझे यहाँ तक छोड़ने आई थी अब वापस लौट जाएगी.

अघोरी- और वो ब्रह्मचारी पुरुष.

नीतू- वो मिल गया है पर आज हमारे साथ आ नहीं पाया पर कल ज़रूर होगा.

अघोरी- और ये बैग ये किसका है इसमें क्या है.

नीतू- वो बाबा इसमें मेरे कपडे है और मेरी ज़रूरत का कुछ बाकी सामान.

अघोरी- ये क्यों इसका हमारी पूजा में क्या काम.

नीतू- वो बाबाजी दरअसल रोज इस तरह आधी रात में यहाँ आना बड़ा रिस्की रहता है कोई भी देख सकता है कुछ भी हो सकता है इसलिए अगर आप बुरा न मने जब तक ये साधना संपन्न नहीं हो जाती मैं आपके घर में रह सकती हु ऐसे roj-roj आना जाना नहीं पड़ेगा.

अघोरी- क्या तुम्हे पता है न मई कहा रहता हु एक कब्रिस्तान में तुम वह कैसे रीह सकती हो. और ये साधना तो अभी तीन दिन और चलेगी तब तक तुम वह कैसे रह पाएगी. वो कोई होटल या धर्मशाला नहीं. वह तुम्हे हवा के लिए पंखा नहीं मिलेगा पेड़ो की हवा मिलेगी नहाने के लिए बाथरूम नहीं मिलेगा नदी का पानी होगा सोने के लिए नरम बिस्तर नहीं होगा सख्त ज़मीन होगी.

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नीतू- जब राज के लिए मैं किसी और के साथ सम्बन्ध बनाने को तैयार हो गई तो ये सब बाते तो बहुत छोटी है मेरे लिए. बाबा मैंने शोभा से इस बारे में बात कर ली है वो कह देगी मैं किसी रिश्तेदार के यहाँ गई हु. समझिये बाबा जी मेरे चैरेक्टर का सवाल है अगर किसी को हलकी सी भी भनक लग गयी की मैं आपके घर जाकर किस तरह की साधना कर रही हु तो लोग मेरे चरित्र के बारे में दस तरह की बाते करेंगे मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहूंगी इसलिए अच्छा यही होगा की इस साधना के ख़तम होने तक मैं इस दुनिया की नज़रो से दूर आपके घर में राहु ताकि roj-roj मुझे यु छुप कर आपसे मिलने ना आना पड़े.

नीतू की बात ने अघोरी को भी सोचने पर मजबूर कर दिया बात नीतू की सही थी roj-roj इस तरह मिलने से पकडे जाने का ख़तरा था और फिर लोग ना सिर्फ नीतू के बारे में अघोरी के बारे में भी कुछ भी सोच सकते थे इसलिए नीतू की बात hi सही लग रही थी की जब तक ये साधना ना हो जाये नीतू अघोरी के घर उस कब्रिस्तान में hi रहे.

अघोरी- ठीक है पर वह तुम किसी तरह की सुविधा की उपेक्षा मत रखना.

नीतू- जी बाबा

अघोरी- और वो ब्रह्मचारी पुरुष उसका क्या तुम्हारे मन में उसके प्रति प्रेम उत्पन्न हो गया है क्या.

नीतू- हो जाएगा मई उसे जानती हूँ उसका चेहरा मेरी आँखों में बस चुका है ऐसा लग रहा है जैसी अभी भी वो मेरे सामने है.

नीतू ने इशारो इशारो में अपनी बात कह दी थी पर अघोरी मोह माया से इतना दूर हो गया था की वो इस इशारे को समझ hi नहीं सका उसे इस बात का अंदाजा भी नहीं था की नीतू की आँखों के सामने तो वो खुद है.

अघोरी- ठीक है चलो और अपनी सहेली को यही से वापस कार्डो.

अघोरी की नज़र आरती पर पड़ी और एक पल के लिए उसे कुछ अजीब सी अनुभूति हुई. जैसे कोई हवा का कवच उसको चारो और से घेरे हुआ है. उसने आगे बाद कर अपना हाथ आरती के सर पर रख दिया. आरती और नीतू दोनों चौंक गए की अचानक से अघोरी को ये क्या हो गया. अघोरी ने अपनी आँखे बंद कर्ली और कुछ महसूस करने की कोशिश करने लगा. वो बंद आँखों से किसी को खोजने की कोशिश कर रहा था. उसे बंद आँखों से किसी के चीखे सुनाई दे रही थी किसी के हसने की आवाज़े सुनाई दे रही थी पर सब दृश्य बहुत धुंधले थे उसे दो परछाईया तो दिख रही थी पर उनके चेहरे नहीं.

अचानक से दृएश्या थोड़े साफ़ हुए और एक चीज़ उसे saaf-saaf दिखने लगे. और जो चीज़ उभरकर उसकी बंद आँखों के सामने आई थी वो था एक सुक्ष्म एक मुखी रुद्राक्ष जो बहुत दुर्लभ होता है और कहते है जिसमे साक्षात् शिव का वास होता है.

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पर ये एक मुखी रुद्राक्ष कुछ अलग था एक अलग सी चमक थी इसमें कुछ संकेत छिपे थे इसमें जैसे वो अघोरी को कुछ बताना चाह रहा हो.

आरती और नीतू को कुछ समझ नहीं आ रहा था की आखिर अचानक से बात karte-karte अघोरी को हो क्या गया. अचानक उस रुद्राक्ष से एक तेज रौशनी निकली और उस अघोरी ने आरती के सर से अपना हाथ हटा लिया.

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अघोरी की साँसे tej-tej चल रही थी. वो पसीने पसीने हो गया था.

नीतू- क्या हुआ बाबा ये अचानक से आपको क्या हो गया.

आरती- ये क्या कर रहे है आप साधना के लिए नीतू आई है मैं नहीं.

अघोरी- मैं जनता हु पूजा के लिए नीतू आई है तुम नहीं पर तुम्हारे चारो तरफ मुझे किसी ऊपरी हवा का साया महसूस हो रहा है जैसे किसी अदृश्य शक्ति ने तुम्हे चारो तरफ से घेर रखा है. जब मैंने तुम्हारे सर पर हाथ रखा तो मुझे दो शक्तियों का आभास हुआ और साथ मेल दिखा एक एक मुखी दिव्या रुद्राक्ष जिसमे से एक अजीब सी चमक निकल रही थी. ये एक मुखी रुद्राक्ष बहुत दुर्लभ होता है और कहते है इसमें साक्षात शिव का वास होता है. भगवान् शिव अपने बाजू में जो रुद्राक्षा की माला बंधे रहते है वो एक मुखी रुद्राक्षा hi है और उन दुर्लभ एक मुखी रुद्राक्षों में भी कुछ आती दुर्लभ एक मुखी रुद्राक्षा जो कहते है संसार में केवल 9 है जो शक्ति के 9 रूपों का प्रतिनिधित्वा करते है और उनमे से एक वो था जो शक्ति के उस रूप का प्रतिनिधि है जो सबसे रुद्रा और सबसे उग्रा था जिसके सामना स्वयं महादेव भी नहीं कर पाए थे और जिसे शांत करने के लिए उन्हें उनके सामने समर्पण करना पड़ा था उनके पैरों के नीचे लेटकर यानी काली ये रुद्राक्षा शक्ति के कालरात्रि रूप का प्रतिनिधि है बहुत शक्तिशाली और उसका तुमसे कुछ ना कुछ सम्बन्ध जरूर है.

आरती- बाबा मैं इन सब बातो में यकीं नहीं करती मैं विज्ञान की छात्रा हु और उसीमे यकीं करती हु ये ऊपरी साया एंड आल मैं नहीं मानती ये सब.

अघोरी- ठीक है मैं तुम्हे फाॅर्स नहीं करूंगा पर तुम्हारे चारो तरफ जो साया उसे दूर जरूर कर सकता हु.

अघोरी ने अपने थैले में से एक पुड़िया निकली जिसके अंदर मन्त्रित भस्म थी अघोरी ने उस भस्म को अपने हाथ में लिया अपने होंठो के पास लाकर कोई मंत्र पड़ा और आरती के ऊपर उसे फूँक दिया. अचानक से अघोरी की इस हरकत पर आरती को खासी आ गयी और गुस्सा भी बहुत आया पर नीतू की वजह से खामोश रही.

जो कवच आरती को घेरे हुए था अभय रायचंद को उस तक पहुंचने से रोके हुआ था वो हैट चुका था नदी के उस पार खँडहर में तपस्यारत बैठे अभय की आँखे अचानक खुल गयी उसे मंजरी की मौजूदगी का एहसास हो गया था.

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अभय- मंजरी का पता चल गया वो उस दिशा में है जो घेरा मुझे उस तक पहुँचने से रोक रहा था वो हैट गया है. मंजरी मैं आ राहु हु तुम्हारा अभय एक बार फिर तुम्हारे पास आ रहा और इस बार हमारे बीच में कोई नहीं आ पाएगा तुम खुद भी नहीं.

इसके बाद अघोरी ने अपने गले में धागे से बंधा एक रुद्राक्ष खोलकर आरती की तरफ बढ़ाया.

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अघोरी- तुम भले hi ये सब नहीं मानती हो पर ये तो रख hi सकती हो. ये एक ग्यारह मुखी रुद्राक्षा है जो भगवान् शिव के रुद्रा अवतार पवनपुत्र हनुमान का प्रिया है. इस रुद्राक्षा को अगर जाग्रत कर लिया जाए तो कोई भी बुरा साया बहुत प्रेत इस रुद्राक्षा के धारक के करीब भी नहीं आ सकते ना उसे कोई नुक्सान पहुंचा सकते है. और ये एक जाग्रत रुद्राक्षा है. इसे तो रख सकती हो तुम या इसमें भी कोई दिक्कत है.

आरती ने वो रुद्राक्षा ले लिया. उस रुद्राक्षा को हाथ में लेते hi अभय रायचंद को आरती की मौजूदगी का एहसास होना फिर बंद हो गया. पर तब तक वो नदी के करीब पहुँच चुका था.

अभय- ये क्या हुआ मुझे फिर से मंजरी का एहसास होना बंद हो गया कोई फिर से मेरे और मंजरी के बीच आने की कोशिश कर रहा है पर अब और नहीं मंजरी इस नदी के उस पार है इतना तय है और अब अगर मुझे मंजरी को खोजना है तो नदी के उस पार जाना होगा.

दूसरी तरफ अघोरी और नीतू वहां से जाने hi वाले थे

अघोरी- इसे हमेशा अपने पास रखना ये तुम्हारी रक्षा करेगा. शिव शंकर तुम्हारा कल्याण करे. अब हमे चलना चाहिए.

नीतू- जी बाबा

इतना कहकर अघोरी और नीतू वहां से अपनी मंजिल की तरफ चल दिए पीछे छोड़ गए अकेली आरती को जिसे पता भी नहीं था की एक तूफ़ान उसकी तरफ भागता हुआ चला आ रहा है.

नदी के पास

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अभय रायचंद तेज रफ़्तार से बहती नदी के ऊपर दौड़ा चला आ रहा था, वो नदी के ऊपर ऐसे दौड़ रहा था जैसे एक चीता अपने शिकार के पीछे दौड़ता है. एक गाँव वाला जो शायद इतनी देर रात नदी के किनारे जंगल पानी के लिए आया था सामने का दृश्य देख उसके पसीने छूट गए उसका लोटा उसके हाथ से छूट गया सामने का दृश्य था hi इतना खौफनाक. काले लिबास में एक शिक्षा नदी के पानी के ऊपर दौड़ कर नदी पार कर रहा था जिसे देख किसी की भी आँखे फटी की फटी रह जाए भला कोई नदी के ऊपर इस तरह कैसे दौड़ सकता है.

चाँद लम्हो में hi अभय नदी पार करके उस गाँव वाले के सामने खड़ा था. गाँव वाला दर और आश्चर्या से अभय को देखे जा रहा था.

गाँव वाला- भय तू कोई जादूगर है के कउनु तमाशो दिखा रियो था के पर अभी तो यहां मेरे अलावा कोई है hi नहीं थारो तमाशो बेकार हो गया एक काम कर तू कल सुबह ये तमाशा दिखना मैं कई गाँव वालों को बुला लाऊंगा बड़ी कमाई होगी थोड़ा कमीशन माने भी दे दियो जो ताने ठीक लगे.

अभय- मंजरी कहा है.

गाँव वाला- मंजरी कौन मंजरी थी मेहरारू है के खो गयी है के अरे तू तो बहुत बड़ा जादूगर मालुम पड़े है ढूंढ ले अपने जादू से वो क्या करे है जादूगर लोग फूंक मार के.

अभय- मंजरी कहा है.

गाँव वाला- भाई मने नहीं पतों जे मंजरी कौन है और कहा रहती है.

अभय ने उसके सर को अपने हाथो मेल थम लिया और आँख बंद करके उसके दिमाग में भारी यादो को टटोलने लगा. वो उन यादो में अपने मतलब की किसी चीज़ को खोज रहा था. यादो में खोजते खोजते उसे उस दिमाग में भरी विक्रम शोभा की शादी के दृश्य दिख रहे थे शायद शादी वाली रात ये आदमी वही था. उन्ही दरश्यो के बीच जयमाला के दौरान स्टेज पर खड़े लोगो में एक चेहरे पर अभय की नजरे जाकर रुक गयी. आरती जो अपनी सहेलियों के साथ स्टेज पर hi खड़ी थी.

अभय- मंजरी आखिरकार मैंने तुम्हे ढूंढ hi लिया बेशक तुम्हारा चेहरा अब बदल गया है पर ना मैं तुम्हारे अंदर की मासूमियत और खूबसूरती को भूल सकता हु ना तुम्हारे दिए धोके को तुम कितना hi चेहरा बदलकर मेरे सामने आ जाओ पर मैं तुम्हे बंद आँखों से भी पहचान सकता हु.

गाँव वाला- भय ये मेरा सर इतने प्यार से क्यों पकडे है भाया और ये मन hi मन क्या बुदबुदा रहा है मैं थी लुगाई नहीं हु भाया तू कही उस टाइप का तो आदमी नहीं है न.

अभय- यहाँ अभी कुछ दिन पहले एक शादी हुई थी वो कहा हुई है.

गाँव वाला- अच्छा तो तू शादी में तमाशो दिखाने आया है वही मैं कहु तुझे यहां तो कभी देख्या नहीं. भाया यहाँ से नाक की सीध में 10 कम चला जा वहां मलखान सींग की हवेली है वही वो शादी का जलसा चल रहा है अभी तो 5 दिन और चलेगा.

अभय- शुक्रिया तुमने मेरी बहुत मदद करि.

गाँव वाला- तो भाया इस मदद के बदले में मुझे कुछ मिलेगा नहीं.

अभय- मिलेगा जरूर मिलेगा बहुत अच्छा इनाम मिलेगा.

अभय ने उस गांववाले का सर अपने हाथो में थम लिया और एक झटके के साथ उसका सर उसके धड़ से अलग कर दिया. उस गाँव वाले का सिरकटा धड़ वहां कुछ देर खड़ा फड़फड़ाता रहा और फिर बेजान होकर वही जमीं पर अभय के पैरो में गिर गया. अभय ने उसका सर वही नदी में फेक दिया और धड़ को भी एक लात मारकर नदी की तरफ उछाल दिया. गाँव वाले का सर और धड़ नदी के तेज बहाव के साथ बहते हुए दूर निकल गए. अभय अपनी मंजिल आरती उर्फ़ मंजरी की तरफ बाद चला.

देखना ये था की 300 साल के लम्बे इंतज़ार के बाद आरती जब उसके सामने होगी तो वो उसके साथ क्या करेगा क्या आरती का हश्र भी उस गाँव वाले जैसा होगा या अभय ने उसके लिए कुछ और hi सोच रखा है. और वो साया जो अब तक आरती का कवच बना हुआ था क्या वो उस बजरंगी रूकरक्षा के रेते आरती के करीब रह पाएगा. क्या होगा जब आरती की वजह से एक दुसरे के साथ उलझ के रह गई इन दो शक्तियों का आमना सामना होगा.

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हवेली में

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नेहा के दोनों मोबाइल पर एक साथ दो मश्ग आए एक मश्ग में नीतू ने उसे अघोरी के यहाँ जाने के बारे में बताया था तो दूसरा मश्ग मास्टर के मोबाइल पर था जिसमे उसने आज के पार्सल में मिली ड्रेस पहनकर कल वाली जगह उसी कॉटेज के पास आने को कहा था. धामु को भी लेन का वक़्त हो गया था और ये काम भी नेहा को hi अंजाम देना था.

नेहा: शबाना दी मई धामु को लेने जा रही हु आप तैयार हो जाओ आज रात के लिए.

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शबाना नेहा को बहुत कुछ कहना चाहती थी पर मुँह से एक भी शब्द निकलने की जैसे उसमे हिम्मत hi नहीं थी. अपने परिवार के पार्टी उसकी चिंता ने उसके होंठो को सील कर रख दिया था उसने अपने कमरे में लगे उस स्पाई सीएएम की तरफ देखा जिससे लालू शायद अब भी सब कुछ देख रहा होगा. लालू का ख्याल आते hi उसके ज़हन में आज सुबह ,,., ऐडा करते वक़्त लालू की बर्बरता याद आ गई और लालू ने जाते वक़्त क्या कहा था वो भी याद आ गया. लालू जाते वक़्त शबाना आज रात में एक बात बोल कर गया था.

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लालू (सुबह): सुन बहुत हो गया तेरा ये धामु के साथ वाला ड्रामा तुझे बच्चा चाहिए न तो मई दूंगा तुझे बच्चा पर जैसा मई कहु चुपचाप वैसा करती जा. सुन आज रात जब नेहा धामु को लेने जाने लगे तो उसे मन कर देना और कहना की अब धामु को यहाँ लेन की ज़रूरत नहीं किसी ने देख लिया तो कही वो सब कुछ बक न दे इसलिए अबसे उसे यहाँ लेन की जगह तू खुद उसके कमरे में चली जाएगी और तड़के सुबह सुबह सबसे नज़र बचाकर वापस अपने कमरे में आ जाएगी. और अगर नेहा तुझे धामु के कमरे तक छोड़ने जाए तो पहले तो उसे मन करना की तू चली जाएगी पर अगर न मने तो धामु के कमरे में दरवाज़े से उसे वापस भेज देना और कमरे के अंदर जाने बजाए मेरा इंतज़ार करना आगे क्या करना है वो मई तुझे रात में बताऊंगा.

लालू के कहे अनुसार शबाना ने नेहा को वही बात कही.

शबाना: नेहा रुक तू आज रात धामु को लेने मत जा.

नेहा: क्यों क्या हुआ कोई प्रॉब्लम है क्या.

शबाना: नहीं मई क्या कह रही थी की रोज़ रात को इस तरह तुम धामु को यहाँ लती हो और खुद साडी रात बहार कड़ी रहती हो ये बहुत रिस्की है इसकी बजाए मई खुद उसके रूम में चली जाती हु. इससे तुम साडी रात बहार नहीं रुकना पड़ेगा और धामु को लाना और छोड़ना भी नहीं पड़ेगा.

नेहा: बात तो आपकी सही है उसे यहाँ लौ या आप वह चली जाओ बात तो एक hi है. तो अगर आपको ठीक लगता है तो आप वह चली जाओ मई आपको वह छोड़ आती हु.

शबाना: नहीं रहने दे मई खुद चली जाउंगी मुझे धामु का कमरा पता है.

नेहा: अरे कल से आप खुद चली जाना आज मई चलती हु साथ छोड़कर वापस आ जाउंगी.

नेहा भी शबाना के साथ धामु के कमरे की तरफ चल दी. नेहा को अंदाज़ा नहीं था की उनके हर मूवमेंट पर बारीक नज़र राखी जा रही है हलाकि शबाना तो जानती थी की उन्हें वाच किया जा रहा होगा. नेहा चुपचाप दबे पाँव धामु के कमरे तक पहुंच गए.

नेहा: लो शबाना दी आ गए हम अपनी मंज़िल पर अब जाओ अंदर और मज़े करो.

शबाना ने नेहा को गुस्से भरी नज़रो से देखा.

नेहा: सॉरी सॉरी मज़ाक कर रही थी आप तो गुस्सा हो गई चलिए आप जाइये अनादर मई भी चलती हु अब तो आप सुबह hi आओगी फिर भी अगर कोई दिक्कत हो तो मुझे कॉल कर देना मई दो मिनट में आप के पास पहुंच जाउंगी.

शबाना: हम्म अब तू जा.

नेहा: अरे जा रही हु न बाबा बड़ी जल्दी है आपको मुझे भेजने की. चलो सुबह मिलते है.

इतना कहकर नेहा वह से वापस चल दी. शबाना बड़ी क़तर नज़रो से नेहा को वापस जाते देख रही थी और एक घुटन भरी आवाज़ में नेहा को रोक लेना चाहती थी. पर उसकी आवाज़ उसके गले तक आकर बहार निकलने की हिम्मत न कर पाई. शबाना की दिल की धड़कने तेज़ और तेज़ हो गई उसका दिल एक अनजान खौफ्फ़ से भर उठा. शायद फिर आज रात लालू उसे जंगली तरीके से उसे प्रताड़ित करेगा उसका बंग करेगा अपना विसरा और मूट उसके ऊपर निकलेगा उसे वो सब पीने को मजबूर करेगा. वो अपलक नेहा को अपने से दूर जाता देखती रही जब तक वो उसकी नज़रो से ओझल नहीं गई. अब वो चुपचाप बिना किसी सहारे के वह कॉरिडोर में धामु में कमरे के बहार दरी सेहमी कड़ी थी. और अचानक अगले hi पल पीछे से किसीने उसके कंधे पर दस्तक दी और जब उसने पीछे पलट कर देखा तो अस एक्सपेक्टेड वो लालू था जो नेहा के जाते hi वह आ गया.

लालू: शाबाश मेरी रुंडी क्या बात है लगता है मेरा लुंड उसका गदा सफ़ेद माल और मेरा पीला पीला पेशाब तुझे कुछ ज्यादा पसंद आ गया जो करेक्ट टाइम पर यहाँ आ गई. पर आज तू वो कल वाली छोटी वाली निघ्त्य नहीं पहने है ये लुम्बा गाउन पेहेन कर आई है.

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शबाना डरते डरते : वो मई कमरे के बहार वो निघ्त्य पेहेन कर कैसे आ सकती थी कोई देख लेता तो पता नहीं क्या सोचता.

लालू: क्या सोचता यही सोचता की तू शहर की एक हाई क्लास प्रोस्टीटूटे है जो रात में अपने धंदे पर निकली है. चल कोई बात नहीं तो छोटी सी निघ्त्य पहने या लुम्बा सा गाउन इन थे एन्ड तो तुझे बिस्तर पर मेरे नीचे नंगा hi होना है.

बेचारी शबाना लालू की ये ज़िल्लत भरी बाते सुनने को मज़बूर थी उसके पास कहने को कुछ नहीं था इसलिए उसने बिना कुछ बोले चुपचाप अपनी नज़रे नीचे झुका ली.

लालू: बोल करेगी न बिस्तर गरम बोल.

शबाना अब भी चुपचाप सर झुकाए कड़ी थी. पर जवाब न प् कर लालू का गुस्सा फूट पड़ा और उसने हाथ बढ़ाकर शबाना के दोनों गालो को अपनी हथेली में जकड लिया.

लालू: जब मई कोई सवाल पूछो तो दो सेक् के अंदर मुझे उसका जवाब मिल जाना चाहिए. समझ में आ रही है की नहीं सवाल रिपीट करने की मुझे आदत नहीं है. और अगर मुझे सवाल रिपीट करना पड़ा तो वो तेरी और तेरे खानदान तेरी माँ बाप तेरी बहनो की सेहत के लिए अच्छा नहीं होगा. समझ आया.

शबाना हां में सर हिलाते हुए.

लालू: गुड, तेरे दो छेड़ो का मज़ा तो ले चूका हु कल रात तेरी गांड का मज़ा लिया आज सुबह तेरे गरम गरम मुँह का. आज रात तेरे तीसरे और सबसे मज़ेदार छेड़ का स्वाद भी चख कर देख लू.

इतना कह कर लालू ने अपना हाथ गाउन के ऊपर से hi सीधा शबाना की छूट पर रख दिया और शबाना की छूट की फैंको को अपने मुठी में कास लिया. शबाना ने पीछे हटने की कोशिश की पर शबाना के पीछे हटने के साथ लालू भी आगे बाद गया. लालू वही कॉरिडोर में खड़ा गाउन के ऊपर से hi शबाना की छूट को सहलाने लगा. शबाना समझ गई की तीसरे छेड़ से लालू का इशारा उसकी छूट की तरफ है मतलब आज वो उसकी छूट में अपना लुंड डालने वाला है. ये ख्याल hi उसके एक्ससिटेमेंट और दर की मिली जुली फीलिंग वाला था एक तरफ जीवन में पहली बार कोई लुंड उसकी कुंवारी छूट में धकिल होने के ख्याल का एक्ससिटेमेंट था तो दूसरी तरफ ये सब उसकी मर्ज़ी के खिलाफ होगा उसे मेंटली और फिसयकाली टॉर्चर करके उसका बंग करके इस बात का खौफ्फ़ भी था.

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शबाना की छूट को सहलाते सहलाते लालू ने उसकी कमर में हाथ दाल कर उसे अपनी और खींचकर अपने सीने से लगा लिया और अपना हाथ उसकी छूट से हटाकर पीछे उसके उभरे हुए नितम्ब पर लेजाकर गाउन के ऊपर से hi सहलाकर उसकी गदराई गांड को महसूस करने लगा.

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लालू: बोल मेरा लुंड अपने आगे वाले चीड़ में लेगी.

शबाना की धड़कने तेज़ तेज़ चल रही थी और वो बार बार अपना थूक गले के अंदर जातक रही थी.

लालू: मैंने अभी तुझे बताया की मेरा सवाल दोहराना तेरे पुरे खानदान के लिए बहुत भरी पड़ेगा फिर क्यों मुझे गुस्सा दिला रही है क्यों मेरे साबरा का इम्तेहान ले रही है. मेरा लुंड अपनी छूट में लेगी बोल.

शबाना ने डरते हुए हां में सर हिला दिया.

लालू: शाबाश ये हुई न बात ऐसे hi अच्छी रुंडी बन कर रह तो क्यों मई तुझे इतना टॉर्चर करू मुझे कोई शौक थोड़ी न है तुझे टॉर्चर करने का. सच कह रहा हु तुझे इस तरह टॉर्चर करते हुए मुझे भी बड़ा बुरा लगता है.

लालू शबाना से बात करते जा रहा था और पीछे अपने हाथ से शबाना की गांड का ज़र्रा ज़र्रा दबा दबा कर महसूस कर रहा था. शबाना की गांड सहलाते सहलाते लालू ने अपनी उंगलिया शबाना के चूतड़ों की बीच की दरार में घुसेड़ दी और गाउन के ऊपर से शबाना की गांड के छेड़ को अपनी उंगलियों से सहलाने लगा. शबाना के लिए तो अब खड़े रहना भी मुश्किल हो रहा था.

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लालू: तुझे बच्चा चाहिए न बच्चे की चाहत में hi तूने ये सब करा न चल तू टेंशन मत ले तुझे बच्चा देने की ज़िम्मेदारी मेरी. तू मेरी साड़ी बात मान मुझे अच्छे से खुश रख और मई वादा करता हु की यहाँ से जाते वक़्त तेरे कोख में बच्चा होगा. माँ बनना है न तुझे.

शबाना ने फिर हां में सर हिला दिया.

लालू: तो मेरी साड़ी बाते मानेगी न मुझे हर तरह से खुश करेगी न.

शबाना ने फिर हां में सर हिला दिया.

लालू: वैरी गुड इसी तरह अगर तू मेरी साड़ी बाते माने तो मई क्यों तुझे टॉर्चर करूँगा. मई इतना भी बुरा नहीं हु बस क्या करू दिल के हरहो मजबूर हु क्या करू दिल आ गया था तुझपर. जबसे पहले दिन तुझे देखा था रात रात भर सो नहीं पता था, किसी भी कीमत पर सोना चाहता था तेरे साथ. पर एक बात तेरी बहुत बुरी है तू बोलती बहुत कम है. शर्मा रही है मुझसे या दर रही है बोल.

शबाना: जी नहीं ऐसा कुछ नहीं है ऐसी कोई बात नहीं है.

लालू: कल रात जब मई तेरे कमरे में गया था तब तो बहुत चिल्ला रही थी क्या जंगली शेरनी की तरह झपटी थी मुझ पर और कितनी साडी धमकिया भी दी थी. खैर छोड़ रात गई बात गई मई तेरा वो झापड़ भूल जाता हु कल रात का तू भी भूल जा. ठीक है न.

शबाना ने फिर हां में सर हिला दिया.

लालू: अरे मई भी कितना बुद्धू हु मई यहाँ खुले में तुझे अपनी बहो में भर कर तेरी गांड में ऊँगली कर रहा हु तुझे यहाँ खुले में ये सब करवाते हुए दर लग रहा होगा की कही कोई देख न ले. यही बात है न बोल बोल बोल न यही बात है न.

शबाना बेचारी क्या जवाब देती उसने एक बार फिर चुपचाप हां में सर हिला दिया.

लालू: ी कनेव आईटी (लालू ने शबाना को अपने से अलग कर दिया और खुद दो कदम पीछे हैट गया) चल कोई नहीं यहाँ तुझे दर लग रहा है तो चल किसी बंद कमरे में चलते है. तेरे कमरे में तो तेरी छिनार सहेली नेहा होगी अगर उसके सामने ये सब करा तो कही तुझसे पहले वो चिन्नार hi मेरा लुंड अपने अंदर न लेले उस छोटे से बच्चे से कहा उसकी आग ठंडी हुई होगी. तेरे कमरे में नहीं तो इस मंदबुद्धि के कमरे में चले बोल देंगे तेरी छूट में अपना लुंड दाल कर अंदर से दवाई लगा रहा हु वो मंदबुद्धि यकीन भी कर लेगा. पर नहीं उसका क्या भरोसा कहने लगे अपनी बीवी को मई खुद दवाई लगाऊंगा यहाँ रहने देते है. सबसे सेफ साइड मेरे कमरे में चल वह कोई हमे डिस्टर्ब नहीं करेगा.

शबाना: पर वह तो आपके वो तीनो दोस्त भी रुके है.

लालू: उनकी तू चिंता मत कर वो मई देख लूंगा. चल तू मेरे पीछे पीछे मेरे कमरे में चली आ. आज रात अपने कमरे में अपने बिस्तर पर तेरी छूट का उद्घाटन करूँगा.

लालू अपने कमरे की तरफ चल दिया और शबाना मजबूर सी चुपचाप उसके पीछे पीछे चल दी. जल्द hi वो लालू के कमरे के दरवाज़े पर पहुंच गई. लालू दरवाज़ा खोल कर अंदर दाखिल हो गया पर शबाना अब भी बहार कड़ी थी. उसके ज़हन में तरह तरह विचार आ जा रहे थे.

शबाना मन में: पता नहीं आज रात इस दरवाज़े के अंदर उसके साथ क्या क्या होगा. लालू जो आज बड़ा अलग बर्ताव कर रहा है क्या ये सब बस एक दिखावा है या लालू सच में थोड़ा नरम पद गया है. और उसके तीनो दोस्त वो कहा है क्या वो भी कमरे के अंदर है क्या आज रात वो सब मिलकर मेरे साथ गलत हरकत करेंगे नहीं नहीं मई नहीं होने दूँगी. या ,.' सुबह ,,., के वक़्त तो आपने मेरा साथ नहीं दिया था पर आज मुझे बचा लो. या ,.' रेहम कर.

पता नहीं आज रात इस बंद दरवाज़े के पीछे उसके साथ क्या होने वाला था. शबाना की धड़कने तो तेज़ तेज़ चल hi रही थी पर साथ अपने वोट्स से शबाना को स्टोरी की मोस्ट पॉपुलर फीमेल चैरेक्टर बनाने वाले रीडर्स का भी दिल बेचैन और धड़कने तेज़ थी की पता नहीं आज रात लालू शबाना के साथ क्या करने वाला है. शबाना के दो छेड़ो (गांड और मुँह) के उद्घाटन में उसकी हालत ख़राब कर देने वाला लालू आज रात उसके असली छेड़ छूट का उद्घाटन किस तरह करेगा क्या आज रात भी एक बार फिर उसकी हालत ख़राब कर देगा या आज रात के लिए शबाना की चुदाई के लिए उसके कुछ अलग प्लान है. और लालू के बाकि तीनो दोस्त वो इन सबमे क्या भूमिका ऐडा करने वाले थे क्या आज भी बस नाईट वॉचमैन hi बनकर खेलेंगे या आज खुद भी फ्रंट में आकर शबाना के जिस्म की उन घातक बल्ला का सामना करेंगे. इन सरे सवालो का जवाब उस दरवाज़े के पीछे था.

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लालू: अरे बहार क्यों कड़ी हो अंदर आओ आओ न आ जाओ.
 
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मन में हज़ार तरह के विचार लिए शबाना उस शिक्षा के दरवाज़े के बहार कड़ी थी जिसने पिछले चौबीस घंटो में उसकी ज़िन्दगी को नरक से बदतर बना दिया था. शबाना का दिलो दिनाग इस वक़्त हज़ारो तरह विचारो से भरा था इसके दोस्त भी अंदर होंगे क्या, क्या आज रात वो सब मिलकर मेरा गैंगबैंग करेंगे, या हो सकता है सच में अब लालू का गुस्सा ठण्ड हो गया हो और वो बस मेरे साथ सेक्स करना चाहता हो वो भी अकेले, क्या सच में वो मुझे आज प्रेग्नेंट कर देगा, पर क्या लालू जैसे आदमी के बच्चे की माँ बनना ठीक होगा कही उसका बच्चा भी उसके जैसा निकला, पर बच्चा तो बच्चा होता है आखिरकार उसे पालूंगी तो मई hi न, पर आज सुबह तक मुझसे अपनी पेशाब चटवाने वाला लालू अचानक से इतना पोलाइट कैसे हो गया या इसके पीछे भी उसका कोई खतरनाक ट्रैप है.

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लालू: आज पूरी रात बहार hi कड़ी रहने का इरादा है क्या वैसे अगर बहार खुले में hi छोड़ना है तो मुझे उसमे भी कोई प्रॉब्लम नहीं है पर किसी ने देख लिया तो तेरी hi बदनामी होगी.

लालू की बात से शबाना अपने सेंसेस में वापस आई.

लालू: सोच विचार ख़तम हो गया तो अंदर आने की ज़ेहमत उठाएंगी.

शबाना ने धड़कते दिल के साथ अपने कदम अंदर की तरफ बड़ा दिए और कमरे के अंदर दाखिल हो गई. कमरे के अंदर आते hi उसने चारो तरफ नज़र घुमाई, कमरे में उसके और लालू के सिवा कोई नहीं था. उसने मन में थोड़ी रहत की सांस ली. शबाना के कमरे में आने के बाद लालू ने उसके पीछे कमरे का दरवाज़ा बंद करके उसकी सिटकनी लगा दी और वापस शबाना के सामने आकर खड़ा हो गया.

लालू: देख ले यहाँ तेरे मेरे अलावा और कोई नहीं है मेरे वो तीनो दोस्त भी नहीं जिनका तुझे दर था. अब तो यकीन हुआ मेरी बात पर अगर अब भी यकीन न हो तो जा बाथरूम में जाकर चेक कर ले की कही वह तो नहीं है या बिस्तर के नीचे चेक कर ले या एक काम कर अलमारी खोलकर देख ले कही वह तो छुपकर नहीं बैठे है हरामखोर.

लालू खुद पहले शबाना को बाथरूम में ले गया वह कोई नहीं था फिर अलमारी खोलकर दिखाया वह भी सिवाय कपड़ो के और कुछ नहीं था उसके बाद खुद शबाना को झुककर बिस्तर के नीचे दिखाया. सच में कमरे लालू और शबाना के सिवा कोई नहीं था. शबाना भी हैरान थी उसने तो क्या क्या सोच लिया था की पता नहीं आज उसके साथ क्या क्या होने वाला है पर ,.' ने सच में उस पर करम कर दिया था लालू ने सच में अपने दोस्तों को वह से हटा दिया था.

लालू: अब तो यकीन है न मेरी जान की मई इतना भी बुरा नहीं हु, चल आज रात तुझे रुंडी नहीं बोलूंगा आज रात तू मेरी जानेमन. पहली चुदाई हर औरत के लिए उसका यादगार लम्हा होता है जिसके लिए उसने हज़ारो सपने सजाए होते है और यकीन मान आज तेरी पहली चुदाई को तेरे लिए इतना यादगार बना दूंगा की तू पूरी ज़िन्दगी आज की चुदाई को भुला नहीं पाएगी.

लालू की बात सुनकर शबाना ने एक बार फिर दर और खौफ्फ़ से लालू को देखा की इस बात से लालू का क्या मतलब था जब गांड मारी तो बालो से घसीट घसीट कर उसे टॉर्चर करा था, जब उसका मुँह छोड़ा था तो ज़मीन से अपना थूक और पेशाब छतवई थी अब चुदाई को किस तरह यादगार बनाने वाला है. शबाना के चेहरे पर दर के भाव देख लालू उसके मन के हालत समझ गया.

लालू: अरे अरे दर मत मई किसी गलत सेंस में नहीं बोल रहा सच में इस पहली चुदाई को तेरे लिए यादगार बनाना चाहता हु. पर ये तभी होगा जब तू भी मेरा साथ दे. सच कहता हु जैसा मई कहु वैसा करती जा तुझे इतना मज़ा आएगा की तू सोच भी नहीं सकती आज रात के लिए बहुत सोच कर रखा है मैंने. बोल जैसा मई कहूंगा वैसा करेगी न.

शबाना ने हां में सर हिला दिया.

लालू ने आगे बाद कर शबाना को एक बार फिर अपनी बहो में भर लिया और बड़े प्यार से उसके माथे को चूम लिया.

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लालू: सच में बड़ी प्यारी है तू बेवजह मुझे गुस्सा दिला कर खुद को इतना टॉर्चर करवाया.

लालू का ये बदला हुआ रूप शबाना को भी बड़ा आश्चर्यचकित कर रहा था उसे समझ नहीं आ रहा था की जिस लालू ने उसे बालो घसीट कर उसकी गांड मारी उसे अपनी पेशाब चाटने को मजबूर करा वो लालू असली लालू था या जो लालू उसके माथे को प्यार से चूम रहा है वो असली लालू है.

लालू: खैर अब तो हमारे बीच सब सही हो गया है. मैंने आज की रात को यादगार बनाने के लिए कुछ इंतज़ाम किया है जिसमे तुझे मेरा साथ देना होगा.

लालू ने अपनी जेब से एक छोटी सी डिब्बी निकली और उसे खोलकर शबाना के हाथ में रख दी. उस डिब्बी में दो गोली थी एक नीली और एक गुलाबी.

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शबाना: ये क्या है. किस चीज़ की गोली है.

लालू: ये केवल गोली नहीं आज रात के हमारे मज़े की चाबी है. नहीं समझी ये वही गोली है जो तुझे दंगल वाले दिन उस मंदबुद्धि के हाथो दिलवाई थी और जिस वजह से तेरी कामोत्तेजना बहुत बाद गई थी. बस उस दिन साथ में नशे की गोली देने की वजह से इसकी डोज़ बहुत लौ राखी थी पर आज ये हाई डोज़ की गोली है. ये गुलाबी गोली औरत के लिए जो उसकी कामिच्छा को कई गुना बड़ा देती है और ये नीली गोली मर्द के लिए जो उसके लुंड के तनाव की समय सीमा को कई गुना बड़ा देती है एक डेड घण्टे तक मर्द का लोढ़ा नीचे बैठने का नाम नहीं लेता और ये दोनों गोलिया मिलकर हमारी पहली चुदाई को यादगार बना देंगी.

लालू ने डिब्बी से वो नीली गोली उठाई और बिस्तर के सिरहाने रखा पानी का गिलास लेकर वो गोली पानी के साथ जातक ली. और फिर वो आधा भरा पानी का गिलास शबाना की तरफ बड़ा दिया.

लालू: ले मैंने तो अपने मज़े की चाबी जातक ली अब तेरी बारी.

पर शबाना अब भी थोड़ी दुविधा में थी की क्या करे क्या न करे.

लालू: क्या सोच रही है की कही मई तुझे कोई गलत गोली तो नहीं खिला रहा ये सोच रही है. ज़हर तो दूंगा नहीं तुझे मार कर मुझे क्या मिल जाएगा और ांशे की गोली खिलाकर तेरे साथ कुछ करनेकी मुझे ज़रूरत नहीं क्युकी ये तू भी जानती है की अगर मई चहु तो तेरे होशो हवास में भी तेरे साथ तेरी मर्ज़ी के बिना भी कुछ भी कर सकता हु और ये तूने कल रात hi देख लिया था तो तुझे नशे की गोली क्यों खिलाऊंगा. वो तो स्टोरी के कुछ दरियादिल रीडर्स को तेरी बर्बाद हालत पर कुछ ज्यादा HI तरस आ गया और उन्होंने राइटर से रिक्वेस्ट करि की तुझे और ज़लील न करा जाए और अपना राइटर भी पिघल गया और अपुन का स्टाइल HI बदल कर रख डाला. पर अगर मेरा ये बदला हुआ रूप समझ नहीं आ रहा है तो वापस कल रात वाला लालू भी बन सकता हु.

लालू की ये धमकी काम कर गई और शबाना ने बिना देर किये लालू के हाथ से वो गिलास लेकर उस गुलाबी गोली को अपने हलक में उतर लिया.

लालू: शाबाश ये हुई न बात जब आखिर में तू करती वही है जो मई कहता हु तो शुरू में खली पीली मेरा दिमाग क्यों सटकती है. देख एक बात अपने भेजे में घुसेड़ ले की अगर मेरे दिमाग की सटक गई न फिर न मई रीडर की देखूंगा न राइटर की सुनुँगा लालू की के बाप का नौकर नहीं है वो वही करेगा जो वो चाहता है. समझ रही है की नहीं.

शबाना ने हां में सर हिला दिया.

लालू: अब देख ये जादू की गोली कैसे आधे घंटे में अपना असर दिखाना चालू करती है उसके बाद मज़े hi मज़े है. पर इस गोली के अलावा भी मैंने आज रात को यादगार बनाने के लिए काफी कुछ कर रखा है.

लालू ालमृ के पास गया और अलमारी से एक पैकेट निकल कर उसे लेकर शबाना के हाथ में रख दिया.

शबाना: अब इसमें क्या है.

लालू: इसमें तेरे आज रात की पेहेन्ने की ड्रेस है तुझे आज यही ड्रेस पहनी है और जो भी जितना भी इसमें है बस उतना hi पेहेनना है न उससे कुछ ज्यादा न उससे कुछ कम. चल अब पैकेट खोल कर देख अपनी ड्रेस और बता ये ड्रेस तुझे कैसी लगी.

शबाना के मन में कुछ पल में hi ड्रेस के अनेको विकल्प आ गए शायद इसमें एक सेक्सी सी निघ्त्य होगी या हो सकता है सेक्सी ब्रा पंतय, या मई बे शार्ट स्कर्ट और टॉप कुछ भी हो सकता है इसमें. पर जब शबाना ने उस पैकेट से वो ड्रेस निकला तो उसे यकीन नहीं हुआ की लालू उसे ये पेहेन्ने को कह रहा है. वो एक बुरखा था और साथ में एक हिजाब जो वो लगभग रोज़ पहनती आ रही है और लालू ने भी उसे वही पेहेन्ने को दिया इसमें क्या नया है. शबाना ने पैकेट के अंदर दुबारा देखा उसमे बुर्के àुर हिजाब के अलावा और कुछ नहीं था.

शबाना: ये तो बुरका और हिजाब है मुझे ये बुरका इस गाउन के ऊपर पेहेनना है.

लालू: तूने मेरी बात ध्यान से सुनी नहीं तुझे इस पैकेट में जो है वही और सिर्फ वही पेहेनना है.

शबाना: पर इसमें तो केवल ये बुरका है इसे तो कपड़ो के ऊपर से पेहेनते है.

लालू: पेहेनते होंगे पर फिलहाल तुझे केवल यही पेहेनना है और कपड़ो के ऊपर से नहीं बल्कि केवल यही पेहेनना है इसके अंदर न ये तेरा गाउन हो न इस गाउन के नीचे पहने हुए तेरे उन्देर्गर्मेन्ट्स. तेर जिस्म पर इस बुर्के के अलावा और कुछ नहीं होना चाहिए. अब जा और बाथरूम इसे पेहेन कर बहार आ वह तेरे सजने सवारने का सारा सामन है कंघा तेल शीशा पाउडर सेंत सब कुछ है वह अच्छे से नाहा धो कर ये बुरका पेहेन कर बहार आ जा. और जो बोलै है वही पेहेन कर आना अपनी तरफ से दिमाग चला कर मेरा मूड ख़राब करके मुझे गुस्सा दिलाने की गलती भूल से भी मत करना. तब तक मई भी आज रात के लिए खुद को तैयार कर लेता हु. यकीन मान जो मज़ा तुझे आज मिलेगा वो तू ज़िन्दगी भर नहीं भूल पाएगी.

शबाना वो बुरका और हिजाब लेकर बाथरूम के अंदर चली गई लालू ने भी आज रात के विशेष रूप से चुने अपने पहनने वाले कपडे निकल लिए. बहार लालू आज रात के लिए कुछ स्पेशल तरीके से खुद को तैयार कर रहा था वही अंदर शबाना भी लालू के कहे अनुसार hi तैयार हो रही थी क्युकी बड़ी मुश्किल से तो लालू के व्हवहार में कुछ नरमी आई है वापस उसे गुस्सा दिलाकर वो उस टॉर्चर को डरा सहना नहीं चाहती थी. लालू के कहे मुताबिक शबाना ने अपने जिस्म का आखिरी कपडा तक उतर दिया वो गाउन और उसके नीचे पहनी हुई अपनी ब्रा और पंतय भी. और अब शबाना आधी रात में उस शिक्षा के कमरे के बाथरूम में अकेली नंगी कड़ी थी जिसने एक रात पहले hi बर्बर तरीके से उसका बंग करा था. शबाना ने वही लगा शावर ों कर दिया और उसके नीचे खड़े होकर खुद को अच्छे से साफ़ करने लगी. बहार तैयार हो रहे लालू को भी अंदर पानी चलने की आवाज़ बहार सुनाई दे रही थी. बड़ी hi अजीब स्थिति थी शबाना के लिए जिस शिक्षा ने कल रात उसे बाँध कर उसका बंग करा उसके अश्लील वीडियो बनाए आज उसी से छुड़वाने के लिए वो नाहा धो कर खुद को उसके मुताबिक hi तैयार कर रही थी.

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पानी शबाना के नंगे जिस्म पर उसकी गर्मी को ठंडा करने की बजाए उसके अंदर की आग को और भड़का रहा था पर असलियत में ये असर उस पानी का नहीं क्यों नहाती तो शबाना पहले भी थी और इसी तरह hi बल्कि असलियत ये तो वो जादू की गुलाबी गोली थी जो हर गुज़रते पल के साथ अपना असर दिखती जा रही थी. अपनी छूट छुड़वाने का ख्याल अब धीमे शाबाना के ज़हन उसके दिलो दिमाग पर हावी होता जा रहा था भले hi ये चुदाई उसके रेपिस्ट के हाथो hi क्यों न होने वाली थी. अच्छी तरह से नहाने के बाद शबाना ने वही तंगी टॉवल से खुद को साफ़ किया, उस टॉवल से आ रही मरदाना सुगंध शबाना की काम उत्तेजना को और भी ज्यादा बड़ा रही थी. शबाना दुबारा वो टॉर्चर नहीं झेलना चाहती थी इसलिए लालू के कहे मुताबिक उसने खुशबूदार पाउडर को अपने जिस्म के हर हिस्से पर छिड़का वही पर शायद उसीके राखी गई सुर्ख लाल लिपस्टिक को अपने होंठो पर लगाया.

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फिर वो बुरका अपने हाथो में थम लिया. बचपन से बुरका पहनती आ रही शबाना को आज इस बुर्के में कुछ अलग hi बात नज़र आ रही थी. जो बुरका अब तक उसके अब्बू और उसका शौहर केवल उसकी ख़ूबसूरती को दुनिया जहाँ से छुपा कर कैद करने के लिए इस्तेमाल करते थे उसी बुर्के को किस तरह लालू उसके लिए यादगार बनाने वाला था यही ख्याल उसके दिलो दिमाग में चल रहा था. और दिमाग का एक हिस्सा अभी भी उसे इन सब पर यकीन करने से रोक रहा था की लालू जैसा इंसान इस कदर बदल जाए ऐसा कैसे हो सकता है. पर फिलहाल लालू पर यकीन करने के अलावा उसके पास कोई चारा भी नहीं था. लालू पर यकीन करते हुए शबाना ने वो बुरका अपने नंगे जिस्म के ऊपर पेहेन लिया. अब तक शबाना ने सैकड़ो बार बुरका पहना था पर जिस तरह आज उसने ये बुरका पहना था वैसा आज तक कभी नहीं पहना क्युकी हमेशा बुरका उसके जिस्म के उन कपड़ो को ढकने का काम करता था जो पहले से उसने अपने जिस्म पर पहने थे पर आज ये बुरका hi उसके जिस्म के नंगेपन को ढकने का एकमात्र जरिया था क्युकी इस बुर्के के नीचे उसका बदन पूरी तरह नंगा था.

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बुरका पेहेन्ने के बाद शबाना ने उस हिजाब से अपने बेपनाह खूबसूरत चेहरे को धक् लिया. उस काळा हिजाब के बीच से शबाना की आँखे ऐसे चमक रही थी जैसे बारिश के मौसम में घने काले बदलो के बीच से चाँद अपनी चमक बिखेरता हुआ नज़र आ रहा हो.

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उन गहरी आँखों को देख हर पड़ने वाले और इस लिखने वाले के दिल से यही दुआ यही प्रार्थना निकल रही थी की उपरवाले तू खुदा हो या भगवान् पर आज इन आँखों से दर्द और तड़प से भरे आंसुओ की एक बूँद भी न निकलने देना. एक रात के लिए hi सही पर बहार बैठे उस हैवान को एक रात के लिए इंसान बना दे.

पर क्या वाकई ये दुआ कबूल होने वाली थी या लालू का अपना कोई अलग hi प्रोग्राम था. क्या वाकई लालू शबाना को उसके जीवन की पहली यादगार चुदाई देने वाला था या पिछली रात की तरह फिर बर्बरता की नै इबारत लिखने वाला था. और अब तक उसके हर काम में उसके साथ रहने वाले देव कुंदन प्रताप कहा थे क्या सच में लालू में उन्हें कही और भेज दिया था या शबाना के बाथरूम में जाने के बाद वो तीनो भी कमरे में आ चुके थे और तैयार थे अपने लीडर लालू के साथ मिलकर शबाना का गैंग बंग करने के लिए. और अगर वो तीनो बाथरूम के बहार नहीं थे तो क्या खास तैयारी की थी लालू ने आज रात को यादगार बनाने के लिए. ये सवाल शबाना के ज़हन में भी थे की क्या उसके बाथरूम में आने के बाद लालू ने अपने दोस्तों को बुला लिया होगा या नहीं. इन सवालो का जवाब तो उस बाथरूम के बहार था जहा पता नहीं कैसी रात शबाना का इंतज़ार कर रही थी.

धड़कते दिल के साथ शबाना ने बाथरूम का दरवाज़ा खोला और बहार का दृश्य देख कर हिजाब में से झक्ति उसकी आँखे फटी की फटी रह गई.

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धड़कते दिल के साथ शबाना बाथरूम से बहार आई और बहार का दृश्य देख शबाना की आँखे फटी की फटी रह गई. क्युकी सामने लालू ने जिस रूप में खुद को तैयार करा था वो देखने लायक था. कमर के नीचे वो ***** पूजा पाठ में आदमियों द्वारा पहनी जाने वाली एक भगवा धोती पहने था और कमर के ऊपर उसका चौड़ा सीना एकदम खुला था. अगर कुछ था तो बस एक रुद्राक्ष की माला जो उसके गले में पड़ी थी. और माथे पर वो एक कुमकुम का टीका लगाए था, उसकी ये वेशभूषा उसके ***** होने का प्रमाण दे रही थी.

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उसकी ये वेशभूषा देख शबाना को अब कुछ कुछ उसका इरादा समझ में आ रहा था की वो आज की रात को सिर्फ चुदाई तक सीमित नहीं रखना चाहता था बल्कि इस चुदाई को अन्तर रिलिजन सेक्स का रूप देना चाहता था. जहा एक भगवा वस्त्रो पहने ***** मर्द एक बुर्कानशीं '. औरत को अपनी खालिस ***** लुंड से छोड़कर उसे अपने बच्चे की माँ बना देता है. वो गोली वैसे hi शबाना की कामोत्तेजना को बड़ा रही थी और ऊपर से जिस तरह कामुक माहौल लालू ने बनाया था वो किसी को भी उत्तेजित होने पर मजबूर करदे.

लालू बड़े आहिस्ता आहिस्ता शबाना की तरफ बाद रहा था और शबाना अपने बुर्के को अपनी उंगलियों से उमेठती थोड़ी नर्वस थोड़ी उत्तेजित और थोड़ी दरी हुई लालू को अपने करीब और करीब आते हुए देख रही थी. लालू शबाना के जिस्म के एकदम करीब आ चूका था इतना करीब की शबाना के जिस्म का सबसे आकर्षक अंग उसके स्तन पर उभरे चूचक उसकी ऊपर नीचे होती साँसों की गति के साथ लालू की खुली छाती बार बार टच हो रहे थे जैसे उसके सीने पर बार बार दस्तक देकर उससे रिक्वेस्ट कर रहे हो की वो हाथ बढ़ाकर उन उभारो में अपने हाथो में भर ले. शबाना की आँखे अपलक ऊपर उठी हुई लालू के चेहरे को निहार रही थी और लालू भी हिजाब के अंदर से झक्ति शबाना की आँखों से अपनी नज़रे नहीं हटा प् रहा था. एक अजीब सी ख़ामोशी छै हुई थी माहौल में, एक बंग विक्टिम और उसका रेपिस्ट कामोत्तेजना के नशे में नशे में डूबे एक दुसरे की आँखों में खोए चुपचाप उस बंद कमरे में खड़े हुए थे. धीमे धीमे लालू अपना चेहरा हिजाब में ढके शबाना के चेहरे के करीब ले गया और पारदर्शी हिजाब में से झाकते शबाना के रसीले होंठो पर अपने खुरदुरे होंठ रख दिए और शबाना को अपनी बहो में जकड कर हिजाब के ऊपर से hi उसके होंठो का रसपान करने लगा. कामोत्तेजना में जल रही शबाना ने अपने दोनों हाथ की मुठी भींच ली, अंदर hi अंदर वो भी लालू को अपनी बहो में जकड लेना चाहती थी पर उसका ज़मीर उसे अपने रेपिस्ट के सामने खुद को समर्पित करने की इज़ाज़त नहीं दे रहा था.

लालू हिजाब के ऊपर से hi शबाना के होंठो को अपने होंठो में जकड़े हुए था और चूस चूस कर हिजाब को आगे से गीला कर दिया उस पर शबाना की लिपस्टिक का लाल निशाँ भी नज़र आने लगा था. आगे से लालू शबाना के होंठो का रसपान कर रहा था वही पीछे उसके हाथ शबाना के पुरे जिस्म का ऊपर से नीचे तक नाप ले रहे थे. शबाना की पीठ पर हाथ फिरते हुए लालू ने महसूस कर लिया की इस बुर्के के नीचे ब्रा नहीं है. वह से अपने दोनों हाथ शबाना के भरी भरकम नितम्ब पर लेकर दोनों हाथो से उनके सुडौल अकार को महसूस करने लगा.

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नितम्ब पर हाथ फिरते हुए लालू ने ये भी कन्फर्म कर लिया की शबाना यहाँ भी नीचे कुछ नहीं पहने है और इस बुर्के के नीचे उसकी बुर यानि छूट पूरी तरह खुली है. काफी देर शबाना के होंठो को चूमते चूसते रहने के बाद लालू ने शबाना को घुमाकर उसकी पीठ अपनी तरफ और चेहरा दूसरी तरफ कर दिया. और शबाना के पीछे घुटनो के बल बैठ गया. घुटनो के बल बैठे होने की वजह से शबाना के उभरे हुए नितम्ब अब लालू के चेहरे के सामने थे. उन्हें अपने हाथ से सहलाते सहलाते लालू ने अपने चेहरा उनके बीच की दरार में घुसेड़ दिया और बुर्के के ऊपर से hi अपनी नाक घुसेड़ कर उसकी गांड की महक को महसूस करने लगा.

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शबाना की गांड को सूंघते सूंघते लालू ने नीचे से अपना एक हाथ शबाना के बुर्के के अंदर दाखिल कर दिया. और शबाना की नंगी टांगो को अपने हाथो से महसूस करते हुए अपने हाथ को ऊपर और ऊपर बढ़ाता जा रहा था. पीछे लालू ने अपनी जीभ शबाना के चूतड़ों के बीच की दरार में दाखिल करदी और बुर्के के ऊपर से hi शबाना की गांड को चाट चाट कर गीला करने लगा और आगे से उसका हाथ ऊपर बढ़ते बढ़ते शबाना के उस असली छेड़ के मुहाने पर पहुंच गया जिसका उद्घाटन आज लालू करने वाला था. पीछे से लालू ने चाट चाट काट शबाना की गांड के ऊपर के कपडे को इस कदर गीला कर दिया था की वो उसकी चूतड़ों की दरार में चिपक गया था और आगे से उसने अपने अंगूठे से शबाना की छूट के दाने को रगड़ना शुरू कर दिया. उस गोली की असर के कारन पहले hi बुरी तरह उत्तेजना की आग में जल रही शबाना के लिए लालू की ये हरकते बर्दाश्त करना मुश्किल हो रहा था. उसका खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा था इसलिए उसने पास hi पड़ी मेज का सहारा ले लिया और मेज के सहारे थोड़ा झुक कर कड़ी हो गई. पर झुकने की वजह से उसकी चूतड़ों की दरार और खुल गई और लालू की जीभ और भी ज्यादा गहराई तक अंदर जा कर शबाना की गांड के छेड़ को गीला कर रही थी. और आगे से भी लालू ने अपनी दो उंगलिया शबाना की छूट में दाखिल करदी और आहिस्ता आहिस्ता अपनी उनगलिया शबाना की छूट में अंदर बहार करने लगा.

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धीमे धीमे शबाना की छूट में लालू की उंगलियों की गति तेज़ हो गई और पीछे भी उसने शबाना की गांड चेतना छोड़ कर अपने डाट से शबाना के नितम्ब को हलके हलके से काटना शुरू कर दिया. जीवन में प्रथम बार पुरे होशोहवास में इतनी उत्तेजना का अनुभव कर रही शबाना के लिए इस उत्तेजना के एक एक पल को काटना मुश्किल हो रहा था. लालू ने पीछे से उसके नितम्बो पर काट काट कर उसकी उत्तेजना को चरम पर पंहुचा दिया था और आगे से उसकी छूट की दीवारों पर अपनी उंगलियों के घर्षण उसे स्खलन के करीब पंहुचा दिया था. और शबाना ज्यादा देर तक इस दोहरी उत्तेजना को बर्दाश्त न कर सकीय और वही खड़े खड़े उसकी छूट से उसकी कामोत्तेजना का रूस बहना शुरू हो गया जो उसकी टांगो से बेहटा बेहटा नीचे तक आ रहा था. शबाना को अपनी जांघो पर काफी चिपचिपा सा महसूस हो रहा था. शबाना ने जीवन में प्रथम बार इस तरह का काम उत्तेजना का आनंद महसूस करा था. आज रात के अपने पहले ओर्गास्म के बाद शबाना निढाल से वही मेज के सहर झुकी कड़ी थी. और अपनी उंगलियों पर गीलेपन के एहसास से लालू भी समझ गया था की शबाना की उत्तेजना का प्रथम चरण पूरा हो चूका है पर अभी तो ये बस आज रात की शुरुआत भर थी अभी तो बहुत कुछ होना बाकि था.

शबाना के झाड़ जाने के बाद लालू ने अपने हाथ शबाना के बुर्के से निकल लिए और उठाकर शबाना के पीछे खड़ा हो गया. और गहरी गहरी सास लेती झुकी कड़ी शबाना के पीछे से चूतड़ों के बीच की दरार में फेज और जगह जगह से गीले हो चुके बुर्के को निहारने लगा. थोड़ा संयत होने पर लालू ने शबाना को अपनी गोड़ में उठा लिया और उसे लेकर बाथरूम की तरफ चल दिया. लालू को इस तरह खुद को गोड़ में उठाए बाथरूम में लता देख शबाना के ज़हन कल रात वाला दृश्य वापस ताज़ा हो गया जब लालू उसे बालो से घसीटता हुआ उसीके कमरे के बाथरूम में ले गया था और वह उसके कपडे फाड़कर उसे नंगा करा था उसके ऊपर मोटा था और आज वही लालू उसे रानी की तरह गोड़ में अपने कमरे के बाथरूम में ले जा रहा है. एक दिन में इतना ज्यादा बदलाव कैसे हो गया. बाथरूम में लेकर लालू ने शबाना को उसी शावर के नीचे खड़ा कर दिया जहा कुछ देर पहले शबाना नहीं थी.

लालू: जानेमन कैसा लगा आज रात का अपना पहला चरमसुख मज़ा आया की नहीं. बोल क्या मेरे ***** लुंड को अपनी मुसलमानी छूट में लेकर एक ***** मर्द के बच्चे की माँ बनना चाहती है. बोल

शबाना चुपचाप नज़ारे झुकाए कड़ी थी.

लालू: देख मैंने तुझे पहले hi कहा था की मुझे एक बार में जवाब दे पर बार तू वही कर रही है पर मैंने आज तुझे वडा करा है की मई तुझे तकलीफ नहीं दूंगा इसलिए आज मई तेरी मर्ज़ी के खिलाफ कुछ नहीं करूंगा. अगर तुझे मेरे साथ मज़ा नहीं आ रहा तो तू जा उस मंदबुद्धि के साथ hi कर ले जो करना है मई तुझे और परेशां नहीं करूँगा.

लालू ने शबाना को अपनी बाहो से आज़ाद कर दिया, शबाना तो लालू की ये बात सुन कर अवाक सी कड़ी रह गई क्युकी अब तक उसे हर तरह से ज़लील करने वाले लालू से इस तरह अलफ़ाज़ की उम्मीद उसने भी न की थी. शबाना को समझ नहीं आ रहा था की वो क्या करे की कही वो यहाँ से जाने के लिए कदम बढ़ती है तो कही लालू के अंदर वो हैवान फिर न जाग जाए और दुसरे उस गोली की उत्तेजना का असर भी यहाँ से जाने से रोक रहा था. शबाना चुपचाप सी नज़रे झुकाए कड़ी थी.

लालू: जा अब यहाँ क्यों रुकी है मई खुद तुझे जाने को कह रहा हु. पर अगर अब तू इस उत्तेजना के सफर में मेरे साथ आगे बढ़ना चाहती है तो तुझे ये साबित करना होगा. मई तू पहले दिन से तेरे रसभरे होंठो का दीवाना बन गया था तेरे ये मदमस्त उभरे हुए स्तन देख कर मेरा लुंड किस कदर तन जाता है मई तुझे बता नहीं सकता इस वक़्त भी इस धोती के अंदर मेरा लुंड की नस नस किस कदर फूल चुकी है तुझे बता नहीं सकता पिछली दो बार भी तेरे इन उबारो को अच्छे से महसूस नहीं कर पाया सोचा था आज रात तेरे इन रसीले ामो को निचोड़ कर रख दूंगा हमेशा बुर्के के नीचे छुपे रहने वाले इन मोठे मोठे गोर गोर दूध को दबा कर मसल कर चूस कर काट कर देखूंगा पर बिना तेरी मर्ज़ी के अब तेरे साथ कुछ नहीं करना चाहता. तुझे अपने पास पाकर मई किस कदर उत्तेजित हु वो मैंने ज़ाहिर कर दिया अब अगर मेरे करीब रहकर तू भी ये उत्तेजना महसूस कर रही है तो अब पहल तुझे करनी होगी. वर्ण तू अभी इसी वक़्त यहाँ से चली जा.

शबाना अपनी मुट्ठी को भींचे हुए अब भी जड़ सी वह कड़ी थी उसे समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे.

लालू: लगता है शायद मेरा दर की वजह से तू यहाँ से जा नहीं पा रही है चल ठीक है मई hi यहाँ से चला जाता हु ताकि तेरा भ्रम दूर हो जाए की मई फिर तुझे टॉर्चर करने वाला हु. मेरे जाने के इत्मीनान से जहा जाना चाहे जा सकती है चाहे तो अपने कमरे में अपनी सहेली के पास या चाहे तो उस मंदबुद्धि के कमरे.

लालू पलट कर वापस चलने को हुआ पर अचानक शबाना ने हाथ बढ़ाकर उसके हाथो को थाम लिया. लालू के पीछे जाते कदम अचानक से ठिठक गए और उसने अपने चेहरा एक बार फिर शबाना की तरफ घुमाया. शबाना ने हिजाब में से झक्ति अपनी खूबसूरत नज़रो को ऊपर उठाया और अपनी नज़रे लालू की नज़रो से मिला दी.

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फिर शबाना अपना एक हाथ अपने चेहरे तक ले गई हुए अपने होठो के सामने पड़ा हिजाब का पर्दा हटा दिया. शबाना के खूबसूरत कमल की पंखुड़ी जैसे होंठ और उसका चौदहवी के चाँद सा दमकता चेहरा अब लालू की नज़रो के सामने बेपर्दा था.

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अब तक अपनी हरकतों से शबाना को उत्तेजित करने वाला लालू पहली बार शबाना की अगली हरकत के इंतज़ार में था.

शबाना अपना चेहरा लालू के चेहरे के करीब ले गई और शायद जीवन में पहली बार शर्मोहया और तहज़ीब की देहलीज़ को लांघते हुए अपनी पलकों को गिरते हुए अपने होंठ लालू के होंठो पर रख दिए.

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लालू के होंठो को चूमते हुए उसने लालू के दोनों हाथो को अपने हाथो में थम लिया और उन्हें ऊपर लेट हुए अपने जिस्म के सबसे आकर्षक हिस्से अपने स्तनों पर रख दिए.

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लालू को तो यकीन नहीं हो रहा था की ये सब शबाना खुद से कर रही है. कल रात शबाना को नंगा करने के बावजूद लालू ने उसके इन स्तनों का मज़ा नहीं लिया था पर आज शबाना ने खुद से अपने ये स्तन उसके हवाले कर दिए थे. ऊपर लालू और शबाना के होंठ एक दुसरे में पूरी तरह डूबे हुए थे बीच में लालू शबाना के स्तनों को धीरे धीरे दबा कर उनकी कोमलता का एहसास कर रहा था पर शबाना यही नहीं रुकी नीचे शबाना ने अपना हाथ धोती के ऊपर से लालू के लुंड पर रख दिया और धोती के ऊपर से उसके लुंड की अकड़न को छूकर महसूस करने लगी.

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लालू: अंदर हाथ डालकर छूकर देख न तुझे इस कदर अपने करीब पाकर की तरह फूल कर मूसल बन गया है. प्लीज अंदर हाथ दाल न.

आज तक उत्तेजना इस एहसास से अनजान रही शबाना के लिए ये एक अलग hi अनुभव था. जीवन में पहली बार एक मर्द उसे अपना लुंड हाथ में लेने की रिक्वेस्ट कर रहा था और इस उत्तेजना भरे हालत में इस रिक्वेस्ट इंकार करना शबाना के लिए उतना hi मुश्किल था जितना एक प्यासे के लिए सामने रखे पानी के गिलास को इग्नोर करना.
 
शबाना ने अपना हाथ लालू की धोती के खुले हिस्से में से अंदर दाखिल कर दिया और लालू के तने हुए लुंड को अपने हाथो से टच करा. शबाना की ऊँगली के हलके से स्पर्श लुंड ने तेज़ झटका और शबाना ने अपना हाथ पीछे हटा लिया.

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लालू: क्या हुआ डर्टी हु ये तुझे काटेगा नहीं अच्छे से अपनी मुठी में पकड़ के देख अगर इसे हाथ में लेने में इतना डरेगी तो माँ कैसे बनेगी.

शबाना ने दुबारा अपना हाथ लालू की धोती के अंदर डाला और कपकपाते कपकपाते अपनी उंगलियों को लालू के लुंड पर फिरने लगी. गोली के असर से नार्मल से ज्यादा फूले लालू के लुंड की एक एक नस शबाना को अपनी उंगलियों से महसूस हो रही थी और शबाना की उंगलियों की छुअन से लुंड भी बार बार झटके पे झटके ले रहा था पर इस बार शबाना ने अपना हाथ पीछे नहीं हटाया बल्कि बिना डरे उस मूसल लुंड को अपनी मुट्ठी में भींच लिया. अपने लुंड पर शबाना की नरम नरम हथेली का एहसास पाकर लालू की आह निकल गई.

लालू आह लेते हुए: ो तेरी साला बेन स्ट्रोक्स क्या मुलायम हाथ है तेरे.

लालू की हालत देख शबाना की हसी निकल गई.

लालू: साला तेरे इन ,,., पड़ने वाले मुलायम हाथो ने मेरे लुंड की हालत ख़राब करदी है और तुझे हसी रही है. अभी बताता हु तुझे.

लालू ने धकेल कर शबाना को पीछे दीवार से सत्ता दिया और उसके होंठो पर टूट पड़ा और शबाना के होंठो को अपने होंठो में भर कर चूसने लगा. होंठो के साथ साथ लालू के हाथो का दबाव भी शबाना के स्तनों पर बाद गया और वो शबाना के स्तनों को बुर्के के ऊपर से hi मसलने दबाने लगा.

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पर नीचे शबाना भी उसका बराबर साथ दे रही थी और उसके लुंड के जारी ज़र्रे को अपने हाथो से दबा दबा कर महसूस कर रही थी. मर्द के लुंड का असली आकार क्या होता है ये उसे आज पता चला था क्युकी आज तक तो उसने अपने नामर्द पति का दबा कुचला लुंड hi देखा था. तन्ने के बाद लुंड क्या रूप लेता है ये उसने आज जाना था और आज तो वैसे भी लालू का लुंड नार्मल से कुछ ज्यादा hi तना हुआ था.

लालू: जानेमन लुंड के आगे की खाल को भी छूकर देख तेरे मुल्ले पति तो खतना करा हुआ लुंड होगा. लुंड के आगे की खाल को रगड़ने माँ मज़ा तो तुझे ये धोती पहना ***** hi दे सकता है.

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शबाना लालू के लुंड के आगे की खाल को अपनी उंगलियों से सहलाने लगी उसे आगे पीछे करने लगी. लालू तो उत्तेजना में तड़प उठा उसने शबाना के डूडभ कास कर दबा दिए जिससे शबाना की भी आह निकल गई और जवाब में उसने भी लालू का लुंड कास कर दबा दिया.

लालू: ो बेन स्ट्रोक्स साली तू तो कुछ ज्यादा गरम हो गई है मेरा लुंड hi उखड लेगी क्या अगर और कुछ पल तूने यही मेरा लुंड रगड़ा तो लगता है खड़े खड़े तेति हाथो में hi झाड़ जाऊंगा तेरी गर्मी को थोड़ा ठंडा करना पड़ेगा.

लालू उसे बिना चोदे कही झाड़ न जाए ये सोच कर शबाना ने अपना हाथ उसके लुंड से हटा लिया. दूसरी तरफ लालू अपना हाथ दीवार में लगे शावर के हैंडल तक ले गया और अगले hi पल उसने शावर ों कर दिया. शावर से गिरता पानी लालू और शबाना के जिस्मो को भिगोता नीचे आ रहा था. शबाना का हिजाब और बुरका और लालू की धोती पानी से भीगकर उनके बदन से चिपक गई थी.

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भीगे बुर्के शबाना के स्तनों के ऊपर के चूचक भी साफ़ नज़र आ रहे थे. बुर्के में से झाकते चकचक लालू को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे और अब लालू उन्हें अपने मुँह में भर उनका स्वाद चखना चाहता था जिनकी वजह से वो शबाना की तरफ आकर्षित हुआ था.

लालू ने पास राखी पानी से भरी बाल्टी से एक मग्गा पानी निकला और शबाना के एक स्तन को बुर्के के ऊपर से hi अपनी मुट्ठी में लेकर सीधा उस पर पानी डालना शुरू कर दिया.

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लालू अपने होंठ शबाना के स्तनों के करीब ले गया और पानी से भीगे उस स्तनों के ऊपर उभरे चूचक के इर्द गिर्द अपनी जीभ फिरने लगा. शबाना का उत्तेजना के मरे बुरा हाल था क्युकी जीवन में पहली बात कोई उसके उभारो के साथ इतने कामुक तरीके से खेल रहा था. शबाना के निप्पल से खेलते खेलते लालू ने उन्हें अपने होंठो में भर लिया और शबाना के निप्पल चूसते चूसते लालू ने अपना बुर्के के ऊपर से उसका दया स्तन आधे से ज्यादा अपने मुँह में भर लिया और अपने दांत से उन्हें हलके हलके काटने लगा.

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उत्तेजना में पूरी तरह डूब चुकी शबाना ने लालू के सर को अपने हाथो में थम लिया और पीछे से दबाव दाल कर उसका चेहरा अपने स्तनों पर दबाने लगी. शबाना को इस कदर उत्तेजित देख लालू ने अचानक से अपने होंठ उसके स्तनों से हटा लिए और सीधा होकर शबाना के सामने खड़ा हो गया. आनंद के सागर में आँखे बंद करे डूबी शबाना के आनंद में अचानक से जैसे ब्रेक लग गया हो. उसने आँखे तो लालू उसके सामने खड़ा मुस्कुरा रहा था. लालू को इस तरह खुद को घूरता देखा शबाना को भी एहसास हो गया की आज वो किस तरह वासना के इस खेल में पूरी तरह डूब चुकी है. उसने भी मुस्कुराते हुए शर्म से अपनी नज़रे नीचे कर्ली.

लालू: दूध चुसवाने में मज़ा आ रहा है.

शबाना ने शरमाते हुए हां में सर दिला दिया.

लालू: पर मुझे भी मज़ा अत अगर तेरे दूध पुरे नंगे होते मेरे होंठो और तेरे स्तनों के बीच ये कपडे का पर्दा न होता. और अगर तू खुद मेरे लिए अपने ये कबूतर आज़ाद करती तो और भी ज्यादा मज़ा अत क्या तू मेरी खातिर ये कर सकती है.

आज शबाना इस कदर उत्तेजना के नशे में मदमस्त थी अगर लालू आज उसे अपने तलवे चाटने को भी कहता तो शायद वो ख़ुशी ख़ुशी उसके लिए भी तैयार हो जाती. लालू ने स्तनों को नंगा करने की बात मुँह से निकली भर hi थी की अगले hi पल शबाना के हाथ खुद बा खुद बुर्के में स्तनों के ऊपर लगे बटन पर पहुंच गए और बिना एक पल की भी देरी किये शबाना ने बुर्के के अपने तीन बटन जो उसके स्तनों को ढके हुए थे खोल दिए और बुर्के को अपने स्तनों के सामने से हटा कर उन्हें लालू के सामने बेपर्दा कर दिया.

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शबाना के जिस्म का सबसे आकर्षक और उत्तेजक अंग अब लालू के सामने लालू के hi लिए hi बेपर्दा था. यु तो कल रात भी लालू ने शबाना को नंगा करा था पर जो बात आज रात में थी वो कल रात में नहीं क्युकी आज शबाना ने खुद अपने स्तनों को लालू के लिए नंगा करा था और एक तरह से अपनी मौन सहमति देदी थी की वो जैसे चाहे इन्हे उसे कर सकता है इन्हे छूने दबाने मसलने चूमने छोस्ने यहाँ तक की काटने की भी उसे खुली छूट है. शबाना के नंगे दूध देखकर एक बार फिर धोती के अंदर छुपे उसके लुंड ने झटके खाना शुरू कर दिया. लालू हैरान था की जिन अमृत कलशो को देख बिना छुए सिर्फ देखने से hi उसके लुंड का ये हाल है उनको मसलने का लाइसेंस होने के बावजूद शबाना का पति इन्हे देखकर उत्तेजित कैसे नहीं हुआ.

चेहरे पर हिजाब और नीचे स्तन खुले हुए गजब का उत्तेजक दृश्य था जिसे देख कर खुद पर कण्ट्रोल करना लालू जैसे मर्द के लिए भी मुश्किल था. लालू भी शबाना के खुले स्तनों को देख कर ज्यादा देर खुद पर काबू न रखा सका और आगे बाद कर पहले तो उसने तो शावर बंद करा और फिर शबाना के उभारो पर पागलो की तरह टूट पड़ा. शबाना अपना बैलेंस बनाने के लिए दीवार से पीठत तक कर कड़ी हो गई और लालू को अपने स्तनों से खुली छूट दे दी. लालू अपना मुँह जितना खोल सकता था उतना खोल लिया पर फिर भी शबाना के पुरे स्तन को अपने मुँह में भरना उसके लिए संभव नहीं था शायद यही शबाना के स्तनों का क्ष फैक्टर था. लालू ने शबाना के दे स्तन को अपने मुँह में भर लिया और बाए स्तन को अपने हाथो से मसलने लगा.

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चूसते चूसते वो शबाना के आगे के चूचक को दातो में दबा कर हल्का सा काट लेता जिस पर शबाना चिहुँक पड़ती पर फिर भी आज शबाना लालू की इन हरकतों में अलग सा मज़ा आ रहा था और वो भी लालू का भरपूर साथ देने का प्रयास कर रही थी. लालू बरी बरी शबाना के दोनों स्तनों का उपभोग कर रहा है. कुछ देर वो उसके दे स्तन को चूसता कट्टा था तो कुछ पल बाद वो शबाना के बाए स्तन पर धावा बोल देता. शबना को भी लालू के इस जंगली उन्माद अलग hi मज़ा मिल रहा था जिस मज़े से वो आज तक अनजान थी. इसी मज़े में शबाना ने अपनी उंगलिया लालू के बालो में फसा दी और बड़े प्यार से उसके बालो को सहलाने लगी.

करीब 20 मिनट से लगातार लालू शबाना के स्तन चूसे जा रहा था. शबाना के स्तनों पर जगह जगह लालू के दांतो के निशान बन गए थे पर फिर शबाना कोई शिकायत नहीं कर रही थी क्युकी आज उसके अंदर भरी उत्तेजना उस दर्द पर भी हावी थी जो उसे लालू के काटने से हो रहा था.

लालू: काश तेरे स्तनों से दूध अत तो आज तेरे स्तनों का सारा दूध निचोड़ कर पी जाता.

शबाना: मई अब तक माँ नहीं बानी हु इसलिए दूध नहीं अत एक बार आप मुझे अपने बच्चे की माँ बना दो फिर दूध भी बनने लगेगा.

लालू: पर तब तक तो यहाँ से चली जाएगी तो क्या मई घर आकर तेरे पति के सामने तेरा दूध पिऊंगा.

शबाना के पास इस बात का कोई जवाब नहीं था.

लालू: चल कोई नहीं तब की तब देखेंगे पहले तुधारु बना तो दू

शबाना के स्तनों को जी भर के चूस लेने के बाद लालू ने अपना चेहरा स्तनों के बीच फसा दिया और जीभ निकल कर शबाना की क्लीवेज चाटने लगा. शबाना के उन दो बटनो के खुले हिस्से को छत्ते छत्ते लालू धीमे नीचे की तरफ बढ़ने लगा उसने एक एक कर शबाना के नीचे के खोलना शुरू कर दिया. एक बार फिर लालू शबाना के सामने घुटनो के बल बैठ गया. और उसने शबाना के बुर्के के नीचे तक के सारे बटन खोल दिए. बटन खुलते hi शबाना के नंगेपन को ढके बुर्के के दोनों पैट इधर उधर हो गए.

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शबाना के नंगे जिस्म पर ढाका एकमात्र पर्दा हट्टे उसकी गदराई हुई संगमरमरी कमर उसकी मोती मांसल जाँघे और उन जांघो के बीच बना वो द्वार जिसमे आज लालू अपने लुंड का ग्रहप्रवेश करवाने वाला था और उस पर उगे झात के छोटे छोटे बाल. चेहरे पर हिजाब जिस्म पर बुरका वो भी आगे से खुला हुआ और अंदर से झांकता शबाना का गोरा चिट्टा नंगा बदन, अगर खुद कामदेव भी आज शबाना को इस रूप में देख लेता तो शबाना के इस रूप पर मोहित हुए बिना न रह पता, जैसे ऊपर वाले ने जिस्म का हर आंग हर कटाव बड़े इत्मीनान ने पूरा वक़्त लेक गदा है. शबाना का बदन इस कदर गिरा था की छू दो तो मैला हो जाए. अगर उसके बेपनाह हुस्न में कुमी निकलना भी चाहे तो भी नहीं निकली जा सकती. लालू शबाना के सामने घुटनो पर बैठा था और शबाना चिकना दूधिया पैट लालू के चेहरे से बस इंच भर के फैसले पर था. लालू ने अपने हाथ बुर्के के खुले हिस्सों में से अंदर डालते हुए पीछे ले जाकर शबाना के नितम्बो को अपने हाथो में थम लिया. और शबाना को थोड़ा आगे बढ़ाते अपने होंठ आगे करके शबाना के पेट पर रख दिए और उस रुई से गुदगुदे और दूध से गोर पेट पर अपने खुरदुरे होंठ राहडने लगा.

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शबाना के पेट को अपने होंठो से चूमते हुए उसने उसके पेट को अपने दातो से काटना शुरू कर दिया. शबाना के स्तनों की तरह उसके पेट पर लालू ने जगह जागब अपनी लव बिट्स के निशान बना दिए. आगे से शबाना के पेट चूमते हुए लालू ने पीछे से उसके नितम्बो को थामे थामे गांड की दरार को थोड़ा चौड़ा करके अपनी दो उंगलिया उसकी गांड में छेड़ में दाखिल करदी. शबाना के सीधे खड़े होने की वजह से उसकी गांड का छेड़ काफी टाइट था जिस वजह लालू की उंगलिया आसानी से अंदर नहीं जा प् रही थी और शबाना को भी दर्द हो रहा था पर वो लालू को रोकना भी नहीं छह रही थी इसलिए गांड को छेड़ थोड़ा चौड़ा करने के लिए वो थोड़ा आगे झुक गई और अपना सर लालू के सर के ऊपर टिका दिया. आगे झुक जाने से शबाना की गांड का छेड़ थोड़ा खुल गया और अब लालू की उंगलिया आसानी से अंदर बहार जा रही थी. पीछे अपनी उंगलियों को शबाना की गांड में अंदर बहार करते लालू ने अपनी जीभ निकल कर शबाना के पेट को चेतना शुरू कर diya,shabana के पेट को छत्ते छत्ते उसने अपनी जीभ उसकी नाभि में घूमना शुरू कर दिया. लालू एक बार फिर शबाना पर आगे पीछे से दोहरा हमला कर रहा था. शबाना ने लालू के कंधो को कास कर थम लिया, शबाना की मजबूत होती पकड़ से लालू को एहसास हो गया की वो एक बार झड़ने के करीब है इसलिए लालू ने भी उसकी गांड में अपनी उंगलियों की स्पीड बड़ा दी. और गहरी गहरी सासे लेते हुए शबाना ने अपना पूरा भर लालू के कंधो पर रख दिया. लालू समझ गया था की शबाना आज की रात में दूसरी बार झाड़ गई है.

शबाना गहरी गहरी सासे लेती हुई अपना पूरा वजन लालू के कंधो पर डाले कड़ी थी. शबाना के झाड़ जाने के बाद लालू ने उसकी गांड से अपनी उंगलिया बहार निकल ली और अपना हाथ आगे लेकर अपनी उंगलिया शबाना की छूट में डालकर उसमे से निकलते पानी को अपनी उंगलियों से महसूस करने लगा. शबाना भी अब तक संयत हो चुकी थी थोड़ा रिलैक्स होते hi शबाना फिर सीढ़ी हो गई और दीवार पर पीठ तक कर कड़ी हो गई. यु खड़े हो जाने से शबाना की उंगलिया खुद बा खुद शबाना की छूट से निकल गई पर शबाना की छूट का पानी अब भी उसकी उंगलियों पर लगा था. दीवार पर तक लगाए शबाना आँखे बंद करे कड़ी थी जब शबाना ने आँखे खोली तो लालू अब भी नीचे ज़मीन पर बैठा उसे देख कर मुस्कुरा रहा था. मुस्कुराते हुए लालू ने अपनी दो वो उंगलिया शबाना को दिखाई जिन पर उसकी छूट का पानी लगा था, जैसे शबाना को दिखा रहा हो की कुछ hi देर में शबाना दो बार झाड़ चुकी है. शबाना ने अपनी पलके झुका ली क्युकी अपने झड़ने पर तो उसका कोई काबू नहीं था और लालू की ये दो उंगलिया देख अब तक शर्म हाय का नक़ाब ओढे शबाना को अपने जिस्म की असली उत्तेजना का एहसास हो रहा था.
 
शबाना ने जब दुबारा अपने पलके उठाई तो लालू अब भी उसकी तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था और उसकी उंगलिया अब भी वैसे hi उठी हुई थी. शबाना को अपनी तरफ देखता देख लालू ने शबाना के छुटृस में डूबी अपनी उंगलिया अपने मुँह में लेली. लालू को यु अपनी छूट से निकला पानी छत्ता देख शबाना को वो पल याद आ गए जब लालू ने जबरन उसे अपना वीर्य पीने को मजबूर करा था पर अब खुद उसकी छूट से निकला पानी चाट रहा है. शबाना की मुस्कुराता गायब हो गई और वो थोड़ी सीरियस हो गई. शबाना को यु सीरियस देख लालू भी समझ गया की उसके मन में क्या चल रहा है. और बिना देर किये उसने आगे बाद कर सीधा अपने होंठ शबाना की छूट पर रख दिए, शबाना को समझ नहीं आया की अचानक से लालू ने ऐसा क्यों किया पर अगले hi पल सब क्लियर हो गया. लालू ने अपनी जीभ शबाना की छूट के अंदर दाखिल कर दी और दो दो बार झड़ने के बाद शबाना की छूट में मौजूद कामरुस को अपनी जीभ से चाट चाट कर साफ़ करने लगा.

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शबाना ने एक्सपेक्ट नहीं करा था की लालू उसकी छूट से निकले पानी को अपनी जीभ से चाटने में भी नहीं हिचकिचाएगा. जीवन में पहली बार कोई मर्द उसकी छूट को इस तरह इतने प्यार से चाट रहा था, उसके पति को कभी सेक्स में hi इंटरेस्ट नहीं रहा तो छूट चेतना तो बड़ी दूर की बात थी. पर लालू ने आज उसे ये अनुभव भी दे दिया था.

लालू ने शबाना की छूट की फांको को पूरी तरह से अपने मुँह में भर लिया और अपनी जीभ को शबाना की छूट के अंदर गोल गोल घूमने लगा.

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उसने शबाना की छूट का सारा पानी चाट चाट कर साफ़ कर दिया वही शबाना का तो बुरा हाल था सर पर गिला हिजाब पीठ पर गीला बुरका दो दो बार का ओर्गास्म और अब छूट में लालू की जीभ की कामुक हरकते. गीले कपड़ो की ठंडक और लालू की उत्तेजक हटकटो से शबाना की छूट अंदर से पेशाब से भर चुकी थी उसे बहुत ज़ोर से पेशाब आ रहा था पर लालू तो उसकी छूट से अपने होंठ हटाने का नाम नहीं ले रहा था. छूट चटवाने में शबाना को अंदर hi अंदर मज़ा तो बहुत आ रहा था की कही लालू के छूट छत्ते छत्ते hi उत्तेजना के मारे उसकी पेशाब छूट गई तो पता नहीं लालू उसके साथ क्या करेगा, जितना प्यार अपनापन वो अभी दिखा रहा है वो सब एक पल में ख़तम हो जाएगा. दूसरी तरफ लालू को रोकने की उसमे हिम्मत नहीं हो रही थी की कही रोकने पर लालू गुस्सा न हो जाए. पर पहले वाले केस में रिस्क ज्यादा था कुछ भी लालू को छूट से हटने को कहना hi होगा. शबाना ने पूरी हिम्मत जूता कर शबाना को असलियत बता दी.

शबाना: लालू प्लीज कुछ देर के लिए मेरी टांगो के बीच से हैट जाओ.

लालू: क्यों क्या हुआ जानेमन क्या मेरा तेरी छूट चेतना तुझे अच्छा नहीं लग रहा या फिर तुझे मज़ा नहीं आ रहा. बोल

शबाना: नहीं ऐसी बात नहीं है वो दरअसल मुझे बहुत ज़ोर से पेशाब आ रहा है तो मुझे पेशाब कर लेने दो.

लालू: बस इतनी सी बात है पहले बताना था.

पेशाब की बात सुन कर लालू ने फिर से शबाना की छूट को पूरी तरह से अपने होंठो में जकड लिया. शबाना को समझ नहीं आया की लालू ये क्या कर रहा है बजाए हटने के उसने और भी मजबूती से शबाना की छूट को अपने होंठो में जकड लिया. शबाना का पेशाब किसी भी पल छूट सकता था उसने एक बार फिर लालू को हटने को कहा.

शबाना: लालू हैट जाओ मेरा पेशाब किसी भी पल निकल सकता है. इसलिए हैट जाओ.

पर लालू ने बजाए हटने के हाथ के इशारे शबाना को पेशाब करने का हामी देदी. लालू के इस इशारे से शबाना भी शॉक रह गई. लालू पूरी तरह शबाना की छूट को अपने मुँह में दबाए था और अब अपना पेशाब और ज़ादा रोकने की शबाना में छमता नहीं बची थी. इसलिए अगले hi पल शबाना की छूट से पेशाब की एक तेज़ धार निकलना शुरू हो गई और शबाना की छूट पर लालू के मुँह की पकड़ होने की वजह से वो सारा पेशाब बिना एक भी बूँद बहार जाए सीधा लालू के मुँह में समां रहा था.

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लालू ने शबाना की छूट से तब तक मुँह नहीं हटाया जब तक की पेशाब की आखिरी बूँद तक उसके मुँह में नहीं समां गई. शबाना हैरान थी की जिस लालू ने आज hi सुबह उसे ज़लील करके अपना पेशाब चाटने को मज़बूर कर दिया था वो खुद अब उसके सामने घुटनो पर बैठा उसका मूट पि गया. लालू ने अब तक शबाना के साथ जो कुछ भी किया आज जैसे उन सबका कर्ज़ा चुकाने का मन बनाए था. शबाना ने खड़े खड़े hi अपना सारा मूट लालू के मुँह में खली कर दिया पर खड़े खड़े मूतने की वजह से पेशाब की एक महीन धार शबाना की टांगो से बहती हुई नीचे तक भी आई थी. शबाना की छूट में भरा पेशाब चाटने के बाद लालू ने शबाना की एक टांग को उठाकर अपने कंधो पर रख लिया और शबाना की जांघो पर लगा पेशाब भी जीभ से चाट चाट साफ़ करने लगा. शबाना के तो पुरे जिस्म में झुरखुरी सी दौड़ गई थी. उसे यकीन नहीं हो रहा था की उसके पेशाब को कोई इस तरह चाट चाट कर साफ़ कर सकता है. शबाना की जांघ को चाहत्ते छत्ते लालू ने अचानक से उसकी जांघ में हलके से काट लिया, शबाना को हल्का सा दर्द हुआ पर लालू ने आज उसे जो मज़ा दिया था उसके लिए वो दर्द सहने को तैयार थी. लालू ने बरी बरी से शबाना की दोनों टांगो पर लगा पेशाब ऊपर से नीचे तक जीभ से चतवकर साफ़ कर दिया.

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शबाना के पेशाब की एक एक बूँद हर जगह से चाट लेने के बाद लालू भी उठकर खड़ा हो गया और धोती के ऊपर से hi अपना लुंड दबाने लगा.

लालू: क्या मस्त नशीला पेशाब था तेरा साडी _ औरतो का मूट इतना नशीला होता है या तुझमे hi कुछ खास बात है.

शबाना ने शरमाते हुए अपनी पलके झुका ली

लालू: साला लुंड तो मेरा भी बहुत देर से तना खड़ा है पेशाब तो मुझे भी बहुत ज़ोर से आया है.

लालू की इस बात से एकदम से शबाना के चेहरे का रंग उड़ गया उसे लगा की लालू ने उसका पेशाब पिया है तो अब तो निश्चित रूप से वो भी उसे अपना पेशाब पीने को कहेगा. शबाना के चेहरे के बदलते भाव देख लालू भी समझ गया की वो क्या सोच रही है.

लालू: घबरा मत आज रात मई तुझे अपना पेशाब पीने के लिए फाॅर्स नहीं करूँगा. आज तुझे मेरा पेशाब पीने की कोई ज़रूरत नहीं.

लालू की इस बात से शबाना ने थोड़ी रहत की सांस ली.

लालू: पर मेरी एक इच्छा है मई अपनी इस पेशाब को भी यादगार बनाना चाहता हु अगर तू मेरा साथ दे तो.

शबाना डरते डरते: क्या करना होगा मुझे.

लालू: अरे तू दर मत अगर तो नहीं चाहेगी तो मई कुछ नहीं करूँगा.

शबाना: जी बताइये.

लालू: तो सुन मई तेरी गांड में मूतना चाहता हु तेरे चूतड़ों के ऊपर पेशाब करना चाहता हु तेरी गांड की दरार में अपना लुंड दाल कर तेरी गांड के छेड़ के अंदर मूतना है मुझे. बोल मूतने देगी मुझे अपनी गांड में.

लालू की ये अजीब सी मांग सुनकर शबाना के गूसबम्प्स खड़े हो गए. बड़ी hi अजीब सी मांग थी लालू की भले मेरी गांड पर मूतकार उसे क्या मज़ा मिल जाएगा. शबाना को समझ नहीं आ रहा था की वो लालू को क्या जवाब दे एक तरफ उसने ऐसी इच्छा ज़ाहिर की और दूसरी तरफ ये भी कह दिया की अगर वो मन कर देगी तो वो ऐसा नहीं करेगा.

लालू: बोल हां या ना.

पर उसे समझ नहीं आ रहा था की ऐसी अजीब चीज़ के लिए वो मुँह से हां कहे तो कैसे और ना कहे तो कैसे.

लालू: जवाब दे क्या मई तेरी गांड पर मूट सकता हु.

शबाना ने मुँह से कुछ नहीं बोलै बस लालू की तरफ पीठ करके कड़ी हो गई और झुक कर पीछे से अपना बुरका अपने चूतड़ों से ऊपर कर दिया और अपने दोनों हाथ सामने दीवार पर रख दिए. शबाना के इस रिएक्शन के बाद अब उसके मुँह से हां या ना के जवाब की ज़रूरत नहीं थी ऐसा करके उसने लालू को अपनी इच्छा पूरी करने की मौन सहमति दे दी थी.

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शबाना ने नंगे गोर गोर चूतड़ अब लालू के सामने बेपर्दा थे. लालू ने अपने खुरदुरे हाथ शबाना के चूतड़ों पर रख दिए और उन्हें प्यार से सहलाने लगा.

लालू: कितने प्यारे चूतड़ है इतने बड़े बड़े एकदम गोल गोल और कितने गोर चित्ते. कल रात मैंने कितना मार था यहाँ कितना बुरा हु न मई. मुझे माफ़ी कर दे.

शबाना को मन hi मन ख़ुशी थी की लालू को कल रात की अपनी गलती का एहसास था शायद ,.' ने उसकी दुआ सुन ली और लालू के दिल में इंसानियत जगा कर उसके उस ज़लालत से बचा लिया.

लालू: एक्चुअली मुझे माफ़ी तो तेरे इन चूतड़ों से मांगनी चाहिए जितना दर्द मैंने इन्हे कल रात दिया उतना hi प्यार देना चाहिए.

शबाना सोच hi रही थी की लालू अब क्या करने वाला है की तब तक लालू ने अपने होंठ शबाना के नंगे चूतड़ पर रख दिए.

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लज़्ज़त और मज़े के मरे शबाना की आँखे बंद हो गई और वो गहरी गहरी साँसे लेने लगी. लालू अपने होंठो को शबाना के चूतड़ों पर यहाँ वह रगड़ रहा था. शबाना के चूतड़ों को चूमते चूमते उसने वह भी हलके से काट लिया और शबाना की पुरे बदन की तरह शबाना की गांड पर भी अपनी लव बाइट का निशान बना दिया. लव बाइट का निशान देने के बाद लालू ने अपनी जीभ निकल कर शबाना के चूतड़ों को चेतना शुरू कर दिया.

शबाना की गांड छत्ते छत्ते लालू ने चूतड़ों के बीच की दरार को थोड़ा चौड़ा करा और अपनी जीभ उस दरार के बीच में दाल दी और अपनी जीभ से उसकी गांड का छेड़ चाटने लगा.

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ूतिजना और कामुकता के मारे शबाना की आँखे बंद हो गई और मुँह खुला का खुला रह गया उसे यकीन नहीं हो रहा था की कोई मर्द उसके जिस्म पर इस कदर मोहित हो सकता है की उसकी जिस्म के सबसे गंदे हिस्से उसकी गांड के छेड़ तक को अपनी जीभ से चाट सकता है. जो एक्सपीरियंस जो मज़ा उसे आज लालू ने दिया अगर उसका अपना पति पूरी तरह से ठीक भी होता तो शायद वो भी उसे ये एक्सपीरियंस ये मज़ा न से पता. लालू ने उसकी इस पहली चुदाई की रात को यादगार बनाने का वडा करा था और अपने उस वादे पर वो अब तक पूरी तरह खरा उतरा था. लालू ने शबाना की गांड के छेड़ को जीभ से कहते जा रहा था.

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शबाना के पेट के अंदर एक बार फिर उत्तेजना की मरोड़ उठ रही थी, अगर कुछ देर और वो यही शबाना की गांड को छत्ता रहता तो शायद यही झुके झुके शबाना तीसरी बार झाड़ जाती. पर शबाना के जिस्म की ऐठन से लालू भी ये बात समझ गया और उसने अपना चेहरा शबाना की गांड से पीछे हटा लिया और वापस से उठकर शबाना के पीछे खड़ा हो गया.

शबाना भी थोड़ा रिलैक्स हुई और उसने अपनी साँसों को काबू में करा क्युकी वो भी अब चुदाई से पहले झड़ना नहीं चाहती थी. लालू ने भी कुछ देर शबाना को रिलैक्स होने का वक़्त दिया और फिर अपनी धोती के खुले हिस्से में से अपना एक एक नस के साथ फूला हुआ लुंड बहार निकल लिया. इतना सब कुछ हो जाने के बाद आज की इस कामुक रात का असली हीरो अब परदे के पीछे से निकल कर अपने विकराल रूप में खुल कर सामने आया था. अपना लुंड निकल कर लालू उसे शबाना की गांड के करीब ले गया और उसे शबाना की गांड की दरार के बीच रख दिया.

लालू: ाव अपने चूतड़ों को ऊपर नीचे कर और जो चीज़ इस वक़्त तेरी गांड की दरार के बीच में है उसे अपने चूतड़ों की दरार से अच्छे से रगड़ जिससे तुझे भी मज़ा आए और मुझे भी.

शबाना भी इस स्पर्श को समझ गई और उसने भी अपने निचले होंठ को अपने दांतो से दबा लिया. वो समझ गई की जो सख्त सी चीज़ इस वक़्त उसकी गांड की दरार में है यही वो जरिया है hi उसकी बंजर पड़ी कोख को अपने बीज से भर कर उसे हरा कर सकता है, उसे एक अदद बच्चे की माँ बना सकता है. बस इस वक़्त वो वक गलत छेड़ के सामने खड़ा है उसकी असली जगह तो आगे उसकी जांघो के बीच बने छेड़ में है. पर लालू ने फिलहाल केवल मूतने की इच्छा ज़ाहिर करि थी इसलिए उसने भरोसा करके अपनी गांड को लालू के लुंड पर रगड़ते हुए ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया.

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शबाना दम साढ़े झुकी कड़ी अपनी गांड को लौ के लुंड पर ऊपर नीचे कर रही थी पर उसके मन में ये भी चल रहा था की कही उसकी नंगी गांड देखकर लालू उत्तेजना में अपना लुंड उसकी गांड में न दाल दे और अपना सारा वीर्य वही न निकल दे और उसकी छूट एक बार फिर प्यासी की प्यासी रह जाए.

लालू ने शबाना की गांड की दरार को दोनों हाथो से थोड़ा फैलाया और अपने लुंड का टोपा शबाना की गांड के छहद के थोड़ा सा अंदर दाखिल करा. शबाना को हल्का सा दर्द हुआ पर उसने हिम्मत से अपनी मुट्ठी भींच ली और दुआ करने लगी की लालू और ज्यादा लुंड उसकी गांड में न डेल. पर यहाँ उसे अपनी गांड मरवाने से ज्यादा दर लालू के स्खलित हो जाने का क्युकी वो आज रात का लालू का पहला वीर्य अपनी छूट में लेना चाहती थी. लालू ने अपने लुंड को हल्का सा बाबय और कुछ गरम गरम गीला गीला शबाना को अपनी गांड के अंदर महसूस हुआ. पहले उसे लगा की लगा की ये लालू का वीर्य है पर लालू के लुंड से निकलती तेज़ धार और अपनी गांड से टांगो के सहारे बह कर आते पानी को मेहुस कर वो समझ गई की ये लालू का वीर्य नहीं बल्कि उसका पेशाब है जैसा की उसने कहा था. लालू के लुंड से निकलती पेशाब की एक तेज़ धार शबाना की गांड को अंदर तक गीला कर रही थी. मर्दो ने सेक्स के दौरान औरत के मुँह पेट बाल और न जाने कहा मोटा होता पर शायद पहली बार कोई मर्द सीधा किसी औरत की गांड के अंदर मूट रहा था. लालू का पेशाब शबाना की गांड के अंदर से ओवरफ्लो होता हुआ उसकी टांगो के सहारे बेहटा हुआ नीचे फर्श तक आ रहा था. काफी मूतने के बाद लालू ने अपने लुंड को दबा कर अपना कुछ पेशाब रोक लिया और अपना लुंड को शबाना की गांड से बहार खींच कर अपना बचा हुआ मूट शबाना की चूतड़ों पर निकलना शुरू कर दिया. लालू ने अपना बचा हुआ पूरा मूट शबाना के चूतड़ों पर खली कर दिया.

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शबाना की कमर का निचला हिस्सा पूरी तरह लालू के मूट से भीग चूका था. काफी देर से रोकी हुई पेशाब निकलने से लालू भी थोड़ा रिलैक्स था पर लुंड अभी भी पहले की तरह तना हुआ था, है मूतने के बाद उसका आकर थोड़ा कम हुआ था पर अब भी वो एक नार्मल तने हुए लुंड के जैसा hi था और शायद उस नीली गोली का hi प्रभाव था जिसने अब तक लालू के लुंड को झड़ने से रोके हुए था. लालू के मूतने के बाद शबाना भी सीढ़ी होकर कड़ी हो गई.

लालू: तेरी -- गांड पर मूट कर मज़ा आ गया. बड़ी इच्छा थी किसी मुसलमान औरत की गांड पर मूतने की तुझे बुरा तो नहीं लगा न.

शबाना ने इंकार में सर हिला दिया.

लालू: आज तू जिस तरह मेरी हर बात को इतने प्यार से मान रही है कही तुझसे मुहोब्बत न हो जाए. चल अब समय आ गया है आज रात के उस असली काम तेरी छूट के उद्घाटन का. पर तू मेरे पेशाब से भीग चुकी है और ये तेरा बुरका भी ख़राब हो गया है. तू ये बुरका उतर कर खुद को अच्छे से साफ़ करले और फिर बिना बुर्के के बहार आ जा मई बहार जा रहा हु और अपने बिस्तर पर तेरा इंतज़ार कर रहा हु ज़ादा देर मत करना. और है अपना ये हिजाब मत उतरना मई चाहता हु जब मई तुझे छोड़ू तो अपने ***** लुंड से तेरी '. छूट को छोड़ू और ये हिजाब तेरे '. होने का प्रमाण है. ठीक है मई बहार तेरा इंतज़ार कर रहा हु जल्दी आना.

इतना कह कर लालू बाथरूम से बहार चला गया. शबाना ने अपना बुरका और हिजाब उतारकर वही बाथरूम में खूटी में टांग दिया. और एक बार फिर शावर ों करके खुद को साफ़ करने लगी. कमरे में दाखिल होने से पहले वो जितना दर रही थी अब उतना hi खुश थी. बहार लालू उसे किस तरह छोड़ेगा ये सोचने लगी क्युकी अब तक जो हुआ वो किसी हसीं सपने से कम नहीं था पर अब आगे इस हसीं सपने का अंतिम पड़ाव कैसा होगा नहाते हुए भी शबाना के ज़हन में बस यही ख्याल चल रहा था.
 
नाहा धो कर अपने जिस्म पर लगा पेशाब साफ़ करके शबाना ने अपना हिजाब दुबारा अपने सर पर बाँध लिया. और वासना के इस खेल के अंतिम पड़ाव को पूरा करने बाथरूम से बहार आ गई. बहार लालू अब भी अपनी धोती पहने रह्जाओ की तरह बिस्तर पर पड़ा था. बाथरूम का दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुन कर उसने नज़र घुमा कर देखा तो शबाना को उस कामुक रूप में देख कर देखता hi रह गया.

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पुरे बदन पर कपडे का नामोनिशान नहीं था. भरी भरी उभर से लेकर चिकनी गदराई कमर, मांसल जांघो से लेकर जांघो के बाइक बना वो छेड़ जिसकी सुंदरता के आगे बड़े बड़े ऋषि मुनियो की तपस्या भी भांग हो गई. शबाना के जिस्म पर कपडे के नाम पर अगर कुछ था तो बस वो हिजाब जो सिर्फ इसलिए था ताकि लालू को उसके जिस्म से मुसलमान होने माँ एहसास मिलता रहे. पर लालू ने अब भी अपने लुंड पर उस भगवा धोती का आवरण दाल रखा था.

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आज की रात में अब तक शबाना ने लालू के लुंड को अपने हाथो के स्पर्श से अपनी गांड पर उसके स्पर्श से तो महसूस करा था पर उसका नंगे वास्तविक रूप को अपनी आँखों से नहीं देखा था.

लालू: वही कड़ी रहेगी या यहाँ मेरे पास इस बिस्तर पर भी आएगी.

शबाना धीमे धीमे चलते हुए बिस्तर की तरफ बढ़ने लगी और बिस्तर के बगल में आकर कड़ी हो गई.

लालू: यही कड़ी रहेगी ऐसी hi कुछ करेगी नहीं, सारा काम मई hi करू, तेरी गांड छाती छूट छाती तेरे दूध रगड़े तेरी गांड और छूट में ऊँगली करके दो दो बार तुझे झड़वाया. अब कुछ काम तू भी तो कर मई तो यही लेता हु अब अगर तुझे छोड़ना है तो तुझे खुद छुड़वाना होगा. तेरी छूट को खुद मेरे लुंड के करीब आकर उसे अपने अंदर लेना होगा. नहीं तो यही कड़ी रह.

शबाना ने एक्सपेक्ट करा था की बहार आते hi लालू उसके नंगे बदन पर टूट पड़ेगा और उसे बिस्तर पर पटक कर सीधा अपना लुंड उसकी छूट की गहराई में उतर देगा पर यहाँ तो हालत बिलकुल इसके उलट थे लालू ने चुदाई की पूरी कमान शबाना के हाथो में hi सौप दी थी. शबाना को समझ नहीं आ रहा था वो क्या करे. एक तो ये उसकी पहली चुदाई दुसरे लालू जैसे शिक्षा के साथ जिसे कब गुस्सा आ जाए पता नहीं तीसरा उसका अपना खुद का शाय नेचर जो उसे पहल करने से रोक रहा था.

लालू: चल कोई बात नहीं मई बतातु हु तुझे क्या करना है. चल पहले मेरी ये धोती तो खोल और देख मेरा ये ***** लुंड तुझे पसंद आया की नहीं.

शबाना ने कपकपाते हुए अपने हाथ लालू की धोती की तरफ बड़ा दिए. मन hi मन वो खुद उसकी धोती उतर देना चाहती थी पर खुलकर ज़ाहिर करने में हिचक रही थी. शबाना ने अपने हाथ लालू की धोती पर रखे और ज्यादा न सोचते हुए एक झटके में खींच कर उसकी धोती को खोल दिया लालू ने अपनी गांड उचका कर शबाना को धोती खींचने का पूरा मौका दिया. शबाना ने लालू की धोती निकलकर वही ज़मीन पर फ़ेंक दी. धोती खुलते hi लालू का तना हुआ लुंड सावधान मुद्रा में सीधा खड़ा हो गया. शबाना ने लालू के लुंड के इस रूप को देखती hi रह गई. वैसे तो उसने आज सुबह भी लालू का लुंड देखा था उसे मुँह में भी लिया था पर आज उसका आकर कुछ अलग hi था, शायद उस गोली के असर के कारन. शबाना सोच में पद गई की एक तो उसका फर्स्ट टाइम और ऊपर से इतना बड़ा लुंड क्या वो पहली बार में इतना बड़ा लुंड झेल पाएगी.

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लालू: क्या हुआ क्या सोच रही है इसका आकर देख कर दर लग रहा है क्या, अरे दर मत तुझे ज्यादा मज़ा देने के लिए hi तो आज ज्यादा बड़ा करा है. और मर्द का लुंड जितना बड़ा होता है औरत को मज़ा भी उतना ज्यादा अत है. जब लुंड छूट में फसकर छूट की दीवारों से रगड़ता हुआ आखिर तक जाता है तभी तो असली मज़ा अत है. है शुरू में जब तेरी शर्म की ज़िल्ली तार तार होगी तो ज़रूर थोड़ा दर्द होगा पर उस शुरूआती दर्द के बाद अंत तक मज़ा hi मज़ा है. तू चिंता मत कर बस बिस्तर पर मेरे दोनों तरफ पेअर करके अपनी छूट को मेरे लुंड पर रख एक बार में नीचे बैठ जा तुझे पता भी नहीं चलेगा और पूरा लुंड तेरी छूट की गहराई में उतरता चला जाएगा.

शबाना: इसमें तो बहुत ज़ादा दर्द होगा.

लालू: लुंड जैसे भी अंदर जाए दर्द तो होगा एक बार में चला जाएगा तो दर्द भी बस एक बार होगा वर्ण बार तुझे दर्द सहना होगा. तू ज्यादा मत सोच जैसा मई कह रहा हु वैसा कर चल ऊपर आ और मेरे लुंड के ऊपर अपनी छूट रखकर धपाक से बैठ जा.

शबाना सोच रही थी की क्या करे उसे थोड़ा दर भी लग रहा था आखिर ये उसका फर्स्ट टाइम था.

लालू: तू आ रही है की नहीं या मई औ सोच ले अगर फिर मई नीचे आया तो शायद तुझे ज्यादा दर्द होगा.

लालू के इस धमकी भर्र लहज़े ने शबाना को लालू की बात मैंने पर मजबूर कर दिया और बिस्तर के ऊपर आ गई. शबाना ने अपनी दोनों टाँगे लालू के इधर उदाहर कर्ली और उसकी जांघो के ऊपर बैठ गई.

लालू: वह कहा बैठा रही तुझे मैंने मेरे लुंड के ऊपर बैठने को कहा तू मेरी जांघो के ऊपर बैठ रही है अरे मुझे दुर्योधन और खुद द्रौपदी समझ रखा है क्या जो मेरी जांघो पर बैठने आ गई. चल अपनी गांड उठा और थोड़ा सरक कर आगे आ.

शबाना लालू की बात से इंकार भी नहीं कर सकती थी क्युकी अब तक काफी पोलाइट ट्रीट कर रहा लालू की आवाज़ अब थोड़ी रफ़ हो रही थी. आवाज़ तक तो ठीक था पर अगर वो खुद रफ़ हो गया तो शबाना की छूट की क्या हालत करेगा ये वो जानती थी. इसलिए चुपचाप लालू की बात मानते हुए अपनी गांड उचका कर लालू के लुंड के ऊपर आ गई.

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पर एकदम से नीचे बैठने की हिम्मत अब भी उसमे नहीं थी. क्युकी एकदम से नीचे बैठने का मतलब था एक झटके में लालू का लुंड उसकी कुंवारेपन की झिल्ली को फाड़ता हुआ उसकी छूट की गहराई में उतर जाएगा. लालू ने हाथ से पकड़ कर अपना लुंड पूरा सीधा करा, लालू के लुंड का टोपा शबाना की छूट के सिरों को टच तो कर रहा था पर शबाना अब भी नीचे बैठने की हिम्मत नहीं जूता प् रही थी. लालू ने शबाना के चेरे को देखा जो उसकी तरफ था, हिजाब में ढके उसके चेहरे पर नरवेयसनेस्स साफ़ नज़र आ रही थी.

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लालू: Ok रिलैक्स मई बहुत धीरे धीरे डालूंगा तुम्हे पता भी नहीं चलेगा. अपनी छूट को हल्का सा नीचे लाओ और मेरे लुंड के टोपे बस सेट करलो बस इतना तो करलो अंदर मत लेना.

शबाना ने लालू की बात मानते हुए अपनी कमर को हल्का सा नीचे करा, लालू ने एक हाथ से शबाना के कंधे को सहलाते सहलाते नीचे से शबाना की छूट की फैंको को फैलते हुए अपने लुंड का टोपा उसकी छूट में सेट कर दिया और इससे पहले शबाना कुछ समझती नीचे से अपनी कमर उठा कर लुंड का एक ज़ोरदार धक्का ऊपर को मारा. शबाना ने ऊपर होने की कोशिश करि पर लालू ने शबाना के कंधे पर दबाव डालकर उसे ऊपर होने hi नहीं दिया और पहले hi धक्के में लालू का मूसल लुंड शबाना की छूट की झिल्ली को फाड़ता हुआ आधे से ज़ादा अंदर चला गया. शबाना दर्द से छटपटा गई वो चीखने को हुई पर लालू ने दुसरे हाथ से उसका मुँह बंद कर दिया. शबाना उठना छह रही थी पर लालू अपने दोनों हाथो की ताकत लगा कर शबाना को पूरा नीचे बैठने को मज़बूर कर दिया. शबाना नीचे बैठते hi लालू का पुर लुंड उसकी छूट की दीवारों को चीरता हुआ उसकी गहराई में समां गया. दर्द के मारे उसने अपने होंठो को इस कदर भींच लिया की उसके निचले होंठ से हल्का खून भी निकल आया.

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खून तो कही और से भी निकला था उसकी छूट से. बेशक शबाना शादीशुदा थी पर थी तो वो अब भी कुंवारी इसलिए कुंवारेपन के भांग होने की निशानी के रूप में छूट से खून तो निकलना hi था. और सीधा बैठे होने की वजह से रिस रिस कर नीचे एते खून से लालू के लुंड के नीचे लटकते गोतो का रंग लाल हो गया था. शबाना का दर्द से बुरा हाल था और दर्द के मारे उसने अपना सर लालू के सीने पर रख दिया. और आँख बंद करके अपने दर्द को बर्दाश्त करने की कोशिश करने लगी. लालू ने भी शबाना के दर्द को समझते हुए उसे कुछ देर यही लेता रहने दिया और बड़े प्यार से उसे अपनी बहो में भर लिया. करीब 5 मं तक शबाना यही लालू का लुंड अपनी छूट में लिए उसके सीने पर सर रखे लेती रही. धीमे धीमे उसका उसका दर्द भी थोड़ा कम हो रहा था.

लालू : जान रिलैक्स इतस ok ये दर्द नार्मल है पहली बार में सबको होता है, और मैंने जानबूझ कर एक झटके में अपना लुंड तेर अंदर उतर दिया क्युकी मेरा लुंड बहुत देर से तना खड़ा है, अगर मई इसे धीमे धीमे तेरे अंदर डालता तो हो सकरा है तेरी कुंवारी छूट की गर्मी से ये तेरे अंदर जाने में hi झाड़ जाता इसलिए एक बार में अंदर दाल दिया. तू ठीक है न.

शबाना भी अब थोड़ा रिलैक्स थी उसने हां में सर हिला दिया. लालू उसे कमर से पकड़ कर हलके हलके ऊपर नीचे करना लगा ताकि जब वो नीचे से ज़ोरदार धक्के लगाए तो वो उसे बर्दाश्त कर सके.

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लालू: अगर तू रिलैक्स हो तो मई नीचे से धक्के मरू या फिर अगर तुझे ज्यादा दर्द हो रहा हो तो मई बहार निकल लू चुदाई फिर किसी दिन कर लेंगे.

ये बात तो लालू भी जनता की इतना बड़ा इतना मोटा लुंड छूट में इतना अंदर लेने के बाद शबाना से बरसो से सेक्स प्यासी कोई भी औरत बिना चुदाई करवाए पीछे नहीं हटेगी. और लालू के पीछे हटने की बात सुनकर अब तक सीट हिलाकर जवाब दे रही शबाना भी बोलने को मजबूर हो गई.

शबाना लालू के सीने पर सर रखे रखे: नहीं मई ठीक हु. आप करिये जो करना है.

लालू: आए है मेरी मुसलमान जानेमन मई रोज़ ,,., पड़ने वाली तेरी इस मुसलमानी छूट को अपने बिना खतने वाले ***** लुंड से छोड़ना चाहता हु.

शबाना: जो आप करना चाहते है कर लीजिये.

लालू: नहीं नहीं अगर तू हां करेगी तभी आगे बढूंगा. अगर तू हां करेगी की तू एक ***** मर्द के बच्चे की माँ बनने को तैयार है तभी तुझे छोडूंगा.

बड़ी मुश्किल से तो शबाना ने खुद को गैर मर्द से छुड़वाने को तैयार करा था पर अब खुलकर यु मुँह से कबूल करना उसके लिए बहुत मुश्किल था. लालू की बात पर वो अब भी चुप थी.

लालू: तू कुछ जवाब नहीं दे रही मतलब अंदर से तेरी इच्छा नहीं है कोई बात नहीं मई अपना लुंड निकल लेता हु.

लालू लुंड निकलने को हुआ.

शबाना: नहीं मई तैयार हु.

लालू: किस बात के लिए तैयार है खुल कर बोल.

शबाना: एक ***** मर्द के बच्चे की माँ बनने के लिए.

लालू: ठीक है जब तूने हामी भर hi दी है तो तैयार हो जा अपने खुदा को याद करने के लिए क्युकी मेरे लुंड का हर धक्का तुझे उसे याद करने को मजबूर कर देगा. धक्को में थोड़ा दर्द होगा क्युकी ये तेरी पहली चुदाई है तुझे बर्दाश्त करना होगा.

शबाना: आप करो मई बर्दाश्त कर लुंगी.

लालू: क्या बात है बड़ी जल्दी है तुझे ये ***** लुंड से छोड़ने की. चल ज़रा अपनी गांड उचका ताकि मुझे नीचे से धक्के मारने की जगह मिल सके.

शबाना ने अपनी गांड थोड़ी सी उचका ली जिससे लालू का आधा लुंड उसकी छूट से बहार आ गया. पर लालू ने ज़ादा देर उसे बहार नहीं रहने दिया और नीचे से एक ज़ोरदार धक्का आगे को मारा और एक बार फिर लालू का पूरा लुंड शबाना की छूट की दीवारों से रगड़ खता हुआ पूरा अंदर समां गया. शबाना को दर्द का हल्का सा झटका लगा और सच में उसे अपना खुदा याद आ गया.

शबाना: या ,.' आआह

लालू: अभी तो ये पहला धक्का हुआ है जानेमन अभी तो तुझे कई धक्के झेलने है.

लालू ने फिर अपना लुंड आधा बहार खींचा और फुल स्पीड के साथ एक बार फिर उसे शबाना की छूट में अंदर पेल दिया.

शबाना: है ,.' ममममम मर गई आआह्ह्ह्ह धीमे धीमे करो प्लीज दर्द हो रहा है.

लालू: जानेमन ये तेरे नामर्द पति का मारा हुआ लुंड नहीं एक ***** ठाकुर का सुल्तानी लुंड है अब तुझे इतना दर्द तो बर्दाश्त करना hi होगा.

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लालू ने नीचे से धक्के पे धक्के लगाए जा रहा था और हर धक्के पर शबाना की सांस हलक तक आ जाती थी. लालू का फूला हुआ लुंड छूट में रगड़ खता हुआ अंदर बहार हो रहा था उत्तेजना के मरे शबाना का बुरा हाल हो चूका था पर दो बार झाड़ चुकी होने के कारन शबाना भी इतनी जल्दी नहीं झड़ने वाली थी. लालू के सीने पर सर रखे रखे hi शबाना ने लालू के एक निप्पल को अपने होंठो में भर लिया और उसे जीभ से चाटने लगी. लालू के धक्को के साथ अब शबाना भी अपनी कमर हिला हिला कर उसका भरपूर साथ दे रही थी. लालू को नीचे से धक्के मरते हुए 10 मं से ज्यादा हो गए थे. शबाना भी अब अपनी अपनी छूट को हर धक्के के साथ सिकोड़ कर लालू के लुंड को घर्षण करने का ज्यादा मौका दे रही थी. लालू और शबाना एक रेपिस्ट और बंग विक्टिम दोनों एक दुसरे के साथ वास्ता के एक अलग संसार में खो गए थे. लालू के लुंड के घर्षण को झेलते झेलते शबाना ने अचानक से अपना पूरा भर लालू के सीने पर छोड़ दिया और उसका मतलब साफ़ था की शबाना ने एक रात में तीसरी बार अपना ओर्गास्म प् लिया था पर लालू अब भी नहीं झाड़ा था पर शबाना की छूट में भरे खून और कामरुस की मिली जुली गर्माहट ने उसके लुंड को भी उत्तेजना के चरमबिंदु पर पंहुचा दिया.

लालू: आअह्ह्ह ममममम साली '. रंडी मई निकलने वाला हु तेरी छूट को भर दू अपने बीज से जल्दी बोल.

शबाना: है भर दो प्लीज निकल दो मेरे अंदर.

लालू: पहले मुझे अपना ***** मालिक बोल मुझसे रिक्वेस्ट कर जल्दी. तू मेरी '. रंडी है की नहीं.

शबाना: मेरे ***** मालिक मई आपकी '. रंडी हु मुझे अपना बच्चा देदो मेरे मालिक. इस रंडी की कोख हरी कर दो. प्लीज मई रिक्वेस्ट करती हु.

शबाना की इस कामुक टेक्वेस्ट के साथ hi लालू के लुंड ने भी अपना अहंकार शबाना की छूट के अंदर छोड़ दिया. बरसो बाद एक बंज़र छूट में वीर्य की बाद आ गई थी. लालू के लुंड से निकले ढेर सरे वीर्य ने शबाना की छूट को अंदर तक भर दिया था. शबाना की छूट उसके छूट के खून उसके अपने कामरुस और लालू के वीर्य से पूरी तरह भर गई थी. और सीधा बैठे होने की वजह से उसकी छूट से लालू का वीर्य बहकर नीचे आ रहा था.

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उस वीर्य में हलकी लालिमा भी थी जो इस बात का सबूत थी की ये एक वर्जिन औरत की प्रथम चुदाई के बाद का वीर्य है जिसमे उसकी छूट की झिल्ली फटने के खून का रंग भी मिला हुआ है.

लालू भी निढाल सा बिस्तर पर लेट गया पर वो अब भी शबाना को अपनी बहो में भरे हुए था और उसका लुंड अब भी शबाना की छूट के अंदर था. शबाना की आँखों से भी आंसुओ की बुँदे लुढ़क लार लालू के सीने पर जा गिरी. वो खुश थी की इतना कुछ सहने के बाद उसे आखिरकार चुदाई का असली सुख मिल hi गया और एक गबरू मर्द के मूसल लुंड से निकला वीर्य से समागम करने का अवसर मिल hi गया. लालू ने उसके साथ अब तक जो कुछ भी करा पर आज उसने जो वडा करा उसे पूरा कर दिया. बस अब वो दिल से ये दुआ कर रही थी की ये वीर्य उसके गर्भ में एक बच्चे का रूप ले ले तो उसका ये सब सहना सफल हो जाए. लालू के वीर्य की आखिरी बूँद तक शबाना की छूट की गहराई में उतर चुकी थी धीमे धीमे उसके लुंड का आकर भी नार्मल होने लगा और पक्का की आवाज़ के साथ एकदम छोटा होकर उसका लुंड शबाना की छूट से बहार आ गया. छूट में वीर्य की गर्माहट के बाद शबाना को बहुत कास कर पेशाब लग रही थी वो उठने को हुई पर लालू ने अपनी बहो की पकड़ को ढीला नहीं करा.

लालू: क्या हुआ जानेमन चुदाई पूरी होते hi तुझे जाने की जल्दी हो गई लेती रह न आज रात मेरे साथ यही हल्का सवेरा होने पर चली जाना. कुछ देर यही मेरे ऊपर लेती लेती सो जा.

शबाना: नहीं मई जा नहीं रही मुझे टॉयलेट आ रहा है जरा बाथरूम में जाकर कर अउ.

लालू: बस इतनी सी बात टॉयलेट तो मुझे भी लगी है बड़ी ज़ोर से पर तुझसे अलग होने का मन नहीं कर रहा.

शबाना: दो मं के लिए छोड़ दो टॉयलेट करके वापस आ जाउंगी.

लालू: नहीं मई नहीं जाने दूंगा तुझे दो मं के लिए खुद से दूर. एक काम कर तू मेरे ऊपर hi मूट ले मेरे लुंड के ऊपर hi मूट दे.

शबाना लालू की बात सुनकर हैरान रह गई की वो इस तरह अपने बिस्तर पर लेते उसे अपने ऊपर hi मूतने को कह रहा है.

शबाना: मज़ाक मत करिये दो मं के लिए छोड़ दीजिये प्लीज.

लालू: मैंने कहा न तुझे मूतना है तो मेरे ऊपर मूट दे मई मज़ाक नहीं कर रहा.

शबाना: सच में मुझे बहुत कास कर टॉयलेट लगी छोड़ दो निकल जाएगी आपका बिस्तर गीला हो जाएगा.

लालू: तो मई क्या किसी और भाषा में बोल रहा हु तुन्हे मूतने से मतलब है न तो मुतो.

शबाना ने अपनी पेशाब रोकने की बहुत कोशिश करि पर लालू को छोड़ने को भी कहा पर आखिरकार लालू के लुंड पर मूतना शुरू कर दिया. शबाना की पाहाब की धार इतनी ज़ादा थी की लालू का पेट तक उसकी पेशाब से गीला हो गया. शबाना ने अपना पूरा मूट लालू के ऊपर hi खली कर दिया. शबाना के मूतने के बाद.

लालू: जानेमन पेशाब तो मुझे भी लगी है.

शबाना: मुझे तो जाने नहीं दिया अब खुद जा रहे हो मूतने.

लालू: मैंने कब कहा की मई मूतने जा रहा हु.

शबाना: मतलब

लालू: मतलब मई भी यही मूतूंगा नीचे से तेरे ऊपर.

शबाना: छी कितने गंदे हो बिस्तर पर hi मूट लोगे.

लालू: अभी जो तू एक गैर मर्द से चूड़ी है वो बड़ा पाक साफ़ काम है न.

लालू की इस बात का शबाना के पास कोई जवाब नहीं था. लालू ने शबाना को हल्का सा उचका कर नीचे से अपना लुंड उसकी छूट के मुहाने पर रखा और उसकी छूट के अंदर मूतना शुरू कर दिया वो मूट उसकी छूट से निकलकर लालू के पेट से रिस्ता हुआ नीचे बिस्तर के गड्डो को गीला कर रहा था. उनके पुरे बदन पूरा बिस्तर उनके मूट में गीला हो चूका था. पर अब तो दोनों मूट hi चुके थे तो अब क्या फायदा. शबाना यही लालू के मूट से भीगे पेट पर लेती रही और लालू भी उस भीगे बिस्तर पर शबाना को अपनी बहो में भरे लेता रहा.

इतने लम्बे चले चुदाई सेशन में बाद इतनी थकावट के वजह से लेते लेते कम उन्हें नींद आ गई उन्हें पता भी नहीं चला. शबाना अपनी बंद आँखों में एक बच्चे का सपना लिए वही लालू के सीने पर लेती लेती सो गई.

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जिस वक़्त नेहा शबाना को धामु के दरवाज़े पर छोड़ कर वापस आई थी.

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कमरे में आने के बाद

नेहा: चलो अच्छा है अब शबाना दी और धामु के बीच सब सही चल रहा है बस अब ब्बागवान की दया से धामु उन्हें एक बच्चा दे दे.

नेहा को अंदाज़ा hi नहीं था की अगले कुछ घंटो में धामु तो नहीं पर लालू शबाना की कुंवारेपन की दीवार को तोड़ कर उसकी छूट को अपने वीर्य से भर देने वाला है.

शबाना के बारे में रीलैक्स हो जाने के बाद नेहा को उस स्ट्रेंजर के मश्ग का ख्याल आया जो उसे नीतू के मश्ग के साथ hi दुसरे वाले मोबाइल पर मिला था. स्ट्रेंजर के मश्ग के साथ उसे उसे पैकेट का भी याद आया जो वो आज सुबह किचन के बहार से लेकर आई थी जब उसने रामु काका को अपनी धोती में झड़ने को मज़बूर कर दिया था. नेहा ने अपने कपड़ो में छिपाए उस पैकेट को बहार निकला, सुबह से तो उसे इस पार्सल को खोलकर देखने का मौका hi नहीं मिल पाया था. कल उसे दुल्हन के लाल जोड़े में उस कॉटेज में बुलाया था पता नहीं इस पार्सल अब क्या निकलने वाला था. ये तो वो जानती थी की हो न हो इसमें भी कोई ड्रेस होगी और मई बे पॉसिबल कोई हॉट ड्रेस जैसे कोई सेक्सी सी निघ्त्य या कोई सेक्सी साड़ी कुछ भी हो सकता है.

नेहा ने वो पार्सल खोला और उसमे मौजूद ड्रेस को देख उसकी आँखे फटी की फटी रह गई. उसने एक हॉट ड्रेस की कल्पना तो की थी पर जो ड्रेस उस पार्सल के अंदर थी वो तो उसकी कल्पनाओ से भी परे थी. उस पार्सल में एक ब्लैक स्टॉकिंग का सेट था, आम लोग तो शायद स्टॉकिंग से परिचित भी नहीं होंगे पर चूँकि नेहा एक इरॉटिक वर्ल्ड में एक्टिव रहती है इसलिए स्टॉकिंग उसके लिए नै चीज़ नहीं थी.

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स्टॉकिंग सेक्स में पैशन को बढ़ाने के लिए पहनी जाने वाली ड्रेस है जिसमे सेक्सी स्किन टाइट ब्रा अस्स रेवेलिंग पंतय एंड और पैरो को घुटनो से ऊपर तक ढके लेग्गिंग होती है जो मोस्टली ट्रांसपरेंट होती है. स्टॉकिंग्स तीन तरह की होती है फुल ओने पीेछे, तवो पीेछे या थ्री पीेछे, नेहा को जो स्टॉकिंग मिला था वो एक तवो पीेछे स्टॉकिंग था बेहद सेक्सी बेहद हॉट. ये ड्रेस मोस्टली विदेशो में लड़किया खुद को हॉट दिखने के लिए पहनती है पर कपड़ो के नीचे. पर नेहा के लिए पार्सल में केवा और केवल ये सेमि ट्रांसपेरेंट स्टॉकिंग सेट था और मश्ग में क्लेअर्ल्य मेंशन था की पार्सल में जो ड्रेस है नेहा की सिर्फ और सिर्फ वही पेहेन कर आज है. स्टॉकिंग एक कपड़ो एक अंदर पहने जाने वाली ड्रेस थी बिना कपड़ो के सिर्फ स्टॉकिंग तीन तरह के लोग पेहेनते थे थाईलैंड मलेशिया बैंकाक जैसे देशो में स्त्री लाइट के नीचे कस्टमर के इन्तेर्जार में कड़ी रहने वाली प्रोस्टीटूट्स,

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दूसरी स्ट्रिप क्लब्स में शराब सर्वे करने वाली वैट्रेस्सेस या वह पोल्ल डांस करने वाली बार डांसर्स,

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तीसरी पोर्न वीडियोस में अलग अलग मर्दो से अलग अलग पोजीशन में छोड़ने वाली पोर्न एक्ट्रेसेस.

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स्टॉकिंग जैसी ड्रेस से शहर में रहने वाले या इस स्टोरी को पड़ने वाले मर्द भी शायद नाम से परिचित न हो ऐसे में एक गाँव में रहने वाले मर्द के पास स्टॉकिंग होना सच में लाजवाब बात थी. पर जिस बन्दे के पास बड़सम का इतना सामन हो उसके पास स्टॉकिंग्स होना कोई बड़ी बात नहीं. नेहा भी सोचने को मजबूर हो गई की ये स्ट्रेंजर जो कोई भी है बहुत शौक़ीन किस्म का बाँदा है. साथ hi साथ नेहा ये भी सोच रही थी की ये बाँदा भी उआकी तरह अलग अलग फैंटाइस का शौक़ीन है तभी तो कल उसने उसे दुल्हन का लिबाज़ भेजा उसे सज संवर कर आने को कहा और आज ये स्टॉकिंग्स मतलब कल दुल्हन बनाया और आज दुल्हन से सीधे प्रोस्टीटूटे बना दिया. उस पार्सल में ड्रेस के साथ ब्लैक हाई हील्स सैंडल्स भी थे जो प्रोस्टीटूट्स ऐसी ड्रेस के साथ पहनती है और उसके नीचे एक लेटर भी था. नेहा ने वो लेटर उठाकर पड़ना शुरू करा.

मास्टर:

Hello माय स्लेव तो तू ये पार्सल भी लेन में सफल हो गई और आज रात की अपनी ड्रेस कैसी लगी. इस ड्रेस में तू एकदम हाई क्लास कॉलगर्ल लगेगी. आज रात तुझे यही ड्रेस पेहेन कर उसी कॉटेज में आना है. और ये ड्रेस मतलब ये ड्रेस न कुछ ऊपर न कुछ नीचे. और हां अच्छे से मेकअप करके आना एक किसी कॉलगर्ल की तरह डार्क रेड लिपस्टिक गहरा काजल गालो पे गदा रूस. रात 12 बजे मई तुझे मश्ग करूँगा जब तू तैयार हो जाना तो मुझे रिप्लाई कर देना. और हां जब आज रात के लिए तू एक प्रोस्टीटूटे बनना मंज़ूर करती है तो तुझे पूरी तरह प्रोस्टीटूटे बनना होगा, और प्रोस्टीटूटे की छूट किसी एक लुंड की नहीं होती हर रात एक नया लुंड उसकी छूट में होता है कई कई बार तो एक रात में कई लुंड की हवस शांत करती तो आज मेरे साथ मेरा एक दोस्त भी तेरे जिस्म का मज़ा लूटेगा. अगर तू इसके लिए तैयार हो तभी उस कॉटेज की तरफ कदम बढ़ाना वर्ण ऑफर फिर खुला है चुपचाप हार मान कर इस खेल से बहार होल. ी ऍम वेटिंग फॉर ुर रिप्लाई माय स्लेव.

नेहा ने एक पल को गहरी सांस ली और मन में आज रात के बारे में सोचने लगी: मतलब आज रात वह एक नहीं दो मर्द होंगे जो शायद मेरे जिस्म के हर छेड़ को एक साथ छोड़ेंगे मेरी छूट मेरी गांड मेरा मुँह. और शायद आज रात काफी देर तक मेरे जवानी को मसला जाएगा उसका मज़ा लूटा जाएगा. ऐसा नहीं था ये उसके लिए नया था ऐसा वो पहले भी कर चुकी थी और वो भी दो से ज़ादा मर्दो के साथ पर वो शहर के मर्द थे ये गाँव के देहाती हट्टे काटते मर्द, पर क्या मई एक साथ दो लुंड को झेल पाऊँगी. मई उनसे रिक्वेस्ट कर सकती हु की वो एक एक करके मुझे चोदे पर जिस तरह का खेल मई खेल रही बड़सम और डोमिनेशन का क्या वो मेरी बात मानेगे. फैसला मुझे करना है की क्या मई इसके लिए मेंटली और फिजिकली तैयार हु.

नेहा गहरे विचारो में डूब गई.

नेहा ने अपने मोबाइल में ऐसा hi डबल पेनेटेरटीओं वाला थ्रीसम वीडियो निकला जिसमे एक जवान दुबली पतली सेक्सी सी लड़की दो मर्दो से एक साथ चुदवाती है. वो दोनों मर्द एक साथ उसकी छूट और मुँह अपने अपने लुंड से भर देते है एक उसके नीचे लेट कर नीचे से उसकी छूट में लुंड दाल देता दूसरा उसके सामने खड़ा होकर उसके मुँह में लुंड घुसेड़ देता है.

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वो दोनों अपनी पोजीशन बदल बदल कर उस दुबली पतली लड़की कई तरह से छोड़ते है उस लड़की का बदन बुरी तरह झटके खता रहता है पर वो दोनों वेह्शी तरह से उसे चोदे जा रहे थे और उसने छोड़ने के बाद उसके जिस्म पर जगह जगह उसके मुँह और छूट गांड अपने अपने वीर्य से भर देते है. पर उसके बाद वो लड़की बजाए दर्द के बड़े इरोटिक अंदाज़ में उन दोनों के लुंड साफ़ करती एक अलग तरह का मज़ा उसकी आँखों में नज़र आ रहा था जैसे आज उसने अपने जीवन कज सबसे बेहतरीन चुदाई की हो.

ये वीडियो देख कर नेहा भी अंदर hi अंदर एक्ससिटेमेंट फील करने लगी. वो उस लड़की में खुद को इमेजिन करने लगी की जब दो मर्द उसे इस तरह रगड़ रगड़ कर छोड़ेंगे तो क्या मज़ेदार एक्सपीरियंस होगा. उसे इस चुनौती में एक नै फंतासी एक नया रोमांच नज़र आने लगा. और दो मर्द से छुड़वाना अब उसे कोई इतना बड़ा टास्क नहीं नज़र आने लगा बल्कि उसे इसमें एक अलग एक्ससिटेमेंट नज़र आने लगा. वो अंदर से काफी एक्ससिटेड हो गई और एक्ससिटेमेंट में कपड़ो के ऊपर से अपनी छूट को मसलने लगी और मन hi मन उसने फैसला कर लिया की वो यहाँ से पीछे नहीं हटेगी बल्कि आज एक नहीं दो मर्दो से एक साथ छुड़वाने का मज़ा लेगी. बड़े दिन से उसने कोई थ्रीसम सेक्स नहीं करा था तो आज उसने इस थ्रीसम सेक्स का मज़ा लेने का फाइनल फैसला कर लिया और खुद को आज रात के थ्रीसम सेक्स के लिए तैयार करने लगी.

नेहा ने अपने सरे कपडे उतर दिए और वो सेक्सी स्टॉकिंग्स पेहेन्ने लगी.

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स्टॉकिंग्स उसके लिए नै नहीं थी वो इससे पहले भी ऐसी hi ड्रेस पेहेन चुकी थी पर आज एक गाँव में ऐसी ड्रेस पेहेन्ने का ये उसका पहला एक्सपीरियंस था. नेहा वो स्टॉकिंग्स पेहेन ली ये एक तवो पीेछे स्टॉकिंग्स थी जिसमे ब्रा का हिस्सा अलग था और नीचे लेग्गिंग्स पंतय से हुक द्वारा आत्ताच थी जिन्हे अलग करके इसे थती पीेछे भी बनाया जा सकता था. लेग्गिंग्स सेमि ट्रांसपेरेंट जिसमे उसकी सेक्सी टाँगे और भी ज्यादा हॉट लग रही थी और पंतय बेहद महीन कपडे की बानी थी और बेहद छोटी की नेहा के चूतड़ों को आधा धक् कर hi ख़तम हो जाती और पंतय की इनर लाइन भी इतनी पतली थी नेहा के चूतड़ों की दरार में घुस गई थी जिस वजह उसके आधे से ज्यादा चूतड़ खुले थे की बिना नंगा करे hi उसके चूतड़ नंगे से कम नहीं थे. सामने से वो पंतय जिस तरह व् शेप में उसकी छूट को ढके थी वो भी अपने आप में बेहद इरोटिक और हॉट था. अगर ब्रा की बात करे तो ब्रा भी अंदर से पैडेड थी जिस वजह से ब्रा के अंदर नेहा की छोटी छोटी छछियो का आकर बहुत मस्त नज़र आ रहा था और पीछे से ये ब्रा बस एक हुक से बंधी थी.

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वो ड्रेस पहनकर नेहा ने अपनी मेकअप किट से डार्क रेड लिपस्टिक निकली और शीशे के सामने बैठ कर उसे अपने होंठो पर लगाने लगी.

लिपस्टिक लगाने के बाद नेहा ने अपनी आँखों पर काजल लगाया, काजल लगाकर उसकी आँखे और भी सुन्दर लगने लगी.

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इसके बाद नेहा ने अपने गालो पर गुलाबी रूस लगाया जिससे उसके गुलाबी गुलाबी गाल और भी ज्यादा गुलाबी हो गए. पूरी तरह तैयार होने के बाद नेहा एक नज़र खुद को आईने में देखा, नेहा इस ड्रेस में सच में किसी हाई क्लास प्रोस्टीटूटे से कम नहीं लग रही. नेहा ने एक बार मन hi मन सोचा की आज वो क्या से क्या बन गई कभी सेक्स की बात सुनकर hi शर्मा जाने वाली नेहा आज इस कदर बेशरम हो चुकी है की एक प्रोस्टीटूटे की तरह खुद को तैयार करके दो मर्दो से छुड़वाने के लिए उनकी बुलाई जगह पर जा रही है वो भी तब जब उन दोनों में से एक को भी नहीं जानती. नेहा यही सोच रही थी की वक़्त ने उसे किस कदर बेशरम बना दिया था पर अब ये सोचने के लिए बहुत देर हो चुकी थी वो फंतासी की इस दुनिया में काफी आगे बाद चुकी थी जहा से वापस लौटने का फिलहाल कोई रास्ता नहीं था.

तैयार होकर नेहा ने अपने मोबाइल से उस स्ट्रेंजर को मश्ग कर दिया.

नेहा: ी ऍम रेडी

मास्टर: ी ऍम आल्सो रेडी एंड माय फ्रेंड आल्सो वैरी एक्ससिटेड तो सी ा प्रोस्टीटूटे. और सुन मैंने उसे ये नहीं बताया की तू शादी में आई एक गेस्ट है मैंने उसे यही बताया की मैंने सच में एक कॉलगर्ल बुलवाई है. तो यहाँ आकर कल रात की तरह शर्माने मत लग्न. बेहवे लिखे ा कॉलगर्ल, गोत आईटी

नेहा: Ok

मास्टर: तो चल जल्दी आ जा वे अरे वेटिंग फॉर ु. उसी कॉटेज में आ जा आज मई तुझे तेरी ज़िन्दगी का एक नया एक्सपीरियंस देने वाला हु जो तूने सपने में भी नहीं सोचा होगा. कल तो बस ट्रेलर था असली बड़सम क्या होता है वो मई तुझे आज बताऊंगा.

नेहा: क्या मतलब ऐसा क्या करने वाले हो.

मास्टर: साडी बाते फ़ोन पर hi जान लेगी तो वह आकर क्या करेगी, क्यों क्या दर लग रहा है अगर दम न हो आने की तो मन कर दे कोई ज़बरदस्ती नहीं है.

चैलेंज से पीछे हटना तो वैसे भी नेहा की फितरत नहीं थी सो बिना किसी दर और झिझक के उसने हां कर दिया.

नेहा: डरना मेरी फितरत नहीं ी ऍम किंग.

मास्टर: ग्रेट थान लेटस के तो ुर मास्टर.

इतना कह कर वो ऑफलाइन हो गया. वो सेक्सी सी स्टॉकिंग्स पेहेन कर नेहा बहार जाने को हुई पर अचानक उसे कल रात की बात याद आ गई जब उस स्ट्रेंजर ने उसे नंगा करके वह खुले में यही छोड़ दिया था उसे वापस जाने के लिए कुछ भी पेहेन्ने को नहीं दिया था और उसे वह से नंगा hi वापस अपने कमरे में आना पड़ा था और ऐसे रास्ते में उस गूंगे जमादार भीमा ने उसे देख लिया था वो तो वो वह से भाग आई वर्ण टट्टी साफ़ करने वाला एक गन्दा संडे जमादार उसे उस हालत में चोदे बिना नहीं छोड़ता. उसने मन hi मन सोचा की कही आज भी उस स्ट्रेंजर ने उसे कल रात की तरह नंगा करके छोड़ दिया तो उसे फिर वह से नंगे वापस आना होगा ऐसे में अगर आज फिर हस जमादार ने उसे नंगा देख लिया तो आज वो उसे बिना चोदे नहीं छोड़ेगा. इसके अलावा किसीने भी उसे इस तरह उन हवेली में नंगे घुमते देख लिया तो उसे गॉसिप मेटेरियल बनते देर नहीं लगेगी इस बारे में कुछ सोचना होगा. नेहा को आईडिया आया उसने अपने कपड़ो में से एक शार्ट स्कर्ट निकली और उसे उस स्टॉकिंग्स के ऊपर पेहेन लिया और एक पॉलीबाग भी अपने रख लिया और कमरे से बहार आ गई.

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नेहा ने एक नज़र यहाँ वह देखा सब तरफ सन्नाटा पसरा था. नेहा हवेली के बरामदे से होती हुई मैंगते तक आ गई बहार सर्वेंट क्वार्टर की तरफ कोई चहल पहल नहीं थी सब शायद सो गए थे. खैर उसे इतना सुकून था की इस वक़्त को हवेली के मैं गेट पर एक कॉलगर्ल की तरह स्टॉकिंग्स पहने नहीं कड़ी थी एक शार्ट सही पर ढंग की स्कर्ट पहने थी. नेहा वह से उस जमादार की झोपडी की तरफ चल दी जिसके पीछे बानी झाड़ियों से उसे अंदर जाना था. नेहा जब उस जमादार की झोपडी के करीब पहुंची तो वो थोड़ा रिलैक्स हुई क्युकी कल की तरह आज भी जाते टाइम भीमा वह नहीं था. नेहा वह से उन झाड़ियों के अंदर दाखिल हो गई. उन पेड़ो के बीच पहुंचकर नेहा ने अपनी पहनी हुई स्कर्ट उतर कर उसे उस पोलुबाग में रखकर वही एक पेड़ की दाल पर उसे टांग कर अच्छे से बाँध दिया. अब नेहा रिलैक्स थी की अगर आज भी उसे नंगा छोड़ दिया गया तो वो ये स्कर्ट पेहेन कर अपने कमरे तक पहुंच जाएगी. अब नेहा केवल उन स्टॉकिंग्स में थी पर फिलहाल उसे यहाँ देखने वाला कोई नहीं था.

उस स्टॉकिंग्स में नेहा उन पेड़ो के बीच से होती हुई उस तालाब के एक छोर पर आ गई और तालाब के ऊपर बना था वो लकड़ी का पल जिसके दूसरी छोर पर वो कॉटेज था जहा वो स्ट्रेंजर उसका इंतज़ार कर रहा होगा. जहा पता नहीं वो स्ट्रेंजर नेहा को बड़सम का कौन सा नया सबक सीखने वाला था. क्या आज वो अपना चेहरा नेहा के सामने उजागर करेगा या आज भी वो नेहा की आँखों में पट्टी बाँध कर hi नेहा की जवानी का मज़ा लूटेगा. और उसका वो दोस्त कौन होगा क्या वो भी उसकी तरह हत्ता कट्टा और एक तगड़े लुंड का मालिक होगा. मन में कई तरह सवाल लिए नेहा ने अपने कदम उस लकड़ी के पल पर बड़ा दिए जिसके उस पार एक बहुत बड़ा सरप्राइज उसका इंतज़ार कर रहा था जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी.
 
बड़सम कॉटेज

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एक सेक्सी स्टॉकिंग्स पहने बोल्ड एंड ब्यूटीफुल नेहा उस वोडेन कॉटेज के गेट पर एक बार फिर कड़ी थी. अंदर घुसने से पहले उसके ज़हन में कल रात के दृश्य ताज़ा हो गए जब बीच कमरे में उसे हाथ ऊपर बांध कर खड़ा कर दिया गया था, कैंची से काट काट कर उसके कपड़ो को उसके शरीर से उतरा गया था, उसके जिस्म को जगह जगह से बर्फ से इस कदर ठंडा करा गया था की उसकी छूट बर्फ से सुन्न पद गई थी, उसे नंगा करके कुत्ते का पत्ता पहना कर चौपाया चलते हुए मोटवाने के लिए कॉटेज के बहार लाया गया था, वह उसे कुत्ते की तरह टांग उठा कर मुट्वाया गया था, उस स्ट्रेंजर ने वही उसके ऊपर मोटा था, उसे उल्टा करके स्टैंडिंग 69 पोजीशन में लुंड चुसवाया गया था, और फिर वही उसे उसी तरह नंगी हालत में वापस जाने के लिए छोड़ दिया गया था.

कल जो हुआ वो तो बस बड़सम का एक छोटा सा ट्रेलर था असली बड़सम तो आज होना था जिसके बारे में नेहा को पहले से जगह कर दिया गया था. नेहा पुरे होशो हवस में बड़सम का मज़ा लूटने ये ड्रेस पेहेन कर यहाँ आने को भी तैयार हो गई थी. नेहा ने धीमे से उस कॉटेज का दरवाज़ा खोला, अंदर कमरे में अँधा घुप्प अँधेरा था कुछ नहीं दिखाई दे रहा था. नेहा के अंदर आते hi पूरा कमरा रौशनी से जगमगा गया पूरा कमरा डिस्को लाइटिंग से जगमगा रहा था और कमरे के बीचो बीच एक बड़ा सा पोल्ल खड़ा था जो पोल्ल डांस में उसे करा जाता था.

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उस पोल्ल के पीछे एक ट्रांसपेरेंट कर्टेन था जिसके पीछे कोई आदमी एक बड़े से सोफे पर बैठा सिग्रेटे के काश भर रहा था पर बीच में उस कर्टेन की वजह से उसका चेहरा नहीं दिख रहा था ये वो स्ट्रेंजर है या उसका दोस्त कहा नहीं जा सकता था. वह का सेटअप कमरे में जगमति डिस्को लाइट बीच में खड़ा पोल्ल और अपनी सेक्सी स्टॉकिंग ड्रेस देख कर नेहा समझ गई की आज उसे यहाँ पोल्ल डांस करना होगा पर इससे पहले कुछ सोचती समझती या कहती परदे के पीछे बैठे उस शिक्षा ने hi सब बता दिया.

स्ट्रेंजर: आ गई और वो भी ये ड्रेस पहनकर एकदम एक हीघक्लास्स प्रोस्टीटूटे लग रही है. तू अपनी फैंटाइस पूरी करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है सच में मान गया तुझे. कमरे में लगी ये लाइट्स और ये पोल्ल देख कर तो तू समझ hi गई होगी की तुझे क्या करना है. क्यों समझ गई की नहीं.

नेहा: है थोड़ा बहुत.

स्ट्रेंजर: अच्छा क्या समझी.

नेहा: पोल्ल डांस मुझे यहाँ पोल्ल डांस करना होगा.

स्ट्रेंजर: वाह तू तो समझ गई पर ये पोल्ल और डिस्को लाइट देखकर कोई चुटिया भी समझ जाएगा की यहाँ तुझे पोल्ल डांस तो करना hi होगा. पर पोल्ल डांस का भी अपना एक कामुक स्टाइल होता है और मुझे वो कामुकता देखनी है यहाँ गाँव में एक से बढ़कर एक धनदेवाली है जो हर तरह का मुजरा कर लेती है पर पोल्ल डांस किसी को नहीं अत मुझे वो देखना है. तू तो शहर की रुंडी है तुझे देख कर मई दावे से कह सकता हु की तू ज़बरदस्त पोल्ल डांस कर लेती होगी. तो तुझे ऐसा डांस करना है की सिर्फ डांस देख कर hi मेरा खड़ा हो जाए.

नेहा: एंड ुर फ्रेंड जिसके बारे में लेटर में लिखा था. वेयर इस हे?

स्ट्रेंजर: तुझे बड़ी जल्दी है उससे मिलने की एक लुंड से मन नहीं भर रहा तेरा पहले ढंग से मुझसे तो मिल ले फिर उससे भी मिल लेना वो भी कुछ देर में अत hi होगा तब तक अपना पोल्ल डांस दिखा कर मेरा खड़ा कर. और हां तुझे सिर्फ पोल्ल डांस hi नहीं करना है साथ में वो बड़सम का सामन भी इरोटिक तरीके से इस्तेमाल करना है जो मई तुझे दूंगा.

उस स्ट्रेंजर ने रिमोट से एक बटन दबाया और कमरे में रखे स्टीरियो सिस्टम में गाना बजना चालू हो गया, गाना भी उसने बड़ा चुन के चलाया था जो इस सिचुएशन को परफेक्ट सूट करता था, महँ चुम्बन सम्राट इमरान हाश्मी की मूवी मर्डर 2 का-

यह.. रात रुक जाये... बात थम जाये..

तेरी बहून में

ख्वाइशें जगी hain.....Pyase प्यासे लबों पे

खुद को जला दूँ

तेरी आहों में

आगोश में.. मेरे आज समः जा..

जाने क्या होना है कल

आ ज़रा

करीब से जो पल मिले नसीब से

आ ज़रा

करीब से जो पल मिले नसीब से जिले…

गाना बजने के साथ hi नेहा उस डांसिंग पोल्ल नज़दीक और झटके दिखते हुए उस पोल्ल के इर्द गिर्द नाचना शुरू कर दिया. नेहा ने मूवीज में हेरोइनेस को पोल्ल डांस करते देखा था उन्ही को याद करते हुए नेहा उन डिस्को लाइट्स के नीचे उस पोल्ल के इर्द गिर्द अपने डांस मूव्स दिखा रही थी और अदाओ के मामले में तो वैसे भी यहाँ उसका कोई सनी नहीं था. कभी नेहा उस पोल्ल में झूलते हुए नीचे तक चक्कर खा जाती तो कभी अपनी कूल्हे परदे के उस पार बैठे के शिक्षा की तरफ गोल घुमा कर हवा में जीरो बना देती.

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नेहा अपने मदस्त कर देने डांस वाले में व्यस्त थी की तभी उस शिक्षा ने अपने पैरो के पास पड़ी एक डोरी को उठाया जिसका दूसरा सिरा कमरे की एक दीवार पर किसी खूटी पर टेंगा एक कपडे से बंधा था. एक झटके में उस शिक्षा ने वो कपडा खींच लिया. कपडे के ज़मीन पर गिरते नाचती हुई नेहा की नज़र भी उस तरफ गई. जिस चीज़ पर वो कपडा टेंगा था वो दरअसल कोई खूटी नहीं थी बल्कि वो एक वाल डिलडो था जिसे दीवार पर चिपका कर लड़किया अपनी कमर को आगे पीछे करके खुद hi अपनी गांड और छूट मार सकती है.

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नेहा ने भी इस तरह के डिलडो का कई बार इस्तेमाल करा था. दीवार पर लगे वाल डिलडो को देख नेहा को भी समझ आ गया की ये उसके लिए लगाया गया है. नेहा ने पोल्ल डांस करते करते hi उस स्ट्रेंजर की तरफ देखा और अस उसुअल उस स्ट्रेंजर ने हाथ के इशारे से नेहा को उस डिलडो की तरफ जाने को कह दिया.

नेहा भी अपनी अदाओ के जलवे दिखती सीधे सीधे न जाकर चौपाया बन कर दीवार पर लगे उस डिलडो की तरफ चल दी.

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उसके करीब पहुंच कर भी नेहा ने अपना बदस्तूर जारी रखा क्युकी गाना अब भी बज रहा था. बलखाते बलखाते नेहा ने अपनी जीभ निकल कर दीवार पर लगे उस डिलडो को चाट लिया और छत्ते छत्ते hi उसे मुँह में भर लिया. और उसे मुँह में भर कर चूसने लगी. कुछ देर चूसने के बाद नेहा घूम गई और पीछे हाथ ले जाकर अपनी छूट के ऊपर से पंतय को हल्का सा साइड में किया और अपनी कमर को पीछे करके अपनी छूट की फैंको को उस डिलडो के सिरे से टच कर दिया और कुछ देर गाने के साथ बलखाती हुई अपनी छूट को उस डिलडो पर घिसने लगी. घिसते घिसते नेहा को भी मज़ा आ रहा था, अपनी छूट को घिसते हुए नेहा ने चेहर घुमा कर अपनी नशीली आँखों से परदे के पीछे बैठे उस स्ट्रेंजर को देखा जो अब हाथ में शराब का गिलास थामे नेहा को hi देख रहा था. और अगले hi पल नेहा ने अपनी कमर को पीछे कर आधे से ज्यादा डिलडो अपनी छूट में ले लिया. उस शिक्षा ने जाम अपने होंठो से लगाया और उस शिक्षा की तरफ देखते हुए नेहा ने एक और झटका पीछे को लिया और पूरा का पूरा डिलडो अपने अंदर ले लिया. और गाने की रिठाम के साथ अपनी कमर को तेज़ तेज़ आगे पीछे करते हुए उस डिलडो को अपनी छूट में अंदर बहार करना शुरू कर दिया.

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ख्वाब हूँ.... मैं तोह मखमली..

पलकों में ले जा मुझे

मैंने दिया मौका तुझे अजनबी…

होश में..... आये ना अभी

इक दूजे में hi कहीं

खोयी रहे तेरी मेरी ज़िन्दगी..

खामोशियाँ धड़कनों ki.....Suna.. जा

जाने क्या होना है कल

आ ज़रा

करीब से जो पल मिले नसीब से

आ ज़रा

करीब से जो पल मिले नसीब से जिले..

ये अंदाज़ा लगाना मुश्किल था की नेहा डांस करते करते चुद रही या चुड़ते चुड़ते भी डांस कर रही है पर नेहा डांस और चुदाई दोनों साथ साथ कर रही थी. डिलडो काफी मोठे आकर था और और छूट में रगड़ते हुए अंदर बहार हो रहा था. नेहा काफी देर से अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी, गाना एक बार ख़तम होकर दुबारा ख़तम होने को आया था इधर नेहा भी झड़ने के बेहद करीब थी और गाने की आखिरी लाइन के ख़त्म होने के कुछ पल बाद नेहा भी चौपाया बने बने ज़मीन पर हाथ टिकाए हुए गहरी गहरी साँसे लेने लगी. इसका मतलब साफ़ था उस वाल डिलडो ने अपना काम कर दिया था. झड़ने के बाद नेहा आगे होकर ज़मीन पर पीठ के बल लेट गई. दीवार पर चिपका वो डिलडो नेहा के जूस से गीला हो गया था. नेहा को रिलैक्स होने का थोड़ा वक़्त देने के बाद गाने के बोल एक बार फिर चालू हो गए. और गाने का दुबारा चालू होना इशारा था की काम अभी ख़तम नहीं हुआ बल्कि ये तो बहस शुरुआत है. हाथो का सहारा लेकर नेहा एक बार फिर उठ बैठी. और इसी के साथ उस स्ट्रेंजर ने एक चेयर पर लात मारी और वो सरकती हुई उस परदे को पार करती हुई नेहा के हिस्से में आ गई. नेहा ने उस चेयर को देखा वो एक डिलडो चेयर जिसमे डिलडो इनबिल्ट होती है और इसमें बैठने का मतलब है वो लुंड सीधा अपने अंदर तक लेना.

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नेहा की नज़र जब उस चेयर पर लगे डिलडो पर पड़ी तो पहली बार उसका डांस रुक गया और उसकी जान हलक में आ गई. क्युकी वो एक एक्स्ट्रा लार्ज साइज का डिलडो था लगभग 10 से 12 इंच का और देखने में बेहद मोटा. नेहा ने आज तक कई लुंड अंदर लिए डिलडो भी इस्तेमाल करे पर इतना लुम्बा कभी अपने अंदर नहीं लिया. ये डिलडो इतना ज्यादा बड़ा था की आराम से उसके पेट में उसकी नाभि तक पहुंच जाता. इतना ज्यादा अंदर लेना का सोच कर hi उसके रोंगटे खड़े हो गए.

स्ट्रेंजर: क्या हुआ लुंड का आकर देखकर गांड पहात गई क्या.

नेहा के पास फिलहाल कोई जवाब नहीं था क्युकी कही न कही वो सही कह रहा था उसकी गांड तो सच में पहात रही थी. पर अपने मन के भावो को छुपाते हुए नेहा बलखाते हुए गाने की धुनों पर नाचते हुए उस कुर्सी के करीब पहुंच गई. और अपनी हीलदार सांडले चेयर पर टिका कर उसके इर्द गिर्द चेयर डांस करने लगी. नेहा चेयर के इर्द गिर्द डांस कर hi रही थी की परदे के पीछे से उस स्ट्रेंजर ने गाना रोक कर तेज़ आवाज़ में चिल्लाकर कर कहा.

स्ट्रेंजर: बैठ इस्पे.

नेहा का दिल ज़ोर ज़ोर से धड़कने लगा इतना बड़ा उसने कभी अंदर नहीं लिया था. उसे असमंजस में देख वो शिक्षा दुबारा चीखा.

स्ट्रेंजर: सुना नहीं बैठ इस्पे.

नेहा: ये बहुत बड़ा है.

स्ट्रेंजर: अफ्रीका के हब्सी का भी इतना बड़ा होता वो अघोरी देखा है उसका भी इतना hi बड़ा है और तू कौन सा वर्जिन है आधा तो ऐसे hi अंदर चला जाएगा और बचे आधे में तुझे वीरगिनती लूसे का एहसास होगा और ड्रामा न कर चल बैठ इस्पे.

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नेहा ने डरते सेहमते अपने दोनों पेअर चेयर के दोनों तरफ करके अपनी छूट उस डिलडो के ऊपर टिका दी और अपनी पंतय की स्ट्रिप को अपनी छूट के ऊपर से थोड़ा सा सरका उस बड़े से डिलडो का आगे का सिरा थोड़ा सा अपने अंदर लिया. और उसके आगे के सिरे को हल्का हल्का अपने छूट में आगे पीछे घिसने लगी.

स्ट्रेंजर: ये क्या कर रही है साली कुटिया तू तो खुद मज़ा ले रही है और अंदर ले इसे चल और नीचे बैठ हरामज़ादी.

उस शिक्षा का यु गली देना नेहा को एक किंकी फीलिंग तो दे रहा था पर डिलडो का आकर इतना ज्यादा बड़ा था की वह उसका एक्ससिटेमेंट भी फ़ैल हो गया था. पर फिर भी नेहा तो थोड़ा और नीचे बैठ कर वो आधा डिलडो अपने अंदर ले लिया. वो आधा डिलडो hi नेहा की छूट के अंतिम छोर तक पहुंच गया था जिस सीमा ताज आज तक नेहा ने किसी भी मर्द का अंदर लिया था पर अभी तो आधा और बाकि था. इससे ज्यादा अंदर लेना नेहा के बस की बात नहीं थी इससे ज्यादा अंदर लेने में उसे दर्द हो रहा था इसलिए वो ऊपर नीचे होकर इतना आधा लुंड hi अपनी छूट में अंदर बहार करने लगी.

स्ट्रेंजर: पूरा अंदर ले.

नेहा: नहीं ले सकती इससे ज़ादा अंदर नहीं जा सकता.

स्ट्रेंजर: मुझे मत सीखा औरत की छूट इतनी गहरी होती है की पूरा का पूरा हाथ अंदर चला जाए वर्ण इतना बड़ा बच्चा अंदर से कैसे निकलता है चल अंदर ले पूरा अंदर होना चाइये तेरे चूतड़ कुर्सी पर टच होने चाहिए. इतना बड़ा लुंड मैंने तेरे लिए खास मंगवाया क्युकी छोटे मोठे लुंड से तेरा क्या होता और तू यहाँ नखरे कर रही है.

नेहा: नहीं प्लीज और कुछ करवा लो ये नहीं ले सकती मई दुबली पतली हु इतना बड़ा अंदर नहीं ले पाऊँगी.

स्ट्रेंजर: साली तू ऐसे नहीं मानेगी मई जनता तू इतना बड़ा पूरा अंदर लेने में नखरा दिखाएगी इसलिए मैंने इसकी तैयारी पहले hi कर राखी थी.

उस आदमी ने एक दुसरे रिमोट का एक स्विच दबाया और स्विच दबाते hi नेहा को बिजली का एक जोरदार झटका लगा की उसके पेअर तक काँप गए जिस वजह से उसका बैलेंस लड़खड़ा गया और वो एक झटके के साथ उस डिलडो के ऊपर बैठती चली गई. और वो डिलडो नेहे की छूट की अंदरूनी फैंको को चीरता हुआ नेहा की बच्चेदानी तक पहुंच गया. पूरा कमरा नेहा की चीख से गूँज उठा. अब तक कमर हिला हिला कर गाने पर उत्तेजक डांस करने वाली नेहा दर्द से तड़प उठी. दर्द के मारे न उसे अब उठा जा रहा था न हिला. उसकी आँखों से दर्द भरे आंसू बह निकले थे. उसने कई मर्दो के साथ कई तरह से छुड़वाया था गांड भी मरवाई थी पर जो दर्द उसने आज महसूस करा वो बरदसाहट से बहार था. नेहा को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे वो अभी तक कुंवारी थी और अब जाकर उसकी विर्जिनिटी लूसे हुई है. उसने अपने पेट पर हाथ लगाकर देखा और अपनी नाभि से थोड़ा नीचे उसे उस आर्टिफीसियल लुंड की मौजूदगी का साफ़ एहसास हो रहा था.

नेहा उसी पोजीशन में वो पूरा डिलडो अपने अंदर लिए उस कुर्सी पर बैठी थी. और वो कुर्सी एक डिलडो चेयर होने के साथ साथ एक इलेक्ट्रिक चेयर भी थी जो बटन दबाने पर बिजली का एक हल्का बर्दाश्त करने वाला झटका मारती थी. और खली चेयर hi नहीं वो डिलडो भी इलेक्ट्रिक का एक हल्का झटका मारता था और इस वक़्त वो नेहा की छूट के अंदर था. और नेहा को उसी पोजीशन में रिलैक्स होता देख उस आदमी ने दूसरा स्विच दबाया जो डिलडो का था और नेहा को अपनी छूट के अंदर करंट का झटका लगा और एक बार फिर रात का सन्नाटा नेहा की चीख से गूँज गया.

स्ट्रागनेर: ऊपर नीचे करती रह ध्यान रख अगर तू धीमी पड़ी तो ये करंट का झटका तुझे तेज़ होने पर मजबूर कर देगा. इसलिए बिना रुके ऊपर नीचे होती रह.

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नेहा दर्द से तड़प रही थी पर फिर भी वो लगातार उस डिलडो पर ऊपर नीचे हो रही थी. नेहा जैसे hi थोड़ा रीलैक्स होती वो आदमी कभी कुर्सी का कभी डिलडो का स्विच दबा देता और नेहा चीखने को मजबूर हो जाती. वो आदमी कभी कुर्सी तो कभी डिलडो से नेहा को झटके दे रहा था और पूरा कमरा नेहा की चीखो से गूँज रहा था. नेहा दर्द में चीख रही थी और उसे चीखता देख वो आदमी मज़े में है रहा था. बड़सम का असली रूप क्या होता है इसका एहसास नेहा को आज हुआ था. जिस खेल को नेहा हलके में ले रही थी वो अब उसके बर्दाश्त के बहार जा रहा था. नेहा लगातार ऊपर नीचे हो रही थी पर फिर भी हर 40 सेक् में उसे एक झटका खाना पद रहा था. इलेक्ट्रिक शॉक्स ने नेहा को बेदम कर दिया था उसके पैरो में अब जान नहीं रही थी. उसकी आँखों का काजल बहकर उसके गालो तक आ गया था. और नेहा का दुबला पतला शरीर उन झटको को और बर्दाश्त नहीं कर सका और वो उसी डिलडो पर बैठे बैठे बेहोश हो गई.

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