A wedding ceremony in village - Page 4 - SexBaba
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A wedding ceremony in village

नाउ इतस हैट्रिक उपदटेस यानि बैक तो बैक थ्री सेक्स उपदटेस है जिनमे से पहला अपडेट आप सबकी फवौराते शबाना का है जो बस कुछ hi देर में धमाकेदार तरह से पोस्ट होने वाला है बाकि के उपदटेस कुछ दिनों के बाद पोस्ट होंगे पर हैट्रिक उपदटेस होने की वजह से ये कन्फर्म है की वो भी फुल ों पुरे सेक्स उपदटेस होंगे.
 
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इधर हवेली में शबाना जहा एक बार फिर धामु के इंतेज़्ज़र में थी पर आज रात दरवाज़ा खुलने पर उसने दरवाज़े पर धामु की बजाए शराब में धुत्त लालू को खड़ा पाया.

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शबाना को होने वाले खतरे का हल्का हल्का आभास हो गया था उसने दरवाज़ा बंद करने की कोशिश करि पर लालू ने अपने दोनों हाथों से उसे दरवाज़ा बंद करने से रोक दिया शबाना अंदर से दरवाज़ा बंद करने का दबाव दाल रही और बहार से लालू दरवाज़ा खोलने का और अचानक से लालू ने एक जोरदार लात दरवाज़े पर मारी शबाना औंधे मुँह निचे गिरी और लालू दरवाज़ा खोलकर अंदर आ गया. अंदर आकर उसने दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया लालू के तेज धक्के से शबाना ज़मीन पर गिरी पड़ी थी. लालू की आँखें शराब के नशे और बेज़्ज़ती के गुस्से में सुर्ख लाल हो चुकी थी. शबाना की ज़िन्दगी का सबसे बड़ा नाईटमेयर उसके सामने खड़ा था. शबाना चिल्लाने को हुई पर लालू ने उससे पहले hi अपना रुमाल उसके मुँह में ठूस दिया.

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और तीन चार तमाचे उसके गाल पर रसीद कर दिए शबाना का तो दिमाग घूम गया. शबाना इससे पहले थोड़े सेंस में आती लालू ने अपनी बेल्ट खोलकर उसके हाथों को पीछे करके बाँध दिया. हाथ बंधे और मुंह में कपड़ा ठुसे होने के कारण शबाना बेबस सी ज़मीन पर पड़ी थी उसके चेहरे पर खौफ साफ़ नज़र आ रहा था.

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देव बहार चौकीदारी कर रहा था नेहा अनजान थी की उसकी बेस्ट दोस्त के साथ क्या हो रहा है धामु बेबस था की उसे समझ hi नहीं आ रहा था की प्रताप और कुंदन उसे खींचकर वापस क्यों ले आए और शबाना की आँखे आंसुओ से भर आई थी ज़मीन पर गिरी हुई वो आज़ाद होने की हर संभव कोशिश कर रही थी पता नहीं लालू अब उसके साथ क्या करने वाला था.

शबाना बेबस सी लालू के सामने पड़ी हुई थी उसे अब भी यकीन नहीं हो रहा था की लालू इस हद तक गिर सकता है.

लालू- क्या हुआ साली अब झापड़ नहीं मारेगी मुझे साली दो टेक की रांड तू मुझे झापड़ मारेगी सबके सामने साली तेरे जैसी औरते तो हर रात मेरा बिस्तर गरम करती है.

शबाना कुछ बोलने की हालत में भी नहीं थी. उसकी आँखें बस आंसुओ से भारी थी जैसे लालू से दया की भीक मांग रही हो. पर लालू कोई भलमानुष… नहीं था जो यही उसे छोड़ देता. लालू उसके करीब आकर बैठ गया और उसके गालों को अपनी मुठी में दबाकर उसका चेहरा अपनी तरफ करा और गुस्से में उसे देखते हुआ शबाना के चेहरे पर थूक दिया. हर पल बड्ड से बद्दतर होती जा रही लालू की हरकतों ने शबाना को अंदर तक खौफ से भर दिया था.

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इतने पर hi लालू का गुस्सा शांत नहीं हुआ उसने शबाना को बालो से पकड़ा और उसे खींचता हुआ उसी बाथरूम के अंदर ले आया जहा आज शबाना ने सेक्स के तीन सूत्रा सीखे थे पर लालू आज उसे सेक्स का ये चौथा सूत्रा सिखने वाला था. लालू ने शबाना को वही बाथरूम की फर्श पर फ़ेंक दिया वो शबाना के साथ ऐसे ट्रीट कर रहा था जैसे बरसो की दुश्मनी निकल रहा हो.

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शबाना बाथरूम की फर्श पर बदहवास सी पड़ी थी और लालू उसकी इस हालत पर खड़ा मुस्कुरा रहा था. शबाना ने लालू की तरफ नज़र उठाकर देखा और उसकी आँखे खौफ से फैल गयी लालू अपनी पंत के हुक खोल रहा था. शबाना समझ रही थी की लालू अपनी पंत क्यों खोल रहा है और वो उसके साथ अब क्या करने वाला है उसने अपने हाथों को आज़ाद करने के लिए पूरा ज़ोर लगा दिया पर उसकी हर कोशिश बेकार थी. लालू ने अपनी पंत खोलकर निचे सरका दी और फिर अपना अंडरवियर भी हाथों से निचे कर दिया. शबाना ने अपने जीवन में पहली बार इतना सख्त और मजबूत लुंड देखा था.

शबाना यही सोच रही थी की लालू अब उसे छोड़ने वाला है तभी उसने अपना लुंड आज़ाद करा है. पर शबाना की अपेक्षा के विपरीत लालू शबाना के सामने मूतने की मुद्रा में खड़ा हो गया और शबाना इससे पहले कुछ समझ पति लालू ने उसके ऊपर मूतना शुरू कर दिया. लालू का पीला पीला पेशाब शबाना के गोर चित्ते बदन को ऊपर से निचे तक भिगो रहा था.

शबाना ने सपने में भी नहीं सोचा था की लालू अपनी बेज़्ज़ती का बदला उससे इस तरह से लेगा. शबाना ने आज भी निघ्टड्रेस पहनी थी पर ये निघ्त्य कल की निघ्त्य से भी ज्यादा उत्तेजक और कामुक थी जो उसने नेहा के कहने पर धामु को उत्तेजित करने के लिए स्पेशलय पहनी थी पर उसे क्या पता था की उसकी उत्तेजक निघ्टड्रेस आज धामु नहीं लालू को उत्तेजित करने वाली थी. आज लालू का गुस्सा उसकी उत्तेजना पर हावी था जिस वजह से शबाना की इतनी हॉट निघ्टड्रेस लालू के मूट से भीग चुकी थी.

लालू ने अपने मूट से शबाना को ऊपर से निचे तक भिगो दिया था यहां तक की उसके बाल भी अपने मूट से गीले कर दिए थे. ऐसा लग रहा था जैसे उसे अपने मूट से नेहला रहा हो. शबाना को खुद से घिन हो रही थी उसने सपने में भी नहीं सोचा था की कभी कोई उसके साथ ये सब करेगा उसके पति ने भी उसपर हाथ उठाया था पर इतनी जलालत इतनी बेज़्ज़ती उसकी कभी नहीं हुई थी. लालू ने शबाना के चेहरे को अपनी तरफ घुमाकर सीधा उसके मुँह पर पेशाब की धार मारी. शबाना ने अपनी आँखे तो बंद कर ली पर मुँह में कपड़ा ठूसा होने की वजह से वो चाह कर भी उसे बंद नहीं कर सकती थी और मुंह में ठुसे कपडे में बची जगह से पेशाब ृस्टि हुई उसके मुँह में समा रही थी वो अपना चेहरा हटाने की भरसक कोशिश कर रही थी पर लालू की पकड़ इतनी मजबूत थी की वो कुछ नहीं कर सकती थी.

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लालू की पेशाब उसके मुंह से होती हुई उसके हलाक में समा रही थी और पेशाब का खट्टा खट्टा स्वाद उसके ज़हन में अंदर तक उतार रहा था. उसके एक झापड़ ने उसे आज लालू का पेशाब पीने पर मजबूर कर दिया था. लालू ने अपना पूरा मूट शबाना के ऊपर खाली कर दिया. शबाना बुरी तरह से चिल्लाना चाहती थी पर गूंगू की आवाज के अलावा वो अपने मुंह से कुछ नहीं बोल पा रही थी.

लालू- आज मूतने में जो मजा आया वो आज से पहले कभी नहीं आया. जब टॉयलेट सीट इतनी चमकदार और गोरी चिट्टी हो तो उसे गंदा करने में उतना hi ज्यादा मजा आता है. मैं जनता हूँ तू तेज आवाज में चिल्लाना चाहती है मन hi मन मुझे बहुत गालिया दे रही होगी पर अभी तो ये तेरे बुरे सपने की शुरुआत है अभी तो तुझे बहुत कुछ सहना है मेरी जान या ये कहु मेरी रांड. सच कहता हु अगर तू यहां धांडे पर बैठ जाए तो कुछ hi महीनो में करोड़पति बन जाए तेरे जैसी माल के साथ कोई भी एक रात गुजरने के लाखो दे दे कहा तू भी उस जनखे के चक्कर में अपनी ज़िन्दगी खराब कर रही है. शहर में चकलाघरों में मेरी अपनी पहचान है तू कहे तो तेरी वहाँ सेटिंग करवा दू जब अपने हिजड़े पति से फ्री हुआकर वहाँ तेरे लिए ग्राहक करेंगे कर दिए जाएंगे उन्हें खुश कर और अपनी ज़िन्दगी ऐश से जी. वैसे मैं तो आज से तेरा परमानेंट ग्राहक हु hi अब जब भी शहर आऊंगा सीधा तेरे पास hi आऊंगा अपना बिस्तर गरम करवाने आज से तू मेरी पर्सोनेल रखैल.

लालू ना सिर्फ अपनी हरकतों बल्कि अपनी बातों से भी शबाना को हुमिलाते कर रहा था. शबाना को ये एहसास करा रहा था की उसकी औकात लालू के सामने क्या है. शबाना अल्लाह से दुआ कर रही थी की कोई रेहम हो जाए और वो इस जलालत से बच जाए पर शायद पिछले कुछ दिनों में उसने जो एक मंदबुद्धि व्यक्ति का अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने का गुनाह करा ये शायद उसके उसी गुनाह की सजा थी जो लालू के रूप में उसके सामने कड़ी थी. वो तो अब तक इस बात से भी अनजान थी की असलियत में उसने धामु का इस्तेमाल नहीं करा बल्कि लालू ने नेहा की मडाड से उससे धामु का इस्तेमाल करवाया था.

कुछ hi दूर किसी कमरे में नेहा खुद को दुल्हन की तरह सजा रही थी किसी के हाथों खुद को हुमिलाते करवाने के लिए. लाइफ में फर्स्ट टाइम हमिलतिओं का मजा लेने के लिए और इस कमरे में उसकी बेस्ट दोस्त का सच में हुमिलिएशन हो रहा था. एक के लिए हुमिलिएशन एक मजा था एक फंतासी थी एक नया अनुभव था तो दुसरे के लिए एक सजा एक बुरा सपना उसकी ज़िन्दगी का सबसे वर्स्ट अनुभव. एक तरफ नेहा का बदन इरोटिक सेंत की खुशबू से महक रहा था तो दूसरी तरफ शबाना के जिस्म से पेशाब की बदबू आ रही थी. एक तरफ नेहा की आँखे काजल से और सुन्दर हो गयी थी तो दूसरी तरफ शबाना की आँखों का काजल आंसुओ के साथ बहकर उसके गालों पर आ गया था. नेहा तो यही सोच रही थी शबाना धामु के साथ है और उसके सिखाए पाठ पर अमल करते हुआ आज उसे अपनी मंज़िल मिल जाएगी पर उसे क्या पता था की उसकी बेस्ट दोस्त को मंज़िल नहीं बल्कि हद से ज्यादा हुमिलिएशन मिल रही थी.

लालू- साली ऐसा कौन सा बड़ा काण्ड कर दिया था तेरे साथ जो तूने भारी महफ़िल में मुझ पर हाथ उठा डाला साला मेरे बाप ने आज तक मुझ पर हाथ नहीं उठाया तू किस खेत की मूली है. मैं तो तेरे इस मुसलमानी कटीले बदन पर तबसे फ़िदा था जबसे तुझे पहली बार देखा था तुझे अपने बिस्तर पर लाना चाहता था तेरे साथ रात गुज़रना चाहता था बस अरे कौनसी बड़ी बात हो जाती इसमें और वैसे भी तेरा वो हिजड़ा पति कौन सा तेरे जिस्म की ज़रूरते पूरी कर पता है तो मैं कर देता पर तुझे तो दुनिया के सामने पतिव्रता बन्ना था.

शबाना की आँखे आश्चर्या से खुली की खुली रलह गयी की इसे मेरे पति की कमी के बारे में कैसे पता चला.

लालू- क्या सोच रही साली कुटिया यही ना तेरे पति के हिजडेपन के बारे में मुझे कैसे पता चला अरे वो है न चलता फिरता रेडिओ तेरी सहेली नेहा उसीको बात करते सूना था बस तभी से मेरी नज़र तुझ पर थी मुझे तो लगा था तू आसानी से मन जाएगी पर तूने तो झापड़ मार दिया.

शबाना को अपने मूट से भिगो देने के बाद लालू ने उसे बालो से पकड़कर ऊपर उठाया और उसके चेहरे के करीब अपने हॉट लाया पर उसे choomte-choomte अचनाका रुक गया.

लालू- मन तो कर रहा की तुझे चूम लू पर क्या करू तुझसे बदबू आ रही है और घटिया चीज को मैं अपने मुंह नहीं लगता पहले तुझे धोकर अच्छे से साफ़ करना होगा. तेरे तो कपडे भी पेशाब से भीग गए है अब इन्हे भी पहनने का क्या फायदा और एक बार पेशाब से भीगे कपडे तू दुबारा तो पहनेगी नहीं तो इन्हे पहाड़ देता हु.

खुद के नंगे होने के ख्याल से शबाना के रौंगटे खड़े हो गए वो सर हिलाकर लालू के सामने खुद को नंगा ना करने की भीक मांग रही थी. पर लालू तो जैसे आज शबाना को हर तरह से ज़लील करने की ठानकर आया था. उसने शबाना की निघ्त्य को उसके क्लीवेज से कसकर पकड़ लिया और उसे तो टुकड़ो में फाड़ने के लिए जोर लगाने लगा.

लालू गाँव का मजबूत कद काठी वाला ठोस मर्द था ये साटन निघ्त्य का पतला सा कपड़ा उसके सामने कितनी देर टिक सकता था. देखते hi देखते शबाना की निघ्त्य आगे से ऊपर से निचे तक दो टुकड़ो में बात गयी. लालू ने खींचकर उसे शबाना के हाथों से निकलकर निचे फेक दिया.

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अब शबाना के जिस्म पर एक सेक्सी सी ब्रा और पंतय थी जो बड़ी मुश्किल से उसके भारी भरकम उभारों और फूले हुए नितम्ब को ढकने की नाकाम कोशिश कर रहे थे. शबाना का गोरा मखमली बदन बस एक ब्रा पंतय में देख लालू ने एक बार अपना लुंड मसल डाला.

लालू- साली क्या कांटास माल है तू तो तेरे चूचे तो क्या bade-bade है बे साली तेरा तो पति भी हिजड़ा है वो तो चूसता नहीं होगा तेरे तो साली इतने bade-bade कैसे कर लिए. अपने बाप और भाई से चुसवाती थी क्या शादी से पहले या मोहल्ले वाले तेरे पति की गैरमौजूदगी में आकर तुझ पर मेहनत करते थे. इतने सुन्दर कबूतर पिंजरे मेल कैद रखने के लिए नहीं बल्कि आजाद रहने के लिए है.

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लालू ने शबाना के ब्रा को आगे से अपने हाथों से पकड़ा और तेज झटके के साथ उसकी ब्रा को भी आगे से पहाड़ दिया. आगे से पहात जाने के बाद शबाना की ब्रा आगे से idhar-udhar झूल गयी. ब्रा फटते hi शबाना के स्तन लालू की आँखों के सामने एकदम नंगे थे. शबाना के mote-mote स्तन देख लालू की तो बच्चे खिल गयी उसने ये तो सोचा की शबाना के स्तन बहुत बड़े है पर इतने बड़े ये उसने भी नहीं सोचा था. पीछे हाथ बंधे होने की वजह से शबाना तो इतनी बेबस थी की अपने हाथों से अपने जिस्म के नंगेपन को धक् भी नहीं सकती थी. कही ना कही शबाना भी अब ये बात समझ गयी थी लालू आज उसे किसी कीमत पर नहीं छोड़ने वाला था.

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अपने नंगेपन को ढकने के लिए शबाना बैठ गयी और और अपनी गर्दन झुका कर अपनी चूचियों को छुपाने की नाकाम कोशिश करने लगी. लालू को शबाना की इन हरकतों पर बड़ा मजा आ रहा था. लालू जैसे आदमियों को औरतों की इज़्ज़त को तार तार करने बड़ा सुकून और आनंद मिलता है.

लालू- हाहाहा अरे बड़ी पाकीज़ा बन रही है साली चुसवा चुसवा कर दूध इतने बड़े और गांड मरवा मरवा कर गांड इतनी चौड़ी कर डाली है और मेरे सामने बड़ी शर्मोहया दिखा रही है. चल तुझे अपने नंगेपन पर शर्म आ रही तो चिंता मत कर मैं भी नंगा हो जाता हूँ ताकि तुझे शर्म ना आए.

लालू ने अपनी जैकेट उतारकर बाथरूम की खुंडी पर टांग दी और ek-ek कर अपने कपडे भी उतरने लगा शबाना अब भी सर झुकाए बैठी थी उसे चैन खुलने कपडे उतरने की आवाजे सुनाई दे रही थी पर ऊपर देखने की तो जैसे उसमें हिम्मत hi नहीं थी. लालू अब शबाना के सामने एकदम नंगा खड़ा था शरीर पर घने घने काले बाल हटता कट्टा कसरती बदन और एक भरपूर मोटा लुंड जो किसी भी औरत को अंदर तक संतुष्ट कर देने की छमता रखता था.

लालू- अरे साली ज़रा नजर उठाकर तो देख ो रांड साली छिनार देख तो सही मेरे लोडे को तेरे बदन की साड़ी गर्मी मिटा देगा ये. इतना बड़ा lod‍a देखा है कभी. तेरे हिजड़े पति का तो मूंगफली जैसा होगा तेरे किसी कस्टमर का lod‍aa था इतना बड़ा. बोल

शबाना चुपचाप सर झुकाए लालू की हर ज़िल्लत हर इंसल्ट को बर्दाश्त कर रही थी क्युकी फिलहाल बर्दाश्त करने के अलावा उसके पास और कोई चारा भी नहीं था. लालू ने शबाना को बालों से पकड़कर खड़ा करा और बाथरूम का शावर ों कर दिया. पानी की तेज बुँदे सीधा शबाना के चेहरे पर पद रही थी शबाना से आँखे भी नहीं खोली जा रही थी. पानी से शबाना के चेहरे और बदन पर लगी लालू की पेशाब धुलती जा रही थी.
 
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लालू ने शबाना को पीछे से दबोच लिया और और अपने हाथ आगे लेजाकर शबाना की चूचियों को अपने हाथों में भर लिया. लालू के देहाती हाथ बहुत बड़े थे पर शबाना की चूची इतनी ज्यादा बड़ी थी की लालू के बड़े हाथों में भी नहीं समा रही थी. लालू और शबाना दोनों शावर के निचे पूरी तरह भीग चुके थे लालू तो पूरी तरह नंगा था और शबाना के जिस्म पर भी पतली सी पंतय थी जो बमुश्किल शबाना की गांड को छुपाए हुए थी. लालू अपने हाथों से शबाना के स्तनों को jor-jor से मसल रहा था और अपने होंठ शबाना की गर्दन पर रखकर पीछे से उसकी गर्दन को छत रहा था.

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ये सब उसकी इच्छा के खिलाफ होने के बावजूद शबाना को अंदर hi अंदर कही ना कही उत्तेजना भी हो रही थी क्युकी जीवन में पहली बार कोई मर्द उसके जिस्म को इस तरह इस्तेमाल कर रहा था बस कही ना कही लालू की बर्बरता उसे तकलीफ दे रही थी और शबाना के अंदर ज़ाहिनियत भी उसे उत्तेजित होने से रोक रही थी. पर लालू की हरकतें पहली बार उसे एक औरत होने का एहसास करा रही थी.

लालू पीछे से शबाना के जिस्म से पूरी तरह चिपका था और शबाना के बदन की गर्माहट से लालू का लुंड पूरी तरह अकड़ गया था और चिपके होने की वजह से पंतय के ऊपर से hi शबाना की गांड पर baar-baar दस्तक दे रहा था. हर झटके के साथ शबाना की जान हलाक में अटक जाती की कही लालू उसके साथ अप्राकृतिक समबन्ध न बनाए क्युकी उसने सूना था की गांड में लुंड डलवाने में बेइंतिहा दर्द होता है छूट में डलवाने से भी कही ज्यादा.

लालू अपने हाथ शबाना के जिस्म पर ऊपर से निचे तक चला रहा था जैसे उसके जिस्म के जर्रे जर्रे को अपने हाथों से महसूस कर रहा हो. शबाना के जिस्म पर हाथ घुमते घुमते लालू ने अपने हाथ आगे शबाना की चड्डी के अंदर दाल दिए और शबाना की फूली हुई छूट को अपनी मुट्ठी में पकड़ लिया. लालू अपने हथेली से शबाना की छूट को घिस रहा था और छूट को घिसते घिसते लालू ने अपनी दो उंगलियां शबाना की छूट के अंदर दाल दी शबाना की एक तेज आह निकल गयी पर मुंह बंद होने की वजह से वो आह भी शबाना के मुंह में hi घुट के रह गयी.

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शबाना की माज़ीहत अब कुछ ढीली पद गयी थी उसकी आँखे वासना के नशे में बंद हो गयी थी उसके पेअर ढीले पद गए उससे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा जैसे उसके पेअर उसके शरीर का भर उठाने से इंकार कर रहे हो. लालू अपनी उंगलियों को शबाना की छूट में अंदर तक चला रहा था जिस औरत की छूट बरसो से सूखी पड़ी हो जिसने आज तक हस्तमैथुन भी ना किया हो उसके लिए तो ये दो उंगलियां hi अंदर जाना बहुत बड़ी बात थी. उसकी छूट में halkaa-halkaa गीलापन आना शुरू हो गया जो लालू जैसे माहिर खिलाड़ी ने महसूस कर लिया पर आज लालू शबाना को मजा देने नहीं उससे अपनी बेज़्ज़ती का बदला लेने आया था.

लालू आगे से तो शबाना की पंतय में घुसा hi था पीछे से भी उसने शबाना की पंतय पर हमला बोल दिया पर पीछे से उसने अपना हाथ शबाना की पंतय के अंदर नहीं डाला बल्कि निचे से शबाना की पंतय को थोड़ा खोलकर अपना अकड़ा हुआ लुंड hi सीधा शबाना की पंतय के अंदर दाल दिया.

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शबाना की तो जान हलाक में आ गयी उसे अब अपनी गांड में लालू का लुंड जाता महसूस होने लगा उसे दर था की कही लालू अब khade-khade hi उसकी गांड ना मार ले. लालू का लुंड शबाना की पंतय के अंदर उसके चूतादो की दरार में रगड़ खा रहा था. उसे आज पहली बार एहसास हो रहा था की एक मर्द का लुंड किस हद तक बड़ा हो सकता था उसने तो आज तक अपने पति का मुरझाया हुआ और धामु का बिना उत्तेजना का लुंड hi देखा था लुंड का असली आकर तो उसे आज अनुभव हुआ था.

लालू ने भी आज तक कई औरतों को गांड मारी पर जो बात शबाना की गांड में थी वो उसे आज तक महसूस नहीं हुई. आगे से लालू की उंगलियां पीछे से उसका लुंड इन्होने aage-pichhe दोनों तरफ से शबाना की चड्डी के अंदर तूफ़ान सा ला दिया था. लालू की बाहों में जकड़ा होने के बावजूद शबाना का बदन अब tej-tej झटके खा रहा था लालू समझ रहा था की शबाना झड़ने के करीब है पर वो अभी उसे झड़ने नहीं देना चाहता था इसलिए अचानक से उसने अपनी उंगलिया शबनान छूट से बाहर खिंच ली और अपना लुंड भी शबाना की चड्डी से बाहर निकल लिया.

शबाना तो जैसे एक बेहोशी से अचानक होश में आई वो इतनी देर से इस पोजीशन को एन्जॉय सा करने लगी थी. उसे खुद पर घिन आ रही थी की कैसे वो अपने बंग को एन्जॉय कर सकती है. इतनी देर से पीछे से शबाना के जिस्म का मजा ले रहे लालू ने झटके से शबाना को अपनी तरफ घुमा दिया. अब शबाना का चेहरा लालू के चेहरे के ठीक सामने लालू शबाना के चेहरे उसकी मासूमियत को गौर से देख रहा था पर शबाना से तो अपनी नज़रे उठाई भी नहीं जा रही थी वो तो अपनी नज़रे झुकाए कड़ी हुई थी.

लालू ने बालों से पकड़कर शबाना को अपने जिस्म से चिपका लिया. शबाना की चूचिया जो लालू के मसलने से लाल पद चुकी थी और अब तक पूरी तरह तन चुकी थी उनके चूचक लालू की बालों से भारी छाती में डाब रहे थे. पीछे से हाथ बंधे और मुंह में ठूसा कपड़ा नज़रे झुकी हुई इस हालत में शबाना में बहुत बेबस सी लग रही थी और शबाना की ये बेबसी hi लालू को अंदर से बड़ी किनकी फीलिंग दे रही थी. लालू को ऐसा महसूस हो रहा था जैसे शबाना उसकी खरीदी हुई रखैल हो और वो उसका मालिक. लालू ने शबाना के चेहरे को अपने चेहरे के नज़दीक लाकर उसके खुले हुए मुंह के होंठों पर अपनी जीभ फिर दी. लालू की इस हरकत पर शबाना ने अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा लिया पर शबाना की इस हरकत का लालू के पास एक hi जवाब था एक और जोरदार तमाचा शबाना के गाल पर पड़ा लालू के हाथ की पांचो उंगलियां शबाना के गाल पर छाप गयी. शबाना के गुलाबी गालों पर तमाचे के निशाँ साफ़ दिखाई दे रहे थे.

लालू ने एक बार फिर जबरदस्ती शबाना का चेहरा अपनी तरफ घुमाया और शबाना के निचले हॉट को अपने दांतो में दबा लिया और शबाना के होंठ को इतनी कास के कटा की उसके होंठों से खून निकल आया.

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शबाना दर्द से बिलबिला उठी पर वो कुछ भी करने या कहने की हालत में फिलहाल नहीं थी. वो समझ गयी की वो जितना विरोध करेगी लालू उसे उतना hi ज्यादा टॉर्चर करेगा. लालू ने पीछे से अपना एक हाथ शबाना की पंतय के अंदर दाल दिया और शबाना की गांड को अपने हाथों में भरकर मसलने लगा.

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और आगे से अपना लुंड शबाना की पंतय पर छूट की जगह पर घिसने लगा. पंतय पर घिसते घिसते लालू ने पंतय के निचे के खुले हिस्से से अपना लुंड शबाना की पंतय के अंदर दाल दिया.

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Aur ek tej siskaari ke saath shabaanaa ne ek mard ke lund ke sparsh ke kaaran apne jeevan kaa pahlaa orgasm paa liya. shabaanaa kaa kaamarus uski chut se behakar baahar aa gayaa aur laalu kaa lund usme bheeg gaya. shabaanaa ko khud par bahut ghin aa rahi thi ki kaise vo is zillat bhaari paristhiti me laalu ke saamne apni uttejnaa ko chhupaa nahin paai kaise vo is haalat men jhad gayi par laalu ke liye aur bhi josh bdaane vaali baat thi. usne aur jor-jor se apnaa lund shabaanaa ki chut me ghisnaa shuru kar diyaa aur jald hi uske andar kaa laavaa bhi shabaanaa ki panty ke andar chhut gaya. shabaanaa ki panty apne aur laalu ke kaamarus se puri tarah bheeg gayi thi. laalu kaa lund sikud kar shabaanaa ki panty se baahar aa gayaa aur laalu kaa veerya shabaanaa ki panty ki daraarao se behkar shabaanaa ki taangon se behtaa huaa niche tak aa rahaa thaa jis wajah se shabaanaa ko badaa chipchipaa saa ehsaas ho rahaa tha.

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Usne shabaanaa ki gardan par apne honth rakh diye aur uski gardan par chumnaa shuru kar diyaa. shabaanaa ke shareer men ek baar phir garmi aane lagi. upar se shower kaa thandaa thandaa paani neeche laalu ki garam kar dene vaali harakten shabaanaa ko ajeeb saa ehsaas karaa rahi thi. shabaanaa ki gardan ko chumte-chumte laalu niche ki taraf aane lagaa aur shabaanaa ke jism ke us hisse ke paas apnaa chehraa le aayaa jisne kayi mardo ke lund jhadvaa diye the uske stan. shabaanaa ke bhaari bhaari stan laalu ke chehre ke ekadam saamne the uske honthon se bas inch bhar ke phaasle par.

Laalu ne apne honthon ko shabaanaa ki chuchiyon par ragadnaa shuru kar diya. shabaanaa ke shareer kaa royaa royaa khadaa ho gaya. laalu ne apne munh utnaa puraa kholaa jitnaa vo khol saktaa thaa aur shabaanaa ki ek chuchi ko apne munh bhar liyaa par phir bhi shabaanaa ki puri chuchi laalu ke munh men nahin samaa paai.

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Laalu jungliyo ki tarah shabaanaa ki chuchi ko choos rahaa thaa kabhi vo daaie choochi ko munh men bharkar chustaa to kabhi baaie choochi ko munh men bhar letaa. sirf chusnaa hi nahin balki chooste chooste vo shabaanaa ki choochi par kaat bhi letaa. shabaanaa ki choochi par kayi jagah laalu ke kaatne ke nishaan ban gaye the.

Laalu ke kaatne par shabaanaa chihuk si padti par kuchh bhi bolnaa uske bas men nahin tha. shabaanaa ke ubhaaron se achchhi tarah khel lene ke baad laalu uske saamne ghutnon ke baal baith gayaa ab shabaanaa kaa nangaa pet laalu ki aankhon ke saamne tha. laalu ne apne hot shabaanaa ke pet par phiranaa shuru kar diya shabaanaa ko apne pet men kapkpaahat si mahsoos ho rahi thi. laalu apni jeebh se shabaanaa ke pet ko chat rahaa thaa chat chat kar usne shabaanaa kaa pet gilaa kar diyaa thaa par laalu ko rokne kaa naa uske paas koi tarikaa tha naa himmat laalu ko rokne kaa matalab thaa ek aur jhaapd ek aur torcher aur uske baad bhi vo baj nahin aataa to shabaanaa chupchaap lachar si khadi hui thi.

Laalu shabaanaa ke pure jism se khel chukaa thaa aur shabaanaa ka makhmali jism ko apne honthon se chakh kar vo ek baar phir uttejit ho gayaa thaa aur uskaa lund bhi dubaaraa tantnaa gayaa thaa aur shabaanaa ke jism ko andar se chakhne ke liye machal rahaa thaa par laalu ne shabaanaa aur apne lund ke liye kuchh aur hi soch rakhaa abhi to shabaanaa ko had se jadaa zaleel karnaa thaa parat dar parat shabaanaa ki izzat ko taar taar karnaa thaa. laalu ek baar phir shabaanaa ke saamne khdaa ho gayaa aur shabaanaa ke jism se ekdum chipak gayaa jis vajah se laalu kaa phir se tanaa huaa lund shabaanaa ki panty ke chut vaale hisse par baar-baar dastak de rahaa tha. shabaanaa kaa to thook bhi halaak se niche nahi aa rahaa thaa use yahi lag rahaa thi ki vo ab chudi tab chudi.

Par laalu ke dimaag me to kuchh aur hi chal rahaa thaa shabaanaa ki chut ke liye to usne bahut kuchh soch rakhaa thaa vo is tarah bang karke shabaanaa ki chudaai kaa majaa kharaab nahin karnaa chaahtaa tha. par shabaanaa ko chhodnaa bhi thaa binaa chhode vo es mauke ko waste nahin karnaa chaahtaa tha. laalu ne shabaanaa ko dhakkaa dekar zameen par giraa diya aur giri hui shabaanaa ki ek taang ko apne haathon me tham liyaa aur shabaanaa ko uske pairon se ghasittaa huaa waapas se bedroom me lekar aa gayaa. laalu to shabaanaa ke saath aise treat kar rahaa thaa jaise shabaanaa koi haad maans ki insaan nahin ek bejaan cheej hai jise dard hi nahi hota. par shabaanaa chupchaap laalu ke har torcher ko seh rahi thi.

Bedroom me laakar laalu ne shabaanaa ko uske bed ke ek kone par ultaa jhukaa kar khadaa kar diya. jhuke hone ki position ke karan shabaanaa kaa chehraa bed par thaa aur uski ubhri hui gaand pichhe ki taraf phuli hui thi. Lalu ne apnaa haath panty ke upar se hi shabaanaa ki gaand par rakhaa aur haule-haule shabaanaa ki gaand ko sehlaanaa use mahsoos karnaa shuru kar diya. laalu shabaanaa ki gaand ke jarre jarre ko apne haathon se chhukar mahsoos kar rahaa thaa jaise apne haathon se uske aakar kaa maap le rahaa ho.

Haathon se achhi tarah mahsoos karne ke baad laalu shabaanaa ke pichhe baith gayaa aur apni naak shabaanaa ki gaand ke kareeb le aayaa aur panty par apni naak rakhkar shabaanaa ki panty ke andar se aa rahi mehek ko sunghne laga. shabaanaa ki panty me uske khud ke kaamarus aur laalu ke veerya ki milijuli khushboo aa rahi thi jo laalu ko uttejit kar rahi thi wahi laalu ki ye ajeebogreeb harakten kahi naa kahi shabaanaa ko bhi uttejit kar rahi thi। laalu shabaanaa ki kamar ko apne haathon me tham liyaa aur aur apni naak puri tarah shabaanaa ki gaand me dabaa di aur panty ke upar se hi shabaanaa ke chutad daat se halke-halke kaatne laga.

Kuchh der yuhi shabaanaa ke nitamb se panty ke upar se khelne ke baad laalu ne vo karaa jiske baare men soch-sochakar hi shabaanaa kaafi der se dar rahi thi. laalu ne shabaanaa ki panty ko apne donon haathon men thamaa aur ek tej jhatke ke saath uski panty ko bhi do siro men phaad diya.

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लालू चाहता तो शबाना के कपडे वो उतार भी सकता था पर उसने जानबूझ कर उसका हर कपड़ा phaad-phaadkar अलग करा क्युकी वो शबाना को उसकी औकात का एहसास करना चाहता था. वो उसे एहसा करना चाहता था की एक औरत कितनी भी badi-badi बातें कर ले कितनी भी स्ट्रांग बन जाए पर उसकी औकात एक मर्द का बिस्तर गरम करने तक hi है.

शबाना के जिस्म का वो आखिरी कपड़ा भी उसके जिश्म से अलग हो चुका था और वो पूरी तरह से नंगी हालत में लालू के सामने झुकी कड़ी थी. झुके होने की वजह से उसके नितम्ब लालू के लिए एकदम खुल गए थे और पहले से बड़े आकरके होने के कारण अब और ज्यादा बड़े लग रहे थे. औरत के bade-bade दूध और bade-bade चूतड़ किसी भी मर्द को पल में अपनी तरफ आकर्षित कर लेते है और शबाना के पास तो वो दोनों थे. तो लालू जैसा मर्द उनकी तरफ आकर्षित हुए बिना कैसे रह सकता था. लालू ने भी एक बार फिर अपना चेहरा शबाना के चूतादो के बिच की दरार में घुसेड़ दिया जिस वजह से लालू की नाक एकदम शबाना की गांड के छेड़ में टच हो रही थी. लालू ने अपनी जीभ निकलकर शबाना की गांड के छेड़ को छत लिया और धीमे धीमे उसकी गांड की छेड़ पर अपनी जीभ फिराने लगा. शबाना का तो बुरा हाल था उसके पेअर काँप रहे थे उसने सपने में भी नहीं सोचा था कोई मर्द उसकी गांड का छेड़ भी छत सकता है उसके शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गयी थी.

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लालू शबाना के पीछे जमीन पर बैठा उसकी गांड छत रहा था और शबाना बेचारी बिस्तर पर सर झुकाए हाथ बंधे कड़ी थी. शबाना को अंदर से उत्तेजना शर्म और दर तीनो का अनुभव हो रहा था. लालू की हरकतें उसे उत्तेजित कर रही थी एक पाक नमाजी '. औरत होने के बावजूद अपने रेपिस्ट की हरकतों पर यु उत्तेजित होने पर उसे शर्म आ रही थी और लालू के अगले कदम के बारे में soch-sochakar उसे दर भी लग रहा था की कही लालू उसकी गांड ना मार ले.
 
Shabaanaa kaa dar galat nahin thaa kaafi der shabaanaa ki gaand ko chhat chhat kar laalu ne puraa gilaa kar diyaa thaa aur ab laalu uthkar uske pichhe khdaa ho gayaa aur apni kamar ko shabaanaa ke chutdo ke ekdam kareeb le aayaa jis wajah se laalu kaa lund baar-baar shabaanaa ke chutaado par yahaan vahaan chhu rahaa tha. shabaanaa dum saadhe laalu ki har harakat ko mahsoos kar rahi thi.

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लालू ने शबाना को बालों से खींचकर उसका सर एक बार फिर बिस्तर पर गिरा दिया और निचे ज़मीन पर राखी शबाना की hi स्लीपर को अपने हाथ में उठा लिया. और चप्पल से शबाना के चूतादो पर एक के बाद एक मारना शुरू कर दिया. लालू अपनी पूरी ताकत से शबाना के चूतादो पर चप्पल से मारे जा रहा था. जिस गांड को कुछ देर पहले वो चुम रहा था छत रहा था अब उसी गांड पर चप्पल की बौछार करदी थी. शबाना का दर्द के मारे बुरा हाल था हर वार के साथ शबाना की चीख निकल जाती पर मुंह में ठुसे कपडे की वजह से गले में hi घुट कर रह जाती.

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मार मारकर लालू ने शबाना की गांड को लाल कर दिया था. शबाना की गांड पर चप्पल की मार के निशाँ साफ़ नजर आने लगे थे. चप्पल की मार ने शबाना को बेदम सा कर दिया था उसकी साड़ी हिम्मत टूट कर कही चकनाचूर हो गयी वो समझ गयी की लालू अब उसे नहीं छोड़ने वाला और बचने के लिए वो कुछ कर भी नहीं सकती. शबाना निढाल सी बिस्तर पर गिर गयी. शबाना को बेदम देख लालू ने भी चप्पल छोड़ दी और शबाना की गांड पर बने मार के निशाँ को अपने हाथ से सहलाने लगा.

लालू- साली रुंडी की औलाद क्यों इतना नाटक करती है मार खाने का शौक है क्या तुझे. चुपचाप जो मैं कर रहा हूँ करने दे तो काम मार खाएगी वरना मार मारकर तेरी जान निकल दूंगा. अब मैं तुझे बताने वाला हूँ असली मर्द से छोड़ने का एहसास क्या होता है. असली lod‍aa क्या होता है वो आज मैं तुझे दिखाऊंगा आज इस लोडे से छोड़ने के बाद तू दुबारा किसी लोडे की इच्छा नहीं करेगी baar-baar इसी लोडे की डिमांड करेगी.

लालू ने अपना लैंड एक बार शबाना के चूतादो के बीच की दरार में सेट करा. शबाना का दिल dhak-dhak कर रहा था उसने दर के मारे अपनी आँखें बंद कर ली. इतनी मार खाने के बाद एक बार फिर विरोध करने की उसमे अब हिम्मत नहीं बची थी. लालू ने अपने लुंड को थोड़ा आगे बढ़ाते हुए शबाना की गांड के छेड़ से छू दिया. शबाना के रौंगटे खड़े हो गए थे वो दम साढ़े आगे होने वाले दर्द का सोच रही थी. उसे अपने साथ जो होने वाला था वो soch-sochkar खुद पर घिन आ रही थी की शायद ये एक मंदबुद्धि का फायदा उठाने के उसके काम की hi सजा है जो उसे इस रूप में मिल रही थी.

लालू का लुंड शबाना की गांड के छेड़ के दरवाजे पर खड़ा था और एकदम से लालू ने झटका आगे की और मारा और लालू का लुंड शबाना की गांड के छेड़ को खोलता हुआ हल्का सा अंदर दाखिल हो गया. दर्द के मारे शबाना बिलबिला उठी वो एक बार उठने को हुई पर लालू ने हाथों से दबाकर उसे उठने से रोक दिया. अभी तो सिर्फ लुंड का टोपा hi हल्का सा अंदर गया था और शबाना दर्द से बिलबिला उठी थी पूरा लुंड अंदर जाने पर वो कैसे बर्दाश्त करेगी ये बात baar-baar उसके दिल में खौफ पैदा कर रही थी.

लालू ने एक और धक्का आगे की और मारा और उसका आधे से ज्यादा लुंड शबाना की गांड के अंदर समा गया. शबाना की गांड बहुत कासी हुई थी अंदर लैंड को दाखिल करने में लालू को भी पूरा जोर लगाना पद रहा था. शबाना दर्द से तड़प रही थी वो अपना शरीर उठाकर लालू को पीछे धकेलने की कोशिश कर रही थी पर लालू की पलाद बहुत मजबूत थी जिसके सामने शबाना पूरी तरह बेबस थी.

लालू- साली मुसलमानी रांड मजा आया एक ***** लोडे से गांड मरवा कर साली तुम औरतों को अधूरे लोदो से hi छोड़ने की आदत होती है कभी खालिस पुरे ***** मर्दो से छुड़वाकर देखो असली लोडे की ताकत पता चल जाएगी.

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कुछ देर यही लालू शबाना की गांड में अपना जा चुका लुंड andar-bahar करता रहा फिर लालू ने शबाना को पीछे से उसके बालों से पकड़ लिया और शबाना की घनी ज़ुल्फो को बेदर्दी से अपनी मुट्ठी में कसकर पीछे खींचते हुआ एक तेज जोरदार धक्का मारा और लालू का बचा हुआ लुंड भी शबाना की गांड में पूरा अंदर तक समा गया. शबाना की घुटी हुई चीख उसके होंठों तक आकर वापस लौट गयी. शबाना की आँखों से आंसू उसके गालों तक आ रहे थे. गांड में लुंड जाने के दर्द के सामने बाल खींचने के दर्द का तो उसे एहसास भी नहीं हो रहा था.

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लालू का पूरा लुंड शबाना की गांड के अंदर समा गया था. शबाना निढाल सी बिस्तर पर झुकी पड़ी हुई थी. उसके बाल अब भी लालू की गिरफ्त में थे. कुछ देर शांत खड़े रहने के बाद लालू ने धीमे धीमे झटके मारना शुरू कर दिया हर झटके पर शबाना की कराह निकल जाती. धीमे धीमे लालू ने धक्कों की स्पीड बढ़ानी शुरू कर दी लालू का लुंड अंदर एडजस्ट हो जाने के बाद शबाना का दर्द भी कुछ हद तक काम हो गया था. लालू शबाना के बालों को पीछे खींचकर jor-jor से शबाना की गांड में धक्के पे धक्का मारे जा रहा था उन्हें देख ऐसा लग रहा था जैसे लालू किसी घोड़े की लगाम पकड़कर उसपर सवारी कर रहा हो.

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शबाना की गर्माहट से भारी गांड ने लालू के लुंड की भी हालत खराब करदी थी नॉर्मली लालू का सेकंड टाइम का स्टैमिना काफी ज्यादा था पर शबाना की गांड की गर्मी ने कुछ hi मिनट के धक्कों के बाद लालू के लुंड को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया. लालू के लैंड का सारा वीर्य शबाना की गांड में काफी अंदर तक समा गया था जीवन में पहली बार शबाना को एक मर्द के वीर्य का एहसास अपने अंदर महसूस हुआ था बेशक वो एहसास उसकी छूट की बजाए उसकी गांड में था और उसे उसकी बच्चे की इच्छा भी पूरी नहीं होनी थी पर वीर्य का एहसास तो था hi जिसकी गर्माहट और चिपचिपाहट को किसी भी कीमत पर इग्नोर नहीं किया जा सकता था.

झाड़ जाने के बाद लालू का लुंड सूखे छुआरे की तरह शबाना की गांड से बाहर आ गया. लालू का वीर्य शबाना की गांड से बहकर बाहर आ रहा था और उसके जाँघों से बेहटा हुए उसके पैरों के निचे तक जा रहा था. दुबारा झाड़ जाने के बाद लालू शबाना से अलग होकर बिस्तर में उसके बगल में hi लेट गया पर अपनी इज्जत को तार तार करवा चुकी शबाना आँखें आंसुओ से भरे हुआ अभी भी बिस्तर पर झुकी कड़ी थी जैसे वो एकदम जड़ सी हो गयी थी और अपने होशोहवास में hi ना हो. वो अपनी शर्म अपनी हया सब कुछ लालू की दरिंदगी के हाथों लुटा चुकी थी.
 
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Shabaanaa ko yuhi bistar par lutaa pitaa chhod laalu ne baathroom jaakar apne kapde uthae aur unhen pehenna shuru kar diya. Laalu ke chehre se ye lag hi nahin rahaa thaa ki abhi kuchh der pehle usne ek shareef aurat ke saath itnaa barbartaapurnaa kaam karaa thaa uski asmaat ko taar taar karaa tha. Apni pant pahenne ke baad usne shabaanaa ke haathon men bandhi apni belt khol di. Haath khulte hi jaise shabaanaa ke andar koi bhooki sherni jaag uthi usne apne munh me thusaa rumaal nikaalaa aur vo puri taakat se laalu par toot padi laalu iske liye pehle se taiyaar thaa usne shabaanaa ke gaalon par ek ke baad ek tamcho ki barsaat kardi. Par apna sab kuchh lutaa chuki shabaanaa bhi ab pichhe hatne ko taiyaar nahin thi vo maar khaane ke baad bhi baar baat laalu par hamlaa kar rahi thi.

Shabaanaa- maar jitnaa maar saktaa hai maar par ab main teri maar se darane waali nahin hun tune kyaa samjhaa hai ye sab ho jaane ke baad main tujhe yuhi jaane dungi main jillat bardsaashat karke chup rahne waali aurat nahin hun main abhi baahar jaakar sabko sab bataa dungi ki tune mere saath kyaa-kyaa karaa.

Lalu- saali nautanki karti hai shareef hone kaa draamaa karti hai saali do take ki raand ek mandabuddhi se bachche ke liye chudwati ghoomti hai uskaa lund apni chut men lene ke liye uske bachche ki maan banne ke liye mari jaa rahi hai aur mainne jaraa si gaand kyaa maar li badaa draamaa kar rahi hai.

Laalu ke munh se maa banne ki baat aur dhamu se chudwaane ki baat sunkar shabaanaa kaa saaraa josh ekdum se thandaa pad gaya vo ekdum se shock reh gayi jaise uski chori pakd li gayi ho। uske haath paanv dhile pd gaye hamla karte-karte vo ekadam se sakapkaa kar khdi ho gayi.

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लालू- क्या हुआ शॉक लगा बहार जाकर बताएगी जा बता बहार जाकर अभी बता बाहर जाकर फिर देख कैसे मैं तेरी इस इज्जत का सरेआम पोस्टमार्टम करता हु.

शबाना- क्या मतलब है तुम्हारा क्या बक रहे हो.

लालू- मैं बक रहा हूँ लगता है तुझे सबूत दिखना होगा.

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लालू ने अपना मोबाइल निकला और उसमे एक वीडियो ों करके मोबाइल शबाना की तरफ घुमा दिया. ये शबाना और धामु की पहली मुलाक़ात का वीडियो था जब नशे की हालत में शबाना वियाग्रा के जोश में धामु के साथ उत्तेजना की हाडे पार गयी थी. वो वीडियो देखते hi शबाना के होश उड़ गए ये वीडियो लालू के मोबाइल में. वो सोच में पद गयी की लालू ने ये वीडियो कब बना लिया सब लोग तो उस दिन दंगल में गए थे जरूर मेरी बेहोशी का फायदा उठाकर इसने ये वीडियो बनाया है.

शबाना- उस दिन मैंने गलती से भांग मिला शरबत पि लिया था और धामु ने भी हम अपने होश में नहीं थे और जरूर हमारी बेहोशी का फायदा उठाकर तुमने ये वीडियो बनाया है. पर इस वीडियो से साफ़ पता चलता है की मैं नशे में हु जो कुछ हो रहा है वो अनजाने में हो रहा है.

लालू- अरे हाँ बात तो तू सही कह रही है इसमें तो तू नशे में है इससे तो कुछ साबित नहीं होगा चल कोई बात नहीं तुझे दुसरा वीडियो दिखता हु.

लालू ने अपने मोबाइल में एक और वीडियो ों करा और एक बार फिर मोबाइल को शबाना की तरफ घुमा दिया ये कल रात का वीडियो था जब शबाना धामु को सेक्स के लिए उत्तेजित कर रही थी उसके लुंड को खड़ा करने की कोशिश कर रही थी और वो भी पुरे होशोहवास में. अब तो शबाना को काटो तो खून नहीं उसे समझ नहीं आ रहा था की इस वीडियो की सफाई में वो क्या तर्क दे और उसके दिमाग में यही चल रहा था की उस वक्त तो कमरे में कोई नहीं था फिर लालू ने ये वीडियो कैसे बना लिया.

लालू- क्या हुआ जानेमन शॉक लगा शॉक लगा शॉक laga-lagaa. अब बता उस दिन तो तू नशे में थी और नशे की हालत में वो सब हो गया पर यहाँ सेक्सी सी निघ्त्य पहनकर कौन सा नशा करे हुआ है जो अपने हाथों से धमौ के कपडे उतार उसके लोडे को खड़ा करने की कोशिश कर रही है बोल. और उस दिन तो हमने तेरी बेहोशी में तेरा वीडियो बनाया पर ये वीडियो कैसे बनाया बोल बेबी बोल. चल ज्यादा मत सोच अब तुझे मैं एक वीडियो और दिखता हूँ दो वीडियो के साथ एक वीडियो मुफ्त मुफ्त मुफ्त.

लालू ने अपने मोबाइल पर एक वीडियो ों करा और शबाना को दिखाया ये वीडियो आज दोपहर का hi था नेहा और छोटू का जिसमे नेहा छोटू के साथ इंटीमेट हो रही थी और फिर उसे बाथरूम में लेकर जाती है और कुछ देर बाद छोटू के जाने के बाद शबाना भी उसी बाथरूम से निकलकर आती है. अब शबाना समझ गयी की उसके कमरे में कही हिडन कैमरा लगा है जो उसकी पल पल की रिकॉर्डिंग कर रहा है.

लालू- ये देख तेरी बेस्ट दोस्त नेहा एक 16 साल के लड़के को सेक्स के लिए तैयार कर रही है कुछ देर बाद वो उसे अपने साथ बाथरूम में लेकर जाती है और उस लड़के के जाने के बाद तू भी उसी बाथरूम से निकलकर आती है जहां नेहा और छोटू गए थे क्या कर क्या रही थी तू वहां उन दोनों का वीडियो बना रही थी या दोनों मिलकर उस 16 साल के बच्चे के साथ अपनी हवस पूरी कर रही थी बोल साली असली मर्द के साथ ड्रामा करती है और एक मंदबुद्धि आदमी और एक 18 साल के बच्चे के साथ अपनी हवस शांत करती है साली तुम दोनों hi रंडी हो या तुम्हारी बाकी सहेलिया भी ऐसी hi है अरे अगर धंदा hi करना है तो खुलकर करो ये सबके सामने शरीफ होने का ड्रामा क्यों करती है.

लालू ने जो वीडियो शबाना को दिखाए शबाना के पास कोई जवाब नहीं था उसकी आँखें आसुओ से भर आई थी.

शबाना- ऐसा नहीं है मेरी सभी सहेलिया बेदाग़ है और मेरी भी ये पहली गलती है वो भी सिर्फ धामु के साथ छोटू के साथ मैंने कुछ भी नहीं करा जो कुछ करा नेहा ने करा.

लालू- अच्छा बेवकूफ समझती है क्या.

शबाना- नहीं सच में मुझे एक बच्चा चाहिए था पर कल रात धामु के अंदर मैं लाख कोशिश के बाद भी उत्तेजना पैदा नहीं कर पाई थी इसलिए नेहा मुझे एक मर्द को उत्तेजित करने के बारे में सीखा रही थी.

लालू- क्या सच में हाहाहा नेहा तुझे मर्द को उत्तेजित करने के फंदे सीखा रही है. अरे तूने कभी खुद को नंगा देखा है ऊपर से निचे तक तू तो उत्तेजना का खजाना है किसी मर्द को अपने दूध दिखा दे तो उसका खड़ा हो जाए तू मर्द को उत्तेजित करने की कोचिंग ले रही कमाल हो तुम लोग यार.

शबाना- पर तुम्हारे पास ये वीडियो कैसे आए तुमने हमारे कमरे में कैमरा लगा रखा था.

लालू ने जहाँ कैमरा लगाया था वहां से कैमरा निकलकर शबाना को दिखाया वो कैमरा देख शबाना को यकीं नहीं हो रहा था की वो कबसे लालू की नजरों में थी.

शबाना- क्यों तुमने क्यों करा ऐसा क्यों हिडन कैमरा लगाया हमारे कमरे में क्या और लोगों के कमरे में भी इस तरह कैमरा लगा रखा है.

लालू- ना ना ना इतना कमीना भी नहीं हूँ मैं बस तुझे पहली बार देखते hi तेरा दीवाना हो गया था किसी भी कीमत पर तुझे अपनी रंडी बनाना चाहता था इसलिए मैंने तेरे कमरे में ये कैमरा लगाया. पर सिर्फ इतना hi नहीं है और भी बहुत कुछ है जो तुझे पता नहीं है दरअसल उस दिन तू गलती से नशे में नहीं गयी थी उसके पीछे हम थे हमने तुझे नशे का ड्रिंक पिलाया और साथ में वियाग्रा भी दी जिस वजह से उत्तेजित होकर तूने धामु के साथ ये सब करा और हमने स्पाई सीएएम से ये वीडियो बनाया. उसके बाद कल रात हमने hi धामु को दवाई दी ताकि उसका लैंड खड़ा ना हो और तू उसे उत्तेजित करने की कोशिश करे और हमने फिर तेरा वीडियो बनाया. पर हाँ आज दोपहर का छोटू के साथ जो हुआ वो हमने प्लान नहीं करा था और सच बताऊ तो मैं बड़े गुस्से में था पर ये बताकर की तेरे और छोटू के बिच कुछ नहीं हुआ तूने मुझे खुश कर दिया.

शबाना बड़े ध्यान से लालू की हर बात सुन रही थी उसे यकीं नहीं हो रहा था की सिर्फ उसे फंसाने के लिए लालू ने इतनी बड़ी प्लानिंग कर राखी थी.

शबाना- क्यों क्यों करा तुमने ऐसा क्या हासिल हो गया तुम्हें ये सब करके.

लालू- आज तुझे हासिल कर लिया अब और हासिल करने को क्या बचा है. वैसे ये सारे वीडियो आज के दिन के लिए hi बनाए थे. वैसे जो सवाल तेरे दिमाग में है वो इस कहानी के हर रीडर के दिमाग में चल रहा है की आखिर ये लोगन कर क्या रहा है. तो अब बता दू तू कह रही थी की ना की तू बाहर जाकर सबको बताएगी जा बता दे मेरा जवाब भी पूरी तरह तैयार है.

शबाना- क्या मतलब क्या कहना चाहते हो.

लालू- तेरा पति तुझे खुश नहीं रख पता था तू सेक्स के लिए तड़प रही थी यहां गाँव में तुझे कोई जनता नहीं था तुझे लगा यहां तू आसानी से अपनी हवस मिटा सकती है शुरुआत के लिए तुझे धामु आसान शिकार लगा. जब सब दंगल चले गए तो धामु तुझे अकेला मिल गया तूने उसे कमरे में बुलाया सेक्स में मजा बढ़ाने के लिए तूने नशा करा. पर नशे की वजह से तेरी आग पूरी नहीं बुझ पाई तूने अपनी सहेली नेहा की मदद से धामु को रात में चुपके से फिर अपने कमरे में बुलाया पर बेचारे धामु का लैंड खड़ा hi नहीं हुआ और वो तेरी हवस की आग को शांत नहीं कर पाया. धामु से अपनी हवस शांत ना होने पर तूने दुसरा शिकार 18 साल के नए नए जवान हुआ छोटू का करा पर अनुभव की कमी के कारण वो भी तुझे संतुष्ट नहीं कर सका तू अंदर hi अंदर सेक्स के लिए तड़प रही थी. तब तूने मुझ पर डोरे डाले मैं भी तुझ पर फिदा हो गया और नशे में बाहेक कर सबके सामने तुझे बाहों में भर लिया पर सबके सामने तुझे शरीफ बांके रहना था इसलिए उस वक़्त तूने मुझे मारा और सबकी नज़र में शरीफ बन गयी पर रात में मुझे अपने कमरे में बुलाया और मुझ पर डोरे डालकर मेरे साथ सेक्स करा मुझसे धोके से खुद को पिटवाया और अब कही मैं बाहर किसी से कुछ कह ना दू तो खुद बाहर आकर सारा इलज़ाम मुझ पर दाल रही है की मैंने तेरा बंग करा तुझे मारा पिता.

शबाना- ये झूठ है गलत है मैंने ऐसा कुछ नहीं करा हाँ धामु के साथ जरूर करा पर वो मेरी मज़बूरी थी.

लालू- ये मैं जनता हूँ तू जानती है तेरी वो दोस्त नेहा जानती है पर बाहर कोई नहीं जनता और तुम दोनों को झूठा साबित करने के लिए मेरे ये वीडियो hi काफी है मुझे दो सेकंड नहीं लगेंगे तुझे सबके सामने रंडी साबित करने में.

शबाना- क्यों कर रहे हो ऐसा प्लीज ऐसा मत करो मैं किसी से कुछ नहीं कहूँगी तुम जो चाहते थे तुमने कर लिया ना अब माफ़ कार्डो मुझे जो मैंने तुम्हे झापड़ मारा बक्शा दो मुझे प्लीज.

लालू- इतनी जल्दी क्या है अभी तो तू चार पांच दिन है ना यहां पर तो तब तक मेरी रखैल बनाकर रहना होगा.

शबाना- कभी नहीं मैं अपनी जान देना पसंद करुँगी बजाए खुद को तेरे हवाले करने के.

लालू- हाँ ये तो मैंने सोचा hi नहीं था तू तो बड़ी शरीफ पाक मुसलमान औरत है तू तो मेरी रखैल बनने की बजाए अपनी जान दे देगी. पर उससे मेरा क्या फायदा होगा. साली हरमजदि तू जानती नहीं मैं कितना बड़ा कमीना है तू जिए या मारे मुझे घंटा फर्क नहीं पड़ता अगर तूने अपनी जान भी देदी ना मैं तब भी तेरे वीडियो नेट पर दाल दूंगा मरने के बाद भी फेमस हो जाएगी तू. तेरा बाप कॉलेज में टीचर है आजमगढ़ में और तेरी दो छोटी बहने भी है जिनकी अभी शादी होनी है सोशल मीडिया का ज़माना है दो मिनट लगते है किसी की जानकारी निकालने में. तेरे bade-bade नंगे पोस्टर तेरे मोहल्ले में तेरे घर के सामने लगवा दूंगा तेरे पुरे मुबल्ले में तेरी ये नंगी वीडियो की कद बटवा दूंगा. फिर तेरे माँ बाप का क्या होगा बेचारे शर्म के मारे खुदखुशी कर लेंगे और तेरी बहने उनसे कौन निकाह करेगा उनके पास दो ऑप्शन बचेंगे या तो वो भी अपने मान बाप के साथ खुदखुशी कर ले या खुद धांडे पर बैठ जाए. तू ना सही तेरी बहनों को अपनी रखैल बनाऊगा अब बोल करेगी खुदखुशी तू तो मरकर इस ज़िल्लत से बच जाएगी पर सोच ले तेरे घरवालों का मैं क्या हाल करूंगा.

लालू की बातें सुन शबाना की रूह अंदर तक काँप गयी. अगर लालू जो कह रहा है उसने सच में ऐसा कर दिया तो सच में उसके घरवाले ये बर्दाश्त नहीं कर पाएंगे वो अपनी जान दे देंगे

शबाना- नहीं तुम ऐसा नहीं कर सकते मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है क्यों मेरी जिंदगी बर्बाद कर रहे हो.

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लालू- मैं कहा तेरी जिंदगी बर्बाद कर रहा हूँ बस जब तक तू यहां तब तक के लिए तुझे अपनी रखैल बनने को कह रहा हूँ बस चार पांच दिन की बात है. या तो चार पांच दिन के लिए मेरी रखैल बन जा या अपने पुरे घर को बर्बाद करवा ले.

शबाना के सामने लालू ने कोई दुसरा रास्ता नहीं छोड़ा था लालू ने उसकी जिंदगी hi नहीं उसकी मौत पर भी अंकुश लगा दिया था. लालू की बात मानने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं बचा था. वो रोए जा रही थी वो क्यों गाँव आई क्यों उसने धामु के साथ वो सब करा baar-baar उसके मन में यही ख़याल आ रहा था उसके एक गलती ने उसे लालू की रखैल बनने पर मजबूर कर दिया था.

लालू- इतना क्या सोच रही है जल्दी बोल जब तक यहां है तब तक के लिए मेरी रखैल बनेगी की नहीं. वादा करता हूँ यहां से जाने के बाद तेरी तरफ पलटकर नहीं देखूंगा तेरी लाइफ में कभी इंटरफेअर नहीं करूँगा.

शबाना- और मेरे वीडियो.

लालू- तेरे सारे वीडियो तेरे यहां से जाने से पहले तेरे सामने डिलीट कर दूंगा. और तुझे एक बच्चा भी दे दूंगा जिसके लिए तूने ये सब करा. बोल तैयार है मेरी रखैल बनने के लिए.

शबाना के सामने कोई दुसरा रास्ता नहीं था अपनी जान वो ले नहीं सकती थी और लालू की जान लेने की उसमे ताकत नहीं थी. मजबूर होकर उसने हाँ में सर हिला दिया.

लालू- ऐसे नहीं मुंह से बोल की अगले 5 दिन तू मेरी रखैल है. बोल

शबाना रट हुआ- अगले पांच दिन मैं आपकी राखिल हूँ.

लालू- शाबाश चल घुटनों पर बैठ जा और घुटनों पर चलती हुई मेरे जुटे लेकर मेरे पास आ.

शबाना लालू की हर बात मानती हुई उसके जुटे अपने हाथ में लेकर घुटनों के बाल चलती हुई लालू के पास आ गयी लालू ने अपने जुटे ले लिए.

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लालू- जुटे तो तू ले आई पर कहा रखकर पह्नु एक काम कर अपना सर निचे कर.

शबाना ने अपना सर लालू के सामने झुका दिया. लालू ने अपना जूता शबाना के सर पर रखा अपने पेअर डालकर उसे पहनने लगा. शबाना को रोना आ रहा था की वो किस स्थिति में फँस गयी थी अपने रेपिस्ट का जुटा अपने सर पर रखने पर मजबूर हो गयी थी. लालू ये सब सिर्फ शबाना को ज़लील करने के लिए कर रहा था उसे एहसास करा रहा था की अगले 5 दिन उसे उसके जूतों के निचे रहना होगा.

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लालू- अगले कुछ दिन अब तू मेरी रखैल है मैं तुझे जो करने को कहूंगा तू वो करेगी जो पहनने को कहूंगा तू वो पहनेगी जहां आने को कहूंगा वहां आएगी जिस वक़्त आने को कहूंगा उस वक़्त आएगी और ध्यान रहे अगर मेरी एक भी बात से इंकार करा तो मैं दुबारा नहीं बोलूंगा समझ जाना मई क्या कर सकता हु. और हाँ अगर नेहा शोभा या और किसी को भी इस बारे में भनक भी लगी तो तू जानती है मैं क्या करूँगा. और है आज मुझे खुश करने के लिए ये रख ( लालू बे अपनी जेब से 50000 की एक गद्दी वही बिस्तर पर फ़ेंक दी ) ये तेरी आज रात की कीमत बाकि रंडियो को तो बस 20 हज़ार देता हु पर तेरे जैसी हाई क्लास रंडी को 50 हज़ार दे रहा हु. धंदे पर बैठ जा 5 दिन के लिए तो सोच 5 दिन में कितना कमा कर शहर जाएगी तेरा नामर्द पति कितना खुश हो जाएगा.

लालू ये रूपीस देकर उसे एक रंडी होने की फीलिंग करा रहा था वो सिर्फ उसे छोड़ कर hi छोड़ देना नहीं चाहता था उसी बेज़्ज़त करके उसे हद से ज़ादा ज़लील करना चाहता था. वो सिर्फ उसे जिस्म का hi नहीं उआकी आत्मा तक का बलात्कार कर देना चाहता था उसे पूरी तरह तोड़ देना चाहता था ताकि आने वाले दिनों में कभी उसके खिलाफ आवाज़ उठाने की हिम्मत न कर पाए. अपने जुटे पहनकर लालू दरवाज़ा खोलकर बहार निकल गया बहार देव उसका इंतजार कर रहा था. लालू ने उसे काम हो जाने का इशारा करा और दोनों वहां से निकल गए. छोड़ गया तो पीछे लूटी पीती शबाना जो न अपना दर्द किसी से बात सकती थी न खुद को ख़तम करके अपने घरवालों को मुसीबत में दाल सकती थी. अगले पांच दिन उसे लालू की रखैल बनाकर hi रहना था अपनी मर्ज़ी या बिन मर्ज़ी के.

शबाना इस नाउ ट्रैप्ड.

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जिस वक़्त लालू शबाना की अस्मत के साथ खेल रहा था उसी वक़्त बहार डांस पार्टी वाली जगह पर मर्दो की दारु पार्टी बदस्तूर अब भी जारी थी जिसे लीड कर रहे थे विक्रम के ससुर और शोभा के बाप मलखान सिंह. ये अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल था की वो कितनी बोतल खाली कर चुके थे.

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विक्रम- पापाजी कितनी पिएंगे आप काफी नशे में है.

मलखान- अरे दामाद जी मैंने कहा था ना आपके पापा और हम अपनी जवानी के दिनों में तो ड्रम के ड्रम खाली कर देते थे. पर आज पीने की एक और वजह भी है.

विक्रम- क्या वजह पापाजी.

मलखान- आज हमें सरला की बहुत याद आ रही है आपकी सासुमा. आपको हमारी बेटी के साथ रोमंटिक अंदाज में नाचते देख सरला की बहुत याद आ रही है. उसे भी नाचने गाने का बहुत शौक था. शोभा बिलकुल अपनी माँ पर गयी है....... हिचकी

विक्रम- हमने मम्मी जी की फोटो देखि है वो तो शोभा से भी ज्यादा सुन्दर थी.

मलखान- याद मत दिलाओ अब दामाद जी वरना रात काटना मुश्किल हो jaegaa..........hichki

विक्रम- बस करिए अब पापाजी शोभा सुबह जानेगी तो बहुत गुस्सा होगी हम दोनों पर की मैंने आपको इतनी क्यों पीने दी. चलिए उठिए मई आपको आपके कमरे तक छोड़ आता हु.

मलखान- अरे बेटा तुमने हमें समझ क्या रखा है हम तो नशे की हालत में उड़ती हुई चिड़िया पर अचूक निशाना लगा सकते है वो तो ओलम्पिक में नहीं गए वरना 10 - 20 मैडल तो यही ले आते.......... हिचकी

विक्रम- जी पता है पता है आपको बहुत चढ़ गयी है बस करिए कल बात करेंगे.

मलखान- चल तू इतना फाॅर्स करता है तो आज के लिए इतना hi बस पर हम खुद चले जाएंगे तू जा जाकर आराम कर.......... हिचकी

विक्रम- अरे कोई बात नहीं पापाजी हम छोड़ देंगे आपको कमरे तक कही गलती से किसी दुसरे के कमरे में मत घुस जाना.

माललखन- अरे बेटे हम कितनी भी पि ले इतना नहीं बहकते की कही और घुस जाए.......... हिचकी

विक्रम- ठीक है पापाजी आपका कमरा दूसरी मंजिल पर है तीसरा कमरा है ग्राउंड फ्लोरे और पहली मंजिल पर औरतों के कमरे है वहाँ मत जाइएगा.

मलखान- ok बेटा जी शुभ raatri..........hichki bye bye............hichki.

हिचकी खाते हुए लड़खड़ाते हुए मलखान वहाँ से अपने कमरे की तरफ चल दिया. शराब का नशा उसपर पूरी तरह हावी था पर विक्रम से सहारा लेकर अपने कमरे तक जाना उसकी शान के खिलाफ था उसने इतनी badi-badi डींगे जो हक दी पर उसे नहीं पता था की उसका ये वरकॉन्फिडेन्स उसके और विक्रम की जिंदगी मी एक भूचाल लाने जा रहा था. मलखान लड़खड़ाते हुए उस जगह पहुँच गया जहा देव खड़ा लालू की पहरेदारी कर रहा था. मलखान को नशे में आता देख देव पेड़ के पीछे छुप गया. मलखान लड़खड़ाता हुआ सीढ़ियों की तरफ बाद गया.

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हवेली की सिडिया घुमावदार थी कुछ सिडिया चढ़कर एक प्लेटफॉर्म था और फिर घुमाकर दूसरी तरफ सिडिया थी. मलखान दीवार का सहारा लेकर सिडिया छोड़ने लगा और सिडिया चढ़ते चढ़ते उस प्लेटफॉर्म पर पहुंचकर सामने दीवार से टकरा गया.

मलखान- अरे ये सामने दीवार किस गधे ने कड़ी करदी जीने के बीच में अरे लगता है फर्स्ट फ्लोरे आ गया मई भी कितना बेवकूफ हु यहाँ तो औरतों के कमरे है सॉरी बहनजी सॉरी गलती हो gayi............hichki

उस जीने के घुमाव को पहली मंजिल समझ मलखान घूमकर और ऊपर चढ़ गया अब वो पहली मंजिल पर पहुँच गया था जहा लाइन से कमरे बने थे जिनमे शादी में आई औरतों के रुकने की व्यवस्था थी पर मलखान के लिए तो वो दूसरी मंजिल पर आ गया था जहा उसका कमरा था.

मलखान- आ गया मेरा फ्लोरे अब तीसरा कमरा ओने कमरा हिचकी ये तवो कमरा एंड ये रहा थ्री कमरा मेरा कमरा.

मलखान ने उस तीसरे कमरे के दरवाजे को पुश करा और ये अजीब संयोग था की दरवाजा खुला हुआ था या तो अंदर कोई था नहीं या जो भी था वो किसी वजह से दरवाजा बंद करना भूल गया था पर मलखान को तो पता भी नहीं था की ये उसका कमरा नहीं किसी और का कमरा है अब ये किसका कमरा है किसी कपल का या किसी सिंगल महिला का और जब उसे पता चलेगा की एक 55 साल का आदमी शराब पीकर उसके कमरे में घुस आया है तो वो कैसे रियेक्ट करेगी ये पता चलना था.

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कमरे में अन्धाघुप्प अन्धेरा था अपना हाथ तक नहीं दिखाई दे रहा था तो कमरा पहचानना तो बहुत दूर की बात थी. नशे में धुत्त मलखान ने दीवार पर यहाँ वहा हाथ मारा लाइट का स्विच ढूंढ़ने के लिए पर उसे मिला नहीं वो लड़खड़ाता हुआ हाथ आगे करके बिस्तर ढूंढ़ने लगा. और जल्द hi उसे बिस्तर मिल भी गया नशे में ढहत्त मलखान सिंह तुरंत बिस्तर पर गिर पड़ा.

बिस्तर पर लेता मलखान सिंह आँखे बंद करे अपनी बीवी सरला को याद कर रहा था. उसकी आँखों के सामने अपनी बेटी शोभा और दामाद विक्रम का रोमंटिक सा डांस hi घूम रहा था. वो यही soch-sochkar उत्तेजित हो रहा था की अगर उसकी बीवी सरला होती तो वो भी उसके साथ ऐसे hi नाचता. नेहा और शबाना के सेक्सी कामुक डांस को याद करके उसकी उत्तेजना और बाद जाती थी.

वो एक औरत के साथ के लिए अंदर hi अंदर तड़प रहा था. शराब ने तो जैसे उसके सोचने समझने की शक्ति hi शून्य करदी थी. कभी वो विक्रम और शोभा के डांस में खुद को और सरला को इमेजिन करने लगता तो कभी नेहा के सेक्सी कपड़ो में अपनी बीवी सरला को इमेजिन करता और कभी शबाना के गद्रे बदन पर अपनी सरला का चेहरा फिट करके कल्पना की दुनिया में खो जाता.

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अपनी इमेजिनेशन में खोया खोया hi कब उसके हाथ अपनी पंत के हुक खोलकर अंडरवियर के अंदर दाखिल हो गए उसे पता hi नहीं चला. अपने अंडरवियर के अंदर हाथ डालकर उन्होंने अपने लुंड को अपनी मुट्ठी में कास लिया और उसे हाथो में लेकर मसलने लगा. लुंड को मसलते हुए भी baar-baar उसके मुँह से सरला सरला hi निकल रहा था. लुंड को मसलते हुए भी उसे ऐसा महसूस हो रहा था की उसका लुंड वो खुद नहीं बल्कि उसकी बीवी सरला hi मसल रही है. नेहा के कपड़ो में सरला को इमेजिन करके उसकी उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी. उसके हाथों की गति इस इमेजिनेशन में और ज्यादा बाद गयी.

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लुंड को मसलते मसलते माललखन सिंह झड़ने की कगार पर आ गया था लुंड को मसलते मसलते उन्होंने एक करवट बायीं तरफ ली और उनका पेअर सीधा किसीके पैरो पर जाकर गिरा. नशा इंसान के सोचने समझने की शक्ति पर इस तरह हावी हो जाता है की वो जिस िमागिनोरी दुनिया में होता है उसीको सच मानने लगता है. मलखान सिंह भी इस वक़्त अपने काल्पनिक संसार में अपनी पत्नी सरला के साथ था और उसके पेअर जिस पर पड़े वो उसके हिसाब से सरला hi थी.

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अपने बगल में अपनी बीवी सरला को महसूस कर उसके हाथ अपने लुंड से अलग हो गए सरला के जिस्म पर पहुँच गए. उसका हाथ सरला की कमर पर था सरला की चिकनी कमर की चिकनाहट उसके अंदर की गर्मी को और ज्यादा बड़ा रही थी. उसके बगल में लेती औरत सदी पेटीकोट ब्लाउज में थी जिस वजह से उसका पेट खुला हुआ था जिसे मलखान अपनी पत्नी का पेट समझकर सहलाए जा रहा था. पेट को सहलाते सहलाते मलखान अपना हाथ ऊपर की तरफ ले गया और सरला की सदी के अंदर हाथ डालकर ब्लाउज के ऊपर से hi सरला के एक उभर को अपने हाथो में भर लिया. और अपने हाथो से उसके स्तन को halke-halke दबाने लगा.

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मलखान- वाह मेरी जान इस उम्र में भी तेरी चुकी क्या टाइट टाइट है. लगता है बड़े दिन से इन्हे चूसा नहीं इसलिए इतनी टाइट हो गई है आज chus-chus करा सारा निचोड़ दूंगा.

मलखान उसके स्तनों को अपने हाथो से दबाने मसलने लगा और वो महिला भी अब उत्तेजना में अंगड़ाइयां भरने लगी थी. पर सोचने वाली बात ये थी की एक अनजान के बगल में लेटकर ये सब करते हुए भी वो उसे ये सब करने दे रही थी या तो वो गहरी नींद में थी और नींद में ये सब सपना समझ रही थी या अंदर से चैरेक्टरलेस थी और सब कुछ जानते हुए भी इस मौके का मजा ले रही थी और या फिर इस सिचुएशन में उसे समझ नहीं आ रहा था की कैसे रियेक्ट करे.

मलखान एक हाथ से तो सरला के स्तनों से खेल hi रहा था उसने दूसरा हाथ सरला की कमर के नीचे से डालकर उसे अपनी तरफ घुमा लिया. उसके जिस्म से आ रही सुगन्धित इत्र की खुशबू मलखान को दीवाना सा कर रही थी. और उसकी घनी रेशमी ज़ुल्फ़े जो मलखान के चेहरे पर आ गयी थी उनसे आ रही गजरे की महक मलखान के नशे को और भी दुगना कर रही थी. वो महिला मलखान की हर पल उत्तेजक होती जा रही हरकतों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दे रही थी.

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मलखान और उस औरत का चेहरा बस इंच भर के फैसले पर था. उस औरत के मुंह से आ रही garam-garam साँसे मलखान के चेहरे को छू रही थी. और मलखान महक के आने की दिशा की तरफ खिंचा चला जा रहा था जैसे वो गरम साँसे उसके चेहरे को अपने साथ खींचकर लिए जा रही थी. उन साँसों के आने की दिशा की तरफ जाते जाते मलखान ने अपने होंठो से उन साँसों के शोर को बंद कर दिया. या यु कहे की मलखान और उस औरत के होंठ आपस में जुड़ गए थे.

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इस चुम्बन के साथ hi उस औरत के जिस्म में भी हलचल सी हुई शायद वो नींद से जाग गयी थी और अब शायद वो मलखान को पीछे धकेल कर शोर मचने वाली थी. पर हुआ इसका एकदम उलटा मलखान सिंह को पीछे धकेलने की बजाए उसने अपनी मलखान की गर्दन के ird-gird दाल दी और मलखान के होंठो के saath-saath अपने होंठो को चलकर उस चुम्बन में मलखान सिंह का साथ देने लगी. दोनों अपनी गर्दन hila-hilakar उस चुम्बन को और भी ज्यादा इंटिमेट बना रहे थे. दोनों की जीभ एक दुसरे के मुंह के अंदर जाकर एक दुसरे के मुंह की गहराई को नाप रही थी.

पहले से मसलने से पूरी तरह तना हुआ मलखान का लुंड पेटीकोट के ऊपर से hi उस औरत की छूट पर दस्तक दे रहा था. और चिपके होने की वजह से महिला की कासी हुई चुकी मलखान के बदन पर घिस रही थी और होंठ तो आपस में जुड़े थे hi. दोनों पूरी तरह से एक दूसरे में गुथे हुए थे की मुँह से आ रही शराब की महक भी अलग नहीं कर सकती थी. पिछले कई मिनट से वो एक दुसरे को किश कर रहे थे. मलखान ने अपना हाथ पीछे लेजाकर उस औरत की गांड को अपने हाथो में भर लिया और सदी के ऊपर से hi उसके नितम्ब अपने हाथ से दबाने लगा.

गांड दबाते दबाते मलखान सरला के चूतड़ के बीच की दरार में अपनी ऊँगली दाल दी और उसकी सदी को गांड के अंदर दबाने लगा. ऊपर सांस लेने के लिए hi सही उन्होंने अपने होंठो को एक दुसरे से अलग करा और मलखान से सरला के गालो पर अपने होंठ फिरना शुरू कर दिया. मलखान सरला के गालो को चुम रहा था और जीभ निकलकर उसके गाल चाटने लगा. उत्तेजना दोनों तरफ काफी बाद चुकी थी और मलखान के saath-saath वो महिला भी इसमें पूरा साथ दे रही थी.

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उस महिला के मुँह से मादक आवाज़े निकल रही थी जो मलखान के जोश को और ज्यादा बड़ा रही थी. गालो को चूमते छत्ते मलखान ने अपने होंठ सरला की गर्दन पर रख दिए और उसकी गर्दन पर अपने होंठो को रगड़ने लगा. उसके मुँह से आती गरम हवाई उस महिला की गर्दन में गुदगुदी सी हो रही थी जिसे कण्ट्रोल करना उसके लिए भी मुश्किल हो गया था. अपनी गर्दन पर मलखान की चुम्बनों ने उसे बहुत उत्तेजित कर दिया था और उसने मलखान के बालो को कसकर पकड़ लिया और मलखान के चेहरे को अपने गले में दबाते हुए मादक आवाज में उसने पहली बार एक नाम पुकारा.

“विक्रम” m‍mmmam ओह्ह… विक्रम किश में

यही वो अलफ़ाज़ थे जो उस महिला के मुँह से निकले. विक्रम यानी शोभा का पति मलखान सिंह का दामाद जिसके साथ कुछ देर पहले मलखान सिंह महफ़िल सजाए बैठा था. वो महिला सेक्स की उत्तेजना में विक्रम का नाम ले रही थी जैसे उसके साथ ये सब विक्रम कर रहा हो. हवेली में केवल एक महिला hi ऐसी थी जो विक्रम के साथ इस लिमिट तक जा सकती थी विक्रम की नयी नवेली बीवी इस वेडिंग सेरेमनी की दुल्हन शोभा.

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यानी इस वक्त मलखान जिस औरत को अपनी बीवी सरला समझकर उसके साथ बिस्तर पर वासना के नशे में डूबा हुआ था वो कोई और नहीं उसकी अपनी बेटी शोभा थी जिसका कुछ दिन पहले hi उसने अपने हाथों से कन्यादान करा था जिसकी शादी की सुहागरात भी अभी नहीं हो पाई थी. जो शादी के तीन दिन बाद भी अब तक अक्षत कुंवारी थी. मलखान नशे में डूब कर खुद उसके कौमार्य को भांग करने की तरफ बड़ा चला जा रहा था. उसके दिलो दिमाग पर शराब और वासना का नशा इस कदर हावी हो गया था की शोभा के होंठो से निकले वो अलफ़ाज़ भी उसके कानो तक नहीं पहुंच पाए थे.

मलखान तो नशे में था कई बोतल शराब ने उसके दिमाग की सोचने समझने की छमता शून्य करदी थी वो अपने अतीत में अपनी बीवी सरला के पास पहुँच गया था पर शोभा क्यों नहीं पहचान पाई की इस वक्त जो उसके बगल में लेता है वो उसका पति नहीं उसका बाप है. इसका जवाब भी वही शराब थी जो विक्रम ने खुद अपने हाथों से शोभा को ज़िद कर करके पिलाई थी. एक हब्बितुअल ड्रिंकर के लिए तो 5-6 पेग आम बात थी पर शोभा जैसी फर्स्ट टाइमर के लिए इतने पेग काफी थे टल्ली होने के लिए. विक्रम ने तो शोभा को किसी और वजह से शराब पिलाई थी ताकि शोभा की कामिच्छा पर ब्रेक लग जाए पर तब वो भी ये नहीं जनता था की ये गलती उसकी बीवी को अपने बाप के बिस्तर पर पहुंचा देगी या यु कहे की उसके ससुर को अपनी बेटी के बिस्तर पर.

शोभा नशे में यही समझ रही थी की डांस पार्टी ख़तम होने के बाद विक्रम अपने वादे के मुताबिक़ उसके साथ सुहागरात मानाने उसके कमरे में आया है… वो बेचारी क्या जानती थी की वो जिसे अपना सब कुछ सौपने जा रही है वो उसका पति नहीं उसका बाप है. जिसने आज तक किसी मर्द को खुद को छूने नहीं दिया कभी कोई बॉयफ्रेंड नहीं बनाया हमेशा अपनी मर्यादा का ख़याल रखा आज उसके पति के धोके की वजह से उसका अपना बाप उसकी मर्यादा को तार तार करने जा रहा था.

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मलखान शोभा की गर्दन को चूमते हुए उसके ऊपर आ गया और पागलो की तरह अपनी बेटी की गर्दन को चाटने लगा. मलखान के भारी भरकम शरीर के निचे शोभा का बदन छुप सा गया था पर गर्दन हर औरत का सबसे सेंसिटिव हिस्सा होता है. मलखान की चुम्बनों ने शोभा की उत्तेजना को भी बड़ा दिया था उसने भी मालखां को पीठ से पकड़कर अपने जिस्म से चिपका लिया. शोभा की गर्दन को चूमते हुए मलखान थोड़ा नीचे को सरक आया. अब मलखान का चेहरा शोभा के स्तनों के ऊपर था. शोभा के उभरे हुए स्तन मलखान को अपनी तरफ आकर्षित कर रहे थे. सातो सहेलियों में विनीता और शोभा hi ऐसी थी जिनका फिगर पूरी तरह परफेक्ट था ना वो नेहा और आरती की तरह दुबली पतली थी ना शबाना और गरिमा की तरह एक्सट्रा लार्ज और ना नीतू की तरह रंग में सांवली.

मलखान ने शोभा का आँचल उसके छाती पर से हटा दिया अब ब्लाउज में कासी हुई उसकी उभरी हुई चूचिया मलखान के होंठो के एकदम करीब थी. बरसो से औरत के लिए तरस रहे मलखान अपने होंठ ब्लाउज के ऊपर से hi शोभा के उभारो पर रख दिए और ब्लाउज के ऊपर से hi अपनी बेटी के स्तनों को अपनी जीभ से चाटने लगा. मलखान के चाटने से शोभा के स्तन टैंकर एकदम कड़क हो गए थे और उसके निप्पल ब्लाउज के अंदर से भी ऊपर उभर आए थे. मलखान ने उन्ही निप्पल के ird-gird अपनी जीभ फिरना शुरू कर दिया. उत्तेजना के मरे शोभा का तो बुरा हाल हुआ जा रहा था ये किसी भी मर्द से उसका पहला मिलान उसकी सुहागरात थी फर्स्ट नाईट वो भी उसके अपने बाप के साथ.

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चाट चाट कर मलखान ने शोभा के ब्लाउज को आगे से गीला कर दिया था. पर उत्तेजना में शोभा भी मलखान के कुर्ते को नीचे से उठाकर उतरने की कोशिश कर रही थी पर दबे होने की वजह से ये पॉसिबल नहीं था. शोभा की हालत को समझते हुए मलखान खुद उठकर बैठ गया और अपना कुर्ता उतारकर नीचे फ़ेंक दिया. बनियान वो पहने hi नहीं था उसकी बालों से भारी छाती अब नंगी थी. खुद को ऊपर से नंगा करने के बाद उसने गर्दन से पकड़कर शोभा को भी ऊपर उठाया और एक बार फिर शोभा को अपनी बाहो में कास लिया और अपने हाथ पीछे लेजाकर शोभा की ब्लाउज के हुक को सहलाने लगा. शोभा ने खुद को पूरी तरह उसके हवाले कर दिया था और मलखान की नंगी पीठ के घने बालो को अपने हाथो से सेहला रही थी.

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दोनों बिस्तर पर बैठे हुए एक दुसरे को अपनी बाहो में जकड़े हुए थे. शोभा के ब्लाउज के हुक से खेलते हुए मलखान ने ek-ek कर उन्हें खोलना शुरू कर दिया. शोभा की ब्लाउज का ek-ek हुक पीछे से खुलता जा रहा था और आगे से उसके ब्लाउज की कसावट ढीली पड़ती जा रही थी. ब्लाउज के सारे हुक खुल गए थे अब मलखान के हाथो और शोभा की नंगी पीठ के बीच अगर कुछ बचा था तो बस उसकी ब्रा का एक आखिरी हुक जो ज्यादा देर उनके बीच बढ़ा नहीं बना. मलखान ने शोभा की ब्रा का वो हुक भी खोल दिया. शोभा की ब्रा की भी कसावट आगे से ख़तम हो गई और मलखान को अपनी छाती पर शोभा के स्तनों की कोमलता साफ़ महसूस हो रही थी.

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मलखान ने शोभा की ब्लाउज और ब्रा की स्ट्रैप्स को अपने हाथो में थमा और धीमे धीमे उन्हें उसके कंधे से सरकाना शुरू कर दिया. शोभा की ब्लाउज और ब्रा उसके कंधो से नीचे आ गए थे और कंधे नंगे हो गए थे मलखान ने सर झुका कर अपने होंठ अपनी बेटी के नंगे कंधो पर रख दिए और उन्हें अपने थूक से गीला करने लगा. मलखान अपने होंठ शोभा के कंधो पर रगड़ रहा था और शोभा गहरी गहरी आहे भरते हुए मलखान सिंह को कसकर अपने बाहो में समेटे हुए थी.

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कंधो को छत्ते हुए मलखान सिंह ने शोभा के ब्लाउज और उसकी ब्रा को उसकी बाहो से खींचकर बाहर निकल दिया और फर्श पर फेक दिया. अब दोनों बाप बेटी उस अँधेरे कमरे में बिस्तर पर एक दुसरे के सामने कमर के ऊपर से पुरे नंगे थे. शोभा को ऊपर से नंगा करने के बाद मलखान ने एक बार फिर उसे अपने सीने से लगा लिया. ब्लाउज और ब्रा उतर जाने के बाद अब शोभा की नंगी चूचिया सीधा मलखान की बालो से भरी छाती में घिस रही थी. शोभा की चूचियों की छुअन का एहसास ने मलखान को दीवाना सा कर दिया था. उसने अपने हाथ अपने और शोभा के बीच में दाल दिए शोभा के स्तन अपने हाथ में थम लिए और haule-haule उन्हें दबाने लगा जैसे अपने हाथों से उनका नाप ले रहा हो.

मलखान- तेरे बुब्बे तो बहुत कड़क हो गए है इस उम्र में भी चिकनाहट है तेरे बदन में ऐसा लग रहा की नयी नवेली दुल्हन के बुब्बे मसल रहा हु.

अब मलखान को क्या पता की वो नयी नवेली दुल्हन के hi बुब्बे मसल रहा था जिसकी अब तक नाथ भी नहीं उत्तरी थी. और नशे ने शोभा के दिमाग को जैसे शून्य सा कर दिया था और ऊपर से सम्भोग का ये पहला पहला एहसास जो उसे मलखान की कही कोई बात सुनाई hi नहीं दे रही थी.

अपनी बेटी के स्तन मसलते मसलते मलखान हद से ज्यादा उत्तेजित हो चुका था और अब वो जल्द से जल्द उन कड़क बब्बो को अपने मुंह में भर लेना चाहता था. मलखान ने बिना देर करे शोभा को वापस से बिस्तर पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर झुकता चला गया जब तक उसके होंठ शोभा के स्तनों को टच नहीं हो गए. मलखान का चेहरा अपनी बेटी के स्तनों के ठीक ऊपर था उसके होंठ halke-halke शोभा की निप्पल को टच हो रहे थे शोभा को अपने स्तनों पर होंठो की छुअन का एहसास हो रहा था उनको मुंह में भरे जाने के एहसास से hi वो उत्तेजित हो रही थी.

बाप बेटी के बीच की मर्यादा तार तार होने की कगार पर थी. मलखान से अब सबर करना मुश्किल हो रहा था जहा शोभा अपने पति से दूध चुसवाने के लिए मारी जा रही थी वही मलखान सिंह भी अपनी सो कॉल्ड पत्नी के उभारों को मुंह में भरने के लिए लालायित था. एक बाप बेटी पति पत्नी का सम्बन्ध बनाने की और अग्रसर थे जिस सुहागरात के लिए शोभा मरी जा रही थी वो सुहागरात उसके बाप के सात मैंने जा रही थी.

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मलखान सिंह ने अपने होंठो को हल्का सा खोला और शोभा के निप्पल को अपने होंठो में कास लिया और उसे ऐसे चूसने लगा जैसे छोटा बच्चा अपनी माँ का दूध पिता है. शोभा के टाइट कैसे हुए निप्पल उसे और ज्यादा मजा दे रहे थे. शोभा की साँसे भी तेज हो गयी थी अपने स्तनों पर मर्द के होंठो का ये पहला एहसास उससे अलग hi दुनिया में ले आया था उसने मलखान के सर को अपने हाथो में थम लिया और उसके सर को अपनी छाती में दबाने लगी. मलखान भी शोभा के अंदर की उत्तेजना को समझ गया और उसने पूरा मुंह खोलकर शोभा के आधे से ज्यादा स्तन को अपने मुंह में भर लिया.

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जिस बच्ची को उसने कभी अपनी गोड़ में लिटाकर दूध पिलाया था आज उसी बेटी के स्तनों को वो अपने मुंह में भरे हुए था. मलखान की garam-garam साँसे अपने स्तनों पर शोभा के भी बर्दाश्त के बाहर की बात थी उसने मलखान के बालो को कसकर अपनी मुट्ठी में जकड लिया और अपने पैरो को मलखान की कमर के ird-gird लपेट लिया.

शोभा के सहयोग ने मलखान का भी जोश बड़ा दिया वो और पागलो की तरह शोभा के स्तनों पर टूट पड़ा. शोभा के स्तन चूसते चूसते वो हलके से उन्हें अपने दातो में दबाकर काट भी लेता जिस पर शोभा की मीठी सी आह निकल जाती. शोभा के स्तनों पर मलखान के कई लव बिघ्ट्स के निशाँ बन गए थे.

दोनों बाप बेटी पूरी तरह से इस कामक्रिया में खो चुके थे. न मलखान को ये होश रहा था की उसकी बीवी को मरे कई साल हो गए है न शोभा को ये होश था की ये उसका पति नहीं उसका बाप है. मलखान के होंठो की चूसै ने शोभा की उत्तेजना को चरम पर पहुंचा दिया उसके पेट में मरोड़ सी उठ रही थी और एक तेज आह के साथ शोभा के सबर का बाँध टूट गया जिस ओर्गास्म को शोभा ने आज से पहले केवल एक बार भीमा के लुंड के तिलक वाले दिन हासिल करा था उसे आज उसने एक बार फिर हासिल कर लिया था और वो भी अपने पति की वजह से नहीं बल्कि अपने बाप की वजह से.

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झाड़ जाने के बाद मलखान की कमर पर शोभा के पैरो की गिरफ़्त भी ढीली पद गयी थी. मलखान भी समझ गया था की उसने अपना चरमसुख प् लिया है शोभा के स्तन को चूसते काटते मलखान थोड़ा निचे की तरफ सरक आया और अपने होंठ शोभा के मखमली चिकने पेट पर रख दिए और अपने होंठों को शोभा के पेट पर idhar-udhar पागलो की तरह घिसने लगा. मलखान की garam-garam साँसें शोभा को अपने पेट पर महसूस हो रही थी जिस वजह से शोभा के गूसबम्प्स खड़े हो गए थे. शोभा के पेट को चूमते हुए मलखान ने अपनी जीभ निकलकर शोभा की नाभि में दाल दी और उसकी नाभि में अपनी जीभ gol-gol घूमने लगा. शोभा को तो हद से ज्यादा गुदगुदी हो रही थी उसका शरीर tej-tej झटके खा रहा था खुद को कण्ट्रोल करने के लिए उसने बिस्तर ली चद्दर को कसकर मुट्ठी में थम लिया.

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शोभा के पेट और नाभि को चूमते हुए मलखान अपना हाथ शोभा की कमर पर पेटीकोट वाले हिस्से पर ले गया और वह फांसी शोभा की सदी को एक झटके में खींचकर बहार निकल दिया और वही फर्श पर फ़ेंक दिया शोभा के जिस्म का एक और कपडा उसके जिस्म का साथ छोड़ गया था. सदी उतरने के मलखान एक बार फिर शोभा के पेटीकोट पर ले गया और पेटीकोट की गाँठ को खोलने का प्रयास करने लगा पर मलखान एक हाथ से hi उस गाँठ को खोलने की कोशिश कर रहा था जिसमे उसे दिक्कत आ रही थी. शोभा का साबरा अब जवाब दे रहा था वो खुद अपने हाथ निचे ले गयी और अपने पेटीकोट की गाँठ को खोल दिया.

मलखान- तू तो मुझसे भी ज्यादा बेचैन लगती है, हो भी क्यों न इतने साल मैं तुझसे दूर रहा तो तू भी तो दूर रही है तेरी छूट भी तो मेरा लुंड लेने के लिए मरी जा रही होगी.

मलखान को अगर पता चल जाता की वो ये शब्द अपनी खुद की बेटी से बोल रहा है तो वो शर्म से धरती में गड hi जाता. पर फिलहाल तो होनी को कुछ और hi मंजूर था.

मलखान एक बार फिर शोभा के ऊपर से हटकर शोभा के बगल में आकर लेट गया और अपने हाथ निचे लेजाकर अपनी धोती भी खींचकर उतर दी और फर्श पर फ़ेंक दी. अब मलखान के जिस्म पर बस एक ढीला ढला पटरे वाला अंडरवियर जो मोस्टली गांव देहात में पहना जाता था. पर अब वो अंडरवियर भी मालखां को बोझ सा लग रहा था उसने उसकी गाँठ खोलकर अपनी टांग उठाकर उसे भी उतार फेका. अब एक बाप एक hi बिस्तर में अपनी बेटी के बगल में नंगा लेता हुआ था और जल्द hi अपनी बेटी को भी नंगा करने जा रहा था.

ुंडेरवेअर उतर जाने के बाद मलखान का तना हुआ 8 से 10 इंच का हद से ज्यादा लम्बा लुंड अपने पूर्ण विकराल अवतार में सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया. मलखान ने एक बार अपने लुंड अपने हाथों में भरकर देखा जो किसी औरत की छूट में घुसने के लिए पूरी तरह बेताब और तैयार था. मलखान ने शोभा के हाथ को अपने हाथों में थमा और उसके हाथों को अपने लुंड के पास लेकर उसमे अपना लुंड थमा दिया. जिन हाथों से विक्रम के नाम की मेंहदी भी नहीं छूती थी उन्ही हाथों में वो अपने बाप का लुंड थामे हुए थी.

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अपने हाथों में एक मर्द का लुंड का एहसास शोभा को भी एक बार फिर उत्तेजित करने के लिए काफी था शोभा की दिमाग में भीमा का लुंड और उसका आकर भी एक पल के लिए दौड़ गया जिसपर उसने तिलक करा था. कुछ देर तो मलखान यही शोभा की हथेली को अपने लुंड के ird-gird कैसे रहा फिर धीमे धीमे उसने शोभा की हथेली को अपने लुंड पर upar-niche करना शुरू कर दिया. कुछ देर मलखान खुद से शोभा के हाथ को अपने लुंड पर चलता रहा फिर धीमे धीमे शोभा को इस एहसास में मजा आने लगा और उसने खुद से अपने बाप के लुंड को मसलना शुरू कर दिया.

शोभा को खुद से अपना लुंड मसलते देख मलखान ने शोभा के हाथों से अपना हाथ हटा लिया मलखान के हाथ हटा लेने के बावजूद भी शोभा मलखान के लुंड को मसले जा रही थी. मजे के मरे मलखान की तो आँखे बंद हो गयी थी. शोभा को वो अपने लुंड के आकर का ेहास करा चुका था पर अब वो भी अपनी बीवी की छूट को छूकर महसूस करना चाहता था और शोभा की तरफ करवट करते हुए उसने अपना हाथ सीधा शोभा के पेटीकोट पर रखा और पेटीकोट के खुले हुए हिस्से से होते हुए बिना देर किआ अपना हाथ सीधा शोभा की पंतय के अंदर दाखिल कर उसकी छूट पर रख दिया. आज की सुहागरात का सोचकर शोभा ने पहले से अपनी छूट को शेव कर रखा था.

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एक बाप बेटी के बीच की मर्यादा पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी एक बेटी के हाथ में अपने बाप का तना हुआ लुंड जिसे अपने छूट में लेने के लिए वो मारी जा रही थी और एक बाप का हाथ अपनी बेटी की चड्डी के अंदर उसकी कामरुस गीली छूट पर था जिसके अंदर वो अपनी एक ऊँगली भी दाखिल कर चुका था. यु तो मलखान ने बचपन में भी शोभा को नंगा देखा था उसे नहलाया था उसके कपडे बदले थे पर बचपन के नंगेपन और जवानी के नंगेपन में ज़मीन आसमान का अंतर आ गया था. बचपन का वो अवसर एक बाप बेटी का पवित्रा प्यार था पर आज के इस नानागेपन में केवल एक औरत और मर्द के बीच की हवस और वासना की भूक थी जिसमे एक बाप बेटी का पाक रिश्ता बलि चढ़ने जा रहा था.

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शोभा की कासी हुई छूट में मलखान की ऊँगली काफी कसकर अंदर जा रही थी और जाए भी क्यों ना एक अक्षत कुँवारी छूट जो थी जिसकी कौमार्य आज ख़तम होने hi वाला था वो भी अपने बाप के हाथो. मलखान की ऊँगली को अपनी छूट के अंदर महसूस कर शोभा ने अपने निचले होंठ को अपने दातो में दबा लिया और मलखान के लुंड को कसकर अपनी मुट्ठी में दबा लिया. एक पल के लिए तो मलखान को बहुत दर्द हुआ और उसने झटके के साथ अपनी ऊँगली को शोभा की छूट से बाहर खींच लिया और शोभा के हाथ को अपने लुंड से अलग कर दिया क्युकी अब वक्त आ गया था मर्यादा की उस आखिरी दीवार के भी गिर जाने का.

मलखान ने शोभा की जांघो के ऊपर अपनी जाँघे रख ली और अपने हाथ को निचे लेजाकर शोभा का पेटीकोट धीमे धीमे ऊपर की तरफ सरकने लगा. जैसे जैसे शोभा का पेटीकोट ऊपर होता जा रहा था उसकी मांसल गोरी मखमली जाँघे नंगी होती जा रही थी. ऊपर होते होते शोभा का पेटीकोट उसकी पंतय तक आ चुका था .बेचारी शोभा ने अपने पति को रिझाने के लिए एक सेक्सी सी पंतय पहनी थी पर उसके पति को रिझाने का मौका तो उसे नहीं मिल पाया पर उसका बाप जरूर अँधेरे में उसकी पंतय की कोमलता का मजा उठा रहा था. मलखान सिंह ने शोभा के पेटीकोट को थोड़ा और ऊपर कर दिया और अब पंतय पूरी तरह से खुल चुकी थी और पेटीकोट तो बस नाम के लिए hi उसकी कमर के ird-gird लिप्त हुआ था. बस ले देकर एक पतली सी पंतय hi एक बाप बेटी के बीच दीवार बानी थी.

मलखान ने शोभा की पंतय को अपने हाथो में थमा और उसे भी नीचे सरकता चला गया शोभा ने भी मौन समर्थन के रूप में अपनी गांड उठा दी ताकि उसकी पंतय आसानी से नीचे उतार जाए. शोभा के जिस्म का वो आखिरी पर्दा भी हैट चुका था. एक बाप ने अपनी बेटी के कौमार्य को भांग करने उसकी सील तोड़ने उसकी नाथ उतरने के लिए उसे पूरा नंगा कर दिया था पेटीकोट तो बस नाम के लिए शोभा के कमर में हिल्गा हुआ था. पंतय उततरने के बाद मलखान अपनी बेटी की छूट के दाने को अपने हाथ से सहलाने लगा.

लम्बे समय से भरा बैठा मलखान अब इस छूट में अपना लुंड घुसेड़ने के ली बेताब हो रहा था वही शोभा भी अपना सब कुछ अपने पति को सौपने के लिए मरी जा रही थी. मलखान ने शोभा को दूसरी तरफ घुमा दिया अब शोभा की पीठ मलखान की तरफ थी. मलखान आगे बाद कर शोभा की पीठ पर पीछे से चिपक गया और पीछे से अपना एक हाथ शोभा के नीचे से लेजाकर उसके स्तन को अपने हाथ में भर लिया. और अपनी एक टांग को शोभा की टांगो के बीच से आगे की तरफ घुसेड़ दिया. शोभा की जांघो के बीच अपनी टांग दाल देने से मलखान का लुंड शोभा की छूट के एकदम करीब पहुँच गया था.

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मलखान के लुंड का कड़क एहसास शोभा को अपनी छूट पर महसूस हो रहा था और शोभा की छूट की गर्माहट का एहसास मलखान को अपने लुंड पर हो रहा था. मालखां ने अपनी कमर को आगे की तरफ hila-hilaakar अपने लुंड को शोभा की छूट पर घिसना शुरू कर दिया. मालखां का तना हुआ लुंड शोभा की छूट के डेन को घिसता हुआ आगे जाता और फिर उसी दाने को रगड़ता हुआ वापस आ जाता. छूट का दाना हर औरत का काफी सेंसिटिव हिस्सा होता है जो उसकी सम्भोग की भूख को एक पल में कई गुना बड़ा देता है.

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एक तरफ जहा मलखान नीचे शोभा की छूट को अपने लुंड से सहलाकर उसकी उत्तेजना बड़ा रहा था वही ऊपर शोभा के स्तनों को अपने हाथों से मसलकर सहलाकर अपने लुंड की उत्तेजना में इज़ाफ़ा कर रहा था ताकि बरसो बाद खुद को और अपनी बीवी को सम्भोग का पूर्ण आनंद दे सके. काफी देर शोभा के छूट के दाने को अपने लुंड से रगड़ने के बाद फिनॉय वो घड़ी आ गयी थी जब बाप बेटी के सम्बन्ध की मर्यादा पूरी तरह ख़तम हो जाने वाली थी. एक बाप अपनी hi बेटी की छूट में अपना लुंड डालने वाला था. एक बाप एक औरत की मर्यादा की वो आखिरी दीवार वो आखिरी पर्दा खुद अपने हाथों से पहाड़ देने वाला था.

मलखान अपना एक हाथ नीचे ले गया और अपने लुंड को अपने हाथ में थम लिया और आगे लेजाकर उसे अपनी बेटी की छूट के सुराख पर सेट कर दिया अब बस उस धक्के की देरी थी शोभा की फर्स्ट नाईट को कम्पलीट होने में. मालखां के लिए वो अपनी कई बार चुद चुकी बीवी को छोड़ रहा था उसे क्या पता था की वो जिसे छोड़ने जा रहा था वो सेक्स के खेल की एकदम कच्ची खिलाड़ी है और ये उसका पहला सम्भोग था. मलखान ने अपनी बीवी समझकर एक तेज धक्का आगे की तरफ मारा. बेशक शोभा की छूट बहुत कासी हुई और टाइट थी पर उसके बाप का लुंड भी गाँव के सबसे तगड़े लौंडो में से एक था शोभा की टाइट छूट की दीवार को खोलता हुआ शोभा की छूट के अंदर समा गया.

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शोभा के मुँह से एक जोरदार चीख निकल गई पर जो शायद बहार भी गयी होगी पर रात बहुत हो जाने के कारन और डांस पार्टी की थकावट के बाद सबके गहरी नींद में होने की वजह से किसी ने ध्यान नहीं दिया. शोभा को चीखता देख माललखन ने उसके मुँह को अपने हाथों से बंद कर लिया.

मलखान- क्या करती है तू तो नयी नवेली दुल्हन की तरह चिल्ला रही है पहली बार छुड़वा रही है क्या.

मलखान ने फिर एक धक्का आगे को मारा पर इस बार जीत शोभा की छूट की तिघटनेस की हुई शोभा की छूट की कसावट ने उसे जरा भी आगे नहीं जाने दिया.

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मलखान- क्या बात है सरला तेरी फुद्दी तो एकदम टाइट टाइट हो गई पहले तो आराम से चला जाता था आज तो ये ऐसी लग रही जैसी हमारी सुहागरात के दिन थी एकदम टाइट एकदम कासी हुई.

मलखान को क्या पता था आज भी वो सुहागरात hi मानाने जा रहा था बस अपनी बीवी के साथ नहीं अपनी बेटी के साथ. शोभा की छूट की तिघटनेस को महसूस करते हुए मलखान ने एक जोरदार तेज धक्का आगे को मारा और शोभा की मर्यादा की वो आखिरी दीवार अपने बाप की कामिच्छा की भेट चढ़ गई. शोभा की छूट की वो झिल्ली टूट चुकी थी मलखान का आधे से ज्यादा लुंड शोभा की छूट के अंदर समा चुका था. शोभा का दर्द के मारे बुरा हाल था वो चीखना चाहती थी पर मलखान के मुँह दबाए होने की वजह से उसकी चीख उसके मुँह से बहार hi नहीं आ पाई.

अभी भी मलखान का थोड़ा लुंड शोभा की छूट के बाहर था. मलखान ने एक और धक्का आगे की तरफ मारा और शोभा की छूट की दीवार को पूरी तरह खोलता हुआ मलखान का लुंड शोभा की छूट की गहराई तक समा गया जहा एक औरत की बच्चेदानी होती है. शोभा की आँखों से आंसू उसके गालो पर बहकर आ रहे थे उसने सपने में भी नहीं सोचा था की कौमार्य भांग होने पर इतना ज्यादा दर्द होता है.

मलखान को तो ये अंदाजा भी नहीं था की उसने abhi-abhi एक कुँवारी कन्या का कुंवारापन चीन लिया था वो भी अपनी खुद की बेटी का उसके लिए तो ये एक नार्मल सेक्स था जिसमे वो अपनी बीवी को हमेशा की तरह छोड़ रहा है. वो बिना रुके लगातार आगे की और धक्के लगता रहा हर धक्के पर शोभा की जान हलक तक आ जाती थी एक तो बेचारी का पहला सेक्स ऊपर से उसके बाप का मुसल जैसा लुंड और ऊपर से उसके कुंवारेपन के बारे में ना सोचते हुए मलखान का लगातार धक्के पर धक्के लगते जाना.

पर वो कहते है ना की सेक्स के शुरुआती तेज धक्के जहा बेइंतिहा दर्द देते है वही बाद के तेज धक्के बेइंतिहा मजा भी देते है. jaise-jaise मलखान का लुंड उसकी छूट में जगह बनाते हुआ खुद को एडजस्ट कर रहा था waise-waise उसका दर्द भी काम होता जा रहा था और अब मलखान के हर धक्के पर उसे मजा आने लगा था. मलखान कसकर शोभा को अपनी बाहो में जकड़े हुए था वो नीचे से लगातार आगे की तरफ धक्के पर धक्के लगाए जा रहा था.

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हर धक्का शोभा की छूट की गहराई तक उतर जाता और मलखान के धक्को का फाॅर्स इतना ज्यादा था की लुंड सीधा शोभा की बचेदनी से जाकर टकराता इस उम्र में शोभा जैसी टाइट छूट को छोड़ने में मलखान को भी बड़ा मजा आ रहा था शोभा की नयी नवेली कासी हुई छूट की गर्मी ने मलखान के लुंड की उत्तेजना को और भी ज्यादा बड़ा दिया. जब भी शोभा की कासी हुई छूट की दीवारों को रगड़ता हुआ मलखान का लुंड अंदर तक जाता मलखान और शोभा दोनों सातवे आसमान पर पहुँच जाते.

मलखान तो वैसे भी चुदाई का माहिर खिलाड़ी था औरत को उत्तेजित करना उसे अच्छे से आता था वो अपना लुंड पूरा बाहर तक खींचता और तेज धक्के के साथ फिर से अंदर दाल देता जिस वाहह से लुंड की खाल aage-peechhe हो रही थी जो लुंड को और भी उत्तेजित कर देती थी. एक बार झाड़ जाने के बाद शोभा भी मलखान के धक्को को और बर्दाश्त नहीं कर पाई और अपने अंदर hi मालखां के लुंड को अपने कामरुस से सराबोर कर दिया पर मलखान अभी तक एक बार भी नहीं झाड़ा था कई सालो का वीर्य था जो आज मलखान के लुंड से बाहर आने को बेताब था.

शोभा की छूट में अपना लुंड andar-baahar करते हुए मलखान को काफी देर हो गयी थी उसका लुंड का लावा बाहर आने को था.

मलखान- जानेमन शोभा की तो शादी हो गयी क्या बोलती हो दुसरा बचा पैदा कर लिया जाए वैसे भी तेरी छूट तो अब भी किसी नयी नवेली लौंडिया जैसी कड़क है.

शोभा तो सेक्स के उन्माद में इस कदर खो सी गयी थी की मलखान की कही हर बात जैसे उसे सुनाई hi ना दे रही हो. दूसरी तरफ जिस बेटी को मलखान ने अपने बीज से पैदा करा जिसे बड़े नाजो से पालपोस कर इतना बड़ा करा था आज खुद उसीकी कोख को अपने बीज से भरने जा रहा था बाप बेटी का ये रिश्ता पूरी तरह दाग दाग होने जा रहा था.

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और एक तेज धक्के के साथ मलखान के लुंड ने भी अपने हथियार दाल दिए बरसो से जो वीर्य मलखान के अंदर भरा हुआ था उसने शोभा की कोख को अंदर तक भर दिया था. मलखान के लुंड से इतना ज्यादा वीर्य निकला की शोभा की छूट से बाहर तक बह कर आ रहा था. बाप बेटी का ये रिश्ता आज पूरी तरह दाग दाग हो चुका था अगर ऊपर बैठी सरला ये देख रही होंगी तो उन्हें घिन आ रही होगी की शराब की कुछ बोतल ने उनकी बेटी को उनकी सौतन बना दिया वही विक्रम को तो ये पता भी नहीं था की शोभा को इग्नोर करने की ये छोटी सी भूल कितना बड़ा काण्ड करवा देगी.

मलखान अपने वीर्य की आखिरी बून्द तक शोभा के अंदर खाली कर चुका था. शोभा भी अपनी इस फर्स्ट नाईट के अनुभव के बाद गहरी साँसे ले रही थी वो खुश थी की उसकी कोख उसके पति के वीर्य से भर चुकी थी. नशे में वो जान hi नहीं पाई जिसे वो अपने पति का बीज मान रही है असलियत में वो उसके बाप का बीज था. अब अगर इस बीज से किसी संतान का जानम होगा तो वो शोभा का बेटा होगा या भाई ये सोचने वाली बात थी.

शोभा की कोख को भर देने के बाद मलखान भी निढाल हो गया था इतना मजा तो उसे आज तक नहीं मिला था और हो भी क्यों ना एक नयी नवेली छूट का उदघाटन जो किया था. मलखान का लुंड सिकुड़ गया था पर अब भी शोभा की छूट के अंदर था. मलखान भी इस जोरदार चुदाई के बाद थक कर चूर हो गया था. उसने शोभा को अपनी बाहो में जकड लिया और उसकी गर्दन पर अपना सर टिकाकर आँखे बंद करके लेट गया. कब वो बाप बेटी नींद के आगोश में चले गए पता hi नहीं चला. नग्न हालत में एक दूसरे से चिपके हुआ hi सो गए.

सोचने वाली बात ये थी रात तो जैसे तैसे सोते हुए काट जाएगी पर सुबह जब दोनों की आँख खुलेगी और नशे का खुमार भी कुछ काम होगा तब क्या होगा. क्या होगा जब एक बाप एक बेटी को नंगी हालत में अपनी बाहों में देखेगा क्या होगा जब एक बेटी अपने बाप के नंगे लुंड को अपनी छूट के अंदर महसूस करेगी. क्या होगा जब उन दोनों को एहसास होगा की उन्होंने रात में बाप बेटी के सम्बन्ध को दाग दाग कर दिया. क्या होगा जब मलखान को पता चलेगा की उसने अपनी बेटी की कोख को अपने बीज से भर दिया क्या होगा जब शोभा को पता चलेगा की जिस कौमार्या को उसने अपने पति के लिए आज तक बचा कर रखा था वो कौमार्या उसके अपने बाप ने उससे चीन लिया.

क्या ये बाप बेटी इस बात को बर्दाश्त कर पाएंगे क्या इनका सम्बन्ध फिर से एक बाप बेटी वाला बन पाएगा. क्या इस जिल्लत भरे काम के बाद वो ज़िंदा रह पाएंगे. जिस शादी को बचाने के लिए लखन विनीता इतने जतनकर रहे है इस बात के उजागर होने के बाद क्या वो शादी बच पाएगी. जिस वेडिंग सेरेमनी के ird-gird इस कहानी की रूपरेखा गाड़ी गयी थी क्या अंजाम होना था उस शादी का ये तो सुबह की पहली किरण के साथ hi पता चलना था.

पर अभी तो बाकी किरदारों की कहानी में इस रात की कई बाते अपना आकर लेने वाली थी.
 
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नेहा नीतू के कमरे में दुल्हन के लिबास में तैयार हो चुकी थी और बेसब्री से इन्तजार कर रही थी उस मश्ग का जो उसे वो स्ट्रेंजर भेजने वाला था जो दो दिन से उसे अपनी उंगलियों पर नचा रहा था. और अचानक से उसके उस मोबाइल के मेस्सेंजर पर मश्ग आया.

मास्टर- “ इतस टाइम तो के माय स्लेव मिलने की घडी आ गयी मैंने जैसा कहा था तुम उस लिबाज़ में तैयार हो गयी ना. “

नेहा- जी

मास्टर- थें के तो योर दादी. योर दादी इस वेटिंग.

नेहा- पर बहार तो लोग बैठे है शराब पी रहे है उनके सामने कैसे औ और आना कहा है.

मास्टर- उसकी चिंता तुम मत करो बहार का सारा माहौल देखकर hi मश्ग करा है. पार्टी ख़तम हो चुकी है सब उठ गए है. और रही बात उस जगह की जहा तुम्हे आना है तो उसी जगह पर आ जाओ जहा तुमने अपनी पंतय उस पेड़ पर तंगी थी. उस जगह से जब तुम थोड़ा और आगे बडोगी तो तुम्हे एक तालाब दिखेगा जिसके ऊपर एक लकड़ी का छोटा सा पल बना है और दूसरी तरफ एक लकड़ी का कॉटेज बना है उसके अंदर मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हु. के तो में माय स्लेव

नेहा- इतनी रात में उस सुनसान जगह जाने में नेहा को दर भी लग रहा था और उत्तेजना भी उस स्ट्रेंजर से मिलने का, वो उसके साथ kyaa-kyaa करेगा ये रोमांच भी था. नेहा ने बहार झांक कर देखा बहार सन्नाटा देख नेहा कमरे से बाहर आ गयी. अचानक उसे किसी के आने की आहात सुनाई दी कोई लड़खड़ाता हुआ उसी तरफ चला आ रहा था. नेहा ने ध्यान से देखा वो मलखान सिंह थे जो नशे में धुत्त अपने कमरे को ढूंढ़ते हुए चले आ रहे थे. नेहा एक पिलर के पीछे चिप्प गयी इसी वक्त बहार लालू की पहरेदारी कर रहा देव भी पेड़ के पीछे छुपा हुआ था जिस वजह से न नेहा देव को शबाना के कमरे के बाहर खड़ा देख सकीय ना देव नेहा को दुल्हन के लिबाज़ में कमरे से निकलता देख पाई.

मलखान सीढ़ियों को ढूनडता ऊपर की तरफ चला गया और बिना एक भी पल गवाए नेहा वह से निकल गई देव का ध्यान उस वक्त पूरी तरह मलखान सिंह की तरफ था इसलिए वो नेहा को वहां से जाता हुआ देख hi नहीं पाई. नेहा बोनफिरे वाली जगह पर पहुंची जहा बोनफिरे बुझ चुकी थी वहां चल रही दारु पार्टी मलखान सिंह के जाते hi ख़तम हो चुकी थी सब apne-apne कमरे में जा चुके थे. रात बहुत हो जाने के कारण वहां नेहा को फिलहाल देखने वाला कोई भी नहीं था. नेहा के लिए इससे अच्छा क्या हो सकता था की कोई उसे नहीं देख रहा है. नेहा वहां से होती हुई उस जगह पहुंची जहां भीमा की झोपडी थी जिसके पीछे घनी झाडिया थी. भीमा भी झोपडी के बहार चारपाई पर लेता था शायद सो रहा था.

नेहा ने रहत की सांस ली क्युकी उसे सबसे ज्यादा टेंशन भीमा की hi थी क्युकी उसकी झोपडी बीच रास्ते में पड़ती थी. नेहा अंदर झाड़ियों में चली आई जहा उसने कालू से अपनी छूट चटवाई थी और भीमा के सामने अपनी पंतय उतरी थी. इस वक़्त वहां घनघोर अन्धेरा था चाँद तो निकला हुआ था पर पेड़ो की वजह से उसकी रौशनी भी नहीं दिख रही थी. नेहा को halkaa-halkaa दर भी लग रहा था क्युकी जिससे वो मिलने जा रही थी उसे वो जानती तक नहीं थी की वो कौन है उसकी आगे क्या है उसने उसे क्यों बुलाया है वो उसके साथ क्या करने वाला है.

यही सब सवाल नेहा को अंदर hi अंदर बेचैन कर रहे थे पर नेहा के अंदर की फंतासी इतनी ज्यादा प्रबल थी की वो इस दर को भी भुलाकर आगे बाद गयी. नेहा अपनी जिंदगी अपनी शर्तो पर जीने वाली लड़की थी. उसका मन्ना था की अगर किसी काम को करने से पहले हम दस बार सोचेंगे तो हमारा सारा वक्त सोचने में hi चला जाएगा और काम को करने का सही वक्त hi निकल जाएगा इसलिए करो पहले सोचो बाद में जो होगा देखा जाएगा. यही फंदा उसने शबाना के केस में उसे करा बिना सोचे समझे लालू की बातों में आकर शबाना को गलत राह पर ले आई जिस वजह से आज शबाना अपना सब कुछ लुटा चुकी थी और जिंदगी लालू के हाथों बर्बाद होने के कगार पर पहुँच गयी थी. और अब नेहा खुद बिना सोचे समझे एक नए अनुभव की तरफ चली जा रही थी ये जाने बिना की ये अनुभव उसके जीवन में क्या उथल पुथल लाने वाली थी और ना सिर्फ उसकी जिनदगी बल्कि कई और लोगो की जिंदगी भी बदल जाने वाली थी. नेहा चलते हुए उस तालाब के पास पहुंच गयी जिस पर एक लकड़ी का वाकिंग पल बना था तालाब के उस तरफ एक कॉटेज बना था जो शायद शोभा के परिवार का hi था और चाँद की रौशनी में चमक रहा था.

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नेहा अपने लंहगे को दोनों हाथो से संभाले हुए सावधानी से पल पर चलती हुई पल पार कर गयी. पल पार करते हुए उसके मन में baar-baar यही सवाल चल रहा था की कौन है वो. इंग्लिश अच्छी बोलता है मतलब पड़ा लिखा है इतना मंहगा लंहगा गिफ्ट करा मतलब पैसे वाला भी है मेस्सेंजर उसे कर लेता है मतलब टेक्नोलॉजी की भी अच्छी जानकारी है कौन हो सकता है वो.

यही सब सोचते हुआ वो पल पार करके कॉटेज के गेट तक आ गयी थी सामने कॉटेज का गेट था जिसके अंदर से कोई रौशनी नहीं आ रही थी. नेहा khade-khade सोच hi रही थी की उसके मोबाइल पर फिर मश्ग आया.

मास्टर- वैरी गुड माय स्लेव आ गयी तुम पर अब ये khade-khade सोच क्या रही अगर मन में कोई भी दुविधा है तो वापस जाने का रास्ता वही है जहा से तुम आई हो और जाते जाते वो मोबाइल उसी तालाब में फ़ेंक देना और अगर हिम्मत है इस डरे को फेस करने की तो कॉटेज की सिडिया चढ़कर अंदर आ जाओ मैं अंदर तुम्हारा इंतजार कर रहा हु.

नेहा ने एक नजर idhar-udhar देखा और फिर गहरी सास लेते हुआ उस कॉटेज की सीढ़ियों पर अपने कदम आगे बड़ा दिए. सीढिया चढ़कर उसने कॉटेज के गेट को हलके से पुश करा हलाकि आवाज़ करता हुआ गाते खुलता चला गया. अंदर पूरी तरह से अन्धेरा था चाँद की रौशनी भी बहुत कम अंदर आ रही थी. सामने एक आराम कुर्सी सी नेहा को दिख रही थी जिसपर किसी के बैठे होने का एहसास नेहा को हो रहा था पर अँधेरे की वजह से उसे ठीक से देखना पॉसिबल नहीं था बस अँधेरे में एक परछाई सी नेहा को दिख रही थी जो आराम कुर्सी पर रिलैक्स मुद्रा में बैठी थी और सिग्रत्ते के काश भर रही थी.

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मास्टर- आ गयी शाबाश मन गया तुम्हे सच में तू काफी हिम्मती है बिना सोचे समझे बिना मेरे बारे में कुछ भी जाने यहाँ तक चली आई. मन्ना पडेगा तुम्हे कुछ बात तो है तुममे. तू बस शरीर में hi दुबली पतली है हिम्मत के मामले में तू अपनी सभी सहेलियों में सबसे आगे है. और इस शादी के लाल जोड़े में तो तू सच में टंच माल लग रही है क्या कहूं अब तेरी तारीफ़ में.

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नेहा ने पहली बार उस आदमी की आवाज़ सुनी थी नेहा उसकी आवाज से उसे पहचानने की कोशिश कर रही थी पर शायद वो अपनी आवाज को कुछ भारी करके बोल रहा था जिस वजह से उसे पहचाना नहीं जा सकता था.

आज की रात इस हवेली में वासना का तूफ़ान आ गया था बच्चे की ख्वाहिश में तड़प रही एक औरत की इज्जत को एक भूके भेड़िये ने तार तार कर दिया था. शराब के नशे और अन्धाघुप्प अँधेरे में एक बाप ने अपनी hi बेटी के कौमार्य को भांग कर उसकी कोख को अपने बीज से भर दिया था और अब एक पड़ी लिखी अच्छे घर की लड़की सिर्फ अपनी बेहूदा फंतासी को पूरा करने की चाहत में खुद को एक ऐसे इंसान की स्लेव बनने आ गयी थी जिसे वो जानती भी नहीं थी.

पता नहीं नेहा को इस तरह यहाँ बुलाकर खुद को अब भी अँधेरे में छुपाए हुए वो शिक्षा कौन था और वो नेहा के साथ kyaa-kyaa करने वाला था.

नेहा उस अजनबी के सामने दुल्हन के लिबाज़ में कड़ी थी और अँधेरे में उसे केवल उस अजनबी की परछाई hi समझ आ रही थी. पर आवाज से काफी रौबीला लग रहा था. नेहा के में दिमाग में alag-alag लोगो के चेहरे आ रहे थे जिसे वो गेस कर रही थी वो ये हो सकता है.

कल्लू- हो सकता है उसे इंग्लिश आती हो और शादी का जोड़ा भी उसकी शादी का हो.

रामु काका- पर लगता नहीं वो इंग्लिश के ऐसे वर्ड उसे कर सकते है.

भूरा- पर वो तो लखन अंकल के साथ गाडी लेकर गया है.

छोटू- वो तो बच्चा है वो ये सब नहीं कर पाएगा.

विक्रम- वो हो सकता है पर क्या शोभा के रहते वो ऐसा रिस्क लेगा अपनी शादी के माहौल में.

लालू- वो तो शकल से hi कमीना लगता है उसके 100 परसेंट चांस है…

लालू के बाकी तीनो साथी- उनकी नजरें भी हम लड़कियों पर hi थी शुरुआत से वो भी हो सकते है.

या फिर बारात में आया कोई और मेहमान कोई परिवार वाला या कोई नौकर होने को कोई भी हो सकता है. सवाल ये है की मैं इस स्ट्रेंजर में किसे देखना चाहती हु. कोई ऐसा हो जो मेरे अंदर की औरत को अपना गुलाम बना ले जिसकी बातों के saath-saath उसके लुंड में भी नशा हो जो मेरे जिस्म का जर्रा जर्रा हिलाकर रख दे.

नेहा अपने खयालो में डूबी हुई थी की उसके कानो में फिर उस स्ट्रेंजर की आवाज गूँज उठी.

मास्टर- क्या सोच रही है साली मेरे बारे में सोच रही है की मैं कौन हु इतनी जल्दी क्या है अभी तो खेल शुरू हुआ है ज़रा इसका मजा तो लेले अच्छे से.

नेहा- जी

मास्टर- इस खेल के नियम तो तुझे पता hi है पर सब नियम का बेस यही है की माय आर्डर इस योर कमांड. जो मैं बोलूंगा उसे हर हालत में पूरा करना तेरा फ़र्ज़ होगा मेरी हर बात को तुझे हर हालत में मन्ना hi होगा और अगर तू मेरी बात को मानने में किसी भी तरह से फ़ैल हुई तो जानती है तेरे साथ क्या होगा.

नेहा- नहीं क्या होगा मेरे साथ.

मास्टर- सजा तुझे सजा मिलेगी कड़ी सजा वो कोने में जो लकड़ी की अलमारी राखी है जा उसे खोल और देख उसमे तेरे लिए kyaa-kyaa रखा है.

नेहा उस अलमारी के पास गयी और उसे खोलकर देखा उसे खोलते hi उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी उसने सपने में भी नहीं सोचा था की ये खेल इस लेवल तक पहुँच जाएगा उसने यही सोचा था की ये जो भी है बस एक गाँवाला hi तो है ज्यादा से ज्यादा उसे छोड़ लेगा गांड मार लेगा उससे लुंड चुसवा लेगा पर उस अलमारी के अंदर जो था उसने उसे इस खेल के लेवल का एहसास करा दिया था. उस अलमारी में बड़सम की तरह तरह चीजे राखी थी जिन्हे इस तरह के सेक्स में उसे करा जाता है.

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गले का पत्ता चमड़े की बेल्ट आर्टिफिशल लुंड हथकडिया नायलोन की रस्सी कैची चाक़ू ब्लैंडफोल्ड मुँह बंद करने वाली बॉल मोमबत्ती क्लोथ्पन और ना जाने kyaa-kyaa था. नेहा को अंदर hi अंदर उत्तेजना भी हुई और दर भी लगा क्युकी ये सब चीजे शायद उसपर hi उसे होने वाली थी. उसने सपने में भी नहीं सोचा था की एक गांव में एक देहाती के पास डोमिनेशन का ऐसा सामान भी हो सकता है. पर अंदर hi अंदर वो अब और भी ज्यादा उत्तेजित थी इस खेल को खेलने के लिए

मास्टर- कैसा लगा अपना तोहफा पसंद आया ये सब तेरे लिए hi है. इन सब चीजों को मैं तुझ पर इस्तेमाल करने वाला हु बोल तुझमे हिम्मत है इन चीजों को झेलने की अभी भी वक़्त है तू चाहे तो पीछे हैट सकती है कोई जबरदस्ती नहीं है.

नेहा- मैं तैयार हु इन्हे इस्तेमाल करने के लिए.

मास्टर- हाहाहा तुझे इस्तेमाल नहीं करना है इस्तेमाल तो मुझे करना है तुझे तो बस सहना है सेह पाएगी ये सब.

नेहा- हम्म्म सेह लुंगी.

मास्टर- शाबाश तू तो मेरी सोच से भी ज्यादा हिम्मती है घबरा मत ये सब तुझे तभी सहना पडेगा अगर तू कुछ गलती करेगी समझी.

नेहा- जी

मास्टर- वो सामने ब्लैंडफोल्ड दिख रहा है.

नेहा- हाँ

मास्टर- उसे उठा और अपनी आँखों में बाँध ले.

नेहा- क्यों क्या मुझे आज भी आपको देखने को नहीं मिलेगा.

मास्टर- मैंने क्या कहा था तुझे की कोई सवाल नहीं लगता है तुझे अच्छे से समझना होगा. चल ब्लैंडफोल्ड पेहेन अपनी आँखों में.

नेहा ने उस ब्लैंडफोल्ड को अपनी आँखों में बाँध लिया.

मास्टर- शाबाश ये हुई ना बात अब मैं तुझे ये खेल अच्छे से समझता हु पर खबरदार जो ये ब्लैंडफोल्ड बिना मेरे कहे हटाया तो.

वो शिक्षा नेहा के एकदम करीब आ गया उसके मुँह से halki-halki दारु की महक भी आ रही थी जिससे नही को अंदाजा हो गया की शायद इसने दारु पि है हो सकता है अभी बहार जो डांस पार्टी हुई ये उसमे मौजूद था. उसने नेहा के हाथ को अपने हाथ में थम लिया. नेहा उसके हाथो के स्पर्श से उसकी आगे का अंदाजा लगा रही थी उसके हाथ एकदम सख्त थे किसी पहलवान की तरह और काफी मजबूत भी थे हथेली काफी रफ़ थी जो नोर्मल्ली हर गाँव वाले की होगी. सिर्फ छुअन से उसकी उम्र का अंदाजा लगाना मुश्किल था.

उस शिक्षा ने अलमारी से हैंडकफ्स निकले और नेहा के हाथ आगे से hi हैंडकफ्स से बांध दिए. फिर वो नेहा को चलता हुआ उस कॉटेज के बीच में ले आया जहा छत से बंधी हुई एक चैन लटक रही थी जिसपर एक हुक लगा था. उसने नेहा के हाथ में बंधे हैंडकफ्स को उस हुक में फंसा दिया.

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अब नेहा दुल्हन के लिबाज़ में हथकडियो में जकड़ी आँखों पर पट्टी बंधे बीच कमरे में बेबस सी कड़ी थी. कुछ कुछ उसकी हालत शबाना जैसी hi थी पर शबाना के साथ जो कुछ हुआ वो उसकी मर्जी के खिलाफ हुआ था पर नेहा तो खुद अपनी मर्जी से एक नया अनुभव लेने के लिए यहाँ खुद आई थी.

वो आदमी नेहा के पीछे आकर खड़ा हो गया उसकी garam-garam साँसे नेहा को अपने कानो के पास महसूस हो रही थी. उसने अपने होंठ नेहा की गर्दन पर रख दिए और उसे चूमने लगा.

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मास्टर- तैयार हो इस खेल को शुरू करने के लिए.

नेहा- हम्म

मास्टर- अब मैं जो पूछू बिना एक भी पल गवाए उसका जवाब देना.

नेहा- जी

मास्टर- ओर्गास्म क्या होता है.

नेहा- जब एक औरत और मर्द अकेले या आपस में सेक्स के दौरान इतने उत्तेजित हो जाते है की उनके अंदर की उत्तेजना वीर्य के रूप में बाहर आ जाती है उसे ओर्गास्म कहते है.

मास्टर- वैरी गुड बिलकुल सही बताया तुमने अपना पहला ओर्गास्म किस आगे में करा था.

नेहा- 15 साल की आगे में.

मास्टर- 15 साल की उम्र में क्या बात है बड़ी जल्दी जवान हो गयी थी तुम तो.

नेहा- हम्म

मास्टर- खुद करा था या किसी के साथ.

नेहा- खुद करा था फिंगरिंग करके.

मास्टर- ऐसा क्या हो गया था की तुम्हे अपनी छूट में ऊँगली डालनी पड़ी.

नेहा- मैंने अपने चचेरे भाई और भाभी को छुप कर सेक्स करते देखा था जिससे मैं उत्तेजित हो गयी.

मास्टर- क्या बात है क्या तुम्हारी भाभी सुन्दर थी.

नेहा- हम्म

मास्टर- तुम्हारे भैया का लुंड कितना बड़ा था.

नेहा- 7-8 इंच का

मास्टर- सही है असली मर्द का लुंड तो इससे कही लुम्बा होता है खैर पहली बार किसी मर्द का साथ ओर्गास्म कब करा.

नेहा- 16 साल में अपने कॉलेज के चौकीदार के साथ.

मास्टर- कॉलेज के चौकीदार के साथ वो कैसे.

नेहा- छुट्टी के बाद मैं क्लास में अपने बॉयफ्रेंड को किश कर रही थी तभी चौकीदार वह आ गया उसने हमें ब्लैकमेल करा मेरा बॉयफ्रेंड भाग गया पर उस चौकीदार ने मुझे पकड़ लिया और उसने मेरे साथ.

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मास्टर- उसने तुम्हारे साथ क्या, क्या करा उसने तुम्हारे साथ, क्या उसने तुम्हे छोड़ दिया.

नेहा- नहीं पर उसने मेरे साथ ओरल सेक्स करा.

मास्टर- ओरल सेक्स क्या होता है.

नेहा- उसने मुझे किश करा मेरे छोटे निप्पल छुए मेरी स्कर्ट ऊपर करके मेरी बिना बालो वाली अधखिली छूट को छटा और.

मास्टर- और, और क्या करा मैंने कहा ना बिना रुके जवाब देती जाओ ये baar-baar रुक क्यों जाती हो और क्या करा उसने तुम्हारे साथ.

नेहा- उसने मुझसे ब्लोजॉब करवाया.

मास्टर- हिंदी में बताओ ब्लोजॉब मतलब.

नेहा- इतनी इंग्लिश तो आती है आपको.

नेहा का इतना बोलना था की एक तेज कंटाप उसके गालो पर पड़ा.

मास्टर- ज्यादा जबान चलाने को नहीं बोलै है जितना पूछा है उसका जवाब दो. ब्लोजॉब मतलब.

नेहा- उसने अपना लुंड मेरे मुँह में डालकर मुझसे चुसवाया और चटवाया और अपना माल भी मेरे मुँह में hi निकल दिया और चाट चाट कर मेरी छूट का पानी भी निकल दिया और पूरा पि गया.

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मास्टर- उस चौकीदार की उम्र कितनी थी.

नेहा- 40-42 साल का होगा.

मास्टर- मतलब तेरे बाप की उम्र का.

नेहा- हम्म

मास्टर- वाह 16 साल की उम्र में अपने बाप की उम्र के आदमी का लुंड मुँह में लेकर झड़वा दिया कमाल है तू तो. उसने छोड़ा नहीं तुझको.

नेहा- नहीं मेरी सील नहीं टूटी थी और कही मामला खुल जाता तो उसकी नौकरी चली जाती और जेल अलग से होती इसलिए छोड़ा नहीं पर आगे भी वो अकेले में मुझे किश करके अपना लुंड चुसवा कर मेरी चूचियां चूसकर मजा ले लेता था.

मटर- पहली चुदाई कब करि.

नेहा- 18 साल की उम्र में जब मैं अन्तर में थी.

मास्टर- किसके साथ करि.

नेहा- मेरी एक सहेली के डैड के साथ.

मास्टर- अपनी सहेली के बाप के साथ वाह गजब है तू तो. कैसे ये इंसिडेंट कैसे हुआ.

नेहा- मेरी सहेली की माँ होस्पिटलिजे थी वो और उसके दाद हॉस्पिटल में रुकते थे मैं उसकी हेल्प के लिए कभी हॉस्पिटल में कभी घर की सेफ्टी के लिए रात में उसके घर रुक जाती थी. एक रात में घर में रुकी थी पर उस रात अंकल को हेडाचे था इसलिए वो घर लौट आए. मैं उनका हेडाचे दूर करने के लिए उनका सर दबाने लगी और उसी दौरान उत्तेजना में हमारे बीच रिलेशन बन गया.

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वो आदमी नेहा के अतीत की इन घटनाओ को निकल निकलकर उसकी उत्तेजना को बड़ा रहा था और नेहा के मुँह से उसके सेक्स जीवन के अनुभव सुनकर कही ना कही खुद भी उत्तेजित हो गया था. अपने मुँह से अपनी सेक्स लाइफ का बायोडाटा बोलकर नेहा को भी अंदर hi अंदर उत्तेजना महसूस हो रही थी. अतीत के वो सारे दृश्य ब्लैंडफोल्ड में जैसे उसकी आँखों के सामने फिर से सजीव हो उठे थे. नेहा ने नहीं सोचा था की केवल अपनी सेक्स लाइफ को याद करके उसे कहकर भी कोई इतनी उत्तेजना महसूस कर सकता है. आज सुबह hi नेहा ने अपनी बातो से hi छोटू को उत्तेजित कर दिया था और अब कुछ कुछ यही उसके साथ हो रहा था. बस अपनी बातो से hi उस आदमी ने को उत्तेजित कर दिया था.
 
बंधे हाथो से खड़े हुए भी नेहा को बहुत उत्तेजना महसूस हो रही तक शायद वो आदमी भी काफी उत्तेजित हो चुका था इसीलिए वो पीछे से नेहा के बदन से एकदम चिपक गया और अपने होंठ नेहा की गर्दन पर रख दिए और अपनी garam-garam साँसे नेहा की गर्दन पर छोड़ने लगा नेहा का रोम रोम रोमांच से भर उठा था. उसने नेहा के साड़ी के पल्लू को उसके सीने से हटा दिया और पीछे से नेहा की ब्लाउज की डोरी से खेलने लगा. नेहा का ब्लाउज जो की पीछे से डोरी वाला था और बस एक गाँठ से बंधा था.

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उस आदमी ने अपनी उंगलिया उस गाँठ के ird-gird gol-gol घूमना शुरू कर दिया नीचे उस आदमी का लुंड भी अकड़कर खड़ा हो चुका था और पीछे से नेहा की गांड पर idhar-udhar टच हो रहा था. नेहा की ब्लाउज की गाँठ से खेलते खेलते उस आदमी ने उसे अपने हाथो में थम लिया और बिना एक भी पल गवाए उसे खोल दिया. गाँठ खुलते hi नेहा की ब्लाउज की कसावट आगे से ढीली पद गयी और पीछे से भी ब्लाउज के दोनों सिरे एक दुसरे से अलग होकर idhar-udhar झोऊ गए. अब नेहा की पीठ पर बस ब्रा की पतली सी लकीर थी जो एक छोटे से हुक से बंधी थी.

उस आदमी ने नेहा की ब्रा स्ट्रैप्स को भी अपने हाथो में थम लिया और उसे अपने हाथो से सहलाने लगा. नेहा इसी उम्मीद में थी की जल्द hi उसकी ब्रा भी खुलकर idhar-udhar झूल जाएगी पर नेहा की ब्रा को खोलने की बजाए उस आदमी ने नेहा की ब्रा को थामे थामे उसके सहारे अपने हाथ पीछे से नेहा की ब्लाउज के अंदर दाल दिए और अपने हाथ आगे लेजाकर ब्रा के ऊपर से नेहा की नोकदार चूचियों को अपने हाथो में थम लिया और haule-haule उन्हें दबाने लगा. होंठो से वो नेहा की गर्दन को चूम रहा था और हाथो से नेहा के छोटे छोटे उभारो को सेहला रहा था और नीचे उसका तना हुआ लुंड नेहा की गांड की दरार के बीच गदा जा रहा था.

ब्लैंडफोल्ड की वजह से नेहा की आँखे तो पहले से hi बंद थी और नेहा को ये पता भी नहीं था की जो शिक्षा उसके जिस्म के साथ खेल रहा है वो दीखता कैसा है सुन्दर है या बदसूरत गोरा है या कला जवान है या अधेड़ उम्र का पर इतना तो तै था की वो कोई बचा नहीं था औरत की उत्तेजना को बढ़ाना उसे अच्छे से आता था. और नीचे अपनी गांड में गड रहे उसके लुंड का आकर भी नेहा को महसूस हो रहा था की ये एक बहुत मजबूत और बड़े लुंड का मालिक है. ऊपर की और करके हाथ बंधे होने की वजह से नेहा के उभर और तन गए थे जो उस आदमी की पूरी मुठी में समा गए थे.

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मास्टर- तो तुम्हारी सहेली के बाप ने तुम्हारी सील तोड़ी.

नेहा- m‍mmmam हम्म आआह्ह

मास्टर- उसने तुम्हे कंडोम पहनकर छोड़ा या बिना कंडोम के.

नेहा- ये सब एकदम अचानक हुआ हम पहले से इसके लिए तैयार नहीं थे घर में कंडोम नहीं था वो अपनी पत्नी की बीमारी में परेशान थे कंडोम क्या रखते घर पर.

मास्टर- मतलब बिना कंडोम के छुड़वा लिया पहली बार में hi. उसने अपना माल कहा निकाला.

नेहा- ये सब अचानक हुआ था हम दोनों को hi उस वक़्त कुछ समझ नहीं आया हम पूरी तरह बहक गए थे और उन्होंने मेरे अंदर hi अपना माल निकल दिया.

मास्टर- पहली चुदाई में hi तूने अपने सहेली के बाप का वीर्य अपने अंदर ले लिया. प्रेग्नेंट नहीं हुई तू.

नेहा- हो गयी थी प्रेग्नेंट मैं पर शुरू में hi हमें पता चल गया और अंकल ने अपने एक दोस्त के अस्पताल लेजाकर मेरा एबॉर्शन करवा दिया.

मास्टर- मतलब जवानी की देहलीज पर कदम रखते hi तू किसी के बच्चे की माँ बन गयी थी. (ये सब कहते हुए भी वो आदमी लगातार नेहा के चूचियों को सहलाए जा रहा था और गर्दन को चूमे जा रहा था.)

नेहा- m‍mmmamam हम्म ेमममममम

नेहा से सवाल जवाब karte-karte उस आदमी ने अपने हाथ पीछे लाकर पीछे से नेहा की ब्रा का हुक भी खोल दिया. नेहा की ब्रा भी पीछे से idhar-udhar झूल गयी. नेहा की चूचियों पर ब्रा की कसावट भी ख़तम हो गयी. अब ब्लाउज और ब्रा तो बस नाम के लिए नेहा के कंधो पर टंगे हुए थे. उस आदमी ने दुबारा से अपना हाथ पीछे से नेहा के खुले ब्लाउज के अंदर दाल दिया पर इस बार उसके सामने ब्रा की दीवार भी नहीं बची थी. वो बढ़ा भी अब ख़तम हो चुकी थी और उसके हाथ नेहा की दिहली पद चुकी ब्रा के अंदर दाखिल होते हु सीधा उसके छोटे छोटे उभारो तक पहुँच गए.

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नेहा के उभर गरिमा शबाना जैसे bade-bade नहीं थे बल्कि विनीता और शोभा से भी आकर में छोटे थे. नेहा के दोनों उभर उस आदमी के अंदर समा गए थे. नेहा के उभर छोटे जरूर थे पर बेहद कैसे और तने हुए थे खासकर उसके निप्पल, उसने नेहा के दोनों निप्पल के ird-gird अपना अंगूठा घूमना शुरू कर दिया. ब्लैंडफोल्ड नेहा ये तो नहीं देख सकती थी की उसके साथ ये सब करने वाला कौन है कैसा दीखता है पर नेहा के अतीत के जिन पन्नो को उस शिक्षा ने दुबारा खोल दिया उस अतीत के वही चेहरे नेहा की आँखों के आगे घूम रहे थे वो चौकीदार वो सहेली के पापा जैसे वही उसके जिस्म के साथ खेल रहे हो.

पीछे से नेहा की पीठ एकदम खुली थी और वो शिक्षा झुक कर नही की पीठ को पीछे से चूम रहा था.

मास्टर- कमाल हो तुम तो 18 साल की उम्र में hi प्रेग्नेंट हो गयी थी अब तक कितने बच्चे गिरा चुकी हो.

नेहा- इमम्म बस एक उसके बाद से प्रकशन का हमेशा ख़याल रखा अगर कभी किसी ने अंदर निकाला भी तो भी गर्भनिरोधक गोली खा ली.

मास्टर- मतलब इन दोनों के अलावा और भी लोग छोड़ चुके है तुझे, कितने मर्दो से छुड़वा चुकी है अब तक.

नेहा- 17-18 होंगे

मास्टर- 17-18 तू अभी 25 साल की है और 17-18 मर्दो के लुंड अंदर ले चुकी है. रुंडी है तू तो पूरी, क्या धंदा करती है शहर में.

नेहा- नहीं बस लाइफ का खुलकर मजा लेती हु नए नए अनुभव लेने में मजा आता है मुझे.

मास्टर- दो तो बता दी बाकी क्या अपने घर में भी छुड़वाया है किसीसे.

नेहा- हम्म्म

मास्टर- क्या घर में भी छुड़वाया है किस्से.

नेहा- अपने फूफाजी के साथ और अपने एक कजिन के साथ. इसके अलावा अपनी कॉलोनी के कुछ लोगों के साथ और अपने कुछ कोलगेउस के साथ भी मेरा रिलेशन रहा है.

मास्टर- तू तो सच में एक नंबर की छिनार है साली बड़ी खेली खाई है, अच्छा लोगो का लुंड केवल छूट और मुंह में hi लिया या पीछे गांड में भी लिया है.

गांड की बात सुनते hi नेहा के सामने बाथरूम में भूरा के साथ हुआ इंसिडेंट दुबारा ताज़ा हो गया पर अभी वो ये जानती भी नहीं थी की जिसे वो ये सब बता रही है वो आखिरकार है कौन और भूरा या यहाँ किसी और के साथ हुआ इन्सिडेंट्स पर वो कैसे रियेक्ट करेगा इसलिए फिलहाल भूरा छोटू के साथ की किसी भी बात को यहां डिस्क्लोसे करना ठीक नहीं था इसलिए नेहा ने इस बात को छुपाना hi ठीक समझा.

नेहा- नहीं किसी ने नहीं वहाँ अब तक किसी से कुछ नहीं करवाया.

मास्टर- मतलब तेरा वो हिस्सा अब भी कोरा चल कोई बात उसका उद्घाटन मैं कर दूंगा.

भूरा से उस तंग बाथरूम में बिना तेल के गांड मरवाके नेहा के अंदर का गांड मरवाने का दर काफी हद तक निकल गया था इसलिए अब उसे गांड मरवाने का भी कोई दर नहीं था. और सेक्स स्लेव बनते समय वो कही ना कही इसके लिए मेंटली तैयार होकर आई थी और उन सेक्स टॉयज को देखकर तो उसने अपने कल्पना के घोड़े काफी दूर तक दौड़ा दिए थे.

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नेहा अब भी हाथ बंधे वैसे hi कड़ी थी और वो आदमी लगातार उसके छोटे छोटे उभारो और उनपर अंगूर के दाने से उभरे निप्पल से खेल रहा था. नेहा इसी इंतज़ार में थी की किसी भी पल वो उसे नंगा करके उसकी गांड मार लेगा पर ऐसी वेयर्ड पोजीशन में वो अपनी गांड नहीं मरवाना चाहती थी. बाथरूम में तो फिर भी उसके हाथ फ्री थे पर यहाँ यहाँ तो उसके हाथ भी ऊपर की तरफ बंधे थे वो दर्द होने पर रेसिस्ट भी नहीं कर सकती थी. मर्दो को अपनी उंगलियों पर नाचने वाली नेहा आज खुद किसी मर्द के सामने बेबस सी कड़ी थी और वो भी अपनी मर्जी से.

उस आदमी ने पीछे से अपना हाथ नेहा के ब्लाउज में से निकल लिया और नेहा के शरीर से अलग होकर थोड़ा पीछे हैट गया. नेहा बू आहात से उसे महसूस करने की कोशिश कर रही थी और ये इंतज़ार कर रही थी अब आगे वो क्या करने वाला है. जल्द hi नेहा को ये पता चल गया नेहा को सामने से अपनी कमर पर किसी के हाथों का स्पर्श महसूस हुआ. वो आदमी पीछे से अब नेहा के सामने आ गया था और नेहा की पतली चिकनी कमर को अपने रफ़ हाथो से सेहला रहा था. वो अपना चेहरा नेहा के चेहरे के एकदम करीब ले आया था. जिस शिक्षा का चेहरे देखने के लिए वो कबसे बेचैन थी उसका चेहरा उसके ठीक सामने था पर आँखों पर बंधी पट्टी की वजह से वो बेबस थी उसे देख भी नहीं सकती थी.

उसके होंठो से आ रही गर्माहट नेहा को अपने होंठो पर महसूस हो रही थी जिससे नेहा को अंदाजा हो गया की उसके होंठ नेहा के होंठो के एकदम करीब थे. और वो क्या करने वाला ये भी नेहा समझ गयी थी. और अगले लम्हे वही हुआ जिसका नेहा को अंदाजा था. नेहा के होंठ उस अजनबी से जुड़ गए. उस आदमी ने कमर से खींचकर अपने से चिपका लिया और बड़े नजाकत और इरोटिक अंदाज़ में नेहो के होंठो को चूमने लगा. नेहा ने उम्मीद करि थी की शायद वो उसे रोगलय किश करेगा पर अपेक्षा के विपरीत वो उसे बड़ी नजाकत से किश कर रहा था. नेहा भी बंधे होने के बावजूद उसका पूरा साथ दे रही थी. किश karte-karte उस शिक्षा ने अपनी जीभ नेहा के मुँह के अंदर दाल दी नेहा भी किसिंग की माहिर खिलाड़ी थी उसने भी अपने होंठो को गोल करके उसकी जीभ को अपने होंठो में फंसा कर चूसना शुरू कर दिया.

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उस आदमी के मुँह से शराब की काफी स्मेल आ रही थी पर नेहा के लिए शराब कोई बड़ी बात नहीं थी उसने खुद कई बार ड्रिंक करा था. दोनों एक दुसरे के होंठो से जुड़े थे और वो नेहा की पतली कमर के ऊपर अपने हाथ फिरै जा रहा था. कमर को सहलाते सहलाते वो अपने हाथ नीचे नेहा के पेटीकोट पर ले आया जहा अब नेहा का शादी का जोड़ा फंसा हुआ था पहले तो उसने उस जोड़े को खींचकर बहार कर दिया. अब नेहा बस एक खुले ब्लाउज और पेटीकोट में उसके सामने कड़ी थी. नेहा बेसब्री से उसकी अगली हरकत का इंतजार कर रही थी और जल्द hi उस शिक्षा का हाथ नेहा के पेटीकोट की गाँठ पर भी पहुँच गया और अगले hi पल उस गाँठ के खुलने के साथ hi वो पेटीकोट नीचे ज़मीन पर नेहा के पैरो में गिर चुका था.

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नेहा अब एक अजनबी के सामने एक पतली महीन पंतय में थी और ऊपर बस नाम का ब्लाउज. नेहा का पेटीकोट उतारकर वो शिक्षा थोड़ा पीछे हैट गया और नेहा को ऊपर से नीचे तक गौर से देखव. नेहा का 0 साइज फिगर चिकना बदन छरहरी टाँगे पतली कमर उसपर जालीदार पंतय जिसमे से उसकी चिकनी बिना बालो वाली छूट halki-halki दिख रही थी बड़ी hi उत्तेजक और कामुक लग रही थी और उसपर भी यु हाथ उठाकर बंधे हुअल बेबस से खड़े होना नेहा को और ज्यादा कामुक बना रहा था.

मास्टर- क्या गजब का बदन है तेरा एकदम हेरोइन जैसा जीरो फिगर दुबला पतला एकदम आलिया भट्ट जैसा, क्या मस्त नुकीली छूट है तेरी ये छोटी सी पंतय क्या लग रही है तुझपर तुझे तो गोड़ में लेकर छोड़ने का मन करता है.

उसने आगे बाद कर अपना अंगूठा नेहा की पंतय पर छूट वाले हिस्से पर रख दिया और अपने अंगूठे से नेहा की छूट के ऊपर के कपडे को उसकी छूट पर घिसने लगा. नेहा का उत्तेजना के मरे अब बुरा हाल हो रहा था. नीचे अपने अंगूठे से नेहा की छूट से खेलते खेलते उसने ऊपर नेहा के ब्लाउज और ब्रा उसके स्तनों से ऊपर चढ़ा दिया और नेहा की chhoti-chhoti चूचियों को एकदम नंगा कर दिया. हाथ बंधे होने से उस ब्लाउज और ब्रा को उसके हाथो से बहार नहीं निकला जा सकता पर इसका इंतजाम भी वो आदमी करके आया था. उसने अपनी जेब से कैची निकली और नेहा के ब्लाउज और ब्रा को काटकर उसके हाथो से अलग कर दिया.

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नेहला का ब्लाउज और उसकी सेक्सी ब्रा टुकड़े टुकड़े होकर ज़मीन पर गिर गयी थी और अब नेहा के बदन पर अगर कपडे के नाम पर कुछ बचा था तो बस छोटी सी पंतय जो बस नाम के लिए उसके नंगेपन को ढकने की आखिरी कोशिश कर रही थी पर कब तक वो भी उसके शरीर का साथ देने वाली थी ये नेहा भी जानती थी.

मास्टर- क्या मस्त गरम छूट है तेरी भले hi तू कई मर्दो से छुड़वा चुकी है पर तेरी छूट की गर्मी आज भी नयी नवेली छूट की तरह बरकरार है.

नेहा- मैं गैमिंग और एरोबिक्स करती रहती हु इसलिए मेरे शरीर में कसावट बानी रहती है.

मास्टर- मुझे नहीं लगता तेरा सामना आज तक किसी असली मर्द से हुआ है चिंता मत कर मई तेरी छूट की कसावट को दिलाकर दूंगा तेरी छूट को असली लोडे की लम्बाई का स्वाद चखाउंगा जिसके बाद तुझे पहले के सभी लुंड बच्चे लगने लगेंगे पर पहले तेरी इस छूट की गर्मी को थोड़ा ठंडा करना होगा.
 
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