ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 2 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 11

अब तक आपने देखा .....हीरो का

janam........ab आगे....


समय ऐसे hi गुजरता चला gaya....aur अब नन्हा अभी 5 साल का होने वाला था......

R.V.S भी अपनी धक् बुसिनेस्स लॉबी में और अपने दूसरे रूप

( संघारक) जो कहानी में आगे देखने को मिलेगा क रूप में अंडरवर्ल्ड क लोगो में अपना दर बिठा चूका था.

ऐसे hi एक दिन जब R.V.S पूजा में बैठे थे तब उन्हें अंतर्मन में महागुरु की आवाज आई....

महागुरु - पुत्र अब समय आगया है अभी क जन्म क दूसरे पड़ाव का

इसीलिए तुम्हारे पुत्र क आनेवाले पान्हवे जन्मदिन का उत्सव तुम्हे अपने महल में hi मानना पड़ेगा

R.V.S - आप जो कहोगे वही होगा गुरुदेव..

पूजा से उठकर R.V.S ने अपनी पत्नी से इस बारे में बात की , वही नन्हा अभी अपने रूम में सो रहा था और ऋतू वही बैठकर अपना होमवर्क कर रही थी .....

तभी अभी अचानक रट हुए उठा

ऋतू - अरे की हुआ मेरे बेतु को क्यों रो रहा है चुप हो जाओ ...

अभी - दी ....दी .....वह ...बहुत बाला शेर था दी .....वह मुज़हे खा जाएगा

.....मिली तलफ देख कल हैश रहा था दी

इतना बोल कर रोने लगा....

ऋतू - नहीं बेतु यहाँ कोई शेर नहीं है

देख (गले लगाकर) तूने सपना देखा होतगा बेतु चुप हो जा....

देख तू मेरा बहादुर भाई है न ....इतना कहकर ऋतू क आँखों से भी आंसू निकलने लगे

अपनी दी की आँखों में आंसू देखकर ...अभी अपना रोना भूल गया.

अभी - अल्ले मिली प्याली दी अब आप ट्यू लो लहि हो, देखो में नहीं रो रहा न दी

अब आप भी मत रोवो

तभी रूम के दूर पर नॉक होता है.... ऋतू जल्दी से अपने और अपने भाई क आंसू पोंछते हुए

ऋतू - कौन है , दूर खुला है आजाओ

तभी एक सर्वेंट अंदर आता है .....

छोटी मालकिन आपकी माँ आपको निचे बुला रही है...

इतना कहकर वह चला गया

अभी - दी में भी चलूँगा....

ठीक है भाई ......फिर दोनों निचे आजाते है

निचे जैसे hi अभी अपनी माँ को देखता है तोह दौड़कर गोदी में बैठ जाता है, और माँ क गालो पर एक किश कर देता है,

अपने बेटे का प्यार देखकर नैना भी अभी का गाल चुम लेती है और गले लगाती है ....अरे मेरा प्यारा शोना

R.V.S - क्या बात है बीटा सारा प्यार माँ क लिए..... और हमारे लिए कुछ नहीं..

अभी - पापा भी तोह में माँ को hi प्यार करूँगा आपका नंबर बाद में आएगा..

ऋतू - अच्छा बेतु और मेरा नंबर

अभी - अरे डीडू आप यहाँ आजाओ न हम दोनों hi माँ को प्यार करेंगे

अब ऋतू भी अपनी माँ क पास पहुँच गयी और नैना क गाल पर किश करके बैठ गयी माँ को पकड़कर

R.V.S - ( ज़्हूटी नाराजगी जताते हुए)

अच्छा अब तुम तीनो तोह एक हो गए अब गाओं जाने का प्लान कैंसिल ,


दादा - दादी से मिलने का भी प्लान कैंसिल

अभी - ऋतू कौनसा प्लान पापा आपने तोह हमे बताया hi नहीं

R.V.S - बीटा अभी हमारे इस नन्हे अभी का जन्मदिन आने वाला है तोह सोचा इससबार गाओं क महल में सभी रिश्तेदारों क साथ मनाएंगे ...

और अब तुम्हारी माँ को भी जरुरत है तोह वह वह कुछ दिन रहेगी जब तक नन्हा मेहमान नहीं आजाता

अभी - कौन आनेवाला है पापा ,

R.V.S - बीटा तुम्हारे साथ खेलने क लिए एक नन्ही पारी आएगी

( जी हाँ नीना को अभी 8 महीने का गर्भ है)

अब R.V.S & फॅमिली पहुँच गए गाओं

जन्मदिन में होनेवाले उत्सव क लिए महल को खूब सजाया गया था

राणा महल --


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राणामहल को खूब चमकाया गया

फिर आया वह दिन ...जब अभी पूरे 5 वर्षा का होने वाला था...

आज पूरा गाओं खुश था ..क्यों की R.S.S ने अपने पोते क जन्मदिन की ख़ुशी में, फिर अपने भंडार गोवालो क लिए खोल दिए

आज पूजन और हवन की तैयारी आचार्य सोमदत्त कर रहे थे ... तभी वह महागुरु यग्नेश का भी आगमन हुआ..

R.V.S ने बड़े श्रद्धा भाव से उनका स्वागत किया और आसान पर बिठाया ...

यहाँ अभी अपनी दे क गोदी में बैठा बड़ा खुश हो रहा था

सुष्मिता देवी (दादी)- बीटा नैना तुम थोड़ी देर आराम करो आज अपने लाला को में अपने हाथो से तैयार करुँगी

नैना - नहीं माँ जी में कर लुंगी अभी पूजन का भी समय होने वाला है

दादी - अभी महागुरु जी ने बताया की मुहूर्त में 4 हरष बाकी है

ऋतू - आप क्यों परेशां होती है दादी में भाई को तैयार कर लुंगी

दादी - अरे मेरी प्यारी लाडू बड़ी समज्जदार हो गयी है... लेकिन बीटा तुम अपनी माँ का ध्यान रखो ...में इससे तैयार कर देती हु

अभी - हां डीडू माँ को आराम करने दो... दादी मुज़हे तैयार कर देगी..

अब में बड़ा हो गया हु

माँ - वह मेरा बेतु तोह समज़दार हो गया

फिर अभी अपने दादी क साथ उनके रूम में चला गया


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वह जैसे hi अभी पहुंचा तोह न जाने क्यों अभी को नींद आने लगी

अभी - दादी मुज़हे बहुत नींद आरही है मुज़हे सोना है

दादी - नहीं बेतु अभी तोह आपको तैयार होना है पूजा में बैठने क लिए

अभी - दादी प्लस थोड़ी देर सोने दो न

दादी ने सोचा अभी अभी तोह बहुत समय है .....

ठीक है बेतु सो जा थोड़ी देर...

यहाँ महागुरु अपने आसान पर बैठकर साड़ी स्थिति का जायजा ले रहे थे, तभी कुछ सोचकर उन्होंने अभी क दादा और दादी को बुलावा भेजा

महागुरु क बुलावे पर पर दादी को तुर्रंत अभी को सोता हुआ छोड़ कर जाना पड़ा

यहाँ पटल लोक में दुर्मुखासुर (D.S.R) आपने पिता क परम शत्रु की खोज में लगा हुआ था ....की तभी उससे पृथ्वी पर और 14 लोको में एक अलग ऊर्जा का आभास होने लगा.

( ध्यान रहे आज अभी क साथ साथ 14 लोको में जन्म लेने वाली उसकी शक्तिया भी 5 वर्ष की होने वाली है)

तभी एक नन्ही पारी सी लड़की दौड़ कर वह आजाती है ...भाई ..भाई करते हुए रट हुए आती है

D.S.R - अरे क्या हुआ मेरी गुड़िया क्यों रो रही है...

लड़की - आपको मेरा जन्मदिन याद नहीं रहा अज्ज

D.S.R - अरे मेरी प्यारी गुड़िया नहीं भुला आज रात को खूब जासं होगा

( जी हां यह K.S की छोटी रानी की पुत्री जो अभी की hi शक्तियों में से एक है

जिस्का नाम है - मदालसा)

यहाँ धरती पर महल में महागुरु को अंदेशा हो गया की दुर्मुखासुर ऊर्जा का पीछा करते हुए यहाँ पहुँच सकता hai...toh उन्होंने अपने मंत्र शक्ति से राणामहल को एक कवच में बंद दिया......

यहाँ अचानक अभी की नींद खुल जाती है वह अपने चारो तरफ देखता है

उससे एक मधुर संगीत सुनाई देता है, ौसा लगता है जैसे उससे कोई बुला रहा है......

तभी उस्सकी नज़र सामने दिवार पर पड़ी .....वह अचानक प्रकाश से चमकता हुआ दरवाजा प्रगट hua...jo महल में बनने हुए गुप्त शिवालय तक जाता hai......isske बारे में केवल अभी क दादा और पापा hi जानते थे.

अभी को ऐसा लगा जैसे उससे उस दरवाजे क भीतर कोई पुकार रहा है ...वह आगे बड़ा तोह देखा वह निच्चे की और सिद्दिया जार रही है


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उन सिद्दियों से होते हुए पहुंच गया अभी वह बने गुप्त शिवालय में वह अद्भुत शिवलिंग क दर्शन करते hi अभी क मुख से मन्त्र निकलने लगा ॐ नमः शिवाय और बैठ गया दोनों हाथ जोड़कर तभी उसकी नज़र वह पड़े दो बॉक्स पर पड़ी जिनमे एक वाइट था और एक रेड

रेड बॉक्स से कुछ तरंगे निकलने लगी

और आवाज आने लगी आओ मेरे मालिक अपना लो मुज़हे कब से आपका hi इंतजार कर रहा tha....Tab अभी ने वह रेड बॉक्स उठाया और जैसे hi खोला तोह एक तेज़ लाल कलर की रौशनी निकली वैसे एक एनर्जी अभी क अंदर से निकली ...जब दोनों एनर्जी आपस में मिली तोह प्रगट हुई एक भयंकर आकृति और फिर गुंजी एक भयंकर शेर की दहाड़..

अभी क लिए इतना hi....

अगला अपडेट जल्द hi....
 
अपडेट - 12

अभी तक आपने देखा ..... अभी क पांचवे जन्मदिन की तैयाररी

पटल लोक मेंअभी की एक शक्ति मदालसा

अभी का गुप्त शिवालय में जाना और बॉक्स खोलना.....

और एक दहाड़ अब आगे.....


जैसे hi आकृति ने शेर का रूप धारण किया और दहाड़ा तोह जाने क्यों अभी उस्सको देखकर डरने क बाजए मुस्कुराने लगा और शेर को जैसे hi हां लगाने वाला था तभी महागुरु R.V.S को लेकर वह प्रगट होगये और तुर्रंत अभी को रोक दिया.

दोनों के वह आने से अभी का ध्यान भांग हो gaya...aur वह बेहोश हो गया

R.V.S उस शेर को देखकर आश्चयरा चकित हो गया, क्यों की वह आम शेरो से 4 गुना बड़ा था, और उसकी आँखों से आग की लपटे निकल रही थी

R.V.S - गुरुदेव यह सब क्या hai...aur यह शेर कहा से aaya....kahi यह मेरे पुत्र को नुकसान न पंहुचा दे

महागुरु - तुम्हारे सारे सवालो क जवाब तुम्हे मिलेंगे putra...paratu पहले में वह काम कर लू जिसके लिए में आया हु

इतना कहकर महागुरु ने त्रिदेवो का ध्यान कर के उनकी आज्ञा मांगी फिर उन्ही क मंत्रो को पड़ते हुए उस शेर पर जल क चित्ते kiye.......aur तभी R.V.S

क आश्चर्य की कोई सिमा नहीं रही

वह भयंकर शेर बदल गया ें 5 साल ने बड़े hi मासूम बालक में जो दिखने में चन्द्रमा क सामान शीतल दिख रहा था और R.V.S की तरफ देखकर मुस्कुरा रहा था..

महागुरु - पुत्र यह तुम्हारे इस पुत्र की संघारक शक्ति है जो काल का hi प्रतिरूप है ...

R.V.S - परन्तु गुरुदेव हमारे वंश में मिली हुई संघारक शक्ति तोह मेरे पास भी है ...तोह उस्सने तोह कभी ऐसा रूप धारण नहीं किया

महागुरु - पुत्र तुम्हारी संघारक शक्ति केवल इस पृथ्वी लोक तक hi सिमित है ......और इस्सकी संघारक शक्ति ....तुम्हारे वंश को मिला वरदान ,अभी की शास्त्र शक्ति और पराशक्ति की ऊर्जा तीनो को मिलकर

बानी है .. अभी चाहे तोह इस शक्ति द्वारा पल भर में इस पृथ्वी का नाश कर सकता है अभी यह अभी शांत स्वरुप में है...... जब भी अभी पर कोई संकट आएगा तब hi यह सक्रिय होगा और अपने काल रूप में आएगा....

अभी हमे इससे एक सांसारिक नाम देना होगा

R.V.S - गुरुदेव में इससे नाम देता हु राकेश...

फिर महागुरु ने राकेश को अपनी शक्तियों द्वारा अपने आश्रम पंहुचा diya...Tab तक अभी को भी होश आगया.... होश में आते hi वह इधर उधर देखने लगा

अभी - पापा मेरा शेर कहा गया मुज़हे वह chahiye....woh मेरा दोस्त है papa.....muzhe मिलना है उससे

R.V.S - जरूर मिलेंगे बीटा, लेकिन यह बात अपनी माँ को मत बताना, बही तोह वह दर जायेगी और तुम्हे मिलने नहीं देगी

अभी - नहीं बताऊंगा में प्रॉमिस

करता हु पापा

R.V.S - थॉट्स लिखे ा गुड बॉय

महागुरु - राणा पुत्र अब इस सफ़ेद बॉक्स को खोलने का भी समय आगया है आज हवन क बाद तुम इससे खोल देना

अब R.V.S महागुरु और अभी क साथ हवन मंडप में पहुंच गया..

तब तक नैना और ऋतू भी तैयार होकर वह पहुंच गयी थी और अभी को ढूंढ रही थी, महागुरु ने अपनी माया से रचे हुए सूंदर वर्स्त्रो से अभी को एकदम राज कुमार की तरह बना दिया था,

अपने बेटे को इतने सूंदर रूप में देखकर नैना बहुत खुश हो गयी

अभी - माँ ..माँ यह देखो गुरूजी ने कितने सूंदर कपडे दिए hai....kaisa लग रहा हु में

नैना - अरे मेरा बेतु तोह बिकुल राजा लग रहा है ...खाई किसी की नज़र न लग jaaye...itna कहकर नैना ने अपनी आँखों से काजल निकलकर अभी क कान क पीछे लगा दिया.

अब हवन शुरू हुआ जैसे जैसे आहुतिया पड़ने लगी वैसे वैसे एक एक करके अभी क चारो तरफ 5 रंगो का बना हुआ एक गोल चक्र प्रगट हुआ और धीरे धीरे अभी में सामने लगा

एग दृस्य केवल R.V.S ,आचार्य सोमदत्त और महागुरुहि देख पाए

हवन समाप्त हुआ और महागुरु क निर्देश अनुसार सफ़ेद बॉक्स खोला गया जिस्में से सफ़ेद एनर्जी निकलते hi नैना क गर्भ में पल रही बच्ची क अंदर समां गयी .

अब महागुरु एक बार फिर R.V.S और अभी को लेकर पहुंच गए गुप्त शिवालय , और भगवन शिव को प्रणाम किया

तभी अभी बोल उठा

अभी - महागुरु , अभी जल्दी hi मेरा इस मानव रूप की शिक्षा शुरू कार्डो, क्युकी इस्सके बाद मुज़हे अपनी 14 शक्तिया को भी पुनः प्राप्त करना है...

R.V.S - अभी की तरफ देखकर सोचने लगा की अभी को सब पता कैसे चला

तभी अभी नार्मल होते हुए

अभी - पापा चलो न मुज़हे बहुत भूख लगी है मुज़हे माँ क पास जाना है

R.V.S का सर चक्र गया......

गुरुदेव यह सब क्या है...

महागुरु - पुत्र यह दोनों hi तुम्हारे पुत्र क दो रूप है

एक रूप वह जिस्सको साड़ी बातें पता है ...जहा तक की जो ज्ञान मुज़हे भी नहीं पता वह ज्ञान भी समाया है

और दूसरा रूप साधारण मानव का जो इनसब बातों से अनजान है

अब इसकी शिक्षा का भी समय आगया है पुत्र जो मेरे आश्रम में होगी,

तभी अभी क शरीर से वह रूप बहार आया दोनों रूप एक जैसे साधारण रूप को लेकर R.V.S पहुंच गया नैना क पास और

दूसरे रूप को लेकर महागुरु पहुंच गए अपने आश्रम.....

अब से में जो अभी घर पर है उससे अभी लिखूंगा..

और जो अभी जो महागुरु से शिक्षा ग्रहण कर रहा है उससे ा1 लिखूंगा

आज क लिए इतना hi ....

अगला अपडेट कल......
 
अपडेट - 13

अभी तक आपने dekha......kaal का jnam......aur अभी क दो रूप

अब ....आगे.....


ओल्ड रूपनगर में दिन में खूब उत्सव चला और रात को एक शानदार पार्टी .......आज अभी क सभी रिश्तेदार आये हुए थे ....रात में रौशनी से जगमगाता हुआ महल और भी शानदार लग रहा था

अभी ने अपना बर्थडे केक काटा और शुरू हुई party......ab शुरू हुआ गिफ्ट्स का सिलसिला जो अभी को बहुत पसंद आया ...... लेकिन अभी को किसी चीज का इंतज़ार था....... तभी ऋतू को देखकर , अभी बहुत खुश हुआ ......

अभी - डीडू कहा गयी थी आप में आपको hi ढूंढ रहा था........

ऋतू - कही नहीं बेतु बस तेरे लिए कुछ सरप्राइज था वह hi लेने गयी थी

इतना कहकर दी ने अभी को एक गिफ्ट दिया

अभी से रहा नहीं गया उस्सने तुर्रंत उससे खोल कर देखा.... तोह उस्समे एक गोल्ड का माउथ ऑर्गन बेशकीमती डैमोन्द्स से ज्यादा हुआ उससे देखकर अभी बहुत खूह हुआ ......अरे डीडू आपने ने मुज़हे सबसे अच्छा गिफ्ट दिया है ....वो यह कितना खूबसूरत है

ऋतू - अच्छा मेरे बेतु को गिफ्ट पसंद आया तोह अब हम सब को बजाकर भी सुना दो

सब बच्चा पार्टी अभी को घेर कर बैठ गयी चाचा की दो लड़किया

पायल और श्रेया, .....मस्सी की दोनों लड़कीअ मोनिका और लवली...........

बड़ी बुआ की पारी ,ाव्य अभी बहुत छोटी थी अपनी माँ को गोदी में

अभी यानि मैंने तभी देखा छोटी सी गुड़िया एकदम क्यूट डॉल जैसी पारी मुज़हे तक पहुँचने की कोशिश कर रही है .....अल्ले मुझे जाने दो na.....muzhe भी भाई को गिफ्ट देना hai..tabhi उसस्के हाथ का गुलाब बच्चो की भीड़ में गिर गया ....और उसके चेहरा उदास हो गया....

ऋतू - क्या हुआ अभी सुनाओ न कोई धुन

तोह में डीडू को पारी की और देखने को इशारे से बताता हु.....

में -- पारी क्या हुआ मेरी गुड़िया ...

पारी - देखो न भाई ...यह छाले बच्चे गंदे है.... मेला लूज़ गिला दिया ...ऑल मुझे आपके पास आने भी नहीं दे लहे है.....

में - सब को साइड करते हुए पारी को अपने पास ले आता hu....Aise किसी को गंदे नहीं बोलते शोना...

अच्छा रोज तोह अब गिर गया अब मुज़हे क्या गिफ्ट डौगी शोना

मेरी बात सुनकर पारी कुछ सोचने लगी ....फिर मेरी गोदी में चढ़कर मेरे गलू पर किश कर दिया

और बैठ गयी मेरी गोदी में.....

में - वह मेरा शोना बच्चा यह गिफ्ट तोह बहुत अच्छा है ...

मेरी बात सुनकर पारी बस मेरे तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी..

फिर मैंने माउथ ऑर्गन बाजांना शुरू किया और खो गया संगीत में

मेरा ध्यान सबकी तालियों से टुटा ...ऐसे एन्जॉय करते करते पार्टी ख़तम हो गयी ....

पापा को शहर जाना पड़ा किसी जरुरी काम से तोह वह ऋतू दी को साथ ले gaye....di जाना नहीं चाहती थी लेकिन स्कूल की वजह से उनको जानना पड़ा..

अब में और माँ रह गए दादा दादी क साथ महल में , यहाँ मेरे बहुत से दोस्त banne.....yaha की हरियाली , कल कल करती नदी .पंछियो की आवाजे सभी कुछ मुज़हे बहुत अच्छा लगता था

अब देखते है हमारे अभी का दूसरा रूप क्या कर रहा है..

जैसे hi महागुरु मुज़हे अपने साथ अपने आश्रम लाये ...वह आश्रम क बहार की मेरे जितना की कोई बच्चा मेरे सामने घुटनो पर बैठ गया

.....

आपका का स्वागत है मेरे मालिक..

उससे पहचानकर ममैने उससे उठाकर गले से लगाया.....

ा1- मित्र तुम मेरे hi शक्तियों क अंश हो ...और यह मुज़हे मालिक बुलाना अच्छा नहीं लगता तुम मुस्हे भाई hi बुलाओ.

राकेश - जैसी आपकी इच्छा भाई

ा1 - यह हुई न बात , मेरे यर

फिर महागुरु ने आचार्य सोमदत्त को मेरे रहने की व्यस्था करने को कहा

एक कुटिया में मेरी व्यस्था कर दी गयी

अब मैंने वह का नजारा देखा तोह यह जगह एकदम एकांत में हिमालय की पहाड़ियों पर स्थित थी ... चारू और ऊँचे ऊँचे parvat....aur एक बहुत बड़ी zheel...jismein पानी पास क hi झरने से आता है ....

वही पास में एक मैदान जहा कुछ विद्यार्थी शास्त्र कला का अभ्यास कर रहे थे, ज़हील क पास hi एक विशाल बरगद का पेड़ है जहा वेदो और उपनिष्दों की शिक्षा दी जाती है

वही कुछ दुरी पर बाग़ बागीचा जहा आश्रम क लिए फल और सब्जिया उगाये जाते है और थोड़ी दूर पर एक Gaushala....jaha बहुत से गौमताये राखी हुई थी

आश्रम को देखते देखते एक बात समाज आगयी थी की यहाँ का सारा काम यहाँ क विद्यार्थी hi करते है,

यह आश्रम हिमालय की एक घटती पर स्थित है, महागुरु की शक्ति से कोई भी बहार का व्यक्ति इस आश्रम को देख नहीं सकता ...

घूमते घूमते मुज़हे शाम हो गयी


और पहुंच गया में अपनी कुटिया में , ......में पृथ्वी लोक में जनम लेने से पहलेवाले अपने स्वरुप और उस्सकी शक्तियों को जानता था .....इसीलिए मुज़हे लगने लगा महागुरु मुज़हे व्यर्थ यहाँ ले आये में तोह अपनी साड़ी शक्तिया जानता hu....aur मुज़हे कुछ सिखने की भी जरुरत नहीं है...

ऐसे hi मेरा समय बर्बाद होगा...

यह अहंकार hi व्यक्ति की विकास का बाधक होता है, में अपनी स्मृतियों क चलते यह भूल चूका था की इस समय में मानव शरीर में हु

और इस शरीर की कुछ सीमाएं होती है जब तक इस्सकी शक्तियों को जागृत न किया जाए

( जैसे मोबाइल कितना भी महंगा और स्टाइलिश हो लेकिन बिना चार्ज किये बेकार hi रहता है)

और इससे जागृत किया जाता है कठिन परिश्रम और अभ्यास से

तभी राकेश कुछ फल लेकर मेरे पास आया..... यह फल गुरुदेव ने आपके लिए भेजे है ......और कहा है आज आराम करलो ...कल से शिक्षा आरंभ karenge.....itna कहकर वह जाने लगा ..तोह मैंने उससे हाथ पकड़कर अपने पास बिठाया ......अरे कहा जा रहा है यर ....थोड़ी देर जरा अपने दोस्त क पास नहीं बैठेगा.......

राकेश - mein......kaise....aaap क पास बैठ साकता हु

उसका ऐसे हकलाते बोलते हुए देखकर मुज़हे हँसी aagayi...mein बोलै अरे अरे क्या हुआ ऐसे घबरा क्यों रहा है ..


फिर हमने साथ मिलकर फल खाये अब रात हो रही थी राकेश मुज़हे कुटिया में छोड़ कर चला गया, अब मुज़हे नींद आने लगी तोह मैंने देखा सोने क लिए सुखी घास का क गद्दा सा बनाया था और उसके ऊपर एक पतली सी चादर,

रात का समय और हिमालय तोह आप समाज hi सकते होंगे की ठण्ड कैसी होगी

ठण्ड लगने लगी तोह में बहार निकलकर टहलने लगा , खुल्ले आकाश में चमकते तारो को देखते ढकते जा रहा था की अचानक किसी से टकरा गया ... तभी एक सुरीली पर गुस्से से भरी आवाज आयी .....

आवाज - uff.....yeh कौन अँधा ...bewakuf...langoor की dum.......akdu ...गधा ....नालायक ..है

अपने लिए पहली बार इतने ऐसे नामो को किसी क मुँह से सुनकर मुज़हे अजीब सा लगा और साथ में हँसी भी आयी

जब मैंने सामने देखा तोह निचे जमीं पर मेरे ढके से गिरी हुई एक लड़की को देखा , जिसके बाल बिखरे हुए थे गुस्से में गाल और लाल हो गए थे ...बड़ी बड़ी आँखें ...जिनको देखकर जाने में कहा खो गया

की मुज़हे ध्यान hi नहीं रहा की उसके मुँह से मेरे लिए कैसी कैसी उपमाये निकल रही है.....

तभी उस्सन्ने पास पड़े एक कंकड़ को मेरी तरफ फेंका जिससे में वापस लौट आया

लड़की - एक तोह मुज़हे गिरते हो और ऊपर से घर घर कर देखते हो

और उठाते भी नहीं ...बतमीज़ कही क

में उससे उठाने क लिए अपना हाथ आगे किया , जैसे hi उस्सने मेरा हाथ पकड़ा जाने क्यों मुज़हे ऐसा लगा जैसे यह मेरा hi एक अंग है

तभी लड़की ने अपना हाथ छुड़ाया और जाने लगी

में - अरे अपना नाम तोह बता दो

लड़की - में लंगूर को अपना नाम नहीं बताती इतना कहकर ेओह अँधेरे में गम हो गयी

इतने में आश्रम के hi किसी ष्षा क हातो गुरूजी ने एक कम्बल भेजा जिससे लेकर चल दिया अपनी कुटिया में सोने..

उन दो आँखों को सोचते सोचते जो आज टकराई सो गया गहरी नींद में..

अभी क लिए इतना hi...

अगला अपडेट जल्द hi.....
 
अपडेट - 14

अब तक आपने dekha....Abhi का दूसरा रूप ा1 ..महागुरु क आश्रम पहुँचता है .........

राकेश से मुलाकात ......

और किसी लड़की से टकराना......

अब आगे


सुबह 5 बजे शंखध्वनि से मेरी नींद खुली..... मैंने देखा अभी तोह बहार अँधेरा hai....mein और सोने लगा तभी

आश्रम का कोठरी हरिदास

( कोठरी मतलब वह जिसके अंडर में आश्रम का स्टोरकीपर) मेरे सामने खड़ा है

हरिदास - उठ जाओ यह कोई राज महल नहीं है .....जहा देर तक सूट hai.....yeh लो तुम्हारे लिए वस्त्र इससे पहनकर टरयर होकर जल्दी से देवालय पहुँचो...

मुज़हे उसके बोलने का तरीका जरा भी अच्छा नहीं लगा ....लेकिन क्या ..करे

ा1 में - ठीक है पहले यह तोह बतादो यहाँ बाथरूम कहा है और फ्रेश होने कहा जाओ

कोठरी - यहाँ कोई बाटरूम वैगेरा नहीं है ....यह लो लोटा ...और वह रहा जंगल शौच क liye.......aur वह रहा सरोवर स्नान क लिए

मरता क्या न करता तोह ले लिया लोटा ...और लंगोटा ....और चल दिया ...किला ..फहतेह... करने

(आप तोह समाज hi गए होंगे

अरे भाई हम सभी को भी रोज़ सवेरे वह किला फ़तेह करना पड़ता है??)

फ्रेश होकर आश्रम में बने हुए देवालय ( मंदिर )

में पहुंच गया..... जहा पर

माँ भगवती की शेर पर सवारी किये हुए एक विशाल प्रतिमा है

सूर्य देव अभी निकलने hi वाले थे और उनकी लालिमा आकाश में फैलने लगी थी ,

सूर्य क पहली किरण जैसे hi मंदिर क शिखर पर पड़ी उस्का स्वर्ण शिखर और पास hi धर्मध्वजा (फ्लैग) दोनों चमकने लगे जब तक में देवालय पहुंचा तब तक सुबह की आरती समाप्त हो गयी थी ...और सब मंदिर क बहार निकल रहे थे

अभी में अंदर जा hi रहा था तोह फिर में टकराया ....फिर वही दो आंखें और बेशुमार गालियां अभी देर हो रही थी इसीलिए उससे वही छोड़कर चल दिया में भीतर

वह जाकर महागुरु को प्रणाम किया


गुरुदेव क साथ वह एक आचार्य खड़े थे

महागुरु - पुत्र आज तुम्हे आने में देर हो गयी ....कल से ध्यान रहे सुबह मंदिर क खुलने से पहले तुम्हे आना होगा, .... और इनसे मिलो यह है आचार्य पवन इस आश्रम में इन् से ज्यादा गतिशील (स्पीड) और कोई नहीं ..

यह पृथ्वी क किसी भी कोने में पालक जहापकते hi पहुँच सकते है

टमाटर शिक्षा की शुरुवात इन्ही से होगी , यह तुम्हे योग ...ध्यान.. और गति की शिक्षा देंगे

में - परन्तु महागुरु आप मेरे वास्तविक रूप को जानतें हैं ....मुज़हे किसी से सिखने और अभ्यास की क्या जरुरत है...

महागुरु - पवत्र यह तुम्हारा अहंकार बोल रहा है ....तुम भूल गए हो क इस समय तुम दिव्या श्री में नहीं मानव शरीर में हो


में - नहीं यह मेरा अहंकार नहीं है गुरुदेव यह hi सत्य है

महागुरु - ठीक है एक परीक्षा हो जाए जो यदि तुम जित गए तोह तुम्हे तुम्हारी शक्तिया मिल जायेगी ....और यदि हार गए तोह यहाँ का हर एक नियम और आदेश का तुम्हे पालन करना होगा जब तक तुम्हारी शिक्षा पूरी नहीं हो जाती

अब हम पहुंच गए एक खुले मैदान में ..

महागुरु - पुत्र तुम्हे बस आचार्य पवन (A.P)se दौड़ ने में स्पर्धा करनी होगी देखते है दोनों में से कौन इस मैदान का चक्कर पहले पूरा करता है

महागुरु ने A.P और मुज़हे रेस शुरू करने का इशारा किया

हम दोनों टायर थे उस मैदान का घेरा करीब करीब 5 कम का होगा

A.P तोह जैसे मेरे साथ खेल रहे थे

जैसे hi दौड़ शुरू हुई में अपनी जान लगा का दौड़ पहा ...एक तोह छोटे कहते पेअर और यह बालक का कोमल शरीर .

..थोड़ी hi दूर जाकर मेरे हौसले पास्ट हो गए मैंने और जोर लगाने की कोशिश की लेकिन सब व्यर्थ मैंने आचार्य पवन की और मुड़के देखा तोह उन्होने अभी दौड़ शुरू hi है की थी अभी करीब 1 कम hi हुआ था की में गिर पड़ा सारे बदन पर धूल मिटटी आ गयी बड़े मुश्किल से दुबारा खड़ा हुआ लेकिन अब में दौड़ नहीं सका

तभी A.P अपने जगह से हिले और तभी मुज़हे ऐसे लगा की कोई मुज़हे ऐसे लगा जैसे किसी ने मुज़हे उठा लिए हो

और जब मैंने सामने देखा तोह अपने आपको महागुरु क आगे पाया

महागुरु - ऐसे चकित न हो पुत्र तुम्हे वह से यह A.P hi लाये है इन् क पास पवन की शक्ति है यह हवा की गति से कही भी जा और आसक्ति है

मुज़हे अपनी गलती का अहसास हो गया था

में अपने घुटने पर बैठकर क्षमा मांगने लगा

में - मुज़हे क्षमा करें गुरुदेव देव अहंकार में भूल गया था की यहाँ त्रिदेवो को भी जनम लेने क बाद गुरु की आवश्यकता पड़ती है ...मुज़ह से बहुत बड़ी भूल हो गयी...

महागुरु - यह सब तुम्हारी प्रूव स्मृतियों क कारण हुआ है , अब जब तक तुम 5 तत्त्व की ऊर्जा को वश में नहीं का लेते तुम्हे कुछ याद नहीं रहेगा ..

तुम्हे सिर्फ इतना hi पता रहेगा की तुम्हारा नाम अभी है और तुम यहाँ क केवल एक साधारण शिष्य हो..

इतना कहकर महागुरु ने मरे सर पर हाथ रखा जिससे मुज़हे एक जहतका सा लगा और फिर में बेहोश हो गया

जब मेरी आँख खुली तोह मैंने देक्ग की कोई मुज़हे आवाज दे रहा है

जब मैंने आंखें खोली तोह देखा सामने एक आश्रम का hi एक युवक हाथ में थाली लेकर मुज़हे आवाज दे रहा था...

yuvak(Chandrakant)-- अरे इधर उधर क्या देख रहे हो ..में कब से उठा रहा हु तुम्हें , यह लो

भंडारी जी (हेड कुक) ने तुम्हारे लिए खाना भेजा है...

वैसे तुम्हे हुआ क्या है ...कल मैंने गुरुदेव क साथ जब तुम आये थे तब तोह ठीक थे......

में अपने दिमाग पर जोर देता हु तोह मुज़हे कुछ याद नहीं आता की में कौन हु सिर्फ नाम याद था

में - आओ बैठो मित्र मुज़हे पता नहीं कुछ सर में दर्द सा हो रहा है

शायद भूक क वजह से ऐसा हो रहा है.

Chandrakant,(C.T) भोजन की थाली रखकर मेरे सामने बैठ गया


में - तोह मित्र शुरू करे भोजन

C.T - तुमने मुज़हे मित्र कहा है ध्यान रहे तुम hi पहले मित्र हो आश्रम में ..क्या सच में मुज़हे मित्र बनाओगे

में - हां मित्र आज से हम पक्के मित्र हुए ...चलो इसी बात पर साथ में खाना कहते है...

C.T - नहीं मित्र मेरा भोजन हो गया , अभी में चलता हु , haa......bhojan करके सरोवर क निकट बरगद क पेड़ जहा वेदो का अध्ययन होता है ..

पहुँच जाना वह महा गुरु ने तुम्हे बुलाया है...

इतना कहके वह चला गया...

मैं भी टूट पड़ा कहने पर ऐसा लग रहा था जाने कब से में भूका था

खन्ना सात्विक था लेकिन था बखूत स्वादिष्ट ...

कहते है न ..हंगर इस थे बेस्ट सॉस

भोजन करके पहुंच गया में C.T की बताई जगह पर जहा महागुरु ने मुज़हे आचार्य पवन से मिलवाया.

उन्हें साथ हुई पहली मुलाकात और साड़ी बातें में भूल चूका था

A.P मुज़हे एक मैदान में ले गए

पुत्र आज से तुम्हारी शिक्षा शुरू होती है... अभी तोह तुम इस मैदान क

3 चक्कर लगाओ बाकी की शिक्षा कल सुबह 4 बजे से आरम्भ करेंगे

मैंने A.P क चरण चुकार उनका आशीर्वाद लिया फिर उस बहुत बड़े मैदान को देखा ... और शुरू का दी दौड़ .....

3 राउंड पूरे करते करते शाम हो गयी और में थक कर एकदम चूर हो गया और वही एक पेड़ क निचे लेटकर थोड़ा आराम किया ... सोचा नाहा लू तोह थोड़ा फ्रेश फील होगा ,

तोह चल पड़ा में सरोवर की तरफ और डुबकी lagayi...na जाने उस शीतल जल में क्या जादू था डुबकी लगते hi साड़ी थकन चली गयी अब मुज़हे बहुत हल्का महसूस हो रहा था....

नाहा कर में वही सरोवर क किनारे बैठकर वह की सुंदरता देख रहा था और अपने बारे ंविं सोच रहा tha...ki कौन हु में ...सिर्फ नाम क अलावा मुज़हे कुछ याद क्यों नहीं..

की तभी मेरे कंधे पर किसी ने हाथ रखा ..मैंने मुड़कर देखा तोह मेरे hi उम्र का एक सुन्दर लड़का था जिस्सको देखकर न जाने क्यों मुज़हे अपनापन महसूस हो रहा था..

(यह लड़का राकेश था महागुरु क कारण अभी अब उससे भी भूल गया था)

राकेश - मित्र क्यों इतने उदास बैठे हो अपने सारे विचार त्याग दो अपना दयँ सिर्फ यहाँ केंद्रित करो

में - तुमने मुज़हे मित्र कहा क्या तुम मुज़हे जानते हो. तोह मुज़हे मेरे बारे में बाताओ....

राकेश - हां जानता hu....mein आपका मित्र हु ...अभी बस इतना hi ....बाकी बातें समय आने पर आपको पता चलेगी थोड़ा ध्यैर्य रखिये....

जब उसने मुज़हे मित्र कहा तोह मुज़हे एक अपनापन महसूस हुआ, और फिर मैंने उससे गले लगा लिया,

राकेश - एक काम करो मित्र आप मन को शांत करके ॐ का ध्यान करो आपका मन शांत हो जायेगा..

फिर जैसे जैसे राकेश मुज़हे बताता गे वैसे में ध्यान में बैठ gaya.....dheere धीरे मुज़हे अपने भीतर एक ग्रीन कलर की लाइट दिखने लगी और में उस लाइट में खो गया

तभी एक सुरली आवाज ने मुज़हे ध्यान से बहार किया...

आवाज ... अरे अरे देखो तोह में थो इस्को लंगूर समझ रही थी यह तोह कावा निकला देखो तोह कैसे उड़ रहा है.....

जब मेरे दयँ निचे गया तोह देखा में जमीन से कोई 5 फट ऊपर उठा था,

जिससे देख में दर गया और में जमीं पर आकर gira......tabhi एक बड़ी hi खिखिलाती हुई हस्सी गुंजी....

अभी की लिए इतना hi .......

अगला अपडेट आज रात को .......
 
अपडेट - 15

अब तक आपने देखा ....ा1 अपनी पिछली यादें भूल गया.... कुछ कहती मिट्ठी नोक झोंक...

ट्रेनिंग का पहला दिन .....ध्यान

और फिर किसी लड़की की हसने की aawaj.....ab आगे.....


हसने की आवाज सुनकर मेरा ध्यान जैसे hi टूटा और में निचे गिरा तोह मैंने अपने सामने फिर वही दो बड़ी बड़ी सूंदर आंखों वाली उस लड़की को देखा......

तब तक में संभल कर बैठ गया

और उसस्के तरफ देखने लगा...

लड़की ... ऐसे क्या घर घर कर देख रहे ho.....jaise पहली बार देख रहे हो

में - क्या तुम मुज़हे जानती हो ,

लड़की - बार बार मुज्ज़हसे टकराने क बाद भी पूछ रहे हो , में सिर्फ इतना जानती हु की तुम अभी यहाँ नए hi आये हो

अगर मेरा तुम्हे चिड़ाना बुरा लगा हो तोह सॉरी

में - नहीं बुरा तोह नहीं लगा ..लेकिन

पता नहीं में सब कुछ भूल गया हु और मुज़हे कुछ याद नहीं आरहा अपने बारे में.... खैर छोड़ो तुम अपने बारे में batao....kya नाम है तुम्हारा

लड़की - अच्छा यह बात है ...कोई नहीं सब ठीक हो जायेगा ...

और वह मेरे पास बैठ गयी..

देखो में तुम्हारे लिए आम लायी थी यह बहुत मीठे है ..लो

पहले इससे कहते है फिर बात करेंगे

मैंने भी आम ले लिया और बात खाने लगा वह मुज़हे ऐसे hi देहः रही थी

में - ऐसे क्या देख रही हो

लड़की - देख रही हु की मैंने तुम्हारा नाम लंगूर ठीक hi रखा .....देखो आम कैसे खा रहे हो बिलकुल बंदर की tarah....apne सारे कपडे ख़राब कर दिए

इतना बोलकर वह खिल खिलर हसने लगी

लड़की - बुरा मत मानना में ऐसी hi हु..... मेरा नाम शालिनी ठाकुर है अभी ..मुज़हे अपने माता पिता क बारे में पता nahi...abhi कुछ दिन पहले hi महागुरु मुज़हे यहाँ लाये है

ैव्हा अभी में चलती hu.....kal फिर यही milenge....itna बोल कर वह चली गयी..

अब में अपनी कुटिया में आगया ..आज में बहुत खुश था ...की मैंने तीन दोस्त बना liye...aise hi दिन ढल गया और रात को भोजन करने क बाद में सो गया...

सुबह मेरी नींद 4 बजे खुली, जब में जगा तोह सामने आचार्य पवन मेरे सामने hi बैठे हुए थे...

A.P - तोह चले अब ...

में - गुरु जी अभी तोह में नहाया भी नहीं

A.P - कोई बात नहीं तुम शौच करके सरोवर पे आजाओ में वही तुम्हारी

प्रतीक्षा करता हु

में अपना सुबह का काम निपटा कर ...पहुँच गया सरोवर वह नाहा कर A.P को प्रणाम किया और बैठ गया

A.P - बीटा जैसे में पद्मासन में बैठा हु वैसे बैठो

( पद्मासना योग क्रिया का एक आसान है)

मैंने वैसे hi किया फिर उन्हों ने प्राणायाम सिखाया और हृदय चकरा में ध्यान करने को बताया .....

जैसे जैसे वह बाटते गए वैसे hi करता gaya....ab मुज़हे मेरे भीतर हर्रे रंग की ऊर्जा दिख रही थी ...मेरा शरीर बहुत हल्का लग रहा था जैसे की कोई वजन hi न हो ....तभी मुज़हे A.P की आवाज आई ......अपनी साड़ी ऊर्जा को अपने हातो में एकत्रित करने की कोशिस करो मैंने वैसे hi किया तोह मुज़हे लगा की मेरी उँगलियों से कुछ निकल रहा है ...तोह मैंने देखा की में आज फिर हवा में जमीं से कुछ 5 फट की ऊंचाई पर हु और मेरे हातो से हर्रे रंग की ऊर्जा निकल रही है ...

A.P - अब अपने दोनों हाथ आगे करके इस सररोवर क जल को अपनी इस ऊर्जा से हिलने का प्यत्न करो...

मैंने कोशिश की तोह थोड़ी hi देर में अपनी हाथो की ऊर्जा से जल को हिलने में सदल हुआ

आप - पुत्र यह तुम्हारी 5 तत्वों की शक्तियों में से वायु शक्ति है इसी प्रकार रोज ध्यान करने पर यह शक्ति पूरी तरह जागृत हो jaayegi...tab बास्की तत्वों क ध्यान तुम्हे बताया जाएगा...

अभी मंदिर चलो सुबह की आरती का समय हो गया है... फिर बर्फ करके ठीक 9 बजे पहुंच जाना मैदान में

वह से उठकर में चल दिया मंडी की और वह मुज़हे राकेश और C.T मिले उन्होंने और बच्चो क साथ मेरी पहचान karayi....lekin कुछ बच्चे बड़े hi क्रोध से मुज़हे देख रहे थे

C.S - इनके तरफ मत देखो मित्र इन्हे हम बाद में मिल lenge...abhi चलो बहुत भूख लगी है नास्ता करते है

बर्फ करके में चल पड़ा मैदान वह A.P ने मुज़हे ग्राउंड क 10 चक्कर लगाने को कहा .... 10 चक्कर सुनकर hi मुज़हे पसीना आगया .....लेकिन

मरता क्या न करता

मैंने दौड़ शुरू कर दी लेकिन यह क्या आज मुज़हे बहुत हल्का महसूस हो रहा था पैरो में भी कोई दर्द नहीं ..

9 वजे शुरू की हुई दौड़ 11 बजे ख़तम हुई ..तोह मैंने सोचा A.P बहुत खुश होंगे ... लेकिन नहीं

A.P - अभी बहुत स्लो हो कोई नहीं ठीक हो जाओगे ऐसे hi अभ्यास करो, फिर लंच क बाद भी दौड़ाया .और धनुष विद्या की भी शिक्षा शुरू hui...aaj की ट्रेनिंग ख़तम करने क बाद ...अपने दोस्तों को मिलकर फिर सरोवर की तरफ जा hi रहा था की पीछे से किसी ने मुज़हे धक्का मारा.....

लेकिन निचे गिरता उससे पहले राकेश ने मुज़हे संभल लिया..... तोह देखा यह वही है जो सुबह मुज़हे गुस्से से देख रहे थे....

ल1 - (उदय) क्यों गुरु जी का ज्यादा hi लाडला बनना हुआ है तू yaha....hum यहाँ क पुराने शशि है

C.T - उदय तुज़हे क्या परेशानी है .इससे


उदय -- अरे वह हम सब शिष्य यहाँ सिखने क साथ कोई न कोई काम करते है और यह राजा साहेब को देखो गुरु कोई काम नहीं बताते

राकेश - यह लड़के अपनी जुबान संभल कर नहीं तोह पछताना पड़ेगा

उदय - क्यों क्या कर लेगा तू ..अभी मजा चखता हु ...इतना सा है और मुज़हे धमकी देता है ....इतना कहकर उस्सने मरने क लिए हाथ उठाया की तभी राकेश की आंखों का रंग बदलने लगा पूरी तरह लाल हो gayi....aur राकेश ने उस्सकी तरफ देखा तोह उस्का हाथ जाम हो गया जैसे किसीने पकड़ लिया हो.

तभी वह महागुरु आये और राकेश को रोक दिया

महागुरु - राकेश क्या कर रहे थे तुम .....

राकेश - gurudev........wohh में....

मेरी ...कोई गलती ..नाही है यह ...hi..haath उठा रहा था ..अभी पर

महागुरु - तोह क्या तुम उससे भसम कर डोज

राकेश -- नहीं तोह गुरुदेव ....

महागुरु -- मुज़हे सब पता है तुम क्या करने वाले थे ...जाओ सब यहाँ से अब ...दुबारा ऐसा नहीं होना चाहिए

फिर में वह से सरोवर पर पहुँच गया , तोह वह शालिनी मेरा hi इंतजार कर रही थी.....

ऐसी hi दिन पर दिन मेरी ट्रेनिंग चलती रही और उदय & गैंग क साथ थोड़ी नोक- झोंक , और फिर रोज सरोवर पर शालिनी से milna.....jisse मुज़हे पता चला वह यहाँ पर वनस्पति और रसायन का और पृथ्वी तत्त्व का अभ्यास कर रही है .....

आज क लिए इतना hi ....

अगला अपडेट कल .....
 
अपडेट - 16

अब तक आपने ा1 ----- की शिक्षा देखि महा गुरु क

आश्रम mein....aur शालिनी...

का saath.......C.T और राकेश की dosti......Aur उदय क साथ

नोक - झोंक ....इन् सब पात्रो को याप रखे यह कहानी में अहम् भूमिका में है.....

अब ा1 को अपनी ट्रेनिंग करने देते है.... देखते है उधर राणा महल में जो अभी है वह क्या चल रह है..

जन्मदिन क उत्सव क बाद R.V.S ऋतू को लेकर सहर चले गए थे और यहाँ अभी और नैना रह गए थे गाओं के राणा महल में.


अभी को गाओं क शुद्ध वातावरण और हार्लियाली , वह क लोगो का सादगी से भरा जीवन बहुत अच्छा लग रहा था .....लेकिन अपनी प्यारी ऋतू दी की कमी बहुत खली थी....

गाओं में अभी क दादाजी R.S.S कुश्ती क बड़े शौक़ीन थे तोह अभी को अभी अपने साथ कुश्ती क आखाड़े ले जाते थे और कसरत करवाते the.....Abhi को यह लड़ना खुश्ती वैगेरे पसंद नहीं थी ..इसीलिए वह बहाने बनाने की कोशिश करता था लेकिन दादाजी क आगे उसकी एक नहीं चलती थी ...

R.S.S को अभी को लेकर बड़ी चिंता होती थी की कैसे वह विरासत में मिलने वाली शक्तियों को संभालेगा....

R.S.S अभी क सच से अनजान थे...

अपने बेटे R.V.S क गद्दी पर बैठने क बाद उन्होंने अपनी शक्तिया संकल्प करके त्याग दी थी और साधारण जीवन जीना स्वीकार किया था

ऐसे hi एक दिन जब वह अपने फार्महाउस गए थे अभी को लेकर..... और वह खेती काम काने वाले मजदूरों की समस्या सुन रहे थे थे ...की तभी

वह बने घोड़े क अस्तबल में एक बड़ा सा कला घोडा बेकाबू हो गया था... अस्तबल क की रस्सिया और बंधन उसको रोक नहीं पा रहे tha......abhi भी वह पास में घूम रहा था....5 -5

लोग मिलकर भी उससे नहीं संभल पा रहे थे ...किसी ने R.S.S को खबर कर दी ..R.S.S अभी पहुंचते इससे पहले घोड़े ने सारे बंधन तोड़ दिए और दौड़ लगा दी ...वही जब अभी ने देखा क बड़ा सा घोडा उसकी तरफ hi बड़े वेग से आरहा है तोह वह बहुत दर गया और अपना हाथ आगे कर दिया

तब तक अभी क दादा भी वह पहुँच गए और उन्होंने अभी क हाथ से ब्लू कलर की ऊर्जा निकल ते हुए देखि जो उस काले घोड़े को छूटे hi वह शांत हो गया

यह देखकर R.S.S क मैं में अभी को लेकर जितनी चिंताए थी सब समाप्त हो गयी

(कभी कभी भय की अधिकता क कारण हमारे अंदर चिप्पी हुई शक्ति बहार आती है)

R.S.S - बीटा अभी अपनी आँखें तोह खोलो बेटे देखो कितना सूंदर घोडा है

अभी - नहीं दादू मुज़हे दर लग रहा है ..यह तोह बहुत बड़ा घोडा है

तभी अभी को अपने हाथो पर कुछ गिला गिला सा महसूस होता है .....

जब वह आंखें खोलकर देखता है तोह घोडा शांत खड़ा था और उस्का हाथ चाट रहा था...

अभी - ची ...ची देखो न दादाजी िस्सने मेरा हाथ गन्दा कर दिया

R.S.S - बीटा यह तुमसे दोस्ती करना चाहता है ...इस्सके नाम वायु है

क्या तुम दोस्ती करोगे इससे...

अभी - सच दादू क्या यह मुजह्से दोस्ती करेगा....

दादू - हां बीटा ..तुम एक बार इस्सके नाम पुकार कर तोह देखो

अभी -- व्यौ क्या तुम मुज़हे दोस्ती करोगे...

घोड़े ने भी हिनहिनाकर जवाब दिया

अब अभी उसी घोड़े व्यौ पर बैठकर गाओं घूमने laga...posts

नैना का गरब अब 9 महीने का हो गया था ..अब कभी भी बच्चा हो सकता है इसीलिए R.V.S भी ऋतू क साथ गाओं आगया था .....अपनी ऋतू दी से मिलकर बहुत खुश हो गया ...

ऐसे hi नैना ने एक बहुत सूंदर कन्या को जनम दिया .......

एक बार फिर महल खुशियों से जगमगाने laga......sab बहुत खुश the......Abhi तोह जैसे उस नहीं पारी को देखकर सब कुछ मिल गया था......

क्यों न हो अभी क प्राण और प्राणशक्ति महागुरु ने इस कन्या में जो डाली थी. जैसे किसी जादूगर क प्राण किसी चिड़िया में रख दिए जाते थे वैसे hi...

( प्राण शक्ति मतलब जब क्रोध आये तोह किसी क भी प्राण सोख ले और जब दया आये तोह किसी भी रोग को पल भर में ठीक कर दे --- हीलिंग पावर)

अब अभी वापस सिटी में आगया था

R.V.S ने अभी का एडमिशन ऋतू क hi स्कूल में करवाया...

यह R.V.S द्वारा बनाया गया स्कूल

है .....यहाँ हर तरह की एजुकेशन होती है , यह एक बहुत बड़े एरिया में फैला हुआ है, जहा बहुत सारे सेक्शन है

R.V.S किड्ज़ ज़होने, रवस विद्या मंदिर

R.V.S इंस्टिट्यूट फॉर हायर स्टडीज

R.V.S - इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस & टेक्नोलॉजी

आज अभी का स्कूल में पहला दिन था

अभी का एडमिशन फर्स्ट स्टैंडर्ड में हुआ था.

स्कूल का पहला दिन नई यूनिफार्म और इतने सारे बच्चे देखकर अभी बहुत खुश हो गया tha.......Ritu ने अभी को उसस्के क्लास तक छोड़ा..

ऋतू दी - बेतु यह रही तुम्हारी क्लास यहाँ सब तुम्हारे दोस्त है , घबराना नहीं ...और हां लंच टाइम में मैं आउंगी हम साथ में लंच करेंगे

इतना कहकर में क्लास क अंडर चला गया तोह देखा सभी जगह फुल है

सिर्फ लास्ट बेंच पर जगह खली है जहा एक दुबला पतला सा लड़का बैठा tha....mein वह जाकर बैठ गया

मैंने अपना हाथ आगे किया ...

हाय में अभी क्या तुम मुजह्से दोस्ती करोगे ... मेरे ऐसा कहने पर उस्सने मेरी तरफ देखा तोह उस्सकी आंखों में आंसूं थे

में - अरे ...arre...arre ऐसे रट क्यों हो अगर दोस्ती नहीं करनी तोह कोई बात नहीं.

लड़का - नहीं ऐसी कोई बात नहीं यहाँ आया तब से सब मुज़हे चिड़ा रहे है

एक तुम hi हो जिसने मुज़ह से अच्छे से बात की ....मेरा नाम भानु है....

फ्रेंड्स...

तभी क्लास में हलचल hui...aur सभी खड़े हो गए ...तोह में भी

हो गया

एक मैडम जो दिखने में बहुत स्ट्रिक्ट लग रही थी


मैडम - सितदोन आल ऑफ़ यू, माय नाम इस सावलानी एंड ी ऍम योर क्लास टीचर...... एंड नाउ माय लिटिल स्टूडेंट्स गिव योर इंट्रोडक्शन ओने बी ओने

सभी अपना अपना इंट्रो दे रहे थे

तोह मैंने भी अपना नाम बता दिया

अब बारी आयी भानु की तोह वह भी खड़ा हो गया

मैडम - हे यू... तुम बिना यूनिफार्म क कैसे आगये ...पता नहीं कहा कहा से आते hai......kal अपने पेरेंट्स को लाना यूनिफार्म क साथ नहीं तोह नहीं आना...

मैडम बातो से भानु की आखों में आंसू आगये, और मुज़हे भी बहुत बुरा लगा....

ऐसे hi लंच टाइम आगया और डीडू लंच क लिए मुज़हे लेने आगयी..

में - चलो भानु तुम भी चलो न साथ

भानु - नहीं मुज़हे भूख नहीं है तुम जाओ

में - अगर तुम नहीं जाओगे तोह में भी नहीं जाऊँगा

भानु - ठीक है फिर चलते है

डीडू क साथ हम कैंटीन पहुंच गए , वह डीडू ने आर्डर दिया ..तब तक मैंने आज क्लास में क्या हुआ सब बता दिया ...

दीदी - क्यों भानु तुमने यूनिफार्म क्यों नहीं पहनी

भानु - दी मेरे पापा नहीं है और माँ घरो में काम करके अपना घर चलती है , वह भी छाती है क में काबिल बन्नू ...इसीलिए उन्होंने मेरा एडमिशन यहाँ करवाया

एडमिशन तोह फ्री में हो गया लेकिन हमारे पास यूनिफार्म क पैसे नहीं है

दी को उसकी बातें संकर बहुत बुरा लगा तोह दी ने उसी समय पापा को स्कूल bulaya....jab राणा साहब ने पूछा तोह दी ने कहा

दी - पापा आपने गरीबो क लिए फ्री एजुकेशन तोह कर दी , लेकिन उनके ुनिफ्रोम का और कहने क बारे में नहीं सोचा ....में चाहती हु की आज से hi यह साड़ी फैसिलिटीज प्रोवाइड करनी चाहिए

R.V.S - मुज़हे तुमपर गर्व है बीटा की तुम्हे अभी से अपनी दुसरो क दुखो का अहसास हो रहा है .. में आज hi एक मीटिंग फिक्स करके ये सारे चंगेस लाने की कोशिश करूँगा..

इसी तरह पहला दिन बिट गया .......

और शुरू हुआ स्कूल का दूसरा दिन..

आज भानु मुज़हे क्लास क बहार hi मिल गया ...नाई यूनिफार्म और नाये बैग और शूज क साथ बहुत खुश लग रहा था, उस्सने मुज़हे देखते की ख़ुशी से गले लगा liya..phir हम पहुंचे क्लास में और बैठ गए अपनी जगह ...लास्ट बेंच..

मैडम क्लास में आयी और सबकी अटेंडेंस लेने लगी की तभी एक आवाज आयी .....मई ी के इन् madam...toh सबका ध्यान उस तरफ देखा तोह बहुत hi क्यूट लड़की कड़ी थी ..

मैडम - यह कोई टाइम है आने का ..कल तोह नहीं देखा था तुम्हे......

नई एडमिशन लगती हो चलो आजाओ ..लकिन दयँ रहे अगली बार कोई देर हुआ तोह में अल्लोव नहीं करुँगी

अंदर आओ और अपना ईंटो दो ...


लड़की - मम माय नाम इस रिम्पी ठाकुर

मम - नाउ जो एंड टेक योर सीट

रिम्पी ने पूरी क्लास में देखा तोह सीर्फ मेरे बगल में जगह बच्ची थी

तोह मुँह फुलाकर पेअर पटकते हुए आकर बैठ gayi....gusse से फुले हुए लाल गाल और बड़ी बड़ी आँखें देखकर मुज़हे हँसी आने लगी....

मैंने उसके तरफ देखकर धीरे से कहा ..friends.....toh उस्सने तिरछी आँखों से देखा.... और ....हहहह ...

कहकर मुँह घुमा दिया....

वही पर कुछ स्टूडेंट्स हमारी तरफ देखकर कुछ खुसर फुसर कर रहे the.....unmein एक मोटा सा लड़के था गोलू जो मुज़हे बार बार घर क देख रहा था....

लंच टाइम में आज फिर मून और भानु दी क साथ कैंटीन में थे

और रिम्पी .. थोड़ी hi दूर पर अकेली लंच कर रही थी और मुज़हे घर घर कर देख रही थी ...तभी गोलू भी रिम्पी क पास आके बैठ गया ...

पता नहीं उनकी क्या बातें हो रही थी

ऐसे hi आज का दिन भी बीत गया....

अभी क लिए इतना hi....

अगला अपडेट जल्द hi.....
 
अपडेट - 17

अभी तक आपने अभी क स्कूल की कुछ ज़हालकिया dekhi...ab आगे

अरे अभी तक अपने हीरो की एंट्री कैसे होती है स्कूल में वह तोह बताया hi नहीं...


स्कूल क गेट क आगे तीन गाड़िया आकर रूकती hai...jinme से आगे और पीछे ब्लैक बोलेरो और सेंटर में थी रोल्स रोये फेंटम

आगे और पीछे गाड़ियों से पहले गॉर्डस उतरे और उनमे से एक ने

कार का गेट खोला और उसमे se.....nikli ....Ri.......mpy...arre यह तोह रिम्पी क गाड़यों का काफिला है, तोह अपना हीरो कहा है....

इन तीन गाड़ियों क पीछे एक सफ़ेद फिएट थी जिसमे हमारा हीरो अपनी दी क साथ बैठा था...

ऋतू और अभी को ज्यादा दिखावा अच्छा नहीं lagta.....nahi तोह जिनके पास 10 प्राइवेट जेट हो उनको गद्दियों की क्या कमी...

आज जल्दी स्कूल पहुँच गए थे..

ऋतू अभी को भानु क पास छोड़कर अपने क्लास रूम चली गयी

जैसे hi अभी क्लास रूम जाने लगा तोह क्लास रूम क बहार रिम्पी को देखा तोह खुश हो गया... और उससे मिलने क लिए आगे बड़ा तभी पीछे से किसी ने सर पर जोर से तपली bajaayi.....chatak ...अभी आगे जैसे hi गिरनेवाला होता है तभी एक लड़का उससे पकड़ लेता है......

यह देखकर रिम्पी हसने लगती है

रिम्पी - ऐ फटीचर ...जरा देखो तोह इससे ....जाने कैसे कैसे यहाँ मुँह उठाकर चले आते है......

यह तपली बजने वाला गोलू था वह क अंडर वर्ल्ड डॉन का बीटा इसीलिए ज्यादा अकड़ता था...

गोलू - क्यों बे कल से देख रहा हु रिम्पी से फ्रेंडशिप करने क चक्कर में hai.....ab अगर ऐसे किया न तोह देख ले...

तभी जिस लड़के ने अभी को गिरने से बचाया (समीर) यह वह क

दसप सुदीर का बीटा है जो अप्राधिओं क लिए मौत से काम नहीं

समीर - ोये मोठे ...गोलू सुधर जा नहीं तोह तू मेरा गुस्सा जानता है

( इसने कई बार गोलू की पिटाई की थी)

अब अगर दुबारा तूने ऐसे किया तोह देख le....aao दोस्त तुम आज से मेरे पास बैठना...

अभी को दुःख रिम्पी की बातों का था

समीर ने अपनी बेंच पर से दो स्टूडेंट्स को अभी और भानु की जगह बिठा दिया और सबसे आगे वाली 1सत रौ में बैठ गया.

रिम्पी क लिए गोलू ने आगे वाली सीट पर जगह 2 रौ में जगह बनायीं ..

ऐसे hi क्लास चलते रही दिन बिताते दये अब अभी बिलकुल भी रिम्पी की तरफ नहीं सीखता था , रिम्पी को भी अपनी गलती का थोड़ा अहसास हो गया था...

वह अभी से बात करना छाती थी लेकिन अभी उससे इग्नोर कर देता था

यहाँ R.V.S ने कुछ दिन से अपने बेटे को खोया खोया देखा तोह अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करके उसस्के मैं में जहाँकने की कोशिस ki....lekin नहीं जान पाया... ऋतू ने भी बहुत बार पूछा लेकिन .....कुछ नहीं दी कहकर

अभी बात को ताल देता था......

लेकिन जब अभी अपनी नन्ही पारी आदिरा क साथ होता था तोह सब कुछ भूल जाता था और बस उसस्के साथ खूब खेलता था .....ाद्दु भी होने भाई को अपने पास देखकर बहुत खुश होती थी और जब तक अभी उससे थपकी देकर सुला न दे तब तक सोती नहीं थी.....

एक दिन R.V.S - क्या बात है बीटा आजकल तुम कहस खोये रहते हो

अभी -- कुछ नहीं हुआ पापा.......

(फिर कुछ सोचते hue)..muzhe स्ट्रांग

बनना है ....

माँ - अभी को गॉड में बिठाते हुए

अरे वह मेरा बेतु तोह अब बड़ा हो गया है .....स्ट्रांग बनने गए..

फिर क्या करेगा बेतु


अभी - ( कुछ सोचते hue).....mein ....माँ ...में न स्ट्रांग बनकर बुरे लोगो को पुनीश करूँगा

माँ -- अच्छा बेतु ....ठीक है

फिर R.V.S ने अभी क लिए एक मास्टर अप्पोइंट किया जो स्पेशलय त्रिनेड था हर तरह क फाइट्स में दक्ष था

मास्टर संग्राम..

अब शुरू हुई अभी की फसयिकाल ट्रेनिंग और फाइट प्रैक्टिस.....

अब अभी की लाइफ बहुत बिजी हो गयी थी.

सुबह योग ,एक्सरसाइज, फिर स्कूल, फिर टूशन क्लास जो घर पर hi होती थी और शाम को मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग ...

ऐसे hi अभी का यह साल बीत गया, स्कूल में अभी सिर्फ समीर और रघु से hi बात करता था......

रिम्पी को अभी की यह इग्नोरेंस बहुत तकलीफ पहुंचने लगी ...लेकिन अभी भी रघु ,और समीर क अल्वा और कोई अभी क बारे में नहीं जानता था की यह स्कूल इन्ही का है और यह इंडिया क टॉप मोस्ट बिज़नेस मन का बीटा है

ऐसे hi अभी का जन्मदिन भी आया..

R.V.S ने बहुत बड़ी पार्टी राखी..

अपने सभी रिश्तेदारों को बुलाया ....देश क बड़े बड़े लोगो को ...नेताओ को भी बुलाया.....

पूरा अभी मेन्शन सजाया गया...

अभी आज बहुत खुश था गाओं से दादा दादी जो आये थे .......bua....massi, चाहा & फॅमिली, नाना, nani,saare कौसिन्स अभी पार्टी शुरू होनेवाली थी

माँ मुज़हे पार्टी क लिए तैयार करने क लिए आई ... मुज़हे सूट बाहत पसंद आये था ...माँ ने बताया दी ने hi मेरे लिए सेलेक्ट किया हुआ था

ब्लैक कलर का जोधपुरी सूट जिस्सके बटन क जगह डैमोन्द्स लगे हुए था और साथ में राजकुमारों वाला रॉयल नेकलेस...

जब में तैयार होक अपने आप को शीशे में देखा तोह तोह दांग रह गया

निचे गेस्ट का आना शुरू हो तय था

सब का ध्यान था स्टेज पर


जो कुछ इस तरह से सजाया था ...तभी लाइट्स ऑफ हुई और स्टेज पर बचपन से लेकर अब तक की मेरी पिछ की फिल्म चलने लगी ...फिर आयी एक आवाज

.....एव्री ओने क्लैप योर हैंड .....

हेरे थे बर्थडे केस और एक फोकस लाइट मुज़हे साथ लेकर स्टेज पर आगयी ...तभी गुंजी मेरी प्यारी दी की आवाज ......हैप्पी बर्थडे तो यू मेरे बेतु .....और गूंजा एक गाना

बार - बार दिन ये आये (थे फमोसे सांग फॉर बर्थडे)

और साड़ी लाइट्स ों हो गयी ..तभी मेरी नज़र सामने गयी जहा दो आंखें ऐसी थी जीन में आंसू थिएन...

केक कटा और शुरू हुआ गिफ्ट्स का सिसलिए

तभी पापा -- आईये होम मिनिस्टर साहब यह मेरा बेया अभी

हम - हैप्पी बर्थडे beta.....arre बेटी रिम्पी गिफ्ट दो अभी को....

अरे तुम्हारी आंखों में यह आंसू क्यों है....

R.V.S - क्या हुआ बीटा , किसी ने कुछ कहा क्या

H.M - नहीं भाई साहब वह बात यह है क आज रिम्पी का भी बर्थडे है लेकिन 3साल पहले एक एक्सीडेंट में इसी दिन इसकी माँ की डेथ हो गयी थी..

तब से यह अपना बर्थडे नहीं मानती है

वैसे आज हम कही जाते भी नहीं लेकिन आपने बुलाया तोह नहीं ताल सके तभी माँ ने प्यार से रिम्पी क सी र पर हाथ फेरा

माँ- अरे बीटा ऐसे दुखी मत हो देखो आज से मुज़हे अपनी माँ hi संजो .....आओ मेरा बच्चा

माँ क इस तरह पुकारने से रिम्पी का रोना फुट पड़ा और माँ क गले लगकर फुट फुटकर रोने लगी...

जाने क्यों उस्का दर्द देखकर मेरा भी दिल रो रहा था ...लेकिन वह ऐसा भर्री माहौल देखकर मुज़हे कुछ सुज्ज़ः और में बोल उठा ...

में - यह रोंदू लड़की रिम्पू...

रट hi रहेगी या मेरा गिफ्ट भी डौगी

उस्सने आंसू भरी आंखों से मेरी तरफ हैरानी से देखा... और गिफ्ट मुज़हे दिया ....तोह मैंने भी केक का एक टुकड़ा उठा कर उसको खलिया जिससे वह बहुत खुश हो gayi....lekin केक क साथ साथ मेरी ऊँगली भी काट ली जंगली बिल्ली कही ki.....aur फिर हसने लगी

ऐसे हुई हमारी दोस्ती ऐसे hi पार्टी सेलिब्रेशन चलता raha....aur अब रिम्पी भी हम बच्चा पार्टी में शामिल हो गयी खूब दम धाम क बाद पार्टी ख़तम हुई तोह मैंने भी अपनी एक गोल्ड चैन रिम्पी को जबरदस्ती बर्थडे गिफ्ट क रूप में diya.....toh बहुत खुश हुई और ऐसे hi पार्टी ख़तम हुई....

अभी क लिए इतना hi...

अगला अपडेट रात को ....
 
अपडेट - 18

अभी तक आपने अभी और रिम्पी क फ्रेंडशिप की शुरुवात देखि

....और अभी की ट्रेनिंग ...

अब आगे....


अब चलते है और देखते है महागुरु क आश्रम में अपना दूसरा अभी ा1 क्या कर रहा है

यहाँ ा1 ने इतने दिनों में पांच तत्वों की शक्ति में से वायु सहक्ति को कंटोरल कर लिया था , अब उस्सकी गति आचार्य पवन से भी बढ़ गयी थी..

वायु शक्ति क नए नए प्रोयग जैसे तूफ़ान और बवंडर का निर्माण करना वह सिख चूका था......

शास्त्रों में धनुर विद्या में भी पारंगत हो गया था लेकिन अभी भी अभ्यास की थोड़ी जरुरत थी ..

अब रोज शिक्षा क बाद पहले अपने दोस्तों क साथ शास्त्र विद्या का अभ्यास और बाद में शालिनी (शालू) क साथ सरोवर पर बातें करना,

और साथ साथ ध्यान भी करना

अब महागुरु ने आचार्य भौमेश क द्वारा पृथ्वी तत्त्व की शक्ति का अभ्यास शुरू कर दिया था

यहाँ शालू भी रसायन विद्या और पृथ्वी तत्त्व का अभ्यास कर रही थी और उस्समे काफी अच्छी भी हो गयी थी

(इस शक्ति में व्यक्ति जब चाहे पृत्वी से कोई भी वनस्पति प्रगट कर सकता था , और पर्वत क सामान शिर और भरी हो सकता है )

राकेश रात को ध्यान की कुछ गुप्त विद्या अभी को बताने लगा जिससे अभी और शीग्रता से सिखने लगा..

ऐसे hi एक दिन अभी पृथ्वी तत्त्व का अभ्यास कर रहा था तभी उसने महसूस हुआ की कोई मजबूत सी राशि से कोई उससे जकड रहा है...

तभी उसने आँखें खोली तोह देखा

की वह कोई रस्सिया नहीं है जमीन से निकली हुए बेल है जो अभी को जकड रही hai....jab अभी ने इधर उधर देखा तोह ...देखा की उदय की हाथो से येलो रंग की किरणे निकल रही थी..

और वह मेरी तरफ देख कर हास रहा था......

में उससे अपनी दूसरी शक्तियों से उस्सको सबक सीखा सकता था ...लेकिन उससे इसी शक्ति से हारने क विचार से मैंने पहले अपने मैं को केंद्रित किया अउ मूलाधार चक्र का ध्यान किया जो पृथ्वी तत्त्व का केंद्र है ....तभी मेरा शरीर भी पीली रौशनी से चमकने लगा..... और जिन बेलो ने मुज़हे जकड कर रखा था उनसे में आज़ाद हो गया ......और उन्ही बेल्लो से उदय को बांधकर पेड़ से उल्टा लटका diya......tabhi वह आचार्य भौमेश वह शालू और C.T क साथ आये ....

अरे पुत्र छोड़ दो उदय को मेरे की कहने पर यह तुम्हे परकने आया tha......ab तुम्हे पृथ्वी तत्त्व के रुट का पता चल गया है.... बहुत अच्छे

तभी महागुरु ने बुलावा भेजा

मैंने उनके पास जाकर पहले प्रणाम किया...

महागुरु - बहुत अच्छे पुत्र ... आज तुमने मानव शरीर में ऊर्जा क केंद्र को पहचाना .....अगर इन् चक्रो ने तुम धान्यं करके जगाओगी तोह जल्द hi पांच तत्वों की शक्ति पर तुम कण्ट्रोल कर लोगे...

में - परन्तु गुरुदेव ...यह कैसे पता चलेगा ... कौनसे तत्त्व क लिए कौनसा चक्र है..

महा गुरु - तोह आज जैसे तुम्हे पता चला की तुम्हे ...मूलाधार में hi ध्यान करना है...

में .... गुरुदेव मुज़हे मेरे भीतर से hi आवाज आयी थी ....

महागुरु - लगता है पुत्र तुम हमारे शिक्षा से अलग भी कुछ क्रिया करते हो ...

में - नहीं गुरु देव में तोह सिर्फ रात को थोड़े देर राकेश क साथ ध्यान कर रहा हु

मेरी बात सुनकर महागुरु muskuraye......aur साड़ी बातें समाज गए

( महागुरु मैं में -- लगता है अंश को अपने पूर्ण स्वरुप से मिलने की कुछ ज्यादा hi जल्दी है)

ध्यान रहे पुत्र यह तुम्हारे मनोमय कोष की आवाज है जो जागृत होने जा रहा है

फिर महागुरु ने मुज़हे अलग अलग चाको में ध्यान की विधि बताई

ऐसे hi समय गुजरता चला गया और अभी 12 वर्ष का हो गया

अब अभी ने पांच तत्वों और उससे सम्बंधित शास्त्रों और विद्या की सिद्धिया पूरी हो गयी थी

और साथ hi साथ उसके दोस्त भी कुछ विद्याओ में सफल हो गए थे

C.T -वायु शक्ति

शालू और उदय - पृथ्वी शक्ति

राकेश - यह तोह हीरो की शक्तियों में से एक है

अग्निवेश - अग्नि

इतने वर्षो में उदय भी अब अभी का मित्र बन गया था... और इनका एक अच्छा सा ग्रुप तैयार हो गया था

महा गुरु - पुत्र अब तुमने पांच तत्त्व ( 5 एलिमेंट्स) की शक्तिया तोह प्राप्त कर ली अब बारी है उसनसे जुड़े हुए शास्त्रों की जिस्सकी खोज तुम्हे करने जाना गई

तुम्हे पृथ्वी तत्त्व को धारण करनेवाली भीम की गदा जो उनके स्वर्ग जाने से पहले ...गंधमादन पर्वत पर कही छोड़ी है वह लानी है

(ध्यान रहे तेह सब काल्पनिक है)

दूसरी जल तत्त्व की प्रतिन वरुणास्त्र और तलवार तुम्हे मानसरोवर में मिलेगा

तीसरा अग्नि तत्त्व का प्रतीक अग्निबाण और शूल तुम्हे पृथ्वी क उत्तर दिशा में ज्वालामुखी पर्वत में मिलेगा

4 तह व्यवस्त्र और चक्र तुम्हे

और 5तह आकाश तत्त्व का प्रतीक व्योमास्त्र और त्रिशूल

तुम्हे ढूंढ़ने है ....और इस्सके लिए तुम्हारे पास ज्यादा समय नहीं

तभू शालू अंदर आते हुए.....

तुम चिंता मत करो अभी हम सभी भी साथ चलेंगे..

महागुरु - नहीं ..पुत्री यह यात्रा इस्सकी अकेले की है ...

में - ठीक है गुरुदेव ....कई सुबह hi में अपनी यात्रा का प्राम्भ करूँगा

और फिर निकल पड़ा शालू क साथ सरोवर पर ....आज हम दोनों चुप बैठे थे ....दोनों में से कोई बात नहीं कर रहा tha......itne बरसो से एक दिन भी हम बिना मुले नहीं रहे

अब मुज़हे अपने लक्ष्य की और बढ़ने क लिए जाना पद रहा था तोह कैच अजीब लगा रहा था

में - शालू क्या हुआ कुछ तोह बोलो

शालू - क्या बोलू में ...तुम तोह जा रहे हो न ....अब में कैसे ..

तभी मैंने इससे रोकते हुए तुम इटंस मत सोचो शालू आखिर मुज़हे भी ओह आपने जीवन का लक्स्य पता करना है

हुए फिर में वचन देता हु की में लौट कर जरूर आऊंगा....

फिर मेरे बहुत जोर देने पर शालू वह से अपने कुटिया में चली गयी

और में आसमान को देखते देखते

ऐसे hi वह बैठे बैठे कब रात गुज़र गयी कुछ पता hi नहीं चला हम

फिर में सुबह सुबह महागुरु का आशीर्वाद लिया और निकल पड़ा अपनी यात्रा पर...


अब देखते है R.V.S क पास जो राछ

वि है वह क्या कर रहा है

अभी और उसस्के दोस्त अब ,7तह क्लास पास करके 8तह में पहुंच गए थे

यहाँ भी अभी मार्टिकल आर्ट की ट्रेनिंग में परफेक्ट बन गया था

और रिम्पी साइंस एंड टेक्नोलोग्य की मास्टर ...

आज हिघ्स्चूल का पहला दिन था की तभी अभी मेन्शन क बहार 3 गाड़िया आकर रुकी जिनमें से दो गॉर्डस की थी और एक रिम्पी कीअंदर आते hi

रिम्पी - माँ ...माँ जल्दी से बर्फ दो न बहुत भूख लगी है

( हाजी अभी क जन्मदिन वाली पार्टी से hi रिम्पी का यह नियम बन गया था क सुबह का बर्फ और स्कूल जाना हमारे साथ hi हो गया था)

इतने सर्वेन्ट्स क होते हुए भी सुबह का बर्फ माँ अपने है हातो से कराती थी

डीडू अब कॉलेज जाने लगी थी

और क्यूट आदिरा भी बहुत शैतान हो गयी थी... बिना मुजह्से चॉक्लेट की रिश्वत लिए स्कूल नहीं जाती थी

स्कूल में समीर और रघु अब मेरे जिगरी बन गए थे

और रिम्पी और समीर क समज़हाने पर गोलू अब मुजह्से फर रहता था

मेरे 12तह बर्थडे क बाद एक दिन रात को मुज़हे जब प्यास लगी तब में किचन जा hi रहा thi...ki तब मुज़हे घरकी टेर्रेस से निचे आते हुए एक साया देखा...

में भी छुपकर देखने लगा तोह दिहा क एक नकाब पॉश था, जिसने ब्लैक कलर का लाठर सूट पहना था और दो तलवारें पीठ पर बंधी हुई thi...maine सोचस क कोई चोर है...

जैसे hi में उस्सको पकड़ ने लिए आगे बड़ा लेकिन रभी उस मास्क मन ने अपना मास्क उतरा तोह में देखकर बहुत हैरान हो गया क्यों की मास्क हटने पर जो चेहरा सम्मन आया था वह और कोई नहीं पापा का था.....

अपने पिता को ऐसे भेष में देखकर में बड़ा hi हैरान हुआ.

आज क लिए इतना hi अगला अपडेट कल

..........
 
अपडेट - 19

अब तक आपने dekha....A1ki अपने शास्त्रों को प्राप्त करने क लिए यात्रा शुरू हो गयी है ...

और अभी रात को अपने घर में एक नकाब पॉश को देखता hai......aur फिर उसका चेरा देखकर हैरान हो जाता है.....

अब ाजी....


रात में अपने पापा को इस तरह देख कर में बड़ा हैरान था......

तभी मुज़हे आवाज aayi.......Bete अपने पापा को ऐसे चुप चुप कर नहीं देखा करते ......यहाँ सामने आओ ..

में पापा क सामने जाकर

--- पापा आप इन् ..कपड़ो ..में ...कैसे kya...kar रहे हो .....और ऐसे चोरो की तरह अपने hi घर में .....

आखिर आप जॉन होऊ .....क्या सचाई है आपकी......

R.V.S - अरे ...अरे ...अरे बीटा थोड़ा सांस तोह le.....ek साथ इतने सवाल

आओ मेरी स्टडी में चल है वही बात करेंगे .....

में पापा क साथ उनके स्टडी रूम में पहुँच गया.....

पापा - बैठो बीटा ...तुम्हारे सारे सवालो का जवाब मिलेगा...

बीटा जब परमात्मा किसी को कुछ शक्तिया देता है तोह उस्का इस संसार क प्रति कुछ कर्तया बनता है

बीटा शक्तियों क साथ जिम्मेदारी भी आजाती है ....

में - पापा कौन सी शक्तिया और कैसी जिम्मेदारियां...

फिर पापा मुज़हे 5 पीडिओ पहले हमारे पूर्वज द्वारा की हुई तपस्या और वरदान में उनके परिवार को मिली हुई तीन शक्तियों क बारे में बताते है

मुज़हे उनकी बातोंपर विश्वास नहीं हुआ तोह पापा ने ने हवा में हाथ ऊपर किया और अपनी आंखें बंद की और उनके हाथो में प्रगट हुई एक बड़ी सी तलवार


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उस लाल रंग की रौशनी से चमकती हुई तलवार को देखकर में बड़ा हैरान हुआ......

पापा - बीटा यह है संघारक की खुनी तलवार ....जो हमेशा अपराधियों क खून की प्यासी रहती है

में - संघारक .... कही यह रॉ का वही एजेंट तोह नहीं ...जिसके बारे में बारे कुछ लोग सिर्फ कहानी मानते है कुछ लोग हक्कीकत

पापा - हां बीटा वही है

में - तोह पापा यह तलवार आपके क पास क्या कर रही है.....

पापा - क्यों की बीटा में hi हु वह

अपराधियों का भक्षक और अच्छे लोगो का रक्षक संघारक

और यही बात तुम्हे बताने क लिए hi आज तुम्हारे सामने इस भेष में आया हु ....क्यों की अब तुम्हारी ट्रेनिंग का दूसरा सफर शुरू करने का समय आगया है ....

अब चलो इतना कहकर पापा ने अपनी आँखें बंद की और फिर अपने नार्मल कपड़ो में आगये

अब में पापा क साथ अपने घर क बबसेमेन्ट में जहा हमारी कार्स और बाइक्स राखी जाती थी

में - पापा यहाँ गररगे में क्या है ..हम यहाँ क्यों आये है..

पापा बीटा थोड़ा रुक जाओ बस देखते रहो...

फिर पापा वह एक दिवार क पास पहुँच गए और मेरा हाथ पकड़कर हो गए दीवार क आर पार

में हैरानी से पापा की और देखता हु

पापा हैरान होने की जरुरत कही यह कोई दीवार नहीं जस्ट इमेज थी की देख वालो को यहाँ सिर्फ दीवार दिखे और कुछ नहीं ...

सामने एक गिलास की बानी हुई लिफ्ट थी ...

में उस लिफ्ट में पापा क साथ अंदर चला गया और , पहुंच गया एक कॉरिडोर में जिस्सके दोनों तरफ कमरे बने हुए थे

बीटा यह रूम्स यहाँ रहनेवालो क लिए और कुछ रूम्स स्टोरेरूओं और वेपन रूम्स क लिए उसे होते है

उस लम्बे कॉरिडोर से चलते चलते मैंने अंदाजा लगाया था की यहाँ काम से काम 1000 रूम्स क लगभग होंगे

और फिर हम पहुँच गए एक बड़े से हॉल में जहा 5000 लोग आराम से रह सकते हो, वह चारो तरफ स्क्रीन में कुछ वीडियोस चल रही थी और ..करीब करीब 1000 लोग वह की मॉनिटरिंग कर रहे थे


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अपने घर क निचे इतना बड़ा कण्ट्रोल रूम देखकर हैरान हो गया..

पापा - यह है यहाँ का कण्ट्रोल रूम , यहाँ से पूरी स्टेट की गतिविधियों पर नजर राखी जाती है ....और हमारे देश में जितने भी मेरे एजेंट्स है इसी क जरिये मुजह्से कनेक्टेड रहते है .. और यह सारा सिस्टम मेरी इस वाच से......

अभी में यह सब सोच रहा था की

पापा - बीटा कहा खो गए अभी तोह बहुत कुछ बाकी hai....ab पापा ने अपनी वाच में कुछ किया तभी वह एक और लिफ्ट आगयी और ूके ीारिये हम पहुँच गए और निचे यहाँ एक बहुत बड़ा हॉल था जहा कुछ लोग....

अडवांस्ड वेपन और फाइटिंग स्किल्स की ट्रेनिंग कर रहे the....papa को देखकर सभी रुक गए .....और उनमे से 5 ने आकर सलूट किया ....

पापा - बीटा यह 5 है यहाँ क बेस्ट एजेंट्स कल से यही तुम्हारी ट्रेनिंग शुरू होगी....

में - पर पापा में तोह मास्टर से मार्टिकल आर्ट की ट्रेनिंग कर hi रहा हु

पापा - बीटा यहाँ तुम्हे फाइटिंग स्किल्स क साथ साथ कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और हैकिंग भी सिखाई जायेगी...

तुमने अभी तक क्या सीखा जरा हम भी देखे ......तोह जरा हो जाए दो दो हाथ इनसे.....

में - जी पापा क्यों नहीं मैं भी तोह देखु आपके टॉप एजेंट्स में कितना दम है

पापा - तोह बोलो इनमें से से किस के साथ लड़ो गए

तोह उस्में से एक को मैंने चुना

जिस्सकी हैघट 6.5फट क कर्रेब थी

पापा - हारक .... गुड choice....go ों

अब शुरू हुआ मुकाबला....

अब में भी सावधान हो गया तभी हरुक ने मुज़हे किसी बच्चे की तरह कंधे पर उठाया


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और पटक दिए ...जिससे देखकर हरुक वह 4 एजेंट्स बहुत खुश hue....lekin अभी वह नहीं जानते थे किस्से पाला पड़ा है, तभी मैंने मौका दरख कर एक जम्प मारी और सुपरमैन पंच सीधा हरुक क जबड़े पर और और हरुक धराशायी...

यह सब इतने जल्दी हुआ क किसी को भी समझ में नहीं आया,

पापा - वह बीटा ..ी ऍम प्राउड ऑफ़ यू ...

हरुक को एक पंच में धराशायी कर देना मतलब ..अब तुम्हे मार्टिकल आर्ट के आगे की टैनिंग का समय आगया है......

ऐसे hi अब पापा मुज़हे अब खुद हमारे वंश को विरासत में मिलने वाली शक्तियों को जागृत करने का प्रशिक्षण दे रहे थे.......

और कंप्यूटर साइंस और हैकिंग भी इंडिया क टॉप मोस्ट हैकर्स से सिख रहा था.....

आप सोच रहे होंगे क ऐसे इतने बड़े जगह का घर क निचे निर्माण कैसे हुआ ...तोह बता दू ...जो पहले भी लिख चूका हु ....जब हीरो ने नैना क गर्भ में प्रवेश किया था तोह महागुरु ने उस्सकी शक्तियों का विभाजन कर दिया tha...Iss में जो सृजनात्मक शक्ति

(क्रिएशन पावर) नैना में hi समाहित की गयी थी..... और जब हीरो

5 यरस का हुआ था तोह धीरे नैना की पावर्स जागने लग जाती है जिससे R.V.S और महागुरु उससे कण्ट्रोल करना सिखाते hai.......aur इसी पावर से इस बेसमेंट का निर्माण हुआ है ....

यह क्रिएशन पावर आगे कहानी में बहुत काम आएगी..

लेकिन अभी हीरो को अपने माँ क पावर क बारे में नहीं पता...

अब दिन पर दिन जाने क्यों मेरी आंखों में कुछ बदलने लगा

ऐसे hi एक दिन स्कूल क लंच टाइम में में और रिम्पी बैठे बातें कर रहे थे...

में अच्छा रिम्पी और बाताओ तुम्हारी टेक की प्रैक्टिस कैसी चल रही है ...

रिम्पी -( मन में) हाय आज कितबा हैंडसम लग रहा है लगता है बस इन् आँखों में खो जाओ ....लेकिन यह बुद्दू तोह कुछ समज़ता hi नहीं ...उफ़

नहीं ..मुज़हे ये क्या हो रहा है...

फिर अपनी hi सोच से शर्माकर उसने दोनों हाथो से अपना मुँह छुपा लिया..

में सोचने लगा अभी इस पागल लड़की को क्या हो गया ...uff..hey ..भगवन

इनको संजना भी बहुत मुश्किल है

तभी मुज़हे कुछ सुज़हा की यही समय है देखने का की पापा की ट्रेनिंग क्या रंग लायी है ..

में --उफ़ रिम्पी जरा देखो न मेरी आंखों में कुछ चला गया लगता है.. ..देखो न वहुत जल रहा है

मेरी बात सुनकर वह जल्दी से पलटी और मेरी आँखों में देखकर फंक मारने लगी..... तुम भी अभी क्या करते हो ...ध्यान नहीं रख सकते a...ab कैसा फील हो रहा है.

इसी मौके का फायदा उठा कर में उस्सकी आखों क जरिये उसस्के भीतर जहाँक क देखा तोह सब जश्न गया जो वह सोच रही thi.......arre वह बीटा अभी चाहत का बीज यहाँ भी पानवे लगा hai.....abhi में उस्सकी भानवो को पढ़ hi रहा था की एक स्काई ब्लू कलर की रौशनी ने मेरे सामने aagayi......sochne लगा की यह रौशनी रिम्पी क भीतर कैसे ...कहा से

तभी रिम्पी ने मुज़हे हिलाकर ...

अरे फिर खो gaye.....Abhi तुम अपना इलाज करवा ....आज कल बैठे बैठे जाने कहा खो जाते हो...

मैंने सोचा मेरा वहां होगा बाद में पापा से पूछ lunga,....tabhi मेरे दोस्त लोग वह आगये....

भानु -- क्या बात है यर आज लंच टाइम क बाद क्लास में क्यों नहीं आये और यहाँ अकेले बैठे क्या कर रहे थे तुम दोनों चलो अभी घर भी जस्ना है या यही बैठना है...

भानु की बात सुनकर हम दोनों हैरान हो गए और चल पड़े अपने अपने घर...

ऐसे hi school..yoga...basement ..और दोस्तों क बिच लाइफ चल रही thi...kabhi कभी दादी दादी से मिलने और मेरा दोस्त आपको याद होगा वायु घोडा से मिलने गाओं जाता था....

ऋतू दी क कहने पर अभी गाओं में भी दादू ने कॉलेज हॉस्पिटल्स साड़ी सिटी जैसी साड़ी सुविधाएं कर दी थी....

विरासत में मिलने वाली तीन पावर्स में से दो को में हासिल कर चूका था मंद- कंट्रोलिंग और वेपोन ...और अब हैकिंग में भी में एक्सपर्ट होने लगा था...

अभी क लिए इतना hi ..

अगला अपडेट जल्द hi ---
 
अपडेट - 20

अब तक आपने देखना R.V.S ने कुछ राज अभी क सामने खोले,

और अभी भी अपनी ट्रेनिंग में लगा हुआ है.......

रिम्पी क अंदर दिखी ऊर्जा का क्या राज़ है ......यह आगे पता चलेगा

अभी तोह अभी को बहुत जननाना है ...सीखना है

अभी तक की पावर्स दोनों ा1 और अभी जल्दी इसीलिए सिख पाया क्यों की वह जन्म से hi इस्सके अंदर थी .....( बहुत कठिन है डगर पनघट की)

आगे रास्ते में बहुत कठिनाईए आएँगी....

खैर अब देखते है ा1 कहा है .....


महागुरु क आश्रम से निकल कर ा1 निकल गया गंधमादन पर्वत की और

यहाँ विराजते है सकल जगत क पालनहार भगवन बद्रीनाथ

अभी अपने वायु तत्त्व की शक्ति क द्वारा यहाँ तक तोह पहुंच gaya.....lekin आगे की यात्रा उससे पैदल hi जाना था

क्युकी वही शक्तिया हमे जीवन में साथ देती है जो हमे कठिन परिश्रम से प्राप्त हुई हो........

और महागुरु का भी यही निर्देश था,

अपनी शक्तियों का प्रयोग तभी करना जब और कोई रास्ता न हो....

गंधमादन पर्वत में नारायण पर्वत पर भगवन बद्रीनाथ और चारो तरफ बर्फ क पर्वत ...kal..kal बहती हुई माँ अलकनंदा ....सब कुछ इतना सूंदर और दिव्या था की यहाँ पहुँच कर अभी को अपने भीतर एक नयी ऊर्जा और दिव्यता का अनुभव हुआ...

वह पहुंच कर गरम पानी क कुंड में स्नान किया और फिर दर्शन करके निकल गया आगे की यात्रा पर..

आगे जब में ..मंदा गाओं पंहुचा

कर तोह वह बने मिटटी क घर देखे और सीधे सरल लोग.... कुछ लोग वह आने वालो को कहने पिने की चीजे दे रहे थे

( मज़ेदार बात यह है की इतनी शक्तिया हासिल करने क बाद bhi...hero का व्यावहारिक ज्ञान शुन्य था, उससे जब वह महागुरु से आज्ञा लेकर जाने लगा था तोह उनका भी इस और ध्यान गया, ...फिर सोचा चलो बाहरी लोगो क संपर्क में जब आएगा तोह अपने आप hi सिख जाएगा.....)

अभी को यह भी नहीं पता था की यह लोग खाने की चीजे ऐसे hi नहीं दे रहे थे बेच रहे थे....

आगे का हाल ा1 की जुबानी ...

अब मुज़हे भी भूक लगाने लगी तोह में भी एक जगह पंहुचा...


और बैठने क लिए एक लकड़ी का बेंच देखकर बैठ गया...

वह क लोग मुज़हे घर घर कर देख रहे थे ....मुज़हे कुछ अजीब भी लग रहा tha.....ki जब से में यहाँ आया हु और जहा से भी जा रहा हु लोग मुज़हे ऐसे क्यों देख रहे है....


मैंने सोचा की छोड़ो अपना काम करते है.... मैंने जो आदमी सब को खाने पिने की चीजे दे रहा था

मैंने वह खड़े आदमी से जो लोगो को कहने पिने की चीजे दे रहा था उसको bola.....Bhaiya मुज़हे भी कुछ कहने को दो... मेरी बात सुनकर वह मेरी तरफ घर कर देखने लगा.....

और हसने लगा..... वह खड़े लोग भी हसने लगे ....

क्यों भाई कहा से आये हो पहले यह तोह बताओ तुम्हे देखकर तोह ऐसा लग रहा है क सीधे महाभारत काल से यहाँ आये हो ...इतना कह कर फिर हसने लगा .......तभी वह एक बुजुर्ग व्यक्ति आया .....और उसने उस व्यक्ति को घर के देखा ..तोह वह चुप होगया..

बुजुर्ग (मंदा गाओं क मुखिया)

- क्या बात है शम्भू यही तरीका है तुम्हारा यहाँ आनेवाले लोगो क साथ

क्या तुम भूल गए हमरे गाओं की परंपरा को .....ऐसे मजाक उड़ाते हो मेहमानो का...

शम्भू - माफ़ करना मुखिया जी लेकिन िस्सने कपडे hi .....

मुखिया - बस चुप हो जाओ ......फिर मेरी तरफ ......आओ बीटा मेरे साथ आओ ...

उनके बीटा कहने में मुज़हे बहुत अपनापन लगने लगा तिह चल दिया में उनके साथ....

अब साड़ी बात मुज़हे समाज में आगयी थी मेरे कपडे वही आश्रम क थे और बाल भी बड़े बड़े जो यहाँ क लोगो से काफी अलग थे....

मुखिया - कौन हो बीटा तुम ....किसी गाओं या शहर क तोह लगते नहीं हो,

देखो तुम मुज़हे बात सकते हो हो सकता है में तुम्हरी कुछ मदत कर सकू.....

में - बाबा ...क्या में आपको बाबा कह सकता हु.....

मुखिया - क्यों नहीं बेटे जरूर

में - बाबा ज्यादा तोह में नहीं बता सकता ...लेकिन इतना hi की में अपने गुरु की आज्ञा से hi ...यहाँ पर आया हु और मुज़हे आगे नीलकंठ पर्वत पर जाना है..

तब तक मुखिया जी का घर भी आगया था ...जो पुराने जम्ने का मिटटी से बना हुआ था....

घर में पहुंच कर उन्होंने मुज़हे बैठने क लिए आसान दिया......

अरे जानकी (मुखिया की वाइफ) जरा देखो तोह कौन आया hai....aur हां पानी और गूढ़ लेते आना....

तभी एक महिला पानी और गूढ़ लेकर वह आयी वह कुछ उदास सी लग रही थी...

मैंने गूढ़ खाकर पानी पिया, ...

..धन्यवाद माजी .....मेरी आवाज सुनकर उन्होने ने मेरी तरफ देखा और थोड़ा muskuraya,.....maine उनकी आँखों में एक अलग hi उदासी देखि

में - बाबा माँ जी को क्या हुआ ....यह इतनी उदास क्यों लग रही है....

मुखिया जी - बीटा वह सब बाद में..


पहले तुम मुँह हाथ धो लो और अपने कपडे बदल लो.... सुनो जानकी अपने विशु क कपड़ो में से कुछ कपडे ले आओ toh...ayr कुछ कहने का भी प्रबंध का दो

जानकी जी ने एक नज़र मुखिया क तरफ देखा और कुछ बोलना hi चाहा रही थी की.....

मुखिया - अरे ऐसे क्या देख रही हो जरा इससे देखो तोह यह भी हमारे विशु की तरह लग रहा है...

तब उन्होंने मुज़हे गौर से देखा तोह उनकी आंखें चालक aayi....aur आगे बढ़कर मुज़हे गले से लगाया ...

हां जी यह तोह कुछ कुछ हमरे बेटे जैसा hi hi.....mere सर पर प्यार से हाथ फेरते

hue....sirf इस्सकी नाक और आंखें कुछ अलग hai...aur बाल भी..

इतना कहकर वह अंदर चली गयी

उनका स्नेह पाकर मेरी भी आँखों में आंसू आगये कुछ धुंदली धुंदली सी तस्वीर दिखने लगी जैसी कोई मेरे सर पर हाथ फेरते हुए सुला रहा है .....तभी मुखिया जी क आवाज से मेरा ध्यान टुटा.....

उनके दिए हुए कपडे मैंने पहन लिए

मुखिया जी - तोह अब बताओ beta....tum कह रहे थे की तुम अपने गुरु की आज्ञा से आये हो ....वैसे क्या नाम है तुम्हारे गुरु का..

में - महागुरु यग्नेश

मुखिया जी ने जैसे hi नाम सुना तोह उनके हाथ अपने आप जुड़ gaye...aur ांखोल में श्रद्धा सुमन आ गए

मुखिया --- क्या ....नाम ...bataya..MAHAGURU YAGNESH....yani की तुम भी मेरे गुरु जी क शिष्य हो...

में - क्या आप भी महागुरु जी क शिष्य ho...phir तोह आपने उनका आश्रम तोह देखा भी देखा होगा ...

में वही से आया हु

मुखिया - नहीं पुत्र मेरा इतना सौभाग्य कहा जो उनका आश्रम देख saku....woh तोह यहाँ बहुत पहले आये थे जब में तुम्हारी hi उम्र का था वह यहाँ कुछ दिन व्यास गुफा क पास रुके तोह तब उन्होंने योग्य पात्र जानकर मुज़हे आयरूवेद का ज्ञान दिया था ..

अगर तुम्हे उन्होने भेजा है तोह जरूर कोई विशेह प्रयोजन hoga.....unhone इस बात का संकेत भी दिया था

में - संकेत कैसा ...बाबा

मुखिया - बीटा उन्होंने मुज़हे एक अंगूठी दी थी और कहा था समय आने पर मेरी यह अमानत कोई तुमसे लेने आएगा .....फिर अंदर पूजा रूम से अंगूठी लाकर मुज़हे देते है


.

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वह अंगूठी मेरे हाथ में आकर चमकने लगी फिर साधारण सी हो गई

तब तक भोजन तैयार हो चूका था .फिर हमे भोजन किया....

मुखिया जी - बीटा अब थोड़ा आराम कर लो

में - मुखिया जी आपके बेटे विशु का नाम तोह मैंने सुना है , लेकिन वह कही दिखा नहीं , कहा है वह

मुखिया जी (थोड़ा उदास होते हुए)

बीटा मुज़हे कुछ दवाई बाने क लिए एक जड़ी की जरुरत पड़ी थी तोह करीब एक महीने पहले नीलकंठ पर्वत की और गया था तब से लौटा नहीं है...

मैंने उससे सावधान भी किया था की उस पर्वत क भीतर न jaaye...kyuki जो भी अब तक उस पर्वत पर गया है वह वापस नहीं आया...

में - आप चिंता न करे मुखिया जी आपका पुत्र आप तक पहुंच जाएगा यह मेरे मैं कह रहा है.

फिर वह दिन मैंने वही गुजरा व्यास गुफा ,भीमपुल, और सरस्वती नदी क उद्गम स्थान का दर्शन करने क बाद सो गया

फिर सुबह 4 बजे उठकर अपना नित्य क्रम किया और मुखिया जी और माजी की आज्ञा लेकर चल पड़ा अपने लक्ष्य की तरफ...

रास्ते क सूंदर नज़ारे देखकर ऐसे लग रहा था की स्वर्ग की hi यात्रा कर रहा hu.....aise hi चलते चलते वसुंधरा पहुँच गया जहा 8 जल की धाराओं से निरन्तर शीतल जल बैठता रहता hai....kuch देर वह विश्राम किया और चल दिया नीलकंठ पर्वत की तलहटी पर बड़ा hi विशाल बर्फ से ढाका हुआ पर्वत अभी वह पहुँचते पहुँचते शाम हो गयी थी तोह वही पास गुफा में रात को आराम किया ....सूर्यास्त क समय का अद्भुत नज़ारा पूरा पर्वत सोने जैसा चमक रहा था.....

दूसरे दिन जैसे hi सूर्योदय हुआ तोह थोड़ी देर क लिए फिर वह पर्वत चमकने laga...aur मैंने पहला कदम रहा पर्वत पर , ...की तभी हवा तेज़ चले लगी और चारो तरफ जैसे धुए का बदल ने मुज़हे घेर लिया आगे का रास्ता मुज़हे दिखना बंद हो gaya.....abhi में सोच hi रहा था की कैसे आगे बदु की तभी वह बदल और घाना होने लगा... की तभी मेरे हाथ की अंगूठी जो मुखिया जी ने दी थी चमकने लगी और उसमे से एक तेज़ नीले रंग की रौशनी चमकी ........और देखते hi देखते सारा धुआँ जाने कहा गयाब हो गया

फिर मैंने जैसे hi अगला कदम उठाया

तोह ऐसे लगा जैसे किसी ने मुज़हे उठाकर फेक diya......mein फिर उठकर आगे बढ़ने लगा .......

तोह आयी एक aawaj.......Ruk जाओ यहाँ से आगे मत जाओ लौट जाओ जहा से आये हो.....

अभी क लिए इतना hi....

अगला अपडेट रात को
 
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