ABHI -- THE WARRIOR (Completed) - Page 8 - SexBaba
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ABHI -- THE WARRIOR (Completed)

अपडेट - 64

अब तक आपने देखा क राकेश और गक की सेना का युद्ध असुरो क साथ चल रहा hai......Do महासुरो क भयंकर वॉर को किसी ने रोका......


अब आगे.......

सब अभी यही सोच रहे थे ...

तभी अभी को वह सब ने प्रगट होते देह्खा.......

हुआ यह था क कनक क मरने क बाद

अभी ने सुलेखा को अपने शक्ति त्रिशूल की ऊर्जा और दिव्या तलवार की ऊर्जा क घेरे में सुरक्षित कर diya.........Aur अपना एक और मायावी रूप बनाकर ...सुलेखा क साथ भेज दिया था........

और khud......kank क पूछताछ तक पहुँचने का रात ढँढ़ने laga........or उसी मार्ग को अपनी आज्ञा चक्र की ऊर्जा से खोजते खोजते अभी यहाँ पहुंचा था.........

कहते है यदि अपनी सबसे कीमती चीज़ छुपा नई हो तोह ऐसी जगह छुपाओ जहा कोई सोच भी बा सके.........

रास्ते को ढूंढ़ते ढूंढ़ते महल क मुख्या प्रांगण क दाहिने मीनार तक अभी पहुंचा hi था की यहाँ चल रहे युद्ध पर उसकी नज़र पड़ी....

अभी अब इस युद्ध को जल्दी ख़तम करना चाहता tha.......toh उस्सने अपनी तलवार से भयंकर ऊर्जा का वॉर ......उन् दोनों का ऊपर कर दिया…… पर या क्या, .....यह वॉर ज1 को लगते hi बेकार हो गया…….

उल्टा उन् दोनों ने उसी ऊर्जा को पलटकर अभी पर hi वॉर कर दिया…….

हुआ तो कुछ नहीं पर या मेरी समझ नहीं आया की मेरा सभी देवो की ऊर्जा का वॉर .... बेकार कैसा हो गया…….

उन् दोनों ने ....... फिर ... मुझे छोड़ ....baaki....sena.... पर हुम्ला कर दिया ……

यही मेरा लिया सबसे बड़ी समस्या बन गयी थी……. में सामना सा उनसे लड़ रहा हु, और वो मेरी जगह बाकियो पर हुम्ला कर रहा है……

मैंने सभी को सुरक्षित करना का सोच कर सभी को पांच तत्वों क 5 सुरक्षा चक्र में बांध दिया और इस लड़ाई सा धुर कर दिया…….

अब बचा लड़ाई में वो दोनों, में और उनका कुछ बच्चे हुए 60 या 70 असुर………

ज1: --- बचा मुझे समझ नहीं आता की कैसा तू महारक्षक banega..……..Aaj तेरी मृत्यु hi तुज़हे यहाँ लायी hai......Janne महागुरु ने तुममे क्या dekha....ha....ha...ha

ज 2:--- पर हां मन्ना पड़ेगा बहुत हिम्मत है तुज़्हेइन…. चल छोड़ रहना दे, तेरी मौत का साथ या भी किसी काम का नहीं…… सैनिको ख़तम कार्डो इससे……

उसका सैनिको न मेरी ऊपर हुम्ला करना का लिया बड़ा…… मैंने भी एक बड़ा सा पानी का भवंडर बना कर उनका ऊपर फेक दिया………

पानी का भवंडर में वो सभी इधर उधर उड़ना लगा……. और वो चल दिया इस दुनिया सा……

ज 1 : ाचा तो तू या भी कर लेता है, ाचा है पर अब इससे बच कर दिखा……..

ऐसा कहा कर उसने मेरा ऊपर आग का गोला बना कर छोड़ना सुरु कर दिया…..

एक का बाद एक गोला वो छोड़ता गया…….. जब वो रुका तो सामना का नजारा देख कर वो खुद हैरान हो गया……

क्यूंकि सामना मैंने सभी गोला को ीखता कर लिया था और एक बड़ा आग का गोला में बदल दिया था…….

पर ज 2 को कोई फरक नहीं पड़ा, बल्कि उसने एक बड़ा पानी का गोला, उस आग का गोला पर फैक कर उससे ख़तम कर दिया…….

एक बार फिर सा दोनों तरफ सा हुम्ला सुरु हुआ, इस बार मैंने उनका ऊपर अपना वायु चक्र का प्रयोग किया......

ज1 की तरफ और अपने बड़ा भवंडर में उलझा दिया…….. वही शैतान 2 पर मैंने फायर मैजिक का उसे करके उसका ऊपर एक का बाद एक अग्नि शूल से भयंकर लावा क गोले छोड़ रहा था, पर एक जगह नहीं रुक रहा था……

में लगातार जगह बदल बदल कर उसपर हुम्ला करता, जिसकी वजह सा वो एक हुम्ला को रोकता तो दूसरा उससे लगता……

इसी तरह सा मैंने कुछ देर उसपर हुम्ला करा, जिससे उससे नुकसान तो हुआ, पर उतना नहीं जितना होना चाहिए था…… वही ज1 1 न भी मेरा हवा का भवंडर को ख़तम कर दिया…….

ज 2: बहुत हुआ अब, अब संभल हमारा हुम्ला को……

या कहकर उन् दोनों न एक साथ अपनी ऊर्जा को जोड़ा और एक बड़ा सा वॉर मेरा ऊपर कर दिया…..

मैंने हाथ में शक्ति त्रिशूल को प्रगट kiya.....aur खड़ा रहा की उनका वह वॉर आकर मुझे लगे……

वो ऊर्जा का गोला मेरा पास आकर मुझे लग्न की जगह शक्ति त्रिशूल पर आकर ख़तम हो गया……

दोनों असुर यह देखकर हैरान हो गए ......मेरे इतने भयंकर वॉर से भी इन् असुरो को कुछ न होता देखकर........

मैं थोड़ा परेशान हो gaya.......tabhi मेरे अंतर्मन से एक विचार प्रगट hua......ki यह दोनों जयद्वा hai......yadi इन्हे समाप्त करना है .....तोह इन दोनों पर एक साथ भयंकर ऊर्जा का प्रहार करना होगा........

मैंने मैं से राकेश को कुछ निर्देश दिए......

जिससे राकेश समाज gaya......Aur वह गक और Shivali.....teeno उन्नासुरो क peeche......aur में उनके आगे से

अभी - अलविदा प्यारे असुर दोस्तों अब लड़ाई का समय ख़तम…….. और या कहा कर मैंने आगे से अपनी ऊर्जा का एक बड़ा सा हिस्सा का इस्तेमाल करके उन् दोनों का ऊपर वार कर दिया…….

बाकियो ने पीछे से अपनी ऊर्जा का वार कर दिया...…..

अब वह उनकी चीखा निकल रही थी और उनकी चीखा इतनी तेज थी की धुर धुर तक सुनी जा सकती थी

फिर दोनों क शरीर वही राख क ढेर में बदल gaye.......aur प्रगट हुई दोनों की आत्मा...

आत्मा - स्वागत है महारक्षक आपका , हम दोनों इस नगर क रक्षक महा नाग थे परतु किसी श्राप से हम असुर बन गए

आपका बहुत बहुत धन्यवाद अब हम मुक्त हो गए.......

पूजा स्थल तक जाने क मार्ग क भी हम मुख्या रक्षक थे.......

अब आप विषयक तक जा सकते हो ......

तभी उन्हों ने पास वाली मीनार की तरफ इशारा किया तोह देखते hi देखते वह मीनार पूरी धरती में सामगायी और प्रगट हुआ वह से निचे जाने का रास्ता.....

फिर वह दोनों आत्माये वह से चली गयी............

फिर में राकेश और गक से मिला ....शिवली मुज़हे देखकर मुस्कुरा रही thi..........lekin अभी बात करने का समय नहीं था ......तोह में गुफा तक जाने वाले मार्ग में उतर गया ...और मेरे पीछे पीछे शिवली ....Rakesh....Aur गक ...भी आगये......

उस रास्ते क आखरी चोर से कुछ धुआँ आरहा tha....hum उसी की और बड़े......

यहाँ पहुंचकर हम छिपकर अंदर देखने लगे........

वह विषक एक हवन कुंड में मॉस की आहुतिया दे रहा tha......uss कुंड क सामने की एक कस्ले पत्थर की शिला thi....aur उस्सकी क बगल में एक टेबल पर था नागमणि.....

और उस पत्थर क आगे सुलेखा सर ज़्हुककर वैथी थी.........

मुज़हे ऐसे छुपकर देखते और कुछ न करते हुए देखकर ....राकेश और GK.....hairan the.....maine उहने इशारे से चुपचाप आगे देखने का इशारा किया........

अभी विषक का हवन हो गया .......और उसने अपनी तलवार उठा li...........mere मालिक अब आपको समर्पित है मेरी आखरी bali.......meri pyari....Rajkumari सुलेखा.......

ha....ha....ha.....ab में बनूँगा सर्व shaktishali......ha...ha..ha....

और वह तलवार लेकर सुलेखा क पास pahuncha........usne तोह अपनी तरफ से सुलेखा को सम्मोहित किया था....

लेकिन मेरे द्वारा बनाये सुरक्षा घेरे क प्रभाव से वह बिलकुल ठीक थी.....

विषक - खमा करना सुलेखा.....

और जैसे hi तलवार uthayi........toh उस्सकी चिक निकल gayi.....ahhhhh....aur वह दूर जाकर गिर गया.....

हुआ यह क जैसे hi विषक वॉर करने वाला tha....Sulekha ने बड़ी फुर्ती क साथ एक जोरदार किक िडकी पसलियों में maari....jissase उसकी चीख निकल गयी और वह दूर जाकर gira.....aur फिर एक छलांग लगाकर ...सुलेखा ने नागमणि को अपने कब्जे में कर लिया.......

सुलेखा का स्पर्श पाकर hi नागमणि चमकने लगा........

अचानक बाजी पलटने क कारण विषक बड़ा हैरान हो गया.....

विषक - नाहीई यह नाहीइ हो sakta......rum कैसे मेरे सम्मोहन से बहार आगयी........

लेकिन अब तू नहीं बचे gi.........aur उस्सने अपनी कसली शक्ति का वार करने क लिए गाठ बढ़ाया .....लेकिन यह क्या .....उस्सकी कोई शक्ति काम नहीं कर रही थी.........

साधना अधूरी छूटने क कारण और नागमणि सुलेखा क पास होने क कारण उस्सकी साड़ी शक्तिया चली गयी थी ...........

अब विषक क्रोध में bharkar......talwar लेकर सुलेखा की और bada.....tabhi हम सब अंदर aagaye........hum सब को वह देहकर अब तोह वह और परेशां हो गया.........

में - wahhh...meri...naagin.....wahhh....tumahari जितनी तारीफ की जाए वह काम hai.........ab हमे भी जरा मौका दो थोड़ा......

सुलेखा - nahhi....yeh मेरा दोषी hai......mein इससे बचपन से अपना परम मित्र मानती थी ...लेकिन सत्ता क लोब में िस्सने मेरे विश्वास को toda......mere अपनों hi हत्याएं ki.......naaglok क लोगो पर अत्याचार किये........

और सुलेखा ने नागमणि मेरे हवाले कर क तलवार लेकर आगयी उसस्के सामने......

विषक ने गुस्से से तलवार का एक भर पुर वॉर सर की तरफ किया .....लेकिन

सुलेखा ने उससे ब्लॉक कर क जोर दर किक उसके पेट पर maari......jissase वह पेट पकड़कर आगे की और ज़्हुका ...और सुलेखा का घुटना सीधा उसकी नाक पर .......और बहने लगा खून उसकी नाक से......

इस वार से विषक जमीन पर गिर गया....

सुलेखा - उठ .....इतने जल्दी हार gaya....bada..apne आपको शक्तिशाली समाज रहा tha....ab क्या हुआ.......

ले अब तलवार भी छोड़ di.........aur अपनी तलवार छोड़ कर निभाते कगड़ी हो गयी...

सुलेखा को बिना हतियार देखकर विषक फिर अपनी ताकत जुटाकर खड़ा हो gaya....aur तलवार लेकर दौड़ पड़ा.......

सुलेखा ने उछलकर एक किक ुआस्के हाट पर मारी .....जिससे उसकी तलवार द्यर जाकर gayi.........aur अभी वह कुछ संभालता उसस्के pahle.......sulekha क घुटनो का जोरदार prahar.......usske दोनों टांगो क bich.......ayiiiiii.....ahhhh.....

...उसस्के अक्रोतो का तोह चुरा हो गया और वह निचे गिर कर तड़पने लगा........

वह देखकर मेरा हाथ अपने आप वह चला gaya.....aur मैं mein.......beta अभी संभल कर रहना .....नहीं ....तोह यह नागिन ...तेरे ...ande....bhi ..फोड़ ...देगी.....

यहाँ अब सुलेखा अपनी आखरी वॉर करने आगे बड़ी hi थी .......क ...शिवली ne....aage...badkar....usse..pakad..liye.....

शिवली - छोड़ दो उससे सुलेखा.......

सुलेखा - कौन हो तुम जो मुज़हे रोक रही ho........chodo muzhe.....iski मौत तोह मेरे हाथो हो गयी........

शिवली - क्या चाहती हो तुम क तुम्हारे बदले की आग में सारा नागलोक जलकर राख हो jaaye........bhul गयी तुम .....

मदन ने तुमसे क्या कहा tha............aaj इसकी साधना अधूरी रह गयी छोड़ दो isse......yeh अपनी मौत खुद मर जाएगा......

सुलेखा को मदन की बात याद aagyi.......tab पता चल की बदले की आग में अंधी होकर कितनी बड़ी भूल करने वाली थी.......

और वह अब पीछे हैट गयी और शिवली क साथ मेरी तरफ आने लगी........

तभी एक नीली रौशनी हवन कुंड से निकली और विषक और वह रहके काले पत्थर पर पड़े .....और एक भयंकर आवाज क साथ दोनों क चीथड़े उड़ गए ......

और ख़तम हुआ विषक का खेल

अभी क लिए इतना hi......


अगला अपडेट जल्द hi.......
 
अपडेट - 65

अब तक आपने देखा क किस प्रकार विषक का विनाश हुआ

अब आगे.........

विषक अब मर चूका था .....नागलोक अब असुरो क अत्याचारों से मुक्त हो चूका tha.......charo तरफ फीस खुशिया फ़ैल गयी.........

और अब यहाँ का राजा किसे बनाया जाए इस बात पर विचार hua.......toh सब की इच्छा थी क अभी को hi बनाया जाए.....

लेकिन इसमें एक बढ़ा thi......Naag लोक क सिंघासन पर केवल नाग hi बैठ सकता hai......ya जिस्में नाग्शक्ति हो....

इसके ली पहले विवाह जरुरी hai.....Sulekha क परवर में तोह कोई अब रहा nahi......toh गक और शिवली ने उससे अपनी बहन बना लिया.....

शिवली - देखो सुलेखा तुम्हे विवाह से पहले एक बात जाना जरुरी. है....

सुलेखा - यही न क उनकी कुल 14 पत्निया होगी......

पिता जी ने मुज़हे सब कुछ बता दिया tha.....jab उन्हें मेरे प्रेम क बारे में पता चला....

इससमे मुज़हे कोई ाहिकायत बही में जानती हु .....मुज़हे इनपर पूरा विश्वास है....

आप भी तोह दूसरे लोक से हो .....क्या आप इनकी 14 में से hi कोई हो...

शिवली - हां मेरा इनसे विवाह हो चूका hai.....phir शिवली सुलेखा को पूरी बात बताती है..

सुलेखा - तोह इस बात से तोह आप मेरी बड़ी दी hui.....ab आप hi मेरे विवाह का सारा प्रबंध dekhogi.....kyu की अब मेरा तोह कोई बचा नहीं.

और उस्सकी आँखों में आंसू आगये.....

शिवली ने उससे गले लगते हुए...

पागल दीदी भी कहती है ...और कहती है तुम्हर कोई नहीं hai....ab दुबारा ऐसी बात की न तोह देख ले.......

अब गक और शिवली विवाह की साड़ी व्यस्था देखने लगे.....

विवाह पूरी नाग पद्धति से हुआ ......शिवली खुद सुलेखा को सुहागरात वाले कक्ष तक छोड़ aayi.......Abhi भी जब रूम में पहुंचा तोह देखा ...सुलेखा बीएड पर सिमट कर बैठी हुई है.....

अभी धीरे से सुलेखा की और बड़ा और उसस्के पास बैठ गया ........और उसको देखने लगा........

अभी - हाय रे मेरी छोटी naagin......dekho तोह कैसे शर्मा रही hai...........aur अपने हाथ से ूका चेहरा अपनी तरफ करके देखने लगता है

कुछ देर तक अभी बस ऐसे hi उसी खूबसूरत चेहरे को देखता hi रहता है.

सुलेखा को उसके यु देखने से सरम आ रही थी........

जब सरम बहुत बाद गई और अभी लगातार बस उससे देखे जारहा था तो सुलेखा से रहा नहीं गया

सुलेखा – ऐसे क्या देख रहे हो..... जी ......muzhe....bahut सरम आ रही है.

अभी – अच्छा जी तुम शर्माती भी ho..........tumahara गुस्सा देखकर तोह लगा hi nahi.......waise तुम बहुत कूबरूरत हो जान..... तुम्हारी इस ज़हील सी नीली आंखों में न जाने क्या hai........bas दिल करता है ऐसे hi...... तुमको देखता राहु.........

सुलेखा उसकी बात सुन कर और शर्मा जाती है. पैर खुस भी थी अपनी तारीफ सुन कर.

सुलेखा - क्या आप भी ...गुस्सा तोह सिर्फ शत्रुओ क लिए tha......aap क लिए तोह......

अभी - क्या मेरे liye.....bolo..na..

सुलेखा शर्म क मारे सर निचे कर देती है....

अभ – Sulu......yu शरमाया न karo.......uff तुम्हारी यह अड्डा ...........

सुलेखा – सुलु ........हाँ ठीक है ....लेकिन थोड़ा अलग है.....

अभी उसके कंदो पे हाथ रख कर उसके फेस पैर झुकता जाता है और उसके होठो पर अपने होठो

रख देता hai.......Sulekha ....का पूरा बदन कस्प जाता hai........aisa अहहसास पहली बार जो हुआ था.............

अभी को भी उसस्के साँसों की खुसबू और बेताब कर देती है.....

अब अभी सुलु क होंठ अपने होंठो में ले कर चूसने लगता hai........abhi जैसे खो गया उसस्के होंठो को चूसने में......

कुछ देर में सुलेखा भी उसका साथ देने लगती है............

दोनों के हाथ एक दूसरे की पथ पर गम रहे the.........dono ऐसी लिपटे थे क जैसे नाग और नागिन hi प्रेम लीला में मगन हो........ एक दूसरे के होतो को दोनों चूस रहे थे. .......और एक दूसरे की जीब से भी खेलने लगे. ........

सुलेखा का तो पहला अनुभव था इसमें. ...........लेकिन फिर भी वह अभी की तरह की करने की कोसिस कर रही थी और मदहोश होती जा रही थी...........

अभी क हाथ अब उसके पथ पे चल रहे the......uske हाथ सुलेखा की नंगी पीठ पर चलने से उसके शरीर में हलचल सी मच गयी थी.........

कुछ देर में hi दोनों की साँसे उखाड़ने लगी .........तो दोनों अपना चुम्बन थोड़ दिया. .....

पर जल्द hi दोनों ने अपनी साँसों को सही किया और फिर एक दूसरे को चूमने लगे........

अभी ने अब उसकी गर्दन पे होठ रख दिए........ जिससे सुलेखा की साँसे तेज़ हो गई.......

अभी निचे की और बढ़ने लगा और चोली क ऊपर कठोर सतानो क ुंहर तक पहुँच गया........

अभी रुक कर सुलेखा की इस सुंदरता को ..आँखों से पिने लगा.........

सुलेखा तोह बस पर्म क हर पल को महसूस कर रही thi.......kai वर्षो क इंतज़ार और बहुत दुःख सहने क बाद आज उससे अपना प्यार जो मिला है.......

अभी ने अब चोली क ऊपर से hi सतनो को चुम्बा शुरू कर दिया और उसस्के हाथ उसस्के स्तनों को सहलाने लगे.........

.अभी क हाथ अपने स्तनों पर महसूस करते hi........Sulekha ी सिसकारियां तेज़ हो gayi......ussa हाथ अभी क हाथ पर आगया... ...

सुलेखा - ssssssd....ahhhhhh......jaaan.....yeh....mat करो naa.......aise .....जाने क्या hi रहा है मुज़हे उफ्फ्फफ्फ्फ़

अभी - जान अभी तोह सिर्फ शुरुवात hai........or सुलेखा की चोली खोलने में लग जाता है.... अभी आधी hi खोली थी ki......sansoon क ताल पर ऊपर निचे होते हुए सतानो को देखने में मगन हो जाता है.........

सुलेखा की आंखें बंद thi......jab अभी को कुछ करते हुए नहीं महसूस हुआ तोह उसने आंखें kholi.......toh

अभी को स्तनों की और घूरते हुए देखा..... तोह उसने तुर्रंत अभी को अपनी बाहो में ले लिया और अपना सर उसकी छाती. ....

में छुपा liya...........Abhi ने उसके चेहरे को उप्पेर उठाये और फिर होंठो से होठ मिला दिए...

और फिर दोनों एक दूसरे में खोने लगे........ अभी ने फिर अपने हाथ उसके स्तनों पे रख कर उनको चोली के ऊपर से hi दबाने लगा....

सुलेखा की तो साँसे और सिसकारियां तेज़ हो gayi......jisse सुनकर अभी की उत्तेजना और बढ़ने लगी........

होठो का बंदन टूट गया और सुलेखा अपनी गर्दन को ीदार उदार करने लगी......

और फिर अभी झुक कर उसकी चोली में से झक रहे स्तनों पर चूमने लगता hai.....or उसकी और देखने लगता है. .......और फिर अपनी और खींच कर एक एक करके उसके गहने देता है है.........

सुलेखा और उत्तेजित हो जाती hai.......uski कुवारी योनि कॉमर्स से भर जाती है.......

अभी अब उसकी चोली की दूरी को खोल देता है और उसकी चोली को निकलने लगता है सुलेखा भी इसमें उसका साथ देती है.......

उसके तने हुए गोर गोर स्तन उसकी लाल चोली में बहुत कामुक लग रहे थे...

अभी फिर स्तनों को चोली से बहार निकलकर नंगे स्तनों को खूब चूमने लगता है और अंगूठे से गुलाभी निप्पल को हलके हैजे सहलाने लगता है.....

सुलेखा की तेज़ सिसकियों से कमरा गूंज उठता है.....

सुलेखा उत्तेजित हो कर गर्दन ीदार उदार करने लगती है. ....अभी उसकी गर्दन पे मुँह रख देता है और उसको चाटने लगता है....... एक तो निप्पल से छेद चढ़ और दूसरा गार्डन पर चुम्बन .....

सुलेखा से सहन नहीं होता और उसकी योनि और कॉमर्स बहाने लगती है......


जिसकारण तड़पते हुए ..वह अपने हाथ इधर उधर हिलती है ..तोह ...तोह उसके हाथ में ..अभी का लिंग आजाता है ..toh..usse ..पकड़कर ..marod..deti..hai...jisase अभी ..क muh...se ..हलकी सी चीख निकल जाती है ....तोह उससे पता चलता है ..क उसने क्या पकड़कर मरोड़ दिया ....

तो वो मरे सरम के अपना चेहरा उसकी और गुमा देती है. जो सीधा अभी के खड़े लिंग से जा टकराता है और जब उसे उसे इस बात का अहसास होता है. ....

तो वो उसको एक बार उप्पेर से hi पाकर कर देखती है..... बस 2 पल के लिए hi उसके हाथो ने उसको छुआ था. ........

अभी क बड़े से लिंग को महसूस करती है तो एक अलग सा अहसास और दर... होता है .........

और उससे हाथो का स्पर्श महसूस करके अभी को एक करंट सा लगता है

अभी - क्या हुआ जान , क्या सोच रही ho.....aur तुम्हारे चेहरे पर ये दर क्यों आ गया. ...

जो तुमने अभी पकड़ा था वो तुम्हारे लिए hi है. दर क्यों रही हो…

सुलेखा – नही ...कुछ भी तोह नही बस थोड़ा दर लग रहा hai....aapka वो वो बहुत बारे hai..na

अभी – दर किस बात का jaan........milan में दर का क्या kaam.....issmein तोह सिर्फ पर्म होना chahiye.......kya तुम्हे मुज़ह पर विश्वास नहीं है......

सुलेखा - आपपर तोह हमे अपने प्राणो से भी अधिक विश्वास है..........

और सुलेखा उसके होतो पे किश कर देती है. ....अभी भी उसके होतो को चूसने लगता है और बूब्स को दबाने लगता है जिससे सुलेखा की आग फिर बड़कने लगती है....

अभी अब पूरी तरह निर्वस्त्र हो जाता hai..........ussko ऐसे देखकर सुलेखा अपनी आंखें बंद कर देती है.........

अभी अब उसस्के भी वस्त्र उतरने लगता है.....

सुलेखा को खड़ा देता है और उस्का लेहगा उतरने लगता hai....woh थी की सरम के मरे तो वो नजरे झुकाये खरी थी...... अभी इतनी hi देर में उससे पूरा निर्वस्त्र कर देता है ......

अभी का लिंग खरा हो कर हवा में लहरा रहा था...... अभी सुलेखा को देख कर समाज जाता है और उसके करीब जाता है.... दोनों पूरी तरह नंगे थे.....

सुलेखा ने अभी तक नजर उठा कर उसकी और नहीं देखा था. ...

अभी उसके चेहरे को अपने हाथ में ले कर उसको देखने लगता है. सुलेखा की सासे बहुत तेज़ चल रही थी जो अब

अभी के चेहरे पर पद रही थी....

अभी सुलेखा क चेहरे को ऊपर उठता है और उससे कसकर बहू में भर कर चूमने lagta....hai......dono क नंगे बदन जब एक दूसरे से रगड़ने लगते hai...toh.......dono का दिल जोरोसे धड़कने लगता hai......or उनकी उत्तेजना चरम पर पहुँच जाती है.....

सुलेखा मरे उत्तेजना के अभी से चिपक जाती है.....

और उसके चेहरे पर किश करने लगती है..... और फिर पूरी सरीर पे किश करने लग जाती है..... .

अभी को भी बड़ा मज़ा आ रहा था..... वो भी उसके नंगे जिस्म पे हाथ फेरने लगता है

उसके हाथ सुलेखा क जिस्म पे चल रहे थे. ...

वो जहा भी मसलता वो हिस्सा लाल पद जाता...

अब अभी बदल बदल कर उसकी दोनों स्तनों को चूस रहा था मसल रहा था. ....

सुलेखा पागल हो चुकी थी…....

एक दम से उसने अभी को बीएड पर धक्का दिया......

अभी मैं में

( लगता है नागिन भड़क gayi......Abhi जरा बचके भाई )

सुलेखा – अब क्या ऐसे hi देखते रहोगे..... ायजू अब नहीं रुका जा रहा है.. ...मुझको अपना बना लो…

अभी भी बहुत उत्तेजित हो गया tha......per वो काबू में था....

अभी ने बीएड से उठकर ...सुलेखा को बीएड पर लेता diya......aur खुद भी उसके ऊपर aagaya......Abhi और मज़े लेना चाहता था .....लेकिन अब सुलेकगा से और सबर नहीं हो रहा था...

इसीलिए अब अभी उसके पैरो के बिच में बेथ गया......

और अपने लिंग को उसकी योनि से ऱगाकर ......छेद से लगा दिया. ..

और बस अब दोनों पागल हो गए the.....dono की आखें वासना से बिलकुल लाल हो गयी थी...

फिर .

अभी ने सुलेखा का इशारा मिलते hi.... एक जोरदार धक्का मारा और उसका आधा लिंग....

उसकी झिल्ली को फरते हुए अंदर घुस गया. .....सुलेखा को इतनी तेज़ दर्द हुआ की .......

उसके मुँह से एक जोर की चीख निकली……. आआआह्ह्ह्हह्ह माँ मर गई मैं. ोुह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है… ...अहह ...dheere....ahhh..

अभी - बस जान एक धक्का और ....जो दर्द होगा एक hi baar.....issko इस मिलान क लिए तुम्हे सहना hoga..........ab हम इससे आधे में नहीं छोड़ सकते

सुलेखा - में अहह छोड़ने को थोड़ी बोल रही हु jaan.....woh तोह बस दर्द क maar...e

अभी - मुज़हे पर विश्वास रखो तुम्हे कुछ नहीं होगा...

और उसने लिंग को थोड़ा सा पीछे लिया और दे दिया एक और जोरदार दक्का. ......

.. लिंग ...सीधे जा कर बचे दानी से टकरा गया...

और सुलेखा की आखों से आंसू बहने लगे...

अभी निचे ज़्हुक कर उसस्के सर को प्यार से सहलाने लगा ...और उसके ैंन्सो को चाटने laga......ab धीरे ढीट फिर से सहलाते हुए यस्को गरम करने laga........thodi hi देर में अभी की कोशिशे रंग लायी और.....

सुलेखा फिर से गरम होने lagi....ab अभी बिना धीरे धीरे धक्के लगाने लगा...

धीरे धीरे सुलेखा की भी उत्तेजना भी चरम पर पहुँचने लगी ...अब उसकी भी ....कमर अभी क कमर क साथ बराबर हिलने लगी....

अभी क हाथ उसके निप्पल पे अपना कमल दिखा रहे थे..... . इससे

सुलेखा की उत्तेजना और बढ़ने लगी...... और उसकी योनि ...रास छोड़ने लगी. ...

तब उसके मुँह से आवाज निकली …. आआअह्हह्ह्ह्ह जान ....uffff.....ahhh...haa...bas...aise hi....

अब दोनों को बहुत मज़ा आ रहा था वो भी कमर उठा उठा के अभी का साथ दे रही थी...

और आह्ह्ही बार रही थी

दोनों आपस में वासना की अधिकता में कुछ बोले जारहे the.....dono की सिसकारियां उस जगह गूंज रही थी.....

.दोनों क साहिर से बहुत मात्रा में नीले रंग की ऊर्जा बहुत अधिक मात्रा में निकलने लगी.....

उनकी यह कामक्रीड़ा लगभग 2 घंटे से चल रही थी... और ये अब अपने अंतिम पड़ाव पर थी.

अभी दोनों की कमर बहुत तेज़ तेज़ चल रही थी और मुँह से सिसकियों के आलावा कुछ नहीं निकल रहा था. बस दोनों कैसे भी अपनी मंजिल को पाना चाहते थे दोनों के ससिर पसीने से भरे हुए थे.

और दोनों कुछ -2 देर में एक दूसरे को चुम लेते या काट लेते. दोनों के हाथ तो रुक hi नहीं रहे थे……

एक दम से सुलेखा चिल्लाती है – ोुह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्ह jaan.....mera होने वाला है और तेज़ करो …… आअह्ह्ह्ह

और ीदार अभी भी चिल्लाया – जान में भी आने वाला हु ….अह्ह्ह्ह उफ्फ्फ्फ़....

और इस टाइम दोनों के झटके सुरु के झटको से भी तेज़ थे. ..दोनों hi अब स्खलन को तैयार थे

और वो पल भी आ गया जब दोनों झड़ने लगे और दोनों की आखें खुद hi बंद होने लगी.....

. और एक नीले रंग की ऊर्जा एकत्रित होकर एक दिव्या प्रकाश में बदल गयी..

जैसे hi दोनों स्खलित हुए ेओह प्रकाश अभी में समां गया.....

और अभी को प्राप्त हुई अपनी नाग शत्कि और किसी का भी रूप लेने की शक्ति...... अब दोनों निढाल होकर एक दूसरे की बहू में सू गए....

आज क लिए इतना hi.......


अगला अपडेट कल......
 
अपडेट - 66



अब तक आपने अभी और सुलेखा का मिलान देखा



अब आगी -----

अपने मधुर मिलान क बाद दोनों एक दूसरे की आगोश में सोये हुए थे.....

आज अभी को इतनी गहरी नींद आयी thi.....ki उससे ध्यान hi नहीं रहा की दिन निकलने hi वाला है.......

अभी को अपने माथे पर किसी क किश करने का अहसास हुआ ...तोह सामने देखा शिवली कड़ी thi......aur दोनों की तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी......

शिवली - लगता है बहुत म्हणत की रात ko.....jo अब तक नहीं उठे हो......

में - अच्छा ji.....kaho तोह थोड़ी म्हणत सुबह भी कर lu........aur मैंने उस्का

हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचने लगा..........

शिवली - क्या कर रहे ho.......chodo.....abhi ...बहुत काम है........

हमारी आवाज सुनकर सुलेखा की नींद खुल गयी .....और शिवली को देखकर उस्सने चददर क अंदर अपना मुँह छुपा लिया........

शिवली - हाय देखो तोह ..अब कैसे शर्मा रही hai......,..meri छोटी सौतन...

सुलेखा - diii....aise मत बोलो na......kal आपने बहन कहा और आज सौतें ......में आपकी बहिन hi ठीक हु.......

तब तक मैंने शिवली को अपने ऊपर खेंच लिया.........

शिवली - क्या कर रहे हो ....आप बहुत बेशरम हो गए ho.......dekho क्सोटी भी देख रही ...है....

सुलेखा - नहीं मुज़हे को ऐतराज नहीं है .......और चददर लपटकर उठते hue........aap दोनों लगे रहो मैं तोह चली.......

में - अरे अब तुम कहा चली .......मैंने उससे पकड़ने क लिए हाथ बढ़ाया hi था क वह चली gayi........phir मैंने शिवली को कसकर गले लगा लिया और अपने होंठ उसके होंठो पर रखकर चूसने laga.......humari साँसे उखाड़ने लगाई तोह हम अलग होकर फिर किश करने लगे.....

शिवली- बस अब बहुत हुआ jaa.....abhi आप और सुलेखा का राज्याभिषेक भी करना है....

इतना कह कर वह वजा से चली गयी

...अब मैं भी उठकर तैयार हो gaya.....Itne में कुछ दस दसिया aagayi........muzhe अब वह की पारम्परिक वस्त्र पहनाये गए.........

तैयार होने क बाद नाग लोक में स्थित शेषनाग क मंडित में अभी और सुलेखा गए.........

उस मंदिर में स्थित नागराज वासुकि क विशाल स्वर्ण प्रतिमा क सर पर नागमणि को दुबारा स्थापित किया गया....... जैसे hi नागमणि वापस अपने स्थान पर स्थापित हुआ......

तभी उस प्रतिमा से एक दिव्या प्रकाश प्रगट होने laga......dekhte hi देखते..... ेओह प्रकाश पूरे मंदिर में फैल गया ......और आयो एक आवाज........

अव्वज - आपने नालोक क आधार इस मणि को मुक्त कराकर ...वापस उससे अपनी जगह स्थापित किया..

.इससे हम आपपर बहुत प्रस्सना होगये है....

हम आपको वरदान देते hai.....k

संसार का कोई भी विष आपको कभी हानि नहीं पहुंचा पायेगा....... और में अपना एक रूप भी तुम्हे देता हु....

और फिर सारा प्रकाश इकठ्ठा हो कर अभी क शरीर में समां गया....

.जिससे अभी का रूप hi बदल gaya.......ab वह कमर क निचे naag....aur ऊपर se..manav..

उस्में एक इच्छाधारी नाग की साड़ी शक्तिया आगयी...

उसके बाद अभी और सुलेखा एक साथ सिंघासन पर बैठे...

और उनका राज्याभिषेक हुआ......

..सारा दरबार ख़ुशी से जयकारे लगाने लगा.......

अभी सुलेखा क साथ दो दिन और रुका और सारे नागलोक की व्यासतः को अच्छी तरह से samzhkar.......Suleka क रिश्ते में जो नाना लगते थे वह

बुड्ढे नाग योद्धा जो अभी को भंडार घर में मिले था अनंता उनको नागलोक का महा मंत्री और उनके मुख्या विश्वासपात्रों को वह का अधिकारी बनाकर वह की व्यस्तता ठीक की

अब आया वह से विदा होने का वचन....

सुलेखा तोह अभी को काने hi नहीं देना चाहती थी....

अभी - देखो जान में तुमसे अलग थोड़े hi हु अब तुम मुजह्से जुड़ चुकी ho......aur अब जब भी तुम्हे मेरी याद आये तुम मुज़ह तक पल में पहुँच सकती ho......Aur मैं से मुज़हे संपर्क भी कर सकती ho.......toh बताओ हम अलग कहा हुए.........

मुज़हे अपने कर्मपथ पर आगे जाना hi होगा....

ऐसे hi बहुत समज़हाकार अभी वह से टेलिपोर्ट होकर अपने घर की चाट पर आगया.....

और गक और शिवली कुछ दिन वही नागलोक में सुलेखा की मदत क लिए रुक गए...

मैंने चाट पर hi अपने बाकि दो रूप जिनको यहाँ छोड़ गया था उन्हें bulaya.......toh थोड़ी hi देर में दोनों आगये ...........

उन्होंने इतने दिनों में क्या क्या किया था ...उनकी साड़ी यादें .....उनके मेरे भीतर वापस प्रवेश करने पर मेरे मंद में समां गयी.....

घर वाले अभी की यादो में कुवह खास तोह था nahi........bas रिम्पी को लेकर कुछ प्रॉब्लम थी....

और संघारक वाले रूप की यादो में मुज़हे सहर में बढ़ते अपराधों क बारे में पता चला..........

शहर में हर रात को बहुत से लोग अचानक गायब होने लगे थे.......

.साड़ी गॉव एजेंसीज इस बात का पता करने में नाकाम हो गयी thi.........kyu की यह सब घटनाये किसी शहर क बीचो बिच हो रही थी........

फिर मैंने राकेश को याद kiya........aur राकेश मेरे सामने प्रगट हो गया.........

में - राकेश मैंने तुम्हे मला क बारे में जानकारी हासिल करने को कहा tha.......usska क्या हुआ

राकेश - मैंने सब पता कर लिया है .......फिर उस्सने कुछ बातें बताया....

उसस्के बाद में निचे aagaya......aaj संडे था तोह ाद्दु घर पर hi थी........

में वह से ाद्दु क रूम में गया था ......जैसे hi मैंने दूर खोला ...तोह एक पिलो मेरे चेहरे पर आकर padi..........jab सामने देखा तोह

दीपू निचे बैठा था और ाद्दु बीएड पर कड़ी थी..........

में - गुड़िया यह क्या है.........

ाद्दु - सॉरी भाई ...वह तोह हम खेल रहे the.......maine डीपी को पिलो मारा ...लेकिन गलती से आपको को लग gaya........aur मासूम सी शकल बनाकर .......दोनों कान पकड़ लिए....

मैंने आगे बढ़कर उससे गले लगा liya......ahh मेरा प्यारा bacche.....sorry बोल ..रहा ...है.......

ाद्दु - bhai.......bahut ..दिन हो गए ....हम बहार नहीं gaye......aaj घूमने चलो न..........

मैं - ाचा कहा जाना hai......Gudiya.....

ाद्दु - भाई ....आज ...हम ...वैर ...पार्क ..चलेंगे.......

में - ok.....betu....

ाद्दु - Bhai.....Sulekha दी का कुछ पता चला .....कहा ...चली ...गयी......

में मैं में ( ओह मैंने अपना तोह रूप रख दिया लेकिन सब लोग ौसे सुलेखा को गायब देखेंगे तोह क्या सोचेंगे यह तोह सोचा hi नहीं )

गुड़िया आज सुबह hi पता चल सुलेखा की याददाश्त वापस आगयी थी तोह वह अपने घर चली गयी........

फिर मैं वह से निकलकर अपने रूम में aagaya........aur रिम्पी को कॉल लगाया........

मैंने कोई 5 - 6 बार कॉल लगाया लेकिन कोई जवाब नहीं.......

फिर एक मश्ग aaya.....kya बात है....

मैंने भी सोचा मामला थोड़ा गरम है.........

तोह में भी मोब लेके टेलिपोर्ट हो गया रिम्पी क रूम में......

और कर्टेन क पीछे से चुप कर देखने laga.......Rimpy बीएड पर मुँह फुलाकर... उलटी लेती हुई थी और मोबाइल में कुछ टाइप कर रही thi......uski आँखों से लग रहा था की रात भर सोई नहीं थी......

मैंने भी मश्ग किया .- क्या बात है जान.....

यु तोह न रूठो अपने दीवाने से......

तभी मुज़हे उस्का मश्ग आया......

कभी पास आना कभी दूर जाना

कैसे कहु यह दिल की लगी है दिल्लगी नहीं....

में - तुम्हारी मोहब्बत के रंग ओढ़कर ही मैं खुशनुमा हूँ

तू तो तो है मुझमे मैं कहाँ हूँ

रिम्पी - अभी बड़ी शायरी सूज रही है ......इतने दिन से तोह मुजह्से तुमने सही से बात भी नहीं की और कॉल भी नहीं...........

और जब कॉलेज जाते समय बात करने की कोशिश की तोह मुँह ऐसे घुमा देते थे क जैसे मुज़हे जानते hi nahi.......mein hi पागल थी......

में - इतनी भी न रूठो जान .......ऐसे रूठोगी तोह अभी तुम्हारे पास आजाऊंगा.......

रिम्पी - अच्छा zhoote....aakar तोह देखो फिर बताती हु.....

में - वैसे ब्लैक लेग्गिंस और रेड टॉप में बड़ी हॉट लग रही ho........aur हां तुम्हारा टॉप पीछे से थोड़ा वपर हो गया है उससे sambhalo....nahi तोह में बाहेक जाऊँगा

वह कमरे में इधर उधर देखने लगी.........

रिम्पी - अभी .....कहा हो तुम ....मुज़हे चुप चुप कर देख रहे हो न......

तभी उससे कर्टेन क पिसवहे चुप्पा में dikha....toh उस्सने पास में पड़ी हुई बुक मुज़हे फ़ेंक कर maari......mein वह से निकलकर उसकी और बड़ा

रिम्पी - Abhi....tum ....chupkar.....aur क्या बोल रहे थे बाहेक जाऊँगा you....aur फिर उस्सने एक पिलो फेककर मुज़हे maari....aur गुस्से में मेरी तरफ बड़ी

..मैं भी मज़े लेने क लिए रूम में इधर उधर उससे बचने क लिए भागने लगा वह मेरे पीछे भागने लगी ...

तभी में एकदम से रुक गया और पलट गया और वह सीधे मेरी बाहों mein.......aur उससे कास कर पकड़ लिया इससे पहले विह कुछ बोलती मैं इसके होंठो को अपने होंठो को भर कर चूसने लगा.....

रिम्पी मेरे पीठ पर हाथ मार रही थी ....और दूर होने की कोशिश करने lagi......lekin मैंने नहीं छोड़ा ....और उसके होंठो को चूमने लगा.......

थोड़ी hi देर में रिम्पी भी नार्मल हो गयी और वह भी साथ दे रही थी....

दोनों अपनी दुनिया में मगन होगये... वो तो बस अपने प्यार में दुबे थे....

उनकी किश में कोई वासना नहीं थी था तो सिर्फ प्यार. ....उनकी आँखे एक दूसरे से बात कर रही थी. हाथ एक दूसरे के कंडे पे थे....

दोनों एक दूसरे के होतो को बारे आराम से चूस रहे the.....aur अपने प्यार की गहराई महसूस कर रहे.. थे

दोनों को बड़े दिन बाद आज मौका मिला था . ...

कभी कोई उप्पेर का होठ चुस्त तो कभी दूसरा उसके उप्पेर के होठ को चूसने लगता....

तो खभी एक दूसरे के होठो को चाटने लगते जीब की नोक से. तो कभी दोनों की जीब मिल जाती और लड़ने lagti......jab दोनों की साँसे उखाड़ने लगी तोह दोनों अलग हो गए......

मैंने रिम्पी को अपनी गोवध में बिठा लिया

मैं - क्या अब भी नाराज हो जान....

रिम्पी - आपसे नाराज़ तोह में हो नहीं sakti.....lekin परेशां थी की क्या बात है जो आप मुजह्से दूर हो रहे हो.....

कभी कभी लगता था की आप कुछ परेशां हो लेकिन वहुत पूछने पर भी आपने कुछ नहीं बताया.....

में - रिम्पी तुम्हे सब सवालो का जवाब जल्द hi मिल जाएगा.......

अच्छा अब में चलता हु .....आज वाटर पार्क हम जा रहे है जल्दी से रेडी हो jaao.....mwin तुम्हे लेने आऊंगा......

रिम्पी - लेकिन तुम अंदर आये kaise.....Room अंदर से बंद है ...साड़ी विंडोज बंद है.....

मैं - यह भी बताऊंगा ...पहले अपनी आखें बंद करो....

और जैसे hi उसने अपनी आंखें बंद की में टेलिपोर्ट होकर अपने रूम में आगया.......

रिम्पी हैरान परेशां अपने रूम में देखने lagi....lekin में वह था hi नहीं..........

वह कंफ्यूज हो गयी क मैं सच में वह गया था या वह खुली आँखों से सपना देख रही थी.......

तभी मेरे पह की घंटी बजी......

में - hello ...jaan.....Ready हो गयी वाटर पार्क जाने क liye......hum कोई 1/2 घंटे में वह पहुँच कर तुम्हे पिक कर लेंगे....

रिम्पी - मतलब ....tum....yaha....kaise......

मैं - बाद में माय love.......abhi तुम तैयार हो जाओ....

फिर ाद्दु , दीपू को लेके निकल gaya......aur ऑफिस से ऋतू दी को भी पिक कर लिए ......कॉल करके कॉलेज क फ्रेंड्स को भी बुला liya.....aur.chal pada....Rimpy को ..पिक ...करने.....

अभी क लिए इतना hi.....


अगला अपडेट रात को......
 
अपडेट - 67



अब तक आपने देखा अभी नागलोक से घर आगया.......

रिम्पी क साथ कुछ प्यार भरे पल......

और अब वाटर पार्क का प्रोग्राम ........



अब आगे .......

हम सब अब वाटर पार्क पहुँच गए .......

.मैंने सबको वाटर पार्क क बहार कैफ़े में बिठाया और सब क टिकट्स लेने चल gaya.............jab तक में वापस पहुंचा तब तक रिंकू और संकु भी बाकी फ्रेंड्स क साथ आगये थे.....

Sankush..Rinkush....Shyam....Vikki....Ashu

girls.....Lima...sophia.....diya....saavi..aur बिना

यह वाटर पार्क सिटी क आउटर एरिया में था........

आज संडे होने से लोगो की बहुत ज्यादा भीड़ थी

यहाँ स्टॉर्म rides.......Shark रीफ वाटर ride......bey रिदेसौर कास्तावे क्रीक आकर्षण का केंद्र थी...

इसके अलावा यहाँ कई तरह क पूल्स बने the.....aur जगह जगह कैफ़े......

बच्चो क लिए किड्स वाटर पार्क अलग था.......

वह इतनी साड़ी राइड्स देखकर तोह ाद्दु और दीपू बहुत खुश थे........

रिम्पी मुज़हे बस तिरछी नज़रो से देखि जा रही थी........

रिंकू और संकु तोह वह बस आंखें फाडे लड़कियों को ताड़ने लग गए थे.......

ाद्दु - wah.....bhai ...कितनी साड़ी अडवेंचरिओउस राइड्स है यहाँ par.....wow....lekin में कंफ्यूज हु किस पर पहले जाओ......

दी जाने क्यों चुप चुप थी........

में - क्या हुआ दी ...आपको ...अच्छा नहीं लगा यहाँ आकर..........

ऋतू - नहीं बेतु ऐसी कोई बात nahi.......thoda ऑफिस क काम में ुलाज़ गयी थी.........

तोह मानिए दी का मंद रीड करना चाहा लेकिन नहीं कर paaya.......pata नहीं क्यों में माँ ...दी और ाद्दु का मंद पूरी तरह से रीड नहीं कर पाटा था......

में - दी छोड़ो अब ऑफिस की टेंशन ...और बस एन्जॉय करो.............

ाद्दु ने बे राइड चुनी .........सब अपने अपने पेयर्स बनाकर अपनी अपनी राइड्स का मज़ा लेने चले गए ......

.ऋतू दी अकेली न रह जाए इसीलिए रिम्पी चली गयी दी क साथ.......

और में रह गया ाद्दु और दीपू क साथ.........

सब अपनी अपनी राइड्स पूरी कर के वह क एक सबसे बड़े पूल जो की एक छोटा सा लेक hi कहा जाएगा वह इक्कठे होने वाले थे........

मैंने आड़ू और दीपू क साथ राइड्स का खूब मज़ा लिया और पहुँच गया पूल par......woh पूल एक दम प्राकृतिक tha.....bas थोड़ा उससे डेवेलोप किया गया था.....

जैसे hi हम पूल में पहुंचे मुज़हे वह कुछ नेगेटिव एनर्जी का अहसास हुआ.........

मैंने अपने चारो तरफ देखा लेकिन कुछ खास नज़र नहीं aaya..........addu में और दीपू वह खूब स्विमिंग का मज़ा ले रहे थे......

तब तक एक एक करके हमारे फ्रेंड्स भी आगये.....

दी भी अब खुश लग रही थी....... रिम्पी को देखकर मेरा बड़ा मैं कर रहा था उसके करीब जाने को ...लेकिन दी और ाद्दु क saamne....mushkil था........

मैंने देखा क अब दी आड़ू क साथ खेलने में बिजी hai.......toh रिम्पी को इशारा kiya.......aur हम स्विमिंग करते करते निकल आयी पूल क एक कोने में ......

यहाँ पूल का पानी hi एक छोटी सी नदी में जाता था .....वह बहुत घने पेड़ थे.........

वह पहुंचकर मैंने रिम्पी को पानी में खिंच लिया और बाहून में भर liya......humara शरीर पूरा पानी क अंदर था और सर bahar.....mein रिम्पी को चूमने laga......paani में हमारे बदन चिपके हुए the.......thande पानी में भी दोनों क बदन गरम होने लगे थे......

तभी मुज़हे पूल क बहार घने पेड़ो की तरफ से एक चीख सुनाई di......toh मेरा ध्यान उस तरफ चला गया........

में तुरंत रिम्पी को लेकर... टेलिपोर्ट होकर वह पहुंचा तोह देखा क एक दानव .ne....ek लड़के की ...गार्डन पकड़कर उठा रखा है....

वह लड़का कुछ कुछ मेरे जैसा दिख रहा था बस उसकी नाक कुछ अलग थी......

और एक लड़की वह बेहोश पड़ी थी....

मैंने देर न करते हुए तुरंत अपनी तलवार से उस दानव का हाथ काट दिया........

हाथ काटते hi अब उस दानव की चीख gunji......ahhhh.....

अउ अपनी भरी आवाज में gurraya........ohhh तोह वह तुम हो.....

और मेरी तरफ bada.....lekin मैंने अपनी मायावी विद्या का प्रयोग करके उसस्के जैसे hi दानव उसस्के सामने खड़े कर दिए......

वह अभी कुछ सोचता उसस्के पहले मैंने उससे वरुण पाश में बाँध दिया......

दानव - छोड़ दो मुज़हे........

मैंने उस्सकी आँखों में ज़हानकर देखा तोह मुज़हे वह सिर्फ चार आँखे दिखी जो मुज़हे hi घर रही thi...........toh मैंने तुरंत उसका सर धड़ से अलग कर दिया.......

यहाँ एक गुफा में ........दो साये एक पानी क पात्र में देखकर जोर जोर से हास रहे थे.....

आईये देखते है ...कौन कई yeh....aur क्या कर रहे है...

कला चोंगे में मला बोलै - ha...ha...ha...dekha mayasur......Rakshak कौन है.........

अब मुज़हे कलासुर क मुख्या सेनापति होने से कोई नहीं रोक सकता.....

मयासुर - नहीं .....सुधाकर.......

सेनापति तोह में hi rahunga.....ab देखता हु ...कैसे बचता है रक्षक मेरे हाथ से......

तुम से मेरी पहले hi बात हुई agar.....tumne रक्षक को ढूढ़ निकला तोह तुम्हे पृत्वी लोक की हमारी काली शक्तियों क प्रधान बनोगे.......

ha...ha...ha.....Rakshak ने सोचा भी नहीं होगा क ...जिसको वह दानव समज़कर मार रहा है वह दानव nahi....mayasur की माया है.......

अब असुर सम्राट बहुत खुश honge.......naaglok की हमारी हार अब यहाँ विजय में बदलने वाली है......

मला - ठीक है मयासुर .....लेकिन मेरी भी एक शर्त है......

यदि हम इससबार रक्षक को समाप्त करने में सफल हुए तोह ...आप हमे असुर सम्राट से मिलाएंगे.......

(मैं mein.....wah मयासुर ......म्हणत करे मुर्गा और ांडा खाये fakir.......Rakshak का पता में लागू और कस से पुरस्कार तुम पाओ )

जब अभी ने रसातल क नागलोक को असुरो और विषक से मुक्त किया ......तोह ....कलासुर का क्रोध बढ़ने laga........ab तक 14 बलियो में से केवल एक hi दे पाया था.....

कस - अपने सिंघासन पर बैठा hua.....Kordh में अपने असुरो पर भड़क रहा था...

..अपनी दूसरी शक्ति भी प्राप्त कर ली ...रक्षक ne......aur तुम इतने शक्तिशाली असुर कुछ नहीं कर सके........

दुर्मुखासुर मुज़हे लज्जा आती है तुम्हे अपना पुत्र कहते हुए.......

और मयासुर तुम ........कहा गयी तुम्हारी maya........tumhe फिर से जीवन देना और तुम्हारे भरोसे रहना हमारी भूल thi......tumahara मरना hi ठीक है........

और क्रोध में भरकर तलवार उठा ली ........

मयासुर - कसम करे असुर samrat.....bas आखिरी बार जीवन दान दे dijiye.......issbar यदि मैं असफल हुआ तोह में स्वयं अपने को समाप्त कर लूंगा.......

कस - यदि में साधना क वजह से विवश न होता .......तोह तुम जैसे नाकारो की जरुरत hi न पड़ती...

तभी बड़ी रानी का दूसरा पुत्र ...

भयाक्षा - पिताश्री इस बार हमे अवसर dijiye......Hum वचन देते है क आपकी साधा पूरी होने से पहले रक्षक आपके चरणों में होगा.......

कस - ठीक है पुत्र अब दुर्मुख क जगह तुम लोगे .....

अपने आधिकारो को अपने हाथो से जाता हुआ देखकर दुर्मुखासुर वह से निकल गया...........

मयासुर वह से निकल कर ..पृथ्वी लोक aagaya......aur ....जहा जहा भी उससे कुछ अलग ऊर्जा महसूस होती .....वह वह वह अभी की खोज करने लगा.....

तभी बहुत अधिक मात्रा में ...उससे एक जंगल में तामसिक ऊर्जा का आभास hua.......aur वह उसे मिला इब्लीस की आराधना करता मला सुधाकर

यहाँ पटल लोक में भयाक्षा ने अधिकार पाते hi .....अपने दो भाई ...मंजली रानी क पुत्र ...मारकेश को पृथ्वी से ऊपर क 7 लोको में कस की सड़ना पूर्ण करने क लिए योग्य कन्या ढूंढ़ने भेजा....

और रक्तासुर को गुप्त रूप से पृथ्वी लोक.......

यहाँ अभी ने जब देखा की जिस दानव को उस्सने मारा वह धुआँ बनकर उड़ गया hai..........yeh देखकर अभी समझ गया की यह कोई दानव nahi.....kisi की माया है जो उस्का पीछा कर रही है.....

तभी रिम्पी की आवाज से उसका ध्यान टुटा.....

रिम्पी - यह सब क्या hai.......kuch मुज़हे भी bataoge........muzhe तोह कुछ समाज नहीं आरहा.......

और तुम्हारे पास यह ...सुपर पावर्स........

अभी - जान सब बता dunga.....bas थोड़ा ..और रुक जाओ.........

और आगे जो लड़का था ussko.....tum ठीक तोह हो न.......

लड़का - हां ....मुज़हे कुछ नहीं हुआ है.......

तब तक वह लड़की भी होश में आगयी thi....aur होश आते hi चिल्लाने lagi......tab उस लड़के ने उससे चुप कराया.....

में - लगता है तुम्हे कहीं देखा hai.......kahin तुम मंदा गाओं क विशु तोह नहीं हो

विशु - हां .....मेरे माता पिता अब नहीं रहे ..........में यहाँ एक कंपनी में काम करता hu.....aur यह मेरी मंगेतर है.....

मैं - बड़ा दुःख हुआ यह जानकार....

तुम्हे कोई मदत चाहिए तोह मुजह्से संपर्क karna.....khusi होगी तुम्हारे लिए कुछ कर क .....

अब जल्दी से यहाँ से निकलो यह जगह ठीक नहीं है....

और में रिम्पी को लेकर वापस वाटर पार्क में aagaya......lekin यहाँ मेरे फ्रेंड्स ....ऋतू di....Addu और दीपू नहु दिखाई नहीं diye......mera मन घबराने लगा........

में उन्हें वाटर पार्क में हर जगह ढूंढ़ने laga......tab मुज़हे रिम्पी का भी ख्याल आया ......तोह देखा अब ...वह भी नहीं है......

सभी को यु गायब हुआ देखकर .....किसी बहुत बड़े षड़यंत्र का आभास हुआ.........

तभी में वह से टेलिपोर्ट होकर एककान्त में गया ....aur.....aur अपनी इन्द्रियों की संपूर्ण ऊर्जा को जागृत करके पता करने का प्रयत्न करने laga.........lekin कुछ पता नहीं चला......

तभी मुज़हे उस दानव की आँखों में दिखे दो सायो का ख्याल आया तोह मैंने अपनी आज्ञा चक्र की ऊर्जा का ध्यान उस डीहके हुए दृस्य पर lagaya......aur मुज़हे वह दोनों चेहरे स्पष्ट दिखाई दिए......

में - मला और मयासुर ...तुम दोनों ने अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल की है.....

........kaal.......tabhi राकेश अपने काल रूप में प्रगट हुआ.......

और में उससे लेकर मला क ठिकाने पहुँच gaya........Lekin यह क्या वह गुफा पूरी ततः खली thi.....aur वह पर था एक सन्देश........

रक्षक ..ध्यान रहे जो दीखता है वह .सच नहीं यह सब आसुरी माया hai.......Dhua hi तुम्हारी मंजिल है.....

यह सन्देश मला ने छोड़ा था.....

उस सन्देश में लिखी हुई बातो को समज़ने की कोशिश करते hue....maine ....गुफा की दिवार पर जोर से हाथ मारा ....लेकिन यह क्या मेरा हाथ आर पार हो gaya........tab मुज़हे पता चला यहाँ जो कुछ भी हम देख रहे है वह सब माया है....

आवेग और क्रोध क कारण में इससे समाज hi नहीं paaya..........Phir मैंने अपने मैं को शांत किया और अंतर्मन की ऊर्जा से देखने लगा तोह देखा तोह वह की माया नष्ट हो गयी ...

.अब न waha....koi गुफा है न पर्वत......

हम बड़ी वादी घास क मैदान में खड़े है.....

अब देखते है जो गायब हुए है उन्हें क्या हुआ.....

जब अभी का उस दानव से सामना हुआ ......तब मयासुर क दानव पूल क पानी क अंदर से सबको चुपके से बेहोश कर के ले गए थे......

और एक गुफा में भयंकर दानवो क पहरे में रख दिया और जब अभी उनको ढूंढ़ने laga.....tab वह रिम्पी को भी ले गए.....

यहाँ अभी और राकेश उस घास क मैदान मैं आगे बढ़ने का रास्ता खोजने लगे..... तभी कही दूर से जले हुए मॉस की बदबू आने लगी......

राकेश माँ पराशक्ति क शेर क अंश से प्रगट हुआ th.....isiliye इसकी सूंघने की शक्ति बहुत अधिक thi..........Ab उससे अपना शेर का रूप धारण कर लिया और मेरे अगर ज़्हुक गया .....मैं उस्का इशारा समाज कर उसके पीठ पर बैठ गया......

राकेश बंदी बनाये गए सब क और उनकी रक्षा करने वाले दानवो को की ऊर्जा और गंध का पीछा करते करते हम दोनों एक तालाब तक पहुँच गए.....

वह थोड़ी hi दूर पर एक पहाड़ी क अंदर से धुआँ आते हुए dekha........toh समाज गया की हो न हो यही गुफा है.....

जब में चुपके से भीतर देखा तोह हैरानी से मेरी आंखें और मुँह दोनों hi खुले रह गए

अभी क लिए इतना है.....

अगला अपडेट कल.......
 
अपडेट - 68

अभी तक आपने देखा ....

अभी वाटरपार्क में अपने फ्रेंड्स अउ बहेनो क साथ जाता hai......waha उसका सामना ...मयासुर क माया से होता ...जिससे मस को अभी की कमजोरी क बारे में पता चलता hai......yaha अभी जब सबको वाटर पार्क से गायब देखता है तोह ...उनकी खोज उससे एक गुफा तक ले जाती है



अब आगे........

जैसे hi अभी उस गुफा में ज़हानका है ....तोह हैरानी से उस्सकी आंखें खुल जाती है........

आये देखते है वह क्या हुआ ..........

जब मस क मायावी असुर सभी को बेहोश करके यहाँ लाते hai.........toh एक गुफा में बांधकर रख देते है.............

मला मयासुर को आस्वाशन देते है क यह जगह उसकी सड़ना से बिलकुल सुरक्षित है........

यहाँ की काली शक्ति और तामसिक ऊर्जा .......का तोड़ ..Rakshak..k पास नहीं hai......jisse वह यहाँ तक कभी पहुँच नहीं सकता........

.और उस्सकी काली शक्तियों से 1000 क लगभग... उसके जीव उसकी काली शक्तियों क प्रभाव से..... दानवो से भी ज्यादा शक्तिशाली हो गए hai...........jo इस जगह की कड़ी सुरक्षा करते है......

और यदि फिर भी किसी तरह रक्षक हो इस जगह क बारे में पता चला तोह मेरे कुछ गुप्तचर जीव हमेशा उसका पीछा करते है जिससे उसके यहाँ आने से पहले hi हम सतर्क हो जाएंगे.........

मयासुर मला की बातो से बड़ा प्रभावित हो गया tha........usse मला क मैं में चल रहे छल का पता नहीं चला........

मयासुर - वह सुधाकर ...wah.....tum वाकई इस पृत्वी पर हमारे प्रतिनिडी बनने क योग हो........

अब जब तक रक्षक क कमजोरी उसके अपने हमारी कब्जे में है तब तक वह हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता ......और हम उस्का अंत कर देंगे........

ha...ha...ha........

यह गुफा मला का असली ठिकाना नहीं thi.......yeh तोह उसस्के जीवो ने पट्ठे खोदकर बनायीं थी.....

इस गुफा में दो कक्ष थे एक बहुत बड़ा सा हल जिसमे लगभग 500 से ज्यादा लोग आजाये .....और दूसरा एक नकली पूजा स्थल और हवन कुंड बनाया गया था.......

मयासुर - आओ सुधाकर जरा देखे toh.....aur मस ..सुधाकर क साथ अंदर चला गया........

अंदर लगभग 100 दानव थे जो बंधे hue........bandhako को बड़ी ललचायी नज़रो से देख रहे the.........jaise hi उन्होंने मयासुर को देखा तोह सकते एक तरफ हो गए....

मयासुर - जानता हु मेरे दानवो तुम बहुत भूके हो ..........लेकिन चिंता मत करो तुम सबको .........तुम्हारी भूक जरूर मिटेगी ....bas...thodi .....और प्रतीक्षा कर लो.....

वह सुधाकर क्या चल चली hai........Aaj ....रक्षक ...की कहानी ख़तम.........

लेकिन हमे और भी प्रबंध कर न hoga..........phir मयासुर सुधाका को लेकर उस गुफा से बहुत दूर aagaya........aur वह अपनी माया से बिलकुल वैसी एक गुफा का निर्माण कर diya........aur वह वैसा hi एक जल का पत्र रख दिया जसमें उन्होंने रक्षक को देखा था.......

मयासुर को अंदेशा था इसी पात्र की छवि का पीछा करते हुए रक्षक यहाँ आएगा........

और जब इस गुफा में विह अपने साथियो को खोजने लगेगा तोह यहाँ की आसुरी माया और अधिक सक्रिय हो ..जायेगी और ...

.रक्षक की सात्विक ऊर्जा इससे भेद नहीं पाएगी और विह यहाँ कैद हो जाएगा....

लेकिन सुधाकर ने गुप्त रूप से वह जो सन्देश छोड़ा tha......usse अभी को जल्दी hi उस गुफा की माया क बारे में पता चल गया था.......

और वह क तामसिक घेरे क सक्रिय होने से पहले hi वह वह से निकल गया........

अब दोनों वापस गुफा पहुंचे...........

सुधाकर ने अपने शक्ति शैली ...जीव ...मयासुर क सामने गुफा क चारो और तैनात कर दिए...........

मला - सेनापति जी ....यह जगह एकदम सुरक्षित hai.......jab तक यहाँ में और मेरे जीव जीवित है तब तक ..रक्षक यहाँ प्रवेश भी नहीं पा सकता......

मयासुर - हम तुमपर बहुत प्रासना है सुधाकर.........

परन्तु मुज़हे रक्षक का सामना करने क लिए .....अभी अपनी ऊर्जा को और बढ़ाना hai.......isske लिए मुज़हे एक सड़ना कख की आवश्यकता है......

मला - आईये.. .दूसरी गुफा में ले जाते हुए..... आप यहाँ मेरे सड़ना स्थान जहा मैंने साधना करके काली शक्तिया पाई hai.....aap यहाँ अपनी साधना kijiye........iss कुंड की विशेहता है क जल्दी hi आपका काम पूरा हो जाएगा

वह एक थाली में मॉस क tukde.....ek कटोरे में sharab........aur एक हवन कुंड था.........

और मैं में ( काम पूरा नहीं ..तमाम हो jayega....kyu की यह मेरा कुंड ..शक्ति बढ़ाएगा nahi......shakti ...सोख lega.....ha..ha..ha.....bada..aaya..senapati)

और मला बहार aagaya........Mayasur ने साधना में बैठने से पहले ...

.उस गुफा को अपनी तामसिक ऊर्जा क घेर में बांध दिए .....taaki.....koi भी मानव या danav....Sadhna क बिच में विघ्न डालने न आजाये.........

मला को पहले hi इस बात का अंदाजा था ........इसीलिए उस्सने इस गुफा में पहले hi एक छिद्र कर दिया था और गुप्त रूप से वह एक सन्देश भी छोड़ दिया था......

जैसे hi मयासुर गुफा का द्वार बंद करके साधना करने baitha......toh मला ...वह से अपने जीव लेकर चला गया.......

यहाँ मयासुर अपनी साधना में व्यस्था था .....और दूसरे कक्ष में उसके दानव बंदहाक बने हुए अभी क फ्रेंड्स ..Addu...Deepu....Ritu..aur रिम्पी को देख कर सबर नहीं हो रहा था.......

दो मुख्या दानव उन दानवो क मुखिया the....dono बात करने लगे

डी1 - यार इनको देख कर तोह मेरी भूक और बढ़ रही hai.....kya करे अब और सबर नहीं होता....

डी2 - भूक तोह मुज़हे भी लगी है ....लेकिन senapati....ji....ne अभी मन किया hai......aur उनकी आगया न मानाने का अर्थ है मृत्यु........

डी1 - तोह क्या kare.....humare साथी भी बहुत अधीर हो रहे hai.....yadi कोई मनोरंजन का साधन होता तोह कुछ समय के भी जाता.......

डी2 - एक बात हो सकती है .....सेनापति की आज्ञा का पालन भी हो जाएगा और हमारा मनोरंजन भी

डी1 - और वह क्या है.....

डी2 - देखो सेनापति जी ने हमे इनको खाने क लिए मन किया hai........lekin हम इनके जवानी का तोह आनंद उठा सकते hai......dekho कितनी सूंदर सूंदर कन्याये है यहाँ पर...

डी1- अरे वह भाई क्या बात कही hai........mere प्यारे साथियो अब यहाँ शुरू होगा हमारा मनपसंद खेल ...तुम सब इस्सके आनंद लो....

और दोनों चल दिया जहा lima...Sophia....waigere साड़ी लड़किया बंदी पड़ी thi.....dono असुर पहले तोह उन् सब को घर घर कर देखने lage....aur उनके शरीर ...को सहलाने लगे.....

डी1 रिम्पी और ऋतू की तरफ इशारा करते हुए....

भाई क्या जबरदस्त खूबसूरत है यह दोनों इनके आगे तोह स्वर्ग की अप्सरा भी बेकार है ......हम इन दोनों से hi मज़ा करेंगे.......

और डी1 रिम्पी की और बढ़ा और डी2 ऋतू की तरफ.......

जैसे hi उस्सने रिम्पी को छुआ उस्सको एक तेज़ जहतका लगा और वह दूर जाकर gira.....aur रिम्पी की आंखें खुल गयी......

रिम्पी ने इधर उधर देखा तोह डी2 ऋतू क कपडे फाड़ने वाला था .......तोह

रिम्पी अपनी जीवन की परवाह किये बिना चिल्लाती हुई उसके तरफ दौड़ी.....

रिम्पी - Nahiiiii.....dur हैट kamine......di....se....aur...uchalkar उस दानव क बॉल पकड़ पीछे की तरफ तेज़ी से khincha.....jisse वह पीठ क बल निचे गिर गया.....

रिम्पी की आंखें ग्रीन कलर की होने लगी.......

उसकी तेज़ी और बल देखकर दानव बड़े हैरान थे.....

तब तक दोनों दानव संभल चुके the......aur अब पोइरे क्रोध में आगये the.......Dono रिम्पी की तरफ daude......aur जैसे hi वॉर करने वाले the......uski एक फ्लाइंग किक सीधा डी1 क मुँह पर पड़ी और वह कराहते हुए निचे गिर गया......

रिम्पी का ध्यान अभी डी1 पर था इसी का फायदा उठाकर रिम्पी क पीछे पहुँच गया और अपना मुद्गर उठाकर रिम्पी क सर पर मारा....

जिससे रिम्पी जमीं पर गिर गयी उसस्के सर से खून बहने laga......aur तेज़ दर्द भी होने लगा .......

सारे दानव ताली बजने लगे ...वह मुर्ख इससे खेल समझ रहे थे.....

डी2 - बड़ी उछाल रही थी न अब देख तेरी hi आँखों क सामे इन् सब को नंगा करूँगा ......और मेरे यह दानव इनको भोग भोग कर ऐसी हालत बना देंगे क यह अपने लिए मौत मांगने लगेगी.....

और वह दानव इस बार ाद्दु की तरफ बढ़ गया .......जिससे देखकर रिम्पी का क्रोध सातवे आसमान में पहुँच gaya.....aur वह अचानक गुर्राते हुए कड़ी हुई......

और उसके शरीर से भयंकर ग्रीन कलर की ऊर्जा निकल ने लगी और वह अब धरती से उठकर हवा में स्थिर हो गयी ..

.अभी डी2 ाद्दु को छूटा उसके पहले hi रिम्पी की आँखों से ग्रीन रौशनी निकली और डी2 पर पड़ी जिससे वह पत्थर की मूर्ति में बदल gaya....aur पल भर में hi टूटकर बिखर गया....

यह सब अचानक इतने जल्दी हुआ क पहले तोह किसी दानव को कुछ समाज नहीं aaya....aur जब समाज aaya.....toh डी1 उछलकर एक खम्बे क पीछे चुप गया.....

अब रिम्पी की नज़र दानवो पर padi......aur वह ग्रीन रौशनी इनपर पड़ने lagi....jis...jis ..दानव पर भी

वह रौशनी पड़ती वह पाथेर की मूर्ति में बदल jaata......aur टूट का बिखर जाता ....दानवो में भगदड़ मच गयी जिस्सको जहा जगह मिली वह वह छुपने लगा.....

और यहाँ बहार उसी समय अभी राकेश को लेकर पहुंचा tha.....aur यह hi वह दृश्य था ....जिस्सको देखकर उसकी आँखें और मुँह खुला का खुला रह गया....

यहाँ अंदर लगभग आधे दानव ख़तम हो गए थे........

पहली बार इतनी अधिक ऊर्जा का प्रयोग होने से ....रिम्पी की आंखें बंद होने लगी और वह निचे की तरफ आने लगी तभी अभी ने तेज़ी से उससे अपने बाहों में थम liya.......aur निचे अपनी गोदी में ........

उस्सने रिम्पी क माथे को चुकार देक्ग तोह वह बहुत जयादा गरम था.......

इधर दानवो ने जब देखा की उनका खतरा तलगाया है तोह सब उनकी तरफ बढ़ने लगे ........डी1 भी अब बहार आगया था.......

.तभी राकेश अभी और दानवो क बिच aagaya........aur उस्सने आगे आरहे डी1 पर अपनी तलवार से भरपूर वॉर किया लेकिन ......उस वॉर से .....डी1 को कुछ भी नहीं हुआ......

.तोह उस्सने एक जोरदार पंच उसके पेट में मारा ......जिससे डी1 थोड़ा .....पीछे हैट गया......

रिम्पी क सर से बहता हुआ खून देखकर मेरे क्रोध बढ़ने लगा tha.....lekin फिर भी मैंने उससे हील करने लगा .....जब देखा कुछ नहीं हो रहा है ....तोह पांच तवा की ऊर्जा का प्रयोग किया जिससे उस्का घाव तोह नहीं भरा लेकिन खून बंद हो गया..

फिर मैंने रिम्पी को वही लिटाया और अपनी माया से बेहोश पड़े सब पर एक कवच बना दिया जिससे कोई दानव उन्हें न देख सके....

और राकेश क साथ उन दानवो पर वार करने लगा.......

में हैरान था यह देखकर की जिन दानवो का रिम्पी ने बुरा हाल किया था उनका हमारी तलवारे कुछ भी नहीं बिगड़ पा रही थी

जैसे जैसे हम उनसे लड़ते उनकी ताकत और तेज़ी और बढ़ती जाती.....

में डी1 से और बिच बिच में जो भी सामने आता उससे लड़ रहा था.........

राकेश भी अपने शेर मानव क रूप में उनसे अपने पंजो से बड़ी तेज़ी से लड़ रहा tha......lekin उसस्के पंजे की खरोच भी उन् दानवो पर नहीं हो रही थी......

में भी बिच बिच में अपने तत्वों की ऊर्जा क गोले उनपर फ़ेंक रहा tha.....jisse वह थोड़े पीछे हैट जाते फिर दुगनी तेज़ी से आगे बाद ते....

वह दानव हाथ लात का इस्तेमाल कर के युद्ध कर रहे थे….. उनके हाथ और लात का कॉम्बिनेशन इतना तीज और सटीक था की मेरा जैसा फुल त्रिनेड क लिए भी मुश्किल हो रहा था

…….

में यदि उनका हाथ ब्लॉक करता तोह वो लात सा मार देते और यदि लात ब्लॉक करता तोह हाथ सा मारते .....

कभी उनका उसका पंच मेरा मुँह पर पढता कभी मेरा चेस्ट पर….. में कभी बैक फ्लिप किक, तो कभी स्पिनिंग बैक किक और कभी हुक और ऐसे किक का भरपूर हुम्ला करते हुए उनका मुकाबला कर रहा था……..

अब मुज़हे थोड़ा गुस्सा आनेलगा tha…......aur उसी समय मेरे गले का लॉकेट भी... बहुत ज्यादा चमकना laga…….mere मन से शिवली ने संपर्क kiya.......aur कुछ बताया...... …..

फिर मैंने अपने वायु तत्त्व और जल तत्वकी ऊर्जा को मिलकर एक भयंकर बवंडर का निर्माण किया और उस

बवंडर में सब दानवो को उड़ाकर गुफा क बहार ले aaya......sab दानव तिनके की तरह उस बवंडर में घूम रहे थे......

मैंने उसमें और जल तत्त्व और वायु तवा की ऊर्जा बढ़ाने लगा जिससे उन् सब दानवो क श्री ठन्डे होकर अकड़ने को लगे तभी मैंने बवंडर रोक दिया.......

और वह जम्में पर इधर उधर गिरने lage.....ab उनका शरीर .....स्तंभित हो गया tha.....phir मैंने शक्ति त्रिशूल की भयंकर ऊर्जा क गोले उनपर चोदे .....और .सभी दानवो क चीथड़े उड़ गए.......

शिवली ने बताया था क यह दानव सप्तधातु और प्राकृत की उस ऊर्जा से बने the.......atyadhik ठाड़ hi इनका अंत कर सकती है......

अभी ने राकेश को रिम्पी और बाकी सब क पास भेज दिय और खुद mayasur......taj पहुँचने का रास्ता ढूंढ़ने लगा.......

उस्सने उस पूजा कक्ष को कहारों तरफ से देखा.......

लेकिन कोई रास्ता नज़र नहीं aaya.....teleport होकर भीतर जाना चाहा लेकिन तमोगुण और पाप की शक्ति क घेरर को तोड़कर अंदर नहीं जा पाया........

तभी गुफा क पिछले हिस्से में उससे एक कपडे का टुकड़ा फसा हुआ mila......jab उस्सने उससे बहार खिंचा तोह उसपर लिखा ह्या था....

गुफा में प्रवेश करेगा वह जिस्सके न हाथ हो ना पाऊँ

अभी सोचने लगा क कौन है वह जो ऐसे चुप चुप कर मेरी सहायता कर रहा है.....

उधर मायावी गुफा में भी और यहाँ भी.....

अभी को अब समाज आगया था क अंदर कैसे प्रवेश किया जाए

अभी क लिए इतना hi......


अगला अपडेट रात को ........
 
अपडेट - 69

अब तक आपने देखा .....रिम्पी की शक्ति जागृत hogayi....aur उसस्के प्रभाव से कई दानवो का नाश hua......Abhi बाकी दानवो का नाश करके ......मयासुर क पूजा वाली गुफा तक पहुंकने का मार्ग खोजता है .....तोह उससे वह एक सन्देश मिलता है.....

अब आगे.......

अभी ने सोचा न हाथ और न पाओ ....ऐसा तोह नाग रूप में hi प्रवेश पाया जा सकता hai.....aur ....naagjaati....mein तमोगुण होता है .....और तमोगुण ...तमोगुण को नहीं rokta,.....isiliye.......naag रूप में वह आसानी से प्रवेश पा सकता है.......

अभी ने अपने नाग्शक्ति का ध्यान kiya.......aur देखते देखते वह एक छोटे से नाग में बदल gaya.....aur वह बने छोटे से छिद्र से भीतर प्रवेश कर गया.....

अंदर जाकर उसने देखा की मयासुर हवन कुंड में मास्स की आहुति दे रहा hai........maya सुर को देखकर अभी का क्रोध बढ़ने laga........kyuki पहले भी इसने बहुत उत्पात मचाया था.........

अभी वापस अपने रूप में aagaya........mayasur को पता hi नहीं चला की कोई गुफा में भी प्रवेश कर गया है........

अभी आगे बड़ा और एक जोर दर लात मयासुर क पीठ पर दे maari.....aur मयासुर कराहते हुए दूर जा गिरा.........

अच्चानक हुए हमले से वह हड़बड़ा gaya........aur जब उस्सने अभी को अपने सामने देखा तोह......

मयासुर - दर्द से करहते हुए .....ahhhhh...ahh....Rakshak ....में तोह तुम्हे शूरवीर समज़ता था ....तुम कब से पीछे से वार करने लग गए.......

और किसी की पूजा में विघ्न दाल अधर्म गई......

अभी - मयासुर तुम जैसे पाई क मुँह से धर्म की बातें शोभा बही deti........tumahare जैसे पापी असुरो को समाप्त करने क लिए जो भी किया जाए वह धर्म hi है.....

मयासुर - लेकिन तुम यहाँ आये kaise........Yeh जगह तोह सुधाकर द्वारा रक्षित hai........ohhh तोह .....मयासुर क साथ viswasghat......Sudhakar ...पहले इससे dekh....lu....baad ..में तुम्हे ऐसी मौत दूंगा ...क फिर कभी कोई मयासुर को धोका देने की सोचेगा भी नहीं.......

मयासुर ने अपनी माया का प्रयोग करने क लिए हाथ आगे किया लेकिन यह क्या आज वह kisi......maaya का निर्माण नहीं कर पा raha...tha.......

वह हवन उस्सकी साड़ी माया ख़तम कर चूका था......

क्युकी की वह जो हवन का रहा था उसमे मानव मॉस नहीं दानव का मॉस था......

अभी मयासुर क पास केवल शास्त्रों की और दो तत्वों की शक्ति थी.....

मयासुर की माया को ख़तम हुआ देखकर अभी ने अपने शक्ति त्रिशूल से उस गुफा को तोड़ दिया अब दोनों खुले मैदान में आगये.....

अभी - चिंता मत करो mayasur.....jaanta हु की तुम्हारी माया अब नहीं rahi......ab युद्ध होगा सिर्फ बाहुबल से .....और शास्त्रों से......

अब दोनों आमने सामने अपनी अपनी तलवार लेकर आगये.......

मयासुर ने मेरा ऊपर तलवार का हुम्ला सुरु कर दिया........ में मार्टिकल आर्ट्स की तकनीक का इस्तेमाल करके उसके वॉर से बच भी रहा था और उसके हर वॉर को ब्लॉक भी कर रहा tha.....ab मुज़हे इस खेल में मज़ा आने लगा था...….. ....वो लगातार एक hi स्पीड सा मुझपर हुम्ला कर रहा था…….

में उससे धुरी बना कर लड़ रहा था.....

, जिसकी वजह सा उससे मुझपर हुम्ला करना में काफी परेशानी हो रही थी ........जिसकी वजह सा उसकी गट्टी काम हो रही thi.…..aur इसी का फायदा उठाकर में अपने पैरो का इस्तेमाल करके ....उसपर किक्स बरसाने लगा ........

एक तोह उसका कोई वॉर मुज़ह तक नहीं पहुँच राग था और दूसरा ...कभी उसके चट्टी पर कभी पेट पर मेरे किक्स पद रहे the.......isse उस्का क्रोध बढ़ने लगा ....

यही तोह में चाहता था ....क्युकी ....युद्ध क समय का क्रोध .....बुद्धि हर लेता hai......aur व्यक्ति ऐसी गलती कर बैठता है जो उसके अंत का कारण बनता है....

अपने सारे वार बेकार जाते देखकर उस्का क्रोध बढ़ गया और

उस्सने ...
.जल तत्त्व की ऊर्जा से

हुम्ला किया उस्सने एक बहुत बड़ा पानी का घेरा मुज़ह पर छोड़ा ........., जिससे मैंने बड़ी आराम सा रोक लिया और उसका एक भी हुम्ला मुझ तक नहीं पंहुचा……..

मैंने उसस्के पानी क वॉर को की वायु तत्त्व का उपयोग करके बर्फ क टुकड़ो में बदल दिया...

और उसी पर छोड़ दिया.......

वह अब माला युद्ध ( रेसलिंग) का प्रयोग करके लड़ने लगा ......…

उसने सबसे पहले अपना हाथो का इस्तेमाल करना सुरु करा…… उसका सुरु का कुछ हुम्ला तो मैंने इधर उधर करके बच गया…… पर उसका एक पंच मुझे अपना फेस पर लगा……..

मुज़हे पंच लगता hi धुर जाकर गिरा जमीं पर…… मेरा मुँह सा खून निकलना लगा था….. सच में मयासुर भी को काम नहीं था ताकत mein......tabhi तोह असुरो का सेनापति बना

उसका पंच में बहुत ताकत थी……………

मेरे गिरते hi मयासुर क चेहरे पर खुसी आगयी....……. में फिर सा खड़ा हुआ और अपना मुँह साफ़ करा…… मुझे खड़ा होता देख उस्का गुस्सा फिर बढ़ने लगा.....…. वो मुझपर हुम्ला करना का लिया एक बार फिर सा तैयार था…..

वो इस बार मेरी तरफ तीजी सा आया और अपना हाथ सा मुझे मारना की कोशिश करने लगा ……. पर इसबार मैंने निंजा तकनीक सा उसका या हुम्ला ब्लॉक कर दिया……. मैंने जैसा hi उसका हुम्ला ब्लॉक करा

अब उस्सने अपनी आखिरी विद्या जिस्में उससे महारथ हासिल थी ....

धनुष विद्या का प्रयोग करने का सोचा .........

मैंने भी धनुष लेकर उसका सामना करने लगा.......

मेरा पास केवल पांच तत्त्व क दिव्यास्त्र the........unhi की सहयता से में उससे युद्ध करने लगा........

उसस्के कई तीर मुज़हे आकर लगे थे जिससे में घायल हो गया था..........

तभी उसने अपना धनुष को आकाश में उठाया और कुछ बड़बड़ाने लगा.......

आकाश का रंग बदल ने laga......bijliya कड़क ने लगी .....तभी ....मेरे मैं से शिवली ने फिर संपर्क किया..........

सावधान जान यह ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करनेवाला hai.....jaldi से इस्सके धनुष तोड़ दो........

तब मैंने तुरंत अपनी गदा को उसपर छोड़ di.......jo जाकर उसस्के धनुष से takrai.......jisse उसका धनुष टूट गया और वह दूर जाकर गिरा.........

उसकी हालत बहुत ख़राब होगयी thi.........mein सोचने laga....mere इतने ब्यायानकर वॉर से इससे कुछ नहीं हुआ ........लेकिन इस गदा क एक प्रहार से उस्का ऐसे बुरा हाल हुआ......

वह गदा आपस मेरे पास आ गयी थी.....

और में चल पड़ा जमीं पर गिरे मयासुर क paas.....jo तड़पता हुआ कराह रहा था.....

माया सुर - नाहीइ यह नहीं हो sakta.......bhramha जी वरदान से कोई सात्विक और देविक ऊर्जा मुज़हे मार नहीं sakti......ahhhhh...kewal ....आसुरी ऊर्जा hi.....meri मृत्यु ....का कारण बन सकती hai....ahhhhh....lekin यह गदा.....

( असल में भीम की गदा जो अभी ने प्राप्त की thi....mahabharat क युद्ध क समय जब घटोत्कच का वध हुआ ...तब उस्सकी साड़ी ऊर्जा अपने पिता की गदा में समां गयी thi......jisse भीम ने महा बलवान 100 कौरवो को इसी गदा से मारा था )

मयासुर बड़ी कठिनाई से खड़ा हुआ .....और मेरी तरफ bada.....ab में और देर नहीं करना चाहता tha........maine अपनी गदा का एक जोरदार प्रहार उसके सर पर किया.......

और उसके साथ की समाप्त हुई मयासुर की जीवन लीला......

मयासुर मारा जा चूका था........

अभी फिर वह से सबको टेलिपोर्ट होकर वापस वाटर पार्क क कोने में चला गया........

अब सब पर किया गया सम्मोहन समाप्त हो गया था.....

अभी ने सब क मंद को कण्ट्रोल करके यह बिठा दिया क स्विमिंग क बाद सब यहाँ आराम करने आये ...है....

लेकिन ाद्दु ....ऋतू ..और ..रिम्पी क मंद को नहीं कण्ट्रोल कर पाया......

ाद्दु - भाई हम यहाँ कैसे ....मुज़हे तोह ऐसा लगा था की किसी ने मुज़हे पानी में कीच लिया था...

ऋतू - हां बेतु ...हम सब तोह स्विमिंग कर रहे थे ...........

में - नहीं दी ...हम सब तोह यहाँ आराम कर रहे थे ....आप सब से पूछ लो..

रिम्पी मेरी तरफ घर घर कर देख रही थी....

उस्सकी आँखों में बहुत सारे सवाल थे.........

रिंकू - यार अभी कुछ खिलायेगा भी या हम सबको अब भूके मारने का इरादा है.....

लिमा - रिंकू की तरफ देखते hue....tumhe तोह बस खाने की सुज़हती hai.....udhar संकु को देखो....

यहाँ संकु और सोफिए दोनों एक दूसरे में खोये हुए थे........

मुज़हे पता लग गया की यहाँ सबके पेअर बन गए है........

ाद्दु - भाई चलो न .....अब ....मुज़हे भी भूक लसगी है....

फिर हम वह एक रेस्टॉरेंट में गए ...और ..अपनी पेट पूजा की.......

और चल पड़े अपने घर की aur..........maine पहले ाद्दु ...Deepu....aur...di को घर छोड़ा ....फिर रिम्पी को लेकर निकल गया.........

में ड्राइविंग कर रहा था.......

रिम्पी - बाबू ...कटा अब मेरे सारे सवालो का जवाब मिलेगा.....

में - रिम्पी थोड़ा इंतज़ार aur.......tumahre रूम में चलकर बात करते है.....

और वह चुप हो gayi......bas मुज़हे घूरे जा रही थी....

अब हम रिम्पी क घर पहुँच गए थे.......

रूम में आते hi उसने दूर बंद कर दिया ....सवालो की ज़हादि लगा दी....

रिम्पी - यह सब क्या है Abhi......tum ....कौन हो .....और यह ....सुपर powers.....kaha..se ...aayi........aaj क ज़माने में भी ...वह अजीब सा दानव.......

मुज़हे कुछ समाज नहीं आरहा.........

वह लोग कौन थे जो सबको ले गए the.....woh कोई इंसान नहीं लग रहे थे........

और जब मेरी आंखें वह khuli.....toh में कैसे उनसे ladi....muzhmein इतनी ताकत कहा से aayi..........jab पीछे से मेरे सर पर मारा उसके बाद मेरे शरीर से हरा प्रकाश निकलने laga....uske बाद क्या हुआ मुज़हे कुछ मालूम नहीं......

और जब अभी देखा रही हु तोह वह घाव और चोट का निशान कुछ भी नहीं hai.........bolo....chup क्यों ho......mein पागल हो jaaungi.....uffff

में - बस करो मेरी ज़हनसी की रानी ......एक साथ इतने सवाल ........अब बिलकुल चुप.......

पहले यह देखो जो दिखा रहा हु.....

फिर मैंने अपनी माया का प्रयोग करके ......उससे गुफा का वह सन दिखाया जब वह दानवो को पत्थर में बदलकर .......मार रही थी....

रिम्पी - क्या यह मैं hi हु ....पर मैंने यह कैसे .......क्या मेरे पास भी सुपर पावर ....है....

फिर मैंने अपने बारे में सबकुछ उससे बताया ..........और यह भी क 14 लोको में मेरी शक्ति बाटी हुई hai.....unko मुज़हे हासिल karna...hai.....

रिम्पी - ओह्ह्ह तोह मेरा बाबू इस श्रिस्ति का महारक्षक hai...wow....

याने क बहुत बड़ा सुपर हीरो सुपर मन से भी बड़ा....

लेकिन वह 14 लोको की शक्तिया तुम्हे कैसे milegi......aur मेरे पास जो पावर है वह ....उस्का क्या......

में - जान छोड़ो न इस बात को अब .....बाद में बता दूंगा ....पहले ......थोड़ा करीब तोह आओ na......aur मैंने उससे अपनी बाहों में खिंच लिया ....और जैसे hi उससे किश करने वाला tha...k उसने अपना हाथ बिच में रॉकग diya.....aur मुज़हे अलग हो गयी

रिम्पी - नहीं जो कुछ भी है अभी बताओ ....बाकी सब बाद में......

में अपनी 14 पत्नियों वाली बात अभी उससे नहीं बताना चाहा रहा था.....

में - क्यों ज़िद कर रही हो जान ....कुछ बातें समय पर छोड़ देनी चाहिए.....

रिम्पी - अभी और बहाने nahi......yadi तुम मुजह्से प्यार करते हो तोह तुम्हे मेरी kasam.....sab कुछ बताओ.....

में - यह क्या है Rimpy.....kya तुम्हे अपने प्यार पर विश्वास नहीं जो कास्मो का सहारा ले रही ho.......jaha प्यार होता है वह विश्वास होता है ....और जहा विश्वास होता है वह कसमें नहीं hoti.....kya यही है तुम्हारा प्यार.......

रिम्पी - रट हुए बस करो ...जान ...bas..karo...aise मेरे प्यार ..का अपमान तोह न करो......

यदि तुम hi मुजह्से रोइथ गए तोह मेरी साँसे भी रोइथ जायेगी....

रिम्पी का रोनी मेरा दिल चिर रहा था.....

मैंने सोचा की 14 शादियों की बात सुनकर वह वह दुखी हो जायेगी ...क्यों की वह बहुत पोस्सेसिवे किस्म की thi.....mein बात को ताल रहा था........

लेकिन मेरा तस्लणा गई उसके दुःख का कारण बन गया....

में - ठीक है जान तोह सुनो.......

रिम्पी - नहीं अब मुज़हे नहीं सुंनना hai.....jiss बात को तुम छुपाना चाहते हो जरूर को वजह hogi........mein hi गलत thi......aur फिर से रोने लगी.....

में उसस्के पास gaya......aur उससे कंधो से पकड़कर अपनी तरफ ghumaya......aur उसके होंतोह को चूमने laga.....badi देर तक हम एक दूसरे क होंठो को चूमते रहे जब साँसे भरी होने लगी तोह हम अलग hue......ab उसका रोना बंद हो चूका था.......

में - अब ठीक हो ...या अब भी कुछ कहना है.....

उस्सने न में इशारा किया......

फिर मैंने अपने 14 शकितीयो क राज़ को बताया.......

और 14 पत्नियों क राज़ क बारे में भी.......

उन् 14 में से मेरी एक शक्ति तुम हो जो हमारे मिलान क बाद मुज़हे प्राप्त होगी....

रिम्पी - यानि की मेरी 13 सौतने और hogi......mein तोह तुम्हे किसी और क साथ बर्दास्त नहीं कर sakti......toh और 13 कैसे........

में - रिम्पी तुम सब अलग अलग होते हुए भी एक हो ....कुय्की तुमसब एक hi सकती क अलग अलग अंश ho.......mera प्यार सब क लिए बराबर होगा.....

बाकी तुम अब सोच लो तुम्हे क्या करना है.......

यदि तुम्हे स्वीकार है ...रोह कल तुम मेरे घर आओगी रोज़ की तरह ....

अब मैं चलता हु और में वह से सीधा अपने घर आगया.....

लेकिन कार ड्राइव करके

आज क लिए इतना hi......

अगला अपडेट कल.......

 
अपडेट - 70



अब तक आपने देखा मयासुर का अंत हो गया......

अभी ने रिम्पी को अपने बारे में सब कुछ बता दिया है

अब आगे...........




रिम्पी क यहाँ से जब में घर पहुंचा ......तब तक रात हो चुकी थी ........

जब में अंदर गया तोह डैड लॉबी में बैठ कर hi टीवी देख रहे थे.........

में अपनी hi सोच में अपने रूम की तरफ जा रहा था .......की पता नहीं रिम्पी एक्सेप्ट कर पाएगी या nahi.........tabhi डैड ने बुला लिया......

डैड - आगये beta.........aao यहाँ बैठो थोड़ी देर मेरे पास भी...........

कुछ दिन से बिज़नेस क कामो में ऐसा ुलाज़ गया था ...क तुमसे अच्छे से मिल भी नहीं सका.....

में डैड क पास गया ....और उनकर पाओ छुए..........

डैड - बीटा यह सब मत किया kar.......aur फिर गले लगा लिया....

में - डैड यह तोह मेरा अधिकार hai......bado का आशीर्वाद जीवन में बहुत महत्व पूर्ण hai............aur आप तोह मेरे गुरु भी है......

डैड - हम्म ...चलो ठीक hai......batao क्या चल रहा है ..aajkal........maine सोचा संघारक क्या कर रहा hai...aajkal.......mein तोह बुसिनेस और इंस्टीटूशन क काम में ऐसा ुलाज़ gaya.......k शहर में क्या चल रहा है पता hi नहीं......

में - डैड आप कण्ट्रोल रूम तोह जा hi सकते हो ......

डैड - हां जा तोह सकता हु ...लेकिन अब ....समय hi नहीं मिल पाटा hai.........Har काम स्टाफ पर तोह नहीं छोड़ सकते है न.......

में भी सोचने लगा ....सही तोह कह रहे hai......itna बड़ा बिज़नेस Empire......aur ..institutions.....reasearch labs....malls & hotels......anath बच्चो क लिए मातृ sadan......naari निकेतन ......और भी बहुत कुछ ........

तभी माँ आते हुए --- तोह कैसा रहा तुम्हारा weekend.......aur मेरे पास आकर बैठ जाती.... ...है......

अब में क्या batata.....k .कैसा रहा.....

में - अच्छा रहा माँ ...हमने बहुत एन्जॉय किया......

माँ - Accha..good ....अभी ाद्दु भी वही बता रही thi......lagta है आज बहुत मस्ती की है ....इसीलिए तीनो जल्दी hi सो गए.......

में भी माँ की गॉड में सर रख कर लेट gaya......aur वह मेरे बालो में हाथ फेरने लगी......

माँ - डैड से .....आपने सोनपुर जाने क बारे में क्या सोचा hai..........issbaar की माहपूजा में पिताजी ने ....जोर देकर बुलाया है....

.कहा है हर बार की तरह बहाना नहीं चलेगा........

डैड - तुम तोह जानती हो ....में ...कितना बिजी हु ....

माँ - वह में कुछ नहीं जानती .......आप बॉस एक दिन क लिए hi aajana....kaam तोह हमेशा hi चलता rahega.....mera भी बड़ा मैं है .....कुछ दिन मइके में गुजरने का

.....और तब तक बच्चो की छुट्टिया भी शुरू हो जाएंगी.....

डैड - ठीक hai.....Ab ...हम ....की बात कैसे ताल सकता हु.......

डैड - अच्छा बेटे वह सुलेखा अचानक कहा गायब हो गयी.......

कुछ पता है.......

में - डैड अब उसकी याददास्त आगयी hai......woh वापस चली गयी.....

फिर मैंने डैड को नागलोक की वाट बता दिया....

माँ - अच्छा तोह मेरी दूसरी बहु भी मिल गयी और मुज़हे तोह पता hi नहीं......

अब तोह तू वह का राजा भी बन gaya........aur राजा साहब अपनी रानी से मिलवाएगा या नहीं....

में माँ क आँचल से मुँह छुपाते हुए...- क्या माँ आप भी.......

माँ - अच्छा देखो तोह ........कैसे शर्मा रहा hai.....aur....jab shadi...ki..tab...hamara ख्याल भी नहीं aaya......humari भी iccha.hai क तेरी धूम दाम से शादी कारें साड़ी रस्में निभाये.....

में - माँ आप तोह जानती है न किंपरिसीहितियो में में मेरी शादी हो रही है..

माँ - वह तोह है betu......lekin एक शादी तोह में अपनी पसंद की करेंगी और वह भी बड़ी धूम धाम se.....ladki तोह मैंने देक्ग ली hai.......vahut ...sunder..hai....

में - माँ आप तोह जानती है क में 14 से एक भी शादी ज्यादा नहीं कर सकता......

माँ - अरे बीटा पहले नाम तोह सुन ले......

में - ठीक है बताओ.......

माँ - उसका नाम है रिम्पी.....

और मेरा फेस एक्सप्रेशन देखकर हसने लगी.....

डैड - अच्छा वह सब chodo........aur बताओ आज कल शहर में लोग गायब होने लगे hai....kuch पता चला इस बारे में की कौन hai........kahi यह मयासुर तोह नहीं जो फिर आगया है.....

में - नहीं डैड यह मयासुर का काम नहीं है ...यह किसी और का काम है ......बहुत जल्द हम ुस्स्तक पहुँचने वाले है......

फिर में वह से अपने रूम में आगया ......और संघारक बनकर .........अपनी टीम क पास pahuncha......aur वह राकेश को भी बुला लिया .......और उससे मला क बारे में साड़ी जानकारी ली....

शलाका ने बताया जिस कंपनी ने हमारे अनाथ आश्रम और नारी निकेतन को बहुत सारे फंड्स इशू कराये थे ....उस्का सीईओ ....लोगो क सामने आनेवाला है......

फिर मैंने कण्ट्रोल रूम का जायजा लिया ...और अपने रूम में आकर सो गया.......

सुबह अपने टाइम पर utha.....daily रूटीन क बाद में ध्यान लगाने baitha......toh बार बार रिम्पी का hi ख्याल आरहा tha.......aur इस वजह से में ध्यान नहीं लगा पा रहा था.......

तोह ...में रूम से निकलकर चाट पर चला gaya........abhi सूर्योदय नहीं हुआ था........

में बस ऐसे hi अपनी सोचो में गुम्म चक्कर लगा रहा tha.........thandi ...ठंडी ताज़ी हवा ....मेरे मैं को शांत कर रही थी......

फिर में वही बैठ gaya........sochte सोचते न जाने क्यों आज शालू की तरफ ध्यान जा रहा tha.....bahut दिन हो गए उससे मिले हुए.........

मैंने सोचा एक बार उससे देख aau.......toh टेलिपोर्ट होकर पहुँच गया ताल्लुक ...क रानी महल में जहा वह रहती थी......

यहाँ हर तरह की सुख सुविधा thi.....Jab में ताल्लुक पहुंचा तोह देखा अब यह पहले वाला उजड़ा हुआ नहीं tha.......Acharya Dhara.....Acharya वरुण ....और शालू की म्हणत ने इससे स्वर्ग जैसा सूंदर बना दिया था........

हरे भरे पहाड़ ....स्वच्छ जल से भरपूर sarower.......jagah जगह फल और फूलो क बागीचे........

वह क लोग अब खुश हाल the........Lekin क्या वह की रानी खुश थी.....

में शालू क कक्ष में पहुँच तोह वह आंखें बंद करके बैठी हुई थी ........दोनों हाथो से कोई तस्वीर सीने से लगाए हुए थी.....

जब में उसस्के पास गया ......तोह देखा उसकी आँखों से गालो तक सुख चुकी आंसू की लकीर सी बानी हुई है.......

लगता है रात भर किसी की याद में रोटी रही hai.........Sote हुए वह बड़ी मासूम लग रही थी.........

उसके चेहरे से उदासी ज़हालक रही thi.......Jisne यहाँ क लोगो क जीवन में खुशियां भरी thi....aaj वही दुखी थी........

तभी उसस्के आंखें khuli........muzhe सामे देखकर.....

शालू - तोह आगये आप .......और कबतक ऐसे hi इंतज़ार करना padega......ab और आपके बिना रहा नहीं jaata.......aap तोह मुज़हे भूल hi गए........

में जानती हु आप सच में याजा खड़े नहीं हो ....फिर भी दिखाई डॉ रहे ho.....roj ऐसा hi होता है .....तुम मुज़हे हर जगह दिखाई देते हो......

पता नहीं में कब आपको दिखाई दूंगी.....

और वह दोनों हाथो से मुँह छुपकर रोने लगी.......

उस्सकी ऐसी हालत देखकर मेरे दिल में एक तीस सी उठी और मेरी भी आंखें भर आयी.........

में उसके पास गया और उसका हाथ पकड़कर चेहरे से hataya.....toh विह फिर मेरी तरफ देखने lagi......ab उससे अहसास हो गया क में सच में hi उसके सामने खड़ा हु.....

तोह ज़हत से कड़ी होकर वह मेरे गले लग gayi.....aur ronelagi.......kaskar मुज़हे बाहू में भरकर अपने जुदाई की तड़प मिटने लगी....

में - उसके बालो में हाथ फेरते hue......bas ...जान ...bas...rok लो इन् आंसुओ को .....

शालू - कैसे रोक lu.......aapko पता है कैसे आपकी यादो क सहारे एक एक पल काटा hai.........kaha थे आप जो इतने दिनों से अपनी शालू की सुध भी नहीं ली........

यदि आप कुछ दिन और लगते ...तोह आपकी शालू सायद बहुत दूर जा चुकी होती.....

में उसके होंटो पर हाथ रखते hue......bas करो जान मत बोलो ऐसी बाते .......तुम्हारी यह बातें मेरे दिल में घाव कर रही ho........tum क्या सोचती हो यदि तुम्हे कुछ होगया तोह क्या में जी पाऊंगा.......

फिर मैंने एक हाथ से उसका चेहरा uthaya.....aur एक हाथ उसके सर क पीछे ले जाते हुए..

उसके चेहरे पैर ज़्हुकता चला gaya..or उसके होठो पर अपने होंठ रख diye......aur चूमने लगा.......

में उसके सारे दर्द को पि जाना चाहता था .......शालू मेरी आँखों में देख रही thi.......meine उससे और करीब खींच लिया ......अब हमारे बिच से हवा गुजरने की भी जगह नहीं थी.........

अब शालू भी मुज़हे किश कर रही thi.......maine उसके होंटो को अपने होठो ने ले कर चूसने लगा........ हम दोनों बस एक दूसरे क प्यार की गहराई को महसूस कर रहे थे........

दोनों के हाथ एक दूसरे की पीठ पर गम रहे थे....... और एक दूसरे के होंठो को चूस रहे थे.

और चूमते चूमते हमारी साँसे उखाड़ने लगी तोह हम अलग हुए .....और एक दूसरे की आँखों में देखने लगे...........

हमारे इस प्यार में कोई वासना नहीं thi......thi तोह बस केवल सच्चे प्रेम की भावना........

हमारे होंठ फिर मिल gaye.....aur इस बार.. दोनों ....एक दूसरे की जीब से भी खेलने lage.....aise hi कुछ देर हम प्यार में खोये थे.......

फिर मुज़हे ख्याल आया की दिन चढ़ गया होगा .....और मुज़हे घर जाना होगा .....मुज़हे वह नहीं देखकर सब परेशां हो जाएंगे.....

में - शालू अभी में चलता hu.........sham को फिर मिलने आऊंगा........

शालू - नहीं आज में दिन भर आपके साथ तहना चाहती हु.......

में - लेकिन मुज़हे अभी घर जाना है.......

शालू - तोह मुज़हे भी ले chalo......muzhe भी माँ से मिलना है.......

में कुछ सोचकर ठीक है तोह फिर चलो.........

और में उसका हाथ पकड़कर टेलिपोर्ट होकर वापस घर क बहार पहुँच गया .और उससे मैं दूर से आने को कहा क्यों की माँ और डैड उससे पहचानते थे....

...और खुद ...चाट पर आगया.........

फिर में वह से इस चलकर निचे आगया ...तोह देखा की ......शालू अंदर आचुकी थी ........और माँ ...क गले लगी हुई थी.....

माँ - आओ बीटा आज बहुत दिन बाद तुम्हे देखकर अच्छा लगा........

शालू - माँ कुछ दिनों से... आपकी बहुत याद आरही थी ..तोह मिलने आगयी........

माँ - अरे बीटा यह भी तुम्हारा hi घर है ....आओ पहले नास्ता करते है ....फिर बातें करेंगे.....

.

माँ शालू को लेकर दिंनिंग हॉल में लेकर गयी वह डैड .....ऋतू दी ..Addu...aur Deepu...sabhi बैठे the........mein भी वह पहुँच गया......

शालू को देखकर डैड खड़े हो गए....

डैड - ारे बीटा शालू बहुत दिनों बाद ......आओ ...बीटा ...आओ......

सहलु ने डैड क पाओ छुए....

डैड - अरे बीटा बेटियां पाओ नहीं चुटी........

बहुत ख़ुशी हुई बीटा तुम्हे dekhkar.....shalu मेरी तरफ देखने लगी.......

ाद्दु - पापा यह दी कौन है पहले भी भाई क बर्थडे में देखा था.....

डैड - बीटा यह शालू है ...मेरे फ्रंड की बेटी ......िस्सने एक बार तुम्हरे भाई की जान भी बचायी थी......

ऋतू - सच में पापा .......लेकिन यह बात तोह हमे पता hi नहीं........

डैड - बीटा हमने hi नहीं बताया.......

ाद्दु - फिर तोह यह अब हमारी पक्की वाली दी है........

ऋतू दी और ाद्दु दोनों hi शालू क पास जाकर उसे गले लगा liya.....aur अपने बिच वाली चेयर पर बैठकर बातें करने लगी

मुज़हे वह खड़े dekhkar.....mom.....Aise क्यों खड़ा है betu......aaj कॉलेज नहीं जाना .....और ..यह ..रिम्पी को क्या हुआ ....उसने भी ...मुज़हे पह कर क बताया क आज कॉलेज नहीं जा रही है......

में - माँ मुज़हे भी आज कुछ काम है ....इसीलिए आज कॉलेज नहीं जा रहा हु....

और मैं में ( शायद रिम्पी को थोड़ा और समय चाहिए सोचने क लिए .....इसीलिए नहीं आयी )

फिर मैंने भी साथ बैठकर ब्रेकफास्ट किया.............

ाड़फू स्कूल चली गयी ......डैड और ऋतू दी ...ऑफिस.......

शालू - माँ आपका घर तोह बहुत बड़ा है किसी महल की रारह ........

माँ - बीटा मैंने पहले hi कहा क अब यह तुम्हारा भी hai.....aur माँ ने शालू क माथे पर किश kiya.....aur मुज़हे कहा.....

बेतु जा शालू को पुअर घर दिखादे अच्छे se......muzhe भी अभी नारीनिकेतन क काम क लिए निकलना है.......

फिर में शालू को अपना घर दिखने लगा .....माँ भी जा चुकी थी.....

यही सोचकर की अब तोह घर में सर्वेन्ट्स क अलावा अब सिर्फ में और शालू hai......toh में उससे लेकर अपने रूम तक pahuncha.....aur दूर खोला.....

तोह अंदर का नज़ारा dekhkar.......hum दोनों की आंखें हैरानी से खुली की खुली रह गयी.....

अभी क लिए इतना hi ......

अगला अपडेट जल्द hi.......
 
सुपर्ब , शानदार, zhakkas...Review..bhai

:अप्प्लायसे: :applause::applause:

ठंकु सू मच नाइक भाई आपके सपोर्ट और कमैंट्स क लिए

:thanks::thanks::thanks:

तीसरी पत्नी का कुछ कुछ इशारा अगले अपडेट में मिलेगा भाई.....

योर अप्प्रेसिअशन इस माय रिवॉर्ड.....

प्लस स्टे कनेक्टेड.....


लेटेस्ट अपडेट 70 पोस्टेड......
 
अपडेट - 71

अब तक आपने देखा शालू अभी क साथ उसके घर आगयी..........


अभी और शालू अभी क रूम में जाने क लिए जैसे hi दरवाजा खोलते है तोह सामने देखकर दोनों हैरान हो गए......

अब आगी.........

जैसे मैंने सामने देखा तोह मेरे तोते उड़ gaye........Yaha शालू क साथ थोड़े मस्ती क अरमान जो मेरे दिल में उठ रहे the.....unnpar पानी फिर गया.........

सामने बीएड पर Shivali...aur.....Sulekha ..क साथ रिम्पी बैठी हुई thi.......aur तीनो ....मुज़हे और शालू को hi घूरे जा रहे थे.....

मैंने सोचा क बीटा बुरे फेज अब तोह..........

तभी शिवली की आवाज आयी..- ओह्हो तोह आज्ञा हमारा प्रेमी joda.........aayieye aayieye.........aise ..हुसे चुप चुप कर यहाँ ..रासलीला ..मानाने का ..पूरा प्लान बनाया tha........lekin मेरे प्यारे बलमा ......अपनी बाकी गोपियों को भी तोह याद कर लेते....

में - meinnnnn....w..ohhhh...

kyaa...haiiii...na

तभी रिम्पी boli.......Abhi कल hi मुज़हे बोल रहे थे सब क साथ एक जैसा प्यार करता hu......ab देखो ....इस्सके साथ कैसा नैन ...मटक्का चल raha...hai.......

शालू - inhe....kuch मत bolo.....ismein ...इनकी कोई गलती नहीं है....

सुलेखा - तुम तोह चुप hi करो .....न जाने क्या जादू किया है ..tumne...inpar....k ..अभी do...din हुए humari...shadi...ko.....lekin यह है ..क ....मेरे पास आने की bajaye.....isske पीछे ...पीछे ...घूम रहे हैई.....

में अब क्या bolta.....teeno ...गुस्से में भरकर हमारी तरफ देख रहे थे..........

शालू बिचारि का तोह मुँह hi बंद हो गया ...उसकी आंखों से लग रहा था की पता नहीं क अब रोई की अब रोई....

तभी शिवली क हसने की आवाज आयी.......

में समाज गया यह तीनो मेरी टांग खींच रही थी......

रिम्पी - क्या दीदी तोड़ी देर और मज़ा लेने देते the.........ab मुजह्से इन्होने सब कुछ छुपाया ....और कल जब bataya....toh ......पहले तोह बहुत कुछ लेक्चर diya.......phir ...bataya.....aur .....बाद ..mein.....bina मेरी पूरी बात सुने चले आये.........

शिवली - वह से उठकर शालू की तरफ आते hue.....chup करो तुम दोनों ........मेरी शालू को ऐसी hi रुला diya......aur शालू को गले लगा लिया.........

शालू - शिवली क पीठ पर हाथ मारते hue.........didi......aap बहुत ख़राब हो ....पता है कितना डरा दिया था आपने......

शिवली - शालू क आंसू पोछते hue....pagli कही ki.......itni सी बात पर रोटी hai.......yeh सब मैंने नहीं ....इस रिम्पी का प्लान है........

शालू - रिम्पी की बच्ची तू ..तोह रुक jaa....aaj hi हमारे ग्रुप में शामिल hui.....aur बीटा हम से hi paanga.......aur दौड़ी रिम्पी क पीछे ...

और रिम्पी चुप गयी सुलेखा क पीछे......

इनका यह खेल चल रहा tha....aur मेरा फ्यूज उड़ गया tha.......ki ...रिम्पी इनके saath......kal तोह बोल रही थी क किसी और क साथ नहीं देख सकती और आज ऐसे....

में - मैं भी हु यहाँ ....koi....kuch ...muzhe..bhi batayega.....yaa तुमलोगो का अभी कुछ और बाकी है तोह बाद में औ.....

तभी सब शांत हो gaye......Aur सुलेखा आगे आयी और ......अब आप कहा चल दिए ........यहाँ हम आपसे मिलने आये और आप जाने की बात कर रहे ho.....aur मेरा हाथ पकड़कर ले गयी और बीएड पर बिठा दिया ........

में - लो अब तोह बैठ gaya....ab तोह बताओ........

शिवली - आप तोह जानते है आपके गले में जो लॉकेट है वह मेरे मैं क साथ जुड़ा hai.....jab आपकी और रिम्पी की जो भी बात हुई वह सब मुज़हे पता है ........जब आप वह से कहल गए और तब आप बहुत परेशां the....aur में आपकी परेशानी नहीं देख सकीय इसीसलिए सुलेखा को लेकर रिम्पी क पास आगयी और usse......apne और उसके जन्म क रहस्य क बारे में विस्तार से बताया.....

जब रिम्पी को इस सत्य का पता चला क हम 14 एक hi मूल शक्ति क अंश hai......humare शरीर भले hi अलग hai.....lekin फिर भी हम सब आपस में जुड़े hai......toh उसने इस सत्य को स्वीकार कर लिया ..........

और फिर हम यहाँ आपको सरप्राइज देने आये तोह ............

में - ओह्ह तोह यह बात hai........toh चलो आज का यह दिन हम चारो साथ में गुजरते है.......

तोह तुम hi बताओ रिम्पी कहा जाए आज....

रिम्पी - में क्या बताऊ अब ......आप का साथ जहा मिल जाए वही हमारे लिए जन्नत है....

में रिम्पी को अपनी गॉड में कीचते hue.......Oh तोह अब बड़ी रोमांटिक हो रही है .....लगता है तुम्हे जन्नत दिह्कनि. hogi.....aur मैंने उसके होंटो को किश किया ...तोह वह मुज़हे धक्का देकर कड़ी हो गयी.....

रिम्पी - क्या आप भी ...इनके सामने hi.........

में - तोह क्या हुआ .....क्यों अब नहीं देखनी jannat.....abhi तोह साथ की बात कर रही थी........

सुलेखा - हां हम भी है यहाँ.......

में - तोह तुम्हे किसने रोका है yaha.....aur में उठकर उसके पास gaya......aur पकड़कर बाँहों में ले liya.......toh वह भी शर्माकर छूटने की कोशिश करने लगी....

शिवली - अब छोड़ो भी जान क्यों इन्हे परेशां कर रहे हो ....

में - परेशां कहा कर रहा हु में तोह प्रेम कर रहा हु....

शिवली - मुज़हे सब पता है ..........आपके मैं में क्या चल रहा है यह मुज़ह से चिप नहीं सकता........

में - जान तुमसे कुछ मांगू....

शिवली - मेरा तोह सब कुछ आपका hi है .....

में - तिह वचन दो क आज क बाद तुम मेरा मैं नहीं padogi....dekho मैंने भी तुम्हे वचन दिया है........

शिवली - में कहा आपका मैं पढ़ती hu....bas आपके दिल क बात मुज़हे तक पहुँच जाती है होने कैसे........

ऐसे hi कुछ देर छेद चढ़ और बातें होती रही......

फिर सब ने शालू का ताल्लुक दहकने की इच्छा जताई तोह हम सब waha....gaye....aur सारा din..Shalu क महल और वह की जगह में घूमे......

जो पोर्ट मैंने पहले असुरो क लिए बंद किया tha......usse मयासुर खोल चूका tha......toh अब मैंने अबकी बार Shalu....Sulekha....Shivali...aur...Rimpy ...और अपनी ऊर्जा को मिलकर बंद कर दिया जिससे कोई भी असुर अब ताल्लुक में प्रवेश नहीं कर सकता......

आचार्य धरा और वरुण ...से भी मिला......

फिर में शालू को जल्द hi मिलान का वचन देकर ....रिम्पी क साथ वापस आगया......

और शिवली और सुलेखा वापस नागलोक चली गयी....

यहाँ आकर अभी की फिर से वही डेली रूटीन चली ....

...

कॉलेज और संघारक दोनों की भूमिका खूब निभा रहा था....

अभी भी लोगो का गायब होना बंद नहीं हुआ था........

अभी इस बात को लेकर बहुत परेशां tha.....pata तोह था क यह काम मला कर रहा hai.....lekin बहुत प्रयत्न करने पर भी वह उस तक नहीं पहुँच पा रहा था.......

तभी अभी को ख्याल आया की मला उसकी हर गतिविधि पर कैसे नज़र रख रहा hai......jab भी उससे उसके ठिकाने का पता चलता है .....उसके पहुँचने से पहले hi ......मला वह से निकल जाता है.....

अब अभी ने गुप्त रूप से काम करने का विचार किया .....अभी ने अपना दो रूपों को फिर से प्रगट kiya.......ek को कॉलेज ..और घर की जिम्मेदारी सौपी .....और दूसरे को संगरक क रूप में अपनी टीम क पास भेज दिया .....और खुद ....अपनी मायावी विद्या se....bhesh बदलकर ......उस जगह घूमने लगा .....जहा से लोग ज्यादा गायब होते थे........

अँधेरी रात में एक आदमी .....हाथ में बॉटल लेकर ज़हमता चला आरहा tha........chalte चलते कभी वह सड़क क बिच आजाता tha.....usse कोई परवाह नहीं थी क कोई गाडी उससे उदा भी सकती hai........usne सामने से आती हुई गाडी को देखकर अपनी बॉटल से ाहृ घुट piya.......aur खली बॉटल सड़क पर दे मारी......

जैसे hi गाडी करीब आयी .....वह सड़क क बिच खड़ा हो गया.........

कार जोर से आवाज करती हुई ruki.......aur ड्राइविंग सीट पर बैठा आदमी बहार आया और जोर ..जोर से चिल्लाने लगा......

ड्राइवर - अबे अँधा हो गया है क्या बे ...haramkhor.....hat यहाँ से.....

शरभ - साले मुज़हे हरामखोर बोलता है ...तू रुक abhi.....batata hu.....aur वह झूमते हुए ड्राइवर की तरफ गया और उसका गिरेबान पकड़ liya...........Driver ने जैसे hi उससे ढाका lagaya....wih लड़खड़ाते हुए ...कार क पीछे की खिड़की से takaraya.....aur उससे पीछे सीट पर दो लड़किया बैठी देखि ......

शरभ - हेल्लो मैडम ...hoooow...r...u......

तभी ड्राइवर उसका गिरेबान पकड़ कर खींचने laga.......tabhi वह अचानक सेवाः धुल भरी आंधी चलने लगी ....वह खुश दिखाई नहीं दे रहा था.......

और जैसे hi वह आदि ख़तम hui.....tih वह को नहीं tha.....na ड्राइवर न वह दो लड़किया और नाही वह शराबी .......

सहर से बहुत दूर कही घने जंगल mein.......ek बड़ी सी गुफा में कुछ 50 क लगभग लोग बंधे हुए the.........aur वह अजीब से जीव जोर जोर से चिल्ला रहे थे.......

तभी एक काले चोंगे में वह को आया ...जिससे देखकर सभी चुप हो गए......

यह था मला सुधाकर......

मला - शांत hi जाओ तुम सब .....पहले इनमें से जो कुवारी कन्याये है उन्हें अलग करो ....

तभी बंधे हुए लोगो से शराबी निकलता hua........arre साला लगता है अपुन टपक गया लगता है सीधा नरक में आगया......

मला की तरफ देखकर .....अरे भाई यमदूत sahab.....tum अपुन को इधर लेके आयेला hai......lekin साला अपुन टपका कैसे .......

तभी उससे वह ड्राइवर भी बंधा दिखा .....ए साला ड्राइवर लगता है तुमने हमको टपकाया लेकिन साला तेरे को कौन टपका गया.......

मला - देख क्या रहे हो जल्दी करो ........कुवारी कन्याओ को अलग करो .....

तभी वह शराबी मला क सामने पहुँच --- यह भाई यह ....तोह गलत है .....साड़ी लड़किया तुम ले jaaoge........saala जीते जी तोह कोई मिली नहीं ....और अब यहाँ भी तुम बिच में आगये....

मला - पहले इससे hi ख़तम karo.....jab से देख रहा हु परेशां कर दिया है..........

शराबी ने उस्का कलर पकड़कर उठा diya......Abhi कहा परेशां हुआ है सुधाकर ...परेशां तोह अब hoga........aur उससे गुफा की दीवार पर फ़ेंक कर मारा.......

मला - aaiiiiiiii......ahhh....maar दिया ...रे ...saala...beh.....d.......usska सर गुफा से टकरा गया था और उससे खून बाह रहा था......

मला - कौन हो तुम ......

तभी सहराबी का रूप बदलने लगा और वह खड़ा था अभी.....

अभी - में हु मला तुम्हारी मौत .....

अभी को अपने सामने देखकर तोह जैसे मला क तोते उड़ गए......

मला - तुम yaha.....lekin तुम तोह इस समय ......संघारक बनकर अपनी टीम क साथ हो......

तभी मला ने सभी जीवो को इशारा kiya......aur जीव अभी की तरफ हुम्ला करने बढ़ने लगे .....

मैंने पहले एक शील्ड बनाकर सभी बंधे हुए लोगो को कवर किया फिर अपनी माया से वैसे hi जीव उनके सामने प्रगट kiye......woh सारे जीव कन्फ्यूज्ड हो गए और एक दूसरे को देखने lage......isse मुज़हे कुछ समय मिल gaya..aur सभी को में गुफा से बहार ले आया....

वह जीव मेरी माया में उलझी थे और में अपनी तलवार से उनका खत्म करने लगा ....तभी मेरी नज़र मला पर पड़ी वह भागने वाला tha......k तभी मैंने उसके पीछे एक जोरदार किक मारी जिससे वह कराहता हुआ आगे गिरा और बेहोश हो गया ...

अभी में उस और बढ़ता क एक जीव मेरे कंधे पर आ बैठा और मेरा सर उखड ने की कोशिश करने laga......toh मैंने अपनी तलवार का वॉर से उसका सर hi फाड़ दिया .......

अब विह जीव संख्या में बढ़ने लगे .....उनकी संख्या लगभग 1000 क करीब थी......

तभी एक ने अपने जबड़े से मेरा पेअर पकड़ लिया और खाने की कोशिश करने लगा ....उसके मुँह से निकलने वाली लार में पता नहीं क्या था....

मेरा पेअर ज़हूलास ने laga.....jahan जहाँ उसकी लार लगती वह वह इतनी जलन हो रही की क जैसे किसी ने तेज़ाब hi दाल दिया हो.....

तभी फिर एक ने मेरी बाजू पकड़ li.......meri माया से भ्रमित होने क कारण जीव उनसे लड़ रहे थे जो वह थे hi नहीं......

मैंने सोचा इतने सारे जीव का ऐसे तोह मुकाबला करना कठिन है....

इनके लार की जलन से मुज़हे यह तोह पता चल गया tha......k ...इन् जीवो में अग्नि तत्त्व की प्रधनता है.......

तोह मैंने जल तत्त्व की ऊर्जा से पहले वह खूब पानी बरसाया और व्युचक्र से उस जल को इतना ठंडा कर दिया क वह बर्फ जमने lagi......yeh जीव कुछ कुछ कोल्ड ब्लडेड एनिमल जैसे the......jo बर्फ में जिन्दा नहीं रह सकते......

जैसे जैसे वह वर्फ जमने lagi......wih जीव तड़प tadapkar....niche गिरने lage......aur ऐसे उन् सब का खत्म हो गया......

अब जहा मला बेहोश पड़ा था में उस और बड़ा तोह देखा मला वहासे ....गायब हो गया था.....

मैं - Sudakar......fir भाग gaya....lekib कब तक भागेगा.....

फिर मैंने सभी बांधियो की मेमोरीज में से यहाँ की मेमोरी निकल दी aur.....unhe उनके घर पहुंचा दिया......

मुज़हे पता चल चूका था क कोई मेरी hi संघारक टीम का है ..जो मेरी साड़ी khabar....MLA को पहुंचा ता tha.......aur में अपने सीक्रेट जगह पर अपनी टीम क पास ....pahuncha......jaha मेरा दूसरा रूप संधारक क रूप में टीम को कुछ इंस्ट्रक्शन दे रहा ..था

.

मुज़हे जैसे hi वह dekha......mere रूप को छोड़कर सभी हैरान हो gaye.......tabhi अर्नाल्ड बोलै...... आप यहाँ हो तोह फिर यह संघारक क भेष में कौन है.......

मैं - वह मेरा hi साथी है अर्नाल्ड ........

अर्नाल्ड - लेकिन हमसे यह बात छुपाने की क्या जरुरत है.......

में - क्यों तुम्हे कुछ परेशानी है .......अरे haa.....tum अपने मालिक को खबर नहीं कर पाए na.......aur मैंने एक जोर दर पंच उसके चेहरे पर मारा.........

उस दिन तुम hi थे न जिसने मला को मारा हुआ बताया tha......aur खुद hi उस्सकी लाश ठिकाने भी तोह तुम hi गए थे न .....और एक फ्लाइंग किक उसके छाती पर ......और वह बेहोश हो गया......

मैंने बाकियो को उससे कास कर बाँधने को कहा .....जब तक यह पूरी बात न उगल दे.... फिर में खुद उस्सको अपने हाथो से दर्दनाक मौत दूंगा

गद्दारी की सिर्फ एक hi सजा होती है और वह सिर्फ मौत है....

अभी क लिए इतना hi.....

अगला अपडेट कल.......
 
सुपर्ब , मिंडब्लोइंग , फैंटास्टिक रिव्यु भाई :yes2::applause::applause::applause:

बहुत बहुत शुक्रिया भाई आप क साथ और सुपर्ब कमेंट क लिए


:thanks::thanks::thanks:

भाई रिम्पी क डैड को सिर्फ इतना पता है की वह एकत्र टैलेंटेड है ....स्पेशल पावर्स क बारे में बाद में पता चलेगा....

ऐसे hi साथ बनाये रखे

लेटेस्ट अपडेट 71 पोस्टेड.....
 
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