- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 146,061
अपडेट - 64
अब तक आपने देखा क राकेश और गक की सेना का युद्ध असुरो क साथ चल रहा hai......Do महासुरो क भयंकर वॉर को किसी ने रोका......
अब आगे.......
सब अभी यही सोच रहे थे ...
तभी अभी को वह सब ने प्रगट होते देह्खा.......
हुआ यह था क कनक क मरने क बाद
अभी ने सुलेखा को अपने शक्ति त्रिशूल की ऊर्जा और दिव्या तलवार की ऊर्जा क घेरे में सुरक्षित कर diya.........Aur अपना एक और मायावी रूप बनाकर ...सुलेखा क साथ भेज दिया था........
और khud......kank क पूछताछ तक पहुँचने का रात ढँढ़ने laga........or उसी मार्ग को अपनी आज्ञा चक्र की ऊर्जा से खोजते खोजते अभी यहाँ पहुंचा था.........
कहते है यदि अपनी सबसे कीमती चीज़ छुपा नई हो तोह ऐसी जगह छुपाओ जहा कोई सोच भी बा सके.........
रास्ते को ढूंढ़ते ढूंढ़ते महल क मुख्या प्रांगण क दाहिने मीनार तक अभी पहुंचा hi था की यहाँ चल रहे युद्ध पर उसकी नज़र पड़ी....
अभी अब इस युद्ध को जल्दी ख़तम करना चाहता tha.......toh उस्सने अपनी तलवार से भयंकर ऊर्जा का वॉर ......उन् दोनों का ऊपर कर दिया…… पर या क्या, .....यह वॉर ज1 को लगते hi बेकार हो गया…….
उल्टा उन् दोनों ने उसी ऊर्जा को पलटकर अभी पर hi वॉर कर दिया…….
हुआ तो कुछ नहीं पर या मेरी समझ नहीं आया की मेरा सभी देवो की ऊर्जा का वॉर .... बेकार कैसा हो गया…….
उन् दोनों ने ....... फिर ... मुझे छोड़ ....baaki....sena.... पर हुम्ला कर दिया ……
यही मेरा लिया सबसे बड़ी समस्या बन गयी थी……. में सामना सा उनसे लड़ रहा हु, और वो मेरी जगह बाकियो पर हुम्ला कर रहा है……
मैंने सभी को सुरक्षित करना का सोच कर सभी को पांच तत्वों क 5 सुरक्षा चक्र में बांध दिया और इस लड़ाई सा धुर कर दिया…….
अब बचा लड़ाई में वो दोनों, में और उनका कुछ बच्चे हुए 60 या 70 असुर………
ज1: --- बचा मुझे समझ नहीं आता की कैसा तू महारक्षक banega..……..Aaj तेरी मृत्यु hi तुज़हे यहाँ लायी hai......Janne महागुरु ने तुममे क्या dekha....ha....ha...ha
ज 2:--- पर हां मन्ना पड़ेगा बहुत हिम्मत है तुज़्हेइन…. चल छोड़ रहना दे, तेरी मौत का साथ या भी किसी काम का नहीं…… सैनिको ख़तम कार्डो इससे……
उसका सैनिको न मेरी ऊपर हुम्ला करना का लिया बड़ा…… मैंने भी एक बड़ा सा पानी का भवंडर बना कर उनका ऊपर फेक दिया………
पानी का भवंडर में वो सभी इधर उधर उड़ना लगा……. और वो चल दिया इस दुनिया सा……
ज 1 : ाचा तो तू या भी कर लेता है, ाचा है पर अब इससे बच कर दिखा……..
ऐसा कहा कर उसने मेरा ऊपर आग का गोला बना कर छोड़ना सुरु कर दिया…..
एक का बाद एक गोला वो छोड़ता गया…….. जब वो रुका तो सामना का नजारा देख कर वो खुद हैरान हो गया……
क्यूंकि सामना मैंने सभी गोला को ीखता कर लिया था और एक बड़ा आग का गोला में बदल दिया था…….
पर ज 2 को कोई फरक नहीं पड़ा, बल्कि उसने एक बड़ा पानी का गोला, उस आग का गोला पर फैक कर उससे ख़तम कर दिया…….
एक बार फिर सा दोनों तरफ सा हुम्ला सुरु हुआ, इस बार मैंने उनका ऊपर अपना वायु चक्र का प्रयोग किया......
ज1 की तरफ और अपने बड़ा भवंडर में उलझा दिया…….. वही शैतान 2 पर मैंने फायर मैजिक का उसे करके उसका ऊपर एक का बाद एक अग्नि शूल से भयंकर लावा क गोले छोड़ रहा था, पर एक जगह नहीं रुक रहा था……
में लगातार जगह बदल बदल कर उसपर हुम्ला करता, जिसकी वजह सा वो एक हुम्ला को रोकता तो दूसरा उससे लगता……
इसी तरह सा मैंने कुछ देर उसपर हुम्ला करा, जिससे उससे नुकसान तो हुआ, पर उतना नहीं जितना होना चाहिए था…… वही ज1 1 न भी मेरा हवा का भवंडर को ख़तम कर दिया…….
ज 2: बहुत हुआ अब, अब संभल हमारा हुम्ला को……
या कहकर उन् दोनों न एक साथ अपनी ऊर्जा को जोड़ा और एक बड़ा सा वॉर मेरा ऊपर कर दिया…..
मैंने हाथ में शक्ति त्रिशूल को प्रगट kiya.....aur खड़ा रहा की उनका वह वॉर आकर मुझे लगे……
वो ऊर्जा का गोला मेरा पास आकर मुझे लग्न की जगह शक्ति त्रिशूल पर आकर ख़तम हो गया……
दोनों असुर यह देखकर हैरान हो गए ......मेरे इतने भयंकर वॉर से भी इन् असुरो को कुछ न होता देखकर........
मैं थोड़ा परेशान हो gaya.......tabhi मेरे अंतर्मन से एक विचार प्रगट hua......ki यह दोनों जयद्वा hai......yadi इन्हे समाप्त करना है .....तोह इन दोनों पर एक साथ भयंकर ऊर्जा का प्रहार करना होगा........
मैंने मैं से राकेश को कुछ निर्देश दिए......
जिससे राकेश समाज gaya......Aur वह गक और Shivali.....teeno उन्नासुरो क peeche......aur में उनके आगे से
अभी - अलविदा प्यारे असुर दोस्तों अब लड़ाई का समय ख़तम…….. और या कहा कर मैंने आगे से अपनी ऊर्जा का एक बड़ा सा हिस्सा का इस्तेमाल करके उन् दोनों का ऊपर वार कर दिया…….
बाकियो ने पीछे से अपनी ऊर्जा का वार कर दिया...…..
अब वह उनकी चीखा निकल रही थी और उनकी चीखा इतनी तेज थी की धुर धुर तक सुनी जा सकती थी
फिर दोनों क शरीर वही राख क ढेर में बदल gaye.......aur प्रगट हुई दोनों की आत्मा...
आत्मा - स्वागत है महारक्षक आपका , हम दोनों इस नगर क रक्षक महा नाग थे परतु किसी श्राप से हम असुर बन गए
आपका बहुत बहुत धन्यवाद अब हम मुक्त हो गए.......
पूजा स्थल तक जाने क मार्ग क भी हम मुख्या रक्षक थे.......
अब आप विषयक तक जा सकते हो ......
तभी उन्हों ने पास वाली मीनार की तरफ इशारा किया तोह देखते hi देखते वह मीनार पूरी धरती में सामगायी और प्रगट हुआ वह से निचे जाने का रास्ता.....
फिर वह दोनों आत्माये वह से चली गयी............
फिर में राकेश और गक से मिला ....शिवली मुज़हे देखकर मुस्कुरा रही thi..........lekin अभी बात करने का समय नहीं था ......तोह में गुफा तक जाने वाले मार्ग में उतर गया ...और मेरे पीछे पीछे शिवली ....Rakesh....Aur गक ...भी आगये......
उस रास्ते क आखरी चोर से कुछ धुआँ आरहा tha....hum उसी की और बड़े......
यहाँ पहुंचकर हम छिपकर अंदर देखने लगे........
वह विषक एक हवन कुंड में मॉस की आहुतिया दे रहा tha......uss कुंड क सामने की एक कस्ले पत्थर की शिला thi....aur उस्सकी क बगल में एक टेबल पर था नागमणि.....
और उस पत्थर क आगे सुलेखा सर ज़्हुककर वैथी थी.........
मुज़हे ऐसे छुपकर देखते और कुछ न करते हुए देखकर ....राकेश और GK.....hairan the.....maine उहने इशारे से चुपचाप आगे देखने का इशारा किया........
अभी विषक का हवन हो गया .......और उसने अपनी तलवार उठा li...........mere मालिक अब आपको समर्पित है मेरी आखरी bali.......meri pyari....Rajkumari सुलेखा.......
ha....ha....ha.....ab में बनूँगा सर्व shaktishali......ha...ha..ha....
और वह तलवार लेकर सुलेखा क पास pahuncha........usne तोह अपनी तरफ से सुलेखा को सम्मोहित किया था....
लेकिन मेरे द्वारा बनाये सुरक्षा घेरे क प्रभाव से वह बिलकुल ठीक थी.....
विषक - खमा करना सुलेखा.....
और जैसे hi तलवार uthayi........toh उस्सकी चिक निकल gayi.....ahhhhh....aur वह दूर जाकर गिर गया.....
हुआ यह क जैसे hi विषक वॉर करने वाला tha....Sulekha ने बड़ी फुर्ती क साथ एक जोरदार किक िडकी पसलियों में maari....jissase उसकी चीख निकल गयी और वह दूर जाकर gira.....aur फिर एक छलांग लगाकर ...सुलेखा ने नागमणि को अपने कब्जे में कर लिया.......
सुलेखा का स्पर्श पाकर hi नागमणि चमकने लगा........
अचानक बाजी पलटने क कारण विषक बड़ा हैरान हो गया.....
विषक - नाहीई यह नाहीइ हो sakta......rum कैसे मेरे सम्मोहन से बहार आगयी........
लेकिन अब तू नहीं बचे gi.........aur उस्सने अपनी कसली शक्ति का वार करने क लिए गाठ बढ़ाया .....लेकिन यह क्या .....उस्सकी कोई शक्ति काम नहीं कर रही थी.........
साधना अधूरी छूटने क कारण और नागमणि सुलेखा क पास होने क कारण उस्सकी साड़ी शक्तिया चली गयी थी ...........
अब विषक क्रोध में bharkar......talwar लेकर सुलेखा की और bada.....tabhi हम सब अंदर aagaye........hum सब को वह देहकर अब तोह वह और परेशां हो गया.........
में - wahhh...meri...naagin.....wahhh....tumahari जितनी तारीफ की जाए वह काम hai.........ab हमे भी जरा मौका दो थोड़ा......
सुलेखा - nahhi....yeh मेरा दोषी hai......mein इससे बचपन से अपना परम मित्र मानती थी ...लेकिन सत्ता क लोब में िस्सने मेरे विश्वास को toda......mere अपनों hi हत्याएं ki.......naaglok क लोगो पर अत्याचार किये........
और सुलेखा ने नागमणि मेरे हवाले कर क तलवार लेकर आगयी उसस्के सामने......
विषक ने गुस्से से तलवार का एक भर पुर वॉर सर की तरफ किया .....लेकिन
सुलेखा ने उससे ब्लॉक कर क जोर दर किक उसके पेट पर maari......jissase वह पेट पकड़कर आगे की और ज़्हुका ...और सुलेखा का घुटना सीधा उसकी नाक पर .......और बहने लगा खून उसकी नाक से......
इस वार से विषक जमीन पर गिर गया....
सुलेखा - उठ .....इतने जल्दी हार gaya....bada..apne आपको शक्तिशाली समाज रहा tha....ab क्या हुआ.......
ले अब तलवार भी छोड़ di.........aur अपनी तलवार छोड़ कर निभाते कगड़ी हो गयी...
सुलेखा को बिना हतियार देखकर विषक फिर अपनी ताकत जुटाकर खड़ा हो gaya....aur तलवार लेकर दौड़ पड़ा.......
सुलेखा ने उछलकर एक किक ुआस्के हाट पर मारी .....जिससे उसकी तलवार द्यर जाकर gayi.........aur अभी वह कुछ संभालता उसस्के pahle.......sulekha क घुटनो का जोरदार prahar.......usske दोनों टांगो क bich.......ayiiiiii.....ahhhh.....
...उसस्के अक्रोतो का तोह चुरा हो गया और वह निचे गिर कर तड़पने लगा........
वह देखकर मेरा हाथ अपने आप वह चला gaya.....aur मैं mein.......beta अभी संभल कर रहना .....नहीं ....तोह यह नागिन ...तेरे ...ande....bhi ..फोड़ ...देगी.....
यहाँ अब सुलेखा अपनी आखरी वॉर करने आगे बड़ी hi थी .......क ...शिवली ne....aage...badkar....usse..pakad..liye.....
शिवली - छोड़ दो उससे सुलेखा.......
सुलेखा - कौन हो तुम जो मुज़हे रोक रही ho........chodo muzhe.....iski मौत तोह मेरे हाथो हो गयी........
शिवली - क्या चाहती हो तुम क तुम्हारे बदले की आग में सारा नागलोक जलकर राख हो jaaye........bhul गयी तुम .....
मदन ने तुमसे क्या कहा tha............aaj इसकी साधना अधूरी रह गयी छोड़ दो isse......yeh अपनी मौत खुद मर जाएगा......
सुलेखा को मदन की बात याद aagyi.......tab पता चल की बदले की आग में अंधी होकर कितनी बड़ी भूल करने वाली थी.......
और वह अब पीछे हैट गयी और शिवली क साथ मेरी तरफ आने लगी........
तभी एक नीली रौशनी हवन कुंड से निकली और विषक और वह रहके काले पत्थर पर पड़े .....और एक भयंकर आवाज क साथ दोनों क चीथड़े उड़ गए ......
और ख़तम हुआ विषक का खेल
अभी क लिए इतना hi......
अगला अपडेट जल्द hi.......
अब तक आपने देखा क राकेश और गक की सेना का युद्ध असुरो क साथ चल रहा hai......Do महासुरो क भयंकर वॉर को किसी ने रोका......
अब आगे.......
सब अभी यही सोच रहे थे ...
तभी अभी को वह सब ने प्रगट होते देह्खा.......
हुआ यह था क कनक क मरने क बाद
अभी ने सुलेखा को अपने शक्ति त्रिशूल की ऊर्जा और दिव्या तलवार की ऊर्जा क घेरे में सुरक्षित कर diya.........Aur अपना एक और मायावी रूप बनाकर ...सुलेखा क साथ भेज दिया था........
और khud......kank क पूछताछ तक पहुँचने का रात ढँढ़ने laga........or उसी मार्ग को अपनी आज्ञा चक्र की ऊर्जा से खोजते खोजते अभी यहाँ पहुंचा था.........
कहते है यदि अपनी सबसे कीमती चीज़ छुपा नई हो तोह ऐसी जगह छुपाओ जहा कोई सोच भी बा सके.........
रास्ते को ढूंढ़ते ढूंढ़ते महल क मुख्या प्रांगण क दाहिने मीनार तक अभी पहुंचा hi था की यहाँ चल रहे युद्ध पर उसकी नज़र पड़ी....
अभी अब इस युद्ध को जल्दी ख़तम करना चाहता tha.......toh उस्सने अपनी तलवार से भयंकर ऊर्जा का वॉर ......उन् दोनों का ऊपर कर दिया…… पर या क्या, .....यह वॉर ज1 को लगते hi बेकार हो गया…….
उल्टा उन् दोनों ने उसी ऊर्जा को पलटकर अभी पर hi वॉर कर दिया…….
हुआ तो कुछ नहीं पर या मेरी समझ नहीं आया की मेरा सभी देवो की ऊर्जा का वॉर .... बेकार कैसा हो गया…….
उन् दोनों ने ....... फिर ... मुझे छोड़ ....baaki....sena.... पर हुम्ला कर दिया ……
यही मेरा लिया सबसे बड़ी समस्या बन गयी थी……. में सामना सा उनसे लड़ रहा हु, और वो मेरी जगह बाकियो पर हुम्ला कर रहा है……
मैंने सभी को सुरक्षित करना का सोच कर सभी को पांच तत्वों क 5 सुरक्षा चक्र में बांध दिया और इस लड़ाई सा धुर कर दिया…….
अब बचा लड़ाई में वो दोनों, में और उनका कुछ बच्चे हुए 60 या 70 असुर………
ज1: --- बचा मुझे समझ नहीं आता की कैसा तू महारक्षक banega..……..Aaj तेरी मृत्यु hi तुज़हे यहाँ लायी hai......Janne महागुरु ने तुममे क्या dekha....ha....ha...ha
ज 2:--- पर हां मन्ना पड़ेगा बहुत हिम्मत है तुज़्हेइन…. चल छोड़ रहना दे, तेरी मौत का साथ या भी किसी काम का नहीं…… सैनिको ख़तम कार्डो इससे……
उसका सैनिको न मेरी ऊपर हुम्ला करना का लिया बड़ा…… मैंने भी एक बड़ा सा पानी का भवंडर बना कर उनका ऊपर फेक दिया………
पानी का भवंडर में वो सभी इधर उधर उड़ना लगा……. और वो चल दिया इस दुनिया सा……
ज 1 : ाचा तो तू या भी कर लेता है, ाचा है पर अब इससे बच कर दिखा……..
ऐसा कहा कर उसने मेरा ऊपर आग का गोला बना कर छोड़ना सुरु कर दिया…..
एक का बाद एक गोला वो छोड़ता गया…….. जब वो रुका तो सामना का नजारा देख कर वो खुद हैरान हो गया……
क्यूंकि सामना मैंने सभी गोला को ीखता कर लिया था और एक बड़ा आग का गोला में बदल दिया था…….
पर ज 2 को कोई फरक नहीं पड़ा, बल्कि उसने एक बड़ा पानी का गोला, उस आग का गोला पर फैक कर उससे ख़तम कर दिया…….
एक बार फिर सा दोनों तरफ सा हुम्ला सुरु हुआ, इस बार मैंने उनका ऊपर अपना वायु चक्र का प्रयोग किया......
ज1 की तरफ और अपने बड़ा भवंडर में उलझा दिया…….. वही शैतान 2 पर मैंने फायर मैजिक का उसे करके उसका ऊपर एक का बाद एक अग्नि शूल से भयंकर लावा क गोले छोड़ रहा था, पर एक जगह नहीं रुक रहा था……
में लगातार जगह बदल बदल कर उसपर हुम्ला करता, जिसकी वजह सा वो एक हुम्ला को रोकता तो दूसरा उससे लगता……
इसी तरह सा मैंने कुछ देर उसपर हुम्ला करा, जिससे उससे नुकसान तो हुआ, पर उतना नहीं जितना होना चाहिए था…… वही ज1 1 न भी मेरा हवा का भवंडर को ख़तम कर दिया…….
ज 2: बहुत हुआ अब, अब संभल हमारा हुम्ला को……
या कहकर उन् दोनों न एक साथ अपनी ऊर्जा को जोड़ा और एक बड़ा सा वॉर मेरा ऊपर कर दिया…..
मैंने हाथ में शक्ति त्रिशूल को प्रगट kiya.....aur खड़ा रहा की उनका वह वॉर आकर मुझे लगे……
वो ऊर्जा का गोला मेरा पास आकर मुझे लग्न की जगह शक्ति त्रिशूल पर आकर ख़तम हो गया……
दोनों असुर यह देखकर हैरान हो गए ......मेरे इतने भयंकर वॉर से भी इन् असुरो को कुछ न होता देखकर........
मैं थोड़ा परेशान हो gaya.......tabhi मेरे अंतर्मन से एक विचार प्रगट hua......ki यह दोनों जयद्वा hai......yadi इन्हे समाप्त करना है .....तोह इन दोनों पर एक साथ भयंकर ऊर्जा का प्रहार करना होगा........
मैंने मैं से राकेश को कुछ निर्देश दिए......
जिससे राकेश समाज gaya......Aur वह गक और Shivali.....teeno उन्नासुरो क peeche......aur में उनके आगे से
अभी - अलविदा प्यारे असुर दोस्तों अब लड़ाई का समय ख़तम…….. और या कहा कर मैंने आगे से अपनी ऊर्जा का एक बड़ा सा हिस्सा का इस्तेमाल करके उन् दोनों का ऊपर वार कर दिया…….
बाकियो ने पीछे से अपनी ऊर्जा का वार कर दिया...…..
अब वह उनकी चीखा निकल रही थी और उनकी चीखा इतनी तेज थी की धुर धुर तक सुनी जा सकती थी
फिर दोनों क शरीर वही राख क ढेर में बदल gaye.......aur प्रगट हुई दोनों की आत्मा...
आत्मा - स्वागत है महारक्षक आपका , हम दोनों इस नगर क रक्षक महा नाग थे परतु किसी श्राप से हम असुर बन गए
आपका बहुत बहुत धन्यवाद अब हम मुक्त हो गए.......
पूजा स्थल तक जाने क मार्ग क भी हम मुख्या रक्षक थे.......
अब आप विषयक तक जा सकते हो ......
तभी उन्हों ने पास वाली मीनार की तरफ इशारा किया तोह देखते hi देखते वह मीनार पूरी धरती में सामगायी और प्रगट हुआ वह से निचे जाने का रास्ता.....
फिर वह दोनों आत्माये वह से चली गयी............
फिर में राकेश और गक से मिला ....शिवली मुज़हे देखकर मुस्कुरा रही thi..........lekin अभी बात करने का समय नहीं था ......तोह में गुफा तक जाने वाले मार्ग में उतर गया ...और मेरे पीछे पीछे शिवली ....Rakesh....Aur गक ...भी आगये......
उस रास्ते क आखरी चोर से कुछ धुआँ आरहा tha....hum उसी की और बड़े......
यहाँ पहुंचकर हम छिपकर अंदर देखने लगे........
वह विषक एक हवन कुंड में मॉस की आहुतिया दे रहा tha......uss कुंड क सामने की एक कस्ले पत्थर की शिला thi....aur उस्सकी क बगल में एक टेबल पर था नागमणि.....
और उस पत्थर क आगे सुलेखा सर ज़्हुककर वैथी थी.........
मुज़हे ऐसे छुपकर देखते और कुछ न करते हुए देखकर ....राकेश और GK.....hairan the.....maine उहने इशारे से चुपचाप आगे देखने का इशारा किया........
अभी विषक का हवन हो गया .......और उसने अपनी तलवार उठा li...........mere मालिक अब आपको समर्पित है मेरी आखरी bali.......meri pyari....Rajkumari सुलेखा.......
ha....ha....ha.....ab में बनूँगा सर्व shaktishali......ha...ha..ha....
और वह तलवार लेकर सुलेखा क पास pahuncha........usne तोह अपनी तरफ से सुलेखा को सम्मोहित किया था....
लेकिन मेरे द्वारा बनाये सुरक्षा घेरे क प्रभाव से वह बिलकुल ठीक थी.....
विषक - खमा करना सुलेखा.....
और जैसे hi तलवार uthayi........toh उस्सकी चिक निकल gayi.....ahhhhh....aur वह दूर जाकर गिर गया.....
हुआ यह क जैसे hi विषक वॉर करने वाला tha....Sulekha ने बड़ी फुर्ती क साथ एक जोरदार किक िडकी पसलियों में maari....jissase उसकी चीख निकल गयी और वह दूर जाकर gira.....aur फिर एक छलांग लगाकर ...सुलेखा ने नागमणि को अपने कब्जे में कर लिया.......
सुलेखा का स्पर्श पाकर hi नागमणि चमकने लगा........
अचानक बाजी पलटने क कारण विषक बड़ा हैरान हो गया.....
विषक - नाहीई यह नाहीइ हो sakta......rum कैसे मेरे सम्मोहन से बहार आगयी........
लेकिन अब तू नहीं बचे gi.........aur उस्सने अपनी कसली शक्ति का वार करने क लिए गाठ बढ़ाया .....लेकिन यह क्या .....उस्सकी कोई शक्ति काम नहीं कर रही थी.........
साधना अधूरी छूटने क कारण और नागमणि सुलेखा क पास होने क कारण उस्सकी साड़ी शक्तिया चली गयी थी ...........
अब विषक क्रोध में bharkar......talwar लेकर सुलेखा की और bada.....tabhi हम सब अंदर aagaye........hum सब को वह देहकर अब तोह वह और परेशां हो गया.........
में - wahhh...meri...naagin.....wahhh....tumahari जितनी तारीफ की जाए वह काम hai.........ab हमे भी जरा मौका दो थोड़ा......
सुलेखा - nahhi....yeh मेरा दोषी hai......mein इससे बचपन से अपना परम मित्र मानती थी ...लेकिन सत्ता क लोब में िस्सने मेरे विश्वास को toda......mere अपनों hi हत्याएं ki.......naaglok क लोगो पर अत्याचार किये........
और सुलेखा ने नागमणि मेरे हवाले कर क तलवार लेकर आगयी उसस्के सामने......
विषक ने गुस्से से तलवार का एक भर पुर वॉर सर की तरफ किया .....लेकिन
सुलेखा ने उससे ब्लॉक कर क जोर दर किक उसके पेट पर maari......jissase वह पेट पकड़कर आगे की और ज़्हुका ...और सुलेखा का घुटना सीधा उसकी नाक पर .......और बहने लगा खून उसकी नाक से......
इस वार से विषक जमीन पर गिर गया....
सुलेखा - उठ .....इतने जल्दी हार gaya....bada..apne आपको शक्तिशाली समाज रहा tha....ab क्या हुआ.......
ले अब तलवार भी छोड़ di.........aur अपनी तलवार छोड़ कर निभाते कगड़ी हो गयी...
सुलेखा को बिना हतियार देखकर विषक फिर अपनी ताकत जुटाकर खड़ा हो gaya....aur तलवार लेकर दौड़ पड़ा.......
सुलेखा ने उछलकर एक किक ुआस्के हाट पर मारी .....जिससे उसकी तलवार द्यर जाकर gayi.........aur अभी वह कुछ संभालता उसस्के pahle.......sulekha क घुटनो का जोरदार prahar.......usske दोनों टांगो क bich.......ayiiiiii.....ahhhh.....
...उसस्के अक्रोतो का तोह चुरा हो गया और वह निचे गिर कर तड़पने लगा........
वह देखकर मेरा हाथ अपने आप वह चला gaya.....aur मैं mein.......beta अभी संभल कर रहना .....नहीं ....तोह यह नागिन ...तेरे ...ande....bhi ..फोड़ ...देगी.....
यहाँ अब सुलेखा अपनी आखरी वॉर करने आगे बड़ी hi थी .......क ...शिवली ne....aage...badkar....usse..pakad..liye.....
शिवली - छोड़ दो उससे सुलेखा.......
सुलेखा - कौन हो तुम जो मुज़हे रोक रही ho........chodo muzhe.....iski मौत तोह मेरे हाथो हो गयी........
शिवली - क्या चाहती हो तुम क तुम्हारे बदले की आग में सारा नागलोक जलकर राख हो jaaye........bhul गयी तुम .....
मदन ने तुमसे क्या कहा tha............aaj इसकी साधना अधूरी रह गयी छोड़ दो isse......yeh अपनी मौत खुद मर जाएगा......
सुलेखा को मदन की बात याद aagyi.......tab पता चल की बदले की आग में अंधी होकर कितनी बड़ी भूल करने वाली थी.......
और वह अब पीछे हैट गयी और शिवली क साथ मेरी तरफ आने लगी........
तभी एक नीली रौशनी हवन कुंड से निकली और विषक और वह रहके काले पत्थर पर पड़े .....और एक भयंकर आवाज क साथ दोनों क चीथड़े उड़ गए ......
और ख़तम हुआ विषक का खेल
अभी क लिए इतना hi......
अगला अपडेट जल्द hi.......