Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 25 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

माँ की सीख





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,... और भैया ने जब घबड़ा के उठने की कोशिश की तो उसे और जोर से हड़का लिया,...

" तू तो हिल मत , जैसे है वैसे पड़ा रह, नहीं तो अभी कपडे धुलने वाली मुंगरी लाती हूँ उसी से तेरी खातिर करुँगी, पड़ा रह चुप चाप, जैसे आँख बंद थीं वैसे बंद कर लें ,... "

और भैया ने मारे डर के आँख बंद कर ली, ...

फिर मेरी पीठ पे दो जबरदस्त चांटे , जैसे किसी ने तेज़ाब छिड़क दिया हो,... मेरी आँखों में आंसू नाच के रह गए ,... मैं जान रही थी , अगर हिली कुछ बोलने की कोशिश की तो उसी मुंगरी से मेरी धुलाई होगी,...

फिर पेटीकोट अपना घुटने तक मोड़ के वो मेरी बगल में बैठ गयीं ,





और जबरदस्त मेरे कान का पान बना दिया, उनका रेडियो फिर चालू हो गया लेकिन अबकी स्टेशन बदल गया था.

धुन और स्वर भी बदल गया था, और बातें भी, हालांकि डांट अभी भी पड़ रही थी , लेकिन अब समझ में आने लगा की क्यों पड़ रही थी...

" मैं दस मिनट से दरवाजे पर खड़ी देख रही हूँ तुझे, सिर्फ मुंह में लेकर इतनी देर से चुसूर चुसूर कर रही हो,... अरे ऐसे चूसा जाता है , वो भी भैया का,... चल निकाल मुंह से मैं बताती हूँ,... "

अब मुझे ध्यान आया की माँ की डांट पड़ रही थी, दो हाथ भी पड़े लेकिन मैं भैया का लॉलीपॉप मुंह में ही लिए,...

और फिर माँ ने सिखाना शुरू किया,...

देख पहले तड़पा थोड़ी देर,ललचा, तंग कर उसे और सीधे ये नहीं की गप्प कर लिया , अरे भागा कहाँ जा रहा है। वो तू उसकी छोटी सगी बहन है, तू मुंह में नहीं लोगी तो कौन लेगा, .. लेकिन पहले जाँघों के ऊपरी हिस्से शुरू कर,... और वो भी सिर्फ जीभ की टिप से, और हाँ साथ साथ उसे देखती भी रह, तेरी आँखे उसे चिढ़ाती उकसाती रहें,... और हाँ हाथ , ... तो अभी शुरू में छूने पकड़ने की जरूरत नहीं,... जैसी गलती से लग गया हो, छू गया हो, बस ऊँगली से हलके से कभी सहला दो , कभी पकड़ के छोड़ दो, ... चल पहले जीभ बाहर निकाल,...





और उन्होंने खुद बड़ी सी जीभ बाहर निकाल के दिखाया, ... और मैंने भी वैसी ही जीभ पूरी की पूरी बाहर निकाली, और जैसा माँ ने कहा था, एकदम उसी तरह से,...

माँ बहुत दुलार से मेरी पीठ सहला रही थीं और मेरे कानों में इंस्ट्रक्शन दे रही थीं , फुसफुसा के जैसे भैया न सुने, ..

मेरी बेटी ठीक कर रही है, जल्द सीख लेगी, हाँ हाँ , बस होंठ न लगने दे , सिर्फ जीभ की टिप ,... होंठों का नंबर बाद में आएगा,...

माँ के कहने पर जीभ की टिप जांघ और डंडे की बीच वाली जगह पर बार बार, ...

और फिर जीभ से अब एक बार फिर से खड़ा तना लिंग, बेस से ऊपर तक नदीदी की तरह ,... लेकिन तबतक चमड़ा एक बार खुल के सुपाडे के ऊपर आ गया,...

और माँ ने झटक के मुझे अलग कर दिया और मेरे कान में कुछ सिखाया ,

और अबकी मेरे होंठ मैदान में थे , जैसे माँ ने कहा था और सिर्फ होंठों के जोर से धीरे धीरे, जैसे कोई सुहागरात के दिन दुलहन का घूंघट उतारे मैंने भैया का सुपाड़ा , फिर सिर्फ होंठों से हलके से दबाव से खोल दिया, ...





" शाबस अब लग रही है तू मेरी बेटी चल घोंट,... लेकिन पहले जीभ से,... "

और मुझे डांट भी पड़ गयी,... मैं असल में पेशाब वाले छेद से थोड़ा हट के,... लेकिन उसी के लिए डांट पड़ी,...

"स्साली, चूत मरानो चाट इसे , ... जीभ की टिप अंदर डाल के, अरे इसी से अमृत निकलता है जिससे लड़कियां गाभिन होती हैं , चाट,... "





हिम्मत थी मेरी बात न मानने की,... और थोड़ी देर में मैंने पूरा सुपाड़ा गप्प कर लिया,... हाँ जैसे माँ ने सिखाया था,... लेकिन उससे ज्यादा मैं घोंट नहीं पाती थी , पर माँ ने न सिर्फ डांटा बल्कि मेरा सर पकड़ के जबरन लंड पे दबा दिया, मैं गों गों करती रही , पर आधे से ज्यादा लंड वो घुटवा के मानी और हँसते हुए बोली की चल अब चूस।

अब मैं मस्त हो के चूस रही थी , सुपाड़ा सीधे हलक पे बार बार ठोकर मार रहा था,... खूब कड़ा, एक नया मज़ा,... इत्ता ज्यादा मैंने आज तक नहीं घोंटा था,.. लेकिन गाल फूले फूले थक रहे थे , आंखे उबल रहीं थी, लेकिन मैं मुस्करा रही थी, और मेरी उँगलियाँ कभी लंड को सहला देतीं, कभी दबा देतीं,... भैया की आँखे मस्ती से भरी थीं, उसकी हालत खराब थी , और उसकी ख़ुशी देख के मैं और जोर जोर से,





माँ बीच बीच में मेरे कान में समझा भी रही थीं, होंठों से रगड़, नीचे जीभ से चाट, और कस के चूस,...

अब तक मैं समझती थी, सिर्फ मुंह में लेके चुभलाओ, लेकिन माँ एक एक चीज़ समझा रही थीं,...

पर थोड़ी देर में मेरा मुंह एकदम थक गया, गाल फटे पड़ रहे थे, ... अच्छा तो लग रहा था भैया का मूसल मुंह में लेकिन बस मन कर रहा था बस थोड़ी देर के लिए मुंह हटा लूँ,

मैंने माँ की ओर देखा तो वो मुस्करा रही थीं, हल्के से बोलीं, मेरी रानी बेटी का मुंह इत्ती जल्दी थक गया, ... लेकिन चल अभी कुछ दिन में,... निकाल ले,...





लेकिन कान में उन्होंने कुछ और सिखाया, और मेरी आँखे चमक गयीं , ये तो उन फिल्मों में भी नहीं देखा था, वो बोलीं , मुंह से तो निकाल ले , थोड़ी देर के लिए लेकिन कोई न कोई हिस्सा चेहरे का, और इशारे से समझाया चाट तो सकती है बाहर से,...
 
लिप्स, लवली लिप्स, लिप सर्विस





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माँ बीच बीच में मेरे कान में समझा भी रही थीं, होंठों से रगड़, नीचे जीभ से चाट, और कस के चूस,...

अब तक मैं समझती थी, सिर्फ मुंह में लेके चुभलाओ, लेकिन माँ एक एक चीज़ समझा रही थीं,...

पर थोड़ी देर में मेरा मुंह एकदम थक गया, गाल फटे पड़ रहे थे, ... अच्छा तो लग रहा था भैया का मूसल मुंह में लेकिन बस मन कर रहा था बस थोड़ी देर के लिए मुंह हटा लूँ,

मैंने माँ की ओर देखा तो वो मुस्करा रही थीं, हल्के से बोलीं,

"मेरी रानी बेटी का मुंह इत्ती जल्दी थक गया, ... लेकिन चल अभी कुछ दिन में,... निकाल ले,..."





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लेकिन कान में उन्होंने कुछ और सिखाया, और मेरी आँखे चमक गयीं , ये तो उन फिल्मों में भी नहीं देखा था, वो बोलीं , मुंह से तो निकाल ले , थोड़ी देर के लिए लेकिन कोई न कोई हिस्सा चेहरे का, और इशारे से समझाया चाट तो सकती है बाहर से,...

बस मैंने धीरे धीरे निकाला बाहर लेकिन, अपने किशोर गुलाबी गोरे गोरे गालों पर, जिस पर गाँव में न जाने कितने फिसलते थे, भैया के तन्नाए खूंटे से रगड़ती रही, फिर कभी जीभ निकाल के बाहर से चाटती, तो कभी हाथों से मुठियाती हुयी छोटे छोटे सैकड़ों चुम्मी, ...





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पर माँ का इशारा जिधर था , मेरी न हिम्मत पड़ रही थी , न मन कर रहा था,...

पर माँ ने जब आँख तरेरी, ... तो मुझे उसके चांटे और मुंगरी याद आ गयी, तो बड़े बेमन से,... पहले जीभ से फिर मुंह खोल के एक,..

माँ भैया के बॉल्स, जिसको ग्वालिन भौजी पेल्हड़ कहती थीं,... की ओर इशारा कर रही थीं,...

और जब मैंने पूरा एक मुंह में ले लिया, चुभलाने लगी, साथ साथ में मेरी पतली पतली कलाइयां भैया के पगलाए लंड को मुठिया, रही थी, तो हंस के बोलीं वो,...





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" अरे पगली , यही तो रसगुल्ला है,... जिसमें सारा असली रस है, यहीं से तो रबड़ी मलाई बन के निकलती है "





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लेकिन जो अगली बात का जो उन्होंने इशारा किया वो मेरे बस नहीं था, मेरे एकदम समझ में नहीं आ रहा था,

भैया का मस्त मोटा एक बित्ते का झंडा हवा में लहरा रहा था , मोटा तन्नाया, माँ की नजरें भी वहीँ अटकी थीं,...

वो सिर्फ ब्लाउज पेटीकोट में, ब्रा तो घर में पहनती नहीं थी , कई बार बाहर भी , ... तो एक पल के लिए सोचा उन्होंने,.. फिर एक झटके में अपना ब्लाउज उतार के वहीँ फेंक दिया , जहां फर्श पे मेरे और भैया के कपडे छितरे पड़े थे,...

और उनकी मोटी मोटी चूँचिया, खूब गोरी,... मैं एकदम उन्ही पे पड़ी थी, ... और फिर मेरी ओर देखा, जैसे कह रही हों , देख सीख, बार बार न समझाउंगी,...

और उन्ही दोनों चूँचियों के बीच भैया का खूंटा, लेकिन उसके पहले अपने लम्बे खड़े निपल को भैया के सुपाड़े में कभी लगाती,तो कभी पेशाब वाले छेद में





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और जब दोनों चूँचियों के बीच दबा के उन्होंने मसलना शुरू किया तो मेरा और भैया दोनों का मुंह खुला रह गया।

इतनी कस के तो मैं अपनी मुट्ठी में नहीं पकड़ पाती थीं , जिस तरह से माँ ने अपने दोनों जोबन के बीच भैया का मूसल दबोच लिया था, ... आज भैया लाख चूतड़ पटकता उस पकड़ से नहीं निकाल सकता था, ...





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मैं बहुत खुश और मुस्करा के चिढ़ाते हुए भैया को देख रही थी और साथ में माँ को भी,

सच में बहुत सीखना था माँ से,...





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वो सिर्फ अपनी चूँचियों से अपने बेटे को नहीं चोद रही थीं, बल्कि उनकी देह का कोई हिस्सा नहीं बचा था , जो उस खेल तमाशे में नहीं शामिल था, उनके हाथों की उँगलियाँ कभी भैया के बॉल्स को सहला देतीं, कभी जाँघों पर चिकोटी काट लेतीं,... तो कभी,... मैं तो चौंक गयी,... भैया के पिछवाड़े की दरार,... सीधे वहीँ रगड़ देतीं कस के,... होंठ उनके बीच बीच में भैया की छाती पे,... और यहाँ तक की पैर भी उसके पैरों पे रगड़ रहे थे,...

और चूँचिया भी कभी खूब कस के जैसे चक्की के दोनों पाटों के बीच, वैसे भैया का खूंटा रगड़ा जा रहा था,...





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तो कभी एकदम धीमे धीमे जैसे हवा सहला के निकल जाए,... और फिर अचानक दबोच लेती, ... जैसे कोई एक्सपर्ट स्विंग बॉलर पहले दिन सुबह सुबह , तीन चार बोलने जबरदस्त आउटस्विंगर फेंकने के बाद, एक बाल एकदम से इनस्विंग करा दे,... और ओपनर बोल्ड,... बस वैसे ही,...

मैं तो बस एक एक चीज सीखने के लिए देख रही थी,

( शाम को रसोई में जब माँ आंटा गूंथ रही थी और मैं बगल में बैठी, सब्जी काट रही थी, मैंने माँ से कहा भी, माँ, तेरे जैसा तो मैं कभी भी नहीं सीख पाउंगी,... तो हंस के दुलार से एक हाथ हलके से मारते वो बोली, अरे तीन दिन में सिखा दूंगी, तुझे सब गुन ढंग,... भूलती क्यों है,... मेरी बेटी है, और कसम से, हफ्ते भर के अंदर तू मेरा नंबर डकायेगी, पक्का )





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और जब मेरी बारी आयी तो अपनी छोटी छोटी चूँची से, कहाँ २८ कहाँ ३८ पर थोड़ा बहुत तो,

लेकिन अब भैया की हालत खराब थी,...

और भैया और मुझे भी लग रहा था , माँ को भी लगने लगा, बहुत चोर सिपाही हो गया , अब असली खेल घुस्सम घुसाई वाला होना चाहिए ,...

मैं माँ का इशारा समझ के पलंग पे पीठ के बल लेट गयी, और टाँगे उठाने लगी,... लेकिन तभी माँ की डांट पड़ी,...

ऐसे नहीं, चल पेट के बल लेट, टाँगे नीची,...

और मैं पेट के बल, ...

मेरी दोनों टाँगे फर्श पे बस छू रहीं थी,...

माँ ने पलंग पे जितनी तकिया रखी थीं, सब मेर पेट के नीचे लगा के मेरा पिछवाड़ा ऊंचा कर दिया था, जिससे मेरे पैर फर्श पे बस,... मान गयी मैं माँ को,अब जो भैया धक्के मारेगा, सब तकिये पे जोर पडेगा, ... वो मारता भी था कस कस के बहुत, बस जान नहीं निकलती थी,...

माँ सिरहाने आके मेरे सर के पास बैठ गयी, दोनों अपनी टाँगे फैला के, वो अब बस पेटीकोट पहनी थी वो भी घुटने के बहुत ऊपर सरका, समझो कमर के पास सरका, सिमटा, हम दोनों के कपडे तो पहले से ही उतरे,...

माँ बहुत दुलार से मेरा सर सहला रही थी, ऊँगली मेरे बालों में घुमा रही थी, और मेरे मुंह को अपनी गोद में दुबका के,...
 
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जोरू का गुलाम ५०० पेज तक पहुंची

मोहे रंग दे ३०० पेज , तक पहुंची

आज क्रिसमस के दिन
 
भैया चढ़ा बहिनिया पे





पहली बार जब भैया ने पेला था तो अच्छी तरह से सीधे बोतल से मेरी बिल में सरसों का तेल पिलाया था , आधी बोतल, और खुद भी उसके बाद हर बार उसकी मलाई भी रहती थी , आज सुबह से दो बार मैं खुद तेल अंदर तक लगा चुकी थी और तीन बार की मलाई भी थी , लेकिन कपडा अंदर डाल के सुखाने से चूत एकदम सूखी हो गयी,

लग रहा था मेरी चमड़ी छिल गयी हो,...

दूसरा टाइम होता तो मैं जोर से चीखती, पलंग पे उछल पड़ती , पर आज माँ की मोटी मोटी जाँघों के बीच मेरा सर फंसा था चीखें घुट के रह गयी, और माँ के पैरों की पकड़ इतनी कस के मेरी पीठ पे थी,...

भैया एक पल के लिए रुका,

असल में मेरे ऊपर चढ़ाई करने का मन तो उसका बहुत दिनों से था, जब से चाची ने उसे उकसाया था, पर उसको यही लगता था की मुझे दर्द बहुत होगा यही सोच के, ...

और जब फुलवा की उसने अमराई में झिल्ली फाड़ी,... फुलवा उसके मन का डर समझती थी, इसलिए अपने सामने ही अपनी छोटकी बहिनिया चमेलिया की उसी अमराई में फड़वाई,... फिर खुद पटा के , लड़कियों के पटने का चक्कर नहीं था , भैया के मन का डर था, इसलिए दिन दहाड़े कभी गन्ने के खेत में तो कभी बँसवाड़ी में तो कभी नदी के किनारे,.. अपनी बहिनिया के अलावा चार पांच कुँवारी कच्ची कोरी लड़कियों को भैया के नीचे लिटा दिया था और उस के बाद तो,... दर्जन भर से ऊपर, कोई रोपनी वाली कोई कटनी वाली, दो चार हम लोगों के पुरवा की भी एकदम पहली बार वाली,... अब उसे खून खच्चर में खूब मजा आता था,...

लेकिन जहाँ मेरे बारे में सोचता था बस वही दर्द सोच के,...

और आज भी उसे लग गया की शायद दर्द हुआ होगा, इसलिए बस वो पल भर के लिए रुका था की माँ की डांट और गालियां एक साथ,

"अबे साले, तेरी बहन को कुत्तों से चुदवाऊ,... गांडू कहीं के अगर चोदने की ताकत नहीं है तो इतना बड़ा घोड़े का लंड लेकर काहें टहलता है, रुक क्यों गया,... '





फिर एक पल के लिए रुक के माँ को शायद बात समझ में आगयी पर न तो उनकी डांट की रफ्तार रुकी,... न गालियां कम हुईं , हाँ उनका विषय जरूर बदल गया,

" अबे अगर तेरी माँ को चोदने वाला उसके दर्द की परवाह करता न तो तू आज पैदा न होता। स्साले धक्के पे धक्का मार , ऐसे लौंडिया कोई चोदता है,... मैं तो समझती थी मेरी बेटी ही बेवकूफ है , लेकिन तू तो उससे भी बड़ा,... सुन ले कान खोल के, अगले तीन धक्के में ये बांस पूरा मेरी बेटी के अंदर, सीधे बच्चेदानी पे ठोकर लगनी चाहिए,... और अगर तीन की जगह चौथा धक्का लगा तो मैं अभी आउंगी , और उलटे तेरी गाँड़ मारूंगी,... कोई गांव की चार बच्चे वाली तेरी भौजाई नहीं है मेरी एकलौती बेटी है, मार कस कस के ,... "





मारे डर के मैंने कस के माँ की बुर को कस के चूसना शुरू कर दिया, ... माँ मेरा सर सहलाने लगी,...





और उस के बाद भाई ने क्या कस के धक्के मारे, पांच दिन से दिन रात वो मुझे पेल रहा था लेकिन ऐसी भयानक चुदाई, ... चूल चूल हिल गयी थी मेरी,... दर्द के मारे जान निकल रही थी, लेकिन पांच छह मिनट के बाद,...





वो पल भर के लिए रुक गया , शायद माँ ने इशारा किया था,...

अभी तक मेरी कमर को दोनों हाथों से पकड़ के वो कस कस के धक्के मार रहा था , लेकिन अब उसने मेरे नीचे हाथ डाल के,...

मेरी छोटी छोटी चूँची,...





माँ बेटे ने मेरी दोनों जुबना आपस में बाँट लिए थे ,बाएं वाला माँ के पास और दाएं वाला बेटा के पास,... और जैसे दोनों के बीच कोई मुकाबला चल रहा था , कौन कितनी कस के दबाता है , कौन निपल ज्यादा जोर से खींचता है, मस्ती से मेरी हालत खराब हो रही थी,...

मैं जो कर सकती थी मैंने किया,

मैंने जीभ माँ के भोंसडे में घुसेड़ दी थी और अब माँ की दोनों फांके मेरे दोनों होंठ के बीच मैं कस कस के चूस रही थी ,





और अब माँ की हालत भी खराब हो रही थी ,

लेकिन स्साले माँ के उस बहनचोद बेटे ने मेरी,... एक हाथ मेरी चूँची निचोड़ रहा था, दूसरा मेरी जाँघों के बीच मेरी जादू वाली बटन पे हलके हलके हलके सहलाते और धक्के अब फिर पूरी तेजी से चालू हो गए थे,...





हम दोनों साथ साथ झड़े,...ऑलमोस्ट,... मैं और माँ, पहले मैं फिर माँ,... माँ की सब चासनी मेरे मुंह में और मैं चुसूर चुसूर पी रही थी,

भाई और दस बारह मिनट तक चढ़ा रहा , एकदम पागल हो गया था , जब मैं तीसरी बार झड़ी तो वो साथ साथ ,... और फिर बहुत देर तक कटे पेड़ तक मेरे ऊपर गिर के पड़ा रहा,...

माँ ने खुश हो के हम दोनों को अपनी गोद में खींच के समेट लिया और खूब दुलार से चिपका लिया और बारी बारी से चूमती रहीं,...

और फिर उठ के फर्श पे गिरा अपना पेटीकोट उठा के पहन लिया, और ब्लाउज उठाया तो जहाँ उनकी बड़ी बड़ी चूँचियों की नोक रहती वहीँ पे भैया की सारी मलाई लगी थी, एक पल देख के मुस्करायीं , फिर उसे भी पहन लिया,...

और मैंने भी स्कर्ट, टॉप,...

मैंने साफ करने की कोशिश की कुछ तो उन्होंने बरज दिया, कस के। और मेरी ऊँगली पकड़ के अपने कमरे में , वहां उनकी साड़ी पड़ी थी, उसे उठा के लपेटते हुए मुझसे बोलीं,

" चल तुझे तेरी चाची के यहाँ टहला लाऊँ, तेरे मामा के यहाँ का भी कुछ सामान उसे देना है,.. और एक झोला उठा के मुझे पकड़ा दिया,.. , फिर अलमारी खोल के कुछ कपडे निकाले अखबार में लपेटे और उस के लेके,... "



 
माँ और मैं





,... मैंने साफ करने की कोशिश की कुछ तो उन्होंने बरज दिया, कस के। और मेरी ऊँगली पकड़ के अपने कमरे में , वहां उनकी साड़ी पड़ी थी, उसे उठा के लपेटते हुए मुझसे बोलीं,

" चल तुझे तेरी चाची के यहाँ टहला लाऊँ, तेरे मामा के यहाँ का भी कुछ सामान उसे देना है,.. और एक झोला उठा के मुझे पकड़ा दिया,.. , फिर अलमारी खोल के कुछ कपडे निकाले अखबार में लपेटे और उस के लेके,... "

मैं अपनी और कभी देखती, कभी उनकी ओर, मेरी दो साल पुरानी स्कर्ट टॉप, एकदम घिसी,... वो तो भैया को गरमाने के लिए मैं घर में,... मेरे उभार मुश्किल से अंटते, निप्स तो एकदम साफ़ साफ़ दीखते और स्कर्ट भी जांघ से बहुत ऊपर.... फिर ब्रा और चड्ढी कुछ नहीं,...

माँ ऐसे ही या चेंज कर लूँ , शलवार कुरता,...

माँ ने जोर घुड़क दिया,... कौन बाजार जा रही है , चाची के यहाँ तो , इसी गाँव में पैदा हुयी खेली बड़ी हुयी , यहाँ कौन शरम,... कौन तेरी ससुराल है,... चल कई काम हैं फिर वापस भी आना है , बादल फिर छा रहें हैं दो तीन घंटे में बारिश जबरदस्त होगी,... तब तक लौट आना है.





और बाहर भैया मिल गया माँ ने उसे भी दर्जन भर काम पकड़ा दिए, ...

" रस्ते में मैंने देखा था खेत में पानी लग गया है, आज भी रात में पानी बरसेगा, रोपनी कल से शुरू करवा दो,... और एक बार रोपनी वाली किसी के खेत में लग गयी न तो पकड़ना मुश्किल होगा। तो अभी चले जाओ,... अरे वहीं , फुलवा क महतारी के यहाँ, उसका घर जैसे उस टोले में घुसोगे, दो छोड़ के तीसरा है, किसी से पूछ लेना, पूरे उसके टोले में आसपास उसका कहा चलता है , ... बोलना मैंने कहा है,दस पन्दरह बीस जितनी मिलें, ... वो सबके घर जाके आज ही पक्का कर ले, और कल सबेरे ले के,... उसको सब मालूम है हर साल वही रोपनी कटनी, वही,... समझा देगी सबको, बड़के घर की बात है, जो सबके यहाँ मिलता है उससे ज्यादा ही आज तक मिला है , ज्यादा ही मिलेगा,...

और हाँ बूढ पुरनिया नहीं जवान करेर, जिनको पानी में घुसने में , साड़ी ऊपर सरकाने में कउनो परेशानी न हो,... और हाँ उसको अलग से,... "





भैया ध्यान से सुन रहा था, फुलवा का नाम सुनते ही मेरे कान खड़े हो गए थे, फुलवा तो गौने चली गयी थी लेकिन अपनी छोटकी बहिनिया चमेलिया क नेवान तो भैया से करा ही गयी थो,...

माँ ने आँचल में खोंसे रुपये खोले और दस की दो नोट निकाल के भैया को पकड़ा दिया और बोलीं,...

" और सुन, ये दो दस टकिया उसे अलग से पकड़ा देना , और जितनी रोपनी वालों को ले आएगी उसके लिए उसका अलग से,... और भागने की जल्दी न करना, घंटा भर रुकना भी पड़े,... तो फुलवा क माई जब तक सब घर जा के पक्का न कर दे, और ये भी समझा देना की अबसे ये सब काम तुम्हारे जिम्मे है , तो तुम्ही उन सबों क हिसाब किताब भी करोगे,... थोड़ा तेरा दबाव ज्यादा पडेगा। "

भाई खाली हूँ हां करता था ,.. उसके बाद माँ ने चार पांच काम और भैया को पकड़ा दिए,... और मुझे हाथ पकड़ के घर के बाहर,.

मौसम बहुत बढ़िया था, हवा में अभी भी ठंडक थी, रात भर की बारिश का असर, जगह जगह पानी के गड्ढे, कहीं पेड़ों से झरता टपकता पानी, और खूब घने घिरे बादल,... मैं दोनों झोले पकडे माँ के साथ साथ चल रही थी। कहीं दूर अमराई से झूले पर से कजरी गाने की आवाजें आ रही थीं,...





तभी सामने से एक भौजी आती दिखीं , माँ से तो दुआ सलाम उन्होंने बाद में की, पहले मुझे घेरा और सच में इस पुराने कसे घिसे टॉप में मेरे उभार खूब छलक कर बाहर आ रहे थे. बस वही,

" काहो ननद रानी जोबन लगता है खूब दबवाने मिसवाने लगी हो, कौन देवर हैं हमार,... " और हाथ लगा के हलके से मीज भी दिया,

माँ ने कुछ बोला तो उनका जवाब देते हुए माँ से ही कहा ,

" यह गाँव के कुल लड़के, देवर बाद में है नन्दोई पहले,... क्यों ननद रानी? "

और बात फिर मेरी ओर मोड़ दी,... मैं लजा रही थी तो वो और मेरे पीछे ,

" लागत है मुंह में हमरे कउनो देवर क रबड़ी मलाई भरी है,... अरे तो गटक जाओ न,... और खाली ऊपर वाले मुंह में , की नीचे वाले में भी घोंटना शुरू किया। "





फिर माँ से अपनी सास की शिकायत, ... सावन में भी मायके नहीं जाने दे रही हैं,... गुड़िया भी निकल गयी,...

उनके जाने के बाद माँ ने मुझे तरेर कर देखा, " हे जवाब काहें नहीं दिया भौजाई को, बोलना चाहिए न,... यही तो उमर है "

फिर चुपके से मेरे पिछवाड़े चिकोटी काटते हुए, मुस्करा के बोलीं , अब तो तू बड़ी भी हो गयी है , भौजाइयों को पक्का टक्कर दे सकती है,... "





मैं मुस्करा के रह दी,

लेकिन थोड़ी देर में नउनिया क छोटकी बहू, गाँव क सबसे नयकी भौजाई,... अरे वही कजरी क भौजी,... मिली और वो तो कउनो रतजगा हो केहू क सादी बियाह , पहली गारी हमहीं से शुरू करती थी, और मुंह से ज्यादा उसका हाथ बोलता था., मुझे देख के एकदम खुस , दोस्ती भी मुझसे बहुत थी,

बस चालू हो गयी,

" अरे ननद रानी, अस बारिश में तो कुल ताल पोखर भर गए , तोहार भरा की ना,... "

" अरे भौजी, भौजाई लोगन का अपने कुंआ इनार , गढ़हा पोखर भरवाए से , अगवाड़ा, पिछवाड़ा जब तक दोनों छलक न जाए , किनारे से बहे न लागे,... ननदन क नंबर कैसे लगेगा। "





अबकी मैंने भी खुल के उसी तरह जवाब दिया।

" अरे हमार ननदों घबड़ा जिन,... बस एक दो दिन और सबुर करा, ... परसों हमारे मायके से अनवार आ रहे है,... "





उस की बात काटते हुए मैं बोली ,

"तो ई कहा भौजी साफ साफ़ की सावन में मायके में भैया के साथे झुलवा झूलने जा रही हो, .. लौट के आयी के खुसखबरी सुनाना, ... मायके के यारों की तो चांदी हो गयी आपके बाहर सावन बरसेगा , अंदर वो सब बरसेंगे , हमरी भौजी क पोखरिया,... "

" और का, ... "

वो पीछे नहीं रहने वाली थी लेकिन मुझसे फिर बोली,...

"अरे तोहरे लिए इंतजाम कर रही हूँ , तो परसों मायके से हमरे भैया आएंगे,... बस आ जाना , तोहार अगवाड़े पिछवाड़े क गढ़ई अपने सामने भरवाय दूंगी, ... सफ़ेद पानी से,... , तुहुं याद करबू अपने भौजी को,... अरे हमरे देवर सब से , अपने भाइयों के साथ तो रोज झूला झुलबू , एक दिन हमरे भाई के साथ भी , स्वाद बदल जाई,... "





" ठीक है भौजी , अपने भाई से कहिया तैयारी कर के आएंगे , तोहार ननद पीछे नहीं हटने वाली, अरे गाँव के सार हैं , आपन बहिन दिए हैं , का पता कुछ और माल दे दें "

फिर हम सब अपने रास्ते लेकिन माँ अब खुश थीं की मैं जवाब देना सीख गयी थी , लेकिन रस्ते में वो दर्जिन भौजी के यहाँ रुक गयीं। और तब मुझे पता चला वो कपड़ा उनहोने क्यों निकाला था। और दर्जिन भौजी के घर में घुसते ही माँ ने समझा दिया, मुस्कराते हुए,...

" सुन तू अब बड़ी हो गयी है, गाँव में निकलते समय,... "

मुझे लगा की छोटी स्कर्ट से झांकती जाँघों को लेकर,... सच में रास्ते में दर्जनों लौंडे, सब की निगाह वहीँ,... वो तो माँ थी, वरना एक से एक कमेंट सुनने को मिलते, ... मैंने टोका,

" मैं तो कह रही थी आप से शलवार कुरता पहन लेती हूँ,... लेकिन,... "

मेरी बात काटते हुए खिलखिलाते हुए वो बोलीं,

:"अरे पगली, कभी तू बाहर गयी, बाजार, शहर , ननिहाल,... वो सब वहां के लिए सूट वूट,... अरे समझ जायेगी धीरे धीरे, गाँव में साड़ी पहनने के बहुत फायदे हैं , जितना चाहो आसानी से ऊपर उठा सकती हो,... और शलवार,... रास्ते में देख रही थी, जगह जगह कीचड़, पानी,... ये तू तूने स्कर्ट पहन रखी थी इसलिए कोई दिक्क्त नहीं हुयी,... तो मैं कपड़ा ले आयी हूँ,... तोहरे दर्जिन भौजी से तोहरे लिए बिलाउज सिलवा लूंगी, एक दो। साड़ी तो तू मेरी भी पहन सकती है , फिर कभी शहर चलेंगे या भैया के साथ जा के दो तीन ले आना। "
 
साड़ी के फ़ायदे और दर्जिन भौजी





मुझे लगा की छोटी स्कर्ट से झांकती जाँघों को लेकर,... सच में रास्ते में दर्जनों लौंडे, सब की निगाह वहीँ,... वो तो माँ थी, वरना एक से एक कमेंट सुनने को मिलते, ... मैंने टोका,

" मैं तो कह रही थी आप से शलवार कुरता पहन लेती हूँ,... लेकिन,... "





मेरी बात काटते हुए खिलखिलाते हुए वो बोलीं,

"अरे पगली, कभी तू बाहर गयी, बाजार, शहर , ननिहाल,... वो सब वहां के लिए सूट वूट,... अरे समझ जायेगी धीरे धीरे, गाँव में साड़ी पहनने के बहुत फायदे हैं , जितना चाहो आसानी से ऊपर उठा सकती हो,... और शलवार,... रास्ते में देख रही थी, जगह जगह कीचड़, पानी,... ये तू तूने स्कर्ट पहन रखी थी इसलिए कोई दिक्क्त नहीं हुयी,... तो मैं कपड़ा ले आयी हूँ,... तोहरे दर्जिन भौजी से तोहरे लिए बिलाउज सिलवा लूंगी, एक दो। साड़ी तो तू मेरी भी पहन सकती है , फिर कभी शहर चलेंगे या भैया के साथ जा के दो तीन ले आना। "





( साडी का असली फायदा मुझे आठ दस दिन बाद पता चला, जब भरी दुपहरिया, बीच बाग़ में , एक बड़े पुराने महुआ के पेड़ के नीचे, बस एक मोटी डाल के सहारे मुझे भैया ने निहुरा के, साड़ी मेरी कमर तक उठा के पेटीकोट के साथ कमर में फंसा के , हचक के चोद दिया,...

उसके बाद तो कभी गन्ने के खेत में , कभी बँसवाड़ी में,





बस उठाया सटाया और पेल दिया,... तब मुझे माँ की बात का असल मतलब समझ में आया, साड़ी का असली फायदा )

दर्जिन भौजी से जब माँ ने बताया तो माँ की सारी प्लानिंग उन्होंने एक झटके में फेल कर दी,... कपड़ा जो माँ लायी थीं, ...

बोलीं "

ये तो तोहरे नाप का है, हमरी ननद का काम तो बित्ते भर के कपडे से चल जाएगा, अभिन छोट छोट टिकोरा तो हैं, ... और ये सब कपडा बेकार हो जाएगा , काटने के बाद ,... एहसे मैं आपका बना दूंगी, एकदम नई कट का,.. और इसकी चिंता छोड़ दीजिये मेरे ऊपर,... भौजी हूँ , पहला बिलाउज अपने हिसाब से बनाउंगी,.. "





और उन्होंने एक कपडा निकाला,... और देखते ही में उछल पड़ी,...

" अरे नाहीं भौजी, ये तो एकदम झलकौवा है इससे तो सब कुछ दिखाई देगा, पहनना न पहनना सब बराबर,... "





प्याजी रंग का कपडा था मैंने हाथ में रख कर देखा। हाथ की एक एक लाइन तक साफ़ साफ़ दिख रही थी।

मैंने माँ की ओर देखा तो उन्होंने बीच बचाव करने से इंकार कर दिया सिर्फ बोलीं, ननद भौजाई के बीच में मैं नहीं पड़ती,...

" अरे घबड़ा जिन नीचे अस्तर लगा दूंगी,... लेकिन केतना लगाउंगी, कौन कट, ये सब फैसला बाद में, पहले तेरा नाप ले लूँ,... "

और जब तक मैं समझूं भौजी ने टॉप ऊपर उठा के अलग, और बोलीं, ...

" अरे जोबन तो खूब गदरा रहें, अरे दबवाना मिजवाना शुरू कर दो,... २८ से ३० होते देरी नहीं लगेगी। "





दर्जिन भौजी की ये खास बात थी की नाप आँख से देख के ले लेती थीं किसी की बायीं चूँची बड़ी है , दायीं वाली छोटी, उसका भी उन्हें अंदाज था।

पर मेरा नाप वो पहली बार ले रही थी और फिर रिश्ते की ननद तो , दबाने मसलने का मज़ा कौन भौजाई छोड़ती है, ... निपल खींच के दोनों, उसके बीच की भी दूरी नापी,..

दोनों निपल के ऊपर से भी टेप लगाया, और फिर उभारो के बेस पर भी और फिर दर्जन भर और,... तब मेरा टॉप वापस मिला।





लेकिन उसके पहले भौजी की तेज निगाह से भैया के दांत के निशान दो चार जगह लगे थे जुबना पे , वो न बचे,... वहां सहलाते बोली,

"अच्छी बात है टिकोरे पे कउनो तोता चोंच मार दिया है , लेकिन यह उमर में यही तो अमिया क सोभा है "

कब तक मिलेगा , मैंने पूछ लिया और वो बोलीं , बस घंटे भर में, सब काम छोड़ के ननद का काम,..

माँ ने मुझसे कहा ठीक है जब हम लोग चाची के यहाँ से लौटेंगे तो ले लेंगे।

चाची के यहाँ एक घंटे के लिए हम लोग गए थे, पूरे सवा दो घंटे रुके,... चलते हुए जब हम दर्जिन भौजी के यहाँ पहुंचे तो गाँव के प्रधान वही मिल गए,... बाहर ही. माँ उनसे बतियाने लगीं और मुझसे बोलीं की तू जा के झट से अंदर से ले आ, लगता है बारिश जल्दी आयेगी।

" हे ननद रानी, पहले अपना ये टॉप उतारो, ... "

मैं झिझकी तो उन्होंने खुद और ब्लाउज पकड़ा दिया,...

" भौजी बहुत टाइट हो रहा है, "





सामने शीशे में देखते मैं बोली।

" अरे ननद रानी, चोली टाइट नहीं होगी तो लौंडों का पैंट कैसे टाइट होगा, मेरी ननदिया के बाला जोबनवा को देख के "

ऊपर से चिकोटी काट के बोलीं, और जोड़ा, देख अस्तर भी लगा दिया है,...

बात सही थी , अस्तर था, मोटा भी था लेकिन दो इंच का भी नहीं होगा सिर्फ एक चौड़ी सी पट्टी,... सबसे नीचे जो उभारों को और उभार के सामने लाती, वी टाइप गला, लेकिन एकदम नीचे तक, पूरा की पूरी गहराई दिखती थी. टाइट नीचे से ज्यादा था,...

और एकदम ऊपर थोड़ा सा ढीला, जिससे अंदर का एक तो सब कुछ दिख जाए, और कोई हाथ डालना चाहे तो कोई रोक टोक नहीं, हाँ अस्तर के कारन ब्रा की जरूरत एकदम नहीं थीं, निपल के पास एकदम टाइट था, जिससे चूजे की चोंच साफ साफ़ दिख रही थी, कड़ाव, उभार, सब कुछ. सिर्फ दो बटन वो भी चुटपुटिया, ...

स्लीवलेस,... सिर्फ एक रस्सी सी पतली पट्टी गोटे की, दोनों कन्धों पर और पीछे भी वैसे ही, एलस्टिक वाली, चाहो तो बिना बटन खोले उतार दो, सरका दो,





दूसरा वाला भी, वैसा ही लेकिन गोल गला और बहुत डीप लो कट.





लेकिन छुटकी असली मुद्दे पर आना चाहती थी, बोली,

" दी, रात का हाल बता न , माँ और भैया के साथ। "





और गीता सीधे मुद्दे पे आ आगयी लेकिन उसने रात में खाना बनाते समय, रसोई में वो और माँ थी उस समय का भी हाल बताया की माँ और उस में कैसे सहेलियों से भी बढ़ के पक्की दोस्ती हो गयी,...

उसने अपनी गुलाबो के बारे में कुछ बोला तो माँ ने हड़काया, और बेलन दिखाते मजे ले ले कर बोलीं,...

" स्साली भाईचोद, चूत में भाई का लंड घोंटने में शरम नहीं, माँ के सामने और,... आज से मेरे सामने, इस घर में और बाहर भी कभी तेरे मुंह से चूत, बुर, लंड.गाँड़ और चुदाई के अलावा कुछ इधर उधर का सुना न तो ये बेलन देख रही है,... तेरे भैया के लंड से भी बड़ा है , तेरी गाँड़ में घुसा के फाड़ दूंगी। "

और गीता भी खिलखिलाते बोली, ...

" अरे माँ मेरे भाई को समझती क्या हो, अभी तो बहनचोद ही बना है, जल्द ही मादरचोद बन जाएगा, वो भी बहन के सामने , बोल चुदवायेगी, बेटा चोद "

माँ भी हँसते बोली

,' स्साली रंडी की, पक्की छिनार है। अरे जिसके बाप से चुदवा के उसे पैदा किया, उसके लौंड़े से डरूंगी, उसके बाप से नहीं डरी तो,... बोल देना बहनचोद को,... "





जल्द खाना बना के तीनों खा के,.... माँ ने कहा था,... आज हम तीनो जैसे जब तुम दोनों छोटे थे, मेरे साथ सोते थे , उसी तरह, मेरे कमरे में वहां बिस्तर भी बड़ा है,...
 
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