Adultery " रेल, रात और वो ..." - Page 3 - SexBaba
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Adultery " रेल, रात और वो ..."



अपडेट - 18


रूद्र धीरे से बिस्तर से उठा. उसकी जींस की ज़िप की आवाज़ कमरे की ख़ामोशी में हलकी सी गूंजी. वह कुछ पल तक सपना को देखता रहा ….वह अभी भी गहरी नींद में डूबी हुई थी. उसका नंगा बदन चादर के एक हिस्से से ढाका हुआ था, बाल बिखरे हुए, चेहरा थकान और तृप्ति से भरा हुआ. रात भर की मस्ती के निशाँ अभी भी उसके जिस्म पर मौजूद थे ….चूचियों पर लाल निशाँ, गर्दन पर काटने के मार्क्स, और जाँघों पर सुख चुके रास की हलकी लकीरें.

रूद्र झुका और सपना के पसीने से नाम माथे पर एक नरम, प्यार भरा किश किया. फिर उसने उसके कान के बिलकुल पास मुँह ले जाकर धीरे से, शरारत भरी आवाज़ में फुसफुसाया:

“सुनो… मुझे काम पे निकलना है. तुम भी उठ कर वक़्त से निकल जाना. और हाँ…” उसने थोड़ा रुक कर मुस्कुराते हुए कहा, “जल्दी से कपडे पहन लेना. रोहन आने वाला है. अगर उसने तुम्हे इस हाल में देख लिया न ….. ….तोह फिर तुम्हे उसके साथ भी वही सब करना पड़ेगा जो मेरे साथ किया है… शायद उससे भी ज़्यादा. :डी”

सपना ने नींद में हलके से होठ हिलाये. उसकी आँखें आधी खुली, मगर थकन इतनी गहरी थी की उसने रूद्र की बात को सिर्फ एक धीमी सी सिसकी के साथ अनसुना कर दिया. वह बस थोड़ा सा करवट ले कर पेट के बल लेट गयी. चादर उसकी गोल गांड पर से सरक गयी, उसकी पीठ और भारी चूचियां अभी भी नंगी थी. वह फिर से गहरी नींद में डूब गयी ….जैसे उसका जिस्म अभी भी कल रात के नाशे में hi बंधा हुआ हो.

रूद्र कुछ पल तक उसको देखता रहा. उसकी आँखों में एक शरारती मुस्कान थी. उसने धीरे से दरवाज़ा खोला, एक अंतिम नज़र सपना पर डाली और कमरे से बहार निकल गया.

कमरे में अब सिर्फ सपना की धीमी सांसें और सुबह की ठंडी हवा की सरसराहट बाकी रह गयी थी.

कुछ देर बाद सपना को हल्का सा होश आने लगा. यह नींद से जगाने वाला होश नहीं था ….यह उसके जिस्म में सुलगती हुई एक गहरी हलचल की वजह से था. वह अभी भी पेट के बल लेती हुई थी, उसका गोरा नंगा बदन चादर से सिर्फ आधा ढाका हुआ. सुबह की धुप dheere-dheere कमरे में नीली रौशनी को पीछे धकेल रही थी और एक नरम, सुन्दर उजाला फैला रही थी.

अचानक उसे महसूस हुआ की उसकी छूट की नरम दरारों पर कोई गरम, सख्त चीज़ dheere-dheere रगड़ खा रही थी. वह अभी पूरी तरह अंदर नहीं घुसी थी ……बस उसकी गीली, फूली हुई पंखुड़ियों के bahar-bahar फिसल रही थी. कभी ऊपर की तरफ उसकी क्लीट को छू जाती, कभी नीचे उसकी दरार को सेहला देती.

सपना की सांस एक पल के लिए रुक गयी. उसको लगा रूद्र अभी भी गया नहीं है और निकलने से पहले एक बार फिर उसकी प्यास बुझाने आया है.

उसने jaan-boojh कर आँखें बंद राखी और नींद का नाटक करने लगी, ताकि यह एहसास poora-pura महसूस कर सके. उसकी छूट में फिर से वह पुराणी गर्माहट दौड़ने लगी. उसकी नरम पंखुड़ियां उस मोती, गरम टोपी के स्पर्श से और भी गीली होने लगी. वह धीरे से अपनी कमर को ऊपर उठाने लगी …..सिर्फ थोड़ा सा, जैसे चुपके से उस औज़ार को अंदर आने का रास्ता दे रही हो.

जैसे hi उसने कमर उठायी, वह मोटा गरम लुंड एक hi सरसराहट के साथ उसकी गीली दरारों को चीरते हुए सीधा अंदर घुस गया.

“Uhhhhhh…mmmmmmm!”

सपना के मुंह से एक गहरी, कांपती सिसकी निकल गयी. उसकी आँखें एकदम से खुल गयी. उसकी छूट रात भर की चुदाई से अभी भी थोड़ी टाइट और सेंसिटिव थी, इसलिए यह अचानक गहरा पेनेट्रेशन उसके पूरे जिस्म में बिजली की तरह दौड़ गया. उसकी उँगलियाँ चादर को कास कर पकड़ ली और उसकी पीठ अपने आप टेडी हो गयी.

पहले hi do-chaar झटकों में सपना को कुछ अजीब सा लगा. यह एहसास रूद्र जैसा नहीं था. रूद्र का लुंड लम्बा और तेज़ था, लेकिन यह औज़ार उससे काफी ज़्यादा मोटा महसूस हो रहा था. इसकी रगड़ उसकी छूट की दीवारों पर एक अलग hi तरह की झनझनाहट पैदा कर रही थी.

स्टाइल बिलकुल अलग था ….स्लो, गहरा और dhire-dhire अंदर तक उतरता हुआ. हर धक्का इतना गहरा था की सपना को अपनी छूट के हर इंच का नशा alag-alag महसूस हो रहा था. उसे हर एक इंच को पूरा फील करने का वक़्त मिल रहा था.

सपना ने सोचा शायद रूद्र subah-subah थोड़ा सेंसुअल मूड में है. इसलिए उसने पीछे मुद कर देखने की कोशिश नहीं की. बस आँखें और कास के बंद कर ली और उस नए, गहरे सुकून में खोने लगी.

Dheere-dheere उसे अपनी नंगी पीठ पर एक bhari-bharkam वज़न महसूस होने लगा. कोई उसके ऊपर पूरी तरह लेट चूका था. Garam-garam, भरी सांसें उसके कान के पास टकरा रही थी. वह सांसें गहरी और भरी थी, लेकिन उनकी महक रूद्र से बिलकुल अलग थी.

सपना का दिल एक पल के लिए ज़ोर से धड़का ……क्या यह रोहन है?

सपना को शक हो चूका था की यह रूद्र नहीं है, लेकिन उसने पीछे मुद कर देखने की कोशिश भी नहीं की. उसका जिस्म इस वक़्त इतना गरम और प्यासा हो चूका था की अब उसे फ़र्क़ नहीं पद रहा था की पीछे कौन है. उसे सिर्फ उस मोठे लुंड की गहरी चुदाई चाहिए थी ….वह लुंड जो उसकी छूट के kone-kone को सेहला रहा था.

सपना पेट के बल गड्ढे पर लेती हुई थी. उसकी सांसें अभी भी रूद्र के साथ बितायी रात की थकन से भरी थी, मगर यह नया स्पर्श उसे किसी और hi दुनिया में ले जा रहा था. वह मोटा औज़ार जो उसकी छूट के होठों को चीरते हुए अंदर घुस रहा था, रूद्र के लुंड से कहीं ज़्यादा भरी था.

हर धक्का लगते hi सपना को लगता जैसे उसकी छूट की दीवारें पहात जाएँगी. मगर उस खिंचाव में जो मज़ा था, वह उसे और ज़्यादा पागल कर रहा था. उसने महसूस किया की उस ने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर गड्ढे पर टिका रखे थे, जिससे उसका पूरा वज़न उसकी नंगी पीठ पर पद रहा था. वह बहुत हैवी और मज़बूत लग रहा था.

सपना ने अपने दोनों हाथ तकिये के नीचे दबाये और मुट्ठियां कास ली. जैसे hi वह मर्द अपना लुंड बहार खींचता, उसे एक गहरा khaali-pan महसूस होता. उस khaali-pan को भरने की तड़प में वह अपनी कमर इतनी ऊपर उठा देती की उसकी गांड हवा में तन्नी हुई नज़र आती.

और फिर...

'फैट!'

वह पूरी ताक़त से वापस अंदर धंस जाता. सपना की कमर झटके से नीचे गिरती और वह गड्ढे से बिलकुल चिपक जाती. इस बार धक्का इतना गहरा था की उसे महसूस हुआ की उस मोटा सर उसकी बच्चादानी से ज़ोर से टकराया है.

"उफ्फ्फ्फ़... aaaahhh...ahmmmm"

सपना के मुंह से एक लम्बी, कांपती सिसकी निकली जो गड्ढे में hi ढबाक गयी.

उसने महसूस किया की पीछे खड़ा मर्द (जो शायद रोहन था) अपनी रफ़्तार jaan-bujhkar स्लो रखे हुए था. हर धक्के के बाद वह थोड़ा रुक जाता, अपने मोठे लुंड को उसकी छूट के अंदर hi घूमता, जैसे उसकी हर एक नस और हर एक दीवार को टटोल रहा हो.

सपना का पूरा जिस्म थरथरा रहा था…….

वह मर्द अब और निचे झुक गया. उसका नंगा सीना सपना की नरम पीठ से बिलकुल चिपक गया. उसके सीने के सख्त बाल सपना की चमड़ी में चुभ रहे थे. उसने अपना चेहरा उसके कान के बिलकुल पास ले आया. कुछ बोलै नहीं, बस उसकी गरम और भरी सांसें सपना की गर्दन पर पसीने की बूँदें गिरा रही थी.

सपना ने आँखें बंद राखी रही. वह डर रही थी की अगर उसने पीछे मुद कर देखा तोह यह नशा टूट जायेगा. या फिर शायद उस शर्म का सामना न कर पायेगी जो मज़े के नीचे डाब रही थी. उसने डेंटन से चादर का कोना पकड़ लिया और ज़ोर से भींचने लगी.

हर धक्का अब और भी ज़बरदस्त हो रहा था. वह सपना की गांड के नरम मॉस को दोनों हाथों से कास कर पकड़ रहा था और दोनों तरफ फैला रहा था, ताकि उसका मोटा लुंड बिना रुकावट के गहरे andar-bahar घुसे. सपना को महसूस हो रहा था की उसकी छूट अब पूरी तरह फूल चुकी है. रात भर की चुदाई के बाद वह हिस्सा पहले से hi बहुत सेंसिटिव था, और अब यह नया दवाब उसे पागल कर रहा था.

Dheere-dheere उसका स्लो और डीप स्टाइल बदलने लगा. वह अब रफ़्तार बढ़ा रहा था. हर धक्के के साथ सपना का सर तकिये पर झटके खा रहा था.

"रूद्र... ओह्ह्ह... तुम इतने... बदल कैसे गए..." सपना ने होश और बेहोशी के बीच महकते हुए कहा, हालाँकि वह जानती थी की यह रूद्र नहीं है.

उसने कोई जवाब नहीं दिया. बस उसने सपना की कमर को दोनों हाथों से कास कर पकड़ा और उसे ऊपर उठा लिया. अब सपना घुटनो और हाथों के बल थी ……डोगग्य स्टाइल में. मगर उसने अब भी पीछे नहीं देखा. वह पीछे से उसे थोक रहा था.

हर रगड़ पर सपना को लग रहा था की उसका पानी निकलने वाला है. उसकी छूट से गीली ‘chapat-chapat’ की आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी. वह इतनी शिद्दत से धक्के मार रहा था की सपना के दोनों उभार नीचे लटक कर बुरी तरह उछाल रहे थे.

"मैं... मैं झड़ने वाली हूँ... प्लीज... और ज़ोर से!" सपना अब चिल्ला रही थी. उसे किसी की परवाह नहीं थी.

उस मर्द ने सपना के बाल पीछे से पकडे और उसका सर ऊपर खिंच लिया. फिर उसने teen-chaar भयंकर ठोकरें मारी. सपना का पूरा जिस्म अकड़ गया. उसकी छूट ने उस मोठे लुंड को जानवर की तरह भींचा और उसी पल उसने भी अपना गरम, गाढ़ा माल सपना की गहराईयों में भर दिया.

सपना का पानी और उसका माल मिल कर गड्ढे पर रिससने लगे. दोनों एक दूसरे पर ढेर हो गए. सपना हांप रही थी, उसकी आँखों से मज़े के आंसू बह रहे थे. उसने महसूस किया की उसने उसके कान पर हलकी सी किश की और धीरे से अपना लुंड बहार निकाल लिया.

दस मिनट तक दोनों सिर्फ अपनी भरी साँसों को सुनते रहे. जब होश आया, तोह दोनों ने एक दूसरे की तरफ देखा. कोई chilla-pukari नहीं, कोई माफ़ी नहीं. रोहन ….जो रूद्र से उम्र में थोड़ा बड़ा था, पतला, लम्बा और गहरी आँखों वाला ….सपना को ग़ौर से देख रहा था.

सपना को फर्क नहीं पद रहा था की यह कौन है. रोहन की आँखों में एक ऐसी कशिश थी जो उसे अपनी तरफ खिंच रही थी. रोहन थोड़ा सेहमा हुआ था. वह तोह बस कमरे में आया था, लेकिन इतनी गोरी, और नंगी लड़की देख कर उसका नशा जाग उठा था और वह खुद पर कण्ट्रोल नहीं रख पाया. अब उसे लग रहा था की शायद सपना नाराज़ होगी, मगर सपना की आँखों में शिकायत नहीं, सिर्फ एक नशा था.
 
अपडेट - 19

सपना ने थकी हुई नज़रों से दीवार पर लगी घडी देखि …….दोपहर के 1 बज रहे थे. उसने एक लम्बी, गहरी सांस ली और दोबारा आँखें बंद कर ली. थकन इतनी गहरी थी की वह वही रोहन के बगल में लेती हुई दोबारा नींद की अघोष में खो गयी.

जब उसकी आँखें दोबारा खुली, तोह वक़्त 2:30 हो चूका था.

रोहन अब भी उसके पास लेता हुआ था, चुपचाप उसे देखे जा रहा था. सपना धीरे से उठी. उसके जिस्म के हर जोड़ में एक मिठास भरा दर्द था — गांड में, छूट में, कमर में… सब जगह वह थकान महसूस कर रही थी.

उसने रोहन की तरफ इशारा किया, आवाज़ में थोड़ी सी बेबसियत के साथ बोलै,

"बाथरूम...?"

रोहन थोड़ा हड़बड़ाते हुए अटैच्ड बाथरूम की तरफ इशारा कर दिया. सपना अंदर गयी. जब शावर का ठंडा पानी उसके गरम बदन पर गिरा, तोह उसे फिर से वह एहसास हो गया ……रोहन के मोठे लुंड की रगड़ और गहराई का. उसकी छूट अभी भी थोड़ी सूजी हुई थी. उसने dheere-dheere खुद को साफ़ किया, पसीना और उनके मिले हुए माल को धोया.

नाहा कर बहार आयी तोह उसने अपना बैग टटोला. उसने पहले एक सिंपल वाइट ब्रा पहना, फिर उसके ऊपर एक लूसे वाइट शर्ट दाल ली. निचे उसने वही पुराणी ब्लू जीन्स चढ़ा ली …..जो न बहुत टाइट थी न ढीली, मगर उसकी गोल और उभरी हुई गांड को अच्छे से हाईलाइट कर रही थी.

जब सपना तैयार होकर बहार आयी, उसने देखा की रोहन अब भी बीएड पर लेता हुआ उसे hi घूर रहा था. उसकी नज़रें उसके गोर बदन पर वाइट शर्ट के अंदर से उभरते हुए उभारों पर अटक रही थी. शर्ट का फैब्रिक उसके टाइट बूब्स पर अच्छे से लपट रहा था और उसकी जीन्स उसकी गांड की गोलाई को बहुत hi सेक्सी तरीके से हाईलाइट कर रही थी.

"क्या देख रहे हो?" सपना ने बाल संवारते हुए, हलकी सी स्माइल के साथ पुछा.

रोहन थोड़ा झिझकते हुए बोलै, "तुम... तुम जा रही हो क्या?"

"हाँ... जाना तोह पड़ेगा," सपना ने जवाब दिया, लेकिन उसकी आवाज़ में इतना दम नहीं था. उसके अंदर की बात कुछ और hi कह रही थी.

इतने दिनों की थकन और सुबह की भयंकर चुदाई के बावजूद भी उसकी छूट में अभी भी तितलियाँ उड़ रही थी. उसकी छूट अभी भी हलकी सी सूजी हुई थी और उसमें वह लुंड की धमक वापस महसूस करने की प्यास जग रही थी. वह चाहती थी की रोहन उठकर उसे पीछे से खिंच ले, उसकी जीन्स का बटन खोले और उसे वापस बीएड पर धकेल दे.

एक दूसरे की आँखों में एक गहरी प्यास थी. सपना ने महसूस किया की अगर रोहन अभी भी शर्मा रहा है और कदम नहीं बढ़ाया, तोह वह खुद को रोक नहीं पायेगी. उसका जिस्म अभी भी उसके मोठे लुंड की याद में सुलग रहा था.

सपना खुद चल कर रोहन के पास पहुँच गयी. इस वक़्त वह अपने होश में नहीं थी — उसका जिस्म उससे सवाल कर रहा था. उसने रोहन का हाथ पकड़ा, उसे बिस्तर से उठाया और एक झटके से दीवार से सत्ता दिया. रोहन हैरान था, लेकिन उसकी आँखों में झट से आग सी जल उठी.

सपना ने बिना एक सेकंड भी वास्ते किये रोहन के होठों पर अपने गरम होठ रख दिए. यह स्लो मगर गहरा और भूखा स्मूच था. उसकी ज़बान रोहन के मुंह में घुस कर उसकी ज़बान से लिपट गयी, जैसे उसे छोड़ने को बेचैन हो. सपना की वाइट शर्ट के नीचे से उसकी गरम सांसें रोहन के सीने पर टकरा रही थी.

रोहन ने अब अपनी साड़ी झिझक छोड़ दी. उसने दोनों हाथ पीछे ले जाकर सपना की भरी और नरम गांड को जीन्स के ऊपर से hi कास कर पकड़ लिया और ज़ोर से भींचने लगा. सपना के मुंह से एक दबी हुई कराह निकली, “उफ्फ्फ्फ़…” और उसने अपनी उँगलियाँ रोहन के बालों में फंसा दी.

"अभी तोह तुम जा रही थी...?" रोहन ने उनके lipat-te होठों के बीच फुसफुसाते हुए कहा.

"जाना है... लेकिन पहले थोड़ा और नशा ले लू," सपना ने जवाब दिया, उसकी आवाज़ में प्यास और बेचैनी थी. उसने तुरंत रोहन की शर्ट के बटन खोलने शुरू कर दिए. कमरे में एक बार फिर से गर्मी बढ़ रही थी, और इस बार का सिलसिला पहले से भी ज़्यादा मदहोश होने वाला था ….

दीवार से सताय हुए रोहन और सपना के बीच की हवा अब इतनी गहरी और गरम हो चुकी थी की सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था. रोहन, जो अब तक डर और हैरानी के बीच झूल रहा था, सपना के इस बेबाक और भूखे हमले से पूरी तरह जोश में डूब गया.

सपना की वाइट शर्ट के नीचे उसकी धड़कन इतनी तेज़ और ज़ोर से dhak-dhak कर रही थी की रोहन को अपने सीने पर साफ़ महसूस हो रही थी. उसकी गरम सांसें रोहन के होठों पर पद रही थी, और उसके बदन की गर्मी उसके अपने जिस्म में महसूस हो रही थी …

रोहन अब बिलकुल बेकाबू हो चूका था. उसने सपना की कमर को और कास कर पकड़ लिया, जैसे अब उसे छोड़ने का कोई इरादा hi नहीं था

सपना ने स्मूच को और गहरा कर दिया. उसने अपनी गरम ज़बान रोहन के मुंह में ऐसे दाखिल की जैसे उसका सारा रास निचोड़ लेना चाहती हो. वह zor-zor से किश कर रही थी, उसकी ज़बान उसकी ज़बान के अराउंड लपट रही थी.

रोहन के बड़े हाथ सपना की जीन्स के ऊपर से hi उसकी भरी गांड पर टिक गए. उसने महसूस किया की कितनी नरम, लचकदार और गरम थी वह गांड. उसने अपने नाख़ून जीन्स के ऊपर से hi उसकी गांड में गढ़ दिए और ज़ोर से मसलने लगा.

“आह्हः… रोहन…” सपना ने होठों के बीच से hi एक मादक और कांपती सिसकी छोड़ी.

रोहन ने सपना को दीवार से हटाया, उसे घुमाया और खुद दीवार से टिक गया. फिर उसने सपना को ज़ोर से अपनी तरफ खिंच लिया. उसने तुरंत सपना की वाइट शर्ट के अंदर हाथ दाल दिया और उसकी वाइट ब्रा के ऊपर से hi उसकी बड़ी और भरी चूचियों को कास कर पकड़ लिया. उसकी उँगलियाँ ब्रा के कप में डाब रही थी.

“तुम… तुम इतनी सुन्दर हो… मैंने कभी नहीं सोचा था,” रोहन ने भांपते हुए उसकी गर्दन पर अपने गीले होठ रख दिए और चूसने लगा.

सपना ने अपना सर पीछे झुका दिया, आँखें बंद कर ली. “तोह देख hi क्यों रहे थे ी… मेरे पास क्यों नहीं आये पहले?” सपना ने उसे छेड़ते हुए, हवस भरी आवाज़ में कहा. उसकी आँखों में अब सिर्फ प्यास थी.

रोहन ने बिना कोई जवाब दिए सपना की वाइट शर्ट के बटन ek-ek करके खोलने शुरू कर दिए. सपना ने उसे नहीं रोका, बल्कि खुद अपने कंधे थोड़े झुका दिए ताकि शर्ट धीरे से सरक कर फर्श पर गिर जाये.

अब सपना सिर्फ अपनी वाइट ब्रा और जीन्स में उसके सामने कड़ी थी. रोहन की नज़रें उसकी नंगी पीठ और ब्रा में से बहार निकलने को तड़प रही भरी चूचियों पर अटक गयी थी.

उसने ब्रा के हुक को एक झटके में खोल दिया. सपना की दोनों बड़ी और गोल चूचियां आज़ाद होकर ज़ोर से उछाल पड़ी. रोहन ने तुरंत दोनों हाथों में उन्हें भर लिया और इतनी ज़ोर से मसलने लगा की सपना के मुंह से एक dard-bhari मगर मीठी चीख निकल गयी.

“ुह्ह्ह्ह… रोहन… धीरे… कल से बहुत बुरा हाल है मेरा…” सपना ने कांपती आवाज़ में कहा, मगर उसने खुद रोहन का सर पकड़ कर अपनी चूची पर और ज़ोर से चिपका दिया.

रोहन ने उसका सख्त निप्पल अपने मुंह में भर लिया और zor-zor से चूसने और ज़बान से चाटने लगा. सपना का पूरा बदन थरथरा उठा. उसकी छूट, जो अभी नाहा कर साफ़ हुई थी, दोबारा से गीली होने लगी थी. उसका गरम रास dheere-dheere उसकी जीन्स के अंदर भिगोने लगा था.

रोहन ने सपना की जीन्स की ज़िप निचे की. जीन्स टाइट होने की वजह से उसे उतरने में थोड़ा वक़्त लगा. जब सपना ने खुद अपनी जीन्स और पंतय दोनों को एक साथ निचे सरका दिया, तोह वह पूरी तरह नंगी हो गयी.

रोहन ने उसे ज़ोर से गड्ढे पर पटक दिया और खुद जल्दी से अपनी पंत उतर दी. सपना ने देखा ….रोहन का लुंड रूद्र से काफी अलग था. वह ज़्यादा मोटा, ज़्यादा लाल था, जैसे अभी फटने वाला हो.

रोहन उसके ऊपर चढ़ गया. सपना ने तुरंत अपने दोनों पेअर उसकी कमर के चारों तरफ लपेट लिए और उसे अपने से चिपका लिया.

“अब और इंतज़ार नहीं… प्लीज रोहन…!” सपना ने गिड़गिड़ाते हुए कहा.

रोहन ने अपने मोठे लुंड की टोपी को उसकी गीली छूट पर रगड़ने लगा. सपना की नरम दरारें उसके मोटेपन को महसूस करके फाड़ने लगी. फिर उसने एक ज़बरदस्त झटका मारा और अपना पूरा मोटा लुंड एक hi धक्के में सपना की छूट में घुसा दिया.

“आआआहहहहहहह! रोहणणन्न…!”

सपना की चीख पूरे कमरे में गूँज गयी. यह धक्का इतना गहरा था की उसको लगा जैसे कोई लोहे का सरिया उसकी कोख तक पहुँच गया हो. उसकी छूट की दीवारें ज़ोर से खिंच गयी.

रोहन ने रफ़्तार बढ़ानी शुरू कर दी. हर धक्का ‘phat-phat’ की ज़ोर की आवाज़ के साथ उसकी छूट के अंदर तक जा रहा था.

गद्दे की पुराणी स्प्रिंग अब रोहन के हर धक्के के साथ एक अजीब सी चीख निकल रही थी, जो सपना की सिसकी के साथ मिलकर कमरे में एक nasha-aawar संगीत पैदा कर रही थी. रोहन अब किसी अपनी रफ़्तार से सपना को ठोंक रहा था. उसका स्टाइल रूद्र से बिलकुल अलग tha….jahan रूद्र की रफ़्तार में एक बचपना और तेज़ी थी, वहीँ रोहन के हर वॉर में be-reham तबाही थी. वह हर धक्का पूरी ताक़त से मरता, और जब उसका मोटा लुंड सपना की गहराईयों को छू लेता, तोह वह उसे वहां रोक कर धीरे से घूमता.

“ओह्ह्ह… गॉड… रोहन… तुम… तुम तोह उससे से भी खतरनाक हो… उह्ह्ह… ahhh…mmmm!”

सपना की मॉनिंग अब तेज़ और be-kaabu हो रही थी. उसका गोरा बदन पसीने से चमक रहा था और उसकी आँखें छत की तरफ पथराई हुई थी. वह लगातार अपने निचे वाले होठ को डेंटन टेल दबा रही थी, इतनी ज़ोर से की वहां खून उतर आया था, ताकि वह इस बेहिसाब मज़े के बीच बेहोश न हो जाये. हर धक्का उसकी रीढ़ की हड्डी में एक बिजली दौड़ता जो सीधा उसकी छूट में जा कर धमाका करती.

रोहन ने सपना के दोनों नरम हाथों को उसके सर के ऊपर ले जा कर एक hi हाथ से कास कर पकड़ लिया. उसने अपना पूरा वज़न सपना पर दाल दिया, जिससे उसकी छाती के सख्त बाल सपना के गोर उभारों पर रगड़ खाने लगे.

“बोलो… किसका लुंड ज़्यादा मज़ा दे रहा है? रूद्र का या मेरा?” रोहन ने भांपते हुए पूछा, उसकी आँखें सपना की आँखों में आग की तरह गाड़ी थी.

सपना ने तड़पते हुए, अपनी कमर को ऊपर उछालते हुए जवाब दिया, “तुम्हारा… तुम्हारा बहुत मोटा है… ओह्ह्ह… Rohan…ahhhhh… रुको मत… और ज़ोर से… हाँ… बिलकुल wahin…shhhhh!”

सपना अब पूरी तरह रोहन के वश में थी. उसने अपने दोनों पेअर रोहन की कमर के चारों तरफ इतनी सख्त लपेट लिए थे की उनके जिस्मों के बीच हव्वा का गुज़र भी नामुमकिन था. जब रोहन अपना लुंड बहार खींचता, तोह सपना अपनी छूट की दीवारों को सिकोड़ लेती, ताकि वह उस मोठे औज़ार को अंदर hi रोक सके. और जैसे hi वह पूरी शिद्दत से वापस अंदर जाता, तोह एक गीली सरसराहट….. chapat-chapat….. पूरे कमरे में गूँज जाती.

सपना हर धक्के पर अपनी कमर को ऊपर उठती, उस मोठे लुंड का स्वागत करती, और धक्का लगते hi उसका जिस्म वापस गद्दे से चिपक जाता. उसके जिस्म का ek-ek rom-rom इस वक़्त रोहन की भूक में शामिल था....

तो बे कॉन्टिनोएड .....
 
अपडेट - 20
कमरे में छायी वह हलकी धुप अब सपना के गोर बदन पर एक सुनहरी पर्दा दाल रही थी. रोहन ने सपना को गड्ढे पर पलट दिया. उसने सपना को घुटनो और हाथों के बल खड़ा kiya……ek असली शिकारी की तरह जो अपने शिकार को दबोचना जानता हो. सपना की भरी हुई, गोरी और कर्तव्य गांड अब रोहन के सामने पूरी तरह नंगी और हाज़िर थी. उस पर रूद्र के हाथों के नीले निशाँ अब भी दास्ताँ सुना रहे थे, मगर रोहन उन निशानों को मिटा कर अपने जूनून की नयी मोहर लगाना चाहता था.

सपना का सर निचे की तरफ झुका हुआ था, उसके बिखरे हुए बाल गड्ढे की चादर को छू रहे थे. उसकी सांसें इतनी तेज़ थी की उसकी पीठ हर सांस के साथ एक अजीब सी थरथराहट पैदा कर रही थी. रोहन ने देखा की सपना की गांड के निचे उसकी छूट अब भी गीली और फूली हुई थी,

रोहन ने पीछे से सपना की दोनों भरी गांड को अपने बड़े और खुरदरे हाथों से कास कर पकड़ा. उसने उन्हें दोनों तरफ ज़ोर से फैलाया, जिससे सपना की गुलाबी दरार पूरी तरह रोहन की नज़रों के सामने खुल गयी. रोहन ने एक लम्बी सास ली और पूरी ताक़त से एक ज़ोर का थप्पड़ मारा.

'चटाक!'

आवाज़ पूरे कमरे में गूंजी. सपना के मुंह से एक मादक चीख निकली, जो दर्र्द की नहीं, बल्कि नशीले दर्द की थी. उसकी गोरी चमड़ी पर रोहन के पंजे का लाल निशाँ उभर आया. सपना ने अपनी कमर को हल्का सा झटका diya…us दर्द में जो मज़ा छुपा था, वह उसके जिस्म को और पागल कर रहा था.

रोहन ने बिना वक़्त जाया किये अपने मोठे और सख्त लुंड को सपना की गीली दरार पर टिका दिया. उसने अपने लुंड की टोपी को थोड़ा सा रगड़ा, और फिर एक hi झटके में पूरा का पूरा सपना के अंदर दाखिल कर दिया.

“आआह्ह्ह्हह! रोहन… ye…ahhhh..ohhh… उह्ह्ह… ओह्ह्ह!”

सपना की आँखें पहात गयी. रोहन का स्टाइल रूद्र से बिलकुल अलग था. रूद्र की चुदाई में एक बचपना और तेज़ी थी, मगर रोहन के हर धक्के में एक नशा था. इस पोजीशन में वह इतना अंदर तक जा रहा था की सपना को महसूस हुआ की उसके पेट के अंदरूनी हिस्से हिल गए हैं. हर धक्का उसकी बच्चादानी से टकरा रहा था, जिससे सपना के पूरे जिस्म में करंट दौड़ रहा था.

सपना के दोनों भरी, उभरे हुए चूचियां रोहन के हर एक भरी और ज़ोर के झटके पर बुरी तरह oopar-neeche उछाल रही थी. वह गुल, नरम और bhari-bhari उभार हर धक्के के साथ zor-zor से लहराते हुए उसके सीने से टकरा रहे थे, जैसे उन्हें रोकने की कोई ताकत hi नहीं बची हो.

रोहन ने अपने दोनों मज़बूत हाथों को आगे बढ़ाया और उन उछालते हुए नरम उभारों को अपनी बड़ी मुट्ठियों में कास कर भर लिया. उसने उन्हें इतनी ज़ोर से भींच दिया की सपना की आँखों से मज़े के आंसू निकल आये. उसकी चूचियों की नरम मांस उसकी उँगलियों के बीच से बहार निकल रही थी, उनकी शेप बदल रही थी. उसने उन्हें मसलते हुए, ट्विस्ट करते हुए और ज़ोर से दबोचते हुए अपने धक्कों की रफ़्तार और तेज़ कर दी.

“अह्ह्ह… रोहन… हैं… ज़ोर से…!” सपना की सिसकी टूट गयी.

उसकी निप्पल्स अब बिलकुल सख्त और खड़े हो चुके थे, रोहन की हथेलियों में चुभ रहे थे. हर बार जब वह उन्हें पिंच करता, सपना के जिस्म में बिजली दौड़ जाती. दर्द और मज़ा का वह तीखा मिलान उसकी छूट को और भी गीला कर रहा था.

“कितनी बड़ी हैं तुम्हारी चूचियां…” रोहन ने आंख बंद करते हुए कहा, “इन्हे मसलते हुए छोड़ने में और मज़ा आ रहा है.”

सपना की आँखों बंद थी , लेकिन उसके मुँह से निकल रही मदहोश सिसकियाँ बता रही थी की यह सिसकियाँ सिर्फ दर्द के नहीं, उस गहरे आनंद के भी थे जो उसके अंदर उबाल रहा था. उसकी छूट रोहन के मोठे लुंड को अंदर hi अंदर kas-kas कर जकड रही थी, जैसे उसको पूरा निगल लेना चाहती हो.

रोहन ने उसकी चूचियों को और ज़ोर से मसला, उनके निप्पल्स को अपनी उँगलियों के बीच पकड़ कर halka-halka घुमाया और अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी. सपना का पूरा बदन अब उसके कण्ट्रोल में था….. उसकी उछलती चूचियां, उसकी गीली छूट और उसकी टूटी हुई सिसकियाँ, सब कुछ.

“आह्हः… मैं… मैं निकलने वाली हूँ… रोहन… प्लीज… अब और बर्दाश्त नहीं होता… ahhhhhh…uuhhhshhhsssshhhh…ahhhh!” सपना अब बिलकुल होश खो चुकी थी.

उसकी सिसकियाँ अब कमरे की दीवारों से टकरा कर वापस आ रही थी. वह लगातार 'उह्ह्ह... अह्ह्ह... हाँ... वहीँ...' की राग अलाप रही थी. रोहन ने अपनी रफ़्तार बढ़ा दी. उसके थप्पड़ों की आवाज़ ('phat-phat-phat' और जिस्मों के टकराने की आवाज़ एक ऐसी धुन बन गयी थी जो सिर्फ उन दो जिस्मों को समझ आ रही थी. रोहन ने सपना की कमर को इतनी ज़ोर से पकड़ा था की उसके नाख़ून उसकी चमड़ी में गढ़ गए थे, मगर सपना को सिर्फ उस मोठे लुंड की रगड़ महसूस हो रही थी.

रोहन ने भी महसूस किया की उसकी रगों में नशा अपने चरम पर पहुँच गया है. उसकी सांसें अब सपना की पीठ पर गरम लकीरें बना रही थी. उसने सपना के बिखरे हुए लम्बे बालों को पीछे से मुट्ठी में पकड़ा और उसका सर ऊपर की तरफ खिंचा, जिससे सपना की नरम गर्दन तन्नी हुई रह गयी.

उसने अपनी रफ़्तार को do-guna कर दिया. अब वह किसी मशीन की तरह सपना को पीछे से ठोंक रहा था. हर एक धक्का पहले से ज़्यादा तेज और भरी था. सपना का जिस्म हर झटके पर आगे की तरफ सरकता, मगर रोहन उसे वापस खिंच कर दोबारा गहराई तक जाता.

कमरे में सिर्फ उनकी भरी सांसें और जिस्मों की रगड़ का शोर था. रोहन ने आखरी 10-12 धक्के इतनी जुनूनी ताक़त से मारे की सपना का पूरा जिस्म थरथरा कर अकड़ गया. उसकी छूट ने रोहन के लुंड को इतनी ज़ोर से भींचा की रोहन के मुंह से भी एक भरी कराह निकली.

"उफ्फफ्फ्फ़... सपनाआ!"

रोहन ने अपना पूरा माल, अपना गरम और गाढ़ा सैलाब, फवारे की तरह सपना की गहराईयों में उड़ेल दिया. सपना को महसूस हो रहा था की उसके अंदर कोई गरम लावा भर गया हो.

दोनों वही गड्ढे पर ढेर हो गए. रोहन सपना की पीठ पर गिरा हुआ था, उसकी छाती की धड़कन सपना को अपनी पीठ पर महसूस हो रही थी. कमरे में सिर्फ उनकी हंप्टी हुई सांसें थी. सपना की आँखें बंद थी, मगर उसके होठों पर एक हलकी सी मुस्कान थी.

दस मिनट तक कोई नहीं बोलै. सपना को महसूस हो रहा था की रोहन का माल उसके अंदर से रिस कर गड्ढे की चादर को गीला कर रहा है. वह जानती थी की ये पांच दिन की तड़प आज पूरी तरह शांत हो गयी थी. रूद्र ने जो आग लगायी थी, रोहन ने उसे आज पूरा कर दिया था.

सपना ने धीरे से अपनी आँखें खोली और पीछे मुद कर रोहन को देखा. रोहन उसे hi तक रहा था. अब कोई डर नहीं था, सिर्फ एक हसीं और गन्दा राज़ था जो उन दोनों के बीच हमेशा के लिए क़ैद हो गया था.

तो बे कॉन्टिनोएड -
 
अपडेट - 21

सपना गड्ढे पर लेती हुई छत को तक रही थी, जहाँ पुराण पंखा अपनी रफ़्तार से घूम रहा था. पिछले एक हफ्ते की घटनाएं उसके ज़ेहन में किसी फिल्म की तरह चल रही थी. एक ऐसी औरत जो हमेशा मर्यादा और ज़िम्मेदारियों की चादर ओढ़े रहती थी, आज उसी चादर को ताक पर रख कर दो अनजान मर्दों के बीच नंगी पड़ी थी.



उसकी साइकोलॉजी पूरी तरह बदल चुकी थी. पहले ट्रैन में रूद्र का वह बेबाक स्पर्श, फिर झाड़ियों में वह मिलान, और अब रोहन के साथ ये be-reham chudai….Sapna को समझ नहीं आ रहा था की वह उनसे नफरत करे या अपने जिस्म की इस नयी भूक का शुक्रिया ऐडा करे. एक अजीब सी आज़ादी महसूस हो रही थी उसे .

शाम के 7 बज चुके थे. कायदे से सपना को अब तक स्टेशन पर होना चाहिए था, मगर उसके जिस्म की लचक और उसकी छूट में अब भी उन मर्दों की तपन बाकी थी. उसने अपना फ़ोन उठाया और अपने पति का नंबर डायल किया.

"सुनो... मेरी सहेली की तबियत थोड़ी ज़्यादा ख़राब है. मैं आज नहीं आ पाऊँगी, कल सुबह निकलूंगी," सपना ने बिना हिचकिचाए झूट बोल दिया. उसका दिल अब इस झूट से धड़का नहीं था,

उसने फ़ोन रखा और देखा की रूद्र भी वापस आ चूका था. अब कमरे में रूद्र और रोहन दोनों मौजूद थे. एक कमरा, दो जवान मर्द, और प्यासी औरत उसकी आँखों में एक अलग hi प्यास झलक दिख रही थी ….

तीनो ने डिनर मंगवाया. गद्दा दीवार से टिका कर वह लोग फर्श पर बैठ गए. रूम में हलकी नीली लाइट अभी भी जल रही थी, जो उनके चेहरों पर एक pur-asrar और सेडक्टिव ग्लो दाल रही थी. डिनर का माहौल थोड़ा अजीब था ….एक तरफ शर्म, दूसरी तरफ छुपी हुई उत्तेजना और तीसरी तरफ तीनो के बीच का naya….bond.

रूद्र, जो हमेशा की तरह शरारती और बेशरम था, सपना को देखते hi एक नॉटी मुस्कान से मुस्कुराया. उसने एक बाईट लिया और धीरे से बोलै,

“तोह… रोहन ने तुम्हारा ख्याल रखा न? मैंने सुना तुम बहुत जोर से सिसकियाँ ले रही थी …”

सपना का चेहरा एकदम से शर्म से तमतमा उठा. उसकी गर्दन और कान तक लाल हो गए. वह अपने होठ काट कर नज़रें झुकाने वाली थी, लेकिन फिर उसने हिम्मत कर के रूद्र की आँखों में देखा. उसकी आँखों में शर्म के साथ एक be-sharmi भी थी.

रोहन थोड़ा शर्मीला था. वह chup-chap रोटी के टुकड़े तोड़ रहा था, लेकिन उसकी नज़रें baar-baar सपना की वाइट शर्ट के उन दो खुले हुए बटन्स पर जा रही थी. शर्ट के अंदर उसकी भारी चूचियों की गहरी लाइन साफ़ दिखाई दे रही थी, और दिन भर की चुदाई के लाल निशाँ अभी भी उसकी स्किन पर चमक रहे थे.

सपना ने धीरे से, एक मीठी मुस्कान के साथ कहा,

“रोहन का काम थोड़ा ‘डीप’ है…”

उसने रोहन की तरफ देखा और आँखों hi आँखों में एक ताज़ा इनविटेशन भेज दिया. रोहन का चेहरा लाल हो गया, लेकिन उसकी आँखों में भूख साफ़ दिखाई दे रही थी.

रूद्र ज़ोर से हंस पड़ा. उसने सपना की तरफ एक और बाईट बढ़ाते हुए कहा,

“डीप तोह है hi… मैंने सुना कैसे तुम उसके लुंड को अपनी छूट में अंदर तक ले रही थी. लग रहा था जैसे तुम्हे ज़िन्दगी भर की भूक आज hi मिटानी हो.”

सपना ने कुछ नहीं कहा. बस उसने अपनी ऊँगली से अपने होठ को हल्का सा सहलाया और दोनों मर्दों की तरफ देखा. उसके अंदर अब कोई डर नहीं था ….सिर्फ दावत थी. तीनो के बीच ख़ामोशी थी, लेकिन वह ख़ामोशी बहुत कुछ कह रही थी.

.

ढाबे का खाना ख़त्म हो चूका था, मगर कमरे की हवा में एक अलग hi तरह की भूक पल रही थी. रूद्र ने बड़े इत्मीनान से अपनी सिगरेट जलाई. धुंए का एक लम्बा काश लेकर उसने उसे सपना के चेहरे की तरफ छोड़ा, जो उस वक़्त गड्ढे पर बैठी अपनी सांसें दुरुस्त कर रही थी. रूद्र की आँखों में वही पुराणी शरारत थी, मगर रोहन की नज़रों में अब थोड़ा थोड़ा नशा चढ़ रहा था ...

"वैसे सपना," रूद्र ने धुंए के बीच से मुस्कुरा कर पूछा, "इतना सब होने के बाद अब तोह बता दो... हम दोनों में से किसका स्टाइल ज़्यादा पसंद आया? मेरा वो ट्रैन वाला स्टाइल , या रोहन की ये चुदाई जो अभी दोपहर में तुमने बर्दाश्त की है?"

सपना ने एक गहरी और लम्बी सांस ली. उसने अपनी वाइट शर्ट के बचे हुए बटन को उँगलियों से टटोला. "तुम दोनों hi... पूरे पागल हो," उसने भांपते हुए कहा. "मैंने अपनी पूरी ज़िन्दगी में कभी नहीं सोचा था की मुझ जैसी शरीफ औरत के साथ ऐसा कुछ होगा... या मैं ऐसा कुछ करुँगी."

रूद्र ज़ोर से हंस पड़ा. उसने सिगरेट का एक और काश लिया और धुंए के साथ बोलै,

“शरीफ? अब भी वही बात? जिस औरत ने ट्रैन के टॉयलेट में khade-khade छुड़वाया, झाड़ियों के पीछे घुटनो के बल बैठ कर और अब एक दिन में दो मर्दों के बीच नंगी लेती हुई है… अभी भी शरीफ बोल रही हो खुद को?”

सपना ने शर्म से अपने होठ काट लिए, लेकिन उसकी आँखों में एक नयी चमक थी. वह धीरे से बोली,

“पता नहीं… शायद वह शरीफ औरत अब अंदर hi अंदर मर चुकी है.”

रोहन, जो अब तक चुप था, धीरे से मुस्कुराया और पहली बार बोल पड़ा, उसकी आवाज़ में नशा और इच्छा दोनों थी,

“तोह जो बची है… वह हम दोनों की है न?”

सपना ने दोनों की तरफ देखा. उसकी सांस तेज़ हो गयी, लेकिन उसने नज़रें नहीं झुकाई.

“हाँ…” उसने हलकी सी सिसकी के साथ कहा, “अब तोह वह भी तुम दोनों की hi है.”

रोहन, जो अब तक थोड़ा sehmat-sehmat सा रहता था, अब पूरी तरह खुल चूका था. उसने देखा की सपना की नंगी तइस गड्ढे से बहार झांक रही हैं. उसने अपना खुरदरा हाथ आगे बढ़ाया और सपना की नरम चमड़ी पर टिका दिया. उसने अपनी उँगलियों को सपना की थिरकती हुई maans-peshiyon में गढ़ाए और उसे हल्का सा दबाया.

"हमें भी नहीं पता था सपना," रोहन ने अपनी भरी आवाज़ में कहा, "की हमारे इस छोटे से, adh-bane बिल्डिंग के कमरे में कोई इतनी गोरी और कर्तव्य लड़की आएगी जो इसे जन्नत बना देगी. रूद्र ने जब बताया था, तोह मुझे यकीन नहीं हुआ... मगर दोपहर में जब मैंने तुम्हे नंगा देखा, तोह मेरा सब्र टूट गया."

सपना का जिस्म रोहन के उस स्पर्श से एक बार फिर से गर्माने लगा. उसने महसूस किया की उसकी छूट जो अभी थोड़ी देर पहले शांत हुई थी, दोबारा से गीली हो रही है. रूद्र ने देखा की सपना की सांसें तेज़ हो रही हैं. उसने अपना हाथ सपना के कंधे पर रखा और उसकी ब्रा की स्ट्राप को ऊँगली से छेड़ने लगा.

“अभी तोह पूरी रात बाकी है,” रूद्र ने सपना के कान के बिलकुल पास फुसफुसाया. उसकी गरम, नमकीन सांसें सपना की बालियों को हिला रही थी, उसकी गर्दन पर एक मादक सी सरसराहट पैदा कर रही थी. “आज कोई जल्दी नहीं है. आज न ट्रैन छूटने का डर है, न रोहन के आने का इंतज़ार. आज हम तीनो हैं… और यह पूरा कमरा हमारा है.”

सपना ने एक बार रूद्र की तरफ देखा, फिर रोहन की तरफ. दोनों मर्दों की भूखी नज़रें उसके नंगे बदन पर थी. उसका दिमाग baar-baar चीख रहा था …..सपना, उठ! निकल जा यहाँ से! घर जा! अपने पति के पास जा! यह गलत है… बहुत गलत!

लेकिन उसके जिस्म ने उस दिमाग की एक न सुनी.

उसकी छूट में हज़ारों तितलियाँ उड़ रही थी. उसकी सांसें तेज़ हो चुकी थी. उसे याद आ रहा था …..रूद्र का लम्बा, तेज़ और be-reham लुंड जो उसकी छूट को अंदर तक पहाड़ देता था, और रोहन का मोटा, गहरा औज़ार जो उसको पूरी तरह भर देता था. दोनों एहसासों को एक साथ महसूस करने की प्यास ने उसको वहीँ जकड लिया था.

सपना ने धीरे से अपना सर पीछे दीवार पर टिका दिया. उसकी आँखें बंद हो गयी. उसकी चूचियां तेज़ साँसों के साथ upar-neeche हो रही थी. यह उसका मूक इक़रार था …बिना एक शब्द बोले……

उसे पता था की यह रात पिछली हर रात से ज़्यादा भयंकर होने वाली है. दो भूखे, जवान मर्द ….एक तेज़ और be-reham, दूसरा मोटा और गहरा …..और उनके बीच सपना का नंगा, पसीने से तर और तृप्त बदन. खेल अब अपनी असली शकल लेने वाला था.

रूद्र ने मुस्कुराते हुए उसके कान में फिर से कहा,

“अब शुरू करें?”

सपना ने सिर्फ अपने होठ काट लिए और धीरे से सर हिला दिया

.

रूद्र ने आगे बढ़कर सपना की शर्ट का वो आखरी बटन भी खोल दिए जो अब तक बचे हुए थे. शर्ट उसके कन्धों से फिसलती हुई निचे गिर गयी. सपना अब सिर्फ अपनी वाइट ब्रा और जीन्स में उन दोनों के बीच नंगी बैठी थी. रोहन ने निचे झुक कर सपना की जीन्स की ज़िप खोली. वह आवाज़ ('ज़ज़्ज़ज़्ज़यप') सुनते hi सपना का जिस्म अकड़ गया.

"आज ये कपडे बीच में नहीं आएंगे," रोहन ने कहा और सपना की जीन्स को उसके पैरों से बहार खिंच दिया.

अब सपना पूरी तरह नंगी थी, सिर्फ उसकी वाइट ब्रा बची थी. रूद्र ने उसे पीछे से पकड़ा और रोहन ने सामने से. उन दोनों के हाथ सपना के गोरा बदन पर ऐसे चल रहे थे जैसे वह कोई खज़ाना टटोल रहे हों. रूद्र ने उसकी ब्रा का हुक खोला, और सपना की bhari-bhari चूचियां नंगी होकर उनके सामने उछाल पड़ी.

“उफ़… कितनी सुन्दर हो तुम सपना,” रूद्र ने उसकी एक भारी चूची को पूरा अपने गरम मुंह में भरते हुए गरम आवाज़ में कहा. उसकी ज़ुबान उसके सख्त निप्पल के चरों तरफ घूम रही थी, कभी ज़ोर से चूस रही थी, कभी डेंटन से halka-halka काट रही थी.

सपना ने अपने होठों को ज़ोर से काट लिया. उसकी आँखें आधी बंद थी. निचे, रोहन झुक कर उसकी छूट को अपनी ज़ुबान से गहरे से सहला रहा था. उसकी ज़ुबान उसकी फूली हुई क्लीट पर zor-zor से घूम रही थी, कभी उसकी गीली पंखुड़ियों को अलग करके अंदर तक घुस रही थी.

एक साथ दो तरफ से होने वाले इस हमले ने सपना को पूरी तरह पागल कर दिया. उसका पूरा जिस्म धनुष की तरह तन गया. उसकी पीठ गड्ढे से ऊपर उठ गयी. वह कभी रूद्र की तरफ झुक कर अपनी चूची उसके मुंह में और गहरे तक धकेल देती, कभी रोहन की ज़ुबान और उँगलियों को अपनी छूट की गहराई में महसूस करती.

“उह्ह्ह… अह्ह्ह… दोनों… दोनों साथ में… मममहह!”

कमरे की वह हलकी नीली लाइट अब उनके पसीने से चमकते जिस्मों पर एक ग्लो दाल रही थी. सपना की सिसकियाँ अब पूरी तरह से लाउड मॉनिंग में बदल चुकी थी. उसकी आवाज़ में अब न सिर्फ मज़ा था, बल्कि एक प्यास और समर्पण भी था.

उसे पता था की आज रात कोई रेहम नहीं होने वाला. रोहन और रूद्र, दोनों ने आज मैं बना लिया था की वह सपना को उसकी आखरी हद्द तक ले जायेंगे ….उस हद्द तक जहाँ वह सिर्फ उनकी हो जाएगी.

रूद्र ने अपना मोटा लुंड बहार निकला. रोहन ने भी अपना. सपना ने आँखें खोल कर देखा ….do-do भयंकर, लाल और तन कर खड़े लुंड उसकी छूट का शिकार करने के लिए बिलकुल तैयार खड़े थे. एक लम्बा और तेज़, दूसरा मोटा…. दोनों के टोपे चमक रहे थे.

सपना ने अपनी आँखें कास कर बंद कर ली. उसकी सांसें तेज़ हो गयी थी और उसकी छूट से गीला रास बहने लगा था. वह तैयार हो गयी थी ….उस हसीं तांडव के लिए जो अब शुरू होने वाला था.

उसने धीरे से अपने दोनों पेअर और फैला दिए और एक हलकी सी सिसकी के साथ बोलै,

“आज… दोनों एक साथ…”


तो बे कॉन्टिनोएड ---
 
Hi एवरीवन ,थ्रेड स्टिकी से हैट गया है अब तो ऊपर लेन के लिए कमेंट पोस्ट करने पड़ेगे स्टोरी पे नहीं तो खो जाएगी इस भीड़ में :दारू: :चियर्स:
 
अपडेट - 22

कमरे की नीली रौशनी अब उन तीनो के जिस्मों की तपिश में ढल चुकी थी. बहार दुनिया सो रही थी, मगर इस adh-bane माकन के कोने में एक ऐसी आग सुलग रही थी जिसने बरसों की मर्यादा को पल भर में राख कर दिया था. सपना गड्ढे के beechon-beech नंगी पड़ी थी, उसके गोर बदन पर पसीने की एक पतली तेह चमक रही थी, जो उसे किसी संगमरमर की मूरत जैसा बना रही थी.

रूद्र ने आगे बढ़कर सपना को पीछे से अपने घेरे में ले लिया. जब उसके मरदाना और सख्त सीने का स्पर्श सपना की नरम, नंगी पीठ से हुआ, तोह सपना के मुंह से एक गहरी सांस निकली. रूद्र का जिस्म किसी जलते हुए कोयले की तरह गरम था, जो सपना की ठंडी पड़ती चमड़ी को झुलसा रहा था. उसने अपने हाथ आगे बढ़ाये और सपना की नंगी कमर को दोनों तरफ से कास कर पकड़ लिया.

दूसरी तरफ, रोहन ने सपना के दोनों पैरों को धीरे से उठाया और अपने मज़बूत कन्धों पर टिका दिया. इस पोजीशन ने सपना को पूरी तरह 'be-parda' कर दिया था. सपना की छूट अब रोहन के चेहरे के बिलकुल सामने thi…….surkh गुलाबी, फूली हुई और पिछले दो दिनों की रगड़ से be-had सेंसिटिव. उसकी दरारों से निकलने वाला गीलापन सुबह की रौशनी में चमक रहा था, जैसे कोई प्यासा दरिया किनारे की तलाश में हो.

रोहन ने थोड़ा और झुक कर अपनी नाक सपना की जाँघों के बीच दाखिल कर दी. वह उस महक को गहराई से पीना चाहता था. सपना का जिस्म थरथरा उठा. उसने अपने हाथ पीछे की तरफ ले जा कर रूद्र के बालों को मुट्ठी में भर लिया.

"रूद्र... रोहन... तुम दोनों मुझे पागल कर डोज," सपना ने भांपते हुए कहा. उसका सर पीछे रूद्र के कंधे पर टिका था और उसकी आँखें बंद हो चुकी थी.

रोहन ने अब अपनी ज़बान की नोक निकाली और सपना के सबसे नाज़ुक हिस्से (क्लाइटोरिस) को बहुत धीरे से छेड़ा. “आआह्ह्ह… रोहन!” सपना का जिस्म एक झटके के साथ ऊपर उठा. वह एहसास इतना तीखा और मीठा था की सपना की रीढ़ की हड्डी में करंट दौड़ गया. रोहन ने रुका नहीं, उसने अपनी ज़बान को एक घेरे में घूमना शुरू किया, जैसे वह हर एक नस को जगा रहा हो.

पीछे से रूद्र ने इस मौके का फायदा उठाया. उसने अपने हाथ ऊपर किये और सपना की दोनों भरी हुई चूचियों को कास कर पकड़ लिया. उसने उन नरम उभारों को अपनी हथेलियों में भरा और उन्हें इतनी शिद्दत से मसला की सपना के मुंह से दर्द और मज़े का एक mila-jula शोर निकलने लगा. रूद्र ने उसके कानो के निचे अपनी ज़बान फेरी और उसके लोब को डेंटन से हल्का सा दबाया.

सपना अब दो तरफ से हो रहे इस हमले में पीस रही थी. रूद्र उसके ऊपरी हिस्से को जला रहा था और रोहन उसकी गहराईयों में नया तूफ़ान खड़ा कर रहा था. उसे महसूस हो रहा था की उसकी छूट अब सिर्फ गीली नहीं, बल्कि उबाल रही है. वह कभी रूद्र के सीने पर अपनी पीठ रगड़ती, तोह कभी रोहन के बालों में अपनी उँगलियाँ इतनी ज़ोर से फंसा देती की रोहन का सर उसकी जाँघों से चिपक जाता.

रूद्र ने अब सपना को थोड़ा सा उठाया और उसकी पीठ को खुद से से सत्ता दिया, मगर उसके पेअर अब भी रोहन के कन्धों पर थे. रोहन ने अब अपनी उँगलियाँ दाखिल करने का फैसला किया. उसने अपनी एक ऊँगली सपना की गीली दरार पर राखी और उसे dheere-dheere अंदर सरकने दिया.

"उफ्फ्फ्फ़... कितनी टाइट हो तुम अब भी," रोहन ने भांपते हुए कहा.

उसने दूसरी ऊँगली भी अंदर डाली और उन्हें 'व्' शेप में फैला दिया. सपना की छूट ने उन उँगलियों को इतनी ज़ोर से भींचा की रोहन के मुंह से एक भरी सांस निकली. रूद्र ने पीछे से सपना की दोनों चूचियों के निप्पल्स को अपने अंगूठे और ऊँगली के बीच पकड़ कर घुमाना शुरू किया. सपना का हर एक अंग अब जाग चूका था.

"रूद्र... और... और ज़ोर से मसलो उन्हें... रोहन, तुम रुकना मत," सपना अब be-sharm हो चुकी थी. उसे अब किसी मर्यादा की परवाह नहीं थी. वह चाहती थी की ये दो मर्द उसे पूरी तरह निचोड़ लें.

रोहन ने अपनी उँगलियों की रफ़्तार बधाई. वह अब सपना के अंदर किसी पिस्टन की तरह चल रहा था. हर एक रगड़ पर सपना का जिस्म aage-piche हो रहा था. रूद्र ने अपना मुंह सपना के कंधे पर रखा और वहां एक गहरा निशाँ छोड़ दिया.

कमरे में सिर्फ गीली आवाज़ें गूँज रही thi…..Rohan की उँगलियों की 'chapat-chapat' और सपना की तेज़ होती हुई सिसकियाँ . सपना को महसूस हो रहा था की उसका पानी अब निकलने hi वाला है. उसने अपने दोनों पेअर रोहन के कन्धों पर और ज़ोर से दबा दिए और अपनी कमर को आगे की तरफ उछाला.

रूद्र ने सपना को घुमाया और उसे गड्ढे पर सीधा लेता दिया. रोहन वही घुटनो के बल बैठा रहा. अब रूद्र सपना के चेहरे के पास था और रोहन उसकी टांगों के बीच. तीनो की सांसें एक दूसरे से टकरा रही थी.

"अब असली खेल शुरू करें?" रूद्र ने निचे झुकाते हुए पूछा. उसका मोटा और सख्त लुंड झटके से निकाल कर सपना के होंठो पर गिरा.

सपना ने उस औज़ार को देखा और फिर रोहन की तरफ देखा, जिसने अपना लुंड पहले hi आज़ाद कर लिया था. वह दोनों औज़ार अब सपना की मौत और ज़िन्दगी का फैसला करने के लिए तैयार थे. सपना ने एक गहरी सांस ली, अपनी आँखें बंद की, और खुद को उन दोनों के हवाले कर दिया.

कमरे की फ़िज़ा अब इतनी गरम हो चुकी थी की दीवारों पर जम्मी सीलन भी जैसे पिघलने लगी थी. सपना गड्ढे पर चित लेती हुई थी, उसकी टांगें अब भी रोहन के कन्धों पर थी और उसकी छूट किसी खुले हुए ज़ख़्मी फूल की तरह सुर्ख और गीली नज़र आ रही थी. रूद्र ने अपना पूरा वज़न सपना के ऊपरी जिस्म पर दाल दिया था, उसकी नंगी छाती सपना के नरम उभारों को कुचल रही थी.

यहाँ से अगले कुछ घंटे सिर्फ जिस्मों की ज़बान में लिखे जाने वाले थे.

रूद्र ने सपना के होठों को अपने मुंह में भर लिया. यह चुम्बन नहीं था, बल्कि एक कब्ज़ा था. उसकी ज़बान सपना के हलक तक जा रही थी, जैसे वह उसके अंदर की साड़ी गर्मी खेंच लेना चाहता हो. सपना ने अपने हाथों से रूद्र की पीठ को कास कर पकड़ लिया, उसके नाख़ून रूद्र की चमड़ी में धंस गए थे.

निचे रोहन ने सपना की जाँघों को और ज़्यादा फैलाया. उसने अपने मोठे लुंड की टोपी को सपना की गीली दरार पर टिका दिया. वह हिस्सा पहले hi रोहन की ज़बान की वजह से थरथरा रहा था. रोहन ने एक बहुत धीमा मगर गहरा दबाव दिया.

"उम्मम्मम...!" सपना ने रूद्र के मुंह के अंदर hi एक दबी हुई चीख छोड़ी.

जैसे hi रोहन के लुंड का वह मोटा, लाल और चमकता सर सपना की टाइट, गीली छूट के अंदर दाखिल हुआ, उसको महसूस हुआ जैसे उसके जिस्म की साड़ी दीवारें एक साथ खिंच कर पतली हो गयी हैं. उसकी छूट की नरम पंखुड़ियां ज़ोर से फैल गयी, और अंदर की सेंसिटिव दीवारें उस मोती टोपी को कास कर जकड रही थी.

रोहन ने पूरा अंदर नहीं डाला. वह jaan-boojh कर रुक गया …..सिर्फ उसका मोटा सर अंदर था, बाकी लुंड बहार. फिर वह dheere-dheere gol-gol घूमने लगा, उसकी छूट की अंदरूनी दीवारों को रगड़ता हुआ, उसकी क्लीट के पास तक प्रेशर बनता हुआ.

सपना का पूरा जिस्म धनुष की तरह तन गया. उसकी पीठ गड्ढे से ऊपर उठ गयी, टांगें कांपने लगी और उसके मुँह से एक गहरी, रूकती हुई सिसकी निकल गयी ……“आआह्ह्ह… रोहन…”

उसकी कमर अपने आप ऊपर की तरफ उछाल रही थी, जैसे उस मोटा लुंड को अंदर तक खिंच लेना चाहती हो. लेकिन रूद्र ने तुरंत उसके ऊपर से दबाव बना दिया. उसने सपना की दोनों कलाइयां पकड़ कर उसको गड्ढे से कास कर चिपका दिया, उसकी हरकतों को रोक दिया.

“तड़पने दो इसे थोड़ा…” रूद्र ने सपना के होठों से अलग होकर, रोहन से गरम और हवस से भरी आवाज़ में कहा. उसकी आँखें लाल हो चुकी थी, चेहरे पर एक मुस्कान थी. “देख कैसे तड़प रही है… कितनी भूखी हो गयी है ……,.”

सपना की सांसें बहुत तेज़ और टूटी हुई थी. उसकी छूट रोहन के लुंड के सर को अंदर hi अंदर kas-kas कर जकड रही थी, जैसे उसको पूरा अंदर खिंच लेना चाहती हो. हर छोटे से घूमने के साथ उसको लग रहा था की उसकी छूट के अंदर आग लग रही है. उसकी चूचियां zor-zor से upar-neeche हो रही थी और निप्पल्स इतने सख्त हो चुके थे की दर्द कर रहे थे.

“रोहन… प्लीज… पूरा दाल दो… tadpaaa…ooo मत… ahhh…ahhhh…” सपना ने सिसकते हुए, तड़पते हुए kaha.,,....uski छूट और भी गीली हो रही थी.

रूद्र ने उसके कान में धीरे से कहा, “तड़प… और तड़प… आज हम तुझे बुरी तरह छोड़ेंगे.”

रोहन मुस्कुराया और अपने लुंड के सर को सपना की छूट के अंदर dheere-dheere घूमता रहा. सिर्फ वह मोटा, लाल टोपा अंदर था, बाकी लम्बा लुंड बहार चमक रहा था. हर छोटे से मूवमेंट के साथ सपना की टाइट छूट की दीवारें उसको कास कर जकड रही थी, जैसे उसको अंदर खींचने की बेचैन कोशिश कर रही हो.

“रोहन… प्लीज… पूरा दाल दो न…” सपना की आवाज़ अब बिलकुल टूट चुकी थी. उसकी कमर अपने आप ऊपर उछाल रही थी, लेकिन रूद्र ने उसको मज़बूत हाथों से गड्ढे पर दबाये रखा था.

रोहन ने अब अपना लुंड थोड़ा और अंदर धकेल दिया …..अब करीब आधा लुंड अंदर था. सपना की आँखें फैल गयी. उसकी छूट इतनी टाइट थी की रोहन को भी ज़ोर लगाना पद रहा था. उसने एक और गहरा धक्का दिया और पूरा का पूरा मोटा लुंड एक hi झटके में सपना की गहराईयों तक उतर गया.

“आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… Rohaaannnnnn…Ahhhhhhhhh…!”

सपना की चीख कमरे में गूँज उठी. उसकी टांगें काँप रही थी, उसकी छूट ज़ोर से फैल चुकी थी और अंदर की हर सिलवट उस मोठे लुंड से रगड़ खा रही थी. दर्द और मज़ा का वह तीखा सिलसिला उसके पुरे जिस्म में दौड़ रहा था.

रूद्र ने अब सपना के ऊपर से दबाव हटाया और उसके बाल पकड़ कर उसका सर पीछे खिंच लिया. उसने अपना लुंड सपना के होठों पर रगड़ने लगा. सपना की आँखें मदहोश थी. वह अपने आप hi मुँह खोल कर रूद्र के लुंड को अपनी ज़ुबान से सहलाने लगी.

अब दोनों तरफ से हमला शुरू हो चूका था.

रोहन ने अपनी रफ़्तार तेज़ कर दी. वह अब zor-zor से धक्के मर रहा था, हर धक्के के साथ उसकी गांड सपना की छूट से टकरा रही थी. रूद्र ने अपना लुंड सपना के मुंह में दाल दिया और dheere-dheere andar-bahar करने लगा.

सपना अब तीनो चेदियों से भरी हुई थी ….उसकी छूट रोहन से, उसका मुँह रूद्र से, और उसका जिस्म उन दोनों की हवस से. उसकी सिसकियाँ अब लुंड से डाब रही थी, फिर भी उसके गले से मदहोश आवाज़ें निकल hi रही थी.

“ग्लुक… ग्लुक… मंमगहहह… अह्ह्ह… ahhh…shhhh…mmmhhhh…gluckkk…ooohmmmm..…”

रोहन ने उसकी कमर पकड़ कर और तेज़ धक्के मरने शुरू कर दिए, जबकि रूद्र उसके मुँह को छोड़ रहा था. सपना का बदन अब उनके बीच एक खेल का सामान बन चूका था ….और वह खुद इस खेल में पूरी तरह खो चुकी थी.

रोहन ने सपना की कमर को दोनों हाथों से मज़बूत पकड़ लिया और अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी. हर धक्का अब पूरा गहरा और be-reham था. उसका मोटा लुंड सपना की छूट को अंदर तक फाड़ता हुआ उसकी गहराईयों तक पहुँच रहा था. ‘पहच… पहच… पहच…’ की गीली आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी.

रूद्र ने सपना के बाल पकड़ कर उसका सर थोड़ा ऊपर खींच लिया और अपना लुंड उसके मुंह में गहरे तक धकेल दिया. सपना का गाला भरता हुआ महसूस हो रहा था, लेकिन वह रुक नहीं रही थी. उसकी ज़ुबान रूद्र के लुंड के नीचे zor-zor से लपेट रही थी, कभी उसकी टोपी को ज़ोर से चूस लेती.

“ग्लुक… ग्लूयक… मंमगहहह!” सपना के गले से गीली, गैग भरी आवाज़ें निकल रही थी.

अब वह तीनो तरफ से पूरी तरह भरी हुई थी. उसकी छूट रोहन के मोठे लुंड से, उसका मुँह रूद्र के लुंड से, और उसका जिस्म उन दोनों की हवस से. उसकी चूचियां zor-zor से उछाल रही थी, निप्पल्स सख्त और लाल हो चुके थे.

रोहन ने उसकी एक चूची पकड़ कर ज़ोर से मसलने लगा और साथ hi अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.

“कितनी टाइट है तुम्हारी छूट ….अभी भी मुझे अंदर जकड रही है,” उसने भांपते हुए कहा.

रूद्र ने उसके मुँह से लुंड बहार निकला, उसके होठों पर थोड़ी सी लार की लकीर छोड़ कर, और उसके कान में बोलै,

“अब बता… कौन बेटर छोड़ रहा है? मैं या रोहन?”

सपना की आँखें मदहोश थी. उसकी छूट रोहन के हर धक्के के साथ झटके ले रही थी. वह टूटी हुई आवाज़ में बोली,

“दोनों… दोनों साथ में… बहुत मज़ा आ रहा है… अह्ह्ह… मत रुकना… दोनों मत रुकना…”

रूद्र ने मुस्कुराते हुए फिर से अपना लुंड उसके मुंह में दाल दिया. अब दोनों मर्द एक परफेक्ट रदम में उसको छोड़ रहे थे …..रोहन नीचे से उसकी छूट को, रूद्र ऊपर से उसके मुँह को. सपना का बदन उनके बीच एक खेल का सामान बन चूका था.

उसकी सिसकियाँ अब रुक नहीं रही थी. हर धक्के के साथ उसके जिस्म से एक नया करंट गुज़र रहा था. उसकी छूट से रास और उनका पहले वाला माल मिल कर उसकी जाँघों पर बह रहा था.

सपना अब सिर्फ उनकी थी …..पूरी तरह, be-sharam और be-lagaam.

रोहन ने सपना की कमर को दोनों हाथों से मज़बूत पकड़ लिया और अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी. हर धक्का अब तेज था….. उसका मोटा लुंड सपना की छूट को अंदर तक फाड़ता हुआ उसकी गहराईयों तक पहुँच रहा था. ‘पहच… पहच… पहच…’ की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी.

“ग्लुक… ग्लूयक… मंमगहहह!” सपना के गले से रुंधी रुंधी आवाज़ें निकल रही थी.

तो बे कॉन्टिनोएड………..
 
अपडेट - 23
सपना का बदन अब बिलकुल उनके कण्ट्रोल में था. उसकी छूट रोहन के हर धक्के के साथ कास रही थी और उसके अंदर से लगातार गरम रास बाह रहा था.

रोहन की सांसें तेज़ होती जा रही थी. उसका चेहरा पसीने से तर था. उसने सपना की कमर को और ज़ोर से पकड़ा और भांपते हुए बोलै,

“मैं… आ रहा हूँ Sapnaannn….ahhhhh…”

सपना की आँखें मदहोश थी. उसकी छूट में भी एक गहरा तूफ़ान उबाल रहा था. वह रूद्र के लुंड से मुँह भरा होने के बावजूद भी धीमी आवाज़ में तड़प रही thi……“Mmmghhh… रोहन… अंदर… nhhiiiiiiiii…ahhhghhh… अह्ह्ह!”

रोहन ने एक ज़ोर का गहरा धक्का मारा और रुक गया. उसका पूरा बदन सख्त हो गया और उसने अपना गरम, गाढ़ा माल सपना की छूट की गहराईयों में zor-zor से उड़ेल दिया. एक… दो… तीसरा झटका. हर झटके के साथ उसका वीर्य उसकी अंदर भर रहा था.

ठीक उसी पल सपना का भी पानी बहार आ गया. उसकी छूट ने रोहन के लुंड को zor-zor से भींचा. उसका पूरा जिस्म एकदम से तन गया, टांगें कांपने लगी और उसके मुँह से रूद्र के लुंड के बावजूद एक लम्बी, बेहोश सिसकी निकल गयी ………..“ुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह… आअह्ह्ह्हह… मैं… आ रही हूँ… हाआनंनं!”

उसका गरम पानी फवारे की तरह निकल कर रोहन के लुंड पर और गड्ढे पर बहने लगा. दोनों का माल एक साथ मिल कर उसकी छूट से बहार निकल रहा था ……सपना का बदन थरथरा कर ढीला पद गया. उसकी आँखें बंद हो गयी और उसके होठ हलके से काँप रहे थे. वह अब सिर्फ उनके बीच पड़ी हुई थी ….

रूद्र ने धीरे से अपना लुंड उसके मुंह से बहार निकला और उसके गाल पर थपकी दी. रोहन ने उसकी कमर पर हाथ फेरते हुए उसके बाल सहलाये…

“अभी तो मेरी बरी है….”. इतना कहकर रूद्र ने सपना को घुमाकर पेट के बल लेता दिया. अब सपना की भरी हुई गांड हवा में तन्नी हुई थी. रूद्र ने पीछे से उसकी दोनों गांड को अपने हाथों से फैलाया और उन्हें थप्पड़ मारने लगा.

'चटाक! चटाक!'

सपना का गोरा बदन हर थप्पड़ पर लाल हो रहा था. रोहन सामने से झुका और उसने सपना के दोनों हाथों को पकड़ कर उसे आगे की तरफ खींचा. सपना अब 'व्' शेप में थी. रूद्र ने अपना सख्त लुंड पीछे से दाखिल किया. इस बार कोई रेहम नहीं था. उसने एक hi झटके में पूरा सरिया सपना की गहराई में उतर दिया.

"आआअह्हह्ह्ह्ह! रुद्रा!" सपना का सर झटके से ऊपर उठा.

वह धक्का इतना तेज था की सपना को लगा जैसे उसकी छूट पहात जाएगी. मगर नशा अभी बाकी था. रोहन ने आगे से सपना के मुंह में अपना मोटा लुंड दाखिल कर दिया. सपना अब दो मर्दों के बीच किसी मशीन की तरह पीस रही थी. पीछे से रूद्र की be-reham ठउँकाई और सामने से रोहन का भरी औज़ार उसके हलक तक जा रहा था.

कमरे में सिर्फ…. मदहोश आवाज़ें गूँज रही थी ….रूद्र के ज़ोर के झटकों की ‘phat-phat-phat’ और सपना की दबी हुई, टूटी सिसकियाँ. रूद्र ने रफ़्तार बढ़ा दी. वह अब सपना की कमर को दोनों हाथों से कास कर पकड़ लिया था और उसको किसी खिलोने की तरह हिला रहा था. हर एक धक्का उसके जिस्म को झिंझोर कर रख रहा था, उसकी गांड को ज़ोर से हिलता हुआ.

“पहात… पहात… पहात… पहात!”

सपना की छूट से निकलने वाला गरम रास और रूद्र का पसीना मिल कर उसकी जाँघों पर बह रहा था. उसकी छूट अब पूरी तरह फूल चुकी थी और हर धक्के के साथ उसके अंदर से एक नया झोंका निकल रहा था.

रोहन ने महसूस किया की सपना अब झड़ने वाली है. उसने अपना लुंड उसके मुंह से बहार निकला और उसके चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ कर उसकी आँखों में गहरी नज़र डाली. सपना की आँखें पथराई हुई थी, उनमें सिर्फ be-inteha हवस और बेकाबू तड़प थी.

“मैं… aaahhh….oohhhh,mmmmm… रुद्रा… Rohaa.nnnnn… और ज़ोर से… अह्ह्ह्ह!” सपना ने भांपते हुए, टूटी हुई आवाज़ में कहा.

रूद्र ने आखरी कुछ धक्के इतनी तेज ताक़त से मारे की सपना का पूरा जिस्म बुरी तरह अकड़ गया. उसकी छूट ने रूद्र के लुंड को इतनी ज़ोर से भींचा की रूद्र भी अपने आप पर काबू नहीं रख पाया.

“ले… ले मेरी jannn….poora अंदर ले!” रूद्र ने एक गहरी सिसकी के साथ अपना गरम, गाढ़ा माल सपना की गहराईयों में फवारे की तरह उड़ेल दिया. उसके लुंड के हर झटके के साथ एक नया गरम झोंका उसके अंदर भर रहा था.

सपना का जिस्म एकदम से सख्त हो गया. उसकी आँखें उलटी पद गयी और उसके मुँह से एक लम्बी, चीख निकल गयी …….. “आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… मैं… आ रही हूँ… हाआनंनं!”

उसकी छूट ने रूद्र के लुंड को zor-zor से जकड लिया. उसका गरम पानी फवारे की तरह निकल कर रूद्र के लुंड पर पर बहने लगा. उसकी टांगें काँप रही थी और पूरा बदन थरथरा रहा था.

लेकिन रोहन ने उसको सँभालने का मौका भी नहीं दिया. उसने तुरंत सपना को घुमा दिया, उसकी टांगें फैलाई और अपना मोटा, अभी भी सख्त लुंड उसकी अभी भी झटके लेती छूट में एक hi बार में घुसा दिया.

“ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… रोहणं…!”

सपना की सिसकी फिर से कमरे में गूँज उठी. उसकी छूट अब दोनों के माल से भरी हुई थी, फिर भी रोहन उसमें अपना लुंड दाल कर zor-zor से धक्के मरने लगा.

रोहन फिर से शुरू हो चूका था. रूद्र का छोड़ा हुआ गरम माल अभी भी सपना की छूट के अंदर था, जो रोहन के लिए रास्ता और भी चिकना बना चूका था. रोहन ने सपना को गड्ढे पर hi उल्टा किया, उसकी कमर को उठाया और पीछे से उसको छोड़ना शुरू कर दिया.

सपना अब पेट के बल थी, उसकी गांड ऊपर की तरफ थी. रोहन ने उसके दोनों पेअर थोड़े फैलाये और अपना मोटा लुंड उसकी गीली, हुई छूट में एक hi झटके से अंदर धकेल दिया.

“ुह्ह्हह्ह… रोहन… बहुत गहरा… अह्ह्ह!”

हर धक्के के साथ सपना की भारी चूचियां गड्ढे से रगड़ रही थी. उसकी गांड रोहन के पेट से zor-zor से टकरा रही थी और ‘phach-phach-phach’ की गीली आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी.

रोहन ने उसके लम्बे बालों को एक मुट्ठी में भर लिया और उसका सर पीछे खिंच लिया, जिससे उसकी पीठ और भी टेडी हो गयी. वह अब उसको पूरी मन से थोक रहा था …तेज़, और अंदर तक जाने वाले धक्कों के साथ.

सपना की सिसकियाँ अब रुक नहीं रही थी.

“अह्ह्ह… रोहन… ahhhhh…mmhhhshhhiiiiii….… हैं… Ahhhhh..ahhhh..ahhhhh…!”

रोहन ने उसकी कमर को दोनों हाथों से मज़बूत पकड़ लिया और अपनी रफ़्तार और तेज़ कर दी. हर धक्का उसकी छूट की गहराईयों तक पहुँच रहा था. सपना का पूरा बदन हर धक्के के साथ हिल रहा था, उसकी चूचियां गड्ढे से रगड़ रही थी और उसकी छूट से दोनों के माल का mila-jula रास बाह रहा था.

जब रोहन का क्लाइमेक्स क़रीब आया, उसने सपना की कमर को और ज़ोर से पकड़ लिया और कुछ आखरी, बहुत तेज़ धक्के मारे. फिर उसने एक गहरी सिसकी ली और अपना गरम, गाढ़ा माल सपना की गहराईयों में zor-zor से उड़ेल दिया.

सपना का जिस्म एक बार फिर से थरथरा उठा. उसकी छूट ने रोहन के लुंड को ज़ोर से भींचा और उसने भी एक लम्बी, मदहोश सिसकी के साथ झड़ना शुरू कर दिया.

दोनों का माल एक साथ मिल कर उसकी छूट से बहार निकल रहा था…..

सपना वही थक कर गड्ढे पर ढेर हो गयी. उसकी टांगें अभी भी काँप रही थी. उसकी सांसें टूटी हुई थी और उसकी आँखों के कोने से आंसू निकल रहे थे या फिर चुदाई की वजह से आया हुआ पसीना था ….क्या पता…

रूद्र और रोहन ने उसको दोनों तरफ से अपने सीने से चिपका लिया. तीनो पसीने और थकन से tar-tar थे. सपना के दोनों तरफ दोनों मर्द लेट गए और उसने धीरे से उनके हाथ पकड़ लिए.

कमरे में सिर्फ उनकी भरी साँसों और उनके जिस्मों की गरम खुशबु बाकी रह गयी थी.

कुछ समय बीता hi था की इस तरह से चिपके होने की वजह से दोनों के लुंड फिर से खड़े होने लगे. इस एहसास को सपना को भी महसूस हो गया. उसने गहरी सांस ली. Jaise-jaise उनके लुंड का आकर उसकी छूट की लकीर और गांड के छेड़ पर बढ़ता जा रहा था, vaise-vaise hi सपना की सांसें भी तेज़ होती जा रही थी. उसकी चूचियां भी उसी बहाव में oopar-neeche हो रही थी.

रोहन ने उसकी आँखों में देखा और सपना ने भी. न चाहते हुए भी सपना ने अपने होठ dheere-dheere रोहन के होठों पर रगड़ दिए. सपना को खुद नहीं समझ आ रहा था की उसने ऐसा क्यों किया. एक बार फिर उसने अपने होठ आगे बढ़ाये और इस बार रोहन के होठों पर रख दिए और हटाया भी नहीं.

रोहन इसका मतलब समझ चूका था. उसने सपना के होठों को अपने होठों में जकड लिया और बेहतरीन फ्रेंच किश करने लगा — कभी एक दूसरे के होठ चूसते, कभी एक दूसरे की ज़ुबान को ज़ोर से चूसने लगे.

सपना की छूट में अलग hi तरह की बेचैनी होने लगी थी. रूद्र भी जो अब तक उसकी गर्दन पर किश कर रहा था, उसने अपना एक हाथ उसकी चूची पर रखा और दबाने लगा. उसकी मुलायम चूची को दबाते हुए रूद्र का लुंड जो dheere-dheere खड़ा हो रहा था, अब पूरी स्पीड से तन कर खड़ा हो गया था.

रूद्र ने उसे अपने लुंड हाथ से पकड़ा और सपना की छूट के मुँह पर रगड़ने लगा. सपना जो बेखबर रोहन के होठों से किश कर रही थी, इस एहसास को पते hi सिसक उठी. उसने रोहन के होठ को ज़ोर से काट लिया.

अब रूद्र ने धीरे से अपने लुंड का भरी सिरा उसकी छूट के छेड़ में डाला. जिससे सपना की निकलती सिसकी रोहन के मुँह में hi रह गयी. जब तक वह इस दाखिले का एहसास ले पति, रूद्र ने एक झटके से पूरा लुंड अंदर दाल दिया.

“ुह्ह्ह्हह्ह्ह्ह… रुद्रा…!”

सपना का पूरा जिस्म एक झटके से अकड़ गया. उसकी छूट अभी भी बहुत सेंसिटिव थी, इसलिए रूद्र का मोटा लुंड उसमें पूरा घुसने पर उसको तेज़ दर्द के साथ गहरा मज़ा भी महसूस हो रहा था. उसकी आँखें बंद हो गयी और उसने रोहन के होठ को और ज़ोर से काट लिया.

रूद्र ने उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़ लिया और dheere-dheere अपनी रफ़्तार बढ़ने लगा. उसकी गांड रूद्र के पेट से टकरा रही थी और ‘पहच… पहच… पहच…’ की आवाज़ें कमरे में गूँज रही थी.

सपना की सिसकियाँ अब रुक नहीं रही थी.

“अह्ह्ह… ahhh..ohhhh…ahhh…ahhhsshhhhhhhs…shhhhh..hmmmmmmm”

रूद्र ने उसकी कमर को और कास कर पकड़ा और अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी. हर धक्के के साथ उसका मोटा लुंड उसकी छूट की गहराईयों तक पहुँच रहा था. सपना की चूचियां zor-zor से उछालना छह रही थी पर रोहन से दबे होने की वजह से वो उसके सीने में डाब जा रही थी … लेकिन उसकी छूट से लगातार गरम रास बाह रहा था.

उसकी सांसें बहुत तेज़ हो चुकी थी. उसकी छूट रूद्र के लुंड को अंदर hi अंदर kas-kas कर जकड रही थी. वह महसूस कर रही थी की उसके अंदर फिर से कुछ बहार आने वाला है.

“रूद्र… मैं… मैं निकलने वाली हूँ… अह्ह्ह… और ज़ोर se…ahhhhhhhh!” सपना की आवाज़ टूट रही थी.

रूद्र ने उसकी कमर को और मज़बूत पकड़ लिया और अपने आखरी कुछ धक्के बहुत तेज़ और गहरे मारे. हर धक्के के साथ उसका लुंड उसकी छूट की सबसे गहरी हद्द तक टकरा रहा था.

सपना का पूरा जिस्म एकदम से सख्त हो गया. उसकी पीठ गड्ढे से ऊपर उठ गयी, टांगें कांपने लगी और उसके मुँह से सिसकी निकल गयी …“आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह… रूद्र… मैं आ रही हूँ… हाआनंनं!”

उसकी छूट ने रूद्र के लुंड को zor-zor से bheencha.Uski छूट के अंदर के झाके इतने तेज़ थे की रूद्र भी अपने आप पर काबू नहीं रख पाया और उसने भी अपना गरम माल सपना की गहराईयों में उड़ेल दिया.

सपना का जिस्म थरथरा कर ढीला पद गया. उसकी आँखें बंद थी, सांसें टूटी हुई थी और उसके चेहरे पर तृप्ति के भाव नज़र आ रहे थे….

रूद्र उसके बगल में लेट गया और उसके पसीने से भीगे माथे को चुम लिया…
 
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