Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में - Page 28 - SexBaba
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Adultery छुटकी - होली दीदी की ससुराल में

रात भर





और माँ ने इत्ता कस के मेरे सर को धकेला की भैया का पूरा मोटा सुपाड़ा मेरे मुंह में ,... और माँ की शह पा के वो भी अब कस के पूरी ताकत से अपना लंड मेरे मुंह में ठेल रहा था। अरे कौन भाई होगा, जिसे अपनी टीनेज बहन से चुसवाने में मजा नहीं आयेगा,...

आज मैं कभी भी भैया का सुपाड़े से ज्यादा घोंट नहीं पायी थी लेकिन आज माँ बेटे ने मिल के,... आधा से ज्यादा,... मेरे हलक तक था भी तो भैया स्साले बहनचोद का पूरा बांस।





पांच छह मिनट में , भाई ने निकाल लिया, मेरा गाल भी थक गया था चूस के लेकिन असर ये हुआ की भैया का एकदम टनाटन खूब मोटा,...

माँ मुझे देख के मुस्करा रही थी और मेरे कान में बोली,... कैसा लगा मेरी बेटी को नया स्वाद,...

फिर एक दो बार अपने बेटे के खूंटे को पकड़ के मुठियाया और मुझे हड़काते बोलीं,

अच्छा चल निहुर जल्दी, देख मेरे बेटे ने कैसा मस्त खड़ा किया है तेरी गाँड़ मारने को अब एक बार मरवा चुकी है तो छिनरापना मत कर,... हाँ ऐसे ही , टांग फैला , चूतड़ ऊपर,...

और फिर पहले की तरह मोटी मोटी तकिया मेरी पेट के नीचे,... और अपने बेटे को हड़काया भी उकसाया भी,

" चल बेटे मार ले गाँड़ इसकी हचक के,बहुत नखड़ा पेल रही थी न तुझे देने में, अबकी सम्हल सम्हल के नहीं बल्कि पहले धक्के से ही,... बस अब फाड़ दे इसकी , चीथड़े चीथड़े कर दे, कल सुबह लगे रात में किसी ने तसल्ली से इसकी गाँड़ मारी है, दिखा से अपना जांगर,... और अब मैं इसका मुंह भी नहीं बंद करुँगी, "





सच में माँ ने अपनी चूँची तो छोड़िये हथेली भी मेरी मुंह पे नहीं रखी जब मैं चीखी, हाँ कस के मुझे दबोच रखा था की मैं हिलू डुलु नहीं , उछलू नहीं जब तक उनका बेटा मेरा गाँड़ मार रहा है,

और सच में भैया ने इत्ती कस के पहला धक्का ही मारा, आधा मूसल तो घुस ही गया, मैं जोर से चीखी, और माँ ने पकड़ा न होता,... तो मैं दो फिट उछलती,... लग रहा था किसी ने मोटा स्टील का डंडा मेरे पेट तक पेल दिया है,

मैं चीखती रही तड़पती रही बिसूरति रही,.. और वो पेलता रहा धकेलता रहा ठेलता रहा बिना रुके,...





चार पांच मिनट में ही पूरा खूंटा अंदर,... और तब जाके वो रुका और माँ ने छोड़ा

लेकिन इंटरवल दो मिनट का भी न रहा होगा, एक बार मैं बस अपने अंदर तक भैया का मोटा खूंटा महसूस करने लगी,एकदम जड़ तक, गाँड़ फटी जा रही थी. लेकिन मैं अब समझ गयी थी की बुर की तरह गाँड़ भी, बल्कि टेम्पो या बम्बई के लोकल की तरह,.. चौथी पांचवी की जगह बना ही लेती है जहाँ तीन की जगह हो..थोड़ा एडजस्ट कर लीजिये प्लीज वाले अंदाज में,...

खूब भरा भरा हल्का हल्का अच्छा लग रहा था , एक नए ढंग का मज़ा,...

पर तबतक भाई ने मेरी कमर छोड़ के दोनों नीचे झुकी हुयी छोटी छोटी चूँचियों को पकड़ लिया और लगा कस के दबाने, निचोड़ने,... एक नया दर्द , एक नया मज़ा कभी वो जोर से नाखून में निप्स में दबा देता चिकोट लेता और मैं चीख पड़ती , ... इस चक्कर में पीछे का दर्द मैं भूल गयी थी,...

फिर दोनों जोबन पकड़ के क्या करारे धक्के लगाए उसने जैसे इंजन का पिस्टन अंदर बाहर हो रहा हो , जैसे वो रगड़ता, दरेरता, घिसटता अंदर घुसता जान निकल जाती, और बाहर जाता तो चमड़ी अंदर की छिल जाती,

इस बार फिर से दर्द की लहर,... एक के बाद एक

उईईई उईईईईई मैं चीख रही थी चूतड़ पटक रही थी , लेकिन उस के धक्के न हलके हुए न वो रुका,... हाँ मैं खुद थोड़ी देर में सिसकने लगी, मजे से कांपने लगी और न उसने मुझे जाँघों के बीच छुआ न माँ ने मेरी गुलाबो को प्यार दुलार किया, पर वो कांपने लगी, ख़ुशी से सिकुड़ने फ़ैलने लगी,

और थोड़ी देर में मैं झड़ रही थी , तूफ़ान में पत्ते की तरह काँप रही थी, ... माँ मेरा सर सहला रही थी,... भैया मेरे अंदर पिछवाड़े पूरी तरह धंसा,

पहली बार लगा की गाँड़ मरवाने से भी कोई लड़की झड़ सकती है,...

और जब मेरा कांपना रुका तो भैया ने फिर धक्के पर धक्के , अब उसको भी खूब मज़ा आ रहा था और मुझे भी, हाँ दर्द भी हो रहा था और उसी दर्द का एक मजा था,...

पांच सात मिनट बाद एक बार मैं फिर काँप रही थी और भैया भी,





हम दोनों साथ साथ झड़ रहे थे और बड़ी देर तक ऐसे ही पड़े रहे, ... अबकी खुद उसने जैसे बाहर किया मैंने प्यारे से चमचम को मुंह में ले लिया,

और उस रात तीन बार,...पहली बार को जोड़ के तो चार बार हचक के भैया ने मेरी गाँड़ मारी।

लेकिन हर बार अलग ढंग से अगली बार मैं पलंग पर वैसे ही लेटी थी जैसे भैया से चुदवाती थी, पीठ के बल , टाँगे भैया के दोनों कन्धों पे,... बस अबकी माँ भी साथ थी, कभी दुलार से प्यार से मेरे गाल सहलातीं तो कभी कभी मस्ती से मेरी चूँची दबोच लेतीं,





धक्का जरा भी धीमा हुआ न तो भैया को डांट पड़ जाती,

कभी गोद में उठा के भैया अपने खूंटे पे बैठा लेता और थोड़ी देर गोद में बिठाये बिठाये मारता फिर आराम से पलंग पे लिटा के





माँ एकदम बगल में दोनों बच्चों की मस्ती देख रही थी

और जब भैया रुका तो लग रहा था जैसे किसी ने पाव भर मिर्चा डाल के कूट दिया हो,...

गनीमत था ठीक चार बजे माँ को याद आ गया, आज रोपनी होनी है और भैया को जाना है , गाँव में सुबह बहुत जल्दी होती है , तो माँ ने भाई को वहां भेज दिया वरना वो तो और,...
 
आप के कहे अनुसार साल के पहले हफ्ते में

दो अपडेट
 
मेरी कहानियां

समय समय पर अलग लाग फोरम में पोस्टेड मेरी कहानियों की सूची , लेकिन ये सिर्फ याद पर आधारित है मित्र पाठक पाठिकाएं इसमें और जोड़ घटाना कर सकते हैं

१, होली में फट गयी -यह मेरी पहली कहानी थी और इस फोरम में भी कोमल के किस्से वाले थ्रेड में मैंने इसे फिर से पोस्ट किया है।

२. चांदनी चली गाँव

३. साजन चले ससुराल होली में

४. मजा लूटा होली में

५. साजन बने नन्दोई

६. एक रात सलहज के साथ या लाइफ आफ अ सेल्समैन

७. इट हैपन्ड या शादी के लड्डू या इंडियन वेडिंग

८ Autumn Sonata

9. Yellow Roses

१०. जीजा साली की दास्तान ( तीन कहानियां )

११. एक छोटी सी होली स्टोरी

१२ लेट अस प्ले होली

१३. होली के रंग

१४. ना भूली वो होली

१५. मजा लुटा होली का ससुराल में ( यह कहानी इस फोरम में हैं और छुटकी इसी का सीक्वेल है )

१६. लला फिर अइयो खेलन होरी ( एक छोटी सी रोमांटिक कहानी , जो इस फोरम में है कोमल के किस्से थ्रेड में )

१७. बरसन लागी बदरिया

१८. सावन के झूले पड़े

१९. सोलहवां सावन ( इसका परिमार्धित संस्करण इस फ़ोरम में है जिसमें ढेर सारे नए प्रसंग जोड़े गए हैं ) .

२०. It's a hard hard rain ( in English section in this forum )

21 Red little riding hood or 666 ( unavailable )

२२ ननद की ट्रेनिंग

२३ फागुन की दिन चार

२४ मोहे रंग दे ( इस फोरम में मूल रूप से पोस्टेड )

२५ जोरू के गुलाम ( इस फोरम में जारी, इसका अंग्रेजी रूप पहले पोस्ट हुआ फिर हिंदी रूप जो काफी अलग था पिछले फोरम में अधूरा और अब यहाँ )

२६ छुटकी - होली, दीदी की ससुराल में ( इस फोरम में ही पहली बार और अभी जारी ) ,

यह लिस्ट मैं इसलिए शेयर कर रही हूँ, क्योंकि कई बार मेरे मित्र कहानी का शीर्षक देख के सोचते हैं की शायद ये उनकी पढ़ी हो,... और कई के नाम मिलते जुलते है जैसे मोहे रंग दे के नाम और पहली पोस्टों से शायद लगा होगा की होली की एक और कहानी ,... लेकिन वो कहानी तन से ज्यादा मन को रंगने की है और वो भी नव दम्पति की

उसी तरह फागुन के दिन चार में शुरू में तो बनारस की होली का एक दृश्य है पर वो कहानी एक लम्बे थ्रिलर के रूप में बढ़ी जिसमें तीन शहरों , बनारस, बंबई और बड़ौदा में आंतकवादी साजिश तक मामला जाता है और अफगानिस्तान की टोरा बोरा की पहड़ियाँ , कुछ पडोसी देश भी पर साथ साथ एरोटिक और रोमांटिक प्रसंग भी है पर नाम से कई बार भ्रम रहता है

और एक कारण ये भी ही ये स्मृति के पृष्ठों से धूल उड़ाने का भी काम करेगी,... और अगर कुछ छूटा बचा होगा तो सहृदय पाठक गण याद भी दिलाएंगे।
 
भाग ४१ इन्सेस्ट कथा - मामला वल्दियत का उर्फ़ किस्से माँ के





रोपनी





हम दोनों साथ साथ झड़ रहे थे और बड़ी देर तक ऐसे ही पड़े रहे, ... अबकी खुद उसने जैसे बाहर किया मैंने प्यारे से चमचम को मुंह में ले लिया,

और उस रात तीन बार,...पहली बार को जोड़ के तो चार बार हचक के भैया ने मेरी गाँड़ मारी।

लग रहा था जैसे किसी ने पाव भर मिर्चा डाल के कूट दिया हो,...

गनीमत था ठीक चार बजे माँ को याद आ गया, आज रोपनी होनी है और भैया को जाना है , गाँव में सुबह बहुत जल्दी होती है , तो माँ ने भाई को वहां भेज दिया वरना वो तो और,...

माँ रसोई में भाई के लिए कुछ बनाने चली गयी और गीता ने एक बार फिर से भाई की खिंचाई शुरू कर दी , उठा उससे नहीं जा रहा था, लेकिन जुबान तो,... वो अपने भाई अरविंद से बोली,

" क्यों वहां फुलवा की छोटकी बहिनिया मिलेगी न, उसकी रोपनी जरूर करना,.. कर तो चुके हो पहले भी भी कई बार, ..आज फिर,.. अगवाड़े की करोगे की पिछवाड़े की,... "





भाई बोला,... " क्या बोलती है तू, तुझे सब बता दिया तो,... माँ सुन लेगी,... और मैं अब कुछ नहीं,... "

गीता भाई के सोते नाग को मुंह में लेकर चुभलाने लगी,.. और हाथ से भी मुठिया रही थी,... लेकिन मुंह से निकाल के, मुंह फुला के , भाई से बोली,...





" भैया, कित्ती बार तुझे समझाया है, जब दो समझदार लोग आपस में बात कर रहे हों तो बीच में नहीं बोलते , लेकिन तुम तो,... तुझसे कौन सुबह सुबह बात करेगा। मैं तो इससे बात कर रही हूँ, इसे समझा रही हूँ "

फिर उसे मुठियाते बोली,...

" छोड़ना मत, रोपनी करने आएगी तो बिना मलाई रोपवाये कैसे जायेगी। और इस बुद्धू की बात मत मानना, मेरी बात मानोगे तो दिन में फिर खीर खाने को मिलेगी। "

( गाँव में सब लोग जानते थे जो रोपनी करने आती हैं, उनमें से शायद ही कोई बचती हो, बाबू लोगों से,... और वो सब बुरा भी नहीं मानती थी, बल्कि,... जान के आती थी, और जिसकी बिल में रोपाई हो जाती थी उसे एक कट्टा ज्यादा मिलता था. और और दस बारह दिन तो कम से कम रोपनी चलती थी।





और इन लोगों का तो गाँव में सबसे ज्यादा खेत था. दूसरे फुलवा की माँ भी ये सब बात समझती थी बल्कि सबसे ज्यादा समझती थी,...

उसे अच्छी तरह मालूम था की फुलवा गाभिन हो के गौने गयी और उसको गाभिन किसने किया है ,





और इससे वो और ज्यादा इससे खुश थी. अरे, ससुरारी में पहुँच के मरद कैसा,..मिलेगा पता नहीं , कहीं एकदमे ढीला केंचुआ अस मिल गया तो . तो लड़कियां यहाँ जो मजे ले लेती हैं ,.. और फुलवा तो बाबू के अलावा,...

फिर कहीं मरद ढील निकल गया तो सास अपने बेटे को नहीं खाली बहू के पीछे , बाँझ है,... कुलच्छनी है,...

और ससुराल में पहुँच के महीने दो महीने में गाभिन होने की खबर सुन के, पोते की ख़ुशी और बेटा तगड़ा है इस की भी ख़ुशी, फिर बहू को कोई नहीं बोलता,... और मरद वैसे ही महीना पंद्रह दिन में,... फिर बबुआने में कुल,... खाली यही सीधा कम से सोझे मुंह आदर से बात भी करता है और देह का भी तगड़ा है,...

तो फुलवा ने साफ़ साफ़ डील कर ली थी. और अरविन्द ने भी फुलवा से साफ़ साफ़ कहा था ,

एकदम करारी , कड़ी देह वाली,...

और फुलवा ने बोल दिया था ठीक है बाबू , तोहार काम बढ़िया से न होय तो हमसे बोलना, हमें खुदे ले के आयेगीं,... लेकिन दो कट्टा हमार अलग से रोज क,... और जैसे ही उसने फुलवा को बोल दिया की माँ ने कहा है की अब किसको का देना है , वो सब उसी के जिम्मे है माँ देखेगी भी नहीं, उसके बाद कटनी भी होगी और भी सब काम धाम खेत में रहते है ,...

समझ गए हम , फुलवा की माई बोली और गाँव में से चुन चुन के ये सब बातें उसने न माँ से बतायीं थी न गीता से )

पर गीता चिढ़ाते बोली, ...

" भैया, कच्ची कुँवारी कितनी है उसमें, ... "





" पांच " बिन बोले उसने ऊँगली से इशारा किया।

" और जो आ रही हैं उसमें से कित्ते पर चढ़ाई कर चुके हो "

दोनों हाथ की उँगलियों से उसने इशारा किया,... पूरे दस।

गीता ने जोड़ा मन ही मन,... २४ रोपनी वालियों में ५-६ तो बड़ी उमर की होंगी, इत्ती बड़ी भी नहीं, फुलवा की माँ की उम्र की या आसपास, और वो सब अभी भी, ....उन्ही के बीच काम बंटता होगा और एक के साथ पांच छह नयी उमर वालियों की टोली, गाना भी सब इतना मस्त गाती हैं, ...

फुलवा की माँ से कितनी छोटी होगी,

ग्वालिन भौजी किसी से बतिया रही थी वो अभी भी, पंडितों के पुरवे में,.... तभी तो उसकी दोनों बेटियां इतनी गोरी गोरी है.

एक बार फिर उसने भैया के मूसल को ललकारा,

"कउनो नहीं बचनी चाहिए, समझ "

फिर थोड़ी देर और पुचकारा,..





तबतक रसोई से माँ की आवाज आयी और भैया जल्द तैयार हो के बाहर

लेकिन माँ ने वहीँ से हड़काया, ये क्या पहन के जा रहे हो बाबू बन के अरे रोपनी में खुद साथ में खेत में धंसना पड़ता है,

भैया ने पैंट शर्ट पहन रखी थी,...

उसे फिर से अपने कमरे में खींच के बोली,... चल उतार इसे,...

वो थोड़ा हिचकिचाया, फिर धीमे से बोला क्या पजामा,...

" अरे मुझसे लजा रहे हो की गितवा से अभी तो थोड़ी देर पहले, उतार जल्दी "

माँ ने चिढ़ाया,... और जब तक भैया शर्ट पैंट उतार रहे थे,.. माँ ने फिर छेड़ा,...

" अरे पाजामा पहिंन के जाओगे तो उहे रोपनी वाली कउनो नाड़ा पकड़ के खींच देंगी, अरे रोपनी में सब कुछ, मज़ाक, खेल तमाशा चलता है सब मजा लेते हैं और आधी तो तोहार भौजाई लगेंगी। "





तब तक गीता ने उन्हें वही शार्ट जो थोड़ी देर पहले पहने थे, घुटने से दो बित्ते ऊपर वाला, सूती, वो पकड़ा दिया पहनने को।

" हाँ ये ठीक है , घुटने तक तो पानी रहता ही है, अरे उ सब तो जांघी से ऊपर तक साड़ी पेटीकोट मोड़ के घुसती हैं,.... "

निकलने के पहले माँ ने फिर टोका,

' अरे बनियाइन ठीक है,... ऊपर से कुछ पहनने की जरूरत नहीं '

गीता भाई को देख रही थी, उसकी हाथों की तगड़ी मसल्स, चौड़ी छाती पतली कमर,..और सबसे मजे की बात है, शार्ट का कपड़ा तो पतला था ही, अंदर का मूसल दिख तो नहीं रहा था, लेकिन झलक दिख रही थी और अगर कहि ज़रा भी भीग गया,...

" और हाँ "

माँ ने निकलते हुए उसको फिर समझाया,"

" रोपनी वाली बहुत मज़ाक वजाक करती हैं , तोहार केतना तो उसमे भौजाई लगेंगी,... और फुलवा की माई तो उ नाता रिश्ता कुछ नाहीं केहू का ना छोड़ती। गाने के साथ , बिना बहिन महतारी क नाम लगाय के गारी दिए,... तो उसमें बुरा मानने क कोई बात नहीं है , न गुस्सा होना। साल भर क काम है,... रोपनी में ये सब सुभ माना जाता है ,...

और तुम भी,.. मुंह बंद कर के बैठने की कउनो जरूरत नहीं है , अरे कउनो भौजाई कुछ बोली तो थोड़ी बहुत मज़ाक, और रोपनी में तो बहुत कुछ,... आपस में तो उ सब, जो औरत साडी पेटीकोट उठाये , तो कउनो पीछे से ऊँगली कर देती तो कउनो पूरा ही उठाय देगी,.. तो तुंहु ,..

बस बुरा मत मानना और रोपनी में सब कुछ चलता है , बाकी फुलवा क माई सब सम्हाल लेगी , लेकिन जाओ जल्दी, सूरज की पहली किरण के पहले आधा पौन घंटा रोपनी हो जाती है,... और कम से कम सात आठ घंटा काम कराने के बाद ही दोपहर बाद लौटना,... "





उनके जाते ही माँ ने दरवाजा बंद किया और गीता को लपेट के सो गयीं , दो ढाई घंटे बाद जब गीता की नींद खुली तो माँ उसे जगा रही थीं , झकझोर के।

" हे उठ न कब तक सोयेगी। धूप चढ़ आयी है ,... "

सोने दे न माँ, गीता ने फिर चद्दर ओढ़ लिया और चद्दर के अंदर से कुनमुनाती बोली,

" रात भर तो आपका बेटा चढ़ा रहा, हिला नहीं जा रहा है, बहुत दुःख रहा है। सोने दो न "

माँ ने चद्दर खींच दी और गुदगुदी लगाते, चिढ़ाते बोलीं, " अच्छा मेरा बेटा है और तेरा जैसे कुछ नहीं है, क्या है तेरा बोल "

" सोने दो न माँ, अरे मेरा प्यारा दुलारा, अच्छा अच्छा मीठा मीठा भैया है और क्या,... "



 
ये तेरा भाई, तेरा भाई हो ही नहीं तो ?"





माँ ने चद्दर खींच दी और गुदगुदी लगाते, चिढ़ाते बोलीं, " अच्छा मेरा बेटा है और तेरा जैसे कुछ नहीं है, क्या है तेरा बोल "

" सोने दो न माँ, अरे मेरा प्यारा दुलारा, अच्छा अच्छा मीठा मीठा भैया है और क्या,... "

लेकिन माँ ने उसे जबरन पकड़ के खींच लिया,... उठ, तेरा वो भइया मुंह अँधेरे रोपनी कराने निकल गया है और तू अभी तक।

" उईईई माँ उईईईईई ओह्ह्ह्हह्ह नहीं,... रुक माँ बहुत तेज से वहां चिलख उठी है अभी,... "

गितवा बड़ी जोर से चिल्लाई , पिछवाड़े बड़ी जोर की चिलख मच रही थी।

"हे सबेरे सबेरे छिनरपना, रात भर मेरे बेटे से मरवाने में लाज नहीं लगी, चूतड़ उठा के खुद तैयार हो जाती थी, मार,... और अब नाम लेने में लाज लग रही है। आएगा दोपहर में मेरा बेटा न तो एक दो बार फिर मरवा लेना, दर्द कम हो जाएगा। बढ़िया मलहम निकालता है , लगवा लेना पिछवाड़े,... चल उठ। "





माँ ने हाथ पकड़ के,... उन्हें अपनी सुहाग रात की याद आ रही थी, ... वैसे वो पहले कित्ती बार लेकिन इसका बाबू तो,.... क्या रगड़ाई की रात भर, हिलने नहीं दिया, और सुबह दो दो ननदें हाथ पकड़ के बल्कि टांग के सुहाग रात वाली सेज से उठा के ले गयी थीं,

बाप का बदला बेटी से उनके बेटे ने,... हलके हलके मुस्कराते माँ ने सोचा,

एक हाथ माँ ने पकड़ा दूसरे से पहले पलंग फिर दीवाल, कभी चिलख उठती तो कभी लगता एक कदम भी जमीन पर नहीं रख पाएगी।

थोड़ी देर बाद माँ बेटी रसोई में, गप्प भी मार रहे थे, और नाश्ता भी, माँ ने दो रोटी और कटोरे भर खूब गाढ़ा औटाया दूध, ... दूध में रोटी डाल के बेटी को दे दिया था और चाय बना रही थीं.





सुबह से गीता के मन में एक सवाल उमड़ घुमड़ रहा था,... और माँ से पूछ ही लिया, माँ उसकी बचपन से ही सहेली ज्यादा थीं, बल्कि सहेलियों और भाभियों से ज्यादा खुल के मजाक भी करती थीं चिढ़ाती भी थीं।

" माँ, भैया के साथ,... "





बनावटी गुस्से में वो बोली, ...

" ये चिमटा देख रही है , तेरे अगवाड़े डाल के फैला दूंगी,... तेरी बुआ का बियाह के पहले जितना चौड़ा भोंसड़ा हो गया था न ,...वैसा ही हो जाएगा और बेलन गंडिया में ठेल दूंगी, मेरे आने के पहले से कबड्डी खेल रही थी और मुझसे बोल रही है,... "





" नहीं नहीं, आप नहीं,... मेरा मतलब, कुछ लड़कियां कहती हैं ,... " वो बोली।

अब माँ सच में गुस्सा हो गयीं,...

"सब स्साली पक्की छिनार होंगी , अरे या तो उनके भाई नहीं होगा या उनके भाई सब गांडू होंगे खुद गाँड़ मराने से फुर्सत नहीं मिलती होगी तो , या तो सालों का खड़ा नहीं होता होगा , तेरे भाई का इत्ता मस्त मूसल है , पूरे गाँव में बल्कि आस पास के दस पांच गाँव में नहीं होगा,... "

फिर कुछ रुक के , गरम चाय से गुस्सा जब थोड़ा ठंडा हो गया तो मुस्कराते बेटी से बोलीं,

" अच्छा मान ले ये तेरा भाई, तेरा भाई हो ही नहीं तो ?"





" मतलब,... " अब गीता चौंक गयी।

" चल तुझे एक बात बताती हूँ , किसी को मत बताना, अपने भाई को तो कत्तई नहीं। और एक बात और सीख ले, हम औरतों को मर्दों से बहुत सी बातें छिपानी पड़ती हैं , ... तो बस ये माँ बेटी के बीच की बात,... "





और गीता की माँ चालू हो गयीं, अपने मायके की बात, कुंवारे पन की,...

नहीं नहीं कुंवारापन तो नहीं, शादी हो गयी थी, गौना नहीं हुआ था, होने वाला था,...

अरे उस ज़माने में शादी कम उमर में हो जाती थी, और जब लड़की जवान होजाती थी, जवान मतलब,.. अरे कैसे समझाऊं,... एकदम खोल के ठीक है मतलब जब घोंटने और बियाने लायक हो जाती थी,... तब उस के बाद गौने का दिन साइत धरी जाती थी,...

अक्सर तो लड़के वाले ही हिसाब रखते थे और पीछे पड़े रहते थे,... मतलब जब लड़की का खून खच्चर शुरू हो जाए, ... वही पांच दिन वाला, उसके बाद ही गौने की बात चलती थी,... तो गीता की माँ के साथ भी,... पहली बार जब हुआ तो वो बहुत घबड़ायी,

लेकिन गीता की नानी ने उन्हें सब बातें खुल के समझा दी और ये भी की दिन घडी का हिसाब रख ले, रसोई, पूजा पाठ सब बेराना होगा,... और ये भी की अब गौने वाले हल्ला करेंगे,... तो वो मना नहीं करेगीं हां कुछ टालेंगी जरूर,... और गौने की रात क्या क्या होगा, उस का भी हाल खुलासा,...

और तारीफ़ भी दर्द होता है झूठ नहीं बोलूंगी, लेकिन मज़ा भी बहुत आता है,...





लेकिन उस के बारे में अपनी सहेलियों से गाँव की भाभियों से अच्छी तरह सुन चुकी थीं,

उस की सील नहीं टूटी थी पर ढेर सारी सहेलियां रोज गप्पागप घोंटती थीं, और उस को चिढ़ाती थीं, उस की भाभियाँ भी , गाँव के कितने लौंडे जब से जोबन आया था , और जोबन आया भी जबरदस्त था। दस पांच गाँव के लौंडे लिबराते थे,...

लेकिन जोबन का रस चखा सबसे पहले उनके सगे बड़े भाई ने,
 
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माँ के नैहर के किस्से





2019 kia forte 0 60

गाँव के कितने लौंडे जब से जोबन आया था , और जोबन आया भी जबरदस्त था। दस पांच गाँव के लौंडे लिबराते थे,... लेकिन जोबन का रस चखा सबसे पहले उनके सगे बड़े भाई ने,

बाद में गीता की माँ को अंदाज लगा रीत रिवाज समझ में आया और ये भी की गीता की नानी की शह पे ही उनका बेटा, गीता के मामा उन पे चढ़े। पता तो उन्हें पक्का था और हामी भी थी।

जिस दिन पहली बार पांच दिन वाली छुट्टी ख़तम हुयी मस्ती के मारे उनकी चूत में आग लगी थी, ऊपर से एक सहेली के जीजा दो दिन पहले आये थे

और वो गीता की माँ के पास आयी और पूरा किस्सा, दो रात लगातार, किसी दिन दो तीन बार से कम नहीं, कित्ता मजा आता है जब रगड़ते दरेरते जाता है, तू भी करवा ले , न हो तो दस दिन बाद जीजा फिर आएंगे, सहेली उसे खुद ले जायेगी, उसके घर जाने से तो कोई मना भी नहीं करेगा,...





2019 kia forte 0 60

लेकिन कहते हैं न की दाने दाने पर लिखा रहता है, खाने वाला का नाम, बस एकदम उसी तरह भरतपुर के स्टेशन पर लिखा हुआ है कौन इंजन यहाँ सबसे पहले दनदनाते हुए घुसेगा,

तो उसी रात गीता के मामा का इंजन , गीता की माँ के भरतपुर स्टेशन पर,...

माँ कही रतजगे में गयी थीं सुबह आने वाली थीं, घर में बस भाई बहन,... खूब चिल्लाई वो लेकिन भाई ने पेल के ही छोड़ा,





2019 kia forte 0 60

कोरी गगरी तोड़ दी.

और एक बार बहन चुद गयी तो कौन भाई एक बार में छोड़ देता है फिर घर में और कोई न हो तो

अगली बार निहुरा के





2019 kia forte 0 60

फिर पोज बदल बदल के गितवा की माँ को उसके मामा ने रगड़ रगड़ के चोदा





2019 kia forte 0 60

और एक बार स्वाद लग गया खूंटे का तो बछिया खुद सांड़ के पास,... गर्मी का महीना था , जून या जुलाई,...

उन्होंने खुद एक दिन गितवा की माँ ने , अपनी माँ को भाई से कहते सुना था,

"अरे अब गौने के लिए सब बहुत जिदीया रहे हैं,... महीने दो महीने में चली जायेगी ससुराल तब तक,...."

उस समय तक तो उन्हें नहीं समझ में आया, लेकिन बाद में समझ गयी,

कोई दिन नागा नहीं जाता था, दो चार दिन के बाद तो वो खुद ही भाई के कमरे में रात में,... और माँ का कमरा दूसरे खंड में था, बीच में कच्चा आंगन और बरामदा, और कई बार तो माँ की भी परवाह नहीं,... माँ ही कहती , आज तू अपनी भाई के पास सो जा, तेरे कमरे में पानी चूता है,...





2019 kia forte 0 60

और रात भर उनकी जांघो के बिच सफ़ेद पानी चूता,

एक महीना गुजरा, वो पांच दिन आये माँ रसोई में नहीं गयी,...

फिर तो रात के साथ दिन में भी कोई दिन नागा नहीं जाता था जब भाई उसके तीन चार बार नहीं चढ़ते थे





2019 kia forte 0 60

लेकिन अगले महीने उसने माँ से पूछा,.. माँ वो अबकी बार नहीं हुआ , मैंने दो बार देखा है तो मैं रसोई में आ सकती हूँ,...

माँ ने मारे ख़ुशी के उसे गले से लगा लिया, लेकिन फिर बोलीं ,

बेटी कभी कभार देर सबेर हो जाती है,... लेकिन वो रोज सुबह पूछतीं, हुआ क्या,... कई बार दोनों नहाती भी साथ थीं तो वहां भी,

जब २८ का ३० दिन हुआ, ३५ दिन हुआ तो वो समझ गयीं की अब वो नानी बनने वाली हैं, और उन्होने उसकी ससुराल खाली ये खबर करा दी , की अगले महीने दिन साइत देख के वो बताएंगी लेकिन एक डेढ़ महीने बाद।

और बिटीया का बिस्तर समान सब बेटे के कमरे में,...

और बेटी को समझा भी दिया कुछ दिन में ससुराल चली जायेगी , तब तक अपने भाई के साथ मजे कर ले, फिर पता नहीं कब आ पाएगी और गुन ढंग सीख के जायेगी तो तेरे मरद को भी,...





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फिर तो चक्की दिन रात , कई बार माँ के सामने भी,...

और वो लजाती तो डांट माँ की पड़ती।

" स्साली छिनरपना गौना हो जाएगा तो ससुराल में तो तेरी ननद का भाई तो दिन रात चढ़ा ही रहेगा, कुछ दिन तेरा भाई भी तेरे जोबन का रस ले ले,.... फिर तो कब मायके आ पाएगी चल छिनार माँ से सरमाती है "

और गितवा का मामा वहीँ धर दबोचता और फिर दुबारा और अबकी और हचक हचक के,...अपनी गोद में ही बिठा के





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जब दूसरे महीने भी वो पांच दिन वाली छुट्टी नहीं हुयी, तो गीता की नानी ने ससुराल में खबर भिजवा दी की बीस दिन के बाद,... दिन बहुत सुभ है गौने के लिए आ जाएँ,...

बस, गौने के ठीक सात महीने बाद गीता के भाई का आगमन हो गया

गीता की बुआ,... चिढ़ाती भी थीं उसके भाई को, ये तो मायके से आया है दहेज़ में।

अब गीता ने चुप्पी तोड़ी, " माँ, तो क्या भैया मामा का जना है, "

देर तक गीता की माँ खिलखिलाती रहीं, फिर बोलीं, एकदम पक्का सोलहो आना और जो थोड़ा बहुत शक था वो अब एकदम दूर हो गया. "
 
तो क्या भैया,...?





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गीता की बुआ,... चिढ़ाती भी थीं उसके भाई को, ये तो मायके से आया है दहेज़ में।





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अब गीता ने चुप्पी तोड़ी,

" माँ, तो क्या भैया मामा का जना है, "

देर तक गीता की माँ खिलखिलाती रहीं, फिर बोलीं,

"एकदम पक्का सोलहो आना और जो थोड़ा बहुत शक था वो अब एकदम दूर हो गया. "

"कैसे,... " गीता को कुछ समझ में नहीं आया.





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" तू न बौड़म है, एकदम पागल। अरे सब साफ़ साफ बताना जरूरी है क्या, अरे तेरे भाई का,.. औजार,... "

अब गीता की बारी थी माँ को चिढ़ाने हड़काने की,

" पकड़ने में शर्म नहीं, मुठियाने में लाज नहीं,... और नाम बोलने में फटती है,.. ये औजार क्या होता है। "





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वो बड़ी जोर से हंसी " मेरे बिल्ली मुझी से म्याऊं,.. तेरे भाई का लौंड़ा, लंड,... अरे उस दिन जो पकड़ा न तो बस लगा की तेरे मामा का पकडे हूँ, शादी के पहले जो रोज बिना नागा मेरे ऊपर चढ़ता था वो एकदम वैसे ही , एकदम अपने असली बाप पे गया है , वैसा ही मोटा तगड़ा मूसल, वैसे ही नम्बरी चोदू,... इत्ता अच्छा लगा की बता नहीं सकती और तेरे ऊपर गुस्सा लगा इत्ता मस्त औजार मेरा मतलब लंड है और तू छिनारपना कर रही है , गाँड़ नहीं मरवाउंगी,... स्साली . मन तो एक बार किया की मैं खुद,... "





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बात उनकी, उनकी बेटी ने पूरी की, अंदर ले लूँ यही न,...

बहुत धीमे से माँ के मुंह से सच निकला,

‘हां।.

फिर तुरंत उन्होंने बात सुधारने की कोशिश की,... असल में मुझे तेरे मामा की, जब उन्होंने पहले बार मेरी ली थी,...

एक बार फिर गीता ने घुड़का,... माँ आप ही ने मना किया था,... ली थी क्या होता है,...

वो जोर से हंसी, 'सच में तू एकदम मेरी बेटी है,...ठीक है तेरी माँ को तेरे मामा ने पहली बार चोदा था, ऐसे ही मस्त लंड था उनका खूब मोटा कड़क





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और याद करके गीली हो जाती है। "

" अरे तो क्या हुआ अपना भाई समझ के मेरे भाई से चुदवा लेती, पक्का सच में बहुत मजा आएगा , हम दोनों मिल के,... मान जा। "

गीता एकदम पीछे पड़ गयी.





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" तू भी न स्साली। पागल। ,मेरा बेटा है. " माँ ने उसे बहलाते हुए कहा।

" अच्छा जी, कल मेरे भाई से मेरी गाँड़ इत्ती हचक के मरवाई तो कुछ नहीं और अपनी बार,... बेटा है। " गीता तुनक के बोली।

" अरे तू भी न, बहने तो होती ही हैं भाई से चुदवाने के लिए, मुट्ठ मार मार के इधर उधर नाली में बहाये इससे अच्छा, बहन के काम आये,... और तू जानती है जिस दिन तेरे मामा ने मेरी ली थी, मेरा मतलब अपनी बहन को चोदा था,... उन से ज्यादा मेरा मन कर रहा था। अपनी सहेली के किस्से सुन सुन के मेरी चूत पहले से गीली थी,... वो स्साला, तेरे बाप का स्साला नहीं चोदता न तो मैं उसको चोद देती,... " गितवा की माँ ने अपने कुंवारेपन की बात कही





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" एकदम माँ मेरी भी यही हालत हो रही थी, मैं खुद गयी थी भैया के पास, वरना आप का बेटा तो ऐसा बुद्धू है,... लेकिन मैं समझ गयी आप बात टाल रही हैं एक बार चुदवा लो न भैया से, आखिर आप ने पकड़ा है आप को अच्छा भी लगता है और सबसे बड़ी बात जैसे आप मुझे सब सिखा रही है अपने बेटे को भी सीखा दीजिये न , अरे मजा लेने के लिए नहीं सिखाने के लिए,... "

गीता भी पीछा छोड़ने वाली नहीं थी,

" अरे स्साली तू भी न वो मानेगा नहीं उसका खड़ा ही नहीं होगा मेरे नाम पे और खड़ा होगा तो ढीला हो जाएगा, ... मैं तो मान जाऊं,... वो मानेगा।"

झिझकते हुए माँ ने बोला,

" वो जिम्मेदारी मेरी, मेरा भाई है, हिम्मत है उस बहनचोद की मेरी बात टालने की. और खड़ा तो उसका ऐसा होगा,... " गीता पीछे हटने वाली नहीं थी।





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" चल कुछ और बात कर,... " माँ बोली।

" क्यों मेरे भैया का सोच के गीली हो रही है न, हाँ सच बोल मेरी कसम,... " गीता हँसते हुए बोली।

" हाँ, खुश,... हो रही है। चल अब कुछ और बात करते हैं। " माँ बोली।

"अच्छा मेरे बाप तो बाबू ही हैं न मेरे ?

गीता का सवाल ख़तम नहीं हुआ और माँ की हंसी चालू हो गयी।
 




भास्करस्य यथा तेजो मकरस्थस्य वर्धते।

तथैव भवतां तेजो वर्धतामिति कामये॥

जैसे मकर राशी में सूर्य का तेज बढता है, उसी तरह आपके स्वास्थ्य और समृद्धि की हम कामना करते हैं। मकरसंक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।
 
भाग ४२

इन्सेस्ट कथा -किस्से माँ के







" अरे तो क्या हुआ अपना भाई समझ के मेरे भाई से चुदवा लेती, पक्का सच में बहुत मजा आएगा , हम दोनों मिल के,... मान जा। "

गीता एकदम पीछे पड़ गयी.





" तू भी न स्साली। पागल। ,मेरा बेटा है. " माँ ने उसे बहलाते हुए कहा।

" अच्छा जी, कल मेरे भाई से मेरी गाँड़ इत्ती हचक के मरवाई तो कुछ नहीं और अपनी बार,... बेटा है। " गीता तुनक के बोली।

" अरे तू भी न, बहने तो होती ही हैं भाई से चुदवाने के लिए, मुट्ठ मार मार के इधर उधर नाली में बहाये इससे अच्छा, बहन के काम आये,... और तू जानती है जिस दिन तेरे मामा ने मेरी ली थी, मेरा मतलब अपनी बहन को चोदा था,... उन से ज्यादा मेरा मन कर रहा था। अपनी सहेली के किस्से सुन सुन के मेरी चूत पहले से गीली थी,... वो स्साला, तेरे बाप का स्साला नहीं चोदता न तो मैं उसको चोद देती,... "





" एकदम माँ मेरी भी यही हालत हो रही थी, मैं खुद गयी थी भैया के पास, वरना आप का बेटा तो ऐसा बुद्धू है,... लेकिन मैं समझ गयी आप बात टाल रही हैं एक बार चुदवा लो न भैया से, आखिर आप ने पकड़ा है आप को अच्छा भी लगता है और सबसे बड़ी बात जैसे आप मुझे सब सिखा रही है अपने बेटे को भी सीखा दीजिये न , अरे मजा लेने के लिए नहीं सिखाने के लिए,... "

गीता भी पीछा छोड़ने वाली नहीं थी,

" अरे स्साली तू भी न वो मानेगा नहीं उसका खड़ा ही नहीं होगा मेरे नाम पे और खड़ा होगा तो ढीला हो जाएगा, ... मैं तो मान जाऊं,... वो मानेगा।"

झिझकते हुए माँ ने बोला,

" वो जिम्मेदारी मेरी, मेरा भाई है, हिम्मत है उस बहनचोद की मेरी बात टालने की. और खड़ा तो उसका ऐसा होगा,... " गीता पीछे हटने वाली नहीं थी।





" चल कुछ और बात कर,... " माँ बोली।

" क्यों मेरे भैया का सोच के गीली हो रही है न, हाँ सच बोल मेरी कसम,... " गीता हँसते हुए बोली।

" हाँ, खुश,... हो रही है। चल अब कुछ और बात करते हैं। " माँ बोली।





अच्छा मेरे बाप तो बाबू ही हैं न मेरे। गीता का सवाल ख़तम नहीं हुआ और माँ की हंसी चालू हो गयी।

और हँसते हँसते वो दोहरी, हंसी रूकती नहीं थी किसी तरह बोलीं,

" बेटी इस का तो जवाब मैं भी नहीं दे सकती। कित्ता कोशिश करूँ, तो भी नहीं हाँ ये पक्का है तू ऐन होली के दिन पेट में आयी थी मेरे। "

गीता कुछ नहीं बोली और माँ ने ही आगे की बात बढ़ाई,...

ये एकदम पक्का है, ... मेरी शादी के तीन साढ़े तीन साल हुए थे। असल में पहली होली ससुराल में ढंग की,... पहली होली में तो तेरे भैया आ गए थे होली के चार पांच दिन पहले तो मैं ऐसे बच गयी। अगली होली मेरे मायके में हुयी, तो उसके बाद की होली,... तेरी बुआ का चार महीने पहले ही गौना हुआ था।

और माँ ने होली का पूरा किस्सा सुनाया।

गौने के पहले भाभियों ने खूब समझाया था, अरे पहली रात तो हर लड़की झेल जाती है कोई जेठानी कडुआ तेल दे जाती है ( वैसे भी माँ को उस का कोई डर नहीं था क्योंकि ८४ आसन से कोई बचा नहीं था,जिसको अपने सगे भाई के साथ दो चार बार ट्राई न किया हो ) लेकिन असली रगड़ाई तो होली में होती है, पूरे गाँव की भौजाई, नयी दुलहिनिया, देवर के अलावा नन्दोई, सगे हों या रिश्ते के वो भी, साजन के दोस्त, हाथ तो सब लगाते हैं , धक्के लगाने वाले भी गिनती के बाहर
 
किस्सा माँ की होली का





और

' मेरे बाबू कौन '

ये एकदम पक्का है, ... मेरी शादी के तीन साढ़े तीन साल हुए थे। असल में पहली होली ससुराल में ढंग की,... पहली होली में तो तेरे भैया आ गए थे होली के चार पांच दिन पहले तो मैं ऐसे बच गयी। अगली होली मेरे मायके में हुयी, तो उसके बाद की होली,... तेरी बुआ का चार महीने पहले ही गौना हुआ था।

और माँ ने होली का पूरा किस्सा सुनाया।

गौने के पहले भाभियों ने खूब समझाया था, अरे पहली रात तो हर लड़की झेल जाती है कोई जेठानी कडुआ तेल दे जाती है ( वैसे भी माँ को उस का कोई डर नहीं था क्योंकि ८४ आसन से कोई बचा नहीं था,जिसको अपने सगे भाई के साथ दो चार बार ट्राई न किया हो )





लेकिन असली रगड़ाई तो होली में होती है, पूरे गाँव की भौजाई, नयी दुलहिनिया, देवर के अलावा नन्दोई, सगे हों या रिश्ते के वो भी, साजन के दोस्त, हाथ तो सब लगाते हैं , धक्के लगाने वाले भी गिनती के बाहर,..





लेकिन माँ पहली होली में बच गयी थी , भैया के होने से, बेचारे देवर हाथ मलते रह गए.

और अगली होली मायके में होती है ,

इसलिए शादी के तीन साल बाद पहली होली ढंग की ससुराल में पड़ी और देवर से ज्यादा, सास और ननद प्लानिंग बना के बैठी थीं.





बुआ का गौना तीन चार महीने पहले ही हुआ था और उन्होंने फूफा जी को खूब गन्दी वाली गारियाँ और कोहबर में उन्होंने और रगड़ाई की, फूफा जी ने भी मौका पा के जोबन नापा और बोल के गए थे होली में आयंगे, तो माँ ने खुद उनको सुना के कहा, आपकी पिचकारी पिचका के रख दूंगी।

बस सुबह सुबह, बुद्धू बना के माँ की ननद और सास ने, माँ को डबल भांग वाली ठंडाई पिला दी,... वैसे भी वो गरमाई थीं,

पति उनके १५ दिन से गायब थे, बंबई और बोल के गए थे होली में आएंगे , दो चार दिन पहले, लेकिन,....

बस वहीँ आँगन में साड़ी तो माँ की ननदों ने,...

भैया तो अक्सर दादी के पास रहता था या बुआ के पास,...

और उसके बाद ब्लाउज फटा और फिर फूफा जी, अब नन्दोई तो सलहज के ब्लाउज में हाथ डालेगा,





माँ भी कौन कम थीं एक झटके में पहले पाजामे का नाड़ा खींचा, एक दो और उनका साथ देने के लिए पड़ोस की,

तो वो देखते देखते चिथड़े

,माँ भी सिर्फ पेटीकोट में,... बाकी सब पड़ोस वाली तो और घर चली गयीं, आंगन में फूफा जी और माँ, ...

और उनकी सास अपने नए नए दामाद को उकसा रही थीं और बुआ तो और ज्यादा,

" अरे सलहज को पेलते तो सब हैं होली में गाभिन कर के छोड़ना,

और वही आँगन में , ... और सिर्फ एक राउंड नहीं ,





दूसरे राउंड में तो माँ खुद अपने नन्दोई पे चढ़ के,..





और गालियो की बौछार ( आखिर रिश्ता सलहज नन्दोई का था ), फूफा जी के दोनों हाथ पकड़ के,

" लाग साले धक्का अब, मेरी ननद की ननदों की चोद चोद के सोचते हो,... अरे ननद के नन्दोई,... ननद की सास का भोंसड़ा नहीं है ताल पोखरा , जिसमें पूरा गाँव डुबकी लगाता है तेरे और मेरे ससुर गोता खाते हैं , स्साले भंड़ुवे , अब लगा धक्के अगर ताकत है अपने बाप का जनमा है तो , नहीं मलाई गिरा पाया तो यही तेरी गाँड़ मारूंगी "

डबल भांग का नशा चढ़ा था माँ पे , ताकत भी बहुत थी और आंगन में सिर्फ माँ, फूफा जी , बूआ और माँ की सास , ... दादी,... और दादी अपने दामाद को चढ़ा रही थीं,

" अरे पाहुन जी बहुत गरमा रही तेरी सलहज आज गाभिन कर के जाओ,... आज देख लूँ , समधन का जोबन तो जबरदस्त है पूरे गाँव से मिजवाया होगा, लेकिन देखूं बेटे को कुछ दूध वूध पिलाया है की नहीं,... "

और माँ ऊपर चढ़ी धक्के पे धक्के मार रही थीं , खूब गरमाई थीं और सास की बातें सुन के और, नन्दोई के सीने पे अपने बड़े बड़े जोबन रगड़ती बोलीं,...

" अरे दूध तो सब इनके मामा को पिला दिया है न एक चूँची से ये चुसुक चुस्सक के दूसरे से ननदोई जी के मामा,... आज इसी आँगन में आपके दामाद की गाँड़ मारूंगी, बचपन में बहुत लौण्डेबाजों से गाँड़ मरवाया होगा न वो सब भूल जाएंगे, अरे नन्दोई जी होली में ससुराल में गाँड़ मरवाना शुभ होता है अब आपके साले नहीं है आज तो सलहज ही ये सगुन करेगी , घबड़ाइये मत "





धक्के पे धक्के

पर थोड़ी देर में नन्दोई ने पलटा खाया और निहुरा के बड़े कटोरे के बराबर,... मलाई माँ के अंदर छोड़ दी,...





और अब बुआ के बोलने की बारी थी अपने पति से बोलीं,

" अरे आराम से,... निकालने की जल्दी मत करिये सब की सब मेरी गोरी गोरी मीठी मीठी भौजी की बच्चेदानी में जाना चाहिए, अगले महीने वाली पांच दिन की छुट्टी ख़त्म , एक एक बूँद रोपिये ठीक से ,... इतने दिन से तड़प रहे थे न , मड़वे में जिद किये थे की नेग में सलहज चाहिए तो अब मिल रही है सलहज तो मजे से लीजिये,... ऐसी सलहज सपने में भी नहीं मिलने वाली "





और सच में झड़ने के बाद भी पंद्रह मिनट बाद भी नहीं उतरे,... और जब उतरे भी तो दोनों टाँगे माँ की ऊपर कर के जिससे सब मलाई अंदर ही रह जाए,...

और बुआ जाने के पहले आसीर्बाद दे गयीं, भौजी ठीक नौ महीने के बाद सोहर होगा, बिटिया होगी अबकी, और काजर लगाने मैं आउंगी नेग में दोनों हाथ का कंगन लूंगी।

एक बात और बुआ ने जोड़ दिया,

" अबकी भतीजा नहीं भतीजी चाहिए, आज पूनम के पूनो सी बिटिया से गाभिन हुयी हो भौजी। "





और दादी ने भी बुआ की बात में बात जोड़ी

" सही कह रही है, अरे इसके साथ वाली अब तक तीन तीन , हर साल ,... ये तो एक के बाद, ... और मुझे भी पोती ही चाहिए,... लड़की होगी तो बच्चे के साथ खेलने के लिए वरना ,...





बुआ ने हँसते हुए जोड़ा,

" और क्या बचपन में खेलेगा और जब टनटनाने लगेगा,... तब पेलेगा . मेरा असीरर्बाद है भतीजी ही होगी आज भौजी गाभिन तो तू हो गयी हो पक्का। "

ये कहते हुए बुआ बिदा हुईं , उनकी ससुराल में होली अगले दिन पड़ रही थी और नन्दोई जी को ससुराल में होली का मजा लेना था तो,...

और थोड़ी देर बाद चाचा ... अरे वही चाची वाले, जिन्होंने भैया को पहली बार कबड्डी खेलना सिखाया ,... और माँ से

उनकी दोस्ती भी थी,... छोटे देवर,तो उन्होंने भी नंबर लगा दिया।

सगा एकलोता देवर, समौरिया तो हंसी मजाक तो खुल के होता ही थी, पहली होली में वो सौरी में ( बच्चा होने के बाद छह दिन सद्य प्रसूता जिस कमरे में रहती है और जहाँ आना जाना लगभग वर्जित रहता है ) , दूसरी होली तो उनके मायके में हुयी और अब तीसरी होली, और बच्चा भी दादी से लगा,... तो माँ, यानी देवर की भौजी भी छुनछियाई हुयी थीं और देवर की दो महीने पहले शादी हुयी थी पर चाची मायके चली गयी थीं, ... तो देवर भी फनफनाये हुए,... ऊपर से बाबू बंबई से आये नहीं थे , ...दादी भी भैया को लेके पड़ोस में कहीं गयी थीं , घंटे दो घंटे के लिए घर खाली ,...

और उसी समय देवर आ गए बस माँ पीछे पड़ गयीं,...

" अरे देवर जी थोड़ा देर हो गयी वरना एक मस्त माल था , तुमको अपने सामने चढ़वाती, तुम भी क्या याद करते, वैसे चढ़े तो पहले भी कई बार होंगे उसके ऊपर लेकिन बियाहता बहन को चोदने का वो भी उसके मरद के सामने दूना मजा मिलता है , और ऊपर से होली का दिन, अरविंदवा की बुआ अभी अभी गयी हैं,... "





देवर ने पहले तो आराम से आंगन का बाहर का दरवाजा बंद किया दोनों हाथों में रंग लगाया,... फिर भौजाई को दबोचते हुए बोला,...

" भौजी,... तोहसे मस्त माल तो कोई है नहीं फिर दो साल होली सूखी गयी , साल भर तो होली होली कह के टार देती हो और दो साल की होली सूखी गयी लेकिन अब की नहीं छोडूंगा बिन डाले,... "





" अरे जब से देवरानी आयी है तो भौजी को बिसरा गए हो और अब वो मायके चली गयी तो भौजाई याद आ रही है बकी छोडूंगी तो मैं भी नहीं आज तुमको, एही आँगन में थोड़ी देर पहले तोहरी बहिन को नंगे नचाया था उसकी बुरिया में मुट्ठी पेली थी





तो अब तोहैं नंगे नचाउंगी और तोहरी गाँड़ में मुट्ठी पेलुँगी , स्साले बचपन के गांडू ,... आज देख लेती हूँ"

माँ देवर को चुनौती देती बोलीं

भांग का नशा अभी भी उनका उतरा नहीं था हाँ बुआ के जाने के बाद साड़ी उन्होंने देह पर लपेट ली थी, ब्लाउज तो ननद ने फाड़ के चीथड़े कर दिए थे और पेटीकोट का नाड़ा खोल के तोड़ दिया था की होली के दिन का करोगी ये सब पहन के ,

तो पहले माँ ने ही झपट्टा मारा पाजामे के नाड़े पे और उनके देवर ने भौजाई के जोबन पे

कुछ देर में ही देह को होली चालू हो गयी थी पहले तो जोबन कस कस के मसले रगड़े रंगे गए उसके बाद,... वहीँ आंगन में निहुरा के देवर ने पेल दिया, ... और दोनों हाथ से कभी जोबन मसलता तो कभी रंग पेण्ट लगाता और माँ धक्के का जवाब धक्के से





नन्दोई के साथ दो राउंड हुआ था तो देवर के साथ तीन से कम क्या होता,... दो साल की होली का उधार भी चुकता करना था,... और पहली बार ही वो निहुरि एकदम झुकी और देवर के लंड की सारी मलाई बुर के अंदर जैसे कोई बुर में लंड नहीं पेल रहा हो, ... बल्कि इंजेक्शन लगा रहा हो और साथ में देवर ने कान में बोल दिया ,

" भौजी पहलौठी का तो भैया का था अबकी वाली हमार होगी,... "

" तोहरे मुंह में घी गुड़, लाला,... लेकिन अगर गाभिन न हुयी न तो सोच लो निहुराई के तोहरी महतारी के सामने तोहार गाँड़ मारब,... बस अगले महीने पता चल जाएगा"

माँ क्यों मजाक का मौका छोड़ देतीं और साथ में अपने देवर के लंड को झुकी हुयी निचोड़ निचोड़ के सीधे बच्चेदानी में,... देवर -नन्दोई का तो होली में हक होता है ,...

और उसके बाद देवर ने चुपचाप रंग लगवा लिया लेकिन रंग लगे हाथों में जब खूंटा मुठियाया गया तो फिर तन्ना गया और अबकी गोद में बैठा के ,





लेकिन थोड़ी देर बाद उसी आंगन में एकदम दुहरा कर के और अबकी भी सारी मलाई अंदर,...





तीसरी बार पहल भौजाई ने की ऊपर चढ़ के लेकिन झड़ते समय देवर फिर ऊपर

फिर नयी नयी रसीली भौजाई हो तो देवरों की संख्या तो बढ़ जाती है,

फिर दो चार तो ख़ास रिश्ते वाले तो उन्होंने ने भी चढ़ाई की,...

और मेरे बाबू भी, पता चला की कोई मालगाड़ी गिर गयी थी तो उनकी ट्रेन घूम घाम के डेढ़ दिन लेट,...

तो रात को तो उन्होंने माँ की क्लास ली ही, तीन चार राउंड पूरे और हर बार पूरी मलाई,...





माँ ने कहाँ देख , चढ़े तो छह सात रहे होंगे, ... लेकिन तीन की मलाई पूरी की पूरी बच्चेदानी में गयी थी, तेरे फूफा चाचा और बाबू इसलिए मैं कहती हूँ पता नहीं.

कुछ देर रुक के माँ मुस्कराने लगीं और गीता के बिना पूछे बोलीं

" अरे एकदम ठीक दिन घड़ी जोड़ के थोड़े ही पता चलता है कब गाभिन हुयी,... होली के अगले दिन ही तेरे मामा भी आये थे,... तेरे बाऊ जी और फूफा जी बाजार गए थे ,

घर में कोई था नहीं, तेरा भाई तो हरदम अपनी दादी, बुआ और चाची के पास,... और ,... बस,... "

गीता बड़ी बड़ी आँखों ने बिन बोले पूछ लिया की क्या मामा के साथ भी





और माँ की खिलखिलाहट ने हामी भर दी,...

फिर मुस्कराते हुए उन्होंने जोड़ा तेरे बाबू की रात भर की मलाई बची थी उसी में तेरे मामा ने भी तो मैं क्या बताऊँ ,...





लेकिन फिर गीता का उदास चेहरा देख के माँ ने उसे दुलार से गले लगा लिया और चूमते हुए बोलीं,

" अरे स्साली काहें कुम्हला रही है, तू मेरी कोख से पैदा हुई मेरी बेटी है और तेरा भाई मेरी कोख से जन्मा, मेरा बेटा,... तो तू भाईचोद और तेरा भाई बहनचोद,... "
 
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