- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 31,768
ट्रेन में मस्ती
वो वापस केबिन में आये और मैं अपनी ससुराल की होली की यादों के झुरमुट से
जब तक वो कोच का दरवाजा बंद कर के आये , ... मैंने दोनों नीचे की बर्थ पर बिस्तर लगा दिया था , पर छुटकी बोली
" दी , मैं ऊपर लेटूंगी ,... "
उसे चिढ़ाते मैं बोली ,
" किसके ऊपर ,... "
भले वो नौवीं में पढ़ती थी पर थी तो मेरी बहन , रीतू भाभी की ननद , डबल मीनिंग में एक्सपर्ट हो गयी थी , ...
' दी जीजू के ऊपर ,... " हँसते हुए वो बोली।
तब तक वो आ गए थे और टी शर्ट पेंट उतार के टांगते बोले , सिर्फ बनयायन और शार्ट में
" सही तो कह रही है मेरी साली , ... " और छुटकी को खींच कर अपनी गोद में बैठा लिया ,...
आने के पहले तो वो मंझली के साथ लगे थे उसके पिछवाड़े का उद्घाटन करने में , खाने के लिए टाइम बचा नहीं था , तो मम्मी ने गुझिया , मिठाई और बहुत सी चीजें रख दी थी ,
मैं भी अपनी साडी उतार के तहियाने में लगी थी , तब तक उन्होंने पूछा ,
" कुछ खाने को है क्या ,... "
" जीजू आप भी न , ... मैं हूँ न देती हूँ आप को अभी ,... " छुटकी बोली और गुझिया के एक डब्बे से गुझिया निकाल के अपने मुंह में रख के अपने जीजू को ललचाने लगी।
मैं भी ब्लाउज पेटीकोट में उनके दूसरी ओर बैठ गयी और छुटकी को चिढ़ाते बोली ,
" एकदम याद रखना , मेरे साथ चल रही हो ,... आज भी देना , ...और वहां भी पहुँच कर देना , कुछ दिन मैं आराम से सोऊंगी। "
उन्हें तो मौका मिल गया गोद में बैठी साली के होंठ से होंठ सटाने का चुम्मा लेने का और साली भी शातिर
वो सारी गुझिया खुद गड़प कर गयी
और मैं उसे मना भी नहीं कर पायी , ये गुझिया इनके सलहज की रीतू भाभी की बनाई थी , डबल भांग वाली , ..गुझिया अंदर शरम लिहाज बाहर ,...
लेकिन दूसरी गुझिया छुटकी ने ईमानदारी से उन्हें खिला दी , हाँ खिलाई अपने होंठों से ही पकड़ के ,...
और डीप किस चालू ,
उसके जीजा की जीभ उसके मुंह के अंदर और वो ऐसे चूस रहे थी जैसे अपने जीजू का मोटा औजार ,... और जीजू का एक हाथ कस के उसके सर को और दूसरा हलके से उसके उभार को सहलाते
जान बूझ के मैंने उसके लिए ऐसी फ्राक चुनी थी जो उसको दो साल पहले ही टाइट होती थी ,
मेरी तरह से मेरी बहनों का भी जोबन ज्यादा ही गदराया , अपनी उम्र की लड़कियों से २२ नहीं २४-२६ होता है ,... और पतली कमर पर तो वो और ,... छुटकी की कच्ची अमिया साफ़ साफ़ ,
जीजू का हाथ हटाते वो बोली ,
" जीजू आप बहुत गंदे हो मैं आपसे नहीं बोलती , अभी तक दर्द कर रहा है ,... " बड़े नखड़े से उनकी छोटी साली बोली ,
" सही कह रही है तू सच में तेरे जीजू बहुत गंदे है ,... " मैंने उसे छेड़ा तो अब वो एकदम पलट गयी
" हे ये जीजू साली के बीच की बात है दी , ... मेरे जीजू हैं गंदे है या अच्छे , हैं तो मेरे जीजू ,... " और छुटकी एकदम उनकी गोद में बैठी चिपक गयी।
वो एक हाथ से उस के गोरे मखन से मुलायम गालों को सहला रहे थे अब गाल चूमते बोले ," क्यों यहाँ दर्द हो रहा है क्या , अभी मैं चूम लेता हूँ सब दर्द चला जाएगा " और अब एकदम खुल के वो गाल चूम चूस रहे थे ,
गाडी चली जा रही थी ,...
खुली खिड़की से हलकी हलकी फगुनाई बयार आ रही थी, रात हो गयी थी पर परसों ही तो पूनो थी , चांदनी छिटकी हुयी खुली खुली खिड़की से , और बाहर बस परछाईं सी आम के बाग़ , गन्ने के खेत , और बीच बीच में कोई कस्बा गुजरता या कोई छोटा स्टेशन जहाँ गाडी को रुकना नहीं होता था तो तेजी से एक रौशनी गुजर जाती
वो वापस केबिन में आये और मैं अपनी ससुराल की होली की यादों के झुरमुट से
जब तक वो कोच का दरवाजा बंद कर के आये , ... मैंने दोनों नीचे की बर्थ पर बिस्तर लगा दिया था , पर छुटकी बोली
" दी , मैं ऊपर लेटूंगी ,... "
उसे चिढ़ाते मैं बोली ,
" किसके ऊपर ,... "
भले वो नौवीं में पढ़ती थी पर थी तो मेरी बहन , रीतू भाभी की ननद , डबल मीनिंग में एक्सपर्ट हो गयी थी , ...
' दी जीजू के ऊपर ,... " हँसते हुए वो बोली।
तब तक वो आ गए थे और टी शर्ट पेंट उतार के टांगते बोले , सिर्फ बनयायन और शार्ट में
" सही तो कह रही है मेरी साली , ... " और छुटकी को खींच कर अपनी गोद में बैठा लिया ,...
आने के पहले तो वो मंझली के साथ लगे थे उसके पिछवाड़े का उद्घाटन करने में , खाने के लिए टाइम बचा नहीं था , तो मम्मी ने गुझिया , मिठाई और बहुत सी चीजें रख दी थी ,
मैं भी अपनी साडी उतार के तहियाने में लगी थी , तब तक उन्होंने पूछा ,
" कुछ खाने को है क्या ,... "
" जीजू आप भी न , ... मैं हूँ न देती हूँ आप को अभी ,... " छुटकी बोली और गुझिया के एक डब्बे से गुझिया निकाल के अपने मुंह में रख के अपने जीजू को ललचाने लगी।
मैं भी ब्लाउज पेटीकोट में उनके दूसरी ओर बैठ गयी और छुटकी को चिढ़ाते बोली ,
" एकदम याद रखना , मेरे साथ चल रही हो ,... आज भी देना , ...और वहां भी पहुँच कर देना , कुछ दिन मैं आराम से सोऊंगी। "
उन्हें तो मौका मिल गया गोद में बैठी साली के होंठ से होंठ सटाने का चुम्मा लेने का और साली भी शातिर
वो सारी गुझिया खुद गड़प कर गयी
और मैं उसे मना भी नहीं कर पायी , ये गुझिया इनके सलहज की रीतू भाभी की बनाई थी , डबल भांग वाली , ..गुझिया अंदर शरम लिहाज बाहर ,...
लेकिन दूसरी गुझिया छुटकी ने ईमानदारी से उन्हें खिला दी , हाँ खिलाई अपने होंठों से ही पकड़ के ,...
और डीप किस चालू ,
उसके जीजा की जीभ उसके मुंह के अंदर और वो ऐसे चूस रहे थी जैसे अपने जीजू का मोटा औजार ,... और जीजू का एक हाथ कस के उसके सर को और दूसरा हलके से उसके उभार को सहलाते
जान बूझ के मैंने उसके लिए ऐसी फ्राक चुनी थी जो उसको दो साल पहले ही टाइट होती थी ,
मेरी तरह से मेरी बहनों का भी जोबन ज्यादा ही गदराया , अपनी उम्र की लड़कियों से २२ नहीं २४-२६ होता है ,... और पतली कमर पर तो वो और ,... छुटकी की कच्ची अमिया साफ़ साफ़ ,
जीजू का हाथ हटाते वो बोली ,
" जीजू आप बहुत गंदे हो मैं आपसे नहीं बोलती , अभी तक दर्द कर रहा है ,... " बड़े नखड़े से उनकी छोटी साली बोली ,
" सही कह रही है तू सच में तेरे जीजू बहुत गंदे है ,... " मैंने उसे छेड़ा तो अब वो एकदम पलट गयी
" हे ये जीजू साली के बीच की बात है दी , ... मेरे जीजू हैं गंदे है या अच्छे , हैं तो मेरे जीजू ,... " और छुटकी एकदम उनकी गोद में बैठी चिपक गयी।
वो एक हाथ से उस के गोरे मखन से मुलायम गालों को सहला रहे थे अब गाल चूमते बोले ," क्यों यहाँ दर्द हो रहा है क्या , अभी मैं चूम लेता हूँ सब दर्द चला जाएगा " और अब एकदम खुल के वो गाल चूम चूस रहे थे ,
गाडी चली जा रही थी ,...
खुली खिड़की से हलकी हलकी फगुनाई बयार आ रही थी, रात हो गयी थी पर परसों ही तो पूनो थी , चांदनी छिटकी हुयी खुली खुली खिड़की से , और बाहर बस परछाईं सी आम के बाग़ , गन्ने के खेत , और बीच बीच में कोई कस्बा गुजरता या कोई छोटा स्टेशन जहाँ गाडी को रुकना नहीं होता था तो तेजी से एक रौशनी गुजर जाती