Apne Pyaare rishte - SexBaba
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Apne Pyaare rishte

hotaks

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Dec 5, 2013
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क्लिक हेरे फॉर इंडेक्स

स्पोइलर: करैक्टर गुइडेलिने

(दादा जी) ठाकुर समशेर परताप सिंह

(दादी जी) संध्या देवी

(चाचा) ठाकुर धर्मवीर प्रताप सिंह

(चची) शर्मीला सिंह

मीणा और रीना :- सिस्टर्स

रीना हीरो की लवर और सेक्स पार्टनर

मीणा हीरो की लवर और सेक्स पार्टनर

(छोटे चाचा) :- ठाकुर वीर प्रताप सिंह

(में) :- ठाकुर राजवीर प्रताप सिंह

रजनी :- हीरो की असली माँ (डेड)

रणवीर :- हीरो के पिता (डेड)

नाना :- शेखर चौधरी

नानी :- सिमा चौधरी

बी. मां :- अरुण

ममी :- कामिनी

स. मां :- संजय

मौसी :- दीपा

सनिका :- मौसी की बेटी

स्वाति :- सनिका की दोस्त

(गाइड) आचार्य राघवेंद्र

काल :- हीरो इन्ही के शक्तियों का उत्तराधिकारी है

(हीरो के रूप)

किंग

योद्धा

साधु

तांत्रिक

एंजेल

डेविल

साइड चरक्टेर्स

मीरा माँ :- हीरो के लिए माँ सामान और हीरो की पहली सेक्स पार्टनर

साक्षी :- हीरो पर क्रश है और उसकी सेकंड सेक्स पार्टनर

कजरी :- ये भी हीरो की सेक्स पार्टनर है

भीमा :- दादाजी का राइट हैंड

शेरा :- भीमा का छोटा बीटा

संग्राम :- भीमा का बड़ा बीटा

शिवा :- भीमा का भतीजा

बिल्ला :- नानाजी का राइट हैंड

सम अपकमिंग करैक्टर

लक्ष्मी :- मैं हीरोइन

लक्ष्मी के पिता :- सुनील सिंह

ओठेर्स नॉट हैवे तो मच रोले

पंडित जी :- लक्ष्मी के घरवालों के कुलगुरु

जैसें :- हीरो का जीन और जिन्नलोक का राजकुमार

मर. नेगेटिव :- थे ओने ऑफ़ थे विलन

सूबा :- थे स्लेव ऑफ़ मर. नेगेटिव

उमिर :- आल्सो स्लेव ऑफ़ मर. नेगेटिव

महामहिम अननोन विलन

(बृजेश) प्रभु थे ग्रेट गॉड फ्रॉम इटरनल रिलिजन

पावर्स ऑफ़ हीरो

1) सप्त चक्र

2) फाइव एलिमेंट

3) स्लो मोड

4) थर्ड ऑय

5) हिज वैरिएंट्स (रूप)

6) विजयी धनुष

7) मायावी शक्तिया (फ्रॉम तांत्रिक)

8) सात्विक शक्तिया (फ्रॉम साधु)

9) नॉलेज

10) चक्र अस्त्र

11) वेपोनिदे ड्रैगन

12) तामसिक तत्त्व (फ्रॉम डेविल)

13) सात्विक तत्त्व (अष्ट विधि) (फ्रॉम एंजेल)

14) थे रीपर आर्मी (डेविल्स आर्मी)

थे पावर्स ऑफ़ हीरोइन

1) सुपर स्ट्रेंथ

2) फ्लाइंग एबिलिटी

3) मंद कण्ट्रोल एबिलिटी

4) थे कार्नेज क्वीन

5) थे कार्नेज आर्मी

6) थे वेपन्स क्रिएटिंग एबिलिटी

7) थे कार्नेज आर्मर

8) कॉपी कैट

एंड सम मोरे चरक्टेर्स अरे कमिंग इन फ्यूचर


जिन चरक्टेर्स का कहानी में ज्यादा रोल नहीं है उन्हें इग्नोर किआ गया है

{ कम्प्लेटेड }
 
अप्रैल महीने के शुरवाती दिन दुपहर का समय था थे गर्मी अपने चरम पर थी

ऐसी ताप्ती गर्मी को देख सरे किसान तक खेती का काम अधूरा छोड़ अपने घर या खेतो में बने jhopde(tent) में जाकर आराम करने लगे खेतो में कुछ गिने चुने hi लोग काम कर रहे थे

उसी में 1 20 साल का लड़का भी था जिसने अपना चेहरा पूरी तरीके से ढाका हुआ था वह पूरी जी जान लगा के काम कर रहा था उस का पूरा शरीर पसीने से भीग चूका था

वो खेतो में उग चुकी फसल को काटने में लगा था 1 तरफ की फसल काट कर दूसरी तरफ जाता है और वह की फसल काट काटने लगता है अभी आधी फसल hi कटी hi थी की शाम हो गयी और उस खेत में काम करने वाले सरे मजदूर अपनी अपनी मजदूरी लेने के लिए लाइन में लग जाते है वो लड़का भी उसी लाइन में लगा हुआ था अभी कुछ देर hi हुई थी की 1 आदमी आकर 1 खुरच पर बैठ जाता है और बही खता निकल हिसाब करने लगता है और फिर सबको पैसे बाटने लगता है जो की उनकी मेहनत से बहुत hi काम थे

मजदूर :- ये क्या मुनीम जी आज भी आप आधे hi पैसे दे रहे हो ये अन्याय मत करिये हमारे घर पर बीवी बचे भूखे बैठे है

मुनीम (गुस्से से) :- सेल! दो कोड़ी के मजदूर मुझे सही गलत सिखाता है चुप चाप निकल जा नहीं तोह जो मिल रहा है वो भी नहीं मिलेगा निकल जा यहाँ से

वो बिचारा मजदूर मायूस होक निकल जाता है

लड़का :- रुकिए काका

अभी वो मजदूर निकला hi था की वो लड़का उसे रुकने के लिए बोलता है ऐसे बोलने से सबकी नजरे उसी पे टिक जाती है फिर वह चलके मिनीम के पास आता है

लड़का :- काका के पुरे पैसे दे नहीं तोह ाचा नहीं होगा

मुनीम :- क्या है लड़के दूध के डाट तोह टूटे नहीं और मुझे धमका रहा है

इतना बोलके मुनीम उस लड़के को ढाका देता है जिसे उसे कुछ ज्यादा फर्क तोह पड़ा नहीं लेकिन फिर वह एक पत्थर उठके अपने हाथो पर जखम के निशान बना देता है जिससे देख सब कंफ्यूज हो जाते है निशान बनाते हुए वो इतना जोर लगता है की उसके हाथ से खून निकल आता है

मुनीम :- अबे पागल हो गया है क्या कोई इसे यहाँ से ले जाओ रे

चत्तत्ताआआक

अभी मुनीम कुछ बोलता के तभी वो लड़का मुनीम का जोर से तमाचा मर देता है

मुनीम (बेहद hi गुस्से में) :- तेरी इतनी हिम्मत मुझ पर हाथ उठता है तुझे अभी बताता हु की तूने किस्से पन्गा लिया है

इतना बोलके वो मुनीम भागता हुआ कही निकल जाता है

काका (मजदूर) :- बीटा ये क्या किया तुमने मुझ गरीब के खातिर इतना खतरा मोल लिया अब जरूर वो जेक ठाकुर के कान भरेगा

लड़का :- में किसीसे नहीं डरता काका (थोड़ा जोर से) बस आप सब लोग मेरी है में है मिला न

सब एक साथ :- ठीक है

लड़का :- बस इस बात का ध्यान रखना की में गलत न तहरु ठाकुरो के सामने

अभी कोई कुछ बोलता की तभी वह 1 के बाद एक 3 गाड़िया आकर रूकती है उन मेसे काफी सरे आदमी निकलते है सब वही रुकते है बस उन मेसे 5 hi लोग आगे बढ़ते है जिनमेंसे 1 मुनीम था 1 70-75 आगे का बूढ़ा इंसान और बाकि तीन 30-35 साल के लगभग थे

मुनीम :- आइये ठाकुर साहब बैठिये यही है वो लड़का जो मुझे मार के पैसे चुराना चाहता था

लड़का :- ये झूठ बोल रहा है ठाकुर साहब ये मजदूरों के हक़ के पैसे मरता है उन्हें बस आधी है कमाई देता है

मुनीम :- नहीं ये झूट बोल रहा है

ठाकुर(70 - 75 आगे वाला) :- हम तुम्हारा यकीं कैसे करे

लड़का :- आप चाहे तोह इन मजदूरों से पूछ लीजिये

मुनीम :- ठाकुर साहब इसने सबको ज्यादा पैसो की लालच देकर अपने साइड कर लिया होगा

ठाकुर:- हमे साबुत चाहिए

लड़का :- मैं इन पैसो को क्यों चुराऊँगा मेरे पास इस से भी ज्यादा है

मुनीम :- देखा ठाकुर साहब कैसे बोलता है मेरे हिसाब से तोह ये पका चोर है आप इसे भीमा के हवाले कर दीजिये

ठाकुर :-( उन तीनो मेसे 1 को देखते हुए)

भीमा मुझे सब सच जानना है जा

जैसे hi भीमा उस लड़के की तरफ बढ़ना सुरु करता है की तभी

लड़का :- रुक जाइये भीमा चाचा

लड़का अपने चेहरे पर बंधा हुआ गमछा निकलते हुए

लड़का :- अब यकीं आया दादाजी

जब वो लड़का अपना चेहरा दिखता है सब चौक जाते है उस मुनीम की तोह पहात के 4 हो गयी थी

मुनीम (दरसे हकलाते हुए) :- च…… चोए माँ.. मालिक

लड़का :- है छोटे मालिक अब बोल में क्यों चुरौ ये पैसे जब की इस पुरे राज गड का वरिष्ठ हु में

सरे किसान तोह बस तक लगाए देखे जा रहे थे

ठाकुर (दादाजी) :- राज बीटा ये क्या हो रहा है यहाँ पर और तुम इस हालत में हमे शुरवात से बताओ

राज :- (सब को सुरवात से सब बता ता है) ये सब हुआ दादाजी

जो और दोनों आये थे उन मेसे एक जो सब सुन रहा था वो सब समझ के मुस्कुरा रहा था वही दूसरा आदमी थोड़ा गुस्से में था

आदमी1 (गुस्से वाला) :- बीटा तुम्हे लगी तोह नहीं न

राज (अचानक रुवासा होने का नाटक करते हुए) :- लगी न चाचा ये देखिये (अपना हाथ दिखते हुए जहा पत्थर से कुरुदने से खून निकल ता है) इस मुनीम ने जब ढाका दिया तब मुझे लगा बहुत जल रहा है

मुनीम को समझ hi नहीं रहा था की क्या बोले

आदमी1 :- भीमा इस मुनीम को जिन्दा मत छोड़ना

भीमा :- जी मालिक

राज :- चाचा इसे पूरा गाओ दौड़ते हुए घर ले आओ और है जहा भी रुके वही उसे बेल्ट से मरना सुरु करना जब तक ये फिर भागने न लगे न इसे कुछ खाने देना न पिने

भीमा :- जी छोटे मालिक

राज :- फिर से छोटे मालिक आप को कितनी बार बोलै है की मुझे बीटा बोलै कीजिये (फिर दादाजी की तरफ देखते हुए) चले दादाजी मुझे बहुत भूक लगी है

ठहर :- है चल बीटा पता नहीं तूने सबेरे से कुछ खाया भी होगा की नहीं ( आदमी 2 की तरफ देखते हुए) छोटे तू यही रुक और सरे मजदूरों को उनकी मजदूरी बाँट याद रहे किसी को भी 1 रुपया भी काम नहीं मिलना चाहिए

सरे गाओं वाले इतना सुन कर खुश हो गए और एक साथ दादाजी के नाम का जय जैकार करने लगे

दादाजी :- चले बीटा

राज :- एक मिनट दादाजी

फिर राज उसी खेत में बने 1 रूम में जाता है और जिन कपड़ो में घर से निकला था वही कपडे पेहेन के आता है

उसके बाद जब सब घर पहुंचे तोह

आँगन में hi एक 65-70 के उम्र की महिला बहार hi कड़ी थी जिसे देख कर hi लग रहा था की बड़ी चिंतित है

महिला (दादाजी से) :- आप कहा चले गए थे पता है कितनी चिंता हो रही थी एक तोह राज भी पता नहीं सुबह से गायब है

तभी गाड़ी से राज निकला

राज :- कैसी चिंता दादी ये गांव भी तोह मेरे घर hi है और अपने hi घर में कैसे किसी को खतरा होगा (दादी के गले मिलके) है लेकिन भूक जोरो की लगी है

दादी :- आज तेरा खाना कैंसिल आज भूका hi रहना तभी तुझे अकाल आएगी

राज (मायूसी के साथ) :- ठीक है दादी वैसे भी सुदाह से एक गिलास पानी भी नहीं पिया था उसके बाद सुबह से लेके अब तक खेतो में काम भी किया पुरे 1.5 हिस्से की कटाई की बहुत भूक लगी थी (रुवासा होकर) मुझे चोट भी लगी मुझे लगा घर जाकर अपनी प्यारी दादी के हाथ का खाना खाऊंगा तोह ठीक हो जाऊंगा लेकिन कोई बात नहीं

इतना बोलके राज अपने कमरे की तरफ दौड़ पड़ा हुए कमरे में जाकर दरवाजा बंद करके मुस्कुरा रहे था की तभी उसके कमरे का दूर नॉक होता है तोह वो तुरंत hi अपना चेहरा रुवासा कर लेता है

जब दरवाजा खोलता है तोह सामने दादी थी

राज :- क्या है दादी अब सोना भी कैंसिल क्या

दादी :- चल अब खाना खा ले

राज :- नहीं दादी में अपने दादी का कहा ाकभी मन नहीं करता आपने कह दिया खाना कैंसिल मतलब कैंसिल

दादी चल अब खा ले अभी क्यों अपनी दादी का कहा ताल रहा है

राज :- आपकी बात भी सही है लेकिन आप मुझे अपने हाथो से खिलाओगी

दादी :- ठीक है चल

राज :- मेरी प्यारी दादी

दादी :- चल अब मस्का मत लगा और अगली बार कैंसिल मतलब कैंसिल चाहे तू कुछ भी कर

राज (मुस्कुरा कर) :- है दादी कैंसिल मतलब कैंसिल

फिर दोनों निचे आते जहा सरे डाइनिंग टेबल पर बैठे थे


वो दोनों भी सबके साथ बैठकर खाना कहते है जब सब सोने जाते है तभी.....

माय 1सत स्टोरी

रूद्र (एडवेंचर स्टोरी)
 
इंट्रोडक्शन



जयपुर के मध्य स्थित शेरगढ़ 120 गाओ में फैला हुआ राज्य जहा अभी बह राज परिवार का शाशन चलता है यहाँ के किसी भी गाओ को इस शहशन से कोई परेशानी नहीं थी

यहाँ हर गाओ में 1 सरपंच को नियुक्त किया जाता है जो हर महीने के ऑनर राजपरिवार को गाओ के हालातो से अवगत करता है

अब आते है राज परिवार पर

(दादा जी) ठाकुर समशेर परताप सिंह :- आगे 70

ये स्ट्रिक्ट नेचर के इंसान है

हेड ऑफ़ फॅमिली होने के नाते सरे बड़े फैसले इनके परमिशन के बिना अधूरे है

ये अपने परिवार से बहुत प्यार करते है स्पेशलय अपने पोते से

सरे मेंबर्स इनसे बहुत डरते है

(दादी जी) संध्या देवी :-

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आगे 65

ये स्ट्रिक्ट नेचर के इंसान है लेकिन मॉडर्न थिंकिंग के साथ

ये भी अपने परिवार से बहुत प्यार करते है अपने पोते को अपने बेटे से भी ज्यादा प्यार करती है

इन दोनों के 4 संतान है 3 लड़के 1 लड़की

(चाचा) ठाकुर धर्मवीर प्रताप सिंह :- आगे :- 39

अपने पिता की 2ऋ संतान ये अपने पिता का बिज़नेस सँभालते है

(चची) शर्मीला सिंह :-

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आगे 37

ये हाउसवाइफ है इन्हे कोई बीटा नहीं है इसलिए अपने हीरो को hi अपना बीटा मंटा है

इनको 2 लड़किया है

मीणा और रीना :-

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आगे 20 दोनों जुड़वा है (फेसेस अरे नॉट सिमिलर) ये दोनों को पढाई कम्पलीट हो चुकी है फिलहाल घर में hi रहती है

अपने हीरो पर जान छिड़कती है

(छोटे चाचा) :- ठाकुर वीर प्रताप सिंह

आगे :- 30

अपने पिता के खेत सँभालते है उम्र ज्यादा नहीं हुई इसलिए अभी तक कुंवारे है

मजाकिया स्वाभाव के है

(में) :- ठाकुर राजवीर प्रताप सिंह

आगे :- 18

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जनम देते वक़्त hi माँ गुजर गयी उसी सदमे में पापा को हार्ट अटैक आया तोह वो भी गुजर गए तब से मुझे मेरे चाचा चची ने hi माँ पापा का प्यार दिया और उनकी बेटियों ने भी मुझे सेज भाई से ज्यादा प्यार किया



बाकि के चरक्टेर्स टाइम के साथ आते रहेंगे
 
अपडेट 2



फिर दोनों निचे आते जहा सरे डाइनिंग टेबल पर बैठे थे

वो दोनों भी सबके साथ बैठकर खाना कहते है जब सब सोने जाते है तभी……

अब आगे

(में एक बात क्लियर कर देता हु अपने हीरो के माँ बाप बचपन में hi मर गए है और उसे अपने बड़े चाचा चची ने hi माँ पापा का प्यार दिया है इसलिए वह ु को माँ डैड बुलाता है)

तभी भीमा (दादाजी का खास) मुनीम को लेके हवेली आ गए

दादीजी :- क्यों मुनीम हमे धोखा देते हुए जरा भी दर नहीं लगा

मुनीम :-(रट हुए) माफ़ी मालकिन माफ़ी

डैड (बड़े चाचा जिन्हे में डैड बोलता हु):- क्यों अब क्या हुआ अब नहीं करना कोई चल बोल अब क्या करे तेरा

दादाजी :- इसकी गलती की क्या सजा देनी है ये हमारे वरिष्ठ hi तय करेंगे

डैड :- बोल बीटा राज क्या सजा देनी है

में :- भीमा चाचा इसके पास से इसकी साडी धन दौलत जमीं जब्त कर लीजिये और इसे केवल इसका 2 समय का खाना बना पाए उतनी hi जमीं इसे दी जाये और इसके परिवार को अगर इसके साथ रहना है तोह इसके साथ रह सकते नहीं तोह जिस घर में अभी रहते है वही रहे बस साडी धन दौलत हमें देने के लिए कहा जाये

अभी मेने फैसला सुनाया hi था की हवेली के अंदर 1 सेवक आ जाता है

सेवत :- मालिक मुनीम की पत्नी अपने बचो के साथ आयी है

दादाजी :- उन्हें आने दो

सेवक चला जाता है और मुनीम की पत्नी रट हुए अंदर आ जाती है उसके साथ उसका बीटा और बेटी भी थे

M.k.p :- मालिक इन्हे माफ़ कर दीजिये

दादाजी :- इसने हमारे साथ धोके बजी की है और हमने इसे सजा दे दी है

म. क. प :- मालिक दया कीजिये मेरे बचे सड़क पर आ जायेंगे

डैड :- सुनाई नहीं देता क्या क्या निकलो यहाँ से और कल सुबह अपने साडी धन दौलत हमारे हवाले कर देना

म. क. प. :- मालिक वप सब मेने अपनी बेटी के शादी के लिए जमा किये थे 2 महीने बाद शादी है इसकी कुछ तोह दया कीजिये

छोटे चाचा :- तुम लोग ऐसे नहीं मानोगे भीमा इन्हे ढके मार के बहार निकालो

दादाजी :- छोटे शांत (मुनीम के परिवार से) अब तुम लोग जा सकते हो

जब वो लोग जाने को होते है

में :- सुन chetan(munim का बीटा) कल से अपने पिता की जगह ले लेना और अगर तूने भी अपने पिता की तरह कोई नीच हरकत की तोह देख लेना अंजाम बहुत बुरा होगा

भीमा चाचा इनके प्रॉपर्टी के सील की करवाई इनके बेटी की शादी के 2 हफ्तों बाद सुरु करना (मुनीम के परवर से) अगर इन दिनों हमे पता चला की आप कोई भी जमीं या जेवरात बेचने की कोशिश कर रहे है तोह याद रखना अब आप जाइये रामु काका (ड्राइवर) आपको आपके घर तक छोड़ आएंगे अलविदा

मेरा ये फैसला सुन जहा मुनीम और उसका परिवार जहा खुश था वही मेरा परिवार मुझे शॉक से देख रहा था

जब वो लोग चले गए तब दादाजी मुझसे बोले

दादाजी :- राज हमे तुम्हारा फैसला सही नहीं लगा अगर उन्होंने फिर से चल किआ तोह

में :- दादू इस फैसले से हमारे बहुत से फायदे होंगे

डैड :- और वो कैसे

में :- वह ऐसे की अगर हम कोई नया मुनीम ढूंढते तोह इसकी क्या गारंटी की वह भी हमारे साथ चल नहीं करेगा

ऊपर से उसे ढूंढ़ने में 2-3 दिन जाते बाद में उसे सारा काम समझने में 1महीना तोह लगता उस टाइम काम कोण संभालेगा

फिर ये चेतन मुनीम के बीटा है इसे पता है ये कई बार मुनीम के गैर हाज़री में काम कर चूका है तोह उसे एक्सपीरियंस भी है और वह पढ़ा लिखा भी है

दादाजी :- अरे हमने इस तरह से सोचा hi नहीं था

छोटे चाचा :- है पिताजी ये सही है लेकिन अगर उन्होंने फिर से चल किआ तोह

में :- नहीं करेंगे

स. चाचा :- और ऐसा क्यों

में :- ऐसा इसलिए क्यूंकि उसने देखा है की हमे धोखा देने का क्या अंजाम होता है और अगर फिर भी उसने चल करने की कोशिश की तोह सबसे पहले उसकी माँ hi उसे मारेगी

दादीजी :- है ये तोह सही कहा

में :- तोह फिर चलो सो जाते है

अब सब लोग सो जाते है

में आपको हवेली के बारे में बता देता हु

उसे हवेली बोलना ठीक नहीं होगा वह पूरा महल है




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ये 1 मंजिला महल है ग्राउंड फ्लोर पर दादा दादी का रूम है और mom-dad (बड़े चाचा चची) का रूम है वही ऊपर की मंजिल पे मेरा और छोटे चाचा का रूम है हम दोनों के रूम के बिच एक और रूम है जो बंद hi रहता है मेरे रूम से हॉल में जाने रस्ते में 3 कमरे और आते थे जिनमेंसे 1 रीना दीदी और एक कमरा मीणा दीदी का था


अब मेरे रूम की बात



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मेरा रूम इस हवेली का सबसे शानदार कमरा है मेरे रूम की बालकनी से पूरा गांव दीखता है हवेली का हर रूम साउंड प्रूफ है


नेक्स्ट डे

ात मॉर्निंग

में अपने रूम में आराम से सो रहा था की तभी मेरे कमरे के दरवाजे पे नॉक हुआ जिससे मेरी नींद खुल गयी जब में ने दरवाजा खोला तब बहार माँ थी जो मुझे उठाने आयी थी

माँ :- गुड मॉर्निंग बीटा

में :- गुड मॉर्निंग माय डिअर माँ

माँ :- चल ये मस्का लगाना बंद कर और तैयार होजा हमे मंदिर भी जाना है

में :- आज क्या खास है माँ जो मंदिर जाना है

माँ :- आज आपका जन्मदिन है और आपको कुछ याद hi नहीं है

में :- खुद का जन्मदिन भी कोई याद रखता है

माँ :- बीटा मेरी एक बात मानेगा न

में :- आप हुकुम करो माँ

माँ :- बीटा आज तेरे दोनों चाचा और दादा ने मिलके एक छोटी पार्टी रखने का प्लान किआ है प्लीज मन मत करना

में :- क्या माँ आप सब को पता नहीं क्या मुझे ये बिरथ डे मानना पसंद नहीं

माँ :- लेकिन बीटा क्यों नहीं मानना बर्थडे देख जो हमे छोड़ कर जाता है वह कभी वापस नहीं आता तोह हम क्यों उनकी याद में दुखी हो सोच अगर तुम्हारी माँ तुम्हे आसमान से देख रही होगी तोह उन्हें कितना बुरा लगेगा तुम्हे इतना साद देख के हाँ बोल

में :- ठीक है माँ लेकिन बस फॅमिली मेंबर्स होने चाहिए बहार का कोई भी नहीं

माँ :- थैंक्स बीटा और अब जल्दी से फ्रेश होजा और अछेसे रेडी होक निचे आ फिर मंदिर भी जाना है

में :- ठीक है माँ में अभी आया

फिर माँ चली गयी में भी फ्रेश होक जब

में निचे जा रहा था तोह मेरी नज़र अपने आप hi रीना दीदी के कमरे पे चली गयी जहा वह कपडे बदल रही थी




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उन्हें देखके मेरे कदम वही थम से गए में समझ hi नहीं प् रहा था की मेरे साथ हो क्या रहा है शायद इसलिए की किसी भी लड़की या औरत को इस हालत में देखने का ये मेरा फर्स्ट टाइम था


में तोह ये hi विश कर रहा था की ते लम्हा यही थम सा जाये लेकिन ईश्वर को कुछ और hi मंजूर था तभी रीना दीदी अचानक से पलट गयी और मुझे खुदको देखते हुए पकड़ लिया और जब मेरे नज़रों का पीछा किया तोह उन्हें पाया की में उनके hi गांड को घूर रहा हु जिससे उन्हें गुडसा आया और 1 तकिया जोर से मुझे फेक के मारा जिससे में होश में आया तोह देखा की रीना दीदी मुझे hi गुस्से से देख रही है और उनकी आखो में ासु है में तुरंत वह से भाग के अपने रूम में आ गया और आखे बंद करके खुद को कोष ने लगा

की जिस बेहेन ने मुझे अपने आप से बढ़ कर प्यार दिया उसी बेहेन के आखो में मेरे वजह से ासु आगये

यही सब सोचते सोचते मेरे आखो के सामने फिर से वही दृश्य आ गया जब रीना दीदी अपने कपडे चेंज कर रही थी और इस बजह से मेरा लुंड अपने आप hi खड़ा होने लगा लेकिन जब दरवाजे पे नॉक हुआ तोह मुझे होश आया की में क्या सोच रहा था और फिर मेने कैसे तैसे करके खुद को शांत कराया और लुंड को पंत में hi एडजस्ट करके दरवाजा खोला तोह सामने माँ कड़ी थी

माँ :- कितनी देर बीटा जल्दी चल सब इंतज़ार कर रहे है

में :- है माँ चलिए

फिर माँ और में निचे उतरने लगे जहा सारा परिवार मौजूद था

तोह देखते है आज का जन्मदिन अपने हीरो के लाइफ में कैसे बदलाव लता है

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आज के लिए इतना hi थर्सडे तक रेविएवस स्पैम करते रहे


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अपडेट 3



फिर माँ और में निचे उतरने लगे जहा सारा परिवार मौजूद था

अब आगे

जब मेने देखा सारा परिवार ब्रेकफास्ट करने के लिए दिंनिंग टेबल पे बैठे थे.

जब मेने देख तोह दीदी का चेहरा उतरा हुआ था इसलिए में उनसे बिना नजरे मिलाये hi माँ के साथ मंदिर जाने लगा.

दादी :- अरे बीटा पहले नाश्ता तो कर ले

में :- नहीं दादी मंदिर जाना है तोह अभी कैसा नाश्ता कर सकता हु आप कर लो फिर में माँ के साथ जा hi रहा था की दादाजी बोले

दादाजी :- बीटा मुझे तेरे से बात करनी थी

में :- जी दादाजी बोलिये

दादाजी :- वो आज शाम को तेरे बर्थडे की पार्टी राखी है

में :- है दादाजी माँ ने बताया था सुबह में तैयार हु आप पार्टी रखिये लेकिन सिर्फ घरवाले hi होने चाहिए कोई बाहरवाला नहीं

दादाजी :- ठीक है बीटा

फिर में और माँ मेरी जीप में मंदिर चले जाते है

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जब मंदिर का काम ख़तम कर के हवेली पहुंचे

माँ :- चल अब हाथ मुँह धोके आ में नाश्ता लगाती हु

लेकिन मेरा मूड तोह सुबह से hi ऑफ था

में :-नहीं माँ मुझे भूक नहीं है

माँ :- अरे ऐसे कैसे बीटा चल पहले खा ले

में :- नहीं माँ प्लीज भूक नहीं है में खेत में जाकर आता हु

इतना बोलके में खेत में चला जाता हु खेत हवेली के नजदीक hi है इसलिए में पैदल hi चला जाता हु जब में खेत में जा रहा था तोह रस्ते में गन्ने के खेत से किसी के चिल्लाने की आवाज आने लगती है जब में झांक कर देखा तोह अंदर 1 लड़का किसी लड़की का रपे कर रहा था उस लड़की के ऊपर के सरे कपडे अब तक पहात गए थे और उस लड़की को रोटा देख कर मुझे आज सुबह का किस्सा याद आया जब मेरी प्यारी दीदी मेरी वजह से रो रही थी और जब वो लड़का उस लड़की का पैजामा पहाड़ रहा था की मेने एक पत्थर उठके उसे दे मारा

जब वो पत्थर उसे लगा तोह वो एकदम हद बड़ा गया और जब पीछे देखा तोह पाया की एक hi उसकी उम्र का लड़का था तोह उसको लगा की वह आराम से मुझसे निपट लेगा इसलिए वह पास hi पास hi एक लकड़ी उठा के मेरे तरफ बढ़ा लेकिन में अब बहुत गुस्से में था तोह मेने 1 दुमदार पूछ पूरी ताकत से उस के मुँह पे वॉर किया जिससे उसके 2 डाट टूट गए और वह जाके पीछे गिरा और फिर मेने उसे उठने का 1 भी मौका न देते हुए उस पर पेअर से लगातार वार करता hi रहा मेरी मार कहते हुए वह जोर जोर से चिल्ला रहा था की तभी किसी ने मेरी पीठ पे वार कर दिया

हुआ यु की जब में उस लड़के को मार रहा था की तभी उसकी आवाज़ सुन कर उसके दोस्त भी आगये अब उन लोगो की तरफ मेरी पीठ थी तोह उन्हें मेरा चेहरा दिखा नहीं इसलिए उन मेसे एक ने मेरे पीठ पर लात मार दी जिससे में जेक उस लड़की के ऊपर गिर गया जिससे उसका भी बैलेंस बिगड़ गया जिससे वो पेड़ से टकरा गयी और उसके हाथ पे चोट लग गयी और खून निकलने लगा जब मेरा ध्यान उसके चेहरे के तरफ गया तोह वो और कोई नहीं मुनीम की बेटी थी साक्षी

इतनी देर में वो लड़का भी संभल गया था और मुझ पर वॉर करने hi वाला था की में पीछे मुद कर उसे लात मर दी जिससे वो दूर जेक गिरा जब उन लड़को ने मेरा चेहरा देखा तोह किसी को कुछ ज्यादा फरक नहीं पड़ा लेकिन एक लड़का जिसने मुझे लात मरी थी वो कम्पनी लगा और पीछे जाने लगा उसे भागता देख में उसकी तरफ बढ़ा तोह उसके सरे दोस्त मेरे तरफ लपके लेकिन कुछ hi देर में वो सरे लड़के जमीं पे पड़े कराह रहे थे मेने तुरंत एक लड़के का शर्ट उतर के साक्षी को दिया जिसे उसने तुरंत पहन लिया

अब में फिर से उन लड़को की तरफ मुदा और उन्हें बेरहमी से मरने लगा लेकिन थोड़े hi देर में मेरे कानो में डैड की आवाज़ आयी जो मुझे रुकने के लिए बोल रहे थे जब मेने आवाज़ आने वाले दिशा में देखा तोह पाया की डैड के साथ भीमा चाचा और चेतन (मुनीम का बीटा) भी था उन्हें देख के में रुक गया

डैड :- यहाँ का सारा हाल देख के मुझे अंदाजा आ गया है यहाँ क्या हो रहा था लेकिन राज आप हमे शुरवात से बताये की यहाँ क्या हुआ.

में :- डैड हुआ यु की

फिर में उन्हें सब बताने लगा जिसे सुन के बाद ने कुछ बोलै नहीं सिर्फ उनके साथ आये भीमा चाचा की तरफ देखा फिर मेरे तरफ देख के चलिए राज घर चलते है चेतन अपनी बहन को घर लेके जाओ यहाँ का कचरा भीमा साफ़ कर देगा

फिर चेतन साक्षी को लेके और डैड मुझे लेके घर चला गए

हुआ यु की मुझे खेत में गए हुए बहुत देर हो गयी थी और शाम भी होने लगी थी इसलिए डैड भीमा चाचा मुझे ढूँढ़ते हुए खेत के तरफ आगये जहा चेतन भी वह था जो साक्षी को ढूँढ़ते हुए पंहुचा था

जब में घर पंहुचा तोह वह पर सब हॉल में hi थे सबने आते hi सवाल पूछने शुरू कर दिए जिसका जवाब डैड ने दिया में आराम करने का बोल अपने रूम में आगया कुछ देर बाद दीदी भी मेरे रूम में आगयी

दीदी :- क्या हुआ भाई

में :- कुछ भी तोह नहीं

दीदी :- तोह तूने सुबह से अब तक मुझसे बात क्यों नहीं की नाराज है क्या अपनी दीदी से

में :- नहीं दीदी में आपसे नाराज़ नहीं हु लेकिन वो सुबह

इतना बोलके में शांत हो गया लेकिन दीदी समझ गयी की में क्या कहना चाहता हु इसलिए दीदी ने मेरे सर को प्यार से सहलाते हुए कहा

दीदी :- ये देख भाई आज जो भी हुआ उसमे तेरी कोई गलती नहीं है खुद को दोष मत दे

में :- नहीं दीदी मुझे hi दरवाजा नॉक करके आना चाहिए था

दीदी :- तू क्यों कमरा नॉक करेगा वो तेरे दीदी का कमरा है

में :- नहीं दीदी मेरी वजह से आपको हर्ट हुआ मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए था

दीदी :- तुझे ऐसा किसने कहा तूने मुझे हर्ट किआ

में :- तोह आप रो क्यों रही थी

दीदी:- अरे में इसलिए रो रही थी की मेरा सर बहुत दर्द कर रहा था इसलिए बाम लगा रही टी तोह वह आँख में चला गया इसिलए तोह में नहाने जा रही थी की तब तक तू आगया

में :- आप सच बोल रही है न दीदी

दीदी :- है भाई क्या तुझे तेरी दीदी पर भरोषा नहीं है

में :- नहीं दीदी ऐसा नहीं है ाचा ये बताइये अब आप का सर दर्द कैसा है

दीदी :- अब ठीक है अरे तेरे चक्कर में मैं तोह भूल hi गयी की तुझे निचे बुलाया है

में :- आप चलिए में आता हु

इतना कहकर में बाथरूम में घुस गया और दीदी निचे उतर गयी

जब में निचे पंहुचा तोह देखा की हॉल को एकदम सजाया गया था जब में निचे आया तोह सबने अचे से मेरा बर्थडे सेलेब्रेट किया सेलिब्रेशन में रात हो गयी इसीलिए सब जल्दी सो गए

चलिए अब जरा मुनीम के परिवार का हाल देख लेते है

ात इवनिंग

मुनीम और उसकी patni(rekha) अपने बेटे का इंतज़ार कर रहे थे

मुनीम :- कहा रह गया ये चेतन

रेखा :- उसके फ़ोन पे कॉल करके देखिये न

मुनीम :- अरे कितनी बार लागू स्विच ऑफ आ रहा है.

रेखा :- आप एक बार ठाकुर साहब से बात क्यों नहीं करते

मुनीम :- किस मुँह से बात करू उनसे पहले hi छोटे मालिक के अहसान की वजह से हम आज इस घर में है

रेखा :- तोह क्या ऐसे hi हाथ पे हाथ धरे बैठे रहोगे

मुनीम :- तोह क्या करू में

रेखा :- कुछ मत करो वैसे भी तुमसे कुछ होता कहा है महि जाती हु ठाकुर साहब के पास मुझे यकीं है कोई मदद करे या न करे छोटे मालिक जरूर मदद करेंगे

अभी रेखा दरवाजे तक पहुंची hi थी की सामने से साक्षी और चेतन आते हुए दिखे लेकिन जब उसने साक्षी को देखा तोह साक्षी के आखो से ासु निकल रहे थे

रेखा :- क्या हुआ साक्षी तू रो क्यों रही है और तेरे कपडे भी नए पहने है

जब हम लोग वह से निकले तोह चेतन ने सबसे पहले साक्षी को नए कपडे दिलाये थे

अपने माँ की आवाज़ सुन के साक्षी के ासु जो थम से गए थे वह फिर से फुट पड़े

मुनीम :- चेतन बताएगा भी क्या हुआ

फिर चेतन उन्हें सब बता देता है

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आज के लिए इतना hi

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अपडेट 4



अब तक आपने देखा की कैसे राज मुनीम की बेटी जिसका नाम साक्षी है उसे बचता है फिर घर जेक रीना दीदी से माफ़ी मांगता है और रीना भी उसे माफ़ कर देती है

अब आगे

रात के सेलिब्रेशन के बाद जब सब सोने चले गए तोह में दीदी के रूम में चला गया में दरवाजा खोलने hi वाला था की सुबह जो हुआ उसे याद करके मेने दरवाजा नॉक करने का फैसला किआ

जब दरवाजा नॉक किआ तोह अंदर से आवाज़ आयी

दीदी :- अंदर आ जाओ दरवाजा खुला है

फिर में अंदर गया जहा देखा तोह दीदी सर पे रुमाल बंधे बैठी थी

दीदी :- तेरे को बोलै था न तुझे नॉक कर के आने की जरुरत नहीं है

में :- वो छोड़ो आप ने ये सर पे रुमाल क्यों बंधा है फिर से दर्द कर रहा है क्या

दीदी :- है देखना भाई सुबह थोड़ी रहत मिली लेकिन फिर से दुखने लगा है

में :- लाइए में मालिश कर दू

दीदी :- अरे नहीं रहने दे में बाम लगा लुंगी

में :- जी नहीं में हु न फिर से बाम सर पे लगाने की जगह आँख में लगा डौगी

दीदी :- लेकिन

में :- कोई लेकिन नहीं में लगा दूंगा

फिर मेने दीदी की एक भी बात बिना सुने हुए उनका सर अपनी गॉड में रख लिया और बाम लगा कर मालिश करने लगा

जिससे दीदी को भी आराम मिला और वो सो गयी जब मेने अपनी गॉड से उनका सर निकलने की कोशिस की तोह वो कसमसा गयी इसलिए में उनका सर ऐसे hi गॉड में लेके सहलाने लगा

इस वक़्त दीदी ने जो निघ्त्य पहनी हुई थी उससे मुझे उनके चूचियों के बिच की दरार साफ़ दिख रही थी

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जिसे देख के में नजरे तोह फेर लेता लेकिन बार बार मेरा ध्यान वही चला जाता जिससे मेरा लुंड मेरे लोअर में झटके खा रहा था लेकिन वह दीदी का सर उसके ऊपर था इसलिए वह निचे hi दबा रहा बस मुझे दर इस बात का था की अगर दीदी ने मुझे इस हालत में देख लिया तोह क्या जवाब दूंगा इसलिए में जब उठने को हुआ तोह दीदी फिर से कसमसा गयी जिससे में दर गया की दीदी जाग जाएगी इसलिए मेने फिर उठने की कोशिस नहीं की लेकिन हर बार मेरा ध्यान दीदी की चूचियों तरफ hi जा रहा था

में भी वैसे बी बैठे बैठे सो गया जब सुबह माँ मेरे रूम में जगाने आयी तोह मुझे न पके घबरा गयी तोह वो मुझे ढूंढते ढूंढते दीदी के रूम में आगयी जब उन्होंने मुझे बैठे बैठे hi सोते हुए दिखा तोह वो कमरे में आगयी और धीरे से दीदी को जगाने लगी जब दीदी जगी तोह माँ ने उसे चुप रहने का इशारा करके मेरी तरफ इशारा किया जिसे दीदी को रात की बात याद आ गयी

माँ :- ये ऐसे क्यों सो रहा है

दीदी फिर माँ को सब बता देती है मैंने उन्हें नंगी देखा उसे छोड़ कर

सब सुन के माँ को हसी आ जाती है

माँ :- पागल कई एकदम

दीदी :- है माँ एकदम पागल है मुझे उठा देता तोह क्या में इसे मरती क्या

माँ :- चल में निचे जा रही हु इसे जगा दे और अगर इसे और सोना है तोह सोने देना

दीदी :- जी माँ

फिर माँ निचे चली जाती है और जब दीदी मुझे जगाने लगती है तोह उनका ध्यान मेरे लोअर पे गया जहा मेरा लुंड तन के खड़ा था दीदी को कॉलेज के दोस्तों के वजह से सेक्स वगैरा के बारे में पता था लेकिन उन्होंने अब तक कोई भी मर्यादा नहीं लगी थी वो एकदम ुँतौचेड थी बस वो कभी कबर मस्टरबैशन कर लिया करती थी

जब उन्होंने लोअर में उभर देखा तोह उनकी ससे एकदम तेज हो गयी थी जिस वजह से उनका मन उस उभर के निचे छुपा लुंड देखने की ीचा हुई लेकिन उन्होंने अपने मन को बहुत मनाया खुद को काबू करने की कोशिस की लेकिन कुछ असर नहीं हुआ तोह मजबूरन उन्हें अपने मन से हर माननी पड़ी तोह उन्हों ने डरते डरते उनका हाथ मेरे लोअर के ऊपर रखा जैसे hi उनका हाथ मेरे लुंड पर पड़ा मेरे लुंड ने झटके मरने लगा

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जिससे दीदी के शरीर में करंट सा दौड़ गया जिससे उन्हें उनके मन को काबू करने में और परेशानी हो रही थी जब उनसे काबू नहीं हुआ तोह उन्होंने लोअर और मेरा अंडरवियर एक साथ उतर दिया अब मेरा 11" लम्बा और 3" मोटा लुंड उनके सामने नंगा था

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जिसे देख कर अपने आप hi उनका हाथ उनके छूट पे चला गया जब उनसे खुद को रोक पाना मुश्किल हुआ तोह उन्होंने फिर से मेरा लोअर लुंड पे चढ़ा दिया और बाथरूम भाग गयी और बाथरूम से hi

दीदी :- राज ो राज उठ जा सब तेरा निचे इन्तेज़ाआर कर रहे है

दीदी की आवाज सुन कर मेरी नींद खुल गयी जब मेने अपने लोअर में देखा की मेरा लुंड पूरी तरह से खड़ा है तोह में सीधा अपने रूम में भाग गया

वही मुनीम के घर का हाल भी जान लेते है

ात इवनिंग

जब चेतन ने अपने माँ बाप को सब बता दिया तोह उसके माँ बाप भी रोने लगे

रेखा ने जाकर सबसे पहले अपनी बेटी को गले लगा कर संभल ने लगी

रेखा :- शांत हो जा साक्षी शांत होजा देख तू सुरक्षित अपने घर पर है और अब तुझे कोई खतरा नहीं है

मुनीम :- है बीटा अब तुझे कोई खतरा नहीं है तेरा बाप तेरे साथ है

अपने माता पिता के स्नेह से साक्षी ने भी रोना बंद कर दिया और अपने कमरे में चली गयी

रेखा :- ाचा हुआ छोटे मालिक समय से वह पहुंच गए नहीं तोह पता नहीं क्या अनर्थ हो जाता

मुनीम :- सही कहा हमे उनका शुक्रिया ऐडा करना चाहिए

रेखा :- है चलिए

चेतन :- नहीं माँ अभी जाना सही नहीं होगा

रेखा :- क्यों बीटा अभी तोह रात होने में भी समय है

चेतन :- है माँ आपने सही कहा लेकिन आज छोटे मालिक का जन्मदिन है जिस वजह से आज हवेली में एक छोटी पार्टी भी है जिसमे सिर्फ परिवार के hi सदस्य हो ऐसा छोटे मालिक का आदेश है और आप जानती है की छोटे मालिक कभी अपना जन्मदिन नहीं मानते आज बड़ी मुश्किल से मने है तोह आज हमारे वजह से उनके सेलिब्रेशन में कोई प्रॉब्लम हो ऐसा में नहीं चाहता इसलिए में आपको रोक रहा था

मुनीम :- है रेखा चेतन सही कह रहा है वैसे भी हमारे पास छोटे मालिक को उपहार देने के लिए भी कुछ नहीं है ऐसे खली हाथ जाना भी सही नहीं है

रेखा :- और हम उन्हें उपहार क्या देंगे अब ये सब तोह उन्ही का है हमे तोह केवल अपनी बेटी के शादी तक सब इस्तेमाल करने की अनुमति दी है नहीं तोह आपके कर्मो की सजा के तहत अभी हम कही रस्ते पे भीख मांग रहे होते

मुनीम :- एक चीज है जिससे हम उन्हें उपहार के रूप में दे सकते है जिस पर वह अपना हक़ नहीं जमा सकते जब तक हम अपने हाथो से न दे

रेखा :- कही आपका इशारा आपके खानदानी लॉकेट से तोह नहीं

मुनीम :- है सही कहा

चेतन :- कोनसा लॉकेट पिताजी

मुनीम :- हमारा खानदानी लॉकेट है बीटा मेरे पिताजी ने बताया था की जब हमारे पूर्वजो ने किसी महान साधु की सेवा करके उनके आशीर्वाद के रूप में प्राप्त किया था ऐसा कहा जाता है जिसके पास भी वो लॉकेट हो वो कभी किसी से नहीं हर सकता

चेतन :- क्या ऐसा सच्ची में हो सकता है पिताजी

मुनीम :- मेरे पिता ने मुझे ये बताया था ये सच है की नहीं ये उन्हें भी नहीं पता

तुम्हारे इस जन्मदिन पर तुम उस लॉकेट को धारण करते

चेतन :- क्या में उस लॉकेट को देख सकता हु पिताजी

मुनीम :- नहीं बीटा वो लॉकेट को स्नान करने बाद उस लॉकेट को गंगा जल से शुद्ध करके hi हाथ लगा सकते है ऐसा मेरे पिता ने कहा था

रेखा तुम कल वो गंगाजल निकल के रखना कल स्नान के बाद में उसे शुद्ध करूँगा तब तुम लोग देख लेना क्यूंकि शुद्ध करने के बाद उसे धक् कर रखना पड़ेगा जब तक कोई उसे धारण न करे

चेतन :- जी पिताजी

इधर साक्षी अपने कमरे में बैठा कर आज के बारे में सोच रही थी वो जब भी आखे बंद करती उसे राज का उसके ऊपर गिरना याद आता जिससे वो रोमांचित हो उठती

हुआ यु की जब राज साक्षी के ऊपर गिरा तोह उसने साक्षी को और खुद को सँभालने के लिए सखी को पकड़ा था जिससे उसका एक हाथ साक्षी के नग्न चुचो पे तोह दूसरा हैट साक्षी के पायजामे के ऊपर से उसके चूतड़ों पे आ गया था जिसका पता राज को तोह नहीं चला लेकिन साक्षी को वो पल बहुत आनंद हुआ था.( क्यूंकि साक्षी राज को बचपन से प्यार करती थी लेकिन हर बार उसके और राज के बिच में देवरे कड़ी हो जाती जो चीख चीख के साक्षी को राज और उसके बिच के फैसले के बारे में बताती. जब साक्षी को राज का प्यार नहीं मिला तोह उसने अपने पिता के मनपसंद लड़के से शादी करने का फैसला लिया लेकिन उसके दिल में फिर भी कही ये विचार था की वो एक दिन तोह राज को प् लेगी. लेकिन जब उसे पता चला की मुनीम को राजपरिवार के साथ गद्दारी करते पकड़ा गया तोह उसके दिल में जो एक विचार था की वो राज को प् सकेगी उसने भी वही दम तोड़ दिया. लेकिन जब राज ने उसके पिता के अपराध के बाद भी माफ़ करके उसकी मदद की तोह साक्षी को अपने प्यार पे और गर्व हो उठा और आज के हादसे के बाद तोह हाल ऐसा था की अगर राज उसकी इज्जत भी उससे मांग लेता तोह वो ख़ुशी ख़ुशी उसके निचे लेट jati.)Jiske बारे में सोच के साक्षी को बड़ा hi रोमांचक और उत्सुक हो उठती.

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आज के लिए इतना hi

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अपडेट 5



अब तक आपने पढ़ा की कैसे रीना राज का लुंड देखके अपना कण्ट्रोल खो बैठी और बाथरूम भाग गयी

अब आगे

जब दीदी बाथरूम गयी तब अभी हुए कुछ पालो को सोच कर उत्साहित हो रही थी और उनका हाथ अपने आप उनकी ुंचुड़ी छूट पर चला गया जब उसने अपनी पंतय उतरी तोह उसकी पंतय पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.




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जब उसका ध्यान अपनी छूट पे गया तोह वह पूरी तरीके से गीली हो चुकी थी

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दीदी :-(मन में) हए ये क्या में अपने hi भाई के साथ ऐसा कैसे कर सकती हु मैं अब उससे कैसे नज़रे मिलाऊँगी


लेकिन जब उसे राज का लुंड याद आया तोह

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Didi(man में) :- लेकिन कुछ भी कहो भाई का है तो बहुत बड़ा इतना बड़ा तोह मैंने वीडियोस में भी नहीं देखा और था भी कितना गोरा हए काश वो मेरा भाई न होता तोह उसके ऊपर से में कभी उतरती hi नहीं. पुरे दिन उसकी सवारी करती.

ऐसा सोचते hi उसका हाथ जो उसके छूट पर था उसी हाथ से खुदकी छूट को सहलाने लगी




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Didi(chut सहलाते हुए) :- लेकिन अगर में उसके साथ सेक्स कर भी लू तोह क्या हो जाये गए वह है तोह भी कजिन मेरा सागा भाई थोड़ी है


इतना बोलते hi उन्हें पता चला की वो क्या बोल गयी

दीदी :- में भी कितनी खुदगर्ज़ हु ाचा हुआ ये बात उसने नहीं सुनी नहीं तोह पता नहीं उसे कितना दुःख होता उसने कभी मुझे भाई की कमी महसूस नहीं होने दी मुझे अपनी इस आग को कुछ भी करके काबू करना होगा

इतना बोलते hi दीदी ने अपनी छूट से हाथ हटा दिया

और शावर ों करके नहाने लगी जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिली लेकिन जब वो नहाते वक़्त अपने बदन पे को रगड़ रही थी तब वह फिर से गरम होने लगी




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और अपने बूब्स को और जोर से मसलने लगी

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लेकिन जब उससे फिर आग काबू नहीं हुई तोह उसका हाथ फिर से छूट पर चला गया

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दीदी :- अह्ह्ह उसका लुंड बस चुकार hi मेरा ये हाल है तोह जब उसका लुंड मेरे अंदर जायेगा तोह कितना मजा आएगा


इतना बोलते hi दीदी का हाथ स्पीड से अपनी छूट पे सहलाने लगी



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दीदी :- वैसे भाई की भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है शायद भाई भी मेरी तरह hi तड़पता होगा


इतनी देर तक छूट सहलाते हुए अब दीदी अपनी चार्म सिमा पे थी उसे होश hi नहीं था

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दीदी :- बस अब और नहीं अब नहीं में तड़पुँगी और नहीं भाई को तड़पने दूंगी अह्हह्ह्ह्ह भईईईई आजा और चूऊऊऊद दाल अपनीई इस बहन कूऊऊओ ईईईई लल्लूऊववववीएएए उउउउउउ भाआईईई

इतना बोलते hi दीदी झड़ने लगी आज उन्होंने इतना माल छोड़ा की जितना आज तक कभी नाजी छोड़ा

इतनी देर से छूट सहलाने के वजह से दीदी बहुत थक गयी थी इसलिए बाथरूम से निकल के नंगी hi बीएड पे सो गयी


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वही मुनीम के घर सुबह होते hi मुनीम ने अचे से स्नान करके तिजोरी से लॉकेट निकला जो लाल कपडे में कैद था

फिर गंगाजल से उस लॉकेट को शुद्ध करके फिर से एक नए लाल कपडे में बांध कर एक पुराने बॉक्स में रख दिया




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और पूरा परिवार चल पड़ा हवेली के तरफ


वही हवेली में राज जब ग्रेश होक निचे आया तोह सब ने उसे गुड मॉर्निंग विश किया और जब गिफ्ट की बरी आयी तोह राज बोलै

राज :- माँ दीदी कहा है

माँ :- कही फिर से तोह नहीं सो गयी वैसे भी तेरी मालिश से अछि नींद आयी होगी

डैड :- मतलब क्या है तुम्हारा शर्मीला

फिर माँ ने सबको सुबह के बारे में बताया कैसे में दीदी की मालिश करते बुए hi सो गया

ये सब सुनके सब हसने लगे

छोटे चाचा :- अरे कभी हमारी तोह ऐसे मालिश नहीं की

छोटे चाचा की बात सुन के सब मेरे तरफ मुस्कुराते हुए देखने लगे मेने भी चाचा की बंद बजने की ठान ली

में :-(दादाजी की तरफ आँख मरते हुए) क्या चाचा आप हर दिन खेत में तोह मुझसे पेअर दबाते हो ठीक से खाना तक ख़तम नहीं करने देते जब देखो तब मुझे मालिश के लिए बुलाते रहते हो (झूठ)

ये सब मेने दुखी टोन में कहा था जिससे दादाजी को गुस्सा आगया

दादाजी :-(गुस्से में) छोटे ये मैं क्या सुन रहा हु

दादाजी की कड़क आवाज़ सुनके जहा सबका चेहरे पे दर दिख रहा था वही चाचा का चेहरा रोने जैसा हो गया था

में हालत बिगड़ते देख में जोर जोर से हसने लगा वही मेरा दादाजी भी मेरा साथ देने लगे जम दोनों को हस्ता देख सब समझ गए की हम मजाक कर रहे थे

में (माँ से) :- में दीदी को लेके आता हु

फिर में तुरंत भाग के रूम की तरफ भगा




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जब में रूम में पंहुचा तोह देखा दीदी के रूम का दरवाजा बंद था में ने दरवाजा को ढका दिया तोह वह अपनेआप खुल गया


जब मेने अंदर देखा तोह होश hi उड़ गए अंदर दीदी नंगी बीएड पे लेती हुई थी



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में वह से भागने hi वाला था की तभी मुझे ख्याल आया की अगर कोई दूसरा दीदी को ऐसे हालत में देखेगा तोह पका दीदी को मार पड़ेगी इसीलिए मेने वह से भागने का इरादा त्याग दिया और जब में ने बहार से hi आवाज़ देने के बारे में सोचा तोह सोचा की अगर मेरी आवाज़ सुनके कोई ऊपर आ गया तोह क्या होगा


फिर मेने सबसे पहले रुमाल से अपनी आके बंद की और दीदी के कमरे में घुस गया और दरवाजा बंद कर दिया

अब आखे बंद थी इसीलिए मुझे कुछ दिखाई नहीं दिया और जमीं पर गिर पड़ा मेरे गिरने से टेबल पे रखा हुआ पानी गिलास भी निचे गिर कर टूट गया और उसका कच मेरे हाथ में घुस गया जिससे मेरे हाथो से खून निकल ने लगा




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जिससे मेरे मुँह से एक हलकी सी चीख निकली


मेरी आवाज सुन के दीदी की नींद तुरंत खुल गयी और जब दीदी ने मेरी तरफ देखा तोह मेरे हाथो से खून निकल रहा था जिस वजह से वो तुरंत दौड़ के मेरी तरफ आयी

दीदी : - क्या हुआ राज ये तेरे हाथ से खून कैसे आया और ये क्या जोकरों की तरह आँख पर रुमाल बंधे घूम रहा है (रुमाल खींचते हुए) निकल इसे

में (दीदी का हाथ पकड़ते हुए) :- दीदी में रुमाल निकल दूंगा लेकिन…

इतना बोलते hi में रुक गया और जब दीदी ने अपनी हालत पे गौर किया तोह तुरंत कप्बोर्ड से कड़े निकल के पहन लिए

दीदी :- राज अब आँख खोल ले मेने कपडे पहन लिए

में :-(आँख खोलते हुए) :- आपकी तबियत तोह ठीक है न दी आप आज ऐसे hi सो गयी

Didi(sharmate हुए) :- में ठीक हूँ भाई मुझे क्या हुआ (अचानक से मेरा हाथ पकड़ते हुए) लेकिन तू भी बुद्धू है ऐसे आखो पे पट्टी बांध के कोई चलता है बहार से आवाज दे देता या वापस चला जाता ऐसे आँख पे पट्टी बांधने की क्या जरुरत थी

में :- अगर मेरी आवाज़ सुनके कोई और ऊपर आजा ता तोह

दीदी :- सॉरी भाई मुझसे गलती हो गयी

में :- ठीक है चलिए आप निचे सब आपका वेट कर रहे है

दीदी :- कर रहे है तोह करने सबसे पहले में तेरी मलम पट्टी करुँगी

में :- लेकिन निचे

दीदी :- तुझे मेरी कसम चुपचाप बैठ जब तक में न बोलू मुँह से आवाज़ मत निकल न

फिर दीदी ने मेरे हाथ पे मालम पट्टी की फिर हम दोनों निचे आगये

माँ :- ये लो आ गए दोनों

जब सब हमारी तरफ देख रहे थे तब मेने तुरंत अपने दोनों हाथ अपने पीछे छुपा दिए जिससे किसी को चोट न देख सके लेकिन दादी की आखो से ये नहीं बच पाया

दादीजी :- राज आपका हाथ तोह दिखाइए

ये जब दादी ने बोलै तोह मुझे कुछ सूझ hi नहीं रहा था

दादी :- आपने सुना नहीं मैंने क्या कहा

में :- (दूसरा हाथ आगे करते हुए) ये लीजिये देखिये

दादी :- दूसरा हाथ दिखाइए

में :- दोनों हाथ शामे hi है दादी उसमे भी 5 hi ऊँगली है और इसमें भी

दादी (कड़क आवाज में) :- मैंने कहा दूसरा हाथ दिखाइए

दादाजी :- क्या बात है संध्या ऐसा क्या है दूसरे हाथ में (मेरे तरफ देखते हुए) बीटा दिखा दो न दूसरा हाथ.

में (दूसरा हाथ आगे करते हुए) :- ये देखिये दादी

मेने अब तक पट्टी निकल दी थी और मलम भी मिटा दिया था

दादी :- इधर आइये हमारे पास

में :- दादी

दादी :- मैंने कहा न आइये

अब मेरे पास कोई चारा नहीं बचा था मुझे जल्द से जल्द कोई बहाना ढूंढना था तभी मुझे एक आईडिया आया और में दादी के पास जेक खड़ा हो गया

दादी :- हाथ दिखाए

मेने हाथ दिखा दिए जब दादी ने मेरे हाथ पे चोट देखि तोह वह चिंतित स्वर में

दादी :- ये क्या आपके हाथ में चोट कैसे लगी

में :- दादी वो. वो मैं

दादा :- ये क्या वो वो लगा रखा है बोलो कैसे चोट लगी

में : दादाजी वो दादी हर दिन मुझे हमारे पूर्वजो का इतिहास बताती थी की कैसे उन्होंने अपने तलवार के जोर पर हमारे राजगढ़ और आसपास की जगहों की रक्षा की तोह उससे मुझे भी लगा की तलवार चलनी चाहिए इसलिए में अपने रूम में प्रक्टिसे करता था

दादा :-(थोड़े कड़क आवाज में) तोह हमे क्यों नहीं बताया क्या हम आपको किसी चीज के लिए मन करते है क्या

में (उदास स्वर में) :- सॉरी दादाजी

दादा:- चलो ठीक है अब जल्दी खाना खा लेने फिर वैदजी को जेक दिखा देना

में :- जी दादाजी वासे भी आज में मीरा माँ के पास जाने hi वाला हु तोह वह लेप लगा देंगी

दादाजी :- ठीक है और है उनसे मेरे घुटनो का तेल लेते आना

में :- ठीक है दादाजी (मस्का लगाने वाले अंदाज में) वैसे दादाजी इस बार क्या गिफ्ट दे रहे हो

दादाजी :- आपको किस बात का गिफ्ट बीटा

में (मासूम फेस बनके) :- मेरे जन्मदिन का

दादाजी :- अरे में तोह भूल गया लाना

में :- झूठ मत बोलिये मुझे पता है आपने कुछ न कुछ जरूर लाया होगा

Dad(masti में) :- इतना बड़ा हो गया फिर भी ऐसे बचो की तरह जिद करते हो ऐसे शोभा देता है क्या अपने दादा से चीजे मांगना

में :- ठीक है तोह आप सब मुझे परमिशन दीजिये

दादाजी :- कैसी परमिशन बीटा

में :- यही की में आज से मेहनत करके कमाऊंगा और आप मेसे कोई बिच में नहीं आएगा में कोई भी काम कर सकता हु और उस वक़्त में सिर्फ राज रहूँगा एक मामूली इंसान

डैड :- इससे ाचा तेरे को गिफ्ट hi देदे

दादा :- है सही कहा बीटा हमे इसे गिफ्ट hi देनी चाहिए

में (थोड़ा मायूस होते हुए) :- ठीक है दादाजी अब बताइये क्या गिफ्ट है

दादाजी :- पहले खाना खा लीजिये फिर बताते है

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आज के लिए इतना hi


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वह क्या है जब भी आपका रिव्यु पढ़ता हु तोह लगता है की जैसे स्कूल में सर लोग 5-6 पेजेज के chapter को 2 पैराग्राफ्स में समझा देते है और सरे स्टूडेंट्स को समझ में भी आता है वैसे hi लगता है

जैसे मेरा अपडेट कोई सीरियल का episode और आपका रिव्यु उसका ट्रेलर

ब्वाइसे आपको सर में जांभोज के नहीं बोलता अपने आप मन में ऐसा लगता है की इस फोरम का कोई ओने ऑफ़ थे गैरत राइटर मुझे गाइड कर रहा है

इसलिए सर बोलता हु
 
अपडेट 6

अभी हम खाना काने बैठे hi थे की मुनीम और उसका परिवार आ जाते है

डैड :- आओ मुनीम बोलो कैसे आना हुआ

मुनीम :- वो बड़े ठाकुर हम यहाँ छोटे मालिक को शुक्रिया कहने आये थे

दादी :- क्यों मुनीम किस बात का शुक्रिया

मुनीम :- वो कल छोटे मालिक ने हमारे घर के इज्जत को लूटने से बचा कर हम पे इतना बड़ा एहसान किया उसी का शुक्रिया

में :- अरे मुनीम काका आप को में बोलने के लिए काका नहीं बोलता मेने आपको हमेशा अपने दिल में काका का स्थान दिया है इस नाते से साक्षी भी मेरी कुछ लगती है न

दादाजी :- तुम बड़े शुभ मुहूर्त पे आये हो आज राज का जन्मदिन है और आज हम ने पुरे गांव में भंडारे का आयोजन किया है जिसमे तुझे भी भाग लेना है और सबकी सेवा करनी है

मुनीम :- जी ठाकुर साहब जैसा आप कहे ठाकुर साहब हमारी एक विनती है

दादा :- है बोलिये

मुनीम :- मैंने आपके साथ धोका किया फिर भी कल चोए मालिक ने हमारे घर की इज्जत को बचाया हम कल hi आने वाले थे धन्यवाद बोलने लेकिन छोटे मालिक का जन्मदिन था और हमारे पास तोहफा देने के लिए भी कुछ नहीं था इसलिए हम आज आगये (मेरी तरफ देख के) छोटे मालिक ये आपके लिए एक छोटा सा तोहफा इस में हमारा पुश्तैनी लॉकेट है

ये सुन ते hi दादाजी चौक उठे

दादाजी :- (चौक ते हुए) ये क्या कह रहे हो मुनीम क्या ये वही हार है जिसे तुम्हारे पूर्वजो ने हासिल किया था

मुनीम :- जी ठाकुर साहब

में :- ऐसा क्या है दादाजी इस लॉकेट में और अगर ये इतना खास है तोह में ये नहीं ले सकता ये आपके पूर्वजों का आशीर्वाद है अपने बच्चों के लिए इस पर में कैसे हक़ जमा सकता हु

दादाजी :- बीटा ये बड़ा hi खास लॉकेट है इसे मुनीम के पूर्वजो ने किसी महँ साधु जो एक समय में पुरे दुनिया के सबसे ताकत वॉर योद्धा थे उनकी सेवा करके प्राप्त किया था ऐसा कहा जाता है की ये जिसके पास होता है वो कभी नहीं हार सकता और इसमें उन साधु का आशीर्वाद भी है इसे अगर तुम न करोगे तोह ये उन साधु के आशीर्वाद का अपमान होगा

में :- ठीक है दादाजी में इसे स्वीकार ता हु

मुनीम :- इसे धारण करने के तुरंत बाद आपको स्नान करना होगा

में :- ठीक है

मुनीम :- इसे पहनने और उतरने की एक खास विधि है जो इस पत्र में लिखा है ये भी उतना hi पुराण है जितना ये लॉकेट

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में :- ठीक है दीजिये

फिर में वह पत्र और लॉकेट लेके अपने रूम में गया जहा जेक वो पूरा पत्र पढ़ा फिर जब सब समझ आ गया की कैसे क्या करना है तोह लॉकेट को उस बक्से से बहार निकला

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वह कुछ ऐसा दीखता था फिर जब मेने उसे पहना तोह मुझे कुछ अजीब सा लगने लगा लेकिन मेने इसपर ध्यान नहीं दिया

और नाहा के आ गया अपने फिर खेतो में पहनने वाले कपडे पहने और निचे आ गया

जब निचे आया तोह मुनीम और उसका परिवार जा चुके थे

जब में निचे आया तोह सब की निगाहे मुझ पर hi अटक गयी क्यूंकि में साढ़े कपड़ो में भी किसी हीरो से काम नहीं दिख रहा था

Didi(man में) :- हए भाई इन साढ़े कपड़ों में भी क्या दिख रहा है मुझसे तोह काबू hi नहीं हुआ जा रहा मन तोह कर रहा है अभी भाई से सेक्स काके उन्हें अपना बना लू

में :- दादाजी में खेत में जाकर आता हु मीरा माँ से भी मिल लूंगा चलता हु

दादाजी :- ठीक है बीटा जल्दी आना

{नई करैक्टर:- मीरा माँ

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हमारे खेत में काम करती है

इन्हे आयुर्वेदा की अछि समझ है जिससे ये अलग अलग दवाई काढ़े बनके गांव वालों की मदद करती है

राज परिवार के प्रमुख दस दसियों में से एक (प्रमुख दस दासी मतलब जिनका परिवार शुरवात से यानि जब से ये राज परिवार है तब से इसकी सेवा करते आये है) जब मुझे जनम देते वक़्त hi मेरी माँ गुजर गयी तब से बड़े चाचा और चची ने hi मेरी माँ जैसी परवरिश की लेकिन एक बचे को जो सबसे जरुरी होता है वो है माँ का दूध मेरी दीदी मुझसे 2 साल बड़े है इस लिए जब में जन्मा तोह माँ कोतब दूध नहीं आता था जिस वजह से मुझे माँ का दूध नहीं मिल सकता था जिस वजह में बीमार पड़ने लगा जब डॉक्टर्स में मेरे बार बार बीमार पड़ने का रीज़न बताया तोह घर में सब निराश हो गए

लेकिन तब मीरा माँ हमारे hi घर में काम करती थी और उसी वक़्त उन्होंने भी 1 लड़की को जन्म दिया था इसलिए उन्होंने hi मुझे अपनी बेटी के साथ स्तनपान कराया था इसलिए में भी उन्हें मीरा माँ कहके बुलाता हु }

बैक तो स्टोरी

जब में खेत में गया तोह मुझे मीरा माँ कही नहीं दिखी रोह में उन्हें ढूँढ़ते हुए उनके खेत में बने झोपडी में गया वो वही रहा करती थी जब में झोपडी में जा रहा था की तभी मुझे कही से कुछ आवाज सुनाई दी जब में पास जेक देखा तोह मीरा माँ अपनी सदी को ऊपर उठके मूत रही थी जिस वजह से उनकी मोती गांड मुझे साफ़ दिख रही थी जिसे देख कर में अपने आप hi मदहोश होने लगा और मेरा लुंड धोती में खड़ा लगा (में खेत में जाते समय ज्यादातर धोती पहन था था और एक साधा पुराण कुरता)

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में इस सुन्दर नजारे में खोया हुआ था की तभी कुछ हलचल महसूस हुयी जब देखा तोह मीरा माँ कड़ी होने लगी में उनके खड़े होने के पहले hi वह से भाग गया और सीधा जेक उनकी झोपड़ी में घुस गया अभी में मन मोहक नज़ारे को देख कर मेरा गाला hi सूखने लगा जब आस पास देखा तोह पानी का घड़ा था लेकिन खली था तभी मेरी नजर टेबल पे रखे हुए शरबत पे पढ़ी

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जिसे देख के मैंने झट से पूरा पि लिया जिससे मेरा गाला और सूखने लगा मुझे और ज्यादा प्यास लगने लगी इतनी की मुझे लगने लगा की अगर पानी नहीं पिया तोह में मर hi जाऊंगा जब मेने पास पड़ी एक और बॉटल देखि तोह में अपनी प्यास बुझने के लिए वह भी पि गया

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प्यास की वजह से कुछ समझ hi नहीं रहा था एक तोह पहले hi मेरा लुंड खड़ा था और अब तोह वह दर्द भी करने लगा

तभी मुझे झोपड़े में मीरा माँ आती दिखी जिनके हाथ में पानी का घड़ा था जिसे देख में तुरंत उनके और लपका और उन्हें ढाका देकर तुरंत वह घड़ा मुँह से लगा लिया

मेरे इस तरह पानी पिने से मेरे सरे कपडे भीग गए जिस वजह से मेरी धोती भी भीग गयी और लुंड से पूरी तरीके से चिपक गयी जिससे मेरा लुंड का उभर धोती से अछेसे दिख रहा था मीरा माँ निचे गिरी हुई थी जिससे मेरा लुंड उनके मुँह के सामने आ गया था जिसे देख के एक पल के लिए वो भी दांग रह गयी

मीरा माँ के पति को मरे 10 साल हो गए थे जिस वजह से वह पिछले 10 सालो से अपने जिस्म की आग में जल रही थी उन्होंने बहार किसी से सम्बन्ध नहीं बनाया था जिसकी 2 वजह थी 1ला उनके संस्कार और दूसरा उसके बचे उनके 1 बीटा और 2 बेतिया थी जिसकी वजह से उन्होंने कभी किसी और से सम्बन्ध नहीं बनाये थे आज अचानक अपने बीए सामान लड़के का लुंड देखने से उनके टैंगो के बिच में हलचल होने लगी थी जिस वजह से वह राज में अपनी जिस्म की आग ठंडी करने का सुनेहरा अवसर देख रही थी (राज उससे माँ का ौदा देता था तब भी वह खुद को उसका दस hi समझती थी) जिस वजह से उसे अपने मालिक का लुंड लेने में कोई प्रॉब्लम नहीं दिख रही थी

क्यूंकि उनके माँ बाप ने उन्हें बचपन से यही बताया था की हम राज परिवार के गुलाम है उनके किसी भी तरीके से काम आना हमारा hi सौभाग्य है

इसीलिए जब बचपन में राज को माँ के दूध की जरुरत थी तोह उन्होंने बिना किसी परेशानी से अपनी बेटी के साथ उसका स्तनपान कराया था

वही अब मुझे पानी पाइक बाहर रहत मिल रही थी जब मेरा ध्यान मीरा माँ पे गया तोह पाया की वो निचे गिरी हुई है में ने जल्दी से उन्हें खत में बिठा के रट हुए माफ़ी मांगने लगा क्यूंकि में उन्हें हमेशा माँ का hi स्थान दिया था

में (रट हुए) :- मुझे माफ़ करना माँ गलती से हो गया पता नहीं क्यों लेकिन आज में पानी पिने के लिए मारा जा रहा था इसीलिए मेरे से भूल हो गयी

में और जोर से रोने लगा

मीरा माँ भी अब तक संभल चुकी थी और मेरी बातों के बारे में सोच रही थी सबसे पहले उन्होंने मुझे अपने बगल में बिठा लिया फिर मुझे समझने लगी

मीरा माँ :- नहीं छोटे मालिक आप रोइये मत अगर आप ने हाथ उठा भी लिया तोह क्या हुआ आप हमारे सरताज है राजा है हमारे लिए भगवन से काम नहीं है

में (रट हुए) :- मुझे माफ़ कर देना

मीरा माँ :- आप मुझे बताइये की आप ने झोपडी में आने के बाद क्या किया

तोह में उन्हें झोपडी में आने के बाद का सब बताने लगा

सब सुनने के बाद मीरा माँ ने तुरंत वह दोनों बॉटल उठके देखि तोह उन्हें सारा माजरा समझ में आने लगा

मीरा माँ :- इसमें आपकी गलती नहीं है छोटे मालिक इस में इन दोनों शरबत का कमल है

में :- मतलब

मीरा माँ :- मतलब यव जो लाल शरबत आपने पिया ये एक शक्ति वर्धक काढ़ा है जिससे किसी में भी 1 साथ 10 महा बलि पहलवान की ताकत समां जाती हज

और ये जो नीला शरबत है उससे किसी भी इंसान के अंदर इतनी सहन शक्ति आ जाएगी की कोई सोच भी नहीं सकता और तोह और आप का शरीर भी मजबूत और गठीला बन जायेगा इसी के साथ इसके और बहुत फायदे है

में :- जैसे

मीरा माँ :- जैसे इसकी मदद से आपका पूरा शरीर हद से ज्यादा लचीला और अभेद्य बन जायेगा

में :- अभेद्य मतलब

मीरा माँ :- मतलब की अब चाकू तलवार गोली तीर जैसे हथ्यार आपका कुछ बिगड़ नहीं सकते आप का शरीर एकदम लोहे जैसा हो जायेगा

में :- और आपके पास ये सरबत कहा से आये

मीरा माँ :- ये गुप्त आयुर्वेदा है जो कुछ hi लोग जानते है

में :- और आपको ये कैसे पता

मीरा माँ:- जिन गुरु ने मुझे आयुर्वेदा का ज्ञान दिया था उन्होंने इस ज्ञान को उनकी सेवा के बदले मुझे दिया

में इतना सुन के एक्साइट हो गया था की इतनी रेयर आयुर्वेदा से बने सरबत का इस्तेमाल कर सका अब मुझे इस बारे में और जानने का दिल कर रहा था

में :- क्या इसका इतना hi काम है या और भी फायदे है इसके

मीरा माँ :- हैना और भी फायदे है जैसे की

इतना बोलके मीरा माँ चुप हो गयी

में :- जैसे की

मीरा माँ :- नहीं छोटे मालिक अब और बताने में मुझे शर्म आएगी

में :- ये हमारा आदेश है

ये मेरी पुराणी तकनीक थी जब भी मीरा माँ से मुझे कोई भी काम करवाना होता था में उन्हें आदेश दे देता

मीरा माँ :- इससे आप के अंदर की कामाग्नि बढ़ जाएगी और आप सम्भोग के लिए आतुर हो जाओगे लेकिन ये आपके साथ तभी असर करेगा जब आप के मन में कोई वैसा ख्याल आये या कोई आप के गुप्तांग को छेड़े

में :- इसका कोई उपाय

मीरा माँ :- सिर्फ और सिर्फ सम्भोग

ये सब बोलते वक़्त मीरा माँ की नज़रे हर वक़्त मेरे उभर पे थी जो मेने महसूस कर लिया था और इस वजह से मेरे दिमाग में फिर से मीरा माँ की नंगी गांड आगयी जिस वजह से उस शरबत ने भी अपना काम शुरू कर दिया

तभी मीरा माँ ने कुछ ऐसा बोलै की मेरा दिमाग hi काम करना बंद कर दिया

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आज के लिए इतना hi


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