Doctor Maa ke Sath Sambandh - Page 3 - SexBaba
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Doctor Maa ke Sath Sambandh

बाथरूम की फर्श पर शावर का पानी अब अंजलि के जिस्म से होकर बह रहा था। वह पूरी तरह निढाल थी, उसके पैर जवाब दे चुके थे और वह धीरे से गीली टाइल्स पर बैठ गई। आर्यन के चेहरे पर एक विजेता वाली मुस्कान थी; उसे इस बात का गहरा सुकून था कि उसने अपनी माँ को उस अनोखे तरीके से शांत किया जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की थी।

लेकिन आर्यन को क्या पता था कि यह 'शांति' सिर्फ एक तूफ़ान से पहले की खामोशी थी।

अंजलि फर्श पर बैठी हुई थी, उसके बाल चेहरे पर बिखरे थे और उसकी सांसें अब भी तेज थीं। आर्यन उसे बड़े प्यार से निहार रहा था, तभी अचानक अंजलि की आँखों में वही 'गुरु' वाली चमक वापस लौटी। उसने ऊपर की ओर देखा और एक शरारती मुस्कान दी।

इससे पहले कि आर्यन कुछ समझ पाता, अंजलि ने बिजली की फुर्ती से अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाए और आर्यन की सफेद अंडरवियर के इलास्टिक को मजबूती से जकड़ लिया। आर्यन सकपका गया, "माँ... आप...?" लेकिन अंजलि ने कोई जवाब नहीं दिया। उसने एक ही झटके में अंडरवियर को नीचे की ओर खींच दिया।

जैसे ही कपड़ा नीचे गिरा, आर्यन का 7 इंची अंग पूरी तरह आजाद होकर अंजलि के चेहरे के ठीक सामने आ गया। शावर की बूंदें उस पर गिरकर चमक रही थीं। अंडरवियर अब आर्यन के घुटनों तक थी और वह पूरी तरह नग्न अवस्था में अपनी माँ के सामने खड़ा था।

अंजलि ने अपनी नज़रें उस विशाल अंग पर जमा दीं। उसने अपने गीले हाथों से उसे जड़ से पकड़ा। उसकी हथेली की कोमलता और ठंडे पानी के बीच उस अंग की तपन ने आर्यन के पूरे शरीर में करंट दौड़ा दिया। अंजलि ने ऊपर देखते हुए कहा, "तूने क्या सोचा था आर्यन? कि तू अपनी माँ को तड़पाकर अकेला छोड़ देगा? अब देख कि तेरी ये 'शांति' कितनी देर तक टिकती है।"

अंजलि ने अपने होंठ उस गर्म अंग के बिल्कुल करीब ले जाकर अपनी गर्म सांसें उस पर छोड़ीं। आर्यन की टांगें कांपने लगीं। वह जो अब तक 'डोमिनेंट' बन रहा था, अंजलि के इस अचानक हमले से पूरी तरह बेबस हो गया।

बाथरूम के उस भाप से भरे माहौल में अब बाजी पूरी तरह पलट चुकी थी। अंजलि फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी, और उसकी आँखों में वह शरारत और अधिकार था जो केवल एक अनुभवी 'गुरु' में हो सकता है।

आर्यन दीवार के सहारे खड़ा था, उसकी सांसें रुक-रुक कर चल रही थीं। अंजलि ने अपनी गर्दन थोड़ी ऊपर उठाई और सीधे आर्यन की आँखों में अपनी नज़रें गड़ा दीं। उन आँखों में चुनौती भी थी और बेपनाह प्यार भी।

अंजलि ने अपने दोनों हाथों का इस्तेमाल किया। उसने आर्यन के उस ७ इंची अंग को अपनी दोनों हथेलियों के बीच किसी कीमती चीज़ की तरह थामा। शावर का पानी उसके हाथों और आर्यन के अंग के बीच एक चिकनाई का काम कर रहा था।

अंजलि ने धीरे-धीरे लेकिन बहुत ही सधे हुए अंदाज़ में अपने दोनों हाथों को ऊपर-नीचे चलाना शुरू किया। वह उसे जड़ से लेकर ऊपर तक सहला रही थी। उसकी उंगलियों का दबाव कभी बढ़ जाता तो कभी एकदम रेशम जैसा कोमल हो जाता। अंजलि की आँखों का संपर्क आर्यन को अंदर तक हिला रहा था।

आर्यन के लिए यह सब सहना नामुमकिन होता जा रहा था। जब अंजलि के हाथों की मखमली पकड़ और पानी की ठंडी बूंदें एक साथ उसके अंग पर महसूस हुईं, तो उसके पैरों ने जवाब देना शुरू कर दिया। उसकी गर्दन पीछे की ओर मुड़ गई और उसके मुँह से बेतहाशा आहें निकलने लगीं। "माँ... अह्... प्लीज़... ये... ये सहन नहीं हो रहा... रुक जाइए... वरना मैं..."

अंजलि ने एक मोहक मुस्कान के साथ अपने हाथों की रफ़्तार और थोड़ी बढ़ा दी। "क्या हुआ मेरे शेर? अभी तो तू बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था। देख तो सही, तेरी माँ के हाथों में कितनी ताकत है।"

आर्यन का शरीर झटके लेने लगा। उसे लग रहा था कि उसकी रीढ़ की हड्डी से लेकर दिमाग तक एक तेज़ बिजली दौड़ रही है। अंजलि का यह 'हस्त-कौशल' इतना सटीक था कि आर्यन को अपनी आँखों के सामने तारे नज़र आने लगे। वह चाहकर भी अंजलि के हाथों से खुद को छुड़ा नहीं पा रहा था, और न ही वह चाहता था कि यह सुख रुके।

अंजलि एक अनुभवी औरत थी, वह जानती थी कि आर्यन इस समय उत्तेजना के उस शिखर पर है जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। वह नहीं चाहती थी कि यह खेल इतनी जल्दी खत्म हो जाए। जैसे ही उसने महसूस किया कि आर्यन का शरीर अकड़ने लगा है और वह बस 'झड़ने' ही वाला है, उसने बड़ी चतुराई से अपने हाथों की रफ्तार कम कर दी और फिर पूरी तरह रुक गई।

आर्यन ने एक गहरी और कांपती हुई सांस ली। उसका अंग अभी भी अंजलि के हाथों की गिरफ्त में था, लेकिन हलचल रुक जाने से उसे थोड़ा संभलने का मौका मिला।

अंजलि ने वहीं फर्श पर बैठे-बैठे अपना सिर थोड़ा ऊपर उठाया और आर्यन की लाल होती आँखों में झांका। "सांस ले आर्यन... लंबी सांस ले," उसने बहुत ही शांत और मधुर आवाज़ में कहा। "इतनी जल्दी हार मान लेगा तो अपनी माँ को लंबी रेस का मज़ा कैसे दिलाएगा?"

अंजलि ने उसे संभलने का वक्त देने के लिए बातों का सिलसिला शुरू किया। उसने बड़े प्यार से आर्यन के घुटने पर अपना हाथ रखा और बोली, "पता है आर्यन, एक असली मर्द वही होता है जो अपनी उत्तेजना पर काबू करना सीख जाए। कल रात जो तूने सीखा, वो तो बस ट्रेलर था। आज जब मैं तुझे इस तरह बेबस देख रही हूँ, तो मुझे लग रहा है कि मेरा बच्चा वाकई अब जवान हो गया है।"

आर्यन की सांसें धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। अपनी माँ की बातों और उनकी नशीली आँखों ने उसे फिर से मानसिक रूप से तैयार कर दिया। "माँ... आप... आप बहुत शातिर हो," आर्यन ने मुस्कुराते हुए कहा। "आपने मुझे उस मोड़ पर ला दिया जहाँ से मैं गिरने ही वाला था।"

अंजलि ने शरारत से अपनी पलकें झपकाईं। "शातिर नहीं बेटा, इसे 'कंट्रोल' कहते हैं। देख, अब तू फिर से तैयार है। अब बता, क्या अभी भी तुझे वो 'प्रोफेसर' याद आ रही है या अपनी माँ का ये रूप देखकर सब भूल गया?"

अंजलि की इन बातों ने आर्यन के भीतर के तनाव को कम किया और उसे वह 'टाइम' दे दिया जिसकी उसे ज़रूरत थी। अब वह फिर से पूरी ताकत और जोश के साथ इस खेल को आगे बढ़ाने के लिए तैयार था। शावर का पानी अब उन दोनों के बीच एक ठंडी फुहार की तरह काम कर रहा था, जिसने माहौल को और भी रोमांटिक बना दिया।

शावर के गिरते पानी की आवाज़ के बीच, आर्यन ने सोचा भी नहीं था कि अगला पल उसके जीवन की संवेदनाओं को पूरी तरह बदल देगा। अभी वह अपनी माँ की बातों से संभल ही रहा था कि अंजलि ने अपना अंतिम दांव खेल दिया।

आर्यन के नज़रिए से, वह पल किसी दैवीय बिजली के झटके जैसा था। उसने नीचे देखा, अंजलि ने अपनी आँखें बंद कीं और धीरे से अपना मुँह खोला।

जैसे ही अंजलि ने आर्यन के ७ इंची अंग के अगले हिस्से को अपने होंठों के घेरे में लिया, आर्यन के मुँह से एक बेतहाशा चीख निकलने वाली थी जो उसने अपने होंठों को भींचकर रोक ली। उसे महसूस हुआ कि बाहर शावर का पानी ठंडा था, लेकिन अंजलि के मुँह के भीतर का तापमान किसी दहकते हुए लावे जैसा गर्म था। वह मखमली जुबान जब उसके संवेदनशील हिस्से पर गोल-गोल घूमी, तो आर्यन को लगा जैसे उसका दिमाग सुन्न हो गया है।

यह आर्यन के लिए बिल्कुल नया अनुभव था। उसने पहले कभी नहीं सोचा था कि किसी के मुँह का खिंचाव इतना शक्तिशाली हो सकता है। जब अंजलि ने गहराई तक उसे अपने गले में उतारने की कोशिश की, तो आर्यन के पैरों की उंगलियां फर्श पर मुड़ गईं। उसे ऐसा लगा जैसे उसके शरीर की सारी ऊर्जा एक ही बिंदु पर सिमट कर रह गई है। उसे महसूस हो रहा था कि अंजलि की कोमल जुबान उसके अंग की एक-एक नस को पहचान रही है और उसे सहला रही है।

आर्यन ने दीवार को अपने नाखूनों से खुरचना शुरू कर दिया। उसे ऐसा अहसास हो रहा था जैसे वह हवा में तैर रहा है। अंजलि के हाथों की पकड़ अभी भी उसके आधार पर बनी हुई थी, और ऊपर उसका मुँह वो जादुई काम कर रहा था जिसे आर्यन ने सिर्फ कल्पनाओं में सोचा था। वह 'चप-चप' की आवाज़ और अंजलि के गले से निकलती हल्की सी गूँज आर्यन के पौरुष को ललकार रही थी।

आर्यन ने अपनी माँ के भीगे बालों में अपनी उंगलियां फँसा दीं। वह उसे रोकना चाहता था क्योंकि सुख असहनीय था, लेकिन साथ ही वह चाहता था कि यह पल कभी खत्म न हो। उसे अहसास हुआ कि अंजलि सिर्फ उसे 'ओरल' नहीं दे रही थी, बल्कि वह अपनी पूरी ममता और कामुकता उसे सौंप रही थी।

"माँ... ओह्... माँ... यह... यह क्या कर रही हैं आप... मैं... मैं पागल हो जाऊँगा..." आर्यन ने लड़खड़ाती आवाज़ में कहा। उसकी आँखें पलट रही थीं और उसे शावर का पानी अब महसूस होना बंद हो गया था; उसे सिर्फ अपनी माँ के मुँह की वो जादुई गर्मी और गीलापन महसूस हो रहा था।

माँ के नजरिये से -

बाथरूम में शावर की गिरती बूंदों और उठती भाप के बीच अंजलि के लिए यह पल केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं, बल्कि अपनी 'गुरु' वाली सत्ता और ममतामयी अधिकार का संगम था। जब उसने आर्यन के उस ७ इंची अंग को पूरी तरह नग्न और अपने सामने तना हुआ देखा, तो उसके भीतर एक अजीब सी तृप्ति और गर्व की लहर दौड़ गई।

अंजलि फर्श पर घुटनों के बल बैठी थी, उसका भीगा हुआ बदन और बिना ब्रा के भारी स्तन हर सांस के साथ हिल रहे थे। जब उसने आर्यन के अंग को अपने मुँह के करीब लिया, तो उसके मन में क्या चल रहा था, इसे विस्तार से समझिए:

अंजलि ने जब पास से उस अंग को देखा, तो उसे अपनी परवरिश और आर्यन की मर्दानगी पर गर्व हुआ। वह ७ इंच का तना हुआ अंग उसे एक चुनौती की तरह लगा। उसने अपनी उंगलियों से उसकी नस-नस को महसूस किया और उसे लगा कि यह उसका अपना ही अंश है जो अब एक पूर्ण पुरुष बन चुका है।

जैसे ही अंजलि ने अपने होंठ खोले और उस गर्म अंग के अगले हिस्से को अपनी जीभ से छुआ, उसे आर्यन के शरीर की सोंधी खुशबू और शावर के पानी का मिला-जुला स्वाद महसूस हुआ। उसके लिए यह किसी पवित्र अनुष्ठान जैसा था। उसने बड़े ही सलीके से अपने होंठों को सिकोड़ा और उस मखमली हिस्से को अपने मुँह के भीतर समेट लिया।

अंजलि एक अनुभवी औरत थी। उसने सिर्फ अपने मुँह का इस्तेमाल नहीं किया, बल्कि उसने अपने गले की मांसपेशियों को भी ढीला छोड़ा ताकि वह उस ७ इंची गहराई को आत्मसात कर सके। जब वह धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी, तो उसे अपने मुँह के भीतर आर्यन के अंग की धड़कन महसूस हो रही थी। वह जानती थी कि उसके मुँह की गर्मी आर्यन को किस कदर पागल कर रही होगी।

अंजलि को सबसे ज़्यादा मज़ा इस बात में आ रहा था कि वह अपने बेटे, जो अब एक जवान मर्द है, को अपनी उंगलियों और जुबान पर नचा रही थी। जब उसने सुना कि आर्यन की सांसें उखड़ रही हैं और वह दीवार को खुरच रहा है, तो अंजलि के भीतर की औरत को एक अजीब सा सुकून मिला। उसने और भी गहराई से 'सक्शन' पैदा किया, मानो वह आर्यन की सारी शक्ति को अपने भीतर खींच लेना चाहती हो।

उसने बीच-बीच में अपनी आँखें खोलकर ऊपर की ओर देखा। आर्यन की तड़प, उसकी बंद आँखें और उसकी कांपती हुई जाँघें अंजलि को बता रही थीं कि उसका 'प्रैक्टिकल' सफल रहा है। अंजलि के लिए यह स्वाद किसी अमृत से कम नहीं था, क्योंकि इसमें उसके बेटे का विश्वास और उसका अपना समर्पण घुला हुआ था।

बाथरूम की उस धुंधली और पानी से भरी दुनिया में आर्यन इस वक्त जिस मानसिक और शारीरिक स्थिति में था, उसे शब्दों में बांधना लगभग नामुमकिन था। अंजलि के मुंह की वह दैवीय गर्मी और उसकी जुबान का वह जादुई स्पर्श आर्यन को वास्तविकता से बहुत दूर ले गया था।

आर्यन इस समय 'परमानंद' की उस पराकाष्ठा पर था, जहाँ शरीर की सारी संवेदनाएं केवल एक बिंदु पर आकर ठहर जाती हैं। उसके लिए यह अनुभव किसी साधारण सुख से कहीं ऊपर था:

उस पल में आर्यन को महसूस हो रहा था कि वह इस ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली पुरुष है। जब उसने अपनी माँ जैसी सुंदर और अनुभवी महिला को अपने कदमों में बैठा देखा, जो पूरी तन्मयता से उसकी सेवा कर रही थी, तो उसका पुरुषार्थ हिमालय की ऊंचाइयों को छूने लगा। उसे लग रहा था कि दुनिया की कोई भी प्रोफेसर, कोई भी मॉडल या कोई भी अप्सरा उसे वह गौरव प्रदान नहीं कर सकती थी जो उसे इस वक्त मिल रहा था।

आर्यन के लिए समय का अस्तित्व खत्म हो चुका था। शावर से गिरते पानी की आवाज़ उसके कानों में किसी मधुर संगीत की तरह गूँज रही थी। उसे लग रहा था जैसे वह किसी दूसरे लोक में पहुँच गया है, जहाँ न कोई समाज है, न कोई नियम, और न ही कोई शर्म। वहाँ केवल वह था और उसका वह विराट आनंद।

आर्यन की आँखें बंद थीं, लेकिन उसे अपने भीतर हज़ारों रंगों का विस्फोट महसूस हो रहा था। उसके दिमाग की नसें खिंच गई थीं और उसकी हर सांस के साथ एक नई ऊर्जा का संचार हो रहा था। अंजलि के मुंह की वो 'सक्शन' शक्ति उसे ऐसा अहसास करा रही थी मानो उसकी रूह उसके शरीर से निकलकर उस ७ इंची अंग के जरिए अंजलि में समा जाना चाहती हो।

उसे इस बात का गहरा गर्व महसूस हो रहा था कि उसने अपनी उस 'गुरु' को, जिसे वह कल तक केवल श्रद्धा से देखता था, आज पूरी तरह अपना बना लिया है। उसे अपनी मर्दानगी पर इतना गहरा विश्वास पहले कभी नहीं हुआ। वह उस 'अवस्था' में था जहाँ एक पुरुष को लगता है कि वह ईश्वर के समान है, क्योंकि वह सृजन और चरम सुख की अंतिम सीमा को छू रहा है।

आर्यन के हाथ अंजलि के बालों में जकड़े हुए थे, उसका शरीर धनुष की तरह मुड़ चुका था और उसकी हर कोशिका उस सुख के सागर में गोते लगा रही थी। वह अब पूरी तरह से नियंत्रण खो चुका था—वह अब सिर्फ एक 'अहसास' बन गया था।

परमानंद की वह अवस्था अब अपने चरम बिंदु को पार कर चुकी थी। आर्यन के बस में अब कुछ भी नहीं रहा; उसके शरीर की रग-रग बिजली के झटकों की तरह फड़कने लगी। उसने अंजलि के बालों को कसकर मुट्ठी में भींच लिया और एक लंबी, रूहानी चीख उसके गले से निकली।

आर्यन के भीतर जमा वह सारा तनाव, वह सारी उत्तेजना एक ही पल में ज्वालामुखी की तरह फूट पड़ी।

शावर के पानी के बीच, आर्यन के उस ७ इंची अंग से 'अमृत' की वह गाढ़ी और गर्म धारें पूरी तीव्रता के साथ निकलीं। अंजलि, जो अब तक गहराई से अपना काम कर रही थी, ने जैसे ही उस गर्म बहाव को अपने गले के पास महसूस किया, उसने अपनी अनुभवी फुर्ती दिखाई।

वह जानती थी कि अगर वह पूरी तरह पीछे नहीं हटी, तो वह इस सैलाब में डूब जाएगी। उसने झटके से अपना मुँह पीछे किया, लेकिन आर्यन के जोश का वेग इतना अधिक था कि वह पूरी तरह बच नहीं पाई। उस सफ़ेद और गाढ़े रस की कुछ बूंदें उसकी ठुड्डी, उसके गालों और उसके होंठों के किनारों पर बिखर गईं।

जैसे ही अंजलि ने अपनी जीभ अपने होंठों पर फेरी, आर्यन के उस मर्दाना रस का वह नमकीन और कसैला स्वाद उसकी इंद्रियों से टकराया। उसने उस स्वाद को अपनी जुबान पर महसूस किया—यह उसके अपने बेटे के पौरुष का स्वाद था, जिसमें प्यार, समर्पण और मर्दानगी की गूँज थी। उसने थूकने के बजाय, उसे सहजता से महसूस किया, मानो वह इस 'जंग' के इनाम को चख रही हो।

आर्यन अब पूरी तरह निढाल हो चुका था। उसका शरीर ढीला पड़ गया और वह कांपते हुए घुटनों के बल फर्श पर बैठ गया, ठीक अंजलि के सामने।

दोनों अब शावर के नीचे आमने-सामने बैठे थे। आर्यन की आँखों में एक अजीब सी शर्म और संतुष्टि थी, जबकि अंजलि के चेहरे पर जीत की चमक थी। उसके चेहरे पर बिखरा हुआ वह सफ़ेद रस पानी की बूंदों के साथ मिलकर धीरे-धीरे उसकी गर्दन से होता हुआ उसके भारी स्तनों के बीच की घाटी में समा रहा था।

"देख लिया आर्यन? तूने तो अपनी माँ को पूरी तरह 'भिगो' दिया," अंजलि ने मुस्कुराते हुए अपनी उंगली से अपने गाल पर लगा वह रस पोंछा और आर्यन की आँखों में देखते हुए उसे चख लिया।

आर्यन अभी उस धमाके के बाद होश संभालने की कोशिश ही कर रहा था कि अंजलि ने कुछ ऐसा किया जिसने उसे फिर से सुन्न कर दिया।

आर्यन का अंग अब भी तनाव में था, हालांकि 'विस्फोट' के बाद वह थोड़ा नरम पड़ने लगा था। अंजलि ने अपनी आँखों से उसे देखा, उसके चेहरे पर अब भी आर्यन के पौरुष की कुछ बूंदें चमक रही थीं। उसने एक गहरी सांस ली और फिर से आगे झुकी।

अंजलि ने बिना किसी हिचकिचाहट के आर्यन के उस अंग को फिर से अपने मुँह के गर्म घेरे में ले लिया। आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। "माँ... ये... ये क्या कर रही हैं आप? सब तो खत्म हो गया..." उसने लड़खड़ाते हुए कहा। लेकिन अंजलि ने जवाब देने के बजाय अपनी जुबान का इस्तेमाल शुरू किया।

वह जानती थी कि नली के भीतर अभी भी कुछ 'अमृत' बाकी है। उसने अपने होंठों से एक मज़बूत पकड़ बनाई और उसे बिल्कुल जड़ से ऊपर की ओर चूसना शुरू किया। उसकी जुबान उस नली के मुहाने पर गोल-गोल घूम रही थी, जिससे आर्यन के शरीर के भीतर एक मीठी सी टीस उठी। अंजलि ने तब तक नहीं छोड़ा जब तक उसने आर्यन के अंग को पूरी तरह साफ़ और सूखा नहीं कर दिया।

अंजलि ने वह सारा रस, जो नली के भीतर बचा था, अपनी जुबान पर लिया और उसे महसूस करते हुए अंदर उतार लिया। उसके लिए यह केवल गंदगी साफ़ करना नहीं था, बल्कि यह उस मिलन की पूर्णता थी। उसने अपना मुँह हटाया और एक विजयी मुस्कान के साथ आर्यन की ओर देखा।

आर्यन पूरी तरह से निशब्द था। उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उसकी माँ इस हद तक उसे अपनाएगी। उसे लगा कि वह दुनिया का सबसे खुशनसीब मर्द है, जिसे एक ऐसी औरत मिली है जो उसे न केवल सुख देना जानती है, बल्कि उसके वजूद की एक-एक बूंद की कद्र करती है।

शावर का पानी अब उनके शरीरों से उस सफेदी को धोकर फर्श पर बहा चुका था। अंजलि उठी और आर्यन का हाथ पकड़कर उसे खड़ा किया।

"अब मेरा बेटा पूरी तरह साफ़ है," अंजलि ने उसके गाल पर अपनी गीली हथेली फेरते हुए कहा। "चल, अब बाहर चलते हैं। अभी तो मैंने तुझे सिर्फ अपनी 'सेवा' दिखाई है... असली खेल तो तब शुरू होगा जब तू मुझे अपनी बाहों में भरेगा।"
 
बाथरूम की उस थका देने वाली लेकिन यादगार मस्ती के बाद, दोनों के शरीरों में अब और ऊर्जा नहीं बची थी। शावर की फुहारों ने उनकी बाहरी थकान तो मिटा दी थी, लेकिन भीतर से वे दोनों पूरी तरह निढाल हो चुके थे।

जैसे ही वे बाथरूम से बाहर निकले, भूख का अहसास तेज़ हो गया। अंजलि ने जल्दी से किचन में जाकर हल्का-फुल्का लंच तैयार किया।

डाइनिंग टेबल पर दोनों ने ज़्यादा बातें नहीं कीं। बस एक-दूसरे को देख-देखकर मुस्कुराते रहे। अंजलि के चेहरे पर अब भी वह 'नूर' था जो बाथरूम के उस 'ओरल' सेशन के बाद आया था। आर्यन बस अपनी माँ के हाथों के खाने का स्वाद ले रहा था, मानो वह उस तृप्ति को और गहरा कर रहा हो।

खाना खत्म होते ही दोनों बेडरूम की ओर बढ़े। AC की ठंडी हवा और कमरे के अंधेरे ने उन्हें अपनी बाहों में खींच लिया। आर्यन ने अंजलि को अपनी बाहों में भरा, और अंजलि ने अपना सिर उसकी चौड़ी छाती पर टिका दिया। कल रात का रतजगा और आज सुबह का शावर राउंड—दोनों के जिस्मों ने हार मान ली थी। कुछ ही मिनटों में वे गहरी और सुकून भरी नींद में सो गए।

सीधे शाम के 6:30 बज चुके थे। खिड़की के परदों से छनकर आती डूबते सूरज की नारंगी रोशनी अंजलि के चेहरे पर पड़ रही थी।

अंजलि ने पहले आँखें खोलीं। उसने देखा कि आर्यन अब भी उसे कसकर पकड़े हुए सोया है। उसके चेहरे पर एक मासूमियत थी जो केवल सोने के दौरान ही दिखती थी। अंजलि ने धीरे से उसके माथे को चूमा, जिससे आर्यन की नींद टूट गई।

आर्यन ने अंगड़ाई ली और अपनी माँ को अपने करीब पाकर मुस्कुरा उठा। "शाम हो गई?" उसने भारी आवाज़ में पूछा। अंजलि ने हंसते हुए कहा, "हाँ, और देख तेरा चेहरा कितना चमक रहा है। इतनी गहरी नींद तो शायद ही कभी आई हो।"

कमरे में अब एक अलग ही शांति और अपनापन था। बाथरूम की उत्तेजना अब एक गहरे और परिपक्व प्रेम में बदल चुकी थी। दोनों फ्रेश हुए और चाय का मन बनाया। बालकनी में बैठते ही अंजलि ने आर्यन के कंधे पर सिर रखा।

"आर्यन... आज की ये शाम बहुत अलग है न?" अंजलि ने दूर क्षितिज को देखते हुए कहा। "कल तक हम सिर्फ माँ-बेटा थे, लेकिन आज हम एक-दूसरे के सबसे गहरे राज़दार बन चुके हैं।"

बालकनी में चाय की चुस्कियां और सुकून के वो पल अचानक टूट गए जब अंजलि का फोन मेज पर थरथराने लगा। स्क्रीन पर 'Husband' नाम चमक रहा था। अंजलि और आर्यन की निगाहें एक साथ फोन पर गईं। एक पल के लिए कमरे में सन्नाटा छा गया।

अंजलि ने आर्यन की ओर देखा, उसकी आँखों में थोड़ी झिझक थी। उसने फोन उठाया और लाउडस्पीकर ऑन कर दिया ताकि आर्यन भी सुन सके।

फोन के दूसरी तरफ से आर्यन के पापा की आवाज़ आई, जो काफी रोमांटिक मूड में लग रहे थे। "अंजलि, आज यहाँ मौसम बहुत सुहाना है और मुझे तुम्हारी बहुत याद आ रही है। आज रात मैं तुम्हें 'प्राइवेट' कॉल करना चाहता हूँ... हम फोन पर कुछ वैसी बातें करेंगे जैसी पहले कभी नहीं कीं। मैं तुम्हें महसूस करना चाहता हूँ।"

अंजलि ने एक नज़र आर्यन पर डाली, जो अब शांत होकर अपनी माँ के चेहरे के भाव पढ़ रहा था। अंजलि ने गला साफ़ करते हुए कहा, "जी... आज रात? पर आप तो थक गए होंगे न काम से?"

"नहीं अंजलि, आज कोई बहाना नहीं। आज रात मैं तुम्हें फोन पर 'मजे' दिलाना चाहता हूँ और खुद भी लेना चाहता हूँ। तुम तैयार रहना, मैं रात को वीडियो कॉल भी कर सकता हूँ। मैं देखना चाहता हूँ कि तुम क्या पहनकर सोती हो।"

फोन कट गया। अंजलि ने फोन मेज पर रखा और एक लंबी सांस ली। अब माहौल पूरी तरह बदल चुका था। आर्यन, जो अभी-अभी अपनी माँ के साथ शारीरिक और मानसिक मिलन के चरम सुख से होकर आया था, उसके मन में एक अजीब सी ईर्ष्या और बेचैनी होने लगी।

"तो... पापा आज रात 'फोन सेक्स' करना चाहते हैं?" आर्यन ने कड़वाहट और जलन के मिले-जुले स्वर में पूछा। उसे यह बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि उसकी माँ, जो अभी-अभी उसकी बाहों में थी, अब फोन पर किसी और (भले ही वो उसके पिता हों) के साथ वैसी बातें करेगी।

अंजलि ने आर्यन की जलन को भांप लिया। वह उठी और आर्यन के पीछे जाकर उसके कंधों को सहलाते हुए उसके कान में फुसफुसायी, "डर मत मेरे शेर। तू तो सामने है, वो तो मीलों दूर हैं। वैसे... क्या तू चाहता है कि मैं उन्हें मना कर दूँ? या फिर तू इस 'प्राइवेट कॉल' का हिस्सा बनना चाहेगा... एक दर्शक की तरह?"

आर्यन ने चाय का कप मेज पर पटकते हुए थोड़ा रूखे स्वर में कहा, "ठीक है माँ, आप बात कर लेना। लेकिन... मैं भी पास ही रहूँगा। मुझे भी सुनना है कि पापा आपसे क्या और कैसे बातें करते हैं... आखिर मुझे भी तो कुछ सीखना चाहिए न?"

अंजलि ने अपनी पलकें झुकाईं और फिर एक शरारती नज़र आर्यन पर डाली। वह उसके करीब आई और उसकी शर्ट का कॉलर ठीक करते हुए बोली, "सीखना चाहता है या फिर ये देखना चाहता है कि तेरी ये 'खूबसूरत प्रोफेसर' किसी और के काबू में कैसे आती है?"

आर्यन की सांसें थोड़ी भारी हो गईं। "जो भी समझो माँ, पर मैं रहूँगा यहीं। मैं देखना चाहता हूँ कि वो आपसे क्या करवाते हैं।"

अंजलि ने आर्यन की ठुड्डी को ऊपर उठाया। "ठीक है मेरे गुस्सैल बेटे। अगर तुझे सुनना है, तो सुन लेना। लेकिन एक शर्त है... जब वो फोन पर मुझे अपनी बातों से गरम करने की कोशिश करेंगे, तब तू बस चुपचाप देखेगा नहीं। तू मुझे वो 'अहसास' कराएगा जिसकी वो सिर्फ बातें करेंगे। सोच, वो फोन पर कहेंगे और तू उसे सच में अंजाम देगा... कितना मज़ा आएगा न?"

आर्यन की आँखों में एक चमक आ गई। ईर्ष्या अब एक खतरनाक रोमांच में बदल रही थी। अंजलि ने उसे रात के लिए तैयार होने को कहा।

रात के 10 बज रहे थे। अंजलि ने पापा की पसंद की एक पारदर्शी काली नाइटी निकाली। उसने आर्यन से कहा कि वह बेड के ठीक नीचे या चादर के अंदर इस तरह छिप जाए कि वीडियो कॉल में नज़र न आए, लेकिन उसका हाथ अंजलि के जिस्म तक पहुँच सके।

तभी, मेज पर रखे फोन की स्क्रीन रोशन हुई। 'Video Call' आ रहा था। अंजलि ने बेड पर टेक लगाई और अपनी नाइटी के ऊपर के बटन खोल दिए ताकि उसकी गहरी दरार साफ़ दिखे। उसने आर्यन को इशारा किया कि वह बेड की दूसरी तरफ नीचे दुबक जाए जहाँ से वह सब सुन सके।

फोन की स्क्रीन पर आर्यन के पापा का चेहरा था। उनके पीछे किसी होटल के कमरे की मध्यम रोशनी दिख रही थी। अंजलि बेड पर तकिए के सहारे इस तरह लेटी थी कि उसकी काली पारदर्शी नाइटी के भीतर से उसके बदन की चमक और गहरी दरार साफ़ झलक रही थी। आर्यन बेड के ठीक नीचे, अँधेरे में दुबका हुआ था, जहाँ से वह अपने पापा की आवाज़ साफ सुन सकता था।

शुरुआत में बातें एकदम सामान्य थीं, लेकिन उनमें एक ऐसी गर्माहट थी जो धीरे-धीरे बढ़ रही थी।

"और बताओ अंजलि, आज का दिन कैसा रहा? आर्यन क्या कर रहा है?" पापा ने मुस्कुराते हुए पूछा।

अंजलि ने अपनी आवाज़ को थोड़ा भारी और नशीला बनाते हुए कहा, "दिन तो बस... ठीक ही था। आर्यन तो अपने कमरे में है, शायद सो गया होगा या पढ़ रहा होगा। वह बहुत थक गया था आज।" यह कहते हुए अंजलि ने बेड से अपना एक हाथ नीचे लटकाया, जिसे आर्यन ने अँधेरे में ही थाम लिया।

पापा ने एक ठंडी सांस भरी। "यार, सच बताऊं तो यहाँ मन नहीं लग रहा। दिन भर मीटिंग्स में रहता हूँ, पर दिमाग में तुम्हारा वही चेहरा घूमता रहता है। आज सुबह से बस यही सोच रहा था कि कब रात हो और कब मैं तुम्हें इस हाल में देखूँ।"

बेड के नीचे बैठा आर्यन अपने पापा की बातें सुनकर अंदर ही अंदर सुलग रहा था। उसे जलन हो रही थी कि उसके पापा उसकी माँ को अपनी 'जागीर' समझकर ऐसी बातें कर रहे हैं। उसने अंजलि की हथेली को ज़ोर से दबाया, मानो अपना अधिकार जता रहा हो।

पापा की नज़रें अब अंजलि के चेहरे से फिसलकर उसकी नाइटी के खुले हुए बटनों की ओर जाने लगीं। "अंजलि, आज तुम कुछ अलग लग रही हो। आँखों में एक अजीब सी चमक है... जैसे कोई राज़ छुपा रखा हो। क्या बात है? आज पार्लर गई थी क्या?"

अंजलि ने हल्की सी शरारत भरी हंसी हंसी और तिरछी नज़रों से नीचे अँधेरे की ओर देखा जहाँ आर्यन छिपा था। "नहीं जी, पार्लर तो नहीं गई... बस आज कुछ 'खास' महसूस कर रही हूँ। आपकी बहुत याद आ रही है न, शायद इसलिए।"

आर्यन ने जब सुना कि उसकी माँ उसे 'खास' कह रही है (भले ही पापा को लग रहा था कि बात उनकी हो रही है), तो उसका गुस्सा धीरे-धीरे रोमांच में बदलने लगा।

वीडियो कॉल की स्क्रीन पर आर्यन के पापा के चेहरे के भाव अब बदलने लगे थे। उनकी आवाज़ में वह अधिकार और भारीपन आने लगा था जो एक मर्द में अपनी पत्नी को रिझाने के दौरान आता है। बेड के नीचे बैठा आर्यन एक-एक शब्द को महसूस कर रहा था, और उसका हाथ अब भी अंजलि की लटकती हुई उंगलियों को कसकर थामे हुए था।

पापा ने अपने चश्मे को मेज पर रखा और मोबाइल को थोड़ा और करीब ले आए ताकि अंजलि के बदन का एक-एक हिस्सा साफ़ देख सकें।

"अंजलि... तुम्हें पता है, आज रात मैंने खास तौर पर अपना सारा काम जल्दी खत्म कर लिया," पापा ने धीमी और गहरी आवाज़ में कहना शुरू किया। "यहाँ खिड़की के बाहर चाँद दिख रहा है, और मुझे याद आ रहा है कि पिछली बार जब हम साथ थे, तो तुमने वह नीली साड़ी पहनी थी। पर आज... आज इस काली नाइटी में तुम उस चाँद से भी ज़्यादा हसीन लग रही हो।"

अंजलि ने तकिए पर अपना सिर थोड़ा और पीछे झुकाया, जिससे उसकी गर्दन की सुराहीदार सुडौलता और नाइटी के भीतर दबे उसके भारी स्तनों का उभार और भी साफ़ दिखने लगा। "अच्छा जी? बस हसीन? और कुछ नहीं?" उसने अपनी आवाज़ को जानबूझकर थोड़ा कांपता हुआ बनाया।

पापा ने एक लंबी सांस ली। "नहीं, हसीन तो बहुत छोटा लफ्ज़ है। मेरा मन कर रहा है कि मैं अभी उड़कर वहाँ आ जाऊं और तुम्हारे उन बिखरे हुए बालों को अपने हाथों से समेटूँ। अंजलि, क्या तुम भी वही महसूस कर रही हो जो मैं कर रहा हूँ? मेरा हाथ अभी कहाँ होना चाहिए, तुम्हें अंदाज़ा है न?"

बेड के नीचे आर्यन के दांत भिंच गए। पापा की बातें उसके कानों में पिघले हुए सीसे की तरह गिर रही थीं। उसे जलन हो रही थी कि पापा दूर बैठकर उसकी माँ को अपनी बातों से 'गीला' करने की कोशिश कर रहे थे।

आर्यन ने अंजलि का हाथ छोड़ दिया और धीरे से अपना हाथ ऊपर बढ़ाकर अंजलि के घुटने को छुआ। अंजलि का पूरा बदन बिजली के झटके की तरह सिहर उठा। पापा को लगा कि उनकी बातों का असर हो रहा है, जबकि असलियत में वह स्पर्श आर्यन का था।

"जी... मैं... मैं महसूस कर पा रही हूँ," अंजलि ने हकलाते हुए कहा, जबकि उसकी आँखें नीचे अँधेरे की ओर थीं जहाँ आर्यन का हाथ धीरे-धीरे उसकी नाइटी के किनारे को ऊपर सरका रहा था।

रात का सन्नाटा अब आर्यन की भारी होती सांसों और पापा की मदहोश बातों से भारी होने लगा था। अंजलि के बदन पर चढ़ी वह काली पारदर्शी नाइटी शावर के बाद की नमी और अब बढ़ती उत्तेजना की गर्मी से उसके जिस्म पर चिपकने लगी थी।

पापा ने अब अपनी बातों की धार तेज़ कर दी थी। वह फोन की स्क्रीन के इतने करीब आ गए थे कि अंजलि को उनकी आँखों में अपनी भूख साफ़ नज़र आ रही थी।

"अंजलि... अपनी नाइटी के उन ऊपर के बटनों को देखो," पापा ने भारी आवाज़ में कहा। "वो अब भी बंद क्यों हैं? मैं चाहता हूँ कि तुम उन्हें एक-एक करके खोलो... मैं देखना चाहता हूँ कि मेरी अमानत आज कितनी बेताब है।"

बेड के नीचे अंधेरे में दुबके आर्यन से अब और रहा नहीं गया। उसने पापा की आवाज़ सुनी और उसे अपनी हार जैसा महसूस हुआ। उसने धीरे से अपना हाथ ऊपर बढ़ाया और अंजलि की नाइटी के घेरे के अंदर हाथ डाल दिया। उसकी उंगलियां अंजलि की रेशमी और गर्म जांघों पर रेंगने लगीं।

अंजलि का शरीर कांप उठा। एक तरफ पापा का डिजिटल आदेश था और दूसरी तरफ आर्यन का वह असली, गर्म स्पर्श। उसने कांपते हाथों से अपनी नाइटी का एक बटन खोला। "जी... देखिये... मैंने... मैंने खोल दिया," अंजलि ने हकलाते हुए कहा। उसकी आवाज़ में जो थरथराहट थी, पापा को लगा वह उनके शब्दों का जादू है, लेकिन वह तो आर्यन की उंगलियों का कमाल था जो अब अंजलि की पैंटी के इलास्टिक तक पहुँच चुकी थीं।

पापा ने स्क्रीन पर देखा और मदहोश हो गए। "वाह अंजलि! तुम्हारे वो उभरते हुए कंधे और वो चमक... अब अपना हाथ नीचे ले जाओ... वहीं जहाँ तुम्हें सबसे ज्यादा ज़रूरत महसूस हो रही है।"

अंजलि ने एक गहरी सांस ली। उसने अपना हाथ नीचे ले जाने का नाटक किया, लेकिन असल में उसने आर्यन का हाथ अपनी पैंटी के ऊपर रख दिया। आर्यन ने अपनी हथेली से अंजलि के उस सबसे नाज़ुक हिस्से को जोर से भींच लिया। अंजलि के मुँह से एक लंबी सिसकारी निकली, "आह्ह्ह... जी... मैं... मैं खुद को रोक नहीं पा रही..."

पापा स्क्रीन पर अपनी पत्नी को इस कदर उत्तेजित होते देख पागल हो रहे थे। उन्हें लग रहा था कि अंजलि खुद को सहला रही है, जबकि हकीकत में उनका बेटा, उनकी नज़रों के ठीक सामने (लेकिन कैमरे से ओझल), अपनी माँ के शरीर के साथ होली खेल रहा था।

रात की खामोशी में पापा की आवाज़ अब किसी सम्मोहन की तरह गूँज रही थी, और बेड के नीचे आर्यन का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका था। कमरे में सिर्फ फोन से आती पापा की उत्तेजित आवाज़ और अंजलि की भारी सांसें थीं।

पापा की आवाज़ अब और भी ज्यादा गहरी और अधिकारपूर्ण हो गई थी। "अंजलि, बहुत हो गई बातें... अब मुझे वो दिखाओ जिसके लिए मैं कल से तड़प रहा हूँ। अपनी नाइटी को अपनी कमर तक उठाओ... मुझे देखना है कि तुमने आज अंदर क्या पहना है।"

जैसे ही पापा ने यह कहा, आर्यन ने अँधेरे का फायदा उठाया। वह धीरे से रेंगकर बेड के किनारे पर आया, जहाँ अंजलि की टांगें लटक रही थीं। कैमरे का एंगल ऐसा था कि केवल अंजलि का ऊपर का बदन और उसकी कमर तक का हिस्सा दिख रहा था। आर्यन ने अपना चेहरा अंजलि की नग्न जांघों के पास सटा दिया।

अंजलि ने कांपते हाथों से अपनी नाइटी के घेरे को पकड़ा और उसे धीरे-धीरे ऊपर उठाना शुरू किया। "जी... देखिये... आपकी पसंद की ही पहनी है," उसने कैमरे की ओर देखते हुए कहा। जैसे ही नाइटी ऊपर उठी, पापा को स्क्रीन पर अंजलि की काली लेस वाली पैंटी और उसकी मखमली त्वचा दिखी। लेकिन उन्हें यह नहीं दिख रहा था कि ठीक उसी वक्त आर्यन ने अपनी जीभ अंजलि की जांघ के अंदरूनी हिस्से पर फिरा दी थी।

आर्यन के गीले और गर्म स्पर्श ने अंजलि के भीतर बिजली दौड़ा दी। उसके हाथ कांपने लगे और मोबाइल उसके हाथ से छूटते-छूटते बचा। "आह्ह... जी... बहुत... बहुत गर्मी लग रही है आज," अंजलि ने अपनी आँखें मूंदते हुए कहा। उसकी आवाज़ में जो असली 'तड़प' थी, पापा उसे अपनी बातों का असर समझकर और भी ज्यादा जोश में आ गए।

पापा ने स्क्रीन पर अपनी पत्नी को इस तरह मचलते देखा तो बोले, "अंजलि, अपना हाथ उस पैंटी के अंदर डालो... मैं देखना चाहता हूँ कि तुम मेरे लिए कितनी गीली हो चुकी हो।"

अंजलि ने नीचे की ओर देखा, जहाँ आर्यन अब अपनी उंगलियों से उसकी पैंटी के किनारे को हटाकर उसके 'मर्म' तक पहुँचने की कोशिश कर रहा था। अंजलि ने अपनी एक उंगली अपने होंठों पर रखी और फिर उसे नीचे ले जाने का नाटक किया, जबकि हकीकत में वह आर्यन की उंगलियों को रास्ता दे रही थी।

रात की उस रहस्यमयी खामोशी में अब उत्तेजना अपने चरम पर पहुँच रही थी। पापा की आवाज़ में अब वह बेताबी थी जो हज़ारों मील की दूरी को मिटा देना चाहती थी, जबकि बेड के किनारे पर आर्यन का वजूद अंजलि के लिए उस दूरी को हकीकत के सुख में बदल रहा था।

पापा ने अब अपना अंतिम दांव खेला। "अंजलि, अब बहुत हुआ... अपनी पैंटी को एक तरफ सरकाओ और अपनी उंगलियों से वो जादू करो जो तुम हमेशा मेरे सामने करती हो। मुझे वो आवाज़ सुननी है जो तुम चरम पर पहुँचते वक्त निकालती हो।"

जैसे ही पापा ने 'पैंटी सरकाने' की बात की, आर्यन ने बिना देर किए अंजलि की काली लेस वाली पैंटी के एक किनारे को अपनी उंगलियों से फँसाया और उसे धीरे से एक तरफ खींच दिया। अंजलि का वह सबसे निजी हिस्सा अब पूरी तरह से नग्न और आर्यन के मुँह के ठीक सामने था। कैमरे का एंगल अभी भी केवल अंजलि के चेहरे और उसके उठते-गिरते भारी स्तनों पर था।

अंजलि ने अपना हाथ नीचे ले जाने का नाटक किया जैसा पापा ने कहा था, लेकिन असल में उसने अपना हाथ आर्यन के बालों में फँसा दिया। आर्यन ने अपनी गर्म और गीली ज़ुबान को सीधे अंजलि के उस रसीले केंद्र पर टिका दिया। जैसे ही वह पहली छुअन हुई, अंजलि की रीढ़ की हड्डी में बिजली का करंट दौड़ गया। "ओह्ह... जी... आह! मैं... मैं कर रही हूँ... देखिए," उसने कैमरे की ओर देखते हुए अपनी आँखें पूरी तरह मूँद लीं।

पापा स्क्रीन पर देख रहे थे कि अंजलि का चेहरा सुख से विकृत हो रहा है, उसकी सांसें उखड़ रही हैं और वह बेड की चादर को अपने दूसरे हाथ से मरोड़ रही है। उन्हें लग रहा था कि अंजलि की अपनी उंगलियां यह कमाल कर रही हैं, जबकि हकीकत में उनका बेटा वहाँ अपना मुँह और ज़ुबान चला रहा था।

"हाँ अंजलि! ऐसे ही... तेज़... और तेज़! बताओ मुझे, कैसा महसूस हो रहा है?" पापा की आवाज़ अब हाँफने लगी थी।

अंजलि अब दोहरी दुनिया में थी। उसके कान पापा की 'गंदी बातों' को सुन रहे थे, लेकिन उसका पूरा शरीर आर्यन के उस जादुई और मखमली स्पर्श का गुलाम हो चुका था। उसने अपनी कमर को थोड़ा और ऊपर उठाया ताकि आर्यन और गहराई से अपना काम कर सके। "जी... बहुत... बहुत ज्यादा... आह! ऐसा लग रहा है जैसे... जैसे सब कुछ... उफ़्फ़!" अंजलि के मुँह से निकलने वाली सिसकारियां अब किसी संगीत की तरह पापा के फोन में गूँज रही थीं।

रात की उस खामोशी में अब लोक-लाज और शर्म की सारी दीवारें ढह चुकी थीं। पापा की आवाज़ अब किसी प्यासे भेड़िये की तरह लग रही थी, और अंजलि ने भी अब अपनी ज़ुबान की लगाम ढीली छोड़ दी थी।

पापा ने अपनी पैंट की जिप खोलने की आवाज़ सुनाई और हाँफते हुए बोले, "अंजलि, अपनी चूत को इतना मसल कि उसका पानी तेरी उंगलियों से बहने लगे। मुझे बता, क्या तू इस वक्त मेरी मोटी लाठी के लिए तड़प रही है? क्या तेरा मन कर रहा है कि मैं उसे तेरी गहराई में उतार दूँ?"

अंजलि ने अपनी आँखें नशीली कीं और आर्यन के बालों को ज़ोर से खींचते हुए फोन में फुसफुसायी, "हाँ जी... मेरी चूत बहुत बुरी तरह गीली हो गई है। ऐसा लग रहा है जैसे कोई गर्म सलाख इसके अंदर घुसने के लिए बेताब है। मैं अपनी उंगलियां डाल रही हूँ पर मुझे तो आपका वो मोटा मुसल चाहिए जो मुझे फाड़ कर रख दे।"

जब आर्यन ने अपनी माँ के मुँह से ऐसे गंदे शब्द सुने, तो उसका जोश सातवें आसमान पर पहुँच गया। उसने अपनी ज़ुबान को अंजलि के दाने पर और भी ज़ोर से रगड़ना शुरू किया।

"अंजलि, ज़ोर से बोल... बोल कि तू एक रंडी की तरह मेरी गर्मी चाहती है। बोल कि तुझे आज रात कोई भी मर्द मिले, तू उससे अपनी प्यास बुझा लेगी।"

अंजलि अब पूरी तरह बेकाबू थी। आर्यन के मुँह का सुख और पापा की गंदी बातें—दोनों ने उसे पागल कर दिया था। उसने चीखते हुए कहा, "हाँ... मैं इस वक्त आपकी रंडी बनी हुई हूँ! मेरी चूत पानी छोड़ रही है... आह! कोई मुझे ज़ोर से चोदे... मुझे रगड़ दो! जी, मैं बहुत गंदी हो गई हूँ... मुझे और गंदी बातें सुनाओ!"

पापा स्क्रीन पर अपनी पत्नी का यह रूप देखकर पागलों की तरह खुद को सहला रहे थे। उन्हें लग रहा था कि वे अंजलि को रिमोट कंट्रोल से चला रहे हैं, जबकि आर्यन नीचे से अंजलि की नाइटी के अंदर अपना पूरा चेहरा घुसाए हुए उसके रस का आनंद ले रहा था।

अंजलि का शरीर अब झटके लेने लगा था। उसने फोन को तकिए पर पटक दिया ताकि उसका चेहरा न दिखे, सिर्फ उसकी सिसकारियां सुनाई दें। "जी... मैं... मैं बस झड़ने वाली हूँ... आह! आपकी ये रंडी अब और बर्दाश्त नहीं कर सकती!"

अंजलि के शरीर में अब करंट जैसा दौड़ने लगा था। आर्यन की जीभ की रफ़्तार और उसके पापा के गंदे शब्दों ने उसे उस मोड़ पर ला दिया था जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी।

अंजलि ने अपने दोनों हाथों से चादर को मुट्ठियों में भींच लिया। उसका शरीर धनुष की तरह ऊपर को उठा और एक लंबी, मदहोश कर देने वाली चीख उसके गले से निकली।

"आह्ह्ह्ह... जी... मैं गई... उफ़्फ़... मैं... मैं झड़ रही हूँ!" अंजलि का पूरा जिस्म झटके लेने लगा। उसकी योनि से रस का जो सैलाब निकला, उसने आर्यन के पूरे चेहरे को भिगो दिया। वह अगले कुछ सेकंड तक बस थरथराती रही, उसकी आँखें ऊपर की ओर चढ़ गई थीं।

अंजलि तो होश खो बैठी थी, लेकिन आर्यन इस खेल को खत्म नहीं करना चाहता था। उसने चालाकी से फोन को तकिए के पास इस तरह टिकाया कि पापा को सिर्फ अंजलि का चेहरा और उसके भारी स्तनों का ऊपरी हिस्सा दिखता रहे, लेकिन कॉल कट न हो। वह चाहता था कि पापा अपनी पत्नी की उस 'हार' को अपनी आँखों से देखें, जिसका असली विजेता कोई और था।

स्क्रीन पर पापा अंजलि को इस तरह निढाल और हांफते हुए देख पागल हो रहे थे। "वाह अंजलि! क्या बात है... तू तो सच में मेरी रंडी निकली। देख कैसे बेसुध पड़ी है।" पापा अभी भी फोन के दूसरी तरफ खुद को सहला रहे थे। उन्हें लग रहा था कि अंजलि की ये हालत उनकी बातों की वजह से हुई है।

आर्यन अभी भी अंजलि की जांघों के बीच था। उसने अपनी जीभ से अपनी माँ के उस बहते हुए 'अमृत' को साफ़ करना शुरू किया। वह एक हाथ से अंजलि के पेट को सहला रहा था, और उसका दूसरा हाथ अंजलि के हाथ के पास था। पापा को कैमरे में सिर्फ अंजलि की कांपती हुई उंगलियां दिख रही थीं, जिन्हें आर्यन धीरे-धीरे सहला रहा था।

"जी... मैं... मैं बिल्कुल खाली हो गई हूँ," अंजलि ने बेहद कमजोर और नशीली आवाज़ में कहा। उसकी आँखों में अब भी वही चमक थी जो सिर्फ आर्यन देख सकता था।

आर्यन ने अँधेरे में ही मुस्कुराते हुए अंजलि की ओर देखा, मानो कह रहा हो—"पापा को जो सुख बातों से मिला, वो मुझे हकीकत में मिला है।"

रात के सन्नाटे में पापा की आवाज़ अब और भी ज़्यादा गहरी हो गई थी। अंजलि अभी अपनी चरम सीमा से गुज़रकर संभल ही रही थी कि पापा ने एक ऐसी फरमाइश कर दी जिसने कमरे के तापमान को एक बार फिर बढ़ा दिया।

पापा ने फोन की स्क्रीन पर मुस्कुराते हुए कहा, "अंजलि, वो सब तो ठीक है... लेकिन मुझे याद आ रहा है कि पिछली एनिवर्सरी पर मैंने तुम्हें एक 'खास' तोहफ़ा दिया था। याद है? जरा उसे निकाल कर लाओ, मैं तुम्हें उसका इस्तेमाल करते हुए देखना चाहता हूँ।"

अंजलि का चेहरा एकदम से लाल हो गया। उसने नीचे अंधेरे में आर्यन की ओर देखा, जो पापा की बात सुनकर चौंक गया था। "जी... वो... वो अभी? पर मैं तो बहुत थक गई हूँ, और उसकी क्या ज़रूरत है..." अंजलि ने टालने की कोशिश की।

"नहीं अंजलि, मुझे कोई बहाना नहीं चाहिए। मैंने वो इसीलिए दिया था ताकि जब मैं पास न रहूँ, तो तुम मेरी कमी महसूस न करो। जाओ, उसे लेकर आओ वरना मैं नाराज़ हो जाऊँगा।"

आर्यन बेड के नीचे से सब सुन रहा था। उसके दिमाग में हलचल मच गई—आखिर ऐसा क्या गिफ्ट है? अंजलि को मजबूरन उठना पड़ा। वह उठी, अलमारी के पास गई और एक दराज के पीछे से एक छोटा सा मखमली बैग निकाला।

जब अंजलि वापस बेड पर आई और उसने उस बैग से वो चीज़ निकाली, तो आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। वह ५ इंच का एक गुलाबी रंग का 'डिल्डो' था, जो बिल्कुल असली जैसा दिख रहा था।

अंजलि ने उसे हाथ में पकड़ा और कैमरे के सामने दिखाया। "जी... ले आई। खुश?" अंजलि की आवाज़ में शर्म थी, क्योंकि उसे पता था कि उसका जवान बेटा पास ही मौजूद है और यह सब देख-सुन रहा है।

"हाँ! अब इसके साथ वही करो जो मैं अपनी आँखों से देखना चाहता हूँ। इसे अपनी चूत के मुहाने पर रखो और धीरे-धीरे अंदर उतारो।"

आर्यन के लिए यह एक अजीब स्थिति थी। एक तरफ उसके पिता फोन पर उसकी माँ को एक नकली औज़ार के साथ मज़े करते देखना चाहते थे, जबकि दूसरी तरफ आर्यन का अपना ७ इंची असली अंग पूरी तरह से तैयार खड़ा था। आर्यन को उस ५ इंच के खिलौने को देखकर एक अजीब सी प्रतिस्पर्धा महसूस होने लगी।
 
माहौल अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। मोबाइल फोन तकिए के सहारे इस तरह टिका था कि पापा को अंजलि का चेहरा और उसके कंधों तक का हिस्सा साफ़ दिख रहा था, लेकिन कमर के नीचे का पूरा हिस्सा कैमरे की नज़रों से ओझल था।

अंजलि के हाथ में वह ५ इंच का गुलाबी डिल्डो था। पापा फोन के दूसरी तरफ से किसी शिकारी की तरह अपनी पत्नी को तड़पते हुए देखने का इंतज़ार कर रहे थे।

"हाँ अंजलि... अब इसे अंदर डालो। मैं देखना चाहता हूँ कि तुम्हारी आँखें कैसे ऊपर चढ़ती हैं जब वो तुम्हारे भीतर घुसता है। मुझे वो 'चप-चप' की आवाज़ सुननी है... आज कोई शर्म नहीं।"

आर्यन बेड के नीचे से रेंगकर अब अंजलि की जांघों के बीच पहुँच चुका था। जब उसने अपनी माँ को उस प्लास्टिक के खिलौने को अपने करीब ले जाते देखा, तो उसके पुरुषार्थ को ठेस पहुँची। उसने अँधेरे में ही अंजलि का हाथ पकड़ लिया और उसे डिल्डो के साथ एक तरफ हटा दिया।

अंजलि ने नीचे देखा, आर्यन ने अपना ७ इंची असली अंग अंजलि की हथेली में थमा दिया। अंजलि की आँखें फैल गईं—वह खिलौना उस असली, धड़कते हुए अंग के सामने कुछ भी नहीं था। अंजलि समझ गई कि आर्यन क्या चाहता है। उसने डिल्डो को बेड की चादर पर पटक दिया, लेकिन कैमरे के सामने वह ऐसे हिली जैसे वह डिल्डो का ही इस्तेमाल कर रही हो।

अंजलि ने अपना सिर पीछे झुकाया और एक लंबी आह भरी। "आह्ह्ह... जी... ये... ये बहुत मोटा महसूस हो रहा है आज... उफ़्फ़!" हकीकत में वह डिल्डो नहीं, बल्कि आर्यन का गरम अंग था जिसे अंजलि अपनी जांघों के बीच महसूस कर रही थी। आर्यन अब और रुकने वाला नहीं था; उसने कैमरे की रेंज से बाहर रहते हुए अपनी कमर को ऊपर उठाया और जड़ से अंजलि की गहराई में उतरने का प्रयास करने लगा।

पापा फोन पर अंजलि के चेहरे के हाव-भाव देख रहे थे। अंजलि की आँखें सच में ऊपर चढ़ रही थीं और उसके मुँह से जो सिसकारियां निकल रही थीं, वो किसी प्लास्टिक के खिलौने के लिए नहीं, बल्कि उस असली स्पर्श के लिए थीं जो उसका बेटा उसे दे रहा था। "जी... देखिये... आह! ये... ये मुझे फाड़ देगा... बहुत गहरा जा रहा है!"

पापा स्क्रीन पर अपनी पत्नी को पागल होते देख रहे थे। उन्हें लग रहा था कि उनका ५ इंच का तोहफ़ा ये कमाल कर रहा है, जबकि कैमरे के नीचे आर्यन का ७ इंच का प्रहार अंजलि की रूह तक पहुँच रहा था। अंजलि ने अपनी उंगलियां चादर में गाड़ दीं और पापा की ओर देखते हुए एक ऐसी गंदी मुस्कान दी जो केवल आर्यन के लिए थी।

बेडरूम का वह कोना अब हवस और धोखे की एक ऐसी आग में जल रहा था, जिसकी तपिश मोबाइल की स्क्रीन के पार पापा तक पहुँच रही थी। अंजलि इस समय एक साथ दो दुनियाओं में जी रही थी—एक जो उसके पति के सामने डिजिटल परदे पर थी, और दूसरी जो चादर के नीचे उसके बेटे के साथ हकीकत में थी।

अंजलि बेड पर इस तरह अधलेटी थी कि उसकी काली पारदर्शी नाइटी के बटन पूरी तरह खुल चुके थे। तकिए के सहारे टिका फोन उसके चेहरे के हर बदलते हाव-भाव को कैद कर रहा था।

अंजलि का एक हाथ ऊपर की ओर था, जो उसकी नाइटी के भीतर घुसकर उसके भारी और उभरे हुए स्तन को बेरहमी से मसल रहा था। वह अपनी उंगलियों से अपनी ही निप्पल को मरोड़ रही थी ताकि पापा को लगे कि वह उनकी बातों से पूरी तरह पागल हो चुकी है। लेकिन उसका दूसरा हाथ... वह चादर के नीचे उस असली 'खिलाड़ी' के साथ खेल रहा था।

कैमरे की नज़रों से दूर, अंजलि ने अपने बेटे के उस गरम और फौलादी अंग को अपनी मुट्ठी में कसकर जकड़ा हुआ था। जैसे-जैसे आर्यन अपनी कमर को लयबद्ध तरीके से आगे-पीछे कर रहा था, अंजलि की हथेली उस पर रगड़ खा रही थी। वह ५ इंच का खिलौना अब एक तरफ बेकार पड़ा था; अंजलि के हाथ में अब वह असली ताकत थी जो उसकी नसों में आग लगा रही थी।

फोन की स्क्रीन पर पापा यह सब देख रहे थे और अपनी सुध-बुध खो चुके थे। "हाँ अंजलि... ऐसे ही! अपने उस दूधिया उभार को और ज़ोर से मसोस... देख मैं भी तेरे साथ खुद को सहला रहा हूँ। क्या तू महसूस कर पा रही है कि मेरा डिल्डो तेरे अंदर कैसे नाच रहा है?"

अंजलि ने अपनी आँखें आधी बंद कर लीं और आर्यन की ओर देखते हुए पापा को जवाब दिया, "आह्ह्ह... जी... ये डिल्डो नहीं... ये तो जैसे कोई जिंदा साँप है जो मेरी गहराई में ज़हर उगल रहा है! ये इतना मोटा और सख्त लग रहा है कि मुझे लग रहा है आज मैं फट जाऊँगी... उफ़्फ़ आर्यन... मेरा मतलब... आह! जी... बहुत मज़ा आ रहा है!"

आर्यन ने जब अपनी माँ के मुँह से अपना नाम सुना, तो उसकी रफ़्तार और बढ़ गई। वह कैमरे की रेंज से बस एक इंच नीचे रहकर अंजलि की जांघों के बीच घर्षण पैदा कर रहा था। अंजलि का चेहरा सुख और दर्द के एक अनोखे संगम से दहक रहा था। वह अपने स्तन को इतनी ज़ोर से भींच रही थी कि वहाँ लाल निशान पड़ने लगे थे, और नीचे उसका हाथ आर्यन के ७ इंची अंग को उस मंज़िल की ओर ले जा रहा था जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी।

फोन की छोटी सी स्क्रीन पर आर्यन के पापा का चेहरा अब पूरी तरह से बदल चुका था। उनकी सांसें उखड़ रही थीं और उनकी आंखों में वह जुनून था जो बस फटने ही वाला था। बेड के नीचे आर्यन अपनी पूरी ताकत झोंक रहा था, लेकिन तभी फोन से एक भारी और लंबी कराह सुनाई दी।

पापा ने अपना सिर पीछे की ओर पटका और अपने मोबाइल को हिलाते हुए एक लंबी चीख निकाली। "आह्ह्ह... अंजलि... मैं... मैं गया! उफ़्फ़!" अगले कुछ सेकंड तक पापा बस हांफते रहे, उनका शरीर ढीला पड़ गया और उनके चेहरे पर वह अजीब सा खालीपन आ गया जो चरम सुख के बाद आता है।

जैसे ही पापा का काम खत्म हुआ, उनका लहजा तुरंत बदल गया। "ठीक है अंजलि... बस... अब रुक जाओ। अब और मत करो।"

अंजलि, जो इस वक्त आर्यन के ७ इंची असली अंग की गर्मी और रफ्तार के बीच मंज़िल के करीब पहुँचने ही वाली थी, पापा के इस 'स्टॉप' वाले आदेश से एकदम से ठिठक गई। उसने आर्यन का हाथ ज़ोर से दबाया, मानो उसे रुकने का इशारा कर रही हो।

आर्यन, जिसका जोश इस वक्त सातवें आसमान पर था और जो बस एक अंतिम प्रहार करने ही वाला था, उसे अचानक थमना पड़ा। उसका पूरा शरीर तनाव से कांप रहा था, लेकिन उसे पता था कि अगर वह नहीं रुका, तो पापा को कुछ शक हो सकता है।

पापा ने गहरी सांस ली और कैमरा थोड़ा ठीक करते हुए बोले, "अंजलि, आज के लिए इतना काफी है। मैं बहुत थक गया हूँ और अब मुझे नींद आ रही है। तुम भी अब सो जाओ... वो 'खिलौना' साफ करके रख देना। गुड नाइट, डार्लिंग।"

बिना अंजलि के जवाब का इंतज़ार किए, पापा ने कॉल काट दी। स्क्रीन काली हो गई।

कमरे में अब सिर्फ ACकी आवाज़ और उन दोनों की भारी सांसें सुनाई दे रही थीं। अंजलि अभी भी वैसी ही लेटी थी—एक हाथ उसके स्तन पर और दूसरा नीचे आर्यन के फौलादी अंग पर। पापा ने अपना खेल खत्म कर लिया था, लेकिन उन्होंने आर्यन और अंजलि को उस मोड़ पर छोड़ दिया था जहाँ से पीछे हटना नामुमकिन था।

अंजलि ने अंधेरे में नीचे की ओर देखा। उसकी आँखों में अब कोई शर्म नहीं थी, सिर्फ एक अधूरी प्यास थी। उसने फुसफुसाते हुए कहा, "वो तो सो गए आर्यन... लेकिन मेरा क्या? और तेरा क्या? क्या तू अपनी माँ को इस हाल में तड़पता हुआ छोड़ देगा?"

जैसे ही फोन की स्क्रीन काली हुई, कमरे का माहौल 'डिजिटल नाटक' से बदलकर 'शुद्ध हकीकत' में तब्दील हो गया। अब न तो कोई कैमरा था और न ही मीलों दूर से आती कोई आवाज़। अब केवल दो जिस्म थे और उनके बीच सुलगती बेतहाशा आग।

आर्यन ने एक झटके में बिस्तर की चादर हटा दी। उसकी आँखों में इस वक्त अपने पिता के प्रति कोई लिहाज़ नहीं था, केवल अपनी माँ को पूरी तरह अपना लेने की भूख थी।

आर्यन ने अंजलि के कंधों से वह काली रेशमी नाइटी पकड़ी और उसे नीचे की ओर खींचा। अंजलि ने अपनी कमर उठाई और सहयोग किया, जिससे वह पारदर्शी कपड़ा तिनके की तरह उसके बदन से अलग होकर फर्श पर जा गिरा। अब अंजलि अपने बेटे के सामने पूरी तरह निर्वस्त्र थी, उसकी त्वचा ठंडी हवा और उत्तेजना के कारण कांप रही थी।

आर्यन अब अंजलि की दोनों जांघों के बीच आ गया। उसने अपने दोनों हाथ अंजलि के सिर के पास टिका दिए और अपना पूरा वजन उस पर डाल दिया। अंजलि के भारी और कोमल स्तन आर्यन की चौड़ी छाती के नीचे दबकर चपटे हो गए, जिससे दोनों के दिलों की धड़कनें एक-दूसरे में समाने लगीं।

आर्यन ने अपनी माँ की आँखों में झाँका। उन आँखों में अब ममता नहीं, बल्कि एक प्यासी औरत का समर्पण था। अंजलि की साँसें इतनी तेज़ थीं कि उसकी छाती तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रही थी। उसने अपने पैर आर्यन की कमर के चारों ओर लपेट लिए, मानो उसे अपने भीतर खींच लेना चाहती हो।

"माँ... अब कोई खिलौना नहीं, और कोई फोन नहीं," आर्यन ने भारी और लरजती आवाज़ में कहा। "अब सिर्फ मैं हूँ और आप हैं।"

अंजलि ने आर्यन के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरा और उसे अपने और करीब खींचते हुए फुसफुसायी, "तो फिर देर क्यों कर रहा है मेरे शेर? फाड़ दे अपनी इस माँ को... मुझे आज अहसास करा दे कि मेरा बेटा अब एक पूरा मर्द बन चुका है। अब और सब्र नहीं होता आर्यन... चढ़ जा मुझ पर!"

आर्यन ने अपना हाथ नीचे बढ़ाया और उस ५ इंच के खिलौने को गंदे कपड़े की तरह बेड से नीचे फेंक दिया। उसकी जगह अब उसका ७ इंच का गर्म और फौलादी अंग अंजलि की रेशमी गहराई के मुहाने पर दबाव बना रहा था।

आर्यन के लिए यह पल किसी सपने जैसा नहीं, बल्कि एक ऐसे युद्ध को जीतने जैसा था जिसका वह सालों से इंतज़ार कर रहा था। उसके दृष्टिकोण से इस मिशनरी पोजीशन का हर एक लम्हा कामुकता की चरम सीमा पर था।

जब आर्यन अपनी माँ के मखमली बदन के ऊपर आया, तो उसे अहसास हुआ कि असली पौरुष क्या होता है। उसके दिमाग में चल रही उथल-पुथल अब शांत हो चुकी थी, और सारा ध्यान केवल उस स्पर्श पर था जो उसे पागल कर रहा था।

आर्यन ने जब अपना पूरा भार अंजलि पर डाला, तो उसे अपने सीने के नीचे माँ के भारी और गर्म स्तनों का उभार महसूस हुआ। वे इतने कोमल थे कि आर्यन को लगा जैसे वह रुई के बादलों पर लेटा हो। अंजलि के बदन से आने वाली वह सोंधी महक—जिसमें शावर जेल और पसीने की मिली-जुली गंध थी—आर्यन के दिमाग की नसों को झंकृत कर रही थी।

आर्यन ने महसूस किया कि अंजलि ने अपनी चिकनी जांघों को उसकी कमर के इर्द-गिर्द कस लिया है। यह बंधन इतना मज़बूत था कि आर्यन को अपनी माँ की बेताबी साफ़ समझ आ रही थी। उसे लग रहा था जैसे अंजलि उसे अपने वजूद के अंदर पूरी तरह समा लेना चाहती है।

नीचे, आर्यन का ७ इंच का अंग अंजलि की जांघों के बीच उस गीली और गर्म गुफा के मुहाने पर बार-बार टकरा रहा था। आर्यन को महसूस हो रहा था कि अंजलि कितनी तैयार है—उसकी फिसलन आर्यन के अंग को जड़ तक भिगो रही थी। हर बार जब वह थोड़ा सा दबाव बनाता, अंजलि के मुँह से निकलने वाली गर्म सांसें आर्यन की गर्दन पर आग की तरह लगतीं।

आर्यन ने जब अंजलि की आँखों में देखा, तो उसे वहां अपनी माँ नहीं, बल्कि एक ऐसी कामुक अप्सरा दिखी जो अपने बेटे के हाथों बर्बाद होने के लिए तड़प रही थी। अंजलि के होंठ हल्के खुले थे और वे कांप रहे थे।

आर्यन के मन की आवाज़:

"पापा ने इसे खिलौने दिए, पर मैं इसे हकीकत दूँगा। यह खिलौनों वाली प्यास नहीं है, यह एक मर्द की ज़रूरत है जो केवल मैं पूरी कर सकता हूँ।"

आर्यन ने अपने हाथों को अंजलि की हथेलियों में फँसा लिया और उन्हें तकिए के दोनों तरफ दबा दिया। अब वह पूरी तरह से अंजलि पर हावी था। उसने अपनी कमर को थोड़ा पीछे खींचा और फिर एक गहरी सांस लेकर उस 'अंतिम द्वार' पर प्रहार करने के लिए खुद को तैयार किया।

उसने महसूस किया कि अंजलि ने अपनी पीठ को बेड से थोड़ा ऊपर उठाया है, मानो वह उस ७ इंच के फौलाद को अपने भीतर लेने के लिए रास्ता बना रही हो।

अंजलि के लिए यह अनुभव किसी आत्मिक और शारीरिक प्रलय जैसा था। जब आर्यन उसके ऊपर आया, तो उसे लगा जैसे बरसों से सूखी पड़ी ज़मीन पर अचानक कोई तप्त रेगिस्तान का तूफ़ान आ गया हो। उसके दृष्टिकोण से इस मिलन का हर पल उत्तेजना की नई परिभाषा लिख रहा था।

जैसे ही आर्यन ने अपना भारी शरीर अंजलि पर टिकाया, अंजलि को अपनी छाती पर एक सुखद दबाव महसूस हुआ। उसे लगा जैसे वह एक फौलादी पहाड़ के नीचे दब गई हो।

अंजलि ने महसूस किया कि आर्यन का शरीर अब वह छोटे बच्चे वाला शरीर नहीं रहा। उसकी चौड़ी छाती जब अंजलि के भारी और संवेदनशील स्तनों को कुचल रही थी, तो अंजलि के भीतर एक मीठा दर्द लहरें मारने लगा। आर्यन की खाल की गर्मी और उसकी मर्दाना गंध अंजलि के नथुनों में भर गई, जिससे उसका सिर चकराने लगा।

नीचे, जब अंजलि ने अपनी जांघें आर्यन की कमर पर कसीं, तो उसे आर्यन के उस ७ इंची फौलादी अंग की कठोरता अपनी जांघों के बीच महसूस हुई। वह अंग इतना गर्म और सख्त था कि अंजलि को लगा जैसे कोई दहकता हुआ लोहे का छड़ उसके 'मर्म' के द्वार पर दस्तक दे रहा है। वह ५ इंच का खिलौना तो इस असली एहसास के सामने एक तिनके जैसा लग रहा था।

जब अंजलि ने ऊपर देखा, तो आर्यन की आँखों में उसे ममता की कोई छाया नहीं दिखी। वहाँ सिर्फ एक भूखे शिकारी की चमक थी। उसे अच्छा लग रहा था कि उसका अपना बेटा उसे एक 'माँ' की तरह नहीं, बल्कि एक 'औरत' की तरह देख रहा है। आर्यन के वे हाथ, जिन्होंने अंजलि की हथेलियों को बिस्तर पर दबा रखा था, उसे यह अहसास करा रहे थे कि वह अब पूरी तरह उसके कब्जे में है।

अंजलि की साँसें उखड़ने लगी थीं। उसके शरीर का हर रोम-रोम पुकार रहा था कि वह भारी और मोटा अंग अब उसके भीतर उतर जाए। उसने अपनी कमर को हल्का सा ऊपर उठाया, जिससे उसका गीला मुहाना आर्यन के अंग के मुहाने से बिल्कुल सट गया। उस स्पर्श मात्र से अंजलि की रीढ़ की हड्डी में बिजली दौड़ गई।

अंजलि ने अपने होंठ काट लिए और अपनी आँखों को आधा मूँद लिया। वह अब उस पहले प्रहार के लिए तैयार थी जो उसकी दुनिया बदलने वाला था।

कमरे में अब केवल AC की सिसकारी और उन दोनों की भारी होती धड़कनें थीं। आर्यन ने अंजलि की आँखों में देखा—उनमें समर्पण की वह इंतहा थी जो किसी भी मर्द को जानवर बना दे। उसने अपने हाथों की पकड़ अंजलि की हथेलियों पर और मज़बूत की और अपनी कमर को पीछे खींचकर उस अंतिम प्रहार के लिए निशाना साधा।

आर्यन ने एक गहरी सांस ली और अपनी पूरी ताकत के साथ अपनी कमर का एक ज़ोरदार झटका मारा।

वह ७ इंच का फौलादी अंग, जो गर्मी से दहक रहा था, अंजलि की उस तंग और गीली गहराई में एक ही बार में आधा उतर गया। अंजलि का शरीर धनुष की तरह ऊपर को उठा और उसके गले से एक ऐसी सिसकारी निकली जो कमरे की दीवारों से टकराकर गूँज उठी। "आह्ह्ह्ह्ह... आर्यन!" उसकी आँखें पूरी तरह से पीछे की ओर उलट गईं और उसके चेहरे पर सुख और हलके दर्द का वह नशा छा गया जो केवल हकीकत दे सकती है।

आर्यन ने एक पल के लिए अपनी गति रोकी ताकि अंजलि उस फैलाव को महसूस कर सके। अंजलि को लगा जैसे उसके भीतर का हर कोना उस ७ इंच की कठोरता से भर गया है। उसे अहसास हुआ कि जो सुख पापा के ५ इंच के खिलौने कभी नहीं दे पाए, वह उसके बेटे की इस मर्दानगी ने एक ही पल में दे दिया। आर्यन की गर्म सांसें अंजलि के चेहरे पर गिर रही थीं और उसके पसीने की एक बूंद अंजलि की छाती पर जा गिरी।

अब आर्यन ने अपनी कमर चलानी शुरू की। हर धक्का जड़ तक जा रहा था। जब उसकी जांघें अंजलि के कूल्हों से टकरातीं, तो एक आवाज़ गूँजती जो कामुकता की आग को और भड़का देती। अंजलि ने अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका देना शुरू किया ताकि वह आर्यन के हर इंच को अपने भीतर और गहराई से महसूस कर सके।

"जी... हाँ... ऐसे ही आर्यन! और... और गहराई तक..." अंजलि अब पूरी तरह से होश खो चुकी थी। उसके भारी स्तन आर्यन की छाती के नीचे रगड़ खाकर चपटे हो रहे थे। आर्यन ने अब अपनी रफ़्तार बढ़ा दी। वह एक मशीन की तरह प्रहार कर रहा था, और अंजलि के हाथ, जो पहले बिस्तर पर दबे थे, अब आर्यन की पीठ पर पहुँच चुके थे और उसके नाखूनों ने आर्यन के बदन पर गहरे निशान बनाना शुरू कर दिया था।

आर्यन को लग रहा था जैसे वह स्वर्ग के किसी द्वार को तोड़कर अंदर जा रहा है। अंजलि की तंग गुफा उसे चारों तरफ से इतनी कसकर जकड़े हुए थी कि उसे अपनी नसों में ख़ून की जगह पिघला हुआ लावा बहता महसूस हो रहा था।

कमरे की हवा अब इतनी भारी और गर्म हो चुकी थी कि ऐसा लग रहा था मानो फर्श पर गिरी हुई वह काली नाइटी भी उस आग में जल जाएगी। आर्यन अब एक बेटे की सीमा लांघकर एक ऐसे प्यासे मर्द में तब्दील हो चुका था, जिसके लिए उसकी माँ का बदन ही उसकी पूरी कायनात थी।

आर्यन ने अंजलि की दोनों टांगों को मोड़ा और उन्हें उसके कंधों तक सटा दिया। इस पोजीशन ने अंजलि के उस रसीले द्वार को पूरी तरह से खोल दिया, जिससे आर्यन का ७ इंची फौलाद अब जड़ तक समाने के लिए तैयार था।

आर्यन ने अपने हाथों से अंजलि के कूल्हों को ऊपर उठाया और एक ऐसा प्रचंड धक्का मारा कि उसका अंग अंजलि के गर्भाशय के मुहाने से जा टकराया। अंजलि के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो आधे सुख और आधे दर्द में डूबी थी। "ओह्ह्ह्... आर्यन... मार ही डालेगा क्या? आह! बहुत... बहुत गहरा जा रहा है... उफ़्फ़!" अंजलि के स्तन पागलों की तरह ऊपर-नीचे उछल रहे थे और उनके गुलाबी निप्पल उत्तेजना के मारे पत्थर की तरह सख्त हो चुके थे।

आर्यन अब किसी जंगली जानवर की तरह अपनी कमर चला रहा था। हर बार जब वह अपना अंग पूरा बाहर खींचता और फिर पूरी ताकत से अंदर झोंकता, तो एक गीली 'चप-चप' की आवाज़ पूरे सन्नाटे को चीर देती। अंजलि का वह हिस्सा इतना गीला हो चुका था कि आर्यन का अंग उसमें फिसलते हुए आग पैदा कर रहा था। अंजलि ने अपनी आँखें उलट ली थीं और उसकी जीभ बाहर निकल आई थी, वह हवा में सुख के गोते लगा रही थी।

आर्यन ने अब प्रहार करते हुए अंजलि के चेहरे को अपने हाथों में भरा और उसके होंठों को इतनी बेरहमी से चूमना शुरू किया कि अंजलि की सिसकारियां उसके मुँह के अंदर ही दब गईं। वह एक तरफ से अपनी माँ के मुँह का रस पी रहा था और दूसरी तरफ से उसकी गहराई को नाप रहा था। अंजलि के नाखून अब आर्यन की पीठ को चीर रहे थे, लेकिन उस दर्द में जो मज़ा था, वह दुनिया की किसी दौलत में नहीं।

"माँ... देखो... पापा का खिलौना कैसा था और मेरा ये कैसा है!" आर्यन ने हाँफते हुए अंजलि के कान में फुसफुसाया। अंजलि ने मदहोशी में जवाब दिया, "आह्ह... वो... वो तो कुछ भी नहीं था... तू... तू तो मुझे अंदर से फाड़ रहा है मेरे शेर... और तेज़... मुझे पूरी तरह तबाह कर दे!"

अंजलि का पूरा बदन अब पसीने से नहा चुका था। उसकी जांघें थरथरा रही थीं और उसे महसूस हो रहा था कि उसके भीतर का सैलाब अब किसी भी वक्त फटने वाला है। आर्यन की रफ़्तार अब अपनी चरम सीमा पर थी, उसकी कमर एक मशीन की तरह चल रही थी और कमरे में सिर्फ उन दो जिस्मों के टकराने की आवाज़ें गूँज रही थीं।

कमरे की उमस अब अपने उच्चतम स्तर पर थी। आर्यन के हर प्रहार के साथ बिस्तर की चरमराहट और अंजलि की सिसकारियां एक पागल कर देने वाली लय बना रही थीं। आर्यन का ७ इंच का फौलाद अंजलि की गहराई के उन कोनों को छू रहा था जिन्हें आज तक किसी ने नहीं छुआ था।

अंजलि का शरीर अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। उसकी जांघें आर्यन की कमर पर बिजली की तरह फड़क रही थीं। जैसे ही आर्यन ने एक आखिरी, सबसे गहरा और लंबा धक्का मारा, अंजलि की रीढ़ की हड्डी में जैसे कोई धमाका हुआ।

"आह्ह्ह्ह्ह... आर्यन... मैं... मैं मर गई! उफ़्फ़!" अंजलि ने अपनी आँखें उलट लीं और उसकी जांघें पत्थर की तरह सख्त होकर अचानक ढीली पड़ गईं। उसकी गहराई की दीवारों ने आर्यन के अंग को इतनी ज़ोर से भींचा कि आर्यन का दम निकलने को हो गया। अंजलि के भीतर से गर्म रस का एक ऐसा सैलाब छूटा जिसने आर्यन के पूरे अंग को तरबतर कर दिया। वह अगले दस सेकंड तक बस थरथराती रही, उसका शरीर पसीने और सुख की चरम सीमा से निढाल हो चुका था।

अंजलि तो अपनी मंज़िल पा चुकी थी और निढाल होकर बिस्तर पर फैल गई थी, लेकिन आर्यन... आर्यन का तूफ़ान अभी शांत नहीं हुआ था। उसका अंग अभी भी पत्थर की तरह सख्त और दहकता हुआ था। अंजलि के रस ने उसके अंग को और भी ज़्यादा फिसलन भरा बना दिया था, जिससे उसकी रगड़ अब और भी ज़्यादा मादक हो गई थी।

आर्यन की सांसें किसी घायल शेर की तरह चल रही थीं। उसे अभी भी उस अंतिम 'विस्फोट' की ज़रूरत थी जिसे वह अपनी माँ के भीतर ही शांत करना चाहता था। उसने देखा कि अंजलि आँखें मूँदे हाँफ रही है, उसका सीना तेज़ी से ऊपर-नीचे हो रहा है।

आर्यन रुका नहीं। उसने अंजलि की ढीली पड़ी टांगों को फिर से ऊपर उठाया और इस बार अंजलि के निढाल शरीर के ऊपर और भी ज़्यादा हावी होकर अपनी कमर चलानी शुरू की। "माँ... आप तो चली गईं... पर मेरा क्या? मुझे देखो... मैं अभी भी जल रहा हूँ," आर्यन ने अपनी भारी आवाज़ में अंजलि के कान के पास फुसफुसाया।

अंजलि ने मदहोशी में अपनी आँखें खोलीं। उसने देखा कि उसका बेटा अभी भी अपनी पूरी मर्दानगी के साथ उसके ऊपर सवार है। उसने एक कमज़ोर मुस्कान दी और अपने हाथ आर्यन के कूल्हों पर रख दिए ताकि वह उसे और गहराई तक खींच सके। "आह... मेरे शेर... तू तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहा। ले ले... अपनी इस माँ का सारा रस निचोड़ ले... मुझे फिर से पागल कर दे!"

कमरे की हवा अब उन दोनों की मिली-जुली सांसों और जिस्मानी रगड़ की खुशबू से भारी हो चुकी थी। अंजलि अभी अपनी चरम सीमा से गुजरी ही थी कि आर्यन के अगले कदम ने उसे फिर से उत्तेजना के समंदर में फेंक दिया।

आर्यन ने अब अपनी माँ के शरीर को किसी कलाकार की तरह सहेजना शुरू किया। उसने अंजलि की दोनों मखमली टांगों को पकड़ा और उन्हें बिस्तर पर इतना फैला दिया कि अंजलि का वह गुलाबी और रसीला केंद्र पूरी तरह से बेपर्दा हो गया।

अंजलि की टांगें अब बिस्तर के कोनों तक फैली हुई थीं, जिससे उसकी गहराई का द्वार पूरी तरह खुल गया था। आर्यन उसके ठीक बीच में घुटनों के बल बैठ गया। ऊपर से आती मद्धम रोशनी जब अंजलि के पसीने से नहाए हुए बदन पर पड़ी, तो वह किसी संगमरमर की मूर्ति की तरह चमक रही थी। आर्यन ने एक पल के लिए रुककर अपनी माँ के उस वैभव को निहारा, जो अब पूरी तरह उसकी गुलामी स्वीकार कर चुका था।

आर्यन ने अपने हाथ अंजलि की जांघों के नीचे फँसाए और उन्हें ऊपर की ओर खींचा, फिर एक ही बार में अपनी कमर का पूरा बोझ आगे झोंक दिया। वह ७ इंच का फौलादी मूसल, जो पहले से ही अंजलि के रस से तरबतर था, बिना किसी रुकावट के जड़ तक धँस गया।

"आह्ह्ह्ह... आर्यन! तू... तू तो मुझे दो फाड़ कर देगा!" अंजलि के मुँह से एक लंबी और सुरीली सिसकारी निकली। आर्यन ने अब अपनी रफ़्तार को एक शानदार लय दी। वह धीरे-धीरे अपना अंग लगभग पूरा बाहर खींचता, यहाँ तक कि केवल उसकी टोपी अंदर रह जाती, और फिर एक झटके के साथ उसे दोबारा अंजलि की कोख तक उतार देता। हर धक्के के साथ एक गीली और भारी 'थप-थप' की आवाज़ गूँज रही थी, जो किसी मदहोश कर देने वाले संगीत की तरह लग रही थी।

अंजलि का पूरा जिस्म हर प्रहार के साथ बिस्तर पर ऊपर-नीचे उछल रहा था। उसके भारी स्तन पागलों की तरह थरथरा रहे थे। आर्यन ने झुककर अंजलि के एक स्तन को अपने मुँह में भर लिया और उसे दांतों से हल्का सा काटा, जबकि नीचे उसकी कमर का प्रहार जारी था। अंजलि के हाथ अब आर्यन के बालों में फँसे थे और वह अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका दे रही थी ताकि वह उस ७ इंच के लोहे को अपनी रूह के और करीब महसूस कर सके।

"माँ... देखो कैसे आप मेरे लिए पूरी तरह खुल गई हो," आर्यन ने हाँफते हुए कहा। अंजलि ने अपनी गर्दन एक तरफ झुका ली, उसकी आँखों से खुशी के आंसू छलक आए थे। "हाँ मेरे लाल... आज तूने अपनी इस माँ को सच में एक औरत बना दिया। रुकना मत... मुझे और तड़पा... मुझे पूरी तरह भर दे!"

आर्यन का जुनून अब अपनी चरम सीमा पर था, लेकिन वह इस मिलन को केवल शारीरिक नहीं, बल्कि रूहानी बनाना चाहता था। उसने अपनी कमर की गति को एक पल के लिए थामा और अंजलि की बाहों में हाथ डालकर उसे धीरे से बिस्तर से ऊपर उठाया।

अंजलि अब आर्यन की गोद में उसके ऊपर सवार थी, उसके पैर आर्यन की कमर के चारों ओर लिपटे हुए थे। आर्यन का ७ इंची फौलाद अभी भी पूरी तरह अंजलि की गहराई में जड़ तक धँसा हुआ था। इस मुद्रा में दोनों के जिस्म एक-दूसरे से पूरी तरह चिपक गए थे।

आर्यन ने अपने हाथ अंजलि के कूल्हों पर टिका दिए और अपनी आँखों को उसकी आँखों में गड़ा दिया। अंजलि का चेहरा पसीने की बूंदों से चमक रहा था और उसकी आँखों में वह नशा था जो केवल एक तृप्त औरत में होता है। "माँ... मेरी आँखों में देखो," आर्यन ने भारी और कामुक आवाज़ में फुसफुसाया। "अब बताओ, क्या पापा का वो खिलौना इस अहसास के आसपास भी था?"

अंजलि ने अपनी हथेलियाँ आर्यन के मज़बूत कंधों पर टिका दीं और धीरे-धीरे अपनी कमर को ऊपर-नीचे करना शुरू किया। जब वह ऊपर उठती, तो आर्यन का अंग उसे अंदर से खालीपन का अहसास कराता, और जैसे ही वह नीचे बैठती, वह ७ इंच का गरम लोहा उसकी गहराई की हर दीवार को सहलाते हुए अंदर समा जाता। "आह्ह्ह... आर्यन... नहीं... कभी नहीं। जो आग तूने लगाई है, वो कोई और नहीं बुझा सकता," अंजलि ने हाँफते हुए कहा।

दोनों के होंठ एक-दूसरे के इतने करीब थे कि उनकी गर्म सांसें आपस में मिल रही थीं। आर्यन ने अंजलि को अपनी बाहों में और कस लिया, जिससे अंजलि के भारी स्तन आर्यन की छाती पर बुरी तरह रगड़ खाने लगे। अब कोई जल्दबाज़ी नहीं थी, केवल एक गहरा और मादक अहसास था। आर्यन अपनी कमर को नीचे से ऊपर की ओर झटका दे रहा था, और अंजलि हर धक्के के साथ आर्यन के गले लग जाती।

अचानक आर्यन का शरीर तन गया। उसके अंग की नसें पत्थर की तरह सख्त हो गईं। उसे महसूस हुआ कि उसका लावा अब और रुकने वाला नहीं है। उसने अंजलि की गर्दन के पीछे हाथ रखा और उसे एक गहरे चुंबन में खींच लिया। अंजलि ने भी महसूस कर लिया था कि उसके बेटे का 'तूफ़ान' अब आने वाला है। उसने अपनी पकड़ और मज़बूत कर ली।

"आर्यन... दे दे मुझे... अपना सारा प्यार मेरे अंदर उड़ेल दे... आह्ह्ह!" अंजलि ने उसके कानों में चीखते हुए कहा।

आर्यन ने एक आखिरी, सबसे गहरा और लंबा प्रहार किया और अंजलि के भीतर ही रुक गया। उसके पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ी और उसका ७ इंची अंग अंजलि की गहराई में गरम लावे की पिचकारियाँ छोड़ने लगा। अंजलि ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उस गरम धार को अपने भीतर महसूस करते हुए आर्यन के कंधे पर दांत गड़ा दिए।

चरम सुख के उस तूफ़ान के बाद, कमरे का माहौल अब पूरी तरह शांत हो चुका था, लेकिन वह सन्नाटा बोझिल नहीं बल्कि एक सुकून भरी गर्माहट से भरा था। अंजलि अभी भी आर्यन की गोद में वैसी ही सिमटी हुई थी, उसका सिर आर्यन के मज़बूत कंधे पर टिका था और उसकी सांसें अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही थीं।

आर्यन जानता था कि एक औरत के लिए जिस्मानी मिलन सिर्फ शुरुआत होती है, असली संतुष्टि तो उस प्यार और परवाह में है जो मिलन के बाद मिलती है। उसने अंजलि को खुद से अलग नहीं किया, बल्कि उसे और भी कोमलता से अपनी बाहों में भर लिया।

आर्यन ने अपने पसीने से भीगे हुए हाथ को अंजलि की नग्न पीठ पर रखा और धीरे-धीरे अपनी उंगलियों को उसकी रीढ़ की हड्डी पर फेरने लगा। अंजलि के शरीर में एक मीठी सी सिहरन दौड़ गई। उसने अपनी आँखें मूँद लीं और आर्यन की गर्दन में अपना चेहरा और गहराई से छुपा लिया।

"माँ..." आर्यन ने बहुत ही धीमी और मखमली आवाज़ में उसके कान के पास फुसफुसाया। "आप ठीक तो हैं न?" अंजलि ने बिना कुछ बोले बस अपना सिर हिलाया। उसने आर्यन के सीने पर एक छोटा सा चुंबन अंकित किया। उसकी आँखों के कोनों में हल्की सी नमी थी—यह दुःख के आंसू नहीं थे, बल्कि उस सम्मान और जुड़ाव के थे जो उसे आज अपने ही बेटे से मिला था।

अंजलि ने एक लंबी और गहरी सांस ली। "आर्यन... आज तूने मुझे वो अहसास कराया है जो मैं सालों पहले भूल चुकी थी। सिर्फ ये शरीर नहीं... तूने मेरी रूह को भी शांत कर दिया है।" उसने आर्यन के चेहरे को अपने दोनों हाथों में भरा और उसकी पेशानी (माथे) पर एक ममता और प्यार भरा लंबा चुंबन लिया।

आर्यन ने अंजलि के बिखरे हुए बालों को उसके चेहरे से हटाया और उसकी आँखों में झाँका। वहाँ अब कोई हवस नहीं थी, सिर्फ एक गहरा लगाव था। उसने अंजलि के हाथों को थामकर चूमा। उस पल में दोनों को अहसास हुआ कि पापा की वो डिजिटल बातें और वो खिलौने इस असली 'आलिंगन' के सामने कितने खोखले थे।

रात ढल रही थी। आर्यन ने अंजलि को धीरे से बिस्तर पर लिटाया और खुद उसके बगल में लेट गया। उसने चादर को खींचकर दोनों के जिस्मों को ढँक दिया। अंजलि ने आर्यन का हाथ पकड़कर अपने सीने पर रख लिया, जहाँ उसका दिल अभी भी लयबद्ध तरीके से धड़क रहा था।

"अब सो जा मेरे शेर," अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा। "आज की रात हमारा वो राज़ है, जिसे शायद कायनात भी हमसे नहीं छीन पाएगी।"
 
नेक्स्ट अपडेट के लिए रेडी हो 😈
 
रात की उस तूफानी और रूहानी मुलाकात के बाद जब सुबह की पहली किरण अंजलि के कमरे में दाखिल हुई, तो फिजाओं में एक अलग ही ताजगी थी। आज अंजलि के चेहरे पर वह थकान नहीं थी जो अक्सर घर के कामों से होती है, बल्कि एक ऐसी चमक थी जो केवल पूर्ण रूप से तृप्त औरत के चेहरे पर नजर आती है।

अंजलि आज वक्त से पहले उठ गई थी। उसने नहा-धोकर अपनी अलमारी से एक गहरे नीले रंग की चिकनकारी कुर्ती निकाली। कुर्ती उसके शरीर के उभारों पर बिल्कुल फिट बैठ रही थी, और उसके गीले बाल उसकी पीठ पर बिखरे हुए थे। रसोई से ताजे पराठों और अदरक वाली चाय की महक पूरे घर में फैल रही थी।

आर्यन जब डाइनिंग टेबल पर पहुँचा, तो उसकी नजरें अपनी माँ पर टिक गईं। कल रात की वह 'बेपर्दा' अंजलि और आज सुबह की यह 'सलीकेदार' अंजलि—दोनों ही रूपों ने आर्यन के दिल की धड़कनें बढ़ा दीं।

अंजलि ने चाय का कप टेबल पर रखा और आर्यन की आँखों में देखा। उन आँखों में रात का सारा सच तैर रहा था। आर्यन ने शरारत से मुस्कुराते हुए कहा, "आज तो आप बहुत हसीन लग रही हैं... ये कुर्ती आप पर बहुत जंच रही है।"

अंजलि का चेहरा हल्का गुलाबी हो गया। उसने पराठा आर्यन की थाली में रखते हुए झुककर उसके कान के पास फुसफुसाया, "तारीफ कुर्ती की कर रहे हो... या उस रात की जो इस कुर्ती के नीचे दफन है?"

आर्यन ने टेबल के नीचे से धीरे से अंजलि के पैर को अपने पैर से छुआ। अंजलि सिहर गई, लेकिन उसने अपना पैर हटाया नहीं। आर्यन ने चाय का घूँट लेते हुए कहा, "रात तो लाजवाब थी ही, पर सुबह का ये सुकून और भी प्यारा है। मुझे नहीं पता था कि नाश्ता इतना लजीज होगा।"

अंजलि ने आर्यन के सामने बैठते हुए अपनी उंगलियों से अपने बालों को कान के पीछे किया। "सब कुछ लजीज ही होगा आर्यन... जब तक तू अपनी इस 'माँ' का ख्याल ऐसे ही रखता रहेगा। आज पापा का फोन आएगा, क्या कहोगे उन्हें?"

आर्यन ने अंजलि का हाथ पकड़कर चूमा और बड़े ही आत्मविश्वास से बोला, "कह दूँगा कि घर की और आपकी फिक्र न करें... यहाँ सब कुछ मेरे 'कंट्रोल' में है।"

दोनों एक-दूसरे को देख मुस्कुरा दिए। नाश्ते की मेज पर अब केवल खाना नहीं, बल्कि एक ऐसा रिश्ता परोसा जा चुका था जिसकी मिठास ताउम्र रहने वाली थी।

दिन भर की उस मीठी बेचैनी के बाद शाम ढली और रात का सन्नाटा एक बार फिर गहराने लगा। डिनर खत्म हो चुका था। घर के बाकी शोर थम चुके थे, और अब दोनों अपने उसी सुरक्षित ठिकाने—बेडरूम में आमने-सामने थे।

आज का माहौल कल रात से थोड़ा अलग था। आज हवस से ज़्यादा एक अपनापन और सुकून भरा खुलापन था। अंजलि बेड पर टेक लगाकर बैठी थी, उसने ऊपर सिर्फ एक काले रंग की लेस वाली ब्रा पहनी थी और नीचे एक ढीला रेशमी पायजामा। उसके खुले बदन की चमक और उभरे हुए स्तनों की गोलाई मध्यम रोशनी में और भी मादक लग रही थी। आर्यन भी सिर्फ एक हाफ नेकर में था, उसका गठा हुआ शरीर अंजलि की नज़रों को अपनी ओर खींच रहा था।

आर्यन धीरे से अंजलि के पास बेड पर बैठा और उसका हाथ अपने हाथ में लिया। कमरे में हल्की सी ठंडक थी, लेकिन उन दोनों के बीच की गर्माहट अभी भी बरकरार थी।

आर्यन ने अंजलि की आँखों में गहराई से देखते हुए पूछा, "माँ... आज दिन भर मेरे दिमाग में एक बात घूम रही थी। क्या... क्या हर औरत वैसा ही महसूस करती है जैसा आप मेरे साथ करती हो? क्या हर औरत के अंदर वही प्यास और वही राज़ दबे होते हैं जो कल रात बाहर आए?"

अंजलि ने एक ठंडी सांस ली और आर्यन के हाथ को अपने सीने (ब्रा के ऊपर) से सटा लिया, जहाँ उसका दिल तेज़ी से धड़क रहा था। "सच कहूँ आर्यन... तो हाँ। हर औरत के अंदर एक समंदर होता है, जिसे अक्सर दुनिया के सामने शांत रहना पड़ता है। शादी, बच्चे और घर की ज़िम्मेदारियों के नीचे हम अपनी वो 'औरत' मार देते हैं जिसे सिर्फ एक मर्द का सच्चा और गहरा प्यार चाहिए होता है।"

अंजलि ने आगे कहा, "ज़्यादातर औरतें पूरी ज़िंदगी गुज़ार देती हैं लेकिन उन्हें वो 'चरम सुख' कभी नसीब नहीं होता जो तूने मुझे कल रात दिया। वे बस एक मशीन की तरह बिस्तर पर सोती हैं। लेकिन जब किसी औरत को तुम्हारे जैसा... उफ़्फ़... तुम्हारे जैसा अहसास मिलता है, तो वह सब कुछ भूलकर बस उस लम्हे को जीना चाहती है।"

बातें करते-करते अंजलि ने आर्यन का हाथ धीरे से अपनी ब्रा की पट्टी के पास सरकाया। "अहसास तो हर कोई करना चाहता है आर्यन... पर किसी के पास तेरे जैसा ७ इंच का 'जवाब' नहीं होता।"

अंजलि की इस बेबाकी ने आर्यन के शरीर में फिर से आग लगा दी। उसने अंजलि को कमर से पकड़कर अपनी ओर खींचा। अंजलि की नग्न त्वचा जब आर्यन के सीने से टकराई, तो दोनों की सांसें एक बार फिर उखड़ने लगीं।

आर्यन की आँखें अंजलि की बात सुनकर फटी की फटी रह गईं। उसे लगा था कि जो कल रात हुआ, वो सिर्फ उसकी माँ की अपनी दबी हुई इच्छाएं थीं, लेकिन अंजलि ने जिस बेबाकी से पूरी दुनिया की औरतों का राज़ खोला, उसने आर्यन को हैरान कर दिया।

आर्यन ने अंजलि के हाथ को थोड़ा और ज़ोर से दबाया और चकित होकर पूछा, "क्या! मतलब... आप सच कह रही हो माँ? मुझे लगा था कि शादियां तो खुशहाल होती हैं। क्या बाकी औरतें भी अंदर ही अंदर ऐसे ही तड़पती हैं? और... और ये 'साइज़' वाली बात... क्या ये सच में इतना मायने रखती है?"

अंजलि ने एक फीकी मुस्कान दी और आर्यन के गाल को सहलाते हुए बोली, "तू अभी बच्चा है आर्यन... जिस्मानी दुनिया के कायदे अलग होते हैं। शादियाँ अक्सर समझौतों पर टिकी होती हैं। औरतें कभी बोलती नहीं, पर उन्हें भी वो गहराई और वो रफ़्तार चाहिए होती है जो उन्हें बिस्तर पर एक 'जानवर' की तरह महसूस कराए। ज़्यादातर मर्द सिर्फ अपना काम खत्म करके सो जाते हैं, उन्हें अंदाज़ा भी नहीं होता कि उनकी पत्नी अधूरी रह गई है।"

अंजलि ने आर्यन के नेकर के ऊपर उभरे हुए तनाव को अपनी उंगलियों से सहलाया और फुसफुसायी, "और जहाँ तक बात तेरे इस 'फौलाद' की है... तो हाँ, साइज़ और सख्ती मायने रखती है। कल रात जब तूने मुझे पहली बार भरा था, तो मुझे अहसास हुआ कि आज तक जो मैं पापा के साथ महसूस कर रही थी, वो तो सिर्फ एक ज़रूरत थी। लेकिन तेरे साथ जो हुआ, वो एक पागलपन था।"

आर्यन को अब समझ आ रहा था कि कल रात क्यों अंजलि उस ५ इंच के खिलौने को देख कर भी ठंडी थी, और क्यों उसके ७ इंच के असली अंग ने उसे चीखने पर मजबूर कर दिया। "मतलब... मैं दुनिया के उन कुछ नसीब वाले मर्दों में से हूँ जो एक औरत को पूरी तरह संतुष्ट कर सकते हैं?" आर्यन ने गर्व और हवस के मिले-जुले लहजे में पूछा।

अंजलि ने अपनी ब्रा की स्ट्रैप को कंधे से नीचे गिराया और अपनी नशीली आँखों से उसे देखते हुए बोली, "तू सिर्फ नसीब वाला नहीं है आर्यन... तू मेरा वो 'मसीहा' है जिसने मुझे दोबारा ज़िंदा किया है। और अब जब तू ये सब जान गया है... तो क्या आज रात भी अपनी इस अधूरी माँ को ऐसे ही बातों में उलझाए रखेगा?"

अंजलि ने आर्यन का हाथ अपने हाथ में लिया और उसकी हथेलियों को सहलाते हुए बिस्तर पर थोड़ा और करीब खिसक आई। कमरे की मध्यम रोशनी में उसकी आँखों में एक अजीब सी गहराई और हल्का सा गीलापन था। आज वह सिर्फ एक प्यासी औरत नहीं, बल्कि उन करोड़ों भारतीय औरतों की आवाज़ बन रही थी जो अपनी इच्छाओं को साड़ी के पल्लू में बांधकर उम्र गुज़ार देती हैं।

अंजलि ने एक लंबी और ठंडी सांस ली और बहुत ही भावुक लहजे में कहना शुरू किया:

"देख आर्यन, एक भारतीय औरत के लिए उसका शरीर उसका अपना नहीं होता। बचपन में वो पिता की 'इज़्ज़त' होती है, शादी के बाद पति की 'अमानत', और माँ बनने के बाद बच्चों का 'आदर्श'। इस इज़्ज़त और आदर्श के बोझ के नीचे उसकी अपनी पसंद, उसकी अपनी उत्तेजना और उसकी कामुकता कहीं दम तोड़ देती है।"

अंजलि की आवाज़ थोड़ी भारी हो गई। "हज़ारों औरतें ऐसी हैं जो रात को बिस्तर पर लेटती तो हैं, पर सिर्फ इसलिए ताकि पति की ज़रूरत पूरी हो सके। उन्हें 'भोग' लिया जाता है, पर उन्हें 'महसूस' नहीं किया जाता। वे कभी खुलकर नहीं कह पातीं कि उन्हें भी ज़ोर से भींचना पसंद है, उन्हें भी वो गहरा अहसास चाहिए, या उन्हें भी वो गंदी बातें सुननी हैं जो उनके खून में आग लगा दें। क्योंकि अगर वो बोलें, तो उन्हें 'चरित्रहीन' समझ लिया जाता है।"

"हम भारतीय औरतें अभिनय करने में माहिर हो जाती हैं आर्यन। हम Orgasm का नाटक करती हैं ताकि पति का अहंकार न टूटे। हम अपनी प्यास को पूजा-पाठ, व्रत और घर के कामों में डुबो देती हैं। कल रात जब तूने मुझे छुआ, तो तूने सिर्फ मेरे जिस्म को नहीं, बल्कि उस बरसों की कैद औरत को आज़ाद किया था जो चीखना चाहती थी, जो बिखरना चाहती थी।"

अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँका। "हमें सिर्फ एक अंग नहीं चाहिए होता आर्यन, हमें वो समर्पण चाहिए होता है जो तूने दिखाया। हमें वो मर्द चाहिए होता है जो हमारी आँखों में देखकर हमें ये अहसास कराए कि हम सिर्फ एक 'माँ' या 'बहू' नहीं, बल्कि एक 'मादक औरत' भी हैं।"

अंजलि की आँखों से एक आँसू टपक कर आर्यन के हाथ पर गिरा। वह आज पूरी तरह से बेपर्दा थी—जिस्म से भी और रूह से भी। उसने आर्यन का चेहरा थाम लिया और कांपते होंठों से कहा, "तूने कल रात जो किया, वो मेरे लिए सिर्फ सेक्स नहीं था... वो मेरी बरसों की घुटन का इलाज था।"

अंजलि की आँखों में अब एक ऐसी सच्चाई थी जो समाज के कड़वे सच को आईना दिखा रही थी। आर्यन सन्न होकर अपनी माँ की बातें सुन रहा था। अंजलि ने अपनी ब्रा की पट्टी को हल्का सा सहलाया और अपनी बात को एक और गहरे मोड़ पर ले गई।

"आर्यन..." अंजलि की आवाज़ अब और भी धीमी और रहस्यमयी हो गई थी। "लोग कहते हैं कि औरत बेवफा होती है, पर कोई ये नहीं पूछता कि उसे उस दहलीज तक पहुँचाया किसने? जब एक औरत को घर की चारदीवारी में वो सुकून, वो तड़प और वो 'मर्दानगी' नहीं मिलती जिसकी उसकी रूह प्यासी होती है, तो उसके पास दो ही रास्ते बचते हैं—या तो वो अंदर ही अंदर घुटकर मर जाए, या फिर उस प्यास को बुझाने के लिए बाहर कदम बढ़ाए।"

अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँकते हुए कहा, "आज जो तू देखता है कि शादीशुदा औरतें दूसरे मर्दों से रिश्ते बनाती हैं, वो सिर्फ हवस नहीं होती। वो तलाश होती है उस एक लम्हे की, जहाँ कोई उन्हें सिर्फ एक 'घरेलू मशीन' न समझे। वे किसी ऐसे को ढूँढती हैं जो उनके कान में गंदी बातें फुसफुसाए, जो उनकी जांघों को इतनी ज़ोर से भींचे कि उन्हें अपने ज़िंदा होने का अहसास हो। वे उस ५ इंच की खानापूर्ति से ऊबकर उस असली ७ इंच के प्रहार की तलाश में बाहर निकलती हैं।"

"कल रात तक मैं भी उसी घुटन में थी। मैं भी शायद कभी भटक जाती, अगर तूने मुझे उस तरह न संभाला होता। जो सुख, जो अपनापन और जो आग मुझे तेरे स्पर्श में मिली, वो मुझे ये समझाने के लिए काफी थी कि औरत को भटकने की ज़रूरत तब पड़ती है जब उसका अपना मर्द उसे वो 'आज़ादी' नहीं दे पाता जो तूने मुझे कल रात बिस्तर पर दी।"

अंजलि ने आर्यन के हाथ को अपने पेट के निचले हिस्से की ओर सरकाया, जहाँ उसका रेशमी पायजामा उसकी त्वचा को छू रहा था। "जब एक गैर मर्द किसी औरत को वो सुख देता है जो उसे पति से नहीं मिला, तो वो औरत उसके लिए अपनी जान तक देने को तैयार हो जाती है। क्योंकि वो मर्द उसके जिस्म को नहीं, उसकी 'ख्वाहिशों' को फतेह करता है।"

अंजलि ने बात खत्म की और आर्यन के करीब सरक आई। उसकी सांसों की गर्मी अब आर्यन के चेहरे पर महसूस हो रही थी। उसने फुसफुसाते हुए पूछा, "बता आर्यन, क्या तू मुझे अब भी वैसी ही आज़ादी देगा? क्या तू मेरी उन सारी दबी हुई ख्वाहिशों को पूरा करेगा जिसके लिए औरतें अक्सर दुनिया से लड़ जाती हैं?"

आर्यन के अंदर अब जज्बातों और हवस का एक ऐसा तूफान उठा, जिसने उसे सब कुछ भुला दिया। उसने अंजलि की कमर को अपने मज़बूत हाथों में भींच लिया।

आर्यन अपनी माँ की इन गहरी और कड़वी बातों को सुनकर एक पल के लिए सुन्न रह गया। उसे आज अहसास हुआ कि जिस दुनिया को वह देख रहा था, उसकी परतों के नीचे कितनी उलझनें दबी हैं। उसने अंजलि के हाथ को चूमते हुए बहुत ही संजीदगी से जवाब दिया।

"माँ... आपकी बातें सुनकर मुझे समझ आ रहा है कि मैंने कल सिर्फ आपको सुख नहीं दिया, बल्कि आपकी रूह की बेड़ियाँ तोड़ी हैं। मैं वादा करता हूँ, अब आपको कभी वो घुटन महसूस नहीं होने दूँगा। मेरा ये ७ इंच का फौलाद और मेरा ये प्यार सिर्फ आपके लिए है।"

लेकिन फिर आर्यन के चेहरे पर एक जिज्ञासा उभरी। उसने अपनी माँ की आँखों में झाँकते हुए एक ऐसा सवाल किया जिसने माहौल को और भी गंभीर बना दिया। "लेकिन माँ... क्या इसका उल्टा भी होता है? क्या ऐसा भी होता है कि एक औरत सब कुछ मिलने के बाद भी भटक जाए? या क्या मर्द भी अपनी पत्नियों से वैसी ही घुटन महसूस करते हैं जैसी आपने बताई?"

अंजलि ने आर्यन की गर्दन के पीछे हाथ रखा और उसे सहलाते हुए बोली, "हाँ मेरे लाल... दुनिया गोल है। जैसे एक औरत प्यासी रह सकती है, वैसे ही कई बार मर्द भी अपनी पत्नियों से वो 'उत्साह' और वो 'जुनून' नहीं पाते जो उन्हें चाहिए होता है। कई औरतें बिस्तर पर पत्थर की तरह लेटी रहती हैं, जिससे मर्द ऊबकर बाहर की चमक-धमक की ओर खिंचा चला जाता है।"

"उल्टा भी सच है आर्यन। कभी-कभी एक औरत को घर में सब कुछ मिलता है—पैसा, प्यार और बिस्तर का सुख भी—लेकिन फिर भी उसके अंदर की 'भटकन' शांत नहीं होती। कुछ औरतों को 'खतरे' में मज़ा आता है, कुछ को नए-नए जिस्मों के स्वाद में। इंसान की फितरत बहुत पेचीदा है।"

अंजलि ने अपनी आवाज़ को थोड़ा और कामुक बनाया और आर्यन के सीने पर अपनी उंगलियां फिराते हुए कहा, "पर हमारे केस में उल्टा कुछ नहीं है। यहाँ सिर्फ एक 'कमी' थी जिसे तूने पूरा कर दिया। अब न मुझे बाहर जाने की ज़रूरत है, और न तुझे... क्योंकि जो आग हम दोनों के बीच है, वो कहीं और मिल ही नहीं सकती।"

अंजलि ने आर्यन का हाथ अपने गाल से लगाकर एक ठंडी सांस ली। कमरे की मद्धम पीली रोशनी अंजलि के कंधों और उसकी काली ब्रा से झांकते उभारों पर थिरक रही थी। आज वह आर्यन को औरत के मन के उस अंधेरे कोने में ले जा रही थी, जहाँ जाने की हिम्मत कम ही लोग करते हैं।

"आर्यन..." अंजलि की आवाज़ अब और भी गहरी हो गई थी, "तूने पूछा कि सब कुछ मिलने के बाद भी औरत बाहर क्यों जाती है? यह सुनकर तुझे अजीब लगेगा, लेकिन औरत का मन एक भूलभुलैया है। कई बार उसे पति से प्यार भी मिलता है और बिस्तर पर सुख भी, फिर भी वह भटक जाती है क्योंकि..."

"एक ही इंसान के साथ सालों साल रहते-रहते जिस्म एक-दूसरे के लिए 'साधारण' हो जाते हैं। वही स्पर्श, वही तरीका... सब कुछ पहले से पता होता है। तब औरत के अंदर की वो 'मादा' किसी अनजाने हाथ के स्पर्श के लिए तड़पने लगती है। वह उस रोमांच को जीना चाहती है जहाँ पकड़े जाने का डर हो, जहाँ कुछ नया और कुछ 'वर्जित' हो। बिल्कुल वैसे ही... जैसे हमारा ये रिश्ता।"

"शादी के बाद औरत सिर्फ किसी की पत्नी या माँ बनकर रह जाती है। बाहर का मर्द जब उसे देखता है, उसे 'घूरता' है, या उसकी तारीफ करता है, तो उसे अहसास होता है कि वह अभी भी जवान और आकर्षक है। वह बाहर सिर्फ 'जिस्म' के लिए नहीं, बल्कि उस 'नशे' के लिए जाती है जो उसे फिर से सोलह साल की लड़की जैसा महसूस कराए।"

"कभी-कभी औरत को लगता है कि उसने अपनी पूरी जवानी एक ही इंसान को दे दी और बदले में उसे वो 'दीवानगी' नहीं मिली। तब वह अपनी उस अधूरी Fantasy को किसी और के साथ पूरा करना चाहती है।"

आर्यन बड़े ध्यान से अपनी माँ की एक-एक बात सुन रहा था। उसने अंजलि की कमर में हाथ डालकर उसे और करीब खींच लिया और बहुत ही मैच्योर अंदाज़ में बोला:

"माँ, मतलब आप यह कह रही हैं कि औरत को सिर्फ 'पेट' और 'बिस्तर' भरना काफी नहीं है, उसे हर पल एक नया अहसास चाहिए? उसे वो तड़प चाहिए जो उसे ये महसूस कराए कि वो खास है। अब मुझे समझ आया कि कल जब आप उस खिलौने के साथ थीं, तो आप सिर्फ मज़े के लिए नहीं, बल्कि उस 'बदलाव' के लिए तरस रही थीं जो मैंने आपको दिया।"

आर्यन ने अंजलि की आँखों में आँखें डालकर कहा, "लेकिन माँ, अब जब मैं आपके साथ हूँ, तो क्या आपको कभी उस 'नयापन' की कमी खलेगी? मैं वादा करता हूँ कि मैं आपको हर रात एक नई औरत की तरह महसूस कराऊंगा।"

अंजलि ने आर्यन की इस बात पर अपनी गर्दन पीछे झुका दी और हल्की सी हंसी बिखेरी। उसकी ब्रा की लैस के ऊपर से उसके स्तन तेज़ी से धड़क रहे थे। "यही तो बात है आर्यन... तूने मुझे वो 'रिस्क' और वो 'नयापन' घर के अंदर ही दे दिया है। एक माँ और बेटे का ये मिलन दुनिया का सबसे बड़ा 'थ्रिल' है। अब मुझे कहीं और जाने की ज़रूरत ही क्या है?"

अंजलि के शब्द अब केवल बातें नहीं रह गए थे, वे आर्यन के लिए एक ऐसी दुनिया के दरवाजे खोल रहे थे जिसकी उसने कभी कल्पना भी नहीं की थी। कमरे की खामोशी में अंजलि की आवाज़ किसी ठंडी सिहरन की तरह तैर रही थी।

अंजलि ने आर्यन के बालों में उंगलियां फेरते हुए बड़े ही शांत लेकिन गंभीर लहजे में कहा, "आर्यन, तू अभी जिस दुनिया को देख रहा है, वो सिर्फ एक मुखौटा है। समाज के बंद कमरों के पीछे क्या-क्या होता है, यह जानकर शायद तू कांप जाएगा। आजकल लोग केवल छिपकर रिश्ता बनाने तक ही सीमित नहीं हैं... अब तो 'कपल स्वैपिंग' (Couple Swap) जैसा चलन भी शहरों में पैर पसार रहा है।"

अंजलि ने बताया, "इसमें शादीशुदा जोड़े अपनी मर्ज़ी से एक-दूसरे के पार्टनर बदलते हैं। वे इसे एक 'गेम' या 'थ्रिल' की तरह देखते हैं। उनकी मानसिकता यह होती है कि जब एक ही इंसान के साथ बोरियत होने लगे, तो क्यों न अपनी पत्नी या पति की मौजूदगी में ही किसी और के जिस्म का स्वाद चखा जाए। इसमें जलन से ज़्यादा एक अजीब तरह की 'मदहोशी' और 'नयापन' की भूख होती है।"

आर्यन की आँखें फटी की फटी रह गईं। "क्या! मतलब... पति खुद अपनी पत्नी को किसी और के साथ देखता है? यह कैसे मुमकिन है माँ? क्या उन्हें बुरा नहीं लगता?"

अंजलि ने मुस्कुराते हुए कहा, "यही तो इंसान की दिमागी गंदगी और Fantasy है, आर्यन। कुछ मर्दों को अपनी पत्नी को किसी और के साथ देख कर और भी ज़्यादा उत्तेजना होती है। वे इसे 'आधुनिक' होने का नाम देते हैं, पर असल में यह उस चरम भूख का हिस्सा है जिसे साधारण तरीके से नहीं मिटाया जा सकता।"

आर्यन अब पूरी तरह से उत्तेजित भी था और हैरान भी। उसने अंजलि के हाथ को सहलाते हुए पूछा, "माँ, तो क्या समाज में जो हम देखते हैं—वो सब झूठ है? और लोग उत्तेजना के लिए और क्या-क्या करते हैं? मैंने इंटरनेट पर बहुत कुछ अजीब देखा है, पर आपकी बातों से लग रहा है कि हकीकत उससे भी कहीं आगे है।"

अंजलि ने आर्यन के कान के पास झुककर फुसफुसाया, "समाज बाहर से बहुत शरीफ बनता है। वही लोग जो दिन में नैतिकता की बातें करते हैं, रात को 'एस्कॉर्ट सर्विस', 'ग्रुप सेक्स' और 'स्ट्रिप क्लब' जैसी जगहों पर अपनी हवस मिटाते हैं। आज के दौर में उत्तेजना सिर्फ बेड तक नहीं रही, अब यह 'पावर' और 'एक्सपेरिमेंट' बन गई है।"

"अब तो लोग अनजानों के साथ वीडियो कॉल पर वो सब करते हैं जो तूने कल रात पापा के साथ देखा। लोग अपनी सबसे निजी चीज़ों को कैमरे के सामने लाना चाहते हैं क्योंकि उन्हें 'दिखाने' में मज़ा आने लगा है।"

इन बातों ने आर्यन के दिमाग की नसों को हिलाकर रख दिया था। उसे अहसास हुआ कि उसकी माँ कितनी गहरी समझ रखती है। उसने अंजलि की कमर को ज़ोर से भींचा और उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल्स को अपनी उंगलियों से मसलना शुरू कर दिया।

"माँ... आपकी बातें सुनकर तो मुझे लग रहा है कि मैं अभी बहुत पीछे हूँ। समाज इतना आगे निकल गया है... पर मुझे उन सब से क्या लेना-देना? मेरे लिए तो मेरा सबसे बड़ा 'थ्रिल' और मेरी सबसे बड़ी 'फंतासी' आप ही हो।"

अंजलि की सांसें अब तेज़ होने लगी थीं। उसने अपनी गर्दन पीछे की ओर झुका दी और अपनी ब्रा की हुक की ओर इशारा करते हुए कहा, "तो फिर देर किस बात की? जब तू जान गया है कि दुनिया कितनी बेबाक है... तो तू अपनी इस 'बेबाक माँ' के साथ आज क्या नया एक्सपेरिमेंट करेगा?"

आर्यन की मासूमियत और उसकी हैरानी देखकर अंजलि के चेहरे पर एक दिलकश और शरारती मुस्कान फैल गई। उसे अपने बेटे का यह भोलापन, जो उसकी मर्दानगी के साथ घुला-मिला था, बहुत प्यारा लगा।

आर्यन ने थोड़ा झिझकते हुए अपना सिर खुजलाया और धीमी आवाज़ में बोला, "माँ, आप जो बता रही हैं वो सब तो मेरे सिर के ऊपर से जा रहा है। स्वैपिंग, थ्रिल, एक्सपेरिमेंट... मुझे तो लगता है इन सब के बारे में मुझे पहले थोड़ा पढ़ना पड़ेगा या कहीं से सीखना पड़ेगा। मैं तो बस आपको प्यार करना जानता हूँ।"

आर्यन की बात सुनकर अंजलि खिलखिलाकर हंस पड़ी। उसकी हंसी में एक अजीब सा नशा था जिससे उसकी काली ब्रा के अंदर कैद उसके स्तन तेज़ी से ऊपर-नीचे होने लगे। "मेरे भोले बच्चे..." अंजलि ने हंसते हुए आर्यन के गाल को थपथपाया, "किताबें और इंटरनेट सिर्फ जानकारी देते हैं, असली 'हुनर' तो जज्बातों और मौके से आता है। और वैसे भी, जब तेरी ये 'अनुभवी माँ' तेरे साथ है, तो तुझे कहीं और जाने की क्या ज़रूरत?"

अंजलि ने आज तय कर लिया था कि वह आर्यन की झिझक को हमेशा के लिए खत्म कर देगी। उसने अपनी नशीली आँखें आर्यन की आँखों में गड़ाईं और बिस्तर पर घुटनों के बल खड़ी हो गई। "कल रात तूने अपनी ताकत दिखाई थी... आज मैं तुझे दिखाती हूँ कि एक औरत जब कमान संभालती है, तो वो अपने मर्द को किस हद तक पागल कर सकती है।"

अंजलि ने अपने हाथ पीछे किए और एक ही झटके में अपनी ब्रा का हुक खोल दिया। बिना किसी शर्म के उसने उस काली लेस वाली ब्रा को उतारकर फर्श पर फेंक दिया। उसके गोरे और भारी स्तन आज़ाद होकर आर्यन की आँखों के ठीक सामने थिरकने लगे। मध्यम रोशनी में उनके गुलाबी निप्पल पत्थर की तरह सख्त और उभरे हुए थे।

इससे पहले कि आर्यन कुछ समझ पाता, अंजलि ने उसे धीरे से पीछे की ओर धकेला जिससे आर्यन बेड पर सीधा लेट गया। अंजलि बिल्ली की तरह रेंगती हुई उसके ऊपर आई और उसके नेकर के ऊपर से ही उसकी मज़बूत मर्दानगी को अपने कोमल हाथों से कसकर पकड़ लिया।

"आज तू सिर्फ देखेगा और महसूस करेगा आर्यन... आज की शुरुआत मैं अपनी शर्तों पर करूँगी," अंजलि ने उसके होंठों के बेहद करीब जाकर फुसफुसाया। उसकी गर्म सांसें और उसके खुले स्तनों का स्पर्श आर्यन के सीने पर बिजली की तरह दौड़ने लगा।

आर्यन जो अब तक सिर्फ Giver था, आज पहली बार Receiver बन रहा था। अंजलि ने आज अपनी ममता को एक तरफ रख दिया था और वह पूरी तरह से एक कामुक प्रेमिका के रूप में अपने बेटे के शरीर की पूजा कर रही थी।

आर्यन बिस्तर पर सीधा लेटा हुआ था, उसकी सांसें तेज़ थीं और सीना उत्तेजना के मारे ऊपर-नीचे हो रहा था। अंजलि उसके ऊपर किसी नागिन की तरह मंडरा रही थी।

अंजलि ने अपने दोनों हाथों की उंगलियों को आर्यन के गठे हुए सीने पर फिराना शुरू किया। उसके कोमल और ठंडे हाथ जब आर्यन के गर्म जिस्म से टकराए, तो आर्यन के पूरे शरीर में एक करंट दौड़ गया। अंजलि ने अपनी उंगलियों से आर्यन के दोनों छोटे और सख्त निप्पल्स को धीरे-धीरे सहलाना और गोल-गोल घुमाना शुरू किया। आर्यन ने अपनी आँखें बंद कर लीं और उसके मुँह से एक दबी हुई आह निकली, "ओह्ह... माँ... यह क्या कर रही हो?"

अंजलि रुकी नहीं। वह और नीचे झुकी, जिससे उसके भारी और नग्न स्तन आर्यन के पेट पर रगड़ खाने लगे। उसने अपनी गर्म ज़ुबान से आर्यन के दाएं निप्पल को धीरे से छुआ और उसे चारों तरफ से चाटना शुरू किया। आर्यन का पूरा शरीर बिस्तर पर धनुष की तरह तन गया। उसे कभी अंदाज़ा नहीं था कि एक मर्द के सीने पर भी इतना Sensation हो सकता है।

अचानक अंजलि ने अपनी शरारत बढ़ाई। उसने आर्यन के निप्पल को अपने होठों के बीच भरा और अपने सफेद मोतियों जैसे दांतों से उसे हल्का सा काट लिया। वह दर्द नहीं था, बल्कि एक ऐसा बिजली का झटका था जिसने सीधे आर्यन की मर्दानगी पर असर किया। आर्यन के हाथ खुद-ब-खुद बिस्तर की चादर को मुठ्ठियों में भींचने लगे।

अंजलि ने अपना चेहरा ऊपर उठाया, उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी। "क्या हुआ मेरे शेर? कल तो तू बहुत बहादुर बन रहा था... आज सिर्फ एक छोटे से काट से कांप गया?" उसने फिर से दूसरे निप्पल पर वही प्रक्रिया दोहराई, उसे चूसते हुए एक सिसकारी भरी आवाज़ निकाली जो कमरे के सन्नाटे को और भी कामुक बना रही थी।

आर्यन को लग रहा था जैसे उसके शरीर का सारा खून नीचे की ओर दौड़ रहा है। अंजलि का यह नया रूप—जहाँ वह उसे तड़पा रही थी—आर्यन को एक ऐसे नशे में ले जा रहा था जहाँ वह सब कुछ भूल चुका था। उसे अहसास हुआ कि औरतों के पास सिर्फ देने के लिए नहीं, बल्कि मर्दानगी को काबू करने के लिए भी हज़ार तरीके होते हैं।

माहौल अब पूरी तरह से बेकाबू हो चुका था। अंजलि ने आज ठान लिया था कि वह आर्यन को केवल सुख नहीं देगी, बल्कि उसे अपनी उंगलियों के इशारों पर नचाएगी। वह आर्यन के ऊपर से थोड़ी बगल में खिसकी, लेकिन उसका जिस्म अभी भी आर्यन से सटा हुआ था।

अंजलि अब करवट लेकर लेटी थी, उसका एक हाथ आर्यन के सीने पर था और दूसरा हाथ उसके नेकर के उस उभार पर, जो किसी ज्वालामुखी की तरह फटने को तैयार था।

अंजलि ने अपना चेहरा आर्यन के सीने के करीब लाया। उसने अपने बाएं हाथ की दो उंगलियों से आर्यन के एक निप्पल को बुरी तरह मसला और साथ ही अपनी गर्म जुबान से दूसरे निप्पल को घेर लिया। वह उसे अपनी जुबान की नोक से ऐसे छेड़ रही थी जैसे कोई प्यासा बूंद-बूंद को तरसता है। कभी वह उसे पूरा अपने मुँह में भरकर चूसती, तो कभी अपने दांतों की हल्की रगड़ से आर्यन के दिमाग की नसें हिला देती। आर्यन के मुँह से बेतहाशा सिसकारियां निकलने लगीं, "आह्ह्ह... माँ... बस करो... मैं... मैं पागल हो जाऊँगा!"

जहाँ ऊपर अंजलि के मुँह का जादू चल रहा था, वहीं उसका दाहिना हाथ नीचे की तरफ अपना काम शुरू कर चुका था। उसने आर्यन के ७ इंच के फौलाद को नेकर के ऊपर से ही अपनी मुट्ठी में भर लिया। कपड़ा बीच में होने की वजह से जो friction पैदा हो रहा था, वह सीधे आर्यन की रीढ़ की हड्डी में बिजली के झटके दे रहा था। अंजलि ने अपने हाथ की पकड़ को कभी ढीला किया तो कभी एकदम कस लिया।

अंजलि ने अपनी हथेली को गोल-गोल घुमाते हुए उस गर्म लोहे को सहलाना शुरू किया। उसे महसूस हो रहा था कि आर्यन का अंग नेकर के कपड़े को फाड़कर बाहर आने को बेताब है। उसने अपनी उंगलियों के पोरों से उस अंग की टोपी वाले हिस्से को कपड़े के ऊपर से ही कुरेदना शुरू किया, जिससे आर्यन का शरीर बिस्तर पर मछली की तरह तड़पने लगा।

ऊपर से निप्पल की चूसन और नीचे से उस अंग की कसी हुई पकड़—आर्यन के लिए यह दोहरी मार असहनीय होती जा रही थी। "देखो आर्यन... अभी तो मैंने कपड़े भी नहीं हटाए और तेरा ये सिपाही अभी से हार मानने लगा है?" अंजलि ने कामुकता से भरी आवाज़ में आर्यन के कान में फुसफुसाया और फिर उसके कान की लौ (earlobe) को अपने होंठों में दबा लिया।

आर्यन के हाथ अब बिस्तर की चादर को फाड़ने की हद तक भींच चुके थे। उसका शरीर पसीने से तरबतर था और उसकी सांसें किसी भागते हुए घोड़े की तरह चल रही थीं। उसे लग रहा था कि अगर अंजलि ने एक मिनट और ऐसे ही किया, तो वह बिना प्रवेश किए ही अपना सारा लावा नेकर में ही निकाल देगा।

आर्यन को लगा था कि अब अंजलि उसके उस ७ इंच के उफनते हुए अंग को अपनी मुट्ठी में कैद कर लेगी, लेकिन अंजलि ने आज 'कामुकता की नई किताब' खोल रखी थी। उसने आर्यन की आंखों में देखते हुए अपना कोमल और गर्म हाथ धीरे से नेकर के इलास्टिक के अंदर डाला, लेकिन वह सीधे ऊपर नहीं गई।

आर्यन ने अपनी सांसें रोक लीं, वह इंतज़ार कर रहा था कि कब उसकी माँ का हाथ उसके फौलाद को छुएगा, पर अंजलि ने अपना हाथ और नीचे सरका दिया। उसने सीधे उस गर्म खंभे को छोड़कर उसके नीचे मौजूद दोनों Testicles को अपनी उंगलियों के घेरे में ले लिया।

जैसे ही अंजलि की रेशमी उंगलियों ने उन दोनों भारी और संवेदनशील गोलों को छुआ, आर्यन के शरीर में बिजली का ऐसा तगड़ा झटका लगा कि उसके पैर की उंगलियां तक मुड़ गईं। उसे कभी अंदाज़ा नहीं था कि असली करंट यहाँ छिपा होता है। आर्यन का मुँह खुला का खुला रह गया, पर आवाज़ नहीं निकली।

अंजलि ने बड़े ही सलीके से अपनी उंगलियों को उन दोनों गोलों के चारों ओर घुमाना शुरू किया। वह उन्हें अपनी हथेली पर रखकर बहुत धीरे से ऊपर-नीचे कर रही थी, जैसे कोई जौहरी कीमती मोतियों को परख रहा हो। "क्या हुआ आर्यन? तू तो ऊपर की तड़प में था... पर असली खज़ाना तो यहाँ है," अंजलि ने अपनी आँखों से हवस की चिंगारी छोड़ते हुए कहा।

जब अंजलि ने अपने नाखूनों को उन दोनों गोलों की त्वचा पर बहुत ही हल्के से रगड़ा, तो आर्यन की सहनशक्ति का बांध टूट गया। उसका ७ इंच का अंग बिना छुए ही हवा में पागलों की तरह उछलने लगा। उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसके शरीर की सारी नसों का सिरा अंजलि की उन्हीं उंगलियों में है। वह बिस्तर पर अपनी कमर को ऊपर की ओर झटका देने लगा ताकि अंजलि का स्पर्श और गहरा हो सके।

आर्यन अब किसी नशेड़ी की तरह हो चुका था। उसका दिमाग काम करना बंद कर चुका था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह चिल्लाए, रोए या अंजलि को खींचकर अपने अंदर समा ले। "माँ... प्लीज... आह्ह्ह... वहाँ नहीं... मैं... मैं फट जाऊँगा! उफ़्फ़... ये क्या जादू है!" आर्यन की आवाज़ अब पूरी तरह भर्रा गई थी।

अंजलि ने देखा कि आर्यन की आंखों की पुतलियां ऊपर चढ़ गई हैं और उसका शरीर पसीने से भीग चुका है। उसने अपनी पकड़ थोड़ी और कसी और उन दोनों गोलों को नीचे की ओर हल्का सा खींचा, जिससे आर्यन के गले से एक ऐसी घरघराहट निकली जो सिर्फ चरम उत्तेजना में निकलती है।

आर्यन की हालत अब उस मुकाम पर थी जहाँ इंसान की सभ्यता और तमीज की सारी दीवारें ढह जाती हैं। अंजलि ने उसके अंडकोषों को जिस तरह अपनी उंगलियों के जाल में फंसाया था, उसने आर्यन के दिमाग का संतुलन बिगाड़ दिया था। अंजलि ने उसकी आँखों में आँखें डालीं, उसकी आँखों में एक अजीब सी 'भूख' थी।

अंजलि ने अपने हाथ की पकड़ को थोड़ा और सख्त किया और अपना चेहरा आर्यन के चेहरे के इतने करीब लाई कि उनकी नाक आपस में टकरा रही थी। "आर्यन..." उसने बहुत ही धीमी और जहरीली आवाज़ में फुसफुसाया, "सिर्फ जिस्म का मजा काफी नहीं है। मुझे बता कि इस वक्त मैं तुझे क्या लग रही हूँ? मुझे वो नाम दे जो समाज मुझे देना चाहता है। मुझे गालियां दे आर्यन... मुझे अपमानित कर, तभी मुझे असली सुख मिलेगा।"

आर्यन हक्का-बक्का रह गया। "माँ... ये आप क्या कह रही हैं? मैं... मैं आपको कैसे..." लेकिन जैसे ही उसने इनकार करना चाहा, अंजलि ने उसके अंडकोषों को एक हल्का सा झटका दिया। आर्यन के मुँह से चीख निकल गई। "बोल! बोल मुझे... कि मैं एक रांड हूँ जो अपने ही जवान बेटे के नीचे लेटने के लिए तड़प रही है! बोल कि मैं कितनी नीच और बदचलन औरत हूँ!"

अंजलि की उत्तेजना देखकर और उस शारीरिक तड़प के दबाव में आर्यन का बांध टूट गया। उसकी आवाज़ में एक जंगलीपन आ गया। "हाँ... तुम... तुम एक नंबर की छिनाल हो! अपने पति के पीछे अपने ही बेटे का ७ इंच का डंडा लेने के लिए पागल हो रही हो! तुम एक कुलटा हो माँ... जो आज रात अपने बेटे से अपनी कोख फिर से भरवाना चाहती है!"

जैसे-जैसे आर्यन के मुँह से गंदी गालियां निकलने लगीं, अंजलि का शरीर बिजली की तरह कांपने लगा। उसे उन शब्दों में वो मज़ा आ रहा था जो शायद ७ इंच का अंग भी न दे पाए। "आह्ह्ह... और बोल... और गंदा बोल! मुझे अपनी 'रखैल' समझ! बता कि तू इस कुतिया के साथ आज क्या-क्या करेगा!"

आर्यन अब पूरी तरह से बेकाबू था। वह गालियां बकता जा रहा था और अंजलि उन गालियों को किसी मीठे संगीत की तरह पी रही थी। "तुम मेरी रंडी हो! आज रात मैं तुम्हारा हुलिया बिगाड़ दूँगा! तुम्हारा ये गोरा बदन कल तक मेरे दांतों के निशानों से भर जाएगा, तुम एक चरित्रहीन औरत हो जिसने अपने ही घर को कोठा बना दिया है!"

अंजलि ने अपनी आँखें उलट लीं। उसके शरीर से पसीना बह रहा था और वह आर्यन की गालियों पर अपनी कमर को बिस्तर पर पटक रही थी। "हाँ आर्यन... मैं तेरी वही रंडी हूँ! अब और इंतज़ार मत कर... इस रंडी को फाड़ दे! अपनी इस कमीनी माँ को अपनी मर्दानगी से तबाह कर दे!"

कमरे की हवा अब उन गंदी गालियों और भारी सांसों से इतनी गाढ़ी हो चुकी थी कि घुटन होने लगी थी, लेकिन वह घुटन ही उन दोनों को पागल कर रही थी। आर्यन के मुँह से निकलती हर गाली अंजलि के जिस्म में बिजली बनकर दौड़ रही थी। उसका रोम-रोम उस अपमानजनक सुख के लिए तड़प उठा था जिसे समाज पाप कहता है।

अंजलि अब और सब्र नहीं कर सकती थी। आर्यन की गालियों ने उसके अंदर की उस 'कुतिया' को जगा दिया था जो अपने ही बेटे के ७ इंच के फौलाद के नीचे कुचले जाने के लिए बेताब थी।

अंजलि ने एक जंगली झटके के साथ आर्यन की नेकर के इलास्टिक को नीचे खींचा। नेकर के उतरते ही वह ७ इंच का मूसल, जो अब तक कैद में तड़प रहा था, एक स्प्रिंग की तरह बाहर उछला। वह पूरी तरह से पत्थर की तरह सख्त, काला और नसों से भरा हुआ था। उसकी टोपी से काम-रस की बूंदें टपक रही थीं। अंजलि ने अपनी प्यासी आँखों से उस विशालकाय अंग को देखा और एक पल के लिए कांप उठी। यह ५ इंच के उस खिलौने से कहीं ज़्यादा भयानक और असली था।

बिना एक पल गंवाए, अंजलि ने अपना मुँह खोला और उस ७ इंच के गर्म लोहे को सीधे अपनी हलक तक उतार लिया। आर्यन के मुँह से निकलती गालियां अचानक एक लंबी सिसकारी में बदल गईं, "आह्ह्ह्ह्ह... माँ... ये... ये क्या... उफ़्फ़!" अंजलि ने अपनी ज़ुबान को उस अंग के चारों ओर लपेट लिया और उसे पागलों की तरह चूसने लगी। वह उसे इतनी गहराई तक ले जा रही थी कि उसे उल्टी जैसी फीलिंग हो रही थी, लेकिन उस दर्द में भी उसे मज़ा आ रहा था। उसके गोरे चेहरे पर आर्यन के काले अंग का घर्षण एक मादक दृश्य बना रहा था।

आर्यन सन्न रह गया था। उसके दिमाग में गालियां आनी बंद हो गई थीं, वह बस उस सुख के समंदर में डूबने लगा था। लेकिन अंजलि को यह मंज़ूर नहीं था। उसे सिर्फ शारीरिक सुख नहीं चाहिए था, उसे अपने अपमान का वह 'मानसिक नशा' भी चाहिए था। उसने झटके से अपना मुँह बाहर निकाला। लार से तरबतर उसका चेहरा और उसके होंठों पर लगा आर्यन का रस उसे और भी कामुक बना रहा था। उसने अपनी नशीली आँखें आर्यन की आँखों में गड़ाईं और भारी आवाज़ में बोली, "रुक क्यों गया? बोल! अपनी इस रंडी माँ को गालियां देना चालू रख! मुझे सुननी है कि मैं कितनी नीच हूँ!"

अपनी बात पर ज़ोर देने के लिए और आर्यन को बेकाबू करने के लिए, अंजलि ने अपना दूसरा हाथ नीचे सरकाया। उसके नुकीले और लाल रंग के नाखून अब आर्यन के उन संवेदनशील Testicles की कोमल त्वचा पर उतर आए। उसने अपने नाखूनों को उन दोनों गोलों पर ज़ोर से गड़ा दिया। आर्यन के पूरे शरीर में दर्द और बिजली की एक लहर दौड़ी। वह बिस्तर पर तड़प उठा। "आह्ह्ह! माँ... दर्द हो रहा है! प्लीज... मत करो!"

अंजलि ने नाखून और गहरे गड़ा दिए। "बोल! वरना ये गोले नोच लूँगी! बोल कि तेरी ये माँ कितनी बदचलन है जो अपने बेटे का मुँह में ले रही है!" आर्यन अब पूरी तरह से जानवर बन चुका था। दर्द और हवस के मिले-जुले अहसास ने उसे पागल कर दिया। उसने अंजलि के बाल पकड़े और उसे फिर से अपने अंग की ओर धक्का दिया। "हाँ! तुम एक नंबर की छिछोरी हो! लो... लो मेरा पूरा लो और अपने कंठ तक उतार लो! तुम एक बेशर्म रांड हो जो आज अपने बेटे की गुलामी कर रही है!"

अंजलि ने एक विजयी मुस्कान दी और फिर से उस ७ इंच के शैतान को अपने मुँह में भर लिया। अब आर्यन गालियां बकता जा रहा था और अंजलि उसके अंडकोषों को नाखूनों से कुरेदते हुए उसके अंग को चूस रही थी। कमरे में सिर्फ आर्यन की गंदी गालियां, अंजलि के चूसने की 'चप-चप' की आवाज़ और बिस्तर की चरमराहट गूंज रही थी। मर्यादा का कत्ल हो चुका था, अब सिर्फ बेबाक वहशीपन का राज था।

आर्यन के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका था। अंजलि के नाखूनों की चुभन और उसके मुँह की गीली गर्मी ने आर्यन के दिमाग को सुन्न कर दिया था। वह अब एक बेटा नहीं, बल्कि एक शिकारी बन चुका था जिसके सामने उसकी अपनी माँ एक प्यासी और लाचार 'रंडी' की तरह उसकी मर्दानगी को पूज रही थी।

आर्यन के शरीर की नसें पत्थर की तरह सख्त होकर उभर आई थीं। अंजलि का मुँह उसके ७ इंच के फौलाद को पूरी गहराई तक निगल रहा था, और उसकी आँखों में वह जंगली चमक थी जो आर्यन को और भी गंदा बोलने पर मजबूर कर रही थी।

आर्यन ने अंजलि के रेशमी बालों को अपनी मुट्ठी में कसकर जकड़ लिया और उसके सिर को अपने अंग पर तेज़ी से आगे-पीछे करना शुरू किया। "हाँ! ले... पूरा ले अपनी हलक तक! देख... देख तेरी ये ७ इंच की मौत अब आने वाली है! तू यही चाहती थी न, कि तेरा जवान बेटा तेरी इस बेशर्म ज़ुबान को अपने गरम रस से जला दे? आज तू इस नीच माँ का सारा गुरूर मिट्टी में मिला दूँगा!"

आर्यन का शरीर अब कमान की तरह तन गया था। उसे महसूस हुआ कि उसके अंडकोषों से गरम लावा अब ऊपर की ओर दौड़ रहा है। अंजलि ने यह भांप लिया और उसने अपने नाखूनों को आर्यन के उन गोलों पर और ज़ोर से गड़ा दिया, जिससे आर्यन का दर्द और हवस एक साथ चरम पर पहुँच गए। "आह्ह्ह्ह... माँ! अब... अब नहीं रुकेगा! ले... अपनी कोख तक ले इसे! तू एक नंबर की छिनाल है... ले मेरा गरम माल!"

अचानक आर्यन के मुँह से एक शेर जैसी दहाड़ निकली और उसका ७ इंच का अंग अंजलि के मुँह के अंदर ही फटने लगा। पिच-पिच-पिच! गरम और गाढ़ा लावा अंजलि के गले की गहराई में सीधे जाकर टकराने लगा। अंजलि ने अपनी आँखें उलट लीं और उस गरम धार को गटकने की कोशिश करने लगी। लेकिन मात्रा इतनी ज़्यादा थी कि उसके गले से वह रस बाहर छलकने लगा।

आर्यन रुका नहीं, उसने अपना अंग अंजलि के मुँह से बाहर खींचा और उस पर लगातार हो रहे डिस्चार्ज की धार को अंजलि के पूरे चेहरे पर बिखेरना शुरू किया। अंजलि का गोरा चेहरा, उसकी आँखें, उसके होंठ और उसकी काली ब्रा—सब कुछ आर्यन के सफेद और गाढ़े लावे से तरबतर हो गए। वह किसी हारी हुई दासी की तरह घुटनों के बल बैठी रही, जबकि उसका बेटा उसे अपनी 'मर्दानगी के निशान' से नहला रहा था।

जब आखिरी बूंद भी टपक गई, तो आर्यन हाँफते हुए बिस्तर पर ढह गया। अंजलि का चेहरा अब उस सफेद रस से चमक रहा था। उसने अपनी उंगली से अपने गाल पर गिरे रस को पोंछा और उसे अपनी ज़ुबान से चाटते हुए आर्यन की ओर देखा। "तेरा ये स्वाद... आर्यन... इसने मुझे मेरी औकात दिखा दी। आज से मैं सिर्फ तेरी गुलाम हूँ।"

कमरे में भारी सन्नाटा छा गया, जिसमें सिर्फ उन दोनों की हाँफने की आवाज़ें और उस सफेद रस की खुशबू फैली हुई थी। ७ इंच के फौलाद ने आज न केवल जिस्म को, बल्कि एक माँ की रूह को भी अपना बंधक बना लिया था।
 
अपडेट कैसा लगा बताना दोस्तों

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हवस का वो तूफ़ान जब थमता है, तो पीछे सन्नाटा और कड़वी हकीकत छोड़ जाता है। आर्यन बिस्तर पर निर्जीव सा पड़ा था, उसका शरीर पसीने और थकान से चूर था। अंजलि उठी, उसके चेहरे पर अभी भी वह सफेद निशान थे जो उसके 'पतन' और आर्यन की 'मर्दानगी' की गवाही दे रहे थे। वह बिना कुछ बोले बाथरूम की ओर बढ़ गई।

बाथरूम से पानी गिरने की आवाज़ आ रही थी। अंजलि अपना चेहरा साफ़ कर रही थी, और यहाँ बिस्तर पर लेटे आर्यन के दिमाग में एक दूसरा ही मंजर शुरू हो गया।

जैसे-जैसे शरीर की उत्तेजना शांत हुई, आर्यन के दिमाग पर चढ़ा वह 'जानवर' धीरे-धीरे उतरने लगा। ५ मिनट के अंदर ही उसे उन शब्दों की गूँज सुनाई देने लगी जो उसने अभी-अभी चीख-चीख कर कहे थे।

आर्यन के कानों में खुद की आवाज़ गूँजी— "रांड... छिनाल... कुतिया..." उसे यकीन नहीं हो रहा था कि ये शब्द उसी के मुँह से उसकी माँ के लिए निकले थे। जिस माँ ने उसे उंगली पकड़कर चलना सिखाया, जिसने उसे दुनिया की हर बुराई से बचाया, आज उसी माँ को उसने बिस्तर पर सबसे गंदी गालियां दी थीं।

आर्यन का दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उसे अपनी परवरिश याद आने लगी। वह सोचने लगा, "क्या मैं इतना गिर गया हूँ? क्या हवस ने मुझे इतना अंधा कर दिया कि मैंने अपनी माँ की ममता का ज़रा भी लिहाज नहीं रखा? मैंने उन्हें अपमानित किया, उनके चेहरे पर अपना लावा फेंका जैसे वह कोई बाज़ारू औरत हों।"

उसे डर लगने लगा कि अब वह अपनी माँ से नज़रें कैसे मिलाएगा। उसे लगा कि अंजलि बाथरूम के अंदर शायद रो रही होगी। उसे अपनी मर्दानगी पर अब गर्व नहीं, बल्कि Disgust महसूस होने लगी। उसे वह ७ इंच का अंग अब एक अभिशाप लगने लगा जिसने उसे मर्यादा की सारी हदें लांघने पर मजबूर कर दिया।

आर्यन ने अपनी आँखें बंद कीं, तो उसे अंजलि का वह चेहरा याद आया जब वह बचपन में उसे चूमती थी। और फिर उसे अभी वाला चेहरा याद आया—सफेद रस से सना हुआ और गालियों से अपमानित। यह विरोधाभास आर्यन को अंदर ही अंदर काटने लगा। उसे महसूस हुआ कि जिस्मानी सुख की कीमत उसने अपनी 'आत्मा' बेचकर चुकाई है।

आर्यन ने चादर से अपना चेहरा ढक लिया। उसकी आँखों के कोने गीले होने लगे। वह खुद से नफरत करने लगा था। उसे लगा कि कल रात जो हुआ वो शायद एक गलती थी जिसे सुधारा जा सकता था, लेकिन आज जो उसने शब्दों और व्यवहार से किया, उसने अंजलि को माँ के पद से गिराकर एक 'गुलाम' बना दिया था।

"मैंने क्या कर दिया? मैंने अपनी माँ का अस्तित्व ही मिटा दिया। मैं कितना नीच बेटा हूँ," यह सोचकर आर्यन बिस्तर पर सिकुड़ गया।

बाथरूम का दरवाजा खुला और अंजलि बाहर निकली। उसका चेहरा धुल चुका था और ताजे पानी की बूंदें उसके गोरे गालों पर चमक रही थीं। लेकिन जैसे ही उसकी नजर बिस्तर पर पड़ी, उसका दिल धक से रह गया। आर्यन चादर में मुंह छुपाए सिसक रहा था।

अंजलि की ममता एक पल में जाग उठी। वह तेजी से बेड के पास आई और आर्यन के कंधे पर हाथ रखा। "आर्यन? क्या हुआ मेरे बच्चे? तू रो क्यों रहा है?" उसने घबराकर पूछा।

आर्यन ने जैसे ही अपनी माँ का साफ और मासूम चेहरा देखा, उसका Guilt और बढ़ गया। उसने रोते हुए अंजलि का हाथ पकड़ लिया। "माँ... मुझे माफ कर दो। मैं... मैं जानवर बन गया था। मैंने आपको क्या-क्या नहीं बोला। मैंने आपकी इज्जत मिट्टी में मिला दी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं क्या बक रहा हूँ। मैं बहुत बुरा बेटा हूँ माँ..."

अंजलि ने एक गहरी सांस ली और आर्यन के सिर को सहलाते हुए उसे अपने सीने से सटा लिया। उसकी धड़कनों की गर्माहट आर्यन के कानों तक पहुँच रही थी।

"पगले... तू इसके लिए रो रहा है? देख मेरी आँखों में।" अंजलि ने आर्यन का चेहरा ऊपर उठाया। उसकी आँखों में कोई नाराजगी नहीं, बल्कि एक अजीब सी संतुष्टि थी। "आर्यन, तूने मेरी इज्जत मिट्टी में नहीं मिलाई, बल्कि तूने मुझे वो अहसास दिया जिसके लिए एक औरत का रोम-रोम तरसता है।"

अंजलि ने उसे समझाते हुए कहा, "आर्यन, तू अभी मर्द की नजर से देख रहा है, पर एक औरत की मानसिकता समझ। एक औरत को सबसे ज्यादा मजा तब आता है जब उसका मर्द उस पर पूरी तरह हक जमाए। जब तूने मुझे वो गंदी गालियां दीं, तो मुझे लगा कि मैं दुनिया की सबसे खूबसूरत और Desired औरत हूँ। मुझे वो अपमान नहीं, बल्कि तेरा मेरे प्रति पागलपन लगा।"

"समाज हमें देवी बनाता है, पर बिस्तर पर हमें कोई देवी बनकर नहीं रहना। हमें वहां एक ऐसी 'मादा' बनना होता है जिसे उसका मर्द अपनी उंगलियों पर नचाए। तूने मुझे जो गालियां दीं, उन्होंने मेरे अंदर की उस औरत को जगा दिया जो बरसों से दफन थी। मुझे उन गालियों में तेरी मर्दानगी की धमक सुनाई दे रही थी।"

अंजलि ने आर्यन के आंसू पोंछे और मुस्कुराकर कहा, "एक औरत तब सबसे ज्यादा सुखी होती है जब उसका प्रेमी उसे अपनी 'प्रॉपर्टी' समझे। तूने मुझे वो 'गंदगी' नहीं दी, तूने मुझे वो अधिकार दिया है। इसलिए रोना बंद कर, क्योंकि तूने आज अपनी माँ को नहीं, बल्कि अपनी 'औरत' को तृप्त किया है।"

आर्यन अपनी माँ की ये बातें सुनकर दंग रह गया। उसे लगा था कि उसने पाप किया है, पर अंजलि के लिए वह उसके प्यार और हवस का सबसे शुद्ध रूप था। अंजलि ने उसके माथे को चूमा और धीरे से उसके कान में फुसफुसाया, "तेरी वो गालियां... और तेरे उस लावे का मेरे चेहरे पर गिरना... वो मेरे जीवन का सबसे कामुक लम्हा था। अब मुस्कुरा, वरना मैं समझूँगी कि तुझे मेरे साथ मजा नहीं आया।"

आर्यन की आँखों में अब आँसू तो नहीं थे, लेकिन एक गहरी हैरानी थी। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि शब्दों का घाव किसी के लिए सुख का मरहम भी बन सकता है। अंजलि ने उसे अपने और करीब खींच लिया, उसका सिर अपनी गोद में रख लिया और उसकी उंगलियों से खेलते हुए अपने अतीत के उन बंद कमरों के राज़ खोलने लगी जो उसने बरसों से सीने में दफन कर रखे थे।

अंजलि की आवाज़ अब बहुत धीमी और मखमली हो गई थी, जैसे वह कोई बहुत ही गुप्त रहस्य साझा कर रही हो।

"देख आर्यन, तेरे पापा एक अच्छे इंसान हैं, पर बिस्तर पर वो हमेशा बहुत 'सभ्य' रहे। उनके लिए शारीरिक संबंध सिर्फ एक ज़रूरत थी, जिसे अंधेरे में, चुपचाप और बड़ी शालीनता से पूरा किया जाता था। उन्होंने मुझे हमेशा एक 'देवी' की तरह देखा, लेकिन कभी उस 'औरत' को नहीं पहचाना जो उनके नीचे दबी होती थी।"

अंजलि ने एक लंबी आह भरी। "मैं चाहती थी कि वो कभी-कभी जंगली बन जाएं। मैं चाहती थी कि वो मेरे बाल पकड़कर मुझे अपनी ओर खींचें, मुझे गंदी गालियां दें, मेरे शरीर पर अपने दांतों के निशान छोड़ दें। मैं चाहती थी कि वो मुझे ये अहसास कराएं कि मैं उनकी 'जागीर' हूँ। लेकिन वो हमेशा डरते रहे कि कहीं मुझे बुरा न लग जाए, कहीं मैं उन्हें गलत न समझ लूँ।"

"कई बार मेरा मन करता था कि मैं बिस्तर पर चीखूँ, गंदे शब्दों का इस्तेमाल करूँ, उन्हें उकसाऊँ... पर भारतीय संस्कार और 'माँ' होने का डर मुझे रोक देता था। मैं सालों तक प्यासी रही—जिस्म से नहीं, बल्कि उस 'दीवानगी' के लिए। जो गालियां आज तूने मुझे दीं, मैं वो गालियां तेरे पापा के मुँह से सुनने के लिए बरसों तरसी हूँ।"

अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँका। "आज जब तूने मेरे मुँह में अपना लावा छोड़ा और मुझे वो सब बोला जो समाज के लिए 'पाप' है, तो मुझे लगा कि आज मेरी वो बरसों पुरानी मुराद पूरी हो गई। तूने मुझे वो 'गंदा सुख' दिया है आर्यन, जो सबसे शुद्ध होता है। तेरे पापा मुझे कभी 'रंडी' नहीं कह पाए, और यही उनकी सबसे बड़ी कमी रह गई।"

आर्यन अब पूरी तरह समझ चुका था कि क्यों अंजलि उस ५ इंच के बेजान खिलौने के साथ भी वो सुख नहीं पा सकी जो उसे आर्यन की कड़वी बातों और ७ इंच के प्रहार में मिला। उसे अहसास हुआ कि एक औरत को सिर्फ 'सुरक्षा' नहीं, बल्कि बिस्तर पर 'समर्पण' और 'वहशीपन' भी चाहिए होता है।

अंजलि ने झुककर आर्यन के होंठों को हल्के से चूमा। "अब कभी Guilt मत करना। आज तूने मुझे वो सब दिया है जो दुनिया का कोई भी मर्द अपनी पत्नी को देने से डरता है। तू मेरा बेटा भी है, और अब मेरा वो 'मालिक' भी, जिसने मुझे मेरी असली पहचान दी है।"

अंजलि ने आर्यन के माथे से बिखरे बालों को बड़े प्यार से हटाया। माहौल की भारी गंभीरता को कम करने के लिए उसने एक शरारती मुस्कान चेहरे पर ओढ़ ली और अपनी यादों के गलियारे में पीछे मुड़कर देखने लगी।

अंजलि ने आर्यन के कान के पास झुककर अपनी रेशमी आवाज़ में एक पुराना किस्सा सुनाना शुरू किया।

"करीब दस साल पहले की बात है, तेरे पापा और मैं एक हिल स्टेशन पर छुट्टियां मनाने गए थे। बाहर बहुत तेज़ बारिश हो रही थी और होटल के कमरे में हम दोनों अकेले थे। मैंने उस दिन एक बहुत ही पारदर्शी और छोटी सी नाइटी पहनी थी, जो मैंने खास तौर पर उस रात के लिए खरीदी थी।"

"मेरा मन था कि आज वो मुझे बिस्तर पर पटक दें, मेरे हाथ बेड के सिरहाने से बांध दें और मुझे अपनी मर्दानगी का अहसास एक कैदी की तरह कराएं। मैंने उनसे धीरे से कहा भी था कि 'आज मुझे ज़रा भी रहम मत दिखाना, आज मुझे अपना गुलाम बना लो'।"

"लेकिन जानते हो उन्होंने क्या किया? उन्होंने बहुत ही भोलेपन से मुझे गले लगाया, माथे पर चूमा और बोले— 'अंजलि, तुम इतनी कोमल हो, मैं तुम्हें तकलीफ कैसे दे सकता हूँ? तुम मेरी अर्धांगिनी हो, कोई दासी नहीं।' उन्होंने बड़े सलीके से लाइट बंद की और हमेशा की तरह वही पुराना, सीधा-सादा तरीका अपनाया।"

अंजलि थोड़ा सा हंसी, पर उस हंसी में एक हल्का सा दर्द था। "मैं उस रात अंदर ही अंदर रो रही थी आर्यन। मैं चाहती थी कि वो मेरे जिस्म को झिंझोड़ दें, मुझे अपनी बाहों में इतना कसें कि मेरी सांसें रुकने लगें। वो फंतासी अधूरी ही रह गई क्योंकि वो कभी उस 'सभ्य पति' के दायरे से बाहर ही नहीं निकल पाए।"

अंजलि ने आर्यन की नग्न छाती पर अपनी उंगलियों से छोटे-छोटे घेरे बनाते हुए कहा, "कल रात और आज... जब तूने मुझे अपने वश में किया, जब तूने मेरा हुलिया बिगाड़ा और मुझे वो सब बोला जिसकी मैंने उस रात कल्पना की थी... तो मुझे लगा जैसे मेरा वो पुराना अधूरा सपना आज सच हो गया।"

आर्यन ने अंजलि की कमर को और ज़ोर से भींच लिया। उसे अब अपनी माँ की उस खामोश तड़प का अंदाज़ा हो रहा था जो उसने बरसों से छिपाई थी। "माँ... जो पापा नहीं कर पाए, वो मैं करूँगा। आपकी हर अधूरी फंतासी अब मेरी ज़िम्मेदारी है।"

अंजलि ने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया। "अब मुझे किसी और चीज़ की ज़रूरत नहीं है आर्यन। तूने मुझे वो सब दे दिया है जो मुझे एक पूरी औरत बनाता है।"

अंजलि की आवाज़ अब और भी धीमी हो गई, जैसे वह अपने मन के सबसे गहरे और सबसे डरावने राज़ की राख को कुरेद रही हो। उसने अपनी नज़रें आर्यन के सीने पर टिका दीं, क्योंकि इस बात को कहते हुए उसकी पलकों में एक स्वाभाविक हिचक और शर्म की लाली तैर रही थी।

अंजलि ने आर्यन की उंगलियों को अपने हाथ में लेकर सहलाया और रुक-रुक कर बोलना शुरू किया। "आर्यन... एक और बात है, एक ऐसी फंतासी जिसे मैंने कभी अपनी ज़ुबान पर लाने की हिम्मत नहीं की। यहाँ तक कि खुद से भी डर लगता था यह सोचते हुए।"

"कभी-कभी, जब तेरे पापा सो जाते थे और मैं जागती रहती थी, तो मेरे दिमाग में एक तस्वीर उभरती थी। मैं सोचती थी कि कैसा लगेगा अगर इस बिस्तर पर हम दो नहीं, बल्कि तीन लोग हों? एक Threesome की वो अनकही चाहत जिसने मेरे रातों की नींद उड़ा दी थी।"

अंजलि ने अपनी आँखें मूंद लीं। "मैंने कभी यह तय नहीं किया कि वह तीसरा इंसान कौन होगा... क्या वह कोई दूसरी औरत होगी, जिसके साथ मैं तुझे साझा करूँ और हम दोनों मिलकर तेरी मर्दानगी की पूजा करें? या फिर कोई दूसरा मर्द, जो मुझे दो तरफ से अपनी पकड़ में रखे और मैं उन दोनों के बीच एक खिलौने की तरह पिसती रहूँ?"

"सोचकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं आर्यन। एक तरफ से तेरा ७ इंच का प्रहार और दूसरी तरफ से कोई और अहसास... या फिर तेरी नग्नता के सामने एक और बदन। यह ख्याल मुझे जितना डराता था, उससे कहीं ज़्यादा उत्तेजित कर देता था। पर तेरे पापा के सामने यह कहना... मतलब अपनी मौत को दावत देना जैसा था।"

आर्यन यह सुनकर पूरी तरह सन्न रह गया। उसकी माँ की सोच इतनी आधुनिक और इतनी बेबाक हो सकती है, यह उसके लिए एक और बड़ा झटका था। उसने महसूस किया कि अंजलि के अंदर जो आग है, वह किसी एक इंसान के बस की बात नहीं है।

अंजलि ने अपना सिर उठाकर आर्यन की आँखों में झाँका। "मुझे नहीं पता कि यह कभी मुमकिन होगा या नहीं, और न ही मैं चाहती हूँ कि तू इसके लिए मजबूर हो। पर आज जब तूने मुझे मेरी 'औकात' दिखाई, तो मुझे लगा कि मैं अपनी हर गंदी से गंदी फंतासी तेरे सामने रख सकती हूँ। तू मेरा बेटा भी है और अब मेरा सबसे करीबी राज़दार भी।"

आर्यन ने अंजलि के चेहरे को अपने हाथों में लिया। वह समझ चुका था कि उसकी माँ सिर्फ एक घरेलू औरत नहीं, बल्कि इच्छाओं का एक ज्वलंत ज्वालामुखी है। "माँ... आपकी हर फंतासी मेरे लिए एक हुक्म है। वक्त आने पर हम हर उस पर्दे को उठाएंगे जिसे दुनिया 'गुनाह' कहती है।"

अंजलि ने एक सुकून भरी सांस ली और आर्यन के गले लग गई। आज रात उसने खुद को पूरी तरह खाली कर दिया था।

आर्यन ने अंजलि की कमर में हाथ डालकर उसे थोड़ा और अपनी ओर खींचा। उसकी आँखों में अब एक शरारती चमक थी, जैसे उसे किसी पुराने राज़ का सुराग मिल गया हो। उसने अंजलि की आँखों में झाँकते हुए पूछा, "माँ... सब बातें अपनी जगह, पर एक बात बताओ। उस दिन असल में क्या हुआ था? जिस दिन मुझे लगा था कि आपको तेज़ बुखार है और आप बिस्तर पर तड़प रही थीं... पर जब मैंने आपको छुआ, तो आपका शरीर आग की तरह गरम तो था, लेकिन वो बुखार जैसा नहीं लग रहा था। आप क्या कर रही थीं उस वक्त?"

अंजलि यह सुनते ही एक पल के लिए ठिठक गई। उसके गालों पर गुलाबी लाली दौड़ गई और उसने अपनी नज़रें झुका लीं। वह समझ गई कि आर्यन किस दिन की बात कर रहा है।

अंजलि ने एक गहरी और शर्म भरी सांस ली। उसने आर्यन के सीने पर अपनी उंगलियां फिराते हुए दबी आवाज़ में सच उगलना शुरू किया।

"आर्यन... वो बुखार नहीं था, वो मेरे अंदर की बरसों की दबी हुई हवस का उबाल था। मैं नहाकर निकली थी और आईने के सामने खुद को देख रही थी। अचानक मुझे महसूस हुआ कि मेरा ये गोरा बदन बेकार जा रहा है। कोई नहीं है जो इसे छुए, जो इसे अपनी बाहों में भींचे।"

"मैं बिस्तर पर लेट गई और आँखें बंद करके सोचने लगी कि काश... काश कोई जवान मर्द आए और मुझे अपनी मर्दानगी से कुचल दे। मैं उस वक्त अपने ही हाथों से खुद को सहला रही थी। मेरी उंगलियां मेरे स्तनों और जांघों के बीच उस जगह खेल रही थीं जहाँ आज तेरा ७ इंच का फौलाद राज कर रहा है।"

"जब तू कमरे में आया और तूने मेरे माथे पर हाथ रखा, तो मुझे एक बिजली का झटका लगा। तेरा वो कोमल और जवान हाथ... मुझे वो किसी 'बेटे' का हाथ नहीं, बल्कि एक 'मर्द' का स्पर्श लगा। मेरा शरीर उस वक्त सच में तप रहा था, पर वो बीमारी नहीं, बल्कि तेरे लिए वो 'भूख' थी जो उस दिन पहली बार मेरे चेहरे पर साफ़ दिख रही थी।"

अंजलि ने शरमाते हुए आगे कहा, "जब तू चला गया, तो मेरी हालत और खराब हो गई। मैं चादर को अपने दांतों से काट रही थी और तेरा नाम लेकर खुद को शांत करने की कोशिश कर रही थी। तुझे लगा मैं बीमार हूँ, पर असल में मैं तेरे उस जवान जिस्म के लिए तड़प रही थी जिसे मैं आज अपनी बाहों में लिए हुए हूँ।"

आर्यन यह सुनकर दंग रह गया। उसे अब समझ आया कि जिसे वह ममता की बेबसी समझ रहा था, वह असल में एक औरत की कामुक पुकार थी। उसने अंजलि के चेहरे को ऊपर उठाया। "मतलब... उस दिन से ही आपके दिल में ये सब चल रहा था?"

अंजलि ने मुस्कुराकर उसके होंठों को छुआ। "शायद उससे भी पहले से... बस उस दिन वो आग बेकाबू हो गई थी। और देख... आज उसी आग ने हम दोनों को एक कर दिया।"

आर्यन की आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जैसे वह उस पुराने मंज़र को फिर से जीना चाहता हो। उसने अंजलि की कमर को थोड़ा और करीब खींचते हुए शरारत से कहा, "माँ... जो आप उस दिन अकेले में कर रही थीं, क्या वो आप अभी मेरे सामने कर सकती हैं? मैं देखना चाहता हूँ कि मेरी बेबाक माँ अपनी प्यास कैसे बुझाती है।"

अंजलि ने जैसे ही यह सुना, उसके चेहरे पर एक हया भरी मुस्कान दौड़ गई। उसने अपनी गर्दन घुमाकर दीवार पर टंगी घड़ी की ओर देखा। सुइयां रात के १२ पर मिल रही थीं।

अंजलि ने एक ठंडी सांस ली और आर्यन के गाल को थपथपाते हुए बड़े प्यार से बोली:

"मेरे पागल शहजादे... देख, रात के १२ बज चुके हैं। तुझे कल सुबह जल्दी उठकर कॉलेज जाना है, तेरी पढ़ाई का नुकसान मैं कभी बर्दाश्त नहीं करूँगी। और मुझे भी सुबह उठकर घर के ढेरों काम निपटाने हैं और अपने काम पर जाना है।"

अंजलि ने अपनी रेशमी आवाज़ में आगे कहा, "और देख... आज रात तूने मुझे जितना निचोड़ा है, और जिस तरह से मैंने तेरे ७ इंच के फौलाद की पूजा की है, उसके बाद मेरे शरीर में अब एक उंगली हिलाने की भी ताकत नहीं बची। आज रात का ये नशा ही काफी है हमें कल तक ज़िंदा रखने के लिए।"

अंजलि ने आर्यन की आँखों में झाँका, "तू जो मांग रहा है, वो मैं तुझे ज़रूर दिखाऊँगी... और शायद उससे कहीं ज़्यादा। पर आज नहीं। आज हमें अपनी नींद पूरी करनी है ताकि कल हम फिर से दुनिया के सामने एक आदर्श 'माँ और बेटा' बनकर खड़े हो सकें, जबकि हमारे अंदर ये राज़ दफन रहे।"

अंजलि ने आर्यन का हाथ पकड़कर उसे अपनी छाती के बीच रख लिया। "अब चुपचाप आँखें बंद कर और सो जा। कल सुबह तुझे एक नई ताज़गी के साथ उठना है।"

आर्यन ने थोड़ी सी मासूमियत के साथ अपना मुंह फुलाया, पर वह जानता था कि माँ सही कह रही है। उसने अंजलि के माथे को चूमा और उसे अपनी बाहों के घेरे में ले लिया। अंजलि ने अपनी टांग आर्यन की टांगों के ऊपर डाल दी, और वे दोनों एक-दूसरे की सांसों की गर्माहट महसूस करने लगे।

बाहर सन्नाटा था, पर कमरे के अंदर दो रूहें अपनी जीत और तृप्ति का जश्न मना रही थीं। ७ इंच के उस शैतान को भी अब शांति मिल गई थी, और अंजलि के चेहरे पर वह सुकून था जो बरसों बाद उसे नसीब हुआ था।
 
सुबह की पहली किरण अभी खिड़की के पर्दों को ठीक से चीर भी नहीं पाई थी कि ५:०० बजे आर्यन की आँख खुल गई। कमरे में हल्की नीली रोशनी और सन्नाटा था, जिसमें सिर्फ अंजलि की धीमी और लयबद्ध सांसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी।

आर्यन ने धीरे से अपनी गर्दन घुमाई और अपने बगल में सोई हुई अंजलि को निहारने लगा। रात के उस भीषण तूफ़ान के बाद, अंजलि अब शांत समंदर जैसी लग रही थी।

अंजलि का सिर आर्यन के एक बाजू पर था। उसके बिखरे हुए काले बाल उसके गोरे कंधों और तकिए पर फैले हुए थे। बिना किसी मेकअप के, भोर की उस कच्ची रोशनी में अंजलि का चेहरा किसी दूधिया संगमरमर जैसा चमक रहा था। उसके होंठ थोड़े खुले हुए थे और चेहरे पर एक ऐसी शांति थी जो आर्यन ने पहले कभी नहीं देखी थी।

अंजलि के शरीर पर अब भी कोई कपड़ा नहीं था, उसने बस एक पतली सफेद चादर ओढ़ रखी थी जो उसकी कमर तक खिसक गई थी। उसकी काली ब्रा फर्श पर बेजान पड़ी थी। आर्यन की नज़रें अंजलि के उन उभरे हुए सीनों पर ठहर गईं जो चादर के ऊपर से साफ़ झलक रहे थे। रात के उस 'लावे' के कुछ सूखे निशान अब भी उसकी त्वचा पर एक विजय-चिह्न की तरह दिख रहे थे।

आर्यन ने बिना उसे जगाए, बहुत धीरे से अपनी उंगली उसकी नाक की नोक पर फिराई। उसे यकीन नहीं हो रहा था कि यह वही औरत है जिसने रात को गालियां सुनते हुए उसके ७ इंच के फौलाद को अपने कंठ तक उतार लिया था। अभी वह सिर्फ एक मासूम, थकी हुई और संतुष्ट माँ लग रही थी।

अंजलि के बदन की उस भीनी-भीनी खुशबू और उस नग्नता को करीब से देखकर, आर्यन के ७ इंच के सिपाही ने एक बार फिर सिर उठाना शुरू कर दिया। नेकर के अंदर वह फिर से अपनी जगह बनाने लगा था। आर्यन का मन किया कि वह अभी अंजलि को जगा दे और सुबह की पहली पारी शुरू करे, लेकिन उसे अंजलि की वो बात याद आ गई— "तुझे कॉलेज जाना है।"

आर्यन ने खुद पर काबू पाया और झुककर अंजलि के माथे को बड़े ही सम्मान और प्यार के साथ चूमा। अंजलि ने नींद में ही थोड़ी सी करवट बदली और आर्यन के हाथ को और कसकर पकड़ लिया, जैसे वह सपने में भी उसे कहीं जाने नहीं देना चाहती थी।

आर्यन को अहसास हुआ कि यह रिश्ता सिर्फ जिस्मानी नहीं रह गया है; यह एक ऐसी 'ज़रूरत' बन गया है जो अब उनकी ज़िंदगी का ऑक्सीजन है।

आर्यन ने बहुत कोशिश की कि वह दोबारा सो जाए और अपनी उत्तेजना को शांत कर ले, लेकिन नींद अब उसकी आँखों से कोसों दूर जा चुकी थी। १० मिनट तक वह बस छत को निहारता रहा, पर उसके शरीर के निचले हिस्से में मच रही खलबली उसे चैन नहीं लेने दे रही थी।

सुबह के ५:१० हो रहे थे। कमरे की मद्धम रोशनी में आर्यन ने महसूस किया कि उसका ७ इंच का मूसल नेकर के अंदर एक ज़बरदस्त 'मॉर्निंग इरेक्शन' की वजह से पत्थर की तरह सख्त हो चुका था। वह नेकर के कपड़े को चीरकर बाहर आने के लिए बेताब था और हर धड़कन के साथ ऊपर-नीचे उछल रहा था।

आर्यन ने चादर के अंदर अपना हाथ डाला और उस गरम लोहे को छुआ। वह इतना गर्म और तना हुआ था कि आर्यन को अपनी जांघों के बीच एक मीठा सा दर्द महसूस होने लगा। रात की थकान के बाद भी, सुबह की इस ताज़गी ने उसकी मर्दानगी को फिर से जवान कर दिया था।

आर्यन ने अपनी नज़रें घुमाईं और अंजलि को देखा। वह अभी भी गहरी नींद में थी, उसका गोरा बदन चादर के नीचे अधखुला सा था। उसकी सांसों की गर्मी आर्यन के चेहरे तक पहुँच रही थी। अंजलि की भारी छाती चादर के ऊपर से ही आर्यन की बांहों को छू रही थी, जिससे उसके अंग की अकड़न और भी बढ़ गई।

आर्यन के दिमाग में दो बातें चल रही थीं। एक तरफ अंजलि का वो हुक्म कि उसे कॉलेज जाना है और अंजलि को आराम करने देना है, और दूसरी तरफ उसके ७ इंच के शैतान की वो पुकार जो कह रही थी कि 'अभी नहीं तो कभी नहीं'।

आर्यन ने बहुत धीरे से अपनी उंगलियां अंजलि की कमर की ढलान पर रखीं। उसका रेशमी बदन सुबह के वक्त और भी मुलायम लग रहा था। उसने अपनी मज़बूत जांघ को अंजलि की कोमल जांघों के बीच धीरे से सरकाया, जिससे उसका खड़ा हुआ अंग अंजलि के कूल्हों के पिछले हिस्से से जाकर सट गया।

अंजलि ने नींद में ही एक छोटी सी सिसकारी भरी और अपनी पीठ को थोड़ा सा पीछे की ओर धकेला, जिससे वह अनजाने में ही आर्यन के उस ७ इंच के खंभे पर और भी ज़्यादा रगड़ खाने लगी। आर्यन की सांसें अब रुकने लगी थीं। वह समझ गया था कि आज की सुबह सिर्फ अलार्म से नहीं, बल्कि एक नए धमाके के साथ होने वाली है।

सुबह की उस मखमली खामोशी में आर्यन का संयम अब पूरी तरह जवाब दे चुका था। अंजलि करवट लेकर सोई थी और उसकी पीठ आर्यन की तरफ थी। चादर के नीचे उन दोनों के जिस्मों की गर्माहट एक-दूसरे में घुल रही थी।

आर्यन ने बहुत ही सावधानी से अपना हाथ अंजलि की पतली कमर पर रखा। उसकी रेशमी त्वचा सुबह के वक्त और भी मुलायम और ठंडी महसूस हो रही थी। लेकिन नीचे का मंजर कुछ और ही था।

आर्यन का ७ इंच का फौलाद नेकर के अंदर पत्थर की तरह सख्त हो चुका था। उसने धीरे से अपनी कमर को आगे की ओर धकेला। चादर के अंदर से ही, उसका गर्म और तना हुआ अंग अंजलि की भारी और गोल गांड़ की दरार के ठीक बीचों-बीच जाकर सट गया।

जैसे ही उस गर्म लोहे का दबाव अंजलि के मांसल कूल्हों पर पड़ा, आर्यन के पूरे शरीर में एक सिहरन दौड़ गई। नेकर का कपड़ा बीच में होने के बावजूद, अंजलि के बदन की गोलाई और उसकी कोमलता आर्यन को पागल कर रही थी। उसने अपनी कमर को हल्का सा हिलाया , जिससे उसका अंग अंजलि की गांड़ पर ऊपर-नीचे रगड़ खाने लगा।

इस अचानक आए गर्म दबाव ने अंजलि की नींद की गहराई को हिला दिया। उसने नींद में ही एक लंबी और दबी हुई सिसकारी भरी— "उफ़्फ़..."। उसे महसूस हो रहा था कि पीछे से कोई गर्म और सख्त चीज़ उसके जिस्म में धंसने की कोशिश कर रही है।

आर्यन रुका नहीं। उसने अपने हाथ से अंजलि के एक स्तन को चादर के ऊपर से ही कसकर भींच लिया और अपनी कमर का दबाव और बढ़ा दिया। अब उसका ७ इंच का मूसल अंजलि की गांड़ की गहराई को नापने लगा था। अंजलि ने अपनी आँखें पूरी तरह नहीं खोलीं, पर उसके चेहरे पर एक मदहोश मुस्कान तैर गई। वह समझ गई कि उसका 'शेर' सुबह-सुबह फिर से शिकार पर निकल पड़ा है।

अंजलि ने नींद भरी आवाज़ में फुसफुसाया, "आर्यन... अभी तो ५ ही बजे हैं... सोने दे ना कमीने..." लेकिन साथ ही उसने अपनी गांड़ को थोड़ा और पीछे की ओर झटका दिया, जिससे वह आर्यन के उस उफनते हुए अंग पर और भी ज़ोर से दब गई।

"माँ... ये अब नहीं सोने वाला। इसे अब आपका ही सहारा चाहिए," आर्यन ने उसके कान के पास अपनी गर्म सांसें छोड़ते हुए कहा।

सुबह की उस सुनहरी और शांत बेला में आर्यन के सब्र का बांध अब पूरी तरह टूट चुका था। कमरे में छाई हल्की नीली रोशनी अब उस कामुक दृश्य की गवाह बनने वाली थी, जिसकी शुरुआत रात के अंधेरे में हुई थी।

आर्यन ने बहुत ही सावधानी से, ताकि अंजलि की कच्ची नींद पूरी तरह न टूट जाए, अपने हाथों को नीचे ले जाकर नेकर के इलास्टिक को पकड़ा। उसने धीरे-धीरे उसे अपनी जांघों से नीचे सरकाया और पैरों से झटककर बिस्तर के नीचे फेंक दिया। अब वह पूरी तरह निर्वस्त्र था, और उसका ७ इंच का काला फौलाद सुबह की ताज़गी पाकर पत्थर से भी ज़्यादा सख्त और गर्म हो चुका था।

आर्यन ने करवट ली और धीरे से अंजलि की पीठ से पूरी तरह सट गया। जैसे ही उसके नंगे और गर्म अंग का सीधा स्पर्श अंजलि की कोमल और मखमली गांड़ की दरार से हुआ, अंजलि के पूरे शरीर में बिजली का एक ज़बरदस्त झटका दौड़ा। कपड़े की वो मामूली सी दीवार भी अब हट चुकी थी। आर्यन का अंग अंजलि के कूल्हों की गहराई में किसी गर्म लोहे की तरह धंसने लगा।

आर्यन ने अपना एक हाथ अंजलि की पतली कमर के नीचे से डाला और उसके भारी और नग्न Boobs को अपनी मज़बूत हथेली में भर लिया। अंजलि ने रात को अपनी ब्रा उतार दी थी, इसलिए आर्यन की उंगलियों को अब उन गर्म और मुलायम गोलों का सीधा अहसास मिल रहा था। उसने अपनी उंगलियों से अंजलि के सख़्त हो चुके निप्पलों को मरोड़ना शुरू किया, जिससे अंजलि के मुँह से एक लंबी सिसकारी निकली— "आह्ह्ह... आर्यन... तू... तू नहीं मानेगा?"

आर्यन का दूसरा हाथ अंजलि की चिकनी और गोरी पीठ पर रेंगने लगा। वह अपनी उंगलियों के पोरों से उसकी रीढ़ की हड्डी के पास छोटे-छोटे घेरे बना रहा था। अंजलि के बदन की महक और उस रेशमी छुअन ने आर्यन को और भी पागल कर दिया। उसने अपनी कमर को एक हल्का सा झटका दिया, जिससे उसका ७ इंच का मूसल अंजलि की गांड़ के बीचों-बीच बुरी तरह रगड़ खाने लगा।

अंजलि ने अब अपनी आँखें अधखुली कर ली थीं। उसे महसूस हो रहा था कि पीछे से उसका जवान बेटा उसे अपनी मर्दानगी के घेरे में ले चुका है। आर्यन की गर्म सांसें उसकी गर्दन पर गिर रही थीं। अंजलि ने अपनी गांड़ को थोड़ा और पीछे की ओर धकेला ताकि वह आर्यन के उस नंगे और उत्तेजित अंग को अपनी गहराई में और साफ़ महसूस कर सके।

"माँ... सुबह की ये ताज़गी और आपका ये बदन... मुझे कॉलेज जाने नहीं देंगे," आर्यन ने उसके कान की लौ को अपने होंठों में दबाते हुए फुसफुसाया।

सुबह की उस ठंडी खामोशी में आर्यन ने अंजलि के शरीर के सबसे संवेदनशील 'स्विच' को पहचान लिया था। किसी भी औरत के लिए कान की लौ और गर्दन का पिछला हिस्सा वो बिजली के तार होते हैं, जिन्हें छूते ही जिस्म में हवस का करंट दौड़ने लगता है।

आर्यन ने अंजलि की गर्दन के पास अपना चेहरा झुकाया। अंजलि की त्वचा से सुबह की ताज़गी और उसकी अपनी एक मदहोश कर देने वाली खुशबू आ रही थी।

आर्यन ने बहुत ही धीरे से अंजलि के दाहिने कान की कोमल लौ को अपने होंठों के बीच दबा लिया। उसने अपनी गर्म ज़ुबान की नोक से उस कोमल हिस्से को कुरेदना शुरू किया। जैसे ही उसकी गीली ज़ुबान ने कान के उस छिद्र के पास हलचल मचाई, अंजलि के पूरे शरीर में बिजली का एक ज़बरदस्त झटका लगा। उसकी उंगलियाँ बिस्तर की चादर को कसकर भींचने लगीं। "आह्ह्ह... आर्यन... मम्म... ये क्या कर रहा है..." अंजलि के मुँह से एक दबी हुई सिसकारी निकली जो साफ़ बता रही थी कि उसका आत्म-नियंत्रण अब खत्म हो रहा है।

आर्यन यहीं नहीं रुका। उसने अपने दांतों से कान की लौ को हल्का सा दबाया और फिर अपने होंठों को नीचे सरकाते हुए अंजलि की सुराहीदार गर्दन पर ले आया। कान के ठीक नीचे का वो हिस्सा, जहाँ नसें साफ़ धड़कती हैं, आर्यन ने वहाँ अपनी गर्म सांसें छोड़ीं। अंजलि का शरीर धनुष की तरह तन गया। जब आर्यन ने अपनी ज़ुबान को उसकी गर्दन की ढलान पर ऊपर से नीचे की ओर रगड़ा, तो अंजलि के रोंगटे खड़े हो गए।

अंजलि की गर्दन अब पूरी तरह से आर्यन के हवाले थी। आर्यन ने अपने होंठों से उसकी गर्दन पर छोटे-छोटे 'लव बाइट्स' देना शुरू किया। हर चुंबन के साथ अंजलि की सिसकारी और गहरी होती जा रही थी। "उफ़्फ़... रुक जा... मेरा... मेरा दम निकल जाएगा... आर्यन!" अंजलि की आवाज़ अब भारी हो गई थी। उसे महसूस हो रहा था कि उसकी योनि में एक अजीब सी हलचल और गीलापन बढ़ रहा है। गर्दन का वो स्पर्श सीधे उसकी जांघों के बीच जाकर धमाका कर रहा था।

ऊपर से गर्दन का ये जादू चल रहा था और नीचे आर्यन का ७ इंच का नंगा और सख्त फौलाद अंजलि की गांड़ की दरार में लगातार दबाव बना रहा था। अंजलि को ऐसा लग रहा था जैसे वह दो पाटों के बीच पिस रही है—एक तरफ गर्दन पर आर्यन के होंठों की आग और दूसरी तरफ पीछे से उस विशालकाय अंग की बेताबी।

अंजलि ने अपना सिर पीछे की ओर झुका दिया ताकि आर्यन को उसकी गर्दन का और ज़्यादा हिस्सा मिल सके। उसकी सांसें अब किसी भागते हुए घोड़े की तरह चल रही थीं। गर्दन पर होने वाली उस रगड़ ने उसके दिमाग को सुन्न कर दिया था। वह अब एक 'माँ' नहीं, बल्कि एक प्यासी मादा थी जो अपने नर के हर प्रहार को झेलने के लिए बेताब थी।

उसकी आँखें उलट गई थीं और उसके हाथ अब आर्यन के बालों में उलझकर उसे अपनी गर्दन की ओर और ज़ोर से खींच रहे थे।

सुबह की उस मद्धम रोशनी में अंजलि का संयम अब पूरी तरह राख हो चुका था। आर्यन के होठों ने उसकी गर्दन पर जो आग लगाई थी, उसने अंजलि के बदन में एक ऐसी तड़प पैदा कर दी कि वह अब और सीधी नहीं लेट पा रही थी। उसने एक गहरी सिसकारी भरी और बिस्तर पर पेट के बल औंधे मुँह लेट गई।

अंजलि के पेट के बल लेटते ही उसकी भारी और गोल गांड़ हवा में एक कामुक पहाड़ की तरह उभर आई। आर्यन ने एक पल भी जाया नहीं किया और वह एक शिकारी की तरह अंजलि के ऊपर आ गया।

जैसे ही आर्यन का पूरा वजन अंजलि की मखमली पीठ पर पड़ा, अंजलि के मुँह से एक मदहोश कर देने वाली आह निकली। आर्यन का ७ इंच का नंगा और सख्त फौलाद अब अंजलि की गांड़ की गहरी दरार में बिल्कुल फिट हो चुका था। बिना किसी कपड़े के, उस गर्म लोहे का सीधा स्पर्श अंजलि के कूल्हों की कोमलता को चीर रहा था।

आर्यन ने अंजलि की गर्दन के पिछले हिस्से पर अपने होठों का जादू शुरू किया। उसने अपनी जीभ से अंजलि के कान के पीछे वाले हिस्से को चाटना और चूसना शुरू किया। अंजलि का शरीर बिस्तर पर मछली की तरह फड़फड़ाने लगा। जब आर्यन ने उसके कान के छेद में अपनी गर्म सांसें फूंकी, तो अंजलि के हाथ बिस्तर की चादर को फाड़ने की हद तक भिंच गए। "आह्ह्ह... आर्यन... मम्म... मार डालेगा क्या... उफ़्फ़ ये जलन!"

आर्यन अब उसकी गर्दन से नीचे उतरा और उसकी गोरी और चिकनी पीठ पर अपने होठों की छाप छोड़ने लगा। वह अपनी ठुड्डी की हल्की रगड़ से अंजलि की रीढ़ की हड्डी पर बिजली के झटके दे रहा था। अंजलि की पीठ पसीने की बारीक बूंदों से चमक रही थी, और आर्यन का हर चुंबन उस तपिश को और बढ़ा रहा था।

ऊपर जहाँ होठों का खेल चल रहा था, वहीं नीचे आर्यन अपनी कमर से अंजलि की गांड़ पर लगातार दबाव बना रहा था। उसका ७ इंच का अंग अंजलि के कूल्हों के बीच किसी गर्म सलाख की तरह रगड़ खा रहा था। अंजलि को महसूस हो रहा था कि वह पीछे से किसी बहुत ही ताकतवर चीज़ से कुचली जा रही है। उसने अपनी कमर को थोड़ा ऊपर की ओर झटका दिया, जिससे वह आर्यन के उस उफनते हुए अंग पर और भी गहराई से दब गई।

अंजलि का चेहरा तकिए में धंसा हुआ था और उसकी सिसकारियां कमरे की खामोशी को चीर रही थीं। आर्यन का मर्दाना हाथ अब अंजलि के बालों को अपनी मुट्ठी में भर चुका था, जिससे वह उसका सिर पीछे खींचकर उसकी गर्दन को और भी बेबाकी से चूम रहा था।

"माँ... आज कॉलेज नहीं... आज सिर्फ आपकी ये मखमली पीठ और मेरा ये फौलाद बातें करेंगे," आर्यन ने उसकी पीठ पर एक गहरा 'लव बाइट' देते हुए फुसफुसाया।

सुबह की उस मखमली रोशनी में अब कोई खेल नहीं, बल्कि एक मुकम्मल 'शिकार' शुरू हो चुका था। आर्यन ने अपनी पकड़ को किसी जंगली शिकारी की तरह और भी मज़बूत कर लिया। अंजलि अब पूरी तरह से उसके भारी जिस्म के नीचे दबी हुई थी, उसकी साँसें तेज़ थीं और शरीर पसीने से भीगने लगा था।

आर्यन ने एक पल भी ज़ाया नहीं किया और अपनी ताकत का अहसास कराते हुए अंजलि की कलाइयों को अपने मज़बूत हाथों में दबोच लिया।

आर्यन ने अंजलि के दोनों हाथ ऊपर की ओर खींचे और उन्हें बिस्तर के सिरहाने की ओर ले जाकर कसकर पकड़ लिया। अंजलि अब पूरी तरह से बेबस थी, उसका सीना बिस्तर पर रगड़ खा रहा था और उसके हाथ आर्यन की मुट्ठी में कैद थे। आर्यन ने उसके कान के पास अपनी भारी और गर्म आवाज़ में फुसफुसाया, "माँ... आज आप कहीं नहीं जा सकतीं। आज आपकी इस मखमली कैद में मेरा ये ७ इंच का शैतान अपनी सल्तनत बनाएगा।"

हाथों को काबू करने के बाद आर्यन ने अपना मुँह अंजलि की सुराहीदार गर्दन पर टिका दिया। वह पागलों की तरह उसकी गर्दन के पिछले हिस्से को चूस रहा था। अंजलि के मुँह से सिसकारियां किसी संगीत की तरह निकल रही थीं— "आह्ह्ह... आर्यन... मम्म... छोड़... बहुत... बहुत तेज़ हो रहा है सब!" गर्दन पर आर्यन के होठों की तपिश अंजलि के दिमाग की नसें हिला रही थी।

आर्यन ने अपने घुटनों और पैरों का इस्तेमाल करते हुए अंजलि की गोरी और चिकनी जांघों को धीरे-धीरे बाहर की ओर फैलाना शुरू किया। अंजलि ने थोड़ी सी रुकावट की कोशिश की, पर आर्यन के भारी शरीर और उसके पैरों के दबाव के सामने उसकी एक न चली। जैसे-जैसे उसकी जांघें फैलती गईं, उसकी चूत अब आर्यन के ७ इंच के नंगे और सख्त फौलाद के सीधे निशाने पर आ गई।

अब अंजलि पूरी तरह से 'एक्स' (X) के आकार में खुली हुई थी। आर्यन ने अपनी कमर को थोड़ा और नीचे धकेला। उसका गरम और नसों से भरा हुआ अंग अब अंजलि की चूत के गीले और रेशमी दरवाज़े पर दस्तक देने लगा था। उस नंगे स्पर्श ने अंजलि के बदन में बिजली की लहर दौड़ा दी। उसे महसूस हो रहा था कि अब उसके ७ इंच के 'बेटे' का ज्वालामुखी फटने के लिए बिल्कुल सही जगह पर पहुँच चुका है।

अंजलि का चेहरा तकिए में दबा हुआ था, उसकी आँखें चढ़ चुकी थीं और वह अपनी कमर को अनजाने में ही ऊपर की ओर झटका दे रही थी ताकि उस गरम लोहे का प्रवेश और गहरा हो सके। आर्यन ने उसकी गर्दन पर एक गहरा निशान छोड़ते हुए अपनी कमर को और भी कस लिया।

"तैयार हो जाओ माँ... आज आपका ये ७ इंच का बेटा अपनी सारी प्यास आपकी कोख में ही बुझाएगा," आर्यन ने दहाड़ते हुए कहा।

सुबह की उस मखमली खामोशी में अब वह घड़ी आ गई थी, जहाँ मर्यादा और रिश्तों की सारी सीमाएं एक ज़बरदस्त विस्फोट के साथ टूटने वाली थीं। अंजलि पेट के बल लेटी हुई थी, उसके दोनों हाथ आर्यन की मज़बूत मुट्ठियों में ऊपर की ओर जकड़े हुए थे और उसके गोरे पैर आर्यन की जांघों के दबाव से पूरी तरह फैल चुके थे।

कमरे की हवा में एक भारी तनाव था। अंजलि की चूत अब पूरी तरह से गीली और गुदगुदी हो चुकी थी, जो अपने ७ इंच के 'शिकारी' का स्वागत करने के लिए बेताब थी। आर्यन ने अपनी कमर को थोड़ा पीछे खींचा और सही निशाना साधा।

आर्यन ने अपनी पूरी ताकत बटोरी और एक ही भीषण झटके के साथ अपना पूरा ७ इंच का नसों से भरा हुआ और खौलता हुआ फौलाद अंजलि की रेशमी गुफा में उतार दिया। वह प्रहार इतना गहरा और अचानक था कि अंजलि का शरीर बिस्तर से एक इंच ऊपर उछल गया। ७ इंच का वह मूसल अंजलि की गहराई की दीवारों को चीरता हुआ सीधे उसकी बच्चेदानी से जा टकराया।

अंजलि के मुँह से एक ऐसी चीख निकली जो कमरे की दीवारों को चीरती हुई सन्नाटे में गूंज उठी— "आह्ह्ह्ह्ह्ह... आर्यन... माँ मर गई! उफ़्फ़... ये क्या... इतना बड़ा... आह्ह्ह!" अंजलि की आँखों के आगे अंधेरा छा गया और उसकी गर्दन पीछे की ओर झटक गई। वह दर्द और चरम सुख का ऐसा संगम था जिसने अंजलि के रूह को कंपा दिया। उसे महसूस हुआ कि उसके अंदर कुछ बहुत ही विशाल और गरम समा चुका है जो उसकी कोख तक पहुँच गया है।

आर्यन ने अपनी कमर का दबाव ज़रा भी कम नहीं किया। उसने अपने ७ इंच के अंग को अंजलि की चूत में पूरी जड़ तक धंसा दिया। अंजलि के गोल और भारी कूल्हे अब आर्यन की जांघों से ज़ोर से टकरा रहे थे। 'चप-चप' की एक गीली आवाज़ कमरे में गूँजने लगी, जो इस बात की गवाह थी कि ७ इंच का शैतान अब अपनी सल्तनत के अंदर पूरी तरह से कब्ज़ा कर चुका है।

अंजलि का शरीर अब थरथरा रहा था। वह दर्द से कराह रही थी, पर उस दर्द में एक ऐसा 'नशा' था जो उसे और गहराई की मांग करने पर मजबूर कर रहा था। उसके हाथ जो आर्यन की पकड़ में थे, अब और भी ज़ोर से भिंच गए। "आर्यन... तूने... तूने मुझे फाड़ दिया... आह्ह्ह... और अंदर... और अंदर डाल अपना ये गरम लोहा!

आर्यन ने अंजलि के बालों को पीछे से पकड़ा और उसकी गर्दन पर अपने दांत गड़ा दिए। ७ इंच का वह फौलाद अब अंजलि की गहराई में अपनी जगह बना चुका था। हर धड़कन के साथ आर्यन का अंग अंजलि की नसों को झकझोर रहा था। सुबह की पहली किरण ने देखा कि एक बेटा अपनी ही माँ को उसकी फंतासियों के चरम पर पहुँचा चुका है।

"आज आप कहीं नहीं जा पाएंगी माँ... आज ये ७ इंच आपकी रूह में उतर चुका है," आर्यन ने भारी आवाज़ में दहाड़ते हुए अपनी कमर को तेज़ी से चलाना शुरू कर दिया।

सुबह की उस सुनहरी रोशनी में अब कोई मर्यादा शेष नहीं बची थी। आर्यन का ७ इंच का फौलाद अंजलि की कोमल गुफा के भीतर अपनी पूरी लंबाई के साथ समा चुका था। अंजलि पेट के बल लेटी हुई थी, उसकी कमर ऊपर उठी हुई थी और आर्यन एक जंगली शिकारी की तरह उसके ऊपर सवार था।

आर्यन ने अब अपनी रफ्तार बढ़ा दी थी। कमरे में जिस्मों के टकराने की 'चप-चप-चप' की आवाज़ें किसी युद्ध के नगाड़े की तरह गूँज रही थीं। लेकिन इस बार आर्यन सिर्फ अपने शरीर से नहीं, बल्कि अपनी ज़ुबान से भी अंजलि की रूह को छलनी कर रहा था।

आर्यन ने अंजलि के दोनों हाथों को बिस्तर के सिरहाने पर और भी ज़ोर से जकड़ लिया। वह पागलों की तरह अपनी कमर को पीछे खींचता और फिर पूरे ज़ोर से अपना ७ इंच का मूसल अंजलि की गहराई में दे मारता। हर धक्का इतना गहरा था कि अंजलि का पूरा शरीर बिस्तर पर आगे की ओर खिसक जाता। "आह्ह्ह... आर्यन... मम्म... मर जाऊँगी... धीरे... उफ़्फ़!" अंजलि की सिसकारियां अब अनियंत्रित हो चुकी थीं।

आर्यन ने अंजलि के कान के पास झुककर अपनी भारी और मर्दाना आवाज़ में उसे ज़लील करना शुरू किया। "बता... कैसी लग रही है अपने बेटे की ये ७ इंच की लाठी? रात को बहुत शेरनी बन रही थी ना... अब बोल! बोल कि तू सिर्फ मेरी रखैल है... मेरी गंदी माँ!"

अंजलि के लिए यह सब असहनीय होता जा रहा था। एक तरफ उसके शरीर के सबसे नाजुक हिस्से पर ७ इंच के गर्म लोहे का भीषण प्रहार हो रहा था, और दूसरी तरफ 'माँ' के पवित्र रिश्ते को सरेआम नीलाम करने वाले वो शब्द। "आर्यन... नहीं... ऐसा मत बोल... आह्ह्ह!" अंजलि रो रही थी, पर उसके आँसू दुख के नहीं, बल्कि उस चरम सुख के थे जो अपमान की आग से पैदा हो रहा था।

आर्यन ने अंजलि के कूल्हों पर एक ज़ोरदार तमाचा जड़ा— 'चटाक'। गोरी गांड़ पर उंगलियों के लाल निशान उभर आए। "चुप रह रांड! आज तुझे तेरी औकात बताऊंगा। तूने ही कहा था ना कि तुझे गालियां पसंद हैं? तो सुन... तू मेरी वो कुतिया है जिसे मैं रोज़ सुबह इसी तरह अपनी मर्दानगी के नीचे कुचलूंगा।"

अंजलि का चेहरा पसीने और आँसुओं से भीग चुका था। वह थर-थर कांप रही थी। आर्यन की गालियां उसके कानों में पिघले हुए सीसे की तरह उतर रही थीं, जिससे उसकी चूत में कामुकता का सैलाब और भी बढ़ गया। वह अपनी कमर को पागलों की तरह गोल-गोल घुमा रही थी ताकि उस ७ इंच के प्रहार का कोई भी कोना खाली न रह जाए।

"हाँ... हाँ आर्यन... मैं तेरी ही हूँ... मुझे और गालियां दे... मुझे और ज़ोर से कूट... फाड़ दे अपनी इस माँ को!" अंजलि अब पूरी तरह से टूट चुकी थी और उसने अपने बेटे की उस वहशी मर्दानगी के आगे घुटने टेक दिए थे।

सुबह की उस मखमली रोशनी में अब हैवानियत और हवस का नंगा नाच शुरू हो चुका था। कमरे में सिर्फ गोश्त से गोश्त के टकराने की 'चटाक-चटाक' और अंजलि की बेकाबू सिसकारियों की आवाज़ गूँज रही थी। आर्यन अब पूरी तरह से अपनी माँ के शरीर और रूह पर कब्ज़ा कर चुका था।

आर्यन ने अपनी रफ्तार को किसी मशीन की तरह तेज़ कर दिया। उसका ७ इंच का फौलाद अंजलि की कोमल गुफा के अंदर-बाहर किसी गर्म आरी की तरह चल रहा था।

आर्यन ने अंजलि के बाल पीछे से झटके और उसके कान में दहाड़ते हुए बोला, "देख अपनी इस हालत को... कैसे कुतिया की तरह मेरे नीचे दबी हुई है! पसंद आ रहा है ना अपने ही जवान बेटे का ये कड़क लंड ? बोल... बोल कि तेरे पति का ५ इंच का खिलौना इस ७ इंच के लोहे के सामने कुछ भी नहीं है!"

गालियों के साथ-साथ आर्यन का हाथ अब अंजलि की भारी और गोल गाँड़ पर कहर बरपा रहा था। 'चटाक... चटाक... चटाक!' हर तमाचे के साथ अंजलि की गोरी त्वचा पर लाल निशान उभर रहे थे। "ये ले रांड! ये उन गंदी फंतासियों की सज़ा है जो तूने बरसों से दबा रखी थी। आज तेरा ये बेटा तुझे वो हर सुख देगा जो तूने माँ बनकर खो दिया था।"

अंजलि के लिए यह सब असहनीय होता जा रहा था। एक तरफ चूत के अंदर वो ७ इंच का फौलादी धक्का, दूसरी तरफ गाँड़ पर पड़ते करारे तमाचे, और कानों में पड़ते वो 'लंड' और 'रांड' जैसे शब्द। इन सबने मिलकर अंजलि के अंदर कामुकता का ऐसा ज्वालामुखी फोड़ दिया कि वह पागलों की तरह थरथराने लगी।

अंजलि की आँखों के आगे सितारे नाचने लगे। उसके पैर कांपने लगे और उसकी योनि की दीवारें आर्यन के ७ इंच के अंग को पागलों की तरह भींचने लगीं। "आह्ह्ह... आर्यन... हाँ... मैं... मैं तेरी रांड हूँ! मार मुझे... और ज़ोर से कूट... उफ़्फ़ ये तेरा गरम लंड ... मुझे खत्म कर देगा! मैं... मैं आ रही हूँ... आह्ह्ह्ह्ह!"

अंजलि का शरीर अब धनुष की तरह तन गया था। वह अपने परम सुखके बिल्कुल करीब थी। आर्यन की गालियों ने उसके दिमाग के उस हिस्से को झकझोर दिया था जहाँ सिर्फ आदिम हवस बसती है। वह बिस्तर की चादर को अपने दांतों से काट रही थी और उसकी गाँड़ अनजाने में ही पीछे की ओर झटके मार रही थी ताकि वह उस ७ इंच के 'मूसल' को अपनी कोख के और करीब महसूस कर सके।

"तैयार हो जा माँ... अब तेरा ये बेटा अपना सारा गरम लावा तेरी इस गंदी गुफा में भरने वाला है!" आर्यन ने अपनी आखिरी और सबसे तेज़ पारी शुरू करते हुए कहा।

सुबह की उस सुनहरी रोशनी में जब हवस अपने सबसे ऊँचे शिखर पर थी, कमरा 'चप-चप' की आवाज़ों और अंजलि की मदहोश सिसकारियों से गूँज रहा था। अंजलि चरम सुख की उस दहलीज पर खड़ी थी जहाँ से वापसी मुमकिन नहीं थी। उसका पूरा शरीर कांप रहा था, उसकी चूत की दीवारें आर्यन के ७ इंच के फौलाद को पागलों की तरह भींच रही थीं। उसे लग रहा था कि अगले ही पल आर्यन का गर्म लावा उसकी कोख को जला देगा।

लेकिन तभी, आर्यन ने कुछ ऐसा किया जिसकी कल्पना अंजलि ने अपने बुरे सपनों में भी नहीं की थी।

आर्यन ने अचानक अपनी कमर की रफ्तार रोकी और एक झटके में अपना नंगा और कड़क लंड अंजलि की गहराई से बाहर खींच लिया। हवा के संपर्क में आते ही वह ७ इंच का मूसल और भी लाल और भयानक दिखने लगा। आर्यन बिना कुछ बोले, झटके से अंजलि के ऊपर से उतरा और बिस्तर के साइड में हाथ के सहारे सिर टिकाकर लेट गया।

जैसे ही वह गर्म लोहा बाहर निकला, अंजलि को महसूस हुआ जैसे उसके शरीर के अंदर से उसकी रूह खींच ली गई हो। वह अधखुली अवस्था में, अपनी उठी हुई गाँड़ के साथ वहीं जमी रह गई। उसकी चूत की नसें अब भी खाली हवा में फड़क रही थीं, जो उस ७ इंच के दबाव के लिए तरस रही थीं। "आ... आर्यन? ये... ये क्या किया तूने? रुक क्यों गया?" अंजलि की आवाज़ में एक अजीब सी बेबसी और तड़प थी।

आर्यन चुपचाप लेटा हुआ अपनी माँ के उस तड़पते हुए चेहरे को निहार रहा था। उसके चेहरे पर एक विजेता जैसी मुस्कान थी। वह देखना चाहता था कि उसकी माँ, जो उसे गालियां देने पर उकसा रही थी, अब इस 'अधूरेपन' में कैसे तिलमिलाती है। उसकी नज़रें अंजलि की उन कांपती हुई जांघों पर थीं जो अब भी फैलने की कोशिश कर रही थीं।

अंजलि के लिए यह किसी मौत की सज़ा से कम नहीं था। जब एक औरत चरम सुख के इतने करीब हो और उसे वहीं छोड़ दिया जाए, तो उसका शरीर आग के गोले की तरह तपने लगता है। "आर्यन... बेटा... प्लीज... ऐसे मत कर... मैं... मैं मर जाऊँगी... डाल ना अपना ये गर्म लंड वापस... मुझे खत्म कर दे!" अंजलि अब गिड़गिड़ा रही थी। उसकी सिसकारियां अब रोने जैसी आवाज़ में बदल गई थीं।

आर्यन ने ठंडे लहजे में कहा, "क्यों माँ? अभी तो आप गालियां सुन रही थीं... अभी तो आप मेरी 'रांड' बनी हुई थीं। अब क्या हुआ? अब क्यों इस ७ इंच के लिए ऐसे तड़प रही हो?" आर्यन का यह बर्ताव अंजलि की गरिमा को पूरी तरह कुचल रहा था। उसे अहसास हुआ कि आर्यन अब सिर्फ उसका शरीर नहीं, बल्कि उसके दिमाग और उसकी तड़प के साथ भी खेल रहा है।

अंजलि ने पलटकर आर्यन की ओर देखा। उसकी आँखों में हवस की लाली और आँसुओं की नमी एक साथ थी। उसका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था और उसके होंठ कांप रहे थे। वह बिस्तर पर रेंगती हुई आर्यन के पास आई और उसके उस खड़े हुए ७ इंच के अंग को अपने हाथों में भर लिया।

"तू बहुत निर्दयी हो गया है आर्यन... ज़्यादा खतरनाक," अंजलि ने उत्तेजना में हांफते हुए कहा, "तुझे मज़ा आ रहा है ना मुझे ऐसे तड़पता देख कर?"
 
इस बार मुझे अच्छा सा कमेंट का इन्तेजा रहेगा और अगले अपडेट में एक सीक्रेट रिविल होने वाला है

सो दोस्तों इस बार अच्छा सा कमेंट करना

इनबॉक्स भी ओपन है B-)
 
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