Doctor Sahab Desi Hindi Sex Kahani - Page 4 - SexBaba
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Doctor Sahab Desi Hindi Sex Kahani

Episode 26

मल्टी बिस्तर पे नंगे लेती हुई थी वो जोर जोर से सास ले रही थी. आज अपने बहु के सामने चुड़ते हुए वो जितनी गर्म हुई और आज जितनी जोश के साथ उसकी चुदाई हुआ उतना पहले नहीं हुआ था. मल्टी को तो लग रहा था ये सब मेरी शक्तियों का कमल है. दीवानी तो वो मेरी पहले hi हो चुकी थी लेकिन अब वो मुझे अपना भगवन मन ने लगी थी. वो बस प्यार भरे नजर से मुझे देख रही थी.

मई अब आरती की तरफ देखता हूँ, उसकी सांसें तेज़ी से चल रही थी , उसकी आँखें गर्मी से भरी हुई थी.

मैं आरती पास जाता हूँ, अपना हाथ उसके चेहरे पर रखा और bola-Aarti, अब तुम्हारी बारी है. यह काली शक्ति तुम्हारे अंदर भी घुस चुकी है. मैं इसे निकालूंगा.

आरती के कपडे तो आधे से ज्यादा कब के खुल चुके थे अब बस उसे आरती के बदन से आजाद करना था जो काम मई सुरु कर दिया.

मई उसके कपडे उतारने लगा, उसके ब्लाउज को खोल देता हूँ. उसकी चूचियां बहार निकल आती हैं, टाइट और गोरी, निप्पल्स सख्त हो चूका था.

मैं बड़े प्यार से आरती के चुकी के निप्पल हाथ से मसला और ज़ोर से दबा दिया. आरती की चीख निकल गयी- आह्हः... डाक्टर saab...aaram से... लेकिन मैं नहीं रुकता, मैं उसके निप्पल्स को मुँह में ले लिया और चूसना सुरु कर दिया, काट ने लगा, और वो मचलने लगी.

अब मैं उसको बीएड पर धकेल दिया, मल्टी के बगल में.

मई आरती की पैरों को फैला दिया. उसके बुर से कॉमर्स हल्का हल्का रिस रहा था वो पूरी तरह से गीली हो चुकी थी.

मई अपना लुंड आरती की कमसिन बुर पे टिका दिया.

आज मई भी जोश में था. मेरे लिए भी ये पहला बार था जब मई कोई कुवारी बुर छोड़ने वाला था.

मई अपना लुंड का टोपा आरती के बुर के ऊपर रगड़ने लगा. आरती जोर जोर से तड़पने लगी अपना पेअर पटकने लगी. मुझे अपने लुंड पे आरती के बुर गर्मी फील हो रहा था.

आरती तड़प उठी और बोली- डाक्टर साब... अंदर डालो... अब बर्दास्त नहीं होता.

मैं अपना लुंड अच्छे से आरती के बुर पे टिकाया और ज़ोर से धक्का मारा,

मेरा लुंड फट्ट्ट्ट से आरती के कमसिन बुर को फाड़ते हुए आधा अंदर घुस गया.

आरती दर्द में जोर से चीखी ahhhhhhhhhnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnnn maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa.

मई तुरंत आरती के मुँह पे हाथ रख दिया.

मुझे पता था अभी अगर मई रुक गया तो चुदाई नहीं हो पायेगा.

मई आरती के दोनों हाथ को मजबूती से अपने हाथ से पकड़ा और जोर डर धक्का मारा और sarrrrrrrrrr से मेरा मोटा लुंड आरती के गर्म तीग़ बुर को चीरता हुआ बच्चेदानी तक घुस गया.

आरती की फिर से चीख nikli-Aaaahhhhh! Maaaaaaaaaaaar gaaaaaaaaaayi! इतना बायदा... aaaahnnnnnnnnnnn!

मई नहीं रुका, मई जोर से आरती का हाथ थामे उसके होठों को अपने होठं में कास के तेज़ तेज़ धक्के मारने लगा, हर धक्का इतना ज़ोर का की बीएड हिलने लगा. उसकी बुर टाइट थी, मेरे लुंड को जकड रहा था, लेकिन मैं ज़ोर से अंदर बहार करने लगा.

आरती बुर पनियाया हुआ था इस लिए पानी की आवाज़ें आ रहा था – छाप छाप छाप!





आरती को अब मजा आने लगा.

आरती चिल्लाती है - आह्हः... डाक्टर साब... ज़ोर से... और ज़ोर से..............

मैं उसकी टांगें ऊपर उठा देता हूँ, शोल्डर्स पर रख देता हूँ, और अब धक्के और गहरे हो जाते हैं. हर धक्का उसकी बच्चेदानी तक पहुँचता है, वो चीखती है, "ोोूह मा... मर जाउंगी... इतना मजा... आआह!" मैं उसकी चूचियां दबाता हूँ, निप्पल्स को मसलता हूँ, और स्पीड बढ़ा देता हूँ – तेज़, जोर दार, बिना रुके.





अब मैं उसको उल्टा करता हूँ, डोगग्य स्टाइल में, उसकी गांड ऊपर करता हूँ. फिर से लुंड अंदर घुसा देता हूँ, और अब धक्के और वाइल्ड हो जाते हैं. मैं उसके बाल पकड़ता हूँ, पीछे से खींचता हूँ, और ज़ोर ज़ोर से पेलता हूँ. आरती की चीखें कमरे में गूँज रही हैं, "आआह... हाँ... डाक्टर साब... छोड़ लो मुझे... पूरा अंदर... आआह!" उसकी बुर से पानी बाह रहा है, मेरे बॉल्स तक गिला हो गया है. मैं और तेज़ करता हूँ, हर धक्का इतना पावरफुल की उसका पूरा बदन हिल जाता है.





मजा इतना था की मैं कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा, लेकिन मैं रुकता नहीं. अब मैं उसको मिशनरी में लाता हूँ, उसके ऊपर चढ़ जाता हूँ, उसके होंठों को चूमता हूँ, जीभ अंदर डालता हूँ, और नीचे तेज़ धक्के जारी रखता हूँ. आरती की आँखें बंद हैं, वो बस चीख रही है, "आआह... क्युम्मिंग... मैं आ रही हूँ... डाक्टर साब... आआह!" उसकी बुर सिकुड़ती है, मेरे लुंड को दबती है, और वो झाड़ जाती है, पानी की धार निकलती है.





लेकिन मैं अभी भी नहीं रुकता, और ज़ोर से पेलता हूँ, और फाइनली मैं भी झड़ने लगता हूँ. ज़ोर से चीखता हूँ, "आरती... ले लो... यह शक्ति निकाल रहा हूँ!" और पूरा माल उसकी बुर में भर देता हूँ, गरम गरम. हम दोनों थक कर लेट जाते हैं, सांसें तेज़ी से चल रही है.

आरती के सील टूटने से निकला खून बिस्तर पे लग चूका था जो उसके काम रास और मेरे काम रास से मिला पड़ा था. आरती अब उठने की हालत में नहीं थी. अक्सर मई खुद पे कण्ट्रोल कर लेता था लेकिन आरती की गरम बदन ने मुझे भी खूब जोश में ला दिया था.

वैसे तो मेरा नजर मल्टी और आरती दोनों के गांड पर भी था लेकिन मई जनता था अगर मई आज इन दोनों की गांड भी पेल दूँ तो ये दोनों 2-3 दिन तक उठ नहीं पाएंगे . मुझे कोई हड़बड़ी नहीं था. मई अपना बीज आरती के गर्भाशय में पूरा भर चूका था. मुझे उम्मीद था अगर मई आरती को ऐसे hi 10-15 दिन प्यार करूँगा तो उसके गर्भ में बच्चा जरूर ठहर जायेगा.

मई एक बार प्यार से आरती और मल्टी को चूमा फिर दोनों को चादर ओढ़ा कर घर से निकल गया.
 
Episode 27

मई आरती और मल्टी की चुदाई के बाद घर गया. रात काफी हो गया था. मई जब घर का दरवाजा खोला और अंदर गया तो देखा मौसी सो रही थी. उन्हें उठाया फिर हम दोनों साथ में खाना खाये और फिर सो गए. अगली सुबह जब मेरा नींद खुला तो मई मौसी के पास गया.

मई मौसी से पूछा- अब घाव कैसे है.

मौसी boli-ab ठीक हो रहा है.

मई bola-mousi क्या सोचा आपने.

मौसी boli-mujhe थोड़ा और समय चाहिए.

मई bola-thik है जैसी आपकी मर्जी. मेरे तरफ से कोई प्रेशर नहीं है. बस मई ये चाहता हूँ की आप जब भी फैसला ले तो अपने पुराने दिन याद करके न ले बल्कि मुझे याद करके ले.

मेरी बात पे वो बस हल्का सा मुस्कुरायी फिर हम दोनों सुबह का खाना खाये.

अब मुझे फिर से जाना था एक बार आरती और मल्टी को देखने. मुझे पता था मल्टी को कुछ नहीं होगा ज्यादा लेकिन आरती बेचारी का तो कह पहला रात था. हो सकता है उसका तबियत ख़राब हुआ हो. वैसे मई मल्टी को कुछ दवा दे आया था जो मई उसे बोलै था आरती को दे देना.

मई घर से निकला तो फिर से मुझे वही sannnnnnnnnn से तेजी से निकलता हुआस्कॉर्पिओ दिखा जो राम बाबू के घर की तरफ मुद गया.

मई मन में socha-ye साला वीरेन राम बाबू के घर क्या करने जा रहा है.

और मई भी उधर hi चल दिया. मई जबतक राम बाबू के घर के बहार दरवाजे पे पंहुचा तो अंदर देखा वीरेन तेज आवाज में राम बाबू को बोल रहा था.

वीरेन का awaj-dekho मुझे आज के आज 6 हज़ार चाहिए. जब तुम मुझसे उधर लेने आया था तब तो बड़ा बड़ा बात बोलै था समय से पैसा दे देगा. अब क्या हुआ. देखो या तो पैसे दे दो नहीं तो दूसरा रास्ता है तुम्हारे पास चुकाने का. कल तक का समय दे रहे है. अगर पैसे नहीं दिए तो देख लेना तुम्हारे हिस्से की बाकि जमीं में से भी आधा मेरा हो जायेगा. या तो कल तक पैसे चूका दो या अपनी जमीं के कागज ले आना.

ये बोलकर वीरेन उधर से निकला अपनी सकषो में बैठा और निकल चला.

वीरेन के जाते hi मई देखा राम बाबू जमीं पे बैठ कर रोने लगे. उसकी बीवी सुधा उन्हें सँभालने का कोसिस कर रही थी.

ऐसे उनलोगों को रोटा देख मेरा दिल पसीज गया.

मई चुप चाप वाहन से निकला अपने घर गया और 6 हज़ार रूपये अपने पर्स में से निकल कर ले आया.

इस काम में एक आधा घंटा और बिट चूका था. जब मई राम बाबू के घर गया तो राम बाबू अब थोड़ा संभल चुके थे लेकिन अभी भी पास पड़े खटिया पे उदास बैठे हुए थे. दयसरे खटिया पे उनका बीटा लेता हुआ था जो कल के मुकाबले आज थोड़ा ठीक लग रहा था.

मई जैसे hi उनके घर में घुसा मुझे देखते hi राम बाबू अपना अंशु छुपाते हुए मेरे पास आये और bola-dekhiya न डाक्टर साहब आपने क्या मंत्र मारा मेरा बीटा ठीक होने लगा.

मई bola-mujhe पता है राम बाबू. मुझे अपनी दिव्या शक्तियों से ये भी पता चला है की आपके सर पे दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. देखिये मई ज्यादा कुछ तो नहीं कर सकता लेकिन फिलहाल के लिए ये पैसे रख लीजिये. ये बोलकर मई 6 हज़ार अपने हाथ से आगे बढ़ा दिया.

ये पैसा देखते hi राम बाबू कांप गए. उनकी पत्नी सुधा और उसकी बहु भीआँख फाड़ फाड़ कर मुझे देखने लगी. ऐसे एक से बढ़कर एक शक्ति देखकर वो लोग सचमे मान गए की मई कोई मामूली आदमी नहीं हूँ.

राम बाबू bole-dakter साब हम ये पैसे हम नहीं ले सकते. हम ऐसे hi कर्ज में दुबे हुए है. आपके पैसे फिर कैसे लौटाएन्गे.

मई bola-ye पैसे ले लीजिये. आपको पैसे नहीं लौटने है. हाँ कभी भविस्य में जब आप सक्षम हो जायेंगे तब लौटा दीजियेगा. बस ये बात इस घर के अलावा कही नहीं जाना चाहिए की मैंने आपको पैसों की मदद की है. मुझे झूठ मुठ की तारीफ और नाम नहीं चाहिए. ये बोलकर पैसे मई राम बाबू के हाथ में दे दिया और चल दिया आरती के पास. मई अब आरती के घर जा hi रहा था की एक आदमी अपना बच्चा लेकर मेरे पास आ गया.

मई पूछा क्या हुआ तो वो इंसान bola-hum बाबा के दरबार में गए थे. उनके पास इतना समय नहीं था की सबको देख पाए तो हमे नगमा जी ने आपके पास भेजा है. हम बहुत उम्मीद से आये है.

मई उनके बच्चे को लेकर अपने छोटे से हॉस्पिटल वार्ड में लाया. चेक किया. बीमारी कोई गहरी नहीं थी. मई फिर कुछ तनरा म्नत्र का नाटक किया. दो टेबलेट खिलाया और कुछ दवा उन्हें देकर bola-ise हर सुबह नास्ते के बाद और हर रात खाने के बाद खिलाये. आपके बच्चे पे जो भी बुरा साया है सब तक जायेगा सब भला होगा.

ये सब में hi दिन हो गया. फिर रंजू और जरा भी आ गयी. रंजू तो बस अपना सिग्न की थोड़ा देर इधर उधर घूमी फिर मुझे ऑंखें दिखते हुए निकल गयी जैसे मुझे बोल रही हो हिम्मत है तो रोक के दिखाओ.

मई और जरा फिर थोड़ा ऑफिस का काम kiye.aise hi शाम हो गया तब जाकर छुट्टी मिला.

शाम में हॉस्पिटल बंद करके मई पंहुचा आरती के घर.

मल्टी तो मुझे देखते hi खुश हो गयी और बड़े इज्जत से boli-aaiye आइये डाक्टर साब बैठिये.

मई pucha-aarti कैसी है.

मल्टी boli-achhi है. आपने बोलै था रात में शक्तियां फिर से बढ़ेगी वैसा hi हुआ था. आरती का बदन तपने लगा था. आपने जो जादू की गोली दी थी वो उसे भी खिला दी और खुद भी खा ली देखिये मई बिलकुल ठीक हूँ. आरती भी ठीक है.

मल्टी फिर थोड़ा शर्मा के boli-bas चलने में थोड़ा दिक्कत होता है वो ठीक हो जायेगा.

मई फिर मल्टी के हाथों का बना चाय पिया फिर आरती के कमरे में गया. वो बिस्तर पे लेती हुई थी. उसका तबियत अब ठीक लग रहा था. मुझे यकीं था कल परसो तक ये अच्छी हो जाएगी.

फिर मई दोनों के माथे पर प्यार से हाथ फेरा. वो दोनों भी मुझे इतने प्यार से देखि जैसे मई उनका न जाने कितने जन्मो से अपना हूँ.

मई bola-mai चलता हूँ. देखता हूँ कल या परसो फिर आऊंगा इलाज करने. ये शक्तियां धीरे धीरे जाएगी लेकिन जाएगी जरूर.

वो दोनों मुस्कुराये जैसे उन्हें मुझपे खुद से भी ज्यादा भरोसा था.

मई फिर वहां से निकला तो जाते जाते शमीमा से भी मिलता गया. वो भी खुश थी और उसका शोहर भी.

शाम ढल चूका था. अँधेरा होने को था. मई वापस घर लौटा और घर का दरवाजा खोलने hi वाला था की पीछे से एक दम धीमा आवाज आया सुनिए.

मई मुदा तो देखा सामने सुधा जी कड़ी थी. राम बाबू की पत्नी. आँखों में ाशूँ लिए.

मई तुरंत अपने घर के बगल वाला हॉस्पिटल खोला और उन्हें अंदर बुलाया. जैसे hi मई उनका ाशूँ पोछने के लिए रुमाल बढ़ाया तो वेरा हाथ पकड़ कर रो दी.

मई समझ गया मामला काफी गंभीर है. मई उन्हें सहर दिया वो 2-3 मिनट ाशूँ बहाई फिर खुद को संभाली. मई उन्हें पास में पड़े कुर्सी पे बैठा दिया और उनके सामने बैठ गया.

मई bola-dekhiye मई जानता सबकुछ हूँ लेकिन आपके मुँह से सुन न चाहता हूँ. आप दुःख बाटेंगे तो आपका दुःख घटेगा. मई बताऊंगा तो बढ़ेगा. वैसे मई जनता कुछ नहीं था ये बस एक तुक्का था जो निशाने पे लगा.

सुधा boli-baat ये है की एक ज़माने में हमारे पास भी बहोत जमीं था पैसे थे खुशियां थी लेकिन फिर हमारे घर को ग्रहण लग गया. पता नहीं किसकी नजर लग गयी. हमारा बीटा बीमार रहने लगा. हर साल में एक बार उसका तबियत इतना बोगद जाता की लगता वो नहीं बचेगा. ये बोलते बोलते फिर वो रोने लगी.

मई उन्हें सहरा देकर चुप कराया.

सुधा फिर boli-fir हम बाबा के पास जाने लगे. 4-5 साल लगातार गए. हर साल बाबा हमसे कुछ जमीं ले लेते. कभी पैसे मांगते तो हम जमीं ठाकुर वीरेन को देकर पैसे बाबा को देते. लेकिन ऐसा करते करते हम गरीब हो गए. एक साल ऐसा आया जब न तो हमारे पास ज्यादा जमीं बचा था न hi पैसा लेकिन मई अपने बच्चे को यु तड़प कर जान देते हुए नहीं देख सकती थी इसलिए मई वीरेन के पास गयी. उसने एक सौदा किया. हर साल में एक बार वो मेरे....

इतना बोलकर सुधा रुक गयी......

मई pucha-ye कितने सालों से चल रहा है.

सुधा boli-pichle दो साल से लेकिन इस बार वो कमीना बोलै अब इसे मई नहीं मेरी बहु चाहिए...

फिर सुधा रट हुए मेरे पेअर पे गिर गयी.

सुधा रट हुए boli-aapko नहीं पता आपके पैसे ने आज क्या किया है. आपके पैसे ने हमारे घर की इज्जत आबरू बचा ली. आपने हमारे बच्चे को ठीक किया. वो भी अब ठीक हो रहा है. जब से आप हमलोगों के जिंदगी में आये है हमारा पूरा परिवार ठीक हो रहा है.

मई सुधा को थोड़ा और सांत्वना दिया उन्हें संभाला. जब वो फिर से थोड़ा शांत हुई तब मई पूछा ये वीरेन ऐसा किसके किसके साथ करता है.

सुधा boli-mai गांव के तीन चार औरतो को जानती हूँ जिसका फायदा वीरेन उठता है.

सुधा फिर boli-in सबमे सबसे बुरी फांसी है रंजू.

मई रंजू का नाम सुनके चौक गया.

मई bola-ranju...

सुधा boli-haan. आपको पता है रंजू की बेटी को बच्चा नहीं हो रहा. वो अपनी बेटी का कुछ उपचार वगैरह करवा रही है बड़े सहर में. सुना है वहां बहुत पैसे खर्च होते है.

फिर सुधा boli-mai तो यहाँ तक सुनी हूँ की रंजू का हरमहीने 10-12 हज़ार उपचार में चला जाता है. पिछले दो साल से वो ये कर रही है. मई तो यहाँ तक सुनी हूँ की अगर इस साल उसकी बेटी को बच्चा नहीं हुआ तो उसके ससुराल वाले उसके बेटी को घर से निकल देंगे.

वीरेन की भी नजर अब उसके बेटी पर है.

फिर सुधा गुस्से में boli-viren की नजर तो पुरे गांव की जवान बहु बेटियों पर है.

मई फिर bola-wo सब बातें छोड़िये अँधेरा बढ़ रहा है. आपने मुझे सुक्रिया भी बोल दिया अब आपको घर जाना चाहिए.

सुधा boli-ek बात बोलूं डाक्टर साब.

मई bola-boliye.

सुधा boli-dekhiye हम गरीब है लचर है. इसमें कुछ मेरी गलती है कुछ मेरे मरद की गलती है. हमे समय रहते hi गांव से बहार जाकर कोई अच्छे से तांत्रिक या डाक्टर को दिखाना चाहिए था. आप तो डाक्टर भी है और तांत्रिक भी. आपको पता है आपसे पहले भी यहाँ एक डाक्टर आयी थी. वो भी एक बार हमारे घर आयी थी. वो बोली भी थी वो मेरे बेटे को ठीक कर सकती है लेकिन बाद में पता चला वो खुद hi चुड़ैल है. अगर उसपे चुड़ैल न चढ़ता तो क्या पता वो मेरे बेटे को बचा पति और तब मेरी भी इज्जत बच पाजी खैर जो हुआ सो हुआ. अब अतीत बदल नहीं सकता लेकिन आप अगर हमारे घर पे ध्यान से तो हमारा घर अब जरूर बदल सकता है. देखिये जब हम बाबा के पास जाते है तो वो पैसे मांगते है. ठाकुर के पास जाते है तो वो हमारा जिस्म मांगता है. आप एक लौटे ऐसे हो जिसने हमारे बच्चे को ठीक भी किया और हमे पैसे भी दिए. अगर हम आपको बदले में कुछ भी न दे तो हमारा वजूद hi क्या रह जायेगा.

इसके बाद सुधा कड़ी हुई. मई देखा उनका सास अब बढ़ रहा था. उनका हाथ कामपर रहा था. वो कंपते हाथों से अपना हाथ अपने कंधे पे राखी और साड़ी का पल्लू गिरा दी.

सुधा सर झुका कर रट हुए boli-dakter साब हमारे पास और कुछ नहीं है काम से काम आप मेरा ये जिस्म hi ले लीजिये. ये मई आपको किसी मजबूरी में नहीं दे रही हूँ बल्कि अपनी ख़ुशी से दे रही हूँ. काम से काम मुझे ये तो तसल्ली रहेगा की जिस महँ लड़के ने मेरे बच्चे को नया जन्म दिया मेरी बहु की आबरू बचा ली उसका कुछ तो कर्ज हम चूका पाए.

मई तुरंत साड़ी का पल्लू उठाया और उनके कंधे पे रख दिया.

मई मन में सोचा वीएस राम बाबू तो अच्छे इंसान है लेकिन उस अच्छाई का क्या फायदा जो अपनी बीवी और बहु की इज्जत भी न बचा पाए. वैसे भी सुधा को देख कर लगता नहीं है की इन्हे भी ज्यादा खुशियां जिंदगी में मिली है. कुछ खुशिया का हक़ तो इनका भी है. लेकिन मई इस तरह से इनके साथ ये सब नहीं करना चाहता था.

मई bola-dekhiye सुधा जी मैंने आप पर कोई अहसान नहीं किया है. रही बात जिस्म की तो मई तब तक किसी के साथ सम्बन्ध नहीं बनता जबतक वो दिल से मुझे अपना माने.

मई आपसे वडा करता हूँ मई आपसे मिलने हर दिन आऊंगा. लेकिन सम्बन्ध उसी दिन हम दोनों का बनेगा जिस दिन आप ख़ुशी ख़ुशी मेरे पास आएँगी जैसे कोई नयी नवेली दुल्हन अपने पति के पास जाती है पहली रात को. अगर हम दोनों के बिच प्यार होगा तभी ये जिस्म मिलेंगे तो रूह मिलेगा.

मई फिर थोड़ा सा झूठ bola-agar रूह मिलेंगे तभी तो आपके घर का बचा खुचा कला साया भी भाग जायेगा और आपकी जिंदगी में और खुशियां आएँगी. अभी के लिए आप जाइये. मई आपको मन नहीं कर रहा बस थोड़ा समय मांग रहा हूँ.

ये बोलकर मई उन्हें प्यार से समझाया और घर भेज दिया.
 
Episode 28

मई सुधा को भेजने के बाद घर आया. आज और कुछ नहीं हुआ. मई अपनी मौसी के साथ खाना खाया और फिर अपने बीएड पे सोने चला गया. मेरे दिमाग में वो बात घूम रहा था जो सुधा जी बोल गयी थी रंजू के बारे में. मई बहुत कुछ सोचा और फिर सो गया. अगली सुबह जब नींद खुला तो आज सुबह से hi मई रंजू का इंतजार में लग गया. सुबह खा पीकर अपने छोटे से चिकित्सा विभाग में सुबह 9 बजे से hi बैठा रहा. लगभग 11 बजे रंजू आयी और किस्मत से जरा नहीं आयी थी. मुझे मौका मिल गया रंजू से अकेले में बात करने का.

मई रंजू को bola-ranju जी आपको क्या लगता है मेरे अंदर दिव्या शक्तियां है या नहीं है.

रंजू मेरे तरफ अजीब नजरों से देखि और boli-docter ये सब झूठ से गांव वालों को फुसलाना समझे.

मई मुस्कुरा कर बोलै- जहाँ तक मेरी शक्तियां जाती है मुझे पता है आपकी बेटी को बच्चा नहीं हो रहा.

मेरी बात सुनते hi रंजू का भाव बदल गया. वो बिलकुल शांत हो गयी और गंभीर आवाज में boli-ye बात आधे गांव के कुछ लोगों को पता है. तुझे पता चल गया तो कोई बड़ी बात नहीं है.

मई bola-ek पते की बात बताऊ जो तुम्हे नहीं पता.

रंजू boli-kya.

मई bola-kami तेरी बेटी में नहीं दामाद में है.

रंजू boli-meri बेटी का परिवार सहर में रहता है. कोई अनपढ़ गवर लोग नहीं है. अगर मेरे दामाद में कोई कमी होता तो वो लोग उसका इलाज करते.

मई bola-padha लिखा होना अलग बात है. ईंमानदार होना अलग बात है.

क्या पता कमी आपके दामाद में हो लेकिन इल्जाम वो लोग आपकी बेटी पे दाल रहे हो.

ये सुनते hi रंजू एक पल में सोच में पद गयी.

मई bola-ek बात बोलूं. तुम एक महीने के लिए अपनी बेटी को गांव ले आओ. मई उसे प्रेग्नेंट कर दूंगा.

ये सुनते hi रंजू गुस्से में boli-doctorrrrrrr........... और मेरा कालर पकड़ ली.

मई बिलकुल शांत आवाज में bola-dekho रंजू अगर कमी तेरे दामाद में है तो तू लाखो क्या करोड़ो खर्च कर ले तुम्हारी बेटी माँ नहीं बन पायेगी. अगर तेरी बेटी माँ नहीं बन पायी तो तुम्हारे पैसे तो डूबेंगे hi साथ hi तुम्हारी बेटी को वो लोग तलाक भी दे देंगे.

फिर तुम्हारी बेटी आएगी इस गांव में. जहाँ रहता है ठाकुर वीरेन.

तुम अपनी बेटी को कितने दिन बचा पाओगी ठाकुर वीरेन के चंगुल से एक दिन, दो दिन दो महीना , एक साल क्या इस से ज्यादा बचा पाओगी.

जिस तरह जिल्लत की जिंदगी तुम जी रही हो उस से भी ज्यादा जिल्लत भरी जिंदगी तेरी बेटी की होगी.

मेरा बात सुनकर धीरे धीरे रंजू का पकड़ मेरे कालर से ढीला होने लगा.

रंजू boli-jab मेरी बेटी को गर्भ hi करना है तो तुमसे क्यों. सहर में लाखो लड़के है. कोई भी अच्छा लड़का देख कर उसके साथ करवा लुंगी डॉक्टर की देख रेख में.

मई bola-bilkul सहर में लाखो क्यों हमारे देश में करोड़ो लड़के है लेकिन क्या उनमे से एक पर भी तुम या तुम्हारी बेटी भरोसा कर पायेगी. क्या गुररंटी है की बाद में वो धोखा न देगा. तुम्हे ब्लैकमेल नहीं करेगा.

रंजू boli-tumhari क्या गुरंटी की तुम अच्छे हो.

मई bola-arey इस गांव में hi मेरे पास बहुत ऑप्शन है. मई सहर जाऊंगा तो वहां भी मेरे पास बहुत ऑप्शन होंगे. मुझे पैसो की भी कमी नहीं है.

रंजू boli0jab तुम्हे कुछ भी नहीं चाहिए तो मेरी बेटी के पीछे क्यों पड़े हो.

मई मुस्कुरा कर bola-tum माल दिखती हो तो तुमजरी बेटी भी माल hi होगी.

रंजू boli-tu मुझे जनता नहीं है. मई वीरेन से बोल कर तेरी खाल उतरवा दूंगी.

मई bola-mera क्या वीरेन मुझे मर देगा या फिर मई गांव छोड़ कर भाग जाऊंगा लेकिन एक बात याद रखना तुम्हे इतना अच्छा मौका दोबारा कभी नहीं मिलेगा. एक बार मेरी पोस्टिंग इस गांव से हटी फिर मई दोबारा तुम्हे नहीं मिलने वाला. अब मर्जी तुम्हारी है.

मेरी बात सुनकर रंजू गुस्से में दफ्तर से निकल कर चली गयी.

मुझे पता था मैंने अपना काम कर लिया है. मुझे जो रंजू के दिमाग में डालना था दाल दिया है. आज नहीं तो कल नहीं परसो रंजू को मदद मांगने मेरे पास आना hi होगा क्यूंकि जिस मुसीबत में वो है उसका उपाय मई hi हूँ. मेरे अलावा इस गांव में दूसरा कोई उसकी मदद नहीं कर सकता.

एक बार रंजू को मई अपने कब्जे में कर लून तो ये बहुत काम आएगी. बाबा को भी बर्बाद करने में और वीरेन को भी बर्बाद करने में.
 
Episode 29दोपहर का वक़्त था. सूरज सर पर था और गांव की गलियों में सन्नाटा. रंजू से बात होने के बाद मई सोच रहा था अब क्या करून फिर याद आया एक बार आरती और मल्टी के पास से घूम आते है. उन दोनों का हाल चल भी देख लेंगे.

मई सीधा मल्टी और आरती के घर चल दिया.

मई जैसे hi मल्टी के घर के अंदर घुसा तो रसोई से साग और रोटी का बढ़िया खुशबू आ रहा था. मल्टी चूल्हे के पास बैठी खाना बना रही थी और आरती वहीँ पास में बैठी सब्जी काट रही थी.

दोनों जैसे hi मुझे देखि, दोनों के आंख में ऐसा चमक आया जैसे उनका पूरा संसार उनके सामने खड़ा हो.

मल्टी फटाफट उठी और भाग के मेरे पास आयी.

मल्टी झुक कर मेरा पाऊँ चुने hi वाली थी की मई उसका हाथ पकड़ लिया तो देखा उधर आरती भी लड़खड़ाते हुए उठी और मेरे तरफ आ hi रही थी मई तुरंत उसके पास गया और सहारा दिया.

जैसे hi मई आरती को सहर दिया बेचारी शर्म से दोहरी हो गयी. उसको अचानक से कल रात का चुदाई याद आ गया. रात का बात और था और अभी दिन में बात बिलकुल अलग बेचारी बहुत शर्मा रही थी.

मई प्यार से आरती को फिर से बैठाया वही मल्टी भी आ गयी.

मई मल्टी को bola-dekhiye आप मुझसे बहुत बड़ी है आपको मेरे पेअर नहीं चुने चाहिए.

मल्टी boli-are डाक्टर साब हम उम्र में बड़े है लेकिन हमारे जीवन में खुशियां लेन वाले बाबा तो आप hi है. आप hi सबकुछ है इस घर के.

मल्टी उठी और boli-aap बैठिये मई चाय बनती हूँ.

मई भी उठा और मल्टी को अपने सीने से लगा लिया. मल्टी की भरा हुआ चुकी मेरे सीने से टकराया मल्टी शर्मा गयी.

मई बड़े प्यार से मल्टी के नंगे कमर पर हाथ फेरा और धीरे से उनके मोठे मोठे गांड को मुट्ठी में भर कर हल्का सा मसल दिया.

मल्टी हल्का सा सिसकी - अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

मई मल्टी को bola-kal रात मई जो वो छोटा जड़ी बूटी दिया था वो खा लिया.

मल्टी boli-haa हां डाक्टर साब मई भी एक खा ली और एक बहु को भी दी थी.

मई मन में सोचा अच्छा है पानिकिलर खायी है तो दोनों को आराम है.

मल्टी boli-pata है डाक्टर साब सुबह सुबह वहां थोड़ा थोड़ा दर्द था लेकिन वो जड़ी बूटी कहते hi दर्द धीरे धीरे चला गया सब आपकी hi शक्ति है. बहु को तो और दर्द था मुझे तो थोड़ा थोड़ा था.

मल्टी ये बोलते बोलते शर्मा गयी. मई देख रहा था दोनों सास बहु आज काफी शर्मा रहे थे.

मल्टी फिर boli-aap रुकिए मई चाय बनती हूँ. या फिर आप कहो तो दिन का खाना यही खा लीजिये हमारे साथ.

मई bola-nahi नहीं सिर्फ चाय hi काफी है. कभी बाद में आऊंगा तब खाना खाऊंगा.

मल्टी फिर मेरे बाहों से निकली और चाय बनाने लगी. मेरे अंदर मल्टी के गदराये बदन को देख कर सररत आने लगा.

मल्टी रसोई में चूल्हे की तरफ मुद कर चाय बना रही थी. मई उसके peeche-peeche गया. वो कड़ी होकर बर्तन उठा रही थी की मई पीछे से उसे अपनी बाहों में भर लिया. मेरा हाथ उसके भरे हुए पेट पर था और मेरा लुंड उसका भरा हुआ गांड के बीच धस गया.

जैसे hi मालती को मेरे लुंड का अहसास उसके गांड पे हुआ उसका बुर में पानी आना सुरु हो गया.

मई मल्टी का कन्धा से बाल को धीरे से हटाया और उसकी मुलायम गर्दन पे अपना होठ रख दिया.

फिर मई वहां गर्दन पे गहरा चुम्मा लिया और उसका चमड़ी को थोड़ा सा काट लिया.

मल्टी आँख मूँद ली और उसका बदन कांपने लगा.

मल्टी कांपते हुए बोली- अह्ह्ह... डाक्टर saab...kya कर रहे है दिन का टाइम है और आरती देख रही है... रुकिए...

मई उसके कान में धीरे से बोलै-देखने दो... वो भी जानती है की उसकी सास का अब इलाज चलेगा.

आरती दरवाज़े पे बैठे हमें देख रही थी, उसके होंठों पे एक शर्मीली मुस्कराहट थी. उसके अंदर अब जलन नहीं, बल्कि एक अपनापन था.

इधर मल्टी के जिस्म की गर्मी और उसके बदन से आता वो खुशबु मेरे अंदर का आग को और भड़का दिया था. मेरा लुंड खड़ा था जो लोहे की तरह सख्त होकर मल्टी की भरी हुई गांड के बीच घुसने को बेताब था.

मल्टी चूल्हे पर बर्तन रख रही थी, उसके हाथ thar-thar काँप रहा था पर वो हिल्ली नहीं. मैंने बड़े सुकून से, बिना किसी जल्दबाज़ी के, उसके नंगे कमर पर हाथ फेरा और dheere-dheere उसकी साड़ी का पल्लू पीछे से उठा दिया. उसका गोरा और भरा हुआ बदन मेरे सामने था. मैंने उसके पेटीकोट को थोड़ा निचे से उठाया और अपना पंत की चैन खोल कर अपना garma-garam मोटा लुंड बहार निकाल लिया. जैसे hi मेरा मोटा लुंड निकला आरती को दिखा और बेचारी के मुँह में पानी आ गया साथ hi उसके बुर में भी पानी आ गया.

इधर जैसे hi मेरे लुंड का सख्त टोपा मल्टी की गीली और नरम बुर के होठों से टकराया, उसके मुंह से एक लम्बी सिषकी निकला -अह्ह्ह्हह... डाक्टर साबबब... अभी तोह चाय... ओह्ह्ह माआ...

मई मल्टी के कंधे पर अपना चेहरा टिकाया और उसके कान की लौ को दांतों से दबाते हुए कहा - चाय तोह बनता रहेगा मल्टी, पहले इस शक्ति को अपने अंदर उतरो... देखो कैसे तड़प रही है तुम्हारे लिए.

मल्टी अपना दोनों हाथ चूल्हे के पत्थर पर टिका दी और अपना भरा हुआ गांड को थोड़ा पीछे की तरफ धकेल दी, ताकि मेरा लुंड उसके बुर के गहराई का रास्ता ढून्ढ ले. वो पूरी तरह पिघल चुकी थी.

एक तरफ ये चल रहा था वही दरवाज़े पे बैठी आरती ये सब देख रही थी. उसका सांस इतना तेज़ चल रहा था की उसका सीना झटके खा रहा था. वो देख रही थी की कैसे उसकी सास मेरे लुंड को अपनी बुर में सामने के लिए बेचैन हो रही है. आरती धीरे से अपना होंठ काट ली और उसका हाथ अनजाने में hi उसकी अपनी जांघ के बीच चला गया.

मई मल्टी का कमर पकड़ा और एक ज़ोरदार धक्का मारा और अपना आधा लुंड एक hi बार में मल्टी की गर्म और फिसलती हुई बुर में उतार दिया.

मल्टी जोर से siskai-Oiiiii मायआ... डाक्टर साबबब... मर गयीईइ... अह्ह्ह्णण





उसके मुंह से निकली वो चीख दर्द की नहीं, बल्कि मेरे प्रति समर्पण की थी जिसे वो dilo-o-jaan से मान चुकी थी. मैंने उसकी कमर को कास के पकड़ा और वहीँ khade-khade उसकी चुदाई शुरू कर दी.

मई देखा की कैसे हर धक्के के साथ उसकी गीली छूट से निकलने वाला रास मेरे लुंड की नसों को और भी ज़्यादा पागल कर रहा था.

मल्टी बस मजे में खड़े खड़े- ाहहननननन अह्ह्ह्हह्हह्हंणन्न डाकटररररर sabbbbbbbbbbbbb uffffffffffff सिसक रही थी. उसका गिला और गर्म बुर छोड़ने में खूब मजा आ रहा था.

मई अपना हाथ आगे बढ़ाया और मल्टी की ब्लाउज के अंदर से उसका बड़ा बड़ा चुकी को अपनी मुट्ठी में भर लिया. उनका साइज इतना भरी था की मेरे हाथों से बहार निकल रहा था. मैंने अपने अंगूठे से टाइट निप्पल को इतनी ज़ोर से मसला की मल्टी अपना सर पीछे झटक दी और नशे में आंख बंद कर ली.

मई मल्टी को जोर जोर से छोड़ते हुए उसके कान में बोलै- मल्टी... ये पानी नहीं, ये तुम्हारी शक्ति है जो मेरे लुंड के लिए बह रही है... बताओ, कैसा लग रहा है ये तोहफा?"

मल्टी मजे में boli-Ahhhhhh... डाक्टर साबबब... ोीी माआ... मर गयीईइ... इतना गहरा... ऐसा लग रहा है जैसे आप मेरे गर्भ को छह रहे हैं... अह्ह्ह... हाँ... वही... वही मारिये...





मई पीछे से अपना रफ़्तार बढ़ा दिया. हर ज़ोरदार धक्का उसके बुर को चीरते हुए सीधा गर्भ से टकरा रहा था. वो "thap-thap" की आवाज़ पूरी रसोई में गूँज रहा था. मल्टी की जांघ से tap-tap करके उसका रास ज़मीन पर गिरने लगा, जैसे कोई टूटा हुआ नल से बून्द बून्द पानी गिरता है.

हमदोनो के बदन से निकलने वाला पसीना अब एक हो चूका था. मल्टी का बदन हर धक्के पे कमान की तरह लचक रहा था. आरती वही बैठी ये सब देख कर इतनी गर्म हो गयी थी की वो अपने पेटीकोट के अंदर हाथ दाल कर अपनी बुर को मसलना शुरू कर दी. उसका सास इतना तेज़ था की रसोई की हवा भी भरी हो गया.

मई मल्टी की कमर पर अपना पकड़ और सख्त किया और आखरी teen-chaar ऐसे दुमदार धक्के मारे की मल्टी का पूरा शरीर झटका खाकर अकड़ गया. वो ज़ोरार चीख मारी—डाक्टर साबबबबब और उसका बुर मेरे लुंड को इतने ज़ोर से भींचा की मेरा गरम माल भी रेससुरे के साथ उसके गर्भ के अंदर भरना शुरू हो गया.

मल्टी निढाला होकर चूल्हे के पत्थर पे hi ढीली पद गयी, उसकी आँखों में जन्नत का नशा था. मैंने अपना लुंड धीरे से बहार खिंचा तोह एक "पूछह" की आवाज़ हुई और मेरा कुछ माल उसकी जाँघों से होते हुए निचे गिरने लगा.

मैंने पीछे मुद कर आरती की तरफ देखा, जो अब अपने कपडे उतरने को बेताब थी. उसका चेहरा टमाटर की तरह लाल था.
 
Episode 30रसोई का गर्म हवा में मल्टी अभी भी निढाल होकर चूल्हे का सहारा लिए हाफ रही थी, उसका बदन मेरे पहले वार से अभी भी thar-thar काँप रहा था. मई जब पलट कर आरती की तरफ देखा, तोह उसकी आँखों में डर और बेहिसाब प्यास का एक अजीब मेल था. उसका नंगा बदन पसीने से चमक रहा था और उसकी कमसिन चूचियां उसके तेज सांस लेने की वजह से फूल रहा था.

मई आरती को छोड़ने का सोच कर तो नहीं आया था लेकिन आरती का हालत देख कर मुझसे रहा नहीं गया

मई बिना एक पल गवाए आरती की नंगा कमर को पकड़ा और उसे झटके से रसोई की ठंडी दीवार से चिपका दिया. दीवार की ठंडक और मेरे बदन की गर्मी के बीच आरती बुरी तरह कास गयी. मैंने उसके thar-thar कांटे गुलाबी होठों को अपने मुंह में भर लिया और उन्हें इतनी बेरामी से चूसा की उसके मुंह से एक दबी हुई चीख निकली.

आरती मेरा कन्धा पर अपने हाथ टिका दी, उसकी उँगलियाँ मेरी खाल में गाड़ने लगा. मई उसकी एक तंग को ऊपर उठाया और अपने लोहे जैसे सख्त लुंड का टोपा उसकी बुर के मुंह पर टिका दिया. आरती की बुर अभी भी कल रात के चुदाई की वजह से थोड़ा सुजा हुआ और नरम था, पर उसकी गर्मी मेरे लुंड का नस को फड़का रहा था.

मई अपना कमर को एक ज़ोरदार झटका दिया और अपना मोटा लुंड एक hi बार में उसके बुर में गहराई तक उतर दिया.

आरती जोर से सिसकी- AHNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNN! डाक्टर साबबब... मर गईइइइइइइइ... ोीी माआआ

आरती का चेहरा दर्द और मज़े के एक अजीब से कसाव में खिंच गया. उसका बदन दीवार से चिपक कर thar-thar कांपने लगा. वो पहली बार khade-khade मेरे लुंड को झेल रही थी. मई उसके रोने और सिसकने की परवाह नहीं किया, मैं जानता था की ये दर्द hi उसको धीरे धीरे मजा देने लगेगा फिर यही चुदाई hi आरती को आने वाले बच्चे का कारन बनेगा जो आरती को बहुत ख़ुशी देगा.

मई आरती का एक तंग उठाया और गुप्प्प गुप्प्प आरती का बुर पेलने लगा. आरती का तीग़ बुर छोड़ने में एक अलग hi मजा आ रहा था वो भी खड़े खड़े इस आंगन में.

आरती मजे में ाह्णण ाह्णण अह्ह्ह डाक्टर साबबबबब ाह्णण डाक्टर साब बोले जा रही थी.





मुझे आरती को छोड़ने में खूब मजा आ रहा था मई जोश में आरती का दोनों जाँघों को पकड़ कर उसे हवा में थोड़ा ऊपर उठाया और दीवार से रगड़ते हुए अपने लुंड पे हवा में झूलना सुरु कर दिया.





आरती को तो यकीं भी नहीं हो रहा था की कोई इतना ताकतवर हो सकता है जो उसे गॉड में उठा कर ऐसे चोदे. वैसे ये चुदाई आम बात है लेकिन आरती का पति तो उसका सील भी नहीं तोड़ पाया था तो इतना दुमदार चुदाई तो दूर का बात है.

मल्टी, जो अभी तक अपना होश संभल रही थी, वो भी dhere-dheere मेरे पास आयी. वो भी ये देख कर खुश थी और मन hi मन सोच रही थी एक न एक दिन उसकी भी इसी तरह हवा में चुदाई होगी.

मल्टी पास आकर आरती से बोली- बहु... सह ले... एहि वो दर्द है जो तुझे सुहागन बनाएगा... डाक्टर साब की शक्ति को अंदर utaar...ye वही शक्ति है जो तुझे गर्भ दिलाएगा.

आरती का आँख नशे में पलटने लगा था ऐसे चुदाई से. जब जब मई उसे लुंड पे गिरता तो मेरे लुंड का टोपा आरती के गर्भ को छू जाता और वो मचल जाती. उसका दर्द अब dheere-dheere एक ऐसी लज़्ज़त में बदल रहा था जिसे उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था. उसका बदन मेरे हर झटके पे उछाल रहा था और उसका बुर से निकलने वाला रास मेरे लुंड को और भी फिसलो बना रहा था.

मई बिना किसी रहम के 10-12 दुमदार धक्का लगाया और हर बार मेरा मोटा लुंड आरती के बुर को पूरा फैलते हुए सीधा गर्भ से जा टकराता. हर झटके के साथ आरती का सर दीवार से हल्का सा टकराता और उसके मुंह से एक लम्बी, गर्म और dard-bhari "अह्ह्ह्हह्हह" निकल जाती. उसका कमसिन बदन मेरे हर धक्के पे लचक रहा था.





आरती का हालत अब देखने लायक था. उसका गोरा चेहरा पसीने से चमक रहा था और उसका आँख नशे में ऊपर की तरफ चढ़ गया था. जब मेरा आखिरी धक्का उसकी बच्चेदानी के मुंह से ज़ोर से टकराया, तोह आरती का पूरा शरीर एक झटके में अकड़ गया. वो अपना नाख़ून मेरे कन्धा में गाड़ दी और उसका बुर मेरे लुंड को किसी भूखी शेरनी की तरह अंदर से भींचना शुरू कर दिया.

आरती जोर जोर से जोश में ोोोीीी मायआ... डाक्टर साबबब... निकल गया... अह्ह्ह... सब निकल गया... मर गयीईइ चीखने लगी.

वो बेचारी khade-khade hi झड़ने लगी थी. उसका रास फुवारे की तरह निकल कर मेरे लुंड को पूरी तरह भिगो चूका था. मई देखा की यही सही मौका है और मई अपना कमर को पूरी ताक़त से आगे धकेला और अपना लुंड उसके गर्भ के आखरी चोरर तक ठूस दिया.

मेरा गरम गरम गधा माल प्रेशर के साथ छूटा और आरती के गर्भ के अंदर एक गर्म सैलाब की तरह भरने लगा. मई अपना लुंड बहार नहीं निकला, बल्कि उसे अंदर hi दबा कर रखा ताकि ek-ek बूँद उसकी बच्चेदानी के अंदर समां जाये.

आरती निढाल होकर मेरे गले लग गयी, उसकी तेज सांसें मेरी गर्दन पे लग रही थी. मल्टी आगे बढ़कर आरती को सहारा दी और हम तीनो उस रसोई में ek-dusre से लिपटे हुए हम्प रहे थे. ज़मीन पर मल्टी और आरती के रास की बूँदें एक साथ गिरा हुआ था, जो बता रहा था की आज इस घर की दोनों औरत मेरी हो चुकी है.
 
Episode 31मई मल्टी और आरती के साथ कुछ देर और बैठा फिर आखिरकार मल्टी चाय भी बनायीं जो हम तीनो बैठ कर पिए. मल्टी तो फिर भी चुदाई के बाद कुछ हद तक ठीक थी आरती काफी थक गयी थी और उसका बुर भी काफी फूल गया था. मई आरती को आराम से बिस्तर पे लेट दिया और थोड़ा देर उस से बात किया फिर दवा देकर दोनों को प्यार से चूमा और घर के लिए चल दिया.

मई मह्सूस कर रहा था जब से मई चुदाई सुरु किया हूँ लुंड में दम बढ़ता hi जा रहा है साथ hi मेरा भी जोश बढ़ता जा रहा है.

मई जब मल्टी के घर से निकल रहा था तब मल्टी और आरती के आँखों में जो संतुष्टि थी, उस से मुझे थोड़ा सुकून भी था लेकिन मन नहीं भरा था. मई जब अपने घर पंहुचा तो दोपहर ख़त्म हो चूका था और शाम आने वाला था लगभग 2-3 बजे का समय था. मई अक्सर इस समय घर नहीं आता था मई अपने घर का टाला खोला और अंदर आया तो घर में सन्नाटा पसरा था.

जैसे hi मैंने अपने घर में अपने कमरे की तरफ बढ़ा मेरे कान में एक ऐसा आवाज़ पड़ा जो मेरे कदम को रोक दिया.

अह्ह्ह... मंहण... ufff...aisa दबा दबा सिसकी और सास का रफ़्तार.

मई कोई बच्चा तो था नहीं एक पल में मई जान गया ये आवाज डॉ नीलम की है मतलब मेरी मौसी की. मौसी लगता है आज फिर अपने जिस्म की गर्मी से जूझ रही है.

मेरा मैं थोड़ा कचोटने लगा. एक तरफ ये गांव है जिसमे मई उन लोगों की मदद कर रहा हूँ जिनको मई ठीक से जनता भी नहीं हूँ बस कुछ दिन हुए है मेरा गांव आये और दूसरी तरफ है मेरी मौसी. हलाकि मौसी से भी मुलाकात मेरा इसी गांव में हुआ है लेकिन फिर भी वो है तो मेरी अपनी मौसी. मेरी माँ की प्यारी छोटी बहन जिसका ख्याल रखने को माँ भी बोल चुकी है.

मई मौसी की इस बीमारी का फायदा भी नहीं उठाना चाहता था लेकिन उन्हें इस तरह तड़पते हुए भी देख नहीं सकता था.

पता नहीं क्यों लेकिन मई दबे पाऊँ उनके कमरे के दरवाज़े तक पहुंचा. अंदर जो नज़ारा मई देखा, उसने मेरा कलेजा मुँह को आ गया. आज भी मौसी उसी आग में तड़प रही थी.

मौसी बिस्तर पे बैठी थी, उनकी आँखें बंद थी और चेहरे पे एक अजीब सा दर्द और मज़े का मिलान था. उनका एक हाथ उनकी निघ्त्य के अंदर घुसा हुआ था और वो jor-jor से अपनी उँगलियाँ अपनी बुर पर चला रही थी.





उनका बदन पसीने से लथपथ था. मुझसे उनका ये दुःख देखा नहीं गया. मैंने सोचा, अगर मई पूरे गांव का इलाज कर सकता हूँ, तोह अपनी मौसी को इस जहनुम में कैसे तड़पने दूँ?

मैंने हिम्मत किया और कमरे के अंदर दाखिल हुआ. मौसी इतनी मदहोश थी की उन्हें मेरे आने का एहसास तक नहीं हुआ. मई बिना कोई सवाल किये, उनकी निघ्त्य के अंदर उनके बुर पे अपना उंगली लगाया.

मौसी अचानक से चिहुँकि- ाह्ह्हह्ह्ह्ह.. उफ्फ्फ

मौसी को एक ज़ोरदार झटका लगा. वो आँखें खोली और जब मुझे वहां देखा, तोह उनका चेहरा डर और शर्म से सफ़ेद पद गया. वो मुझे धकेलना चाहती थी, उनके होंठ कुछ कहने के लिए खुले, पर उनके बोलने से पहले hi मैंने अपना उंगली उनके गर्म बुर के छेद में घुसना सुरु कर दिया.

मौसी sisaki-AIYIIIIIIIIIIIIIIIIIIIIIIII! ांशःह्ह्ह... ये क्या... अह्ह्ह्हहननन

मौसी का आवाज़ उनके गले में hi फँस गया. मई किसी भूखे की तरह उनकी उस बरसों की प्यासी बुर में उंगली अंदर बहार करना सुरु कर दिया.

मौसी तड़पने लगी.

मौसी बस ाहन्नँ अंशहठ ररररर रुक जजजाऊओऊ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ufffffffffffff uffffffffffffffff करने लगी.





मई bola-mousi अब और नहीं मई आपको ऐसे नहीं देख सकता.

मौसी बिस्तर का चादर को अपनी मुट्ठी में जकड ली और उनका सर पीछे की तरफ झटकने लगा.

मई देखा मौसी अभी भी प्यासी है तो मई तुरंत झुका और अपना मुँह उनके बुर पे लगा दिया और उनके बुर को जोर जोर से जीभ से चाटने लगा. मौसी और ज्यादा तड़पना सुरु कर दी.





मई देखा मौसी अब जोर जोर से झड़ना सुरु कर दी वो भी जोर जोर से चिल्ला कर ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh uffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffffff

मौसी की बुर से निकलने वाला रास इतना ज़्यादा था की मेरी थोड़ी तक गीला हो गया . वो zor-zor से चिल्लाने लगी थी, पर उनका चिल्लाहट में अब डर नहीं, बल्कि एक ऐसी रहत था जो उन्हें सदियों बाद मिला था.

मौसी जोर जोर से हाफ रही थी.

मई जैसे hi मौसी के बुर से अपना मुँह हटाया और बैठा मौसी chattakkkkkkkkkkk से एक थप्पड़ मेरे गाल पे मरी.

पुरे घर में सन्नाटा हो गया. मेरा दिल रो पड़ा. मई कुछ बोल hi नहीं पाया.

कमरे में सन्नाटा इतना गहरा था की मेरी अपनी साँसों की आवाज़ भी शोर लग रहा था. मौसी का वो थप्पड़ मेरे गाल पे अभी भी जलन पैदा कर रहा था, पर उससे कहीं ज़्यादा दर्द मेरे दिल में हो रहा था.

मई बहुत हिम्मत करके उनके तरफ देखा उनकी आँखों में गुस्सा नहीं था, बल्कि एक ऐसी शर्मिंदगी और डर था जो किसी को भी अंदर तक तोड़ दे. मैंने सोचा था की शायद उन्हें सुकून मिलेगा, पर सायद मई गलत था. मेरे मुँह से एक शब्द नहीं निकला, बस मेरे आँखों में आंसू आया.

मैं बिना कुछ बोले मुद कर वहां से निकलने hi वाला था की अचानक मौसी पीछे से मेरी ब्याह पकड़ी और मुझे इतनी ज़ोर से खींची की मैं सीधा उनके सीने से जा लगा. वो मुझे इतनी जो से अपने गले लगायी जैसे अगर वो छोड़ देंगी तोह मैं हमेशा के लिए गायब हो जाऊंगा.

मौसी रट हुए बोली- अंश... मुझे माफ़ कर दे... बीटा... मैं... मैं पागल हो गयी thi...iske आगे वो कुछ बोली hi नहीं और फिर, बिना किसी मौके के वो पागलों की तरह मेरे चेहरे को चूमने लगी. कभी मेरे माथे को, कभी मेरे गालों को जहाँ उन्होंने अभी थप्पड़ मारा था, और कभी मेरी आँखों को. उनका आंसू मेरे चेहरे पर गिर रहा था. वो एक ऐसी प्यासी औरत की तरह बेहवे कर रही थी जिसे बरसों बाद सुकून मिला हो.

मौसी boli-main तुझसे नफरत नहीं कर सकती अंश... पर मैं खुद से नफरत कर रही हूँ. तुझे नहीं मालूम मेरा साया कितना बुरा है. मेरा बदलूक तुमको भी ले डूबेगा.

मई बड़े प्यार से उनका चेहरा अपने हाथों में लिया. उनकी निघ्त्य के स्ट्राप कंधे से निचे फिसल गया जो अभी कुछ मिनट पहले hi वी ठीक की थी और उनके भरे हुए बदन की गर्मी मुझे महसूस हो रहा था. मई देखा की उनका गुस्सा अब पूरी तरह वासना और अपनापन में बदल चूका था.

मई बोलै मौसी... मई जो किया वो गुनाह नहीं था. मई आपको तड़पते हुए नहीं देख सकता. अगर आपको लगता है की ये गलत है, तोह मुझे मार लीजिये... पर रोइये मत.

मौसी मेरी बात सुनकर अपनी आँख मूँद ली और धीरे से रट हुए मेरे होंठ पर अपने होंठ टिका दी. इतना hi नहीं मौसी धीरे से अपने निघ्त्य का दूसरा स्ट्राप भी कंधे से गिरा दी और मौसी का निघ्त्य उनके बदन से फिसलता हुआ जमीं पे गिर गया.

उनका नंगा बदन चमक रहा था, किसी तराशी हुई मूर्ती की तरह. उनकी निघ्त्य ज़मीन पर एक ढेर बन कर गिरा था. मई उन्हें चूमने के बजाय पीछे हैट गया.

मई बिना कुछ बोले उठा और कमरे के कोने में रखे भगवन की मूर्ती के पास गया. वहां रखा डिब्बे से मैंने एक चुटकी सिन्दूर लिया और वापस मौसी के पास आया. मौसी हैरत से मुझे देख रही थी.

मई बड़े अदब और हक़ से उनके तरफ देखा और बोलै -मौसी आज मन मत करना और फिर मई वो सिन्दूर मौसी के मांग में भर दिया.

मौसी का आँख एकदम से ाशूँ से भजन लग गया. उनका पूरा बदन एक झटके में thar-thara गया. उनके लिए ये सिर्फ रंग नहीं था,

मई आज उनका vidhva-pan और तन्हाई का अंत कर दिया था.

मई निचे झुक कर उनका निघ्त्य उठाया और बड़े प्यार से उन्हें फिर से पहना दिया. उनके बिखरे बालों को संवारा और मुस्कुरा कर बोलै - मौसी, अब चिंता मत करो. ये निघ्त्य तोह अब हज़ार बार गिरेगा और हर बार मैं hi इसे उठाऊंगा... और फिर गिराऊंगा लेकिन वो सिर्फ तब होगा जब आपकी मर्जी होगी.

मौसी रट हुए में भी मुस्कुरा दी. मई उनका ाशूँ पोचतो वो मेरे गले लग कर मेरे कान में बोली- हज़ार बार क्यों... लाखों बार गिरा लो अंश. मई तोह अब तेरी hi हूँ. मई हमेशा डर्टी रही हूँ जिंदगी में लेकिन तुम्हारे हिम्मत से अब मुझे भी हिम्मत आ रहा है. तू मेरा देवता है, मेरा पति है और मेरा सब कुछ है. और फिर मौसी मुझे बहुत जोर से अपने गले लगा ली.
 
Episode 32मौसी काफी देर तक बस मेरे गले लगे रही जैसे मेरे साइन में उन्हें सुकून मिल रहा हो, काफी देर गले लगे रहने के बाद मई जब bola-mousi खड़े खड़े थक जाओगी तब जाका वो मेरे साइन से अलग हुई और शरमाते हुए थोड़ा दूर सर झुका कर कड़ी हो गयी.

मई bola-ab चलिए खाना कहते है रात हो गया है.

मौसी boli-haan हाँ चलो और फिर हम दोनों साथ में खाना खाये. घर भी वही खाना भी वही लेकिन माहौल आज पूरा बदल गया था. मेरे दिल में भी अरमान जाग रहा था और मौसी के दिल में भी.

खाना खाने के बाद हम दोनों आज बिस्तर पे गए. वैसे तो दोनों अलग अलग कमरे में सोते थे लेकिन आज हम दोनों एक hi कमरे में गए.

जब हम दोनों बिस्तर पे आ गए तब मौसी boli-dekho अंश तुमने मुझे पत्नी बना लिया इसके लिए मई बहुत खुश हूँ लेकिन मुझसे किया वडा नहीं भूलना.

मई bola-abhi मई छोटा हूँ. मेरी शादी में बहुत दिन है.

मौसी boli-haan पता है लेकिन फिर भी तुम्हे अपनी उम्र की लड़की धुंध कर शादी करनी hi होगी.

मई bola-aapko बुरा नहीं लगेगा जब मई आपकी सौतन लाऊंगा.

मौसी थोड़ा मुस्कुरायी और boli-agar मई तुम्हे अपने पल्लू से बांध दूंगी तब तुम इस गांव का भला कैसे करोगे और तुम्हारी जिंदगी सिर्फ ये गांव नहीं है तुम्हारा अपना भी जिंदगी है. मेरा क्या मई तो अपनी लगभग जिंदगी गुजर चुकी हूँ लेकिन तुम्हारी जिंदगी तो अभी सुरु हुई है.

मई bola-dr नीलम जी आज hi हमारी शादी हुई है और अभी ये सब बातें करना जरुरी है क्या???

मौसी boli-bilkul जरुरी है मई नहीं चाहती मेरे लिए तुम अपनी जिंदगी अपनी खुशियों का गाला घोट दो.

मई कुछ सोचा फिर bola-ek बात पुछु आपसे.

मौसी boli-pucho...

मई bola-aap और माँ मुझे अपनी पुराणी जिंदगी के बारे में क्यों नहीं बताते.

मौसी boli-arey आज शादी हुई है और तुम ये सब बात लेकर बैठ गए.

मई bola-suruaat आपने किया है.

मौसी boli-ye सब अपनी माँ से पूछ लेना...

मई bola-kyun ये सब बाते सिर्फ मेरी माँ बताएंगी मेरी पत्नी कुछ नहीं बताएंगी.

मौसी एक बार मेरे आँखों में देखि और boli-kyun आखिर क्यों जान न है तुम्हे.

मई bola-ye गांव मेरे लिए नया है यहाँ के लोग मेरे लिए नए है फिर भी मई इस गांव के लिए लड़ रहा हूँ. हर दिन कुछ न कुछ कर रहा हूँ ताकि मई ये हाकिम सरीफ और वीरेन को इस गांव से उखड फेकू. आपको पता है मई ये सब क्यों कर रहा हूँ क्यूंकि मुझे प्रमोशन चाहिए. उस से भी बड़ी बात मुझे आपका बदला लेना है.

मई bola-aapko पता है इस गांव में आने से पहले मेरी पूरी दुनिया मेरी माँ और मेरी बहने hi थी. जब से मुझे पता चला है किसी ने उन्हें बचपन से जवानी तक परेशां किया है मेरा दिल में रह रह कर ऐसा गुस्सा उठता है की सीधा आपके घर जाऊ और अपने नाना छोटे नाना और उनके दरिंदे बेटे सबको पटक पटक के घसीट घसीट के मैरून. उनलोगों को मई एक दिन वैसे hi तड़पते हुए डरते हुए रट गिड़गिड़ाते हुए देखना चाहता हूँ जैसा जिंदगी उनलोगों ने मेरी माँ और आपको दिया था.

मौसी boli-tumhara गुस्सा जायज है लेकिन वो गांव वो घर सही नहीं है. तुम उस जगह से जितना दूर रहो उतना अच्छा है.

मई bola-maa भी हमेशा यही कहती है आखिर ऐसा क्या है ऐसा कौन सा शैतान है जिस से आपलोग इतना डरते है.

मौसी एक लम्बी सास ली और boli-tum सब कुछ जान न कहते हो है न....

मई bola-haan

मौसी boli-sirf एक शर्ट पे बताउंगी.

मई bola-kya???

मौसी boli-tumhe मेरी कसम है ये सब बातें जान ने के बाद भी तुम कभी भी उस जगह उस घर उस आदमी से नहीं मिलोगे.

मई bola-bilkul नहीं मिलूंगा.

फिर मई मन में bola-mai तो नहीं मिलूंगा मौसी लेकिन किस्मत से या गलती से वो मुझे मिल गया फिर देखना क्या करता हूँ मई. माँ भी कसम दे कर मुझे रोक राखी है आपने भी कसम दिया है. मेरा वडा है पहला हाथ या पहली चाल मेरी नहीं होगी लेकिन मई उनका वो हसरा कर दूंगा की वो ना तो दोबारा हाथ उठा ोायेगा नहीं कोई चल चल पायेगा.

मौसी बोली- घर में हमारे पापा और छोटे चाचा दोनों में बहुत प्यार था. लेकिन फिर धीरे धीरे पता नहीं चाचा जी ने ऐसा क्या किया की घर में सबकुछ बदलने लगा. हमारे घर में हर रात एक कमरे से चीखें सुनाई देने लगा. वो चीख सुरु सुरु में तो चची की थी लेकिन कुछ दिन बाद उसी कमरे से माँ की भी चीख सुनाई देने लगा. एक रात जब मई पानी पिने गयी थी तब भी उस कमरे से वैसी hi चीख आ रहा था और मई चुपके से वहां झाकने गयी.

अंदर का हालत अजीब था.

मई झक के देखि तो अंदर मेरी माँ बंधी हुई थी और चाचा जी जोर जोर से उनकी चुदाई कर रहे थे.

माँ जोर जोर से चिलाती और चाचा उतने hi जोर जोर से उनको छोड़ते.





मुझे लगा वो माँ के साथ जबरन करते है लेकिन मई गलत थी. जब भी माँ उस कमरे से निकलती तो बहोत खुश हो कर निकलती ऐसे hi हार रात होता कभी वहां माँ होती तो कभी चची.





चची को भी चाचा इसी तरह छोड़ते थे. ये सब चीजे हमे बिलकुल अच्छा नहीं लगता था नहीं दीदी लोग को लेकिन हम कुछ बोल नहीं पाते थे. हद तो तब हो गया जब मेरे अपने hi भाई यानि तेरे अपने मां हिरा और चचेरा भाई विवेक भी शामिल हो गया. ये घटियापन यही नहीं रुका धीरे धीरे उन लोगों की नजर हमलोगों पर भी ख़राब होने लगा. कभी वो हमे चुप कर नहाते हुए द्केहते कभी जब हम सोये होते तो हमे छूटे. फिर बड़ी दीदी की शादी का बात विवेक से होने लगा. विवेक दीदी से छोटा था और चचेरा भाई भी था फिर भी ये बाते होने लगा. आखिर कर दीदी घर से भाग गयी फिर यही सिलसिला तुम्हारी माँ और मेरे साथ चला तो तंग आकर दीदी भी वो घर से भाग गयी. मेरे लिए तो वो सब दरिंदे बन चुके थे. मेरी शादी विवेक से करवाने के लिए पुरे घर के सभी मर्द यहाँ तक की मेरी सगी माँ और चची भी जुट गयी. बहुत म्हणत करके बहुत सरे प्लान बना कर उस घर से मई भाग पायी नहीं तो पता नहीं क्या करते मेरे साथ वो सब लोग.

मई पूछा- क्या नाना जी ने या नानी जी ने या फिर कभी मां जी ने किसी ने आपका साथ नहीं दिया.

मौसी boli-kabhi कभी हिरा भैया साथ देते थे लेकिन वो भी कभी कभी.

कभी कभी हिरा भय जब बहुत दारू पि लेते थे तब रट हुए मेरे पास बैठते थे. मुझे तो बहोत दर लगता था लेकिन वो बताते थे की घर में कोई शक्ति है जो जीतेगा वही राज करेगा ऐसा कुछ फालतू बड़बड़ाते थे.

मई उस घर से और उस घर के लोगों के परछाई से भी दूर रहना चाहती हूँ.

मौसी boli-mai जहाँ तक सुनी हूँ विवेक के दो बेटे है वो भी वैसे hi है. मुझे तो दर है कही हिरा के बेटी होगी तो वो बेचारी अब कैसे होगी.

मौसी फिर boli-khair छोड़ो वो सब बात वो बातें पुराणी है.

मई बड़े प्यार से मौसी को गले लगाया क्यूंकि मुझे पता था ये सब बाते याद करके भी उनका दिल उस दर्द से भर गया था.

मई प्यार से मौसी के चेरे को बालों को सहलाता रहा और मौसी मेरे आगोश में सो गयी.

मई मन में सोचा -साला ये छोटा नाना मुझे मिल जाये वही गाड़ दूंगा फिर मन में ख्याल आया अभी तक तो वो बूढ़ा होकर क्या पता मर भी गया होगा. ये विवेक मिल जाये या फिर उसका जो दोनों बीटा है कोई तो भूले भटके मेरे हाथ लग जाये मजा hi आ जाये.
 
Episode 33रात में मौसी मेरे साइन पे सर रखकर सो गयी. मई काफी देर तक सोचता रहा की आखिर क्या किया जाये. बहुत सोचने के बाद सोचा सबसे पहले तो माँ मौसी के घर कहाँ है उस सहर उस गांव का नाम पता करना होगा. मई कसम खाया हूँ मई खुद वहां नहीं जाऊंगा.

फिर मई मन में खुद से बोलै- मई खुद से नहीं जा सकता लेकिन अगर कोई बुलाये तब तो जाना hi पड़ेगा. ये सब सोच सोच के मई भी सो गया.

सुबह हुआ तो सुबह सूरज की रौशनी खिड़की के तरफ से एकदम हल्का हल्का कमरे में आ रहा था. मेरी बीवी मेरी प्यारी मौसी अभी भी मेरे साइन से चिपक कर सो रही थी.

मई धीरे से बिस्तर से उठने लगा तो मौसी भी जाग गयी. फिर हम दोनों साथ में सुबह का खाना खाये. मौसी आज कल के मुकाबले ज्यादा खुश लग रही थी.

मई फिर मौसी को ब्यय बोलकर अपने चिकित्सा केंद्र में आ गया.

मई देखा आज रंजू सुबह सुबह hi आ गयी थी. वैसे तो रंजू या तो लेट आती थी या फिर नहीं आती थी लेकिन आज तो बिलकुल टाइम से आयी थी.

आज भी नगमा दो लोगों को भेजी थी. दो औरत अपने बच्चे को लेकर मेरे पास आयी थी. एक को मामूली बुखार था दूसरे के सर्दी खासी. मई भी तंत्र मंत्र का नाटक करके दोनों को कुछ दवा दिया और कुछ दवा सुबह शाम खिलने का बोलकर उन्हें भेज दिया.

कैसे hi वो लोग गए रंजू मेरे पास आ गयी लेकिन है रे उसकी किस्मत तब तक ज़रा आ गयी.

रंजू फिर ज़रा को boli-zara थोड़ा देर बहार रुकना मुझे डॉक्टर सर से कुछ बात करना है पर्सनल.

फिर ज़रा कमरे से निकल गयी और रंजू boli-dekho डॉक्टर मई रात में बहुत सोची और इस नतीजे पे पहुंची हूँ की तुम ठीक हो. मेरी बेटी माँ बन न चाहती है और तुम ये काम कर सकते हो. मई अपनी बेटी के ससुराल में बात कर ली है. वो 3-4 दिन में यहाँ आ जाएगी फिर 5-6 दिन यहाँ रहेगी. तुम इन 5-6 दिन में अपना काम कर लेना.

मई bola-to रंजू जी आपने अपनी बेटी को बता दिया है न की उसे यहाँ क्या करना है.

रंजू boli-tum तो पुरे गांव को पागल बना रहे हो तुम क्या मेरी बेटी को समझा नहीं सकते.

मई bola-dekho अगर सारा काम मई hi करून तो काम से काम 15-20 दिन तो लग hi जायेगा.

रंजू टपक से boli-nahi नहीं मई इस घटिया गांव में अपनी बेटी को 10-15 दिन नहीं रख सकती.

मई bola-to फिर काम कैसे होगा. एक काम करो उसे तुम सबकुछ बता देना और यहाँ ले आना. हम दोनों हर रात तरय करेंगे तो 5-6 दिन में हो सकता है.

रंजू boli-nahi नहीं मई अपनी बेटी से इस सिलसिले में बात नहीं कर सकती.

मई bola-fir कैसे होगा.

रंजू कुछ देर सोची फिर boli-tum एक काम कर सकते हो. कभी कभी 2-4 दिन के लिए सहर चले जाना मेरे बेटी के पास.

मई bola-kya???? अरे जरुरत तुम्हारी है और मई सहर जाऊ तुम्हारी बेटी को प्रेग्नेंट करने. कही कुछ गड़बड़ हो गया तो मेरा हिसाब किताब उधर hi निपट जायेगा. मई कोई अनजान सहर नहीं जाने वाला.

रंजू boli-soch लो डॉक्टर. मई अभी के लिए होनी बेटी को बुला चुकी हूँ. वो 3-4 दिन में आ जाएगी. 6-7 दिन में उसे जितना समझा सकते हो समझा लेना अगर काम हुआ तो ठीक नहीं तो तुम्हे सहर जाकर काम करना पड़ेगा.

मई bola-mai नहीं करूँगा.

रंजू boli-agar तुम ना बोलोगे तो मई जाउंगी सीधा हाकिम के पास और उसे बता दूंगी तुमने आरती और शमीमा के साथ क्या किया है.

मई bola-tumhe कैसे मालूम.

रंजू boli-chota सा गांव है हमारा और तुम कही जाओ और मई खबर न रखूँ हो नहीं सकता है ये.

रंजू फिर boli-ye मत भूलो डॉ नीलम भी तुम्हारे साथ है जो इस गांव में किसी को नहीं पता.

मुझे रंजू पे गुस्सा तो बहुत आया लेकिन रंजू पे तरस भी आया. पहले मई कंज़ोर था लेकिन अब मेरे पास रंजू की भी एक कमजोरी थी.

मई कुछ सोचा फिर bola-thik है मुझे मंजूरर है.

रंजू ये सुनते hi खुश हो गयी. उसे लग रहा था वो मुझसे जीत गयी है लेकिन बेचारी को क्या पता था वो बहुत बुरे तरीके से हरने वाली है.

रंजू मेरे केबिन से खुश होते हुए निकली और उसके जाते hi ज़रा मेरे पास आ गयी.

ज़रा boli-ranju दीदी आपसे क्या बात कर रही थी.

मई bola-kuch नहीं बस उनको थोड़ा प्रॉब्लम था तो मुझसे सलाह ले रही थी और मई कुछ दवा भी लिख के दिया हूँ वो ठीक हो जाएगी.

मई ज़रा को झूठ बोल दिया क्यूंकि सच बताकर कोई फायदा नहीं था.

ज़रा boli-ye तो होना hi था आपको पता है ठाकुर वीरेन है न वो रंजू दीदी के साथ कुछ कुछ करता रहता है. लगता है इसलिए उनको दवा चाहिए होगा.

ये सुनते hi मेरा कान खड़ा हो गया हो गया.

मई bola-haan बात तो तुम्हारी भी सही है.

ज़रा फिर boli-kya आप सचमे रंजू जी को दवा दे रहे है.

मई bola-haan.

ज़रा फिर थोड़ा हिचकिचाई फिर boli-doctor साब वो क्या है न मुझे भी एक दिक्कत है.

मई तो ये सुनते hi खुश हो गया और bola-bolo क्या दिक्कत है.

ज़रा boli-pata नहीं आपको बताऊ या नहीं.

मई तुरंत ज़रा का हाथ थमा और bola-arey मई सहर से पढ़ लिख के आया हूँ अगर अपने अस्पताल के लोगों को hi ठीक न कर पाव तो लानत है.

ज़रा थोड़ा घबरा के boli-baat ये है की मेरे सोहर जब मेरे साथ करते है.

मई तो समझ गया ज़रा क्या बोल रही थी फिर भी मई pucha-kya करते है?

ज़रा थोड़ा घबरा के boli-doctor साहब समझिये न वो जो बेगम और सोहर में होता है.

मई ज़रा को और परेशां नहीं किया और bola-haan हाँ समझ गया आगे बोलो.

ज़रा boli-jab वो करते है तो मेरा वहां दर्द करता है और कभी कभी उनका वो मेरे पीछे भी लग जाता है तो वहां भी दर्द करता है.
 
Episode 34ज़रा को देख कर और फिर उसकी बातें सुनकर मेरा लुंड तो एक पल में hi तन गया. सचमे क्या दिन है आज. एक तरफ है रंजू जो अब मेरे कण्ट्रोल में आने वाली है तो दूसरी तरफ ये मासूम ज़रा. लगता है इसके नसीब में भी मेरा लुंड का स्वाद लिखा है.

वैसे ये एक तरह से बहुत अच्छी बात है. क्यूंकि इस ऑफिस में हम तीन लोग है और अगर रंजू और ज़रा दोनों मेरी हो जाये तो फिर हम इस छोटे से चिकित्सा अस्पताल को अपने मर्जी के हिसाब से चला पाएंगे. जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी इस गांव को ये हाकिम और वीरेन के जाल से मुक्त कर पाएंगे. मेरा प्रमोशन तो इस गांव में हो कर hi रहेगा.

मई अपने सोच में खोया था और ज़रा को लगा उसकी बीमारी के चक्कर में सोच में हूँ.

ज़रा डरते हुए बोली- डॉक्टर साब कोई ज्यादा दिक्कत है क्या.

मई bola-dekho ज़रा दिक्कत तो है अब कितना दिक्कत है ये तो check-up के बाद hi पता चलेगा.

फिर मई अपने कुरिस से उठा बहार का दरवाजा बंद कर दिया फिर ज़रा के पास आया.

मई bola-zara चलो यहाँ बीएड पे आ जाओ चेक करना पड़ेगा.

मई बड़े प्यार से ज़रा का हाथ थमा और उसे check-up वाले बीएड की तरफ ले गया.

मई bola-Zara, डरो मत. अगर दर्द मिटाना है तोह पहले बीमारी को जड़ से देखना होगा. चलो, इस बीएड पे धीरे से लेट जाओ.

ज़रा एक गहरा सांस ली और बीएड पर लेट गयी. उसका दिल इतनी ज़ोर से धड़क रहा था की उसका सूट के ऊपर से भी उसका सीना उछलता हुआ दिख रहा था.

मई bola-zara घबराना मत अभी निचे वहां चेक करेंगे.

ये सुनते hi ज़रा घबरा गयी.

मई bola-dekho ज़रा चेक किये बिना कैसे ठीक होगा.

ज़रा को लगा मई बात तो सही बोल रहा हूँ बिना चेक किये ठीक केस होगा लेकिन वो दर भी रही थी और उसे थोड़ा अजीब भी लग रहा था.

ज़रा boli-doctor साब कोई ऐसा दवा नहीं है जो आप दे दो और हम ठीक हो जाये.

मई bola-arey कैसी बात करती हो ज़रा तुम तो पढ़ी लिखी हो. बिना चेक किये कैसे दवा दे दे. कही गलत हो गया तो तुम्हारा तबियत और बिगड़ जायेगा.

मेरे बात पे ज़रा थोड़ा घबराई फिर बोली -ठीक है डॉक्टर साब.

अब मई धीरे से ज़रा के पेअर के पास गया और ज़रा का कुर्ती जो घुटने तक था उसे उठाना सुरु किया और कमर तक उठा दिया.

मई देखा ज़रा थार थार कांप रही थी. जैसे hi मई अपने हाथ से ज़रा के पायजामे का नाडा खोला ज़रा अपना आंख बंद कर ली और बिस्तर के एक कोने को कास के पकड़ ली.

मई फिर ज़रा के पायजामे को जांघ तक सरकाया और उसका मोटा मोटा जांघ मेरे सामने आ गया. फिर मई धीरे से दो उंगली ज़रा के पंतय में फसाया और उसको निचे सरका दिया.

ज़रा का ढकन तो बिलकुल तेज हो गया था वो बेचारी आंख बंद किये कुछ बोल भी नहीं पा रही थी.

मई ज़रा के दोनों टांगों को फैलाया ताकि उसकी तकलीफ की असली जगह देख पौन.

ज़रा के बुर पे और वहां से होते हुए गांड तक खूब सारा बाल जमा हुआ था. जब मई ज़रा के बुर के बाल को थोड़ा सा हाथ से हटाया तो दिखा ज़रा के बुर के साइड में हल्का हल्का लाल लाल धब्बा टाइप का छोटा छोटा दाना हो गया है. ये दाना अक्सर गर्मी और गलत तरीके से बाल खींचने से होता है. मलतला ज़रा को कोई बहुत बड़ा बीमारी नहीं था.

ये देख कर मई खुश हो गया फिर मेरे दिमाग में आया एक आईडिया.

मई bola-zara देखो यहाँ बहुत बाल है इसलिए ठीक से दिख नहीं रहा इसको साफ़ करना पड़ेगा तुम यही लेती रहो मई दो मिनट में आता हूँ.

ये बोलके मई उधर से निकला.

ज़रा का तो हालत ख़राब हो गया. जिस जगह को आज तक ठीक से उसके सोहर ने भी नहीं देखा था वो जगह मई न सिर्फ देख रहा था अब उसको साफ़ भी करने वाला था. ज़रा मुझे मन करना छाती थी लेकिन बीमारी के नाम पे दर भी रही थी. उसे इलाज भी चाहिए था और अंत में बेचारी सोची जो होगा सो होगा पहले इलाज करा लेती हूँ.

मई थीधर कमरे से निकला और फिर अपने दराज़ से एक इलेक्ट्रिक त्रिम्मेर और एंटीसेप्टिक पाउडर निकला.

मई जैसे hi त्रिम्मेर ज़रा के बुर के पास लगाया उसके वाइब्रेशन से hi ज़रा चिहुँक उठी लेकिन वो खुद का मुँह खुद hi दबा ली. इधर मई ज़रा के बुर के बाल पे पाउडर छिड़क छिड़क कर अच्छे से त्रिम्मेर से पहले ज़रा के बुर का सारा बाल साफ़ किया फिर थोड़ा पेअर उठाकर ज़रा के गांड के पास भी जो बाल था वो भी साफ़ कर दिया.

ज़रा बेचारी शर्म के मारे गाड़ी जा रही थी. आज एक अजनबी लड़के ने उसका बुर आगाँद सब अच्छे से देख लिया था. इतना बेबस और इतना शर्म ज़रा को कभी नहीं आया था. जब पूरा बाल निकल गया तब जो छोटे छोटे धब्बे जैसे डेन थे वो मुझे अच्छे से दिखने लगा.

अब बारी था मेरे हाथों के कमल का. मई ड्रावर में से क्रीम निकला जो जरा के बुर के धब्बो को और दानो को आराम देता.

मई अपना ऊँगली पर थोड़ा सा सफ़ेद और नरम क्रीम लिया.

ज़रा तो अपना आँख कास के बंद कर ली थी, पर उसका जिस्म की thar-tharahat बता रहा था की वो मेरे हर अगले कदम का इंतज़ार कर रही है.

मई अपना क्रीम भरा ऊँगली धीरे से ज़रा के बुर के ऊपर रखा. जैसे hi वो ठंडा क्रीम ज़रा के बुर के कमसिन खाल से टकराया, ज़रा का पूरा बदन एक झटके में धनुष की तरह लचक गया.

Ufffffffffffffffffffffffffffffffffffff... डाक्टर साबबब... ये क्या है... बहुत ठंडा लग रहा haiiiiiiiiiiiii...wo शिशकते हुए बोली..





मई अपना ऊँगली को dhere-dheere गोल गोल में घूमना शुरू किया. क्रीम अब उसके बुर के होठों के बीच समां रहा था. मई देखा की कैसे वो दाना उस क्रीम को सोख रहा था. Dhere-dheere वो ठंडक ख़तम होने लगा और उसके जगह एक मीठा सा प्यारा सा जलन और गर्मी ले लिया.

ज़रा का जांघ अब khud-ba-khud और फैलने लगा था,

मेरे उंगली का सारा क्रीम जैसे hi ज़रा के बुर पे लग गया मई फिर से क्रीम लिया और इस बार अपना निशाना बदला. मई ज़रा की दोनों टांगों को पकड़ कर ुठोदा सा उठा दिया जिस से उसका गांड का छेद मुझे दिखने लगा जो बिलकुल छोटा सा था. उसका गांड देख कर hi लुंड में भूचाल आ गया लेकिन मई कण्ट्रोल किया.





मई अपना ऊँगली उसके गांड के हलके भूरे हलके गुलाबी छेद पर रखा और धीरे से वहां क्रीम मलने लगा. ज़रा तो बिस्तर का चादर को अपनी मुट्ठी में जकड ली और उसके मुंह से एक लम्बा AHNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNNN निकल गया.

मेरा ऊँगली जब उसके उस नाज़ुक रस्ते के किनारों को छू रहा था, तोह ज़रा का शरीर झटके मार रहा था.

ज़रा बहुत हिम्मत करके boli-Dakter साबबब... वहां नहीं... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhh...

मई देखा ज़रा के बुर से अब पानी आने लगा था इसलिए मई रुका नहीं. मई अपना हाथ से उसका पूरा गांड और बुर के बीच की जगह को dhere-dheere मसला. क्रीम की वजह से मेरा हाथ वहां माखन की तरह फिसल रहा था.

ज़रा को समझ hi नहीं आ रहा था की ये क्या हो रहा है ज़रा को बुरा भी लग रहा और अच्छा भी लग रहा था.

मई जनता था ज़रा अब पूरी तरह मेरे कब्ज़े में है. ज़रा का पसीना और वो क्रीम मिलकर एक ऐसा महक पैदा कर रहा था जो केबिन का हवा को भरी बना रहा था.

ज़रा के बुर का चिकना खाल अब मेरे उँगलियों के नीचे किसी रेशम की तरह फिसल रहा था. मई देखा की क्रीम अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है.

मई क्रीम वाले डब्बे से थोड़ा ज़्यादा क्रीम लिया और अपना दो उंगली जो क्रीम से पूरा भरा हुआ था ज़रा के बुर के छेद पे टिका दिया. जैसे hi मेरा ऊँगली उसके बुर के नरम होठों को अलग करके अंदर के चमड़े को छुआ, ज़रा एक लम्बी और dard-bhara सिसकी ली-अह्ह्ह... डाक्टर साबबब... ये क्या... इतना गहरा क्यों...

ज़रा का आंख ऊपर उठने लगा था वो जोर जोर से हाफ रही थी.

मई रुका नहीं. मई अपना ऊँगली को dhere-dheere, milimetre-dar-milimetre उसके गरम और गिला बुर के अंदर उतरना शुरू किया. क्रीम के वजह से मेरा ऊँगली माखन की तरह अंदर सरक रहा था. ज़रा का बदन कमान की तरह लचक गया और उसने अपने दोनों पेअर अनजाने में मेरा कन्धा पर कास गया.





मई अपना ऊँगली को पूरा अंदर तक उतार दिया. ज़रा की बुर के अंदर की दीवार इतना गर्म था की मुझे अपना ऊँगली पर उसका धड़कन महसूस हो रहा था. मई बुर के अंदर hi अपना ऊँगली को गोलाई में घूमना शुरू किया, ताकि वो दवा उसके गर्भ की देहलीज़ तक पहुँच जाये.

ज़रा अब पूरी तरह होश खो रही थी. उसके मुंह से अब शब्द नहीं, सिर्फ अजीब सा ahhnnnnnnnnnnnn ohhhhhhhhhhhhh वाला आवाज़ निकल रहा था. मई महसूस किया की उसका बुर से निकलने वाला रास क्रीम के साथ मिलकर बाह रहा है जो ज़रा के बुर से निकल कर उसके गांड के तरफ जा रहा है

मई मौके का फायदा उठा कर अपना ऊँगली को थोड़ा बहार खिंचा और फिर झटके से अंदर डाला. ज़रा जोर से अपना दोनों पेअर जो मेरे कंधे पे था उसको दबा दी और सिसकने लगी.

अब तो ऐसा हो रहा था की जब जब मेरा ऊँगली उसके अंदर जाता, ज़रा का गांड बिस्तर से दो इंच ऊपर उछाल जाता. मई अपनी दूसरा हथेल भी आगे बढाकर सीधा ज़रा के कुर्ती में घुसा दिया और उसका एक चुकी को कास के दबाया, जिससे उसका तड़प और बढ़ गया.

ज़रा मदहोशी में chillayi-Dakter साबबब... मार डालो मुझे... बहुत आग लग रहा है... अंदर तक... ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh...

मई देखा की ज़रा का चेहरा पसीने से lath-path हो चूका है और उसका आँख नशे में ऊपर हो चूका है. मई अपना ऊँगली को तेज़्ज़ी से andar-bahar करना शुरू किया.

ज़रा का सीना upar-neeche हो रहा था, और उसका नरम हाथ बिस्तर को मुट्ठी में भींचते जा रहा था. उसका गांड बिस्तर से दो इंच ऊपर उछाल रहा था. हर झटके के साथ वो आगे की तरफ सरकने की कोशिश कर रही थी. वो बार बार कमर उचका रही थी जिस से उसका प्यारा गांड का छेद मुझे दिख रहा था. मई भी मौके का फायदा उठाया. मई बिना कोई मौका गंवाए अपना क्रीम से भरा दूसरा ऊँगली को उसका गांड का छेद पर टिका दिया. इधर ज़रा झड़ना सुरु की उधर मई एक झटके में अपना ऊँगली उसके पीछे वाले रस्ते में घुसा दिया.

ज़रा का पूरा बदन एक पल के लिए पत्थर जैसा अकड़ गया. उसका बुर से झड़ने का सुख और गांड में क्रीम वाला ऊँगली का तीस... दोनों मिलकर उसे एक ऐसा तड़प में धकेल दिया जो वो आज तक महसूस नहीं की आईटी.

ज़रा जोर से सिस्का का chikcki-Uiyiiiii अम्म्मीईईईई... डाक्टर साबबब... ये... ये क्या किया... अह्ह्ह... वहां... बहुत दर्द... और मज़्ज़ा भी... उसने शिशकते हुए बोली. बेचारी अपने मुँह पर भी कण्ट्रोल खो चुकी थी.

इस मजे के कारन उसके आंख से आंसू बहने लगा.





मई अभी भी नहीं रुका. मई अपना दोनों ऊँगली ko—ek आगे और एक piche—dhere-dheere अंदर गोल गोल घूमना शुरू कर दिया. क्रीम का गर्मी पीछे वाले रस्ते में भी अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था. ज़रा अब मेरे हाथों में माँ की पुतले की तरह पिघल रही आईटी. उसका दोनों जांघ खुद बा खुद उछाल रहा था उसका पेअर मेरे कंधे पे था वो झटका खा खा के झाड़ रही थी. मई एक बार और अपना दोनों ऊँगली को पूरा अंदर दबा दिया और वही थामे रखा जब तक की ज़रा का बदन पूरी तरह ठंडा होकर बिस्तर पर गिर नहीं गया.
 
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