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अपडेट 24
एकांश रात भर सो नहीं पाया था, जब से उसे अक्षिता की बीमारी का उसके मरने का पता चला था उसे रातों को बुरे सपने आते थे और अब डॉक्टर क्या बोलेगा ये सोच सोच कर वो घबरा रहा रहा था, अक्षिता के बारे मे सोच सोच कर वो अंदर ही अंदर डर रहा था
जैसे ही सुबह हुई एकांश उठ बैठा था, आज उसे अक्षिता के बारे मे पता करने अस्पताल जाना था और वो तयार होने लगा था, एकांश ने अस्पताल मे अपॉइन्ट्मन्ट कन्फर्म करने फोन किया जो की कल उसके धमकाने के बाद कन्फर्म हो ही जानी थी और रीसेप्शनिस्ट ने उसे सुबह 10 बजे वहा पहुचने का कहा, रीसेप्शनिस्ट भी उससे थोड़ा डर कर ही बात कर रही थी... उसे भी डर था के डॉक्टर शायद अपॉइन्ट्मन्ट ना दे लेकिन उस रीसेप्शनिस्ट ने एकांश की अपॉइन्ट कन्फर्म कर ली थी, डॉक्टर ने उसका नाम सुनते ही उससे मिलने के लिए हामी भरी थी, डॉक्टर को वो दिन याद था जब अक्षिता बेहोश हुई थी और एकांश की उनसे मुलाकात हुई थी
एकांश जल्दी जल्दी अपने घर से निकला, उसके पेरेंट्स उसे पुकार ही रहे थे लेकिन एकांश ने उन सब की आवाज को इग्नोर कर अपनी कार उठाई और जितनी तेज हो सकती थी चला कर वो 15 मिनट मे अस्पताल मे था, उसने अपनी कार पार्क की और अस्पताल मे आया
“आइ वॉन्ट टु मीट डॉक्टर सुरेश अवस्थी” एकांश ने अस्पताल मे अंदर आते हुए रीसेप्शनिस्ट से कहा जिसपर उसने बस एकांश को यस सर कह कर डॉक्टर के केबिन का रास्ता बता दिया और एकांश उस ओर बढ़ गया
डॉक्टर का केबिन कॉरिडर के आखिर मे बना हुआ था और केबिन के गेट कर नेम प्लेट लगी थी, डॉक्टर. सुरेश अवस्थी, एमडी, सर्जन, नुरालजिस्ट
एकांश ने नाम पढ़ते हुए दरवाजा खटखटाया
“कम इन”
डॉक्टर का आवाज सुनते ही एकांश केबिन मे इंटर हुआ,
“आइए आइए रघुवंशी एम्पायर के मालिक, द ग्रेट एकांश रघुवंशी, जिन्होंने मेरी अपॉइन्ट्मन्ट के लिए मेरे स्टाफ को धमकाया था, आइए...” डॉक्टर ने एकांश को देख तंज कसते हुए कहा लेकिन एकांश शांत रहा
“मैंने कीसी को नहीं धमकाया डॉक्टर, मैं बस अपॉइन्ट्मन्ट चाहता था लेकिन नहीं मिल रही इसीलिए....”
“इसीलिए आपने उसे डराया, और जबरदस्ती मुझसे मिलने की अपॉइन्ट्मन्ट ली... खैर जाने दीजिए बताइए ऐसी क्या बात तो जो आप मुझसे मिलने इतने उतावले थे” डॉक्टर ने अपने सामने रखी पैशन्ट फाइलस् को देखते हुए पूछा
“मुझे कुछ इनफार्मेशन चाहिए थी” एकांश ने कहा
“तो बताइए मैं क्या मदद कर सकता हु आपकी क्या जानना है आपको”
“मुझे अक्षिता पांडे के बारे मे जानना है” एकांश ने कहा लेकिन अक्षिता का नाम लेते हुए उसकी आवाज मे कंपन था, डॉक्टर ने अपने पैशन्ट का नाम सुनते ही एकांश को देखा
“अक्षिता के बारे मे?”
“जी, उसकी उसकी तबीयत के बारे मे उसकी बीमारी के बारे मे जानना है”
“मैं इस बारे मे आपको कुछ नहीं बता सकता”
“प्लीज डॉक्टर मेरा इस बारे मे जानना बहुत जरूरी है, मुझे जानना है उसे क्या हुआ है, कीस बीमारी से जूझ रही है वो” एकांश ने कहा, वो लगभग रोने ही वाला था
“क्या मैं जान सकता हु आप कौन है उसके?” डॉक्टर ने सवाल किया
मैं... वो... वैसे तो मैं अभी उसका कुछ नहीं हु डॉक्टर लेकिन वो मेरे लिए सबकुछ है, मेरी जिंदगी है और इसीलिए मेरे लिए ये सब जानना बहूत जरूरी है” एकांश ने कहा उसकी आवाज कांप रही थी और आंखे भर आई थी
डॉक्टर भी एकांश को इतना वुलनरेबल देख कर हैरान था जो एक लड़की के लिए रो रहा रहा
“आइ एम सॉरी मिस्टर रघुवंशी लेकिन मैं पैशन्ट की फॅमिली के अलावा उसके बारे मे कीसी और को नहीं बता सकता” डॉक्टर ने एकांश को समझाते हुए कहा
“प्लीज डॉक्टर बात समझिए, मैं उसे नहीं खो सकता, मुझे उसे ढूँढना है बचना है और इसके लिए मेरा ये बात जानना जरूरी है के क्या हुआ है उसे” एकांश ने एक बार को बिनती की
अब डॉक्टर को भी थोड़ा बुरा लग रहा था लेकिन वो इसमे कुछ नहीं कर सकते
“मैं आपकी बात समझ रहा हु मिस्टर रघुवंशी लेकिन मैं अस्पताल के नियमों के खिलाफ जाकर आपको कुछ नहीं बता सकता उपर से ये मेरे उसूलों के भी खिलाफ है, मुझे माफ कीजिए लेकिन मैं इस मामले मे आपकी कोई मदद नहीं कर सकता” एकांश ने कहा
एकांश ने डॉक्टर की बात सुन एक लंबी सास छोड़ी, अक्षिता के बारे मे सोचते हुए उसकी आँखों से एक आँसू की बंद टपकी, डॉक्टर भी अब मामला समझ चुका था लेकिन वो कुछ नहीं बता सकता थे, उन्होंने एकांश को सांत्वना दी और एकांश वहा से उठाया और चुप चाप चलते हुए बाहर आ गया
एकांश दीवार से अपना सर टीका कर खड़ा था और ये सोच रहा था के अब आगे क्या किया जाए, और मन ही मन ये दुआ कर रहा था के अक्षिता ठीक हो
--
एकांश अस्पताल से बाहर आकार अपनी कार से टिक कर खड़ा था और ये सोच रहा था के आगे क्या करना है, कोई रास्ता ना मिलने से अब वो फ्रस्ट्रैट हो रहा था
“सर?”
एकांश ने जैसे ही सुना उसने पलट कर देखा तो वह स्वरा और रोहन उसे चिंतित नजरों से देख रहे थे
“क्या हुआ है कुछ पता चला?” रोहन ने पूछा
“आपको अपॉइन्ट्मन्ट मिली?” स्वरा ने अगला सवाल किया
वो लोग अब एकांश के पास आ गए थे...
“मेरी बात हो गई है डॉक्टर से और उन्होंने कहा है के फॅमिली मेम्बर के अलावा वो अपने पैशन्ट की इनफार्मेशन कीसी और को नहीं दे सकते” एकांश ने हल्के गुस्से मे कहा
एकांश की बात सुन स्वरा और रोहन भी निराश हो गए थे क्युकी अक्षिता के बारे मे जानने का अभी तो यही सबसे सरल तरीका उन्हे नजर आ रहा था
“कोई और भी तो रास्ता होगा पता करने का” स्वरा ने सोचते हुए कहा और एकांश ने उसे देखा
“आइडीया” स्वरा ने अचानक कहा....
“नहीं” रोहन एकदम बोला
“क्यू?”
“स्वरा तुम्हारे आइडियास् नाम नहीं करते है और कुछ ऊटपटाँग करने का ये वक्त नहीं है मेहरबानी करके अपने दिमाग का यूज मत करो हम सोचते है कुछ” रोहन ने कहा और स्वरा ने उसे गुस्से मे घूरा
“एक बार सुन तो लो फिर कहना”
“ना सुनना भी नहीं है”
और इसीके साथ सीरीअस महोल मे वो दोनों झगड़ने लगे थे और उन दोनों की ये नोकझोंक देख एकांश अपने आप को हसने से नहीं रोक पाया और उसे हसता देख वो दोनों रुक गए
“क्या हुआ, कन्टिन्यू करो ऐसी हैरान शकले क्यू बनाई है” एकांश ने उन्हे चुप देखा तो बोला
“वो आप हस रहे थे ना तो...” रोहन बोला
“तो...?” एकांश
“वो... सर हमने आपको कभी ऐसे हसते हुए नॉर्मल इंसान जैसा नहीं देखा न तो...” स्वरा ने कहा
जिसपर एकांश ने अपनी गर्दन हिलाई
“तुम लोगों ने मुझे देखा ही कितना है अभी” एकांश ने कहा
“तो अब आगे क्या करना है सर”
“मुझे पता है आगे क्या करना है”
“मतलब”
“मतलब ये के मेरा नॉर्मल रहना काम नहीं आया तो अब बताना पड़ेगा न के एकांश रघुवंशी कौन है और वो क्या कर सकता है” एकांश ने कहा और अब स्वरा और रोहन ने अपने उस रुड बॉस को वापिस आते देखा
एकांश ने अपना फोन निकाला और कीसी को फोन लगाया
“एकांश रघुवंशी स्पीकिंग, मुझे सिटी अस्पताल के एक डॉक्टर से कुछ इनफार्मेशन चाहिए” एकांश ने कहा
“हो जाएगा, कौन डॉक्टर है?”
“डॉक्टर सुरेश अवस्थी”
जिसके बाद एकांश ने फोन काट दिया और अस्पताल को देखने लगा वही रोहन और स्वरा इस बात का इंतजार करने लगे के आगे क्या होगा
--
अगले आधे घंटे मे ही अस्पताल मे अफर तफरी मैच गई थी, सारे फोन बजने लगे थे, अस्पताल के चेयरमैन बोर्ड मेम्बर, सभी अस्पताल मे आ रहे थे,
अस्पताल के सभी नर्स, वार्डबॉय, डॉक्टर, सभी लोग रीसेप्शन कर उन लोगों को रिसीव करने खड़े थे, सभी को इस अचानक वाली विज़िट का कारण जानना था....
और फिर अस्पताल मे एंट्री होती है एकांश की, फूल पावर के साथ जैसे ये अस्पताल ही उसका हो, उसके साथ साथ स्वरा और रोहन भी थे और साथ मे अस्पताल के सभी बोर्ड मेम्बर्स एकांश से बात करते हुए अंदर आ रहे थे,
वो लोग अंदर आकार डॉक्टरस् के सामने रुके, एकांश ने उन्हों देखा और वो लोग सीधे डॉक्टर सुरेश अवस्थी की ओर गए
इस सब मे भी डॉक्टर सुरेश अवस्थी अपने आप को क्षांत रखे हुए थे क्युकी वो जानते थे के वो अपनी जगह सही थे ये तो एकांश की जिद थी जो अस्पताल के सभी हाइयर अथॉरिटी के मेम्बर वहा आए थे,
“डॉक्टर अवस्थी, मिस्टर रघुवंशी जो भी जानना चाहते है प्लीज बात दीजिए उन्हे” अस्पताल के चेयरमैन ने कहा
“लेकिन सर...”
“डॉक्टर, हम आपके उसूलों की कद्र करते है लेकिन ये बात अभी ज्यादा जरूरी है, हम आपको पर्मिशन दे रहे है मिस्टर रघुवंशी जो भी जानना चाहते है उन्हे बता दीजिए”
“ठीक है, आइए मिस्टर रघुवंशी मेरे केबिन मे बात करते है” डॉक्टर अवस्थी ने हार मानते हुए कहा
एकांश ने भी हा मे गर्दन हिलाई और बगैर कीसी की ओर देखे वो डॉक्टर के पीछे उनके केबिन की ओर बढ़ गया, स्वरा और रोहन ने अस्पताल के बोर्ड मेम्बरस् को थैंक यू कहा और वो भी एकांश के पीछे हो लिए...
--
“आप काफी जिद्दी है मिस्टर रघुवंशी, जो चाहिए था वो मिल रहा है आपको” डॉक्टर ने अपने केबिन मे बैठे एकांश को देखते हुए कहा
“मुझे हो चाहिए होता है वो मैं ले कर ही रहता हु डॉक्टर” एकांश ने कहा
“डॉन्ट माइन्ड डॉक्टर लेकिन सर अक्षिता को लेकर परेशान है और इसीलिए ये सब...” रोहन ने कहा
“तो बताए क्या जानना है आपको”
“उसकी सेहत के बारे मे सबकुछ”
“ठीक है”
और अब वो तीनों गौर से डॉक्टर की बात सुनने लगे
“मिस अक्षिता पांडे को ब्रैन हेमरेज है” डॉक्टर ने अपने सामने रखे सिस्टम पर देखते हुए कहा, वही उन तीनों को इसपर कैसे रीऐक्ट करे समझ नहीं आ रहा था...
“मैं आपलोगों को आसान भाषा मे बताता हु, ये एक तरह का ब्रैन स्ट्रोक है, जो दिमाग मे जो नसे होती है उनके फटने के कारण होता है, ब्रैन के एक हिस्से मे रक्त वाहिकाये काफी सूज जाती है और फटने लगती है जिससे ब्रैन मे ब्लीडिंग होने लगती है जो की काफी खतरनाक है, अब इसके कई प्रकार होते है, इस मामले मे ये इन्टरसेरेब्रल हेमरेज है यानि पैशन्ट के दिमाग मे इन्टर्नल ब्लीडिंग है, इसमे ब्रैन का एक हिस्सा सूज जाता है जिससे नसों के फटने से इन्टर्नल ब्लीडिंग होती है” बोलते हुए डॉक्टर रुके और उन तीनों को देखा, वहा रोहन के चेहरे पर दर्द के भाव थे थी स्वरा की आँखों मे पानी था और एकांश कीसी मूर्ति की तरह बैठा सब सुन रहा था
“इससे बचने के क्या चांस है डॉक्टर?” रोहन ने कांपती आवाज मे पूछा
“फिलहाल चल रही है लेकिन ये सब इन्टर्नल ब्लीडिंग पर निर्भर करता है, कई लोग इस बीमारी से बच भी जाते है लेकिन ब्लीडिंग ज्यादा हो तो बच पाना मुश्किल होता है”
“और अक्षिता की कन्डिशन कितनी सीरीअस है?” स्वरा ने पूछा और एकांश ने डॉक्टर को देखा लेकिन डॉक्टर कुछ नहीं बोल रहे थे, उनके हावभाव से साफ था के मामले काफी सीरीअस है
डॉक्टर ने उन्हे उदास होकर देखा, खास कर एकांश को को अपने आप को संभाले बैठा था और वहा हिमायत दिखने की पूरी कोशिश कर रहा था, डॉक्टर भी अब तक समझ गए थे के उन लोगों के लिए अक्षिता क्या मायने रखती है लेकिन किस्मत को कोई हरा सका है क्या....
क्रमश:
एकांश रात भर सो नहीं पाया था, जब से उसे अक्षिता की बीमारी का उसके मरने का पता चला था उसे रातों को बुरे सपने आते थे और अब डॉक्टर क्या बोलेगा ये सोच सोच कर वो घबरा रहा रहा था, अक्षिता के बारे मे सोच सोच कर वो अंदर ही अंदर डर रहा था
जैसे ही सुबह हुई एकांश उठ बैठा था, आज उसे अक्षिता के बारे मे पता करने अस्पताल जाना था और वो तयार होने लगा था, एकांश ने अस्पताल मे अपॉइन्ट्मन्ट कन्फर्म करने फोन किया जो की कल उसके धमकाने के बाद कन्फर्म हो ही जानी थी और रीसेप्शनिस्ट ने उसे सुबह 10 बजे वहा पहुचने का कहा, रीसेप्शनिस्ट भी उससे थोड़ा डर कर ही बात कर रही थी... उसे भी डर था के डॉक्टर शायद अपॉइन्ट्मन्ट ना दे लेकिन उस रीसेप्शनिस्ट ने एकांश की अपॉइन्ट कन्फर्म कर ली थी, डॉक्टर ने उसका नाम सुनते ही उससे मिलने के लिए हामी भरी थी, डॉक्टर को वो दिन याद था जब अक्षिता बेहोश हुई थी और एकांश की उनसे मुलाकात हुई थी
एकांश जल्दी जल्दी अपने घर से निकला, उसके पेरेंट्स उसे पुकार ही रहे थे लेकिन एकांश ने उन सब की आवाज को इग्नोर कर अपनी कार उठाई और जितनी तेज हो सकती थी चला कर वो 15 मिनट मे अस्पताल मे था, उसने अपनी कार पार्क की और अस्पताल मे आया
“आइ वॉन्ट टु मीट डॉक्टर सुरेश अवस्थी” एकांश ने अस्पताल मे अंदर आते हुए रीसेप्शनिस्ट से कहा जिसपर उसने बस एकांश को यस सर कह कर डॉक्टर के केबिन का रास्ता बता दिया और एकांश उस ओर बढ़ गया
डॉक्टर का केबिन कॉरिडर के आखिर मे बना हुआ था और केबिन के गेट कर नेम प्लेट लगी थी, डॉक्टर. सुरेश अवस्थी, एमडी, सर्जन, नुरालजिस्ट
एकांश ने नाम पढ़ते हुए दरवाजा खटखटाया
“कम इन”
डॉक्टर का आवाज सुनते ही एकांश केबिन मे इंटर हुआ,
“आइए आइए रघुवंशी एम्पायर के मालिक, द ग्रेट एकांश रघुवंशी, जिन्होंने मेरी अपॉइन्ट्मन्ट के लिए मेरे स्टाफ को धमकाया था, आइए...” डॉक्टर ने एकांश को देख तंज कसते हुए कहा लेकिन एकांश शांत रहा
“मैंने कीसी को नहीं धमकाया डॉक्टर, मैं बस अपॉइन्ट्मन्ट चाहता था लेकिन नहीं मिल रही इसीलिए....”
“इसीलिए आपने उसे डराया, और जबरदस्ती मुझसे मिलने की अपॉइन्ट्मन्ट ली... खैर जाने दीजिए बताइए ऐसी क्या बात तो जो आप मुझसे मिलने इतने उतावले थे” डॉक्टर ने अपने सामने रखी पैशन्ट फाइलस् को देखते हुए पूछा
“मुझे कुछ इनफार्मेशन चाहिए थी” एकांश ने कहा
“तो बताइए मैं क्या मदद कर सकता हु आपकी क्या जानना है आपको”
“मुझे अक्षिता पांडे के बारे मे जानना है” एकांश ने कहा लेकिन अक्षिता का नाम लेते हुए उसकी आवाज मे कंपन था, डॉक्टर ने अपने पैशन्ट का नाम सुनते ही एकांश को देखा
“अक्षिता के बारे मे?”
“जी, उसकी उसकी तबीयत के बारे मे उसकी बीमारी के बारे मे जानना है”
“मैं इस बारे मे आपको कुछ नहीं बता सकता”
“प्लीज डॉक्टर मेरा इस बारे मे जानना बहुत जरूरी है, मुझे जानना है उसे क्या हुआ है, कीस बीमारी से जूझ रही है वो” एकांश ने कहा, वो लगभग रोने ही वाला था
“क्या मैं जान सकता हु आप कौन है उसके?” डॉक्टर ने सवाल किया
मैं... वो... वैसे तो मैं अभी उसका कुछ नहीं हु डॉक्टर लेकिन वो मेरे लिए सबकुछ है, मेरी जिंदगी है और इसीलिए मेरे लिए ये सब जानना बहूत जरूरी है” एकांश ने कहा उसकी आवाज कांप रही थी और आंखे भर आई थी
डॉक्टर भी एकांश को इतना वुलनरेबल देख कर हैरान था जो एक लड़की के लिए रो रहा रहा
“आइ एम सॉरी मिस्टर रघुवंशी लेकिन मैं पैशन्ट की फॅमिली के अलावा उसके बारे मे कीसी और को नहीं बता सकता” डॉक्टर ने एकांश को समझाते हुए कहा
“प्लीज डॉक्टर बात समझिए, मैं उसे नहीं खो सकता, मुझे उसे ढूँढना है बचना है और इसके लिए मेरा ये बात जानना जरूरी है के क्या हुआ है उसे” एकांश ने एक बार को बिनती की
अब डॉक्टर को भी थोड़ा बुरा लग रहा था लेकिन वो इसमे कुछ नहीं कर सकते
“मैं आपकी बात समझ रहा हु मिस्टर रघुवंशी लेकिन मैं अस्पताल के नियमों के खिलाफ जाकर आपको कुछ नहीं बता सकता उपर से ये मेरे उसूलों के भी खिलाफ है, मुझे माफ कीजिए लेकिन मैं इस मामले मे आपकी कोई मदद नहीं कर सकता” एकांश ने कहा
एकांश ने डॉक्टर की बात सुन एक लंबी सास छोड़ी, अक्षिता के बारे मे सोचते हुए उसकी आँखों से एक आँसू की बंद टपकी, डॉक्टर भी अब मामला समझ चुका था लेकिन वो कुछ नहीं बता सकता थे, उन्होंने एकांश को सांत्वना दी और एकांश वहा से उठाया और चुप चाप चलते हुए बाहर आ गया
एकांश दीवार से अपना सर टीका कर खड़ा था और ये सोच रहा था के अब आगे क्या किया जाए, और मन ही मन ये दुआ कर रहा था के अक्षिता ठीक हो
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एकांश अस्पताल से बाहर आकार अपनी कार से टिक कर खड़ा था और ये सोच रहा था के आगे क्या करना है, कोई रास्ता ना मिलने से अब वो फ्रस्ट्रैट हो रहा था
“सर?”
एकांश ने जैसे ही सुना उसने पलट कर देखा तो वह स्वरा और रोहन उसे चिंतित नजरों से देख रहे थे
“क्या हुआ है कुछ पता चला?” रोहन ने पूछा
“आपको अपॉइन्ट्मन्ट मिली?” स्वरा ने अगला सवाल किया
वो लोग अब एकांश के पास आ गए थे...
“मेरी बात हो गई है डॉक्टर से और उन्होंने कहा है के फॅमिली मेम्बर के अलावा वो अपने पैशन्ट की इनफार्मेशन कीसी और को नहीं दे सकते” एकांश ने हल्के गुस्से मे कहा
एकांश की बात सुन स्वरा और रोहन भी निराश हो गए थे क्युकी अक्षिता के बारे मे जानने का अभी तो यही सबसे सरल तरीका उन्हे नजर आ रहा था
“कोई और भी तो रास्ता होगा पता करने का” स्वरा ने सोचते हुए कहा और एकांश ने उसे देखा
“आइडीया” स्वरा ने अचानक कहा....
“नहीं” रोहन एकदम बोला
“क्यू?”
“स्वरा तुम्हारे आइडियास् नाम नहीं करते है और कुछ ऊटपटाँग करने का ये वक्त नहीं है मेहरबानी करके अपने दिमाग का यूज मत करो हम सोचते है कुछ” रोहन ने कहा और स्वरा ने उसे गुस्से मे घूरा
“एक बार सुन तो लो फिर कहना”
“ना सुनना भी नहीं है”
और इसीके साथ सीरीअस महोल मे वो दोनों झगड़ने लगे थे और उन दोनों की ये नोकझोंक देख एकांश अपने आप को हसने से नहीं रोक पाया और उसे हसता देख वो दोनों रुक गए
“क्या हुआ, कन्टिन्यू करो ऐसी हैरान शकले क्यू बनाई है” एकांश ने उन्हे चुप देखा तो बोला
“वो आप हस रहे थे ना तो...” रोहन बोला
“तो...?” एकांश
“वो... सर हमने आपको कभी ऐसे हसते हुए नॉर्मल इंसान जैसा नहीं देखा न तो...” स्वरा ने कहा
जिसपर एकांश ने अपनी गर्दन हिलाई
“तुम लोगों ने मुझे देखा ही कितना है अभी” एकांश ने कहा
“तो अब आगे क्या करना है सर”
“मुझे पता है आगे क्या करना है”
“मतलब”
“मतलब ये के मेरा नॉर्मल रहना काम नहीं आया तो अब बताना पड़ेगा न के एकांश रघुवंशी कौन है और वो क्या कर सकता है” एकांश ने कहा और अब स्वरा और रोहन ने अपने उस रुड बॉस को वापिस आते देखा
एकांश ने अपना फोन निकाला और कीसी को फोन लगाया
“एकांश रघुवंशी स्पीकिंग, मुझे सिटी अस्पताल के एक डॉक्टर से कुछ इनफार्मेशन चाहिए” एकांश ने कहा
“हो जाएगा, कौन डॉक्टर है?”
“डॉक्टर सुरेश अवस्थी”
जिसके बाद एकांश ने फोन काट दिया और अस्पताल को देखने लगा वही रोहन और स्वरा इस बात का इंतजार करने लगे के आगे क्या होगा
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अगले आधे घंटे मे ही अस्पताल मे अफर तफरी मैच गई थी, सारे फोन बजने लगे थे, अस्पताल के चेयरमैन बोर्ड मेम्बर, सभी अस्पताल मे आ रहे थे,
अस्पताल के सभी नर्स, वार्डबॉय, डॉक्टर, सभी लोग रीसेप्शन कर उन लोगों को रिसीव करने खड़े थे, सभी को इस अचानक वाली विज़िट का कारण जानना था....
और फिर अस्पताल मे एंट्री होती है एकांश की, फूल पावर के साथ जैसे ये अस्पताल ही उसका हो, उसके साथ साथ स्वरा और रोहन भी थे और साथ मे अस्पताल के सभी बोर्ड मेम्बर्स एकांश से बात करते हुए अंदर आ रहे थे,
वो लोग अंदर आकार डॉक्टरस् के सामने रुके, एकांश ने उन्हों देखा और वो लोग सीधे डॉक्टर सुरेश अवस्थी की ओर गए
इस सब मे भी डॉक्टर सुरेश अवस्थी अपने आप को क्षांत रखे हुए थे क्युकी वो जानते थे के वो अपनी जगह सही थे ये तो एकांश की जिद थी जो अस्पताल के सभी हाइयर अथॉरिटी के मेम्बर वहा आए थे,
“डॉक्टर अवस्थी, मिस्टर रघुवंशी जो भी जानना चाहते है प्लीज बात दीजिए उन्हे” अस्पताल के चेयरमैन ने कहा
“लेकिन सर...”
“डॉक्टर, हम आपके उसूलों की कद्र करते है लेकिन ये बात अभी ज्यादा जरूरी है, हम आपको पर्मिशन दे रहे है मिस्टर रघुवंशी जो भी जानना चाहते है उन्हे बता दीजिए”
“ठीक है, आइए मिस्टर रघुवंशी मेरे केबिन मे बात करते है” डॉक्टर अवस्थी ने हार मानते हुए कहा
एकांश ने भी हा मे गर्दन हिलाई और बगैर कीसी की ओर देखे वो डॉक्टर के पीछे उनके केबिन की ओर बढ़ गया, स्वरा और रोहन ने अस्पताल के बोर्ड मेम्बरस् को थैंक यू कहा और वो भी एकांश के पीछे हो लिए...
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“आप काफी जिद्दी है मिस्टर रघुवंशी, जो चाहिए था वो मिल रहा है आपको” डॉक्टर ने अपने केबिन मे बैठे एकांश को देखते हुए कहा
“मुझे हो चाहिए होता है वो मैं ले कर ही रहता हु डॉक्टर” एकांश ने कहा
“डॉन्ट माइन्ड डॉक्टर लेकिन सर अक्षिता को लेकर परेशान है और इसीलिए ये सब...” रोहन ने कहा
“तो बताए क्या जानना है आपको”
“उसकी सेहत के बारे मे सबकुछ”
“ठीक है”
और अब वो तीनों गौर से डॉक्टर की बात सुनने लगे
“मिस अक्षिता पांडे को ब्रैन हेमरेज है” डॉक्टर ने अपने सामने रखे सिस्टम पर देखते हुए कहा, वही उन तीनों को इसपर कैसे रीऐक्ट करे समझ नहीं आ रहा था...
“मैं आपलोगों को आसान भाषा मे बताता हु, ये एक तरह का ब्रैन स्ट्रोक है, जो दिमाग मे जो नसे होती है उनके फटने के कारण होता है, ब्रैन के एक हिस्से मे रक्त वाहिकाये काफी सूज जाती है और फटने लगती है जिससे ब्रैन मे ब्लीडिंग होने लगती है जो की काफी खतरनाक है, अब इसके कई प्रकार होते है, इस मामले मे ये इन्टरसेरेब्रल हेमरेज है यानि पैशन्ट के दिमाग मे इन्टर्नल ब्लीडिंग है, इसमे ब्रैन का एक हिस्सा सूज जाता है जिससे नसों के फटने से इन्टर्नल ब्लीडिंग होती है” बोलते हुए डॉक्टर रुके और उन तीनों को देखा, वहा रोहन के चेहरे पर दर्द के भाव थे थी स्वरा की आँखों मे पानी था और एकांश कीसी मूर्ति की तरह बैठा सब सुन रहा था
“इससे बचने के क्या चांस है डॉक्टर?” रोहन ने कांपती आवाज मे पूछा
“फिलहाल चल रही है लेकिन ये सब इन्टर्नल ब्लीडिंग पर निर्भर करता है, कई लोग इस बीमारी से बच भी जाते है लेकिन ब्लीडिंग ज्यादा हो तो बच पाना मुश्किल होता है”
“और अक्षिता की कन्डिशन कितनी सीरीअस है?” स्वरा ने पूछा और एकांश ने डॉक्टर को देखा लेकिन डॉक्टर कुछ नहीं बोल रहे थे, उनके हावभाव से साफ था के मामले काफी सीरीअस है
डॉक्टर ने उन्हे उदास होकर देखा, खास कर एकांश को को अपने आप को संभाले बैठा था और वहा हिमायत दिखने की पूरी कोशिश कर रहा था, डॉक्टर भी अब तक समझ गए थे के उन लोगों के लिए अक्षिता क्या मायने रखती है लेकिन किस्मत को कोई हरा सका है क्या....
क्रमश: