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इ कहानी है बढ़ते हुए हवस की इ कहानी है दिल में छुपे हुए तमन्ना की इ कहानी है धोके की इ कहानी है प्यास मिठाने ki..jyaada वक़्त न गवाते हुए सीधे कहानी की शुरुवात kare…e कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित hai…matra जगह की नाम बदली गयी hai..aur शायद इस कहानी में कही बी जगह का नाम नह आएंगे पर बाकी सब पत्र क नाम असल hi रहेंगे…
तीन महीने पहले
दूर किसी शहर में एक कोर्ट में एक आदमी पर मुकद्दमा चल रहा था और वकील साहब उसका एक एक गुनाह का हिसाब जज सब क सामने बयां कर रहे थे पर कटकटेरे में खड़ा मुजरिम किसी डर क बिना बस जज साहब क सामने हर गुनाह काबुल कर रहा था और मैं hi मैं है रहा tha….aur आखिरकार वो समय आ hi गया जिसका सब बेसब्री से इंतज़ार कर रहे the…faisla सुनानेका..
जज साहब ने सारा मुकद्दमा ठीक से सुना और और फैसला सुनाने लगे" तमाम गावावो और हालत को नज़र रखते हुए इ अदालत मुजरिम जमील को मुजरिम करार देते हुए 1 बरस क लिए तड़ीपार का हुकुम देती hai…aur 20000 का जुरमाना और अगर जुरमाना न भर पाए तो फिर से 1 साल की जेल की सजा सुनती है और पुलिस को मुजरिम पर नज़र रखने की हुकुम देती है जब तक वो तड़ीपार न हो jaaye…mujreem जमील को इ अदालत 2 दिन का वक़्त देती है इस शहर छोड़ने ko….adalat भरकास्ट….
और मुजरिम जमील कोर्ट से बहार आया और अपने जेब से मोबाइल निकल कर अपने वकील को फ़ोन करता है..
कॉल पर
जमील- क्या वकील तुमने मुझे एक बरस क लिए तड़ीपार करदिया..
वकेरल- अरे जमील भाई जिंदगी भर चक्की फिस्ने से तो ाचा hi है na…aur वो दूसरा केस बी खुल गया hai..aur हम आपके गैर हजारी में वो केस को रफा दफा kardenge…samje न आप
जमील- पक्का एक बरस क अंदर हो जायेगा न…
वकील- पक्का हो जायेगा भाई पर आप इस बीच कही ऐसी जगह पे रुको की जहा आपको कोई पहचान न ले..
जमील- ठीक है तो फिर मई कल hi निकल जाता हु आप बॉस से बात कर लेना
वकील- आप बॉस की चिंता मत करो मई समजा दूंगा पर भाभी???
जमील- तुम उनकी चिंता मत करो मई उन्हें उनके गांव भेजदूँगा और कहूंगा की मुझे किसी अर्जेंट काम से उस जाना है…
वकील- ठीक है फिर कोई परेशानी नह
……
तीन महीने पहले
दूर किसी शहर में एक कोर्ट में एक आदमी पर मुकद्दमा चल रहा था और वकील साहब उसका एक एक गुनाह का हिसाब जज सब क सामने बयां कर रहे थे पर कटकटेरे में खड़ा मुजरिम किसी डर क बिना बस जज साहब क सामने हर गुनाह काबुल कर रहा था और मैं hi मैं है रहा tha….aur आखिरकार वो समय आ hi गया जिसका सब बेसब्री से इंतज़ार कर रहे the…faisla सुनानेका..
जज साहब ने सारा मुकद्दमा ठीक से सुना और और फैसला सुनाने लगे" तमाम गावावो और हालत को नज़र रखते हुए इ अदालत मुजरिम जमील को मुजरिम करार देते हुए 1 बरस क लिए तड़ीपार का हुकुम देती hai…aur 20000 का जुरमाना और अगर जुरमाना न भर पाए तो फिर से 1 साल की जेल की सजा सुनती है और पुलिस को मुजरिम पर नज़र रखने की हुकुम देती है जब तक वो तड़ीपार न हो jaaye…mujreem जमील को इ अदालत 2 दिन का वक़्त देती है इस शहर छोड़ने ko….adalat भरकास्ट….
और मुजरिम जमील कोर्ट से बहार आया और अपने जेब से मोबाइल निकल कर अपने वकील को फ़ोन करता है..
कॉल पर
जमील- क्या वकील तुमने मुझे एक बरस क लिए तड़ीपार करदिया..
वकेरल- अरे जमील भाई जिंदगी भर चक्की फिस्ने से तो ाचा hi है na…aur वो दूसरा केस बी खुल गया hai..aur हम आपके गैर हजारी में वो केस को रफा दफा kardenge…samje न आप
जमील- पक्का एक बरस क अंदर हो जायेगा न…
वकील- पक्का हो जायेगा भाई पर आप इस बीच कही ऐसी जगह पे रुको की जहा आपको कोई पहचान न ले..
जमील- ठीक है तो फिर मई कल hi निकल जाता हु आप बॉस से बात कर लेना
वकील- आप बॉस की चिंता मत करो मई समजा दूंगा पर भाभी???
जमील- तुम उनकी चिंता मत करो मई उन्हें उनके गांव भेजदूँगा और कहूंगा की मुझे किसी अर्जेंट काम से उस जाना है…
वकील- ठीक है फिर कोई परेशानी नह
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