Erotica Ek se jee nh bhara to aur b sahi - SexBaba
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Erotica Ek se jee nh bhara to aur b sahi

hotaks

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इ कहानी है बढ़ते हुए हवस की इ कहानी है दिल में छुपे हुए तमन्ना की इ कहानी है धोके की इ कहानी है प्यास मिठाने ki..jyaada वक़्त न गवाते हुए सीधे कहानी की शुरुवात kare…e कहानी एक सच्ची घटना पर आधारित hai…matra जगह की नाम बदली गयी hai..aur शायद इस कहानी में कही बी जगह का नाम नह आएंगे पर बाकी सब पत्र क नाम असल hi रहेंगे…

तीन महीने पहले

दूर किसी शहर में एक कोर्ट में एक आदमी पर मुकद्दमा चल रहा था और वकील साहब उसका एक एक गुनाह का हिसाब जज सब क सामने बयां कर रहे थे पर कटकटेरे में खड़ा मुजरिम किसी डर क बिना बस जज साहब क सामने हर गुनाह काबुल कर रहा था और मैं hi मैं है रहा tha….aur आखिरकार वो समय आ hi गया जिसका सब बेसब्री से इंतज़ार कर रहे the…faisla सुनानेका..

जज साहब ने सारा मुकद्दमा ठीक से सुना और और फैसला सुनाने लगे" तमाम गावावो और हालत को नज़र रखते हुए इ अदालत मुजरिम जमील को मुजरिम करार देते हुए 1 बरस क लिए तड़ीपार का हुकुम देती hai…aur 20000 का जुरमाना और अगर जुरमाना न भर पाए तो फिर से 1 साल की जेल की सजा सुनती है और पुलिस को मुजरिम पर नज़र रखने की हुकुम देती है जब तक वो तड़ीपार न हो jaaye…mujreem जमील को इ अदालत 2 दिन का वक़्त देती है इस शहर छोड़ने ko….adalat भरकास्ट….

और मुजरिम जमील कोर्ट से बहार आया और अपने जेब से मोबाइल निकल कर अपने वकील को फ़ोन करता है..

कॉल पर

जमील- क्या वकील तुमने मुझे एक बरस क लिए तड़ीपार करदिया..

वकेरल- अरे जमील भाई जिंदगी भर चक्की फिस्ने से तो ाचा hi है na…aur वो दूसरा केस बी खुल गया hai..aur हम आपके गैर हजारी में वो केस को रफा दफा kardenge…samje न आप

जमील- पक्का एक बरस क अंदर हो जायेगा न…

वकील- पक्का हो जायेगा भाई पर आप इस बीच कही ऐसी जगह पे रुको की जहा आपको कोई पहचान न ले..

जमील- ठीक है तो फिर मई कल hi निकल जाता हु आप बॉस से बात कर लेना

वकील- आप बॉस की चिंता मत करो मई समजा दूंगा पर भाभी???

जमील- तुम उनकी चिंता मत करो मई उन्हें उनके गांव भेजदूँगा और कहूंगा की मुझे किसी अर्जेंट काम से उस जाना है…

वकील- ठीक है फिर कोई परेशानी नह

……
 
और इस तरह जमील सब सेट करके अपने शहर को छोड़ कर दूसरे स्टेट आगया और 15- 20 दिन को एक एक शहर बदलने laga…aur आखिरकार वो उस शहर में आगया जहा उसके लिए उसकी जिंदगी की सबसे ज्यादा ख़ुशी मिलने वाली थी…

जमील- उस शहर आके कुछ hi दिन हुए थे उसे वह का अट्मॉस्फेरे रहना खाना पीना सब ाचा लगाने लगा था और ऊपर से मस्त मस्त बदन वाली लड़किया औरते देख जमील ने सोच लिया की वो इस शहर में hi कुछ ज्यादा hi रहेगा और किसी एक मस्त पटके को पाटकर उसके साथ मजा बी karega…q की जमील एक गुंडा था इसलिए सेक्स उसकी कमज़ोरी थी वो एक दिन बिना सेक्स किये नह रह सकता tha…iska मतलब इ नह की जमील को रंडिया छोड़ने की आदत hai…Jameel सिर्फ अचे घर की लड़की या औरतो को अपने हवस का शिखर बनता tha..pyaare से मिले तो ठीक hi सही और न मिले तो जबर दस्ती या उन्हें मजबूर कर k..aur वो बी तब जब उसकी बीवी न ho…nh तो जमील सिर्फ अपनी बीवी को hi रोज रात को तकलीफ देता और जिसे झेलना उसकी पतली सवाली बीवी क लिए काफी मुश्किल था क्यू की सेक्स दौरान जमील जानवर बन जाता और उसकी बीवी में इतनी ताकत नह थी की वो जमील हो हर दिन jhele..isliye जब जमील ने उसे अपने घर जाने को कहा तो वो ख़ुशी ख़ुशी अपनी बची क साथ चालीगयी थी..

जमील को तड़ीपार हो के दो महीने हो चुके थे और इस बीच उसने 4 शहर बदल क इस शहर में आये अब 5-6 दिन बन गए थे और इस बीच जमील ने रात में बार में बैठ कर दारु पिटे वक़्त इस शहर क चार- पांच लफंगो से मिल बी चूका tha..aur उसमे एक दो उसके खास बी बन गए थे जिनके साथ जमील का उतना फिरना घूमना और रात को दारू पीना बी स्टार्ट हो गया tha…aur जमील उनके मुँह से इस शहर क बारे में जानने लगा एक की rehn+dehn…khana पीना आखिर में लड़किया और औरतो क बारे में जानने लगा tha..Jameel बहुत शातिर था उसने उन लड़को से तो बहुत कुछ जानकारी तो लिटी पर अपने बारे में कुछ नह bataya…kisi एक ने पूछने पर बी उसे झूट hi बोलै tha..aur वो इन लड़को क साथ मिलकर कभी कभी औरतो का पीछा बी करने लगा tha…q की वही एक चीज़ थी जो जमील को पिछले दो महीनो से नह मिली thi…bas वो अब इसी क तलाश में हर जगह अछि औरतो को देख मुँह मरने की कोशिश कर रहा तो दूसरी तरफ उसके सतिंदर दारू क नशे में हर एक पर लाइन मरने लग गए थे और इन सब बातो से परेशां एक औरत ने इन लफंगो पर पुलिस कॉम्पलिएंट बी किया और पुलिस ने उन्हें अंदर दाल diya…aur उस दिन जमील ने समाजरी दिखाकर उस औरत को उन लफंगो से बचाया तो वो जेल जाने से बच गया और दूसरे दिन स्टेशन जाके उन लफंगो को जमीन पर छुड़ा laya…aur इ खबर उस छोटे शहर में ज्यादातर फ़ैल गयी थी और उस दिन जमील ने उन लफंगो को कुछ दूर hi रखा और सिर्फ रात में बार में hi मुलाकात कर leta..aise एक महीना गुजर गया था नहीं कोई उसे मिली नहीं उसकी लुंड की प्यास भुजी तो उसने सोचा कुछ दिन बाद इ शहर बदल देते है और दूसरा कही तरय मरते है कुछ काम बन jaaye..e बात नह की जमील पूरी तरह से नाकामयाब रहा जिनके पीछे वो लगा था उनमे से कुछ कट्टर पतिव्रता निकले और कुछ ने जमील को भाव नह diya..aur जो जमील को पते वो जमील को पसंद नहीं आये क्यू की जमील की पसंद कुछ अलग hi थी…. खैर इ हुई जमील की बात अब एते है इस कहानी की मुख्या नायिका मीणा इसे आप एक खलनायक बी कह सकते हो क्यू इ आपको बाद में पता चलेगा…

अब मीणा क बारे में क्या बताये मीणा 35 साल की भरी बदन की मालकिन थी रंग इतना गोरा की दूध बी शर्म जाए गोल सुडौल चेहरा लाल हॉट नशीली आंखे उसके खूबसूरती को चार चाँद लगते the.bhara हुआ जिस्म किसी कहते पिटे घर की निशानी दिखती थी और उसके मूमे और गांड तो इतनी मस्त की किसी बुड्ढे की बी नज़र एक बार उनपे नज़र दौड़ने से रोक नह पाती thi…gore गले निचे उसके भरे हुए बूब्स अब बी कैसे हुए थे जो एक लीटर क करीब दूध किसी को पिलाने जैसे तैयार खड़े ho…aur निचे सटकते hi अन्ह्के चौड़ी करनी पड़ती थी क्यू की मीणा की कमर hi इतनी चौड़ी thi..aur इस वजह से उसकी गांड क कूल्हे पीछे सरक कर उभर आये थे और इस वजह से चलते वक़्त उसकी गांड की दरार में कपडे फास जाते थे और इ नज़र हवस क पुजारियों क लिए किसी हसीं पल से काम नह होता tha…aur इ जानकर मीणा ज्यादातर बहार जाते वक़्त साडी hi पहना करती थी…

मीणा का पति एक अचे पद पर काम करता था जिस वजस से मीणा क लिए किसी चीज़ की कमी नह होती थी और उनके दो बचे हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करते the..is वजह से मीणा और उसका पति दोनों hi घर में रहते the..aur इस वक़्त उसके पति को ड्यूटी ऐसी जगह पे लगी थी वो सुबह 8 बजे निकल जाता तो शाम को 7 या 8 क करीब hi लौट आता और इस बीच मीणा अकेली hi घर में rehti..aur इस बीच उसका मैं बहलाने क लिए एक साधन था वो है टीवी क्यू की मीणा ज्यादातर अस्स पास पडोसी क घर जाकर गप्पे मरना पसंद नह करती थी और मार्किट वगैरा जाना बी होतो तो ज्यादातर अकेली hi jaati..lekin कभी कबर अपने पडोसी या किसी सहेली क साथ बी jaati…par ज्यादा nh…aur उसके पति को उसके अकेले को मार्किट जाना किसी सहेली का साथ जाने में कोई पाबंधी नह thi..q की उसके पति उस पर पूरा विश्वास रखता tha…par इ विश्वास कब टूटेगा इ तो वक़्त hi बताएगा

और मीणा की सेक्स की लाइफ बस ठीक थक hi संजो पर उसमे कोई रोमांच नह होता था बस दो जिस्म कुछ देर क लिए मिलते थे और कुछ देर में वही दो जिस्म अलग मुँह करके सो जाते थे क्यू की कुछ 5-6 मीन्स में उनका खेल ख़तम हो जाता था..

बचे होने क बाद और पति क बढ़ते काम क टेंशन मीणा ने अपने सेक्स की कमी पूरा काबू रखा हुआ था और वही उसका पति इ सब भूल hi जाने क मंज़िल पर था पर अपनी बीवी को खुश करने क लिए वो हफ्ते में एक दो बार कुछ 5 मीन्स क म्हणत बिस्टेर पे करलिया करता tha..khair मीणा बी अब इनसब की परवा किये बगैर अपने पति और बचो का ख्याल रखते हुए अपने hi ख़ुशी से जी रही thi…lekin उसे क्या पता था कुछ hi दिन में उसकी जिंदगी ऐसा तूफ़ान आनेवाला है जो उसकी दिल दिमाग और जिस्म में छुपी हवस को जगदगी और जिंदगी का वो मजदगी जिसने उसे सपने में बी नह सोचा था

खैर इ बात तब शुरू हुई जब मीणा अपने एक सहेली क साथ मार्किट गयी हुई थी और उस वक़्त जमील कोई जुगाड़ ढूंढने की आखरी कोशिश में इधर उधर घूम रहा tha…aur उधर मीणा अपने सहेली क साथ मार्किट में कुछ चीज़े खरीद रही थी वो कुछ देर बाद वो दोनों मार्किट से जरुरत क सामान खरीद कर उसी रस्ते से आये जिस रस्ते पे जमील शिखर को ढूंढ रहा tha..is बीच मीणा और उसकी सहेली क ऊपर जमील क नज़र पद गयी और और वो दोनों को बारी बारी घर क देखे जा रहा था पास असल में वो मीणा को देख कर पागल हो गया था और उसकी नज़र इसलिए मीणा की सहेली को बी देख रही थी की क्यू की वो जमील को खा जाने वाली नज़र से गुस्से से देख रही thi…par मीणा इन दोनों से वाकिफ नह thi…par तब उसकी सहेली उसे थोड़ा जल्दबाज़ी में चलने को कहा तो मीणा ने पूछा क्यू क्या हुआ भाभी? कोई परेशानी है क्या?

सहेली- अरे मीणा तुम जल्द चलो तो सही बताती hu..kehke वो मीणा क हाथ को थम कर चलने लगी तो मीमा थोड़ी सी रुक गयी और क्या हुआ bhabhi.tab सहेली बोली मीणा वो आदमी को देख रही ho…meena ने पूछा कौन bhabhi…kehke इधर उधर देखने लगी और बोली यहाँ तो बहुत सारे मर्द आते जाते है आप किसकी बात कर रहे हो?

सहेली - अरे वही जो उस कार क बगल में खड़ा hai..na वो…

मीणा ने एक बार नज़र डाली तो सामने एक हत्ता कट्टा कला आदमी रुका है जो दुखने में एक गुंडे की तरह hi है ..

मीणा ने उसे देखा और अपने सहेली से बोली है वो गुंडा जैसा दीखता है वो?

सहेली है वही गुंडा जैसा दीखता नह गुंडा hi है…

मीणा- चलो जाने तो भाभी हमे क्या लेना देना..

इधर मीणा और उसकी सहेली की बाते चल रही थी तो उधर जमील को समझने में देर नह लगी दोनों औरते उसी क बारे में बात कर रही hai…wo अब मैं hi मैं मुस्कुराया क्यू की उसे मीणा की जिस्म की बमवात को अपने आँखों में कैद करने का जो वक़्त मिल रहा tha..aur वो मीणा को hi घर कर देखने laga..meena इ तो नोटिस किया पर उसने इग्नोर किया क्यू की ऐसे उसके साथ कही बार हो चूका tha..aur वो अपने सहेली से बोली चलो भाभी इतने लोग होते हुए आपका वो गुंडा हमे क्या तकलीफ देगा chalo..kehkar मीणा आगे बड़ी तो उसकी सहेली बोली मीणा नज़र झुकाये jaana..tum उसके बारे में जानती नह हो तो मीणा बोली तो बतादो न bhabhi…saheli बोली बस उसको क्रॉस होने दो सब बतादूंगी कहकर वो चुप चाप चलने लगी और मर्म बी उसके saath..aur जैसे वो दोनों जमील क करीब aaye..to जमील एक पल क मीणा को देखता hi रह gaya….meena का वो खूबसूरत चेहरा लाल हॉट गोरा बदन मीणा की वो सीने की उभर जो इस वक़्त उसके नील रंग क साडी क पल्लू क पीछे छुपी हुई थी और ऊपर से मीणा की चलने की चाल जो एक हाथ में साडी को पकड़ी हुई thi…aur जैसे hi मीणा ने जमील को क्रॉस किया तो मीणा की मटकती गांड को साड़ी क ऊपर से देख कर जमील को रहा नह गया और उसके मुँह से ahhhhh….kya पीेछे है….

जमील ने धीरे से hi बोलै था पर इतनी आवाज़ काफी थी मीणा की कानो तक पहुंचने क liye…aur एक पल मीणा ने मुद क जमील को गुस्से से dekha…par उसी वक़्त उसकी सहेली ने उसे रोकते हुए पूछी पीछे क्यू देख रही चलो सीधे…

और मीणा और वो दोनों चलने lagi…tab मीणा ने पूछा कौन है वो आदमी बड़ा बत्तमीज़ लगता है…

सहेली- बत्तमीज़ लगता नह बत्तमीज़ hi है..

मीणा- आप कैसे जानती हो उसे?

सहेली- अरे मीणा वो मेरे पडोसी है न रेशमा उसका पति पुलिस में है न उसके पति ने रेशमा को बताया तो उसने मुझे बताया….

मीणा- ाचा इ तो बतावो की क्या बताया..

सहेली- वो किसी औरत ने उसके दोस्त और उस पर कंप्लेंट किया tha…aur उनको स्टेशन लेके गए बी थे और सुना है की वो तड़ीपार गुंडा बी है…

मीणा की सहेली ने कुछ चढ़ा कर hi बोलै था बल्कि हक़ीक़त इ है की सिर्फ उसके दोस्तों पर hi कंप्लेंट हुआ था बल्कि जमील ने दूसरे दिन छुड़ा लिया था..

पर मीणा को सचाई पता नहीं थी वो यही सच मान बैठी और उसे इस वक़्त जमील पर गुस्सा बहुत अज्ञता था…

तब उसकी सहेली बात को बढ़ाते हुए बोली और सुना है बहुत बड़ा औरतबाज़ है..

अब मीणा कुछ इर्रिटेट फील करने लगी क्यू की एक तरफ उसकी सहेली जमील की बुराई कर रही थी और वही मीणा को कुछ देर पहले जमील क कही हुई बात "क्या पीेछे है" मीणा को इ बात कुछ बुरी लगी थी क्यू की पीेछे तो रंडी औरतो को कहा जाता hai…isliye उसे थोड़ा बुरा लग रहा tha..par वो बात उसकी सहेली ने सुना नह था इस बात की मीणा को ख़ुशी थी क्यू की अगर उसकी सहेली सुन लेती तो वो किसी और को जरूर बताती और उसके मुँह से दूसरा तीसरे क मुँह se…aur मीणा एक बार फिर से मुद क देखा तो उसमे जमील को उसे hi घूरते हुए hi पाया और वो ज्यादा कुछ होने देना नह चाहती थी और नहीं सहेली की बात को इस मामले में आगे बढ़ाना चाहती thi..isliye उसने ऑटो पकड़ा और सहेली को बीच में उसके घर को ड्राप किया फिर उसी ऑटो पर अपने घर chaligayi….aur इस बीच मीणा ने गौर नह किया की एक कार उसका ऑटो को फॉलो करके उसके ठिकाने का पता कर क जा चूका है..

जैसे hi मीणा और उसके सहेली ने ऑटो पकड़ा था जमील अपने कार में बैठ कर उनका पीछा किया दूर से hi..aur उसने मीणा क घर को देख लिया tha..aur वो मीणा क बारे में सोचने लगा था…

उसे आँखों क सामने बार बार मीणा का हसीं चेहरा नज़र आ रहा tha..uski जिस्म की वो करवट जो पिचि सर्कि hui…Jameel का इ सोच कर तो लुंड hi खड़ा होने लगा tha..wo मैं में hi सोचने लगा सोउ ालतु फालतू औरतो को छोड़ने क बदले मीणा जैसे एक हसीं औरत को छोड़ा जाए तो उससे बी दुगना मजा aayega…aur इ सोच कर उसने थान लिया की वो काम से काम एक बार तो मीणा क जिस्म को चक लेगा चाहे प्यार से या जबरदस्ती se..lekin तब उसे ख्याल आया की जबरदस्ती से मीणा को उठाने क लिए इ उसका शहर नह जो चाहे kare….ab क्या karu…meena जैसी औरत को तो मैंने आज तक नह ठोका hai…bas सपने देखे है और आज जब मेरे सामने ऐसी औरत कड़ी है तो मई कुछ नहीं कर पा रहा hu…lekin मीणा को पटके ??? पता नह पटेगी या नह …और मुझे इसका एक्सपीरियंस बी नह कैसे pataye…aur उसे तभी कुछ याद आया और उसने अपने फालतू दोस्त इस शहर में बने थे उन्हें फ़ोन लिया और अपने रूम में bulaya…aur उनको शराब पिलाकर उन्हें पूछा की यार तुम लोग इ लड़की कैसे पता लेते ho…aur उनका जवाब सुनाने लगा ….उन दो लोगो में एक काफी होशियार था लड़कियों को पटाने क मामले में तो उसने बातो बातो में बोलै की अरे भाई कुछ लोगो पे ज्यादा म्हणत करनी पड़ती है और कुछ लोग तो आसानी से पैट जाती hai..aur कुछ औरते तो ज्यादा स्ट्रिक्ट hi होती hai…jaise कुछ दिन पहले हुआ और आप ने हमे पुलिस स्टेशन से छुड़ाया…

जमील ने पूछा ाचा तो आसानी से पाटडी है वो कैसे…

अरे भाई जिन्हे पैसो की या किसी चीज़ की लालच होती है वो आसानी से पड़ती hai…aur है भाई कुछ शादीशुदा औरत बी होते है जो आसानी से पटती है

जमील- वो कैसे

लड़का- अरे भाई उनके पति गांडू होते है इसलिए हाहाहा और तीनो हास्पदे..

जमील- तो मुश्किल वाली कौनसी

लड़का- भाई कुछ लड़किया थोड़ी घमंडी होती है वो इतनी आसानी से जाल में नह आते वैसे कुछ औरत बी जो पहले बहुत नखरे करते है…

दूसरा लड़का बात को आगे बढ़ाते हुए बोलै भाई हमने आज तक जितने बी माल पतये hai..aur वो सब इन्ही केटेगरी क hi है…

पहला लड़का है भाई वो बी एक या do..waise हमारे जैसे लफंगो को लड़किया काम hi पटती hai…hahaha और तीनो हसने लगे

लेकिन जमील को उनके बात से संतुष्टि नह हुई थी क्यू की वो अंदाज़ा नह लगा पाया था की मीणा किश केटेगरी में आती होगी और उसे लगा की इन लफंगो से कुछ होनेवाला नह और वो चुप शराब की घूंट मरता रहा तभी पहला लड़का बोलै पर भाई एक बात hai….pativrata औरत बहुत मजा देती है..

जमील- अरे वो कैसे पतिव्रता औरत तो अपने पति क सिवा किसी और को देखती बी नह न..

लड़का- क्या भाई आप बी ..आज कल तो आपको पता hi है काम क सिलसिले में मर्द बिजी हो जाता है और अपनी पत्नी को टाइम नह दे पते और वो बेचारी पत्नी बी कितने दिन तक अपने जिस्म को भूखा rakhegi…aur उसकी जिस्म की आग जब भड़की हुई होती है तब सही वक़्त पे किसी ने उसे प्यार दिखाया तो वो …सब कुछ भूल सकती hai….aur इ बात मई झूट नह बोल रहा हमारे एक दोस्त को ऐसी hi औरत मिली थी क्यू भाई बोल क उसने अपने दूसरी साथी को देखा तो उसने बी है बोल diya…khair कुछ देर बाद उनकी शराब ख़तम होगयी तो वो चले गए और जमील रूम में बैठा सोचने लगा शायद मीणा बी ऐसी हो to…muje बी किसी तरह मीणा को पटना hi होगा…( यहाँ पर एक बात बताना जरुरी है की जमील को अब बी मीणा का नाम पता नह tha…wo बस कहानी आगे बढ़ाने क लिए फ़िलहाल जरुरी है)

खैर ऐसे hi दो दिन बीत गए और जमील मीणा को पीछा करते हुए उसकी घर क पास जाकर बी रुकने लगा और मीणा ने इसे इन दो दिन में एक दो बार नोटिस बी किया…

और जब वो अगले दिन जब कुछ खरीदने मार्किट गयी तब तो मीणा ने देखा hi जमील उसे घर से होते हुए मार्किट और मार्किट से होते हुए घर तक आने तक बी पीछा कर रहा hai…aur तब तो मीणा को यकीं hi होगया था की वो उसके hi पीछे पड़ा हुआ hai…meena ने सोचा इस बात को उसके पति को batadu…par कुछ सोचने क बाद उसे लगा nh…wo बेचारे तो अपने काम क टेंशन में होते है और उन्हें इ बात बोलकर और टेंशन नह dena…ise मई hi सबक सीखा थी hu…tab उसे अपनी सहेली की बात याद आगयी की वो एक गुंडा है और बड़ा बत्तमीज़ बी है… मीणा सोची तो क्या हुआ मुझे क्या उससे लेना Dena..aise लोगो को अब नह रोका तो बात हाथ से निकल सकती hai…mai hi डाट दूंगी उसे पहले और कुछ काम नह बन पाया तब hi पति को बताकर उसकी मरम्मत karungi..e मीणा में अपने मैं में डेसिओं लिया और वो कुछ देर क लिए सब भूल कल अपने घर काम में बिजी होगयी….

खैर 2 दिन फिर बीत गए और इन दो दिन में जमील कई बार मीणा क घर का चक्कर काट चूका tha..aur मीणा ने बी उसे एक दो बार देख कर गुस्से से मुँह मोड़ लिया tha…par इस बात से जमील को कोई फर्क बी नह पड़ा था…

और उसी दिन शाम को मीणा कुछ काम से बहार गयी थी और आतेवक़्त उसने देख लिया की जमील उसके पीछे hi चले आरा रहा hai…meena ने पहले सोचा की यही उसको डाट देती हु पर लगा नह ऐसे करू तो यही तमाशा खड़ा हो jayega…jo बिलकुल सही नह होगा और मीणा ने कुछ सोचा और वो आगे जाके दूसरे रस्ते पर टर्न ली जो थोड़ा अँधेरा होते hi सुनसान हो जाता है और वह से मीणा क घर क लिए शार्ट कट tha..aur वो कुछ दूर चलकर एक सुनसान जगह देख कर रुक गयी और पीछे पीछे मुद क देखती तो जमील ठीक उसके पीछे कुछ hi दुरी पर खड़ा था और उसकी नज़र मीणा की गांड पर thi…aur इ देख कर तो मीणा और गुस्से से लाल होगयी और वो गुस्से से जमील से बोली hello mr…kya है कब से देख रही हु आप मेरा पीछा करते hi रहते हो humesha…meena की बातो में गुस्सा जरूर था पर आवाज़ थोड़ी धीमी थी क्यू की मीणा नह चाहती थी की उसकी आवाज़ आस पास क घर या लोगो तक pahuche…waise तो वह ज्यादा लोग नह थे बस एक दो बुड्ढे hi इधर उधर घूम रहे थे और जो एक दुकान बी थी थोड़ी दूर थी और लोगो क घर तो कुछ दूर hi थे .

मीणा की आवाज़ सुन कर जमील वही रुका और मुस्कुराया

जमील को अपनी बात पे मुस्कुराता देख कर मीणा और बी गुस्सा हो गयी और इस बार उसने थोड़ी बड़ी आवाज़ में hi बोली क्यू सुनाई नह देता क्या बेहरे हो??

इस बार जमील फिर हँसा और बोलै बहुत अछि तरह से सुनाई दिया मैडम…

मीणा फिर गुस्से से तो फिर बतावो क्यू पीछा करते हो मेरा…

जमील- हस्ते हुए अरे मैडम अगर मई कहु की आप मेरे आगे आगे क्यू चलती हो हमेशा?? हेहेहे

जमील की बात पर मीणा और गुस्सा हुई और बोली इ बत्तमीज़ी मेरे पास मत karo…mai ऐसी वैसी नह हु

जमील हस्ते हुए- है पता है.. हहै

जमील की ऐसी नज़र अंदाज़ करनेवाली बातो से मीणा का गुस्सा सर पर चढ़ रहा था और वो गुस्से से पूछी क्या पता है…

जमील- अपने चेहरे पे हसी लाते हुए यही की आप बहुत खूबसूरत ho…aisi वैसी नह ho…hehe

जमील क मुँह से अपनी तारीफ सुनकर मीणा को कुछ अजीब सा लगा tha…aur कही न कही इस तारीफ क चलते उसका थोड़ा गुस्सा बी काम hogaya…lekin वो जानती थी की जमील उसके पीछे किस इरादे से पड़ा हुआ hai…aur जमील का वो इरादा उसे बिलकुल बी पसंद नह tha…aur वो जमील को गुस्सा धिकाते हुए बोली मेरी तारीफ करके आपको कुछ नह मिलने वाला ..इसलिए अपना वक़्त बर्बाद मत करो और किसी और को ढूंढ लो…

जमील को औरत हो या लड़की पटाने का एक्सपीरियंस तो नह था पर वो बातो को कटना अछि तरह समझता था और उसने अपने चेहरे पे हसी बढ़ाते हुए bola…ab जब चन्दन जैसे बदन वाली खूबसूरत हसीना मेरे सामने हो तो किसी और क पास जाने की ीचा तो दूर की बात और चाहे इसके लिए मेरा वक़्त क्यू न बर्बाद ho…waise बी क्या काम है मुझे आज kal…hehehe

इस बार मीणा अपनी तारीफ सुनकर अंदर से अंदर कुछ ज्यादा hi खुश हो गयी thi..q की आज तक उसके पति ने बी उसके सामने इस तरह कभी तारीफ नह किया tha…aur नहीं और किसी ने और अगर गलती से किसी ने किया बी होगा तो उसके सामने नह किया tha…wo ा ऐसी तारीफ़ की उसके बदन जैसे कीमती चीज़ से तुलना किया हुआ tha…meena अंदर से खुश तो थी पर मीणा को किसी गैर मर्द क साथ कोई रिश्ता जोड़ना नह था किसी कीमत pe…isliye उसने सोचा इससे और कुछ बोलने से ाचा है मई hi चली जाती हु सोच क मीणा जाने लगी तो जमील फिर से कुछ आगे बड़ा और बोलै कहा चले madam…aapne कुछ बताया नहीं…

मीणा उसे घूरते हुए आप से बात करना hi बेकार है कहकर फिर से अपने कदम तेज कर दी..

तब पीछे से जमील की आवाज़ आयी एक बार अपना क तो देखो मैडम इ बेकार की चीज़ अपनी बहुत काम आनेवाली..

मीणा पलट क देखि और रुक कर बोली मुझे आपकी किसी काम की जरुरत नह hai…mera पीछा करना छोड़ दो यहाँ कुछ नई मिलने वाला आपको…

जमील- हस्ते हुए अगर किस्मत में लिखा होगा तो सब मिलेगा madam..wo बी उम्मीद से ज्यादा एक बार प्यार से सोच क तो देख लो माशूका बनके दिल में रखेंगे आपको..

इ बात सुनते hi मीणा में इधर उधर देखा की कही किसी ने जमील क बात सुनी तो nh…aur जब उसने देखा की उनके नज़दीक कोई नह है तो वो थोड़ा रिलैक्स होगयी और sochi..e तो बड़ा बत्तमीज़ hai…ab और इसका मुँह लग्न ठीक नह है और उसने देखा आगे से कुछ लोग चलते हुए उसी रस्ते से आ रहे है तो मीणा बिना कुछ बोले hi अपनी घर की तरफ चलने लगी और इधर जमील ने बी उन लोगो को देखा और कुछ कहना ठीक नह समजा और निकल गया….

यहाँ मीणा अपने धड़कते दिल क साथ अपनी घर की और जा रही थी तो उसे जमील की हर एक हरकत को याद करके दोहरा रही thi…aur सोच रही थी क्या मई सच में चन्दन जैसे बदन की मालकिन हु या जमील मुझे पटाने क लिए ….हो सकता है पटाने क लिए hoga…..par पटाने क लिए तो सही पर कभी किसी ने मुझे ऐसा नहीं कहा बल्कि मेरे पति ने b…..kya मेरे पति को मई चन्दन जैसे बदन वाली नह lagti…kya उनकी नज़र में मई अब खूबसूरत नह hu..q की उन्होंने मुझे खूबसूरत बी नह कहा जो आज जमील में kaha…wo बी बार baar…e सोचते हुए मीणा को पता hi नह चला की उसका घर कब aaya…aur उसने एक बार फिर पलट क देखा कही जमील फिर से उसका पीछा तो नह karra…lekin पीछे कोई नह tha…aur न चाहते हुए उसका मैं कुछ उदास हो गया tha…uska दिल कर रहा था की जमील उसके पीछे आते आते ौकी और तारीफ़ karta…khair इ सब नह हुआ था और मीणा अपने घर में जाके डिनर की तैयारी करने lagi…aur न चाहते हुए बी उसे जमील की एक एक बात उसके दिमाग में घूमने लगी थी किसी सवाल की tarah…aur उसने अपना मोबाइल निकला और यूट्यूब में जाके कुछ सर्च की और कुछ देर बाद उसके मोबाइल में गाना बजने लगा…

चन्दन सा बदन चंचल सी पवन धीरे से तेरा इ musukana….hume दोष न देना जग्वालो हो जावु अगर मई deewana….chandan सा बदन…..

गाना चल hi रहा tha…meena का पति ऑफिस से आया और अपना बैग रख क सीधे किचन में आया तो देखा की उसकी बीवी गान सुनते हुए डिनर बना रही hai…e देख कर वो बोलै आज क्या मीणा बड़ी खुश लग रही हो गाना सुनते हुए डिनर बना रही ho…kuch खास है क्या…

मीणा अपने पति को देख कर एक पल चौक पड़ी क्यू की गाने क वजह उसे पता hi नह चला था की कब उसका पति आया और बोली अरे आप aagaye…e गाने की वजह से सुनाई नह दिया…

पति- वही सोच रहा था की मेरी प्यारी बीवी आज इ कैसे गाना लगाए हुई hai..wo बी किचन में..

मीणा वो बस ऐसे hi बोर हो रही थी सोचा गाना सुनु…

पति- है वो ओल्ड गाने ः

मीणा- हस्ते हुए है पुराने गाने बहुत मीनिंग फुल होते है न..

पति - है मीणा बहुत अचे होते है…

तब मीणा को कुछ याद आया और अपने चेहरे पे एक मुस्कराहट लेकर पूछी एक बात बतावो इ चन्दन सा बदन का मतलब क्या होता है…

पति- इसका मतलब इ होता है की एक खुसभुदार बदन…

मीणा कुछ उत्सुकता से पूछी जैसे?

पति- इसका मतलब जैसे फिल्म में हीरोइन होती है न जो अपने बदन को तरह क खुशबु क परफ्यूम लगते hai…waise इसको तुम शायर की कल्पना बी संजो…

मीणा- और?

पति- और कुछ नह बस अब मई फ्रेश होता हु मेरे लिए थोड़ा कॉफ़ी बनाना

मीणा- ठीक है…

और उसका पति बाथरूम जाते hi मीणा सोचने lagi..inko कोई दूसरा और मतलब नह मिला kya….q की मीणा ने सोचा था उसका पति बोलेंगे की जैसा तुम्हारा badan…par पति ने ऐसा कुछ नह बोलै था इसलिए उसे थोड़ा बुरा लगा tha…isliye वो कही माँ कही जमील क उस बात को याद करके खुश हो रही थी…

और तब तक उसका पति फ्रेश हो क आया और मीणा ने उसे कॉफ़ी दी और उसके बाद वो कॉफ़ी पि कर बहार चला गया..

पति क जाते hi मीणा डिनर बनाकर रेडी की और कुछ देर बाद उसका पति बी आया और खाना बी फिनिश करके दोनों सो गए….

पर मीणा की नींद कुछ देर क लिए उड़ गयी thi…use आज शाम को जमील क साथ हुई एक एक बात याद आ रही थी कैसे मीणा क गुस्सा होने पर बी जमील उसके साथ फ़्लर्ट कर रहा tha..uski तारीफ़ कर रहा tha…e सब सोच कर उसके दिल में थोड़ी हलचल सी महसूस hui…wo जानती थी की जमील जिस इरादे से उसके साथ फ़्लर्ट कर रहा hai…uske लिए वो इरादा बिलकुल गलत था हलाकि उस इरादे क बारे सोचना बी उसके लिए गलत था पर कही कही न कही जमील की बाते उसे उसे अछि बी लग रही thi…aur वो यही सोचते सोचते hi सो गयी…

अगले दो दिन कुछ खास नह hua…bas जमील मीणा की घर क 4-5 चक्कर काटे थे और इस बीच मीणा और जमील की आंखे एक बार मिल बी चुके थे और मीणा में उसे कोई रियेक्ट करना जरुरी नह समजा था…

और उस दिन शाम को मीणा फिर से मार्किट गयी thi…aur जाते और आतेवक़्त वही हुआ जो मीणा ने सोचा tha…Jamil का पीछा karna…aur इस बीच मीणा ने मुद क बी देखा था और उसने पाया था की जमील की नज़र कहा पे hai…par सच बात इ थी की आज इसतरह जमील का उसका पीछा करना उसे बुरा नह लगा tha…aur इ बात शायद जमील बी जान गया tha….aur जब वो मार्किट से वापिस आने लगी तभी मीणा का मन कुछ दुविधा में पद गया tha…wo इसलिए की वो सोच रही थी अगर वो सीधी चली जाएगी तो जमील भीड़ में उसके साथ बात करने की कोशिश नह करेगा और अगर वो आड़े रस्ते से गयी तो जमील उसको जरूर chedega…q की उसे जमील क इरादा बिलकुल पसंद नह था तो वो जमील को ज्यादा भाव देना नह चाहती थी पर कही न कही उसके कान को जमील की बाते सुनने की ीचा जाग उठी थी उसके जिस्म को जमील क मुँह से तारीफ़ सुन्ना ाचा लग रहा था और वो जमील क इरादे जानते हुए बी अपनी जिस्म की तारीफ़ सुनने क लिए आड़े रस्ते पे मुद gayi…aur जैसा उसने सोचा था वैसे hi हुआ और एक सुनसान जगह देख जमील मीणा क नज़दक आया तो मीणा ने शुरुवात करते हुए जमील से बोली आप समजे नह क्या क्यू पीछा करते हो मेरा आपकी दाल मेरे पास नह गलनेवाली..

जमील हस्ता हुआ किस्मत ने चाहा तो दाल बी गलेगी और बाकी सब b…haha

मीणा- पागल हो गए हो क्या?

मीणा की इस बात में गुस्सा कही नह था बल्कि एक नटखट अंदाज़ था जिसे बखूबी जमील समाज कर दिल hi दिल में खुश हुआ था और मीणा को उसी अंदाज़ में बोलै है है आपका इ कोमल मुलायम जिस्म को चुने की ख़ुशी में पागल हो जावु मई..

मीणा जानती थी एक गैर मर्द वो बी अंजना उसकी जिस्म की तारीफ़ कर रहा है और चुने की बी बात कर रहा है

..इ गलत है पर मीणा को इस बात से कुछ ख़ुशी मिल रही थी जो उसके चेहरे पर एक छोटी सी मुस्कान बन कर aayi..lekin अँधेरे क वजह से जमील को दिख नह paayi…meena अपना मुँह थोड़ा अगल बगल में देखते हुए boli..Dekho इ सब ठीक नह hai…mai एक शादीशुदा हु और दो बचो की माँ हु..

जमील- क्या?

जमील की ऐसी सवाल वाली जवाब सुन मीणा ने सोचा की अब जमील मेरा पीछा छोड़ेगा क्यू की शायद उसे पता नह था की मई दो बचो की माँ hu…aur बोली अब क्यू होश उड़ gaye…bacho की बात सुन कर..

जमील- है …पर सोचा नह था..

मीणा अब थोड़ी अपने चेहरे पे मुस्कान लाते हुए अब तो मेरा पीछा करना छोड़ दो…

जमील हस्ते हुए अब तो और ज्यादा पीछा करूँगा …जो औरत दो बचे क माँ होते हुए बी अपनी फिगर ऐसे मेन्टेन कर सकती है तो सोचो वो अंदर से कितनी सेक्सी होगी कितनी भुकी hogi….meri तो लाटरी निकल जाएगी अगर गलती से एक बार बी चुने को मिल गयी तो….
 
जमील की इ बात मीणा की उम्मीद क बहार थी मीणा ने कभी नह सोचा था की जमील उसे सेक्सी kahega…..use लगा की वो जाने अनजाने में जमील क गलत इरादे को बढ़ावा दे रही hai…isliye वो बिना कुछ बोले hi जाने लगी तो जमील उसकी मटकती हुई गांड को देख कर है है क्या ऐडा hai…aisi मटकती है की जैसे आगे बढ़ाने की दावत दे रही हो…

मीणा समाज गयी थी की जमील किस चीज़ की बात कर रहा है और वो मुद क थोड़ा गुस्सा दिखते बोली मेरे जिस्म पर अपनी गाँधी नज़र मत डालो…

जमील है है बनानेवाला बड़ी फुर्सत से बनायीं होगी इ चीज़ और क्यू न देखु जब इतना सुन्दर नज़रर आँखों क सामने हो…

मीणा अब शर्म सी गयी थी क्यू की एक गैर मर्द उसकी गुप्त अंग गांड की तारीफ़ कर रहा tha….wo कुछ बोलने hi वाली थी तभी जमील ने कहा अरे मैडम जाते वक़्त कपडे थोड़ा पीछे से ठीक करके जाना वर्ण मेरे साथ कई और बी आपके पीछे पद जायेंगे इ खूब सूरत नज़ारा देखने क लिए और मुझे लड़ना न पड़े उनसे अपनी माशूका का की इज्जत छुपाने क लिए…

जमील क इस बात पर मीणा को थोड़ी हसी आयी और उसने पूछा क्या हुआ है मेरे कपडे को…

Jamil-aapke कपडे फास्सी हुई है दरार में…

इ सुनते hi मीणा थोड़ी चौक गयी और शर्मा बी गयी और वो इस बार जमील क तरफ मुँह करके कड़ी हुई और पीछे हाथ डालके अपनी गांड की दरार में फांसी हुई चूड़ीदार को ठीक करने lagi…aur बोली आप क्यू नज़र वह क्यू thi….sidhe देख कर चल नह सकते kya….meena ने थोड़ा बहुत गुस्सा दिखते हुए kaha…par शायद इ गुस्सा सिर्फ चेहरे पर था दिल में नह…

मीणा ने जानबूजकर फेस ..जमील की तरफ किया हुआ था ताकि जब वो पीछे से अपना कपडे ठीक करे तब वो नह देखे…

और मीणा को अपने फेस तो फेस देख जमील खुश हुआ और बोलै अरे मैडम बोलै न आपकी बहुत कमल का है आपका इ cheez..bol कर जमील मीणा क कमर क निचे अपनी नज़र दौड़ने लगा…

इस बार मीणा को जमील की बातो पर गुस्सा नह आया था और वो जमील को छेड़ते हुए बोली ऐसा हर औरत की पीछे hi घूमते हो kya..e चीज़ को dekhne…e बोलते hi मीणा चुप रही और सोचने लगी इ क्या बोल बैठी मई इसके samne….chi मुझे बी न सोच समाज कर बोलना बी नह आता..

सामने खड़ा जमील हस्ते हुए बोलै अरे मैडम ऐसे तो सबके पास इ चीज़ होती है मैडम लेकिन आपका कुछ हैट क है मैं करता है है देखते hi राहु मई तो इ सोच कर पागल हो रहा हु इ कपडे की ऊपर से इतनी मुलायम दिख रही थी सोच रहा हु अंदर से कितनी मुलायम hogi…chune में मजा आएगा….

जमील मीणा की जिस्म की तारीफ़ कर रहा था वह मीणा को कुछ अलग hi फीलिंग होने लगी thi…wo सोच रही thi…kaisa इंसान hai….meri किसी बातो का इसपर असर hi नह पड़ता और इसकी डेरिंग तो देखो इतने खुल्लम खुल्ला वो मेरी अस्स की बी तारीफ कर रहा है बिना किसी डर क लगता है बहुत हिम्मतवाला hai….par मई इ सब क्यू सोच रही hu..jabki इसका इरादा गलत hai…nh मुझे अब इसको रोकना होगा लेकिन kaise…e तो बातो से नह मानता बेहतर है मई hi चुप rahu..lekin इसकी बाते तो ऐसे होते है की मई न चाहते हुए बी उसका जवाब दे बैठ थी hu….nh नह अब चुप रहना hi होगा इ सोच कर मीणा कुछ बोले बिना hi निकलने लगी तो जमील बोल जाते जाते अपना नाम तो बताते जावो मैडम कहके मीणा क पीछे जाने laga…aur बार बार नाम पूछने पर मीणा थोड़ी गुस्सा हुई और उसे बोली देखो अगर आप ऐसे hi मेरा पीछा करोगे तो मई अपने पति को बोलडूँगी फिर वो जाने और तुम…

लेकिन जमील बी हस्ते हुए bola…e तो ाचा hi हुआ मैडम, लेकिन मई उनसे बी दोस्ती करलूँगा जल्द hi हाहाहाहा तब बतादेना…

मीणा की इस बात की बी कोई असर जमील पर न पड़ते देख कर मीणा बोली ाचा वो आपके जैसे बेकार इंसान नह है जो किसी ैरे गैर से दोस्ती बनाये..

जमील देखते है मैडम कौन किसकी दोस्ती करता hai….aur है अगर मई उनसे दोस्ती करके दिखावु तो आप मेरे साथ……. सामजी न..

मीणा उसकी अधूरी बात को थोड़ी बहुत समाज गयी थी और वो बोली आप कुछ बी करो आपकी दाल नह गलनेवाली मेरे पास…

जमील- ाचा इ आपके पति से दोस्ती होते hi आपको पता चलेगा की दाल कितनी गलेगी…. हाहाहा

जमील मीणा की हर बात को काट रहा था फिर बी मीणा मैं hi जमील की हिम्मत को मान रही thi…aur उसे लगा की उसका पति ऐसे लोगो से कभी दोस्ती नह करेगा इसलिए वो अपने पति क भरोसे से बोली दोस्ती कर क तो दिखावो फिर दाल क बारे में socho..aur सुनो अब जावो यहाँ से और है दुबारा कभी मेरे पीछे मत आना और गलती से बी ….मीणा कुछ कहने वाली थी और शर्म क मरे में रुक क अपनी गांड की तरफ देखने लगी…

और जमील मीणा की आधी बात की मतलब जानकर बी मीणा को छेड़ते हुए क्या गलती से बी…..?

मीणा कुछ नह बोली और आगे जाने लगी तो जमील शरत अंदाज़ में बोलै वो आपकी पीछे की कोमल हिस्सा न देखु na……par क्या करू मैडम चीज़ hi ऐसी है देखना तो पड़ेगा hi न कही चलते वक़्त गिरना जाए एक दूसरे क टक्कर में…

जमील ने फिर से मीणा को इ बताने की कोशिश की थी उसकी मटकती हुई गांड बिजली बरसती hai...Jamil की इ बात अच्छीतरह समाज गयी थी की चलते वक़्त उसकी कूल्हे मटकते हुए देखना ाचा लगता hai…aur शर्म सी गयी और पीछे मुद क जमील को देखने से अपने आप को रोक नह paayi…aur फिर आगे मुड़कर अपनी गांड मटकते हुए घर की और चलने लगी

और उसे फिर जमील की आवाज़ आयी मैडम आप बहुत प्यारी हो..

इ बात सुनकर मीणा को थोड़ा ाचा लगा और वो फिर से एक मुस्कराहट क साथ पीछे मुड़ी तो जमील उसे देखते हुए बोलै बहुत मजा आएगा मैडम जब आपसे प्यार karunga…hehe..meena. ने दर क मरे चारो तरफ देखा कही किसी ने सुन तो नह liya…aur सोची अब और इसके मुँह लग्न ठीक नह है और चल padi….fir रस्ते में जमील क बारे में hi सोच रही thi…..aaj जमील ने उसकी तारीफ़ बी की और उसे सेक्सी बी kaha..upar से वो मेरे सामने hi मेरी अस्स को गन्दी नज़र से देख रहा tha…aur तो और मुझे चुने की बात कर रहा tha….par मुझे उसकी कोई बात बुरी क्यू नह लग रही thi….uski गन्दी नज़र मेरे जिस्म को देखते हुए मुझे उसे दताना tha…mai क्यू नह उसे डाट paayi…kahi मुझे उसकी हरकत अछि तो नह लग rahi….kahi मई उसके गलत इरादे को कामयाब होने में इंदिरेक्ट मदत तो नह कर रही hu…nh नह मुझे बिलकुल ऐसा कुछ नह करना चाहिए जिससे मेरे परिवार की बदनामी हो ..और पति धोका करने की बात तो सोचनी बी नह chahiye…bas होगया आज क बात मई उसके मुँह कभी नह लगूंगी….

मीणा ने सोच समाज कर इ डेसिओं तो लिया था पर कही कही न कही न कही जमील उसके दिमाग में बस चूका tha…aur इ बात मीणा नकार नह सकीय…

रात में

जब मीणा और उसके पति ने डिनर फिनिश किया तो मीणा क पति ने मीणा से कहा आज थोड़ा प्यार करे क्या?

मीणा शरमाते hue…lagta है आज मूड बन गया है साहब का चलो मई आती हु…

कुछ देर में मीणा न बर्तन साफ़ करके किचन बी क्लीन किया और पति क साथ देने बैडरूम में चालीगयी..

वह बैडरूम में आयी और बैडरूम का दरवाज़ा बंद करके पति को देखते हुए बोली प्यार करोगे आज मेरे राजा?

पति - है मूड बन गया है…

मीणा पति क नज़दीक आते हुए ाचा तो कितना प्यार करोगे आज…

Pati-bahut करूँगा अब आजा

और उसके पति ने मीणा को बहो में लेलिया और बैडरूम का लाइट ऑफ करदिया…

तब मीणा बोली और लाइट क्यू निकले मई कपडे उतर देती…

Pati-q?

मीणा - प्यार कपडे क ऊपर से hi करोगे क्या?

पति- अब हम कोई पहली बार थोड़ी कर रहे है की तुम कपडे utardo…bas अपनी निघ्त्य ऊपर कार्डो और चड्डी निचे कर लो काम बन जायेगा..

पति क इ बात से मीणा थोड़ी निराश तो हुई थी क्यू वो आज इ सोच कर आयी थी की उसका पति उसे आज बहुत प्यार करेगा और जन्नत की सैर कराएगा पर हुआ तो बिलकुल अलग और वो कुछ न बोलते हुए अपनी पति का साथ देने क लिए अपनी निघ्त्य को ऊपर उठायी और निचे हाथ दाल क चड्डी को निचे घुटनो तक सरका दी तो उसका पति उसके ऊपर aaya..to मीणा की थोड़ी बहुत निराशा काम हुई और उसके पति की जिस्म उसके ऊपर आते hi मीणा थोड़ी गरम हुई और अपने टाँगे फैला diye..to उसके पति ने अपने 6 इंच लम्बे लुंड को उसकी छूट की दरार पर रखा और हल्का सा एक धक्का मारा तो मीणा क मुँह से अह्ह्ह्हह्हह की हलकी सी सिसकारी निकल पड़ी और उसने अपने पति को बहो में लिया और उसके होतो को चूसने lagi..ek hi धक्के में पूरा का पूरा 6 इंच मीणा की छूट ने निगल लिया था तब उसके पति ने बी उसे कुछ देर chuma..aur फिर चूमना छोड़कर निचे मीणा क चेहरे क बगल में अपना चेहरा रक् कर अपने छोटे लुंड से अपनी प्यारी बीवी की छूट में हलके धक्के मरने laga..aur इ हलके धक्के hi मीणा क लिए मदहोश हो कर सिसकारियां लेने क लिए और एक हर धक्के क साथ अह्ह्ह्हह्हह अह्ह्ह्हह्हह सससससस करते raho…..ahhhh मजा अअअअअररररराहा है…..

इधर निचे मुँह किये हुए उसका पति उसे छोड़ रहा तो वह मीणा अपनी hi धुन में चुदाई का मजा उठाते हुए ..अपनी कमर हिलने लगी thi…aur अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह उम्म्म्म आयआईईईइससे ऐसे होओओओओओ करते राहूऊओ…..

इधर मीणा की नशीली सिसकारी सुनकर मीणा का पति और जोर से धक्के लगते हुए बोलै कैसा लग रहा है मीणा….

अपनी छूट में लुंड की बढ़ती रफ़्तार से मीणा और ज्यादा मदहोश हो गयी और अपने पति को जवाब देते hue….haaaaaaa बहुत ाआक्कछहहआ ललललागता है जब आप करते ho……haass……uuuuuuu

लेकिन मीणा की इ नशीली सिसकारी ज्यादा देर न निकली क्यू की उधर मीणा की पति तेज धक्के क साथ झाड़ गया और हाफने laga…aur एक दो चमच काम रास मीणा की छूट में उगल दिया और दूसरी तरफ होकर सो gaya…lekin मीणा की आज प्यास की पूरी तरह से नह भुजी थी और वो अपनी कपडे ठीक करके उस अधूरी जिस्म की प्यास क साथ सोने क लिए मुद गयी…

लेकिन आज उसकी नींद कोसो दूर चली गयी thi…wo इ सोचने पे मजबूर हो गयी थी की आज उसकी प्यास अधूरी कैसे रह gayi…wo अपने पति की हर बार की चुदाई की याद करने की कोशिश करती रही लेकिन नतीजा वही निकला की उसका पति ने हर बार तो उसे इतना hi प्यार किया है …पर आज क्यू मुझे और प्यार की जरुरत महसूस हो रही hai…q अबतक मेरा जिस्म गरम hai….kahi वो कमीने जमील क बातो से तो nh…ha वो बी ऐसे hi बात किया था आज …मेरे बहुत प्यार करेगा मजा aayega..aisi वैसी बाते ची…. लेकिन जब मेरे सामने ऐसी बाते कर रहा था तब मुझे शर्म क्यू नह aayi..mati मरगयी थी meri…us पागल क मुँह लगती hu….ab नह बस hogaya…mere पति और उसका कोई सामना nh….kaha मेरे इतना ाचा केयरिंग पति और कहा हो हवस का pujari….jise सिर्फ औरत को जिस्म से मतलब hai….kaise गन्दी नज़र से देख रहा था मेरी अस्स ko…chiii और मई अब क्यू उसे अपने पति से कपड़े कर रही hu….muje तो ऐसे लोगो की शक्ल बी नह dekhni…aur मीणा ने चद्दर ोड लिया और सोने की कोशिश करने लगी और कुछ देर में कामयाब बी होगयी…

मीणा अपनी अधूरी जिस्म की प्यास की तड़प में पति का गुस्सा जमील पर निकल तो रही थी पर वो अच्छीतरह जान गयी थी की उसकी दबी हुई हवस थोड़ी जग चुकी hai…aur कही न कही इसका जिम्मेदार जमील hi hai….aur कही कही आज जो उसके पति ने उसे अधूरा छोड़ दिया था उससे वो थोड़ी खुश बी थी क्यू की आज उसे उसकी चुदाई की ीचा बढ़ती हुई पायी वर्ण अब तक तो वो पति क 5 मीन्स की चुदाई से hi खुश हो jaati….aur इस बात का श्रेय बी जमील को मान रही थी….

सच बात तो इ थी की मीणा पहले से एक सेक्सी औरत thi…aur उसे सेक्स करना बहुत पसंद था पर वो एक संस्कारी खंडन से थी और अपने संस्कार का अछि तरह पालन करती थी इसलिए उसने अपने माँ बाप क विरोध न करते हुए शादी कर्ली क्यू की उसका पति और उसकी किसी एंगल से बी जोड़ी नह बनती thi…fir शादी क बाद की सेक्स लाइफ बी उतनी खास नह और बचे होने क बाद तो उसे लाइफ से समजौता hi कर्मा पड़ा और आज तक बी वो एक अछि बेटी पत्नी और दो बचो की प्यारी माँ बनकर अपना हर काम पूरी ख़ुशी निभाया हुआ hai….par सेक्स??? इ शब्द बी अजीब होता है जो एक बार चढ़ गया तो उतरना मुश्किल हो जाता hai…aur आज मीणा की दबी हुई वासना ने फिर से बहार निकलने की कोशिश की hai…aur उसका जिम्मेदार उसका पति नह बल्कि एक गैर मर्द hai….dekhte है अब आगे होता है क्या…

ऐसे hi 4 दिन बिट चुके थे और इस बीच न जमील मीणा की घर का चक्कर लगाया या उसे कही और दिखाई diya…halaki इस बीच मीणा मार्किट बी नह गयी थी क्यू की उसे कोई काम बी नह tha..aur कुछ हद तक मीणा क दिमाग से जमील का नाम बी मिट गया था…

जमील कुछ दूसरे काम से hi बिजी था और वो इसलिए मीणा का पीछा करना कुछ दिन क लिए बंद किया tha…darasal जिस दिन मीणा ने कहा था उसके पति का दोस्ती करके तो दिखावो तब hi जमील क शैतानी दिमाग एक तूफानी आईडिया आगया था और उसी दिन उसने मीणा क पति क बारे में जानकारी हासिल कर ली thi…aur उसे जब पता चला की मीणा का पति अपनी थकन मिठाने क लिए हफ्ते में एक दो बार पेग मरने क लिए बार जाय करता है तो उसने अपने प्लान को रेडी कर लिया था और इफ्तेफाक़ से अगले दिन hi मीणा का पति बार में आके व्हिशक्य का पेग धीरे धीरे ले रहा तो जमील बी उस वक़्त बार में gaya..aur उसके बगल में hi बैठ क पिने लगा और बातो बातो में जमील ने मीणा क पति से थोड़ी बहुत दोस्ती बदली और अपना इंट्रोडक्शन देते हुए कहा की वो कुछ काम से इस शहर आया हुआ hai…aur अकेला लॉज में रहता hai…aur इ बी कहा की उसे मीणा क पति क जैसे अचे इंसान की तलाश थी जो इस शहर में उसकी मदत करे और उस दिन मीणा क पति का बिल बी उसीने hi चुकाया .और उसके बाद दूसरे दिन वो मीणा क पति क साथ उसके काम क प्लेस में बी गया और मीणा क पति क सामने ऐसे ऐसे बाते बनाये की मीणा का पति उस पर यकीं कर baitha…aur उनके बीच दोस्ती थोड़ी बाद गयी थी और आज फिर से बार में मिलने वाले थे वो बी शाम ko…aur इस बात की खबर मीणा को बिलकुल बी नहीं थी न उसे उसके पति ने बताया था और नहीं जमील ने..

और जमील बी चाहता था की इ बात मीणा को सरप्राइज दे और अपनी मैं की ीचा उससे पूरी कर ले…

शाम क वक़्त

उस दिन शाम क वक़्त मीणा का पति जैसे hi काम से आया तो वो पहले रोज़ाना की तरह फ्रेश होक कोफ्फीस पिने क बाद घर से निकलते हुए मीणा से बोलै मीणा आज थोड़ा लेट आवूंगा तो मीणा समाजगायी की आज उसके पति का पार्टी का प्रोग्राम है दोस्तों क साथ इ सोच कर उसने है में गार्डन hilaya…aur जैसे hi पति चला गया मीणा घर काम में बिजी होगयी…

और उधर बार में जमील और उसके पति की पार्टी शुरू हो चुकी thi…Jamil ने मीणा क पति को खुश करने क लिए एक महंगी शराब की बोतल मंगवाई और दोनों पेग बनके पिने लगे स्नैक्स क साथ और कुछ आधे घंटे में hi दोनों ने दो दो पेग खली कर चुके the…aur इस बीच जमील ने चिकन खाना मंगवाया और दोनों तीसरे पेग क साथ खाने लगे…

खबब तो बहुत अचे बने हुए थे और जमील को पसंद बी आया था और मीणा क पति को b…par जमील को अपना प्लान को आगे बढ़ाना था इसलिए वो बोलै क्या भाई इ होटल का खाना खा खा के बहुत बोर होगया hu…ghar की खाने की बहुत याद आरही hai…kaash मेरा घर नज़दीक होता तो काम से काम एक बार एक वक़्त का तो खाना खा के aata…aur दिनु को देख बोलने लगा अरे भाई यहाँ कोई ऐसी होटल नह है क्या जहा घर जैसा खाना मिलता ho…e बोल कर जमील मीणा क पति की तरफ hi देखने लगा क्यू की उसे उसका जवाब का hi इंतज़ार tha…aur उसका निशाना बी सही जगह पे लग गया tha..meena क पति ने एक शराब मारी और बोलै ऐसा तो होटल यहाँ देखना पड़ेगा पर कल मई आपको हमारे घर का खाना जरूर khilaunga..apne निशाने को सही जगह जमील मन hi मैं खुश हुआ और थोड़ा नाटक करते हुए बोलै अरे नह भाईसाब बेकार में आपको तकलीफ क्यू आप बस मुझे एक ाचा होटल ढूंढने में मदत करो बस…

लेकिन मीणा का पति उसके नाटक को समाज नह पाया और बोलै नह जमील जी एक दिन खाना खिलने से मई थोड़ी गरीब हो जावूंगा……

जमील- अपनी नाटक जारी रखते हुए ऐसा नह भाईसाब बेकार में भाभी को मेरी वजह से तकलीफ होगी

मीणा का पति- अरे ऐसी कोई बात नह मेरी बीवी बहुत अछि hai…kal आप मिल जावोगे न तब आपको पता चलेगा…

जमील मैं में- अरे चूतिये इ सब तो उसी क लिए हो रहा hai…aur आपकी बीवी कितनी अछि है इ तो मई देख hi लूंगा और तुम देखते रहना उसका अचपन हेहेहे

जमील को कुछ सोचता हुआ देख कर मीणा का पति बोलै क्या सोच रहे हो जमील जी…

जमील अपने सोच से बहार आते हुए अरे कुछ नह बस इ सोच रहा था की आपकी बात मानु या ताल दू…

मीणा का pati-agar आपने मन किया न तो संजो मई बी आपके साथ कभी नह आवूंगा..

जमील- अरे नह भाईसाब ठीक है आता हु …

मीणा का pati-e हुई न बात

और दोनों ने फिर आखरी पेग खली किया और बार से बहार निकल गए इस बार बी जमील ने hi बिल पाय किया हलाकि मीणा की पति ने बी बिल पाय करना चाहा था पर जमील क ज़िद क आगे नह पाय कर पाया…

और रूम में जाते hi जमील अपने प्लान क कामयाबी पर खुश हुआ था उसे वो रास्ता मिल गया था जो सीधे मीणा क जिस्म तक पहुँच जाता हो और वो अपनी कामयाबी की ख़ुशी में अपने नेक्स्ट प्लान क बारे में सोचते हुए hi सो गया…

वह मीणा क घर में बी दोनों मिया बीवी खाना खा के सो गए..

अगली सुबह मीणा क लिए एक नयी सुबह thi..ek नयी खुशिया लाने वाली सुबह thi..ek नया जोश एक नए उत्साह की सुबह थी…

और उस दिन मीणा ने सुबह उठ कर रूटीन की तरह चाय नाश्ता बनाया फिर पति क लिए दोपहर क खाने क लिए टिफ़िन बनायीं…

और जब उसका पति सुबह 8 बजे काम पे निकल रहा था तो वो मीणा से बोलै अरे मीणा रात में खाने क लिए कुछ ाचा बनाना

मीणा- क्यू जी आज कोई खास बात है क्या?

पति- अरे ऐसे कोई खास बात नह मैंने एक दोस्त को खाने पे दावत दी है….

मीणा- ठीक है तो फिर मई शाम को चिकन बनती hu…chalega न..

पति- ठीक है पर दो तीन आइटम बनाना

मीणा- ठीक है…

और पति क जाते hi मीणा किचन में गयी और सब काम फिनिश करने क बाद वो चिकन शॉप जा के चिकन खरीद लायी और उसे ाचा मसाला लगाके फ्रिज में रख दी…

लेकिन मीणा ने कदफि इ नह सोचा था जमील हो वो दोस्त है जिसको उसने पति ने खाने पे बुलाया hai….aur उसे थोड़ा बी अंदाज़ा नह था की जमील उसे पाने क लिए सच में उसके पति से दोस्ती कर सकता hai…aur उसे इ बी अंदाज़ा नह था की उसका पति जमील जैसे आदमी से दोस्ती बना बी सकता hai…in सब बात से अनजान मीणा रात क खाने की तैयारी करने लगी thi…wo बी सुभह से…

शाम तक कुछ खास नह हुआ और शाम को उसके पति ने आते hi उसे पूछा की क्या बनाया है खाने में तो मीणा बोली खबब बिरयानी और चिकन करी…

तब मीणा का पति बोलै थोड़ा दाल बी बनाना क्या है न तुम जो वो दाल बनती हो वो आखिर कर पिने में मजा आता है….

मीणा- जी banalungi…waise कब तक सब रेडी करना है…

पति- 8-30 से 9 बजे तक होगा न..

मीणा- अरे 8 बजे तक सब रेडी हो जायेगा..

पति- ठीक है अब मई थोड़ा फ्रेश होता हु…

कुछ देर बाद वो फ्रेश होक बहार आया तो मीणा ने उसे कॉफ़ी दे दी और वो पीकर जमील से मिलना चला gaya…bina इस खबर क की आज वो आज वो खाने क साथ साथ अपनी बीवी की जिस्म को भोगने की की दावत एक पराये मर्द को देने जा रहा है…

खर रात क 8 बज चुके थे और मीणा न सब खाना रेडी करके अपने पति का इंतज़ार करने लगी थी तभी उसे गेट खुलने की आवाज़ आयी और उसने जब दरवाजे पर देखा तो वो चौक गयी thi…q की उसके पति का दोस्त कोई और नह था उसके साथ फ़्लर्ट करनेवाला जमील hi tha….e yaha…aur मेरे पति का दोस्त कैसे ?????

और मीणा को उस दिन की सब बात एक साथ याद आयी जो जमील क साथ हुई thi…meena सोचने लगी मैंने तो सोचा इ नामुमकिन है पर इसने तो नामुमकिन को बी मुमकिन बना दिया क्या करूऊऊऊ शायद पति को इसने कुछ झूट बोलै hoga…kya मई पति को अंदर बुलाके सच batadu..nh नह खममकाम हज़ारो सवाल उठ जायेंगे तुम कैसे पता? किसने बताया? कितनी बार छेड़ा? तुमने मुझे बताया क्यू नह? …वगैरा wagaira…aur क्या मई जवाब दे पावुंगी? नह नह इससे ाचा तो चुप hi rahu..aur कभी ाचा वक़्त देख कर पति को batadu….par अब इसने पति क सामने hi फ़्लर्ट करना शुरू कर दिया तो इ तो बत्तमीज़ का बी लीडर है हे भगवन बचा ले muje..aur बहार से आती उसके पति की आवाज़ ने उसे सोच से बहार निकल दिया tha…uske पति ने पानी लाने को बोलै था…

और मीणा एक ट्रे में दो गिलास पानी रख कर कंपते दिल क साथ बहार जाने लगी उसकी नज़र सिर्फ और सिर्फ जमील पर thi..wo बस दुआ कर रही थी की जमील कुछ गलत न करदे वो बी उसके पति क samne….aur वो कंपते हाथो से तरय को टीपोय पर रख क अंदर जाने hi वाली थी की उसके पति ने उसे रोका और बोलै अरे मीणा इ मेरे नए दोस्त है जमील ji..kuch दिन पहले hi बने hai…aur जमील जी इ मेरी धर्म पत्नी मीणा…

मीणा न चाहते हुए बी वह रुकी और नज़रे निचे ज़ुका ली तब जमील में उसे देख कर कहा नमस्ते भाभी जी कैसी ho….lagta है मैंने आपको तकलीफ दी…

मीणा मैं में सोचने लगी कितना बड़ा नाटकबाज़ है इ ऐसा नमस्ते कर रहा है जैसे पहले देखा hi नह ….और न चाहते हुए बी मीणा की मुँह से निकल गया namaste..aur वो मुद क किचन तरफ जाने लगी और जाते वक़्त उसने फिर एक बार मुद क जमील को देखा तो वो उसके पति क साथ बात कर रहा था यहाँ वही की…

मीणा किचन में आके थोड़ी रिलैक्स होगयी क्यू की जमील ने नहीं उसे ठीक से नज़र उठा क देखा और नहीं उसका कोई इसवक्त फ़्लर्ट करने की कोशिश की इसलिए वो थोड़ी खुश hui…jamil का इस तरह उसके पति क दोस्त बन क उसके घर आना उसे ाचा तो नह लग रहा था पर मैं hi मैं वो जमील क हिम्मत को मान बी चुकी थी….

और कुछ देर बाद जमील और उसका पति आके डाइनिंग टेबल पर बैठ गए खाने क लिए तो मीणा ने उनके लिए खाना परोसना शुरू कर दिया था और मीणा कुछ दूर से जमील को खाना परोस रही थी क्यू की उसे डर था की मौका पाकर कही जमील उसे चुना le..par जमील ने ऐसा कुछ बी नह किया और वो बी मौका मिलने पर bhi..aur इस बात से मीणा का थोड़ा दर बी दूर होगया था की जमील आज उसके साथ कोई फ़्लर्ट नह करेगा….

उधर जमील और उसका पति खाना खा रहे थे तो मीणा किचन क स्टैंड क पास रुक कर उन्हें कुछ चीज़ की जरुरत पड़ेगी इ देख रही thi..jaha पे वो कड़ी थी वह से उसे उसका पति की पीठ दिखती थी और जमील का एक side..udhar जमील खाने की तारीफ़ कर कर के खा रहा था तो मीणा सोचने लगी कितना बड़ा कमीना है इ मुझसे चैलेंज किया और और मेरे हार की जीत मन रहा है वो बी मेरी खाने की तारीफ़ करने का नाटक करके…

और जब कुछ देर बाद उनका खाना फिनिश हुआ तो मीणा क पति ने जमील को दाल पिने को bola..to जमील ने पहले तो मन किया पर आखिर उसे कुछ याद आया और दाल को पीकर एक चुस्की लागर मीणा को देकते हुए बोलै दाल अछि बानी है भाभी ji..achi गली है….

और मीणा उसकी इस बात का मतलब अछि तरह समाज गयी और उसे छेड़ने क लिए अपना अंगूठा दिखा कर उसे इशारे में बोली की कुछ नह मिलनेवाला यहाँ….

और इस इशारे की अछि तरह समाज चूका जमील बोलै कभी कभी हम चीज़ क बारे में सोचते है वो उम्मीद से ज्यादा मिल जाता है है न भाई सब कहते हुए जमील ने मीणा क अंगूठे को सही जवाब दे दिया था….

लेकिन उसके पति को इ बात समाज में नह आयी और उसने जमील से पूछ hi लिया मतलब?

जमील- भाई सब मई खाने की बात कर रहा था मैंने सोचा बी नह था की खाना इतना ाचा होगा….

मीणा का पति- है जमील जी बात सही है आपकी कहते हुए वो पहले हाथ धोने वाशरूम गया तो अब किचन में मीणा और जमील दोनों hi थे…

तो जमील ने मीणा आँखों में hi इशारा करते हुए पूछा कैसा लगा?

मीणा ने बी उसका जवाब देते हुए बोलै इ सब कैसे किये….

जमील- आपके खातिर तो ओइसे हज़ार लोगो की दोस्ती बना लू….

और तक मीणा का पति वाशरूम से बहार आया और जमील वाशरूम जाके हाथ धोने लगा…

इस बीच मीणा की पति ने जमील और मीणा की बीच हो रही बात को सुनी थी लेकिन उसे कुछ ठीक से सुनाई नह दे रहा था तो जैसे hi जमील वाशरूम गया तो उसके पति ने पूछ hi लिया क्या बोल रहे थे जमील ji…meena एक पल क लिए हड़बड़ाई और अपने आपको नार्मल करते हुए बोली कुछ नह बस खाने की तारीफ़ कर रहे the….aur क्या बोलती bechari..is वक़्त जो उसकी हालत थी वो खुद hi जान थी thi….khair जमील वाशरूम से बहार आते hi मीणा का पति उसे लेके फिर से हॉल में चलागया और वह बैठ क कुछ देर बाते होने क बाद जमील जाने क लिए खड़ा हुआ और मीणा क पति को दावत क लिए थैंक्स बोलै और बोलै जाने से पहले एक बार भाभी जी को थैंक्स बोलना पड़ता hi है…

तब मीणा क पति ने मीणा को आवाज़ दी जो इस वक़्त किचन में काम कर रही थी पर उसकी दिमाग में सिर्फ और सिर्फ जमील की सोच चल रही थी..

पति की आवाज़ सुनकर जैसे hi मीणा बहार aayi..to जमील बहुत भेड़िया खाना बनती हो आप भाभी ji…chicken तो इतना सॉफ्ट और मुलायम पूछो hi mat….baar बार खाने को दिल karega…realy बहुत khubsurat..kehte हुए उसने मीणा को आंख maari…to डर क मरे मीणा की नज़र अपनी पति पर padi..jab उसने देखा की पति बहार की तरफ देख रहा है तो वो थोड़ी रिलैक्स hui..aur जमील को थैंक्स बोली उखड़े मैं से.. और मुँह घुमा hi रही थी तो जमील बोलै ाचा भाभी फिर मिलते hai….kehte हुए उसने फिर से आंख मारी तो इस बार मीणा को सच में गुस्सा आया था क्यू की उसका पति जो वही पे खड़ा था और उसे इ बात बिलकुल बी अछि नह लगी thi…aur इ बात शायद जमील बी समाज गया था और कुछ न बोलते हुए वह से चला gaya…lekin जमील ने एक बात जान ली थी की मीणा को उसके पति क सामने छेड़ना ाचा नह लगा tha…khair जमील क चले जाने क बाद मीणा यही सोच रही थी की कैसे अपने पति को जमील की सचाई batade….aur उसके पहले उसने इ जानना जरुरी समजा की जमील और उसके पति की दोस्ती कैसे hui…aur वो रात क सोते वक़्त अपने पति से पूछ hi ली…

मीणा- सुनो आज जो आये थे वो कौन थे वो और आपकी कैसे मुलाकात हुई उनसे…

पति- कुछ खास नह बस कुछ दिन पहले hi मुलाकात हुई और दोस्ती थोड़ी बन gayi..bechare घर की खाने की बहुत याद कर रहे थो मुझे लगा दावत दे…

मीणा समाज गयी की जरूर इ जमील की कोई चल hi थी और बात को आगे बढ़ाते हुए पूछी ाचा क्या करते है वो?

पति- कह रहे थे की कुछ काम की वजह से आये hai…aur लॉज में रुके हुए hai….aur ज्यादा कुछ जानना मुझे जरुरी नह laga..ha अब आगे पता hi चल जायेगा na..par बहुत सीधा इंसान है….

मीणा मैं me…sidha इंसान एक नंबर का बत्तमीज़ hai..ab मई आपको कैसे बतावु की वो एक गुंडा hai…loffar और इतना hi नह एक नंबर का हवसी hai…aur उसकी नज़र आपकी बीवी पे पड़ी हुई है…

पति क बातो से मीणा मैं hi मैं इ सोचने लगी थी इ अब कैसे बी करके अपने पति को जमील से दूर करना hi होगा और boli..dekho मई ऐसे बोल रही हु बोलके बुरा मत maano…kisi बी अनजान आदमी से इसतरह बिना कुछ जाने दोस्ती आगे बढ़ाना ठीक NH…isliye आप थोड़ा सोच कर hi कदम रखा करो…

पति- तुम सही कह रही हो मीणा पर मुझे उससे क्या लेना dena..bas दो बात चित और कभी कबर उसके साथ दो peg…waise एक बात तो मैंने गौर किया है की वो बहुत सिंपल है और सीधे बी…

मीणा- मैं में अब मई इनको कैसे samjhau….isse ाचा की मई hi कुछ karu…aur वो सोचने लगी …और उसी सोच में वो कब सगाई उसे पता hi नह चला था…

अगले दिन सुबह से लेकर दोपहर तक कुछ खास नह हुआ पर दोपहर को मीणा की उसी सहेली का फ़ोन आया जिसने उसे जमील क बारे में बताया था और वो मीणा को मार्किट क लिए बुलाने लगी और मीणा ने उसे है बी बोल दिया और शाम क 5 बजे मीणा एक नील रंग की साडी पहन कर पहले अपने सहेली क घर गयी और उसके बाद दोनों मार्किट Gaye..saheli ने थोड़ी बहुत शिपिंग की और उसके नाद दोनों चलते चलते आ रहे थे तो मीणा बार बार इधर उधर आगे पीछे नज़र दौड़ने लगी थी..

….और इ बात उसके सहेली बी नोटिस किया tha..aur उसने पूछ hi लिया क्या मीणा आज थोड़ी परेशां लग रही हो तब से देख रही हु की तुम अपनी नज़र को बार बार इधर उधर दौड़ा रही ho…(sach बात तो इ थी की मीणा को लगा था आज फिर से जमील उसका पीछा करेगा और उसके साथ बार करने की कोशिश करेगा जो वो अपने सहेली क होते हुए बिलकुल नह चाहती थी क्यू की बात उसके पति क कानो तक पहुंच सकती थी)

सहेली की बात से मीणा एक पल क लिए चौक गयी थी पर उसने अपने आप को थोड़ा नार्मल दुखते हुए कहा अरे नह भाभी बस ऐसे hi देख रही हु कही आपका वो गुंडा कही फिर से खड़ा तो नह…

सहेली- है मीणा ऐसे लोगो से हम इज़्ज़तदार लोगो को बच क hi रहना चाहिए

और दोनों चल hi रहे थे की मीणा को कुछ दूर जमील दिखाई यी hi दिया था…

दरअसल जमील ने मीणा को कुछ देर पहले hi जब वो सहेली क साथ मार्किट क लिए निकली थी तब देख लिया था पर उस वक़्त उजाले की वजह से वो मीणा से कोई बात करना ठीक नह समजा था क्यू की वो जनता था की मीणा उसके सहेली क होते हुई बात करना नह चाहेगी …जैसे वो अँधेरा होते hi करती hai..isliye वो सही वक़्त का इंतज़ार कर रहा था और उसे इ बी पता था की कुछ hi देर में मीणा अकेली होगी सहेली क घर जाने क baad..isliye वो दूर खड़े hi मीणा और उसकी सहेली पर नज़र गड़ाए हुआ था…

और इधर जैसे hi मीणा ने जमील को देखा उसके तो फासिने hi छूट Gaye…uske पाँव एक पल क लिए रुक से hi गए डर क वजह से फिर बी वो हिम्मत जुटते हुए चलने लगी कुछ आगे बढ़ाने की बाद मीणा को जमील की कोई मूवमेंट नह दुखी तो वो थोड़ी रिलैक्स होगयी ..और वो थोड़ी खुश बी हुई की उसकी सहेली ने जमील को अब तक नह देखा tha…aur ऐसे बात करते करते वो सहेली क घर क नज़दीक आगये थे …जहा दो रस्ते जाता करते थे एक उसकी सहेली क घर जो यहाँ से कुछ hi दुरी पर था और दूसरा जो मीणा का घर वह कुछ दूर hi tha…aur एक सुनसान जगह से होक जाना पड़ता tha…jaha रात क वक़्त भीड़ न hi सही संजो पर अगल बगल में घर जरूर थे कॉलोनी क टाइप की इसलिए ज्यादातर लोग बहार बी निकलते थे अँधेरा होते hi ..

जब वो क्रॉस आया तो मीणा ने देखा की अभीतक अँधेरा नह हुस hai…usne चारो तरफ देखा तो उसे जमील कही नज़र नह आया tha…aur हो न हो उसे यकीं था जमील यही कही छुपा हुआ है और सहेली जाते hi उससे बात करने की कोशिश जरूर करेगा और मीणा नह चाहती थी की क्यू की उसे दर था की कोई उसे देख न ले इसलिए उसने थोड़ा अँधेरा होना hi ठीक समजा और जब तक पूरी तरह से अँधेरा नह होता तब तक वो वही रुक क सहेली से इधर उधर की बात करने लगी जब उसने देखा की चरक तरफ पूरा अँधेरा छ गया है तो सहेली से बीड़ा लेके अपने हलके कदम बढ़ाने लगी …उसकी एक एक कदम बी आज उसे भरी लग रही thi..wo धीरे धीरे कुछ दूर चल hi चुकी थी उसके सामने जमील आगया था और उसे देख कर मीणा की धड़कने तेज होने लगी thi..use खुद पता नह चल रहा था की वो जमील से बात करे या nh….lekin तब उसे जमील की आवाज़ आयी अरे भाभी ji…itna बी गुस्सा ठीक नह है. ..

जमील क बात मीणा क कानो में पड़ते hi न चाहते हुए बी मीणा क कदम रुक गए और वो बोली आप काम hi ऐसे करते हो की गुस्सा हो जावु..

जमील- ाचा ऐसा क्या किया मैंने

Meena-aapne मेरे पति से दोस्ती का नाटक क्यू बनाया

जमील हस्ते हुए अरे तुमने hi तो कहा था की दोस्ती कर क तो दिखावो और मैंने कर्ली..

मीणा फिर गुस्सा दिखते हुए ाचा मतलब इ की मई कुछ बी कहु तो करोगे क्या?

जमील- अरे भाभी जी जरा एक बार कह क तो देखिये..

मीणा- नह मुझे आपसे कुछ नह करवाना बस आप मेरा पीछा करना छोड़ दीजिये बस..

जमील- अरे भाभी जी आप हमेशा मुझसे गुस्सा क्यू होती हो एक बार थोड़ा सोच क हमसे दोस्ती बी कर लीजिये न..

मीणा- कभी नह…

जमील- क्यू?

मीणा- क्यू की आपका इरादा गलत है…

Jamil-mera इरादा जाने बिना आप कैसे कह सकती हो की गलत hai..ho सकता है दोस्ती बढ़ाने क बाद आपको सही बी लगे

मीणा- इसमें जानने की क्या बात hai…muje पता hi है न आप मेरे पीछे क्यू पड़े ho..aur वो आपकी वो गन्दी नज़र….

जमील- ठीक hai..to इससे आपने तैय किया की मई गलत हु…

मीणा थोड़ी रूप दिखते हुए – यस

जमील- ठीक है तो आप मेरे कुछ सवाल का जवाब do…kya किसी खूबसूरत चीज़ को देखना गलत hai…kya किसी हसीं औरत क साथ कुछ पल गुजरने की तमन्ना रखना गलत hai….aur तुम तो खूबसूरती की मूरत हो जिसे जितनी बार बी देखु दिल बार बार देखने का मैं करता hai..jise बार चुने से दिल की ख़ुशी दूंगी होती hai…jiski सासो में अपनी सासे महसूस करना ाचा लगता hai….kya इ सब गलत है…..

इ सब बात कहते हुए जमील खुद हैरान था की उसे इतनी अचे लब्ज़ कहा से मिल गए the…aur उधर मीणा जमील क जवाब क साथ अपनी tàarif सुनकर थोड़ी बहुत खुश बी होगयी थी और फिर उसके गुस्से ने अब उसका साथ छोड़ना शुरू कर दिया tha….wo नज़र निचे करके boli…aap जो बोले मई उसे इंकार नह सकती पर किसी और की अमानत क साथ इ सब ठीक नह है और सरासर गलत बी है..

मीणा का गुस्सा उतरता देख कर जमील समाज गया था की मीणा अपनी tàarif की शौकीन hai…aur वो उसने अब ऐसे बात की की मीणा सोचनेपर मजबूर hi होगयी…

जमील बोलै की है पता है मैडम इ गलत hai…par जब से आपको देखा न तब से पता नह मुझे क्या होगया आपका इ सूंदर खूबसूरत चेहरा जो चाँद बी शर्मा जाए आपके इ रेशम से झुल्फे आपका इ सेक्सी figure…upar से आपका इ गोरा दूध सा rang…pata नह बस हमेशा देकते hi राहु आपके बहो में अपना सर रख कर हमेशा आपसे मीठी बाते करते राहु ऐसा लगता है….

जमील की तीर सही निशाने पे लग गयी थी और मीणा अपनी tàarif सुनकर पूरी तरह से नार्मल हो गयी थी अब उसके चेहरे पर अब कही बी गुस्से का नाम और निशाँ नह tha…wo बस निचे सर झुककर जमीन की अंघूठे से खरोज रही थी….

तब जमील फिर बोलै क्या मई गलत हु…

मीणा- सर उठाकर पर आप समझते क्यू नह मई एक शादीशुदा हु और दो बचो की माँ हु…

जमील- है जनता हु तुम शादीशुदा हो पर तुमने कभी वो शादीशुदा जिंदगी का असली सुख उठाया hai…tumare पति तो हमेशा काम में hi रहते hai…kya वो तुम

वो वक़्त देते है जो तुम जरुरत है…

मीणा को इ बात अछि नह लगी थी क्यू की इ उसके परिवार की पर्सनल बाते थी जो वो किसी गैर क मुँह से सुन्ना नह चाहती thi….par उसे पता था की कही न कही इ बात सच बी thi..lekin मीणा जानती थी की जमील उसे इमोशनल करना छह रहा hai..isliye वो जमील से बोली आप कुछ बी बोलो मेरे लिए इ सब गलत है और आपको मुझसे कुछ बी नह मिलनेवाला …

मीणा की इस बात में गुस्सा तो नह था पर थोड़ी मस्ती जरूर थी जिसे वो जमील को हार मानाने पर मजबूर कर रही थी..

और इधर जमील बी सोचने लगा साली इतना कहने पर बी आते आने की बात नह बन रही hai…kya इ पटाने वालो में से नह hai…agar नह है तो बी क्या hua…itni म्हणत पर इसकी गांड फाड़ने से कैसे पीछे हैट सकता hu…aur वो बी जवाब देते हुए बोलै अक्स देकते hai..maine तो थान hi लिया है की तुम किसी तरह पा के hi रहूँगा चाहे इसलिए मुझे तुम्हारे 100 चक्कर क्यू न कटना पड़े…

मीणा फिर अपना हाथो का अंगूठा न में हिलाते हुए कुछ नह मिलेगा….

जमील- ाचा सोच लो एक बार दोस्ती काबुल तो करके देखो दोस्त क साथ एक हमसफ़र बी बन सकता हु जो तुम जन्नत की सैर करा सकता है ..और पसंद न आये तो छोड़ do…hahaha

मीणा जमील को नकार तो रही थी पर उसकी एक एक बात उसके दिल में जगह बना रही थी…. लेकिन इस वक़्त उसे जमील क सामने कुछ बी शो नह करना था तो वो बोली कहा न न मतलब न….

जमील सोच लो …उतना बी बुरा नह हु जितना सोच रही हो..

मीणा कुछ बोले hi जाने लगी तो जमील का दिमाग फिर से तेजी से दौड़ गया और बोलै है है क्या ऐडा hai….is साडी में तो किसी अप्सरा से काम नह दिख रही हो. …

अपनी tàarif सुनकर मीणा क बढ़ते कदम ने फिर से ब्रेक लग गया था और वो पीछे मुद क देकते हुए बोली कुछ नह मिलने wala..aur फिर चल पड़ी तो जमील बोलै मिले या न मिले मई टी बस यही छह रहा था की जब आप मुझे खुद मिलना चाहोगी तो ऐसी hi किसी साडी में सजी हुई ho…aur इ नेक काम की शुरुआत कल सुबह तुम्हारे पति क जाते हुए hi तरय करूँगा…

मीणा को जमील की बाते समाजमे नह आयी थी.. और वैसे बी उसे घर जाने क लिए लेट हो रहा tha..uska पति किसी बी वक़्त आ सकता था इसलिए वो बिना कुछ बोले hi एक बार पीछे मुद कर देखि और सीधे चल padi…lekin इस बार जब वो मुड़ी थी तो उसके चेहरे पे कही न कही एक हसी थी जो वो जमील से छुपाना छह रही thi…aur जमील ने बी इस बात को अछि तरह नोटिस कर लिया था और उसे पता चल गया था की वो मंज़िल क बहुत करीब hai..bas उसे अब सिर्फ ऐसा बेहवे करना चाहिए जैसे वो सच में hi मीणा से प्यार करता hai…aur इसी प्यार क चलते वो उससे जिस्मानी रिश्ता बी जोड़ना चाहता hai…aur इसके लिए वो बिलकुल hi तैयार tha…halaki उसे हर दिन चुदाई का शौक था. ..और पिछले 3 महीने से तो वो बिलकुल बी इस काम से दूर hi था …इसलिए उसने सोचा था की मीणा को पाने क लिए और कुछ दिन hi sahi…pure 3 महीने से दबिहुयी हवस मीणा की छूट में hi उतर dunga…aur वो मीणा को जाते हुए बस देखता hi Raha..aur अपने आगे की प्लान क बारे में सोचने लगा तो वही मीणा चलते यही सोच रही थी की आज उसने जमील से कुछ ज्यादा hi बात karli…jo उसे करना नह चाहिए tha…par उसे समाजमे नह आरहा था की जमील की बाते सुन क वो बिना जवाब दिए क्यू नह रह paati..aur इ सोच उसके दिमाग को चुबता रहा जब तक घर नह pahuchi..aur घर जाते hi उसने अपनी साडी निकल फेकि और निघ्त्य पहन कर फ्रेश हुई और तब तक उसका पति बी आगया था. . और रूटीन की तरह वो कॉफ़ी बनके अपने पति को दी और किचन में डिनर की तैयारी करने लगी .. लेकिन कही कही उसे आज अपने पति का साथ चाहिए tha..q की आज जमील ने उसे अपने बातो से इम्मोशनल करना चाहा था और उस बात की भूलने क लिए आज उसके पति क साथ की बहुत जरुरत थी इसलिए वो किचन का काम अधूरा छोड़ क हॉल में जाकर पति क बगल में बैठ क बाते करने lagi..lekin कुछ 10 मीन्स बाद उसका पति बैडरूम जाके दूसरे कपडे पहन कर बहार जाने क लिए तैयार हुआ to….meena ने उससे पूछा की हर दिन आते hi बहार जाना ठीक है क्या कुछ देर घर में रुक नह सकते क्या?

पति- अरे मीणा तुम तो पता hi है सुबह से लेकर शाम तक काम करके थक जाता हु सो थोड़ा बहार जाके दिमाग फ्रेश कर लेता हु…

मीणा कुछ नह बोली क्यू की उसे पता था की पति को काम का कितना टेंशन होता है…

और कुछ hi देर में उसका पति चला गया तो मीणा फिर से आके किचन में अपना बचा हुआ काम निपटने lagi..lekin कही कही तो मीणा को आज कुछ अकेलापन फील हो रहा tha..aur दूसरी तरफ उसके दिमाग में जमील की baate..aur तैय नह कर पा रही थी की जमील को आगे बढ़ने से रोकना चाहिए या nh…lekin किचन क काम क वजह से इसके बारे ज्यादा सोच नह पायी और काम फिनिश होते hi वो हॉल में आके टीवी देखने lagi…aur कुछ hi देर में उसका पति बी आगया था और और दोनों ने डिनर बी फिनिश कर्ली …और जब तक मीणा बर्तन साफ़ और किचन क्लीन करके बैडरूम आती उसका पति सो चूका tha…aur इ बात मीणा क लिए और बी निराश होनेवाली thi..q की आज उसे पति से प्यार की उम्मीद thi…aur वो बीएड क दूसरे किनारे मुँह करके सो gayi…lekin आज उसकी नींद बहुत दूर thi….use जमील क साथ किये हुए एक एक बात याद आने लगी थी और वो जमील क बारे में सोचने पर मजबूर हो गयी थी..

क्या करू इस जमील का इ तो मेरे पीछे हाथ धो क पड़ा हुआ hai..aur मई क्यू उससे बात करती hu…kya मुझे बी उसकी बाते सुन्नी अछि लगती hai…ha शायद इसलिए तो न चाहते हुए बी उसके सवाल का जवाब देने पर मजबूर होती hu….par क्यू? मुझे अछि लगती है इसलिए की वो मुझे खूबसूरत कहता hai…q की वो मेरी तारीफ़ करता hai…nh नह इ गलत hai…q की वो मुझपर गाँधी नज़र बी डालता है ….मेरी अस्स क बारे में बोलै उसने. .इ गलत hi है … पर ….सिर्फ जमील अकेला नह जो मुझे गाँधी नज़र से देखे ऐसे तो बहुत लोग देखते है muje…aur जमील बी तो एक मर्द hai….mere पे कितने लोगो ने तरय मरने की कोशिश की उनमे मेरे पति क दोस्त बी थे जमील अकेला थोड़ी hai…par मैंने किसी को इतना भाव नह दिया जितना जमील को दे रही hu…par क्यू? क्या खास बात है usme..dikne में बी तो एक गुंडे जैसा hi hai…fir बी मुझे जमील की बाते क्यू अछि लगती hai…qqq?

इसलिए की जमील कहता है की वो मुझसे माशूका बना क रखेगा या इसलिए की मुझे सच में एक हमसफ़र की तलाश है….

पर मुझे हमसफ़र की जरुरत क्यू पड़ेगी मेरे पास तो मेरे प्यारे और केयरिंग पति क होते हुए?

पर आज कल तो पति को टाइम hi नह मेरे liye..subh जाते है शाम को आते है और फिर उसके बाद अपना मूड फ्रेश करने क लिए बहार जाते hai…is तरह मई कितने दिन घर में अकेली पड़ी रहूंगी.. काश आज बचे मेरे साथ होते?

अकेली रहती हु इसका मतलब इ नह की अपना दिल बहलाने क लिए जमील से दोस्ती का हाथ badavu…..par जमील तो पीछे हटाने तैयार hi नह और अब उसने पति से बी दोस्ती बना ली hai…aur आगे जाके मुझे बी उसके साथ बात चित करनी पद जाएगी पति क खातिर क्यू की जमील ऐसा मौका जरूर banayega…isse ाचा इ तो नह की मई hi उसकी दोस्ती को स्वीकार कर उसे समजवू की इ सब ठीक NH..par क्या वो samjega…aur नह समजेगा तो वो मुझसे सेक्स करना चाहेगा और मई उसके साथ chi…e मई कभी सपने में बी सोच नह sakti…..lekin की एक बात तो सच है की मुझे किसी हमसफ़र की जरुरत hai…jo मुझे अकेला न छोड़ de…par मेरे पति क पास तो टाइम hi nh…..kya मुझे जमील की बात को एक बार तरय करके देखना चाहिए?

क्या करू…..? और तब उसने अपनी पति की और एक बार देखा तो वो बिना किसी टेंशन क खर्राटे लेते हुए सो रहा है तो मीणा सोची मई इनके खातिर अपने साड़ी ीचा मैं में दबा क जी रही और इ साहब घोड़े बेचकर सो रहे है बिना मेरी परवाह kiye…..kabhi कभी लगता है की इनसे ाचा तो वो जमील hi है….

Ha…par जमील क इरादे बिलकुल ठीक नह hai…par उसने मेरे साथ कभी गलत करने की कोशिश नह की है na…jo कुछ बी बोलता है आगे hi बोलता है पीछे नह ….क्या वो वैसा नह है जैसे सहेली ने बताया tha…nh बी हो सकता है क्यू की सहेली को तो बात चढ़ा फिर क बोलने की आदत hai…kya उसने जो पति से कहा वो बात सच hai?...kuch बी तो नह सूज रहा hai…upar से इ नींद बी नह आरही hai…ha एक बात तो है अगर जमील चाहता तो वो मेरे घर बी आ सकता था पति क न होते हुए उसे मुझसे बीच रस्ते में hi बात करने की जरुरत बी नह thi…aur मेरे साथ कुछ बी कर सकता tha…chi इ मई क्या सोच रही हु कही मेरा दिल बी जमील क साथ….. ची नह कभी नह मई इ गंधा काम कभी नह कर sakti…lekin मई क्यू उसके बारे में इतना सब कुछ सोच रही hu…aur क्यू मुझे आज कल कही न कही किसी की जरुरत लग रही hai……shayad कुछ हद तक जमील की बाते सही बी hai…aur उसने आखिर में क्या बोलै वो बात मुझे कुछ समझ में नहीं aaya…aur मीणा जमील की वो आखरी बात क बारे में सोचने lagi…e नेक काम कल सुबह पति जाने क बाद hi तरय करूँगा?

कौनसा नेक काम और क्या तरय करने की बात कर रहा था वो ..?

क्या मुझे वो कल सुबह साडी पे देखना पसंद करता है पर कहा मई तो सुबह कही नह जाने wali…kya होगा उसकी बातो का मतलब? क्या जमील कल मेरे अकेले होते hi घर आएगा …..??? ओह no….par आगया तो……? क्या उसके लिए मई सुबह साडी पह्नु इ ठीक rahega…..meena को इस सवाल का कोई जवाब नह मिल रहा tha…par वो जान गयी थी की वो जमील क प्रति थोड़ी आकर्षित हो रही hai….aur इ सोचते हुए उसकी होतो कर एक मुस्कान बी आगयी थी और इसी मुस्कान को चेहरे पर लेके वो नींद क अघोष में चालीगयी….

अगली सुबह 5 बजे hi मीणा जाग गयी थी और उसने अपने दिल में एक फैसला बी लिया था की जब उसका पति hi जमील से दोस्ती बना चूका है तो वो बी जमील क दोस्ती का हाथ थम लेगी और सुबह hi वो जमील को साडी पहन कर इंदिरेक्ट्ली उसकी दोस्ती काबुल होने की इशारा छोड़ देगी चाहे इसके लिए उसे सुबह सुबह मार्किट क्यू न जाना पड़े लेकिन मीणा गलती से बी इ नह सोचा था की वो जमील क साथ सेक्स बी करेगी…

बीएड से उठाते गई उसने नाहा लिया और एक नार्मल सी निघ्त्य पहन ली ताकि पति की कोई शक न ho…aur अपने डेली काम काज में लग gayi…aur जब तक उसका पति उठ क फ्रेश हो जाता मीणा ने ब्रेकफास्ट और पति क लिए टिफ़िन बी रेडी करलिया tha…aur कुछ देर बाद दोनों ने ब्रेकफास्ट बी किया और पति ऑफिस जाने क लिए घर से बशर निकला तो मीणा बी उसे छोड़ने बहार गेट तक आयी लेकिन तब उसकी नज़र सामने पड़ी कॉलोनी पे पड़ी तो वो चौक पड़ी क्यू की उस कॉलोनी क बंद पड़े एक घर क सामने जमील रुका हुआ था और उसकी नज़र मीणा क घर पर hi थी और मीणा थोड़ी दर बी गयी थी कही इस वक़्त उसके पति ने उसे देख तो नह लिया ho.meena एक नज़र अपने पति पर डाली तो उसने देखा की पति की नज़र दूसरी तरफ hai…aur वो अपनी बाइक पे बैठे निकलने hi वाला है और फिर मीणा की नज़र जमील पे padi…aur तब तक उसका पति मीणा की bye कहकर अपनी बाइक पर निकल चूका था…

दरअसल मीणा क घर क सामने कुछ दुरी पर एक कॉलोनी थी जो इस वक़्त खली पड़ी हुई thi…aur मीणा क घर और उस कॉलोनी क बीच थोड़े घर थे और उसके बगल में एक खुल्ला सा jagah…meena अपने घर से वो खुली जगह से होते हुए वो कॉलोनी को आसानी से देख सकती थी..…

और इ बात जमील ने कुछ दिन पहले hi देखा हुआ tha….aur आज सुबह hi वो उस कॉलोनी क पास आके खड़ा हुआ था ताकि मीणा का पति जाते hi वो उसके घर आ sake..aur जैसे hi मीणा का पति घर से बहार गेट तक आया तो जमील वही चुप क खड़ा हो गया था ताकि मीणा की पति की नज़र उसपर न pade..aur जैसे hi उसका पति बहार बाइक पे आया तो जमील अपनी जगह से थोड़ा बहार आया और उसी वक़्त मीणा बी बहार आयी और उसकी नज़र जमील पे पद गयी थी..

मीणा एक पल फिर जमील की तरफ देखि उसे अब समाजमे ने आरा था क्या kare…aur वो बिना नज़र चुराए जमील को hi कुछ देर तक Dekhi..par जमील ने इसवक्त मीणा को कोई रिप्लाई देना ठीक नह समजा था और वो बी मीणा को बस देखता hi Raha..aur कुछ देर ऐसे hi नज़र मिलने क बाद पता नह मीणा को क्या लगा और वो घर क अंदर आके सोफे पे बैठ गयी और सोचने लगी आगे क्या kare….ek तरफ वो नह चाहती थी की जमील आगे बड़े और दूसरी तरफ उसकी तन्हाई किसी का साथ मांग रही thi…meena अछि तरह जानती थी जमील का इरादा गलत hai…par कही कही मीणा क मैं जमील क इरादे को गलत बी नहीं साबित कर पा रही thi..meena को लगा की उसे अकेला पा कर आज जमील उसके घर आके गलत हरकत कर सकता hai…isliye वो दरी हुई बी thi…isliye उसने दरवाज़ा बी बंद करके रखा हुआ था ताकि जमील अंदर न आये और आगया तो उसे बहार से भागड़ेगी …पर अगले 15 मं तक ऐसा कुछ बी नह hua…aur मीणा सोच में पड़गयी की जमील तो घर आने क इरादे से सुबह सुबह आया होगा फिर बी वो अबतक आया क्यू nh…kya वो सिर्फ मुझे देखने hi आया tha….kya जमील सच में मुझसे प्यार करता hai…agar उसका इरादा गलत होता तो वो आज मेरे अकेले होने का फयदा जरूर उठा सकता tha…par क्यू नह आया अब tak,kya वो चला gaya…kuch बी हो मुझे देखना hi होगा एक बार

और मीणा इ सोच कर दरवाज़ा खोल कर गेट की तरफ गयी और कॉलोनी की और देखने लगी तो उसने जमील को वही खड़ा पाया जहा वो कुछ देर पहले खड़ा tha…aur इस बार बी दोनों की नज़र मिली और उसने जमील को कुछ इशारा करते हुए पाया अपनी कपडे पकड़ते हुए.

मीणा को पहले तो उसके इशारे समाज में नह आया पर उसने जब अपने दिमाग पर जोर डाला तो उसे जमील की कल की बात याद आयी की वो नेक काम मीणा साडी क पहने पर hi शुरुवात करेगा और मीणा ने अपने पहने निघ्त्य को देख कर समाज गयी की जमील अबतक इसलिए नह आया की उसने निघ्त्य पहनी हुई hai…aur इ बात पे उसे अछि बी लगी क्यू की उसे लगा की जमील अपनी बात को निभाना अछि तरह जनता hai…aur इ सोचते सोचते फिर घर क अंदर आयी पर इस बार उसने दरवाजा नह dala..aur वो सीधे बैडरूम आयी और सोचने लगी क्या मई जमील को एक बार बुलाके उससे बात karlu…kya जमील क सामने साडी पहन कर जाके उसकी दोस्ती काबुल होने इशारा दे दू क्या इ सही rahega…kya वो दोस्ती करने पर मुझे गलत करने क लिए मजबूर तो नह karega…nh नह अगर उसे ऐसा करना hi होता तो वो अब तक घर आ चूका hota…aur मेरी साडी पहने का इंतज़ार बी नह karta…lekin क्या मेरा साडी पहन क जमील से दोस्ती का इशारा करना ठीक rahega…shayad न बी और है b,..aur मीणा ने इ सोचते सोचते hi अपनी निघ्त्य उतर दी thi..meena चाहे जमील को दूर रखने की सोच रही थी पर कही न कही मीणा क दिल में जमील क लिए जगह बनाते जा रही thi…khair उसने सोच hi लिया की आज वो जमील क दोस्ती की ऑफर काबुल करलेगी. उसे लगा की अगर आज वो जमील की दोस्ती काबुल नह करेगी तो हो सकता है जमील हर दिन सुबह ऐसी hi हरकत करे जैसे आज वो कर रहा है और इ बी हो सकता है की आज उसकी मैं की होने पर वो कभी मुझे रस्ते पे छेड़ना छोड़ de….aur इ सोचते सोचते hi मीणा ने एक नीले रंग की साडी पहन ली और ेने क सामने कड़ी होकर एक बार अपने चेहरे को अचे से श्रंगार ने लगी और कुछ hi मिनट में तैयार हो गयी थी जमील पर जलवे बिछाने ko…aur वो एक नए अनजान रस्ते पे चल पड़ी जिसका नतीजा खुद वो बी नह जानती थी..

जैसे hi जमील ने मीणा को देखा तो उसके रुके हुए कदम अब आगे बढ़ाने लगे the…meena वही गेट रुक कर उसका इंतज़ार करना छह रही थी पर उस वक़्त उसके पहचान की एक औरत सामने से गुजरने लगी तो मीणा ने उसे अनदेखा करके वापिस घर में aagayi…wo नह चाहती की वो औरत उसे देखे और पूछे सुबह सुबह साडी पहन क कहा जा रही हो और जिसका जवाब मीणा क पास नह बी था shayad…kuch 5 मं बिट गए थे तो मीणा को अपने गेट खोलने की आवाज़ आयी तो मीणा का दिल धड़कना शुरू हो गया tha..use थोड़ा बी अंदाज़ा नह था की आगे क्या होनेवाला hai…meena कुछ और सोच hi रही थी दरवाजे पर उसने जमील को देख लिया जो उसे एक जुट होक hi देख रहा था..

जमील मीणा की ऊपर से निचे तक बिना आंख बंद किये देखे hi जा रहा था जिसे देख कर मीणा थोड़ी शर्मा सी गयी …..शायद इ पहली बार था जो मीणा इस तरह जमील क सामने शर्मा रही thi…fir वो थोड़ी सहम गयी और जमील से बोली ऐसा क्या देख रहे हो पहली बार थोड़ी देख रहे हो..

मीणा की बातो से होश में आते हुए जमील बोलै पहले बी देख चूका हु पर आज जितनी खूबसूरत लग रही हो शायद इतनी खूबसूरत पहले कभी देख नह पाया था…

मीणा अपनी tàarif सुनकर फिर से आंखे चुराए नज़र ज़ुका ली तो जमील समाज गया की मीणा अपनी tàarif से खुश हुई है और वो अछि तरह जनता था की यही एक रास्ता है जो उसे मीणा क करीब ले जा सकता है…

कुछ सेकण्ड्स की ख़ामोशी क बाद जमील बोलै अपनी इस खूबसूरती को दरवाजे क बहार से दिखावोगी या अंदर बी बुलावोगे…

मीणा नज़रे झुकाये hi जब अंदर आने क इरादे से hi आये हो तो पूछ रहे हो क्यू?

जमील एक कातिल मुस्कान देते हुए अंदर आया तो मीणा ने उसे इशारो से बैठने को kaha…kuch 3-4 मं तक दोनों क बीच कोई बातचीत नह hui..meena नज़रे झुकाये जमील की आगे की बातो का इंतज़ार करने लगी तो जमील मीणा की सुंदरता को अपने आँखों में सजाने लगा था.

कुछ देर की ख़ामोशी की बाद जमील बोलै क्या मुझे एक गिलास पानी मिल सकता है…

मीणा अपने कदम धीरे किचन की तरफ बढ़ाने लगी पानी लाने क लिए पर उसे डर था की कही जमील उसके पीछे किचन में न आ जाये इसलिए उसने एक बार मुद क देखा तो जमील अपनी जगह पर स्तिथ था और पीछे से मीणा की चल को देख रहा tha..jise देख कर मीणा को थोड़ा अजीब बी लगा पर उसे ाचा बी लगा था क्यू की जमील ने ऐसी कोई हरकत नह की थी जैसे उसने सोचा tha..fir बी मीणा क दिल में कही न कही एक डर था की आगे कुछ गलत तो नह hoga……aaj उसने पहली बार एक गैर मर्द को अपने पति क गैर मौजूदगी में बात करने की कोशिश की थी वो बी उसके खुद क घर me…kuch देर किचन में कड़ी मीणा यही सोचने लगी थी की आखिर उसने ऐसा फैसला क्यू liya…par उसे इस बात का जवाब नह मिल रहा tha…to वो पानी का गिलास लेके बहार गयी जहा पे जमील उसकी रह देख रहा था.

बहार बैठे जमील बी यही सोच रहा था की मीणा कुछ हद तक उसकी गिरफ्त में आ चुकी है और आगे अगर बात बनानी है तो मीणा की तारीफ़ क साथ उसका दिल बी जीतना होगा और उसने कुछ फैसला बी ले लिया tha..…aur जैसे hi मीणा ने पानी का गिलास आगे बढ़ाया तो जमील ने पानी के लिया और पूरा गिलास खली करके क गिलास मीणा को देने क लिए हाथ आगे badaya..aur जैसे hi मीणा ने गिलास लेने क लिए हाथ आगे बढ़ाया तो जमील ने उसकी कलाई थम ली..

छोड़ो मुझे इ क्या कर रहे हो इ सही नह है प्ल्ज़ छोड़ दो muje…achanak हुए जमील की इस हरकत से अपनी कलाई छुड़ाने की कोशिश करते हुए मीणा boli…lekin जमील ने इतने जोर लगाया था की मीणा की लाख कोशिश करने क बाद बी कलाई को जमील क हाथो से छुड़ा न सकीय और तब उसे और एक धक्का लगा जमील ने उसे अपनी तरफ खिंच लिया था जिसके वजह से वो जमील क बगल में बैठ गयी थी पर मीणा की कोशिश अब बी जमील को दूर करने की hi थी.

छोड़ो मुझे इ क्या बत्तमीज़ी hai…maine इसके लिए आपको अंदर आने नह दिया tha…e सब मुझे पसंद नह …छोड़ो मुझे और चले जावो यहाँ se….meena गुस्सा होते हुई बोली

पर इस वक़्त मीणा की बाते जमील पर कोई असर नह कर रही थी…

जमील- मीणा को शांत करने की कोशिश करते हुए बोलै है पता है मुझे तुम इ सब पसंद नह और मई बी नह चाहता तुम जो पसंद नह है वो करू ..

मीणा- तो आप अब क्या कर रहे हो छोड़ तो मेरी कलाई को .मीणा ने फिर से अपने हाथ छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोलै

जमील- है छोड़ दूंगा और चला बी javunga….par उसके पहले मेरी बात तो suno…jamil ने मीणा क सर पर एक हाथ फेरते हुए बोलै. ..

इ सब मीणा क लिए कुछ अजीब सा लग रहा tha….par जमील का हाथ सर से होकर उसके पीठ पर चलने लगा तो मीणा कुछ देर क लिए चुप होगयी …क्यू की जब जमील का हाथ उसके पीठ पर हलके से चलने लगा तो मीणा की जिस्म में कुछ सनसनी मच गयी thi…pehli बार एक गैर मर्द का हाथ उसके जिस्म पर चल रहा tha…e गलत है जानते हुए बी. मीणा को इ ऐसस ाचा लगने लगा tha…lekin जब उसे लगा की इ सरासर गलत है तो उसने फिर से होश संभाला और जमील से बोली आप प्ल्ज़ इ सब मत करो मेरे saath…mai ऐसी औरत नह hu…plz…meena ने बिंनती करते हुए जमील से bola…q की मीणा इ सब रोक नह सकती थी क्यू की उसके दोनों हाथ जमील ने पकड़ा हुआ था…

Jamil-Yakeen मानो मीणा मई तुम्हारे साथ कुछ गलत नह करूँगा बस तुम कुछ देर क लिए मेरी बात गौर से सुन लो…

अब मीणा क पास बी कोई चारा नह tha…usne जमील की बातो को सुन्ना hi ठीक समजा और बोली ठीक है पर जो बोलना है जल्द hi बोलो कहते हुए मीणा ने अपने चेहरे को दूसरी तरफ मोड़ liya…lekin अब बी मीणा क हाथ को जमील ने पकड़ा हुआ था और जमील का एक हाथ मीणा की पीठ पर सवारी कर रहा tha..aur मीणा क लिए एक अजीब ऐसस बी था पर उसका जिस्म को कुछ हद तक ाचा बी लग रहा था क्यू की आज तक उसके पति ने बी उसका इस तरह पीठ पर हाथ रख क प्यार करने की कोशिश नह की thi…par आज एक गैर मर्द क हाथ उसे इस मधुर एसएस करने में सफल बी हो गए the..par मीणा अपने पति को कभी बी धोका देना नह चाहती thi..wo जानती थी उसका पति hi उसके लिए सब कुछ hai..aur उसे डर लग रहा था की कही जमील उसके साथ गलत न करदे और इसी डर क वजह से उसका पसीना निकलने लगा था और जिस्म कांप बी रहा था..

दूसरी तरफ जमील बी सोच रहा था कहा से शुरू करदु…. डायरेक्टली बोल दू की वो एक बार मीणा की जिस्म का मजा लेना चाहता hai…nh नह ऐसा बोलूंगा तो मीणा हरगिज़ नह मानेगी बेहतर यही होगा की इससे प्यार से पेश aavu…aur उसके बाद मीणा को धीरे धीरे लाइन पे लाना होगा और वो कुछ सोचा और बोलै देखो मीणा तुम बिलकुल hi मुझसे घबरावो मत …यकीं मानो मई तुम्हारे मर्ज़ी क बिना एक कदम बी आगे नह बढ़ाने वाला

तो फिर इ क्या hai…muje ऐसे पकडे रहना क्या इ मेरी मर्ज़ी hai…meena गुस्सा दिखते हुए boli..aur फिर हाथ छुड़ाने की कोशिश करने लगी

है जनता हु मीणा इ सब तुम पसंद नह ..पर मई क्या करू जब से तुम देखा है तब से पागल हो गया hu…muje हर जगह तुम hi तुम नज़र आती ho…jamil ने मीणा क सर पर हाथ फेरते हुए कहा तो मीणा उसके तरफ गुस्से देखते हुए boli..wahi तो मई जानना चाहती हु की आप मेरे पीछे hi क्यू पड़े ho….koi और नह मिली kya…is शहर में मई अकेली थोड़ी हु . ..और आप जो चाहते है वो सब करने क लिए कोई आपके लायक मिल hi जाएगी…

जमील- है यही तो ख्हास बात है की इस शहर में बहुत सारे है पर क्या करू प्यार दोस्ती तो उसे से hi की जाती है न जो दिल को ाचा लगे…

मीणा- पर मेरे दिल में ऐसा कोई ख्याल nh….isliye आप प्ल्ज़ अपनी पसंद बदल दो यहाँ कुछ नह मिलने वाला आपको…

जमील- ठीक है कोई बात नह मुझे कुछ मिले या न मिले काम से काम मई तुम खुश तो रखने की कोशिश karunga….yahi मेरे लिए सब कुछ होगा..

मीणा- ख़ुशी और आपसे कभी नह …शायद आप भूल गए की मेरा पति बी है और वो जितना मुझे खुश रखता है जितना आप कभी नह रख सकते . इ सब सपना देखना छोड़ दो. ..

जमील- सपना तो सपना hi sahi…par मुझे नह लगता की फिलाल तुम खुश हो…

मीणा- हाहाहा मई और खुश नह इ आपकी सोच hai…aur आप कैसे कह सकते हो की मई खुश नह हु फिलाल

जमील- ok अगर मई बाटाडू तो सच को मान लोगी..

मीणा- क्यू नह अगर सच हो तो जरूर मान लुंगी पर झूट निकली तो आप मुझे दुबारा कभी परेशां नह करोगे

जमील- ठीक है. ..पर सच और झूट का फैसला तो तब hi होगा जब तुम मेरी बात को सच इ दिल से सुनोगे

मीणा- ठीक है बोलो

इस बीच मीणा थोड़ी रिलैक्स बी होगयी थी क्यू की जमील ने उसे कहा था की वो उसकी मर्ज़ी क बिना एक कदम बी आगे नह बढ़ाएगा इसलिए उसने जमील क हाथो से अपना छुड़ाने का विरोध थोड़ा काम hi किया था और इ जानकर जमील ने बी मीणा का एक हाथ को आज़ाद किया हुआ था पर अब बी जमील मीणा क एक हाथ को पकड़ा हुआ था और उसका दूसरा हाथ मीणा क शोल्डर से होते हुए उसकी पीठ पर सवारी रहा था ….

और मीणा उसे दूर बी नह करना छह रही थी…

कुछ देर ख़ामोशी क बाद जमील बोलै देखो मीणा मई जनता हु की आज कल तुम बहुत अकेली फील करती हो क्यू की तुम सुबह से लेकर शाम तक घर में अकेली hi होती हो . ….और शाम को बी तुम्हारा पति तुम्हारा साथ देने क बजाय वो खुद अपना मैं बहलाने क लिए बहार निकल जाता hai…aur मुझे यकीं है रात को बी वो थाखा हुआ जल्द hi सो जाता hai…aur तुम सुबह से लेकर रात तक सिर्फ अकेला पैन hi तुम्हारा साथ देता है…

जमील ने जो बात कही थी इ सोच कर मीणा कुछ देर क लिए खामोश हो गयी थी क्यू की जमील की कही एक एक बात सच hi थी.. पर वो जमील क सामने अपने अकेलेपन की एसएस नह करना चाहती थी इसलिए वो बोली.. आप को किसने कहा की मई अकेलापन महसूस करती हु…

जमील- मुझे किसी से क्यों जानना है . इ तो मई खुद समाज सकता हु …तुम लाख छुपाने की कोशिश करो पर तुम्हारा इ चेहरा मुझे साफ़ बयां कर रहा है की मेरी बात कुछ हद तक सही है.

मीणा- जमील को देखते हुए नह आप बिलकुल गलत हो..

जमील- ठीक है अगर इ बात तुम अपनी पति की कसम खा कर कहोगी की तो मई बी वडा करता हु अब बिना कुछ बोले hi मई यहाँ से चला जावूंगा और कभी तुम अपना मुँह तक नह दिखाऊंगा कहकर जमील ने उसके हाथ को आज़ाद करदिया था और उसके पीठ से बी हाथ निकल लिया था..

अब मीणा पूरी तरह से अपने बातो में गई फास गयी थी न hi वो अपने पति की झूटी कसम खा सकती थी और नहीं वो जमील क बातो में आकर उसके प्यार को हरी झंडी दिखा सकती thi…wo बात को टालने की कोशिश करते हुए बोली …मई अकेली रहती हु इसका मतलब इ नह की मई अपने पति क साथ धोका करने का सोचु..

जमील मतलब तुम मान गयी की तुम अकेली फील करती हो…

अब मीणा और बुरी तरह से फस्स गयी थी. …क्यू की उसने इंदिरेक्ट्ली इ काबुल कर लिया था की जमील की बात सच hi है. . हम्म्म की सिवा उसकी दूसरी कोई आवाज़ न निकलता देख कर जमील ने मीणा क एक हाथ को फिर पकड़ा और फिर से अपने दूसरे हाथ को मीणा पीठ पर चलते हुए bola….bas इसलिए तो मई चाहता हु की तुम एक बार मुझसे दोस्ती करलो और देखो तुम कितनी ख़ुशी मिलती है..

कही न कही जमील की बाते मीणा दिल में उतर रही थी और वो सोच ने लगी की अगर जमील चाहता तो अब तक मेरे साथ बत्तमीज़ी की साथ पेश आ सकता था पर नह इसने तो ऐसा कुछ बी नह किया और इ सच बी तो बोल रहा है इससे दोस्ती करना कोई गलत बी तो नह …वैसे मेरे पति ने बी इसे दोस्त मान लिया है तो मई क्यू नह कर सकती अगर मेरा पति अपना मुद फ्रेश करने क लिए दोस्त बना सकता है तो मई क्यू नह . ….

मीणा का कोई जवाब न पाकर जमील बात को आगे बढ़ाते हुए बोलै क्या सोच रही हो meena…agar अब बी तुम लगता है की मई तुम्हारे दोस्ती क लायक नह हु तो सीधे बोल दो मई चला जावूंगा….

लेकिन मीणा उसकी तरफ मुड़ी और बोली मैंने इ कब कहा …पर मुझे डर लगता है. ..

अब जमील जान गया की मीणा सही पटरी पे चढ़ चुकी है और उसने पटरी की रफ़्तार बढ़ाने की कोशिश करते हुए बोलै किश बात का darr…tumara यही तो डर और अकेलापन दूर करने क लिए तो मई तुम्हारे करीब आना चाहता हु. …अगर तुम लगता है की मई इ बात हर किसी को कहते फिरूंगा तो सुनो मई ऐसा कभी नह करनेवाला क्यू की तुम मेरे लिए क्या हो इ मई शब्दों में बयां नह कर सकता पर इतना जरूर कहूंगा की तुम्हारे जैसे मखमल बदन वाली औरत मैंने काम hi देखे hai…sach कहता हु ऊपरवाला बी जब तुम बना रहा था तो अपना पूरा कारीगरी तुमसे hi बारसडी हो….

अपनी tàarif सुनकर मीणा और बी पिगल ने लगी थी उसे थोड़ा बी अंदाज़ा नह था जमील उसकी तारीफ़ करके उसे वश में लेने की कोशिश कर रहा hai…is बात से अनजान मीणा क गुस्सा पूरा उतर गया tha…use जमील की बाते सच लग रही थी …पर वो इ नह चाहती की किसी गैर मर्द क साथ उसके जिस्मानी तालुकात bade…isliye वो जमील से boli…aap समझते क्यू नह जमील ji..mai अपने पति क साथ कभी देखा नह कर सकती…

पहली बार मीणा ने जमील का नाम लिया था जिससे जमील बी खुश hua..aur उसे अब यकीं बी होगया था की मीणा का गुस्सा बी उतर चूका hai..isliye वो मीणा क और करीब आने की कोशिश करते हुए bola..kaisa धोका मीणा?

मीणा- वही पति क गैर मौजूदगी में आपसे दोस्ती निभाना? अगर मेरे पति को पता चल गया की हम दोनों उसकी गैर हज़ारी में बाते करते है हसी मज़ाक करते है तो वो क्या sochenge?...Maine आज तक कोई बी काम उनसे चुपके नह किया है …..नह प्ल्ज़ मुझसे नह होगा प्ल्ज़..

जमील- ाचा इतनी सी बात इ बात तो तुम्हारे पति को तब पता चलेगी जब हम दोनों में से कोई एक उसे batayega…mai तो नह बतावुंगा और मुझे यकीं है की तुम बी नह बताना चाहोगी सही न…

मीणा- हम्म्म

जमील- बस और kya…aur रही बात पति से कोई बात छुपाने की तो सोचो क्या तुम नह लगता की तुम बी हमेशा हस्ती खिलती raho…kya तुम बी हसी मज़ाक करने का मैं नह hota..hota है न..

मीणा- हम्म्म

मीणा बस कुछ बोल hi नह रही थी पर जमील क बातो का हम्म में जवाब दे रही thi…isse जमील का हौसला बी बढ़ते hi जा रहा tha…aur इस बढ़ते हौसले ने जमील को एक कदम और आगे बड़ा दिया tha…is बार उसने प्यार से मीणा क सर पे हाथ रखा और उसे उसके भुजा ो से होते हुए पीठ तक लगाया और हलके से मीणा क पीठ को सवारते हुए बोलै सोच लो मीणा मई इससे ज्यादा तुम कुछ कह नह सकता क्यू की मई तुम किसी बात क लिए फाॅर्स नह करना chahta..bas इतना hi कहूंगा की अगर तुमने मेरा हाथ थम लिया तो जो ख़ुशी जो मजा मई तुम दे सकता हु शायद तुम्हारा पति कभी नह दे sakta..aur मुझे इ बी पता है की तुम अपने पति से बहुत प्यार करती ho…aur मई तुम्हारे इस प्यार क बीच कभी नह aavunga…pati का प्यार एक तरफ और जमील एक taraf…soch लो ख़ुशी चाहिए या ऐसे उदास hi जिंदगी बिताना चाहती हो….

मीणा का मैं चंचल होने लगा था एक तरफ जमील की बाते उसके दिल और दिमाग में असर कर रहे तो दूसरी तरफ अपने पीठ पे पेहरता हुआ उसका जमील क हाथ मीणा क जिस्म को गरम करने में लगा हुआ था जो मीणा क लिए एक सुखद एसएस दिला रहा tha..use समाज में यह आरा था की आगे क्या करे क्या bole…lekin कुछ देर ख़ामोशी क बाद मीणा ने कुछ तैय किया और जमील से boli…thik है मान लेती हु आपने जो कुछ कहा वो सच है पर मई आप पे कैसे यकीं करू की आप मेरे साथ कोई गलत हरकत नह करोगे..

जमील- सही सवाल किया मीणा tumne…mai बस बताने hi वाला था तुमने बोल Diya…to सुन अगर मेरा ऐसा कोई गकत इरादा होता तो अब तक मई बहुत कुछ कर चूका hota…tume तो पता बी है हम कितनी बार अँधेरे में सुनसान रस्ते पे मिले और तो और आज अब बी तुम मेरे साथ अकेली hi हो वो बी इतने करीब जितने दो प्रेमी होते है…

जमील की बात सुनते hi मीणा ने अपने आप को जमील क इतना करीब देख कर उससे दूर होने की कोशिश की तो जमील उसे रोकते हुए कोई जरुरत नह मई खुद जा रहा hu…muje जो संजना था समजा दिया और आखरी बात मई तुम्हारे मर्ज़ी की खिलाफ कुछ नह karunga….ab जवाब देना तुम्हारी बारी कहकर जमील घर से निकल गया और मीणा उसे बस देखते hi रही कुछ बोल बी नह सकीय…

जमील क जाते hi मीणा अब सिर्फ जमील क बारे में hi सोचने लगी thi…use आज दोपहर का खाना बनाने का बी मैं नह hua…wo बस जमील क एक एक बातो को याद करके उसे अचे तरह से समझने lagi….aur उसका दिल बार बार यही कहने लगा की जमील उतना बुरा नह है जितना वो सोच रही hai…aur उस रात बी वो जमील क बारे में सोचते hi सगाई…

अगली सुबह मीणा क लिए एक नयी सुभह thi…aaj उसने कुछ फैसला बी लिया था और वो रोज़ाना की तरह वो सुबह ब्रेकफास्ट और पति क लिए टिफ़िन बनायीं और कुछ देर बाद उसका पति बी काम क लिए जाने तैयार हुआ तो मीणा उसे बीड़ा करने गेट तक आयी लेकिन आज उसकी नज़र पति पे काम थी पर उसकी नज़र उस कॉलोनी क आस पास hi थी जहा कल जमील खड़ा हुआ tha..kuch देर तक उसे जमील कही नह दिखा तो उसका मैं थोड़ा उदास होगया था क्यू की मीणा ने सोचा था की जमील आज बी उसके लिए इंतज़ार करते खड़ा rahega…aur इसी उदास मैं से मीणा का चेहरे का रंगा ुधा hi गया था की तभी उसे उस कॉलोनी क पास एक झाड़ क पीछे कुछ हलचल दिखी और कुछ सेकण्ड्स में hi सामने जमील खड़ा दिख गया tha….darasal जब मीणा का पति घर से बहार आगया था तब जमील झाड़ क पीछे चुप गया था और जैसे hi मीणा का पति चला गया जमील बहार आय गया था…

जैसे hi जमील और मीणा की नज़र मिली दोनों एक दूसरे को बस देखते hi रह गए the..dono की तरफ से कोई इशारा कोई रिप्लाई नह था दोनों बस एक दूसरे को देखे hi जा रहे थे जैसे दो प्रेमी आँखों में आंखे मिलकर देखते hai..lekin बहुत देर तक वो वह रुक क जमील को देख नह सकती थी क्यू की सुबह का वक़्त आस पड़ोस मर्द अपने काम पे जाने क लिए निकलते थे…. इसलिए मीणा ने जमील को एक स्माइल पास किया और इस उम्मीद क साथ घर क अंदर आयी की उसकी स्माइल का मतलब जानकार जमील उसके घर आएगा….

अंदर आके मीणा सोफे पे बैठ गयी और जमील का इंतज़ार करने lagi…uske मैं में एक डर बी था जो उसे आगे बढ़ाने से रोक रहा tha..par उसका अकेलापन उसे किसी हमसफ़र का साथ मांग रह था …उसका जिस्म आज कुछ गरमी महसूस कर रहा था जिसकी वजह शायद मीणा खुद बी नह जान पास रही thi….par जमील का इंतज़ार करना आज उसके लिए एक ाचा सुकून दे रहा था..15 मिनट्स बीत गए लेकिन जमील नह आया और इस वजह से मीणा की बेसब्री और बधाई वो सोच में पड़गयी जमील अभीतक क्यू नह आया उसे तो इतने देर में आजाना चाहिए tha…kahi वो मेरे बुलाने का इंतज़ार तो नह कर raha…ya कही बहार कोई आस पड़ोस वाले बहार तो नह nikle….kuch बी हो मुझे देखना hi चाहिए सोच कर मीणा फिर से बहार जाके गेट पास रुक गयी और पहले उसने आस पास नज़र डाली कही कोई बहार तो नह और उसके बाद उस कॉलोनी पे नज़र डाली जहा पे जमील वही खड़ा था जहा वो पहले खड़ा tha…aur मीणा उसे ऐसे देखने लगी की अभीतक क्यू नह आये ..पर जमील ने कुछ और hi सोच रखा था …वो बखूबी जनता था की मीणा उसे देखने दुबारा जरूर आएगी और उसका रास्ता आसान हो jayega….aur वैसा hi हुआ था और जमील क चेहरे पे जीत की हसी आगयी thi…lekin मीणा को अभीतक समाज में नह आरा था की जमील क्यू उधर hi खड़ा hai…usne अपनी बेसब्री को तोड़ते हुए जमील को इशारे में पूछ hi लिया की क्या हुआ…

मीणा का इशारा पते hi जमील ने बी कुछ इशारा किया तो मीणा समाज गयी की जमील क्या कहना चाहता है और वो मुस्कुराते हुए अंदर आयी और बैडरूम में जाके अपनी निघ्त्य उतारते हुए सोचने लगी आखिर जमील क्यू मुझे साडी क ऊपर hi देखना चाहता hai..lagta है मई साडी में उसे और बी खूबसूरत लगती hu..lekin मई उसके कहने पर साडी पहन क बहार जावु इ ठीक rahega..,...shayad नह पर मैंने तो अब बिना कुछ सोचे hi निघ्त्य उतर दी है मतलब कही न कही मुझे जमील पसंद आ रहा hai…par क्यू?

इस क्यू का जवाब शायद मीणा क पास बी नह था और वो इस बीच एक लाल रंग की साडी पहने तैयार ेने क सामने अपनी सुंदरता को निहारने लगी थी जो कुछ hi दिनों में जमील क साथ बिस्टेर पर रंगरलिया मानाने वाला था…

तैयार होकर मीणा पहले बहार दरवाजे पे जाके कड़ी हुई और आस पास एक नज़र डालने लगी उसे डर था की आस पड़ोस क कोई उसे देखे और पूछ न ले की इतनी सुबह सुबह कहा जाने क लिए तैयार होगयी ho….lekin ख़ुशी की बात इ थी की मीणा पर नज़र डालने क लिए आस पड़ोस में कोई बहार नह था और मीणा गेट तक जाके दूर खड़े जमील को देख कर बिजली बरसने लगी जिसे दूर से hi देख कर जमील का लुंड ने तम्बू खड़ा करदिया tha..aur वो अपने चेहरे पे जीत की ख़ुशी लेकर मीणा क घर क तरफ अपने कदम बढ़ाने लगा

और मीणा बी जमील को आता देख कर घर क अंदर चालीगयी क्यू की अब जो बी होनेवाला था वो बंद कमरे में hi जो होना tha…aur आज बंद कमरे में क्या होगा शायद दोनों बी नह जानते थे पर दोनों जानते थे की आज उनकी नज़दीकिया कुछ हद तक बढ़ानेवाली जरूर है…

मीणा घर में आकर जमील का इंतज़ार करने लगी जो कुछ hi पल में गेट खोल कर घर में आने वाला tha…aur उसका इंतज़ार बी जल्द hi ख़तम हो गया tha.jamil मीणा क घर क दरवाजे पे आके खड़ा होगया था और सामने कड़ी मीणा को बिना पलके झुकाये देखने लगा तो मीणा एक पल क शर्मा गयी और नज़र झुकाये hi बोली ऐसे क्या देख रहे हो अंदर तो आवो….

जमील अपने कदम अंदर बढ़ाते हुए मीणा को देखते बोलै इतने प्यार से अंदर बुलावोगे तो पूरी जिंदगी अंदर hi रहूँगा कहते हुए जमील ने मीणा की कलाई थम ली तो मीणा ने बड़े प्यार से अपनी कलाई छुड़ाने की कोशिश करते हुए बोली क्या कर रहे हो दरवाजा खुला है कोई देख लेगा छोड़ो न….

जमील बी एक कातिल हसी क साथ बोलै तो बंद कार्डो न दरवाजा….

मीणा उसे देखते हुए नह नह इ दरवाजा बंद करने का टाइम नह…

ाचा तो बंद करने का टाइम कब aayega…jamil बात को आगे बढ़ाते हुए बोलै …और जिसका मतलब मीणा अछि तरह समाज तो गयी थी पर पहिलाल मीणा का ऐसा कोई इरादा नह था वो बस जमील से दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहती thi…aur उसे अछि तरह पता था की जमील से दोस्ती करने का मतलब जमील से ऐसे डबल मीनिंग क बाते सुन्नी बी padegi….jiske लिए वो अपने आप को तैयार कर चुकी thi….lekin तब उसे झटका लगा क्यू की जमील ने उसके कलाई को थम कर अपने बगल में बैठाया tha..lekin आज मीणा ने उतना विरोध नह किया जितना उसने कल किया tha…wo बस इतना hi बोली की क्या कर रहे हो इ सब ठीक नह…

लेकिन जमील उसकी बात को अनसुना करके उसे hi देखने लगा था वो बी ऊपर से निचे तक जिसे देख कर मीणा शर्म से लाल होगयी और बोली ऐसे क्या देख रहे हो…..

जमील मीणा क सर से हाथ फेरते हुए उसे पीठ पर सवारते हुए देख रहा की इतनी हसीं पारी एक hi दिन में कैसे बदल गयी हो कल तक मुझसे दूर भागना चाहती थी…

मीणा- बस ऐसे hi संजो क्यू की आप की बात कुछ हद तक सही थी .

जमील- ाचा तो मैडम को हमारी दोस्ती मंज़ूर हुई..

मीणा नज़ारे झुकाये ha…..par सिर्फ dosti..aur कुछ नह…

मीणा की इ बात जमील क लिए किसी झटके से काम नह thi…usne तो सोचा था मीणा आज उसकी हो जाएगी पर मीणा ने सिर्फ दोस्ती की बात बोलकर जमील क लिए एक पाबंधी बड़ा दी thi….lekin जमील जनता की आज दोस्ती काबुल की है तो जल्द hi वो उसके निचे लेटने बी तैयार hogi..aur वो बिना कुछ बोले hi मीणा क एक एक अंग को देखने लगा था जिसे देख मीणा और बी पानी हो गयी थी पहली बार एक गैर मर्द उसके ठीक बगल में बैठे उसे हवसी नज़र से देख रहा था और जिसके आँखों में आंखे डालकर वो खुद उसे देख रही thi…aur वो अपनी शरमाते हुए बोली ौसे क्या देख रहे ho…ab तो मैंने आपकी दोस्ती बी काबुल कर ली न….

जमील- देखने दो मीणा आज मुझे मत रोको कितने दिनों से तुम्हारा इ खूबसूरत चेहरा देखने को तड़प रहा हु….

मीणा- शरमाते हुए पागल हो आप

जमील- है पागल हु मई जबसे तुम देखा है उसी दिन मई पागल हो गया था इसलिए बिना कोई काम काज क तुम्हारे पीछे लग गया था..

मीणा- एक बात पुछु?

जमील है पूछो

मीणा- क्या मई आपको सच में खूबसूरत लगती hu…ya आप मुझे बहकाने क लिए बोलते हो…

जमील मीणा क पीठ सवारते हुए ..क्या तुम किसी ने नह कहा क्या …मेरा मतलब तुम्हारे पति ने या किसी सहेली ने या रिश्तेदार में से किसी ने

मीणा- एक पल क लिए उदास चेहरा बनके शायद किसी को बी मई उतनी खूबसूरत नह लगी जितनी आप को लग रही हु…

जमील- पागल है वो सब जिन्हे चादन जैसी बदन वाली औरत की खूबसूरती नह dikhi….mera बस चले तो तुम बस ऐसे hi दिन रात देखता hi राहु…

मीणा अपने तारी सुन कर कुछ देर क लिए भूल hi गयी थी की वो एक गैर मर्द क साथ है और जमील से puchi…acha आप हमेशा बोलते हो की मेरा बदन चन्दन जैसा है इसका मतलब क्या है…

जमील हस्ते हुए वो इसलिए कहता हु की तुम्हारे बदन से मुझे हमेशा खुशबू आती hai…jisse मुझे नशा सा हो जाता hai…wahh कितना खुसभुदार है तुम्हारा इ बदन कहते हुए जमील ने अपने होतो को मीणा क कान क करीब लेजाकर हलके से फुक मारी तो मीणा इस मधुर ऐसस से मदहोश होगयी और कुछ देर क लिए अपने आंखे बंद karli…lekin मीणा अब बी अपने आप पर काबू प् राखी हुई थी वो गलती से बी अपने कदम फिसल देना नह चाहती thi..wo आंखे खोल कर एक बार जमील को देखि जो उसके खड़े पे अपना चेहरा रखना छह रहा tha..aur मीणा ने अपने आप को संभल कर उसके चेहरे को दूर करते हुए boli…ab बस hogaya..bas करो मेरी तारीफ़ करना और इ bolo..aap सुबह सुबह ब्रेकफास्ट करके आते हो या ऐसे hi सीधे…

जमील- कहा का ब्रेकफास्ट सुबह उठाने ब्रश करके दो दिन से आ रहा हु इस उम्मीद से की मैडम जी हमारी कुछ खिदमत करे ….

मीणा- ाचा इतनी बी सुबह सुबह आने की क्या जरुरत है…

जमील- हस्ते हुए जरुरत है इसलिए तो आता हु…..

मीणा- और है इ साडी का नाटक क्या है…

जमील- वो मुझे तुम साडी में अछि लगती हो…

मीणा- लेकिन आप जानते हो अगर किसी ने मुझे सुबह सुबह साडी पे देखा तो क्या पूछेगा . .

जमील- है पता hai…lekin तुमने बी तो मुझे कोई इशारा नह किया न…

मीणा - कैसा इशारा

जमील- वही दोस्ती काबुल होने का

मीणा- वो तो मैंने कल hi इशारा छोड़ दिया था आपको साडी पहन कर आप समजे नह तो मई क्या करू…

जमील चौकठे हुए क्या? मतलब तुम कल hi …..तो इतना भाव क्यू खा रही थी कल बोल देना चाहिए था न….

मीणा कुछ देर चुप रही और बोली कैसे batati….mai एक शादीशुदा औरत हु ऊपर से मेरे दो बचे बी hai…aur मुझे किसी गैर मर्द से दोस्ती का हाथ बढ़ाने से पहले सोउ बार सोचना तो पड़ता है न..

जमील हस्ते हुए तो अब क्या सोचा

मीणा- सच कहु तो मैंने आपके बारे में बहुत सोचा और आखिरकार मैंने इ फैसला किया की मई आपकी दोस्ती काबुल karungi..aur उम्मीद है की आप बी इस दोस्ती को अचे से nibhavoge..kehkar मीणा उठाने लगी तो जमील ने उसका हाथ थम लिया और बोलै मेरा बी वडा रहा की मई तुम्हारे मर्ज़ी क बगैर कुछ गलत करने का सोचूंगा बी नह..

मीणा उसके हाथो से कलाई छुड़ाते hue….thank यू बोलकर किचन में जाने लगी तो जमील बोलै और है अगर तुम्हारी मर्ज़ी बन गयी तो मुझे मत रोकना हाहाहा….

मीणा जमील को मुद क देखि और बोली मेरी मर्ज़ी कभी नह बनेगी बोलै न यहाँ कुछ नह मिलनेवाला हाहाहा लेकिन आज भूले को नास्ता जरूर मिलेगा कहते हुए किचन में चालीगयी तो जमील मीणा की मटकती गांड को देखकर मैं में hi बोलै है है या गांड है क्या ऐडा hai….aisi गांड मरने क लिए पूरा जनम इंतज़ार karu……aur वो बी उठ क किचन की तरफ चलागया…

अंदर किचन में मीणा जमील क लिए ब्रेकफास्ट बना रही थी तो जमील ठीक मीणा क पीछे आके खड़ा हुआ तो मीणा उसे देख एक मुस्कान देते हुए बोली फौवा खावोगे न…

जमील मीणा क शोल्डर पर हाथ फेरते हुए तुम प्यार से खिलावोगी तो जहर बी खा जायेंगे..

मीणा को जमील की इ बात कुछ हद तक पसंद आयी थी और वो मुस्कुराते हुए बोली उतनी बी बुरी नह हु जो आपको जहर खिलासकु..

मीणा की इस मुस्कराहट ने जमील को और बी हौसला दिया था इस बार वो ठीक मीणा क पीछे खड़ा हुआ और मीणा का बहो में बहे डालके खड़ा हुआ अब उसका एक हाथ मीणा क मांगे पेट पर था तो दूसरा हाथ मीणा क शोल्डर पैर था जमील का चेहरा मीणा क दूसरे खंधे पर था और उसकी तेज सासे मीणा अपने कान और गाल पर महसूस करने लगी thi…lekin इस तरह एक गैर मर्द क बहो में जाना मीणा क संस्कार क खिलाफ था लेकिन मीणा को आज कुछ अलग सा अनुभव हो रहा था जो कभी पहले नह हुआ tha..lekin जब जमील की ऊँगली मीणा की नंगे पेट पर चलने लगी तो मीणा उसे रोकते हुए बोली इ सब नह जमील plz….hum बस दोस्त है इ सब नह प्ल्ज़ …आप समझते क्यू नह मई इ सब किसी गैर क साथ नह कर सकती प्ल्ज़ छोड़ दो…
 
मई बस एक नया राइटर hu...ek घाटी हुई घटना को आपके ख़ुशी क लिए प्रस्तुत करने की एक छोटी सी कोशिश कर रहा हु ...अगर किसी को इस कहानी से आपत्ति है तो वो लोग इस कहानी को नहीं पड़े तो hi ठीक hai...kahani को थोड़ा उत्तेजक बनाना हर एक राइटर का हक़ है इ तो सब जानते hi honge....agar किसी को पसंद नह आये तो वो कमेंट न दे यही ठीक rahega...jisko पसंद आयी वो जरूर अपना कमेंट दे...

मीणा क इस बात में कई बी गुस्सा नह था बल्कि वो बड़े प्यार से जमील को दूर करने की कोशिश कर रही thi…sach बात तो इ थी की मीणा थोड़ी गरम बी हुयी थी उसे जमील क ऊँगली अपने पेट पर चलना ाचा बी लगा रहा था पर उसका संस्कार उसे इस बात की इज़ाज़त नह दे रही थी…

मीणा क बात में कोई गुस्सा या विरोध न पाकर जमील मीणा क पेट को हलके से भीचता हुआ बोलै दोस्ती में तो इतना तो मेरा हक़ बनता है न की अपने प्यारे दोस्त क साथ थोड़ा फ़्लर्ट karu…kehte हुए जमील ने मीणा का ñआगे गार्डन पर हलके से हॉट फेरा तो मीणा की जिस्म की गर्मी और बी बढ़गयी और वो जमील को दूर करते हुए boli…dosti में इ सब ठीक नह जमील ji….plz आप वह बैठ जातीय मई आपके लिए ब्रेकफास्ट बनती हु….

हाथ में आये मीणा की खूबसूरत सेक्सी बदन को जमील कहा इतनी आसानी से छोड़ने वाला था वो मीणा की नंगी गार्डन पर गरम सासे छोड़ते हुए बोलै मीणा तुम तो जानती hi ho…mai तुमसे प्यार बी करता hu…aur उस प्यार क नाते मेरा इ हक़ मत chino…ahhhhh वैसे बी मई तुमसे वडा कर hi चूका हु माँ तुम्हारे मर्ज़ी क खिलाफ कुछ नह करूँगा बस इतना तो करने do…ahhhh क्या मुलायम बदन है tumara…ahhhhhhh जमील ने फिर से मीणा क मांगे गार्डन पर अपनी जुबान फेरी साथ hi साथ मीणा क पेट से होते हुए उसकी नाभि तक अपना हाथ ले जाके नाभि क चारो तरफ ऊँगली फेरने लगा तो मीणा बढ़ती जिस्म की गर्मी से मदहोश होगयी और कुछ 1-2 मीन्स क लिए उसने जमील को रोका nh…jamil बी मीणा का कोई विरोध न पाकर बड़े सिद्दत क साथ मीणा की गार्डन पर जुबान फेरने क साथ hi मीणा की नाभि में ऊँगली करने laga…jise मीणा की हलकी सी सिसकारी बी निकल पड़ी थी लेकिन मीणा ने अपना होश को संभाला और जमील क हाथ को अपने पेट से दूर करते हुए boli…kya आप मुझसे सच में प्यार करते हो..

मीणा की इ बात सुनकर जमील थोड़ा चौक गया जमील को मीणा से इस बात की उम्मीद नह थी वो हैरानी से मीणा से बोलै क्यू कोई शक है…

मीणा उसे दूर करने की नास्कॉम कोशिश करते हुए है शक है इसलिए तो पूछ रही हु…

तब जमील अपना प्यार का नाटक को आगे बढ़ाते हुए मीणा को इम्प्रेस करने की कोशिश करते हुए बोलै कैसा शक..? ठीक है तो बोलो कैसे यकीं दिलवु

मीणा एक हलकी मुस्कान अपने चेहरे पे लाते हुए तो क्या आप मेरा वो काम कर सकते हो जो मई कहूँगी …

जमील को लगा मीणा अब मीणा उसे कुछ तोफà मांगेगी और उसे दिलाने का वडा कर दू तो वो आज छोड़ने क लिए तैयार hogi..wo ख़ुशी ख़ुशी से बोलै मांग क तो देखो अगर नह लाके दिया न तो मेरा नाम hi बदलदो कहते हुए उसने इस बार मीणा क पेट पर जोर दिया जिससे मीणा की गांड जमील क कमर से सात गयी और जमील क पंत में खड़े लुंड मीणा क गांड पर दस्तक देने लगà tha…jiska एसएस मीणा को होगया था और इ मीणा क लिए एक नया अनुभव दे रहा था जो काफी रोमांचित था पर मीणा का मकसद फिलाल जमील को अपने जिस्म से दूर करके अपने आप पर काबू पासना hi tha..jo जमील की हरकत से किसी बी वक़्त बेकाबू हो सकता tha…aur वो मुस्कुराते हुए जमील को दूर करते हुए बोली अगर आप मुझसे सच में प्यार करते है तो ऐसी हरकत करना छोड़ क वह कुर्सी पर बैठ क मुझे नास्ता बनाने दो और खाके चलेजावो बिना कोई सवाल किये..

मीणा की बात सुन के जमील सोच ने लगा मैंने क्या सोचा था और क्या hogaya….lekin वो जान था मीणा जैसी पतिव्रता औरत आसानी से हाथ नह आनेवाली और इस वक़्त मीणा पे दबाव दालु तो हो सकता है वो गुस्सा बी hojaye….isliye बेहतर यही होगा की मीणा की बात मान ले और वो मीणा से दूर होक एक आज्ञाकारी सेवक की तरह बगल क कुर्सी में बैठ गया..

मीणा अपनी जीत की ख़ुशी अपनी चेरे पे लेट हुए जमील को देख कर खिलाकर मुस्कुराने लगी तो जमील बी उसे देख कर मैं में hi बोलै इतनी बी खुश न मेरी जान जल्द hi तेरी छूट पहाडुंगा तब जो तेरी चिक निकलेगी तब मई हसूंगा हेहेहे..

कुछ देर तक दोनों में कुछ बात नह हुई मीणा ब्रेकफास्ट बनाने में बिजी होगयी तो जमील मीणा की मटकती गांड को देख कर अपने लुंड को पंत में hi एडजस्ट करने laga..kuch 5 मीन्स में मीणा ने गरमागरम फोवे बनाये और कॉफ़ी क साथ जमील को परोसा और एक प्लेट में खुद थोड़े फोवे लेके जमील क साथ बैठ gayi..is बीच दोनों क बीच खास नह हुआ बस जमील ने मीणा क बारे में थोड़ी जानकारी leli…aur ब्रेकफास्ट फिनिश होते hi जमील जाने को रेडी हुआ और जाते जाते बोलै कल साडी नह कोई chudidar…..aur इतना बोलकर वो मीणा को एक कातिल मुस्कान देकर chalagaya….e सब इतना जल्द में हुआ की मीणा क समाज में नह आया ….दरअसल मीणा को लगा था जमील ब्रेकफास्ट होने क बाद जमील फिर से उसके साथ फ़्लर्ट करेगा और वो फिर से प्यार का वास्ता देखे चुप karayegi….par जमील ने तो मीणा की बात को एक hi झटके में मान लिया था जो मीणा क लिए कुछ ाचा लगा था और जमील क इस हरकत से वो जमील की तरफ और बी आकर्षित होगयी thi…aur वो फिर से जमील क बारे में सोचने पे मजबूर हो गयी थी…

वो सोचने lagi..kaisa इंसान है है जब मई उससे दूर होने की कोशिश कर रही थी तो मेरे पीछे हाथ धोके पड़ा था और जब आज मई खुद उसके सामने कड़ी थी तो मेरी सिर्फ एक बात मान कर चला गया… क्या वाकई में जमील मुझसे प्यार करता hai..ha लगता तो यही hai…agar उसका इरादा गलत होता तो शायद आज वो कुछ बी कर सकता tha….agar वो मुझसे प्यार करता है तो उसके मेरा साथ थोड़ा बहुत फ़्लर्ट करना तो बनता hi hai…aur मुझे बी तो ाचा लग रहा tha…pata नह क्या एसएस था वो पर उसके हाथो में मुझे कुछ अजीब सा सुखद अनुभव तो हो रहा था जो मेरे पति क साथ कभी नह हुआ hai..lekin इ गलत बी तो है मई एक शादीशुदा औरत हु क्या इस उम्र में किसी गैर मर्द क साथ प्यार में पड़ना सही rahega…nh नह इ ठीक nh…par जमील ने तो मुझसे वडा किया हुआ है की वो मेरे मर्ज़ी क बगैर कुछ नह karega…aur उसने आज वो वडा बी निभाया hai..iska मतलब जब तक मई नह चहु तब तक कुछ गलत तो नह हो सकता…

उस दिन मीणा का सुबह से लेकर शाम तक सिर्फ जमील क बारे में hi वक़्त गुजर गया था और शाम को जब उसका पति आया तो कुछ हद तक मीणा जमील को भूल गयी और अपने प्यारे पति क सेवा में लग gayi….aur रात में सोते वक़्त वो फिर से जमील क बारे में सोचते hi सो गयी..

अगले दिन सुबह मीणा सुबह उठ क पहले नहाकर फ्रेश हुई और उसने एक लाल रंग की टॉप पहन ली और निचे सफ़ेद रंग की लेग्गिंग्स जिससे मीणा की गांड की गोलाई पूरी उभर क पीछे सर्कि हुई साफ़ दिख रही thi…uske बाद मीणा ने ब्रेकफास्ट बी बनालिया .और पति क लिए टिफ़िन बी तैयार किया और जब पति उठ क फ्रेश हुआ तो उसने सिर्फ पति क लिए hi ब्रेकफास्ट परोसा. दरअसल मीणा और उसके पति हमेशा साथ में ब्रेकफास्ट किया करते थे लेकिन आज मीणा का मैं कुछ अलग था आज वो अपने दोस्त अपने प्रेमी क साथ ब्रेकफास्ट करना चाहती thi…aur पति क पूछने पर मीणा ने बताया की उसका पेट थोड़ा ख़राब है इसलिए वो बाद में आराम से ब्रेकफास्ट करेगी .और पति बेचारा इस बात से अनजान की उसकी प्यारी बीवी क कदम बहक रहे hai..meena को अपना ख्याल रखने बोल क काम पे जाने क लिए बहार निकल गया और मीणा उसके पीछे उसे गेट तक छोड़ने..

वही दूर कॉलोनी क पास खड़ा जमील मना को टॉप पे देख कर खुश होते हुए मैं में hi बोलै अरे मेरी जान जैसे तू मेरी कहने पर कपडे पहन रही हो न वैसे hi वो दिन बी दूर नह की मेरे सामने तुम उसी कपडे को उतर क नंगी हो जावेगी..

और जैसे hi मीणा का पति गया तो मीणा जमील की तरफ देख कर उसे िशाररा करके उसे आने को कहा..

इ पहली बार था जो मीणा ने जमील को खुले आम दावत दिया हुआ था और इ बात जमील क लिए खास बात थी क्यू की जमील को आज तक किसी औरत ने आज तक उसे किसी ने ऐसे दावत दी thi…aur वो अपनी ख़ुशी को समेटे हुए मीणा क घर की तरफ अपना कदम बड़ा दिया…

अब अंदर एते hi मीणा और जमील क बीच क्या hua….kya जमील और मीणा का मिलान आज होगया ..क्या जमील क बातो में आकर मीणा ने अपना पाक जिस्म को जमील क हवाले kiya….agar ऐसा नह हुआ था तो और क्या hua…e सब अगले अपडेट me..lekin इतना तो जरूर हुआ की जमील और मीणा दोनों मजा aaya…wait फॉर नेक्स्ट अपडेट.
 
मीणा अंदर बैठे जमील का इंतज़ार करने लगी थी पर आज उसे ज्यादा इंतज़ार करना नह पड़ा कुछ hi मिनट में जमील मीणा क घर क अंदर दाखिल हुआ और सोफे पे बैठे मीणा को देख मुस्कुराया तो मीणा ने बी उसे स्माइल क साथ स्वागत kiya…to जमील देर न करते हुए मीणा क बगल में बैठ गया और एक हाथ मीणा क सर पे रख कर हलके से निचे लाते हुए मीणा की पीठ की सवारी करने लगा मीणा उसे आज रोकने की कोशिश बी नह की थी एक तो वो जानती थी उसके रोकने पर बी जमील रुकेगा नह और दूसरी बात इ की मीणा को जमील क इस तरह साथ में चिपक क बैठना उसके जिस्म पर हाथ फेरना ाचा लगने लगा था उसके पाक जिस्म को एक नया अनुभव मिल रहा था जो आज तक उसके पति क बगल में बैठ कर बी कभी नह मिला tha…wo बिना कुछ बोले जमील को hi देखने लगी तो ख़ामोशी तोड़ते हुए जमील मीणा से पूछा आज क्या मेरी दोस्त कुछ खामोश सी है..

जमील की बात सुन क मीणा अपनी ख़ामोशी तोड़ते हुए बोली बस ऐसे hi आपके बारे में hi सोच रही थी..

जमील- ाचा तो क्या सोचा तुमने मेरे बारे में जरा मई बी तो सुनु…

मीणा- वही तो प्रॉब्लम है की कुछ बी तो समाज में नह आरा

जमील- तो मई कुछ मदत करू समजने में…

मीणा- शायद कर सकते हो…

जमील- तो देर किस बात की पूछो न..

मीणा- एक घेरि सास लेते hue…muje समाज में नह आरा जमील जी मई आपको दूर क्यू नह कर पा रही hu..pehle आप मेरे पीछे पड़े मुझे ाचा नह लगता था, आप पे गुस्सा बी आया पर आपकी एक एक बात एक एक हरकत ने मुझे आपसे दोस्ती करने पर मजबूर बी किया लेकिन उससे अजीब इ बात है की मुझे खुद पता नह चल रहा की आप कहो तो मई साडी पहन थी हु और आप क कहने पर आज चूड़ीदार b….kya मई एक गैर मर्द क लिए इ सब कर क अपने पति से धोका तो नह कर रही हु…..

मीणा की बात गौर से सुनकर जमील है पड़ा और बोलै बस इतनी सी बात…

मीणा उसे इसतरह हस्ते देख कर बोली क्या हुआ क्यू ऐसे है रहे हो एक तो मुझे कुछ बी समाज में नह आरा और आपको हसी आरही कहके गुस्सा दिखते हुए मीणा जमील से थोड़ी दूर हुई तो जमील फिर से मीणा क करीब जाकर उसे इस बार बाहोंमे लेने की कोशिश करते हुए बोलै …इसका जवाब सिर्फ एक hi है मीणा की तुम बी अब मुझसे प्यार होने लगा है या हो चूका hai…hehehe..

मीणा चौक कर उसे देखते हुए kyaa….pyaar नह इ गलत है मई मेरे पति क साथ धोका नह कर sakti…kabhi कभी नह..

जमील मीणा की कलाई को अपने हाथ में लेते हुए कैसा धोका मीणा जब दो प्रेमी मैं से कुछ करते है तो वो कभी गलत नह hota…bas उसमे प्यार hi छुपा हुआ रहता है इसलिए इ धोका गकत सोचना बंद कार्डो और प्यार का मजा लो…

मीणा- जमील की और देखते hue…nh जमील ji…muje इ ठीक नह लगता और शादीशुदा मर्द और औरत क बीच प्यार कैसे हो सकता hai…..use तो समाज वासना की नज़र से hi देखेगा…

जमील- samaj…is समाज क बारे में सोच कर हमे मिलता क्या है कुछ बी तो nh…aur हम दोनों का रिश्ता हम खुले आम थोड़ी निभा रहे hai..jab तक तुम ऐसे बेकार क बातो में सोचती रहोगी तब तक तुम अपनी जिंदगी में मौज मस्ती नह karpavogi..samaj क डर से तुम खुद अपने आप पर पाबन्दी लगा रही ho…aur ऐसा करोगी तो नहीं तुम मेरे साथ और नहीं अपने पति क साथ और नहीं किसी और क साथ मौजमस्ती करके खुश हो सकती हो….

जमील की बाते मीणा क दिल और दिमाग में होते हुए उसके जिस्म पर बी असर कर रही thi…use कही न कही जमील की बातो में सचाई नज़र आ रही thi..q की मीणा ने हमेशा समाज क डर से अपने आप को पाबन्दी में hi रखा tha…aur आज जमील बिन बताये hi वो बात मीणा को बतादि thi…jisse मीणा को लगा सच में जमील मुझसे बहुत प्यार करता है इसलिए मेरे बिना बताये hi इसने जान लिया की मई समाज क डर से अपने आप पर काबू पाने की कोशिश करती रही hu…shaadi क पहले और शादी क बाद बी कितने लड़के और मर्द मेरे पीछे पद गए the…shayad इ समाज क डर से hi मैंने उनको घास नह डाला वर्ण आज तक मई किसी एक तो पैट चुकी hoti….lekin अब मई शादीशुदा हु क्या इस उम्र में जमील क साथ प्यार में पड़ना ठीक rahega…..lekin जमील कितना समझदार hai…muje नह लगता की जमील मेरे मर्ज़ी क बगैर मेरे साथ कुछ गलत karega..to क्यू न मई जमील को समजके इसके साथ प्यार और दोस्ती का एक पाक रिश्ता nibhavu…meena मैं में hi सोच रही थी तो उधर जमील को अपनी जीत की निशानी मीणा क चेहरे पर साफ़ नज़र आ रही थी …उसे लगा अब वो मीणा क मैं में प्यार की बीज तो उगने में सफल हो गया hai…ab इसे थोड़ा थोड़ा गरम करके वासना का बीज बी ऊगा सकता hai…aur मीणा क सामने अपना एक घुटना तक कर बैठ क मीणा की एक कलाई को हाथ में पकडे हुए bola…lo कल तक तो मैंने तुमसे दोस्ती का हाथ मांगता आज मई तुमसे प्यार का साथ मांग था हु कहके ी लव यू मीणा मई तुमसे बहुत प्यार करने लगा hu..kya तुम मेरे इस प्यार को अपना साथ dogi….kehte हुए जमील ने मीणा की कलाई को चुम लिया तो मीणा अपने कलाई पर जमील क गरम होतो का एसएस होते hi एक पल क लिए मदहोश hogayi…use जमील क इस तरह प्यार का एसएस दिलाना ाचा लगा tha..wo बस जमील को देख कर मुस्कुराते हुए बोली पागल हो aap…chalo अब बाते ख़तम बड़ी जोरो से भूक लगी है ब्रेकफास्ट करलेते hai…aur वो वह से उठ गयी तो जमील ने पूछा मतलब तुमने बी ब्रेकफास्ट नह किया…

मीणा गार्डन हिलाते हुए न में जवाब दी तो जमील अपने जगह से उठाते हुए बोलै लगता है आज तुम मुझपे बहुत प्यार आया है ..मीणा उसे हाथो से अपनी कलाई छुड़ाते हुए किचन की तरफ जाते हुए उसे मुस्कान पास करते हुए जमील की बातो को है में इशारा kardi..jise देख जमील खुश हुआ वो मैं में hi सोचने लगा चोरी तो पटजायी hai…ab बस टंगे खोलना hi बाकी है और वो बी जल्द hi होगा चलो थोड़ा और गरम करते है इसे और वो मीणा क पीछे पीछे किचन में गया जहा मीणा किचन रैक क सामने कड़ी नास्ता गरम करने लगी थी साथ में कॉफ़ी बी बना रही थी…

जमील मीणा क पीछे जाकर खड़ा हुआ और अपने दोनों हाथो को मीणा क कमर से होते हुए आगे से मीणा को पेट पर डालके मीणा को पीछे से बहो में लिया to..meena उसकी तरफ अपना चेहरा घुमा कर देखते हुए बोली नह जमील कुछ देर क लिए तो अपने हाथ को शांत रखो ..कहते हुए जमील क हाथो को प्यार से दूर करने लगी..

मीणा ने जमील का कोई विरोध नह किया था बल्कि प्यार से जमील क हाथो को दूर किया था जिसे जमील तो समाज गया था की मीणा अब उसका कोई विरोध नह करना चाहती पर अब बी उसके मैं में उसका संस्कार अदा आ रहा hai…chalo उसे बी बीच रस्ते से निकल देते है सोच कर जमील ने इस बार मीणा क पेट को हलके से दबोच लिया जिससे मीणा की हलकी सी अह्ह्ह्ह की सिसकारियां निकल padi…thi.

जमील मीणा को और बी अपने तरफ खिंच ते हुए बोलै क्या करू मीणा तुम हो hi इतनी खूबसूरत और तुम्हारा इ बदन तो इतना मुलायम है की बार बार चुने को मैं करता hai…..haa सच में मीणा मुझे तुम्हारे साथ हुई पूरी जिंदगी जीने का मान करता hai…jamil मीणा को इम्प्रेस करने क लिए कुछ ज्यादा hi मीणा की तारीफ की थी..

वही मीणा अपनी tàarif सुन क फिर से पिगल ने लगी लेकिन अब वो नह चाहती थी की जमील और उसके बीच जिस्मानी तालुकात बन जाए लेकिन कही न कही मीणा को जमील क जिस्म से अपनी जिस्म की टकराहट अछि बी लग रही थी इस लिए वो जमील को दूर बी कर्मा नह चाहती thi..par वो अपने संस्कार क हाथो मजबूर थी इसलिए जमील से बोली बस बस करो बहुत हुई तारीफ़ अब एक अचे दोस्त की तरह उस कुर्सी पे बैठो पहले ब्रेकफास्ट करलेते hai..bad में अगर तारीफ़ से जी नह भरा तो और थोड़ी तारीफ़ करलेना hegehe.e कहकर मीणा ने उसे आगे बढ़ाने से नाकारा बी नह tha…aur जमील बी आज मीणा पे ज्यादा जोर देना नह चाहता था उसका मकसद आज सिर्फ मीणा को गरम करके छोड़ना था जिससे मीणा जिस्म की गर्मी जमील से मिठाने पर मजबूर होजाये और वो खुद उसे बिस्टेर पर bulaye…isliye वो जमील मीणा से दूर हुआ और जाकर कुर्सी पे बैठ gaya…aur इस बात से मीणा जमील क प्रति और बी ज्यादा आकर्षित hogayi..aur वो नास्ता परोसते हुए सोचने लगी जमील सच में मुझे प्यार करता है इसलिए मेरी हर बात को मनाता अब इससे मुझे कोई खतरा nh…ha वो बस थोड़ा जिस्म क साथ छेद चढ़ कर सकता hai..aur प्यार में इतना तो हक़ बनता hi उसका….

मीणा इ सब सोचते हुए उसे थोड़ा बी अंदाज़ा नह था की वो जमील की बातो में आकर खुद अपनी दबी हुई वासना को जगा रही hai..aur वो खुद नह जानती थी जमील क लिए जो रास्ता वो अपना रही है उस रस्ते पे चलते चलते वो और कितने मर्द को अपनाएगी और अपनी जिस्म की गर्मी bhujayegi..is बात से अनजान वो दो प्लेट में नास्ता परोस कर जमील क सामने वाली कुर्सी पर बैठकर नास्ता करने लगी..

दोनों एक दूसरे क सामने बैठ क एक दूसरे को देखते हुए कॉफ़ी और नास्ता का मजा लेने लगे तो जमील नाश्ते की तारीफ़ करते हुए बोलै सच मीणा तुम्हारी हाथ का खाना बी इतना ाचा स्वादिष्ट होता है की क्या bolu…jee करता है हर दिन तुम्हारे बनाये नास्ता hi खलु सुबह…

मीणा- हस्ते हुए अच्छा तो रोका किसने hai…aajavo हर दिन..

जमील- सच में..

मीणा- मई क्यू झूट बोलूंगी..

जमील- और है इस ब्रेकफास्ट का मजा और बाद जायेगा जब तुम बी मेरे साथ बैठ कर करोगी….

मीणा उसकी बात पर हस्ते हुए सच में पागल हो गए हो आप अब मेरी एक बात मानोगे..

जमील को लगा मीणा अब उसे कल की तरह फिर प्यार का वास्ता देखे जाने बोलेगी जो जमील मैं से तो नह चाहता tha…par उसे मीणा का दिल जो जीतना था इसलिए वो बोलै बोलो न आपका हुकुम सर आँखों par..bolo अब ब्रेकफास्ट होते hi मुझे जाने बोलोगी न ठीक है चला जावूंगा खुश…

जमील की बात सुनकर मीणा को क्या रिप्लाई देना hi सज़ा नह क्यू की जमील उसके साथ इस तरह प्यार से पेश आएगा उसने कभी सोचा बी नह tha..aur इस बात में मीणा का दिल बी जीत लिया था वो एक पल क लिए अपने आप को जमील की माशूका की तरह सोचने lagi…lekin कुछ देर में वो अपने होश को संभल कर बोली अरे नह …मई तो बस इ कहना छह रही थी की आप हर दिन उस कॉलोनी क पास आके मत ruko…kabhi किसी ने देख लिया तो और कभी बी मेरे पति क नज़र आप पर पद सकती hai….samje न..

जमील- इसका मतलब तुम मुझे आने से रोकना चाहती हो?

इस सवाल भरे जमील की जवाब सुनकर मीणा थोड़ी हसी और बोली नह नह ऐसा नह मई कल से पति क जाते hi आपको फ़ोन करदूंगी उसके बाद आप चले आना..

जमील- लेकिन हर दिन आने से तुम्हारे आस पास पडोसी या किसी ने मुझे देख लिया तो..

जमील ने इ बात जानबूजकर कही थी ताकि वो बी जानना चाहता था की मीणा क घर आने क लिए उसे कोई पाबंधी तो नह होगी

लेकिन मीणा का जिस्म अब जमील की तरफ आकर्षित होने लगा था इसलिए वो जमील को अपने पडोसी लोगो क बारे बताते हुए boli…nh ऐसा कुछ प्रॉब्लम नह hai…yaha सब लोग तो अपने काम से hi मतलब रखते है किसी क घर कौन आये उनको कोई फरक नह padta…par हमे फिर बी थोड़ी सावधानी बरसनी hogi…isliye तो कह रही हु हर दिन उस कॉलोनी क पास रुकने से किसी को शक हो सकता है..

जमील क लिए अब रास्ता क्लियर हो गया था और बोलै इ तो अछि बात hai…to फिर हर दिन तुम्हारा बना ब्रेकफास्ट hi करूँगा हेहेहे

मीणा- जैसा आप ठीक समजे पर प्ल्ज़ इ बात ….हम दोनों में hi सिमित रहे..

जमील को बी इ बात सही लगी थी और बोलै ठीक है मीणा इसी बहाने फ़ोन पर hi हम दोनों क बीच गुलचप्पी होगी हेहेहे..

मीणा बोली है पर जब इ नह रहेंगे तब hi और सुनो जब तक मई न कहु मुझे फ़ोन या मश्ग नह करोगे ok…q की मई नह चाहती इ बात किसी और को पता चले खासकर मेरे पति को समजे..

जमील है मि भरते हुए ठीक है किसी को पता नह चलेगा खुश…

मीणा ठीक है तो मेरा नंबर लो और मुझे एक मिस कॉल दो कहते हुए मीणा ने अपना मोबिल नंबर दिया तो जमील ने तुरंत मीणा का मोबाइल नंबर अपने सेल फ़ोन में सेव किया और मीणा को मिस कॉल बी दिया तो मीणा ने बी उसका नंबर सेव करलिया..

इस बीच दोनों का ब्रेकफास्ट बी फिनिश होगया तो मीणा उठ क दोनों का प्लेट क साथ कॉफ़ी मग लेके उसे धोने किचन क बेसिन की तरफ बड़ी तो जमील बी उसके पीछे आकर बेसिन में अपने हाथ धोने laga..iswaqt दोनों इतने करीब थे की दोनों की भुजाये एक दूसरे से टकरा रही थी और कमर बी एक दूसरे को घर्षण कर रहे the..aur मीणा बी बिना किसी विरोध किये बर्तन साफ़ करने में लगी thi…par कुछ hi देर में उसे जमील का हाथ पीछे से एके अपने पेट को लपेटा महसूस हुआ तो मीणा जमील को देख कर मुस्कुराते हुए बोली शुरू hue…thoda तो सबर करो na…meena ऐसे बोल रही थी की जैसे वो बर्तन साफ़ करते hi जमील से छुड़वाने तैयार है …और जमील मीणा की बात को जवाब देते हुए इस बहार वो मीणा को पीछे इस कदर पकड़ लिया की जमील का लुंड ठीक मीणा की गांड पर दस्तक de…aur बोलै ख़तम hi कब होगया था जो शुरू हो जावु और उसने हलके से एक धक्का मारा तो इस बार मीणा को अपनी गांड की छेद पर किसी गरम लोहे की तरह महसूस हुआ और मीणा को समझने में देर नह लगी की वो लोहे जैसा चीज़ क्या hai….jamil धीरे धीरे पीछे से धक्के देरहा तो मीणा अपनी माधोसी में खोने लगी thi..wo खुद तैय कर नहीं पा रही थी जो कुछ हो रहा है वो सही है या galat….bas वो कुछ देर क लिए जमील को अपने गांड पर महसूस करना hi ठीक सामजी लेकिन देखते hi देखते जमील क एक हाथ मीणा क पेट को टॉप क ऊपर से hi मसलने लगा तो दूसरा हाथ मीणा क टॉप क अंदर उसके जांघो को छूटे हुए उसके नंगे पेट पर आकर उसकी नाभि से खेलने लगा tha..is बीच मीणा ने गौर किया की उसका टॉप उसके पीछे से बी ऊपर आ चूका है और जमील उसके लेग्गिंग्स क ऊपर से hi उसकी गांड पे हलके धक्के दे रहा है तो मीणा एक पल क लिए शर्म से लाल होगयी thi…use जमील की पीछे से हरकत तो नह दिख रही थी पर वो जमील क लुंड को महसूस करके जान गयी थी काफी मोटा hai…aur इ सोच कर उसका चेहरा लज़्ज़त से भर गया tha..ek तरफ जमील क हाथ उसके नंगे पेट पर गुदगुदी करते हुए उसके नाज़ुक नाभि को सहला रही थी पीछे से जमील का लुंड उसकी गांड पर खयामत बरस रहा था और ऊपर से जमील क हॉट उसके नंगे गार्डन पर चल रहे the..meena अब पूरी तरह से जमील क बहो में कैद अपने जिस्म को सुख प्रधान कर रही थी…

और जमील बी जनता था मीणा इस वक़्त पूरी तरह से टायर नह है इसलिए वो ज्यादा आगे न बढ़ते हुए बस मीणा क गांड और पेट क साथ hi खेलता रहा ऐसा hi कुछ 5 मिनट तक मीणा ने कोई विरोध किये बिना जमील का साथ देने लगी thi..aur इस वक़्त मीणा बर्तन साफ़ करना बी छोड़ क सिर्फ जमील क बहो में थी जैसे जो कुछ होरा है होने दे…

इस बीच मीणा का कोई विरोध न पाकर जमील ने अपने हाथ को हलके से मीणा क पेट से उतारते हुए उसकी छूट की तरफ लेने लगा to..meena ने अपना होश को संभाला और जमील को रोकते हुए नह जमील इ सब नह plz…ahhhhhhh

मीणा की बात सुनते hi जमील ने अपने बढ़ते हाथ को रोका और फिर से उसकी नाभि क साथ खेलते हुए बोलै मीणा कितना मुलायम तुम्हारा इ पेट…

मीणा- अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बस करो na…plz……ahhhhh

जमील- क्या मई एक बार तुम्हारे पेट को चुम सकता हु……

मीणा- नाशियी plz…e सब नह plz…muuuujje ाचा नननननाहीई लगता पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़.

जमील मीणा की नाभि में ऊँगली करते hue….bas एक बार प्ल्ज़…

सच बात तो इ थी की मीणा भी यही छह रही थी की जमील और आगे bade…lekin उसका संस्कार उसे रोक रहा tha…aaj तक जो वो पतिव्रता धर्म निभाते आयी है उसे वो एक hi झटके में तोडना नह चाहती thi…isliye वो जमील से अपने कंपते आवाज़ में बोली ह्ह्हह्ह जमील ाआजजजजज नहह नह प्ल्ज़….

मीणा की बात सुनकर जमील को लगा आज लाख कोशिश करो तो बी इ छुड़वाने तैयार नह होगी क्यू न इससे अपने मैं की होने दे aaj..aur उसने फिर से मीणा की नाभि के खेलते हुए bola…aaj नह तो कब मीणा…

Meena-.....ahhhhh पता ननननाहीई

जमील- मीणा की पीछे से एक जोर का झटका देते हुए अगली बार???

जमील ने ऐसा झटका मारा था की जमील का लुंड मीणा को अपनी गांड चीरता हुआ अंदर घुसता हुआ महसूस हुआ और उसके मुँह से नशीली सिसकारी निकल padi…ahhhhhhhh ढहहिर्री ….हआ अगली बहार जारररर दूंगी wada…….aaiiiiii

मीणा ने बिना मांगे hi जमील से वडा किया था और उसे पता नहीं था इ अगली बार कल hi आएगा वो अपनी जिस्म में होरही बेचैनी को दूर करने क लिए ऐसे बोली क्यू की उसका संस्कार उसके गुनाह का जवाब माँगने लगा था पर उसके जिस्म को इ गुनाह बी एक मीठा एसएस था जो कभी नह हुआ था इससे पहले और वो अपनी जिस्म की बढ़ती गर्मी से वो भूल गयी थी इ अगली बार कल hi आनेवाला है…

लेकिन जमील अछि तरह जनता की इ ागलीबार कल सुबह तक hi सिमित है और वो अपने चेहरे पे कातिल मुस्कान लाते हुए मीणा से अलग हुआ और वही किचन क प्लेटफार्म पे बैठ गया…

जमील को अपने से दूर होते hi मीणा ने एक गहरी सास ली और जमील की तरफ देख कर शर्मा गयी और निचे मुँह करके अपनी चेहरे पे मुस्कराहट लायी जो जमील क प्रति उसका समर्पण की पहली मुस्कान thi…q की कही न कही उसके मैं में जमील को दूर करना ाचा बी नह लगा tha…par वो मजबूर थी अपने संस्कार क हाथो…

वही प्लेटफार्म में बैठा जमील क साथ कलपद तो होगया था पर वो जनता था की मीणा पूरी तरह से उसकी वश में आचुकी है बस और थोड़ा इंतज़ार करने की बारी hai…aur उसके बाद वो मन चाहे मीणा को भोग सकता है…

अगले एक घंटे तक कुछ खास नह हुआ दोनों सिर्फ नार्मल बाते hi करते रहे इस बीच जमील ने कुछ चुटकी सुनके मीणा को हँसा बी दिया tha..tabhi मीणा का सेल बजने लगा तो मीणा ने अपनी सेल की तरफ देखा तो वो उसका पति का फ़ोन tha…jise देख कर मीणा डर क मरे कंपनी लगी और जमील से बोली पति का फ़ोन है कही उन्हें शक तो नह हुआ…

जमील बी एक पल क लिए डर गया था पर वो अपनी डर को मीणा को न दिखते हुए बोलै तुम बेकार में डर रही ho..phone उठके तो देखो किसी काम से फ़ोन किया hoga…meena एक पल क लिए बहार नज़र डाली और फ़ोन को रिसीव करते हुए कंपते हुए आवाज़ में बोली ह्ह्ह्हहईलो

मीणा का पति मीणा की कम्पटी आवाज़ को पहचान गया और अपना काम भूल कर मीणा से पूछा क्या हुआ मीणा तुम इतनी कांप क्यू रही हो तबियत तो ठीक है न..

मीणा अपने आप को नार्मल बनाते हुए बोली ारे वो फ़ोन बहार हॉल में था और मई किचन में थी जब रिंग सुनाई दिया तो भागते हुए आयी शायद आपको इसलिए लगा होगा…

मीणा की बात सुनकर उसका पति थोड़ा रिलैक्स होते हुए बोलै ाचा ठीक है वो मई मीणा इसलिए फ़ोन किया था की मई कुछ जरुरी पेपर्स घर में hi भूल गया था इसलिए वो लेने मई रेतुर्न आ रहा हु और दोपहर खाना खाके hi जावूंगा वापिस काम पर…

मीणा अब थोड़ी रिलैक्स होगयी थी उसके मैं का शक दूर हुआ था और वो बोली ठीक है कब तक आवोगे आप…

पति- बस एक छोटा सा काम है उसे निपटा कर एक घंटे में आजावूंगा…

मीणा- ठीक है तो फिर कोई बात nh..aur दोनों का फ़ोन कट गया तो मीणा ने फिर एक ग़हरी सास ली और जमील की तरफ देखा तो जमील बोलै ठीक है तो फिर मई चलता hu..bolte हुए वो जिसने को खड़ा हुआ…

लेकिन मीणा को उसका जाना पसंद नह था क्यू की जमील ने उसके जिस्म क साथ थोड़ा बहुत खेला बी था फिर बी जमील ने उसके साथ थोड़ी हसी मज़ाक करके उसे खुश बी किया था जो मीणा क लिए ख़ुशी का पल था और वो नह चाहती थी उनकी ख़ुशी का पल इतनी जल्द hi ख़तम ho…par वो कुछ कर बी नह सकती थी …इसलिए वो जमील को कुछ बोल नह पायी क्यू की अब वो वक़्त क हाथो मजबूर thi..aur वो कुछ सोच पति तबतक जमील घर से बहार बी निकल चूका tha..par उसके लिए ख़ुशी की बात थी की जमील उसका कहना मनाता hai…wo सोचने लगी कैसे जमील उसके एक बात कहने पे उसे छोड़ किचन स्टैंड पे बैठ gaya..aur उसके बाद तो उसने उसके करीब आने की कोशिश बी नह ki..kya वो सच में वही जमील है जिसके बारे में सहेली चढ़ा फिर क कहा tha…auratbaaz….nhnh शायद मेरी सहेली hi गलत hai…agar जमील सच में औरतबाज़ होता तो शायद वो आज अपनी मैं की कर चूका hota..mai तो आज पूरी उसके बाहोंमे thi…lekin उसने ऐसा नह किया मेरे साथ प्यार से पेश aaya..aur उसका प्यार करने का तरीका बी कितना ाचा hai..muje तो मजा hi आरहा tha…kitne प्यार से वो मेरी पेट को सवार रहा tha…aur उसका वो हाथ अगर मेरी चड्डी तक चला जाता तो शायद मई बी सब कुछ भूल जाती लेकिन जमील ने मेरी एक hi बात पर वो हाथ को दूर kiya…sach में कितना ाचा लगता है उसके साथ…

मीणा उसके खयालो खोयी hi अपने पति क लिए दोपहर का खाना बनाने लगी thi…use हर तरीके से जमील ाचा hi लग रहा tha…wo इन सब ख़यालात में इ बी भूल चुकी थी एक गैर मर्द का जिस्मानी तालुकात बनाना तो छोड़ो उसके बहो में जाना बी गलत hai..aur मीणा इ सब कर चुकी hai…e सब मीणा की दबी हुई हवस थी जो मीणा को जमील का हर गलती बी अछि लग रही थी..

दोपहर तक कुछ ख़ास नह हुआ मीणा का पति आके अपने जरुरी पेपर्स लेके खाना खाके ड्यूटी पे चला गया और मीणा बी रोज़ाना की तरह खाने क बाद दोपहर में नींद की एक हलकी सी झप्पी लेने क लिए बैडरूम में चालीगयी और वो दो घंटे की नींद से जाएगी तो शाम क 5 बज चुके थे वो करवट लेते हुए उठी और उसने एक नज़र अपनी मोबिल पे डाला तो उसने पाया की उसने जमील का एक मश्ग है…

पति आके गए kya…sab कुछ ठीक है न…

मीणा मश्ग देखते hi खुश हुई उसे लगा की जमील उसका पूरा ख्याल रक्त है और देर न करते हुए जमील को कॉल लगायी तो उधर से जमील ने कॉल रइवे करके hello बोलै..

मीणा- क्या कर रहे थे

जमील- कुछ बी तो nh..bas तुम्हारे बारे में hi सोच रहा था..

मीणा- ाचा ज्यादा मत सोचा करो मई कही भाग क जाने वाली नह हाहाहा

जमील- है वो मुझे पता है अब इ बतावो तेरे पति कब आये…

मीणा ने सब कुछ बताया पति क आके फिर वापिस जाने तक जिसे सुनकर जमील थोड़ा रिलैक्स hua..aur बोलै ठीक है तो फिर वैसे एक बात तो अछि है तेरे पति आने से पहले फ़ोन करते hai..e हम दोनों क लिए अछि बात है न…

मीणा- हम्म्म

जमील- वैसे कल सुबह नाश्ता क्या hai…kuch प्लान है क्या

Meena-abhitak तो सोची नह वैसे आप जो कहे वो बना सकती hu…aavoge न कल..

जमील- क्यू नह आवूंगा वैसे आज का आधा काम जो अधूरा है उसे तो कल पूरा करके hi रहूँगा…

मीणा समाज गयी थी कौनसा काम अधूरा hai..aur वो अपने पेट की तरफ एक बार देख कर तत्तत्त पागल…. बोलते हुए अपने आप में शर्मा gayi..to जमील बात को आगे बढ़ाते हुए बड़े प्यार से क्यू मीणा डौगी न….

जमील की इस प्यार भरी बात से मीणा उसे इंकार नह कर सकीय और ह्म्म्मम्म्म्म …अब मई रक्ति हु कल इनके जाते hi फ़ोन करदूंगी bye…

जमील- bye..

और उस दिन बी कुछ खास नह hua..aur रात में सोते वक़्त मीणा ने फैसला लिया वो कल जमील को उसकी नाज़ुक पेट क साथ सिर्फ एक बार चुम्मा छाती करने परमिशन देगी और उसके बाद वो जमील को समजदगी की इ गलत है और उसे यकीन था की जमील उसकी बात मान जायेगा और इसी फैसले को वो आखरी मान कर सो गयी..

मीणा ने इ फैसला तो कर लिया था पर वो नह जानती थी उसका इ फैसला किस हद तक काम karega..jise वो सिर्फ एक बार सोची थी वो कितनी बार और बार बार किस किस क साथ होगा उसे इस बात की कोई खबर बी नह थी…..

अगली सुबह मीणा रोज़ाना की तरह सुबह उठ क फ्रेश हुई और उसके बाद उसने ब्रेकफास्ट बी बना लिया और पति क लिए टिफ़िन बी आज उसे बस अपने पति क जाने का hi इंतज़ार tha…isliye वो सब काम इतने जल्दबाज़ी में निपट चुकी थी की पति उठाने क पहले hi सब काम फिनिश हो चूका tha…aur कुछ hi डेरे उसका पति बी उठ गया और फ्रेश होने हाथरूम चला गया तो मीणा ने जल्द से अपना मोबाइल निकला और जमील को मश्ग किया की 'अब आधे घंटे में पति जाने वाले है आप तैयार रहो मई कॉल करदूंगी'. ..और उसने अपना फ़ोन अपने निघ्त्य क पॉकेट में रख liya..kuch 10-15 मीन्स में उसका पति बाथरूम से बहार आया और अपने ड्यूटी क कपडे पहन कर डाइनिंग टेबल पर एके बैठ गया तो मीणा ने आज बी उसे अकेले को hi नास्ता परोसा और खुद किचन स्टैंड क पास काम करने का बहाना करने lagi..aur कुछ hi देर में उसका पति ब्रेकफास्ट करके ड्यूटी को जाने लगा तो मीणा उससे बोली आज तो सब पेपर्स ठीक से लिए न…

पति है बाबा लिया..

मीणा- फिर से एक बार चेक करलो वर्ण आपको hi तकलीफ hogi…aane जाने में…

मीणा की बात सुनकर पति ने फिर से एक बार चेक किया और जब उसे सब ठीक लगा तो वो अपने बाइक पे बैठ क चलागया.

दरअसल मीणा नह चाहती थी की जमील और उसको कोई डिस्टर्ब न हो जैसे कल हुआ tha…aaj उसे जमील क साथ ज्यादा से ज्यादा वक़्त गुजरना tha…aur इस वक़्त को कोई डिस्टर्ब करे चाहे उसका पति बी क्यू न हो उसे पसंद नह था…

पति क जाते hi मीणा ने कॉलोनी की और नज़र दौड़ाई और देखने लगी कही जमील चुप क खड़ा तो nh…par उसे वह जमील कही बी नह दिखा तो वो सीधे अंदर आयी और जमील को फ़ोन लगायी..

मीणा का मश्ग पाते hi जमील बी फ्रेश होक तैयार होगया था और मीणा क घर क लिए पैदल निकल पड़ा था..

मीणा क घर क आने क लिए तीन रस्ते थे पहला ठीक उसके घर क सामने से जहा दोनों तरफ से आ सकते थे पर उस रस्ते पे बहुत सारे घर the..aur दूसरा जो कॉलोनी का रास्ता और तीसरा और आखरी मीणा क घर क बगल से जो सीधा मीणा क कंपाउंड गेट को छूटे हुए बाकी दोनों रस्ते से जुड़ता था जहा से आसानी से मीणा क गेट क होते हुए घर में दाखिल हो सकते थे और उस रस्ते में कोई भीड़ बी ज्यादा नह होती thi…isliye जमील ने बी वही रास्ता चुना tha…aur जब मीणा ने उसे कॉल किया था तो वो उसी रस्ते में कुछ hi दुरी पर था और उसने मीणा का फ़ोन रिसीव करके बोलै था की वो बस 5 मीन्स में आजायेगा…

घर में बैठी जमील का इंतज़ार कर रही मीणा का दिल आज बड़ी जोरो से धड़कने लगा tha..wo खुद हैरान थी की वो कैसे एक गैर मर्द क इतने करीब आगयी थी… सिर्फ करीब hi नह बल्कि आज वो गैर मर्द उसके जिस्म क नाज़ुक अंग उसके पेट पर किश बी करनेवाला है वो बी उसकी मर्ज़ी क saath…wo सोच hi रही थी तब उसे गेट खुलने की आवाज़ आयी और कुछ 5-10 सेकण्ड्स में hi जमील ठीक उसके सामने खड़ा tha..aur दोनों की नज़र milgayi..aur दोनों क बीच एक ख़ुशी की मुस्कान पास होगयी थी..

जमील ने दरवाजा थोड़ा अदा किया और ठीक मीणा क बगल में आके मीणा से चिपक कर बैठ gaya..aur मीणा ने इस बात पर कोई आपत्ति नह jatayi…aur उसे देख कर बोली आते hi शुरू हो जाते हो पहले कुछ बात तो करो..

जमील मीणा क खंधे पे हाथ डालते हुए तुम हो hi इतनी खूबसूरत की नचाहे तो बी कुछ करने का मैं करता है….

जमील से फिर से तारीफ़ सुनकर मीणा खुश होगयी और जमील से बोली एक बात पुछु जी…

जमील है पूछो न..

मीणा- आप को मई सच में खूबसूरत लगती हु….

जमील- मीणा की चेहरे पे उंगलिया फेरते हुए.. नह सिर्फ लगती नह हो तुम तो खूबसूरत हो hi इ सिर्फ मई नह कहता बहुत लोग कहते होंगे..

मीणा जमील की देख कर एक सास लेते हुए बोली नह जमील ऐसा कभी नह hua…ha मेरे पति कभी कभी कहते है की तुम अछि ho..bas और कुछ नह..

जैसे कैसे मीणा बोल रही थी वैसे वैसे जमील का हाथ मीणा की चेहरे से उतारकर उसके नंगे छाती पर गुड्डूड़ी करते हुए उसके क्लीवेज जो निघ्त्य में छुपी हुई थी उसकी ठीक बीच में सिर्फ एक ऊँगली को टीका दिया..

और जमील की इस हरकत ने मीणा क जिस्म में बिजली की एक लहर सी दौड़गाई thi..meena अपने नारियल से बड़े मम्मो क बीच दरार में रुकी हुई जमील की ऊँगली को देखि तो वो थोड़ी शर्मा सी गयी थी उसे समाज में नह आरा है था की अब जमील क्या karega…kya जमील उसमे मम्मो पे वॉर करेगा ya..yahi रुक जायेगा और जमील मेरे मम्मो को दबा दे तो मई उसे रोको या उसे आज थोड़ा मम्मो क साथ बी खेलने du….ek तरफ उसका मैं केहरहा था की इ गलत है इसे रोक दो पर उसका जिस्म उसे रोकने का इजाजत बी नह दे रहा था वो इसी असंजस ने जमील को और देखने लगी…

जमील बी पक्का खिलाडी था वो जनता था की मीणा अब उसके गिरफ्त में hai…aur वो इस वक़्त कोई जल्दबाज़ी करना नह चाहता था हलाकि अब उसकी नज़र क सामने ठीक मीणा क मोठे उभरे हुए मम्मो पर thi.jo मीणा की तेज सासो की वजह से ऊपर निचे हो रही thi..jise देख कर जमील का लुंड अपनी सीमा पार करने क लिए तैयार खड़ा होगया tha..lekin इसवक्त कोई जल्दबाज़ी नह चाहता था जिसे खेल बिगड़ जाए और वो अछि तरह जनता मीणा ने पहले उसकी दोस्ती को बी है बोल दिया फिर अगले दिन hi प्यार को बी है बोल दिया और जल्द hi वो नंगी होकर टंगे खोलने बी रेडी होगी और उस वक़्त मीणा क इन मम्मो का इतना रास निचोड़ निचोड़ कर खजावूंगा और वो अपनी तरफ देखते हुए मीणा की तरफ एक कातिल मुस्कान देते हुए मीणा क छाती से अपनी ऊँगली को धीरे से मम्मो क बीच से से निचे लाने laga…ab बी मीणा इसी दुविधा में थी की जमील को रोकू या nh..lekin जमील की ऊँगली उसके बीच दरार से आते हुए उसके जिस्म के सनसनी मचने लगी thi…uski सासे तेज होने लगी thi…uska जिस्म कुछ गर्मी का एसएस करने लगा था इस वजह से उसके माथे पे पसीने की बुँदे सजाने लगी thi…vasana का नशा उसके दिमाग में चढ़कर उसके आंखे लाल होने लगी thi…wo पहली बार अपने जिस्म में ऐसी गर्मी का एसएस कर रही thi….uske पति ने अब अबतक उसे ऐसा हराम नह किया था वो शर्म क मरे लज़्ज़त से जमील को देखने लगी थी तो कभी अपनी छाती पे तिकी जमील की ऊँगली को जिसकी अगली हरकत वो खुद नह जानती thi…lekin तब उसे लगा की जमील की ऊँगली चलने लगी hai..aur देखते hi देखते जमील की वो ऊँगली उसकी क्लीवेज से होते हुए उसके पेट पर पड़ी तो मीणा ने एक गहरी सास ली और मैं में hi बोली बच गयी ahhhhh..lekin तब उसे और एक झटका लग गया था जमील ने जोरो से मीणा क पेट को निघ्त्य क ऊपर से अपनी मुट्ठी में भींच लिया था …..दर्द और लज़्ज़त क मारे मीणा की अहह अहह की चिक निकल पड़ी और वो अपने आप को संभल ते हुए जमील से बोली क्या कर रहे हो जरा धीरे से नह कर सकते क्या..??? अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

जमील इस बार मीणा क पेट को प्यार से सवारते हुए क्या आज तो इसे प्यार करने डोज…

मीणा जमील की और शर्म से देखते हुए वह से उठगयी और किचन जाने लगी तो जमील ने मीणा क कलाई को फिर से थम लिया और बोलै मेरे सवाल जवाब नह आया…

मीणा फिर से उसे देखते हुए पहले ब्रेकफास्ट तो फिनिश करले बहुत जोरो की भूक लगी है…

मीणा की बातो में खुल्ला इशारा था की वो ब्रेकफास्ट क बाद जमील को अपने जिस्म से खेलने देगी जिसे बखूबी जमील समाज गया था और उसने इस बार बिना कोई हरकत किये मीणा की कलाई को छोड़ दिया तो मीणा किचन की तरफ जाते हुए एक बार मुद क जमील को देखि और एक नशीली मुस्कान पास kardi…aur जमील को अंदर किचन में आने बोली..

किचन में जाते hi मीणा नाश्ता गरम करने लगी तो जमील बिना कोई हरकत किये चुप आकर कुर्सी पे बैठगया और कुछ hi देर में मीणा ने दो प्लेट में गरमा गरम नाश्ता परोसा और और दोनों एक दूसरे क सामने बैठकर नाश्ते का मजा उठाने lage..aur दोनों ने कुछ hi देर में नाश्ता ख़तम बी करदिया और मीणा फिर कल की तरह प्लेट्स उठके किचन क बेसिन में धोने लग गयी.. लेकिन उसकी तिरछी नज़र सिर्फ जमील पर थी जो पीछे बैठे हुए मीणा की मटकती गांड को देख रहा था..
 
इ पूरी कहानी मेरे पास रेडी hi है बस आप लोगो क प्यार की जरुरत है . ..जैसे जैसे आप लोगो क कमैंट्स आएंगे वैसे वैसे अपडेट बी पोस्ट होंगे बस इतना बताना जरुरी समझता हु मीणा एक से नह थकी ... बस मेरी कोशिश होगी मीणा क हर अडवांटुरे को बयां करने की कोशिश Karu..aur आखिर में बतादूँगा की मुझे इ सब कैसे पता चला
 
बिजी हु thoda....update एक दो दिन में aajayega....just वेट एंड एन्जॉय
 
अपडेट कमिंग सून गेट रेडी ओनली ओने और तवो हॉर्स ......
 
अब आगे

जमील मीणा की मटकती गांड को देख कर मैं में इ सोचने लगा था की इ कपडे क ऊपर बी इतनी मटकती हुई दिखती है तो अगर मई इसे पूरा नंगा करके इसकी गांड को देखु तो क्या नज़ारा rahega..e सोच कर hi जमील क पंत में तम्बू खड़ा हो गया था और उसे मजबूरन आज शांत करना hi था सो जमील ने अपने लुंड को धीरे से सवार और पंत में सही तरीके से एडजस्ट किया…

जमील जनता था की मीणा उसकी हो चुकी है पर पूरी तरह nh..aur जमील इ बी जनता था की कुछ एक दो बार की और मुलाकात से मीणा पूरी तरह उसकी होजायेगी जैसे वो मीणा क दिल में पहले दोस्ती और फिर प्यार की बीज उगने सफल हो गया था वैसे अब उसे आखरी बीज जो चुदाई की वो बी मीणा क दिल में उगानी hogi..aur वो अछि तरह जनता था इस बीज को बहुत प्यार और होशियारी क साथ सावधानी से उगना होगा इसलिए वो कोई जल्दबाज़ी नह करना छह रहा था…

और वही दूर बेसिन में बर्तन साफ़ कर रही मीणा जमील की हर हरकत को तिरछी नज़र से देख रही thi…lekin उसे समाज में नह आरहा था की जमील अभीतक उसके पीछे क्यू नह aaya…use तो लगा था जैसे hi ब्रेकफास्ट फिनिश होगा जमील उसके पीछे लग जायेगा फ़्लर्ट karne…jo आज कुछ हद तक मीणा का बी मैं हो रहा tha…q की उसने सोच hi लिया था की आज वो पहले और आखरी बार जमील को अपने नंगे नाभि से खेलने देगी और उसे समजायेगी की इस बात को यही ख़तम करते hai..shayad मीणा को अंदाजा नह था जिसे वो पहली और आखरी सोच रही है वो गर्मी एक बार से नह मिठाने वाली है…

इधर जमील ने कुछ सोच लिया और वो खड़ा होगया और सीधे मीणा क बगल में आके खड़ा होगया और मीणा से पूछा अबतक बर्तन साफ़ नह होगये क्या? जमील इ सब जानबूजकर ऐसा बर्ताव कर रहा था की मीणा को लगे वो सच मच उससे प्यार करता hai…aur जमील क इस चाल से अनजान मीणा उसे देख मुस्कुराते हुए बोली बस थोड़े बचे है..

जमील- थोड़ा जल्दी करो न…

मीणा जानती थी की जमील उसे क्यू जल्दबाज़ी करने कह रहा है फिर बी अनजान बनते हुए पूछी है करदूंगी' क्यू कोई काम है क्या?

जमील ने अब एक हाथ को मीणा क कमर पे डाला और उसे कसके अपने और खींच कर वैसे काम तो बहुत है पर आज का काम को भूल गयी kya…jo तुमने कल वडा किया था…

मीणा अनजान बननेकी नाटक करते हुए आज का काम क्या hai…muje नह pata..kehte हुए मीणा जमील की तरफ देख कर मुस्कुराने लगी.. इस मुस्कराहट में एक नशीली ऐडा थी जो जमील को और उत्तेजित कर रही थी..

जमील- ाचा तो याद बी डीलडूँगा कहते हुए वो ठीक मीणा क पीछे चिपक कर खड़ा हो गया और अपने हाथो से मीणा क पेट को लपेट कर उसे धीरे से सवारने लगा

जमील क इस प्यार भरे आलिंगन से मीणा मदहोश होगयी और अपनी आंखे बंद कर ली और जमील क साथ देते हुए बोली यही काम था आपका सही न..

जमील मीणा क नंगे गार्डन पर एक हल्का सा चूमा देते हुए नह मीणा इ तो बस शुरुवात hai..agar तुम साथ डौगी तो आज तुम जिंदगी की वो ख़ुशी दूंगा जो तुमने कभी सोचा बी नह होगा..…

जमील क बात का मतलब बहुत खूबी से मीणा जान गयी थी लेकिन अब बी वो इस काम क लिए तैयार नह थी उसे जमील का साथ ाचा तो लगता था पर अपने पति और परिवार क साथ धोका करना बी नह चाहती thi…sach बात तो इ थी की मीणा अब दुविधा में thi..wo जमील को मन कर क अपने जिस्म क साथ नाइंसाफी बी नह करना चाहती थी और जमील क साथ दे कर अपने जिस्म को नापाक बी करना नह छह रही thi..aur वो कुछ देर क ख़ामोशी तोड़ते हुए बोली जमील सच कहु तो आप मुझे अचे लगते ho..par मेरे लिए मेरे पति क साथ धोका करना बी पाप hai…isliye प्ल्ज़ जमील जी आप प्ल्ज़ मुझे समजा karo..hum आगे नह बाद सकते plz…aur अगर आप मेरे साथ जबरदस्ती करोगे तो आपको सिर्फ मेरा जिस्म hi मिल सकता hai…kahi बी मेरा प्यार nh…kehte हुए मीणा ने जमील को समजने की कोशिश की थी..

पर बात का अंदाज़ा जमील को पहले से hi tha..so वो बी अपना प्यार का नाटक को आगे बढ़ाते हुए bola…Maine कब तुम्हारे साथ जबरदस्ती की है जो तुम ऐसी बात कर रही ho…kehte हुए जमील मीणा से अलग हुआ और थोड़ा नाराज़ होने का नाटक kiya…e सब जमील की एक चल थी जो मीणा समाज नह पायी और जमील को नाराज़ डेक कर उसके कलाई को थम कर बोली प्ल्ज़ नाराज़ मत ho..meri हालत को समजा करो न..

जमील फिर नाराज़गी दिखते हुए बोलै मई तुमसे प्यार करता हु मीणा वो बी sacha…aur इस प्यार क बदले मई कुछ देर तुम बहो में लेलु तो क्या गलत है…

मीणा- एक गहरी सास लेते हुए बोली वैसे गलत तो सबकुछ होरा hai…fir बी मई तुम्हारे बाहोंमे समां जाती hu..jante हो क्यू? क्यू की मुझे बी तुम्हारा साथ ाचा लगता है.. ..मीणा ने न जाने कैसे सचाई जमील क सामने काबुल कर्ली थी और बाद में सोचने लगी मैंने क्यू जमील को इ बात batadi…chi…sach में मई पागल hu…aur वो आगे कुछ बोले बिना चुप चाप निचे मुँह करके कड़ी हो गयी..

मीणा की इ बात जमील क लिए सोने पे सुहागा बन गयी थी लेकिन वो अब बी जनता था की मीणा अभी पूरी तरह से तैयार नह पर जरूर हो jayegi…isliye वो अपने कदम आगे बढ़ाते हुए मीणा को फिर से बाहोंमे में लेते हुए बोलै

जमील- तो अब रोका क्यू? जानती हो तुम जब मुझे रोकती हो मुझे कितना बुरा लगता hai…jamil अब मीणा को इमोशनल बना रहा tha…aur इस बार जमील ने मीणा को ऐसा कास क बहो में भर लिया था की जमील का पंत में खड़ा लुंड मीणा क गांड पे पूरी तरह से चुबने लगा था जिसका एसएस होते hi मीणा क जिस्म में सनसनी मचने लगी thi…lund का एसएस से मीणा क जिस्म में एक ख़ुशी की लहार hi दौड़ने लगी thi…wo अब कुछ बोलना बी नह छह रही thi…bas सोचने लगी थी की किसी का लुंड इस तरह कपडे क ऊपर से बी चूब सकता है kya…mere पति का लुंड तो कभी मुझे नह चुबता hai…par इ जमील ka….Chi ची इ मई क्या सोच रही हु.. galat..jamil ने मुझे बस बहो में लिया है वो मुझसे प्यार करता hai…q की कुछ देर पहले मैंने उसे रोका था इसलिए वो नाराज़ हो गया था अब जब मई मांगयि तो उसने मुझे प्यार से ऐसे बहाए लिया hai…aur मई इ गलत सब सोच रही hu…nh नह …लेकिन मुझे एक गैर मर्द का इस तरह बहो में लेना क्यू ाचा लग रहा hai….kya इ मेरी वासना है…. अह्ह्ह्ह

मीणा की ख़ामोशी को तोड़ते हुए जमील मीणा से बोलै बोलो मीणा क्यू रोका था tumne…jamil अब मीणा को सडके करना छह रहा था वो बी मीणा की मर्ज़ी से…

मीणा का जिस्म अब थोड़ा गर्मी बी महसूस करने लगी थी और वो अपने कंपते आवाज़ में boli…nh जमील मुझे बस डर लगता है…

जमील- कैसा डर मीणा तुमने hi तो कहा था यहाँ किसी का डर नह …

मीणा- है मुझे लोगो से डर नह बस इस बात का डर है की कही मई आपके प्यार में बहक कर गलती कर न बायतु जो नाज़ायज़ हो और जिसे मेरा पति और परिवार क साथ धोका हो…

जमील की सोच सही थी की मीणा अभी पूरी तरह से तैयार नह थी और जमील बी अछि तरह आगे कैसे बढ़ना है जनता क्यू की उसे पता था मीणा प्यार की भुकी hai…aur इस प्यार क साथ मीणा का दिल जीतने क लिए पहले मीणा को इ विश्वास दिलाना होगा की उसके मर्ज़ी क खिलाफ कुछ नह hoga…aur वो बड़े प्यार से मीणा क चेहरे को सवारते हुए बोलै नह मीणा हम एक ऐसा रिश्ता निभाएंगे जो किसी को कानो कान खबर बी नह होगी और नहीं हम दोनों एक दूसरे का गलत फयदा उठाएंगे..

मीणा- हम्म्म फिर बी ….

इस बार जमील ने मीणा की बात को बीच में hi रोकते हुए bola..aur सुन मेरा वडा रहा तुमसे मई तुम्हारे मर्ज़ी क खिलाफ तुम्हारे साथ कुछ बी नह karunga…khushhhhhh

जमील की इ बात मीणा क दिल और दिमाग में उतर गयी थी और जमील की इस ऐडा ने मीणा क मैं hi जीत लिया tha…aur वो अपने चेहरे पे ख़ुशी लाते हुए बोली पक्का na..aap मेरे साथ मेरे अकेलेपन का फयदा उठके जोर जबरदस्ती नह करोगे?

जमील- अरे नह यार इतना तो यकीं करो…

जमील क मुँह से यार सुनकर मीणा एक नयी दुनिया में hi चली गयी thi…jindagi क 35 साल में आज तक किसी ने बी उसे यार नह कहा tha…balki उसका हमसफ़र जिसके लिए वो अपनी बहुत साड़ी खुशिया को समेटे हुए एक नयी जिंदगी की शुरुवात करने शादी की थी उसके पति ने बी आज तक नह कहा tha…meena इस ख़ुशी को झेल नह पायी और जमील क कलाई को थम ने से अपने आप को रोक नह पायी…

इसी मौके की तलाश में खड़ा जमील ने मीणा क नंगे गार्डन पर चुम्मे की बारिश करते हुए बोलै जानती हो मीणा तुम्हारा इ जिस्म कितना मुलायम hai…tume बहो लेने में जो ख़ुशी मिलती hai..use मई बयां नह कर sakta….tum ऐसे hi हमेशा मेरे बहो में रहो ….अह्ह्ह मजा आता hai…..hhhh

मीणा - हम्म्म्म रहूंगी पर मेरी बात याद है न…..

जमील को क्या था अब मीणा तो उसके पुरे वश में होगयी थी बस अब उसे मीणा क जिस्म में अब गर्मी बदनी थी जो उसे बखूबी पता tha…aur वो हस्ते हुए bola…ha बाबा याद hai…ab मई तुम्हारे हर बात को तो मान चूका हु तो मुझे इनाम नह डौगी….?? कहते हुए जमील मीणा क पेट को सवारने लगा तो मीणा उसकी साथ देते हुए उसके हाथ पर अपना हाथ रख di…aur पूछी ाचा क्या चाहिए इनाम ….मीणा की इस बात में शरारत थी जो कभी जमील ने नह पाया tha..jamil का मैं तो कर रहा था की वो मीणा को डायरेक्टली बोल दे की वो उसे छोड़ना चाहता hai…par वो जनता था की मीणा जैसी पतिव्रता इतनी जल्दी आसानी से अपने जिस्म को एक गैर मर्द क हवाले कर degi…aur जहा तक जमील ने सोचा था वो बी सही था क्यू की मीणा ने अबतक चुदाई क बारे में सोचा बी नह था उसे बस जमील क साथ बहे से बहे मिलाना था जो उसे एक सुखद अहसास दे रहा था..

और वही जमील आज किसी बी तरह मीणा क दिल में सेक्स की रूचि बढ़ाने क बारे में प्लान बनाने में लगा tha…aur वो मीणा क कान को हलके से काटते हुए बोलै क्या मई तुम्हारे पेट को चुम सकता hu….bahut मुलायम है तुम्हारा इ पेट ….प्ल्ज़ न मत कहना…

जमील क प्यारी भरी रिक्वेस्ट को मीणा मन नह करना चाहती थी और कही न कही उसे बी ऐसा karna..ek नया अनुभव लगने लगा था तो वो मुद क कड़ी होगयी और जमील क आंखे मिलती हुई शर्माके नज़र ज़ुका ली…

मीणा पहली बार एक गैर मर्द क सामने इस तरह आमने सामने कड़ी thi..wo जानती थी इ सब गलत hai…par कही न कही जमील क प्यार भरे बर्ताव से वो इतनी आकर्षित हो गयी थी की वो जमील का इ हक़ चिन्ना नह चाहती thi…use उसके गलती से ज्यादा जमील की ख़ुशी अछि लग रही थी…

मीणा क ठीक सामने खड़ा जमील पहली बार मीणा को इतने नज़दीक से देख कर पागल हो रहा tha..meena की छाती की उभर मीणा की लाल गुलाबी hot….gori नंगी छाती जो निघ्त्य क बहार दिख रही थी जिसे देख कर उसका मैं तो कर रहा था की सब कुछ भूल कर अब hi मीणा को उठके बैडरूम ले chalu…lekin जस्मिल मीणा को बड़े प्यार से उसके मर्ज़ी क साथ भोगना चाहता था tha…so उसने अपने आप पर काबू पाना hi ठीक समजा क्यू की उसकी छोटी सी जल्दबाज़ी में लिया हुआ गलत कदम उसके अब तक क किये नाटक पर पर्दा दाल सकता था …और वो अपने प्यार क नाटक को आगे बढ़ाते हुए मीणा क भुजाओ पर अपना हाथ रख कर मीने से पूछा बोलो न मीणा चुप क्यू हो..

मीणा पूरी तरह शर्मा गयी थी क्यू की आज वो पहली बार ऐसा काम करने जा रही थी जो आज तक उसने सोचा बी नह tha…ek पतिव्रता क लिए अपने जिस्म का थोड़ा हिस्सा बी एक गैर मर्द क सामने गलती से बी दिख जाना बी सहन नह होता ऐसे में मीणा आज अपने जिस्म क नाज़ुक हिस्सा अपनी नाभि को एक गैर मर्द क हवाले करने जा रही थी इ सोच कर hi मीणा का चेहरा लज़्ज़ा से भर गया था…

जमील बी अब मीणा क दिल में सेक्स की बीज उगने क लिए बेताब tha…aur वो मीणा की ख़ामोशी को उसका सहमति मान कर बोलै बोलो न मीणा तुम तो पता hi है मई तुम्हारे मर्ज़ी क खिलाफ जा नह sakta…aise चुप रहोगे तो क्या samjhu…bolo न .

लेकिन शर्म और लज़्ज़त क मरे मीणा क ज़ुबान से कोई शब्द hi निकल नह रहे the…wo बस निचे नज़ारे झुकाये कड़ी थी..

मीणा का कोई जवाब न प् कर जमील बोलै ठीक है लगता है तुम अब बी मुझपर यकीं नह hai…to अब मेरा यहाँ रुकने का कोई मतलब nh..kehte हुए जमील जाने की एक्टिंग किया तो मीणा ने झट से जमील क हाथ को पकड़ लिया और उसे अपने पेट पर रख लिया..

सच बात तो इ थी की जमील मीणा की ख़ामोशी देख कर hi पहचान गया था मीणा तैयार hai….par वो जनता था मीणा शर्म और लज़्ज़त क मरे कुछ बोल नह रही hai…aur चाहे तो वो बिना मीणा क इज़ाज़त से बी मीणा क पेट पर अपना हक़ जमा सकता tha…par आज वो मीणा की मैं क हिसाब से चलना चाहता था ताकि मीणा उसपे यकीं करके उसके जिस्म क हर एक अंग को उसके हवाले करने ख़ुशी से मान jaaye….q की मीणा आज उस दहलीज़ पे कड़ी थी जहा जमील की छोटी से छोटी हरकत बी मीणा क दिल और दिमाग में असर कर सकती thi…aur जैसे hi मीणा ने जमील क हाथ को अपने पेट पर रख लिया तो जमील वही रुक गया और bola…aise नह मीणा दिल खोल क बोलो करू या नह….

अब मीणा को अपनी ख़ामोशी तोड़नी पड़ी thi..q की उसे लगा की अगर वो जवाब नह देगी तो हो सकता है जमील चला जाए जो वो बिलकुल नह छह रही थी ….क्यू की कही न कही मीणा का जिस्म ने बी आज उसका साथ छोड़ दिया tha…use आज जमील ने इतना प्यार दिखाया था की वो कुछ देर क सबकुछ भूल जाना चाहती थी और जमील क होतो को अपने जिस्म पर नाचने देना चाहती thi…aur उसके मुँह से बस एक आवाज़ निकली hmmmmm..hmmmm

जैसे मीणा की है का जवाब मिल गया जमील मीणा क सामने घुटनो क बल बैठ गया और मीणा क घुटनो को पर अपना हाथ रख क मीणा क आँखों में आंखे डालते हुए मीणा क पेट को हलके से चुम लिया तो मीणा की मुँह से अह्ह्ह्हह्हह की मधुर सिसकारी निकल padi..jo जमील को आगे बढ़ने क लिए इशारा देने क लिए काफी thi….aur वो अब मीणा क आँखों में आंखे डालते हुए मीणा क पेट को निघ्त्य क ऊपर से hi चूमने लगा..

जमील का एक एक चुम्बन मीणा क जिस्म में 400 वोल्टस की बिजली धार क तरह समां रही thi…ek अनगिनत ख़ुशी की लहार उसके दिल में उगने लगी thi….aur वही जमील बी मीणा का नाज़ुक मुलायम पेट क स्पर्श अपने होतो पे पाकर अपनी खुशिया समेत नह पा रहा tha..jamil ने बहुत सारे औरतो क साथ खेला था पर मीणा जैसे नरम रुई जैसा बदन उसने कभी नहीं पाया tha…isliye वो अब इतने से अपने आप रोकना नह चाहता था और उसके मैं में अब शरारत सूजी और उसने धीरे से मीणा की निघ्त्य को निचे से पकड़ लिया और एक हाथ को मीणा क निघ्त्य में घुसा कर मीणा क नंगे पाँव को पकड़ लिया….

अपने नंगे पाँव पर जमील का हाथ पड़ते hi मीणा क जिस्म की गर्मी और बाद गयी थी और एक बार फिर से जमील और मीणा की नज़ारे मिल गयी थी और दोनों ने अपनी ख़ुशी को आँखों hi आँखों में hi बयान करलिया था..

एक ताराम जमील क अपने पेट को चुम्मा और दूसरी तरफ उसके नंगे पाँव को सवर्ण मीणा क लिए एक सुखद अहसास दे रहा tha…e जानते हुई बी इ उसके संस्कार क खिलाफ है मीणा जमील को रोकना नह चाहती thi…par जमील की हरकत इतने को hi नह ruki…wo धीरे से अपने हाथ को मीणा क नंगे पाँव से ऊपर करते हुए आगे बढ़ाने लगा …अब मीणा की निघ्त्य घागरे क साथ एक तरफ से घुटनो तक ऊपर आ चुकी थी और उसका पाँव घुटनो तक नंगा दुखने लगा tha…jise जमील नज़ारे झुकाये देख कर पागल होने लगा tha…wo सोचने लगा मीणा का घुटने तक पाँव hi hi मोटा और मुलायम है तो इसके janghe….wahhhh इसे नंगा करने में जो मजा aayega….waahhh क्या माल है इ तो…

लेकिन दूसरी तरफ मीणा बी अपने आपको नंगा होता देख कर असमजस महसूस करने लगी thi…use लगा वो हद पार कर रही hai…aur वो जमील को रोकने की कोशिश करते हुए बोली नह जमील plz…..kapado क अंदर nh……plzz….

लेकिन जमील ने आज कुछ अलग hi सोच रखा tha…aur शायद जमील को मीणा की इस बात का अंदाज़ा बी था तो वो मीणा की तरफ प्यार से देखते हुए बोलै नह मीणा आज मुझे तुम्हारी नंगी नाभि को चूमने से मत रोको प्ल्ज़…

मीणा अपनी मदहोश भरी आवाज़ में बोली नह जमील plz…ander से नह ऊपर से करो मई कहा मन कर रही हु….

लेकिन जमील को आज किसी बी तरह कर क आज मीणा क नंगे जिस्म पर अपना मोहर लगाना hi था तो वो मीणा को प्यार से देखते हुए बोलै ..मीणा आज तक मैंने तुम्हारी हर बात मानी hai…kya आज तुम मेरी बात मान क तुम्हारे नंगी नाभि पर मेरे प्यार का चुम्बन नह logi..itna तो मज़ा करना हम दोनों का बनता है na…plz न मत बोलो…

जमील ने इतने प्यार से कहा था की मीणा फिर से एक बार बहक गयी और वो सोचने लगी कैसा इंसान है e..kitna प्यार करता है muje…kaise मन कर सकती हु ise…aur मन बी क्यू Karu…muje बी तो ाचा hi लग रहा hai…..meena सोचते हुए बस जमील को hi देख रही थी जो मासूम सा चेहरा बना क मीणा क परमिशन का इंतज़ार कर रहा tha…aur जमील क मासूम सा बना चेहरे को देख कर मीणा अपने आप को रोक नह पायी और boli…thik hai..jamil जी पर प्ल्ज़ सिर्फ निघ्त्य hi uthalo…e बात कहते हुए मीणा पूरी तरह से लज़्ज़त से शर्मा गयी thi..wo खुद नह जानती थी की कैसे वो एक गैर मर्द को अपनी निघ्त्य ऊपर करके अपने मांगे पेट को देखने की चूमने की इज़ाज़त दे बैठ gayi..aur शर्म क मरे उसने अपने आंखे hi बंद कर्ली…

लेकिन जमील क लिए उसका रास्ता खुल गया tha…aur वो जनता इस निघ्त्य ऊपर करने क बहाने उसे और क्या क्या करना नसीब होगा जो उसके लिए कल तक एक सपना सा था और वो देर न करते hue..meena की निघ्त्य को दोनों तरफ से घुटनो क ऊपर तक लाया और अपना सर मीणा क निघ्त्य में घुसा कर ऊपर की तरफ होने laga..jamil ने सपोर्ट क लिए इस बार दोनों तरफ से मीणा क झंगो को पकड़ लिया tha…aur जैसे hi वो पूरी तरह निघ्त्य में समां गया पहले वो अपने चेहरे को ठीक मीणा क छूट क सामने ले जाके कुछ देर वही मीणा की छूट को सुंघाने लगा जो इस वक़्त घागरा और चड्डी में छुपी हुई थी …मीणा की छूट की खुशबु जमील को किसी नशे से काम नह लग रही thi…uska मैं तो कर रहा था की वो चुम hi ले पर वो जनता मीणा की छूट बी जल्द hi उसीकी होने वाली hai…isliye वो वह पे कुछ हरकत किये बगैर hi ऊपर हुआ और इस बार उसने मीणा क नंगे पेट पर एक प्यार भरा चुम्बन दे hi दिया..

अपने निघ्त्य हो रहे हलचल से मीणा का जिस्म कंपनी hi लगा था और जैसे hi अपने पेट पैर जमील क चुम्बन पाते hi मीणा एक अलग hi दुनिया में खो गयी वो इतनी उत्तेजित हो गयी की उसने अपने एक हाथ से जमील क सर को थम लिया aur…ahhhhhhh की एक नशीली सिसकारी ले li…ek गैर मर्द को अपने जिस्म पर इस तरह चूमना मीणा क लिए एक नया अनुभव tha…ek नया सुख मिल रहा tha..wo अपने आंखे बंद किये जमील क अगले स्टेप का इंतज़ार करने लग गयी..

जमील बी अब धीरे से मीणा को पेट को चूमते हुए अपने हाथ को मीणा क जांघो से होते हुए निचे तक चला रहा tha..is दुगने प्रहार से मीणा अपने आप रोक नह पा रही थी वो कामोद्रेक होने लगी ..और जमील क सर को अपने पेट पर दबा कर अपने नाभि को चुने की इशारा करने लगी thi…lekin मीणा घागरा जमील क हॉट और मीणा क नाभि क बीच पर्दा बन कर खड़ा tha..q की मीणा हमेशा अपनी नाभि को घागरे में चुपके रखती थी…

और जमील ने अपने दातो से hi मीणा क घागरे को निचे करने की कोशिश की और वो थोड़ा कामयाब हुआ की क्यू मीणा ने अपने पेट को थोड़ा पीछे करके जमील की मदत बी की thi…lekin जितना चाहता था उतना घागरा निचे नह आया तो अपने हाथो से hi घागरे को निचे किया और और मीणा की नंगी नाभि को बड़े प्यार से चूमने लगा..

पता कितने सालो बाद किसी मर्द क होतो ने मीणा की नाभि को चुम लिया tha…jab नयी नयी शादी हुई थी तब मीणा का पति मीणा क साथ सेक्स दौरान मीणा की नाभि को चुम लिया करता tha…par बचे होने क बाद इ सब ख़तम hi होगया tha…par आज एक गैर मर्द मीणा की नंगी नाभि को प्यार करने लगा tha..e सोच कर hi मीणा और उत्तेजित होने लगी..

और वही जमील मीणा क नाभि को चुम कर मीणा की गर्मी बढ़ाने की कोशिश कर रहा था साथ hi साथ मीणा क भरे जांघो क नाप बी ले रहा tha…aur वो धीरे धीरे मीणा क घागरे को बी ऊपर उठा के मीणा को निचे से नंगा करने का प्लान बना रहा tha….aur वो मीणा को और सडके करने क लिए मीणा क नाभि में अपने जुबान को फेरने लगा साथ hi साथ नाभि क चारो तरफ अपने थूक लगाए हुए मीणा क पेट और नाभि को चाटने लगा तो मीणा को पेट पर गुदगुदी क साथ एक सुखद एसएस बी होने लगा था अब वो और रोमांचित होने लगी thi..uski पुरे जिस्म में गरम पानी की तरह खून उबलने laga..use इस पल को किस तरह एन्जॉय करना समाज में नह आने लगा tha…aisa अनुभव तो उसने कभी नह पाया tha…uske मुँह से अब अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह जजजजजजमंमीिललल हहहहहह कककककक. …स्स्स्सह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह बबबबाआसस ककककाररूओ जाहाम्म्म्मील्ल हहहहह.

मीणा बस करो तो कह रही थी पर वो नह चाहती थी जमील ruke…aur मीणा की मशीली सुक्ष्कारी सुन क और बी उत्तेजित हुआ और इस बार उसने मीणा क घागरे क अंदर हाथ डालके मीणा क नंगे जांघो को थम hi लिया aur..meena की नरम गोर मोरे जांघो को प्यार से सहलाने laga…ab मीणा इ जानते हुए बी वो निचे से आधी नंगी एक गैर मर्द क सामने कड़ी hai…wo जमील क सर थम लिए पूरा साथ देने लगी thi…kuch 5-6 मिनट तक दोनों क बीच कोई बात चित नह हो पायी थी बस किचन सिर्फ मीणा की नशीली सिसकारी की आवाज़ गूंज रही थी… दोनों एक दूसरे की गर्मी बढ़ाने में कोई कसार नह छोड़ रहे the…tab मीणा को अपने गांड पर जमील क हाथ का स्पर्श महसूस होने लगे और और वो कुछ देर क लिए स्तम्भ हो गयी…

क्यू की मीणा क लिए इ एक सुखद अहसास तो था hi पर कही न कही उसका मैं इस बात का इजाजत नह दे रहा था की एक गैर मर्द क हाथ उसके गुप्त अंग को छू le..uska संस्कार फिर से जवाब मांगने laga…use लगा अब तक जो कुछ हुआ वो कुछ हद तक तो ठीक था पर इसे आगे बढ़ना उसके उसूल क खिलाफ है और वो जमील क हाथो को रोकते हुए बोली नह जमील plz….e सब nh…plz नह …छोड़ do…plz बस करो…

लेकिन जमील इतने मस्त बदन से कैसे अलग हो सकता था वो मीणा की बात को अनसुना कर क मीणा क नंगे जिस्म क साथ खेलने में व्यस्त था…

जब मीणा क कहने पर जमील नह रुका तो मीणा समाज गयी की अब जमील को रोकना आसान nh…aur वो थोड़ा पीछे की तरफ हैट गयी और बोली आप ने तो कहा था की आप मुझसे कभी जबरदस्ती नह karoge…aur इ क्या??? कहते हुए मीणा ने जमील को दूर करना चाहा..

मीणा की इ बात सुनते hi जमील रुक gaya..use समाज में आगया की मीणा फिर से भावनाओ में बहक रही hai..par आज ऐसे मोमेंट पे इसे छोड़ दू तो मीणा आगे बी बार बार ऐसी हरकत को दौड़ाएगी और वो उसे आगे बढ़ने नह होगा क्यू की उसने मीणा से जबरदस्ती न करने का वडा जो किया हुआ hai…aur वो वडा उसे तब तक निभाना है जबतक वो मीणा को पूरी तरह से अपना नह leta…wo कुछ देर घागरे क भीतर hi सोचता रहा और कुछ दो मिनट क बाद घागरे से अपना चेहरा बहार निकल क मीणा को hi देखने लगा जो उसे hi विनंती भरे नज़रो से देख रही थी…

जैसे hi जमील बहार आया मीणा थोड़ी पीछे सरक गयी और अपने कपडे ठीक करने lagi…na hi मीणा क चेहरे पर कोई मुस्कान थी नहीं कोई गुस्सा बस मीणा अपने मन में hi कुछ विचलित थी ….वो तैय नह कर पा रही thi…jamil और उसके बीच जो आज थोड़ी बहुत जिस्मानी तालुकात बन गयी वो सही है या गलत..

जमील मीणा क दिल में चल रही हलचल को समाज गया और वो नह चाहता था मीणा और ज्यादा कुछ soche…aur उससे दूर हो jaaye…wo देर न करते हुए मीणा क सामने आया और मीणा की ज़ुकी हुए सर को प्यार से ऊपर उठाते हुए kaha..kya सोच रही हो यार..

मीणा धीमी आवाज़ में बोली कुछ नह जमील जी मुझे इ सब ठीक नह लगता…

जमील- क्या ठीक नह लगता …यही की हम दोनों एक दूसरे क साथ खुश रहे ..

मीणा- वो बात नह जमील ji…mai अपना हद पार नह करना चाहती….

जमील- तुमने कौनसा हद पार किया है …

मीणा- पता नह……

जमील अब मीणा को इमोशनल बनाना चाहता था और bola..muje पता है तुम लगता hai..hum दोनों ने कुछ देर क लिए एक दूसरे को सुख देने की कोशिश की इ गलत है न…

मीणा- हम्म्म्म

जमील- इसमें क्या गलत है मीणा प्यार में ऐसा करना कोई गलत नह hota…kya तुम मुझसे प्यार नह karti…ya मई तुम ाचा नह लगता??

मीणा अब क्या जवाब देती वो तो जमील क प्यार बारे बर्ताव से उसकी तरफ आकर्षित हो hi गयी thi..aur आज बी जमील ने उसकी बात मान कर बीच में hi रुक गया tha…is बात से मीणा पूरी तरह से इम्प्रेस हो गयी थी जमील par…aur वो सच को न छुपाते हुए बोली है जमील जी तुम मुझे अचे लगते ho…….fir बी मेरे संस्कार……

मीणा आगे कुछ बोलने hi वाली थी जमील ने मीणा की बात को काटते हुए बोलै प्यार नह करती हो मुझसे….??

मीणा झूट नह बोलना चाहती थी क्यू की जमील ऐसा पहला मर्द था जो उसके जिंदगी आया था जिसने मीणा को प्रोपोज़ किया tha…wo बी बड़े प्यार se…aur जमील ने उसे नफरत करे ऐसी कोई हरकत बी नह की thi…jamil ने मीणा की हर एक बात को रखने की पूरी कोशिश की thi…aur मीणा ने बी जमील क बारे में सोच समझकर hi उससे प्यार करने का फैसला लिया हुआ tha…so अपने नज़रे झुकाये शर्माती हुए boli…..hmmmmmm

जमील- तो इ सब करने में क्या प्रॉब्लम है… जमील को लगा अब मीणा उसे मान जाएगी…

लेकिन मीणा जमील से प्यार तो करने लगी थी लेकिन वो नह चाहती थी की इस प्यार में बहकर वो अपनी इज्जत को lutale…q की उसे बदनामी का बी डर था साथ hi साथ उसके आज तक पालन किये हुए पतिव्रता धर्म आदर्श का ख्याल था सो वो जमील से बोली प्यार तो ठीक है पर इन सब क लिए मेरा दिल नह manata…bas…aur कुछ मत पूछो प्ल्ज़…

जमील अब थोड़ा सोच में पड़गया tha…agar उसका शहर होता तो वो शायद इन सब लिए मौका hi नह deta….aur दूसरी बात इ बी थी की मीणा जैसे खूबसूरत औरत कभी उसकी जिंदगी नह आयी thi..aur हाथ में आये मीणा को भावना ो में बहकने देना नह चाहता tha…use कुछ बी कर क मीणा क आधी जगी हवस को पूरा जगाना hi tha…aur आज उसके लिए जो मौका था वो खोना नह चाहता था क्यू की आज मीणा गरम बी थी सो वो बोलै ठीक है मीणा कुछ नह बोलूंगा पर मेरे लिए एक आखरी काम करोगी….

मीणा जमील को देखते हुए बोली ठीक है बोलो…

जमील- एक काम करो कुछ देर क लिए अपने आंखे बंद करो…

मीणा कुछ बोलना hi छह रही थी की जमील बोल पड़ा इतना तो यकीं करो मुझपर मैंने वडा किया हुआ है na..mai कभी गलत फयदा नह उठावउँगा…

मीणा कुछ नह बोली बस एक दो पल क लिए जमील को hi देखि और अपने आँखे बंद कर ली…

और कुछ देर में जमील ने मीणा को आंखे खोलने को कहा तो मीणा ने धीरे से आंखे खोल क जमील को देखा और जैसे hi उसकी नज़र निचे पड़ी वो एक पल क लिए चौक गयी और पीछे हैट क अपना मुँह छुपा लेते हुए बोली इ क्या हरकत hai….ise अंदर करो….

जमील आगे बढ़ते हुए अंदर दाल दूंगा बस दो मिनट मेरी बात सुनी तो सही…

जैसे hi मीणा ने आंखे खोली थी मीणा ने जमील क काळा मोरे लुंड को पंत क बहार hi खड़ा पाया था जिसे देख कर वो चौक गयी थी और पीछे मुड़कर अपने आँखे बंद कर ली thi..meena ने जमील क लुंड को अपनी गांड पर चुब्ते हुए महसूस तो किया हुआ था पर अब वही लुंड ठीक मीणा क नज़रो क सामने नंगा बहार खड़ा tha…jise मीणा अपनी चेरे पे छुपी उंगलियों क बीच चोर नज़र से देखने से अपने आप नहीं रोक पा रही थी ..वो मैं में hi सोचने लगी कितना मोटा और लुम्बा है इसका हथियार मेरा पति का तो इसका आधा बी नह hai…….pehli बार मीणा किसी गैर मर्द क हथियार को अपने पति क साथ कपड़े करने क लिए मजबूर हो गयी थी…

इस बीच जमील ठीक मीणा क सामने खड़ा हुआ और मीणा क हाथ को उसके चेहरे से अलग करके हुए बोलै कुछ नह करूँगा मीणा बस एक पल क लिए इसे अपने हाथ में समां लो और मेरी बात गौर से सुनो…

इतना बड़ा लुंड किसी कामुक औरत क सामने हो और वो उसे चुना नह चाहे ऐसे कैसे हो सकता hai…aur मीणा क दिल में बी अब जमील क हथियार को चुने का मैं होने लगा था पर उसका संस्कार उसे इस बात का इजाजत नह दे रहा tha…wo मन करते हुए बोली नह जमील जी…. पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़

लेकिन जमील ने मीणा की नह सुनी और मीणा क हाथ को अपने लुंड की और ले जाते हुए बोलै बस दो मिनट उसके बाद मई खुद चला जावूंगा…

मीणा अपनी हाथो की बंधी हुई मुठी को धीरे से छुड़ाते हुए जमील क हथियार को स्पर्श करते हुए boli….nh plz…mujse इ पाप मत करवा प्ल्ज़…

लेकिन जमील कहा सुननेवाला नह मीणा आज तुम इसे चुना hi hoga…ho सकता hai..e पहली और आखरी बार बी ho…..plz…

अब मीणा क पास कोई चारा नह बचा था वो अपनी नाज़ुक कलाई को जमील क लुंड की तरफ बड़ाई और उसे धीरे से मुठी में लेकर लज़्ज़ा क मरे अपनी आंखे बंद कर li…lekin जमील का लुंड उसके दिल में एक नयी उमंग जगा चूका tha…itna बड़ा लुंड उसने कभी बी हाथ में नह लिया tha…use लुंड से आ रही खुस्भु बी उसे अलग दुनिया में सैर करने लगी thi…uski सासे तेज़ होने लगी thi…uska मैं कर रहा था की लुंड को आगे पीछे करते rahu…lekin उसके लिए अपने आप पर काबू पाना hi ठीक tha….wo बिना कोई हरकत kiye…chup चाप आंखे बंद किये लुंड की मुठी में थमाए चुप कड़ी रही…

सामने खड़ा जमील को अपनी जीत की निशानी तो मिल hi गयी thi…ab वो मीणा क गोर गाल को दोनों हाथ में थामे bola…Dekho meena..ab मैंने आज तुम्हारे हाथ में वो चीज़ दी है जो मुझे hi नह है एक मर्द को सबसे प्यारी होती hai….ab मुझे फैसला तुम्हारे हाथ में है इसे प्यार करोगी या मुरजके रहने डौगी…

मीणा बस जमील की बात सुन रही thi…kuch बोल hi नह पा रही thi…q की जमील क लुंड का असर उसके दिल और जिमाग में बस गया था…

जमील आगे bola..bas इतना जरूर कहूंगा की मई तुम्हारे साथ कभी जबरदस्ती नह karunga….aur है अगर तुम मान गयी तो इ तुम इतना मज़ा दे सकता है जितना तुम कभी सोचा बी नह hoga…aur मुझे यकीं है तुम बी ऐसी ख़ुशी की जरुरत है सो तुम ढुकरावोगी नह……

इ बात बोलकर जमील ने अपना लुंड मीणा की मुठी से बहार निकल लिया और पंत में डालके पंत ठीक कर लिया….

और जैसे hi जमील ने लुंड खींच लिया मीणा ने अपने आंखे खोल लिए और जमील को hi देखने lagi…maano की कह रही हो क्यू निकल लिया कुछ देर रुक jaate…aur उसके चेहरा शर्म क मरे झुक gaya…jamil इ सब पहचान गया tha…lekin उसको जो करना था वो कर चूका tha…ab उसके लिए एक और आखरी बार मीणा का विश्वास जीतना था सो वो चलता हु तुम्हारे जवाब का इंतज़ार रहेगा उम्मीद है कल मिलेगा कह कर निकलने hi लगा तो मीणा उसे रोखते हुए बोली जमील कल नह कल संडे है…..

मीणा की इस बात पे जमील एक कातिल हसी हस्ते हुए वह से निकल गया और मीणा बस उसे देखते hi रह गयी…..

आगे क्या hua…jamil और मीणा कब मिले? मिले तो बी उनके बीच क्या हुआ….? इ सब नेक्स्ट अपडेट me…..hope ु लिखे थिस story…pasand आये तो कमैंट्स जरूर देना…..
 
जमील क जाते hi मीणा ने दरवाजा बंद करलिया और सोफे पे बैठ कर आज जमील क साथ हुई हर घटना को दोहराने की कोशिश करने lagi….meena क दिल अब इन सब बात से ख़ुशी महसूस करने लगा tha..use जमील क साथ बाईट हुए हर एक पल एक मीठा एसएस दिलाने लगा tha..wo कुछ सोच कर बैडरूम में चालीगयी और आयने क सामने अपने आप को देखि तो पसीने से अपना चेहरा और बाल भीकरें हुए पायी उसे समझने में देर नह लगी थी की जमील और उसके बीच हुए जिस्म की टकराहट क वजह से ऐसा हुआ है और वो अपने चेहरे पे एक मुस्कान लाते हुए अपने आप को फ्रेश करने क लिए बाथरूम में गयी और वाटर तप को ों hi करने वाली थी तभी उसे कुछ याद आया और वो अपने कलाई को hi देखने लगी जिसमे उसने जमील क लुंड को थमा tha…aur शर्माने lagi….aur कुछ देर क बाद उस कलाई को एक बार सूंघ ली. मीणा क चेहरे पे अब ऐसी मुस्कान च गयी थी की जो साफ़ बयां कर रही थी जमील का कला अजगर उसे पसंद आगया hai…aur वो इस बात से खुश है की उसे काम से काम चुने की तो उसे मौका मिला…

और फिर से अपने हाथो क साथ चेहरा वाश करके बहार आयी और घडी की तरफ देखि तो सुबह क 11.15 बज चुके थे..

मीणा को किचन में बचा हुआ आधा काम बी पूरा करना था और अपने लिए दोपहर का खाना बी बनाना tha…par उसका मैं किचन में नह लग रहा tha..wo बस इ सोचने में मजबूर होगयी थी कैसे जमील क साथ उसने सुबह क करीब 3 घंटे bitayete…jamil क साथ कैसे वक़्त बीत जाता है पता नह चलता कितना प्यार से पेश आता है वो मेरे साथ मेरी हर बात मनाता hai..kya वाकई में जमील मुझसे प्यार करता hai…kya इ उसका दिखावा है जो वो मुझे पाने क लिए कर रहा hai…nh नह जमील मुझसे प्यार hi करता hai…agar उसके मैं में वासना hi होती तो वो आज अपनी हद पार कर चूका होता उसे जाने की कोई आवश्यकता hi नह thi…chahe मेरा मैं न हो तो बी वो मेरे साथ जबरदस्ती मुझे पा सकता tha…meena खुद से सवाल कर रही थी और खुद hi उसका जवाब बी देने लगी थी…

लेकिन जमील का कही न कही मेरे साथ वो सब करने का बी इरादा है जो एक पति पत्नी क बीच होता hai……e तो गलत है na?…ha उसका इरादा तो यही hai…aur ऐसा कौनसा मर्द का नह hoga…aise बी मुझे पहले कितने लोगो ने इस बात को इंदिरेक्ट्ली जताने की कोशिश नह ki…khair जमील ने तो इ सब मुझसे प्यार से मांगने की कोशिश की hai..aur क्यू नह मांगता वैसे मैंने बी तो उससे प्यार का दवा किया hai…lekin मई एक अजनबी से कैसे प्यार कर baithi…kya मेरी वासना जो डाब गयी थी जिसे जमील ने प्यार से jagaya?…nhnh अगर मई वासना क पीछे पागल होती तो नजाने आज कितने लोगो क saath….chi ची इ सब क्या सोच रही hu….muje पति क सिवा इस काम में किसी क साथ रूचि नह है …पर जमील???

क्यू मई उसके साथ इतनी फ्री हो चुकी हु..?? क्यू मई उसके बाहोंमे में समां जाती हु? क्यू आज मैंने उसे मेरे जिस्म क नाज़ुक अंग मेरी नाभि को चूमने दिया? और तो और क्यू मैंने उसका हथियार अपने मुठी में थम लिया ज्यादा विरोध न किये?

इन सब का जवाब मीणा क पास नह tha…uska मैं अब उड़ाते हुए पंछी की तरह हो गया था जिसका कोई राह नह hota…waise hi मीणा का मैं भटकने लगा tha…wo इ तैय नह कर पा रही थी जमील क साथ उसका रिश्ता क्या hai…pyaar का या जिस्मानी….

तब उसकी नज़र फिर से अपने हथेली पे गयी जिसमे उसने कुछ देर पहले जमील क लुंड को थमी थी और उसे वो घडी बी याद आयी और वो सोचने लगी क्या किसी का हथियार बी इतना बड़ा होता hai..kitna तगड़ा था wo…sach में उसे देखने में डर लग रहा tha…fir बी वो मेरे कलाई में बिना कोई हरकत किये कैसे चुप खड़ा tha….kaash एक बार आगे पीछे करती तो कुछ हरकत कर paata….lekin मेरे पति का ऐसा क्यू nh….kitna मोटा सूपड़ा है जमील ka…wo बी लाल लाल …और जमील ने मुझे उससे प्यार करने क बारे में bola…kya करू कैसे करू उसे प्यार…..

क्यू मीणा नह जानती हो क्या कैसे प्यार किया जाता है…..

नह नह मई ऐसा कुछ नह करना chahti….e सब पाप है मेरे पति और परिवार क साथ सरासर धोखा है…

तो जमील को क्या जवाब डौगी…??

मई उसे समजा dungi….ki इ सब ठीक NH…aur मुझे उम्मीद है वो मेरी बात कभी नह टलेगा…

और अगर वो फिर बी नह माना तो???

Ha…kya karu…mera दिल तो इन सब का इजाजत कभी नह देता…

बस तुम्हारे पास एक hi रास्ता है मीणा या तो तुम जमील को अपना क जिंदगी क मजे लूट lo…ya जमील से नाता hi तोड़ दो…

जिंदगी मजा मतलब मई अपने पति से खुश नह हु जो गैर मर्द को अपना लू…

कहा खुश हो मीणा सोच lo…jo जमील कर सकता है वो तुम्हारा पति कर सकता है..

क्यू नह कर sakte..wo बी तो एक मर्द hi hai..kitna प्यार करते है मुझसे कितना केयर करते है मेरा…

ाचा तो फिर तुम क्यू लगा की काश मेरे पति का बी ऐसा हथियार होता..

शायद मीणा क पास इस सवाल का बी जवाब नह tha…aur वो सोचने लगी सच में जमील का हथियार कितना बड़ा hai…kitna कड़क था वो जब मैंने उसे अपने हाथ में थमा हुआ tha…mere पति का इतना कड़क होता मैंने कभी नह dekha….sach में कमल की चीज़ hai…par मुझे इस बात से क्या लेना dena….lekin मई जमील को क्या जवाब दू जब वो पूछेगा क्या सोचा है….

क्या मई जमील को दूर करके ऐसा सिचुएशन आने hi मत du….nh नह मई जमील को क्यू दूर करू उसने तो मेरे साथ कोई गलत हरकत नह की hai..ha आज हम दोनों क बीच थोड़ा गलत तो हुआ पर उसमे मेरा बी साथ tha….kya karu….kuch बी तो समाज में नह aara…aur इ सब मीणा अपने आप में सोचते हुए कब सोफे पर hi सो गयी उसे hi पता चला…

मीणा की नींद तब खुली जब उसे जोरो से सुसु होने लगा ..वो सोफे से उठ कर एक करवट ली और घडी देखि तो दोपहर क 3 बजने वाले the….pehli बार इतनी गहरी नींद में खो गयी thi…wo सोचने लगी क्या होगया है आज मुझे न खाने की परवा है न कुछ करने ki….wo अपने आप को कोसते हुए बाथरूम चालीगयी और सु सु करने क लिए अपनी चड्डी उतरने hi लगी thi…tab उसे अपने चड्डी पर कुछ गीला गीला महसूस hua..aur उसने नज़र निचे दौड़ाई तो मीणा को उस गिल्लां में कुछ चिप छिपाहट सी महसूस हुई.. इस बात से वो खुद शॉकेड thi…aaj तक वो पति क साथ बिस्टेर में बी कभी नह झड़ी thi…par आज एक गैर मर्द क बारे में सोच कर उसका छूट पानी छोड़ चूका hai…wo मैं में hi बोली अब क्या करू जमील tumara…bina कुछ किये hi मेरी पानी बी निकलदी आपने…. अह्ह्ह्हह्हह

कुछ देर में मीणा फ्रेश होकर बहार आयी और किचन में जाके सुबह का बचा हुआ ब्रेकफास्ट को फिर से गरम करके अपनी भूक मिठाई और फिर से बैडरूम में chaligayi….aur फिर वही ख़यालात में दुब gayi…wo हर तरीके से बार बार सोचने पर बी उसे कोई ऐसा बहाना नह मिला जिससे वो जमील को गलत करार de…darasal इ मीणा की दबी हुई वासना thi…jo जमील की गलती सामने होते हुए बी मीणा उसे डिफेंड कर रही thi….akhirkar मीणा ने फैसला लिया की ो जमील को समजने की पूरी कोशिश karegi…aur जमील फिर बी नह माना तो वो जमील से रिश्ता तोड़ degi…lekin साथ hi साथ उसे इ बी ज्ञात था इ सब इतना आसान नह जितना वो सोच रही hai..use यकीं था अगली बार जब जमील और वो मिलेगी तो जमील फिर से उसके साथ फ़्लर्ट जरूर karega…aur वो मन नह कर payegi..to मीणा ने इ बी तैय कर लिया की वो आखरी बार होगा जो वो जमील क बहो में कुछ देर क लिए समां जाएगी और उसके बाद जमील को प्यार का वास्ता देकर अछि तरह से समजा degi….ise वो अपना आखरी निर्णय मन कर फिर कुछ सोचे बिना hi नींद में चालीगयी…..

और उसके बाद उस दिन कुछ खास नह हुआ मीणा पति आने क बाद अपने काम में बिजी hogayi….halaki उसके दिमाग में अब जमील की सोच चल रही thi…fir बी मीणा अपने पति क सामने कुछ झहीर होने नह दी…

अगला दिन संडे

आज मीणा क पति की छुट्टी थी इसलिए वो देर से उठा और तब तक मीणा ने सुबह का ब्रेकफास्ट बी तैयार कर लिया था और पति क फ्रेश होने क बाद दोनों मिया बीवी बैठ कर नाश्ता करने lage..lekin मीणा को आज ब्रेकफास्ट में उतना मजा नह आरहा था जितना पिछले दो तीन दिन से आया tha…q की पिछले दो तीन दिन तो वो जमील क साथ बैठकर ब्रेकफास्ट की थी …न चाहते हुए बी वो जमील को मिस करने लगी thi…use पिछले कुछ दिनों की बात आँखों क सामने आने लगी थी ..कैसे पति क जाने क बाद जमील aata…kaise वो उसके बगल में बैठ था tha…kause उसके बाद दोनों नाश्ता करते the…aur कैसे उसके बाद जमील उसके पीछे आके उसे बहो में लेता था और प्यार करता tha…wo इ सब याद करके जमील की गैर मौजूदगी से कुछ खोयी खोयी सी hogayi…lekin मीणा ने गलती से बी कोई ऐसा एक्सप्रेशन अपने चेहरे पर नह लाया था जिससे उसका पति पहचान ले ..

ब्रेकफास्ट फिनिश होने क बाद उसका पति बहार चला गया और मीणा बर्तन साफ़ करने लगी तब वो सोचने लगी काश इस वक़्त जमील होता to..is वक़्त वो मुझे बहो में लेता और ………इतना सोच कर hi मीणा क चेहरे पे इ ख़ुशी की लहार दौड़ गयी और वो शर्मा गयी…

दरअसल मीणा ने सोचा था की अगर वो इस वक़्त जमील की बहो में होती तो जमील का लुंड उसके गांड को चूब रहा होता …और कितना ाचा पल hota…yaadgar…aur आज कही न कही वो मान चुकी थी की जमील क आलिंगन उसे बी बहुत मजा देता है….

बर्तन साफ़ होने क बाद मीणा रसोई क काम में बिजी होगयी और बहार उसका पति हॉल में बैठे टी व् देखने लगा tha…kareeb 12 बजे मीणा का सेल रिंग करने लगा जो बहार हॉल में hi tha…thik उसके पति क सामने टीपोय par…cell फ़ोन की आवाज़ सुनते hi मीणा एक पल क लिए डर गयी उसे लगा कही इ जमील का तो कॉल नह..? कही मेरे पति नह देख लिया और मुझे पूछ लिया तो जमील का फ़ोन तुम्हारे मोबाइल में कैसे???

डर क मरे उसके कदम वही रुक गए the…uske माथे पे पसीना छूट गया था…

अरे मीणा कितनी देर से तुम्हारा सेल बज रहा है ..जरा एक बार देखो न किसका फ़ोन है.. पति क इस आवाज़ से मीणा थोड़ी रिलैक्स हुई क्यू की उसे यकीं हुआ की पति ने उसका सेल अभीतक नह देखा और वो दौड़ते हुए बहार आयी और अपना सेल उठके देखि और एक रहत की सास li..q की कॉल उसके सहेली का था…

ओह्ह्ह हो इसको बी न काम hi नह hai..jab देखो तब फ़ोन करते रहती है…

मीणा की बात सुनकर सामने बैठा उसका पति बोलै किसका फ़ोन है..

मीणा अपना सेल फ़ोन का स्क्रीन पति को दिखते हुए बोली वही ..शीला भाभी का छोटे छोटे काम को बी मुझे कॉल करके परेशां करती है…

पति - इसे परेशां नह बोलते मीणा वो तुम शायद अपना खास मानती hogi…isliye तुमसे hi हर बात शेयर करती होगी…

तब तक फ़ोन की घंटी बी बंद हो चुकी थी .

मीणा अपने पति की जवाब देते हुए बोली है इ तो hai…par बार बार फ़ोन करने से मुझे थोड़ा इर्रिटेट होता है…

पति- ाचा बाबा जैसी तुम्हारी marzi..ab तुम दोनों सहेली क बीच मई क्या बोलू…

मीणा अपने फ़ोन को पति से दूर टी व् स्टैंड पर रख कर अंदर जा hi रही थी फिर से मीणा का सेल बजने लगा तो मीणा ने फिर स्क्रीन देखा और पति से कहा उसका hai…aur दोनों haspade..tab मीणा का पति बोलै चलो उठालो और बात karo..lagta है कुछ ुर्गेनस्य होगी…

अब मीणा ने बी फ़ोन रिसीव किया और hello बोली

शीला - hello मीणा कैसी हो..

मीणा- है भाभी ठीक हु आप कैसे हो…

शीला- मई बी भेड़िया hu…darasal मैंने फ़ोन इसलिए किया की दरअसल आज हम दो तीन सहेलिया मेले में जाने का प्रोग्राम बनाया hai…muje लगा तुम बी हमारे साथ चलोगी तो मजा आएगा…

मीणा- अरे नह bhabhi..aaj संडे है न इ घर पर hi hai…to मुझे आने नह होगा..

शीला- अरे मीणा हमे थोड़ी वह पूरी रात गुजारनी है एक दो घंटे वह मजे करेंगे और वापिस अपने घर ….और वैसे बी तुम्हारा घर से वो जगह बहुत नज़दीक hi है न…

मीणा- है भाभी नज़दीक तो hai…par मुझे ऐसे मेला वगैरा ाचा नह lagta…wo तो बचो क खेलने क लिए ाचा होता है..

सामने बैठा मीणा क पति की मीणा की बात सुनकर थोड़ा अंदाज़ा हो गया था की मीणा कही आने से इंकार कर रही hai…wo मीणा को बीच में hi रोकते पूछ liya..kaha बुला रही है तुम्हारी सहेली…

तो मीणा ने फ़ोन चालू रख कर hi सब अपने पति को बता दिया तो उसका पति bola…to जावो न मीणा क्यू मन कर रही ho…is बहाने तुम्हारा बी दिल बहाल जायेगा….

मीणा और उसके पति क बीच हो रही बात को उसके सहेली ली सुन लिया और वो बोली देख मीणा अब भाईसाब ने बी परमिशन दे दिया

मीणा उसे अब मन नह कर पायी और मेले में आने की राज़ी होगयी..

मीणा क घर से कुछ hi दूर में कुछ 4-5 दिन पहले hi एक मेला लगा हुआ tha…aur वो शाम क 6 बजे शुरुवात हो कर रात क 11 बजे तक चलता tha…sach बात तो इ थी की मीणा का मैं बी था उस मेले में जाने का पर पति घर में होने क वजह से वो सहेली को मन कर रही thi…lekin जब उसके पति ने hi उसे परमिशन दे दिया तो वो मेले में जाने क लिए रेडी होगयी thi…aur शायद उसके पति को इस बात का अंदाज़ा नह था की उसने अपनी बीवी को मेले में जाने की परमिशन दे क क्या खोया है…

खैर शाम तक कुछ रूटीन की तरह वक़्त बीत गया और ठीक 6.30 क करीब मीणा एक नीले रंग की साडी पहन कर तैयार होकर अपने पति से विदा लेकर मेले क लिए निकल padi…q की उसके सहेली ने उसे 6.30 क करीब hi आने बोलै tha…aur करीब 6.45 क करीब मीणा मेले में पहुंच गयी थी और अपने सहेलियों क साथ घुल मिल गयी थी..

दूसरी तरफ जमील कल दोपहर बाद से मीणा का न कोई फ़ोन न कोई मश्ग न पाकर कुछ चिंतित tha..uske मैं में कही कही एक बात चल रही thi…uski हरकत क वजह से कही मीणा उसके हाथ से निकल तो नह gayi….lekin उसे थोड़ा बहुत यकीं बी था ऐसा कुछ हुआ नह अगर मीणा गुस्सा होती तो मुझसे फ़ोन पे भला बुरा सुना deti..aur उसने मुझसे आज आने को मन किया वो बी इसलिए की आज उसका पति की छुट्टी hai…matlab मीणा गुस्सा nh…par इस बात को मैंने कैसे जान lu..kuch देर सोचने क बाद उसके दिमाग में एक आईडिया आया और उसने मीणा क पति को फ़ोन मिला लिया…

फ़ोन पर

मीणा का पति - hello जमील भाई कैसे हो बहुत दिन क बाद याद किये

जमील- याद तो हम आपकी डेली करते hai…bas थोड़ा बिजी था एक काम में सो मिल नह पाया..

( सच बात तो इ थी की जबसे मीणा और जमील मिलने लगे थे तब से जमील मीणा क पति तरफ ध्यान hi नह दिया था)

ंपति- और सब ठीक है न..

जमील- है सब ठीक hai…muje बी लगा बहुत दिन हुए आपके साथ बैठक करके तो क्यू न आज संडे बी hai…aur आपके पास वक़्त बी है…

ंपति- क्यू नह कहा आना है बोलो…

जमील- अरे भाई आप क्यू तकलीफ लेते हो मई खुद आजावूंगा आपको लेने अब ावु क्या…

दरअसल जमील ने सोचा था की इसी बहाने वो मीणा को देख लेगा और सचाई जानने की कोशिश करेगा की मीणा उसपर नाराज़ तो नह…

लेकिन तब मीणा का पति बोलै अरे नह भाई इतने जल्दी नह वैसे तुम्हारी bhabhi(meena) बी घर पर नह है वो अपने सहेली क साथ मेले में गयी हुई है ..

इ बात सुनते hi जमील क शैतानी दिमाग में कुछ ऐसी सोच आयी थी की उसके चेहरे पे एक कातिल मुस्कान आगयी और वो बोलै ठीक है भाईसाब भाभी जी क आते hi मुझे कॉल करदेना …वैसे कब तक आएगी भाभी जी….

म पति- 8 से 8.30 तक तक आजायेगी…

जमील- ठीक है तो fir..baad में कॉल करलेना मिलते है .

ंपति- ठीक है

और दोनों का फ़ोन काट गया…

फ़ोन काटते hi जमील की दिमाग की घंटी बजने लगी thi…wo सोचने लगा ऐसा मौके का कैसे सही इस्तेमाल कर lu…..aur ज्यादा सोचने क लिए उसके पास वक़्त बी था क्यू की वो जनता था पति क घर में होते हुए मीणा ज्यादा दी बहार रुक नह sakti…aur बचे हुए हुई कुछ वक़्त में hi उसे मीणा से मिल क बात करनी hogi…lekin kaise…meena तो अपने सहेलियोंके साथ hai…kya वो इस वक़्त मुझे मिलना पसंद karegi…Shayad नह ..लेकिन एक बार कोशिश करने में क्या hai…aur वो अपने कदम को मेला की और बढ़ाने लगा….

दरअसल मीणा और जमील क रूम क बीच hi कुछ hi दुरी पर मेला लगा हुआ tha…so जमील को मेले तक का सफर पैदल चलने में कुछ 5-10 मं hi लगे थे और वो कुछ 10 मीन्स में hi मेले क पास आगया और दूर से hi नज़र दौड़ने laga…logo की भीड़ क वजह से उसे मीणा कही नज़र नह आयी तो वो दूसरी तरफ जाकर देखने लगा तो कुछ देर क म्हणत क बाद उसे मीणा एक नील रंग की साडी में नज़र आयी जिसे देख कर जमील की वासना जग गयी थी जिसका असर उसके पंत में हो गया था…

नील रंग की साडी में मीणा बाला की खूबसूरत लग रही thi…meena अपने झुल्फे हेयर क्लिप में बंधे होने पर बी उसके भुजा क दोनों तरफ फैले हुए the..aur मेले की लाइट क रोशनी में मीणा का गोरा बदन चमक रहा tha..jise देख कर जमील की अपने आप पर काबू पाना hi मुश्किल हो रहा tha…jamil दूर खड़े एक जुट होकर मीणा पर hi नज़र गड़ाए खड़ा था कब उसे मौका मिल जाए मीणा से अकेले बात करने का…

लेकिन इस बात से बेखबर मीणा अपने सहेलिया और उनके बचो क साथ मेले का आनंद ले रही थी….

तभी जमील ने गौर किया की मीणा अपने मोबाइल को हाथ में hi पकड़ी hui..jamil ने तुरंत एक मश्ग टाइप किया और मीणा को सेंड करदिया…

मेले में चल रही शोर शराबा और लाउड स्पीकर्स क आवाज़ से मीणा को मश्ग की टोन सुनाई नह दी थी..

पर दूर खड़ा जमील इसी बात का इंतज़ार कर रहा था की कब मीणा मश्ग देखेगी और कब उसे मीणा से बात करने का मौका milega..aur इस वक़्त क इंतज़ार जमील को और 10-15 तक करना पड़ा था..

कुछ 10 - 15 मीन्स क बाद जब मीणा ने अपनी नज़र अपने मोबाइल पे दौड़ाई तो उसे नोटिफिकेशन में जमील का मश्ग दिखा तो वो बी बड़ी उत्सुकता से मश्ग को खोल क देख कर आशा भरी निगाहो से चारो तरफ देखने lagi…q की जस्मिल ने उस मश्ग में लिखा था " मुझे छोड़ कर अकेले अकेले hi मेले में मजा उदा रही हो."

जमील जमील उसे कही पे बी नह दिखा तो उसने रेतुर्न मश्ग kiya…aap को किसने रोका hai…aap बी आजवाना हहै हहै…

जमील ने तुरंत टाइप Kiya…agar मुझे तुम्हारे सहेलियों ने देख लिया तो क्या जवाब डौगी..

मीणा इ बात भूल hi गयी थी की उसके साथ उसकी सहेलिया बी है ..और उनके सामने होते हुए वो जमील से बात तो क्या उसके तरफ देख बी नह sakti….wo मैं hi मैं जमील को शुक्रिया ऐडा करते हुए sochi…kitna ाचा इंसान है मेरी सेफ्टी का कितना ख्याल रखता है . ..लेकिन इन सहेलियों क होते हुए जमील से कैसे बात Karu….aur उसने कुछ सोचा और अपने एक सहेली को बोली आप सब लोग एन्जॉय करो मुझे घर से कॉल आरहा है बात करके आती हु कहकर मीणा एक कोने में गयी और जमील को कॉल लगा दी…

इस घडी का इंतज़ार कर रहा जमील मीणा का कॉल रिसीव करते हुए बोलै क्या यार मुझे छोड़ क अकेले अकेले मजा कर रही हो…

मीणा- कहा का मजा वो तो सहेली ने फाॅर्स किया तो आना पड़ा…

जमील- काम से काम मुझे बता तो देती…

मीणा- ाचा अब मई कहा जाती हु क्या करती हु सब जनाब को बता क hi करना क्या??? मीणा ने शरारत भरे अंदाज़ में कहा tha…aur मीणा क शरारत भरे अंदाज़ काफी था जमील liye…aur उसकी परेशानी दूर गोगई थी ..उसे अब यकीं होगया था की उसकी कल की हरकत से मीणा नाराज़ नह hai..aur वो बी शरारत को आगे बढ़ाते हुए bola…ha काम से काम उस वक़्त तो बतावो ..जब मिलने का कोई मौका सा बन जाए ..

जमील की इ बात मीणा को समाज में नह आयी और और सवाल भरे नज़रिये से पूछी मिलना??

जमील- है क्यू नह मिलना चाहती हो…

मीणा का मैं तो कर रहा था की वो जमील से कुछ देर क लिए Mile…q की रोज़ाना की तरह आज सुबह उनकी नाश्ते क बहाने मुलाकात नह हुई थी और इस बात को मीणा सुबह से hi मिस कर रही thi…par उसके लिए अब उसके सहेलियों क होते हुए मिलना मुश्किल था सो वो जवाब देते हुए बोली …मेरे सहेलियों क होते और भीड़ में इ कैसे मुमकिन है…

जमील- मुमकिन तो तब होगा जब तुम मिलना चाहोगी…

मीणा- वही तो मई पूछ रही हु कैसे? हमदोनो यहाँ कैसे मिल सकते है? मीणा ने फिर से सवाल भरे नज़रिये से पूछा…

जमील- है पता है मई अब यहाँ तुम्हारे पास आ नह सकता पर तुम तो मेरे पास आ सकती ho..na

जमील क इ बात मीणा की दिमाग में उतर hi नह रही thi..aur वो बोली पागल हो क्या जो इतने खुले आम मई आप क पास आके बात करू…

जमील हस्ता हुआ bola…are खुले आम कहा तुम आवो तो sahi..hum कही ऐसी जगह पे जायेंगे जहा होने कोई देख न ले…

अब जाके जमील की बात मीणा क दिमाग में उतर चुकी thi…use समाज आया की जमील उसे मेले से बहार कही दूर ले जाना चाहता hai…meena मानसिक टूर पे तो इस बात क लिए राज़ी thi…par उसे समाज में नह आरा था की वो सहेलियों को क्या bole…aur दूसरी बात इ बी थी की उसे 8.30 क पहले घर जाना hai..aur उसे पता था जमील क साथ जाना और वक़्त का अंदाजा भूल जाना एक hi hai…use इस बात का अछि तरह ज्ञात था की जमील उसके साथ ऐसी बाते करता है फ़्लर्ट करता है की वक़्त का अंदाज़ा hi नह लगता और कही मुझे देर होते देख कर पति मुझे ढूंढते हुए आये और मई उन्हें यहाँ नज़र नह ावु तो..?

मीणा कुछ सोच कर बोली नह जमील जी …मुझे घर बी जाना है. ..

जानइली है मुझे पता है तुम 8.30 तक घर जाना है उससे पहले hi हम वापस आ जायेंगे न..

लेकिन जमील क इस बात से मीणा थोड़ी चौक गयी थी की जमील को कैसे पता चला की मुझे 8.30 तक घर पहुंचा hai…aur उसने जमील को पूछ hi लिया पर आपको कैसे पता चला?

जमील हस्ते हुए हम अपनी जान क हर एक बात से वाकिफ hai…aur वैसे बी आज आपके hi पतिदेव ने मुझे इ सब बोलै और जमील ने उसके और मीणा क पति क बीच फ़ोन पर की बाते बतादि…

जमील क बात सुनते hi मीणा बी अब जमील से कुछ देर मिलने का मैं बना ली थी …क्यू की वो जानती थी की जमील आज किसी बी हालत में उसके पति से मिलेगा hi…wo उसके पति क सामने अपने आप को कभी झूठा साबित नह karega…fir बी उसे डर था की गलती से बी उन्दोनो को देर हीगयी to…aur वो जमील से बोली पक्का न 8.30 क पहले आजायेंगे…

जमील- पक्का बाबा आजायेंगे…

लेकिन फिर बी मीणा क मैं में और एक सवाल बचा हुआ था की वो कहा पे जाने वाली है है जमील क साथ वो इस वक़्त अँधेरे में…

पर कहा ले जाजावोगे मुझे इस वक़्त? मीणा में अपनी मैं में उगे सवाल को जमील से पूछ hi लिया…

दरअसल जमील को बी इस वक़्त पता नह था कहा जाए पर उसे इस वक़्त किसी बी तरह मीणा की मेले ले बहार ले जाकर मीणा क साथ अकेले में वक़्त बिताना था..

अरे कोई न कोई आशियाना हमे मिल hi जायेगा जो हमे कुछ देर क लिए एक होने को सहारा देगी…

जमील की बात का मतलब तो मीणा थोड़ी बहुत समाज गयी thi…lekin वो जमील को बस इतना hi बोली पागल हो गए हो आप..

जमील है पागल तो हु hi..ab बिना वक़्त गवाए इस पागल को अपने बहो में लेने आवोगी या फ़ोन पर hi…..

मीणा जमील की बात को आधे में काटते हुए बोली है आती हु पर एक बार सोच लो अगर किसी ने हमे देख लिया तो??

जमील- मीणा को यकीं दिलाते हुए बोलै कोई नह dekhega…yakin करो न…

मीणा- है यकीं तो करती हु इसलिए तो इतना बड़ा रिस्क ले रही hu…acha अब बोलो किश तरफ ावु मई…

तब जमील में अपना फ़ोन ऊपर उठा कर मीणा को अपना लोकेशन बता या और मीणा को उसे फॉलो करने बोलै…

मीणा जमील की बात को मान कर अपना फ़ोन कट करके अपने सहेलियों क पास आने लगी और सोचने लगी की अब इनलोगो को क्या bolu…sochte हुए hi वो उनके पास आयी तो एक सहेलिने पूछा बड़ी देर लगाडी मीणा गांव से फ़ोन था क्या….

मीणा है कहने hi वाली थी तब उसे कुछ सज़ा और boli…nh वो मेरे पति क फ़ोन था…

सहेली- मज़ाक करते हुए लगता है भाईसाब अपनी बीवी को हमारे साथ भेजकर अकेले वह तड़प रहे होंगे सो फ़ोन पे hi …..हाहाहा

मीणा उसकी बात को काटते हुए ऐसी बात नह…

दूसरी सहेली- तो क्या बात है हमे बी बता दो na…humare पति हमारे साथ कभी इतना देर बात नह करते…

मीणा- अरे आप लोग सब गलत सोच रहे हो .वो एक्चुअली इनकी एक इम्पोर्टेन्ट फाइल मेरे पास राखी हुई thi…jo उन्हें इस वक़्त चाहिए thi…so उसी क बारे में बता रही थी ..

सहेली - ाचा आखिर कर मिल गयी फाइल

मीणा- nh…isliye मुझे अब खुद जाना pada…q की उन्हें वो फाइल लेके उनके बॉस क पास जाना है कुछ जरुरी काम बोल रहे थे…

दूसरी सहेली मीणा को छेड़ते हुए बोली है हमे पता है संडे की दिन कौनसा काम?.. हेहेहे

मीणा- अब आप लोगो को कैसे samjavu….aap इ सब बकवास की बाते hi सोचती raho..mai chali…meena ने थोड़ा गुस्सा दिखते हुए कहा था..

पहली सहेली - गुस्सा मत हो मीणा हम तो मज़ाक कर रहे थे…

मीणा बी अपने सहेलियों की और देख कर हस्ते हुए बोली जानती hu….bas मई अब निकलती हु आप सब लोग एन्जॉय करो. ..और मीणा निकल hi रही थी तो और एक सहेली मीणा को छेड़ते हुए बोली और तुम बी एन्जॉय Karo……hahaha

मीणा मुद क उसे देख कर बोली अब आप सब लोग कह रही हो तो मई बी karlungi….bye….

मीणा वह से निकट हुए मैं में अपने सहेलियों से बोली अब आप लोगो को कैसे बतावु की मई बी तो एन्जॉय करने hi जा रही hu…par मेरे पति क साथ nh…jo मुझे बहो में लेने पर मुझे अलग hi मजा आता है जो मई आपको बयां नह कर सकती…

जमील को पहले यकीं नह था की मीणा उसे इस वक़्त मिलने राज़ी हो jayegi…unse बस एक ऐसी hi चल चली thi…jo चल चुकी thi..ab जब मीणा खुद hi राज़ी होगयी मिलने तो जमील को बी कुछ सूज नह रहा था इतने काम समय में वो मीणा को कहा और कैसे ले जा सकता है क्यू की उसने अपनी कार बी नह लायी thi..aur इस वक़्त जाके कार ले आना वक़्त की बर्बादी hi thi….wo सोच में पड़गया था…

लेकिन कहते है न रही को उसकी उसकी मंज़िल मिल hi जाती hai….aur जमील को बी ऐसी जगह याद आगयी थी और उसके चेहरे पे ख़ुशी आगयी थी……
 
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