Update..No..53*
MeGa..UpDaTe
Abb..Takk...
कबीर फॅमिली में आज की रात बहुत भरी पद गयी...
सभी किसी तरह एक दूसरे को सांत्वना देते हुए रात गुजरने का इंतेज़रर करने लगे...
Abb..Aage...
जो हुआ जैसे भी हुआ अच्छा हुआ,
आगे भी.... जो होगा अच्छा ही होगा....
रात के बाद नए दिन की सुबह आएगी,
दिन नहीं बदलेगा, तारिख बदल जाएगी..
वो कहते है न....
""एक नयी Subah...Ek नया पैगाम लेकर आती है....
Dukh-Sukh तो है उड़ता बदल गम से क्या घबराना......
ज़िन्दगी तो बस चलते जाने का नाम है.....!!""
कबीर फॅमिली पर मंडरा रहे गम के बदल छटने वाले थे.....
उनके दरवाज़े पे आज एक नयी सुबह ने दस्तक दी...
लेकिन इन सब बातों से अनजान कबीर और उसकी फॅमिली गम के सागर में डूबी हुयी थी....
गम में होने के बावजूद भी एक अनचाही ख़ुशी की उम्मीद महसूस हो रही थी...
सुबह के समय कबीर और मीरा अन्य के बीएड के पास बैठे उसके चेहरे को बड़े hi प्यार से निहार रहे थे...
न जाने कितने दिन बीत चुके थे न तो हयान की कोई खबर थी और न hi अन्य को कोई होश....
डेली सुबह की तरह आज भी दोनों अन्य के पास बैठे उसके उठने का इंतज़ार कर रहे थे....
की तभी किचन में बर्तन गिरने की आवाज़ आयी....
कबीर और मीरा जो अब तक अन्य के चेहरे की मासूमियत में खोये हुए थे की अचानक बर्तन गिरने के शोर से दोनों होश में आये....
कबीर - इतनी सुबह सुबह कौन किचन में आ गया... देखो कही कोई चूहा तो नहीं....??
मीरा उठ कर किचन की तरफ चल पड़ी...
किचन का नज़ारा देख कर मीरा चौंक गयी....
मीरा - माँ आप यहाँ क्या कर रही हो...??
वो भी इतनी सुबह..
आपको तो डॉ ने रेस्ट करने के लिए कहा है...??
माजी - मैं बिलकुल ठीक हु..!!
मेरा बेतु आने वाला है इस्सलिये आज मैं उसके लिए उसके पसंद का खाना बना रही हु...
माजी की बात सुनकर मीरा को थोड़ा अजीब लगा...
मीरा (मन में) - ये माँ को क्या हुआ है....
कही माँ को फिर से तो दौड़े न पड़ने लगे...??
मीरा - माँ आप ठीक तो हो न...
सुबह सुबह ये कैसा पागलपन ले बैठे हो..
आप अभी अपने रूम जाकर रेस्ट करो..
लेकिन माजी मीरा की सभी बातों को अनसुना करती हुए अपने काम में लगी रही....
मीरा चिंता के भाव में वापस कबीर के पास आ गयी...
कबीर - क्या हुआ.. तुम इतना क्यों परेशां हो...??
मीरा - लगता है माँ को आज फिर से दौड़े पड़े है..
Anap-sanap हरकतें किये जा रही है...
आप खुद जाकर देख लो किचन में न जाने क्या क्या बनाये जा रही है..
कह रही है हयान आने वाला है...??
कबीर को हयान नाम सुनते hi दिल में अजीब बेचैनी और ख़ुशी होने लगी...
कबीर भी उठकर किचन की तरफ चल देता है..
जहाँ एकदम फिट सही हालत में माजी अपने काम में बिजी थी...
कबीर वापस मीरा के पास आकर...
कबीर - इतनी छोटी सी बात पर तुम क्यों परेशां होती हो..
वो अपने दिल की तसल्ली के लिए जो भी कर रही है करने दो...
वैसे भी दिन भर बीएड पर लेती रहती है.. आज इतने दिनों बाद वो फिर से सही सलामत दिख रही है...
मीरा - ठीक है जी..
अच्छा, आप रिया को बुला दो
अन्य को फ्रेश करने में मेरी हेल्प कर देगी...
कबीर - हम्म अभी बुलाता हु...
बाथ भी करवा देना आज अन्य भी मंदिर चलेगी हमरे साथ....
कबीर रिया को मीरा की हेल्प करने के किये बोल देता है...
और जैन से मिलने के लिए उसके रूम की तरफ चल देता है....
इधर मीरा और रिया दोनों मिलकर अन्य को Nahla-dhulakar अच्छे से रेडी करने में लग जाते हैं...
इधर कबीर और जैन आगे क्या और कैसे करना है रश्मि फॅमिली को खोजने के लिए उस पर काफी देर विचार करते रहते हैं...
लेकिन सभी बातें एक Hi जगह पर आकर रुक जाती थी की शुरुआत कैसे और कहा से करें...??
कही इन सभी बातों का सम्बन्ध हयान से तो नहीं....??
अगर ऐसा कुछ है तो हमारी परेशानी का सिर्फ एक hi हल है आदिगुरु महाराज....
दोनों अपनी सहमति को जताते हुए गुरु सदनं जी के पास जाते है...
कबीर - गुरु जी ! आपकी की क्या रे है इन सभी आकस्मिक घटनाओं के बारें में....??
सदनं जी - तुम्हारी सभी बातें मेरी समझ में आ गयी है...
हमारी सभी परेशानियों का सिर्फ एक hi निवारण है आदिगुरु महाराज...
किन्तु मैं उन तक संपर्क बनाने में असमर्थ हु...
कबीर - तो फिर आप hi बताओ अब हम क्या करें..
अब तो सब कुछ तबाह होने के कगार पर है...
धीरे धीरे मुझसे मेरा सब कुछ छिना जा रहा है...
सदनं जी - देखो कबीर ! जैसा की तुम जानते हो...
अगर ईश्वर ने उसको जन्म दिया है तो उसकी रक्षा भी ईश्वर पर hi छोड़ दो...
शायद ईश्वर तुम्हरे धैर्य की परीक्षा ले रहा हो...!!
किसी को कुछ नहीं होगा..
बस तुम ईश्वर पर अपना यक़ीन बनाये रखो सब ठीक होगा...!!
कबीर के पास आगे और बात करने के लिए कुछ बचा hi नहीं....
इस्सलिये सदनं जी को पूजा के लिए कह कर वापस अपने रूम की तरफ चल देता है...
किचन में माजी को अभीतक काम में लगा हुआ देख उनकी तरफ चक देता है...
कबीर - क्या बात है माजी आज तो बहुत स्वादिष्ट पकवान बनाये जा रहे है...??
माजी - है तो क्यों न बनाऊं आज मेरा दुलारा मुझसे मिलने आ रहा है...!!
कबीर - आपको कैसे पता..??
की वो आ रहा है.. हमें तो उसने कुछ न बताया...??
माजी - वो आज रात में जब मुझे दुबारा दौड़े पड़ने लगे थे..
तो वह मुझसे मिलने आया था उसको देखते hi मैं एकदम टगुक हो गयी...
कह रहा था की सुबह फिर से मिलने आएगा...
माजी की बात सुन कर कबीर हैरान रह जाता है...
कबीर - ठीक है माजी ! बाकी काम बाद में कर लेना...
चलिए पहले पूजा कर लीजिये...
माजी - ठीक है तू चल में कुछ देर में आती हु..
कबीर किचन से निकल कर सीधा रिया के रूम जाता है...
कबीर - रिया ! क्या माजी को आज रात फिर से दौड़े पड़े थे...??
रिया - है, वो रात में अचानक सोते सोते माजी हयान का नाम लेकर चीखने लगी थी...
लेकिन फिर कुछ देर बाद अपने आप फिर से शांत हो गयी....
फिर सुबह तो जैसे जादू हो गया....
देखिये वो तो बिलकुल ठीक दिख रही है ऐसा लग रहा है..
जैसे कुछ हुआ hi नहीं....
कबीर - हम्म, बस इतना hi कह पाया और रूम से बहार आ गया...
कबीर के मन एक बार से फिर से उथल पुथल होने लगी...
कबीर - कही माजी का कहना सच तो नहीं...
आज न जाने मेरा दिल क्यों ख़ुशी से झूम रहा...??
मीरा - ऐसे कहा कहिये हुए...
खुद hi मन hi मन अमुव्कुराये जा रहे हो...??
कबीर - मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है... आज सुबह से मेरे साथ ाक्य हो रहा है...
एक पल अचानक ख़ुशी सी महसूस होने लगती है...
और दूसरे hi पल कुछ बातें याद करके डर लगने कागता है...
मीरा - क्या..?? ऐसा तो आज सुबह से मेरे साथ भी हो रहा है...
आज तो सब कुछ बड़का बदला सा महसूस हो रहा है...
माँ भी बिलकुल ठीक दिख रही आज सुबह से...
तभी रिया रूम में एंटर करते हुए...
पूजा का समय हो चूका है..
गुरूजी सबका मंदिर में वेट कर फाहे है...
कबीर और मीरा की बातें यहीं रुक जाती है....
अजय को व्हीलचेयर में बैठकर मंदिर ले जाते है...
हयान के शिव बाकि सब कबीर, अन्य, मीरा, माजी, तेंजिन , रिया, जैन, डचेन सभी इस पूजा में उपस्थित थे...
सभी ईश्वर की आराधना और भक्ति में लीं हो गए....
और ईश्वर से रो रो कर दया याचना करने लगे की उनपर छाये सभी दुःख के साये को दूर कर दे.....
पूजा समाप्ति के बाद सदनं जी सबके माथे पे तिलक और प्रशाद वितरण करने लगे...
सदनं जी ने जैसे hi अन्य के माथे पे तिलक लगाया.....
अन्य जोरर से हय्यू ! कहते हुए चीख उठी..... और व्हील चेयर से उठ कर दौड़ पड़ी...
सभी अन्य की चींख सुनकर एकदम से चौंक गए....
और अन्य को यूँ बेतहाशा भागता हुआ देख सब घबराने लगे की आखिर इसे क्या हुआ...??
सब अन्य के पूछे पीछे उसकी तरफ भागे....
तभी घर का मैं दूर खुला और किसी ने घर पे एंटर किया...
अन्य भागते हुए जाकर उस शक्श के गले से लिपट गयी....
सबके कदम जैसे एक जगह रुक गए....
सभी सामने का नज़ारा देख कर ख़ुशी से चिल्ला उठे और अपनी आखों से आंसू की नदियां बहाने लगे....
एक पल के किये ऐसा लग रह था हु की जैसे वक़्त रुक गया हो...
अचानक हवाओं ने जैसे अपना रुख मोड़ लिया हो...
फ़िज़ा महक उठी थी... हर तरफ भीनी भीनी खुशबु फ़ैल गयी हो....
अन्य बेतहाशा रट हुए हयान के चेहरे चूमने लगी....
हर एक हिस्से को चूमते हुए अपने दिल की तड़प को बयान करने लगी....
अन्य की तड़प को देख कर हयान भी खुद पर काबू न रख पाया और उसकी आखों से भी आंसू के फव्वारे फुट पड़े...
अन्य को जोरर से अपने सीने से भींचते हुए खुद में समेटने लगा...
दोनों एक दूसरे में शमा जाना चाहते हो जैसे....
सभी कुछ दूर पे खड़े दोनों के प्यार की तड़प को महसूस कर रहे थे...
किसी की भी आगे जाने की हिम्मत न हो रही थी...
तभी हयान ने अन्य के चेहरे को अपने हाथों में थमते हुए उसकी आखों में देखने लगा....
दोनों की नज़रे Mili....Fir तो जैसे एक दूसरे की आखों में खो गए....
आँखों hi आँखों में अपने दिल का हाल बयान करने लगे...
""काश ये वक़्त यही रुक जाये,
यही थम जाये..
और तू मेरे पास हो..!!
ले चालू तुझे एक ऐसी दुनिया में...
जहाँ प्यार जिस्मों से नहीं रूह से हो,
जहा बिन बोले तुम मेरी साड़ी बातें समझ लो,
जहा एक मुस्कराहट से hi सारे झगडे ख़त्म हो,
जहाँ भावनाओ की सच्ची कदर हो,.
जहाँ आंसू सिर्फ हँसते वक़्त आये,
जहा प्यार की इज़्ज़त ho...Aur इज़्ज़त hi प्यार हो..!!""
काफी देर यूँही एक दूसरे में खोये रहे...
तभी मीरा का शाबर का बांध टूट गया और जोरर से हयान! चिल्लाते हुए उसकी तरफ दौड़ी....
मीरा की आवाज़ सुन कर दोनों का ध्यान भांग होता है....
सामने मीरा उनकी माँ आँख में आंसू लिए हुए उनकी तरफ आते हुए दिखी...
हायं और अन्य आगे बढ़ कर अपनी माँ को अपने बाजुओं में थाम लेते है....
तीनो एक दूसरे लिपटकर रोने लगते है...
आज सभी के आँखों में सिर्फ ख़ुशी के आंसू थे....
मीरा हयान के चेहरे को चूम चूम कर अपने ममता की बरषत किये जा रही थी...
मीरा को तो जैसे उसका खोया हुआ संसार वापस मिल गया था...
उसकी आँख के टारे उसकी नज़रों के सामने सही सलामत खड़े थे...
मीरा तो उन पर अपना प्यार लुटाये जा रही थी...
एक माँ की तड़प का तो कोई मोल नहीं...
उसकी तड़प को या तो वह खुद hi समझ सकती या फिर ईश्वर.....
कबीर दूर से खड़े इस नज़ारे को देख रहा था... .
उसे तो अभी भी अपनी आँखों विश्वाश नहीं हो रहा था....
की वो सपना देख रहा या फिर हक़ीक़त....
धीरे धीरे क़दमों के के साथ.. दिल में प्यार का समंदर लिए उनके करीब आने लगा....
जहा तीनो एक दूसरे से लिपटे अपने प्यार को एक दूसरे पर लुटा रहे थे...
कबीर भी जाकर हयान को अपने सीने से लगा लिया....
और अपनी ख़ुशी का इज़हार करने लगा...
और अपने दिल को सुकून देने लगा...
उसकी हर एक मुराद जैसे पूरी हो गयी थी...
कबीर, मीरा, अन्य, हयान चरों एक दूसरे के लगे हुए खड़े थे...
इनसब से दूर तेंजिन, डचेन, सदनं जी अपनी आखों में आंसू लिए इस प्यार भरे मिलान का आनद उठा रहे थे...
जबकि रश्मि, विजय , माहि, अखिल सभी बातों से अनजान, बड़ी हैरत के साथ इस पल को देख रहे थे.....
लेकिन एक अजीब बात थी माजी कहीं नहीं दिख रही थी...
तभी सदनं जी की नज़र इन सब से अलग एक शख्श पर पड़ती है...
जो सबसे अलग खड़े अपने चेहरे पे मुस्कान liye....Khade थे...
उन्हें तो अपनी आँखों पर विश्वाश नहीं होता...
सदनं जी की आँखें छलक पड़ती है....
भागते हुए जाकर सामने खड़े शख्श के चरणों में गिर्र पड़ते है...
इधर सब एक दूसरे से अभी मिक्ने में बिजी थे....
तेंजिन भी दोनों से मिल कर अपने शिकवे गीले दूर कर रही थी....
धीरे धीरे सबकी निगाह सामने की तरफ जाती है.....
एक तरफ रश्मि फैमिकय कड़ी थी...
तो दूसरी तरग वह सख्श...
सबकी ख़ुशी की कोई सीँलम नहीं रहती..
आज एक पल में Hi जैसे सब मिल गया हो..
कबीर ख़ुशी से चिल्ला उठता है....
आदिगुरु महाराज !!
आज के लिए बस इतना hi....
....
.....
लाइक्स, कमैंट्स, और वोट्स का रखना dhyan...Aapka दोस्त हयान..!!
थैंक्स गाइस !