Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 15 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

उपदटेस काफी निकल चुके हैं

बूत फिर भी अपने स्टार्टिंग पॉइंट पर hi है ..?


ये बात आपने बिलकुल सही कही...

52 उपदटेस निकल जाने के बाद भी अभी हयान का करैक्टर खुलकर सामने नहीं आया... उसकी पर्सनालिटी और एआईएम दोनों अभी तक छिपे है..

अब वक़्त आ गया है.. हयान के रोले का...

अब कहानी अपने किरादरों को इंट्रोडस करेगी..

हर एक करैक्टर का इंट्रोडक्शन और वर्क खुलकर सामने आएगा...

बहुत बहुत शुक्रिया आपके बेहतरीन सुग्गेशन के लिए....

बिलकुल आपकी सोंच के मुताबिक hi...Main इस स्टोरी के किरदारों को गढ़ूँगा...

सब का अपना अलग अंदाज़ होगा...

थैंक्स सर जी..

बेहतरीन रिव्यु देने के लिए....

मुझे बहुत ख़ुशी हुयी की आपको स्टोरी पसंद आयी...
.



 
Update..No..53*

MeGa..UpDaTe



Abb..Takk...

कबीर फॅमिली में आज की रात बहुत भरी पद गयी...

सभी किसी तरह एक दूसरे को सांत्वना देते हुए रात गुजरने का इंतेज़रर करने लगे...

Abb..Aage...

जो हुआ जैसे भी हुआ अच्छा हुआ,

आगे भी.... जो होगा अच्छा ही होगा....

रात के बाद नए दिन की सुबह आएगी,

दिन नहीं बदलेगा, तारिख बदल जाएगी..

वो कहते है न....

""एक नयी Subah...Ek नया पैगाम लेकर आती है....

Dukh-Sukh तो है उड़ता बदल गम से क्या घबराना......

ज़िन्दगी तो बस चलते जाने का नाम है.....!!""

कबीर फॅमिली पर मंडरा रहे गम के बदल छटने वाले थे.....

उनके दरवाज़े पे आज एक नयी सुबह ने दस्तक दी...

लेकिन इन सब बातों से अनजान कबीर और उसकी फॅमिली गम के सागर में डूबी हुयी थी....

गम में होने के बावजूद भी एक अनचाही ख़ुशी की उम्मीद महसूस हो रही थी...

सुबह के समय कबीर और मीरा अन्य के बीएड के पास बैठे उसके चेहरे को बड़े hi प्यार से निहार रहे थे...

न जाने कितने दिन बीत चुके थे न तो हयान की कोई खबर थी और न hi अन्य को कोई होश....

डेली सुबह की तरह आज भी दोनों अन्य के पास बैठे उसके उठने का इंतज़ार कर रहे थे....

की तभी किचन में बर्तन गिरने की आवाज़ आयी....

कबीर और मीरा जो अब तक अन्य के चेहरे की मासूमियत में खोये हुए थे की अचानक बर्तन गिरने के शोर से दोनों होश में आये....

कबीर - इतनी सुबह सुबह कौन किचन में आ गया... देखो कही कोई चूहा तो नहीं....??

मीरा उठ कर किचन की तरफ चल पड़ी...

किचन का नज़ारा देख कर मीरा चौंक गयी....

मीरा - माँ आप यहाँ क्या कर रही हो...??

वो भी इतनी सुबह..

आपको तो डॉ ने रेस्ट करने के लिए कहा है...??

माजी - मैं बिलकुल ठीक हु..!!

मेरा बेतु आने वाला है इस्सलिये आज मैं उसके लिए उसके पसंद का खाना बना रही हु...

माजी की बात सुनकर मीरा को थोड़ा अजीब लगा...

मीरा (मन में) - ये माँ को क्या हुआ है....

कही माँ को फिर से तो दौड़े न पड़ने लगे...??

मीरा - माँ आप ठीक तो हो न...

सुबह सुबह ये कैसा पागलपन ले बैठे हो..

आप अभी अपने रूम जाकर रेस्ट करो..

लेकिन माजी मीरा की सभी बातों को अनसुना करती हुए अपने काम में लगी रही....

मीरा चिंता के भाव में वापस कबीर के पास आ गयी...

कबीर - क्या हुआ.. तुम इतना क्यों परेशां हो...??

मीरा - लगता है माँ को आज फिर से दौड़े पड़े है..

Anap-sanap हरकतें किये जा रही है...

आप खुद जाकर देख लो किचन में न जाने क्या क्या बनाये जा रही है..

कह रही है हयान आने वाला है...??

कबीर को हयान नाम सुनते hi दिल में अजीब बेचैनी और ख़ुशी होने लगी...

कबीर भी उठकर किचन की तरफ चल देता है..

जहाँ एकदम फिट सही हालत में माजी अपने काम में बिजी थी...

कबीर वापस मीरा के पास आकर...

कबीर - इतनी छोटी सी बात पर तुम क्यों परेशां होती हो..

वो अपने दिल की तसल्ली के लिए जो भी कर रही है करने दो...

वैसे भी दिन भर बीएड पर लेती रहती है.. आज इतने दिनों बाद वो फिर से सही सलामत दिख रही है...

मीरा - ठीक है जी..

अच्छा, आप रिया को बुला दो

अन्य को फ्रेश करने में मेरी हेल्प कर देगी...

कबीर - हम्म अभी बुलाता हु...

बाथ भी करवा देना आज अन्य भी मंदिर चलेगी हमरे साथ....

कबीर रिया को मीरा की हेल्प करने के किये बोल देता है...

और जैन से मिलने के लिए उसके रूम की तरफ चल देता है....

इधर मीरा और रिया दोनों मिलकर अन्य को Nahla-dhulakar अच्छे से रेडी करने में लग जाते हैं...

इधर कबीर और जैन आगे क्या और कैसे करना है रश्मि फॅमिली को खोजने के लिए उस पर काफी देर विचार करते रहते हैं...

लेकिन सभी बातें एक Hi जगह पर आकर रुक जाती थी की शुरुआत कैसे और कहा से करें...??

कही इन सभी बातों का सम्बन्ध हयान से तो नहीं....??

अगर ऐसा कुछ है तो हमारी परेशानी का सिर्फ एक hi हल है आदिगुरु महाराज....

दोनों अपनी सहमति को जताते हुए गुरु सदनं जी के पास जाते है...

कबीर - गुरु जी ! आपकी की क्या रे है इन सभी आकस्मिक घटनाओं के बारें में....??

सदनं जी - तुम्हारी सभी बातें मेरी समझ में आ गयी है...

हमारी सभी परेशानियों का सिर्फ एक hi निवारण है आदिगुरु महाराज...

किन्तु मैं उन तक संपर्क बनाने में असमर्थ हु...

कबीर - तो फिर आप hi बताओ अब हम क्या करें..

अब तो सब कुछ तबाह होने के कगार पर है...

धीरे धीरे मुझसे मेरा सब कुछ छिना जा रहा है...

सदनं जी - देखो कबीर ! जैसा की तुम जानते हो...

अगर ईश्वर ने उसको जन्म दिया है तो उसकी रक्षा भी ईश्वर पर hi छोड़ दो...

शायद ईश्वर तुम्हरे धैर्य की परीक्षा ले रहा हो...!!

किसी को कुछ नहीं होगा..

बस तुम ईश्वर पर अपना यक़ीन बनाये रखो सब ठीक होगा...!!

कबीर के पास आगे और बात करने के लिए कुछ बचा hi नहीं....

इस्सलिये सदनं जी को पूजा के लिए कह कर वापस अपने रूम की तरफ चल देता है...

किचन में माजी को अभीतक काम में लगा हुआ देख उनकी तरफ चक देता है...

कबीर - क्या बात है माजी आज तो बहुत स्वादिष्ट पकवान बनाये जा रहे है...??

माजी - है तो क्यों न बनाऊं आज मेरा दुलारा मुझसे मिलने आ रहा है...!!

कबीर - आपको कैसे पता..??

की वो आ रहा है.. हमें तो उसने कुछ न बताया...??

माजी - वो आज रात में जब मुझे दुबारा दौड़े पड़ने लगे थे..

तो वह मुझसे मिलने आया था उसको देखते hi मैं एकदम टगुक हो गयी...

कह रहा था की सुबह फिर से मिलने आएगा...

माजी की बात सुन कर कबीर हैरान रह जाता है...

कबीर - ठीक है माजी ! बाकी काम बाद में कर लेना...

चलिए पहले पूजा कर लीजिये...

माजी - ठीक है तू चल में कुछ देर में आती हु..

कबीर किचन से निकल कर सीधा रिया के रूम जाता है...

कबीर - रिया ! क्या माजी को आज रात फिर से दौड़े पड़े थे...??

रिया - है, वो रात में अचानक सोते सोते माजी हयान का नाम लेकर चीखने लगी थी...

लेकिन फिर कुछ देर बाद अपने आप फिर से शांत हो गयी....

फिर सुबह तो जैसे जादू हो गया....

देखिये वो तो बिलकुल ठीक दिख रही है ऐसा लग रहा है..

जैसे कुछ हुआ hi नहीं....

कबीर - हम्म, बस इतना hi कह पाया और रूम से बहार आ गया...

कबीर के मन एक बार से फिर से उथल पुथल होने लगी...

कबीर - कही माजी का कहना सच तो नहीं...

आज न जाने मेरा दिल क्यों ख़ुशी से झूम रहा...??

मीरा - ऐसे कहा कहिये हुए...

खुद hi मन hi मन अमुव्कुराये जा रहे हो...??

कबीर - मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है... आज सुबह से मेरे साथ ाक्य हो रहा है...

एक पल अचानक ख़ुशी सी महसूस होने लगती है...

और दूसरे hi पल कुछ बातें याद करके डर लगने कागता है...

मीरा - क्या..?? ऐसा तो आज सुबह से मेरे साथ भी हो रहा है...

आज तो सब कुछ बड़का बदला सा महसूस हो रहा है...

माँ भी बिलकुल ठीक दिख रही आज सुबह से...

तभी रिया रूम में एंटर करते हुए...

पूजा का समय हो चूका है..

गुरूजी सबका मंदिर में वेट कर फाहे है...

कबीर और मीरा की बातें यहीं रुक जाती है....

अजय को व्हीलचेयर में बैठकर मंदिर ले जाते है...


हयान के शिव बाकि सब कबीर, अन्य, मीरा, माजी, तेंजिन , रिया, जैन, डचेन सभी इस पूजा में उपस्थित थे...

सभी ईश्वर की आराधना और भक्ति में लीं हो गए....

और ईश्वर से रो रो कर दया याचना करने लगे की उनपर छाये सभी दुःख के साये को दूर कर दे.....


पूजा समाप्ति के बाद सदनं जी सबके माथे पे तिलक और प्रशाद वितरण करने लगे...

सदनं जी ने जैसे hi अन्य के माथे पे तिलक लगाया.....

अन्य जोरर से हय्यू ! कहते हुए चीख उठी..... और व्हील चेयर से उठ कर दौड़ पड़ी...

सभी अन्य की चींख सुनकर एकदम से चौंक गए....

और अन्य को यूँ बेतहाशा भागता हुआ देख सब घबराने लगे की आखिर इसे क्या हुआ...??

सब अन्य के पूछे पीछे उसकी तरफ भागे....

तभी घर का मैं दूर खुला और किसी ने घर पे एंटर किया...

अन्य भागते हुए जाकर उस शक्श के गले से लिपट गयी....

सबके कदम जैसे एक जगह रुक गए....

सभी सामने का नज़ारा देख कर ख़ुशी से चिल्ला उठे और अपनी आखों से आंसू की नदियां बहाने लगे....

एक पल के किये ऐसा लग रह था हु की जैसे वक़्त रुक गया हो...

अचानक हवाओं ने जैसे अपना रुख मोड़ लिया हो...

फ़िज़ा महक उठी थी... हर तरफ भीनी भीनी खुशबु फ़ैल गयी हो....

अन्य बेतहाशा रट हुए हयान के चेहरे चूमने लगी....

हर एक हिस्से को चूमते हुए अपने दिल की तड़प को बयान करने लगी....


अन्य की तड़प को देख कर हयान भी खुद पर काबू न रख पाया और उसकी आखों से भी आंसू के फव्वारे फुट पड़े...

अन्य को जोरर से अपने सीने से भींचते हुए खुद में समेटने लगा...

दोनों एक दूसरे में शमा जाना चाहते हो जैसे....


सभी कुछ दूर पे खड़े दोनों के प्यार की तड़प को महसूस कर रहे थे...

किसी की भी आगे जाने की हिम्मत न हो रही थी...

तभी हयान ने अन्य के चेहरे को अपने हाथों में थमते हुए उसकी आखों में देखने लगा....

दोनों की नज़रे Mili....Fir तो जैसे एक दूसरे की आखों में खो गए....

आँखों hi आँखों में अपने दिल का हाल बयान करने लगे...



""काश ये वक़्त यही रुक जाये,

यही थम जाये..

और तू मेरे पास हो..!!

ले चालू तुझे एक ऐसी दुनिया में...

जहाँ प्यार जिस्मों से नहीं रूह से हो,

जहा बिन बोले तुम मेरी साड़ी बातें समझ लो,

जहा एक मुस्कराहट से hi सारे झगडे ख़त्म हो,

जहाँ भावनाओ की सच्ची कदर हो,.

जहाँ आंसू सिर्फ हँसते वक़्त आये,

जहा प्यार की इज़्ज़त ho...Aur इज़्ज़त hi प्यार हो..!!""

काफी देर यूँही एक दूसरे में खोये रहे...

तभी मीरा का शाबर का बांध टूट गया और जोरर से हयान! चिल्लाते हुए उसकी तरफ दौड़ी....

मीरा की आवाज़ सुन कर दोनों का ध्यान भांग होता है....

सामने मीरा उनकी माँ आँख में आंसू लिए हुए उनकी तरफ आते हुए दिखी...

हायं और अन्य आगे बढ़ कर अपनी माँ को अपने बाजुओं में थाम लेते है....

तीनो एक दूसरे लिपटकर रोने लगते है...

आज सभी के आँखों में सिर्फ ख़ुशी के आंसू थे....

मीरा हयान के चेहरे को चूम चूम कर अपने ममता की बरषत किये जा रही थी...

मीरा को तो जैसे उसका खोया हुआ संसार वापस मिल गया था...

उसकी आँख के टारे उसकी नज़रों के सामने सही सलामत खड़े थे...

मीरा तो उन पर अपना प्यार लुटाये जा रही थी...

एक माँ की तड़प का तो कोई मोल नहीं...

उसकी तड़प को या तो वह खुद hi समझ सकती या फिर ईश्वर.....

कबीर दूर से खड़े इस नज़ारे को देख रहा था... .

उसे तो अभी भी अपनी आँखों विश्वाश नहीं हो रहा था....

की वो सपना देख रहा या फिर हक़ीक़त....

धीरे धीरे क़दमों के के साथ.. दिल में प्यार का समंदर लिए उनके करीब आने लगा....

जहा तीनो एक दूसरे से लिपटे अपने प्यार को एक दूसरे पर लुटा रहे थे...

कबीर भी जाकर हयान को अपने सीने से लगा लिया....

और अपनी ख़ुशी का इज़हार करने लगा...

और अपने दिल को सुकून देने लगा...

उसकी हर एक मुराद जैसे पूरी हो गयी थी...

कबीर, मीरा, अन्य, हयान चरों एक दूसरे के लगे हुए खड़े थे...

इनसब से दूर तेंजिन, डचेन, सदनं जी अपनी आखों में आंसू लिए इस प्यार भरे मिलान का आनद उठा रहे थे...

जबकि रश्मि, विजय , माहि, अखिल सभी बातों से अनजान, बड़ी हैरत के साथ इस पल को देख रहे थे.....

लेकिन एक अजीब बात थी माजी कहीं नहीं दिख रही थी...

तभी सदनं जी की नज़र इन सब से अलग एक शख्श पर पड़ती है...

जो सबसे अलग खड़े अपने चेहरे पे मुस्कान liye....Khade थे...

उन्हें तो अपनी आँखों पर विश्वाश नहीं होता...

सदनं जी की आँखें छलक पड़ती है....

भागते हुए जाकर सामने खड़े शख्श के चरणों में गिर्र पड़ते है...

इधर सब एक दूसरे से अभी मिक्ने में बिजी थे....

तेंजिन भी दोनों से मिल कर अपने शिकवे गीले दूर कर रही थी....

धीरे धीरे सबकी निगाह सामने की तरफ जाती है.....

एक तरफ रश्मि फैमिकय कड़ी थी...

तो दूसरी तरग वह सख्श...

सबकी ख़ुशी की कोई सीँलम नहीं रहती..

आज एक पल में Hi जैसे सब मिल गया हो..



कबीर ख़ुशी से चिल्ला उठता है....

आदिगुरु महाराज !!

आज के लिए बस इतना hi....

....

.....

लाइक्स, कमैंट्स, और वोट्स का रखना dhyan...Aapka दोस्त हयान..!!

थैंक्स गाइस !
 
Update..No..54*

MeGa..UpDaTe




Abb..Takk..

चेयरमैन खुद में hi बैठे बाद बड़ा रहा था..

उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर वो क्या करे...??

काफी देर यूँही सोचने बिचरने के बाद वह

टेबल में रखे टेलीफोन से किसी को कॉल करता है..

और 30 मं में मीटिंग रखने को बोलता.....

Abb..Aage....

एक सीक्रेट बेस में चार लोग कुर्सियों में बैठे थे उनके अगल बगल गन लिए कई सरे गार्ड्स खड़े थे....

सभी खामोश बैठे किसी के आने की राह देख रहे थे.....

की तभी फुल सुईठे बूट में एक आदमी वह पहुँचता है

जिसे देख कर सभी अपनी जगह से खड़े हो जाते है....

सब उस आदमी से मिलते है फिर सभी अपनी जगह में बैठ जाते है...

आदमी - कहो डी6 क्या मुसीबत ाँ पड़ी थी जो इतने अर्जेंट में मुझे बुलाया....??

डी6 (चेयरमैन) - सर ! आपको तो सब पता चल hi चूका होगा...??

बूत ये प्रॉब्लम अब मेरे अकेली की न रही...

मैं भी इस ग्रुप का हिस्सा हु...

सो मेरी हेल्प कीजिये..

वो आदमी इन सभी का ग्रुप लीडर है जिसे सब डी1 के नाम से जानते है...

सभी ग्रुप मेंबर की ओरिजिनल आइडेंटिटी छिपी हुयी है...

सब एक दूसरे को बस कोड नाम से hi जानते हैं..

डी1 - जो भी हो रहा है और आगे भी जो होगा उसके जिम्मेदार तुम खुद हो...

तुमने अपना काम ठीक से नहीं किया...

बॉस तुमसे बहुत नाराज़ है...

डी2 - बूत सर ! हमें डी6 की हेल्प करनी चाहिए..

वर्ण उसका अगला टारगेट हम खुद हो सकते है...??

डी1 - उसकी नौबत कभी न आएगी....

Db.Boss ने उसका इंतेज़ाम कर लिया है...

उस परेशानी को जड़ से ख़त्म करने के लिए...

डी6 - मेरी जान खतरे में आप सभी समझते क्यों नहीं...

अगर वो मुझ तक पहुँच गया to....Hamare नेटवर्क तक पहुंचने में समय नहीं लगेगा...??

डी1 - उसकी फ़िक्र तुम्हें करने की जरुरत नहीं है...

तुम सिर्फ अपने बचे हुए काम को सही से अंजाम दो...

अगर न कामयाब हुए तो अंजाम भुगतने के लिए रेडी रहना...

डी3 - सर ! क्यों न हम सब डी6 की हेल्प करें और उस नए जन्मे खतरे को ख़त्म कर दे...??

डी1 - इतनी छोटी सी प्रॉब्लम के लिए हमारा सामने आना ठीक नहीं...

अगर डी6 ठीक से अपना काम करता तो आज ये प्रॉब्लम न आती....

सो डी6 को अकेले hi इस प्रॉब्लम का सलूशन निकलना होगा...

और उसे ख़त्म करना होगा...

डी6 - लेकिन वो कोई इंसान नहीं है....

मुझे तो वो फर्स्ट केटेगरी का म्यूटेंट्स लगता है...

अगर आप सभी ने मेरी मदद न की तो वो मुझसे साडी इनफार्मेशन छीन लेगा....??

डी1 - Db.Boss के पास उसका भी सलूशन है...

तुम उसका सामना करो बाकी आगे जो भी होगा हम संभल लेंगे....!!

डी6 - तो अब मेरे लिए क्या आदेश है...

क्या किसी प्रकार के हेल्प की उम्मीद राखु....??

डी1 - हुक्म ये है की....

अपनी फैलाई गंदगी को खुद hi साफ़ करो....

वर्ण सजा कामे लिए तैयार रहना...??

डी6 - Okay सर ! मैं उसे ख़त्म करने की कोशिश करता हु....

मरते डैम तक मैं इस ग्रुप का वफादार रहूँगा.

अगर न कामयाब रहा तो मेरी गईं को हाशिल कर लेना और उसे डिस्ट्रॉय कर देना...

वर्ण वो हमारे नेटवर्किंग में घुश जायेगा...??

चेयरमैन को सिवाय मायूसी के कुछ न मिला....

वहीँ दूसरी तरफ....

कभी कभी दुःख भी सुखदायी होते है...

सही मायने में बहुत अच्छी सीख दे जाते है....

वो बात अलग है की इंसान सब जान कर भी अनजान बना रहता है...

आज एक बार फिर से कबीर फॅमिली में खुशिया वापस लौट आयी थी...

हर तरफ बस ख़ुशी का माहौल छाया हुआ था...

गम के लिए शायद hi कोई जगह बची थी...

एक तरफ जहा हयान के वापस आने और अन्य के ठीक होने की ख़ुशी थी..

तो वहीँ दूसरी तरफ आदिगुरु महाराज के दुबारा दुर्लभ दर्शन पाने की ख़ुशी..

और रश्मि फॅमिली एक बार फिर से कबीर फॅमिली के साथ होने की ख़ुशी...

सब एक दूसरे से मिलकर बहुत खुश थे...

हर तरफ बस मिलान का माहौल था...

सब एकदूसरे का हाल चाल जानने में बिजी थे....

एक दूसरे को सही सलामत देख कर सब बहुत खुश थे....

माजी जो अब तक अकेले मंदिर में बैठी ईश्वर से प्रार्थना कर रही thi...Unki अभी फरियाद ईश्वर ने सुन ली सबको कुशल मंगल वापस भेज दिया....

माजी तो सब को अपने सामने देख कर फुले न समां रही थी...

उनका कहना था की....

सबको सही सलामत देख लिया... अब मौत भी आ गयी तो कोई गम नहीं...

काफी समय तक एक दूसरे के आवभगत में बिजी रहे....

आदिगुरु की उपस्थिति कबीर हाउस पर चार चाँद लगा दिए थे....

गुरु डचेन तो बहुत ज्यादा hi खुश दिख रहे थे गुरुवार से मिलकर....

उनकी ख़ुशी चेहरे से साफ़ कहलक रही थी...

सब ने मिल कर आदिगुरु महाराज की बहुत Hi श्रद्धा के पूर्वक निस्चल मन से सेवा की....

हालाँकि सबके मन में हजारों सवाल उठ रहे थे इस तरह अचानक गुरुवार को अपने सामने देख कर...

लेकिन सब अपने मन में उठ रही भावना को दबाये रखा और उचित समय आने का इंतज़ार करने लगे....

लेकिन अन्य को न जाने क्या हुआ था जब से उसने आदिगुरु महाराज को देखा था उनके hi चेहरे में खोयी हुयी थी...

जैसे किसी चीज़ की तलाश हो उसे....

इस बात से हयान बहुत ज्यादा हैरान था की अन्य तो पहली बार मिल रही है उनसे फिर ये आकर्षण कैसा...??

कबीर मीरा का हयान और अन्य से मिलकर खुश होना तो लाजमी था...

लेकिन सबसे ज्यादा खुश तेंजिन दिख रही थी...

ये बात अलग है की उसने अपने मन में पनप रहे दर्द को सब से छिपा के रख था...

लेकिन आज वापस हयान को देख कर उसके सब्र का बांध फुट पड़ा और हयान के गले लग कर बिलख बिलख कर रोई...

आज हयान भी खुद पर गर्व महसूस कर रहा था ki...Use इतने चाहने वाला परिवार जो मिला था...

हयान को यहाँ वापस आकर अपनी बेचैनी का राज़ मालूम हुआ....

अन्य की हालत का अंदाज़ा हुआ....

सब एक दूसरे से मिल कर अपने गीले - शिकवे दूर किये....

Mel-Milap होने के बाद सब ने मिल कर एक साथ खाना खाया...

और एक बार फिर सभी अपने जरुरी काम से फारिग होकर ादुगुरु महाराज जे समक्ष प्रस्तुत हुए.....

आगे की कहानी हयान और अन्य की जुबानी......

हम सभी आदिगुरु महाराज के सामने घेरा बनाकर बैठ गए...

मेरी मुलाक़ात तो उनसे पहले भी हो चुकी थी.

किन्तु बाकियों के लिए दुबारा थी तो किसी के लिए पहली बार...

सभी तक- ताकि निगाह लगाए ुबके ज्ञान रूपी वचनो को सुनने की आस में बैठे रहे ख़ामोशी के साथ...

काफी देर ख़ामोशी के बाद

सदनं जी के मुख से कुछ शब्द फुट पड़े....

आदिगुरु - जो मैं दीखता हु असल में मैं वो नहीं हु...

जो मैं नहीं हु वही मेरी पहचान है.....

मैं ईश्वर की उपासना करने वाला एक तुच्छ सा प्राणी हु..

जिसका कोई अस्तित्व नहीं... सिवाय ईश्वर के नयमो का पालन करने के....

मैं कही भी एक जगह नहीं रुक सकता..

इस दुनिया की भांति और भी दुनिया है...

जहा का संतुलन मुझे hi बनाये रखना होता है...

कुछ चीज़े सबकी समझ से परे होते hai...Use Hi परम शक्ति के नाम से जानते है...

उसका अस्तित्व न होकर भी होता है, सिवाय महसूस करने के और कुछ नहीं कर सकते..

जितना तुम सब को जानना आवश्यक था मैंने बता दिया....

सदनं जी - क्षमा करें गुरुवार ! अगर मैंने कोई ओछी बात की हो तो...

मैं तो बस जिज्ञासा वश आपके वास्तविक रूप को जानने के लिए उत्सुक था...

हम तो धन्य हो गए आपके इस रूप के बारे में जानकर...

हमरे बीच रहते हुए भी हम आपकी सही रूप से सेवा न कर पाए उसके लिए माफ़ कर दीजिये...

कबीर - माफ़ कीजियेगा गुरुवार ! अज्ञानता वश और पुत्र मोह में बाह कर हमारा भी विश्वाश टूट चूका था...

किन्तु आपने सही समय पर दर्शन देकर हमारे मन में जन्मे सभी दोष को दूर कर दिया.... और ईश्वर की महिमा रुपी ज्ञान की डीप पुनः हमारे मन में ज्वलित की....

हम सभी अपनी आखों में आंसू लिए गुरुवार के सामने शीश झुकाये क्षमा याचना करने लगे....

आदिगुरु - उठ जाओ सभी...

इतना निराश होने की आवश्यकता नहीं है....

तुम सभी ने वही किया जो उस हालात की कंग थी...

किन्तु एक बात याद रखना कभी भी मन से ईश्वर के प्रति अपना मोह विस्वास टूटने मत देना....!!

गुरुवार के ज्ञान रुपी भाषण सुनने के बाद एक बार फिर सबने पूजा की और गुरुवार ने सबको आशीर्वाद दिया....

पूजा समाप्ति के बाद सभी अपने अपने कमरे की तरफ जाने लगे....

सिवाय अन्य और सदनं जी के...

क्युकी उन्हें आदिगुरु महाराज ने अकेले मिलने को कहा...??

तीनो को अकेला छोड़ कर हुक सभी हाल में आ गए और रेस्ट करते हुए बातें करने लगे....

बीते दिनों में क्या क्या हुआ...

कैसा गुज़रा इन सभी बातों पर चर्चा करने लगे....

वही दूसरी तरफ....

आदिगुरु - शिष्य सदनं ! मेरी गैर मौजूदगी में तुमने अपने कार्य को बहुत hi अच्छे से किया...

मैं तुमसे बहुत प्रशन्न हु..

कुछ खामियां हुयी है हालाँकि ये आसान काम नहीं था...

इस्सलिये तुम्हारी सभी गलतियों को नज़रअंदाज़ किया जाता है...

सदनं जी - कोटि कोटि धन्यवाद गुरुवार ! आपने मुझे इस लायक समझ...

आदिगुरु - वैसे तो मैं सबको जनता हु... किन्तु मैं तुमसे जानना चाहता हु..

कौन है ये सब क्या जानते हो इन सब के बारें में.....??

सदनं जी - ********** (फॅमिली इंट्रो नेक्स्ट अपडेट में)

सदनं जी - मुझे आदेश दे मेरे अगले कार्य के लिए...??

ादुगुरु - फ़िलहाल तुम्हारा कार्य यहीं समाप्त होता है...

अब तुम्हें पुनः लौटना होगा अपने उद्देश्य की ओर...

आगे चलकर तुम्हें ईश्वर के ज्ञान रुपी ज्योति को जलाये रखना है....

इस्सलिये अपने ज्ञान से मनुष्यों के मन में फैके अंधकार को दूर करो....

ईश्वर की प्राप्ति में उनकी मदद करो...

सदना जी - जो आज्ञा गुरुवार ! मुझे आशीर्वाद दे की मैं अपने कार्य का निर्वहन पूर्ण श्रद्धा से कर सकू..



आदिगुरु - विजयी भाव शिष्य ! अब तुम अपने लक्ष्य की ओर जा सकते हो... अब तुम मुक्त हो मेरे दिए गए सभी वचनो से...

सदनं जी गुरुवार को प्रणाम करके अपने रूम की तरफ चले जाते है...

अब सिर्फ अन्य और गुरुवार hi रह गए थे...

सामने अन्य को देख कर गुरुवार मुस्कुरा उठते है...

अन्य फिर से किन्ही ख्यालों में गम हुयी बैठी थी...

आदिगुरु - पुत्री अन्य !!

खुद का नाम पुकारे जाने से और होने पैरों में में किसी का अहसास होने से अन्य वापस होश में आयी....

और एकदम से हद बढ़ाकर दूर हैट गयी....

आश्चर्य और घबराहट के साथ...

अन्य - ये ये अआप ककया कर रहे हैं...??

ऐसा करके मुझे पाप का भागीदार मत बनाईये.....??

आज के लिए बस इतना hi..

.......

..........

-----------

लाइक्स कमैंट्स और वोट्स का रखना Dhyan.....Aapka दोस्त हयान..!!
 
मैं आप दोनों का बहुत शुक्रगुज़ार हु....

जहा एक तरफ जी ने मेरे हौसले को Badhaya....aur मुझे लिखने के लिए प्रेरित किया...

वहीँ दूसरी तरफ

भाई जी ने शुरुआत से लेकर अब तक अपना बहुत कीमती साथ बनाये रखा है....

ऐसे कई रीडर्स है स्टोरी के जो अब तक मेरा भरपूर साथ निभाए जा रहे है...

उन सभी का शुक्रिया ऐडा करना चाहता हु....

जीने जाना था वो Gaye....Aur आगे भी जा सकते है...

मुझे उनसे कोई शिकवा शिकायत नहीं...

जो मेरे रियल रीडर है...

वो मेरा कभी साथ न छोड़ेंगे...

और न Hi मैं उनका साथ छोडूंगा...

कोशिश करूँगा की उन के नजरिये ंविं खरा उतरु...

थोड़ा सा काम में बिजी होने कारन उजड़ते भी लेट आ रहे है....

बूत मैं स्टोरी नहीं छोडूंगा.... कम्पलीट करके hi रहूँगा....

हालाँकि आज कल कमैंट्स और रिव्यु काम हो गए है...

बूत जितने भी है मेरे लिए उतने भी काफी है...

बहुत बहुत शुक्रिया गाइस... आप सभी का...
 
आज कल तो राइटर से ज्यादा रीडर्स बिजी है....??

:lol1:. :lol1:. :lol1:

या फिर कमैंट्स करने और रिव्यु देने में कोई इंटरेस्ट नहीं रहा....??

ामे या हौसला अफ़ज़ाई तो बनती hi Hai....Aise कैसे काम चलेगा....

आज कल कोई सुग्गेस्टिव hi नहीं दे रहा....??

क्या स्टोरी अपना ट्रैक खो चुकी है...??

:बकवास: और अपडेट देने में ध्यान Do...!!:bat1:. :बात1:
 
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मुहय्यā सब है अब asbāb-e-Holī ...

उठो यारो भरो Rañgoñ से झोलī..!!

आप सभी को हयान की तरफ से होली की ढेरों शुभकामनाएं....
 
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मुहय्यā सब है अब asbāb-e-Holī ...

उठो यारो भरो Rañgoñ से झोलī..!!

हैप्पी होली माय डिअर फ्रेंड हयान की तरफ से आपको और आपके परिवार को होली की ढेरों शुभकामनाये
 
भाई जी बास 2 या 3 अपडेट हिंदी में लिख डाके the...Bit रीडर नाराज हो gaye...Issliye हिंगलिश में कंटिन्यू की....

हम्म आपका कहना बिलकुल सही है...

मुझे स्टोरी का प्लाट बनाए में बहुत वक़्त लगा....

सीधे हीरो से न स्टार्ट करके विलन से स्टार्ट kiya.....aur हीरो के माँ डैड से जिससे स्टोरी का बेस मजबूत कर सकू....

हम्म अब समय आ गे है की हयान बाहरी दुनिया से रूबरू हो...

लेकिन इसे बहार आने से पहले अपने सुष्मनों को शांत करना होगा जिससे वो खुद की लाइफ को एंजोये कर सके नहीं तो उन्ही में फंसकर रह जायेगा....

अल Last....Upates बढ़ने के साथ साथ आपको स्टोरी पसंद आयी...

मुझे बहुत ख़ुशी हुयी....

थैंक यू वैरी मच भाई जी...

इतने बेहतरीन रिव्यु देने के लिए.....

और स्टोरी की तारीफ करके मेरे हौसला बढ़ने के लिए....

बस ऐसे Hi आगे भी अपना साथ बनाये रखे...

थैंक यू..!!
 
हम्म सही कहा सर जी....

जब वक़्त की कमी हो तो जज़्बात सही तरह से निकल कर सामने नहीं आ पते...

फीलिंग लेन के लिए उसमें Hi समां जाना होता है....

लेकिन मैं बिजी होने के कारन स्टोरी पर फुल कंसन्ट्रेट नहीं कर प् रहा....

....

बूत अन्य वे......

मैं नेक्स्ट टाइम से कोशिश करूँगा की फीलिंग्स को सही मायने में दर्शा सकू...

एंड थँक्स सर जी....

एक बार फिर से मेरी खामियां को उजागर करने के लिए....

और एक बेहतरीन रिव्यु देने के लिए....
 
Update..No..55* (फॅमिली इंट्रोडक्शन)

●MeGa..UpDaTe●


Abb..Takk...

आदिगुरु - वैसे तो मैं सबको जनता हु... किन्तु मैं तुमसे जानना चाहता हु..

कौन है ये सब क्या जानते हो इन सब के बारें में.....??

सदनं जी - ********** (फॅमिली इंट्रो नेक्स्ट अपडेट में)



Abb...Aage...

(फॅमिली इंट्रोडक्शन..)

वैसे तो मैमे शुरू के उपदटेस में इन दोनों का बहुत Hi खूबसूरती के साथ करैक्टर और डिटेल्स दे दिया था.....

कुछ रीडर्स ने तो इन्हें Hi स्टोरी का मैं करैक्टर समझ लिया था.....

मर. कबीर सोन

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सोनपुर का निवासी कठिन परिश्रम और लगन से जिसने अपने गांव से बहार निकल कर अपनी एक नयी पहचान बनायीं India's टॉप 10 बिजनेसमैन का ख़िताब खुद के नाम किया...

मरस. मीरा सोन

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कबीर की वाइफ विथ बुसिनेस्स पार्टनर इन्होने अपने पति का हर अच्छे और बुरे समय पर बखूबी साथ निभाया और बुसिनेस्स की ऊँची बुलंदियों पर पहुंचने पर सहयोग दिया....

तन की खूबसूरती के साथ साथ मन की भी सुन्दर अपनी दयालुता और स्नेह से सबके दिलों पर राज करने वाली.....

हयान 18यरस ओल्ड

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इनके बारे में जितना भी लिखू उतना Hi काम होगा....

क्युकी ये ठहरे स्टोरी के हीरो...

इनका करैक्टर धीरे धीरे खुलकर सामने आएगा....

Waise....Dikhne हैंडसम विथ स्मार्ट पर्सनल्टी

फाइटिंग में कुंगू फु, करते शाओलिन, मार्टिकल आर्ट्स की ट्रेनिंग..

अन्य 18यर 6मोनथस ओल्ड

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इस करैक्टर ने तो सबके दिमाग में उथल - पुथल मचा राखी है....

इनकी म्हणता के चर्चे तो दूर दूर तक फ़ैल रहे....

आदिगुरु भी इनके सामने शीश झुकाते....

अभी इनका करैक्टर भी छिपा हुआ है....

सो इनके बारे में भी डिटेल्स धीरे धीरे खुलकर सामने आएगा...

एंजेल ऑफ़ वाइट पावर

दिखने में भी एंजेल

फाइटिंग में हयान को भी पीछे छोड़ देती..

तेंजिन - 20+ईयर

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ब्यूटी विथ ब्रेन

मार्टिकल आर्ट्स, कुंग फु, जुडु करते, में हयान को टक्कर देती है..

कंप्यूटर एक्सपर्ट...

फ़िलहाल ये भी करैक्टर भी अभी खुलकर सामने नहीं आ रहा है...

रचना देवी - मीरा की माँ

रश्मि - मीरा की कजिन एंड कबीर बुसिनेस्स पार्टनर

विअज्य - रश्मि हस्बैंड एंड रश्मि के बुसिनेस्स पार्टनर

अखिल 21यरस ओल्ड

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रश्मि और विजय का बीटा,

मार्टिकल आर्ट्स ट्रैन,

सिंगापुर रेतुर्न.....

महिमा 19 यरस ओल्ड

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- रश्मि और विजय की डॉटर

फाइटिंग स्किल में होशियार

सिंगापुर रेतुर्न....

रिया

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- मीरा की मुँह बोली बहन


हयान एंड अन्य टीचर.

जैन -

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मीरा का मुँह बोलै भाई,


सिक्योरिटी हेड

हयान वेपन्स ट्रेनर

सदाफन जी - हयान और अन्य के गुरु.....

ाफिगुरु - *******†*******

डचेन - Tenzin's फादर हयान और अन्य के गुरु...

दोरजी - Tenzin's मदर....

मिस कनिका

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- Kabeer's पर्सनल सेक्रेटरी....

जो अब ऑफिस का सारा वर्क संभालती....

हनी - अरे दीवानो... मुझे पहचानो....??

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- बोले ट्रिंग ट्रिंग जिया, I'm योर हनी बन्नी, हनी बन्नी,

तोको तोको..

I'm योर पम्पकिन पम्पकिन, hello हनी बन्नी

फीलिंग समथिंग समथिंग, hello हनी बन्नी, हनी बन्नी

तोको तोको..

हाउ मान्य टाइम्स लेडी लव हद गिवेन में मिस्ड कॉल,

विल्लने ऑफ़ स्टोरी......

इनके बारे में भी डिटेल्स में शुरू के अपडेट में सब बता दिया है....

गेरयों

कस्सदेया,

बल्ला,

तामुलु,

बुमलीन, उर्फ़ Db.Boss

साकूबी,

नरकिस्सा..

इनके अलावा भी कुछ करैक्टर जो हल फ़िलहाल सामने ायें आये है और आगे भी कुछ आएंगे....

चेयरमैन डी6,

डी1, डी2, डी3, डी4, डी5....



चलिए अब वापस चलते है आदिगुरु और अन्य के पास....

देखते है उनके बीच क्या बातें हो रही है.....

खुद का नाम पुकारे जाने से और अपने पैरों में में किसी के स्पर्श का अहसास होने से अन्य वापस होश में आयी....

और एकदम से Had-badakar दूर हट गयी....

आश्चर्य और घबराहट के साथ...

अन्य - ये ये अआप ककया कर रहे हैं...??

ऐसा करके मुझे पाप का भागीदार मत बनाईये.....??

आदिगुरु - हे ! देव कन्या ! यह पाप नहीं ! अपितु मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी....

अन्य - मैं कुछ समझी नहीं.. आप कहना क्या चाहते है..??

एक तो आप मुझसे उम्र में बड़े है...

साथ साथ मेरे गुरु के भी गुरु है..

इतनी उच्च कोटि के ऋषि मुनि होकर एक आम कन्या के पेअर छूना आप पर शोभा नहीं देता...

आदिगुरु - शायद तुमने मेरी बात पर ध्यान नहीं दिया....

मैंने देव कन्या कहा...!!

इसका अर्थ यह हुआ की तुम एक आम कन्या नहीं हो..

तुम सबसे महान हो और उससे भी ज्यादा महान तुम्हारे जीवन का उद्देश्य है जिसके लोए ईश्वर ने तुम्हें चुना है....

गुरुवार ! की बातें सुनकर और अपनी सचाई सुन कर अन्य एक डैम शॉक हो जाती है...

उसके सामने उसके बचपन से लेकर अब तक की साड़ी घटनाये एक चल चित्र के रूप में आखों के सामने तैरने लगती है...

जो भी दिख रहा था उसे देख कर अन्य को अपनी आँखों पर तो यकीं नहीं हो रहा था....

Hich-kichate हुए...

अन्य - क्या क्या ये सच है...

मैंने जो अभी देखा....??

क्या यह सिर्फ सपना नहीं हक़ीक़त था....??

आदिगुरु - है पुत्री ! जो कुछ भी तुमने देखा यह कोई सपना नहीं हक़ीक़त है...

जिसे तुम अब तक महज़ एक ख्वाब समझ रही थी वो सात प्रतिशत सत्य है...

ऐसा हो चूका है...??

बस तुमने उन घटनाओ को महज़ एक ख्वाब समझकर भुला दिया....

अन्य - इसका मतलब मुझे चुना गया है....??

ईश्वर ने मुझे चुना है...

मई Hi हु वो देव कन्या...??

आदिगुरु - है पुत्री ! तुम hi हो....

मुझपर विश्वाश करो....

अन्य - लेकिन क्या मैं इस काबिल हु....

इस कार्य को करने के लिए सक्षम हु...

आदिगुरु - अच्छा तुम मेरे एक प्रश्न का उत्तर दो....

जल्दबाज़ी नहीं धैर्य से उत्तर देना...

"अगर तुम्हें हयान और अपने Maa-Baap में से किसी एक को चुनना पड़े तो किसे चुनोगी....??"

गुरुवार के ऐसे प्रश्न को सुनकर अन्य गहरी सोंच में डूब जाती है....

काफी देर सोचने के बाद अन्य - हया !!

आदिगुरु - बिलकुल सही उत्तर ! जो भी सोचकर तुमने उत्तर दिया है

वो सही है... और एहि तुम्हारा भाग्य है तुम इससे भाग नहीं सकती...

अन्य - किन्तु क्या यह सही है..??

यह तो पाप Hai..Prakriti के विरुद्ध होगा...??

आदिगुरु - जब ईश्वर ने खुद Hi यह खेल रचा है तो भला यह पाप कैसे हो सकता है...

यह सिर्फ आम मनुष्य के के लिए बनाये गए नियम है लेकिन तुम उन सब से परे हो....

वैसे भी जिस कार्य से दूसरों का उद्धार हो भला वो पाप कैसे हो सकता है....!!

अन्य - मैं मानती हु आपकी कही गयी बातें सत्य हो सकती है...

किन्तु मैं यह ज़िम्मेदारी नहीं उठा सकती..

मुझे माफ़ी करना गुरुवार !!

आदिगुरु - मुझे ज्ञात था की तुम्हारा एहि जवाब होगा...

किन्तु मेरी एक बाद सदैव याद रखना....

तुम अपनी तक़दीर से बाघ नहीं सकती... जो लिखा है वो होक Hi रहेगा.....

रही बात ज़िम्मेदारी उठाने की तो वक़्त आने पर हालात तुम्हें मज़बूर कर देंगे अपने कर्तव्यों की ओर जाने के लिए....

बस फर्क इतना है की तुम अभी अपने सत्य से अनजान हो...!!

अन्य - अगर ऐसा है...

तो मैं अपना फैसला भी वक़्त पर छोड़ती हु...

अगर एहि नियति है तो मैं खुद को रोकूंगी नहीं...

लेकिन मैं कभी भी किसी भी प्रकार के अन्याय को बर्दाश्त नहीं करुँगी...!!

अन्य और ादुगुरु महाराज के बीच काफी देर बहस चलती रही....

इधर मैं सबके सवालों का जवाब दे दे कर थक चूका था...

सबके मन में तरह तरह के सवाल थे.....

आखिर उस दिन हुआ क्या था...??

मैं कहा था....??

लेकिन मेरे पास सिवाय झूट बोलने के और कोई राष्ट न था..

इस्सलिये मैंने सबको बस इतना Hi कहा की अचानक गुरुमहाराज मुझे अपने साथ ले गए थे...

बिना किसी को बताये क्युकी उस वक़्त मेरी जान को खतरा था...

लेकिन मेरा यह सच सुनकर रश्मि मौसी ने अपने सालन सामने रख दिए...

क्युकी मैंने उनसे भी झूट बोलै था....

जिसे सुन कर माँ डैड और भी ज्यादा शॉक हो गए....

की उनको मैं Hi बचाकर लाया हु सिंगापुर से....

सभी सिचुएशन और भी ज्यादा पेचीदा होती चली गयी और सबको झूट झूट बोलकर उनके डॉब्टस क्लियर करता रहा...

मेरी बातों से कुछ लोग तो सटिस्फी हो गए गए लेकिन कुछ मुझे शक की निगाह से देखते रहे...

जिनमें से पहला नाम तेंजिन का था.....

लास्ट में आदिगुरु महाराज और अन्य के आने से सब के प्रश्न रुके...

क्युकी गुरुवार ने खुद कहा की मैं उनके Hi साथ था..

और उनके hi कहने पर मैं सिंगापुर गया...

सबके सवालों का किसी तरह जवाब देकर सबको शांत किया....

आदिगुरु महाराज ने अब सब कुछ सही हो जाने का संकेत दिया और हमें अपने हिसाब से लाइफ एन्जॉय करने का आदेश दिया....

ऐसा करने के लिए मैंने Hi उनसे कहा क्युकी अब मैं भी अपनी मर्जी की लाइफ जीना चाहता था...

हालाँकि खतरा अभी टाला नहीं था लेकिन अब मैं तैयार हो चूका था हर मुसीबत से लड़ने के लिए.....

गुरुवार ने माँ डैड को कुछ जरुरी बातें समझायी और लास्ट में वापस जाने की िक्षा जाहिर की....

क्युकी कुछ हद्द तक उनका कार्य सम्पत हो चूका था....

शाम होने को थी

गुरुवार और सदनं जी का सभी ने मिलकर बड़े hi सदर भाव के साथ विदाई दी....

गुरुवार ने सबको आशीर्वाद दिया और वचन दिया की जब भी जरुरी होगा वो आते रहेंगे....

सबकी आँखों में आंसू थे...

होते भी न कैसे...

एक तरफ जहा सदनं जी खुद घर में रहकर सबकी रक्ष और शिक्षण कर रहे थे...

जो की अब इसी फॅमिली का एक हिस्सा बन चुके थे...

वहीँ गुरुवार के आशीर्वाद से Hi मेरा और अन्य का जन्म हुआ था...

मेरे माँ डैड पर उनका बहुत Hi बड़ा क़र्ज़ था जो की शायद कभी उतर पते...

क्युकी यह क़र्ज़ नहीं एक आशीर्वाद था वो भी ईश्वर का...

लास्ट में मुझे और अन्य को बरी बरी कुछ जरुरी हिदायतें दी और कुछ जरुरी बातें समझईन...

जैन अंकल दोनों गुरु को लेकर मन गांव की तरफ़ा रवाना हो गए...

गुरुवार के जाने के बाद हम सभी भी वापस हॉल में आकर बैठ गए...

और एक दूसरे से बातें करने लगे....

लेकिन दो आखें मुझे घूर रही थी....

ऐसा लग रहा था की जैसे कुछ पूछना छह रही ho....Kuvhh कहना छह रही हो....??

अब तो बस दो Hi शख्स बचे थे जिन्हे मुझे जवाब देना बाकी रह गया था.... अन्य और तेंजिन....

और शायद इनके सामने अब झूट बोल पाना आसान नहीं होगा...??

आज के लिए बस इतना hi.....

सॉरी फॉर डिले.....

ऐसा अब होता रहेगा...... बहुत बिजी हु भाई लोग... आप लोग समझदार है.... प्रॉब्लम में यारों !!

 
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