Abb..takk..
हमारी वन माना गांव के लिए निकल गयी धीरे - धीरे आराम से....
सिक्योरिटी गार्ड से भरी हुयी एक गाडी वन के आगे और एक गाडी वन के पीछे चल रही थी....
अपडेट No. 26
Abb..Aage..
""पर्दे में रहने दो ....पर्दा न हटाओ,
पर्दा जो उठ गया...तो भेद खुल जायेगा..!!""
वन में गाना बज रहा था...
करीब 2.5 हरष के बाद हमारी गाड़िया माना गांव पहुँच गयी...
जब हम व्यास गुफा में पहुंचे तो हमारे रहने के लिए
पहले से सारा इंतेज़ाम हो रखा था,
सदनं जी ने हमे हमारे रहने के स्थान बताया....
सदनं जी - कबीर इन आदमियों को कहो की धोती और कुरता पहन कर रखवाली करे,
अपना भेष बदलकर जिससे की किसी को भी शक न हो और इनसे अपने हथियारों को गाड़ी में छिपकर रखने को कहो....
मई - जैसा आप कहे ऋषिवर ...
सारे गार्ड्स अपना भेष बदलकर कुटिया की रक्षा करने लगे....
कल महाशिवरात्रि thi...Kintu अभी तक गुरु महाराज के दर्शन नहीं हुए थे...
रात के 8 बजे के समय मीरा को फिर दर्द उठा मैंने सदनं जी को बुलाया...
उन्होंने मीरा के ऊपर गंगाजल छिड़का और कुछ मात्रा Padhe....jisse आराम मिला...
""ऋषिवर क्या मेरी भेंट गुरुमहारज से हो सकती hai...mujhe बहुत जरुरी बात करनी है.."
धैर्य रखो कबीर !!
जब उचित समय आएगा गुरुवार खुद तुम्हारे समक्ष प्रस्तुत होंगे और तुम्हे साडी चिंताओं का हल भी देंगे...
अब मुझसे मीरा का यह हाल बर्दाश्त के बहार हो रहा था...
न जाने कैसे सह रही थी रोज रोज ये दर्द
आज तो मीरा का पेट भी रोज की अपेक्षा ज्यादा बहार को निकला हुआ प्रतीत हो रहा था....
न जाने कौन सा इन्फेक्शन हो गया था...
डॉक्टर को दिखते तो सायद कुछ समझ भी आता
परन्तु महागुरु की वचनो के कारन मई खुद को रोके हुए हु....
मई मीरा के बाजु मई बैठा मीरा का दर्द बाँट ने लगा,
मेरी जब भी नन्ही गुड़िया के चेहरे पे नजर पड़ती सरे दुःख दर्द दूर हो जाते थे....
ऐसे hi वक़्त गुजरता जा रहा था पास बैठे हुए....
रात्रि 11.30 बजे
गुरुमहाराज कुटिया में पधारे...
मैंने उन्हें प्रणाम किया और गिड़गिड़ाने लगा मीरा के दर्द निवारण के लिए...
आदिगुरु - संयम रखो पुत्र सब अच्छा hi होगा...
फिर महागुरु मीरा के बीएड के चक्कर लगते हुए मंत्र जाप करने लगे...
और हाथों में लिए लाल रंग के पाउडर से बीएड के चारो ओर एक घेरा बना दिया...
मई चुपचाप खड़ा सब देखने लगा
आदिगुरु - पुत्र कबीर इस कन्या को अपनी गॉड में लो, और मीरा के पास बैठ जाओ...
माजी की तरफ इशारा करते हुए..
तुम बहार जाकर प्रतीक्षा करो...
जब तक मेरी अनुमति न हो कोई भी अंदर या बहार मत जाना...
आदिगुरु ने एकबार मीरा के सर पर हाथ फेरा फिर मुझे गुड़िया के साथ मीरा की दाहिनी तरफ बैठा दिया...
खुद मीरा के करीब एक टेबल में बैठकर मन्त्रों का उच्चारण करने लगे....
यह सब लगभग 15 मं चला और गुरुमहाराज उठे और बहार की तरफ इशारा किया....
बहार से 1 ऋषि कन्या आयी जो मीरा के डिलीवरी के दौरान थी...
गुरु जी ने उन्हें कुछ समझाया....
और फिर ध्यान में बैठकर मन्त्रों को जोरर से पढ़ने लगे....
बहार से भी मंत्रो और कीर्तन की ध्वनि गूंजने लगी....
ऋषि कन्या - गुड़िया का दाहिना हाथ मीरा के पेट में रखो....
मैंने गुड़िया का दाहिना मीरा के पेट पर रखा..
तभी मीरा को तेज दर्द उठा वो जोरर जोरर से चिल्लाने लगी....
हाथों को पटकने lagi...Aankhein दर्द से बहार को आने lagi...aansu लगातार बहने लगे..
मई तो फटी आँखों से मीरा के इस दर्द भरे रूप को देख रहा tha....na जाने कितना असहनीय दर्द सह रही थी इस वक्त मीरा...
मन्त्रों की गूँज और मीरा के दर्द की दर्दनाक चीख और तेज़ हो गयी....
तभी आदिगुरु उठे और मीरा के पेट पर हाथ रखकर मंत्र पढ़ा और पुनः अपनी जगह में दूसरी तरफ मुँह करके बैठ गए....
"गुड़िया को मीरा के दाहिनी तरफ लिटाकर शीघ्र hi बहार जाओ और इंतज़ार करो....." ऋषि कन्या जोरर से कहा..
मई बहार आ गया...
बहार भी कुछ अजीब रंगत थी..
खुशनुमा माहौल...
और साथ मेरी परेशानियां..
बहार कुटिया के बहार लगभग 7 ऋषि कन्या और 15 ऋषिवर इस वक़्त बैठे मंत्र पढ़ रहे थे ऊँची आवाज़ में तभी.....
अचानक से मेरे सीने में दर्द उठने लगा...
सांस लेने में तकलीफ होने लगी...
चांदनी रात अमावस्या की खौफ नाक काली रात का रूप ले लिए,
हवा भी रुक गयी...
ये सिर्फ मेरा hi हाल नहीं था...
माजी भी अपने सीने को पकडे तेज़ तेज़ साँस लेने की कोशिश कर रही थी....
बहार बैठे ऋषि भी खुद को सँभालते हुए मन्त्रों का उच्चारण कर रहे थे...
सारे गार्ड्स वही पर छाती पकडे बैठे हुए थे..
हर तरफ सन्नाटा पसर गया...
अगर कुछ सुनाई दे रहा था तो सिर्फ मीरा की चीख और मंत्रो की ध्वनि...
ठीक 12 बजे अचानक तेज़्ज़ हवा और बिजली चमकने lagi....Mausam ने अचानक अपना रौद्र रूप ले लिया....
तभी तेज़्ज़ बिजली चमकी और उधर मीरा की बहुत दर्दनाक चीख सुनाई पड़ी...
अचानक से मुझे, माजी और गार्ड्स को तेज़ झटका लगा हम सभी कुटिया से दूर जा गिरे...
ऐसा लगा किसी साये ने हमे उठा कर दूर फेंक दिया और खुद कुटिया की तरफ गया..
फिर अचानक हर तरफ श्वेत प्रकाश फ़ैल gaya...Jo कुटिया के भीतर से आता प्रतीत हो रहा था...
अचानक वो प्रकाश बंद हो गया...
हर तरफ घुप्प कला अँधेरा...
उस श्वेत प्रकाश के फैलने से वह पर किसी की दर्द भरी चीख गुंजी और और अचानक आग में जलता हुआ कोई आसमान की तरफ उड़द गया...
फिर मुझे अंदर से गुड़िया के रोने की आवाज़ सुनाई दी.....
मैं तुरंत उठकर कुटिया की तरफ भगा...
किन्तु अंदर न जा पाया...
अब सब कुछ ठीक हो चूका था माजी भी ठीक थी और गार्ड्स भी...
सब इस विचित्र घटना से परशान तो थे लेकिन सब चुप थे...
सवाल तो हजार थे किन्तु जवाब एक भी नहीं..
करीब 30 मं बाद ऋषि कन्या बहार आयी
और मुझे बस अंदर जाने को कहा
माजी को बहार hi रुकने को बोलै...
मई तुरंत अंदर गया मीरा के पास....
जब मीरा के करीब पहुंचा तो डर के मरे मेरी चीख निकल गयी.....
शैतान लोक
वहीँ दूसरी तरफ शैतान लोक में....
कस्सदेया ध्यान में बिठा था...
की अचानक उसकी आखें खुल गयी..
उसकी आखें ख़ुशी से चमक रही थी...
और चेहरे पे एक विजयी मुश्कान दिख रही थी....
""हहहह ः वक़्त आ गया है...
जिसकी मुझे न जाने कब से प्रतीक्षा थी..."", कस्सदेया बोलै.
डेमों 1 - क्या हुआ मालिक ?
आज कितने दिनों के बाद आपके चेहरे पे हंसी..??
कस्सदेया - क्या करू बात hi इतनी ख़ुशी की है..
जाओ सरे शैतान लोक को खबर कर दो की आज बहुत ख़ुशी का दिन है...
जश्न की तयारी करो...
बहुत जल्द सब कुछ बदलने वाला है...??
""बुमलीन !!""कस्सदेया जोर से चिल्लाया...
बुमलीन तुरंत कस्सदेया के समक्ष प्रस्तुत हो गया...
""क्या खबर लाये हो वह से.."" कस्सदेया बोलै,
बुमलीन - मालिक मुझे वह बहुत hi बड़ी काली शक्ति का श्रोत महसूस हुआ,
किन्तु जब मैं वह उस शक्ति के पीछे पहुंचा तो वह का नजारा hi बदल गया...
जहाँ पहले मुझे ब्लैक पावर की स्ट्रांग एनर्जी महसूस हो रही थी..
की अचानक मेरे करीब पहुँचते hi वो ब्लैक एनर्जी वाइट एनर्जी में बदल गयी...
मैं उस शक्ति तक नहीं पहुँच पाया
और मुझे उस शक्ति से दूर भागना पड़ा...
वर्ण मई जलकर खख हो जाता...
कस्सदेया - ओह्ह तो ये बात है...
आखिर कब तक के लिए..??
और कस्सदेया जोर जोरर से हंसने लगा...
कस्सदेया - बुमलीन एक काम करो..??
बुमलीन - हुक्म कीजिये मालिक,
मेरे लिए क्या कार्य है. ??
कस्सदेया - जो कुछ भी मैंने समझाया था,,
उसका वक़्त आ गया है..
अब से तुम अपने काम लग जाओ..
बिलकुल सावधानी से...
बिना किसी के नजर में आये...
कस्सदेया - जश्न की शुरुआत करो...
पारी लोक में...
ृषीधर कुछ तो बुरा हो रहा है...??
किन्तु ये अच्छे संकेत कहा से आ रहे हैं...??
आज के लिए बस इतना hi...
""जो अपना वाडेंपूरे करने का रखे Dhyaan......Wo मई हु !! आपका दोस्त हयान..!!""
ामे यार एक लिखे तो तो बनता है न...