Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 14 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

थैंक्स सर जी..

फॉर योर ब्यूटीफुल आनद सुग्गेस्टीवे रिव्यु...

आपके रिव्यु से मुझे हमेशा बहुत कुछ सीखने को मिलता है ...

थोड़ा बिजी होने के कारन डेली अपडेट नहीं दे ोा रहा और न hi ठीक तरीके से लिख प् रहा हु... वक़्त hi नहीं मिलता पॉइंट के बारे में ज्यादा सोचने समखने का...

अन्य वे कोशिश रहेगी... अच्छा किखने की और स्टोरी को जल्द से कम्पलीट करने की...


थैंक्स भाई...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड सपोर्टिंग...

कीप वेटिंग एंड स्टे विथ उस...

नेक्स्ट अपडेट पोस्टेड ात पेज No.233
 
ही गाइस !!

आप सभी से माफ़ी चाहूंगा नेक्स्ट अपडेट के इंतेज़रर जे लिए...

सो गाइस काम के चलते बहित बिजी हु..

नेक्स्ट अपडेट नहीं लिख पाया... और न बैकअप अभी तक बना पाया..

सो नेक्स्ट अपडेट कल या फिर परसों पक्का आ जायेगा..

मुझे खुद बुरा लगता.. की डेली अपडेट देने वाला 2 दिन में 1 अपडेट मुश्किल से दे प् रहा..

थैंक्स गाइस !! फॉर वेटिंग एंड सपोर्टिंग !!
 
भाई जी कोशिश थी की मेगा अपडेट दूंगा ..

बूत ज्यादा लिख न पाया...

और जैसा एडिट किया था वाईएस hi कोप्यपस्ते कर दिया...

मगोपड़ाते का टैग हटाना भूल गया...


थैंक्स भाई..

हमेशा की तरह शानदार और लाजवाब रिव्यु देने के लिए...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड सपोर्टिंग..

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखे...
 
Update..No..50*

MeGa..UpDatE


जैन - सर ! हम अपनी खोज आज से hi सुरु करेंगे... वो भी उसी एड्रेस से.....

देखते है क्या मिलता है उस एड्रेस में...??


कबीर - मैं भी तुम्हारे साथ उस एड्रेस पर चलूँगा..

जैन - No सर ! आप नहीं जा सकते,

आपको यही रहना होगा..

हम उस मास्क मन के बारे में कुछ नहीं जानते..

वैसे भी उसकी दरिंदगी को आप देख hi चुके मैं आपकी जान खतरे में नहीं दाल सकता..

कबीर - बूत एक एहि लीड मिली है हयान तक पहुंचने की मैं ऐसे हाथ पर हाथ रख कर नहीं बैठ सकता...

जैन - जो भी हो सर,

मैं मंटा हु आपको अपने बेटे की ज्यादा फ़िक्र है..

बूत आप मीरा दीदी और अन्य बेटी को इग्नोर कर रहे हो...

उनको आपकी ज्यादा जरुरत है..

वैसे मजी की भी तबियत ठीक न रहती..

जरा उनके बारे में भी सोचिये..

कबीर - ठीक है मैं घर पर रुकूंगा..

बूत मुझे पल पल की खबर चाहिए..

जैन - सर अब आप बिलकुल निश्चिंत रहे..

एक बार लापरवाही हो गयी जज़्बात में बाह कर बूत अब कोई भी चूक न होगी..

आपको हर एक पल की खबर मिलती रहेगी

कबीर - Okay,

इस बार खली हाथ मत लौटना..

मेरे बेटे की खबर लेकर आना..

जैन - Okay सर..

अब मैं चलता हु..

कुछ तयारी कर लू हालात के मुताबिक..

जैन सर्वर रूम से निकल कर सभी गार्ड्स के पास जाता है..

और मिशन पर चलने के लिए रेडी रहने को बोलता है..

इधर कबीर भी मीरा के पास जाता है जो की बीएड पर लेती हुयी थी..

कबीर - कब तक यूँही ऐसे अपना हाल बनाये रखोगे .

काम से काम बेटी अन्य के बारे में तो सोंचो..

उसे तुम्हारी जरुरत है..

मीरा - उसको मेरी जरुरत नहीं है किसी की जरुरत नहीं है....

जरुरत होती तो एक बार माँ कहके पुकारती तो सही..

1 हफ्ते से यूँही खामोश लेती है..

मुझसे बात भी नहीं करती...

तो मैं क्यों जॉन उसके पास..

कबीर - ये कैसी बहकी बहकी बातें कर रही हो तुम मीरा !

उसे तुम्हारे ममता की जरुरत है..

तुम्हारा प्यार उसे ठीक कर देगा...

उसके पास जाओ...

वो सदमें में है

अपने भाई के जाने के गम में...

तुम तो समझदार हो..

तुम कैसे बहकी बहकी बातें कर सकती हो...

मीरा - है मैं बहक चुकी हु.. पागल भी हो गयी हु..

एक तरफ मेरी बेटी मुझसे बात न कर रही..

तो दूसरी तरफ बेटे की सूरत देखने के लिए ये मेरी आखें तरस गयी है...

कबीर - खुद को सम्भालो..

सब ठीक होगा.

एक बात और.. हयान का पता चल गया है..

जैन जल्द hi उसे लेकर आ जायेगा...

मीरा तुरंत बीएड से उठाकर बैठ गयी..

आँख में खुसी के आंसू छलक पड़े..

बदहवास होते हुए..

मीरा - कहा है मेरा बीटा मुझे अभी उससे मिलना है..

मुझे ले चलिए उसके पास प्ल्ज़ मुझे ले चलो.

कबीर - शांत हो जाओ मीरा. जैन उसे लेने गया है .

शाम तक लेकर आ जायेगा...

फिर उससे जी भर के मूल लेना..

मीरा - नहीं नहीं मुझे अभी उससे मिलना है...

मैं आपके आगे हाथ जोड़ती हु मुझे उसके पास ले चलो...

कबीर - हम वह नहीं जा सकते..

वो शाम तक आजायेगा...

लेकिन तुमको और अन्य को ऐसी हालत में देखेगा तो उसे बहुत तकलीफ होगी..

इस्सलिये खुद को सम्भालो और अपनी बेटी के पास जाओ...

उसे तुम्हारी जरुरत है...

मीरा - ठीक है ठीक है.. मैं जाती हु..

मैं एक डैम ठीक हु..

मेरी बेटी भी ठीक हो जाएगी..

अब सब ठीक हो जायेगा..

बस तुम हयान को ले आओ...

काबवेर - ये हुयी न बात..

बस कुछ घंटे और सब्र कर लो..

वो तुम्हारे पास होगा...

मीरा उठाकर अन्य के रूम की तरफ चली गयी...

कबीर बीएड मैं बैठा सोचने लगा


मैंने मीरा को झूठी तसल्ली तो दे दी है..

क्या सच में जैन को वह कुछ मिलेगा..??

कबीर वही बीएड पर बैठे बैठे हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना करने लगता है...

हे भगवन मेरे बेटे को मुझ तक पहुंचा दो..

यहाँ कई ज़िंदगियाँ दांव पर लगी हुयी है..

उसे कुछ हुआ तो हम जी नहीं पाएंगे...

कबीर का सब्र का बांध टूट गया और उसके आँख से आंसू छलकने लगे...

कुछ देर यूँही रोटा रहा..

खुद को सँभालते हुए माजी की तरफ चल दिया .

उनकी भी हालत ठीक न थी...

इधर मीरा अन्य के रूम में आ गयी थी...

वो उसके बीएड में बैठी उसके चेहरे में हाथ फेर रही थी...

मीरा - प्ल्ज़ उठ जा मेरी बची कब तक युहीं खामोश लेती रहेगी..

मुझसे बात कर ...

तेरी नाराजगी तो हयान से है न..

तू मुझसे क्यों रूठी है..

अन्य के चेहरे को चूमते हुए रोने लगी..

बेटी उठ जा देख तेरी माँ रो रही हज.. तुझे बुला रही है..

बस एक बार अपने मुँह से माँ कह दे बस एक बार...

तेरा हय्यू ! आने वाला है... तेरे अंकल उसे वापस लेने गए है..

वो जल्दी आ jayega..tujhe ऐसी हालत में देखेगा तो वो बहुत रोयेगा .

बहुत तकलीफ होगी उसे...

उठ जा मेरी बची..

काफी देर मीरा यूँही अन्य से लिपटे आंसू बहती रही..

लेकिन अन्य को इस सब से कोई फर्क न पड़ा वो वैसे hi बेहोश लेती रही ...

उसका चेहरा एकदम कुम्हला सा गया था..

चेहरा मुरझाया हुआ..

बाल बिखरे हुए..

ऐसा लग रहा था जैसे किसी चाँद पर दाग लग गया हो...

मीरा - मेरी बची खुद को देख तो सही..

क्या हालत बना राखी है...??

तुझे मेरे हाथ से मालिश करना बहुत पसंद है न रुक मैं अभी आती हु..

तेरी अच्छे से मस्सगे कर दूंगी..

तुझे एक डैम पारी के जैसे तैयार करुँगी..

तेरा हय्यू ! आने वाला है न..

मीरा बीएड से उठने लगी...

कबीर तुरंत दरवाजे से हैट कर दूसरी तरफ चला गया..

उसकी आखों में भी आंसू थे..

जो की मीरा की ममता और तड़प को देख कर अपने आप बाह निकले थे..

मीरा किचन में जाकर आयल गरम करके वापस अन्य के पास आ जाती है...

अन्य के सर को अपनी गॉड में रख कर उसके बालों को सहलाने लगती हज...

और बिलकुल हलके हाथों से उसके सर की मस्सगे करने लगती है..

कबीर वापस आकर दरवाज़े पर खड़ा हो गया. ..

और मीरा की हरकतों को देखने लगा..

मीरा बहुत प्यार से मस्सगे करती रही ..

मीरा - मेरी बची तू अपने माँ के दिल की तड़प को तो सुन hi सकती है...

क्या तुझे मेरे प्यार में कोई कमी दिखी जो तू मेरी बात नहीं सुन रही..

प्ल्ज़ एक बार बस एक बार अपने मुँह से मुझे माँ बुल दे...

फिर मैं तुझसे कोई शिकवा गिला न करुँगी...

एक बार फिर मीरा रोने लगती है...


गॉड में अन्य के लेते होने कारन... मीरा के आंसू सीधा अन्य के फेस पे गिरते है...

जिअसे अन्य की आँखों से भी आंसू निकलने लगते है..

मीरा मस्सगे करते हुए रोये जा रही थी..

उसने अन्य की आखों में बहते हुए आंसू की तरफ न ध्यान दिया...

मस्सगे ख़त्म करने के बाद..

जब मीरा ने अन्य के फेस को देखा तो उसके गाल गीले पड़े थे..

मीरा न समझा ये उसके hi आंसू की बूंदे है...

मीरा अनजान बनकर रह गयी...

आज मीरा के साथ - साथ अन्य भी रो रही थी..

बेहुएहि की हालत में...

शायद उसने अपने माँ के दिल की तदाओ महसूस कर ली थी...

शायद इसी लिए बेहोशी के हालत में भी होने के बाद उसके आंसू बाह निकले....

मीरा वापस उठी और कबीर को बुलाने लगी...

मीरा - ाजी सुनते हो..??

कबीर कमरे में एंटर करते हुए...

कबीर - क्या हुआ ..??

कुछ काम था क्या..??

मीरा - वो रिया कहा है..??

अन्य को नहलाना था .

आप जरा उसे बुला दे..

कबीर - वो तो माजी की देख भल करने में लगी हुयी है..

थोड़ा देर रुक जाओ वो आती होगी..

मीरा - रहने दीजिये..

ऐसा करे आप,

एक कुर्सी में अन्य को बाथरूम में बैठा दीजिये बाकी मैं खुद hi कर लुंगी..

कबीर आगे कुछ भी न बोलै..

मीरा जैसा छह रही थी वैसा hi करने दिया...

एक कुर्सी को लेकर बाथरूम में रख दिया..

और अन्य को गॉड में ले जाकर कुर्सी पे बैठा दिया...

मीरा बाथरूम में आ गयी और कबीर को वापस जाने को कहा...

मीरा अन्य को अच्छे से नहलाती है..

और उसके बदन को ठीक से पोछकर

हयान का सबसे फवौरीते कलर का ड्रेस पहनती है....

जो की ग्रीन और येलो का मिक्स कॉम्बिनेशन गौण था...

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मीरा वापस कबीर को आवाज़ देती गई..

अन्य को वापस बीएड पर लुटा देता है..

मीरा - नहीं नहीं उसे वह मत लिटाओ..

मैं व्हील चेयर लेकर आती हु..

उसे गार्डन में ले चलो..

यहाँ रूम के अंदर रह रह कर उसका डैम घुटने लगा होगा...

कबीर को भी मीरा की बात ठीक लगी...

और बहुत ख़ुशी भी हुयी की मीरा अब बिलकुल होश में आ चुकी है...

कबीर और मीरा अन्य को व्हील चेयर में बिठा कर गार्डन में ले आते है..

जहा सदनं जी और तेंजिन ध्यान में बैठे होते है...

जब अन्य वह पहुँचती है..

तो सब अन्य को वह देख कर बहुत खुश होते है.....

इधर जैन देहरादून अपने चाँद साथियों के साथ पहुँच गया था...

जो एड्रेस उन्हें उस वीडियो से मिला था वो देहरादून से बहार जंगल में बने किसी फार्म हाउस का था ...

जैन सीधा उसी फार्महाउस की तरफ निकल गया....

वह पहुंचने पर सिर्फ फार्महाउस के मालिक के नाम के शिव कुछ न मिला...

जैन - Hello सर ! हमें यहाँ कुछ नहीं मिला...??

यह एक फार्म हाउस का एड्रेस है जो की सिटी से बहार है...

इसका मालिक आपका बुसिनेस्स अर्रिवाल है...

कबीर - ...........

जैन - Okay सर ! मैं अभी साडी डिटेल्स और लोकेशन आपको भेजता हु...

जैन वह से वापस देहरादून सिटी के लिए रावण हो जाता है...

और पहुँचता है..

Company....IMRB

जैन - Hello सर !

वो यहाँ नहीं है...

वो बुसिनेस्स के सिलसिले में सिंगापुर गया है 1 दिन पहले....

जैन वह से साडी इनफार्मेशन लेकर

जैन वापस सोनपुर के लिए निकल गया...

इधर कबीर की चिंताएं और से बढ़ जाती हैं...

सिंगापुर का नाम सुनकर...

कबीर ने तुरंत रश्मि दी के पास कॉल लगा दी...


लेकिन रश्मि दी कॉल नहीं पिक क्र रही थी...

कबीर ने विजय जीजू को भी कॉल किया बूत उनसे बात न हो पायी...

कबीर - ये कोई कॉल क्यों नहीं पिक कर रहे...

कबीर को फिर से किसी बड़ी अनहोनी की आशंका होने लगी....??

कबीर बेशब्री से जैन के आने का वेट करने लगा....??

वहीँ दूसरी तरफ.....

आदिगुरु - पुत्र हयान ! अब तुम जितना ज्यादा म्हणत और कठिन तपस्या करोगे उसी के अनुशार hi तुम्हें शक्तियां प्राप्त होगी....



मैं - जैसा आप कहे गुरुवार !

किन्तु अब मुझे करना क्या होगा...??

आदिगुरु - पाप...??

मैं - कक्किय्या...?? पाप !!

मैं कुछ समझा नहीं गुरुवार...??

आदिगुरु - तुमने बिलकुल सही सुना है पुत्र ! जिस नियति के लिए तुम्हें चुना गया है, उसकी राह इतनी सरल नहीं है उसमें तुम्हें खुद को बलिदान भी करना पद सकता है..

सभी मोह माया को त्यागकर तुम्हें अपने पथ पर पूरी दृढ़ता का से साथ आगे बढ़ना होगा..

मैं - गुरुवार मुझे आपकी बातें बिलकुल भी न समझ आ रही है,

मेरे कार्य और नियति से पाप का क्या सम्बन्ध....??

आदिगुरु - सब समझ जाओगे नियति तुम्हें खुद संकेत देगी,

मैं तो बस तुम्हें आगाह कर रहा हु..

तुम्हारे इस जीवन में बहुत से अनचाहे मोड़ आएंगे...

न छह कर भी तुम्हे अपने मार्ग पर अडिग रहना होगा...

तुम्हें ऐसे भी कार्य करने होंगे जिनकी इज़ाज़त समस्त संसार नहीं देता..

प्रकृति के विरुद्ध भी जाना पद सकता है.. .??

मैं - गुरुवार कोई भी रह हो अगर उसमें सचाई और दूसरों की भलाई छिपी होगी तो उस कार्य को करने से कभी पीछे नहीं हटूंगा...

ये मेरा आपसे वचन है गुरुवार !!

आदिगुरु - ये तो समय आने पर ज्ञात होगा की तुम उस हालात से कैसे निकलते हो...

एक बात हमेशा याद रखना हत्या तो सिर्फ हत्या होती है..

चाहे किसी निर्दोष की की जाये या किसी पापी की...

वो हत्या hi होगी और यह एक पाप भी होगा ...

ये बात अलग है की पापी की हत्या को सभी अच्छा मानते,

लेकिन यह उस ईश्वर के बनाये गए नियम के विरुद्ध जाना होगा ...??

मैं - गुरुवार ! मुझे इन सब बातों से फर्क नहीं पड़ता मैं सभी कठिनाइयों से लड़ने के लिए तत्पर रहूँगा..

मेरी हमेशा कोशिश एहि रहेगी की

मेरे किये गए किसी भी कार्य से सिर्फ इस संसार का कल्याण hi हो...!!

आदिगुरु - पुत्र ! मुझे भी तुमसे ऐसी hi उम्मीद है,

अपनी नियति की ओर तत्पर रहना, एक दिन सब कुशल मंगल होगा .. !!

पुत्र ! तुम्हारी वापसी का समय आ चूका है.. तुम्हें अपने घर लौटना होगा अपनी नियति की ओर...

आदिगुरु - अब तक जो भी तुमने सीखा है, उससे तुम सभी अस्त्र शास्त्र का सामना कर पाओगे, कोई भी तुम्हे किसी भी युद्ध में परास्त नहीं कर पायेगा,

किन्तु तुम्हें खतरा सिर्फ उस शत्रु से नहीं होता जो सामने से वार करे,

सबसे ज़्यादा खतरा आस्तीन में छुपे सांप से होता है.

उन लोगों से भी है जो हमें अपने जाल में फसा कर षड़यंत्र द्वारा हानि पहुंचते हैं,

ऐसा तुम्हारे साथ किया hi जा चूका है...

इस ब्रम्हांड का सबसे बड़ा मायाजाल वो समाज है जहाँ हम रहते हैं, मिथ्या, धोकेबाज़ी , वो अस्त्र है जो सीधे हमारे ह्रदय पर वार करते हैं और एक ऐसा कष्ट पहुंचते है जो किसी प्राण घाटी मंत्र से भी ज़्यादा पीडादेई होता है...

आदिगुरु - पुत्र ! मैं तुम्हें वरदान देना चाहता हु...

कहो क्या मांगते हो...??

मैं - गुरुवार ! आपने मुझे अपना शिष्य बनाया शिक्षा दी, मेरा मार्गदर्शन किया...

यह मेरे लिए किसी वरदान से काम नहीं, मुझे किसी भी प्रकार के वरदान की अब आवश्यकता नहीं....!!

मुझे बस अपना आशीर्वाद दे दीजिये.. समय समय पर मेरा मार्गदर्शन करते रहे बस मुझे कुछ नहीं चाहिए..!!

आदिगुरु - पुत्र ! तुम सच में एक पुण्य आत्मा हो,

मेरे वरदान मांगने पर भी तुमने कुछ नहीं माँगा,

तुमको वही मिलेगा जिसके लिए ईश्वर ने तुम्हें चुना है...

जिस नियति के चलते तुम्हारा जन्म हुआ है...!!

अब सब तुम पर निर्भर है तुम कैसे इस मार्ग पर चलते हो..!!

मैं - गुरुवार ! मुझे अपने दूसरे रूप का तो ज्यादा पता नहीं किन्तु..

मैं हयान सिर्फ सत्य की राह पर hi चलूँगा.. भले hi इसके लिए मुझे हज़ारों कुर्बानिया क्यों देनी पद जाये..!!

आदिगुरु - अति उत्तम पुत्र ! मैं तुमसे बहुत अधिक प्रसन्न हु !!

आज मई तुम्हे एक नयी शिक्षा देने वाला हूँ जिसके उपयोग से कोई भी तुम्हे धोका नहीं देगा.....

मई- नयी शिक्षा,

वो क्या है गुरुवार ..??

आदिगुरु - अनुभवति इस मंत्र के उपयोग से तुम किसी के भी मन को पढ़ सकोगे......

और दूसरा दर्शनम करोति, ी स मंत्र के उपयोग से तुम किसीके भी आँखों ने जो भी देखा होगा या उस पल देख रहा होगा, वो सब तुम भी देख सकोगे.....!!

मैं - कोटि कोटि धन्यवाद गुरुवार जो मुझे इस काबिल समझा...!!

आदिगुरु - पुत्र ! अब तुम्हारे जाने का समय हो चूका है...

आशा करता हु की तुम इसी तरह अपने व्यक्तित्व से सबकी सहायता करोगे और अपने कर्तव्यों का पालन सत्यनिष्ठा और प्रेम पूर्वक करोगे और हमेशा सत्य की राह पर चलोगे...!!

मैं - गुरुवार ! ऐसा hi होगा...!!




आदिगुरु - ठीक है पुत्र ! विजयी भाव ! मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ रहेगा...

मैं गुरुवार के सामने झुक कर उनके चरणों को स्पर्श कर आशीर्वाद लेता हु....

गुरुवार मेरे दर पर अपना हाथ फेरते है...

उनके हाथ से वाइट और ब्लू कलर की मिक्स रौशनी निकलती है और मेरे सर में शमा जाती है....

कुछ पल के लिए मेरा पूरा शरीर ब्लैक हो जाता है..

फिर धीरे धीरे ग्रीन होने लगता है...

और अचानक से मेरा शरीर गायब जाने लगता है...

मैं वह से गायब होकर एक अनजान शहर जा पहुंचा...

जिस जगह मैं प्रकट हुआ वह बड़ी बड़ी इमारतें बानी हुयी थी...

बहुत hi Hi-tech और मॉडर्न सिटी दिख रही थी....

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सामने बोर्ड पर सिटी का नाम पढ़ कर मैं सोंच में डूब गया..

आखिर मैं यहाँ क्या कर रहा हु...??

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.


आज के लिए बस इतना hi...

गाइस बिजी रहता हु इस लिए अपडेट डिले आएंगे...

अगर अपडेट अच्छे न लग रहे ho...Jaldbaji दिख रही हो तो

अगर आपको कोई प्रॉब्लम हो तो..

मैं स्टोरी को कुछ दिनों के लिए रोक देता हु..??

बाद में फ्री होक लिख सकता हु..??

आप सभी अपनी गए दे..??

थैंक्स फॉर सपोर्टिंग..!!
 
ही गाइस !!

टाइम की कमी के कारन शायद मैं ठीक से अपडेट नहीं लिख प् रहा और न hi फीलिंग को एक्सप्रेस कर प् रहा हु..

सो गाइस आप आप सभी अपनी रे दे...

क्या मैं स्टोरी को कुछ दिन के लिए रोक दू..??

जब फ्री हो जॉन फिर स्टार्ट करू...??

हालाँकि फ्री होने में वक़्त लग सकता है...??

आप सभी अपना कीमती सुझाव दें...

थैंक्स गाइस फॉर रीडिंग एंड सपोर्टिंग...!!
 
अपडेट No..51*..

MeGa..UpDaTe

Abb..Aage..

मैं आदिगुरु के पास से गायब होकर सीधा सिंगापुर पहुंचा...

मैं एक बिल्डिंग के सामने खड़े सिंगापुर आने के बारे में सोंच hi रहा tha...Ki आखिर गुरुवार ने मुझे इस जगह hi क्यों भेजा है...

कहीं रश्मि मौसी की फॅमिली पर कोई खतरा तो नहीं...

जरूर कोई बात होगी वर्ण यूँही यहाँ नहीं भेजते...

लेकिन मुझे तो मौसी के घर का एड्रेस भी नहीं पता....

और नहीं इस वक़्त मेरे पास मोबाइल है की उनसे बात हो जाती...

अभी मैं इन सब बातों को समझने की कोशिश कर hi रहा था की.... धन्य धंएं....

जिस बिल्डिंग के सामने मैं खड़ा था उस बिल्डिंग के अंदर से गोली चलने की आवाज़ आयी....

मैं गोली की आवाज़ सुनकर चौंक गया,

फिर किसी के दर्द में चीखने की आवाज़ आयी....

और अचानक hi फायर अलार्म भी बजने लगा....

एक साथ कई प्रतिक्रिया होने से अंदर किसी खतरे की शंका हुयी....

मैं भी सभी बातों को साइड रख उस बिल्डिंग के अंदर घुश गया...

की आगे जो भी होगा देखा जायेगा..

3रद फ्लोर से अलार्म बजने की आवाज़ आ रही थी इस्सलिये सीधा वहीँ सीढ़ियों के रस्ते रूम के बहार जा पहुंचा....

दरवाज़ा खोलने की कोशिश करने लगा बूत रूम अंदर से लॉक था...

अंदर से चीखने की आवाज़ें और तेज़ हो गयी मुझे और ज्यादा देर रुका न गया...

मैं दरवाज़े को तोड़ते हुए सिद्ध रूम के अंदर घुश गया...

अंदर का नज़ारा देख कर मेरे तो होश hi उड़द गए...

सामने जमीन पर मौसी, मौसा, अखिल भैया और महिमा दीदी बेहोश पड़े थे...

मैं दौड़ कर उनके पास गया और उनकी नब्ज़ चेक करने लगा...

सभी बेहोशी की हालत में थे

देखने में ऐसा लग रहा था की जैसे इन्हें जबरदस्ती बेहोश किया गया हो...

ये सब तो बेहोश है फिर चिल्लाया कौन...??

मैं इधर उधर पानी ढूंढने लगा की तभी दूसरे रूम से फिर किसी के चीखने की आवाज़ आयी...

मैं भी उसी रूम की तरफ बढ़ गया...

अनादर का नज़ारा देख कर तो मेरी हालत hi ख़राब हो गयी...

एक नकाब पॉश शख्श दो आदमियों के पेट में अपना हाथ घुसाए हुए खड़ा था..

और उसके बगल में hi 3 लोगों के सर धड़ से अलग गिरे हुए पड़े थे... तीनो को बड़ी बेरहमी से मारा गया था...

हाथ - पेअर को कटे हुए टुकड़े वहीँ जमीन पर इधर उधर बिखरे पड़े थे ..

हर तरफ बस खून hi खून दिख रहा था...

मुझे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर यहाँ हो क्या रहा है...??

कौन है ये नकाब पॉश शख्श जो इतनी बेदर्दी से लोगों को मारा रहा है....??

तभी वो नकाब पॉश शख्श अपने हाथों को उनके पेट से बहार निकलता है...

उसके हाथ इस वक़्त खून से साणे हुए थे हाथ में दोनों की अतड़ियां पकडे हुए था....

उस ज़ालिम ने तो दोनों के शरीर से गुर्दे hi निकल लिए थे...

ऐसा खौफ नक् दृश्य देख कर मेरी चीख निकल गयी...

नकाब पॉश शख्स मेरी तरफ पलटा....

अब हम दोनों एक दूसरे के बिलकुल सामने थे...

वो मेरी तरफ देख कर अपनी गर्दन को टेढ़ी करके ऊपर से लेकर निचे तक देखने लगा...

मास्क मन - बहुत देर कर दी आने में...

अपनों की जरा सी भी फ़िक्र नहीं...??

मैं - कौन हो तुम...??

इन्हें क्यों इतनी बेरहमी से मर रहे हो...??

मास्क मन जोरर जोरर से हसने लगता है...

मास्क मन - मैं कौन हु... इतना बचकाना सवाल...??

और मैं क्या हु तुमसे बेहतर कौन जनता होगा...?? हयान !!

और रही बात इनकी ये तो भाड़े के तत्तो थे जीने मैंने नरक की शेर करवा दी...

अब इनके मालिक की बारी है....!!

मैं उसके मुँह से अपना सुनकर सॉलिड चौंक उठा... लेकिन खुद ओर काबू किये रहा..

मैं - मेरी फॅमिली से दूर hi रहना अगर उन्हें हाथ भी लगाया तो... ज़िंदा नहीं छोडूंगा...??

मास्क मन - मैं तो तुम्हारा साथी हु..

तुम्हारे फॅमिली की जान बचायी है..

वर्ण आज तुम्हें यहाँ सिर्फ उनकी लाशें hi मिलती...

रही बात मुझे मरने की तो... मैं अमर हु.... मुझे कोई नहीं मर सकता...

अभी तुम मेरे बारे में नहीं जानते... जल्द hi जान जाओगे...??

मैं - मुझे कुछ भी नहीं जानना...

अपनी जान प्यारी है तो यहाँ से चले जाओ...

फिर तुम चाहे अमर हो या अकबर मेरे हाथ से नहीं बच पाओगे... ??

मजाकिये अंदाज़ में.. हँसते हुए...

मास्क मन - अमर अकबर तो कहा अन्थोनी को भूल गए...

डायलाग पूरा बोलने का...

वैसे मैं तुम्हारा शुभचिंतक hu..Hayaan !!

मैं यहाँ से चला jaunga..Bass मेरा एक काम कर दो...

न जाने क्यों मुझे उसकी बातों पर गुस्सा नहीं आ रहा था... इतनी बकचोदी भरी बातें करने बाद भी...

मैं - क्या करना होगा मुझे..??

मास्क मन - ज्यादा कुछ नहीं bass..Tumhein एक वीडियो रिकॉर्डिंग करनी hai..Meri, जिसे मैं यूट्यूब में डालकर फेमस होना चाहता हु...??

अब तो मेरा दिमाग hi ख़राब होने लगा...

एक तरफ मेरी फॅमिली बेहोश पड़ी थी..

ऊपर से इसकी बिना सर - पेअर की बातें ...

मैं झल्लाते हुए...

ठीक है ठीक hai...Jo भी करना है जल्दी करो... और यहाँ से दफा हो जाओ...

मास्क मन - ये लो मेरा मोबाइल..

सीधा यूट्यूब पे लाइव अपलोड करो इस वीडियो को....

मैं उसका मोबाइल लेकर वीडियो शूट करने लगा....

ऐसे माहौल में होते हुए भी उसकी बातें सुनकर मुझे एकतरफ ुसस्पर गुस्सा आ रहा तो दूसरी तरफ उसकी बातें सुन कर बहुत हंसी आ रही थी...

वीडियो में...

""सबसे पहले 5 डेड बॉडी को दिखाया, फिर दो आदमी के सर को अपने हाथ में लेकर फुटबॉल की तरह उछाल कर वीडियो में दिखाया...

काफी देर अपनी दरिंदगी का नमूना शो करता रहा...

फिर बोलना शुरू किया..

ट्रेलर देखने के बाद भी तुम नहीं सुधरे,

अब तुम अपनी सजा भुगतने के लिए तैयार रहना... इससे भी बड़ी...

साथी तो गए.. .अब तेरा क्या होगा कालिया...?? ओह्ह सॉरी िमरब चेयरमैन....!!

वौइस् मॉग...

ही गाइस !! आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया... आप सभी ने पहले वीडियो को बहुत पसंद किया...

अब दूसरी वीडियो आपकी खिदमत में हाज़िर है..

पसंद आये तो शेयर और लिखे करना न भूले..., ब्बये..

म्यूजिक Hello हनी बन्नी.......""

मेरे हाथ से उसने मोबाइल ले लिया...

मैं तो चेयरमैन का नाम सुनकर hi गहरी सोंच में डूब गया था...

अचानक से मोबाइल छीने जाने पर मुझे होश आया...

सामने का नज़ारा बिलकुल बदल चूका था...

देखने में ऐसा लग रहा था की जैसे यहाँ कुछ हुआ hi नहीं....

सभी डेड बॉडी गायब थी... मास्क मन भी वह पर नहीं था... और न hi एक भी खून के निसान....

अचानक से सब कुछ गायब हो जाने से मुझे बहुत ज्यादा हैरानी हुयी...

फिर मुझे मेरी फॅमिली का ख्याल आया तो तुरंत दूसरे रूम की तरफ भगा....

चारो अभी भी बेहोशी के आलम में जमीन पर पड़े थे...

सबको अपने सामने देख कर दिल को थोड़ा सुकून मिला...

मैं जल्दी से सब के ऊपर पानी के छींटे दाल कर होश में लेन की कोशिश करने लगा....

कुछ देर बाद सबको होश आ गागा...

मुझे अपने सामने देख कर सभी चौंक गए....

कुछ देर यूँही असमंजस भरी निगाह से देखती रहे...

फिर अचानक मौसी जी और माहि दीदी तुरंत आगे बढ़कर मुझसे लिपट कर रोने लगी....

मौसी जी - मेरा बचा तू Yaha...Kaise ..??

कैसा है तू..??

तुझे कोई चोंट तो नहीं लगी...~~

दोनों को अपने से अलग करते हुए...

आगे बढ़कर मौसा जी और मौसी जी के पेअर छूने लगा तो वो मुझे अपने गले से लगा लिए....

मैं - एक मं पहले आप सब लोग रिलैक्स हो जाईये..

अब सब ठीक है..

अपनी हालत तो देखिये....

सबको सहारा देकर सोफे पर बिठाया...

मैं - मैं बिलकुल ठीक हु मौसी जी... मुझे कुछ भी नहीं हुआ...!!

लेकिन आप सब की यह हालत कैसे.. कौन थे ये लोग..??

और क्यों किया ये सब...??

मौसी के जवाब देने से पहले hi बीच में...

मौसा जी - कुछ नहीं बीटा, वो सब बस ऐसे hi चोर थे... हमें बंदी बनाकर पैसे चुराने आये थे ..

लेकिन तुमने वक़्त पर आकर हमारी जान बचा ली..

लेकिन बीटा तुमने हमें बेहोश क्यों किया था....??

मौसा जी के इस बात से मुझे तगड़ा झटका लगा...

मैं एकदम शॉक हो गया....

मैं - मैं कुछ समझा नहीं आप क्या कह रहे हो...??

मौसी जी - समझ में तो हमें भी नहीं आ रहा, की तुम अचानक यहाँ कैसे आये... तुमने हमें उन लुटेरों से बचाया बूत हम कुछ समझ पते उससे पहले hi तुमने स्प्रे डालकर बेहोश कर दिया.....

ये सब बातें मुझे हैरानी और बेचैनी के आलम में दाल दिए.....

एक तो उस मास्क वाले बन्दे का मुझे पहचानना,

उसकी आवाज़ बिलकुल मेरे जैसी होना...

और दूसरी तरफ हमला करने वाली की पहचान को मुझसे छिपाना...

ये सब मेरे समझ के बिलकुल परे था...

मैं बात को बदलते हुए....

मैं - सॉरी ! आप लोगों को जो तकलीफ हुयी,

वो दरअसल मैंने आप सबको सेफ करने के लिए बेहोश करके रूम में लॉक कर दिया था... ताकि किसी की भी जान का कोई खतरा न हो...

दीदी जो अब तक शांत बैठे मुझे बड़ी hi अजीब नज़रों से घूर रही थी... अचानक बोल पड़ी...

माहि दीदी - तू ऐसे कैसे कर सकता है..??

अगर तुझे कुछ हो जाता तो....

तुमने हमारे लिए अपनी जान की भी परवाह न की..

इतना सब बोलकर दीदी रोने लगी...

मैं दीदी के पास गया.... और उन्हें अपनी बाँहों में भरकर शांत करने लगा....

मैं - जिस्सकी इतनी फ़िक्र करने वाली प्यारी दीदी हो,

उसका भला कौन कुछ बुरा कर सकता है...

वैसे भी आप जानते हो मैं 10 पर भरी हु वो तो फिर भी 5 थे...

अब सब कुछ ठीक हो चूका था...

लेकिन एक चिंता की लकीर मुझे उनके चेहरे पे साफ़ नजर आ रही थी...

कुछ तो था जो मुझसे छिपाने की कोशिश कर रहे थे...

तभी मुझे गुरुवार के द्वारा दिए गए अंतिम ज्ञान यानि की मंत्र की याद आयी मैंने तुरंत...

अनुभवति और दर्शनम मंत्र का उच्चारण किया...

और मौसा जी की आँखों में झाकने लगा...

सभी बातों को जानने में मुझे जरा सा भी समय न लगा...

क्या कब कैसे और क्यों हुआ..??

हर एक पहलु खुलकर मेरे सामने आ चुके थे...

बस इतना hi नहीं अब आगे मौसा जी क्या करने की सोंच रहे उसके बारें में भी मुझे सब पता चल गया...

गुरुवार के दिए गए इस सीख्शा से तो मेरी हर एक राह आसान होने वाली थी...

लेकिन एक बात मुझे सबसे ज्यादा परेशानी में दाल चुकी थी की आखिर वो मास्क मन था कौन...

मेरे इन मन्त्रों का उस पर कोई असर क्यों न हुआ...??.

मैं काफी देर यूँही गम शूम बैठा सोंचता रहा तभी अखिल भाई ने मुझे हिलाते हुए पूछा....

अखिल - क्या हुआ भाई..??

कहाँ गम - शूम हो..??

मैं - हद - बढ़ाते हुए...

वो मैं मैं तो इस चोरी की अजीब घटना के बारे में सोंच रहा था...

यहाँ तो सब कुछ एकदम ठीक है..

जैसे ki...Kuchh हुआ hi नहीं...

मौसी जी - वो सब छोडो बीटा, ये बताओं तुम यहाँ अचानक कैसे...??

मौसी जी की इस बात से मैं थोड़ा घबरा सा गया की अब क्या जवाब दू.. अभी कोई प्लान सोंच hi रहा था की...

माहि दी - है भाई आपने अभी तक इस बात का जवाब नहीं दिया...

अगर तुम सिंगापुर आने वाले थे तो तुमने मुझे बताया क्यों नहीं....??

मैं एकदम शांत होते हुए....

दीदी के पास जा baitha...Aur उनका हाथ अपने हाटों में थामते हुए...

मैं - वो इस्सलिये नहीं बताया क्युकी....

मैं अपनी प्यारी सी दीदी को सरप्राइज देना चाहता था...

बूत आप सबने तो पहले hi मुझे शॉक में दाल दिया...

मैं तो यहाँ सिंगापुर एक चैंपियनशिप टूर्नामेंट्स में पार्टिसिपेट के लिए आया था तो सोंचा पहले आप सभी लोगों से मुलाकात कर lu....But यहाँ का तो नज़ारा hi बिलकुल बदला हुआ सा था...

मौसा जी - छोडो इन सब बातों को...

अच्छा क्या तुम्हारा पार्टिसिपेट करना बहुत ज्यादा जरुरी है...??

मैं - पार्टिसिपेट करना तो एक बहाना था मैं तो आप सब से मिलने आया था...

ऐसा क्यों पूछ रहे आप...??

मौसा जी - वो क्या है हम इंडिया वापस सेटल होने की सोंच रहे थे...

हम तो 2 दिन बाद जाने वाले hi थे की आज ये सब हो गया...

इस्सलिये मैं सोंच रहा था की 2 बाद क्यों जाएं आज की फ्लाइट से चलते हैं..

अगर तुम्हें कोई प्रॉब्लम न हो तो...

मैं मौसा जी की बातों को सुनकर मन hi मन मुस्कुराने लगा...

मन में... और कितने झूट बोलोगे मौसा जी... और कितनी बातों को छिपाओगे...

मैं - मुझे कोई परेशानी नहीं है..

बूत मेरी एक शर्त है...??

अगर आप सभी को मेरी शर्त मंज़ूर है तो मैं नेक्स्ट 4 हरष के बाद वाली फ्लाइट से वापस घर जाने को रेडी हु....??

मेरी बात सुनकर चरों लोग मुझे घूरने लगे...

मौसी जी - तेरी जो भी शर्त हो बीटा हमें सब मंज़ूर है..

हाहाहा hahah....heheh

मैं तो मज़ाक कर ारः था...

बस ऐसे hi माहौल को हल्का करने के लिए...

बस आप सब से रिक्वेस्ट है की अभी कोई भी माँ डैड को इन्फॉर्म नहीं करेगा की हम सब लोग अपने गांव वापस आ रहे है...

सब वहीँ जाकर सरप्राइज देंगे...

मौसी जी - तूने तो हमें डरा hi दिया था...

तेरी सबको ोारेषण करने की आदत अभी तक गयी नहीं...

माहि दी - माँ आप जाकर जो पैकिंग बची है कम्पलीट kijiye...Mujhe भाई से जरुरी बात करनी है..

हयान !! तुम मेरे साथ मेरे रूम चलो... कुछ काम है तुमसे...??

मैंने माहि दी की आँखों में एक बार गौर से देखा और सारा माज़रा समझ में आ गया...

मैं भी मुस्कुराते huye....Unke साथ चल दिया.....

......

आज के लिए बस इतना hi...

थैंक्स गाइस..... फिर रीडिंग एंड सपोर्टिंग....!!

लाइक्स, कमैंट्स और वोट्स का रखना Dhyan...Aapka दोस्त हयान..!!
 
अनजान शख्श के लिए सन्देश...

भाई जी वक़्त सब का बदलता है...

हमेशा एक जैसा नहीं रहता...

मेरा भी वक़्त बदला है...

शुरू में जब tak...Free था तो डेली अपडेट देता था... कभी कभी तो एक दिन 2 अपडेट भी दिए...

बूत आज बिजी हु रियल लाइफ के स्ट्रगल में... जिसके सहारे मुझे अपनी ज़िन्दगी जीनी है...

इस्सलिये स्टोरी को टाइम नहीं दे प् रहा...

बूत इसका ये मतलब नहीं ki...Main स्टोरी कम्पलीट नहीं करूँगा...

मौत का पता नहीं अगर ज़िंदा रहा तो स्टोरी जरूर कम्पलीट करूँगा...

वीक में 3 अपडेट देने की पूरी कोईश रहेगी भले hi रिप्लाई न दे पौन सबके मश्ग का...

उम्मीद है मेरे रीडर्स हमेशा मेरा सपोर्ट करेनेगे..

जिन्हे जाना है वो तो चले hi जायेंगे.... वो किसी के नहीं हुए तो मेरे क्या होंगे...

थैंक्स भाई लोग... मुझे इतना प्यार देने के लिए...!!
 
ही गाइस !!

मैं एक नौ सिखिया राइटर हु...

पिछले कुछ दिनों से अपने पर्सनेल लाइफ में बिजी होने के कारन डेली अपडेट नहीं दे प् रहा .....

जिसके कारन मेरे रीडर्स मुझसे नाराज़ हो गए...

बूत आज मेरी एक गलती.... या पागलपन की वजह से मेरे दो सबसे प्यारे दोस्त और गुरु... ***** जी और ***** जी मुझसे नाराज़ हो गए...

अब शायद कभी वो सफ पर लौटकर भी न आये...

मैंने उन्हें मानाने की बहुत कोशिश की बूत शायद मेरी गलती माफ़ करने के लायक नहीं...

इस्सलिये जब तक वो दोनों मुझे नहीं बुलाएँगे.... यह स्टोरी स्टार्ट नहीं होगी....

इन्ही दोनों की वजह से मैं लिख पाया... अगर यह दोनों hi मेरा साथ छोड़ देंगे तो भला मैं किसके शहर स्टोरी आगे स्टार्ट कर सकूंगा....

यह दोनों मेरी जान है......

बड़े hi खेद के साथ आप सभी को सूचित किया जाता है की यह स्टोरी कुछ समय के लिए क्लोज की जाती है....

हो सके तो मेरी इस गलती के लिए मुझे माफ़ कर देना....

मैं ***** जी और ***** जी का गुनेहगार हु...!!

:सॉरी: :cry::cry::cry::cry: हो सके तो माफ़ कर देना....

 
बहुत बहुत शुक्रिया जी...

मेरा सपोर्ट करने के लिए और ेन्सॉरगे करने के लिए..

जबकि मेरी गलती के कारन कुछ लोगों ने मुझसे मोह मोड़ लिया था...

लेकिन आपने मुझपर भरोषा बनाये रखा..

और मुझे हौसला देते रहे ...

थैंक यू वैरी मच....
 
Update..No..52*

MeGa..UpDaTe



Abb..Aage...

इधर जैन और उसकी टीम को घर पहुंचने में रात हो गयी...

रात 12 बजे सभी घर पहुंचे....

कबीर की तो नींद hi उडी हुयी थी...

जब भी कोई प्रॉब्लम आती थी... उसके साथ फ्री में 2 और आ जाती थी...

कबीर बड़ी बेसब्री से जैन के आने का वेट कर रहा था....

जैन भी सीधा जाकर कबीर सर से मिला...

कबीर - जैन जल्दी बताओ.. क्या इनफार्मेशन है...??

सब ठीक तो है न...

जैन - सर ! मैंने साडी इनफार्मेशन हासिल कर ली है... जैसा आपने कहा था..

चेयरमैन सिंगापुर में hi है..

हो न हो वो रश्मि मम के पीछे hi वह गया हो..

बूत उसके फ़ोन की लोकेशन रश्मि मम से काफी दूर किसी दूसरी सिटी का है...

बूत अभी तक हमारी रश्मि मम की फॅमिली से कोई बात न हो पायी...

सभी फॅमिली मेंबर्स के फ़ोन की लोकेशन घर की है...

मैंने अपने एक पहचान के आदमी को उनके घर पर नज़र रखने को बोलै है...

उसका कहना है की रश्मि मम की फॅमिली अभी अपने घर पर है...

जैसे hi कोई हलचल होती है वो एक्शन पे आएगा...

और हम तक इन्फो. शेयर करेगा....

कबीर - कितने आदमी वह पर लगे हुए है..??

जैन - सर ! वो अपने साथ 4 हथियारबंद आदमी ले गया है ....

कबीर - ठीक है !.

उनके मोबाइल में चरों फॅमिली मेंबर्स की डिटेल्स और पिक्स भेज दो...

अगर उन पर किसी भी प्रकार का खतरा दिखे तो सीधा अटैक करने को बोलो...

बाकी जो भी होगा मैं देख लूंगा...

बूत उन चरों को कुछ नहीं होना चाहिए...!!

जैन - सर ! मैंने यह काम पहले hi कर दिया है..

सबकी डिटेल्स है उनके पास है....

कोई भी अजनबी उन तक पहुंचा तो मेरे आदमी तुरंत उनपर एक्शन लेंगे..

अब आप बेफिक्र रहो उन्हें कुछ नहीं होगा...

कबीर - गुड जॉब ! जैन... तुमने इस बार बिलकुल सही काम किया...

बस एक बार हयान की खबर मिल जाये....

उसके बाद मैं किसी को नहीं बख्सूंगा....!!

जैन - सर ! आप टेंशन न लो अब सब ठीक होगा....

अभी ये दोनों आपस में बातें hi कर रहे थे की अचानक जैन का मोबाइल बजा....

कबीर - किसकी कॉल है...??

जैन - सिंगापुर एजेंट...

जैन कॉल पिक करता है...

एजेंट - ............????

लगभग 10 मं तक जैन मोबाइल में बिजी रहता है...

कबीर तो बस खड़े जैन के फेस एक्सप्रेशन को देख रहा था....

जो की बहुत गुस्से में था...

कबीर को कुछ बुरा होने की शंका होने लगी...

तभी जैन के मुँह से मास्क मन का नाम सुनकर कबीर चौंक जाता है....!!

जैन मोबाइल को वही जोरर से पटक देता है...

कबीर घबराते हुए..- क्या हुआ जैन..??

कह दो की सब ठीक है...

सर झुकाये huye...Glani के के साथ..

जैन - सॉरी सर ! हम एक बार फिर से नाकाम हो गए...

कबीर - आखिर हुआ क्या है साफ़ साफ़ बताओ..??

जैन - सर ! न जाने कहा से एक मास्क पहने हुए आदमी आया और हमरे एजेंट को बेहोश कर दिया...

जब उन्हें होश आया तो उस घर में कोई भी नहीं था...

किसी भी फॅमिली मेंबर्स की कोई जानकारी नहीं...

कहा गए.. कौन ले गया.. कुछ hi नहीं पता चल...??

जैन की बात सुन कर कबीर का दिल धक् से रह गया...

वही पर अपने सर को पकड़ के धम्म से जमीन पर बैठ गया....

जैन तुरंत आगे बढ़ कर कबीर को संभालता है...

कबीर रट हुए.. - सब कुछ तबाह हो गया...

न जाने क्या हुआ होगा उनके साथ...??

.

जैन - सर ! खुद को सम्भालिये...

अगर आप hi टूट गए तो बाकि सबका क्या होगा..??

उम्मीद रखिये सब ठीक होगा....

मैंने उन एजेंट से कह दिया है...

सिंगापुर में हर जगह उनकी तलाश जारी कर दो...

जितने आदमी लगे लगाओ..

पैसे चाहे पानी की तरह बाह जाये..

लेकिन चरों की खबर जल्द से जल्द दे...

जैन - सर ! अभी इस बात को मीरा दीदी तक मत पहुंचने देना वर्ण वो टूट जाएँगी...

जैन काफी देर कबीर को समझाता रहा...

आखिर कबीर कब तक खुद को संभाले रखता..

एक तरफ बीटा लापता..

बेटी कोमा में...

अब वहीँ दूसरी तरफ रश्मि फॅमिली गायब...

जैन कबीर को रूम लेकर जाता है और बीएड पर लिटा देता है....

जैन मीरा को हयान के जाने के गम की स्टोरी बताकर..

कबीर को सदमा लगा की झूटी कहानी बताकर सँभालने को कहता...

जैन भी अपने रूम चला जाता है रेस्ट करने..

दिन भर की भाग दौड़ के कारन वो भी थक चूका था...

और हासिल भी तो कुछ न हुआ था..

अब तो जो भी करना है कल दिन के उजाले में hi किया जा सकता है...

कबीर फॅमिली में आज की रात बहुत भरी पद गयी...

सभी किसी तरह एक दूसरे को सांत्वना देते हुए रात गुजरने का इंतेज़रर करने लगे...

__________________________________

वहीँ दूसरी तरफ....

एक अनजान Jagah...Secret बेस में...

चेयरमैन बेचैनी के आलम में इधर उधर टहल रहा था....

तभी सामने रूम का दूर खुला और एक शख्श भागता हुआ आया....

और वहीँ पर धाम से गिर्र पड़ा...

जिसे देख कर चेयरमैन उसकी तरफ भागता हुआ पहुंचा....

चेयरमैन - क्या हुआ बे !! तेरी हालत ऐसे कैसे हुयी...??

जल्दी बता क्या खबर लाया है...??

आदमी - पानी पानी !

बस इतना hi कह पाया और बेहोश हो गया...

चेयरमैन जल्दी से उसके लिए पानी मांगता है...

उसका नौकर उस आदमी के ऊपर पानी की छीटें मरता है जिससे उसे होश आ जाता है....

होश में आते hi 1लतर पानी की बॉटल को एक hi सांस में पी जाता है.. और वही पर पड़े पड़े हाफने लगता है...

उस आदमी के कपडे जगह जगह से फाटे थे, खून से सना हुआ था..

देखने में ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने तलवार से उसे घायल किया हो...

चेयरमैन - झल्लाते हुए... बता न क्या हुआ.. तेरी ऐसी हालत कैसे हुयी...??

अब वो आदमी थोड़ा संभल चूका था...

आदमी - बॉस बॉस वो वो इंसान नहीं है शैतान है...

वो आपको नहीं छोड़ेगा... किसी को hi नहीं छोड़ेगा वो आ रहा hai...Aapke लिए..??

आदमी की बातें सुनकर चेयरमैन को गुस्सा आ जाता है...

झल्लाते हुए उस आदमी के दो थप्पड़ खिंच के मरता है...

चेयरमैन - सेल हरामी ! मैंने तुझे सब पता कर के आने को कहा था..

और तू है की मेरी मौत की खबर सुना रहा है...??

साफ़ साफ़ बता वर्ण एहि गाड़ दूंगा...

चेयरमैन का गुस्सा देख कर वह आदमी बिलकुल डर जाता है...

खुद सँभालते हुए...

आदमी - बॉस ! जैसा आपने कहा था, मैंने बिलकुल वैसा hi किया...

पुरे प्लान के साथ मैं उस जगह पर छिपा बैठा था....

लेकिन उस्सको मेरी खबर हो गयी थी...

उसने मुझे सिर्फ इस्सलिये जिन्दा छोड़ा ताकि मैं आप तक यह पैगाम दे दू.. की वो आ रहा है...??

बाकी वह क्या हुआ है.. उसे मैं ठीक से नहीं बता सकता...

वो दरिंदा है... हैवान है...

उसकी दरिंदगी का नमूना यूट्यूब में पड़ा है पहले वाली वीडियो की तरह...

आप खुद hi देख लो...

इतना बोलकर वह आदमी शांत हो जाता है...

चेयरमैन तुरंत अपना मोबाइल निकलता है..

और आदमी के द्वारा बताये गए चैनल पे जाकर वीडियो देखने लगता है...

वीडियो में मास्क मन की दरिंदगी के नमूने को देख कर एक बै फिर से चेयरमैन की फट जाती है...

पेट में हाथ डालकर गुर्दा निकलना.... जबड़ा तोड़कर जुबान निकलने वाला सन देख कर चेयरमैन को वोमिटिंग होने लगती है..

इतना घिनौनी वीडियो शायद hi कोई देख कर बर्दाश्त कर पता...

लास्ट में वौइस् मश्ग सुनकर जिसमे उसका hi नाम लिया गागा था...

चेयरमैन को बहुत जोरर से गुस्सा आ जाता है.. अपना मोबाइल उठा कर पटक देता है...

चेयरमैन गुस्से में...

उस कल के आये छोकरे ने मुझे चुनौती दी है...

मुझे शर - इ - आम मरने की धमकी दी है...

शायद वो मुझे जनता नहीं की मैं कौन हु....

मैं एक म्युटेंट hu..Mutant...

मुझे कोई नहीं मर सकता...!!

और जोरर जोरर से हंसने लगता है...

तभी उसकी हंसी रुक जाती है उस आदमी की बात सुन कर....

चेयरमैन - क्या कहा तूने..??

मुझे कोई नहीं बचा सकता...??

आदमी - एस बॉस ! आपने सही सुना है...

उसने आपके लिए कुछ दिया है..

ये लीजिये इससे खुद पर इंजेक्ट कर लीजिये...

उसे पता है की आप एक म्युटेंट हो..

उसने आपके लिए एक पावरफुल सीरम गिफ्ट में दिया है..

जिससे की आप और ताक़तवर हो जाओगे...

उसका कहना है की वह आपको सबसे खतरनाक सजा देगा...

चेयरमैन उस आदमी की बातों और उसके हाथ में म-1 सीरम देख कर चौंक जाता है...

चेयरमैन - ये ये उसके पास ककैसे... थिस इस इम्पॉसिबल....

यह तो फर्स्ट क्लास रेंज के प्रैक्टिकल का सीरम है...

यह तो अभी तक बना भी नहीं.....

आदमी - वही तो बॉस ! वो एक इंसान नहीं शैतान है...

उसके लिए कोई भी चीज़ नामुमकिन नहीं...

मेरी रे है की अब आप गायब हो जाओ... जोश में होश मत खो देना...

चेयरमैन अपने कोट की पॉकेट से गन निकलता है और उस आदमी के ऊपर पूरी मागज़ीने खली कर देता है....

गुस्से में...

चेयरमैन - बहुत बक बक करता है...

एक तो पीठ दिखा कर भाग आया....

ऊपर से बकचोदी कर रहा केरे से...

लो जाओ इस हरामी की लाश को...

साला मुझे सलाह देता है...

एक बार फर se..Chillate हुए...

और कोई है जो मुझे सलाह देना चाहेगा....??

कोई कुछ न बोलै वह सन्नाटा पसरा रहा... दो आदमी आगे बढ़ कर उस डेड बॉडी को लेकर चले जाते है...

चेयरमैन जाकर अपनी कुर्सी में बैठ जाता है... और उस म-1 सीरम को गौर से देखने लगता है...

चेयरमैन - कही उसका कहना सही तो नहीं..

देखने में तो सच में hi उसके काम किसी राक्षस से काम नहीं...

क्या मैं इस सीरम को इंजेक्ट करू..??

क्या उसका सामना करना ठीक रहेगा...??

क्या मुझे अपने साथियों से हेल्प लेनी चाहिए..??

या फिर मुझे Db.Boss के पास जाना चाहिए...

लेकिन किश मुँह से जॉन उनके पास...??

चेयरमैन खुद में hi बैठे बाद बड़ा रहा था..

उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर वो क्या करे...??

काफी देर यूँही सोचने बिचरने के बाद वह

टेबल में रखे टेलीफोन से किसी को कॉल करता है..

और 30 मं में मीटिंग रखने को बोलता.....

__________________________________

चलिए एक बार अपने हीरो को भी देख लेते हैं....

मैं माहि दी के पीछे - पीछे उनके रूम में आ गया...

मेरे रूम में एंटर करते hi माहि दी ने दूर लॉक कर लिया...

और आकर मेरे गले से लग गयी... और सुबकने लगी....

मैं भी उन्हें प्यार से समझने लगा...

माहि दी - इतने दिन बाद मिला है कुछ देर ठीक से गले तो लगे रहने दे...

कुछ देर यूँही ख़ामोशी के साथ मेरी बाँहों में झूलती रही..

मैं भी प्यार से उनके सर को सहलाने लगा...

मैं - क्या हुआ दीदी ...??

अब तो सब ठीक है न !!

दीदी अपना सर उठाकर मेरी आखों में देखते हुए....

माहि दी - सच में मैं आज इतननि ज्यादा खुश हु, तुझे अपने सामने देख कर की मैं तुझे अपनी ख़ुशी बयां नहीं कर सकती...

मैं - अच्छा जी ! तो ये बात है..

लेकिन दूर जाने का फैसला भी तो आपका hi था..

जब इतना प्यार करती हो अपने भाई से तो इतना दूर क्यों चली आयी...

माहि दी - हम्म ! क्या करती वह उस गांव में रह कर मैं इस मॉडर्न सोसाइटी में पिछड़ जाती... मुझे अपने हिसाब से ज़िन्दगी जीनी थी..

इस लिए मुझे आना पड़ा...

मैं - तो जी ली अपने हिसाब से ज़िन्दगी...

अब लौट चलो मेरे साथ.. अपनों के पास...

माहि दी - हम्म ! बूत मुझसे एक प्रॉमिस कर तू ....

अब हम किसी सिटी में चल कर आगे की स्टडी कम्पलीट करेंगे...

मैं - Mom-Dad नहीं रेडी होंगे...

फिर भी आपके लिए उनसे बात करूँगा...

अब चलो मुआसि मेरा वेट कर रही होंगी...

माहि दी - ओह्ह सॉरी ! मैं जिस बात के लिए तुझे यहाँ लेकर आयी थी वो तो भूल hi गयी बातों बातों में..

मैं - कौन सी बात...??

माहि दी - अब एक भी झूट नहीं केवल सच....

वो तू नहीं था न जिसने हमें बेहोश किया था....??

मैं - मैं hi तो था..

ऐसा क्यों पूछ रहे हो..??

माहि दी - देख तू फिर झूट बोल रहा..

मेरी आखें कभी धोखा नहीं खा सकती...

वो तू नहीं था तेरा कोई बहरूपिया था...

जिसकी शकल तुझसे मिलती - जुलती है...

मैं - क्या दीदी कुछ भी !! भला ऐसे कैसे हो सकता है डबल फेस...

वो मैं hi था...

मुझे खुद समझ नहीं रहा की आप ऐसा सवाल क्यों पूछ रही हो..??

माहि दी - तू मुझसे कुछ छिपा रहा है.. देखना एक दिन मैं सब पता लुंगी..

फिर देखना तेरी क्या हालत करती हु... अगर मेरी बात सच निकली तो..

मैं मुस्कुराते हुए दीदी को अपनी बाँहों में भर लिया...

मैं - अरे मेरी हिटलर दीदी ! अभी से जासूसी शुरू कर दी.. अभी तो ठीक से आपसे मिला भी नहीं...

वैसे दीदी आप यहाँ आकर काफी सेक्सी हो गयी हो..??

दीदी मेरी चेस्ट पे मुक्का मरने लगी..

माहि दी - बदमाश अपनी दीदी को सेक्सी बोलता है...

तू वापस घर चल..

मैं और अन्य मिलकर तेरा बंद बजाते है...

बहुत बेशर्म हो गया है तू...

माहि दी के मुँह से अचानक अन्य ! का नाम सुनकर मेरे दिल में हल्का सा दर्द उठने लगा....

मैंने माहि दी को और जोरर से हुग कर लिया...

मैं अपने जज़्बात को छिपाते हुए...

मैं - Okay Okay जो भी करना है कर लेना..

पहले मौसी के पास चलो.. वर्ण हम दोनों की क्लास लग जनि है...

मैंने किसी तरह माहि दी के मन से बहरूपिये वाले शक को काम कर दिया था..

लेकिन मेरे मन में बहुत सरे सवाल ने जन्म ले लिया था...

जिसका जवाब मुझे जल्द से जल्द खोजना था...

मेरे दिल में रह रह कर अन्य! के लिए ख्याल उमड़ने लगे..

हम दोनों वापस मौसी के पास आ गए...

अब माहौल बिलकुल नार्मल हो चूका था..

सब एक डैम रिलैक्स दिख रहे थे...

मौसी - क्या बात है बीटा जी ! बहन के मिलते hi बाकि सब को भूल गए...

मैं मुस्कुराते हुए...

ऐसी बात नहीं है मौसी जी ! वो तो दी मुझे जरुरी बात के बहाना से रूम लेकर चली गयी...

वर्ण कौन जाना चाहेगा.. इनके जैसी हिटलर बहन के साथ....

मेरी बात से सब हसने lage....Aur माहि दी का मुँह फूल गया...

मौसा जी - मेरी बची को कोई कुछ नहीं कहेगा....

अखिल भाई - मुझे समझ नहीं आता, पापा ! की ये आपको बची कहा से दिखती है..

मेरा तो जीना हराम कर दिया है इस चुहिया ने...

माहि दी - भैय्या ! आप भी...

जाओ मैं आप दोनों से बात नहीं करती....

मौसा जी - देखो तो मेरी बची को रुला दिया...

मैं - अरे दी आप तो इतने में hi रूठ गए...

हम तो बस यूँही आपको चिढ़ा रहे थे..

आप तो दुनिया की सबसे अच्छी हिटलर दीदी हो !

मेरी बात से एक बार फिर सब हसने लगे...

माहि दी - तुझे तो मैं बाद में देखती हु...

मौसी - Ok ok टाइम आउट ! ये रूठना मानना बाद में...

हम सभी 15 मं में यहाँ से निकल रहे है...

अखिल तुम जाकर अपने और माहि के डॉक्यूमेंट चेक कर लो...

देख लेना कोई भी जरुरी चीज़ छूट न जाये...

माहि तुम भी जाकर अपना लगेज और जरुरी चीज़े चेक कर लो....

दोनों लोग वह से चले गए...

अब हॉल में सिर्फ मैं , मौसा और मौसी जी hi बचे....

कुछ देर ख़ामोशी छायी रही..

इस चुप्पी को तोड़ते हुए...

मौसा जी - बीटा वो लोग कहा गए जो घर में घुसे थे...??

मैं - वो मैंने उन्हें समझा - बुझाकर वापस भेज दिया है..

बास थोड़ी सी म्हणत करनी पड़ी थी....

मौसी जी - कुछ गलत तो नहीं किया उनके साथ...

क्युकी यहाँ कानून बहुत सख्त है..

पुलिस तुम तक पहुँच जाएगी....

मैं - नहीं ऐसा कुछ भी नहीं होगा..

सब कुछ एक डैम ठीक हो गया है...

आप लोग एक डैम निश्चिंत रहे...

मौसा जी - बहुत बहुत शुक्रिया बीटा हयान ! तुमने सही टाइम पर आ कर सबको बचा लिया...

वर्ण न जाने क्या हो जाता....

मैं - इसके थैंक्स की क्या बात है..

यह तो मेरा फ़र्ज़ था...

आप सब को अब मैं कुछ नहीं होने दूंगा...

मौसा जी - हम्म बीटा !

अब हमें निकलना चाहिए फ्लाइट का टाइम भी होने वाला है...??

एक बार फिर सबने अपना अपना लगेज चेक किया...

और सिंगापुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए......

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आज के लिए बस इतना hi...

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थैंक यू वैरी मच गाइस !!

इतने बेहतरीन सपोर्ट के लिए...

एंड सॉरी फॉर डिले एंड एक्सक्यूज़...

लाइक्स, कमैंट्स और वोट्स का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!

 
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