अपडेट..No..59*
MeGa..UpDaTe
अब्ब.. तक्क..
अब तक आप सभी ने पढ़ा की हयान और जैन मिलकर किसी प्लान को अंजाम देने की साजिश कर रहे और साथ में देहरादून शिफ्ट होने की भी प्लानिंग कर रहे...
वही दूसरी तरफ चेयरमैन ने रश्मि फॅमिली को एक बार फिर से अपने टारगेट में लिया है..
वो भी किसी अनजाने साक्ष के साथ जिसे देख कर चेयरमैन का आत्मविश्वास और भी ज्यादा बढ़ गया अपनी जीता का....
सक्कूबी और नरकिस्सा भी मास्क मन की तलाश की शुरुआत करने की सोंच रही...??
Abb..Aage...
ात Hayaan's रूम...
शाम होने को थी...
माहि दी गुस्से से मुझे घूरे जा रही थी...
मैं (मुसकुटे हिये)- अरे दीदी ! क्या हुआ ऐसे क्यों देखे जा रही हो..
इतनी सिद्दत से मत देखिये..
दिल में कुछ कुछ होने लगता है...
मेरी बात से अन्य! और जिन! ठहाके मार कर हसने लगी...
जिससे माहि दी को और भी ज्यादा गुस्सा आने लगा...
माहि दी - तुझे मजाक की सूझ रही है..
यहाँ मेरा पूरा प्लान धरा का धरा रह गया...
आखिर तूने क्यों किया ऐसा....??
जब की मैं तुझे पहले hi सब बता चुकी हूँ...!!
मैं माहि दी को बाजुओं को कशते हुए...
मैं - मेरी प्यारी बहना... पहले पूरी बात तो सुनो न...
खामखा पहले से hi क्यों रूठ कर बैठे जा रहे हो....
इसमें नाराज़ होने वाली बात क्या है...??
माहि दी - नाराज़ न होऊं तो क्या...
तेरी आरती उतरूं..
मैं भला होती कौन हु तेरी जो मेरी सुनने लगा...??
माहि दी की ऐसी बातें सुनकर मैं अब सीरियस हो गया...
उनसे थोड़ा दूर हट्टे हुए...
मैं - ऐसी बात नहीं है की मुझे आपकी परवाह नहीं...
बूत आप खुद गौर करो..
कौन सा ऑप्शन बेस्ट है.. दिल्ली या फिर देहरादून..
मैंने कभी भी आप में और अन्य ! में भेदभाव नहीं किया...
जितना उसका मुझपर हक़ है उतना आपका भी...
ये बात अलग है की मैं और अन्य! करीब रहने के कारन लगाव कुछ ज्यादा hi है...
मैं आगे कुछ और कहता उससे पहले hi मेरा मोबाइल रिंग करने लगा... जो की डैड की कॉल थी...
मैंने कॉल पिक की...
मैं - है डैड बोलिये...
........
Okay ! मैं अभी आ रहा हु..
इतना कहकर कॉल कट कर दी...
मैं - सॉरी ! अभी मुझे जाना पड़ेगा..
डैड ने बुलाया है..
मुझे अपनी सफाई में और कुछ नहीं कहना....
बाकी आप को जो भी जानना है अन्य! और जिन से पूछ लो...
मैं वहां से निकल कर जैन अंकल के रूम की तरफ चल दिया...
मैं भी जाकर डैड के बाजु में सोफे पर बैठ गया....
डैड - अब बता भी दो यार ! क्या क्या प्लान बनाये जा रहे है...??
जैन अंकल - सर ! बात दरअसल ऐसी है की कल शाम को अन्य और हयान मेरे पास आये और अपनी स्टडी और फ्यूचर प्लानिंग के बारे में बताने लगे ...
तब हम तीनो में यह तय हुआ की हम सभी वापस देहरादून शिफ्ट होंगे...
लेकिन वहां शिफ्ट होने का मतलब था की दबी हुयी परेशानियों का फिर से उभर कर सामने आना...
और जब तक इन प्रॉब्लम को जड़ से न ख़त्म किया जाता,
हम सभी का वहां रहना खतरे से खली नहीं था...
सो हम सभी ने प्लान डिसकस किया और अपने दुश्मन की साडी डिटेल्स निकली..
जिससे उस तक पहुँच कर उसे जड़ से ख़त्म कर सके...
और दूसरा काम ये किया की मैंने अपने तकनीशियन की मदद से कबीरा पैलेस को और भी ज्यादा बेहतर बनाए को कहा है..
जो की 2 दिन में रेडी हो जायेगा.... विथ Hi - टेक सिक्योरिटी !!
डैड - वाओ ! गुड जॉब जैन ! इतना कुछ कर डाला और मुझे कानो -कण खबर भी न हुयी..
हम्म चलो भी हुआ अच्छा हुआ...
लेकिन उस फॅमिली का क्या हुआ जो वह रहती थी...
जैन - हमने उन्हें रश्मि दीदी के घर में शिफ्ट कर दिया है.. उन्होंने कोई ऐतराज़ नहीं किया,
उस घर में भी हमने दो सिक्योरिटी गार्ड्स मुहैय्या करवाई है...
डैड - ये काम तुमने ठीक किया...
वैसे अनवर फॅमिली अब कैसी है...??
लेकिन क्या तुमने रश्मि दी से इसकी इजाज़त ली है..??
जैन - अनवर फॅमिली बिलकुल ठीक है..
वो दोनों अपने दोनों बचो के साथ बहुत ख़ुशी से रह रहे हैं..
बाकी सब सिक्योरिटी गार्ड्स देख लेते...
मैं हयान से कहा था की अनवर फॅमिली को वह शिफ्ट करने से पहले एक बार रश्मि दी और विजय भैया से पूछ लेना चाहिए...
बूत इसने कहा की वो सब मुझ पर छोड़ दो...??
मैं - हम्म डैड ! मैंने hi मन किया था..
क्युकी अब हम एक साथ कबीरा पैलेस में hi रहेंगे...!!
मौसी जी मेरी बात को कभी नहीं टलेगी...!!
डैड - चलो अब सब कुछ पहले से hi हो गया है...
तो अब ये भी बता दो..
उस िमरब चेयरमैन से कैसे निपटने का सोंचा है...??
जैन - अरे है ये तो मैं बताना hi भूल hi गया..
जो की सबसे इम्पोर्टेन्ट था...
जब मैं चेयरमैन की डिटेल्स हासिल करने उसके ऑफिस और फार्महाउस गया तो मुझे बहुत बड़ी साज़िश का पता चला जो की हमारे लिए की जा रही है...??
डैड (उत्सुकता वश ) - कैसी साज़िश...
क्या खबर मिली है तुमको...
कही कोई खतरे की बात तो नहीं.....
जैन - जब हयान गायब हुआ था और मैं चेयरमैन के फार्महाउसे गया था खोजने के लिए...
तभी मैंने उसके हाउस में एक हिडन वौइस् रेकॉर्डर फिट कर दिया था...
जिसके जरिये मुझे वहां की जानकारी मिलती रहे...
आज जब वह की रिकॉर्डिंग चेक की तो मुझे पता चला की उनको हमारी लोकेशन मिल गयी है....
और कैसे मिली इसका कोई भी सुराग न मिला...??
डैड - ये तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो गयी है.. इससे तो पूरा सोनपुर खतरे में आ गया है...
जैन - शायद उन्हें सोनपुर के बहार बने बेस की Hi लोकेशन मिली है...
लेकिन अगर वो यहाँ तक पहुँच सकते है तो घर तक भी आ सकते है...??
डैड - तो इस खतरे ऐ निपटने के बारे में भी कुछ सोंचा है या अभी नहीं...??
जैन - फ़िलहाल अभी तक तो नहीं....
बस वही डिसकस करने के लिए आप दोनों को बुलाया है...??
अब तुम hi बताओ हयान आगे कैसे और क्या करना है...??
मैं - मुझे इसकी खबर पहले hi मिल चुकी है..
और इसका सलूशन भी मैंने ढूंढ लिया है...
अब बस उनके कदम उठाने का इंतेज़रर है..??
मेरी बात सुनकर जैन अंकल और डैड एकदम शॉक हो गए ....
डैड - तुम्हें कैसे पता चला इसके बारे में जबकि जैन को आज hi पता चला...??
मैं - वो सब बाद में बताऊंगा बस इतना समझ लीजिये आदिगुरु ने हेल्प की मेरी....
जैन - तो बताओ क्या करने का सोंचा है...??
मैं - ये सब मुझ पर छोड़ दो...
इस खेल को मैं अकेले अपनी तरह खेलूंगा...
जैन - यह कोई खेल नहीं.. बचो का,
जिसे अकेले खेलने की बातें कर रहे हो...
250 से ज्यादा हथियारबंद गुंडे हम पर अटैक करने आ रहे है....??
मैं - मुझे सब पता है...
बस आप दोनों मुझ पर भरोषा रखिये...!!
डैड - बात भरोसे की नहीं बीटा ! यह बहुत रिस्की है..
मैं मंटा हु की तुम 100 पर भरी हो..
बूत मैं तुम्हें ऐसे अकेला नहीं जाने दूंगा...
मैं - किसने कहा मैं अकेला जा रहा हु..
कोई है जो मेरी हेल्प करने आ रहा है...??
वो हजारों पर भरी है... ये तो 250...300 hi हैं...
अब बस ये मत पूछना की कौन हेल्प करने आ रहा है क्यूंकि इसका जवाब मैं नहीं दे सकता...??
डैड कुछ बोलने वाले थे की जैन अंकल ने उन्हें चुप रहने का इशारा किया ऑफ खुद बोलने लगे ..
जैन अंकल - ठीक है हयान..
जैसा तुम चाहते हो वैसा Hi होगा...
हमें तुम पर पूरा यक़ीन है...!!
अगर तुम्हें किसी भी प्रकार की कोई हेल्प चाहिए तो बता देना..
मैं रेडी हु तुम्हारे साथ चलने को....!!
मैं - जब जरुरत होगी आपको बुला लूंगा...
आपको मेरा एक काम करना है...
जो मैं जाते वक़्त आपको बता दूंगा....
जैन - ठीक है जैसा तुम सही समझो...
अब तुम जाओ...
मैं वापस अपने रूम की तरफ चल दिया....
जैसे Hi मैं दरवाज़े से बहार निकला...
Dad(Gusse से तेज़्ज़ में ) - जैन ! ये तुमने क्या किया...??
इतनी बड़ी गलती कैसे कर सकते हो...??
जैन - सॉरी सर ! लेकिन आप हयान को नहीं रोक सकते वो अपनी मर्ज़ी hi करेगा...
रही बात उसके अकेले जाने की वो अकेले जायेगा तो जरूर लेकिन मैं और मेरे आदमी उसके पीछे साये की तरह लिपटे रहेंगे....
उस पर किसी भी प्रकार का कोई भी खतरा नहीं आने देंगे....
ये मेरा आपसे वडा है...!!
डैड ( रहत की साँस लेते हुए ) - थैंक गॉड ! मैं तो एकदम घबरा गया था तुम्हारा फैसला सुनकर...!!
बूत बे केयरफुल जितना तुम खुद को होशियार समझते हो वो अब तुमसे भी ज्यादा चालक है...
वो तुम्हारी चाल कामयाब नहीं होने देगा...
जैन (मुस्कुराते हुए ) - चाहे जितना होशियार हो... है तो मेरा Hi स्टूडेंट्स....
देख लेंगे....
मैं दोनों की बातें सुनकर मुस्कुराये बिना रह नहीं पाया...
इधर इन दोनों की बातें ख़त्म होते hi,
मैं भी अपने रूम की तरफ निकल गया....
मैं अपने रूम का दरवाज़ा खोलने वाला hi था की मुझे अंदर से किसी के सिसकने की आवाज़ आयी...
मुझे समझते देर न लगी कौन रो रहा है...
मैं रूम का दूर खोलते हुए अंदर चला गया...
अंदर का नजारा इस वक़्त ग़मगीन था...
माहि दी रोये जा रही थी...
जिन और अन्य ! उसे चुप करने की कोशिश कर रही थी...
लेकिन जैसे hi मुझपर नजर पड़ी माहि दी दौड़ती हिये मेरे सीने से आकर लग गयी... और सुबकने लगी....
मैं - क्या हुआ दी ! आप ऐसे क्यों रो रहे हो...??
जवाब देने के बजाये माहि दी और जोरर से रोने लगी..
तभी जिन ने जवाब दिया....
जिन - ये दी न बिलकुल बावली हैं....
पहले तो बिन बातों को समझे hi गुस्सा हो गयी...
फिर जब बातों की सचाई पता चलती है तो रोना शुरू कर दिया ..
कह रही की हयान मुझसे नाराज़ हो गया है..
अब तुम आ गए हो तुम hi सम्भालो इन्हें....
मैं - क्या दीदी ! आप से भी हद्द है,
जरा जरा सी बात पे बच्चों की तरह रोने लगती हो...
ये भी कोई बात हुयी...
आपसे किसने कह दिया की मैं नाराज़ हु...??
माहि दी ने सिसकते हुए बोलना शुरू किया...
माहि दी - तू hi तो उस वक़्त नाराज़ हो गया था...
तुमने मुझे डांटा भी...
मैं - उफ़ हद्द है दी, आपसे भी...
वो तो बस मैं समझा रहा था आपको..
अगर आपको बुरा लगा हो तो सॉरी...!!
मैं दी से अलग होते हुए उनके सामने कान पकड़ के उठक - बैठक करने लगा...
मुझे बच्चों की तरह ऐसा करते देख, माहि दी मुस्कुराने लगी...
माहि दी - धत्त पगलू ! ऐसा भी कोई करता है...
मैं - मेरी क्यूट सी दी के लिए कुछ भी....
अन्य - अच्छा बच्चू ! वो क्यूट सी... बाकि हम दोनों क्या है....?? पागल सी...
मैं - अरे नहीं आप दोनों तो मेरी जान हो..!!
जिन - ऐसा क्या ..?? अच्छा तो हम दोस्त से जान कब बने...
मैं - मैं तो हमेशा से जान Hi मंटा हु...
अब आप दोनों जानो की मेरे लिए क्या अहमियत है दोनों के दिल में...??
अन्य - तू तो मेरे दिल का टुकड़ा है रे.... आ गले लग जा....
मैंने भी इतना अच्छा मौका भला क्यों छोड़ने लगा....
सीधा जा के अन्य! को अपनी आगोश में भर लिया..
मैं - हम्म तो जिन ! तुम्हारे लिए मैं सिर्फ एक दोस्त हु या कुछ और भी...
जिन - आगे का पता नहीं फ़िलहाल अभी तक तो तुम मेरा दोस्त काम दुश्मन ज्यादा है...
और मुझे तेरी दुश्मन बनना Hi ज्यादा पसंद है..!!
मैं - वाओ ! मेरी छोटी नाक वाली जंगली बिल्ली...
बस ऐसे Hi हमेशा रहना कभी बदलना मत...
जिन - ये कुछ ज्यादा न बोल गया तू...
फिर भी बदलने का कोई इरादा hi नहीं...
कोई शक !
मैं - No वे ! वैसे आप दोनों इतनी दूर क्यों कड़ी हो...
जरा पास तो आओ छलिये...
मैंने बाहें फैला दी...
जिन और माहि दी आकर मेरे गले लग गयी...
कुछ देर ऐसे hi हम तीनो का मेल मिलाप चलता रहा....
लेकिन कोई था जो इस वक़्त दरवाजे की आड़ से हमें देख कर मुस्कुरा रहा था और साथ hi में दिल hi दिल रो भी रहा था....
रिया मौसी - कितने भाग्यशाली है ये लोग... जो इतना ख़ूबसूरत परिवार और साथ मिला...
काश मेरा भी कोई परिवार होता...
तभी पीछे Se...awaaz आयी रिया मौसी एकदम से चौंक गयी....
माँ - अभी तो कह दिया...
अब कभी दुबारा यह लफ्ज़ मुँह से न निकले... की तेरा कोई नहीं...
तू मेरी सगी बहन से भी बढ़कर है.. और इस परिवार का हिस्सा भी...
आइंदा अब कभी खुद को अकेला मत समझना हम सब एक परिवार है..!!
रिया मौसी - सॉरी दी ! वो बस इन सब को देख कर अपनों की याद आ गयी.. जो कभी मुझे मिले नहीं..
बूत अब मिल गए हैं..!!
माँ - चल चल अब ज्यादा इमोशनल होने की जरुरत नहीं...
अच्छा ये बता तूने सब काम कर लिया जो भी हयान ने कहा था करने को..
रिया मौसी - हम्म दीदी ! सब फिनिश हो गया है..
बूत एक बात समझ नहीं आ रही ये इतनी पैकिंग क्यों हम कही जा रहे है क्या..??
माँ - ये तो मुझे भी नहीं पता...
न जाने इस बचे के दिमाग में क्या क्या चलता रहता है...??
रिया मौसी - पैकिंग हिसाब से तो यही लग रहा है की, जैसे दो तीन दिन के लिए कही पिकनिक करने जा रहे हो..
माँ - लग तो मुझे भी ऐसा hi रहा है..
लेकिन जबकि हमें देहरादून शिफ्ट होना है तो फिर ये अचानक दो दिन की पैकिंग कहा जाने के लिए....??
जो भी हो सब पता चल जायेगा...!!
माँ - अच्छा तू सबको लेकर हॉल में आ डिनर रेडी हो गया है...??
इतना कहकर माँ वापस चली गयी...
रिया मौसी - अहं अहं....
क्या मैं अंदर आ सकती हु.. अगर तुम्हारे मिलान समारोह में बढ़ा न हो तो...
मौसी की आवाज़ सुनकर हम तीनो अलग हुए....
मैं - क्या मौसी आप भी हमेशा गलत समय पर आते हो...
इतने दिनों बाद तो थोड़े से प्यार की बरसात हो रही थी..
वो भी आपने आकर रोक दी..
चलो अब आ गए हो तो आप भी शामिल हो जाओ..
इस मिलान समारोह में...
मैं आगे बढ़कर रिया मौसी को हुग कर लिया....
रिया मौसी - छोड़ मुझे, छोड़ बदमाश ! मैं नहीं आने वाली तेरी चिकनी चुपड़ी बातों में...
इनकी तरह मुझे बेवक़ूफ़ समझा है क्या..
जो तेरे प्यार के जाल में फंस जाउंगी..
मुस्कुराते हुए...
मैं - अले मिली प्याली मौसी जी... अगर ऐसे hi तरय मरता रहा तो एक न एक दिन जरूर फंस जाओगी....
रिया मौसी - है है वो भी देख लेंगे बाद की बात है..
पहले चलके सब डिनर कर लो...
वर्ण कहीं तू hi न फंस जाये माँ की चुंगल में...
मैं *घबराते हुए) - हैं.. इतनी जल्दी डिनर का टाइम हो गया..
अच्छे वक़्त का पता hi नहीं चलता कब गुज़र जाता है...
इससे पहले की माँ आएं....
चलो सब लोग it's टाइम तो डिनर...
हम सभी मुस्कुराते हिये हॉल में आ गए....
और फ्रेश होकर डाइनिंग टेबल में बैठ गए....
धीरे धीरे बाकि सब भी आ गए...
अभी डैड नहीं आये थे डिनर के लिए शायद उनके और जैन अंकल के बीच अभी तक बातें चल रही थी...
मैंने भी सोंचा लाओ कुछ देर माँ के साथ भी कुछ मस्ती की जाये...
माँ - खाना लाइए बहुत जोरर से भूख लगी है..??
माँ - बस 2 मं अभी लती हूँ...
मैं टेबल पर चमच से पटकते हुए... टेबल की धुन बजने लगा...
""याहू याहू...
चाहे कोई मुझे जंगली कहे....
कहने दो जी.. जो भी कहता रहे....
हम भूख के मरे तड़प रहे हैं हम क्या करें...??
याहू.......""
मेरे ऐसा करने से अन्य ! भी अब कहाँ पीछे रहने वाली थी...
वो भी मेरी धुन में धुन लगाने लगी...
हम दोनों की हरकतों से . बाकि सब हसने लगे...
और पुरे हॉल में शोर शराबा मचने लगा....
Mom(Chillate हुए) - अरे शांत भी हो जाओ...
अभी लाती हूँ...
पर हम दोनों न रुके और अपनी धुन जारी राखी..
माँ - अरे कोई शांत करवाओ इन दोनों को...
कितना शोर मचा रखा है....
शोर शराबा सुनकर डैड भी हॉल में आ जाते हैं...
डैड - अरे इन दोनों को क्या हुआ...
क्यों पुरे घर को सर पे उठा रखा है..
अखिल भाई - वो खाना के लिए अपनी स्टाइल में इंतेज़रर कर रहे हैं...
डैड - ओह्ह तो यह बात है...
तब तो मुझे भी इन दोनों का साथ देना चाहिए....
डैड - अरे Jaan-e-Man और कितना टाइम लगेगा..
क्यों बचो को भूखा कर रखा है....
इतना कहकर डैड भी हम दोनों का साथ देने लगे....
माँ खाना लेकर आते हुए....
माँ - हे Bhag*wan! अभी दो काम थे क्या जो आप भी बचे बनकर इनका साथ देने लगे....
आप से भी हद्द है...
डैड - है तो क्यों न दू इन बेचारे भूखे बच्चों का...
देखो कैसे भूख से तड़प रहे है...
कैसी जालिम माँ हो जो उनकी तड़प न दिख रही...
माँ - बस बस... आप तो रहने hi दो..
आपसे तो कुछ कहना hi बेकार है...
उनको चुप करवाने के बजाये खुद भी उनकी तरफदारी करने लगे...
लो आ गया है खाना, खा लो जी भर के...
मैं - अले मेरी प्यारी अम्मा ! इतना गुस्सा ठीक न है बुढ़ापे में...
हम तो नन्हे मुन्ने बचे हैं...
मैं तो आप के hi हाथ से खाऊंगा...
अन्य - और मैं भी...
माँ - ठीक है ठीक है...
आ जाओ....
लेकिन बदमाश पहले तू ये बता मैं तुझे बूढी अम्मा कहा से दिखती हूँ..
मैं - जस्ट चिल माय डिअर माँ...
माँ बरी बरी से एक एक निवाला हम दोनों को खिलने लगी....
डैड - भाग्यवान ! एक निवाला हमें भी मिल जाता तो बहुत महेरबानी होती....
माँ - नहीं मिलेगा...
मैं तो ज़ालिम माँ हु न..
खुद के हाथ से खा लो...
ऐसे hi हंसी मजाक करते हुए डिनर फिनिश हुआ...
अब वक़्त था अपने प्लान को अंजाम देने का....??
आज के लिए बस इतना hi...
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लाइक्स, कमैंट्स और वोट्स का रखना dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!