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- Dec 5, 2013
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Update..No..69*
MeGa..UpDaTe
Abb..Takk...
अब तक आपने पढ़ा....
हयान मंडली अपने कॉलेज डाक्यूमेंट्स लेने जाती है...
जहाँ सबकी मुलाक़ात भर्ती सींग से होती है जो की K.M. कॉलेज की प्रिंसिपल है...
भर्ती सिंह हयान, अन्य और जिन का एडमिशन आलरेडी कर चुकी थी..
हयान अखिल और माहि का एडमिशन भी अपने Hi कॉलेज में करने की रिक्वेस्ट करता है.....
उधर कबीर की मुलाक़ात मीडिया से होती है, और कबीर अपनी फेक डेथ का पर्दाफाश करता है.....
जबकि दूसरी तरफ तामुलु और कस्सदेया के बीच दोनों अंश, हयान और हनी को लेकर चर्चा होती है..
जिसमे किसी गहरी साज़िश रचे जाने की झलक देखने को मिलती है....
Abb..Aage...
आज का दिन माँ और डैड के लिए बहुत खुशनुमा रहा...
कई पुराने दोस्त और भूले बिसरे पलों की याद ताज़ा हो गयी थी ऑफिस जाकर....
एक बार फिर से वही जवानी भरे काम काज वाले दिन याद आ गए थे....
और ऐसा सिर्फ वापसी पर hi पॉसिबल था,
बहुत कुछ मिस कर दिया था सोनपुर जाकर..
खैर छोड़िये इन बातों को..
अब इनमें क्या रखा है...
जो बीत गया सो बीत गया...
ऑफिस से आने के बाद हम सब ने मिलकर माँ, डैड, मौसा, मौसी का बहुत hi अच्छे तरीके से वेलकम किया.....
ढेर सरे गिफ्ट भी दिए जो की मॉल से खरीद कर लाये थे....
डिनर के बाद सब ने मिलकर एक छोटी सी हाउस पार्टी ऑर्गेनिसे की....
जिसमें डैड के ख़ास दोस्त बद्री चाचा, निगहबॉर अनवर अली और उनकी पत्नी ज़ीनत भी साथ आयी.....
(अनवर और ज़ीनत वही है जो की अब तक कबीरा पैलेस में रहते थे....
सबकी वापसी के बाद इन्हें Rashmi's हाउस में शिफ्ट कर दिया गया था....
बाकी का इंट्रो बाद में)
पार्टी ख़त्म होते होते 11 बज गए...
दिन भर के थके होने के बावजूद भी सबने खूब एन्जॉय किया.....
लेकिन इस बीच अन्य ! बहुत बेचैन दिख रही थी....
मैं उनकी बेचैनी को समझ सकता था..
उनकी परेशानी को दूर भी करना चाहता था लेकिन अकेले में वक़्त hi नहीं मिल प् रहा था......
ात लास्ट सब अपने अपने रूम की तरफ चल दिए सोने...
मैं भी चल दिया अपनी रूम की तरफ...
जहाँ जिन, माहि दी और अन्य ! पहले से hi बीएड पर आराम से लेते हुए थे .....
मैं - क्या हुआ आज सबका यहीं सोने का प्लान है क्या....??
जिन - क्यों तुझे कोई प्रॉब्लम है क्या...
अगर परेशानी हो तो मेरा रूम खली है वहां जाकर सो जा....
मैं - मैं क्यों जॉन तेरे रूम....
तुम निकलो यहाँ से...
यह मेरा रूम है सिर्फ और सिर्फ मेरा.....
तभी अन्य! ने इशारों से जिन और माहि दी को दूसरे रूम भेजने को कहा....
जो की अन्य! के साथ चिपकी चली आयीं थी....
मैं भी मज़बूर था.... सीधे तौर पर जाने को कह भी तो नहीं सकता था.....
इस्सलिये मैं भी इशारे से शांत रहने को कह दिया.....
मैं बाथरूम जाकर चेंज करके आ गया...
और सोने की तयारी करने लगा......
अन्य ! को लगा था की शायद रात में हम दोनों खुलकर बात कर सकेंगे लेकिन यहाँ भी सब उल्टा हो गया.....
मैं - अच्छा बातें हो गयी हो तो अब सब शांति से सो जाओ..... सुबह कॉलेज भी जाना है....
लाइट ऑफ करके
चुपचाप जाकर बीएड पर लेट गया...
और सोने की कोशिश करने लगा....
अभी कुछ देर लेते हुए थे की अन्य ! मेरे मुँह पर हाथ रख कर चुप चाप उठने को कहा....
और एक तरफ चलने को इशारा किया....
शायद जिन और माहि दी सो चुकी थी....
मैं अन्य! के पीछे पीछे जिन के रूम आ गया.......
मैं - क्या हुआ आप इतने बेशबर कैसे हो गए....??
अन्य - जब से वो सन देखा है तब से मैं परेशां हु सचाई जानने को और तू है की मुझसे पीछा छुड़ा रहा है..!!
देख अब एहि सही वक़्त है...
तूने वडा वडा भी किया था रात को बताने का.....
इस्सलिये तू न मेरे बस दो सवालों का जवाब दे दे....
बाकि मैं खुद पता कर लुंगी.....!!
मैं - कौन से दो सवाल....??
अन्य - पहला ये की उस दिन मेरे साथ क्या हुआ था जब नानी की डेथ हुयी....??
दूसरा ये की मैं तुम्हें महसूस क्यों नहीं कर प् रही....
और जो सुबह देखा था वो सब क्या है....??
इतना कहने के बाद अन्य ! खामोश होकर बीएड पर बैठ गयी और मेरी तरफ तक ताकि निगाह से देखने लगी......
मैं - आप मेरा सच जानने के लिए नहीं बेकरार हो..
बल्कि ये बेचैनी भूले हुए कुछ पलों की वजह से है...
बास आप बिना कुछ बोले मेरी बातों को गौर से सुनिए....
सब कुछ समझ आ जायेगा.....
है एक बात का ख्याल रहे जो भी बातें मैं आपको बताऊंगा वो बस हम दोनों के दरमियान hi रहे....
अन्य ! ने मेरी है में है मिल्यै...
और मुझसे वडा भी किया....
मैं - तो सुनिए उस दिन आपके साथ क्या हुआ था....??
दरअसल आप अपने कण्ट्रोल से बहार जा चुके थे...
ऐसा आप पर चेयरमैन के ब्लैक पावर के अटैक के कारन हुआ था..!!
आपने हर तरफ Qatl-e-Aam मचा रखा था,
यहाँ तक की आपने गुरुवार ! पर भी तलवार उठा दी....
जिसके परिणामस्वरूप गुरुवार! ने अपनी शक्तियों से आपको पुनः ठीक किया...
और आपके और सभी फॅमिली मेंबर्स (जो भी वहां मौजूद थे) के दिमाग से उस दिन की कुछ यादें मिटा दी...
और सबको बस नार्मल सा हमला लगा...
जिसमे नानी माँ की जान चली गयी....
लेकिन आपकी यादें पूर्ण रूप से नहीं मिट सकीय जिसके कारन आप हर पल बेचैन रहते हो...!!
इतना कुछ कहने के बाद मैं खामोश हो गया....
अन्य - हम्म तो ये वजह थी...
बूत मुझे एक बात समझ न आयी... मुझपर तो देवी माँ का आशीर्वाद है न...
फिर कैसे मुझे बुरी शक्तियों ने अपने वश में कर लिया.....??
मैं - देवी माँ का आशीर्वाद बरक़रार है...
हर घटना के पीछे कोई न कोई कारन जरूर छिपा होता है...
इसके पीछे भी किसी की गहरी साज़िश छिपी है...
लेकिन मैं उसे कामयाब नहीं होने दूंगा भले Hi मुझे इसके लिए किसी भी हद्द से क्यों गुजरना पड़े..!!
अन्य - मुझे कुछ भी समझ नहीं आया...
तुम क्या कहना चाहते हो...??
कैसी घटना... कैसी साज़िश...??
मैं - कुछ सचाई का न जानना hi बेहतर होता है....
नहीं तो उसके चक्कर में हम अपना फ्यूचर तबाह कर डेट है....
इस्सलिये अभी के लिए इस बात को रहने दो....
जब सही वक़्त आएगा..
आपको खुद सब पता चल जायेगा....!!
अन्य - ठीक है...
अगर इसके पीछे का कारन जानने से मेरा फ्यूचर अँधेरे में जा सकता है तो फिरर रहने दो.....
(भले गई तुम न batao..Lekin मैं सब पता कर लुंगी..)
अच्छा तो मेरे दूसरे सवाल का जवाब भी बता दो....
कौन है हनी...??
मैं - इसे समझाना थोड़ा पेचीदा है...
फिर भी कोशिश करता हु बताने की....
मैं हयान hi हनी हु...
लेकिन हनी कभी हयान नहीं हो सकता....!!
अन्य - ये क्या बात हुयी...
तुम हनी कैसे हो सकते हो...
फिर भी यदि तुम hi हनी हो तो फिर हनी हयान क्यों नहीं....??
मैं - वो इस्सलिये क्युकी मैं ईश्वर का उपासक हु जबकि....
हनी ईश्वर के साथ साथ शैतान को भी मंटा है...
उसे सही गलत की कोई समझ नहीं...
उसे बस गलत करने वाले को सजा देना आता है....!!
अन्य - तुम्हारी बातें बिना सर पेअर के जैसी है....
बस गोल मोल घुमाये जा रहे हो...
तो क्या जिसको मैंने सुबह देखा था वो hi हनी था...??
मैं - नहीं वो हनी नहीं.. मैं Hi था...
बस ऐसा गुस्सा आने कारन हुआ था....!!
अन्य - अगर गुस्से कारन हुआ था तो फिर तुम मुझे दूर क्यों भगा रहे थे...
ऐसे बेहवे कर रहे थे की जैसे मेरी वजह से हुआ हो....??
मैं - नहीं ऐसा कुछ नहीं है....
अन्य - तो फिर ठीक से समझाओ न हनी कौन है....??
क्या मैं उससे मिल सकती हूँ....??
मैं - इससे ज्यादा मैं और तजिक से नहीं समझा सकता...
हनी से मिलना अभी ये पॉसिबल नहीं है..
गुरुवार के दिए हुए प्रशाद से वह कुछ समय के लिए गायब हो गया....
अब जब कभी वापस लौटेगा मैं तुम्हारी मुलाक़ात उससे जरूर करवा दूंगा....!!
अन्य - तुमने मुझसे वडा लिया...
जैसे की कुछ गहरे राज़ बताने जा रहे हो...
लेकिन फिर बीच बीच में बातों को घूमते चले गए....
ऐसा लग रहा जैसे की तुम बातों को छिपा रहे हो...
अभी पूरा सच नहीं बताया....
(मन में - अभी सही समय नहीं आया सभी बातों को जानने का...
सही समय आने पर सब बता दूंगा....
फ़िलहाल के लिए इतने से hi संतुष्टि करो...!!)
अन्य - क्या हुआ ... कहा खो गए....
कुछ कहना है तो साफ़ साफ़ बता दो...
मैं - मुझे जो भी बताना था सब बता दिया...
सारा सच आपके सामने है...
आप चाहे तो जो भी समझे....
चाहे तो इतने में hi अपनी बेचैनी को शांत कर लें...
या फिर सही समय आने का इंतज़ार करें....
जब देवी माँ पुनः दर्शन देकर आपको सभी सचाई से स्वयं अवगत करवाएंगी....!!
अन्य - फ़िलहाल अभी रात ज्यादा हो गयी है...
सो आज के लिए इतना काफी है....
बाकी का मैं खुद पता लुंगी....!!
मैं - जो भी करना है करें...
बस अपनी जासूसी गिरी को कुछ काम hi रखियेगा.....
इससे बाकियों को परेशानी होती है..... आपके सवाल - जवाब से....!!
हाहा हहहह
अन्य - बाकियों का तो पता नहीं....
शायद तुम्हें जरूर प्रॉब्लम हो रही है..
चलो तुम्हारी रिक्वेस्ट मान लेती हु...
तुम्हारी जासूसी नहीं करुँगी....!!
मैं - जैसी आपकी मर्जी...
अब चलो भी नींद बहुत आ रागी है....
सबसे लेट उठने का इरादा तो नहीं है न...!!
अन्य - कहीं चलने की जरुरत नहीं....
वो मोती हमारे रूम में सो रही है..... सो हम दोनों यहीं सो जाते हैं...
वैसे भी बस 5 हरष की तो बात है .. ...
उसके बाद फिर से नया सवेरा नया दिन...!!
मैंने आगे कोई जवाब न दिया...
चुप चाप वही बीएड पर लेट गया....
अन्य - कबसे देख रही hu....Kuchh बदले बदले से लग रहे हो...
मैं - अब सोने भी दो...
कुछ नहीं बदला सब वैसा hi है..
अन्य - सब वैसा hi है तो फिर इतने दूर दूर क्यों लेते हो..
थोड़ा करीब आओ... ऐसे न घबराओ....!!
मैं - हद्द है तुमसे भी किसी तरह में भी सुकून नहीं...
(अन्य की तरफ खिसकते हुए)
अब इतने करीब ठीक है न....
अन्य - थोड़ा और पास...
देखो अभी कितना फासला है...
""यह फासले थोड़े काम कार्डो
मैं शुरुआत करती हूँ
तुम ख़तम कार्डो..""
मैं - वाओ ! ब्यूटीफुल लाइन्स.....
अच्छा मेरी भी सुनो...
""बड़े ही अज़ीब से ,
ये मोहब्बत के काफ़िले होते हैं ,
दिल के करीब जो हो ,
उसी से अक्सर फ़ासले होते हैं..!!!""
अन्य - ""हर रोज की तरह वो शाम की लड़ाई के बाद की हसीं रात हो,
जहाँ हर सुबह, बस तेरे साथ हो,
दिन के फासलों में तेरी याद हो,,
बस फिर वही, हर रोज की तरह,
वो शाम की लड़ाई के बाद की हसीं रात हो....""
मैंने आगे कोई जवाब न दिया....
बस अन्य को हुग कर लिया....
और उसके होंठो पे अपनी ऊँगली रख दी...
और ख़ामोशी से सोने को कहा...
अन्य ने भी मुझे तिघ्टलय हुग कर लिया...
हम दोनों एक दूजे की बाँहों में हसीं रात की वादियों में खोने लगे.....
""तुझसे दूर रहना ये मेरी मजबूरी है ,
ना चाहकर भी दरमियां अपने दूरी है ,
महज साथ तेरे होने से ,
मेरी ये जिन्दगी, लगती पूरी है ,
तेरे बिना मेरी हर ख़ुशी अधूरी है ,
कैसे तुझे समझाऊं तू मेरे लिये कितना जरुरी है..!!""
_________________________________
""एक काम भी ठीक ढंग से नहीं होता तुम तीनो से...
तुम्हारी नाकामियों की वजह से महामहिम से मुझे बातें सुन्नी पड़ती है...
बास बहुत हुआ...
अब एक भी गलती हुयी तो उसकी सजा तुम्हें अपना जीवन खोकर चुकानी होगी...""
बुमलीन - मालिक ! हमने तो वही किया जैसा आपने करने को कहा था....
अब वो डी6 अर्ध मानव अपना काम ठीक ढंग से नहीं कर पाया तो इसमें हमारी क्या गलती....??
तामुल्लू - जब ज़िम्मेदारी तुम्हें दी गयी है तो हार का बोझ भी तुम्हारे Hi सर आएगा....
इस्सलिये फालतू की बकवास न कर के ढूंढो उससे और मेरे सामने प्रस्तुत करो....
मुझे उसके मस्तिष्क से उसकी यादें निकालनी है...
जो भी जानकारी उसके पास है सब हमारे काम की है.....!!
बुमलीन - अब कैसे धुन्धु उसे....
न जाने कहाँ गायब हो गया है....
डर के मरे न जाने किश बिल में छिपा बैठा है....??
तामुल्लू - ये सब तुम्हें पहले सोचना चाहिए था.....
उसे काली शक्तियां देने से पहले...
मुझे कोई बहाने बजी नहीं सुन्नी केवल परिणाम चाहिए....
बास परिणाम....!!
बुमलीन - किन्तु मालिक ! अपने hi तो कहा था.... हम से कोई भी उस तक नहीं पहुँच सकता.... इस्सलिये मैंने उस डी6 को मोहरा बनाया था....
लेकिन ऐसा कुछ भी हो सकता मुझसे जरा सी भी उम्मीद न थी...
तामुल्लू - उम्मीद तो मैंने भी तुम तीनो से बहुत सी कर राखी थी...
लेकिन क्या तुम तीनो सही मायने में खरे उतरे हो...??
जरा सा भी काम ठीक ढंग से नहीं किया....
तुम (बुमलीन) शक्ति के नशे में चूर दिन भर अय्याशी में लगे रहते हो....
और इनको (नरकिस्सा) कहा था की अपने हुश्न के जलवों से मानव को वश में करो...
और उन्हें काली शक्ति का उपाशक बनाओ...
लेकिन ये भी अपने मार्ग से भटक कर अंडरवर्ल्ड की क्वीन बनने की चाहत सजा बैठी है....
बस हमेशा जुआन शराब में डूबी रहती है....
क्या जवाब दूंगा मालिक को जब वो कैद से आजाद होकर वापस आएंगे...
तामुल्लू के मुँह से गेरयों का नाम सुनकर तीनो की सिटी पित्ती गम हो गयी......
डरते हुए लड़खड़ाती आवाज़ में.....
सक्कूबी ,- क्या मालिक के आज़ाद होने का समय आ चूका है...??
तामुल्लू - समय हुआ है, या नहीं...
यह मायने नहीं रखता है ...
अगर किसी बात से फ़र्क़ पड़रा है तो बस इतना hi की क्या उनसे किया हुआ वादा पूरा हुआ है या नहीं.....
वडा नहीं पूरा हुआ... तो सोंचो इसका क्या परिणंम हो सकता है...??
तामुल्लू की बात सुनकर बुमलीन, सक्कूबी और नरकिस्सा को एक अंजना डर सताने लगता है....
तीनो एक साथ.....
""मालिक हमें हमारी भूल जो क्षमा करें...
हमें एक और मौका दे....
हर बिगड़े हुए खेल को पुनः सही ढंग से ठीक करेंगे....
बस हमें आने वाले खतरे से बचा कर रखें.....
तामुल्लू - वैसे तो यह मेरे बस से बहार है...
फिर भी मैं कोशिश करूँगा...
तुम तीनो सेफ रहो...
बस एक बात का ख्याल रहे....
अपने कर्त्वयों की ओर वापस लौट जाओ.....
"जी मालिक! ऐसा hi होगा"
इतना बोलकर बुमलीन, नरकिस्सा और सक्कूबी गायब हो गए.....
उनके जाते hi तामुल्लू जोरर जोरर से हसने लगा ....
""खेल शुरू किया जाये""
आज कलिये बस इतना hi..
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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
MeGa..UpDaTe
Abb..Takk...
अब तक आपने पढ़ा....
हयान मंडली अपने कॉलेज डाक्यूमेंट्स लेने जाती है...
जहाँ सबकी मुलाक़ात भर्ती सींग से होती है जो की K.M. कॉलेज की प्रिंसिपल है...
भर्ती सिंह हयान, अन्य और जिन का एडमिशन आलरेडी कर चुकी थी..
हयान अखिल और माहि का एडमिशन भी अपने Hi कॉलेज में करने की रिक्वेस्ट करता है.....
उधर कबीर की मुलाक़ात मीडिया से होती है, और कबीर अपनी फेक डेथ का पर्दाफाश करता है.....
जबकि दूसरी तरफ तामुलु और कस्सदेया के बीच दोनों अंश, हयान और हनी को लेकर चर्चा होती है..
जिसमे किसी गहरी साज़िश रचे जाने की झलक देखने को मिलती है....
Abb..Aage...
आज का दिन माँ और डैड के लिए बहुत खुशनुमा रहा...
कई पुराने दोस्त और भूले बिसरे पलों की याद ताज़ा हो गयी थी ऑफिस जाकर....
एक बार फिर से वही जवानी भरे काम काज वाले दिन याद आ गए थे....
और ऐसा सिर्फ वापसी पर hi पॉसिबल था,
बहुत कुछ मिस कर दिया था सोनपुर जाकर..
खैर छोड़िये इन बातों को..
अब इनमें क्या रखा है...
जो बीत गया सो बीत गया...
ऑफिस से आने के बाद हम सब ने मिलकर माँ, डैड, मौसा, मौसी का बहुत hi अच्छे तरीके से वेलकम किया.....
ढेर सरे गिफ्ट भी दिए जो की मॉल से खरीद कर लाये थे....
डिनर के बाद सब ने मिलकर एक छोटी सी हाउस पार्टी ऑर्गेनिसे की....
जिसमें डैड के ख़ास दोस्त बद्री चाचा, निगहबॉर अनवर अली और उनकी पत्नी ज़ीनत भी साथ आयी.....
(अनवर और ज़ीनत वही है जो की अब तक कबीरा पैलेस में रहते थे....
सबकी वापसी के बाद इन्हें Rashmi's हाउस में शिफ्ट कर दिया गया था....
बाकी का इंट्रो बाद में)
पार्टी ख़त्म होते होते 11 बज गए...
दिन भर के थके होने के बावजूद भी सबने खूब एन्जॉय किया.....
लेकिन इस बीच अन्य ! बहुत बेचैन दिख रही थी....
मैं उनकी बेचैनी को समझ सकता था..
उनकी परेशानी को दूर भी करना चाहता था लेकिन अकेले में वक़्त hi नहीं मिल प् रहा था......
ात लास्ट सब अपने अपने रूम की तरफ चल दिए सोने...
मैं भी चल दिया अपनी रूम की तरफ...
जहाँ जिन, माहि दी और अन्य ! पहले से hi बीएड पर आराम से लेते हुए थे .....
मैं - क्या हुआ आज सबका यहीं सोने का प्लान है क्या....??
जिन - क्यों तुझे कोई प्रॉब्लम है क्या...
अगर परेशानी हो तो मेरा रूम खली है वहां जाकर सो जा....
मैं - मैं क्यों जॉन तेरे रूम....
तुम निकलो यहाँ से...
यह मेरा रूम है सिर्फ और सिर्फ मेरा.....
तभी अन्य! ने इशारों से जिन और माहि दी को दूसरे रूम भेजने को कहा....
जो की अन्य! के साथ चिपकी चली आयीं थी....
मैं भी मज़बूर था.... सीधे तौर पर जाने को कह भी तो नहीं सकता था.....
इस्सलिये मैं भी इशारे से शांत रहने को कह दिया.....
मैं बाथरूम जाकर चेंज करके आ गया...
और सोने की तयारी करने लगा......
अन्य ! को लगा था की शायद रात में हम दोनों खुलकर बात कर सकेंगे लेकिन यहाँ भी सब उल्टा हो गया.....
मैं - अच्छा बातें हो गयी हो तो अब सब शांति से सो जाओ..... सुबह कॉलेज भी जाना है....
लाइट ऑफ करके
चुपचाप जाकर बीएड पर लेट गया...
और सोने की कोशिश करने लगा....
अभी कुछ देर लेते हुए थे की अन्य ! मेरे मुँह पर हाथ रख कर चुप चाप उठने को कहा....
और एक तरफ चलने को इशारा किया....
शायद जिन और माहि दी सो चुकी थी....
मैं अन्य! के पीछे पीछे जिन के रूम आ गया.......
मैं - क्या हुआ आप इतने बेशबर कैसे हो गए....??
अन्य - जब से वो सन देखा है तब से मैं परेशां हु सचाई जानने को और तू है की मुझसे पीछा छुड़ा रहा है..!!
देख अब एहि सही वक़्त है...
तूने वडा वडा भी किया था रात को बताने का.....
इस्सलिये तू न मेरे बस दो सवालों का जवाब दे दे....
बाकि मैं खुद पता कर लुंगी.....!!
मैं - कौन से दो सवाल....??
अन्य - पहला ये की उस दिन मेरे साथ क्या हुआ था जब नानी की डेथ हुयी....??
दूसरा ये की मैं तुम्हें महसूस क्यों नहीं कर प् रही....
और जो सुबह देखा था वो सब क्या है....??
इतना कहने के बाद अन्य ! खामोश होकर बीएड पर बैठ गयी और मेरी तरफ तक ताकि निगाह से देखने लगी......
मैं - आप मेरा सच जानने के लिए नहीं बेकरार हो..
बल्कि ये बेचैनी भूले हुए कुछ पलों की वजह से है...
बास आप बिना कुछ बोले मेरी बातों को गौर से सुनिए....
सब कुछ समझ आ जायेगा.....
है एक बात का ख्याल रहे जो भी बातें मैं आपको बताऊंगा वो बस हम दोनों के दरमियान hi रहे....
अन्य ! ने मेरी है में है मिल्यै...
और मुझसे वडा भी किया....
मैं - तो सुनिए उस दिन आपके साथ क्या हुआ था....??
दरअसल आप अपने कण्ट्रोल से बहार जा चुके थे...
ऐसा आप पर चेयरमैन के ब्लैक पावर के अटैक के कारन हुआ था..!!
आपने हर तरफ Qatl-e-Aam मचा रखा था,
यहाँ तक की आपने गुरुवार ! पर भी तलवार उठा दी....
जिसके परिणामस्वरूप गुरुवार! ने अपनी शक्तियों से आपको पुनः ठीक किया...
और आपके और सभी फॅमिली मेंबर्स (जो भी वहां मौजूद थे) के दिमाग से उस दिन की कुछ यादें मिटा दी...
और सबको बस नार्मल सा हमला लगा...
जिसमे नानी माँ की जान चली गयी....
लेकिन आपकी यादें पूर्ण रूप से नहीं मिट सकीय जिसके कारन आप हर पल बेचैन रहते हो...!!
इतना कुछ कहने के बाद मैं खामोश हो गया....
अन्य - हम्म तो ये वजह थी...
बूत मुझे एक बात समझ न आयी... मुझपर तो देवी माँ का आशीर्वाद है न...
फिर कैसे मुझे बुरी शक्तियों ने अपने वश में कर लिया.....??
मैं - देवी माँ का आशीर्वाद बरक़रार है...
हर घटना के पीछे कोई न कोई कारन जरूर छिपा होता है...
इसके पीछे भी किसी की गहरी साज़िश छिपी है...
लेकिन मैं उसे कामयाब नहीं होने दूंगा भले Hi मुझे इसके लिए किसी भी हद्द से क्यों गुजरना पड़े..!!
अन्य - मुझे कुछ भी समझ नहीं आया...
तुम क्या कहना चाहते हो...??
कैसी घटना... कैसी साज़िश...??
मैं - कुछ सचाई का न जानना hi बेहतर होता है....
नहीं तो उसके चक्कर में हम अपना फ्यूचर तबाह कर डेट है....
इस्सलिये अभी के लिए इस बात को रहने दो....
जब सही वक़्त आएगा..
आपको खुद सब पता चल जायेगा....!!
अन्य - ठीक है...
अगर इसके पीछे का कारन जानने से मेरा फ्यूचर अँधेरे में जा सकता है तो फिरर रहने दो.....
(भले गई तुम न batao..Lekin मैं सब पता कर लुंगी..)
अच्छा तो मेरे दूसरे सवाल का जवाब भी बता दो....
कौन है हनी...??
मैं - इसे समझाना थोड़ा पेचीदा है...
फिर भी कोशिश करता हु बताने की....
मैं हयान hi हनी हु...
लेकिन हनी कभी हयान नहीं हो सकता....!!
अन्य - ये क्या बात हुयी...
तुम हनी कैसे हो सकते हो...
फिर भी यदि तुम hi हनी हो तो फिर हनी हयान क्यों नहीं....??
मैं - वो इस्सलिये क्युकी मैं ईश्वर का उपासक हु जबकि....
हनी ईश्वर के साथ साथ शैतान को भी मंटा है...
उसे सही गलत की कोई समझ नहीं...
उसे बस गलत करने वाले को सजा देना आता है....!!
अन्य - तुम्हारी बातें बिना सर पेअर के जैसी है....
बस गोल मोल घुमाये जा रहे हो...
तो क्या जिसको मैंने सुबह देखा था वो hi हनी था...??
मैं - नहीं वो हनी नहीं.. मैं Hi था...
बस ऐसा गुस्सा आने कारन हुआ था....!!
अन्य - अगर गुस्से कारन हुआ था तो फिर तुम मुझे दूर क्यों भगा रहे थे...
ऐसे बेहवे कर रहे थे की जैसे मेरी वजह से हुआ हो....??
मैं - नहीं ऐसा कुछ नहीं है....
अन्य - तो फिर ठीक से समझाओ न हनी कौन है....??
क्या मैं उससे मिल सकती हूँ....??
मैं - इससे ज्यादा मैं और तजिक से नहीं समझा सकता...
हनी से मिलना अभी ये पॉसिबल नहीं है..
गुरुवार के दिए हुए प्रशाद से वह कुछ समय के लिए गायब हो गया....
अब जब कभी वापस लौटेगा मैं तुम्हारी मुलाक़ात उससे जरूर करवा दूंगा....!!
अन्य - तुमने मुझसे वडा लिया...
जैसे की कुछ गहरे राज़ बताने जा रहे हो...
लेकिन फिर बीच बीच में बातों को घूमते चले गए....
ऐसा लग रहा जैसे की तुम बातों को छिपा रहे हो...
अभी पूरा सच नहीं बताया....
(मन में - अभी सही समय नहीं आया सभी बातों को जानने का...
सही समय आने पर सब बता दूंगा....
फ़िलहाल के लिए इतने से hi संतुष्टि करो...!!)
अन्य - क्या हुआ ... कहा खो गए....
कुछ कहना है तो साफ़ साफ़ बता दो...
मैं - मुझे जो भी बताना था सब बता दिया...
सारा सच आपके सामने है...
आप चाहे तो जो भी समझे....
चाहे तो इतने में hi अपनी बेचैनी को शांत कर लें...
या फिर सही समय आने का इंतज़ार करें....
जब देवी माँ पुनः दर्शन देकर आपको सभी सचाई से स्वयं अवगत करवाएंगी....!!
अन्य - फ़िलहाल अभी रात ज्यादा हो गयी है...
सो आज के लिए इतना काफी है....
बाकी का मैं खुद पता लुंगी....!!
मैं - जो भी करना है करें...
बस अपनी जासूसी गिरी को कुछ काम hi रखियेगा.....
इससे बाकियों को परेशानी होती है..... आपके सवाल - जवाब से....!!
हाहा हहहह
अन्य - बाकियों का तो पता नहीं....
शायद तुम्हें जरूर प्रॉब्लम हो रही है..
चलो तुम्हारी रिक्वेस्ट मान लेती हु...
तुम्हारी जासूसी नहीं करुँगी....!!
मैं - जैसी आपकी मर्जी...
अब चलो भी नींद बहुत आ रागी है....
सबसे लेट उठने का इरादा तो नहीं है न...!!
अन्य - कहीं चलने की जरुरत नहीं....
वो मोती हमारे रूम में सो रही है..... सो हम दोनों यहीं सो जाते हैं...
वैसे भी बस 5 हरष की तो बात है .. ...
उसके बाद फिर से नया सवेरा नया दिन...!!
मैंने आगे कोई जवाब न दिया...
चुप चाप वही बीएड पर लेट गया....
अन्य - कबसे देख रही hu....Kuchh बदले बदले से लग रहे हो...
मैं - अब सोने भी दो...
कुछ नहीं बदला सब वैसा hi है..
अन्य - सब वैसा hi है तो फिर इतने दूर दूर क्यों लेते हो..
थोड़ा करीब आओ... ऐसे न घबराओ....!!
मैं - हद्द है तुमसे भी किसी तरह में भी सुकून नहीं...
(अन्य की तरफ खिसकते हुए)
अब इतने करीब ठीक है न....
अन्य - थोड़ा और पास...
देखो अभी कितना फासला है...
""यह फासले थोड़े काम कार्डो
मैं शुरुआत करती हूँ
तुम ख़तम कार्डो..""
मैं - वाओ ! ब्यूटीफुल लाइन्स.....
अच्छा मेरी भी सुनो...
""बड़े ही अज़ीब से ,
ये मोहब्बत के काफ़िले होते हैं ,
दिल के करीब जो हो ,
उसी से अक्सर फ़ासले होते हैं..!!!""
अन्य - ""हर रोज की तरह वो शाम की लड़ाई के बाद की हसीं रात हो,
जहाँ हर सुबह, बस तेरे साथ हो,
दिन के फासलों में तेरी याद हो,,
बस फिर वही, हर रोज की तरह,
वो शाम की लड़ाई के बाद की हसीं रात हो....""
मैंने आगे कोई जवाब न दिया....
बस अन्य को हुग कर लिया....
और उसके होंठो पे अपनी ऊँगली रख दी...
और ख़ामोशी से सोने को कहा...
अन्य ने भी मुझे तिघ्टलय हुग कर लिया...
हम दोनों एक दूजे की बाँहों में हसीं रात की वादियों में खोने लगे.....
""तुझसे दूर रहना ये मेरी मजबूरी है ,
ना चाहकर भी दरमियां अपने दूरी है ,
महज साथ तेरे होने से ,
मेरी ये जिन्दगी, लगती पूरी है ,
तेरे बिना मेरी हर ख़ुशी अधूरी है ,
कैसे तुझे समझाऊं तू मेरे लिये कितना जरुरी है..!!""
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""एक काम भी ठीक ढंग से नहीं होता तुम तीनो से...
तुम्हारी नाकामियों की वजह से महामहिम से मुझे बातें सुन्नी पड़ती है...
बास बहुत हुआ...
अब एक भी गलती हुयी तो उसकी सजा तुम्हें अपना जीवन खोकर चुकानी होगी...""
बुमलीन - मालिक ! हमने तो वही किया जैसा आपने करने को कहा था....
अब वो डी6 अर्ध मानव अपना काम ठीक ढंग से नहीं कर पाया तो इसमें हमारी क्या गलती....??
तामुल्लू - जब ज़िम्मेदारी तुम्हें दी गयी है तो हार का बोझ भी तुम्हारे Hi सर आएगा....
इस्सलिये फालतू की बकवास न कर के ढूंढो उससे और मेरे सामने प्रस्तुत करो....
मुझे उसके मस्तिष्क से उसकी यादें निकालनी है...
जो भी जानकारी उसके पास है सब हमारे काम की है.....!!
बुमलीन - अब कैसे धुन्धु उसे....
न जाने कहाँ गायब हो गया है....
डर के मरे न जाने किश बिल में छिपा बैठा है....??
तामुल्लू - ये सब तुम्हें पहले सोचना चाहिए था.....
उसे काली शक्तियां देने से पहले...
मुझे कोई बहाने बजी नहीं सुन्नी केवल परिणाम चाहिए....
बास परिणाम....!!
बुमलीन - किन्तु मालिक ! अपने hi तो कहा था.... हम से कोई भी उस तक नहीं पहुँच सकता.... इस्सलिये मैंने उस डी6 को मोहरा बनाया था....
लेकिन ऐसा कुछ भी हो सकता मुझसे जरा सी भी उम्मीद न थी...
तामुल्लू - उम्मीद तो मैंने भी तुम तीनो से बहुत सी कर राखी थी...
लेकिन क्या तुम तीनो सही मायने में खरे उतरे हो...??
जरा सा भी काम ठीक ढंग से नहीं किया....
तुम (बुमलीन) शक्ति के नशे में चूर दिन भर अय्याशी में लगे रहते हो....
और इनको (नरकिस्सा) कहा था की अपने हुश्न के जलवों से मानव को वश में करो...
और उन्हें काली शक्ति का उपाशक बनाओ...
लेकिन ये भी अपने मार्ग से भटक कर अंडरवर्ल्ड की क्वीन बनने की चाहत सजा बैठी है....
बस हमेशा जुआन शराब में डूबी रहती है....
क्या जवाब दूंगा मालिक को जब वो कैद से आजाद होकर वापस आएंगे...
तामुल्लू के मुँह से गेरयों का नाम सुनकर तीनो की सिटी पित्ती गम हो गयी......
डरते हुए लड़खड़ाती आवाज़ में.....
सक्कूबी ,- क्या मालिक के आज़ाद होने का समय आ चूका है...??
तामुल्लू - समय हुआ है, या नहीं...
यह मायने नहीं रखता है ...
अगर किसी बात से फ़र्क़ पड़रा है तो बस इतना hi की क्या उनसे किया हुआ वादा पूरा हुआ है या नहीं.....
वडा नहीं पूरा हुआ... तो सोंचो इसका क्या परिणंम हो सकता है...??
तामुल्लू की बात सुनकर बुमलीन, सक्कूबी और नरकिस्सा को एक अंजना डर सताने लगता है....
तीनो एक साथ.....
""मालिक हमें हमारी भूल जो क्षमा करें...
हमें एक और मौका दे....
हर बिगड़े हुए खेल को पुनः सही ढंग से ठीक करेंगे....
बस हमें आने वाले खतरे से बचा कर रखें.....
तामुल्लू - वैसे तो यह मेरे बस से बहार है...
फिर भी मैं कोशिश करूँगा...
तुम तीनो सेफ रहो...
बस एक बात का ख्याल रहे....
अपने कर्त्वयों की ओर वापस लौट जाओ.....
"जी मालिक! ऐसा hi होगा"
इतना बोलकर बुमलीन, नरकिस्सा और सक्कूबी गायब हो गए.....
उनके जाते hi तामुल्लू जोरर जोरर से हसने लगा ....
""खेल शुरू किया जाये""
आज कलिये बस इतना hi..
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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!