Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan - Page 22 - SexBaba
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Hayaan - Ek Insaan Ya Shaitaan

Update..No..69*

MeGa..UpDaTe

Abb..Takk...

अब तक आपने पढ़ा....

हयान मंडली अपने कॉलेज डाक्यूमेंट्स लेने जाती है...

जहाँ सबकी मुलाक़ात भर्ती सींग से होती है जो की K.M. कॉलेज की प्रिंसिपल है...

भर्ती सिंह हयान, अन्य और जिन का एडमिशन आलरेडी कर चुकी थी..

हयान अखिल और माहि का एडमिशन भी अपने Hi कॉलेज में करने की रिक्वेस्ट करता है.....

उधर कबीर की मुलाक़ात मीडिया से होती है, और कबीर अपनी फेक डेथ का पर्दाफाश करता है.....

जबकि दूसरी तरफ तामुलु और कस्सदेया के बीच दोनों अंश, हयान और हनी को लेकर चर्चा होती है..


जिसमे किसी गहरी साज़िश रचे जाने की झलक देखने को मिलती है....

Abb..Aage...

आज का दिन माँ और डैड के लिए बहुत खुशनुमा रहा...

कई पुराने दोस्त और भूले बिसरे पलों की याद ताज़ा हो गयी थी ऑफिस जाकर....

एक बार फिर से वही जवानी भरे काम काज वाले दिन याद आ गए थे....

और ऐसा सिर्फ वापसी पर hi पॉसिबल था,

बहुत कुछ मिस कर दिया था सोनपुर जाकर..

खैर छोड़िये इन बातों को..

अब इनमें क्या रखा है...

जो बीत गया सो बीत गया...

ऑफिस से आने के बाद हम सब ने मिलकर माँ, डैड, मौसा, मौसी का बहुत hi अच्छे तरीके से वेलकम किया.....

ढेर सरे गिफ्ट भी दिए जो की मॉल से खरीद कर लाये थे....

डिनर के बाद सब ने मिलकर एक छोटी सी हाउस पार्टी ऑर्गेनिसे की....

जिसमें डैड के ख़ास दोस्त बद्री चाचा, निगहबॉर अनवर अली और उनकी पत्नी ज़ीनत भी साथ आयी.....

(अनवर और ज़ीनत वही है जो की अब तक कबीरा पैलेस में रहते थे....

सबकी वापसी के बाद इन्हें Rashmi's हाउस में शिफ्ट कर दिया गया था....

बाकी का इंट्रो बाद में)

पार्टी ख़त्म होते होते 11 बज गए...

दिन भर के थके होने के बावजूद भी सबने खूब एन्जॉय किया.....

लेकिन इस बीच अन्य ! बहुत बेचैन दिख रही थी....

मैं उनकी बेचैनी को समझ सकता था..

उनकी परेशानी को दूर भी करना चाहता था लेकिन अकेले में वक़्त hi नहीं मिल प् रहा था......

ात लास्ट सब अपने अपने रूम की तरफ चल दिए सोने...

मैं भी चल दिया अपनी रूम की तरफ...

जहाँ जिन, माहि दी और अन्य ! पहले से hi बीएड पर आराम से लेते हुए थे .....

मैं - क्या हुआ आज सबका यहीं सोने का प्लान है क्या....??

जिन - क्यों तुझे कोई प्रॉब्लम है क्या...

अगर परेशानी हो तो मेरा रूम खली है वहां जाकर सो जा....

मैं - मैं क्यों जॉन तेरे रूम....

तुम निकलो यहाँ से...

यह मेरा रूम है सिर्फ और सिर्फ मेरा.....

तभी अन्य! ने इशारों से जिन और माहि दी को दूसरे रूम भेजने को कहा....

जो की अन्य! के साथ चिपकी चली आयीं थी....

मैं भी मज़बूर था.... सीधे तौर पर जाने को कह भी तो नहीं सकता था.....

इस्सलिये मैं भी इशारे से शांत रहने को कह दिया.....

मैं बाथरूम जाकर चेंज करके आ गया...

और सोने की तयारी करने लगा......

अन्य ! को लगा था की शायद रात में हम दोनों खुलकर बात कर सकेंगे लेकिन यहाँ भी सब उल्टा हो गया.....

मैं - अच्छा बातें हो गयी हो तो अब सब शांति से सो जाओ..... सुबह कॉलेज भी जाना है....

लाइट ऑफ करके

चुपचाप जाकर बीएड पर लेट गया...

और सोने की कोशिश करने लगा....

अभी कुछ देर लेते हुए थे की अन्य ! मेरे मुँह पर हाथ रख कर चुप चाप उठने को कहा....

और एक तरफ चलने को इशारा किया....

शायद जिन और माहि दी सो चुकी थी....

मैं अन्य! के पीछे पीछे जिन के रूम आ गया.......

मैं - क्या हुआ आप इतने बेशबर कैसे हो गए....??

अन्य - जब से वो सन देखा है तब से मैं परेशां हु सचाई जानने को और तू है की मुझसे पीछा छुड़ा रहा है..!!

देख अब एहि सही वक़्त है...

तूने वडा वडा भी किया था रात को बताने का.....

इस्सलिये तू न मेरे बस दो सवालों का जवाब दे दे....

बाकि मैं खुद पता कर लुंगी.....!!

मैं - कौन से दो सवाल....??

अन्य - पहला ये की उस दिन मेरे साथ क्या हुआ था जब नानी की डेथ हुयी....??

दूसरा ये की मैं तुम्हें महसूस क्यों नहीं कर प् रही....

और जो सुबह देखा था वो सब क्या है....??

इतना कहने के बाद अन्य ! खामोश होकर बीएड पर बैठ गयी और मेरी तरफ तक ताकि निगाह से देखने लगी......

मैं - आप मेरा सच जानने के लिए नहीं बेकरार हो..

बल्कि ये बेचैनी भूले हुए कुछ पलों की वजह से है...

बास आप बिना कुछ बोले मेरी बातों को गौर से सुनिए....

सब कुछ समझ आ जायेगा.....

है एक बात का ख्याल रहे जो भी बातें मैं आपको बताऊंगा वो बस हम दोनों के दरमियान hi रहे....

अन्य ! ने मेरी है में है मिल्यै...

और मुझसे वडा भी किया....

मैं - तो सुनिए उस दिन आपके साथ क्या हुआ था....??

दरअसल आप अपने कण्ट्रोल से बहार जा चुके थे...

ऐसा आप पर चेयरमैन के ब्लैक पावर के अटैक के कारन हुआ था..!!

आपने हर तरफ Qatl-e-Aam मचा रखा था,

यहाँ तक की आपने गुरुवार ! पर भी तलवार उठा दी....

जिसके परिणामस्वरूप गुरुवार! ने अपनी शक्तियों से आपको पुनः ठीक किया...

और आपके और सभी फॅमिली मेंबर्स (जो भी वहां मौजूद थे) के दिमाग से उस दिन की कुछ यादें मिटा दी...

और सबको बस नार्मल सा हमला लगा...

जिसमे नानी माँ की जान चली गयी....

लेकिन आपकी यादें पूर्ण रूप से नहीं मिट सकीय जिसके कारन आप हर पल बेचैन रहते हो...!!

इतना कुछ कहने के बाद मैं खामोश हो गया....

अन्य - हम्म तो ये वजह थी...

बूत मुझे एक बात समझ न आयी... मुझपर तो देवी माँ का आशीर्वाद है न...

फिर कैसे मुझे बुरी शक्तियों ने अपने वश में कर लिया.....??

मैं - देवी माँ का आशीर्वाद बरक़रार है...

हर घटना के पीछे कोई न कोई कारन जरूर छिपा होता है...

इसके पीछे भी किसी की गहरी साज़िश छिपी है...

लेकिन मैं उसे कामयाब नहीं होने दूंगा भले Hi मुझे इसके लिए किसी भी हद्द से क्यों गुजरना पड़े..!!

अन्य - मुझे कुछ भी समझ नहीं आया...

तुम क्या कहना चाहते हो...??

कैसी घटना... कैसी साज़िश...??

मैं - कुछ सचाई का न जानना hi बेहतर होता है....

नहीं तो उसके चक्कर में हम अपना फ्यूचर तबाह कर डेट है....

इस्सलिये अभी के लिए इस बात को रहने दो....

जब सही वक़्त आएगा..

आपको खुद सब पता चल जायेगा....!!

अन्य - ठीक है...

अगर इसके पीछे का कारन जानने से मेरा फ्यूचर अँधेरे में जा सकता है तो फिरर रहने दो.....

(भले गई तुम न batao..Lekin मैं सब पता कर लुंगी..)

अच्छा तो मेरे दूसरे सवाल का जवाब भी बता दो....

कौन है हनी...??

मैं - इसे समझाना थोड़ा पेचीदा है...

फिर भी कोशिश करता हु बताने की....

मैं हयान hi हनी हु...

लेकिन हनी कभी हयान नहीं हो सकता....!!

अन्य - ये क्या बात हुयी...

तुम हनी कैसे हो सकते हो...

फिर भी यदि तुम hi हनी हो तो फिर हनी हयान क्यों नहीं....??

मैं - वो इस्सलिये क्युकी मैं ईश्वर का उपासक हु जबकि....

हनी ईश्वर के साथ साथ शैतान को भी मंटा है...

उसे सही गलत की कोई समझ नहीं...

उसे बस गलत करने वाले को सजा देना आता है....!!

अन्य - तुम्हारी बातें बिना सर पेअर के जैसी है....

बस गोल मोल घुमाये जा रहे हो...

तो क्या जिसको मैंने सुबह देखा था वो hi हनी था...??

मैं - नहीं वो हनी नहीं.. मैं Hi था...

बस ऐसा गुस्सा आने कारन हुआ था....!!

अन्य - अगर गुस्से कारन हुआ था तो फिर तुम मुझे दूर क्यों भगा रहे थे...

ऐसे बेहवे कर रहे थे की जैसे मेरी वजह से हुआ हो....??

मैं - नहीं ऐसा कुछ नहीं है....

अन्य - तो फिर ठीक से समझाओ न हनी कौन है....??

क्या मैं उससे मिल सकती हूँ....??

मैं - इससे ज्यादा मैं और तजिक से नहीं समझा सकता...

हनी से मिलना अभी ये पॉसिबल नहीं है..

गुरुवार के दिए हुए प्रशाद से वह कुछ समय के लिए गायब हो गया....

अब जब कभी वापस लौटेगा मैं तुम्हारी मुलाक़ात उससे जरूर करवा दूंगा....!!

अन्य - तुमने मुझसे वडा लिया...

जैसे की कुछ गहरे राज़ बताने जा रहे हो...

लेकिन फिर बीच बीच में बातों को घूमते चले गए....

ऐसा लग रहा जैसे की तुम बातों को छिपा रहे हो...

अभी पूरा सच नहीं बताया....

(मन में - अभी सही समय नहीं आया सभी बातों को जानने का...

सही समय आने पर सब बता दूंगा....

फ़िलहाल के लिए इतने से hi संतुष्टि करो...!!)

अन्य - क्या हुआ ... कहा खो गए....

कुछ कहना है तो साफ़ साफ़ बता दो...

मैं - मुझे जो भी बताना था सब बता दिया...

सारा सच आपके सामने है...

आप चाहे तो जो भी समझे....

चाहे तो इतने में hi अपनी बेचैनी को शांत कर लें...

या फिर सही समय आने का इंतज़ार करें....

जब देवी माँ पुनः दर्शन देकर आपको सभी सचाई से स्वयं अवगत करवाएंगी....!!

अन्य - फ़िलहाल अभी रात ज्यादा हो गयी है...

सो आज के लिए इतना काफी है....

बाकी का मैं खुद पता लुंगी....!!

मैं - जो भी करना है करें...

बस अपनी जासूसी गिरी को कुछ काम hi रखियेगा.....

इससे बाकियों को परेशानी होती है..... आपके सवाल - जवाब से....!!

हाहा हहहह

अन्य - बाकियों का तो पता नहीं....

शायद तुम्हें जरूर प्रॉब्लम हो रही है..

चलो तुम्हारी रिक्वेस्ट मान लेती हु...

तुम्हारी जासूसी नहीं करुँगी....!!

मैं - जैसी आपकी मर्जी...

अब चलो भी नींद बहुत आ रागी है....

सबसे लेट उठने का इरादा तो नहीं है न...!!

अन्य - कहीं चलने की जरुरत नहीं....

वो मोती हमारे रूम में सो रही है..... सो हम दोनों यहीं सो जाते हैं...

वैसे भी बस 5 हरष की तो बात है .. ...

उसके बाद फिर से नया सवेरा नया दिन...!!

मैंने आगे कोई जवाब न दिया...

चुप चाप वही बीएड पर लेट गया....

अन्य - कबसे देख रही hu....Kuchh बदले बदले से लग रहे हो...

मैं - अब सोने भी दो...

कुछ नहीं बदला सब वैसा hi है..

अन्य - सब वैसा hi है तो फिर इतने दूर दूर क्यों लेते हो..

थोड़ा करीब आओ... ऐसे न घबराओ....!!

मैं - हद्द है तुमसे भी किसी तरह में भी सुकून नहीं...

(अन्य की तरफ खिसकते हुए)

अब इतने करीब ठीक है न....

अन्य - थोड़ा और पास...

देखो अभी कितना फासला है...


""यह फासले थोड़े काम कार्डो

मैं शुरुआत करती हूँ

तुम ख़तम कार्डो..""

मैं - वाओ ! ब्यूटीफुल लाइन्स.....

अच्छा मेरी भी सुनो...



""बड़े ही अज़ीब से ,

ये मोहब्बत के काफ़िले होते हैं ,

दिल के करीब जो हो ,


उसी से अक्सर फ़ासले होते हैं..!!!""

अन्य - ""हर रोज की तरह वो शाम की लड़ाई के बाद की हसीं रात हो,

जहाँ हर सुबह, बस तेरे साथ हो,

दिन के फासलों में तेरी याद हो,,

बस फिर वही, हर रोज की तरह,


वो शाम की लड़ाई के बाद की हसीं रात हो....""

मैंने आगे कोई जवाब न दिया....

बस अन्य को हुग कर लिया....

और उसके होंठो पे अपनी ऊँगली रख दी...

और ख़ामोशी से सोने को कहा...

अन्य ने भी मुझे तिघ्टलय हुग कर लिया...

हम दोनों एक दूजे की बाँहों में हसीं रात की वादियों में खोने लगे.....


""तुझसे दूर रहना ये मेरी मजबूरी है ,

ना चाहकर भी दरमियां अपने दूरी है ,

महज साथ तेरे होने से ,

मेरी ये जिन्दगी, लगती पूरी है ,

तेरे बिना मेरी हर ख़ुशी अधूरी है ,


कैसे तुझे समझाऊं तू मेरे लिये कितना जरुरी है..!!""

_________________________________

""एक काम भी ठीक ढंग से नहीं होता तुम तीनो से...

तुम्हारी नाकामियों की वजह से महामहिम से मुझे बातें सुन्नी पड़ती है...

बास बहुत हुआ...

अब एक भी गलती हुयी तो उसकी सजा तुम्हें अपना जीवन खोकर चुकानी होगी...""

बुमलीन - मालिक ! हमने तो वही किया जैसा आपने करने को कहा था....

अब वो डी6 अर्ध मानव अपना काम ठीक ढंग से नहीं कर पाया तो इसमें हमारी क्या गलती....??

तामुल्लू - जब ज़िम्मेदारी तुम्हें दी गयी है तो हार का बोझ भी तुम्हारे Hi सर आएगा....

इस्सलिये फालतू की बकवास न कर के ढूंढो उससे और मेरे सामने प्रस्तुत करो....

मुझे उसके मस्तिष्क से उसकी यादें निकालनी है...

जो भी जानकारी उसके पास है सब हमारे काम की है.....!!

बुमलीन - अब कैसे धुन्धु उसे....

न जाने कहाँ गायब हो गया है....

डर के मरे न जाने किश बिल में छिपा बैठा है....??

तामुल्लू - ये सब तुम्हें पहले सोचना चाहिए था.....

उसे काली शक्तियां देने से पहले...

मुझे कोई बहाने बजी नहीं सुन्नी केवल परिणाम चाहिए....

बास परिणाम....!!

बुमलीन - किन्तु मालिक ! अपने hi तो कहा था.... हम से कोई भी उस तक नहीं पहुँच सकता.... इस्सलिये मैंने उस डी6 को मोहरा बनाया था....

लेकिन ऐसा कुछ भी हो सकता मुझसे जरा सी भी उम्मीद न थी...

तामुल्लू - उम्मीद तो मैंने भी तुम तीनो से बहुत सी कर राखी थी...

लेकिन क्या तुम तीनो सही मायने में खरे उतरे हो...??

जरा सा भी काम ठीक ढंग से नहीं किया....

तुम (बुमलीन) शक्ति के नशे में चूर दिन भर अय्याशी में लगे रहते हो....

और इनको (नरकिस्सा) कहा था की अपने हुश्न के जलवों से मानव को वश में करो...

और उन्हें काली शक्ति का उपाशक बनाओ...

लेकिन ये भी अपने मार्ग से भटक कर अंडरवर्ल्ड की क्वीन बनने की चाहत सजा बैठी है....

बस हमेशा जुआन शराब में डूबी रहती है....

क्या जवाब दूंगा मालिक को जब वो कैद से आजाद होकर वापस आएंगे...

तामुल्लू के मुँह से गेरयों का नाम सुनकर तीनो की सिटी पित्ती गम हो गयी......

डरते हुए लड़खड़ाती आवाज़ में.....

सक्कूबी ,- क्या मालिक के आज़ाद होने का समय आ चूका है...??

तामुल्लू - समय हुआ है, या नहीं...

यह मायने नहीं रखता है ...


अगर किसी बात से फ़र्क़ पड़रा है तो बस इतना hi की क्या उनसे किया हुआ वादा पूरा हुआ है या नहीं.....

वडा नहीं पूरा हुआ... तो सोंचो इसका क्या परिणंम हो सकता है...??

तामुल्लू की बात सुनकर बुमलीन, सक्कूबी और नरकिस्सा को एक अंजना डर सताने लगता है....

तीनो एक साथ.....

""मालिक हमें हमारी भूल जो क्षमा करें...

हमें एक और मौका दे....

हर बिगड़े हुए खेल को पुनः सही ढंग से ठीक करेंगे....

बस हमें आने वाले खतरे से बचा कर रखें.....

तामुल्लू - वैसे तो यह मेरे बस से बहार है...

फिर भी मैं कोशिश करूँगा...

तुम तीनो सेफ रहो...

बस एक बात का ख्याल रहे....

अपने कर्त्वयों की ओर वापस लौट जाओ.....

"जी मालिक! ऐसा hi होगा"

इतना बोलकर बुमलीन, नरकिस्सा और सक्कूबी गायब हो गए.....

उनके जाते hi तामुल्लू जोरर जोरर से हसने लगा ....

""खेल शुरू किया जाये""


आज कलिये बस इतना hi..

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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
तारीफ करने के लिए शुक्रिया भाई जी....



थैंक्स भाई...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड ब्रिलियन फैंटास्टिक सुप्पोर्टस....

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखें...




नेक्स्ट अपडेट ात पेज No. 400...
 


सही कहा सर जी आपने... मानव कल्याण....

शायद इसी के लिए hi तो हयान का जन्म हुआ है...!!

हमेशा की तरह शानदार रिव्यु..... कुछ नयी सीख देने वाला....

थैंक्स भाई...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड सुपर फैंटास्टिक सुप्पोर्टस....

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखें...




नेक्स्ट अपडेट ात पेज No. 400...
 
बहुत hi अच्छे तरीके से उप्दते का विश्लेषण किया गई आपने...



और बहित Hi शानदार रिव्यु दिया आपने...

बहुत बहित शुक्रिया सर जी....

थैंक्स भाई...


फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड सुपर फैंटास्टिक सुप्पोर्टस....

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखें...




नेक्स्ट अपडेट ात पेज No. 400...
 




हम्म नार्मल लाइफ की ओर जा रहे गई....

अब ये देखना बाकी गई....

की इस प्रतिष्ठित से कैसे गुज़रते हैं...

थैंक्स भाई...

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड अवेसमे सुप्पोर्टस....



बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखें...


नेक्स्ट अपडेट ात पेज No. 400.
 
Update..No..70*

MeGa..UpDaTe


Abb..Takk..

मैंने आगे कोई जवाब न दिया....

बास अन्य को हुग कर लिया....


Aur Uske Hontho Pe Apni Ungli Rakh di...

Aur Khamoshi se Sone Ko Kaha...

Any ne bhi Mujhe Tightly Hug kar liya...

Hum dono Ek duje ki bahon mein Haseen Raat ki Wadiyon mein Khone lage.....

""तुझसे दूर रहना ये मेरी मजबूरी है ,

ना चाहकर भी दरमियां अपने दूरी है ,

महज साथ तेरे होने से ,

मेरी ये जिन्दगी, लगती पूरी है ,

तेरे बिना मेरी हर ख़ुशी अधूरी है ,

कैसे तुझे समझाऊं तू मेरे लिये कितना जरुरी है..!!""

__________________________

Apne Kartwayon ki Oor wapas Laut jao.....

"Jee Malik! aisa hi Hoga"

itna bolkar Bumalin, Narkissa aur Saccubi gayab ho gaye.....

Unke Jaate hi Tamullu jorr Jorr se Hasne laga ....


""खेल शुरू किया जाये""

Abb..Aage...

""माँ और कितनी देर लगेगी ब्रेकफास्ट रेडी करने में...


आज हमारा कॉलेज का फर्स्ट डे....

इस पल को मिस नहीं होने देना चाहती"" "अन्य चिल्लाई...."

माँ - बस 1 मं में आयी मेरी माँ....

मैं - अभी बहुत टाइम है..

तुम इतना क्यों बेकरार हो....??

अन्य - तुम न एकदम बुद्धू हो....

कबसे मैं इस दिन सपने देखती आयी हु.....

आज सच में मेरा ख्वाब पूरा होने जा रहा है..

और तुम कहते हो की मैं ख़ुशी न मानों...

अपने सपने सच होने के.....??

मैं - मैंने ऐसा तो नहीं कहा....

सच कहु तो मेरा भी यही ख्वाब था...

की काश दूसरों की तरह हिम भी नार्मल लाइफ जी पते...

और देखो आज वो डॉन आ hi गया....

माहि दी - तुम दोनों तो एकदम उतावले हो रहे हो... कॉलेज के नाम से....

ऐसा लग रहा है जैसे किसी फॉरेन ट्रिप में जा रहे हो....

जिन - आप नहीं समझ सकोगे...

आज़ादी क्या होती है....

क्युकी आपने दुनिया देख राखी है..

हमारे लिए यह पहला मौका है अपने तरीके से लाइफ एन्जॉय करने का....

सो हम इस पल को युहीं जाया नहीं होने दे सकते...

अन्य - ये तुमने कही न मेरे दिल की बात....

ब्रेकफास्ट लेकर आते हुए...

माँ - अरे तुम सब किश बात पर बहस कर रहे हो.....

लो आ गया नाश्ता... शुरू करो...

तभी डैड की आवाज़ आयी... जो की

हॉल के कोने में रखे सोफे पर बैठे हुए....

डैड - अरे कोई मुझे भी नाश्ता दे दो...

ऑफिस के लिए लेट हो रहा हु....

माँ - है आपको तो कुछ ज्यादा hi जल्दी है...

मेरे रेडी होने तक शांति से अखबार पढ़िए...

मुझे भी लेट हो रहा है ऑफिस के लिए....

आप hi को बस नहीं जाना ऑफिस..!!

आज एक हफ्ते में कबीरा पैलेस में बहुत सारे बदलाव आ चुके थे...

सबका तुम टेबल रूटीन बदल चूका था.....

माँ - डैड, मौसा - मौसी ने ऑफिस जाना शुरू कर दिया था....

चरों मिलकर बुसिनेस्स को सँभालने पर ध्यान लेने लगे थे....

जिसमें मिस कनिका तीनो की हेल्प कर रही थी....

तो वहीँ दूसरी तरफ मेरा, अन्य, जिन, माहि दी और अखिल भाई, का आज कॉलेज का फर्स्ट डे था....

हम पांचो के एडमिशन हो चुके थे...

मेरा, जिन और अन्य का एडमिशन एक hi क्लास में B.Sc. 1सत ईयर मैथ्स एंड साइंस सेक्शन में हुआ था....

तो वही माहि दी और अखिल भाई का एडमिशन B.Sc. फाइनल ईयर में हुआ था...

क्युकी इन दोनों ने 2ंद ईयर तक की स्टडी सिंगापुर में hi कम्पलीट कर चुके थे..

इस्सलिये इनका डायरेक्ट फाइनल ईयर में एडमिशन हुआ...

माहि दी और अखिल भाई के लिए यह नार्मल बात थी...

लेकिन हमारे लिए यह किसी अमेजिंग जर्नी से काम नहीं था....

बीते 7 दिनों में हमने बहुत सी मस्ती की..

अपने शहर को और वहां की संस्कृति को जाना और समझने की कोशिश की....

हम सभी अपना बुसिनेस्स एम्पायर भी देखने गए....

जो की अब तक काफी बढ़ चूका था....

हमें तो ज्यादा पता भी न था की हम इतने बड़े एम्पिरेस के वरिष्ठ है.....

कबीरा पैलेस में भी कुछ ख़ास लोगों का आना जाना जारी रहा....

प्रिंसिपल मैडम, मिस कनिका, और बद्री अंकल का अब तो आना जाना लगा hi रहता है

आईये अब वापस चलते है नाश्ते की टेबल पर......

डैड - वैसे तुम सब अब समझदार हो चुके हो..

अपने फैसले खुद hi ले सकते हो...

पर मैं तुम सब से एक वडा चाहूंगा....

क्या तुम सब मेरी बात मानोगे....??

मैं - कैसा वडा डैड...

और भला हम आपकी बात क्यों नहीं मैंने लगे....??

डैड - भले hi मैं एक फेमस बुसिनेस्स मन हु...

बूत मेरी ख़ास बात रही है....

मैंने अपना दामन पॉलिटिशियन और पुलिस दोनों से हमेशा बचा कर रखा है....

न तो मेरी इनसे कोई दोस्ती है और न दुश्मनी....

सो मैं चाहता हु मेरु तरह तुम सब भी इनसे दूरी बनाकर रखो....

हम सब एक साथ...

""जैसा आप चाहते ho..Waisa hi होगा...""

डैड - ठीक है...

मुझे तुम सब से ऐसी hi उम्मीद है...

अब तुम सब जाओ...

वर्ण लेट हो जायेगा....

हम सब अपनी कार के पास आकर खड़े हो गए....

डैड - दादू ! इन पर नजर गड़ाए रखना...

किसी भी प्रकार का कोई नुकसान न होने पाए...

दादू - जी सर ! जैसा आपने कहा है वैसा hi होगा..

जैन सर ! ने मुझे सब बता दिया है कैसे क्या करना है...

मेरे साथ रघु और निशाम भी जा रहे है, जो हर पल हयान बाबा और अन्य बेबी पर नजर रखेंगे....!!

डैड आगे कुछ न बोले और जाने का इशारा दिया.....

हम सब गाडी पर सवार हुए और सीधा जाकर कॉलेज के कुछ दूर पहले hi गाड़ी रोकने को कहा....

दादू - क्या हुआ बाबा! यहाँ क्यों गाडी रुकवा दी...??

मैं - इसके आगे हम पैदल जायेंगे...

मुझे शो ऑफ पसंद नहीं...

इस कार के कारन सभी हमें अमीरज़ादा समझेंगे... और सब हमसे दूर रहेंगे...

कोई भी दोस्ती करने के लिए पास नहीं आएगा.....

दादू - ठीक है बाबा, जैसी आपकी मर्जी...

हम कार से उतारकर पैदल hi कॉलेज की तरफ चल दिए... दादू और रघु, निशाम हमसे कुछ दूरी बनाकर हमारे साथ चलने लगे....

क्लास और टीचर स्टाफ के बारे में हमने पहले जानकारी हासिल कर ली थी....

सो हम सीधा अपने अपने क्लास रूम की तरफ चल दिए....

क्युकी क्लास शुरू होने में सिर्फ 10मं hi बचे थे....

इन माय क्लास रूम..

आगे की सभी बेंच पहले से hi फुल हो चुकी थी...

सभी गर्ल्स एंड बॉयज एक साथ बैठे हुए थे.....

मैं और अन्य 2ंद रौ की 6तह बेंच में जाकर बैठ गए जहाँ पर एक लड़की पहले से hi बैठी हुयी थी..

बैठना तो हम तीनो साथ चाहते थे...

लेकिन

सभी बेंच थ्री सीटर थी....

इस्सलिये जिन को हमारे बाजु वाली सीट पर बैठना पड़ा....

फर्स्ट कार्नर में वो लड़की.... बीच में अन्य और लास्ट में मैं जाकर बैठ गया.....

मुझसे कुछ दूरी पर जिन बैठी हुयी थी...

इतने में hi फर्स्ट बेल्ल रिंग हुयी टीचर की एंट्री हुयी....

वही दूसरी तरफ इन माहि दी क्लास रूम...

फर्स्ट बेल्ल बजते hi...

प्रिंसिपल मम की एंट्री होती है.....

उन्हें देख कर सब अपनी जगह पर खड़े हो जाते हैं....

प. मम - सीट डाउन गाइस ! गुड मॉर्निंग एवरीवन....

प्ल्ज़ Stand-up मिस महिमा एंड मर. अखिल...

माहि दी और अखिल भाई अपना नाम सुनकर अपनी जगह पर ओहदे हो जाते है.....

इतने में hi क्लास टीचर की भी एंट्री होती है....

P.Mam - गाइस ! इनसे मिलिए ये है महिमा सोन एंड अखिल सोन...

किसी पर्सनल रीज़न की वजह से इन्हें अपनी स्टडी बीच में छोड़कर यहाँ शिफ्ट होना पड़ा...

सो अब से ये दोनों इसी क्लास में स्टडी कंटिन्यू करेंगे...

सो आप सभी स्टूडेंट्स से रिक्वेस्ट है की इनकी हेल्प करें...

मैं क्लास टीचर से भी अनुरोध करती हु की

इन्हें थोड़ा वक़्त दे यहाँ के माहौल को समझने के लिए...

क्युकी ये दोनों अब तक सिंगापुर में स्टर्डी कर रहे थे....

सिंगापोर का नाम सुनकर सभी स्टूडेंट्स दोनों की तरफ देखने लगे....

P.Mam ने और भी कुछ बातें समझायी...

.इसके बाद वो चली गयी....

फिर शुरू हुआ इंट्रोडक्शन सेशंस....

चलिए हम वापस चलते हैं हयान और अन्य की तरफ.....

यहाँ भी इंट्रोडक्शन सेशन चल रहा था....

अभी जो क्लास टीचर आयी थी....

उनका नाम था मिस रागिनी जो की केमिस्ट्री ब्रांच की हेड थी...

एक एक करके सब का इंट्रोडक्शन शुरू हुआ.....

हमारे बेंच में बैठी लड़की टर्म आया....

"ही माय नाम इस सृजल श्रीवास्तव फ्रॉम देहरादून...

माय इंटरमीडिएट स्कोर इस 95.7 %.....""

पूरी क्लास में तालियों की गड़गड़ाहट गूँज उठी......

""ओह्ह तो ये हैं मिस सृजल...

जिनका नाम बहार बोर्ड में लिखा है....

""ही I'm अंकित मिश्रा फ्रॉम उत्तराखंड..

माय इंटरमीडिएट स्कोर इस 96.5%...""

एक बार फिर से तालियां बज उठी.....

""ही I'm तेंजिन फ्रॉम देहरादून....

I'm थे 3रद रैंकर ऑफ़ उत्तराखंड स्टेट्स....

माय स्कोर इस 98.5%""

सबकी निगाहें जिन पर टिक गयी....

इस बार स्टूडेंट्स के साथ साथ टीचर ने भी तालियां बजायी....

""ही I'm हयान फ्रॉम मन ग्राम.....

I'm थे 2ंद रैंकर ऑफ़ थे आल इंडिया...


माय स्कोर इस 98.9%...

मैं शुक्रिया ऐडा करना चाहूंगा इस कॉलेज के सभी टीचर्स का जिन्होंने मेरी हेल्प की मुझे इस मुवम तक पहुंचने में...

"अगर सच्ची लगन के साथ हार्ड वर्क किया जाये तो आप घर बैठे मुझ जैसा स्कोर हाशिल कर सकते है.....

बस कोई सही राह दिखने वाला हो...""

थैंक यू.. थैंक यू वैरी मच तो आल रेस्पेक्टेड टीचर्स...!!

इतना कहकर मैं शांत हो गया....

मेरे शांत होते hi मम अपनी कुर्शी से उठ ल्हाडी हुयी....

और मेरा ाभोवदान तालियों से करने लगी...

उनको देख कर सभी स्टूडेंट्स भी खड़े होकर मेरा स्वागत करने लगे.....

नेक्स्ट बारी थी अन्य की.....

""ही I'm अन्य फ्रॉम देहरादून....


I'm थे 1सत रैंकर ऑफ़ आल इंडिया इंटरमीडिएट एग्जाम

I'm थे टोपर ऑफ़ थिस ईयर... माय स्कोर इस 99.5%""

""मैं ज्यादा कुछ अपनी तारीफ में नहीं कहूँगी..

क्युकी मेरा स्कोर मेरी क़ाबलियत को दर्शाता है...

मुझे हमेशा से सबसे आगे रहना पसंद है...

और ऐसा मेरे हार्डवर्किंग की वजह से हो पाया है....

सबसे आगे रहना मेरा ऐटिटूड है...

और लास्ट बस इतना कहना कहूँगी..... आप सब भी मुझ जैसा बन सकते hai....Basharte स्टडी के पार्टी आपकी सच्ची लगन हो...!!

थैंक यू मच माय टीचर्स....

एंड माय मसि....

जिनके डैम पर आज मैं इस मुक़ाम पर पहुंची हु...!!

इतना कुछ खाने के बाद अन्य! अपनी सीट पर बैठ गयी...

और उसके बैठते hi...

सभी एक साथ खड़े हो गए....

एयर तालियों और हूटिंग के साथ अन्य का अभिवादन करने लगे....

.अन्य! जब स्पीच दे रही थी..

उसका ऐटिटूड देखने लायक था...

जैसे इस पल का बेशब्री से इंतज़ार कर रही थी...

अपनी क़ाबलियत का डंका बजने को....

क़ाबलियत का डंका बजती भी क्यों न,

म्हणत जो की थी ऐसा मुक़ाम हाशिल करने के लिए...

सबका इंट्रोडक्शन समाप्त हो जाने के बाद.....

रागिनी मम - कीप साइलेंस...

हम्म तो पांचो टोपर आज एक hi क्लास में इकठ्ठा हुए हैं..

मेरे लिए यह गर्व की बात है की मैं आप जैसे स्टूडेंट्स का मार्गदर्शन करुँगी...

वैसे मैं इस पल का बहुत बेशब्री से वेट कर रही थी....

आज मैं अनाउंसमेंट करती हु...

कल आप सभी तोप्पेर्स का अभिवादन बहार ग्राउंड पर किया जायेगा...

कल आप सभी अपने पेरेंट्स और गार्डियन साथ आईयेगा...

क्युकी हम दूसरे इंस्टिट्यूट को दिखाएंगे की हम किसी से काम नहीं...!!

मैं उम्मीद करती हु सभी स्टूडेंट्स से की आप सभी आगे चलकर अपने पेरेंट्स और इंस्टिट्यूट का नाम इसी पटाकर रौशन करेंगे.....

मैं वडा करती हु की मेरी तरफ से नॉलेज प्रोवाइड करने में कोई कमी नहीं rahegi....Fir भी आपके डॉब्टस बचते है तो....

एक्स्ट्रा पीरियड देकर मैं आप सभी के डॉब्टस क्लियर करुँगी.....

रागनी मम की स्पीच और आगे तक चलती की नेक्स्ट पीरियड की बेल्ल बज गयी...

फर्स्ट पीरियड तो इंट्रोडक्शन में hi निकल गया....

टीचिंग करने का माइका hi न मिला.....

इंट्रोडक्शन के बाद तो जैसे हम पांचो.. सभी के ध्यान का केंद्र बन गए थे...

सब आपस गॉसिप करने लगे...

हम तीनो भी सृजल और अंकित से मिले....

एक दुआरे से जान पहचान की...

थोड़ा इंट्रो... थोड़ा स्टडी करते हुए फर्स्ट सेशन ख़त्म हुआ...

मैं जिन और अन्य! के साथ बहार आ गया....

.हमें प. मम ने बुलाया था...

सो मैं जिन और अन्य! को जाने को बोलकर टॉयलेट की तरफ चल दिया....

""भाई क्यों मेरी लेने में तुला है..

थोड़ा देर उससे दूर रहा कर...

मेरा दम घुटने लगता है..""

मैं - मैंने तुमसे पहले भी कहा है..

मैं अन्य से ज्यादा देर दूर नहीं रह सकता...

वेड के मुताबिक जब भी थोड़ा सा भी फ्री तुम मिलेगा...

मैं बहाना करके उससे दूर होने की कोशिश करूँगा....

हनी - सिर्फ कोशिश करेगा...

यहाँ मेरी जान पर बन आती hai....aur तुझे उसके करीब रहने की पड़ी है....

साला कितना हसीन फुलझड़ी भरा मौसम है यहाँ का...

लेकिन तेरी वजह से मिझे डयबाक कर रहना पद रहा है...

मैं - तुझे हमेअह ठरक hi सूझती है...

खुद पर काबू रख...

आगरा तेरी वजह से मेरी साख पर कोई आंच आयी तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा....

हनी - अरे भाई तू नाराज क्यों होता है...

तू तो अच्छा भाई है न..

बुरा तो मैं हु..

मैं - चल अब चुप रह मुझे वापस जाना होगा...

शायद इतना सुकून काफी है तेरे लिए...

काफी ताज़ी हवा खा चूका...

फिर से शांत हो जा....

हनी - अबे साले..

टॉयलेट में लेकर ताज़ी हवा की बात कर्त है...

मौका मुलने दे फिर मैं भी दिखता हु... हनी क्या चीज़ है...

मैं - हम्म मुका जरूर मिलेगा...

तब की तब देखेंगे....

फ़िलहाल अभी मुझे जाना होगा....

मैं वापस चल दिया ऑफिस की तरफ...

हनी फिर मुझमे समां गया...

मेरे लेफ्ट हैंड का टैटू एक पल के लिए चमका फिर पहले जैसे हो गया.....

तभी मुझे जिन और अन्य वापस आती हुयी दिखीं...

मैं भागता हुआ.. अन्य! के पास पहुंचा....

मैं - क्या हुआ...

किश लिए बुलाया था....??

अन्य - कुछ खास नहीं..

बस पूछने के लिए की प्रॉब्लम तो नहीं....

मैं - हम्म तजिक है..

चलो कैंटीन चलते है..

एक एक कॉफ़ी हो जाये....

हम तीनो कैंटीन पहुँच गए...

और एक खली टेबल पर बैठ गए....

और कॉफ़ी लेकर पीने लगे....

अभी हम कॉफ़ी का लुत्फ़ उठा रहे थे की...

तभी एक खूबसूरत लेडी हमारे करीब आते हुए दिखी...

जो मुझे देख कर मंद मंद मुस्कुरा रही थी....

दिखने में कोई टीचर लग रही थी.....

लेकिन इनके बारे में तो P.Mam ने कोई जानकारी नहीं दी....

मेरे करीब आकर अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ा दिया....

मैं उसकी आँखों में देखते हुए.. स्माइल पास की....

अपना हाथ आगे बढ़ा दिया....

जैसे Hi मेरा और उस लेडी का हाथ टच हुआ.....

एक तेज़्ज़ झटका लगा....

वह लेडी मुझसे 10फ़ीट दूर जा गिरी...

अचानक ऐसा होने से कैंटीन में हलचल सी मच गयी...

ऐसा नजारा देख कर सब हिरण हो गए....

समझने की कोशोष्य करने लगे की....

आखिर अभी हुआ क्या....

जिन और अन्य! भी मेरी तरफ परेशानी भरी निगाह से देखने लगी.....

कुछ पूछने वाली थी...

की तभी दादू! मेरी तरफ भागकर आये..

उनके साथ रघु और निशाम भी थे....

हम तीनो को चारो तरफ से घेर लिया....

और अपने साथ चलने को कहा....

मैंने एक बार पलटकर उस लेडी की तरफ देखा...

जो की अब तक अपनी जगह पे कड़ी हो चुकी थी....

मैंने उसकी तरफ देखते हुए स्माइल पास की..

""मुझतक पहुंचना इतना भी नहीं आसान... मैं हु हयान"

वापस दादू के साथ.... P.Offoce की तरफ चल दिया......

आज कलिये बस इतना hi..




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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
ही गाइस गुड मॉर्निंग...



आज कल मेरे थ्रेड्स में साइलेंट रीडर्स की संख्या ज्यादा बढ़ गयी है.....

जो चुपके से आते है अपडेट रीड करते हैं और बिना कमैंट्स और लिखे किये निकल जाते हैं..... ??. ??.

डिअर रीडर्स ये मेरे साथ न इंसाफ़ी है....

वैसे
नेक्स्ट अपडेट आज रात 11 बजे तक्क आ जायेगा....



थैंक्स फॉर रीडिंग एंड सपोर्टिंग..!!
 
Update..No..71*

MeGa..UpDaTe

Abb..Takk..

जैसे Hi मेरा और उस लेडी का हाथ टच हुआ.....

एक तेज़्ज़ झटका लगा....

वह लेडी मुझसे 10फ़ीट दूर जा गिरी...

अचानक ऐसा होने से कैंटीन में हलचल सी मच गयी...

ऐसा नजारा देख कर सब हैरान हो गए....

समझने की कोशिश करने लगे की आखिर अभी हुआ क्या....??



"मुझ तक पहुंचना इतना भी नहीं आसान... मैं हु हयान"

Abb...Aage...

""माँ ! आप यहाँ, आपको तो इस वक़्त ऑफिस में होना चाहिए था.."" मैं थोड़ा शॉक होते हुए होला,

माँ - अगर यही बात मैं तुम सब से पूछूं की इस वक़्त तुम सब घर में क्या कर रहे हो...??

जबकि इस वक़्त तुम्हें कॉलेज में होना चाहिए था.....??

मैं - वो माँ! दरअसल आज फर्स्ट डे था.. सो इंट्रोडक्शन वगैरह हुआ...

और क्लास जल्दी ऑफ हो गयी.....

बूत घर पे कैसे....??

माँ - लगता है मेरे ऐसे प्रेजेंट होने से तुम शॉक में हो...

क्या मैं गलत वक़्त पर घर में हु...

थोड़ा सा घबराते हुए.....

मैं - नहीं Mom!Aisi कोई बात नहीं है..

बस ऐसे hi पूछा...

मुझे उम्मीद न थी की आप यहाँ होंगे....

माँ - क्या हुआ बेतु ! सब ठीक तो गई न...

तुम ऐसे घबराये हुए से क्यों लग रहे हो....

क्या कॉलेज में कोई प्रॉब्लम हुयी...

क्या मैं डैड से बात करू...??

माँ अपना मोबाइल पर्स से निकलने लगी.....

मैं - No No माँ...

डैड को कॉल न करे...

कोई प्रॉब्लम नहीं है....

वो तो हम आज कॉलेज के फर्स्ट डे एक्सपीरियंस आप दोनों के साथ शेयर करना चाहते थे शाम को...

बिट आपको इस तरह अचानक देख कर शॉक हो गया....

माँ - ओह्ह मेरा बचा....

हम्म तो ये बात है...

मैं तो डर hi गयी थी...

मैं - आप भी न माँ..

छोटी छोटी बात पर डरने लगते हो...

माँ - क्या करूँ बीटा....

माँ हु न... तो फ़िक़र लगी रहती है...!!

अच्छा तुम सब जल्दी से फ्रेश होकर आओ....

साथ में खाना कहते हैं....

Okay माँ.. हम बस 10मं में आते हैं...

इतना कहकर मैं अपने रूम की तरफ चल दिया....

जिन, अन्य! माहि दी और अखिल भाई भी.. अपने अपने रूम चल दिए फ्रेश होने....

5मं बाद सब यूनिफार्म चेंज करके मेरे रूम में आ गए...

अन्य - हय्यू ! तुमने तो माँ से झूट कह दिया...

पर क्या दादू भी इस बात को छिपा पाएंगे....

मैं - माँ से तो नहीं कहेंगे...

बूत दादू! डैड या जैन अंकल से जरूर बताएँगे....??

अन्य - अगर बता दिया तो....

तू फिर क्या जवाब देगा सबको आज हुयी घटना के बारे में.....??

मैं - आप चिंता न करे..

तब तक मैं कोई न कोई बहन जरूर खोज लूंगा....

.अन्य - पर क्या झूट बोलना सही होगा...??

अगर आगे कोई प्रॉब्लम हुयी तो....??

मैं - आप भी न कभी कभी माँ की तरह बातें करने लगती हैं...

बोलै न आप फीवर न करें...

कोई न कोई राष्ट जरूर निकल आएगा....!!

अब चलो भी माँ वेट कर रही होंगी....

आज कॉलेज में जो भी हुआ...

उसके बारे में मैंने चरों को समझ दिया था की इसके बारे में घर में कोई भी जैकार न हो....

वैसे आज जो भी हाउ था...

उसके बारे ंविं किसो को कुछ भी पता नहीं चला की आखिर उस वक़्त हुआ क्या था....

क्युकी सब इतनी जल्दी हुआ था की किसी को कुछ समझ नहीं आया...

सबने बस इतना देखा की... एक लेडी दूर जा गिरी... हमारी टेबल से 10फ़ीट दूर....

जबकि अन्य! जिन, माहि, अखिल ने देखा की मुझे छूने से ऐसा हुआ...

चरों मुझसे सच जानना चाहते थे लेकिन मैंने उन्हें भी एक सफ़ेद झूट बोल दिया....

वो बात अलग है की किसी ने मेरी बात में यक़ीन नहीं किया....

उस घटना के तुरंत बाद hi...

दादू हमें P.Mam के पास ले गए...

और उनसे बात करके हमें वापस घर ले आये....

P.Mam भी को भी उस घटना की खबर हो चुकी thi....Wo भी जानना चाहती थी...

की वो लेडी कौन thi....Aur एक्चुअल में क्या हुआ था.....??

अब भला मैं क्या जवाब देता उन्हें...

जो की सब उनकी समझ से ोारे हो....

एक्चुअल में आज जो भी हुआ था......

सचाई या तो मैं जनता था.... या फिर वो लेडी.....

जो की गायब हो चुकी थी..... सबकी नजरो से ओझल होकर....

माँ - क्या हुआ बेतु !

क्या सोंच रागे हो...

तुम्हारा ध्यान खाने पे न होकर कहीं और है....??

मुस्कुराते हुए...

मैं - कुछ नहीं माँ...

वो बस कुछ याद आ गया था... तो ध्यान मेरा उस तरफ चला गया था....

माँ - स्माइल से लग रहा है....

आज कॉलेज में बहुत अच्छा वक़्त गुज़रा है....

अन्य - सही कहा माँ आपने...

आज तो पूरी क्लास में हम पांच Hi छाये हुए थे.....

माँ - अच्छा वो भला क्यों....??

अन्य - क्युकी आज इंट्रोडक्शन था..

सो हमारा स्कोर सुनकर सब शॉक थे...

हमारी टीचर भी हमसे बहुत खुश थी....

और तो और कल मीडिया के सामने हम सबको कोंग्रटुलते किया जायेगा....

जिसमें आपको और डैड को भी बुलाया गया है....

माँ - हम्म तो ये बात है....

बूत मीडिया के सामने तुम तीनो नहीं आ सकते...

और न Hi मैं और तुम्हारे डैड !

हमें कोई न कोई राष्ट खोजना होगा...

इससे बचने के liye...m

अन्य - राष्ट खोजने की जरुरत नहीं है...

आपको और डैड को जाने की भी जरूरकत नहीं..

क्युकी P.Mam गुआर्डिन के तौर पर हम तीनो के साथ hogi....Baki वो सब देख लेंगी....

माँ - ये तो अच्छी बात है...

माहि बीटा तुजे कुछ नहीं बताया... तुम्हारी क्लास में क्या हुआ....

माहि दी - वो मौसी जी...

हमारे क्लास में भी आज इंट्रोडक्शन hi हुआ ..

और खास बात ये थी की मेरा और भाई का इंट्रोडक्शन खुद P.Mam ने किया...

और सबसे रिक्वेस्ट भी की हम दोनों की हेल्प करें...

अखिल भाई - हम्म मौसी जी... प. मम बहुत अच्छी है...

हमारे बिन कहे Hi हमारी सभी प्रॉब्लम पहले से hi सोल्वे कर दी....

माँ - हम्म करती भी क्यों न..

उस दिन जब घर आयी थी..

मैंने सब पहले से hi समझा दिया था...

वैसे तुम सबकोई टेंशन लेने की कोई जरुरत नहीं....

मैं - हमें भला क्या टेंशन होगी अब...

जबकि प. मम ने कॉलेज को पहले से Hi बहुत Hi अच्छी तरीके से मेंटेनेंस कर रखा हो...

हमारा कॉलेज बहुत hi अच्छा है...

वहां का स्टाफ, सिक्योरिटी और अट्मॉस्फेरे इतर इंस्टिट्यूट की अपेक्षा बेस्ट है...

No रैगिंग.... No फाइट... सब एक साथ मिलजुल कर प्यार से रहते हैं...

माँ - अच्छा जी..

एक Hi दिन में सब जान लिया...

क्या पता ये सब सिर्फ पहले दिन की वजह से लगा हो...

मैं - नहीं माँ ! बात पहले दिन की नहीं...

मुझे सृजल और अंकित जे बताया....

वहां के बारे में...

वैसे भी कुछ चीज़े छिपाये नहीं छिपती चाहे जितनी भी कोशिश करो...

माँ - हम्म सही कहा...

तुम्हारे डैड ने Hi रैगिंग को शुरुआत से hi बन कर रखा है...

हमारे इंस्टिट्यूट में न तो कोई रैगिंग है न तो कोई लीडरशिप...

गायत्री ने वह के रेगुलेशन सिस्टम को बहुत hi स्ट्रिक्ट कर रखा है...

गरीब से लेकर अमीर तक.. सबके लिए एक जैसा रूल है...

किसी से कोई भेदभाव नहीं....

धीरे धीरे बहुत सी बातें खुलकर सामने आएन्हि...

तुम सबको इस कॉलेज से प्यार हो जायेगा....

अन्य - वो तो पहले दिन से hi हो गया है....

माँ - अच्छा चलो बातें बहुत हुयी...

अब सब जाकर रेस्ट करो...

अखिल भाई - मौसी जी..

माँ डैड कब तक वापस आएंगे ....??

माँ - मैं तो भूल hi गयी थी बताना....

अन्य के डैड, और तुम्हारे मुंय - पापा बुसिनेस्स टूर के सिलसिले में दिल्ली गए हैं...

इससलए मुझे घर जल्दी आना पड़ा....

सो वो आज नहीं आ पाएंगे....!!

अखिल - Okay मसि ! अब हम लोग चलते गेन अपने Room.....Aap भी आराम कर लें,

थक गयी होंगी ऑफिस में काम करके....

इतना बोलकर सब अपने अपने रूम को तरफ जाने लगे....

माँ - अन्य बेटी... तुम कहा जा रहे हो....

आओ मेरे साथ रूम चलो...

बहित दिन हो गए तुम्हारी हेड मस्सगे नहीं की....

अन्य - अच्छा हुआ माँ ! आपने याद दिला दिया....

मैं भी कब से यही छह रही थी....

माहि दी - मसो क्या मैं भी ाओँ....??

माँ - ये भी कोई पूछने की बात है.....

जिन बीटा, तुम भी आ जाओ...

जिन, अन्य और माहि चल दिए... माँ के रूम...

अखिल भाई अपने रूम चल दिए...

अब बचा मैं अकेला...

मुझे तो वायदे भी आज कल थोड़ा अकेलेपन की तलाश रहती है....

मैं - मैं भी जा रहा सोने....

सो Don't डिस्टर्ब में....

इतना बोलकर मैं अपने रूम आ गया... और दूर को अंदर से लॉक कर दिया.....

जैसे Hi दूर लॉक किया.....

""आखिर कर मिला गया वक़्त तुझे....

पूरा दिन डैम घुटने लगता है खामोश रहते हुए"" " हनी बोलै,

मैं - मुझे तेरी ल्हामोशी hi अच्छी लगती है....

तेरे बोलने से डर लगता है.....

क्या पता तू कहाँ क्या न बोल बैठे....

हनी - बोलना तो बहुत कुछ चाहता hu.....Gaali देने का भी मन कर रहा....

फ़िलहाल बस इतना बता दे...

उस अप्सरा के साथ तूने ऐसा सुलूक क्यों किया...

कितनी खूबसूरत थी..

साली लाल साडी में तो एक डैम एटम बम लग रही थी...

एकदम रापचिक माल थी बे....

मैं - चुप रह बे छिछोरे...

जहाँ लड़की देखि नहीं वहीँ लार टपकनी शुरू कर दी...

वैसे एक बात तूने सच कही... वो एटम बम hi थी...

हनी - इसका मतलब तुझे भी वो अच्छी लगी....

भाई जुगाड़ कर न उसका और मेरा.....

मैं - साले हवसी... एटम बम मतलब मौत का सामन थी वो लेडी....

मौत का फरमान लेकर आयी थी....??

हनी - कहना कुआ चाहता है तू....

किसकी मौत बन कर आयी थी....

मैं - तुझे कहाँ कुछ समझ आएगा....

उसके आने का रीज़न न देख कर तू उसकी ऐडा में जो खोया हुआ था....

शुक्र मन मेरा...

वर्ण आज दोनों का कल्याण हो जाना था....

हांस्य - भाई... बातों को घुमा मत..

सीधे पॉइंट पर आ न....

मैं - वो तेरे लिए आयी थी...

उसके वहां आने की वजह भी तुम हो....??

हनी - आज तू न... उस बफहाउ की जैसो बातें कर रहा है.... सर दुख देने वाली...

सीधे सीधे बता दे न बे......

वो कौन थी....??

मैं - उसका बाम है नरकिस्सा.....

हनी - अब ये कौन सी बाला है बे....??

और तू कैसे उसे जानता है.....??.

मैं - मैं उसे कैसे जनता Hi ये जरुरी नहीं.....

जरुरी ये है उसके आने का मकसद...??

मैं - ठीक है अच्छा सुन मेरी बात गौर से....

उसका नाम और पहचान है.....

नरकिस्सा - वारियर ऑफ़ वैम्पायर वर्ल्ड, ब्यूटी विथ डेविल मंद,

____________________________


वहीँ दूसरी तरफ.....

""ये कैसा घटिया मजाक किया गया है मेरा साथ, क्या आपको जरा सी भी खबर थी की इसका अंजाम क्या हो सकता था...??"" "नरकिस्सा गुस्से में चिल्लाते हुए बोली"",

बुमलीन - ऐसा क्या हो गया... जो तुम गुस्से से गाला फाड़ रही हो...??

नरकिस्सा - क्या हुआ है...??

ये पूछो क्या से क्या होते होते बचा है...

आपकी वजह से आज मेरी जान जाते जाते बची है....??

बुमलीन - किस्में इतनी हिम्मत आ गयी...

जो तुम्हारी जान ले सके....

नरकिस्सा - उसी में समायी हुयी असीमित ताक़त....

जो मेरी क्या... हम सब की जान ले सकता है....

बुमलीन - ये तुम क्या बकवास किये जा रही हो....

बस इतना बातो की जिस काम के लिए तुम्हें भेजा गया था, वो काम हुआ या नहीं....

नरकिस्सा - नहीं हुआ...

और हम में से किसी से होगा भी Nahi.....Kyuki वह ब्लैक एनर्जी नहीं...

पुरे वाइट एनर्जी थी....

बुमलीन - ये तुम कैसे कह सकती हो....??

नरकिस्सा - क्युकी मैं साक्षात् उससे निलकत आ रही हु....

महामहिम की कृपा थी मुझपर जो मैं सबके सामने जिन्दा कड़ी हु...

वर्ण मुझे तो अपना अंत दिखाई दे गया था....

गुस्से से चिल्लाते हुए...

बुमलीन - बास बहुत हुआ... बातों को घूमना बंद करो...

और बातो की माजरा क्या है....??

नरकिस्सा के साथ आज जो भी हुआ....

बुमलीन और सक्कूबी के सामने सब खुलकर आ गया....... जिसे देख कर दोनों शॉक के मरे अपनी जगह से उठ खड़े हो गए....

बुमलीन - ये तो असंभव है...

ऐसा कदापि नहीं हो सकता.....

नरकिस्सा - सच आपकी आँखों के सामने hai.....Fir भी आप मैंने को तैयार नहीं....

मैं तो बास इतना hi कहना है.. वो महामहिम का Hi कोई दूसरा रूप है... जो की मैंने उसके करीब जाकर महसूस किया है..!!

सक्कूबी - क्या ये सच गई...

जो मैंने महसूस किया था.....

आज तुम्हें भी महसूस हुआ उसके करीब जाकर....

नरकिस्सा - जब तुमने कहा tha.....Tab मुझे भी यक़ीन नहीं हुआ tha....Lekin आज उसका सामना Karke....Main पूरे दावे के साथ कह सकती हु....

उसके अंदर असीम सगक्तियों का भंडार छिपा है...

जो की शायद महामहिम के समतुल्य है !!

बुमलीन - ये तो बहित बड़ी चिंता की बात है....

लेकिन हमारी बातों पर मालिक यक़ीन नहीं करेंगे....??

नरकिस्सा - तो फिर अब क्या किया जाये....

जिससे मालिक जो इस संकट का यक़ीन दिलाया जा सके....

क्युकी आने वले समय में यह हमारे अस्तित्व के किये खतरा बन सकता है.....!!

सक्कूबी - मैं भी तुम्हारी बात से आज पूर्ण रूप से सहमत हु.....

बुमलीन ,- सहमत तो मैं भी हु.... लेकिन बिना सबूत के हम मालिक के सामने नहीं जा सकते ....

सक्कूबी - तो फिर आप hi Batao.....Hamein क्या करना चाहिए....??

काफी देर कुछ सोचते हुए...

बुमलीन - एक बार फिर से उसका सामना करना होगा.....??


आज के लिए बस इतना hi..



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लाइक्स, कमैंट्स, वोट्स और रिव्यु का रखना Dhyan....Aapka दोस्त हयान..!!
 
बहुत Hi शानदार रिव्यु है...

कुछ सवालों के जवाब आपको मिल चुके होंगे नेक्स्ट अपडेट में..

थैंक्स भाई..

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड बहुत बढ़िया सुप्पोर्टस....

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखें...


नेक्स्ट अपडेट शायद आज दे सकूँ.. क्युकी अभी इन्कम्प्लीट है...
 
मैं आपकी बात से सहमत हु...

मैंने भी ये सन बहुत सी स्टोरी में आलरेडी रीड कर चूका हु...

नार्मल लगता है..

गुंडे को पीटना.. फिर गुंडा मला का लड़का निकलता हैं. और एक और दुश्मन पैदा हो जाता hai...m

इसीलिए मैंने ये सब चेंज किया....

मुझे बहुत ख़ुशी हुयी ये जानकार की आपको अपडेट बहुत अच्छा लगा...

हमेशा की तरह बहुत Hi शानदार रेविएवस...

जिससे एक राइटर को उसकी म्हणत का फल मिल गया हो जैसे....

थैंक्स सर जी..

फॉर कंटिन्यू रीडिंग एंड बहुत बढ़िया सुप्पोर्टस....

बस ऐसे hi अपना साथ बनाये रखें..




नेक्स्ट अपडेट कल आएगा... क्युकी अभी इन्कम्प्लीट है...
 
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