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“ये तूने बहुत अच्छा किया के भाभी को सब बता दिया”
विशाल ने राघव से कहा जो इस वक्त राघव के ऑफिस मे बैठा हुआ था
राघव- उससे बात करके अब सही लग रहा है, अब लग रहा है के मैं गलत नहीं था, मैंने कुछ नहीं किया था
विशाल- मैं ये सब हुआ था तब से यही तो समझा रहा था तुझे खैर अब भाभी बोली तो समझ आया है
राघव- भाई विसर्जन पे सब खतम करना है, मुझे लग रहा है नेहा ने भी उस दिन के लिए कुछ सोच रखा है अब क्या ये नहीं पता लेकिन तू बस उस दिन मेरे साथ रहना
विशाल- तू चिंता मत कर मैं हमेशा तेरे साथ हु
--x--
आज विसर्जन का दिन था उस दिन के बाद से ना तो नेहा ने और ना ही राघव ने राघव के अतीत के बारे मे कोई बात की थी, राघव इतना तो जानता था के नेहा के दिमाग मे कुछ तो चल रहा था लेकिन क्या ये उसे नहीं पता था और उसने पूछा भी नहीं क्युकी वो उसपर यकीन करता था और जानता था के वो उसका कभी बुरा नहीं चाहेगी
सब कुछ एकदम नॉर्मल था बस शेखर थोड़ा नर्वस था क्युकी नेहा के बोले बोले उसने निखिल को बुला तो लिया था लेकिन उसको देख राघव कैसे रिएक्ट करेगा नहीं जानता था बस उसे इतना पता था के नेहा राघव का बुरा नहीं चाहेगी
राघव इस वक्त अपने ऑफिस मे था और नेहा पिछले कुछ दिनों से ऑफिस नहीं गई थी क्युकी वो घर के कामों मे बिजी थी और वैसे भी उसने कई सारी छुट्टिया ले ली थी तो राघव ने उसे साफ कह दिया था के अगले 2 महीने उसे कोई छुट्टी नहीं मिलने वाली यहा तक के संडे को भी नहीं जिसपर नेहा ने भी उसे चैलेंज कर दिया था के वो छुट्टी ले लेगी और राघव उसे रोक भी नहीं पाएगा
देशपांडे वाडे मे बप्पा के विसर्जन की तयारिया हो रही थी नेहा इस वक्त कुछ काम मे लगी हुई थी, वाडे मे ही एक साइड मे पानी का बड़ा टँक बनाया हुआ था जहा विसर्जन होना था,
नेहा इस वक्त कुछ काम कर रही थी तभी श्वेता उसके पास आई
श्वेता- भाभी!!
श्वेता ने एकदम एक्साइटमेंट मे कहा
नेहा- हा..
श्वेता- आप प्रेग्नेंट हो??
श्वेता ने अचानक से सवाल किया और ये सवाल आते ही नेहा एकदम से अपनी जगह जम गई, उसने बड़ी आँखों और खुले मुह से श्वेता को देखा
नेहा- ये सब बाते तुम्हारे कान मे कौन भर रहा है श्वेता??
श्वेता- नहीं कोई नहीं वो मैं अभी अभी विसर्जन के टँक का काम देख रही थी तो वो वर्क इन प्रोग्रेस है तो मुझे अचानक भईया की उस दिन की लाइन याद आ गई तो.....
नेहा- श्वेता!! वो बस मज़ाक था
श्वेता- तो क्या हुआ, आप उसे सच कर दो उसे
नेहा- एक्चुअल्ली तुम क्यू नहीं करती ऐसा?
नेहा ने अपने हाथ बांधे श्वेता से कहा और अब श्वेता की बोलती बंद
नेहा- मैं ऐसा करती हु शेखर से कहती हु के तुम्हें....
श्वेता- वो भाभी.... भाभी मुझे कोई बुला रहा है, बाय
नेहा की बात पूरी होने के पहले ही श्वेता वहा से निकल गई और नेहा बस उसे जाते देख मुस्कुराने लगी और बाद मे नेहा वापिस अपने काम मे बिजी हो गई, कुछ समय बाद उसने राघव को कॉल किया ताकि उसे घर जल्दी आने को याद दिलाए और जैसे ही उसने राघव को कॉल लगाया बस 2 रिंग मे राघव ने कॉल उठाया
राघव- हैलो
नेहा- आज बप्पा का विसर्जन है
राघव- पता है
नेहा- तो क्या आप भूल गए है आज छुट्टी का दिन है और आप ऑफिस चले गए
राघव- पता है बस कुछ जरूरी काम था
नेहा- एक दिन की छुट्टी से कुछ नहीं होता
राघव- होता है भई पहले ही मैं कुछ दिन बाहर था और काम बढ़ जाता
नेहा- ठीक है ठीक है बस विसर्जन के पहले आप मुझे घर पर चाहिए
राघव- आ रहा हु बाबा बस निकल ही रहा हु
नेहा- अगर आप आधे घंटे मे घर नहीं आए तो फिर अंदर एंट्री नहीं मिलेगी
राघव को धमका कर नेहा ने फोन रख दिया और उससे बात करके राघव ने विशाल को फोन लगा
विशाल- हा भाई
राघव- कहा है?
विशाल- बस तेरे घर के लिए निकल ही रहा हु
राघव- ठीक है मैं भी पहुच रहा हु,
---
शेखर- भाभी आप श्योर हो ना
शेखर ने अपने नाखून चबाते हुए पूछा
नेहा- हा बाबा, तुमने देखा न वो आ गया है ना
श्वेता- हा वो आ गया है
नेहा- गुड विसर्जन मे अब भी थोड़ा सा वक्त बाकी है हमे उससे पहले इन दोनों को आमने सामने लाना होगा
शेखर- ठीक है आप भाई को लिविंग रूम मे ले आइए मैं निखिल को यहा लाता हु
इतना बोल के शेखर वहा से चला गया
‘हे बप्पा आज इनकी सारी प्रॉब्लेम्स का विसर्जन हो जाए’ नेहा ने मन ही मन प्रार्थना की और राघव को बुलाने गई तो उसने देखा के वो किसी से बात कर रहा था जो और कोई नहीं बड़ी दादी थी
नेहा- दादीजी आप इतना देरी से क्यू आए
नेहा ने बड़ी दादी का आशीर्वाद लेते हुए पूछा
कुमुद- अरे बेटे मैं तो नहीं आने वाली थी फिर सोचा चलो चल ही आते ही तो शुभंकर के साथ आ गई वो छोड़ो ये बताओ ये नालायक तुम्हें तंग तो नहीं करता ना
राघव- दादी ऐसे पार्टी बदलोगे अब आप मैं किसी को तंग वंग नहीं करता
कुमुद- अरे तुम बहुत तंग करते हो मैं जानती हु
राघव- बताओ दादी को
राघव ने नेहा से थोड़ा धमकाने वाली टोन मे कहा
कुमुद- राघव उसे बोलने दो
नेहा- नहीं दादीजी ज्यादा तंग नहीं करते है
कुमुद- अच्छा है अगर करे तो मुझे बताना मैं सीधा कर दूँगी उसे, अब तुम लोग अपना रोमांस शुरू रखो मैं चली बकियों से मिलने
जिसके बाद बड़ी दादी वहा से चली गई और राघव नेहा की ओर मुड़ा
राघव- तो मैं तंग करता हु तुम्हें ?
नेहा- हा
राघव- रुको अभी बताता हु के तंग करना कीसे कहते है
राघव अपने कुर्ते ही सलीव्स ऊपर चढ़ाते हुए नेहा की ओर बढ़ा और नेहा हस कर वहा से भाग गई और राघव उसके पीछे पीछे गया और इस तरह नेहा राघव को लिविंग रूम मे लाकर रुक गई
राघव- अब कहा जाओगी चिक्की? देखो यहा कोई नहीं है और अब तुम्हें पता चलेगा तंग करना कीसे कहते है
नेहा- ही ही
नेहा उधर उधर देखने लगी और राघव उसके करीब बढ़ने लगा और राघव एक और कदम आगे बढ़ता इससे पहले ही उसे एक आवाज सुनाई दी और वो रुक गया
“ओ सॉरी सॉरी! मैं जाता हु” उस बंदे ने कहा और जाने ही वाला था के रुक गया
राघव ने मूड के उस इंसान को देखा तो उसके जबड़ा कस गया
“रा.. राघव!!”
राघव- नेहा चलो यहा से
राघव ने नेहा का हाथ पकडा और वहा से जाने लगा लेकिन नेहा ने उसे रोक दिया, राघव को अब वहा अनीज़ी फ़ील हो रहा था
नेहा- बात कीजिए राघव, कब तक ऐसे ही गिल्ट मे रहेंगे, मैं चाहती हु आपका ये गिल्ट हमेशा के लिए खतम हो
नेहा ने धीमे से कहा जिसे बस राघव सुन पाए बदले मे राघव ने ना मे अपनी मुंडी हिलाई
राघव- मैं नहीं कर पाऊँगा, अभी तो नहीं
नेहा- आप मुझपर भरोसा करते है ना? यही सही वक्त है, या तो अभी या कभी नहीं
“राघव!!” निखिल ने एक और बार राघव को पुकारा
और तभी विशाल की वहा एंट्री हुई
विशाल- ये हरामजादा यहा क्या कर रहा है
विशाल के आते ही सबका ध्यान उसकी ओर गया और नेहा को अपना प्लान फेल होता हुआ दिखा लेकिन इससे पहले विशाल कुछ बोलता नेहा उसकी ओर बढ़ी और जाते जाते राघव से बोल गई के वो बाहर है
नेहा विशाल को अपने साथ ले आई थी
विशाल- भाभी आप मुझे यहा क्यू लाई है?? वो पहले ही मेरे भाई को बहुत तकलीफ दे चुका है इस बार उसका मुह नहीं तोड़ूँगा बल्कि सीधा सर फोड़ूँगा मैं
नेहा- विशाल भईया शांत, कुछ नहीं होगा
विशाल- भाभी आपको नहीं पता ये
नेहा- सब पता है मुझे बस मुझपर थोड़ा भरोसा तो रखिए
विशाल राघव के पास जाना चाहता था और निखिल को तो बहूत कुछ सुनाना चाहता था लेकिन नेहा की वजह से वो वही रुक गया और इधर अंदर राघव ने अपनी मुट्ठियां भींची और निखिल की ओर मुडा लेकिन वो उसकी ओर देख नहीं रहा था
निखिल- राघव!
राघव- यस मिस्टर चोपड़ा बोलिए मैं सुन रहा
राघव ने एकदम सपाट आवाज मे कहा
निखिल राघव को देख उसकी आवाज सुन थोड़ा चौका, जिस राघव को वो जानता था ये वो नही था बदली हुई आवाज बदले हुए लुक्स राघव की पर्सनैलिटी सब बदल चुका था, ये वो राघव नहीं था जो उसके साथ कॉलेज मे पढ़ता था
निखिल- काफी बदल गए हो तुम
निखिल मे मुस्कुरा कर राघव को देखते हुए कहा और इस बार उसे देख राघव जरा भी अनकंफर्टेबल नहीं हुआ
राघव- हा बदलाव अच्छा होता है
इतना बोल के राघव वहा से जा ही रहा था के निखिल ने उसे रोक दिया
निखिल- राघव रुको मुझे बात करनी है तुमसे
राघव- तो बोलिए मिस्टर चोपड़ा मेरे पास आपकी बकवास सुनने का वक्त बहुत कम है
राघव ने हार्शली कहा जिसका निखिल को बुरा भी लगा, राघव बाहर से जितना कॉन्फिडेंट बन रहा था उतना ही वो डरा हुआ था उसने अपने आप को टफ दिखाना सीख लिया था
निखिल- राघव.... मैं.. मैं जानता हु मैंने बहुत गलत किया है लेकिन....
राघव- मैं बीती बातों को डिस्कस करने मे बिल्कुल भी इंटरेस्टेड नहीं हु मिस्टर चोपड़ा तो मैं चलता हु
राघव ने निखिल की बात को बीच मे काटते हुए कहा और वहा से जाने लगा लेकिन निखिल ने उसे रोक दिया
निखिल- पहले मेरी बात सुन लो! वादा करता हु मैं यहा से चला जाऊंगा और दोबारा अपनी शक्ल भी नहीं दिखाऊँगा लेकिन बस एक बार मेरी बात सुन लो
‘यही सही वक्त है’ राघव के दिमाग मे नेहा के शब्द घूमे
राघव- ठीक है 15 मिनट बस।
राघव ने अपने हाथ बांधे कहा और निखिल की आँखों मे देखने लगा
निखिल- राघव मुझे माफ कर दो! आई एम सॉरी फॉर एव्रीथिंग! मैंने जो कुछ भी किया उसके लिए मैं बस तुमसे माफी मांगना चाहता हु, मैं जानता हु के मेरे आज ऐसे माफी मांगने से कुछ नहीं बदलेगा लेकिन मैं गलत था ये बात सच है, मुझे जब ये बात समझ आई तब तक बहुत देर हो चुकी थी और तुम वापिस भारत आ चुके थे, तुम सोचते होंगे मैं तुमसे नफरत करता था लेकिन ये सच नहीं है राघव तुम मेरे दोस्त थे। तुमसे आज मैं झूठ नहीं कहूँगा मुझे तुम्हारी और निशा की दोस्ती तुम्हारी नजदीकिया कभी पसंद नहीं थी मुझे जलन होती थी उससे मैं पसंद करता था उसे और जब तुम दोनों की लड़ाई हुई और मैंने उसे रोते हुए वहा से जाते देखा मेरा मेरे गुस्से पर काबू ही नहीं था और फिर उसकी मौत! मैं अपना आपा खो चुका था और अपने गुस्से मे मैंने तुम्हें बहुत कुछ कह दिया, मैं इतना ज्यादा गुस्से मे था के मैं सोचने समझने की शक्ति खो चुका था और मुझे बस निशा की मौत की वजह तुम्हारा उससे झगड़ा दिख रहा था, मैं जानता हु मेरे शब्दों ने तुम्हें बहुत तकलीफ पहुचाई है आई एम सॉरी! लेकिन ऐसा कभी मत सोचना के मैंने तुम्हें अपना दोस्त नहीं माना मैं तुम्हें अब भी मेरा दोस्त मानता हु और मैं तुम्हारी दोस्ती खो चुका हु ये भी जानता हु, तुम हमेशा के मेरे दोस्त रहे हो लेकिन उस वक्त उस एकतरफा मोहब्बत का जुनून इस दोस्ती पर भारी पड गया, मैं जानता हु मैंने बहुत गलतियां की है और अब चाहू भी तो उसे बदल नहीं सकता
निखिल- राघव रियली रियली सॉरी, मैं मानता हु के मेरी माफी मेरी गलती के लिए काफी नहीं है लेकिन अब मैं इस गिल्ट को और बर्दाश्त नहीं कर सकता तुम कोई किलर नहीं हो तुम उसके सच्चे दोस्त थे जो मैं कभी बन नहीं पाया और जब इसका एहसास हुआ वक्त बीत चुका था, तुम बहुत बहादुर हो मेरे भाई, मैं ये नहीं कह रहा के मुझे माफ कर दो मैं तो तुम्हारी माफी के भी काबिल नहीं इतनी जल्दी तो नहीं लेकिन तुम मेरे शब्दों को अपने दिमाग से निकाल दो यही मैं चाहता हु, ट्राय टु मूव ऑन यू डिजर्व तो बी हैप्पी
निखिल- आई एम रियली रियली सॉरी मैंने बहुत तकलीफ दी है तुम्हें और मैं दिल से तुमसे माफी माँगता हु
निखिल ने राघव के सामने अपने हाथ जोड़ लिए, बोलते बोलते उसकी आंखे नाम हो गई थी राघव ने निखिल के हाथ नीचे किए और एक लंबी सास छोड़ी
राघव- अच्छा है तुम्हे इस बात का एहसास हुआ है निखिल, मैंने ये सुनने के लिए बहुत इंतजार किया है के मैं कोई किलर नहीं हु, अब थोड़ा हल्का महसूस हो रहा है, तुम्हारे शब्दों ने मुझे उस वक्त बहुत आहत किया था और अब जब तुमने सब क्लियर किया है थोड़ा सही लग रहा है, शब्द अगर घायल कर सकते है तो मरहम भी लगा सकते है
राघव की बात सुन निखिल थोड़ा मुस्कुराया
राघव- लेकिन मैं वो पहले वाला राघव नहीं रहा, तुमने भले वो सब गुस्से मे कहा हो लेकिन मैंने उसकी वजह से बहुत कुछ सहा है, मैं नहीं जानता मैं तुम्हें कभी माफ कर भी पाऊँगा या नहीं लेकिन कोशिश करूंगा और मैं अब जिंदगी मे आगे बढ़ चुका हु, अब चुकी तुम माफी मांग चुके हो तुम अपने गिल्ट से फ्री हो और मैं भी लेकिन मैं वापिस पहले वाला राघव नहीं बन सकता और मिस्टर चोपड़ा हम अब दोस्त नहीं है, मैं उस इंसान से दोस्ती नहीं रख सकता जिसकी वजह से मैंने इतना कुछ सहा है लेकिन तुम्हें थैंक यू जरूर कहना चाहूँगा के भले मुझे तकलीफ हुई लेकिन ये बदलाव भी आया
राघव ने सपाट चेहरे के साथ कहा
निखिल- मैं समझ सकता हु, मैंने तुमसे मिलने की बहुत कोशिश की लंदन मे मुझे देखते ही तुम चले गए थे यहा आकार पोलिटिकल इनफ्लुएंस से तुमहारे डैड से पहचान की ताकि बस तुमसे मिल सकु उस दिन भी गणेश चतुर्थी को तुमसे मिलने आया था लेकिन तुम नहीं मिले और जब शेखर ने मुझे आज बुलाया है उसके लिए मैं हमेशा उसका एहसानमंद रहूँगा
‘तो सब मिले हुए है’ राघव ने मन मे सोचा
निखिल- मुझे खुशी है के तुमने मेरी बात सुनी, मैं तुम्हारी वाइफ से मिला हु और आई मस्ट से के यू आर लकी टू हैव नेहा जी एज योर वाइफ, अगर वो मुझसे बात नहीं करती तो शायद मैं तुमसे बात करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाता, तुम दोनों एकदूसरे के लिए एकदम परफेक्ट हो
निखिल ने मुस्कुरा कर कहा वही राघव भी मुस्कुरा दिया
राघव की नेहा के लिए फीलिंग दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही थी, वो ऐसा फ़ील कर रहा था जैसा उसने पहले कभी नहीं किया था और अब वो उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकता था.....
क्रमश:
“ये तूने बहुत अच्छा किया के भाभी को सब बता दिया”
विशाल ने राघव से कहा जो इस वक्त राघव के ऑफिस मे बैठा हुआ था
राघव- उससे बात करके अब सही लग रहा है, अब लग रहा है के मैं गलत नहीं था, मैंने कुछ नहीं किया था
विशाल- मैं ये सब हुआ था तब से यही तो समझा रहा था तुझे खैर अब भाभी बोली तो समझ आया है
राघव- भाई विसर्जन पे सब खतम करना है, मुझे लग रहा है नेहा ने भी उस दिन के लिए कुछ सोच रखा है अब क्या ये नहीं पता लेकिन तू बस उस दिन मेरे साथ रहना
विशाल- तू चिंता मत कर मैं हमेशा तेरे साथ हु
--x--
आज विसर्जन का दिन था उस दिन के बाद से ना तो नेहा ने और ना ही राघव ने राघव के अतीत के बारे मे कोई बात की थी, राघव इतना तो जानता था के नेहा के दिमाग मे कुछ तो चल रहा था लेकिन क्या ये उसे नहीं पता था और उसने पूछा भी नहीं क्युकी वो उसपर यकीन करता था और जानता था के वो उसका कभी बुरा नहीं चाहेगी
सब कुछ एकदम नॉर्मल था बस शेखर थोड़ा नर्वस था क्युकी नेहा के बोले बोले उसने निखिल को बुला तो लिया था लेकिन उसको देख राघव कैसे रिएक्ट करेगा नहीं जानता था बस उसे इतना पता था के नेहा राघव का बुरा नहीं चाहेगी
राघव इस वक्त अपने ऑफिस मे था और नेहा पिछले कुछ दिनों से ऑफिस नहीं गई थी क्युकी वो घर के कामों मे बिजी थी और वैसे भी उसने कई सारी छुट्टिया ले ली थी तो राघव ने उसे साफ कह दिया था के अगले 2 महीने उसे कोई छुट्टी नहीं मिलने वाली यहा तक के संडे को भी नहीं जिसपर नेहा ने भी उसे चैलेंज कर दिया था के वो छुट्टी ले लेगी और राघव उसे रोक भी नहीं पाएगा
देशपांडे वाडे मे बप्पा के विसर्जन की तयारिया हो रही थी नेहा इस वक्त कुछ काम मे लगी हुई थी, वाडे मे ही एक साइड मे पानी का बड़ा टँक बनाया हुआ था जहा विसर्जन होना था,
नेहा इस वक्त कुछ काम कर रही थी तभी श्वेता उसके पास आई
श्वेता- भाभी!!
श्वेता ने एकदम एक्साइटमेंट मे कहा
नेहा- हा..
श्वेता- आप प्रेग्नेंट हो??
श्वेता ने अचानक से सवाल किया और ये सवाल आते ही नेहा एकदम से अपनी जगह जम गई, उसने बड़ी आँखों और खुले मुह से श्वेता को देखा
नेहा- ये सब बाते तुम्हारे कान मे कौन भर रहा है श्वेता??
श्वेता- नहीं कोई नहीं वो मैं अभी अभी विसर्जन के टँक का काम देख रही थी तो वो वर्क इन प्रोग्रेस है तो मुझे अचानक भईया की उस दिन की लाइन याद आ गई तो.....
नेहा- श्वेता!! वो बस मज़ाक था
श्वेता- तो क्या हुआ, आप उसे सच कर दो उसे
नेहा- एक्चुअल्ली तुम क्यू नहीं करती ऐसा?
नेहा ने अपने हाथ बांधे श्वेता से कहा और अब श्वेता की बोलती बंद
नेहा- मैं ऐसा करती हु शेखर से कहती हु के तुम्हें....
श्वेता- वो भाभी.... भाभी मुझे कोई बुला रहा है, बाय
नेहा की बात पूरी होने के पहले ही श्वेता वहा से निकल गई और नेहा बस उसे जाते देख मुस्कुराने लगी और बाद मे नेहा वापिस अपने काम मे बिजी हो गई, कुछ समय बाद उसने राघव को कॉल किया ताकि उसे घर जल्दी आने को याद दिलाए और जैसे ही उसने राघव को कॉल लगाया बस 2 रिंग मे राघव ने कॉल उठाया
राघव- हैलो
नेहा- आज बप्पा का विसर्जन है
राघव- पता है
नेहा- तो क्या आप भूल गए है आज छुट्टी का दिन है और आप ऑफिस चले गए
राघव- पता है बस कुछ जरूरी काम था
नेहा- एक दिन की छुट्टी से कुछ नहीं होता
राघव- होता है भई पहले ही मैं कुछ दिन बाहर था और काम बढ़ जाता
नेहा- ठीक है ठीक है बस विसर्जन के पहले आप मुझे घर पर चाहिए
राघव- आ रहा हु बाबा बस निकल ही रहा हु
नेहा- अगर आप आधे घंटे मे घर नहीं आए तो फिर अंदर एंट्री नहीं मिलेगी
राघव को धमका कर नेहा ने फोन रख दिया और उससे बात करके राघव ने विशाल को फोन लगा
विशाल- हा भाई
राघव- कहा है?
विशाल- बस तेरे घर के लिए निकल ही रहा हु
राघव- ठीक है मैं भी पहुच रहा हु,
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शेखर- भाभी आप श्योर हो ना
शेखर ने अपने नाखून चबाते हुए पूछा
नेहा- हा बाबा, तुमने देखा न वो आ गया है ना
श्वेता- हा वो आ गया है
नेहा- गुड विसर्जन मे अब भी थोड़ा सा वक्त बाकी है हमे उससे पहले इन दोनों को आमने सामने लाना होगा
शेखर- ठीक है आप भाई को लिविंग रूम मे ले आइए मैं निखिल को यहा लाता हु
इतना बोल के शेखर वहा से चला गया
‘हे बप्पा आज इनकी सारी प्रॉब्लेम्स का विसर्जन हो जाए’ नेहा ने मन ही मन प्रार्थना की और राघव को बुलाने गई तो उसने देखा के वो किसी से बात कर रहा था जो और कोई नहीं बड़ी दादी थी
नेहा- दादीजी आप इतना देरी से क्यू आए
नेहा ने बड़ी दादी का आशीर्वाद लेते हुए पूछा
कुमुद- अरे बेटे मैं तो नहीं आने वाली थी फिर सोचा चलो चल ही आते ही तो शुभंकर के साथ आ गई वो छोड़ो ये बताओ ये नालायक तुम्हें तंग तो नहीं करता ना
राघव- दादी ऐसे पार्टी बदलोगे अब आप मैं किसी को तंग वंग नहीं करता
कुमुद- अरे तुम बहुत तंग करते हो मैं जानती हु
राघव- बताओ दादी को
राघव ने नेहा से थोड़ा धमकाने वाली टोन मे कहा
कुमुद- राघव उसे बोलने दो
नेहा- नहीं दादीजी ज्यादा तंग नहीं करते है
कुमुद- अच्छा है अगर करे तो मुझे बताना मैं सीधा कर दूँगी उसे, अब तुम लोग अपना रोमांस शुरू रखो मैं चली बकियों से मिलने
जिसके बाद बड़ी दादी वहा से चली गई और राघव नेहा की ओर मुड़ा
राघव- तो मैं तंग करता हु तुम्हें ?
नेहा- हा
राघव- रुको अभी बताता हु के तंग करना कीसे कहते है
राघव अपने कुर्ते ही सलीव्स ऊपर चढ़ाते हुए नेहा की ओर बढ़ा और नेहा हस कर वहा से भाग गई और राघव उसके पीछे पीछे गया और इस तरह नेहा राघव को लिविंग रूम मे लाकर रुक गई
राघव- अब कहा जाओगी चिक्की? देखो यहा कोई नहीं है और अब तुम्हें पता चलेगा तंग करना कीसे कहते है
नेहा- ही ही
नेहा उधर उधर देखने लगी और राघव उसके करीब बढ़ने लगा और राघव एक और कदम आगे बढ़ता इससे पहले ही उसे एक आवाज सुनाई दी और वो रुक गया
“ओ सॉरी सॉरी! मैं जाता हु” उस बंदे ने कहा और जाने ही वाला था के रुक गया
राघव ने मूड के उस इंसान को देखा तो उसके जबड़ा कस गया
“रा.. राघव!!”
राघव- नेहा चलो यहा से
राघव ने नेहा का हाथ पकडा और वहा से जाने लगा लेकिन नेहा ने उसे रोक दिया, राघव को अब वहा अनीज़ी फ़ील हो रहा था
नेहा- बात कीजिए राघव, कब तक ऐसे ही गिल्ट मे रहेंगे, मैं चाहती हु आपका ये गिल्ट हमेशा के लिए खतम हो
नेहा ने धीमे से कहा जिसे बस राघव सुन पाए बदले मे राघव ने ना मे अपनी मुंडी हिलाई
राघव- मैं नहीं कर पाऊँगा, अभी तो नहीं
नेहा- आप मुझपर भरोसा करते है ना? यही सही वक्त है, या तो अभी या कभी नहीं
“राघव!!” निखिल ने एक और बार राघव को पुकारा
और तभी विशाल की वहा एंट्री हुई
विशाल- ये हरामजादा यहा क्या कर रहा है
विशाल के आते ही सबका ध्यान उसकी ओर गया और नेहा को अपना प्लान फेल होता हुआ दिखा लेकिन इससे पहले विशाल कुछ बोलता नेहा उसकी ओर बढ़ी और जाते जाते राघव से बोल गई के वो बाहर है
नेहा विशाल को अपने साथ ले आई थी
विशाल- भाभी आप मुझे यहा क्यू लाई है?? वो पहले ही मेरे भाई को बहुत तकलीफ दे चुका है इस बार उसका मुह नहीं तोड़ूँगा बल्कि सीधा सर फोड़ूँगा मैं
नेहा- विशाल भईया शांत, कुछ नहीं होगा
विशाल- भाभी आपको नहीं पता ये
नेहा- सब पता है मुझे बस मुझपर थोड़ा भरोसा तो रखिए
विशाल राघव के पास जाना चाहता था और निखिल को तो बहूत कुछ सुनाना चाहता था लेकिन नेहा की वजह से वो वही रुक गया और इधर अंदर राघव ने अपनी मुट्ठियां भींची और निखिल की ओर मुडा लेकिन वो उसकी ओर देख नहीं रहा था
निखिल- राघव!
राघव- यस मिस्टर चोपड़ा बोलिए मैं सुन रहा
राघव ने एकदम सपाट आवाज मे कहा
निखिल राघव को देख उसकी आवाज सुन थोड़ा चौका, जिस राघव को वो जानता था ये वो नही था बदली हुई आवाज बदले हुए लुक्स राघव की पर्सनैलिटी सब बदल चुका था, ये वो राघव नहीं था जो उसके साथ कॉलेज मे पढ़ता था
निखिल- काफी बदल गए हो तुम
निखिल मे मुस्कुरा कर राघव को देखते हुए कहा और इस बार उसे देख राघव जरा भी अनकंफर्टेबल नहीं हुआ
राघव- हा बदलाव अच्छा होता है
इतना बोल के राघव वहा से जा ही रहा था के निखिल ने उसे रोक दिया
निखिल- राघव रुको मुझे बात करनी है तुमसे
राघव- तो बोलिए मिस्टर चोपड़ा मेरे पास आपकी बकवास सुनने का वक्त बहुत कम है
राघव ने हार्शली कहा जिसका निखिल को बुरा भी लगा, राघव बाहर से जितना कॉन्फिडेंट बन रहा था उतना ही वो डरा हुआ था उसने अपने आप को टफ दिखाना सीख लिया था
निखिल- राघव.... मैं.. मैं जानता हु मैंने बहुत गलत किया है लेकिन....
राघव- मैं बीती बातों को डिस्कस करने मे बिल्कुल भी इंटरेस्टेड नहीं हु मिस्टर चोपड़ा तो मैं चलता हु
राघव ने निखिल की बात को बीच मे काटते हुए कहा और वहा से जाने लगा लेकिन निखिल ने उसे रोक दिया
निखिल- पहले मेरी बात सुन लो! वादा करता हु मैं यहा से चला जाऊंगा और दोबारा अपनी शक्ल भी नहीं दिखाऊँगा लेकिन बस एक बार मेरी बात सुन लो
‘यही सही वक्त है’ राघव के दिमाग मे नेहा के शब्द घूमे
राघव- ठीक है 15 मिनट बस।
राघव ने अपने हाथ बांधे कहा और निखिल की आँखों मे देखने लगा
निखिल- राघव मुझे माफ कर दो! आई एम सॉरी फॉर एव्रीथिंग! मैंने जो कुछ भी किया उसके लिए मैं बस तुमसे माफी मांगना चाहता हु, मैं जानता हु के मेरे आज ऐसे माफी मांगने से कुछ नहीं बदलेगा लेकिन मैं गलत था ये बात सच है, मुझे जब ये बात समझ आई तब तक बहुत देर हो चुकी थी और तुम वापिस भारत आ चुके थे, तुम सोचते होंगे मैं तुमसे नफरत करता था लेकिन ये सच नहीं है राघव तुम मेरे दोस्त थे। तुमसे आज मैं झूठ नहीं कहूँगा मुझे तुम्हारी और निशा की दोस्ती तुम्हारी नजदीकिया कभी पसंद नहीं थी मुझे जलन होती थी उससे मैं पसंद करता था उसे और जब तुम दोनों की लड़ाई हुई और मैंने उसे रोते हुए वहा से जाते देखा मेरा मेरे गुस्से पर काबू ही नहीं था और फिर उसकी मौत! मैं अपना आपा खो चुका था और अपने गुस्से मे मैंने तुम्हें बहुत कुछ कह दिया, मैं इतना ज्यादा गुस्से मे था के मैं सोचने समझने की शक्ति खो चुका था और मुझे बस निशा की मौत की वजह तुम्हारा उससे झगड़ा दिख रहा था, मैं जानता हु मेरे शब्दों ने तुम्हें बहुत तकलीफ पहुचाई है आई एम सॉरी! लेकिन ऐसा कभी मत सोचना के मैंने तुम्हें अपना दोस्त नहीं माना मैं तुम्हें अब भी मेरा दोस्त मानता हु और मैं तुम्हारी दोस्ती खो चुका हु ये भी जानता हु, तुम हमेशा के मेरे दोस्त रहे हो लेकिन उस वक्त उस एकतरफा मोहब्बत का जुनून इस दोस्ती पर भारी पड गया, मैं जानता हु मैंने बहुत गलतियां की है और अब चाहू भी तो उसे बदल नहीं सकता
निखिल- राघव रियली रियली सॉरी, मैं मानता हु के मेरी माफी मेरी गलती के लिए काफी नहीं है लेकिन अब मैं इस गिल्ट को और बर्दाश्त नहीं कर सकता तुम कोई किलर नहीं हो तुम उसके सच्चे दोस्त थे जो मैं कभी बन नहीं पाया और जब इसका एहसास हुआ वक्त बीत चुका था, तुम बहुत बहादुर हो मेरे भाई, मैं ये नहीं कह रहा के मुझे माफ कर दो मैं तो तुम्हारी माफी के भी काबिल नहीं इतनी जल्दी तो नहीं लेकिन तुम मेरे शब्दों को अपने दिमाग से निकाल दो यही मैं चाहता हु, ट्राय टु मूव ऑन यू डिजर्व तो बी हैप्पी
निखिल- आई एम रियली रियली सॉरी मैंने बहुत तकलीफ दी है तुम्हें और मैं दिल से तुमसे माफी माँगता हु
निखिल ने राघव के सामने अपने हाथ जोड़ लिए, बोलते बोलते उसकी आंखे नाम हो गई थी राघव ने निखिल के हाथ नीचे किए और एक लंबी सास छोड़ी
राघव- अच्छा है तुम्हे इस बात का एहसास हुआ है निखिल, मैंने ये सुनने के लिए बहुत इंतजार किया है के मैं कोई किलर नहीं हु, अब थोड़ा हल्का महसूस हो रहा है, तुम्हारे शब्दों ने मुझे उस वक्त बहुत आहत किया था और अब जब तुमने सब क्लियर किया है थोड़ा सही लग रहा है, शब्द अगर घायल कर सकते है तो मरहम भी लगा सकते है
राघव की बात सुन निखिल थोड़ा मुस्कुराया
राघव- लेकिन मैं वो पहले वाला राघव नहीं रहा, तुमने भले वो सब गुस्से मे कहा हो लेकिन मैंने उसकी वजह से बहुत कुछ सहा है, मैं नहीं जानता मैं तुम्हें कभी माफ कर भी पाऊँगा या नहीं लेकिन कोशिश करूंगा और मैं अब जिंदगी मे आगे बढ़ चुका हु, अब चुकी तुम माफी मांग चुके हो तुम अपने गिल्ट से फ्री हो और मैं भी लेकिन मैं वापिस पहले वाला राघव नहीं बन सकता और मिस्टर चोपड़ा हम अब दोस्त नहीं है, मैं उस इंसान से दोस्ती नहीं रख सकता जिसकी वजह से मैंने इतना कुछ सहा है लेकिन तुम्हें थैंक यू जरूर कहना चाहूँगा के भले मुझे तकलीफ हुई लेकिन ये बदलाव भी आया
राघव ने सपाट चेहरे के साथ कहा
निखिल- मैं समझ सकता हु, मैंने तुमसे मिलने की बहुत कोशिश की लंदन मे मुझे देखते ही तुम चले गए थे यहा आकार पोलिटिकल इनफ्लुएंस से तुमहारे डैड से पहचान की ताकि बस तुमसे मिल सकु उस दिन भी गणेश चतुर्थी को तुमसे मिलने आया था लेकिन तुम नहीं मिले और जब शेखर ने मुझे आज बुलाया है उसके लिए मैं हमेशा उसका एहसानमंद रहूँगा
‘तो सब मिले हुए है’ राघव ने मन मे सोचा
निखिल- मुझे खुशी है के तुमने मेरी बात सुनी, मैं तुम्हारी वाइफ से मिला हु और आई मस्ट से के यू आर लकी टू हैव नेहा जी एज योर वाइफ, अगर वो मुझसे बात नहीं करती तो शायद मैं तुमसे बात करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पाता, तुम दोनों एकदूसरे के लिए एकदम परफेक्ट हो
निखिल ने मुस्कुरा कर कहा वही राघव भी मुस्कुरा दिया
राघव की नेहा के लिए फीलिंग दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही थी, वो ऐसा फ़ील कर रहा था जैसा उसने पहले कभी नहीं किया था और अब वो उसके बिना एक पल भी नहीं रह सकता था.....
क्रमश: