Incest "मांगलिक बहन " (Completed) - Page 3 - SexBaba
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Incest "मांगलिक बहन " (Completed)

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प्यारे भाई अद्भुत प्यार,

मैंने जुलाई के पहले वीक में अपडेट के लिए नहीं कहा था, जुलाई के आखिरी वीक में लिखा था। लेकिन अभी शायद अगस्त के पहले वीक में ही अपडेट आ पायेगा। धैर्य और संयम बनाए रखे। अपनी सब कहानी की तरह मैं इसे भी पूर्ण जरूर करूंगा।

Dhanyawad।।

अनुज शर्मा जी आपका शुक्रिया। अच्छा लगा कोई तो हैं जो लेखक के बारे में अच्छा सोचता है। सच कहूं तो आप जैसे लोगो की वजह से ही कहानी लिखने को मन करता है। एक लेखक को समझने वाले और उसे हिम्मत देने वाले सभी साथियों का दिल की असीम गहराइयों से बहुत बहुत शुक्रिया।
 
अजय ने गाड़ी आगे बढ़ा दी। धीरे धीरे अपनी रफ्तार से चलती हुई गाड़ी गांव से बाहर निकल गई और सड़क पर आते ही एक तेज रफ्तार के साथ दौड़ पड़ी। गाड़ी में पूरी शांति थी, ऐसा लग रहा था मानो अजय और सौंदर्या दोनो गूंगे हो। दोनों एक दूसरे से बात करना चाह रहे थे लेकिन हिम्मत नही हो रही थी। आखिकार हिम्मत करके अजय ने चुप्पी तोड़ी और बोला:"

" दीदी आप किस टाइम तक फ्री हो जाएगी शाम को ?

सौंदर्या ने एक नजर अपने भाई पर डाली और भावहीन चेहरे के साथ बोली:"

" करीब 5 बज जाएंगे। आप उससे पहले ही अा जाना भाई।

अजय;" आप फिक्र मत कीजिए। मैं आपको बाहर ही मिल जाऊंगा जब आप आओगी।

सौंदर्या ने राहत की सांस ली और कार में एक बार फिर से खामोशी ने अपना डेरा डाल दिया। सौंदर्या ने अजय की तरफ देखा जो भावहीन चेहरे के साथ गाड़ी चला रहा था तो उसे अपनी गलती का एहसास हुआ कि उसे अपने भाई को थप्पड़ नहीं मारना चाहिए था। आखिर गलती उसकी भी तो हैं। थप्पड़ के बजाय उसे अपने भाई को प्यार से समझाना चाहिए था।

सौंदर्या का कॉलेज अा गया और उसने एक प्यार भरी नजर के साथ अपने भाई को देखा और अंदर चली गई। अजय उसे अंदर जाते हुए देखता रहा और थोड़ी देर बाद ही सौंदर्या आगे मुड़कर आंखो से ओझल हो गई।

अजय ने गाड़ी को शहर की तरफ घुमा दिया और उस जगह पहुंच गया जहां उसने शेरा और उसके गुण्डो को मारा था। उसने आस पास नजर दौड़ाई लेकिन उसे कुछ खास नजर नहीं आया।

पिंकी की लाश यहां से थोड़ी ही दूर मिली थी इसलिए अजय ने सोचा कि घटना स्थल पर एक बार जरूर जाया जाए। अजय ने अपनी कार आगे बढ़ाई और थोड़ी देर बाद वो उस जगह अा गया जहां से पिंकी की लाश मिली थी। चारो और लोगो की भीड़ सड़क से अा जा रही थी और अजय ने काफी देर तक इधर उधर देखा लेकिन उसे कुछ खास नहीं मिला तो उसने अपनी गाड़ी को वापिस लिया और घूमने ही वाला था कि उसे एक बाइक पर बैठे हुए व्यक्ति पर शक हुआ लेकिन अजय ने तुरंत अपना चेहरा दूसरी तरफ घुमा दिया मानो उसने देखा ही नहीं और गाड़ी को हल्की रफ्तार से आगे बढ़ा दिया। शीशे से उसने धीरे से देखा तो उसके दिमाग़ में हलचल मच गई क्योंकि बाइक भी उसकी तरफ अा रही थी। अजय ने जान बूझकर गाड़ी को सड़क पर बाई तरफ घुमा दिया तो थोड़ी दूर जाने पर बाइक भी उसी दिशा में घूम गई। अब अजय के दिमाग में शक की कोई बात ही नहीं रह गई थी और वो समझ गया था कि बाइक उसका पीछा कर रही है। लेकिन क्यों कर रही हैं और ये बाइक पर कौन आदमी हैं और उसके पीछे यहीं से क्यों लगा जहां पिंकी की हत्या हुई हैं।

कोई तो है जो मुझे ये नहीं जानने देना चाहता हूं कि पिंकी की मौत क्यों और किसने की जबकि मैं तो कोई पुलिस ऑफिसर भी नहीं हु। अजय ने अपने दिमाग पर जोर दिया तो उसे एक बात समझ अा गई कि उसकी दीदी पिंकी को बचाने के लिए ही तो गुण्डो से भिड़ गई थी तो कहीं अब पिंकी के बाद दीदी ही तो उनके निशाने पर नहीं है।

अजय के दिमाग में खतरे की घंटी बज उठी और उसने तुरंत गाड़ी को सौंदर्या के कॉलेज की तरफ दौड़ा दिया। गाड़ी हवा से बातें कर रही थी और थोड़ी देर बाद ही वो कॉलेज के सामने था।

कॉलेज के बाहर पहले से पुलिस की गाडियां देखकर उसके दिमाग को झटका सा लगा और वो तेजी से नीचे उतरा तो देखा कि कॉलेज के प्राचार्य बुरी तरह से डरे हुए थे और पुलिस उनसे पूछताछ कर रही थी।

ऑफिसर:" आपके स्कूल से दिन में ही एक महिला टीचर का किडनैप हो गया कैसे ? आपके पास तो अपने गार्ड है।

प्राचार्य: मेरे गार्ड बेहोश और जख्मी हालात में मिले हैं। ये तो आपको सोचना चाहिए कि शहर में पुलिस के होते हुए गुण्डो की हिम्मत इतनी कैसे बढ़ गई ?

अजय का दिल किसी अनहोनी की आशंका से कांप उठा और वो तेजी से आगे आया और एक महिला अध्यापक से पूछा :"

" क्या हुआ हैं यहां ? किसका किडनैप हो गया है ?

मैडम के चेहरे पर खौफ के मारे हवाइयां उड़ी हुई थी और वो डरते हुए बोली:"

" हमारे कॉलेज की एक टीचर सौंदर्या का।

अजय अपनी बहन का नाम सुनते ही परेशान हो गया क्योंकि वो जानता था कि उसकी बहन बहुत बड़े खतरे ने पड़ चुकी है। अजय ने तुरंत पीछे नजर दौड़ाई क्योंकि वो जानता था कि जो बाइक वाला उसका पीछा कर रहा हैं जरूर उसके है गैंग ने उसकी बहन का किडनैप किया है। लेकिन अजय को बाइक वाला दूर दूर तक कहीं नहीं दिखाई दिया।

अजय परेशान हो उठा और तेजी से गाड़ी से बाहर निकला और इधर उधर बाइक वाले को देखने लगा लेकिन उसे वो कहीं नजर नहीं आया। अजय को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे ?

अजय तेजी से आते हुए अपनी गाड़ी में बैठा और गाड़ी सीधे रोड की तरफ दौड़ा दी और बाइक की तलाश में जुट गया।

एक बहुत ही वीरान सा खंडर था ये शहर से बाहर की तरफ। मुख्य सड़क से हटकर एक कच्छी मिट्टी की सड़क बस यहां आने के लिए एक मात्र रास्ता थी। बरसात की वजह से सड़क पर जगह जगह पानी भरा हुआ था और कीचड़ बहुत ज्यादा हो गई थी।

इसी सड़क पर एक स्कॉर्पियो मुड़ी और धीरे धीरे खंडर की तरफ बढ़ने लगी। स्कॉर्पियो के पीछे तीन गाडियां और थी जो गुण्डो से पूरी तरह से भरी हुई थी। शेरा ने गाड़ी को खंडर के ठीक सामने रोक दिया और उसके साथ ही सारे गुंडे गाड़ी से बाहर निकल गए।

शेरा ने गाड़ी की डिक्की खोली तो उसमे सौंदर्या बेहोश पड़ी हुई थी। शेरा की आंखों चमक उठी और उसने सौंदर्या के अचेत जिस्म को कंधे पर उठाया और अंदर की तरफ चल पड़ा। एक एक करके सभी गाड़ियों से गुंडे उतर गए थे गाड़ियों को घास और लकड़ियों से ढक दिया गया। अब दूर दूर से गाड़ी नजर नहीं अा रही थी बल्कि घास का एक ढेर नजर आ रहा था।

शेरा सौंदर्या को लिए हुए एक अंदर घुस गया और शेरा को देखते ही सामने बैठे हुए मनोज की आंखे चमक उठी।

मनोज अपनी कुर्सी से उठ गया और एक विजयी मुस्कान के साथ बोला:" शाबाश मेरे शेर, तुम सचमुच शेर हो। मानना पड़ेगा तुम्हारी हिम्मत को क्योंकि आज तुमने जो किया हैं उसके लिए सचमुच शेर का ही दिल चाहिए।

शेरा ने सौंदर्या को एक चारपाई पर पलट दिया और स्माइल करते हुए बोला:" डरता नहीं हूं इसलिए ही तो मेरा नाम शेरा हैं। लीजिए जिसकी आपको तलाश थी आपके सामने पड़ी है।

मनोज ने एक नजर सौंदर्या की तरफ देखा और शेरा के कंधे पर हाथ रखकर उसे शबासी दी और बोला:"

" शेरा मुझे अपने बाद पर सिर्फ तुम पर ही तो सबसे ज्यादा भरोसा है। सच में तुम एक सच्चे वफादार हो।

शेरा अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गया और उसके बाद मनोज ने सभी को बाहर जाने का इशारा किया तो एक के बाद एक सभी लोग बाहर चले गए। शेरा भी बाहर चला गया जबकि मनोज ने उसे जाने के लिए नहीं बोला था।

मनोज ने सौंदर्या में मुंह में ठूंसा हुआ कपड़ा बाहर निकल लिया और एक बॉटल से थोड़ा सा पानी लेकर सौंदर्या में मुंह पर छिड़क दिया तो सौंदर्या ने एक झटके के साथ अपनी आंख खोल दी और अपने आप को एक बिल्कुल अंजना जगह पर पाया।उसकी नजर अपने सामने बैठे हुए मनोज पर पड़ी तो उसकी समझ में आ गया कि ये सब उसी का किया धरा है।

सौंदर्या:" मनोज ये क्या बदतमीजी हैं ? मुझे इस तरह क्यों उठा कर लाया गया ?

इतना कहकर सौंदर्या उठ खड़ी हुई और गुस्से से उसकी तरफ देखने लगी। मनोज ने उसकी तरफ एक स्माइल दी और बोला:_

" मेरी प्यारी सौंदर्या तुमने और तुम्हारे भाई ने मेरी इज्जत मिट्टी में मिला दी, मेरे गुण्डो पर पहली बार किसी ने हाथ उठाया और उन्हें बुरी तरह से मारा अजय ने सिर्फ तुम्हारी वजह से।

सौंदर्या के चेहरे पर गुस्से के भाव बढ़ गए और बोली:" अच्छा तो तुम गांव में शरीफ होने का नाटक करते हो और ये शहर में फैले हुए सारे अपराध की असली वजह तुम हो।

मनोज:" सही समझी तुम सेक्सी सौंदर्या, मेरे आदमी ही सब कुछ करते हैं और पिंकी की मौत भी मेरी वजह से ही हुई हैं क्योंकि उसने मेरी बहन के खिलाफ जाने की कोशिश करी थी।

सौंदर्या की आंखे लाल सुर्ख हो गई और वो गुस्से से अपने शब्दो को चबाते हुए बोली:"

" बस मनोज, अब तुम्हारे पापो का घड़ा भर गया हैं और मैं सारी दुनिया को तुम्हारी करतूत बताउंगी।

मनोज ने उसकी तरफ देखा और जोर जोर से हंसने लगा मानो वो कोई जोक सुना रही हो।

सौंदर्या:" हंस लो अपनी आखिरी हंसी तुम क्योंकि फिर इसके बाद कोई तुम्हे जेल में रोना पड़ेगा।

मनोज:' मर गए मुझे जेल भेजने वाले, जरा पहले यहां से निकल कर तो दिखाओ तुम।

सौंदर्या तेजी से आगे की तरफ बढ़ी और मनोज ने सामने लगे स्विच को दबा दिया तो कमरे का एक मात्र दरवाजा तेजी से बंद हो गया और सौंदर्या के माथे पर परेशानी और डर को रेखाएं उमड़ अाई।

सौंदर्या:" देखो मनोज तुम मुझे जाने दो नहीं तो अंजाम बहुत बुरा होगा तुम्हारा।

मनोज थोड़ा सा आगे आया और उसकी आंखो में देखते हुए बोला:" मेरे अंजाम की छोड़, अपनी फिक्र करो। दुनिया की कोई ताकत मेरी मर्जी के बिना ये दरवाजा नहीं खोल सकती। मान लो तुम बाहर चली भी गई तो मेरे आदमी भूखे कुत्तों की तरह तुम्हे नोच डालेंगे। ये देखो।

इतना कहकर उसने टीवी ऑन किया तो बाहर खड़े और बेहद डरावनी सूरत के गुंडे नजर आए जिन्हे देखते ही सौंदर्या का पसीना टपक पड़ा।

मनोज:" मान लो तुम गुण्डो से भी बच गई तो यहां से बाहर कैसे निकल पाओगी ? ये एक घणा जंगल हैं और तुम्हे कोई दूर रास्ता नजर नहीं आएगा। बाहर तुम्हे जंगली जानवर खा जाएंगे।

सौंदर्या समझ गई थी कि वो बेहद बुरी तरह से फंस गई है और उसका बचना मुश्किल है लेकिन उसे अपने भाई पर पूरा भरोसा था कि वो उसे जरूर बचा लेगा।

सौंदर्या सोच में डूब गई।

मनोज" किस सोच में डूब गई मेरी जान ? देखो तुम्हे अब सारी ज़िन्दगी यहीं रहना होगा मेरी रखैल बन कर, कहां तो तुम एक लंड के लिए तरस रही थी यहां अब तुम्हे हर रोज लंड मिलेंगे, एक नहीं काफी सारे। मेरे सारे आदमी तुम्हारी साथ बारी बारी से मस्ती करेंगे।

सौंदर्या मनोज की बात पूरी होते ही बेहोश हो गई और मनोज ने उसके उसे उठा कर बेड पर पटक कर और कमरे को बाहर से बंद करने के बाद बाहर अा गया और अपने गुण्डो से बात करने लगा।

अजय को समझ नहीं आ रहा था कि वो अपनी बहन को कहां तलाश करे। दोपहर हो गई थी लेकिन उसे अभी तक कुछ भी समझ नहीं आ रहा था।

अजय ने गाड़ी को सड़क के किनारे रोक दिया और सोच में डूब गया कि आखिर उसकी दीदी का किडनैप क्यों और किसने किया तो उसके आगे सिर्फ एक ही वजह उभरी। वहीं पिंकी वाली और वो समझ गया कि ये दोनो काम जरूर एक ही आदमी के है।

अजय ने अपने दिमाग को उधर इधर दौड़ाया तो उसे एक उम्मीद की किरण नजर आईं। उसे सामने सड़क पर सीसीटीवी कैमर लगा नजर अाया जिसमे वो उस बाइक का नंबर पता कर सकता था जो उसका पीछा कर रही थी।

अजय ने सावधानी से उसकी डिटेल निकाली तो बाइक सवार उसे जाना पहचाना सा लगा मानो अजय उसे बहुत अच्छे से जानता हो। अजय ने बाइक का नंबर नोट किया और बार बार वो उस आदमी की फोटो देखने लगा जो बाइक पर बैठा हुआ था।

अजय ने उस आदमी की पेंट की जेब पर ध्यान दिया तो उसकी जेब से कुछ बाहर की तरफ निकला हुआ था। अजय ने वीडियो को स्टार्ट किया तो थोड़ा आगे जाकर मोड़ पर उसकी जेब से कुछ गिरा और अजय ने बिना देर किए कार को उस दिशा में दौड़ा दिया और जल्दी ही वो उस जगह पहुंच गया और उसे सड़क पर अपना अज्जु भाई का मास्क दिखाई दिया।

अजय को आंखे चमक उठी और उसने वो मास्क उठा लिया और वो समझ गया कि ये सब इस मास्क की वजह से हुआ है क्योंकि गुण्डो को पता चल गया होगा कि मैंने ही उनके लोगो को मारा था इसलिए उन्होंने मेरी बहन को उठा लिया। अजय एक बात तो साफ समझ गया था कि उसकी दीदी बहुत बड़े खतरे में पड़ गई है।

अजय ने बहुत ध्यान से फिर से वीडियो को देखा और उस आदमी के बारे में सोचने लगा कि ये कौन हो सकता हैं। अजय अपनी सोच में डूबा हुआ था कि उसका फोन बज उठा ।

उसकी मम्मी का फोन था। अजय अपनी मम्मी को अभी कुछ भी बताकर उन्हें परेशान नहीं करना चाहता था।

कमला: अरे बेटा, अजय शाम को थोड़ा जल्दी अा जाना, रामू आज काम पर नहीं आया है इसलिए घास तुम्हे ही लाना होगा। आज फिर से शहर गया है वो किसी काम से।

अजय:" ठीक है मम्मी। आप फिक्र मत कीजिए। मैं जल्दी अा जाऊंगा।

इतना कहकर उसने फोन काट दिया। अचानक अजय के दिमाग में एक विस्फोट सा हुआ और उसने फिर से वीडियो देखी तो उसकी आंख हैरत से खुलती चली गई और उसे सारी कहानी समझ में आ गई।

शाम हो गई थी और अजय ने गांव से थोड़ी दूर ही अपनी कार को एक पेड़ की साइड में छुपा है और खुद एक पेड़ के पीछे छुपकर किसी का इंतजार करने लगा। थोड़ी ही देर हुई थी कि एक बाइक उसे सामने से आती हुई नजर आईं और जैसे ही बाइक उसके पास आई उसने जंप लगा दी और बाइक सवार सड़क पर गिर पड़ा और अजय ने उसे बिना कोई मौका दिए हुए उस पर हमला कर दिया।

रामू तड़प उठा। हान ये रामू ही तो था। उसके घर का नौकर। अजय ने उसे पकड़ लिया और उसकी गर्दन की एक नस दबाई तो तो वो बेहोश होता चला गया।
 
आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद आलू भाई। आलू वैसे सब्जियों का राजा होता है और मुझे तो जीरा आलू बेहद पसंद हैं। 😘😘

आलू भाई अगर पुलिस ही मनोज को पकड़ लेगी तो फिर अपने हीरो की क्या जरूरत होगी। वैसे भी पुलिस के बारे में एक बात मशहूर हैं कि कांड हो जाने के बाद पहुंचती हैं। अगर अजय पुलिस के भरोसे रहा तो सौंदर्या की तो दुनिया लूट जाएगी।

वैसे भी शहर से बाहर जाने के बाद सीसीटीवी कैमरे का ज्यादा महत्त्व नहीं रह जाता। खंडहर पूरी तरह से गोपनीय हैं और उसके बारे में कोई नहीं जानता।

काफी समय के बाद ऑफिस जाना भी शुरू किया हैं और अभी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हूं इसलिए अभी अपडेट थोड़े धीमे ही आएंगे। हफ्ते में एक अपडेट तो जरूर आएगा। वैसे कोशिश ज्यादा की होगी।
 
सौंदर्या ने आंखे खोली तो उसे कमरे में कोई नहीं दिखा। वो बैठ गई और अपने मोबाइल की तरफ देखा तो उसमें नेटवर्क ही नहीं थे।

उसे समझ में नहीं अा रहा था कि वो क्या करे, कमरे में कोई खिड़की तक नहीं थी। वो उदास होकर बैठ गई और बचने के बारे में उपाय सोचने लगी।

तभी एक झटके के साथ दरवाजा खुल गया और मनोज के साथ शेरा भी अंदर दाखिल हुआ। उनके मुंह से दारू की तेज बदबू अा रही थी और नशे के कारण दोनो की आंखे लाल सुर्ख हो गई थी। दोनो सौंदर्या को घूर रहे थे जिससे सौंदर्या बुरी तरह से डर गई थी।

मनोज:" शेरा यार पहले मैं इसे आज कली से फूल बनाता हूं और बाद में तुम इसका मजा लेना।

शेरा: ठीक है , जैसे आपको ठीक लगे, लेकिन मैं आराम से नहीं बैठ कर नहीं देख सकता, कुछ ना कुछ तो मैं भी इसके साथ करता रहूंगा।

शेरा ने सौंदर्या की चूचियों को घूरते हुए कहा तो सौंदर्या के चेहरे पर डर उमड़ आया और उसकी आंखो से आंसू टपक पड़े।

मनोज:" क्या यार ये तो पहले ही डर गई है। ऐसे कैसे काम चलेगा सौंदर्या मेरी जान। अब तो तुम्हे आखिरी सांस तक यहीं रहकर चुदना होगा।

इतना कहकर मनोज हंस पड़ा तो शेरा भी हंसने लगा। दोनो को जानवर की तरह हंसते देख कर सौंदर्या की रुलाई छूट गई और वो जोर जोर से रोते हुए बोली:

" मनोज मुझे छोड़ दो, मेरे साथ ये सब मत करो, मेरी ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी। मैं तो पहले से ही मांगलिक हूं।

मनोज:" अरे मेरी जान, बर्बाद नहीं तेरी ज़िन्दगी आबाद कर रहा हूं। लंड मिल जाएगा तुझे आज जिसके लिए तू तड़प रही है।

सौंदर्या:" नहीं, मुझे नहीं चाहिए कुछ भी, भगवान के लिए मुझे छोड़ दो। तरस खाओ मुझ पर तुम भाई।

मनोज ने उसकी एक नहीं सुनी और टीवी को शुरू कर दिया और एक एडल्ट फिल्म शुरू कर दी और बोला:*

" मेरे सामने तुम्हे शर्म आएगी और तुम देख नहीं पाओगे, नहीं देखोगी तो गर्म कैसे होगी तुम, मैं थोड़ी देर बाद अंदर आऊंगा जब तक तुम्हारी चूत भीग गई होगी मेरी जान।

इतना कहकर मनोज बाहर चला गया और उसके पीछे पीछे ही शेरा भी अा गया जबकि सौंदर्या पीछे टीवी बंद करने के लिए बोलती रह गई। सौंदर्या डर गई थी और उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। आखिरकार उसका ध्यान अपने आप ही टीवी पर चला गया जिसमें एक लड़का अपनी भाभी पर लाइन मार रहा था और भाभी भी उसे खुलकर भाव दे रही थी ।

वहीं अजय ने रामू से सब कुछ मालूम किया तो पता चला कि कल रामू को कपडे धोते समय अज्जू भाई का मास्क मिल गया था जिससे उसे पता चल गया कि अजय ही अज्जु भाई है। इतना सब कुछ जान लेने के बाद उसकी गाड़ी तेजी से दौड़ती हुई खंडर की तरफ चल पड़ी। कच्चे रास्ते पर आते ही उसने गाड़ी को बंद कर दिया और उसे सामने खंडर नजर आया तो रामू को गाड़ी से बाहर निकाला और उसकी कमर के ठीक पीछे एक बंदूक लगाई और सड़क पर चल पड़ा। रामू किसी यंत्र चालित मशीन की तरह उसके इशारे पर चलता रहा क्योंकि वो जानता था कि अगर उसने कुछ भी होशियारी दिखाई तो अजय गोली चला देगा।

अजय को आगे मुड़कर सिर्फ पेड़ो का एक झुंड ही नजर आया और वो समझ गया कि ये ही मनोज और उसके गुण्डो का अड्डा हो सकता है। अजय ने धीरे धीरे सावधानी पूर्वक अपने कदम आगे बढ़ाए और वो जल्दी ही उसे एक सूखा हुआ पेड़ नजर आया जिसके पीछे अंदर खंडर में जाने का रास्ता था।

मनोज ने साइड में लगा बटन दबा दिया और आगे एक दरवाजा नजर आया और देखते ही देखते दरवाजे के हॉल से दो काली आंखे नजर अाई और उन्होंने मनोज को पहचान कर दरवाजा खोल दिया क्योंकि मनोज के बराबर में खड़ा हुआ अजय उन्हें नजर नहीं आया था।

दरवाजे के खुलते ही मनोज एक झटके के साथ अंदर गिरा और अजय तेजी से अपने घुटनों के बल झुका और गार्ड के कुछ समझने से पहले ही अजय की उंगली हिली और अगले ही पल गार्ड की लाश फर्श पर पड़ी नजर आईं।

अजय अंदर घुस गया और उसने बिना देर किए मनोज को गर्दन से पकड़ा और उंगली से उसकी नस दबाई तो मनोज बेहोश होता चला गया। अजय ने गार्ड के कपडे पहने और मनोज को को एक कोने में फेंक दिया और अन्दर बढ़ गया।

अजय को आश्चर्य हो रहा था क्योंकि अंदर सिर्फ टूटी फूटी दीवारें ही थी और उसे अभी तक कोई नजर नहीं आया था। उसके गांव के पास के जंगल में ऐसा खुफिया अड्डा भी हो सकता है उसने सपने में भी नहीं सोचा था। अजय को तभी कुछ आवाजे सुनाई दी तो वो दीवार के पीछे छुप गया और सामने से उसे एक गार्ड आता दिखाई दिया जो शायद सुरक्षा का जायजा लेने आया था।

अजय ने उस पर चीते की फुर्ती से वार किया और देखते ही देखते उसकी लाश पड़ी हुई नजर आईं। अजय उसी दिशा में बढ़ गया जिधर से वो गार्ड अाया था। अजय ने देखा कि गार्ड के गले में चाबियो का एक छल्ला लटका हुआ था जिसमें कुछ चाबिया थी अजय ने वो लिया और आगे बढ़ गया। अजय थोड़ा आगे पहुंचा तो एक दरवाजा नजर आया जिस पर ताला लगा हुआ था। अजय ने ताली लगाई और देखते ही देखते दरवाजा खुल गया और उसे नीचे की तरफ सीढ़ियां जाती हुई नजर आईं और और अजय बिना एक पल की भी देरी किए हुए नीचे उतरता चला गया। अजय की आंखे हैरानी से खुली रह गई। अंदर एक बहुत ही खूबसूरत महल जैसा बना हुआ था और उसे उपर खुला आसमान नजर आया। अजय को अपनी आंखो पर यकीन करना मुश्किल हो रहा था जो वो देख रहा है क्या हकीकत है।

अजय ने सपने में भी नहीं सोचा था कि बेजान सी पड़ी हुई खंडहर इमारत के अन्दर इतना शानदार अड्डा भी हो सकता है।

अजय सावधानीपूर्वक आगे बढ़ गया और धीरे धीरे इमारत के पीछे की तरफ अा गया और पाइप के सहारे उपर चढ़ गया और देखा कि एक गुंडा छत पर बैठा हुआ दारू पी रहा था तो अजय ने उस पहरा दे रहे गुंडे पर घात लगाकर हमला किया और उसकी गर्दन तोड़ दी। बेचारा गुंडा इससे पहले की कुछ समझ आता उसकी ज़िन्दगी खत्म हो गई। अजय ने उसकी लाश को एक तरफ किया और सीढ़ियों से होता हुआ नीचे की तरफ चल पड़ा।

वहीं मनोज और शेरा दोनो दारू के पैग लगा रहे थे और उनके पास की करीब चार से पांच गुंडे और बैठे हुए थे जो शायद इस इन्तजार में थे कि कब ये दोनो सौंदर्या पर को लूटे और उसके बाद हमारा नंबर आए।

मनोज;" क्या बोलते हो शेरा ? अब तक तो बेचारी वीडियो देख देख कर गर्मा गई होगी।

शेरा के होंठो पर मुस्कान थिरक उठी और बोला:" बिल्कुल साहब, काफी देर हो गई और वो तो होगी भी कुंवारी ही क्योंकि संस्कारी जो ठहरी। लेकिन अभी गर्म हो गई होगी, थोड़ी देर शुरू में आना कानी करेगी लेकिन इसके बाद खुद ही मस्ती करेगी।

इतना कहकर वो हंस पड़ा तो सारे लोग जोर जोर से हंसने लगे और मनोज उठकर अंदर की तरफ चल पड़ा।

अंदर सौंदर्या वीडियो को देखकर अपनी आंखे बंद कर ली थी लेकिन टीवी से आती कामुक सिसकियां उसके ना चाहते हुए भी उसके जिस्म पर अपना असर छोड़ रही थी। सौंदर्या के चेहरे का रंग बदलता जा रहा था और आंखों में लाली अा गई थी। सौंदर्या अंदर ही अंदर बुरी तरह से कांप रही थी कि अब उसका क्या होगा? लेकिन उसे अभी भी अपने बचने की एक उम्मीद नजर आ रही थी और वो था उसका अपना भाई अजय।

रोशनी मनोज की बहन इस वक़्त वहीं इमारत में एक आलीशान कमरे के अंदर मात्र पेंटी ब्रा में सोई हुई थी और उसकी आंखे खुली तो उसने अपने सामने रखी हुई दारू की बोतल को उठाया और गटागट पीने लगी। उसने जोर से आवाज लगाई तो एक गुंडा तेजी से अंदर अाया और उसकी नजर रोशनी के बूब्स पर चली गई लेकिन फिर नजरे चुरा कर बोला:"

" अच्छा हुआ मैडम आप उठ गई, आपके लिए एक खुशखबरी हैं।

रोशनी उसे घूरते हुए बोली;" साले, मेरे आंखे फाड़ फाड़ कर क्या देख रहा है

वो कांप उठा और बोला:" मैडम कुछ नहीं, मुझे माफ़ कर दीजिए। वो सौंदर्या पकड़ी गई और अंदर कमरे में बंद हैं।

रोशनी के होंठो पर स्माइल अा गई और उसने उस गुंडे को इशारे से अपने पास आने का इशारा किया तो वो डरते डरते उसके पास पहुंच गया और नजरे झुका कर खड़ा हो गया। रोशनी ये सब देखकर स्माइल करते हुए बोली:"

" थोड़ी देर पहले तो मुझे घूर रहा था तू और अब क्या हिजड़े की तरह नजरे झुकाए खड़ा हुआ है।

गुंडा उसके कदमों पर गिर पड़ा और रोते हुए बोला:"

" मुझे माफ कर दीजिए। अनजाने में मेरा ध्यान चला गया, आगे से ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी।

रोशनी ने एक अदा के साथ अपने हाथ को पीछे ले जाते हुए अपने ब्रा को खोल दिया और उस ब्रा को उसने गुंडे के गले में फंसा कर उसे उपर उठाया और बोली:

" ले देख ले मेरी चूचियों को, तेरे लिए मेरी तरफ से आज का तोहफा, तूने दिल खुश कर दिया सौंदर्या के बारे में बताकर।

गुंडे ने शर्म से मारे अपने आंखे बंद कर ली तो रोशनी ने उसके हाथ पकड़ लिए अपने बूब्स पर रख दिए तो गुंडा डर और घबराहट के मारे बेहोश हो गया। रोशनी उसकी हालत पर जोर जोर से हंसने लगी और बाथरूम में नहाने के लिए घुस गई।

मनोज जैसे ही कमरे के अंदर घुसा तो डर के मारे सौंदर्या की आंखे खुल गई और उसने मनोज को अपने सामने देखा तो डर के मारे उसकी सांसे तेज हो गई। मनोज ने उसकी तरफ एक बार ध्यान से देखा और उसकी तेजी से चलती हुई सांसे, बड़ी बड़ी लाल हो चुकी आंखे देखकर समझ गया था कि सौंदर्या अब मस्ती में अा गई है।

मनोज: सौंदर्या आखिरकार आज तुम मेरे नीचे अा ही जाओगी। कितना तड़पा हुआ तुम्हारे किए।

सौंदर्या: नहीं मनोज, देखो ऐसा कुछ मत करना, मुझे जाने दो। नहीं तो तुम्हारा अंजाम बहुत बुरा होगा,अजय तुम्हे छोड़ेगा नहीं।

मनोज:" मेरा छोड़ और अपनी फिक्र कर मेरी जान, आज तुझे कली से फूल बना दूंगा। मसल दूंगा तेरी जवानी को। देख तेरी ये मदमस्त चूचियां कैसे तड़प तड़प कर उछल उछल पड़ रही है। हाय दिखा दे ना अपनी ये ज़ालिम चूचियां मुझे।

सौंदर्या अंदर से दर गई थी लेकिन हिम्मत करते हुए बोली:"

" कमीने तुझे शर्म नहीं आती। ऐसी बाते अपनी बहन से करता तो तुझे पता चलता।

तभी साइड से एक कमरे का गेट खुला और रोशनी एक काले रंग की छोटी ड्रेस पहने हुए हाथ में सिगरेट के कश लगाती हुई कमरे के अंदर दाखिल हुई और बोली:"

" करी थी मेरी जान सबसे पहले मुझसे मुझसे ही करी थी और मैंने अपनी अपनी चूचियों को दिखा दिया था क्योंकि अगर अपने सगे भाई को नहीं दिखाऊंगी तो और किसे दिखाऊंगी।

इतना कहकर उसने अपनी ड्रेस को उपर उठा दिया और उसकी दोनो चूचिया पूरी तरह से नंगी होकर लहरा उठी।

सौंदर्या की आंखे खुली की खुली रह गई। उफ्फ कमीनी ने कैसे अपने भाई के आगे अपनी चूचियों को नंगा कर दिया।

मनोज:" मिल गया तुझे जवाब, चल अब जल्दी से दिखा दे मुझे अपने है मस्ती भरे अमृत कलश।

सौंदर्या को काटो तो खून नहीं, उसकी समझ में नहीं अा रहा था कि वो क्या करे। तभी रोशनी थोड़ा आगे हुई और बोली:"

" ओह भाई मेरी चूचियां देख ले ना फिर से, इससे जरा भी कम नहीं है। और चूचियां छोड़ तुझे अपनी चूत ही दिखा देती हूं।

इतना कहकर वो एक कुर्सी पर बैठ गई और अपनी दोनो टांगो को खोलते हुए मनोज के सिर को अपनी टांगो के घुसा दिया।

मनोज के होठ अपने आप उसकी चूत पर जा लगे और रोशनी के मुंह से एक मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

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मनोज ने अपने जीभ को उसकी चूत के होंठो पर घुमाया तो रोशनी मस्ती से सिसक उठी

" भाई उफ्फ चूस ना मेरी चूत को ऐसे ही, फिर तुझे आज सौंदर्या की चूत भी मिलेगी।

सौंदर्या के मुंह से आवाज नहीं निकल रही थी और वो बिना पलके झपकाए रोशनी के मुंह को देख रही थी जिसकी दोनो आंखें इस समय मस्ती से बंद थी।

वहीं दूसरी तरफ अजय सीढ़ियों से नीचे उतरा और उसने बाहर बैठे दोनो गुण्डो को मौत के घाट उतार दिया। तभी अंदर से दारू लेने के एक गुंडा बाहर की तरफ निकला और वो भी मौत को प्यारा हो गया।

मनोज ने धीरे से अन्दर झांका तो उसे शेरा और उसके साथ दो आदमी दिखाई दिए। शेरा इस वक़्त नशे में चूर था और दोनो गुण्डो बैठ कर दारू पी रहे थे। अजय ने सावधानी से आगे बढ़ा और उसने अपनी जेब से एक तेज धार वाला चाकू निकाला और बिना समय गंवाए हमला किया तो एक गुंडे की गर्दन फर्श पर पड़ी हुई थी वहीं दूसरा फुर्ती से उठा लेकिन अजय ने उससे कहीं ज्यादा फुर्ती से उसकी गर्दन को काट दिया और उसकी दर्द भरी आह सुनकर शेरा की आंखे खुल गई और उसने अजय पर हमला किया लेकिन अजय तेजी से झुकते हुए उसके वार को बचा गया और उल्टा होते हुए शेरा को जमीन पर गिरा दिया और उसके मुंह पर हाथ रखते हुए उसके टट्टे पर जोरदार लात जड़ दी तो शेरा दर्द के मारे बेहोश हो गया और अजय ने अगले ही पल उसकी गर्दन तोड़ दी।

अजय ने अब जैसे ही दरवाजे को खोला तो उसे उसकी आंखे खुली की खुली रह गई। नशे में धुत मनोज अपनी सगी बहन की चूत चाट रहा था और सौंदर्या दोनो को बड़ी उत्सुकता के साथ देख रही थी। सौंदर्या की नजर जैसे ही अपने भाई पर पड़ी तो उसकी जान में जान अा गई और उसने एक जोरदार धक्का कुर्सी पर बैठी हुई रोशनी को दिया और रोशनी के साथ साथ उसकी टांगो के बीच में फंसा हुआ मनोज भी फर्श पर गिर पड़ा और दोनो के मुंह से दर्द भरी आह निकल पड़ी।

दोनो ने उपर की तरफ देखा तो सौंदर्या के साथ अजय खड़ा नजर आया। मनोज को अपनी आंखो पर जैसे यकीन ही नहीं हुआ और उसने जोर जोर से अपने गुण्डो को आवाज लगाई लेकिन कोई अंदर नहीं आने वाला था।

अजय:" तेरे सारे लोगों को मैनें जहन्नुम में भेज दिया और अब तुम्हारी बारी है ।

मनोज खड़ा हुआ और उसने अजय अपने हमला किया तो अजय ने उसके हाथ को पकड़ लिया और उठकर दीवार पर पटक दिया तो उसकी रीढ़ की हड्डी टूट गई और उसके मुंह से दर्द भरी चींखें निकल पड़ी।

रोशनी ने अपने भाई की ये हालत देखकर अजय पर छलांग लगा दी लेकिन फुर्तीला अजय सामने से हट गया और रोशनी का सिर सीधे दीवार से जा टकराया और फट गया तो रोशनी का जिस्म एक झटके के साथ अजय के उपर गिरा और अजय फिर से दर्द से कराह उठा क्योंकि रोशनी के गिरने से उसकी पसलियां टूट गई थी। अजय आगे बढ़ते हुए उसके पास बैठ गया और बोला:"

" हरामजादे मेरी बहन पर नजर उठाने से पहले तुझे सोचना चाहिए था कि सौंदर्या मेरी इकलौती बहन है और मेरी जान है कुत्ते वो।

अजय ने इतना कहकर उसकी गर्दन को पकड़ा और तोड़ दिया। बेचारा ठीक से चींखें भी नहीं सका।

सौंदर्या दौड़ती हुई अपने भाई के गले लग गई और जल्दी ही दोनो भाई बहन वहां से निकल पड़े। प्लान के मुताबिक सौंदर्या सीधे पुलिस स्टेशन गई और बताया कि दारू पीकर सभी लोग आपस में लड़ पड़े और मौका उठाकर वो भाग अाई।

पुलिस ने अड्डे पर हमला किया लेकिन वहां सिर्फ लाशे बरामद हुई और बहुत सारे हथियार।

सौंदर्या अपने भाई के साथ घर अा गई और उसकी मा ने उसे देखते ही गले से लगा लिया।
 
रात में करीब आठ बजे सौंदर्या अपने भाई के साथ घर पहुंच गई और उन्हें देखते ही कमला की जान में जान अाई और रोती हुई भगाकर सौंदर्या से लिपट गई।

सौंदर्या ने भी अपनी मा को अपनी बांहों में भर लिया और उससे चिपक गई। घर में आस पड़ोस के लोगो की भीड़ इकट्ठा हो गई थी जो कमला को सांत्वना देने और उसका दुख दर्द बांटने आए थे। सभी लोग अजय से वहां क्या हुआ पूछ रहे थे और अजय उन्हें वहीं सब बता रहा था जो वो अपने प्लान के तहत पहले ही पुलिस को बता चुका था।

सीमा के पापा:" ओह बेटा ये तो बहुत अच्छा हूं कि अपनी समझदारी से अच्छा मौका देखकर सौंदर्या अपनी जान बचा कर भाग अाई और उस कमीने मनोज का पर्दाफाश कर दिया।

राम बाबू ( सरपंच)= मनोज ने अपने गंदे कामो से गांव का नाम बदनाम किया वहीं सौंदर्या ने ना सिर्फ अपनी जान बचाई बल्कि उसके काले कारनामों का पर्दाफाश करके गांव का नाम भी खराब होने से बचा लिया। सौंदर्या जैसे बेटी भगवान सबको दे। ये सिर्फ कमला बहन की ही नहीं बल्कि पूरे गांव की बेटी है।

सौंदर्या अपनी मा से लिपटी हुई चुपचाप अपने भाई की बाते सुन रही थी और तभी अजय बोल पड़ा:"

" सच में मेरी दीदी ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए उनकी सूचना पुलिस को दी और गांव का नाम रोशन किया है। नारी शक्ति के लिए एक नई मिशाल हैं मेरी दीदी सौंदर्या।

सारा गांव मिलकर सौंदर्या की जय जयकार कर रहा था और सौंदर्या अपनी मा से लिपटी हुई प्यार और इज्जत भरी नजरो से अपने भाई को देख रही थी कि वो कितना महान हैं। सब गुण्डो को उसने मारा और लोगो की नजरो में मुझे ऊंचा कर दिया। सच में मेरा भाई लाखो में एक हैं, हीरा हैं बिल्कुल हीरा।

थोड़ी देर के बाद जय जयकार करके गांव के सभी लोग अपने घर चले गए और सौंदर्या ने अपनी मम्मी को सारी सच्चाई बता दी तो उसने खुशी और गर्व से अपने बेटे की तरफ देखा और स्माइल करते हुए अपने बेटे की बलाएं लेते हुए अपने पास आने का इशारा किया

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कमला:" शाबाश बेटा। आज तूने मेरे दूध का हक अदा कर दिया। भगवान करे तेरी ताकत को कभी नजर ना लगे। बेटा हो तो मेरे बेटे जैसा। आज से तुम्हे पूरी आजादी हैं चाहे जिम करो या फाइट।

कमला ने आगे बढ़कर अपने बेटा का माथा चूम लिया। सौंदर्या मंद मंद खड़ी हुई स्माइल कर रही थी और कमला बार बार अपने बेटे के माथे को चूम रही थी।

कमला:" सच में तू ही अपनी बहन की इज्जत की मान मर्यादा और इज्जत का रखवाला है। अरे मैं तो भूल ही गई रुक तेरी नज़र उतार देती हूं।

इतना कहकर कमला अंदर चली और जल्दी ही हाथ में एक थाली लिए अाई और खुशी के मारे उसकी आंखो से आंसू टपक रहे थे। उसने अजय के सामने खड़ी होकर उसकी आरती( नजर) उतारनी शुरू कर दी।

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कमला अपनी आंखो में खुशी के आंसू और चेहरे पर मुस्कान लिए अपने बेटे की आरती उतार रही थी और अजय बहुत ही प्यार और इज्जत भरी नजरो से अपनी मा को खामोशी से देख रहा था जिसकी आंखो से आंसू निकलकर उसके गालों को भिगो रहे थे। कमला के ठीक पीछे खड़ी हुई सौंदर्या ये सब देख कर खुशी से फूली नहीं समा रही थी क्योंकि वो जानती थी कि उसके भाई को उसके किए का असली सम्मान और प्यार अब मिल रहा है। कानूनी प्रक्रिया के चलते वो चाह कर भी सबके सामने सच नहीं बोल सकती थी लेकिन घर में अपनी मा को बताकर उसने अपने दिल का बोझ हल्का कर लिया था।

अजय ने अपनी जेब से रुमाल निकाला और अपनी मा की आंखो से आंसू साफ करने लगा और बोला:"

" बस मम्मी हो गई मेरी आरती। सच कहूं मम्मी आपका ये ही प्यार तो अद्भुत हैं।

कमला ने थाली एक तरफ रखी और अजय से गले लग गई। उसके आंसू अब पूरी तरह से रुक गए थे। थोड़ी देर के बाद कमला ने थोड़ा सा खाना बनाया और सभी ने साथ ने मिलकर खाना खाया।

खाना खाने के बाद सभी लोग नीचे ही हॉल में बैठ गए और बात होने लगी।

कमला:" बेटा आज तूने सच में कमाल किया है। तेरे पापा जिंदा होते तो सच में आज वो बहुत खुश होते ।

अजय:" मम्मी कमाल वामाल कुछ नहीं किया। बस अपनी दीदी की रक्षा करी जो कि मेरा फ़र्ज़ है।

कमला:" लेकिन बेटा आजकल लोग अपना फ़र्ज़ भी कहां पूरा करते हैं। मैंने जरूर पिछले जन्म में कुछ पुण्य किए होंगे जो तुझ जैसा लायक बेटा मिला।

सौंदर्या:" हान मम्मी ये बात आपने बिल्कुल ठीक कही। ऐसे भाई आजकल किस्मत से ही मिलते हैं बस।

कमला:" अच्छा अजय अब हमे जल्दी से जल्दी सौंदर्या के हाथ पीले कर देने चाहिए। कल आचार्य तुलसी प्रसाद जी भी अा रहे हैं गांव में ही। क्यों ना हमे उनसे मिलकर इसकी कुंडली के निवारण का कोई उपाय देखना चाहिए।

सौंदर्या अपनी शादी की बात सुनकर शर्मा गई और अपने गुलाबी गाल लिए वहां से उठकर उपर चली गई। अजय और कमला दोनो ये देखकर हंस पड़े और अजय बोला:"

" हान मम्मी, मैंने उनके बारे में सुना है कि वो बहुत ही अच्छे और सिद्ध पुरुष हैं। इसलिए मुझे भी पूरी उम्मीद है कि वो जरूर कोई ना कोई उपाय बता देंगे।

कमला ने गर्दन हिला कर अपने बेटे की बातो को समर्थन दिया और बोली:"

" हान बेटा। अच्छा अब एक काम करो तुम भी जाओ और जाकर आराम कर लो। थक गए होंगे दोनो आज बहुत। ऊपर से मौसम भी खराब हैं।

अजय:" ठीक है मम्मी। आप सौंदर्या दीदी की शादी की चिंता मत कीजिए। मैं अपने आप अब सब संभाल लूंगा , मैं चलता हूं आप भी आराम कर लीजिए।

इतना कहकर अजय खड़ा हो गया और उपर की तरफ चल पड़ा। कमला भी बाहर हॉल में ही पड़े हुए बेड पर लेट गई और सोने का प्रयास करने लगी।

वहीं दूसरी तरफ शादाब और शहनाज़ दोनो इंडिया वापिस अा गए थे और दोनो सीधे हॉस्पिटल में पहुंच गए जहां उसके फूफा भर्ती थे। शहनाज़ को देखते ही रेशमा उससे लिपटकर भावुक हो गई और दोनो औरतें एक दूसरे के गले लग गई।

शादाब ने दोनो को समझाते हुए और अलग किया और बोला :"

" बुआ कहां है फूफा जी ? उनसे हमे मिलवाओ।

रेशमा शादाब और शहनाज़ को अपने साथ अंदर ले गई और एक कमरे में उन्हें वसीम लेटा हुआ दिखाई दिया। शादाब को देखते ही वो भावुक हो उठा और उठने की कोशिश करने लगा लेकिन उठ नहीं पाया और उसकी आंखो में आंसू अा गए।

शादाब बिना कुछ बोले ही समझ गया कि उसके फूफा को पेट से नीचे लकवा मार गया है।

वसीम के पास ही शादाब बैठ गया तो वसीम ने शादाब का हाथ थाम लिया और बोला:"

" शादाब बेटा, मेरा कमर से नीचे का हिस्सा खत्म हो गया है। डॉक्टर बोलते हैं कि मैं कभी ठीक नहीं हो सकता। तुम भी तो एक डॉक्टर बन रहे हो बेटा। तुम सच बताओ क्या मैं ठीक हो सकता हूं कभी या नहीं ?

शादाब जानता था कि ऐसी हालत में कोई जादू ही वसीम को ठीक कर सकता है लेकिन फिर भी तसल्ली देते हुए बोला:"

" मुश्किल तो बहुत हैं लेकिन आप खुदा पर भरोसा रखिए। आप जल्दी ही ठीक हो जाएंगे।

वसीम:" बेटा मुझे यहां से घर ले चलो, मैं अब और यहां रहना नहीं चाहता।

शादाब:" ठीक है। मैं डॉक्टर से बात कर लेता हूं और शाम तक हमे छुट्टी मिल सकती हैं।

इतना बोलकर शादाब उठकर बाहर अा गया और फिर डॉक्टर दे बात करने चला गया। दोपहर तक सब कागजी कार्यवाही पूरी हो गई और उसके बाद सभी लोग घर की तरफ लौट पड़े।

वसीम को नीचे बैठक में ही लिटा दिया जहां पहले कभी दादा दादी लेटा करते थे। रेशमा घर में नीचे ही रह रही थी और उसने कभी भी उपर शहनाज़ और शादाब के कमरे नहीं खोले थे।

रेशमा घर आकर खाना बनाने में जुट गई और शादाब और शहनाज़ दोनो उससे चाबी लेकर उपर चले गए। कमरे को खोला तो वो काफी गंदे हो गए थे। धूल मिट्टी लग गई और पूरे कमरे में बंद होने की वजह से एक अजीब सी बदबू फैली हुई थी।

दोनो के एक दूसरे की तरफ देखा और उनके होंठो पर एक साथ स्माइल अा गई और दोनो साफ सफाई में जुट गए। शादाब ने कमरे से एक एक करके सारा सामान बाहर निकाला। सारी कमरे में लगे हुए जालो को हटाया झाड़ू से शहनाज ने पूरे कमरे को साफ किया। उसके बाद शादाब ने कमरे की दीवारों को अच्छी धोया और फिर एक गुलाब की महक वाला लिक्विड निकालकर उसने शहनाज़ को दिया और शहनाज ने फिर सारे कमरे में उसका पोछा मार दिया तो पूरा कमरा खुशबू से भर उठा।

दोनो के उपर धूल जम गई और दोनो ही एक दूसरे ही हालत को देखकर हंस रहे थे।

शादाब:" अम्मी अपनी शक्ल देखो आइने में। बिल्कुल चुड़ैल जैसी लग रही हो आप। आपके ऊपर बहुत ज्यादा धूल जम गई है आज सफाई करके।

शहनाज़ ने उसकी तरफ घूरकर देखा और बोली:" अच्छा और खुद को देखो। आदि मानव जैसे लग रहे हो तुम।

आदि मानव की बात सुनकर शादाब के होंठो पर स्माइल अा गई और बोला:"

" लेकिन मेरी जान शहनाज़, मेरी अम्मी आदि मानव तो नंगे रहते थे बिल्कुल नंगे।

शहनाज़ अपने बेटे के मुंह से नंगे शब्द सुनकर शर्म से लाल हो गई और बोली:" शर्म नहीं आती तुम्हे। अपनी मा के सामने नंगा बोलते हो तुम।

शादाब थोड़ा सा उसके करीब हुआ और उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसकी आंखे में देखते हुए बोला:"

" तुमसे नंगा बोलने में कैसी शर्म मेरी जान। नंगा तो तुम्हे आज सारी रात रहूंगा। यहीं इसी बेड पर इसी कमरे में सारी रात।

इतना कहकर उसने शहनाज की गांड़ को दोनो हाथों में भर कर मसल दिया तो शहनाज के मुंह से एक आह निकल पड़ी और वो किसी मछली की तरह फुर्ती दिखाती हुई उसकी बांहों से निकल गई और तेजी से बाथरूम में घुस गई और गेट से बोली:"

" सच में आदि मानव ही हो तुम। वो दिन में नंगे रहते थे और तुम रात में होते हो।

इतना कहकर शहनाज़ ने बाथरूम बंद कर दिया और अपनी उपर नीचे हो रही चूचियों को देख कर मुस्करा उठी और बेड शीट पर पर्दे धोने में जुट गई। कमरा अब तक अंदर से सूख गया था तो वहीं शादाब ने एक एक करके सारे सामान को अंदर वापिस लगा दिया। अब कमरे में किसी भी तरह की बदबू का कोई नामो निशान नहीं था बल्कि एक भीनी भीनी सी खुशबू पूरे कमरे में फैली हुई थी।

शहनाज ने सभी कपडे धोकर शादाब को दिए और उसने वो उपर छत पर सूखने के लिए डाल दिए। शहनाज़ नहा चुकी थी और बिल्कुल एक ताजे गुलाब की तरह खिली हुई लग रही थी। अपनी अम्मी को ललचाई नज़रों से देखते हुए शादाब भी नहाने के लिए बाथरूम में घुस गया और जल्दी ही दोनो मा बेटा नहा धोकर नीचे अा गए।

खाना बन गया था इसलिए पूरे परिवार ने खाना खाया और उसके बाद थके और शादाब और शहनाज़ दोनो उपर कमरे में गए और बेड पर गिरते ही उन्हें नींद आ गई।

अजय उपर छत पर अा गया और उसने देखा कि उसकी बहन उसके कमरे में हैं और उसके सोने की चादर ठीक कर रही थी। अजय को ये देखकर काफी सुकून मिला कि दोनो भाई बहन के बीच गलतफहमी की वजह से बनी हुई नफरत की दीवार अब ढह गई थी।

सौंदर्या:" आओ भाई। देखो मैंने आपकी बेड शीट को बिल्कुल ठीक कर दिया है।

अजय स्माइल करते हुए बोला:" हान दीदी वही तो मैं भी देख रहा हूं कि आप अपने भाई का कितना ज्यादा ध्यान रख रही है।

सौंदर्या ने एक मीठी सी स्माइल अजय को दी और उसकी आंखो में देखते हुए बोली:"

" रखूंगी क्यों नहीं, मेरा भाई हैं भी लाखो में एक।

अजय अपनी दीदी की बात सुनकर खुश हो गया और वहीं बेड पर बैठ कर अपने जूते निकालने लगा। तभी सौंदर्या को याद आया कि उसने अपने भाई के लिए अलमारी से तकिया तो अभी निकाला नहीं हैं तो वो तकिया निकालने लगी। तकिया हाथ में लेकर वो आगे बढ़ी और अजय से तकरा गई और उसके हाथ से तकिया छूटकर नीचे गिर गया। सौंदर्या तकिया उठाने के लिए नीचे की तरफ झुकी और उसकी रेशमी साडी उसके कंधे से पूरी तरह से सरक गई। साडी सरकते ही उसकी हल्के पीले रंग के शॉर्ट ब्लाउस में कैद चूचियों का उभार साफ़ नजर आया और अजय की नजरे किसी चुंबक की तरह उन पर टिक गई। सौंदर्या पूरी तरह से इस बात से बेखबर नीचे झुकती जा रही थी और उसकी चुचियों का उभार और ज्यादा गहरा होता जा रहा था।

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अजय की आंखो में एक अजीब सी चमक थी और उसे अपनी बहन की चूचियों की गहराई बहुत आकर्षक लग रही थी। सौंदर्या ने तकिया उठाया और जैसे ही सीधी हुई तो उसकी नजरे अजय पर गई और अजय की ललचाई नज़रों का पीछा करते ही उसे अपने हालत का एहसास हुआ था तो वो शर्म से लाल हो गई और उसने तेजी से तकिए को बेड पर फेंक दिया और अपने कमरे में दौड़ती चली गई।

अजय अपनी बहन की इस हरकत पर हैरान हो उठा। जो हुआ वो सब हादसा था लेकिन उसकी इतनी शर्मा कर तकिया फेंक कर क्यों भाग गई। कहीं उसे ये सब गलत तो नहीं लगा या फिर दीदी मुझसे शर्मा गई है।

अपने विचारो में डूबा हुआ अजय सोच रहा था कि आखिर हुआ क्या हैं। वहीं सौंदर्या अपने भाई की ललचाई नजरो को समझते ही अंदर से कांप उठी थी। उसे समझ नहीं आया कि वो क्या करे इसलिए तेजी से अपने कमरे में भागती हुई चली अाई थी।

सौंदर्या अपने भाई के बारे में सोच रही थी और वो बेड पर लेट गई। शर्म और उत्तेजना के मारे उसकी सांसे अभी तक तेजी से चल रही थी। सोने की कोशिश करते हुए सौंदर्या ने अपने साडी को उतारकर एक तरफ रख दिया और तभी बेड के उपर लगे हुए बल्ब से एक कीड़ा नीचे गिरा और सीधे उसके ब्लाउस में घुस गया। सौंदर्या के मुंह से डर के मारे एक आह निकल पड़ी और वो तेजी से बाहर की तरफ भागी और अजय के कमरे में घुस गई और अपने दोनो हाथों से अपने ब्लाउस को इधर उधर करने लगी। कभी ब्लाउस के अंदर झांकती तो कभी उसे नीचे से उपर उठाने की कोशिश करती तो कभी उसने हाथ ब्लाउस के अंदर घुसा देती।

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सौंदर्या की हरकतों से उसकी चूचियां बाहर को छलक पड़ रही थी। अजय ये देखकर तेजी से उसकी और दौड़ा और बोला:"

" क्या हुआ दीदी ? आप क्यों परेशान हो और चिल्ला रही हो ?

कीड़ा खुद अंदर छटपटा रहा था और तेजी से अपनी जान बचाने के लिए इधर उधर दौड़ रहा था जिससे सौंदर्या को तेज गुदगुदी हो रही थी और वो कांपती हुई बोली:"

" आह भाई मेरे ब्लाउस के अंदर कीड़ा घुस गया है। उफ्फ निकल नहीं रहा। कुछ मदद करो।

सौंदर्या मचलते हुए सिसक उठी तो अजय उसके करीब हो गया और उसके ब्लाउस के अंदर झांकने लगा। सौंदर्या की हालत उत्तेजना से खराब हो गई और उसने शर्मा कर अपनी आंखो को बंद कर दिया। अजय ने अपने हाथ को आगे बढ़ाया और उसने कांपते हाथो से अपनी दीदी के ब्लाउस को थोड़ा सा आगे की तरफ खींच दिया ताकि अंदर अंदर झांक सके।

अजय ने अपनी बहन के ब्लाउस के अंदर झांका तो उसकी गोरी गोरी गोल गोल चूचियों की जानलेवा उभार को देखते ही उसके लंड ने अपने आप एक जोरदार अंगड़ाई ली। सौंदर्या अभी भी मचल रही थी क्योंकि उसे कीड़े की वजह से तेज़ गुदगुदी हो रही थी इसलिए वो उत्तेजना से भर उठी और तड़पते हुए बोली:"

" आह भाई कुछ करके बाहर निकालो इसे। उफ्फ मेरी जान ही ले लेगा ये आज। आह भाई जल्दी करो तुम।

अजय से अपनी बहन की तड़प बर्दाश्त नहीं हुई और उसने अपने हाथ से ब्लाउस को आगे की तरफ किया। खींचते ही एक झटके के साथ उसके दो बटन कटक की आवाज के साथ टूट गए और सौंदर्या के मुंह से डर और शर्म के मारे एक आह निकल पड़ी और वो शर्म के मारे अपने भाई के सीने में घुस गई।

अजय ने एक हाथ को उसके गोरे चिकने कंधे पर रख दिया और उसके कान में धीरे से बोला:"

" दीदी डरो मत। देखने दो मुझे ताकि कीड़ा निकाल सकू।

सौंदर्या का रोम रोम अपने भाई की बात सुनकर सिहर उठा। उसकी चूचियों में कड़कपन अा गया और ये सोचकर कि उसका भाई उसकी चूचियों को देखेगा वो उससे पूरी तरह से चिपक गई।

अजय उसकी हालत समझ गया और उसने धीरे से उसकी कमर सहलाते हुए उसके कान में कहा::"

" दीदी देर मत करो, कहीं कीड़ा जहरीला हुआ और काट लिया तो दिक्कत होगी।

सौंदर्या अपने भाई की बात सुनकर डर और फिर धीरे से उसके कान में फुसफुसाई:"

" आह मेरे प्यारे भाई, जल्दी निकालो फिर तो, सिर्फ कीड़ा ही देखना तुम।

इतना कहकर सौंदर्या ने अपनी छाती को थोड़ी सा पीछे किया और अपनी आंखे बंद करते हुए अपने सिर को अजय के कंधे पर टिका दिया। अजय ने पहली बार अपनी बहन की चुचियों को देखा। बस ब्लाउस नाम भर के लिए था और उसकी चूचियों के सिर्फ निप्पल को छुपा रहा था जबकि उसकी पूरी चूची बाहर निकली हुई थी। अजय पूरी तसल्ली से बिना किसी जल्दबाजी के अपनी बहन को देख रहा था जिसका असर उसके लंड पर पूरी तरह से हो गया था और लंड अपनी औकात में आकर लोहे की रॉड की तरह तन गया था। सौंदर्या ने एक पल के लिए अपनी आंखे खोली और अपने भाई को अपनी चूचियों को घूरते हुए देखकर शर्म से पानी पानी हो गई और उससे कसकर लिपट गई और जैसे ही उसे अपने भाई के खड़े हुए लंड का एहसास हुआ तो उसके मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी।

अजय ने देखा कि कीड़ा मर गया था और ये तो घर में उड़ने वाला मामूली सा कीड़ा था। अजय के खड़े हुए लंड और सौंदर्या की गोल गोल चूचियां अपना असर अजय पर दिखा रही थी और अजय ने कीड़े को हाथ में पकड़ लिया और उसे सौंदर्या के सीने पर घुमाना शुरू कर दिया। सौंदर्या पूरी तरह से मचल रही थी और आगे पीछे उत्तेजना की वजह से हो रही थी जिससे उसके भाई के खड़े हुए लंड का एहसास उसे अपनी जांघो के बीच में हो रहा था। अजय के हाथ सौंदर्या की चूचियों पर घूम रहे थे और रह रह कर सौंदर्या के मुंह से मस्ती भरी आह निकल रही थीं। अजय अपनी बहन की नरम नरम चूचियों के एहसास से पागल सा हो रहा था और उसने अपनी चाल चलते हुए कीड़े को उसके ब्लाउस में फिर से एक तरफ डाल दिया।सौंदर्या के मुंह से आह निकल पड़ी क्योंकि वो जानती थी कि अब उसका भाई कीड़े को पकड़ने के लिए उसके ब्लाउस के सभी बटन खोल देगा।

अजय ने अपने साथ को आगे बढ़ाया और उसकी दाई चूची की तरफ ब्लाउस के अंदर घुसाने लगा। सौंदर्या की चूत में चिंगारी सी निकलने लगी और उसकी सांसे तेज चल रही थी।

अजय के हाथ उसके ब्लाउस में घुसे और उसकी आधे से ज्यादा चूची उसके भाई की गिरफ्त में अा गई। सौंदर्या मस्ती में डूब गई और उसने खुद ही अपनी चूचियों को उपर की तरफ उभार दिया तो अजय ने हिम्मत करके उसकी पूरी चूची को अपने हाथ में भर लिया और इसके साथ ही सौंदर्या का धैर्य जवाब दे गया और वो अपने भाई से अमर बेल की तरह लिपट गई। अजय ने एक उंगली से कीड़े को पकड़ा और उसके निप्पल पर घुमाया तो सौंदर्या पूरी तरह से बहक गई और अपनी टांगो को पूरी से खोलते हुए अजय के लन्ड पर अपनी चूत को चिपका दिया। अजय अपनी बहन की एक हरकत से जोश में अा गया और उसने उसकी चूची को हाथ में भरते हुए हल्का सा मसल दिया तो सौंदर्या मस्ती से बिफर उठी और अजय के कंधे में अपने दांत गडा दिए।

अजय तड़प उठा और उसने पहली बार अपनी बहन की पूरी चूची को अपनी हथेली में कस लिया और थोड़ा जोर से दबाया तो सौंदर्या के मुंह से आह निकल पड़ी और उसकी जीभ अपने भाई के कंधे को चाटने लगी।

कीड़ा कभी का नीचे गिर गया था और अजय अब अपने हाथ से उसकी चूची को मसल रहा था। दोनो भाई बहन पूरी तरह से मस्ती में डूबे हुए थे और अजय ने अपने दूसरे हाथ से सौंदर्या के ब्लाउस के आखिरी बटन को भी खोल दिया तो उसकी चूचियां नंगी होकर उछल पड़ी। सौंदर्या को जैसे ही अपनी नंगी बिल्कुल नंगी चूचियों का एहसास हुआ तो उसे अपनी हालत का एहसास हुआ और वो अपनी आंखे खोली और एक तेज झटके के साथ अजय से अलग हुई और अपने कमरे में दौड़ती हुई चली गई।
 
अगले दिन सुबह सौंदर्या उठी और कॉलेज के लिए तैयार हो गई। उसने अपनी मम्मी और भाई के साथ नाश्ता किया।आज रक्षा बधन था इसलिए सौंदर्या ने अपने भाई को राखी बांधी और अजय ने उसे गिफ्ट के तौर पर कुछ पैसे और एक खूबसूरत ड्रेस दी।

इस बीच उसके मन में रात हुई घटना घूम रही थी और उसे शर्म अा रही थी। खाना खाकर वो कॉलेज की तरफ जाने लगी तो अजय भी उसके साथ चल पड़ा।

कमला:" अरे दोनो जल्दी अा जाना, आज आचार्य भी अा रहे है। कहीं लेट हो जाओ और वो चले जाए।

अजय:" मम्मी हम करीब दो बजे तक वापिस अा जाएंगे।

इतना कहकर अजय अपनी दीदी के साथ आगे बढ़ गया। दोनो में आज ज्यादा बात नहीं हुई और जैसे ही कॉलेज तो सौंदर्या अंदर चली गई और अजय का मोबाइल बज उठा। उसने देखा कि उसके दोस्त शादाब का फोन था तो उसने खुशी खुशी उठाया और बोला:"

" अरे भाई कहां हो खान साहब ? आज मेरी याद कैसे अा गई ?

शादाब:" घर आया हूं भाई कल ही, फूफा जी की तबियत खराब थी इसलिए अा गया। तुम कहां हो भाई मेरे ?

अजय ने गाड़ी शादाब के घर की तरफ दौड़ा दी और बोला:"

" बस तेरे घर ही अा रहा हूं। बाकी बाते मिलकर होगी।

इतना कहकर उसने फोन काट दिया और अपनी मम्मी को बताया कि अजय घर अा रहा है तो सभी लोग बहुत खुश हुए। अजय को सभी लोग जानते थे और उन्हें पता था कि वो बहुत अच्छा लड़का हैं और अपनी जान पर खेलकर शादाब और शहनाज़ की जान बचा चुका था। सभी लोग उसके स्वागत की तैयारी में जुट गए।

करीब एक घंटे बाद वो उसके घर अा गया तो शादाब ने देखते ही उसे अपने गले लगा लिया। दोनो दोस्त एक दूसरे से लिपट गए। रेशमा और शहनाज़ ये देखकर बहुत खुश हुई। दोनो दोस्त कम और सगे भाई ज्यादा लग रहे थे।

उसके बाद अजय ने शहनाज़ और रेशमा के पैर छुए तो उन्होंने उसे आशीर्वाद दिया और अजय ने अपने साथ लाया मिठाई का डिब्बा रेशमा को दिया और बोला

" बुआ आज रक्षा बंधन हैं, हम अपनी बुआ और बहन के घर खाली हाथ नहीं जाते।

अजय की बात सुनकर रेशमा बहुत खुश हुई और उसने अंदर कमरे में चली गई। अजय वसीम के पास बैठ गया और उनके हाल चाल पूछने लगा।

थोड़ी देर बाद ही रेशमा और शहनाज़ दोनो कमरे में अा गई। रेशमा के हाथ में एक राखी और पूजा का सामान था। अजय ये सब देखकर पूरी तरह से हैरान हो गया क्योंकि उसे उम्मीद नहीं थी कि एक मुस्लिम परिवार उसका इस तरह से भी सम्मान कर सकता है ।

अजय को बेड पर बिठाकर रेशमा ने उसकी आरती उतारी और फिर उसके माथे पर तिलक लगा कर उसके हाथ में राखी बांध दी। अजय की आंखो से आंखो निकला पड़े इतना प्यार और सम्मान देखकर। वो गदगद हो गया और बार बार प्यार भरी नजरो से रेशमा को देख रहा था और कभी शादाब की तरफ देखता।

फिर उसे याद आया कि उसने रस्म के तौर अपनी बुआ रेशमा को कुछ दिया तो हैं नहीं तो उसने अपनी जेब से कुछ पैसे निकाले और रेशमा की तरफ बढ़ा दिए और बोला:"

" बुआ मेरी तरफ से एक छोटी सी भेंट। मुझे पता होता कि यहां मेरा ऐसा सम्मान और स्वागत होगा तो और कुछ सोच कर आता।

रेशमा ने खुशी खुशी अपना हाथ आगे बढाया और अजय से रस्म के तौर पैसे ले लिए और उसका माथा चूम कर बोली:"बेटा एक रस्म के तौर पर रख रही हूं बस। नहीं तो इनकी कोई जरूरत नहीं थी। तुम वैसे पहले ही इतने सारे एहसान कर चुके हो हम पर।

अजय ने बुरा सा मुंह बनाया और रेशमा को बनावटी गुस्से से देखा तो सभी लोग एक साथ जोर जोर से हंस पड़े। शादाब और शहनाज आज बहुत खुश थे क्योंकि अजय जैसा दोस्त उसे मिला ये उसकी किस्मत थी।

उसके बाद सभी लोग खाना खाने बैठ गए और अजय को पहला निवाला रेशमा ने खुद अपने हाथ से खिलाया। उसके बाद सभी ने खाना खाया और शादाब और शहनाज़ अजय के साथ उपर चले गए जबकि रेशमा अपने शौहर को खाना खिलाने के लिए नीचे ही रुक गई।

शादाब:" और बता भाई गांव में आए कितने दिन हो गए ? घर में सब कैसे हैं ?

अजय:" घर में सब ठीक है भाई। 15 दिन के आस पास हो गए। यार एक बात बताना हो मैं भूल ही गया।

शादाब:" वो क्या मेरे भाई ?

अजय:" यार गांव के ही गुण्डो ने मिलकर गैंग बनाया हुआ था और मेरी दीदी सौंदर्या उनसे भिड़ गई और फिर उनका किडनैप हो गया और मुझे दीदी को बचाने के लिए सबको मारना पड़ा।

शादाब की आंखो में गुस्सा अा गया और अपने बोला:"

" अच्छा किया सालो को मार दिया। ऐसे लोगो को जीने का कोई हक नहीं हैं जो लड़की पर गलत नजर डालते हैं। वैसे अभी कैसी हैं मेरी बहन सौंदर्या ?

अजय:" बिल्कुल ठीक है भाई। अपने कॉलेज पढ़ाने गई हुई है।

शहनाज़:" ओह अच्छा वो पढ़ाती हैं ये तो बहुत अच्छी बात हैं। बातो से तो लग रहा है कि वो तुमसे बड़ी होगी।

अजय:" जी अम्मी, बड़ी ही नहीं बल्कि मुझसे 13 साल बड़ी है। आपसे बस दो या तीन साल ही छोटी होंगी।

शहनाज़:" अच्छा जी ये तो बहुत अच्छी बात हैं। फिर तो उनके बच्चे भी काफी बड़े होंगे।

अजय के चेहरे पर उदासी अा गई और बोला:" नहीं अम्मी, उनकी अभी शादी ही नहीं हुई है क्योंकि वो मांगलिक हैं। ।

शहनाज़ और शादाब दोनो एक साथ चौक उठे और शहनाज़ बोली:' बेटे ये मांगलिक क्या होता है वैसे ?

अजय:" जब बच्चा जन्म लेता हैं तो कभी कभी उस समय मंगल ग्रह उन पर भारी हो जाता है और वो बच्चे मांगलिक होते हैं। मांगलिक के लिए मांगलिक ही अच्छा जीवन साथी होता हैं या फिर कुंडली से दोष निकालने के लिए कुछ कठिन उपाय करने पड़ते हैं।

शहनाज़:" हाय मेरे खुदा, ये तो बहुत दिक्कत वाली बात है। मतलब अगर मांगलिक लड़का नहीं मिला तो क्या उसकी शादी नहीं होगी?

अजय:" मिल जाता है, बस लड़का अच्छा नहीं मिल रहा है। वैसे एक दोनो मांगलिक हो तो किसी का मंगल दूसरे पर भारी पड़ सकता है। कुंडली के दोष को दूर करना ही बेहतर उपाय होता हैं। आज एक बहुत पहुंचे हुए आचार्य तुलसी दास जी अा रहे हैं और कोई ना कोई उपाय निकल ही जाएगा।

शादाब शहनाज़ से बोला:" एक काम करते हैं हम दोनों भी अजय के घर चलते हैं। आज रक्षा बंधन भी है। दीदी मुझे राखी भी बांध देगी और भी इसकी मम्मी और दीदी दोनो से मिल लेना।

शहनाज़ को ये आइडिया पसंद आया और जल्दी से तैयार हो गई। थोड़ी देर बाद ही शहनाज़ और शादाब अजय के साथ गाड़ी में उसकी गाड़ी में थे और गाड़ी सौंदर्या के कॉलेज की तरफ चली जा रही थी।

शादाब और शहनाज़ दोनो कार में बैठे हुए सौंदर्या का इंतजार कर रहे थे जबकि अजय मार्केट से कुछ सामान लेने गया था।

तभी एक खूबसूरत सी लड़की गाड़ी के पास अाई और उसने खिड़की पर नॉक किया तो उसे देखते ही शादाब और शहनाज़ दोनो समझ गए कि यही सौंदर्या है। शहनाज उसे गौर से देखा तो उसे लगा कि जैसे उसे वो सालो से जानती हैं।

शादाब ने दरवाजा खोला और बाहर अा गया तो सौंदर्या उसे देखकर हैरान हो गई। शादाब बिल्कुल गोरा था और देखने में किसी राजकुमार की तरह खूबसूरत था।

शादाब ने सौंदर्या को देखते हुए अपने दोनों हाथ उनके आगे जोड़ दिए और बोला:"

" नमस्ते दीदी, क्या आप सौंदर्या दीदी हैं ?

सौंदर्या हैरान हो गई कि ये लड़का मुझे कैसे जानता हैं तो उसने पूछा : हान नमस्ते। मैं ही सौंदर्या हूं लेकिन तुम कौन हो ? मुझे कैसे जानते हो ?

शादाब: दीदी मैं शादाब हूं अजय का दोस्त बिल्कुल भाई जैसा।

शादाब नाम सुनते ही सौंदर्या के होंठो पर स्माइल अा गई और बोली:" अच्छा तो तुम शादाब हो। मैंने अजय से तुम्हारे बारे में सुना है कि तुम बहुत अच्छे हो।

तभी अजय अा गया और उसने सभी को आपस में मिलाया तो सौंदर्या शहनाज़ से मिलकर बहुत खुश हुई। अजय और शादाब आगे बैठ गए और पीछे सौंदर्या और शहनाज़ बैठ गई और बाते करने लगी।

शहनाज़:" आप तो बिल्कुल अपने नाम की तरह हो सौंदर्या। बिल्कुल फूल सी सुंदर।

सौंदर्या अपनी तारीफ सुनकर खुश हुई और बोली:"

" आंटी जी मैं कहां इतनी सुन्दर हूं। ये तो आपके देखने का नजरिया हैं बस।

शहनाज़ अमेरिका में रही थी जहां 60 साल की औरत भी खुद को जवान समझती थी। सौंदर्या के मुंह से अपने लिए आंटी सुनकर उसे बुरा लगा और बोली:" वैसे तो मेरी उम्र तुमसे दो या तीन साल ही ज्यादा हैं सौंदर्या। तुम्हारे मुंह से आंटी अच्छा नहीं लगता।

सौंदर्या के होंठो पर स्माइल अा गई और बोली:" माफ कीजिए मोहतरमा जी आप। आंटी ना कहूं तो फिर आपको क्या कहूं आप ही बता दीजिए।

शहनाज़ एक पल के लिए सोच में पड़ गई और फिर बोली:" वैसे तो हम दोनों हम उम्र ही है। आप चाहो तो नाम से भी बुला सकती हो मुझे।

सौंदर्या:" ना जी ना, नाम से नहीं बुला सकती। अच्छा एक काम करती हूं आपको शहनाज़ दीदी बोल दिया करूंगी।

इतना कहकर सौंदर्या ने दोस्ती के लिए अपना हाथ आगे किया और

शहनाज़ को ये ठीक लगा और उसने अपना हाथ सौंदर्या की तरफ बढ़ा दिया और बोली:"

" ठीक है। फिर आज से हम दोनों पक्की दोस्त। लेकिन एक बात ध्यान रखना अकेले में सिर्फ शहनाज़ कहकर बुलाना मुझे।

सौंदर्या ने उसका हाथ पकड़ लिया और दोनो एक साथ स्माइल कर पड़ी। आगे शादाब और अजय अपनी बातो में लगे हुए थे कि तभी अजय का मोबाइल बज उठा तो उसने देखा कि उसकी मम्मी का फोन था।

अजय:" हान जी मम्मी, बस अा रहे हैं, 10 मिनट में अा जायेगे।

कमला:" अच्छा हैं बेटा। तुम सीधे यहीं आचार्य जी के पास ही अा जाना। मैं यहीं हूं।

अजय:" ठीक है मम्मी। आप वहीं रुकिए मैं अा रहा हूं थोड़ी ही देर में आपके पास।

अजय ने फोन काट दिया और थोड़ी देर बाद ही उनकी गाड़ी एक बड़े से घेर के सामने खड़ी हुई थी और यहीं आज के लिए आचार्य तुलसी दास जी ने अपना डेरा लगाया हुआ था।

भीड़ बहुत ज्यादा थी और चारो तरफ लोग ही लोग नजर अा रहे थे। चारो और से आचार्य जी की जय जयकार के नारे गूंज रहे थे और साथ ही साथ हल्की आवाज में एक भक्ति संगीत भी बज रहा था। सभी लोग गाड़ी से उतरे और अंदर अा गया तो देखा कि सामने एक बहुत ही बड़ी और सुंदर स्टेज लगी हुई थी जिसके चारो ओर भक्तो की भारी भीड़ थी। बीच में स्टेज पर एक सिंहासन नुमा बहुत ही शानदार कुर्सी रखी हुई थी जिस पर आचार्य तुलसी दास जी विराजमान थे। एक सिद्ध महापुरुष, उनके चेहरे से उनका ओजस साफ छलक रहा था। एक सपाट चेहरा और आंखो में भोलापन ये इस महापुरुष की पहचान थी।

थोड़ी देर के बाद कमला का नंबर आया तो वो भी अपने परिवार को लेकर स्टेज पर अा गई और गुरू जी के सादर चरणों में झुक कर प्रणाम किया। अजय और सौंदर्या ने भी उनके पैर छुए।

कमला:" महाराज ये मेरी बेटी हैं सौंदर्या। अब आपसे क्या छुपाना...

महाराज ने कमला को मौन रहने का इशारा किया और थोडी देर तक कुछ सोचते रहे आंखे बंद कर के पूरी तरह से ध्यानमग्न।

महाराज:" तुम्हारी बेटी सौंदर्या मांगलिक हैं बेटी जिस वजह से इसकी शादी नहीं हो रही है। एक और राज की बात तुम्हारी बेटी का कल किडनैप हो गया था और तुम्हारे इस बाहुबली बेटे ने बदमाशों का काम तमाम करके इस कन्या को बर्बाद होने के बचा लिया है।

महाराज की बात खत्म होते ही कमला सीधे उनके पैरो में गिर गई और अजय और सौंदर्या का मुंह खुला का खुला रह गया। साथ ही खड़े शादाब और शाहनाज भी आश्च्यचकित थे।

कमला:" आप सच में बहुत ही ज्ञानी और सिद्ध पुरुष हैं। आपको तो सब कुछ पहले से ही मालूम हैं और आप ही मुझ पर अपनी कृपया कीजिए और मेरी बेटी की शादी के लिए कोई उपाय बताए।

महाराज:" हर एक समस्या का उपाय हैं पुत्री। तुम्हारी पुत्री के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे। जिस तरह कल अजय ने इसकी इज्जत बचाई उसी तरह इसकी कन्या की सभी समस्याओं का समाधान तुम्हारे बेटे के हाथो ही होगा। ये समझ लो कि अजय का जन्म ही अपनी बहन की रक्षा और उसके कष्ट निवारण के लिए हुआ हैं।

थोड़ी देर के लिए महाराज रुके और फिर बोले:" मैं तुम्हारे बेटे को इस कन्या की दोष मुक्ति के उपाय बता दूंगा और मुझे पूरा यकीन है कि ये जरूर अपने लक्ष्य में सफल रहेगा। अजय तुम शाम को मेरे पास अा जाना और मेरे तुम्हे सब पता समझ दूंगा। अभी आप लोग आराम से घर जाइए।

इतना कहकर बाबा की चुप हो गए और उसके बाद सभी उनके पैर छूकर वापिस घर की तरफ चल पड़े। कमला शादाब और शहनाज़ से मिलकर बहुत खुश हुई। शहनाज़ तो अपने मिलनसार स्वभाव के लिए ही बनी हुई थी और शादाब इतना सुन्दर और स्मार्ट था उसकी तरफ बिना आकर्षित हुए कोई रह ही नहीं सकता था।

सभी लोग घर पहुंच गए और थोड़ी ही देर में उनका नाश्ता हो गया। उसके बाद अजय ने अपनी को आरती का थाल और राखी लाने के लिए कहा।

शादाब के अंदर एक अलग ही उत्साह था। आज तक किसी ने भी उसे राखी नहीं बांधी थी और ये सोच सोच कर कि आज उसकी कलाई भी राखी से सज जाएगी उसके अंदर बहुत ही सुखद महसूस हो रहा था। काले रंग के कुर्ते में वो बेहद ही खूबसूरत लग रहा था।

शादाब एक कुर्सी पर बैठ गया और सौंदर्या उसके हाथ में राखी बांधने लगी। शादाब का हाथ कांप था था क्योंकि उसके लिए ये बिल्कुल नया एहसास था। उसके चेहरे पर खुशी और आंखे गीली हो गई थी। सौंदर्या राखी बांधते हुए बोली:"

" क्या हुआ शादाब भाई जान ? आप का हाथ कांप क्यों रहा हैं ? आप ठीक तो हैं ना।

शादाब की आंखे भर आई और उसने दूसरे हाथ से अपने आंखो को साफ किया। हर कोई शादाब को ही देख रहा था जिसके आंखे बार बार भीग रही थी।

शादाब:" दीदी आज पहली बार किसी ने मेरी कलाई पर राखी बांधी है। अपने दोस्तो की बहनों को राखी बांधते हुए देखता था लेकिन कभी कह नहीं पाया कि मुझे भी राखी बांध दो। आज बस आप राखी बांध रही थी तो मेरी आंखे खुशी से भर अाई।

इतना कहकर शादाब की आंखे फिर से भर अाई तो उससे पहले ही सौंदर्या ने उसके आंसू साफ कर दिए और बोली:"

" बस भैया बस करो। मर्द रोते हुए अच्छे नहीं लगते। अब मैं हूं ना हर साल आपकी कलाई पर राखी बांध दिया करूंगी। और हान मुझे आप देना अच्छे अच्छे कीमती गिफ्ट।

सौंदर्या की बात सभी लोग हंस दिए और सौंदर्या ने शादाब के हाथ में राखी बांधकर उसके माथे पर चंदन का तिलक लगा दिया।

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राखी की रस्म पूरी होने के बाद सौंदर्या खड़ी हुई और उसने थाली से एक लड्डू लिया और अपने भाई के मुंह की तरफ किया। शादाब ने जैसे ही अपना मुंह खोला तो सौंदर्या ने तेजी से पूरा लड्डू उसके मुंह में घुसा दिया।

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एक बार फिर से कमला अजय के साथ साथ शहनाज़ भी जोर से हंस पड़ी। शादाब के मुंह में लड्डू होने के कारण उसका मुंह ठीक दे नहीं चल रहा था इसलिए सौंदर्या उसे देखकर स्माइल कर रही थी। शादाब इशारे से कुछ बोलने की कोशिश कर रहा था जिसे देखकर सबको पूरी हंसी अा रही थी। भावुक माहौल को एक ही पल में खुशनुमा माहौल में बदल किया था सौंदर्या ने।

जैसे ही शादाब ने लड्डू खाया तो सौंदर्या उसके सामने खड़ी हो गई और बोली:"

" चलो मेरे भैया राजा जल्दी से अब मेरा गिफ्ट निकालो।

शादाब ने अपना बैग खोला और एक बहुत ही खूबसूरत साडी उसकी तरफ बढ़ा दी जिसे देखकर सौंदर्या बहुत खुश हुई। शादाब ने अपनी बहन का हाथ पकड़ा और बोला:"

" आज सबके सामने तेरा ये भाई कसम खाता है कि तेरी खुशी के लिए सारी दुनिया से टकरा जाऊंगा। तेरी आंखो में आंसू लाने वाले की आंखे निकाल लेगा तेरा भाई शादाब। अगर जान भी देनी पड़ी तो पीछे नहीं हटूंगा।

शादाब की बात सुनकर सौंदर्या अपने भाई शादाब के गले लग गई। शादाब ने भी अपनी बहन को अपने गले लगा लिया। बिल्कुल भाई बहन का निर्मल प्रेम, कोई उत्तेजना नहीं, कामुक एहसास नहीं, सिर्फ प्यार काम रहित प्यार।

बाकी सारे लोग बिल्कुल शांत लेकिन खुश खड़े हुए ये सब देख रहे थे। थोड़ी देर के बाद सौंदर्या अलग हुई तो शादाब बोला:"

" दीदी आपने तो मेरा मुंह मीठा करा दिया। अब मैं आपको अपने हाथ से लड्डू खिलाता हूं।

इतना कहकर शादाब ने एक लड्डू उठाया और सौंदर्या के मुंह की तरफ बढ़ा दिया तो सौंदर्या ने स्माइल करते हुए अपना मुंह खोल दिया।

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सौंदर्या ने आराम से लड्डू खाया और उसके बाद सभी लोगो ने अपना मुंह मीठा किया।

कमला:" अच्छा बेटी अब राखी तो बांध दी अपने भाई के लिए कुछ खाने के लिए भी बना लो। देख चार बजने वाले हैं।

सौंदर्या किचेन में जाने लगी तो उसके पीछे पीछे ही शहनाज़ भी चल पड़ी तो सौंदर्या बोली:"

'" अरे आप कहां किचेन में अा रही है, आप तो मेहमान हैं, आराम से बाहर हाल में बैठिए।

शहनाज़:" बस करो सौंदर्या, मैं कोई मेहमान नहीं हू। जब हम दोनों सहेली बन गई हैं तो फिर मेहमान वाली बात कहां से अा गई हमारे बीच ?

सौंदर्या ने मुस्कुरा कर शहनाज़ को देखा और बोली:" वो तो ठीक हैं लेकिन आप पहली बार हमारे घर अाई हैं तो अच्छा नहीं लगता।

शहनाज़ ने सौंदर्या की आंखो में देखा और बोली:" अच्छा जी कुछ ज्यादा ही बोलती है आप, ये सिर्फ आपका ही नहीं मेरा भी घर हैं समझी तुम।

सौंदर्या ने अपनी गलती मान ली और दोनो उसके बाद खाना बनाने में जुट गई। करीब एक घंटे में सभी कुछ बन गया।

सभी लोग हॉल में बैठे हुए थे और बाते कर रहे थे। तभी कमला बोली :" अजय बेटा देखो शाम पूरी तरह से घिर आई है। तुम एक बार जाकर आचार्य जी से मिल लो। अच्छा एक काम और करो, अपने साथ सौंदर्या को भी ले जाओ कहीं उसकी जरूरत ना पड़ जाए।

अपनी मम्मी की बात सुनकर अजय अपनी बहन को लेकर आश्रम की तरफ निकल गया।

कमला:" अच्छा तुम दोनो आराम कर लो, मैं घेर से होकर आती हूं। भैंसो का थोड़ा काम हैं।

कमला घेर में अपनी भैंस और गाय का दूध निकालने के लिए चली गई।

शहनाज़:" वैसे शादाब एक बात तो हैं कि अजय और उसकी फैमिली बहुत अच्छी हैं।

शादाब ने अपनी अम्मी का हाथ पकड़ लिया और सहलाते हुए बोला:" हान अम्मी, बहुत अच्छे लोग है, मुझे आज बहुत खुशी जब सौंदर्या दीदी ने मुझे राखी बांधी।

शहनाज़ की आंखो के आगे सौंदर्या का चेहरा घूम गया तो वो बोली:" मुझे भी तुझे खुश देखकर अच्छा लगा। वैसे बेचारी सौंदर्या, 34 साल की होने के बाद भी अभी तक उसकी शादी नहीं हुई। मुझे तो उस पर तरस आता हैं।

शादाब:" हान देखो ना अम्मी, अब आप 37 साल की ही तो हैं और दूसरी बन दुल्हन बन गई वहां बेचारी सौंदर्या पहली ही शादी के लिए तड़प रही है।

शहनाज़ ने एक हल्की सी चपत उसके गाल पर लगाई और बोली:" तेरी जुबान बहुत ज्यादा चलती है।

शादाब:" जुबान से ज्यादा तो मेरा लन्ड चलता है मेरी जान।

शहनाज़:" चुप कर बेशर्म, वो चलता नहीं बल्कि दौड़ता है।

इतना कहकर शहनाज़ शर्मा गई तो शादाब ने अपनी अम्मी के होंठ चूम लिए तो शहनाज़ उसे प्यार से डांटते हुए बोली:" बस कर बेशर्म लड़के, अभी हम यहां तेरे दोस्त के घर हैं अपने घर नहीं।

शादाब ने उसकी चूचियों को सूट के उपर से ही पकड़ किया और सहलाते हुए बोला:"

" उफ्फ मेरी जान शहनाज़, कल रात भी तुम सो गई थी। कुछ तो रहम करो मेरे मूसल पर बेचारा देखो कितना तड़प रहा है तुम्हारी औखली में घुसने के लिए।

इतना कहकर उसने अपनी पैंट को अंदर वियर सहित नीचे सरका दिया तो उसका दमदार लंड शहनाज़ की आंखो के आगे लहरा उठा। शहनाज़ की आंखे लंड देखकर लाल सुर्ख हो गई और और शादाब ने उसके कंधो पर दबाव डालते हुए उसे नीचे झुका दिया।

वहीं दूसरी तरफ अजय अपनी बहन के साथ तुलसी दास जी के आश्रम में पहुंच गया। अभी भक्तो की भीड़ खत्म हो गई थी और महाराज आराम से अपने कमरे में जमीन पर बैठे हुए थे पूरी तरह से ध्यानमग्न।

अजय और सौंदर्या ने उनके पैर छुए तो उन्होंने अपनी आंखे खोल दी और बोले:"

" आओ पुत्र मैं तुम्हारे बारे में ही सोच रहा था। अच्छा हुआ तुम खुद ही अा गए।

अजय ने दोनो हाथ जोड़ दिए और श्रद्धा पूर्वक उनकी तरफ देखते हुए विनती भरे स्वर में बोला:" गुरु जी हमे कोई उपाय बताए आप ताकि मेरी बहन की ज़िन्दगी से उसकी कुंडली से इस दोष का निवारण हो सके।

महाराज:" अवश्य पुत्र। एक काम करो तुम दोनो अपना हाथ मुझे दो।

दोनो ने अपना एक एक हाथ महाराज के हाथो में दे दिया। महाराज उनका हाथ अपने हाथों में लिए पूरी तरह से ध्यानमग्न होकर कुछ सोचते रहे और फिर उन्होंने अपनी आंखे खोल दी और उनके चेहरे पर कुछ अजीब सी बेचैनी के भाव थे जिन्हें देखकर अजय के मन में शंका हुई और बोला:"

" क्या हुआ महाराज? आपके चेहरे पर बनी हुई चिंता की लकीरें मेरे मन में डर पैदा कर रही है।

महाराज ने अजय और सौंदर्या दोनो को एक बार फिर ध्यान से देखा और बोले:"

" उपाय तो अवश्य हैं पुत्र। लेकिन करना बहुत मुश्किल होगा तुम दोनो के लिए।

अजय को एक उम्मीद की किरण दिखाई दी और बहुत ही विनम्र शब्दो में बोला:"

" महाराज आप बताए जल्दी से, अपनी बहन के लिए मैं कठिन से कठिन इम्तिहान दूंगा।

महाराज:" ठीक है पुत्र। सौंदर्या बेटी तुम मकर राशि में पैदा हुई हो इसलिए तुम्हारा मंगल अधिक भारी हैं जबकि तुम्हारा भाई कर्क राशि में पैदा होने के कारण तुम्हारे लिए संकट मोचक बन सकता है।

एक बात ध्यान रखना तुम्हारे लिए एक मात्र उम्मीद सिर्फ तुम्हारा भाई ही हैं। सिर्फ ईओ ही तुम्हारी कुंडली से दोष निकाल सकता है।

सौंदर्या ने राहत की सांस ली कि आखिर कोई तो उपाय हैं उसके लिए क्योंकि वो अब कुछ भी करके किसी भी हालत में इस मुश्किल से छुटकारा पाना चाहती थी किसी भी कीमत पर।

महाराज:" बेटी तुझे तुम्हे के लिए हरिद्वार जाना होगा। लेकिन उससे पहले तुम्हे कियाबा में स्थित लिंगेश्वर मंदिर जाना होगा और वहां पुष्प अर्पित करने होंगे। उसके बाद तुम खजुराहो की गुफाएं में जाना होगा और वहां तुम्हे कुछ विशेष पूजा करनी होगी, तुम्हे मंगलवार के दिन लाल सुर्ख पकड़े पहनकर मंगल कर जल देना होगा। ये क्रिया तुम्हे सात दिन तक लगातार करनी होगी। इसके अलावा तुम्हारे भारी मंगल को काबू में करने के लिए तुम्हे मैं एक मंगला यंत्र भी दूंगा। बेटी अब तुम बाहर जाओ। बाकी की विधि में तुम्हारे भाई को समझा दूंगा। मै तुम्हे एक बार फिर से समझा रहा हूं कि तुम्हारे लिए आशा की एक मात्र किरण तुम्हारा भाई ही है। मै इसे सब उपाय और उनके करने की विधि बता दूंगा।

महाराज ने अपनी बात खत्म होते हुए ही सौंदर्या को बाहर जाने का इशारा किया और वो महाराज के पैर छूकर बाहर निकल गई।

महाराज ने अब अजय को विधि बतानी शुरु करी तो अजय हैरानी से उनके मुंह देखता रह गया। उसे समझ नहीं अा रहा है कि ये महाराज को क्या हो गया है। जैसे ही उन्होंने अपनी बात पूरी करी तो अजय बोल उठा:"

" लेकिन महाराज ये उपाय तो बेहद कठिन हैं, भला एक भाई बहन वो भी सगे किस तरह इस तरह की विधि और पूजा कर सकते है। क्षमा चाहता हूं क्या कोई दूसरा उपाय होगा ?

महाराज:" पुत्र हमे भी ज्ञात है कि ये मुश्किल होगा लेकिन इसके अलावा दूसरा कोई उपाय नहीं है मेरे पास। मेरे पास क्या दुनियां में किसी के भी पास नहीं होगा।

अजय:" लेकिन महराज मेरी बहन मेरे बारे में क्या सोचेगी ? कहीं उसने मुझे गलत समझ लिया तो ?

महाराज:" हमसे कुछ भी छुपा नहीं हैं बच्चा, ना भूत ना भविष्य। तुम्हारी बहन तुम्हारी हर बात को मान लेगी इसका हमे पूरा विश्वास है बस उसे ये क्रिया विधि करके दिखाने के लिए कोई दूसरी अनुभवी औरत चाहिए जिसकी राशि सौंदर्या से मिलती हो।

अजय ने लिए दूसरी अनुभवी औरत की बात कहकर महराज ने एक और बड़ी मुश्किल समस्या पैदा कर दी।

अजय:" महाराज ये तो बहुत विकट परिस्थिति हो गई। मैं तो सिर्फ एक ही औरत को जानता हूं और वो हैं मेरी मम्मी। लेकिन उनकी और दीदी की राशि दोनों अलग अलग हैं।

महाराज:" पुत्र घबराओ मत, समय आने पर हर एक समस्या के लिए समाधान निकल आता है ठीक वैसे ही इसका समाधान भी निकल आएगा।

इतना कहकर महाराज खड़े हो गए और उन्होंने अपनी कमरे की अलमारी से दो छोटे छोटे बैग निकाले और अजय को देते हुए बोले:"

" ये सिद्ध किए हुए मगंल यंत्र है बेटा, इनका उपयोग सोच समझ कर अपने विवेक से करना। तुम्हारी आधी समस्या हल हो जाएगी इनसे।

इतना कहकर महाराज ने अजय को मंगल यंत्र दिए और बाहर की तरफ अा गए। बाहर सौंदर्या बैठी हुई थी।

महाराज:" पुत्री हमने सब कुछ तुम्हारे भाई को समझा दिया है, तुम्हे अगर अपनी कुंडली के दोष का निवारण करना हैं तो अपने भाई की हर एक बात माननी होगी। अगर तुमसे कहीं चूक हुई तो तुम्हारे लिए फिर दुनिया में दूसरा कोई उपाय नहीं होगा।

सौंदर्या:" जी महाराज जैसी आपकी आज्ञा। मैं अपनी तरफ से अपनी भाई को पूजा और हर विधि में भरपूर सहयोग दूंगी। आखिर समस्या मेरी हैं तो इसके लिए कष्ट भी मुझे भी उठाना होगा।

दोनो ने महाराज के पैर छुए और उसके बाद दोनो घर की तरफ निकल गए।

सौंदर्या:" भाई क्या क्या विधि बताई हैं महाराज ने ?

अजय:" दीदी मैं ऐसे नहीं बता सकता, महाराज ने मना किया हैं और अगर अभी बताया तो बाद में विधि काम नहीं करेगी। महाराज के अनुसार मुझे विधि करने के वक़्त ही आपको बतानी होगी।

इतना कहकर अजय चुप हो गया और उसके बाद दोनो भाई बहन घर की तरफ चल पड़े।

शहनाज़ अपने बेटे के सामने घुटनों के बल बैठ गई और उसने उसके लंड पर अपनी नजरे टिका दी तो उसकी चूचियां अपने आप अकड़ने लगीं और चूत ने भूचाल सा उठ गया।

शादाब ने अपनी अम्मी के मुंह को लंड पर झुका दिया तो शहनाज ने अपने हाथ से लंड को पकड़ लिया और अगले ही पल जीभ उसके सुपाड़े पर फिराई।

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शादाब अपने अम्मी के मुलायम लाल सुर्ख लिपस्टिक लगे होंठो को अपने लंड पर महसूस करते ही सिसक उठा और उसने अपनी उंगलियां अपनी अम्मी के बालो में घुसा दी तो शहनाज ने अपने मुंह को पुर खोल दिया और उसके लंड को आधे से ज्यादा मुंह में भर लिया तो शादाब के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी। शाहनाज ने उसके लंड को को अपने होंठो के बीच में कस कर बाहर की तरफ जोर से चूस दिया।

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शादाब के मुंह से मस्ती भरी आह निकल पड़ी और उसकी आंखे मस्ती से बंद हो गई। शहनाज़ के होंठो की लिपस्टिक से लंड का सुपाड़ा लाल सुर्ख हो गया था और शहनाज़ ने जैसे ही उसके लंड को मुंह में भरा तो गेट खुलने की आवाज अाई और इसके साथ ही उसने तेजी से लंड को बाहर निकाला और शादाब अपनी पैंट ऐसे ली लिए हुए बाथरूम में घुस गया। कमला तेजी से अंदर अाई और वो थोड़ी घबराई हुई लग रही थी। शहनाज़ की खुद की हालत खराब थी और कमला से आंखे चुरा रही थी।

कमला:" शहनाज़ यार दिक्कत हो गई, मेरे भैंस ने दो महीने पहले ही बच्चा दे रही। आधे से ज्यादा बाहर अा गया है, नीचे गिर तो दिक्कत हो जाएगी। शादाब कहां हैं ?

शहनाज़:" ओह ये तो सच में दिक्कत की बात है। शादाब बाथरूम में गया है।

कमला:"अजय यहां हैं नहीं , मुझसे बच्चा नहीं संभाला जाएगा।

शादाब ने अंदर जल्दी से अपनी पैंट पहनी और बाहर की तरफ अा गया। उसे देखते ही कमला ने सारी बाते बताई और तीनो तेजी से घेर की तरफ दौड़ पड़े। शादाब ने जल्दी से एक बड़ी सी थाली ली और भैंस के पीछे खड़ा हो गया। दर्द के मारे भैंस इधर उधर घूम रही थी और शादाब उसके पीछे पीछे। थोड़ी देर बाद आखिरकार उसने बच्चे को जन्म दे दिया और शादाब ने अपनी सूझ बूझ से बच्चे को नीचे नहीं गिरने दिया। कमला बहुत खुश हुई और बोली:"

" बहुत ही बढ़िया बेटे। तुमने तो इस बच्चे को नई ज़िन्दगी दी है। तुम दोनो के कदम मेरे घर में बहुत शुभ पड़े हैं।

शादाब ने बच्चे को नीचे भैंस के पास कच्चे में लिया दिया और भैंस खुशी खुशी अपने बच्चे को अपनी जीभ से चाटने लगी।

शादाब:" क्यों शर्मिंदा कर रही हो आंटी, ये तो मेरा फ़र्ज़ था। आखिर अजय मेरे भाई जैसा ही तो हैं। वो नहीं हैं घर तो सारे काम मुझे ही देखने पड़ेंगे।

थोड़ी देर अजय और सौंदर्या भी अा गए और छोटे बच्चे को देखकर सौंदर्या खुशी से भर उठी।

सभी थोड़ी देर बाद घर अा गए और बैठ कर बाते होने लगी। सभी उत्सुक थे ये जानने के लिए कि वहां पर क्या हुआ और आचार्य जी ने सौंदर्या के लिए क्या उपाय बताया है।

कमला:" बेटा क्या कहा आचार्य जी ने ? क्या उपाय बताया हैं उन्होंने ?

अजय:" मम्मी उपाय उन्होंने बता दिया है और साथ ही साथ ये भी सलाह दी हैं कि अगर करने से पहले मैंने किसी को बता दिया तो उपाय करने का कोई फायदा नही होगा फिर।

अजय की बात सुनते सब लोग उसकी तरफ देखने लगे और एक खामोशी सी छा गई। अजय ko समझ नहीं आ रहा था कि वो सौंदर्या वाली राशि की एक अनुभवी औरत का कैसे इंतजाम करे इसलिए अपनी मम्मी से बोला:"

" मम्मी महाराज ने पूजा और उसकी कुछ विधियां बताई हैं जो सौंदर्या को करनी होगी हमे कुछ मंदिरों में जाना होगा और उसके बाद हरिद्वार में पूरी पूजा को अंजाम देना होगा। लेकिन एक दिक्कत अा रही है कि हमे सौंदर्या की राशि की ही कोई परिपक्व औरत हेल्प के लिए चाहिए जो सौंदर्या को पूजा और उसकी विधि के बारे में सब कुछ बता सके। ये दिक्कत हैं एक।

अजय की बात सुनकर कमला सोच में पड़ गई जबकि शादाब और शहनाज़ ये राशि बात समझ नहीं आ रही थी।

शहनाज़:" अजय बेटा ये राशि क्या होती हैं ? मुझे थोड़ा इसका बारे में बताए।

अजय:" देखिए हिन्दू धर्म के अनुसार कुछ राशियां होती है जो इंसान के नाम से पहले अक्षर पर आधारित होती है।

शहनाज़:" ओह इसका मतलब तो ये हुआ कि मेरी और सौंदर्या की एक ही राशि होनी चाहिए। मैं सही बोल रही हूं ना ?

अजय:" हान बिल्कुल आप सही बोल रही है, आप दोनो की एक ही राशि हैं और वो हैं कुंभ।

शहनाज़:" इसका मतलब तो ये हुआ कि मैं राशि वाले मुद्दे पर तुम्हारी मदद कर सकती हूं। मतलब मेरी राशि भी सौंदर्या से मेल खाती है और मैं परिपक्व भी तो हूं ही।

शहनाज़ की बात सुनकर थोड़ी देर के लिए सन्नाटा छाया रहा। कमला शहनाज़ की इस बात से हैरान थी वहीं अजय जानता था कि पूजा की विधियां और उसमे आने वाली मुश्किलों को ध्यान में रखते हुए शहनाज़ इस काम के लिए सही नहीं हैं क्योंकि वो उसके दोस्त की सगी मा हैं।

अजय:" लेकिन माफ कीजिए आंटी जी, पूजा की विधि इतनी आसान नहीं है जितनी आप समझ रही हैं। इसमें आगे चलकर बहुत सारी दिक्कतें अा सकती हैं।

शहनाज़:" मैं हर दिक्कत का सामना कर लूंगी। सौंदर्या को मैंने अपनी बेटी, अपनी बहन मान लिया है इसलिए मैं उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हूं।

अजय:" लेकिन फिर भी आप समझने की कोशिश कीजिए। सारी पूजा और विधियां हिन्दू धर्म के रीति रिवाज के अनुसार होगी और आप एक मुस्लिम हैं। आपको दिक्कत हो सकती हैं।

शहनाज़ के चेहरा गुस्से से लाल हो गया और वो अजय को घूरते हुए बोली:"

" वाह अजय कमाल कर दिया तुमने, जब तुमने रेशमा को राखी बांधी, सौंदर्या ने शादाब को राखी बांधी, तुमने अपनी जान पर खेलकर हम सबकी जान बचाई और आज मैं तुम्हारे लिए मुस्लिम हो गई।

अजय शाहनाज के क़दमों में गिर पड़ा और उनके पैर पकड़ते हुए बोला:" मुझे माफ़ कर दीजिए अगर आपको मेरी बात बुरी लगीं हो तो। मेरा ऐसा कोई मकसद नहीं था। मैं तो सिर्फ धर्म के रीति रिवाज के आधार पर बात कर रहा था।

शहनाज़ ने उसे उपर उठाया तो देखा कि अजय की आंखे भर आई थी तो शहनाज़ ने अपने दुपट्टे के पल्लू से उसका मुंह साफ किया और बोली:"

" तुम एक बहादुर बेटे हो। तुम्हारे आंखो में आंसू अच्छे नहीं लगते। देखो ये जात पात धर्म सब इंसान ने बनाए हैं और उस अल्लाह/भगवान् ने हमे सिर्फ इंसान बनाया है। इंसान का काम होता है एक दूसरे के काम आना और उनकी मदद करना। मैंने सौंदर्या को अपनी छोटी बहन मान किया है इसलिए उसकी हर समस्या अब मेरी समस्या हैं। फिर भी अगर तुम्हे लगता हैं कि मैं इसके लिए सही नहीं हूं तो तुम किसी और कि साथ ले जा सकते हो।

इतना कहकर शहनाज़ चुप हो गई और कोई कुछ नहीं बोला। सभी लोगो ने साथ में खाना खाया और उसके बाद कमला और अजय एक बार घेर की तरफ अपनी भैंस को देखने के लिए अा गए।

कमला:" कब जाना होगा तुम्हे सौंदर्या को पूजा के लिए लेकर ?

अजय:" मम्मी कल सुबह ही जाना होगा।

कमला:" फिर सौंदर्या की राशि की कौन परिपक्व औरत तेरे साथ जायेगी ? क्या सोचा हैं तुमने ?

अजय:" मम्मी अभी तो कुछ नहीं, आप ही कुछ मदद कीजिए।

कमला ने अपने दिमाग पर जोर दिया तो उसे दो नाम समझ में आए एक सपना और दूसरी सीमा।

कमला:" अच्छा सपना और सीमा के बारे में क्या खयाल हैं तुम्हारा ? उनकी राशि भी तो कुंभ ही हैं बेटा।

अजय:" हान ये बात तो हैं। लेकिन मम्मी सपना और परिपक्व नहीं है और सीमा परिपक्व तो हैं लेकिन उसकी टांग में दिक्कत होने के कारण उसका शरीर खंडित हैं इसलिए उसकी मदद नहीं ली जा सकती।

दोनो मा बेटे सोच में पड़ गए। बात तो अजय की बिल्कुल ठीक थी। थोड़ी देर सोचने के बाद कमला बोली:"

" फिर तेरे पास क्या उपाय हैं ? कोई नाम हैं क्या तेरी समझ में जो सौंदर्या की मदद कर सके।

अजय:" नहीं मम्मी अभी तो ऐसा कुछ नहीं है।

कमला:" जब अभी नहीं है तो फिर सुबह तक क्या तुम कोई जादू कर दोगे ? मेरे हिसाब से शहनाज़ का प्रस्ताव बुरा नहीं है बेटा। हमे भटकने की जरूरत नहीं है। घर बैठे ही इच्छित वर मिल रहा है और क्या चाहिए !!

अजय को कुछ समझ नहीं आ रहा था क्योंकि पूजा कि जो विधियां थी वो अपनी मा समान शहनाज़ से खुलकर कैसे बोल सकता था। लेकिन अंत में उसने अपनी मां के सामने हथियार डाल दिए और बोला:"

" ठीक है मम्मी, जैसे आप चाहें। अगर आप सबकी यहीं मर्जी हैं तो मुझे कोई दिक्कत नहीं।

दोनो ने भैंस को देखा और उसके बच्चे को दूध पिलाया और उसके बाद घर की तरफ अा गए।

कमला:* लेकिन बेटा तेरे जाने के बाद भैंस का काम कौन करेगा? रामू तो मर गया कुत्ता कहीं का। अभी भैंस ने नया नया बच्चा दिया है मुझे अकेले दिक्कत होगी। जंगल से घास भी लेकर आना होगा।

अजय:" मम्मी एक रास्ता है आप शादाब से बात कीजिए। अगर वो मान जाए तो अच्छा रहेगा। जब तक हम लोग पूजा करके आएंगे वो घर रह सकता है और भैंस का काम आराम से कर सकता है।

कमला को ये विचार पसंद अाया और घर सबने बैठकर इस मुद्दे पर बात करी तो अंत में फाइनल ये हुआ कि शहनाज़ सौंदर्या के साथ पूजा में जाएगी और शादाब घर पर रहकर कमला की मदद करेगा। शहनाज़ सोच रही थी कि पूजा में शादाब भी उनके साथ जाएगा लेकिन यहां तो कहानी ही पूरी बदल गई। शहनाज़ के लिए अपने बेटे से दूर रहना बहुत मुश्किल था लेकिन सौंदर्या को इस मुश्किल से बचाने के लिए उसने कुछ दिन की जुदाई को स्वीकार कर लिया।

कमला:" बेटा तुम जाने की तैयारी करो, कब जाना होगा तुम्हे ?

अजय:" मम्मी हम सुबह 3:40 मिनट पर घर से निकल जाएंगे क्योंकि ये ब्रह्म काल का समय होता है और बहुत शुभ माना जाता है।

उसका बाद सभी जाने के लिए तैयारी करने में जुट गए। मौका देखकर शादाब अपनी अम्मी के पास आया और उसके मुंह को चूम लिया और बोला:"

" आपके बिना कैसे जी पाऊंगा मैं मेरी जान।

शहनाज़ भी अपने बेटे से लिपट गई और बोली:" थोड़ा सा सब्र करो। जुदाई से भी प्यार बढ़ता है शादाब मर राजा। थोड़े दिन की बात है वैसे भी अजय के हम पर एहसान हैं तो चुकाने का इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा।

इतना कहकर शहनाज़ ने अपने बेटे के होंठो पर अपने लिप्स रख दिए और चूसने लगी। दोनो मा बेटे के दूसरे को चूमने लगे और लेकिन अगले ही पल उन्हें अलग ही जाना पड़ा क्योंकि कमला उधर की अा गई थी।

आखिरकार अजय के जाने का समय हो गया तो उसने अपने गाड़ी बाहर निकाली और अपने मम्मी में पैर छूकर शादाब के गले लग गया।

एक एक करके शहनाज़ और सौंदर्या दोनो गाड़ी में बैठ गई और अजय ने गाड़ी को आगे बढ़ा और बाहर फैले अंधेरे में उसकी गाड़ी गुम होती चली गई और ऐसे सफर पर चल पड़ी जिसकी मंजिल क्या रंग दिखाएगी किसी को मालूम नहीं था।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दू कि मेरी कोई कहानी अधूरी नहीं रही हैं। मैंने किसी को नहीं कहा कि आप कमेंट कीजिए लेकिन एक एक शब्द के कमेंट ना करे ये बात मैं फिर से बोलता हूं। मुझे एक एक लाइन के कमेंट मत लिखिए। इससे निराशा होती है और बुरा लगता हैं। एक एक शब्द के कमेंट के बिना भी मैं स्टोरी पूरी कर दूंगा।

स्टोरी लिखने के अलावा ज़िन्दगी में और भी बहुत काम होते हैं। आप लिखिए कहानी और बस हफ्ते में तीन अपडेट देकर देखिए। मा नानी दादी ताई चाची सब याद आएगी और आपके अनुसार स्टोरी अधूरी छोड़ने वालो की लिस्ट में आपका नाम जुड़ जायेगा।

इस मुद्दे को यहीं खत्म करता हूं। मुझे किसी से कोई बहस नहीं करनी। लेकिन सभी से निवेदन है कि एक शब्द के कॉमेंट ना करे।
 
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कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।
 
धन्यवाद सर। दरअसल खजुराहो ही है। वो गलती से हो गया। उसको ठीक कर दिया जाएगा।

पूजा में क्या होगा और किसी का नंबर लगेगा या नहीं ये तो आने वाले वक्त में पता चल ही जाएगा। साथ बने रहिए सर।

चित्तौड़ गढ़ की रानी कर्णवती जी के बारे में मैंने भी पढ़ा है और यही हिंदुस्तान की सबसे बड़ी खूबी है कि यहां अनेकता में भी एकता हैं।

शादाब के लिए ये पहला अवसर था इसलिए वो थोड़ा भावुक हो गया।
 
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