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- Dec 5, 2013
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जब राजेश, शशी और राजू अपने परिवार वालो के पास राजू वापस लौट रहा था। तभी अचानक राजेश के पीठ पर पड़ी, वहा से खून रिसता huwa दिखाई दिया। टी शर्ट के ऊपर खून दिखाई दिया,
शशी _रूको राज ये तुम्हारे पीठ पर खून,,,
राज क्या तुम्हे चोंट लगी है? तुमने हमे बताया नही।
राजेश_अपने हाथ की पीछे ले जाकर बहते खून को ऊंगली से लगाकर, अपने आंखो के पास उंगली लाकर देखा।
राजेश _लगता है तेंदुए का पंजा पीठ पर लगा है, जिसके कारण यह खून बह रहा। पर मैं बिल्कुल ठीक हू। घबराने कि कोई बात नही। मुझ कुछ नहीं huwa
शशि _राज दिखाओ मुझे,
राजेश _चाची जी, मुझे कुछ नहीं huwa
शशि _नही, दिखाओ मुझे,,, और वह राजेश के पीछे खड़ी होकर टी शर्ट ऊपर की, राजेश के पीठ पर तेंदुवे के पंजा लगा था, तेंदुवे के नाखून से खरोच के कारण पीठ से खून बह रहा था।
शशि _राज, तेंदुवे के पंजा पीठ पर लगा है जिससे पीठ पर नाखून से खरोच होने के कारण खून रिस रहा है। राज तुमने मेरे लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। रूको मैं इसे पानी से साफ़ कर देती हूं।
तुम पानी में बैठो।
राज पानी में बैठ गया, उसके पीठ और और टी शर्ट पर लगे खून को अच्छे से साफ़ की।
राजेश_चाची जी, मेरे घर वालों को चोंट के बारे में बिल्कुल मत बताना। उन लोगो के घूमने आने का मज़ा खराब हो जायेगा।
शशी _पर राज।
राजेश _प्लीज चाची।
शशि _ठीक है, राज। वैसे जख्म ज्यादा गहरी नही है जल्दी ठीक हो जायेगा। मैने अच्छे से टी शर्ट साफ़ कर दी है, किसी को पता नही चलेगा।
इधर सुनिता शशि की हरकतों को दूर से देख रही थी।
सुनिता _ये, औरत राज के टी शर्ट के साथ क्या कर रही है।
राजेश, राजू और शशि अपने परिवार वालो के पास पहुंच कर राजेश को अपने परिवार वालो से मिलाया और बताया की कैसे राज ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तेंदुए से उनकी जान बचाया। सभी ने राजेश को धन्यवाद दिया।
राजेश _अच्छा चाची जी, अब मैं चलता हूं, मां परेशान हो रही होगी।
शशि _ठीक है राज, पर क्या हमे अपने परिवार वालो से नही मिलाओगे।
राजेश _क्यू नही? थोड़ी देर बाद।
राजेश जब, सुनिता और स्वीटी के पास पहुंचा। स्वीटी तो जलक्रीड़ा का मज़ा ले रही थी।
सुनिता _क्यू re, ये तो वहीं औरत है लडका है न जो रंगरेलिया मना रहे थे, तुम उसके साथ क्या कर रहे थे और वह महिला तुम्हारे कपडे के साथ क्या कर रही थी।
राजेश _मां, तुम भी न जल क्रीड़ा का मज़ा लो फालतू किन बातों में पड़ रही हो।
सुनिता _नही, मुझे सच सच बताओ क्या बात है।
राजेश _मां, जब मैं आ रहा था तो ये दोनो भी वहा से आ रहे थे तभी अचानक से एक तेंदुआ आ गया और तेंदुआ इन पर हमला करने वाला था, तो मैंने तेंदुवे को भगाकर उनकी मदद की बस, तेंदुआ फिर से पीछे न आ जाए, हम साथ में ही आए।
सुनिता_हे भगवान, किसी को कुछ huwa तो नही।
राजेश _नही मां, किसी को कुछ नहीं हवा। वह तेदुवा, तुम्हारे बेटे को सामने देखकर भाग गया।
सुनिता _पर वो औरत तुम्हारे कपड़े के साथ कुछ कर रही थी। सच बताओ।तुम्हारे कपड़े के साथ क्या कर रही थी।
राजेश खामोश रहा,,,
सुनिता _तुम खामोश क्यू हो,,, दिखाओ मुझे, वह तुम्हारे पीठ को क्यू देख रही थी।
सुनिता राजेश के टी शर्ट ऊपर उठा कर देखी,
हे भगवान,,, सुनिता कुछ और बोलने वाली थी की राजेश ने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया।
राजेश _मां, मुझे कुछ नहीं हुआ है, तुम घबराओ मत, स्वीटी और पापा को पता चलेगा तो, घूमने आने का सब मजा उनका खराब हो जायेगा, इसलिए उन दोनो को कुछ मत बताना।
सुनिता के आंखो में आंसू आ गए, पर बेटा तुम्हारे पीठ पर तो तेंदुवे के पंजे के नाखून से खरोच लगा लग गया है जिससे खून जम गया है।
राजेश _मां, मै बिल्कुल ठीक हू, हल्का फुल्का खरोच है 2_4दिनों में ठीक हो जायेगा। अब रोने मत लग जाना, नही तो स्वीटी और पापा को सब पता लग जाएगा।
सुनिता _पर बेटे तुम्हे बहुत दर्द हो रहा होगा,
राजेश _मां मै मर्द हू, और मर्द को दर्द नही होता।
तभी स्वीटी उनके पास आ गई
स्वीटी _भईया, आप इतने समय तक कहा रह गए थे, चलो नीचे चलते हैं झड़ने में नहाएंगे, मज़ा आएगा। मै कब से इंतजार कर रही थी।
सुनिता _स्वीटी, बस करो,अब चलो, काफी देर हो गई, पानी में जलक्रीड़ा करते, अब चलते हैं।
राजेश _मां, थोड़ी देर और रुकते हैं फिर चलेंगे। स्वीटी की झरने में नहाने की इच्छा है उसे भी पुरी कर देते है।
सुनिता _पार बेटा,,,,, कुछ डर सोंचने के बाद,,, अच्छा ठीक है तुम दोनो जाओ। मै तुम्हारे पीटा जी के पास जाती हूं। पर तुम लोग जल्दी आना।
स्वीटी _थैंक्स मां।
राकेश और स्वीटी पहाड़ से निचे आकार झरने में नहाने का मज़ा लेने लगे।
इधरसुनिता पानी से बहार निकलकर शेखर के पास आ गई ,जो समान के पास बैठ कर दूर से सब देख रहा था।
शेखर _अरे, हो गया आप लोगो का जल क्रीड़ा, मज़ा आया की नही। और बच्चे कहा है।
सुनिता_बच्चे झरने में नहाने गए है।
शेखर _सुनिता, तुमको भी चला जाना था बच्चो के साथ थोड़ा और मजा ले ले लेती।
सुनिता _अरे, नही जी काफी देर हो गई, और कितना मज़ा लेंगे, हमे गुफा देखने लिए भी तो जाना है।
मैने उन दोनो को जल्दी आने को कहा है।
इधर राजेश और स्वीटी कुछ देर झरने में नहाने का मज़ा लेने के बाद वहा से वे भी वापस आ गए।
शेखर _अरे आ गए तुम दोनो, झरने में नहाने का मज़ा आया की नही।
स्वीटी _पापा, वहा बहुत मजा आया, मां तुम को भी जाना चाहिए था, कितना मजा आया वहा।
सुनिता _चलो ठीक है तुम लोग मजा किए वहीं काफी है, अब तुम लोग अपने गीले कपड़े जल्दी चेंज करके तैयार हो जाओ हमे यहां से जल्द निकलना है।
स्वीटी और राजू कपड़े चेंज कर जल्दी तैयार हो गए।सुनिता तो पहले ही तैयार थी।
अब वे सभी पहाड़ से नीचे आ गए और अपने कार की ओर जाने लगे। जाते जाते सुनिता की नजर निचे कुंड और झरने में नहाने वालो पर गई, जहा नहाने वालो की खूब भीड़ थी। महिला पुरुष बच्चे युवक युवतियां सब बिना किसी लाज लज्जा के नहाने का मज़ा ले रहे थे।
सुनिता अपने मन में बोली,, छी यहां तो सब बेशरम बन कर नहा रहे हैं। लोगो को शर्म नाम की कोई चीज ही नहीं। क्या जमाना आ गया है। ऊपर चाची भतीजा रंगरेलिया मना रहे, नीचे खुल्लम खुल्ला नहा रहे।
अब वे सभी जब कार की ओर जाने लगे रास्ते में होटल एवम खाने पीने का ठेला लगा huwa था।
शेखर _सुनो सुनिता अगर भुख लगी हो तो कुछ खा ले क्या?
स्वीटी _हा पापा, नहाने के बाद शरीर में थकावट और भुख लगी है, चलो न कुछ खाते है।
सुनिता _मुझे तो खाने पीने में कुछ क्वालिटी दिखाआई नही दे रही है जी। यहां खाना उचित नहीं लग रहा। कुछ फल फूल खरीद लो वही खाकर काम चला लेते है। आगे देखेंगे कोई अच्छी जगह, जहा कुछ खाने मिल जाए।
शेखर _जाओ बेटा कुछ फल खरीद कर रख लो रास्ते में खाते हुवे चलेंगे।
राजेश _ठीक है पापा।
राजेश कुछ फल खरीद कर रख लिया।
उसके बाद चारो प्राचीन गुफा के लिए निकल पड़े, लोगो से पूछने पर पता चला की यहां से 16km की दूरी पर गुफा है, वहा पहुंचने पर आधा घंटा का समय लगा। गुफा देखने दूर दूर से लोग आए हुवे थे।
कार से उतरकर वे अब कुछ दूर पैदल चलने लगे, स्वीटी उत्साहित थी वह अपने पिता के साथ आगे आगे चल रही थी जबकि सुनिता और राजेश दोनो पीछे साथ साथ चलने लगे।
सुनिता _बेटा, तुम्हारा जख्म कैसा है? दर्द कर रहा है क्या?
राजेश _मां तुम खा मो खा चिन्ता कर रहि हो मामूली सा खरोच है जल्दी ठीक हो जायेगा।
सुनिता _बेटा, तुम्हे क्या जरूरत थी, उन लोगो की मदद करने की, देखे नही कैसे वे अपने परिवार वालो से छुपकर पाप का खेल खेल रहे थे।
राजेश _मां, तुमने ही तो सिखाया है, अगर हम किसी किसी मुसीबत में फंसे लोगो की मदद कर सके तो हमे पीछे नहीं हटना चाहिए।
सुनिता _मैंने, इंसानों के लिए ऐसा कहा, पाप करने वालो के लिए नही।
राजेश_मां वो भी तो इंसान हैं। लोगो की अपनी जरूरत होती है। हर कोई आपकी तरह तो नही हो सकते जो अपनी इच्छाओं को दबाकर जीवन गुजारे।
सुनिता _नाराज होते हुए बोली, राजेश आख़िर तुम कहना क्या चाहते हो।
राजेश _मां, उस महिला ने मुझे बताया की उसका पति उसे संतुष्ट नहीं कर पाता इसलिए मजबूरी में अपने भतीजे के साथ सम्बंध बनाती है।
सुनिता _नाराज होते हुए बोली,, अच्छा तो तुम ये चाहते हो की मैं भी अपनी इच्छा पुरी करने तुम्हारे सामने अपनी टांगे खोल के लेट जाऊं,,, बोलो चुप क्यो हो गया,, तू तो यही चाहता है, तभी उन लोगो की तरफ दारी कर रहा हैं। जवाब क्यू नही देते,,,तुम भी तो यही चाहते हो न कि मैं भी अपनी प्यास बुझाने तुम्हारे साथ सोऊं।
राजेश कुछ न बोला और अपना मुंह फुलाकर चलने लगा,,
शेखर _क्या बात हो रही है मां बेटे में, जरा मै भी तो सूनू।
सुनिता _कुछ नही जी, राजेश बड़ा हो गया है अपने ही मां को क्या अच्छा है क्या बुरा है, सीखा रहा है।
शेखर _भई, वो तो है, राजेश तो है समझदार।
वे गुफा के पास पहुंच गए।
स्वीटी _पापा ये गुफा का द्वार तो एकदम सकरी है। हम इसके अदंर कैसे जा पाएंगे। मुझे तो अदंर जाने में डर लग रहा।
गुफा का द्वार इतना छोटा था की एक व्यक्ति बडी मुस्कील से अदंर प्रवेश कर पा रहा था।
शेखर _बेटी डरो मत यहां और भी लोग है, चलो हम भी अदंर चलते हैं।
शेखर पहले अदंर प्रवेश किया, फिर स्वीटी उसके बाद सुनिता और आखिरी में राज। द्वार से जैसे ही पांच मीटर अदंर गए अदंर का नज़ारा देख दंग रह गए। अदंर काफी बड़ा जगह जिसमे 100लोग आसानी से समा सकते, अदंर पानी भी बह रहा था। अदंर रोशनी भी आ रही थी। अदंर की दीवारों पर आदिमानव द्वारा भित्ती चित्र उकेरे गए थे। लोग उन चित्रों को देख रहे थे।
स्वीटी तो इन दृश्यों को देखकर रोमांचित हो उठी, भईया यहां देखो पानी में छोटी छोटी मछलियां भी तैर रही है।
वहा आस पास एक दो गुफा और भी था। वे उनके अदंर प्रवेश कर, गुफा के बारे में लोगो से जानकारी प्राप्त किए। पुराने समय में लोग किस तरह गुफाओं में रहते थे।
शेखर _चलो बच्चों अब हम वापस चलते हैं। यहां पर एक रेस्टोरेंट है चलो देखते हैं की कुछ खाने को मिल जाए फिर वहा से सीधा धर्मशाला निकलेंगे।
वे सभी रेस्टोरेंट में पहुंच गए,
शेखर _बोलो भाई किसको क्या क्या खाना है? मेनू चार्ट देख कर बताओ।
स्वीटी अपनी पसन्द की चीजों के बारे में बताई।
शेखर _राजेश बेटा तुम चुप क्यू बैठो हो, तुम क्या खाओगे।
राजेश _पापा मुझे भुख नही है, मै कुछ नहीं खाऊंगा।
सुनिता राजेश की ओर देखने लगी।
शेखर _बेटा, सुबह का नाश्ता किए हो 3बजने वाला है, कुछ खा लो।
राजेश _नही पापा। मुझे भुख नही है।
शेखर _अच्छा ठीक है। सुनिता तुम बताओ क्या खाओगी।
सुनिता _मुझे भी भुख नही है जी, आप और और switi खा लीजिए।
शेखर _तुम दोनो मां बेटो के बीच कुछ खटपट हो गई है क्या?
सुनिता _नही जी, ऐसी कोई बात नहीं है, मुझे भुख नही है।
शेखर _भाई आप दोनो को भुख नही है, तो फिर मैं भी नही खाऊंगा।
स्वीटी के लिए आर्डर कर देता हूं।
राजेश _नही पापा, आप लीजिए न। आप क्यू भूखा रहेंगे, आपको तो भुख लगी थी।
शेखर _लगी तो थी बेटे पर तुम लोग नही खा रहे हो तो मेरी भी भुख चली गई।
राजेश _ओह, पापा आप भी ना, मेरे लिए भी आर्डर कर दो जो आपको पसन्द हो।
शेखर _ये हुईं न बात, सुनिता ,तुम्हारे लिए भी आर्डर कर रहा हूं।
सुनिता _ठीक है जी अब आप इतना ही जिद कर रहे हैं तो मैं भी थोड़ा खा लूंगी।
वे भोजन करने के बाद, वहा से सीधे धर्मशाला पहुंच गए।
वहा जाकर वे आराम करने लगे।करीब शाम 6बजे,,
स्वीटी _चलो, भैय्या मेला चलते हैं वहा झूले का मज़ा लेंगे। पापा चलो न।
शेखर _चलो भई सुनिता, बच्चो का शौक पूरा करते हैं।
अब वे मेले में जाकर फिर मेले का आनंद उठाए। फिर वो वहा रात 9बजे तक घूमते रहे। फिर वहा से वापस आते समय रेस्टोरेंट में डिनर किए। वहा पास में ही मेडिकल था,,,
सुनिता _सुनो जी मुझे, मुझे मेडिकल में कुछ लेना था।
शेखर _क्या लेना है, मै खरीद लाता हूं।
सुनिता _मेरा पैर के नीचे दर्द कर रहा है लगता है पैदल चलचल कर पैर छिल गया है , चलने की ज्यादा आदत नही है न।कोई मलहम ले आना।
शेखर _ठीक है सुनिता
शेखर मेडिकल से मलहम ले आया।
अब वे सभी अपने रूम में पहुंच गए और सोने की तैयारी करने लगे। सुनिता की गाउन गीली थी तो वह साड़ी ही पहन रखी थी।
सुनिता _सुनो जी तुम आज ऊपर ही सो जाओ, कल तुम्हारा क़मर पकड़ लिया था। कही फिर से क़मर न पकड़ ले। मै और राजेश नीचे सो जाते हैं।
शेखर _पर सुनिता, तुम्हे क्या निचे नींद आयेगी।
सुनिता _जी, आदत तो नही है, पर कोई चारा भी नहीं है।
सुनिता मलहम को अपने तकिए के पास रख लीऔर राजेश से बोली,,
बेटा _लाईट को ऑफ कर दे, लाईट में नींद नहीं आतीऔर आकर सोजा।
राजेश _कमरे का लाईट ऑफ कर दिया। अब वे एकदूसरे को देख नही पा रहे, थे। केवल सुन पा रहे थे।
शशी _रूको राज ये तुम्हारे पीठ पर खून,,,
राज क्या तुम्हे चोंट लगी है? तुमने हमे बताया नही।
राजेश_अपने हाथ की पीछे ले जाकर बहते खून को ऊंगली से लगाकर, अपने आंखो के पास उंगली लाकर देखा।
राजेश _लगता है तेंदुए का पंजा पीठ पर लगा है, जिसके कारण यह खून बह रहा। पर मैं बिल्कुल ठीक हू। घबराने कि कोई बात नही। मुझ कुछ नहीं huwa
शशि _राज दिखाओ मुझे,
राजेश _चाची जी, मुझे कुछ नहीं huwa
शशि _नही, दिखाओ मुझे,,, और वह राजेश के पीछे खड़ी होकर टी शर्ट ऊपर की, राजेश के पीठ पर तेंदुवे के पंजा लगा था, तेंदुवे के नाखून से खरोच के कारण पीठ से खून बह रहा था।
शशि _राज, तेंदुवे के पंजा पीठ पर लगा है जिससे पीठ पर नाखून से खरोच होने के कारण खून रिस रहा है। राज तुमने मेरे लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। रूको मैं इसे पानी से साफ़ कर देती हूं।
तुम पानी में बैठो।
राज पानी में बैठ गया, उसके पीठ और और टी शर्ट पर लगे खून को अच्छे से साफ़ की।
राजेश_चाची जी, मेरे घर वालों को चोंट के बारे में बिल्कुल मत बताना। उन लोगो के घूमने आने का मज़ा खराब हो जायेगा।
शशी _पर राज।
राजेश _प्लीज चाची।
शशि _ठीक है, राज। वैसे जख्म ज्यादा गहरी नही है जल्दी ठीक हो जायेगा। मैने अच्छे से टी शर्ट साफ़ कर दी है, किसी को पता नही चलेगा।
इधर सुनिता शशि की हरकतों को दूर से देख रही थी।
सुनिता _ये, औरत राज के टी शर्ट के साथ क्या कर रही है।
राजेश, राजू और शशि अपने परिवार वालो के पास पहुंच कर राजेश को अपने परिवार वालो से मिलाया और बताया की कैसे राज ने अपनी जान की परवाह न करते हुए तेंदुए से उनकी जान बचाया। सभी ने राजेश को धन्यवाद दिया।
राजेश _अच्छा चाची जी, अब मैं चलता हूं, मां परेशान हो रही होगी।
शशि _ठीक है राज, पर क्या हमे अपने परिवार वालो से नही मिलाओगे।
राजेश _क्यू नही? थोड़ी देर बाद।
राजेश जब, सुनिता और स्वीटी के पास पहुंचा। स्वीटी तो जलक्रीड़ा का मज़ा ले रही थी।
सुनिता _क्यू re, ये तो वहीं औरत है लडका है न जो रंगरेलिया मना रहे थे, तुम उसके साथ क्या कर रहे थे और वह महिला तुम्हारे कपडे के साथ क्या कर रही थी।
राजेश _मां, तुम भी न जल क्रीड़ा का मज़ा लो फालतू किन बातों में पड़ रही हो।
सुनिता _नही, मुझे सच सच बताओ क्या बात है।
राजेश _मां, जब मैं आ रहा था तो ये दोनो भी वहा से आ रहे थे तभी अचानक से एक तेंदुआ आ गया और तेंदुआ इन पर हमला करने वाला था, तो मैंने तेंदुवे को भगाकर उनकी मदद की बस, तेंदुआ फिर से पीछे न आ जाए, हम साथ में ही आए।
सुनिता_हे भगवान, किसी को कुछ huwa तो नही।
राजेश _नही मां, किसी को कुछ नहीं हवा। वह तेदुवा, तुम्हारे बेटे को सामने देखकर भाग गया।
सुनिता _पर वो औरत तुम्हारे कपड़े के साथ कुछ कर रही थी। सच बताओ।तुम्हारे कपड़े के साथ क्या कर रही थी।
राजेश खामोश रहा,,,
सुनिता _तुम खामोश क्यू हो,,, दिखाओ मुझे, वह तुम्हारे पीठ को क्यू देख रही थी।
सुनिता राजेश के टी शर्ट ऊपर उठा कर देखी,
हे भगवान,,, सुनिता कुछ और बोलने वाली थी की राजेश ने अपना हाथ उसके मुंह पर रख दिया।
राजेश _मां, मुझे कुछ नहीं हुआ है, तुम घबराओ मत, स्वीटी और पापा को पता चलेगा तो, घूमने आने का सब मजा उनका खराब हो जायेगा, इसलिए उन दोनो को कुछ मत बताना।
सुनिता के आंखो में आंसू आ गए, पर बेटा तुम्हारे पीठ पर तो तेंदुवे के पंजे के नाखून से खरोच लगा लग गया है जिससे खून जम गया है।
राजेश _मां, मै बिल्कुल ठीक हू, हल्का फुल्का खरोच है 2_4दिनों में ठीक हो जायेगा। अब रोने मत लग जाना, नही तो स्वीटी और पापा को सब पता लग जाएगा।
सुनिता _पर बेटे तुम्हे बहुत दर्द हो रहा होगा,
राजेश _मां मै मर्द हू, और मर्द को दर्द नही होता।
तभी स्वीटी उनके पास आ गई
स्वीटी _भईया, आप इतने समय तक कहा रह गए थे, चलो नीचे चलते हैं झड़ने में नहाएंगे, मज़ा आएगा। मै कब से इंतजार कर रही थी।
सुनिता _स्वीटी, बस करो,अब चलो, काफी देर हो गई, पानी में जलक्रीड़ा करते, अब चलते हैं।
राजेश _मां, थोड़ी देर और रुकते हैं फिर चलेंगे। स्वीटी की झरने में नहाने की इच्छा है उसे भी पुरी कर देते है।
सुनिता _पार बेटा,,,,, कुछ डर सोंचने के बाद,,, अच्छा ठीक है तुम दोनो जाओ। मै तुम्हारे पीटा जी के पास जाती हूं। पर तुम लोग जल्दी आना।
स्वीटी _थैंक्स मां।
राकेश और स्वीटी पहाड़ से निचे आकार झरने में नहाने का मज़ा लेने लगे।
इधरसुनिता पानी से बहार निकलकर शेखर के पास आ गई ,जो समान के पास बैठ कर दूर से सब देख रहा था।
शेखर _अरे, हो गया आप लोगो का जल क्रीड़ा, मज़ा आया की नही। और बच्चे कहा है।
सुनिता_बच्चे झरने में नहाने गए है।
शेखर _सुनिता, तुमको भी चला जाना था बच्चो के साथ थोड़ा और मजा ले ले लेती।
सुनिता _अरे, नही जी काफी देर हो गई, और कितना मज़ा लेंगे, हमे गुफा देखने लिए भी तो जाना है।
मैने उन दोनो को जल्दी आने को कहा है।
इधर राजेश और स्वीटी कुछ देर झरने में नहाने का मज़ा लेने के बाद वहा से वे भी वापस आ गए।
शेखर _अरे आ गए तुम दोनो, झरने में नहाने का मज़ा आया की नही।
स्वीटी _पापा, वहा बहुत मजा आया, मां तुम को भी जाना चाहिए था, कितना मजा आया वहा।
सुनिता _चलो ठीक है तुम लोग मजा किए वहीं काफी है, अब तुम लोग अपने गीले कपड़े जल्दी चेंज करके तैयार हो जाओ हमे यहां से जल्द निकलना है।
स्वीटी और राजू कपड़े चेंज कर जल्दी तैयार हो गए।सुनिता तो पहले ही तैयार थी।
अब वे सभी पहाड़ से नीचे आ गए और अपने कार की ओर जाने लगे। जाते जाते सुनिता की नजर निचे कुंड और झरने में नहाने वालो पर गई, जहा नहाने वालो की खूब भीड़ थी। महिला पुरुष बच्चे युवक युवतियां सब बिना किसी लाज लज्जा के नहाने का मज़ा ले रहे थे।
सुनिता अपने मन में बोली,, छी यहां तो सब बेशरम बन कर नहा रहे हैं। लोगो को शर्म नाम की कोई चीज ही नहीं। क्या जमाना आ गया है। ऊपर चाची भतीजा रंगरेलिया मना रहे, नीचे खुल्लम खुल्ला नहा रहे।
अब वे सभी जब कार की ओर जाने लगे रास्ते में होटल एवम खाने पीने का ठेला लगा huwa था।
शेखर _सुनो सुनिता अगर भुख लगी हो तो कुछ खा ले क्या?
स्वीटी _हा पापा, नहाने के बाद शरीर में थकावट और भुख लगी है, चलो न कुछ खाते है।
सुनिता _मुझे तो खाने पीने में कुछ क्वालिटी दिखाआई नही दे रही है जी। यहां खाना उचित नहीं लग रहा। कुछ फल फूल खरीद लो वही खाकर काम चला लेते है। आगे देखेंगे कोई अच्छी जगह, जहा कुछ खाने मिल जाए।
शेखर _जाओ बेटा कुछ फल खरीद कर रख लो रास्ते में खाते हुवे चलेंगे।
राजेश _ठीक है पापा।
राजेश कुछ फल खरीद कर रख लिया।
उसके बाद चारो प्राचीन गुफा के लिए निकल पड़े, लोगो से पूछने पर पता चला की यहां से 16km की दूरी पर गुफा है, वहा पहुंचने पर आधा घंटा का समय लगा। गुफा देखने दूर दूर से लोग आए हुवे थे।
कार से उतरकर वे अब कुछ दूर पैदल चलने लगे, स्वीटी उत्साहित थी वह अपने पिता के साथ आगे आगे चल रही थी जबकि सुनिता और राजेश दोनो पीछे साथ साथ चलने लगे।
सुनिता _बेटा, तुम्हारा जख्म कैसा है? दर्द कर रहा है क्या?
राजेश _मां तुम खा मो खा चिन्ता कर रहि हो मामूली सा खरोच है जल्दी ठीक हो जायेगा।
सुनिता _बेटा, तुम्हे क्या जरूरत थी, उन लोगो की मदद करने की, देखे नही कैसे वे अपने परिवार वालो से छुपकर पाप का खेल खेल रहे थे।
राजेश _मां, तुमने ही तो सिखाया है, अगर हम किसी किसी मुसीबत में फंसे लोगो की मदद कर सके तो हमे पीछे नहीं हटना चाहिए।
सुनिता _मैंने, इंसानों के लिए ऐसा कहा, पाप करने वालो के लिए नही।
राजेश_मां वो भी तो इंसान हैं। लोगो की अपनी जरूरत होती है। हर कोई आपकी तरह तो नही हो सकते जो अपनी इच्छाओं को दबाकर जीवन गुजारे।
सुनिता _नाराज होते हुए बोली, राजेश आख़िर तुम कहना क्या चाहते हो।
राजेश _मां, उस महिला ने मुझे बताया की उसका पति उसे संतुष्ट नहीं कर पाता इसलिए मजबूरी में अपने भतीजे के साथ सम्बंध बनाती है।
सुनिता _नाराज होते हुए बोली,, अच्छा तो तुम ये चाहते हो की मैं भी अपनी इच्छा पुरी करने तुम्हारे सामने अपनी टांगे खोल के लेट जाऊं,,, बोलो चुप क्यो हो गया,, तू तो यही चाहता है, तभी उन लोगो की तरफ दारी कर रहा हैं। जवाब क्यू नही देते,,,तुम भी तो यही चाहते हो न कि मैं भी अपनी प्यास बुझाने तुम्हारे साथ सोऊं।
राजेश कुछ न बोला और अपना मुंह फुलाकर चलने लगा,,
शेखर _क्या बात हो रही है मां बेटे में, जरा मै भी तो सूनू।
सुनिता _कुछ नही जी, राजेश बड़ा हो गया है अपने ही मां को क्या अच्छा है क्या बुरा है, सीखा रहा है।
शेखर _भई, वो तो है, राजेश तो है समझदार।
वे गुफा के पास पहुंच गए।
स्वीटी _पापा ये गुफा का द्वार तो एकदम सकरी है। हम इसके अदंर कैसे जा पाएंगे। मुझे तो अदंर जाने में डर लग रहा।
गुफा का द्वार इतना छोटा था की एक व्यक्ति बडी मुस्कील से अदंर प्रवेश कर पा रहा था।
शेखर _बेटी डरो मत यहां और भी लोग है, चलो हम भी अदंर चलते हैं।
शेखर पहले अदंर प्रवेश किया, फिर स्वीटी उसके बाद सुनिता और आखिरी में राज। द्वार से जैसे ही पांच मीटर अदंर गए अदंर का नज़ारा देख दंग रह गए। अदंर काफी बड़ा जगह जिसमे 100लोग आसानी से समा सकते, अदंर पानी भी बह रहा था। अदंर रोशनी भी आ रही थी। अदंर की दीवारों पर आदिमानव द्वारा भित्ती चित्र उकेरे गए थे। लोग उन चित्रों को देख रहे थे।
स्वीटी तो इन दृश्यों को देखकर रोमांचित हो उठी, भईया यहां देखो पानी में छोटी छोटी मछलियां भी तैर रही है।
वहा आस पास एक दो गुफा और भी था। वे उनके अदंर प्रवेश कर, गुफा के बारे में लोगो से जानकारी प्राप्त किए। पुराने समय में लोग किस तरह गुफाओं में रहते थे।
शेखर _चलो बच्चों अब हम वापस चलते हैं। यहां पर एक रेस्टोरेंट है चलो देखते हैं की कुछ खाने को मिल जाए फिर वहा से सीधा धर्मशाला निकलेंगे।
वे सभी रेस्टोरेंट में पहुंच गए,
शेखर _बोलो भाई किसको क्या क्या खाना है? मेनू चार्ट देख कर बताओ।
स्वीटी अपनी पसन्द की चीजों के बारे में बताई।
शेखर _राजेश बेटा तुम चुप क्यू बैठो हो, तुम क्या खाओगे।
राजेश _पापा मुझे भुख नही है, मै कुछ नहीं खाऊंगा।
सुनिता राजेश की ओर देखने लगी।
शेखर _बेटा, सुबह का नाश्ता किए हो 3बजने वाला है, कुछ खा लो।
राजेश _नही पापा। मुझे भुख नही है।
शेखर _अच्छा ठीक है। सुनिता तुम बताओ क्या खाओगी।
सुनिता _मुझे भी भुख नही है जी, आप और और switi खा लीजिए।
शेखर _तुम दोनो मां बेटो के बीच कुछ खटपट हो गई है क्या?
सुनिता _नही जी, ऐसी कोई बात नहीं है, मुझे भुख नही है।
शेखर _भाई आप दोनो को भुख नही है, तो फिर मैं भी नही खाऊंगा।
स्वीटी के लिए आर्डर कर देता हूं।
राजेश _नही पापा, आप लीजिए न। आप क्यू भूखा रहेंगे, आपको तो भुख लगी थी।
शेखर _लगी तो थी बेटे पर तुम लोग नही खा रहे हो तो मेरी भी भुख चली गई।
राजेश _ओह, पापा आप भी ना, मेरे लिए भी आर्डर कर दो जो आपको पसन्द हो।
शेखर _ये हुईं न बात, सुनिता ,तुम्हारे लिए भी आर्डर कर रहा हूं।
सुनिता _ठीक है जी अब आप इतना ही जिद कर रहे हैं तो मैं भी थोड़ा खा लूंगी।
वे भोजन करने के बाद, वहा से सीधे धर्मशाला पहुंच गए।
वहा जाकर वे आराम करने लगे।करीब शाम 6बजे,,
स्वीटी _चलो, भैय्या मेला चलते हैं वहा झूले का मज़ा लेंगे। पापा चलो न।
शेखर _चलो भई सुनिता, बच्चो का शौक पूरा करते हैं।
अब वे मेले में जाकर फिर मेले का आनंद उठाए। फिर वो वहा रात 9बजे तक घूमते रहे। फिर वहा से वापस आते समय रेस्टोरेंट में डिनर किए। वहा पास में ही मेडिकल था,,,
सुनिता _सुनो जी मुझे, मुझे मेडिकल में कुछ लेना था।
शेखर _क्या लेना है, मै खरीद लाता हूं।
सुनिता _मेरा पैर के नीचे दर्द कर रहा है लगता है पैदल चलचल कर पैर छिल गया है , चलने की ज्यादा आदत नही है न।कोई मलहम ले आना।
शेखर _ठीक है सुनिता
शेखर मेडिकल से मलहम ले आया।
अब वे सभी अपने रूम में पहुंच गए और सोने की तैयारी करने लगे। सुनिता की गाउन गीली थी तो वह साड़ी ही पहन रखी थी।
सुनिता _सुनो जी तुम आज ऊपर ही सो जाओ, कल तुम्हारा क़मर पकड़ लिया था। कही फिर से क़मर न पकड़ ले। मै और राजेश नीचे सो जाते हैं।
शेखर _पर सुनिता, तुम्हे क्या निचे नींद आयेगी।
सुनिता _जी, आदत तो नही है, पर कोई चारा भी नहीं है।
सुनिता मलहम को अपने तकिए के पास रख लीऔर राजेश से बोली,,
बेटा _लाईट को ऑफ कर दे, लाईट में नींद नहीं आतीऔर आकर सोजा।
राजेश _कमरे का लाईट ऑफ कर दिया। अब वे एकदूसरे को देख नही पा रहे, थे। केवल सुन पा रहे थे।