Incest यह क्या हुआ - Page 28 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

गीता ने जब देखा की, राजेश नदी किनारे अकेला बैठा है, अपने ख्यालों में खोया हुआ है। वह उसके पास गई।

उसने राजेश को आवाज दी।

गीता _राजेश,,

राजेश,,,

राजेश ने कोई जवाब नहीं दिया, वह कही खोया हुआ था। तब गीता उसकी कंधे पर हाथ रखी,,,

गीता _राजेश,,,

राजेश, अपने ख्यालों से बाहर आया।

राजेश _गीता दी तुम यहां,,,

गीता _वहीं सवाल तो मैं तुम्हे पुछने वाली थी। तुम यहां क्या कर रहे हो।

राजेश _बस ऐसे ही,, अपना अकेला पन इन हसीन वादियों के साथ बाटने, चला आया।

पर आप यहां कैसे?

गीता _मै तो जिला कार्यालय मीटिंग में गई थी, यहां सड़क किनारे तुम्हारा बाइक खड़ा देखा तो, तुम्हे ढूढते यहां चला आया।

वैसे जगह काफी खूबसूरत है, लगता है तुम यहां पहले भी किसी के साथ आते रहे हो।

राजेश _जगह ही ऐसी है दी, राही को रुकने पर मजबूर कर देता है।

गीता _पर लोग यहां अकेले तो नही आते ,,

राजेश _ये तो किस्मत की बात है दी , इंसान का समय हमेशा, एक जैसा तो नही रहता न। कभी कोई हमारे साथ होती है तो कभी हम अकेले रह जाते हैं।

गीता _तुम दिव्या को मिस कर रहे हों?

राजेश _दिव्या जी को मैने अपना सच्चा दोस्त माना था, दी, पर वह मुझे बिना बताए ही चली गई।

मतलब वह मुझे अपना दोस्त नहीं समझती थी।

पहले निशा जी, और अब दिव्या जी, शायद मेरे जीवन में अकेला पन ही लिखा है।

जब भी कोई मुझे अपना लगने लगता है, मुझे छोड़ कर चली जाती है।

वैसे आपको, इस सुन सान जगह पर नही आना चाहिए था दी।

गीता _राजेश दिव्या ने, तुमसे सच बताने से मना कि थी, पर मुझे लगता है कि सच बताना जरूरी है नही तो बहुत देर हो जायेगी।

राजेश _कैसा सच दी?

गीता _यही की दिव्या, विदेश नही गई है

राजेश _क्या?

गीता _हां, दिव्या विदेश नही गई है ।

राजेश _तो फिर कहा है दिव्या जी।

गीता _वह, नानी के पास गई है, सेवा आश्रम ।

राजेश _अगर वह नानी के पास गई है तो फिर झूठ बोलने की क्या जरूरत पड़ी?

गीता _क्यों कि वह मां बनने वाली है?

राजेश _क्या,,

दी ये आप क्या कह रही है?

गीता _वही जो सच है।

वह मां बनने वाली हैं ?

इससे पहले लोगो को पता चलता की वह बियाहे, मां बनने वाली हैं? लोग हमारे खानदान पर कीचड़ उछाले, वह यहां से चली गईं।

राजेश _पर ये कैसे हो सकता है दी, दिव्या जी ने तो मुझे कभी बताया ही नहीं की कोई उसका यार दोस्त भी है, फिर वो मां कैसे बन सकती है?

गीता _क्यों, तुम तो हो न उसके दोस्त?

राजेश _दी मै कुछ समझा नही।

गीता _राजेश उसके पेट मे जो बच्चा है वह तुम्हारा है?

राजेश _दी ये आप क्या कह रही है? दिव्या जी के पेट में मेरा बच्चा कैसे आ सकता है?

गीता _तुम चौंक गए न।

तुम्हे पता नही उस रात क्या huwa था?

राजेश _तुम किस रात की बात कर रहे हो दी?

गीता _राजेश, वह दिन याद करो जब गणेश पुर मेले का उद्घाटन था, मुझे सर पिता जी को नक्सली अपने साथ ले गए थे। तुमने और दिव्या ने अपनी जान जोखिम में डाल कर हमे बचाया, हम नदी के रास्ते लकड़ी के नाव से रात में निकल रहे थे।

राजेश _हां दी वो सब तो मुझे याद है।

गीता _तुम्हे यह भी याद होगा, नाव हम सबका भार नही उठा पाया तो तुम नदी में ही तैरते हुए, नाव को किनारे तक पहुंचाने की कोशिश करने लगे।

राजेश _हां दी ये सब तो मुझे याद है।

गीता _उसके बाद क्या हुआ था तुम्हे याद है?

राजेश _नही दी, उसके बाद तो सुबह मैं अपने आपको झोपड़ी के खाट में लेटा पाया।

गीता _राजेश तुम्हे पता नहीं है उस रात क्या हुआ था। नदी का पानी इतना ठंडा था की पानी में डूबे रहने से तुम्हारा पुरा शरीर ठंड से अकड़ गया था। तुम बेहोश हो गए थे।

तुम्हारा शरीर का खून जम गया था। नब्ज एकदम धीमा हो गया था।

हमने कई उपाये किए तुम्हे होश ही नहीं आया।

तब दिव्या ने तुम्हे बचाने के लिए वह किया जो आज उसके जीवन का अभिशाप बन गया।

राजेश _दी, दिव्या जी ने मेरी जान बचाने के लिए क्या किया?

दिव्या _वह निर्वस्त्र होकर तुम्हे अपनी जिस्म की गर्मी दिया। जिस्म की गर्मी से तुम धीरे धीरे होस में आने लगे। फिर वही huwa जिसका डर था।

तुमने उसकी कौमार्य भंग कर दिया।

राजेश _नही, ऐसा नहीं हो सकता? मै दिव्या जी के साथ ऐसा सोच भी नही सकता।

गीता _ये सच है, राजेश।

राजेश _पर ये सब चीजे मुझसे छिपाने की क्या जरूरत थी? दिव्या जी ने मुझे बताया क्यूं नही?

गीता _क्या बताती वह, तुम तो निशा से प्यार करते हो न। दिव्या यह बता कर की वह तुम्हारे बच्चे की मां बनने वाली हैं? तुम पर कोई दबाव नहीं बनाना चाहती थी। वैसे भी तुम्हारा इंटर व्यू था।

इन सबका तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़ सकता था। दिव्या नही चाहती थी कि तुम्हारा इंटरव्यू पर बुरा प्रभाव पड़े, वह तुम पर दबाव भी नहीं बनाना चाहती थी।

हमने उसे बच्चा गिराने के लिए कहा, पर वह नही मानी। वह तुम्हारे बच्चे को जन्म देना चाहती है!

पिता जी तो उसकी दूसरे से शादी कराने की बात कर रहे थे। पर दिव्या नही मानी।

अब दिव्या के पास कोई और चारा नहीं बचा था, इसलिए उसे यहां से जाना पड़ा।

राजेश _दिव्या जी को मेरे कारण इतना कुछ सहना पड़ा, धिक्कार है मुझे।

मुझे उसके पास जाना है, दी कहा है दिव्या जी बताओ मुझे। पता नहीं वह किस हालत में होगी ?

गीता _मैने बताया तो था, वह नानी के पास गई है। यहां से 300km दूर नानी का सेवा आश्रम है।

वह वहीं गई है।

राजेश _दिव्या जी मै आ रहा हूं, मै अकेले आपको दुनिया से संघर्ष करने नही दूंगा। चाहे जो भी हो जाए।

राजेश और गीता वहां से घर चलें आए।

रत्नवती _बेटी आज आने में देर कर दी?

गीता _हां मां, मुझे रास्ते में राजेश मिला था, वह अकेला था। नदी किनारे बैठा था। मां राजेश दिव्या को बहुत मिस कर रहा है।

मैने राजेश को सब सच बता दिया कि दिव्या विदेश नही बल्कि नानी के घर गई है, उनकी सेवा आश्रम में।

रत्नवती _बेटी ये तूने क्या किया? दिव्या ने मना किया था, बताने को।

गीता _मैने जो किया ठीक किया मां, शायद दिव्या की इसी में भलाई है। मै जानती हूं, दिव्या राजेश को बहुत प्यार करती है, और दिव्या निशा के कारण राजेश से यह बात छिपाती है। मां दिव्या ने जो जो त्याग किया है उसके लिए उसे फल मिलना चाहिए मां। राजेश कल सेवा आश्रम जा रहा है, दिव्या से मिलने।

रत्नवती _बेटी, अब क्या होगा?

गीता _जो भी होगा, अच्छा ही होगा मां।

गीता और रत्नवती की बाते ठाकुर ने छुपकर सुन लिया।

ठाकुर _मुझे उस साले को रोकना होगा? वो साले दिव्या से मिले और मेरी इज्जत को मिट्टी में मिला दे, मै उस साले को ही मिट्टी में मिला दूंगा।

दिव्या जब आश्रम पहुंची, तो ठाकुर ने पहले ही, अपने आदमियों को, वहां तैनात कर दिया था। आश्रम की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए।

वहा की जानकारी उसको मिलती रहे।

उसने अपने खास आदमी भैरव को वहा भेजा था।

उसने भैरव को फोन लगाया।

भैरव _हुकुम आपने मुझे याद किया।

ठाकुर _हा भैरव।

वो समय आ चुका है, जिसके लिए तुम्हे वहा भेजा था। मुझे पता था वो शाला एक दिन आश्रम जरूर पहुंचेगा, वो शाला राजेश कल आश्रम पहुंच रहा है।

पर तुम्हे उसे आश्रम में पहुंचने से पहले ही ख़त्म करना होगा।

भैरव _हुकुम आप चिन्ता न करे। राजेश, आश्रम नही पहुंचेगा।

ठाकुर _भैरव, उस साले को ख़त्म करना आसान नहीं है बहुत ताकतवर है साला, उसे खत्म करने की कई बार कोशिश किया गया, पर हर बार बच निकलता है।

तुम लोग उसे सामने से नही नही हरा सकते। उसे धोखे से मारना।

भैरव _मै समझ गया हुकुम। इस बार वह नही बचेगा आप निश्चिंत रहिए।

उसके बाद भैरव, राजेश को ख़त्म करने के लिए योजना बनाने में जुट गया।

इधर राजेश घर पहुंचा,,,

पदमा _अरे बेटा तू कहा गया था?

राजेश _कही नही ताई, बस यूं ही टहलने के लिए।

पदमा _अरे बेटा कही जाता है तो बताकर जाया कर, हमे तुम्हारी चिन्ता होने लगती है।

राजेश आंगन में लगे खाट पर लेट गया।

पदमा _बहु, राजेश के लिए चाय ले आ।

पूनम _ जी मां जी,

राजेश _नही ताई चाय को रहने दो, पीने का मन नही है।

पदमा _क्या बात है बेटा, कुछ चिंतित लग रहा है?

राजेश _ताई मै कल चंद्रपुर जा रहा हूं। वहा एक गांव है शिवपुर।

पदमा _पर वहा क्या काम है बेटा?

राजेश _हां ताई, वहा कुछ काम है, जो अभी आपको नही बता सकता। वहा से आने के बाद ही आपको बताऊंगा।

पदमा _ऐसा क्या काम आ गया है बेटा, कही कोई लड़ाई झगडे वाली बात तो नही। मुझे बड़ी चिंता हो रही है।

राजेश _नही ताई, ऐसी कोई बात नही है। मै जाकर जल्द ही वापस लौट आऊंगा।

रात में भोजन के समय घर के सभी लोगो को पदमा ने यह बात बताई की राजेश कल चंद्रपुर जा रहा है।

भुवन _राजेश, मुझे लगता है की तुम्हारा अकेले जाना ठीक नही है, मै भी तुम्हारे साथ चलूंगा।

राजेश _भईया मुझे वहा कितने दिन लगेंगे, एक दो तीन दिनो में आ जाऊ या सप्ताह लगेंगे। कह नही सकता, यहां आपकों खेती के काम सम्हालने है। इसलिए मेरा अकेला जाना ही उचित है।

रात में सबके सो जाने के बाद पूनम राजेश के कमरे में आई।

राजेश _भाभी आप इस वक्त

पूनम _तुम भी तो इतनी रात तक जाग रहे हो।

क्या बात है देवर जी। आज आप कुछ ज्यादा ही चिंतित लग रहे हैं।

राजेश _हां भाभी, आज मैं चिंतित हूं ।

पूनम _चिंता का कारण आप अपनी भाभी को नही बताओगे।

राजेश _भाभी, बात ऐसी है जो मैं अभी किसी को नहीं बता सकता मुझे माफ करना भाभी।

पूनम _कोई बात नही देवर जी। कल आपको चंद्रपुर जाना है। आप इस तरह जागते रहेंगे तो, तबियत बिगड़ सकती है।

राजेश _अभी इन आंखो में नींद मुस्किल हैं भाभी, मुझे रात जाग कर ही बितानी होगी।

आप मेरी चिंता न कीजिए, जाइए सो जाइए।

पूनम _मै तुम्हारी नींद में कुछ मदद कर दू।

पूनम ने अपनी ब्लाउज की बटन खोलते हुए कहा,,

राजेश _भाभी आज मेरा मन नही है, प्लीज

पूनम _तुम्हारा मन नही है तो क्या,मेरा तो मन है, लगता है तुम्हारा, मन अपने भाभी से भर गया है। जब से इंटरव्यू दिलाकर आए हो। एक बार भी प्यार से गले नही लगाए होऔर कल फिर जा रहे हो। देवर जी तुम मतलबी निकले।

पूनम की आंखो में आंसू भर आए।

वह आंसू पोछते हुवे, कमरे से जानें लगी।

तभी राजेश ने उसकी हाथ को पकड़ लिया।

राजेश _भाभी , मुझसे नाराज़ हो गई क्या?

पुनम _नही, देवर जी आपको क्या लगता है, सिर्फ निशा और दिव्या ही आपसे प्यार करती है और कोई नहीं।

आपने तो कभी किसी औरत की दिल की बात जानना चाहा नही, रात को भोग कर सुबह सब भूल गए।

पर औरत के साथ ऐसा नहीं है, हा मै ये जानती हूं कि अपनी पति के अलावा दूसरे मर्द को चाहना गलत है।

पर दिल कहा किसी की सुनता है। जिसको ये दिल भाता है बस उसी का होकर रह जाता है।

तुम मर्दों को तो औरत बस मन बहलाने की चीज लगती है। कुछ दिन खेल लिए फिर जी भर गया तो भूल गए।

राजेश _भाभी मुझे माफ कर दो, आपकी भावनाओं को मैं समझ नही पाया। अभी मैं कुछ दिनो से तनाव में हूं।

पुनम _कोई बात नही देवर जी, अब मुझे जाने दो, आगे मै आपसे कोई शिकायत नहीं करूंगी।

राजेश _नही भाभी, पता नही आगे क्या होने वाला है। आगे हमे मिलने का मौका मिलेगा कि नही कुछ कहा नहीं जा सकता। इसलिए आज की रात, अपने सारे गीले सिकवे दूर कर लो।

पुनम राजेश की आंखों में देखी, फिर वह उसके करीब गई। फिर अपनी ओंठ राजेश की ओंठ पर रख चूसने लगीं।

राजेश भी पुनम की साथ देने लगा।

दोनो के बीच कुछ देर तक चूमा चाटी चलता रहा। उसके कपड़े कब उतरे उन्हे पता ही नहीं चला। राजेश ने पूनम की दूदू को मसल मसल कर खूब निचोड़ निचोड़ कर पिया। उसकी chut चांट चांट कर उसे खूब मज़े दिए। पुनम ने भी राजेशका लंद चूस चूस कर उसका लंद खूब लंबा और मोटा कार दिया।

राजेश रात भर पुनम को पेलता रहा। उसे कामसूत्र के कोइ भी आसन नहीं बचा जिसका उसने उपयोग न किया हो।

रात भर कमरे के अदंर पुनम की मादक सिसकारी और चूड़ियों की खनकने की आवाज गूंजती रही।

पुनम को पूरी तरह तृप्त करने के बाद, राजेश उसकी योनि में बीज छोड़कर उसके ऊपर ढेर हो गया।

राजेश थक चुका था उसे नींद आ गई।

पुनम कुछ देर बाद उठा अपने कपड़े पहने फिर राजेश के ऊपर चादर डाल कर उसकी माथा चूम कर वहा से चली गईं।

सुबह राजेश का नींद खुला तो 7बज चूके थे।

उसे याद आया उसे तो चंद्रपुर जाना है। वह नहाने चला गया। बहाकर आया।

पुनम ने उसके लिए चाय नाश्ता की तैयार कर ली थी।

पदमा _बेटा चाय नाश्ता तैयार हो गया है, चाय नाश्ता करके ही जाना।

राजेश ने चाय नाश्ता किया फिर अपना बैग पर कुछ कपड़े और सामान लेकर जाने को तैयार हो गया।

पदमा _बेटा तुम अपना ख्याल रखना।

राजेश _जी ताई।

भुवान _यार पहुंचते ही फोन करना, और हाल चाल बताते रहना।

राजेश _जी भईया।

राजेश सन से इजाजत लेकर, चंद्रपुर के लिए अपनी बाइक से निकल पड़ा। सूरज पुर से चंद्रपुर जिला जाना था वहा एक गांव शिवपुर जो नदी किनारे बसा था। वही था सेवा आश्रम।

राजेश बाइक को तेजी से दौड़ाता huwa चले जा रहा था।

बीच बीच में लोगो से रास्ता पूछ लेता था। कही रास्ता अच्छा था तो कही खराब, उसे शिवपुर पहुंचते पहुंचते शाम हो गया।

इधर भैरव और उसके साथी, रास्ते पर जगह जगह छिपे हुए थे। राजेश की पहुंचने की जानकारी भैरव को हो चुका था। भैरव सिंह ने ही राजेश को अस्त्र शस्त्र चलाना सिखाया था। उसके ताकत से भैरव सिंह भी वाकिफ था।

भैरव सिंह एक भिखारी का रूप बना लिया और सड़क पर चलने लगा जिस मार्ग से राजेश आ रहा था।

राजेश ने जब बूढ़े व्यक्ति को देखा।

राजेश _बाबा ये सेवा शिव पुर आसपास है क्या?

भैरव सिंह _हा, बेटा शिव पुर पास में ही है। तुम्हे किसके घर जाना है।

राजेश _बाबा मुझसे सेवा आश्रम जाना है।

भैरव सिंह _बेटा सेवा आश्रम तो मैं भी जा रहा हूं।

राजेश _अच्छा बाबा तो आप मेरे बाइक पर बैठिए। हम दोनों की मंजिल एक ही है।

भैरव सिंह _ठीक है बेटा।

राजेश _बाबा, मुझे ऐसा लग रहा है जैसे मैं आपको पहले से जानता हूं।

भैरव _अरे बेटा, दुनिया में तो एक ही सकल की कई आदमी होते है। देखा होगा किसी मेरे हमसक्ल को।

राजेश _हो सकता है बाबा।

भैरव _बेटा इस रास्ते से चलो , ये हमे आश्रम तक जल्दी पहुंचाएगी।

राजेश _पर बाबा ये रास्ता तो थोड़ी खराब लग रही है।

भैरव _आगे रास्ता ठीक है बेटा।

कुछ दूर चलने के बाद रास्ता आगे बंद था।

राजेश _बाबा, ये रास्ता तो आगे बंद है।

भैरव _बेटा मै बूढ़ा हूं न मेरी आंखें कमजोर हो गई है, लगता है हम गलत रास्ते पर आ गए। तुम गाड़ी रोको बेटा।

राजेश ने गाड़ी रोका।

भैरव सिंह अपने पास छुरा छिपाकर रखा था। उसे वह निकाल लिया।

और राजेश पीठ पर घोप दिया।

आस पास घने पेड़ों के बीच भैरव के साथी भाई छिपे थे वे भी बाहर निकल आए।

और राजेश सम्हल पाता उसके पहले ही लाठी से उसके सिर पर कई वार कर दिया। राजेश का सिर फट गया।

राजेश के आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा। वह लोगो को पहचानने की कोशिश करने लगा। पर पहचान न सका। वह वहीं पर लहूलुहान बेहोश होकर गिर पडा।

भैरव सिंह _अब ये नही बचेगा। इसने ठाकुर खानदान के इज्जत से खेला था, उसकी सजा मिली साले को।

उसके बाद भैरव और उसके साथी वहा से चले गए। और ठाकुर को इस बात की जानकारी दिया।

भैरव _हुकुम हवेली की इज्जत से खेलने वाले को हमने खत्म कर दिया।

ठाकुर बहुत खुश huwa

इधर अंधेरा होने को था। किसान लोग खेत में काम करने वाले किसानों का घर जाने का समय था।

दो किसान अपने खेत से काम करके घर के लिए जा रहे थे। उसने रास्ते में लहूलुहान किसी व्यक्ति को पड़ा देखा।

किसान _ये कौन है? लगता है किसी ने इज पर जान लेवा हमला किया है।

एक किसान _देखो तो इसकी सांसे चल भी रही है या मर गया है।

दूसरे किसान ने राजेश का हाथ छूकर अवलोकन किया।

किसान २_ये मरा नहीं है। ये बेहोश हो गया है। इसकी सांसे अभी भी चल रही है।

किसान १_इसे हमे आश्रम ले जाना चाहिए। वहा शायद इसकी जान बच जाए।

आश्रम में एक बडा हॉस्पिटल भी था जहा आश्रम में रहने वाले लोगो के साथ साथ आस पास के गांव के लोग भी इलाज कराने के लिए आते थे।

दोनो किसानों ने किसी तरह राजेश को आश्रम तक पहुंचाया ।

हॉस्पिटल में कई डॉक्टर, नर्स एवम कर्मचारी कार्य कर रहे थे। अन्य बड़े बड़े डाक्टर भी सेवा आश्रम से जुड़े हुए थे। आवश्यकता पड़ने पर उन्हे बुलाया जाता था। दिव्या भी डॉक्टर के रूप में सेवा देने के साथ साथ अन्य जिम्मेदारी भी सम्हाल रही थी।

आश्रम के डॉक्टरों ने किसानों से पूछा _कोन है ये, इसकी ये हालात कैसे हुई?

किसान _ये कोई अजनबी है, ये हमे रास्ते पर पड़ा मिला। लगता है इस पर किसी ने जानलेवा हमला किया है।

हमने देखा इसकी सांसे अभी भी चल रही है तो हम इसे आश्रम ले आएं। शायद इसकी जान बच जाए।

डाक्टर _इसकी हालत तो काफी खराब लग रही है।

लोगो की भीड़ देख कर दिव्या ने नर्स से पूछा।

दिव्या _क्या बात है, नीरा वहा इतनी भीड़ क्यू है।

दिव्या हॉस्पिटल में एडमिट कुछ मरीजों की हालचाल पूछ कर बाहर निकल रहीं थीं।

नर्स _दीदी, एक नया केस आया है। कोई युवा है। किसी ने उस पर जानलेवा हमला किया है। डाक्टर बता रहे थे की उसका बचना मुश्किल है।

इधर डाक्टर लोगो ने राजेश का पर्स चेक किया। उसमे रखे परिचय कार्ड से उसके बारे में पता चला कि इस युवक का नाम राजेश है और ये राजधानी का रहने वाला है।

दिव्या अन्य मरीजों को देख रही थी तभी उसके कानो पे राजेश शब्द सुनाई पढ़ा वह चौंकी।

उसका दिल जोरो से धड़कने लगा।

वहकापते कदमों से, उस युवा की ओर बड़ने लगा जिसे डाक्टरों ने घेर रखा था।

दिव्या जब युवक के पास पहुंची। उसे देखते ही। चीख पड़ी।

सवहा सभी लोग चौंक पड़े।

वहा के बुजुर्ग हेड डाक्टर _दिव्या बेटी क्या तुम इसे जानते हो।

दिव्या _ये राजेश है,ये यहां पहुंचा कैसे किसने की इसकी ये हालात। राजेश, उठो,,,

दिव्या रोने लगी,,

बुजुर्ग डॉक्टर _बेटी तुम डॉक्टर होकर भावुक हो रही हो, धैर्य रखो।

दिव्या _डॉक्टर, राजेश को कुछ नहीं होना चाहिए। जल्दी इलाज सुरू करो, दिव्या चीखी।

राजेश को आपातकाल कक्ष में ले जाया गया।

वहा पर राजेश का गहन जांच किया गया। उसके पीठ पर घुपे छुरे को निकाला गया।

जांच के दौरान पाया गया कि उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है।

इधर दिव्या की हालात की बात राजवती तक पहुंची। वह भी दौड़ी भागी हॉस्पिटल पहुंची।

राजवती _बेटी क्या हुआ क्यों रो रही हो?

दिव्या _नानी राजेश की हालात काफी नाजुक हैं। पता नहीं क्या होगा?

राजवती _पर बेटी राजेश वहा आया कैसे और मेरे उसके साथ ये सब huwa कैसे?

दिव्या _मुझे कुछ नही मालूम नानी, उसकी ये हालात किसने की और वह शिव पुर पहुंचा कैसे? नानी उसे कुछ नहीं होना चाहिए।

राजवती _बेटा, धैर्य रखो, सब ठीक होगा बेटा, तुम खुद एक डॉक्टर हो। तुम तो एक साहसी लड़की हो। तुम इतनी भावूक कैसी हो सकती हो?

दिव्या _नानी मै राजेश से बहुत प्यार करती हूं, अगर राजेश ही नहीं रहा तो मेरा जीना व्यर्थ है। उसे बचा लो।

बुजुर्ग डॉक्टर आपात कालीन रूम से बाहर निकला।

राजवती _क्या huwa डॉक्टर, राजेश ठीक तो है न।

डॉक्टर _माता जी, राजेश की हालात काफी गंभीर है। उसके सिर पर गंभीर चोंट लगी है। आपरेशन करना पड़ेगा। और यह ऑपरेशन स्पेसलिष्ट ही कर सकता है।

राजवती _ठीक है आप उसे फोन लगाइए और मुझसे बात कराइए।

डॉक्टर ने स्पेलिस्ट डॉक्टर को फोन लगाया। राजवती ने उससे बात किया।

स्पेशलिस्ट डॉक्टर राजधानी में ही था। उसे आने में 6से 7घंटे लग सकता था। राजवती ने उसे चार्टेड प्लेन से आने को कहा, सारा खर्च आश्रम उठाएगा।

स्पेशलिस्ट डॉक्टर चार्टेड प्लेन से 2घंटे में ही आश्रम पहुंच गया।

उसने राजेश का ऑपरेशन किया।

ऑपरेशन कक्ष से बाहर निकला।

राजवती _डॉक्टर राजेश ठीक तो है न।

डॉक्टर _मैने उसका ऑपरेशन कर दिया है माता जी। पर उसकी स्थिति काफी नाजुक हैं । उसे 24घंटे के अदंर होश आ गया तो ठीक, नही तो कुछ कहा नहीं जा सकता।

दिव्या _नही मेरे राजेश को कुछ नहीं हो सकता, वह जरूर उठेगा,,,

दिव्या, आश्रम अपने कमरे में रखी श्री कृष्ण की मूर्ति के सामने जाकर फरियाद करने लगी।
 
आखिर 24घंटे बीतने के पहले राजेश होश में आ गया।

इस बात की जानकारी नर्स ने दिव्या को जाकर दी।

दिव्या बेशुद भगवान के मूर्ती के सामने पड़ी थी।

नर्स _दीदी उठो,,,

दिव्या ने अपनी आंखें खोली,,

नर्स _दीदी राजेश को होश आ गया है,,,

दिव्या _क्या कहा तुमने, राजेश को होश आ गया,,

नर्स _हा दीदी, वो तुम्हे याद कर रहा है।

दिव्या_क्या?

दिव्या _ राजेश

दिव्या उठी और भागते हुवे , राजेश के पास पहुंची,,,

दरवाजे के पास जाकर खड़ी हो गई।

राजेश ने दिव्या की ओर मुड़ कर देखा।

राजेश _दिव्या जी,,,

धीमे स्वर में कहा,,

दिव्या दौड़कर राजेश के पास गई और घुटने पर खड़ी हो गईं।

दिव्या _राजेश तुम होश में आ गए,,

राजेश के हाथ को पकड़ कर कहा ,,,

राजेश _दिव्या की मुझे माफ कर दीजिए,,,

धीमे स्वर में कहा,,

मेरे कारण आपको इतने कष्ट सहने पढ़ रहे हैं।

दिव्या _राजेश, इसमें तुम्हारी कोई गलती नही,किस्मत में जो होना लिखा था वो हो गया,,, इसमें तुम अपने को दोषी न समझो,,,

तभी वहां राजवती पहुंची साथ में उस क्षेत्र के थानेदार भी थे। राजवती ने इस घटने की जानकार थाने को दी थी और रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।

थानेदार _राजेश क्या तुम हमें बता सकते हो की तुम पर हमला किसने किया था?

राजेश जान चुका था कि हमला ठाकुर के कहने पर उसके आदमियों ने किया था।

राजेश ने हमलावरों को पहचानने से इंकार कर दिया।

राजेश _नही थानेदार साहब, वे कौन लोग थे, मुझे पता नही।

थानेदार _क्या तुम्हे किसी पर शक है?

दिव्या _देखिए थानेदार साहब, अभी राजेश की हालत ठीक नहीं है, इन सब सवालों से उसके उसके दिमाक पर दबाव बढ़, ये सब बाते आप बाद में पूछ लेना।

राजवती _दिव्या ठीक कह रही है थानेदार साहब, राजेश जब ठीक हो जाए तो सब जानकारी ले लेना। लेकिन जिन लोगो ने राजेश पर हमला किया है, जब उसे पता चलेगा राजेश बच गया है तो वे राजेश पर फिर से हमला की कोशिश कर सकते हैं।

इसलिए अपने दो जवानों को राजेश की सुरक्षा के लिए तैनात कर दो।

थानेदार _ठीक है माता जी।

थानेदार ने अपना 2 जवान राजेश की सुरक्षा के लिए लगा दिया।

जवान दरवाजे बाहर बैठ कर निगरानी करने लगे।

दिव्या ने पुलिस जवानों को साफ हिदायत दे दी थी की उसके इजाजत के बिना राजेश के कमरे मे कोई भी प्रवेश न करे।

इधर गीता ने दिव्या को फोन किया।

गीता _दिव्या कैसी है तू?

दिव्या _यहां सब ठीक नही है दी ,,

दिव्या ने अपने रूवासी होते हुए कहा,,

गीता _क्या huwa दिव्या?

दिव्या _क्या आपने राजेश को सारी सच्चाई बताई?

गीता _सॉरी दिव्या, राजेश यहां तुम्हे बहुत मिस कर रहा था। उसकी दशा देखकर मुझे सच बताना पढ़ा।

वह तुम्हारे पास जाने वाला था, वो पहुंचा क्या?

दिव्या _दी राजेश राजेश पर कुछ लोगो ने हमला कर दिया था, उसकी हालात बहुत खराब थी दी, बहुत मुस्किल से उसकी जान बच सकी है।

गीता _क्या राजेश को कुछ लोगो ने जान से मारने की कोशिश की।

अभी कैसा है राजेश।

गीता _अभी वो खतरे से बाहर है दी।

दिव्या _किसने किया था राजेश पर हमला।

दिव्या _पता नही दी, राजेश ने अभी कुछ बताया नही है?

गीता _दिव्या तू घबरा मत, मै वहां आ रही हूं। तू अपना और राजेश का ख्याल रखना।

दिव्या _जी दी।

गीता ने यह बात अपनी मां को बताई।

रत्नवती _मुझे लगता है राजेश पर हमला तुम्हारे पिता ने कराया है। उसे पता चल गया होगा की राजेश दिव्या से मिलने जा रहा है।

गीता _ मुझे पता नहीं था पिता जी सच में ऐसी हरकत करेंगे नही तो मैं राजेश को सच्चाई नहीं बताती।हमे आश्रम चलना चाहिए। वहा दिव्या बहुत दुखी हैं।

रत्नवती _ठीक है बेटी वहा जाने की तैयारी करो, मै तुम्हारे पिता से मिलकर आती हूं।

रत्नवती ठाकुर के पास पहुंची,,,

रत्नवती _ये आपने अच्छा नही किया?

ठाकुर _मैंने क्या किया?

रत्नवती _भोले मत बनो। राजेश पर आपने हमला करवाया है न।

ठाकुर _मेरे घर के इज्जत से खेलने वाले को मैं ऐसे ही जाने दूंगा? साले को उसकी करनी की सजा मिली। और तू अपनी मुंह बन्द रखो, नही तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

रत्नवती _क्या करोगे, मारोगे मुझे, मारो लो मारो,,,

मैने पहले ही कहा था आपको, आपकी सारी जुल्मों को अब तक देखती और सहती आ रही थी। पर बात मेरी बेटियों की खुशियों पर आयेगी तो मैं चुप नही बैठूंगी।

राजेश पर हमला कराकर आपने अच्छा नही किया। भगवान की कृपा है कि राजेश बच गया, अगर उसे कुछ हो गया होता न तो पूरी दुनिया को चीख चीख कर बताती कि उसकी जान तुमने ली है।

ठाकुर _क्या वो साला बच गया?

रत्नवती _शुक्र मनाओ की वह बच गया, नही तो अपनी पत्नी और बेटियों से हाथ धो बैठते । और सुन लो आज के बाद ऐसी हरकत करने के बारे में भी सोंचे तो मैं और गीता दोनो हवेली छोड़कर सदा के लिए मां के पास चले जायेंगे आश्रम।

रत्नवती वहा से चली गईं,,,

ठाकुर शराब पीने लगा,,,

गीता और रत्नावति दोनो आश्रम के लिए निकल पड़े।

शाम तक वे आश्रम पहुंच गए।

वे दोनो राजेश से मिले, उसकी हालत देखकर दोनो को काफी दुख हुआ।

राजेश _मां जी आप यहां,,

रत्नवती _हा बेटा, दिव्या ने तुम्हारे बारे में हमें बताया, तो रहा नहीं गया तुम्हे देखने चले आए।

मै आपसे माफी मांगती हूं बेटा,,,

राजेश _किस बात के लिए मां जी,,,

रत्नवती _तुम पर हमला बेटा मेरे पति ने ही कराया है और शायद ये बात तुम भी जानते होगे। इसलिए मैं माफी मांगती हूं तुमसे।

राजेश _जानता हूं मां जी, पर आपकों माफी मांगने की कोई जरूरत नहीं, ये तो मेरे कर्मों की सजा मुझको मिली है। मेरे कारण दिव्या की को इतना कुछ सहना और त्यागना पड़ा है।

रत्नवती _ये तो तुम्हारा बड़प्पन है बेटा।

इधर दिव्या को जब पता चला कि राजेश पर हमला उसके पिता ने ही करवाया है, उसे गुस्सा आया।

वह अपने पिता जी को फोन लगाया।

ठाकुर _बेटी दिव्या कैसी है तू, वहा सब ठीक तो है न?

दिव्या _पिता जी आप अनजान बनने का नाटक मत करिए मुझे सब पता चल गया है। राजेश पर आपने ही हमला करवाया है न।

ठाकुर _ये सच नही है बेटी, लगता है किसी ने तुमको बहकाया है।

दिव्या _मां कभी झूठ नहीं बोल सकती, अब तक आपको मै भगवान की तरह पूजती रही। लेकिन मुझे अब पता चला कि आप उस लायक नहीं है। जिस आदमी ने आपकी बेटियों की इज्जत बचाया ,आपका जान बचाया उसके साथ आप ऐसा कैसे कर सकते हैं। मेरे साथ जो कुछ भी huwa उसके लिए राजेश दोषी नहीं है यह सब जानते हुवे भी। आज

आप मेरे नजरो से गिर गए पिता जी।

दिव्या _अब मै आपके सामने कभी नहीं आऊंगी।

दिव्या ने फोन रख दिया। और रोने लगी।

ठाकुर, दिव्या की बात सुनकर,,,

ये क्या हो गया? ये साला राजेश ने मुझे बर्बाद कर दिया। मेरी पत्नी और बेटियां सब मेरे खिलाफ हो गए। पर उस साले से बदला लेकर रहूंगा, चाहे कुछ भी हो जाए।

ठाकुर और ज्यादा शराब पीने लगा।

बिंदिया _बस करो ठाकुर और कितना पियोगे।

ठाकुर _चुप कर साली,,

उस साले के कारण मेरी बेटी और पत्नी मेरे खिलाफ हो गई है। उस साले ने मुझे बर्बाद कर दिया है।

बिंदिया _शराब पीने से क्या क्रोध शांत हो जायेगा, ज्यादा शराब पीने से आपका लिवर खराब न हो जाए। आपकी क्रोध शांत करने के लिए आज रात नई लड़कि का प्रबंध किया है मैने? आप अपना गुस्सा उस लङकी की chut पर उतारिए। वो चीखेंगी। तो आपको सुकून मिलेगा।

ठाकुर _पर ये लड़कि कहा कि है?

बिंदिया _पास वाले गांव की है। मुनीम ने बताया कि उस के पिता जी कर्ज नही चुका पा रहे हैं तो एक रात अपनी बेटी को हवेली भेजने के लिए राजी हो गए हैं। 18की है एकदम अनछुई कली।

ठाकुर _बिंदिया तू कितनी अच्छी है मेरी जान तू मेरी कितना ख्याल रखती है।

उस को बुलाकर दुल्हन बनाकर मेरे कमरे मे भेजो। आज हवेली में उनकी चीख गूंजेगी। मै अपना सारा गुस्सा उस लड़की की सील तोड़ कर उतारूंगा।

हा हा हा हा हा,,,,

ठाकुर हंसने लगा।

इधर आश्रम में गीता और रत्नवती आज रुकी,,

दिव्या राजेश की देखभाल में लगी हुई थी। वह रात में भी राजेश के कमरे में ही राजेश के पलंग के नीचे चटाई बिछाकर सोने लगी ताकि राजेश को रात में उसकी जरूरत न पढ़ जाए।

इधर उस रात रत्नवती ,गीता और राजवती आपस में राजेश और दिव्या के बारे में ही बात कर रहे थे।

रत्नवती _अब तो दिव्या की जिंदगी में खुशियां तभी आयेगी, जब राजेश से उसकी शादी हो जायेगी।

गीता_जानती हूं मां दिव्या राजेश से बहुत प्यार करती है। पर ये तभी संभव हो पाएगा जब राजेश दिव्या को शादी के लिए स्वयं प्रपोज करेगा। दिव्या कभी भी राजेश को शादी के लिए नही कहेगी।

राजवती _भगवान पर भरोसा रखो बेटी, भगवान दिव्या को उसका त्याग का फल जरूर देगा।

इधर रात में हवेली में बिंदिया ने उस लङकी की नहलाई शरीर पर उगे अनचाहे बालों की सफ़ाई कर दुल्हन की तरह सजा कर ठाकुर के कमरे में सेज पर बिठा दी।

बिंदिया _जाओ ठाकुर साहब दुलहन आपकी इन्तजार कर रही है।

ठाकुर हाथ में मोंगरे का माला डाला था उसके सूंघते हुए। लढ़खराते कदमों से कमरे में प्रवेश किया।

जब उसने दुलहन का घूंघट उठाया तो उसकी खूबसूरती देख कर दिल खुश हो गया।

उसने लङकी के एक एक कर सारे गहन उतारे फिर कपड़े उतार कर नंगी कर दिया। और स्वयं भी नंगा हो गया।

उसके बाद ठाकुर ने लङकी की सील तोडी और बेदर्दी से चोदने लगा। पुरे बिस्तर पर खून फेल गया। राजेश का सारा गुस्सा उस लङकी पर उतारने लगा। रात भर हवेली में उस लङकी की चीखे गूंजने लगी।

अगले दिन सुबह गीता और रत्नवती , राजवती से इजाजत लेकर और दिव्या का हौसला अफजाई कर दोनो आश्रम से घर के लिए निकल पड़े।

दिव्या राजेश की देखभाल में लगी रही 5दिन निकल गए।

पदमा ने भुवन से राजेश फोन लगा कर उसकी हाल चाल पुछने को कहा।

राजेश का मोबाइल स्विच ऑफ बताया।

घर के लोगो को राजेश की चिन्ता होने लगी।

पदमा ने भुवन से कहा की अपने दोस्तों को लेकर आश्रम चले जाओ, वहा राजेश का हाल चाल पता करो, पुरे एक सप्ताह हो गए राजेश की कोई खबर ही नहीं। मुझे बड़ी चिंता हो रही है।

पदमा के कहने पर भुवन, अपने कुछ दोस्तों को लेकर आश्रम के लिए निकल पड़ा।

वे आश्रम में जाकर पता लगाया की क्या राजेश नाम का कोइ लडका यहां आया है, वह आश्रम जाने के लिए ही सूरज पुर से निकला था, उसके बाद से उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया है, कृपया हमारी मदद कीजिए।

आश्रम के एक सेवा दार भुवन और उसके दोस्तों को दिव्या के पास लेकर गया।

भुवन और उसके दोस्त दिव्या को देखकर चौंक गए।

भुवन _दीदी आप यहां,

दिव्या _भुवन तुम यहां,,,

भुवन _ दिव्या दीदी हम तो राजेश से मिलने यहां आए हैं। एक सप्ताह पहले वह गांव से निकला था, आश्रम के लिए। जब उसकी कोई खोज खबर नही मिली तो हमें उसकी बड़ी चिंता हुई ।

इसलिए हम उनसे मिलने आश्रम आए हैं। पर आप यहां कैसी। हमे तो बताया गया था कि आप आगे की पढाई के लिए, विदेश गई है।

दिव्या _कुछ समस्या के कारण मुझे आश्रम आना पड़ा।

भुवन _मतलब राजेश यहां आश्रम आपसे मिलने के लिए आया है।

दिव्या _अच्छा किया, आप लोग यहां आ गए राजेश आप लोगो से मिले गा तो उसे अच्छा लगेगा उसकी हालत में जल्दी सुधार होगी।

भुवन _दिव्या दी, क्या हुआ है राजेश को।

दिव्या ने भुवन और उसके दोस्तों को सारी सच्चाई बता दिया।

दिव्या ने भुवान और उसके दोस्तों को राजेश के पास लेकर गई।

दिव्या _राजेश देखो तो तुमसे मिलने कौन आया है?

राजेश _अरे भुवन भईया आप।

भुवन और उसके दोस्त राजेश की हालात देख कर काफी दुखी हुवे।

भुवन _इतना कुछ हो गया हमे पता ही नहीं चला। जब इतने दिनो तक तुम्हारा कोई खबर नहीं आया तो घर के सभी लोग चिंतित हुवे, तुम्हारा खोज खबर लेने के लिए ही भेजा है घर वालों ने हमें।

राजेश _माफ करना भईया मेरी यह हालत जानकर आप लोग दुखी और चिंतित न हो जाए इसलिए मैंने कोई काल नही किया। वैसे भी मेरा मोबाइल पता नहीं कहा है?

दिव्या _राजेश तुम जल्दी से अच्छे हो जाओ फिर मैं तुम्हारे लिए एक अच्छी सी मोबाइल गिफ्ट करूंगी।

भुवन _राजेश, ठाकुर साहब ने आप पर हमला करवा कर अछा नही किया?

राजेश _आपको किसने बताया की ठाकुर साहब ने मुझ पर हमला करवा या है।

भुवन _दिव्या दी ने हमें सच बता दिया है। आप दिव्या जी से मिलने यहां आ रहे थे, ठाकुर साहब नही चाहते थे आप दिव्या दीदी से मिले इसलिए उसने तुम पर हमला करवाया।

ठाकुर की ये हरकत उस पर बहुत भारी पड़ेगी।

राजेश _देखो गुस्से में आकर तुम लोग कोई उल्टी सुल्टी हरकत न कर देना जिससे लेने के बदले देना पड़ जाए। मुझे बिना बताए कोई कदम नहीं उठाना।

भुवन और उसके दोस्त दो दिन आश्रम में रुके और अगले दिन अपने गांव के लिए निकल पड़े।

गांव पहुंचने के बाद, राजेश के स्थिति एसऔर ठाकुर के करनी के बारे में सबको बताया।

सभी लोग राजेश से मिलने के लिए आश्रम आना चाहते थे।

भुवन ने उन्हें बताया कि राजेश ने उन्हें आने से मना किया है कुछ दिनों में वह ठीक हो जाएंगे फिर वह खुद गांव आ जायेंगे। दिव्या जी उसकी बहुत अच्छी देखभाल कर रही है।

गांव के लोगो को जब पता चला की दिव्या विदेश नही गई है बल्कि वह शिव पुर गई है और वहां अपने नानी के आश्रम के हॉस्पिटल में अपनी सेवा दे रही है।

तब लोगो ने यह समझा कि ठाकुर ने दिव्या को राजेश से दूर करने के लिए ही यहां से अपनी नानी के पास आश्रम भेजी, और लोगो को झूठ बोला गया की वह विदेश गई है। जब राजेश को सचाई पता चला तो दिव्या से मिलने शिवपुर गया।

ठाकुर को यह बात पता चल गया होगा तो उसने राजेश को पर हमला करवा कर उसे जान से मारने की कोशिश की।

सूरज पुर और आसपास के गांव वाले ठाकुर के इस करनी से काफी क्रोधित हुए। वैसे भी ठाकुर के अत्याचार से आस पास के गांव वालों के अदंर उसके खिलाफ काफी आक्रोश था।

वे सभी ठाकुर को सबक सिखाने के लिए मौके की तालाश में थे।

और वह मौका आ चुका था। सामने चुनाव था। आस पास के गांव के लोग ठकुर को सबक सिखाने के लिए योजना बनाने लगे।

वह इस बार चुनाव में ठाकुर के खिलाप प्रत्यासी उतारेंगे। और ठाकुर को सबक सिखाएंगे।

इधर दिव्या की सेवा से राजेश की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ अब उसे हॉस्पिटल से छुट्टी दे दिया गया।

अब उसे राजवती ने अपने भवन में ही एक कमरे में राजेश को ठहरने का इंतजाम कर दिया।

अब राजेश दिव्या के साथ सुबह और शाम प्रार्थना सभा में जाने लगा।

आश्रम के हरे भरे गार्डन में भी दोनो समय बिताने लगे।

एक दिन राजवती ने राजेश को अपने पास बुलाई और बोली।

राजवती _राजेश बेटा जरा इधर आना।

राजेश _जी माता जी,,

राजवती _बेटा तुम मुझे माता जी नही, नानी मां कहा करो।

राजेश _जी, आपको कुछ काम था मुझसे।

राजवती _बेटा कुछ दिनो से मैं तुमसे कुछ बात कहने वाली थी पर तुम्हारे स्वास्थ्य के कारण कह नही पाई।

राजेश _बोलो नानी मां क्या बात है।

राजवती_बेटा बात दिव्या को लेकर है।

वैसे तो वो बहुत साहसी लड़की है, लेकिन उस दिन जब तुमको लहूलुहान देखी तो वह अपनी सुध बुध खो बैठी वह डॉक्टर होकर भी अत्यंत भावुक हो गईं। जानते हो इसका कारण क्या हैं?

वो तुमसे बेपनाह मुहब्बत करती है बेटा, मुझे पता है कि यह बात वह तुमसे कभी नहीं कहेगी। क्यों कि वह बता रही थी कि तुम किसी अन्य लङकी से प्यार करते हो, पर इतना मै तुमसे मै पुरे विश्वास के साथ कह सकती हूं की दिव्या जितनी प्यार तुम्हे और कोई नहीं कर सकती बेटा, वो तो पूरी जिंदगी तुम्हारी याद के सहारे ही गुजार देगी। वह अपनी दिल की बात कभी नहीं कहेगी।अब आगे तुम्हारी मर्ज़ी बेटा, तुम क्या फैसला लेते हो। तुम पर किसी का की दबाव नहीं है।

एक दिन राजेश और दिव्या गार्डन में टहल रहे थे।

राजेश _दिव्या जी आप जानती हो निशा ने मुझे क्यों छोड़ा, क्यों कि मेरे कई औरतों से संबंध थे। जब उन्हे पता चला तो वह ये सदमा बर्दास्त नही कर सकी और वह विदेश चली गई।

दिव्या जी तुम त्याग कि देवी हो मैं आपकी बहुत इज्जत करता हूं। मै आपको धोखा में भी नहीं रहना चाहता पहले भी मैने एक दोस्त खो दिया है। अब आपको धोखे में रख कर, मै आपको खोना नहीं चाहता।

सच पूछो तो मैं आपके काबिल नहीं हूं। मेरे आज भी कई औरतों से संबंध है। मै टू यह बात कहने की हिम्मत भी नहीं कर सकता, लेकिन नानी मां की बात सुनकर मैं आपसे कहने की हिम्मत जुटा पा रहा हूं।

दिव्या _क्या बात है राजेश, तुम्हारे मन में जो भी बात है, निःसंकोच कह सकते हो।

राजेश _क्या तुम मुझसे शादी करोगी?

दिव्या राजेश की आंखों में एक टक देखती रही। उसकी आंखो में आंसू छलक आए।

वह राजेश के गले से लिपट गई।

वह राजेश को ऐसे चूमने चाटने लगी। जैसे बरसो बिछड़ने के बाद प्रेमी प्रेमिका मिलते हो। उसकी आंखो से आंसू बह रही थी।

अगले दिन वे दोनो आश्रम के पास नदी किनारे घूमने गए। वे दोनो प्यार के गीत गाने लगें।

माहिया तेरी कसम हाय जीना नहीं जीना मुझे तेरे बिना हाय।

साथिया तेरी कसम हाय तेरे बिना जीना भी है क्या जीना हाय,,,
 
रात को सोते समय,,,

राजवती _बेटी तुम आज बहुत खुश लग रही हो, क्या बात है?

दिव्या _नानी राजेश मुझसे शादी करना चाहता है। रजवती के गले से लिपट कर बोली।

राजवती _क्या? बेटी ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है।

देखना तुम दोनो की शादी मै कितनी धूमधाम दे कराती हूं। मै कल ही पंडित जी को बुलाकर शुभ मुहूर्त निकलवाती हूं।

नानी, दिव्य राजवती से कस के लिपट ली।

राजवती _यह बात अपनी मां को बताई की नही।

वो तुम्हारी कितना चिंता करती है यह जानेगी तो वो बहुत खुश हो जायेगी। मै उसे अभी फोन करती हूं।

राजवती ने रत्नवती को फोन लगाई।

रत्नवती _मां इतनी रात को, क्या बात है वहा सब ठीक तो है?

राजवती _अरे बेटी बहुत बड़ी खुशखबरी है, मुझसे रहा न गया, सोचा तुमको बता दू, तुम दिव्या को लेकर बहुत चिंतित जो रहती हो।

रत्नवती _क्या बात है मां बड़ी खुश लग रही हो।

राजवती _बात ही ऐसी है, राजेश और दिव्या दोनो शादी करने जा रहे हैं।

रत्नवती _ये तो बड़ी खुशी की बात है मां,

राजवती _मै कल पंडित जी से शादी का शुभ मुहूर्त निकलवा रही हूं, देखना मै राजेश और दिव्या के शादी कितनी धूम धाम से कराती हूं।

पहली बार यह आश्रम दुलहन की तरह सजेगा।

रत्नवती _हां मां, हम दिव्या की शादी धूमधाम से करेंगे।

यह खुशखबरी बताने के लिए रत्नवती , गीता कमरे मे गई।

गीता _मां इतनी रात को मेरे कमरे में, कुछ काम था क्या?

रत्नवती _बेटी बात ही इतनी खुशी की है कि मैं खुद को रोक नहीं पाई और तुम्हे बताने चली आई। अभी आश्रम से मां का फोन आया था।

मां बता रही थी की राजेश और दिव्या दोनो शादी करने जा रहे हैं।

गीता _ओह सह मां, ये तो बहुत बड़ी खुशखबरी है

रत्नवती _हां बेटी अब दिव्या बेटी की जिंदगी को सारी तकलीफ दुर हो जायेगी।

गीता _हा मां, आख़िर दिव्या को उसका प्यार मिल ही गया। हर किसी की किस्मत ऐसी नही होती।

रत्नवती _अरे बेटी, अगर तुम्हे भी कोई पसन्द हो तो बता दो, तुम दोनो की शादी एक साथ करा देंगे।

गीता _नही मां, कबीर के जाने के बाद अब मुझे शादी में कोई इंट्रेस्ट नही।

अब तो मैं अपनी पूरी जिंदगी समाज सेवा में निकाल देना चाहतीं हूं।

मां तुम पिता जी को दिव्या और राजेश की शादी करने की बात, अभी मत बताना। पिता जी शादी पे अडंगा डालने की कोशिश करेंगे।

रत्नवती _बेटी तुम चिन्ता मत करो, तुम्हारा पिता जी ऐसा कुछ नहीं करेगा।

मैने उसे समझा दिया है, राजेश पर फिर से हमला huwa तो मैं और मेरी बेटी हवेली छोड़कर, चले जायेंगे। अब वह ऐसा नहीं करेगा।

राजेश और दिव्या की शादी करने की बात आस पास के क्षेत्रों में आग की तरह फैल गई।

राजवती ने पंडित को बुलाकर शुभ मुहूर्त निकलवाया। आज से एक सप्ताह बाद, दोनो की शादी की तिथि तय हुआ।

राजवती शादी की तैयारी में लग गई।

भुवन ने राजेश को फोन किया,,,

भुवन _राजेश मां तुमसे बात करना चाहतीं है, लो बात करो।

पदमा _राजेश बेटा जो हम सुन रहे हैं क्या वो सच है? तुम ठाकुर की बेटी से शादी कर रहे हों।

राजेश _हा ताई आपने सही सुना है।

पदमा _बेटा ये ठाकुर तुम्हरे जान के पीछे पड़ा है और तुम उसकी बेटी से शादी कर रहे हो। बेटा वो ठाकुर तुम्हे फिर नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

राजेश _ताई, आप चिंता न करे, वो ठाकुर मेरा कुछ नही बिगाड़ पाएगा।

पदमा _क्या तुमने ए बात अपने मां को बताई।

राजेश _, नही ताई,

पदमा _तुम्हारी मां इसके लिए कभी नही तैयार होगी।

राजेश _टाई मै मां को मना लूंगा। मुझे पुरा भरोसा है मां मान जायेगी।

पदमा _बेटा तू अपना ख्याल रखना। जी ताई।

पदमा ने भुवन को सुनिता के पास फोन लगाने के लिए कहा।

भुवन_प्रणाम चाची।

सुनीता _अरे भुवन बेटा तुम, खुश रहो, वहा गांव में सब ठीक तो है न।

भुवन _चाची, लो मां से बात करो, वही बताएगी, यहां का हाल चाल।

पदमा _सुनिता कैसी है तू?

सुनीता _मै ठीक हूं दी, आप लोग कैसे है? वहा सब ठीक तो हैं, भुवन की बातो से लगा, वहा कुछ ठीक नहीं है।

पदमा _हा, सुनिता, तुम कुछ बताने लिए ही फोन किया था।

सुनीता _क्या बात है दीदी, बताओ ,,

पदमा _राजेश ठाकुर की बेटी दिव्या से शादी करने जा रहा है।

सुनीता _क्या?

पदमा _हां, ये सच है

सुनीता _राजेश ने मुझे अब तक कुछ नहीं बताया है इस बारे में आख़िर मै उसकी मां हूं जिंदगी का इतना बड़ा फैसला आख़िर वो मुझसे बिना पूछे कैसे ले सकता है।

पदमा _सुनिता तुम जल्दी गांव आ जाओ, कही देर न जो जाए।

सुनीता _दीदी हम कल ही गांव पहुंचती हूं।

सुनीता ने यह बात शेखर के बताया। शेखर को भी राजेश का फिक्र होने लगा।

उसने ट्रेन के लिए टिकट उपलब्ध न होने के कारण वे कार से ही गांव के लिए निकल पड़े।

वह सुबह 6बजे घर से निकले गांव पहुंचते उन्हे रात हो गए।

गांव के घर पहुंचते ही।

सुनीता _भुवन बेटा, राजेश कहा है? बुलाओ उसे,

पदमा ने सारी बाते सच सच बता दिया कि राजेश यहां नही शिव पुर स्थित सेवा आश्रम में है। उसके ऊपर हुवे हमले के बारे में सब बाते बता दो।

सुनीता _दीदी इतना कुछ हो गया और हमे आप लोगो ने बताया ही नहीं।

पदमा _माफ कर दो सुनिता, राजेश ने हमले के बारे में आपको बताने सी मना किया था, तुम डर न जाओ इसलिए। पर बात उसकी शादी तक पहुंच गई है,,, इसलिए तुम्हे बताना जरूरी समझी।

तभी वहां कविता भी आ पहुंची,,

कविता _कैसी हो दीदी, लोगो ने बताया की आप लोग आए हो तो हम लोग मिलने चले आए,,

पदमा _कविता इतना कुछ हो रहा है आप ने भी मुझे तुमने भी मुझे बताया नही,,

कविता _दीदी पदमा दीदी ने तो आपको बताया ही होगा राजेश ने आपको बताने से मना किया था।

पर शादी के फैसले से उसे रॉक तो सकते थे।

कविता _दीदी राजेश एक समझदार लडका है जो भी कर रहा है सोच समझ कर रहा होगा।

वैसे दिव्या बहुत अच्छी लङकी है।

पदमा _बात दिव्या की नही है, बात ठाकुर की है वह जरूर इस शादी के खिलाफ होगा और राजेश को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

कविता _दीदी उसकी चिन्ता तो हम सबको है।

हम सब कल वहा चलेंगे, उससे बात करेंगे।

भुवन _ चाची आप लोग चिंता न करे, गांव के सारे लडके तैयार है ठाकुर उसका अब कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

अगले दिन राजेश और दिव्या राजवती, शादी की तैयारी पर ही चर्चा कर रहे थे कि सेवादार ने बताया की कोई व्यक्ति राजेश से मिलने आया है।

राजेश उस व्यक्ति से मिलने गया।

राजेश _लाखन काका आप यहां।

लाखन _राजेश, मुझे पता चला है कि तुम ठाकुर की बेटी से शादी करने जा रहे हो, और यह भी पता चला है कि ठाकुर के आदमियों ने तुम पर जानलेवा हमला किया था, तो तुमसे मिलने चला आया।

ठाकुर डे हम बदला लेना चाहते हैं पर तुम उसकी बेटी से शादी कर रहे हो ये बात मुझे कुछ समझ नहीं आया।

राजेश _लाखन काका, गलती ठाकुर ने किया है उसकी बेटियो ने नही, वे बहुत अच्छे लोग हैं, ठाकुर की जुल्मों में उनका कोई हाथ नहीं,ठकुराइन और उसकी बेटियां तो हमेशा लोगो के भला के बारे में ही सोंचती है। अगर आपको लगता है कि दिव्या से शादी के बाद मैं उस ठाकुर को उसके किए की सजा नही दिलाऊंगा, तो ऐसा नहीं है। ठाकुर को उसकी करनी का फल भुगतना ही पड़ेगा।

लाखन _ओह मै तो कुछ और ही समझ बैठा था। सुना है ठाकुर इस शादी के खिलाफ है वह शादी को रोकने का प्रयास कर सकता है। पर तुम निश्चिंत रहो ठाकुर के आदमी ऐसा कुछ नहीं कर पाएगा। मै अपने साथियों को आस पास तैनात कर दूंगा। वे आस पास नजर रखेंगे। ठाकुर के आदमी अगर आस पास भी नजर आए तो वे बचेंगे नही।

इधर हवेली में,,,

मुनीम _हुजूर, उधर आश्रम में दिव्या और राजेश की शादी की तैयारी चल रही है और आप हाथ में हाथ धरे बैठे हैं, क्या आप भी उस दो टके के लडके को अपना दामाद बनाने के लिए राजी हो गए हैं।

ठाकुर _मुनीम जी मुझे तो कुछ समझ नहीं आ रहा है क्या

किया जाय। अब तो पत्नी और बेटियां भी मेरे खिलाफ हो गए हैं। रत्नवती ने मुझे धमकी दिया है की मैने अब राजेश को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश भी किया तो वे घर छोड़ कर चले जायेंगे।

तभी वहां रत्नवती पहुंची,,,

रत्नवती _मै आपको ये बताने आई हूं कि मैं और गीता आश्रम जा रहे हैं, दिव्या और राजेश की शादी हो रही है। क्या आप भी चलेंगे?

ठाकुर _मुझे इस शादी में कोई इंट्रेस्ट नही। मै उस दो टके के लडके को अपना दामाद स्वीकार नहीं कर सकता।

रत्नवती _ठीक है, पर तुम्हे मेरी बात याद है न शादी में विघ्न डालने की कोई भी कोशिश किए तो,,,,

रत्नवती वहा से चली गईं,,,

इधर शाम तक सुनिता, पदमा कविता स्वीटी शेखर और माखन सभी आश्रम पहुंच गए थे।

सेवा दार उन्हें राजवती के पास लेकर गए।

सेवादार _ये इस आश्रम की माता है, इस आश्रम की फाउंडर । माता जी ये लोग राजेश भईया से मिलने के लिए आए हैं।

राजवती _आप लोग कौन है, और राजेश से क्यों मिलना चाहती हो।

सुनीता _मै राजेश की मां हूं। और ये उनके पिता।

राजवती _ओह बड़ी खुशी हुई आप लोग यहां चल आए। आप लोगो के शादी मे शामिल होना बहुत जरूरी था।

राजवती ने सेवादार से सब के लिए चाय नाश्ता का प्रबंध करने के लिए कहा।

सुनीता _हमे राजेश सी मिलना था, कहा है वो,,,

राजवती _वे दोनो कुछ काम से गए हैं मै उन्हें बुलाती हूं।

राजवती ने दिव्या और राजेश को बुलाने भेजा।

दिव्या और राजेश दोनो कुछ देर में वहां पहुंचे।

राजेश उन सबको वहा देख कर चौंका,,

राजेश _मां आप लोग यहां,,,

राजेश ने सबका पैर छूकर प्रणाम किया। दिव्या ने भी सबका पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

सुनीता _राजेश मुझे तुमसे कुछ बाते करनी है।

अकेले में,,,

राजेश दिव्या की ओर देखने लगा,,,

दिव्या ने हा में इशारा किया,,,

राजेश _क्या बात है मां सबके सामने भी तो कह सकती हो!

सुनीता _नही मुझे तुमसे कुछ पूछना है।

राजवती _बेटा, जाओ अपने कमरे में अपनी मां को ले जाओ,

राजेश और सुनिता कमरे में गए।

सुनीता _ये सब क्या है? तुम जानते हो ठाकुर हमारा दुश्मन है और तुम उसकी बेटी से शादी कर रहे हो, और एक बार अपनी मां से पूछा नही क्या मैंने यही संस्कार दिया है।

राजेश_सॉरी मां मैं फोन करके बताना ही चाहता था, यहां नेटवर्क का इशू था।

सुनीता _राजेश चलो मै तुम्हे यहां से ले जाने आई हूं। तुम मेरे साथ शहर चलोगे।

राजेश _मां ये आप क्या कह रही हो दिव्या जी और मेरी शादी होने वाली है, और तुम मुझे अपने साथ ले जाना चाहतीं हो।

सुनीता _देखो बेटा मै मानती हूं दिव्या एक अच्छी लङकी है पर उसके पिता जी, वो ठाकुर तुम्हे अपना दामाद कभी स्वीकार नहीं करेगा। वो तुम्हे नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा।

राजेश _मां क्या आप चाहती हो तुम्हारा बेटा किसी के नजरो में गिर जाए। जिस लङकी ने मेरी दिन रात सेवा की मेरी जान बचाई, उसे मै जमाने के ताने से मरने के लिए छोड़ दू।

सुनीता _बेटा तुम क्या कहना चाहते हो मै कुछ समझा नही।

राजेश ने सुनिता को सारी बाते सच सच बता दिया, किस प्रकार दिव्या ने उसकी जान बचाने के लिए अपनी इज्जत दाव में लगा दी, और वह आज उसके बच्चे की मां बनने वाली हैं।

उस बच्चे को गिराया नही वह उसे जन्म देने सब कुच छोड़कर इस आश्रम में रहने चली आई। कितना कष्ट सहा है राजेश के लिए उसने।

राजेश _बोलो मां सब कुछ सच जानने के बाद भी क्या तुम चाहती हो मै दिव्या के उसकी हालत पार छोड़कर तुम्हारे साथ शहर चला जाऊ। तो ठीक है चलो मै माता जी से कह देता हूं,,,

सुनीता रुक गई,,

राजेश _मां क्या हुआ?

सुनीता _नही बेटा, सच जानने के बाद, मै जान गई हूं की दिव्या ज्यादा प्यार करने वाली लङकी तुम्हे और नही मिलेगी। अब जो होगा देखा जाएगा बेटा, दिव्या तुम्हारी दुलहन जरूर बनेगी।

राजेश _मां

राजेश ने सुनिता को अपने गले से लगा लिया। मां मुझे यकीन था, तुम यहीं सच जानने के बाद यही फैसला करोगी।

दोनो कमरे से बाहर निकले।

सुनीता _दिव्या बेटी मेरे पास आना।

दिव्या _जी मां जी,,,

सुनीता_बेटी राजेश ने मुझे सब सच बता दिया, उसकी जान बचाने के लिए तुमने क्या कुछ नहीं किया।

तुम एक लङकी नही देवी हो बेटा, तुम मेरी बहु बनो इससे बड़ी खुशी की बात और कुछ नहीं हो सकती।

दिव्या _मां जी मैंने जो कुछ भी किया वो मेरा फर्ज था।

इधर सभी लोग सुनिता के की बात सुनकर हैरत में थे।

सुनीता _अब तो तुम दोनो की शादी धूमधाम से सारी रीति रिवाज और रश्म से करेंगे। कल से ही सारी रस्में सुरु हो जायेगी।

कुछ देर बाद ही वहा रत्नावती और गीता भी वहा पहूंच गई।

रत्ननावती और सुनिता ने शादी की तैयारी शुरू कर दी। अब बचे हुए हर दिन शादी की कोई न कोई रश्म होने लगें।

पूनम भुवन और आरती भी वहा पहूंच गए। शादी के रस्मों में शामिल हुवे।

हल्दी रस्म

सभी बारी बारी से राजेश पर हल्दी लगा रहे थे।

राजेश सिर्फ एक छोटा सफेद कपड़ा कमर पर लपेटा था।

पूनम _ने राजेश के पुरे शरीर पर हल्दी मल रही थी।

सभी औरते आपस में हसी ठिठोली कर रहे थे। राजेश को छेड़ रहे थे।

तभी कविता ने पुनम को इशारा किया।

राजेश _भाभी हो गया न और कितना हल्दी लगाओगी।

पूनम _देवर जी, अभी सभी जगह कहा लगा है। एक जगह तो अभी बांकी है वहा पर हल्दी लगाने का अधिकार भाभी का ही होता है। इसलिए यह जिम्मेदारी मुझे सौंपा गया है।

पूनम ने हाथ में हल्दी लेकर सीधा राजेश के अंडर वियर के अंदर घुसा दिया।

राजेश चौंक गया।

सभी औरते हसने लगे।

पूनम राजेश के लंद और अंडकोष पे अच्छे से हल्दी मलने लगा।

राजेश _भाभी क्या कर रही हो छोड़ों न।

पदमा _बाबुवा लगाने दे अच्छे से तुम्हारी भाभी को सबसे ज्यादा जरूरत तो हल्दी लगाने की यही पर होती है।

सभी लोगो हंसने लगे।

सुनीता भी अपनी मुंह छिपाकर हसने लगीं।

कविता _पूनम अगर तुमने लगा लिया तो हटो मुझे लगाने दो।

पूनम _हा भई जानती हू ऐसी खास जगह पर हल्दी लगाने का अधिकार भाभी की बाद चाची का ही होती है।

पूनम वहा से हट गई। अब कविता ने राजेश के पुरे शरीर में हल्दी मलने के बाद हाथ में हल्दी लेकर राजेश के अंडर वियर में हाथ घुसा दिया, और राजेश के अंडकोष में हल्दी लगाने लगी। उसके लंद को हल्दी और तेल से मूठ मारने लगी।

राजेश गर्म हो गया न चाहते हुए भी उसका लंद खडा हो गया

बड़ा उभार देखकर सब समझ गए की राजेश का खडा हो गया है। सभी मुंह छिपाकर हसने लगे।

राजेश शर्मिंदा हो रहा था।

स्वीटी _मां , देखो तो भईया का घोड़ा तो,,,

सुनीता _चुप बेशरम,,,

सभी औरतों ने बारी बारी से राजेश के पुरे शरीर में हल्दी मला, पर राजेश के लंद पार हल्दी लगाने का अधिकार भाभी और चाची को ही था।

सुनीता ने देखा की राजेश का लंद हल्दी रश्म के बाद भी तना huwa है अभी कुछ और रस्म निभाने है और पुरुष भी उपस्थित रहेंगे।

सुनीता चिंतित हो गई,, अगर ऐसे ही खड़ा रहा तो राजेश पर सब हसेंगे।

राजेश बेटा अब बांकी का रस्म कल करेंगे । जाकर अपने कमरे में आराम करो।

उधर राजवती, गीता और रत्नवती और आश्रम की सेविकाएं, दिव्या के पुरे शरीर में हल्दी मल रही थी। सेविकाओं ने तो दिव्या के boor में भी अच्छे से हल्दी मल दी। दिव्या शर्म से पानी पानी हो गई। सभी औरते हंसने लगी। हल्दी रस्म पूरी होने के बाद।

सभी लोग अपने अपने कमरे मे जाकर सोने लगे।

रात में राजेश आराम कर रहा था। तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

राजेश ने दरवाज़ा खोला..

राजेश _भाभी आप इस वक्त,,,

कुछ काम था क्या?

पूनम _मै ये देखने आई थी कि तुम्हे किसी चीज की जरूरत तो नही।

राजेश _भाभी, मुझे तो किसी चीज की जरूरत नहीं है अभी,,

पूनम _अच्छा देवर जी, फिर ये अब तक खड़ा क्यू है?

पूनम ने राजेश के अंडरवियर के ऊपर से ही लंद को पकड़ कर सहलाते हुए कहा।

राजेश _भाभी, ये क्या कर रही हो छोड़ों कोई आ गया तो।

पूनम _अरे कोई नहीं आएगा। सब सो रहे हैं। मै तो तुम्हारी मदद के लिए ही आई हूं मुझे पता था कि तुम्हारा घोड़ा जब खड़ा हो जाता है तो कुंआ का बिना पानी पिए बैठता नही। इसलिए तुम्हारे पास आई हूं। तुम मेरी कुंवे का पानी अपने घोड़े को पिलाकर इसकी प्यास बुझाओ।

पूनम ने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया। और राजेश का अंडरवियर खीच कर लंद बाहर निकाल कर चूसने लगी।

राजेश पहले ही गर्म था वह और भी गर्म होने लगा। उसका लंद झटका मारने लगा।

तभी किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

राजेश और पूनम घबरा गए।

पूनम _देवर की अब क्या होगा? कही दिव्या जी होगा?

राजेश _एक काम करो तुम बाथरूम में छिप जाओ।

पूनम _बाथरूम में जाकर छिप गई।

राजेश ने दरवाज़ा खोला_चाची आप, इस वक्त कुछ काम था क्या?

सविता _मुझे नींद नहीं आ रही थी तो तुमसे बात चीत करने चली आई।

राजेश _पर इस वक्त?

सविता _क्यू क्या हुआ? तुम तो ऐसे चौंक रहे हों जैसे पहली बार रात में तुम्हारे कमरे में आ रही हूं।

राजेश _पर चाची जगह तो अलग है न।

सविता _मैने खुद को समझाने की बहुत कोशिश की पर मेरा मन नही माना,,,

राजेश _बोलो क्या बात करनी है।

सविता _जब से तुम्हारे मूसल पे हल्दी लगाया है मेरा मन बडा बेचैन है।

मेरे अंदर का पानी बाहर निकल कर मुझे परेशान कर रहा है वैसे भाई कितने दिन हो गए। पानी निकालने के खेल खेले हुए । कल तुम्हारी शादी हो जायेगी। उसके बाद तो तुम दिव्या के ही होकर रह जाओगे। इसलिए आज मेरे शरीर में जो पानी जमा है उसे बहा दो ताकि तुम्हारी यादों में तड़पती न रहु।

सविता राजेश का अंडरवियर खीच कर उसके लंद बाहर निकाल कर चूसने लगी।

राजेश _आह चाची, आह क्या कर रही हो?

आह कोई आ जाएगा?

राजेश सवीता की बालो को सहलाने लगी।

कुछ देर बाद फिर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

दोनो चौंक गए।

सविता डर गई,,,

कौन हो सकता है अब क्या करे?

राजेश _चाची आप आलमारी में छुप जाओ।

सविता अलमारी में छिप गई।

राजेश ने दरवाज़ा खोला।

राजेश _ताई आप इस वक्त, कुछ काम था क्या?

पदमा _तू सोया है कि नही बस पता करने आई थी। हल्दी रस्म के समय तू उत्तेजित हो गया था। तो मुझे लगा की तुम्हे आज ठीक से नींद नहीं आएगी। और देखो मेरा अनुमान सच निकला तुम अभी तक जग रहे हो।

और ये तुम्हारा सांप भी। पदमा ने राजेश के अंडरवियर की ओर इसारा करते हुवे कहा। वैसे सच कहूं तो हल्दी रश्म के समय औरतों की हसी ठिठोली छेड़ छाड़ से मैं भी गर्म हो गई थी, मुझे भी नींद नहीं आ रही थी। इसलीय तुम्हारे पास आई हूं।

पदमा ने राजेश के बेड पर लेट गई और अपनी पेटी कोट और साड़ी ऊपर उठा दी।

पदमा _बेटा, अपनी ताई को आज जमकर बजा और उसकी प्यास बुझाओ।

राजेश बेड में चढ़ गया और अपनी दो उंगलियां पदमा की योनि में घुसा कर अदंर बाहर करने लगा।

फिर अपना खड़ा लंद उसकी योनि में सेट कर गाच से पेल दिया। लंद उसकी योनि को चीरकर आधे से ज्यादा अदंर घुस गया।

पदमा कराह उठी। राजेश ने फिर एक जोर जोर धक्का मारा।

पदमा की boor फाड़कर पुरा अंदर घुस गया लंद का टोपा सीधा उसके बच्चेदानी से टकराया।

पदमा सिसकने चीख उठी।

अब राजेश पदमा की ब्लाउज का बटन खोल कर उसकी चूची को थाम लिया और मसल मसल कर तेज तेज चोदने लगा।

पदमा की सिसकारियां कमरे में गूंजने लगी। पूनम और सविता उसकी सिसकारियां सुनकर और गर्म हो गई। अपनी chut सहलाने लगी।

तभी फिर किसी ने दरवाज़ा खटखटाया।

पदमा और राजेश चौंक गए।

पदमा _बेटा अब क्या होगा? हम पकड़े गए तो बहुत बदनामी होगी।

राजेश _ताई, तुम तुम बेड के नीचे छुप जाओ, मै देखता हूं। कौन है।

पदमा बेड सेउतरी अपने कपड़े ठीककी फिर बेड के नीचे छुप गई।

राजेश ने दरवाज़ा खोला _मां, आप इस वक्त।

सुनीता _हूं देखने आई थी की मेरा बेटा अब तक सोया है कि नही।

तुम्हारे कमरे किसकी आवाज आ रही थी बेटा।

राजेश _मां किसी की भी तो नही, लगता है ये आपका कोई वहम है।

सुनीता _कौन छिपा है बाहर निकलो? नही तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।

तीनो औरते बाहर निकली।

सुनीता तीनो को देखकर सब चौंक गई। पदमा भी पूनम और सविता को देखकर चौंक गई।

सुनीता _ये सब क्या है? कल राजेश की शादी होने वाली है। और तुम लोग, ये हरकत कर रहे हों।

दिव्या या उसके परिवार के किसी को भी पता चल गया तो।

पदमा _सुनिता हमे माफ कर दो, हल्दी रश्म के हसीं ठिठोली छेड़ छाड़ से हम गर्म हो गए थे। नींद नहीं आ रही थी।

तो हमने सोचा कल तो राजेश की शादी हो जायेगी फिर हम उससे संभोग का सुख फिर नही मिलेगा इसलीये हमारा मन नही माना और हम यहां चले आए।

सुनीता _राजेश तुम भी इन लोगो की बात में आ गए।

पदमा _वो क्या मना करेगा बेचारा, उसका तो हल्दी रश्म के बाद से अब तक खड़ा huwa है।

सभी औरते मुंह छिपाकर हसने लगीं।

सुनीता ने राजेश के अंडर वियर की ओर देखा। एक बडा उभार देख कर समझ गई।

राजेश का खड़ा हुआ है।

सुनीता _राजेश तुम क्या चाहते हो?

राजेश _आप लोगो की खुशी।

सुनीता _हमे खुश करने के लिए क्या अपनी बीबीi से धोखा करोगे।

राजेश _मां मैने उसे प्रपोज करने से पहले ही बता दिया था कि मेरे कई औरतों से संबंध है।

सुनीता _क्या?

राजेश _हां मां।

सुनीता _फिर भी वो शादी के लिए मान गई।

राजेश _हा मां।

सुनीता _शादी के पहले तुम्हारे कई औरतो से संबंध भले ही हो पर बेटा मई नही चाहती तुम शादी के बाद भी दिव्या से छिपाकर तुम दूसरी औरतों के साथ संबंध बनाओ।

राजेश _आप ठीक कह रही है, मैं दिव्या जी से छिपाकर किसी से संबंध नहीं बनाऊंगा।

सुनीता _मुझे तुमसे यही उम्मीद है बेटा।

पदमा _पर सुनिता आखिरी बार तो हमें राजेश से संभोग सुख ले लेने दो। फिर हम आपसे वादा करते है। हम राजेश से कभी संभोग के लिए नही कहेंगे।

सुनीता कुछ देर सोची,,

ठीक है पर ये आखिरी बार है जितनी मजा लेना है ले लो।

फिर मौका नहीं मिलेगा।

सभी औरते खुश हो गई।

उसके बाद सभी औरते नंगी। हो गई।

पदमा _सुनिता तू क्यू खड़ी है। तुम भी आखरी बार मजा ले लो अपने बेटे से चुदने का।

पूनम उतार दो सुनिता के कपड़े।

सुनीता की कपड़े उतार कर उसे भी नंगी कर दी।

सभी औरते बारी बारी से राजेश का लंद चूसने लगी।

पूनम _देवर जी तुम मेरा दूदू पियो। दूदू पीने से तुम्हे ताकत मिलेगा। हम चारों की चीखे निकालने के लिए।

राजेश पूनम की चूची पकड़ कर मसल मसल कर गटागट उसकी दूध पीने लगा।

उसके बाद राजेश बेड पर लेट गया।

सविता _पहले कौन सवारी करेगा लंद की।

सुनीता _पहले हक मेरा है मै उसकी मां हूं। इसलिए उसके घोड़े की सवारी पहले मैं करूंगी।

सभी औरते मुस्कुराने लगी।

सुनीता बेड पार चढ़ गई और राजेश के लंद को अपने हाथों से पकड़ कर अपनी योनि द्वार पर रखी और बैठ गई। लंद सरसराता huwa जड़ तक अन्दर घुस गया।

राजेश ने अपने दोनो हाथो से उसकी चूतड पकड़ लिया।

सुनीता उछल उछल कर चुदने लगी।

राजेश भी ऊपर की ओर धक्के लगाने लगा। लंद गच घच्छ अंदर बाहर होने लगा। सुनिता जन्नत में पहुंच गई वह चीखने चिल्लाने लगी।

पदमा _ये रण्डी तो खूब चीख रही है इसकी आवाज सुनकर पुरा आश्रम उठ जाएगा। उसके मुंह में कपड़ा ठूंस।

सविता ने अपनी पेंटी सुनिता के मुंह में ठूंस दिया।

सुनीता कुछ देर में झड़ गई।

अब पदमा ने सुनिता का स्थान ले ली। वह भी लंद पर उछल उछल कर चुदने लगी। उसे चीखती देख पूनम ने अपनी सास के मुंह में अपनी पेंटी ठूस दी।

कुछ देर में ही पदमा भी झड़ गई।

उसके बाद सविता ने पोजीसन सम्हाली। सविता के बाद पूनम भी राजेश के लंद पर उछल उछल कर चुदाने लगी।

और वह भी झड़ गई।

अब राजेश ने सुनिता को kutiya बना दिया और पीछे से अपना लंद उसकी boor में घाप से पेल दिया। फिर दनादन चोदना शुरु कर दिया।

उसके बाद राजेश ने तीनो को घोड़ी बना कर बारी बारी पेलने और उन सबकी चीखे निकालने लगा।

राजेश ने सुनिता को गोद में उठाया और उसे अपने land में बिठा कर हवा में उछाल उछाल कर चोदने लगा। एक एककरके सभी औरतों को इसी पोजीशन में चोदा।

अब राजेश ने सुनिता को घोड़ी बनाया और उसकी गाड़ में लंद घुसा कर पेलना शुरु कर दिया। सुनिता चीखने लगी तो पूनम ने अपनी पेंटी उसकी मुंह में ठूंस दी। उसके बाद बारी बारी से सभी की गाड़ मारकर फाड़ दिया। रात भर चुदते रहे। सुबह चार बजे तक सभी थक कर वही राजेश से लिपट कर सो गए थे। सुबह 5बजते ही वे वहा से निकल कर अपने अपने कमरे में चली गई।
 
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