Incest यह क्या हुआ - Page 3 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

दोस्तों कहानी को अब आगे बढ़ाते हैं

जिम से राजेश घर आ जाता है। घर आने के बाद वह नहा कर। कॉलेज जाने की तैयारी में लग जाता है।

इधर सेखर और स्वीटी दोनों नाश्ता करने के लिए डाइनिंग टेबल पर आ जाते हैं, परंतु राजेश डाइनिंग टेबल पर नहीं पहुंचता।

शेखर राजेश को आवाज लगाता है।पर राजेश कोई जवाब नहीं देता,। तब शेखर उसके कमरे में जाकर राजेश को आवाज लगाता हैं ।

राजेश अपने पिताजी से कहता है ।पापा आज मेरा पेट कुछ ठीक नहीं है आज मैं नाश्ता नहीं करूंगा।

शेखर राजेश से कहता हैं थोड़ा सा कर ले बेटा,पर राजेश मना कर देता। राजेश यह बात सुनीता को जाकर बताता है ।सुनीता आज राजेश की तबीयत ठीक नहीं है, वह नाश्ता नहीं करना चाहता ।

सुनीता समझ जाती है कि राजेश नाश्ता क्यों नहीं करना चाहता , सुनीता शेखर से कहती है ठीक है जी तुम लोग नाश्ता कर लो जब उसका तबीयत ठीक होगा तो वह नाश्ता कर लेगा या कॉलेज के कैटीन मे नाश्ता कर लेगा ।

शेखर -एक बार जाकर देख लो की राजेश की तबीयत कैसी है ,क्यों नाश्ता नहीं करना चाहता।

सुनीता कहती है मैं बाद में पूछ लूंगी तुम लोग नाश्ता कर लो ।

शेखर को कुछ अजीब सा लगा पहले सुनिता तो ऐसे नही करती थी ।

10:00 बजने के बाद राजेश कालेज जाने के लिए तैयार हो जाता है और वह अपनी मां से बिना कुछ बोले ही कालेज के लिए निकल जाता है ।स्वीटू भी उसके साथ चली जाती है ।

इधर सुनीता अपने किचन में राजेश का कॉलेज जाने ने का इंतजार कर रही थी कि वह कुछ बोलेगा लेकिन राजेश सुनिता से कुछ बोलता नही , सुनीता को थोड़ा बुरा लगता है ।वह में सोचती है कि अभी राजेश नाराज होगा । कुछ दिन बाद सब ठीक हो जाएगा ।

उधर कॉलेज जाने के बाद राजेश कॉलेज की कैटिंन मे बैठा था साथ में भगत और उसके अन्य साथी भी बैठे थे।

भगत राजेश से कहता है भाई आज कुछ बोल नहीं रहा है ।गुमशुम सा हो कुछ बात है क्या ?क्लास का समय हो रहा है आज क्लास अटेंड नहीं करनी है क्या?

राजेश कहता है नहीं यार आज क्लास अटेंड करने का मन नहीं है तुम लोग जाओ क्लास अटेंड करना है।

भगत कहता ह भाई कुछ प्रॉब्लम है क्या ?बताओ मुझे।

राजेश कहता है कुछ नहीं यार, बस ऐसे हीा बस आज मन थोडा ठीक नही ।

तभी भगत को किसी का काल आता है किसी लड़के का काल था। लड़के ने भगत को बताया कि भाई जिन लड़कों ने राजेश भाई पर हमला किया था ।वे लड़के लोग पूल के नीचे पार्टी कर रहे है ।

यह बात भगत ने राजेश को बताता है ।राजेश इस समय गुस्से में था। उसका गुस्सा और बढ़ जाता है।

राजेश अपने मन में कहता हैं इन भोसड़ी वालों को मैं नहीं छोडूंगा इन साले के कारण आज मेरी ये हालत हुई है ।और वे साले मजे कर रहे है ।

वह भगत से कहता है इन सालों को आज मैं छोडूंगा नहीं और वह अपना बाईक लेके निकल पड़ता है । भगत कहता है रूको भाई हम भी आते है ।

भगत अपने साथियो से कहता है।चलो रे भाई के साथ।

वे सभी राजेश के पीछे पीछे अपने बाइक लेकर जाने लगते हैं।

राजेश पुल के नीचे पहुंच जाता है सभी लोग गाड़ी खड़ा करके रूके थे ।राजेश लड़कों की तरफ आगे बढ़ता है ।भगत राजेश से कहता हैं भाई तुम यहीं रुको उन सालों को हम लोग सबक सिखा कर आते हैं।

राजेश कहता हैं नहीं तुम लोग यहीं रुको इन सालों को अकेले ही सबक सिखाऊंगा, पर भगत राजेश से कहता हैं भाई मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूं। लड़के लोग को वहीं ठहरने के लिए कह देता है। पर राजेश कहता हैं नहीं तुम भी यही ठहरो ।मैं अकेले ही जाऊंगा ।

राजेश अकेले ही उन लड़कों की तरफ चला जाता हैं।

एक लड़का ,राजेश को आते हुए देखता है और कहता है ।भीमा भाई यह तो वही लडका है जिसका हमने पिटाई किया था। हमारे तरफ ही आ रहा है ।

भीमा उन लड़कों के लीडर का नाम था, भीमा कहता है लगता है । लगता है साला फिर मार खाने आया

है।

जब राजेश लड़कों के पास जाकर खड़ा हो जाता है तब भीमा कहता है क्यों बे लल्लू और मार खाने के लिए चला आया ।

राजेश करता है बहनचोदो , लल्लू नहीं तेरा बाप आया है। तुम लोग को सबक सिखाने।

राजेश पर उन लड़कों को बहुत गुस्सा आता है एक लड़का गुस्से में आकर राजेश के पास जाकर अपने मुक्क से हमला कर देते हैं।

राजेश लड़के कि प्रहार को अपने एक हाथ से रोक देता है और दूसरे हाथ से जोर का मू क्का उसके पेट पर लगाता है ।वह लड़का हवा में उछलता हुआ, अपने साथी लड़कों के पास जाकर गिरता है।

उसकी हालत देखकर दो लड़के राजेश की ओर दौड़ते हैं ।दोनों लड़के राजेश पर मुक्के से हमला करते हैं।

राजेश दोनों लड़कों के प्रहार को हाथ से रोक लेता है। राजेश एक लड़के के पेट पर लात से और एक लड़के की गाल पर पर मुक्के से प्रहार कर देता है ।राजेश के प्रहार से दोनों लड़के हवा में उछलकर दूर जा कर गिर जाते हैं।

शेष लड़के राजेश पर एक साथ टूट पड़ते हैं। राजेश उन सभी लड़कों पर भारी पड़ता है।

राजेश उन लडके को बुरी तरह से पिटने लगता है सभी लड़की जमीन पर पड़े करा ने लगते हैं ।एक लड़का कहता हैं ।यह साला जानवर बन गया है ।हम लोगो को छोड़ेगा नहीं भाई हमें भाग कर अपनी जान बचाना पड़ेगा ।

भीमा को अपने साथियों की हालत देखकर कुछ घबराहट होने लगता है । वह भी राजेश पर हमला कर देते हैं। राजेश भीमा के प्रहार को रोक कर उसे बुरी तरह लात घुसा से पिटने लगता है ।

राजेश के रौद्र रूप को देखकर सभी लड़के अपनी जान बचा कर भाग जाते हैं ।इधर भीमा अकेला पड़ गया ।राजेश उसे बुरी तरीके से लात घुसाे से पीटता है भीमा की हालत खराब होने लगता है वह भगत से माफी मांगने लगता है । पर राजेश रूकता नही ।

तभी भगत को लगता है कि अगर वह राजेश को नही रोकेगा तो अनर्थ हो जाएगा। वह तेजी से राजेश को रोकने उसके पास जाता है। राजेश से कहता हैं भाई उइसे छोड़ दो नही ते ये मर जाएगा ।मर जाने दे साले को ,राजेश भीमा को बूरी तरह पिटाई करता रहता है।

भगत राजेश को पकड़ लेता है ।वह राजेश से कहता है ।भाई उसको छोड़ो नहीं तो मर जाएगा।

राजेश कहता है भगत छोरा मुझे साले को आज छोडूंगा नहीं। तभी भगत के अन्य साथी भी आ जाते है राजेश को पकड़ लेते वे राजेश से कहते है , भैया छोडो इसे, जाने दो नहीं ये तो मर जाएगा ।

सभी लड़के जब राजेश को पकड़ लेते हैं ,तब भीमा भी अपनी जान बचाकर किसी तरह कराहते हुए लंगड़ाते हुए भागने लगता है ।

इधर भगत कहता है भैया यह साले बचकर जाएंगे कहां इन सालों को पुलिस वाले भी कुत्ते की तरह ढूंढ रहे हैं।

राजेश गुस्से में था वह बाइक चलाने की स्थिति में नहीं था ।भगत राजेश इसे कहता हैं। भाई अभी तुम बहुत गुस्से में हो ,तुम गाड़ी चलाने की हालात में नहीं हेो।

भगत अपने साथी लड़का से कहता हैं अरे पप्पू गाड़ी चला लड़का गाड़ी स्टार्ट करता हैं । भगत ,राजेश को गाड़ी पर बैठने के लिए कहता है ।राजेश गाड़ी पर बैठ जाता। भगत जी उसके पीछे बैठ जाता है पप्पू भगत से कहता चलना कहां है भैया। राजेश बीच बीच मे बडबडाता रहता है शालो को छोडूंगा नही ।

भगत कहता हैं अब ऐसी हालत में कॉलेज जाना ठीक नहीं है। गाड़ी मेरे किराये के घर की ओर ले चल।

पप्पू कहता है ठीक है भैया।

राजेश का गुस्सा शांत नहीं हुआ था। भगत और पप्पू के बीच क्या बातचीत हो रही है ।उस पर उसका ध्यान ही नहीं था ।त भी तीनों बाइक में भगत जहां किराए पर रहता था वहां पहुंच जाते हैं ।मकान कालेज के पास ही थ ।

साथी लड़के भी बाइक लेकर पीछे पीछे पहुंच जाते ,भगत उन्हे आवश्यक सलाह देकर उन लड़कों को कॉलेज के लिए भेज देते हैं।

लड़के अपनी बाइक लेकर कालेज चले जाते हैं

राजेश भगत से कहता हैं अबे तू मुझे यहां क्यों ले आया ।

भगत कहता है भाई तेरा मन ठीक नहीं है आज तुम मेरे रेंट के घर में आराम करना और जब मूड ठीक हो जाये तब घर जाना ।

घर के मेन दरवाजा अंदर से बंद था भगत दरवाजा खटखटाता है।

कौशल्या देवी दरवाजा खोलती है अरे बेटा तुम कॉलेज से आज जल्दी घर आ गए ।

भगत कौशल्या देवी से कहा मा जी आज कालेज में मन नहीं लगा तो घर आ गए। मां जी इसे पहचाना।

कौशल्या देवी राजेश को गौर से देखने लगती है ।अरे यह तो राजेश है न जिसने तुम्हारे अंकल को रक्त देकर मदद किया था।

हां मा जी आपने बिल्कुल सही पहचाना यह मेरा दोस्त राजेश है ।

कौशल्या देवी राजेश से पूछती है ।कैसे हो बेटे?

पर राजेश कोई जवाब नहीं देता।

भगत कौशल्या देवी से कहता है ।मा जी अभी राजेश भाई का मुंड ठीक नहीं है इसलिए मैं इसे अपने यहां ले आया ।

कौशल्या देवी पूछती है क्या हुआ बेटे राजेश को ।

भगत कहता हैं मैं बाद में बताऊंगा ।मां जी।

भगत राजेश को लेकर ऊपर अपने रूम में ले जाता ह। कौशल्या देवी जानना चाहती थी कि आखिर राजेश को हुआ क्या है ?

इधर घर में राजेश की मां सुनीता जब नाश्ता करने के लिए डाइनिंग टेबल पर बैठती है ।और जैसे ही वह नाश्ता का टुकड़ा अपने मुंह में ले जाने को होती है। वह स सोचने लगती है पता नहीं राजेश कुछ खाया होगा कि नहीं । आज की घटनाओ से उसका भी मन कुछ अच्छा नहीं लग रहा था ।उसे भी खाने का मन नहीं किया।वह नाश्ता को किचन में रख देती है ।

इधर राजेश और भगत बेड पर लेटे हुए थे ।राजेश अपनी सोच में डूबा हुआ था। तभी भगत सिगरेट जलाने लगता है। वह कभी कभार सिगरेट भी पीता था। राजेश की नजर उस पर पड़ता है वह सिगरेट को खींच कर भगत के मुंह से हटाकर अपने मुंह में दबा लेता है ।

भगत को आश्चर्य होता है । वह कहता है भाई यह क्या कर रहे हो ।

राजेश ने कहां हा मुझे भी सिगरेट पीना है , अब मैं वह हर काम करूंगा जो अभी तक नहीं किया है। अब मैं भी हूं गर्लफ्रेंड बनाऊंगा आप उसके साथ वेो सब करूंगा जो तू करने कहता था ।

भगत कहता हैं भाई कोई बात है क्या ? तुम बताते क्यों नहीं ? वह सोचता राजेश भाई मे इतना बदलाव कैसे आ गया ।

राजेश कहता हैं हां मैं बदल गया हूं अब मै वह सब करूंगा जो अभी तक नहीं किया था ।अबे तू सिगरेट जलायेगा या देखता रहेगा।

भगत कहते हैं जलाता हू भाई। भगत सिगरेट जलाता है ।

राजेश सिगरेट पीने लगता है। लेकिन उसका पहली बार था ।इसलिए वह खासने लगता है ।

भगत कहता है भाई आराम से , धीरे-धीरे पीना सीख जाओगे। मैं सिखा दूंगा ।

सिगरेट पीने के बाद राजेश फिर उन लड़कों के बारे में सोचने लगता हैं उन लड़कों की लड़कों के कारण मेरा यह हाल हुआ है मैं उन सालों को को छोडूंगा नहीं। उसे फिर गुस्सा आने लगते हैं। वह भगत से फिर सिगरेट मांगने लगता है, पर भगत सिगरेट नहीं देता। भाई अभी तुम्हारा मूड ठीक नहीं है तुम आराम कर लो ।ज्यादा सिगरेट पीना ठीक नही ।

भगत राजेश से कहता है भाई तूम आराम कराे मै थोडा नीचे से आता हू।

भगत नीचे चला जाता हैा कौशल्या देवी इस समय नीचे घर का काम कर रही थी ।

भगत को देखकर कौशल्या देवी पूछती है बेटा राजेश को क्या हुआ ।भगत कौशल्या देवी के पूरी बातें बता देता है।

भगत कौशल्या देवी से कहता मां जी राजेश का मुड ठीक नहीं है ।वह बहुत गुस्से में है, पर तुम उसकी मदद कर सकती हो ,जिससे उसका गुस्सा शांत हो जाएगा। उसका मूड ठीक हो जाएगा ।

कौशल्या देवी भगत से कहती हैं । बेटे मै कैसे मदद कर सकती हूं ।

भगत कहता हूं मा जी ऐसे समय में यदि मर्द को औरत का प्यार मिल जाता है तो उसका मूड भी ठीक हो जाता है और गुस्सा भी शांत हो जाता है । राजेश ने बुरे समय में रक्त देकर रक्त तुम्हारी मदद किया था। आज उसे औरत का प्यार देकर तूम राजेश भाई की मदद कर सकती हो।

कौशल्या देवी सोच में पड़ जाती है वह क्या जवाब दे। अंत में वह अपन् मन मे कहती है है कि उसे राजेश की मदद करनी चाहिए क्योंकि उसने भी बुरे समय में उसकी मदद की थी।

कौशल्या भगत से कहती है ठीक है बेटा मैं कोशिश करूंगी ।पर मैं यह सब तुम्हारे सामने नहीं कर पाऊंगी

भगत कहता है , ठीक है मा जी मै राजेश से बहाना बना कर कॉलेज चला जाऊंगा, ताकि तुम्हें राजेश की मदद करने में कोई दिक्कत ना हो ।कौशल्या देवी कहती है ठीक है बेटा।
 
भगत राजेश के पास जाता है और उससे कहता है। भाई राजेश कॉलेज से पप्पू का फोन आया था। कॉलेज में कुछ जरूरी काम है। मुझे जाना होगा ,तुम आराम करो, मैं कॉलेज से होकर आता हूं। मैंने मां जी से कह दिया है ।वह तुम्हारा ख्याल रखेगी।

राजेश कहता है अबे जा साले ,मेरी तो किसी की चिंता ही नहीं और हां जल्दी आ जाना और अपना सिगरेट का पैकेट मुझे दे।

भगत कहता हैं भाई ज्यादा सिगरेट मत पीना ।ज्यादा सिगरेट पीना शरीर के के लिए नुकसानदायक होता है।

राजेश कहता है अबे पैकेट दे ,ज्यादा ज्ञान मत बांट।

भगत राजेश को सिगरेट का पैकेट दे कर कालेज चला जाता है ।इधर राजेश सिगरेट निकाल कर पीने लगता है ।ठीक उसी समय कौशल्या देवी पानी लेकर कमरे में आती हैं ।राजेश के पास जाकर कहती है बेटा पानी पी लो ।मैं तुम्हारे लिए पानी लाई हूं ।

राजेश को सिगरेट पीता हुआ देखकर वह कहती है ,यह क्या बेटे तुम सिगरेट पी रहे हो ।यह सेहत के लिए हानिकारक होता है। तुम तो एक अच्छे लड़के, तुम्हें इसे नहीं पीना चाहिए ।

राजेश कहता हूं मां जी आज मेरा मूड ठीक नहीं है।

कौशल्या देवी कहती है ,हां बेटा मैं जानती हूं ।आज तुम्हारा मूड ठीक नहीं है ।मुझे भगत ने सब कुछ बता दिया है ।बेटा इतना गुस्सा करना ठीक नहीं है। लो पानी पी लो तुम्हें ठीक लगेगा ।

राजेश कहता है ,पानी का गिलास टेबल पर रख दो मा जी। मैं बा़़़द मे पी लूंगा ।

सुनीता देवी कहती हैं, ठीक है बेटा और वह पानी का गिलास टेबल पर रख देती है।

सुनीता देवी वहीं राजेश के बगल में बेड पर बैठ जाती है और राजेश के मूह से सिगरेट को खींचकर उसे बुझाने लगती है ।बेटा सिगरेट सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। इसे मत पियो ।तुम एक अच्छे लड़के हो और अच्छे लड़के सिगरेट नहीं पिया करते ।

मैं तुम्हारी मनोदश अभी समझ सकती हूं ,पर इतना गुस्सा करना भी ठीक नहीं है ।लड़कों को पुलिस वाले खोज रहे हैं। कानून उन्हे सजा देगी।

सुनीता देवी की नजर राजेश के कपड़ों की ओर जाती है । वह देखती है कि राजेश का जींस एवं सर्ट पर जगह-जगह धूल लगा हुआ था ।राजेश से कहती है बेटा तुम्हारे कपड़े तो गंदा हो गया है । अगर इस हालत में तुम घर गए तो तुम्हारे घर वालों को पता चल जाएगा कि तुम किसी से लड़ाई झगड़ा करके आए हो ।

राजेश अपने कपड़े की और देखता है सच मेउसके कपड़े गंदे हो गए थे उसमें जगह-जगह धूल जमा हो गया था।उसे लगा सच में मैं इन कपड़ों में ऐसे ही घर जाउंगा ,तो घर वालों को इसका पता चल जाएगा जो वह नहीं चाहता था।

सुनीता राजेश से कहती है बेटा एक काम करो तुम अपने सारे कपड़े निकाल दो मैं ईसे धो देती हूं। धो कर सुखा कर उसे प्रेस कर दूंगी ।जाते समय पहन लेना ।

राजेश को भी उचित लगा ।

सुनीता देवी एक टावेल लाकर राजेश को दे देती है, बेटा तुम इस टावेल को लपेट लेना और अपने सारे कपड़े उतार कर मुझे दे दो ।पर राजेश चूप था ।

क्या सोच रहे हो बेटे मैं तुम्हारी मां जैसी हूं ।तुमने अपना खून देकर मेरे पति की जान बचाई है,तो मैं तुम्हारे लिए इतना नहीं कर सकती ।

सुनीता देवी पानी का गिलास उठा लेती है और कहती है लो पानी पी लो तुम्हें अच्छा लगेगा। वह गिलास उठाकर राजेश के माुख के पास ले जाती हैं ।

राजेश गिलास से ना चाहते हुए भी पानी पीने लगता है।

पानी पीते हुए उसकी नजर सुनीता देवी पर जाती है राजेश को अपनी मां की याद आने लगती है ।वह सोचता है ऐसा प्यार तो एक मां ही कर सकती है।

राजेश कौशल्या देवी से कहता है मां जी मुझे माफ कर देना ।मैंने आपके साथ बुरा बर्ताव किया। मैंने आपकी बातों का रिप्लाई नहीं दिया। आपको बुरा लगा होगा ।

कौशल्या देवी- नहीं बेटा मैने बुरा नहीं माना ।तुम्हारी स्थिति ही ऐसी है कि तुम्हारे जगह कोई और भी होता तो यही करता । बेटा अपने कपड़े उतार कर मुझे दे दो ,मैं इसे धो दूंगी ।

राजेश बेडसे उतर जाता है और अपना कपड़ा उतारने लगता है। वह जींस और सर्ट निकालकर टावेल लपेट लेता है ।

कौशल्या देवी कहता है बेटा तुम्हारे बनियान से तो पसीने की बू आ रही है। तुम बनियानभी निकाल दो ।यह गंदा हो गया है। राजेश को असहज महसूस करते हुए देखकर कौशल्या देवी ने कहा। बेटा तुम मेरे से शरमाओ मत। अपनी मां जैसी समझो।

राजेश अपने बनियान भी निकाल कर कौशल्या देवी को दे देता है ।बनियान निकलते ही राजेश का गठीला बदन देखकर कौशल्या देवी मोहित सी हो जाती है ।

वह राजेश से कहती है बेटा तुमने तो बहुत ही अच्छी बॉडी बनाई है ।तभी तुम उन लड़कों पर अकेले ही भारी पड़ गए ।राजेश अपने बदन को कौशल्या देवी को देखते हुए पाकर ।असहज महसूस करने लगा।

कौशल्या देवी मुस्कुराने लगी। कौशल्या देवी कहती है अच्छा मै न जाती हूं तुम कमरे मे आराम करो किसी चीज की जरूरत हो तो मुझे आवाज देना।

कौशल्या देवी कपड़े लेकर नीचे चली जाती है ।इधर राजेश टावेल लपेटकर बेड पर लेट कर ,आज हुई घटना को सोचता रहता है।

नीचे जाकर कौशल्या देवी राजेश के कपड़े को एक बाल्टी में पानी डालकर डुबा देती है और उस पर वाशिंग पाउडर डाल देती है ।कौशल्या देवी सोचने लगती है कि वह आगे क्या करें। ताकि वह राजेश को एक औरत का प्यार दे पाएं ताकि उसका गुस्सा शांत हो जाए और उसका मूड भी ठीक हो जाए ।

तभी उसके मन में आगे बढ़ने का एक विचार आया औरं वह राजेश के कमरे में चली गइ ,वह देखती है कि राजेश फिर से सिगरेट पी रहा है।

कौशल्या देवी कहती है ,यह क्या बेटा, तुम फिर से सिगरेट पीने लगे ,मै जानती थी कि तुम ऐसा ही करोगे।वह राजेश के पास जाकर उसके मूह से सिगरेट खीचकर ,उसे बुझा कर फेंक देती है।

राजेश कहता है मा जी मुझे पीने दो ।मेरा मूड ठीक नहीं है । नहीं बेटा मैं तुम्हें और सिगरेट पीने ने नहीं दूंगी अब मैं तुम्हें यहां अकेले नहीं रहने दूंगी, तुम चलो नीचे मेरे साथ, नहीं तो फिर से सिगरेट पीना शुरू कर दोगे। और वह राजेश के ना चाहते हुए भी उसके हाथ को खींचते हुए ,नीचे ले गया और वह अपने बेडरूम में ले गया ।

वह बोली ,बेटे तुम, मेरे बेडरूम में आराम करो तब तक मैं तुम्हारे कपड़े धो लेती और नहा लेती हूं ।

राजेश को कुछ असहज महसूस कर रहा था जिसे भापकर ,कौशल्या देवी ने कहा बेटा तुम्हें डरने या घबराने की जरूरत नहीं,घर मे इस समय कोई नहीं आने वाला है। तुम्हें डरने या घबराने की जरूरत नहीं है ।अब मैं बाथरूम में तुम्हारे कपड़े धोकर नहा लेती हूं ।

और कौशिल्या देवी हाल के बाथरूम में चली गई। इधर राजेश बेड पर लेट गया और फिर से अपने विचारों में खो गया ।

इधर कौशिल्या देवी राजेश के कपड़ों एवं अपने का घर के कपड़ों को धोने के बाद नहाने की तैयारी करने लगी वह अपने साड़ी और ब्लाउज निकाल दी और वह सिर्फ़ पेटिकोट मेथी। वह नहाने लगी। अपने बदन पर साबुन लगाने लगी। वह अपने पीठ पर भी साबुन लगाना चाहती थी, पर हाथ वहां तक नहीं पहुंच पा रहा था ।राजेश को करीब लाने का एक अच्छा बहाना मिल गया था ।

वह अपने पेटिकोट को एक हाथ से पकड़े हुए थी और दूसरे हाथ से बाथरूम का दरवाजा थोड़ा स खोल कर राजेश को आवाज लगाती है ।बेटा राजेश ,बेटा राजेश

इधर राजेश बेड में अपने विचारों पर मग्न था। कौशिल्या देवी की आवाज सुनते ही वह अपने विचारों से बाहर आया। बाथरूम की ओर गया और कौशल्या देवी से कहा ,मां जी कुछ काम था।

हां बेटे क्या तुमने मेरी मदद करोगे ?कौशल्या देवी राजेश ने कहा ।

कैसी मदद मा जी ।

बेटा मेरे हाथ पीठ पर नहीं पहुंच पा रही है ।क्या तुम मेरे पीठ पर साबुन लगा दोगे ?

राजेश कुछ असहज महसूस करने लगा। वह समझ नहीं पा रहा था कि वह क्या बोले ?

कौशल्या देवी ने कहा लगता है बेटा तुम्हें अच्छा नहीं लगेगा ।ठीक है बेटा तुम जाओ ।कमरे में आराम करो। मैं ऐसे ही नहा लेती हूं ।

राजेश ने कहा नहीं मा जी ऐसी बात नहीं है ।चलो मैं साबुन लगा देता हूं ।और दानाे बाथरूम के अंदर घुस गए ।

कौशल्या देवी नीचे बाथरूम पर बैठ गई और अपने पेटिकोट के नाड़े को खोल दी और पेटीकोट को थोड़ा ढीला कर दी और अपने पीठ से पेटिकोट को थोड़ा नीचे सरकार दीऔर बोली , बेटा तुम पीठ पर साबुन लगा दो।

राजेश को कौशल्या देवी को ऐसी अवस्था में देखकर उसके शरीर में रक्त प्रवाह तेज होना शुरू हो गया ।वह साबुन उठाया और कौशल्या देवी की पीठ पर लगाने लगा ।

कौशल्या देवी को भी मर्दाना हाथ अपने शरीर पर महसूस होने पर, वह भी गर्म होने लगी।

कौशल्या देवी बोली, बेटा थोड़ा और नीचे लगादो और पेटीकोट को ढीला कर दी, ताकि राजेश का हाथ पूरे नीचे तक जा सके।

इधर राजेश भी गर्म होने लगा ।उसके लंड की ओर रक्त का प्रवाह तेज हो गया ।आखिर उसने भी पिछले कई दिनों से मुठ नहीं मारा था ।एक जनाना को ऐसी अवस्था में इतने करीब पाकर। वह भी गर्म होने लगा और कौशल्या देवी के पीठ पर साबुन लगाने मे उसे भी आनंद आने लगा ।

कौशल्या देवी ने बोला , बेटा पीठ पर साबुन लगाने में तो दिक्कत नहीं हो रही है ।मैं पेटीकोट को और थोड़ा ढीला कर देती हूं तीकि तूम् अच्छे से साबून लगा सको और पेटिकोट को अपनी चुचियों के नीचे ले गई।

वह राजेश से बोली , ठीक से लगा दो बेटा मैने कई दिनों से मेरी पीठ पर साबुन नहीं लगाई है ।जिससे पीठ पर खुजली होती है ।तुम अच्छे से रगड़ कर साबुन लगा दो ।

इधर राजेश की नजर कौशल्या देवी की चुचियों पर पड़ी ।उसकी गेल गोल बडी बडी सुंदर चुचियों को देखते ही ,उसका लंड खड़ा हो गया और खड़ा होकर ठुमकने लगा।

राजेश भी अब जोश में आने लगा । वह अपनी मां की चुचियों को अपने हाथे से मसलना चाहता था। उस से खेलना चाहता था। उसकी मा ने मना कर दिया । आज एक चूची उसके सामने थी ।उसके मन में इस से खेलने की इच्छा होने लगी ।

वह कौशल्या देवी के पीठ पर साबुन लगाते हुए। उसके पीठ को सहलाना शुरू कर दिया ।सहलाते हुए उसका हाथ कौशल्या देवी के चूची की तरफ जाने लगा।

कौशल्या देवी भी गर्म हो गई थी ।वह भी आंखें बंद कर मजा लेने लगी थी ।

इधर राजेश का हाथ कौशल्या देवी की चुचियों तक पहुंच गया और उसके सूचियों पर भी साबुन लगाने लगा।

उस की चूची पर हाथ पढ़ते ही कौशल्या देवी की सांसे तेज होने लगी ।उसके शरीर में सिहरन दौड़ने लगी ।

राजेश ने जब देखा कि कौशिल्या देवी ने कोई विरोध नहीं किया और वह आंखें बंद कर मजा ले रही है ,उसका हिम्मत बढ़ गया ।वह साबुन लगाते हुए कौशल्या देवी के चूची को मसलने लगा ।

कौशल्या देवी राजेश की इस हरकत से सिसकने लगी जिसे राजेश को पता चल गया की मा जी को भी मजा आ रहा है ।

राजेश भी अब जोश में आ गया ।वह अपने दोनों हाथों पर साबुन लगा कर ।दोनों चुचियों पर साबुन लगाते हुए उसे मसलने लगा।

कौशल्या देवी आंखें बंद करें सिसकने लगी । उसकी चुचिया फूलने और पिचकने लगी उसके चूचक कड़क हो गए।

इधर राजेश का लंड लोहे की राड की तरह सक्त होकर ठुनकी लगाने लगा ।राजेश को भी कौशल्या देवी के चूची को मसलने में बहुत मजा आने लगा ।राजेश अपने दोनों हाथों से कौशल्या देवी के चुचियो पर साबुन लगा लगाकर मसलने लगा। उससे खेलने लगा।

कौशल्या देवी और राजेश दोनों के अंदर हवस जाग चुका था ।

कौशिल्या देवी ने अपनी आंखें होली उसने कहा बस बेटा बस हो गया ।

इधर राजेश को मसलने में बहुत आनंद आ रहा था। उसका मन रुकने का नहीं हो रहा था ।लेकिन कौशल्या देवी के मना करने पर वह रुक गया ।

कौशिल्या , राजेश से बोली बेटा तुम्हारे शरीर से पसीने की गंध आ रही है ।तुम भी नहा लो। नहाने से तुम्हें अच्छा और हल्का महसूस होगा ।तुम्हारे मन शांत होगा। तमे ताजगी महसूस होगी ।

इधर राजेश जोश में था ।वह कौशल्या देवी की बातों को मानने लगा। ठीक है मा जी ।

कौशल्या देवी राजेश से बोली ,बेटा तुम्हारे पास अंडरवियर एक हीं है । तुम अपना अंडरवियर निकाल दो ।नहीं तो वह गीला हो जाएगा। उसे सूखने में काफी समय लगता है।

राजेश ने कहा ठीक है मा जी और वह टावेल और अंडरवियर दोनों को निकाल कर नंगा हो गया।वह टावेल और अंडरवियर बाथरूम के बाहर रख दिया।

राजेश के नंगा होते ही कौशल्या देवी की नजर राजेश के लंड पर पड़ी वह राजेश की लंड को आश्चर्य से देखने लगी। राजेश का लंड* कितना बड़ा लंबा और मोटा है। उसका लंड* देखकर उसके चूत मे खलबली मचने लगी । वह रस छोड़ने लगी।

कौशिल्या देवी उसके लंड देख कर मुस्कुराने लगी।

राजेश भी इस समय जोश में था। उसका लंड अधनंग जनाना को अपने करीब पाकर, हवा में लहरा रहा था। ठुमका लगा रहा था ।कौशल्या देवी को उसके लंड की ओर देखना उसे अच्छा लगने लगा।

कौशल्या देवी ने सावर चालू कर दी ।दोनों सावर के पानी से राजेश नहाने लगे। कौशल्या देवी ने कहा बेटा सावर बंद कर दी बोली ,बेटा मैं तेरी शरीर पर साबुन लगा देती हूं ।

कौशल्या देवी उसके शरीर पर साबुन लगाने लगी वह पूरे शरूर पर साबून लगाते लगाते, राजेश के लंड की ओर आगे बढ़ने लगी।

जब साबुन लगाते लगाते उसकी हाथ राजेश के लंड पर गई ।कौशल्या देवी के शरीर में सिहरन दौड़ने लगी।

कौशल्या देवी राजेश के लंड पर साबून लगाने लगी । इस समय राजेश का लंड तन कर खड़ा हुआ था कौशल्या देवी कि हाथ पढ़ते हैं वाह ठूमकने लगा। कौशल्या देवी राजेश के लंड को सहलानेने लगी।

राजेश आनंद के मारे ,अपनी आंखें बंद कर लिया।

कौशल्या देवी को महसूस हुआ कि राजेश मजा आ रही है और आनंद मे अपनी आंखें बंद कर दिया है। वह उसके लंड को मुठ मारने लगी ।जिससे राजेश को अत्यधिक आनंद आने लगा।

राजेश ने अपनी आंखे खोला ।कौशल्या देवी इस समय के पेटीकोट में थी। उसकी चूचियां पेटीकोट से बाहर थी। राजेश की नजर उस की चुचियो पर पड़ी। राजेश कौशल्या देवी की चूचियो को अपने हाथों मेरे लेकर मसलने लगा ।

इधर कौशिल्या सिसकने लगी । वह राजेश के लंड को तेज तेज मुठ मारने लगी तभी राजेश की इच्छा लंड चूसाने का होने लगा ।राजेश ने कौशल्या देवी के हाथों को मुठ मारने से रोक दिया और उसे अपने हाथों से उसके कंधे को दबाकर नीचे बैठने का इशारा किया।

कौशिल्या देवी नीचे बैठ गई।राजेश ने अपना लंड कौशल्या देवी के मुख्य के पास ले गया ।कौशल्या देवी रीजेश की ओर देखी राजेश ने इशारा किया ।वह समझ गई कि राजेश क्या चाहता है ।वह अपना मुंह खोल कर राजेश के लंड* की सुपाडा को अपने मुंह में भर लेती है और धीरे-धीरे लंड को अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगती है ।

इधर राजेश अपने लंड को कौशल्या देवी के मुंह के अंदर बाहर होते हुए देख कर और उत्तेजित होने लगा।

वह अपने दोनों हाथों से कौशल्या देवी के रसिर के बालो को पकड़कर अपने लंड को उसके मुंह के अंदर डालने की कोशिश करने लगा।

कौशल्या देवी राजेश के लंड को जितना अंदर तक ले सकती थी ।अंदर लेने लगी।

राजेश का लंड बहुत लंबा था। उसे पूरा अंदर लेने में न परेशानी होने लगी ।वह जितना अंदर ले सकती थी। लंड को अंदर लेकर चूसने लगी। लंड उसके मुंह में गपा गप अंदर-बाहर होने लगा ।

राजेश को लंड चूसवाने में बहुत मजा आने लगा ,उसके मुंह से आवाज निकलने लगी ।माजी और चूसो बहुत मजा आ रहा है हां मा जी ऐसे ही चुस्ती रहो।

राजेश जोश में आकर अपना कमर हिला कर अपने लंड को कौशल्या देवी के मुंह में ठेलने लगा।

लंड कौशल्या देवी के मूह में गपा गप अंदर बाहर होने लगा। राजेश को बहुत ही मजा आ रहा था ।

इधर कौशल्या देवी को लगा कि अगर वह ऐसे ही चूस्ती रही तो राजेश झड़ जाएगा ।वह चूसना बंद कर दी वह नहीं चाहती थी ,कि राजेश अभी झड़ जाए।

चूसना बंद होती है राजेश ने अपनी आंखें खोली। वह बहुत ही जोश में था ।उसे कौशल्या देवी के द्वारा चूसाई रोकना पसंद नहीं आया ।

वह कौशल्या देवी से बोला माजी चूसना क्यो बंद कर दी ,बहुत मजा आ रहा था।

कौशल्या देवी बोली बेटा तुमने किसी औरत को भोगा है।

राजेश ने कहा ,जी मैं समझा नहीं मा जी ।

बेटा मेरा मतलब है कि तुमने किसी औरत का बूर चोदा है।

राजेश शर्मा गया ,वह बोला नहीं माजी ।मैने तो किसि ऐरत का बूर देखी भी नही है।

कैशिल्या- बेटा क्या बूर चोदोगे ।

राजेश के शरीर में कौशल्या देवी की बात को सुनकर सनसनाहट होने लगा ।उसके दिल की धड़कन बढ़ गई उसने कहा कहा क्या माजी तुम मुझे अपनी बूर चोदने दोगी ।

कौशल्या देवी ने कहा तुम्हारा मस्त लंड को देख देखकर मेरा भी मन चुदवाने का हो रहा है ।

राजेश ने कहा मां जी मैंने आज तक किसी औरत का बूर नहीं देखा ,दिखाओ न मुझे अपनी बूर*।दिखाओ ना मा जी ।

ठीक है बेटा मैं तुम्हें अपना बूर दिखाऊंगी और तुम्हें बूर चोदना भी सीख आऊंगी ।

कौशल्या देवी जबसे राजेश का लंबा और मोटा लंड* देखी थी उसके चूत* से रस बहना शुरू हो गया था। उसे चुदवाने का बहुत इच्छा हो रही थी।उसकी चूत* पर खुजली बडं गई थी। उसकी चूत लंड* मांग रही थी।

कौशल्या देवी ने राजेश से कहा लो बेटा पहले मेरी चूची को मसलो और उसे पियो।

राजेश कौशल्या देवी के चूची पर टूट पड़ा वह उसे अपने हाथों से जोर जोर से मसलने लगा।

कौशल्या देवी ने कहा बेटा आराम से करो मैं भागी नही जा रही।

राजेश चूची को आराम आराम से दबाने लगा और अपने मुंह में उसके निप्पल को भरकर चूसने लगा।

जिससे कौशल्या देवी की सांसे और तेज हो गई। वह बहुत ही अधिक उत्तेजित होने लगी ।वह सि सकने लगी।

इधर राजेश को कौशल्या देवी की चूत देखने का इच्छा हो रहा था क्योंकि आज तक वह किसी औरत का चूत नहीं देखा था ।वह एक हाथ से कौशिल्या देवी के पेटीकोट के नाड़े को पकड़ कर खींच दिया, जिससे कौशल्या देवी पूरी तरह नंगी हो गई क्योंकि वह पेंटी नहीं पहनी थी।

कौशल्या देवी के नंगी होते ही राजेश की नजर उसकी चूत पर गई। उसकी चिकनी चूत * को देखकर राजेश का उत्तेजना के मारे उसका लंड और कठोर हो गया और ठूमकने लगा।

राजेश से रहा न गया और वह एक हाथ , कौशल्या देवी के चूत पर ले जाकर ,उसे सहलाने लगा।

राजेश की इस हरकत से, अपनी आंखें खोल, कौशल्या देवी लैट्रिन सीट पर जाकर बैठ गई और अपनी दोनों टांगों को फैला दी देखो बेटा औरत की चूत कैसी होती है। कौशिल्या देवी हवश मे पूरी तरह बेशरम बन गई थी।

राजेश बाथरूम फर्श पर नीचे बैठ गया । चूत उसकेआखो के सामन् थी।

कौशल्या देवी के चिकनी एवं फूली हुई बूर को देखकर, राजेश का लंड झटके मारने लगा ।

राजेश ने कहा ,माजी तुम्हारी चूत कितनी चिकनी और पाव रोटी की तरह फूली हुई बहुत सुंदर लग रही है ।

कौशिल्या देवी ने अपने हाथ से अपनी चूत के मुख् को फैलाया ,और बोली लो बेटा ठीक से देख लो औरत की चूत कैसी होती ?

राजेश उसके चुत के छेद को देखने लगा ।राजेश कौशल्या देवी से पूछा, मां जी क्या इसी छेद में लंड को अंदर डाल कर चोदा जाता है।

कौशल्या देवी ने कहा,बेटा इस बूर के अंदर दो छेद होता है ।एक छेद से औरतें पेशाब करती हैं और दूसरे छेद से बच्चे को जन्म देती है ।

लंड को दूसरे छेद में डालकर चोदने से मर्द का बीज औरत के बच्चेदानी पर गिरता है ,जिससे औरतें पेट से से हो जाती है, और वह 9 महीने के बाद बच्चे को जन्म देती है ।

राजेश कहता है, मां जी यह तुम्हारी चूत में चने के दाने के जैसी उठा भा हुआ क्या है? कौशल्या देवी कहती है बेटा यह भग्नासा है यह काफी संवेदनशील अंग है ,इसे उंगली से रगड़ने से औरत बहुत ही अधिक उत्तेजित हो जाती है।

कौशल्या देवी की नजर राजेश के लंड पर जाती है राजेश से कहती है ,बेटा तुम्हारा लंड तो मेरा बूर देखकर ठुमके लगा रहा।

राजीव कहता हैं हा मा जी यह तुम्हारी चूत** को देखकर और लंबा ,मोटा और खड़ा हो गया है और तुम्हारी चूत के अंदर जाने के लिए तड़प रहा है।

राजेश ने देखा कि कौशल्या देवी के बूर से कुछ चिपचिपा सा निकल रहा है ।उसने कौशल्या देवी से कहा मां जी यह तुम्हारी बूर* से पानी जैसा क्या निकल रहा है?

कौशल्या देवी -बेटा यह चूत का रस है ।जब औरत उतेजित होती है तो उसके चूत से रस बहने लगती है।

राजेश कहता है मा जी पर तुम्हारा चूत* का छेद छोटा लग रहा है ।मेरा लंड तो काफी मोटा है तुम्हारी चूत * के अंदर जाएगा कैसे ?

अरे बेटा यही तो चूत* की खूबी है । चूत* जब बच्चे बाहर निकाल सकती है तो वह मोटा से मोटा लंड को भी अपने अंदर ले पा लेने की अद्भुत क्षमता होती है वह आवश्यकतानुसार फैल और सिकुड़ जाती है।

राजेश ने कहां मा जी क्या तुम्हे भी चुदने का मन कर रहा है जो क्या तुम्हारी बूर रस बहा रही।

कौशल्या देवी ने कहां ,बेटा जब से मैंने तेरा इतना बड़ा लंड देखी मेरा चूत् भी रस बहाने लगी है।

राजेश कहता हैं चलो ना माजी चुदाई * करते है मेरा भी बहुत मन कर रहा है ।

कौशल्या देवी और राजेश दोनों ही बहुत उत्तेजित हो गए थे। दोनों ही चुदाई के लिए तड़प रहे थे।

कौशल्या देवी ने कहां चलो बेटा बेड पर चलते हैं यहा बाथरूम में ठीक से चुदाई नहीं हो पाएगी ।

कौशिल्या देवी राजेश के हाथ को पकड़ कर अपने बेडरूम में ले गई ।बेडरूम में जाने के बाद कौशल्या देवी बेड पर किनारे मे पीठ के बल लेट गई ।और अपने दोनों पैर को मोड़कर फैला दी ,जिससे उसका चुत खुलकर राजेश के सामने आ गया ।

कौशल्या देवी ने कहा लो बेटा अपना लंड मेरी चूत में डालो ।राजेश बेड के किनारे खडा हुआ था, एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर ,कौशल्या देवी के चूत पर रखा और धक्के लगाने लगा। पर लंड चूत * में नहीं नहीं जा रहा था।

कौशल्या देवी को हंसी आ रही थी वह बोली बेटा तुम्हें अभी सीखना पड़ेगा और कौशल्या देवी अपना एक हाथ से लंड को पकड़ कर अपने चूत के मुख पर रख दी।

राजेश से बोली ,बेटा अब थोड़ा अपना लंड* का दबाव चूत पर डालो ।राजेश अपना लंड कौशल्या देवी के चूत पर धकेला। लंड का टोपा चूत की मुख् पर कुछ घुस गया।

कौशल्या देवी ने कहा बेटा थोड़ा और धक्का लगाओ राजेश में थोड़ा और धक्का लगाया उसका लंड कौशल्या देवी के चूत को चीरता हुआ थोड़ा और आगे सरक गया ।

कौशल्या देवी ने कहा बेटा थोड़ा और धक्का मारो। इस बार राजेश ने थोड़ी ज्यादा ताकत से चूत पर अपना लंड ठोका। लंड चूत * को फाड़ता हुआ आधे से ज्यादा घूस गया ।

कौशल्या देवी के मुख से ऊई मां निकल गया। बेटा आराम से तुम्हारा लंड बहुत मोटा है मेरी चुत* फट जाएगी ।आराम से डालो ।

कौशल्या देवी ने आगे कहा लो बेटा अब मेरी चूची को मसलो और उससे खेलो ,उससे मेरी चुत का दर्द कम होगा।

राजेश कौशल्या देवी के चूची को अपने हाथों से मसलने लगा ।उसकी चूची को चूसने लगा जिससे सुशीला देवी और उत्तेजित होने लगी ।वह सिसकने लगी।

कौशल्या देवी ने राजेश से कहां बेटा अब तुम अपना लंड थोड़ा खींच कर फिर धकेलो ।थोड़ा थोड़ा अंदर बाहर करते रहो ।

राजेश ने वैसे ही किया वह अपने कमर हिला कर अपना लंड धीरे धीरे चूत * के अंदर बाहर करने लगा।

राजेश को एक नया एहसास होने लगा । वह धीरे-धीरे अपना स्पीड बढ़ाने लगा। राजेश अपने दोनों हाथों से कौशल्या देवी के चूची को मसल मसल कर अपना लंड कौशल्या देवी के चूत के अंदर बाहर करने लगा।

राजेश को बूर चोदने में बहुत ही मजा आने लगा। राजेश का लंड चूत* के अंदर अपनी जगह बना लिया था । कौशल्या देवी की चूत लंड को जकड़े हुए था। क्योंकि लंड काफी मोटा था ।लंड चूत* में कसा कसा सा अंदर बाहर आने जाने लगा । लंड काफी मोटा होने के कारण वह चूत के भग्नासा को भी रगड़ रहा था ।जिससे कौशल्या देवी सिसकने लगी ।दोनों ही स्वर्गीय आनंद पा रहे थे।

अब राजेश पुरी तरह जोश में आ गया वह अपना लंड* पूरी ताकत से कौशल्या देवी के चूत* में डाल कर चोदने लगा।

कौशल्या देवी के मुख से सिसकारियां निकलने लगी। राजेश का यह पहला चुदाई* था। उसे चूत *चोदने मे बहुत मजा आ रहा था ।वह पूरी तरह जोश में आ गया। और लंड को तेजी से चूत* के अंदर बाहर करने लगा। लंड गच गच, फच फच की आवाज के करता हुआ,चूत के अंदर बाहर होने लगाा।

राजेश का लंड * काफी लंबा था ।राजेश का लंड कौशिल्या देवी के बच्चेदानी के मुख को ठोकर मारने लगा। जिसका एहसास कौशल्या देवी को होते ही उसकी शरीर में एक अलग तरंग पैदा होने लगा। कौशल्या देवी अपने मुख से कामुक आवाजें निकालने लगी ।उसे भगत से चुदाई में िजतना मजा आया था उससे कई गुना अधिक मजा राजेश के चोदने से आ रहा था।

इधर राजेश भी बोले जा रहा था मा जी भगत ने सही कहा था चुदाई करने में बहुत मजा आता है। वह जोश में पागल सा हो गया और तेज तेज चोदने लगा।

कौशल्या देवी के चूत * से रस बहता हुआ बेड पर गिरने लगा। राजेश का लंड कौशल्या देवी के चूत से पूरी तरह से भीग गया था ।और लंड चुत में गच गच फच फच की आवाज करता हुआ अंदर बाहर होने लगा ।

राजेश के आश्चर्य हुआ कि उसका इतना मोटा और इतना लंबा लंड कौशल्या देवी के चूत के अंदर पूरा आ समाहित हो गया था दोनो दे जिश्म एक जान हो गए थे ।

कमरे में कौशल्या देवी की कामुक आवाजें गूंजने लगी ।वह अपने मुख से बोलने लगी बेटा और चोदो जोर से चोदो बड़ा ही मजा आ रहा है। कौशल्या देवी ज्यादा देर तक बर्दाश्त ना कर सके राजेश के कमर को अपने पैरों से जकड़ ली , जिससे राजेश धक्का मारना बंद कर दीया ।

उसने कौशल्या देवी से पूछा मा जी क्या हुआ, तुम ठीक तो हो ना ।

कौशल्या देवी ने आंखें नीचे कर शरमाते हुए बोली बेटा मैं झड़ गई। थोड़ा रुको ।

राजेश ने कहा मां जी अभी तक मेरा पानी निकला नहीं है मुझे अभी और चुदाई करने का मन कर रहा है।

कौशल्या देवी ने कहा बेटा धीरज रखो ।औरत के झड़ने के बाद उसे फिर से गर्म करना पड़ता है ,ताकि फिर से वह चुदाई के लिए तैयार हो जाए ।

राजेश ने कहां मा जी उसके लिए क्या करना होगा ।

बेटा पहले अपना लंड* बाहर निकाल दो ।उसके बाद बताती हूं।

राजेश ने कौशल्या देवी के चूत से लंड बाहर खींच लिया। लंड फचाक की आवाज करता हुआ चूत से बाहर आया ।लंड कौशल्या देवी के चूत रस से भीगा चमक रहा था । काफी लंबा और मोटा लग रहा था और ठूनकी मार रहा था , जिसे देखकर कौशल्या देवी मुस्कुराने लगी।

कौशल्या देवी ने अपनी चूत को देखा उसका चूत काफी फैल गया था उसकी छेद काफी बड़ा लग रहा था।

राजेश ने कौशल्या देवी से कहा मां जी मुझसे रहा नहीं जा रहा है ।मुझे और चोदना है ।

कौशल्या देवी ने कहा बेटा जब औरतें झड़ जाते है तब उसे फिर से उत्तेजित करना पड़ता है ताकि वह चुदाई के लिए फिर से तैयार हो सके ।पूरूषो का काम केंद्र तो सिर्फ उसका लंड होता है ।परंतु औरतों के शरीर के अंग अंग में काम भरा होता है ।जिसे छेड़ने पर औरत उत्तेजित होता है।

राजेश ने पूछा माजी औरतों को फिर से उत्तेजित करने के क्या-क्या करना चाहिए ।

कौशिल्या -बेटा मर्द को एक औरत को उत्तेजित करने के लिए, उसके होंठों को चूसना चाहिए ।उसके गालों को चूमना चाहिए। उसके गर्दन एवं पट को चाटना एवं शहलाना लाना चाहिए। उसकी चूची को मसलना एवं मुंह से चूचक को पीना चाहिए । उसके पेट को चाटना, नाभि को चुमना चाहिए ।औरत की चू को सहलाने अऔर उसकी चूत के भग्नासा को उंगली से छेड़ना चाहिए। उसके नितंब को हाथों से सहलाना एवं मसलना चाहिए ।उसकी टांगों पर चुंबन करना चाहिए। टांगों को हाथों से सह लाना चाहिए ,उसके पैर की अंगुलियों को चूसना चाहिए ,ऐसा करने से औरतें बहुत जल्दी उत्तेजित और काम विहिल हो जाती है और वह चूदने के लिए जल्दी तैयार हो जाती है।

बेटा हर औरत का शरीर में कुछ अंग ऐसा होता है जिसे छेड़ने से वह बहुत ही अधिक उत्तेजित हो जाती है तुम्हें यह जानना होगा ,अपने अनुभव द्वारा कि कौन सी औरत किस अंग से जल्दी उत्तेजित होती है।

यह भी जान ना होगा कि किस आसन में किस औरत को चुदाई करने में बहुत अधिक मजा आता है ।क्योंकि हर औरत ही अपनी पसंद होती है। अगर तुम यह सब जान गए तो औरत तुम्हारी दीवानी हो जाएगी ।तुम जितनी अधिक औरतों को चोदोगे तुम्हारा अनुभव बढ़ता जाएगा। एक पुरुष को औरत के झड़ने के पहले नहीं झड़ना चाहिए, नहीं तो उसकी औरत खुश नहीं रहती और औरत किसी दूसरे पुरुष के साथ संबंध बनाने के बारे में सोचने लगती है ।

राजेश ने कौशल्या देवी से कहा मा जी मेरी चुदाई से तुम खुश हो ना।

कौशल्या देवी कहां बेटा तुम्हारा लंड तो काफी मोटा और लंबा है हर कामुक औरत चाहती है कि उसे ऐसा लैंड चुदाने**के लिए मिले। मैंने तो तुम्हारी चुदाई से बहुत जल्दी झड़ गई। तुम्हारी चुदाई से मुझे बहुत ही मजा आया ।ऐसा मजा तो मुझे आज तक कभी नहीं आई देखो मेरी चूत के रस से पूरा बेड भीग गया है । तुम्हारा लंड मेरी चूत के हर हिस्से को रगडता है।और मेरे बच्चेदानी को भी ठोक रहा था । जिससे मेरे शरीर मे तरंग पैदा कर रहा था ।चूदवाने मै ऐसा सूख मूझे पहली बार मिला ।

जरा देखो तो तुम्हारा लंड अभी भी कैसे हवा में ठूमक रहा है ।कौशल्या देवी मुस्कुराने लगी ।

राजेश ने कहा मा जी मुझे चोदने का बहुत मन कर रहा है ।

कौशल देवी ने कहा हां हां मुझे फिर से चोद लेना, पहले मुझे गरम तो करो ।

राजेश बेड पर बैठ जाता है, उसके दोनों पैर नीचे थे। कौशल्या देवी को अपने गोद पर बैठने का इशारा करता है ।

कौशल्या देवी बेड से उठकर राजेश के गोद मे जाकर बैठ जाती है ।दोनों के चेहरे आने सामने थे। राजेश कौशिल्या देवी को अपने बाहों में जकड़ लेता है जिसे उसकी चूचियां राजेश के सीने में दब जाता है ।जिसका राजेश को अहसास होते ही ,उसके लंड* ठुमकने लगता है ।जिसका एहसास कौशल्या देवी को होता है। क्योंकि वह उस पर ही बैठी थी ।

अब राजेश उसके होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगता है ।कौशल्या देवी इस समय अपनी आंखें बंद कर ली।

होठों को कुछ देर चूसने के बाद वह उसके गर्दन पर चूसने लगा, चाटने लगा और हाथों से पेट को सहलाने लगा ।

कौशल्या देवी राजेश की इन हरकतों से उत्तेजित होने लगी।

अब राजेश कौशल्या देवी के चूचियो को हाथ से दबाने लगा उसकी निप्पल को मुंह में भरकर पीने लगा जिससे कौशल्या देवी के मुख सिसकने की आवाज निकलने लगी ।

राजेश को इसका अहसास हो गया था कि अब मा जी उत्तेजित हो रही है वह चूची को मसलते हुए एक हाथ उसके चूत पर ले जाकर सहलाने लगा जिससे कौशल्या देवी बहुत अधिक उत्तेजित हो गई ,और वह बोलनी बस बेटा बस अब मुझसे बर्दाश्त नहीं होगा ।

वे दोनों बेड से उतर गए, कौशल्या देवी नीचे बैठ गई और राजेश के लैंड को मुंह में भर कर चूसने लगी। राजेश अपनी आंखें बंद करें लंड* चूसाने का मजा लेने लगा और वह अपने मुंह से बोलने लगे आह मा जी तुम बहुत अच्छे से लैंड चुस्ती हो ।हां बहुत मजा आ रहा है। और वह धीरे-धीरे अपना लंड उसकी मूह के अंदर बाहर करने लगा ।

कौशल्या देवी को लगा कि कहीं राजेश झड़ ना जाए वह चूसना बंद कर दी और खडी होकर, बेड को अपने हाथों से पकड़कर झुक जाती है ।उसके दोनों पैर जमीन के नीचे थे और झुकी हुई थी ।

वह राजेश को पीछे जाने का इशारा किया ।राजेश अपने लंड को हाथ से पकड़ ,कौशल्या देवी की पीछे खड़ा हो गया ।कौशल्या देवी के चिकनी गुदाज कुल्हे को देखकर उसका लंड झटके मारने लगा ।

कौशिल्या देवी अपना एक हाथ में पीछे ले जाकर राजेश के लंड को पकड़ लिया और लंड को अपनी चूत के मुख पर रख दी और राजेश से बोली बेटा अब अंदर डालो ।मुझसे रहा नहीं जा रहा है।

चुत पहले चुदाई से खुल चुका था ।चूत से रस भी बह रहा था अतः धक्का मारते ही राजेश का लैंड का टोपा है उसके चुत के अंदर चला गया ।राजेश फिर से एक धक्का अपने लंड से कौशल्या देवी के चूत पर मारा लंड सर सराता हुआ आधा घुस गया ।

राजेश अपने दोनों हाथ सामने ले जाकर कौशल्या देवी के चूची को पकड़कर मसलने लगा। कुछ देर मसलने के बाद, वह अपने दोनों हाथों से मा जी के कमर को पकड़ लिया और अपने लंड को चुत के अंदर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।

कुछ ही देर के बाद लंड ने चूत पर अपनी जगह बना ली और लंडफच फच की आवाज करता हुआ अंदर बाहर होने लगा ।राजेश को फिर से जुदाई करने में बहुत मजा आने लगा ।वह स्वर्ग में चला गया और तेज झटके मार मार कर चुदाई । करने लगा ।

राजेश के तेज धक्के लगाते ही उसका लंड का टोपा कौशल्या देवी के बच्चेदानी से टकराने लगा जिससे कौशल्या देवी को बहुत ही मजा आने लगा। ऐसा मजा उसे भगत की चुदाई से भी नहीं आता था। वह चिखने और सीसकने लगी ।एक बार फिर से कमरे में गच गच फच की आवाज गूंजने लगी ।

राज को इस आसन में चोदने में बड़ा मजा आ रहा था क्योंकि कौशल्या देवी की गोरे गोरे कुल्हे उसके आंखों के सामने था जब राजेश अपना लंड* कौशल्या देवी की की चूत पर मारता था ।तो लंड* के टट्टे कौशल्या देवी के कुल्हे से टकराता था जिससे राजेश को एक अलग ही आनंद की अनुभूति होता था ।

लंड की टट्टो और कुल्हे के टकराने से कमरे थप थप की आवाज गूंज रही थी । राजेश पूरे जोश में था ।वह कौशल्या देवी को हूमच हूमच कर चोदने लगा। वह जन्नत मैं पहुंच गया था ।

इधर कौशल्या देवी को भी जन्नत का अनुभव मिलने लगा ।उसे चुदाने का ऐसा मजा इसके पहले कभी नहीं आया था वह सिसक रही थी ।

जब राजेश के लैंड का टोपा उसके गर्भाशय के मुख से टकराता था ।उसे परम आनंद की अनुभूति होती थी। जिससे उसके मुंह से आह आह की आवाजें निकलने लगती थी ।अब उसे और बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया। वह अपने हाथों से बेड को जोर से भीच ली। उसके पैर कपकपाने लगी ।वह एक बार फिर से झड़ गई थी ।

राजेश को इसका एहसास हुआ की मा जी फिर से झड़ गई है लेकिन राजेश इस समय रुकने के मूड पर बिल्कुल नहीं था क्योंकि उसे चुदाई ** करने में बहुत ही मजा आ रहा था।

वह और तेजी से कौशल्या देवी को चोदने लगा ।राजेश कौशल्या देवी को चोदते हुए किसी दूसरी दुनिया में खो गया था ।वह लगातार चुदाई** किए जा रहा था।

इधर कौशल्या देवी के चूत में दर्द करने लगा क्योंकि वो झड़ गई थी। वह दर्द से कराहने लगी ।पर राजेश रुका नहीं वह लगातार अपना लंड* कौशल्या देवी की चूत * में तेज गति से अंदर-बाहर करने लगा। कमरे में थप थप , फच फच ,गच गच की आवाजें गुंज रही थी।

राजेश भी अपनी चरम की ओर पहुंच रहा था। वह और तेज तेज शॉट लगाने लगा।

इधर कौशल्या देवी फिर से गर्भ होने लगी उसके चूत से फिर रस बहना शुरू हो गया ।फिर से का कौशिल्या देवी को आप चूत मरवाने में मजा आने लगा ।वह फिर से आनंद के मारे सिसकने लगी ।

राजेश को अब अपने पर नियंत्रण रख पाना मुश्किल हो गया था उसकी सारी शक्ति उसके लंड* पर केंद्रित हो गई थी ।अब वह बहुत जोर जोर से कोशल्या देवी को चोदने लगा ।वह एक जोरदार शॉट लगाकर कौशल्या देवी के कुल्हे को अपने लंड से सटा दिया और वह कौशल्या देवी के चूत में ही झड़ने लगा। झड़ते हुए अपने मुंह से आह आह कि कराहने की आवाजें निकाल रहा था। उसके पैर कपकपा रहा था।

वह ढेर सारा वीर्य उसके लंड* से निकलकर कौशल्या देवी के बच्चेदानी तक जा रहा था कौशल्या देवी अपने बच्चेदानी पर गर्म गर्म में वीर्य का को गिरते हुए महसूस करके ।वह भी चरम में पहुंच गई और फिर से एक बार झड़ने लगी ।

इधर राजेश का लंड से जब वीर्य निकलना बंद हुआ । कुछ देर वैसे ही खड़ा रहा, फिर अपना लंड कौशल्या देवी के चूत से बाहर निकाला ।

लंड फचाक की आवाज करता हुआ बाहर आया ।राजेश बेड पर लुढ़क गया और लंबी लंबी सांसे लेते हुए सुस्ताने लगा।

इधर कौशल्या देवी के चूत से राजेश का वीर्य झरने की तरह बहता हुआ फर्श पर गिर रहा था। कौशल्या देवी को इसका अहसास होते ही वह खड़ी हो गई और अपने चूत को देखने लगी। वह आश्चर्य में थी कि कोई इतना सारा वीर्य भी अपने लंड से निकाल सकता है । वह अपने चूत की हालत देखकर मुस्कुराने लगी ।और शर्म के मारे बाथरूम की भागने लगी उसे भागते हुए मटकते गाड को को देखकर राजेश का लंड* फिर से ठूनकी मारने लगा।
 
कौशल्या देवी के मटकती गांड को देखकर ,राजेश का लंड फिर से खड़ा होकर ठूनकी मार रहा था ।

इधर कौशिल्या देवी बाथरूम में जाकर नहाने लगी वह अपनी चूत को ,उंगली डालकर अच्छे से साफ कर रही थी ।जब उसने अपनी चूत* की हालत देखी तो से बड़ी शर्म आ रही थी ।

कितना बुरी तरीका से राजेश ने उसे चोदा था और खूब सारा माल उसके बूर में भर दिया था। उसका चुत काफी फैल गया था ।लेकिनउसे राजेश से चुदवाने मे*बहुत ही मजा आया था ।ऐसा सुख उसे आज तक कभी नहीं मिला था। यही सब सोचते हुए वह नहा रही थी ।

इधर राजेश का पहला चुदाई* था ।उसे भी खूब मजा आया था ।कौशल्या देवी को भागने ,उसे जन्नत का आनंद प्राप्त हुआ था ।उस आनंद का एहसास होते ही उसका मन फिर से चुदाॉई करने का होने लगा।

उससे रहा न गया और वह बेड से उठकर बाथरूम की ओर चला गया ।बाथरूम का दरवाजा अभी बंद नहीं था। वह सीधा बाथरूम के अंदर घुस गया।

कौशल्या देवी अपनने विचारों में मग्न होकर नहा रही थी। राजेश पीछे से जाकर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसकी चूची को मसलने लगा ।

इधर कौशिल्या लिया देवी अपनी आंखें खोली, वह थोड़ा घबरा सी गई थी, पर तभी जब उसे पता चला कि राजेश ने उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया है तो वह राजेश से कहती है ,बेटा छोड़ो मुझे अभी मुझे नहाना एवं खाना भी बनानी है ।तुमने मेरी चूत* की क्या हालत कर दी है देखो जरा ।

राजेश कहता हैं नहीं मा जी मेरा फिर से चुदाई**** करने का मन कर रहा ।देखो मेरे लंड को कैसे फिर से तुम्हारे चूत में जाने के लिए तड़प रहा है। मैं बिना चोदी नहीं रह सकता और वह कौशल्या देवी की चूची को मसलने लगता है और अपने लंड* को उसकी गांड में दबाने लगा ।

उसके गर्दन को चूमने और चटनी लगा ।राजेश की इन हरकतों से कौशल्या देवी फिर से गर्म होने लगी। राजेश अपना एक हाथ को कौशल्या देवी के पेट में ले जाकर उसके नाभी कुरेदने सहलाने लगा ।फिर धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए ।अपना हाथ उसकी चूत की ओर ले जाने लगा ।एक हाथ से उसके चूत* को सहलाने लगा। जिससे कौशल्या देवी की उत्तेजना बढ़ने लगी

फिर राजेश एक उंगली से उसके भग्नासा को छेड़ने लगा ।जिससे कौशल्या देवी सिसकने लगी ।कुछ देर ऐसी हरकत करते रहने से कौशल्या देवी फिर से उत्तेजित हो गई ।उसे फिर से चुदाने की इच्छा होने लगी।

इधर राजेश का लंड* कौशिल्या देवी के चूत पर जाने के एहसास से ही झटके पर झटके लगाया जा रहा था। वह बहुत ही कठोर लंबा और मोटा हो गया था।

कौशल्या देवी नल की टोटी को पकड़कर थोड़ा झुक गई ।राजेश कौशल्या देवी के पीछे खड़ा होकर उसके कमर को पकड़ लिया। फिर एक हाथ से अपने लंड* को पकड़ कर उसकी चूत * के पास ले गया।

वह एक हाथ से कौशल्या देवी के बूर * के पहले सहलाया फिर उसके भग्नासा को उंगली से रगड़ा तो देखा कि कौशल्या देवी के बूर से चिपचिपा पदार्थ निकलना शुरू हो गया है ।

राजेश अपना एक हाथ से लंड को पकड़ कर उसकी चूत के छेद पर रख कर ।हल्के से दबाया लंड का टोपा कौशिल्या देवी के चूत में घुस गया ।

राजेश फिर से एक धक्का मारा क्योंकि कौशल्या देवी का बूर पहले चुदाई से काफी खूल गया था ।अत: धक्का लगते ही राजेश का लंड सर सराता हुआ कौशल्या देवी के चूत में आधा घुस गया।

राजेश कौशल्या देवी के कि चूचियों को अपने दोनों हाथों में लेकर फिर से दबाने लगा और अपने कमर को हल्के हल्के हिलाते हुए अपने लंड को कौशल्या देवी की चूत * के अंदर बाहर करने लगा ।

धीरे-धीरे राजेश का लंड कौशल्या देवी के पूदी में पूरी तरह अपनी अपनी जगह बना लिया ।अब राजेश अपना स्पीड बढ़ाने लगा ।राजेश का लंड, अब कौशल्या देवी के बूर में गच ,गच फचफच की आवाज करता हुआ। आने जाने लगा ।

कौशिल्या देवी एक बार फिर से आनंद के मारे अपने मूह से सिसकारी निकलना शुरू कर दी।

इधर राजेश को भी कौशिल्या देवि का फिर से चूत ** मारने में बहुत मजा आने लगा है।

वह जोर-जोर से उसकी चूत * को मारने लगा ,जिससे लंड का टोपा कौशल्या देवी के बच्चेदानी को ठोकने लगा ,जिससे कौशल्या देवी के शरीर में तरंग पैदा होने लगी और वह आनंद के मारे चिखने और सिसकने लगी ।

पूरे बाथरूम में गच गच और फच फच की आवाज के साथ-साथ कौशल्या देवी के सिसकने की भी आवाज गूंजने लगी ।साथी ही लंड* के टट्टे कौशल्या देवी के कुल,हे से टकराने के कारण थप थप की आवाज भी गूंज रही थी ।

कौशल्या देवी को पीछे से चोदने में राजेश को एक बार फिर से बहुत ही मजा आने लगा है ।तेजी से लंड* को कौसिल्या देवी की चूत * में अंदर-बाहर करने लगा।

लमड गपागप चूत के अंदर बाहर हो रहा था ।इसी तरह चुदवाने *** से काौशिल्या देवी आनंद के मारे अपना सुध बुध खो बैठी।और वह झड़ने लगी। झड़ते समय उसके पर कप कपाने चूत फूलने पिचकने लगा ।

इधर राजेश को जब पता चला कि वो झड़ गई है ,तो वह चुदाइ*** बंद कर दिया इधर कौशल्या देवी सिसकते हुए झरने का आनंद ले रही थी।

इस समय उसकीआंखें बंद थी ।कुछ देर ऐसे ही राजेश खड़ा रहा फिर वह कौशल्या देवी को जकड़ कर लैट्रिन सीट पर जाकर बैठ गया ।और अपने लंड पर कौशल्या देवी को बिठा लिया ।

वह कौशल्या देवी को अपने लंड पर बिठाकर दोनों हाथों से उसकी चूची को फिर से मसलने लगा उसके पेट को सहलाने ,उसके गर्दन को चूमने चाटने लगा। उसके होठों को चूमने लगा।

अपना एक हाथ सामने ले जाकर उसकी चूत* को सहलाने लगा उसकी भग्नासा को रगड़ने लगा ।

कौशल्या देवी फिर से एक बार सिसकने लगी। कौशल्या देवी को फिर से चुदने की इच्छा होने लगी। वह अपने कमर को ऊपर नीचे करते हुए राजेश के लंड* को धीरे-धीरे अपनी चूत के अंदर बाहर करना शुरू कर दी ।

राजेश भी कौशिल्या देवी के कमर को पकड़कर अपने लंड पर उसके कूल्हे को पटकना शुरू कर दिया ।ऐसा करने से लंड का बूर में गपा गप अंदर बाहर आना-जाना शुरू हे गया ।दोनों को ही बहुत ही मजा आने लगा ।

राजेश को लंड बहुत ही मोटा होने के कारण वह चुत के अंदर पूरे हिस्से को अच्छी तरह से रगड़ रहा था ।चुत क् भग्नासा लंड से रगड़ खाने के कारण ,कौशल्या देवी को बहुत ही मजा आने लगा ,जिससे उसके मुंह से सिसकारी निकलने लगी ।

इधर राजेश को भी इस आसन में चूदाई करने से एक नया आनंद मिल रहा था ।वह भी जोश में आकर कौशल्या देवी के कमरर को पकड़ कर उसके कूल्हे को अपने लंड पर पटक पटक कर जोर-जोर से चोदना शुरु कर दिया ।जिससे लंड काै शिल्या देवी के चूत मे गहराई के अंतिम छोर बच्चेदानी के मुख पर जाकर ठोकर मारने लगा ।जिससे कौशल्या देवी को दोगुना मजा मिलने लेगा ।

उसकी आंखें बंद हो गई। उसके मुख से सिसकारी के साथ बीच-बीच में और कराहने और चीखने की आवाजें भी निकालने लगी।

इधर राजेश भी आनंद के मारे स्वर्ग में चला गया ।उसे जन्नत का मजा आने लगा ।वह भी तेज गति से चूदाई करने लगा ।दोनों ही अपना सुध बुध खो बैठे थे ।

अपना सुध बुध खो कर चूदाई*** का मजा ले रहे थे।

लंड कौशल्या देवी के चूत * में फच फच , गच गच की आवाज करता हुआ ।अंदर बाहर आ जा रहा था ।

राजेश का लंड कौशल्या देवी के चूत* के रस से पूरी तरह भीग चुका था ।बूर रस अमड कोश से बहता हुआ लैट्रिन सीट पर टपकने लगा ।

कौशल्या देवी से बर्दाश्त करना अब मुश्किल हो गया। अपने पैरों को सिकुड़ने लगी ,अपने दांतो से अपने होंठ को चबीने लगी ।उसकी आंखों की पुतलियां पलट गई। और वो झड़ने लगी ।

झड़ते समय उसकी योनि द्वार टाइट हो गया। उसके बर फूलने पिचकने लगी। जिससे राजेश को पता चल गया कि कौशल्या देवी फिर से झड़ गई है।

पर राजेश बहुत ही जोश में था और रुकना नहीं चाहता था ।कौशल्या देवी लंड पर उछलना बंद कर थी,जिससे राजेश को मजा नहीं मिल पा रहा था।

अतः वह लेटरीन सूट से से खड़ा हो गया और कौशल्या देवी को घुमाकर लैट्रिन सूट की ओर झुका दिया।

कौशिल्या देवी अपने दोनों हाथों से लैट्रिन सीट को पकड़ लिया। इस समय राजेश का लंड बूर के अंदर ही था।

राजेश कैशिलेया देवी के कमर पकडंकर लंड को जोर जोर से चूत मे मारना शुरू कर दिया ,क्योंकि देवी अभी झड़ चुकी थी अत:उसे राजेश के द्वारा चूदाई*** करने से ,उसके चूत में दर्द होने लगा ।

वह राजेश को रूकने के लिए बोली ,बेटा रुक जा दर्द कर रहा है ।पर राजेश इस समय बहुत ही जोश में था। वह तेजी से चूदाई** करना जारी रखा ।

लंड फच फच , गच गच की आवाज करता हुआ कौशल्या देवी के बूर में गपा गप अंदर बाहर हो रहा था। राजेश लगातार तेज झटके कौशल्या देवी के चूत पर लगारहा था।

राजेश के लंड के टट्टे कौशल्या देवी के कूल्हे पर टकराने से बाथरूम में फिर से एक बार थप थप की आवाज गूंजने लगा।

राजेश की लगातार चूदाई* करने से एक बार फिर से कौशल्या देवी गर्म हो गई और वह भी उत्तेजित हो गई। राजेश का लमड उसके बच्चेदानी से टकराने से फिर से कौशल्या देवी सिसकने लगी उस् फिर से चूदवाने **मे मजा आने लगा ।

वह भी अपनी कमर को हिला हिला कर राजेश का चूदाई * करने में साथ देने लगी ।

इधर राजेश से को अब अपने पर नियंत्रण रख पाना मुश्किल हो गया और वह भी एक जोरदार शॉट लगाते हुए अपने लंड को कौशल्या देवी के कुल्हे से जोर से सटा लिया और अपने लमड से वीर्य की जोर-जोर से पिचकारी मारने लगा, जो कौशल्या देवी के बच्चेदानी पर गिरने लगा ।गर्म वीर्य का अहसास पाकर कौशल्या देवी फिर से एक बार झड़ गई ।

दोनों कुछ ही देर तक ऐसे ही खड़े रहे। कूछ देर बाद राजेश का लंड कुछ ढीला हुआ। वह अपने लंड * को खींचकर बाहर निकाला।

कौशल्या देवी अपने चूत की ओर को देखा ,उसका बूरी तरह से चोदने से काफी फैल गई थी ,जैसे कोई औरत बच्चे को को जन्म देने से उसका योनि द्वारा फैल हो जाताीहै ।

उसकी चूत सूज गयी थी। उसमे दर्द कर रहा था।

कौशल्या देवी राजेश से कहा बेटा अब जल्दी नहा लेते हैं फिर मै खाना बनाऊंगी लेट हे रही है ।तुम नहा कर आराम करना ।

बाथरूम में दोनो एक साथ नहाने लगे। ना कर राजेश ऊपर भगत के कमरे मे चला गया और वह आराम करने लगा।

इधर कौशल्या देवी राजेश जैसे स्मार्ट लड़के से चुद कर बहुत ही खुश थी ।वह अपने को भाग्यशाली समझ रही थी। वह खुश थी कि इस उम्र में इतने स्मार्ट लड़के से संभोग का सुख प्राप्त हुआ । ऐसा सुख उसे अभी तक कभी नहीं मिला था ।वह राजेश की दीवानी हो गई थी ।

राजेश को आकर्षित करने के लिए नहा लेने के बाद नए कपड़े पहन कर सजने सवरने लगी। खुद को आईने में देखकर उसे शर्म आने लगी कि आज भी वह इस उम्र में भी कितनी जवान लगती है ,फिर वह खाना बनाने कीचन मे चली जाती है , जा कर खाना बनाने लगी

घर में खाना बनाने लगी ,खाना बनाते हुए वह सोच रही थी कि राजेश कितना जल्दी सब सीख गया ,कितना जोश है उसमे । उसका लंड कितना बड़ा और मोटा तथा खूबसूरत है। चुत के हर हिस्से को रगड़ता है और बच्चे दानी चोट करने से कितना आनंद देता है। आज तक मुझे चुदवाने**मे ऐसा मजा कभी नहीं आया ।वह राजेश की दीवानी हो गई ।

उधर राजेश भी सोए हुए सोचने लगा की चोदने* में कितना मजा आता है। आज तक मै इस सुख से वंचित था , परअब मैं रोज ही चुदाई का मजा लूंगा और औरत का सुख भाेगूंगा ।

दो बार की दमदार चुदाई* से राजेश भी थोडा थकावट महसूस करने लगा और उसे बहुत जल्दी नींद आ गई।

कौशल्या देवी ने खाना बना ली और नौकर को फोन लगा कर टिफिन ले ले जाने के लिए बुला ली। नौकर घर आया और टिफिन लेकर चला गया ।

कौशल्या देवी उपर के रूम में गई और राजेश से बोली बेटा चलो खाना खा लो ।राजेश सोया हुआ था वह नींद से जागा ।वह कौशल्या देवी को देखता रह गया वह इस वक्त बहुत ही खूबसूरत लग रही थी ।

राजेश कौशल्या देवी को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया और कौशल्या देवी से बोला । मा जी इस साड़ी में बहुत खूबसूरत लग रही हो और वह कौशल्या देवी की चूची को दोनों हाथों से मसलने लगा। मां जी चलो न एक बार फिर से चुदाई करते हैा

कौशल्या देवी ने कहा ,बेटा छोड़ो मुझे। मेरी चूत* की क्या हालत कर दी है। चूत सूज गई है । चूत में दर्द हो रहा है ।

वह राजेश से बोली चलो बेटा खाना खा लो । खाना ठंडा हो जाएगा।

फिर दोनो साथ नीचे चले आये ।जब किचन में कौशल्या देवी खाना निकाल रही थी । राजेश से रहा ना जा रहा था ।राजेश किचन में गया। अतः वह किचन में जाकर उसे पीछे से बाहों में लेकर ,जकड़ लिया।

कौशल्या देवी बोली बेटा पहले खाना तो खा लो और अभी और नही चूद पाऊंगी । मेरी चूत में दर्द हो रहा है मैं ठीक से चल भी नहीं पा पा रही हूं ।

इसे पहले ठीक होने दो उसके बाद जब मन करे चोद लेना । मैं मना नहीं करूंगी ।तुम्हें जब इच्छा हो , घर आ जाना। राजेश बोला मा जी मुझे अभी करने की इच्छा हो रही है। करने दो ना और वह उसकी चूची को मसलने लगा।

कौशल्या देवी ने कहा नहीं बेटा मेरा चूत सूज गया है वह दर्द भी कर रहा है तुम मेरा कहना मानो ।इस तरह जिद न करो । अपने पर नियंत्रण रखो। औरतों की परेशानियां और समस्या को भी इतने में समझना होगा तभी औरतों को तुम्हारे लिए प्रेम जागेगा ।

राजेश ने कहा ठीक है मा जी आपने सही कहा मुझे अपने पर नियंत्रण रखना होगा और दोनों खाना खाने लगे ।इस समय राजेश केवल टावेल लपे टा हुआ था। उसके कपड़े सूख रहे थे।

कौशिलेया देवी ने खाना खाने के बाद कहा बेटा तुम्हारे कपड़े सूख चुके होंगे मैं उसे प्रेस कर देती हूं ।फिर उसे तुम पहन लेना ।चार भी बजने वाला है ।

भगत भी अब आता ही होगा ।राजेश ने कहा ठीक है मा जी अब मुझे भी निकलना होगा क्योंकि कॉलेज की छुट्टी का समय 4:00 का ही है। आप मेरे कपडे जल्दी से प्रेस कर दीजिए।

।राजेश का लंड* कौशल्या देवी को पास में पाकर अभी भी खड़ा हुआ था ।उसकी टावेल काफी ऊपर उठा हुआ था जिस पर कौशल्या देवी की नजर पड़ी कौशल्या देवी ने कहा बेटा तुम्हारा तो अभी तक खडा है ।

राजेश ने कहा हां माजी तुम इस ड्रेस में बहुत ही खूबसूरत लग रही हो मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया है।

कौशल्या देवी ने कहा बेटा में मुझे माफ करना मैं अभी चूद नही पाउंगी । मेै इसे चूस कर शांत कर देती हूं। चलो मेरे बेडरूम में जाओ मैं बर्तन धो कर आती हूं।

राजेश बेडरूम में जाकर इंतजार करने लगा । वह फिर काफी उत्तेजित हो गया था। की फिर से कौशिल्या देवी उसके लंड को चूसने वाली है ।

कौशल्या देवी कुछ समय के बाद राजेश बेडरूम में आई राजेश बेडरूम में लेटा हुआ था ।उसका लैंड सीधा खड़ा होकर ।हवा में लहरा रहा था।

कौशिल्या देवी बेड के उपर चड कर राजेश के कमर के पास जाकर बैठ गई और झूक कर एक हाथ से राजेश के लंड को पकडकर अपने मूह मे ले ली और राजेश के लंड* को चूसने लगी।

राजेश कैशिल्या देवी के सिर को पकड़कर लंड चूसवाने का आनंद लेने लगा ।कौशल्या देवी राजेश के लंड को अपने मुंह गपा गप ,अपने मुंह के अंदर बाहर करने लगी।

इधर राजेश आंखें बंद कर मजा लेने लगा। अपने मुख से आवाज निकालने लगा ।मां जी आप बहुत ही अच्छा चूसती हो, बहुत ही मजा आ रहा है ।आह ,आह और तेज चूसो।

राजेश अपने चरम अवस्था की ओर बढ़ने लगा और कुछ ही समय के बाद राजेश से बर्दाश्त करना मुश्किल हो गया और वह कौशल्या देवी के मुख् में ही झडने लगा ।

कौशल्या देवी वीर्य को अपने मुंह में भर ली।सारा वीर्य अपने मुंह मे भर लेने के बाद ,राजेश के वीर्य को निगल गई। उसे वीर्य का स्वाद कुछ मीठा और कुछ नमकीन लगा ।इसके पहले कौशल्या देवी ने किसी के वीर्य को नहीं पिया था।

वह राजेश कि वह दीवानी हो गई थी राजेश के लिए उसके मन मैं प्रेम उमडने लगा अतः वह उसके वीर्य को बाहर फेंकना उचित नहीं लगा और वह उसे पी गई।

एक प्रकार से वह राजेश के लिए समर्पित भावना उसके मन में जागृत हो गई थी। राजेश को उसे लंड का पानी पीता हुआ देखकर ।आश्चर्य हुआ उसने कौशल्या देवी से पूछा माझी ।आप लंड का पानी पी गई ।

कौशल्या देवी ने कहा पता नहीं बेटा मुझे इसे उगलने का मन नहीं हुआ और मैं और मैं तुम्हारे वीर्य को निगल ली। तुम्हारा वीर्य का स्वाद बहुत ही अच्छा लगा।

राजेश मुस्कुराने लगा जिसे देख कर कौशिल्या देवी को शर्म आने लगी।

कौशल्या देवी राजेश के कपड़े को प्रेस कर दी ।राजेश अपना कपड़ा पहन कर तैयार हो गया। तभी राजेश को स्वीटी का फोन आया ।भैया तुम कहां हो स्वीटी ने राजेश ने कहा ।

राजेश-स्वीटी तुम अपनी सहेली के साथ घर चली जाओ ।मुझे कुछ काम है ,थोड़ा लेट हो जाऊंगा।

स्वीटी ने कहा ठीक है भैया ।

कुछ समय के बाद भगत भी आ गया ।भगत ने देखा कि राजेश का गुस्सा शांत हो गया है । वह खुश लग रहा है।

उसने राजेश से कहा भाई अब तुम कैसे हो ।

राजेश ने कहा मां जी के प्यार ने मेरा गुस्सा शांत कर दिया ।

भगत ने कहा मुझे यकीन था मा जी तुम्हारा गुस्सा को शांत कर देगी ।

राजेश ने कहा ठीक है यार अब मैं निकलता हूं ।काफी समय हो गया है।

भगत ने कहा ठीक है भाई ।

कौशल्या देवी ने राजेश से जाते हुए कहा बेटा घर में आते जाते रहना अपने मा जी को भूल मत जाना। राजेश मुस्कुराने लगे और मुस्कुरा कर कहा नही मा जी अब आप जब बुलाएंगे मै आ जाऊंगा । अभी तो अभी तो बहुत कुछ सीखना है आपसे और वे दोनों मुस्कुराने लगे ।
 
दोस्तों कहानी को आगे बढ़ाते हैं

जब स्वीटी कॉलेज से घर पहुंचती है, सुनीता स्वीटी को अकेले देख कर पूछती है।

स्वीटी तुम अकेले ही आई हो, राजेश कहां है?

स्वीटी ने कहा मां भैया को कुछ काम था ।उसने कहा कि मैं थोड़ा लेट आऊंगा तुम अपनी सहेली के साथ घर चली जाना।

सुनिता -पर् वह कहां है, क्या काम है । तुम् पूछी नहीं।

स्वीटी ने कहा- नहीं मा।

सुनीता ने खीझते हुए कहा ,तुम्हें पूछना चाहिए था कि वह कहां है ?वह बोला और तुम आ गई।

स्वीटी- मां तुम मुझ पर ,क्यों चिल्ला रही हो। भैया आएगा तब उसी से पूछ लेना वह कहा था।मुझ पर क्यों चिल्ला रही हो?

सुनीता को अपनी गलती का एहसास हुआ।वह बोली ठीक है ,ठीक है। स्वीटी अपने कमरे मे चली जाती है।

सुनीता अपने आप से कहती है ,मुझे स्वीटी से एेसा नहीं पूछना चाहिए था ये मुझे क्या हो गया । वैसे भी राजेश यह सब जानबूझकर कर रहा है ।

सुनीता किचन में जाकर काम करने लगी ,वह सोचती है । जनाब ऐसा करके अपना नराजगी जताना चाह रहा है।पर वह कहा गया होगा ।वह कॉलेज गया था कि नहीं । वह सुबह भी कुछ खाया नहीं था अभी तक कुछ खाया होगा कि नहीं उसे राजेश की चिंता होने लगी।

उसका मन राजेश को फोन करके पूछने का हुआ। राजेश को फोन करके पूछना चाह रही थी, लेकिन सुबह की की घटना को याद करके।वह कॉल ना कर सकी।

वह सोची अभी वह गुस्से में है ।नाराजगी दिखाने के लिए ऐसा हरकत कर रहा है।धीरे-धीरे सब ठीक हो जाएगा । मैं भी देखती हूं अपनी मां से कब तक नाराज रहता है ।

1 घंटे के बाद राजेश घर पहुंचता है इस समय सुनीता किचन में काम कर रही थी। राजेश बिना कुछ बोले सीधे अपने कमरे में चला जाता है।

सुनीता का मन किया कि वह राजेश से पूछे की वह कहां था ।पर दूसरा मन , ऐसा करने से रोक दिया। उसे कमरे मे जाते हुए देखती रही ।वह सोचती है पता नहीं मैं सुबह से कुछ खाया भी है कि नहीं।

राजेश अपने कमरे में जाकर पढ़ाई करने लगा रात्रि भोज के समय स्वीटी और शेखर ,भोजन के लिए डाइनिंग टेबल पर आकर बैठ गए। सुनीता ने शेखर से कहा राजेश को भी बुला लाओ। पता नहीं सुबह से कुछ खाया है भी कि नहीं।

शेखर ,राजेश के कमरे में गया। वह देखा कि राजेश समय पढ़ाई कर रहा था। उसने राजेश कहां बेटा डिनर का टाइम हो गया है ।चलो डिनर कर लो ।

राजे ने अपने पिताजी से कहा पापा जी आज मेरा खाने का मन नहीं कर रहा है। शेखर ने कहा बेटा तुमने सुबह भी कुछ नहीं खाया था। राजेश ने कहा पापा मैंने दोपहर में लंच किया था ।अभी मेरा खाने का बिल्कुल मन नहीं है ।

शेखर ने कहा बेटा कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ना तुम्हारी तबीयत तो ठीक है ना।

राजेश ने कहा पापा मेरी तबीयत ठीक है ।पर खाने खाने का बिल्कुल भी मन नहीं।

शेखर ने कहा, ठीक है बेटा।

शेखर चला गया ।जब वह डायनिंग टेबल पर पहुंचा सुनीता ने शेखर से पूछा क्यो जी राजेश नहीं आया शेखर ने कहा नहीं। उसका खाने का मन नहीं है ।

सुनीता ने कहा ठीक है जी तुम लोग खाना खा लो उसे भूख लगेगा तब वह खाना खा लेगा।

सुनीता स्वीटी और शेखर दोनों को खाना परोसने लगी। शेखर ने देखा कि सुनीता अपने लिए खाना नहीं निकाल रही है वह सुनीता से पूछा ,तुम नहीं खाओगी

सुनीता ने कहा मैं राजेश को खिलाने के बाद खा लूंगी। तुम लोग खाना खालो।

शेखर को कुछ अजीब सा लगा। इन मां बेटा के बीच आखिर चल क्या रहा है?

स्वीटी और शेखर दोनों भोजन कर लेने के बाद ।अपने अपने कमरे में चले गए। सुनीता बर्तन धोने और किचन का कुछ काम निपटा लेने के बाद। एक थाली में भोजन निकालकर राजेश के कमरे की ओर चली गयी।

कमरे में जाने के बाद देखा राजेश लेटा हुआ है। कमरे मे एक स्टूल नाम रखा हुआ था ।सूनिता स्टूल को पास खींच कर ,उसमें भोजन की थाली रख दी ।और बेड पर बैठ गई ।उसने राजेश से कहा चलो खाना खा लो।

राजेश ने कहा ,मुझे भूख नहीं है। मुझे नहीं खाना है।

सुनीता ने कहा, तुम्हें क्या लगता है कि तुम खाना नहीं खाओगे तो मैं पीघल जाऊंगी और जो तुम करना चाहते हो। वह सब करने दूंगी ।मैं अपनी मर्यादा भूल जाऊंगी। ऐसा कभी नहीं होगा।

तुम खाना नहीं चाहते तो ठीक है मत खाओ।मैं भी नहीं खाऊंगी। यहां मेरी चिंता किसको है ।मैंने सुबह से कुछ नहीं खायी है ।वह सुबकने लगी ।

कुछ देर बाद फिर बोली ,तूम नहीं खाना चाहते हो तो ठीक है मैं जा रही हूं ।मैं भी नहीं खाऊंगी और भूखी रहूंगी ।

वह भोजन की थाली उठाकर जाने को हुई।

राजेश अपनी मां को अच्छी तरह से जानता था ।उसे लगा था कि उसकी मां कुछ नहीं खाई होगी ।वह नहीं चाहता था कि उसकी मां भूखी रहे ।जब सुनीता भोजन की थाली ले जा रही थी ।तो उसने उसे रोक दिया थाली को अपने हाथों में ले लिया और बेड पर ही बैठ कर ।भोजन करने लगा।

सुनीता राजेश को भोजन करते देख मुस्कुराने लगी। राजेश बिना कुछ बोले ही खाना जल्दी से खत्म कर दिया वह चाहता था, उसकी मां कमरे से जल्द से जल्द चली जाए ।

सुनीता राजेश से पूछना चाहती थी कि आज तुम्हें कॉलेज से घर आने में लेट क्यों हो गया ।कहां थे ?पर उस उसे इस समय कुछ पूछना ना कुछ ना ठीक नहीं लगा । राजेश ने भोजन कर लिया वह उसी पर संतुस्ट हो गई थी।

वह भोजन की थाली लेकर किचन में चली गई और खुद भी भोजन कर ,अपने रूम में चली गई।

सुनीता अपने बेड पर लेट गई। शेखर अभी सोया नहीं था। उसने सुनीता से पूछा, राजेश ने भोजन किया।

सुनीता ने कहा हां ।

राजेश आखिर भोजन क्यों नहीं कर रहा था लगता है वह नाराज है ।आखिर बात क्या है? मुझे भी कुछ बताओ।

सुनीता कहती है वह मुझसे इजाजत मांग रहा है ?

शेखर कहता है ,कैसी इजाजत?

सुनीता मन में कहती है, मैं क्या बताऊं, तुम्हारा बेटा अपने ही मां पर चढना चाहता है ।अपनी मां को अपनी बच्चे की मां बनाना चाहते हैं। अपनी मां को भोगना चाहता है।

शेखर फिर पूछा, क्या सोचने लगी ?कुछ बताती क्यों नहीं ?

सुनिता ने कहा ,अब क्या बताऊं जी ।राजेश अब बिगड़ गया है। वह कालेज में गर्लफ्रेंड बनाना चाहता है ।तुम तो जानते हो बिना मेरे इजाजत राजेश कोई भी नया काम नही करता ।वह मुझसे इजाजत मांग रहा है मैंने इजाजत नहीं दी,तो वह जिद करने लगा ।मैंने उससे कहा कि तुम लड़कियों के चक्कर में ना पड़ो पढ़ाई लिखाई पर ध्यान दो और अपने पैरों पर खड़े हो जाओ। उसके बाद कोई गर्लफ्रेंड बनाना इसलिए वो नाराज है संगीता ने शेखर से सही बात नहीं बताई।

शेखर ने कहा ,राजेश अब जवान हो चुका है उसका भी मन करता होगा ।कुछ करने का ।गर्लफ्रेंड बनाने दो।वह इस समय में इंजॉय नहीं करेगा तो कब करेगा।

सुनीता ने कहा ,नहीं जी लड़कियों के चक्कर में वह पढ़ाई में ध्यान नहीं देगा ।जब तक वह अपने पैरों पर खड़ा न हो जाए उसे लड़कियों से दूर रहना चाहिए ।मैं उसके भविष्य को बर्बाद होते नहीं देख सकती इसलिए मैं राजेश को किसी लड़कियों के चक्कर में पडने की में इजाजत नहीं दे सकती । चाहे वह मुझसे कितना ही नाराज क्यों ना हो जाए और आप मां बेटा के बीच में ना पढ़ें ।उसकी नाराजगी धीरे-धीरे दूर हो जाएगी ।रात काफी हो गई है ,आप सो जाइए ।

शेखर ने सुनीता से कहा , ठीक है भाग्यवान तुम तो मुझे पर ही चिल्लाने लगी । जैसी तुम्हारी इच्छा हो करो, पर राजेश का इस तरह रूठना मुझे कुछ अच्छा नहीं लगा।

सुनीता ने कहा सब ठीक हो जाएगा ।आप परेशान मत होइए।

इधर स्वीटी अपने बेड पर लेटे हुए राजेश की मदद करते समय अपने भाई के लंड को हाथ से हिलाना उसे चूसना सब याद आने लगी । वह राजेश के लंड को याद करते हुए उत्तेजित हो गई थी।

वह मन में कह रही थी, अब भाई तो ठीक हो गया है अब पता नहीं मुझे भाई के लंड* को देखने का का मौका कब मिले। कितना बड़ा , लंबाऔर प्यारा है भाई का लंड । काश मुझे और मौका मिल पाता, भाई के लैंड से खेलने का।

वह अपना एक उंगली है अपनी चूत * के अंदर ले जाकर उसे अंदर-बाहर करने लगी और अपने भैया के लंड को याद करते हुए उंगली को चूत मे तेज तेज चलाने लगी । और कुछ देर बाद ही वह आह भैया आह करते हुए झडने लगी।

इधर राजेश बेड पर लेटा हुआ दोपहर में कौशल्या की चूदाई करने में जो मजा आया था उसे याद करते हुए उत्तेजित हो गया था। उसका लंड तन कर खड़ा हो गया था ।

उसका चुदाई*करने का मन करने लगा। वह सोचने लगा, काश मां मान जाती तो मेा। मां को भोग रहा होता ।वह अपने लंड को अपने हांथ से सहला रहा था।

राजेश ने सोची मां नहीं मान रही तो क्यों ना स्वीटी के साथ आगे बढ़ू ।स्वीटी मना नहीं करेगी ,कम से कम वह लंड तो चूसेगी ही ।

फिर वह सोचने लगता है नहीं ,नहीं ,मां ने मुझे स्वीटी की मदद लेने से मना किया है ।अगर मेै स्वीटी के साथ अभी कुछ किया और मा द्वारा पकड़ा गया तो मां मुझे कभी नहीं मिलेगी। वह मुझे हवस की पुजारी समझेगी। मैं उसकी नजरों में गिर जाऊंगा ।मुझे पहले मां को प्राप्त करना होगा और उसके कहने पर ही स्वीटी के साथ आगे बढ़ूगा ।मुझे अपने पर नियंत्रण रखना होगा और चूत का का जुगाड़ बाहर ही करना होगा।

इधर भगत को भी चुदाई करने का मन कर रहा था वह कौशल्या देवी को कॉल करता है।

इ स समय कौशल्या देवी और उसका पति कामता प्रसाद दोनों बेड पर लेटे हुए थे। कामता प्रसाद सो चुका था, पर कौशल्या देवी का नींद नहीं लगी थी।मोबाइल पर रिंगटोन बजने की आवाज सुनकर कौशल्या देवी अपने बेड से उठ कर, मोबाइल उठाती है।

वह देखती है ,भगत कॉल हैं। उसका पति ना जग जाए , इसलिए कॉल उठा कर वह हाल के बाथरूम मे चली गई और फिर भगत से बोली बेटा कैसे फोन किए हो।

भगत- मा जी आओ ना ऊपर मुझे चूदाई* करने का बड़ा मन कर रहा है।

कौशल्या देवी कहती है ,नहीं बेटा ,अभी मैं ऐसी स्थिति में नहीं हूं कि चूद* सकूं ।राजेश की चूदाई**** से मेरी चूत* बुरी तरह सूज गई है। बूर के अंदर की दिवारे छिल गई है जिससे चूत में दर्द हो रहा है। मैं ठीक से चल भी नहीं पा रही ।जब तक मैं ठीक नहीं हो जाती, मैं नहीं चूद नही* पाऊंगी ।

भगत ने कहा ,मां जी यह तो राजेश का पहली बार था पहली बार में ही तुम्हारी ऐसी हालत कर दी ।

कौशल्या देवी कहां ,बेटा राजेश का लंड* काफी बड़ा है, गजब का जोश है उसके अंदर, पूरे शरीर को हिला कर रख दिया । मेरे शरीर का पूरा अंग अंग टूट गया। मै पांच-छह दिन तक चुद नही पाऊंगी ।

भगत ने कहा राज भाई को मैं अनाड़ी समझ रहा था वह तो खिलाड़ी निकला ,पर मा जी मै 5 दिनों तक बिना चोदे नहीं रह सकता। अगर चूत में दर्द हो रहा है तो मै गांड मार के संतुष्ट हो जाऊंगा। आओ ना,।

कौशल्या देवी ने कहा, नहीं बेटा मैं नहीं चूद पाऊंगी ,तुम जवानों का कोई भरोसा नहीं रहता, जोश में होश खो बैठते हो ।कब लंड गांड से निकालकर बूर मे चला जाएगा। पता ही नहीं चलेगा ।मै रिस्क लेना नहीं चाहती अगर तुम बिना चूदाई के नहीं रह सकते ,तो कोई दूसरा जुगाड़ कर लो और कौशल्या देवी मोबाइल रख दी।

इधर भगत अपने लंड* को अपने हाथों से हिलाते हुए सोना पड़ा ।

अगले सुबह जब राजेश सो कर उठा वह बिना ,अपनी मां से बात किए हैं जिम के लिए निकल गया और जिम से आने के बाद सुनीता से कोई बात नहीं किया।

नाश्ता करते समय भी वह खामोश बैठा था ,शेखर जान चुका था ।राजेश अपनी मां से नाराज है । यह मां बेटे के बीच का मामला है ।वह इस मेटर पर कुछ नहीं बोला ।

सुनीता भी चूप थी, वह सोच रही थी । बेटा कब तक तुम अपनी मां से नाराज रहता है ,मैं भी देखती हूं, सुनिता भी अकड़ में आ गई थी ।

नाश्ता करने के बाद शेखर अपनी ड्यूटी पर चला गया कुछ देर बाद राजेश और स्वीटी भी कालेज के लिए निकल गए ।

कॉलेज में लंच ब्रेक के समय राजेश और भगत दोनों कैंटीन में बैठे थे ।भगत ने राजेश से बोला , भाई राजेश तुमने तो मेरा खेल ही बिगाड़ दिया।

राजेश ने कहा , क्यो बे ?क्या हुआ ?

भगत-भाई रात में मुझे चुदाई * करने का बड़ा मन था। मैंने मां जी को कमरे में आने को कहा, पर मा जी मेरे कमरे में नहीं आई ,कह रही थी तुमने उसे जम कर चोदा है जिससे उसकी चूत * सूज गई है ।वह बोली कि मै 5 दिनो तक नहीं चुद पाऊंगी।

राजेश -क्या कहा मा जी ने ,वह 5 दिनों तक नहीं चूद* पाएगी ।यार मेरा मन आज फिर उसे चोदने* का था ।

भगत ने कहा ,भाई कॉलेज में सभी लड़कियां तुम पर मरती है । तुम्हारा जुगाड़ तो आसानी से हो जाएगा। तुम्हारा इशारा करने की देर है। लड़कियां तुम्हारी बाहों में आ जाएगी ।कई लड़कियां तो ऐसी है जो तुमसे चुदने के लिए मरी जा रही है ।

राजेश ने कहा यार किसी के भावनाओं के साथ खेलना ठीक नहीं ।किसी को बहला-फुसलाकर चोदन मे मजा नहीं। प्यासी औरत को चोदने में ,जो बिना किसी शर्त के मजे के लिए चुदवाए, उसको चोदने में बड़ा मजा आएगा ।इन कॉलेज की लड़कियों को धोखे में रख कर , बहला-फुसलाकर चोदना है ठीक नहीं है। कोई प्यासी गदर आई माल का जुगाड़ हो तो बताओ।

भगत ने कहा भाई ऐसा माल का जुगाड़ करने में कई दिन निकल जाती है। लगता है अब हाथ से काम चलाना पड़ेगा ।भगत कैटिन के खिड़की से बाहर के तरफ देखने लगता है। तभी उसकी नजर कॉलेज के चौकीदार सुखीराम पर पड़ता है ।वह देखता है कि सुखीराम अपने साइकिल से कॉलेज के बाहर कहीं जा रहा है ,जिसे देखकर वह राजेश से कहता हैं भाई प्यासी और गदर आई मांल का जुगाड़ हो गया समझो।

राजेश -क्या बोल रहा है बे कहां है गदर आई माल और वह भी भी खिड़की से बाहर देखने लगा। उसने देखा कि कालेज का चौकीदार सुखी राम अपनी सायकल से कॉलेज के बाहर जा रहा था। उसने कहा अबे वह चौकीदार चाचा सुखीराम है।

भगत ने कहा अरे हां भाई गदर आई माल तो इसकी बीवी चमेली बाई है। भूल गया क्या ?क्या मस्त चूची है साली की ?इस वक्त घर पर अकेली होगी ।चाचा जी तो किसी काम से बाहर जा रहे है ।चलो चलते हैं। मुझे पूरा यकीन है कि चमेली बाई प्यासी है ।क्या तराशा हुआ बदन है साली का ? उसकी चूत मारने में बड़ा मजा आएगा। चलो उसके घर चलते हैं।

राजेश कहता हैं पर अचानक से उसका घर जाना ठीक रहेगा ।कहीं गलत समझी तो। लेने के देने न पड़ जाऐगे।

भगत- भाई लगता है तुम सब भूल गए उसने तो हमें घर आते जाते रहने के लिए कहा है भूल गए क्या ?

राजेश -चाची ने कहां कहा तो था ,पर काफी दिन हो गए ।

भगत -अरे ट्राई करने में क्या जाता है?

असल में सुखीराम कॉलेज का चौकीदार था जो रात में चौकीदारी करता था ।कालेज परिसर में एक कोने पर चौकीदार के रहने के लिए कॉलेज प्रशासन के द्वारा रहने के लिए एक मकान बनाया गया था ।जिसमें एक बेड एक ,बैठक रूम और किचन था। कालेज के द्वारा ही सुखीराम को रहने के लिए दिया गया था ।सुखीराम के दो बच्चे थे जो स्कूल में पढ़ाई कर रहे थे ।उसकी बीवी चमेली काफी खूबसूरत थी ।उसका बदन का गदराया हुआ था । वह जवान थी ।उसकी उम्र मैं 35- 36 वर्ष की होगी। परिवार के चार सदस्य कालेज प्रशासन के द्वारा दिए गए मकान रहकर कॉलेज की रात में चौकीदारी करते थे ।

तभी कालेज में 1 दिन ,एक घटना घट गई

कॉलेज में रात मे चोरी हो गया ।उस दिन सुखीराम चौकीदारी कर रहा था । चोर कैसे आया और कैसे चोरी की उसे पता ही नहीं चला। कॉलेज प्रशासन ने सारा दोष सुखी राम पर डाल दिया और ठीक से ड्यूटी ना करने का इल्जाम लगाकर । उसे डांटते हुए नौकरी से निकालने का प्रस्ताव पारित कर दिया गया ।

सुखी राम कॉलेज के पदाधिकारियों से काफी हाथ पाव जोड़ते रहे लेकिन किसी ने उस पर दया नहीं दिखाई।

भगत और राजेश ने सुखीराम को रोते गिडगिडाते देखकर ,उस पर दया आ गया। उसने सुखीराम से सारी बातें जानने की कोशिश की ,सुखीराम ने बताया कि आखिर उस दिन हुआ क्या था ।

राजेश और भगत को लगा कि सुखीराम निर्दोष है उसका बचाव करना चाहिए और उन दोनों ने कॉलेज प्रशासन के सामने ,सुखीराम का बचाव किया और अपनी सूझबूझ असली चोर को पकड़वा भी दिया।

भगत और राजेश के द्वारा सपोर्ट करने से कालेज प्रशासन ने सुखीराम को एक और मौका दिया।

सुखीराम राजेश और भगत के मुरीद हो गए ।उसने दोनो से हाथ जोडकर बहुत धन्यवाद किया और यह बात अपनी पत्नी चमेली बाई को बताई । किस तरह राजेश्वर भगत उनकी मदद की ।

चमेली बाई ने अपने पति सुखीराम से राजेश और भगत से मिलकर उन्हे धन्यवाद देने की इच्छा जाहिर की।

सुखी राम जी अपनी बीवी चमेली बाई से कहा मैं उन दोनों को घर में लंच के लिए आमंत्रित करूंगा फिर तुम उनसे मिलकर धन्यवाद दे देना ।

चमेली बाई बोली - हां ,यह ठीक रहेगा ।कल तुम उन दोनो को लंच के लिए आमंत्रित कर देना और पूछ लेना कि उन्हें खाने में क्या पसंद है ?

सुखी राम ने कहां, हां, मैं आज ही उनसे मिलकर उन्हें कल लंच के लिए आमंत्रित कर देता हूं ।

सुखीराम राजेश और भगत से मुलाकात किया और उनसे कहा बेटा तुमने जो हमारी मदद की उसकी शुक्रिया अदा करने के लिए तुम्हारी चाची तुम लोगों से मिलना चाहती है। वह तुम दोनों को लंच के लिए आमंत्रित की है ।

राजेश -चाचा जी आप निर्दोष थे ।आपका मदद करना हमारा फर्ज था ।हमारे लिए आप लोगों को कष्ट उठाने की जरूरत नही ।हम आपके घर आकर चाची जी से मिल लेंगे ।हमें भी चाची जी से मिलकर खुशी होगी ।

सुखीराम -फिर भी बेटा हमारा भी मान रख लो। कल लंच हमारे यहां करना।

सुखीराम के जिद करने पर राजेश ने लंच के लिए हामी भर दी ।

सुखीराम ने खाने में क्या चीज पसंद है राजेश और भगत से पूछ लिया ।

दूसरे दिन जब कॉलेज में लंच ब्रेक हुआ सुखीराम दोनों को घर ले जाने के लिए राजेश और भगत से मिले उनसे बोले , चलो बेटा लंच के लिए ,घर चलो , तुम्हारी चाची तुम लोगों का राह देख रही है ।

राजेश और भगत दोनों सुखीराम के साथ उसके घर की ओर चल देते हैं ।घर जाने के बाद तीनों के घर के बैठक रूम में जाकर बैठ जाते हैं। सुखीराम अपनी बीवी चमेली को आवाज लगाती है । इस समय चमेली बाई , कीचन मे ,भोजन की तैयारी कर रही थी ।

अजी सुनती हो राजेश् और भगत आ गए है ।चमेली किचन से बाहर निकलती है। चमेली को देखते ही भगत की आंखें खुला का खुला रह गया ।

दरअसल सुखीराम 50 से ज्यादा के लगते थे ।उसी हिसाब से भगत ने अंदाजा लगाया था उसकी बीवी काफी उम्र की होगी और एक देहात किस्म की होगी।

पर चमेली बाई काफी जवान गदराया हुआ बदन और बन ठन कर रहने वाली महिला थी ।उसने एक नई साड़ी पहनी हुई थी ।उसकी ब्लाउज पीछे से काफी खुला और सामने से काफी डिप था साड़ी को नाभि के नीचे बांधी हुई थी ।जिससे नाभि गदराए बदन की शोभा बढ़ा रही थी।

जब चमेली किचन से बाहर आई सुखीराम ने चमेली बाई से राजेश और भगत का परिचय कराया ।

राजेश ने चमेली बाई से - नमस्ते चाची ।

भगत उसकी मदमस्त जवानी को देखकर कहीं खो सा गया था ।राजेश ने भगत को अपने कहानी मारा ।भगत होश में आया और उसने चमेली भाई को नमस्ते चाचू कहा।

चमेली बाई बोली -नमस्ते बेटा ,बेटा तुम्हारे चाचा जी ने तूम दोनो के बारे में मुझे बताया किस तरह से तूम दोनो ने हमारी मदद की ।अगर तुम नहीं होते हमारी इज्जत मान सम्मान सब चला जाता ।मुझे आप लोगों से मिलने की बड़ी इच्छा थी आप दोनों ने जो उपकार हम पर किए उसके लिए हम सदा आभारी रहेंगे।

राजेश ने कहा चाची जी यह तो हमारा फर्ज था। चाचा जी निर्दोस थे ,इसलिए हमने चाचा जी का सपोर्ट किया ।

राजेश ने भगत को फिर कोहनी मारा, भगत कहीं खो गया था ।वह होश में आया ।भगत लड़खड़ाते आवाज में कहा हां चाची जी राजेश सही कह रहा है यह तो हमारा फर्ज था ।

चमेली बाई ने कहा बेटा यह तुम दोनों का बड़प्पन है खाना तैयार है चलो हाथ धो लो भोजन करना ।

चमेली बाई पानी का गिलास टेबल पर रख दी ।राजेश ,भगत और सुखी राम तीनो हाथ धोकर भोजन करने के लिए बैठ गए ।

चमेली बाई तीनों के लिए थाली में भोजन लेकर आई और थाली नीचे रखने के लिए नीचे झूकी तो उसके बड़ी-बड़ी चूचियां सामने झूलने लगी उसका गोरे गोरे दूध ,भगत को अपना दीवाना बना दिया।

भगत अपने मन में कहने लगा क्या मस्त माल है यार साली की क्या मस्त चुचीया है ।भगत का लंड* खड़ा खडा हो गया ।

जब चमेली भोजन की थाली लगाकर वह किचन की ओर गई, तो वह अपने चूतड को मटकाते हुए ।कमर को लचकाते हुए गई जिससे भगत समझ गया चाची भी हमें रिझाने की कोशिश कर रही है ।लगता है चाची भी प्यासी है ।

जब वह भोजन परोसती थी तो भगत को लगता था कि वह जानबूझकर ज्यादा झुक जाती थी ताकि उसकी चूचियां सामने झुलने लगे और भगत और राजेश अच्छे से देख सके ।भगत अपने मन में कहां यह साली तो चालू लगती है । कैसी अपनी चुचिया दिखा रही है।

राजेश ने चमेली बाई से कहा ,चाची जी क्या स्वादिष्ट खाना बनाई हो, मटर पनीर का स्वाद तो पूछो मत, होटल से भी ज्यादा स्वादिष्ट बना है। आपके हाथों में तो जादू है। क्यों भगत ?

राजेश ने भगत को फिर कोहनी मारा भगत ने लड़खड़ाते हुए आवीज मे कहा हां चाची खाना काफी स्वादिष्ट बना है ।

चमेली बाई राजेश के द्वारा अपनी तारीफ सुनकर खुश हो गई।

इधर राजेश ने भगत से धीरे से कहां अबे कहां खो जाता है है । खाने पर ध्यान दें ।क्यो इज्जत का भाजीपाला कर रहा है ?चाची जी ऐसे तुम्हें घूरते हुए देखेगी तो हमारे बारे मे क्या समझेगी ?

भगत राजेश की बात से थोड़ा शर्मिंदा हुआऔर खाने में पर ध्यान देने लगा ।

भोजन कर लेने के के बाद भगत की नजर दीवार पर लगे फोटो की तरफ गया ।उसमें एक महिला की फोटो थी ।जिसे देखकर राजेश ने सुखीराम से पूछा चाचा जी यह किसकी फोटो है ?

सुखीराम ने बताया ,बेटा यह मेरे पहले बीवी की फोटो है ।जब वह बच्चे जन्म दे रही थी तक गुजर गई। बच्चा भी ना बच सका। लोगों के बार बार कहने पर मैंने दूसरी शादी की ।चमेली मेरी दूसरी पत्नी है। यह दोनों फोटो मेरे बच्चों की है,जो इस समय स्कूल गए हुए है।

भगत ने मन मे कहा तभी चाची इतनी जवान है।

कुछ समय तक चमेली बाई , राजेश, भगत और सुखीराम आपस मे बातचीत करते रहे ।भगत तो चमेली बाई के गदराया बदन को ही निहार रहा था बातचीत के दौरान भगत ने अनुभव किया कि कैसे तिरछी नजरों से चमेली बाई राजेश को चुपके से निहारती है । चमेली बाई राजेश की तरफ आकर्षित थी जिससे पता चलता था कि चमेली बाई प्यासी है।

राजेश् और भगत को आया एक घंटा हो चुका था क्लास लगने का समय हो चुका था ।राजेश ने कहा चाची जी आपसे बातें करते करते ,समय ,कैसा निकला, पता ही नहीं चला ।क्लास लगने का समय हो चुका है। अब हमें चलना होगा। हमें इजाजत दीजिए।

चमेली बाई ने कहां ठीक है बेटा ।अपनी चाचा चाची से मिलने के लिए आते रहना। भूल ना जाना और भोजन करने का मन हो तो मुझे बतला देना तुम दोनों के लिए लंच बना दूंगी ।

राजेश ने कहा ठीक है चाची जी और धन्यवाद इतना स्वादिष्ट भोजन कराने के लिए। जब भी हमारा मन करेगा । स्वादिष्ट खाना खाने जरूर आएंगे ।अच्छा चाचा जी हम चलते हैं ।

सुखीराम ने कहा ठीक है बेटा बेटा तुम्हारी चाची ने बिल्कुल ठीक कहा हमारे घर आते रहना ।राजेश बोला ठीक है चाचा जी ।

राजेश् और भगत क्लास अटेंड करने के लिए चले गए ।

उस दिन के बाद से अभी तक दोनों सुखीराम के घर फिर नहीं गए थे लेकिन आज काफी कुछ बदल गया था आज राजेश और भगत दोनाे को एक चूत की जरूरत थी । इसलिए आज दोनो फिर से सुखी राम के घर की ओर चल पड़े। इस आस मे की सुखी राम के घर चूत * का जुगाड़ हो जाए।

दोस्तों क्या चेतन और भगत दोनों चमेली बाई को भोग पाएंगे, यह जानने के लिए पढ़ते रहिए ,यह क्या हो गया,?
 
🌺🌺🌼💥💥💥सभी मित्रों को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं💥💥🌹🌹
 
राजेश्् और भगत चमेली बाई को जी भर के भोगने और नाश्ता करने के बाद क्लास अटेंड करने कॉलेज आगए।

अंतिम कालखंड की घंटी बजी , केमिस्ट्री पढ़ाने मैडम सुमन कक्षा में क्लास लेने पहुंची।

आज वह काफी हॉट लग रही थी ।वह पारदर्शी साड़ी पहनी हुई थी ,जिससे उसके साड़ी के अंदर का गोरा बदन पर उसकी नाभि और ब्लाउज बाहर के बाहर जाते हुए उसकी चूचियां साफ नजर आ रहे थे ।

उसके गोरे बदन पर खूबसूरत नाभि छात्रों की उत्तेजना बढ़ाने के लिए काफी थे।

ऊपर से उसकी बड़ी बड़ी गोल-गोल चूचियां जो ब्लाउज से बाहर आने के लिए बेताब थे ,उसे देखकर कक्षा मे लड़कों के लंड में तनाव आने लगा ।

भगत ने राजेश से कहा देखो भाई आज मैडम कितनी हॉट लग रही है ।वह राजेश से बोला उन लड़कों की तरफ देखो, सुमन मैडम के इस हॉट रूप को देखकर कैसे लड़के अपने लंड* मसल रहे हैं।

भाई सच में क्या मस्त माल है? मैडम सुमन ।

आखिर इतनी हॉट ड्रेस क्यो पहनती है। मुझे लगता है जरूर किसी को रिझाने के लिए ही ऐसी ड्रेस पहनती हैपर पता नहीं यह किसको दिखाने के लिए पहनती है?

कई लड़के एवं शिक्षक इनके करीब आने का प्रयास करते हैं ,लेकिन किसी को भाव ही नहीं देती। पता नहीं उसके मन में कौन समाया हुआ है।

क्या मस्त गदराया हुआ बदन है शाली का ,जिसको यह मिलेगी ,वह बहुत किस्मत वाला होगा। वह तो जन्नत में ही पहुंच जाएगा।

राजेश भोला अबे क्या बकवास किया जा रहा है पढ़ाई पर ध्यान दें उसे ऐसी ड्रेस अच्छी लगती होगी इसलिए पहनती होगी ।आजकल तो यह सब फैशन है ।

भगत बोला नहीं भाई मुझे लगता है ?यह जरूर किसी को रिझाने के लिए ही ,ऐसी हॉट ड्रेस पहनती है।

मैडम सुमन जब ब्लैक बोर्ड पर डायग्राम बना रही थी तब उसके खुले पीठ एवं उसकी गांड को देखकर लड़के लोग की हालत और खराब हो गयी।

सभी लड़के मैडम की गांड को ही घूर रहे थे।

डायग्राम बनाते समय मैडम के हाथों से चाक नीचे गिर जाती है। मैडम चाक उठाने के लिए जैसे ही नीचे झुकती है ।उसकी साड़ी के पल्लू नीचे गिर जाती है। जिससे उसके बड़ी-बड़ी गोरे-गोरे, गोल गोल चूचिया नीचे झुलकर छात्रों के सामने आ जाते हैं, जिससे देखकर राजेश का ना चाहते हुए भी, उसका लंड में तनाव आ गया ।

जब मैडम ऊपर उठी तो वह राजेश की ओर देखी, राजेश उसकी चूचियां को ही देख रहा था। राजेश की नजर मैडम की नजर से मिली तो मैडम सुमन, राजेश को अपनी चुचियों को घूरते हुए पाया।

राजेश चूचियो को घूरते हुए पकड़े जाने पर बहुत ही शर्मिंदा महसूस किया।

मैडम सुमन की झूलती हुई चुचियों को देखकर सभी लड़कों की हालत और ज्यादा खराब हो गई। भगत का लंड तो तनकर ठूनकी मारने लगा था ।

भगत ने राजेश से कहा भाई क्या मस्त कबूतर है यार मैडम की । मैडम ने तुम्हे में एक मौका दिया था उसके करीब जाने का ।तुम चाहो तो अभी भी उसे करीब जा सकते हो। क्या गजब का बदन है? क्या मस्त कबूतर है।

राजेश बोला अबे अब बस भी कर ,तुम्हें तो हर वक्त बस यही सूझता है ।

क्लास खत्म होने के के बाद सभी स्टूडेंट अपने घर जाने लगते है। राजेश आज भी घर जल्दी नहीं जाना चाहता था क्योंकि वह अपनी मां को तड़पाना चाहता था ।

स्वीटी राजेश के पास आती है वह बोली, चलो भैया घर चलते हैं ।

राजेश आज भी घर लेट से जाना चाहता था ,वह बोला ,नहीं स्वीटी ,मुझे कुछ काम है ।तुम अपनी सहेली के साथ घर चले जाओ ।मुझे थोड़ा लेट हो जाएगा।

स्वीटी कहती है भैया क्या काम है? आपको ।मां पूछेगी तो क्या बताऊंगा ।

राजेश को कुछ सूझ नहीं रहा था कि वह क्या बहाना बनाए ,कि वह कहां जा रहा है । वह सोचने लगा कि सिटी को क्या जवाब दूं ,फिर अचानक उसके मुंह से निकल जाता है ।कह देना कि वह केमिस्ट्री टीचर के घर गया है ।छूटे कोर्स पूरा करने हैं इसलिए मुझे आने में लेट हो जाएगा।

स्वीटी बोली ,ठीक है भैया ,मैं चलती हूं।

इधर राजेश स्वीटी से तो बोल दिया था कि वह मैडम सुमन के घर जाएगा, लेकिन उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह कहां जाए।

वह गार्डन में जाकर सोचने लगा कि वह कहां जाए कुछ देर सोचने के बाद राजेश यह निर्णय लिया कि वह सुमन मैडम के घर ही जाएगा। मैडम ने खुद ही घर आने के लिए उसे आमंत्रित किया था ।

मैं उसे झूठ बोल देता हूं कि मुझे कुछ चैप्टर में दिक्कत है। वह मन में कहता है, हां यही सही रहेगा और वहां कुछ समय व्यतीत करके मै अपना घर चला जाऊंगा।

राजेश मैडम सुमन को कॉल करता है ।

मैडम सुमन कॉलेज से आने के के बाद थकान मिटाने अपनी बेड पर आराम करती है ।वह प्रतिदिन की तरह आराम कर रही थी ।तभी अपने मोबाइल पर किसी का कॉल आने की घंटी सुनाई पड़ती है ।वह देखती है कि राजेश ने कॉल किया है।

वह खुश हो जाती है । वह कॉल उठाती है । उधर से आवाज आताहै, हेलो मैम।

मैडम सुमन कहती है हेलो राजेश ।कैसे कॉल किए थे।

राजेश ने कहा ,मैंम मुझे छूटे हुए चैप्टर के कुछ टॉपिक पर दिक्कतें हैं । आपने कहा था कि कोई दिक्कत हो तो घर आने के लिए।

सुमन बोली ,हां राजेश ।तुम आ सकते हो। तुम्हें कोई दिक्कत है क्या ?

राजेश बोला हां मैंम क्या मैं आज आपके घर आ सकता हूं ?

सुमन बोली ,हां ,क्यों नहीं ?वैसे कितने समय तक पहुंच जाओगे।

राजेश- मैंम मै 5:00 बजे पहुंच जाऊंगा ।

सुमन ने कहा, ठीक है राजेश तुम आ जाओ।

काल रखने के बाद सुमन खुशी से झूमने लगती है। उसे लगने लगता है कि उसकी अरमान अब पूरे होने वाले हैं और वह अपने पति सौरभ को जो कि एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था और एक बड़ी कंपनी कार्यरत था ,को कॉल लगाती है ।

सौरभ काल उठाता है ।वह कहता है ,अरे सुमन कैसे काल लगाई हो ।

सुमन ने कहा सुनिये जी आज मैं बहुत खुश हूं।

सौरभ ने कहा ऐसी क्या बात है हमें भी तो पता चले।

सुमन ने कहा तुम भी जानोगे तो खुशी से झूम उठो लगे ।

सौरभ -अरे सुनाओ हमे भी क्या बात है ?जिससे तुम इतनी खुश हो ।

सुमन ने कहा ,आज राजेश हमारे घर आ रहा है ।

सौरभ ने कहा, क्या तुमने सच कह रही हो , क्या राजेश सच में आज हमारे घर आ रहा है।

सुमन ने कहा हां जी उसने मुझे अभी फोन पर खुद खुद ही आने की बात कही है ।वह 5:00 बजे तक घर पहुंच जाएगा ।

सौरभ भी यह बात सुनकर खुशी से झूम उठता है।

सुमन सौरभ से कहती है सुनो जी मुझे तो समझ ही नहीं आ रहा है कि मैं क्या करूं ।

सौरभ कहता है तुम पहले काम वाली बाई की छुट्टी कर दो और कोई अच्छी सी हॉट ड्रेस पहन लो ।राजेश को अपने जलवा दिखाना। वैसे भी तुम कहां पहले से ही काफी हॉट हो ।

मुझे यकीन है तुम्हारा गदराया बदन को देखकर राजेश जरूर बहकेगा ।

सुमन ने कहा पर मैं राजेश के सामने ये सब कैसे कर पाऊंगी ।मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा।

सौरभ शाम को 6:00 बजे घर पहुंच जाता था ।वह सुमन से बोला राजेश कब तक रहेगा?

सुमन ने कहा कम से कम 2 घंटा तो रहेगा ही 7:00 बजे चला जाएगा। सौरभ ने कहा ठीक है मैं 7:00 बजे के बाद घर आता हूं । तुम राजेश को अपना हुस्न का दीवाना बना देना ।

सुमन ने कहा ठीक है जी कोशिश करूगी ।

सौरभ ने सुमन को बेस्ट ऑफ लक कहा।

दरअसल सुमन और सौरभ की शादी को हुए 8 साल हो गए थे ।उनके कोई बच्चे नहीं थे ।

शादी के 5 साल बाद तक जब बच्चा नहीं हुआ तब वे दोनों डॉक्टर को दिखाएं ।डॉक्टर ने कुछ टेस्ट कराने को कहा ।

टेस्ट कराने के बाद पता चला कि सौरभ की वीर्य मे शुक्राणु इतने सक्रिय नहीं है कि वह सुमन के अंडे को निषेचित कर सकें ।

डॉक्टर ने यह जानकारी सुमन और सौरभ को दिया। सौरभ को जब यह जानकारी हुआ तो उसे काफी दुख हुआ क्योंकि सुमन को मां बनने की बड़ी इच्छा थी।

सौरभ उसकी इच्छा पूरी नहीं कर पा रहे थे और उसकी इच्छा पूरी करना उसकी बस की बात नहीं था।

सौरभ और सुमन एक दूसरे को बहुत प्यार करते थे सौरभ ने सुमन से कहा क्यों ना तुम भी टेस्ट ट्यूब पद्धति से गर्भधारण कर लो ।

आज लाखों लोग इस पद्धति से संतान सुख प्राप्त कर रहे हैं ।सुमन ने सौरभ से कहा नहीं जी मुझे इस पद्धति से मां नहीं बनना है ।इसमें पता ही नहीं चलता की तुम्हारे पेट में किसका बच्चा पल रहा है ।मैं किसी अनजान व्यक्ति के बच्चे की मां नहीं बनाना चाहती उससे अच्छा तो नी :संतान रहना ठीक है ।

सौरभ ने कहा सुमन मैं यह नहीं चाहता कि तुम मेरी कारण संतान सुख से वंचित रहे हो ।अगर तुम्हारा कोई पहले का बॉयफ्रेंड हो तो और तुम उससे मां बनाना चाहो, तो मुझे कोई एतराज नहीं होगा ।

सुमन ने कहा नहीं जी यह तुम क्या कह रहे हो, मेरा कोई बॉयफ्रेंड नहीं है और ना मैं ऐसा करूंगी ।

इस तरह 2 वर्ष और निकल गए सुमन का मुलाकात इधर कॉलेज में राजेश से हुआ ।

वह राजेश की ओर आकर्षित हो गई क्योंकि राजेश हर क्षेत्र में नंबर वन था ।वह कालेज मे स्टूडेंट ऑफ द ईयर चुना गया था ।जब राजेश को यह किताब दिया जा रहा था । वह सौरभ के पास भी राजेश का गुणगान करने लगी ।

कॉलेज में एनुअल फंक्शन था जिसमें स्टूडेंट ऑफ द ईयर का खिताब दिया जाना था ।उस कार्यक्रम में सुमन और उसका पति सौरभ भी उपस्थित थे। राजेश को यह खिताब पाता देख सुमन के मुंह से यह निकल पड़ा काश हमारा भी कोई ,राजेश जैसा बेटा होता। राजेश हर क्षेत्र में सबसे आगे हैं ।मैंने तुमसे राजेश के बारे में बताया था ।

सौरभ ने कहा राजेश तो बहुत ही हैंडसम है ।

घर आने के वाद सुमन और सौरभ दोनों बेड पर सोए हुए थे। तभी सौरभ ने सुमन से कहा मेरे मन में एक विचार आया है ।अगर तुम मान लो तो।

सुमन ने कहा क्या विचार आया है जी मैं भी तो जानू।

सौरभ ने कहा, क्यों ना तुम राजेश की बच्चे की मां बनो ।

सुमन ने कहा, यह तुम क्या कह रहे हो ।वह मेरा स्टूडेंट है ।

सौरभ ने कहा ,हां मैं सही कह रहा रहा हूं ।तुम्हारी मां बनने के के लिए राजेश से अच्छा लड़का तुम्हें और नहीं मिलेगा और मैं जानता हूं जिस तरह से तुम राजेश की तारिफ करती हो राजेश को तुम बहुत पसंद करती हो।

सुमन कहती है पर राजेश को मै एक बेटे के रूप में देखती हूं ।

सौरभ ने कहा देखो सुमन मैं नहीं चाहता कि मेरे कारण तुम संतान सुख से वंचित रहो ।

संतान के लिए तुम्हें दुखी देखकर मुझे अच्छा नहीं लगता ।मेरे कहना मान लो। तुम राजेश से गर्भधारण करो। राजेश तुम्हारा स्टूडेंट है तो उसे अपनी ओर आकर्षित करो। तुम भी काफी सुंदर और हॉट हो ।उसी उसे घर बुलाओ और अपनी समस्या बताओ ।

तूम उसकी बच्चे की मां बनकर , संतान की कमी को पूरा करो ।मुझे बड़ी खुशी मिलेगी ।बोलो तूम क्या कहती हो?

उसने आगे सुमन से कहा मैं जानता हूं कि तुम अचानक से मेरे इस विचारो पर, अपना निर्णय नहीं दे सकती ।तुम इसके बारे में सोचो । और आराम से सोच कर कोई निर्णय लो।

सुमन, सौरभ से बोली मै अभी इसके बारे में मैं कुछ नहीं बोल पाऊंगी। रात हो गई है अब सो जाओ।

सुमन ,सौरभ की कही गई बातों पर चिंतन मनन करने लगी।

जब वह कॉलेज जाती थी वह राजेश को निहारा करती थी और अपने पति सौरभ के बातों पर चिंतन मनन करने लगती थी ।

धीरे-धीरे सूमन राजेश से प्यार करने लगी और अंत में यह निर्णय ली कि वह राजेश की बच्चे की मां बनेगी। और अपने निर्णय से अपने पति को अवगत करा दी।

सौरभ यह जानकार काफी खुश हुआ ।

अब सूमन राजेश को रिझाने के लिए कॉलेज में बन ठन कर जाने लगी। कभी वह हॉट ड्रेस पहन कर भी कॉलेज जाती थी और राजेश को रिझाने की कोशिश करती थी ।पर राजेश लड़कियों से दूर ही रहता था। इसलिए सुमन को समझ ही नहीं आ रहा था कि राजेश को अपनी मन की बात कैसे बताएं ।

जब राजेश कॉलेज नहीं जा पा रहा था और काफी दिन बाद कॉलेज पहुंचा ।तब उसके मन में विचार आया क्यों ना राजेश को छूटे कोर्स को पूरा कराने के बहाने घर बुलाया जाय और अपनी मन की बात बताएं।

यह उसे एक अच्छा मौका जान पड़ा और इसके लिए उसने कोशिश भी की ,जो उसे आज कामयाब होते दिखाई पड़ रहे थे।

आज सुमन और सौरभ दोनों काफी खुश थे ।दोनों के अरमान जो पूरे होते दिखाई पड़ रहे थे ।

सूमन ने आज कामवाली बाई को जल्दी छुट्टी दे दी और सजने सवरने लगेी जैसे किसी विवाहित महिला का पति विदेश गया हो और वह काफी दिनों के बाद लौट रहा हो ।

आज उसकी पिया काफी दिनों बाद घर आ रहा है उसकी इच्छा पूरी करने वह उसे रिझा कर अपना दीवाना बनाना चाहती थी ।

वह एक नई खूबसूरत सी पारदर्शी साड़ी पहन ली ।और एक ब्लाउज जो आगे और पीछे दोनों तरफ से काफी ओपन था, पहन लेी।

साड़ी के अंदर से उसका गोरा बदन दमक रहा था। आंखों पर काजल ,होठों पर लिपस्टिक ,बालों को सवार कर , तैयार होकर ,राजेश के आने का इंतजार करने लगी।
 
सुमन सज धज कर राजेश की आने का बेसब्री से इंतजार कर रही थी ।

कुछ देर बाद दरवाजे पर किसी के आने की बेल बजा।

सुमन का दिल जोरों से धड़क रहा था। धड़कते दिल को किसी तरह संभाले हुए, वह दरवाजा खोलती है।

दरवाजा खुलते ही राजेश की नजर सुमन पर पड़ता है।

सुमन इस समय बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। किसी फिल्मी हीरोइन की तरह ।

राजेश उसे एकटक देखता ही रह गया,वह उसकी खूबसूरती मे कहीं खो सा गया।

जब सुमन ने राजेश से कहा, अरे राजेश कहां खो गए? आओ अंदर आओ।

राजेश नींद से जागा थोड़ा शर्मिंदा पंच महसूस किया क्योंकि उसे लगा मैम ने मुझे इस तरह अपने को देखते हुए कहीं गलत ना समझ बैठे।

राजेश बैठक रूम में जाकर सोफे पर बैठ गया। राजेश पहली बार मैडम सुमन के घर आया था ।किसी अनजान घर में आने से , थोड़ा असहज होना स्वाभाविक है।

मैडम सुमन ने राजेश से कहा, राजेश तुम बैठो मैं तुम्हारे लिए पानी लाती हूं।

राजेश ने कहा मैंम आप क्यों तकलीफ कर रही हो। आप मेरे लिए पानी लाए, मुझे अच्छा नहीं लगेगा।

सुमन ने कहा वो क्या है ना, राजेश कामवाली को अपने घर में कुछ काम था। वह छुट्टी लेकर चली गई है।

राजेश ने कहा मैम आप कष्ट ना करो।

सूमन ने कहा अरे राजेश इसमें कष्ट करने की क्या बात है? बल्कि मुझे खुशी होगी । और वह पानी लाने कीचन मे चली गई।

सुमन को पानी लाने के लिए जाते हुए राजेश पीछे से उसकी खूबसूरती को निहारने लगाा । वह मन में सोचा मैम तो आज खूब सजी है। लगता है वह कहीं जाने को तैयार हुई है ,और मैं बीच में बाधा बन गया। उसे कुछ बुरा सा लगा।

सुमन जब पानी लेकर आई राजेश ने पानी का गिलास उठाया और वह सुमन से कहा,मैम मुझे आपसे कुछ बात पूछनी थी। आप बुरा तो नहीं मानोगी।

सुमन ने कहा नहीं राजेश मैं क्यों बुरा मानूंगी बोलो क्या बात है? मुझे लगता है आप कहीं जाने के लिए तैयार बैठी थी और बीच में आ गया ,कबाब में हड्डी बनने मैंम मै चलता हूं, मै कल आ जाऊंगा ।

सुमन ने कहा अरे राजेश तुम्हें ऐसा क्यों लगा कि मैं कहीं जाने वाली थी

राजेश ने कहा मैंम मुझे आपके पहनावे से लगा कि आप कहीं जाने के लिए लिए तैयार हुई है।

सुमन को कुछ सूझ नहीं रहा था कि राजेश से क्या कहें।वह इतना सजी-धजी क्यों है। वह बुरी तरह फस चुकी थी ।

वह क्या बताएं कि मैं सज धज कर क्यों बैठी हूं। तभी उसे कुछ उसे सूझी और वह बोली ,राजेश आज कामवाली घर जल्दी चली गई तो मेरे हस्बैंड सौरभ और मैंने सोचा क्यों ना आज खाने के लिए किसी अच्छे से होटल में जाए। सौरभ ने मुझे तैयार रहने के लिए बोला है ।

मैम सर कितने समय आएंगे।

सुमन ने कहा वे 7:00 बजे के पहले आजाएंगे ।

सुमन राजेश के सवाल-जवाब से बचना चाहती थी। अतः बात को काटती हुए बोली ,अच्छा राजेश तुम कह रहे थे कुछ टॉपिक को समझने में दिक्कत हो रही है ।

राजेश ने कहा हां मैंम राजेश ने बूक निकाला और वह एक टॉपिक निकाल लिया और सुमन से बोला मैंम मुझे इस टॉपिक मेरी समझ नहीं बन पा रही है इस पर आपकी हेल्प चाहिए।

सुमन सोफे पर राजेश के बगल में बैठ गई और बुक उठाकर देखने लगी। सूमन , राजेश को टॉपिक के बारे मे समझाने लगी ।

कुछ देर समझाने के बाद उसने राजेश से कहा अच्छा राजेश अब तुम आगे के पैराग्राफ को समझने की कोशिश करेो उसमें कोई दिक्कत हो तो बताना।

राजेश ने कहा ठीक है मैम।

सुमन ने राजेश से कहा , राजेश मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बना देती हूं।

राजेश ने कहा नहीं मैम आप कष्ट ना उठाएं, वैसे भी मुझे नाश्ता करने का , अभी मन नहीं कर रहा।

तब सुमन ने कहा अच्छा मैं तुम्हारे लिए चाय बना देती हूं ,अब इसके लिए भी मना मत करना।

राजेश ने कहा ठीक है मैं सुमन मुस्कुराते हुए किचन में चाय बनाने चली गई ।

चाय बनाते हुए सुमन सोचने लगी मैं तो राजेश के सामने लज्जित होते होते बची ।अगर वह जान जाता कि मैं उसी के लिए सज धज कर बैठी हूं तो उसके सामने मेरी क्या इज्जत रह जाती है?

मैं राजेश को कैसे रिझा पाऊंगी ?कहीं राजेश ने कुछ गलत समझ लिया तो , मेै तो उसके सामने मूह दिखाने लायक नहीं रह पाऊंगी वह नर्वस होने लगती है ।

फिर भी वह सोचती है कि उसे प्रयास तो करनी चाहिए आखिर इस पल के लिए उसने इतने दिनों तक इंतजार जो की है और वह फिर वह चाय बना कर बैठक रूम में पहुंची जहां पर राजेश बैठा हुआ था ।

राजेश के सामने जाकर उसके सामने वह झूक गई और जानबूझकर अपनी साड़ी की पल्लू नीचे गिरा दी वह राजेश से बोली ,लो राजेश चाय पी लो।

साड़ी के पल्लू नीचे गिर जाने से सुमन की बड़ी-बड़ी गोल गोल मस्त चूचियां ब्लाउज से बाहर झूलने लगी।

जैसे ही राजेश , पढ़ाई से अपना ध्यान हटा कर ऊपर की ओर देखा ।उसकी नजर सीधा सुमन की बड़ी-बड़ी चूचियों पर गया। सुमन ने जब देखा राजेश उसकी चुचियों को ही देख रहा है उसके शरीर में एक सिहरन दौड़ने लगी।

इधर राजेश सुमन की सुडौल बड़ी-बड़ी चूचियों को देखा तो कुछ समय के लिए उसके लंड* की नसों में खून भरने लगा लेकिन शीघ्र ही उसने अपने पर यंत्रण पा लिया। उसने मन सोचा अबे क्या देख रहा है मैम क्या सोचेगी मेरे बारे मे वह तुरंत अपनी नजर को सुमन की चुचियों से हटा लिया ।

वह चाय का कप उठाकर , चाय पीने लगा।

सुमन सोफे पर बैठ गई । वह राजेश से बोली अच्छा राजेश तुम ,यह बताओ तुम्हारे घर में कौन-कौन है राजेश ने कहा मैंम मेरे घर में मेरे पापा ,मेरे मम्मी, मेरी बहन स्वीटी और मैं 4 मेंबर हैं। मेरे पापा बैंक में मैनेजर है और मम्मी एक हाउसवाइफ है।

राजेश ने पूछा मैमनआप अकेली नजर आ रही है ।घर में और कोई नहीं है क्या?

सुमन ने राजेश से कहा मैं और मेरा हस्बैंड सौरभ रहते है ।सौरभ अभी ड्यूटी पर गया हुआ है ।वह शाम को 7:00 बजे आ जाते है।

राजेश ने कहा और बच्चे ,बच्चे शब्द सुनते ही सूमन की आंखें भर आई और कुछ बोल ना पाई ।

,राजेश को लगा कि कुछ गलत पूछ लिया ।उसने सुमन से कहा मैंम आपके आंखों मे आंसू , मैंने कुछ गलत पूछ लिया ।मुझे माफ कर दीजिए मैंम, मै आपके दिल को दुखाना नहीं चाहता था ।

सुमन ने कहा नहीं राजेश ऐसी कोई बात नहीं है। वह अपने आंसू पोछते हुए बोला राजेश हमारे कोई बच्चे नहीं है।

राजेश को दुख हुआ वह बोला मैम मुझे माफ कर दो , मैं आपका दिल नहीं दुखाना चाहता था। मेरे ऐसे पूछने से लगता है आपको दुख पहुंचा ।

राजेश को भी काफी दुख हुआ मुझे मैम से इस बारे मे नहीं पूछना चाहिए था ।बातचीत के विषय को बदलते हुए, राजेश ने कहा आपने चाय बहुत अच्छा बनाती है ,पीकर मजा आ गया। थैंक्यू मैम अच्छी चाय के लिए।

मैडम सुमन -राजेश तारीफ के लिए शुक्रिया ।

मैडम सुमन चाय का कप उठाकर किचन मे चली गई। सुमन नर्वस हो गई थी। वह सोचने लगी मुझे नहीं लगता है कि मैं राजेश से अपने मन की बात कर पाऊंगी।

वह सौरभ को कॉल किया सौरभ ने देखा कि सुमन ने कॉल किया है वह खुश हो गया और कहां, हेलो डियर। क्या कुछ बात बनी?

सुमन ने कहा नहीं जी मुझसे नहीं हो पाएगा। मैं नर्वस हो गई हूं ।

सौरभ ने कहा पर कोशिश तो करो।

सुमन ने कहा नहीं जी मेरा मन बड़ा दुखी हैं ।मुझसे नहीं हो पाएगा।

सौरभ ने कहा लगता है मुझे ही कुछ करना पड़ेगा। वह बोला, ठीक है मैं आता हूं।

मैडम सुमन किचन से निकलकर बैठक रूम में आ जाती है और सुमन और राजेश दोनों पढ़ाई पर फोकस करते हैं। 6:45 बजे दरवाजे की बेल बजी ।

सुमन ने राजेश कहा लगता है सौरभ आ गया वह दरवाजा खोलने चली गई दरवाजा खोली दरवाजे पर सौरभ ही था।

सौरभ ने सुमन को देखते ही उसे गले से लगा लिया यार तुम तो आज अप्सरा लग रही हो।

सुमन- छोड़ो क्या कर रहे हो? राजेश सामने बैठा हुआ है ।राजेश की नजर उन दोनों पर ही था।

सौरभ ने कहा यार तुम मेरी बीवी हो तो क्या मैं अपनी बीवी से प्यार भी नहीं कर सकता ।एक किस तो लेने दो। सच में आज तो तुम बहुत हॉट लग रही हो ।

सुमन ने सौरभ को धक्का देकर हटा दिया तुम तो बड़े बेशर्म हो ।घर में कोई आया है और ऐसी हरकत करते हो।

दोनों सोफे पर आकर बैठ गए ।राजेश सौरभ को देखते ही कहा हेलो सर।

सौरभ -हेलो राजेश ।

राजेश तुम तो बहुत ही इस्मार्ट और टैलेंटेड लड़के हो सुमन तो तुम्हारी बड़ी तारीफ करती रहती है ।इस बार भी बेस्ट स्टूडेंट के लिए तैयारी कैसी चल रही है ?

राजेश ने कहा सर यह तो मैम ही बता सकती है की इस बार मैं बेस्ट स्टूडेंट का खिताब का हकदार हूं कि नहीं।

वैसे तो मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करूंगा ।

सुमन ने कहा ,मुझे तो पूरा यकीन इस बार भी स्टूडेंट ऑफ द ईयर तुम ही चुने जाओगे राजेश।

सौरभ सुमन की हाथ को पकड़ के किस कर लेता है वह कहता है यार आज सच में तुम बहुत ही खूबसूरत और हॉट लग रही हो ।सच में मेरा मन किस करने का कर रहा है और वह उसके हाथ को किस कर लेता है।

सुमन हाथ को खींचते हुए क्या कर रहे हो छोड़ो झूठी तारीफ करना तो कोई तुमसे सीखे ।

सौरभ यार मैं मैं सच कह रहा हूं ।राजेश से पूछ लो।

राजेश तुम बताओ क्या मै झूठ बोल रहा हूं । बोलो तुम्हारी मैम बहुत ही खूबसूरत और हॉट लग रही हैया नही।

राजेश मुस्कुरा दिया मैं वह कुछ नहीं बोला।

सौरभ ने कहा अरे राजेश तुम तो शर्माने लगे, अरे बोलो भाई सुमन खूबसूरत और हॉट लग रही है कि नहीं।

राजेश ने सिर हिलाते हुए, हां का इशारा किया।

सौरभ ने राजेश से कहा अरे यार राजेश तुम्हें डर या संकोच करने की जरूरत नही मुझे अपना दोस्त समझो और जो भी मन में हो उसे खुल कर बोलो । आज तुम्हारी मैम कैसी लग रही ,

अरे बोलो भी शर्माओ नहीं।

राजेश ,सौरभ के बार बार जोर डालने पर बोल पड़ता है, हां मैम आज तुम बहुत ही खूबसूरत और हॉट लग रही हो।

राजेश की ऐसी बात सुनकर सूमन शर्म से पानी पानी हो गई ।

सौरभ ने राज्ेश से कहा यह हुई ना बात ।

सौरभ ने सुमन से कहा यार सुमन राजेश को चाय नाश्ता कराया कि नहीं।

सुमन ने कहा राजेश नाश्ता के लिए मना कर दिया उसने चाय ली ।

सौरभ -यार राजेश पहली बार घर आया है उसे कुछ खिलाओ।

सौरभ ने कहा यार राजेश तुम इसे अपना ही घर समझो तुम्हें शर्माने की जरूरत नहीं है ।सुमन मैं सोच रहा हूं ।क्यों न आज किसी होटल में खाने के लिए चलते हैं और मैं चाहता हूं कि राजेश भी हमारे साथ चले।

सुमन ने कहा यह तो बड़ी अच्छी बात है। राजेश चलो हमारे साथ तुम भी होटल बड़ी खुशी होगी।

राजेश ने कहा मुझे भी आप लोगों के साथ जाने में खुशी होगी लेकिन मैं घर में मां को क्या जवाब दूंगा।

सौरभ ने कहा अरे यार राजेश तुम तो अब जवान हो हो गए हो। अब तुम अपने हिसाब से भी फैसला लेना सीखो। कब तक मॉम बाय बने रहो गे।अपनी मां से कह देना कि मैं आज किसी दोस्त के घर से खाना खाकर आऊंगा।

सुमन और सौरभ के जीद करने पर राजेश ,मना नहीं कर सका और वह स्वीटी को फोन लगाया ।

स्वीटी ने काल उठा यी ,स्वीटी ने कहा ,भैया आप कहां हो। कैसे फोन किए हो ।

राजेश ने कहा, स्वीटी मै सुमन मैंम के घर हूं।मैडम खाना खाकर ही घर जाने के लिए जिद कर रही है ।अतः मुझे घर आने में देर हो जाएगा ।तुम मां को बता देना ।

स्वीटी - ठीक है भैया ।

राजेश , सौरभ और सुमन तीनों भोजन के लिए किसी अच्छे होटल के लिए निकल पड़े।

सौरभ एक अच्छा ला होटल देखकर कार रोक देता है तीनों होटल के अंदर चले जाते है।

होटल के अंदर बैठे सभी लोगो की नजर सूमन पर गड़ी हुई थी क्योंकि सूमन सचमुच में काफी हाट लग रही थी ।जिसे देखकर सौरभ ने सुमन से कहा, यार देखो सभी की नजर तूम पर ही गढी हुई है ।सच में तुम आज बहुत ही सेक्सी और हॉट लग रही हो ।

राजेश भी होटल में बैठे हैं अन्य लोगों की नजरों को देखा , सचमुच लोगों की नजर सुमन पर टिकी हुई थी।

राजेश भी बोल पड़ा हां सर आपने सही कहा सभी की नजर मैम पर ही है ।

राजेश के मुख से यह सुनते ही सुमन शर्मा गई ।

सौरभ ने कहा अच्छा यार सौरभ खाने में क्या लोगे शर्माना नहीं । अपनी पसंद बताओ ।

वेटर को तीनो ने अपनी अपनी पसंद का खाना आर्डर किया ।तीनों आपस में चर्चा करते हुए भोजन करने लगे। बीच-बीच में हसी मजाक भी उनके बीच में होने लगी। इस तरह राजेश, सौरभ और सुमन से अच्छ से घुल मिल गया ।

अभी भोजन कर रहे थे की उसी समय बाजू वाले मेज पर कोई फैमिली भी भोजन करने बैठे थे ।उसका एक छोटा बच्चा जो 3 साल का होगा। वह अपने ही धुन में इधर-उधर हो रहा था।

वह सुमन के पास आ गया और जिस मेज पर सौरभ सुमन बैठे थे उस मैच को बच्चा पीटने लगा ।

सूमन ने उसे रोका और बोला अरे बेटा ऐसा नहीं करते ।क्या नाम है है तुम्हारा? कितना क्यूट हो। उस बच्चे से उसका नाम पूछते हुए, वह उस बच्चे को अपने गोद मे बिठा लिया।

बच्चे की मां ने देखा कि उसका बच्चा सुमन के गोद जाकर बैठ गया हैं ।

वह अपनी मेज से उठ कर आया और सुमन से बोली माफ करना बहन यह यह लड़का भी ना बड़ा शरारती है एक जगह बैठ ना इसको आता ही नहीं है



हमेशा इधर उधर ही करता रहता है और मां अपने बच्चे को सुमन के गोद उतारने के लगी । बच्चा गोद से नहीं उतर रहा था ।

सौरभ ने कहा माफ करना बहन इस बच्चे को सुमन की गोद में बैठना अच्छा लग रहा है ।उसे कुछ समय के लिए बैठे रहने दीजिए ।

वह महिला बोली नहीं भाई साहब यह बड़ा शरारती हो गया है यह आप लोगों का भी परेशान करेंगा ।

और वह महिला अपने बच्चे को जबरदस्ती खींचकर सुमन की गोद से उतार दी।

सुमन को बहुत ही बुरा लगा उसकी आंखों से आंसू आ गए ।जिसे राजेश और सौरभ दोनों ने देखा ।उन्हें भी बड़ा खराब लगा और वहां का महाौल थोड़ा गमगीन हो गया ।

भोजन कर लेने के बाद सौरभ ने राजेश से पूछा हमारे साथ भोजन करके तुम्हें कैसा लगा राजेश ।

राजेश ने सौरव से कहा सर आप लोगों के के साथ भोजन करके मजा आ गया ।आप तो बहुत ही फनी पर्सन है ।

सौरभ ने कहा थैंक यू राजेश हमें भी तुम्हारे साथ बहुत अच्छा लगा।

सुमन थोड़ी उदास थी वह चुप बैठी थी।

सौरभ ने सुमन से कहा , सुमन तुम भी तो कुछ बोलो तुम्हें अच्छा लगा कि नहीं ।

सुमन ने कहा हां राजेश के का हमारे साथ भोजन करना मूझे अच्छा बहुत अच्छा लगा ,लेकिन वह यह बातें दुखी मन से कहा ।उनके मन में ज्यादा उत्साह नहीं था, जिसे राजेश और साैरभ दोनों ने महसूस किया।

सौरभ न राजेश से कहा राजेश मुझे तुमसे कुछ बात करनी है। राजेश ने कहा कहिए ना सर क्या बात है ?

सौरभ- राजेश हमें तुम्हारी मदद की जरूरत है ।

राजेश ने कहा ,कैसी मदद सर? अगर मैं आप लोगों का कोई काम आ सका तो मेरे लिए खुशी की बात होगी।

सौरभ ने कहा राजेश विषय बड़ा गंभीर है, यहां इस बारे में बात नहीं की जा सकती ,घर चलते हैं वही बात करेंगे ।

राजेश ने कहां, ठीक है सर जैसी आप ठीक समझे।

सौरभ ने खाने का बिल पे किया और तीनों घर के लिए लिए निकल पड़ते हैं। तीनों गंभीर एवं चिंतन मुद्रा में थे।

घर पहुंचने तक तीनों खामोश बैठे रहे ।घर पहुंचने के बाद सुमन बेडरूम में चली गई। सौरभ ने राजेश से कहा राजेश आओ बैठो।

वे दोनों सोफे पर बैठ गए ,राजेश ने कहा, कहिए सर मेरी कैसी मदद चाहिए आप लोगों को?

सौरभ गंभीर होत होते हुए कहा, दर्असल राजेश मैं सुमन के लिए दुखी रहता हूं।

राजेश ने कहा क्यों सर ?

राजेश हमारी शादी को कितने साल हो गए लेकिन मैं उसे बच्चा नहीं दे सका ।सूमन की बड़ी इच्छा थी कि उनका अपना कोई बच्चा हो,।

सौरभ ने कहा ,राजेश डॉक्टर से चेकअप करने के बाद पता चला कि मेरे स्पर्म मैं शुक्राणु इतने एक्टिवेट नहीं जो सुमन को गर्भ धारण करा सके और इस कारण शादी के इतने दिनों बाद भी वह मां न बन सकी।

राजेश- सर आजकल तो चिकित्सा के क्षेत्र में ऐसीकई तकनीकें आ गई है जिसने मां बनना आसान आसान हो गया है ।

सौरभ-हां राजेश तुमने सही कहा,पर सूमन जानना चाहती है कि वह किसके बच्चे की मां बन रही है वह चाहती है कि उनका होने वाला बच्चा तुम्हारी तरह स्मार्ट और सभी क्षेत्र में आगे हो, इसलिए हमने सोचा की तुम्हारे स्पर्म से सुमन मा बने ।

राजेश हमें तुमसे बड़ी उम्मीदें हैं क्या तुम हमारी मदद करोगे ?क्या तुम हमारी जिंदगी में खुशियां लाओगे?

राजेश भी गंभीर हो गए सर क्या मैंम भी इसके लिए तैयार है।

सौरभ बोला ,हां राजेश वह भी तैयार है ।

सुमन इस समय बेडरूम के दरवाजे के पास खड़ी होकर दोनों की बातें सुन रही थी। देखो राजेश सुमन तुम्हारे मुंह से हा कहने का इंतजार कर रही है।

राजेश ने अपना सिर घुमा कर बेडरूम की ओर देखा उसने देखा कि सुमन खड़ी होकर उनकी बातों को सुन रही है ।सिर नीचे झुका रखी है ,जो यह दर्शाने के लिए काफी था इन सब बातों में उनकी भी सहमति है ।

राजेश -पर सर यह सब होगा कैसे ?किसी बाहर वाले को पता चला तो आप लोगों की बदनामी होगी ।

सौरभ ने कहा राजेश, तूम उसकी चिंता है ना करो यह राज हम तीनों के बीच में ही रहेगा ।दूसरे को कोई पता नहीं च चलेगा ।

राजेश ने कहा ठीक है सर यह मेरे लिए खुशी की बात होगी कि मैं आप लोगों कि कोई काम आ सका।

सौरभ ने राजेश से कहा , थैंक राजेश हमें तुमसे यही उम्मीद थी।

सुमन भी खुश हो गई, वह शर्मा भी रही थी और अपने बेड पर जाकर किसी सोच में डूब गई ।

राजेश ने सौरभ से कहा पर सर यह सब होगा कैसे

सौरभ ने कहा, राजेश आगे क्या करना है ?मै सब तुमको बताऊंगा। तूम उसकी चिंता ना करेो। तुम अभी कुछ दिन समय पर घर आ जाना।

राजेश ने कहा ठीक है सर मैं समय पर आ जाऊंगा।

राजेश ने सौरभ से कहा अच्छा सर अब मैं चलता हूं। घर वाले परेशान हो रहे होंगे ।

सौरभ बोला ठीक है राजेश फिर कल मिलते हैं। आंगे क्या करना है? कल बात करेंगे ।

राजेश मे कहां ओके सर।

राजेश अपने बाइक को लेकर घर चला गया ।

जब राजेश घर पहुंचा रात के 9:00 बज चुके थे। शेखर और स्वीटी दोनों भोजन कर अपने बेडरूम में आराम कर रहे थे ।सुनीता किचन की काम निपटा रही थी। सुनीता को स्वीटी ने राजेश के बारे में बता दिया था कि वह मैडम सुमन के घर स्टडी करने गया है और वह आज खाना वही खाकर लौटेगा ।उसे घर आने में लेट होगा।

सूनीता जानती थी राजेश ऐसा क्यों कर रहा है? वह जानबूझकर घर से गायब रहना चाहता है, ताकि बता सके कि मुझसे नाराज है, फिर भी राजेश का ऐसा करना उसे अच्छा नहीं लग रहा था ।

जब राजेश घर आया, वहअपने कमरे की ओर जाने लगा, उसे कमरे में जाते देख सुनीता ने उसे रोका ।

राजेश से पूछी कहां थे?

राजेश रुक गया जवाब दिया स्वीटी ने तो बताया होगा मैं कहां था।

सुनीता ने कहा मै तुमसे पूछ रही हूं ।

राजेश ने कहा मैं मैडम सुमन के यहां गया था ।केमिस्ट्री में मुझे कुछ टॉपिक पर समझ नहीं बन पा रहा था। तो उनसे हेल्प लेने गया था ।अभी मैं कुछ दिन रोज उसके घर जाऊंगा और मुझे आने में लेट होगा ।

सुनीता ने कहा पर तुम्हें वहां खाना खाने की क्या जरूरत थी ।

राजेश ने कहा मैंम ने जीद की मैं मना ना कर सका सुनीता ने कहा मैं सब समझती हूं कि तुम ऐसा क्यों कर रहे हो ?ऐसी हरकत करके मुझे तोड़ना चाहते हो पर तुम मेरी बात गौर से सुन लो ।जो तुम चाहते हो उसके लिए मैं कभी तैयार नहीं होंऊंगी। मैं अपनी मर्यादा कभी नहीं भूलूंगी।

राजेश ने मन में कहा मैं भी देखूंगा मां तुम कब तक हार नहीं मानती ।

इधर रात में स्वीटी अपने बेड पर लेटे हुए प्रतिदिन की तरह राजेश की लंड* को याद करते हुए ,अपनी उंगली से अपने बूर की भगनाशा को रगड़ रही थी ।वह काफी उत्तेजित हो गई थी। कुछ देर के बाद वह झड़ गई ।

वह जबसे राजेश के लंड* को देखी थी, उसे हाथ से हिलाई थी ।उसे मुंह में ले कर चुसी थी ,तब से उसे रात में सोते समय उसके लंड* को याद करते ही बहुत उत्तेजित हो जाती थी और बूर का पानी निकालने के बाद ही वह सो पाती थी।

इधर राजेश आज हुई घटनाओं के बारे में ही सोच रहा था।

वह सोच रहा था कि मैम कितनी सुंदर है, कितनी सेक्सी और गदराया बदन की मालकीन है।

वह मेरे बच्चे की मां बनाना चाहती है यह सोचकर रोमांचित होने लगा।

वह सोचने लगा मैम की खूबसूरत बदन कल उसकी बाहों में होगी । मैम को जी भर कर भोगने को मिलेंगा। मेम को अपने लंड में बिठाकर चोदने में कितने मजा आएगा ।यह सोच कर उसका लंज खड़ा हो गया।

वह सोंचा कि जब मैं मैम को में चोद रहा होंऊगा तब क्या उसका पति सौरभ भी वहां मौजूद रहेगा ? यह सोच कर के उसका लंड और कड़क हो गया और ठूनकी मारने लगा ।

पति के सामने ही उसकी बीवी को चोदने में कैसा लगेगा। यह सोचकर ही वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गया ।

इधर सुमन बेड पर लेटे हुए सोच रही थी कल मैं राजेश का सामना कैसे करूंगी। मै कैसे उसके सामने अपना कपड़ा उतार पाऊंगी।

मै राजेश के साथ कैसे सेक्स कर पाऊंगी? वह यह सोच कर थोड़ा नर्वस होने लगी।

वह सौरभ से बोली सुनिये जी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है कि मैं कल राजेश के साथ ,सब कैसे कर पाऊंगी। मुझे लगता है मुझे से नहीं हो पाएगा।

सौरभ ने कहा अरे मेरी जान तुम्हें चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। मैं हू ना ।

सौरभ बोला तुम तो बस यह सोचो एक जवान लड़के का लंड* खाने को मिलेगा।

सुमन बोला छी तुम्हें तो हर वक्त शरारत ही सूझती है । मुझे लगता है कि राजेश अभी तक कुछ किया नहीं होगा । उसे सेक्स के बारे में कुछ जानकारी नहीं होगा ।वह यह सब कैसे कर पाएंगा । मैं भी पहले पहल नहीं कर पाऊंगी उसके साथ। मुझे बहुत ही शर्म आएंगी।

सौरभ बोला डार्लिंग तुम यह सब चिंता छोड़ो मैं राजेश को सब सिखा दूंगा।मै सब सीखा कर तुम्हारे कमरे में भेजूंगा। बस तूम उसका सहयोग करना। और हां कल तुम कॉलेज से छुट्टी ले लेना और अच्छे से तैयार होना ,दुल्हन की तरह।

यह सोचना कल राजेश के साथ तुम्हारी सुहागरात है।

सुमन ने राजेश से कहा छी जी तुम कितने बेशर्म हो और वह सौरभ के सीने में मुक्के मारने लगी।

महिलाओं के शरीर पुरुषों के शरीर से बिल्कुल भिन्न होता है। महिलाओं के शरीर में माह के30 दिन हर दिन उसके शरीर में कोई न कोई परिवर्तन होती रहती है।

उसके शरीर में हार्मोन के कारण परिवर्तन होती रहती है। हर मांह महिलाओं का, माहवारी आना , माहवारी के दौरान स्त्री के योनि से 4 से 5 दिनों तक रक्तस्राव होना।उसे कमर एवं सिर दर्द होना बुखार आना आदि लक्षण दिखाई पड़ती है।

माहवारी की ग्यारह से 13 वे दिन उसके अंडाशय से अंडा उत्सर्जित होता है। यह अंडा अंडाशय के ट्यूब मे 4 दिनों तक रखा रहता है और वहां शुक्राणु का इंतजार करता हैं।

इस दौरान जब महिला किसी पुरुष से संभोग करती और पुरुष जब अपना वीर्य महिला के के गर्भाशय मे छोड़ता है तब उसका शुक्राणु और अंडा का मिलन होता है और महीला पेट से हो जाती है ।

जब अंडा उत्सर्जन के 4 दिनों तक महिला संभोग ना करें तो यह अंडा टूट जाता। इस दौरान महिला का गर्भाशय की दीवारें मोटी होने लगती है ।गर्भधारण के लिए प्रेगनेंसी के लिए तैयार होता रहता है ।

गर्भाशय की दिवारो में एक नई परत जमने लगता है अंडा निषेचन ना होने पर 10-11 दिनों के पश्चात गर्भाशय मैं जमा हुआ परत एवं अंडा रक्त बनकर योनि मार्ग से बाहर निकलता है । जिसे रितु स्राव कहते हैं ।

महिलाओं का रितु स्राव 11- 50 वर्षों तक होती है उसके बाद महिलाओं का रितु स्राव होना बन जाता है। और वह महिला मां नहीं बन सकती।

जब महिलाओं के शरीर से अंडा उत्सर्जित होता है। तब महिला की योनि से चिपचिपा पदार्थ स्रावित होता है ।जिसनसे उसकी योनि में खुजली होती है। महिलाओं के सेक्स इच्छा बहुत बढ़ जाती है ।

महिलाओं के शरीर से इस दौरान कुछ गंध भी निकलती है ,जो पुरुषों को अपनी और आकर्षित करती हैं ।

आज सुनीता का भी गर्भधारण काल प्रारंभ हुआ था जिसके कारण उसके योनि से चिपचिपा रस निकल रहा था, जिससे उसकी योनि में खुजली बढ़ गई थी।

उसकी आज सेक्स करने की बहुत इच्छा हो रही थी। बेड पर लेट कर अपनी योनि को अपने उंगली से खूजाने लगी।

वह शेखर से लिपट गई ।वह एक संस्कारी महिला थी शेखर से वह सीधा नहीं कर सकती थी की उसे चुदाई* कराने का मन कर रहा है।

वह शेखर से लिपट गई और उसके पैर को अपने पैर से रगड़ने लगी शेखर समझ गया ,सुनीता क्या चाहती है? लेकिन वह थका हुआ था वह।

सुनीता से कहां सुनीता क्या कर रही हो मैं थक गया हूं सो जाओ।

सुनीता को बहुत गुस्सा आया ।वह शेखर से अलग हो गई । उसकी योनि में तेज खुजली हो रही थी ।वह अपनी योनि को अपने उंगली से रगड़ते हुए ।अपनी आंखें बंद कर ली ।जैसे ही अपनी आंखें बंद किया उन्होंने राजेश का लैंड इमेज करने लगी।

सुनीता काफी उत्तेजित हो गई थी ।उसे राजेश का लंबा लंड याद आने लगा । किस तरह उसने राजेशका लंड चूसकर उसका रस निकाला था।

सुनीता से बर्दाश्त नहीं हो पा रहा था ।वह बेड से उठी और पता नही उसे क्या हुआ ?वह राजेश के कमरे की ओर जाने लगी।

वह राजेश की कमरे के पास पहुंच गई और दरवाजा खटखटाना चाहि तभी उसे होश आया, ेह भगवान वह क्या कर रही है।मै अपनी मर्यादा कैसे भूल सकती हूं। कामवासना में मैं अंधी हो कर अपने ही बेटे के पांस जाने लगी थी छी ।

वह वहां से वापस लौट कर किचन में आ गई। फ्रिज खोली फ्रीज में गाजर रखा हुआ था ।उसमें से एक गाजर जो लंबा और मोटा था। देखने में राजेश के लंड के समान लग रहा था, उसे उठा ली।

वह राजेश का लंड इमेज करने लगी और अपनी पेटिकोट उठाकर अपना पेंटिं सरका दी और गाजर को अपने योनि में डालकर अंदर बाहर करने लगी।

वह काम वासना में जल रही थी उसके मुंह से लगातार सिसकारी निकल रही थी ।वह अपने आंख बंद कर राजेश के लंड* को इमेज करने लगी ।उसे महसूस होने लगा कि उसकी योनि में गाजर नहीं राजेश का लंबा लंड* अंदर बाहर हो रहा है ।

वह बहुत ज्यादा उत्तेजित हो गई और तेजी से गाजर को अंदर बाहर करने लगी। कुछ देर बाद आह मा करके झड़ने लगी।

जब होश में आई खुद को धिक्कारने लगी वह कामवासना में कितनी गंदी हो गई ।इतनी गंदी हरकत कैसे कर सकती है ?आज से पहले कभी उसने ऐसी हरकत नहीं की थी।

वह बेड मे जाकर लेट गई वह अपने किए पर शर्मिंदा हो रही थी। वह भगवान से बार बार माफी मांग रही थी। भगवान मुझे माफ कर दो ,सुनिता सोच रही थी की वह ईतनी कैसे गिर सकती है ,?पर उसने अनुभव किया की जबसे उसने राजेश का लंड मूह मे लिया है उसकी बूर कुछ ज्यादा ही खुजाती एवं रस बहाती है।

इधर राजेश अपने बेड मे लेटकर अपना लंड सहला रहा था ।उसका लंंड आने वाले कल को लेकर काफी उत्तेजित हो गया था। वह अपने लंड को सहलाते हुए कहा ,अब सो जा मेरा शेर अपनी ताकत को बचा कर रख, कल तुम्हे मैम की चूत फाड़नी है।
 
हेलो दोस्तों आप सभी कैसे हैं? आप सभी जरूर मुझसे नाराज होंगे। आप लोगों का मुझ पर नाराज होना भी वाजिब है, पर दोस्तों समय अभाव होने के कारण चाह कर भी अपडेट नहीं दे पा रहा था। अभी कुछ समय मिला है तो सोच रहा हूं कहानी को आगे बढ़ाऊ पर बडा अपडेट ना देकर कहानी का छोटे-छोटे अपडेट देकर आगे बढ़ाऊंगा।

धन्यवाद
 
जैसे की आप सभी को पता है राजेश कल सुमन मैडम की जमकर चुदाई* करने वाला था।यह सोचकर ही उसकी आंखों में नींद नहीं आ रही थी।

उसे प्यास लगी थी ।वह बिस्तर से उठा , उसने देखा जग खाली था। सुनीता जग में पानी नहीं भरी थी।

राजेश पानी पीने किचन की ओर चला गया। वह फ्रिज में रखा पानी का बॉटल निकालने के लिए जैसे ही फ्रिज का डोर ओपन करने दरवाजे को खीचा फ्रीज हिल गया।

उस पर रखा कांच का गिलास फ्रीज से नीचे फर्श पर गिर गया। गिलास के नीचे गिरते ही जोर की आवाज हुआ और गिलास के टुकड़े टुकड़े हो गये।

सुनीता इस समय सोई नहीं थी। उसकी आंख नहीं लगी थी। वह किचन से कुछ गिरने की आवाज सुनकर , वह उठी और अपने बेडरूम से किचन की ओर लगी है।

इधर राजेश पानी पीना भूल कर गिलास के टुकड़े को उठाने लगा, उसे उठाना जरूरी था नहीं तो कांच के टुकड़ों पर किसी का भी पांव पड़ने से पैर कट सकता था।

सुनीता किचन में पहुंच गई ।उसने देखा राजेश किचन मैं है, वह राजेश पूछा । राजेश तुम इस वक्त किचन में क्या कर रहे हो और यह कैसी आवाज थी।

राजेश अपनी मां की आवाज सुनकर थोड़ा हड़बड़ा गया, इस हडबडी में कांच उसके हाथ की उंगली में चुभ गया।

जिससे उसका उंगली कट गया। उंगली कटने से उससे तेज खून निकलने लगा। राजेश को तेज दर्द हुआ और उसके मुंह से आह मा निकल गया।

सुनीता राजेश की कराह सुनकर ,घबरा गयी।

वह राजेश से बोली क्या हुआ बेटे?

राजेश की उंगली कट गया था । उंगली से तेजी सेखून बाहर निकलने लगा और फर्श पर गिरने लगा।

यह देखकर सुनीता तेजी से राजेश की ओर आने लगी वह बोली बेटा यह क्या हुआ तुम्हारी उंगलियों से तो तेज खून निकल रहा है ।

राजेश ने कहां , मां तुम अंदर मत आओ ,नहीं तो कांच के टुकड़े तुम्हारे पांव में चुने जाएंगे ।सुनीता अपनी जगह पर खड़ी हो गई।

राजेश की उंगलियों से खून बहता देखकर वह तड़प उठी उसे राेना आ गया ।

उससे रहा न गया और वह फर्श पर ध्यानपूर्वक संभल कर चलती हुई ।राजेश के पास पहुंची।

सुनीता ने राजेश से पूछी, बेटा यह सब कैसे हो गया? तुम्हारी उंगली कैसे कट गई ।

राजेश ने अपनी मा कोपूरी बातें बताइ ।

राजेश के उंगली से खून बहता देखकर सुनीता घबरा गयी उसका जी रूआसी हो गया।

सुनीता राजेश से बोली ,बेटा तेज दर्द हो रहा है क्या?

राजेश ने कहा, हां मां ।

सुनीता-बेटा प्यास लगी थी तो मुझसे कह देते रात में किचन में आने की क्या जरूरत थी।

सुनीता राजेश की उंगली को अपने मुंह में डालकर चूसने लगी जिससे राजेश का दर्द कम हो गया ।

वह सुनीता से बोली ,अब दर्द कम हो गया मा ।थैंक यू मां ।

सुनीता ने उंगली कोम मूह से बाहर निकाला और राज से कहा बेटा मैं तुम्हारी उंगली में पट्टी बांध देती हूं और किचन में रखी फर्स्ट एड बॉक्स निकालकर उंगली का उपचार करने लगी।

मां की ममता को देखकर राजेश को उस पर बड़ा प्यार आने लगा।

इधर सुनीता राजेश को इस हालत में देखकर उसका दिल तड़प रहा था । उसके उंगली पर पट्टी बांधने के बाद सुनीता राजेश से बोली, बेटा अब उंगली जल्दी ठीक हो जाएगा घबराओ मत ।

राजेश ने कहा, मा आपके होते हुए मुझे घबराने की क्या जरूरत ?यह जल्दी ठीक हो जाएगा मा। थैंक यू माम ।

सुनीता ने राजेश से कहा बेटा अब तुम अपने कमरे में जाकर आराम करो मैं फर्श की सफाई कर देती हूं फिर मेै पानी लेकर तुम्हारे कमरे में आती हूं।

राजेश ने कहा ठीक है माम और राजेश किचन से निकलकर अपने रूम में चला गया और अपने बेड में लेट कर अपनी मां के आने का इंतजार करने लगा
 
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