Incest यह क्या हुआ - Page 5 - SexBaba
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Incest यह क्या हुआ

जैसे कि आपने पढ़ा किस प्रकार एक संस्कारी, धार्मिक एवम पतिव्रता मा हवस के वशीभूत होकर अपने ही सगे बेटे के सामने अपना boor खोलकर लेटी थी।

राजेश तो एक नौजवान था। नया नया जोश था। उसको तो सिर्फ boor चाहिए था।अपनी land की गर्मी शांत करने अब इस उम्र में नौजवान दिल दिमाक से नही land से सोचता हैं,बाद मे परिणाम क्या होगा इसके बारे में नही सोचते।

राजेश यह भी जान चुका था कि जोऔरत इस समय मेरे सामने लेटी हैं यह वो ma सुनिता नही जो हमेशा मुझे मर्यादा की पाठ पढ़ाती हैं । ये तो एक प्यासी जनाना हैं जो कामांध होकर यह भूल चुकी हैं कि वह जिसके नीचे नंगी होकर लेटी हैं ,वह उसका सगा बेटा है।

सुनिता एक गदराई औरत थी। एक गदराया खूबसूरत बदन वाली औरत ,किसी पुरुष को भोगने कहे और वह पुरुष उस औरत को भोगने को छोड़कर उसे सही गलत का ज्ञान कराए तो ,सभी उस पुरुष की पुरुषत्व पर सक करेंगे।

राजेश तो एक मर्द था । नया नया जोश था तो वह भी यह जानते हुवे की, सामने जो औरत लेटी हैं वो उसकी सगी मां हैं ।भूल गया और उसे वह एक गदराया बदन की खूबसूरत औरत नज़र आ रही थी जो उसे जन्नत मे ले जायेगी , परम सुख देगी।

राजेशको इस बात का भय था कि कही मां के ऊपर जो हवस की भूत सवार हैं कही उतर गया। तो फिर से मर्यादा की पाठ पढ़ाना शुरू कर देगी। और वह देर न करते हुवे दो धक्के मे ही अपने आधे से अधिक land ko अपने मां के योनी में उतार दिया था।

इसके बाद राजेश अपनी मां के ऊपर लेट गया और उसके ओंठो को चुसने लगा। एक हांथ से अपने मां के स्तनों का मर्दन करने लगा।

सुनिता राजेश की इन हरकतों से अपने chut se pani बहाने लगी ।

अब राजेश अपने कमर को धीरेधीरे ऊपर नीचे करने लगा । सुनिता के मुंह से सिसकारी निकलने लगी।

अब राजेश उकडू बैठ गया और अपने मां के स्तनों को दोनों हाथो से मर्दन करने लगा। उससे खेलने और चूसने लगा।

राजेश की इन हरकतों से ,सुनिता के शरीर को अब बर्दाश्त के बाहर हो गया अब वह खुद ही अपने कमर उठा कर राजेश के land को निगलने की कोशिश करने लगी।

राजेश समझ गया की सुनिता तेज chudna चाहती है।

अतः वह अब देर न करते हुए सुनिता के chut चू त पर land ki धक्के की गति को बढ़ाना शुरू कर दिया।

इधर सुनिता भी राजेश का सहयोग land को पूरे अंदर घुसाने मे कर रही थीं जिसका नतीजा यह huwa की लौड़ा कुछ ही पल सुनिता की boor में पूरी तरह समा गया।

अब राजेश अपने land पूरा बाहर खींचकर सुनिताके chut के अंदर डालकर चोदने लगा।

Land सुनिता के chut की रस से सराबोर होकर बड़े आसानी से अन्दर बाहर होने लगा।

Land काफी मोटा होने के कारण boor की पूरी दीवार को अच्छी तरह रगड़ रहा था । जिससे सुनिता जन्नत में पहुंच गई।

वह अपने मुंह से लगातार कामुक आवाजे निकालने लगी।

Land chut me गपागप अन्दर बाहर होने लगा।

सुनिता को आज से पहले चुदाने में इतना आनन्द कभी नही आया था।

Chut का पानी झरने की तरह बाहर आने लगा।

Chut का रस राजेश के land se होता huwa उसके अंडकोस से bed par टपकने लगा।

Rajesh भी अब जन्नत में पहुंच गया।

उसे सुनिता को चोदने में सुमन से भी ज्यादा मजा आ रहा था।

अब वह अपने chudai की गति को लगातार बड़ा रहा था। कमरे में सुनीता की सिसकने और चीखने की आवाज गूंजने लगी।

यदि दरवाजा बंद ना होता तो सुनिता की चीखने कीआवाज सुनकर स्वीटी और राजेश जरूर उठ जाता ।

सुनिता राजेश की कमर को अपने दोनों हाथो से जकड़ लिया । राजेश पूरे जोश में आकर सुनिता की दनादन chudai करने लगा।

सुनिता ज्यादा देर बर्दास्त ना कर सकी और rajhesh कि कमर को जोर से जकड़ कर चीखते हुवे झड़ने लगी।

राजेश समझ गया कि सुनिता झड़ गई है।

वह अच्छी तरह जानता था कि यदि वह ज्यादा देर तक रुका तो उसकी मां के उपर चढ़ा हवस का भूत उतर जायेगा और फिर उसकी मां उसे चोदने नही देगी।

अतः वह chudai की गति कम जरूर कर दिया लेकिन chudai रोका नहीं।

वह अपने मां की चुचियों को मसलना एवम चूसना लगातार जारी रखा जिससे सुनिता फिर गर्म होने लगी।

उसके मुंह से फिर सिसकारी निकलने लगीं।

राजेश को पता चल गया की उसकी मां फिर गरम हो गई है। वह फिर से chudai की गति बड़ा दी।

कुछ ही पल में फिर से सुनिता जन्नत में पहुंच गई वह अत्यंत कामुक आवाजे निकालने लगी।

Rajhesh अब तेज तेज चोदने लगा जिससे कमरे में फाच फ्च की आवाज गूंजने लगा।

सुनिता एकबार फिर झड़ने की स्थिति में पहुंच गई।

वह राजेश के कमर को जोर से जकड़ ली और झड़ने लगी। उसके हांथ पैर कपकाने लगे।

इधर राजेश नही झड़ा था वह नही चाहता था कि उसके झड़ने से पहले उसकी मां होश में आए।

अतः वह chudai जारी रखा।

वह अपने हाथो से अपने मां के गले को सहलाते, होंठो को चूसते, चुचियों को मसलते हुवे chudai जारी रखा। अब सुनिता थकने लगी थी पर राजेश की हरकतों से वह फिर गरम होने लगीं।

राजेश का land अपने मां के boor का पानी पी पीकर खूब मोटा हो था । chut land को puri tarah जकड़ा huwa था। वह कसा कसा अन्दर बाहर हो रहा था।

सुनिता दो बार झड़ चुकी थी, अब वह फिर गरम होकर सिसकारी निकालने लगी।

राजेश जिस chut se बाहर आया था वह उसी के अन्दर समा जाने मा बेटे के बीच फिर से एक बार युद्ध होने लगा, पर पुरुष कितना ही ताकतवार हो अंत में हार तो पुरुष का ही होता है।

अतः राजेश भी अब स्खलन की ओर बढ़ने लगा अब वह अपने कमर को उपर उठा उठाकर जोर जोर से चोदने लगा। पूरे कमरे में fuch fuch guch की आवाज गूंजने लगा।land का टोपा chut के अंतिम छोड़ पर पहुंच कर सुनिता के गर्भाशय को ठोकर मारने लगा जिससे सुनिता को अनोखा आनंद आने लगा ऐसा सुख की कल्पना भी उसने नही की थी।

आनंद के मारे वह अपने आंखे पलटने लगी।

इधर राजेश भी अपने अंतिम अवस्था मे पहुंच गया।

वह अपनी मां को हूमच हुमच कर चोदने लगा। वह जन्नत में था

अब rajhesh अपने को रोक न सका और सुनिता की कमर को जोर से जकड़ कर ,आह मां,,, haah ma h,hh, कर कराहते करते हुवे आंख बंद झड़ने काआनंद लेने लगा।

वह सुनीता के बच्चेदानी मेंअपने land se वीर्य की लम्बी लंबी पिचकारी मारने लगा। पूरे गर्भाशय को अपने बीज से भर दिया।

सुनीता गरम गरम वीर्य को अपने कोख में महसूसकर बर्दास्त ना कर सकी । क्योंकि बरसो बाद यह आनंद उसको मिला था और वह भी चीखते हुवे झड़ने लगी। और वह इस आनंद को बर्दास्त ना कर सकी और वह बेहोश हो गई।

इधर राजेश भी थक कर bed में लेट गया।

कुछ देर बाद राजेश नार्मल huwa वह अपनी मां की ओर देखा मां की आंखे बंद थी।

वह मां को आवाज लगाई । मां ।

उसे हाथो से हिलाया।

सुनिता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दिया।

राजेश ghabra गया।

वह कमरे में रखे जग से पानी लाया और पानी की छींटे उसके चहरे पर मारा। और बोला उठो मां। क्या होगया आपको।

पानी की छींटे चहरे पर पड़ते ही सुनिता को होश आया। वह अपने हालत को देखा। उसके ऊपर से हवश का भूख उतर चुका था। वह रोने लगी। वह देखी की वह अपने बेटे के सामने नंगी है वह लज्जित होकर जोर जोर से रोने लगी।

वह अपने कपड़े ठीक करते हुवे जोर जोर से रोने लगी।he भगवान मुझसे ये इतना बड़ा पाप कैसे हो गया।

मै कैसे बहक गई। मैं किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रही। ये कैसा अनर्थ हो गया। मै अपने ही बेटे के साथ सो गई।

मै हवस में इतनी अंधी कैसे ho गई, और वह जोर जोर से रोने लगी।

राजेश अपने मां को रोते देख उसे गले लगाकर चुप karnae की ,उसे समझआने की कोशिश करने लगा।

सुनिता राजेश को जोर से धक्का दे देती है और कहती हैं।

मै तो हवस में कामंध हो गई थी।

तुमने मुझे क्यू रोका नहीं।

राजेश अपनी मां से माफी मांगने लगा।

राजेश के गालों पर सुनिता तीन चार चांटे लगा देती है।

तुम तो खुद ही मुझे भोगना चाहते थे। तुमने भी मुझे रोकने के बजाए मौके का अच्छा फायदा उठाया । तुम तो बहुत खुश होगे अपने मां का शील भंग कर मेरी पतिव्रता को भंग कर।

राजेश अपनी मां के पैरो को पकड़कर माफी मांगने लगा। सुनिता ने उसे पैरो से लताड़ लगा कर मुझे मत छु।

सुनिता छोड़ दो मुझे छुओ मत। अगर आज के बाद मुझे कभी छुआ भी तो मेरा मरा मूंह देखोगे। वह कमरे मे अपने हाथो से सिर पकड़कर रोते बैठी रही।

फिर अपने सारे कपडे समेटकर सुबकते हुवे अपने कमरे मे चली गई।

राजेश भी सुबक रहा था।

उसे अपने किए पर पछतावा हो रहा था।
 
जैसे कि आपने पढ़ा कैसे सुनिता हवस में अंधी होकर अपने सगे बेटे से chud gayi और जब होश में आई तब अपने बेटे को सब कुछ लूटा बैठी थी।

वह हवस में अंधी होकर अपनी सारी मर्यादा भूल गई और वह काम कर डाली जिसे समाज में वर्जित और महापाप माना जाता है।

वह जोर जोर से रोने लगी अपने इस पाप के लिए अपने और अपने बेटे दोनो को जिम्मेदार मानते हुवे अपने बेटे को दो चार थप्पड़ भी जड़ दिया था।

और कुछ देर कमरे में रोते रहने के बाद वह अपनेkapde समेटते हुवे राजेश के कमरे से निकलकर अपने कमरे मे चली गई।

अपने कमरे में जाकर कुछ देर तक अपने गलती पर आंसू बहाती रही पर राजेश के द्वारा की गई जमकर chudai se bahut थक गई थीं वह तीन बार झड़ी थी। अतः वह कुछ ही पलों में गहरी नींद के आगोश में चली गई।

राजेश भी अपने किए पर पछता अपनी आंसु बहा रहा था। उसने एक बार फिर अपनी मां को नाराज कर दिया था। यह सोचकर अपने को कोश रहा था मैंने अपने पर नियंत्रण क्यू नही रख सका। सब मेरी गलती है मैने ही मां को कमरे में आने के लिए जिद किया था। वह अब पछताने के अलावा और कुछ कर भीं क्या सकता था।पर मां की chudai से वह भी काफी थक गया था। अतः जल्द ही वह भी नींद में चला गया।

सुबह सुनिता की काफी लेट उठी उसने अपने मोबाइल से समय देखी उसेउठने में पूरे एक घंटे लेट थी। उसने कहा हे भगवान मुझे उठने में आज काफी लेट हो गई।

वह बेड से उठकर सीधे बाथरूम में नहाने चली गई।नहाते वक्त वह यही सोच रही थी कि हे भगवान कल रात जो अनर्थ huwa है उसके बाद मैं राजेश के सामने कैसे जाउंगी उससे कैसे नजरे मिलाऊंगी।

कल रात जो पाप मुझसे huwa है उसके बाद राजेश मेरे बारे में क्या सोच रहा होगा? मै तो शेखर को भी अपने मुंह दिखाने लायक नहीं रही।

यह सोच के ही उसके आंखो के सामने अंधेरा छाने लगा। बड़ी मुस्किल से अपने को सम्हालते हुवे वह नहाकर कपड़े पहन कर,पूजा रूम में गई।और भगवान से बोली, हे भगवान ये महापाप जो मुझसे huwa है। उसे दुनिया से तो छुपा सकता हूं पर आप से नही, मै तो आपसे माफी मांगने लायक नही रही।

आज उसका पूजा पाठ में भी मन नहीं लग रहा था पर भगवान से बार बार क्षमा mangti रही थी।

पूजा रूम से सीधे कीचन में जाकर अपने काम में लग गई पर, कल रात की घटना के बारे में ही सोचती रही।

इधर राजेश भी उठकर जिम जाने के लिए तैयार हो गया। जिम जाते समय उसने अपने मां को कीचन में देखा। लेकिन उसके पास जाने की उसका सामना करने की उसके पास हिम्मत नहीं था।

और मां से बिना बात किए ही वह जिम के लिए निकल गया। जिम में भी कल रात की घटना याद कर पछताता रहा।

जिम से आने के बाद वह नहा धोकर बिना नाश्ता किए,कालेज चला गया।

कालेज में जाकर वह अपने ही में गुम दोस्तो के साथ कैंटीन में बैठा था।

भगत _राजेश से कहा ,भाई आज तुम्हारा चहेरा कुछ उतरा सा लग रहा है। लगता है कोई बात है? हमे नही बताओगे, आखिर बात क्या है?कल भी कालेज से जल्दी चले गए थे।

Rajhesh ने कहा यार सही कहा तुमने आज मेरा मन ठीक नहीं। तभी सुमन कार से कॉलेज पहुंची।

सभी का ध्यान उसकी ओर गया। सभी सुमन को देख आश्चर्य में थे।

भगत ने कहा यार आज मैडम सुमन को क्या हो गया काफी चेंज लग रही है। पहले तो काफ़ी हॉट कपड़े पहन कर आती थीं आज तो इनका ड्रेस और लुक दोनो ही बदल गया है।

आज सुमन ऐसी ड्रेस पहनी थी ,जिससे उसके शरीर का कोई भी अंग का मुआयना नही हो रहा था। जिसे देखकर सभी लड़के आश्चर्य में थे। पहले वह पारदर्शी साड़ी पहन कर आती थीं। आज सलवार सूट में थी।

इधर सुमन की आंखें किसी को ढूंढ रही थी। वह कार से उतरकर स्टाफ रूम की ओर चली गई।

क्लास के लिए बेल बजने पर सभी स्टूडेंट्स क्लास में चले गए पर राजेश कैंटीन में ही बैठा रहा।

भगत बोला Bhai क्या सोच रहा है, क्लास अटेंड नही करना क्या?

राजेश_नही यार आज मेरा मन नहीं क्लास अटेंड करने का।

भगत _अगर ऐसा है तो चलो घर चलते हैं। वैसे भी कौशल्या मां जी तुम्हे बहुंत मिस करती है। वह भी देखकर तुम्हे खुश हो जायेगी।

भगत राजेश को अपने घर ले गया।

घर पहुंचते ही राजेश भगत के बेड पर जाकर लेट गया और वह फिर सोच में डूब गया।

भगत राजेश से बोला भाई मा जी को बताऊं की राजेश आया है।

राजेश ने कहा रहने दो यार।ha और एक सिगरेट देना।

भगत _लगता है फिर तुम्हे अन्दर से चोंट पहुंचा है।

भगत ने सिगरेट जलाकरराजेश को दिया। पीने लगा।

कुछ देर बाद भगत ने राजेश से कहा कौशल्या मां जी को बुलाऊं क्या वो तुम्हारा मुड ठीक कर देगी।

Rajesh ने कहा _नही यार। आज कुछ करने का मन नहीं।

कुछ समय बाद भगत को एक कॉल आया। भगत ने कॉल उठाया। काल उसके गांव की कोई महिला चंदा की थी। जिसे भगत चोदता था।

भगत _बोलो जाने मन कैसे याद की।

चंदा_ कब आ रहे गांव।

भगत _क्यू boor में खुजली बड़ गई है क्या?

चंदा _हा, कब आ रहे। मुझसे रहा नहीं जा रहा।

भगत _क्या तुम्हारा पति chudai नही कर रहा।

चंदा _तुम तो जानते ही हो अब क्या बताऊं।

भगत _क्या अभी भी अपने मां की chudai में ही लगा रहता है तुम्हारा पति।

चंदा _हा । दिन रात अपने मां के भोसड़े में ही घुसा रहता है। मेरे लिए तो समय ही नहीं। तुम जल्दी आ जाओ।

भगत _ठीक है जानेमन मैं जल्द ही गांव पहुंचकर तुमारी प्यास भुझाऊंगा।

Rajhesh दोनो की बाते सुन रहा था।

दोनो की बाते जब बंद हुबा तो राजेश ने भगत से पूछा तू क्या बाते कर रहा था, और कौन है जो अपनी मां चोदता है?
 
भगत ने राजेश को बताया कि मेरे गांव की एक भाभी है चंदा जिसने मुझे चोदना सिखाया, उसी का काल था। वह पूछ रही थी कि मैं गांव कब आ रहा हूं। उसे मेरी याद सता रही है।राजेश _उसे तुम्हारी याद क्यू सता रही है?

भगत _क्यू की उसकी प्यास मेरे land se ही बुझती है।राजेश _क्यू, उसका पति, उसे नही चोदता क्या?

और तुम कुछ मां के भोसड़े में घुसे रहने की बात कर रहे थे। आखिर बात क्या है मैं भी तो जानू।भाई तुमने पूछा है तो मुझे बताना ही पढ़ेगा, भला मैं तुमसे कोई बात छुपा सकता हूं।चंदा मेरी गांव की भाभी है जो, गजब की मॉल है। हमारे बीच कहानी तब सुरू huwa जब हमारे गांव में नया मंदिर बनने के बाद। उसमे मूर्ति स्थापित करने का कार्यक्रम था। जिस दिन मूर्ति स्थापित करना था।गांव में सारा काम बंद करा दिया गया था। सभी लोगो को, कार्यक्रम में शामिल होना था। उस दिन पूरे दिन भर का कार्यक्रम रखा गया था। जिसमे मूर्ति को लाकर स्थापित करना। पूजा पाठ फिर धार्मिक प्रवचन और अंत में भंडारा।उस समय मैं 18वर्ष का थाऔर मैं भी अपने गांव के दोस्तो के साथ कार्य क्रम की जिम्मेदारी सम्हाल रहा था। उस दिन चंदा भाभी से मेरी पहली मुलाकात हुईं।वह पूजा की थाली लेकर मंदिर पहुंची थीं। मै बैठक व्यवस्था सम्हाल रहा था। जब चंदा भाभी पर मेरी पहली बार नज़र पड़ी तो मैं उसे देखता रहा गया। क्या कयामत लग रही थी।पहली नज़र में ही वह मेरे दिल में उतर गई थी।

चंदा को एकटक नज़र गड़ाए देखते हुवे उसका एक दोस्त बोला, क्या देख रहे हों भाई? लगता है, भाभी तुम्हे पसंद आ गई है।भगत_अबे ye कौन, पहली बार देख रहा हूं इनको।दोस्त_अरे यार ये तो चंदू भैया की लुगाई चंदा है। २साल हो गया है बिहा कर इस गांव में आए, जब ये आई थी तो थोडा पतली दुबली थी और अब देखो कैसी गदरा गई है। एक बच्ची की मां बनने के बादउसका बदन भर गया है और कितनी खूबसूरत और सेक्सी लग रही है। बड़ा किस्मत वाला है चंदू भाई जो इतनी खूबसूरत लुगाई मिली है।

भगत ने कहा हा यार चंदू भाई की किस्मत देखकर तो मुझे भी जलन होने लगी है।

क्या पटाखा बीबी मिला है।चंदा के साथ एक लडकी थी, जो एक बच्ची को पा कर ला रही थी।भगत ने कहा लगता है वह छोटी बच्ची जो वह लड़की पा कर ला रही है, वह भाभी का ही है।सभी लडको की नज़र चंदा पर ही गड़ी हुई थी।चंदा मंदिर में पहुंचकर मूर्ति की पूजा अर्चना करने के लिए लाइन में खड़ी हो गई मंदिर में महिलाओं की काफी भीड़ थी। पूजा करने के बाद महिलाए मंदिर प्रांगण में बैठ रही थी जहा एक संत द्वारा प्रवचन दिया जा रहा था। पूजा अर्चना करने के बाद चंदा भी अपने बच्ची को अपने गोद में लेकर,बैठने के लिए स्थान देखने लगी। भगत की नज़र चंदा पर ही गड़ी थी।भगत बैठक व्यवस्था सम्हालने की जिम्मेदारी भगत की ही थी।भगत,चंदा के पास गया और बोला अरे भौजी आप मेरे साथ आइए इधर बैठने के लिए, जगह है। लाइए बच्चा मुझे देदो। भीड़ में बच्चे लेकर चलने में तुम्हे दिक्कत होगी।भौजी ये आपही का बच्चा है क्या?

कितनी सुंदर है बिलकुल आपही की तरह।भगत की बात सुनकर चंदा शर्मा गई।भगत ने बच्ची को चंदा के गोद से लेकर, स्वयं pa लिया और आगे चलने लगा। चंदा उसके पीछे चलने लगी।वह संत के सामने बैठे महिलाओं के पास पहुंची और एक महिला से भोली काकी थोड़ा उधर सरकिएगा। भौजी के गोद में छोटी बच्ची है भीड़ में उसे दिक्ककत होगी।महिला ने कहा अरे ये तो चंदू की लुगाई है आ जा बहुरिया आ सामने बैठ जा और वह महिला थोड़ा पीछे खिसक कर चंदा के बैठने के लिए जगह बना दीजब चंदा बैठ गई तब तब भगत बच्ची को उसके गोद में दे दिया और कहा लो भौजी सम्हालो अपने बच्ची को।चंदा ने भगत से बच्ची लेकर उसे धन्याद दिया।भगत ने कहा भौजी अगर कोई दिक्कत या जरूरत हो तो मुझे बताना मैं यही आस पास ही रहूंगा। चंदा सर हिलाकर हा कहा।प्रवचन चल रहा था सभी महिलाए प्रवचन बड़े ध्यान से सुन रहे थे। भगत का ध्यान तो चंदा पर ही था।चंदा भी जब कभी भगत की ओर देखता तो वह भगत को अपने ओर ही देखते पाता, जब दोनो की नज़र मिलती तो चंदा शर्माकर अपना सिर नीचे कर लेती थीं।कुछ समय के बाद बच्ची रोने लगी, चंदा बच्ची को चुप कराने की कोशिश करने लगी। शायद उसे भूख लगी थी। भगत चंदा के पास गया और बोला भौजी लगता है बच्ची को भूख लगी है।पीछे बैठी महिला भी चंदा से बोली हा बहुरिया बाबुवा ठीक कह रहा है। तुम बच्ची को दूध पिला दो।भगत ते महिला से कहा काकी तुम सामने आ जाओ भौजी को पीछे बैठे दो ताकि वह बच्ची को दूध पिला सके।महिला ने कहा ठिक है बबुआ, आ जाओ बहुरिया मेरे जगह तुम आ जाओ और स्वयं आगे बैठ गई।चंदा पीछे सरककर बैठ गई।भगत वहा से चला गया।चंदा अपने ब्लाउज के बटन खोलकर अपना दूदू बाहर कर साड़ी के पल्लू से ढककर अपने बच्ची को दूध पिलाने लगी।दूध पीते ही बच्ची चुप हो गई।कुछ देर तक प्रवचन चलने के बाद, प्रसाद वितरण का कार्यक्रम था।सभी लोगो के लिए भोजन की व्यवस्था भीं किया गया था।महिलाओं को भोजन के लिए कतार बद्ध बिठा दिया गया।

लड़के लोग महिलाओं को भोजन परोसने लगे भगत देख रेख रहा था कि सभी लोगो को भोजन समय पर मिल पा रहा है कि नही कही कुछ कमी तो नहीं रह गया,कमी होने पर लडको को बतलाता था कि यहां ये लाओ।

जब लड़के चंदा को पकवान परोस रहा था तो भगत वहा खड़ा था। वह लड़के से बोला यार भौजी को दो पूड़ी और दो।

चंदा ने हांथ सामने रख कर कहा बस हो गया और नही।

भगत ने कहा अरे भौजी और लो न शर्माओ नही जितना लेना है,। उसने लड़के से कहा अरे बुधारू भाभी को और दो कुछ कमी नहीं होना चाहिए।

भगत की बातो को सुनकर बाजू में बैठी महिला ने कहा अरे बबुआ सिर्फ़ भौजी की ही खातिर दारी करोगे क्या? अपने काकी को का भी तो ख्याल रखो।

हा भाई भौजी इतनी सुंदर है तो खातिर दारी तो होगी ही।

महिला की बात सुनकर वहा बैठी सारी महिलाएं मुंह बंद कर हसने लगी, जिसे देखकर चंदा शर्म सी गड़ी जा रही थी।

भगत ने कहा अरे काकी हम सबका ख्याल रखने के लिए ही तो यहा खड़े है। अरे बुधारु काकी को भी खिलाओ अच्छे से।

भोजन कर लेने के बाद चंदा साथ में आई लडकी के साथ अपने बच्ची को लेकर घर जाने लगी।

तभी एक लड़का आया और एक पैकेट चंदा को देते हुवे कहा भौजी इसे ले जाओ।

चंदा ने लड़के से कहा ये क्या है?

लड़के ने कहा , भौजी इसमें पकवान और कुछ मिठाई है भगत भैया ने भेजा है।

चंदा ने वह पैकेट रख लिया। तब वह लड़का ने कागजकी पर्ची देते हुवे कहा भौजी ये पर्ची भी रख लो, इसमें भगत भैया का नंबर लिखा है। कुछ जरूवत पड़े तो भगत भैया ने कॉल करने कहा है।

चंदा ने वह पर्ची रख कर ब्लाउज के अन्दर छुपा लिया।

और अपने घर की ओर चली गई।
 
घर जाने के बाद उसकी सास कमला ने चंदा से पूछा आ गई बहु मन्दिर से, काफ़ी देर lagadi आने में।

चंदा ने कहा, हा मां जी सभी लोगो को भोजन करके ही जाने के लिए कहा गया इसलिए लेट हो गई।

कमला _मै तो चिंतित थी की तुम पहली बार बाहर गई हो सब ठिक तो है न। अगर तुम्हारे ससुर जी ठिक होते तो मैं भी तुम्हरे santh जाती। वहा तो गांव की सारी महिलाएं गई रही होगी।

चंदा _हा मां जी, मंदिर में काफ़ी भीड़ लगी थी।कमला _अच्छा अब जाओ बहु अपनी साड़ी बदल लो और घर का काम सम्हालो

ठीक है मां जी।चंदा अपने कमरे मे चली गईऔर वह आईने के सामने खड़ी होकर खुद को निहारने लगी।

आज उसे अपनी सौंदर्यता पर काफ़ी गर्व महसूस हो रही थीं। कैसे सभी लडको की नजर आज उन्ही पर टिकी थी। वह आईने मे खुद को निहारते हुवे अपना साड़ी उतारने लगी।

साड़ी उतारने के बाद फिर सेअपने बदन को देखते हुवे सोचने लगी हाय बहार से देखने पर ही लडको का ये हाल था कही बिना साड़ी के देख ले तो पता नहीं उनका क्या होगा।

तभी उनको याद आया की लड़के ने एक पर्ची दिया है, वह उस पर्ची को अपने ब्लाउज से बाहर निकाल कर देखने लगा। उसने उसपर एक मोबाइल नंबर पाया जिसमे लिखा था। भौजी ये मेरा मोबाइल नंबर है। मै तुम्हारे कॉल का इंतजार करूंगा।

उसे पड़कर चंदा मुस्कुराने लगी। और वह भगत के बारे में सोचने लगी। भगत कितना ख्याल रखा उनका , भगत जैसा स्मार्ट लड़का भी उसका दीवाना हो गया है। यह सोचकर अपने बदन को आईने में फिर निहारते हुवे, अपने पर गर्व करने लगी।

इधर भगत को चंदा के घर जाने के बाद मंदिर में उनका मन नहीं लग रहा था। पर जिम्मेदारी पूरी करने के लिए वहा उपस्थित था। अगर चंदा का मोबाइल नंबर उसके पास होता तो जरूर वह उससे काल कर पूछ लेता की भौजी खातिर दारी में कोई कमी तो नहीं रह गई। पता नही चंदा उसे काल करेगा की नही।

इधर चंदा सोच रही थी की भगत ने उनका कितना ख्याल रखा और उनको शुक्रिया भी नही कर पाई। फिर वह सोची क्यू न उन्हे कॉल कर उनका शुक्रिया अदा kardoo।

फिर चंदा सोची की नही अभी नहीं अभी घर में बहुत से काम है पहले काम निपटा लू फिर भगत को काल करूंगी।

और वह साड़ी बदलकर घर का काम करने लगी।

चंदा का पति चंदन दिनभर दुकान सम्हालता था। सामने दुकान और उसके पीछे मकान था।

ग्राहक ज्यादा आ जाने पर चंदन की मां कमला चंदन का हांथ बटाती थीं। चंदा घर का काम सम्हालती थी।

किराने की दुकान से उनकी अच्छी कमाई हो जाता था। घर में किसी प्रकार की कोई आर्थिक समस्या नहीं थी। उसकी कोई समस्या थी तो वह था चंदन के पिता जी लकवा का शिकार हो गया था।

और घर की जिम्मेदारी चन्दन पर आ गया था।

चंदा घर का काम निपटा लेने के बाद अपने कमरे में चली गई। और ब्लाउजसे चूची बाहर निकालकर अपने बच्ची को अपना दूदू पिलाने लगी।

फिर वह दूध पिलाते हुवे आज हुई घटनाओं को याद करने लगी।

उसे याद आया कि भगत ने उसे अपना मोबाइल नंबर दिया है। कॉल करने के लिऐ और उसने यह भी लिखा है कि वह उसकी कॉल का इंतजार करेगा।

क्यू न कॉल करके उन्हे आज जो उनका इतना ख्याल रखा उसके लिऐ शुक्रिया कह दू।

और वह अपना मोबाइल पर पर्ची पर लिखा नंबर डायल करने लगी।

इधर भगत का मन भी चंदा पर ही लगा था। मंदिर का कार्यक्रम संपन्न कर वह भी अपने घर जाकर अपने कमरे में लेटा चंदा को याद कर रहा था।

जब उसका मोबाइल बजा, तब उसका ध्यान उस ओर गया।

वह देखा की किसी अंजान नंबर से कॉल आया है उसका दिल धड़कने लगा कही चंदा भाभी का तो नही।

उसे मोबाईल पर हैलो किसी महीला की आवाज कहा जीआप कौन बोल रही है।

चंदा _क्या देवर जी अपनी भौजी को इतनी जल्दी भूल गए।

भगत _चंदा भौजी क्या तुम हो?

चंदा _हा देवर जी। तुमने ही तो नंबर दिया था और उसमे लिखा था कि तुम्हे मेरा कॉल का इंतजार रहेगा तुम तो मुझे भूल गए।

भगत _नही भौजी ऐसी बात नहीं है तुम्हारा नंबर मेरे पास सेव नही था न इसलिए और पहली बार तुमसे mobile पर बात हो रही है न इसलिए मैं तुम्हारी आवाज़ पहचान न सका। मुझे माफ कर दो भौजी।

चंदा _ कोई बात नहीं देवर जी मैं तो इसलिए कॉल कि थी की चलो मैं तुम्हे शुक्रिया कह दू कि आपने आज इतना ख्याल जो रखा।

भगत _भाभी जी आप हो ही इतनी खूबसूरत आपका ख्याल कौन नहीं रखना चाहेगा।

चंदा _महिलाओं की झूठी तारीफ करना तो तुम लडको की फितरत है।

भगत _नही भौजी मैं झूठी तारीफ नही कर रहा। मै सच कह रहा हूं। सभी लड़के तुम्हारी खुबसूरती के ही चर्चा कर रहे थे और कह कर थे की चन्दन भैया कितने किस्मत वाले है जो इतनी सुंदर और सेक्सी लुगाई मिली है।

चंदा_धत। कितना गन्दा बोलते है तुम्हरे दोस्त।

अछा ये बताओ मैं तुम्हे कैसी लगी ।

भगत _भौजी सच बताऊं तो जब से देखा है तुम्हे बस तुम्हारे खयालों मे ही खोया हू।

चंदा _चुप झूठे झूठ बोल रहे हो अभी तो तुम मेरी आवाज़ ही नहीं पहचान पाए थे।

भगत _भौजी मै सच कह रहा हूं।

तभी किसी की आने की आहट सुनाई दी।

चंदा बोली, अछा भगत कॉल रखो लगता है कोई आ रहा। मै बाद में कॉल करूंगी।

भगत _ठीक है भौजी मुझे तुम्हरे काल का इंतजार रहेगा। और कॉल काट दिया।

इसके बाद जब भी मौका मिलता भगत और चंदा दोनो। मोबाइल पर बाते करने लगे। उन दोनो को बाते करना अछा लगने लगा। किसी दिन बात न हुवा तो दोनो बेचैन हो जाते थे। Dhire धीरे दोनो और करीब आते गए। एक दूसरे से मिलने दोनो तड़पने लगे।

एक दिन जब दोनो mobile पर बाते कर रहे थे। तब भगत ने चंदा से कहा भाभी मुझे आपसे अकेले में मिलना है।

चंदा ने कहा पर भगत मै घर से बाहर निकलती नही। मै तो पहली बार उस दिन घर से बाहर गांव में कही गई थी। जव मंदिर में कार्यक्रम था।

हम अकेले में कैसे मिल पाएंगे।

भगत ने कहा _भौजी तुम कुछ उपाय करो न, मुझे तुमसे अकेले में मिलना है।

चंदा ने कहा _देखो भगत दिन में मिलना तो मुस्कील है। क्यों की गांव वाले अगर साथ में देखेंगे तो दोनो की बदनामी होगी।

पर रात में अगर तुम आ सको तो हम मिल सकते हैं।

भगत ने कहा _भौजी तुम बताओ तो सही मै रात में भी आ जाऊंगा तुमसे मिलने।

चंदा_ तो ठीक है आज रात तुम गांव वालो के सो जाने के बाद तुम मेरे घर के पीछे जो बड़ी है उसके दीवार फांदकर बाड़ी अन्दर आ जाना । घर के पीछे बाड़ी में दो कच्चे कमरे बने है जिसमे एक में जानवर बंधे होंगे। दूसरे कमरे में जानवरो के लिए चारा पैरा वागेरा रखा है तुम उस कमरे में आकर मेरा इंतजार करना। जब तुम आ जाओ तो मुझे मैसेज कर देना । मै मौका देखकर घर के पीछे बाड़ी में आ जाऊंगा।

भगत _भौजी मैं आज रात जरूर आऊंगा।

इसके बाद दोनो रात होने का बेसब्री से इंतज़ार कर ने लगे। रात में घर के सभी लोगो केभोजन करके सो जाने के बाद करीब 12बजे रात में भगत अपने घर के पीछे दरवाजे जो बाड़ी में खुलता था से बाहर निकलकर वह गांव की गलियों से होकर छुपते छुपाते चंदा के घर के पीछे बाड़ी में पहुंच गया। इस समय गांव के गलियों में सन्नाटा पसरा था। बाड़ी का दीवार फांदकर भगत बाड़ी के अन्दर चला गया बाड़ी में अंधेरा था। वह अपने मोबाईल का टार्च ऑन कर बाड़ी का मुआइना किया उसने देखा घर के पीछे दो मिट्टी से बने दो कमरे बने है। एक कमरे मे जानवर बंधा था।

दूसरे कमरे मे देखा जानवरो के खाने के लिऐ पैरा भरा huwa था। कमरे के अन्दर एक पुराना खाट भी था। भगत खाट बिछाकर उसपर बैठकर चंदा को अपने आने का मैसेज कर दिया और वह खाट पर लेटकर चंदा के आने का बेसब्री से इंतज़ार करने लगा।

एक
 
आपने पढ़ा की किस तरह भगत रात मे छिपते छिपाते चंदा के घर के पीछे बाड़ी में पहुंचकर वहां कमरे मे रखे खाट पर लेटकर चंदा की आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।दरअसल huwa ये था कि जब उन दोनो के बीच मोबाईल पर बात चीत सुरु huwa फिर वे विडियो काल कर बात चीत करने लगे।एक दिन चंदा सुंदर साड़ी पहनकर भगत को विडियो काल कर दिखा रही थी की मैं कैसी लग रही हूं।इस साड़ी में चंदा काफी हॉट लग रही थी। उसके स्तन काफ़ी बड़े एवम आकर्षक दिखाई पड़ रहे थे।भगत का ध्यान जब चंदा के चूचे पर गया तो वह देखता रह गया। वह बोला भौजी तुम तो इस साड़ी में काफ़ी खूबसूरत और हॉट लग रही हो। आपके wo काफी बड़े बड़े लग रहे है।चंदा ने कहा क्या बड़े बड़े लग रहे है।भगत ने लड़खड़ाते शब्दो में कहा आपके दूदू।चंदा ने कहा धत तुम बदमाश होते जा रहे हों।भगत ने कहा मैं सच कह रहा हूं। भौजी आपके दूदू काफी बड़े एवम आकर्षक लग रहे है।

चंदा शर्मा गई।भगत ने कहा भौजी मुझे अपना दूदू दिखाओ ना।चंदा धत पागल ये क्या कह रहा है न बाबा मैं नही दिखाने वाली।भगत _प्लीज भौजी दिखाओ ना।मुझे देखना है।चंदा _ना बाबा कोई आ गया तो।भगत _भौजी दिखाओ ना सिर्फ एकबार। अपने देवर की इतनी इच्छा पुरी नही कर सकती।चंदा _ना बाबा मुझे शर्म आती है।भगत _भौजी अब मुझसे क्या शर्माना। प्लीज दिखाओ ना।भगत के जिद करने पर चंदा ने कहा ठिक है सिर्फ एक बार ही दिखाऊंगा। बार बार दिखाने न बोलना।चंदा पहले कमरे के बाहर घर का मुआयना, कर ली kआपने पढ़ा की किस तरह भगत रात मे छिपते छिपाते चंदा के घर के पीछे बाड़ी में पहुंचकर वहां कमरे मे रखे खाट पर लेटकर चंदा की आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।

दरअसल huwa ये था कि जब उन दोनो के बीच मोबाईल पर बात चीत सुरु huwa फिर वे विडियो काल कर बात चीत करने लगे।

एक दिन चंदा सुंदर साड़ी पहनकर भगत को विडियो काल कर दिखा रही थी की मैं कैसी लग रही हूं।

इस साड़ी में चंदा काफी हॉट लग रही थी। उसके स्तन काफ़ी बड़े एवम आकर्षक दिखाई पड़ रहे थे।

भगत का ध्यान जब चंदा के चूचे पर गया तो वह देखता रह गया। वह बोला भौजी तुम तो इस साड़ी में काफ़ी खूबसूरत और हॉट लग रही हो। आपके wo काफी बड़े बड़े लग रहे है।

चंदा ने कहा क्या बड़े बड़े लग रहे है।

भगत ने लड़खड़ाते शब्दो में कहा आपके दूदू।

चंदा ने कहा धत तुम बदमाश होते जा रहे हों।

भगत ने कहा मैं सच कह रहा हूं। भौजी आपके दूदू काफी बड़े एवम आकर्षक लग रहे है।

चंदा शर्मा गई।

भगत ने कहा भौजी मुझे अपना दूदू दिखाओ ना।

चंदा धत पागल ये क्या कह रहा है न बाबा मैं नही दिखाने वाली।

भगत _प्लीज भौजी दिखाओ ना।मुझे देखना है।

चंदा _ना बाबा कोई आ गया तो।

भगत _भौजी दिखाओ ना सिर्फ एकबार। अपने देवर की इतनी इच्छा पुरी नही कर सकती।

चंदा _ना बाबा मुझे शर्म आती है।

भगत _भौजी अब मुझसे क्या शर्माना। प्लीज दिखाओ ना।

भगत के जिद करने पर चंदा ने कहा ठिक है सिर्फ एक बार ही दिखाऊंगा। बार बार दिखाने न बोलना।

चंदा पहले कमरे के बाहर घर का मुआयना, कर ली कोई आ तो नही रहा। जब उसे आस पास कोई नज़र नही आया तब वह कमरे मे जाकर दरवाजा बंद कर मोबाईल के सामने खड़ी हो गई और बोली लो देख लो। देवर जी अपनी भौजी की दूदू। नही तो बाद में मुझसे नाराज़ हो जाओगे।

भगत खुश हो गया वह एक टक मोबाइल पर देखने लगा। उसका दिल ka धड़कन बड़ गया।

इधर चंदा अपनी साडी का पल्लू नीचे गिरा दिया। और अपने ब्लाउज का बटन निकालने लगी।

बटन ज्यों ज्यों खुलता जा रहा था।

त्यो त्यों भगत का दिल का धड़कन बड़ने लगा।

जब सारे बटन खुल गए तब , चंदा अपने ब्लाउज को दोनो हाथो से पकड़कर थोड़ा खोल दिया जिससे उसके चूचे भगत के आंखो के सामने आ गया।

भगत का तो चंदा के बड़े बड़े सुडौल स्तन को देखकर हालत खराब हो गया। वह पहली बार किसी जान पहचान वाली महीला की स्तन को देख रहा था।

वह चंदा की चूचे देखकर गर्म हो गया।

उसके शरीर में खून दोगने गति से दौड़ने लगा , असर ये huwa की उसका land उसके पेंट में तनकर खड़ा हो गया। और उसका हांथ न चाहते हुवे भी उसके land पर चला गया। वह अपने land ko सहलाते हुवे। एक टक चंदा के बड़े बड़े मम्मे को देखने लगा।

चंदा ने भगत को कहा क्या huwa देवर जी कहा खो गए। अगर दर्शन कर लिए तो इसे बंद कर दू।

लगता है कि मेरे दूदू आपको पसंद नहीं आया क्यू?

तब भगत कपकपाते जुबान से_बोला नही भौजी आपके दूदू तो कमाल के हैi कितने बड़े बड़े है। चंदू भैया तो बहुत किस्मत वाले है।

चंदा _ शरमाते हुवे पूछा वो क्यू।

भगत _चंदू भईया को तो रोज ही इसका दर्शन लाभ मिलता होगा।

चंदा _अब देख लिये हो तो इसे बंद करू। मुझे बड़ी शर्म आ रही और अपने दोनों हाथो कोसे अपने चहरे को छिपा ली।

भगत _नही भाभी अभी मेरा मन भरा नहीं है वहअपने land ko सहलाते हुवे कहा । थोड़ा देर ऐसे ही खुला रहने दो ना।

चंदा _ना बाबा कोई आ गया तो।

अब बस और वह अपना ब्लाउज का बटन बंद करने लगी।

भगत निराश हो गया।

भगत के उतरे चहरे को देखकर चंदा बोली, क्या huwa देवर जी तुम्हरा चेहरा क्यू उतर गया। लगता है भौजी का दूदू कुछ ज्यादा ही पसंद आ गया।

अब चेहरा ऐसा उतार कर मत रहो, मुझे तुम्हरा उतरा चेहरा अच्छा नही लगता।

भगत _भौजी थोड़ा देर और दिखा देती तो क्या हो जाता।

चंदा_अरे बाबा तू तो नाराज हो गया रि ।

अच्छा मुझसे नाराज़ न हो अब कल देख लेना।

भगत _खुश होते हुवे,सच भौजी मुझे कल दिखाउगी न पक्का।

चंदा _ हा बाबा पक्का।

भगत _भौजी कल का बेसब्री से इंतज़ार रहेगा।

अब दोनो अपने काम में लग गए।

दूसरे दिन फिर निर्धारित समय पर विडियो काल कर बात चीत करने लगे।

भगत ने कहा भौजी तुम तो आज भी दिखाने वाली थीं न अपने दूदू, दिखाओ न।

चंदा _क्यू, इसे देखे बिना नहीं रह सकता।

भगत _आपके दूदू है ही इतनी खूबसूरत मन करता है इसे देखता ही रहूं ।

चंदा _लो देख लो तुम भी क्या याद रखो ge किस भौजी से पाला पड़ा है।

चंदा अपने ब्लाउज के बटन खोलनेउसे अपने स्तन को फिर से आजाद कर दिया।

भगतचंदा के दूदू देखकर फिर गर्म हो गया उसका land pent में अकड़ गया जिसे अपने हाथो से सहलाते हुवे अपने आंखो से चंदा के दूदू का रसपान करने लगा।

भगत _सच में भौजी आपके दूदू कितने मस्त है।भौजी इसमें दूध भी तो आता होगा।

चंदा _शर्माते हुवे बोली, इसमें दूध भरा है तभी तो इतने बड़े है। भाभी थोडा इसको मसलकर दूध निकलकर दिखाओ ना, मै भी तो देखूंइससे दूध कैसे बाहर आता है।

चंदा _धत पागल, अब तो तुम्हारी नईं नईं ख्वाइश बढ़ती जा रही है। न बाबा मैं अपने ही हाथों से ऐसा गंदा काम नहीं करूंगी।

भगत _प्लीज भाभी इसे एकबार मसलकर दूध निकालो ना। चंदू भैया भी तो मसलते होंगेइन्हे।

चंदा _छी कैसी गंदी बाते कर रहा। तुम तो बड़े अच्छे लड़के थे। किसने बताया ये सब।

भगत _वो भाभी मेरे दोस्तो ने बताया कि औरतों के दूदू मसलने पर बडा मजा आता है तो मुझे लगा की चंदू भईया भी आपके दूदू मसलते होंगे।

चंदा _तू बड़ा बदमाश हो गया है। मै तुझे कितना शरीफ समझती थी।

भगत _भौजी सिर्फ एक बार इसे मसलकर दूध निकालो ना मुझे देखना है प्लीज।

चंदा _तू मानेगा नही, बड़ा जिद्दी है।

पर प्रोमिस कर तुम अपने दोस्तो को इन सब के बारे मे कभी नही बताओगे बोलो।

भगत _मै तुमसे प्रोमिस करता हू भाभी मैं किसी को भी हमारे बारे मे नही बताऊंगा।

चंदा _लो देख लो और अपनी देखने की इच्छा पूरी कर लो।

चंदा अपने दोनो हाथो से अपने चूचे मसलकर उससे दूध निकालने लगी। दूध के दबते ही उसके स्तनों के चुचक से लम्बी लंबी पिचकारी निकलेने लगीं।

जिसे देख कर भगत का land उसके पैंट पर ही ठुनकी मारने लगा।

कुछ देर मसलकर दूध निकाल कर दिखाने के बाद अपने हाथों से ही अपने मम्मे मसलने से ही चंदा भी काफ़ी गर्म हो गई। अब वह ज्यादा देर बर्दास्त नही कर सकती थीं । वह दबाना बंद कर बोली।

चंदा _अब देख लिया न हो गया tumhari मुरादे पूरी अब इसे बंद करू।

भगत _भौजी थोड़ी देर और करो ना।

चंदा नाबाबा और नही नही तो तुम फिर नया डिमांड कर दोगे।

और चंदा अपने ब्लाउज का बटन लगा दी।

इस तरह अब रोज ही भगत चंदा के दूदू का अपने आंखो से रसपान करने लगा।

भगत का ख्वाइश अब चंदा के स्तन को मसलने एवम उसके दूध को पीने का होने लगा

भगत ने चंदा से एक दिन कहा भौजी मुझे आपके दूदू पीने की इच्छा है प्लीज भौजी मेरी यह इच्छा पुरी करो।

चंदा _हसने लगी क्या तुम बच्चे हो जो मेरे दूध पियोगे!

भगत_हा भौजी, मै तो अभी बच्चा ही हू। मुझे आपके दूदू पीने है। मैभी तो जानू की मेरे भौजी के दूध k का स्वाद कैसा है!

चंदा अच्छे से जानती थी कि भगत जिद्दी है। वह बोली।

मै जानती हू तू बड़ा जिद्दी है तू अपनीबात मनवाकरही रहेगा । मना करो तो अपना चहेरा उतार कर बैठ जाता है। जो मुझे पसंद नहीं।

अच्छा बताओ तुम मेरे दूदू पियोगे कैसे बाहर तो मैं जाती नही। अगर मैं बहाने बनाकर कही बाहर निकली भी तो गांव वालो की नज़र से कैसे बचूंगी।

न बाबा ना बहुत बदनामी हो जायेगी।

तुम दूदू पीने का ख्याल अपने मन से निकाल दो।

भगत _नही भौजी तुमहे ये मेरी इच्छा पुरी करनी ही होगी तुम्हे ही कोई उपाय निकालना होगा।

चंदाy यह सोचकर की यह मानने वाला नही, वैसे तो वह भी भगत के करीब जाना चाहती थी, पर बदनामी से डरती थी।

कुछ समय सोचने के बाद वह भगत से बोली, देखो भगत दिन में तो यह संभव नहीं है अगर रात में गांव वालो के सो जाने के बाद तुम मेरे घर आ सको तो तुम्हारी इच्छा पुरी हो सकती है।

भगत तो बावरा हो गया था वह चंदा के दूदू को मसल मसल कर पीना चाहता था वह अपनी इच्छा पूरी करने के लिए कुछ भी कर सकता था।

अतः निर्धारित समय पर वह रात में चंदा के घर के पीछे बाड़ी में पहुंच गया और कमरे में रखा पुरानी खाट मे लेटकर चंदा के आने का इंतजार करने लगा। वह खाट में लेटकर चंदा के चूचे को ही याद कर रहा था की आज भौजी कि दूदू को अपने हाथो में लेकर मसलने को मिलेगा। आज भौजी के चूचे को पकड़कर वह खूब मसल मसल कर दूध पिएगा।

यह सोचकर ही उसका land तनकर खड़ा हो गया था। वह एक हांथ से land सहलाते हुवे चंदा के मम्मे को इमेज करते हुवे खाट में लेटकर चंदा की आने का इंतजार करने लगा।
 
राजेश खाट में लेटकर चंदा के आने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था। उधर चंदा भी बेताब थी भगत से मिलने के लिए। जब उसने देखा की चन्दन उसका पति नींद में खर्राटे ले रहा है तब वह अपने बेड से उठी और दबे पांव चलते हुए कमरे से बाहर निकल गई घर में सन्नाटा पसरा था। वह सीधे घर के पीछे बाड़ी की ओर चली गई जहा भगत उनका इंतजार कर रहा था।

भगत को किसी की आने की आहट महसूस हुई इसका दिल का धड़कन बढ़ गया। चंदा कमरे मे पहुंचकर आवाज लगाई भगत कहा हो। कमरे में अंधेरा था।

चंदा कि आवाज़ सुनकर भगत मोबाइल का टार्च ओन किया। वह बोला भौजी मै यहां हू, काफ़ी इंतजार करा दी आपने मै कब से तुम्हरा इंतजार कर रहा था।

चंदा,_इंतजार का फल मीठा होता है देवर जी।

भगत खाट से उठकर बैठ गया।

चंदा भी खाट पर बैठ गई। चंदा ने कहा तुम्हे यहां आते किसी ने देखा तो नही।

भगत _नही भौजी किसी ने नहीं देखा।

चंदा _तुम्हारी क्या इच्छा थी देवर जी? लो कर लो अपनी इच्छा पूरा।

भगत _भौजी मेरी इच्छा तो तुमको मालूम है?

चंदा _हा मै जानती हू। तुम मुझसे मिलने क्यू तड़प रहे थे। तुम्हे मेरे दूदू पीने है चंदा खिलखिलाकर हस पड़ी।

चंदा _लो कर लो अपनी इच्छा पूरी। और चंदा खाट पर लेट गया।

भगत ने कहा, भौजी अपनी ब्लाउज तो खोलो।

चंदा _हा हा सब समझती हूं तुम मेरी चूंची देखने मरा जा रहा है। ले देख ले और पीले मेरे दूध।

चंदा अपने ब्लाउज के बटन खोलने लगी।

भगत का दिल जोरों से धड़क रहा था इस पल के लिए वह कब से इंतजार कर रहा था। उसका land तो पहले ही तन कर पैंट फाड़ने की कोशिश कर रहा था।

जैसे ही ब्लाउज का बटन खुला, चंदा के सुडौल, बड़े बड़े स्तन स्तन बाहर आ गया। जिसे भगत एकटक देखने लगा।

चंदा_अब देखता ही रहेगा, कि दूध पिएगा भी। लगता है किसी महीला का स्तन पहली बार देख रहे हो।

भगत _हा भौजी पहली बार मैं किसी के स्तन को ऐसा देख पा रहा हूं। कितने खूबसूरत है।

चंदाखिलखिलाकर हसने लगी।

भगत _भौजी क्या मैं इसे छू कर देखू।

चंदा _बिना छुए दूध पियेगा कैसे?

भगत ने अपने हांथ आगे बड़ाकर, चंदा के मम्मे पकड़ लिया उसे दबाकर देखने लगा।

भगत _भौजी आपके दूदू तो काफ़ी मुलायम है। और भगत उसे हल्का हल्का दबाने लगा।

चंदा _अब जल्दी इसे पियो कोई आ न जाए।

भगत अब अपना मुंह में चंदा के चूचक को भरकर चूसना शुरु किया। जैसे ही स्तन को दबाकर उसके चूचक को चूसा, दूध की एक तेज धार चंदा की चूची से निकलकर भगत के मुंह में जाने लगा।

मुंह में दुध जाने पर भगत उसे गटकने लगा। वह बोला, आह भौजी आपके दूध तो कितना मीठा और स्वादिष्ट है।

चंदा _इसी के लिए तू तड़प रहा था न पीले जी भर के अपने भौजी के दूदू।

चंदा _मेरे भोले देवर जी, मेरे चूल्हे में जो आग लगी है उसे बुझाने

अब भगत अपने हाथों से चंदा के दोनो दूदू को मसल मसल कर उसके दूध निकलकर पीने लगा।

भगत की इस हरकत से चंदा गर्म होने लगी।

भगत भी अब जोश में आ रहा था। अब वह और भी जोर जोर से उसके स्तन मसलने लगा और एक हांथ की ऊंगली से उसके चूचक को छेड़ते हुवे दुसरे चुचक को मुंह से जो जोर से चूसकर दूध पीने लगा।

भगत की इन हरकत से चंदा बहुत अधिक गर्म हो गई। वह बर्दास्त ना कर सकी और मुंह से सिसकारी निकालने लगी।

भगत_क्या huwa भौजी काहे सिसक रही।

चंदा _tu नही समझेगा रि तू अभी बच्चा है।

भगत_अब इतना छोटा बच्चा भी नही मैं, अगर समझाओगी तो मैं समझ जाऊंगा।

चंदा _अरे देवर जी तुम्हारी हरकतों ने मेरे चूल्हे पे आग लगा दी है। इस आग की जलन से मेरे मुंह सिसकारी निकल रही।

भगत _भौजी तुम ये क्या कह रही मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा।

चंदा _मैने कहा था न कि तू अभी बच्चा है नही समझेगा। अब तो यह आग तुम्हरे भईया ही बुझा पाएगा।

भगत_मम्मे को जोर जोर से मसलते हुवे कहा भौजी भईया ऐसे क्या करेंगे जो मैं नही कर पाऊंगा।

तुम मुझ बताओ तुम मुझे बताओ की क्या करना है। कैसे तुम्हारी चूल्हे की आग बुझेगी।

चंदा _भगत की हरकतों से अत्यंत कामुक हो गई। लगातार उसके मुख से कामुक सीत्कार निकलने लगी। वह बोली देवर जी मेरे अन्दर जो आग लगी है उसे बुझाने के लिए कुआ खोदना पड़ेगा। कुवे से पानी निकालला पड़ेगा तभी ये आग बुझेगी। कुआ खोदने के लिए हथियार चाहिए।

चंदा _जोश में आ गई थी, तू अभी बच्चा है । तुम्हरा हथियार अभी kuwa खोदने लायक नहीं huwa है।

भगत _भौजी ये तुम क्या बोल रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा तुम किस हथियार की बात कर रही।

भगत लगातार चंदा के मम्मे मसल मसल कर उसके दूध निकाल कर मुंह में भर कर गटके जा रहा था।

चंदा काम विहिल होकर बोली, अरे वही हथियार जो तुमने पैंट में छुपा रखा है।

भगत _भौजी कही तुम नुन्नू की बात तो नही कर रही।

चंदा _हा अब कुछ समझे।

भाभी _आप भी न।

चंदा _ तू तो शर्माने लगा रि। चल तो दिखा अपना नुन्नु कुछ करने लायक huwa hai ki नही।

भगत _भौजी मुझे शर्म आयेगी।

चंदा _चलो दिखाओ लुल्ली अपनी भौजी को तभी दूध पीने दूगी नही तो छोड़ो मेरे दूदू पीना।

भगत _नही भौजी मुझे अभी और दूदू पीना है, लो देख लो मेरी लुल्ली।

भगत खड़ा होकर अपने पैंट का चेन खींचकर अपना अंडर वियर नीचे खिसका दिया।

भगत के land ko देखकर चंदा की आंखें फटी की फटी रह गई।

चंदा ने देखा भगत का लैंड एक दम तनकर खड़ा हवा में चंदा केसामने ही ठुमक रहा था। उसका land तो चंदन के land se bhi बड़ा था।

जिसे देखते ही चंदा की आंखें फटी की फटी रह गई।

चंदा_देवर जी तुम तो बड़े भोले बनते थे। अपने लुल्ली को कब से फुलाकर रखा है। हाय दईया कितना लम्बा और और मोटा हो गया है तेरा नुनू । मै तो तुम्हे बच्चा ही समझ रहा था। तू तो काफ़ी बड़ा हो गया है रि। कब से खड़ा कर रखा है इसे बता।

भगत _भौजी जब से आपके दूदू देखे है तब से ये ऐसे ही खड़ा हो कर मुझे परेशान करता है। भौजी मेरे लुल्ली को क्या हो हो जाता है।

चंदा _अब तू छोटा बच्चा नहीं रहा और ये अब लुल्ली नही land बन चुका है। ये नल से हैंड पंप बन चुका है।

तू जानना चाहता है कि ये खड़ा क्यू हो जाता है? अरे तुम्हरे हैंड पंप का पानी बाहर निकलना चाहता है।

अपना हैंड पंप का पानी कभी बाहर निकाला है।

भगत _कैसी बाते कर रही हो भाभी मैं तो इससे हमेशा पानी निकलता रहता हू।

चंदा _अरे बुद्धू मै मूतने की बात नहि कर रहा। वह पानी जो इसे हिलाने या कुवा खोदने से निकलता है।

भगत _भौजी तुम किस पानी की बात कर रही हो मुझे कुछ समझ नहि आ रहा।

चंदा _लगता है तुम अभी इसे हिलाना नही सीखे हो। आओ मेरे पास मै दिखाता हूं पुरुष अपना दूसरा पानी कैसे निकलता है।

चंदा भगत के land को अपने हाथो में लेकर सहलाने लगी।

भगत _भौजी ये क्या कर रही हो। मुझे शर्म आ रही है।

चंदा _अरे क्या लड़कियों की तरह शर्मा रहा है।मै तुम्हरा land ka पानी निकालकर रही हू इससे तुम्हे राहत और आनद मिलेगा। तुम्हारा यह land fir लुल्ली बन जायेगा।

भगत _ठीक है भौजी ऐसी बात है तो मुझे जल्दी राहत दिलाओ। कब से ये फूलकर मुझे परेशान कर रहा है।

चंदा अब अपने हाथो की गति बड़ाने लगी अब वहभगत के land पर मूठ मारने लगी और पूछी कैसा लग रहा है देवर जी।

भगत _भौजी बहुत अछा लग रहा है ऐसे ही हिलाते रहो रूको मत।

चंदा भगत के land ko देखकर बहुत अधिक उत्तेजित हो गई। उसके boor का रस झरने की तरह बहने लगी।

चंदा से रहा न गया और वह land हिलाना छोड़कर उसे अपने जीभ से चाटने लगा।

भगत _भौजी ये क्या कर रही हो?

चंदा _अरे देवर जी क्या तुम्हे ये अछा नही लग रहा।

भगत _बहुत अछा लग रहा है भौजी।

चंदा_तो चुप रहकर मजा लो।

चंदा अब land ko मुंह में भरकर चुसने लगी। चंदा की इस हरकत से भगत के मुंह से सिसकारी निकलने लगीं।

आह भौजी बहुँत मजा आ रहा है और चूसो चूसती रहो।

चंदा अब जोर जोर से land ko अपने मुंह में लेकर चूसने लगी।land उसके मुंह मे गपागप अन्दर बाहर होने लगा।

भगत तो जन्नत में पहुंच गया।

उसे अब बर्दास्त ना huwa और वह चंदा के सिर के बाल को पकड़कर लेंड मुंह में पेलने लगा और आह आह करते हुवे चंदा के मुंह में ह झड़ने लगा।

पहली बार वह झड़ने का आनंद लें ने लगा वह इस समय जन्नत में था।
 
चंदा भगत के land के पानी को अपने मुंह में भर रखी थी फिर जब भगत अपने आंखें खोला और चंदा की ओर देखा, चंदा ने land का पानी अपने हाथ अपने हाथ पर उगल कर भगत को दिखाने लगीं।

।चंदा _देखो तुम्हारा land ka पानी।

भगत अपने पानी को अपने उंगली से छूकर देखने लगा और बोला भौजी ये तो काफ़ी चिकना, चिपचिपा और गाड़ा है। इससे अलग ही गंध आ रही है।

चंदा _इसका गंध तो औरतों को मदहोश कर देती है। यही जब औरत के कोख में जाती है तो वह मां बनती है।

भगत _क्या इससे औरते मां बनती हैपर कैसे?।

चंदा _ये land ka पानी कोई साधारण पानी नहीं है। ये पुरुषों का बिज है। इसे वीर्य भी कहते हैं। जब पुरुष अपना बीज औरतों के कोख में छोड़ता है तो औरत पेट से हो जाती है और 9माह बाद बच्चे को जन्म देती है।

भगत _पर, भौजी ये औरतों के कोख में जाता कैसे है? क्या औरते इसको पीते हैं?

चंदा _अरे तू तो पुरा बुद्धू है! क्या तुम किसी कुत्ते को किसी kutiya के उपर चढ़ा huwa नही देखा।

भगत _हा भौजी देखा है। कुत्ता तो अपना नुनु निकालकर kutiya की पिछवाड़े में डालकर खूब धक्का मारता है।

चंदा _अरे बुद्धू कुत्ता धक्के मारकर अपना बीज kutiya के अन्दर छोड़ता है जिससे वह मां बनती है।

भगत _तो क्या? पुरुष भी औरतों के अन्दर उसके पिछवाड़े में धक्का मारकर अपना बीज छोड़ता है।

चंदा _उसके पिछवाड़े में नही उसकेउसके boor में।

तुमने किसी औरत की boor देखी है।

भगत _वही न जिससे औरते पेशाब करती है।

चंदा _हा वही, सही पकड़े।

भगत _नही भौजी अभी तक नहीं देखी। मुझे अपनी boor दिखाओ ना, आखिर मैं भी तो अपना नुनु दिखाया है।

चंदा _अच्छा फिर boor देखकर क्या करेगा?

भगत _उसे देखूंगा कि आखिर ओ दिखता कैसे हैं।

चंदा _लो कर लो अपनी मुराद पूरी। देख लो अपनी भौजी की बुरिया।

चंदा खाट पर लेट गईं और अपनी साड़ी और पेटीकोट उपर उठाकर अपनी कच्छी नीचे सरका दी।

जिससे उसकी chut भगत के सामने आ गया।

चंदा की गोरी गोरी फुली हुई चिकनी chut को देखते ही भगत का land fir से लुल्ली से land ban गया।

भगत नीचे झुककर चंदा की boor को देखने लगा।

भगत _भौजी आपकी boor तो बहुंट सुंदर है।

क्या इसी से पुरुष अपना land का पानी औरत के अन्दर डालता है।

चंदा _हू।

भगत_पर भौजी इससे तो औरते मूतती है न।

चंदा _सिर्फ मूत ती ही नहीं इससे,land ka pani अन्दर जाता है और बच्चा इसी से बाहर आता है।

भौजी क्या मैं इसे छूकर देखू।

चंदा _कर लो अपनी मुराद पूरी।

भगत _चंदा के boor को से छूकर देखने लगा।chut ke उठे भाग को जब भगत अपने उंगली से सहलाया तो चंदा सिसक उठी।

भगत _क्या huwa भौजी काहे सिसक रही हो।

भगत _अभी तुमने जिसे छुआ उसे boor की भग्नाशा कहते हैं जब कोई पुरुष उसको छूता है तो औरत के शरीर में करेंट लगता है। इसका शरीर गरम होने लगता है। जिससे औरत के muh से सिसकारी निकलने लगती है।

भगत _kya मै इसे अच्छे से सहलाऊ ।

चंदा _जैसी तुम्हारी मर्जी।

अब भगत अपने हाथों से चंदा के boor ko अच्छे से सहलाने लगा उसे अपने ऊंगली से कुरेदने लगा जिससे चंदा के मुख से कामुक सीत्कारी निकलने लगी।

भगत समझ गया की ऐसा करने से भौजी को मजा आ रहा है। इधर चंदा बहुन्त गर्म हो गई थी।

वह भगत से बोली सिर्फ सहलाता रहेगा कि कुछ करेगा भी।

भगत_भौजी और क्या करू।

चंदा _अरे वही जो एक मर्द औरत के boor ke साथ करता है।

भगत_बताओ न भौजी और क्या करू?

चंदा _अरे मैने तेरा land चूस कर मज़ा दिया था ना। वैसे ही पुरुष चाहे तो boor चांटकर, उसे चूसकर औरत को मजा दे सकता है।

भगत _भौजी मै भी तुम्हारा boor चांटू ।

चंदा _अगर तुमे अच्छा लगे तो!

भगत अपना मुंह चंदा के chut ke paas ले गया और उसे अपना जिब निकलकर चाटने लगा।

भगत के ऐसी हरकत से चंदा सातवे आसमान में पहुंच गई और जोर जोर से सिसकने लगीं।

भगत समझ गया कि भौजी को बहुत मजा आ रहा है। वह और जोर जोर से boor चाटने लगा। चंदा के boor se pani बहने लगा।

भगत _ये क्या भौजी तुम तो मूतने लगी?

चंदा _अरे ये मूत नही है ये chut रस है जो औरत को मजा आने पर अपने chut se बहाने लगती है। अब बाते कम करो और जोर जोर से चांटो मुझे बहुंत मजा आ रहा है।

भगत जोर जोर से चंदा के chut ko चाटने एवम चूसने लगा। जिससे चंदा बर्दास्त न कर सकी।

वह दोनो हाथों से भगत के सर को पकड़कर दबा दिया ओर जोर जोर से सिसकारी मारते huwe झड़ने लगी।
 
चंदा जब झड़ गई तब वह कुछ समय बाद भगत से बोली भगत अब बस करो मैं झड़ गई।भगत ने chut चांटना बंद कर दिया। और बोला क्या huwa भौजी अब मजा नही आ रहा क्या?चंदा_जैसे तुम्हरा पानी निकलने के बाद तुम सुस्त पड़ गए थे वैसे ही औरतों के झड़ने के बाद वह भी सुस्त पड़ जाती है। औरतों को थोडा आराम देना चाहिए।भगत_भौजी देखो न मेरा नुनु तो फिर फिर से फूलकर खड़ा हो गया है।चंदा अपनी आंखें खोलकर भगत की land की ओर देखा।चंदा _हाय दईया तेरा तो फिर खड़ा हो गया रि।भगत _भौजी इसे चूसकर फिर से इसका पानी निकालो ना। बड़ा मजा आया था।

चंदा _अरे बहुत देर हो गई है कही कोई जग गया तो, मुसीबत हो जायेगी। अब चलो चलते हैं।

भगत _भौजी, इसका पानी पहले निकालो तभी मैं जाऊंगा। भले ही कोई आ जाए।

चंदा _तू बड़ा जिद्दी है, मानेगा नही।

ला इधर चूस दू। और वह खाट से उठकर बैठ गई।

भगत अपना अपना land अपने हाथो से पकड़ कर चंदा के मुंह के सामने ले गया।

चंदा फिर से उसका land मुंह में लेकर चूसने लगी।

तभी भगत का ध्यान चंदा का चूची मसलने का huwa वह चंदा के चूची को पकड़ कर मसलने लगा।

जिससे चंदा फिर गरम हो ने लगी।

भगत चूची मसलकर थोडा झुककर उसे पीने भी लगा जिसका असर चंदा पर ये huwa की वह फिर गर्म हो गई। उसके chut se फिर पानी रिसने लगा।

चंदा ने भगत से कहा तू अभी झड़ा है चुसने से जल्दी झड़ेगा नही एक काम कर तू अपना ये land मेरे boor pe डालकर धक्के मार जिससे तू जल्दी झड़ेगा और वह खाट पे फिर लेट गई और अपने दोनो टांगे चौड़ी कर दी।

भगत _भौजी क्या ऐसा करने से मैं जल्दी झड़ जाऊंगा।

चंदा _हा और एक काम कर अपना पैंट और अंडरवियर दोनो निकाल देताकि तुम्हे डालने में कोई परेशानी न हो।

भगत ने अपना pent और अंडर वियर निकाकर नीचे से नंगा हो गया। और खाट पे चढकर चंदा के फैली हुई टांगो के बिच में जाकर बैठ गया।

चंदा अपने boor ke दोनो फांकों को अपने हाथो से फैलाकर कहा लो अब डाल दो मेरे boor के छेद में। अपना land

भगत चंदा के boor के छेद को देखा और बोला, भौजी तुम्हारा boor का छेद तो छोटा है मेरा लैंड काफ़ी मोटा है अन्दर जायेगा कैसे।

चंदा _ हस्ते हुए बोली,यही तो खासियत है boor की ये दिखने में छेद छोटी पर बडा सा बड़ा land ko निगल जाती है। जब इतना बड़ा बच्चा बाहर आ जाती है तो ।

भगत _हा भौजी मुझे तो यकीन नहीं हो रहा हैं कि इतनी छोटी छेद से बच्चा बाहर कैसे आता होगा।

चंदा _अब ज्यादा बाते न कर जल्दी chut के छेद में land रख के धक्के लगा। फिर देख boor का कमाल।

भगत अब अपने हाथों से land ko पकड़ कर उसका टोपा boor के छेद में रखकर उसे आगे धकेला।land ka दबाव boor पर पड़ते ही टोपा boor के अन्दर चला गया।

चंदा _अब थोडा जोर लगा के धक्का दे।

भगत एक जोर का धक्का boor pe mar land चंदा के boor को चीरता huwa आधा घुस गया।

चंदा के मुंह से चीख निकल गई।

भगत _क्या huwa भौजी दर्द हो रहा है क्या? क्या land बाहर निकाल दू।

चंदा नही रि इसे बाहर न निकालना, इतना मोटा land अंदर जायेगा तो थोडा दर्द तो होगा ही। अब धीरे धीरे अन्दर बाहर कर।

भगत ने अब land ko boor में धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया।

Chut गीला होने के कारण land dhire dhire boor me और अन्दर चला गया और एक समय ऐसा आया ki भगत ने देखा पुरा land chut ke अंदर समा गया है।

भगत _भौजी ये तो कमाल हो गया तुम्हारा boor to मेरा पुरा land ही निगल गई।

चंदा _मैना कहा था न ये बड़ी कमाल की चीज है।

भगत _भौजी chut के अन्दर तो काफ़ी गर्मी महसूस हो रही है।

चंदा _हा re , अब इस boor में लगी आग को अपने hand पंप के पानी से बुझा दे। अब जल्दी जल्दी hand पंप को चला जिससे तुम्हारा hand pump का पानी बाहर निकल कर मेरी boor की गर्मी और प्यास दोनो शांत हो सके।

भगत अब अपना land को आगे पीछे करते हुए उसे boor के अन्दर बाहर करने लगा जिससे भगत को एक नया मजा आने लगा।

चंदा ने भगत के हाथ को अपने चूची पर रख दिया।

भगत अब चंदा के चूची को मसलते हुवे land ko boor me अंदर बाहर करने लगा।

जिससे चंदा को बहुत मजा आने से अपने मुंह से सिसकारी निकालने लगी।

भगत _कैसा लग रहा है भौजी, मजा आ रहा है न।

चंदा_हा re ऐसा ही पेलता रह।

भगत _भौजी, मुझे भी बहुत मजा आ रहा है land ko तुम्हारे boor में डालने में।

धीरे धीरे भगत अपने गति बड़ाने लगा।l आनंद के मारे चंदा अपने आंखें बन्द कर ली उसके chut se लगातार रस बहने लगा जिससे land काफी गीला हो गया और land अंदर डालने पर fuch fuch की आवाज़ आने लगा,land बिना किसी रुकावट के chut me अंदर बाहर होने लगा।

भगत को ऐसा सुख पहली बार मिल रहा था वह पूरे जोश में आकर चंदा को जोर जोर से पेलने लगा। कमरे में कई प्रकार की कामुक आवाजे गूंजने लगी।

चंदा की सिसकने की आवाज़। खाट की चर चर बजने की आवाज़। चंदा की चूड़ियों कि खन खन खन खन खनकने की आवाजे। और land का boor में अंदर बाहर हो ने से fuch fuch guch guch की आवाज़ कमरे मे एक साथ गूंजने से कमरे का माहौल अत्यंत कामुक हो गया।

चंदा तो अपना सुध बुध खो बैठी chudai ka ऐसा मजा तो उसे चन्दन से आज तक नही मिला था। जो उसे अभी मिल रहा था वह भगत से चीखते हुवे बोली, भगत और जोर जोर से चोदो मुझे मेरा आने वाला है।

भगत भी जन्नत में पहुंच गाया था, वह भी स्खलन के काफ़ी करीब था। वह चंदा को और जोर जोर से चोदने लगा, पर अब वह बर्दास्त न कर सका और चंदा के कमर को पकड़ कर अपने land se सटा कर लंबी लम्बी पिचकारी मारते हुवे झड़ने लगा।

वीर्य के गर्भसाय में जाते ही उसके गर्म एहसास पाकर चंदा भी अपने को न रोक सकी और वो भी भगत को जोर से जकड़कर झड़ने लगी।
 
दमदार chudai के बाद दोनो कुछ देर खाट पर ऐसे लेटे रहे, फिर चंदा ने भगत से पूछा _कैसा लगा देवर जी तुम्हरा तो ये पहली बार था।आया boor चोदने मे मजा।भगत _भौजी क्या इसी को chudai कहते है।चंदा _और नही तो क्या?भगत _सच भौजी chudai में जो मजा आता है ऐसा मजा किसी और में नही।

चंदा _चलो देवर जी काफ़ी देर हो गई है नही तो ये मजा सजा में बदल जाहि।

भगत अपना कपड़ा पहनकर चंदा को एक बार बाहों मे भरकर मजा देने एवमunki इच्छा पूरी करने के लिए धन्यवाद देते हुवे वहा से रात के अंधेरे में छुपते छुपाते अपना घर आ गया।

एक बार chudai ka खेल सुरू होने के बाद चंदा और भगत को chudai ka Aisa चस्का लगा कि वे अक्सर रात में चंदा के बाड़ी के कमरे में यह खेल खेलने लगे।

चंदा ने भगत को chudai ka har पाठ सिखाया। अब भगत एक एसा मर्द बन गया था कि अच्छी खेली खाई औरतों को अपना गुलाम बना ले।

एक दिन चंदा रात के अंधेरे में अपने कमरे से निकलकर बाड़ी की ओर जा रही थी, तभी उसकी सास कमला,जो मूतने के लिए उठी थीं,की नज़र उस पर पड़ गई।

कमला _बहु इतनी रात को बाड़ी की ओर क्यू जा रही। उसे लगा की शायद कोई काम हों

कमला बाथरूम में जाकर मूतने लगी। मूत लेने के बाद वह अपने कमरे की ओर सोने के लिए जाने लगी तब उसने सोचा, बहु अभी तक आई नही आखिर बाड़ी में करने क्या गई होगी,।

कुछ देर इंतजार करने के बाद उससे रहा न गया और यह पता करने की बहू आखिर बाड़ी में अब तक क्या कर रही है, वह बाड़ी की ओर जाने लगीं।

बाड़ी का दरवाजा पर बाहर से कुड़ी नही लगा था वह उसे धकेल कर बाड़ी में चली गई।

और बहू को बाड़ी में ढूंढने लगी।

जब बाड़ी में बने उस कमरे की ओर गई तो उसे किसी की सिसकने और चर चर चर खाट की बजने की आवाज़ सुनाई दी जिसे सुनकर कमला की कान खड़ी हो गई उसकी दिल की धड़कन बड़ गई उसे लगा की कमरे मे कुछ चल रहा है।

कमरे का दरवाजा पुराना वा टूटा फूटा था उसमे कई छेद थे। कमला अपनी तेज चलती सांसों को काबू में करते हुवे अंदर झांकने लगी।

अंदर का नजारा देख कर दंग रह गई।

इस समय चंदा पीठ के बल खाट पर लेटी थी। और भगत उसके टांगो को अपने कंधे रखकर उसके उपर झुका हु़वा था और दनादन अपने land चंदा के chut pe डालकर चोदे जा रहा था।

चंदा के मुंह से कामुक सिसकारी निकल रही थी।

यह नजारा देखकर चंदा के उपर कमला को अत्यंत क्रोध आया वह दरवाजे को जोर का धक्का मारा, दरवाजा खुल गया।

भगत chudai बंद कर दिया, चंदा और भगत दोनो दरवाजे की ओर देखने लगे। और कमला को देखकर चौंक गए।

कमला_ कलमुही तुम्हे शर्म नही आती पराया मर्द के साथ आधी रात को रंगरेलिया मना रही है। क्या इसी दिन के लिए तुझे यहां बीहा कर लाए थे, की तू हमारे खानदान की इज्जत मिट्टी में मिला दे।

भगत _खाट से उठने लगा की चंदा ने उसे रोक दिया। भगत को आश्चर्य huwa

चंदा _माजी आपको यहां नहि आना चाहिए था आप यहां से चली जाइए। इसी में आपकी भलाई है।

कमला _कलमुही इतना सब कुछ होने के बाद तुम्हे शर्म नहि आ रही है कैसे टांगे उठाकर अभी भी लेटी हैं। बदचलन कही की।

चंदा _मां जी मेरे सब्र का इंतिहान मत लीजिए मैं कह रही हूं। मेरे जो जी में आए मै वो करूंगी। जो करना है karlo

कमला _कैसे इतना होने के बाद भी मुझसे जुबान लड़ाती है kutiya रण्डी कही की। अभी मैं तुम्हरे पति को बुलाकर लाती हूं।

चंदा _जा जा बता दें अपने बेटे को वो जानता है की मैं यहां हूं।

कमला _भोसडी कही की ये क्या बोल रही है मेरे बेटे को पता है की तू यहां गैर मर्द से chuda Rahi है।

कमला को अपने कानो पर यकीन नहीं हो रहा था।

चंदा _हा उसे पता है मैं भगत से चुदाती हू क्यू की तुम्हारा बेटा मेरी chut की प्यास बुझा नही पाता। क्यू की वह भोसड़े की प्यास बुझा कर थक जाता है।

जिसके कारण मेरे chut प्यासी रह जाती है। और मुझे भगत का सहारा लेना पड़ा।

कमला _ये मेरे और मेरे बेटे के बारे में क्या बोले जा रही। तुम्हे शर्म नही आती मां बेटे के रिश्ते को बदनाम करते हुवे।

चंदा _शर्म तो तुम्हे नही आती जो अपने ही बेटे से chudwati हो। मैने कई बार अपने आंखो से देखा है। अगर और ज्यादा देर यहां रुकी तो सबको बता दूंगी की तुम अपने बेटे से चुदाती हो।

भगत चंदा की बातो को सुनकर, हैरान था।

कमला अब कुछ कहने की स्तिथि में नही थी, वह रोते हुवे वहा से जाने में ही अपना भलाई समझा उसे पता नही था की चंदा को मां बेटे के बीच का यह राज पता चल गया है।

कमला के चले जाने के बाद भगत चंदा से बोला, भौजी क्या ये सच है जो अभी तुम बोली हो।

चंदा _भगत हा ये सच है, मै तुम्हे नही बताना चाहती थी इसके बारे में पर आज जो परिस्थिति बनी मुझे कहना पड़ा।

भगत मुझसे वादा करो कि यह बात तुम किसी और को नहीं बताओगे। इसमें हमारे घर की बदनामी होगी। आखिर मुझे तो इसी घर में रहना है।

भगत _भौजी, तुम बेफिक्र रहो मैं यह बात किसी को नहीं बताऊंगा।

चंदा _मुझे तुमसे यही उम्मीद है।

कुछ देर बाद फिर दोनो गर्म हो गए और दोनो chudai करने लगे।

उधर कमला अपने कमरे मे जाकर बेड पर लेट गईं और आंसू बहा रही थीं। उसे चिंता सताने लगी की मेरे और मेरे बेटे के बारे में भगत को भी बहू और भगत को भी पता चल गया है अब क्या होगा अब तो पुरे गांव में हमारी बदनामी होगी।

Badi muskil से रात कटा।

सुबह उठते ही वह अपने बहु के कमरे मे गई और आवाज़ लगाई।

अपनी सास की आवाज़ सुनकर चंदा बाहर आई।

कमला _बहु मुझे तुमसे कुछ बाते करनी है।

चांद _क्या बात करनी है मां जी।

बहु मुझे माफ कर दो बेटी हमसे बहुंत बड़ी भूल हीहो गई है अब ऐसा गलती नही होगी। पर यह बात गांव वालो को पता चला तो हम गांव में किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेंगे।

चांद _तुम बेफिक्र रहो मां जी भगत किसी को कुछ नहीं बताएगा।

फिर भी मुझे डर है कही और को यह बात न बतादे तुम एक काम करना आज भगत को घर बुला, मै उससे हांथ जोड़कर निवेदन करूंगी की वह ये बात किसी को न कहे।

चंदा _ठिक है मां जी मैं भगत को हमारे घर आने के लिए कह दूंगी।

दोस्तो इसके बाद हम देखेंगे की आखिर चन्दन और कमला के बीच शारारिक संबंध कैसे बना जो खुद कमला भगत को बताएगी।

तो पढ़ते रहिए

यह क्या huwa?😃
 
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