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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - ३७
इधर देवायत मंजु चंदा पुनम लखन सब चाइ नास्ता कर रहेथे तभी भानुका फोन आगया तो सब गोरसे सुन रहेथे सबको इतना तो पता चल ही गयाकी भावनाको डीलीवरीके लीये होस्पीटल लेके गये हे.. तब लखनके मनमे लडु फुटने लगे क्युकी इस वक्त लता घरपे अकेली होगी.. ओर इनसे अच्छा मौका दोनोको कहा मीलने वाला था.. तब लखनभी जल्दी जल्दी चाइ नास्ता करने लगा....अब आगे
मंजुला : देवु क्या भावुको होसपीटल ले गये..?
देवायत : हां.. भानुकाही फोन था वो तीनो पहोंच गये हे..
मंजुला : देवु मुजेभी आज कुछ ठीक नही लग रहा.. हमेभी कीभी भी जाना पडे..
चंदा : अरे.. तो डीलेवरी पेलनका वेइट क्यु करे मे अभी सब तैयारीया करती हु.. हम चले जाते हे..
देवायत : हां मंजु मौसी ठीक केह रही हे हम आरामसे कार चलाते चले जायेगे.. वरना अेन्ड वक्तपे भागना पडेगा ओर इस हालतमे कार तेज चलानाभी मुस्कील हो सकता हे.. क्या कहेती हो..?
मंजुला : (गभराते) ना बाबा ना मे तेज कार बरदास्त नही करपाउगी चलो चलो.. अभी नीकल जातेहे मे सृतीको फोन कर देती हु..
पुनम : (मंजुको) भाभी मेभी चलती हु.. मुजे भी आना हे..
चंदा : बेटा तुम वहा क्या करोगी मेतो हु ही.. बस डीलेवरी होजाये फीर वहा कीसीका काम नही.. देवुकोभी हम वापस भेज देगे वहा नाइटमे इनको रुकनेकी जरुरत नही..
पुनम : मम्मी आने दोना.. फीर मे भाइके साथही चली आउगी.. म..म्मी.. प्लीज.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) ठीक हे चल.. मौसी ये मानने वाली नही हे.. अब आपकोभी इसे अेसेही जेलना पडेगा..हें..हें..हें..
पुनम : (मंजुको कंधेपे मुका मारते) भाभी.., सीर्फ साथ चलनेतो केह रही हु.. हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) चल ठीक हे आजा.. चल पहेले कुछ कपडे बपडे ले लेते हे मंजु तेरा गाउन बाउन सब कहा हे..
पुनम : (हाथ पकडते लेजाते) मम्मी चलो मे दीखाती हु.. भाभी भलेही इधर बैठी.. मुजे सब मालुम हे..
कहेते पुनम चंदाका हाथ पकडते लगभग घसीटके मंजुके रुममे लेगइ ओर वहा मंजुके सब कपडे ओर कुछ फालतुके कपडेभी साथ मे लेलीये ओर अेक थेलेमे सब पेकींग करने लगे.. तभी पुनमने कहा..
पुनम : मम्मीजी अेक दो जोडी आपकेभी कपडे लेलो.. वहा रुकना हेनां..
चंदा : (हसते) हां अभी लेलुगी.. तुजे इन सब जीचे बहुत याद रहेती हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते) तो फीर.. आपभीतो रुकने वाली हो.. कपडे चेन्ज नही करोगी..?
पुनम : (बहारकी ओर अपने रुममे जाते) चल ठीक हे मे मेरे कपडे लेके आइ तबतक तुजे कुछ याद आता हे तो रखदे.. अभी आइ..
कहेते चंदा अपने रुममे चली गइ ओर अपना गाउन ओर दो जोडी कपडे लेलीया तबतक पुनमभी अपने रुममे दोडके चली गइ ओर कुछ कपडे उसने अेक अलग केरी बेगमे रखा.. ओर कुछ सामान ओरभी बेगमे डाल दीया ओर बेग लेके सीधीही बहार चली गइ ओर कारमे बेग जुपाके आगइ.. तब चंदाभी बेग लेके मंजुके रुमसे बहार आ रहीथी तब मंजु लखन ओर देवायत होलमे बेठे थे..
चंदा : (बहार आते) अरे पुनम कहा चली गइ थी चल ये बेग रखदे कारमे.. फीर हम चलते हे..
कहातो पुनम ट्रोली बेग लेके वापस कारमे रखके आइ ओर होलमे सबके साथ बैठ गइ.. तब देवायत लखनको कुछ सुचना दे रहाथा लेकीन लखनतो कुछ ओरही प्लान करके बैठा था.. तो दुसरी ओर पुनमभी कुछ चान्स मीलेतो उनकी तैयारीया करके बैठी थी.. फीर सब खडे होगये ओर कारकी ओर जाने लगे तब मंजु दया ओर रजीयाको घरका ध्यान रखने ओर कुछ कामकी हीदायत देती रही..
पुनमने आगेकी सीट थोडी लंबी करदी ताकी मंजुला आरामसे बैठ सके तो सब देखके मंजु ओर चंदा हसने लगी.. देवायत बैठ गया तो मंजु आरामसे उनकी बगलमे बेठ गइ ओर चंदा पुनम पीछेकी सीटमे बेठ गये तब देवायतने कार सहेरकी ओर धीरे धीरे चलाते जाने दी.. सब आरामसे जा रहेथे.. जेसेही देवायत कार लेके नीकल गया तब वहीसे लखनने लताको फोन लगा दीया.. तब लताने फोन उठालीया..
लखन : (धीरेसे) लता.. कहा हो..? क्या सब चले गये..?
लता : (सरमाते हसते) हां.. सब सुबहही नीकल गये.. मे ओर भावेस अकेले हे.. क्या आप आ रहे हो..?
लखन : हां.. अभी अभी यहाभी सब होस्पीटल नीकल गये हे.. मे आ रहा हु.. भावेस सो गया..?
लता : (सरमाते) नही.. अभी सुला दुगी.. लखन.. कुछ होगा तो नही..?
लखन : अरे नही कुछ नही होगा.. क्या तेरा मन नही हे..? तो फीर रहेने दे..
लता : अरे नही नही.. मेने अेसातो नही बोला.. आजाओ.. ओर सुनो.. मोटरसाइकील अंदरही लेलेना..
लखन : (थोडा डरते) सुनो.. वो आजु बाजु कोइ देखेगा तो नही..?
लता : अरे नही.. आप मोटरसाइकील सीधे अंदरही लेना.. मे दरवाजा खुला रखती हुं..
लखन : ठीक हे मे गांवके बहारसेही फोन करता हु तब दरवाजा खोल देनां.. चल अभी नीकलता हु..
कहेते लखन अपना स्कुटर लेके नीकल जाता हे वो आज सुबहसेही अच्छेसे तैयार हुआथा.. लखन ओर लताने मीलके कइ दीनोसे मीलनेकी योजना बनालीथी वो इसी दीनका वेइट कर रहे थे ओर उन दोनोने सोचाथा वैसाही हुआ.. भावनाके साथ उनकी मां सरलाभी चली गइ तब लता बहुतही खुस हो रहीथी.. जेसेही सुनाकी लखन आ रहा हे तबसे लताके दीलकी धडकन बढ गइथी उनकी सांस तेज चलने लगीथी वो रोमांचीत होते अपने रुममे चली गइ..
वहा जाके वो भावेशको सुलानेकी कोसीस करने लगी.. उसे जुलेमे डालके जोरोसे जुला हीलाने लगी ओर सोचमे डुब गइकी जो वो चाहती थी वो सब आज होने वाला हे.. अेकतो वो खुले विचारोकी थी उपरसे जबसे जवानीकी देहलीजपे कदम रखा तबसे ही लता कइ बार अपने भाइ भाभी ओर अपनी मांइके साथ देवायतकी चुदाइ देख चुकी थी तबसे ही उनकी जवानी उफानमे हिलोरे लेते मचल रहीथी..
वो पीछले कइ दीनोसे अपने भाइ भाभीकी चुदाइ देखनेकी आदी हो चुकीथी ओर हर दीन चुतमे उंगली डालके अपने आपको सांत करती थी यहा तक की वो अपने भाइके लंडको लेनेकोभी तैयार होगइ थी.. तभीतो आये दीन वो खुलके अपने अंगोका प्रदर्शन भानुके सामने करती थी ताकी भानुको अपनी ओर आकर्सीत कर सके ओर अपने रुमका दरवाजा हमेसा खुला रखती ताकी भानु कभीभी अंदर आके आगे बढ सके ओर उनका नतीजा यही हुआकी अेक बार भानुने रुममे आके जबरदस्तीसे उनके मुहको चोद भी लीया..
लेकीन तबतक उनके रीस्तेकी बात लखनसे हो चुकी थी वरना उसी दीन वो पका भानुसे चुद जाती.. तब सगाइसे पहेलेही वो लखनके साथ हर रात फोन सेक्स कर रही थी.. वो गांवमे रहेते हुअेभी इतनी फोरवर्ड हो चुकीथी की सगाइसे पहेलेही भानुको छोडके लखनके साथ सब कुछ करना चाहती थी ओर आज उसे लखनके साथ पहेलीबार अकेलेमे मीलनका मौका मील गया..जीसके लीये पुरी तैयारीया करके बैठीथी..
दुसरी ओर देवायत मंजुको लेके नीकल गया तब सहेरमे डो.सृतीकी होसपीटलमे सरला ओर भानु ओटी के बहार बेठे थे जहा अंदर भावनाकी डीलेवरी हो रहीथी.. डो.सृती मंजुकी वजहसे भावनाकोभी पहेचानती थी तो वो खुद ही डीलेवरी कर रहीथी.. तभी थोडीही देरमे सृती अेक बच्चीको गोदमे लेके बहार आगइ ओर सरला भानुको हसते हुअे दीखाने लगी.. तब सरला ओर भानु खुस होते बच्चीको देखने लगे..
डो.सृती : कोन्ग्रेच्युलेशा भानुजी लडकी आगइ.. देखो.. उनकी मां की तराह ही गोरी हे.. हें..हें..हें..
तब भानुने ओर सरलाने उसे छु के प्यार दीया फीर सृती बच्चीको लेके वापस अंदर चली गइ, थोडी देरके बाद अेक नर्स बच्चीको लेके अेक रुममे आगइ तो पीछे सरला ओर भानुभी आगये ओर नर्सने बच्चीको वही बेडपे सुला दीया तो भानु उसे देखके बहार चला गया ओर देवायतको फोन करने लगा तब ओटीमे अंदर डो.सृती भावनाकी चुतको टांके लगा रहीथी तब अंदर कोइ नहीथा तो सृतीने अपना काम करते भावनासे बाते करते पुछ ही लीया..
डो.सृती : (हसते) भावना.. कीतने साल हुअे सादीको तीन सालनां..? मे आइथी तुम्हारी सादीमे.. क्या आप दोनो ज्यादा मीलते नहीहो.. क्या..?
भावना : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) नही.. क्यु..? कुछ हुआ हे क्या..?
डो.सृती : (हसते) अरे नही नही.. बस मे देख रहीहु तुम्हारी ये अभीभी बहुत छोटी कीसी कुआरी लडकीकी तराह हे.. इसीलीये.. हें..हें..हें..
भावना : (सरमाते हसते) जी..वो..वो.. उनका छोटा हे.. ओर हम बहुत कम मीलते हे.. इसीलीये..
डो.सृती : ये सादी मंजुने करवाइ हेनां.. मेने सुनाथा तुम कीसीसे प्यार करतीथी.. तो फीर इनसे सादी क्यु करली..? अपने प्यारमे कुछ प्रोबलेम आइथी क्या..?
भावना : नही सृती.. मे प्यारतो करतीथी लेकीन मेरे दीलकी बात उन तक नही पहोचा पाइ.. ओर उनकी सादी होगइ.. तो इनसे सादी करनी पडी.., आपकीभी हुइ थीनां..?
डो.सृती : हां लेकीन मेनेही मेरे पतीको छोड दीया.. सायद वो पुरुषमे नही था.. हमारी सेक्स लाइफ अच्छी नही थी.. तो छोड दीया.. अब नही करनी सादी..हें..हें..हें..
भावना : सृती वो जीजु ओर मंजु आगये क्या..? सायद आतेही होगे..
डो.सृती : (हसते) आजायेगे.. मंजुका फोन आयाथा.. दोनो साथमे ही हुइ थीनां..?
भावना : (सरमाते धीरेसे) सृती.. वो टाका अच्छेसे लेना.. ये अैसीही कसी हुइ रखनी हे..
डो.सृती : (हसते) दो बच्चे होगये.. ओरभी करने हे क्या..? अबतो तुम्हारे नसीबमे वोही पेनीस हे.. तो क्या फर्क पडता हे.. वेसेभी अच्छेसे करदीया हे तुजे कोइ प्रोबलेम नही होगी..हें..हें..हें..
फीर सृतीने भावनाकोभी अपने रुममे सीफ्ट कर दीया ओर उनको अेक बार अच्छेसे चेक करके अपने पेसन्ट देखने चली गइ इधर भानु बहार आके देवायतको फोनपे लडकी होनेकी बात करता हे तब देवायतभी भानुको २० मीनीटमे होस्पीटल आनेकी बात करता हे.. फीर फोन कट करते भानु अंदर चला गया तबतक भावना अपने बेडपे आ चुकीथी.. भानु अंदर आगया ओर भावनाकी ओर देखा तो भावनाने अपना मुह दुसरी ओर करलीया जेसे वो देवायतका मुह दीखना नही चाहती.. तब भानु थोडा चीड गया ओर बहार चला गया..
भानु आके बहार बेठ गया तब थोडीही देरमे देवायकी कार आके रुकी तो इनमे सब बहार नीकल गये.. तो मंजु चंदा ओर पुनमभी धीरे धीरे चलके आ रहेथे ओर आतेही तीनो लेडी सीधी अंदर भावनाके पास चली गइ तब पुनम चंदा मंजु सब बच्चीको देखके प्यार करने लगे ओर उधर देवायत भानुके पास रुक गया..
देवायत : हां भानु सब अच्छेसे होगया..? कोइ परेसानी तो नही हुइ..?
भानु : (खराब मुडसे) नही यार.. कुछ नही.. सब अच्छेसे होगया..
देवायत : क्यु.. क्या हुआ..? ये चहेरेपे बाराह क्यु बजे हे कुछ हुआ क्या..?
भानु : क्या यार.. वो भावुको पता नही क्या होगया हे.. पीछले कुछ दीनोसे मुजसे बात करना बंध करदीया हे.. अबतो सामने देखनाभी बंध करदीया पता नही उनको मुजसे क्या प्रोबलेम हे..
देवायत : (हसते) अच्छा.. तो मीया बीवी वाला जगडा..हें..हें..हें.. ठीक हे इनको इतना सीरीयस मत ले.. लेडीसका अैसाही होताहे तीन दीन नही बोलेगी ओर चोथे दीन सब भुल जाती हे.. तु टन्शन मत ले मे मेरी सालीसे बात करुगा..
भानु : हां यार बात कर लेना वो तेरी ही सुनती हे..
देवायत : वो सब छोड ये बता दोनोकी तबीयत कैसी हे..?
भानु : अच्छी हे यार.. चल तुही जाके देखले.. मे यही हु फीर इधर आजा कुछ चाइ बाइ पीने जाना हे..
देवायत : (अंदर जाते) तु बैठ अभी आया वो सृतीको भी मीलना हे.. मीलके आता हु..
कहेते देवायत पहेले भावनाके रुममे चला गया तो भावना देवायतको देखतेही खुस होगइ ओर उनके चहेरेपे लाली छागइ वो सरमाते देवायतकी ओर हसने लगी.. तो सरलाभी देवायतको देखके सरमाने लगी ओर चोर नजरसे उसे देखती रही.. तब देवायतने उनको पुछा..
देवायत : भावु.. कैसीहे तुम दोनोकी तबीयत..?
भावना : (धीरेसे सरमाते) ठीक हे.. अच्छी हे..? केसेहो जीजु.. अबतो आतेही नही.. हमे भुल गये क्या..?
देवायत : (हसते) नही बस कुछ काममे फस गयाथा अब आता रहुगा..
सरला : बेटा पहेलेतो बहुत आताथा अबतो हम समधी होगये हे तो आजाया करो.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) माजी अबतो मे इसे खीचके लाउगी.. देखना हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) हां लेजाना.. पहेले जो कामके लीये आयेहे वोतो करलो.. वो सृतीको नही दीखाना..?
देवायत : हां जाही रहे हे चल मंजु..
तब देवायत ओर मंजु हसते हुअे सृतीकी ओफीसके पास चले जाते हे ओर वहा रीसेपनीस्टपे नाम लीखवा देते हे तब वो लडकी चीठी लेके अंदर चली गइ ओर बहार आके तुरंत देवायत ओर मंजुको अंदर भेजदीया तब सृती खडी होके मंजुके गले लग गइ ओर दोनो सामने बेठ गये.. तब देवायतने कहा..
देवायत : सृतीजी.. येतो बडी नाइन्साफी हे दोस्तकोतो गले लया लीया ओर हमे कुछ नही..? हें..हें..हें..
डो.सृती : (सरमाते हसते) ओह.. सोरी सोरी.. कोइ बात नही मेरे बदले आपको मंजु गले लगा लेगी.. हें..हें..हें.. कहो.. आगये..? आजकी डेट थीनां..? कुछ पेइन बेचेनी हो रहा हे..?
मंजुला : अरे सृती पुछोही मत दो दीनसे कही चेइनही नही हे अभी अभी हल्का दर्द हो रहा हे..
डो.सृती : (हसते) चल आजा अंदर चेक करते हे.. ओर जी..जु.. आप इधरही बैठीये.. हें..हें..हें..
कहेते सृती ओर मंजु दोनोही हसते अंदर चली गइ तब सृती मंजुको सब चेक करने लगी.. मंजुका बीपी पल्स सब चेक करलीया ओर दोनोही बहार आगये तब सृतीने कहा..
डो.सृती : मंजु अच्छा हुआ तु आगइ कुछ प्रोबलेमतो नही लेकीन टाइम होगया हे.. मे तुजे अभी अेक गोली देती हु अगर लेबर पेइन बढजाये तो कहेना.. तेरी डीलीवरी कर देगे.. तु वही भावुके पास बेड हे चली जा..
तब देवायत ओर मंजु दोनोही खडे होगये तो सृती देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करती रही.. ओर दोनो भावुके पासके बेडपे आगये.. तब अेक नर्स पानी ओर अेक गोली लेके आइ ओर मंजुको खीलादी तब देवायत बहार भानुके पास चला गया ओर दोनो बहारही होटेलथी वहा चाइ पीने चले गये.. ओर बाते करने लगे....
कन्टीन्यु
अध्याय - ३७
इधर देवायत मंजु चंदा पुनम लखन सब चाइ नास्ता कर रहेथे तभी भानुका फोन आगया तो सब गोरसे सुन रहेथे सबको इतना तो पता चल ही गयाकी भावनाको डीलीवरीके लीये होस्पीटल लेके गये हे.. तब लखनके मनमे लडु फुटने लगे क्युकी इस वक्त लता घरपे अकेली होगी.. ओर इनसे अच्छा मौका दोनोको कहा मीलने वाला था.. तब लखनभी जल्दी जल्दी चाइ नास्ता करने लगा....अब आगे
मंजुला : देवु क्या भावुको होसपीटल ले गये..?
देवायत : हां.. भानुकाही फोन था वो तीनो पहोंच गये हे..
मंजुला : देवु मुजेभी आज कुछ ठीक नही लग रहा.. हमेभी कीभी भी जाना पडे..
चंदा : अरे.. तो डीलेवरी पेलनका वेइट क्यु करे मे अभी सब तैयारीया करती हु.. हम चले जाते हे..
देवायत : हां मंजु मौसी ठीक केह रही हे हम आरामसे कार चलाते चले जायेगे.. वरना अेन्ड वक्तपे भागना पडेगा ओर इस हालतमे कार तेज चलानाभी मुस्कील हो सकता हे.. क्या कहेती हो..?
मंजुला : (गभराते) ना बाबा ना मे तेज कार बरदास्त नही करपाउगी चलो चलो.. अभी नीकल जातेहे मे सृतीको फोन कर देती हु..
पुनम : (मंजुको) भाभी मेभी चलती हु.. मुजे भी आना हे..
चंदा : बेटा तुम वहा क्या करोगी मेतो हु ही.. बस डीलेवरी होजाये फीर वहा कीसीका काम नही.. देवुकोभी हम वापस भेज देगे वहा नाइटमे इनको रुकनेकी जरुरत नही..
पुनम : मम्मी आने दोना.. फीर मे भाइके साथही चली आउगी.. म..म्मी.. प्लीज.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) ठीक हे चल.. मौसी ये मानने वाली नही हे.. अब आपकोभी इसे अेसेही जेलना पडेगा..हें..हें..हें..
पुनम : (मंजुको कंधेपे मुका मारते) भाभी.., सीर्फ साथ चलनेतो केह रही हु.. हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) चल ठीक हे आजा.. चल पहेले कुछ कपडे बपडे ले लेते हे मंजु तेरा गाउन बाउन सब कहा हे..
पुनम : (हाथ पकडते लेजाते) मम्मी चलो मे दीखाती हु.. भाभी भलेही इधर बैठी.. मुजे सब मालुम हे..
कहेते पुनम चंदाका हाथ पकडते लगभग घसीटके मंजुके रुममे लेगइ ओर वहा मंजुके सब कपडे ओर कुछ फालतुके कपडेभी साथ मे लेलीये ओर अेक थेलेमे सब पेकींग करने लगे.. तभी पुनमने कहा..
पुनम : मम्मीजी अेक दो जोडी आपकेभी कपडे लेलो.. वहा रुकना हेनां..
चंदा : (हसते) हां अभी लेलुगी.. तुजे इन सब जीचे बहुत याद रहेती हे.. हें..हें..हें..
पुनम : (सरमाते हसते) तो फीर.. आपभीतो रुकने वाली हो.. कपडे चेन्ज नही करोगी..?
पुनम : (बहारकी ओर अपने रुममे जाते) चल ठीक हे मे मेरे कपडे लेके आइ तबतक तुजे कुछ याद आता हे तो रखदे.. अभी आइ..
कहेते चंदा अपने रुममे चली गइ ओर अपना गाउन ओर दो जोडी कपडे लेलीया तबतक पुनमभी अपने रुममे दोडके चली गइ ओर कुछ कपडे उसने अेक अलग केरी बेगमे रखा.. ओर कुछ सामान ओरभी बेगमे डाल दीया ओर बेग लेके सीधीही बहार चली गइ ओर कारमे बेग जुपाके आगइ.. तब चंदाभी बेग लेके मंजुके रुमसे बहार आ रहीथी तब मंजु लखन ओर देवायत होलमे बेठे थे..
चंदा : (बहार आते) अरे पुनम कहा चली गइ थी चल ये बेग रखदे कारमे.. फीर हम चलते हे..
कहातो पुनम ट्रोली बेग लेके वापस कारमे रखके आइ ओर होलमे सबके साथ बैठ गइ.. तब देवायत लखनको कुछ सुचना दे रहाथा लेकीन लखनतो कुछ ओरही प्लान करके बैठा था.. तो दुसरी ओर पुनमभी कुछ चान्स मीलेतो उनकी तैयारीया करके बैठी थी.. फीर सब खडे होगये ओर कारकी ओर जाने लगे तब मंजु दया ओर रजीयाको घरका ध्यान रखने ओर कुछ कामकी हीदायत देती रही..
पुनमने आगेकी सीट थोडी लंबी करदी ताकी मंजुला आरामसे बैठ सके तो सब देखके मंजु ओर चंदा हसने लगी.. देवायत बैठ गया तो मंजु आरामसे उनकी बगलमे बेठ गइ ओर चंदा पुनम पीछेकी सीटमे बेठ गये तब देवायतने कार सहेरकी ओर धीरे धीरे चलाते जाने दी.. सब आरामसे जा रहेथे.. जेसेही देवायत कार लेके नीकल गया तब वहीसे लखनने लताको फोन लगा दीया.. तब लताने फोन उठालीया..
लखन : (धीरेसे) लता.. कहा हो..? क्या सब चले गये..?
लता : (सरमाते हसते) हां.. सब सुबहही नीकल गये.. मे ओर भावेस अकेले हे.. क्या आप आ रहे हो..?
लखन : हां.. अभी अभी यहाभी सब होस्पीटल नीकल गये हे.. मे आ रहा हु.. भावेस सो गया..?
लता : (सरमाते) नही.. अभी सुला दुगी.. लखन.. कुछ होगा तो नही..?
लखन : अरे नही कुछ नही होगा.. क्या तेरा मन नही हे..? तो फीर रहेने दे..
लता : अरे नही नही.. मेने अेसातो नही बोला.. आजाओ.. ओर सुनो.. मोटरसाइकील अंदरही लेलेना..
लखन : (थोडा डरते) सुनो.. वो आजु बाजु कोइ देखेगा तो नही..?
लता : अरे नही.. आप मोटरसाइकील सीधे अंदरही लेना.. मे दरवाजा खुला रखती हुं..
लखन : ठीक हे मे गांवके बहारसेही फोन करता हु तब दरवाजा खोल देनां.. चल अभी नीकलता हु..
कहेते लखन अपना स्कुटर लेके नीकल जाता हे वो आज सुबहसेही अच्छेसे तैयार हुआथा.. लखन ओर लताने मीलके कइ दीनोसे मीलनेकी योजना बनालीथी वो इसी दीनका वेइट कर रहे थे ओर उन दोनोने सोचाथा वैसाही हुआ.. भावनाके साथ उनकी मां सरलाभी चली गइ तब लता बहुतही खुस हो रहीथी.. जेसेही सुनाकी लखन आ रहा हे तबसे लताके दीलकी धडकन बढ गइथी उनकी सांस तेज चलने लगीथी वो रोमांचीत होते अपने रुममे चली गइ..
वहा जाके वो भावेशको सुलानेकी कोसीस करने लगी.. उसे जुलेमे डालके जोरोसे जुला हीलाने लगी ओर सोचमे डुब गइकी जो वो चाहती थी वो सब आज होने वाला हे.. अेकतो वो खुले विचारोकी थी उपरसे जबसे जवानीकी देहलीजपे कदम रखा तबसे ही लता कइ बार अपने भाइ भाभी ओर अपनी मांइके साथ देवायतकी चुदाइ देख चुकी थी तबसे ही उनकी जवानी उफानमे हिलोरे लेते मचल रहीथी..
वो पीछले कइ दीनोसे अपने भाइ भाभीकी चुदाइ देखनेकी आदी हो चुकीथी ओर हर दीन चुतमे उंगली डालके अपने आपको सांत करती थी यहा तक की वो अपने भाइके लंडको लेनेकोभी तैयार होगइ थी.. तभीतो आये दीन वो खुलके अपने अंगोका प्रदर्शन भानुके सामने करती थी ताकी भानुको अपनी ओर आकर्सीत कर सके ओर अपने रुमका दरवाजा हमेसा खुला रखती ताकी भानु कभीभी अंदर आके आगे बढ सके ओर उनका नतीजा यही हुआकी अेक बार भानुने रुममे आके जबरदस्तीसे उनके मुहको चोद भी लीया..
लेकीन तबतक उनके रीस्तेकी बात लखनसे हो चुकी थी वरना उसी दीन वो पका भानुसे चुद जाती.. तब सगाइसे पहेलेही वो लखनके साथ हर रात फोन सेक्स कर रही थी.. वो गांवमे रहेते हुअेभी इतनी फोरवर्ड हो चुकीथी की सगाइसे पहेलेही भानुको छोडके लखनके साथ सब कुछ करना चाहती थी ओर आज उसे लखनके साथ पहेलीबार अकेलेमे मीलनका मौका मील गया..जीसके लीये पुरी तैयारीया करके बैठीथी..
दुसरी ओर देवायत मंजुको लेके नीकल गया तब सहेरमे डो.सृतीकी होसपीटलमे सरला ओर भानु ओटी के बहार बेठे थे जहा अंदर भावनाकी डीलेवरी हो रहीथी.. डो.सृती मंजुकी वजहसे भावनाकोभी पहेचानती थी तो वो खुद ही डीलेवरी कर रहीथी.. तभी थोडीही देरमे सृती अेक बच्चीको गोदमे लेके बहार आगइ ओर सरला भानुको हसते हुअे दीखाने लगी.. तब सरला ओर भानु खुस होते बच्चीको देखने लगे..
डो.सृती : कोन्ग्रेच्युलेशा भानुजी लडकी आगइ.. देखो.. उनकी मां की तराह ही गोरी हे.. हें..हें..हें..
तब भानुने ओर सरलाने उसे छु के प्यार दीया फीर सृती बच्चीको लेके वापस अंदर चली गइ, थोडी देरके बाद अेक नर्स बच्चीको लेके अेक रुममे आगइ तो पीछे सरला ओर भानुभी आगये ओर नर्सने बच्चीको वही बेडपे सुला दीया तो भानु उसे देखके बहार चला गया ओर देवायतको फोन करने लगा तब ओटीमे अंदर डो.सृती भावनाकी चुतको टांके लगा रहीथी तब अंदर कोइ नहीथा तो सृतीने अपना काम करते भावनासे बाते करते पुछ ही लीया..
डो.सृती : (हसते) भावना.. कीतने साल हुअे सादीको तीन सालनां..? मे आइथी तुम्हारी सादीमे.. क्या आप दोनो ज्यादा मीलते नहीहो.. क्या..?
भावना : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) नही.. क्यु..? कुछ हुआ हे क्या..?
डो.सृती : (हसते) अरे नही नही.. बस मे देख रहीहु तुम्हारी ये अभीभी बहुत छोटी कीसी कुआरी लडकीकी तराह हे.. इसीलीये.. हें..हें..हें..
भावना : (सरमाते हसते) जी..वो..वो.. उनका छोटा हे.. ओर हम बहुत कम मीलते हे.. इसीलीये..
डो.सृती : ये सादी मंजुने करवाइ हेनां.. मेने सुनाथा तुम कीसीसे प्यार करतीथी.. तो फीर इनसे सादी क्यु करली..? अपने प्यारमे कुछ प्रोबलेम आइथी क्या..?
भावना : नही सृती.. मे प्यारतो करतीथी लेकीन मेरे दीलकी बात उन तक नही पहोचा पाइ.. ओर उनकी सादी होगइ.. तो इनसे सादी करनी पडी.., आपकीभी हुइ थीनां..?
डो.सृती : हां लेकीन मेनेही मेरे पतीको छोड दीया.. सायद वो पुरुषमे नही था.. हमारी सेक्स लाइफ अच्छी नही थी.. तो छोड दीया.. अब नही करनी सादी..हें..हें..हें..
भावना : सृती वो जीजु ओर मंजु आगये क्या..? सायद आतेही होगे..
डो.सृती : (हसते) आजायेगे.. मंजुका फोन आयाथा.. दोनो साथमे ही हुइ थीनां..?
भावना : (सरमाते धीरेसे) सृती.. वो टाका अच्छेसे लेना.. ये अैसीही कसी हुइ रखनी हे..
डो.सृती : (हसते) दो बच्चे होगये.. ओरभी करने हे क्या..? अबतो तुम्हारे नसीबमे वोही पेनीस हे.. तो क्या फर्क पडता हे.. वेसेभी अच्छेसे करदीया हे तुजे कोइ प्रोबलेम नही होगी..हें..हें..हें..
फीर सृतीने भावनाकोभी अपने रुममे सीफ्ट कर दीया ओर उनको अेक बार अच्छेसे चेक करके अपने पेसन्ट देखने चली गइ इधर भानु बहार आके देवायतको फोनपे लडकी होनेकी बात करता हे तब देवायतभी भानुको २० मीनीटमे होस्पीटल आनेकी बात करता हे.. फीर फोन कट करते भानु अंदर चला गया तबतक भावना अपने बेडपे आ चुकीथी.. भानु अंदर आगया ओर भावनाकी ओर देखा तो भावनाने अपना मुह दुसरी ओर करलीया जेसे वो देवायतका मुह दीखना नही चाहती.. तब भानु थोडा चीड गया ओर बहार चला गया..
भानु आके बहार बेठ गया तब थोडीही देरमे देवायकी कार आके रुकी तो इनमे सब बहार नीकल गये.. तो मंजु चंदा ओर पुनमभी धीरे धीरे चलके आ रहेथे ओर आतेही तीनो लेडी सीधी अंदर भावनाके पास चली गइ तब पुनम चंदा मंजु सब बच्चीको देखके प्यार करने लगे ओर उधर देवायत भानुके पास रुक गया..
देवायत : हां भानु सब अच्छेसे होगया..? कोइ परेसानी तो नही हुइ..?
भानु : (खराब मुडसे) नही यार.. कुछ नही.. सब अच्छेसे होगया..
देवायत : क्यु.. क्या हुआ..? ये चहेरेपे बाराह क्यु बजे हे कुछ हुआ क्या..?
भानु : क्या यार.. वो भावुको पता नही क्या होगया हे.. पीछले कुछ दीनोसे मुजसे बात करना बंध करदीया हे.. अबतो सामने देखनाभी बंध करदीया पता नही उनको मुजसे क्या प्रोबलेम हे..
देवायत : (हसते) अच्छा.. तो मीया बीवी वाला जगडा..हें..हें..हें.. ठीक हे इनको इतना सीरीयस मत ले.. लेडीसका अैसाही होताहे तीन दीन नही बोलेगी ओर चोथे दीन सब भुल जाती हे.. तु टन्शन मत ले मे मेरी सालीसे बात करुगा..
भानु : हां यार बात कर लेना वो तेरी ही सुनती हे..
देवायत : वो सब छोड ये बता दोनोकी तबीयत कैसी हे..?
भानु : अच्छी हे यार.. चल तुही जाके देखले.. मे यही हु फीर इधर आजा कुछ चाइ बाइ पीने जाना हे..
देवायत : (अंदर जाते) तु बैठ अभी आया वो सृतीको भी मीलना हे.. मीलके आता हु..
कहेते देवायत पहेले भावनाके रुममे चला गया तो भावना देवायतको देखतेही खुस होगइ ओर उनके चहेरेपे लाली छागइ वो सरमाते देवायतकी ओर हसने लगी.. तो सरलाभी देवायतको देखके सरमाने लगी ओर चोर नजरसे उसे देखती रही.. तब देवायतने उनको पुछा..
देवायत : भावु.. कैसीहे तुम दोनोकी तबीयत..?
भावना : (धीरेसे सरमाते) ठीक हे.. अच्छी हे..? केसेहो जीजु.. अबतो आतेही नही.. हमे भुल गये क्या..?
देवायत : (हसते) नही बस कुछ काममे फस गयाथा अब आता रहुगा..
सरला : बेटा पहेलेतो बहुत आताथा अबतो हम समधी होगये हे तो आजाया करो.. हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) माजी अबतो मे इसे खीचके लाउगी.. देखना हें..हें..हें..
चंदा : (हसते) हां लेजाना.. पहेले जो कामके लीये आयेहे वोतो करलो.. वो सृतीको नही दीखाना..?
देवायत : हां जाही रहे हे चल मंजु..
तब देवायत ओर मंजु हसते हुअे सृतीकी ओफीसके पास चले जाते हे ओर वहा रीसेपनीस्टपे नाम लीखवा देते हे तब वो लडकी चीठी लेके अंदर चली गइ ओर बहार आके तुरंत देवायत ओर मंजुको अंदर भेजदीया तब सृती खडी होके मंजुके गले लग गइ ओर दोनो सामने बेठ गये.. तब देवायतने कहा..
देवायत : सृतीजी.. येतो बडी नाइन्साफी हे दोस्तकोतो गले लया लीया ओर हमे कुछ नही..? हें..हें..हें..
डो.सृती : (सरमाते हसते) ओह.. सोरी सोरी.. कोइ बात नही मेरे बदले आपको मंजु गले लगा लेगी.. हें..हें..हें.. कहो.. आगये..? आजकी डेट थीनां..? कुछ पेइन बेचेनी हो रहा हे..?
मंजुला : अरे सृती पुछोही मत दो दीनसे कही चेइनही नही हे अभी अभी हल्का दर्द हो रहा हे..
डो.सृती : (हसते) चल आजा अंदर चेक करते हे.. ओर जी..जु.. आप इधरही बैठीये.. हें..हें..हें..
कहेते सृती ओर मंजु दोनोही हसते अंदर चली गइ तब सृती मंजुको सब चेक करने लगी.. मंजुका बीपी पल्स सब चेक करलीया ओर दोनोही बहार आगये तब सृतीने कहा..
डो.सृती : मंजु अच्छा हुआ तु आगइ कुछ प्रोबलेमतो नही लेकीन टाइम होगया हे.. मे तुजे अभी अेक गोली देती हु अगर लेबर पेइन बढजाये तो कहेना.. तेरी डीलीवरी कर देगे.. तु वही भावुके पास बेड हे चली जा..
तब देवायत ओर मंजु दोनोही खडे होगये तो सृती देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करती रही.. ओर दोनो भावुके पासके बेडपे आगये.. तब अेक नर्स पानी ओर अेक गोली लेके आइ ओर मंजुको खीलादी तब देवायत बहार भानुके पास चला गया ओर दोनो बहारही होटेलथी वहा चाइ पीने चले गये.. ओर बाते करने लगे....
कन्टीन्यु

































