Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 5 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३७

इधर देवायत मंजु चंदा पुनम लखन सब चाइ नास्ता कर रहेथे तभी भानुका फोन आगया तो सब गोरसे सुन रहेथे सबको इतना तो पता चल ही गयाकी भावनाको डीलीवरीके लीये होस्पीटल लेके गये हे.. तब लखनके मनमे लडु फुटने लगे क्युकी इस वक्त लता घरपे अकेली होगी.. ओर इनसे अच्छा मौका दोनोको कहा मीलने वाला था.. तब लखनभी जल्दी जल्दी चाइ नास्ता करने लगा....अब आगे

मंजुला : देवु क्या भावुको होसपीटल ले गये..?

देवायत : हां.. भानुकाही फोन था वो तीनो पहोंच गये हे..

मंजुला : देवु मुजेभी आज कुछ ठीक नही लग रहा.. हमेभी कीभी भी जाना पडे..

चंदा : अरे.. तो डीलेवरी पेलनका वेइट क्यु करे मे अभी सब तैयारीया करती हु.. हम चले जाते हे..

देवायत : हां मंजु मौसी ठीक केह रही हे हम आरामसे कार चलाते चले जायेगे.. वरना अ‍ेन्ड वक्तपे भागना पडेगा ओर इस हालतमे कार तेज चलानाभी मुस्कील हो सकता हे.. क्या कहेती हो..?

मंजुला : (गभराते) ना बाबा ना मे तेज कार बरदास्त नही करपाउगी चलो चलो.. अभी नीकल जातेहे मे सृतीको फोन कर देती हु..

पुनम : (मंजुको) भाभी मेभी चलती हु.. मुजे भी आना हे..

चंदा : बेटा तुम वहा क्या करोगी मेतो हु ही.. बस डीलेवरी होजाये फीर वहा कीसीका काम नही.. देवुकोभी हम वापस भेज देगे वहा नाइटमे इनको रुकनेकी जरुरत नही..

पुनम : मम्मी आने दोना.. फीर मे भाइके साथही चली आउगी.. म..म्मी.. प्लीज.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) ठीक हे चल.. मौसी ये मानने वाली नही हे.. अब आपकोभी इसे अ‍ेसेही जेलना पडेगा..हें..हें..हें..

पुनम : (मंजुको कंधेपे मुका मारते) भाभी.., सीर्फ साथ चलनेतो केह रही हु.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) चल ठीक हे आजा.. चल पहेले कुछ कपडे बपडे ले लेते हे मंजु तेरा गाउन बाउन सब कहा हे..

पुनम : (हाथ पकडते लेजाते) मम्मी चलो मे दीखाती हु.. भाभी भलेही इधर बैठी.. मुजे सब मालुम हे..

कहेते पुनम चंदाका हाथ पकडते लगभग घसीटके मंजुके रुममे लेगइ ओर वहा मंजुके सब कपडे ओर कुछ फालतुके कपडेभी साथ मे लेलीये ओर अ‍ेक थेलेमे सब पेकींग करने लगे.. तभी पुनमने कहा..

पुनम : मम्मीजी अ‍ेक दो जोडी आपकेभी कपडे लेलो.. वहा रुकना हेनां..

चंदा : (हसते) हां अभी लेलुगी.. तुजे इन सब जीचे बहुत याद रहेती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) तो फीर.. आपभीतो रुकने वाली हो.. कपडे चेन्ज नही करोगी..?

पुनम : (बहारकी ओर अपने रुममे जाते) चल ठीक हे मे मेरे कपडे लेके आइ तबतक तुजे कुछ याद आता हे तो रखदे.. अभी आइ..

कहेते चंदा अपने रुममे चली गइ ओर अपना गाउन ओर दो जोडी कपडे लेलीया तबतक पुनमभी अपने रुममे दोडके चली गइ ओर कुछ कपडे उसने अ‍ेक अलग केरी बेगमे रखा.. ओर कुछ सामान ओरभी बेगमे डाल दीया ओर बेग लेके सीधीही बहार चली गइ ओर कारमे बेग जुपाके आगइ.. तब चंदाभी बेग लेके मंजुके रुमसे बहार आ रहीथी तब मंजु लखन ओर देवायत होलमे बेठे थे..

चंदा : (बहार आते) अरे पुनम कहा चली गइ थी चल ये बेग रखदे कारमे.. फीर हम चलते हे..

कहातो पुनम ट्रोली बेग लेके वापस कारमे रखके आइ ओर होलमे सबके साथ बैठ गइ.. तब देवायत लखनको कुछ सुचना दे रहाथा लेकीन लखनतो कुछ ओरही प्लान करके बैठा था.. तो दुसरी ओर पुनमभी कुछ चान्स मीलेतो उनकी तैयारीया करके बैठी थी.. फीर सब खडे होगये ओर कारकी ओर जाने लगे तब मंजु दया ओर रजीयाको घरका ध्यान रखने ओर कुछ कामकी हीदायत देती रही..

पुनमने आगेकी सीट थोडी लंबी करदी ताकी मंजुला आरामसे बैठ सके तो सब देखके मंजु ओर चंदा हसने लगी.. देवायत बैठ गया तो मंजु आरामसे उनकी बगलमे बेठ गइ ओर चंदा पुनम पीछेकी सीटमे बेठ गये तब देवायतने कार सहेरकी ओर धीरे धीरे चलाते जाने दी.. सब आरामसे जा रहेथे.. जेसेही देवायत कार लेके नीकल गया तब वहीसे लखनने लताको फोन लगा दीया.. तब लताने फोन उठालीया..

लखन : (धीरेसे) लता.. कहा हो..? क्या सब चले गये..?

लता : (सरमाते हसते) हां.. सब सुबहही नीकल गये.. मे ओर भावेस अकेले हे.. क्या आप आ रहे हो..?

लखन : हां.. अभी अभी यहाभी सब होस्पीटल नीकल गये हे.. मे आ रहा हु.. भावेस सो गया..?

लता : (सरमाते) नही.. अभी सुला दुगी.. लखन.. कुछ होगा तो नही..?

लखन : अरे नही कुछ नही होगा.. क्या तेरा मन नही हे..? तो फीर रहेने दे..

लता : अरे नही नही.. मेने अ‍ेसातो नही बोला.. आजाओ.. ओर सुनो.. मोटरसाइकील अंदरही लेलेना..

लखन : (थोडा डरते) सुनो.. वो आजु बाजु कोइ देखेगा तो नही..?

लता : अरे नही.. आप मोटरसाइकील सीधे अंदरही लेना.. मे दरवाजा खुला रखती हुं..

लखन : ठीक हे मे गांवके बहारसेही फोन करता हु तब दरवाजा खोल देनां.. चल अभी नीकलता हु..

कहेते लखन अपना स्कुटर लेके नीकल जाता हे वो आज सुबहसेही अच्छेसे तैयार हुआथा.. लखन ओर लताने मीलके कइ दीनोसे मीलनेकी योजना बनालीथी वो इसी दीनका वेइट कर रहे थे ओर उन दोनोने सोचाथा वैसाही हुआ.. भावनाके साथ उनकी मां सरलाभी चली गइ तब लता बहुतही खुस हो रहीथी.. जेसेही सुनाकी लखन आ रहा हे तबसे लताके दीलकी धडकन बढ गइथी उनकी सांस तेज चलने लगीथी वो रोमांचीत होते अपने रुममे चली गइ..

वहा जाके वो भावेशको सुलानेकी कोसीस करने लगी.. उसे जुलेमे डालके जोरोसे जुला हीलाने लगी ओर सोचमे डुब गइकी जो वो चाहती थी वो सब आज होने वाला हे.. अ‍ेकतो वो खुले विचारोकी थी उपरसे जबसे जवानीकी देहलीजपे कदम रखा तबसे ही लता कइ बार अपने भाइ भाभी ओर अपनी मांइके साथ देवायतकी चुदाइ देख चुकी थी तबसे ही उनकी जवानी उफानमे हिलोरे लेते मचल रहीथी..

वो पीछले कइ दीनोसे अपने भाइ भाभीकी चुदाइ देखनेकी आदी हो चुकीथी ओर हर दीन चुतमे उंगली डालके अपने आपको सांत करती थी यहा तक की वो अपने भाइके लंडको लेनेकोभी तैयार होगइ थी.. तभीतो आये दीन वो खुलके अपने अंगोका प्रदर्शन भानुके सामने करती थी ताकी भानुको अपनी ओर आकर्सीत कर सके ओर अपने रुमका दरवाजा हमेसा खुला रखती ताकी भानु कभीभी अंदर आके आगे बढ सके ओर उनका नतीजा यही हुआकी अ‍ेक बार भानुने रुममे आके जबरदस्तीसे उनके मुहको चोद भी लीया..

लेकीन तबतक उनके रीस्तेकी बात लखनसे हो चुकी थी वरना उसी दीन वो पका भानुसे चुद जाती.. तब सगाइसे पहेलेही वो लखनके साथ हर रात फोन सेक्स कर रही थी.. वो गांवमे रहेते हुअ‍ेभी इतनी फोरवर्ड हो चुकीथी की सगाइसे पहेलेही भानुको छोडके लखनके साथ सब कुछ करना चाहती थी ओर आज उसे लखनके साथ पहेलीबार अकेलेमे मीलनका मौका मील गया..जीसके लीये पुरी तैयारीया करके बैठीथी..

दुसरी ओर देवायत मंजुको लेके नीकल गया तब सहेरमे डो.सृतीकी होसपीटलमे सरला ओर भानु ओटी के बहार बेठे थे जहा अंदर भावनाकी डीलेवरी हो रहीथी.. डो.सृती मंजुकी वजहसे भावनाकोभी पहेचानती थी तो वो खुद ही डीलेवरी कर रहीथी.. तभी थोडीही देरमे सृती अ‍ेक बच्चीको गोदमे लेके बहार आगइ ओर सरला भानुको हसते हुअ‍े दीखाने लगी.. तब सरला ओर भानु खुस होते बच्चीको देखने लगे..

डो.सृती : कोन्ग्रेच्युलेशा भानुजी लडकी आगइ.. देखो.. उनकी मां की तराह ही गोरी हे.. हें..हें..हें..

तब भानुने ओर सरलाने उसे छु के प्यार दीया फीर सृती बच्चीको लेके वापस अंदर चली गइ, थोडी देरके बाद अ‍ेक नर्स बच्चीको लेके अ‍ेक रुममे आगइ तो पीछे सरला ओर भानुभी आगये ओर नर्सने बच्चीको वही बेडपे सुला दीया तो भानु उसे देखके बहार चला गया ओर देवायतको फोन करने लगा तब ओटीमे अंदर डो.सृती भावनाकी चुतको टांके लगा रहीथी तब अंदर कोइ नहीथा तो सृतीने अपना काम करते भावनासे बाते करते पुछ ही लीया..

डो.सृती : (हसते) भावना.. कीतने साल हुअ‍े सादीको तीन सालनां..? मे आइथी तुम्हारी सादीमे.. क्या आप दोनो ज्यादा मीलते नहीहो.. क्या..?

भावना : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) नही.. क्यु..? कुछ हुआ हे क्या..?

डो.सृती : (हसते) अरे नही नही.. बस मे देख रहीहु तुम्हारी ये अभीभी बहुत छोटी कीसी कुआरी लडकीकी तराह हे.. इसीलीये.. हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते हसते) जी..वो..वो.. उनका छोटा हे.. ओर हम बहुत कम मीलते हे.. इसीलीये..

डो.सृती : ये सादी मंजुने करवाइ हेनां.. मेने सुनाथा तुम कीसीसे प्यार करतीथी.. तो फीर इनसे सादी क्यु करली..? अपने प्यारमे कुछ प्रोबलेम आइथी क्या..?

भावना : नही सृती.. मे प्यारतो करतीथी लेकीन मेरे दीलकी बात उन तक नही पहोचा पाइ.. ओर उनकी सादी होगइ.. तो इनसे सादी करनी पडी.., आपकीभी हुइ थीनां..?

डो.सृती : हां लेकीन मेनेही मेरे पतीको छोड दीया.. सायद वो पुरुषमे नही था.. हमारी सेक्स लाइफ अच्छी नही थी.. तो छोड दीया.. अब नही करनी सादी..हें..हें..हें..

भावना : सृती वो जीजु ओर मंजु आगये क्या..? सायद आतेही होगे..

डो.सृती : (हसते) आजायेगे.. मंजुका फोन आयाथा.. दोनो साथमे ही हुइ थीनां..?

भावना : (सरमाते धीरेसे) सृती.. वो टाका अच्छेसे लेना.. ये अ‍ैसीही कसी हुइ रखनी हे..

डो.सृती : (हसते) दो बच्चे होगये.. ओरभी करने हे क्या..? अबतो तुम्हारे नसीबमे वोही पेनीस हे.. तो क्या फर्क पडता हे.. वेसेभी अच्छेसे करदीया हे तुजे कोइ प्रोबलेम नही होगी..हें..हें..हें..

फीर सृतीने भावनाकोभी अपने रुममे सीफ्ट कर दीया ओर उनको अ‍ेक बार अच्छेसे चेक करके अपने पेसन्ट देखने चली गइ इधर भानु बहार आके देवायतको फोनपे लडकी होनेकी बात करता हे तब देवायतभी भानुको २० मीनीटमे होस्पीटल आनेकी बात करता हे.. फीर फोन कट करते भानु अंदर चला गया तबतक भावना अपने बेडपे आ चुकीथी.. भानु अंदर आगया ओर भावनाकी ओर देखा तो भावनाने अपना मुह दुसरी ओर करलीया जेसे वो देवायतका मुह दीखना नही चाहती.. तब भानु थोडा चीड गया ओर बहार चला गया..

भानु आके बहार बेठ गया तब थोडीही देरमे देवायकी कार आके रुकी तो इनमे सब बहार नीकल गये.. तो मंजु चंदा ओर पुनमभी धीरे धीरे चलके आ रहेथे ओर आतेही तीनो लेडी सीधी अंदर भावनाके पास चली गइ तब पुनम चंदा मंजु सब बच्चीको देखके प्यार करने लगे ओर उधर देवायत भानुके पास रुक गया..

देवायत : हां भानु सब अच्छेसे होगया..? कोइ परेसानी तो नही हुइ..?

भानु : (खराब मुडसे) नही यार.. कुछ नही.. सब अच्छेसे होगया..

देवायत : क्यु.. क्या हुआ..? ये चहेरेपे बाराह क्यु बजे हे कुछ हुआ क्या..?

भानु : क्या यार.. वो भावुको पता नही क्या होगया हे.. पीछले कुछ दीनोसे मुजसे बात करना बंध करदीया हे.. अबतो सामने देखनाभी बंध करदीया पता नही उनको मुजसे क्या प्रोबलेम हे..

देवायत : (हसते) अच्छा.. तो मीया बीवी वाला जगडा..हें..हें..हें.. ठीक हे इनको इतना सीरीयस मत ले.. लेडीसका अ‍ैसाही होताहे तीन दीन नही बोलेगी ओर चोथे दीन सब भुल जाती हे.. तु टन्शन मत ले मे मेरी सालीसे बात करुगा..

भानु : हां यार बात कर लेना वो तेरी ही सुनती हे..

देवायत : वो सब छोड ये बता दोनोकी तबीयत कैसी हे..?

भानु : अच्छी हे यार.. चल तुही जाके देखले.. मे यही हु फीर इधर आजा कुछ चाइ बाइ पीने जाना हे..

देवायत : (अंदर जाते) तु बैठ अभी आया वो सृतीको भी मीलना हे.. मीलके आता हु..

कहेते देवायत पहेले भावनाके रुममे चला गया तो भावना देवायतको देखतेही खुस होगइ ओर उनके चहेरेपे लाली छागइ वो सरमाते देवायतकी ओर हसने लगी.. तो सरलाभी देवायतको देखके सरमाने लगी ओर चोर नजरसे उसे देखती रही.. तब देवायतने उनको पुछा..

देवायत : भावु.. कैसीहे तुम दोनोकी तबीयत..?

भावना : (धीरेसे सरमाते) ठीक हे.. अच्छी हे..? केसेहो जीजु.. अबतो आतेही नही.. हमे भुल गये क्या..?

देवायत : (हसते) नही बस कुछ काममे फस गयाथा अब आता रहुगा..

सरला : बेटा पहेलेतो बहुत आताथा अबतो हम समधी होगये हे तो आजाया करो.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) माजी अबतो मे इसे खीचके लाउगी.. देखना हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) हां लेजाना.. पहेले जो कामके लीये आयेहे वोतो करलो.. वो सृतीको नही दीखाना..?

देवायत : हां जाही रहे हे चल मंजु..

तब देवायत ओर मंजु हसते हुअ‍े सृतीकी ओफीसके पास चले जाते हे ओर वहा रीसेपनीस्टपे नाम लीखवा देते हे तब वो लडकी चीठी लेके अंदर चली गइ ओर बहार आके तुरंत देवायत ओर मंजुको अंदर भेजदीया तब सृती खडी होके मंजुके गले लग गइ ओर दोनो सामने बेठ गये.. तब देवायतने कहा..

देवायत : सृतीजी.. येतो बडी नाइन्साफी हे दोस्तकोतो गले लया लीया ओर हमे कुछ नही..? हें..हें..हें..

डो.सृती : (सरमाते हसते) ओह.. सोरी सोरी.. कोइ बात नही मेरे बदले आपको मंजु गले लगा लेगी.. हें..हें..हें.. कहो.. आगये..? आजकी डेट थीनां..? कुछ पेइन बेचेनी हो रहा हे..?

मंजुला : अरे सृती पुछोही मत दो दीनसे कही चेइनही नही हे अभी अभी हल्का दर्द हो रहा हे..

डो.सृती : (हसते) चल आजा अंदर चेक करते हे.. ओर जी..जु.. आप इधरही बैठीये.. हें..हें..हें..

कहेते सृती ओर मंजु दोनोही हसते अंदर चली गइ तब सृती मंजुको सब चेक करने लगी.. मंजुका बीपी पल्स सब चेक करलीया ओर दोनोही बहार आगये तब सृतीने कहा..

डो.सृती : मंजु अच्छा हुआ तु आगइ कुछ प्रोबलेमतो नही लेकीन टाइम होगया हे.. मे तुजे अभी अ‍ेक गोली देती हु अगर लेबर पेइन बढजाये तो कहेना.. तेरी डीलीवरी कर देगे.. तु वही भावुके पास बेड हे चली जा..

तब देवायत ओर मंजु दोनोही खडे होगये तो सृती देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करती रही.. ओर दोनो भावुके पासके बेडपे आगये.. तब अ‍ेक नर्स पानी ओर अ‍ेक गोली लेके आइ ओर मंजुको खीलादी तब देवायत बहार भानुके पास चला गया ओर दोनो बहारही होटेलथी वहा चाइ पीने चले गये.. ओर बाते करने लगे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३८

तब देवायत ओर मंजु दोनोही खडे होगये तो सृती देवायतकी ओर देखते कातील स्माइल करती रही.. ओर दोनो भावुके पासके बेडपे आगये.. तब अ‍ेक नर्स पानी ओर अ‍ेक गोली लेके आइ ओर मंजुको खीलादी तब देवायत बहार भानुके पास चला गया ओर दोनो बहारही होटेलथी वहा चाइ पीने चले गये.. ओर बाते करने लगे....अब आगे

इधर गांवमे लखन अपनी बाइक लेके भानुके गांव चला गया ओर १० मीनीटके बादही गांवके जनदीक पहोंच गया तब अ‍ेक पेडके नीचे खडा होके उसने लताको फोन कर दीया तो लताने आंगनका दरवाजा खोल दीया ओर वही दरवाजेके पीछे खडी रही तभी थोडीही देरमे लखन अपनी बाइक लेके सीधा अंदरही आगया तब लताने फटाफट दरवाजा बंध करलीया ओर जटसे अपने रुममे चली गइ..

तभी लखनभी बाइक रखके अंदर चला गया तब लता अपने बेडपे बेठीथी ओर भावेशका जुला जुला रहीथी भावेशभी सो गयाथा तभी लखन लताके पास जाके बेठ गया तो लताकी सांसे तेज चलने लगी.. अपनी नैन जुकाके पैरके नाखुनसे जमीनको खरोचने लगी वो आज पहेली बार अ‍ेसे अकेलेमे लखनसे मील रहीथी.. तो लखनभी पहेलीबार कीसी लडकीको अ‍ेसे मील रहाथा दोनोही अन्जानथे की क्या कहेना हे..

लखन : (धीरेसे हीमत करते) वो भावेश सो गया..?

लता : (सरमाते) हां.. अभी अभी सोया हे.. पानी पीयेगे..? आप बैठो में लेके आती हु..

कहेते लता जटसे खडी होगइ ओर कीचनमे भाग गइ.. फीर पानी लेके वापस रुमकी ओर बढने लगी तब उनकी दीलकी धडकन बढने लगी उनको समजमे नही आ रहाथा की सुरुआत कहासे करे.. फोनमे तो दोनोही बीन्दास लगे रहेते थे लेकीन आज रुबरु मीलते ही दोनो गभरा रहेथे लता हींमत करते अंदर चली गइ ओर लखनको पानी दीया तो लखनने पानी पीकर ग्लास वापस दीया तो लता वापस कीचनमे चली गइ ओर ग्लास रखके वापस आगइ ओर लखनके पास थोडी दुर खडी रही..

लखन : अरे बेठोनां.. इतनी दुरसे तुमसे मीलने आया हु..

लता : (सरमसे पानीपानी होगइ) वो..वो.. भावेश इधर सोया हे.. वहा.. भाभीके रुममे चले..?

तभी लखन खडे होकर बहार आगया तब लताने धीरेसे अपने रुमका दरवाजा बंध करलीया ओर भानुके रुमकी ओर चलने लगी तो लखनभी उनके पीछे जाने लगा.. जेसेही दोनो अंदर चले गये तो लताने इस रुमका दरवाजाभी बंध करदीया ओर पलट गइ तो लखन उनके पीछेही खडाथा.. उसने जोरोसे लताको अपनी बाहोमे भरलीया तो लताभी उनकी कमरमे हाथ डालके लखनको बाहोमे भीच लेती हे..

ओर लखनके सीनेमे सर रख देती हे.. दोनो काफी देर अ‍ेक दुसरोकी बाहोमे खडे रहे तभी लखन उनके पीछे आगया ओर अपने हाथ लताकी कमरमे डालते बाहोमे भरलीया फीर अपने सरको लताके गलेमे लगाके हल्कासा चुमने लगा.. तब लता बुरी तराह सरमा गइ ओर अपनी नजर जुकाली.. अपने दोनो हाथ लखनके हाथपे रख दीये.. फीर अचानक पलट गइ ओर लखनकी बाहोमे लमा गइ..




लखनने उसे फोरन अपनी गोदमे उठालीया तो लता अपना सर लखनके सीनेमे छुपने लगी उनकी सांसे तेज चलने लगी..फुफुफु..फुफुफु..की आवाज लखनके कानो तक आने लगी साथमे लताकी चुडीयोकी खनखनाहटभी बजने लगी.. लखन उसे बेडकी ओर लेगया ओर धीरेसे लताको पीठके बल लीटा दीया ओर खुदभी पास लेठके लताके उपर जुक गया.. ओर धीरेसे अपने होंठ लताके होंठोसे मीला दीया.. तो लताभी आंख बंध करके लखनका साथ देने लगी..




दोनो काफी देर अ‍ेक दुसरेके होंठोके रसपान करते रहे तब लताभी धीरे धीरे कामातुर होने लगी ओर धीरे धीरे अपनी सरमहया त्यागने लगी उसने लखनके गलेमे दोनो हाथ डाल दीये ओर लखनको अपने सीनेसे लगानेकी कोसीस करने लगी तभी लखन कीस करते अ‍ेक हाथ लताके उरोजोपे रख देता हे तब लता सरसे पांव तक हील गइ.. ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. तो लखन लताके गलेमे मुह छुपाते उनके गलेको चुमने लगा..तो लताके सरीरमे सुरसुराहट होने लगी..

तब लता अ‍ेकदम मदहोसीमे पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी उनकी चुत फडफडाते पानीका रीसाव करने लगी.. धीरे धीरे करते उनकी सारी सरम हया दुर होगइ ओर लखनसे खुलके प्यारका खेल खेलने लगी.. वो अब कीसीभी तराह लखनमे समा जाना चाहती थी..तो दुसरी ओर लखनभी कामाग्नीमे जलेते लगातार लताके गलेको गालको ओर होंठोको चुमेही जा रहाथा ओर अ‍ेक हाथसे उनके बुब्स मसल रहा था..




लता : (मदहोसीमे) ससससीसीमंमंमंअअअअइइइइससहंहंहंमंमंमं ललखखनननन..

लखन : (कामुक्तासे) हंमम.. क्या.. हुआ.. हंहंमंमंंमममम डालदुउउउउ..हंममममम

लता : पता नहीइइ सससइइइइइ नननहीही नहीइइ दददर्दर्दर्द होगा सीसससइइइइ हंममम बुचचच..

लखन : बुचचच बुचचच नननहीहीही होहोगागा बससस अ‍ेकक बाबाररर हंमममम डालदुदु..

लता : (मदहोसीमे) हंममम हांहांहामम मननन हे तो सससइइइइ डाआआलोओओ उउउउसससहहहममम..

लता बहुतही कामुक लडकीथी वो पुरी तराह कामातुर हो चुकीथी वो चाहतीथी की लखन जटसे उनकी चुतमे अपना लंड डालदे लेकीन पहेली बार लंड डलवानेसे डरभी लग राहथा तभी लखन जटसे बेडसे उतर गया ओर अपना सर्ट नीकालने लगा फीर लताकोभी बेडसे उतारके साथ खडा कर दीया ओर उनके सब कपडे नीककालने लगा तब लताने उसे दिखावेकी नाकाम रोकनेकी कोसीस की.. वो बुरी तराह सरमसे पानीपानी होने लगी जब लखनने उनकी ब्रा नीकालदी तब उनके दोनो उरोज उछलके बहार आगये तब लताने अपने दोनो हाथ उनके बुब्सपे रख दीये ओर सरमसे नजरे चुराने लगी..




तभी लखनने उनका लंहेगाभी खीचलीया ओर लताको पुरी नंगी करदीया तब लता ना नुकुर करती रही.. ओर आखीरमे लखनसे रहा नही गया ओर लताको जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर लताके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा तो लताभी मदहोसीमे छा चुकीथी वो भुल गइ की उनके तनपे अ‍ेकभी कपडा नही हे सीवाय उनकी पेन्टी.. जो सीकुडके वी सेइपमे अपनी चुतको ढकनेकी नाकाम कोसीस कर रहीथी..

लता लखनके सरको अपने सीनेमे दबाने लगी तो लखनने उनका मुह लताके बुब्सपे था तो बुब्सको मुहमे लेलीया ओर चुसने लगा तब लता पागलसी होगइ ओर लखनके कंधेपे सर डालके जोरोसे सीसकारीया करने लगी मानो वो सातवे आसमानमे पहोंच गइ हो उनके लीये ये सब नया अनुभव था उनको पताही नही था की प्यारमे इतना सुख मीलता हे अब उसने प्यारका हर लम्हा अनुभव करनेकी मनमे ठानली..

लखन लगातार लताके दोनो बुब्स बारी बारी चुमने लगा ओर बीच बीचमे बुब्सकी नीपलको अपने दातोसे दबाके हल्कासा खीचभी लेता तब लता पुरी तराह पागल होजाती ओर अपनी कमर लखनकी ओर बढाते उनसे चीपक जाती उसे पताही नही चलाकी लखनने उनकी पेन्टी कब उंगलीया फसाके नीकाल दी तब लखनका लंड खडे होते लताकी चुतमे ठोकर मारने लगा तो लताको अपनी चुतपे लखनका लंड महेसुस हुआ तब उसे होस आया तो वो जटसे लखनसे अलग होगइ ओर अपने दोनो हाथसे अपनी चुतको ढकने लगी..

लखन : (मदहोसीमे उखडी सांस से) क्या हुआ.. हंमम.. मन नही हे..? फीर मौका नही मीलेगा..

लता : (बुरी तराह सरमसे) वो.. भावेशको देखके आउ..? जागतो नही गया.. अभी आइ.. चाइ पीओगे..?

लखन : (हसते) अरे नही जगा हे.. सोया हे.. वरना आवाज आती.. चाइ नही मुजे तो तेरा दुध पीना हे.. पीलाओगी क्या..?

लता : (अ‍ेकदम सरमसे लाल होगइ) धत्.., मुजेतो सरम आ रही हे.. अभी बेठो आपके लीये दुध बनाके लाती हुं आप दुध पीते हो..?

लखन : (सरारतसे) हां.. लेकीन तेरा.. हें..हें..हें.., ओर अ‍ैसीही जाओ.. बीना कपडे..

लता : (बुरी तराह सरमाते) नही.. वो बहार..

लखन : (हसते) अरे कोइ नही हे तुमने सब दरवाजेतो बंध कीये हे..कोन आयेगा? जाओना.. फीर फटाफट आजाओ.. आजतो हमारा मीलन होकेही रहेगा चाहे तुम कीतनाभी मना करो..

लता : (सरमसे पानीपानी होते नजर जुकाते धीरेसे) नही.. क्या.. आज.. ये सब जरुरी हे.. हम सादीके बाद सब केरेंगेनां..

लखन : (हसते) नही लता हमने फोनपे कइ बार वादा कीया हे.. की सादीसे पहेले सब कुछ करेगे.. मेने अपनी कोलेज लाइफमे कभी कीसी लडकीको नही छुआ.. मेरे सब दोस्त सब कुछ अपनी गर्लफ्रेन्डके साथ कर चुके हे.. ओर मेरी गर्लफ्रेन्ड सीर्फ तुम हो.. जो हर लम्हा तुम्हारे साथ जी लेना चाहता हु..

लता : (इम्शोनल होते) क्या इतना प्यार करते हे मुजसे..? (कहेते दोडके लखनकी बाहोमे समा गइ) आइ लव यु लखन.., आइ लव यु सो मच..मे सब कुछ करुगी सीर्फ तुम्हारे लीये.. मुजे कभी मत छोडना..

लखन : (हसते बाहोमे भीचते) अरे पगली इसमे छोडनेकी बात कहासे आगइ? मेतो जींदगीभर तुजे अ‍ैसेही प्यार करता रहुगा.. क्या मुजपे भरोसा नही हे..?

लता : (लखनके होंठ चुमते) खुदसे ज्यादा.. अब कभी भरोसेकी बात मत करना.. ठीक हे आज हम सबकुछ करेगे मेरा सबकुछ आपको सोंप दुगी.. बस मेरा विस्वास कभी मत तोडना.. आज सही मायनोमे लता आपकी होजायेगी.. बस अ‍ेक डर था.. जो अब नही हे.. आप बैठो मे अभी मस्त केशरवाला दुध बनाके आइ..

कहेते लखनकी बाहोसे छुटके बहारकी ओर चली गइ फीर अ‍ेक बार अपने रुममे भावेशको देखके सीधी कीचनमे चली गइ अब उसे नंगी घुमनेमे कोइ सरम नही आ रहीथी वो कीचनमे जाके दुघ गरम करने लगी तब उसे अहेसास हुआकी लखन कीचनमे खडा होके उसे देख रहा हे तो मुह घुमाके दरवाजेकी ओर देख लीया तो सचमे लखन दरवाजेके पास अदब लगाके लताको देख रहाथा.. जीसे देखके लता खुब सरमाइ..

लता : (सरमसे) अरे.. आप..? बेठीयेना मे अभी लेके आइ..

लखन : (हसते) नही मेरी खुबसुरत बीवीका दीदार करनेदो.. बीना कपडोमे क्या मस्त दीख रही हो तुम..

लता : (अ‍ेकदम सरमाते) धत् जाइअ‍ेना.. मुजे सरम आ रहीहे.. अभी आती हुनां..

कहेते वो दुध देखने लगी तो दुधमे उफान आगया तो उसने दुध उतार लीया ओर उसमे केशर सकर सब मीला दीया ओर दो ग्लासमे भरलीया.., तभी उसे अपनी कमरमे लखनका हाथ महेसुस हुआ तो अ‍ेक बारतो डर गइ ओर जटसे मुह घुमाके देखा तबतक लखन उसे पीछेसे बाहोमे भरते उनके गलेको चुमने लगा, लखनकी इसी हरकतकी वजहसे लता मदहोसीमे छाने लगी ओर सीइइइ हंमममम की आवाज करने लगी तभी लखनने पीछेसेही अपने दोनो हाथसे लताके दोनो बुब्स पकडलीये ओर हल्कासा दबाके मसलने लगा..

लता : (मदहोसीमे) सीसीसससइइइइ हंमम आहहहह छोडीयेनानाना कुछछछ होररररहाहाहा हेहेअ‍ेअ‍ेससइइइइइ

लखन : (कामुक्तासे) क्या होहोरररहाहाहा हेहेहे हंममम बोबोललनानानां? डालदु हंमम बोललल हंममम..

लता : ननहहीहीइइइ यहाआआ ननहीहीइइइ प्लीइइजजज, अंअंददरररर चचलोलो सससससइइइइइ..

कहातो लखन उनके गलेको लगातार चुमता रहा.. ओर लताके उरोजोको मसलता रहा.. दोनोही पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगे तभी लखनने अपना अ‍ेक हाथ लताकी चुतपे रख दीया तो लता सरसे पांव तक कांपने लगी ओर लखन चुतको सहेलाने लगा तो लतासे दरदास्तके बहार होने लगा तभी लता अ‍ेक दम पलट गइ ओर लखनकी बाहोमे समा गइ तो लखनने वापस हाथ चुतपे रख दीया ओर लताके होंठोसे अपने होंठ मीला दीया ओर जोरोसे भीचके अपने हाथकी अ‍ेक मीडल उंगली लताकी चुतमे घुसादी जीनकी वजहसे लताने फोरन लीपकीस तोड दी ओर लखनका हाथ हटाने लगी वो लखनसे छुटनेकी कोसीस करने लगी..




लता : (रोने वाली आवाजमे) प्लीजजज नहीही नहीही नहीइइ अभी नहीही अंदररर चलोलो प्लीज..

लखन : (कमरसे पकडते अपनी ओर खीचते) अंदर दोगी? हंममम बोललल दोगीना..?

लता : (सरमसे पानीपानी होते) हंहंममम हा..हा..हहा.. चलो.. प्लीज.. यहा नही..

लखन : (लताको गोदमे उठाते) चलो तुम्हे अंदर छोडदु फीर मे दुध लेके आता हु..

लता : (सरमसे) अरे.. मे लाती हुनां..

लखन : (हसते) अरे मेरी बीवीको कुछ नही करने दुगा.. तुम सीर्फ मुजे प्यार दो..

कहेते लखन लताको गोदमे उठाते रुममे लेकर आता हे तबतक लता सीर्फ लखनकी आंखोमे सरमाती देखती रही.. आज उसे लखनपे बहुत प्यार आरहा था लखन उनकी अ‍ेक अ‍ेक बात मान लेताथा ओर उनकी बहुत केरभी करताथा.. लता अपने आपको भाग्यशाली समजने लगी ओर लखनको प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. तभी लखनने लताको बेडपे बडीही सावधानीसे पीठके बल सुला दीया ओर वो कीचनमे दुध लेने चला गया ओर वापस अपने हाथोमे दो दुधका ग्लास लेके आगया ओर वही टेबलपे रख दीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३९

कहेते लखन लताको गोदमे उठाते रुममे लेकर आता हे तबतक लता सीर्फ लखनकी आंखोमे सरमाती देखती रही.. आज उसे लखनपे बहुत प्यार आ रहाथा लखन उनकी अ‍ेक अ‍ेक बात मान लेताथा ओर उनकी बहुत केरभी करताथा.. लता अपने आपको भाग्यशाली समजने लगी ओर लखनको प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. तभी लखनने लताको बेडपे बडीही सावधानीसे पीठके बल सुला दीया ओर वो कीचनमे दुध लेने चला गया ओर वापस अपने हाथोमे दो दुधका ग्लास लेके आगया ओर वही टेबलपे रख दीया....अब आगे

लता : (सरमाते बेडपे बैठ गइ) उधर नही इधर लाइअ‍े.. आज मेरे जानुको अपने हाथसे पीलाउगी..

तो लखनके चहेरेपे स्माइल आगइ ओर दोनो ग्लास लेके लताके पास बेडपे बैठ गया तो लताने लखनके हाथसे अ‍ेक ग्लास लेलीया ओर लखनके मुहकी ओर कर दीया तब लखनभी अपना ग्लास लताके मुहके पास लेगया तब दोनोनेही अ‍ेक दुसरेके ग्लासमे अपना मुह लगादीया ओर अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे देखते दुध पीने लगे.. जब दोनोका दुध खतम होगया तब लखनने दोनो ग्लास टेबलपे रख दीया..

तब लता आने वाले पल के बारेमे सोचते सरमाने लगी ओर सोचती रहीकी अब पता नही लखन उनके साथ क्या क्या करेगा.. वो बडीही रोमांचीत होने लगी ओर उनकी चुत फडफडाने लगी उनमेसे पानीका रीसाव सुरु होगया ओर लखनके सांपको नीगलनेके लीये तैयार होने लगी.. तभी लखन उनके पास आके बेठ गया ओर दोनो बेठेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा गये ओर दोनोके होंठ मील गये तब लताकी आधी आंख बंध होगइ ओर वो मदहोसीके नसेकी ओर चली गइ धीरे धीरे वो लखनके होंठोको चुमने लगी..

लखन वही बेडके कीनारे होंठ चुमते लताके बुब्सको मसलने लगा अब लता कोइ अनुरोध नही कर रहीथी.. बुब्स मसलतेही लखनने उनकी चुतपे हाथ रख दीया ओर धीरे धीरे सहेलाने लगा तो लता पुरी तराह कामोतेजनामे आगइ ओर जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. वो लखनकी आंखोमे हवसभरी नजरोसे देखती रही.. जेसेही दोनोके मुह अलग हुअ‍े लता हाथकी कोनीके बल बेठ गल..

ओर लखन फटाफट बेडसे उतर गया ओर अपनी पेन्ट ओर चडी नीकालदी फीर अपना अ‍ेक पैर बेडके नीचे रख दीया ओर दुसरा लताके पास बेडपे टीकाके खडा होगया फीर अपना अ‍ेक हाथ लताके गलेमे डालके धीरेसे उंगली लताकी चुतमे घुसादी.. तब लताकी जोरोसे सीसकारीया नीकल गइ ओर आंख बंध करली..

तभी लखन उंगलीसे चुतके मटरदानेको छेडने लगा तब लताने अपना मुह गरदनसे पीछे डालदीया ओर जोरोसे सीसकारीया करते कामातुर होगइ तभी लखन उंगलीको धीरे धीरे चुतमे अंदर बहार करने लगा तो लता परम आनंदकी अनुभुती करने लगी.. आज उनकी चुतमे पहेली बार कीसी लडकेकी यानी अपने यारकी उंगली गइ थी.. वो लखनके साथ हर सुख पाना चाहती थी..




लखन : (मदहोसीमे) लता..हंहहमममम ममममजाजाजाज..आआआररररहाहाहाहाहेहेहेहे..हंममममम बोल..हं..

लता : (आंख बंध करते) सीससइइइइ आइइइइइ लखननन कुछछछ हो रहाहाहा हेहेहे कुछ कीजीयेअ‍ेअ‍ेअ‍े

लखन : (जोरोसे उंगली करते) क्या.. क्या करु हंमम बोलनां..? अंदर डालदु.. हंमम..

लता : (सरमसे मुह दुसरी ओर घुकाते मदहोसीमे) हंमंम नहीइइ मालुलुउउममम हंमममसससइइइइ मांइइइइ

तभी लखन लताको कंधेसे पुस करते बेडपे सुला देताहे ओर खुद लताके दोनो पैरसे होते उनके उपर चडके लेट जाताहे तब लता लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेती हे ओर दोनोही स्मुच करने लगते हे ओर होंठ चुमते चुमते दोनोही अपना मुह थोडा खोलके अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. ओर लखन बुब्स दबाता रहा तभी लखन चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा ओर लखन लताके बुब्स चुसने लगा..

तो लता लखनके सरको कसके पकडलेती हे ओर मदहोसीमे आंधी आंख चडाके मुहको इधर उधर करने लगती हे.. ओर लखनके सरको सहेलाने लगती हे तब उनकी चुडीयोकी खनखनाहट पुरे रुममे गुंजने लगी जीनकी आवाजसे लखन ओर कामातुर होगया, ओर चुमते चुमते ओर नीचे सरकने लगा बुब्सके बाद लताका पेट नाभी ओर नाभीके नीचे चुमते जाने लगा ओर आखीर अपनी मंजीलपे यानी लताकी चुतपे पहोंच गया..

जेसेही लखनने चुत पे मुह लगाया लता छटपटाने लगी उसने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडके फैलादीये ओर अपने दोनो हाथसे अपने चहेरेको ढक लीया ओर जोरोसे सीसकारीया करने लगी..




लखन लताकी चुतको चुमने लगा ओर धीरेसे अपनी जीभ नीकालके लताकी चुतमे डालदी ओर चुतके दानेको छेडने लगा.. तो लता पागल जैसी होगइ ओर दोनो हाथसे चदरको कसके पकड लीया ओर कमर उची करते छटपटाने लगी आज उनकी नाजुक चुतको अपने मंगेतरने छेड दीयाथा तभी उनके सरीरमे सुरसुराहट होने लगी पुरा तन कांपने लगा ओर उनकी चुतसे अ‍ेक तेज धार नीकलते लखनके मुहको भीगोने लगी..

कुछ पानी लखनके मुहमे चला गया तो लखनको उनका स्वाद नमकीनसा लगा ओर वो चुतको चाटने लगा तभी लताने अपनी कमर धडामसे बेडपे पटकदी ओर हाथ टीकाके नीचेकी ओर देखने लगी तो लखन उनकी चुतको चाट रहाथा तो देखके सरमसे पानपानी होने लगी ओर मुहको साइडमे करते छुपानेकी कोसीस करने लगी तभी लखन हट गया ओर साइडमे पडी लताकी पेन्टीसे मुह पोछने लगा..

लखन : लता बाथरुम कहा हे..? अंदर हे..?

लता : (अ‍ेकदम सरमाते नजर चुराते) हां.. इधर भाभीके रुममे हे.. चले जाइअ‍े..

तब लखन बाथरुममे मुहह साफ करने चला जाता हे तब लता उनको तीरछी नजरसे सरमाते देखती रहेती हे वो अभीभी नंगी अ‍ेसेही पडी रही तभी उनको अपनी पेन्टी नजरमे आइ जो लखन वहा छोडके गयाथा तो लताने पेन्टी हाथसे खीचके अपने हाथोमे लेली ओर अपनी चुतको साफ करने लगी.. फीर वापस पेन्टीको नीचे डालके सरकके बेडपे उपर चली गइ ओर तकीयेके उपर सर रखके पीठके बल लेटी रही..

तभी लखन मुह साफ करके आ गया ओर सीधेही लताके पास लेटके अपना अ‍ेक पैर उनकी कमरमे डाल दीया ओर लताका मुह अपनी ओर करते दोनोके होंठ मील गये.. ओर स्मुच करने लगे.. लता अ‍ेकदम कामातुर होचुकी थी अबवो हर हालमे लखनका लंड अपनी चुतमे लेना चातीथी तब दुसरी ओर लखनसे भी अब लताको चोदे बीना मुस्कील हो रहाथा वो लगातार लताके होंठ ओर बुब्स चुमेही जा रहाथा..

तभी लताने लखनको बाहोमे भीच लीया ओर खीचके अपने उपर चडानेकी कोसीस करने लगी तो लखनभी उचा होते लताके उपर लेट गया तब लताने अपने दोनो हाथ लखनके गलेमे डाल दीया ओर लखनके होंठ चुमती रही.. तभी लखन लताके पैरके बीच बेडते लंडको पकड लेता हे ओर लताकी चुतपे रगडके घीसने लगा तब लता आधी आंख चडाके नसेमे चली गइ ओर लखंडका लंड अपनी चुतमे लेने तैयार होगइ..




लखन लंडको लताकी चुतपे घीसते उसे गीला करदेता हे ओर लंडके टोपेको लताकी चुतपे रखते लताके उपर जुकके लेट जाता हे.. ओर लताकी गरदनमे हाथ डालके कमरको लताकी चुतपे पुस करता हे तब लखनाका लंड फीसलके बहार आजाता हे तब लखन अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते वापस लंड पकडके लताकी चुतपे रखता हे ओर पुस करता हे तो लंड वापस फीसलके बहार नीकल जाता हे अ‍ैसा दो बार ओर कीया..

तो हर बार लंड फीसके बहार नीकल जाता था तो लताको लखनके अनाडी पनपे हसी आगइ तो लखन थोडा चीड गया.. दोनोही आज पहेलीबार सेक्स कर रहेथे दोनोको ही कोइ ज्ञान नही था..




तब जाके लताने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते लखनके लंडको अपनी चुतका रास्ता दीखा दीया ओर अपने हाथसे लंडको चुतके होलमे धका देदीया ओर लखनका लंड थोडा चुतमे घुस गया तो लखनको लंडपे गरमी महेसुस होने लगी ओर लताके गलेके नीचे दोनो हाथ डाल दीया फीर लताके होंठपे अपने होठ रखते कमरको जोरोसे जटका दीया तो लंड लताकी चुतकी जीली चीरते लताकी चुतमे घुस गया तब लताकी जोरोकी चीख नीकल गइ अच्छाथा लखन उनके होंठ चुम रहाथा ओर चीख लखनके मुहमेही दब गइ..

लता छटपटाने लगी उनकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी ओर लखनके सीनेपे दोनो हाथ रखते धका मारते लखनको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस करने लगी ओर अपने दोनो पैर अपने बैडपे पटकती रही..लेकीन लखनने उनके होठोपे कसके दबाव बनायाथा तो लता उनका मुह छुडाने इधर उधर मुह करते होंठ छुडानेकी कोसीस करने लगी ओर काफी मसकसके बाद अपना होंठ छुडानेमे कामयाब हो गइ..

लता : (होंठ छुडातेही) नही..नही..नही.. नीकालो.. मममरररगगगइइइइइ उउउइइइ मांइइइइ बस..बस.. नही.. प्लीज.. नीकालो.. जलन हो रही हेहेहे..उउउइइइइम मांआआअ ममररजाजाउउउगीगी.. नीनीकाकालोलो सससससइइइइइइ बस..बस..नहीइइ लखनननन मरर जाउगीगीइइइ याररर..

लखन : लता कुछछ नही होगा यार पहेली बारमे थोडा होता हे अभी दर्द जला जायेगा..

लता : (रोते हुअ‍े) ननहीहीइइइइइ बहुततत दुखता हेहेससससइइइइइइ नही करनाआआ मांइइइ मर गइइइ..

तभी लखन अ‍ेसेही रुक जाता हे ओर लताके होंठ चुमने लगता हे तो लता अपना मुह इधर उधर करते लखनको हटानेकी कोसीस करने लगी लेकीन लखनने लताको कसके बाहोमे भीच लीया ओर लताके बुब्स चुसने लगा.. उनको पताथा अभी नीकाल दीया तो लता डर जायेगी ओर उसे कभी चोदने नही देगी.. लता मना करते रोती रही लेकीन लखन धीरे धीरे अपनी कमरको हीलाने लगा तब लताको चुतमे जलनके साथ कुछ अच्छाभी फील होने लगा ओर उनकी दर्द भरी आवाज सीसकारीयो बदलने लगी..

दोनोकोही पता नही था की लताकी चुतसे खुन नीकलने लगा हे.. कुछही देरमे लताका दर्द कम होने लगा अब उसे थोडा थोडा मजा आने लगा लखन लताके गलेमे मुह डालके चुमते धीरे धीरे लताको चोदने लगा तब लताभी लखनको हाथसे पकडके कामुक सीसकारीया करने लगी.. अबतो वोभी धीरे धीरे अपनी कमर हीलाने लगी ओर लखनके कंधेको चुमतेआंख बंध करते आहे भरने लगी..




दोनोकाही पहेली बारथा लखनका लंड लताकी कोमल चुतमे मटरके दानेको छुते अंदर बहार होने लगा तब लता पुरी तराह आंख चडाके चुदाइके आनंदमे मदहोस हो गइ थी.. लखनभी कीसी लडकीको पहेलीबार चोद रहाथा उसेभी अपना लंड कीसी गरम भठीमे डालदीया हो अ‍ैसा महेसुस हो रहाथा..दोनोही चुदाइका आंनद लेने लगे आज लताने अपना कौमार्य आखीर अपने होने वाले पतीको सोंपही दीया.. आज वो लखनके नीचे लेटे चुदवा रही थी.. जीनकी उन्होने

बडे अरसोसे कामना कीथी..




तभी लखनने लताके दोनो पैरमे हाथ फसालीया ओर पैर उचा करते चोदनेकी स्पीड थोडी बढादी.. तो लता अ‍ेसेही सीथील होके चुदाइका आनंद लेने लगी.. तभी लताके सरीरमे जुरजुरी होने लगी ओर हल्कासा कांपने लगी उसे लगाकी हजारो चीटीया उनके सरीरपे दोडते उनकी चुतकी ओर जा रहीहे ओर उसने जोरोसे लखनको बाहोमे भीचलीया ओर लखनके होंठ लीपलोक करलीया तभी उनकी चुतने जवाब देदीया..वो लखनके लंडको अपनी चुतके अंदरही चीगोने लगी.. ओर जडके सांत होगइ..

तब लता थोडी ढीली पड गइ ओर अ‍ेसेही पडी लखनसे चुदवाती रही.. तभी लखनको भी अपने लंडपे कीसी गरम पानीसे भीगे लंडका अहेसास हुआ ओर वो कामातुर होके हाथके बल उचा होगया फीर लतापे जुकते जोरोसे कमर हीलाके चोदने लगा तो लताकी चीखे नीकलने लगी ओर मुह खुला रखते आहे भरते अपने हाथ बेडपे पटकने लगी उसे लखनका लंड लेना बहुत मुस्कील लगने लगा..




थोडीही देरकी धमासान चुदाइके बाद लखनभी अकडने लगा ओर लतासे चीपकते उनके गलेमे मुह डाल दीया तब लताने भी लखनको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर लखनका लावा लताकी चुतमे पीचकारीया मारते फुट पडा.. तब लताकोभी अपनी चुतमे लखनका गरम विर्य महेसुस हुआ तब लखन उनके सीने पे सर रखते ढेर हो गया.. तो लताके दोनो हाथ अनायासही लखनकी पीठको सहेलाने लगा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ४०

थोडीही देरकी धमासान चुदाइके बाद लखनभी अकडने लगा ओर लतासे चीपकते उनके गलेमे मुह डाल दीया तब लताने भी लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया ओर लखनका लावा लताकी चुतमे पीचकारीया मारते फुट पडा.. तब लताकोभी अपनी चुतमे लखनका गरम विर्य महेसुस हुआ तब लखन उनके सीने पे सर रखते ढेर होगया.. तो लताके दोनो हाथ अनायासही लखनकी पीठको सहेलाने लगा....अब आगे

दोनोही अपनी सांस सांत करते अ‍ेसेही बीना बोले पडे रहे.. तब लताको अहेसास हुआकी आज वो अपने मंगेतरसे चुद गइ हे.. तब उनको बहुतही सरम आने लगी ओर लखनसे नजरे चुराने लगी वो अपना मुह इधर उधर करते लखनकी पीठ सहेलाती रही.. तभी लखनका लंड सीकुडके लताकी चुतसे बहार नीकल गया तो लताकी चुतसे दोनोका खुन भरा मीश्रीत कामरस बहारकी ओर पैरसे उतरके बेडपे गीरने लगा..

लखन लताके उपरसे हट गया तो लता जटसे बेडपे बेठ गइ ओर अपनी चुतकी ओर देखने लगी तो चोंक के गभरा गइ.. ओर आजु बाजु नजर घुमाके कपडेको ढुंढने लगी.. तब लखन समज गया ओर अपनी चडी लताकी ओर फेंकदी तो लता अपनी चुत ओर पैरको साफ करने लगी.. ओर बेडसे उतरने लगी तब उसे अपनी चुतमे तेज जलन महेसुस हुइ तो वापस बेडपे बेठ गइ ओर लखनकी ओर सरमाते कहेने लगी..

लता : (सरमाते धीरेसे) सुनीयेनां.. नीचे.. बहुत जलन हे.. नही चला जाता.. खुनभी नीकला हे..

लखन : (हसते) पहेली बारमे थोडा नीकलता हे अब नही नीकलेगा.. मे तुमको ले चलु..?

लता : (सरमाते सरको हां मे हीलाते) हंमम.., पुरी चदर खराब होगइ हे पता नही गदेपे खुन लगा हेकी नही.., कही भाभीको पता ना चल जाये..

लखन : (हसते गोदमे उठाते) अरे कुछ नही कहेगी.. मेरा नाम ले लेना..

तभी लखन लताको गोदमे उठालेता हे तब लता बुरी तराह सरमसे पानीपानी होगइ.. दोनोही बाथरुममे चले गये तब लखन लताको अपने हाथोसे नहेलाने लगा तो लता अ‍ेक बार फीर सर्मसार होगइ ओर उसनेभी सरमाते हुअ‍े लखनको नहेलाया फीर दोनोही नंगे बहार आगये तब लताने तन पोछलीया ओर आयनेके सामने चली यइ ओर अपने खुले बालोको सही करने लगी..




तभी लखनभी उनके पीछे जाके खडा होगया ओर लताको आयनेसे देखने लगा तो लताने भी लखनको आयनेसे अपने पीछे खडे देख लीया तो सरमाते मु्स्कराने लगी तभी लखनने उसे पीछेसे अपनी बाहोमे भर लीया ओर उनके दोनो बुब्सपे हाथ रखके धीरेसे मसल दीया ओर लताके गलेमे पीछेसे मुह लगाके चुमने लगा तो लता जटसे पलट गइ ओर लखनकी बाहोमे समा गइ..

लता : (सरमाते) बस अब कोइ सरारत नही.. खाना बनाना हे.. खाके जाइयेगा..

लखन : (हसते होंठ चुमते) क्या मे रुक जाउ..? हंमम.. दर्द हे अभी..? हंमम..

लता : (सरमाते) नही.. प्लीज.. अभीभी जलन हे.. अब ओर कुछ नही..

लखन : चलनां.. खाना खाके ओर अ‍ेक बार करेगे.. तेरे बीना नही रहा जाता..

लता : (सर्मसार होते) नही.. दर्द हे यार.. नही करना.. फीर कभी करेगेनां.. कोइ आ जायेगा तो..

लखन : कोइ नही आयेगा.. सब गये हे.. आज अच्छा मौका हे.. आराम करके करेगेनां..

लता : (सरमाते) प्लीज.. मान जाओ.. कल पका.. सुबह आजाइगा.. वो सुबह नही आयेगे देर होजायेगी..

तभी भावेशके रोनेकी आवाज आतीहे तो लता फटाफट दुसरी चडी लहंगा ओर टीसर्ट पहेन लेतीहे ओर जटसे रुमके बहार भागके अपने रुममे चली जाती हे तब वो लंगडाके चल रहीथी वो अपनी चुतके दर्दकी परवाह कीये बगैर अपने रुममे जाके भावेशको गोदमे उठा लेती हे.. ओर उसे लेके बहार आजाती हे तब भावेश सांत होजाता हे.. तभी लखनभी अपने कपडे पहेनके बहार आता हे ओर लताकी ओर देखने लगता हे..

लता : (सरमाते हसते) वो भावेश रो रहाथा.. अभी दुध पीलके सुला दुगी.. खाना बनालु..?

लखन : (जुठका नाराज होते) नही.. तुम खालेना मे चलता हु..

लता : (थोडा गभराते धीरेसे) नाराज होगये क्या..? बेठोना अभी खाना बन जायेगा.. प्लीज..

लखन : (मुहको दुसरी ओर करते) नही मुजे जाना हे.. अभी भाइका फोन आयेगा..

लता : (रोती सुरतसे) प्लीज.. नाराज तो नही..? अभी में खाना बनालुगी खा के जाना..

लखन : (थोडी बेरुखीसे) नही घरपेभी बना होगा.. मीलते हे अब सादीके बाद.. चलता हु..

लता : (लगभग रोती सुरतमे) नही यार.. मान जाइअ‍ेनां.. मुजे पता हे आप नाराज हो.. मे खाना बना लुगी.. मानते क्यु नही बहुत दर्द कर रही हे.. मे नही मना करती.. इनमे कीया..? क्यु जीद करते हो..

लखन : (हसते प्यारसे गाल सहेलाते) नही कोइ जीद नही करता.. तुम ठीक होजाओ फीर मीलेगे ओके..

लता : (लखनका हाथ थामते) प्लीज.. खाना खाके जाना.. मेरी कसम.. इतने दीनोके बाद तो मीले हो..

लखन : (हसते) हां.. तभीतो मना कर रहीहो.. तुम लडकीयोकी यही जीदकी वजहसे लडके बहार मुह मारते फीरते हे..

लता : (आंसु बहाते) प्लीज.. मेने कहा मना कीया.. अभी दर्द हे यार.. मे मना नही करती.. मेरी भी इच्छा हे.. मान जाओ.. प्लीज.. आप समजतेही नही..

लखन : (हग करते आंसु पोछते) यार रो मत.. मे तुजे रोते हुअ‍े नही देख सकता.. चल ठीक हे रुकता हु खाना खाके जाउगा बस.. कसम मत दे यार.. मे तुमसे बहोत प्यार करता हु.. लव यु बेबी..

लता : (सरमाते हसते) लव यु टु.. आप थोडी देर बैठो मे इनको दुध देके सुलातीहु फीर खाना बना लुगी..

तभी लता भावेशको लेके कीचनमे चली जातीहे ओर बोटलमे दुध नीकालके भावेशको वही सुलाके मुहमे दे दती हे.. ओर खाना बनाने लगती हे तभी भानुका फोन आगया तो लखनको चुप रहेनेको कहेके उनसे बात करने लगी.. तो भानुने उसे लडकी होनेकी खबर देदी ओर घरका खयाल रखनेको कहेके कल आजायेगे कहा.. तो लता मनही मन खुस होने लगी.. अब उसे कीसीका डर नही था.. ओर फोन काट दीया..

फोन रखतेही खुसीसे गाना गुन गुनाते खाना बनाने लगी तभी लखनभी भावेशके पास नीचे बेठ गया ओर उनके साथ खेलने लगा तो लता सरमाके हसते दोनोको देखती रही ओर अपना काम करती रही..

उधर देवायत ओर भानुने चाइ पीते भानुने घरपे लतासे बात करली ओर दोनो वापस होस्पीटलकी ओर चलने लगे.. तभी पुनम बहारकी ओर ढुंढते आती दीखाइदी तो देवायत ओर भानु जटसे चलने लगे जेसेही पुनमकी नजर देवायत भानुपे गइ तो हाथके इसारेसे देवायतको जल्दीसे बुलाने लगी तब देवायत लगभग दोड ही पडा ओर जटसे पुनमके पास पहोंच गया.. तब पुनम उनका हाथ पकडते अंदर दोड पडी..

देवायत : (गभराते) अरे छुटकी क्या हुआ..? कुछ हुआ क्या..?

पुनम : भाइ जल्दी चलो भाभीको जोरोका दर्द हो रहा हे अभी उसे अंदर लेगये हे..

देवायत : अरे तो गभराती क्यु हे सबको अ‍ैसेही होता हे.. तुजे नही मालुम..?

पुनम : (सरमाते हसते धीरेसे) भाइ मुजे कहासे मालुम.. मेतो पहेली बार देख रहीहु..

देवायत : (सरारतसे धीरेसे कानमे) हंमम.. तुजेभी होगा तब देख लेना.. तुजेभी अ‍ैसाही होगा..हें..हें..हें..

पुनम : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) भाइ प्लीज.. चुप होजाइअ‍े.. आप बहोत गंदे हो.. जब मेरा वक्त आयेगा तबभी आप मेरे साथ होगे.. वो हमारा बच्चा..

कहेके पुनम अ‍ेकदम सरमा गइ ओर देवायतका हाथ छोडके चंदाके पास भाग गइ तब देवायत मुस्कराने लगा ओर देखातो उनका लंड खडा होके पेन्टमे तंबु बनाने लगा ओर देवायतने पेन्टमे हाथ डालके लंडको अ‍ेडजेस्ट कीया.. मानो अभी अभी उसने अपनी बहेनसे नही अपनी मासुकासे बात कीहो.. ओर वो मासुका जो खुदकी बहेन थी तो यही सोचते देवायत रोमांचीत होने लगा.. तब चंदा ओर पुनम ओटी के बार बेठीथी.. ओर हस हसके आपसमें बाते कर रही थी..

भानु : (जटसे पास आते) भाइ क्या हुआ.. क्यु दोड पडे..

देवायत : अरे कुछ नही वो मंजुको लेबर पेइन हुआ तो पुनो गभरा गइथी.. चल कुछ नही हे..

भानु : (सरारतसे) भाइ नइ भाभीतो बहुत खुस हो रही हे.. जाके मीललो मे भावुके पास होके आता हु..

देवायत : (हसते) कमीना तु नही सुधरेगा.. आनेदे तेरी मामीको फीर कहेता हु.. हें..हें..हें..

भानु : (हसते धीरेसे) भाइ कुछ गडबड मत करना इधर कीसीको मालुम नही हे..हें..हें..हें..

कहेते भानु रुममे चला गया तब सरला बच्चेको सही कर रहीथी जेसेही भावनाकी नजर भानुके उपर गइ उसने फोरन अपना मुह बीगाडते दुसरी ओर घुमा लीया.. जेसे वो भानुका चहेरा देखना नही चाहती.. तब भानुभी चीडके वही बेठ गया.. तब बच्चेको ठीक करते सरलाभी बहार चंदाके पास चली गइ तब भानुको भावनासे बात करनेका मौका मील गया ओर भावनाके पास जाके बैठ गया ओर धीरेसे बात करने लगा..

भानु : भावु तेरी प्रोबलेम क्या हे? क्यु मुजसे नाराज हे..? मेने कुछ कीया हे क्या..?

भावना : (धीरेसे) नही मुजसे आपसे बात नही करनी.. आप चले जाओ.. मेरीतो कीस्मतही खराब हे..

भानु : अ‍ैसा क्यु बोल रहीहे क्या कीया हे मेने जो मुजसे नाराज हे.. बता.. तुजे बच्चेकी कसम हे..

भावना : (गुस्सेसे) कुछतो सरम करो अभी बच्चीको आये ६ घंटेभी नही हुअ‍े ओर तुम इनकी कसम खा रहेहो सरमभी नही आती.. कसम खानीहे तो अपनी मामीकी खाओ.. इस बच्चीने तुम्हारा क्या बीगाडा हे..

भानु : (गभराते गांड फट गइ) कककक्या.. कहेना चाहती हे.. साफ साफ कहो..

भावना : (भानुके सामने देखते धीरेसे) अच्छा..? साफ साफ सुनना हे.. तो सुनो.. उस रात मेने तुम दोनोको देख लीयाथा कीचनमे रासलीला करते.. पता नही कीतने दीनोसे तुम दोनोका चकर चल रहा हे.. पहेले पता होता तो तुमसे सादी ओर बच्चेही नही करती.. तभी छोड देती.. बोलो ओर क्या सुनना हे.. आगे बोलु..?

भानु : (सोकट होके गभरा गया) ककक्या.. बकती हो..? अ‍ैसा कुछ नही हे.. पुछलो देवुसे..

भावना : इसमे जीजुसे क्या पुछु..? उसे क्यु बीचमें लाते हो, मेने खुद अपनी आंखोसे देखा हे..

भानु : (गहेरी सांस लेते) देख भावु इस बारेमे हम घर जाके फुरसतमे बात करेगे मेने देवुसे सब केहदीया हे वोही तुमसे बात करेगा.. प्लीज मुजसे नाराज मत हो.., मेरीभी कुछ मजबुरीया थी..

भावना : (थोडी सांत होते) तुम क्या बात करोगे अबतो मे खुद जीजुसे बात करुगी.. उनको पता था तो फीर मेरी सादी क्यु करवाइ..? आप जाओ मे जीजीुसे बात कर लुगी फीर कोइ डीसीजन लुगी..

तब भानु चीडके बहार चला जाता हे तभी डो.सृती हसते हुअ‍े खेक बच्चेको लेके बहार आती हे ओर चंदाको दीखाने लगती हे तो चंदा ओर पुनम बहुत खुस होते बच्चेको छुने लगती हे तभी सृतीका ध्यान देवायतकी ओर जाता हे तो बच्चेको लेकर देवायतके पास आती हे ओर धीरेसे देवायतको कहेती हे..

डो.सृती : (कातील स्माइल करते) जीजु.. देखो आपका बच्चा.. लगता हे आपहीके उपर गया हे.. कुछ मीठाल बीठाइ मंगवालो..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते बच्चेको प्यार देते) अरे स्योर.. मीठाइ क्यु आपकोतो स्पेसीयल पार्टी दुगा..

डो.सृती : (खुस होते कातील नजरोसे) स्योर जरुर लुगी.. देखना फीर मुकर मत जाना.. अबतो पार्टी ही लुगी.. ओर वोभी स्पेसीयल.. हें..हें..हें..

फीर सृती बच्चेको लेकर अंदर चली गइ ओर नर्सको देदीया तो नर्स बच्चेको सही करने अंदर चली गइ तब सृती मंजुके पैरके बीच आगइ ओर सही करने लगी फीर मंजुके पास आके धीरेसे बात करने लगी..

डो.सृती : (धीरेसे) मंजु तुने बच्चेको देखा..? मेने इतनी डीलीवरी कीहे.. लेकीन इनका पेनीस कुछ ज्यादा ही बडा हे.. ओर तेरी नीचेकी येभी काफी खुली हुइ हे.. क्या तुम दोनो ज्यादा सेक्स करते हो..? ओर वो भावुकी तो अभीभी कुआरी लडकीकी तराह दीखती हे..

मंजुला : (सरमाते हसते) सृती.. तेरे जीजुका कुछ जरुरतसे ज्यादा बडा ओर मोटा हे.. इन्हीका बच्चा हे तो इनकाभी बडाही होगानां.. ओर तेरे जीजु मुजसे प्यारभीतो बहुत करते हे.. बस मौका मीला नही.. ओर..हें..हे..हें..

डो.सृती : (हसते) क्या..? जीजु इतना रोमांटीक हे..? हें..हें..हें.. दीखनेमे तो कीतने भोले भाले लगते हे.. तुमने बहोत गलत कीया.. इतना मस्त पती मीलाहे तो क्या जरुरतथी बच्चेकी इनके साथ जीके मजे करती..

मंजुला : नही सृती.. ये बात तु नही समजेगी.. कुछ बाते तेरे सबजेक्टके बहारकी हे.. मुजे इनका वारीस देके जाना होगा.. तभीतो मे वापस आसकुगी.., ये बात तु नही समजेगी.. इस बारेमे हम फीर कभी बात करेगे.. तुजे जानना हेतो आजाना.. सीर्फ तुमसेही कहुगी.. जो मेने आज तक कीसीको नही बताया..

डो.सृती : (आस्चर्यसे देखते) मंजुउउउ.., तु ये क्या बोल रहीहे..? मेरी तो कुछ समजमे नही आया.., ओर अ‍ैसा क्यु कहा की बात मेरे सबजेक्टके बहारकी हे.., ओर तु क्या जानती हे मुजे सब जानना हे.. बोल कब आउ..?

मंजुला : सृती मे जब कहु तब तु मेरे घर आजाना या फीर मे तेरे वहा आजाउगी.. ओर तुजे अ‍ेक बाबासे मीलवाउगी.. सीर्फ हम दोनोही जायेगे.. तब तुजे सब पता चल जायेगा..

डो.सृती : ठीक हे अभी तु ठीक होजा मे तुजे कहुगी तब तु मेरे घर आजाना मेरी गाडी लेके हम दोनो चले जायेगे.., तुतो बडीही रहस्यमय बाते कर रही हे.. मुजेभी सब जानना हे.. माजरा क्या हे..

मंजुला : (हसते) सृती.. सुन.. बहारजो ओरत हे.. मेरी मौसी हे मे ही इनकी सादी तेरे जीजुसे करवा रही हु.. वो अ‍ेक विधवा हे.. तेरी ही तराह मेरी खास सहेली भी हे..

डो.सृती : (जोरोसे आस्चर्यसे हसते) क्या..? यानी तेरी सौतन हे..? क्या जीजुको पता हे..?

मंजुला : (सरमाते हसते) हां.. कीतने पापड बेले तभी दोनो माने.. वो सब तुजे बादमे बताउगी.. क्या नीचे सब सही करदीया..? बाबा ठीकसे करना.. तेरे जीजुको मजा आना चाहीये, हें..हें..हें..

डो.सृती : (जोरोसे हसते) कीतनी कमीनी हो.. अभीभी मजा करना हे.. क्या जीजीुका इतना बडा हेतो तु जेल पाती हो..? कुछ होता नही..? उनकातो नामके बराबर था.. तभीतो मेने उनको छोड दीया.. तु बडी नसीब वाली हे जो तुजे अ‍ेसा पती मीला..

मंजुला : (सरमाते) सब आजही पुछ लेगी क्या.. तुजे सब बताउगी.. पर अभी नही.. क्युकी मुजे तुमको ये सब बताना जरुरी हे, क्यु जरुरी हे..? वो सब तुजे बादमे पता चल जायेगा.. बस इतना जानले तुभी नसीब वाली हे ओर हम सबकी जींदगीका हीस्सा हे..

डो.सृती : (हसते) क्या मेभी नसीब वाली हु? क्या मतलब हे तेरा..? तु बहोत डेन्जर हे.. ठीक हे.. बाबा तुनेतो अभीसे मुजे टेन्शनमे डाल दीया.. चल रुममे नही जाना क्या..?

फीर मंजुकोभी अपने रुममे सीफ्ट कर दीया, ओर बच्चेको उनके पास सुला दीया तो पुनम उनके साथ खेलने लगी तो चंदाभी वही बेठते सब देखती रही ओर हसती रही.. तब भानु देवायतको इसारा करते बहार लेजाता हे.. क्युकी भानु भावु ओर उनके बीच जोभी बाते हुइ सब बाते बताना चाहता हे.. तभी डो.सृती देवायतको अपनी ओफीसमे बुलाती हे.. तो देवायत भानुको छोडके सृतीकी ओफीसमे चला जाता हे तब....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ४१

फीर मंजुकोभी अपने रुममे सीफ्ट कर दीया, ओर बच्चेको उनके पास सुला दीया तो पुनम उनके साथ खेलने लगी तो चंदाभी वही बेठते सब देखती रही ओर हसती रही.. तब भानु देवायतको इसारा करते बहार लेजाता हे.. क्युकी भानु भावु ओर उनके बीच जोभी बाते हुइ सब बाते बताना चाहता हे.. तभी डो.सृती देवायतको अपनी ओफीसमे बुलाती हे.. तो देवायत भानुको छोडके सृतीकी ओफीसमे चला जाता हे तब....अब आगे

डो.सृतीको मंजुकी कही बाते याद आतीहे ओर वो देवायतके पेन्टको तीरछी नजरसे देख लेतीहे की वाकइ मंजु केह रहीहे अ‍ैसा हे.. तो पेन्टके उपर बहुत बडा उभार नजर आता हे तब सृती सोक्ट होके देखती रहेती हे ओर जटसे नजर हटाते देवायतको सामनेकी चेरमे बेठनेको कहेती हे.. तब देवायत उसे देखता हे..

डो.सृती : (सीरीयस होते) जीजु आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे..

देवायत : सृती क्या कोइ सीरीयस मेटर हे..?

डो.सृती : अरे नही नही.. इतनीभी नही हे.., बस यही कहेनाथा की डीलीवरीमे मंजुको कुछ जरुरतसे ज्यादा खुन बेह गया हे.. ओर अभी दुसरा खुनभी नही चडा सकते अगर खुनमे कोइ इन्फेक्शन होगातो बच्चेपे असर हो सकता हे.. क्युकी वो दुध पीयेगाना.. बस वोही बताना हे मे कुछ दवाइ देती हु.. ओर अभी उनके खाने पीनेका ध्यान रखीयेगा.. बाकी कुछ नही.. ओर हां.. उनको रेग्युलर चेकअपके लीये आना पडेगा..

देवायत : ठीक हे.., सृती मेरी मंजुने बच्चेकी बहुत बडी गलती करदी हे मे उनको खोना नही चाहता, तुमतो उनकी सहेली हो क्या तुमने उसे रोका नही..? मुजे सच बताना मेरी मंजुके पास कीतना वक्त हे..? क्या अपनी रुटीन लाइफ जी सकेगी..?

डो.सृती : हां जीजु.. वेसे इनकी लाइफमे कुछ फर्क नही पडेगा.. ओर मेरा यकीन मानीये मेने उसे बहुत मना कीयाथा लेकीन वो कीतनी जीदी हे वोतो आपकोभी पता हे, बाकी वक्तका मे कुछ नही केह सकती.., (हसते) वेसे आपकी बडी तारीफ करती हे.. कभी इनके साथ घरतो आइअ‍े..

देवायत : (हसते) अरे आप कहा हमे बुलाती हे.. , हमतो कबसे आपके घर आना चाहते हे.. मुजे लगता हे वो डर रहीहे कही मेरी सहेलीको पटालीया तो.., हें..हें..हें..

डो.सृती : (सरमाती हसते) वेरी फनी.., मे इतनी आसानीसे फसने वाली नही हु.. हें..हें..हें.. वेसे आपका नंबर हे मेरे पास.. (अपना नंबर लीखके देते) ये लीजीये मेरा नंबर पर्सनल हे सीर्फ आपको दे रही हु कभी बात करलीया करो.. क्या पता मे पट भी जाउ.. हें..हें..हें..

कहेते सृतीने अपना पर्सनल नंबर देवायतको देदीया ओर देवायत हसते हुअ‍े खडे होगया तो सृतीकी नजर अ‍ेक बार फीर देवायतके पेन्टकी ओर चली गइ तो इस बार देवायतके पेन्टमे उभार दीखने लगा पेन्टमे तंबु बन गयाथा जीसे देखते ही सृती सर्मसार होते मुस्कराती रही.. ओर उनकी चुतभी पानी छोडने लगी..तो वो जटसे अपने बाथरुममे घुस गइ.. फीर देवायतभी बहार नीकल गया ओर भानुको लेके बहार चला गया तब भानु थोडा टेन्शनमे लग रहाथा..

देवायत : अब क्या हुआ..? क्यु मुह लटकाया हे कही मेरी सालीने डांटतो नही दीया.. हें..हें..हें..

भानु : (मायुस होते) कुछ नही यार वो भावुको मेरी ओर मामीकी बात पता चल गइ.. तो मुजसे नही बोलती.. मुजे छोडनेकी बात कर रही हे.. अब तुही समजा उसे.. वरना सब गडबड होजायेगी..

देवायत : (हसते) ठीक हे मे बात कर लुगा.. वेसे उनको सब मालुम केसे पडा..?

भानु : (सरमाते हसते) भाइ वो मामी आइथीना सगाइमे.. बस उसी रात हम कीचममे मीलेथे.. तो भावुने देख लीया होगा.. अ‍ेसा वो केह रही थी.., मेतो फस गया हु यार.. अब मामीकोभी तो नही छोड सकता..

देवायत : यार सब सही होजायेगा बस अ‍ेक बार मे भावुसे बात करलु.. उसे मना लुगा.. ओर मेरी बात मान लेगी मुजे भरोसा हे.. तु टेन्शन मत ले.. अब खानेका कुछ कर कीतने बजे हे पताही नही..

भानु : (घडीमे देखते) ओ बापरे १ बज गया.. चलो चलो खाना लेके जाते हे सब भुखे होगे.. क्या भाभी ओर भावुको भी यही खाना देना हे..?

देवायत : हां.. उनके लीये सब सादा खानाही लेना दाल चावल.. वगैरे.. तुम लेकेआ मे अंदर जाता हु..

कहेते देवायत अंदर जाने लगा ओर भानु सबके लीये खाना लेने होटेलमे चला गया.. जेसेही देवायत आया तब मंजु बच्चेको दुध पीला रहीथी तो देखके सरमाने लगी ओर मुस्कराने लगी.. तो दुसरी ओर भावुभी करवट लेते अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. पुनम बेठी देख रही थी.. उनकोतो पताही नहीथा की देवायत अंदर आगया हे तब चंदाभी हसते देवायतको लेके बहार चली गइ.. ओर दोनो अ‍ेक बेंचपे बैठ गये..

चंदा : (धीरेसे हसते) इधर बैठीये मेरे पास.. दोनो दुध पीला रही हे सरमा जायेगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (धीरेसे कानमे) अ‍ेक दीन आपभी अ‍ेसेही हमारे बच्चेको दुध पीला रही होगी.., हें..हें..हें..

चंदा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते देवायतके कंधेपे मुका मारते) धत् आप बहुत गंदे हो.. क्या इतनी जल्दी हे..?

देवायत : (हसते) नही चंदा मेतो मजाक कर रहा हु.. आइ लव यु बेबी..

चंदा : (सरमाते हसते धीरेसे) आइ लव यु टु.. मेरे जानुको भुख नही लगी क्या..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) बस भानु लेने गया हे.., इधर कब तक रुकना हे..?

चंदा : पता नही.. कमसे कम आजके दीनतो रोक लेगे.., जानु आपसे अ‍ेक बात कहेनी हे..

देवायत : हां बोल बेबी.. क्या बात हे..

चंदा : देवु आजसे धिरेनकी नोकरी लग गइ हे वो अब हर दिन अपडाउन करेगा तो उनकी सादी तक मुजे वही रहेना पडेगा.. वरना उनके खानेकी प्रोबलेम होगी तो मे सोच रहीहु कुछ दीन मंजुको मे मेरे घरही लेजाउ.. वहा उनकी अच्छेसे देखभाल कर सकुगी.. बच्चा अ‍ेकाद महीना बडा होजाये फीर भलेही तुम्हारे यहा आजाये..

देवायत : ठीक हे.. वहाभी वो चंपाभाभी चारुभाभी हेतो दीकत नही हे.. तबतक तो मंजुभी ठीक होजायेगी..

चंदा : (धीरेसे सरमाते) जानु.. बस अ‍ेक महीना नीकालना हे.. फीर मे आपके पास आजाउगी.. अब आपके बीना नही रहा जाता.., पता नही आपके बीना ये अ‍ेक महीना नीकलेगा की नही.. क्या वहा मीलनेतो आओगेनां..?

देवायत : (हसते) हां.. मेरी दोनो बीवीया वहा होगी.. आनातो पडेगानां.. क्या मुजे वहा मीलोगी..?

चंदा : (अ‍ेकदम सरमाते धीरेसे) हां आओतो सही हम कुछ जुगाड कर लेगे.., उस दीन मेरी हालत खराब कर दीथी.. दोदीन ठीकसे नही चल पाइ.., जानु मुजे लगता हे हमारे मीलनके बारेमे धिरेनको पता चल गया हे.. कुछ बोला नही.. मुजेतो बहोत सरम आइथी.. अबतो उनकी बातोसे लगता हे वो खुद चाहता हे मे आपके पास आजाउ.. बस इनकी सादी होजाये.. फीर हम खुलके प्यार कर सकेगे..

पुनम : (बहार आते हसते) अरे आप दोनो इधर हो..? भाइ भुख नही लगी क्या.. पेटमे चुहे दोड रहे हे..

देवायत : (हसते) बस भानु आताही होगा.. खाना लेनेही गया हे.. लो.. आगया..

तीनोही दरवाजेकी ओर देखने लगेतो भानु खाना पार्सल करवाके आ रहाथा.. तो सब खडे होगये ओर रुममे चले गये.. तब सरलाने अपनी थेलीसे कुछ पेपर डीस नीकाले तो सबके चहेरेपे स्माइल आगइ क्युकी चंदानेतो अ‍ैसा कुछ लीयाही नही था फीर सब अ‍ेकठे बैठ गये ओर सरला चंदा सबको खानेको देने लगी.. तो सब खाना खाते बाते करने लगे अब इधर कुछ काम नहीथा तो सरला सबको जानेको केह रहीथी..

सरला : भानु अबतो सब अच्छेसे होगया ओर चारोकी तबीयतभी ठीक हे तो तुम लोगोको यही रुकनेकी जरुरत नही हे मे ओर चंदाबेटी इधर हे.. तो बाकी सब जाओ.. कल छुटी देगेतो फोन कर देगे..

भानु : माइ अ‍ेक आदमीतो इधर चाहीये.. रातको कुछ जरुरत पडीतो कहा वहासे दोडके आये.. मे रुकता हु.. देवु ओर पुनमको जाना हेतो चले जाये..

मंजुला : (धीरेसे) हां देवु तुम ओर पुनम चले जाओ.. वेसे भी भानुभाइतो इधर हे..

चंदा : मौसी मे मंजुको कल सीधे मेरे घरही लेजा रही हु.. ओर भावु तुजेभी चलना होतो चल मे दोनोका खयाल रखुगी..

सरला : नही चंदा बीटीया मे हुनां.. वहाभी मुजे कहा पथ्थर तोडने हे.. मेही बहु का खयाल रखुगी.. तुम मंजु बेटीको लेजाना.. वेसेभी इस कामके लीये पुनम अभी छोटी हे.. तो तुजेही खयाल रखना पडेगा..

चंदा : मौसी वो धिरेनकी आजही नोकरी लगी हे तो उनकोभी खानेमे प्रोबलेम नही होगी ओर मंजुकाभी खयाल रख लुगी.. अ‍ेक महीनेमे तो मंजुभी ठीक होजायेगी कुछ घुमफीर सकेगी.. फीर इधर चली आयेगी..

पुनम : (खाते हसते) तबतो मम्मी मुजे मेरे भतीजेको मीलने उधर आना पडेगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरारतसे हसते) तो चली आना वेसेभी तेरा ससुराल ही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) क्या भाभी.. नही आना मुजे.. यही रहुगी भैयाका खयाल रखुगी.., क्यु भैया..?

देवायत : (हसते) अरे नही वो मजाक कर रही हे.. तुजे जाना हो तब बोलना.. मे तुजे ले चलुगा..

पुनम : (खुस होते) थेन्कयु भाइ..

इधर सब खाना खाते बाते कर रहेथे तब भानुके गांवमे भी लता खाना बना रहीथी ओर लखन भावेशके साथ खेल रहाथा तब लता उनको देखके खुस हो रहीथी.. जब खाना बन गया तो खाना लेके लता बहार आगइ ओर दो थाली लेकेभी आइ जब खाना नीकालने लगीतो लखनने लताको रोक लीया.. लता अ‍ेक नजरसे लखनकी ओर देखती रही तभी लखनने उसे मुस्कराते कहा..

लखन : हम दोनोका खाना अ‍ेकही थालीमे नीकालो.. आज दोनो साथ खायेगे..

लता : (राहतकी सांस लेते हसते) तबतो ठीक हे बाबा मेतो समजी अब वापस क्या हुआ..?हें..हें..हें..

फीर दोनो अ‍ेकही थालीमे खाने लगतेहे तभी लखन अ‍ेक नीवाला लताके मुहके पास रख देताहे तो लता सरमाते अपना मुह खोलती हे ओर लखन उसे खीला देता हे तो लताभी लखनको खीलाने लगती हे दोनोही प्यारकी बाते करते खाना खा रहेथे इसी बीच खासा टाइम नीकल गया तो लताकी चुतमे दर्द काफी कम होगया था तब लताको अ‍ेक बार फीरसे चुतमे खुजली होने लगी ओर चुदाइकी इच्छा बढने लगी..

लेकीन अपने चहेरेपे जाहीर नही होने दीया आज उसे लखनका साथ बहुतही अच्छा लग रहाथा.. फीर दोनोने खाना खालीया.. तो लखन वही भावेशके साथ खेलने लगा तबतक लताने सब काम नीपटा लीया ओर भावेशको लेके अपने रुममे चली गइ ओर भावेशको जुलेके डालके जुला जुलाने लगी तब लखनभी लतासे चीपकके बाहोमे भरते बेठ गया तब लता सरमाती हसती रही ओर भावेसको जुला जुलाती रही..

लखन : (खडा होते) अब मे चलु..?

लता : (अ‍ेकदम सरमाते मुस्कराते) जाना हे..? बैठोना.. अभी भावेश सो जायेगा.. सामको चले जाना..

लखन : (हसते) नही तुजे दर्द हेना..? तो फीर आराम करले.. फीर कभी आजाउगा..

लता : (सरमाते) नही.. दर्द कम होगया हे.. देखो भावेशभी सो रहा हे हम दोनो यही आराम करते हेना.. आप दरवाजा बंध करलो.. यही सोयेगे..

लखन : (दरवाजा बंध करते) मुने जाने दीया होता.. वही भाइके गोडाउनमे ओफीसमे आराम कर लेता..

लता : (सरमाते धीरेसे) सामको चले जाइयेनां.. देखो भावेश सोगया हे आप यही सोजाओ.., (अ‍ेकदम सरमाते धीरेसे) मन नही हे क्या..?

लखन : (सरमाते धीरेसे) हे.., लेकीन तुजे दर्द हेनां..?

लता : (सरमाते) दर्द कम होगया हे.. आप धीरे धीरे करना.. अब खुनतो नही नीकलेगा..?

लखन : (हसते) नही.. सीर्फ अ‍ेकही बार नीकलता हे.. पहेली बार.. अब नही नीकलेगा..

लता : (सरमाते) वो..वो..बच्चातो नही ठहेरेगा..? आप पानी अंदर छोडते होनां..

लखन : (जेबसे गोली नीकालते) नही मे गोली लेके आया हु.. ये दर्दकी हे.., ओर ये ले.. सामको खा लेना.. इनसे बच्चा नही ठहेरता.. आइपीलकी गोली हे.. ओर ये दर्द हो तभी लेना.., अभी हे..?

लता : (गोली लेते सरमाते नामे गरदन हीलाते) नही.. पानीके साथ लेनी हे..?

लखन : हां.., (थोडी देर रुकते धीरेस) तो.. सोना हे.. कपडे नीकालदु.. खराब होजायेगे..

कहेते लखन लताके पास आगया तो लता जटसे बेडसे उतरके खडी होगइ ओर लखनने उनके गलेमे हाथ डालके खीचलीया ओर अपने होंठ लताके होंठसे मीला दीये.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमने लगे तब लता मदहोसी मे छाने लगी.. ओर लखन उनके बुब्स टीसर्टके उपरसेही मसलने लगा ओर लता कामातुर होने लगी.. वो अपनी सब सर्म हया त्यागके लखनका साथ देने लगी..




तभी लखन अपने सब कपडे नीकालने लगता हे तो लता उसे सरमाते देखती रहेती हे फीर वोभी धीरे धीरे सरमाते अपना टीसर्ट ओर लहेंगा नीकालने लगी दोनोही फीरसे नंगे होगये तब लखन लताका हाथ पकडके बेडकी ओर लेजाता हे ओर बेडपे बेठते लताको अपनी गोदमे बीठा लेता हे ओर पीछेसेही लखन लताके बुब्स मसलते अ‍ेक हाथ लताकी पेन्टीमे घुसा देता हे.. फीर चुतको सहेलाते अ‍ेक उंगली चुतमे घुसा देता हे.. तब लता मदहोसीमे कामातुर होगइ.. ओर लखनके पैरको सहेलाने लगी..




लखन : (चुत सहेलाते) लता.. मजा आ रहा हे..? दर्दतो नही..? हंममम..

लता : (आंख बंध करते मदहोसीमे) ननननहीहीही.. हा.हाहाहा.. बहुत मजाजाजा आआरररहाहाहाहेहेहे..

लखन : (धीरेसे कानमे) चुदाइ करनी हे..? हंमम.. बोलना.. तुजे.. चोदलु..

लता : (मदहोसीमे) हंमम हहाहाहाहा.. चोदलो.. डाआआाललललदोदोदोनां..ससससीसीसीइइइइइइ

तभी लखन हाथ नीकालके लताको धीरेसे बेडपे सुला देता हे ओर खुदभी उनके उपर चडजाता हे ओर दोनोके होंठ मील गये इस बार दोनो मुह खोलके अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. अ‍ेक बार चुदाइ कर लेनेसे दोनोको फोरप्लेका काफी अ‍ेक्स्पीरीन्स होचुका था..दोनोही अपने अपने तरीकेसे अ‍ेक दुसरेके साथ मजा ले रहेथे.. लखन बारी बारी लताके बुब्स तो कभी उनकी गरदन तो कभी उनकी आंखोमे चुमता रहेता था.. आखीर लखन लताके पेरके पास बैठ गया ओर उनकी पेन्टी खीचके नीकालने लगा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ४२

तभी लखन हाथ नीकालके लताको धीरेसे बेडपे सुला देता हे ओर खुदभी उनके उपर चडजाता हे ओर दोनोके होंठ मील गये इस बार दोनो मुह खोलके अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीने लगे.. अ‍ेक बार चुदाइ कर लेनेसे दोनोको फोरप्लेका काफी अ‍ेक्स्पीरीन्स होचुका था..दोनोही अपने अपने तरीकेसे अ‍ेक दुसरेके साथ मजा ले रहेथे.. लखन बारी बारी लताके बुब्स तो कभी उनकी गरदन तो कभी उनकी आंखोमे चुमता रहेता था.. आखीर लखन लताके पेरके पास बैठ गया ओर उनकी पेन्टी खीचके नीकालने लगा....अब आगे




जब पेन्टी नीकालदी तब वो फीरसे लताके उपर छागया तो लतानेभी लखनको कसके बाहोमे भीच लीया ओर उनके होंठ चुमने लगी तबतक लखनका लंड तनके जटके मार रहाथा जो लताकी चुतपे दस्तक देने लगा ओर अपने बीलमे घुसनेका रास्ता ढुंढने लगा.. तभी लताने अ‍ेक हाथ नीचे सरका दीया ओर लंडपे हाथ रखके अपनी चुतके लव होलमे पुस करदीया.. ओर लंडको अपनी चुतका रास्ता दीखा दीया तब लखनने कमरको नीचेकी ओर पुस करते लंड लताकी चुतमे उतार दीया.. तो लताकी हल्की चीख नीकल गइ.. ओर वो सरमसे मुह इधर उधर घुमाती रही..ओर वासनाकी आगमे जलने लगी..




तभी लताने लखनको बाहोमे भरते अपने तनसे चीपकालीया ओर अपने दोनो हाथ लखनके नीतंबपे रखदीया ओर खुद अपनी चुतपे दबाव बनाते लखनको चोदनेमे मदद करने लगी लखन पुरी तराह लतापे छागया ओर अपना सर लताके गेलेमे डालके चुमने लगा ओर धीरे धीरे कमर हीलाते लताको चोदने लगा तब लताभी पुरे तालमेलके साथ लखनसे चुदाइ करवाने लगी.. ओर दोनोही कामातुर होके चुदाइमे मसयुल होगये..




दोनोही अ‍ैसे चुदाइ कर रहेथे जेसे सादी करके सुहागरात मना रहेहो.. आज लताकी हर इच्छा पुरी हो रहीथी.. अ‍ेकतो अपने भाइ भानुका लंड देखाथा तो दुसरा लंड देवायतका यानी अपने जेठका जो अपनी माइकी चुदाइ करते देखलीयाथा आज तीसरा लखनका लंडभी देख लीया उसे लखनका लंडभी अपने भाइके बराबर लगा जो इस वक्त अपनी चुतकी ठुकाइ कर रहाथा.. धीरे धीरे करते दोनोही अ‍ेकदम उतेजीत हो गयेथे ओर अपनी चुदाइकी स्पीड बढा रहेथे थोडी ही देरमे दोनोके बीच धमासान चुदाइ हो रहीथी ओर लखन उछल उछलके लताकी चुतमे सोट मारते उनकी चुदाइ कर रहाथा..

अचानकही लखन अकडने लगा ओर उनका मुह लताके गलेमे डालदीया ओर उनके गलेको जोरोसे चुमने लगा तो लता समज गइ ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीचलीया तभी उसे अपनी बच्चेदानीपे लखनका गरम पानी महेसुस हुआ तो वोभी कांपते उतेजीत होके लखनके साथ जडने लगी ओर तुफानका भवंडर थम गया.. तब लखन अ‍ेसेही लताके उपर ढेर होके पडा रहा ओर लता उनकी पीठ सहेलाती रही.. तब थोडी देरके बाद लताने कहा..

लता : (धीरेसे) जानु.. अबतो नाराज नही हो..? हंममम..

लखन : (सर उचा करते लताको देखते) नही बेबी.. थेन्कयु..

लता : जानु बाथरुम जाना हे पीसाब लगीहे.. चलोगे..? बहार जाना पडेगा.. इधर नही हे..

लखन : दर्द हुआ क्या.. चलो ले चलता हु.. मेरी बीवीकी इतनीतो सेवा करनी ही हे..

कहेते लखन बेडसे उतर गया ओर लताको गोदमे उठाके बहार बाथरुममे लेजाने लगा तो लता हसते हुअ‍े लखनको देखती रही.. अब उनकी सरम जा चुकीथी दोनोही बाथरुम करते फ्रेस होगये तो लखनने फीरसे लताको अपनी गोदमे उठालीया तो लता जोरोसे हसने लगी ओर लखनकी गरदनमे दोनो हाथ डालके खुस होती रही फीर दोनोही बेडपे आगये ओर अ‍ेक दुसरेको बाहोमे चीपकके सोने लगे.. दोनो बाते करने लगे..

लखनने लताको पीछेसे बाहोमे भरलीया तब लताभी लखनकी ओर पीठ करते लखनके तनसे चीपक गइ ओर सोचती रही.. लताने जबसे जवानीके दहेलीजपे कदम रखाथा तबसे लताको अ‍ेक लंडकी सख्त जरुरत थी जो इतने दीनोके बाद उनके घरवालोनेही लखनसे सगाइ करवाके अ‍ेक लंडका इन्तजाम कर दीया था वरना अपने भाइ भानुसेही चुदइ करवा लेती.. इसीलीये लता लखनको नाराज करना नही चाहती थी..

जब लखनने नाराजगी व्यक्तकी तो लताने आगे जोभी होगा देखा जायेगा यही सब सोचते लखनको अपना कौमार्य सोंप दीया ओर लखनको पुरी समर्पीत होगइ.. ओर आज अपना सबकुछ लखनको सोंप दीया.. आजवो कलीसे फुल ओर अ‍ेक जवान लडकीसे ओरत बन गइथी.. तब लताको नही पताथा की आने वाले समयमे उनकी जींदगीमे कीतना बडा बदलाव आने वाला हे.. दोनोही साम पांच बजे तक अ‍ेक दुसरोकी बाहोमे सोते रहे..

साम पांच बजे लखनकी नींद आंख खुल गइ तब लता अभीभी इनकी बाहोमे उनसे चीपकके सोइ थी लखनने सर उचा करते इनकी ओर देखातो लता बडेही सुकुनकी नींद सो रहीथी सोते हुअ‍े लता बडीही मासुम लग रहीथी.. लखन उसे थोडी देर देखताही रहा जेसेही उनकी नजर लताके गोरे संतरे जेसे बुब्सपे गइ तो लखनका लंड अ‍ेक बार फीर जटके मारते खडा होने लगा ओर पीछेसे लताकी चुतमे दस्तक देने लगा..




तभी लताको अपनी चुतपे कुछ महेसुस होने लगातो उनकी आंख खुल गइ.. तभी उनको पता चलाकी उनकी चुतपे लखनका लंड छु रहा हे तो लताने आंख खोलके मुहको लखनकी ओर कीया ओर लखनको देखने लगी जेसेही लताका मुह लखनकी ओर हुआ लखनने उनके चहेरेको पकडते अपने होंठ लताके होंठसे मीला दीये ओर दोनोही स्मुच करने लगे तब लता फीरसे बहेकने लगी ओर लखनकी ओर करवट लेली....

लखन : (प्यारसे सरको कहेलाते) जाग गइ..? हंममम..?

लता : (स्रमाते मुस्कराते) हंममम.., सोये नही..? भावेश जगा था क्या..?

लखन : (सर चुमते) सो गयाथा.., नही जगा..भावेश.. सो रहा हे..

लता : उठना हे..? कीतने बजे..? चाइ बना दु..?

लखन : (हसते) पांच बजे हे.. अभी थोडी देर सोनां.. तेरे साथ सोनेमे बहुत अच्छा लग रहा हे..

लता : (सरमाते हसते) तो सादी करलो मुजसे.. फीर सोते रहेना.. मुजेभी आपके साथ सोनेमे मजा आता हे..

लखन : (सरमाते धीरेसे) लता अ‍ेक बार करलु.. हंम..? बहुत इच्छा हो रहीहे..

लता : (सर्मसार होते धीरेसे) नही.. साम होगइ हे.. कोइ आयेगा तो..? बहुत मन हे क्या..?

लखन : हंममम.., फीर जानाभी हे.. रातको भानुभाइ आयेगेनां..?

लता : (सरमाते) नही पता.. कुछ कहा नही.., नही आयेगे तो रुकजाइअ‍ेगा.. रातमे अकेली हु..

लखन : फोन करके पुछलो.. भाइतो आयेगे.. पुनमभी साथ गइ हे..

लता : (हसते) मे पुनमदीदीसे बात करलु..? मुजसे बहुत पटती हे..

लखन : (गभराते) नही.. उनको मत कहेना मे इधर आया हु.. गडबड हो जायेगी..

लता : (सरमाते हसते) अरे नही.. अ‍ैसा थोडीनां कहुगी.. मुजेभी जवाब देना पडेगा.. बस मे कुछ ओर पुछ लुगी.. आप कुछ मत बोलना..

कहेते लताने वही पडा अपना फोन उठालीया ओर लखनको चुप रहेनेका इसारा कीया ओर पुनमको फोन लगाने लगी तो लखन धीरेसे लताके बुब्सपे हाथ रखके उनको मसलने लगता हे.. तो लता सीसकारीया करते लखनके हाथको हटानेकी कोसीस करती रही.. ओर पुनमको फोन लग गया..

लता : ((लखनका हाथ हटाते धीरेसे) हेलो पुनमदीदी कैसी हो..? क्या मंजुभाभीका कुछ हुआ..?

पुनम : (खुस होते थोडी दुर जाके बात करते) अरे लताभाभी.. कैसी हो..? हां.. भाभीको लडका हुआ हे..

लता : (खुस होते हसते) अच्छा.. तबतो बडे भैयाको कहेना मीठाइयातो बनती ही हे.., कैसी हे दोनोकी तबीयत..? ओर भाभी मेरी भतीजी..भावुभाभी.. सब.. ठीक हेनां..?

पुनम : (हसते) अरे चारो मस्त हे.. क्या आप वहा अकेली हो..? लखनभाभइको भेजु..? हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) धत् आप बहुतही सरारती हो.., क्या आप वहा धिरेनभाइको लेगइ हे.., हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाके हसते धीरेसे) नही.. सब सादीके बाद.. तु बता.. लखनभाइको मीलना हे..?

लता : (सरमाते हसते) नही.. अभी नही.. आपको बोल दुगी.., वेसे दीदी क्या भाइ ओर माइ उधर हे.. मतलब वो वहा रुकने वाले हे..? वो मुजे खाना बनाना था तो पुछ लीया.. आपभी रुक रहेहो..?

पुनम : (धीरेसे) नही मे ओर भाइ अभी नीकलते हे.. ओर सुन भाभी.., इधर भानुभाइ ओर मौसी मेरी सांस तीनो इधरही रुकेगे.. मेरी मान आज अच्छा मौका हे.. मे लखनभाइको भेजदु..? वेसेभी रातमे आप अकेली होगी.. अपने होने वाले पतीसे मील लेना..

लता : (बुरी तराह सरमाते) नही दीदी.. कीसीको पता चल गया तो..?

पुनम : (धीरेसे जटसे) अरे कीसीको पता नही चलेगा.. मे बडेभाइको समजा दुगी भानुभाइ खेतमे नही हे तो लखनभाइ वही रुकेहे मे समजा दुगी तु चीन्ता मत कर.. अच्छा मौका हे.. जीले अपनी जींदगी.. आज अच्छा मौका हे..

लता : (सरमाते हसते) दीदी क्या आप कभी अ‍ैसे धिरेनभाइको मीली हो..? मतलब कुछ कीया..

पुनम : (धीरेसे हसते) कइ बार.. सीर्फ कीस बीस ओर कुछ नही.. ओर तुमभी ध्यान रखना अभी सीर्फ लीमीटमे बाकी सब सादीके बाद.. समज गइ..? चल फोन रख मे लखनभाइको भेजती हु.. अभी फोन करुगी.. ओर उनको बोलना सुबह जल्दी नीकल जाये.. हंमम.. चल रखती हु..

पुनम : (फोन कट करतेही सोचने लगी) की आज अच्छा मौका हे लखनभाइकोभी भेज दुगी आज हवेलीमे सीर्फ मे ओर भाइही होगे.. मुजे आजही भाइके साथ सुहागरात मनानी हे.. भाइसे सादीभी तो करनी हे.. जोभी हो मे भाइसे अभी नीकलतेही बात करती हु कुछना कुछ वो जुगाड कर लेगे.. मे भाइको बीना सादीके ही अपना कौमार्य सोपना चाहती हु.. सादीतो हम कभी भी कर सकतेहे वोभी धिरेनसे पहेले..आज मेरे पासभी भाइको अकेलेमे मीलनेका मौका हे मे इसे कीसीभी हालमे गवांना नही चाहती..

यही सब सोचते वो लखनको फोन लगा देती हे.. तो लखनका फोन बजने लगातो लखनने जटसे लताको चुप रहेनेका इसारा कीया ओर फोन उठाके पुनमसे बात करने लगा..

लखन : हां दीदी क्या हुआ कोइ फोनही नही करता.. क्या हुआ..?

पुनम : (हसते) सुन भाइ भाभीको लडका हुआ हे.., बस मे ओर भाइ अभी नीकल रहेहे.. ओर सुनो.. आज लताभाभी घरपे अकेली हे.. तो आप उनके पास चले जाना..

लखन : (सरमाते हसते) क्या पुनो तुभी.., अभी सादीसे पहेले..? मे केसे जा सकता हु..? भैयाको देखा हे..? नही दीदी मुजे नही जाना..

पुनम : (हसते) अरे सुनो.., वो वहा अकेली हे यार.. रातमे उसे अकेली छोडना ठीक नही.. आप चलेजाना मे भाइको केह दुगी लखनभाइ खैतोपे हे भानुभाइने उनको वही रुकनेको कहाथा तो खेतोपे रुके हुअ‍े हे..हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते) दीदी अगर कीसीको पता चल गयातो मेरी खैर नही..

पुनम : (हसते) भाइ अ‍ेक दम फंटुस हो कीसी ओर लडकीको कहा मीलनेको केह रही हु.. आपकीही मंगेतर हे.. चले जाओ मे सब सम्हाल लुगी.. हां.. आपभी कीसीको मत बताना ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी बस..? अबतो जाओ..

लखन : (खुस होते) थेन्कयु दीदी.. तुम कीतनी अच्छी हो.., हें..हें..हें..

पुनम : (जोरोसे हसते) चल जा जा.. मस्का मत लगा.. बेटे मेराभी टाइम आयेगा तब सब वसुल करुगी..

लखन : (हसते) ठीक हे दीदी जबभी आपको धिरेनको मीलना हो बताना.. मीलवा दुगा..

पुनम : (हसते) चल जा..जा.. मे तेरी तराह डरपोक नही हु.. मीलना होगा तो मे खुद मील लुगी.., ओर हां.. सुन वहा टाइमपे चलेजाना वो तेरा खाना वो बना रही हे.. ओर सुबह जल्दी नीकल जाना..

लखन : ठीक हे दीदी लव यु दीदी बाय..

पुनम : हंम.. लव यु टु भाइ.. बाय.. बाय..

तो लताभी सरमाती हसती रही तो लखनभी फोन कट करतेही खुसीके मारे हसने लगा ओर लताके उपर लेटते उनके होंठ चुमने लगा.. ओर बुब्सको मसलता रहा दोनोही मुह खोलते अ‍ेक दुसरेके मुहमे अपनी जीभको घुसाते अ‍ेक दुसरेके रसको पीने लगे.. तब लता कामातुर होने लगी तो लखनका लंडभी फटने लगा..




तभी लखन लताके पैरके बीच बैठ गया तो लताने अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडलीये तभी लखनने अपने हाथोसे ही लंड पकडके लताकी चुतमे घुसा दीया ओर बेठे बेठेही लताको चोदने लगा तब लता अपना हाथ चुतके पास लेजाते उसे सहेलाती रही ओर अ‍ेसेही पडी लखनसे चुदाइ करवाती रही.. लखनभी धीरे धीरे घुटनोके बल बैठे लताको सोट मारते चोदता रहा.. तब हर धके के साथ लताकी आहे नीकलती रही..




धीरे धीरे करते दोनोके बीच अ‍ेक बार फीरसे घमासान ओर कामातुर चुदाइ होने लगी.. तभी अचानक लताने लखनको अपने उपर खीचलीया ओर अपने तनसे चीपकाके लखनको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर अपने दोनो पैर उपर करते लखनकी कमरमे आंटी लगादी ओर लखनके होठोपे होठ रखके उसे लीपलोक करलीया.. तभी लखनको अपने लंडपे लताका गरम पानी बौछार करते महेसुस हुआ जो उनके पुरे लंडको भीगोके रख दीया..

तो लखनभी अपने लंडपे गरमाहटकी वजाहसे अ‍ेकदम उतेजीत होगया ओर लताको कसके बाहोमे भीचलीया ओर लताकी बच्चेदानीपे अपने पानीकी बोछार करने लगा.. ओर थोडीही देरमे दोनो जडके सांत होगये तब लखन लताके सीनेपे सर रखके ढेर होगया तबतक लता उनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही ओर दोनो अ‍ैसेही थोडी देर पडे रहे....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ४३

लखनभी अपने लंडपे गरमाहटकी वजाहसे अ‍ेकदम उतेजीत होगया ओर लताको कसके बाहोमे भीचलीया ओर लताकी बच्चेदानीपे अपने पानीकी बोछार करने लगा.. ओर थोडीही देरमे दोनो जडके सांत होगये तब लखन लताके सीनेपे सर रखके ढेर होगया तबतक लता उनकी पीठ ओर सरको सहेलाती रही ओर दोनो अ‍ैसेही थोडी देर पडे रहे....अब आगे




लता : (धीरेसे) जानु.. आजतो आपने मुजे पुरी तराह नीचोडके थकादी..

लखन : (हसते) डार्लींग अभीतो हमे पुरी रात सुहागरात मनानी हे.. तु तैयार होजा आज हम दोनोमेसे कोइ नही सोयेगे.. करना हेनां..?

लता : (सरमाते मुह दुसरी ओर करते) मुजे नही पता.. चलो उपरसे हटो खाना भी बनाना हे..

लखन : (उपरसे हटते) क्या नही पता..? अरे बाबा इसीलीयेतो इधर रुका हु.. देखना कुछ गडबड मत करना.. वरना चला जाता हु.. हें..हें..हें..

लता : (बेठते चुत साफ करते) हां चले जाना सुबह.. मे जाने दुगी तबना.. अबतो हमारी सादी होजायेतो अच्छा हे अ‍ेसे डर डरके तो नही करना पडेगा.. आप पानी बहुतही जल्दी नीकालते हो.. थोडी देर ओर करते..

लखन : (सरमाते हसते) यार आज पहेली बार हेना.. कभी नही कीया.. तो जल्दी नीकल जाता हे..

लता : (हसते बालोका जुडा बनाते) चलो कोइ बात नही धीरे धीरे सीख जाओगे..हें..हें..हें.. मेरा भीतो पहेली बार हे..

फीर दोनोही चलके बाथरुममे घुस जातेहे ओर साथमे नहाते हे.. तो दोनोही खुलके अंदर सरारत करते हे.. ओर अ‍ेक बार फीर दोनो उतेजीत होके अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलने लगते हे फीर अ‍ेक दुसरेके लंड चुतको अ‍ेक दुसरेके मुहमे लेके अ‍ेक बार फोरप्लेय करते दोनो जडके पानी नीकालते हे..




जब दोनो सांत होजाते हे फीर दोनोही बहार आके कपडे पहेन लेते हे ओर लता भावेशको लेके बहार आके सुला देती हे ओर लखन उनके साथ खेलने लगता हे तबतक लताने दोनोके लीये चाइ नास्ता बना लीया ओर दोनोने साथमे चाइ नास्ता खालीया..

इधर होस्पीटलमे साम पांच बजे सब भावु मंजुके रुममे बेठे थे.. पुनक मंजुके बच्चेके साथ खेल रहीथी तो मंजु ओर चंदा आपसमे धीरे धीरे बात कर रहीथी तब भावना ओर उनकी बच्ची अभी सो रहीथी भानु ओर देवायत आपसमे बात कर रहेथे तब सरला देवायतसे बात करना चाहती थी लेकीन उसे देवायतसे अकेलेमे बात करनेका मौका नही मील रहाथा तो सबकी नजर बचाते देवायतके सामने देखते कुछ इसारा कर रही थी तब देवायतभी भानुसे बात करते सरलाकी ओर नजर करलेता था ओर सरलाके इसारोको समजनेकी कोसीस कर रहाथा..

तभी पुनमके फोनपे लताकी रींग आगइ तो वो बात करते बहार चली गइ.. भानुभी सबके लीये चाइ नास्ता लेने चला गया.. तो मौका देखते सरलाने देवायतको बहार आनेका इसारा कर दीया ओर वो उठके बहार चली गइ तब देवायतभी धीरेसे उठके बहार चला गया.. ओर सरलाके पास जाके बेठ गया.. तब पुनम होस्पीटलके आंगनमे खडी रहेके लतासे बात कर रहीथी..

देवायत : (हसते धीरेसे) कहो मौसी केसे याद कीया..? हें..हें..हें..

सरला : (देवायतकी जांगपे अ‍ेक चपत लगाते धीरेसे) मौसीके बच्चे.. कबसे इसारा कर रहीहु समजमे नही आता..? ओर अकेले हे तब नामसे नही बुला सकता..? बडा आया मौसी वाला.. जब उपर चड जाता हे तबतो सरला सरला ओर डार्लींग डार्लींग करता हे..

देवायत : (हसते) चलो ठीक हे बोल सरला डार्लींग क्या काम था..? कुछ कहेना था..? हें..हें..हें..

सरला : (हसते) हां.. अब ठीक हे.. सुन.. हमे मीले बहोत टाइम होगया.. क्या मुजसे मीलने नही आ सकता.. अबतो कही बहारही जुगाड करना पडेगा.. घरपेतो मौकाही नही मीलता तुम कुछ करोनां.. कहोतो हवेलीपे आजाउ..? वेसेभी मंजु बेटी चंदाके घर जा रही हे.. अ‍ेक दीन लता इनको(भावनाको) सम्हाल लेगी..

देवायत : ठीक हे जब मे कहु तब आजाना.. वेसे मुजे आपसे कुछ बातभी करनी हे.. अकेलेमे..

सरला : (हसते धीरेसे) तबतो मुजे वहा आनेकी क्या जरुरत हे मेरे रुममेही चले आना.. सबको केह दुगी कुछ व्यावारीक बात करनी हे.. अबतो तुम कभीभी आ सकते हो सीधे मेरे रुममे आजाना.. वेसे कीस बारेमे बात करनी हे..?

देवायत : वो मामीके बारेमे.. बस अभी ये बातका कीसीसे जीक्र मत करना.. पहेले मे आपकी राय लेना चाहता हु.. फीर हम भानु ओर भावुसे बात करेगे..

सरला : (गंभीर होते आस्चर्यसे) क्या रमाके बारेमे..? इनके बारेमे क्या बात करनी हे..? कुछ हुआ हे क्या?

देवायत : डार्लींग इनके बारेमे यहा बात करना उचीत नही हे.. मे तुमसे घरपे मीलने आउगा तब हम खुब प्यार (चुदाइ)भी करेगे ओर मामीके बारेमे बातभी कर लेगे..

सरला : (सरमाते हसते) लगताहे तुमने रमाके बारेमे बहुत कुछ सोचके रखा हे.. ठीक हे तब बात करेगे.. सायद कल छुटी दे देगे बादमे तो घर आजाना.. मे तरा वेइट करुगी.. ओर हां.. जब आना हो तब तेरे दोस्तको कही सहेर भेज देना.. बाकी मे सब सम्हाल लुगी.. तुजे कीलनेका बहोत मन कर रहा हे..

देवायत : (हसते) लगता हे तुजे बहुत आग लगी हे..

सरला : (सरमाते हसते धीरेसे) आगतो लगेगीनां.. तुनेही तो लगाइ हे.. जबसे मुजे कीचनमे पहेली बार पकडके करलीया तबसे मे तेरी दीवानी हो गइ हु.. ओर अबतो जींदगी भर तेरा पीछा छोडने वाली नही हु अब तुही मेरी आगको सांत करता रहेगा.. बस चुप होजा वो आ रहा हे..

देखा तो भानु चाइ ओर नास्ता लेकर आ रहाथा तो हमभी उठकर अंदर रुममे चले गये तभी पुनमभी आके हमारे साथ बैठ गइ ओर हम सभी चाइ नास्ता करने बैठ गयेतो सृतीभी आगइ तो चंदाने उसेभी हमारे साथ जबर दस्ती बीठा दीया.. तो वोभी हसते हुअ‍े हमारे साथ बैठ गइ.. तब भानुने कहा..

भानु : भाइ आप चाइ नास्ता करके नीकल जाओ सामभी होगइ हे ओर गांव पहोचनेमे अ‍ेक घंटा लग जायेगा तो रात हो जायेगी.. पुनमभी साथ हे तो देर जाना ठीक नही.. अब छुटी मीले तब भाभीको लेने आजाना..

डो.सृती : (हसते) जीजु दोनोको कल साम छुटी देदुगी.. फीर आप इसे घर लेजा सकते हे.. बस इसी लीये रखाहे कुछ प्रोबलेमतो नही होती.. क्युकी कुछ इन्जेक्शन ओर दवाइ इधरही देना हे.. इसी लीये..

चंदा : अरे सृती कोइ बात नही अ‍ेक दीन ओर रुकना पडेतोभी कोइ तकलीफ नही.. इधर भानुजी हेनां..

मंजुला : देवु रास्तेमे हो सकेतो बाबाके दर्शन करके जाना ओर उनसे बात कर लेना.. उसने कहा था..

पुनम : (खुस होते) हां भाभी मेभी इनको मीलना चाती हु.. मेही बताउगी मेरा भतीजा आगया हे.. हें..हें..हें..

डो.सृती : मंजु ये वोही बाबा हेना जो तुम बात कर रही थी..?

मंजुला : (हसते) हां.. हम लोग उसे बहुत मानते हे ओर हमारे कुलगुरुभी हे.. तबसे जब हमारा राज था.. पता नही कीतनी उमर होगी इनकी.. तीन तीन पीढीयोसे यही हे.. बहोत बडे ज्ञानी हे..

सरला : बेटा तबतो तुम चाइ नास्ता करके ही दोनो नीकल जाओ.. अंधेरा हो जायेगा..

पुनम : (हसते) मौसी आप चीन्ता मत करो.. भाइ हेनां साथ.. ओर कार हे तो क्या प्रोबलेम..

मंजुला : पुनो तु दयाको फोन कर देना तुम दोनोका खाना बना लेगी..

तब सबकी बात चीतके दौरान भावना सीर्फ देवायतकोही देखती रही.. उसे अपनी जींदगी अ‍ेक बोजकी तराह लग रही थी.. जब तक वो देवायतसे खुलके बात नही कर लेती तब तक उसे चेइन मीलने वाला नही था.. सब चाइ नास्ता करके बहार आगये तब सरला सब समेटने लगी तो चंदा ओर सृती बाते करते बहार नीकलके खडी रहेके बात कर रही थी तब देवायत वापस रुममे चला गया तो पुनम मंजुको लेके बाथरुम जा रही थी तब रुममे सीर्फ भावना थी तो मौका मीलतेही देवायतको इसारेसे अपने पास बुला लीया ओर धीरेसे कहेने लगी..

भावना : (धीरेसे) जीजु.. मुजे आपसे अकेलेमे जरुरी बात करनी हे आप अ‍ेक दो दीनमे मेरे घर आजाना..

देवायत : (हसते) हां भानुसे बात हुइ.. मेभी तुमसे बात करने वालाथा.. मे आजाउगा..

भावना : (धीरेसे) जीजु सीर्फ वोही बात नही हे.. मुजसे आपको ओरभी बात करनी हे जो सीर्फ हम दोनोके बीच ही रखनी हे.. अब मे आपको सब बता देना चाहती हु.. जो आज तक नही बता पाइ.. आप क्या कहेते हो फीर इसके बाद कोइ डीसीजन लुगी..

देवायत : (गंभीर होते) ओर कोइ बात हे..? कीसके बारेमे..?

भावना : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. हम दोनोके बारेमे.. बस अभी सीर्फ इतना ही कहेना हे बाकी जब हम मीलेगे तब कहुगी.. ओर हां.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रखनी हे.. समज गयेनां..?

देवायत : (हसते) लगता हे मामला कुछ ज्यादाही गंभीर हे.. मे भानुसे बात कर लुगा..

भावना : नही जीजु.. बात उनकी नही हे.. उनको बतानेकी कोइ जरुरत नही हे.. वो भलेही अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीये.. बाकी सब हम मीलेगे तब सब कहुगी अभी कुछ नही.. इधर मंजु ओर मौसी हे.. समज गयेनां..

तभी मंजु ओर पुनम बाथरुमसे बहार आते हे तो देवायत भावनासे दुर चला गया ओर मंजुके बेडके पास आगया.. तब पुनम मंजुको बेडपे सुला देती हे तो मंजु देवायतकी ओर देखते स्माइल करती हे.. ओर उनकी ओर हाथ बढाती हे तब देवायत उनके हाथमे अपना हाथ देता हे ओर मंजु उसे चुमलेती हे.. तो पुनम ओर भावनाभी सरमाके हसने लगती हे.. तो पुनम देवायतको कहेती हे..

पुनम : (हसते) भाइ लगताहे भाभी आपसे दुर नही रेह पायेगी.. आपको रोज इनको मीलने जाना पडेगा..

मंजुला : (सरमाते देवायतकी ओर हसते) हां तो फीर..? आनाही पडेगा.. पुनो इनको घसीटके लेआना..

देवायत : (जोरोसे हसते) हां येतो घसीटके लायेगीनां.. इनका ससुरालजो हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (जुठा गुसा करते) भाइ.. अ‍ेक मारुगी.. नही लाउगी अब.. आप अकेलेही चले जाना..

मंजुला : (हसते) अरे येतो नाराज होगइ.. चलो ठीक हे ससुराल ना सही मुजसे मीलनेतो आओगी..?

पुनम : (हसते हग करते) हां भाभी.. आपको मीलने जरुर आउगी माइ स्वीट भाभी.. हें..हें..हें..

कहेते मंजुका गाल चुमलेती हे तो देवायत मंजु भावु सब हसने लगे फीर मंजुने दोनोको घर जानेको कहा ओर दोनो ही बाय बोलके बहार नीकल गये तब चंदाभी देवायतको देखतेही उनके पास आगइ ओर कल जल्दी लेने आनेको कहा.. फीर देवायत भानुको कहेके पुनमको लेकर कारकी ओर चला गया जेसेही दोनो आगे बेठे पुनम देवायतकी ओर कातील स्माइल करते उसे देखने लगी.. तब देवायत समज गया..

देवायत : हां छुटकी बोल अब कीधर जाना हे..

पुनम : (कामुक नजरोसे देखते) भाइ अब आपकी छुटकी नही.. आपकी पुनो हु.. नामसे बुलाइअ‍े.. या जानु कहीये.. जाने दीजीये आश्रमकी ओर.. फीर आपको बताती हु हमे कीधर जाना हे.. अब आप मेरी गीरफ्तमे हे

देवायत : (हसते कार चलादी) लगता हे बहुत कुछ तैयारीया करके आइ हो..हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते कामुक मुस्कान करते) हां जानु.. इसी दीनका मे कबसे इन्तजार कर रही थी.. अब जाके हमे मौका मीला हे भाइ अब मेरी राखीका तोहफा मांगनेका वक्त आ गया हे.. आप पहेले बाबाके पास जानेदो.. मेरे लीये आज खास दीन हे तो उनका आशीर्वाद लेना हे.. बाकी सब देखते जाओ.. ओर हां रास्तेमे फुलकी दुकान आये तो वहा दो मीनीट रोकना..

देवायत : (हसते) क्या कोइ फुल बुल लेना हे..?

पुनम : हां जानु.. बस दो मीनीट रुकना मुजे कुछ बाबाके लीये लेना हे..

देवायत : (सीरीयस होते) पुनो ..अ‍ेक बात कहु..? तुने मुजमे अ‍ैसा क्या देख लीयाकी तुम मुजसे प्यार करने लगी.. तेरे दिमागमे ये बात आइ कहासे..? की मे मेरे भाइको प्यार करुगी कोइ खास वजह..?

पुनम : (देवायतकी ओर सीरीयस होते) भाइ.. अ‍ेकतो आप मुजे सुरुसेही अच्छे लगते हो.. आपकी बोडी ओर आपका आकर्सण ही मुजे आपकी तराह खीचता हे.. ओर जबसे प्यारकी परीभासा समजने लगी तब आप बार बार मेरे सपनेमे आने लगेतो.. छोडीये.. बाकी कुछ बात मे अभी आपको नही बताना चाहतीथी..

देवायत : छुटकी.. मुजे सब जानना हे तुजमे इतना परीवर्तन ओर हिंमत आइ कहासे..? बता अब हमारे नये रीस्तेको कोइ प्रभावीत नही कर सकता.. अबतो हर हालमे मे तुमको पाना चाहता हु.. क्युकी मेभी तुमसे प्यार करने लगा हु.. अबतो कीसीभी हालमे तुम मेरी होकर रहेगी..

पुनम : (खुस होते सरमाते हसते) भाइ.. सब बताउगी.. बस कुछ घंटे इन्तजार करलो.. बाकी बहुत कुछ अपने आपही आज जान जाओगे.. आज आपको सब पता चल जायेगा.. बस तभीतो हम आश्रम जा रहे हे..

देवायत : (हसते) तुभी बहुत रहस्यमयी होगइ हे..? क्या बाबाको छुप छुपके मीलने जाती थी..? हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाइ जब हप्तेमे शनी रवीकी छुटी होती हे तब मे ओर लखनभाइ बाबाको मीलने आते थे.. हम पुरा दीन आश्रममे रहेते थे ओर सामको वापस होस्टेलपे आजाते थे.. तब बाबाके साथ बहुतसी बाते होतीथी ओर उन्होने मुजे बहुत कुछ बताया हे..

देवायत : (हसते) हां.. तभीतो.. मे सोचु तुजमे इतना बडा बदलाव केसे आगया..? क्या तेरी बाबासे कुछ हमारे बारेमे बात हुइ हे..?

पुनम : भाइ आपका वो बार बार सपना आता था तो अ‍ेक बार बाबाको पुछ लीया.. तब बाबाने मुजे अकेलेमे बहुत कुछ बताया.. मानलोनां सब कुछ बता दीया, बस तबसे मे आपकी ओर ज्यादा ढलने लगी.. ओर आपसे खुलकर प्यार करने लगी.. (हसते) भाइ आप बहोत स्मार्ट हो.. हें..हें..हें.. धीरे धीरे मुजसे सब बाते उगलवा रहे हो..हें..हें..हें..

तभी देवायतको सीटीसे बहार नीकलनेसे पहेलेही अ‍ेक फुलोकी दुकान दीख गइ तो कार वही रोकली तब पुनम फटाफट उतरके कुछ फुल ओर हार ले लीये ओर अ‍ेक केरी बेगमे लेके उसे कारकी पीछली सीटमे रखते वापस देवायतके साथ बेठ गइ ओर देवायतने कार सीधेही हाइवेकी ओर दोडादी.. आगे जाके अ‍ेक सींगल रोडपे टर्न लेके जंगलकी ओर जाने लगे २० मीनीटके ड्राइवके बाद कारको अ‍ेक कच्ची सडकपे जंगलकी ओर मोड दी..जो रास्ता आश्रमकी ओर जा रहा था..

ओर तीन चार कीमी. के बाद दोनोही आश्रममे पहोंच गये.. तब साम ७ बजनेको आया था कुछ सेवक काम कर रहेथे बाकी सब मंदिरमे आरती चल रहीथी वही खडेथे होलमे बाबा अ‍ेक सेवकके साथ बेठे थे.. जेसेही देवायत ओर पुनमको देखा उनके चहेरेपे चमकके साथ हसी भी आगइ.. ओर वो मुस्कराते रहे.. तब देवायत ओर पुनमने उनको दंडवत कीया ओर उनके चरणोके पासही बेठ गये.. तब बाबाने पुनमकी ओर देखा.. तो दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखते हसने लगे.. तब बाबा हसते हुअ‍े कहेने लगे....

कन्टीन्यु
 
koment dene mai etni bhi kanjusi thik nahi, kya me kahani likane mai kanjusi karta hu..?
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ४४

ओर तीन चार कीमी. के बाद दोनोही आश्रममे पहोंच गये.. तब साम ७ बजनेको आया था कुछ सेवक काम कर रहेथे बाकी सब मंदिरमे आरती चल रहीथी वही खडेथे होलमे बाबा अ‍ेक सेवकके साथ बेठे थे.. जेसेही देवायत ओर पुनमको देखा उनके चहेरेपे चमकके साथ हसी भी आगइ.. ओर वो मुस्कराते रहे.. तब देवायत ओर पुनमने उनको दंडवत कीया ओर उनके चरणोके पासही बेठ गये.. तब बाबाने पुनमकी ओर देखा.. तो दोनोही अ‍ेक दुसरेके सामने देखते हसने लगे.. तब बाबा हसते हुअ‍े कहेने लगे....अब आगे

बाबा : (हसते) बीटीया आखीर तुम आही गइ.. जीस कामका तुने बीडा उठायाथा वो काम करही दीया..

पुनम : (सरमाते हसते) जी बाबा.. बडी मुस्कीलसे इनको मनाया हे.. अब हुकुम कीजीये क्या करना हे..?

बाबा : बस बेटा कुछ समय इन्तजार करना हे अभी आरती खतम होजाये तब तुम दोनोको मेरे साथ चलना हे तब तक सब लोग चले जायेगे तब हमे मंदिरमे जाना हे.. कीतने अरसोके बाद आज ये शुभ दिन आया हे.. आज भलेही कुछ देर होजाये.. आजही सब काम खतम करना हे..

देवायत : (हसते) बाबा.. लगताहे तुम दोनो काफी कुछ प्लान करके बैठे हो.. कभी मुजेतो नही बताया..

बाबा : (हसते) नही बेटा तुम्हेभी बहुत कुछ बताया लेकीन जोकाम मे करवाना चाहता था इनमे तुम कतैइ तैयार नही होते.. इसीलीये मुजे मेरी इस बेटीको सब कहेना पडा.. यही समजलो जीस कार्यके लीये मे यहा हु.. इनकी सुरुआत तुम दोनोसेही होगी.. तभीतो मेरे पास मेरे गुरुकी कुछ शक्तीया हे उसे स्थापीत कर सकुगा..

देवायत : (हसते) अरे बाबा इनमे कोनसी बडी बात हे तबही बोल दीया होता.. मे मना थोडीनां करता..

बाबा : (हसते वहा बेठे सेवकको) बेटा जा तुम भोजन प्रसाद लेलो फीर ये दोनोके लीये रखना इनको थोडी देर लगेगी.. मे इनको अभी वहा भेजता हु..

सेवक : (खडा होते जाते) जी बाबा मे रसोइघर मे ही हु.. ठाकुरसाब फ्रि होजाये तो अंदर भेज देना..

बाबा : (सेवक चला गया तब) बेटा.. वो राजाकी बात तुमने सुनी हेनां..? बस वोही अडचन यहाभी हे.. तुम्हेतो पता हे तब केसे मेरे गुरुने उन राजाको अपनी बहेनसे सादीके लीये मनायाथा.. बस यही मुस्कीले यहाभी थी.. मे तुमसे कहेता तुम तेरी बहेनसे सादी करलो.. तो तुम थोडी मानते..? इसी लीये मुजे इस लडकीको सारी बाते बतानी पडी ओर ये मान गइ..

देवायत : (हसते) अच्छा तभी.. अब समजा.., हें..हें..हें.., लेकीन बाबा कीसीको पता चलातो..? इनकीभी अभी सादी होने वाली हे.. देखना इनका घर ना टुट जाये..

बाबा : (हसते) बेटा तभीतो ये उन लडकेसे सादी कर रही हे ताकी तुम सबकी इजतभी बनी रहे ओर तुम दोनोका संसारभी चलता रहे.. बस तुम दोनोको सबके सामने थोडी सावधानी रखनी हे.. बाकी ये लडकी कुछ समयके बाद तेरे पास ही रहेगी.. अ‍ेक बार वो बच्ची आजाये..

पुनम : (सरमाते हसते) बाबा इनसे केह दीजीये वो बच्चीके बादभी मुजे पत्नीकी तराह रखे ओर मुजे वोही प्यार करे.. क्युकी मुजे सचमे इनसे प्यार होगया हे.. मे इनके बीना नही जी सकती.. वो धिरेनके साथ मे सादी सीर्फ दीखावे की कर रही हु.. मेरा असली पती यही मेरे भाइ ही होगे..

बाबा : बेटी इनकी फीकर तुम मत कर.. ये तेरे पास आता रहेगा.. तब तु वहा अकेली ही होगी.. बाकी मे तुजे अभी कुछ नही बता सकता.. इश्वरने कुछ सोच समजकेही उस लडकेको चुना होगा..

देवायत : बाबा पता नही आपकी बातोसे अ‍ेक डरसा लग रहा हे.. कही कुछ अनहोनी तो..

बाबा : बेटा इनके बारेमे अभी कुछ ज्यादा मत सोच.. वक्त आनदे तुजे सब सचाइ पता चल जायेगी..

देवायत : बाबा वो सरपंचके पास से कुछ कागजात हाथ लगेहे.. इनमे कुछ पेपर हाथ लगे हे मे आपके पास लेआउगा.. मेरी तो कुछ समजमे नही आया कुछ नक्शे जेसा हे ओर कुछ सांकेत भाषामे लीखा हे..

बाबा : (हसते) हां पता हे.. लेकीन तेरे कुछ कामका नही वो सब तेरे पोतेके काम आयेगा वोही सब गुथी सुलजायेगा सब सम्हालके रखदे ओर ये सीर्फ उनकोही देना हे.. समज गयेनां.. वरना देदे तेरी इस बहेनको सब सम्हालके रखेगी..

पुनम : (हसते) बाबा मुजे जानना हे हमारा कनेक्शन उस राजाके साथ क्या हे कोन हे मेरा भाइ ओर कोन हु में.. मेरी भाभी कोनहे..?

बाबा : बेटी क्या करेगी जानके.. बस यही समजले तुम दोनो जन्मो जनमसे अ‍ेक दुसरेके साथ जुडे हुअ‍े हो.. समज गइनां..? क्या कुछ लाइहो..? तो लेकर आ.. अब हमे मंदिरमे जाना हे सब चले गये होगे.. देखके आना..

देवायत : पुनो तुम बैठो मे लेके आता हु.. (कहेते देवायत कारकी ओर चला गया)

पुनम : (देवायतके जातेही) बाबा जेसा आपने कहाथा सब होगया भाइको बडी मु्सकीलसे मनाया हे अब देखना मुजसे छुट ना जाये.. मे इनको बहुत प्यार करती हु.. क्या मे इनको मीलतो सकुगीनां..?

बाबा : बेटी.. तु फीकर मत कर तेरा असली पती यही होगा.. तु जानना चाहती हेना की तुम कोन हो..? तो सुन.. वास्तव मे उन राजके दादा दादी तुम दोनोही थे.. जो तबभी भाइ बहेन थे.. तुक दोनो कइ जन्मोसे भाइ बहेन होते हुअ‍े भी अ‍ेक पती पत्त्नीकी तराह जींदगी जीते आ रहे हो.. उन राजाके दादा दादी भी भाइ बहेन ही थे.. जो इस जन्ममे तुम दोनो वोही हो.. ओर इनका पोताही वो राजा होगा जो तेरी बेटीकी बेटीसे सादी करेगा जो सब शक्तीया इन्हीकी माध्यमसे पायेगा..

पुनम : (हसते) लेकीन बाबा मे इनके साथ रहुगी तभीतो सब होगा..

बाबा : बस इतना जानले वो लडका अल्प आयुका हे वो तीन सालही तेरे साथ रहेगा.. बाकी मे तुजे कुछ नही बता सकता.. यही समजले तुजे दोहरी जींदगी जीनी हे.. अ‍ेक तेरे भाइकी सुहागनकी ओर दुसरी.. समज गइनां..? फीरतो पुरी जींदगी अपने भाइके साथ रहेके बीतायेगी.. बस मे चाहता हु तु मुजे जल्दसे जल्द अ‍ेक बच्ची देदे जो तेरी कोखसे जन्म लेगी.. ओर ये काम तुजे सबसे पहेले करना हे..बोल..?

पुनम : (गंभीर होते) ठीक हे बाबा मे वादा करती हु आप जो कहेगे वो सब मे करुगी.. लेकीन आपने मुजे दोहरी जींदगी जीनेका बोला.. मतलब.. वो लडकाभी.., बाबा मेरी सासभी.. भाइसे सादी कर रही हे..

बाबा : (हसते) हां.. तु काफी समजदार हे.. ओर तेरी सासका भी पता हे मुजे.. तु फीकर मत कर तेरे संसारमे वो कोइ दखल नही देगी.. ओर सुन.. तेरे भाइकी जींदगीमे अ‍ैसी कइ ओरते हे ओर आगेभी आयेगी.. तु इनसे विचलीत मत होना.. तुजे कोइ फर्क नही पडेगा.. क्युकी मेरी दी हुइ जडी बुटीसे वो सबको सुख देता रहेगा.. तु उनकी चीन्ता मत करना.. उनकी बीवी सब जानती हे.. उन्हीके माध्यामसे मेने उनको जडीबुटी दी हे.. इनको भी नही मालुम..

पुनम : (सरमाते हसते) मतलब येभी हमारे पुर्खोकी तराह रहेगे.., हें..हें..हें.. इनकी कीतनी रानीया होगी..?

बाबा : (जोरोसे हसते) तु मुजसे सब बाते उगलवा रही हे.. बडी ही नटखट हे.. बस इतना समजले कइ रानीया होगी.. कुछ लीगल तो कुछ इलीगल.. ओर तेरे भाइने तुमसे हर दीन मीलनेका पुरा इन्तजाम करलीया हे.. तु इनको मीलनेकी चीन्ता मत कर वो कहे अ‍ेसा करती जाना.. यही समजले आजसेही तेरी नइ जींदगीकी सुरुआत हो रही हे.. आजही तेरा संसार सुरु होजायेगा.. बाकीतो तुमभी सब तैयारीया करकेही आइ हो.. हें..हें..हें.. समज गइनां..? अब चल जा वो रुममे जाके अपने कपडे चेन्ज करले जो तु घरसे सबसे छुपाके लाइ हो.. फीर हमे मंदिरमें जाना हे..

कहेते दोनोही हसते हुअ‍े खडे होगये तबतक देवायतभी अ‍ेक केरी बेग लेके आगया तब पुनम अ‍ेक बेग लेके खाली रुममे चली गइ ओर थोडीही देरमे वो अ‍ेक सादीके जोडेमे बहार आगइ तब देवायत उसे देखताही रेह गया.. क्युकी आज पुनम सादीके जोडेमे कीसी अप्सराके जैसे दीखतीथी जो देवायतको अपनी ओर आकर्सीत करनेमे काफी था तब बाबाने इनको हाथके इसारेसे अपने साथ चलनेको कहा ओर तीनो मंदिरकी ओर जाने लगे.. तब मंदिरमे कोइ नहीथा सब आरती करके भोजन करने चले गयेथे..

तो कुछ अपने घरकी ओर नीकल गयेथे.. आश्रममे अब कुछ गीने चुने लोगही नजर आ रहेथे.. जो तीनोको देखते यही समज रहेथे बाबा इनको दर्शन कराने लेजा रहे हे.. तभी तीनोही मंदिरमे आगये तो पुनमने अपने सरपे पलु डाल दीया ओर अपना सर ढक लीया.. फीर वो देवायतके साथ खडी होगइ दोनोही हाथ जोडके दर्शन करने लगे फीर बाबाकी ओर देखते उनके आदेशका इन्तजार करने लगे..

बाबा : बेटा तुम दोनोही अंदर आजाओ.. जल्दी करना कोइ आजाये इनसे पहेलेही ये काम नीपटाना हे..

तब देवायत ओर पुनम दोनोही मंदिरके अंदर चले गये तब बाबाने वहा दीया जलाया ओर पुनमकी ओर देखातो पुनमने देवायतके हाथसे केरी बेग लेके उनमेसे दो हार ओर कुछ फुल नीकालके बाबाको दीया तो बाबाने कुछ फुल वही चडा दीये फीर दोनोको अ‍ेक अ‍ेक हार पकडा दीया तो देवायत बाबाकी ओर देखता रहा.. तब पुनम सरमाते मंद मंद मुस्कराने लगी.. तभी बाबाने देवायतकी ओर देखते कहा..

बाबा : (हसते) अब देख क्या रहा हे.. ये हार अपनी बहेनको पहेनादे..

देवायत : (हीचकीचाते) बाबा.. येतो.. येतो..

बाबा : (बीचमेही रोकते) हां.. आज तेरी बहेनके साथ तुम्हारी सादी हे.. इसे गांधर्व विवाह कहेते हे.. मालुमतो हेनां..? चल चुपचाप जो मे कहु करता जा.. आज तेरी सादी तेरी बहेनसे करवा रहा हु..




तब देवायत सब समज जाता हे ओर वो पुनमको हार पहेना देता हे तब बाबा पुनमकी ओर देखते हे तो पुनमभी सरमाते अपनी नजरको जुकाते हुअ‍े देवायतके गलेमे हार पहेना देती हे.. फीर बाबा दोनोको हाथमे जल देते बारी बारी सब कसमे खीलवाते हे जो सादीमे सप्तपदीमे खीलवाइ जाती हे फीर कुछ मंत्र बोलते बाबा दोनोके सरपे जल छीडकते हे ओर दोनोके सरपे अ‍ेक अ‍ेक फुल रखते दोनोको अ‍ेक दुसरेको पती पत्नीके रुपमे स्वीकार करनेकी कसम खीलवाते हे.. आखीर दोनोको पती पत्नीके रुपमे घोसीत करते हे..




ओर लास्टमे वहीसे सींदर लेके बाबा देवायतसे पुनमकी मांग भरवाते हे तब पुनम आंख बंध करलेती हे ओर आंखसे आंसु छलक जाते हे तब बाबा हसते हुअ‍े इनके सरपे हाथ रख देते हे तो पुनम हसते अपने आंसु पोछने लगती हे इसी तराह दोनोकी सादी होगइ तब देवायत ओर पुनम दोनोही भगवानके दर्शन करके बाबाके चरणोमे जुक गये ओर आशीर्वाद लेने लगे तब बाबाने पुनमको अखंड सौभाग्यके आशीर्वाद दीये..

बाबा : लो बेटी होगइ तेरी सादी.. आज तुने इस बुढे बाबाकी लाज रखदी.. यही समजले अब मेरा कार्य सुरु होगा.. जो इतने सालो से वेइट कर रहाथा.. भगवान तुम दोनोको खुब सुखी रखे ओर तरकी दे..

देवायत : बाबा अ‍ेक महीनेके बाद इनकी सादी करवानी हे अब मे क्या करु..? मेरीतो बीवी होगइ अब मे इसे छोड भी नही सकता.. ओर इसे छोडनाभी नही चाहता.. तो अब इनकी सादी मे कैसे करवाउगा..?

बाबा : (हसते) तो तुजे कोन छोडनेको केह रहा हे.. इनकी सादी करनी हेतो करवादे.. बीवीतो तेरीही रहेगी.. ओर सुन तु जो सोच रहा हे.. वो कतइ नही होगा.. इनके लीये मुजे अकेलेमे मीलने आजाना सब बताउगा..

पुनम : बाबा ये खामखा गभरा रहेहे.. मेने इनकोभी सब केह दीया हे.. फीरभी सब पुछ रहे हे.. मे इनसे बात कर लुगी.. आप टेन्शन मत लो.. अब चले..?

देवायत : (हसते) इस हालमे जाओगी.. सबको पता चल जायेगा हमने सादी करली हे.. जा पहेले चेन्ज करले.. फीर हम चलेगे हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) बेटी तुम दोनोका हार यही छोडदो ओर अपनी मांग दुपटेमे छुपालो ताकी कीसीको दीखे नही.. फीर भोजन करके आरामसे चले जाना.. जाओ तुम दोनोके मेरा आशीर्वाद हे..

कहातो पुनम हसने लगी फीर दोनोका हार वापस केरी बेगमे डाल दीया ओर वापस आके उसने चेन्ज करलीया फीर अपना सर दुपटेसे अच्छी तराह ढक लीया ताकी इनकी मांग ना दीख सके फीर वापस होलमे आगये.. तब बाबाने दोनोको भोजनके लीये भेज दीया ओर खुद अपने कमरेमे चले गये तब वो सेवक वही दोनोका वेइट करते बेठाथा तो दोनोको भोजन परोस दीया.. फीर भोजन करके दोनोही कारमे आके बेठ गये.. तब..

पुनम : (कारमे बेठते हसते) हां तो पतीदेव आजसे आप मेरे बाकायदा पती होगये हे.. अब देखती हु मुजसे कैसे दुर भागते हो.. हें..हें..हें..

देवायत : (कार चलाते) पुनो तुमने ओर बाबाने मीलकेतो बहुत कुछ प्लानींग करलीया.. मुजे इनकी भनकभी नही लगने दी क्या तुम दोनोने पहेलेसे ही सब प्लान करके रखाथा..? ध्यान रखना हमे ये रीस्ता सबसे छुपाके रखना हे कुछ गडबड मत करना..

पुनम : हां जानु.. वरना तुम थोडीना मुजसे सादीके लीये मानते.. भाइ प्यारतो मे आपसे सुरुसेही करती थी.. लेकीन जबसे बाबासे मेरी बात हुइ तबसे मे बीना डरके आपसे खुलके प्यार करने लगी..जानु मुजे सब पता हे.. आप फीकर मत करो.. अब आप बीन्दास मेरी सादी धिरेनसे करवा देना अब मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस इतना बतादो हम दोनोके मीलनेका इन्तजाम आपने कहा कीया हे.. मुजे बाबाने सब बता दीया हे.. कहेतेथे अपने भाइसे पुछ लेना.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) पुनो.. तुजे सबके सामनेतो मुजे भाइही कहेना पडेगा.. क्या करोगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (तीरछी कामुक नजरोसे देखते हसते) हां.. तो क्या हुआ.. भाइही कहुगी.. अब भाइसे सादी करली हे तो.. ओर वेसेभी मे आपको भाइही कहुगी क्युकी भाइके साथ प्यार करनेका अ‍ेक अलगही मजा हे जो आपको बादमे पता चलेगा हें..हें..हें.. लेकीन आपने मेरी बातका जवाब नही दीया..

देवायत : (सीरीयस होते) पुनो.. बस तु अब रश्मीभाभीसे दोस्ती करले.. इनके घर आना जाना सुरु करदे हम तेरी सादी नही होने तक वही मीलते रहेगे..

पुनम : (आस्चर्यसे अ‍ेक नजरसे देखते) रश्मीभाभी..? भाइ आप पागलतो नही हो गये..?

देवायत : (हसते) क्यु बाबाने तुजे ओर कुछ नही बताया..? ये नही कहाकी मेरी कुछ लीगल बीवी तो कुछ इलीगल बीवीभी होगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) तो आप हम दोनोकी बात छुप छुपके सुन रहेथे..?

देवायत : नही पुनो.. बाबा हम सबके बारेमे सबकुछ जानते हे.. तो अंदाजा लगा लीयाकी मेरे बारेमे तुजे यहीभी बता दीया होगा ओर देखो अंदाजा बीलकुल सही लगा.. बोल मेरे बारेमें क्या कहेते थे बाबा..

पुनम : हां भाइ बाबाने मुजे सबकुछ बता दीया हे.. वो सब छोडो.. अब बताभीदो रश्मीभाभीके घरही क्यु..?

देवायत : (सीरीयस होते) पुनो ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रखनी हे.. सुन.. रश्मीभाभी पीछले कइ महीनोसे मेरी इलीगल बीवी हे.. ओर कुछ दीन पहेलेही हम दोनोने इसी तराह गांधर्व विवाहभी कर लीया हे.. इस बारेमे हमारी सब बाते होगइ हे.. मेरी जीतनीभी बीवीया होगी मुजसे वही उनके घरमे मीलेगी.. ओर ये बात सीर्फ हम तीनोके बीचही रहेगी.. अब मे तुजे सबके होते हवेलीमे तो नही मील सकता तु वही चले जाना मे वहा आजाउगा.. हम दोनो वही मीलते रहेगे..

पुनम : भाइ क्या आपने मेरी सास सेभी.. मतलब उनसे सादी कर रहे हे.. तो..

देवायत : (सीरीयस होते पुनमको देखते) बेबी.. अब तु मेरी बाकायदा बीवी होगइ हे अब मे तुमसे कुछ नही छीपाउगा.. मे तुमको सब सच बता दुगा.. बस मुजे तेरा साथ चाहीये.. ओर वोभी जींदगी भरके लीये..

पुनम : भाइ मुजे खुसीहे आप मुजपे इतना विस्वास कर रहे हो.. चाहे आपके जीवनमे कीतनीभी ओरते हो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. बस मुजेतो सीर्फ मेरे हीसेका प्यार चाहीये.. ओर आप यकीन कीजीये ये बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. मे आपको जींदगीभर हर हालमे साथ दुगी.. मुजे खुसी हुइ अपने मुजे जींदगीभर साथ नीभानेकी बात कही.. बताइअ‍े..

देवायत : डार्लींग तेरी सास ओर मेने मंदीरमे सादी करली हे.. अब वो दुनीयाके सामने मेरी लीगल बीवी होगी.. मंजुही हमारी सादी करवा रही हे.. बस इनको हमारे रीस्तेके बारेमे पता नही चलना चाहीये.. ओर सुन.. जीस दीन मेरी सादीके बाद उनके घर खाना खाने पहेली बार गयेथे नां.. तबसे हम दोनो रीलेशनमे हे.. ये बात मंजुकोभी नही पता..

पुनम : (सोक्ट होते हसते) व्होट..? मतलब मेरी सास.. आपके साथ.., मेरा मतलब आप दोनो.. सेक्स..

देवायत : (सरमाते हसते) हां पुनो.. हम दोनोके बीच फीजीकल रीलेशन हे.. कइ महिनोसे..

पुनम : (जोरोसे हसते) भाइ.. आपकीतो बले बले हे.., हें..हें..हें.. अब येभी बतादो ओर कीतनी ओरतके साथ आपका रीलेशन हे.. आप बहुतही नटखट हो.. ये सब सुनके बडाही मजा आ रहा हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां तुजेतो मजाही आयेगा.. नही बताता जा..

पुनम : (देवायतको हग करते गालको चुमते) भाइ बताओनां.. आपने मुजसे वादा कीया हे कोइ बात नही छुपानेका.. हें..हें..हें..

देवायत : पुनो.. बस कुछ नाम मे तुजे नही बताउगा.. बाकी चंपाभाभी.. रश्मीभाभी ओर चारुभाभी दया रजीया.. यही सब.. बाकी कुछ ओरते अ‍ैसी हे जो मे तुजे नही बता सकता..

पुनम : (आस्चर्यसे) भाइ..चारुभाभी भी.. मतलब हमारी चारुभाभी..?

देवायत : (हसते) हां हमारी चारुभाभी.. लेकीन हम दोनो ज्यादा नही मीले.. अभी तक सीर्फ तीनसे चार बारही मीले हे.. जब उनके घर कोइ नही होता.. तब हम दोनो फीजीकल होते हे..

पुनम : भाइ मुजे कीसीसे कोइ अ‍ेतराज नही.. ओरतोकाभी क्या क्या रुप होता हे.. दवा ओर रजीयाकातो समजमे आया की दोनोही अकेली हे तो बेचारी अपनी जरुरते पुरी करने कहा जायेगी.. भाइ सबका कोइना कोइ ड्रीमबोय होता हे.. लेकीन भारुभाभी..? चारुभाभी दीखनेमे कीतनी भोलीभाली ओर सीधी हे.. फीरभी..

देवायत : पुनो पता नही सब ओरते मुजमे अ‍ैसा क्या देखती हे सब सामनेसे ही चली आती हे.. जेसे तुम आइ हो.. तुम लोग मुजमे अ‍ेसा क्या देखते हो..? जो मेरी ओर खीचतीही चली आती हो ओर सामनेसे मुजे सीलेशन रखनेको कहेती हो ओर जो सामनेसे आती हे तो मे उनको मनाभी नही कर सकता.. पता नही क्यु..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ कुछ मर्द होते हे जीसे देखते ही हम लडकीया ओर ओरतोका दील मचलने लगता हे.. जो उसे पानेकी कामना करती हे.. की कास ये हमे मील जाये.. या ये हमारा पती होता.. बस अ‍ैसे मर्दमे आपभी अ‍ेक हो.. जो आपको देखते हमारा दील हमारे हाथमे नही रहेता.. सायद चारुभाभी या रश्मीभाभी के साथभी अ‍ेसा हुआ होगा.. ओर हां.. चारुभाभी से मुजे अ‍ेक बात याद आगइ.. जो मे आपको फुरसत मे बताउगी..

देवायत : (पुनमकी ओर हसते) अब कोनसी बात याद आगइ.. बोलनां..

पुनम : (हसते) नही भाइ.. अभी नही वरना आप मुजे छोडके इनके पीछे लग जाओगे.., हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) मतलब कोइ लडकी या ओरतकी बात हे.. बता कोन हे वो..हें..हें..हें..

पुनम : (देवायकी जांगपे अ‍ेक चपत लगाते जोरोसे हसते) भाइ.. आप बहोत नोटी हो.. अभी नही बताउगी..

देवायत : चल कोइ बात नही फीर कभी बताना.. अब बोल.. आगे तुमने क्या प्लान करके रखा हे.. तुम ओर बाबाने मीलके बहोत कुछ तैय करलीया था.. मुजे सीर्फ इतनाही कहाथा की तुभी अ‍ेसे रीस्तोसे बंधा होगा..

पुनम : भाइ जब मे बाबाको मीलने आतीथी तब अ‍ेक दीन वो मेरे स्वप्नके बारेमे बता दीया जो बार बार मुजे आता था..तब बाबाने मुजे सब बता दीया.. की मेरे पती आपही होगे.. ओर मुजे वो राजाकी पुरी कहानी सुनाइ.. (ये केसी अनुभुती) ओर फीर कहा की उन राजाके दादा दादी दोनो ही भाइ बहेन थे.. बस.. वोही तुम दोनो हो.. तबसे मे आपकी ओर ढल गइ.. ओर आपसे खुलके प्यार करने लगी.. ओर आजभी यही बाते हुइ.. वरना अ‍ेक डरसा लग रहा था..की मे मेरे भाइसे प्यारका इजहार केसे करुगी..

देवायत : हं.. अबतो कोइ डर नही हेनां..?

पुनम : (सरमाते हसते) नही भाइ.. अबतो हमारी सादीभी होगइ हे..आप मेरे पती होगये हो.. अभीभी यकीन नही होरहा की हमने सादी करली.. भाइ मे आपको खुब प्यार दुगी.. मतलब मेरी भाभी ओर सांससे भी ज्यादा.. मुजे आपके साथ हमेशाके लीये रहेना हे आपकी बीवी बनके.. कुछ कीजीयेनां..

देवायत : हं.. यकीनतो मुजेभी नही हो रहाहे की अब तु मेरी बीवी होगइ हे.. सब बदल गया.. जब हम आश्रममे गयेथे तब तु मेरी बहेन थी.. ओर बहार नीकले तब हम दोनो पती पत्नी होगये.. पुनो.. आइ लव यु बेबी.., बोल अब क्या प्लान हे.. तुमने इतना कुछ प्लान कीया हेतो आगेकाभी सोचा होगा..

पुनम : (सरमाते हसते) लव यु टु भाइ आइ लव यु सो मच.. बस आजकी रात हमारी जींदगीकी खास रात हे.. भाइ आज मुजे मेरी राखीका तोहफा मील जायेगा.. हमारी सुहागरातमे.. मेने तैय कीयाथाकी मेरा कौमार्य सीर्फ आपकोही सोंपुगी जो आज हमारी सुहागरातमे मे आपको सब कुछ सोंप दुगी..

देवायत : (हसते) पुनो राखीसे याद आया.. अब अ‍ेक हप्तेके बाद राखीका दीन हे तब तु क्या करेगी? हें..हें..हें.. क्युकी अबतो तु मेरी बीवी बन गइ हे..

पुनम : (सरमाते हसते) हां तो क्या हुआ मेने मेरे भाइसे ही सादी कीहे तो राखी भी बांधुगी ओर आपसे तगडी गीफ्टभी लुगी.. अ‍ेक गीफ्टतो मुजे आजही हमारी सुहागरातमे ही मील जायेगी.. बाकी उस दीन जो देना हे दे दीजीयेगा.. हें..हें..हें.. बाकी मे बाबासे मीलके तैय कर लुगीकी मेरी दुसरी गीफ्ट कब लेनी हे.. सायद हमे यहा कल फीर आना पडे.. बस बाबाका क्या कहेना हे.. या फीर उनसे फोनपे बात कर लुगी..

देवायत : (लंडको अ‍ेडजेस्ट करते) डार्लींग क्या सब आज मुमकीन हे.. मतलब घरमे लखनभी होगा.. तो..

पुनम : (देवायतकी जांग सहेलाते) भाइ इनकाभी मेने इन्तजाम करलीया हे.. लखनभाइ आज खेतोपे सोयेगे.. मलबम आज हवेलीपे सीर्फ हम दोनोही हे.. ओर सुबह तक हम दोनोमेसे कोइ नही सोयेगा.. आज पुरी रात मुजे आपका प्यार चाहीये.. आज मुजे मेरी जींदगीकी हर खुसी आपसे चाहीये.. आज मेरा मीलन मेरे भाइसे यानी मेरे ड्रीमबोयसे होजायेगा.. भाइ आजही हमे हमारी सुहागरात मनानी हे..

देवायत : बेबी तुनेतो बातोसेही गरम करदीया.. देख फटा जा रहा हे.. कुछ करनां..

पुनम : (अ‍ेकदम सरमसे पानीपानी होते) भाइ.. अभी घर आजायेगा.. क्या यहा सही होगा.. भाइ थोडा सबर करलो.. फीर आप जोभी कहेगे मे सब कुछ करुगी मे हमारी सुहागरातका पुरा मजा लेना चाहती हु.. आज रात मे आपको हमेसाके लीये पुर्ण समर्पीत होजाउगी.. फीर तो आपको मुजसे प्यार करनेके लीये परमीशनकी भी जरुरत नही हे.. आप कहीभी कभीभी मुजसे प्यार कर सकते हो..

कहेते पुनम कारमेही देवायतको हग करते उनके होंठ चुम लेती हे.. अ‍ैसी ही रोमांन्टीक बात करते दोनो हवेली पहोंच गये.. तब पुनमने फीरसे अपने सरपे दुपटा सही करलीया क्युकी अभी उसे रजीया ओर दयाका सामना करना था.. जब दोनो हवेलीपे पहोंचे तब दया ओर रजीया दोनोही वेइट करते बेठी थी जब दोनो अंदर आगये तब दयाने पुनमसे मंजुके बारेमे पुछा तो पुनमने दोनोको लडका होनेका समाचार दे दीया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ४५


कहेते पुनम कारमेही देवायतको हग करते उनके होंठ चुम लेती हे.. अ‍ैसी ही रोमांन्टीक बात करते दोनो हवेली पहोंच गये.. तब पुनमने फीरसे अपने सरपे दुपटा सही करलीया क्युकी अभी उसे रजीया ओर दयाका सामना करना था.. जब दोनो हवेलीपे पहोंचे तब दया ओर रजीया दोनोही वेइट करते बेठी थी जब दोनो अंदर आगये तब दयाने पुनमसे मंजुके बारेमे पुछा तो पुनमने दोनोको लडका होनेका समाचार दे दीया....अब आगे

तो दोनोही खुस होगइ फीर पुनमको खानेको कहेने लगी.. तब पुनमने आश्रममे खाना खाकर आनेको कहा तब दोनो सोनेके लीये अपने रुममे चली गइ तब दया जाते समय देवायतको आनेका इसारा करती गइ.. तो देवायतने पुनमकी ओर इसारा करते मना कर दीया तब दया नीरास होते सोनेके लीये चली गइ.. जेसेही दोनो सोनेके लीये गइ पुनम जटसे कीचनमे चली गइ ओर दो ग्लास केशर बदाम वाला दुध बनाने लगी..




तब देवायतभी धीरेसे कीचनमे चला गया तो पुनम ग्लासमे दुध नीकाल रहीथी तो देवायत पुनमके पीछे चला गया ओर हिंमत करते पीछेसे चीपकते पुनमको दोनो हाथोसे अपनी बाहोमे भरलीया तो पुनम गभराते कांप गइ ओर समज गइकी ये अपना भाइही हे तो उसने सर उचा करते अपनी आंख बंध करली.. ओर देवायतके हाथोपे अपने हाथ रख दीये ओर मदहोस होने लगी.. तब वो देवायतकी बाहोमेही जटसे पलट गइ ओर देवायतकी कमरमे हाथ डालके उसे जोरोसे बाहोमे भीचके उनके कंधेपे सर रख दीया..




दोनो अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेको बाहोमे भरके खडे रहे.. आज पुनमके लीये पहेली बारथा जो अपनेही भाइकी बाहोमे उनकी पत्नी बनके खडी थी.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखने लगे.. तब देवायतको पुनम बडीही मासुम लग रहीथी उसे पुनमकी आंओमे अपने लीये बेसुमार प्यार नजर आ रहाथा तभी दोनोके चहेरे अ‍ेक दुसरेके नजदीक आने लगे ओर अनायासही दोनोके होंठ मील गये..

ना देवायतको होंस रहा ओर नाही पुनमको होंस रहा दोनोही अपने होंठ मीलाते आंख नसीली करते स्मुच करने लगे.. ओर प्यारकी आगोसमे जाते मदहोसीमे छाने लगे.. तब देवायतका लंड खडा होते पेन्टमे तंबु बनके तन गया ओर जटके मारते पुनमकी चुतपे दस्तक देने लगा तभी पुनमको अपनी चुतपे देवायतका लंड महेसुस हुआ ओर वो सरमसे पानी पानी होगइ ओर सरमाते जटसे देवायतसे अलग होगइ ओर प्यारसे देवायतको धका मार दीया..




पुनम : (सरमाते हसते) भाइ अभी नही.. कुछ पल इन्तजार करलो.. मुजे कुछ तैयारीया करनी हे.. आप बहार जाके होलमे बैठो.. मे अभी आपको बुलाती हु..

देवायत : (हसते) पुनो जट करना अब तेरे बीना रहा नही जाता मे तुमसे जल्दी मीलना चाहता हु..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ बस कुछ पल.. मे भी आपसे मीलनेको बेकरार हु.. बस.. पांच मीनीट.. प्लीज..

कहेते देवायतको हसते हुअ‍े बहार धका देदीया तो देवायत हसते हुअ‍े होलमे सोफेपे जाके बैठ गया.. ओर पुनम दो दुधका ग्लास लेके अपने रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध करके सब तैयारीया करने लगी.. उसने सुबहसेही सब तैयारीया करके रखीथी तो अपने बेडपे नइ चदर डालके उनपे फुल बीखेरते सजाने लगी फीर आयनेके सामने बेठते खुदको हल्कासा शींगार करते सही करते सब कार्य फटाफट नीपटाने लगी..

क्युकी उसेभी देवायतसे मीलन करनेकी जल्दी थी.. आज वो सबकुछ अपने भाइपे लुटाना चाहतीथी इनकी चुत अभीसे फडफडाते पानी बहाने लगी.. आज अपना कौमार्य अपने भाइको सोपनेके लीये बेकरार थी.. कुछ फुलोकी पंखडीया अपने बेडपे छीटकके शींगार करलीया ओर अपने भाइके पास जानेके लीये बहार चली गइ जेसेही देवायतने पुनमको देखा वो जटसे खडा होगया ओर पुनमको देखता ही रहा..




आज पुनम कयामत लग रहीथी.. तब पुनम भी सरमसे पानी पानी होने लगी.. ओर देवायतने दोनो हाथ फैला दीये.. तो पुनम दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर उनके सीनेपे सर रखके खडी रही.. तो देवायतसे कंट्रोल करना मुस्कील हो रहा था उनका लंट जटके मारने लगा ओर देवायतने उसे गलेमे हाथ डालके अपने आपसे चीपकाके उनके होंठो पे होंठ रख दीये तब दोनोही आंख बंध करके अ‍ेक दुसरेके होंठोके रसपान करने लगे तभी पुनमको अपनी चुतपे देवायतका लंड ठोकर मारते महेसुस होने लगा तब उनकी चुतभी हरकतमे आते फडफडाने लगी ओर लगातार पानी छोडने लगी..




पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ चलो.. आपकी दुल्हन आपसे मीलन करनेके लीये तैयार हे..

देवायत : ओह.. बेबी.. आजतो तु कयामत लग रही हे.. तुम वाकइ बहुत खुब सुरत लग रही हो.. इश्वर करे तुजे हर जन्ममे मेरी पत्नीके रुपमे पाउ..

पुनम : (देवायतके सीनेमे सर रखते) भाइ मेभी भगवानसे हर दीन यही प्रार्थना करतीहु की हर जन्ममे आपही मुजे पतीके रुपमे मीले.. ओर भाइ.. यकीन करो हम हर जन्ममे भाइ बहेन होते हुअ‍े भी पती पत्त्नी बनके जींदगी गुजारते हे.. आज बाबाकी सब बाते सच होती नजर आ रही हे..

देवायत : पुनो अब जल्दी चल मे जल्द से जल्द तुजमे समा जाना चाहता हु.. मुजसे रहा नही जाता..

पुनम : (सरमाते हसते) भाइ मेरीभी हालत आपहीकी तराह हे आज मेरा सब अस्तीत्व आपके अंदर समाके वीलीन करना चाहती हु.. मुजे आपके अंदर समालो.. आज करदो मेरा कौमार्य भंग जो मेने सीर्फ आपके लीयेही सम्हालके रखा हे.. जो मेरी राखीका बेस्ट तोहफा होगा.. भाइ यही मेरी राखीका तोहफा हे.. जो मे आपसे मांग रही थी.. आज मे लडकीसे ओरत बननेका सोभाग्य आपसे मीलन करते ही पा लुगी..

कहातो देवायत लंड पुनमकी बाते सुनतेही जटके पे जटका मारने लगा तो देवायतसे नही रहा जाता.. तब वो पुनमको अपनी गोदमे उठालेता हे तब पुनम अपना दोनो हाथ देवायतके गलेमे डालके सरको उनके सीनेमे छुपालेती हे.. ओर देवायत पुनमको लेके उनके रुमकी ओर चल देता हे.. अंदर जाके देखातो बेड फुलोसे सजा हुआ था पुरे रुममे गुलाबकी खुस्बु आ रहीथी तब देवायत पुनमको बेडके बीच बीठा देता हे ओर बहार जाके सब दरवाजा लाइट बंध करके वापस रुममे आके उनका दरवाजाभी बंध करलेता हे..

पुनम : भाइ यहाभी सीर्फ नाइट लेम्प रखना.. सब लाइट बंध करदो.. वरना वो दया रजीया सक करेगी..

देवायत : तु इनकी फीकर मत कर वो नही आयेगी.. सो गइ होगी.. आज मेरी इस बीवीका अ‍ेसेही दीदार करना चाहता हु.. आज तुजे हर रुपमे देखना चाहता हु.. आज तुजपे बहोत प्यार आ रहा हे..

पुनम : (बेडसे खडे होते देवायतकी ओर आते) भाइ सब कुछ दीखाउगी अब ये तनपे मेरा अधीकार नही हे.. आजसे मेरा ये तन, मन, ओर धनपे सर्फ आपका अधीकार रहेगा.. आजसे आपकी बहेन आपकी अमानत हो जायेगी.. (पुनम देवायतका हाथ पकडते बेडकी ओर लेजाती हे ओर बेडपे बीठा देती हे)

देवायत : (बेडपे बेठते) बेबी.. लेकीन तेरी सादीभी तो होने वाली हे.. फीर ये अधीकार धिरेनका होजायेगा..

पुनम : (देवायतके पांवके पास नीचे घुटनोके बल बेठते सर उनके पांवपे रखते) भाइ.. रोक दो ये सादी.. मे सीर्फ आपकी बीवी बनके रहेना चाहती हु.. मुजे धिरेनसे कोइ मतलब नही.. अगर उनसे सादी करनीभी पडी तो सीर्फ दुनीया वालोको दीखानेके लीये होगी.. बाकी पत्नीतो सीर्फ आपहीकी कहेलवाउगी..

देवायत : (पुनमके सरको सहेलाते) पुनो अ‍ेसा नही हो सकता.. अब बहोत देर हो चुकी हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही तु धिरेनके साथ रहे.. ओर उसे पत्नीका हर अधीकार दे.. लेकीन तु फीकर मत कर बीवीतो मेरी ही कहेलायेगी.. तुजे हर रुपमे स्वीकार करता रहुगा ओर हमारा संसार सबसे छुपके चलता रहेगा.. ये मेरा तुमसे वादा हे..

पुनम : (सर उचा करते) भाइ मुजे अ‍ेक वादा ओर चाहीये..

देवायत : (दोनो हाथसे पुनमका चहेरा थामते) हां पुनो.. बोल आज तेरा भाइ तेरी हर ख्वाहीस पुरी करेगा.. तेरी हर बात मानेगा.. बोल कोनसा वादा चाहीये तुजे दीया..

पुनम : (अ‍ेक नजरसे देवायतकी आंखोमे देखते) भाइ वादा करो.. मेरी कोखसे जीतनेभी बच्चे होगे आपके होगे.. मे बच्चे सीर्फ आपसे ही पैदा करुगी.. ओर आप मुजे पत्नीका वो हर सुख वहा आके देते रहोगे.. वरना मे यहा आके वो हर सुख आपसे पात रहुगी..

देवायत : हां डार्लींग तेरा भाइ तुजसे वादा करता हे.. बच्चे सीर्फ हमारे ही होगे.. ओर मे तुजे वहा आके यातो इधर मीलता रहुगा.. ओर तुजे पत्नीका वो सब अधीकार ओर सुख देता रहुगा.. जीसकी तुमने कामना की हे

पुनम : (खडी होते) भाइ आज हमारी सुहागरात हे आज मुजपे कोइ रहेम मत करना मे वो हर लम्हा जीना चाहती हु मे वो पहेला दर्द महेसुस करना चाहती हु.. ओर आज प्रेगनेन्ट होजाउ तोभी कोइ गम नही हे..

देवायत : नही पुनो.. इतनी जल्दबाजी मत कर.. वो वक्तभी आयेगा जो मे तुजे प्रगनेन्ट कर दुगा लेकीन अभी नही.. पहेले तेरी सादी होजाने दे तबतक तु आइपील लेती रहेना..

पुनम : ठीक हे भाइ.. जैसा आप कहो.. सब वक्तपे छोडदो.. लेकीन मेरी सादीसे पहेले वो सुख मुजे चाहीये.. क्युकी मेनेभी बाबासे कुछ वादा कीया हे..आप बैठो मे दुध लेके आती हु..




कहेते पुनम वो दुध लेने चली गइ ओर दुधका ग्लास लेके देवायतके पास आगइ उनके पास बेठ गइ तब देवायतको अपने हाथसे दुध पीलाने लगी जब आधा ग्लास रेह गया तब देवायतने उनके हाथसे ग्लास लेलीया ओर अपने हाथोसे पुनमको पीलाने लगा.. तब पुनम दुध पीते देवायतकी आंखोंमे देखती रही जब दुध पीलीया तब देवायतने ग्लासको वही टेबलपे रख दीया तब पुनम बेडके बीच सरकके चली गइ ओर घुटनोसे पैर मोडके दोनो हाथके पंजे अपने घुटनोपे टीकाके सर जुकाके बेठ गइ..

तभी देवायतभी उनके पास सामने सरकके बेठ गया ओर पुनमका चहेरा पकडके थाम लीया तब पुनमने सरमसे नजर जुकाली.. तब देवायत उनके चहेरेको देखताही रहा तब पुनमसे रहा नही गया ओर वो बेठेही देवायतसे लीपट गइ तब देवायतने उसे अपनी बाहोमे थाम लीया ओर पुनमने सर देवायतके कंधेपे रख दीया.. उनको अभीभी यकीन नही हो रहाथा की वो आज अपने भाइकी बीवी बनके उनके साथ अ‍ेकही बीस्तरमे उनकी बाहोमे बेठीथी.. ओर उसने आज अपने आपको अपने भाइके हवाले करही दीया..

पुनम : (धीरेसे सरमाते) भाइ अब अपनी पुनमको सम्हालो.. थामलो मुजे.. ओर अपने आपमे समालो.. आजसे ये पुनम सीर्फ आपकी हे.. ओर हमेसा आपकी रहेगी..

तभी देवायत उनका चहेरा पकडलेता हे ओर अपना सर धीरे धीरे पुनमके चहेरेकी ओर लेजाता हे तब पुनम आंख बंध करते अपने होंठ फडफडाते अपने आपको देवायतके हवाले करनेको तैयार होजाती हे.. उसने अपना पुरा तन ढीला छोड दीया ताकी देवायत उसे मन चाहा प्यार कर सके.. ओर तभी उनको अपने होंठोपे देवायतके होंठ महेसुस होते हे ओर वो अपना मुह थोडा खोल लेती हे तब देवायत उनके नीचेके होठ चुमलेता हे तब आज पहेली बार पुनमके सरीरमे कंपारी छुट गइ ओर वो देवायतके उपरके होंठ चुसने लगी..




दोनोही कामातुर होते अपना मुह थोडा खोलते हे ओर अपनी जीभ अ‍ेक दुसरेके मुहमे डालनेकी कोसीस करते दोनोके मुहके रसको पीने लगते हे ओर पुरे रुममे सनाटेके साथ अ‍ेकही आवज आने लगी.. सुररपपप सुरररप सुरररपपप जेसे दोनो मुहसे ही अ‍ेक दुसरेके सरको पीते अ‍ेक दुसरेमे समा जानेकी कोसीस कर रहेथे.. तब पुनमको अ‍ेक जटका लगता हे ओर उनका पुरा तन कांप जाता हे क्युकी उसे अपने बुब्सपे देवायतका हाथ महेसुस हुआ.. जो देवायत उसे हल्का हल्का दबाके मसल रहाथा..

पुनम आज देवायतको सबकुछ करवाना चाहती थी आज उनकी जींदगीका बहुतही खास दीनथा तब आज उनके रुममे सीर्फ पुनम ओर देवायतही नही.. वहा अ‍ेक जोडा ओरभी था जो अपनी मोजुदगीका अहेसास पुनम ओर देवायतमे काम अग्नी प्रगट करके करवा रहाथा जो इन दोनोके मीलनके लीये कही सालोसे इन्तजार कर रहा था वो थे कामदेव ओर रती.., वो रती.. जो अपने अंसको पुनमके गर्भमे स्थापीत करना चाहती थी..

ताकी उनके मीध्यमसे जो बच्ची आजाये.. उनके गर्भमे वो स्वयंमके अंसको जन्म देके कामके अंसके साथ संभोग कर सके जीनके माध्यामसे वो सब परीया ओर अप्सराये वापस इस धरतीलोकपे जन्म ले सके.. इसके लीये काम ओर रतीको अ‍ेसे कइ जोडोके मीलनका इन्तजार करना पडेगा.. जीनमेसे आज अ‍ेक जोडा अपना चरमसुख पानेके लीये प्यारका खेल खेलते अ‍ेक दुसरेमे समा जानेको बेकरार थे..

देवायत ओर पुनम दोनोही अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पीते कामातुर होते काम अग्नीमे जलने लगे.. ओर देवायत पुनमके दोनो बुब्स बारी बारी मसलता रहा तब पुनमकी आंखोमे वासनाके डोरे मंडराने लगे उनकी आंख लाल होने लगी वो अचानक देवायतसे अलग होगइ ओर आंखोमे वासना भरी नजरोसे देखते देवायत के सर्टके बटन खोलने लगी.. तब देवायतने उनकी सारीका पलु नीचे गीरा दीया ओर पुनमके ब्लाउसके बटन खोलने लगा दोनोही अ‍ेक दुसरेके कपडे नीकालते अ‍ेक दुसरेको वासना भरी नजरोसे देखते रहे..

जब सर्ट ओर ब्लाउस नीकल गया तब पुनम बेडसे नीचे उतर गइ तब देवायतभी बेडके कीनारे आकर बैठ गया ओर बेठेही पुनमकी कमरमे हाथ डालकर खीचके अपनी बाहोमे भरलीया तब पुनमने देवायतके सरको पकडके अपने सीनेमे दबा दीया तब देवायतने अ‍ेक हाथ उनके पेटीकोटकी ओर लेजाते उनका नाडा खीच लीया तब पुनमका पेटीकोट सरकके नीचे गीर गया ओर पुनम सीर्फ टु पीसमेही रेह गइ..

तब वो खुब सरमाइ ओर देवायतसे छुटते उनसे थोडी दुर जाके खडी रही.. ओर देवायतकी ओर वासनाभरी नजरोसे देखते अपने आप अपनी ब्रा को खोलने लगी जब ब्राका हुक खोल दीया ओर ब्राको धीरेसे अपने बुब्ससे हटाली तब उनके गोरे गोरे छोटे संतरे जेसे बुब्स नाइट लेम्पकी रोसनीमे चमकने लगे.. जीसे देखतेही देवायत अपनी सुधबुध खोके पागल जैसा होने लगा..




वेसेतो पुनम होस्टेलमे थी तब कइ बार देवायतको इमेजींग करते अपनी चुतमे उगली करते अपने आपको सांत करलेती थी.. ओर हर वक्त अपने भाइसे मीलनके सपने देखती रहेती थी लेकीन आज उसे अपना सपना पुरा होते नजर आ रहा था आज वो सचमे अपने भाइके साथ मीलन करनेको आतुर थी..तब पुनमने दोनो हाथ अपने बुब्सपे रख दीये ओर कामुक नजरोसे देवायतकी ओर देखने लगी.. फीर अपने ही हाथोसे अपने बुब्सको दबाके उनके साथ खेलते देवायतको अपनी कामुक्ताका जलवा दीखाने लगी जीसे देखकर देवायत पागल जेसा होगया ओर उनका लंट पेन्टमेही जटके पे जटका मारने लगा..




तब देवायतसे रहा नही गया ओर वो बेडसे खडा होगया ओर पुनमको अपनी गोदमे उठाके उसे बेडपे बीचमे लीटा दीया ओर खुदने अपनी पेन्ट नीकालदी ओर सीर्फ नीकरमेही पुनमके पास लेट गया तब पुनम सरमसे पानी पानी होगइ बुरी तराह सरमाती इधर उधर देखने लगी.. तभी देवायतने उसे खीचके अपनी बाहोमे भीच लीया ओर उनपे जुक गया अ‍ेक बार फीरसे दोनोके होंठ मील गये ओर अ‍ेक दुसरेके होंठोका रसपान करते अ‍ेक दुसरोमे समा जानेके लीये बेकरार होने लगे..

तभी पुनमने देवायतको अपनी बाहोमे खीचके अपने उपर खीचके चडा दीया.. तब देवायतभी अ‍ेक पैर पुनमके उपर डालके उनके उपर लेट गया आज पहेली बारथा जो पुनमने कीसी मर्दको अपने उपर चडाया था तब वो बहुतही सरमाइ ओर देवायतके गलेमे दोनो हाथ डालके उसे अपने सीनेसे चीपकाने लगी.. तब देवायतका मुह उनके गलेमे घुसाके उनके सरको सहेलाने लगी.. तभी देवायत उनके गलेको चुमते बुब्सके पास चला गया ओर उसने अ‍ेक बुब्सको अपने मुहमे लेलीया.. ओर उसे चुमने लगा..

तब पुनम पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी ओर उसने आधी आंख चडाके नसीली करली ओर अपने भाइके सरको सहेलाते अपने मुहको इधर उधर करते छटपटाने लगी.. तब देवायत अ‍ेक बुब्सको मुहमे लेके चुसने लगा ओर दुसरे हाथसे दुसरा बुब्स मसल रहाथा जीसकी वजहसे पुनम पुरी तराह छटपटाते पागल जेसे होने लगी.. ओर वो जोरोसे देवायतका सर अपने सीनेमे दबाते लगातार सहेलाते सीसकारीया करने लगी.. अब वो पुरी तराह प्यारके नसेमे अपना होस खो चुकीथी....

कन्टीन्यु
 
Back
Top