- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 33,339
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) श्रीधर.. चलोना हम दोनो ही साथमे चले जाये.. हमारी सादीके बाद हम कही गये ही नही.. ओर तब जयश्रीका भी थोडा टेन्शन था.. अब वोभी उनकी मम्मीके वहा हे तो क्युना हम भी बेगलोर चले जाये..? चार दीन हे.. वहा हम घुम भी लेगे..
साहील : (मुस्कुराते) हां यार चलोना.. आप अपना छोटासा हनीमुन भी मना लेना.. ओर मेभी सबुको मील लुगा.. हम साथमे घुमेगे.. ओर वापस आजायेगे.. क्या कहेते हो..?
श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर हम मुना ओर बंसीको भी साथ लेले..?
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां ये अच्छा आइडीया हे.. बसंती भी साथ होगी तो मजा आजायेगा..
साहील : नही भाभी.. आनेसे पहेले मुनाको ही फोन कीया था.. अगर मुना ओर बसंती भाभी साथ चलेगे तो बरखा भाभी अकेली होजायेगी.. ओर उनकी छोटी बच्ची हेतो अकेली मेनेज नही करपायेगी.. इसीलीये मुनाने मना करदीया.. ओर बंसी नही आसकता.. क्युकी सांती भाभीके भी अच्छे दीन चल रहे हे..
श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर ठीक हे.. हम दोनो ही चलते हे.. कब नीकलना हे..?
साहील : (मुस्कुराते) बुधवार सामको वही पहोचना हे.. मे सबुको कहेकर होटेलमे दो कमरे बुक करवा लेता हु.. हम फ्लाइटमे चले जायेगे.. ओर वापसीमे देखते हे.. ट्रेनमे पीकीट मीली तो उनमे वरना वापस फ्लाइटसे आजायेगे..
श्रीधर : (मुस्कुराते) हां यार.. ये ठीक रहेगा.. तेरी भाभी कभी फ्लाइटमे नही बैठी.. तु पैसे लेजा ओर टीकीट बुक करवाले..
साहील : (मुस्कुराते) यार पैसेकी चीन्ता नही हे.. लेकीन यहा कीसीको बेंगलोरके बारेमे बताना मत.. कहेना बोम्बे कामकी वजहसे जा रहे हे.. ओर मेभी घरपे कहे दुगा.. की मे श्रीधरके साथ कंपनी देने जा रहा हु..
ब्रीन्दा : (जोरोसे हसते) साहील भैया.. मासुकाको मीलने क्या बहाना बनाया हे.. हें..हें..हें.. चलो.. इसी बहाने हमारी देवरानीको भी मील लुगी.. मतलब.. हमे परसो नीकलना हे..
बादमे साहील अपने खेतोपे चला जाता हे.. देवायतसे वापस मीली जमीन अब लेवल हो चुकी थी.. ओर उनमे उपजाव मीटी डालनेका काम भी लगभग खतम होने वाला था.. साहील वहा देखने चला गया.. उनको अपने चाचा कही दीखाइ नही दीये.. ओर दुर सब मजदुर मीटी डालनेका काम कर रहे थे..
साहील वही रुमके पास खटीया पे बैठ गया.. अभी सोच ही रहा थाकी चाचा कीधर गये.. तभी पीछेसे कुछ आवाज आइ.. साहीलने पीछे मुडकर देखा तो अेक जवान खुबसुरत मजदुरन लडकी अपने कपडे ठीक करते रुमसे बहार नीकली.. ओर साहीलको वही देखकर चोंक गइ..
फीर सरमके मारे नजरे जुका लेती हे.. ओर मुस्कुराते जटसे वहासे चली गइ.. साहीलको जरा भी समजनेमे देर नही लगीकी रुममे क्या होरहा था.. तभी फीरोज भी अपने कपडे सही करते बहार नीकला.. ओर साहीलको वही खटीया पे देखकर थोडा डरते सहेम गया..
फीरोज : (पास आते खटीयापे बैठते) अ..अरे.. साहील बेटा.. तुम कब आये..?
साहील : (मुस्कुराते) अभी.. जब आपका प्रोग्राम रुममे चल रहा था..
फीरोज : (थोडा थभराते) बेटा.. वो.. वो.. मे.. थो..डा..
साहील : (मुस्कुराते) अरे चाचा डरो मत.. ये गांवमे यही तो मजे हे.. सब कुछ खुलकर करो.. बस.. अेक दुसरेकी सहेमती होनी चाहीये.. कीसीपे कोइ जोर जबरदस्ती नही.. समज गयेनां..?
फीरोज : (सरमाकर मुस्कुराते) हां साहील बेटा.. वो.. अपनी सहेमतीसे ही आइ थी.. तुम घरपे मत कहेना.. वरना घरपे जगडा होजायेगा..
साहील : (मुस्कुराते) चाचा फीकर मत करोे कीसीको पता नही चलेगा.. बस.. उसे पेटसे मत करदेना.. वरना आपको तीसरा नीकाह भी करना पडेगा.. क्युकी इस गांवके भी कुछ उसुल हे..
फीरोज : (जटसे) अरे नही नही.. मे समज गया.. मेरे पास वो.. वो कोन्डम हे.. फीर भी अब खयाल रखुगा.. बस.. कीसीको कहेना मत..
साहील : (मुस्कुराते) चाचा.. मुजे परसो साम श्रीधरके साथ चार पांच दीनके लीये बोम्बे जाना पडेगा.. उनको वहा कुछ काम हे.. तो वो साथ चलनेको केह रहा था.. क्या मे उनके साथ जाउ..?
फीरोज : (जटसे) अरे कोइ बात नही.. मे यहा सब सम्हाल लुगा.. तुम आरामसे जाओ.. जबतक तुम वापस आओगे तबतक यहा भी काम खतम होगया होगा.. फीर कौनसी फसल उगानी हे तुम तैय करलेना..
फीरोजके पकडे जानेसे साहीलने आरामसे अपनी बात कहेदी.. ओर दुसरे खेतोकी ओर चला गया.. फीर दो पहोर खानेके वक्त भी साहील घरपे श्रीधरके साथ बोम्बे जानेकी बात करता हे.. तो सलमा साहीलकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करने लगी.. फीर वो टीकीट बुक कराने सहेर चला गया..
टीकीट बुक करते ही साहील सीधा फीरोजके पुराने घरपे चला गया.. जहा अब सायरा ओर कादीर रहेते थे.. क्युकी उनको पता थाकी दोपहर दीनमे कादीर अपनी ओफीसमे होता हे.. साहीलने दरवाजा खटखटाया.. तो उमीदके मुताबीक सायराने ही दरवाजा खोला..
सायरा साहीलको देखते ही खुसीके मारे उनके गले लग गइ.. फीर साहीलको अंदर खीचकर दरवाजा बंध करके लोक कर दीया.. फीर साहीलकी ओर मुडकर उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर साहीलके चहेरेपे पागलोकी तराह चुंबनोकी बारीस करदी..
फीर दोनोके होठ मील गये.. साहील सायराके उरोजोको दबाते सायराके होठ चुमने लगा.. तो सायराने हसते हुअे साहीलके गालको काट लीया.. ओर साहील उसे गोदमे उठाकर उनके बेडरुमकी ओर बढ गया.. फीर कुछही देरके बाद सायराके वही बेडरुमसे सीसकारीयोकी आवाज गुंजने लगी.. जहा उसने ओर कादीरने अपनी कइ राते रंगीन की थी..

दोनो ही नीवस्त्र अपनी काम क्रीडामे मग्न होगये थे.. सायराके दोनो पैर साहीलके कंधे पे थे.. ओर साहील हाथके बल उचा होते सायराकी जबरदस्त घमासान चुदाइ कर रहा था.. अपनी आदतके मुताबीक बीना नीचे उतरेही साहीलने सायराकी चुतको दो बार अपने पानीसे सीच दी..

सावर लेते भी अेक बार साहीलने खडे खडे सायराको पीछेसे चोद लीया.. फीर दोनो बहार आकर अपने अपने कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. ओर बहार होलमे आगये.. सायराने दोनोके लीये चाइ नास्ता बनाया ओर दोनो साथ बेठकर खाने लगे.. सायरा बहुत ही खुस थी..
साहील : (मुस्कुराते) हां यार चलोना.. आप अपना छोटासा हनीमुन भी मना लेना.. ओर मेभी सबुको मील लुगा.. हम साथमे घुमेगे.. ओर वापस आजायेगे.. क्या कहेते हो..?
श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर हम मुना ओर बंसीको भी साथ लेले..?
ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां ये अच्छा आइडीया हे.. बसंती भी साथ होगी तो मजा आजायेगा..
साहील : नही भाभी.. आनेसे पहेले मुनाको ही फोन कीया था.. अगर मुना ओर बसंती भाभी साथ चलेगे तो बरखा भाभी अकेली होजायेगी.. ओर उनकी छोटी बच्ची हेतो अकेली मेनेज नही करपायेगी.. इसीलीये मुनाने मना करदीया.. ओर बंसी नही आसकता.. क्युकी सांती भाभीके भी अच्छे दीन चल रहे हे..
श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर ठीक हे.. हम दोनो ही चलते हे.. कब नीकलना हे..?
साहील : (मुस्कुराते) बुधवार सामको वही पहोचना हे.. मे सबुको कहेकर होटेलमे दो कमरे बुक करवा लेता हु.. हम फ्लाइटमे चले जायेगे.. ओर वापसीमे देखते हे.. ट्रेनमे पीकीट मीली तो उनमे वरना वापस फ्लाइटसे आजायेगे..
श्रीधर : (मुस्कुराते) हां यार.. ये ठीक रहेगा.. तेरी भाभी कभी फ्लाइटमे नही बैठी.. तु पैसे लेजा ओर टीकीट बुक करवाले..
साहील : (मुस्कुराते) यार पैसेकी चीन्ता नही हे.. लेकीन यहा कीसीको बेंगलोरके बारेमे बताना मत.. कहेना बोम्बे कामकी वजहसे जा रहे हे.. ओर मेभी घरपे कहे दुगा.. की मे श्रीधरके साथ कंपनी देने जा रहा हु..
ब्रीन्दा : (जोरोसे हसते) साहील भैया.. मासुकाको मीलने क्या बहाना बनाया हे.. हें..हें..हें.. चलो.. इसी बहाने हमारी देवरानीको भी मील लुगी.. मतलब.. हमे परसो नीकलना हे..
बादमे साहील अपने खेतोपे चला जाता हे.. देवायतसे वापस मीली जमीन अब लेवल हो चुकी थी.. ओर उनमे उपजाव मीटी डालनेका काम भी लगभग खतम होने वाला था.. साहील वहा देखने चला गया.. उनको अपने चाचा कही दीखाइ नही दीये.. ओर दुर सब मजदुर मीटी डालनेका काम कर रहे थे..
साहील वही रुमके पास खटीया पे बैठ गया.. अभी सोच ही रहा थाकी चाचा कीधर गये.. तभी पीछेसे कुछ आवाज आइ.. साहीलने पीछे मुडकर देखा तो अेक जवान खुबसुरत मजदुरन लडकी अपने कपडे ठीक करते रुमसे बहार नीकली.. ओर साहीलको वही देखकर चोंक गइ..
फीर सरमके मारे नजरे जुका लेती हे.. ओर मुस्कुराते जटसे वहासे चली गइ.. साहीलको जरा भी समजनेमे देर नही लगीकी रुममे क्या होरहा था.. तभी फीरोज भी अपने कपडे सही करते बहार नीकला.. ओर साहीलको वही खटीया पे देखकर थोडा डरते सहेम गया..
फीरोज : (पास आते खटीयापे बैठते) अ..अरे.. साहील बेटा.. तुम कब आये..?
साहील : (मुस्कुराते) अभी.. जब आपका प्रोग्राम रुममे चल रहा था..
फीरोज : (थोडा थभराते) बेटा.. वो.. वो.. मे.. थो..डा..
साहील : (मुस्कुराते) अरे चाचा डरो मत.. ये गांवमे यही तो मजे हे.. सब कुछ खुलकर करो.. बस.. अेक दुसरेकी सहेमती होनी चाहीये.. कीसीपे कोइ जोर जबरदस्ती नही.. समज गयेनां..?
फीरोज : (सरमाकर मुस्कुराते) हां साहील बेटा.. वो.. अपनी सहेमतीसे ही आइ थी.. तुम घरपे मत कहेना.. वरना घरपे जगडा होजायेगा..
साहील : (मुस्कुराते) चाचा फीकर मत करोे कीसीको पता नही चलेगा.. बस.. उसे पेटसे मत करदेना.. वरना आपको तीसरा नीकाह भी करना पडेगा.. क्युकी इस गांवके भी कुछ उसुल हे..
फीरोज : (जटसे) अरे नही नही.. मे समज गया.. मेरे पास वो.. वो कोन्डम हे.. फीर भी अब खयाल रखुगा.. बस.. कीसीको कहेना मत..
साहील : (मुस्कुराते) चाचा.. मुजे परसो साम श्रीधरके साथ चार पांच दीनके लीये बोम्बे जाना पडेगा.. उनको वहा कुछ काम हे.. तो वो साथ चलनेको केह रहा था.. क्या मे उनके साथ जाउ..?
फीरोज : (जटसे) अरे कोइ बात नही.. मे यहा सब सम्हाल लुगा.. तुम आरामसे जाओ.. जबतक तुम वापस आओगे तबतक यहा भी काम खतम होगया होगा.. फीर कौनसी फसल उगानी हे तुम तैय करलेना..
फीरोजके पकडे जानेसे साहीलने आरामसे अपनी बात कहेदी.. ओर दुसरे खेतोकी ओर चला गया.. फीर दो पहोर खानेके वक्त भी साहील घरपे श्रीधरके साथ बोम्बे जानेकी बात करता हे.. तो सलमा साहीलकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करने लगी.. फीर वो टीकीट बुक कराने सहेर चला गया..
टीकीट बुक करते ही साहील सीधा फीरोजके पुराने घरपे चला गया.. जहा अब सायरा ओर कादीर रहेते थे.. क्युकी उनको पता थाकी दोपहर दीनमे कादीर अपनी ओफीसमे होता हे.. साहीलने दरवाजा खटखटाया.. तो उमीदके मुताबीक सायराने ही दरवाजा खोला..
सायरा साहीलको देखते ही खुसीके मारे उनके गले लग गइ.. फीर साहीलको अंदर खीचकर दरवाजा बंध करके लोक कर दीया.. फीर साहीलकी ओर मुडकर उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर साहीलके चहेरेपे पागलोकी तराह चुंबनोकी बारीस करदी..
फीर दोनोके होठ मील गये.. साहील सायराके उरोजोको दबाते सायराके होठ चुमने लगा.. तो सायराने हसते हुअे साहीलके गालको काट लीया.. ओर साहील उसे गोदमे उठाकर उनके बेडरुमकी ओर बढ गया.. फीर कुछही देरके बाद सायराके वही बेडरुमसे सीसकारीयोकी आवाज गुंजने लगी.. जहा उसने ओर कादीरने अपनी कइ राते रंगीन की थी..

दोनो ही नीवस्त्र अपनी काम क्रीडामे मग्न होगये थे.. सायराके दोनो पैर साहीलके कंधे पे थे.. ओर साहील हाथके बल उचा होते सायराकी जबरदस्त घमासान चुदाइ कर रहा था.. अपनी आदतके मुताबीक बीना नीचे उतरेही साहीलने सायराकी चुतको दो बार अपने पानीसे सीच दी..

सावर लेते भी अेक बार साहीलने खडे खडे सायराको पीछेसे चोद लीया.. फीर दोनो बहार आकर अपने अपने कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. ओर बहार होलमे आगये.. सायराने दोनोके लीये चाइ नास्ता बनाया ओर दोनो साथ बेठकर खाने लगे.. सायरा बहुत ही खुस थी..









