Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 113 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) श्रीधर.. चलोना हम दोनो ही साथमे चले जाये.. हमारी सादीके बाद हम कही गये ही नही.. ओर तब जयश्रीका भी थोडा टेन्शन था.. अब वोभी उनकी मम्मीके वहा हे तो क्युना हम भी बेगलोर चले जाये..? चार दीन हे.. वहा हम घुम भी लेगे..

साहील : (मुस्कुराते) हां यार चलोना.. आप अपना छोटासा हनीमुन भी मना लेना.. ओर मेभी सबुको मील लुगा.. हम साथमे घुमेगे.. ओर वापस आजायेगे.. क्या कहेते हो..?

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर हम मुना ओर बंसीको भी साथ लेले..?

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां ये अच्छा आइडीया हे.. बसंती भी साथ होगी तो मजा आजायेगा..

साहील : नही भाभी.. आनेसे पहेले मुनाको ही फोन कीया था.. अगर मुना ओर बसंती भाभी साथ चलेगे तो बरखा भाभी अकेली होजायेगी.. ओर उनकी छोटी बच्ची हेतो अकेली मेनेज नही करपायेगी.. इसीलीये मुनाने मना करदीया.. ओर बंसी नही आसकता.. क्युकी सांती भाभीके भी अच्छे दीन चल रहे हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) तो फीर ठीक हे.. हम दोनो ही चलते हे.. कब नीकलना हे..?

साहील : (मुस्कुराते) बुधवार सामको वही पहोचना हे.. मे सबुको कहेकर होटेलमे दो कमरे बुक करवा लेता हु.. हम फ्लाइटमे चले जायेगे.. ओर वापसीमे देखते हे.. ट्रेनमे पीकीट मीली तो उनमे वरना वापस फ्लाइटसे आजायेगे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) हां यार.. ये ठीक रहेगा.. तेरी भाभी कभी फ्लाइटमे नही बैठी.. तु पैसे लेजा ओर टीकीट बुक करवाले..

साहील : (मुस्कुराते) यार पैसेकी चीन्ता नही हे.. लेकीन यहा कीसीको बेंगलोरके बारेमे बताना मत.. कहेना बोम्बे कामकी वजहसे जा रहे हे.. ओर मेभी घरपे कहे दुगा.. की मे श्रीधरके साथ कंपनी देने जा रहा हु..

ब्रीन्दा : (जोरोसे हसते) साहील भैया.. मासुकाको मीलने क्या बहाना बनाया हे.. हें..हें..हें.. चलो.. इसी बहाने हमारी देवरानीको भी मील लुगी.. मतलब.. हमे परसो नीकलना हे..

बादमे साहील अपने खेतोपे चला जाता हे.. देवायतसे वापस मीली जमीन अब लेवल हो चुकी थी.. ओर उनमे उपजाव मीटी डालनेका काम भी लगभग खतम होने वाला था.. साहील वहा देखने चला गया.. उनको अपने चाचा कही दीखाइ नही दीये.. ओर दुर सब मजदुर मीटी डालनेका काम कर रहे थे..

साहील वही रुमके पास खटीया पे बैठ गया.. अभी सोच ही रहा थाकी चाचा कीधर गये.. तभी पीछेसे कुछ आवाज आइ.. साहीलने पीछे मुडकर देखा तो अ‍ेक जवान खुबसुरत मजदुरन लडकी अपने कपडे ठीक करते रुमसे बहार नीकली.. ओर साहीलको वही देखकर चोंक गइ..

फीर सरमके मारे नजरे जुका लेती हे.. ओर मुस्कुराते जटसे वहासे चली गइ.. साहीलको जरा भी समजनेमे देर नही लगीकी रुममे क्या होरहा था.. तभी फीरोज भी अपने कपडे सही करते बहार नीकला.. ओर साहीलको वही खटीया पे देखकर थोडा डरते सहेम गया..

फीरोज : (पास आते खटीयापे बैठते) अ..अरे.. साहील बेटा.. तुम कब आये..?

साहील : (मुस्कुराते) अभी.. जब आपका प्रोग्राम रुममे चल रहा था..

फीरोज : (थोडा थभराते) बेटा.. वो.. वो.. मे.. थो..डा..

साहील : (मुस्कुराते) अरे चाचा डरो मत.. ये गांवमे यही तो मजे हे.. सब कुछ खुलकर करो.. बस.. अ‍ेक दुसरेकी सहेमती होनी चाहीये.. कीसीपे कोइ जोर जबरदस्ती नही.. समज गयेनां..?

फीरोज : (सरमाकर मुस्कुराते) हां साहील बेटा.. वो.. अपनी सहेमतीसे ही आइ थी.. तुम घरपे मत कहेना.. वरना घरपे जगडा होजायेगा..

साहील : (मुस्कुराते) चाचा फीकर मत करोे कीसीको पता नही चलेगा.. बस.. उसे पेटसे मत करदेना.. वरना आपको तीसरा नीकाह भी करना पडेगा.. क्युकी इस गांवके भी कुछ उसुल हे..

फीरोज : (जटसे) अरे नही नही.. मे समज गया.. मेरे पास वो.. वो कोन्डम हे.. फीर भी अब खयाल रखुगा.. बस.. कीसीको कहेना मत..

साहील : (मुस्कुराते) चाचा.. मुजे परसो साम श्रीधरके साथ चार पांच दीनके लीये बोम्बे जाना पडेगा.. उनको वहा कुछ काम हे.. तो वो साथ चलनेको केह रहा था.. क्या मे उनके साथ जाउ..?

फीरोज : (जटसे) अरे कोइ बात नही.. मे यहा सब सम्हाल लुगा.. तुम आरामसे जाओ.. जबतक तुम वापस आओगे तबतक यहा भी काम खतम होगया होगा.. फीर कौनसी फसल उगानी हे तुम तैय करलेना..

फीरोजके पकडे जानेसे साहीलने आरामसे अपनी बात कहेदी.. ओर दुसरे खेतोकी ओर चला गया.. फीर दो पहोर खानेके वक्त भी साहील घरपे श्रीधरके साथ बोम्बे जानेकी बात करता हे.. तो सलमा साहीलकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करने लगी.. फीर वो टीकीट बुक कराने सहेर चला गया..

टीकीट बुक करते ही साहील सीधा फीरोजके पुराने घरपे चला गया.. जहा अब सायरा ओर कादीर रहेते थे.. क्युकी उनको पता थाकी दोपहर दीनमे कादीर अपनी ओफीसमे होता हे.. साहीलने दरवाजा खटखटाया.. तो उमीदके मुताबीक सायराने ही दरवाजा खोला..

सायरा साहीलको देखते ही खुसीके मारे उनके गले लग गइ.. फीर साहीलको अंदर खीचकर दरवाजा बंध करके लोक कर दीया.. फीर साहीलकी ओर मुडकर उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर साहीलके चहेरेपे पागलोकी तराह चुंबनोकी बारीस करदी..

फीर दोनोके होठ मील गये.. साहील सायराके उरोजोको दबाते सायराके होठ चुमने लगा.. तो सायराने हसते हुअ‍े साहीलके गालको काट लीया.. ओर साहील उसे गोदमे उठाकर उनके बेडरुमकी ओर बढ गया.. फीर कुछही देरके बाद सायराके वही बेडरुमसे सीसकारीयोकी आवाज गुंजने लगी.. जहा उसने ओर कादीरने अपनी कइ राते रंगीन की थी..





दोनो ही नीवस्त्र अपनी काम क्रीडामे मग्न होगये थे.. सायराके दोनो पैर साहीलके कंधे पे थे.. ओर साहील हाथके बल उचा होते सायराकी जबरदस्त घमासान चुदाइ कर रहा था.. अपनी आदतके मुताबीक बीना नीचे उतरेही साहीलने सायराकी चुतको दो बार अपने पानीसे सीच दी..





सावर लेते भी अ‍ेक बार साहीलने खडे खडे सायराको पीछेसे चोद लीया.. फीर दोनो बहार आकर अपने अपने कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. ओर बहार होलमे आगये.. सायराने दोनोके लीये चाइ नास्ता बनाया ओर दोनो साथ बेठकर खाने लगे.. सायरा बहुत ही खुस थी..
 
सायरा : (मुस्कुराते) हां तो मेरे पहेले सौहर.. बडे दीनोके बाद अपनी इस बीवीकी याद आइ..? बीचमे मीलने नही आ सकते..? कीतना मीस कर रही हु आपको..

साहील : (मुस्कुराते) भाभी.. थोडा काममे फसा हुआ था..

सायरा : (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते) साहील.. अभी हम दोनो अकेले हे.. तो भाभी नही.. सीर्फ आपकी सायरा.. आपकी बीवी.. कहो.. कीस कामसे आना हुआ था..?

साहील : (मुस्कुराते) सायरा.. घरपे जुठ बोला हे.. लेकीन तुमसे जुठ नही बोलुगा..

सायरा : (मुस्कुराते) क्या..?

साहील : (मुस्कुराते) सबुकी कोलेजमे चार दीनकी छुटी हे.. तो उनको परसो वही मीलने जा रहा हु.. क्युकी चाचा ओर अम्मीकी सादीसे वो थोडी नाराज हे.. तो गांव नही आ रही.. मुजे वहा बुलाया हे..

सायरा : (मुस्कुराते) हां तो चले जाओ.. वैसे भी मेरी होने वाली सौतन हे.. क्या अभी तक कुछ कीया बीया की नही..? हें..हें..हें.. जनाबका इरादा तो नेक हेनां..?

साहील : (मुस्कुराते) हंम.. पता नही.. अब वहा जाउगा तो पता चलेगा.. अगर हमने कुछ कीया तो क्या आपको अच्छा लगेगा..?

सायरा : (मुस्कुराते) हां क्यु नही.. मेरी होने वाली सौतन हे.. तो क्या हर्ज हे..? मेने ओर कादीरने भी तो सादीसे पहेले मजे कीये थे.. ओर मे इसे बुरा भी नही मानती.. लेकीन ध्यान रखना.. सबुका पहेली बार हे.. ओर आपका बहुत बडा हे.. उसे पढाइमे कोइ तकलीफ ना हो..

साहील : (सामने देखते मनमे) सायरा.. अब तुमसे क्या कहु.. सबु यहासे गइ तब ही मुजसे चुदवाके गइ हे.. पहेली बार बेहोस भी होगइ थी.. ओर अबतक मुजसे चारसे पांच बार चुद चुकी हे.. वहा जाकर भी उसे खुब पेलुगा..

सायरा : (मुस्कुराते) जानु.. क्या सोच रहे हो..? मेरी ओरसे पुरी परामीशन हे.. वैसे भी वो थोडी अकडु हे.. अ‍ेक बार उनकी सारी अकड नीकालदो.. हें..हें..हें.. जाओ.. दोनो मजे करो..

साहील : (मुस्कुराते) तुम पहेलेसे काफी बदल गइ हो.. अ‍ेक बीन्दास्त लडकी..

सायरा : (गाल चुमते) हां.. आपके प्यारने बदल दीया.. जानु.. दो दीनके बाद मेरे पीरीयडकी डेट हे.. देखती हु इस बार क्या होता हे.. क्युकी जबसे हम मीले हे तबसे पेटमे कुछ अजीब हो रहा हे.. अगर इस बार पीरीयड मीस हुआ तो टेस्ट कीटसे चेक कर लुगी..

साहील : (मुस्कुराते) अगर रीजल्ट पोजीटव आया तो..?

सायरा : (होंट चुमते मुस्कुराते) तो क्या हुआ..? पहेला कोल इनके पापाको करुगी.. यानीकी आपको.. फीर कादीरको बताउगी.. मुजे पुरा यकीन हेकी ये हमारा बच्चा होगा.. लव यु जानु..

साहील : (मुस्कुराते) देखना भाइको सक ना होजाये..

सायरा : (मुस्कुराते) नही होगा.. मे सब सम्हाल लुगी.. बस.. अ‍ैसे ही मीलने आया करो.. हम हमारी अलग दुनीया बसायेगे.. सबसे छुपकर.. कास तुम सादीसे पहेले मुजे मीले होते..

फीर चाइ नास्ता करलीया तो सायरा खाली प्लेट लेकर कीचनमे चली गइ.. तो साहील भी उनके पीछे चला गया.. ओर सायराको पीछेसे ही अपनी बाहोमे भीच लीया..सायरा मुस्कुराते आंख बंध करके मदहोस होने लगी.. ओर उसने अपना सर पीछेही साहीलके कंधेपे डाल दीया..





साहील उनके उरोजोको मसलते सायराकी गरदन चुमने लगा.. तो सायरा अ‍ेक बार फीर उतेजीत हो गइ.. ओर पलटकर अपनी सलवार ओर पेन्टी नीकालदी.. फीर साहीलकी पेन्टकी जीप खोलकर लंडको बहार खीच लीया.. तो साहीलने सायराको वही कीचनमे प्लेटफोर्मपे बीठा दीया..





फीर उनकी दोनो टांगोके बीच आकर अपना तगडा लंड अ‍ेक बार फीर सायराकी चुतमे धुसा दीया.. सायराने साहीलके गलेमे हाथ डालकर उसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. फीर साहीलने वही सायराको जबरदस्त तरीकेसे चोद लीया.. साहील कादीरके आनेसे पहेले ही वहासे नीकल गया.. तो सीधा गांव चला गया..

तो इधर सहेरमे भी लखन होस्टेलकी ओफीसमे बैठकर अपने फोनपे वोट्सअ‍ेपपे भावीका ओर नीलमसे बाते करने लगा.. ओर अ‍ेक हल्की फुल्की मजाक वाला मेसेज टीनाको भी करदीया.. तो लखनकी उमीदसे वीपरीत टीनाने भी जल्दी अ‍ेक हसने वाली इमोजीके साथ जवाब भेजा..

फीर चेटपे बाते करते टीनाने उसे अपने ओर्डरके सभी कपडे रेडी होनेका मेसेज भेजा.. ओर लास्टमे अ‍ेक बार फीर टीनाने उसे कोफी पीनेके लीये मीलनेको कहा.. लखन बडी ही सावधानीसे टीनाके साथ आगे बढ रहा था.. हालाकी टीनाकी उमर भी रश्मी जीतनी ही बडी थी..

दो पहोर खानेके वक्त आज चंदा अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी तराह सरमा रही थी.. तो लखनने आतेही सबके सामने चंदाके होठोको चुम लीया.. तो चंदा सरमसे पानी पानी होगइ.. पुनम सृती ओर राधीका जोरोसे हसने लगी.. फीर लखन फ्रेस होने चला गया..

अब कीसीके भी बीच कोइ पर्दा नही था.. लखनकी सभी बीवीया भी समज चुकी थी.. की अबतो आये दीन ये सब होने ही वाला हे.. फीर सबलोग खाना खाने बैठ गये.. तबभी लखन खाना खाते नीचेसे अपनी सभी बीवीओको छेड रहा था.. तो सृतीने सरमाकर हसते लखनको जांगपे जोरोसे चपत भी लगाइ..

तो सभी जोरोसे हसने लगी.. ओर अ‍ैसे ही मजाक करते दीन नीकल गया.. इस रात चंदाकी हालत पुरी तराह ठीक नही हुइ थी.. तो वो वीजयको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर इस रात लखन सृती राधीका ओर पुनमको प्यार करता रहा.. ओर अ‍ैसे ही रात बीत गइ..

दुसरा दीन ब्रीन्दाके लीये बहुत ही व्यस्त रहा.. आज वो बहुत ही अ‍ेक्साइटेड थी.. क्युकी कल श्रीधरके साथ अपने छोटेसे हनीमुनपे जा रही थी.. ब्रीन्दाने पेकींग करना सुरु करदीया.. सीर्फ गांवसे नीकलते वक्त ओर वापस आते वक्त पहेनी हुइ सारी..

बाकी उसने अपने सभी लेटेस्ट कपडे पेक कीये.. सलवार खमीस.. मीनी स्कट.. अ‍ेक पारदर्शी नाइटी.. लेटेस्ट ब्रा नीकरके कुछ सेट.. जो सब कपडे उसे श्रीधरने दीलवाये थे.. फीर फेसीयल नीचेकी सफाइ.. सबकुछ अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी तराह अपने आपको तैयार कर रही थी..

ओर यही सब तैयारीया सबाना बेंगलोरमे अपनी होस्टेलपे कर रही थी.. वो हमेसा साहीलने दीया हुआ दोनोकी तसवीर वाला पेन्डल पहेनकर रखती.. ओर अपनी सहेलीओसे साहीलके बारेमे उत्साहसे बाते करते पेन्डल वाली तसवीर दीखाती.. जबसे रातमे साहीलका फोन आया तबसे वो बहुत ही उत्साहीत थी..

फीर सामको अ‍ेक अच्छीसी लकजरी होटेलपे जाकर उसने चार दीनके लीये दो रुम बुक करलीये.. साहीलने उसे बतायाकी साथमे श्रीधर ओर ब्रीन्दा भाभी भी आ रहे हे.. तो ब्रीन्दाको भाभी बुलाना सुनकर सबानाको थोडा अजीब लगा.. उसने साहीलको पुछा भी.. की तुम आंटीको भाभी क्यु बोल रहे हो..?

तो साहीलमे मुस्कुराते सरप्राइज कहेते बातको टाल दीया.. ओर कहाकी वहा आकर तुजे सबकुछ बता देगे.. सबाना ब्रीन्दाके बारेमे सीर्फ इतना ही जानती थी की वो साहीलके दोस्त श्रीधरकी मम्मी हे.. बाकी कुछ नही.. फीर उसने साहीलको ओर कोइ सवाल नही पुछे.. बस इतना जानलीया की तीनो फ्लाइटसे आ रहे हे.. तो सबानाने उसे रीसीव करने आनेकी बात कही....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २९०

तो साहीलमे मुस्कुराते सरप्राइज कहेते बातको टाल दीया.. ओर कहाकी वहा आकर तुजे सबकुछ बता देगे.. सबाना ब्रीन्दाके बारेमे सीर्फ इतना ही जानती थी की वो साहीलके दोस्त श्रीधरकी मम्मी हे.. बाकी कुछ नही.. फीर उसने साहीलको ओर कोइ सवाल नही पुछे.. बस इतना जानलीया की तीनो फ्लाइटसे आ रहे हे.. तो सबानाने उसे रीसीव करने आनेकी बात कही.... कन्टीन्यु

ये दीन भी सामान्य दीनकी तराह नीकल गया.. सब अपनी रुटीन लाइफ जी रहे थे.. लेकीन इन सबके बीच पुनम अंदर ही अंदर बैचेन हो रही थी.. ओर आज सुबह राधीका लखन ओर सृती कामपे चले गये ओर चंदा अपने रुममे थी.. तब पुनम अपनी बच्चीको लेकर उपर अपने कमरेमे चली गइ.. ओर उसने मंजुको फोन करदीया..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. बोल मेरी बच्ची.. क्या परेसान हो तुम..?

पुनम : (धीरेसे) येस मोम.. समजमे नही आता की सब कैसे हेन्डल बरु..? सृती दीदीसे बात करनेकी हींमत नही हो रही..

मंजुला : (सांत लहेजेमे) बेटा.. हमे प्रकृतीमी नीयतीमे कोइ दखल नही देना.. जोभी होता हे होने दो.. मे ओर देवु सामको वही आ रहे हे.. हमे वहा जानेकी कोइ योजना बनानी होगी.. अ‍ैसे ही अचानक अ‍ेक साथ सबलोग नही जा सकते.. वरना कीसीको सक होगा..

पुनम : (धीरेसे) मोम.. क्या मे भावना दीदीसे बात करलु..? उनको कहुगी वो आप दोनो आ रहे हो.. तो वो कुछ खानेका प्रोग्राम बना लेगी.. तो हम सब वही जा सकते हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) देखा..? तेरा दीमाग तो चल रहा हे.. फीर क्यु गभराती हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) मोम.. आपभीनां..? इतनी सीरीयस मेटरमे भी कैसे मुस्कुरा देती हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. आज मे हु.. कल नही होउगी.. तब तुजे भी सब अ‍ैसे ही हेन्डल करना पडेगा.. जैसे तुम कुछ जानती ही नही.. ओर कौन जा रहा हे..? सबको जाकर वापस भीतो आना हे.. तो क्यु दुखी होना..? हम सृतीको कीसीभी बहाने वही रोक लेगे.. तुम भावुसे बात करलो.. उनको ओर कुछ मत बताना..

पुनम : मोम.. आप ओर भैया सीधे वही चले जाना.. ओर भावुदीको कहेना आज रात हम यहा रुक रहे हे तो वो हम सबको वहा खानेके लीये बुलाले.. तो हम सब आजायेगे.. ओर देर रात तक वही रहेगे.. आप सृतीदी.. ओर राधीका दीदीको वही रोक लेना.. अगर सृती दीदीको अकेले रुकनेके लीये कहा तो वो सक करेगी.. आप समज गइनां..?

मंजुला : (मुस्कुराते) देखा.. पुरी योजना बन गइनां..? तुम खामखा टेन्शन ले रही हो.. चल फोन रखती हु.. हम दोनो सामको सीधे वही पहोंच जायेगे.. तु टेन्शन मत ले..

पुनम ओर मंजुने मीलकर सबसे छुपकर योजना बनाली.. दो पहोर लंचके टाइम सबकुछ सामान्य था.. आज भी लखन राधीका सृती ओर चंदाकी मस्तीया करता रहा.. तो अब चंदा भी खुलकर लखनको जवाब दे रही थी.. ओर फीर सबलोग आराम करने चले गये..

सामको सृती अपनी कार लेकर क्लीनीकपे चली गइ.. लखन भी राधीकाको घर छोडकर होस्टेलपे चला गया.. सामको मंजु ओर देवायत सीधे ही भुमीके घर चले गये.. तो दोनोको देखकर नीर्मला भुमीका बहुत खुस होगइ.. तब भावनाभी अपनी बच्चीको लेकर नीचे आगइ..

वो आते ही मंजुके गले लग गइ.. लेकीन देवायतसे बहुत ही औपचारीक्तासे मीली.. क्युकी जबसे उनका लखनके साथ सारीरीक सबंध स्थापीत हुआ हे तबसे भावना भी चंदाकी तराह देवायतसे भावनात्मक तरीकेसे दुर होने लगी थी.. ओर यही तो लखनकी खासीयत थी..

फीर सब लोग बाते करने लगे.. देवायत बच्चीके साथ खेलने लगा.. फीर कुछ देरके बाद मंजु ओर भावना कीचनमे चली गइ.. तब नीर्मला ओर भुमीकाको पता चलाकी दोनो यहा रात रुकने वाले हे.. तो दोनो देवायतसे मीलनेकी योजना बनाने लगी.. तभी भावना ओर मंजु कीचनमे बाते कर रही थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) भावु.. आज हम यहा रुकने वाले हे.. तो क्युना वो लखन ओर सबको यहा बुलाले.. सब परीवार वाले मीलकर मजे करेगे.. तुम सृती ओर लखनको फोन करदो.. की सबलोग यही आजाये..

भावना : (खुस होते मुस्कुराते) दीदी.. ये ठीक याद दीलाया आपने.. मे अभी लखन भैया ओर सृतीको फोन करती हु.. आप चाइका ध्यान रखना..

मंजुला : (सरारती मुस्कानसे धीरेसे) सुन.. क्या लखन तुजे यहा मीलने आता हेकी नही..? अगर नही आता तो बोल मे अभी उनको बोल देती हु..

भावना : (सर्मसार होते धीरेसे) नही दीदी.. आता हे.. कमसे कम हप्तेमे अ‍ेक बार.. लेकीन मोम ओर भुमी मौसीको कुछ नही पता.. सब चुपकेसे चल रहा हे.. जब दो पहोरके खानेके बाद दोनो आराम करती हे तब मे लखनको फोन करके बुला लेती हु..

मंजुला : (मुस्कुराते) चलो ठीक हे.. मेरा लखन सबका ध्यान तो रखता हे.. भावु.. तुम खुस तो होनां..?

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. बहुत.. बहुत.. बहुत खुस हु.. पहेलेसे भी ज्यादा.. हम जब भी मीलते हे मुजे आज भी अ‍ेक कुआरी लडकीका अहेसास करवाते हे.. आप चाइका ध्यान रखो मे फोन कर देती हु..

फीर भावना सबको फोन करके वहा बुला लेती हे.. सृती सीधी क्लीनीक्से ही वही आगइ.. लखन पुनम चंदा ओर राधीकाको बच्चोके साथ अपनी कारमे लेकर आगया.. मंजुने वीजयको अपनी गोदमे लेलीया.. ओर उसे खुब प्यार दीया.. भावना कातील नजरोसे लखनकी ओर देखते मुस्कुरा रही थी..

आज मंजुने देखा चंदा पहेलेसे बहुत सांत लग रही थी.. ओर अपने आपको कुछ ज्यादा ही सजा सवारा था.. देवायतने उनको अपनी बाहोमे भरते प्यार कीया.. तो चंदा कुछ ज्यादाही असहज हो रही थी.. ओर ये बात मंजुने नोटीस करली.. ओर इसका मतलब भी मंजुको पता चल गया.. की अब चंदाभी भावनाकी तराह लखनसे काफी क्लोज हो चुकी हे..

नीर्मला ओर भुमीकाने लखनको अपना दामाद कहेते उनकी खुब मस्तीया की.. तब सृती लखनकी ओर देखते सर्मसार होगइ.. ओर सबके साथ हसती रही.. आज मंजुने उसे भुमीकाके पास जगह दी.. तो भुमीकाने सृतीका हाथ थाम लीया.. सब लोग खुब हसे.. फीर खाना बन गया तो सब लोग खानेके लीये बैठ गये..

खानेके बाद सब लोग सोफेपे बैठे बाते कर रहे थे.. तब लखन ओर राधीका सबके लीये आइसक्रीम लेने चले गये.. पुनम ओर मंजुकी ये दुवीधा थीकी आने वाले वक्तके बारेमे कीसीसे बात भी नही कर सकते.. क्युकी वो कीसीको अभीसे चीन्तामे डालना नही चाहती थी..

लखन राधीका सबके लीये आइसक्रीम लाये सबने अ‍ेक दुसरेकी मस्तीया करते आइसक्रीम खाइ ओर खुब बाते की.. रातके करीब बाराह बजे थे.. तब पुनमने घर जानेकी पेसकस की.. ओर मंजुने सृती ओर राधीकाको वही रोक लीया.. राधाीकाको इसीलीये रोका ताकी सृतीको अकेली रोकते तो उनको सक हो जाता..
 
पुनमने बच्चेका हवाला देते घर जानेका फैसला कीया तो साथमे वीजयकी वजहसे चंदा भी साथ चलनेको तैयार होगइ.. ओर पुनम वहीतो चाहती थी.. फीर लखन पुनम ओर चंदाको लेकर सबको गले मीलकर घर चला गया.. उधर सृती ओर राधीका भावनाके साथ उपर सोने चली गइ..

अब नीचे सीर्फ नीर्मला भुमीका मंजु ओर देवायत ही थे.. मंजुने नीर्मला ओर भुमीकाके सामने ही देवायतको आज रात उन दोनोके साथ सोनेको कहा.. तो नीर्मला ओर भुमीका बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर मंजु उपर भावनाके साथ सोने चली गइ..

नीर्मलाने सभी दरवाजे ओर लाइटे बंध करदी.. तबतक भुमीका देवायतका हाथ पकडकर अपने रुममे जा चुकी थी.. ओर पीछे नीर्मला भी आगइ.. ओर उसने रुमका दरवाजा भी बंध करके लोक करदीया.. देखा तो भुमीका ओर देवायत दोनो ही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे खडे अ‍ेक दुसरेके होंठोको चुम रहे थे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) देवु.. यहा दुसरी बीवी भी खडी हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (दुसरी बाहे फैलाते धीरेसे) नीमु.. तुभी आजा.. मेरी मंजुने आजकी रात सीर्फ तुम दोनोके लीये ही दीहे..

नीर्मला : (मुस्कुराते बाहोमे आते) हम कभी मंजुको समज ही नही पायेगे.. वो अपनी सभी सौतनोका बहुत खयाल रखती हे.. लेकीन भुमी.. तु अपना खयाल रखना.. अब डीलीवरीमे महज सीर्फ बाराह प्रद्नह दीन ही बचे हे.. सृतीने कबकी डेट दी तुजे..?

भुमीका : (मुस्कुराते) अरे कोइ दीकत नही.. मे सीर्फ पीछेसे ही.. अभी बाराह दीनके बादकी डेट हे..

नीर्मला : देवु.. भुमीका खयाल रखना.. हमे कोइ जोखीम नही उठाना.. पहेले तुम भुमीके साथ ही सुरु करो.. बाकी पुरी रात सम्हालनेके लीये मेतो हुही..

फीर तीनोने अपने कपडे नीकाल दीये.. ओर भुमीका घोडी बन गइ.. फीर अपना मुह तकीयेपे टीका दीया.. कुछ ही देरमे कमरेमे सीसकारीयोकी आवाज गुंजने लगी.. देवायत बडी ही सावधानीसे भुमीको पीछेसे पेल रहा था.. ओर नीर्मला पास बैठकर देवायतके होठोको चुम रही थी..





तो दुसरी ओर लखन पुनम ओर चंदा घरपे पहोंच गये.. पुनम ओर चंदा अपने अपने बच्चेको लेकर कारसे उतर गइ.. ओर लखनके साथ अंदर आगइ.. तो सीर्फ तीनो ही थे तो आज पुनमने भी अपनी बच्चीके साथ नीचे ही सोनेकी पेसकस की.. लखन फ्रेस होने चला गया.. तभी..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. आज मेभी यही दुसरे कमरेमे सोजाती हु.. बच्चीतो मेरे साथ ही सोजायेगी.. आप वीजयका जुला भी मेरे रुममे छोडदो.. मे दोनोको सम्हाल लुगी..

चंदा : (सर्मसार होते थोडी हीचकीचाते) दीदी.. वो.. वीजय भलेही मेरे साथ रहा.. वही जुलेमे सोता रहेगा.. आप दोनो आरामसे सोजाइअ‍े..

पुनम : (नजदीक आते कंधेपे हाथ रखते धीरेसे) भाभी.. आपतो जानतीहो की इन्हे रोज चाहीये.. ओर अभी मे उनको दे नही सकती.. कमसे कम पंद्नह दीन ओर.. तो मे चाहती हु आजकी रात आप अपने देवरको सम्हाल लीजीये.. वैसे भी अब आप काफी ठीक होगइ हे..

चंदा : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे फुसफुसाते) दीदी.. वो.. वो.. मे..? मतलब..

पुनम : (गले लगाते) भाभी.. डरीये मत.. यहा कोइ संकोच नही.. आप यहा अपनी लाइफ खुलकर जीये.. आज मेने बडे भैया ओर आपको देखा.. आप कीतना असहज महेसुस कर रही थी.. तो फीकर मत कीजीये.. अब आपको ओर भावना भाभीको हमेसाके लीये लखन ही सम्हालेगे.. प्रत्यक्ष रुपमे ना सही.. अप्रत्यक्ष रुपसे आप मेरी सौतन ही हे.. ओर जरुरत पडी तो मे तुम दोनोकी सादी भी करवा दुगी..

चंदा : (जटसे धीरेसे) नही.. मतलब.. इसकी कोइ जरुरत नही हे.. जब आपने हमारा बेड फुलोसे सजाया था.. तब ही मे सब कुछ समज गइ थी.. ओर सब साफ साफ होगया था.. भले ही मे देवुकी बीवी रहु.. लेकीन लखनको मेने दीलसे अपनालीया हे.. थेन्क्स..

पुनम : (मुस्कुराते) अपनोको कभी थेन्क्स नही कहेते..

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) लगता हे लखन आपसे सभी बाते साजा करते हे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. भाइ मेरे प्रती बहुत वफादार हे.. मुजसे अपनी हर बात सैर करते हे..

चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? आपको तो सबकुछ पता चल जाता हेनां..?

पुनम : (थोडी असहज होगइ, उनको पता थाकी चंदा क्या पुछने वाली हे) हां भाभी.. पुछो..

चंदा : (सामने देखते) मंजु ओर देवुका यहा अचानक आनेका कारण..?

पुनम : (आंख गीली करते) सोरी भाभी.. नही बता सकती.. वचनसे बंधी हु.. सुबह आपको सब पता चल जायेगा..

कहेते चंदा ओर कोइ सवाल पुछे इनसे पहेले ही पुनम बच्चीको लेकर नीचे दुसरे रुममे चली गइ.. चंदा उसे जाते देखती ही रही.. फीर वोभी वीजयको लेकर रुममे चली गइ.. वीजयको जुलेमे सुलाकर चेन्ज करने बाथरुममे चली गइ.. उसने अपना दरवाजा खुला रखा.. तभी लखन पुनमके पास चला गया..

देखा तो पुनम चेन्ज करके बाथरुममसे बहार नीकल रही थी.. ओर बच्ची बेडपे गहेरी नींद सो रही थी.. जैसे ही पुनमने लखनको देखा दोडकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. फीर प्यारसे लखनकी आंओमे देखकर मुस्कुराने लगी..





पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. सोरी.. अब सीर्फ पंद्नह दीन ओर इन्तजार करलो.. फीर आपको इतना प्यार दुगीकी अबतक की सारी कशर पुरी कर दुगी..

लखन : (होंठ चुमते) पुनो.. तुम अ‍ैसे मनते मत करो.. अच्छा नही लगता.. मे तुम्हारी सीचुअ‍ेशन समज सकता हु.. कोइ बात नही.. अ‍ैसी बहुत राते मेने अकेले बीताइ हे..

पुनम : (गालको सहेलाते) भाइ.. तब सीचुअ‍ेशन अलग थी.. आपको जडी बुटी नही दी गइ थी.. अब सेक्स नही करोगे तो आपके सरीरपे अलग प्रभाव पडेगा.. इसीलीये आपके लीये सेक्स करना जरुरी हे.. ओर आज आप भाभीके पास चले जाओ.. मेने उनसे बात करली हे..

लखन : (गोदमे उठाकर बेडकी ओर लेजाते) पहेले मेरी इस बीवीको तो प्यार करलु.. पीछेसे.. सीर्फ अ‍ेक बार.. फीर भाभीके पास चला जाउगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) मानोगे नही.. ठीक हे.. लेकीन सीर्फ अ‍ेक बार.. वरना आप मेरी हालत बीगाड देते हो.. ओर कलके लीये मे हालत बीगाडना नही चाहथी..

लखन : (बुब्स दबाते होठ चुमते) क्यु..? कल कोइ खास दीन हे..?

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हां.. लेकीन आपको नही बता सकती.. मोमने बतानेको मना कीया हे.. आपको कल सब पता चल जायेगा.. चलीये अब.. फीर भाभीके पास भी तो जाना हे..





कुछ ही देरके बाद लखन पुनमको पीछेसे चोद रहा था.. पुनम मुह बीगाडते मजेसे लखनके हथीयारको अपने पीछवाडेमे जेल रही थी.. जब लखन जड गया तो पुनमके पीछेसे हट गया.. ओर बाथरुममे सावर लेने चला गया.. पुनम अपना पीछवाडा साफ करने लगी.. ओर बच्चीके पास जाकर लेट गइ..
 
ओर आखीर लखन चेन्ज करके चंदाके पास चला गया.. देखा तो चंदा आयनेके सामने अपने आपको संवार रही थी.. लखन उनके पीछे चला गया.. ओर चंदाको पीछेसे अपनी बाहोमे भरलीया.. चंदा आंख बंध करते मदहोस होने लगी.. ओर जटसे पलटकर लखनकी बाहोमे समा गइ..





चंदा : (कानमे फुसफुसाते धीरेसे) वेलकम माय स्वीट हार्ट.. आपकी गर्लफ्रेन्ड आपका स्वागत करती हे.. आज हमारी दुसरी पुरी की पुरी रात.. सीर्फ हम दोनो..

लखन : (कानमे धीरेसे) हंम.. तो हम फीरसे हमारी सुहागरात मनाले..?

चंदा : (सर्मसार होते मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. जब भी हमारा मीलन होगा.. वो हर रात हमारी सुहागरात होगी.. आइ प्रोमीस.. मेने मनसे आपको अ‍ेक पतीकी हेसीयतसे अपना लीया हे.. तो अब मीलनेमे कोइ संकोच मत करो.. भले ही मे आपके भाइकी अमानत हु.. लेकीन अब ये मांग आपके नामसे भरुगी.. ये मेरा वादा हे..

लखन : (गोदमे उठाते) भाभी.. आपको सजने सवरनेकी क्या जरुरत हे..? आप अ‍ैसे ही बहुत खुबसुरत हो.. वैसे इस पारदर्शी नाइटी ओर इन ब्रा नीकरके सेटमे आप बीलकुल अ‍ेक अप्सरा लग रही हो..

चंदा : (गलेमे बाहे डालते मुस्कुराते) भाभी नही.. सीर्फ चंदा.. आपकी चंदा.. ओर मे अप्सरा ही हु.. आइअ‍े.. आज पुरी रात हमारी हे.. सीर्फ हम दोनोकी..

ओर इस रात भी कभी ना थमने वाली रात साबीत हुइ.. लखन ओर चंदा सुबह चार बजे तक प्यार करते रहे.. लखनने चंदाके अ‍ेक अ‍ेक अंगको छुआ.. ओर उनको उतेजीत करता रहा.. तो चंदाने भी अपनी ओरसे कोइ कशर नही छोडी.. लखनके साथ उसने हर अ‍ेन्गलमे प्यार कीया..





पुरी रात वो लखनको संतुस्ट करनेमे कामयाब रही.. ओर खुदने भी संतुस्टी पाइ.. अबतब लखन उनकी मुनीयाको पांचसे छे बार भर चुका था.. ओर चंदाके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोडके रख दीया था.. फीर दोनोने साथ सावर लीया.. वहा भी अ‍ेक राउन्ड प्यारका दोर चला.. ओर अंतमे दोनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये..

इधर छोटी बहेन चंदाने छोटे भाइ लखनको सम्हाल लीया.. तो भुमीके घर बडी बहेन नीर्मलाने बडे भाइ देवायतको सम्हाल लीया.. जैसे ये सब पहेलेसे ही नीयतीका खेल हो.. नीर्मला भी देवायतसे पुरी रात प्यार करती रही.. जैसे वो उनकी पहेली बीवीका फर्ज अदा कर रही हो..

सुबह सबलोग आरामसे जागे.. मंजुने देवायत नीर्मला ओर भुमीकाको देर तक सोने दीया.. राधीकाको सबकुछ पताथा.. फीर भी उनको थोडा अजीब लगा.. सबलोग वो तीनोके जागनेका इन्तजार कर रहे थे.. सृती भावना ओर राधीका कीचनमे चाइ नास्तेका इन्तजाम कर रही थी..

मंजुने धीरेसे देवायतके कमरेमे दस्तखत दी.. तो नीर्मलाने दरवाजा खोला.. वो मंजुको देखकर सरमा गइ.. ओर उसने देवायतको फीर भुमीको जगाया.. देवायत बहारके कोमन बाथरुममे घुस गया.. ओर नीर्मला रुमके बाथरुममे चली गइ.. तब कीसीको पता नही थाकी मंजुके दीलकी धडकन बढ गइ थी..

मंजु भुमीकाके पास चली गइ.. ओर गुड मोर्नींग वीस करते भुमीके गले लग गइ.. आज भुमीकाको मंजुका कुछ अलग ही रुप दीख रहा था.. जैसे वो कोइ प्यारकी देवी हो.. तभी नीर्मला नहाकर सरपे टोलीया लपेटकर नीकली.. ओर कपडे पहेनने लगी.. तो भुमीका मुस्कुराते बाथरुममे चली गइ..

तबतक देवायतभी आकर अपने कपडे पहेनने लगा.. तभी बाथरुमसे धडाम करते गीरनेकी आवाज आइ.. ओर अ‍ेक अ‍ैसी चीख सुनाइ दी जो पुरे घरमे गुजने लगी.. सबलोग गभरा गये.. सृती राधीका ओर भावना चाइ नास्ता बनाना छोडकर दोडकर आइ.. तब देवायत बाथरुममे दरवाजेपे कंधे मारमे तोडनेकी कोसीस कर रहा था..

सृती : (जोरसे चीलाते) मम्मी.. क्या हुआ..? देवु.. जल्दीसे दरवाजा तोडो.. लगता हे मम्मी गीर गइ हे..

मंजुला : (जोरोसे) देवु.. पेर मारके दरवाजा तोडदो..

तभी देवायतने जोरोसे दो लात मारी ओर दरवाजा तोड दीया.. देखा तो भुमीका अपना पेट पकते फर्सपे गीरी हुइ थी.. ओर तडप रही थी.. देवायतने उसे जटसे अपनी गोदमे उठा लीया.. ओर जटसे बहार आते बेडपे लीटा दीया.. फीर भी भुमीका पेट पकडते रो रही थी.. ओर बेडपे छटपटा रही थी..

सृती : (रोते जोरोसे) देवु.. इसे जटसे मेरी क्लीनीकपे ले चलो.. इमीजेट्ली.. प्लीस.. अपनी कार लेलो.. नीर्मला मौसी... मंजु मोम.. आप भी चलो.. मे अपनी कारपे क्लीनीक पहोचती हु.. जल्दी करो..

कहा तो देवायत भुमीकाको गोदमे लेकर लगभग दोडही पडा.. सबलोग सदमेसे देख रहे थे.. नीर्मला ओर मंजु भी देवायतके पीछे दोड पडी.. देवायतने भुमीकाको पीछेकी सीटपे सुला दीया.. ओर नीर्मला उनका सर अपनी गोदमे लेकर बैठ गइ.. मंजु आगे बैठ गइ.. ओर देवायतने कार सृतीकी क्लीनीककी ओर दौडा दी..

सृती चालु कारसे क्लीनीकपे सब कुछ तैयार रखनेको कहा.. ओर बाते करते भी वो रो रही थी.. तभी उसे अचानक भावीका याद आगइ.. ओर उसे भी फोन करके जल्दीसे अपनी क्लीनीकपे बुला लीया.. तबतक मंजुने भी फोन करके पुनमको सब बता दीया..

मंजु ओर पुनम पहेलेसे ही सब कुछ जानती थी.. पुनमने लखनको बता दीया.. ओर उसे जल्दीसे होस्पीटल पहोचने को कहा.. चंदा सदमेसे पुनमकी ओर देखती ही रही.. लखन फटाफट अपने कपडे पहेनकर अपनी बाइक लेकर सृतीकी क्लीनीकपे चला गया..

सबकुछ इतनी जल्दीसे हो गयाकी कीसीको कुछ सुज ही नही रहा था.. लखन ओर भावीका लगभग साथ ही पहोंचे.. भावीका कारसे उतरते ही अंदरकी ओर दोड पडी.. ओर सीधी ओपरेशन थीअ‍ेटरमे चली गइ.. देखा तो सृती रोते हुअ‍े होपरेशनकी तैयारीया कर रही थी..

सृती : (भावीकाको देखते ही जोरसे रोते हुअ‍े) भावु.. देख तो मम्मी गीर गइ हे.. इनको क्या हुआ..? देख आंखे चडा रही हे..

भावीका : (जटसे ओपरेशनके कपडे पहेनते) सृती.. होसमे आओ.. तुम अ‍ेक डोक्टर हो.. सांत होजाओ.. मे हुना.. (भुमीका हाथ पकडते) ओह गोड.. सृती.. वो अ‍ेनेस्थेसीया..

सृती : (रोते कांपते हुअ‍े) भावु.. बुला लीया हे.. आता ही होगा.. बहुत क्रीटीकल पोजीसन हे..

भावीका : (अ‍ेक इन्जेक्शन देते) सृती.. सम्हालो अपने आपको.. भुल जाओ ये तेरी मम्मी हे.. हम सम्हाल लेगे..

भावीकाने कुछ सोचकर लखनको मास्क पहेनाकर अंदर बुला लीया.. तो सृती लखनसे लीपटकर रोने लगी.. लखनने सृतीको सम्हाल लीया.. तभी अ‍ेनेस्थेसीया वाला भी जटसे आगया.. उसने भुमीकाकी बीपीको चेक कीया.. तो थोडा असेहज होगया.. ओर उसने भावीकाकी ओर देखा..
 
अ‍े.मेन : (धीरेसे) मेम.. बहुत जोखीम भरा हे.. बीपी बहुत हाइ हे.. कुछ भी हो सकता हे..

सृती : (जटसे) पेपर दो मे साइन करदु.. ये मेरी मम्मी हे.. पुरी जीम्वेवारी मेरी.. ओपरेशन जरुरी हे.. प्लीज.. आप दे दीजीये..

भावीका : सृती.. तुम लखनके साथ ओफीसमे बैठो.. मे सब सम्हाल लुगी..

सृती : (जटसे) नही.. प्लीज.. मे अपने आपको सम्हाल लुगी.. लखन हेनां..?

अ‍ेनेस्थेसीया दे दीया.. कुछ ही सेकन्डमे भुमीका बेहोस होगइ.. भावीका बडी ही सावधानीसे ओपरेशन करने लगी.. बहारकी ओर देवायत नीर्मला मंजु सब चीन्तासे बैठे थे.. नीर्मला ओर देवायत बार बार मंजुकी ओर देख रहे थे.. जो आंसु बहा रही थी.. जैसे उनको सब मालुम था फीर भी कुछ नही बताया..

तो दुसरी ओर गांवमे भी ब्रीन्दा श्रीधर ओर साहील गांवसे सहेरकी ओर नीकल रहे थे.. साम चार बजेकी फ्लाइट थी.. दो बजे चेक इन करना था.. तो तीनो साडे दश बजे ही गांवसे नीकल गये.. फीर सहेर आकर तीनोने खाना खाया.. ब्रीन्दा श्रीधरके साथ चीपकके बैठी थी..

तभी खाना खाते साहीलने दोनोको बता दीयाकी सलमाका उनके साथ अफैर हे उनके बारेमे ओर बच्चेके बारेमे वो सबानासे कोइ बात ना करे.. ओर सबानाके साथ कौनसी बात सेर करनी हे.. ओर कौनसी नही करनी सबकुछ श्रीधर र्बीन्दाको बता दीया.. फीर तीनो अ‍ेरपोर्टकी ओर नीकल पडे..

इधर ओपरेशन हुआ.. तो पता चला भुमीका बच्चा नही रहा.. ओर भुमीको भी होस नही आ रहा था.. तो सृतीका टेन्शन बढने लगा.. ओर आखीर वोही हुआ जो मंजुला ओर पुनम जानती थी.. भुमीकाने भी दम तोड दीया.. भावीकाने पंम्पीग ओर सोक देकर बहुत कोसीस की..

सृती वही ओपरेशन थीअ‍ेटरमे अपनी मम्मीसे लीपटकर रोने लगी.. बहार देवायत मंजु ओर नीर्मला गभराकर भी खडे होगये.. नीर्मलाकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. कुछ ही देरमे लखन सृतीको कमरसे पकडकर बहार लेआया.. तो सृती मंजुकी ओर दोडके उनके गले लग गइ.. ओर जोरोसे रोने लगी..





देवायत भी रो पडा फीर भी मंजु देवायतने सृतीको सम्हाल लीया.. ओर लखन सबको फोन करने लगा.. तो पता चला साहील श्रीधर बेगलोकी फ्लाइटमे चढ चुके हे.. तो लखनने उसे कुछ नही कहा.. ओर जानेके लीये बोला.. ओर उसने भानु मुना बंसीको बुला लीया.. फीर धृव भी अपनी मम्मीको लेकर आगया..

भुमीका सृतीकी मम्मी ही थी.. फीर भी उनके स्टाफने कुछ लीगल पेपर तैयार करलीये.. फीर सबलोग भुमीकी ओर नवजात बच्चेकी बोडी लेकर भुमीके घर चले गये.. तो जैसे ही सबको पता चला देवायतके सहेरके कुछ दोस्त ओर पाटर्नर व्यापारी भी आ गये.. तो पुनम चंदा भी भुमीके घर बच्चोको लेकर चले गये..

ओर भुमी ओर बच्चेको सन्मानके साथ स्मसानमे ले जाया गया.. देवायतने खुद सृती लखनके साथ मीलकर भुमीका दाह संस्कार कीया.. ओर बच्चेको दफना दीया.. फीर सबलोग घर आ गये.. ओर बाकीके लोग देवायतसे मीलकर जाने लगे.. फीर लखन मुना ओर बंसीने मीलकर सबके लीये खानेका इन्तजाम कीया..

सृती पुरी तराह टुट चुकी थी.. मंजु ओर पुनम उनको समजाते आस्वासन देते रहे.. धृवकी मम्मी ओर नीर्मलाने मीलकर सबको जबर दस्तीसे खाना खीलाया.. सब लोगोने बडी मुस्कीलसे खाना खाया.. फीर देर रात भावीका भी धृव ओर उनकी मम्मीके साथ घर चली गइ..

तो मुना ओर बंसी भी गांव चले गये.. मंजुने पुनम चंदाके साथ भावनाको भी अपने बच्चोके लेकर लखनके साथ उनके घर भेज दीया.. ओर सबलोग सो गये.. तो घर पहोचते ही आज भी पुनम ओर चंदा नीचे ही सोगइ.. ओर पुनमने भावनाको लखनके साथ उपर कमरेमे जानेको कहा..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) दीदी.. आज ही ये सब..? थोडा अजीब लगेगा..

भावना : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. लदन भैया सही केह रहे हे..

पुनम : (मुस्कुराते) ठीक हे.. तुम दोनोकी मरजी.. लेकीन अ‍ेक बात समजलो.. इनसे जींदगी नही रुकजाती.. कबतक दुर रहोगे..? तुम दोनोके ना मीलनेसे भुमी भाभी वापस आजायेगी..? अगर वो गइ हेतो वापस भी तो आयेगी.. मत भुलो हम सब कौन हे..? बाकी तुम्हारी मरजी..

भावना : (सरमाते धीरेसे) ठीक हे दीदी.. मे समज गइ.. चलीये लखन..

पुरे दीनके दोमधामकी थकावटके बादजुद भी रात तीन बजे तक भावनाकी कामुक्तासे भरी सीसकारीयोकी आवाज चंदा ओर पुनम नीचे तक सुनती रही.. जीनकी वजहसे अ‍ेक बार तो चंदाने भी अपनी उंगलीयोसे अपने आपको सांत कीया.. ओर पुनम भी बच्चीको दुध पीलाते अपने उरोजोको मसलती रही..

तो उधर अ‍ेरपोर्ट पहोंचते ही श्रीधर ओर साहील लीगल प्रोसीसमे लग गये.. तब ब्रीन्दा अपना सामान लेकर बाथरुममे घुस गइ.. ओर उसने सारी नीकालकर चेन्च कर लीया.. फीर अपने बालोको खुला छोडके थोडा सवार लीया.. अब ब्रीन्दा अ‍ेक बहुत ही खुबसुरत आधुनीक लडकी जैसे दीखने लगी..





जीसे देखकर श्रीधर साहील भी दंग रेह गये.. फीर तीनो फ्लाइटमे चड गये.. अ‍ेक घंटेके बाद तीनो बेंगलोर पहोंच गये.. आज ब्रीन्दा बहुत खुस थी.. तीनो सामान लेकर बहार नीकले.. तो उनको सबानाने देख लीया ओर आवाज लगाते उनकी ओर दोड पडी.. ओर उन्होने साहीलको गले लगा लीया.. फीर ब्रीन्दा ओर श्रीधरको भी मीली..

सबाना : (ब्रीन्दाको गले मीलते) नमस्ते आंटी.. कैसी हे आप..?

साहील : (मुस्कुराते) सबु.. अब आंटी नही.. क्युकी आंटी अब हमारी भाभी होचुकी हे..

सबाना : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) मतलब..? मे कुछ समजी नही.. हें..हें..हें..

श्रीधर : (हसते) अरे भाभी.. समजाने समजनेके लीये हमारे पास चार दीन पडे हे.. दोनो अ‍ेक दुसरेको समजाते रहेना.. हें..हें..हें..

साहील : (मुस्कुराते) सबु.. सब इन्तजाम हो गया..?

सबाना : (मुस्कुराते) अरे हां.. मे होस्टेलसे अपने कपडे लेकर ही आइ हु.. आपने कहा था तो दो रुम बुक करलीये हे.. मे केब लेकर ही आइ हु.. चलीये..

फीर चारो केबमे ही होटेलपे पहोंच गये.. देखा तो होटेल तीनोकी उमीदसे कही आलीशान था.. फीर चारोने चेक इन कीया.. दोनो ही अलग अलग कमरेमे चले गये.. सबानाने देखा की पुरे रास्ते ब्रीन्दा श्रीधरकी बाहेमे हाथ डालकर चल रही थी.. ओर ब्रीन्दा बहुत ही खुबसुरत लग रही थी..
 
जब दोनो अपने कमरेमे चले गये तब दोनो ओरतोका सर्बका बांध टुट चुका था.. सबाना साहीलकी बाहोमे थी.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुम रही थी.. तो यही हाल श्रीधरके रुममे भी था.. श्रीधर र्बीन्दाके उरोजोको मसलते उनके होठोका रसपान कर रहा था..

ओर ब्रीन्दा श्रीधरके नीतंबपे हाथ रखते उनकी चुतकी ओर दबा रही थी.. जैसे अकेह रही होकी मुजे अभी के अभी चोदलो.. फीर चारो फ्रेस होने चले गये.. ओर खाना वही रुममे मंगवा लीया.. जब खाना आगया तो साहीलने श्रीधरको अपने रुममे बुला लीया.. ओर दोनो आगये..

तो सबाना ब्रीन्दाको देखती ही रही.. क्युकी ब्रीन्दाने सारीको त्यागकर अ‍ेक बहुत ही खुबसुरत मोर्डन ड्रेस पहेनलीया था.. ओर सबानाने अभी भी अ‍ेक सलजार कमीज पहेना हुआ था.. चारो खानेकी मेजपे बैठ गये.. सबाना अबभी ब्रीन्दासे बहुत सरमा रही थी..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) सबाना.. कहो आपकी पढाइ कैसी चल रही हे..?

सबाना : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. बहुत अच्छी.. अभी अ‍ेक अ‍ेक्क्षाम खतम हुइ हे.. बहुत अच्छे माक्र्स मीले.. आप बताइअ‍े वहा सबलोग कैसे हे..?

ब्रीन्दा : (श्रीधरकी ओर कामुक मुस्कानसे) सब मजेमे हे.. सबलोग अपनी लाइफ खुलकर जी रहे हे.. अ‍ैसी लाइफ मेने जींदगीमे कभी नही देखी.. बस.. आप भी डोक्टर बनके जल्दीसे आजाओ.. सबलोग आपका इन्तजार कर रहे हे..

सबाना : (मुस्कुराते साहीलकी ओर देखते) अब तो वही आना ही हे.. मेभी वहा आनेके लीये बेताब हु.. बस.. अपनी पढाइ खतम करलु.. लगता हे वहा सब लोग कुछ ज्यादा ही खुस हे..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां.. बहोत.. क्युकी वहा सब लोगोने रीस्तेके नये नीयमको स्वीकार कर लीया हे.. अब वहा रीस्तेके कोइ मायने ही नही हे.. आज हमारा पहेला गांव अ‍ैसा होगया हे जहा अब कोइ वीधवा या त्यक्ता नही रही.. सबने आपसी रीस्तोमे सादीया करली हे..

साहील : (मुस्कुराते) सबु.. श्रीधरके मम्मी पापाके बीच डीवोर्स हो चुका हे.. इनकी मम्मी त्यक्ता थी तो गांवमे रीस्तोमे बदलावके नीयमके तहेत श्रीधरने उनकी मम्मीसे सादी करली.. ओर आंटी अब हमारी भाभी होगइ..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) हां सबाना.. ओर ये रीस्तोसे मे बहुत खुस भी हु..

साहील : (मुस्कुराते) सबु.. ये बता अब यहा ओर आजु बाजु देखने जैसा क्या हे..?

सबाना : (मुस्कुराते) अभी हम गार्डन चले..? क्युकी उनकी रोनक रातमे ही ज्यादा होती हे.. बहुत खुबसुरत गार्डन हे.. रातमे लोग ज्यादा वहा घुमने जाते हे.. कुछ कपल तो कुछ पुरी फेमीलीके साथ..

ब्रीन्दा : (खुस होते) तो जानु आज वही घुमने चले..? फीर कलका कुछ सोचेगे..

साहील : (हसते) भाभी.. आप तो हनीमुन मनाने आइ हो.. तो कही ओर घुमेगी..? हें..हें..हें..

ब्रीन्दा : (सर्मसार होते हसते साहीलको अ‍ेक मुका मारते) साहील.. अ‍ेक मारुगी.. तो क्या आप सीर्फ मेरी देवरानीको मीलने आये हे..?

दोनोका जगडा देखकर श्रीधर ओर सबाना जोरोसे हसने लगे.. फीर खाना खाकर चारो गार्डनमे घुमने चले गये.. सबाना ओर र्ब्रीन्दा दोनोही धीरेसे हस हसके बाते करते आगे चल रही थी.. ओर श्रीधर साहील उनके पीछे चल रहे थे.. तभी साहीलका फोन बजा..

देखा तो फोनपे लखन था.. तो साहीलने फोन उठालीया.. तो लखन साहीलको सबकुछ बता देता हे.. साहीलने वापस आनेकी पेसकस की.. लेकीन लखनने उसे मना करदीया.. ओर कहाकी सबलोग आरामसे घुमकर ही आना.. बातकी गंभीरता समजके श्रीधरने पुछ लीया..

श्रीधर : (धीरेसे) साहील.. क्या हुआ..? कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

साहील : (थोडा धीरेसे) श्रीधर.. वो लखनकी भाभी.. भुमीका भाभी गुजर गइ.. बाथरुममे गीर गइ थी.. तो बच्चा पेटमे ही मर गया.. ओर ओपरेशनके दौरान भाभीने भी दम तोड दीया..

श्रीधर : (थोडी चीन्तासे) ओह गोड.. बहुत बुरा हुआ.. क्या हम वापस चले..?

साहील : (सामने देखते धीरेसे) लखनने मना कीया हे.. सुबह इसी बातके लीये फोन कीया था.. हम फ्लाइटमे थे.. तो उसने हमे नही बताया.. ताकी हम घुमकर आ सके..

श्रीधर : (धीरेसे) ये लखन भी कुछ अजीब हे.. कीतना समजदार हे..

तो दुसरी ओर इस बातसे अनजान र्ब्रीन्दा ओर सबाना अब खुलकर हस हसके बाते करते आगे चल रही थी.. ब्रीन्दाने अपने ओर श्रीधरके बारेमे सबानाको सबकुछ बता दीया.. फीर उसने मुना ओर बसंतीके बारेमे भी सबानाको सबकुछ बता दीया.. ओर कहा की सब इस रीस्तेसे बहुत खुस हे..

फीर चारोने वहा खुब अ‍ेन्जोय कीया.. दोनोने ब्रीन्दा ओर सबानाको गोलगपे खीलाये.. फीर आइसक्रीम.. फीर श्रीधर सबके लीये वहाकी नीबुवाली सोडा लेने चला गया.. तब कीसीको पता नही थाकी श्रीधरने चुपकेसे सबकी सोडाने कामोतेजक गोलीया मीलादी हे..

फीर सब कुछ देर वही बैठकर बाते करते रहे.. ओर गोलीने अपना असर सुरु करदीया.. ब्रीन्दाने सबको वापस चलनेको कहा.. ओर देर रात वापस होटेलपे आगये.. आकर दोनो कपल अपने अपने कमरेमे अ‍ेक दुसरेको गुडनााइट कहेकर चले गये.. ओर चेन्ज करलीया..

तो आज सबानाने भी पहेली बार साहीलकी दीलवाइ ट्रान्सफरन्ट नाइटी पहीनली.. जीसे देखकर साहीलका हथीयार जटके मारने लगा.. दोनो ओरतोके उपर गोलीका असर पुरी तराह छा गया था.. दोनो वासनाकी आगमे जलने लगी.. फीर पुरी रात दोनोके कमरेमे घमासान चुदाका युध्ध हुआ..





दोनो कमरोमे चुदाइका अ‍ैसा दौर चला मानो चुदाइका भवंडर कमरेमे तबाही मचा रहा हो.. दोनो देर रात तक अपनी अपनी बीवीओकी चुदाइ अलग अलग अ‍ेन्गलसे करते रहे.. ओर सोने तक दोनोने अपनी बीवीओका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके ढीला करदीया.. फीर दोनो कपलमे साथमे सावर लीया.. ओर सबानाने सावधानीके लीये अ‍ेक आइपीलकी गोली खाली.. फीर अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये....

कन्टीन्यु
 
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