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पुनम : (सरमाते धीरेसे गाल चुमते) भाइ.. थेन्क्यु.. आज आपने मुजे बीना कुछ कीये अैसे ही दो बार जडा दीया.. जो उस कमीनेका काम नही था.. भाइ.. मेतो थक गइ.. फीर भी आपका नही नीकला..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अैसे नही नीकलेगा.. आपको थोडी तकलीफ होगी..
पुनम : (होंठ चुमते) भाइ.. मे यहा सीर्फ आपके लीये आइ हु.. आपके लीये मे हर तकलीफ सेह लुगी.. बोलो.. क्या करना हे..?
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर नीचे घुटनोके बल बैठ जाइअे.. मे करलुगा..
कहातो पुनम मुस्कराते बेडके नीचे घुटनोके बल बैठ गइ.. ओर लखन बेडके कीनारेपे पुनमकी दोनो ओर पेर नीचे रखकर बैठ गया.. पुनम समज गइ ओर लखनके पास सरकते आगइ.. ओर लंडको थामकर मुहमे लेलीया..

लखनने पुनमके सरको पकडलीया.. ओर कमर हीलाते धीरे धीरे पुनमके मुहमे चोदने लगा.. तो लंड पुनमकी हलकसे टकराने लगा.. जीनकी वजहसे पुनमकी आंओसे आंसु नीकलने लगे.. तो लखनने फौरन अपना लंड बार खीच लीया..

पुनम : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) भाइ.. क्या हुआ..? क्यु नीकाल दीया..?
लखन : (मायुस होते) सोरी दीदी.. मे आपकी आंखोमे आंसु नही देख सकता..
पुनम : (जटसे खडी होते बाहोमे भरते) भाइ.. आइ लव यु.. इतना प्यार करते हो मुजसे.. की मेरे आंसु तक नही देख सकते.. भाइ.. ये आंसु नही हे.. मेरे भाइका प्यार हे.. हमे ओरल करते अेक घंटा होगया.. ओर इस अेक घंटेमे आपने मुजे वो सुख दीया जो मेने कल्पना भी नही कीथी..
मुजे आज तक इतना सुख कीसीसे नही मीला.. ना धीरेनसे ओर ना बडे भैयासे.. मे दोनोको छोड चुकी हु.. अब ये पुनम सीर्फ आपकी अमानत हे.. मेरे आंसुकी परवाह मत करो.. चलो.. मुजे जीतना प्यार करना हो करलो.. फीर तो हम सादीके बाद ही मीलेगे..
कहेते पुनम वापस नीचे बैठ गइ.. ओर फीरसे लंडको मुहमे भरलीया.. फीरतो लखन वही खडा हो गया ओर पुनमके सरको पकडकर जोरोसे कमर हीलाते पुनमके मुहको चोदने लगा.. इस बार लखनने पुनमकी कोइ परवा नही की.. पुनमकी हालत पतली होने लगी..

ओर आखीर लखन भी जडनेकी कगारपे पहोंच गया.. ओर अपनी कमरको जटके देते पुरा लंड मुहमे घुसा दीया.. पुनमकी सांसे अटकने लगी.. उनकी आंखे बडी होने लगी.. ओर खांसते हुअे लखनकी ओर देखने नांमे गरदन हीलाने लगी..
तभी लखनके लंडसे पीचकारीया छुटने लगी.. ओर पुनमके हलकके नीचे उतरने लगी.. लखन पुनमके मुहमे जडने लगा.. पुनम लखनका सारा अमृत पीने लगी.. फीर लखनके लंडको चाटते साफ करने लगी.. दोनो सांत होगये.. तो पुनम लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते हसने लगी..
लखन : (हसते धीरेसे) दीदी.. आपतो केह रही थी आपने ये कभी नही कीया.. ओर आपतो पुरा पी गइ..
पुनम : (खडी होकर बाहोमे आते) भाइ.. मेरे भाइका अमृत रस था.. ओर आपने भी मेरा रस दो दो बार पीया.. तो मे इसे कैसे नही पीती..? भाइ.. थेन्क्स.. अब पता चला.. उस दिन सृतीदीकी क्या हालत हुइ होगी.. सायद इसीलीये आपसे नाराज हुइ होगी.. क्या दोनो पहेली बार मीले तब वापस कीया था..?
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. कीया था.. वो भी बीलकुल आपहीकी तराह हे..
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. भाइ.. तो मे मुह साफ करके आउ..?
लखन : (मुस्कुराते गोदमे उठाते) दीदी.. चलो.. मे लेचलता हु.. आपको जो भी करना हो अभी करलो.. फीर आपको सुबह ही बाथरुममे जानेको मीलेगा.. हें..हें..हें..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) क्यु..? भाइ.. बादमे दुबारा आना पडेगानां..? आप समज गयेनां..?
लखन : (अंदर लेजाते) हां समज गया.. लेकीन आज मे जो करने वाला हु.. उसमे कोइ चान्स नही हे..
पुनम : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) भाइ.. अैसा क्या करने वाले हो..? बताइअेनां..?
लखन : (हसते) नही.. आपको सुबह पता चल जायेगा.. चलीये जो भी करना हो करलीजीये..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. सुसु करना हे.. तो आप बहार जाइअेनां..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. हमारे बीच इतना कुछ तो होगया.. क्या अभी भी सरमाओगी..? मेरे सामने ही करलो..
तो पुनम सरमाते हसने लगी.. दोनोने मुह साफ करलीया.. लखन भी मुह साफ करके हल्का होने लगा.. लेकीन पुनमको लखनके सामने पीसाब करनेमे सरम आरही थी.. फीर भी हिंमत करके पीसाब करने लगी.. लखन उसे देखता रहा.. तो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. इसी दौरान बहारकी ओर अंदरसे आवाज आनी बंध होगइ तो चारो समज गइकी लखन ओर पुनम बाथरुममे चले गये हे.. तभी....
कन्टीन्यु
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अैसे नही नीकलेगा.. आपको थोडी तकलीफ होगी..
पुनम : (होंठ चुमते) भाइ.. मे यहा सीर्फ आपके लीये आइ हु.. आपके लीये मे हर तकलीफ सेह लुगी.. बोलो.. क्या करना हे..?
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. तो फीर नीचे घुटनोके बल बैठ जाइअे.. मे करलुगा..
कहातो पुनम मुस्कराते बेडके नीचे घुटनोके बल बैठ गइ.. ओर लखन बेडके कीनारेपे पुनमकी दोनो ओर पेर नीचे रखकर बैठ गया.. पुनम समज गइ ओर लखनके पास सरकते आगइ.. ओर लंडको थामकर मुहमे लेलीया..

लखनने पुनमके सरको पकडलीया.. ओर कमर हीलाते धीरे धीरे पुनमके मुहमे चोदने लगा.. तो लंड पुनमकी हलकसे टकराने लगा.. जीनकी वजहसे पुनमकी आंओसे आंसु नीकलने लगे.. तो लखनने फौरन अपना लंड बार खीच लीया..

पुनम : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) भाइ.. क्या हुआ..? क्यु नीकाल दीया..?
लखन : (मायुस होते) सोरी दीदी.. मे आपकी आंखोमे आंसु नही देख सकता..
पुनम : (जटसे खडी होते बाहोमे भरते) भाइ.. आइ लव यु.. इतना प्यार करते हो मुजसे.. की मेरे आंसु तक नही देख सकते.. भाइ.. ये आंसु नही हे.. मेरे भाइका प्यार हे.. हमे ओरल करते अेक घंटा होगया.. ओर इस अेक घंटेमे आपने मुजे वो सुख दीया जो मेने कल्पना भी नही कीथी..
मुजे आज तक इतना सुख कीसीसे नही मीला.. ना धीरेनसे ओर ना बडे भैयासे.. मे दोनोको छोड चुकी हु.. अब ये पुनम सीर्फ आपकी अमानत हे.. मेरे आंसुकी परवाह मत करो.. चलो.. मुजे जीतना प्यार करना हो करलो.. फीर तो हम सादीके बाद ही मीलेगे..
कहेते पुनम वापस नीचे बैठ गइ.. ओर फीरसे लंडको मुहमे भरलीया.. फीरतो लखन वही खडा हो गया ओर पुनमके सरको पकडकर जोरोसे कमर हीलाते पुनमके मुहको चोदने लगा.. इस बार लखनने पुनमकी कोइ परवा नही की.. पुनमकी हालत पतली होने लगी..

ओर आखीर लखन भी जडनेकी कगारपे पहोंच गया.. ओर अपनी कमरको जटके देते पुरा लंड मुहमे घुसा दीया.. पुनमकी सांसे अटकने लगी.. उनकी आंखे बडी होने लगी.. ओर खांसते हुअे लखनकी ओर देखने नांमे गरदन हीलाने लगी..
तभी लखनके लंडसे पीचकारीया छुटने लगी.. ओर पुनमके हलकके नीचे उतरने लगी.. लखन पुनमके मुहमे जडने लगा.. पुनम लखनका सारा अमृत पीने लगी.. फीर लखनके लंडको चाटते साफ करने लगी.. दोनो सांत होगये.. तो पुनम लखनकी ओर कातील नजरोसे देखते हसने लगी..
लखन : (हसते धीरेसे) दीदी.. आपतो केह रही थी आपने ये कभी नही कीया.. ओर आपतो पुरा पी गइ..
पुनम : (खडी होकर बाहोमे आते) भाइ.. मेरे भाइका अमृत रस था.. ओर आपने भी मेरा रस दो दो बार पीया.. तो मे इसे कैसे नही पीती..? भाइ.. थेन्क्स.. अब पता चला.. उस दिन सृतीदीकी क्या हालत हुइ होगी.. सायद इसीलीये आपसे नाराज हुइ होगी.. क्या दोनो पहेली बार मीले तब वापस कीया था..?
लखन : (मुस्कुराते) हंम.. कीया था.. वो भी बीलकुल आपहीकी तराह हे..
पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. भाइ.. तो मे मुह साफ करके आउ..?
लखन : (मुस्कुराते गोदमे उठाते) दीदी.. चलो.. मे लेचलता हु.. आपको जो भी करना हो अभी करलो.. फीर आपको सुबह ही बाथरुममे जानेको मीलेगा.. हें..हें..हें..
पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) क्यु..? भाइ.. बादमे दुबारा आना पडेगानां..? आप समज गयेनां..?
लखन : (अंदर लेजाते) हां समज गया.. लेकीन आज मे जो करने वाला हु.. उसमे कोइ चान्स नही हे..
पुनम : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) भाइ.. अैसा क्या करने वाले हो..? बताइअेनां..?
लखन : (हसते) नही.. आपको सुबह पता चल जायेगा.. चलीये जो भी करना हो करलीजीये..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. सुसु करना हे.. तो आप बहार जाइअेनां..
लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. हमारे बीच इतना कुछ तो होगया.. क्या अभी भी सरमाओगी..? मेरे सामने ही करलो..
तो पुनम सरमाते हसने लगी.. दोनोने मुह साफ करलीया.. लखन भी मुह साफ करके हल्का होने लगा.. लेकीन पुनमको लखनके सामने पीसाब करनेमे सरम आरही थी.. फीर भी हिंमत करके पीसाब करने लगी.. लखन उसे देखता रहा.. तो पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. इसी दौरान बहारकी ओर अंदरसे आवाज आनी बंध होगइ तो चारो समज गइकी लखन ओर पुनम बाथरुममे चले गये हे.. तभी....
कन्टीन्यु
















