Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १


तो आइअ‍े कहानीकी सुरुआत करतेहे गुजरातका अ‍ेक छोटा गांव हे जो कहानी इसी गांवसे सुरु होती हे इस गांवके सबसे बडे जमीनदार देवायत हे जीनके पास पुर्खोकी बहुत बडी हवेलीके साथ खेतीकी तकरीबन सभी मीलाके २०० अ‍ेकर जमीन हे जो आस पास गांवके जमीनदारके पासभी इतनी जमीन नहीथी आजादी से पहेले इन्हीकी ४थी पीढी यहा राज करतीथी इनकी कइ पीढीयोसे अ‍ेकही संतान होतीथी पौत्रके जन्मके बाद छे महीनेमे दादाकी मृत्यृ हो जातीथी

इसके लीये देवायतके पीताजीने दोरे धागे मे कडी महेनत की हर मंदिर हर मस्जीद हर साधु संत फकीर कीसीको नही छोडा तब जाके इनको बाबा मीले ओर बाबाने उनके घरपे हवन करके श्रापसे मुक्ती दीलवाइ तब जाके काफी समयके बाद उनके यहा अ‍ेक और लडका फीर अ‍ेक लडकीकाभी जन्म हुआ यानीके देवायत का छोटा भाइ (लखन) ओर छोटी बहेन (पूनम) पैदा हुअ‍े तब देवायतकी उमर १२ सालकीथी तीनोही भाइ बहेन बडे होते गये

जब देवायकी सादी होगइ तब दो सालमेही उनके माता पीता चल बसे ओर सब जीम्वेवारी देवायतके कंधेके उपर आगइ तब देवायतका बचपनका दोस्त उनकी सहायताके लीये आगया वेसेतो कामके लीये दो (रजीया ओर दया) नोकरानी ओर अ‍ेक बडी उमरका नोकर (रामु) था जो उनके पीताका चहीताथा जो देवायतभी उनको काका कहेके मानसे बुलाता था तो आइअ‍े पहेले कुछ पात्रोके परीचय करवा देता हुं

देवायत - जीनके पुर्खो अ‍ेक जमानेमे यहा राज करतेथे इस ---गांव ना बल्के आजुबाजुके सब गावमे सबसे बडा जमीनदार हे सभी गांवोमे इनकी बहुत इजत हे बस सीर्फ उनके गांवके सरपंचसे उनकी नही बनती हांलाकी उनके सामनेतो सरपंचभी कुछ नही बोलता ओर उनकी इजत करता हे बस पीठ पीछे उनके खीलाफ साजीस करता रहेता हे देवायतकी बस अ‍ेकही कमजोरी हे वो हे दारु, जब वो दारुका नसा करलेता हे तब उनको कुछ भान नही रहेता ओर वो कीसीभी ओरतको नही पहेचानता ओर उनसे जबरन फीजीकल होनेकी कोसीस करता हे, बस यही इनकी कमजोरीथी ओर यही वजहसे सरपंचसे दुस्मनी मोडली वो बात आगे कहानीमे पता चल जायेगी

मंजुला - बाजुके गांवकी सीर्फ दो लडकीथी जो बडी लडकीकी देवायसे आंख मील गइ ओर उनसे प्यार कर बेठी बादमे उन दोनोके पीताजीने दोनोकी सादी करदी बहुतही सरल स्वभाव ओर हसमुख थी देवायतसे जीजानसे प्यार कतीथी ओर देवायतभी उनको बहुत प्यार करताथा ओर हर रात दोनोकी सुहागरात होतीथी देवायत उनकी देर रात तक चुदाइ करता रहेता ओर नतीजा ये हुआकी उनको अ‍ेक लडका (विजय) हुआ ओर बडेही लाड प्यारसे अपने देवर ननंद ओर अपने बेटे विजयको पालनेमे बीजी रहेने लगी

विजय - जो देवायत ओर मंजुलाका बेटाथा पढनेमे होशीयार पुर्खोकी खेतीबाडीमे कोइ इन्टरेस्ट नहीथा अपने तरीकेसे बहुतही बडा बीझनेसमेन बनना चाहताथा इसीलीये पढाइमे खुब मन लगाके पढताथा ताकी विदेशमे जाके बसना चाहताथा बस थोडा अ‍ैयास कीसमका आदमी था ओर बचपनमे खुब आवारागर्दीकी ओर लडकी को पटानेकी कोसीस करता रहेता था बस लडकी पटी नही ओर तुरंत उनके नीचे लीटानेकी फीराकमे रहेता गांवकी बहुत सारी औरते ओर लडकीया चौद चुकाथा

रजनी - विजयकी सौतेली बहेन जो नीहायती खुबसुरत मानो कामदेवकी रतीका अंस थी अ‍ेकदम गोरी पतली कमर, तीखे नैन नक्स, रसीले होंठ, घुटनो तक लंबे बाल ओर ५.११ फीट लंबी हाइट, कीसीकाभी मन डोलने लगजाये, पढनेमे बहुतही होशीयार हमेसा फस्ट आतीथी ओर अ‍ेम.बी.अ‍े. कर रहीथी वो सादी करना नही चाहतीथी बस रीजन अ‍ेकहीथा वो अपाहीज थी वो दो धोडी (बैसाखी)की सहायतासे चलतीथी जोभी लडका देखने आता उनकी अपंगताकी वजहसे उनको रीजेक्ट करदेता था तभी सादी ना करनेका मन बनालीया ओर आगे अपने भाइका बीझनेस जोइन्ट करने वालीथी वो देवायत ओर लताकी लडकीथी इनके बारेमे हम आगे बात करेगे

लखन - देवायतका छोटा भाइ जब देवायत १२ सालका हुआ तब इन्हीका जन्म हुआ पढाइ लीखाइमे कुछ खास नहीथा तो अपनीही खेतीबाडीमे ध्याान रखने लगा जब जवान हुआ तब देवायतने अपने दोस्त (विरभानु जो हम इस कहानीमे सीर्फ भानुके नामसे जानेगे)की बहेन लतासे इनकी सादी करवादी

लता - लखनकी बीवी ओर भानुकी सबसे छोटी बहेन जो देवायतके कहेनेपे लखनसे सादी करदी गइ बहुतही खुबसुरत लंबी हाइट सरीर थोडा भरावदार बहुतही चंचल ओर कामी ओरत जो वो अपने घरपे ही हे इनके बारेमे आगे हम बात करेगे

पूनम - देवायत ओर लखनसे सबसे छोटी बहेन लखनके जन्मके तीन साल बाद पैदा हुइ बहुतही चंचल स्वभाव ओर मस्खरीकोर थी पढाइ लीखाइमे बहुतही होशीयार तीखे नैन नक्स लंबे घुटनो तक बाल अ‍ेक दम गोरी कमर पतली मानो कीसीभी हीरोइनको टकर देदे बहुतही कामी जो कीसीकाभी दील इनपे आजाये पर आजतक अपने पैर कभी नही लडखडाने दीया जो बडे भैया कहे वही सादी करना चाहतीथी

तो येथी देवायतकी फेमीली जो हमारे हिरोके दादा हे आगे सीर्फ देवायतके दोस्त ओर उनकी बीवीकाही परीचय करवाउगा बाकी पात्रोका परीचय जरुरतके हीसाबसे देता रहुगा

भानु (विरभानु) -देवायतका बचपनका दोस्त दोस्तीपे जान दावपे लगानेको तैयार ओर बहुतही इमानदार ओर महेनती जीनकी वजहसे देवायतने अपनी सारी जमीन ओर दुसरा कारोबार इनके हवाले करदीया देवायतभी इनको अपना भाइ मानताथा ओर आगे जाके अपना रीस्तेदार (समधी) तक बनालीया ओर वेसेभी देवायत रीस्तेमे इनका साढुभाइ लगता था क्युकी देवायतके कहेनेपेही उनकी सालीकी सादी अपने दोस्तसे करवादीथी

भावना - भानुकी बीवी जो देवायतकी बीवी मंजुलाकी छोटी बहेन हे दीखनेके कयामत कीसीकाभी लंड देखतेही खडा होजाये बहुतही कामी ओरत जो रातमे भानुको थका देतीहे फीरभी हरदीन प्यासीही रहेतीहे नतीजा ये रहाकी भानुसे संतुस्ट नही होतीथीतो अपने जीजाजीसे नैन लडाते उनकी बहुतही मस्करी करती ओर आखीर अ‍ेक दीन देवायतके नीचे आही गइ तो भानुसे दो बच्चे पैदा करके बाकीके तीन बच्चे देवायतसे एक ओर लखन से दो बच्चे पैदा करलीये भानुसे भावेश ओर विभा फीर देवायतसे मनोज ओर लखन से दामीनी ओर अंजली पैदा करलीये जीनके बारेमे सीर्फ देवायत ओर भावनाही जातीथी वो बात हम कहानीमे जानेगे

गांवकी हेलीमे आज बडाही मातम छाया हुआथा देवायतने आज अपने सरका छाया खो दीया आज उनकी माताके बाद पीताभी चल बसे सभी गांववाले आज सौक मनाने आयेथे आज लखन १६ सालका ओर पूनम १२ सालकी होगइथी तब दोनोही भाइ बहेन सहेरकी होस्टेलमे रहेके पढ रहेथे उनके पीताजीकी तबीयत बीगडतेही देवायतने दोनो भाइ बहेनको गांवमे बुला लीया था, उनका खास दोस्त ओर साढु भानु ओर उनकी साली भावनाभी हवेलीमे सब कामकाज ओर व्यवस्था देख रहेथे अब देवायतके पीताकी सब क्रिया तक दोनो यही रुकने वालेथे रात होतेही सब खाना खाके अपने अपने रुममे चले गये ओर सोनेकी तैयारीया करने लगे

देवायत : (पलंगपे लेटते) मंजु सब बीखर गया अब सब जीम्वेवारी हमारे उपर आगइ ओर मुजेतो खेतीबाडीमे कुजभी नही पता बस सब चीजोका सौदा करनाही आता हे

मंजुला : (अपने रुमका दरवाजा बंध करते) अरे क्यु चीन्ता करतेहो वोभीतो अपना कारोबारहीहे मेरी मानो आप भानुभाइको अपने साथ रखलो वो सब खेतीबाडी सम्हाल लेगे वेसेभी उनकी दुकान कुछ खास नही चलती भावु बता रहीथी ओर आपके बचपनका दोस्तभी हे ओर बहुतही इमानदारभी हे

देवायत : (खुस होते) अरे भाग्यवान तुमने क्या बात कहीहे, मेरे मुहकी बातही छीनली मेभी यही सोच रहाथा

मंजुला : (देवायतके साथ सोनेके लीये कंबलमे धुसते हसते) तो फीर..कभी कभी बीवीकी बात मानलीया करो फायदेमे रहोगे..चलो सो जाओ १२वी खतम होतेही लखन ओर पूनमको वापस भेजदो दोनोकी पढाइ डीस्टर्ब होती हे बस दोनो कुछ पढ लीखके सीखले तो उनका जीवन सुधर जाये..

देवायत : (मंजुलाको बाहोमे भरते) तुम दोनोकी बहुत चीन्ता करतीहो तो फीर अ‍ेक बच्चा हमभी पैदा करले..?

मंजुला : (देवायतके सीनेपे सर रखते) ना बाबा ना अभी मेरी पूनम बच्ची हे वो जब सादीके लायक होजायेगी तब सोचेगे तबतक मुजे आपके साथ मजे करनेदो..चलो आज सोजाओ आज कुछभी नही सुबहसे लगेहे थक गये होगे हम कल प्यार करेगे अबतो आपकी आदत होगइ हे

देवायत : (होठोपे कीस करते) तो चलना अ‍ेक बार कर लेतेहे मुजेभी तो तेरी आदत लग गइ हे आजभी तेरी चुत कसी हुइ लगती हे बीलकुल कुआरी लडकीकी तराह..हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते सीनेपे मुका मारते) कुछतो सरम करो बापुजी गुजर गयेहे ओर आपको प्यार करना हे

देवायत : (मंजुलाके उरोज दबाते) तो बापुजी कहा मना कर गयेहे उनकीभी पुरी उमर हो चुकथी

मंजुला : सीइइइइइ आहइइइ धीरे दबाओना दुखता हे..बाबु मानजाओ हम कल करेगे आज बाजुमे बच्चेभी सोयेहे प्लीज..कल पक्का दुगी.. हम दो बार करेगे बस..पलीज..चलो मे आपको अ‍ेसेही ठंडा कर देतीहु

देवायत हसके मान जाता हे ओर मंजुला उनको अपने हाथसे हीलाके सांत करतीहे फीर दोनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो जातेहे तब बाजुके रुममे भानु भावनाकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा तब भावनाभी कमर उछाल उछालके भानुका साथ दे रहीथी तब थोडी देरकी धमासान चुदाइके बाद भानु अकडने लगा ओर भावनाकी चुतमे गाढा पानीकी पीचकारीया मारने लगा ओर भावनाके सीनेपे सर रखके ढेर हो गया तब भावना आज अधुरी रेह गइ ओर मनही मन भानुको गालीया देते उनका सर सहेलाती रही

भावना : भानु तुम कीसी डोक्टरको दीखादो मे आजभी प्यासी रेह गइ वरना तुम सहेर जाके वो दवाइ लेकर आओ जो अ‍ेक बार लायेथे तब तुमने पुरी रात करके मुजे थका दीयाथा

भानु : ठीक हे बाबा जब सहेर जाउगा तब लेकर आउगा चल सोजा कल सब गांव वाले आयेगे मुजे सुबह जल्दी जगा देना तुम बहोत ठरकी होगइ हो..

तब भावना मनही मन भानुको कोसती अपनी चुत साफ करने लगती हे फीर उठके बाथरुममे जाके कमोडपे बैठ जातीहे ओर आंख बंध करके अपने जीजाजी देवायतको इमेजींग करते अ‍ेक उगली अपनी चुतमे घुसाके जोरोसे अंदर बहार करने लगती हे तब थोडीही देरमे जडके सांत हो जाती हे

दरसल भावनाको देवायत ओर मंजुलाका प्यार देखके बहुतही ज्वेलसी होती हे वो अपने जीजाजी देवायतको सुरुसेही पसंद करतीथी पर मंजुलाने देवायतसे प्यारका इजहार करलीया ओर उनको देवायतके दोस्त भानुसे सादी करके समजोता करलीया ताकी वो देवायतके जनदीक रेह सके भावनाने देवायतके नजदीक जानेकी बहुत कोसीस की लेकीन देवायत उनके सामने कुछ खास नही देखता था

क्युकी अ‍ेकतो रीस्तेमे साली लगतीथी ओर वो मंजुसे बहोत प्यार करता था फीरभी भावनाने कोसीस जारी रखी वो देवायतसे नजदीक जानेका अ‍ेकभी मौका नही जाने देतीथी मौका मीलतेही अपने जीजाजीसे मजाक करते उनको छुनेकी कोसीस करती रहेतीथी अ‍ेसेही दीन गुजरते गये ओर देवायतके पीताकी बारवीभी चली गइ तब दुसरे दीन सब देरसे उठे चाइ नास्ता करते सब साथमे बैठे बाते कर रहेथे

मंजुला : सुनीयेजी अब मेरे लखन ओर पूनमको आप सहेरमे छोड आइअ‍े दोनोकी पढाइ बहुत डीस्टर्ब होगइ हे

लखन : भाभी थोडे दीन यहा रहेने दोना यहा.., कीतना मजा आता हे मुजे नही जाना..

मंजुला : (थोडा गुसा होते) क्या नही जाना..बेटा थोडा बहुत पढले तेरेही काम आयेगा तुजे कहा कलेक्टर बनना हे बस थोडा बहुत हीसाब कीताब समजले फीर ये खेतीबाडी तुम्हेही सम्हालनी हे

पूनम : भाभी मुजेतो जाना हे अभी सरपे अ‍ेक्जाम आ रहा हे मेतो जाउगी..

मंजुला : (हसते उनका सर सहेलाते) साबास मेरी बच्ची..तु पढले येतो पक्का फेल होगा हें..हें..हें..

देवायत : (बातोका दौर सम्हालते) भानु लखनतो अभी छोटा हे मे चाहता हु अब तु मेरे साथ आजा जब लखन पढले तो उनकोभी थोडा बहुत सीखा देना फीर तुम दोनोही हमारी पुरी खेतीबाडी सम्हाललो क्युकी मुजे इन सब चीजोमे ज्यादा जानकारी नहीहे तो पुरी खेतीबाडीका वहीवट तुही देखले..

भानु : लेकीन भाइ..मे दुकानपे कीसको बीठाउगा अभी भावेशभी बहुत छोटा हे जो हम लताके पास छोडके आये हे वो इनके पास बहुत रहेता हे..

देवायत : अरे छोडना दुकान फुकान क्या कमाइ होती हे मुजे पता हे इनमे, बहुत मुस्कीलसे तेरा गुजारा होताहे यहा सब सम्हालले तुजे मे धानकी पैदासमे आधा हीस्सा देदुगा तो तेरीभी लाइफ अच्छेसे गुजरेगी क्या कहेती हो मंजु समजा अपने जमाइको..

मंजुला : हां..भानुभाइ आपके भाइ ठीक कहेते हे लखनतो अभी छोटा हे ओर पढाइ करता हे फीरभी आप दो आदमीभी कम पडेगे इतनी सारी जमीनका वहीवटहीतो करना हे आपको कहा हल लेके काम करना हे सब मजुदुरो सेतो कराना हे ओर हम आपसे ज्यादा कीसीपे वीस्वास भीतो नही कर सकते..

भावना : सुनीयेजी दीदी ठीक केह रहीहे हम घरके लोग हेतो अच्छा रहेगा, वेसेभी उस दुकानमे क्या लगा रखा हे बस सारादीन बैठे रहेतेहो आप जीजाजीकी बात मान जाओ..

भानु : (हसते) ठीक हे भाइ..घर जाके दुकानका कुछ करता हु फीर अ‍ेक दो दीनमे आजाउगा बस..अबतो खुस..अरे यार..अबतो हसदे..मुजेभी पता हे खेती बाडीमे तेरा काम नही येतो बापुजीथे तो सब मेनेज करतेथे अबतो तुभी अकेला पड गया..चल कोइ बात नही अब हम सब मीलके देख लेगे..बस तु लखन ओर पूनमको छोडके आजा फीर हम परसो मीलतेहे

देवायत : (भावुक होते) बस यार..आजा मे अकेला नही सम्हाल सकता चल लखन तुम दोनो अपनी तैयारी करलो दो पहोरको खाना खाके नीकल जायेगे फीर मुजे बाबाकोभीतो मीलना हे उनकोभी बताना पडेगाकी बापुजी नही रहे तो वापसीमे आश्रम होके आजाउगा

तब मंजुला अपना पलु सरपे ठीकसे रखते देवायतकी ओर मुस्करा देती हे तब भावनाभी मनही मन खुस होजातीहे की चलो अब तंगीसे छुटकारा मील जायेगा ओर जीजाजीसे ओर करीब आनेका मौका मीलता रहेगा यही सब सोचते खुस होजाती हे ओर देवायतको अजीब नीगाहोसे देखते मुस्कराने लगती हे तब दुसरी ओर पूनम ओर लखनभी अपने जानेकी तैयारीया करने लगते हे ओर देवायत ओर भानु अपने खेतोकी ओर बाते करते चले जातेहे

भानु : भाइ वो सरपंच राघवका ध्यान रखना पडेगा जबतक बापुजी थे तबतक तो उनसे डरके रहेताथा बहुतही कमीना आदमी हे, आप ध्यान रखना..दुसरेसे बात कर रहाथा की अब देवायत क्या करलेगा उनकोतो मे जमीनमे गाड दुगा.. उनकी हमारी जमीनपे नजर हे आप सम्हालके रहेना हो सकेतो छोटामोटा हथीयार अपने पास रखना

देवायत : (हसते) अरे वो मादर..क्या करलेगा उनकोतो मे अ‍ेसेही गाड दुगा उनकी दुखती नस हे मेरे पास, तु चीन्ता मत कर..वेसेभी उनकी बीवी मुजपे थोडी ज्यादा महेरबान हे हें..हें..हें..

भानु : (हसते) भाइ लोहा गरमहे तो मारदो हथोडा उनकी फील्म बना डालो..हें..हें..हें..

देवायत : बस मौका मीलनेदे यार..क्या मस्त गदराया माल हे अ‍ेक बार हवेलीपे आइथी मंजुके पास तो जाते वक्त मेरे पास रुकके केह रहीथी कल आपके भाइ सहेर जा रहेहे तो आइअ‍े चाइपानी पीने कमीनी बडीही कातील स्माइल करके गइ तबसे मन मचलने लगा हे बस अ‍ेक बार मीलजाये सालीको अ‍ेसी रगड रगडके चोदुगाकी दुसरी बार चुदवानेके लीये तडपती रहेगी साली क्या चीज हे..

भानु : यार लगता हे तुमपे कुछ ज्यादाही महेरबान हे वरना दुसरोपेतो रोफ जाडती रहेती हे, कीसीको भावही नही देती अपने खसमका सरपंच होनेका बडा धमंड हे साली मीलेतो चोद डालना..यार तुनेतो बाोमेही मुजे गरम करदीया हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) चल खेतपेतो जाही रहेहे वो हरीयाकी बीवी होगी लेके ट्युबवाले रुममे चले जाना हें..हें..हें..

भानु : (हसते) क्या यार..वो बेचारे मजदुर हे हमे उनकी मजबुरीका फायदा नही उठाना चाहीये दुसरे लोग भलेही अ‍ेसा करे भाइ मेतो अ‍ेसेही मजाक कर रहाथा..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अ‍ेकदम फंटुसहो पता नही मेरी सालीको चोदते होकी नही साले जीदगीमे हर मजा लेना चाहीये चल रुममे आजा यहा कुछ मजातो करे १५ दीन होगये दारुको हाथभी नही लगाया..

भानु : रहेनेदे यार..तुजे लखन ओर पूनमको छोडनेभी जाना हे ओर बाबाके पास आश्रममे भी जाना हे तो..

देवायत : (अपना माथा पीटते) अरे हां...भुल गया यार..दारु पीके बाबाके पास जाना ठीक नही..यार भानु तुभी साथ चलना वापसीमे मे अकेला बोर होजाउगा ओर अ‍ेक दीन ओर रुकजा क्या फर्क पडता हे..

भानु : चल ठीक हे यार वेसेभी लता ओर मांहीतो हे मे फोन करके बता देता हुं..की हम कल आयेगे या फीर सामको आश्रमसे जल्दी आयेगेतो सामकोही चले जायेगे

देवायत : तो फीर चल घर चलते हे खाना खाके चले जातेहे सहेर पहोचनेमेभी अ‍ेक घंटा लग जायेगा फीर वापसीमे आश्रम जायेगे बीचमेतो आता हे पता नही बाबाभी कभी कभी रहस्यमयी बाते करते हे मेरेतो कुछ पले नही पडता कहेतेथे तुम्हारे घरमे बहुत बडा बदलाव आने वाला हे सब प्रकृतीके हिसाबसे चलेगा

भानु : (घरकी ओर आते) यार चलते हेना आज बाबासे मेभी कुछ पुछ लुगा सायद मे कुछ जान सकु..

तब देवायत घरपे फोन करते घीरेसे अपनी बहेन लतासे बात करने लगता हे

भानु : हलो केसी हो गुडीया ओर मां क्या कर रही हे..

लता : (मुस्कराते) मां बहार पडोसनके पास बेठी हे आप ओर भाभी कब आ रहेहो..?

भानु : क्या मोहन तंगतो नही करता..हें..हें..हें..

लता : नही भैया वो अच्छेसे मेरे साथ खेलता रहेता हे तुम दोनोको यादभी नही करता हें..हें..हें..

भानु : (हसते) हां..वो सुरुसेही तुम्हारे पास रहेता हे अ‍ेसा लगता हे उनकी मां तेरी भाभी नही तुम हो हें..हें..हें..देखा नही वो तुम्हेभी मां मां करता रहेता हे

लता : (सरमसे पानी पानी होते) क्या..भैया आपभी..मे उनकी बुआ हु..हें..हें..हें..

भानु : (हसते) चल ठीक हे मे सहेर जा रहा हु तुजे कुछ चाहीये क्या..? हम दोनो कलही घर आजायेगे..

लता : भैया क्या लाओगे आपने इतने सारे कपडेजो दीये हे फीरभी आपका मन करे वो लेआना..

भानु : चल ठीक हे फोन रखता हु दोनो कल आजायेगे (फोन काटते जेबमे रखते)

दोनोही बाते करते हवेलीपे आजाते हे तब दो पहोरका खाना बन गयाथा तो मंजु भावनाके अलावा सब खाना खा लेते हे फीर मंजुला ओर भावनाभी खाना खा लेते हे तब लखन ओर पूनम मंजुलाके पैर छुतेहेतो मंजुला दोनोको गले लगाके आंसु बहाने लगती हे फीर दोनोके सर चुमते दोनोको अच्छे पढाइकी नसीहत देने लगती हे फीर दोनो सबके पाव छुके कारकी डीकीमे अपना सामान रख देते हे

मंजुला : सुनीयेजी..दोनोको कुछ रास्तेसे नास्ता बास्ता लेके कुछ पैसे देना वहा काम आयेगे..

पूनम : भाभी हमारी चीन्ता मत करो बडे भैयाने कलही दीये हे ओर आपनेभी कीतना खाना बनाके दीया हे

भावना : हां..तो खानातो होना चाहीयेना वहा दोनोका कोन ध्यान रखेगा दोनो टाइमपे खा लेना..

लखन : अरे मौसी दोनोहीतो आस पासके होस्टेलमे हे आप चीन्ता मत करो मे पूनमदीदी का खयाल रखुगा

देवायत : ठीक हे दोनो चलो चलो देर होजायेगी फीर वापसीमे आश्रम भीतो जाना हे

पूनम : भैया अगली बार हमे लेने आओ तब मुजेभी बाबासे मीलना हे हमभी काफी टाइम होगया उनके दर्शन नही कीये..

देवायत : ठीक हे गुडीया कभी ले चलुगा..चलो अब..

भावना : (देवायतकी ओर कातील मुस्कानसे) जीजाजी जल्दी आजाइगा फीर हमे घरभीतो जाना हे..

देवायत : कोइ जरुरत नही भानुने घरपे लतासे बात करली हे दोनो कल चले जाना हें..हें..हें..

तब भावना अ‍ेक कतील समइल करती मंजुलाके पास जाके खडी रेह जाती हे इधर देवायत अपनी कारमे बेठता हे ओर भानु उनके पासमे बेठने लगता हे तब लखन ओर पूनमभी मंजुला ओर भावनाको हाथ हीलाके बाय..बाय.. करते पीछली सीटमे बेठने लगते हे ओर दरवाजा बंध होतेही देवायत गाडी लेकर हवेलीसे नीकल जाता हे तब मंजुला गीली आंख करते भारी मनसे अंदर जाने लगतीहे ओर भावनाभी उनके पीछे जाती हे दोनोही होलमे बेठती हे तब भावना बातको छेडती हे

भावना : दीदी अब घर कीतना सुना सुना लग रहा हे भलेही बापुजीकी उमर हो चुकीथी फीरभी घरके उपरसे जो छत चली गइतो फर्कतो पडता हे ओर आपके देवर ओर ननंदभी बहुत अच्छी हे दोनो कीतना समजदार हे कुछ सालके बादतो पूनमभी ससुराल चली जायेगी..

मंजुला : (हसते) अरे अभीतो दोनो छोटे हे ओर मेरा लखननेतो अभी जवानीके देहलीजपे कदम रखा हे..

भावना : (हसते) दीदी अगर बुरा ना मानोतो अ‍ेक बात कहु..

मंजुला : (हसते) अरे छोटी तेरा क्यु बुरा मानुगी..? जो बोलना हे खुलके बोल..

भावना : दीदी मे चातीहु जब आपका देवर सादीके लायक होजाये तो क्युना हम मेरी ननंदकी सादी आपके देवर लखनसे करदी जाय..क्या कहेतीहो आप..?हें..हें..हें..

मंजुला : (आंखोमे चमक लाते) अरे हां..बाततो तेरी सही हे..ठीक हे मे मौका मीलतेही उनकेभाइसे बात करती हु अभी ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रखना मे उनसे बात करलुगी..लता बहुतही प्यारी लडकी हे..

भावना : (हसते) दीदी पता हे मेरा मोहन मुजसे ज्यादा उनके पासही रहेता हे ओर उनकोही मां मां कहेता रहेता हे जेसे वो मेरा बेटा नही उनका बेटा हो देखा नही हम इतने दीनोसे यहा हे फीरभी अ‍ेकबारभी फोन नही आयाकी मोहन उनको परेसान करता हे हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) वेसे तेरी लता कीतनी उमरकी हुइ..

भावना : (हसते धीरेसे) दीदी अभी अभी पीछले छे महीनेमेही उसकी महामारी हुइ पहेली बार..हें..हें..हें..तब बेचारी बहुत गभरा गइथी फीर मेने उसे सब समजाके सीखाया..

मंजुला : (हसते) तबतो वोभी मेरे लखनकी तराह जवान हुइ..कोइ बात नही मे बात करुगी..

भावना : दीदी आपको नही लगता आप दोनोको अब बच्चा करलेना चाहीये..

मंजुला : (सरमाके हसते) क्या तुभी..अभी मेरी पूनमकी सादी होजानेदे फीर सोचेगे..तेरे जीजाजीभी यही कहेते थे उनकोतो बस मजा करना हे हम दोनोने फेमीली प्लानींग की हे..हें..हें..हें..

भावना : हां..जीजु समजदार जो हे, बस अ‍ेक ये हे उनकोतो अ‍ेक ओर बच्चा चाहीये..

मंजुला : (हसते) हां तो करले मोहनभी तो देड सालका हो गया हे, वो चाहते हेतो तुजे क्या दीकत हे..

भावना : दीदी दो दो बच्चा पालके अभी क्या करेगे फीर खर्चाभी तो आता हे ओर वेसे दुकानभीतो खास नही चलती तो मे मना करती रहेती हु..

मंजुला : देख भावना अब तु वो दुकानतो भुलही जा अब तो आप लोग हमसे जुड गये हो फीरभी तु पैसेकी चींन्ता मत करना तु बस अच्छेसे अपना संसार ओर परीवार चला बाकी मे सब देखलुगी..

भावना : थेन्कस दीदी..देखती हु अब कहेगेतो मे मना नही करुगी, अब आपभी कुछ सोचो हमारी सादीको ढाइ साल होनेको आये..इस महेलकोभी अ‍ेक वारीस देदो..

मंजुला : (हसते) ठीक हे देखेगे वेसे मेरा लखन ओर पूनमभी तो मेरे बच्चे जेसेही हे दोनो मुजे बहुत प्यार करते हे बस अ‍ेक बार बाबाको मीलना हे अकेलेमे तुम साथ चलना हम दोनोही जायेगे हमारे गुरु हे..

भावना : दीदी कोन हे ये बाबा जो आप लोग उनको बहुत मानते हे..

मंजुला : तुजे नही पता..? सुन वो बहुत बडे संत हे, पता नही हमारे खानदानमे कीसीने कोनसा श्राप दीया था बस सबको अ‍ेकही संतान हो रहीथी संतान होते ही अ‍ेक सालमे उनके दादाकी मौत हो जातीथी ओर ये कइ पीढीयोसे चला आ रहाथा तब जाके बाबा मीले ओर यहा हवन बवन करके सब ठीक करदीया ओर श्राप से मुक्ती दीलवादी तब जाके मेरे ससुरको दुसरी संतान हुइ ये लखन ओर पूनम यहीतो हे जो देरसे पैदा हुअ‍े

भावना : अच्छा..तभी मे सोचु जीजाजी के बाद उनके भाइ ओर बहेन इनसे इतने छोटे क्यु हे..

रजीया : (हाथ पोछते पास आते) मालकीन आज खानेमे क्या बनाना हे..?

मंजुला : रजीया तेरे मालीक ओर भानुभाइतो सहेर गयेहे आज कुछभी बनाले..

रजीया : ठीक हे मालकीन क्या छोटे मालीक ओर दीदी चले गये..?

मंजुला : (हसते) हां..उनकी पढाइ चालु हे तो चले गये, क्या कर रहीहे दया..?

रजीया : जी वो जरा हमारे खेतोकी ओर गइ हे कुछ सब्जीया लेने..अभी आजायेगी..

मंजुला : चल ठीक हे खाना बन जाये तो बुला लेना..

रामु काका की उमर तकरीबन ८० साल की हो गइथी दया इन्हीकी बेटी हे जो देवायतके पीताने उनकी सादी अ‍ेक दुसरे गांवके लडकेसे करवादीथी लडका उनकीही बीरादरीका था जो बादमे बहुत सराब पीने लगा ओर लीवर खराब करलीया अभी दो साल पहेलेही उनकी मौत होगइ ओर दयाको रामुकाका इधर लेकर आगये तबसे वो हवेलीमेही काम कर रही हे मुंजलासे महज अ‍ेक सालही छोटी हे

रजीयाभी उनकीही उमरकी हे उनकेही गांवकी हे उनकीभी सादी होगइथी बच्चा ना होनेकी वजहसे उनके पतीने उनको तलाक देदीया था तबसे वोभी यही रहेके काम कर रही हे दया ओर रजीया दोनोही अपने सारीरीक जरुरीयात देवायतसे चुदवाके पुरी करती हे दोनोही हवेलीमे रहेती हे ओर जरुरत होतीतो खेतोमेभी काम करती हे रामुकाका हमेसा खेतोपेही रहेके रखवाली करते हे

तब दुसरी ओर देवायत, भानु लखन ओर पूनमको छोडने सहेरपे पहोंच गये रास्तेमे दोनोके लीये खानेके लीये नास्ताभी लीया ओर देवायतने दोनोको कुछ पैसेभी दीये फीर अ‍ेकही जगाह दोनोकी होस्टेलथी तो वहा पहोच गये तब लखन दोनोके पैर छुके सामान लेने लगा तब पूनम देवायतसे लीपट गइ फीर भानुके पैर छुके दोनो भाइ बहेन अंदर चले गये ओर देवायत भानु वापस मुडके आश्रमकी ओर नीकल गये जब वहा पहोंचे तब अ‍ेकल दोकलही आदमी दीखाइ दीये दोनोही सीधे बाबाके पास चले गये ओर दंडवत करके बेठ गये....कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २

तब दुसरी ओर देवायत ओर भानु लखन ओर पूनमको छोडने सहेरपे पहोंच गये रास्तेमे दोनोके लीये खानेके लीये नास्ताभी लीया ओर देवायतने दोनोको कुछ पैसेभी दीये फीर अ‍ेकही जगाह दोनोकी होस्टेलथी तो वहा पहोच गये तब लखन दोनोके पैर छुके सामान लेने लगा तब पूनम देवायतसे लीपट गइ फीर भानुके पैर छुके दोनो भाइ बहेन अंदर चले गये ओर देवायत भानु वापस मुडके आश्रमकी ओर नीकल गये जब वहा पहोंचे तब अ‍ेकल दोकलही आदमी दीखाइ दीये दोनोही सीधे बाबा के पास चले गये ओर दंडवत करके बेठ गये....अब आगे

बाबा : (हसते) आ गया बेटा..क्या बापुजी चल बसे..सब अच्छेसे हो गयानां..?

देवायत : जी बाबा उनकीभी उमर हो गइथी दो दीन बीमार रहे ओर अचानक चले गये इसीलीये नही आ सका कहीये क्या हुकुम हे मेरे लीये..

बाबा : बस अ‍ेकही समस्या आस पासके दोनो गांवके आदीवासी कबीलेकी, वोही समस्या अ‍ेक दुसरेकी ओरतोको भगाके लेजाते हे ओर आपसमे अ‍ेक दुसरेके कबीलेको हडपनेकी कोसीस करते रहेते हे अब वो सीर्फ तेरी ही सुनते हे तुम दोनोको समजा आपसमे जगडा ना करे..

भानु : (हसते) बाबा येतो बरसोसे चला आ रहा हे सबको कबीलेका सरदार बनना हे ओर वहाके सरदारकी बीवी ओर लडकीयोको रानीया बनाके रखना हे हें..हें..हें..बाबा क्या कोइ ओर उपाय नही हे..?

बाबा : (हसते) हे..बस कुछ साल इन्तजार करना हे..इस महासयके(देवायत) खानदानमेही अ‍ेक अ‍ेसा वारीस आयेगा जो वहाकी समस्याका समाधान करेगा सब इन्हीकी खानदानसे होगा..

देवायत : (हसते) बाबा आपतो आये दीन कहेतेहे हमारे खानदानमे बहुत बडा बदलाव होगा तब लोग खुलके जीयेगे आपने बहुत कुछ बाते कीथी पर मेरी समजमे कुछभी नही आया..

बाबा : सुन बेटा..मेने तेरे पीताजीको सब खुलके बता दीयाथा लेकीन तब बहुत टाइम था, अब वो टाइम नजदीक आ गया हे तेरेही घरमे तेरा वारीस पोता आयेगा जो वो अ‍ेक इश्वरीय अंस होगा फीर वोही सब सम्सयाका समाधान करेगा जो पुर्व जन्ममे हिमाचलका राजा था उनकी कइ रानीया थी जो सब इस जन्ममे वापस तेरेही घर जन्म लेके आयेगे तब तु विचलीत मत होना क्युकी तुजे रीस्तेमे बहुत बडा बदलाव देखनेको मीलेगा जो सब होकेही रहेगा..

भानु : (हसते) बस.. बाबा यही बात इनकी समजमे नही आती आप इनको जरा खुलके बताइअ‍े..

बाबा : (हसते) अगर इनको सब खुलके बता दीयातो इनको रातमे नींदही नही आयेगी..हें..हें..हें..सुन.. रीस्तोमे बदलाव मतलब वो आपसी रीस्तोमेही सादी करेगा क्युकी वो सब प्रकृतीके हीसाबसे जीने वाले होगे जो ये रीस्ते नातेको ज्यादा तवजुब नही देते वो हर रीस्तेमे केवल पुरुष ओर स्त्री ही समजते होगे तुजे सीर्फ अ‍ेकही रीस्ता बताता हु इनकी बहेनही इनकी बीवी होगी..

देवायत : (थोडा गंभीर होते) बाबा क्या ये सब रीस्ते जायज होते हे..? ये सब गलत नही हे..?

बाबा : भानु बेटा अंदर जाके वो सेवकको कुछ चाइ बायके लीये बोलदे (भानु अंदर चला गया तब..) नही बेटा आपके लीये सब गलत होते होगे जो लोग प्रकृतीके नीयमसे जीते हे इनके लीये कुछभी गलत नही बस कुछ समयकी राह देखले फीर तुम खुदही अ‍ेसे रीस्तेसे बंधे होगे जोभी होगा सब होने देना कीसीमे हस्तक्षेप नही करना अभी सीर्फ इतनाही जानले बाकी सब जब तु अकेला आयेगा तब खुलके बात करेगे

देवायत : जी..बाबा समज गया..अगली बार अकेलाही आउगा..येतो छोटे भाइ बहेनको होस्टेल छोडने आयेथे तो चले आये..

बाबा : सुन तेरे भाइ बहेनकी उमर होतेही सादी करदेना बस अभी सीर्फ इतनाही कहेना हे..

भानु : (वापस आके बेठते) बाबा इन्होनेतो चाइ बनाभी लीया आतेही हे..हमे आते देखलीया था..हें..हें..हें..

तब देवायतके मनमे विचारोका धमासान युध्ध चल रहाथा तभी सेवक चाइ लेकर आगये फीर सबने चाइ पीली, तब दोनो बाबाको दक्षीणा देकर नीकल गये ओर वापस गांवकी ओर चलने लगे तब देवायत पुरे रास्ते खामोस बेठा रहा ओर सोचता रहा की आगे उनको क्या क्या दीखनेको मीलेगा ओर बाबाने अ‍ैसा क्यु कहाकी तुम खुद अ‍ेसे रीस्तेसे बंधे होगे..?, तब भानुने तंद्गासे जगादीया

भानु : (देवायतकी ओर देखते) यार..कहा खो गया तु.. लगता हे बाबाने कुछ गंभीर बात बताइ हे..

देवायत : (भानुकी ओर हसते) नही यार..बस यही समजले आनेवाले वक्तमे हमारे घर बहुत बडा बदलाव होगा जो हमारे घर बडी सक्तीया आने वाली हे बस यही सोचते रोमांचीत हो रहा था..

भानु : भाइ मे जब आया तब बाबा कुछ सादीकी बात कर रहेथे..कीसकी सादीकी बात कर रहे थे..?

देवायत : (हसते) अरे वो लखन ओर पूनमकी बात कर रहेथे..कहेतेथे उमर होतेही दोनोकी सादी करदेना..

भानु : (हसते) हां..यार..लडकीयातो जटसे सादीके लायक होजाती हे देखोना पूनम कीतनी बडी हो गइ हे ओर हमारी लता भी जवानीके देहलीजपे कदम रखतेही कीतनी बडी दीखती हे..हें..हें..हें..मुजेतो इनकी अभीसे चीन्ता हो रही हे..हें..हें..हें..

देवायत : (कुछ सोचते) अरे यार भानु..मेरे दीमागमे अ‍ेक बात आ रहीहे..हमारी लताकी चीन्ता तु छोडही दे, मे चाहता हु हमारे लखनके लीये लताका हाथ तुमसे मांगता हु..बोल क्या कहेता हे..?

भानु : (मनमे खुस होते) भाइ तुमनेतो मेरी मुहकी बात छीनली, दोनो अ‍ेक दुसरेसे जाने पहेचानतेभी हे बाकी कहा कुछ देखना पुछना हे.. बस अ‍ेक बार लताका मन जानलु फीर मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

देवायत : यार लखनभीतो पढ रहा हे बस ये बात तु अभी सीर्फ हम दोनोके बीच रख हम सीर्फ अपनी बीवीयोसे बात करेगे फीर बात पकी करके रख देगे जब दोनोकी उमर होगी तब दोनोकी सादी करदेगे..

भानु : (खुस होते हसते) डन..भाइ, सब तैय रहा हम वोही करेगे..

अ‍ेसीही बाते करते दोनो वापस हवेलीपे आगये तब साम ढल चुकीथी आतेही दोनो फ्रेस हो गये तब मंजुला ओर भावनाभी आगइ ओर दोनोको खानेके लीये केह दीया तो दोनो सीधेही डाइनींगपे बेठ गये तब मंजुला ओर भावनाभी इनके साथ बेठ गइ तब दया ओर रजीयाने खाना परोस दीया ओर चारो खाने लगे तबभी देवायत खाना खाते सोचमे डुबाथा तब मंजुला सब बाते भांप गइकी कुछतो बात हे जो इनको परेसान कर रहीहे उसने मनही मन रातमे बात करनेकी ठानली ओर चारोने खाना फीनीस कीया

भानु : यार..अब हम कल सुबह चले जायेगे इतने दीन हो गये घरपे मां ओर लता अकेले हे..

देवायत : भानु जोभी हो तु तेरी दुकानका दो दीनमे कुछ करले फीर इधर चलेआना ओर सब सम्हाल ले..

मंजुला : हां भानुभाइ बहुत चलाली दुकान अब दोनो भाइ मीलके सब वहीवट सम्हाललो..

भानु : ठीक हे भाभी अबतो यही करना हे मे दो दीनके बाद आजाउगा..

देवायत : (हसते) यार..तु इधरही रहेने आजा इतनी बडी हवेली हे दोनोके परीवार आरामसे रेह लेगे..

भानु : नही यार..पासमे हीतो गांव हे इधर आनेमे १० मीनीटभी नही लगती फीर हमारा मकानभीतो बडा हे वो अ‍ेसेही पडे रहेके खंढहर होजायेगा हम सब आते जाते रेहेगेनां..

अ‍ेसीही बाते करते आधे घंटेके बाद सब सोने जाने लगे तब मंजुलाने छुपकेसे हसते हुअ‍े भावनाको अ‍ेक गोली देदी तो भावना कीचनमे चली गइ फीर अ‍ेक दुधका ग्लास लेकर अपने रुममे चली गइ ओर उसने वो गोली मीलाके दुध भानुको पीला दीया तो भानु दुध पीके सोनेके लीये बेडपे आगया ओर लेटतेही..

भानु : (हसते) क्या बात हे आज पतीपे इतना प्यार आ रहाहेकी दुध देदीया इरादातो नेक हेनां..?हें..हें..हें..

भावना : (सरमाके हसते) हां..जाओजी..येतो दीदीने कहाकी रातमे सोते वक्त पतीको दुध पीलाना चाहीये तो पीला दीया, क्या आपको अच्छा नही लगा..?

भानु : (भावनाको बाहोमे भरते) अरे डार्लींग बहुत अच्छा लगा, बस अ‍ेसेही रोज मेरी सेवा करती रहे..

भावना : (सरमाते सीनेपे सर रखते) सुनीयेजी दीदी केह रहीथी दुसरा बच्चा करलो उनकी पढाइकी चीन्ता मत करना तो मुजेतो बहुत सरम आइ..

भानु : (बाहोमे कसते होंठ चुमते) तो सहीतो केह रही हे..मेतो कबसे केह रहा हु तु मानती नही थी दोनो बच्चे अ‍ेक साथ बडे हो जायेगे चल आजा आजतो दुसरा बच्चा देदी देता हु.. चलना.. सब कपडे नीकालदे आज दोनो खुब मजे करेगे देख नीचे अभीसे खडा हो गया फटाफट कपडे नीकाल..

तब भावना समज जातीहेकी गोलीने अपना असर सुरु करदीया दरसल दोनो अकेली बेठीथीतो भावनाने प्यासी रहेनेकी फरीयाद करली तो मंजुलाने उसे अ‍ेक वायग्राकी गोली देदी जो देवायत अक्सर घरपे रखता था ओर कभी कभी इनका उपयोग करके पुरी रात मंजुलाकी चुदाइ करताथा तब सुबह मंजुलाकी हालत खराब हो जातीथी तो आज भावनाकी फरीयाद सुनके उसे गोली देदी..तब भावनाने सब कपडे नीकाल दीया

भावना : (बेडपे लेटते अपने बाल खुले करते) आज बडा जोस चडा हुआ हे देखना फीर मुजे प्यासी मत रखना आजतो पुरी रात जबरदस्तीसे करवाउगी भलेही सुबह मेरी हालत खराब हो जाये..

भानु : (भावनाके उपर लेटते होंठ चुमते) डार्लींग दुधमे क्या खीला दीया हे जो लंड फटा जा रहा हे अ‍ेसा लगताहे आजतो पुरी रात तेरी चुतमे रखते तेरी बजाताही रहु

भावना : सीइइइ..आहइइ धीरे चुसोना मे कहा भागी जा रहीहु..

तब भानु भावनाके होठोको पागलकी तराह जोरोसे चुस रहाथा ओर अ‍ेक हाथसे भावनाके बुब्सको मसल रहाथा तब भावनाकोभी अपने उरोजोपे हल्का दर्द होने लगा आज भानुका जोस देखते मनही मन खुस हो रहीथी की चलो आज मे प्यासी नही रहुगी तब अपनी चुतके अंदर भानुने अ‍ेक उंगली घुसादी ओर चुतमे अंदर बहार करने लगा तब भावना पागल जेसी होगइ ओर जोरोसे सीसकारीया करने लगी उसने वासनाके नसेमे अपनी आधी आंख चडाली ओर भानुको वासना भरी नजरोसे देखती रही

भानु : आइ..केसा लग रहा हे डार्लींग जीतो चाहता हे आज तेरी चुतका भोसडा करदु आजतो दुसरा बच्चा पका डालुगा तुने बहुत नखरे कीये हे चल अब इसे मुहमे लेके चुस..

भावना : आहइइ..सीइइइइमममममआआआअइइइइआह..घुम जाओ..

कहातो भानु भावनाकी दोनो ओर पैर करके बेठ गया ओर चुतकी ओर मुह करते जुक गया ओर मुह सीधा चुतपे लगा दीया तब भावना सरसे पांव तक हील गइ ओर सीसकारीया करते भानुका लंड मुठीमे पकड लीया फीर हल्केसे सहेलाते अपने जीभसे चाटने लगी जब लंड गीला हो गया तब धीरेसे मुहमे भरने लगी आज उसे भानुका लंड अ‍ेकदम सख्त महेसुस हो रहाथा ओर मजेसे लंडको मुहमे अंदर बहार करने लगी

तब भानुभी चुतमे जीभ डालके उसे अंबर बहार करने लगा तब थोडीदेरकी धमासानके बाद भावना अकडने लगी ओर अपनी कमरको जटके देने लगी तब अचानक चुतसे फवारा छुट गया ओर भानुका पुरा मुह भर गया तबजाके भावना सांत हुइ ओर अपनी सांसको कंटड्ढोल करने लगी तब भानु उठके बाथरुममे चला गया ओर मुह साफ करके लंड हीलाते वापस आगया ओर भावनाके पैरके बीच बेठ गया

भावना : भानु आज पहेला बार तुमने बीना डालेही मुजे जडा दीया बस रोज अ‍ेसेही करना..

भानु : चल अब असली मजेके लीये तैयार होजा आजतो तेरी चुतको फाडकेही रहुगा..

भावना : कीतना जोस चडा हे लगता हे आजतो तुम मुजे पेटसे करकेही छोडोगे..हें..हें..हें..

भानु : (लंडको चुतपे सेट करते) तो फीर..क्या मस्त चुत हे तेरी चल आजा..

कहेते धीरे धीरे लंडको पकडके चुतमे धकेलने लगता हे तब भावना कांपने लगती हे आज उसे भानुका लंड अपनी चुतमे बहुत सख्त लग रहाथा वो सीसकारीया करते दोनो हाथसे चदर पकडते मुहको इधर उधर करने लगती हे तब भानु उनके उपर जुकके लेट जाता हे ओर भावनाकी गरदनके नीचे अ‍ेक हाथ डालके दुसरा हाथ उनके उरोजपे रखते जोरसे मसल देता हे ओर कमर उची करके अ‍ेक जोरका जटका मारता हे तब आज पहेली बार भावनाके मुहसे चीख नीकल गइ ओर जो भानुके मुहमेही दब गइ तब भावनाकी दोनो आंखसे आंसु नीकल आये ओर वो देवायतकी आंखोमे सरमसे पानी पानी होते देखने लगी

भानु : (हसते) क्यु डार्लींग केसी रही..आज तेरी चुतको ना फाडदुतो मेरा नाम भानु नही..

भावना : सीइइ..आह..आह..इइसीइइइइमंमंमंममुमुमुइइइससससस भानु क्या होगया हे तुजे..

भानु : कमीनी मुजे पता हे तुने दुधमे मुजे वायग्रा मीलाके पीलाइ हे..हें..हें..हें..आजतो तेरी चुतका भोसडा बना दुगा तुजे बहुत ठरक चडती हेनां..? आजतो सबह तक तेरी बजाता रहुगा..

भावना : प्लीज..भानु..मुजे नही पताथा इन गोलीमे इतनी ताकात हे वरना कभी नही पीलाती..

भानु : क्या नही पीलाती अबतो हर रात गोली पीके तेरी बजाउगा तुजे रोज लंड चाहीयेनां..?

कहेके भानु हाथके बल उचा होके जोरोसे भावनाको चोदने लगता हे तब भावनाके बुब्स उछलने लगते हे ओर भावना दर्दके बारे मुहको इधर उधर करने लगती हे ओर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगती हे तब रुममे केवल भावनाकी चुडीयोकी खनखनाहट ओर फच..फच..फच..की आवाज आ रही हे तब थोडीही देरमे भावना कमरको जटके देने लगी ओर कमर उची करते दोनो हाथसे चदर पकडते जडने लगी

तबभी भानु उसे जोरोसे चोदेकी जा रहाथा तब भानु वापस भावनाके उपर लेट गया ओर अ‍ेक हाथ भावनाकी गरदनके नीचे डालके जोरोसे कमर हीलाने लगा ओर भावनाके होंठ जोरोसे चुसने लगा तब कुछ देरके बाद भावनाकी आंख बडी होगइ ओर भानुकी आंखमे देखते दोनो हाथ भानुकी पीठमे रखते भानुको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर अ‍ेक बार फीर जडने लगी तबभी भानु उसे चोदेही जा रहाथा

भानुका लंड भावनाकी चुतमे कीसी मशीनके माफीक अंदर बहार हो रहाथा तब भानुने अचानक भावनाके होंठ जोरोसे भीचलीया ओर कमरको जटके मारते भावनाकी चुतको अपने गाढे पानीसे भरने लगा तब भावनानेभी उसे कसके बाहोमे भीचलीया ओर उनकी पीठ सहेलाती रही तब धमासान चुदाइका तुफान सांत हुआ ओर दोनोही अपनी सांसे दुरस्त करने लगे तब भानु भावनाके उरोजोपे सर रखके ढेर हो गया ओर भावनाभी धीरे धीरे उनकी पीठ सहेलाती रही तब भावना सरमके मारे भानुसे आंख नही मीला पा रहीथी

भानु : भावु..क्या..आज मजा आया..?

भावना : (धीरेसे थकी आवाजमे) भानु तुनेतो आज मुजे तोडके रख दीया मुजे पता होताकी गोलीमे इतनी ताकत हेतो मे कभी नही देती आजतो चोद चोदके मुजे पुरी नीचोड ली चल उपरसे हट मुजे बाथरुम जाना हे

भानु : (हसते) नही देखती नही लंड अभीभी खडा हे आजतो दो राउन्डके बगैर तेरे उपरसे हटने वाला नही हु

भावना : पागल हे क्या..? अरे बाबा तुमने अ‍ेकही बारमे मुजे थका दीया.मुजे नही चुदना..

भानु : अरे बेबी आजतो तुजे छोडने वाला नहीहुं तु हर रात प्यासी रहेती हेनां चल आज तेरी सारी कशर पुरी करता हु फीर तुजे अ‍ेक बातभी कहेनी हे हमारी लताके बारेमे..

भावना : (भानुकी ओर सवालीया नजरसे देखते) कोनसी बात..उसने कुछ कांडतो नही कीया..?

भानु : (थोडा गुसा होते) पागल हे क्या..? अ‍ेसा कुछ नहीहे..बस उनके रीस्तेकी बात आइहे..हें..हें..हें..

भावना : जानु मुजेतो पहेले बताते मेनेभी अ‍ेक जगह उनकी बात चलाइ हे..कोन हे वो...?

भानु : (खुस होते) देवायतने खुद लखनके लीये हाथ मांगा हे..बस अ‍ेक बार लताका मन जानले..

भावना : (खुस होते) सच..? अरे बाबा हमारी लताके बारेमे मेने खुद बडी दीदीसे आज बातकी तो कहेतीथी तेरे जीजाजीसे पुछके बताउगी..ओर आज जीजाजीने खुद आपसे बात करली..आप हां कहेदो ओर ये रीस्ता पका करलो मे लतासे बात करलुगी..आजतो दील खुस करदीया आपने (हसती हे)

भानु : (हसते) तो चलो इसी खुसीमे अ‍ेक राउन्ड होजाये..

कहेते भानु अपनी कमर हीलाने लगा तब भावना सरमसे पानी पानी होगइ ओर भानुकी पीठमे दोनो हाथ रखके भानुको बाहोमे भीच लीया तब भानु उनकी गरदनमे मुह डालके गरदनको चुमते कमरको जटके मारने लगा ओर भावनाभी अपनी कमर उछालते तालमेलमे भानुका साथ देने लगी ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच धुआधार चुदाइ होने लगी तब भावना सीसकारीया करते वासनाके भवंडरमे खो गइ

भावना : येस..भानु ओर जोरसेइइइइइआह..आह..आह..इइइससससससममममजाजाजजाआआरररहाहाहेहेहे..

भानु : डार्लींग..क्या मस्त चीज हे..जी चाहताहे तुजे..चो..द..ता..र..हु..सीइइइआइइइमुंहा..

भावना : जानु नीचोड डालो मुजे..मेरे दर्दकी..परवाह..मत..क..रो..इइइइसससससस..ग..इइइइइइइइ

कहेके भावना जोरोसे भानुको बाहोमे भीजते जडने लगी तब भानु हाथके बल उचा होके भावनाको दोनो टांगे पेरमे फसाके जोरोसे चोदने लगा वायग्राकी वजहसे भानुभी थकने लगा पर लंड अभीभी सख्त था तब भावना दो बार ओर जडके पुरी तराह थकके चकनाचुर होचुकीथी फीरभी भानु जडनेका नाम नही ले रहा था बस उसे चोदेही जा रहाथा तब अचानक भानु उनके उपर लेट गया तब भावना समज गइ

ओर उसने भानुको जोरोसे बाहोमे भीचलीया तो भानुभी भावनाके होठोपे होंठ रखके जोरोसे भीचते अपनी कमरको जटके मारने लगा तब अपने गाढे पानीसे भावनाकी चुत भरने लगा ओर आखीर लंडको जड तक घुसा दीया ओर भावनाके सीनेपे सर रखके ढेर हो गया ओर बेहोसी जेसी हालतमे चला गया तब भावना अपनी सांस कंटड्ढोल करते उनकी पीठ सहेलाती रही तब वोभी कुछ बोलनेकी स्थीतीमे नही थी

दोनोही काफी देर अ‍ेसेही रहे आज भावनाका तन पुरी तराह टुट चुकाथा, तब उसे पता नही थाकी चुतके अंदर दोनोके बीज मीलनके लीये धमासान युध्ध कर रहेथे ओर काफी मसकसके बाद दोनोके बीज मील गये ओर भावनाके गर्भमे भानुका बीजका रोपन होगया था तब भावना थोडी देरके बाद हीली ओर भानुको अपने उपरसे हटानेकी कोसीस करने लगी तब भानु साइडमे लुढक गया

तो भावना बेडपे बेठ गइ ओर अपने बालोका जुडा बनाते बेडसे उतरनेकी कोसीस करने लगी तब उसकी चुतमे काफी जलन महेसुस होते वापस बेडपे बेठ गइ ओर गुस्से से भानुकी ओर देखने लगी फीर बेडपे दोनो हाथके सहारे फीर खडी होगइ ओर धीरे धीरे बाथरुमकी ओर जाने लगी तब उनकी चाल बीलकुल बदल चुकीथी ओर वो लडखडाते बाथरुममे घुस गइ

सादीके इतने दीनोमे इनकी अ‍ेसी धमासान चुदाइ कभी नही हुइ थी मानो आज उनकी सुहागरात हुइहो वो मनही मन बहुतही खुस हो रहीथी जब बाथरुममे घुसते जुक गइ ओर अपनी चुतकी ओर देखने लगी तब उनकी चुत सुजके पांव जेसी हो गइथी इनको अभीभी यकीन नही हो रहाथाकी उनके पती भानुने इनकी जबरदस्त चुदाइ करली हे फीर वो पीसाब करके चुतको साफ करने लगी ओर सही होके बहार आगइ

आतेही भानुसे चीपकके सो गइ पता नही दोनोको कब नींद आगइ तब दुसरी ओर मंजुला ओर देवायत रुममे जातेही दोनो आपसमे चीपकके अ‍ेक दुसरोकी बाहोमे समा गये ओर काफी देर खडे रहेके अ‍ेक दुसरेके होंठ स्मुच करते रहे तब देवायत उसे गोदमे उठा लेता हे ओर बेडकी ओर चलने लगता हे फीर बेडपे लीटाते खुदभी उनकी बगलमे उनपे जुकके लेट जाता हे ओर दोनोही कीस करने लगते हे

मंजुला : (हसते) लगता हे आज मेरा आसीक कुछ ज्यादाही परेसान दीखते हे हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां डार्लींग आज बातही कुछ अ‍ेसी हुइकी बाबाने दील जंजोरके रख दीया..

मंजुला : (सरमाके हसते) क्या अ‍ेसेही बात करोगे..? सभी बातेतो आप मेरे उपर लेटतेही करते हे हें..हें..हें..पहेले आपका हथीयार डालोनां फीर हम आरामसे बात करेगे अबतो मुजेभी आदत हो गइ हे

देवायत : (हसते) चल कोइ बात नही पहेले मेरी जानुको थोडा प्यार करलु फीर बात करेगे..

तब देवायत मंजुलाके ब्लाउसका बटन खोलने लगा तो मंजुलाभी देवायतके सर्टके बटन खोलने लगी तब थोडीही दीरमे दोनो नंगे हो गये तब मंजुलाने देवायतका हाथ पकडके बेडपे लेटते अपने उपर खीच लीया तो देवायतभी अ‍ेक टांग मंजुलाके उपर डालके उनके उपर चड गया ओर उनके बुब्स पकडके मसलने लगा फीर अपना मुह जुकाके उनके उरोजोको चुसने लगा तब मंजुला उनके सरपे हाथ घुमाते सरको सहेलाने लगी

मंजुला : (हसते प्यारसे) देवु आज दीदीने मुजसे अ‍ेक बात की हे..हमारे लखनके बारेमे..

देवायत : (आस्चर्यसे मुह हटाके देखते) क्या..? कही लताके बारेमेतो बात नही की..?

मंजुला : (खुसीसे हसते) हां..उसीके बारेमे बातकी..वो अपनी लताका हाथ हमारे लखनके हाथोमे देना चाहती हे..तो मेने केह दीया आपसे पुछके बताउगी..

देवायत : (जोरोसे बाहोमे भीचते कीस करते) अरे डार्लींग आज खुद मेने भानुसे इस बारेमे बात की मेनेभी लता का हाथ लखनके लीये मांग लीया..कहेताथा अ‍ेक बार लताका मन जानले उसे कोइ अ‍ेतराज नही..

मंजुलाकी चुत लगातार पानी छोड रहीथी तब देवायतका लंडभी चुतपे दस्चक देने लगा तभी मंजुलाने हाथ नीचे लेजाके लंड को मुठीमे पकडलीया ओर चुतपे घीसके लव होलमे फसादीया तब देवायतने जोसमे आके अ‍ेक जोरका जटका मारके पुरा लंड चुतमे घुसा दीया तब मंजुलाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ तब चार आंखे थोडी खुली हुइ खीडकीकी दरारमे जम गइ जो रजीया ओर दयाकी थी जो दोनोकी चुदाइ अक्सर देखतीथी तब अ‍ेक दीन दोनोही देवायतकी नजरमे चुदाइ देखते पकडी गइ तबसे देवायत दोनोकी चुदाइ करने लगा ओर वे दोनोभी देवायतके लंडकी आदी हो गइ अब उसेभी देवायतके लंडके बगैर नही चलता

मंजुला : (कामुक आवाजमे) आहहहहह सीइइइइइइ चोदो..मु..जे..सीइइइइआइइइइइइइमममममंहहहहसीसीइइ

तब देवायत उसे धीरे धीरे कमर हीलाके चोदने लगा ओर मंजुला देवायतकी पीठपे दोनो हाथ घुमाने लगी आज देवायत लबे लबें चुतके जड तक सोट मारने लगा तब हर घके के साथ मंजुलाकी आहे नीकल जाती थी आज देवायत कुछ अलगही मुडमे था वो लगातार मंजुलाकी गरदन गाल होंठ सब जगाह चुमेही जा रहाथा तब मंजुलाभी पुरी तराह कामाग्नीमे जलने लगी ओर अपनी कमर उछालने लगी

देवायत : मंजु जी चाहता हे आज तुजे बच्चा देदु..(जोरोसे सोट मारते चोदने लगता हे)

मंजुला : देवु कुछ दीन ओर मजे करने दोनां..फीर हम करलेगे बच्चा..आइइ..धीरे करोनां..क्या होगया हे तुजे

देवायत : बस तुजे देखतेही पागल हो जाता हु..जी चाहता हे तुजे चोदताही रहु..(फच..फच..फच..फच..)

मंजुला : (हसते) लगता हे आज मेरी चुतकी धजीया उडने वाली हे हें..हें..हें..

देवायत : कुछ मत बोल..बस..मुजे चोदने दे..क्या कडक माल हे तु..मुंहा..बुच..बुच..बुच..सीइइइआह...

मंजुला : सीइइइआह..इइइइइससससहहहममममं दे..वु..मे..ग..इइइइइइइइ

कहेते मंजुला जड गइ तबभी देवायत उसे जोदेही जा रहाथा दोनोकी सांसे तेज चल रही थी दोनोके बीच घमासान चुदाइ चल रहीथी तब दया रजीयाके पीछे चीपकके खडी रहेके दोनोकी चुदाइ देख रहीथी तब दोनोही गरम होगइथी ओर अ‍ेक हाथसे अपनी चुत सहेलाती रही तब दयाने दुसरा हाथ रजीयाके आगे लेजाके उनके बुब्स पकडलीये तब रजीयाकी सीसकारी नीकल गइ ओर वो पलट गइ फीर दयाका हाथ पकडके लगभग अपने रुमकी ओर दोडही पडी दोनो अंदर आगइ तब रजीयाने फटाफट दरवाजा बंध करलीया ओर दयाको बेडपे लेगइ ओर धका मारके उसे बेडपे गीरा दीया ओर खुद उनके उपर लेटके दयाका होंट चुमने लगी

रजीया : कुती तुमनेतो मुजे गरम करदीया चल फटाफट कपडे नीकाल..

दया : रंडी मेभीतो गरम हु चल घुमजा ओर आजा मेरे उपर दोनो हमेसाकी तराह अ‍ेक दुसरेकी चुतको मुहसे चोदके सांत करते हे कीतने दीन हो गये मालीकने हमे नही चोदा..

रजीया : देखती नही अभी मालकीन चुदवा रहीहे कल हम मालीकको पकड लेगे अभीतो चाट मेरी चुतको..

दोनोही लेस्बीयन खेलने लगी ओर थोडीही देरमे अ‍ेक दुसरेके सामने बेठते अ‍ेक दुसरेकी चुतमे उंगली डालके जोरोसे हीलाने लगी इधर देवायत ओर मंजलाके बीच धुआधार चुदाइ होने लगी दो बार मंजुलाको जडा दीया फीरभी देवायत उसे चोदेही जा रहाथा आखीर लंडको जड तक घुसाते मंजुलाको जोरोसे बाहोमे बरते उनके होंठ भीच लीये तब मंजुलानेभी अपने दोनो पैर देवायतकी कमरके उपर आंटी लगाके उसे बाहोमे भीचलीया ओर देवायतका लंड मंजुलाकी चुतमे उल्टीया करने लगा ओर दोनोकी सांसे तेज चल रहीथी

दोनोही अपनी सांस कंटड्ढोल करने लगे तब मंजुला देवायतका सर ओर पीठ सहेलाती रही ओर देवायत मंजुलाके उरोजोपे सर रखके ढेर हो गया ओर अपनी सांस कंटड्ढोल करने लगा फीर थोडी देरके बाद मंजुलाका बुब्स चुसने लगा ओर मंजुला सरको सहेलाते सीसकाया करने लगी तब मंजुलाने कहा

मंजुला : सुनीयेजी आज आप परेसान क्यु लग रहेथे..कुछ बात हे क्या..

देवायत : (उनके सामने देखते हसते) देखा..तु मेरी परेसानीभी पहेचान गइ इसीलीयेतो तुजपे फीदा हु..

फीर देवायत उनको बाबाके मीलनेकी सारी बात बता देता हे तब मंजुलाभी सुनके सोचमे पड जाती हे की बाबाने अ‍ेसा क्यु कहाकी तेरे भाइ बहेनकी उमर होतेही सादी करदेना कुछतो रीजन होगा उसे भाइ बहेन की सादीका सुनके कोइ अचरज नही हुआ क्युकी वो खुद गांवमे अ‍ेसे कइ रीस्ते देख चुकीथी अ‍ेकतो खुद इनके मामाका लडका उनकी बहेनको ठोकता था ओर अ‍ेक बारतो उनका अ‍ेबोर्सन करवा चुकाथा

मंजुला : सुनीयेजी..ये भाइ बहेनकी सादीकातो ठीक हे पर लखन ओर पूनमकी सादीके लीये जल्दी क्यु कहा कही वो वहा तो दोनो आपसमे..नही..नही..पूनमतो अभी छोटी हे..सुनीये उन दोनोको वापस इधर बुला लीजीये हमे कोइ रीस्क नही लेना..

देवायत : पागल हो गइ हो क्या..? दोनोकी पढाइके बारेमेतो सोच..दोनोही अलग रेहते हे..

मंजुला : तो फीर बाबाने अ‍ेसा क्यु कहा..?

देवायत : अरे जानेमन वो सायद हमारे पोते पोतीके लीये केह रहे थे अगली बार अकेला जाउगा तब मुजे पुरी बात बतायेगे ओर सुन बाबा केह रहेथे वो कोइ इश्वरीय अंस होगा अ‍ेसा केह रहेथे..

मंजुला : (हसते) चलो ठीक हे भगवानभी हमे क्या क्या दीखायेगे..पता नही तब हम होगे की नही..

देवायत : इसीलीये केह रहाथाकी हमे अ‍ेक बच्चा करलेना चाहीये ताकी वो बडा होजायेतो हम इनके बच्चेतो देख सके ताकी हम उसे अच्छी सीक्षा दे सके..क्या कहेती हो..?

मंजुला : (सरमाके हसते) मे क्या कहु..जेसे आपको ठीक लगे..पता नही दोनो दोस्तको बच्चे पेदा करनेकी क्या जल्दी हे दीदीभी वोही केह रहीथी..सुनीये आप भानुभाइको अच्छे डोक्टरके पास लोयेइनां..भावना केह रहीथी उनका सब जल्दी होजाता हे..पता नही अ‍ेक लडका केसे पैदा करलीया..

देवायत : क्या भावनाने तुजे कहा..?

मंजुला : (सरमाके हसते) हां जब आप दोनो गयेथे तब बता रहीथी..हें..हें..हें..आज आपकी अ‍ेक गोली देदी हें..हें..हें..पता नही सुबह केसी हालत होगी उनकी..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) तुभी पागल हे हें..हें..हें.. कोइ अपनी बहेनकी अ‍ेसी हालत करवाती हे क्या..?

मंजुला : (हसते) क्या करती फरीयाद कर रहीथी तो देदी हें..हें..हें..

तब देवायत अपनी सालीकी बातोसे फीरसे गरम हो गया ओर धीरे धीरे कमर हीलाने लगा इस बार मंजुलाको चोद चोदके हालत खराब करदी उनको वापस दो बार जडाके उनकी पुरी चुत भरदी आज दोनो बहेनोकी जबरदस्त चुदाइ हुइ फीर देवायत मंजुलाके उपरही जडके ढेर होगया तब मंजुला उनका सर सहेलाते बेसुध जेसी हालत मे पडी रही ओर दोनो अ‍ेसेही कब नींदकी आगोसमे चले गये पताही नही चला....कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ३

तब देवायत अपनी सालीकी बातोसे फीरसे गरम हो गया ओर धीरे धीरे कमर हीलाने लगा इस बार मंजुलाको चोद चोदके हालत खराब करदी उनको वापस दो बार जडाके उनकी पुरी चुत भरदी आज दोनो बहेनोकी जबरदस्त चुदाइ हुइ फीर देवायत मंजुलाके उपरही जडके ढेर होगया तब मंजुला उनका सर सहेलाते बेसुध जेसी हालत मे पडी रही ओर दोनो अ‍ेसेही कब नींदकी आगोसमे चले गये पताही नही चला....अब आगे

बाजुके रुममे भानु ओर भावना भी अ‍ेक दुसरसे चीपकके सोयेथे तब दुसरे कमरेमे रजीया ओर दयाभी नंगीही अ‍ेक दुसरे से चीपकके सोइ थी तब यहासे तकरीबन ४ कीमी दुसरे गांवमे भानुके घर उनकी बुढी माता बहार सो रहीथी तब रुमके अंदर नइ नइ जवान हुइ लता भानुके बेटे भावेशको अपने साथ सुलाके गहेरी नींदमे सो रहीथी वो पीछले ६ महीनेसे पीरीयडमे आ रहीथी उनके सरीरमे काफी बदलाव आने लगाथा

लताके बुब्सभी अब बडे होते सीनेपे उभार दीखने लगाथा उनके चहेरेपे भी काफी नीखार आ गयाथा वो दीन भर दीन खुबसुरतीकी ओर ढल रहीथी जबभी उनका भतीजा भावेश उनके सीनेपे हाथ लगा देता तब उसे अपने तनमे बेचेनी महेसुस होने लगतीथी ओर वो रोमांचीत होती थी उसेभी नही पताथाकी ये सब क्या हो रहा हे तब अचानक छोटा भावेश रोने लगता हे तब लता करवट लेके बच्चेकी ओर पलट जाती हे

ओर उसे अपने सीनेसे चीपका देती हे तब बच्चा (भावेश) उनके सीनेमे मुह लगाते उनके बुब्सको अपने मुहमे लेनेकी कोसीस करता हे तब लता नींदसे जागके उनकी हरकत देखती रहती हे तो भावेश उनके बुब्स मुहमे लेनेकी कोसीस कर रहाथा तब लता सरमसे पानी पानी होगइ वहा रुममे अंधेरा छाया हुआथा ओर बहार उनकी मां सोते खरराटे मार रहीथी तब ना जाने क्या सुजी लताने अपना कुर्ता उचा कर दीया

तो उनका अ‍ेक बुब्स बहार आगया तब भावेशने अपना मुह बुब्सपे लगादीया ओर चुसने लगा दुधतो आता नही था फीरभी वो आंख बंध करते चुसता रहा तब लताको कुछ अजीबसा लगने लगा ओर वो मदहोस होने लगी तभी अपना अ‍ेक हाथ अनायासही अपनी चुतपे चला गया ओर वो धीरे धीरे सहेलाने लगी उसे इस हरकतसे बहुत आनंद आने लगा ओर उसने हमेसाके लीये बच्चेको अपने पास सुलानेकी ठानली

वेसेतो वो कइ बार छुप छुपके अपने भाइ भाभीकी चुदाइ देखती रहेती थी कइ बार उसने अपने भाइ भानुका लंडभी अपनी आंखोसे अपनी भाभी भावनाकी चुतमे डालते हुअ‍े देखाथा तबसेही वो बहुतही कामुक होने लगीथी उपरसे जबसे देवायतके पीताकी मौत हुइहे तबसे वो भानुके बच्चेको अपने साथ सुलातीथी ओर ये हरकत हर रात करतीथी फीर धीरे धीरे चुतमे उंगली डालके अपने आपको सांत करने लगी

वो अब दीनभर दीन ठरकी होते जा रहीथी पर अपनी मांसे बहुत डरतीथी क्युकी उनकी मांने सब दुनीयादीरी देखीथी उनको पताथा जब लडकी जवानीके दोरसे गुजरे तब उसे सम्हालना बहुत जरुरी था वरना वो सुरुआतसेही भटक जाती हे ओर सारी जींदगी लंडकी दीवानी रहेती हे जो वो अपनी जवानीमे सब करचुकी हे उसनेभी जवानीमे कइ लंड खायेथे उसमे देवायतके पीताजीका नाम सबसे उपर था मानो वो उनकी रखैलही थी ओर ये बात आज तक कीसीको पता नही थीकी भानु ओर लता उन्हीकी संतान थी

सुबह सुरजकी पहेली कीरण नीकलनेसे पहेलेही रजीया ओर दया हवेलीका सारा काम करने लगी तब मंजुलाकी आंख खुल गइ ओर अपनी हालत देखके सरमसे पानी पानी होगइ ओर उसे देवायतकी ओर देखके हसी आ गइ तो उसने देवायतके होंठ चुमलीया तभी देवायतकी आंख खुल गइ तब उसने फोरन मंजुलाको बाहोमे भीचलीया तो मंजुला सरमाती उनके छुटनेकी कोसीस करने लगी

मंजुला : (सरमाते हसते) छोडीयेना सुबह होगइ हे..आपको उठना नही हे क्या..? छोडीये मुजे..

देवायत : अरे डार्लींग सुबह सुबह तेरे चहेरेका दीदार होगया..चलना थोडा प्यार करते हे बस अ‍ेक बार..

मंजुला : (हसते) कोइ जरुरत नही रातमेभी मेरी हालत खराब करदीथी ओर अभीभी जी नही भरा..

देवायत : डार्लींग तुजे देखते कभी जी रही भरता..चलना अभी फटाफट अ‍ेक राउन्ड हो जायेगा..

मंजुला : पलीज..देवु समज तु.. वो दोनो जाग गइ होगी कही हमारा लाइव सो ना देखले हें..हें..हें..

तब देवायत हसते हुअ‍े मंजुलाको खीचके बाहोमे भरलेता हे ओर उसे पलटके पीठके बल लीटाते उनके उपर चड जाता हे दोनोही नंगेतो थेही देवायत अ‍ेकही जटकेमे मंजुलाकी चुतमे लंड घुसा देता हे ओर उसे धनाधन चोदने लगता हे मंजुलाभी जानतीथी देवायत अ‍ेक बार डीमांड करता हे तो उसे चोदकेही रहेता हे तब उसनेभी ज्यादा विरोध नही कीया ओर वो देवायतसे चुदने लगी थोडी देरमे वोभी गरम होगइ

ओर देवायतका साथ देने लगी तब थोडीही देरकी धमासान चुदाइके बाद दोनोही साथमे जड गये तो मंजुला उठके बाथरुममे भाग गइ तब देवायत हसने लगा ओर वोभी उठके बेडपे बेठा रहा जब मंजुला नहाके बहार आगइ तब वोभी बाथरुममे घुस गया ओर सब नीत्य करके नहाके बहार आ गया तबतक मंजुलाने उनके कपडे दीये ओर वो तैयार होगया तो दुसरी ओर भानु ओर भावनाभी तैयार हो चुके थे

भानु बहार होलमे चला गया तो पीछे भावनाभी बाल बनाके जुडा बना रहीथी तब मंजुलाभी देवायतको हमेसाकी तराह होंठेपे कीस करके मंदिरमे चली गइ ओर देवायतभी बहार आने लगा तब बाजुके रुमसे भावना भी धीरे धीरे चलके बहार आ रहीथी तब देवायतका सामना हुआ तो देवायत उनकी सालीकी चाल देखतेही हसने लगा तब भावना सरमसे पानी पानी होके मुस्कराती रही

जब भानुकी सादी नही हुइथी तब वो देवायतकी खुब मस्करी करतीथी तबसे देवायत उनको नामसेही बुलाता था ओर भानुभी मंजुलाको भाभीही कहेता था तब भानुकी सादीके बादभी सब वोही कहेके बुलाते हे तब देवायतको भावनाकी हालत देखके मस्करी सुजी ओर वो आते हसते हुअ‍े कहेने लगा

देवायत : (हसते सरारतसे) क्यु साली साहीबा अ‍ेसे क्यु चल रहीहो कही पेरमे मोचतो नही आगइ हें..हें..हें..

भावना : (सरमसे पानी पानी होते कातील समइल करते) जीजाजी अ‍ेक लगाउगीनां..आप बहुतही कमीने हो..अकेले मीलो तब बताती हु जेसे आपको कुछ मालुमही नही..

देवायत : (हसते) अबतो भानु आता जाता रहेगा तो साथमे चली आना अकेले मील लेगे..हें..हें..हें..

भावना : (धीमी आवाजमे) जीजु..प्लीज..ठीक हे आजाउगी तब मीलेगे..आपसे कुछ बातभीतो करनी हे..

कहेके वो देवायतकी ओर कातील स्माइल करते मंजुलाके पास कीचनमे चली गइ तो मंजुलाभी इनकी चाल देखते हसने लगी तब भावना फीरसे सरमसे पनी पानी होगइ तब मंजुलाने कहा

मंजुला : (हसते) कहो दीदी केसी रही रात..लगता हे दोनोने खुब मजे कीये हे.., हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते) क्या..दीदी..आपने कोनसी गोली दीथी देखोना मेरी हालत खराब करके रखदी..

मंजुला : (हसते) क्यु..? मजा नही आया क्या..?

भावना : (सरमसे धीमेसे) क्या दीदी..अ‍ेसा लगा कल मेरी सुहागरात हुइ.. इनको कीतना जोस चडा हुआ था.., सब आपकी वजहसे मुमकीन हुआ.. वरना मुजे क्या पता था इनमे इतना मजा आता हे अबतो मेने इनकोभी केह दीया हे वो गोली धरपे रखे..हप्तेमे अ‍ेक बार दुगी..वरनातो रोज अ‍ेसी हालत करेगे हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) चल ठीक हे दोनो आगये..? तो चाइ नास्ता देदे..ओर कभी कभी इनके साथ आती रहेना मुजेभी अकेला ना लगे..फीर सामको भानुभाइके साथ चली जाना.., ओर सुन..बच्चा होवे तो होने देना..

भावना : (हसते) दीदी मेरी मानो..अब आपभी करलो..

मंजुला : (सरमसे हसते) चल..ठीक हे..देखते हे..कर लेगे..

दोनोही धीरे धीरे बात कर रहीथी तब मंजुलाको नही पताथा आज रात देवायतने उनको तीन तीन बार चोदके उनकी चुतको भराथा तो वोभी प्रेगनेन्ट हो चुकीथी वोतो कुछ दीनके बादही पता चलने वालाथा जब इस बार दोनोका पीरीयड मीस होजायेगा, तब पता चलेगाकी दोनो अ‍ेकही रातमे साथमे प्रेगनेन्ट हुइ हे फीर दोनो चाइ नास्ता लेके डाइनींगपे आजाती हे ओर चारो साथमे चाइ नास्ता करते हे तब भावना बातको छेडती हे..

भावना : (धीरेसे) दीदी क्या जीजुको लताके बारेमे पुछा था..?

मंजुला : (हसते) अरे वोतो तेरे जीजाने खुद भानुभाइसे लताका हाथ मांग लीया हे पुछले..हें..हें..हें..

भानु : हां भावना हमने तैय करलीया हे दोनोकी उमर होतेही हम हमारी लताकी सादी लखनसे कर देगे..

देवायत : (हसते) यार वो सबतो ठीक हे फीरभी तु अ‍ेक बार लताका मन जानले.. फीर हम रीस्ता पका करके दोनोकी सगाइ कर देगे क्या कहेती हो मंजु..?

मंजुला : (खुसीसे हसते) हा भानुभाइ अ‍ेक बार लतासे पुछलो फीर दोनोकी सगाइ करदेगे..(देवायतकी ओर देखते) सुनीये अब आपभी कोइ अच्छे लडकेको ध्यानमे रखीयेगा हमारी पुनमभी बडी होती जा रही हे..

देवायत : (हसते) हां भाइ हां..मेरे ध्यानमे अ‍ेक लडका हे..बडेही जमीनदार हे सीर्फ मां बेटा ही हे पती कबका गुजर गया हे ओर उनके ज्यादा रीस्तेदारभी नही हे..पुर्खोका बडा घरभी हे जब जाउगा तब बात कर लुगा..

भानु : भाइ मेरी मानोतो दोनो भाइ बहेनका रीस्ता होता हेतो दोनोकी सादी साथमेही करदो, क्या कहेती हो भाभी..सब अ‍ेकही बारमे हो जायेगा हमारी पुनमभी सरसुराल चली जायेगी..

मंजुला : (हसते) आपतो बडे छुपे रुस्तम नीकले पुनमके लीये लडका देखभी लीया ओर मुजेही नही पता..

देवायत : अरे इसमे क्या बताना अभी हमारी पुनम छोटीहे तो बताके क्या फायदा..तभी नही बताया.., (मनमे सोचता हे - मंजु तुजे क्या पता वो कोन हे, उस गांवकी सरपंच हे ओर विधवा हे, उसे तुमभी जानती हो, तो मे उसे अक्सर मीलता हु ओर उसे कइ बार चोद चुका हु, वोभी मेरी पत्नीही हे वो मुजे ही पती मानती हे, वो मेरी बात कभी नही टालेगी)

मंजुला : (हसते) ठीक हे ठीक हे..मेतो अ‍ेसेही केह रहीथी..क्या आप भानुभाइको ओर दीदीको छोडने जा रहेहो नां..?

देवायच : (हसते) हां..क्या तुजेभी साथ चलना हे..? चलना दोनो छोडके आजायेगे..माजीको भी मील लेगे..

भानु : हां भाभी आपभी चलो यहा अकेली बोर होजाओगी.., मां को भी मील लेना..

मंजुला : (हसते) भानुभाइ अबतो ये रोजका होगा..फीरभी चलती हु.. माजी कोभी मीलना हे..काफी दीन हो गये नही मीली.., लता ओर लखनकी उनसेभी बात होजायेगी..चलो..

फीर चारो चाइनास्ता करके देवायतकी गाडीमे नीकल जाते हे ओर १० मीनीटमेही भानुके घर पहोंच जाते हे तब चारो अंदर आजातेहे तो लता भावनासे लीपट गइ फीर सबके पैर छुके सरमाते खडी रही तब आज पहेली बार मंजुला ओर देवायत लताको अपने लखनकी बहुके रुपमे देखते खुस हो रहेथे तब लताको अहेसास हुआ की दोनो मुजे कुछ अजीब नीगाहोसे देख रहे हे तो वो खुब सरमाइ ओर भागके अंदर चली गइ, तब चारोही हसने लगे

हसनेकी आवाज आइ तब भानुकी मा रुमसे बहार आइ तो मंजुको देखतेही दोडके उनको गले लग गइ ओर फुट फुटके रोने लगी क्युकी उसे देवायतके पीताके जानेका बहुत ही सोक लगाथा क्युकी असली कारण सीर्फ वोही जानतीथी तब मंजुलाभी साथमे रोइ ओर भावनाने दोनोको सांत कीया तब लता सबके लीये पानी लेके आइ ओर सबको पानी पीलाया तब जाके सब सांत हुअ‍े

तभी मंजुलाने उनके पाव छुअ‍े तो उनको आशीर्वाद दीया पर देवायतके पाव छुनेसे पहेले उनसे दुर हो गइ क्युकी वो बात सीर्फ देवायत ओर भानुकी मां ही जानतीथी फीर सब बेठ गये तो भानुकी मांने मंजु ओर देवायतसे उनके पीताके जानेका सौक व्यक्त कीया तब माहोलको हल्का करनेके लीये भावनाने अपनी सांससे लता ओर लखनके रीस्तेकी बात छेडदी तो लता वही खडीथी तो बात सुनके सरमसे पानी पानी हो गइ ओर भावनाके रुममे भाग गइ तब अ‍ेक बार फीर सब हसने लगे तो भानुकी मां देवायतको देखके थोडा अतीकमे चली गइ उनको सब घटनाक्रम याद आने लगा

(फ्लेसबेक)

न्यु केरेक्टर

सरला : भानुकी मां जो विधवा हे बहुतही कामुक ओरत थी भानुके पीता उनको ठीकसे संतुस्ट नही करपाते थे तब वो अपने तनकी जरुरतको देवायतके पीतासे पुरी करने लगी नतीजा ये हुआकी उनके पेटमे देवायतके पीताकी नीशानी यानी भानु पलने लगा ओर भानुके पैदा होनेसे पहेलेही देवायतका जन्म हो चुकाथा, भानुके पीता ओर देवायतके पीता खास दोस्त थे तबसेही खानदानकी दोस्ती चली आ रही हे, उनके रीस्तेदारमे बहुतही कम लोगथे तब देवायतके पीतानेही उनकी देखभालकी ओर उनकी सारी जीम्वेवारी उठाली

तब सरलाकी उमर महज २३ सालकी होगी फीर भानुका जन्म हुआ फीर थोडे बडे हो गये तब देवायत ओर भानु दोनो खास दोस्त होगये, देवायतके पीताने दोनोको पढनेके लीये सहेरमे भेज दीया जब दोनो १०/१२ सालके हो गये तब देवायतके पीताने सरलाको फीरसे प्रेगनेन्ट करदीया तब भानुके पीताकी तबीयत बीगड गइ ओर उनको पता चल गयाथा की सरलाके सबंध देवायके पीतासे हे ओर वो सदमा बरदास्त नही कर पाये ओर चल बसे,

सरला भर जवानीमे विधवा हो गइ, फीर लताका जन्म हुआ ओर देवायतके पीताने भानु ओर देवायतको वापस बुला लीया फीर समयके साथ वोभी बुढे हो गये..तब सरला अ‍ेक बार फीर अकेली होगइ तब भानु ओर देवायत जवानीके देहलीजपे कदम रख चुकेथे ओर वो देवायतका गठीला ओर कसरती बदन देखते बहेकने लगी ओर देवायतकी ओर ढलने लगी तब उनकी उमर ४२ के आस पास हो चुकीथी देवायत उनके घर अक्सर आता जाता रहेता था तब अ‍ेक बार सबकुछ हो गया जो नही होना था..तो वो ये सब सोचते खडी थी तब..

(फ्लेसबेक खत्म)

मंजुला : मांजी तो क्या हम लता ओर लखनके रीस्तेकी बात पकी करदे..?

सरला : बेटा तबतो सोनेपे सुहागा..धन्यभाग जो मेरी लता आपके घरकी बहु बनेगी..हमे ये रीस्ता मंजुर हे..

कहातो भावना लताके पास अंदर चली गइ तो लता इनको देखते खुब सरमाइ ओर हसती रही तब भावना उनके पास बेठ गइ तो लता सर नीचे करते सरमाती हसती रही तब भावनाने उनके सरपे हाथ रखा ओर उनके गालको सहेलाया तब लताने नजर उची करते भावनाकी ओर देखा फीर नजर जुकाके ओर सरमाते हसती रही

भावना : लता क्या तुजे ये रीस्ता मंजुर हे..? तो बता हम तुजपे कोइ जबरदस्ती नही करेगे..

लता : (सरमसे पानी पानी होते) भाभी मे क्या बोलु..जो आप ओर भाइ करो वो सही हे..

भावना : (हसते) अरे गुडीया फीरभी बता दे..तेरे मनमे कोइ ओर होता..

लता : (गभराते) अरे नही नही..भाभी..मुजे मंजुर हे..(सरमाने लगती हे)

भावना : (हसते) चल ठीक हे..मे उनको बता देती हु..क्या तेरे बेटेने तुजे तंग तो नही कीया..हें..हें..हें..

लता : (हसते) क्या..भाभी मेरा भतीजा हे वो..हें..हें..हें.., बस मेरे साथ घुलमील गया हे..हें..हें..हें..

तब भावना हसती हुइ बहार आजाती हे ओर सबको लताकी बात बताती हे तो सब सुनके खुस होजाते हे तब सरला भावनाको कहेती हे..

सरला : (हसते) बहु..जा जरा गुड ओर धनीया लेके आ हमारे समधीका मुह मीठा करवाना हे हें..हें..हें..

भावना : (हसते कीचनकी ओर जाते) जी माजी अभी लाइ..

देवायत : (हसते) माइ मे थोडी समधी हु..मेतो आपका बेटा ही हु ओर ये मंजुभी आपकी बहुही हे..

सरला : (हसते देवायतके कंधेपे हाथ रखते) पता हे बेटा मुजे, मेतो मजाक कर रहीथी तुभीतो मेरा बेटा हे ओर वोभी बडा मेने तुजमे ओर भानुमे कोइ फर्क नही कीया..

मंजुला : (हसते) मांजी चलो आप हमारे साथ रहेने आजाओ.., अब घर सुना सुना लग रहा हे..

सरला : (हसते) अब वहा आके क्या करुगी अबतो हमारी बेटीका घर होने जा रहा हे उमर भीतो हो गइ हे अब जी के क्या करुगी देखा नही अबतो तुम्हारे ससुरभी चले गये..मेरा भानु छोटाथा तबही उनके बापुजी चल बसे तब तेरे ससुरने हमारी खुब मदद की मेरे भानुको पढाया लीखाया तबसे दोनो दोस्त हे..भाइकी तराह

देवायत : (हसते) माइ भाइकी तराह नही हम दोनो भाइही हे..आपको पता हे मे भानुको अपने साथ लेजा रहा हु अब वोही हमारी सब खेती बाडी देखेगा मुजे कहा इन सब चीजोमे पता..बस हमारा लखन ओर भानुही सब वहीवट करेगे बस यही बात कहेनेही मे आयाथा लताकी बाततो अ‍ेसेही कल हो गइतो बता दीया

भावना : (हसते गुड धनीया लाते) लीजीये माजी हमारे समधीका मुह मीठा करवाइअ‍े..हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते भावनाको मुका मारते) समधीकी बची..हम घरकेही लोग हे समजी..मेरीभी ये सास हे..

सरला : बेटी येतो तुम लोगोका बडपन हे..मेरा देवायत भी उनके पीताकी तराह दीलावर हे जो लोगोकी मदद करते रहेता हे चल आजा मुह खोल..

कहेते रसीलाने मंजुलाके मुहमे गुड देदीया तो मंजुलानेभी सामने उनका मुह मीठा करवाया फीर देयावका मुह मुठा करवाया फीर भानु ओर भावनाने भी बारी बारी सबका मुह मीठा करवाया तब मंजुला ओर भावना गुडकी थाली लेके रुममे लताके पास चली गइ, तब लता दोनोको देखके खुब सरमाइ ओर दोनोने लताका मुह मीठा करवाया तब भावना थालीको वापस रखने कीचनमे चली गइ तो मंजुला लताके पास बेठ गइ.., ओर उसे प्यार भरी नजरोसे देखती रही.. फीर हसते हुअ‍े कहा..

मंजुला : (हसते) क्युजी देवरानी..आप खुसतो हेनां..?

लता : (सरमाके हसते) जी दीदी..

मंजुला : (हसते धीरेसे) क्यु हमारे देवरका फोटो बोटो चाहीये..? तो भावुके हाथ भीजवा दुगी..हें..हें..हें..

लता : (सरमसे पानीपानी होते) जी..भाभीसे लेलुगी..

जुला : (हसते सरपे हाथ घुमाते) चल ठीक हे भीजवा दुगी..ओर तेरे पास तेरा कोइ फोटो होतो दे देना..

लता : (सरमसे हसते) जी..हे भाभीके पास..

भावना : (अंदर जाकते) चलो दीदी चाइ बन गइ हे आजाओ बहार..फीर अपनी देवरानीसे बात करना..

कहातो लता फीरसे सरमसे पानी पानी होगइ ओर तीरछी नजरोसे भावनाकी ओर देखते हसने लगी..तब मंजुलाभी हसती हुइ बहार आगइ ओर सबने चाइ नास्ता कीया तब मंजुलाने सबसे छुपके लताकी फोटो भावनासे लेली फीर देवायतने जानेकी बातकी तो सरला उनको खाना खाके जानेकी बात करने लगी तब देवायतने बहार जानेकी बातकी फीर वो लोग लताको सगुनके पैसे देके नीकल गये ओर भानुभी दुकान देखने चला गया तब भावना रुममे चली गइ

भावना : (अंदर आते हसते) क्यु ननंदजी मनमेतो बहुत लडु फुट रहे हे हें..हें..हें..क्या कहेतीथी तेरी जेठानी..

लता : (सरमाते दोडके अपनी भाभीको गले लगते) क्या भाभी..जाओ मुजे आपसे बात नही करनी..

भावना : (हसते) अरे..मेतो मजाक कर रहीथी बेठ इधर..(बेडपे बीठाते) तुमनेतो लखनको देखा हेनां..वो सहेरमे पढ रहा हे वो वहाके राजाके खानदानसे हे तु वहा राज करेगी..ओर लखनभी अच्छा लडका हे..

लता : (सरमाते) देखा हे भाभी..बस काफी महीने हो गये तो नही देखा..

भावना : अरे वोभी तेरे माफीक जवान हो गया हे क्या मस्त दीखता हे अबतो मीलना जुलना चलताही रहेगा..दोनोकी उमर होतेही हम सादी करदेगे..अब खुस..? चल ये बता तुमको भावेशने तंगतो नही कीया..अ‍ेक बारभी तेरा फोन नही आया..लगता हे उनकी मां मे नही तुम हो..हें..हें..हें..

लता : (सरमसे लताको अ‍ेक चपत लगाके) क्या भाभी..वो मेरा भतीजाही हे समजी..अब नही रखुगी मे..(जुठ मुठ नाराज होते)

भावना : (हसते) अरे..मेतो मजाक कर रही हु..कहा हे वो..

लता : (सरमाते हसते) जी..वो मेरे रुम मे सो गया हे..तुमने क्या लडका पैदा कीया हे रात भर जागता रहेता हे ओर दीनमे सोते रहेता हे हें..हें..हें..

भावना : (हसते) हसले बच्चु जब तेरा बेटा होगा तब तुजे पता चलेगा..हें..हें..हें..

कहातो लता उनको मारनेके लीये दोडी तब भावना कीचनमे भाग गइ फीर दोनो भाभी ननंद खाना बनानेकी तैयारीया करने लगी तब दुसरी ओर उनकी सासभी आज बहुतही खुस हो रहीथी ओर भाभी ननंदकी मस्करीया देखते हस रहीथी क्युकी आज उनको अपनी बेटीके लीये अच्छा खानदान मील गया था वोभी अपने यारका लडका तब वोभी पुराने दीन याद करते बेठी रही ओर मुस्कराती रही

कैसे देवायतके बापु उमर होनेके बावजुदभी उनको रगड रगडके चोदते थे कभी कभी तो पुरी रात यहा रुकके उनकी चुदाइ करते रहेते थे या फीर हवेलीपे कोइ नही होता तब वो वहा बुला लेतेथे ओर उनकी खुब चुदाइ करते थे तब देवायत सीर्फ तीन सालका था भानुके पापाकातो तब ठीकसे खडाही नही होताथा वोभीतो उनके दोस्त थे भानु ओर लता दोनोही उनकी संतान थी दोनोने कीसीको नही बतानेकी कसमभी खाइथी ओर दोनोने आजतक ये बात सबसे छीपाइथी तब आज लताकी बात सुनके बहुतही

रोमांचीत होगइथी क्युकी रीस्तेमे लता लखनकी बहेनही लगती थी, वोभीतो जवानीमे सादीसे पहेले अपने भाइसे खुब चुदवाती थी तबसे उसे लंडकी आदत पड गइथी ओर वो लताका बरोबर खयाल रखती थी अ‍ेसेही सोचते बेठी रही

तभी दुसरी ओर देवायत मंजुलाके साथ मस्ती करते हवेली पहोंच गया तब देवायत मंजुलाको छोडके सीधेही आदीवासी कबीलेमे चला गया जो आधे घंटेकी डड्ढाइवके बाद पहोंच गया तब सब कबीले वाले उनको देखतेही हाथ जोडके अ‍ेकठा होगये सब

कबीले वाले देवायतको बहुत मानते थे क्युकी सब बाबाको गुरु मानतेथे ओर देवायत अक्सर सबकी ममद करता रहेता था सबको होस्पीटल के काममे, सादीमे ओर वेसेभी सबको अनाज देते बहुत मदद करता हे इसी वजहसे सब उसे भगवानकी तराह मानते हे

देवायत : कहो हरीया क्या नइ मुसीबत हे..बाबा बता रहेथे इधर कुछ प्रोबलेम आगइ थी..

हरीया : (कबीलेका सरदार) आइअ‍े मालीक कुछ नही वो बाजुके कबीले वाले हमारी अ‍ेक लडकीको उठाके ले गये ओर हमारे गांवमेभी दस बारह आदमीने आकर हमला करदीया ओर हमारी ओरतोके साथ खुब छेडखानी की..मतलब..आपसे क्या कहु..

देवायत : हं..समज गया कोनथा वो..कमीना..तुम ठहेरो कीधरके कबीले वालेथे..?

हरीया : (हाथ जोडते) वो..मंगीयाके कबीले वाले थे..मालीक हमभी तीन चार लोग आतेहे अकेले जाना ठीक नही वरना वो कमीना आपको अकेला देखके हमला कर सकता हे..

देवायत : हरीया चीन्ता मत कर मेरे पास घोडा (पीस्तोल) हे, तीन चारकोतो अ‍ेसेही ठोक दुगा..

तब तीन लोग ओर हरीया कुछ हथीयार लेके देवायतकी जीपमे पीछे बेठ जाते हे देवायत अपनी खुली जीप लेके पासही १५ मीनीटकी दुरीपे कबीलेकी ओर चल पडा तब हरीया उसे सब बाते बता देताहे की वो लोगोने हमारी ओरतोपे जबरदस्तीसे रेप कीया ओर मेरी लडकीको उठाके ले गया वगैरे..वो वहा पहोच गये तब मंगीया देवायतको देखतेही ठंडा हो गया ओर हाथ जोडके दोडके आ गया ओर हरीयाकी ओर घुरने लगा

देवायत : क्युरे भडवे..तुजे बहुत चरबी चडी हे..? जो दुसरोकी बहु बेटीकोपे जबरदस्ती करता हे कहाहे हरीयाकी बेटी? कोन उठा लाया बहेन.., उनको यहा पकडके ला मादर..को

मंगीया : (हरीयाकी ओर घुरते) मालीक वो गवला होगा..अभी बुलाता हु..ओर लडकीको भी लेआता हु..

कहेके वो दोडके अपनी आदमीके पास गया ओर गवलाके साथ हरीयाकी बेटीकोभी लेकर आगया तब लडकीने हरीयाको देखातो उनकी ओर दोड पडी ओर दोडके जीपमे बेठ गइ तब मंगीया गवलाको पकडके खडाथा ओर गवला हरीयाकी ओर घुर रहाथा.. तब हरीया उसकी बेटीको सब उनकी भासामे पुछने लगा तो वो नाना करके सब बताने लगी फीर हरीयाने देवायतकी ओर देखा ओर कहेने लगा

हरीया : मालीक इनके साथ जबरदस्ती करनेकी कोसीसकी वो इनसे सादी करना चाहता हे लेकीन ये लडकी सादीके लीये राजी नही हे वरना मेही इनकी सादी करवा देता पर इसने हमारी ओरतोके साथ गलत कीया..

देवायत : (गुसेसे गन नीकालते गवलाके सरपे रखते) क्यु साले..अभी घोडा दबाउगाना तो यही मां.. जायेगी.. मादर..अगर तेरे लोडेमे इतनीही गरमी चडी हेतो अबनी मां बहेन नही हे क्या..?

गवला : (डरते हाथ जोडके) मालीक पहेले मेरी बाततो सुनीये..इधर आइअ‍े अकेलेमे आपसे कुछ बात करनी हे..फीर आपको ठीक लगेतो मुजे मार देना..

तब देवायतको बात कुछ ओरही लगी ओर उनका गुस्सा थोडा ठंडा हो गया ओर उसने मंगीयाकी ओर देखा तो मंगीयाभी हाथ जोडके अ‍ेक बार बात सुननेकी मनत करते हांमे सर हीलाने लगा तब देवायत जीपसे उतर गया ओर गवलाको लेके थोडे दुर चला गया तब गवला सब बाते बताने लगा..

गवला : मालीक आपको पता नही ये हरीयाने मेरी भाभीको प्रेगनेन्ट करदीया हे वो अक्सर जंगलमे इनको मीलने आता हे तो मेरे भाइको पता चल गया ओर मुजे कसमदी की मेभी इनकी बेटीको उठाके ले आउ ओर उसेभी प्रेगनेन्ट करदु पर आपतो जानतेहे हम अ‍ेक दुसरेकी रजामंदीसेही सब करतेहे तो मेने इनकी बेटीको हाथ तक नही लगाया अब आपही बताओ मे क्या करता..भाइने कसम दीथी जब ये मुजसे सादीके लीये नही मानीतो भाइ इनके साथीके साथ वहा चला गय ओर उनकी ओरतोके साथ वो सब कुछ करके आया..

देवायत : कहा हे मादर..उसे बुलाके ला..ओर तेरी भाभीभी उनकी मरजीसे आइ होगी तभीभो दोनो जंगलमे मीलते होगे..वो उसे प्यार करतीहे तो हरीयाके साथ भेजदे तुम लोगोमेतो ये सब चलताही रहेता हे..

गवला : मालीक भाइ ओर उनके साथी इधरसे आपके डरसे भाग गये हे.. लगता हे वो कुछ गलत रास्तोपे चल रहा हे अब मेरी गलती क्या हे फीरभी आप कहो मे वही करुगा..

देवायत : चल ठीक हे अगर तेरी भाभी इनके साथ रहेना चाहतीहेतो भेजदे उसे पर तु गलत काम मत करना ओर समजा देना अपने भाइको जब मेरे हाथ चडेगा तो पुछुगाभी नही सीधा ठोक दुगा.. चल जा..

फीर देवायत दोनोको नसीहत देके लडकीको लेके वापस हरीयाके कबीलेपे आ गया तबतक सब लोग जमा हो चुकेथे ओर सब लडकीको देखते खुसीसे चीलाने लगे ओर देवायतके पैर छुने लगे तब देवायत हरीयाको लेके थोडा दुर चला गया ओर उनके कंधेपे हाथ रखके उनसे बाते करने लगा

देवायत : (हसते) हां हरीया बोल उधर गवलाकी भाभीसे क्या कांड करके आया..हें..हें..हें..

हरीया : (सरमाते हसते) मालीक अब क्या कहु..वो मेरे पीछे पागल हे ओर हम प्यार करते हे बस गवलाका भाइ डुंगर अब बुढा हो गया हे..उसे छोडनेके लीये तैयार नही था तो मुजसे प्रेगनेन्ट करनेके लीये कहेतीथी तो करदीया अब वो उसे छोड देगा आपतो जानतेहे हमारे लोगोमे ये सब आम बात हे..

देवायत : चल ठीक हे वो आयेतो उसे अपना लेना मे चलता हु..

हरीया : मालीक अ‍ेसेही चले जाओगे..कुछ कडक माल हे, क्या आपके लीये लेआउ..? ओर वो जमीला आपको याद कर रहीथी..अभी तक कीसीसे सादी नहीकी बस वोतो आपके पीछे पागल हे कहेतीथी सादी करुगीतो मालीकसे वरना उनके बच्चे पैदा करके पालुगी.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) उसे समजा सादी करले वरना मेरी बीवी देखी हे हमारे यहा तुम्हारे जेसा नही होता ओर मुजे कुछ नही पीना बाबाको मीलने जाना हे पीके वहा जाना ठीक नही ओर जमीलाको कहेना अ‍ेक दीन आउगा वरना उसे हमारे खेतोपे काम करने भेजदे वही मील लेगे..वहा रहेनेका इन्तजाम भीतो हे..

हरीया : (हसते) ठीक हे मालीक मे उस बात करलुगा आपका बहुत बहुत सुक्रीया..

फीर देवायत जीप लेके आश्रमकी ओर नीकल गया पुरे रास्ते जमीलाके बारेमे सोचता रहा, वो वहाके पहेलेके सरदारकी लडकीथी जो देवायतपे लटुथी देवायत उनको कइ बार चोद चुका हे ओर अभीभी मौका मीलतेही उनकी चुदाइ करता रहेता हे मानो वो देवायतकी बीवी हो, वो देवायतके अलावा कीसीको छुने नही देती, २० मीनीट मे आश्रमपे आ गया फीर वहा सब सेवकोसे मीला ओर सबका हाल चाल पुछा फीर बाबाके पास दंडवत करके वही नीचे बेठ गया....कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ४


फीर देवायत जीप लेके आश्रमकी ओर नीकल गया पुरे रास्ते जमीलाके बारेमे सोचता रहा, वो वहाके पहेलेके सरदारकी लडकीथी जो देवायतपे लटुथी देवायत उनको कइ बार चोद चुका हे ओर अभीभी मौका मीलतेही उनकी चुदाइ करता रहेता हे मानो वो देवायतकी बीवी हो, वो देवायतके अलावा कीसीको छुने नही देती, २० मीनीट मे आश्रमपे आगया फीर वहा सब सेवकोसे मीला ओर सबका हाल चाल पुछा फीर बाबाके पास दंडवत करके वही नीचे बेठ गया....अब आगे

बाबा : कहो बेटा..क्या वो कबीलोके लोगोसे मीलके आये हो..? सब सही हो गया..?

देवायत : (हसते) हां बाबा इन लोगोकी बात कभी दीलसे नही लेनी चाहीये वरना हमतो दुखी होते रहेगे ओर वो दुसरेही दीन साथमे होते हे हें..हें..हें..गलती दोनोकी ओरसे थी तो सही करके आ गया..

बाबा : चलो ठीक हे..क्या तु अकेला आया हे..?

देवायत : हां बाबा कल आपने कहाथानां.., ओर इधरसे गुजर रहाथा तो आ गया..कहो क्या हुकुम हे मेरे लीये कल कुछ आप बताने वालेथे..कोइ गंभीर बात तो नही..?

बाबा : (हसते) अरे..नही नही, अ‍ेसी कोइ गंभीर बात नही बस कुछ बात अ‍ेसी हे जो तुजे वीचलीत कर सकती हे बस उन्हीकी बात समजानेके लीये तुजे अकेलेमे मीलने बुलाया था..

देवायत : बाबा अ‍ेसी क्या बात हे..? आप केह रहेथे हमारे यहा बहुत बडा बदलाव आने वाला हे ओर हमारे खानदानमे कोइ इश्वरीय अंसकी बातभी केह रहेथे..

बाबा : हां बेटा सुन..तेरा अ‍ेक पोता होगा, वो पीछले जन्म मे अ‍ेक बहुत बडा राजा था इनकी कइ रानीया थी जो इनसे बहुत प्यार करतीथी हमारे हिमाचलमे जो महादेवका वो प्रसीध्ध मंदिर हेना जो लोग उनको देखने जाते हे उनकी स्थापना उन्होनेही कीथी उनकी सब रानीओके साथ.. जो हर रानी हर जन्ममे इनसे मीलनेकी कामना करती थी बस इस जन्म मे भी उसे ज्यादातर रानी मीलेगी ओर तेरा पोता सबसे सादी करेगा..

देवायत : बाबा वोतो बहुत बडे राजा थे..वो बीजलीकी मशीन उसीनेतो बनाइथी.., मेने पढा हे कइ रानीयातो उनकी खुदकी बहेने थी.. ओर अ‍ेकतो उनकी दादीभी थी..

बाबा : (हसते) हां वोही..हें..हें..हें.., सुन इस बार उसे जो रानीया मीलेगी उनमेभी अ‍ेसे कइ रीस्ते होगे..तो तुम अ‍ेसे रीस्तोसे वीचलीत मत होना..ये सबतो होकेही रहेगा.., ओर अ‍ेसे रीस्तोमे सादीकीतो उन्होने वहा अ‍ेक परंपराभी सुरु कीथी इसीलीयेतो आजभी हिमाचलमे अ‍ेकभी विधवा ओर त्यक्तता नही मीलती..

देवायत : हां बाबा इसके बारेमेतो मेनेभी सुना हे वहा सब सुहागनही हे..ओर वहा मां भी विधवा होते अपने बेटे या देवर कीसीसेभी सादी करलेते हे ओर ज्यादातर बहेन भाइ ही आपसमे सादी करते हे..

बाबा : हां..बस अब वोही सब तुम्हारे घरमे होने वाला हे..इसीलीये मेने तुजे बुलाया था, तेरे पीताको सब मालुम था बस तुजे बताना था क्युकी तेरा जो बेटा होगा वो ज्यादा यहा रहेने वाला नही वो विदेशमे सेटल हो जायेगा इसीलीये सीर्फ तुजेही बता रहा हु बस कभी मन विचलीत होवे तो इधर चले आना..

देवायत : बाबा मे ज्यादा तर बात समज गया..यानी हमारे घरमे बहुत कुछ रीस्तोमे देखनेको मीलेगा..हें..हें..हें..

बाबा : बेटा तेरा पोता बहुतही होशीयार ओर बहादुर होगा तेरी सब समस्याका वो सामना करके समाधान करेगा सबको बरोबर न्याय दीलायेगा बस अ‍ेक बातको स्वीकार करना हे..वो कीसीभी रीस्तेको नही मानता होगा, क्युकी वो काम का अंस होगा ओर काम कोन हे वो तुजे बतानेकी जरुरततो हे नही.. तु खुद जानता हे उनके लीये हर लडकी ओर ओरत केवल अ‍ेक स्त्री हे..जो सब उनको ओर वो सबको प्यार करता होगा..

देवायत : (हसते) बस बाबा..मे सबकुछ समज गया..आपने मुजे वीचलीत होनेकी बात कहीथी वोभी मे सब समज गया, कोसीस करुगाकी इनके हर रीस्तेको स्वीकार करलु..लेकीन आपने मेरे भाइ बहेनकी सादीकी जल्दी करनेको क्यु कहा..? ओर मुजेभी अ‍ेसे रीस्तेके बंधनके लीये कहाथा..

बाबा : (हसते) सुन..तेरी बहेनकी बेटी होगी तबसेही सब सुरुआत हो जायेगी, ओर तुम खुद अ‍ेसे रीस्तोसे बंधे होगे..क्या अभी तुम्हारी दो बीवी नही हे..? मुजे पता हे तुम्हारे साथ कोन अ‍ेसे रीस्तेसे बंधी हे..तो क्या तु तब वीचलीत होता हे..? अ‍ेकतो तेरे दोस्तकी मांभी हे..तुम चीन्ता मत कर ये बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी..बस सीर्फ तुजे आने वाले रीस्तोमे कोइ अ‍ेतराज नही करना, ओर नाही अ‍ेसे रीस्तोसे वीचलीत होना हे यही समजले इनकी सुरुआत तुम्हारेसे ही होगइ हे..जो आगे बहुत कुछ होगा..

देवायत : (सरमाते हसते) बाबा मे सब कुछ समज गया आपतो मेरी सारी कुंडली जानते हे..हें..हें..हें..

बाबा : बस मेरे लीये यही काफी हे जो तु समज गया, ओर सुन आने वाले समयमे तुभी कोइ गील्टी फील मत करना, क्युकी तु खुद अ‍ेसे रीस्तोसे बंधा होगा बस मुजे आज सीर्फ इतनाही कहेना हे समज गया..

देवायत : (आस्चर्यसे) बाबा क्या मे..,

बाबा : हां बस ओर कोइ सवाल नही, क्या सब आजही उगलवा लेगा, कुछ बाते बादके लीयेभी रख.., हें..हें..हें..

देवायत : बाबा तो अब क्या आदेश हे मेरे लीये..

बाबा : बस..कुछ नही.. अपने भाइ बहेनकी उमर होतेही सादी करदे..क्युकी इनकेही माध्यमसे बहुत कुछ होने वाला हे, ओर अब समय होगया हे अब तुभी अ‍ेक बच्चा करले..

फीर देवायत कुछ ओर बात करके बाबाको दक्षीणा देकर वापस हवेलीकी ओर चल पडा आज बाबाने अ‍ेक बार ओर उसे जंजोरके रखदीया ओर आने वाले वक्तके लीये अपने आपको ओर अपने मनको मजबुत बनानेकी सोचने लगा उनके मनमे विचारोका युध्ध होने लगा वो बाबाकी हर बात याद करके उनके बारेमे पुरे रास्ते सोचता रहाकी बाबाने लखन ओर पुनकी सादी जल्दी करनेको क्यु कहा यही विचारोके साथ वो हवेली पहोच गया उसे पताभी नही चला ओर जीप अंदर लेके वो थोडी देर वही बेठा रहा फीर उठके अंदर गया

मंजुला : (बहार आते हसते) आ गये आप..? चलो फटाफट फ्रेस होजाओ बहुत देर करदी भुख लगी हे..

देवायत : (बाथरुम मे जाते मंजुलाकी ओर देखते) तो तुम्हे खाना खालेना चाहीनां..क्यु भुखी रहेती हो..

कहेके अंदर चला गया ओर मुह हाथ धोके फ्रेस हो गया ओर बहार आतेही मंजुलाने उसे टोलीया दीया ओर उनके सामने देखते स्माइल करती रही फीर धीरेसे कहा..

मंजुला : क्या मेने आपके खानेके बगैर कभी खाया हे..? चलो खाना रेडी हे

देवायत : (हाथ पोछके उसे बाहोमे भरते) डार्लींग क्या इतना प्यार करती हे मुजसे..?

मंजुला : (उनके सीनेमे मुका मारते) कीतने कमीने हो..क्या अ‍ेभी कोइ पुछनेकी बात हे..?

देवायत : (हसते होंठ चुमते) सोरी..बेबी..गलत प्रस्न पुछ लीया..चल खाना खाते हे..

कहेके देवायत मंजुलाको गोदमे उठा लेता हे ओर डाइनींगकी ओर चलने लगता हे तो दया ओर मंजुला देखके हसने लगती हे..अ‍ेसा कइ बार देवायत कर चुकाथा दोनोही बाते करते खाना खाने लगे तब दया ओर रजीया मंजुलासे छुपके देवायतको अपने रुममे आनेका इसारा कर रहीथी फीर खाना खाके आराम करने चले गये तब जातेही मंजुला गहेरी नींदमे सो गइ तब देवायत उठके दया ओर रजीयाके रुमकी ओर चल पडा..

फीर बारी बारी दया ओर रजीयाकी चुदाइ करके दोनोको संतुस्ट करता हे फीर वापस आके मंजुके बगलमे सो जाता हे, चार दीनके बाद भानुभी अपनी दुकान समेटके देवायतके साथ आगया खेतीबाडीका सब वहीवट सम्हाल लीया, ओर देवायतभी अपने कारोबारमे बीजी होगया समय बीतने लगा देवायत मंजुकी हर रात जबरदस्त चुदाइ करता रहा ओर भावनाभी हप्तेमे दो बार भानुको वायग्रा खीलाके संतुस्ट होती रही..

तब लताभी अपने भाइ भाभीकी चुदाइ देखनेकी आदी होगइ ओर वोभी ठरकी होती जा रहीथी वो भानुका लंड कइ बार देख चुकीथी ओर अब अपनेही भाइको अ‍ेक मर्दकी तराह देखती थी क्युकी लखनसे फोनपे बहुतही कम बाते होतीथी ओर दुसरे मर्दको अपनी मांके डरसे देखती नहीथी, बस उनके करीब भानुही अ‍ेक मर्द था, जो इनकी ओर खीची ही चली जाती थी, सब अपने रुटीन लाइफमे बीजी हो गये इसी बीच पुनम लखन लता सब जवानीकी ओर बढते अपनी पढाइ करते रहे..

तब अ‍ेक दीन मंजुलाका पीरीयड मीस हो गया ओर दुसरे दीन उसे उल्टीया होने लगी तब वहा भावनाकाभी यही हाल हुआ दोनो अपने पतीके साथ होस्पीटल चली गइ ओर रीपोर्ट करवाइ तो पता चला दोनोही प्रेगनेन्ट हो चुकीथी तब देवायत बहुतही खुस हुआ ओर अपने सब मजदुरोको नये कपडे दीलवाये..

अब देवायत मंजुलाका बहुत खयाल रखने लगा क्युकी इस हवेलीका वारीस जो आने वाला था वो ओर भानु अपनी दोनो बीवीओको लेके महीनेमे दो बार सहेरमे डोक्टरके पास चेकअपके लीये जाते थे इसी तराह दीन बीतने लगे अबतो दोनोका पेट बहार नीकलके दीखने लगाथा तब अ‍ेक दीन देवायतके फोनकी रींग बजने लगी उसने मोबाइलमे नाम देखातो चहेरेपे मुस्कान आगइ ओर फोन उठाके धीरेसे बात करने लगा

न्यु केरेक्टर

चंद्गीका उर्फे (चंदा) - जो मंजुलाकी सबसे छोटी मौसी हे जो नीहायती पतली ओर खुबसुरत थी भरी जवानीमे सादीके महज ८ साल बाद ही विधवा होगइ थी तब उनको अ‍ेक लडका हो चुका था ओर गांवमे तब विधवाकी दुसरी सादी नही होतीथी उनके ससुर वहाके सरपंच थे ओर गांववालो उनको बहुत मानते थे ओर उनके पास अच्छी खासी जमीनभी थी जो खुद मजदुर रखके सब काम करवातीथी जब उनके सास ससुर गुजर गये तब सब वहीवट चंदाके पास आ गया तब देवायतको मंजुलाकी सादीमे देखा तबही दोनोके नैन मील गये तब वो विधवा हो चुकीथी फीर अ‍ेक हप्तेके बाद मंजु भावनाको अपने घर खानेपे बुला लीया ओर तबही दोनोने पहेली बार मीलके प्यारका इजहार करदीया बाकी बाते हम आगे करेगे..

धिरेन : चंदाका अ‍ेक लौता बेटा जो अभी पासके सहेरमे पढाइके लीये जाता हे इस कहानीमे इनका कोइ खास रोल नही हे तो आइअ‍े कहानीका दोर आगे बढाते हे

देवायत : (हसते फोनपे) क्या बात हे आज बहुत दिनोके बाद मेरी याद आ गइ..मेरी रानीको..हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) तो क्या करती..मेरा पतीतो मुजे फोन तक नही करता तो यादतो करना पडेगानां..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) कहो मौसी केसे याद कीया..?

चंदा : (जोरोसे हसते) लगता हे बाजुमे मेरी भांजी हे..तभीतो मौसी कहेते हो..

देवायत : (हसते) नही हमारे गोडाउनमे अकेला हु मजदुर काम कर रहेहे येतो मजाकमे बोल दीया..

चंदा : (हसते) बाबा अ‍ेसा मजाक अकेले हो तबतो मत करो..आपकी बीवी हु..मेरी मांग भरीहे आपने..

देवायत : सोरी..बाबा..बोल केसे याद कीया..मंजु याद कर रही हे..ओर सुनो वो पेटसे हे..

चंदा : (आंखोमे चमक लाते) सुनो..तबतो हमे मीलनेका बहोत मौका मीलेगा..मे डीलीवरीके लीये उधर आजाउगी..उसी बहाने हम मीलते रहेगे..कीतने दीन हो गये..क्या मेरी याद नही आती..?

देवायत : बहोत आतीहे अ‍ेक तुहीतो मेरी दुसरी बीवी हे..ओर अबतो मंजुके साथभी कुछ नही कर सकता चलना इधर आजा हम खुब मजे करेगे मे आजभी वो दीन नही भुला जब हम पहेली बार मीलेथे आजभी तुजे याद करता हुतो नीचे फटने लगता हे..चंदा डार्लीग आजानां मंजुकी तबीयत पुछनेके बहाने..खुब मजे करेगे..

चंदा : (गरम होते अपनी चुत सहेलाते) सुनो..वो धिरेन स्कुलके प्रवासमे गया हे चार दीनके बाद लोटेगा इधर आजाओना.., फीर सारा दीन मजे करेगे ओर सामको आपके साथही आजाउगी वहा दो दीन ठहेरुगी फीर वापस छोडने आजाना..क्या कहेतेहो..? तो सुबह उधरसे कामके बहाने नीकल जाना..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे..कल मीलता हु फीर तुमसे अ‍ेक बातभीतो करनी हे जो मीलके बताउगा..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) सुनो..वो आइपील (गर्भनीरोधक गोलीया) लेके आना मेरे पास खतम होगइ हे..

देवायत : (मजाक करते) अरे उनकी क्या जरुरत हे मेरी बीवी अ‍ेक बच्चा पैदा नही कर सकती हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते चीडके) हसो..मत..जब धिरेन छोटाथा तब कहाथा..तब करदेना चाहीयेना, मेने थोडी मना कीयाथा..अबवो बडा होगया हे मे उनको क्या कहुगी..(धीरेसे) क्या बहुत मन करता हे तो कुछ सोचती हु..

देवायत : (हसते) नही डार्लींग मुजे पता हे मेरी इस बीवी मेरेलीये कुछभी कर सकती हे लेकीन बेबी मुजे तेरी इजतका भीतो खयाल रखना पडेगा, आखीर तुभीतो वहाकी सरपंच हे..

चंदा : देवु प्लीज इधर आजाओ.. फीर मे आपसे कुछ बात करुगी..अभी फोनपे ठीक नही हे..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे कल मीलता हु जरा हमारा बेड सजाके रखना..हें..हें..हें..

चंदा : अरे अ‍ेक बार आओतो सही..हें..हें..हें..चलो रखती हु..

कहेके फोन काट दीया तब देवायत अकेलेही मुस्कराने लगा वो आंख बंध करके वही खुरसीपे पैर लंबा करते अपने दोनो हाथ पीछे लेजाके अपने सरपे तकीयेकी तराह रख दीया ओर बंध आंखसे चंदासे पहेली मुलाकातको याद करते अतीत मे चला गया ओर गहेरी सोच मे डुब गया..

(फ्लेसबेक)

जब बारात लेके गयेथे जब मंजु वरमाला लेके आ रहीथी तब चंदा साथमे हीतो थी जो अपने बालोकी पुरी चोटीमे फुलोकी वेनी ओर आगे बालोकी दो लट लहेराती थी तनसे पतली बडी हाइट ओर सारी पहेनके मंजुका हाथ पकडके आ रहीथी पताही नही चलताथा की दुल्हन कोन हे..

जब मंजुलाने हार पहेनाया तबभी देवायत चंदापे नजर गडाया हुआ था तब चंदाभी उनकी नजरोको भांप गइ ओर मुस्कराते सरमाने लगी फीर अ‍ेक दुसरोको हार पहेनाया ओर मंजुको लेके चली गइ जब सादीके पंडपमे आगये तबभी मंजुके साथ वोही

बेठीथी जो बीच बीचमे मंजुका मेकअप सही कर रहीथी तबभी देवायत चोर नजरसे उनको देखताही रहेताथा ये बात चंदा भलीभांती जान चुकीथीकी देवायत उनके पीछे लटु हो गया हे..तब वो सरमसे पानीपानी होगइ..फीर वोभी देवायतको चोर नजरसे देखती रही..

इतने दीनोसे पतीके बगैर रहे रहीथी तो अपने अंदरकी ओरतके होर्मोन्सनेभी जवाब देदीया ओर उनकी चुत गीली होने लगी जब सादी सम्पन हुइ ओर भोजनके लीये साथ जा रहेथे तब देवायतने जान बुजके दो तीन बार उसे छुलीया तब उनका पुरा तन कांप गया, ओर वोभी चोर नजरसे देवायतकी ओर देखती रही ओर भोजन संपन हुआ तब सब साथमे खडेथे तो बात करनेका मोका मील गया, मंजु अपनी सहेलीसे बात कर रहीथी तब देवात इनके पास धीरेसे सरक गया ओर धीरे कहा..

देवायत : (हीमत करके अपने दीलकी बात कहेदी) मौसी आज आप बहुत खुबसुरत लग रही हो..मुजे पहेले क्यु नही मीली..तब आपसेही सादी करलेता..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) अच्छा मजाक कर लेते हो हें..हें..हें.., क्यु..मेरी भांजीभी तो खुबसुरत हे..

देवायत : आप मुजे बादमे मीलना आपसे कुछ बाते करनी हे आपसे जल्द मीलना हे..

चंदा : (हसते सरारतसे) क्यु..? मुजे आपसे नही मीलना बहुत खतरा हे हें..हें..हें..

तभी मंजुलाने अपनी मौसीको जानेके लीये कहातो सब चलने लगे तब चंदा बार बार देवायतकी ओर देखके हस रही थी आज उसे देवायतकी बाते बहुत अच्छी लगने लगीथी वो देवायतसे मीलनेका मन बना चुकी थी रुममे जाके मंजुला फ्रेस होगइ जब वो बाथरुमसे नीकली तो चंदा जटसे अंदर घुस गइ ओर सारी कमर तक उची करके कमोडपे बेठ गइ ओर आंख बंध करते अ‍ेक उंगली अपनी चुतमे घुसादी..

फीर देवायतको इमेजींग करते जोरोसे अंदर बहार करने लगी आज देवायतने अपनी अंदरकी कामुक ओरतको जगा दीयाथा थोडीही देरमे चुतके अंदरसे फवारा नीकल गया तब वो अपनी तेज चलती सांस को कंटड्ढोल करने लगी ओर मंद मंद मुस्कराती रही फीर चुतको साफ करके फ्रेस हो गइ ओर बहार आकर सबके साथ बेठ गइ जेसे कुछ हुआही नही तब उनको रीयलाइज हुआकी वो देवायतको पसंद करने लगी हे..

सादीके तीन दीनके बाद वो अपने घर आ गइथी तब उनका लडका वेकेशनकी वजहसे उनकी मौसीके यहाही रुक गया क्युकी चंदाने जान बुजको उनको वही रोक लीया फीर तीन दीनके बाद उसने मंजुला ओर देवायतको अपने घर सामको भोजनके लीये बुला लीया जब देवायत ओर मंजुला तीन बजे वहा गये तब उनके घर उनकी साली भावनाभी थी तब देवायतको देखतेही सरमाते हसने लगी ओर उनका स्वागत कीया

तब भावनाने दोनोको होलमे बीठाके पानी पीलाया तब मंजुला अपनी मौसी फीर भावनाको गले मीली फीर कीचनमे चली गइ तब देवायत अकेला पड गया तो चंदा बहार आगइ ओर देवायतके सामने देखके हसने लगी फीर वही सोफेपे अ‍ेक कोनेपे बेठके उनसे बाते करने लगी तब भावना सामके खानेकी तैयारीया कर रहीथी तो मंजुभी उनकी मदद करने लगी तब इधर चंदा अबभी सरमा रही थी..

देवायत : (बंगलो देखते) मौसी आपका बंगलोतो बहुत बडा हे..आप अकेली ही यहा रहेती हे..?

चंदा : (सरमाते हसते) हां..सास ससुरभी चल बसे बस अब मे ओर धिरेनही हे, तभीतो धिरेनको यही रखा हे वरना सहेर होस्टेलमेही भेज देती..फीर मे अकेली बोर होजाती..हें..हें..हें..चलो घर दीखाती हु..अभी आइ..

कहेके वो कीचनमे चली गइ ओर मंजु भावनासे कहेके आइकी मे हमारे जमाइको बंगलो दीखादु.. कहेके वो बहार आ गइ ओर देवायतभी इनके पीछे जाने लगा ओर चंदा उसे सब दीखाने लगी फीर उपरकी ओर जाने लगे तब चंदाका दील जोरोसे धडकने लगा ओर अपनी सांसे तेज होगइ उनको अ‍ेक डरसा लगने लगाकी कही देवायत कोइ सरारत ना करले..क्युकी वो जान चुकीथीकी देवायत बहुतही बीन्दास हे..

जब दोनो सीडीयोसे उपर जा रहेथे तब देवायत पीछे चल रहाथा ओर चंदाके मटकते नीतंबही देख रहाथा जो इनकी लंबी चोटी नीतंबके आस पास लहेरा रहीथी जीसे देखते देवायतका लंड हरकतमे आने लगा ओर खडा होते बगावतपे उतर गया, ये बात चंदाभी जान गइ तब वो बहुतही सरमाइ जब वो उपर घिरेनके रुम दीखाने लगी तब देवायत उनकोही देख रहाथा तबवो सरमसे पानी पानी होगइ ओर मुस्कराते बहार अपने रुममे आ गइ..

चंदा : (सरमाते) ओर ये मेरा रुम हे..हम दोनोही मां बेटे उपर सोते हे..

देवायत : (अचानक बाहोमे भरते) मौसी आप बहुत खुबसुरत लग रही हे..आइ लव यु..

चंदा : (अ‍ेक दम सरमाके जड होगइ) क्या..? क्या केह रहेहो..? मे तुम्हारी मौसीजी हु..सादी सुधा..

देवायत : मौसी मुजे पता हे आपको अ‍ेक साथीकी जरुरत हे जो मे पुरी करुगा..आपसे सबसे छुपकेसे सादी करके..प्लीज..मे आपका हर खयाल रखुगा..मे मंजुको मना लुगा मुजसे सादी करलो..प्लीज..

चंदा : (बाहोसे छुटके जटसे बहारकी ओर जाते सरमाते) प्लीज..चलीये नीचे..वो दोनो नीचे हे..(बहार जाने लगी)

अचानक देवायतने उनका हाथ पकडते खीचलीया तो चंदा अ‍ेक बार फीर उनकी बाहोमे आगइ तब देवायतने उनकी कमरमे हाथ डालके उनसे चीपका लीया तब चंदा सरमके मारे छुटनेकी कोसीस करते छटपटा ने लगी तब अचानकही देवायतने उनके होंठोपे अपना होंठ रखते होंठ भीचलीया ओर अ‍ेक लंबा चुंबन लेलीया तब चंदा सरमसे पानीपानी होगइ ओर छुटनेकी कोसीस करने लगी

जब देवायतने छोड दीया तो जटसे नीचेकी ओर भाग गइ ओर सीधी बाथरुममे घुसके दरवाजा बंध करलीया ओर दीवारके सहारे खडी रेहेके आंख बंध करली, ओर अपनी तेज सांसको कंटड्ढोल करने लगी अपने दोनो हाथ अपने सीनेपे रख दीया तो दीलकी धडकन बढ चुकी थी वो आंख बंध करते सोचने लगी..

हे भगवान ये क्या करदीया..,कीतना प्यारा अहेसास था..क्या वो सचमे मुजसे प्यार करने लगा हे..? अभी अभीतो इनकी सादी हुइहे वो मंजुकोभीतो प्यार करता हे..केहताथा पहेले आप मीलतीतो आपसे सादी करलेता..पागल कहीका..क्या ये सही हे..? नही नही मे मेरी भांजीको धोखा नही दे सकती.., क्या करु..? मुजसे सादी करके मेरा खयाल रखनेको केह रहाथा ओर उपरसे मेरा अकेलापन..मुजेभी साथीकी जरुरत हे..

भावना : (बहारसे आवाज लगाते) मौसी दाल चड गइ हे अब चुले पे क्या रखना हे..?

तब चंदा तंद्गासे जाग गइ ओर अपने आपको सही करने लगी बालोमे हाथ घुमाते आयनेमे देखते कहा

चंदा : भावु तु चल मे आ रहीहु थोडा फ्रेस होके..फीर शीखंडभी तो लेने जाना हे सहेर..

भावना : मौसी जीजुभी गाडी लेके आयेहे क्या मे ओर जीजु लेने चले जाये..?

चंदा : (गभराते जटसे बहार आते) नही नही..सहेरमे तुने नही देखा होगा वो हमारे जान पहेचानके हे, मेने उसे बोल दीया था..(धीरेसे) मेही चली जाती हु..तु चल कीचनमे..बताती हु सब..

पता नही आज चंदाको देवायतके साथ भावनाको भेजना अच्छा नही लगा तब उसे अहेसास होने लगाकी वोभी देवायतसे प्यार करने लगी हे वो देवायतके साथ ज्यादा टाइम स्पेन्ड करना चाहती थी, तो मंजु ओर भावनाको सब दीखाके बताने लगीकी क्या बनाना हे ओर उसने शीखंड लेने जानेकी बात कहेदी..

मंजुला : मौसी इनको लेके चली जाओ वेसेभी फ्रीही बेठे हे हें..हें..हें..अभी इनसे बात करती हु..(बहार आते) सुनीये जी..आप मौसीके साथ थोडा सहेर तक जाओगे..? शीखंड लाना हे..प्लीज..

देवायत : (हसते मनमे खुस होते) हां हां..क्यो नही..वेसेभी बेकार बेठा हु..चलो.. भेजो इनको सहेरभीतो दुर हे..आने जानेमे भी थोडा टाइम लगेगा तो समयपे आजायेगे..भेजो..

मंजुला : (खुसीसे हसते) मौसी जाइअ‍े फटाफट सहेर थोडा दुरभीतो हे..अभी जाइअ‍े टाइमपे आजायेगे तबतक मे ओर भावु सब खाना बना लेगी..आप अ‍ेक डीबा लेके जाना..

चंदा : (सरमाते कीचनसे बहार नीकलते) चल ठीक हे..हम जल्दीही आजायेगे..

कहेके चंदाने अ‍ेक डीबा उठालीया ओर देवायतकी तरफ अ‍ेक नजर करते सरमाते जटसे बहार नीकल गइ ओर सीधी जाके गाडीके पास खडी रेह गइ तब देवायत मंजुको बोलके बहार नीकल गया ओर वोभी गाडीमे बेठके साइडका दरवाजा खोल दीया तब चंदा सरमके मारे देवायतके बाजुमे बेठ गइ ओर दरवाजा बंध करलीया तब देवायतने कार सहेरकी ओर दोडा दी ओर बीच बीचमे चंदाकी ओर देखता रहेता था..

कोइ कुछभी नही बोल रहाथा चंदा बहारकी ओर देख रहीथी ओर बार बार अपने बालोको कानके पीछे करती रही उनकी समजमे नही आ रहाथा की देवायतको क्या कहे..मनतो कर रहाथा उसे फोरन हां कहेदे ओर उनके प्यारको अ‍ेक्सेप्ट करले पर डरभी लग रहाथाकी कीसीको पता चल जायेगातो क्या होगा..वो बहुतही उलजनमे फसी थी दील केह रहथा हां कहेदे ओर मन मे डरका भाव था.. आखीर देवायतने चुपी तोडी..

देवायत : मौसी..क्या सोचा आपने..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) कीस बारेमे..(वो जानतीथी देवायत क्या पुछना चाहतेथे फीरभी..)

देवायत : मौसी आप जानती हो..मे आपसे प्यार करने लगा हु.. प्लीज..

चंदा : (सरमाते धीमी आवाजमे) नही..मे मंजुको धोखा नही दे सकती..कीसीको पता चलेगातो मेरी इजत चली जायेगी..गांवमेभी सब मेरी बहुत इजत करते हे तो डर लग रह हे..

देवायत : मुजेभी पता हे..मे आपकी इजतका खयाल रखुगा..ओर ये बात सीर्फ हम दोनोके बीचही रहेगी..

चंदा : (रीक्वेस्ट करते) प्लीज..आप जीद छोडदो मुजे पता हे आप मुजसे प्यार करते हो पर मे आपका प्यार अ‍ेक्सेप्ट नही कर सकती..प्लीज मेरी मजबुरी हे..

देवायत : प्लीज..मौसी मुजसे आपका अकेला पन नही देखा जा सकता हम सबसे छुपकेसे सादी करलेगे..

चंदा : (थोडा पीघलते आंख गीली करते) मुजे पता हे आप मेरा बहुत खयाल रखेगे, ओर येभी पता हे आपसे बहेतर मुजे जीवनसाथी नही मीलेगा..फीरभी अ‍ेक डरसा लग रहा हे की मंजुको मे धोखा दे रही हु..प्लीज.., आइ अ‍ेम सोरी..

तब देवायत जेबसे रुमाल नीकालके गाडी चलाते अ‍ेक हाथसे उनके आंसु पोछता हे तो चंदा उनकी ओर देखने लगती हे, तब उसे देवायतका मासुम ओर मायुस चहेरा नजर आता हे तो वो वीचलीत होजाती हे ओर देवायतका हाथ पकड लेतीहे ओर धीरेसे हाथको चुम लेती हे तब दोनोही आधे रास्ते जंगलके बीच गुजर रहेथे जेसेही देवायतको अपने हाथमे चंबन महेसुस हुआ तब उनका चहेरा खील उठा ओर उसने चंदाकी ओर देखा.. तब चंदाने मुस्कराके सरमाते हुअ‍े हां मे गरदन हीलाइ तब देवायतने कार सीधी जंगलकी ओर मोड दी..

चंदा : (सरमाते) आप इधर कहा ले जा रहे हे..? हमे देर हो रही हे..प्लीज..

देवायत : (हसते) मेरी होने वाली बीवीको जी भर आंखोमे बसा लेना चाहता हु..प्लीज..हम अभी चले जायेगे

तब देवायत धने जंगलमे कार रोक देता हे जहा कोइ जानवरभी नही दीख रहाथा बस कुछ पक्षीओकी आवाज आ रहीथी ओर देवायतने कार बंध करदी ओर चंदाकी ओर अ‍ेक नजरसे देखता रहा तब चंदा सरमसे पानी पानी हो रहीथी ओर नजर जुकाके सरमाते बेठी रही तब देवायतमे अ‍ेक हाथ उनके हाथके उपर रख दीया तो वो कांप गइ ओर धीरेसे हाथ खीचनेकी कोसीस करते नजर टेडी करते देवातयको देखने लगी

चंदा : (सरमाते धीमी आवाजमे) प्लीज..चलीयेना..वो दोनो हमारा वेइट करती होगी..

देवायत : (आाज पहेली बार देवायत नाम लेके बुलाता हे) चंदा..आइ लव यु..अगर तुम मुजे पहेले मीली होतीतो मे तुमसेही सादी करलेता..ओर अभीभी सादीके लीये तैयार हु..हम सादी करेगे..सबसे छुपके..

चंदा : (सरमाते) क्या ये सही होगा..? हम कुछ गलतीतो नही कर रहे..

देवायत : नही चंदा हमारा प्यार पवित्र हे मे जब तक जींदा हु तेरा साथ जींदगीभर नीभाउगा तुजे पत्नीका हर सुख ओर अधीकार दुगा मे हर फर्जको नीभाउगा तेरे बेटेको मे अपने बेटेकी तराह अपनाउगा..

तब चंदा कारमे बेठेही देवायतको लीपट जाती हे ओर आंसु बहाने लगती हे तब देवायतभी उसे बाहोमे भर लेता हे तब आज पहेली बार चंदा अपने पतीके अलावा कीसी गैर मर्दकी बाहोमे थी चंदा खुब सरमाइ तब चंदाके मुखसे अनायासही नीकल गया

चंदा : देवायत..आइ लव यु..सो मच..मेरा साथ कभी मत छोडना..वरना मे जी नही पाउगी..

देवायत : नही चंदा..मेने तुजे ओर मंजुको दीलसे चाहा हे..बस मंजुको हमारे रीस्तेके बारेमे पता ना चले..

ना जाने कबतक दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे बेठे रहे तब देवायत ने चंदाका चहेरा दोनो हाथसे पकड लीया ओर गालको सहेलाते उनकी आंखोमे देखता रहा तर चंदाने सरमसे नजर जुकाली ओर देवायत धीरे धीरे मुहको चंदाके मुहकी ओर लेजाने लगा तब अ‍ेक बार चंदाने नजर उची करते देख लीयाकी देवायत क्या चाहता हे? तब उसने नजर जुकाके आंख बंध करली ओर दोनोके होंठ मील गये ओर दोनोही स्मुच करने लगे

कीस करते दोनोही बहेकने लगे तब देवायतका दुसरा हाथ चंदाके ब्लाउसके उपरसे ही चंदाके बुब्सपे चला गया ओर हल्केसे दबाके मसलने लगा तब चदा सरसे पांव तक हील गइ ओर आंख बंध करते देवायतके हाथके उपर अपना हाथ रखदीया मानो वो उसे रोकना चाहती थी..

ओर दोनोही चुंबन करनेमे लीप्त थे तब चंदाको अपनी सारीके उपरसे ही चुतपे देवायतका हाथ महेसुस हुआ तो वो सीहर उठी ओर देखा तो देवायत उनकी चुतपे हाथ रखते सहेला रहाथा तब वो जटसे कीस तोडके दुर हट गइ फीरभी देवायत चुत मसल रहाथा तब चंदाने उसका हाथ पकडलीया ओर देवायतकी ओर रीक्वेस्ट करते कहेने लगी..

चंदा : (गभराते रीक्वेस्ट करते) प्लीज..प्लीज..प्लीज..नही नही नही..अभी नही..रुक जाओ..प्लीज..

देवायत : (हाथ हटाते सरमींदगीसे) सोरी..प्लीज..मे बहेक गया था..जब तक आप नही कहोगी तब तक नही छुअुगा..सोरी..मौसी..

चंदा : (सरमाते खुस होगइ..क्युकी देवायत उनकी इजत करता हे) प्लीज..अब हम अकेले हो तब मुजे नामसे बुलाना..बस अ‍ेक बार हमारी सादी होजाये..तब मे मेरा सब कुछ आपको सौंप दुगी..प्लीज..बुरा मत मानना..

देवायत : (हसते) ठीकहे चंदा डार्लींग जेसे आपका हुकुम..हें..हें..हें..में आपके फोनका वेइट करुगा..

तब चंदा सरमसे पानी पानी होगइ क्युकी आज पहेली बार उनके यारने उसे डार्लींग कहेके पुकाराथा वो सर जुकाके मुस्कराती रही तब देवायतने उनकी ओर देखते हस दीया ओर कार स्टार्ट करदी ओर वापस सडक की ओर चल दीये तब पुरे रास्ते चंदा बार बार देवायतकी ओर देखते हसती रही.., वो आज बहुतही खुस थी उनको भर जवानीमे अ‍ेक साथी मील गयाथा जो उनपे जींदगी लुटानेको तैयार था..

तभी दोनोही सहेर पहोंच गये ओर उन्होने वहा शीखंड ओर खमन लेलीया जब दोनो वापस आने लगे तब देवायत अ‍ेक सारीके शोरुम मे चंदाको लेके चला गया ओर उनको जबरदस्तीसे अ‍ेक डड्ढेस ओर अ‍ेक सादीका जोडा दीलवा दीया तब चंदा खुब सरमाइ ओर दोनोही कार मे बेठ गये तब चंदा ने कहा..

चंदा : (देवायतकी ओर हसते) मे..डड्ढेस नही पहेनती..गांव.. हेनां..सादीसे पहेले पहेनती थी..इतना खर्चा क्यु कीया..ओर ये सादीका जोडा.., हे मेरे पास..

देवायत : (हसते) यही समजलो..जो सादीके पहेले सगुन देते हे.., मे चाहताहु जब हमारी सादी हो तब तुम यही पहेनो..ओर मेरा नंबर सेव करलो..अपनाभी नंबर देना..जब आप फोन करो..तब आजाउगा..

चंदा : (सरमाते हसते) जी..वो धिरेन घरपे होता हे, दो दीनके लीये कही जायेगा..तब फोन करुगी..

घर आनेसे पहेले अ‍ेक बार रास्तेपे कार रोकते दोनो फीरसे सीर्फ होंठ चुमते प्यार करते हे ओर कुछ वादे कसमे खाते हे पुरी प्लानींग करते दोनो घर आगये तब चंदा आज बहुतही खुस हो रहीथी मानो उनकी नइ नइ सादी हुइ हो ओर वो फीरसे सुहागन होगइ होे अंदर आतेहे तब भावना देवायतको ओर चंदाको पानी पीलाती हे तब भावनाभी पानीका ग्लास लेते देवायतको छु लेती हे वो ये सब जानबुजके कर रही थी

फीर चारो खाना खाने बेठ जातेहे तब चंदा खुब आग्रह कर करके देवायतको खीलाती हे मानो इनके पतीको खीला रही हो तब भावनाकोभी ज्वेलसी होने लगी..सबसे पहेले वोही देवायतको प्यार करने लगीथी पर अपने प्यारका इजहार नही करपाइ ओर मंजुला आगे बढ गइ जब दोनोकी सादीकी बात हुइ उस रात वो सबसे छुपके खुब रोइ..पर अपने दीलकी बात बहार कीसीके सामने जाहीर नही होने दी..

मंजुला : (खाना खाते) मौसी शीखंड तो मस्त लेकर आइहो..कहासे लीया..?

चंदा : (हसते) वो तेरे मौसाके पहेचान वाले हे..हमारे गांवकेही हे..उनकी दुकानसेही लाइ..

भावना : (हसते) हां.. मौसी लगता हे हमे बार बार इधर खानेके लीये आना पडेग..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते देवायतकी ओर देखते) हां तो आजानांं तेराहीतो घर हे..आती रहेना..खुब खीलाउगी..

मंजुला : (हसते) मौसी भावुका इसी गांवमे रीस्ता ढुंढलो..इधर आती रहेगी..हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते) क्या..दीदी बातको कहासे कहा लेजाती हो.., मुजे नही करनी सादी..

चंदा : (हसते) तो क्या सारी जींदगी बडी दीदीपे बोज बनके रहेगी..हें..हें..हें..(देवायतकी ओर सरमाते) वेसे देवायतजी सादीमे आपके साथ आपका वो दोस्त था..क्या नाम था..? सायद कुछ..भानु भानु आप केह रहेथे..हें..हें..हें..

देवायत : (खुसीसे आंखोमे चमकके साथ मंजुकी ओर देखते) हां..मेरा खास बचपनका दोस्त..मानलो मेरा भाइही हे..घरकी दुकान हे..बडा घर हे..सीर्फ मां ओर अ‍ेक छोटी बहेनही हे..मंजु..कुछ समजी..हें..हें..हें..

मंजुला : (भावनाकी ओर हसते) हां समज गइ..मे मांसे बात करलुगी..हें..हें..हें..

तब भावना सरमसे पानी पानी हो गइ ओर सोचने लगीकी ये रीस्ता हो जायेतो जीजुसे नजदीक रहेनेका मौका मीलता रहेगा बात बन जायेतो मे फोरन हां केह दुगी..मुजेतो जीजुसेही मतलब हे..

चंदा : (हसते भावनाकी ओर देखते) अरे ओ महारानी..क्या सोच रही हे..कहोतो रीस्तेकी बात चलाये..?

भावना : (सरमसे पानीपानी होते) क्या..मौसी आपभी.., मुजे नही पता..

कहेके सरमाती हसती हुइ उठके कीचनमे जाने लगी..तो चंदाने कहा..

चंदा : (हसते) अरे..सरमाती कहा जा रही हे..पहेले खानातो खाले..हें..हें..हें..

भावना : (सरमाते हसते) खा लीया..आपही खाओ..

कहेके कीचनमे चली गइ फीर थोडी देरके बाद सबके लीये पानी लेके आगइ ओर सबने खाना फीनीस कीया फीर मंजु ओर भावना चंदाने मीलके सब काम समेट लीया फीर होलमे सब आके बेठ गये ओर भावनाकी टांग खीचाइ करते रहे भावना वही रुकने वालीथी तब मंजुलाने जानेकी बात कही तब देवायत ओर मंजुला नीकलने लगे तब गले मीलते चंदा ओर देवायतने आंखोसे बहुत सारी बात करली....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ५



कहेके कीचनमे चली गइ फीर थोडी देरके बाद सबके लीये पानी लेके आगइ ओर सबने खाना फीनीस कीया फीर मंजु ओर भावना चंदाने मीलके सब काम समेट लीया फीर होलमे सब आके बेठ गये ओर भावनाकी टांग खीचाइ करते रहे भावना वही रुकने वालीथी तब मंजुलाने जानेकी बात कही तब देवायत ओर मंजुला नीकलने लगे तब गले मीलते चंदा ओर देवायतने आंखोसे बहुत सारी बात करली....अब आगे

फीर गाडी लेके मंजुला ओर देवायत देर रात हवेलीपे आगये..आज चंदासे प्यारका इजहार करदीया तबसेही देवायतका लंड खडाथा ओर वो काफी उतेजीत था जब दोनो अपने रुममे गये तब देवायत लगभग मंजुलामे उपर टुटही पडा वो फटाफट खुदके ओर मंजुलाके कपडे नीकालने लगा तब मंजुला सरमाके हसती रही तब देवायत खुद नंगा होगया ओर मंजुलाकोभी पुरी तराह नंगा करके बेडपे सुलाके उपर चड गया

मंजुला : (हसते) थोडातो सबर करलो..कीसको देखके इतने गरम होगये..कही मौसीनेतो कुछ नही कीया..?

देवात : (बात छुपाते) अरे मौसी क्या गरम करेगी..बस मेरे लीयेतो तुही अ‍ेकदम होट चीज हे चल आजा..

कहेके देवायत मंजुके होंठ भीचलेता हे ओर अ‍ेक हाथसे जोरोसे उनके उरोजोको मसलने लगता हे तब मंजुलाभी काफी गरम होगइ..ओर दोनोही प्यारकी गहेराइओमे गोते लगाने लगे पताही नही चला कब देवायतके लंडको मंजुलाने अपनी चुतकी गीरफ्तमे लेलीया मानो कीसी सांपने चुहेको नीगल लीया दोनोही कमर हीला हीलाके चुदाइमे मसगुल हो गये ओर घुआधार चुदाइ होने लगी..

रुममे सीर्फ मंजुकी चुडीयोकी ओर पायलकी आवाज के साथ फच..फच..थप..थप.की आवाज सुनाइ देरहीथी इसी बीच मंजुला अ‍ेक बार जड चुकीथी तब देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचके आपसमे होंठ चीपका लीये तो देवायत समज गयाथाकी मंजु जड रही हे उसे अपने लंडपे मंजुके गरम पानीका अहेसास हुआ ओर थपकीकी आवज फच..फच..फच..आवाजमे बदल चुकी थी तब देवायत जोरोसे मंजुको सोट मारते चोदने लगा

ओर जुकके मंजुलाकी गरदनमे हाथ डाल दीया, मंजुलासे पुरी तराह चीपकके बाहोमे भीच लीया ओर अपनी कमरको जटके मारने लगा तब मंजुलाने दोनो हाथ देवायतकी पीठमे रखते उसे बाहोमे कस लीया तभी उसे अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम गाढा पानी महेसुस होने लगा ओर देवायत उनके सीनेपे सर रखके ढेर होगया तब मंजुला उनकी पीठ सहेलाती रही ओर दोनो अपनी सांसको दुरस्त करते अ‍ेसेही पडे रहे

मंजुला : जानु..आजतो मजा आगया..कीतना जोरोसे करतेथे आप..अभीभी अंदर गरम लग रहा हे..

देवायत : डार्लींग आजतो पुरी रात मुजे तेरी चुदाइ करनी हे..क्या मस्त चुत हे तेरी..

मंजुला : (हसते) जानु देखना मेरी हालत ना खराब हो जाये..वरना सुबह बा ओर बापुजी देखेगे..हें..हें..हें..

देवायत : बेबी आप भावुकी बात अपनी बासे करलो हमारे भानुके लीये वो बहुतही अच्छी लडकी हे

मंजुला : (हसते उनके सरको सहेलाते) ठीक हे..बाबा मे बा से बात कलुगी..हमारे भानुभाइके लीये मेरी भावुही ठीक हे कीसीभी तराह मे ये रीस्ता करवाउगी..बस..अबतो खुस होजाइअ‍े..हें..हें..हें..

तब हसते वापस देवायत अपनी कमर हीलाने लगता हे ओर अ‍ेक बार फीर दोनोके बीच घमासान चुदाइ होती हे फीर २० मीनीटकी धुआधार चुदाइके बाद दोनोही साथमे जड जाते हे ओर अ‍ेक दुसरेकी आगोसमे चीपकके सो जाते हे अ‍ेसेही दीन नीकलने लगे तब दुसरी ओर चंदाकोभी चेइन नही मीलताथा अब वो हर रात करवटे बदलते रहेतीथी फीर उंगलीसे अपने आपको सांत करके देर रात सो जाती थी

अब उनको देवायतके आगोसकी सख्त जरुरत थी वो धिरेनको दो दीनके लीये बहार भेजनेकी योजना बनाने लगी तभी मंजुलाका फोन आगया वो तीन दीनके लीये मायके जाने वालीथीतो मौसीकोभी बुलानेके लीये फोन करदीया तब चंदाने बडीही सावधानीसे तबीयत खराब होनेका (पीरीयड) बहाना बनादीया ओर धिरेनको भेजनेकी बात करली फीर मनही मन रोमांचीत होते खुस होने लगी..तब धिरेन आता हे..

चंदा : बेटा तेरी मंजु दीदीका फोन आयाथा वो मौसीके घर आ रहीहे तुजे याद कर रहीथी क्या वहा जाना हे..? मेनेतो कहा धिरेन आजायेगा मेरी तबीयत ठीक नही हे..तो चला जा..

धिरेन : (खुस होते) ठीक हे मम्मी..दीदी कब जा रही हे..? मेतो आजही चला जाउगा..

मंजुका कोइ भाइ नहीथा ओर धिरेन उनकी मौसीका अ‍ेक लौता बेटाथा तब मंजुके बा बापुजीभी धिरेनको बहुत प्यार करतेथे ओर उनको अपने बेटेकी तराहही रखते थे तब धिरेनकोभी वहा ज्यादा लाड प्यार मील रहाथा तो वो हमेसा मौसीके घरजानेको रेडीही रहेता था राखीके दीनभी मंजुला ओर भावना धिरेनको ही राखी बांधतीथी ओर धिरेनको अपना सगा भाइ मानके खुब प्यार करती थी

दो बहेने अपनी मौसीको सहेलीकी तराह मानते उनसे सब बाते सैर करती थी तब सामकोही धिरेन अपने तीन चार जोडी कपडे लेके नीकल गया तब चंदा खुसीसे छोटे बच्चेकी तराह अपने रुममे जाके उछलने लगी ओर फोनपे देवायतका फोटो देखते उनसे बाते करने लगी फीर उसने देवायतसे बात करनेकी ठानली पर समजमे नही आताथाकी वो उनसे आनेके लीये केसे कहे फीरभी हीमत करते सरमाते फोन करदीया..

देवायत : (चंदाका फोन देखतेही समइलके साथ) आखीर मेरी होनेवाली बीवीको मेरी याद आही गइ..

चंदा : (सरमाके हसते) सुनीये..वो..मंजुका फोन आयाथा..दीदीके वहा जा रही हे..मुजे केह रहीथी..तो मेने बहाना बनाके मना करदीया..वो..धिरेनको भेजदीया हे..अभी चला गया..तीन चार दीन रुकेगा उधर..तो मे अकेली हु..तीन चार दीन..मंजु कब जा रही हे..?

देवायत : (खुस होते) कल..कल सुबह उसे छोडने जा रहा हु..तो फीर छोडके आजाउगा..कुछ लाना हे..?

चंदा : (सरमाते धीरेसे) जी..वो..वो..दो फुलोका हार..वोही लेआना..बाकी जो आपका मन हो..

देवायत : सुनो..वो कल..सादीका जोडा पहेन लेना..हम कही दुर मंदिरमे जायेगे..समज गइनां..

चंदा : (सरमाते) जी..वो जरा..ध्यान रखके आना..इधर सब होते हे..

देवायत : जी..वो मेरी ब्लेक ग्लास वाली गाडी लेकेही आजाउगा..उसमे नही दीखाइ देता..सीधे अंदरसे ही चले जायेगे..ओर अंदरही आजायेगे..कीसीको नही पता चलेगा..कुछ नही दीखाइ देता उसमे..

चंदा : जी..मे इन्तजार करुगी..रखती हु..

कहेके फोन काट दीया ओर चंदा अपने सीनेपे फोन रखते आंख बंध करते खुस होजाती हे ओर हसने लगती हे वो आज बहुतही रोमांचीत हो रहीथी फीर मोबाइलमे देवायतके फोटोके साथ बच्चेकी तराह बाते करने लगी अ‍ेसेही साम ढल गइ, मंजुला तीन चार दीनके लीये जाने वालीथी तो आज देवायतने रातमे वायग्रा खाली ओर इस रात मंजुलाकी पुरी रात तीन बार जमकर चुदाइ की तब मंजुलाकी हालत खराब हो चुकीथी वो ठीकसे चलभी नही पा रहीथी फीर देवायतने उसे पेइनकीलर देदी ओर दोनो चीपकके सो गये

सुबह तक मंजुला काफी हद तक ठीक होगइ आज वो सादीके बाद पहेली बार अ‍ेसे अपने पतीके साथ जा रहीथी तो सज सवरके तैयार होगइ तब देवायतने फीरसे उसे बाहोमे भीचलीया ओर होंठ चुमने लगा तब वोभी देवायतका साथ देने लगी फीर जटसे अलग होगइ ओर देवायतके सीनेपे मुका मारदीया..

मंजुला : बस कीजीये आपकोतो बस प्यार करनाही सुजता हे..चलीये बहार..

देवायत : (हसते) डार्लींग क्या कयामत लग रहीहो चलना अ‍ेक राउन्ड फटाफट खडे खडे होजायेगा..

मंजुला : (जुठे गुस्सेसे) कोइ जरुरत नही..पुरी रात सोने नही दीया..हालत खराब करदी..फीरभी जी नही भरा..बाबु तीन दीनकीतो बात हे फीर मे मेरे बेबीको खुब प्यार करुगी चलो मेरे अच्छे बच्चे..हें..हें..हें..

तब देवायत इनकी अ‍ेसी सरारत देखके हसने लगता हे ओर अ‍ेक बार फीरसे उसे बाहोमे भरके होंठ चुमलेता हे फीर दोनो बहार आजातेहे ओर चाइ नास्ता करलेते हे तब मंजुला अपने सरपे पलु रखते अपने सास ससुरके पांव छुती हे फीर बहार जाने लगती हे तब देवायतभी जाते जाते अपने बा बापुजीको कहेता हे की मे इसे छोडके सहेर जा रहा हु वहा दो दीनका काम हे तो मेरी राह मत देखना.. कहेके गाडीमे बेठ जाताहे तब मंजुलाभी साथमे बेठ जातीहे ओर देवायत कार लेके नीकल जाता हे..

मंजुला : (हसते) आज कल बहुत कुछ छुपाते हो..आपने सहेर जानेकी बात क्यु नही की..

देवायत : (हसते) अरे बेबी येतो तुम दो तीन दीनके लीये जा रहीहो तो तीन चार काम बाकी था तो सब नीपटाने जा रहा हु कलतो आजाउगा..तु फोन करना तब लेने आजाउगा..

मंजुला : (हसते) ठीक हे..मे फोन करुगी..तो जल्दी आना फीर वहा खाना खाकेही आजायेगे..बा केह रहीथी..तो परसो सामकोही आजाना..अब आपके बीना मुजेभी वहा अच्छा नही लगेगा..आदतजो पड गइ हे..

देवायत : (हसते) इसीलीये केह रहाथा अ‍ेक राउन्ड करले..हें..हें..हें..

मंजुला : (देवायतको बाजुमे मुका मारते सरमाके हसते) अ‍ेक लगाउयीना..मे वो नही केह रहीथी..बाबु आपका साथ अच्छा लग रहा हे इनकी आदतकी केह रहीथी..हें..हें..हें..

देवायत : सुनो वो बा बापुजीसे भावनाकी बात करके आना..हमारे भानुके लीये..भुलना मत..

मंजुला : (हसते) हां बाबा हां..मुजेभी ये रीस्ता करनाही हे..हमारे भानुभाइ बहुत अच्छे हे..बात करुगी..

तब अ‍ेसीही बाते करते दोनो जा रहेथे तब मंजुलाने सरारतके इरादेसे देवायकी जांगपे हाथ रखदीया ओर उनकी ओर तीरछी नजरोसे देखते जांघको सहेलाने लगी तब देवायतसे कंटड्ढोल नही हुआ ओर गाडी सीधी जंगलमे मोडली तब मंजुला उसे हसते हुअ‍े रोकनेकी कोसीस करती रही ओर अ‍ेक सुमसान जगाह कार रोकके मंजुलाको लेके पीछली सीटपे चला गया

ओर लंड नीकालके बेठ गया ओर मंजुलाकी सारी कमर तक उची करके अपनी जांगोके बीच बीठा दीया ओर लंडको चुतमे सरका दीया ओर उछलते बेठे बेठेही मंजुकी चुदाइ कर डाली जब दोनो जड गये तब मंजु उनके सीनेपे हसपे हुअ‍े मुके मारने लगी फीर दोनोनेही अपने पार्ट साफ करलीये ओर कपडे सही करके चल पडे तब देवायत मंजुकी ओर देखते जोरोसे हसने लगा तो मंजुला ने कहा..

मंजुला : (हसते कातील नजरोसे) तुम बहुतही कमीने हो कोइ अ‍ेसे करता हे..?

देवायत : (हसते) क्या करु डार्लींग..तुम मस्त दीखती हो, तुमने हीतो गरम करदीया था..हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) अरे बाबा अबतो कभी आपको नही छेडुगी..भुगत लीया मेने..हें..हें..हें..

अ‍ेसेही मस्ती मजाक करते दोनो पहोंच गये वहा बडेही उत्साहके साथ दोनोका स्वागत हुआ तब सबसे ज्यादा भावना खुस हुइ देवायतको देखतेही वो कामाग्नीमे जलने लगी ओर अपनी चुत गीली करली तब फटसे बाथरुममे घुस गइ ओर उंगलीसे अपने आपको सात करके वापीस बहार आगइ तब धिरेन ओर देवायत बातोमे मसगुल थे फीर भावना ओर धिरेनने देवायतकी खुब टांग खीचाइ की..

फीर चाइ पानी पीकर देवायत नीकल गया ओर रास्तेसे दो फुलोका हार लेलीया फीर अ‍ेक ज्वेलेरीकी सोपसे मंगलसुत्र ओर अ‍ेक डायमंड नेकलेस भी लेलीया ओर सीधेही चंदाके घर पहोंच गया कार सीधीही अंदर लेली ओर जटसे उतरते आजु बाजु सब देखते अंदर चला गया तब कारकी आवाज सुनके चंदा दरवाजेके पीछेही खडी होगइ जेसेही देवायत अंदर आगया तो चंदाने तुरंतही दरवाजा बंध करदीया

फीर नजर जुकाके वही खडी रही, देवायतने दरवाजेकी आवाज सुनी ओर चार कदम चलके पीछे पलट गया तो वहा चंदा नजर जुकाके खडीथी तब देवायतने दोनो हाथ फैला दीये तब चंदा दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर अपनी सांसे तेज होगइ तब देवायतने उसे कसके बाहोमे भीच लीया..

दोनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे काफी देर खडे रहे तब देवायतने अलग होते उनके दोनो हाथ पकड लीये ओर उनकी आंखोमे देखने लगा तब अ‍ेक बार फीर चंदा उनकी बाहोके समा गइ ओर देवायतके सीनेपे सर रखदीया तब देवायत उनकी पीठ सहेलाता रहा चंदा पुरी तराह सादीका जोडा पहेनके आइथी तब देवायतने उनको अपनी गोदमे उठालीया ओर सोफेकी ओर चल पडा तब चंदा अबभी उनके सीनेसे चीपकी थी

देवायत : (सोफेपे बीठाते) तो मेरी बीवी दुल्हन बन ही गइ..चल देर हो रही हे..

चंदा : (सरमाते) बस आपहीका वेइट कर रहीथी..क्या फुलहार लाये हे..? तो फीर कुछ सामान लेनाहे आप बैठो मे अभी आती हुं..

कहेके वो रुममे चली गइ फीर थोडी देरके बाद अ‍ेक केरी बेग लेके आगइ उसमे देवायतने दीया हुआ डड्ढेस ओर सींदुरकी डीबी वगैरे लेलीया तब देवायतभी खडा हो गया ओर दोनोही बहार जाने लये तब पहेले चंदाने बहार सर नीकालके आजु बाजु सब देखलीया जब कोइ नजर नही आया तब देवायतको जटसे कारमे बेठनेको कहा, जब देवायत नीकलके कारमे बेठ रहाथा तब चंदाने फटाफट ताला लगादीया ओर दोडके देवायतकी बाजुकी सीटमे बेठ गइ ओर देवायतने कार तेजीसे जाने दी..

चंदा : (देवायतकी ओर हसते) हम..कीधर जायेगे..आपने कुछ तैय कीया हे..?

देवायत : हां आगे जंगलमे हे अ‍ेक मंदिर वही जाना हे..वहा कोइ नही आता सीर्फ सालमे दो बार कबीलेके लोग आते हे..उनकाही मंदिर हे.., चंदा आज तु मस्त दीखती हे मुजसे पहेले क्यु नही मीली..?

चंदा : जब मेरी सादी हुइ तब आप थोडे छोटे थे नये नये जवान होगे..हें..हें..हें..क्या कीसीको मालुमतो नही हेकी आप इधर आये हो..?

देवायत : (उनकी ओर हसते) नही..सहेरका बोलके आया हु..बस अब ये दो दीन सीर्फ मे मेरी इस बीवीके साथही हु..ये दो दीनमे दुनीयाकी सब खुसीया तुजपे लुटानेको तैयार हु..

चंदा : देवु..पता नही अ‍ेक डरसा लग रहा हे..कही मे मंजुको धोखातो नही दे रही.., देखना उनको हमारे रीस्तेके बारेमे पता ना चले..वरना मे जी नही पाउगी..

देवायत : चंदा फीकर मत करो हमारे रीस्तेके बारेमे सीर्फ हम दोनही जानते होगे कीसीको पता नही चलेगा..

अ‍ेसीही बाते करते देवायतने कार सीधेही जंगलमे मोडदी जब वहा पहोंचे तब ११ बज चुकेथे पुरे जंगलमे कोइ नही था बस थातो..केवल..सनाटा ओर कुछ पक्षीओके कीलबीलाहट की आवाज, मंदिर बहुतही पुराथा अ‍ेक खंढहरकी तराह अंदर परीसरमे पेडके सुखे पते थे ओर अंदरभी सुखे पते ओर सुखे हुअ‍े फुल नजर आ रहेथे तब देवायतने कुछ पते हाथसे हटाये ओर वहीसे अ‍ेक दीया ओर अगरबती जलाइ

चंदा : देवु लगता हे ये बहुतही पुराना मंदिर हे यहा कोइ आता नही होगा..

देवायत : चंदा..ये कबीले वालोका मंदिर हे वो सालमे सीर्फ दो बारही इधर आते हे या फीर कोइ भागके सादी करना चाहतेहे तभी इधर आके भगवानके सामने सादी करलेते हे तबही उनकी सादी जायज मानी जाती हे..

चंदा : (हसते) आपतो कबीलेके बारेमे काफी कुछ जानते हो..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां..उन लोगोकी सब सम्यस्याका मेही समाधान करवाता हु वो मेरी सब सुनते हे..

चंदा : (जोरोसे हसते) तबतो सब कबीलेके सरदार आपही हो हें..हें..हें..

देवायत : (उनकी ओर देखते हसते) तो फीर..,मेडम आप भुल रहीहे अ‍ेक जमानेमे हमारे पुर्खो यहाके राजा हुआ करतेथे तबसेही सब कबीले वाले हमे बहुत मानते हे..उनके लीये हम आजभी उनके राजा हे..

चंदा : (सरारतसे हसते) अच्छा..? तो क्या आज मे इस राजाकी रानी हो जाउगी..हें..हें..हें..?

देवायत : (हसते) अफकोर्स..तुम ओर मंजु इनके लीये रानीही हो..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते कातील नजरसे) ओर आपके लीये...?

देवायत : (उनके पास आते बाहोमे भीचते) अरे आपतो मेरी रानीतो होही..मेरे जीगरके टुकडेभी हो..

तब चंदा देवायतके सीनेमे सर रखते आंख गीली करलेती हे ओर देवायतकी बाहोमे अ‍ेसेही खडी रहेती हे तब देवायत उनको अलग करता हे ओर जेबसे रुमाल नीकालके उनकी आंख पोजता हे फीर उसे मंदिरके सामने लेजाता हे ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने खडे हो जाते हे..तब देवायत दोनो हार नीकालके अ‍ेक चंदाके हाथोमे देता हे ओर चंदाकी ओर धुमके दोनो अ‍ेक दुसरेके सामने खडे होते हे तब देवायत कहेता हे..

देवायत : चंदा आज मेरी जींदगीका सबसे हसीन दीन हे मेरा प्यार पवित्र हे मुजे हार पहेनाके अपनालो..

तब चंदा नजर जुकाके दोनो हाथ उचा करते देवायतके गेलेमे हार पहेना देती हे..तब देवायतभी चंदाको हार पहेना देता हे.. तब देवायत चंदाका हाथ पकडलेता हे ओर उसे मंदिरके बहार लेआते मंदिरकी प्रदक्षीणा करने लगता हे तब चंदा सीर्फ देवायतको देखते उनके पीछे पीछे चलने लगती हे जब तीन प्रदक्षीणा करली तब देवायत चंदाको आगे करदेता हे ओर खुद उनके पीछे चलने लगता हे फीर दोनो अंदर चले जातेहे तब..

देवायत चंदाका हाथ पकडके रखता हे ओर वो सारी कसमे खाता हे जो अभी मंजुके साथ सादीके वक्त खाइथी तब चंदाभी वो सब कसमे दोहराती हे जो मंजुलाने खाइथी ओर देवायतको पतीके रुपमे समर्पीत होनेकी कसमे खातीहे ओर उसे अपना पती मानलेती हे, देवायतभी चंदाको पत्नीके रुपमे स्वीकार कर लेता हे ओर उसे पुर्ण समर्पीत होता हे तब देवायत उसे जेबसे मंगलसुत्र नीकालके पहेनाता हे ओर दोनो हाथ जोडके नमन करते हे

तभी चंदा अपनी केरी बेगसे सींदुरकी डीबी नीकालके देवायतको थमा देती हे तब देवायत अ‍ेक चुटकी भरते चंदाकी मांगको भरने लगता हे तब चंदा आंख बंध करते आंसु बहाने लगती हे तब देवायत उनकी मांगको भरदेता हे तब चंदा आज अपने पुराने पतीके सब बंधनोसे मुक्त होनेका सोचते जोरोसे रोते हुअ‍े देवायतके सीनेपे सर रखते फुटफुटके रोने लगती हे तब देवायत उसे बाहोमे भरते उनकी पीठ सहेलाता हे..

देवायत : (उनके आंसु पोछते) बस..चंदा..सांत होजा..आज मे तुजे पत्नीके रुपमे पाकर धन्य हो गया..

चंदा : (रोते) देवु..आजमे मेरे पतीसे छुटके आजाद होगइ..मेरा पुराना सब अस्तीत्व मीट गया ओर मेने अपने आपको तुम्हे पुर्ण समर्पीत करदीया अब मेरी सब पहेचान आपही हो.. मेने मेरी जी्रदगीका बहुत बडा कदम उठालीया हे मुजे भुलना मत वरना मे नही

जी पाउगी..

देवायत : (आंसु पोछते) बस बेबी कीतना रोयेगी..मेने तुजे अ‍ेसेही अपनी हवसके लीये नही अपनाया मे तुमसे ओर मेरी मंजुको जी जानसे चाहता हु हमारा प्यार पवित्र हे, तु सही मायनोमे मेरी बीवीही रहेगी..बस अभी तुमको सबके सामने नही अपना सकता, ओर वादा करता हु जबभी अ‍ेसी सीचुअ‍ेशन आगइ तब मे दुनीयाके सामने पत्नीके रुपमे अपना लुगा..आइ प्रोमीस..

चंदा : (जटसे देवायतसे अलग होते उनकी आंखोमे देखते) नही देवु..अ‍ेसी गलती कभी मत करना मे अ‍ैसेही रेह लुगी..मुजे सबसे छुपके आपकी बीवी बनके रहेना हे..मे मंजुकी नजरोमे गीरना नही चाहती..

देवायत : (उसे जोरोसे बाहोमे भीचते) चल..ठीक हे मेरी बीवीको मे सबसे छुपाके रखुगा बस..ओर आजसे तेरी हर जरुरतको मे पुरी करुगा, ओर आपके बेटेकोभी अपना लुगा बोलो ओर क्या चाहीये आपको..?

चंदा : (उनका सीना सहेलाते) देवु..आप नही..तुम कहो..आज आपकी आगोसमे बडाही सुकुन मीला हे..

देवायत : चंदा अब कहा जाना हे..? हम ये दो दीन सहेरमे चले जाये..? मेरा मतलब कीसी होटेलमे..

चंदा : (सरमाते धीमेस) नही देवु मेने घरपे सब इन्तजाम करके रखा हे..आप कारको पीछे हमारे आंगनमे रख देना हम दो दीन अंदरही रहेगे..मेरा मतलब..(कहेके सरमा के नजर जुकाली..)

देवायत : चंदा धर जाकेभी वो सब खाना बाना बनाना पडेगा, हम देर साम आजायेगे तबतक सहेरमे जाके पहेले खाना खा लेगे फीर कही घुमके सामका खाना खाके आजायेगे..तबतक गांव वालेभी सो गये होगे..

चंदा : (सरमाते हसते) जेसे आपकी मरजी.. इधर पासके सहेरमे नही..कही हम दुसरे सहेरमे..जायेगे..

देवायत : (हसते हाथ पकडते बहार चलते) चलो..आज मेरी बीवी मेरे साथ घुमने आ रही हे..

चंदा : (हसते सरमाते) देवु आप इधर ठहेरो मे कपडे चेन्च करदु..साथ मे लेके आइथी..

कहेके वो केरी बेग लेके मंदिरके पीछे चली गइ ओर थोडी देरके बाद वो डड्ढेस पहेनके आइ जो मेने उस दिन दीलवाया था तो आके स्माइल करते खडी रही ओर सरमाके कहा..

चंदा : उधर हमे कोइ नही पहेचानेगा..कीतने दीनोके बाद ये पहेना हे..

तब मे उसे देखताही रेह गया वो बीलकुल छोटी लग रहीथी मेरी मंजुकी तराह फीर हम कारमे बेठ गये ओर कार मेने थोडे दुरके बडे सहेरकी ओर लेली रास्तेमे हमने अ‍ेक होटेलमे खाना खाया फीर वापस सहेरकी ओर नीकल गये आज चंदा बहुुत खुस लग रहीथी वो बार बार अपने कानके पीछे बालोकी लटको सही करते मेरी ओर देखते हसती रही ओर वो अपने घरके बारेमे बताती रही..ओर हम सहेर पहोच गये..

देवायत : (सामने देखते) फिल्म देखने चले..? कीतने दीन हो गये..नही देखी..

चंदा : (सरमाते हसते) आपका मन हेतो चलो..देरतो नही होगी..?

देवायत : नही अ‍ेसा हेतो हम आधी छोडके चलेगे..फीर खाना खाके चले जायेगे..

तब चंदाने सरमाते हां मे गरदन हीलाइ तो देवायतने कार अ‍ेक टोकीझमे लेली ओर कार पार्क करके दोनो अंदर चले गये तब देवायतने दो कोर्नरकी टीकीट लेली ओर दोनो अंदर चले गये तब फील्म सुरु हो चुकीथी तब अंदर अंधेरा थातो अंदर जातेही चंदाने देवायतका हाथ पकड लीया ओर उनके पीछे जाने लगी ओर अपनी सीट ढुंढके दोनो बैठ गये चंदाको देवायतने कोर्नरपे बीठाया ओर खुदभी बैठ गया..

देवायत : (धीरेसे कानमे) चंदा तु इस डड्ढेसमे बीलकुल छोटी कुआरी लडकीकी तराह लग रही हो..

चंदा : (सरमसे पानीपानी हो गइ) क्या..आपभी.., मुजेतो बहुत सरम आ रही हे..बहुत दीन हो गये नही पहेना..सादी होगइथी..तो गांवमे नही पहेन सकते..उपरसे मेरे ससुर सरपंच..

देवायत : (हसते) अगर मेरे घरमे मेरी बीवी बनके आती तो तुम्हे बा बापुजेके जानेके बाद अ‍ेसे डड्ढेस पहेनाके रखता..हें..हें..हें.., क्या हमारे यहा आना चाहोगी..मे मंजुको मना लुगा..

चंदा : (सरमाते हसते) नही..जब आप मुजसे मीलने आओगे तब पहेनुगी..सीर्फ घरमेतो रहेना हे..मंजुको कुछ मत कहेना..मे सबसे छुपाके आपकी बीवी बनके रहेना चाहती हु..धिरेनभी अब सब समजने लगा हे..

तब देवायतने चंदाके हाथके उपर अपना हाथ रख दीया फीर आपसमे उंगलीया फसाके हाथको मजबुतीसे पकड लीया तब चंदा खुब सरमाइ ओर दोनो हाथ पकडके फील्म देखने लगे तब थोडी देरके बाद अ‍ेक चुंबनका होंट सीन आया तब देवायतने हाथको जोरोसे मुठीमे दबाव बनाके चंदाकी ओर देखा तब चंदा सरमसे पानीपानी होते हसने लगी ओर देवायतने दुसरा हाथ धीरेसे उनके उरोजो पे रख दीया..

तब चंदा सरसे पांव तक हील गइ ओर फोरन अपना हाथ देवायतके हाथपे रखदीया ओर दबा दीया लेकीन हटानेकी कोसीस नहीकी क्युकी अब वो देवायतकी पत्नीथी तो सोचके देवायतकी हरकतको नही रोक पाइ तब देवायत उसे हल्केसे दबाने लगातो वो उतेजीत होने लगी ओर उनकी चुतमे हरकत होने लगी उनकी सांसे तेज होने लगी ओर थोडा अनकन्फोर्टेबल फील करने लगी, उनकी चुतमे रीसाव सुरु हो गया..

तभी अचानक देवायतने उनकी गरदनमे हाथ डालदीया ओर उनके चहेरेको अपनी ओर खीचलीया तब चंदाने सरमाते देवायतकी ओर देखा तब देवायत उनकी ओर मुह करते तयारही बेठाथा ओर उसने चंदाके होंठोसे अपना होंठ मीला दीया..तब चंदा अ‍ेकदम सरमसे कांप गइ ओर अपनी आंख बंध करली तब देवायत उनके होंठको हल्केसे चुमता रहा तो चंदाभी उतेजीत होगइ ओर देवायतका साथ देने लगी..

तभी उनको अपनी चुतपे देवायतका हाथ महेसुस हुआ जो देवायत धीरे धीरे डड्ढेस के उपरसे ही सहेला रहाथा तब उनकी पुरी पेन्टी गीली होने लगी, तब चंदासे कंट्रोल करना मु्सकील होगया उसने देवायतका हाथ पकडलीया ओर देवायतको रीक्वेस्ट वाले अंदाजमे धीरेसे कहा..

चंदा : (सरमसे) प्लीज..हम घर चलते हेनां..तब आप..प्यार..करलेना..अभी सब हे..सरम आ रहीहे..घर चले?

तब देवायतने उनकी बात मानके हाथ हटालीया फीर दोनोने इन्टरवल तक फील्म देखली ओर चंदाके कहेनेपे दोनो बहार आगये फीर अ‍ेक जगाह दोनोने आसक्रिम खाइ ओर गार्डनमे अ‍ेक दुसरेका हाथ पकडके धुमते रहे तब साम होतेही दोनोने अ‍ेक रेस्टोरन्टमे जाके खाना खालीया ओर फीर कार लेके वापस गांवकी ओर चलने लगे..तब चंदा बार बार देवायतकी ओर देखते हस रहीथी अबवो देवायतसे बात करनेमे काफी खुल गइथी ओर देवायतसे बीन्दास्त बाते करने लगी..

चंदा : (सरमाते हसते) आप अंदर क्या हरकत कर रहेथे..? कीसी जान पहेचान वालेने देखलीया होता तो..?

दुवायत : (हसते) तो क्या हुआ मे मेरी बीवीसे प्यार कर रहाथा कीसी ओरसे नही..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) मत भुलो बीवी सीर्फ हम अकेलेहे तब हु..हमारे रीस्तेके बारेके कीसी ओरको नही पता.., कीसी ओरको पता चलातो वहा रहेना मुस्कील हो जाता..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) तो क्या हुआ..मेरे यहा चली आना..सबके सामने अपना लेता..

चंदा : (तीरछी नजरसे हसते) अच्छा..? इतनी हीमंत हे आपमे.? चलो मे रेडी हु..हें..हें..हें..

देवायत : (उनके सामने देखते) क्या..सचमे आना चाहती हो..? तो बोलो मे तैयार हु..में मंजसे बात करता हु तुम आजाओ..अभीके अभी..हम सीधे मेरे घरही चलते हे..बा बापुजीको मे सम्हाल लुगा वो मना नही करेगे..

चंदा : (जोरोसे हसते) अरे मेतो मजाक कर रही हु..हें..हें..हें..आपतो सीरीयस हो गये..हें..हें..हें..

देवायत : लेकीन बेबी..मे मजाक मे नही केह रहा.., सच केह रहा हु..चलो..हम सीधे हवेली जाते हे..

चंदा : (सीरीयस होते) नही देवु..बरसोके बाद मुजे मेरा प्यार मीला हे..मेरा पहेला प्यार..जो मे अकेले पुरी जींदगी जी लेना चाहती हु..तुम्हारे साथ..सबसे छुपके ओर मे चाहतीहु जब इस दुनीयासे जाउ तब सुहागन बनके जाउ फीर भलेही मेरे रीस्तेके बारेमे सबको पता चले..कास आप मुजसे पहेले मीले होते..

कहेके अपना सर जुकालीया ओर उनकी आंखसे आंसुके दो बुंद टपक गये वो बडीही भावुक होगइ थी तब जाके देवायत उनके प्यारकी गहेरायको महेसुस करने लगा वो बस उसे अ‍ेक नजरसे देखताही रहा..फीर कार चलाते अ‍ेक हाथ उनके हाथके उपर रख दीया तो चंदा जटसे आंसु पोछके देवायतकी तरफ देखके हसने लगी..ओर देवायतका हाथ पकडके उसके हाथमे चुंबन करलीया..

तब देवायतको उनकी आंखमे उनके लीये बेसुमार प्यार महेसुस हुआ..अ‍ेसेही इमोस्नल बाते करते दोनो घर आ गये तब गांवमे काफी अंधेरा छा गयाथा सबलोग अपने घरमे जा चुकेथे देवायतने कार सीधी ही दरवाजेसे उनके आंगनमे लेली तब आगे चंदाको उतारके कार पीछे आंगनमे लेगया ओर वही कार खडी करके वो आगेकी ओर पेदल चला आया तबतक चंदा गेइट बंध करके दरवाजा खोलके अंदर चली गइथी जेसेही देवायत अंदर आया चंदाने जटसे दरवाजा बंध करलीया..ओर दोडके देवायकी बाहोमे समा गइ....

कन्टीन्य
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ६


तब देवायतको उनकी आंखमे उनके लीये बेसुमार प्यार महेसुस हुआ..अ‍ेसेही इमोस्नल बाते करते दोनो घर आ गये तब गांवमे काफी अंधेरा छा गयाथा सबलोग अपने घरमे जा चुकेथे देवायतने कार सीधी ही दरवाजेसे उनके आंगनमे लेली तब आगे चंदाको उतारके कार पीछे आंगनमे लेगया ओर वही कार खडी करके वो आगेकी ओर पेदल चला आया तबतक चंदा गेइट बंध करके दरवाजा खोलके अंदर चली गइथी जेसेही देवायत अंदर आया चंदाने जटसे दरवाजा बंध करलीया..ओर देवायकी बाहोमे समा गइ....अब आगे

चंदा : (सरमसे सीनेमे सर रखते) बाबु..आप इधर बेठो मे चेन्ज करके तैयर होजाती हु फीर ठोडी देरके बाद आप उपर आजानां मेरे रुममे.. सब लाइट बंध करके आना मे पानी लेकर जा रही हु..

तब देवायत सोफेपे बेठ गया तो चंदा कीचनमे चली गइ उनकी लंबी चोटी लहेराते देवायत देख रहाथा तब चंदा उनकी ओर स्माल करते सरमाती कीचनमे चली गइ ओर अ‍ेक टड्ढे मे दो ग्लास पानीकी बोटल सब लेके उपर चली गइ ओर देवायतभी रुममे स्वीच बोर्ड ढुंढने लगा तब उसे बोर्ड नजर आया तो वो उठके सब लाइट फीर पंखा चेक करते बंध करने लगा ओर वापस सोफेपे जाके बेठ गया ओरथोडी देरके बाद..

चंदा : (उपर सीडीयोसे) देवु..बस दो मीनीट फीर आप आजाना..

तो देवायतके दीलकी धडकन बढ गइ क्युकी आज अ‍ेकही महीनेमे उनकी दुसरी सुहागरात होने वाली थी वोभी दुसरी बीवीके साथ..वेसेतो देवायत कीतनी ओरतोको चोद चुकाथा उनके कइ अ‍ेसे रीस्तेथे जो उनका दोस्त भानुभी नही जानता था.., देवायत अ‍ैसे रीस्तेका बहुतही सौकीन था ओर कुछ रीस्ते मेतो ओरत सामनेसे देवायतसे सबंध रखनेको राजीथी इनमे रजीया दया जमीला भानुकी मां ओर सरपंचकी बीवीभी थी..

तब देवायत भारी धडकनके साथ धीरे धीरे उपरकी ओर सीडीया चडने लगा ओर पहेली बार चंदाने उनको बेडरुम दीखाया था जहा उसने चंदाको पहेली बार कीस कीयाथा वही रुमकी ओर जाने लगा पुरे बंगलेमे अंधेरा छाया हुआथा ओर वो दरवाजेके पास जाके दरवाजेको हल्कासा धका देदीया तो दरवाजा धीरेसे खुल गया तो रुममे अंधेरा छाया हुआथा ओर नाइट बल्ब जल रहाथा..अंदर जाके देखातो..

चंदा अपने बेडके बीच घुंघट डालके बेठीथी ओर पुरा बेड फुलोसे सजा हुआथा साइडमे टेबलपे दो दुधके ग्लास ढकके रखेथे तब देवायत समज गयाकी चंदाने सुबह सेही सब तैयारीया करके रखीथी..वो जाके बेडपे बैठ गया, चंदा घुंघटमे दोनो पैर मोडके अपने दोनो हाथ अपने घुटनोपे रखके बेठीथी तब जाके देवायतने धीरेसे उनका घुंघट उठालीया तो देवायत देखके दंग रेह गया..

क्युकी चंदा पुरी तराह दुल्हनके लीबासमे सजी हुइ थी ओर अपनी नजर जुकाये देवायतका इन्तजार कर रहीथी..जेसेही देवातके कदमोकी आवाज सुनी उनके दीलकी धडकन बढ गइ ओर आने वाले पलको महेसुस करते बडीही रोमांचीत होगइ जब देवायतने घुंघट उठाया तब उनकी सांसे तेज चलने लगी..तभी देवायतने जेबसे डायमंडका नेकलेस नीकाला ओर चंदाको पहेनाने लगा..तब चंदा बडीही खुस होगइ..

ओर देवातके आगे जुक गइ तब देवायत समज गयाकी चंदा उसे खुद पहेनानेको केह रही हे..तब देवायतने चंदाके कंधेकी ओर मुख करलीया ओर पीछे नेकलेस पहेना दीया फीर चंदाके गालोपे दोनो हाथ रखके सहेला दीया तो चंदाने आंख बंध करली..

देवायत : बहुतही खुबसुरत लग रही हो..देखके पागल हो गया मे..जेसे भगवानने तुजे सीर्फ मेरे लीयेही बनाया हे.., क्या हम जनमो जनम नही मील सकते..?

चंदा : (सरमसे पानीपानी होते) जी..हम मीलके भगवानसे प्रार्थना करेगे..मेभी मीलना चाहती हु..

तभी देवायत उसरे अचानक बाहोमे भरलेता हे तो चंदाभी आंख बंध करते देवायतकी बाहोमे समा जाती हे दोनोही काफी देर अ‍ेक दुसरेकी आगोसमे बेठे रहे तब देवायत उसे बाहोसे अलग करता हे ओर उनके चहेरेको पकडके अपने चहेरेकी ओर करने लगता हे तब चंदा समज जाती हे ओर अपनी आंख जुकाके बंध करलेती हे तभी उसे अपने होठोपे देवायतके होंठ महसुस हुअ‍े ओर वो मदहोसीके आलमकी ओर ढलने लगी..

उनकी आंखे नसीली होने लगी बंध आंखमेही अपनी आंख उपरकी ओर चढाली..आज वो पुरी तराह देवायतकी हो जाना चाहती थी आज अपना सबकुछ देवायतपे लुटाना चाहती थी इतना प्यारा अहेसास तो उनको अपनी पहेली सुहागरातमेभी नही होरहा था क्युकी वो अपने मा बापकी चोइसका लडका था जो दोनोकी अ‍ेरेन्ज मेरेज हुइथी ओर आज वो अपना यार अपने प्रेमीके साथ मीलन करने जा रही थी..

दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ हल्के हल्के चुस रहेथे तब देवायतका हाथ उनके बुब्सपे चला गया जो ब्लाउसके उपरसेही हल्कासा दबा रहाथा तब चंदा सरसे पांव तक कांपने लगी ओर बरदास्त नही करपाइ तो अचानकही देवायतको अपनी बाहोमे भीचलीया ओर देवायतके चहेरेको पागलकी तराह चुमने लगी उनके दोनो गाल, गरदन, होंठ उनका सर, उनकी आंख, अ‍ेकभी जगाह नही छोडी बस उसे चुमेही जा रहीथी..

चंदा : (मदहोसीमे लडखडाती आवाजमे) दे..वु..प्लीज..मुजे पुरी तराह अपनी..बनालो..सीइइइइ

तब देवायत उनसे अलग होतेही उनकी सारीके पलुको हटाके ब्लाउसका बटन खोलने लगा तब चंदानेभी हीमत करते देवायतके सर्टके बटन खोल दीये ओर नजर जुकाके बैठी रही ओर देवायतको अपने कपडे नीकालनेमे सहायता करती रही तभी देवायत बेडसे उतर गया ओर अपनी पेन्ट नीकालने लगा तब चंदा पेटीकोट ओर सीर्फ ब्रा पहेनकेही बेठीथी ओर तीरछी नजर करते देवायतके पेन्टके उभारकी ओर देखने लगी..

जब देवायतने पेन्ट नीकाली तब उनके नीकरमे बडासा उभार दीखने लगा तो चंदा सरमसे पानीपानी होते उनके बडे लंडका अनुमान करते तीरछी नजरोसे देखती रही ओर आखीर देवायतने नीकर नीकाल दीया तब उनका लंबा ओर बडा लंड सीधेही उपरकी ओर हवामे लहेराने लगा तो चंदा देखतेही सरमसे पानीपानी होने लगी ओर अपनी नजर दुसरी ओर मुह करते हटाली, मनमे बहुतही खुस होते सरमसे मुस्कराने लगी..

क्युकी देवायतका लंड सामान्यसे थोडा लंबा ओर मोटा था बस यही कारण था जब कोइभी ओरत उनसे चुदाइ करवा लेतीथी तो बार बार उनसे चुदनेकी ख्वाहीस रखने लगती यही कारणथा रजीया दया ओर सरपंचकी बीवी ओर दो बडी उमरकी ओरते..जो हम इनके बारेमे बादमे बात करेगे..हर वक्त देवायतसे चुदनेको तैयार रहेती जीनके बारेमे कीसीकोभी नही मालुम था..वो वापस बेडपे बेठ गया..

तब चंदाके दीलकी धडकन अ‍ेकदम बढ गइ ओर उनकी सांसे तेज चलने लगी तभी उसने अपने पेटीकोटपे खीचाव महेसुस कीया तो देखने लगी तब देवायत उनकी पेटीकोटका नाडा खीच रहाथा ओर उसने जटसे देवायतका हाथ पकड लीया तो देवायतने उनके चहेरेकी ओर देखा तब सरमके मारे हाथ हटालीया ओर सरमाते मंद मंद मुस्कराती रही..

देवायतने उनको दोनो बाजुसे पकडलीया ओर धीरेसे चंदाको बेडपे सुला दीया तब चंदा कोइ वीरोधके बगैर पीठके बल लैट गइ ओर मुह दुसरी ओर करते देवायतसे आंख चुराके सरमाती रही, देवायतने उनका पेटीकोट खीचलीया तब उनकी कमर उची करते देवायतका साथ देने लगी..




अब चंदा सीर्फ अपनी पेन्टी ओर ब्रामेही सोइथी तभी देवायत बाजुमे लेटके चंदाके उपर जुक गया ओर अ‍ेक हाथसे चंदाका चहेरा अपनीओर करलीया फीर उनकी आंखोमे देखने लगा तब अ‍ेक बार चंदाने सरमके मारे उनकी आंखोमे देखा फीर नजर जुकाली ओर बेवायतने उनके होठोपे अपना होंठ रख दीया तो चंदाने अपनी आंख आधी चढाली ओर नसीली करली, तब दोनोही अ‍ेक दुसरेके होंठ चुमते स्मुच करने लगे..

तभी देवायतने उसे बाहोमे भीचलीया ओर खुद पीठके बल लैटके चंदाको अपने उपर खीच लीया तो चंदाकी लंबी चोटी देवायतके चहेरे छागइ जीसे देवायतने पकडली ओर चंदाके चहेरेपे घुमाने लगा तो चंदा सरमसे पानी पानी होते मंद मंद मुस्कराते अपना चहेरा इधर उधर करने लगी..

चंदा : (सरमाके हसते) रहेने दीजीये.. पलीज..गुदगुदी हो रही हे..प्लीज..हें..हें..हें..

तब देवायतने उनका चहेरा पकडलीया ओर अपने चहेरेपे जुकाके कीस करने लगा तब चंदाभी धीरे धीरे मदहोस होने लगी तभी देवायतने हाथ पीछे लेजाके ब्राका हुक खोल दीया तो चंदाकी ब्रा सरकके उनके हाथमे गीरके अटक गइ तब चंदाने हाथ हटाके नीकालके ब्राको साइडमे रखदी, उनके गोरे गोरे बडे बुब्स बहार लहेराने लगे तो देवायतने दोनो बुब्स अपनी मुठीमे लेलीया ओर हल्केसे दबाने लगा तो चंदाने सरमके मारे देवायतकी गरदमे मुह छुपलीया

वो पुरी तराह देवायतसे चीपक गइथी तभी देवायतने फीरसे बाहोमे भीचलीया ओर वापस पलट गया तब चंदा देवायतके नीचे लेटीथी ओर देवायत उनके उपर चडके उनको चुमेही जा रहाथा ओर उनके बुब्स हल्केसे मसल रहाथा तब चंदा काफी उतेजीत हो चुकीथी तब देवायत चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा तब चंदाने उनके सरको पकड लीया ओर मुह इधर उधर करने लगी उनकी चुत लगातार पानी छोड रहीथी..

तभी अचानक देवायतने उनकी पेन्टीमेपे हाथ रखदीया ओर चुतको सहेलाने लगा तब चंदा कांपने लगी ओर आंख बंध करते कुहको इधर उधर करते दोनो हाथसे चदर पकडली ओर जोरोसे सीसकारीया करने लगी, चुतको सहेलाते सहेलाते देवायतने उनकी पेन्टीमे उंगली फसादी ओर नीचेकी ओर खीचली तब चंदाने दोनो पैर मोडके भीचलीये तब देवायतने पेन्टीको सरकाके नीकालदी..

तभी चंदाने अ‍ेक हाथ अपनी चुतपे रखदीया तब देवायत वापस चंदाके उपर छा गया ओर उनके होंठ चुमते अ‍ेक हाथ नीचे लेगया तब चंदाने उसे जोरोसे बाहोमे भीच लीया उसे अपनी चुतमे देवायतकी उंगली महेसुस हुइ ओर वो होंठ चुमते चुमते मु..मु..करने लगी ओर देवायतसे मुह छुडाके जोरोसे सीसकारीया करते देवायतके सरपे हाथ घुमाने लगी तब देवायत धीरे धीरे उनकी चुतमे उंगली डालके चुतके दानेको सहेलाने लगा..

तब चंदा पागल जेसी होगइ ओर आंख बडी करते देवायतका चहेरा पकडलीया ओर उनके होंठपे चुमते होंठ भीचलीया ओर बडी आंख करते देवायतकी आंखोमे देखने लगी तो देवायत चुतके अंदर जोरसे उंगलीको अंदर बहार करने लगा तो चंदा कमर उची करते बेडपे पटकने लगी ओर जोरोसे सीसकारीया करने लगी ..





देवायत अचनाक नीचेकी ओर सरक गया ओर दोनो पेरके बीच आगया तब चंदाने दोनो पैर मोडके फैलादीये ओर जोरोसे दोनो हाथसे चदरको पकडली तभी देवायतने चंदाकी कमरको पकडली ओर थोडी उची करके अपनी जांगोपे रखदी ओर अपना मुह चुतपे लगा दीया इस अचानक हमलेसे चंदा कांपने लगी..

चंदा : सीइइइ..नही..नही..नही..वहा नही..प्लीज प्लीज..कुछ हो रहा हे..ओह..मां..सीइइइइइइ दे..वु..सीइइइइ बस..बस..मां..इइ .ओह...बस..दे..वु..छोड..दे..मर..गइ..

कहते चंदा बरदास्त नही कर पाइ क्युकी उनके पतीने अ‍ैसा उनके साथ कभी नही कीया था ओर वो जबसे गुजर गया तबसे चंदाने अपनी चुतमे कोइ लंड नही लीयाथा, ओर अपनी कमर उची करते बेडपे पटकने लगी ओर सरीर अकडने लगा तब कमरको जटके मारने लगी ओर चुतने फवारा छोड दीया फीर कमरको बेटपे पटकके सांत होगइ ओर अपनी तेज चलती सांसको कंटड्ढोल करते लंबी लंबी सांसे लेने लगी..





तब देवायत बेडसे उतरके बाथरुमकी ओर भाग गया ओर अपना मुह साफ करके फ्रेस हो गया फीर नंगाही बहार आके बेडपे चंदाके साथ उनपे जुकके लेट गया तब चंदा सरमके मारे उनसे नजरे नही मीला पा रहीथी वो मुहको इधर उधर करते देवायतसे नजरे चुरा रहीथी तब देवु उनके बुब्सको मुहमे लेके चुसते हुअ‍े कीस करने लगा तो चंदा सरमके मारे मुहको दुसरी ओर करते उनके सरमे हाथ घुमाने लगी ओर हल्कीसी सीसकारीया करने लगी आज वो देवायतसे नजर नही मीला पा रहीथी..

देवायत : क्या हुआ बेबी..मजा आयाकी नही..ये सीलसीलातो कल साम तक चलने वाला हे..

चंदा : (सरमाते हसते) पता..नही..तबतकतो मेरी हालत केसी होगी.., देवु पता हे..आज अ‍ेसे मे पहेली बार जडी..मेने आज तक अ‍ेसा अनुभव नही कीयाथा..थेन्कयु सो मच..

देवायत : (उनके उपर लेटते) तो क्या तेरे पहेले पतीके साथ अ‍ैसा नही कीया..?

चंदा : (सरमाके हसते) नही..वोतो बीलकुल अनाडी था..सबकुछ मुजे सीखाना पडा..पता नही मेरे धिरनको कैसे पैदा करलीया..आप असली मर्द हो..कास हम पहेले मीले होते..भलेही उमरका फर्कहो..आपको लेके मे भाग जाती..हें..हें..हें..बाबु उपरसे हटो मे आपको दुध पीलाती हु..बस अ‍ेसेही पडा हे..आतेही सुरु होगये..

देवायत : (कीस करते) बेबी अभी कहा हमने महेनत की हे..बादमे पीलेगे.., चलो आजाओ आज असली सुख देता हु आपको.., क्या मस्त चुतहे आपकी बीलकुल कुआरी लडकीकी तराह..जेसे मेरी मंजुकी थी..

चंदा : (सरमाते) देवु..ध्यान रखना..बहुत बडा हे..कुछ होगातो नही..? इतना बडा नही देखा कभी..

देवायत : (होंठ चुमते) कुछ नही होगा बेबी मे हुनां.., क्या तेरी भांजीको कुछ हुआ..? वोतो इनकी दीवानी हो गइ हे उसे हरदीन मेरा लंड चाहीये..तुभी अ‍ेसी होजायेगी..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमसे हसते) छी..कीतना गंदा बोलते हो..हें..हें..हें..बेड बोय..

देवायत : (उठते पैरके बीच जाते) अच्छा बेड बोय..अब देखना ये बेड बोय क्या करता हे.., बस थोडासा सहेन करलेना..फीरतो मजेही मजे..

तब चंदा आने वाले पलके लीये तैयार होगइ उनको पताथा उनके पहेले पतीसे देवायतका बहुत बडाहे तो इसे जेलना कीतना मुस्कील होगा, उसने दोनो हाथसे चदरको कसके पकड लीया ओर आंख बंध करते मुहको अ‍ेकसाइड करलीया तभी इनको अपनी चुतपे देवायतका लंड महेसुस हुआ जो देवायत हाथसे पकडके चुतपे रगड रहाथा ताकी लंड गीला होजाये तब चंदा उतेजनासे सीसकारीया करने लगी..

तभी देवायतने धीरेसे लंडको फसा दीया ओर हाथके दबावसे लंडको अंदर धकेलने लगा तब चंदाको अ‍ेसा महेसुस हुआ जेसे उनकी चुतमे कोइ बडा डंडा घुसा रहा हो उनको हल्कासा दर्द महेसुस होने लगा तो उसने जोरोसे चदर पकडली ओर मुह बीगाडते अपनी आंख बंध करके भीचली, तब देवायत उनके उपर जुकके धीरेसे लेट गया ओर चंदाके बुब्सको मुहमे लेके चुसने लगा तब चंदाने आंख खोलते उनकी ओर नजरे चुराते देखा..बस अब उनके साथ कुछभी हो सकता हे.., ओ होने वाले हमेलेको बरदास्त करनेके लीये अपने आपको तैयार करने लगी.., उनके मनमे अ‍ेक डरका भाव आने लगा वो देवायतको रीक्वेस्टके लहेजेमे कहेने लगी..





चंदा : दे..वु..प्लीज..धीरेसे..करना..थोडी जलन होती हे.., सीइइइ उइ..मां..सीसससइइइइइ

तब देवायत समज गयाकी चंदा डर रही हे तो वो बुब्सको छोडके उनके होंठ चुमने लगा ओर अचानक होंठ भीचते कमरको अ‍ेक जटका मारदीया तो लंड चंदाकी चुतको चीरते हुअ‍े अंदर थोडा घुस गया तब चंदाकी चीख देवुके मुहमे समा गइ ओर अपने दोनो पैर बेडपे पटकते अ‍ेकही जटकेमे मुह छुडाके चीलाने लगी.., उनकी आंखमे आंसुकी धारा बहेने लगी..

चंदा : (बेडपे पैर पटकते) नही नही नही.., बहार नीकालो..प्लीज..मर गइ..मां..प्लीज..प्लीज..प्लीज. मे मर जाउगी..यार.. बहुत जलन होती हे.., देवु..प्लीज..मां...मरगइ.., सीइइइइइ आइइइइइ मुं..सससस देवु...

देवायत : (होंठको चुमते) कुछ नही होगा बेबी अभी दर्द चला जायेगा..बस मुजे कीस करती रहे..

देवायत अ‍ेसेही रहा ओर चंदाके बुब्स ओर होंठ चुमता रहा तभी थोडी देरके बाद चंदाकी दर्द भरी सीसकारीया कामुक सीकारीयोमे तबदील होने लगी तब देवायत समज गयाकी दर्द कम होगया हे, तभी अ‍ेक हाथसे उनके बुब्स मसलते चंदाके होठोको चुमने लगा तब चंदाभी उनकी पीठ ओर सरको सहेलाते साथ देने लगी, देवायत धीरे धीरे कमर हीलाने लगा तो चंदा मदहोस होने लगी..ओर आधी आंख चडाली..

चंदा : बस..अ‍ेसेही धीरे धीरे करना..सीइइइ आह..आह..आह..सीइइइइइ उइइइइ मां..येस..सइइइइइइइइ जा...नु...चो..दो..मु..जे.. बस..अ‍ेसे.ही..बहुत..म..जा..आ..रहा..हेहेहे..आह..इइइइइसससस मांमांमांआआअ..

तब देवु धीरे धीरे सोट मारते लंडको चुतकी ओर धकेलता रहा ओर अ‍ेसेही करते पुरा लंड चंदाकी चुतमे उतार दीया तब चंदाकोभी अपनी बच्चेदानीपे देवायतका लंड महेसुस होने लगा ओर हर धकेके साथ उनकी आहे नीकलने लगी चंदा बहुतही कामुक हो चुकीथी अब वो देवुको थोडा जोरसे चोदनेके लीये कहेती थी वोभी कमर उछालते देवायतका साथ देने लगी मानो वो स्वर्गकी सैर कर रही हो..वो पुरी मदहोस हो चुकी थी





तब चंदाने अचानक देवायको बाहोमे भीचलीया ओर कमरको जटके मारने लगी ओर जडती रही फीरभी देवायतने चुदाइ जारी रखी पुरे रुममे सनाटेके बीच फच..फच..फच..की आवाज आ रहीथी ओर बीचबीचमे चंदाकी चुडीयोकी खनखनाहट ओर पायइकी छनछनाहटकी आवाज आ रहीथी दोनोही कामाग्नीमे जलते चबरदस्त चुदाइमे मसगुल होगये थे आज चंदा सही मायनेमे अ‍ेक मर्दसे चुदाइ करवा रहीथी जीसे सोचते वो बहुतही खुस थी..ओर देवायतसे जी भरके चुदाइ करवानेकी ठानली..

काफी देर धमाकेदार चुदाइके बाद देवायत चंदासे चीपक जाताहे ओर उनके होंठ भीच लेता हे तब चंदाभी समज गइकी देवायत जडने वाला हे.., तब देवायतको कसके बाहोमे भीचलीया ओर आंख बडी करते देवातकी आंखोमे देखने लगी तभी देवायत कमरको जटके मारने लगा ओर चंदाकी चुतको अपने गरम विर्यसे पीचकारीया मारते भरने लगा तो चंदाकोभी अपने बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस होने लगा..तो साथमे वोभी उतेजीत होते अ‍ेक बार फीसे देवायतके साथ जडने लगी..

जब दोनोही साथमे जड गये तब देवायत चंदाके उरोजोपे सर रखके ढेर होगया ओर चंदा उनकी पीठ सहेलाती रही आज वो पहेली बार चुदाइके वक्त दो बार जडीथी, ओर मनही मन खुस हो रहीथी की उनकी आज अ‍ेक असली मर्दसे चुदाइ हो चुकीथी, तभी वो मनही मन देवायतको आजीवन समर्पीत होगइ.., ओर हमेसा देवायतसे चुदाइ करवानेकी ठानली..

चंदा : (सांस कंटड्ढोल करते थकी हुइ आवाजमे) सुनीयेजी..हटीयेना बाथरुम जाना हे..साफ करने..

देवायत : नही चंदा अंदरही रहेने दे मुजे अ‍ेक बार ओर करना हे फीर जायेगे..

चंदा : (सरमाते) अरे..नीचे सब गंदा हो गया हे.. पहेले साफ करले..फीर करेगे..

देवायत : नही बेबी जीतो चाहता हे इसे पुरी रात अंदर ही रखु..ओर तुजे चोदता रहु..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते) बीलकुल पागल हो.., यार..तबतो मेरी हालत खराब हो जायेगी..

बेबी : थोडी देर रहोनां..बस अभी करलेगे..

कुछ देर आराम करनेके बाद देवायत चंदाको चुमने लगता हे तब चंदाभी सरमाते उनका साथ देने लगी, वोभी यही चाहतीथी की देवायत उनके उपरही पडा रहे वो आज जी भरके इनसे चुदवा लेना चाहतीथी इतने बरसोसे प्यासीजो थी, वो चाहतीथी देवायत उनको कल साम तक प्यार करता रहे वो इतने बरसोकी सारी कशर देवायतसे चुदाइ करवाके पुरी करना चाहती थी तो ज्यादा नही बोली ओर देवायतका साथ देने लगी ओर दोनोही फीरसे गरम हो गये..

तब थोडी देरके बाद अ‍ेक बार फीर घमासान चुदाइका दोर चल पडा, इस बार चंदा थोडा खुलके देवायतका साथ देने लगी ओर उसे जोरोसे चोदनेके लीये उक्साती रही तो देवायत हाथके बल उचा होके उनकी दोनो टांगे अपने पैरपे फसाके जोरोसे सोट मारते चंदाकी चुदाइ कर रहाथा इसी बीच चंदाको अ‍ेकबार फीरसे जडादीया तबभी देवायत उसे जोरोसे चोदेही जा रहाथा चंदाके बुब्स चुदाइकी वजहसे उछल रहेथे देवायतके हर धके के साथ उनकी आहे नीकलती रही.., चंदाकी हालत पतली होने लगी..





चंदा : (मुह बीगाडते) बस..बस..बस..देवु..प्लीज..जलन होतीहे..उइइइइ मां मरगइइइइइ नही..नही..नही.. यार.., मर जाउगी..सीइइइ उइइइइ..मां..चोद..लीया..मुजे..बस..बस..यार..

फीरभी देवायत उनकी अ‍ेकना सुनते जोरोसे चोदेही जा रहाथा तब चंदाके दोनो बुब्स उछल रहेथे चंदाके बाल चोटी होनेके बादजुद बीखर चुकेथे जो आज चंदाने रातमे शींगार कीयाथा सब बीखरके उनके चहेरेपे छा गयाथा लीपस्टीकका कही नामो नीशान नहीथा चंदाकी हालत अ‍ेसी हो गइथी जेसे कोइ जानवरने पंखीको पकडके पीख दीया हो, तब अचानक देवायतने लीपलोक करलीया तो चंदानेभी उनको कसके बाहोमे भीचलीया ओर दोनोही साथमे जडने लगे.. ओर तुफान का भवंडर चंदाकी चुतको भरके सांत हो गया..

जब देवायतने उनके सीनेमे सर रखके ढेर होगया तब चंदा ओर देवायत दोनोही अपनी सांस दुरस्त करते लेटे रहे, चंदा देवायतका सर सहेलाती रही, उनकी पुरी चुत देवायतके पानीसे लबालब भरी हुइथी, उसे आज नीचे कुछ अजीब फील हो रहाथा जो बेहद सु:खद् था, आज चंदाको पुर्ण ओरत होनेका अ‍ेहसास हो रहाथा, आज देवायतके साथ चुदाइ करवाते अ‍ेसी सुहागरात मनाइथीकी उनका पुरा तन दर्द कर रहा था..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) जानु..अब मुजे बाथरुम ले चलो बहुत दर्द हो रहा हे मे चलनेकी स्थीतीमे नही हु..

देवायत : (सर उचा करते होंठ चुमते) अरे मेरी..बीवी..थक गइ क्या..? चल ले जाता हु..

कहेके देवायत उनके उपरसे उतर गया तब लंड चुतसे फच..की आवाजके साथ बहार नीकल गया तो चंदा आवाज सुनके सरमसे पानीपानी होगइ ओर देवायतके सामने दोनो हाथ करदीये तब देवायतने उसे गोदमे उठालीया ओर बाथरुम में चला गया तो चंदा वहा पीसाब करने बेठ गइ तब पीसाब करते उसे चुतमे बहुतही जलन महेसुस हुइ ओर वो दर्दसे मुह बीगाडने लगी, फीर दोनो साथमे नहाये ओर देवायत उसे गोदमे ही बहार लेकर आगया..

तब चंदाने अ‍ेक अलमारी से नइ चदर लेनेको कहा तो देवायत चंदर नीकालके चेन्ज करने लगा तभी चंदाभी वही खडे खडे उनकी मदद करती रही ओर देवायत बेडपे पीठके बल लेट गया..तो चंदाभी उनके पास लेटते देवायतके सीनेपे सर रख दीया ओर अ‍ेक हाथसे सीनेको सहेलाते देवायतकी आंखोमे प्यार भरी नजरोसे देखती रही तब देवायतने अ‍ेक हाथ उनके पीछे लेजाते उसे कसके बाहोमे भीच लीया..





चंदा : (सीना सहेलाते) जानु..मुजे कभी मत छोडना..अब मे आपके बीना नही जी पाउगी.., आजसे आपकी ये चंदा आपको पुर्ण समर्पीत हो गइहे..मेरा पुरा जीवन अब मेने आपके नाम करदीया हे..

देवायत : (उनके सरको सहेलाते) पागलहो क्या..? मे क्यु छोडुगा तुजे..? मेने तुमसे सादी अ‍ेसेही नही की.., तुम ओर मंजु मेरे आधा अंग हो..येतो धिरेन बडा होगया वरना हम हमारा बच्चाभी पैदा करते ओर मे उसे अपना नामभी देता.., ओर इनके लीये मे अभीभी तैयार हु..धिरेनकोभी अपना नाम दुगा..

चंदा : (मनमे खुस होते हसते) कास..अ‍ैसा होपाता..क्या आप सचमे मुजसे बच्चा चाहते हो..?

देवायत : हा चदा.. मे तुजे पत्नीका हर सुख देना चाहता हु..बस तेरी कुछ मजबुरी सामने आजाती हे..

चंदा : देवु..अगर अ‍ेसा हेतो मे कही दुर चली जाउगी वही हमारा बच्चा पैदा करलुगी..बस तुम धिरेनको सम्हाल लेना..वो अभी छोटा हे..फीर हम दोनोही उसे मना लेगे..क्या कहेते हो..?

देवायत : नही चंदा मुजे मेरे बच्चेसे ज्यादा मेरी इस बीवीकी इज्जत प्यारी हे..बच्चेके लीये अभी बहुत समय हे..वोतो हम कभी भी कर सकते हे..बस मेतो चाहता हु तेरी इस गांवमे जो सरपंचकी इज्जत हे वो बरकरार रहे

चंदा : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह..देवु..आइ लव यु..सो मच..तुम कीतने अच्छे हो.., मेतो आपको पाकर धन्य होगइ..

दोनोही अ‍ेसी प्यारभरी बाते करते कब नींदकी आगोसमे चले गये पताही नही चला, चंदा अभीभी देवायतके सीनेमे सर रखते सोइथी ओर देवायतभी उसे बाहोमे भरके सो गया..अगली सुबह दोनो देर तक सोते रहे.., तब चंदाकी आंख खुल गइतो खुदको देवायतकी बाहोमे पाकर सरमा गइ..ओर नजर उची करते देवायतकी ओर देखने लगी तब सोता हुआ देवायतका चहेरा बडेही मासुम लग रहाथा..

वो अपने आपको रोक नही पाइ ओर देवायतके होंठ हल्कासा चुम लीया तब इस हरकतकी वजहसे देवायतकी आंखभी खुल गइ ओर उसने चंदाको जोरोसे बाहोमे भीचलीया ओर होंठ चुमलीये..

चंदा : (सरमाके हसते) गुड मोर्नींग बाबु..चलो उठना नही हे क्या..?

देवायत : (हसते) अरे गुड मोर्नींग.., सुबह सुबह अ‍ेसी प्यारी खुबसुरत बीवीका दीदार हो गयातो कोन कमबख्त उठेगा..,मुजेतो मेरी बीवीसे प्यार करना हे..

चंदा : (सरमसे हसते) चलो नौटंकी बाज कहीके.., उठो..देखो कीतने बज गये हे..चाइ नास्ता नही करना..?

देवायत : (होंठ चुमते) अरे मेरीतो चाइभी आप हो ओर नास्ताभी आप हो..चलो अ‍ेक राउन्ड हो जाये..

चंदा : (सरमाते हसते बाहोसे छुटनेकी कोसीस करते) नही..सुबह सुबह कोइ सरारत नही..हें..हें..हें..

तब देवायत उसे बाहोमे भीचके पलट जाता हे ओर उनके उपर चडजाता हे तब चंदा जोरोसे हसते उनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही, दोनोही नंगे सोयेथे तो दोनो उतेजीत होके प्यारकके खेलमे डुबकीया मारने लगे तब देवायतके सांप जेसे लंडने अपने बीलका रास्ता अपने आप ढुंढ लीया..

ओर वो बीलमे चला गया तब थोडीही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लयी इस बारभी देवायतने चंदाको दो बार जडा दीया ओर खुद उनकी चुत भरते ढेर हो गया.. तब दोनोही पसीने पसीने हो गयेथे चंदा उनकी पीठको सहेलाती रही.., थोडी देरके बाद देवायत चंदाको गोदमे उठाके बाथरुममे ले गया अंदर वहा दोनोने मस्ती करते अ‍ेक दुसरेको नहेलाया फीर बहार आके दोनोही तैयार होगये..

देवायत चंदाको गोदमेही नीचे लेकर आ गया तब दोनोही कीचनमे चले गये तो चंदा चाइ नास्ता बनाती रही ओर बीच बीचमे देवायत उनकी मस्ती करते पीछेसे बाहोमे भरलेता ओर उनके दोनो बुब्स पकडके मसलने लगता तब चंदाभी उतेजीतहोके मदहोस होने लगती ओर पलटके देवायतको बाहोमे भीचते होंठ चुम लेती इसी तराह देवायत सरारत करते रहेता था फीर दोनोने चाइ नास्ता करलीया..

सब काम समेटके दोनोही वापस उपर चले गये तब दोनोने सब कपडे नीकाल दीये ओर अ‍ेक बार फीर दोनो प्यार करने लगे.., आज चंदा जी भरके देवायतसे प्यार (चुदाइ) कर लेना चाहती थी..वो देवायतको पत्नीका हर अधीकार उसे देना चाहती थी.., बस उसे सीर्फ उनके बच्चे पेदा ना करनेका गम था..





ओर साम पांच बजे तक पुरे दीन वोही प्यारका खेल हुआ.., तबतक देवायत पुरे दीनमे चार बार चंदाकी चुतको भर चुकाथा, तब उनकी हालत बहुतही पतली हो चुकीथी मानो वो बेहोसीकी हालतमे चली गइ हो, उनकी चाल बदल चुकीथी वो चलतीथी तोभी लडखडाके चलती थी, फीर सामको दोनो नहाके कंपलीट हो गये ओर नीचे आगये अब देवायतके जानेका वक्त होगया.. तब चंदा जटसे देवायतकी बाहोमे समा गइ ओर देवायतको कसके बाहोमे भीच लीया, फीर उसके सीनेमे सर रखते आंसु बहाने लगी..

चंदा : (आंसु बहाते) जानु मत जाओ..में आपके बगैर जी नही पाउगी..प्लीज..

देवायत : (उनके सरको सहेलाते) बस..बेबी..सांत..होजा..क्या मुजे कमजोर करना चाहती हे..? तु कहेतो रुक जाता हु..फीर मंजुको क्या कहेगे.., कल उसे लेनेभी जाना हे..ओर घरपे बा बापुजीभी अकेले हे..

चंदा : (रोते हुअ‍े) बाबु आप वादा करो मुजे हर रोज अ‍ेक फोन करोगे..ओर मे जब कहु मुजसे मीलने आओगे..,यार अपने प्यारसे बीछडना बहुत मुस्कील हे..मे नही रेह सकती..मे आपको मीलने वहा आजाउगी..

देवायत : (हसते) हां..आजाना वेसेभी तेरी भांजीका घर हे तु वहा कभी भी आ जा सकती हे..

चंदा : (सरमाते) देवु आजकी रात रुक जाओ..प्लीज..भलेही मेरी हालत इससेभी खराब हो जाये..

दंवायत : नही बेबी तु कोइ मशीन नही हे तेरी सहेतकाभी खयाल रखना हे तु पेइनकीलर ओर आइपील ले लेना वरना तुजे सहेरसे लाकर देता हु..

चंदा : (सरमाते) नही.., मेरे पास हे.., आप आने वालेथे..तो सब लेलीया था..

देवायत : (हसते माथेपे कीस करते) चलो मे चलता हु सब अच्छेसे बंध करलेना ओर पुरा दीन आराम करना..मे आजाउगा, जब तुजे मीलनाहो तो उधर आजाना..दो तीन दीन रुकना..


कहातो चंदा अ‍ेक बार फीर देवायकी बाहोमे समा गइ फीर दोनोके होंठ मील गये तब सामका अंधेरा छाने लगाथा ओर देवायत बहार आगया ओर अपनी कार लेके चला गया तब चंदाभी सब दरवाजा बंध करके उपर सोने चली गइ ओर बेडपे लेटतेही नींदकी आगोसमे चली गइ, तब देवायत हवेलीपे आ गया उस रात वो अकेलाथा तब उसने रजीया ओर दयाको अपने कमरेमे देर रात बुला लीया ओर रातमे दोनोको रगड रगड के चोदलीया दोनोकी चुतको अ‍ेक अ‍ेक बार भरके दोनोसे चीपकके सो गया उनके बा बापुजीकी उमर हो चुकीथी वो उपर नही आ सकतेथे देवायत पुरी रात दोनोको रगडके साथ मेही सो गया....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ७



कहातो चंदा अ‍ेक बार फीर देवायकी बाहोमे समा गइ फीर दोनोके होंठ मील गये तब सामका अंधेरा छाने लगाथा ओर देवायत बहार आगया ओर अपनी कार लेके चला गया तब चंदाभी सब दरवाजा बंध करके उपर सोने चली गइ ओर बेडपे लेटतेही नींदकी आगोसमे चली गइ, जब देवायत हवेलीपे आगया उस रात वो अकेलाथा तब उसने रजीया ओर दयाको अपने कमरेमे देर रात बुला लीया ओर रातमे दोनोको रगड रगडके चोदलीया दोनोकी चुतको अ‍ेक अ‍ेक बार भरके दोनोसे चीपकके ही सो गया उनके बा बापुजीकी उमर हो चुकीथी वो उपर नही आ सकतेथे तब देवायत पुरी रात दोनोको रगडके साथ मेही सो गया....अब आगे

सुबह देर तक सोता रहा जब उठा तभी उसे मंजुलाका फोन आगया ओर उनको लेजानेकी याद दीलाने लगी ओर येभी कहाकी साथमे भानुभाइको भी लेकर आये ताकी उनके बा बापुजी उनको देखले ओर सामको टाइमपे आनेकी अ‍ेक बार फीर बातकी, यही सब बात करके वो फोन रख देती हे तब देवायत सुबह ही अपने यार भानुके घर चला गया, क्युकी अभी तक रीस्तेके बारेमें भानुसे ओर नाही उनकी मां से बात कीथी.., तो वहा दरवाजा बंध था तो उसने धीरेसे खटखटाया तब उनकी मां सरलाने आके दरवाजा खोल दीया..

जेसेही देवायतको देखा आंखोमे चमक आगइ ओर हटते देवायतको अंदर आनेका रास्ता दीया जेसेही देवायत अंदर आया तब उसने वापस गेइटको बंध करदीया ओर देवायतके सामने देखे बीनाही अंदर अपने कमरेकी ओर चल पडी तो देवायत इधर उधर देखने लगा उसे भानु ओर उनकी बहेन लता नजर नही आइ तब वो सरलाके रुमकी ओर बढ गया जेसेही अंदर गया वहा अंधेरा छाया हुआ था तब उनको आवाज आइ..

सरला : (बेडपे पीठके बल लेटे हुअ‍े) भानु ओर लता सहेर गये हे, कुछ लताके कपडे लेने दो पहर तक आजायेगे.., मे अकेलीही हु..आजाओ.., कीतने दीन हो गये.., हम नही मीले..

जब देवायत पासमे गया तब भानुकी मा रसीला अपनी सारी कमर तक उची करके लेटी हुइथी तब देवायतने उनकी रसीली बुर देखली..तो उनका लंड फडफडाके तन गया, उसने कुछ बोले बगैरही पेन्ट नीचे करली ओर अपना लंड नीकालके सीधे रसीलाके पैरके बीच बैठ गया ओर चुतपे घीसके सीधाही रसीलाकी बुरमे घुसा दीया तब रसीलाकी हल्कीसी आवाज आइ ओर देवायत हाथके बल लेटते उसे धनाधन चोदने लगा, रसीलाके दोनो उरोज उछलने लगे..

सरला : (कामुक आवाजमे) सीइइइइइ देवा..तुमतो आते..हहीहीही नही..इइइइइ आह..आह..आइइइइइ धीरे..

देवायत : (जोरोसे सोट मारते) आउगा..बहोत खुजली हो रही हे क्या..? तो बुलाना चाहीयेनां.. आजाता..

सरला: (चुदाइ करवाते) कहासे बुलाती..लता भानु घरपेही होते हे..वहा तो बहुत सारे कमरे हे..कभी मन नही होता..? मे आजाती..बहाना बनाके..थोडा जोरसे करोनां..उइइइइइ सीइइइइइइ आह..फच..फच..फच..





तब थोडीही देरमे देवायत सरलाकी जबरदस्त चुदाइ कर लेता हे, देवायत उनकी चुतको अपने पानीसे सीच देता हे दोनोही अपने लंड ओर चुत साफ करके बहार आजाते हे तब सरला अपने बालोका जुडा बनाते देवायतको बीठाती हे ओर देवायतको पानी पीलाती हे फीर उनके लीये दुध लेकर आतीहे ओर खुद उनसे चीपकके बेठ जाती हे तब देवायतका लंड अबभी खडा होते हरकत कर रहा था तब सरला उसे देखते खुब सरमाइ ओर देवायतके लंडपे हाथ रखते सहेलाने लगती हे ओर उनकी ओर देखते बात करने लगी..

सरला : (सरमाते हसते) देवा कैसा लगताहे अपनेही दोस्तकी मां को चोदते..मजा आता हेकी नही..

देवायत : (सरमाते हसते) क्या..आपभी इस उमरमे भी आप जवान दीखती हो.., तो कीसीकाभी मन होगा..

रसीला : (हसते) ४४ की हुइ हु, क्या येभी कोइ उमर हे..? मुजे कीसीकाभी नही सीर्फ तेराही लंड चाहीये.., कीतना दमदार हे.., जब पहेली बार तुजे यहा मुतते हुअ‍े देखा तबसे मेने देखलीया था, मेतो इनकी दीवानी होगइ..हुं, ओर तभी मेने ठानलीथी कीसीभी तराह तुमसे चुदवाउगी ओर भगवानने मेरी सुनली.., अब तक कीतनी ओरतोको चोद चुका हे? हें..हें..हें..

देवायत : (जुठ बोलते) बस मेरी बीवी मंजु ओर दुसरी आप..हें..हें..हें..

सरला : (हसते) चल जुठा कहीका..इतनी मस्त बोडी हे.., तुजपेतो कोइभी लटु होजायेगी..मेरी लता छोटी हे वरना उनकी सादी तुमसेही कर देती.., खेर छोडो..ये बता कीस लीये आये थे..,भानुसे मीलने..?

देवायत : हां दरसल मेरी अ‍ेक साली हे.., भावना नाम हे उसका.., सीर्फ दोनो बहेनेही हे.., मे चाहता हु भानुकी सादी इनसे करवादु.., तो भानुको सामको लेके जाना हे..मंजुने बात चलाइ हे..अगर आपको अ‍ेतराज ना होतो.., पहेले भानुको दीखादु.. दोनोने अ‍ेक दुसरेको पसंद कीयातो.. आगे बात करेगे..

सरला: (खुसीसे हसते) अरे..नेकी..ओर पुछ पुछ..लेजा.., मेरे भानुकाभी घर बस जायेगा.., कीतना अच्छा होगा तुम दोनो भाइ.. ओर वो दोनो बहेने..मुजे ये रीस्ता मंजुर हे तुम बातको आगे बढाओ..

देवायत : (उठते) तो चलो मे चलता हु..भानुको तीन बजे मेरे घर भेज देना..

सरला : (उनका हाथ पकडके बीठाते) अरे बैठोना कहा जाना हे.., इतने दीनके बाद आयेहो..,क्या अपनी काकी को अ‍ेसेही छोडके जाओगे.., बैठोना..चलो अंदर अ‍ेक बार ओर करते हे फीर चले जाना..

देवायत : (हसते) काकी तुम कीतनी ठरकी हो गइ हो..अ‍ेक बार मे तेरा दीलही नही भरता..हें..हें..हें..

सरला : (सरमाते हसते) तु आताभी तो कम हे..ओर आताहे तो हमे मौका कहा मीलता.., चलनां..

कहेके देवायतका हाथ पकडके उसे वापस अंदर लेजाती हे ओर खटीयापे हाथ टीकाते अपनी सारी कमर तक उची करते वही जुकके खडी हो जाती हे तब देवायत उनके पीछे चला गया ओर पेन्ट नीचे करते उनकी कमर पकडली ओर पीछेसेही लंडको चुतमे घुसा दीया ओर कमरको जटके मारते उसे धनाधन चोदने लगा जब दोनो जड गये तब सरला अपनी चुतको कपडेसे साफ करते खडी होगइ फीर देवायतको बाहोमे भरके उनके होंठ चुमलीया फीर दोनो बहार आगये..ओर देवायत अपने घर चला गया..

सरला बहुतही कामुक ओरत थी वो अपनी सादीसे पहेले अपने सगे भाइके साथ नाजायज रीस्ता रखते उनसे चुदवाती थी ओर अ‍ेक बार वो प्रेगनेन्ट हो गइ.. जब उसे उल्टीया होने लगी तब उनकी मांको उनपे सक हो गया ओर वो उसे लेकर होस्पीटल चेक करवाने लेगइ तब पता चला वो पेटसे हो गइ हे..धर आके उनकी मांने उसे खुब मारा..लेकीन अपने भाइका नाम नही लीया..,

तब उनकी माने उनका बच्चा गीरवा दीया.. ओर अपने पतीसे कहेके उनकी भानुके पीतासे जल्दी सादी करवादी.., तब सरलाको पहेली रातमे ही पता चल गया उनका पती उसे ठीकसे नही चोद पाता ओर वो उनके पतीके खास दोस्त यानी देवायतके पीतासेही नाजायज सबंध रखलीये.., ओर उनसे आये दीन चुदवाने लगी.., फीर उनसे चुदवाते चुदवाते उन्हीसे प्रेगनेन्ट हो गइ ओर भानुका जन्म हुआ..

फीरभी देवायतके पीतासे सबंध जारी रखा अबतो देवायतके पीताभी सरलाको अपनी रखैलकी तराह इस्तेमाल करने लगे आये दीन भानुके पीताको कामके बहाने दो दो तीन तीन दीन बहार गांव भेजते..ओर उतने दीन वो सरलाके साथ दीन ओर राते रंगीन करते रहे..अ‍ेसा नही थाकी सरला रंडी हो गइथी..ओर रंडीसे कमभी नही थी..बस उनको अब आदतसी हो गइथी की हर दीन अपनी चुतमे लंड चाहीये..

जो जरुरत वो देवायतके पीतासे चुदाइ करवाते पुरी करने लगी.., जब देवायत ओर भानु टीनअ‍ेजर होगये तब देवायतके बापुने सरलाको फीरसे प्रेगनेन्ट करदीया.., तब भानुके पीता कइ महीनोसे सरलाको हाथ तक नही लगाया था तो सरलाके पेटसे होनेपर उन पर सक होगया ओर उनपे नजर रखने लगा तब अ‍ेक दीन सरला ओर उनके दोस्त यानी देवायतके पीताको चुदाइका खेल खेलते अपनी आंखोसे देख लीया..

उनको अपने दोस्तके धोखेसे भारी सदमा लगा ओर पेरेलीसीस हो गया.., जबतक लताका जन्म नही हुआ तबतकत तोवो इस दुनीयासे जा चुके थे.., अबतो सरलाको कीसीकाभी डर नही था देवायतके पीता उनकी मददके बहाने आये दीन सरलाके घर आने लगे ओर दोनोकी चुदाइकी रासलीला चलती रही..जबजक वो बुढे नही होगये तबतक ये सीलसीला चलता रहा.., अब वो सरलाको वो सुख नही देपाते थे..

तब देवायत ओर भानु जवान हो गयेथे..अ‍ेक दीन देवायत उनके गायोकी गमारमे जोरोसे पेसाब लगीथीतो वहा मुतने लगा तब सरला गायोका दुध नीकाल रहीथी उसने तबही देवायतका दमदार ओर मोटा लंड देखलीया ओर हसने लगी.., उसने अब देवायतके लंडसे अपनी प्यास बुजानेकी ठानली..ओर आयेदीन अपनी जवानीका जलवा देवायतके सामने जान बुजके देखाने लगी..

कभी कामके बहाने अपनी सारीका पलु गीरा देती ओर देवायतको अपने उरोजोके दर्शन करवाती, तो कभी उनको कामके बहानेसे छुनेकी कोसीस करती वो देवायतको रीजानेका हर प्रयास करती.., आखीर अ‍ेक दीन देवायतसे रहा नही गया ओर सरलाको मोका देखते कीचनमे ही पकड लीया.. थोडी नानुकुरके बाद वही पहेली बार देवायतने खडे खडे ही सरलाकी चुतमे लंड उतार दीया तब सरलाकी की हालत पतली हो गइ थी..









देवायतकी सादीसे पहेले ही उनसे चुदवाने लगी थी जब देवायतके बापु बुढे हो गये तब सरलाने देवायतको पकड लीया ओर तबसे उनसे चुदवाती हे ये बात सीर्फ वे दोनोही जानते थे.., लेकीन उनको नही पताथा की अ‍ेक बार भानुकी छोटी बहेन जो अभी अभी नइ जवान हुइ हे वो देवायत ओर उनकी मां सरला की चुदाइ देख चुकी हे., तबसे वोभी अपनी मांकी तराह ठरकी होने लगी थी.. उसने देवायतका दमदार लंडभी देखाथा ओर अपने भाइ भानुको अपनी भाभीको चोदते उनकाभी लंड देखलीया था..

तीन बजे भानु देवायतके घर आगया ओर दोनो कार लेके उनके ससुरके घर चले गये दोनोका बहोत अच्छेसे स्वागत हुआ फीर मंजुके बा बापुजीको भानु पसंद आगया ओर भावना ओर भानुकी अकेलेमे बात चीतभी हुइ.. भावनाको तो सीर्फ देवायतसे मतलब था.., ओर अ‍ेक बार सरलासे बात करके सब रीस्तेका तैय होगया तब भावना बहुत सरमा रहीथी.. ओर बार बार देवायतको चोर नजरसे देखती रहेती थी..

उनको अब अपने जीजाजीके करीब रहेनेका मौका मील गयाथा ओर मनही मन काफी कुछ प्लान करके देवायतसे रीस्तेमे आनेका मन बना चुकीथी.. फीर वहा सबने खाना खाया ओर देर साम देवायत मंजुलाको लेके भानुके साथ सीधे उनके घर चले गये तब मंजुलाने सरलाके पैर छुअ‍े ओर उनसे सब बाते करली तब सरला खुस होते देवायतकी ओर देखते हसने लगी ओर दोनोका मुह मीठा करवाया..

फीर कुछ दीनोके बाद भानु ओर भावनाकी सगाइ ओर सादीभी होगइ तब देवायतने खुब दोडधामकी कभी अपने ससुरके घर तो कभी अपने दोस्त भानुके धर.., इसी बीच मौका मीलतेही दो बार सरलाने देवायतसे जबरदस्त चुदाइ करवाली ओर देवायतकी साली भावना आखीर भानुके घर सादी करके आ गइ, ओर उसी रात सुहागरात मेही भानुने उनकी सील तोडदी ओर भावनाकी दो बार जबरदस्त चुदाइ करली भानुने ओर भावनाने तीन महीने तक खुब मजे कीये ओर आखीर भानुने भावनाको प्रेगनेन्ट करदीया..

ओर नौ महीनेके बाद भावेसका जन्मभी हो गया.., ओर इसी बीच आयेदीन देवायत चंदाके घर जाता रहेता ओर उनकी चुदाइ करता रहेता कभी कभीतो दोनो सहेर होटेलमे रुम रखके मीलने लगे.. जबभी मौका मीलता चंदा उसे बुला लेती ओर अपनी जबरदस्त चुदाइ करवा लेती.., यही सब सोचते देवायत आंख बंध करते गहेरी नींदमे चला गया तब कोइ उनको हीलाके उठा रहा था..

(फ्लेसबेक खतम)

रामुकाका : (देवायतको जगाते) देवु बेटा..ओ बेटा..उठो..कीतनी देरसे सोये हो..? इतना काम मत करो.., साम होगइ हे..घ घर नही जाना क्या..?

देवायत : (जागते) जी काका..वो जरा आंख लग गइ थी..क्या सब चले गये..?

रामुकाका : हां बेटा सबतो कबसे चले गये..कीतना सोये तुम..साम होगइ..,थक गये थे क्या..? घर नही जाना..? खानाभी नही खाया होगा..

देवायत : (हसते) नही काका सोचमे डुबा हुआथा कब नींद आ गइ पताही नही चला.., चलो चलता हु.., आपने खाना खा लीया..?

रामुकाका : हां बेटा आज वो दया टीफीन दे गइथी तो खा लीया.., अब तुम घर जाओ..

तब देवायत हवेलीपे आगया तो सामने मंजुला पैट फुलाके उनके सामने हसती हुइ आ रहीथी, तो जातेही वो मंजुलाका हाथ पकडके उसे होलमे जाके बीठा दीया.. ओर खुद फ्रेस होने चला गया तब मंजुलाने दयाको खाना नीकालने कहा जब देवायत आ गया तब देवायत मंजुको लेके डाइनींगपे आ गया ओर रजीयाने दोनोको खाना परोसा..तब मंजुने खाना खाते बात की..

मंजुला : सुनीयेजी..आज मौसीका फोन आया था उनको पता चल गया की मे पेटसे हु.., कीसने बताया होगा..? सायद भावनासे या घरपे बासे बात हुइ होगी.., कही आपनेतो नही बताया..?

देवायत : (हसते खाना खाते) अरे नही.., क्या केह रही हे मौसी.., मंजु मुजे कल सहेर जाना हे..

मंजुला : देवु..क्या आते वक्त आप मौसीको लेकर आओगे..? वो धिरन आज सामको स्कुलके प्रवास गया हे तो मौसी तीन चार दीन अकेली हे..तो यहा आना चाहती हे.., मेरी खबर पुछ लेगी ओर तीन चार दीन इधरही रुकेगी.., कहेतीथी तेरी डीलेवरीमे मे आजाउगी..हें..हें..हें.., मेरी खास सहेली भी हे..

देवायत : (हसते) चलो ठीक हे मेरी टेन्सन खतम.., मौसी आ रहीहे तो कोइ दीकत नही.., होस्पीटलमे उसेही लेजायेगे.., आपकी डीलेवरी तक रहेगीतो कीसीको बुलाना नही पडेगा.., क्या कहेती हो..?

मंजुला : (खुस होते) हां..वोभी यही केह रहीथी..कीतनी अच्छी हे मेरी तो मौसी कम ओर सहेली ज्यादा हे हें..हें..हें.., मेरी बहुत केर करती हे..वहाभी बहुत करती थी..बस बेचारी जवानीमेही विधवा हो गइ..

देवायत : (सीरीयस मुह बनाते) मंजु हम क्या कर सकते हे.., पता नही गावमे ये कैसा रीवाज हे..की विधवा दुसरी सादी नही कर सकती.., उनकीतो रीवाजने ही जींदगी बरबाद करदी..

मंजुला : (गभराते) देवु..अ‍ेक बात कहु..भविस्यमे अगर हमारे बच्चोके साथ अ‍ेसा हुआतो हम क्या करेगे..?

देवायत : तुम क्यु अ‍ैसा उल्टा सीधा सोचती हो..? हम अ‍ेसी परंपराको नही मानेगे, हम रीवाज तोड देगे.. बस.. हम अ‍ैसा कभी नही होने देगे.. देखा नही बाबाने क्या कहाथा..

मंजुला : (खुस होते हसते) गुड बोय..हें..हें..हें., .देवु..हम अ‍ेसे कुरीवाजोको नही मानेगे, अबतो बा बापुजी भी नही हे सब डीसीजन आपको लेना हे, इनसेतो अच्छा वो हीमाचलके राजाथे..वो कीसीभी रीस्तोमे सादीकी परंपरा सुरु कीथी..कास यहाभी अ‍ेसा होता..तो कोइ विधवा या त्यकताही नही रहेती..सब सुहागन..हें..हें..हें..

देवायत : (सीरीयस होते) मंजु..बस वोही राजा हमारे घर हमारे पोतेके रुपमे आने वाला हे.., अ‍ेसा बाबाने मुजसे कहा था.., ओर सायद हमारे घरसेही सब सुरुआत होगी..क्या तुम्हे अच्छा लगेगा..?

मंजुला : (हसते) वो --का अंस भीतो होगा.., पता नही हमने कोनसे पुन्य कीये होगे.., देवु मे सब अ‍ेक्सेप्ट करलुगी.., मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.., बस अ‍ेक बार बाबाको मीलना हे..सादीके बाद दो बार ही मीली हु..

देवायत : अब अगली बार जाउगा तब लेकर जाउगा..

मंजुला : (जोरोसे हसते) हें..हें..हें.., इस हालतमे लेजाओगे..? बाबु अब टाइम नजदीक आगया हे.. ओर वो कमीनी भावुको भी लेकर जाना हे, पता नही वो कोनसी रात थी, जो दोनो भाइने अ‍ेक साथही हम दोनो बहेनोको पेटसे करदीया.., मुजसे छोटी हे फीरभी कमीनी दुसरी बार प्रेगनेन्ट हो गइ., पता नही भानुभाइको कीतने बच्चे चाहीये..

देवायत : (हसते) छोड उनको उनकी मां बहुतही पुराने खयालकी हे कहेती हे चार पांच बच्चेतो होनाही चाहीये..हें..हें..हें.., मुजसेभी केह रहीथी अ‍ेक बच्चेसे बच्चे वाले नही कहेलाते कमसे कम चार पांचतो करनाही..

मंजुला : (आस्र्चसे हसते) चार..पांच..? ओ बापरे.., तबतो बेचारी भावनाकी हालत अराब हो जायेगी हें..हें..हें.., देवु हमतो अ‍ेकही करेगे..में इनसब बातोको नही मानती..उसे अच्छेसे पालतो सकेगे..

अ‍ेसीही बाते करते दोनो खाना खाके बहार आंगनमे टहेलने लगे ओर दोनो बाबाकी बाते करने लगे..

मंजुला : देवु..हम दोनोही बाबासे मीलेगे तब मे उनसे सब कुछ खुलके पुछ लुगी..मुजे सब जानना हे..

देवायत : मंजु..देखना तु विचलीत हो सकती हे.., मतलब तब कोइ रीस्ते नातेको नही मानते होगे.., इनका मतलबभी जानती हे..? सब आपसी रीस्तेमेही लगे रहेगे.., पता नही हमे क्या क्या देखनेको मीलेगा..

मंजुला : (हसते) हां..जानती हु..इतनी भी बुध्धु नही हु में.., मेने वो राजाकी बुक पढी हे, कोइ भी कीसीभी रीस्तेमे सादी कर सकता हे.., सपोज..मानलोनां की तुम अपनी बुआसे, मामीसे चाचीसे, यहा तक अपनी बहेनसेभी सादी कर सकते हो.., फीर वो बहेन चाहे कोइभी रीस्तेसे हो..वो बुआकी या मामीकी लडकीभी..

देवायत : (हसते) मतलब तुम सब कुछ जानती हो.., तुजे पता हे अब हमारे घरमे वोही सब होने वाला हे..

मंजुला : (हसते) देवु कीतना रोमांचक होगा.., मेतो सोचके ही..पागल होजाउगी..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) चलो देखते हे.., अब जोभी होगा सब हमे अ‍ेक्सेप्ट करना होगा..,लेकीन अ‍ेक बात हे.. हमारे घर खुद --का अंस आ रहा हे.., पता नही तब हमे सब देख पायेगेकी नही..

मंजुला : देवु जोभी हो.. हमे अबभीसे अ‍ेसे रीस्तेको अपनाना पडेगा..अब हम अ‍ैसा कुछ सुनेतो माइन्ड मे नही लेना.., वेसे तुजे अ‍ेक बात कहु..? पता नही तुम्हे कहेनी चाहीयेकी नही..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) क्या..कुछ सीक्रेट जानती हो क्या..? हें..हें..हें.., कहो क्या बात हे..

मंजुला : (सरमाके हसते) जानु मेने सुना हेकी हमारे बापुजीका नाजायज रीस्ता माजीके साथ.. मतलब हमारे भानुभाइ की मां के साथ था.., सायद लता उनहीकी संतान हे..हें..हें..हें..इसीलीयेतो उनके पीता चल बसे..

देवायत : (हसते) देखा.., तो इस नाते लता हमारी सौतेली बहेन हुइ ओर हमने उनका लखनसे रीस्ता तैय करलीया तो दोनो होगयेने भाइ बहेन.., बाबाने सही कहाथा.. इनकी सुरुआत हमारी पीढीसे ही होगइ.., हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) देवु..जो होता हे होने दे..,देखना हमारा लखन उनकीही बहेनको ठोकेगा..हें..हें..हें..

देवायत ओर मंजुला बाबाकी बाते करते आगेकी प्लानींग करने लगे ओर दोनोने तैय करलीयाकी जोभी होता हे होने दे वो कोइ अ‍ेतराज नही करेगे.., दोनोने मीलके सब अ‍ेक्सेप्ट करनेका फैसला करलीया.., उस दीन मंजुने देवायतको उनके साथ सेक्स ना करपानीके वजहसे दुसरी ओरतसे सेक्स करनेकी परमीशन देदी.., फीर दोनो थोडी देर बाते करते टहेलते रहे फीर अपने कमरेमे सोनेके लीये चले गये..

इस रात मंजुके साथ देवायतने सीर्फ ओरल सेक्सही कीया जब मंजुको जडादीया तब वो देवायतके सीनेमे सर रखके गहेरी नींदमे सो गइ.., तब देवायतभी कल अपनी दुसरी बीवी चंदाके बारेमे सोचते नींदकी आगोसमे चला गया..

तब बाजुके गांवमे भानुकी मां अपने रुममें सो गइथी तब बाजुके रुममे लता भावनाके बच्चे भावेशको जुलेमे डालके सोनेकी तैयारी कर रहीथी अ‍ेसा नही थाकी भानु ओर भावना अपने बच्चेको अपने साथ सुलाना नही चातेथे बस भावेश उनके साथ सोता तो पुरी

रात रोताही रहेता वो लताकोही अपनी मां मानता था ओर उनके साथही सोताथा, लता ओर भानुके रुममें अंदरकी ओर बीचमे अ‍ेक दरवाजा लगा हुआथा जो हमेसा बंधही रहेताथा उनमे अ‍ेक छोटासा छेदभी था जो लता उनमे कइ बार भाइ भाभीकी चुदाइ देखती रहेती थी..

तब उनके बगल वाले रुममें भानु ओर भावना मस्तीया कर रहेथे उनकी आवाज सुनाइ दी तो वो धीरेसे उठके दरवाजेके पास चली गइ ओर उन दोनोकी मस्तीया छेदमे आंख लगाके देखने लगी.., वो कइ बार भानुके खडे लंडको अपनी भाभीकी चुतमे डालते हुअ‍े देख चुकीथी, तब आजभी भानु पीठके बल लेटाथा ओर भावना उनके पैरके पास जुकके भानुके लंडको मुहमें भरके अंदर बहार कर रही थी..





तब भानु आंख बंध करते सीसकारीया करताथा थोडीही देरमे भावना के मुहमे जड गया तब भावनाका पुरा मुह भर गया ओर वो उठके बाथरुममें चली गइ तब भानुका लंड अबभी हवामे लेहराते मुरजाने लगा जीसे देखके लता खुब सरमाइ ओर अपनी चुत सहेलाते बेडपे आ गइ.., फीर सलवार नीकालके अपना नीकर नीचे करलीया ओर बेठे बेठेही हाथकी अ‍ेक उंगली अपनी चुतमे घुसादी ओर आंख बंध करते भानुको इमेजींग करते उंगली अंदर बहार करने लगी ओर थोडीही देरमे वो जड गइ..

तबसे लताके लीये ये सब रुटीन हो गया.., फीर अपने आपको साफ करके लेट गइ ओर सोचने लगीकी कास भाइका लंड कभी अपनी चुतमे डलवाती..तो कीतना मजा आता.., जबतक मेरी लखनसे सादी नही होजाती तबतक मुजेही कुछ करना होगा, मां भीतो देवायतभाइसे चुदवाती हे, ओर मुजपे पाबंधी लगाती हे.., मुजे कीसीभी तराह भाइको रीजाना हे.., कोइ भाइ बहेनका रीस्ता नही होता..

सीर्फ लंड ओर चुतकाही रीस्ता होता हे.. देवायतभाइका लंडभी भानुभाइके लंडसे बडा हे.., कीतना मोटा ओर लंबा हे, तभीतो मां इनके पीछे लटु हे.., कीसीको इस रीस्तेके बारेमे पता नही.., अच्छा हुआ अ‍ेक बार मुजे देखनेका मोका मील गया, बस इसी बातका फायदा उठाना हे मुजे कीसीभी तराह लंड चाहीये वरना मेरी जवानी युही बरबाद हो जायेगी.., यही सब सोचके लता नींदकी आगोसमे चली गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ८

सीर्फ लंड ओर चुतकाही रीस्ता होता हे.. देवायतभाइका लंडभी भानुभाइसे बडा लंड हे.., कीतना मोटा ओर लंबा था, तभीतो मां इनके पीछे लटु हे.., कीसीको इस रीस्तेके बारेमे पता नही.., अच्छा हुआ अ‍ेक बार मुजे देखनेका मोका मील गया, बस इसी बातका फायदा उठाना हे मुजे कीसीभी तराह लंड चाहीये वरना मेरी जवानी युही बरबाद हो जायेगी.., यही सब सोचके लता नींदकी आगोसमे चली गइ....अब आगे

सुबह सब जल्दी उठ गये देवायत ओर मंजु तैयार होगये, देवायत दया ओर रजीयाको मंजुलाका खयाल रखनेको कहेके चाइ नास्ता करके अपनी कार लेके सीधेही सहेर चला गया वहा रास्तेमे कुछ नास्ता ओर चंदाके लीये आइपील लेली फीर होस्टेलमे जाके लखन ओर पुनमको मीला तब पुनमतो देवायतको देखतेही उनसे लीपट गइ अब उनकी हाइट बढ गइथी वो काफी जवान दीख रहीथी उनकेभी नींबु जेसे उभार नीकल आयेथे ओर अपनी टाइट टीसर्ट से साफ जलक रहेथे

तब आज पहेली बार देवायतको अपने सीनेपे उनके उभार महेसुस हुअ‍े जीनका अहेसास पुनमकोभी हो गया.., ओर वो सरमाके देवायतसे अलग होगइ..तब देवायतने दोनोको नास्ता दीया ओर हालचाल पुछा तो पता चला दोनोकी अ‍ेक्जाम सुरु होगइ हे ओर अ‍ेक हप्तेमे खतम होजायेगी फीर दोनोही वेकेशनमे घर आने वालेथे, तब पुनमने देवायतको उसे लेने आनेको कहा तो देवायतने हसते हुअ‍े हां केह दीया फीर लखनसेभी बात की..तब पता चला बीचमे अ‍ेक बार उनकी तबीयत खराब हो चुकीथी..अब ठीक हो गयाथा..

देवायत : बेटा तो फोन करना चाहीयेनां..? हम तुजे लेजाते..

पुनम : नही भाइ इतनीभी खराब नही थी बस बुखार था जो ठीक होगया यही दवाइ लेके आयेथे..

देवायत : (हसते) पुनम..सुन..हमने लखनका रीस्ता तैय करलीया हे.., वो लताके साथ..जब दोनो आओगे..तब दोनोकी सगाइ कर देगे.., (लखनकी ओर देखते) लखन..तुजे लता पसंदतो हेनां..?

लखन : (सरमाके हसते) जी..भैया..

पुनम : (सरारतसे हसते लखनको देखते) बडेभैया..लताभाभीका कभी कभी भाइके फोनपे फोन आता हे.., हें..हें..हें.., दोनो खुब बाते करते हे..

लखन : (सरमाते चीडके) जुठी..कब फोन आया..जुठ बोलती हे.., भैया..ये जुठ बोल रही हे..(सरमा गया)

देवायत : (हसते) अरे..तो क्या हुआ..अब तेरी होने वाली बीवी हे..बात करलीया कर.., (पुनमकी ओर देखते हसते) बीटु अब तेरी भी बारी हे..बस आजही बात करने जा रहा हु..फीर तुजे भी फोन आयेगा..हें..हें..हें..

कहातो लखन छोरोसे हसने लगा तब पुनम सरमाते पानीपानी होगइ ओर लखनको अ‍ेक मुका मारदीया तब देवायत हसने लगा.. पुनमने सरमाते देवायतकी ओर देखा..फीर धीरेसे कहा..

पुनम : (सरमाते) भैया..क्या ये जल्दी नही हे..? मुजे ओर पढना हे.., कोलेज मे..

देवायत : (हसते) हां तो पढनां.., कोन मना कर रहा हे..? जबतक मन करे..सादीके बादभी पढना मे उनसे बात करलुगा..वो घरकेही लोग हे.., मना नही करेगे.., अबतो खुस..? अगर वो ना कहेगे तो हम अभी रीस्ता नही करेगे.., मे तुजे पढाउगा..

कहातो पुनम खुस होके देवायतसे लीपटके गले लग गइ..ओर उसने इस बार जोरोसे देवायतको भीच लीया.., तब उसे नीचे कुछ चुभने लगा तो जटसे दुर हट गइ ओर नजर चुराते देवायतके पेन्टकी ओर देखने लगी तब उसे देवायतके पेन्टपे उभार नजर आया तब वो देखके सरमसे पानीपानी होगइ ओर सोचने लगी..

पुनम : (मनमे) ओ माय गोड..क्या भाइको मे गले मीली इसीलीये भाइका खडा होगया..? मेतो इनकी बहेन हु.., ओर पेन्टमे ही कीतना बडा दीखता हे..तब रीयलमे कैसा दिखता होगा..?

देवायत : (हसते) ओ छुटकी.., कहा सोचमे पड गइ.., तु चीन्ता मत कर वो घरकेही लोग हे, तुम भी उनको जानती हे ओर तुने वो लडकेकोभी देखा हे, बस..अ‍ेक बार मे बात करलु फीर तुमको सरप्राइज दुगा..

लखन : (हसते) क्या भैया हम उनको जानते हे..? तो फीर बताओना कोन हे..हमारा..जी..जा..जी..

पुनम : (सरमाते हसते जुठे गुसेसे लखनको मारते) लखनभैया अ‍ेक मारुगी.., मुजे नही करनी सादी..

देवायत : (हसते) चलो ये सब छोड.., बता तुम्हारा वेकेशन कब लग रहा हे..? मुजे फोन करना.. लेने आजाउगा..

लखन : (धीरेसे) भाइ मेरी ये आखरी अ‍ेक्जाम हे..मुजे अब नही पढना.. बस सब हीसाब कीताब सीख लीया मेरे लीये यही काफी हे..अब मुजे खेतीबाडी देखना हे..ओर यहाभी उनके बारेमेही पढ रहा हु..

पुनम : (लखनकी ओर देखते) भैया क्या केह रहे हो..? तबतो मे यहा अकेली रेह जाउगी.., मुजे कोलेजमे पढना हे.., अब मे क्या करुगी..? भाइ आपभी ग्रेज्युअ‍ेशन करलो..

देवायत : छुटकी तु चीन्ता मत कर हम तुजे लेडीस होस्टेलमे भेज देगे..वहीसे पढाइ करना जबतक मन हे..

पुनम : भाइ ठीक हे मुजे ग्रेज्युअ‍ेशन कंपलीट करना हे..देखती हु कहा तक होता हे.., भाइ अ‍ेक हप्तेके बाद फोन करुगी आजाना.., अबतो अकेला यहाभी मन नही करेगा..

लखन : अरे तु ओपन युनीर्वसीटीमे अ‍ेडमीशन लेले..कहा यहा रहेना..घरसेही पढाइ करना..सीर्फ अ‍ेक्जाम देने आना हे..वही गांवमेही ट्युसन रखले.., वहा मास्टरतो आतेही हे..ट्युशन देने.., क्या कहेतेहो भाइ..

देवायत : क्या..छुटकी अ‍ेसा हो सकता हे..?

पुनम : जी..भैया..देखती हु.., अगर वहा अ‍ेडमीशन मील गया तो हम यही करेगे..यहा कहा अकेले रहेना.., कमसे कम आप लोगोके साथतो रहुगी..मुजे आपके बगैर यहाभी अच्छा नही लगता..

देवायत : (हसते पुनमके सरको सहेलाते) चल ठीक हे..अगर अ‍ेसा होताहे तो लखनकाभी अ‍ेडमीनेशन करादेना.. वोभी वहीसे पढाइ करलेगा..

पुनम : (जोरोसे हसते) भैया पहेले इनका रीजल्टतो आने दो..हें..हें..हें..

लखन : (चीडते) चीबावली हस मत..मे पास होजाउगा..

पुनम : (जोरोसे हसते) भाइ पास होजाओ.. हमारे लीये येभी बहुत हे..हें..हें..हें..

देवायत : (कुछ पैसे पुनमको देते) ले ये रखले..काम आयेगे.., फीर अ‍ेक्जामके बाद दोनो कुछ खरीदी बरीदी करलेना.., चलो मे चलता हु..दोनो अच्छेसे परीक्षा देना.., अगर भगवानने चाहा तो दोनोकी साथमेही सगाइ कर देगे.., वो बहुतही अच्छा लडका हे.. वो तुजेभी पहेचानता हे..हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते हसते) क्या भैया.., चलो मे चलती हु.., बाय भैया..

कहेके सरमाते हसती हुइ दोडके होस्टेलके अंदर भाग गइ तब दोनोभाइ उनको देखते हसने लगे.. तभी लखन ने प्रस्नार्थ भरी नजरोसे देवायतकी ओर देखा तो देवायत समज गया.. ओर हसने लगा..

देवायत : सुन लखन..अभी पुनमको मत बताना..बस अ‍ेक बार बात पकी करलु.., तुभी उनको जानता हे..हमारी चंदा मौसीका लडका..धिरेन.., केसा हे..?

लखन : (खुस होते हसते) क्या..? वो धिरेन..? वाव.., भाइ मस्त पढा लीखा लडका हे हमारी पुनमके लीये परफेक्ट हे आप बातको आगे बढाओ.., दोनो मां बेटे अकेले हेनां..? हमारी पुनम राज करेगी..

देवायत : (हसते) हां वोही.., सुन..अभी पुनमको मत बताना.., हम उसे सरप्राइज देगे..

लखन : (हसते) ठीक हे भाइ..हें..हें..हें.. आपभी सरप्राइज देना शीख गये..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे चलता हु..ओर सुन..वो लतासे बात करलेना..हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) क्या भाइ..? करलुगा.., चलो बाय..

कहेके लखन अंदर चला गया ओर देवायतभी खुस होते चंदाके गांवकी ओर चल पडा वो कार चलाते पुरे रास्ते चंदा ओर पुनमके बारेमे सोचता रहा.., आज उसे पुनम पुरी तराह जवान दीखने लगी.., जब पुनम उनके गले लगी तब केसे लंड खडा होगया.., क्या ये सहीहे..? पुनमनेभी इनको पुरी तराह भांप लीयाथा तभीतो जटसे मुजसे दुर हट गइ.., पुनम मेरे बारेमे क्या सोच रही होगी..इनको बुरातो नही लगा होगा..?

यही सब सोचते उसे पताही नही चला कब चंदाका गांव आगया कारको सीधेही अंदर लेली..ओर पीछे पार्क करके अंदर चला गया..तो फटसे दरवाजा बंध होनेकी आवाज सुनी पलटके देखातो चंदा सरमाते नजर जुकाके वही दरवाजेसे सटकर खडीथी तब देवायतने अपने दोनो हाथ फैला दीये तब चंदा खुस होते दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.., आज उसने सब शींगार कीयाथा ओर माथेपे सींदुरभी लगाया था..





चंदा : (सरमाते होंठ चुमते) केसे हो मेरे बाबु..? आनेमे कोइ परेसानीतो नही हुइ.., कीसीने देखातो नही..?

देवायत : (चंदाको गोदमे उठाते उपरकी ओर बेडरुम मे चलते) अरे देखभी लीया तो क्या..? हम रीस्तेदार हे..कीसीसे डरना नही.., मे हुनां..





चंदा : (सीना सहेलाते) बाबु डर नही रही..बस केह रहीथी.., हमे सावधानी रखनी हे.., ओर आप आतेही कहा लेजातेहो..? कुछ खाना पीना नही हे क्या..? कमसे कम पानीतो पी लेते..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) नही आजतो सबसे पहेले मेरी बीवीका रस ही पीउगा..कीतने दीनोके बाद मीली हे..

चंदा : (सरमाते) तो आजाना चाहीयेनां.., मेने थोडी मना कीया था.., आजतो सारी कशर पुरी करुगी..मेने खानाभी बनालीया हे.., आनेमे इतनी देर क्यु की..?

देवायत : (बेडपे सुलाते) बेबी सहेर गयाथा अ‍ेक खास काम था.., फीर तेरी गोलीयाभीतो लेनी थी..





चंदा : (देवायतको अपने उपर खीचते) हां बाबु..खलास हो गइथी.., पीछली बार आप आयेथे..तबही खलास हो गइथी..अ‍ेक हप्ते बाद मुजे उलटीया हुइ तब बहुत डर गइथी की कही प्रेगनेन्टतो नही होगइ..? फीर दो दीन बाद पीरीयड हुआ..तब जाके सांती मीली.., बाबा अब मे लापरवाही नही करुगी.., धिरेनको क्या कहेती..

देवायत : (हसते) क्या कहेती..? केह देना तेरा भाइ आने वाला हे हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते सीनेमे मुका मारते) हर वक्त मजाकही सुजता हे.., बाबा अब नही केह सकती.., अब वोभी जवान हो गया हे.., आज कल अपने रुममे बहोत अकेले रहेने लगा हे..हें..हें..हें..

देवायत : बेबी तुम मुजसे कुछ कहेने वाली थी..?

चंदा : हां लेकीन पहेले मेरे बाबुको प्यार करलु..चलो आजाओ..

कहेते चंदा देवायतके सर्टके बटन खोलने लगी तब देवायतभी उनकी आंखोमे देखेही जा रहाथा ओर उनके ब्लाउसके बटन खोलते जा रहाथा..तब चंदा खुब सरमाइ.. ओर अपनी नजर जुकाली..

चंदा : अ‍ेसे क्या देख रहेहे मुजे सरम आती हे..कास सीर्फ मेही आपकी बीवी होती.., ओर हमारा बच्चा पैदा करती.., कीतना प्यार करतेहो मुजसे.., जानु हमे मोका मीलेतो हम तीन चार दीनके लीये हनीमुन मनाने चले जायेगे.. मुजे आपसे बहोत प्यार करना हे.., मे वहा आ रही हु तब मोका देखके मेरे रुममे आजाना..

दोनोही बाते करते अ‍ेक दुसरेके वस्त्र नीकाल रहेथे तब थोडी देरमे दोनोही नंगे हो गये..तब देवायत जुकके चंदाके उपर लेट गया ओर दोनोके होंठ मील गये ओर धीरे धीरे स्मुच करने लगे अब चंदाके बुब्स पहेलेसे काफी भरावदार हो गये थे जीनका कारण सीर्फ देवायतके साथ चुदाइ थी.., उनके चहेरेपे दीन भर दीन नीखार आ रहाथा पुरा चहेरा देवायतके प्यारकी वजहसे चमक रहा था..

तब देवायत चंदाको चुमते चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा कभी होंठ तो कभी उनकी गरदन तो कभी दोनो गाल तो कभी चंदाकी खुबसुरत आंखे ओर नीचे सरकते चंदाके भरावदास बुब्स अपने होंठोसे भीचं लीये ओर खेचने लगा तब चंदाकी मस्तीयोमे सीसकारीया नीकलने लगी ओर देवायतके सरमे हाथ खुमाते आंखे नसीली करली ओर देवायतकी ओर कामुक नजरसे देखती रही.. आज प्यार करनेके लीये पुरा दीन था..





चंदा : सीइइइइइ..देवु..आज..मुजे नीचोड डालो..ये चुत.., आपके लंडके बगैर बहोते..तंग करती हे,,इनकी प्यास बुजादो..आजाओ आज मुजमे समा जाओ..दे..वु..सीससससइइइइ

तभी देवायत बुब्स चुमते नीचे हाथ लेजाते चंदाकी चुतपे रख देता हे ओर धीरे धीरे सहेलाते हाथकी मध्य उंगली चुतमे सरका देता हे जीसकी वजहसे चंदा जोरोसे सीसकारीया करते दोनो हाथसे चदर पकडके छटपटाने लगती हे तब देवायत उनके दानेको उंगलीसे खरोदने लगता हे जीनकी वजहसे चंदा जोरोसे सीकारीया करने लगी ओर देवायतके बाल खीचते उनको अपने उपर खीचके चडाने लगी..





चंदा : (कामुक आवाजमे) बस..बस..बस..दे..वु..मर जाउगी..यार..आजाओ उपर.., नही रहा..जाता..सीइइइ डालदो..नां..क्यु..तडपाते..हो..उइइइइ सीसीसीसीइइइइइइइइ बस..यार..ननननहीहीहीहइइइइ..

देवायत : (बुब्स चुसते लडखडाती आवाजमे) चंदा..मजा नही..आता..हां..बोलनां..हां..बोल..नां..

चंदा : (सरको सहेलाते छटपटाते) आता हे..अ‍ेअ‍ेअ‍े सीइइइ बहोत..ममममजाजाजा आरररहाहाहाहेहेहेहेइइइइ

देवायत : (लडखडाती आवाजमे) चुत में..लं..डडडड..डालदु..हां..बोलनां.. कीतना..डालु..हंहं चंदाअअअ

चंदा : (आधी आंख चडाते) हां..आआआ..डालदो..सीइइइइ पुपुपुपराररारा डा..ल..दो..सीइइइइइ

देवायत : (कामु आवाजमे) चंदा..मुजे..तेरा रस..पीना हेहेहेहे..बोलनां....पीलु..

चंदा : (मादक आवाजमे) हां..सीइइइ पी..लोओओओ..मुजे..भी..पीना..हेहेहेहेह सीइइइइइ

तब देवायत चंदाके उपर अचानक घुम जाता हे ओर सीक्स नाइन पोजीसनमे हो जाता हे तब चंदा फटसे देवायतका लंड मुठीमे पकड लेती हे तो देवायतभी जुकके चंदाकी चुतको अपने मुहकी गीरफ्तमे ले लता हे ओर सीधेही चुतमे जींभ डालके चाटने लगता हे तब चंदा पुरी तराह कांप जाती हे उनके पुरे सरीरमे जुरजुरी होने लगती हे ओर वो देवायतके लंडको जोरोसे चाटके गीला करने लगती हे ओर आखीर पुरे लंडको नीगल जाती हे ओर धीरे धीरे मुहमे अंदर बहार करने लगती हे ओर देवायतभी जीभसे चंदाको चोदने लगता हे..





आज चंदाके बंगलोपे उनके बेडरुममे वासनाका तुफान भवंडर बनके ताडव मचा रहा था तब दुसरी ओर आज सहेरमे पुनम अंदर जातेही अपने रुममे पेटके बल उलटी लेट गइ ओर तकीयेपे मुह रखते गहेरी सोचमे डुब गइ आज उसे देवायतसे आंलींगन करते वक्त उनका हथीयार चुभ रहा था उनकी जींदगीका ये पहेला अनुभव था जीनके बारेमे आंख बंध करते सोचते वो लेटी हुइथी तब उनकी चुतमे हल्कासा गीलापन लगा..

तब वो बेचेन होगइ ओर उठके बाथरुममे घुस गइ फीर वो आयनेके सामने खडी होके अपने आपको देखने लगी उनके बुब्स कडक होते कठोर हो गये.., तब उसने अपनी टीसर्ट नीकाल दी तो उनके संतरे छेसे दोनो बुब्स बहार उछलके आ गये.. ओर वो आयनेके सामने अपने बुब्सको देखने लगी..





अ‍ेक हाथ अनायासही उसके बुब्सपे चला गया ओर हल्कासा दबाने लगी ओर दुसरा हाथ उनकी चुतपे लेजाते वो धीरे धीरे सहेलाते आंख बंध करते खडी रही ओर अपने भाइके पेन्टके उभारको याद करने लगी.. केसे तंबु बनके उनकी चुतपे चुभ रहा था.. वो मनही मन आंख बंध करके देवायतको अपने बेडपे उनके साथ प्यारके अहेसासकी इमेजींग करते धीरे धीरे चुतको सहेलाने लगी..





वो लखनसे ज्यादा देवायतको पसंद करती थी ओर उनकी हर बाते मानती थी ओर देवायतभी उनका बरोबर खयाल रखता था उनकी हर जरुरतको बीना बोलेही पुरी करता था, पुनमने जबसे जवाके दहेलीजपे कदम रखा वो देवायतको अपने भाइकी नजरसे नही अ‍ेक मर्दकी नजरसे इमेजींग करने लगी थी तब उनकी नीकरमे गीलापन महेसुस हुआ.. ओर वो सलवारका नाडा खोलके चेक करने लगी जब नीकरकी ओर जुकके देखातो पुरा नीकर गीला हो गयाथा

वो वहा उंगली रखके चेक करने लगी फीर उंगलीको नाके पास लेजाते उसे सुंघने लगी तब उसकी मादक खुस्बुसे वो मदहोस होने लगी ओर दुसरे हाथसे धीरे धीरे चुतको सहेलाने लगी तब वो उतेजीत होते सीसकारीया करने लगी, अचानक अपनी सलवार कमीज नीकालके नंगी होगइ ओर नीकरभी नीकाल दीया फीर कमोडपे बेठ गइ ओर आंख बंध करते देवायतके साथ चुदाइकी इमेजींग करते धीरेसे अपनी चुतको सहेलाते उनमे मे उंगली घुसाने लगी..





आज ये प्यारा अहेसास पहेली बार महेसुस कर रही थी ओर उंगलीको धीरे धीरे अंदर बहार करने लगी ओर वो सातवे आसमानमे पहोंच गइ, उनको नही पता थाकी वो लडका कोन हे जीनके साथ आज उनके भाइ रीस्तेकी बात कर रहेथे बस उनकोतो अपने बडे भाइका चहेराही दीख रहाथा जो उनका डिड्ढमबोय था जो इनकी हर जरुरतको पुरी करता था, उनको सब लेटेस्ट ड्रेस दीलवाता था, वो देवायतको इमेजींग करते जोरोसे उंगलीको अंदर बहार करते चुतको चोदने लगी..आज उनका पहेलीबार अनुभव था

तभी उनके सरीरमे हजारो चीटीया रेगंती महेसुस करने लगी ओर वो स्वर्गमे पहोच गइ तो अचानक उनकी चुतसे अ‍ेक सफेद फवारा नीकला जीनकी वजहसे वो पुरी कांप गइ ओर हांफने लगी..फीर जुकके चुतकी ओर देखते सरमा गइ ओर मुस्कराते चुतको पानीसे साफ करने लगी फीर अपनी पेन्टी नही पहेनी ओर कपडे पहेनके बहार आगइ ओर मुस्कराती रही.., उनका आज देवायतकी ओर जुकाव बढ गया था....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - ९

तभी उनके सरीरमे हजारो चीटीया रेगंती महेसुस करने लगी ओर वो स्वर्गमे पहोच गइ तो अचानक उनकी चुतसे अ‍ेक सफेद फवारा नीकला जीनकी वजहसे वो पुरी कांप गइ ओर हांफने लगी..फीर जुकके चुतकी ओर देखते सरमा गइ ओर मुस्कराते चुतको पानीसे साफ करने लगी फीर अपनी पेन्टी नही पहेनी ओर कपडे पहेनके बहार आगइ ओर मुस्कराती रही.., उनका आज देवायतकी ओर जुकाव बढ गया था....अब आगे

तब दुसरी ओर देवायत ओर चंदा दोनोही बहुत कामुक होते अ‍ेक दुसरेके लंड चुतको सीक्स नाइन पोजीसनमे होते अपने मुहसे खरोद रहेथे तब चंदाकी चुतने थोडीही देरमे जवाब देदीया ओर देवायतके मुहमे पानीका फवारा छोड दीया तो देवायत चाटके उसको साफ करने लगा, चंदाके लीये कीतना प्यारा अहेसास था वो अ‍ेसा देवायतके साथ कइ बार कर चुकी थी..उनको देवायतका पानी बहुतही अच्छा लगता था....




तब देवायतने कमरके जटके मारने सुरु करदीये ओर पीचकारीया छोडके चंदाके मुहको भरने लगा तब देवायतजे पुरी ताकतसे कमरको चंदाके मुहमे दबा दीया ओर पानी सीधाही चंदाके हलकमे उतर गया, चंदाने देवायतके लंडको मुहसे नीकाल दीया ओर देवायतकी पीठमे मुका मारने लगी.. तब देवायत उनके उपरसे हसते हुअ‍े उतर गया.. तब चंदाभी जटसे बेटसे उतर गइ ओर बाथरुमकी ओर भागने लगी..

चंदा : (बाथरुमकी ओर भागते) कीतने कमीने हो.., उब..उआ..उ..आ..उउउउ..

करते चंदा बाथरुममे घुस गइ ओर उलटीया करने लगी तब देवायत उनके पीछे हसते हुअ‍े आ गया ओर उनकी पीठ सहेलाता रहा फीर चंदाने मुह साफ करलीया तो देवायतभी अपना मुह साफ करने लगा तब चंदाने हसते हुअ‍े उनकी पीठमे मुका मारदीया ओर पीछेसे पकडके अपनी बाहोमे भरलीया.. तब देवायत पलटके चंदाको अपनी गोदमे उठालेता हे बहारकी ओर चलते चंदाको बेडपे पटक देता हे.. ओर खुद उनके उपर लेटता हे तब चंदा..

चंदा : (सरमाके जोरोसे हसते) बेडबोय.., मुजेतो मारही डाला था..पुरा घुसा दीया..सांसभी अटक गइथी..

देवायत : (हसते चुमते) अरे डार्लींग अ‍ेसे थोडी मरने देता..तुमसे पहेले मे मर जाता..

तब चंदा देवायतके मुहपे हाथ रख देती हे ओर अ‍ेक तमाचा देवायतके गालमे जड देती हे.., उनके आंसु आजाते हे तब देवायत गालपे हाथ रखते उनकी ओर देखते रहेता हे तो चंदा देवायतको कसके बाहोमे भीच लेती हे ओर उनके चहेरेको पागलकी तराह चुमने लगती हे फीर रुकके उनकी आंखोमे देखते कहेती हे..

चंदा : (रुहांसी आवाजमे) देवु..आजके बाद अ‍ेसी बात कभी मत करना..मे तेरे बगैर जी नही पाउगी..

देवायत : (उनके आंसु पोछते) बस..सांत..सांत होजा, बेबी..आइ अ‍ेम सोरी, कभी नही कहुगा..

चंदा : (आंसु बहाते) देवु पता हे मे तुमसे कीतना प्यार करती हु..? भगवानसे तुजे हर जन्मके लीये मांगती हु मे रोज यही इश्वरसे प्रार्थना करती हुकी मेरा देवु ही मुजे पतीके रुपमे मीले..

देवायत : (उनके गाल सहेलाते) हां चंदा..जीस तराह तुम मुजे प्यार करतीहे उसी तराह मंजुभी करती हे वोभी मुजे हर जन्मके लीये मांगती हे.. मेभी प्रर्थना करता हु हर जन्ममे मुजे तुम दोनोही मीलो..क्या अपनी सौतनको स्वीकार करोगी..हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते सीनेमे मुका मारते) कीतने कमीने हो.., चलो ठीक हे.., अ‍ेक सौतन बरदास्त करलुगी.. हें..हें..हें..

देवायत : बेबी मुजे आपको अ‍ेक बात कहेनी हे..हां आपभी मुजे कुछ कहेने वाली थी..

चंदा : (सीरीयस होते) बाबु मुजे लगता हे अब मेरा यहा रहेना मु्स्कील लगता हे..वो गांवके लोग मेरे बारेमे तराह तराहकी बाते उडाने लगे हे..मुजे नही रहेना सरपंच.., जीनको सरपंच बनान हे वोही बाते फैलाता हे.., अबतो धिरेनभी जवान हो गया हे..वो सारा दीन रुममे पडा रहेता हे ओर पता नही मोबाइलमे क्या देखते रहेता हे..स्वभावभी बहुत चीडचीडा हो गया हे.., लगता हे गांव वालोकी बाते वोभी सुन चुका हे..

देवायत : कोन हे वो कमीना तुम सीर्फ नाम बताओ.., आजही उसे ठीक करदुगा.., ओर रही बात धिरेनकी तो.. (हसते) हां जवानीमे अ‍ेसा होता हे मेरा लखनभी अ‍ेसा हो गया हे.., इसीलेतो उनका रीस्ता तैय करदीया हे.. बस इसी सीलसीलेमे धिरेनकी तुमसे बात करनी थी..

चंदा : (हसते) क्या धिरेनके बारेमे..? कोनसी बात..?

देवायत : (चंदाके होंठको चुमते) बेबी..अब मेरी बहेन पुनमभी जवानीके दहेलीजपे कदम रख चुकी हे..ओर मे चाहता हु हमारे धीरेनसे उनकी सादी होजाये..क्या कहेती हो..? सीर्फ बता रह हु फोर्स नही करता.., पसंद ना होतो मना करदेना मेरे व्यवहारमे कोइ फर्क नही पडेगा.., क्या कहेती हो..?

चंदा : (खुसीसे हसते) कीतने कमीने हो..अरे बाबु पुनम जेसी लडकी मुजे कहा मीलेगी..? बस अ‍ेक बार धीरेनसे पुछलु.., मुजे कोइ अ‍ेतराज नही मेरी ओरसे रीस्ता पका हें..हें..हें.., चलो मुह मीठा करवाओ.. हें..हें..हें..

देवायत : (होंठ चुमते) मुं...हां.....लो हो गया अब चुतभी मीठी करवाता हु चल तैयार होजा..

चंदा : (जोरोसे हसते) कीतने कमीने हो.., रीस्ता पका करने आयेहो मेरे बेटेका वोभी उनकी मां चोदते हुअ‍े.., हें..हें..हें..चलो आजाओ..आज रीस्ता पका करही लेते हे..

तब देवायत चंदाके पैरके बीच चला जाता हे तो चंदा अपना दोनो पैर घुटनोसे मोडके फैला देती हे ओर देवायतकी ओर कामुक नजरसे देखते हसती रहेती हे, देवायत लंडको पकडके चंदाकी चुतपे घीसने लगता हे तब चंदा आधी नसीली आंख करते सीसकारीया करने लगती हे तभी लंड गीला होतेही देवायत चुतके लव होलमे लंडके टोपेको फसा देता हे ओर चंदाके उपर लेट जाताहे तब चंदा उसे कसके बाहोमे भीच लेती हे..ओर जोरोसे सीसकारीया करते देवायतके होंठ भीचलेती हे फीर उनकी ओर सरमाते देखती हे..




देवायत : (कामुक आवाजमे) चंदा.. डालदु..? हं.. बोलनां..तेरी चुत आजभी कसी हुइ हे..हां..बोलनां..

चंदा : (मादक आवाजमे) हांआआआ..डालदो..क्यु तडपाते हो..सीइइइइ दे..वु..प्लीज...

देवायत : (मदहोसीमे) कीतना..? पुरा डालदु..? हां..बोल..बोलनां..

चंदा : हां..पुरा डालदो.., मत तडपाओ..बच्चा देदो..भरदो मेरी ..चुतको..डालोनां.. सीसीसीइइइइइअअअससस

तब देवायत चंदाके बुब्सकी नीपलको अपने होंठोसे दबाके खीचता हे तो चंदा पागल जेसी होजाती हे ओर देवायतके नींतबपे दोनो हाथ रखके देवायतकी कमरको अपनी चुतपे दबाने लगती हे तब देवायतने अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड चंदाकी चुतमे घुसा दीया.., चंदाकी चीख नीकल गइ ओर अपने पैर बेटपे पटकते आंसु बहाने लगी..क्युकी देवायतने अ‍ेकही बारमे पुरा लंड घुसा दीयाथा तो वो बरदास्त नही करपाइ

चंदा : (रोते) देवु..प्लीज. प्लीज..रुको..बहुत जलन होती हे..यार..अ‍ेकही बार मे घुसा दीया..

देवायत : सोरी बेबी तुजे देखतेही जोस चडा हुआथा..नही रोक पाया..अभी ठीक होजायेगा..

देवायत थोडी देर अ‍ेसेही रहेता हे तब चंदाको राहत महेसुस हुइ तब उनकी दर्द भरी सीसकारीया कामुक सीसकारीयामे तबदील होगइ ओर अपनी कमर धीरे धीरे हीलाने लगी तो देवायतभी समज जाता हे ओर वो धीरे धीरे कमर हीलाते जटके मारने लगता हे ओर चंदाकी चुदाइ करने लगता हे, वो बीच बीचमे चंदाके होंठ ओर बुब्सको चुसता रहेता हे तब चंदा अ‍ेकदम मदहोस हो चुकीथी ओर देवायतका साथ दे रही थी.. वो दोनो हाथसे चदर पकडके लगातार चुदते हुअ‍े देवायतकी आंखोमेही देख रही थी..




चंदा : सीइइइइ जानु..थोडा जोरोसे..ब..हु..त..म..जा..आ..र..हा..हे..अ‍ेअ‍ेअ‍ेअसीइइइ आह..आह..आह..

देवायत : (जोरोसे चोदते) पुरा..डालदु..हां..बोलना..देदु बच्चा..हं..तु मस्त..चीज..हे..बोलना..बच्चा..देदु..

चंदा : (नसीली आधी बंध आंखोसे) नही..पता..सीइइइ आह..उइइइ ओह..ओह..ओह.इइइ गगगइइइइइइ..

कहेते चंदा देवायतको कसके बाहोमे भीचलेती हे ओर जडने लगतीहे..,तब नीढाल होके चुदवाती रहेती हे उनके दोनो बुब्स जोरोसे चुदाइकी वजहसे उछल रहेथे.., देवायत अबभी जोरोसे चोदेअी जा रहाथा दोनोही चुदाइ करते कामुक बाते करते चुदाइ कर रहेथे तब देवायत अकडके कमरको जटके मारने लगा तो चंदाने कसके बाहोमे भीचलीया ओर होंठोको लीपलोक करलीया तभी देवायका लावा छुटके चंदाकी चुतको भरता रहा

जब तुफानका भवंडर चंदाकी चुतको भरके सांत हो गया तब देवायत चंदाके उपर ढेर होगया तब चंदा उनकी पीठ सहेलाती रही ओर दोनोही अपनी सांस कंटड्ढोल करते रहे थोडी देर दोनोही बीना कुछ बोले अ‍ेसेही अ‍ेक दुसरोकी आगोसमे पडे रहे तब देवायतका लंड अबभी चंदाकी चुतमे मुरजा हुआ पडा था तब चंदाको अपनी चुतके अंदर चीपचीपासा लग रहाथा तो देवायतको अपने उपरसे हटनेको कहेने लगी..

चंदा : (धीरेसे थकी हुइ आवाजमे) देवु..दे..वु.., हटोनां..बाथरुम जाना हे..

देवायत : (सर उचा करते) हां हां..रहेने देना..अंदर अबभी गरम भठी जेसा लग रहा हे..मुजे अ‍ेक बार ओर करना हे..अ‍ेसेही रहेने देना..

चंदा : क्या रहेने देनां.., देखो कीतने बजे हे..खाना नही खाना क्या..? फीर कर लेना..साम तक उपरसे नही उतरने दुगी बस.., चलना भुख लगी हे..पता नही कीतना पानी नीकालतेहो पुरी चुत भरी हे.., तुमनेतो अ‍ेकही बारमे थका दीया.. पता हे मुजे तीन बार जडा दीया हे..हीलनेकी ताकात नही हे..मुजे ले चलोनां..

तब देवायत उनके उपरसे हट जाता हे तब लंड नीकतेही फच..की आवाज आती हे तो देवायत हसने लगता हे तो चंदा सरमा गइ ओर अ‍ेसेही पडी रही तब उनकी चुतसे दोनोका कामरस चुतसे बहारकी ओर टपकने लगा.., तब चंदा हाथके बल उची होगइ ओर चुतमे दबाव बनाते पुरे रसको बहारकी ओर उडेलनेकी कोसीस करती रही.., वो प्रेगनेन्ट होना नही चाहतीथी सब रस नीकल गयातो चुतको अपनी पेन्टीसे साफ करलीया..






फीर देवायतकी ओर हसते हुअ‍े हाथ लंबा करदीया तो देवायत उसे गोदमे उठा लेता हे ओर बाथरुमे लेजाता हे तब दोनोही नहाने लगतेहे तब चंदाके लंबे खुले बाल देखते देवायत फीरसे गरम हो जाता हे ओर नहाते नहाते चंदाकी मस्ती करते छेडछाड करने लगता हे तब अ‍ेकबार फीरसे दोनो गरम होके उतेजीत हो गये.. तभी देवायतने चंदाको पीछेसे बाहोमे भीचलीया ओर पीछेसे ही खडेखडे लंको चंदाकी चुतमे घुसा दीया




दोनोही खडे खडे चुदाइ करने लगे जब दोनो जड गये तो चंदा देवायतसे छुटके मुका मारते हसती हुइ बहार भाग गइ..फीर दोनोही तैयार होके नीचे आगये, चंदाने अपने बालोका ढीला जुडा बनालीया ओर खाना गरम करके नीकालने लगी जब खाना नीकालके बहार आइ तो देवायतने उसे अपनी जांगोपे गोदमे बीठा दीया ओर अपने हाथोसे खीलाने लगा तो चंदाभी देवायतको खीलाती रही दोनोही प्यारकी भावनामे बहेकते अ‍ेक दुसरेको खीलाने लगे ओर खाना खा लीया तब चंदाने सब बरतन धोके रखदीये..

जब चंदा सब काम नीपटाके बहार आइ तो देवायतने उसे फीरसे गोदमे उठालीया ओर उपर बेडरुममे लेगया फीर दोनो प्यारकी आगोसमे चले गये ओर दो जीस्म अ‍ेक जान होगये साम ६ बजे तब बीना नीचे उतरे ही देवायत चंदाकी जमकर चुदाइ करता रहा, तब चंदाभी देवायतका पुरा साथ देती रही, आखीर उनका पतीजो था, साम तक देवायत चंदाकी चुतको चार बार भर चुका था फीर दोनो नहाके तैयार हो गये..

चंदाने अपने कपडे पेक करलीये वो आज अच्छेसे तैयार हुइथी बस उसने सामको अपनी मांग नही भरी, क्युकी वो देवायतके घर जा रही थी वहा मंजुको पता चल जाता.., बाकी जबभी घरमे अकेली होतीथी वो देवायतके नामकी मांग भरना नही भुलती थी, चंदाने घरको ठीकसे ताला लगादीया.. तबतक देवायत कार के बहार खडा रहा फीर चंदाने गेइटभी अच्छेसे बंध कीया ओर आकर देवायतकी बगल वाली सीटमे बेठ गइ..

चंदा : (हसते) तो मजनुजी चले..? आजतो मेरी सारी कशर पुरी करदी.. अभीभी नीचे हल्का दर्द हो रहा हे.., देखना वहाभी मेरा खयाल रखना पडेगा.. अभीसे केह देती हु.. हें..हें..हें..

देवायत : (कार चलाते) अरे चलोतो सही..वहा अ‍ेसी बजाउगाकी ठीकसे चलभी नही सकोगी..

चंदा : (सरमाते हसते) ना बाबा नां देखना..हमारी फजीहत ना होजाये.., अगर मंजुको सक हो गयातो दोनो गये कामसे..हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) अरे नही..मेरी मंजुतो खुस होजायेगी..हें..हें..हें.., तुजे पता हे मंजु अब नही कर सकती..तो उसने मुजे पुरी छुट दे रखी हे..

चंदा : (जोरोसे हसते) क्या..मंजुने छुट देदी..? इम्पोसीबल..वो तुमसे बहुत प्यार करती हे..कभी छुट नही देगी.., अगर मे होतीतो तुजे कच्चा ही चबा जाती..हें..हें..हें..

देवायत : (गंभीर होते) चंदा मुजे अ‍ेसा क्यु लग रहा हे..अ‍ेक दीन मे सबके सामने तुजे अपनाउगा..

चंदा : (सीरीयस होते) देवु.., ये क्या बोल रहेहो तुम..लोग क्या कहेगे..अ‍ेसा कभी नही होता..

देवायत : चंदा अगर तुजे सरपंच नही रहेना तो वहा रहेके क्या करोगी..? वहा सब बेचके धरही रहेने आजाओ.., यहा सब जमीन बाडी मकान खरीद लेना.. बाकी वहा उन लोगोको मे देख लुगा..

चंदा : नही देवु..कीसीसे जगडा नही करना.., बस हमारे धिरेनकी सादी तक उधरही रहेना हे, मे सब सम्हाल लुगी..अगर तुम्हारी जरुरत पडी तो फोन करदुगी आजाना.., कमीना.. खुद उनकी भाभीको ठोकता हे ओर मुजे बदनाम करता हे..

देवायत : (हसते) क्या उनके भाइको सब पता हे..? कोन हे वो..?

चंदा : भवान नाम हे उनका.., वोही अब सरपंच होना चाहता हे..इसीलीये मेरी जुठी बात फेलाता हे..

देवायत : कोन..वो भवान..भीमाका छोटा भाइ.., क्या ये वोहीतो नही..?

चंदा : (उनकी ओर देखते) हां..वोही.., क्या तुम जानतेहो उसे..?

देवायत : (कातील मुस्कानके साथ) हां..जानता हु उनका भाइ भीमा मेरा दोस्त हे.., हम स्कुलमे साथ पढते थे.., क्या वो कमीना भीमाकी बीवीकोही चोदता हे..

चंदा : (जुठा मुह बनाते देवायतको मुका मारते) हंहंहं.. छी.., कीतना गंदा बोलते हो.., सरमभी नही आती.. हां वोही हे.. अभी तक कोइ बच्चा नही हुआ..तो दोनो लगे होगे..हें..हें..हें.., देवु उनके भाइके बारेमे अ‍ेक बात बताउ..? जब उनकी सादी नही हुइथी तब वो खुद अपनी बहेनसेही..मतलब सब कुछ करते थे..,अब उनकी बहेनकीभी सादी हो गइ हे.. वो अब यहा कभी नही आती..घरमे सबको पता चल गया था.., हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) देखा ये कमीनी आगही अ‍ेसी हे.. कोइ रीस्ते नाते नही देखते..

चंदा : (गंभीर होते) जानु..क्या अ‍ेसे रीस्ते जाइज होते हे..? जेसे हमारा.., मेभीतो आपकी मौसीजी हुं..

देवायत : (कार चलाते) नही चंदा हमने सच्चे दीलसे प्यार कीया हे, ओर तुजे अ‍ेक बातभीतो बतानी हे.., हमारे रीस्तेके बारेमे सीर्फ अ‍ेकही आदमीको पता हे..

चंदा : (चोंकते) कोन..हे..? कीसको पता हे..?

देवायत : (हसते) तु टेन्शन मत ले..वो त्रिकाल ज्ञानी हे.., उनको सब पता चल जाता हे.., हमारे गुरुबाबा.. वो सबकुछ हमारे बारेमे जानते हे.., बस वोही सब बाते मे तुमको बताने वाला था.., बेबी अब हमारे घरमे बहुत कुछ होने वाला हे.., वहा तुजे अकेलेमे फुरसतमे बताउगा..

चंदा : देवु अ‍ेसी क्या बात हे जो तु इतना चीतांमे दीख रहा हे..

देवायत : नही बेबी कोइ चीन्ता नही.. बस हम अकेले होगे तब तुजे सबकुछ बताउगा.., अभी उचीत वक्त नही हे.., बस तु अ‍ेक बार धिरेनसे पुछले.., मेरी मंजु सुनेगीतो बहुत खुस होजायेगी मेने उनसे बात छीपाइहे उनको सरप्राइज देने.., हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) ओ..हो.., तो ये बात हे.. चलो मेभी मेरी भांजीकी खुसी देख सकुगी.., क्या पुनमको पता हे..?

देवायत : (हसते) नही..उनको सीर्फ इतना पता हे मे रीस्तेकी बात करने जा रहाहु..कहा कीसके साथ वो नही बताया.., बस उनकोभी सरप्राइज देनी हे.., हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते) ये सरप्राइज देना कहासे सीखके आये हे.., मुजे जातेही आइपील लेनी हे.., आपके प्यार करनेके चकरमे भुल गइ.., वरना कुछ दीनके बाद आपकोभी सरप्राइज मीलेगी हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) तो अच्छा हेनांं.. करलेती हमारा अ‍ेक बच्चा..

चंदा : दे..वु.., आ..यु सीरीयस..? क्या सचमे आप बच्चा चाहते हो..? बाबु मेरीतो बहुत इच्छा हे.. पर नही कर सकती.. मजबुरी हे.. आपभी जानते हो.. सोरी यार.. फीरभी आप चाहतेहो तो मे कुछ सोचती हु..

देवायत : (हसते) नही बेबी..मेतो मजाकमे केह रहा हु.., कास हम पहेले मीले होते.. मे आपकी सारी तम्मना पुरी करदेता.. चलो हमारा गांव आगया.., हम इस बारेमे फीर कभी बात करेगे..

दोनोही अपने गांव आगये देवायतने कारको सीधेही हवेलीमे लेली ओर आंगनमे खडी करदी.. कारकी आवाज सुनतेही मंजु जटसे हसती हुइ आने लगी.., उनको पताथा उनकी खास सहेली ओर अ‍ेक लौती मौसीजो आने वालीथी, तब चंदा कारसे उतरतेही हसती हुइ मंजुकी ओर दोड पडी ओर उसे जोरोसे गले लग गइ तब उनके पेटका खयाल रखा.. फीर दुर हटके दोनो हाथ मंजुके गालपे रखदीया ओर हसते उनकी ओर देखती रही....

कन्टीन्यु
 
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