रातमे पुरे गांवमे सन्नाटा छाया हुआथा.. इस रात कही घरोमे रीस्तोके मायनेही बदल चुके थे.. ना सीर्फ इस गांवमे.. बल्की आजु बाजुके सभी गांवोमे यही हालथा.. जीतनीभी जवान कुआरी लडकीया थी.. वो ज्यादातर अपने भाइके साथ आपसी रीस्तोमे बंधी हुइ थी.. ओर जीतनीभी सादी सुधा ओरते थी.. उनकीभी अपने पतीके अलावा घरके दुसरे मर्दसे या पडोसमे कीसी ओर जवान मर्दसे रीलेशन रखनेकी जीज्ञासा बढ गइ थी..
आज सुबहका सुरज कुछ ज्यादाही मस्तीयामे गांवकी ओर हसते हुअे आगे बढ रहाथा.. सुबह ५ बजे रजीया उठकर अपने रुममे थोडी लंगडाते चली गइ.. ओर नहाके कंपलीट होगइ.. फीर वो ओर चंपाभाभी दोनोही अपने रुटीन कामपे लग गये.. देवायत वंदना ओर रश्मी अभीभी अेक दुसरोसे चीपकके सो रहेथे.. तो धिरेन पुनमभी जल्दी उठ गये.. तब दया नीचे कंपलीट होकर कीचनमे काम कर रही थी..
पुनम आज मायके जाने वालीथी तो देवायतको मीलनेके लीये कुछ ज्यादाही अेक्साइटेड थी.. तो दुसरी ओर आज धिरेनभी बहुत खुस हो रहाथा.. क्युकी सब अपने प्लानके मुताबीक हो रहाथा.. आज वो सामको आते वक्त नीलमको साथ लेकर आने वाला था.. इसके लीये धिरेनने बहुत कुछ प्लान बनाके रखाथा.. तो दुसरी ओर आज नीलमभी सुबह उठकर बडीही रोमांचींत हो रहीथी.. वोभी फटाफट नहाके कंपलीट होगइ..
दिया : (बेडपे लेटे मुस्कुराते) नीलु.. आज तो जल्दी उठ गइ.. ओर कंपलीट भी होगइ..? कही जाना हे क्या..? कही जीजुके साथतो नही जाना.. हें..हें..हें..
नीलम : (सर्मसार होते हसते) बडी कमीनी हो तुम.. सब बाते जानलेती हो.. लेकीन अभी नही.. वो सामको मुजे लेने आयेगे.. सेटरडे सन्डे हे तो मे घर जा रही हु.. ओर कुछ नही..
दिया : (कातील मुस्कानसे) क्या अपने घर जा रही हो..? हंम..? की जीजुके घर.. हें..हें..हें..
नीलम : (दियाके पास आकर बेडपे बेठते सरमाते) दिया.. सायद जीजु मुजे अपने घरपे लेजाये.. अगर यहा कोइ आकर मेरे बारेमे पुछेतो तुम सम्हाल लेना.. मुजेतो बहुत डर लग रहा हे..
दिया : (बेडपे बैठते) अरे तु फीकर मत कर.. तु मेडमको कहेकर जाना वो सब सम्हाल लेगी.. इसमे डरनेकी क्या बात हे..? सायद आज मेभी अपने बोयफ्रेन्डके घर जा रही हु..
नीलम : (सरमाते धीरेसे) दिया.. अेक बात कहु..? सायद जीजु मुजसे फीजीकल होना चाहते हे.. मे क्या करु..? मुजेतो बहुत डर लग रहा हे.. मुजे इसके बारेमे कुछ बताना.. क्या ये सही हे..? आइ मीन सादीसे पहेले.. सबकुछ.. कुछ होगातो नही..
दिया : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) नीलु.. पहेले तु बता.. तुम क्या चाहती हो..?
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) दिया.. मनतो मेराभी बहुत कर रहा हे.. लेकीन डरभी लग रहा हे..
दिया : (खुस होते मुस्कुराते) अरे वाह.. नीलु.. तुम खामखा डर रही हे.. इनमे कुछ नही होता.. बस पहेली बार अंदर डालते हे तब कुछ देरके लीये मामुली दर्द होता हे.. लेकीन बादमेतो मजेही मजे हे.. देखना तुजे अैसा लगेगा मे स्वर्गकी सैर कर रही हु.. नीलु.. तु गभराना नही.. अपनी लाइफको खुब अेन्जोय कर.. भाडमे जाये सादी.. सादीके बादभी तो चुदवाना हे.. तो पहेले क्यु नही..? क्या वो मेने किताब (ये केसी अनुभुती) दी वो पढीकी नही..?
नीलम : (सरमाते हसते) हंम.. पढ रही हु.. बहुत मजा आ रहा हे.. वो राजाने अपनी सभी बहेनोसे, दादी चाची.. भाभी.. सबसे सादी करली हे.. क्या हिमाचलमे सचमे अैसा हुआ होगा..? इसमे हमारे इस सहेरकाभी जीक्र हे.. वो राजा ओर उनकी तीनो रानीया इसी सहेरमे रहेते थे..
दिया : (मुस्कुराते) नीलु.. सीर्फ इसी सहेरमे नही.. अभी जो हम पढ रहे हेनां.. इसी स्कुलमे सब पढते थे..
नीलम : दिया.. क्या आज सेटरडे सन्डे हे तो तुम सचमे अपने बोयफ्रेन्डके घर जा रहीहो..?
दिया : (मुस्कुराते) हंम.. कल रातही मेरे बी.अेफ.का फोन आयाथा.. उनके मम्मी पापा भी दो दिनके लीये कही जा रहे हे.. तो वो घरपे अकेला हे.. तो उनके मम्मी पापाके जातेही वो मुजे लेने आयेगा.. नीलु.. ये दो दिन हम दोनो खुब मजे करेगे.. कमीना कीतना जोसमे करता हे.. मुजेतो डर हेकी कही वो मुजे प्रेगनेन्ट ना करदे.. उनको कोन्डम चडाना अच्छा नही लगता.. तो मुजे ही आइपील लेनी पडती हे.. तुम भी ले लेना..
नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. मे उनको कहुगी.. वो ले लेगे.. पहेलेतो आज हमारे लीये मकान देखने जाना हे.. वहीसे सीधे घर चले जायेगे.. आज आधे दिन बेन्क खुली रहेती हे.. फीर जीजु मुजे लेने आयेगे..
दोनोही बाते करते बैठी रही.. तो इधर धिरेनके घर दयाने सब काम नीपटाकर चाइ नास्ता बनालीया था.. तो तीनोही साथमे चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तो अेकही बाइकमे तीनो नही जा सकते.. तो पुनमने वहीसे लखनको फोन करदीया.. तो लखन भी चाइ नास्ता करके अपनी जीप लेकर पुनम दयाको लेने आ रहा था.. ओर धिरेन चाइ नास्ता करके आज जल्दी सहेरकी ओर नीकल गया..
रश्मीके घर तीनोही आज देरसे उठे.. तो पहेले रश्मी नहाकर कंपलीट होगइ.. तब वंदना नहानेके लीये बाथरुममे थोडा लंगडाते जा रहीथी.. तो देवायत जटसे बेडसे उतर गया.. ओर वंदनाको गोदमे उठाकर बाथरुममे चला गया तो वंदना बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अंदर जातेही देवायतने बाथरुमका दरवाजा बंध करदीया.. तो वंदना सब समज गइ.. ओर वो सर्मसार होते मुस्कराते देवायतको मनते करने लगी..
वंदना : (सरमाते हसते) देवु.. प्लीज.. यहा कोइ सरारत मत करना.. अभी मेरी हालत ठीक नही हे..
देवायत : (हसते बाहोमे भरते) अरे अैसे कैसे मेरी खुबसुरत बीवीको छोड देता.. चल आजा सीर्फ अेकबार..
वंदना : (सरमाते बाहोमे) देवु.. प्लीज.. सायद आज मम्मीभी इधर आजाये.. मुजेतो बहुत सर्म आयेगी..
देवायत : (प्यारसे होंठ चुमते) वंदु.. उनसे डरनेकी जरुरत नही.. वो हमारे बारेमे सब जानती हे..
वंदना : (सरमाते धीरेसे) जानु.. क्या इस बारेमे आपसे उनकी बात हुइथी..? हंम..?
देवायत : (गाल चुमते) नही.. मुजे सब रश्मीने बताया था.. लेकीन हो सकता हे आज कुछ बात होजाये.. वंदु.. सायद कल या परसो.. मे ओर तेरी मम्मी अेक मंदिरमे चले जायेगे.. वहा जाकर पहेले मे उनसे सादी कर लुगा.. मे चाहता हु की हमारी सादीसे पहेले तेरी मम्मीसे सादी करलु.. क्युकी मेने उसे सादीका वादा कीयाथा..
वंदना : (जोरोसे बाहोमे भीचते) जानु.. बस.. मुजे आपसे यही उमीद थी.. आइ लव यु सो मच.. आपने हम मां बेटी दोनोको सम्हाल लीया हे.. अब उनको पापासे कोइ उमीद नही हे.. आप दोनो करलो सादी..
तभी देवायतने वंदनाके होठ चुमलीये.. ओर अेक हाथसे उनके उरोजोको दबाके मसलने लगा.. तो वंदना सरसे पांव तक कांपने लगी.. वो बहुतही सर्मसार होगइ.. उनके दोनो बुब्स कठोर होने लगे.. ओर वंदनाकी चुत फीरसे हरकतमे आकर फडफडाने लगी.. तब वंदना पुरी तराह मदहोसीमे चली गइ.. ओर उसने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. ओर अपनी कमर हीलाते देवायतके लंडसे अपनी चुतको रगडने लगी..
वंदना : (कामुक आवाजमे धीरेसे सरमाते) दे..वु.. बस.. बस.. ओर नही.. मुजे कुछ हो..रहा..हे..हे.. आह.. आह.. आइ.. कुछ कीजीये.. इसे डालदो अंदर.. बहुत मन कर रहा हे..
तभी देवायत वंदनाके पैरोके बीच बैठ गया.. ओर उनकी अेक टांग उची करके वंदनाकी चुतपे मुह लगा दीया.. तब वंदना पुरी तराह कामातुर होगइ.. ओर जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. देवायत अपनी जीभ नीकालके वंदनाकी चुतके दानेको छेडने लगा.. तब वंदनासे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. वो फौरन देवायतके सरको दोनो हाथोसे पकड लेती हे.. ओर सरको अपनी चुतपे दबाने लगती हे..

वंदना : (सीसकारीया करते लडखडाती आवाजमे) सीससइइइ...दे..वु.. बस.. ब..स.. बस.. ओर नही.. मुजसे कंट्रोल नही होगा.. जा..नु.. मत.. छे..डो.. मुजे.. कु..छ.. हो.. रहा हे.. आइ..ससससीइइइइ...
देवायतने वंदनाको पुरी तराह गरम करदीयाथा.. अब देवायत उनके साथ कुछभी करे वो देवायतको मना करनेकी स्थीतीमे नही थी.. तभी देवायत जटसे खडा होगया.. तो वंदनाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर देवायतके लंडको बीना सरम मुठीमे पकडलीया.. ओर देवायतकी ओर वासनाभरी नजरोसे देखते लंडको होले होले सहेलाने अपनी चुतपे घीसने लगी..
देवायत : (वंदनाके बुब्सको मसलते) वंदु.. डालदु..? हंम.. बस.. सीर्फ अेक बार..
वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. जानु.. डालदो.. धीरेसे करना.. अभीभी थोडा दर्द हे.. प्यारसे.. हंम..?
कहेते वंदना देवायतके लंडको अपनी चुतका रास्ता दीखा देती हे.. वो लंडको अपनी चुतके लव होलमे फसाके देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलेती हे.. ओर देवायतने धीरेसे कमरपे दबाव बनाके आगे करदीया.. तो लंड धीरेसे वंदनाकी चुतमे सरक गया.. तब वंदना आधी आंख चडाते मदहोसीमे उनके कंधेपे सर रख देती हे.. ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते खडी रहेती हे.. तो देवायत उनको नीतंबसे पकडके अपनी गोदमे उठा लेता हे.. ओर धीरे धीरे वंदनाको उछालते वंदनाको चोदने लगा..

तो कुछही देरकी घमासान चुदाइके बाद वंदना अकडने लगी.. उसने जोरोसे देवायतके गलेमे अपना मुह डालदीया ओर देवायतसे चीपक गइ.. तब कुछही देरमे उनकी चुतसे लावा फुट पडा.. ओर वो सांत होगइ.. तब देवायतने फौरन वंदनाको नीचे उतार दीया ओर अपना लंड नीकालके वंदनाको पीछेकी ओर घुमा दीया.. वंदना कुछ समजे उनसे पहेलेही देवायतने वंदनाके पीछेसे उनकी चुतमे लंडको उतार दीया ओर उनकी कमर पकडते वापस वंदनाको जोरोसे चोदने लगा..

वंदना दर्दके मारे मुह बीगाडते आह.. आह.. आह.. करते चुदवाती रही.. तब बाथरुममे थप..थप..थप.. फच..फच..फच.. की आवाज गुंजती रही.. तभी बहार रुममे रश्मी आगइ.. तो बाथरुमसे वंदनाकी सीसकारीयोकी ओर थपकीकी आवाज सुनके समज गइकी अंदर वंदनाकी कुटाइ हो रही हे.. ओर वो मुस्कुराते वापस बहार चली गइ.. ओर राधव वाले रुममे जाकर अपना मोबाइल लेकर बेडपे बैठ गइ.. ओर उसने चारुको फोन करदीया..
चारु : (फोन उठातेही धीरेसे) हां रश्मीभाभी..
रश्मी : (धीरेसे) भाभी.. क्या अभी रमेशभाइ घरपे हे..? हंम..?
चारु : (रमेशकी ओर देखते धीरेसे) हंम.. भाभी मे बादमे आपको फोन करती हु.. इधर ही हे..
कहातो रश्मीने फौरन फोन काटदीया.. तबतक तो बाथरुममे वंदनाकी जबरदस्त चुदाइ होने लगीथी.. वंदना धीरेसे चीलाती चीखती रही.. ओर देवायतने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते दोनो बुब्स थामलीया.. ओर वंदनाके गलेमे मुह डालके उनको चुमते हुअे जडने लगा.. ओर वंदनाकी पुरी चुतको अपने गाढे पानीसे भरदी.. ओर जटसे लंडको खीचके नीकाल दीया.. तब वंदनाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ..
तब दोनोका काम रस वंदनाकी चुतसे नीकलते उनके पैरोसे होता नीचेकी ओर जाने लगा.. ओर वंदना पलटके जोरोसे देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तब देवायतने वही खडे खडे सावर चालु करदीया.. फीर दोनोही अेक दुसरेको नहेलाके बहार आगये.. देवायत वंदनाको गोदमेही उठाकर बहार लेकर आगया.. तब रश्मीभी अंदर आगइ.. कुछही देरमे तीनो पुरी तराह कंपलीट होगये.. तो रश्मी तीनोका चाइनास्ता लेकर रुममे ही आगइ..
तब वंदना बहुतही सरमा रहीथी.. आज सबकुछ हो चुकाथा.. वंदनाने अपनी सादीसे पहेलेही देवायतके साथ अपनी सुहागरात मनाली थी.. कल साम तकतो उनको पताभी नही थाकी कल सुबह उठतेही वो लडकीसे ओरत बन चुकी होगी.. तीनोही चाइ नास्ता कर रहेथे.. तब वंदना बार बार सरमाते तीरछी नजरोसे देवायतकी ओर देखती रही.. तो रश्मीभी देवायतकी ओर कातील स्माइल करते वंदनाकी ओर इसारा करती रही.. तभी..
देवायत : रश्मी.. अब मुजे जाना होगा.. मे यहीसे सीधे हमारे खेतोपे चला जाउगा.. तुम मेरी इस खुबसुरत बीवीका खयाल रखना.. ओर इसे अभी अेक आइपील ओर पेइनकीलर दे देना..
रश्मी : (सरमाते धीरेसे हसते) क्यु..? इस बीवीकी बहुत चीन्ता हो रही हे..? मेरीतो इतनी चीन्ता कभी नही की.. हें..हें..हें..
देवायत : (थोडा गुस्सेसे) चुप कर.. तेरीभी चीन्ता करता हु.. तुजे तो बच्चा चाहीयेथानां..? तो तुजे आइपीलकी क्या जरुरत थी.. क्या इसेभी बच्चा चाहीये..?
वंदना : (सरमाते जटसे) अरे नही नही.. अभी नही..
रश्मी : (जोरोसे हसते) क्यु..? अभी क्यु नही..? कमीनी.. बोलना अभी इनके साथ ओर मजे करने हे.. हें..हें..हें.. अंदरतो कैसे चीला रही थी.. हें..हें..हें..
वंदना : (अेकदम सर्मसार होते अेक मुका मारते) भाभी.. चुप करो.. सरमभी नही आती.. बहार सुन रहीथी क्या..?
देवायत : वंदना.. अब तुम मेरी बीवी बनके तुम्हारे घरम ही रहोगी.. मे नही चाहता रमेश ओर चारुभाभी अकेले होजाये.. मे तुजे हमारे साथभी रख सकता हु.. अगर तुजे हमारे साथ रहेनाहेतो भी मुजे कोइ अेतराज नही हे.. क्युकी तुम्हारे बारेमे पुनो मंजु सृती चंदा सब जानते हे.. तो मुजे कोइ दीकत नही हे..
वंदना : (सरमाते मुस्कुराते) देवु.. थेन्क्स.. लेकीन मे मम्मी पापाके पासही रहेना चाहती हु.. वरना वो अकेले होजायेगे.. खास करके मम्मी.. वो मुजे बहुत चाहती हे.. मेरी बहुत चीन्ता करती हे..
रश्मी : वंदु.. तुम जरासाभी फीकर मत करना.. जबभी इनको मीलनेका दिल करे मुजे बता देना.. ओर इनको यहा आकर मील लेना.. बस अबतो ये घर इसीके लीयेही हे.. इसीलीये मे गांवसे बहार नया घर बनवा रही हु.. ताकी बहार कीसीको पताही नही चलेगाकी मेरे घर कोन आता हे ओर कौन नही..
तीनो अैसीही बाते करते चाइ नास्ता करलेते हे.. तब देवायत वंदना ओर रश्मी दोनोको हग करके उनके होठोको चुम लेता हे.. ओर वहासे नीकल जाता हे.. आज रश्मी ओर वंदना दोनोही पंचायतकी ओफीस जाने वाली नहीथी.. तभी वंदना देवायत चला गयातो वही वापस बेडपे लेट गइ.. ओर थकानकी वजहसे कुछही देरमे नींदकी आगोसमे चली गइ.. तो रश्मीभी घरके सभी दरवाजे बंध करके वंदनाके पास आकर सोगइ.. क्युकी दोनो पुरी रात जागीथी..