Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 24 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती





my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४७

पुनम धिरेनके साथ हर तराहके मजे ले रहीथी.. उनको सब मालुम होनेके बावजुदभी धिरेनके साथ बातोसे खेल रहीथी.. उनको पताथा कल सेटरर्डे सामको धिरेन नीलमको लेकर यही आने वाला हे.. ओर कल रातको ही नीलम इसी बीस्तरपे कलीसे अ‍ेक फुल बनके खीलने वाली थी.. दोनो ही मन्डे सुबह तक यही रुकने वालेथे.. ओर इस बारेमे धिरेनने भी सब प्लानींग करके रखीथी....अब आगे

इधर रश्मीके घरपे अभी देवायत ओर वंदनाके बीच जोरोसे घमासान चुदाइ हो रहीथी.. देवायतने अभी तक वंदनाको दो बार जडा दीयाथा.. तब वंदना भी जडते वक्त देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेतीथी.. फीर वापस उतेजीत होकर अपनी कमर उछालते देवायतका साथ देने लगती.. तभी देवायत वंदनाकी चुतमे पुरा लंड डालके रुक गया.. ओर वंदनासे चीपकके उसे जोरोसे बाहोमे भीचते लीपलोक करलीया..

तब वंना भी समज गइ.. ओर उसनेभी देवायतको अपनी बाहोमे कसके पकड लीया.. तभी देवायत अपनी कमरको जटके देते जडने लगा.. तो वंदनाको अपनी बच्चेदानीपे देवायतका गरम विर्य महेसुस हुआ तो वोभी उतेजनासे कांपने लगी.. ओर देवायतके साथ जडने लगी.. तब वंदनाके लीये कीतना प्यारा अहेसास था.. इस पलके मजेकी उसने कभी कल्पना भी नही कीथी.. ओर वो पसीनेसे तरबोर होकर देवायतकी पीठ सहेलाने लगी..





वंदना : (कामुक आवाजमे) ओह.. देवु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच.. कीपना प्यारा अहेसास था.. बस यही प्यार मुजे चाहीये.. आजसे ये वंदना आपकी अमानत होगइ..

रश्मी : (मुस्कुराते सरको सहेलाते) वंदु.. बस.. यही मजेके लीयेतो हम इनके पीछे पागल हे.. अब तुमभी हमारी टीममे सामील होचुकी हो.. हें..हें..हें..

वंदना : (रश्मीको ओर मुस्कुराते) भाभी.. मुजे यहा जबरदस्तीसे लानेके लीये थेन्क्स.. अगर आज मेने यहा आनेकी हिंमत नही की होतीतो सायद देवुसे मे कभी नही मील पाती..

रश्मी : (मुस्कुराते) नही वंदु.. मेने ये सब तेरी मम्मीके कहेनेपे कीया हे.. वो चाहती हेकी तुजे तेरा प्यार मीलजाये.. इसीलीये पुनोदीदी मंजुभाभी मेने ओर नीशाभाभीने तुम दोनोको मीलवानेका प्लान बनाया हे..

देवायत : (वंदनाके उपर अभीभी लंड डालके लेटते) रश्मी.. क्या इस बारेमे मंजुकोभी सब पता हे..?

रश्मी : (सरमाते हसते) हां.. लेकीन सीर्फ मंजुभाभी ओर पुनोदीदीको.. बाकी इस बारेमे अभी कीसीको नही पता.. तो बी केरफुल.. अभी इस बातका जीक्र कीसीके सामने करनेकी जरुरत नही हे.. आगे जाकर सब ठीक होजायेगा..

देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. मेरी मंजुको सब पता हे की मेरी कीतनी बीवीया होगी.. वंदु.. अब मे जल्दसे जल्द तुमसे सादी करलुगा.. तुम फीकर मत करना..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) देवु.. अब उपरसे हटीअ‍ेनां.. अभी भी अंदर सख्त महेसुस हो रहा हे..

देवायत : (मुस्कुराते) नही वंदु.. मुजे तुमसे अ‍ेक बार ओर प्यार करना हे.. पुछलो रश्मीको..

रश्मी : (सरमाते हसते) हां वंदु.. ये दो बार करनेसे पहेले तेरे उपरसे हटने वाले नही हे.. हम सबकी दो दो बार बजाकरही उपरसे हटते हे.. पता नही बाबाने इनको कोनसी जडीबुटी पीलाइ हे.. हें..हें..हें..

वंदना : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) क्या..? अभी अ‍ेक बार ओर करेगे..? जानु.. देखना मुजे कल चलने फीरने लायक छोडना.. वरना मे सबको क्या जवाब दुगी..?

रश्मी : (गालको चुमते) वंदु.. तुम कलकी चीन्ता मत कर.. कल पुरा दिन तुजे यही रहेकर आराम करना हे.. यहा कोइ तुजे पुछनेभी नही आयेगा.. मेरी चारुभाभीसे सब बाते होगइ हे.. हें..हें..हें..

वंदना : (मुस्कुराते सरमाते) भाभी.. तुम ओर मम्मी कीतनी कमीनी हो.. सबकुछ तैय करके बैठी हो..

फीर देवायतने वंदनाकी अ‍ेक बार ओर जबरदस्त तरीकेसे घमासान चुदाइ करली.. इस बारभी वंदनाको दो दो बार जडाके तीसरी बारमे दोनो साथमे जड गये.. तब देवायतने चोद चोदके वंदनाकी अ‍ेक अ‍ेक नब्सको ढीली करदी.. वंदना हीलनेकी भी स्थीतीमे नही थी.. तब देवायत उनको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गयातो साथमे रश्मीथी चली गइ.. तीनोही नंगेथे.. वहा रश्मीने वंदनाकी चुतकी गरम पानीसे सीकाइ करदी..

फीर तीनोने साथमे सावर लीया.. ओर देवायत वंदनाको गोदमे उठाकर बहार लेआया.. देखातो चदरके बीच देवायत ओर वंदनाके प्यारकी नीशानी मौजुद थी.. पुरी चदरमे दोनोका कामरसके साथ खुनके धब्बेभी थे.. तो रश्मीने चदरको खीचकर चेन्ज करलीया.. ओर पुरानी चदरको बाथरुममे वोसके लीये लेजाने लगी.. तो वंदनाने सरमाकर उनको मना करदीया..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. इस चदरको अ‍ैसेही यही रखदो.. मे कल इसे लेजाउगी.. इनमे मेरे ओर देवुके प्यारकी पहेली नीशानी हे.. मे इसे जींदगीभर अ‍ैसेही रखुगी.. इसके बदले मे आपको नइ चदर लाके दे दुगीं..

रश्मी : (वंदनाकी ओर कातील स्माइल करते) अरे वाह.. मेरी ननंदतो बडी सीयानी नीकली.. हें..हें..हें.. कोइ बात नही लेजाना.. ओर नइ चदरकी कोइ जरुरत नही हे.. इसके बदले मे हमारे पतीसे अभी वसुल करलुगी.. बस अ‍ेक बार तुम दोनो अच्छेसे प्यार करलो.. फीर मे तो हुही.. हें..हें..हें..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) भाभी.. अब मे प्यार करनेकी स्थीतीमे नही हु.. आपही करलो..

देवायत : भाभी.. तुम फटाफट चदर चेन्ज करलो.. बादमे बाते करलेना.. मे इनको गोदमे लेकर खडा हु..

रश्मी : (चदर चेन्ज करते) बडेही कमीने हो.. मजे करनेमे तो उछल उछलके चुदाइ करते थे.. दो मीनीट गोदमे उठाकर खडे नही रेह सकते..? चलो.. आजाओ.. लीटादो इसे.. ओर आप इधर मेरे पास आजाओ..

देवायत : (मुस्कुराते) बडीही तीखी हो.. अभी आनेदो.. तेरी भी हालत वंदुकी जैसे नही कीतो मेरा नाम देवायत नही.. हें..हें..हें.. मुजे गालीया देती हे..

कहेतेही देवायतने वंदनाको बेडपे लीटाकर रश्मीको दबोच लीया.. तो वंदना उन दोनोको देखते हसती रही.. ओर रश्मी जोरोसे हसते देवायतसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करती रही.. तभी देवायत रश्मीको बेडपे पटककर उनके उपर चड गया.. ओर रश्मीके दोनो बुब्स जोरोसे मसलते उनको लीपलोक करलीया.. तभी देवायतके लंडने रश्मीके बिलका रास्ता ढुंढ लीया.. ओर रश्मीकी चुतने भी देवायतका पुरा लंड नीगल लीया..

रश्मी : (कामुक आवाज करते कातील नजरोसे हसते) आइ.. आह.. आह.. आहहहइइइइ.. देवु धीरेसे.. कीतने कमीने हो तुम.. कहेकरतो डालते.. उहंम.. आइइइ.. देवु धीरे.. बच्चा हे.. अंदर..

देवायत : (थोडा उपर होते) ओह.. सोरी.. सोरी.. सोरी.. डार्लींग.. मे भुल गयाथा.. चल आजा अब प्यारसे करुगा.. कीतनी क्युट बीवीहे मेरी.. हें..हें..हें..

रश्मी : (मुस्कुराते धीरेसे कामुक नजरोसे) कीतने गंदे हो.. पुरातो घुसा दीया.. ओर अब क्युट..? हें..हें..हें..

इस रात देवायतने रश्मीको ओर तीन बार जबरदस्त तरीकेसे अलग अलग पोजीसमे चोद लीया.. वंदनाभी काफी थक चुकीथी.. वो देवायतको रश्मीकी चुदाइ करते देखती रही.. ओर कब नींदकी आगोसमे चली गइ उसे पताभी नही चला.. वो नंगीही सो गइ.. इसके बाद देवायतने दो बार ओर रश्मीकी चुदाइ करली.. तब आखरी बारकी चुदाइमे रश्मीकी हालतभी पतली हो चुकी थी..





आखीर चुदाइ करके देवायत रश्मीको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. फीर दोनोही सावर लेकर बहार नंगेही आगये ओर अ‍ेक दुसरेके साथ चीपकके सोने लगे.. तब वंदनाभी करवट लेकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर तीनोही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपककर सोगये.. आज हवेलीमे भी लखनने रजीयाकी चोद चोदके हालत पतली करदी थी.. तो वोभी दोनो अ‍ेक दुसरेसे नंगेही चीपककर सोगये थे..
 
रातमे पुरे गांवमे सन्नाटा छाया हुआथा.. इस रात कही घरोमे रीस्तोके मायनेही बदल चुके थे.. ना सीर्फ इस गांवमे.. बल्की आजु बाजुके सभी गांवोमे यही हालथा.. जीतनीभी जवान कुआरी लडकीया थी.. वो ज्यादातर अपने भाइके साथ आपसी रीस्तोमे बंधी हुइ थी.. ओर जीतनीभी सादी सुधा ओरते थी.. उनकीभी अपने पतीके अलावा घरके दुसरे मर्दसे या पडोसमे कीसी ओर जवान मर्दसे रीलेशन रखनेकी जीज्ञासा बढ गइ थी..

आज सुबहका सुरज कुछ ज्यादाही मस्तीयामे गांवकी ओर हसते हुअ‍े आगे बढ रहाथा.. सुबह ५ बजे रजीया उठकर अपने रुममे थोडी लंगडाते चली गइ.. ओर नहाके कंपलीट होगइ.. फीर वो ओर चंपाभाभी दोनोही अपने रुटीन कामपे लग गये.. देवायत वंदना ओर रश्मी अभीभी अ‍ेक दुसरोसे चीपकके सो रहेथे.. तो धिरेन पुनमभी जल्दी उठ गये.. तब दया नीचे कंपलीट होकर कीचनमे काम कर रही थी..

पुनम आज मायके जाने वालीथी तो देवायतको मीलनेके लीये कुछ ज्यादाही अ‍ेक्साइटेड थी.. तो दुसरी ओर आज धिरेनभी बहुत खुस हो रहाथा.. क्युकी सब अपने प्लानके मुताबीक हो रहाथा.. आज वो सामको आते वक्त नीलमको साथ लेकर आने वाला था.. इसके लीये धिरेनने बहुत कुछ प्लान बनाके रखाथा.. तो दुसरी ओर आज नीलमभी सुबह उठकर बडीही रोमांचींत हो रहीथी.. वोभी फटाफट नहाके कंपलीट होगइ..

दिया : (बेडपे लेटे मुस्कुराते) नीलु.. आज तो जल्दी उठ गइ.. ओर कंपलीट भी होगइ..? कही जाना हे क्या..? कही जीजुके साथतो नही जाना.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते हसते) बडी कमीनी हो तुम.. सब बाते जानलेती हो.. लेकीन अभी नही.. वो सामको मुजे लेने आयेगे.. सेटरडे सन्डे हे तो मे घर जा रही हु.. ओर कुछ नही..

दिया : (कातील मुस्कानसे) क्या अपने घर जा रही हो..? हंम..? की जीजुके घर.. हें..हें..हें..

नीलम : (दियाके पास आकर बेडपे बेठते सरमाते) दिया.. सायद जीजु मुजे अपने घरपे लेजाये.. अगर यहा कोइ आकर मेरे बारेमे पुछेतो तुम सम्हाल लेना.. मुजेतो बहुत डर लग रहा हे..

दिया : (बेडपे बैठते) अरे तु फीकर मत कर.. तु मेडमको कहेकर जाना वो सब सम्हाल लेगी.. इसमे डरनेकी क्या बात हे..? सायद आज मेभी अपने बोयफ्रेन्डके घर जा रही हु..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दिया.. अ‍ेक बात कहु..? सायद जीजु मुजसे फीजीकल होना चाहते हे.. मे क्या करु..? मुजेतो बहुत डर लग रहा हे.. मुजे इसके बारेमे कुछ बताना.. क्या ये सही हे..? आइ मीन सादीसे पहेले.. सबकुछ.. कुछ होगातो नही..

दिया : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) नीलु.. पहेले तु बता.. तुम क्या चाहती हो..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे मुस्कुराते) दिया.. मनतो मेराभी बहुत कर रहा हे.. लेकीन डरभी लग रहा हे..

दिया : (खुस होते मुस्कुराते) अरे वाह.. नीलु.. तुम खामखा डर रही हे.. इनमे कुछ नही होता.. बस पहेली बार अंदर डालते हे तब कुछ देरके लीये मामुली दर्द होता हे.. लेकीन बादमेतो मजेही मजे हे.. देखना तुजे अ‍ैसा लगेगा मे स्वर्गकी सैर कर रही हु.. नीलु.. तु गभराना नही.. अपनी लाइफको खुब अ‍ेन्जोय कर.. भाडमे जाये सादी.. सादीके बादभी तो चुदवाना हे.. तो पहेले क्यु नही..? क्या वो मेने किताब (ये केसी अनुभुती) दी वो पढीकी नही..?

नीलम : (सरमाते हसते) हंम.. पढ रही हु.. बहुत मजा आ रहा हे.. वो राजाने अपनी सभी बहेनोसे, दादी चाची.. भाभी.. सबसे सादी करली हे.. क्या हिमाचलमे सचमे अ‍ैसा हुआ होगा..? इसमे हमारे इस सहेरकाभी जीक्र हे.. वो राजा ओर उनकी तीनो रानीया इसी सहेरमे रहेते थे..

दिया : (मुस्कुराते) नीलु.. सीर्फ इसी सहेरमे नही.. अभी जो हम पढ रहे हेनां.. इसी स्कुलमे सब पढते थे..

नीलम : दिया.. क्या आज सेटरडे सन्डे हे तो तुम सचमे अपने बोयफ्रेन्डके घर जा रहीहो..?

दिया : (मुस्कुराते) हंम.. कल रातही मेरे बी.अ‍ेफ.का फोन आयाथा.. उनके मम्मी पापा भी दो दिनके लीये कही जा रहे हे.. तो वो घरपे अकेला हे.. तो उनके मम्मी पापाके जातेही वो मुजे लेने आयेगा.. नीलु.. ये दो दिन हम दोनो खुब मजे करेगे.. कमीना कीतना जोसमे करता हे.. मुजेतो डर हेकी कही वो मुजे प्रेगनेन्ट ना करदे.. उनको कोन्डम चडाना अच्छा नही लगता.. तो मुजे ही आइपील लेनी पडती हे.. तुम भी ले लेना..

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. मे उनको कहुगी.. वो ले लेगे.. पहेलेतो आज हमारे लीये मकान देखने जाना हे.. वहीसे सीधे घर चले जायेगे.. आज आधे दिन बेन्क खुली रहेती हे.. फीर जीजु मुजे लेने आयेगे..

दोनोही बाते करते बैठी रही.. तो इधर धिरेनके घर दयाने सब काम नीपटाकर चाइ नास्ता बनालीया था.. तो तीनोही साथमे चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तो अ‍ेकही बाइकमे तीनो नही जा सकते.. तो पुनमने वहीसे लखनको फोन करदीया.. तो लखन भी चाइ नास्ता करके अपनी जीप लेकर पुनम दयाको लेने आ रहा था.. ओर धिरेन चाइ नास्ता करके आज जल्दी सहेरकी ओर नीकल गया..

रश्मीके घर तीनोही आज देरसे उठे.. तो पहेले रश्मी नहाकर कंपलीट होगइ.. तब वंदना नहानेके लीये बाथरुममे थोडा लंगडाते जा रहीथी.. तो देवायत जटसे बेडसे उतर गया.. ओर वंदनाको गोदमे उठाकर बाथरुममे चला गया तो वंदना बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अंदर जातेही देवायतने बाथरुमका दरवाजा बंध करदीया.. तो वंदना सब समज गइ.. ओर वो सर्मसार होते मुस्कराते देवायतको मनते करने लगी..

वंदना : (सरमाते हसते) देवु.. प्लीज.. यहा कोइ सरारत मत करना.. अभी मेरी हालत ठीक नही हे..

देवायत : (हसते बाहोमे भरते) अरे अ‍ैसे कैसे मेरी खुबसुरत बीवीको छोड देता.. चल आजा सीर्फ अ‍ेकबार..

वंदना : (सरमाते बाहोमे) देवु.. प्लीज.. सायद आज मम्मीभी इधर आजाये.. मुजेतो बहुत सर्म आयेगी..

देवायत : (प्यारसे होंठ चुमते) वंदु.. उनसे डरनेकी जरुरत नही.. वो हमारे बारेमे सब जानती हे..

वंदना : (सरमाते धीरेसे) जानु.. क्या इस बारेमे आपसे उनकी बात हुइथी..? हंम..?

देवायत : (गाल चुमते) नही.. मुजे सब रश्मीने बताया था.. लेकीन हो सकता हे आज कुछ बात होजाये.. वंदु.. सायद कल या परसो.. मे ओर तेरी मम्मी अ‍ेक मंदिरमे चले जायेगे.. वहा जाकर पहेले मे उनसे सादी कर लुगा.. मे चाहता हु की हमारी सादीसे पहेले तेरी मम्मीसे सादी करलु.. क्युकी मेने उसे सादीका वादा कीयाथा..

वंदना : (जोरोसे बाहोमे भीचते) जानु.. बस.. मुजे आपसे यही उमीद थी.. आइ लव यु सो मच.. आपने हम मां बेटी दोनोको सम्हाल लीया हे.. अब उनको पापासे कोइ उमीद नही हे.. आप दोनो करलो सादी..

तभी देवायतने वंदनाके होठ चुमलीये.. ओर अ‍ेक हाथसे उनके उरोजोको दबाके मसलने लगा.. तो वंदना सरसे पांव तक कांपने लगी.. वो बहुतही सर्मसार होगइ.. उनके दोनो बुब्स कठोर होने लगे.. ओर वंदनाकी चुत फीरसे हरकतमे आकर फडफडाने लगी.. तब वंदना पुरी तराह मदहोसीमे चली गइ.. ओर उसने देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलीया.. ओर अपनी कमर हीलाते देवायतके लंडसे अपनी चुतको रगडने लगी..

वंदना : (कामुक आवाजमे धीरेसे सरमाते) दे..वु.. बस.. बस.. ओर नही.. मुजे कुछ हो..रहा..हे..हे.. आह.. आह.. आइ.. कुछ कीजीये.. इसे डालदो अंदर.. बहुत मन कर रहा हे..

तभी देवायत वंदनाके पैरोके बीच बैठ गया.. ओर उनकी अ‍ेक टांग उची करके वंदनाकी चुतपे मुह लगा दीया.. तब वंदना पुरी तराह कामातुर होगइ.. ओर जोरोसे सीसकारीया करने लगी.. देवायत अपनी जीभ नीकालके वंदनाकी चुतके दानेको छेडने लगा.. तब वंदनासे बरदास्त करना मुस्कील होने लगा.. वो फौरन देवायतके सरको दोनो हाथोसे पकड लेती हे.. ओर सरको अपनी चुतपे दबाने लगती हे..





वंदना : (सीसकारीया करते लडखडाती आवाजमे) सीससइइइ...दे..वु.. बस.. ब..स.. बस.. ओर नही.. मुजसे कंट्रोल नही होगा.. जा..नु.. मत.. छे..डो.. मुजे.. कु..छ.. हो.. रहा हे.. आइ..ससससीइइइइ...

देवायतने वंदनाको पुरी तराह गरम करदीयाथा.. अब देवायत उनके साथ कुछभी करे वो देवायतको मना करनेकी स्थीतीमे नही थी.. तभी देवायत जटसे खडा होगया.. तो वंदनाने देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर देवायतके लंडको बीना सरम मुठीमे पकडलीया.. ओर देवायतकी ओर वासनाभरी नजरोसे देखते लंडको होले होले सहेलाने अपनी चुतपे घीसने लगी..

देवायत : (वंदनाके बुब्सको मसलते) वंदु.. डालदु..? हंम.. बस.. सीर्फ अ‍ेक बार..

वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. जानु.. डालदो.. धीरेसे करना.. अभीभी थोडा दर्द हे.. प्यारसे.. हंम..?

कहेते वंदना देवायतके लंडको अपनी चुतका रास्ता दीखा देती हे.. वो लंडको अपनी चुतके लव होलमे फसाके देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचलेती हे.. ओर देवायतने धीरेसे कमरपे दबाव बनाके आगे करदीया.. तो लंड धीरेसे वंदनाकी चुतमे सरक गया.. तब वंदना आधी आंख चडाते मदहोसीमे उनके कंधेपे सर रख देती हे.. ओर देवायतको जोरोसे बाहोमे भीचते खडी रहेती हे.. तो देवायत उनको नीतंबसे पकडके अपनी गोदमे उठा लेता हे.. ओर धीरे धीरे वंदनाको उछालते वंदनाको चोदने लगा..





तो कुछही देरकी घमासान चुदाइके बाद वंदना अकडने लगी.. उसने जोरोसे देवायतके गलेमे अपना मुह डालदीया ओर देवायतसे चीपक गइ.. तब कुछही देरमे उनकी चुतसे लावा फुट पडा.. ओर वो सांत होगइ.. तब देवायतने फौरन वंदनाको नीचे उतार दीया ओर अपना लंड नीकालके वंदनाको पीछेकी ओर घुमा दीया.. वंदना कुछ समजे उनसे पहेलेही देवायतने वंदनाके पीछेसे उनकी चुतमे लंडको उतार दीया ओर उनकी कमर पकडते वापस वंदनाको जोरोसे चोदने लगा..





वंदना दर्दके मारे मुह बीगाडते आह.. आह.. आह.. करते चुदवाती रही.. तब बाथरुममे थप..थप..थप.. फच..फच..फच.. की आवाज गुंजती रही.. तभी बहार रुममे रश्मी आगइ.. तो बाथरुमसे वंदनाकी सीसकारीयोकी ओर थपकीकी आवाज सुनके समज गइकी अंदर वंदनाकी कुटाइ हो रही हे.. ओर वो मुस्कुराते वापस बहार चली गइ.. ओर राधव वाले रुममे जाकर अपना मोबाइल लेकर बेडपे बैठ गइ.. ओर उसने चारुको फोन करदीया..

चारु : (फोन उठातेही धीरेसे) हां रश्मीभाभी..

रश्मी : (धीरेसे) भाभी.. क्या अभी रमेशभाइ घरपे हे..? हंम..?

चारु : (रमेशकी ओर देखते धीरेसे) हंम.. भाभी मे बादमे आपको फोन करती हु.. इधर ही हे..

कहातो रश्मीने फौरन फोन काटदीया.. तबतक तो बाथरुममे वंदनाकी जबरदस्त चुदाइ होने लगीथी.. वंदना धीरेसे चीलाती चीखती रही.. ओर देवायतने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते दोनो बुब्स थामलीया.. ओर वंदनाके गलेमे मुह डालके उनको चुमते हुअ‍े जडने लगा.. ओर वंदनाकी पुरी चुतको अपने गाढे पानीसे भरदी.. ओर जटसे लंडको खीचके नीकाल दीया.. तब वंदनाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ..

तब दोनोका काम रस वंदनाकी चुतसे नीकलते उनके पैरोसे होता नीचेकी ओर जाने लगा.. ओर वंदना पलटके जोरोसे देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तब देवायतने वही खडे खडे सावर चालु करदीया.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेको नहेलाके बहार आगये.. देवायत वंदनाको गोदमेही उठाकर बहार लेकर आगया.. तब रश्मीभी अंदर आगइ.. कुछही देरमे तीनो पुरी तराह कंपलीट होगये.. तो रश्मी तीनोका चाइनास्ता लेकर रुममे ही आगइ..

तब वंदना बहुतही सरमा रहीथी.. आज सबकुछ हो चुकाथा.. वंदनाने अपनी सादीसे पहेलेही देवायतके साथ अपनी सुहागरात मनाली थी.. कल साम तकतो उनको पताभी नही थाकी कल सुबह उठतेही वो लडकीसे ओरत बन चुकी होगी.. तीनोही चाइ नास्ता कर रहेथे.. तब वंदना बार बार सरमाते तीरछी नजरोसे देवायतकी ओर देखती रही.. तो रश्मीभी देवायतकी ओर कातील स्माइल करते वंदनाकी ओर इसारा करती रही.. तभी..

देवायत : रश्मी.. अब मुजे जाना होगा.. मे यहीसे सीधे हमारे खेतोपे चला जाउगा.. तुम मेरी इस खुबसुरत बीवीका खयाल रखना.. ओर इसे अभी अ‍ेक आइपील ओर पेइनकीलर दे देना..

रश्मी : (सरमाते धीरेसे हसते) क्यु..? इस बीवीकी बहुत चीन्ता हो रही हे..? मेरीतो इतनी चीन्ता कभी नही की.. हें..हें..हें..

देवायत : (थोडा गुस्सेसे) चुप कर.. तेरीभी चीन्ता करता हु.. तुजे तो बच्चा चाहीयेथानां..? तो तुजे आइपीलकी क्या जरुरत थी.. क्या इसेभी बच्चा चाहीये..?

वंदना : (सरमाते जटसे) अरे नही नही.. अभी नही..

रश्मी : (जोरोसे हसते) क्यु..? अभी क्यु नही..? कमीनी.. बोलना अभी इनके साथ ओर मजे करने हे.. हें..हें..हें.. अंदरतो कैसे चीला रही थी.. हें..हें..हें..

वंदना : (अ‍ेकदम सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. चुप करो.. सरमभी नही आती.. बहार सुन रहीथी क्या..?

देवायत : वंदना.. अब तुम मेरी बीवी बनके तुम्हारे घरम ही रहोगी.. मे नही चाहता रमेश ओर चारुभाभी अकेले होजाये.. मे तुजे हमारे साथभी रख सकता हु.. अगर तुजे हमारे साथ रहेनाहेतो भी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. क्युकी तुम्हारे बारेमे पुनो मंजु सृती चंदा सब जानते हे.. तो मुजे कोइ दीकत नही हे..

वंदना : (सरमाते मुस्कुराते) देवु.. थेन्क्स.. लेकीन मे मम्मी पापाके पासही रहेना चाहती हु.. वरना वो अकेले होजायेगे.. खास करके मम्मी.. वो मुजे बहुत चाहती हे.. मेरी बहुत चीन्ता करती हे..

रश्मी : वंदु.. तुम जरासाभी फीकर मत करना.. जबभी इनको मीलनेका दिल करे मुजे बता देना.. ओर इनको यहा आकर मील लेना.. बस अबतो ये घर इसीके लीयेही हे.. इसीलीये मे गांवसे बहार नया घर बनवा रही हु.. ताकी बहार कीसीको पताही नही चलेगाकी मेरे घर कोन आता हे ओर कौन नही..

तीनो अ‍ैसीही बाते करते चाइ नास्ता करलेते हे.. तब देवायत वंदना ओर रश्मी दोनोको हग करके उनके होठोको चुम लेता हे.. ओर वहासे नीकल जाता हे.. आज रश्मी ओर वंदना दोनोही पंचायतकी ओफीस जाने वाली नहीथी.. तभी वंदना देवायत चला गयातो वही वापस बेडपे लेट गइ.. ओर थकानकी वजहसे कुछही देरमे नींदकी आगोसमे चली गइ.. तो रश्मीभी घरके सभी दरवाजे बंध करके वंदनाके पास आकर सोगइ.. क्युकी दोनो पुरी रात जागीथी..
 
तो दुसरी ओर जबसे जागृती ओर लखनके बीच अपने भाइ बंसीके बारेमे बात हुइ.. ओर उनकी सहेली जयश्रीने भी जागृतीको अपने भाइ बंसीके साथ रीलेशनकी बात कही.. तबसे जागृती अ‍ेक बार फीर अपने भाइ बंसीके बारेमे सोचनेको मजबुर होगइ.. लेकीन वो लखनको भी बहुत प्यार करती थी.. ओर उसेभी छोडना नही चाहती थी.. तो जागृती थोडी असंमजमे फसी थी.. तो कोइ बीचके रास्तेके बारेमे सोचने लगी..

बंसीके बारेमे बार बार सोचते सोचते जागृतीके मनमे उनके भाइ बंसी छाने लगा.. जब रात होगइ.. ओर सबलोग सो गये तब जागृतीको बंसीको मीलनेका बहुत मन करने लगा.. लेकीन वो देर रात बंसीको कैसे मीले..? यही सोचते वो बार बार बंसीके रुमके पास जाकर दरवाजेको देखते थोडी देर वही खडी रहेकर वापस आजाती.. इसी बीच रातको १२ बज गये.. जब वो आखरी बार गइ..

तब बंसीके रुमसे कुछ आवाज आ रहीथी.. तो जागृतीको बडा आस्चर्य हुआ.. ओर वो की होलसे जांकने लगी.. तब अंदरका नजारा देखतेही चोंक गइ.. ओर उनका सपना उसे चकनाचुर होते नजर आया.. क्युकी अंदर उनका भाइ बंसी ओर उनकी बुआ सांती दोनोही बीलकुल नंगेथे.. ओर बंसी उनकी बुआके उपर लेटते उनको जोरोसे कमर हीलाते चोद रहाथा.. तब जागृती उनको देखती ही रही..

फीर जटसे अपने रुममे वापस आगइ.. ओर बेडपे लेटतेही उनकी आंओसे आंसु नीकल गये.. भलेही वो लखनके साथ अपने तनकी प्यास बुजातीथी.. लेकीन उनका ड्रीमबोय सुरुसेही उनका भाइ बंसी था.. जब लखनने उसे कहाथाकी बंसीभी तुमसे प्यार करता हे ओर तुजे पाना चाहता हे.. तब वो कीतनी खुस थी.. ओर आज बंसीने उनके सारे अरमानोपे पानी फीरदीया था.. वो बंसीके बारेमे गहेरी सोचमे डुब गइ..

वो सोचती थीकी बंसी ओर सांतीके बीच कीतने दिनोसे रीलेशन होगा..? उनको लगताथा की बंसीभी उसे प्यार करता हे.. लेकीन आज बंसीका सांतीके साथभी रीलेशन देखकर उसे लगाकी बंसी भी अयास आदमी हे.. वो उसे प्यार नही सीर्फ उनके तनको भोगना चाहते हे.. अगर लडके इतने अयास हो सकते हे तो फीर लडकीया क्यु नही.. क्या सीर्फ लडकेकोही सबके साथ रीलेशन रखनेकी छुट हे.. हमे नही..?

रातमे सोते वक्त इसी बारेमे सोचते सोचते उनके दिमागमे अ‍ेक आइडीया आगया.. ओर उनके मुहसे अ‍ेक कातील मुस्कान नीकल गइ.. ओर वो सो गइ.. तब देर रात ४ बजे उनके फोनकी रींग बज उठी.. देखातो जयश्रीका फोनथा.. ओर जागृतीने जयश्रीके साथ बात करली.. ओर बात करके उसने अपना इरादा मजबुत करलीया.. ओर उसने अपने दिमागके आइडीयाके मुताबीत बीच रास्ता नीकालते उसी हिसाबसे चलनेका फैसला कर लीया..

आज सुबह सुबह सामतभाइके घरपे जया कीचनमे काम कर रहीथी.. उनकी विधवा बहेन सांती ओर उनका लडका बंसी.. दोनोही रातमे प्यार करके अपने अपने रुममे सो रहेथे.. तब आज उनकी लडकी जागृती अपनी सहेली जयश्रीकी सलाहके अनुसार अपने भाइको रीजानेके लीये सुबह जल्दी उठ गइ.. ओर तैयार होकर पुरे घरमे जाडु पोछा करने लगी.. जब होल ओर सामतके रुममे जाडु पोछा होगया तो अपने भाइके रुममे चली गइ..

तो उनका भाइ बंसी गहेरी नींदमे सो रहाथा.. अंदर जातेही जागृती जाडु पोछा साइडमे रखके उनकी ओर देखती रही.. जब उनका ध्यान बंसीकी लोअरकी ओर चला गया.. तो लोअरमे लंड खडा होनेकी वजहसे तंबु की तराह दीखने लगा.. तब जागृती देखकर बहुतही सरमाइ..

ओर उनके दिलकी धडकन थोडी बढ गइ.. उन्होने धीरेसे अपना दुपटा नीकाल दीया.. ओर वही टेबलपे रखके उनके टोपका उपरका बटन खोल दीया.. ताकी उनके बुब्सके दर्शन अपने भाइको आसानीसे करा सके.. लेकीन बंसी हेकी गहेरी नींदमे सो रहाथा.. तो वो जाडु लेकर बंसीके बेडकी ओर चली गइ..

जागृती : (सरमाते धीरेसे बंसीके उपर जुकते अपने बुब्सके दर्शन कराते, बंसीको हीलाते) भाइ.. भाइ.. सुबह होगइ हे.. उठ जाओ.. देखो सुरजभी नीकल चुका हे.. कीतनी देरतक सोते रहोगे..?

बंसी : (नींदसे जागते जागृतीकी ओर देखते) जागु.. तुम..? सोने दोनां.. तुम यहा क्या कर रही हो..?

जागृती : (बंसीके उपर जुकते, सरमाते धीरेसे) भाइ.. मुजे जाडु पोछा करना हे.. उठ जाइअ‍ेनां.. सुबह होगइ हे.. अ‍ेक बार देखोतो सही.. सुरज नीकल चुका हे.. आपका बीस्तरभीतो सही करना हे.. दुखो चदरभी खराब होगइ हे.. पता नही इनपे क्या गीराते हो.. हें..हें..हें..

बंसी : (जागृतीके सीनेकी ओर नजर करते) अरे जागु क्यु परेसान कर रहीहे..? नीचे फर्सपे तो करना हे.. बेडपे थोडीना करना हे..? सोने दे.. ओर चदरपे मेने कुछ नही गीराया.. तुम खामखा मुजे परेसान कर रही हो..

जागृती : (धीरेसे अपनी चाल चलते) भाइ.. बापुभी उठ गये हे.. आपके बारेमे वो मम्मीको कुछ पुछ रहेथे..

बापुका नाम सुनतेही बंसीकी नींद उड गइ.. ओर जागृतीने जब ये कहाकी वो मम्मीको आपके बारेमे पुछ रहेथे तो बंसीकी गांड फटने लगी.. उनको आसंकाअ‍े होने लगी.. की उनके ओर सांतीके बारेमे उनके बापुको पतातो नही चल गया..? हालाकी चदरपेभी क्या गीरा हे वोभी बंसीको पताथा..

अब वो उनकी बहेनको कैसे कहेकी उनके ओर उनकी बुआका कामरस गीरा हे.. यही सोचते ही वो अपनी आंखे मलते हुअ‍े बेडपे बैठ गया.. ओर अ‍ेक नजर चदरपे डालके वो जागृतीकी ओर देखने लगा.. तब जागृती उनके सामनेही घुटनोके बल बैठकर जुक जुकके जाडु पोछा लगाने लगी.. ताकी बंसी उनके बुब्सके दर्शन कर सके..

ओर आखीर जागृती अपने प्लानमे कामयाब होगइ.. वो जाडु लगाते टेडी नजरसे बंसीकी ओर देखने लगी.. तो बंसी मुह फाडके बडी आंखोसे अभीभी जागृतीके भरावदार बुब्सको तीरछी नजरसे देख रहा था.. आज बंसी पहेली बार उनकी बहेनको अ‍ैसे देख रहाथा.. तो उनके लोअरमे लंड खडा होकर जटके मारने लगा.. जागृती भी अपने तैय इरादेसे अ‍ेकदम कंपलीट होकर पटाका बनके आइ थी.. तो आज बंसीको उनकी बहेन बहुतही खुबसुरत ओर कामदेवकी मुरत दीखने लगी.. तभी..

बंसी : (बातोका दौर सम्हालते) जागु.. बापु मम्मीको क्या केह रहेथे..? मेरा कुछ काम था..?

जागुती : (जाडु लगाते रुक गइ.. ओर सामने देखकर हसते) नही भाइ.. वो सीर्फ पुछ रहेथे.. की आप उठ गयेकी नही.. सायद उनको सहेरका कोइ काम होगा.. हो सकता हे आपको मम्मीके साथ सहेर जाना पडे.. आप अ‍ेक बार उनको मीलकर पुछ लेना..

बंसी : (राहतकी सांस लेते धीरेसे) हंम.. जागु.. आज तुम कही जा रही हो..? हंम..

जागृती : (उनकी ओर देखते मुस्कुराते) नही तो..? क्यु..? आपको अ‍ैसा क्यु लगाकी मे कही जा रही हु..

बंसी : (सरमाते हसते) अरे नही.. आज तुम सुबह सुबह तैयार होकर आइहो इसीलीये पुछा.. हें..हें..हें.. जागु.. तुम इन कपडोमे मस्त लग रही हो..

जागृती : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. मेतो रोज सुबह अ‍ैसेही तैयार होजाती हु.. क्या आपने सीर्फ आजही देखा..? हां.. आप मेरी ओर क्यु देखेगे.. मे अच्छी थोडीना हु.. आपकोतो बुआही अच्छी लगती हे.. सारा प्यार उनपेही लुटा देते हो.. तो हमे कौन पुछेगा..? मे आपकी बहेन थोडीना हु.. हें..हें..हें..

बंसी : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) चल जा.. काम कर अपना.. जब देखो चपड बपड करती रहेती हो.. कीसने कहाकी मुजे सीर्फ बुआ अच्छी लगती हे.. तुमभी तो अच्छी लगती हो.. मे सबको प्यार करता हु.. जागु.. अ‍ैसा तुजे क्यु लगा..? बस वो मेरा थोडा ज्यादा ध्यान रखती हे.. इसीलीये तुजे अ‍ैसा लगता होगा..

जागृती : (मुस्कुराते जाडु लगाते) भाइ.. ध्यानतो मेभी आपका रखती हु.. आपतो सोये पडे रहेते हे.. आपके रुमकी सब सफाइ मे ही तो करती हु.. अगर आपको अ‍ैसा लगता हे तो आजसे आपका बाकीका सब कामभी मेही करुगी.. मुजे आपका सब काम करना अच्छा लगता हे.. लेकीन आपकोतो बुआही अच्छी लगती हे..

बंसी : (बुब्सकी ओर घुरते) नही बहेन.. तुमभी मुजे बहोत अच्छी लगती हो.. जागु.. तुम बहुतही खुबसुरत हो.. हमारी बुआसेभी ज्यादा.. इस बात तुम बुआसे मत कहेना.. आजके बाद तुजे कोइभी सीकायतका मौका नही दुगा.. तुजे जोभी कुछ चाहीये मुजे बोलना.. मे तुजे लाकर दुगा.. लेकीन इसके लीये तुजे अ‍ेक काम करना पडेगा..

जागृती : (पौछा लगाते जुककर रुकते आस्चर्यसे देखते) क्या..? कौनसा काम..?

बंसी : (सरमाते बुब्सकी ओर देखते मुस्कुराते) जागु.. मे चाहता हु.. तुम बुआके साथभी अ‍ेक सहेली जैसा व्यवहार करो.. तुम उनको अपनी पकी सहेली बनालो.. फीर देख मे तुम दोनोको कैसे प्यार देता हु..

जागृती : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) भाइ.. वो तो पहेलेसे ही मेरी सहेली हे.. बस आपहीका ध्यान नही गया.. हम बुआ भतीजीसे ज्यादा सहेली ही हे.. लेकीन आपतो सीर्फ बुआको प्यार देते हो मुजे नही..

बंसी : (कातीलाना मु्कुराते) ये तुजे कीसने कहा..? की मे सीर्फ बुआको प्यार देता हु ओर तुजे नही..? ठीक हे.. आजसे तुजेभी वोही प्यार मीलेगा जो बुआको मीलता हे.. बस..? अब खुस..?

जागृती : (बंसीकी डबल मीनींग बात समज गइ.. तो कातील मुस्कानसे) हंम.. अब ठीक हे.. लेकीन याद रखना.. अपनी बातसे मुकर मत जाना.. हें..हें..हें..

कहेते जागृती जुक जुकके अपने बुब्सके जलवे दिखाती रुमकी सफाइ करने लगी.. ओर बीच बीचमे टेडी नजरसे बंसीकी ओर देख लेतीथी.. तब बंसी अबभी उनके बुब्सकी ओर जांक रहाथा.. ये देखके जागृती मनमे हसने लगी.. आज वो अपने पहेदे प्लानमे कामयाब हो चुकी थी.. ओर इस खेलमे उनकोभी मजा आ रहाथा.. फीर वो दुपटा डालकर रुमसे बहार चली गइ.. ओर अपना हाथ मुह धोकर कीचनमे चली गइ..

तो बंसी उठकर सीधाही बहार नीकलके बाथरुममे चला गया.. ओर अपना नीत्यक्रम करके नहाकर जब नहाके अपने रुममे गया तो वहा जागृती बंसीके कपडे उनकी अलमारीसे नीकालके बेडपे रख रहीथी.. तब बंसी अंदर आगया तो उनको भी ये सब देखकर थोडा अजीब लगा.. तभी जागृती कपडे रखकर बंसीकी ओर कातील स्माइल करके बहार नीकल गइ.. वो बंसीको दीखाना चाहतीथी मे ही सब तुम्हारा काम कर रही हु.. ओर बंसी तैयार होकर होलमे आगया तो वहा उनकी मां सांती ओर सामत बैठे थे.. तो बंसीने आतेही....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १४८

तो बंसी उठकर सीधाही बहार नीकलके बाथरुममे चला गया.. ओर अपना नीत्यक्रम करके नहाकर जब नहाके अपने रुममे गया तो वहा जागृती बंसीके कपडे उनकी अलमारीसे नीकालके बेडपे रख रही थी.. तब बंसी अंदर आगया तो उनको भी ये सब देखकर थोडा अजीब लगा.. तभी जागृती कपडे रखकर बंसीकी ओर कातील स्माइल करके बहार नीकल गइ.. वो बंसीको दीखाना चाहतीथी मे ही सब तुम्हारा काम कर रही हु.. ओर बंसी तैयार होकर होलमे आगया तो वहा उनकी मां सांती ओर सामत बैठे थे.. तो बंसीने आतेही.... अब आगे

बंसी : (धीरेसे) हां बापु.. वो.. जागु केह रही थी.. की आपको मुजसे कुछ काम था..

सामत : (मुस्कुराते) अरे कुछ नही.. बस केह रहाथा की अगर तुम फ्रि होतो अपनी मां के साथ थोडा सहेर चलाजा.. उनकी कमरमे थोडी मोच जैसा हे.. तो दोनो डोक्टरको दीखाकर चले आओ..

जया : (थोडी परेसानीमे) अरे रहेने दीजीयेनां.. क्यु बेचारेको परेसान कर रहे हे.. मे अकेली चली जाउगी.. बसमे तो जाना हे.. अगर वहा मेरे भाइका लडका होगातो उसे बुला लुगी. वरना दीखाकर मे खुद चली आउगी.. बंसीबेटा.. जा तुम अपना काम कर.. मे अकेली ही चली जाउगी..

(बंसीकी ओर देखते) ओर हां बेटा.. घरपे सांती ओर जागु अकेली हे.. तो घरपेभी आते जाते रहेना.. तेरे बापुतो अभी चले जायेगे.. फीर पता नही रातमे कब लौटेगे.. बस इनकोतो सीर्फ गांवकी सेवाही करनी हे.. ये नहीकी अब घरमे जवान लडकी लडका हे.. तो थोडा उनपेभी ध्यान दे..

सामत : (थोडा परेसान होते) तुम फीर सुरु होगइ..? अरे बाबा.. जब उनकी कीस्मत खुलेगी तब सामनेसे सबकुछ ठीक होजायेगा.. तुम क्यु परेसान हो रही हो..?

बुसी : (जटसे) मम्मी.. तो फीर मे जाउ.. मुजे आज बहुत काम भी हे..

जया : ( कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां बेटा तुम जाओ.. ओर हां.. थोडा घरपेभी ध्यान देना.. जागुतो अभी उनकी कोइ सहेलीके यहा चली जायेगी.. बेचारी सांती घरपे अकेली होगी.. तो तुजे कुछ खास काम ना होतो तुम घरपे रहेना..मे दोपहर दो बजे तक दीखाकर वापस आजाउगी.. फीर तुजे जहा जाना हो चले जाना..

सामत : (बंसीके जातेही) जया.. आज पंचायतमेभी बहुत काम हे.. ओर रमेशभी आज सहेर पंचायतकी ओफीस कामसे जा रहा हे.. वो गांवके लीये बहुत महेनत करता हे.. बस अ‍ेक बार यहा होस्पीटल खुल जाये.. फीर तुजे सहेरके चकर काटनेकी जरुरत नही हे.. यही सब इलाज होजायेगा.. अच्छा हुआ हमारे देवुने रमेशको सरपंच बनाया..

जया : (मनमे खुस होते) अ‍ेजी.. मेने सुना हे यहा कोइ बललाव होने वाला हे.. तो कीस टाइपका बदलाव होगा.. क्या आपको कुछ पता हे..? मुजे बताइअ‍ेनां..

सामत : (मुस्कुराते) हां.. हमारा देवु केह रहाथा की यहा सब रीस्तोमे बदलाव होगा.. जो जीनके साथ सादी करना चाहता हे वो कर सकता हे.. मतलब आपसी रीस्तोमे भी सादी कर सकते हे.. अ‍ैसा कुछ केह रहा था..

जया : (जानकरभी अनजान बनते) आपसी रीस्तोमे बदलाव मतलब..? मे कुछ समजी नही.. जरा ठीकसे समजाइअ‍ेनां..

सामत : इसका मतलब घरमे ही रीस्तोमे सादीया.. जैसेकी भाइ बहेन.. अगर कोइ वीधवा भाभी, ताइ, बुआ, मामी.. सब घरकेही लोगोके साथ सादी करके फीरसे सुहागनकी जींदगी जी सकती हे.. कास अ‍ैसा हमारे गांवमे पहेले होता.. तो आज मेरी बडी बहेन जींदा होती.. जो दहेजके चकरमे अपनी जान गवा बैठी.. अगर अ‍ैसा बदलाव तब होता तो मेही उनके साथ सादी कर लेता..

जया : (आस्चर्यसे सरमाते मुस्कुराते) ये आप क्या बोल रहे हे..? कुछतो सरम कीजीये.. वो बडी बहेनथी आपकी.. क्या आप अपनी बहेनके साथही सादी करते..? तो फीर मेरा क्या होता..? हें..हें..हें..

सामत : (मुस्कुराते धीरेसे) जया.. मे तुमकोभी साथ रखता.. तुम दोनो साथमे ही रहेती.. मेरी बीवीया बनके..

जया : (सरमाते हसते) सरम करो.. सरम करो.. कुछभी बोलते हो.. कही अ‍ैसा भी हो सकता हे..?

सामत : (हसते) हां जया.. हमारा देवु केह रहाथा..की अब वो दिन दुर नही.. जो अ‍ैसा हमे यहा देखनेको मीलेगा.. देखना कुछही दिनोमे अ‍ैसे कइ रीस्ते यहाभी सामने आयेगे..

जया : (मनमे खुस होते) क्या..? आप अ‍ैसे रीस्तोको मानते हो..? अगर कलको हमारा बंसी कहेगाकी मुजे सांतीसे सादी करनी हे.. तो क्या आप इस रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करोगे..? वो भी तो बेचारी विधवा हे.. अभी छोटी ओर जवानभी तो हे..

सामत : (थोडा सीरीयस होते) हां जया.. क्यु नही..? अगर बंसी ओर सांती चाहेगेतो मे जरुर उन दोनोकी सादी करवा दुगा.. मेरी छोटी विधवा बहेनको घरमेही अ‍ेक सहारा मील जायेगा.. ओर बेचारी फीरसे सुहागनकी जींदगी जी सकेगी.. तो फीर मे क्यु अ‍ेतराज करुगा..? हमभी इसी गांवमे रहेते हे.. सायद बाबाभी अ‍ेक बार हम सबको यही समजानेके लीये आयेगे.. अ‍ैसा देवु ओर रमेश केह रहाथा..

जया : (मनमे खुस होते) ठीक हे ठीक हे.. तबतकी तब देखेगे.. चलीये मुजे बस स्टेन्ड तक छोड दीजीये..

सामत : (मुस्कुराते) जया.. आज रमेशभी अकेला सहेर जा रहा हे.. तो तुम उनके साथ ही चलेजाना.. वोभी तो तेरा देवर ही हे.. हें..हें..हें..

जया : (सरमाते धीरेसे) क्या आपभी.. भलेही वो मेरा देवर हो.. लेकीन हे तो अ‍ेक पराया मर्द.. ओर आप गांवमे भी हमारी बाते करवाना चाहते हो.. ना बाबा ना.. मे अकेली ही चली जाउगी.. अ‍ेब बार उनके साथ सहेरसे आइथी.. हमारे गांवमेही कमीने हमारी तरेह तरेहकी बाते करने लगे हे.. अब चलीये..

सामत : (मुस्कुराते) अरे करनेदो.. मेतो नही मानतानां..? अब चलो..

कहेकर जया बडीही सीफततासे सहेरकी ओर चली गइ.. तब सामतको क्या पताकी जया अपनी कमर दीखाने जा रही हे.. लेकीन डोक्टरको नही रमेशको.. वहा वो रमेशको अपनी कमर दीखाकर अपनी चुत मरवाने जा रही हे.. अब जया ओर रमेश दोनोही अ‍ेक दुसरेके बगेर नही रेह सकते थे.. जयाको अब रमेशके लंडकी आदत जो लग चुकीथी.. अब उनका रमेशके बीना रहेना मुस्कील होगया था..

तो दुसरी ओर रमेशने चारुको दुबारा जयासे ना मीलनेका प्रोमीस कीयाथा.. लेकीन फीरभी वो जयाके बीना नही रेह पाया.. ओर कलही बात करके आज दोनोही अपनी तैय जगहपे मीलने चले गये.. जयाके दो दो बच्चे होनेके बावजुद भी आजभी उनकी चुतमे पहेले जैसा कसाव था.. सामतने उनकी बहुतही कम चुदाइ कीथी.. सामतको तो बस गांवका मुखीयाही बनना था.. ओर सारा दिन गांवकी सेवा करते रहेता..
 
तो इधर भानुके घरपे भी सुबह वोही हाल था.. सब उठकर नहाके कंपलीट हो चुके थे.. सरला भावेसको लेकर बहार आंगनमे बैठकर उनके साथ खेल रही थी.. तो भानुभी वही बैठकर अखबार पढ रहा था.. तब रमा कीचनमे चाइ नाास्ता बना रहीथी.. ओर लता उनकी मदद कर रहीथी.. लेकीन लताको आज रमाका मुड अच्छा नही लगा.. लताको नही पताथाकी पीछले तीन दिनसे रमाका मुड क्यु खराब होगया था..

क्युकी उनके मुडकी असली वजह सीर्फ रमाही जानती थी.. उनकी जहेनमे अभी भी लखन छाया हुआथा जो नीकलनेका नामही नही ले रहाथा.. देवायतकी सादीमे तो लखन उनकी तारीफ करते उनके पीछे ही पड गयाथा.. ओर लखन उनको बहुतही हेन्डसम लग रहाथा.. जबसे लखनके साथ लताकी सादी हुइ तबसे रमाको लतासे अ‍ेक ज्वेलसी फील हो रहीथी.. वो लताकी जगाह अपनी नीलमको देख रहीथी.. तभी..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. मे जबसे आइ तबसे देख रही हु.. आपका मुड ठीक नही हे.. कुछ हुआ हे क्या..?

रमा : (भारी मनसे मुस्कुराते) अरे नही नही.. आपको अ‍ैसा लगता होगा.. मे तो बीलकुल ठीक हु.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. अगर कोइ तकलीफ होतो बताना.. मे मेरे जेठजीको कहुगी.. उसने मुजे कहा हे..

रमा : (सरमाते हसते) अरे नही दीदी.. अ‍ैसी कोइ तकलीफ नही.. बस थोडी नीलुकी याद आ रहीथी..

लता : (मुस्कुराते) भाभी उनकी चीन्ता करनेकी कोइ जरुरत नही.. ओर वैसेभी आज सेटरडे सन्डे हेतो उनको इधर बुला लेना चाहीयेनां.. दो दीन इधर रहेती तो आपकोभी अच्छा लगता.. ओर उनकोभी अच्छा लगता..

रमा : (लताकी ओर देखते) दीदी.. क्या वो लोग नीलुको अ‍ैसे यहा आने देते हे..? हंम..?

लता : (मुस्कुराते) हां.. आने देते हे.. मुजेभी पुनमदीदी केह रहीथी.. लेकीन भाभी.. मेरे दिमागमे अ‍ेक बात आ रही हे.. वैसेभी हम दो तीन दिनमे सहेरमे रहेने तो जाही रहे हे.. ओर मेने सुनाहे हमारा मकानभी बहुत बडा हे.. ओर नीलुकी स्कुलसे नजदीक हे.. तो क्यो हम नीलमको हमारे साथही रखे..? वो वहासे पढने चली जायेगी..

रमा : (खुस होते हसते) अरे हां.. दीदी बाततो आपकी सही हे.. ये हो सकता हे.. लेकीन मुजे नही लगता इसके लीये आपके भाइ मानेगे.. ओर आप लोगभी डीस्टर्ब होगे.. तो रहेने दीजीये..

लता : (रोटी सेकते) क्या डीस्टर्ब होगा..? भला अपनोसे भी कोइ डीस्टर्ब होता हे..? भाभी अभी चाइ नास्ता करेगे तब इस बारेमे मे भाइसे बात करलुगी.. आप नीलुकी चीन्ता छोडदो.. मे उनको मेरे साथ ही रखुगी..

कहातो रमाको अचानक रातमे भानुने कही नीलम लखनकी सादीकी बात याद आगइ.. तो रमाकी आंखमे चमक आगइ.. वो नीलमको लेकर आगेकी प्लानींग करने लगी.. ओर वो खुदभी लखनकी ओर काफी ढल चुकी थी.. रमा बहुतही ठरकी ओर कामुक ओरत थी.. उनको बीस्तरे सामान्य सेक्सके बजाय वाइल्ड सेक्स बहुत पसंदथा.. जो भानु उनकी चीखे नीकलवा देता था.. जो वो सब अब नही हो रहाथा.. तो रमा मनमे सोचने लगी..

रमा : (मनमे) अगर लता नीलमको उनके साथ रखेगी तो नीलम ओर लखन अ‍ैसेही अ‍ेक दुसरेके नजदीक आजायेगे.. अगर अ‍ैसा होता हे तो हमे नीलमकी सादीकी बातही नही करनी पडेगी.. लखन खुद नीलमको अपना लेगा.. वरना मुजेही कुछ करना पडेगा.. वैसेभी लखनको मेभी अच्छी लगती हु.. वो मुजे बहुत पसंदभी करते हे..

अबतो भानुमे भी वो पहेले वाला दम नही रहा.. हम ओरतोको चाहीयेभी तो क्या..? की मर्द हमे बीस्तरे खुस रखे.. तो लखनभी जवान हे.. हेन्डसम हे.. तो ओरतोकी तराह मर्दोको भी तो वही चाहीये.. तो इसमे गलतभी क्या हे..? मेरी नीलमको अच्छा ससुराल मीले तो इनसे अच्छा मौका ओर कहा मीलेगा.. यही सब सोचते रमा मुस्कुराने लगी तो लताने कहा..

लता : (सामने देखते मुस्कुराते) भाभी.. कहा सोचमे डुब गइ..? क्यु मुस्कुरा रही हे..? हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते) अरे.. कुछ नही दीदी.. मे सोच रहीथी.. इस बारेमे आजही अपने भाइसे बात करलो.. ओर ये मत कहेना ये सब मैने कहा हे.. वरना मुजपे भडक जायेगे.. जवान लडकी हे.. अगर होस्टेलमे रहेकर बीगड गइतो..? इनसे तो अच्छा हे आपके साथही रहे.. आपकी नीगरानीमे रहेगी तो कोइ दीकत नही आयेगी.. क्या कहेती हो..?

लता : (हसते) हां भाभी.. सही कहा आपने मे अभी भाइसे बात करलुगी.. आप फीकर मत करना..

रमा : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आप अ‍ेक बार जरा हमारे जमाइ लखनजीसे भी पुछ लीजीये.. उनकोतो कोइ अ‍ेतराज नही हेनां..? लगता हे वो मुजसे कुछ नाराज हे.. हें..हें..हें.. मुजसे बातही नही करते.. आपको छोडने आये तो वो मेरे साथ बोलेभी नही.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते) नही भाभी.. आपको गलत फहेमी हे.. वो अ‍ैसेही हे.. बहुत कम बोलते हे.. हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते) अरे.. कोइ कम नही बोलते.. बहुतही सरारती हे.. सादीमे आइथी तब देखा हे मेने.. मेरी मस्तीया करते कीतनी तारीफ कर रहेथे.. मेने सृतीदीदीकी सादीमे देखा हे.. बडे ही मस्तीखोर हे.. हें..हें..हें..

लता : (हसते) हां.. वैसेतो वो बहुत कमीने हे.. हें..हें..हें.. ओर आपतो उनकी भाभी हे तो मस्तीतो करेगे ही..

रमा : (खुस होते हसते) दीदी.. अ‍ेक बात कहु..? आपके ससुरालमे सभी लोग बहुतही अच्छे हे.. कीसीको पैसेका कोइ धमंड ही नही.. सबलोग सबकी मदद करते रहेते हे.. सुनाहे देवरजीने हमारी खुब मदद की हे..

लता : (मुस्कुराते) हां भाभी.. सही कहा आपने.. हमारी मंजुभाभीतो देवी हे देवी.. हमारे बडे भैयाकी इतनी सादीया होगइ.. फीरभी उन्होने अपनी सौतनोके बीच कीसीभी बातका भेद भाव नही कीया.. ओर बडेभैयाकी तो बातही कुछ ओर हे.. जब मेरी लखनसे सादी नही हुइथी.. तब हम दोनो कीतनी मस्तीया करते थे..

रमा : (अपनी बात रखते) दीदी अ‍ेक बात कहु..? आपके खानदानमे सब दो दो तीन तीन सादीया करते हे तो आपको बुरा नही लगता..? अगर कल हमारे लखनजीने भी दुसरी सादी करली तो..?

लता : (सरमाते हसते) भाभी.. इसमे बुरा माननेकी क्या बात हे..? हमारे खानदानम तो ये सब चलताही हे.. मेरे ससुरजी दादा ससुरजीने भी वही कीया हे.. ओर येतो ओर अच्छा हेकी सब खुलके सबके सामने सादीया करते हे.. यहातो लोग अ‍ेक सादी करकेभी दुसरी ओरतसे सबसे छुपकर अवैध रीस्ते रखते हे.. इनसेतो ये अच्छा हे जोभी करो सबके सामनेही करो.. तो मे इन सब चीजको गलत नही मानती.. अगर लखनभी दुसरी सादी करले तो भी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. हें..हें..हें..

रमा : (मनमे खुस होते) हां दीदी.. सच कहा आपने.. अब अपने भाइको ही देखलो.. मुजेभी धोखा दीया.. ओर भावनाकोभी धोखेमे रखा.. इसीलीये भावनादीदी हमसे थोडी नाराज हे.. अगर सब बताके करते तो..?

लता : (मुस्कुराते) हंम.. भाभी.. सही कहा आपने.. भावनादीदीका भी यही कहेना था..

रमा : (हसते) लतादीदी.. क्या आप उसे दीदी कहेती हो..? हें..हें..हें.. आपकी भाभी हे वो..

लता : (मुस्कुराते) नही भाभी.. वो मेरी दीदी ही हे.. भाभी सीर्फ आप रहोगी.. मे उनको अपनी बडी दीदी मानती हु.. वो बहुत ही अच्छी हे.. ओर अबतो सब सुलह होगइ हे.. बस अपने माइकेसे वो अब सीधी यहा वापस आजायेगी.. भाभी.. बुरा मत मानना.. वो बहुत अच्छी हे..

रमा : (जटसे हसते) अरे नही नही.. मे क्यु बुरा मानुगी..? हंम..? ओर मेरे साथ उनकोभी कोइ प्रोबलेम नही हे.. जोभी नाराजगीथी सीर्फ आपके भाइके साथ थी.. मेरे साथ नही.. मेरी उनसे बहुत अच्छी पटती हे..

लता : (मुस्कुराते) भाभी.. अब आप नीलुकी भी चीन्ता मत करना.. मेरे जेठजी ही उनके लीये कोइ अच्छासा लडका देख लेगे.. इस बारेमे मुजे मेरे जेठजीसे कुछ बात भी करनी हे.. हें..हें..हें..

रमा : (लताकी ओर देखते हसते) दीदी.. अ‍ेक बात कहु..? क्या आप आपके जेठके सामने बोलती भी हे..?

लता : (सरमाते हसते) भाभी.. मत भुलो सादीके पहेले वो मेरे भैयाही थे.. तब मे उनसे खुब बाते ओर मस्तीया कीया करती थी.. ओर मेरी लखनके साथ सादीकी बात उन्होने ही चलाइ हे.. तो मे उसे आजभी अपना बडा भैया मानती हु.. हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते) हंम.. चलो अच्छा हे.. आप वहा अच्छेसे सेट होगइ.. लतादीदी.. अब मेरी नीलमको मे आपको ही सोंपती हु.. अब उनका जोभी करना हे आपही सब तैय करना.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे..

लता : (सरमाते हसते) भाभी आप नीलुकी चीन्ता तो छोडही दो.. अब जोभी करना हे मे सब देख लुगी..

दोनोही बाते कमरते चाइ नास्ता बना रहीथी.. अ‍ेक तरफ लता नीलमको अपने साथ रखके धिरेनसे बचाना चाहती थी.. तो दुसरी ओर रमा अपने सातीर दिमागसे प्लान करते अपनी बेटी नीलमको लखनके साथ सेट करना चाहती थी.. ओर इसके लीये वो कीसीभी हदतक जानेको तैयार थी.. आज रमाने बडीही सीफततासे लतासे नीलमकी बात करली.. तब उनको नही पताथा की वो खुद इस खेलमे फस चुकी हे..

क्युकी जबसे लखनने उनके साथ बाते करना बंध करदीया.. तबसे वो लखनकी ओर ढलती ही जा रहीथी.. अब उनको हर वक्त लखनका खयाल ही आने लगाथा.. रातमे भानुके साथ बीस्तरमे होती तबभी वो बेमन भानुसे चुदवाते लखनके बारेमे सोचती.. लखन रमाके दिमागमे पुरी तराह छाया हुआथा.. जब सब लोग साथमे चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तो लताने बडीही सीफततासे भानुसे बात करली..

लता : (चाइ पीते मुस्कुराते) भैया.. आपनेतो हमारा सहेर वाला मकान देखा हे.. वो कीतना बडा हे..?

भानु : (हसते) क्यु..? अब दो तीन दीनमे तो तुम जाही रहीहो.. तो देख लेना.. हें..हें..हें..

लता : (मुस्कुराते) अरे.. बताओतो सही.. मुजे इसके बारेमे आपसे कुछ काम हे.. हें..हें..हें..

भानु : (लताकी ओर देखते) मुजसे..? क्या काम हे..? ओर वो मकान थोडीना हे..? वोतो बहुत बडा बंगलो हे.. बडासा होल कीचन नीचे दो रुम स्टोरेज उपरकी मंजीलपे तीन रुम.. बहार छोटासा गार्डन.. सबकुछ हे..

लता : (सरमाते हसते) तबतो ठीक हे.. भैया मे सोच रहीथी अब इतना बडा मकान हे तो क्युना हम नीलुको उधर हमारे साथ ही रखे..? मेने सुनाहे उधरसे नीलुकी स्कुलभी नजदीक पडती हे.. पुनोदीदी बता रहीथी..

भानु : (मुस्कुराते) नही बीटु.. वो होस्टेलमेही ठीक हे.. तुम खामखा क्यु तकलीफ लेती हो..

लता : (थोडी नाराज होते) क्यु..? वो मेरी भतीजी नही हे..? अगर वहा इतना बडा घर हेतो क्या आचार डालनेके लीये हे..? आप कुछभी नही बोलेगे.. मे बडेभाइ ओर मंजुभाभीसे बात करलुगी.. नीलु मेरे साथही रहेगी.. बस..

सरला : (हसते) बीलकुल जीदी लडकी हे.. भानु.. लता सहीतो केह रही हे.. अगर नीलु इनके साथ रहेगी तो उनका खयाल भी अच्छेसे रखेगी.. वरना होस्टेलमेतो पता हे.. साथ वाली लडकी अच्छी नीकली तो कोइ दिकत नही.. वरना उनकी संगतमे नीलुभी बीगड जायेगी.. इनसेतो अच्छाहे वो लताके साथ ही रहे..

भानु : (मुस्कुराते) ठीक हे मां.. मे भाइसे बात करलुगा..

रमा : (मुस्कुराते) आपको बात करनेकी कोइ जरुरत नही हे.. वो सब लतादीदी देख लेगी.. हें..हें..हें..

भानु : (हसते) लगताहे तुम दोनो ननंद भौजीने ही सब प्लान करके रखा हे.. हें..हें..हें..

लता : (हसते) हां.. तो फीर..? भाइ आप नीलुकी फीकर छोडदो.. अब उसे मे सम्हाल लुगी.. ओर जबवो पढलेगी तो इनके लीये लडकाभी हम ही देख लेगे.. हें..हें..हें..

भानु : (मुस्कुराते) ठीक हे बाबा.. हमने आजसे नीलुको तुजे सोंप दीया.. बस..?

लता : (सरमाकर हसते) हां.. अब ठीक हे.. हें..हें..हें..

अ‍ैसीही बाते करते सब चाइ नास्ता कर रहेथे.. तब लखन पुनम ओर दयाको लेने उनके गांव अपनी जीप लेकर नीकल गयाथा..
 
तो दुसरी ओर राजीवके घर सबलोग आरामसे उठकर तैयार होकर होलमे बैठे थे तब चंदा ओर भावना दोनोही चाइ नास्ता बना रही थी.. तो मंजु नीर्मला दोनो बच्चोको लेकर राजीवके पास बैठीथी.. ओर बच्चोके साथ खेल रही थी.. आज राजीवभी बहुत खुस था..

राजीव : (मुस्कुराते) नीमु.. कीतने दिनोके बाद हमारे घरमे रोसनी लग रही हे.. सब साथमे हे तो कीतना अच्छा लगता हे.. कास भुमीभी यहा होती..

मंजुला : (मुस्कुराते) पापा फीकर मत करो.. मेने कलही सृतीको फोन करदीया हे.. सायद दोपहोरके बाद वोभी हमारे घरपे आजायेगी.. तो भुमीआंटीको हम यही बुला लेगे.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (सरमाते हसते) क्या..? तुमने उसे बुला भी लीया..? कब आ रहीहे कमीनी.. हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) यार तुम मेरी बहेनको गालीया तो मत दे.. आनेदे उसे सब बता दुगा.. हें..हें..हें..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) सोरी.. सोरी.. मेतो भुलही गइथी इनके अ‍ेक लौते भाइ इधर बैठे हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) पापा.. अब हम यहा हेतो आप हमारी दुकानभी कीरायेपे देदो.. आप कीसी ब्रोकरको फोन करके कहेदो.. ओर मेतो कहेती हु आप दोनो हमारे साथही रहेने आजाओ..

राजीव : (मुस्कुराते) थेन्क्स बेटा.. लेकीन मे नही आसकता.. इस गांवने मुजे बहुत कुछ दिया हे.. खास करके मेरी नीमु.. तब हमे यहा कोइ नही पहेचानता था.. तेरे ससुरने हमारी बहुत मदद की..

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे पापा.. छोडो पुरानी बाते.. बस अबतो आप अपनी लाइफ खुलकर जीयो..

बात होते राजीव इमोस्नल होने लगा.. तो मंजुने बडी ही सीफततासे बातको घुमा दीया.. फीर जब चाइ नास्ता बन गयातो सबलोग चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तब इधर गांवमे देवायत रश्मीके घरपे चाइ नास्ता करके सीधेही अपने खेतोपे आगया था.. ओर गोडीउनकी ओफीसमे बैठकर फोन घुमाते सोदेबाजी करते बीजनेसकी बाते करने लगा.. काफी देर बाते करते कही सोदे करलीये.. तब देरसे भानु भी आगया..
 
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