- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 33,357
भानु : (हसते) क्यु भाइ..? आजतो सुबह सुबह ही आगये..? कुछ ज्यादा काम था क्या..?
देवायत : (मुस्कुराते) नही यार.. आज घरपे कोइ नही था.. सीर्फ मे ओर लखन ही थे.. सबलोग राजीव अंकलके वहा रुक गये हे.. तो सुबह उठकर आगया.. यार हरीयाको बोलदे थोडी चाइ बनादे..
भानु हरीयाको चाइके लीये बोलने चला गया.. तभी मुना जल्दी जल्दीसे आगया.. ओर सांस लेते देवायतके पास आकर रुक गया.. लगता हे वो दोडकर आयाथा.. तो देवायतने उसे सामनेकी ओर बैठनेका इसारा कीया तो वो भारी सांसोसे मुस्कुराते बैठ गया.. तब भानुभी अंदर आके दुसरी चैयरपे बैठ गया.. तो मुना उनको अजीब नजरोसे देखने लगा.. तब देवायत सबकुछ समज गया.. ओर उसने इसारोसे भानुको बहार भेज दीया.. तो भानुभी समकुछ समजके बहार चला गया.. तब..
देवायत : (मुस्कुराते) हां मुना.. बोल सुबह सुबह इतनी जल्दीसे दोडकर कैसे आगया..? ओर अब तु भानुको तो भुलही जा.. वो अब तेरे घरके सामने कभी नही देखेगा.. मेने उनको केह दीया हे.. बोल..?
मुना : (भारी सांस लेते) थेन्क्स ठाकुर साहेब.. बस अेक खबर देनीथी आपको.. तो इधर आगया..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. बोल कीसकी खबर देनीथी..? गांवमे कुछ नया हुआ हे क्या..?
मुना : (सरमाते मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. ठाकुरसाहेब हमारा अेक दोस्त हेना..? श्रीधर.. रातमे उनके बडे पापाकी लडकीको लेकर भाग गया.. जयश्री नाम हे उनका.. श्रीधर उनके चाचाका लडका ही हे.. दोनो भाइ बहेन कही दिनोसे आपसमे रीलेशनमे थे.. तो अभी सुबह सुबहही जयश्रीकी मांके हाथ उनकी लीखी हुइ चीठी हाथ लग गइ.. तो अभी उनके घरमे थोडा हंगामा हुआ हे..
देवायत : (मुस्कुराते) क्या..? उनकी कजीन बहेनको लेकरही भाग गया..? क्या दोनो भाइ अभी जगडा कर रहे हे..?
मुना : (सरमाते हसते) नही ठाकुर साहब.. आपकोतो पता हे ये लोगोके बीच कभी जगडा नही होता.. बडीही सयानी कोम हे.. सब आपसमे बैठकर ही नीपटा लेते हे.. बहार वालोको उनकी भनक तक नही लगने देते..
देवायत : तो फीर तुजे सब कैसे पता चला..? लखनभी तुम सबका दोस्त हेनां..? क्या उसेभी सब पता हे..?
मुना : (मुस्कुराते धीरेसे) पता नही.. अभी इस बारेमे कीसीको कुछ नही मालुम.. सबसे पहेले आपहीको बता रहा हु.. आपतो जानते हे उनके घरका पीछवाडा ओर हमारे घरका पीछवाडा दोनोही मीले हुअे हे.. वो हमारे पीछली गलीमे रहेते हे.. मे सुबह हमारे घरके टेरेसपे ब्रस कर रहाथा ओर टहेलते पीछे चला गयातो जयश्रीकी मम्मी रो रहीथी.. ओर श्रीधरके मम्मी पापा आपसमे बहेस करते थोडा जगडा कर रहेथे.. ओर जयश्रीके पापा अपने सरपे हाथ रखके परेसानीमे सांत होकर बैठे थे..
देवायत : (आस्चर्यसे) लेकीन इनमे श्रीधरके मम्मी पापा आपसमे क्यु लड रहेथे..? उनका जगडातो उनके बडे भाइ भाभीके साथ होना चाहीये.. मे कुछ समजा नही..? क्या तुमने उनकी कुछ बात सुनी..?
मुना : (सरमाते हसते) हां ठाकुरसाहब.. उनको पता नही थाकी मे उनके पीछे ही हमारे घरकी छतपे हु.. ओर उनकी बाते सुन रहा हु.. मेने उनकी बातभी सुनी.. लेकीन अब मे आपसे सब कैसे कहु..? बात थोडी लंबी हे.. मुजे आपको सब सुरुसे बताना पडेगा.. क्युकी हम दोस्तोके बीच सभी तराहकी बाते होती हे.. तो मुजे उनके घरके बारेमे सब पता हे.. ओर मेरे बारेमे भी मेरे सभी दोस्तोको सबकुछ पता हे.. मतलब हम सभी दोस्तोको अेक दुसरेके बारेमे सबकुछ पता हे..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तुम सब दोस्तोके बीच काफी अंडर स्टेन्डींग हे.. हें..हें..हें.. चल पहेले हम चाइ पीते हे.. फीर खेतोकी ओर चलते वही बाते करते हे..
कहेते देवायत खडा होगया.. तो उनके पीछे मुनाभी खडा होगया.. ओर दोनोही गोडाउनके बहार आ गये तब भानु ओर रामुकाका दोनोही खटीयापे बेठे बाते कर रहेथे तभी मालती अपने नीतंब मटकते चाइ लेकर आ रहीथी.. ओर देवायतको देखतेही कातीलाना मुस्कराने लगी.. फीर मालतीने सबको चाइ पीलादी.. ओर खाली बर्तन लेकर चली गइ तब देवायत ओर मुना खेतोकी ओर जाने लगे.. तब..
देवायत : (मुस्कुराते) हां मुना.. अब मुजे सब कुछ सुरुसे बता.. माजरा क्या हे..?
मुना : (हसते साथ चलते) ठाकुरसाहेब.. बस माजरा कुछ नही.. दरसल बात ये हे की हमारा दोस्त श्रीधर उनकी कजीन बहेनके साथ रीलेशनमे आया उनसे पहेले श्रीधरके पीता उनकी भाभीके साथ यानी जयश्रीकी मांके साथ कइ सालोसे रीलेशनमे हे.. ओर ये बात श्रीधरकी मम्मीको बहुत देरसे पता चली.. वो जान गइथी की उपका पती उनकी भाभीके साथ रीलेशनमे हे.. लेकीन वो कुछ नही बोली.. ओर उसने बदलेकी भावनासे अेक चाल चली..
देवायत : (मुस्कुराते) अच्छा..? कैसी चाल..?
मुना : (हसते) ठाकुरसाहब.. दरसल जयश्री ओर श्रीधरकी मम्मीया.. आपसमे कजीन बहेने हे.. जयश्रीकी मम्मीने ही उनकी कजीन बहेनका रीस्ता अपने देवरसे यानीकी श्रीधरके पापासे करवाया हे.. जब श्रीधरके पीताकी सादीभी नही हुइथी.. उनसे पहेलेही देवर भाभीके बीच अवैध रीस्ता हो गयाथा.. श्रीधरकी मम्मी तब वहा उनकी बहेनके घरपे बहुत आती थी.. ओर वो श्रीघरके पीताको भा गइ.. ओर उसने अपनी भाभीको कहेकर उनकी बहेनका हाथ मांग लीया..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो ये दोनो भाइ ओर उनकी बीवीया आपसमे बहेने हे..
मुना : (हसते) हां ठाकुरसाब.. श्रीधरकी मम्मी जयश्रीकी चाचीके साथ उनकी मौसीभी हे.. ओर यही रीलेशन श्रीधरका भी हे.. जयश्री ओर उनकी चाचीके बीच बहुत बनती हे.. दोनो अेक दुसरेकी सहेलीकी तराह हर तराहकी बाते खुलके करती थी.. कभी कभी उनके साथ उनकी सहेली जागृती भी होती हे.. जो सामतभाइकी लडकी हे.. जयश्री ओर जागृती.. दोनोही सहेली बहुत कामुक ओर थोडी ज्यादा फोरवर्ड हे..
देवायत : तो फीर ये दोनो भाइ बहेन रीलेशनमे कैसे आये..? क्या ये सब श्रीधरकी मम्मीने करवाया..?
मुना : हां ठाकुरसाब.. जब श्रीधरकी मम्मीको उनके पतीके ओर उनकी बहनका आपसमे रीलेशनका पता चला.. तब बातो ही बातो मे श्रीधरकी मम्मीने ही जयश्रीको श्रीधरसे रीलेशन रखवाके फसाया.. उन्होने बातोही बातोमे जयश्रीको श्रीधरके साथ रीलेशन रखनेके लीये उक्साया.. ओर उसे ये समजाया की घरकी बात घरमेही रहेगी.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. मे तेरे साथ हु.. ओर जयश्री भी बहुतही कामुक लडकी थी.. ओर उपरसे जवान.. तो वो अपनी चाचीकी बात आसानीसे मान गइ..

देवायत : (हसते) हंम.. समजा.. तो फीर ये सब उन्हीका कराया कीराया हे.. फीर..?
मुना : (सरमाते हसते) ठाकुरसाहेब.. श्रीधरकी मां बहुत दिमाग वाली हे.. उन्होने अेक चाल चली.. जब ये दोनोके अेक्जाम आने वालेथे उसी टाइम उन्होने अपने पती ओर जेठको कही घुमने जानेके लीये मनाया.. ताकी दोनोके बच्चे अक्जामकी वजहसे साथमे ना आसके.. ओर भाइ बहेनको प्यार करनेका मौका मीले..
ओर वो प्लानमे कामयाब भी होगइ.. उनका पती ओर उनकी जेठानी तो घुमने जानेकी बात सुनतेही जानेके लीये रेडी होगये.. ताकी दोनो आपसमे मजे कर सके.. लेकीन तब उनको ये नही पताथा की श्रीधरकी मम्मी अभी घुमनेके लीये क्यु लेजा रही हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) क्या दोनो भाइ बहेन नजदीक आ सके इसीलीये बहार घुमनेका प्लान बनाया..?
मुना : (हसते) हां.. दोनो भाइ ओर देवरानी जेठानी कही चार पांच दिनके लीये आउट ओर स्टेशन धुमने चले गये.. तब दोनो भाइ बहेन अकेलेही घरमे रेह गये.. ओर श्रीधरकी मम्मी जयश्रीको पहेलेसे ही सबकुछ समजाकर गइथी.. तो जयश्रीने ही पहेलकी.. ओर पहेले दिनही जयश्रीने श्रीधरसे अपने प्यारका इजहार करदीया..

फीरतो आप जानते हे.. दोनोही काफी जवान थे.. जयश्रीतो श्रीधरसे दो तीन साल बडी हे.. ओर उसी रात दोनोही प्यारमे बहेक गये ओर सबकुछ होगया.. श्रीधरने उसी रात ही जयश्रीका कौमार्य भंग करके उसे लडकीसे ओरत बना दीया..

फीरतो जबतक दोनोके माता पीता नही आये.. तबतक अेक पती पत्नीकी तराह अेकही बीस्तरमे सोते ओर सेक्स करते रहे.. ओर उसी दिनसे ये सीलसीला चल रहा हे.. फीरतो दोनो हर दिन सेक्स करते रहे.. बस उस पांच दिनके टाइमको छोडके..हें..हें..हें..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो ये बात हे.. लेकीन मुना.. तुजे ये सब इतना कुछ कैसे मालुम..?
मुना : (सरमाते धीरेसे) ठाकुरसाहेब.. आपतो जानते हे हम सभी दोस्तोको आनेवाले बदलावके बारेमे सबकुछ पता हे.. इसीलीये हम सब दोस्तो इस बारेमे सब खुलके बात करते हे.. ओर आपसमे सब अपनी बात सेर करते हे.. ताकी भवीस्यमे कीसीको कोइ ज्यादा तकलीफ नाहो.. इस बातपे हम सभी दोस्तो बहुतही उत्सुक हे.. ओर हमसब आपके साथ हे.. तो ये सब बाते हमे श्रीधरनेही बताइ हे.. श्रीधरकोभी पता हे उनके पापा उनकी बडी अम्माको ठोकता हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) कमाल हे.. तुम सबके सब कमीने हो.. हें..हें..हें.. तो फीर तुजे येभी पता होगाकी ये दोनो भागकर कहा गये हे..? सच बताना.. हें..हें..हें..
मुना : (सरमाते हसते) नही पता.. कसमसे.. ठाकुरसाहब हमे कुछभी बताके नही गया.. बस कमीना कल मीलाथा तो हसते हुअे केह रहाथा की कल कुछ नया होगा.. लेकीन क्या होगा ये उसने नही बताया हें..हें..हें.. लेकीन मुजे लगता हे इस बारेमे सीर्फ दो लोग अैसे हे.. जो उनको सबकुछ मालुम होगा..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) कौन..? मुना.. क्या उनका नाम मुजे बता सकता हे..?
मुना : (हसते) हां.. इसीलीये तो मे आपके पास आया हु.. सायद वो लोग आपको मीलनेके लीये उनके घरपे भी बुलाये.. तो आपको केस हेन्डल करनेमे आसानी रहे.. लेकीन देखना इसमे मेरा नाम कही नाआये..
देवायत : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते) अरे तु फीकर मत कर.. तेरा नाम कभी नही आयेगा बता..?
मुना : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. अेक हे जागृती.. क्युकी वो ओर जयश्री दोनोही खास सहेली हे.. ओर दुसरा सख्स हे खुद श्रीधरकी मम्मी.. ठाकुरसाहेब.. मुजेतो लगता हे.. सायद श्रीधरकी मम्मीने ही उन दोनोको भगा दीया हे.. ओर अभी अन्जान बननेका नाटक कर रही हे.. साली बहुतही सातीर दिमाग वाली हे..
देवायत : (मुस्कुराते) मुना.. सही पहेचाना तुने.. छोड ये सब.. जब बात हमारे पास आयेगी तब हम देखलेगे.. बस.. अब तु बता.. तेरा क्या हुआ..? सब कैसे चल रहा हे..? बात कुछ आगे बढी की नही..?
मुना : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) ठाकुरसाहब.. मम्मी तो मान गइ.. बस अब हमारे बापु मान जाये.. मे अपनी बहेनको जाहेरमे सबके सामने अपनालु इनसे पहेले मां हमारी सादी मंदिरमे जाकर करदेना चाहती हे.. क्युकी अब ज्यादा दिन हम बरखाकी बातको नही छीपा सकते.. आप समज गयेनां..?
देवायत : (थोडा सीरीयस होते) मुना.. सच कहेना.. तेरी मम्मी तुम दोनोकी बात इतनी आसानीसे कैसे मान गइ..? उसने कोइ विरोध नही कीया..?
मुना : (सरमाते नजरे जुकाते) ठाकुरसाहब.. आपने मेरी बहुत मदद की हे.. अब आपसे मे सब कैसे कहु..? क्युकी कुछ बात अैसी हे जो मे आपके साथ सैरभी नही कर सकता.. ओर आपसे जुठभी नही बोल सकता.. हमे भानुभाइके उनके साथ रीलेशनकी बात कहेनी पडी.. तबजाके वो मानी हे.. उन्होने वादाभी कीयाहे की अब वो भानुभाइसे कोइ रीलेशन नही रखेगी.. लेकीन इसके बदले उन्होने जो सर्त रखी वो मे आपको नही बता सकता.. हमारी इजतका सवाल हे.. मे नही चाहता की मम्मीकी इजतपे कोइ आंच आये.. सोरी..
देवायत : (मुस्कुराते) मुना.. कोइ बात नही.. तु फीकर मत कर.. मे तेरे साथ हु.. मे इस मामलेमे तुमसे ज्यादा तर्जुबेकार हु.. मे समज सकता हु उन्होने तुमसे क्या सर्त रखी होगी.. तुम कोइ संकोच मत करना.. उनकी सब सर्त मानले.. क्या वो तेरे साथ रीलेशनमे आना चाहती हेनां..?
मुना : (आस्चर्यसे मुह फाडके देखता ही रहा) ठाकुरसाहेब.. आप..? आपको ये सब कैसे पता..? क्या हमारे घरमे कीसीने आपको कुछ बताया..? कही मम्मीके जरीये भानुभाइसे तो ये बात..
देवायत : (कंधेपे हाथ रखते धीरेसे) अरे नही नही.. मुना तुम टेन्शन मतले.. अैसा कुछभी नही हुआ.. देख मुना.. बुरा मत मानना.. मेने अैसे कइ केस देखे हे.. तेरी मम्मीकी अभी उमरही क्या हे..? उनकोभी अपने तनकी जरुरतको पुरी करना हे.. ओर उपरसे तेरे बापु बहुत बीमार हे.. उनकोभी पता हे अब वो उसे वो सुख देनेमे सक्षम नही हे..
इनका कभीभी कुछभी हो सकता हे.. तो बेचारी कहा जायेगी.. ओर बहार कीसीसे रीलेशनसे इजत जानेका खतरा.. तो इनसे तो बहेतर हे वो घरके आदमीसे ही रीलेशन रखले.. ओर हमारे गांवमे ज्यादातर लोगोने वही कीया हे.. सभीने आपसमे ही रीलेशन रखा हे.. तुजेतो सब पता हे..
मुना : (सरमाते धीरेसे) सही कहा आपने.. लेकीन ठाकुरसाहेब.. लोग क्या कहेगे..? बस यही डर लगता हे..
देवायत : (धीरेसे) देख मुना.. लोगोके बारेमे मत सोच.. बस अपने घरके बारेमे सोच.. अगर भानुके साथ नही तो वो कीसी ओरके साथ रीलेशन रखती तो क्या तुम दोनोको अच्छा लगेगा..? इनसेतो अच्छा हे तुमही तेरी मम्मीको सम्हाललो.. अगर बायचान्स तेरे बापुको कल कुछ कुछ होजाता हे तो मेतो कहेता हु तुम उनसेभी सादी करलो..
मुजे पता हे तुम इतना सक्षमहो की तुम दोनोको सम्हाल सकोगे.. ओर तुम तीनो खुसभी रहोगे.. क्या कहेते हो..? मुना फीकर मत कर इस मामलेमे मे तेरे साथ हु.. बस अब ज्यादा दिन दुर नही हे.. सब अैसे रीस्तोको अपनायेगे.. मे इसे गलत नही मानता.. तुजेतो पता हे हमारे खानदानमे पीछली तीन पीढीसे सबने यही कीया हे.. सबने अपनी बहेनसेही सादीया करली हे..
मुना : (इमोस्नल होते) जी.. मे जानता हु सब.. थेन्क्स ठाकुरसाहेब.. आपने हम लोगोकी तकलीफको समजा.. बस अभी अेक ही बिनंती हे.. जबतक सब सही नही होजाता तबतक इस बातको हमे सबसे छुपाना हे.. ओर कुछ नही..
देवायत : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते) मुना.. तु फीकर मत कर.. ये बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. तु बहुत अच्छा लडका हे.. जो परीवारमे सबका खयाल रखता हे.. तुजे कोइभी मददकी जरुरत होतो मुजे बताना.. ओर हां.. तुम ओर तेरी बहेन तेरी मम्मीको साथमे रखकर आश्रममे जाकर सादी करलो.. मे बाबासे बात कर लुगा.. वहा कीसीको पताभी नही चलेगा.. जब भी जाना हो मुजे बता देना..
मुना : (खुस होते मुस्कुराते) जी ठाकुरसाहब.. सुक्रिया.. सोचके बताता हु.. सायद कल या परसो ही हम आश्रमपे जाके सादीका नीपटा लेगे.. क्युकी अब दो तीन दिनकी हमारी छुटी होगी.. आप बाबासे बात करलेना..
देवायत : दो तीन दिनकी छुटी होगी.. मतलब..? कही जाने वाले हो..? ओर क्या कर रहा हे तेरा डोक्टर..? हें..हें..हें.. अब वो तुजे कुछ डीमान्ड करता हेकी नही..? हें..हें..हें..
मुना : (सरमाते हसते) क्या ठाकुरसाहेब.. कुतेकी दुम कभी सीधी हो सकती हे क्या..? ओर मेरीभी मजबुरी हे.. मुजेभी वहा नोकरी करनी हे.. हां.. जब आपने कहा तबसे बहुतही कम डामान्ड करते हे.. सायद अेक दो दीनमे वो कीसी दो दिनकी डोक्टरोकी कोन्फरन्समे जाने वाले हे.. तब हमारी छुटी होगी.. हें.. हें.. हें..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तु फीकर मत कर.. हो सकेतो ये दो तीन दिनमे ही सब नीपटाले.. ओर बादमे तेरी मम्मीसे भी सादी करलेना.. ओर इसके लीये बरखा कोइ अेतराज करेतो मुजे कहेना मे ओर मंजु उसे समजा देगे..
मुना : (सरमाते हसते) जी.. ठाकुरसाहेब.. तो अब मे चलु..? आप वो श्रीधरके घरके लोग आये तो सब नीपटा लेना.. ओर हो सकेतो दोनो भाइको ये रीस्ता स्वीकार करनेके लीये समजाइअेगा.. हें..हें..हें..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. यही होगा.. चल अब जा.. ओर कोइ खबर होतो बताना.. हमे अैसेही सबको नीपटाना हे..
कहातो मुना खुस होते हसते हुअे वहासे चला गया.. ओर देवायतभी मुस्कुराते वापस आके भानु ओर रामुकाकाके पास बैठ गया.. तो भानु देवायतकी ओर देखते हस रहा था.. तो देवायतको भानुसे रामुकाकाके सामने बात करना उचीत नही लगा.. ओर वो इसारोसे भानुको अंदर आनेको कहेते गोडाउनकी ओफीसमे चला गया.. तो उनके पीछे भानुभी उठकर आगया.. ओर देवायतके सामने बैठ गया.. तब....
कन्टीन्यु
देवायत : (मुस्कुराते) नही यार.. आज घरपे कोइ नही था.. सीर्फ मे ओर लखन ही थे.. सबलोग राजीव अंकलके वहा रुक गये हे.. तो सुबह उठकर आगया.. यार हरीयाको बोलदे थोडी चाइ बनादे..
भानु हरीयाको चाइके लीये बोलने चला गया.. तभी मुना जल्दी जल्दीसे आगया.. ओर सांस लेते देवायतके पास आकर रुक गया.. लगता हे वो दोडकर आयाथा.. तो देवायतने उसे सामनेकी ओर बैठनेका इसारा कीया तो वो भारी सांसोसे मुस्कुराते बैठ गया.. तब भानुभी अंदर आके दुसरी चैयरपे बैठ गया.. तो मुना उनको अजीब नजरोसे देखने लगा.. तब देवायत सबकुछ समज गया.. ओर उसने इसारोसे भानुको बहार भेज दीया.. तो भानुभी समकुछ समजके बहार चला गया.. तब..
देवायत : (मुस्कुराते) हां मुना.. बोल सुबह सुबह इतनी जल्दीसे दोडकर कैसे आगया..? ओर अब तु भानुको तो भुलही जा.. वो अब तेरे घरके सामने कभी नही देखेगा.. मेने उनको केह दीया हे.. बोल..?
मुना : (भारी सांस लेते) थेन्क्स ठाकुर साहेब.. बस अेक खबर देनीथी आपको.. तो इधर आगया..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. बोल कीसकी खबर देनीथी..? गांवमे कुछ नया हुआ हे क्या..?
मुना : (सरमाते मुस्कुराते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. ठाकुरसाहेब हमारा अेक दोस्त हेना..? श्रीधर.. रातमे उनके बडे पापाकी लडकीको लेकर भाग गया.. जयश्री नाम हे उनका.. श्रीधर उनके चाचाका लडका ही हे.. दोनो भाइ बहेन कही दिनोसे आपसमे रीलेशनमे थे.. तो अभी सुबह सुबहही जयश्रीकी मांके हाथ उनकी लीखी हुइ चीठी हाथ लग गइ.. तो अभी उनके घरमे थोडा हंगामा हुआ हे..
देवायत : (मुस्कुराते) क्या..? उनकी कजीन बहेनको लेकरही भाग गया..? क्या दोनो भाइ अभी जगडा कर रहे हे..?
मुना : (सरमाते हसते) नही ठाकुर साहब.. आपकोतो पता हे ये लोगोके बीच कभी जगडा नही होता.. बडीही सयानी कोम हे.. सब आपसमे बैठकर ही नीपटा लेते हे.. बहार वालोको उनकी भनक तक नही लगने देते..
देवायत : तो फीर तुजे सब कैसे पता चला..? लखनभी तुम सबका दोस्त हेनां..? क्या उसेभी सब पता हे..?
मुना : (मुस्कुराते धीरेसे) पता नही.. अभी इस बारेमे कीसीको कुछ नही मालुम.. सबसे पहेले आपहीको बता रहा हु.. आपतो जानते हे उनके घरका पीछवाडा ओर हमारे घरका पीछवाडा दोनोही मीले हुअे हे.. वो हमारे पीछली गलीमे रहेते हे.. मे सुबह हमारे घरके टेरेसपे ब्रस कर रहाथा ओर टहेलते पीछे चला गयातो जयश्रीकी मम्मी रो रहीथी.. ओर श्रीधरके मम्मी पापा आपसमे बहेस करते थोडा जगडा कर रहेथे.. ओर जयश्रीके पापा अपने सरपे हाथ रखके परेसानीमे सांत होकर बैठे थे..
देवायत : (आस्चर्यसे) लेकीन इनमे श्रीधरके मम्मी पापा आपसमे क्यु लड रहेथे..? उनका जगडातो उनके बडे भाइ भाभीके साथ होना चाहीये.. मे कुछ समजा नही..? क्या तुमने उनकी कुछ बात सुनी..?
मुना : (सरमाते हसते) हां ठाकुरसाहब.. उनको पता नही थाकी मे उनके पीछे ही हमारे घरकी छतपे हु.. ओर उनकी बाते सुन रहा हु.. मेने उनकी बातभी सुनी.. लेकीन अब मे आपसे सब कैसे कहु..? बात थोडी लंबी हे.. मुजे आपको सब सुरुसे बताना पडेगा.. क्युकी हम दोस्तोके बीच सभी तराहकी बाते होती हे.. तो मुजे उनके घरके बारेमे सब पता हे.. ओर मेरे बारेमे भी मेरे सभी दोस्तोको सबकुछ पता हे.. मतलब हम सभी दोस्तोको अेक दुसरेके बारेमे सबकुछ पता हे..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तुम सब दोस्तोके बीच काफी अंडर स्टेन्डींग हे.. हें..हें..हें.. चल पहेले हम चाइ पीते हे.. फीर खेतोकी ओर चलते वही बाते करते हे..
कहेते देवायत खडा होगया.. तो उनके पीछे मुनाभी खडा होगया.. ओर दोनोही गोडाउनके बहार आ गये तब भानु ओर रामुकाका दोनोही खटीयापे बेठे बाते कर रहेथे तभी मालती अपने नीतंब मटकते चाइ लेकर आ रहीथी.. ओर देवायतको देखतेही कातीलाना मुस्कराने लगी.. फीर मालतीने सबको चाइ पीलादी.. ओर खाली बर्तन लेकर चली गइ तब देवायत ओर मुना खेतोकी ओर जाने लगे.. तब..
देवायत : (मुस्कुराते) हां मुना.. अब मुजे सब कुछ सुरुसे बता.. माजरा क्या हे..?
मुना : (हसते साथ चलते) ठाकुरसाहेब.. बस माजरा कुछ नही.. दरसल बात ये हे की हमारा दोस्त श्रीधर उनकी कजीन बहेनके साथ रीलेशनमे आया उनसे पहेले श्रीधरके पीता उनकी भाभीके साथ यानी जयश्रीकी मांके साथ कइ सालोसे रीलेशनमे हे.. ओर ये बात श्रीधरकी मम्मीको बहुत देरसे पता चली.. वो जान गइथी की उपका पती उनकी भाभीके साथ रीलेशनमे हे.. लेकीन वो कुछ नही बोली.. ओर उसने बदलेकी भावनासे अेक चाल चली..
देवायत : (मुस्कुराते) अच्छा..? कैसी चाल..?
मुना : (हसते) ठाकुरसाहब.. दरसल जयश्री ओर श्रीधरकी मम्मीया.. आपसमे कजीन बहेने हे.. जयश्रीकी मम्मीने ही उनकी कजीन बहेनका रीस्ता अपने देवरसे यानीकी श्रीधरके पापासे करवाया हे.. जब श्रीधरके पीताकी सादीभी नही हुइथी.. उनसे पहेलेही देवर भाभीके बीच अवैध रीस्ता हो गयाथा.. श्रीधरकी मम्मी तब वहा उनकी बहेनके घरपे बहुत आती थी.. ओर वो श्रीघरके पीताको भा गइ.. ओर उसने अपनी भाभीको कहेकर उनकी बहेनका हाथ मांग लीया..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो ये दोनो भाइ ओर उनकी बीवीया आपसमे बहेने हे..
मुना : (हसते) हां ठाकुरसाब.. श्रीधरकी मम्मी जयश्रीकी चाचीके साथ उनकी मौसीभी हे.. ओर यही रीलेशन श्रीधरका भी हे.. जयश्री ओर उनकी चाचीके बीच बहुत बनती हे.. दोनो अेक दुसरेकी सहेलीकी तराह हर तराहकी बाते खुलके करती थी.. कभी कभी उनके साथ उनकी सहेली जागृती भी होती हे.. जो सामतभाइकी लडकी हे.. जयश्री ओर जागृती.. दोनोही सहेली बहुत कामुक ओर थोडी ज्यादा फोरवर्ड हे..
देवायत : तो फीर ये दोनो भाइ बहेन रीलेशनमे कैसे आये..? क्या ये सब श्रीधरकी मम्मीने करवाया..?
मुना : हां ठाकुरसाब.. जब श्रीधरकी मम्मीको उनके पतीके ओर उनकी बहनका आपसमे रीलेशनका पता चला.. तब बातो ही बातो मे श्रीधरकी मम्मीने ही जयश्रीको श्रीधरसे रीलेशन रखवाके फसाया.. उन्होने बातोही बातोमे जयश्रीको श्रीधरके साथ रीलेशन रखनेके लीये उक्साया.. ओर उसे ये समजाया की घरकी बात घरमेही रहेगी.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. मे तेरे साथ हु.. ओर जयश्री भी बहुतही कामुक लडकी थी.. ओर उपरसे जवान.. तो वो अपनी चाचीकी बात आसानीसे मान गइ..

देवायत : (हसते) हंम.. समजा.. तो फीर ये सब उन्हीका कराया कीराया हे.. फीर..?
मुना : (सरमाते हसते) ठाकुरसाहेब.. श्रीधरकी मां बहुत दिमाग वाली हे.. उन्होने अेक चाल चली.. जब ये दोनोके अेक्जाम आने वालेथे उसी टाइम उन्होने अपने पती ओर जेठको कही घुमने जानेके लीये मनाया.. ताकी दोनोके बच्चे अक्जामकी वजहसे साथमे ना आसके.. ओर भाइ बहेनको प्यार करनेका मौका मीले..
ओर वो प्लानमे कामयाब भी होगइ.. उनका पती ओर उनकी जेठानी तो घुमने जानेकी बात सुनतेही जानेके लीये रेडी होगये.. ताकी दोनो आपसमे मजे कर सके.. लेकीन तब उनको ये नही पताथा की श्रीधरकी मम्मी अभी घुमनेके लीये क्यु लेजा रही हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) क्या दोनो भाइ बहेन नजदीक आ सके इसीलीये बहार घुमनेका प्लान बनाया..?
मुना : (हसते) हां.. दोनो भाइ ओर देवरानी जेठानी कही चार पांच दिनके लीये आउट ओर स्टेशन धुमने चले गये.. तब दोनो भाइ बहेन अकेलेही घरमे रेह गये.. ओर श्रीधरकी मम्मी जयश्रीको पहेलेसे ही सबकुछ समजाकर गइथी.. तो जयश्रीने ही पहेलकी.. ओर पहेले दिनही जयश्रीने श्रीधरसे अपने प्यारका इजहार करदीया..

फीरतो आप जानते हे.. दोनोही काफी जवान थे.. जयश्रीतो श्रीधरसे दो तीन साल बडी हे.. ओर उसी रात दोनोही प्यारमे बहेक गये ओर सबकुछ होगया.. श्रीधरने उसी रात ही जयश्रीका कौमार्य भंग करके उसे लडकीसे ओरत बना दीया..

फीरतो जबतक दोनोके माता पीता नही आये.. तबतक अेक पती पत्नीकी तराह अेकही बीस्तरमे सोते ओर सेक्स करते रहे.. ओर उसी दिनसे ये सीलसीला चल रहा हे.. फीरतो दोनो हर दिन सेक्स करते रहे.. बस उस पांच दिनके टाइमको छोडके..हें..हें..हें..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तो ये बात हे.. लेकीन मुना.. तुजे ये सब इतना कुछ कैसे मालुम..?
मुना : (सरमाते धीरेसे) ठाकुरसाहेब.. आपतो जानते हे हम सभी दोस्तोको आनेवाले बदलावके बारेमे सबकुछ पता हे.. इसीलीये हम सब दोस्तो इस बारेमे सब खुलके बात करते हे.. ओर आपसमे सब अपनी बात सेर करते हे.. ताकी भवीस्यमे कीसीको कोइ ज्यादा तकलीफ नाहो.. इस बातपे हम सभी दोस्तो बहुतही उत्सुक हे.. ओर हमसब आपके साथ हे.. तो ये सब बाते हमे श्रीधरनेही बताइ हे.. श्रीधरकोभी पता हे उनके पापा उनकी बडी अम्माको ठोकता हे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) कमाल हे.. तुम सबके सब कमीने हो.. हें..हें..हें.. तो फीर तुजे येभी पता होगाकी ये दोनो भागकर कहा गये हे..? सच बताना.. हें..हें..हें..
मुना : (सरमाते हसते) नही पता.. कसमसे.. ठाकुरसाहब हमे कुछभी बताके नही गया.. बस कमीना कल मीलाथा तो हसते हुअे केह रहाथा की कल कुछ नया होगा.. लेकीन क्या होगा ये उसने नही बताया हें..हें..हें.. लेकीन मुजे लगता हे इस बारेमे सीर्फ दो लोग अैसे हे.. जो उनको सबकुछ मालुम होगा..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) कौन..? मुना.. क्या उनका नाम मुजे बता सकता हे..?
मुना : (हसते) हां.. इसीलीये तो मे आपके पास आया हु.. सायद वो लोग आपको मीलनेके लीये उनके घरपे भी बुलाये.. तो आपको केस हेन्डल करनेमे आसानी रहे.. लेकीन देखना इसमे मेरा नाम कही नाआये..
देवायत : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते) अरे तु फीकर मत कर.. तेरा नाम कभी नही आयेगा बता..?
मुना : (सरमाते मुस्कुराते) हंम.. अेक हे जागृती.. क्युकी वो ओर जयश्री दोनोही खास सहेली हे.. ओर दुसरा सख्स हे खुद श्रीधरकी मम्मी.. ठाकुरसाहेब.. मुजेतो लगता हे.. सायद श्रीधरकी मम्मीने ही उन दोनोको भगा दीया हे.. ओर अभी अन्जान बननेका नाटक कर रही हे.. साली बहुतही सातीर दिमाग वाली हे..
देवायत : (मुस्कुराते) मुना.. सही पहेचाना तुने.. छोड ये सब.. जब बात हमारे पास आयेगी तब हम देखलेगे.. बस.. अब तु बता.. तेरा क्या हुआ..? सब कैसे चल रहा हे..? बात कुछ आगे बढी की नही..?
मुना : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) ठाकुरसाहब.. मम्मी तो मान गइ.. बस अब हमारे बापु मान जाये.. मे अपनी बहेनको जाहेरमे सबके सामने अपनालु इनसे पहेले मां हमारी सादी मंदिरमे जाकर करदेना चाहती हे.. क्युकी अब ज्यादा दिन हम बरखाकी बातको नही छीपा सकते.. आप समज गयेनां..?
देवायत : (थोडा सीरीयस होते) मुना.. सच कहेना.. तेरी मम्मी तुम दोनोकी बात इतनी आसानीसे कैसे मान गइ..? उसने कोइ विरोध नही कीया..?
मुना : (सरमाते नजरे जुकाते) ठाकुरसाहब.. आपने मेरी बहुत मदद की हे.. अब आपसे मे सब कैसे कहु..? क्युकी कुछ बात अैसी हे जो मे आपके साथ सैरभी नही कर सकता.. ओर आपसे जुठभी नही बोल सकता.. हमे भानुभाइके उनके साथ रीलेशनकी बात कहेनी पडी.. तबजाके वो मानी हे.. उन्होने वादाभी कीयाहे की अब वो भानुभाइसे कोइ रीलेशन नही रखेगी.. लेकीन इसके बदले उन्होने जो सर्त रखी वो मे आपको नही बता सकता.. हमारी इजतका सवाल हे.. मे नही चाहता की मम्मीकी इजतपे कोइ आंच आये.. सोरी..
देवायत : (मुस्कुराते) मुना.. कोइ बात नही.. तु फीकर मत कर.. मे तेरे साथ हु.. मे इस मामलेमे तुमसे ज्यादा तर्जुबेकार हु.. मे समज सकता हु उन्होने तुमसे क्या सर्त रखी होगी.. तुम कोइ संकोच मत करना.. उनकी सब सर्त मानले.. क्या वो तेरे साथ रीलेशनमे आना चाहती हेनां..?
मुना : (आस्चर्यसे मुह फाडके देखता ही रहा) ठाकुरसाहेब.. आप..? आपको ये सब कैसे पता..? क्या हमारे घरमे कीसीने आपको कुछ बताया..? कही मम्मीके जरीये भानुभाइसे तो ये बात..
देवायत : (कंधेपे हाथ रखते धीरेसे) अरे नही नही.. मुना तुम टेन्शन मतले.. अैसा कुछभी नही हुआ.. देख मुना.. बुरा मत मानना.. मेने अैसे कइ केस देखे हे.. तेरी मम्मीकी अभी उमरही क्या हे..? उनकोभी अपने तनकी जरुरतको पुरी करना हे.. ओर उपरसे तेरे बापु बहुत बीमार हे.. उनकोभी पता हे अब वो उसे वो सुख देनेमे सक्षम नही हे..
इनका कभीभी कुछभी हो सकता हे.. तो बेचारी कहा जायेगी.. ओर बहार कीसीसे रीलेशनसे इजत जानेका खतरा.. तो इनसे तो बहेतर हे वो घरके आदमीसे ही रीलेशन रखले.. ओर हमारे गांवमे ज्यादातर लोगोने वही कीया हे.. सभीने आपसमे ही रीलेशन रखा हे.. तुजेतो सब पता हे..
मुना : (सरमाते धीरेसे) सही कहा आपने.. लेकीन ठाकुरसाहेब.. लोग क्या कहेगे..? बस यही डर लगता हे..
देवायत : (धीरेसे) देख मुना.. लोगोके बारेमे मत सोच.. बस अपने घरके बारेमे सोच.. अगर भानुके साथ नही तो वो कीसी ओरके साथ रीलेशन रखती तो क्या तुम दोनोको अच्छा लगेगा..? इनसेतो अच्छा हे तुमही तेरी मम्मीको सम्हाललो.. अगर बायचान्स तेरे बापुको कल कुछ कुछ होजाता हे तो मेतो कहेता हु तुम उनसेभी सादी करलो..
मुजे पता हे तुम इतना सक्षमहो की तुम दोनोको सम्हाल सकोगे.. ओर तुम तीनो खुसभी रहोगे.. क्या कहेते हो..? मुना फीकर मत कर इस मामलेमे मे तेरे साथ हु.. बस अब ज्यादा दिन दुर नही हे.. सब अैसे रीस्तोको अपनायेगे.. मे इसे गलत नही मानता.. तुजेतो पता हे हमारे खानदानमे पीछली तीन पीढीसे सबने यही कीया हे.. सबने अपनी बहेनसेही सादीया करली हे..
मुना : (इमोस्नल होते) जी.. मे जानता हु सब.. थेन्क्स ठाकुरसाहेब.. आपने हम लोगोकी तकलीफको समजा.. बस अभी अेक ही बिनंती हे.. जबतक सब सही नही होजाता तबतक इस बातको हमे सबसे छुपाना हे.. ओर कुछ नही..
देवायत : (मुस्कुराते कंधेपे हाथ रखते) मुना.. तु फीकर मत कर.. ये बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी.. तु बहुत अच्छा लडका हे.. जो परीवारमे सबका खयाल रखता हे.. तुजे कोइभी मददकी जरुरत होतो मुजे बताना.. ओर हां.. तुम ओर तेरी बहेन तेरी मम्मीको साथमे रखकर आश्रममे जाकर सादी करलो.. मे बाबासे बात कर लुगा.. वहा कीसीको पताभी नही चलेगा.. जब भी जाना हो मुजे बता देना..
मुना : (खुस होते मुस्कुराते) जी ठाकुरसाहब.. सुक्रिया.. सोचके बताता हु.. सायद कल या परसो ही हम आश्रमपे जाके सादीका नीपटा लेगे.. क्युकी अब दो तीन दिनकी हमारी छुटी होगी.. आप बाबासे बात करलेना..
देवायत : दो तीन दिनकी छुटी होगी.. मतलब..? कही जाने वाले हो..? ओर क्या कर रहा हे तेरा डोक्टर..? हें..हें..हें.. अब वो तुजे कुछ डीमान्ड करता हेकी नही..? हें..हें..हें..
मुना : (सरमाते हसते) क्या ठाकुरसाहेब.. कुतेकी दुम कभी सीधी हो सकती हे क्या..? ओर मेरीभी मजबुरी हे.. मुजेभी वहा नोकरी करनी हे.. हां.. जब आपने कहा तबसे बहुतही कम डामान्ड करते हे.. सायद अेक दो दीनमे वो कीसी दो दिनकी डोक्टरोकी कोन्फरन्समे जाने वाले हे.. तब हमारी छुटी होगी.. हें.. हें.. हें..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. तु फीकर मत कर.. हो सकेतो ये दो तीन दिनमे ही सब नीपटाले.. ओर बादमे तेरी मम्मीसे भी सादी करलेना.. ओर इसके लीये बरखा कोइ अेतराज करेतो मुजे कहेना मे ओर मंजु उसे समजा देगे..
मुना : (सरमाते हसते) जी.. ठाकुरसाहेब.. तो अब मे चलु..? आप वो श्रीधरके घरके लोग आये तो सब नीपटा लेना.. ओर हो सकेतो दोनो भाइको ये रीस्ता स्वीकार करनेके लीये समजाइअेगा.. हें..हें..हें..
देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. यही होगा.. चल अब जा.. ओर कोइ खबर होतो बताना.. हमे अैसेही सबको नीपटाना हे..
कहातो मुना खुस होते हसते हुअे वहासे चला गया.. ओर देवायतभी मुस्कुराते वापस आके भानु ओर रामुकाकाके पास बैठ गया.. तो भानु देवायतकी ओर देखते हस रहा था.. तो देवायतको भानुसे रामुकाकाके सामने बात करना उचीत नही लगा.. ओर वो इसारोसे भानुको अंदर आनेको कहेते गोडाउनकी ओफीसमे चला गया.. तो उनके पीछे भानुभी उठकर आगया.. ओर देवायतके सामने बैठ गया.. तब....
कन्टीन्यु







