Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 95 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

लखन : (आस्चर्यसे देखते) हमारे बडे भैयाको..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. भानु भाइ ओर भैया अच्छे दोस्त थे तो भैया अक्सर उनके घरपे जाते थे.. ओर भानु भाइसे छुपकर दोनो वासनाका खेल खेलते..

लखन : (हसते) ओ..ह.. गोड.. हमारे बडे भैया भी हमारे बापुके उपर गये हे..

पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां.. ओर आपको भी उसीकी राहपे चलना हे.. फीर हमारा वीजय..

इसके अलावा भी पुनमने लखनको बहुत कुछ बताया.. तभी अ‍ेक दुकान आगइ तो पुनम ओर लखन दुकानमे चले गये.. वहा पुनमने सृतीको सरप्राइज देनेके लीये कुछ सामान लेलीया ओर लखनको पुरा प्लान समजा दीया.. फीर सामानको कारमे ही रखते दोनो घरमे आगये..

आते ही पुनम सबको गले मीली.. तो लखनने सृतीको गोदमे उठा लीया.. ओर उपर अपने रुममे ले गया.. वहा पुनमके साथ सब उपर आगइ.. पुनमने अलमारीसे अ‍ेक लाल सारीके साथ अ‍ेक कपडेकी जोडी नीकालके सृतीको पहेननेके लीये देदी..

ओर बाकीको सब सामान नीचे लेजानेको कहा.. फीर सृती कंपलीट होगइ तो मना करनेके बावजुद लखन उसे गोदमे नीचे लाया.. सभीने खरीदी कीया हुआ सब सामान ओर कुछ कपडे भी साथमे लेलीये.. ओर घरको ताला लगाकर सबलोग गांवकी ओर नीकल गये..

सृतीको अभी भी समजमे नही आ रहा था की पुनमने उसे दुल्हन जैसे कपडे पहेननेके लीये क्यु कहा.. वो चुप चाप कारमे बैठी रही.. बीच रास्ते जंगल आया तब कबीलेकी ओर जानेके रास्तेमे लखनने कार मोडली.. तो सृतीको आस्चर्य हुआ..

लेकीन बाकीके सबलोग मुस्कुराते रहे.. सृतीने अ‍ेक बार सबको पुछा.. की हम इधर कहा जा रहे हे..? लेकीन कीसीने कुछ नही बोला ओर हसते रहे.. लखनने कबीलेकी ओर ना जाते कारको बीच जंगलमे लेली.. तो सृतीकी दिलकी धडकन भी बढने लगी.. ओर आखीर उनसे रहा नही गया..

सृती : (थोडा जोरोसे) लखन.. अब तो बता दीजीये हम कहा जा रहे हे..?

पुनम : (जोरोसे हसते) अरे दीदी सांत रहीये.. आपही के लीये जा रहे हे.. आपके लीये अ‍ेब बडीया सरप्राइज हे.. आप देखती जाइअ‍े.. हें..हें..हें..

सृती : (अपना सर पकडते) ओह गोड.. आप ओर हमारे भाइकी सरप्राइज.. कभी खतम ही नही होती..

आखीर सबलोग मंदिरपे आगये.. बीच जंगल डरावना लग रहा था.. सबलोग कारसे उतर गये.. ओर चारो ओर देखने लगे.. फीर मंदिरके परीसरमे चले गये.. वहा अंदर महादेवका मंदिर देखा.. अंदर जाकर सब लोगने थोडी साफ सफाइ करली..

फीर सबलोगोने दर्शन कीये.. तभी पुनमने लखन ओर सृतीको आगे आनेके लीये कहा.. तो सृती सरमाते हुअ‍े लखनके साथ आगेकी ओर आगइ.. तो पुनमने साथमे लीया हुआ सामान उठाया.. ओर अंदरसे दो फुल हार नीकालके लखन ओर सृतीको अ‍ेक अ‍ेक पकडा दीया..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) इनका क्या करना हे..? सीवलींगपे चडाना हे..?

पुनम : (अपना सर पीटते हसते) अरे बुध्धु.. यही तो हे सरप्राइज.. आप ओर लखन भैया अ‍ेक दुसरेके सामने खडे होजाइअ‍े.. आज आप दोनोका इधर गांधर्व विवाह हे.. मीन्स.. दोनोकी सादी.. चलीये दोनो अ‍ेक दुसरेको हार पहेनाइअ‍े..





कहातो सृती सोक्ट होते पुनमकी ओर देखने लगी.. उनकी आंखसे खुसीके मारे आंसु नीकल गये.. वो समज गइ की घरसे आते वक्त इसीलीये पुनमने उनको सादी जैसे कपडे पहेनाये थे.. सृतीने सरमाके लखनको हार पहेना दीया तो लखनने भी सृतीके गलेमे वरमाला पहेनादी..

फीर पुनमने लखनको अ‍ेक मंगलसुत्र नीकालके लखनके हाथोमे थमा दीया.. जीसे लखनने सृतीके गलेमे पहेना दीया.. आखीर लखनने सृतीकी मांग भरदी.. तो सृती पुनमसे लीपटकर जोरोसे रोने लगी.. सबने हसते हुअ‍े सृतीको सांत कीया..

फीर पुनमने दोनोको सादीकी कसमे खीलाइ.. तब सृतीसे रहा नही गया.. ओर वो नीचे जुकते लखनके पांवको छुने लगी.. ओर लखनने उसे खडी करते अपनी बाहोमे भर लीया.. सृतीके अ‍ेक बार फीर आंसु नीकल गये.. आखीर सृतीकी सादी लखनसे होगइ..

दया : (गुलाबके फुलोकी बेग दीखाते) पुनोदी.. मेरे देवर ओर देवरानीकी सादी तो होगइ.. अब इतने सारे फुलोका हम क्या करेगे..? यही रखदु..?

रजीया : (पीठमे अ‍ेक मुका जडते थोडा डांटते) बुध्धु की बुध्धु ही रहेगी.. अभी अभी कुछ दिन पहेलेही तेरी सादी हुइ हे.. फीरभी नही पता..? आज इन दोनोकी सादी हुइ हे.. तो सुहागरात नही मनेगी..? ये फुल इसीके लीये हे समजी..? लेचल साथ..

कहा तो दयाने अपना सर पीट लीया तो सब जोरोसे हसने लगे.. फीर सब लोग दर्शन करके वहासे नीकल गये.. पुनम खुद सबके साथ बैठ गइ.. ओर सृतीको लखनके साथ बीठा दीया.. सबलोग मस्ती मजाक करते गांव पहोंच गये..

तो कारकी आवाज सुनते ही लता ओर मंजु बहार आगये.. सबको देखते ही दोनो दोड पडी ओर बारी बारी सबको गले मीलने लगी.. सृतीको सादीके जोडेमे मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र देखते मंजु खुस होगइ.. तो लता भी समज गइकी सृतीने लखनसे सादी करली हे..

मंजुला : (जोरोसे सृतीको गले लगाते) आगइ मेरी बहु.. सादी करली मेरे बेटेसे..? कैसा लगा हमारा सरप्राइज..? हें..हें..हें..

सृती : (आंख गील करते धीरेसे) मोम.. आप लोगोकी सरप्राइज कभी खतम ही नही होगी.. ये आप ओर पुनोदीका प्लान थानां..?

मंजुला : (हथलीमे चहेरा पकडते) हां मेरी बच्ची.. यहासे दुखी होकर गइ थी.. तो तुजे खुस होते देखन चाहती थी.. कैसा लगा मेरा बेटा..? तुजे खुस तो रखता हेनां..?

सृती : (वापस गले लगते) मोम.. वो हम सबको बहुत.. बहुत.. बहुत खुस रखते हे.. थेन्क्स.. कास मे आपकी बाते समज पाती.. सब कीतना कुछ बदल गया..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. चल घरमे.. तेरी गृह प्रवेसकी वीधी भी करनी हे.. फीर अपनी मम्मीको भी मीलले.. यहा कीसीको पता नही हे.. की तुमने लखनसे सादी कीहे.. सबको सरप्राइज मील जायेगी.. तुजे मेरी लखनकी सुहागन देखते बहुत खुस होजायेगी..

तभी लखन भी आकर मंजुका पांव छुता हे.. तो मंजु उसे भी गले लगा लेती हे.. तबतक लता भी सबको गले मीली.. लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखा.. तो लताको बहुत बुरा लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. तभी मंजु लताको पानीका कलश लानेको बोलती हे.. तबतक सबलोग सामान लेकर अंदर आजाते हे.. मंजुने सृती ओर लखनको दरवाजेपे ही रोक लीया....

कन्टीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६४

तभी लखन भी आकर मंजुका पांव छुता हे.. तो मंजु उसे भी गले लगा लेती हे.. तबतक लता भी सबको गले मीली.. लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखा.. तो लताको बहुत बुरा लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. तभी मंजु लताको पानीका कलश लानेको बोलती हे.. तबतक सबलोग सामान लेकर अंदर आजाते हे.. मंजुने सृती ओर लखनको दरवाजेपे ही रोक लीया.... अब आगे

ओर वही साथमे खडे रहेनेको बोला.. लखन ओर सृती सरमाते वही खडे रहे.. मंजुने उन दोनोके सरपे कलश घुमाकर गृह प्रवेस करवाया.. तबतक अंदर रजीया दया पुनम भुमीका ओर नीर्मलाको भी गले मीली ओर पुनम चंदाके पास चली गइ.. तो चंदा अ‍ैसे ही विजयको लेकर गुमसुम बैटी थी.. पुनमको देखते ही खुस होते मुस्कुराने लगी.. बेडसे खडी होगइ.. ओर पुनमको जोरोसे गले लगा लीया..

चंदा : (मुस्कुराते) आगइ मेरी बच्ची..? क्या मेरे दामाद भी साथमे आये हे..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां भाभी.. लेकीन वो अभी आपके दामाद नही हुअ‍े हे.. आपके देवर भीतो हे..

चंदा : (मुस्कुराते) नही.. मे उसे अपना दामाद ही मानुगी.. अब दामाद होने मे बचा ही क्या हे..?

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) क्या..? मतलब..? सादी बाकी हे..

चंदा : (हसते) सादी बादी तो होती रहेगी.. मे इतनी भी भोली नही हु.. जानती हु इस खानदानके मर्दोको.. दोनो भाइ अ‍ेक जैसे ही हे.. कोइ मौका हाथसे नही जाने देते.. तभी तो आप अ‍ैसे चल रही हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमाते गले लगते)) भाभी.. प्लीज.. मुजे सरम आ रही हे..

चंदा : (हसते) अरे.. सरमाओ मत.. मुजे सब पता हे.. बस तुम खुस रहो..

बहारकी ओर भुमीका ओर नीर्मला होलमे बैठे गपे लगा रही थी.. जैसे ही सृती लखनको देखा दोनो खडी होगइ.. तो सृती दोडकर उनकी मम्मीके गले लग गइ.. ओर जोरोसे रोने लगी.. तो भुमीका भी सृतीकी मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र देखके सोक्ट होगइ..

तो नीर्मला भी मुह फाडकर सृतीकी मांगको देखती रही.. दोनोके चहेरेपे खुसी ओर सरप्राइज के मीले जुले भाव थे.. ओर दोनो समज गइकी सृती लखनने सादी करली हे.. तभी लखन भी आकर दोनोके पांव छुलेता हे.. ओर सबलोग होलमे ही बैठ गये..

भुमीका : (सृतीको अपने पास बीठाते) बेटा.. ये सब क्या हे..? तुम दोनोने सादी करली..?

सृती : (सरमाकर लखनकी ओर देखते मुस्कुराते) हां मोम.. हम आपको सरप्राइज देना चाहते थे.. क्या आपको बुरा लगा..?

भुमीका : (सरको चुमते) अरे नही नही.. इतना होनहार दामाद मीला हे तो कौन खुस नही होगे.. मे बहुत खुस हु.. की तुमने हमारे लखनसे सादी करली.. चलो अब मुजे तेरी चीन्ता ही नही हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) सृतीबेटा.. मुजे सब पता था.. मेभी भुमीको सरप्राइज मीलनेका रीअ‍ेक्शन देखना चाहती थी.. हम सब बहुत खुस हे..

लखन : (भुमीका नीर्मलाके पांव छुकर बीचमे बैठते) हां तो आंटी.. अब आपसे मे क्या कहु.. बुआ..? भाभी..? की सासुमां..? हें..हें..हें..

भुमीका : (कान खीचते) तु हेनां.. बहुत बदमास हो गया हे.. मुजे कुछ नही बनना.. तेरी बुआ ही ठीक हु.. जा अंदर रामु भाइ हे.. पहेले उनकी खबर तो पुछले..

जैसे ही सबको पता चलाकी रामुकाका यही रुममे हे.. तो दया दोडकर वहा चली गइ.. ओर रामुकाकासे लीपटकर रोने लगी.. तबतक सबलोग अंदर आचुके थे.. मंजुने दयाको सम्हाला.. तो लखन ओर सृतीने मीलकर रामुकाकाके पैर छुअ‍े ओर उनका आशीर्वाद लीया..

फीर कुछ देर वही रुकके सब लोगोने रामुकाकाके हालचाल पुछे.. ओर होलमे आगये.. तो रजीया ओर दया कीचनमे चली गइ.. ओर चंपा भाभीको गले मीलकर उनकी मदद करने लगी.. पुनम अब भी चंदाके पास थी.. तो भावना थोडी लंगडाते चलते बच्चीको लेकर पुनम वाले रुममे चली गइ..

तो मंजु उसे देखकर कातील स्माइल करती हे.. उसे सब पता चल गया थाकी पीछली रात वो लखनसे फीजीकल होकर आइ हे.. ओर लखनने उनकी अ‍ैसी हालत कीहे.. जीसे देखकर मंजु भी खुस होगइ.. होलमे भुमीका नीर्मला सृती मंजु लथा लखन सबलोग बैठकर बाते करने लगे..
 
लता बार बार लखनकी ओर देखती रही.. लेकीन लखनने अ‍ेक बार भी लताकी ओर नही देखा.. तो लता खडी होकर भावनाके पास चली गइ.. सृतीने भुमीकाका हाथ पकडकर उसे चेक करलीया.. ओर लंचके बाद भुमीको रुममे आकर देखलेनेको बोला..

ताकी भुमीकाकी सोनोग्राफी होजाये ओर सब सही पता चले.. तबतक दो पहोर होगइ.. तो देवायत भी घरपे आगया.. ओर सबके साथ बैठ गया.. सृती फोर्मालीटी करते देवायतका हाल चाल पुछकर भावनाके पास चली गइ.. सृतीने देवायतसे बातकी तो भुमीका ओर नीर्मलाने राहतकी सांस ली..

ओर देवायतने डो. वसुधाने कही बात मंजुको बतादी.. की रामुकाकाकी तबीयत ज्यादा खराब होनेकी वजहसे सायद उसे खानेके बाद होस्पीटल लेजाना पडे.. फीर सबलोग खानेके लीये बैठ गये.. पुनमसे बाते करते आज चंदा थोडी खुस लग रही थी.. लता अब भी लखनकी ओर प्यारसे देख रही थी..

ओर मनमे मनते कर रही थीकी अ‍ेक बार तो लखन उनकी तरफ देखले.. लेकीन लखन साथमे बैठी पुनम ओर सृतीसे बाते करता रहा.. सृतीकी मांगमे सींदुर देखते देवायतभी समज गया थाकी लखन ओर सृतीने सादी करली हे.. फीर खाना खाकर देवायत ओर लखन अपने खेतोपे चले गये..

देवायत : (रास्तेमे) लखन.. अच्छा कीया तुमने सृतीसे सादी करली.. कमसे कम हमारी नजरके सामने तो रहेगी.. तो भुमी भी खुस रहेगी.. वो उन्हीकी चीन्ता कर रही थी..

लखन : (सरमाते धीरेसे) सोरी भैया.. मे आपको नही बता सका.. लेकीन भाभीमां सब जानती थी.. ओर सृती दीदी भी मुजसे प्यार करने लगी थी..

देवायत : (मुस्कुराते) अरे तु टेन्शान मतले.. मुजे तेरी भाभीमांने सब कुछ बता दीया था.. ओर सुन.. तु आज कही मत जाना.. मुजे नही लगता रामुकाका आजकी रात नीकाल पायेगे..

लखन : (थोडा सीरीयस होते) भाइ.. क्या उनको ज्यादा तकलीफ हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. सुधीरको मीन्स.. वो वसुधाको बुलाया था.. रामुकाकाकी उमर होगइ हे.. कुछ नही हो सकता.. बस.. हमे उनकी सेवा करनी हे..

लखन : भाइ.. अ‍ेक बात पुछु..? क्या वो सुधीर भाइ ही वसुधा हेनां..? मुजे पुनोदीने बताया..

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. तुजे तो पता हे उनमे अ‍ेक मर्दसे ज्यादा ओरतके लक्षण थे.. तो बेचारेने अपना जेन्डर चेन्ज करवा लीया.. ओर ये अच्छा भी हे.. कमसे कम अपनी लाइफमे तो खुस रहेगी..

लखन : (सामने देखते) तो फीर नीशा भाभी..? उनका क्या..?

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. कुछ बाते हे जो आज तुजे खुलकर बताना चाहता हु.. तेरी भाभीमां ओर पुनोको सब कुछ पता हे.. मेने नीशा ओर चारु रश्मी तीनोसे सादी करली हे.. ओर लता वंदनाके साथ सादी करने जा रहा हु..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. अ‍ेक बात पुछु..? हम दोनोकी इतनी बीवीया हे.. आपने ओर भाभीमांने भी कुछ नीर्णय लीया हे.. कही हम कुछ गलत कदम तो नही उठा रहे..?

देवायत : (मुस्कुराते) नही लखन.. इस बारेमे तेरी भाभीमासे सब बाते होगइ हे.. वो ओर पुनो बहुत कुछ जानती हे.. हम सब वो नही हे जो तुम समज रहे हो.. हम सब लोगोसे अलग हे.. पुनोको सब पुछ लेना.. हमारे खानदानकी मुजे कुछ जीम्वेवारी नीभानी हे.. ओर इसके लीये सब जरुरी था.. जब मेरा वक्त खतम होजायेगा तब यही सब जीम्वेवारी तुजे ही उठानी हे.. जबतक मेरा विजय बडा नही होजाता..

लखन : (सरमाते धीरेसे) हां भाइ.. भाभीमाने मुजे भी ये बात कही हे.. चलो ठीक हे.. मुजे लगा कही आपको बुरा लगता होगा.. इसीलीये पुछ लीया..

देवायत : (मुस्कुराते) लखन.. पता हेना हम सब कौन हे..? हम दोनोमे कामका अंस हे.. हम सेक्सके बीना नही रेह सकते.. मुजे पता हे तेरी सादीसे पहेले बहुत सारी लडकीया ओर ओरतोके साथ तेरा रीलेशन रेह चुका हे.. इसी तराह मेरा भी कइ ओरतोके साथ रीलेशन हे.. हमे ओर मर्दोके मुकाबले ज्यादा सेक्स चाहीये.. वरना हमे तकलीफ होने लगती हे.. तो तु कोइ संकोच मत कर.. जो हो रहा हे होने दे.. मुजे कोइ बुरा नही लगेगा..

लखन : (धीरेसे) भाइ.. साहील मीला था.. वो कुछ अन्जान लोगोकी बात कर रहा था.. जो भानु भाइसे मीलते हे.. तो आप जरा ध्यान रखना..

देवायत : (मुस्कुराते) हां वहासे आकर मीला था मुजसे.. मेरी सब बाते होगइ हे.. मेने इस बारेमे भानुसे भी बात करली हे.. तु फीकर मत कर.. हम लोग देख लेगे..

लखन : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. आपसे अ‍ेक बात ओर करनी थी.. हमारे साहीलके बारेमे..

देवायत : (मुस्कुराते) जानता हु.. फीर भी बता..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. अब उनके चाचा चाची गांवमे रहेने आजायेगे.. आपको उनके चाचाको मनाना हे.. साहील ओर उनकी अम्माके लीये.. आप समज गयेनां..?
 
देवायत : (मुस्कुराते) तु टेन्शन मत ले.. अ‍ेक बार यहा आनेदे उसे.. उनके चाचासे सब बाते कर लुगा.. साहील बहुत ही होशीयार लडका हे.. अच्छा हुआ उन्होने अपनी अम्माको सम्हाल लीया.. वरना उनका भी हाल मुनाकी मां जैसे होता..

लखन : (मुस्कुराते) क्या मुनाकी मां अभी भी भानु भाइसे मील रही हे..?

देवायत : (मुस्कुराते) नही.. अब तो उनके सामने तक नही देखती.. लगता हे मुनाने उसे अच्छी तराह सम्हाल लीया हे.. ओर हेभी अच्छा.. घरकी बात घरमे ही रेह जायेगी..

फीर बाते करते दोनो खेतपे आगये.. वहा दोनो भानुसे मीले.. ओर रामुकाका की बाते करने लगे.. तो बातो ही बातोमे भानुको पता चलाकी सृती यहा आइ हे ओर पुनमकी सादी तक यहा रुकने वाली हे.. तो ये सुनकर भानुने रमाको सृतीको दीखानेकी बात करली..

फीर अ‍ेक घंटेके बाद दोनो घरपे आगये तो दया रामुकाकाके पास ही बैठे उनकी सेवा कर रही थी.. लखन भी रामुकाकाके पैर दबाने लगा.. घरपे गमगीन वातावरण होगया था.. क्युकी रामुकाकाकी हालत ओर बीगड चुकी थी.. वसुधाने देवायतको पहेलेसे ही सब बताके रखा था..

रामुकाका बेसुध जैसी हालतमे पडे थे.. कोइ उनको बुलाता तो मुस्कीलसे खांख खोलकर उनके सामने देख लेते.. वो अपनी जींदगीकी आखरी सांसे गीन रहे थे.. रामु काकाके पेर ठंडे पड गये थे.. उनके सीनेसे कुछ अजीब आवाज आने लगी थी..

लखनने श्रीधरको फोन कीया तो कुछ ही देरमे श्रीधर मुना बंसी साहील सभी दोस्तो घरपे आगये.. रामुकाका अंतीम समय था.. दयाने उसे पानी पीलाया.. ओर कुछ ही देरमे रामुकाकाकी सांसे थम गइ.. देवायतने वसुधाको फोन करके बुलालीया..

तो सृतीने उनका हाथ पकडकर नब्स चेक करली.. ओर मंजुकी ओर देखते नांमे गरदन हीलाइ तो दया उनसे लीपटकर जोरोसे रोने लगी.. भुमीका नीर्मला मंजु सबकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर दयाको सम्हालने लगे.. फीर वसुधाने वही डेथ सर्टी लीखकर देदीया..

तो कुछ देरमे चारु नीशा वंदना रश्मी ओर गांवकी सभी ओरते ओर कइ मर्द आगये.. जैसे जैसे सबको पता चला सबलोय आने लगे.. लखनने श्रीधर बंसीको कहेकर अर्थीका सामान मंगवाया.. ओर साम तक सब कंपलीट होगया.. सबने रामुकाकाके आखरी दर्शन कीये..

फीर रामुकाकाको लेकर स्मसान चले गये.. वहा उनको देवायतने मुखाग्नी दी.. ओर उनका अग्नी संस्कार करके सबलोग घरपे आगये.. फीर सब लोग देवायतको मीलकर अपने घर जाने लगे.. घरपे सीर्फ देवायत ओर लखनकी सब बीवीया ओर लखनके दोस्त रेह गये..

रातने सबने मीलकर खाना खाया.. फीर रश्मी नीशा चारु वंदना ओर वसुधा भी अपने घरपे चले गये.. ओर लखन दोस्तोके साथ बहार चला गया.. सभी लोग चोहारेपे अपनी जगह बैठ गये.. ओर लखनने सबको सृतीके साथ सादीके बारेमे बताया..

आज रामुकाकाकी मोतकी वजहसे लखन ओर सृतीकी सुहागरात मुमकीन नही थी.. ओर लखनको इस माहोलमे अ‍ैसा करने उचीत भी नही लगा.. तो लखनने हसते हुअ‍े बंसीको उनकी सादीके बारेमे पुछा तो बंसी सरमा गया ओर मुस्कुराने लगा.. ओर सुबह वापस सहेर जानेकी बात करने लगा..

श्रीधर : यार रुकजाना यहा.. वैसे तेरी सादी भी हे.. ओर सबलोग यहा भी हे.. तो वहा अकेला क्या करेगा..?

लखन : (मुस्कुराते) यार वहा तेरी होस्टेल वाली भाभी हेनां.. खाने पीनेकी कोइ तकलीफ नही हे.. ओर वैसे भी वहा मेरी सांसकी तबीयत भी ठीक नही हे.. ओर धंधा भी तो वही हे.. ओर हमारा गांव हे ही कीतना दुर.. अब तो नइ गाडी भी हे.. सादीके अगले दिन आजाउगा.. अब देखते हे भाभीमां कब हमारी सादी करवाती हे..

साहील : भाइ रामुकाका का बहुत बुरा हुआ.. वरना आपकी सादी होजाती..

लखन : खैर छोड सब.. होजायेगी.. तु बता.. सबानाका क्या हुआ..? उनका रीजल्ट आयाकी नही..?

साहील : (मुस्कुराते) भाइ.. आज ही उनसे बात हुइ.. सायद कल या परसो आजायेगा.. उन्होने तो जानेकी पुरी तैयारीया करली हे..

मुना : (जोरोसे हसते) चलो सही हो रहा हे.. अगर साहील भी सबानासे सादी करलेगा तो इनकी भी दो बीवीया होजायेगी..

साहील : (मुस्कुराते) कमीने पहेले उसे डोक्टरतो बनने दे.. क्या पता डोक्टर होनेके बाद उनका मन बदल जाये..

लखन : (मुस्कुराते) यार तु टेन्शन मत ले.. सबाना अ‍ैसी लडकी नही हे.. वो बहुत अच्छी लडकी हे.. सुन.. मेने भाइसे बात करली हे.. वो सब सम्हाल लेगे..

फीर सभी दोस्तो बाते घरके अपने अपने घर चले गये.. लखन हवेलीपे आया तो पुरी हवेलीमे अंधेरा ओर सनाटा छाया हुआ था.. जाहीरसी बात हे आज रामुकाकाकी वजहसे सबलोग थकके सो गये थे.. दया चंदा लता ओर मंजु देवायतके रुममे थी..

भावना नीचे पुनमके रुममे थी.. जो अपनी बच्चीको दुध पीलाते लखनके साथ बीताये पलको याद कर रही थी.. लखन सीधा उपर अपने रुममे चला गया.. तो वहा रजीया सृती ओर पुनम बेडपे लैटे बाते कर रही थी.. तो लखन भी वही जाकर बैठ गया.. तभी..
 
पुनम : (मुस्कुराते) सोरी भैया.. आज ही तुम दोनोकी सादी हुइ हे ओर आज ही रामुकाका चले गये.. तो तुम दोनोकी सुहागरात नही हो सकी..

सृती : (सरमकर मुस्कुराते) दीदी कोइ बात नही.. वैसे भी हमने सुहागरात तो मनाली हे.. ओर साथमे सोने भी लगे हे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. वैसे भी मम्मीने मुजे भी हमारी सादी तक आपसे दुर रहेनेको कहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) यार वैसे भी तुम सब इनकी टेन्शन मत लो.. मुजे पता हे सब..

रजीया : (कातील नजरोसे देखते) वैसे भी आज यहा मे ओर सृतीदी तो आपके साथ सो ही रही हे.. पुनोदी अभी नीचे भावनादीके पास चली जायेगी.. येतो आप नही आयेतो हम गप्पे लगा रही थी..

लखन : (पुनमके सामने देखते) दीदी.. अब वैसे भी यहा कुछ खास काम नही हे.. तो सोचा रहा हु कल मे नीकल जाता हु.. जब सादीका कंन्फोर्म होजाये तो फोन कर देना मे अ‍ेक दिन पहेले आजाउगा..

पुनम : (सामने देखते) भाइ.. तो फीर आपके खाने पीनेका..? क्युकी अब रजुदी ओर सृतीदी हमारी सादी तक यहा रुकेगी.. क्युकी इनको मम्मीने बोला हे..

लखन : (मुस्कुराते) अरे मेरे खाने पीनेकी चीन्ता मत करो.. वहा मेरी बीवी हेना.. मे राधुके घर खा लुगा..

पुनम : (थोडी मायुसीसे खडी होते) ठीक हे भाइ.. सुबह मम्मीको पुछ लेना.. अगर वो आपको जानेकी परमीशन देती हेतो चले जाना.. चलो मे सोने जा रही हु.. मजे करो तीनो..





लखन जटसे खडा होकर पुनमका हाथ पकडलेता हे.. ओर उसे हग कर लेता हे.. देखा तो पुनम लखनके जानेकी बात सुनकर थोडे नाराज जैसी दीख रही थी.. तो लखन समज गया.. ओर पुनमका चहेरा अपनी हथेलीओमे थामते उनकी आंखोमे देखते..

लखन : (मनाते धीरेसे) दीदी.. प्लीज.. आप कहोतो नही जाता.. अ‍ैसे नाराज मत हो.. आप मायुस होजाती हो तो अच्छा नही लगता..

पुनम : (सीनेमे सर रखते) भाइ.. क्या करु..? अब आपसे दुर रहेनेका जी नही करता..

लखन : दीदी.. आपको तो सब पता हे.. वहा राधुकी मम्मीकी तबीयत भी खराब हे.. अगर उनको कुछ होगया तो उनके पास भी कोइ नही हे..

पुनम : (जटसे अलग होते) हां भाइ.. सोरी.. मेतो भुल ही गइ थी.. आप चले जाना.. लेकीन फीकर मत करना.. हमारी सादी तक उनके पास वक्त हे.. हम सब अ‍ेक बार फीर उनको मीलेगे..

फीर पुनम सबको गुड नाइट कहेकर नीचे चली गइ.. तो भावना कल रातकी चुदाइकी वजहसे थकके सो गइ थी.. ओर पुनम भी उनकी बगलमे लेटकर सो गइ.. उपर लखनने भी आज रजीयाको दो बार चोद लीया.. जब रजीया सोगइ तो लखन देर रात तक सृतीको चोदता रहा..





सृतीको लखनके लंडको अपनी चुतपे लेनेमे काफी तकलीफ हो रही थी.. क्युकी लखन सृतीकी चुतमे जड तक घुसाता.. तो लंड उनकी बच्चेदानीसे टकराता.. ओर सृतीको दर्द होता था.. फीर भी अपने दर्दकी परवा कीये बगैर मजेसे लखनसे चुदवाती रही..





सृती अबतक की अपनी सारी कशर लखनसे चुदवाते पुरी कर रही थी.. फीर तीनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये.. नीचेकी ओर आज दया साथमे थी तो सब लोग अ‍ैसेही सोगये थे.. लेकीन चंदाकी आंखोसे नींद कोसो दुर थी.. क्युकी आज कल देवायत भी उनसे दुर था.

सुबह सब लोग जल्दी जाग गये ओर कंपलीट होगये.. सबलोग चाइ नास्ता करते डीसकस करने लगे.. ओर तैय हुआकी रामुकाकाकी वीधी पांच दीनमे नीपटा लेगे.. ओर अ‍ेक हप्तेके बाद लखन ओर पुनमकी सादी कर देगे.. तबतक सृती रजीया यही रहेगी..

ओर लखनको जानेकी परमीशन मील गइ.. तो पुनम लखनसे अकेलेमे बात करना चाहती थी.. तो उसने लखनको आंखोके इसारोसे रुममे आनेको कहा.. सबलोग चाइ नास्ता करते होलमे चले गये.. दया रजीया चंपाभाभी सब काम नीपटाने लगे.. क्युकी रामुकाका का सोक मनाने अभी गांवकी ओरते आने लगेगी..

इसी बीच सृती ओर पुनम लखनको लेकर अपने रुममे चली गइ.. ओर पुनमने दरवाजा बंध करलीया.. बंध करते ही पुनम जोरोसे लखनकी बाहोमे समा गइ तो दुसरी ओर सृतीभी लखनकी बाहोमे आगइ.. लखनने बारी बारी दोनोके होठ चुमलीये.. तभी..

पुनम : (सर उठाके सामने देखते) भाइ.. धिरेनसे बदला लेनेका अच्छा मौका हे आपके पास..

लखन : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) दीदी.. कैसे..?

पुनम : (मुस्कुराते कानमे धीरेसे) भाइ.. वहा जाकर राधुदीदीको फोन मत करना.. उसे मत बताना की मे सहेरमे हु.. आपके शीकारको लेकर सीधे हमारे घरपे चले जाना.. आप समज गयेनां.. मे चाहती हु धिरेनको आपका जुठन मीले.. मनालो अपना छोटासा हनीमुन.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते देखते) मेरा जुठन..? आपका मतलब खानेसे हे..?

सृती : (मुस्कुराते सरपे टपली मारते) बुध्धु के बुध्धु ही रहोगे.. अरे वो नीलुकी बात कर रही हे..

पुनम : (नैन नचाते) समज गयेनां..? चार पांच दिन दोनो अकेले ही घरपे रहोगे.. अ‍ैसी हालत करदो.. की धिरेनको नीलुके साथ सेक्समे कुछ फील ही ना हो.. अभी बीस दिनके बाद दोनोकी कोर्ट मेरीज हे.. आप समज गयेनां..?

सृती : (धीरेसे फुसफुसाते) यार पुनोदी मुजे ये सब ठीक नही लग रहा.. लखनको कीसीके साथ बांटते अच्छा नही लगता..

पुनम : (सामने देखते) अरे दीदी कुछ नही होगा.. समजोनां ये सब जरुरी हे.. हमारे आगेके प्लानका हीस्सा..
 
सृती : (सरमाते) ठीक हे दीदी.. अगर आप कहेती होतो मान लेती हु.. करनेदो मजे दोनोको..

लखन : (सामने देखते) यार तुम दोनो हेनां.. मरवाओगी मुजे.. ये बात आपके अलावा कीसीको पता नही.. तो बी केर फुल.. वैसे भी वो दोनो मां बेटी सुधर गइ हे.. क्या अ‍ैसा करना जरुरी हे..?

पुनम : (कान खीचते) ज्यादा भोले मत बनो.. आप उसे गांव छोडने गये थे तब मेने आप दोनोकी बाते सुनली हे.. कमीनीको खुदको ही आग लगी हुइ हे तो आपको क्या प्रोबलेम..?

सृती : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) क्या..? नीलने खुद इसे कहा हे..?

पुनम : (लखनकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) हां.. मीटादो उनकी खुजली.. वैसे भी वो आपके साथ ही रीलेशन रखना चाहती हे तो क्यु साधु बनते हो..? भवीस्यमे आपको ओर हमारे विजयको ही तो सम्हालना हे उसे.. ओर ये बात हम दोनो तक सीमीत रहेगी.. आप टेन्शन मतलो..

सृती : (जोरोसे हसते) लखन भैया.. आप बहुत लकी हो.. कोन बीवीया होगी जो सामनेसे दुसरी लडकीको ठोकनेको कहेती हे.. जाओ मौज करो.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) यार.. तुम दोनो.. होना.. बहोत डेन्जर हो..

पुनम : (कातीलाना मुस्कुराते) फीकर मत करो.. उनके घरमे अ‍ेक ओर लाइनमे खडी हे.. वो भी अपनी खुजली आपसे मीटवाना चाहती हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) ओर कौन हे..? मां बेटी दोनोतो आगइ..

पुनम : (धीरेसे कानमे) सरला चाची.. अगर कमीनी खुद चाहे तो मार देना हथोडा.. वो भी आपका लेनेका मन बना चुकी हे..

लखन : (जुठा गु्सा करते) यार तुम दोनो पागल तो नही होगइ..? उनकी उमरका तो लीहाज करो..

पुनम : (दांत पीसते पेटमे मुका मारते) ओये उमरके बच्चे.. वो सामनेसे कहेगी तो क्या आप उनकी पुजा करोगे..? चुपचाप हम कहे अ‍ैसा करते जाओ समजे.. अपना दिमाग मत लगाओ.. उनके बारेमे आपको सबकुछ बता तो दीया हे.. ओर घरपे जाकर मुजे फोन करना.. मे आपको कुछ बाते बता दुगी.. आप समज जाओगे..

लखन : (दोनोकी गरदन दबोचते) ठीक हे.. जी तो चाहता हे तुम दोनोको यही पटक पटकके ठो..

सृती : (कातील मुस्कानसे) तो ठोकलोना.. वैसे भी हम दोनो आपकी बीवीया हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (पेटमे मुका मारते धीरेसे) भाइ.. आप हेनां.. ठोकनेकी तो बात ही मत करो.. मे घरपे नही थी तो अच्छा मौका उठाया हे आपने.. ओर उस कमीनीकी भी खबर लेनी हे.. कैसे उछल उछलके ले रही थी..

सृती : (धीरेसे हसते) दीदी आप कीसकी बात कर रहे हे..? इसने क्या फायदा उठाया..? मुजे भी तो पता चले.. की जनाब कीसकी बजाकर आये हे..

पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) भावना दीदीकी.. आपसे प्यार करनेके बाद भावना दीदीके कमरेमे चले गये थे.. सुबह तक खुब बाजाइ हे उनकी.. बेचारीकी हालत बीगाडदी..

सृती : (मुहपे हाथ रखते) क्या..? भावना दीदी..? अरे हां.. तभी मे सोचु वो अ‍ैसे लंगडाते क्यु चल रही हे.. मेने पुछा भी.. तो कहेती थी बाथरुममे पैर फीसल गया.. ये नही की हमारे पतीपे उनकी नीयत फीसल गइ थी.. मीलनेदो कमीनीको..

पुनम : (हसते) दीदी छोडीयेना उनको.. वैसे आज नही तो कल.. इनके नीचे आने ही वाली थी..

लखन : (दोनोके होठ चुमते) यार.. तुम दोनोकी दोनो ही कीतनी समजदार कमीनी हो.. चलो मे चलता हु.. नीलुको भी साथ लेजाना हे..

सृती : (पीठमे मुका मारते) आगयेना लाइनपे.. अच्छे बच्चे बन जाओ.. ओर कहोतो मे साथ चलु..?

लखन : (खुस होते हसते) हां हां.. चलो..

पुनम : (सामने देखते) क्या चलो..? ओये.. क्या साथ चलु.. कोइ जरुरत नही हे.. खामखा वहा कबाबमे हडी बनोगी.. दोनोको मजे करनेदो.. जाओ भाइ.. ओर हां.. सादीके दो तीन दिन पहेले आजाना.. समजे..? ओर हां.. जानेसे पहेले अ‍ेक पप्पी नही दोगे..?

मंजुला : (जोरोसे आवाज लगाते) पुनो बेटा.. लखन वहा हे क्या..? उसे जाना नही..?

पुनम : (जोरोसे हसते) लोजी.. हो गया कबाडा.. आगइ मेरी सास.. ये मम्मी भीनां.. बीलकुल सास वाला काम करती हे.. उसे सब पता चल गया.. जाओ भाइ.. आपकी मां बुला रही हे..

सृती : (जोरोसे) मोम.. वो आ रहे हे.. बस.. जरुरी बात कर रहे थे..

लखन : (जोरोसे पुनमके होठ चुमते) बु..च.. अब बीलकुल उनकी बहु लग रही हो.. चलो मे चलता हु..

सृती : ओये.. मेरी पप्पी..?

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अरे आजा मेरी बहेना.. तुम भी स्पेसीयल हे..

कहेते लखनने सृतीके बुब्सको मसलते जोरोसे होठोको चुस लीया.. तो सृतीकी आंख बडी होगइ.. ओर उनकी सास उखडने लगी.. तो लखनको धका मारते उनसे अलग होगइ ओर सृती लखनके सीनेमे मुका मारने लगी.. ओर लखन हसता हुआ वहासे चला गया..

तो पुनम ओर सृती दोनो ही उनको कामुक स्माइल करते देखती रही.. बहार नीकलते ही लखनने नीलमको फोन करदीया ओर उसे तैयार रहेनेको बोला तो नीलम भी खुस होगइ.. ओर लखन सबके पैर छुते मंजुके पास चला गया ओर उनके पैर छुने लगा.. तभी..
 
मंजुला : (हसते धीरेसे) क्या केह रहीथी मेरी दोनो कमीनी बहुअ‍े..? मेरी तारीफ कर रही थी क्या..?

लखन : (जोरोसे हसते धीरेस) मोम.. आपको तो सब पता हे.. आपको नही लगता आपने पुनोदीको कुछ ज्यादा ही सरपे चडा रखा हे.. पता हेना वो आपको क्या केह रही थी..

मंजुला : (कान खीचते) चुप कर बदमास.. हां पता हे सब.. खबरदार जो मेरी बहुको कुछ कहा तो.. वो जो कहेती हे ठीक हीतो कहेती हे.. वो बोले अ‍ैसा करते जा.. समजे..? साधु बननेकी जरुरत नही हे.. बडा आया मेरी बहुकी सीकायत करने वाला.. चल जा..

लखन : (हसते धीरेसे) मोम.. क्या ये आप केह रही हे..? हें..हें..हें..

मंजुला : (सरारतसे हसते) ओर नही तो क्या..? तु अभी जवान मुंडा हे.. अभी अयासीया नही करेगा तो कब करेगा..? देखना मेरा विजय तो तुमसे भी बडा कमीना होगा.. चल जा बहुत बाते होगइ.. ओर सुन.. सादीके दो तीन दिन पहेले आजाना.. ओर सम्हालके जाना.. नइ कार हे तो फास्ट मत चलाना..

लखन : (हग करते गाल चुमते) जी मोम.. धीरे चलाउगा.. मे कोइ बच्चा नही हु..

मंजुला : (अलग होते) अच्छा अच्छा ठीक हे.. सुन.. तेरी चंदा भाभीको मीलकर जाना.. उसे अच्छा लगेगा..

लखन : (मुस्कुराते) जी मोम.. मोम.., अब कैसी हे उनकी तबीयत.. सारा दिन गुमसुम ही बैठी रहेती हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. तुम फीकर मत करो.. बहुत जल्द तुमसे ही ठीक होजायेगी.. जा अच्छेसे मीलले.. अब आगे उनको तुजे ही सम्हालना हे..

कहा तो लखन चंदाके पास चला गया.. चंदा गुमसुम बैठी थी.. लखनको देखते ही खुस होते बेडसे खडी होगइ.. ओर लखनको गले लगा लीया.. तभी अ‍ेक बार फीर चंदाको अपने नीचे लखनके पेन्टकी उभार चुभने लगी.. तो चंदाकी कामाग्नी भडकने लगी..

उनको लखनसे दुर होनेका मन नही कर रहा था.. ओर उनकी चुत गीली होने लगी.. जीनका अहेसास होते ही वो जटसे लखनसे दुर होगइ.. ओर पेन्टके उभारको टेडी नजरसे देखने लगी.. तभी उसे अहेसास हुआकी लखन उनके पास कीतना बडा हथीयार हे तो..

चंदा : (मुस्कुराते) अ..अ.. आओ दामादजी.. बैठीये इधर..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. क्या केह रही हो..? मे आपका देवर हु..

चंदा : (हाथ पकडकर पास बीठाते) नही.. आप ओरोके लीये देवर होगे.. अब पुनोदीदी मेरी बेटी हे.. तो आप मेरे दामाद हुअ‍ेनां..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. क्या धिरेनका फोन आता हे..? आपसे बात करता हे..?

चंदा : (थोठा गुस्सेमे) नही.. नाम ना लो उस कुतेका.. मे उनकी सकल देखना नही चाहती.. मेरा उनसे कोइ लेना देना नही हे.. मेरा कोइ बेटा नही हे.. मेरी सीर्फ अ‍ेक बेटी हे.. वोभी पुनोदी.. ओर आप मेरे दामाद.. समजे..?

लखन : (बैठे ही हग करते) भाभी.. वो बेटा हे आपका.. माफ करदो उसे.. नादानीमे गलती होगइ..

चंदा : (सामने देखते) आप लोग कीतने अच्छे हे.. इतना सबकुछ होजानेके बाद भी उसे माफ करनेको केह रहे हे..? इनसे तो अच्छा हे आप मेरी कोखसे जन्मे होते.. आप मेरे दामाद भी हे ओर मेरा बेटा भी..

लखन : (हग करते सर चुमते) आइ नो भाभी.. दामाद भी बेटा ही होता हे.. चलीये मे चलता हु..

चंदा : (हाथ पकडते) जा रहे हे आप..? मेरी बेटीके साथ सादी हे आपकी..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. रामुकाका का ये होगया.. तो सादी अ‍ेक हप्तेके बाद हे.. मे दो तीन दिन पहेले आजाउगा.. आप फीकर मत करो..

चंदा : (सामने देखते) लखन.. मे मेरे घर जाना चाहती हु.. आप मेरी बेटीको लेकर वहा आते जाते रहेना..

लखन : (आस्चर्यसे देखते धीरेसे) अरे..? भाभी.. क्या बोल रही हे आप..? क्या ये आपका घर नही हे..? अब यही आपका घर हे..

चंदा : (मुस्कुराते गाल सहेलाते) नही.. अब ये मेरी बेटीका ससुराल होजायेगा.. ओर मां बटीओके घरपे नही रहेती..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. कैसी बाते कर रही हे आप..? मे भी तो आपका बेटा हु.. आप मेरे घरपे चली आना.. ओर वैसे भी पुनो अब वही रहेने वाली हे.. तो आपके दामादका घर तो वो हुआ.. आप यहा आरामसे रहीये..

चंदा : (मुसकुराते) अच्छा ये सब छोडो हम बादमे डीसाइड करलेगे.. ये कहो आपने कुछ खाया पीयाकी नही..? सबकी सब काम चोर हे.. मेरे दामादका खयाल भी नही रखती.. चलीये मे आपको कुछ खीलाती हु.. सादी तक अपनी तबीयत अच्छी करलो..

लखन : (समज गया तो) भाभी.. सब मेरा खयाल रखते हे.. अभी अभी सबने मुजे चाइ नास्ता करवाया..

चंदा : (मुस्कुराते) अच्छा..? मुजे तो कुछ पता ही नही.. मेरी बेटीको खुस रखना.. ओर कुछ नही..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. चलो ठीक हे मे चलता हु.. सहेरसे आपके लीये कुछ लाउ..?

चंदा : (नामे गरदन हीलाते) नही.. आपके लाये हुअ‍े कपडे पडे हे मेरे पास.. बहुत अच्छे हे..

लखन : (खडा होते हग करते) अच्छा.. चलो मे चलता हु.. कुछ काम होतो बताना..

कहेते लखन वहासे बहार नीकल गया.. ओर सबके पैर छुकर जाने लगा.. तो पुनम ओर सृती उनको बहार तक छोडने आगइ.. साथमे लता भी थी.. ओर अभी भी अ‍ेक आसमे लखनकी ओर देख रही थी.. लेकीन बात करना तो दुर लखनने उनके सामने तक नही देखा तो लताकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. ओर लखन वहासे भानुके गांवकी ओर नीलमको लेने नीकल गया....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
Back
Top