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- Dec 5, 2013
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लखन : (आस्चर्यसे देखते) हमारे बडे भैयाको..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. भानु भाइ ओर भैया अच्छे दोस्त थे तो भैया अक्सर उनके घरपे जाते थे.. ओर भानु भाइसे छुपकर दोनो वासनाका खेल खेलते..
लखन : (हसते) ओ..ह.. गोड.. हमारे बडे भैया भी हमारे बापुके उपर गये हे..
पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां.. ओर आपको भी उसीकी राहपे चलना हे.. फीर हमारा वीजय..
इसके अलावा भी पुनमने लखनको बहुत कुछ बताया.. तभी अेक दुकान आगइ तो पुनम ओर लखन दुकानमे चले गये.. वहा पुनमने सृतीको सरप्राइज देनेके लीये कुछ सामान लेलीया ओर लखनको पुरा प्लान समजा दीया.. फीर सामानको कारमे ही रखते दोनो घरमे आगये..
आते ही पुनम सबको गले मीली.. तो लखनने सृतीको गोदमे उठा लीया.. ओर उपर अपने रुममे ले गया.. वहा पुनमके साथ सब उपर आगइ.. पुनमने अलमारीसे अेक लाल सारीके साथ अेक कपडेकी जोडी नीकालके सृतीको पहेननेके लीये देदी..
ओर बाकीको सब सामान नीचे लेजानेको कहा.. फीर सृती कंपलीट होगइ तो मना करनेके बावजुद लखन उसे गोदमे नीचे लाया.. सभीने खरीदी कीया हुआ सब सामान ओर कुछ कपडे भी साथमे लेलीये.. ओर घरको ताला लगाकर सबलोग गांवकी ओर नीकल गये..
सृतीको अभी भी समजमे नही आ रहा था की पुनमने उसे दुल्हन जैसे कपडे पहेननेके लीये क्यु कहा.. वो चुप चाप कारमे बैठी रही.. बीच रास्ते जंगल आया तब कबीलेकी ओर जानेके रास्तेमे लखनने कार मोडली.. तो सृतीको आस्चर्य हुआ..
लेकीन बाकीके सबलोग मुस्कुराते रहे.. सृतीने अेक बार सबको पुछा.. की हम इधर कहा जा रहे हे..? लेकीन कीसीने कुछ नही बोला ओर हसते रहे.. लखनने कबीलेकी ओर ना जाते कारको बीच जंगलमे लेली.. तो सृतीकी दिलकी धडकन भी बढने लगी.. ओर आखीर उनसे रहा नही गया..
सृती : (थोडा जोरोसे) लखन.. अब तो बता दीजीये हम कहा जा रहे हे..?
पुनम : (जोरोसे हसते) अरे दीदी सांत रहीये.. आपही के लीये जा रहे हे.. आपके लीये अेब बडीया सरप्राइज हे.. आप देखती जाइअे.. हें..हें..हें..
सृती : (अपना सर पकडते) ओह गोड.. आप ओर हमारे भाइकी सरप्राइज.. कभी खतम ही नही होती..
आखीर सबलोग मंदिरपे आगये.. बीच जंगल डरावना लग रहा था.. सबलोग कारसे उतर गये.. ओर चारो ओर देखने लगे.. फीर मंदिरके परीसरमे चले गये.. वहा अंदर महादेवका मंदिर देखा.. अंदर जाकर सब लोगने थोडी साफ सफाइ करली..
फीर सबलोगोने दर्शन कीये.. तभी पुनमने लखन ओर सृतीको आगे आनेके लीये कहा.. तो सृती सरमाते हुअे लखनके साथ आगेकी ओर आगइ.. तो पुनमने साथमे लीया हुआ सामान उठाया.. ओर अंदरसे दो फुल हार नीकालके लखन ओर सृतीको अेक अेक पकडा दीया..
सृती : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) इनका क्या करना हे..? सीवलींगपे चडाना हे..?
पुनम : (अपना सर पीटते हसते) अरे बुध्धु.. यही तो हे सरप्राइज.. आप ओर लखन भैया अेक दुसरेके सामने खडे होजाइअे.. आज आप दोनोका इधर गांधर्व विवाह हे.. मीन्स.. दोनोकी सादी.. चलीये दोनो अेक दुसरेको हार पहेनाइअे..

कहातो सृती सोक्ट होते पुनमकी ओर देखने लगी.. उनकी आंखसे खुसीके मारे आंसु नीकल गये.. वो समज गइ की घरसे आते वक्त इसीलीये पुनमने उनको सादी जैसे कपडे पहेनाये थे.. सृतीने सरमाके लखनको हार पहेना दीया तो लखनने भी सृतीके गलेमे वरमाला पहेनादी..
फीर पुनमने लखनको अेक मंगलसुत्र नीकालके लखनके हाथोमे थमा दीया.. जीसे लखनने सृतीके गलेमे पहेना दीया.. आखीर लखनने सृतीकी मांग भरदी.. तो सृती पुनमसे लीपटकर जोरोसे रोने लगी.. सबने हसते हुअे सृतीको सांत कीया..
फीर पुनमने दोनोको सादीकी कसमे खीलाइ.. तब सृतीसे रहा नही गया.. ओर वो नीचे जुकते लखनके पांवको छुने लगी.. ओर लखनने उसे खडी करते अपनी बाहोमे भर लीया.. सृतीके अेक बार फीर आंसु नीकल गये.. आखीर सृतीकी सादी लखनसे होगइ..
दया : (गुलाबके फुलोकी बेग दीखाते) पुनोदी.. मेरे देवर ओर देवरानीकी सादी तो होगइ.. अब इतने सारे फुलोका हम क्या करेगे..? यही रखदु..?
रजीया : (पीठमे अेक मुका जडते थोडा डांटते) बुध्धु की बुध्धु ही रहेगी.. अभी अभी कुछ दिन पहेलेही तेरी सादी हुइ हे.. फीरभी नही पता..? आज इन दोनोकी सादी हुइ हे.. तो सुहागरात नही मनेगी..? ये फुल इसीके लीये हे समजी..? लेचल साथ..
कहा तो दयाने अपना सर पीट लीया तो सब जोरोसे हसने लगे.. फीर सब लोग दर्शन करके वहासे नीकल गये.. पुनम खुद सबके साथ बैठ गइ.. ओर सृतीको लखनके साथ बीठा दीया.. सबलोग मस्ती मजाक करते गांव पहोंच गये..
तो कारकी आवाज सुनते ही लता ओर मंजु बहार आगये.. सबको देखते ही दोनो दोड पडी ओर बारी बारी सबको गले मीलने लगी.. सृतीको सादीके जोडेमे मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र देखते मंजु खुस होगइ.. तो लता भी समज गइकी सृतीने लखनसे सादी करली हे..
मंजुला : (जोरोसे सृतीको गले लगाते) आगइ मेरी बहु.. सादी करली मेरे बेटेसे..? कैसा लगा हमारा सरप्राइज..? हें..हें..हें..
सृती : (आंख गील करते धीरेसे) मोम.. आप लोगोकी सरप्राइज कभी खतम ही नही होगी.. ये आप ओर पुनोदीका प्लान थानां..?
मंजुला : (हथलीमे चहेरा पकडते) हां मेरी बच्ची.. यहासे दुखी होकर गइ थी.. तो तुजे खुस होते देखन चाहती थी.. कैसा लगा मेरा बेटा..? तुजे खुस तो रखता हेनां..?
सृती : (वापस गले लगते) मोम.. वो हम सबको बहुत.. बहुत.. बहुत खुस रखते हे.. थेन्क्स.. कास मे आपकी बाते समज पाती.. सब कीतना कुछ बदल गया..
मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. चल घरमे.. तेरी गृह प्रवेसकी वीधी भी करनी हे.. फीर अपनी मम्मीको भी मीलले.. यहा कीसीको पता नही हे.. की तुमने लखनसे सादी कीहे.. सबको सरप्राइज मील जायेगी.. तुजे मेरी लखनकी सुहागन देखते बहुत खुस होजायेगी..
तभी लखन भी आकर मंजुका पांव छुता हे.. तो मंजु उसे भी गले लगा लेती हे.. तबतक लता भी सबको गले मीली.. लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखा.. तो लताको बहुत बुरा लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. तभी मंजु लताको पानीका कलश लानेको बोलती हे.. तबतक सबलोग सामान लेकर अंदर आजाते हे.. मंजुने सृती ओर लखनको दरवाजेपे ही रोक लीया....
कन्टीन्यु
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. भानु भाइ ओर भैया अच्छे दोस्त थे तो भैया अक्सर उनके घरपे जाते थे.. ओर भानु भाइसे छुपकर दोनो वासनाका खेल खेलते..
लखन : (हसते) ओ..ह.. गोड.. हमारे बडे भैया भी हमारे बापुके उपर गये हे..
पुनम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां.. ओर आपको भी उसीकी राहपे चलना हे.. फीर हमारा वीजय..
इसके अलावा भी पुनमने लखनको बहुत कुछ बताया.. तभी अेक दुकान आगइ तो पुनम ओर लखन दुकानमे चले गये.. वहा पुनमने सृतीको सरप्राइज देनेके लीये कुछ सामान लेलीया ओर लखनको पुरा प्लान समजा दीया.. फीर सामानको कारमे ही रखते दोनो घरमे आगये..
आते ही पुनम सबको गले मीली.. तो लखनने सृतीको गोदमे उठा लीया.. ओर उपर अपने रुममे ले गया.. वहा पुनमके साथ सब उपर आगइ.. पुनमने अलमारीसे अेक लाल सारीके साथ अेक कपडेकी जोडी नीकालके सृतीको पहेननेके लीये देदी..
ओर बाकीको सब सामान नीचे लेजानेको कहा.. फीर सृती कंपलीट होगइ तो मना करनेके बावजुद लखन उसे गोदमे नीचे लाया.. सभीने खरीदी कीया हुआ सब सामान ओर कुछ कपडे भी साथमे लेलीये.. ओर घरको ताला लगाकर सबलोग गांवकी ओर नीकल गये..
सृतीको अभी भी समजमे नही आ रहा था की पुनमने उसे दुल्हन जैसे कपडे पहेननेके लीये क्यु कहा.. वो चुप चाप कारमे बैठी रही.. बीच रास्ते जंगल आया तब कबीलेकी ओर जानेके रास्तेमे लखनने कार मोडली.. तो सृतीको आस्चर्य हुआ..
लेकीन बाकीके सबलोग मुस्कुराते रहे.. सृतीने अेक बार सबको पुछा.. की हम इधर कहा जा रहे हे..? लेकीन कीसीने कुछ नही बोला ओर हसते रहे.. लखनने कबीलेकी ओर ना जाते कारको बीच जंगलमे लेली.. तो सृतीकी दिलकी धडकन भी बढने लगी.. ओर आखीर उनसे रहा नही गया..
सृती : (थोडा जोरोसे) लखन.. अब तो बता दीजीये हम कहा जा रहे हे..?
पुनम : (जोरोसे हसते) अरे दीदी सांत रहीये.. आपही के लीये जा रहे हे.. आपके लीये अेब बडीया सरप्राइज हे.. आप देखती जाइअे.. हें..हें..हें..
सृती : (अपना सर पकडते) ओह गोड.. आप ओर हमारे भाइकी सरप्राइज.. कभी खतम ही नही होती..
आखीर सबलोग मंदिरपे आगये.. बीच जंगल डरावना लग रहा था.. सबलोग कारसे उतर गये.. ओर चारो ओर देखने लगे.. फीर मंदिरके परीसरमे चले गये.. वहा अंदर महादेवका मंदिर देखा.. अंदर जाकर सब लोगने थोडी साफ सफाइ करली..
फीर सबलोगोने दर्शन कीये.. तभी पुनमने लखन ओर सृतीको आगे आनेके लीये कहा.. तो सृती सरमाते हुअे लखनके साथ आगेकी ओर आगइ.. तो पुनमने साथमे लीया हुआ सामान उठाया.. ओर अंदरसे दो फुल हार नीकालके लखन ओर सृतीको अेक अेक पकडा दीया..
सृती : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) इनका क्या करना हे..? सीवलींगपे चडाना हे..?
पुनम : (अपना सर पीटते हसते) अरे बुध्धु.. यही तो हे सरप्राइज.. आप ओर लखन भैया अेक दुसरेके सामने खडे होजाइअे.. आज आप दोनोका इधर गांधर्व विवाह हे.. मीन्स.. दोनोकी सादी.. चलीये दोनो अेक दुसरेको हार पहेनाइअे..

कहातो सृती सोक्ट होते पुनमकी ओर देखने लगी.. उनकी आंखसे खुसीके मारे आंसु नीकल गये.. वो समज गइ की घरसे आते वक्त इसीलीये पुनमने उनको सादी जैसे कपडे पहेनाये थे.. सृतीने सरमाके लखनको हार पहेना दीया तो लखनने भी सृतीके गलेमे वरमाला पहेनादी..
फीर पुनमने लखनको अेक मंगलसुत्र नीकालके लखनके हाथोमे थमा दीया.. जीसे लखनने सृतीके गलेमे पहेना दीया.. आखीर लखनने सृतीकी मांग भरदी.. तो सृती पुनमसे लीपटकर जोरोसे रोने लगी.. सबने हसते हुअे सृतीको सांत कीया..
फीर पुनमने दोनोको सादीकी कसमे खीलाइ.. तब सृतीसे रहा नही गया.. ओर वो नीचे जुकते लखनके पांवको छुने लगी.. ओर लखनने उसे खडी करते अपनी बाहोमे भर लीया.. सृतीके अेक बार फीर आंसु नीकल गये.. आखीर सृतीकी सादी लखनसे होगइ..
दया : (गुलाबके फुलोकी बेग दीखाते) पुनोदी.. मेरे देवर ओर देवरानीकी सादी तो होगइ.. अब इतने सारे फुलोका हम क्या करेगे..? यही रखदु..?
रजीया : (पीठमे अेक मुका जडते थोडा डांटते) बुध्धु की बुध्धु ही रहेगी.. अभी अभी कुछ दिन पहेलेही तेरी सादी हुइ हे.. फीरभी नही पता..? आज इन दोनोकी सादी हुइ हे.. तो सुहागरात नही मनेगी..? ये फुल इसीके लीये हे समजी..? लेचल साथ..
कहा तो दयाने अपना सर पीट लीया तो सब जोरोसे हसने लगे.. फीर सब लोग दर्शन करके वहासे नीकल गये.. पुनम खुद सबके साथ बैठ गइ.. ओर सृतीको लखनके साथ बीठा दीया.. सबलोग मस्ती मजाक करते गांव पहोंच गये..
तो कारकी आवाज सुनते ही लता ओर मंजु बहार आगये.. सबको देखते ही दोनो दोड पडी ओर बारी बारी सबको गले मीलने लगी.. सृतीको सादीके जोडेमे मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र देखते मंजु खुस होगइ.. तो लता भी समज गइकी सृतीने लखनसे सादी करली हे..
मंजुला : (जोरोसे सृतीको गले लगाते) आगइ मेरी बहु.. सादी करली मेरे बेटेसे..? कैसा लगा हमारा सरप्राइज..? हें..हें..हें..
सृती : (आंख गील करते धीरेसे) मोम.. आप लोगोकी सरप्राइज कभी खतम ही नही होगी.. ये आप ओर पुनोदीका प्लान थानां..?
मंजुला : (हथलीमे चहेरा पकडते) हां मेरी बच्ची.. यहासे दुखी होकर गइ थी.. तो तुजे खुस होते देखन चाहती थी.. कैसा लगा मेरा बेटा..? तुजे खुस तो रखता हेनां..?
सृती : (वापस गले लगते) मोम.. वो हम सबको बहुत.. बहुत.. बहुत खुस रखते हे.. थेन्क्स.. कास मे आपकी बाते समज पाती.. सब कीतना कुछ बदल गया..
मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. चल घरमे.. तेरी गृह प्रवेसकी वीधी भी करनी हे.. फीर अपनी मम्मीको भी मीलले.. यहा कीसीको पता नही हे.. की तुमने लखनसे सादी कीहे.. सबको सरप्राइज मील जायेगी.. तुजे मेरी लखनकी सुहागन देखते बहुत खुस होजायेगी..
तभी लखन भी आकर मंजुका पांव छुता हे.. तो मंजु उसे भी गले लगा लेती हे.. तबतक लता भी सबको गले मीली.. लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखा.. तो लताको बहुत बुरा लगा.. ओर उनकी आंख गीली होगइ.. तभी मंजु लताको पानीका कलश लानेको बोलती हे.. तबतक सबलोग सामान लेकर अंदर आजाते हे.. मंजुने सृती ओर लखनको दरवाजेपे ही रोक लीया....
कन्टीन्यु



