Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 96 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६५

कहेते लखन वहासे बहार नीकल गया.. ओर सबके पैर छुकर जाने लगा.. तो पुनम ओर सृती उनको बहार तक छोडने आगइ.. साथमे लता भी थी ओर अभी भी अ‍ेक आसमे लखनकी ओर देख रही थी.. लेकीन बात करना तो दुर लखनने उनके सामने तक नही देखा तो लताकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. ओर लखन वहासे भानुके गांवकी ओर नीलमको लेने नीकल गया.... अब आगे

तो जाते वक्त सोचाकी चलो खेतपे चकर लगाके जाता हु.. ओर वो बीच रास्तेमे अपने खेतोपे चला गया.. तो वहा भानु आचुका था ओर रामुकाका की खटीयापे बैठा बीडी पी रहा था.. तो लखन उनके साथ जाकर बैठ गया.. तो भानु लखनको देखकर खुस होगया..

भानु : (मुस्कुराते) आओ आओ लखन.. कैसे हो..?

लखन : (मुस्कुराते) मे तो ठीक हु. लेकीन आप कुछ उदास लग रहे हे.. कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

भानु : (मुस्कुराते) क्या करु यार..? देखोना अब इस उमरमे आपकी भाभी पेटसे होगइ हे.. ओर मांको भी ये बच्चा चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) हां तो क्या प्रोबलेम हे..? होने दोनां.. वैसे भी भाभीकी इतनी बडी उमर कहा हे..? मेरी सादी तक सृती इधर ही हे.. उनको दीखा देना.. ये बताओ आपने डोक्टरको दीखाया..?

भानु : (थोडी चीन्तासे) यार उसीकी तो टेन्शन हे.. नही दीखाया.. कैसे दीखाउ..? मेरी तो समजमे ही नही आरहा.. की अचानक क्या होगया..

लखन : (धीरेसे) लेकीन आपको हुआ क्या हे..? क्या तकलीफ हे आपको..? बताइअ‍े.. हम भाइके साथ दोस्त भी हे..

भानु : (सरमाकर धीरेसे) यार क्या बताउ..? अब मुजमे पहेले जैसा दम नही रहा.. ठीकसे खडा भी नही होता.. रीटाको भी कीतनी महेनत करनी पडती हे.. तब जाके खडा होता हे.. अगर खडा होजाये तो भी दो मीनीटमे खतम.. ओर अब तो तेरी भाभी भी मुजसे दुर रहेने लगी हे.. कमीनी जबसे बच्चा ठहेर गया हे तबसे हाथ ही नही लगाने देती..

लखन : (मुस्कुराते) यार आपके पास रीटा तो हेनां.. तो फीर क्या प्रोबलेम हे..?

भानु : भाइ मुजे लगता हे वो गोलीया खा खाकर मेने ही अपना नुकशान करलीया हे.. रीटा भी कमीनी उतनी चुदकड हो गइ हे की उनको भी मेरे बीना नही चलता.. मुजे खुद गोली खीलाकर पुरी रात मजे लेती हे.. ओर मे साला गोलीकी वजहसे सारी रात महेनत करते रहेता हु.. ओर आज ये हाल होगया..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. अ‍ेक काम करो.. मे दो तीन दीन तो बहुत बीजी हु.. फीर सादीके लीये इधर आजाउगा.. तो हम हमारी दोनो सादीके बाद कीसी डोक्टरको दीखाकर आजायेगे..

भानु : (मुस्कुराते) हां.. यही ठीक रहेगा.. ओर सुनाओ.. क्या खबर हे..?

लखन : भाइ.. आपसे कुछ पुछना था.. मेने सुना हे कुछ अनजान लोग यहा खेतोपे आते हे..

भानु : हां यार मेने भी उनको पहेले कभी नही देखा.. देवु नही था तब दो तीन बार मेरे पास आये थे.. कुछ बडे सोदे करनेकी बाते कर रहे थे.. मेने हमारी फसल भी दीखाइ.. ओर इस बारेमे देवुसे भी बात हुइ.. उसने मुजे चोकने रहेनेको कहा हे..

लखन : भाइ.. कुछ तो गडबड हे.. अ‍ेक बार भाइ थे तब ही आये थे.. ओर भाइकी कार देखकर बहारसे ही चले गये.. ओर कहेते हे खेतोका मालीक हे.. हम बादमे आयेगे.. अगर भाइसे सोदा करना होता तो भाइको मीलके बगैर थोडी जायेगे..?

भानु : (चोंकते सामने देखते) क्या बात करे हे भाइ..? अगर भाइ थेतो कमीने उनको मीले क्यु नही..? मुजे तो कहेता था मालीकसे मीलवाओ.. जरुर कुछ गडबड हे.. ध्यान रखना पडेगा..

लखन : भानु भाइ.. पहेले काका थेतो कोइ चीन्ता नही थी.. अब तो वोभी चले गये.. तो ध्यान रखना पडेगा.. कही कोइ चोर लुटेरा तो नही.. भाइसे बात करनी पडेगी..

भानु : हां यार देवुको बताना पडेगा.. आनेदो सालेको यहा पेडपे बांधके सब उगलवाना पडेगा..

लखन : (खडा होते) भाइ.. चलो मे चलता हु आप देख लेना.. कुछ प्रोबलेम हेतो बताना.. मे नीलुको लेने जा रहा हु.. फीर वहीसे सीधा सहेर नीकल जाउगा.. उनकी स्कुल भी चालु होगइ हे..

भानु : भाइ.. सब लोग यहा हे तो नीलुको कहेना वो खाना बना देगी..
 
लखन : आप उनकी टेन्शन मतलो.. वो मेरी होस्टेल वाली मेडम हेनां.. खाना हम वही खालेगे.. ओर नीलुभी कुछ दिन उनके साथ रहेगी.. क्युकी मे नही चाहता हम दोनो अकेले रहे.. तो मे घरपे अकेला रहुगा.. ओर नीलु कुछ दिन राधुके पास रहेगी..

भानु : क्या भाइ..? क्यु हमे सर्मीन्दा कर रहे हो..? आप अकेला होतो क्या हुआ.. हमे इतना विस्वास तो हे आपपे.. नीलुको अपने साथ ही रखना.. सुबह का चाइ नास्ता बना देगी.. ओर कुछ छोटे मोटे काम भी कर देगी.. आप आरामसे जाओ.. मीलते हे सादीमे..

लखन : (जुठ बोलते) नही भाइ.. आपको विस्वास हे.. हम ओरोका तो मुह बंध नही कर सकते.. तो मे चाहता हु सबलोग वापस नही आजाते तबतक नीलु राधुके पास रहेगी.. ओर बात ही कीतने दिनोकी हे.. तीन चार दिन.. फीर उनको भीतो सादीमे आना हे..

भानु : जैसे आपको ठीक लगे..

लखन : (जाते) भाइ मे चलता हु.. यहा खयाल रखना..

कहेते लखन वहासे नीकल गया.. तो दुसरी ओर लखनका फोन आते ही नीलम भी बहुत अ‍ेक्साइटेड थी.. ओर अभी आयनेमे अपने आपको सजा रही थी.. उसने लखनने दीलवाइ नइ सेक्सी ड्रेस पहेनी थी.. तीन दिन लखनके साथ वो अकेली रहेने वाली थी..

ये सब सोचते वो बहुत ही रोमांचीत फील कर रही थी.. लखनके साथ मजे करनेके सपने देख रही थी.. इसके लीये नीलमने पुरी तैयारीया करली थी.. नीलमने अपनी चुतकी सफाइसे लेकर छुपकेसे हाथो ओर पैरके साथ अपनी चुतके आसपास भी महेंदी लगाली थी..





वो लखनको अ‍ेक दुल्हनका अहेसास करवाना चाहती थी.. ओर आज फाइनली लखनका फोन आगया.. ओर वो सुबह ही आयनेके सामने बैठकर अपने आपको सजा रहीथी.. लेकीन रमा ओर सरला इस बातसे अनजान थी की लखनकी सब बीवीया यहा हे.. तभी रमा उनके पास आगइ..

रमा : (मुस्कुराते) अरे वाह.. तेरे जीजु लेने आ रहे तो जानेकी बडी तैयारीया हो रही हे..? क्या बात हे महेंदी बहेंदी चहेरेपे मेकअप.. अ‍ैसे सज रही हे जैसे अपना पती लेने आ रहा हो.. उनके घर ही जा रही होनां..? हें..हें..हें..

नीलम : (दांत पीसते अ‍ेक बाजुमे मुका मारते) मोम.. आप भीनां.. अपनी हरकतोसे बाज नही आओगी.. तो क्या मे अ‍ैसे ही चली जाउ..?

रमा : (मुस्कुराते पास बैठते) अरे.. मेतो मजाक कर रही हु.. सुन.. हम सबको इनकी सादीमे जाना हे.. तो तु तेरे लखन जीजुके साथ ही चली आना.. अब हम वही मीलेगे..

नीलम : (रमाकी ओर घुमते धीरेसे) मोम.. वहा आपको मंजु मोमको मीलनेका मौका मीलेगा.. तो उनसे माफी मांग लेना.. मुजे यकीन हे वो आपको माफ कर देगी..

रमा : (थोडी उदास होते) हां नीलु.. मे भी यही सोच रही हु.. ठीक हे.. मे उनकी माफी मांग लुगी.. चल जल्दीसे तैयार होजा.. तेरा बोय फ्रेन्ड तुजे लेने आता ही होगा..

नीलम : (कातीलाना मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. मेरा तो बोय फ्रेन्ड हे.. लेकीन आपका कुछ नही लगता..? आपने तो उसे अपना पती तक बना लीया हे..

रमा : (मुहपे हाथ रखते) कमीनी धीरे बोल.. कही तेरी दादीने सुनलीया तो हंगामा होजायेगा..

नीलम : (मुस्कुराते तैयार होते) अरे वोतो बहार बैठी हे.. यहा कहा सुनने आयेगी.. मोम.. अ‍ैसे अफैर करके मजा आरहा हेनां..? जींदगी तो अ‍ैसी ही होनी चाहीये.. अ‍ेक आजाद पंछीकी तराह.. बीन्दास.. हें..हें..हें..

रमा : (सामने देखकर मुस्कुराते) हंम.. लगता हे तेरे इरादे कुछ नेक नही हे.. तुजे अ‍ैसी जींदगी जीनेका बडा सौक हेनां..? ज्यादा मत उडना.. वरना पंख कट जायेगा.. अपनी सेफ्टीका पुरा खयाल रखना.. अगर तेरे पास टेबलेट ना होतो यहीसे लेजा.. मेरे पास पडी हे..

नीलम : (मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. वो टेबलेट भी अ‍ेसे ही पडी हे जो आपने दीथी.. वोतो बस आपके पीछे पागल हे.. कभी मेरी ओर ध्यान दे तो टेबलेट युस करुगीनां.. उनको कीतना कहा.. लेकीन हम सीर्फ ओरल तक ही सीमीत रहे..

रमा : (कातीलाना मुस्कुराते) क्यु..? तु तो अभी जवान हे.. सेक्सी दीखती हे.. वो भी कच्ची कली.. थोडा अपना जलवा दीखाती रहे.. तो तुजे भी ओरत बननेका सुख मील जायेगा.. क्या मस्त हथीयार हे उनका.. जीतो चाहता हे मे तेरे पापाको छोडकर उनके पास ही चली जाउ..

नीलम : (सामने देखते) मोम.. आर यु मेड..? माना की आप दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. लेकीन आप पापाको छोडनेकी बात कर रही हे.. क्या वो आपको प्यार नही करते..?

रमा : (आंख गील करते नांमे गरदन हीलाते) नही नीलु.. अब हम दोनोका रीस्ता लगभग खतम होगया हे.. बस अब तो नामके पती पत्नी रेह गये हे.. ओर आज कलतो वो मुजे प्यार ही नही करते.. कैसे करेगे..? खडा होगा तभी तो प्यार करेगे..

नीलम : (चोंकते धीरेसे) मोम.. ये क्या केह रही हो आप..? क्या बीलकुल खडा नही होता..? उस रंडीके पीछे तो पडे रहेते हे.. अगर उनको कुछ प्रोबलेम हेतो आप उनका इलाज करवाओ.. कब तक अ‍ैसी जींदगी काटोगी..?

रमा : (मुस्कुराते धीरेसे) क्यु..? तेरा बोय फ्रेन्ड हेनां.. वो हम दोनोको खुस रख सकते हे..

नीलम : (खडी होकर हग करते) मोम.. कीतना अजीब हेनां..? की हम मां बेटीका अ‍ेक ही आदमीसे अफेर चल रहा हे.. लगता हे आपतो उनके प्यारमे बीलकुल पागल हो चुकी हो..

रमा : (गाल सहेलाते धीरेसे मुस्कुराते) हां.. पागल हो चुकी हु.. जब वो तुजे प्यार करेगेना तब पता चलेगा.. फीर देखना.. तु भी उनके पीछे कैसे पागल होजाती हे..
 
नीलम : (सामने आंखोमे देखते धीरेसे) मोम.. अब तो हमने अपना प्लान भी केंशल करदीया हे.. क्या आपको लगता हे मुजे अभी भी उनके साथ रीलेशनमे आना चाहीये..? मीन्स.. सादी..

रमा : (आंखोमे देखते धीरेसे) नही नीलु.. अब इन सब चीजोकी कोइ आवस्यक्ता नही हे.. लेकीन मेने तेरी आंखोमे देखा हे.. की तुम भी उनको प्यार करती हो.. फीर भी ये तेरे उपर डीपेन्ड हे.. मे नही चाहती अब मे तेरे उपर कोइ पाबंधी लगाउ..

नीलम : (मुस्कुराते) मोम.. मे अपने तरीकेसे जींदगी जीना चाहती हु.. अ‍ेक आजाद पंछीकी तराह..

रमा : (मुस्कुराते) ठीक हे नीलु.. तु अपने तरीकेसे जीना चाहती हेनां..? तो तुम अपने तरीकेसे जींदगी जीनेके लीये आजाद हो.. मुजे अपने तरीकेसे जीनेदे.. बस.. तेरी केरीयर बनने तक अपनी सेफ्टीका खयाल रखना..

नीलम : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) मोम.. ये आप क्या बोल रही हे..? मानलो अगर वो जीजु नही हेतो..?

रमा : (मुस्कुराते) मुजे पता हे तेरी जींदगीमे अभी तेरे जीजीुके अलावा ओर कोइ नही हे.. तुम भी उनको पसंद करती हो.. फीर भी तुम स्वतंत्र हो.. मुजे तुमपे विस्वास हेकी तुम अपना भला बुरा खुद सोच सकती हो.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. फीर चाहे तेरे जीजु हो या कोइ ओर.. वैसे भी अब तुम कोलेजमे आओगी.. हो सकता हे तेरे बहुत सारे फ्रेन्ड होगे.. ओर उनमेसे तुजे कोइ पसंद आजाये..

नीलम : (आस्चर्यसे मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. अ‍ैसा कुछ होने वाला नही हे.. मे रीलेशन रखुगी तो सीर्फ जीजुसे.. ट्रस्ट मी.. आप जीजुको मीलनेके बाद कीतना बदल गइ हे.. मेतो सोच भी नही सकती अ‍ेक गांवकी ओरत इतना बदल सकती हे.. आइ कान्ट बीलीव.. कीतनी खुली सोच हे आपकी..

रमा : (फीकी मुस्कुरानसे) नीलु.. हालात सबको बदल देता हे.. बचपनमे मेरे भी सपने थे.. जवानी उफानपे थी.. मेरा भी बहुत मन कर रहा थाकी कोइ मुजसे आकर प्यार करे.. लेकीन हालात कुछ ओर ही थे.. बापुके कर्जकी वजहसे मुजे सराबी ओर नामर्दके खुटेसे बांध दीया..

नीलम : (मुस्कुराते) मोम.. दील छोटा मत करो.. अब तो सब सही हो गयानां..?

रमा : (मुस्कुराते) हां होगया.. ये तो अच्छा हुआ तेरे पापा सही वक्तपे मेरी जींदगीमे आगये.. ओर हमारा अफैर इतने सालो तक चला.. ओर आज वो पती हे मेरा.. वरना मेरा क्या होता..? नीलु.. थेन्कस.. तुमने मुजे फीरसे जीना सीखा दीया..

नीलम : (हग करते) आइ नो मोम.. मे आपकी तकलीफ समज सकती हु.. लेकीन इसका मतलब येतो नही की मे कीसीके साथ.. मुजे अच्छे बुराका खयाल हे.. अच्छा हुआ लखन जीजु हमारी जींदगीमे आगये.. अभी तो हम दोनो इनसे ही खुस हे..

रमा : (सरको सहेलाते) नीलु.. पता हे जैसा मेने सपने सजायेथे.. मेरे सपनोका राज कुमार.. लखन अ‍ैसा ही हे.. मे अब जींदगी भरके लीये उनकी होकर रहेना चाहती हु..

नीलम : (अ‍ेक नजरसे देखते धीरेसे) मोम.. सायद मे भी.. वो मेरे भी सपनोके राजकुमार हे..

रमा : (अ‍ेक नजरसे सामने देखते) अ‍ेक काम करेगी मेरा..?

नीलम : (आंखोमे देखते धीरेसे) हंम.. हां कहीये..

रमा : (बस देखती ही रही) ......

नीलम : (देखते धीरेसे) मोम.. कहा खो गइ..? आप कुछ कहेने वाली थी..

रमा : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम..? हां.. सुन.. तुम दोनोको जब भी मौका मीले.. तुम दोनोका मीलन होजाये.. ओर तुम अ‍ेक लडकीसे ओरत बन जाओ.. तो तुम मुजे फोन करके बता देना..

नीलम : (थोडी जेपते सरमाते धीरेसे) मतलब..? व्हाय..? कुछ ओर प्लान तो नही..?

रमा : (मुस्कुराते धीरेसे) नही नीलु.. तुम भुल गइ हम मांबेटीके साथ अब भी अ‍ेक सहेलीया हे.. तो क्या अपनी खुसी अपनी सहेलीके साथ साजा नही करोगी..?

नीलम : (खुसीसे हग करते) अफकोर्स मोम.. मे फोन करुगी..

रमा : (गले भीचते) नीलु.. वो मेरे लीये सबसे बडी खुसीका दीन होगा.. मुजे तसली मीलेगी.. की मेरी बेटीका कौमार्य अ‍ेक सही आदमीसे भंग हुआ हे.. तु कहेती हेनां वो कामका अंस हे..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) हंम.. हां.. वोतो हे.. ठीक हे.. मे बता दुगी..

तभी बहार होर्नकी आवाज सुनाइ दी.. तो नीलम ओर रमा दोनो ही खुस होते बहारकी ओर दोड पडी.. तभी लखन अंदर आया ओर सरलाके पैर छुते उनके पास ही बैठ गया.. रमा लखनको देखकर सरमाते हसने लगी.. तो नीलम उनके गले लग गइ..

सरला ओर लखन नीलमको देखते ही रेह गये.. सरलाने नीलमका अ‍ैसा रुप कभी नही देखा था.. आज नीलम अ‍ेक परीकी तराह दीख रही थी.. नीलम लखनके पास उनसे सटकर बैठ गइ.. रमा लखनके लीये पानी लेने कीचनमे चली गइ.. ओर नीलमको भी आवाज देकर अंदर बुलालीया.. तब बहारकी ओर..
 
सरला : लखन बेटा.. रामु काकाके बारेमे सुना.. सुनकर बहुत दुख हुआ.. वो हमारी पीढीके आखरी मर्द थे.. अब कोइ नही बचा.. अब तो तुम दोनोकी सादीमे भी थोडी देर होगी..

लखन : (मुस्कुराते) हां काकी.. बस.. अ‍ेक हप्तेके बाद.. हम पांच दिनमे रामुकाका की क्रिया खतम करलेगे.. उनके दो तीन बाद हमारी सादी हे.. ओर साथमे भैयाकी भी.. सीर्फ हम घर वाले.. मेरे सभी दोस्त ओर आप लोग होगे.. आप सभीको आना हे..

सरला : बेटा हमे माफ करदेना.. इस लडकीने तो हमारी नाक कटवादी.. अगर वो(लता) देवुसे प्यार करती थी तो हमे पहेले बताना चाहीयेनां.. तेरे जैसा दामामको छोडकर अपने जेठसे सादी कर रही हे.. हमे तो वहा बहुत सरम आयेगी.. मे तो नही आउगी.. रमा नीलु ओर भानु आजायेगे..

लखन : (मुस्कुराते) काकी आपको आना ही पडेगा.. आपको मेरी कसम.. हमारे घरमे अ‍ैसा कुछ भी नही हे.. आपतो सब जानती हे.. लता अगर भाइसे प्यार करती हेतो उसमे क्या गलत हे.. मे भी तो पुनोदीसे प्यार करता था.. तो सब सही होगया..

सरला : (मुस्कुराते) बेटा कसम मत दे मे आजाउगी.. तुम दोनो भाइ जैसा दामाद सबको मीले.. कास मे लताकी गलती सुधार सकती.. मेरा बस चले तो मे नीलुका ब्याह तुमसे करवादु.. कमसे कम लडकी खुस तो रहेगी..

नीलम : (हसते पानी देते) क्या दादी.. सादी ओर इनसे..? इनकी सकल देखी हे..? बंदर जैसे दीखते हे.. कीतनी बीवीया होगइ हे इनकी.. ओर बंदरकी तराह अभी भी सादी कीये जा रहे हे.. मे ना करु इनसे सादी.. अगर आपको करनी हे तो करलो.. हें..हें..हें..

सरला : (जोरोसे हसते) चुप कर बदमास.. क्या हमारी बाते सुनली..? हें..हें..हें.. चल जा.. तेरी मांको कहे फटाफट चाइ नास्ता बनाले.. आज तो मेरा बेटा चाइ नास्ता करके ही जायेगा..

नीलम : (लखनकी ओर सरारतसे जीभ नीकालते) जा रही हु.. करलो बाते.. जो करनी हो..

सरला : (नीलमकी ओर देखते हसते) ये लडकी भीनां.. सहेरमे रहेकर बीगड गइ हे.. आजकल बहुत सरारती होगइ हे.. तेरे भी मस्तीया करने लगी हे.. मेरे साथ भी बीन्दास्त बाते करने लगी हे..

लखन : (मुस्कुराते) तो अच्छा हेनां.. वैसे भी दादी पोती अ‍ेक सहेली जैसी ही होती हे..

सरला : (हसते) सही कहा तुमने.. वहा रहेकर काफी होशीयार होगइ हे.. बेटा.. सुन.. अब ये भी सादीके लायक होती जा रही हे.. कोइ अच्छासा लडका ध्यानमे रखना.. हम इनकी सादी करवा देगे..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. क्यु बच्चीकी जींदगी खराब कर रही हो..? अभी वो पढ रही हे.. कुछ पढ लीखकर काबील होजानेदो बादमे सोचेगे.. कहेती थी बेन्कमे जोब करुगी.. तो अच्छा हेना अपने पैरोपे खडी होजायेगी..

सरला : (मुस्कुराते) वोतो ठीक हे बेटा.. मे उमरमे सबसे बडी हु.. मेने दुनीया दारी देखी हे.. इस लडकीका हाव भाव देखकर लगता हे सहेरमे जाकर काफी कुछ सीख गइ हे.. कल अगर इसने कुछ गलत कदम उठालीया तो हम कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहेगे..

लखन : काकी अ‍ैसा क्यु सोचती हो..? नीलु होस्टेलमे नही हमारे साथ रेह रही हे.. ओर रजीया सृती सब इनका बरोबर खयाल रखती हे..

सरला : (धीरेसे) बेटा आपके घरकी चीन्ता नही हे.. छे महीनेके बाद कोलेजमे आजायेगी.. ओर वहाका माहोल कैसा होता हे वोतो तुजे भी पता हे.. बस.. वहीकी चीन्ता हे..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) काकी.. हमारी नीलु अ‍ैसी नही हे.. वो बहुत समजदार हे.. आप खामखा टेन्शन ले रही हे.. अगर उसने लडका चुना भीतो बहुत अच्छा होगा.. अच्छा ये बताओ.. भाइ कभी मीलने आते हे की नही..?

सरला : (थोडी जेंपते) मतलब..? कोन देवु..? नहस.. वो कामके बगैर यहा क्यु आयेगे भला..?

लखन : (सहस्य मुस्कानसे) बस काकी.. मेतो सीर्फ पुछ रहा था.. वैसे मेरी होने वाली बीवीने मुजे आपके बारेमे बहुत कुछ बता दीया हे..

सरला : (सामने देखते थोडी गभराते धीरेसे) क्या..? मतलब.. पुनम..? सबकुछ मतलब..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे कानके पास मुह लेजाते) आपके अतीतके बारेमे बापुके बारेमे.. ओर बडे भैया..

सरला : (जटसे लखनका हाथ पकडकर कीचनकी ओर देखते) चुप कर.. कोइ सुनलेगा.. क्या अ‍ैसी बाते यहा करेगा..? यहा नही.. हम अकेले होगे तब बात करेगे.. वहा सादीमे हमे बाते करनेका बहुत मौका मीलेगा.. हम वहा बात करेगे..

लखन : (मुस्कुराते) अरे काकी गभराइअ‍े नही.. मेतो सीर्फ बता रहा था.. उस दिन कहेती थीनां अपनी नइ बीवीसे जानकर मुजे अकेलेमे बतना.. सबकुछ जान लीया तो बता रहा हु.. बाकी इस बातसे हमे कोइ अ‍ेतराज नही.. ओर सादीमे तो बीलकुल नही.. वहा सब लोग होगे.. तो बात नही कर सकते..
 
सरला : (कीचनकी ओर देखते) ठीक हे बेटा.. अभी यहा नही.. अकेलेमे तुजे सब कुछ बता दुगी.. अब अ‍ेक तुही तो मेरा अच्छा बेटा हे.. मुजे कुछ ओर भी जानना हे.. हम अकेले मीलेगे तब बात करेगे..

रमा : (चाइ नास्ता लाते) लीजीये देवरजी.. चाइ नास्ता रेडी.. सासु जमाइ क्या बाते कर रहे हो..? हें..हें..हें..

सरला : (आंख गीली करते धीरेसे) रमा.. अब लखन हमारा जमाइ नही हे.. ये बेटा हे मेरा..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. अब भुल जाओ इस बातको.. यही तो जींदगी हे.. ओर हमारे घरकी बात ही कुछ ओर हे.. आप सबको पता तो हे..

सरला : (मुस्कुराते) सही कहा तुमने.. वहा सब चलता हे.. कीसीपे कोइ पाबंधी नही.. सब लोग खुलकर अपनी जींदगी जीते हे..

नीलम : (आते) जीजु.. चलो मे भी रेडी हु.. टाइमसे पहोंच जायेगे तो स्कुलपे जापाउगी..

रमा : अरे चाइ नास्ता तो करनेदे फीर चले जाना.. इतनी भी क्या जल्दी हे..?

सरला : (मुस्कुराते) ये लडकी भीनां.. कीतनी उतावली हो रही हे.. ओर ये क्या कपडे पहेना हे तुमने..? इतने छोटे छोटे..? कोइ ढंगके कपडे नही हे क्या..? हाथोमे महेदी.. जैसे स्कुल नही कीसीकी सादीमे जा रही हो.. तु हेनां सहेरमे जाकर बीगड गइ हे..

नीलम : (मुस्कुराते) क्या दादी..? सहेरमे सब अ‍ैसे ही कपडे पहेनते हे.. पुछलो जीजुको.. आजकल यही फेशन हे.. ओर जीजुने ही दीलवाये हे.. ओर ये महेदीं..? पुनोदीकी सादीमे नही जाना क्या..?

सरला : (हसते) अच्छा अच्छा ठीक हे.. पहेन सब मेरे बापका क्या जाता हे..

लखन : (मुस्कुराते) काकी.. पहेनने दोनां.. फेशन हे.. ओर भाभी.. सृतीको साथ लेकर आया हु.. अभी मेरी सादी तक यही हे.. आप उसे यही दीखा देना.. मेने भानु भाइसे बात करली हे..

रमा : (सरमाते धीरेसे) जी.. दीखा दुगी..

सरला : (खुस होते मुस्कुराते) हां ये अच्छा कीया तुमनेकी सृती बीटीयाको इधर लाया.. दो पहोरको जाना हे तेरे घर.. वो रामुभाइका सौक करने.. तो वही दीखा देगे..

लखन : (खडा होते) काकी.. तो फीर हम चले..?

सरला : (खडी होते धीरेसे) लखन बेटा.. तुम भले ही हमारे दामाद ना हो.. अब देवु तो आता नही कमसे कम तुम तो आते रहेना..

लखन : (मुस्कुराते) अरे काकी कैसी बाते कर रही हो.. अफकोर्स आता रहुगा..

फीर लखन चाइ नास्ता करके खडा होगया तब नीलम अपनी बेग लेकर रुमसे बहार आजाती हे.. ओर सरलाके पांव छुकर रमाको गले मीलती हे.. तो लखन भी सरलाके पांव छुकर खडा हो गया तो सरलाने लखनको कसके गले लगा लीया.. ओर वोही चुभन वाला अहेसास..

जब लखन नीकलने लगता हे तो रमा उसे बहार तक छोडने आती हे.. वो लखनसे बात करना चाहती थी लेकीन सरलाकी वजहसे उसे कोइ मौका नही मीला.. तो नीलम भी इस बातको जानती थी.. तो वो जटसे कारमे बैठ गइ ताकी दोनो बात कर सके.. तभी..

रमा : (पास आते धीरेसे) लखन.. कमसे कम फोनपे तो बात करलीया करो.. आपके भाइ कुछ बोले नहीनां..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. हम तीनोके अलावा इस बातका कीसीको पता नही चलेगा.. टड्ढस्ट मी..

रमा : (मुस्कुराते धीरेसे) हंम.. भरोसा तो खुदसे भी ज्यादा हे.. ठीक हे मे सृती दीदीको दीखा दुगी.. आप नीलुका खयाल रखना..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. नीलुकी चीन्ता मत करो.. वहा जाओतो भाभीमांसे अकेलेमे बात कर लेना.. वो आपको माफ करदेगी.. ओर कुछ चाहीये..?

रमा : (मुस्कुराते) नही.. आपके दीये पैसे अभी भी अ‍ैसे ही पडा हे.. चाहीये तो मांग लुगी.. लखन.. प्लीज.. मेरी नादानीकी वजहसे मुजे माफ कर देना..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. भुल जाओ उस बातको.. चलो मे चलता हु..

कहेते लखन रमाको हग करके कारमे बैठ गया.. ओर नीलमको लेकर नीकल गया.. रमा गीली आंखसे उसे जाते हुअ‍े देखती रही.. फीर अपनी आंओ पोछते घरमे चली गइ.. तो सरला रमाकी ओर कातील मुस्कानसे देखती रही..

भानुकी हकरतकी वजहसे सरलाको अब कोइ अ‍ेतराज नही था.. इधर लखनने दुसरे रास्तसे कार सहेरकी ओर जाने दी.. नीलम कातील मुस्कानसे लखनकी ओर देखती रही.. तभी अचानक नीलम लखनकी गरदनमे हाथ डालक उनके गालको चुम लेती हे.. ओर चहेरेसे चहेरा सटाकर बैठ गइ..



 
लखन : (हसते) क्या कर रही हे..? सही बैठ.. कोइ देख लेगा..

नीलम : (मुस्कुराते) देखने दो.. आज मे अपने बोय फ्रेन्डके साथ लोंग ड्राइवपे जा रही हु.. क्या सब लोग इधर हेनां..? मेने घरपे कुछ नही बताया.. की मेरी अ‍ेक हप्तेकी छुटी हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. रामुकाका की वजहसे सादी भी तीन चार दिन डीले होगइ..

नीलम : (अ‍ेक्साइटेड होते खुसीसे) वाव.. जीजु.. तब तो हमारे पास चार पांच दिन हे.. हम दोनो खुब मजे करेगे.. हम कही आउट ओफ स्टेशन घुमने चले..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. वहा राधुकी मम्मीकी तबीयत भी खराब हे.. हमे घरपे रहेना पडेगा.. पता नही कब राधुका कोल आजाये..

नीलम : (दुखी होते अपनी जगहपे बैठ गइ) ओह सीट.. क्या जीजु.. आपभीनां..? हम दोनोके पास कीतना अच्छा मौका था.. मे आपके साथ वो सारे लह्मे जीना चाहती थी.. ना जाने मेने क्या क्या सपने सजाये थे..

लखन : (सामने देखकर मुस्कुराते) हंम.. तो मेने कहा मना कीया..? तु दुखी मत हो.. मेने राधुको नही बतायाकी मे घरपे आ रहा हु.. हम दोनो सीधे हमारे घर जा रहे हे.. तीन चार दिन हम दोनो घरपे अकेले हे.. सोचले..? हें..हें..हें..

नीलम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हंम.. तो जनाब पुरी तैयारीया करके आये हे.. लेकीन हम अ‍ेक दिन तो लोंग ड्राइवपे जा सकते हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) लोंग ड्राइवपे जाकर हम क्या करेगे..? बता क्या प्लान हे तेरा..?

नीलम : (कातीलाना मुस्कुराते) हंम.. प्लान तो कुछ नही.. बस.. थोडी मस्ती.. मुजे थोडा आराम मील जायेगा.. आप समज गयेनां..? ओर सुनो.. हमारे पास तीन चार दिन हेनां..? तो हम दोनो घरसे बहार ही नही नीकलेगे.. मानलो हमारा छोटा हनीमुन हे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हनीमुनकी बच्ची.. पता हेना मोम ओर पुनोदीको सब पता चल जाता हे..

नीलम : (मुस्कुराते) हां पता हे.. आप उनकी फीकर मत करो.. वो सब मे देख लुगी.. वो कुछ नही कहेगे.. ओर वैसे भी पुनोदीको हम दोनोके बारेमे सबकुछ पता हे.. आप बहाने मत बनाओ..

लखन : (मुस्कुराते) लगता हे आज तो तुम मेरा बलात्कार ही करोगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (पेन्टके उभारपे हाथ रखते) ओर नही तो क्या..? जनाब कीतने दिनोके बाद हाथ लगे हे.. हर बार दर्दका बहाना बनाकर कुछ नही करते.. जीजु.. मेने तो पुरी तैयारीया करली हे.. आज हम दोनोका पहेला मीलन.. मीन्स.. हमारी सुरागरात..

लखन : (चुतको सहेलाते) हंम.. तो क्या मुजे रात तक इन्तजार करना पडेगा..?





नीलम : (सर्मसार होते पैर फैलाते कातील नजरसे) नहीइइइ... नोटी बोय.. मतलब.. आप चलो.. आपको सब पता चल जायेगा.. जीजु.. आइ लव यु सो मच.. कास मे आपसे सादी कर सकती..





लखन : (मुस्कुराते) तो करले.. अ‍ेक बीवी ओर सही..

नीलम : (सही बेठते आंख गीली करते) नही जीजु.. कुछ रीस्ते अ‍ैसे होते हे जो हमे नीभाना पडेगा.. आप फीकर मत करो.. भलेही मे धिरेनसे सादी करलु.. पहेली बीवी तो आपकी ही कहेलाउगी.. ओर जो प्यार छुपकर करनेके मजा आता हे वो बीवी बनकर नही.. मेने सब तैय करलीया हे की क्या करना हे..

लखन : (सामने देखते) लगता हे तेरी पुनोदीदीसे काफी बाते हो गइ हे..?

नीलम : (हां मे गरदन हीलाते) हां.. हम दोनो फोनपे बाते करती रहेती हे.. पता हे जीजु.. पहेले मुजे बहुत गील्टी फील होती थी.. की मेने पुनोदीका घर उजाड दीया..

लखन : (सामने देखते) तुम अ‍ैसा क्यु सोचती हो.. सब उपर वालेका खेल हे..

नीलम : (सामने देखते) हां जीजु.. सही कहा आपने.. जबसे उनसे सब बाते हुइ तब उन्होने मुजे कुछ जीम्वेवारीया भी दी हे.. अ‍ैसा लगता हे मेने सब सही कीया.. मेरी वजहसे आपकी जींदगीमे पुनोदी आगइ.. आपको अपना पुराना प्यार मील गया..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. वोतो हे.. थेन्क्स नीलु..

नीलम : (कातीलाना मुस्कुराते) अब थेन्क्स बेन्क्ससे काम नही चलेगा.. ये चार दिन आप मेरी गीरफ्तमे हो.. जैसा मे कहुगी वैसा करना पडेगा.. बोलो मंजुर हे..?

लखन : (मुस्कुराते) अरे हां मेरी मां जो तु कहेगी वैसा करुगा ओर कुछ..? वैसे तेरी मम्मीसे बात होगइ..?

नीलम : (सरपे टपली मारते) मां कीसको बोला..? गर्लफ्रेन्ड हु आपकी..





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लखन : (हसते) ओह सोरी सोरी..

नीलम : जीजु.. मम्मीसे सब बाते होगइ.. वो मंजु मोमको मीलेगी तो उनकी माफी मांग लेगी.. आपकी सादीमे सब आ रहे हे.. जीजु.. वो काफी बदल चुकी हे.. वो मेरी पहेले वाली मम्मी नही रही..

लखन : (सामने देखते) मतलब..?

नीलम : (मुस्कुराते) जीजु.. उनको बहुत पछतावा होरहा हे.. उनको हम दोनोके रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही.. आपको पता हे..? सी इज प्रेगनेन्ट..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. पता हे मुजे.. वो मुजसे हुइ हे.. हमारा बच्चा हे वो.. तुजे बुरा लगा..?

नीलम : (मुस्कुराते) नही.. आइ सो अ‍ेम हेप्पी.. थेन्क्स.. आपने उनका सपना पुरा कर दीया.. वो इस बातसे बहुत खुस हे.. आपको सचमे प्यार करने लगी हे.. जीजु.. अ‍ेक बात कहु..? पापा ओर मम्मीके बीचमे लगभग सब खतम होचुका हे.. दोनो अलग सोते हे..

लखन : (सोक्ट होते) लेकीन क्यु..? मेने तेरी मम्मीको समजाया तो था.. अ‍ैसा क्यु कीया उसने..?

नीलम : (आंख गीली करते) जीजु.. इसमे मम्मीकी कोइ गलती नही हे.. पता नही इनको क्या होजाता हे.. मम्मी प्रेगनेन्ट हे.. फीर भी वो कामोतेजक गोलीया खाकर बडी बेहरेमीसे मम्मीके साथ सेक्स करते हे.. मानो कोइ जानवर हो.. मेने उनका मम्मीके प्रती बीहेवीयर देखा.. कोइ अच्छा नही हे..

लखन : (सामने देखते) क्या..? मीन्स.. वाइल्ड..

नीलम : (सेड मुह करते धीरेसे) हंम.. ओर सेक्स करते भी उस रंडीका नाम लेते हे.. आपके खेतोपे हे कोइ रीटा नामकी.. मम्मीके स्तन काट काटके सुजा देते हे.. तो मम्मी अब उनसे दुर ही रहेती हे.. ओर अब तो पापा भी हप्तेमे दो तीन बार ही घर आते हे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) लेकीन वोतो हर दीन टाइमपे घर चले जाते हे..

नीलम : (सामने देखते) हां.. वहासे तो टाइमपे नीकल जाते होगे.. फीर जाते होगे उस रीटाके पास..

लखन : (थोडी परेसानीसे) यार.. ये रीटाका कुछ करना पडेगा.. साली इतनी हवसी होगी नही पता था..

लखन : (मुस्कुराते) जीजु.. पता हे.. पुनोदीदीने अ‍ेक बात बहुत अच्छी कही हे.. जो होता हे अच्छेके लीये होता हे.. इसीलीये जो होता हे होने दो.. हो सकता हे सायद इसीमे सबकी भलाइ हो.. आप पापाको या फीर उस रीटाको कुछ मत कहेना.. मम्मी आपसे ही खुस हे.. ओर अब तो उसने आपको ही अपना पती मान लीया हे..

लखन : (सामने देखते) नीलु.. फीर भी येतो अफैर हुआनां..? क्या ये सब गलत नही हे..?

नीलम : (मुस्कुराते) कुछ गलत नहीं.. अगर हेतो सीर्फ दुनीयाकी नजरोमे.. ओर हमे दुनीयासे कोइ लेना देना नही हे.. ओर हमारे लीये कुछ अफैर नही हे.. आपको पता हेनां हम सब कौन हे..? ओर आप दोनो भाइका तो काम ही यही हे.. हम सबको खुस रखना.. हम इतनी सारी ओरते ओर लडकीया हे.. मजे करो दोनो भाइ.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. हमारे बारेमे काफी कुछ जान गइ हो..

नीलम : (लखनके पेन्टकी चेइन खोलते) चलो अब बहुत होगइ बाते.. मे मेरे बाबुको खुस करदेती हु.. बाते करनेके लीये हमारे पास कइ दिन पडे हे.. मेरी पुरी लाइफकी कहानी सुना दुगी..





कहेते नीलम चेइन खोलकर लखनके लंडको नीकाल देती हे.. तो लखनका लंड पहेलेसे ही तनके हवामे जटके मार रहा था.. नीलमने उसे मीठीमे थाम लीया.. फीर लखनकी ओर मुस्कुराते नीचे जुक गइ.. वो नसीली आंखसे लंडपे अपनी जीभ फेरने लगी..





जब लंड गीला होगया तो धीरेसे मुहमे लेलीया.. ओर सरको उचा नीचा करते लखनको ब्लुजोब देने लगी.. लखन परंम आंनदकी अनुभुती करते रीलेक्ल होकर बैठ गया.. ओर कारको सहेरकी ओर दोडाने लगा.. जब सहेर नजदीक आने लगा तबतक नीलमने भी अपनी स्पीड बढा दीथी..





तभी अचानक लखनके लंडसे लावा फुट पडा.. ओर वो अ‍ेक हाथ नीलमके सरपे रखते लंडकी ओर दबाने लगा.. तो नीलमके मुहमे ही पीचकारीया छुटने लगी.. ओर नीलम लखनका सारा माल अपनी हलमे उतारने लगी.. जब लखन सांत होगया तो नीलम कातील नजरोसे देखते लखनके लंडको चाटकर साफ करने लगी.. फीर सही होकर बैठ गइ ओर रुमालसे अपना मुह पोछते लखनकी ओर देखते हसने लगी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
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