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रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २६६
तभी अचानक लखनके लंडसे लावा फुट पडा.. ओर वो अेक हाथ नीलमके सरपे रखते लंडकी ओर दबाने लगा.. तो नीलमके मुहमे ही पीचकारीया छुटने लगी.. ओर नीलम लखनका सारा माल अपनी हलमे उतारने लगी.. जब लखन सांत होगया तो नीलम कातील नजरोसे देखते लखनके लंडको चाटकर साफ करने लगी.. फीर सही होकर बैठ गइ ओर रुमालसे अपना मुह पोछते लखनकी ओर देखते हसने लगी.... अब आगे
नीलम : (मुह पोछते) जीजु.. कैसा लगा मेरा सरप्राइज.. क्या मस्त टेस्ट हे इनका.. मम्मी अैसे ही आपके पीछे पागल नही हे..
लखन : (मुस्कुराते) तेरी दादी ठीक ही कहेती थी.. तु सहेरमे रहेकर बीगड गइ हे..
नीलम : (कातील नजरोसे) हां.. बीगड गइ हु.. लेकीन सीर्फ आपके लीये.. समजे..?
लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. अभी खानेका टाइम भी होजायेगा.. हम कीसी होटेलमे चले..?
नीलम : (मुस्कुराते) हंम.. गुड आइडीया.. फीर रातके लीये ओर्डर कर देगे.. घरपे आजायेगा..
लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? तु हेनां..? तेरी मम्मीतो केह रही थी तुम सभी खाना बना लेती हो..
नीलम : (कातील नजरोसे) हां बना लेती हु.. लेकीन रातको जनाब खाना बनाने लायक रहेने देगे तबनां..?
लखन : (आस्चर्यसे देखते मुस्कुराते) तो क्या दिनमे ही..?
नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) मुजे नही पता.. ओर नही तो क्या..? अेक जवान गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्ड घरपे अकेले होगे.. ओर वो भी बंध दरवाजा.. जो तीन दिनके बाद खुलने वाला हे.. तो क्या आप अैसे ही बैठे रहोगे..? वो भी जवान सालीके साथ..
लखन : (होटेलकी ओर लेजाते लंडको मसलते) यार मत कर अैसी बाते.. मुजसे कंट्रोल नही होता.. वरना अभीका खाना भी केन्शल होजायेगा..
नीलम : (सरमाकर कातीलाना मुस्कुराते धीरेसे) तो फीर पार्सल करवालो.. आरामसे खायेगे..
लखन : (लंडको अेडजेस्ट करते) हंम.. वही सही रहेगा.. तुम कारमे बैठो मे अभी पेक करवाके लाता हु..
कहेते लखन अेक होटेलपे कार रोकते अंदर चला गया.. ओर काउन्टरपे खडा होकर पार्सलका ओर्डर दीया.. फीर इधर उधर देखने लगा.. तभी होटेलके अेक कोनेपे दुर उसे धृव ओर उनकी बहेन पुजा लंच करते दीखे.. लखन उन दोनोको सर्मीन्दा करना नही चाहता था..
लेकीन लखन मुह फेरले इनसे पहेले ही धृवने लखनको देख लीया.. ओर उसने जोरोसे आवाज लगाइ.. तो लखनको उनकी ओर देखना पडा तो धृवने उसे हाथ हीलाते अपने पास बुलाया.. ओर लखन हसते हुअे वहा चला गया.. तो पुजा लखनको देखते ही आस्चर्यसे सोक्ट होगइ ओर हसने लगी..
पुजा : (हसते) अरे लखन भैया..? कैसे हो..? व्होट अे सरप्राइज..? इधर..?
लखन : (मुस्कुराते) हाइ पुजादी.. कैसी हे.. बस.. खाना पार्स करवाने आया था.. अब यही रहेता हु.. धृवको सब पता हे..
धृव : (हसते) यार तु बैठना साथमे लंच करते हेनां..
लखन : (मुस्कुराते) नही बस.. पार्सल ओर्डर कर दीया हे.. ओर मेरी साली बहार कारमे बैठी हे.. कहो पुजा दीदी कब आइ..? सब मजेमे..?
पुजा : (मुस्कुराते) हां सब मजेमे.. धृवसे अभी आपके बारेमे ही बात हो रही थी.. सुना हे आप पुनम दीदीसे सादी कर रहे हो..? हो गइ सादी..?
लखन : (मुस्कुराते) नही.. बस अेक चाचा गुजर गये तो सादी चार पांच दीन डीले होगइ..
पुजा : (हसते) ओह.. सेड.. तो आखीर आपको अपना प्यार मील ही गया.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) हां देरसे ही सही.. लेकीन मील गया.. हर कोइ धृवकी तराह नसीब वाले थोडीनां होता हे..? हें..हें..हें..
पुजा : (सरमार मुस्कुराते) वेरी फनी.. आपका इसारा समजती हु.. आप भाइ बहेनके चकर मे भी फस गइ.. अब क्या करे..? लेकीन बहुत नसीब वाली हु.. इतना केरींग ओर लव करने वाला भाइ जो मीला हे.. थेन्क्स.. आपकी वजहसे मुजे धृव मीला.. बस.. अभी दो नावमे सवार हु..
लखन : (मुस्कुराते) हां इस बारेमे धृवसे सब बाते हुइ.. चलो अच्छा हुआ आप मील गये.. अगर आप ठहेर रही हो तो दोनो गांव चलो.. मेरी सादीमे.. चार पांच दीनके बाद हे..
धृव : (थोडा जीजकते) लखन.. पुजा कीसीको बीना बताये आइ हे.. सामको चली जायेगी.. दोनो अेक होटेलमे ठहेरे हे.. तो बी केर फुल.. समज गयानां..
वैइटर : (आते) सर.. आपका पार्सल रेडी हे..
लखन : (मुस्कुराते) चीन्ता मत कर यार.. मे भी तेरी तराह हु.. चलो फीर तो मीलते हे.. बाय धृव बाय दीदी..
पुजा : (मुस्कुराते) सुनो.. कभी धृवके साथ अपनी बीवीओको लेकर आओ.. वहा तुम्हारी दीदीका घर ही हे..
लखन : (मुस्कुराते) जी जरुर.. कभी पुनोको लेकर आउगा.. चलो बाय..
धृव पुजा : (मुस्कुराते) बाय..
कुछ देरके बाद दोनोके लीये खाना पेक करवाके आगया.. फीर दोनो ही कार लेकर घरपे आगये.. तो लखनने कार सीधी अंदर ही लेली.. फीर दोनो गेइटको अच्छेसे बंध करके घरमे आगये.. तो नीलमने अंदर आते ही मेइन गेइटभी लोक करदीया..
अध्याय - २६६
तभी अचानक लखनके लंडसे लावा फुट पडा.. ओर वो अेक हाथ नीलमके सरपे रखते लंडकी ओर दबाने लगा.. तो नीलमके मुहमे ही पीचकारीया छुटने लगी.. ओर नीलम लखनका सारा माल अपनी हलमे उतारने लगी.. जब लखन सांत होगया तो नीलम कातील नजरोसे देखते लखनके लंडको चाटकर साफ करने लगी.. फीर सही होकर बैठ गइ ओर रुमालसे अपना मुह पोछते लखनकी ओर देखते हसने लगी.... अब आगे
नीलम : (मुह पोछते) जीजु.. कैसा लगा मेरा सरप्राइज.. क्या मस्त टेस्ट हे इनका.. मम्मी अैसे ही आपके पीछे पागल नही हे..
लखन : (मुस्कुराते) तेरी दादी ठीक ही कहेती थी.. तु सहेरमे रहेकर बीगड गइ हे..
नीलम : (कातील नजरोसे) हां.. बीगड गइ हु.. लेकीन सीर्फ आपके लीये.. समजे..?
लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. अभी खानेका टाइम भी होजायेगा.. हम कीसी होटेलमे चले..?
नीलम : (मुस्कुराते) हंम.. गुड आइडीया.. फीर रातके लीये ओर्डर कर देगे.. घरपे आजायेगा..
लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? तु हेनां..? तेरी मम्मीतो केह रही थी तुम सभी खाना बना लेती हो..
नीलम : (कातील नजरोसे) हां बना लेती हु.. लेकीन रातको जनाब खाना बनाने लायक रहेने देगे तबनां..?
लखन : (आस्चर्यसे देखते मुस्कुराते) तो क्या दिनमे ही..?
नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) मुजे नही पता.. ओर नही तो क्या..? अेक जवान गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्ड घरपे अकेले होगे.. ओर वो भी बंध दरवाजा.. जो तीन दिनके बाद खुलने वाला हे.. तो क्या आप अैसे ही बैठे रहोगे..? वो भी जवान सालीके साथ..
लखन : (होटेलकी ओर लेजाते लंडको मसलते) यार मत कर अैसी बाते.. मुजसे कंट्रोल नही होता.. वरना अभीका खाना भी केन्शल होजायेगा..
नीलम : (सरमाकर कातीलाना मुस्कुराते धीरेसे) तो फीर पार्सल करवालो.. आरामसे खायेगे..
लखन : (लंडको अेडजेस्ट करते) हंम.. वही सही रहेगा.. तुम कारमे बैठो मे अभी पेक करवाके लाता हु..
कहेते लखन अेक होटेलपे कार रोकते अंदर चला गया.. ओर काउन्टरपे खडा होकर पार्सलका ओर्डर दीया.. फीर इधर उधर देखने लगा.. तभी होटेलके अेक कोनेपे दुर उसे धृव ओर उनकी बहेन पुजा लंच करते दीखे.. लखन उन दोनोको सर्मीन्दा करना नही चाहता था..
लेकीन लखन मुह फेरले इनसे पहेले ही धृवने लखनको देख लीया.. ओर उसने जोरोसे आवाज लगाइ.. तो लखनको उनकी ओर देखना पडा तो धृवने उसे हाथ हीलाते अपने पास बुलाया.. ओर लखन हसते हुअे वहा चला गया.. तो पुजा लखनको देखते ही आस्चर्यसे सोक्ट होगइ ओर हसने लगी..
पुजा : (हसते) अरे लखन भैया..? कैसे हो..? व्होट अे सरप्राइज..? इधर..?
लखन : (मुस्कुराते) हाइ पुजादी.. कैसी हे.. बस.. खाना पार्स करवाने आया था.. अब यही रहेता हु.. धृवको सब पता हे..
धृव : (हसते) यार तु बैठना साथमे लंच करते हेनां..
लखन : (मुस्कुराते) नही बस.. पार्सल ओर्डर कर दीया हे.. ओर मेरी साली बहार कारमे बैठी हे.. कहो पुजा दीदी कब आइ..? सब मजेमे..?
पुजा : (मुस्कुराते) हां सब मजेमे.. धृवसे अभी आपके बारेमे ही बात हो रही थी.. सुना हे आप पुनम दीदीसे सादी कर रहे हो..? हो गइ सादी..?
लखन : (मुस्कुराते) नही.. बस अेक चाचा गुजर गये तो सादी चार पांच दीन डीले होगइ..
पुजा : (हसते) ओह.. सेड.. तो आखीर आपको अपना प्यार मील ही गया.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते) हां देरसे ही सही.. लेकीन मील गया.. हर कोइ धृवकी तराह नसीब वाले थोडीनां होता हे..? हें..हें..हें..
पुजा : (सरमार मुस्कुराते) वेरी फनी.. आपका इसारा समजती हु.. आप भाइ बहेनके चकर मे भी फस गइ.. अब क्या करे..? लेकीन बहुत नसीब वाली हु.. इतना केरींग ओर लव करने वाला भाइ जो मीला हे.. थेन्क्स.. आपकी वजहसे मुजे धृव मीला.. बस.. अभी दो नावमे सवार हु..
लखन : (मुस्कुराते) हां इस बारेमे धृवसे सब बाते हुइ.. चलो अच्छा हुआ आप मील गये.. अगर आप ठहेर रही हो तो दोनो गांव चलो.. मेरी सादीमे.. चार पांच दीनके बाद हे..
धृव : (थोडा जीजकते) लखन.. पुजा कीसीको बीना बताये आइ हे.. सामको चली जायेगी.. दोनो अेक होटेलमे ठहेरे हे.. तो बी केर फुल.. समज गयानां..
वैइटर : (आते) सर.. आपका पार्सल रेडी हे..
लखन : (मुस्कुराते) चीन्ता मत कर यार.. मे भी तेरी तराह हु.. चलो फीर तो मीलते हे.. बाय धृव बाय दीदी..
पुजा : (मुस्कुराते) सुनो.. कभी धृवके साथ अपनी बीवीओको लेकर आओ.. वहा तुम्हारी दीदीका घर ही हे..
लखन : (मुस्कुराते) जी जरुर.. कभी पुनोको लेकर आउगा.. चलो बाय..
धृव पुजा : (मुस्कुराते) बाय..
कुछ देरके बाद दोनोके लीये खाना पेक करवाके आगया.. फीर दोनो ही कार लेकर घरपे आगये.. तो लखनने कार सीधी अंदर ही लेली.. फीर दोनो गेइटको अच्छेसे बंध करके घरमे आगये.. तो नीलमने अंदर आते ही मेइन गेइटभी लोक करदीया..



















