Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 97 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६६

तभी अचानक लखनके लंडसे लावा फुट पडा.. ओर वो अ‍ेक हाथ नीलमके सरपे रखते लंडकी ओर दबाने लगा.. तो नीलमके मुहमे ही पीचकारीया छुटने लगी.. ओर नीलम लखनका सारा माल अपनी हलमे उतारने लगी.. जब लखन सांत होगया तो नीलम कातील नजरोसे देखते लखनके लंडको चाटकर साफ करने लगी.. फीर सही होकर बैठ गइ ओर रुमालसे अपना मुह पोछते लखनकी ओर देखते हसने लगी.... अब आगे

नीलम : (मुह पोछते) जीजु.. कैसा लगा मेरा सरप्राइज.. क्या मस्त टेस्ट हे इनका.. मम्मी अ‍ैसे ही आपके पीछे पागल नही हे..

लखन : (मुस्कुराते) तेरी दादी ठीक ही कहेती थी.. तु सहेरमे रहेकर बीगड गइ हे..

नीलम : (कातील नजरोसे) हां.. बीगड गइ हु.. लेकीन सीर्फ आपके लीये.. समजे..?

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. अभी खानेका टाइम भी होजायेगा.. हम कीसी होटेलमे चले..?

नीलम : (मुस्कुराते) हंम.. गुड आइडीया.. फीर रातके लीये ओर्डर कर देगे.. घरपे आजायेगा..

लखन : (मुस्कुराते) क्यु..? तु हेनां..? तेरी मम्मीतो केह रही थी तुम सभी खाना बना लेती हो..

नीलम : (कातील नजरोसे) हां बना लेती हु.. लेकीन रातको जनाब खाना बनाने लायक रहेने देगे तबनां..?

लखन : (आस्चर्यसे देखते मुस्कुराते) तो क्या दिनमे ही..?

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) मुजे नही पता.. ओर नही तो क्या..? अ‍ेक जवान गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्ड घरपे अकेले होगे.. ओर वो भी बंध दरवाजा.. जो तीन दिनके बाद खुलने वाला हे.. तो क्या आप अ‍ैसे ही बैठे रहोगे..? वो भी जवान सालीके साथ..

लखन : (होटेलकी ओर लेजाते लंडको मसलते) यार मत कर अ‍ैसी बाते.. मुजसे कंट्रोल नही होता.. वरना अभीका खाना भी केन्शल होजायेगा..

नीलम : (सरमाकर कातीलाना मुस्कुराते धीरेसे) तो फीर पार्सल करवालो.. आरामसे खायेगे..

लखन : (लंडको अ‍ेडजेस्ट करते) हंम.. वही सही रहेगा.. तुम कारमे बैठो मे अभी पेक करवाके लाता हु..

कहेते लखन अ‍ेक होटेलपे कार रोकते अंदर चला गया.. ओर काउन्टरपे खडा होकर पार्सलका ओर्डर दीया.. फीर इधर उधर देखने लगा.. तभी होटेलके अ‍ेक कोनेपे दुर उसे धृव ओर उनकी बहेन पुजा लंच करते दीखे.. लखन उन दोनोको सर्मीन्दा करना नही चाहता था..

लेकीन लखन मुह फेरले इनसे पहेले ही धृवने लखनको देख लीया.. ओर उसने जोरोसे आवाज लगाइ.. तो लखनको उनकी ओर देखना पडा तो धृवने उसे हाथ हीलाते अपने पास बुलाया.. ओर लखन हसते हुअ‍े वहा चला गया.. तो पुजा लखनको देखते ही आस्चर्यसे सोक्ट होगइ ओर हसने लगी..

पुजा : (हसते) अरे लखन भैया..? कैसे हो..? व्होट अ‍े सरप्राइज..? इधर..?

लखन : (मुस्कुराते) हाइ पुजादी.. कैसी हे.. बस.. खाना पार्स करवाने आया था.. अब यही रहेता हु.. धृवको सब पता हे..

धृव : (हसते) यार तु बैठना साथमे लंच करते हेनां..

लखन : (मुस्कुराते) नही बस.. पार्सल ओर्डर कर दीया हे.. ओर मेरी साली बहार कारमे बैठी हे.. कहो पुजा दीदी कब आइ..? सब मजेमे..?

पुजा : (मुस्कुराते) हां सब मजेमे.. धृवसे अभी आपके बारेमे ही बात हो रही थी.. सुना हे आप पुनम दीदीसे सादी कर रहे हो..? हो गइ सादी..?

लखन : (मुस्कुराते) नही.. बस अ‍ेक चाचा गुजर गये तो सादी चार पांच दीन डीले होगइ..

पुजा : (हसते) ओह.. सेड.. तो आखीर आपको अपना प्यार मील ही गया.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हां देरसे ही सही.. लेकीन मील गया.. हर कोइ धृवकी तराह नसीब वाले थोडीनां होता हे..? हें..हें..हें..

पुजा : (सरमार मुस्कुराते) वेरी फनी.. आपका इसारा समजती हु.. आप भाइ बहेनके चकर मे भी फस गइ.. अब क्या करे..? लेकीन बहुत नसीब वाली हु.. इतना केरींग ओर लव करने वाला भाइ जो मीला हे.. थेन्क्स.. आपकी वजहसे मुजे धृव मीला.. बस.. अभी दो नावमे सवार हु..

लखन : (मुस्कुराते) हां इस बारेमे धृवसे सब बाते हुइ.. चलो अच्छा हुआ आप मील गये.. अगर आप ठहेर रही हो तो दोनो गांव चलो.. मेरी सादीमे.. चार पांच दीनके बाद हे..

धृव : (थोडा जीजकते) लखन.. पुजा कीसीको बीना बताये आइ हे.. सामको चली जायेगी.. दोनो अ‍ेक होटेलमे ठहेरे हे.. तो बी केर फुल.. समज गयानां..

वैइटर : (आते) सर.. आपका पार्सल रेडी हे..

लखन : (मुस्कुराते) चीन्ता मत कर यार.. मे भी तेरी तराह हु.. चलो फीर तो मीलते हे.. बाय धृव बाय दीदी..

पुजा : (मुस्कुराते) सुनो.. कभी धृवके साथ अपनी बीवीओको लेकर आओ.. वहा तुम्हारी दीदीका घर ही हे..

लखन : (मुस्कुराते) जी जरुर.. कभी पुनोको लेकर आउगा.. चलो बाय..

धृव पुजा : (मुस्कुराते) बाय..

कुछ देरके बाद दोनोके लीये खाना पेक करवाके आगया.. फीर दोनो ही कार लेकर घरपे आगये.. तो लखनने कार सीधी अंदर ही लेली.. फीर दोनो गेइटको अच्छेसे बंध करके घरमे आगये.. तो नीलमने अंदर आते ही मेइन गेइटभी लोक करदीया..
 
ओर लखनके हाथसे खाना लेकर कीचनमे चली गइ.. ओर वापस आगइ.. आते ही दोडकर लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. नीलमकी चुत तो कारमे ही गीली होचुकी थी.. ओर लगातार पानी बहा रही थी..

लखनने उसे गोदमे उठा लीया ओर नीचे ही लास्ट रुममे चला गया.. मेइन गेइट लोक था तो लखनने रुमका दरवाजा बंध नही कीया.. ओर नीलमको लेकर बेडके पास चला गया ओर बेडपे लीटा दीया.. तो नीलमने हसते हुअ‍े लखनका हाथ पकडते अपने उपर खीच लीया..





नीलम : (कातील नजरोसे हाथ खीचते) जीजु.. आजाओ उपर.. आज सारी दुरीया मीटादो.. आजाओ.. बहुत तडपी हु आपके लीये..

लखन : (पास लेटते) सोचले.. दर्द होगा.. जेल पाओगी..?

नीलम : (बाहोमे भीचते) उसी दर्दको महेसुस करने तो आइ हु.. अभीसे हमारा हनीमुन सुरु.. रातमे हम अपनी सुहागरात मनायेगे.. पुरी रात.. आपको सोने नही दुगी..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) लगता हे तुजे बहुत आग लगी हुइ हे..

नीलम : (जोरोसे बाहोमे भीचते) हां.. लगी हे.. अभी कोइ फोर प्लेय या ब्लुजोब नही.. डायरेक्ट अ‍ेटेक.. बनादो ओरत मुजे.. इस दिनके लीये मे कीतने दिसोसे तरस रही हु.. आजाओ उपर.. डालदो अंदर..

लखन : (मुस्कुराते आंखोमे देखते) क्या..? क्या डालु अंदर..?

नीलम : (कातील नजरोसे) मेरे मुहसे सुनना चाहते हो..? तो सुनो.. आपका ये काला नाग.. जो अभी अपनी फन फैलाते फनफना रहा हे.. अपने नये बीलमे घुसनेके लीये मचल रहा हे.. तो इनको मेरी बीलमे घुसादो.. आजके बाद यही उनका नया आसयाना हे.. ओर कुछ सुनना हे..?

लखन : (होठोको चुमते) नही.. इतना काफी हे.. लेकीन बील थोडा छोटा हे.. नाग बीलमे नही जापायेगा.. पहेले इनको नागके हीसाबसे बडा करना पडेगा..

नीलम : (वासना भरी नजरोसे) अ‍ेक बार नागको बीलमे जबर दस्तीसे घुसादो.. वो अपने आप अ‍ेडजेस्ट होजायेगा ओर अपने हिसाबसे बीलको बडा कर लेगा.. मेरे दर्दकी परवाह मत करना.. आज पहेली बार मेरे ड्रीम बोयके साथ मीलन करने जा रही हु.. तो दर्दतो होगा ही.. बस.. खीचके घुसादो.. कपडे नीकाल दु..? हंम..?

कहेते नीलम जटसे बेडपे बैठ गइ ओर लखनकी ओर वासना भरी नजरोसे देखते उनके सर्टके बटन खोलने लगी.. तो लखन भी नीलमके टोपको उतारने लगा.. दोनोने अ‍ेक दुसरेके कपडे नीकाल दीये.. नीलम सीर्फ ब्रा ओर पेन्टीमे रेह गइ जो नाके बराबर थी..





नीलमने सरमाते लखनके नीकरको खीच लीया.. तो लखनका लंड जटकेसे बहार नीकलते हवामे सलामी देने लगा.. जीसे देखकर नीलम सरमा गइ.. ओर अ‍ेक नजरसे देखने लगी.. लंडका टोप चमक रहा था.. ओर नीलमसे रहा नही गया.. वो हाथमे लेकर सहेलाने लगी..

बैडपे लेटते लखनको अपने उपर खीच लीया ओर जोरोसे बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. तो लखन नीलमको बाहोमे भीचते पलट जाता हे.. नीलमके खुले बाल लखनके चहेरेको ढक रहे थे.. ओर लखनने नीलमके ब्राकी स्ट्रीप खोलदी.. ओर नीलमकी पेन्टीमे उंगली फसाली..

नीलम समज गइ.. ओर धीरेसे अपनी कमरको उची करदी.. लखनने पेन्टी खीचकर नीकालदी.. अब नीलम ओर लखन पुरी तराह नंगे थे.. नीलम वापस लखपे लेट गइ तो लखनका लंड नीलमकी चुतको छुते जटके मारने लगा.. नीलमके दोनो बुब्स जो कठोर हो गये थे..

लखनके सीनेमे चुभने लगा.. तभी अचानक नीलमने लखनको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर होठो मीलाते पलट गइ.. अब लखन नीलमके उपर लेटा था.. दोनोके होंठ अभी भी अ‍ेक दुसरेसे जुडे हुअ‍े थे.. ओर अ‍ेक दुसरेके मुहके रसको पी रहे थे जैसे अंदर जानेकी होड लगा रहे हो.. तभी..





नीलम : (होंठ छुडाकर वासनासे देखते धीरेसे) जीजु.. ओर ना तडपाओ.. घुसादो अपना नाग..

लखन : मेरी जानको थोडा प्यार तो करने दे.. कीतने दिनोके बाद इनका रस पीउगा..

नीलम : (लंडको पकडकर सहेलाते) जीजु.. वो सब बादमे.. कीतना तडपाओगे.. अ‍ेक बार मुजे जी भरके चोदलो.. फीर खेलते रहेना..

लखन : (गलेको चुमते) नीलु.. हम पहेली बार मीलन करने जा रहे हे.. मे इसे यादगार बनाना चाहता हु..

नीलम : (दोनो पैर फैलाते धीरेसे) मानोगे नही.. आजाओ.. पीलो अपना रस.. मेनेतो कारमे ही पी लीया था..

कहातो लखन नीलमके पैरोके कीच चला गया ओर जुकते नीलमकी चुतपे मुह लगा लीया.. तो नीलमके तनसे अ‍ेक बीजलीसी लहेर दोड गइ.. उसने दोनो हाथसे चदरको कसके पकडलीया.. लखन नीलमकी चुतमे जीभ घुसाकर उनके दानेको (क्लीरोटीस) छेडने लगा..





नीलमकी चुतसे ओर पानी छुटने लगा.. वो आंख भीचते अपनी कमर हीलाते छटपटाने लगी.. वो पहेलेसे ही बहुत उतेजीत थी.. वो अपनी कमर उछालने लगी.. लेकीन लखनने कमरको कसके पकडली.. ओर जीभसे चुतको खरोदने लगा..

तो कुछ ही देरमे नीलमकी चुतने जवाब देदीया ओर फवारा छोडते लखनके मुहको भीगो दीया.. नीलम सांत होते अपनी सांसको दुरस्त करते मुस्कुराने लगी.. लखन नीलमकी चुतको चाटते साफ करने लगा तो नीलम बहुत ही सरमाइ.. ओर लखन बाथरुममे मुह धोकर वापस आगया..
 
नीलम : (सरमाते अपनी चुतको नीकरसे साफ करते) जीजु.. तो अब सुरु करे..? आजाओ..? आज अपनी सालीको मसल डालो.. कबसे प्यासी हे.. आपके चकरमे मेने कइ दिनोसे धिरेनको हाथ भी नही लगाने दीया..

लखन : (पास आकर लेटते) नीलु.. तेरा आगेका क्या प्लान हे..?

नीलम : (मुस्कुराते गाल चुमते) जीजु.. कुछ खास प्लान नही हे.. मेने सब पुनमदीदीको बता दीया हे.. बस.. ग्रेज्युअ‍ेशन खतम होते ही बेन्कमे जोब करनी हे.. दीदी केह रहीथी तुजे आसानीसे जोब मील जायेगी.. ओर धिरेनके साथ सादी करनी हे.. लेकीन मे चाहती हु धिरेन मेरी दुसरी चोइस रहे.. मतलब वो मेरा दुसरा पती कहेलाये..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) मतलब..? तो फीर पहेला पती कौन होगा..?

नीलम : (मुस्कुराते होठ चुमते) आप.. इसमे इतना आस्चर्य दीखानेकी क्या बात हे..?

लखन : लेकीन तुमतो मुजसे सादीके लीये मना कर रहीथीनां..?

नीलम : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन दुनीयाकी नजरोमे.. आज साम हम दोनो गांधर्व सादी कर रहे हे.. इसके बाद हम दोनोकी सुहागरात होगी.. मे चाहती हु धिरेनको आपका जुठन मीले..

लखन : (अ‍ेक नजरसे देखते) हंम..? ये बात तो मुजे सुबह पुनो भी केह रही थी.. कही तुम दोनोकी मीली भगत तो नही..?

नीलम : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हंम.. वेरी स्मार्ट बोय.. ये हम दोनोका ही प्लान हे.. देखना मे धिरेनको कंगाल कर दुगी.. कमीनेने पुनोदीदीकी जींदगी खराब कीहे..

लखन : (अ‍ेक नजरसे देखते) अ‍ेक मीनीट.. नीलु येतो गलत हे.. मानाकी धिरेनने गलती कीहे.. लेकीन पुनोदीकी वजहसे तु अपनी जींदगी क्यु खराब कर रही हे..? ओर ये सबतो हमारी कीस्मतमे लीखा था.. मतलब सब पहेले सेही तैय था..

नीलम : (सामने देखते) आपको पता हेनां उसने पुनमदीदीको ओर खुद अपनी मांको बदचलन कहा हे.. यही सब कल वो मेरे साथ भी कर सकता हे.. तो क्या आपको अच्छा लगेगा..? जीजु.. मेतो सबके खीलाफ जाकर उनसे सादी कर रही हु.. अगर कल कुछ मेरे साथ अ‍ैसा हुआ तो मे कहा जाउगी..?

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) नही नीलु.. अ‍ैसी नौबत नही आयेगी.. अगर आइ तो मेरे घरका दरवाजा हमेसाके लीये तेरे लीये खुला ही रहेगा.. यहा आजाना.. मे सबके सामने तुजे अपनी पत्नीके रुपमे स्वीकार करलुगा..

नीलम : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह जीजु आइ लव यु.. मुजे आपसे यही उमीद थी.. आप फीकर मत करो.. अ‍ैसी नोबत नही आयेगी.. मे ओर पुनोदी जो करते हे करने दो.. अभीतो बहुत सारी मंजील पार करनी हे.. बस.. ओर बाते नही.. आज मुजे पुर्ण ओरत बनादो.. जो धिरेन जैसे नामर्दका काम नही हे.. आजाओ.. मुजे आपके अंदर समालो..

कहातो लखन नीलमके उपर छा गया ओर दोनोके होंठ मील गये.. लखन नीलमके छोटे छोटे संतरे जैसे बुब्सको मुहमे लेकर चुमने लगा.. बुब्सकी नीपलको अपने दांतोसे हल्केसे दबाते छोड देता.. तब नीलमके तनमे अ‍ेक आगकी लेहर दोड जाती..





वो जल्दसे जल्द लखनके अंदर समा जाना चाहती थी.. लखनका लंड नीलमकी चुतपे दस्तक देने लगा.. तो नीलमने धीरेसे अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते लखनके नागको पकडलीया ओर सहेलाते धीरेसे अपनी चुतपे घीसने लगी.. लखन लगातार नीलमके होठोको ओर गलेको चुमता रहा..

जब लंड गीला हो गया तो नीलमने धीरेसे अपनी चुतमे फसा लीया.. ओर लखनको जोरोसे बाहोमे भीचते उनके होठोको चुमने लगी.. उनकी चुतसे लगातार पानी बेह रहा था.. ओर लखनने होंठ छुडाते नीलमकी आंखोमे देखा.. तो नीलमकी आंख वासनासे लाल हो चुकी थी.. वो बहुत ही कामुक नजरोसे लखनको देखती रही..





लखन : (धीरेसे) आर यु रेडी..? हंम..? डालदु..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) हंम.. आइ अ‍ेम रेडी.. प्लीज.. धीरेसे..

लखन : (होंठ चुमते) दर्द होगा.. थोडा सेह लेना..

नीलम : (हांमे गरदन हीलाते) हंम.. पता हे मुजे.. लेकीन मेरी परवाह मत करना.. आज मुजे ओरत बननेका सुख देदो.. बनालो अपनी सीक्रेट बीवी.. ये हमारा पहेला मीलन हे..

कहातो लखनने नीलमके दोनो हाथके पंजोमे उंगलीया फसाली.. ओर हाथको कसके पकडते लीपलोक करलीया.. नीलम बडी आंख करते लखनकी आंखोमे देखती रही.. तभी लखनने अ‍ेक जटका मारा.. लखनका आधा लंड नीलमकी चुतको चीरते अंदर घुस गया..

ओर नीलन अपना मुह छुडाते जोरोसे चीख पडी.. उनकी आंखोसे आंसु बहेने लगे.. ओर वो छटपटाते बेडपे पैर पटकने लगी.. उनको अ‍ैसा लगा की लखनने उनकी चुतमे गरम सलीया डाल दीया हो.. ओर लखनके लंड पे भी गरमाहट महेसुस होने लगी..



 
नीलम : (रोते मनते करते) जीजु.. प्लीज.. नीकालदो.. मुजे नही चुदना.. बहुत जलन होती हे..

लखन : (नीलमके मुहपे हाथ रखते) चुप.. चुप होजा.. बस होगया..

कहेते लखनने नीलमके मुहपे हाथ रखते अ‍ेक ओर जोरोका जटका दीया.. तो लखनका पुरा लंड नीलमकी चुतमे समा गया.. इस बार नीलमकी चीख अपने मुहमे ही दब गइ.. वो जोरोसे चीखते बेहोस हो चुकी थी.. उनकी आंखे फटीकी फटी ही रेह गइ..





लखन ने हाथ हटालीया तो नीलमका मुह खुला ही रेह गया.. वो कीसी अचेतन जैसे अ‍ैसे ही पडी रही.. आज नीलमकी नइ चुतकी वजहसे लखन भी बहुत उतेजीत था.. वो बैहोस नीलमके मुहमे ही जीभ घुसाते नीलमको चुमने लगा.. ओर अपनी कमर हीलाते नीलमको चोदने लगा..





नीलमकी चुतसे काफी खुन नीकल गया था.. लखनको भी लंडपे काफी गरमाहट महेसुस हो रही थी.. मानो उनका लंड कीसी गरम भठीमे डाल दीया हो.. फीर भी नीलमकी परवाह कीये बगैर वो नीलमको चोदता रहा.. कुछ देरकी चुदाइके बाद बडी ही आसानीसे लंड अंदर बहार होने लगा..





लखन लगातार नीलमके होठोको ओर गलेमे मुह डालकर चुमते चोदे ही जा रहा था.. काफी देरके बाद नीलमको होंस आने लगा.. लेकीन लखनने चोदना जारी रखा.. नीलमकी आंखसे अब भी आंसु बेह रहे थे.. नीलम लखनसे नजरे चुराते साइडमे देखते लखनके हर धके को जेलने लगी.. उनके दोनो बुब्स लखनके धकेके साथ ताल मेलमे उछल रहे थे..

नीलम : (धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. थोडी देरके लीये रुक जाइअ‍े.. अभी दर्द खतम होजायेगा..

कहातो लखन रुक गया ओर नीलमके चहेरेको थामते उनके होठोको चुमने लगा.. कुछ देरके बाद नीलम भी लखनका साथ देने लगी.. दोनो अ‍ेक दुसरेके मुहमे जीभ घुसाते पेच लडाने लगे ओर अ‍ेक दुसरेके होठोके रसको पीने लगे..





बीच बीचमे लखन नीलमके गले ओर उनके बुब्सको भी चुम लेता.. ओर धीरे धीरे करते नीलम फीरसे उतेजीत होगइ.. उनका दर्द भी खतम हो चुका था ओर वो अपनी कमर हीलाने लगी.. मानो कीसी स्वर्ग मे पहोंच गइ हो.. चुतमे लखनका बडा लंडको महेसुस करते कमरको जटके देने लगी..

नीलम : (लखनका चहेरा थामते जोरोसे होठ चुमते) जीजु.. थेन्क्यु.. आइ लव यु सो मच.. कीतना प्यारा अहेसास था.. अब धीरे धीरे सुरु करो.. आज अपनी सालीको मसल डालो.. आज अधीसे पुरी घरवाली बनादो..

लखन : (सामने देखते) अब दर्द हो रहा हे..?

नीलम : (नामे गरदन हीलाते) नही.. चोदो मुजे.. समा जाओ मुजमे.. अब कोइ बात नही.. सीर्फ चुदाइ..

कहातो लखन धीरे धीरे कमर हीलाते नीलमको फीरसे चोदने लगा.. इस बार नीलम भी अपनी कमर तालमेलमे उछालते लखनका साथ देने लगी.. दोनोके उपर वासना पुरी तराह हावी हो चुकी थी.. दोनो चुदाइके महासागरमे गोते लगाने लगे.. ओर काफी देर चुदाइ करते रहे..





तभी नीलमका तन अकडने लगा.. ओर नीलम लखनकी पीठमे नाखुन रगडते लखनको बाहोमे भीच लेती हे.. ओर लखनसे लीपलोक करते अपनी कमरको जटके देते जडने लगी.. तभी लखनके लंडपे गरमाहट महेसुस हुइ मानो कोइ उनके लंडको गरम पानीसे भीगो रहा हो..

नीलम : (कामोतेजनामे) आह.. सीइइइ... जी..जु.. आइइ.. अ‍ेम.. क..मीं..ग.. जोरोसे चोदो मुजे..

ओर लखन जोरोसे कमर हीलाते नीलमको चोदने लगा.. कुछ ही देरमे नीलम नीढाल होगइ ओर अ‍ैसे ही पडी रही.. तभी लखन हाथके बल उचा होगया ओर नीलमको जोरोसे चोदने लगा.. नीलमके दोनो बुब्स उछलते रहे.. ओर नीलम इधर उधर मुह करते छटपटाती रही.. कुछ देरके बाद फीरसे उतेजीत होगइ.. ओर कमर उछालते फीरसे लखनका साथ देने लगी..





नीलम : (उतेजनामे) येस.. येस.. जीजु.. फक मी हार्ड.. ओर जोरोसे चोदो मुजे.. आज मेरी सारी गर्मी नीकालदो.. आजसे ये साली आपकी अमानत हे..

लखन : (उतेजनामे गलेको चुमते) सादीके बाद भी चुदेगी मुजसे..? हंम..?

नीलम : (कांपती आवाजमे) हां.. जब मन करे चोदलेना मुजे.. आपसे सारी जींदगी चुदवाती रहुगी.. मेरे सब बच्चे हमारे होगे.. आइ प्रोमीस..

लखन : (बुब्सको चुमते) तो फीर धिरेनको क्या जवाब दोगी..?

नीलम : (जोरोसे कमर हीलाते) उस नामर्दका नाम मतलो अभी.. मे सब मेनेज करलुगी.. येस.. येस.. जीजु.. मे फीरसे आने वाली हु.. ओर जोरसे चोदो.. मसल डालो मुजे..

नीलमने फीरसे लखनको बाहोमे भीच लीया ओर जोरोसे होठोको चुमते अ‍ेक बार फीर जडने लगी.. ओर लखनके लंडको भीगोते सुस्त पड गइ.. लेकीन लखनने हाथके बल उचा होते नीलमके दोनो पैर अपने कंधेपे रखलीया.. ओर नीलमको जोरोसे चोदने लगा..





नीलमकी चुतकी नाजुक पंखुडीया ओर फील गइ ओर नीलम चदर पकडते छटपटाती रही.. दोनो काफी देरसे चुदाइमे मसगुल थे.. दोनोके चहेरे पसीनेसे भीग चुके थे.. अ‍ैसा अहेसास उनको धीरेनसे चुदाइ करवाते कभी नही हुआ था.. आखीर लखन जटसे नीलमके उपर लेट गया..

लखन : (कांपती आवाजमे) नीलु.. आइ अ‍ेक कमींग.. कहा नीकालु..?

नीलम : (जोरोसे बाहोमे भीचते) अंदर.. जीजु.. अंदर नीकालो.. मे इसे अंदर महेसुस करना चाहती हु.. मेरे पास आइपील हे.. फीकर मत करो..

कहा तो लखन नीलमके होठोसे लीपलोक करते जोरोसे अपनी कमर हीलाने लगा.. तो नीलम भी समज गइ.. ओर लोप लोक करते बडी आंख करते लखनकी ओर देखते अपनी कमर हीलाने लगी.. तभी लखन अपनी कमरको जटके देने लगा..



 
तो नीलम अपनी बच्चेदानीपे लखनका गरम विर्य महेसुस करने लगी.. ओर लखन नीलमकी चुतमे पीचकारीया छोडते जडने लगा.. तभी लखनका पानी अपने बच्चेदानीपे महेसुस करते नीलम अ‍ेक बार फीर कांपने लगी.. ओर लखनके साथ जडने लगी..





दोनोका कामरस नीलमकी चुतसे बहार नीकलने लगा.. ओर कुछ ही देरमे लखन नीलमके सीनेपे ढेर हो गया तो नीलम उनकी पीठको सहेलाने लगी.. दोनो अपनी अपनी सांसको दुरस्त करते कुछ देरके लीये अ‍ैसे ही पडे रहे.. फीर नीलम लखनके सरको सहेलाते उनके होठोको चुम लेती हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जानु.. थेन्क्यु वेरी मच.. आखीर आपने मुजे ओरत बना ही दीया..

लखन : (होंठ चुमते) क्यु.. तो तुम ओरत नही थी..? उस कमीनेके साथ तो बहुत मजे कीये हे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. पुनो दीदीने उनको अ‍ैसे ही नही छोड दीया.. खुद मुजे भी फील नही हो रहा था तो पुनोदीदको क्या खाक ओरत बनायेगे..?

लखन : (सामने देखते) मतलब..? क्या वो तुजे संतुस्ट नही करता..?

नीलम : (नामे गरदन हीलाते) इसीलीये तो उनके साथ बीन्दास्त चली जाती थी.. क्या आप ओर पुनोदी पहेली बार मीले तब उनको खुन नही नीकला था..? फीर भी यकीन ना होतो नीचे देखलो.. आज सही मायनेमे मेरा कौमार्य भंग हुआ हे.. ओर वो भी मेरे पहेले पतीसे.. इसीलीये तो मेरी सादीसे पहेले आपसे मीलना चाहती थी..

लखन : (जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह नीलु.. आइ लव यु सो मच.. मुजे यकीन नही हो रहाकी तुम मुजसे इतना प्यार करती हो.. तो फीर क्यु अपनी जींदगी दावपे लगा रही हो..? करले मुजसे सादी.. मे तुजे भी अपना लुगा..

नीलम : (आंख गीली करते) नही जीजु.. आपके प्यारके लीये थेन्क्स.. मे वादा करती हु जींदगी भर आपसे प्यार करती रहुगी.. लेकीन मेरी भी कुछ मजबुरी हे.. कुछ नइ जीम्वेवारी मीली हे.. सोरी.. हम सादी नही कर सकते..

लखन : (गालको चुमते) अ‍ैसी क्या मजबुरीया हे जो तु उस नामर्दसे सादी कर रही हे.. क्या इस बारेमे भी पुनोसे चर्चा हुइ हे..?

नीलम : (मुस्कुराते हांमे गरदन हीलाते) हां.. बहुत सारी.. जीजु.. जीस तराह बाबाने पुनोदीको कुछ जीम्वेवारी दीथी.. उसी तराह मुजे भी मंजु मोम ओर पुनोदीने कुछ जीम्वेवारी दीहे.. उसे नीभाना हे..

लखन : (सामने देखते) मुजे बता सकती हे कैसी जीम्वेवारी..?

नीलम : (मुस्कुराते होठ चुमते) हंम.. बता सकती हु.. चंदा मोमको सम्हालने की.. हमारे विजयको सम्हालनेकी.. आपको भीतो सम्हालुगी.. क्या इस बीवीको मीलने नही आओगे..?

लखन : (मुस्कुराते) आउगा.. जरुर आउगा.. जब तु बुलायेगी आजाउगा.. थेन्क्स नीलु.. तुम हमारे परीवारके लीये इतना कुछ कर रही हे..

नीलम : (आंख गीली करते) जीजु.. बस.. मेरा अ‍ेक काम करना..

लखन : (होंठ चुमते) हंम.. बोल.. मे तेरे लीये सबकुछ करुगा..

नीलम : (सामने देखते) बस.. ओर कुछ नही.. आप मम्मीका खयाल रखना.. बहुत दुख जेले हे उसने..

लखन : (गालको चुमते) नीलु.. आइ प्रोमीस.. तुम दोन मां बेटीका हम जींदगीभर खयाल रखेगे.. क्युकी तुम दोनो ही हमारे परीवारका हीस्सा हो.. ओर कुछ चाहीये तो बोल..

नीलम : (जोरोसे बाहोमे भीचते) नही जीजु.. ओर कुछ नही चाहीये.. बस.. हम दोनो मां बेटीको आपका प्यार अ‍ैसे ही मीलता रहे.. आपको पता हे..? मम्मी खुद चाहती हे की मे आपके साथ रीलेशन रखु.. वो हम दोनोके बारेमे सबकुछ जानती हे..

लखन : (सामने देखते) क्या..?

नीलम : (सरमाते हांमे गरदन हीलाते) हां.. हम मां बेटीके साथ अच्छी सहेलीया भी हे.. मम्मी को पता हे मे आपके साथ यहा हु.. वो चाहती हेकी मे ओरत बननेका सुख आपसे पाउ.. जीजु.. आज मे बहुत खुस हु.. देखो.. अभी भी अंदर सख्त महेसुस हो रहा हे..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीरसे सुरु करे..? हंम..

नीलम : (सामने देखते) अभी..? थके नही हो क्या..? मेरी इतनी लंबी चुदाइ कभी नही हुइ..

लखन : (होंठ चुमते) नही.. तुजे नही पता जबतक मे मेरी बीवीको लगातार दो बार चोद नही लेता तबतक इसे बहार नही नीकालता.. तो तुम भी फीरसे चुदनेके लीये तैयार होजाओ..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. तब तो ये तीन चार दिन नीकालना मुस्कील होजायेगा.. आप मेरी हालत बीगाड दोगे.. अभी पुरी रात जागना हे.. क्या कल हम आराम करनेके बाद कही लोंग ड्राइवपे चले..?

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. तबतक तुजे आराम भी होजायेगा.. ठीक हे हम चलेगे.. लेकीन कहा..?

नीलम : (कातील नजरोसे) जहा आपका मन करे.. अ‍ैसी जगाह.. जहा सीर्फ हम दोनोके सीवा कोइ नाहो.. बीच जंगल.. जहा नदी हो.. अ‍ेक बार खुले आसमानके नीचे.. आप समज गयेनां..?

लखन : (गलेको चुमते) हंम.. समज गया.. तेरी भी क्या क्या फेन्टासी हे.. ओर कुछ होतो बता..?

नीलम : (आंख मारते मुस्कुराते) हे.. अ‍ेक बार नदीमे.. पानीके अंदर.. फीर कारमे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) ये कैसी फेन्टासी हे तेरी.. ठीक हे चलेगे.. अब सुरु करे..?

नीलम : (सरमाते) हंम.. लेकीन इस बार धीरे धीरे.. आप बहुत जोरोसे करते हो..

ओर अ‍ेक बार फीर लखन ओर नीलमके बीच चुदाइ सुरु होगइ.. इस बार भी नीलमको दो दो बार जडाके तीसरी बार दोनो साथमे जडे.. दुसरी बार दोनोके बीच काफी लंबे समय तक चुदाइ चली.. लखनने नीलमके अ‍ेक अ‍ेक अंगको ढीला करदीया.. उनकी सारी गर्मी नीकाल दी..





फीर भी नीलम लखनका साथ देती रही..आजवो बहुत खुस थी.. अब नीलु लडकी नही रही थी.. वो ओरत बन चुकी थी.. फीर लखनने लंडको नीकाल दीया.. तो दोनोका कामरस नीलमकी चुतसे बहार बहेने लगा.. नीलमने जटसे अपने नीकरदो चुतपे दबा दीया..

तो पुरा नीकर दोनोके कारस ओर खुनसे भीग गया.. नीलम उसे देखकर सरमा गइ.. वो बडी मुस्कीलसे बेडपे बैठ गइ.. ओर बेडकी चदरको देखने लगी.. बीचमे दोनोके कामरसके साथ खुनका बडा धबा हो गया था.. ओर नीलम लखनकी ओर देखते हसने लगी.. तभी लखन उसे गोदमे उठाकर बारुममे ले गया..
 
तो दुसरी ओर आज सहेरमे भी सबानाके घरपे खुसीका माहोल था.. सुबह दस बजे ही सबानाका रीजल्ट आ गया था.. ओर वो अच्छे परसेन्टसे पास होगइ थी.. जीनकी उसने उमीद भी नही थी.. रीजल्ट आते ही सबसे पहेले उन्होने कोलेजसे ही साहीलको फोन करदीया..

ओर अपने पास होनेकी खबर दी.. तो साहीलकी खुसीका कोइ ठीकाना नही था.. फीर सबानाने सृतीसे भी बात करली.. फीर रीजल्ट लेकर घरपे आगइ ओर जरीनाके गले लगकर उनको खुस खबर सुनाइ.. सुनकर जरीनाकी आंखोमे भी खुसीके आंसु आगये..

उनके पीता नोकरीपे जा चुके थे.. तो सबानाने उनको भी फोन करके बतादीया.. तो वोभी खुसीसे रो पडे ओर सामको आते वक्त मीठाइया लेकर आनेकी बात करने लगे.. फीर सबाना रीजल्ट लेकर सायबर काफे चली गइ.. क्युकी सृतीने रीजल्ट आते ही उसे आवेदन करनेको कहा था..

उनको जैसे सृतीने बताया उसी साइडपे जाकर उसने ओन लाइन बेंगलोरके लीये आवेदन कर दीया.. तीन दिनके बाद वहासे पहेली सुची नीकलने वाली थी.. तो सबाना ओन लाइन अ‍ेन्टरर्स फीस डालदी.. ओर वापस घरकी ओर आने लगी.. आते वक्त वो बहुत ही खुस थी.. तभी अ‍ेक ओरत बुर्केमे सामनेसे आ रही थी.. ओर उसने पास आते ही सबानाका हाथ पकड लीया..

सबाना : (थोडा गभराते धीरेसे) आप कौन..? छोडीये मेरा हाथ..

सायरा : (चहेरेसे नकाब उपर करते) सबाना.. मे सायरा..

सबाना : (थोडे गुस्सेमे) कौन सायरा..? मे आपको नही जानती.. जाने दीजीये मुजे..

सायरा : (आंख गीली करते) यार इतनी नाराज हो मुजसे..? आइ अ‍ेम सोरी.. माफ करदो हमे..

सबाना : (आंख गीली करते) माफ..? क्या आपको लगता हे आप दोनो माफीके लायक हो..? मेरा.. सपना तोडके गये हो.. अ‍ेक बार भी मेरे बारेमे नही सोचा..? मेरा तो छोडो कमसे कम अम्मी अबुकी इजतके बारेमे तो सोचते..

सायरा : (आंसु बहाते) सबु.. यहा नही.. चल यही पार्कमे बैठकर बात करते हे.. मे तुजे सबकुछ बता दुगी..

सबाना : (हाथ जटकते) मुजे कही नही आना.. आप चली जाओ.. ओर मुजे भी जाने दो..

सायरा : (आंसु बहाते) सबु.. प्लीज..अमीकी कसम.. सीर्फ अ‍ेक बार.. फीर चली जाना..

सबाना : (गुस्सेमे) अमीकी कसम क्युदी..? ओह.. मेतो भुल ही गइ.. आपको क्या फर्क पडता हे वो जीये या मरे.. चलीये..

सायरा : (आंसु पोछते) ताने मत मारो यार.. आओ.. यही अंदर.. दो मीनीट बात करते हे.. फीर चली जाना.. चलो..

कसमकी वजहसे सबाना सायराके साथ अंदर पार्कमे चली जाती हे.. ओर अ‍ेक बेंचपे बैठ जाती हे.. तो सायरा भी हीचकीचाते सबानके पास बैठ जाती हे ओर उनको अ‍ेक नजरसे देखने लगती हे.. तो सबाना असहज महेसुस करने लगी.. तभी..

सबाना : (थोडा सख्त लहेजेमे) हां बोलो.. क्या कहेना चाहती हे आप..?

सायरा : (हाथ थामते) सबु.. तब हालात ही अ‍ैसे थे हमे रातको ही घर छोडना पडा.. अमीने कहा था.. अभीके अभी दोनो मेरी नजरोके सामनेसे दुर होजाओ.. तो हमे रातको ही घर छोडना पडा..

सबाना : दोनो कीतने सालोसे रीलेशनमे थे..?

सायरा : (नजरे जुकाते) पीछले चार सालोसे.. जब मे हाइस्कुलमे थी.. तबसे..

सबाना : (सामने देखते) इस चार सालोमे भाइने अ‍ेक बार भी नही सोचाकी सबानाकी पढाइका क्या होगा..? मेरा डोक्टर बननेका सपना चुर चुर करदीया आपने.. येतो अच्छा हुआ. सही वक्तपे साहील भाइ ओर लखन भैया आगये.. ओर उसने मेरी फीसके पैसे देदीये.. वरना मेरा क्या होता..?

सायरा : (सामने देखते) क्या हमारे साहीलने पैसे दीये..? ओर ये लखन भैया.. उनके दोस्त हेनां..? वो छोटे ठाकुर..

सबाना : (सख्त नजरोसे) हां.. हमारे गांवके छोटे ठाकुर.. साहील भैयाके अच्छे दोस्त हे.. अब वो यही रहेते हे..

सायरा : (हाथ थामते) सबु.. तु पैसोकी चीन्ता मत कर.. हमारा साहील मीलाथा.. हमारे बडे भाइसे..

सबाना : (सामने देखते) क्या..? हमारे बडे भाइ..? आप अपने सोहरको अब भी भाइ कहेती हो..? सरम नही आती..?

सायरा : (नजरे चुराते) हंम.. उनको मीया बीवीसे ज्यादा भाइ बहेनका रीस्ता पसंद हे.. ज्यादातर मे उनको नामसे ही बुलाती हु.. ओर वो भी..

सबाना : (दुसरी ओर देखते) ठीक हे.. वोतो तुम दोनोका आपसी मसला हे.. बोलो.. क्या केह रहे थे..?

सायरा : साहील भाइ केह रहा था दोनो हमारे घरपे आजाओ.. क्युकी अब अम्मी अबु गांव जा रहे हे.. सबु.. हमने फ्लेट खरीदनेके लीये लोन लीया था.. वो अ‍ैसे ही पडे हे.. मे भाइको कहुगी आपको दे देगे..

सबाना : (थोडी सख्तीसे) नही.. अब आपकी महेरबानीकी हमे कोइ जरुरत नही.. मेरी हर जरुरतको पुरी करनेके लीये मेरा साहील ही काफी हे..

सायरा : (आस्चर्यसे देखते) मेरा साहील..? मतलब..?

सबाना : (सख्तीसे) हां.. मेरा साहील.. मेरा होने वाला सौहर.. डोक्टर होजानेके बाद मे साहील भाइसे सादी करलुगी..

सायरा : (आस्चर्यसे देखते) सबु..? तुम पागल होगइ हो क्या..? वो अ‍ेक अनपढ.. गावंका लडका.. मानाकी बडी अम्माने उसे गोद लीया हे.. लेकीन हेतो हमारा सगा भाइ..

सबाना : (स्खतीसे गुस्सेसे) हमारा सगा भाइ..? ये सब ज्ञान आप मुजे दे रही हो..? मत भुलो बडे अबुने उसे बाकायदा गोद लीया हे.. ओर आप उसे अनपढ गंवार केह रही हो..? पढे लीखे बेजवाबदार इन्जीनयरसे तो ज्यादा मेरा अनपढ गवार भाइ ही लाख गुना ज्यादा अच्छा हे.. कमसे कम हमारे परीवारकी जीम्वेवारी तो समजता हे.. ओर मे खुस नसीब हुकी मेने अपने जीवन साथीका सही चुनाव कीया हे..

सायरा : (नजरे चुराते) सबु.. मेरे कहेनेका ये मतलब नही था.. तुजे हर्ट हुआ हे तो आइ अ‍ेम सोरी..

सबाना : (गस्सेसे खडी होते) मुजे आपकी सोरीकी कोइ जरुरत नही हे.. मे जा रही हु.. ओर हां.. अ‍ेक बात ओर.. आजसे हम दोनोका बहेनका रीस्ता खतम.. आपको मेरी भाभी बननेका बहुत सौक थाना..? खुदा करे अगर हम दुबारा मीले तो अब आपको भाभी ही कहुगी..

कहेते सबाना बीना मुडे चली गइ.. ओर सायरा आंसु बहाते उनको जाते हुअ‍े देखती रही.. उसे सबानाकी अ‍ेक अ‍ेक बात कांटेकी माफीक चुभती रही.. सायरा भारी कदमोसे अपने घरकी ओर चल पडी.. तो सबाना भी घरपे आगइ.. ओर सीधे अपने कमरेमे चली गइ.. उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. लेकीन जल्दही अपने आपको सम्हाल लीया.. ओर मुह धोकर अपनी अम्मीकी मदद करने लगी.. उसने सायरासे हुइ मुलाकातके बारेमे अपनी अम्मीको सब बतानेका फैसला करलीया.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६७

कहेते सबाना बीना मुडे चली गइ.. ओर सायरा आंसु बहाते उनको जाते हुअ‍े देखती रही.. उसे सबानाकी अ‍ेक अ‍ेक बात कांटेकी माफीक चुभती रही.. सायरा भारी कदमोसे अपने घरकी ओर चल पडी.. तो सबाना भी घरपे आगइ.. ओर सीधे अपने कमरेमे चली गइ..

उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. लेकीन जल्दही अपने आपको सम्हाल लीया.. ओर मुह धोकर अपनी अम्मीकी मदद करने लगी.. उसने सायरासे हुइ मुलाकातके बारेमे अपनी अम्मीको सब बतानेका फैसला करलीया.. तभी.... अब आगे

जरीना : (मुस्कुराते) बेटा.. क्या हुआ..? तु दाखलेके लीये गइथीनां..?

सबाना : (मुस्कुराते) हां मम्मी.. सब अच्छेसे होगया.. तीन दिनके बाद सुची नीकलेगी.. अगर इनमे मेरा नाम आया तो मुजे जाना होगा..

जरीना : (हसते) वैसे भी तु कइ दिनोसे अपने जानेकी तैयारीया तो कर रही हे.. क्या तुमने साहीलको फोन कीया..?

सबाना : (सरमाते धीरेसे) हंम.. उसे भी बतादीया.. की मे पास होगइ हु.. सृतीदीसे भी बात करली..

जरीना : (सरारती मुस्कानसे) बस.. सीर्फ इतना ही बताया.. की मे पास होगइ हु.. ओर कुछ नही..?

सबाना : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) मोम.. ओर क्या बात करती..? बाकी कोइ बात नही हुइ समजी..?

जरीना : (सरारतसे हसते) होने वाला सौहर हे.. उनसे अच्छेसे बात करलेती.. क्या दीकत हे..?

सबाना : (आंख गीली करते) मोम.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? कही मे भाइसे सादी करके कुछ गलत तो नही कर रही..?

जरीना : (आस्चर्यसे सामने देखते) क्यु..? अ‍ैसा क्यु बोल रही हे..? कीसीने कुछ कहा क्या..?

सबाना : (सामने देखते धीरेसे) मोम.. अभी मे दाखला करवाके आ रही थी तो रास्तेमे दीदी मीली..

जरीना : (सब काम छोडकर सामने घुमते) क्या..? सायरा..? क्या केह रही थी..?

सबाना : (धीरेसे) यही.. साहील भाइ कादीर भाइसे मीले थे.. ओर घर आनेकी बात कर रहेथे..

जरीना : (थोडी सखतीसे) ओर कुछ..?

सबाना : (नजरे चुराते धीरेसे) थोडी बहेस हु.. तो मेने केह दियाकी मे साहील भाइसे सादी कर रही हु.. तो सगे भाइकी नसीहत देने लगी..

जरीना : (सामने देखते) क्या..? तो केह देना चाहीयेनां की कमीनी तुमने क्या कीया हे.. फीर तुमने क्या कहा..?

सबाना : (सामने देखते धीरेसे) तो फीर मेने भी केह दीया की आपने क्या कीया हे..? तो चुप होगइ.. मोम.. हम सही कर रहे हेनां..?

जरीना : (घुमते सबानाके चहेरेको थामते) बेटी.. मुजे सीर्फ इतना बतादे.. तु क्या चाहती हे..? क्या हमारा साहील तुजे पसंद तो हेनां..? तुम अ‍ेक दुसरेको महोबत करते हो..? मुजे सब सच बतादे.. बाकी सब मे देख लुगी..

सबाना : (आंखोमे देखते) हां मोम.. लास्ट बार आये तब हम अ‍ेक दुसरेसे अपनी महोबतका इजहार कर चुके हे.. (नजरे जुकाते) ओर मे उसे पसंद भी करती हु.. मेने तैय करलीया हे.. अब सादी करुगी तो साहील भाइसे.. वरना अ‍ैसे ही रहुगी..

जरीना : (खुसीसे मुस्कुराते) मेरे साहीलको इतनी महोबत करती हे..? चल ठीक हे.. अब तु सब मुजपे छोडदे.. मे ओर सलमा दीदी सब देख लेगे.. तुजे अपना साहील मील जायेगा.. सायराकी बातको दीलसे लेनेकी कोइ जरुरत नही हे..

सबाना : (जोरोसे बाहोमे भरते) मोम.. आइ लव यु.. मे अबु ओर आपके खीलाफ कोइ कदम उठाना नही चाहती..

जरीना : (आंख गीली करते) कास.. इतनी समजदारी सायरामे होती.. कमसे कम अ‍ेक बार मुजे बता देती.. मे खुसी खुसी उनका नीकाह कादीरसे करवा देती.. अ‍ेक बार मीलनेदे उसे.. कमीनीको सब बता दुगी..

सबाना : (जटसे अलग होते) लेकीन मोम.. वो दोनो सगे भाइ बहेन हे.. सबसे कैसे लडती..?
 
जरीना : (आंख गीली करते) बेटा.. सलमा दीदी केह रही थी अब हमारे गांवमे बहुत कुछ बदल चुका हे.. खुद साहीलके सभी दोस्तोने अपनी बहेनसे सादी करली हे.. तो हम गांव चले जाते हे.. तेरे पापाको कुछ समजानेकी जरुरत ही नही पडेगी.. कुछ दिन सबर हीतो करना हे.. पता नही अब उनका सब करेगा कौन..?

सबाना : (सामने देखते) मतलब..? कसका..?

जरीना : (सामने देखते धीरेसे) सायराका.. सबु.. अब तो तेरे पापा उनसेतो कोइ रीस्ता रखने वाले हे नही.. कल अगर वो पेटसे होगइ.. तो कहा जायेगी..? उनका सब कौन करेगा..? यहा अ‍ेक समस्या थोडीना हे.. हम ओरतोको कीतनी समस्याये होती हे..

सबाना : (कुछ सोचते) मोम.. आप इनकी चीन्ता मत करो.. यहा लखन भैयाकी होने वाली बीवी हेनां.. सृती दीदी.. मे उनसे बात करलुगी..

जरीना : (आस्चर्यसे देखते) छोटे ठाकुरकी बीवी..? लेकीन वो यहा आइथी तब तो वो उनकी भाभी थी..?

सबाना : (मुस्कुराते) बडे ठाकुरसे उनका तलाक हो गया हे.. सीर्फ इनका ही नही.. अपनी बहेनका भी उनके पतीसे डीवोर्स हो चुका हे.. अब दोनो भाभी ननंद लखन भैयासे प्यार करने लगी तो अब लखन भैया सृतीदीदी ओर पुनम दीदीसे सादी कर रहे हे.. हें..हें..हें..

जरीना : (हसते अपना सर पीटते) या खुदा.. ये सब क्या हो रहा हे..? अब बडे घरके लोग ही ये सब कर रहे हेतो सायरा ओर कादीरने कीया तो क्या गुनाह हो गया..? चलो.. अब तुतो चली जायेगी.. तो हमे भी अपनी पेकींग करनी पडेगी.. तेरा साहील बोलके गया हे.. जब तुजे छोडने आयेगा उसी दिन हमे गांवके लीये नीकलना हे..

सबाना : (जुठे गुस्सेसे बाजुमे मारते) मेरा साहील..? आपका कुछ नही लगता..?

जरीना : (सामने देखते हसते) हां.. पहेले सगा बेटा था मेरा.. बडे भैयाने गोद लीया तो मांसे चाची होगइ उनकी.. अब मेरा दामाद होजायेगा.. चल.. खाना बना तेरे अबु आते ही होगे..

दोनो आपसमे मस्ती मजाक ओर बाते करते खाना बनाती रही.. इधर लखनने नीलमकी गरम पानीसे चुतकी सीकाय करदी.. नीलमने अपनी पर्ससे अ‍ेक पेइन कीलरकी गोली नीकालकर खाली.. फीर नाइट गाउन ही पहेना.. वोभी लखनने दिलवाइ पारदर्शी.. इनमे नीलमका अ‍ेक अ‍ेक अंग साफ दीखाइ देरहा था.. नीलम लंगडाते हुअ‍े कीचनकी ओर जाने लगी.. तो लखन उनको मुस्कुराते देखता रहा..

नीलम : (कातीलाना मुस्कुराते) जीजु.. हसो मत.. ये सब आपकी ही महेरबानी हे.. आपने तो मेरी चाल ही बदलदी.. अभी भी नीचे जलन हो रही हे.. अब खाना नही खाना क्या..? चलो..

लखन : (जटसे दोडकर आते नीलमको गोदमे उठाते) अरे चलो मेरी छोटी रानी.. मे ले चलता हु..

नीलम : (गलेमे हाथ डालकर गाल चुमते) स्वीट बोय.. मेरा पती राजा.. चलो मे खाना गरम करदेती हु.. फीर खा लेते हे.. अब जोभी होगा सब रातमे.. हमारी सुहागरातमे समजे..? अब कोइ सरारत नही..

लखन : (कीचनके पास खडे करते) हंम.. ठीक हे.. तुम रात तक रेह पाओगी..?

नीलम : (हसते नांमे गरदन हीलाते लीपट जाती हे) पता नही.. ये तीन दिन मे मेरे जानुको लुट लुगी.. ये तीन दिन मेरी लाइफका गोल्डन पीरीयड हे.. क्या कोइ लडकी उसे छोडती हे..? पर.. अब थोडा आराम करके.. प्लीज..

नीलमने वही खाना गरम करलीया.. फीर दोनो डाइनींगपे आगये.. तो नीलम खाना नीकालकर लखनकी गोदमे ही बैठ गइ.. दोनो अ‍ेक दुसरेको खीलाते रहे.. ओर प्यार भरी बाते करते अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमते रहे.. फीर खाना खालीया तो लखनने सब समेट लीया..

फीर नीलमको गोदमे उठाकर फीरसे रुममे चला गया.. वहा दोनो अ‍ेक दुसरेसे चीपकके देर साम तक सोते रहे.. वहा गांवमे पुनम इन दोनोपे नजर गडाये हुअ‍े बैठी थी.. आज उसे फीरसे नीलमसे थोडी ज्वेलेसी फील होने लगी.. ओर लखनपे बहुत प्यार आने लगा..

क्युकी लखन हर ओरतको अ‍ैसे ही समर्पीत होकर प्यार करता था की ओरतको लगेकी वो सीर्फ उनको ही प्यार करता हे.. नीलम ये सब सोचते मुस्कुराने लगी.. उनको सबके बारेमे पताथा की आगे क्या कुछ होने वाला हे.. उसने इस बारेमे नीलमसे भी बहुत कुछ बाते करली थी..

उसे पता थाकी आने वाले दीनोमे वो वीजयको बहुत अच्छेसे सम्हालने वाली थी.. सुबह नीलमके जानेके बाद दो पहोरको भानु भी घरपे खाना खाने आगया.. खाना खानेके बाद सरला ओर रमाको लेकर देवायतके घरपे आगया.. कुछ देर बैठकर दोनोको छोडके खेतोपे चला गया..

सृती अपना सब सामान लेकर आइ थी.. दो पहोर खानेके बाद ही उसने पहेले भुमीकाकी सोनोग्राफी करली ओर उसे पुरा चेक करलीया.. फीर चंदा.. पुनम.. चारु.. नीशा.. रश्मी ओर वंदनाको भी चेक करलीया.. ओर रमा आइ तो उसे भी चेक करलीया..
 
सृती : (चेक करके) भाभी.. सब मस्त हे.. मे कुछ गोली देती हु सुबह साम अ‍ेक अ‍ेक खा लेना.. हम अगले महीने फीर चेक करलेगे..

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. नीलम इतनी बडी होगइ.. अब इस उमरमे बच्चा..? थोडा अजीब लग रहा हे..

सृती : (मुस्कुराते) अरे कुछ अजीब नही.. देखा नही मेरी मम्मी भी पेटसे हे.. तो आप तो अभी छोटी हो.. अभी तो दो तीन बच्चे ओर पैदा कर सकती हो.. इतनी भी बडी नही हुइ.. हें..हें..हें..

रमा : (मुस्कुराते) अरे.. यही होजाये तो भी अच्छा हे.. कमसे कम माजीके ताने तो सुनने नही पडेगे..

सृती : (मुस्कुराते) ये काकी भीनां.. बडी उमरकी ओरतोका बच्चोसे कभी जी नही भरता..

फीर दोनो बहार आगइ.. चंदा नीर्मला भुमीका सबलोग बैठे थे.. गांवकी ओरत चली गइ तो मंजु अपने रुममे चली गइ.. ओर मौका देखकर रमा भी धीरेसे उठकर मंजुके पीछे रुममे चली गइ.. देखा तो रुम खाली था.. मंजु बाथरुममे गइ थी.. अंदर पानीकी आवाज आ रही थी..

तो रमा धीरेसे दरवाजा बंध करके बेडपे जाकर बैठ गइ.. ओर मंजुका इन्तजार करने लगी.. जैसे ही मंजु बहार नीकली रमा जटसे खडी होगइ.. मंजु रमाको देखकर सबकुछ समज गइ की रमा इधर अकेलेमे मीलने क्यु आइ हे.. तभी रमा मंजुके पैरमे गीरते रोने लगी..

मंजुला : (कंधेसे पकडकर खडी करते) भाभी.. ये आप क्या कर रही हो..? क्या हुआ..?

रमा : (हाथ जोडते) दीदी.. मुजे माफ करदो.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ.. मे पैसोकी लालचमे अंधी होगइ थी..

मंजुला : (मुस्कुराते हाथ थामते) लेकीन क्या हुआ..? बताइअ‍ेतो सही..?

रमा : (रोते) दीदी.. क्यु सर्मीन्दा कर रही हे..? मुजे पता हे आपको सबकुछ पता चल जाता हे.. मे पापी हु.. आपके खानदानकी गुनहगार.. मुजे माफ करदो..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. माफ करदीया.. क्युकी अ‍ैसी नादानी..? पैसे चाहीये तो हमसे कहेती.. हमने कभी आप लोगोको जुदा नही समजा.. आपको हमारे परीवारका हीस्सा ही मानते हे..

रमा : (नामे गरदन हीलाते) अब कुछ भी नही चाहीये.. मुजसे बहुत बडी गलती होगइ.. मुजे माफ करदो.. मे लालचमे अंधी होगइ थी.. आपको तो पता हे मे कीस खानदानसे आइ हु..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) भाभी.. माफ करदीया.. रोइअ‍े मत.. बच्चेपे बुरा असर पडता हे.. प्रेगनेन्ट होनां आप..?

रमा : (नजरे चुराते आंसु पोछते) हां दीदी.. आपको तो सब पता हे.. प्लीज.. कीसीसे कहीयेगा नही.. मेरी भी मजबुरी थी.. मेरी सासको बच्चा चाहीयेथा.. ओर ये बच्चा..

मंजुला : (मुस्कुराते हाथ पकडकर बेडपे बीठाते) हंम.. जानती हु मे.. बैठीये इधर.. अपनी सेहतका खयाल रखीये.. ये मेरे बेटेकी नीशानी हे.. मेरे लखनकी.. प्यार करती हेनां उसे..?

रमा : (नजरे जुकाते हांमे गरदन हीलाते) हंम.. आइ अ‍ेम सोरी.. आपसे क्या छीपाना..? अब आपके देवरसे कुछ नही होता.. ओर मेरी सासको अभी भी बच्चा चाहीये..

मंजुला : (मुस्कुराते) भाभी.. मुजे सब पता हे.. वो गलत राहपे चल पडे हे.. मेरी भावुने भी इसीलीये उनको छोडा हे.. लेकीन आप गभराइअ‍े नही.. ये राज सीर्फ मेरे तक सीमीत रहेगा.. मेरी पुनोभी सब जानती हे.. हम चारोके अलावा कीसीको पता नही चलेगा.. ओर आपतो जानती हेना हम सब कौन हे..?

रमा : (हांमे गरदन हीलाते धीरेसे) हां.. मुजे पुनोदीदी ओर नीलुने सब बताया.. क्या हम सब वाकइ वो सब हे जो नीलुने बताया हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. नीलु बडी प्यारी बच्ची हे.. उनकी चीन्ता मत करना.. भलेही वो कही ओर सादी करले.. रानीतो मेरी लखनकी ही कहेलायेगी..

रमा : (चोंकते सामने देखते) उनका सब पता हेनां आपको..? क्या सचमे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सब पता हे.. आज उनकी जींदगीका अनमोल दीन हे.. वो अभी मेरे लखनके पास ही हे.. समज गइनां..? सुना हे दोनो मां बेटी कम.. सहेलीया ज्यादा हो..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) हां.. अ‍ैसा लगता हे मे उनकी मां नही वो मेरी मां हे.. मुजे सब ज्ञान देती हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. जाइअ‍े अब बाथरुममे जाकर हुलीया ठीक कर लीजीये.. ओर भुल जाइअ‍े इन सब बातोको.. जो होता हे होने देजीये.. ओर देखती जाइअ‍े.. ओर कभी कुछ जरुरत पडे तो कहीयेगा..

रमा : (खडी होते) जी दीदी.. थेन्क्यु..

रमा बाथरुममे जाकर ठीक होगइ.. ओर मंजुके साथ बहार आगइ.. दोनो अ‍ैसे बहार नीकली जैसे अंदर कुछ हुआ ही नाहो.. रमा काफी रीलेक्स फील कर रही थी.. पुनमको भी सब पता चल गया थाकी अंदर मंजुके रुममे क्या हुआ हे.. फीर वो भी हस हसके रमाके साथ बाते करने लगी..
 
फीर साम होते ही भानु सरला ओर रमाको लेकर वापस घर चला गया.. तो दुसरी ओर साम ढल चुकी थी.. ओर लखन नीलम जाग गये.. नीलमने चाइ बनाइ.. ओर नास्ता नीकाला.. फीर दोनोने चाइ नास्ता करलीया ओर दोनोने साथमे सावर लीया.. लखन नीलमकी मस्ती करने लगा..





तो नीलमने उसे दुर रखा.. फीर नीलम घरसे अपनी मम्मीका लाल जोडा लेकर आइथी वो पहेन लीया.. तबतक लखनने फोन करके खाना ओर्डर कर दीया था.. नीलमने लखनको भी अच्छे कपडे पहेननेको केह दीया.. जब दोनो कंपलीट हो गये तो नीलम लखनको लेकर घरके मंदीरके सामने चली गइ..





लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. क्या कर रही हो..? ये सादीका जोडा..

नीलम : (मुस्कुराते) हां.. जीजु.. आज हमारे भगवानके सामने हमेसाके लीये आपकी होजाना चाहती हु.. वो भी कायदेसे..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन तुम तो सादीके लीये मना कर रही थी.. अब क्या हुआ..?

नीलम : (हाथ मे डीबी लेकर मुस्कुराते) हां.. लेकीन दुनीयाके लीये.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगी.. सीर्फ औपचारीक की सादी.. क्या कहेते हे.. वो.. गांधर्व विवाह.. अ‍ैसे ही करते हेना सब..? लीजीये.. मेरी मांग भर दीजीये..

लखन : (चुटकी सींदुर लेते सामने देखते)......

नीलम : (मुस्कुराते) देख क्या रहे हे..? भरदो मेरी मांग.. भले ही मे धिरेनसे सादी करलु.. ये मांग हमेसा आपके नाम ही भरेगी..

लखन : (इमोस्नल होते धीरेसे) नीलु.. इनसे तो अच्छा होता तुम मुजसे सादी ही कर लेती..

नीलम : (सामने देखते) नही जीजु.. कुछ जीम्वेवारीया हे जो मुजे नीभानी हे.. आप भर दीजीये मांग..





फीर लखनने नीलमकी मांग भरदी.. ओर दोनोने बारी बारी अ‍ेक दुसरेको पती पत्नी स्वीकार करलीया.. लखन नीलमको वहीसे गोदमे उठाकर होलमे आ गया.. दोनो सोफेपे बैठ गये तो नीलम लखनकी बाहोमे समा गइ.. दोनो काफी देर अ‍ैसे ही बैठे रहे..

अब साम ढल चुकी थी.. तभी दरवाजेकी घंटी बजी.. तो लखन चला गया.. देखा तो खानेका पार्सल आगया था.. ओर लखनने पैसे देकर दरवाजा बंध कर लीया.. तो नीलमने लखनके हाथोसे पार्सल लेलीया.. ओर लेकर कीचनमे गरम करने लगी..

नीलम : (अंदरसे मुस्कुराते) जीजु.. मे खाना नीकालती हु.. फीर हमारा प्रोग्राम सुरु करेगे..

लखन : (हसते) लगता हे तुम ठीक हो गइ हो.. अबतो दर्द नही हेनां..?

नीलम : (कीचनसे) दर्द ही जेलने तो आइ हु.. मेरी चीन्ता मत करो.. अब मे ओरत होगइ हु..

लखन : (डाइनींगपे बैठते) अगर तेरी मम्मीको पता चलाना तो तेरी खैर नही.. हें..हें..हें..

नीलम : (अपना सर पीटते बहार आते) हाये.. मे कैसे भुल गइ.. उनको फोन करना था.. अभी खानेके बाद बात करती हु..

लखन : (मुस्कुराते) क्या..?

नीलम : (कातील नजरोसे खाना नीकालते) यही.. आपकी लडकी अब लडकी नही रही.. ओरत बन चुकी हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अरे तु पागल होगइ हो क्या..? अ‍ैसी बाते कोइ बताते हे..?

नीलम : (मुस्कुराते खाना परोसते) आप यही हो.. हमारी बाते सुनलेना.. मे स्पीकरमे बात करुगी..

फीर लखन ओर नीलम डीनर करलेते हे.. नीलम कीचनका सभी काम नीपटा लेती हे.. तबतक लखन टीवी देखता.. ओर नीलम लखनके पास आकर बैठ गइ.. तो लखनने टीवी बंध करदीया.. ओर नीलमने अपनी मम्मीको फोन लगा दीया.. तो वहा रमा अकेली रुममे थी.. ओर भानु सरला बहार आंगनमे बैठे थे तभी नीलमका फोन आगया.. तो रमा मुस्कुराते उनसे बात करने लगी..

रमा : (मुस्कुराते धीरेसे) हां नीलु.. बोल.. दोनो पहोंच गये तो फोन भी नही कीया.. बोल..

नीलम : (स्पीकर ओन करते) मोम.. मेरी चीन्ता मत करो.. हम सहीसे पहोंच गये थे.. पहेले ये बताओ.. आप गइ थी वहा..?

रमा : (मुस्कुराते) हां.. मे ओर तेरी दादी.. दोनो तेरे पापाके साथ गये थे.. नीलु.. उसने मुजे माफ कर दीया.. वाकइ सबलोग कीतने अच्छे हे.. अच्छा ये बता.. इस वक्त कहा हे..? राधु दीदीके घर..?

नीलम : (लखनकी ओर देखते मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. वहा आप अकेली हो..? कोइ हे आसपास..?
 
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