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अपडेट-52
पूरा घर सजा हुआ था बहुत भीड़ थी बड़े बड़े लोग आये हुए थे, शहर की बड़ी बड़ी हस्तिया आई हुई थी, मंत्री जी भी आये थे और उनके साथ थी ननदनी,
ननदनी की जान बचाई थी तुषार ने और ननदनी ने जीवन का असली मजा भी तो लिया था तुषार के साथ, मंत्री जी को अंजलि के साथ मिलने में ज्यादा भलाई लगी, वही कमिश्नर भी आये हुए तो, कोमल जेल में थी, सरकारी गवाह बन चुकी थी, कमल भी जेल में था उस पैर इतने संगीन जुर्म लगे थे की उसे न बैल मिल सकती थीं ा hi किसी से मिलने की परमिशन थी,
वही अनीता और रिंकी भी आई हुई थी, तुषार ने बुलवाया था,
वर्षा और अलका भी आई हुई थी, सब एक से एक खूबसूरत लग रही थी,
अलका- दीदी हम यहाँ क्यों आये हैं हमे तो तुषार के पास जाना थान ा,
वर्षा- उनसे भी मिलेंगे
फिर जीने से उतरती हुई आई तीन परिया, सीमा दीपा और रूचि सबकी निगाहे उन्ही पैर रुक गई, क्या खूबसूरत लग रही थी, तीनो ने लांचा पहना हुआ था,
उनके hi साथ में थे कपिल और सचिन सूट में,
राजेश ने आज कुरता पायजामा पहना हुआ था, सभी पार्टी में बिजी थे, फॅमिली वाले शादी की तैयारी में मंडप सजा हुआ था दोनों दूल्हे अपनी जगह बैठ गए थे,
पंडित जी- दुल्हनों को बुलवाओ
दुल्हनों को बुलवाया गया रश्मि और आशिमा लाल रंग के लहंगे में बड़ी खूबसूरत लग रही थी, उनके साइड में दीपा और रूचि थी, जिनके सामने दुल्हन थोड़ी फीकी पद रही थी, तभी पीछे से आई ब्यूटी क्वीन, जिसे देख क्र पूरी पार्टी की सांसे hi रुक गई, वो थी अंजलि
कोई औरत हो या मर्द सबकी नजर अंजलि की तरफ थी, ऐसा लग रहा था जैसे कोई पारी उतर आई ह आसमान से,
दुल्हनों को उनकी जगह बैठा क्र तीनो भेने अंजलि के पास आ गई,
वह खड़े हद आदमी के मुँह पैर एक hi बात थी ये सब कितनी खूबसूरत हैं,
वर्षा और अलका भी अंजलि के पास आकर कड़ी हो gai,nanadani भी वर्षा के पास आ गई और धीरे से बोली वर्षा मेरी गलतियों के लिए मुझे माफ़ क्र देना, वर्षा ने बस ननदनी का हाथ पकड़ा और सब ठीक ह का इशारा किया, अंजलि ने अनीता को भी अपने hi पास बुला लिया था,
Uuufffffffffffffffffff क्या नजारा था एक साथ इतनी खूबसूरती देख क्र वह खड़े हर आदमी की हालत ख़राब हो चुकी थी,
वह 9 लेडीज थी जिनमे दो औरते थी लेकिन कोई उन्हें बता hi नहीं सकता ये इनमे बड़ी ह, सब एक जैसी hi लग रही थी, अंजलि और अनीता उनकी बस बड़ी बहन लग रही थी,
अगर किसी से ये फैसला करने को कहा जाये की इनको 1 से 9 तक no देने हैं तो वो कभी फैसला नहीं क्र पायेगा की किसको 1 पैर रखे किसको 2 पैर 9 के लिए तो कोई सोच hi नहीं सकता,
सब शादी में बिजी थे,
अनीता- अंजलि जी वो खा ह
रिंकी- हमे बुला क्र खुद यहाँ नहीं ह
अलका बड़ी कंफ्यूज थी ऐसा कोण ह जिसके लिए सब इतने पागल हैं,
अलका- दीदी ये किसकी बात क्र रहे हैं
वर्षा- खुद देख लेना
वही टीवी की स्क्रीन पैर शादी का नजारा चल रहा जिसे देख रहे थे सोनिया और सुरेश
सोनिया की आँखों में आंसू और चेरे पैर भयानक गुस्सा था, वो किसी नागिन की तरह फुंकार मर रही थी, सोनिया ने अंजलि के महेमानो में अपना एक आदमी भेजा हुआ था जो वह से लाइव वीडियो भेज रहा था सोनिया और सुरेश को,
सुरेश- सब कुछ निकल गया हाथ से
सोनिया ने बस है में गार्डन हिलाई
सुरेश- ये देख वो मंत्र और कमिश्नर भी उसकी तरफ हो गए, सालो ने मेरे बेटे को फसाया और वो तेरी बेतिया कैसे सज क्र गई रंडी बन क्र उसके पास,
सोनिया- नहीं छोडूंगी इस बार नहीं छोडूंगी, ऐसी मोत दूंगी की अगले जनम में पैदा होने से भी मन क्र देंगे सब के सब,
सुरेश- मोत तो तब देगी जब हम यहाँ रुक पाएंगे, उस मंत्री ने हमारे खिलाफ भी केस दाल दिया ह, अगर हम यहाँ से नहीं गए तो कभी जेल से बहार नहीं निकल पाएंगे, हमारे पास आज का hi टाइम ह कल से पूरी पुलिस फाॅर्स हमारे पीछे होगी,
सोनिया- जायेंगे कहा
सुरेश- शकील ने सब इंतजाम क्र दिया ह तू बस यहाँ से निकल सोहन को लेकर
सोनिया- मेरी बेतिया वो तो
सुरेश- वो रंडिया उस अंजलि के तलवे चाट रही हैं, तुझे लगता ह वो तेरे साथ आएँगी
सोनिया- मैंने उनके लिए इतने सालो तक अपने आप को बदले रखा, वो hi मुझे धोका दे गई,
सुरेश- तूने कभी उन्हें हमारे परिवार जैसा बनाया नहीं
सोनिया- मैंने उन्हें उनकी जिंदगी जीने की आजादी दी थी, पता नहीं ऐसी कैसे बन गई
सुरेश- तेरे सब अपने धोका दे गए तेरे उस कमल ने भी धोका hi दिया था जिसके नाम पैर तूने मेरे बेटे का नाम रखा ह
सोनिया- वो धोका नहीं दे सकता वह कुछ जरूर हुआ होगा
सुरेश- पता नहीं अगर वो वापस आ जाता तो ये दिन न देखना पड़ता
उधर पार्टी में,
अंजलि सभी लेडीज को लेकर सेकंड फ्लोर पैर आ गई, नंदनी रिंकी अनीता भी साथ थी,
अलका- दीदी हम यहाँ क्यों हो वो क्यों नहीं आ रहा
वर्षा- सबर तो क्र
अनीता- अंजलि जी पार्टी तो निचे ह हम यहाँ क्यों ह
अंजलि- क्योकि वो अभी सबके सामने नहीं आएगा इसलिए, और आप सब पैर मैं ट्रस्ट क्र रही हु की यहाँ हम जो बाते क्र रहे हैं वो हम तक hi रहे, ये बात अंजलि ने अलका नंदनी और रिंकी की तरफ देख क्र कही, क्योकि वो hi थे जो इस सब से अनजान थे,
दीपा- तो मिलिए हमारे जाने भर जिगर के चले से
सबने पलट क्र देखा
सबकी नजर एक साथ उधर गई तो ब्लैक सूट में तुषार आ रहा था,
सभी औरतो के दिल जोर से धड़क गए, वह कड़ी हर औरत के दिल में बस तुषार hi था, वर्षा जो अब तक उसे अलका का दोस्त देखती थी, पिछले कुछ दिनों में हुए हादसों और तुषार की ताकत और उसकी हीरोपंती देख क्र वो भी उसकी तरफ कब झुक गई उसे पता hi नहीं चला,
तुषार को वह देख क्र नंदनी और अलका चौंक गए, अलका ने वर्षा को देखा
वर्षा मुस्कुराई-
अलका- दीदी क्या ये इनका बीटा ह
वर्षा ने है में सर हिलाया
तुषार के फेस पैर एक स्माइल थी, और सामने कड़ी सभी औरतो के दिल की धड़कन तेज थी,
तुषार जैसे hi नजदीक आया, तो हर औरत दौड़ क्र तुषार से लिपटना चाहती थी, लेकिन तुषार किसके पास जाने वाला था ये देखने वाला था, सबके दिल में तुषार था लेकिन तुषार के दिल में सबसे ज्यादा कोण ह, ये देखने वाली बात थी,
और ये hi चिंता तुषार के दिमाग में घूम रही थी, सामने हर लड़की औरत उसके लिए खास थी बस नंदनी के अलावा, नंदनी के लिए तुषार के दिल कुछ खास फीलिंग्स नहीं thi,lekin हसीं पल तो वो उसके साथ भी बिता चुक्का था, तुषार असमंजस में था,
तुसाहर थोड़ा नौरवसे सा सबके नजदीक आया तो अलका भाग क्र तुषार से गले लग गई,
अलका- तुम ठीक हो तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न, मैं बहुत दर गई थी, वो पागल कुछ भी क्र सकता ह
तुषार भोचका सा खड़ा था, साडी औरते बस उन्हें hi देखे जार hi थी, सबके फेस पैर जलन साफ दिख रही थी,
तुसाहर ने अलका को सीधा किया, मैं ठीक हु अलका जी और मुझसे बड़ा पागल शायद अभी तो कोई पैदा नहीं हुआ आप चिंता मत करो, और देखो सब हमे hi देख रहे हैं
अलका ने मुद क्र देखा तो वो शर्मा गई,
तुसाहर चलता हुआ सबके पास आया, और वो सबसे पहले अंजलि के पास गया, और उसे गले से लगा लिया, आज वो तुषार की पत्नी थी ऑफिसियल पत्नी,
फिर तीनो बहन एक साथ चिपक गई, बेचारी अनीता और रिंकी शरमाई सी कड़ी थी, उन्हें पता था यहाँ कुछ भी करना ठीक नहीं था, वही वर्षा उसे तो समझ hi नहीं आ रहा था उसे हो क्या रहा ह वो इतना नाराज सी क्यों ो रही ह,
नंदनी कड़ी देख रही थी, वो तुषार के नजदीक आई और बोली- तुम ठीक हो अब तबियत ठीक ह न
तुषार ने मुस्कुराकर- है मैं ठीक हु आप ठीक ह कोई तकलीफ तो नहीं ह न
बस ये नहीं पूछना था तुषार को वह कड़ी वर्षा और अलका के अलावा सब समझ गई तुषार क्या पूछ रहा ह, क्योकि सब जानती थी तुषार का लुंड लेने के बाद ठीक रहना पॉसिबल नहीं ह,
दीपा- सीमा के कान में लगता ह इसकी भी खोल दी
सीमा- ये पता नहीं किस किस की खोलेगा
रूचि- इन सब के चेरे देख रही हो, ये सब पागल हुई पड़ी ह इसके लिए, दीपू ये मेरे तुषार को चीन लेंगी
दीपा- चिंता मत क्र बाबू इनकी छूट फाड़ दूंगी जो तुसाहर पैर नजर डाली तो,
तुषार गोपियों के बिच खड़ा बैचैन सा हो रहा था,
अंजलि- आप सबसे एक रिक्वेस्ट ह की तुसाहर जिन्दा ह ये बात कही बहार न जाये और मेरा बीटा तुषार और सुरेश चोपड़ा की कंपनी में काम करने वाला तुषार एक hi ह ये भी राज रहे, अलका नंदनी और रिंकी चौंक गए,
अलका- लेकिन ये सब क्यों किस लिए
वर्षा- मैं समझा दूंगी तुझे
अंजलि- ननदनी ये तुम्हारे लिए थोड़ा अजीब होगा, तुमने मेरे बेटे की हेल्प की इसलिए तुम मेरे परिवार की तरह यहाँ हो, बाकि तुसाहर तुम्हे समझा देगा,
और जिनको कुछ शंका ह उन्हें तुषार समझा देगा, बस आप सभी तुषा रकि फ़िक्र करती हैं इसलिए आपको यहाँ लेकर आई हु ताकि आप टुशु को देख सके, और अपनी चिनाये काम क्र सके,
अब चलो पार्टी में चलते हैं, सभी लेडीज तुषार से दूर नहीं जाना चाहती थी लेकिन जाना पड़ा,
मंत्री- आइये आइये अंजलि जी आप बड़ी कमल हो आपने तो सब कुछ बदल दिया एक hi झटके में
अंजलि - सर अगर आपने अपनी बेटी की चिंता पहले की होती तो शायद आपको आज ये सब न देखना पड़ता, राजनीति में आने के लिए आपने अपनी hi बेटी उन जानवरो के बिच भेज दी
मंत्री- अंजलि जी मुझे नहीं पता था वो लोग ऐसे हैं
अंजलि- सर जो औरत आपके निचे लेट क्र अपने बेटे का रिश्ता मांग रही ह तो उसके बेटे कैसे रहे होंगे ये तो सोचना छाइये थान ा, आपकी बेटी कभी बोली नहीं आपकी इज्जत की वजह से
मंत्री- मैं समझ गया हु, राजनीती परिवार से बड़ी नहीं होती, मैंने अपनी बेटी को hi मोहरा बना दिया था, लेकिन अब जो उसका दिल करे वो करेगी
तभी नंदनी आ गई वह,
ननदनी- क्या बाते हो रही हैं
मंत्री- कुछ नहीं बीटा बस अंजलि जी मुझे मेरी गलतियों का अहसास करा रही थी
नंदनी- पापा इनकी जैसी मजबूत औरत मैंने कभी नहीं देखि, ऐसा परिवार आज से पहले कभी नहीं देखा
मंत्री- वो तो देख लिया मैंने, और मैं तुझसे माफ़ी मंटा हु बीटा मेरी वजह से तू उन जलादो में फास गई
नंदनी- भूल जाइये बस वो कमल बहार नहीं आना चाहिए
मंत्री- नहीं आएगा उस पैर इतने केस हैं की शायद फांसी तक हो जाये
तभी पीछे से आवाज आई- मेरी बेटी को बचा लीजिये मंत्री जी
ये कमिसिनोर तेज प्रताप थे
मंत्री- अरे तेज साहिब वो तो इस लड़के ने पहले hi बचा लिया अपनी बेटी को सरकारी गवाह बना क्र और नंदनी ने भी उसे माफ़ क्र दिया वर्ण मैं माफ़ी देने वाला नहीं था, अब तो आप कानून जानते hi हैं हो सकता ह कुछ महीने या साल की सजा और जुरमाना लगे
तेज प्रताप- अगर आप चाहे तो बस जुर्माने से काम बन जाये मैं उसे कही दूर भेज दूंगा
मंत्री- अभी जब तक ये केस चल रहा ह तब तक तो वो जेल में hi रहेगी मैं कोशिश करूँगा उसे सजा न हो,
इधर शादी पूरी हो गई, दूल्हा दुल्हन सबका आशीर्वाद लेने लगे, तभी एक औरत बड़े गुस्से में अंदर आई, लेकिन वह भीड़ और हालत देख क्र शांत कड़ी रह गई,
धीरे धीरे महेमान जाने लगे, जैसे hi वह भीड़ काम हुई तो वो दूल्हा दुल्हन के पास पहुंची
औरत- ये सिला दिया तुम दोनों ने हमारे लाड प्यार का, इसी लिए तुम्हे पढ़ाया था खुद से दूर भेजा था, ये hi दिन दिखने थे तो मर जाती क्यों हमारा नाम मिटटी में मिला दिया तुम दोनों ने,
रश्मि- माँ हम इनके बिना नहीं रह सकते
औरत- तूने मेरा सर आज शर्म से झुका दिया, और तुम दोनों तो इनके दोस्त बांके आये थे हमारे घर, इतना बड़ा धोका दिया हमे,
आशिमा- माँ ख़बरदार जो हमारे पतियों को कुछ कहा तो,
औरत- अच्छा अब ये इतने खास हो गए तुम्हारे लिए,
आशिमा- ये पति ह हमारे
औरत- जान से मर दूंगी मैं तुम्हे
कपिल- रुकिए रुकिए थोड़ा गुस्सा ठंडा कीजिये
औरत- दूर हटो मुझसे तुम जैसी ओरल दी माँ बाप का नाम मिटटी में मिलती हैं, आज कल के बच्चे थोड़ा बड़े होते hi खुद को सबसे समझदार समझने लगते हैं, जैसे उन्हें सबा पता हो देख लेना तुम दोनों ये लड़के तुम्हे धोका देकर भाग जायेंगे
तभी वह राजेश पंहुचा, क्या हुआ भेजी
औरत ने राजेश को देखा तो चौंक गई, वही राजेश की भी वही हालत थी, राजेश की आँखों में आंसू थे,
राजेश कनपटी हु आवाज में- कामिनी
जी है ये कामिनी थी,
राजेश- कामिनी तुम यहाँ
राजेश के फेस पैर ख़ुशी और आंसू एक साथ थे, लेकिन कामिनी के फेस पैर कोई ख़ुशी नहीं थी,
कामिनी- तुम यहाँ क्या क्र रहे हो, ओह्ह्ह तो तुम यहाँ के नौकर हो और तुम्हे ने इन लड़को को मेरी बेटियों के पीछे लगवाया होगा ह न
राजेश- ये क्या बोल रही हो कामिनी, बेतिया तुम्हारी बेतिया
कामिनी- दूर हटो मुझसे मैं नोकरो से बात नहीं करती उसने राजेश को दूर धकेल दिया
तभी सरे बच्चो की आवाज एक साथ गूंज गई, ख़बरदार जो हमारे पापा को हाथ भी लगाया, हम भूल जायेंगे आप कोण हैं
कामिनी ने पलट क्र देखा 6 बच्चे उसके पीछे खड़े थे, जिनमे दोनों दूल्हे भी थे,
कामिनी- चौंकते हुए बच्चे इसके बच्चे हहहहहह क्या मजाक ह
राजेश बेचारा सर निचे करके खड़ा था,
तुषार- बस चुप हो जाइये आप भाभियो की माँ ह इसलिए मैं चुप हु वर्ण ठीक नहीं होगा
तुषार भी वह आ चुक्का था क्योकि बहार के सभी लोग जा चुके थे,
सचिन- चुप हो जाइये बुआ जी
सचिन के मुँह से बुआ सुन क्र वह खड़े सब आदमियों का मुँह खुला रह गया, तुषार सीमा दीपा रूचि रश्मि आशिमा, सब सचिन को देखने लगे
सचिन- है ये हमारी बुआ हैं पापा की बहन कामिनी
अंजलि अभी वह नहीं थी वो सभी महेमानो को बहार विदा क्र रही थी, वह बस अंजलि का परिवार खड़ा था,
कामिनी- मैं किसी की बुआ नहीं हु
कपिल- आप हमारे पापा की बहन हो न
तभी रश्मि और आशिमा उनके पास आई
रश्मि- ये क्या बोल रहे हो ये कैसे हो सकता ह तुम मेरे भाई नहीं नहीं ये कैसे हो सकता ह, ये तो अनर्थ ह ये तुमने क्या किया
कामिनी- है बताओ तुमने क्या किया ह मैं तुम्हारी बुआ हु न तो तुमने अपनी बहन से शादी क्र ली,
कामिनी- देखा रश्मि देखा इन दोनों की चाल ये तुमसे प्यार नहीं करते धोका दे रहे हैं
राजेश- नहीं नहीं बीटा ये कोई धोका नहीं दे रहे हैं, ये सब मुझे पिता मानते हैं बस मैं इनका पिता नहीं हु
सरे बच्चे एक साथ- पापा नहीं
राजेश- बच्चो तुम्हारी बुआ सब जानती ह,
बच्चियों मैं पिता नहीं बन सकता, बस ये सरे मुझे पिता मानते हैं ये मेरे बच्चे नहीं हैं तुम्हारे भाई नहीं हैं,
रश्मि और आशिमा को थोड़ी रहत हुई,
कामिनी- क्या हुआ भाई नहीं ह तो ये एक हरा हुआ इंसाने ह जो अपने परिवार को नहीं सम्हाल पाया इन्हे क्या सम्हालेगा, ये सब कुछ दिखावा ह इस आदमी के पास तो खाने का भी पैसा नहीं ह ये सब तुम्हे फ़साने की चल ह, इस आदमी के पास कोई खुश नहीं रह सकता फिर ये बचे कैसे इस ेपिता मन सकते हैं
तभी एक आवाज आई,- जैसे तुम छोड़ क्र भाग गाइट hi अपने लचर भाई को, लेकिन ये मेरे बच्चे हैं अपने पिता के लिए जान भी दे देंगे,
कामिनी ने पलट क्र देखा तो सामने अंजलि कड़ी थी, अंजलि को देख क्र कामिनी थोड़ी चौकी वही अंजलि भी चौंक सी गई जैसे पहले कभी मिले हो,
कामिनी- हूऊऊऊह्ह्ह्ह ये आदमी दे भी क्या सकता ह
अंजलि- इनका नाम राजेश ह अगर भैया नहीं बोल सकती तो नाम ले लो
कामिनी- तुम्हे बड़ा प्यार आ रहा ह
अंजलि- वो मेरे बच्चो के पिता ह
कामिनी- ओहो किसकी नाजायज औलादे हैं ये जिन्हे इसने गॉड ले लिया ह और यहाँ महल में घुस गया ह
कामिनी- जबान सम्हाल क्र कामिनी, ये इस घ रके मालिक हैं समझी, और तुम अभी कुछ देर पहले अपनी बेटियों को संस्कारी का ज्ञान दे रही थी, उन्हें शर्म सीखा रही थी,
तुम वही औरत हो न जो मोत से लड़ते हुए अपने भाई को छोड़ क्र किसी के साथ भाग गाइट hi, तब तुम्हे अहसास नहीं था की परिवार की इज्जत क्या होती ह, माँ बाप भाई की इज्जत क्या होती ह, तुम्हारे भागने के बाद तुम्हारे भाई का क्या होगा, उसके बाद वो जिन्दा बचा या मर गया तुम पूछने भी नहीं आई,
रश्मि- ये क्या बोल रही ह मम्मी आप
कामिनी- खामोश
अंजलि- इन्हे क्यों खामोश क्र रही हो, इन्हे पता होना चाहिए तुमने क्या किया ह, जिस ासिक के साथ तुम भागी थी कोण था ो क्या करता था उसके पास पैसे के लिए तुम उसके साथ भाग गई और जब वो तुम्हे छोड़ क्र भाग गया तो तुमने रश्मि के पिता से शादी क्र ली,
कामिनी- बस करो
अंजलि- जब तुम्हे खुद भागते हुए एक बार नहीं सोचा तुम्हारे परिवार का क्या होगा भाई का क्या होगा अब तुम इन बच्चियों को ज्ञान देने आई हो,
इन बच्चियों को अपने माँ बाप की फ़िक्र ह ये आज भी तुम्हे अपना मानते हैं तुम तो अब भी अपने भाई को भाई नहीं मान रही,
कामिनी- क्या करती मैं तुम्हे पता ह क्या हालत थी उस टाइम, मेरी शादी भी नहीं हो रही थी इनकी वजह से, कुछ भी नहीं था हमारे पास, मेरी लाइफ बर्बाद हो रही थी,
अंजलि- जब इनके पास कुछ नहीं था तब भी इन्होने तुम्हारी पढाई वह के सबसे अच्छे स्कूल में करवाई, जब इनके पस कुछ नहीं तहत ुम गाओं में सबसे अच्छे कपडे पहनती थी,
ये क्यों नहीं खेती तुम्हे अयाशी की आदत पद गाइट hi, तुम भी जानती थी उस लड़के के परिवार वाले तुम्हे नहीं अपनाएंगे फिर भी तुम भाग गई, और कभी लोट क्र नहीं आई,
कामिनी- इन्होने खून किया था
अंजलि- पूरा गाओं इनके खिलाफ था और तुम भी हो गई, जब अम्मा इनके सतह थी तो तुम्हे अपने भाई पैर तो यकीन करना चाहिए था,
कामिनी- मैं बस दूर रहना चाहती थी
आशिमा- अब हम आपसे दूर रहना चाहते हैं नहीं रखना कोई रिश्ता आपसे
कामिनी- ऐसा मत बोलो
रश्मि- क्यों न बोले जब आप अपनी ख़ुशी के लिए अपने भाई को मरता हुआ छोड़ सकती हैं तो हम तो फिर भी आपको सही सलाम छोड़ रहे हैं
कामिनी- तुम दोनों मेरी जान हो
अंजलि - तुम भी अपने भाई की जान थी,
कामिनी वही बैठ क्र रोने लगी तो राजेश ने उसके कंधे पैर हाथ रखा,- मत रो बहन मत रो, अंजलि बस करो इसकी गलती नहीं थी, उस टाइम मेरे साथ जॉब hi रहता बर्बाद hi हो जाता, आज ये सुखी ह इससे ख़ुशी की बात और क्या होगी मेरे लिए, बस एक hi इच्छा थी की एक बा राइज देख लू तो सकूं से मर सकूंगा आज तुमने मेरी ये भी इच्छा पूरी क्र दी, आज मेरी साडी िछाये पूरी हो गई, अब तो मोत भी आ जाये तो गम नहीं
तुषार और रूचि- पापा दुबारा ऐसा मत बोलना
सरे बच्चे राजेश से लिपट गए- आप हमारे साथ हो तो हम पूरी दुनिया से लड़ सकते हैं
कामिनी बहुत बैचैन सी सब देख रही थी, उसका दिल टुटा जार है था,
अंजलि- देखा इस इंसाने को ये आज भी तुम्हारी खुशिया चाहते हैं, आज ये इस देश के सबस ेज्यादा आमिर इंसानो में से एक हैं,
कामिनी ये सुनकर शोकेड थी,
कामिनी- मुझे माफ़ क्र दो भाई मैं बहक गई थी
राजेश- बस बस बहन भूल जॉव ो सब तेरी बेतिया इस घर की बहु हैं ये मेरे लिए बड़ी ख़ुशी की बात ह,
अंजलि- रश्मि और आशिमा अपनी माँ का आशीर्वाद लो
अंजलि की बात मानते हुए दोनों ने कामिनी के पेअर छुए,
अंजलि देख प् रही थी की कामिनी के मन में राजेश के लिए अभी कोई खास लगाव नहीं दिख रहा था, शायद बेतिया उससे दूर न हो जाये और ये परिवार बहुत पैसे वाला लग रहा था इसलिए कामिनी शांत हो गई थी,
लेकिन अब सब बड़ा खुशनुमा लग रहा था, राजेश सबसे ज्यादा खुश था, कामिनी और अंजलि एक साथ खड़े थे बाकि सब खुशिया मन रहे थे,
कामिनी- तुम मेरे बारे में बहुत कुछ जानती हो
अंजलि- है जानती हु और वो भी जानती हु जो कोई नहीं जनता
कामिनी ने अंजलि को देखा- और क्या जानती हो
अंजलि- तुमने 2 जुड़वाँ लड़को को जनम दिया थान ा
कामिनी की गांड फैट गई इतना सुनते hi, उसने पलट क्र इधर उधर देखा
अंजलि- कोई नहीं सुन रहा
कामिनी- तुम्हे कैसे पता
अंजलि- तुमने उन दोनों बच्चो को एक औरत को दे दिया था
कामिनी- कोण हो तुम कैसे जानती हो ये सब
अंजलि- पहचाना नहीं मुझे तुमने, पहले मैंने भी नहीं पहचाना था लेकिन तुम्हारी बात करने का स्टाइल और ये आवाज आज तक मेरे दिमाग में अटकी हुई ह चेरा तो उस टाइम यंग था अब ये चश्मे लग गए ह तुम्हे, थोड़ी मुश्किल हुई पहचानने में, लेकिन मैं तो वैसी की वैसी हु, जिसे तुम अपने बच्चे देकर गाइट hi,
कामिनी- तुम तुम वही औरत हो
अंजलि- है मैं वही हु
कामिनी- कहा ह मेरे बच्चे
अंजलि- ख़बरदार जो उन्हें अपने बच्चे बताया तो
कामिनी- है है तुम्हारे बच्चे कहा ह एक बार मिलवा दो
अंजलि- वही हैं जिनसे तुम्हारी बेटियों की शादी हुई ह
ये सुनते hi कामिनी को चक्कर सा आ गया, वो भौचक्की सी कभी अंजलि को कभी सचिन कपिल को देख रही थी,
अंजलि- वही हैं, अब ड्रामा मत करना, जो हो गया उसे बदल नहीं सकते लेकिन अगर तुमने कुछ बोलने की कोशिश की तो सब बर्बाद हो जाएगा, दोनों घर उजाड़ जायेंगे, सचिन कपिल को तो मैं समझा दूंगी लेकिन आशिमा और रश्मि को नहीं समझा पाऊँगी अभी, और तुम भी जवाब नहीं दे पाओगी ये क्यों हुआ, तुम hi कटघरे में कड़ी होगी,
कामिनी की आँखों में आंसू थे उसकी गलती की वजह से आज क्या हो गया था, उसके पास शब्द नहीं थे,
कामिनी- तुम तो जानती थी फिर क्यों नहीं रोका, तुमने ये होने दिया
अंजलि- मैं नहीं जानती थी की तुम वही औरत निकलोगी
कामिनी- ये क्या पाप हो गया ह भगवान् हमे कभी माफ़ नहीं कर्जा
अंजलि- भगवान् जब सजा देंगे हम शनि hi होगी, लेकिन मैं अपने बच्चो को सजा नहीं दे सकती, अब वोट क दूसरे को प्यार करते हैं, और उनको सच बता क्र उनकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी,
कामिनी- मैं ये सब सहन नहीं क्र प् रही हु
अंजलि- तो अपनी बेटियों को आशीर्वाद दो और चली जाओ यहाँ से, वैसे भी तुम्हे अपने भाई ये कुछ लगाव तो हुआ ह नहीं
कामिनी- मेरी बेतिया
अंजलि- एक दिन तुमने अपने बेटे दिए थे मुझे आज मैं बेतिया ले रही हु और वडा करती हु उनका भी वैसा hi ख्याल रखूंगी जैसा सचिन कपिल का रखा ह,
कामिनी- तुम बहुत बुरी औरत हो तुमने एक माँ से उसके बच्चे चीन लिए,
अंजलि- हाहाहाहा ये तुम बोल रही हो जो अपने बच्चो को अनाथो की तरह फेकने जार hi थी, खेर छोड़ो, मैं कैसी भी औरत हु लेकिन अपने बच्चो के लिए मैं कुछ भी क्र सकती हु कुछ भी,
अब इन बातो का कोई फायदा नहीं ह बच्चो आशीर्वाद दो और चली जाओ यहाँ से, अगर तुम्हारे दिल में राजेश जी के लिए मुझे कुछ प्यार दिखाई देता तो मैं तुम्हे जाने नहीं देती, लेकिन तुम नहीं बदलोगी इसलिए यहाँ से चली hi जाओ, तुमने जो आज कुछ भीतर व्यव्हार ुबके साथ किया ह उससे hi वॉक हश हैं और उनकी ख़ुशी hi मेरे लिए मायने रखती ह,
कामिनी- मेरे चारो बच्चे यहाँ ह
अंजलि- मैं फिर वार्निंग दे रही हु मेरे बेटो को अगर अपना बच्चा कहा तो अच्छा नहीं होगा, और आज से वो दोनों लड़किया भी मेरी बेतिया हैं समझी, मैं एक माँ हु तो तुम्हारा दर्द समझ क्र इतनी परमिशन दे रही हु की कभी कभी मिल सकती हो तुम,
कामिनी के मुँह से कुछ न निकला, अंजलि कामिनी को सबके पास ले आई, कामिनी के फेस पैर झूटी स्माइल थी, वो बस सचिन और कपिल को देखे जार hi थी, फिर कामिनी ने सबको आशीर्वाद दिया,
अंजलि- बच्चो अपनी माँ से बात क्र लो फिर वो चली जाएँगी
रश्मि- माँ हम खुश ह की हमारी शादी में आप यहाँ हो आपके सामने हमारी शादी हुई वर्ण हमे तो लगा था की माँ बाप का आशीर्वाद भी नहीं मिलेगा
अंजलि- बीटा इन्हे तो आना hi था, जल्दी hi तुम्हारे पिता भी मान जायेंगे,
आशिमा- वोन hi मानेंगे
अंजलि- जरूर मानेंगे
दोनों बहेनो की आँखों में आंसू आ गए,
रश्मि- माँ पापा से बोलना अब हम हमेशा के लिए उनके सामने से चले गए हैं अब वापस नहीं आएंगे
कामिनी की आँखों में आंसू थे वो दोनों लड़कियों के गले लग गई, अंजलि को रश्मि की बात थोड़ी अजीब लगी, सबकी आँखों में आंसू थे, राजेश सबसे ज्यादा रो रहा था,
सरे बच्चे राजेश के समाने बैठ गए,