Update 20
सोमवार शाम को परम पुष्पा के साथ और सेठजी के बेटे के साथ गाँव लौटते समय, गुलाबो के साथ छोटी सी हनीमून ट्रिप के बाद, सेठजी ने अपनी किस्मत सही जगह आजमाई।
और महक के घर।
चूँकि विनोद गाँव में नहीं था, महक कॉलेज से अकेली लौटी। सुधा और पूनम, दोनों मुनीम के साथ चुदाई करने के लिए महक के साथ रात बिताना चाहती थीं। महक ने उन्हें बताया था कि सुंदरी और परम, दोनों सेठजी के घर पर ही होगी, तब शाम को अपनी चूत की मरामत कराने आ सकती है, अभी तो वह घर जाके थोडा काम करेगी। घर पर, उसने सुंदरी द्वारा बनाया हुआ खाना खाया। खाने के बाद, वह कपड़े उतारने लगी, तभी मुख्य द्वार पर दस्तक हुई। उसने सलवार और कुर्ता पहना हुआ था। उसने दरवाजा खोला और सेठजी को दरवाजे पर देखकर हैरान रह गई।
"सेठजी आप!" महक ने कहा, "माँ आपके घर ही गई हैं...!"
लेकिन सेठजी ने खुद को अंदर धकेला और दरवाजा बंद कर लिया।
"बेटी, मैं तुमसे ही मिलने आया हूँ!" सेठजी बाहर वाले कमरे में कॉटन पर बैठ गए। महक पानी लाने अंदर गई, लेकिन सेठजी को इस समय घर पर अकेला देखकर वह बहुत परेशान हो गई।
“मुज से मिलने क्यों आये है? सेठजी आपका माल आपके घर पर ही है।“ शेठजी के लिए पानी का ग्लास लेने को किचन की तरफ जाते हुए कहा।
सेठजी महक को घर पर अकेला पाकर बहुत खुश हुए। अभी तो सिर्फ़ 4:15 बजे थे। उन्होंने खुद को कोसा कि सुंदरी द्वारा दिए गए महक के कौमार्य भंग के अवसर का फ़ायदा क्यों नहीं उठाया। उन्होंने बेजुबान की तरह अपने एक दोस्त को महक का प्रस्ताव दिया, जिसने पहले महक को चोदा था।
अगले दिन उस सेठने महक के साथ अपनी पूरी चुदाई का अनुभव सुनाया और यह भी बताया कि उन्होंने सुंदरी की भी चुदाई की थी। लेकिन उस सेठने सेठजी को यह नहीं बताया कि परम ने उनके सामने महक को चोदा था। उस सेठ को अभी तक यह नहीं पता था कि परम महक का बड़ा भाई है। उस दूसरे सेठ ने महक की चुदाई से अपनी गहरी संतुष्टि खुलकर ज़ाहिर की।
“यार, मैंने बहुत छोटी-बड़ी माल को चोदा है, लेकिन महेक सबसे अलग है। ऐसे बोलने से पता नहीं चलेगा, जब उसकी जवानी का मज़ा लोगे तभी पता चलेगा कि महक में क्या खास है…और उसका माल कैसा है।”
'भाई, मैं अपनी सारी प्रॉपर्टी उसके नाम कर दूंगा, अगर वो मेरे साथ रहने को तैयार हो जाए...।' उस सेठ ने अपना लंड बाहर निकाला और हमारे सेठजी ने लगभग अपने साइज और आकार का धड़कता हुआ लंड देखा।
"उसका नाम लेते ही लोडा टाइट हो जाता है...।" उन्होंने सेठजी को 5 लाख रुपये वाला एक ब्रीफकेस दिया,
“भैया, मैं उसे रात भर अपने साथ रखना चाहता हूँ,किसी तरह से महक को मना लो…।”
लेकिन अब सेठजी नहीं माने। अब उन्होंने महक के साथ संबंध रखने के परिणामों की चेतावनी दी। विनोद का डर दिखाया कहा “भाई उसका यार विनोद है,अगर उसे पता चल गया की महक को तुमने छोड़ा है तो वह पुरे गाव के सामने तेरा लंड काट देगा। और हां,तेरे घर की सब औरतों को खुद चोदेगा और अपने लोगो से चुदवा कर रंडी बना देगा। सुरक्षा अधिकारी भी विनोद से डरते है।”
उन्होंने उसे महक को भूल जाने की सलाह दी। लेकिन वह सेठ ऐसा कर नहीं सकता था। पिछले 15 दिनों में जब भी वह सेठजी से मिला, उसने महक को फिर से चोदने की इच्छा व्यक्त की। और अब हमारे अपने सेठजी ने अपनी सबसे पसंदीदा महिला सुंदरी की बेटी को चखने का फैसला किया।
और सेठजी महक के पास यह निश्चय करके आए हैं कि महक के शरीर और उसका माल का स्वाद चखेंगे कि क्या सचमुच इसकी कीमत लाखों में है!
“आज सुंदरी की बेटी को जरूर चोदूंगा, देखु माँ स्वादिष्ट है कि बेटी ज्यादा मजा देती है...” सेठजी खुद से बोले।
महक एक गिलास पानी और घर की बनी मिठाई का टुकड़ा लेकर लौटी। सेठजी ने एक टुकड़ा और कुछ घूंट पानी लिया। उसने गिलास नीचे रखा। महक गिलास उठाने के लिए झुकी और सेठजी ने पकड़ लिया उसे बाहों में।
“छोड़िये ना… क्या कर रहे हैं…।” महक ने ईमानदारी से खुद को आज़ाद करने की कोशिश की।
सेठजी ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली। "वो सेठ तुम्हें बहुत याद करता है....बेटी" सेठजी ने कहा, “तुमने उसे क्या खिलाया कि वो सारा प्रॉपर्टी तेरे नाम करने को तैयार है…।”
“कौन सेठ? आप के सिवा मैं किसी और को नहीं जानती....।'' उसने विनती की, ''प्लीज सेठजी छोड़िए ना...सुंदरी आपकी माल है,मैं नहीं...।''
मुझसे क्यों दूर हो रही है बेटी....मुझे भी तो तेरा यह मखमली चूत अपने लंड से भिगोने दे बेटी... ।“ सेठजी ने अपने हाथ की पकड़ उसके स्तनों पर बधाई ताकि वह छटक ना सके।
“अरे, महक, वही सेठ जिसने सबसे पहले तुम्हे चोदा था…। जिसने तेरी चूत को पहला लंड बन ने अवसर प्राप्त किया था,जिस के लंड ने तुम्हे एक छोटी लड़की से एक बड़ा माल में तब्दील किया था। याद आया? वो फिर से तुम्हारी जवानी का मजा लेना चाहता है…जो बोलेगी…।”
सेठजी ने महक को और कस कर दबाया, महक की मस्त बोबले सेठजी के सीने से टीकरा रही थी और सेठजी का पारा गरम होने लगा था। महक ने निचे देखा की सेठजी का लंड अब उभरने लगा है। वह मन ही मन मुस्कुराई और अपने चूत और बोबले पर गर्व करती हुई सोचा की देखा मेरे माल में कितना दम है देख सेठजी का लंड खड़ा कर दिया।
“बेटीचोद, हरामी, कभी दिखाई दिया तो उसका मुंह नोच लूंगी…मेरी गांड उसके मुह में डाल दूंगी...साले हरामी को छोडूंगी नहीं। हरामी को मैंने और मेरे पुरे माल ने पूरा मजा दिया लेकिन मादरचोद सुंदरी को देखा की मुझे छोड़कर मेरे और परम के सामने सुंदरी को चोदने लगा और साले ने एक लाख भी दिया। मेरा सिल तोड़ने की ख़ुशी उसने जताई ही नहीं। साले का लंड को पुरे गर्भगृह में मुत ने दिया (वीर्य को डालने दिया) फिर भी.... । ”
उस सीन को याद करते ही महक को गुस्सा आ गया। न तो उस सेठ ने बताया और न ही महक ने बताया कि जब उस सेठ ने सुंदरी को चोदा, तो परम ने पहली बार उसकी बहन को भी चोदा था।
“रानी, सुंदरी की बात मत करो…उसको देख कर तो मुर्दों के लंड भी टाइट हो जाता है। और तुम भी यह बात अच्छे से समजती हो फिर भी इतनी जलन क्यों?” सेठ ने कहा। उसने बिना वजूद कारण बताते हुए जोड़ा;
”वह सेठ तुमको तीन बार चोद चुका था और उसे मालूम था कि वो तुमको ठंडा नहीं कर सकता, इसलिए उसने तुम्हारी माँ सुंदरी को चोदा… लेकिन कोई बात नहीं, इस बार जो मांगोगी दूंगा।”
“हाँ...हाँ मुझे पता है सेठजी आप मेरी चूत का भाव लगायेंगे पर आज मुझे कोई फुर्सत नहीं है, मैं चुदवाने के मूड में बिलकुल नहीं हूँ।“ लकिन वह सेठजी के गोदी से उठी नहीं बल्कि उसकी गांड को ऐसे सेट किया ताकि उसकी गांड की गर्मी सेठजी के लंड को खड़ा कर सके।
वैसे भी हर लड़की को पसंद आता है की उसकी गांड की गर्मी कोई लंड ले और बदले में उसका तोप उसकी गांड के छेद से बाते करे।
ठीक है जैसी तेरी मर्जी, इस गाँव में मर्दों की मर्जी कहा चलती है! सेठजी ने उसके स्तनों पर अपनी पकड़ ढीली करते हुए कहा। दरअसल वह चाहता था की महक खुद ही अपने बोब्लो को दबवाए। उसने सिर्फ कहा और पकड़ को ढीला किया पर छोड़ा नहीं।
“बहनचोद, साला मैं तो ऐसे ही कहती हूँ तुम अपना काम चालू रख मेरे अभी के लिए चोदुमदन” अपने स्तनों पर सेठजी की पकड़ ढीली होते हुए इसने मन में कहा और खुद को कोसा।
“हाँ सेठजी, आपको चुंदरी की चूत में ही अपना लंड को खली करना चाहिए। हम जैसी छोटी चूतो आप को पसंद नहीं आएगी। मैं जानती हूँ की मेरा माल सुंदरी जैसा भरा फुआ तो नहीं है।“ महक भी कहा छोड़नेवाली थी। आखित सुंदरी की बेटी थी।
“मैं जानता हु बेटी और सुंदरी भी तो ऐसे ही अच्छे माल की मालकिन नहीं बनी उस ने भी तो कई लंड की सफ़र के बाद में ही अपना यह भरा हुआ बदन बनाया है। तुम्हे भी लंड लेने चाहिए बेटी। लंड ही तो है जो औरतो को पानी पिलाते रहते है और उनको ताज़ा रखते है।“ उसने फिर से महक के स्तन को सहलाते हुए कहा।
हाँ, सेठजी मैं जानती हूँ आप को यह सब रेखा को सिखाना चाहिए, मुझे नहीं मुझे सिखानेवाली मेरी माँ है जो बताती रहती है की कैसे लंड के सामने पैरो को फैलाते है।“ महक ने भी उनकी गोदी से उठने की कोशिश नहीं की।
“हाँ बेटी यह बात तुमने सही कही रेखा भी तो मस्त माल है और उसको शायद परम पानी पिलाता ही है, अगर मौक़ा मिलेगा तो मेरा लंड भी रेखा की चूत में सफ़र कर ही देगा। एक बार उसकी गांड मारने को मन भी करता है।“
अब महक लम्बा खीचने के मूड में नहीं थी। वह सेठजी के पकड़ से छूटने की नाकाम और अनिच्छा से उठने की कोशिश करी ताकि सेठजी उसे और सही तरीके से पकड़ में ले। उसने अपने पैरो को इस तरह से फैलाया ताकि सेठजी को लगे की वह उठने जा रही है और वह पकड़ ने के लिए उसकी चूत से छेद्छानी करे।
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आज के लिए बस इतना ही कल फिर मिलेंगे, इस बार मैं आपके कोमेंट की भीख नहीं मागुंगी।
आप सब को फनलवर की तरफ से....
नए साल की शुभकामनाये।
।। जय भारत ।।